MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 17 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 130

अब तक अवनि लेद को अपने लेपटॉप से कनेक्ट कर चुकी थी. और वो सब दिखने लगती है जो की उसने रेडी किया हुआ था. बैंक अकाउंट के रस., बनायीं हुई साडी लिस्ट्स. उसने सभी लिस्ट बहुत अच्छे से तैयार की थी. सब अवनि और जुली की टैरिफ करते है. ये सब देखने के बाद पब बोलता है.

पब – गुड जॉब अवनि.. वेल दोने. अब आगे का काम सुनो, एक यूनिफार्म तैयार करो इन सब लड़कियों के लिए, उससे फेस भी कवर होना चाहिए. और ड्रेस ऐसी हो जिससे फाइटिंग में प्रॉब्लम न हो. यदि फायर और बुलेट प्रूफ हो सके तो और भी अच्छी बात है. पारी तुम भी इस काम में इनकी हेल्प करोगी.

अवनि और पारी – ok

पब – अब हमको ये फाइनल करना है की अपनी आर्मी का क्या नाम हो. और सुरुवात किस्से की जाये??

जय – लेडी आर्मी??

अंकिता – क्यों न आप अपने नाम पे रखो??

गुरु – क्यों न दस माँ के नाम पे रखे??

पब – हम्म (कुछ देर सोच कर) – दानव सेना….. ये केसा है, दस माँ और मेरे सबके लिए दानव वर्ड फिट है. और अब ये लड़किया जो बन गयी है ये दानवो से काम भी नहीं.

सभी लोग – बेस्ट है…..

पब – तो ठीक है अवनि ये नाम भी इस ड्रेस में मार्क करवा देना.

अवनि – ok

पब – अवनि फिर से इन लड़कियों के सप्लायर की लिस्ट ओपन करना. देखो यहाँ पैर जो लड़किया है इनको बरदाद करने में किस-2 का हाथ है.

अवनि पब के कहे अनुसार उस लिस्ट को फिर से खोलती है. और सब उस लिस्ट को देखने लगते है. इन लड़कियों को यहाँ सप्लाई करने में एक आदमी का नाम सबसे ज्यादा था. 40-42 लड़कियों को उस एक आदमी ने hi तेखुर भानु को बेचा था. और उस आदमी का नाम था – रखा और वो चोन अक रहने वह था.

पब – ये रखा ने सबसे ज्यादा लड़कियों को यहाँ सप्लाई किया है. कोण है ये??

अवनि रखा की पिछ ओपन कर देती है. उसकी पिछ देखते hi पारी रोने लगती है. पारी को रोटा देख पब उसे अपनी गोद में बिठा लेता है. और बोलै – क्या हुआ मेरी पारी को??? इस फोटो को देख कर रोने क्यों लगी??

पारी – आप भूल गए शायद… मेने आपको बताया था की ये hi वो दरिंदा है जिसने मेरे सामने मेरी पूरी फॅमिली को मार कर मुझको ठाकुर को बेच दिया… (और ये कहा कर पारी जोर -2 से रोने लगती है)

पब – सॉरी पारी मैं सच में ये नाम भूल गया था सॉरी जान. पैर मेने ये आर्मी तेरी उस दर्द भरी कहानी सुनने के बाद hi बनाना की सोची थी. और अब हमारी आर्मी का 1सत टारगेट भी ये hi होगा. मेरा वादा है तुजसे इसे सिर्फ और सिर्फ तू hi अपने हाथो से मारेगी. बोल मारेगी इसे??

पारी पब की बाते सुन कर उसके सीने में अपना मुँह छुपा कर रोने लगती है. सबकी आखें नाम थी. तो ऐडा ने समझदारी दिखते हुए सबके फेस पैर स्मेल लेन के लिए पारी से कहा – यार अब तू hi इनकी गोद में बेथ कर मज़े लेती रहेगी तो मेरा no. कब आएगा. उड़ अब मुझको बेथ्रा है इनके उप्पेर…

ऐडा की बात को समझते हुए अंकिता – ोुये तेरा no. मेरे बाद में आएगा. अब मेरा no है.

ऐडा बुरा सा फनी सा फेस बनाते हुए… - तुम्हारा नहीं है तुम चीटिंग कर रही हो मेरे साथ…

इस बात पैर सब हसने लगते है. फिर कुछ देर तक ऐसे hi बाते होती रहती है और ये फाइनल होता है की दानव सेना 2 दिन बाद रखा को अपना 1सत टारगेट बनाएगी और इसको लीड जुली और पारी करेगी. इनके साथ 120 लड़किया जाने वाली थी. अंकिता को काम दिया गया था की वो पारी और जुली के साथ बेथ कर एक अच्छा सा प्लान बनाये. और गुरु को सरे अरेंजमेंट चक करने को बोलै गया. पारी की आखों में एक अलग चमक थी. पब भी इनके साथ वह जाने वाला था. अभी से सब बात कर hi रहे थे की वो मैनेजर (ालर होटल का मैनेजर) भी वह आ गया. पैर तब तक लेद और लेपटॉप बंद हो चुके थे.

मैनेजर ने आ कर पब को विश किया और वो एक फाइल लाया था अपने साथ वो पब को दे दी. पब उस फाइल को डायन से देखने लगा. और उसके फेस की मुस्कान गहरी होती चली गयी. जब उसने पूरी फाइल देख ली तो वो बोलै

पब – गुड जॉब दीपक (मैनेजर) … बहुत अच्छा काम किया है.

फिर पब ने कामिनी को अपने पास बुलाया और धिरे से बोलै की 2 क्रूर रस ला कर इसको दे. कामिनी ने भी वैसा hi किया. इतने रस देख कर दीपक खुश हो गया. और सबको विश करके चला गया. तो पब भी उसके पीछे -2 बहार तक आया.

दीपक – जी सर???

पब – उस मला का क्या हुआ???

दीपक पब को अपने फ़ोन में रवि की साडी डिटेल देखता है. और फिर बोलै – सर उस पार्टी के बाद से hi रवि और उसकी पत्नी गायब है. अभी कुछ दिन पहले तो उसे देखा गया था. पैर अब वो कहा है किसी को नै पता. मेने अपने कुछ आदमियों को उसे धुनने में लगा रखा है जैसे hi कुछ पता चलेगा मैं आपको इंफार्म कर दुगा.

उसके बाद दीपक निकल गया और उसके जाने के बाद पब अंदर आ गया. जब पब अंदर आया तो सब हैरानी से पब की और देख रहे थे जैसा जानना चाहते हो की क्या है इस फाइल में. पब ने सबको ऐसे गुरता देख कर मुस्कुराते हुए एरिका को अपने पास बुलाया और वो फाइल पकड़ा दी. एरिका ने जब उस फाइल को पड़ना सुरु किया तो पहले तो उसका फेस ख़ुशी से चमक उदा और फिर उसकी ाशों में आशु आ गए. वो फाइल पड़ती हुई रोटी रही. एरिका के रिएक्शन को देख कर सब और भी कंफ्यूज हो गए. फिर एक दम से एरिका फाइल को एक साइड रख कर पब से जा लिपटी और उसके फेस पैर पागलो की तरह चूमने लगी. पूरा फेस hi गेला कर दिया और फिर पब के होंटो को अपने होंटो में ले कर चूसने लगी. पब भी उसका ऊपर साथ देता रहा. वो सब लोग इन दोनों को बस देखते रहे. जब अंकिता पैर साबरा न हुआ तो वो बोल hi पड़ी

अंकिता – अरे हमको भी तो बताओ बात क्या है. एरिका क्या है इस फाइल में जो तुम कभी रोटी हो तो कभी इनके साथ किश करने लगती हो.
 
भाई मेने ये बात तो अपडेट 2 में HI कही थी की मणि दस माँ का बीटा है ये बात किसी को नहीं पता अभी. हाँ फ्यूचर में बता हो सकती है. मणि, दस माँ और डलासुर को HI पता है बस.......

त्रिकाल जितने तो एक्सपर्ट ये दोनों तंत्र मंत्र में कभी नहीं हो पाएंगे. उसकी सालो की मेहमत है. हाँ पैर अभी उसकी पावर्स उसके पास नहीं है.

थैंक यू बीआरओ फॉर ुर लवली कमेंट....................
 
सॉरी फ्रेंड्स वेट करवाने के लिए...

पैर क्या करू भाई लोगो.. गोवत. ने नेट HI बंद करवा दिया था पुरे सिटी का. आज कल के हाल तो आप सभी जानते होंगे. कल ों हुआ था 1 हॉर्स के लिए. मुझको लगा की अब ों HI रहेगा. पैर फिर से बंद. आज सुबह उदा तब नेट ों था तो सबसे पहले अपडेट पोस्ट किया है.

साथ बने रहे अपडेट भी आते रहेंगे.............
 
देखते है की त्रिकाल का नेक्स्ट अटैक कब और केसा होगा.

पब और सलोनी तो रिश्ते के लिए तैयार लग रहे है पैर क्या दयासुर मानेगा???

अवनि और पब के प्यार का क्या होगा ये तो भगवन HI जाने. पता नहीं कब दोनों एक दूसरे को अपने दिल का हाल कहा पाएंगे.............

जुली की टीम का काम बस सुरु होने वाला है............

थैंक यू बीआरओ फॉर लवली कमेंट.....
 
अपडेट 131

अंकिता – अरे हमको भी तो बताओ बात क्या है. एरिका क्या है इस फाइल में जो तुम कभी रोटी हो तो कभी इनके साथ किश करने लगती हो.

अंकिता की आवाज से एरिका अलग हुई और बोली – अंकिता मैं आज बहुत खुस हु. इन्होने आज मेरे लिए वो किया है जो में कभी सोच भी नहीं सकती थी. यदि अब पूरी उम्र इनकी गुलामी भी करू तो भी इस एहसान को नहीं चुक्का पाउगी.

एरिका की ये बात सुन कर पब को गुस्सा आ गया और उसने एक तप्पड़ दिया एरिका के कान के निचे. और फिर उसे अपने से चुपके लिया. और प्यार से उसके बालो को सहलाने लगा. फिर बोलै – एरिका तुम मेरी पत्नी हो. और मेने अपने पति होने का फ़र्ज़ निभाया है बस. मैं तो बस ये hi कोसिस करता हु की तुम सब हमेश खुस रहो.

अंकिता – अब कोई बताएगा की ये है क्या??

एरिका – मैं बताती हु, ये सब लंदन गोवत के पेपर की कॉपी है. जिनमे मेरे उप्पेर लगाए गए सरे इल्जाम से मुझको बरी कर दिया गया है. अब मैं कोई अपरादि नहीं हु. मैं कभी भी कही भी आ जा सकती हु. और इसमें मेरी माँ की जो प्रॉपर्टी के पेपर भी है जो माउद के नाम पैर है. और मेरे डैड की पूरी िंलेगेल प्रॉपर्टी का 10% और उनके सभी पटनेर की प्रॉपर्टी का 10% भी माउद के नाम किया हुआ है. जो वह की गोवत ने मेरे डैड और उनके पार्टनर के सभी काळा डाँडो को पकड़वाने के लिए गिफ्ट में दी है. इन सब प्रॉपर्टी की टोटल कॉस्ट 1 मिलियन $ है. सबसे बड़ी बात ये है की गोवत ने रिटेन में मुझसे और मूड से माफ़ी मागि है. अब हम फिर से लोदों के रेस्पेक्टेड पर्सन बन चुके है.

कामिनी – ये तो बहुत अच्छी बात है. मेरी एरिका अब निर्दोष प्रूफ हो चुकी है.

ऐडा – तो क्या एरिका तुम अब हमको छोड़ कर चली जाओगी??

एरिका – नहीं पागल है क्या.. अपनी फॅमिली को छोड़ कर वह फिर से ड्रम बजने में नहीं जाने वाली. अब तो जिंदगी भर तुम सबको खून peugi…hahahahahahah

एरिका की इस बात पैर सब है देते है. तभी पीछे से माउद भाग कर आती है और अपनी दीदी के उप्पेर चढ़ जाती है और उसको किश करने लगती है. कुछ देर बाद पब बोलै

पब – अरे माउद सारा प्यार दीदी को hi करोगी अपने जीजा को नहीं करोगी क्या???

माउद फिर पब को भी किश कर देती है. और सब लोग कुछ देर तक यु hi हाशि मजाक करती रहती है. और इस बिच hi पब के कहने पैर एरिका अपनी मदुर आवाज के एक सांग गति है. कुछ देर में सब लोग चल देते है अपने अपने काम पैर जो पब ने सको दिए थे.

पब अपने रूम में रेस्ट करने को आ जाता है. कुछ देर बात कामिनी, ऐडा और गुरु भी रूम में आ जाते है. ऐडा के फेस पैर सरम और घबराहट थी. तो कामिनी भी घबरा रही थी. गुरु का फेस सपाट था. पब उन तीनो को देख कर बेथ जाता है. और कामिनी और गुरु भी उसके पास जा कर बेथ जाती है. जबकि ऐडा पब के सामने सर जुका कर कड़ी हो जाती है.

गुरु – ये ऐडा आपसे कुछ कहना चाहती है??

पब – हाँ ऐडा बोलो क्या बात है. अब तुम मुझसे बात करने में कब से घबराने लगी??

ऐडा – वोओओओ वोओओओओ बात hi कुछ ऐसी है की…… प्लीज आप गुस्सा मत होना….

पब – बोलो तो जान बात क्या है. (पब ऐडा का हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लेता है और अपनी गौड़ में बिठा लेता है. एक तो ऐडा आज इतनी सेक्सी लग रही थी की पब का मन बार बार भटक रहा था. वो अपने लुंड को तो अपने कण्ट्रोल में कर सकता था. पैर मन का क्या करे. उसे आज ऐडा पैर बहुत प्यार आ रहा था. उसका सेक्सी लुक देख कर उसका मन उसे छोड़ने का कर रहा था.)

ऐडा (धीरे से) – ी म प्रेग्नेंट.

पब – व्हाट???? कब?? कैसे???? किसने कहा???? (ये सब पब के मुँह से अपने आप निकल गया)

ये सुन कर ऐडा रोने लगी उसको लगा की पब खुश नहीं है. पैर पब इस बात को हजम नहीं कर पाया था. की उसकी सबसे छोटी बीबी प्रेग्नेंट है. जबकि उससे बड़ी उम्र की पत्निया नहीं है. ऐडा इसलिए hi गबरा रही थी की पता नहीं पब को ये बात पसंद आएगी की भी नहीं. वो तो पहले ऐडा से शादी hi नहीं कर रहा था. फिर शादी करके भी पत्नी की तरह नहीं रखा. और ये सब उसकी काम आगे की वजह से hi था. और अब वो हो गया जिसके लिए एक लेडी की बॉडी इस आगे में पूरी तरह तैयार नहीं होती. ऐडा को भी ये फील हो रहा था की पब की इतनी और भी पत्निया है और प्रेग्नेंट हुयी तो केवल वो hi. जबकि वो सबसे छोटी है. 2 मं तक कोई कुछ नहीं बोलै ऐडा और कामिनी की आखों से आशु बहा रहे थे. गुरु के फेस पैर भी दुःख और नासमझी की भाव थे. जब पब को होश आया की वो क्या बोल गया है तब उसने ऐडा के सर पैर हाथ फेरा और फिर उसे अपनी भंहो में कास कर भर लिया. ऐडा पब की छाती में खो सी गयी. फिर पब ने ऐडा को थोड़ा सा अलग कर के उसके माथे को चुम लिया. और फिर उसके होंटो पे भी एक छोटी सी किश कर दी. और फिर बोलै

पब – मैं बहुत खुश हु ये सुन कर पैर???

ऐडा ने सवालिया नजरो से उसकी और देखा जैसे पूछ रही हो की खुश हो तो ये पैर केसा??

फिर से पब बोलै पैर इस बार वो गुरु से बोलै – गुरु क्या ये पॉसिबल है?? और हमारे बच्चे से जो युद्ध चल रहा है उस पैर क्या आसार होगा… बच्चे के लिए किसी तरह की कोई परेशानी???

गुरु – नहीं कोई नहीं बस एक ये hi है की अब इस नन्हे मेहमान का भी डायन रखना होगा. मेने गुरूजी (मणि) से बात की थी तब उन्होंने भी ये hi कहा की ये एक ख़ुशी की बात है. बस ये हो सकता है की जैसे ऐडा तुमसे जुडी है वैसे hi ये भी न तुमसे जुड़ जाये…

गुरु की बात सुन कर पब ख़ुशी से फुले नहीं समता और ऐडा को गौड़ में उदा कर डांस करने लगता है. तो कामिनी उससे कहती है – रुको जी क्या कर रहे हो आप. वो प्रेग्नेंट है और ऐसे डांस करना इसके लिए ठीक नहीं है.

कामिनी की बात सुन कर पब एक दम से रुक जाता है और अड़ को प्यार से बिस्तर पैर बिठा देता है. और फिर बोलता है – सॉरी -2 गलती से हो गया….

पब की ये हारकर देख कर ऐडा शर्मा जाती है और गुरु और कामिनी दोनों हसने लगती है. फिर पब कहता है – अब मुझको पूरी बात बताओ गुरु की ये हुआ कैसे?? और तुमने अभी तक मुझको क्यों नहीं बताया???

गुरु – वो बात ये है की ऐडा का इस बार पीरियड मिस हो गया. और जब पीरियड मिस हुए कई दिन हो गए तब इसने कामिनी को बताया और कामिनी ने मुझको तो कल सुबह हमने घर पैर hi वो प्रेगनेंसी वाला टेस्ट किया. वो पॉजिटिव था. अब आप आज आ hi रहे थे तो इसलिए अभी तक नहीं बताया. कामिनी और ऐडा को लगा की आप इस बच्चे को ले कर खुश नहीं होंगे इसलिए ये दोनों दर भी रही थी इस बात को बताने से. पैर मुझको आप पैर पूरा विस्वास था की आप खुश गए. और जो एक बात आपके मंद में आयी वो मेरे भी आयी तो इसके लिए मेने गुरु जी से बात कर ली.

पब – हम्म ये बात है… अच्छा ऐडा तुमको क्यों लगा की में अपने बच्चे की खोवार सुन कर खुश नहीं होगा??

ऐडा – वोऊ वोओओओ बात ये थी की मेने सोचा की जैसे हमारी शादी हुई उसके बाद भी अपने मुझको पत्नी की तरह नहीं रखा. तो सायद आप अभी मुझसे बच्चा भी न चाहते हो.. पैर आपका फेस बता रहा है की आप कितने खुश है. और मैं भी बहुत खुश हु….

कामिनी – और मैं तो डबल खुश हु…

पब ऐडा के पास बेथ जाता है और उसकी आखों में देखता है और फिर उसके होंटो को चूसने लगता है. और बहुत देर तक चुस्त रहता है. और फिर अलग हो कर बोलै – मैं जनता हु जान तुमको ये लगता है की मैं तुमसे प्यार नहीं करता. पैर यकीं करो की मेरे दिल में तुम्हारे लिए भी उतना hi प्यार है जितना पारी, अंकिता या कामिनी के लिए है या गुरु के लिए है. मेरे लिए मेरी साडी पत्निया एक जैसी है. हाँ मंटा हु जब मेने तुमसे शादी की थी उस टाइम मैं तुमसे प्यार नहीं करता था पैर फिर तुम्हारे प्यार ने मुझको भी तुम्हारा दीवाना बना दिया. और फिर हॉस्पिटल के वो 15 दिन. तुमको लगा होगा की वो में तुम्हारा अहसान चुकाने के लिए तुम्हारे साथ हु. नहीं जान मैं भी तुमसे प्यार करता हु. मुझको भी तुम्हारी चिंता थी. तुम्हारे साथ रहा कर तुम्हारे प्यार को फील करके मुझको बहुत अच्छा लगता था. अब कभी ऐसा मत सोचना की मैं तुमसे प्यार नहीं करता … ok… ी लव यू माय स्वीट नॉटी ऐडा

ऐडा (अभी उसके फेस पैर ख़ुशी की एक चमक थी) – ी लव यू तू माय लोवलय हस्दंद…. अरे आप गलत सोच रहे है. वो बात नहीं थी. मैं जानती हु की आप मुझसे कितना प्यार करते है. अब मैं नहीं बताऊगी की मैं क्या सोच कर परेशां थी.

पब – क्या मतलब??? क्या कहना चाहती हो तुम???

कामिनी – हाहाहाहाहा वैसे तो आप बहुत बड़े बनते है. पैर अभी कुछ पता है नहीं. शादी कर्ली देर साडी पैर है अभी भी बच्चे hi… हाहाहाहाहा

पब कामिनी को हस्ता देख कर चीड़ गया. और उसको अपनी भंहो में खींच कर बोलै – बता न क्या बात है???

कामिनी – नाआ मैं नहीं…..

पब – अच्छा नहीं बताएगी… रुक अभी…

फिर पब कमीनी के पेट पैर चुटकी काट लेता है. कामिनी ाओऊंछह करके चिलाती है. पब फिर से दूसरी तरफ चुटकी कट्टा है. कमैनी फिर चिल्लाती है और गुरु से बोलती है – दीदी देखो न क्या कर रहे है. मार रहे है मुझे…

गुरु – हाहाहाहाहा… मैं नहीं आने वाली बिच मैं…. हाहाहाहाहा

पब गुरु को भी खींच लेता है और उसको भी चुटकी काट कर बोलता है की बताओ क्या बात है???

तब गुरु बोली – ok.. ok मैं बताती हु. बात ये है की ऐडा की अभी ये जो आगे है इस आगे में एक लेडी की बॉडी प्रेगनेंसी के लिए फिट नहीं होती. वैसे पहले ज़माने में तो इस आगे में बच्चे होते थे. पैर हो भी सकता है की फ्यूचर में कोई प्रॉब्लम हो. और नाब hi हो…

गुरु की बात सुन कर पब सर पकड़ कर बेथ जाता है और फिर बोलै – मैं भी कितना बड़ा घड़ा हु. मेने ये तो सोचा hi नहीं… नहीं नहीं… मैं ऐडा की हेल्थ के साथ कोई रिस्क नहीं ले सकता… ये पहले से hi कमजोर है…

ऐडा – प्लीज अब आप मन मत करिये न. मैं आपकी हर बात मानूगी पैर प्लीज मैं हमारे बच्चे को जनम देना चाहती हु. वैसे भी ठाकुरो की बेतिया बहुत स्ट्रांग होती है. मुझे कुछ नहीं होगा…

पब ऐडा की बात सुन कर सोच में पद जाता है एक तो वो भी चाहता था की ऐडा इस बच्चे को जनम दे. वो भी तो बाप बनता न. पैर वो ऐडा के लिए रिस्क भी नहीं ले सकता था. तो वो कुछ देर तक सोचता रहा क्या किया जाये. फिर एक दम से उसे ठाकुरो की कुल देवी ाष्टिका की याद आयी. तो वो मन hi मन उनको याद करने लगा. कुछ hi देर में उसके मन में देवी की आवाज आयी – पुत्र चिंता मत करो ये बच्चा तुम्हारे अच्छे कर्मो का फल है. ऐडा को कुछ नहीं होगा. तुम्हारा और बच्चे का कल्याण हो”
 
अपडेट 132

पब ऐडा की बात सुन कर सोच में पद जाता है एक तो वो भी चाहता था की ऐडा इस बच्चे को जनम दे. वो भी तो बाप बनता न. पैर वो ऐडा के लिए रिस्क भी नहीं ले सकता था. तो वो कुछ देर तक सोचता रहा क्या किया जाये. फिर एक दम से उसे ठाकुरो की कुल देवी ाष्टिका की याद आयी. तो वो मन hi मन उनको याद करने लगा. कुछ hi देर में उसके मन में देवी की आवाज आयी – पुत्र चिंता मत करो ये बच्चा तुम्हारे अच्छे कर्मो का फल है. ऐडा को कुछ नहीं होगा. तुम्हारा और बच्चे का कल्याण हो”

देवी की बात सुन कर पब का मन शांत हो गया. फिर भी पब के मन में एक दर था ऐडा के लिए. वो ऐडा को कोई तकलीफ नहीं देना चाहता था. इसलिए उसने मन hi मन अंकिता को रूम में बुला लिया अंकिता के पास hi पारी बैठी थी तो वो भी उसके साथ hi पब के रूम में आ गयी.

पब – अंकिता तुमको एक गुड न्यूज़ पता है.

अंकिता – नहीं.

पब – तुम माँ बनने वाली हो…

ये सुन कर अंकिता और पारी दोनों चौक गयी और ये तीनो माध -2 मुस्कुराने लगी..

अंकिता – क्या कहा अपने??? मैं माँ बनने वाली हु और मुझको hi पता नहीं??? यार मजाक मत करो. मेरा पीरियड 4 दिन पहले hi गया है. (अंकिता जोश में पीरियड वाली बात बोल तो गई पैर फिर शर्मा भी गयी)

पब – अरे अंकिता प्रेग्नेंट तुम नहीं हो प्रेग्नेंट तो ये है हमारी बच्ची ऐडा…

अंकिता और पारी – क्या?????? उनको भी ये बात एक बार में हजम नहीं हुई पैर जब समाज आयी तो दोनों पब की बात समाज गयी और खुश हो गयी पारी ने तो डांस करना सुरु कर दिया. ये बोल कर की मैं माँ बनने बलि हु….

और फिर पारी भाग गयी रूम से और सबको ये खबर सुना दी. सब भागते हुए ऐडा के रूम में पहुंच गए. जय और काजल भी साथ में थे.

पब – अंकिता, गुरु, कामिनी और सविता अब से ये दोनों तुम चारो की जिम्मेदारी है इन दोनों का (ऐडा और काजल) हर तरह का ख्याल तुमको रखना है. और कामिनी तुमको डायन रखना है ये अब जयादा फुदकती न रहे घर में. बहुत ुच्चति कूदती है. अब यदि मेने इसे ऐसे उछलते कूदते देख तो मैं इसकी टंगे तोड़ कर इसके हाथ में दे दुगा.

ऐडा – सच में आप ऐसा करेंगे (ऐडा ने ये बात एक दम मासूमियत से बच्चो के जैसे से बोली)

पब – haan…(uski नक़ल करते हुए)

फिर सब हसने लगे. हवेली मैं खुशियों का माहौल था सभी लोग खुश थे. पेय और माउद भी खुश थी. उनके साथ खेलने के लिए 2 खिलोने जो आने वाले थे. फिर पब ये बात अपनी दीदी को भी बता देता है फ़ोन पैर. लता भी ये सुन कर खुश हो जाती है. सभी लोग ऐसे hi हसी मजाक करते हुए डिनर करके रूम से चले जाते है. और पब गुरु को ले कर अपने रूम में आ जाता है. और फिर वो गुरु को बताता है की उसने इस एक महीने में क्या -2 सीखा और सलोनी के बारे में भी बताता है. तो गुरु उससे कहती है की उसे दयासुर जी से बात करनी चाहिए कियोकि वो भी जानते है की तुम्हारा शादी करना क्यों जरुरी है. और वैसे भी अब दिन बहुत काम बचे है 36 दिन तो ख़तम हो चुके है. फिर गुरु पब के साथ hi सो जाती है और पब नेक्स्ट डे सुबह hi टेलिपोर्ट हो कर वह पहुंच जाता है. और अपनी प्रैक्टिस करके दयासुर जी के पास आता है.

पब – नमस्ते गुरूजी… (और फिर उनके पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है.)

दयासुर – विजयी भाव!!!

पब – ये कैसे आशीर्वाद है गुरूजी?? मैं अभी कोण से युद्ध पैर जा रहा हु?? मैं तो यहाँ आपसे एक जरुरी बात करने आया हु…

दयासुर – हम्म हम जानते है पुत्र. वो बात तुम करने आये हो उसके लिए hi हमने तुमको ये आशीर्वाद दिया है. पैर अपनी किसी भी बात को कहने से पहले तुम सलोनी को भी बुला कर ले आओ..

पब – जी गुरूजी ……..(और फिर पब सलोनी को बुला लता है साथ में माहि भी आ जाती है कियोकि वो भी जानती थी की पब सलोनी का हाथ मांगने जा रहा है. और उसके मन में किसी तरह की एक बेचैनी थी.)

दयासुर – बैठो सब लोग… सलोनी आज मैं तुम सब को एक कहानी सुनाने जा रहा हु उसे डायन से सुन्ना. ये सलोनी के जमन की कहानी है.

सलोनी दयासुर जी की बात को सुन कर चौक जाती है उसे नहीं पता था की उसके जनम की भी कोई कहानी है. उसको तो बस अपनी माँ का एक डुंडला सा फेस याद था. और उसके पास उसकी माँ का एक छोटा सा (पासपोर्ट साइज) फोटो भी था. उसको तो ये hi पता था की वो एक दानव कन्या है और ये फोटो वाली उसकी माँ है जो 20 साल पहले hi मर चुकी है. पब भी समाज गया था की गुरूजी जानते है की वो सलोनी से शादी करना चाहता है. इसलिए hi उन्होंने सलोनी को भी बुलाया और अब उसके जनम की कहानी भी सुना रहे है. वो तो खुस था की गुरूजी ये जान कर क्रेडिट नहीं है तो उसकी शादी में कोई रुकावट नहीं होगी.

दयासुर – सलोनी तुम भी डायन से सुन्ना ये सब अब तुमको जानना जरुरी है. और पब ये सब मैं तुमको इसलिए बता रहा हु कियोकि तुम जो चाहते हो उससे पहले ये जानना तुम्हारे लिए बहुत जरुरी है – बात आज से करीब 32 साल पुराणी है. मैं अपनी माँ और पिताजी की भक्ति करते हुए इसी गुफा ने रहता था. ये वो एरिया है जहा से माँ पिताजी के निवेश की सीमा आरम्भ होती है. मेने यहाँ पैर रहना इसलिए hi चुना था जिससे में माँ के पास भी रहा सकू और उसके एकांत में कोई बढ़ा भी पैदा न हो. मैं कई सालो से यहाँ रह रहा हु. बहुत से मुसाफिर भटकते हुए यहाँ ा hi जाते है. साल में 4-5 लोग तो आ hi जाते होंगे. पैर आज से 32 साल पहले एक नारी यहाँ आयी पैर वो मार्ग भक्ति नहीं थी. बल्कि उसका कोई मार्ग hi नहीं था. वो जिन्दा रहने के लिए यहाँ से वह भटक रही थी. जब वो यहाँ पहुंची तो मेने उससे अपनी गुफा में ले आया. कियोकि जब में उससे मिला था उस टाइम रात होने वाली थी. और रात में वो कहा भटकती. उप्पेर से उसके पास जयादा गर्म कपडे भी नहीं थे. यदि वो बहार रहती तो पक्का उस दिन वो मर जाती या तो ठण्ड से या फिर कोई जंगली जानवर उसको खा जाता. इसलिए उसे मेने यहाँ इस गुफा में hi रोक लिया. सुबह मैं जल्दी उड़ता हु तुम लोग जानते hi हो. पैर वो भी मेरे साथ hi उड़ गयी थी. और मैं तो अपने दैनिक कामो में बिजी हो गया पैर उसने इस गुफा की साफ़ सफाई कर दी. हम दोनों की लिए भोजन भी बना लिया. जब में गुफा में बापिस आया तो अपनी गुफा को साफ़ देख कर दांग रहा गया. और जब मेने उससे ये करने का कारन पूछा तो वो बोली – मुझको अपने रात में रुकने के लिए जगह दी तो मेरा भी तो फ़र्ज़ है की मैं यहाँ आपका कुछ सहयोग करू.

डायरुर – बहुत hi अच्छे विचार है आपके. क्या नाम है आपका??

वो – जी काँटी

दयासुर – अब आप कहा जाएगी??

काँटी – पता नहीं कहा.. जहा ये पग ले जायेगे वही चल देती हु. मेरा कोई ठिकाना नहीं है.

दयासुर – क्यों?? ऐसा क्यों?? तुम्हारा क्या कोई नहीं है इस संसार में?? तुम्हारे भाई बहन , माँ बाप?? पति बच्चे?? कोई तो अपना होगा??

काँटी ये सुन कर रोने लगी शायद उसे किसी की याद आ गयी थी.

दयासुर – अरे ा प्रो क्यों रही है?? शायद मेने hi कुछ गलत पूछ लिया आपसे.. मुझको माफ़ करे..

काँटी – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. बस ऐसे hi मुझको किसी की याद आ गयी तो ये आखें जलक उडी. छोड़िये आप बताईये आप कोण है. लगता तो है की आप कोई तपस्वी है. जो सड़ना के लिए यहाँ रहते है. और कोई नहीं है क्या आपके साथ??

दयासुर – मैं सड़ना तो करता हु. पैर तपस्वी नहीं हु. यही मेरा घर है. सालो से में यहाँ रह रहा हु. मैं हु दानव राज डलासुर का सबसे छोटा पुत्र दयासुर.

काँटी दानव सुन कर दर गयी और दर के मरे सुकुड़ने लगी.

दयासुर – अरे डरो नहीं मैं वैसा दानव नहीं हु जैसा तुम सोच रही हो. मैं तुमसे कुछ नहीं कहुगा.

दयासुर की बात सुन कर काँटी का दर थोड़ा सा काम हुआ और फिर बोली – आप जब दानव राज के पुत्र है तो काया क्यों रहते है?? आपके पिताजी के पास तो बड़े -2 महल होंगे?? तो आप उनके साथ क्यों नहीं रहते?? आप और दानवो के जैसे क्यों नहीं है?? और कोई दानव होता तो रात से अब तक तो मुझको मार कर खा चुक्का होता पैर अपने ऐसा कुछ नहीं किया क्यों??

दयासुर – हाँ हमारे महल भी है और वो पटल में है. पैर वह पैर न तो मेरे माँ पिताजी रहते है और न hi मैं. मेरे माँ पिताजी भी यही पास में hi रहते है. और रही और दानवो के जैसे होने की बात तो बता दू की मेरे माँ पिता जी भी मेरे जैसे hi है.

फिर कुछ देर तक वो ऐसे hi बाते करते रहे और फिर भोजन का टाइम हो गया तो उसने बनाया हुआ भोजन मेरे सामने कर दिया. मेरे लिए तो ये बहुत बड़ी बात थी. मैं हमेशा से खुद hi बना कर खता आया था. या फिर जब भी माँ के पास होता तो माँ खिलाती थी. या आज पहले बार किसी और ने मेरे लिए खाना बनाया था. जब मेने भोजन किया तो मज़ा आ गया. एक लम्बे टाइम के बाद में टेस्टी खाना खा रहा था. हम फिर एक दूसरे से बाते काने लगे. जब सूरज सर पर आ गया (मतलब दोपहर) तब मेने उससे पूछा की तुम कब जाओगी. तो वो बोली – क्या मैं आपसे कुछ मांग सकती हु???

दयासुर – हाँ हाँ क्यों नहीं… यदि वो हमारे वश में हुआ तो हम तुमको जरूर देंगे??

काँटी – वो बात ये है की मैं पिछले 1 साल से ऐसे hi भटक रही हु. जहा भी गयी हु वह मेने मर्दो की नजरो में अपने लिए हवस hi देखि है. आप पहले वो साक्ष है जिसने ऐसा नहीं किया है. मैं यहाँ पैर खुद को बहुत साहफुज महसूस किया है. यदि आप कृपा करे तो मैं भी कहा पैर एक नौकरानी की तरह से hi रहना चाहती हु. आपको मेरी वजह से कोई प्रॉब्लम नहीं होगी. आपका हर काम कर दिया करुँगी.

पता नहीं क्यों पैर मैं उससे मन नहीं कर पाया. और फिर वो मेरे साथ इस गुफा में रहने लगी. उसने अपने वेयर मैं मुझको सब बता दिया था. वो एक ठाकुर थी. और एक बार उसका पति उसे लड़ाई में हार गया. पैर उसे जीते वाले ने भी उसे अपनाने से मन कर दिया. तो ठाकुरो की परंपरा के अनुशार उसे सभी ठाकुरो की रंडी बनना पड़ता जो की उसे मंजूर नहीं था इसलिए वो अपनी 5 साल की बेटी कामिनी को छोड़ कर घर से भाग आयी और 1 साल तक यहाँ वह भटकने के बाद मेरे पास पहुंची थी. वो मेरे साथ रहती. और यह अक हर काम करती. मेरी सड़ना में भी हेल्प करती. सरे दिन तो काम करती और रात में अपनी बेटी कामिनी को याद करके रोटी रहती. धिरे -2 समय बीतता गया. और 2 साल बिट गए. हम दोनों में एक प्रेम सा हो गया था. मुझको उसकी आदत हो गयी थी. एक दिन उसने मुझसे शादी के लिए कहा. तो मेने कहा की मैं तो एक दानव हु तुमसे कैसे शादी कर सकता हु. पैर जब वो बार -2 मुझसे शादी के लिए कहने लगी तो मेने अपनी दस माँ से इस वेयर में बात की तो माँ में भी मुझसे कहा की यदि तुम भी ये चाहते हो तो तुमको उससे शादी कर लेनी चाहिए. ये नियति का एक खेल है. और इस खेल को वैसे hi चलने दो जैसे की नियति चाहती है. अपनी माँ की बात सुन कर मुझको भी लगा की मैं भी उससे प्रेम करने लगा हु तो हम दोनों ने शादी कर्ली और उसके एक साल बाद सलोनी का जनम हुआ. हमारी जिंदगी बहुत खुशाल हो गयी थी. 7 साल तक मैं और काँटी अपनी बेटी सलोनी के साथ इस गुफा में बहुत आनंद से रहे. पैर फिर नियति ने अपना खेल दिखाया और काँटी बीमार हो गयी. और कुछ दिन बाद वो मार भी गयी. पैर मरने से पहले उसने मुझसे वचन लिया की मैं उससे hi अपनी बेटी की शादी करवाऊंगा जो की युद्ध में मुझको हरा देगा. ये उसके घर की परंपरा थी. पैर वो चाहती थी की उसकी बेटी सलोनी की शादी ऐसे इंसान से हो जो उसे बिच रस्ते में न हार जाये और उसकी बेटी को भी उसकी तरह भटकना पड़े.

दयासुर जी की कहारी सुन कर पब समाज गया की उन्होंने उनको ये कहानी क्यों सुनाई है. इसका मतलब ये था की पब को सलोनी से शादी करने के लिए उसे अपने गुरु दयासुर को hi हराना होगा. वही सलोनी अपनी माँ की कहानी सुन कर रोने लगी थी. तो वो अंदर चली गयी और अपनी माँ की उस फोटो को अपनी सीने से लगा कर रोने लगी. माहि भी सलोनी के पास चली गयी और पब भी एक दूसरी जगह जा कर अपने मन में सोचने लगा की वो दयासुर जी से कैसे लड़ सकता है वो तो उसे बहुत जल्दी हरा देंगे.
 
अपडेट 133

दयासुर जी की कहारी सुन कर पब समाज गया की उन्होंने उनको ये कहानी क्यों सुनाई है. इसका मतलब ये था की पब को सलोनी से शादी करने के लिए उसे अपने गुरु दयासुर को hi हराना होगा. वही सलोनी अपनी माँ की कहानी सुन कर रोने लगी थी. तो वो अंदर चली गयी और अपनी माँ की उस फोटो को अपनी सीने से लगा कर रोने लगी. माहि भी सलोनी के पास चली गयी और पब भी एक दूसरी जगह जा कर अपने मन में सोचने लगा की वो दयासुर जी से कैसे लड़ सकता है वो तो उसे बहुत जल्दी हरा देंगे. फिर उसे याद आया की उसके पास तो वरदान है की उसे युद्ध में कोई नहीं हरा सकता ये सोच कर hi वॉक हश हो गया. और फिर सलोनी की माँ की कहानी को सोचने लगा. उसे लगा की उसने काँटी नाम और ये कहानी कही सुनी है. फिर जब उसे काँटी की बड़ी बेटी का नाम कामिनी याद आया तो उसे सब याद आ गया. की कामिनी ने बताया था की उसकी माँ के साथ भी ऐसा hi हुआ था. (अपडेट 27) पब समाज गया की सलोनी कामिनी की hi छोटी बहन है. तो वो इस बात को कन्फर्म करने के लिए पहले वो सलोनी से मिलने गया. सलोनी इस टाइम अपनी माँ की फोटो को देख देख कर रो रही थी. तो पब ने भी उसकी माँ की फोटो देख ली. अब सब क्लियर हो चुक्का था. कामिनी की hi माँ वह से भाग कर दयासुर जी के पास आयी और फिर दयासुर जी से उसे एक और बेटी हुयी – सलोनी.

पब दयासुर जी के पास पहुंच गया था. और उनसे बोलै – गुरूजी मैं आपसे युद्ध करना चाहता हु.

दयासुर – मुस्कुरा देते है – ये तो बहुत अच्छी बात है. यानि की तुम सलोनी के लिए मुझसे भी युद्ध करने को तैयार हो.

पब – जी गुरूजी. आपका hi शिष्य हु. पीछे भी तो नहीं हैट सकता.

दयासुर – ठीक है कल सुबह हम दोनों युद्ध करेंगे. पैर डायन रहे मेरे हाथो मरे जाओ तो मुझको दोष मत देना. चाहो तो एक बार अपनी और पत्नियों से सलहा कर सकते हो. कियोकि तुम जानते हो तुम्हारे मरने से क्या होगा.

पब – उसकी जरुरत नहीं है गुरूजी. कियोकि युद्ध में विजय का वरदान तो मुझको आपके पिता से hi मिला है. और आप खुद अपने पिता के वरदान को गलत सिद्ध नहीं होने देंगे.

दयासुर – हम्म बहुत चालक हो….. पैर युद्ध तो होगा hi. मैं बिना युद्ध के तुम्हारी शादी नहीं होने दुगा. मेरी पत्नी की इच्छा थी ये.. और ये युद्ध तुम्हे ये भी बता देगा की तुमने क्या सीखा है.

पब – जैसी आपकी आज्ञा गुरूजी….

पब दयासुर से आज्ञा ले कर सनोली के पास आ जाता है. और उसे पूरी बात बता देता है. एक और सलोनी अपनी शादी की बात से खुश थी तो वही दूसरी और घबरा भी रही थी. कियोकि वो संसार में 2 लोगो से hi प्रेम करती थी. और कल दोनों hi एक देसरे से युद्ध करने वाले थे. पब उसे समजता है की ये युद्ध किसी को मरने के लिए नहीं है. तब जा कर सलोनी की घवराहट काम होती है. फिर बचे हुए टाइम में पब अपने मंत्रो को याद करने लगता है. रात को जल्दी सो जाता है और सुबह 4 बजे hi डायन में बेथ जाता है. 4 हॉर्स तक डायन में रहने के बाद जब वो उड़ता है तो उसे महसूस होता है की उसके अंदर कितनी पावर्स आ चुकी है.

दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे. माहि और सलोनी मूक दर्शक की तरह दूर बैठी दोनों को देख रही थी. जैसे hi दयासुर जी युद्ध सुरु करने को कहते है तो पब पहले जा कर उसके पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है. और फिर उनके सामने खड़ा हो कर उनको युद्ध के लिए ललकारता है. तो दयासुर जी पहले प्रहार का मौका पब को देते है.

पब अपनी आँखें बंद करके कुछ मंत्र पड़ता है और एक तलवार उसके हाथ में आ जाती है. वो उस तलवार को दयासुर की और पकता है तो उससे वो तीन तलवार में बदल जाती है. दयासुर इस वॉर को देख कर हस्ते है और एक मंत्र पद कर उन तलवारो का रुख बदल देते है. तो वो पब की और hi बाद जाती है. वो अभी पब से जयादा दूर गयी भी नहीं थी की वापस आ गयी. पब को सभालने का मौका भी नहीं था. पब बाटने के लिए थोड़ा साइड हो जाता है. फिर भी एक तलवार उसके एक हाथ से टकराती है. हलाकि उसे कुछ होता नहीं है. पैर ये पब की एक नकमियाबी hi थी.

पब फिर से मंत्र पद कर हाथ आगे करता है तो एक ब्लू रौशनी निकल कर दयासुर जी की और जाती है. दयासुर जी भी एक लाइट ब्लू रौशनी छोड़ते है दोनों अपश में टकराती है और एक जोर का दमका होता है. फिर दयासुर जी एक ऑरेंज रंग की रौशनी का गोला पब पैर पकते है तो पब भी उसका जवाब देता है. फिर एक बार दमका होता है. ये सिलसिला यु hi चलता रहता है. केवल रोशनियों के रंग और इनकी शेप में चेंज हो रहा था. और हर बार टकराने के बाद जो दमका होता उसमे चेंज था पैर दोनों में से कोई भी रुकने को तैयार नहीं था. इन दमको ने पुरे पहाड़ो को hi हिला दिया था, पैर कोई रुक hi नहीं रहा था. फिर दयासुर जी एक बहुत सक्तिसाली ब्लैक रौशनी की किरणे चोदे है जिनका जवाब पब के पास नहीं था. वो दानवो की वो अद्भुत पावर थी जो की हर किसी के पास नहीं होती. और इसको हाशिला करना भी लग भाग न मुमकिन है. ये दानवो की काली शक्ति है. पब के पास बचाव के लिए कुछ पल hi थे. तो वो एक डैम से भौवन शिव को याद कर उस पावर को छोड़ता है जो की देवी ाष्टिका ने उसे दी थी. और जैसे hi ये दोनों शक्ति आपस में टकराती है. वह भूकंप आ जाता है. दोनों को भी बहुत जोर का जतका लगता है दोनों दूर जा कर गिरते है. पब को तो चोट नहीं आती. पैर दयासुर जी बहुत घायल हो जाते है. और बेहोश हो जाते है.

एक काली शक्ति और एक भगवन शिव की शक्ति इन दोनों की तकर से ये तो होना hi था. वो पहाड़ उस दमके से हिल जाते है. और बर्षो से जमी बर्फ टूटना सुरु कर देती है. चारो और से बर्फ उस घाटी की और आने लगती है ये देख कर तीनो वह दर जाते है. पब हिमत से काम लेता है. और भाग कर दयासुर जी को कंडे पर उदा कर माहि और सलोनी के पास पहुंच जाता है. दोनों का हाथ पकड़ कर जैसे hi टेलिपोर्ट होने वह होता है. सलोनी कहती है उसकी माँ की फोटो और उनकी आखरी निशानी अंदर है. उसे वो हर हाल में चाहिए. पब तुरंत गुफा में hi टेलिपोर्ट हो जाता है. सलोनी भाग कर अपने रूम में जाती है और एक कान की झुमकी (जोड़ा नहीं केवल एक झुमकी) और एक फोटो ले कर आ जाती है. पैर अभी तक बर्फ बहुत नजदीक आ चुकी थी. और गुफु में भी एक डैम अंधेरा हो चुक्का था. आधेरे में सलोनी किसी चीज से टकरा कर गिर जाती है और वो झुमकी भी पता नहीं कहा गयी थी. अब तो सलोनी का रोना सुरु हो गया था. एक दम से ठण्ड भी भड़ने लगती है. कियोकि बहार बर्फ ने गुफा को डाक दिया था. ये चोरो की hi इस दाब चुके थे. साँस घुटने लगी थी. ठण्ड बहुत तेज़ी से बढ़ती जा रही थी. पब ने टेलिपोर्ट होने की कोसिस की पैर नाकामियाब रहा. जमीन के अंदर दबने के बाद टेलिपोर्ट होना पॉसिबल नहीं था. कुछ hi मं. में ये तीनो भी बेहोश हो कर गिर पड़े. किसी को नहीं पता था की बर्फ के पहाड़ो में कहा -2 पैर कोण -2 डाब चुक्का है.

दूसरी और कामिनी, पारी, अंकिता, सविता, गुरु, अवनि, एरिका सभी का मन बहुत घबरा रहा था. सभी पब ने मन hi मन कांटेक्ट करने की कोसिस कर रही थी. पैर किसी का भी कांटेक्ट नहीं हो प् रहा था. ऐडा अपने रूम में सोते -2 कब बेहोश हो गयी किसी को पता भी नहीं चला. ऐडा को साँस लेने में प्रॉब्लम होने लगी पैर आज किसी का डायन किसी की तरफ था hi नहीं सब बेचैन से यहाँ से वह घूम रहे थे. सभी के दिलो की दधकण बड़ी हुई थी. गुरु से जब न रहा गया तो वो अपने रूम में बेथ कर दस माँ से प्राथना करने बेथ गयी. कामिनी अपनी कुल देवी की आराध्ना में लग गयी. सविता मन hi माँ शिव जी डायन करने लगी. पब की सलामती की दुआए करने लगी. एरिका गॉड की प्रे करने लगी जो की वो बचपन से करती आ रही थी. सभी के मन में अपने अपने भगवानो का जप चल रहा था. फिर भी दिल की बेचैनी काम नहीं हो रही थी. पूरी रात ऐसे hi गुजर गयी. न तो कोई सोया और न hi किसी ने किसी और की और डायन दिया. रात का एक एक पल काटना सभी के लिए भरी हो गया था.
 
अपडेट 134

सुबह जब पब आखें खुली तो पब किसी की गौड़ी में सो रहा था. उसका सर किसी की गौड़ में था. आखें खोल कर जब उसकी नज़ारे चारो और घुमाई तो उसने पाया की वो एक बहुत hi सुन्दर सी गुफा में है. वो गुफा से ज्यादा कोई प्रकृति का बनाया हुआ रूम लग रहा था. भहुत सी आराम देह बिस्तर पैर लेता हुआ था. और सर किसी नारी की गौड़ में था. अभी रात की खुमारी उत्तरी नहीं थी ुकर से नजरो के सामने का मनमोहक नजारा. पब को कुछ पालो के लिए समाज में hi नहीं आया की वो है कहा और क्यों है. फिर उसके मंद में कल के दिन की घटना याद आयी की वॉक अल पूरा दिन दयासुर जी से युद्ध करता रहा और फिर उसे याद आया की युद्ध के अंत में बर्फ ने जो तभी मचाई थी. वो माहि, सलोनी और दयासुर जी सभी उस गुफा में hi बर्फ के अंदर डाब गए थे. उसकी किसी भी पावर ने उसका साथ नहीं दिया. और फिर सांसो लेने में भी प्रॉब्लम होने लगी और लास्ट में उसकी चेतना hi चली गयी. से सब याद आते hi वो चौक गया. उसे तो अभी तक मार जाना चाहिए था. फिर अभी जिन्दा कैसे है. किसने बचाया उसे. और बाकि के तीनो लोग कहा है. क्या हुआ उसके बेहोश होने के बाद ??? जैसे hi ये सब बाते उसे मंद में आयी वो एक दू मुद कर बेथ गया. और चारो और देखने लगा. तभी उस नारी ने उसके सर पैर हाथ फिराया. तो उसकी नजर उस नारी पैर चली गयी. और फिर उसे कुछ याद hi नहीं रहा. वो एक तक बस उनको देखता hi रहा गया. उनको देखते हुए उसके मन में न तो कोई वासना थी और न hi प्यार. बस उस नारी के फेस का अट्रैक्शन hi इतना था की वो अपनी नजरे हटा hi नहीं प् रहा था. दिमाग बंद हो चुक्का था. मन केवल उस नारी को देखते hi रहने को कर रहा था. ऐसा लग रहा था की इस नारी के दर्शन मात्रा से hi उसका कल्याण हो जायेगा. बार -2 उसके मन में वो प्यार जनम लेता जो की एक बच्चे का उसकी माँ से होता है. और फिर उनके उस सुन्दर से मुख्ते में खो जाता. कभी माँ का प्यार तो कभी सुंदरता का वो आकर्षण जिसमे कोई भाव hi नहीं था.

कुछ देर तक जब दोनों में से कोई नहीं बोलै तो इस छुपी को उस नारी ने hi तोड़ा – क्या हुआ पंकज??? ऐसे क्या देख रहे हो??? पहचाना नहीं मुझको???

पब – नहीं देवी. कोण है आप?? और कहा हु मैं?? मेरे साथ में मेरे गुरु दयासुर जी और उनकी पुत्री भी थी वो कहा है??? मेरी पत्नी माहि भी थी मेरे साथ में वो कहा है??? मैं जीवित कैसे हु?? किसने बच्या मुझे?? हम सब तो बर्फ में डाब गए थे.

नारी – हाहाहाःहाहा (नारी की हसने से hi पब के दिल में एक शांति सी छ गयी. वो उतावला पैन अपने आप hi शांत हो गया. दिल अब किसी बात का जवाब नहीं चाहता था)

नारी – एक साथ इतने सवाल. इतने वयाकुल न हो पुत्र…..

पब – आप कोण है. आपके दर्शन से आपकी मदुर आवाज से hi मेरे मन की वायुकुलता अपने आप ख़तम हो रही है. अभी मन में कोई विचार नहीं है. हे देवी कोण है आप??

नारी – तुम कैसे भक्त हो मेरे, और कैसे bête हो जो अपनी माँ को hi नहीं पहचान रहे हो. मैं हु “दानवो की महारानी –दक्षसूरी”.

पब (हैरान हो जाता है) – पैर माँ मेने तो आपको पहले भी देखा है. जब पहले आपको देखा था तो मेरा दर से बुरा हाल था. और आज आपका रूप hi अलग है. ये किसी माया है माँ??

दस माँ – बीटा ये माया नहीं है. पहले तुमने जो देखा था वो मेरा दानव रूप है. और आज जो तुम देख रहे हो वो है देव रूप. पहले जो तुमने देखा था वो भी संपूरड़ नहीं था. जब भी कोई देव या दानव अपने भक्तो को दर्शन देने के लिए जाते है तो वो हमारा वास्तविक रूप नहीं होता. वो वास्तविकता का एक प्रतिबिम्ब होती है. सयद hi कोई मानव देवो के वास्तविक रूप को अपनी आखों से देख सकता है. गौर तपश्वी और कुछ महँ आत्माये, जो की अपने पास tap(bhakti) का बल रखते है वो hi देवो कके दर्शन कर पते है. तुम भी मेरे वास्तविक देव रूप के दर्शन इस लिए कर प् रहे हो कियोकि ये दानव जनम का देव रूप है. मैं केवल एक अपशरा हु. फिर भी मेरे अंदर मेरे पति का बहुत तेज़ है.

पब – इसका मतलब माँ, जो लोग कहते है की उन्होंने देवो के दर्शन किये है वो उन देवो के वास्तविक रूप का प्रतिबिम्ब होता है??? और माँ फिर इस हिसाव से मेरे देवो के देव महादेव के दर्शन तो सायद hi कोई कर पता होगा??

दस माँ – बीटा महादेव के वास्तविक रूप के दर्शन तो हम देवो के लिए भी कदिन है. उनका वरतविक रूप hi परभ्रम है. उनके वास्तविक रूप को सवदो से कहा पाना संभव hi नहीं. उनके तो प्रतिबिम्ब रूप के दर्शन भी दुर्लभ है.. उनमे तो ये सारा संसार निहित है.

पब – माँ जब एप क अपशरा है तो फिर दानव कैसे बन गयी?? और आपके ये 2 रूप क्यों है??

दस माँ – बीटा ये एक लम्बी कहानी है. और नियति का ऐसा खेल है जिसमे हम सब उलझे हुए है. तुमको इस बारे में दयासुर बता देगा. अभी तुम ऊधो और माहि और सलोनी को ले कर बहार आ जाओ. फिर तुमको दयासुर के साथ जाना भी है.

पब – यहाँ है ये सब?? ठीक तो है न?? क्या हुआ था रात को?? कैसे बचे हम सब??

दस माँ – सब ठीक है bête. रात को जब तुम सब उस गुफा मैं पाश गए थे तो मेने वह पहुंच कर तुम सबको बचाया. और फिर सब पहले जैसा कर दिया. पैर तुम सब की हालत ठीक नहीं थी इसलिए इलाज के लिए तुम सबको यहाँ अपने निवेश स्थान पैर ले कर आ गयी. दयासुर तो पलहे hi उड़ चुक्का है अब तुम इन दोनों को भी उदा कर बहार ले औ. मैं चलती हु. तुम सब जल्दी आना.

पब ने जब माँ के इशारे की और नजर की तो वह पैर एक बीएड पैर दोनों लड़किया आराम से सो रही थी. और बहुत मासूम भी लग रही थी. पब के मन में दोनों के लिए प्यार आ रहा था. इस टाइम दोनों के फेस बड़े क्यूट लग रहे थे. पब दोनों को देख कर खुश हो रहा था की तभी उसके मन में गुरु की आवाज आने लगी. गुरु की आवाज सुन कर पब गुरु से बात करने लगा. उसने उसे बता दिया की वो एक दम ठीक है. और अभी दस माँ उसका बहार वेट कर रही है. तो उसे जल्दी जाना है. ये सुन कर जहा गुरु खुस थी की पब ठीक है वही हैरान भी थी की दस माँ पब का वेट कर रही है. जिनके दर्शन के लिए उसने कई साल तक तप किया था. आज वो खुद उसके पति का वेट कर रही है.

पब गुरु से बात करके दोनों के पास जाता है और दोनों को उदा देता है. ये दोनों भी नयी जगह और रात की साडी घटना याद करके चौक जाती है. फिर पब के बताने पैर खुश होते हुए फ्रेश होने चली जाती है. सलोनी तो पहले भी यहाँ आ चुकी थी दयासुर जी के साथ. पैर माहि और पब तो पहली वॉर hi प्रकृति के इस अद्भुत नज़ारे को देख रहे थे. ये जगह बहुत hi सुंदर थी.

अभी दस माँ ने इन चारो के लिए भोजन लगवा दिया था. और ये बड़े चाव से उस भोजन के मज़े ले रहे थे. भोजन करते हुए एक दम सलोनी को अपने माँ की फोटो और उस झुमकी की याद आयी जो उसके पास में उसकी माँ की आखरी निशानी थी. तो ये याद एते hi उसकी आखों में आशु आ गए. वो अपनी माँ की उन आखरी निशानी को भी खो चुकी थी. उसे लगा की एक बार फिर उसने अपनी माँ को खो दिया. उसका भोजन करना रुक चुक्का था. बैठे हुए सिर्फ आशु बहा रही थी. जैसे hi दस माँ ने उसके आशु देखे तो उसके पास आ कर उसके सर पैर हाथ पेरते हुए बोली – क्या हुआ मेरी बच्ची??

सलोनी – दादी …(रोटी हुए).. दादी माँ की आखरी निशानी और उनका फोटो भी खो गया. मेरी माँ की आखरी निशानी भी खो गयी दादी (फिर फुट फुट कर रोने लगी)

दस माँ – पागल लड़की कुछ नहीं खोया है. वो उसी रूम में तेरे बिस्तर पैर तेरे पास hi तो रख दिया था मेने. वह से ले लेना. चल अब चुप हो और पहले भोजन कर.

दस माँ की बात सुनते hi सलोनी रूम में भाग गयी और दस माँ और दयासुर जी उसको आवाज देते रहा गए. सलोनी जितनी स्पीड से अंदर गयी उल्टी hi स्पीड से बहार भी आ गयी और एते hi दस माँ के गले लग गयी – थैंक यू दादी, आप बहुत अच्छी हो..

दस माँ – चल अब पहले अपना भोजन कर. और ये हरकते बंद कर दे अब तेरी शादी होने वाली है. कुछ दांग सिख.

दस माँ की बात सुन कर पब को खशी आ गयी. उसकी तो हालत hi खराब हो रही थी दस माँ की बात सुन कर. कहा तो दस माँ की वो पूजा करता है. और कहा उनकी पोती से hi शादी कर के उनका दामाद बनने की सोच रहा है. दस माँ पब को खस्ता देख कर

दस माँ – घबराओ नहीं बीटा. सलोनी और तुम्हारी शादी तो नियति का hi एक आदेश है. सायद इसका जनम hi इस लिए हुआ था की ये तुम्हारी पत्नी बन कर उस उद्देश्य में हिस्सा ले सके. और तुम इसकी माँ की आखरी ीचा के अनुसार इनके पिता को भी युद्ध में हरा चुके हो. आज hi तुम्हारी शादी होगी और वो भी दयासुर की गुफा में. और शादी करवाएगा खुद दयासुर. कियोकि ये शादी कुछ अलग होगी. इस शादी में तुम दोनों hi मानव और दानव दोनों हो. तुम आंशिक दानव हो और ये आंशिक मानव.

दयासुर – जैसी आपकी इच्छा माँ. मैं आज hi इन दोनों की शादी करवा देता हु.

पब, माहि और सलोनी तो कुछ बोल hi नहीं प् रहे थे. जहा सलोनी अपनी शादी की बात से शर्मा रही थी. वही माहि तो ये देख कर hi हैरान थी की जिसके एक बार दर्शन के लिए न जाने कितने लोग तप करते है वो उनके साथ बेथ कर भोजन कर रही है. दस माँ के बारे में वो अपने बापू से सुन चुकी थी. और शादी के बाद तो गुरु से उनके बारे में सुनती hi रहती थी. पैर आज वो उनके साथ बैठी थी जैसे वो उनकी बेटी हो. वही पब का सबसे बुरा हाल था एक तो उसकी शादी की बात हो रही थी. और वो भी उसकी अरड्या देवी की पोती से और वो भी उन देवी के सामने hi. वो तो नजरे झुका कर चुप चाप भोजन कर रहा था. दस माँ और दयासुर जी शादी के विषय में बाटे कर रहे थे.
 
अपडेट 135

पब, माहि और सलोनी तो कुछ बोल hi नहीं प् रहे थे. जहा सलोनी अपनी शादी की बात से शर्मा रही थी. वही माहि तो ये देख कर hi हैरान थी की जिसके एक बार दर्शन के लिए न जाने कितने लोग तप करते है वो उनके साथ बेथ कर भोजन कर रही है. दस माँ के बारे में वो अपने बापू से सुन चुकी थी. और शादी के बाद तो गुरु से उनके बारे में सुनती hi रहती थी. पैर आज वो उनके साथ बैठी थी जैसे वो उनकी बेटी हो. वही पब का सबसे बुरा हाल था एक तो उसकी शादी की बात हो रही थी. और वो भी उसकी अरड्या देवी की पोती से और वो भी उन देवी के सामने hi. वो तो नजरे झुका कर चुप चाप भोजन कर रहा था. दस माँ और दयासुर जी शादी के विषय में बाटे कर रहे थे.

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जब तक ये लोग शादी के बारे में बात करते है तब टेक क नजर हवेली पैर भी दाल लेते है –

गुरु की पब से बात होने के बाद गुरु को शांति मिल चुकी थी. वैसे भी जब सुबह उड़े तो इनके दिलो में बेचैनी के भाव नहीं थे. रात में कोण कितने बजे क्या करते हुए सो गया था किसी को होश नहीं था. पैर सुबह जब सब अपने आप को नार्मल फील करने लगे तो पहले सबने एक दूसरे को कल की बेचैनी के बारे में बताया. सभी एक दूसरे से बात कर रही थी तब गुरु ने पब से मन hi मन बाते की. और गुरु ने सबको बता दिया की पब एक दम ठीक है ये सुन कर सबकी जो थोड़ी बहुत चिंता थी वो भी ख़तम हो गयी. अब सब एक दूसरे से बात करने में बिजी हो गयी. पैर ऐडा अभी तक निचे नहीं आयी थी. अंकिता ने जब ये देखा की ऐडा अभी तक उप्पेर hi है तो वो भी भाग कर उप्पेर गयी ऐडा को देखने के लिए. वैसे भी पब ने अंकिता और गुरु की ड्यूटी लगाई थी ऐडा के लिए. वो माँ जो बनने वाली थी. जब अंकिता वह पहुंची तो ऐडा को देखते hi वो चीखा उडी. ऐडा इस टाइम जमीन में बेहोश पड़ी थी. ऐडा की ये हालत देख कर अंकिता की हालत ख़राब हो गयी. उस एक से अभी सभी को माँ बनने का सुख मिलने वाला था. अंकिता को कल रात की अपनी लापरवाही पैर गुस्सा आने लगा. अभी तक सब ऐडा के रूम में आ चुके थे. अंकिता की चीखा सुन कर. अंकिता और सविता ने ऐडा को उदा कर बीएड पैर लिटाया तो गुरु ने पानी के जग से पानी के चीते उसके मुँह पर मरे. पानी पड़ते hi ऐडा को होश आ गया. फिर कामिनी के पूछने पैर ऐडा ने बताया. की रात को सोते हुए भी वो एक बार बेहोश हो गयी थी. और जब दुवारा होश आया तो फिर साँस लेने में प्रॉब्लम होने लगी. जब एक बार ऐसा लगा की मेरी सांसे hi न बंद हो जाएगी तो उड़ कर किसी को हेल्प के लिए बुलाने के लिए जैसे hi बीएड से उड़ने लगी. मैं उड़ने की जगह जमीन में गिर गयी और बेहोश हो गयी फिर उसके बात अभी होश आया है. फिर अंकिता ने उसे चक किया था अभी कुछ भी प्रॉब्लम नहीं थी. अंकिता को समाज में नहीं आया की ऐडा के साथ रात के क्या और क्यों हुआ. पैर गुरु कुछ -2 समाज चुकी थी. उसे ऐडा की ये हालत देख कर समाज आ गया था की रात को पब भी मरते मरते hi बचा है. पैर उसने किसी से भी इस बात का जिक्र नहीं किया.

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अभी ये चारो गुफा में थे. दयासुर जी के साथ में कुछ दानव भी दस माँ के घर से साथ में आये थे. ये दानव उनके सेवक थे. ये सब उस गुफा को सजाने में लगे हुए थे. कुछ शादी के हवन की किरिया में लगने वाले सामान को ला रहे थे. दयासुर और पब हवन कुंड के पास बेथ कर हवन की तैयारी में लगे थे. आज उस गुफा में बहुत चहल पहल थी. सभी इस शादी की तैयारी में लगे थे. माहि और सलोनी अपने मेक उप के बारे में सोच रहे थे. यहाँ कोई सामान नहीं था माहि के पास जिससे वो सलोनी का मेक उप कर सके. सलोनी भी खुद को अपने सजना के लिए सजाना चाहती थी. वैसे भी सजना तो हर लड़की का जमन सिद्ध अधिकार है. पैर इतना टाइम नहीं था की कही जा कर मेक उप का सामान लाया जा सके. कियोकि शादी करने के बाद इनके सुहागरात भी होनी थी. जो की हवेली में hi होनी थी. ऐसा दस माँ का hi आदेश था. इसलिए डायसु जी शादी जल्दी करवा कर टाइम से सलोनी को विदा करना चाहते थे.

पूजा की पूरी तैयारियां हो चुकी थी. दयासुर जी ने हवन पैर बैठने से पहले लंच करने के लिए बोलै था. लंच के तुरंत बाद शादी की क्रिया होनी थी. ये चारो एक साथ में बेथ कर लंच कर रहे थे. सलोनी ने अभी एक पुराणी साडी पहनी हुई थी. हलाकि वो भी सूंदर थी पैर उस साडी में एक दुल्हन का गेटउप नहीं था. पब ने भी नार्मल पेण्ट शर्ट hi पहने थे. और इन्ही कपड़ो में इनकी शादी होनी थी. पब को तो इस बात से कोई ज्यादा दुःख नहीं था. पैर सलोनी के दिल पैर क्या बिट रही थी ये तो सलोनी hi जानती थी. रहा -2 कर उसे आज अपनी माँ की याद आ रही थी. यदि आज उसकी माँ होती तो वो पक्का उसे एक सुन्दर सी दुल्हन बनती. नहीं तो वो खुद अपनी माँ से अपने दिल की ये बात बोल देती. पैर बाबा से ये बात बोलने की उसमे हिम्मत hi नहीं थी. पब सलोनी के फेस को देख कर hi समाज गया था की सलोनी किसी बात से दुखी है. तो लंच होने के बाद पब सलोनी से बात करने को उसके रूम में पहुंच गया.

पब – क्या बात है सलोनी ??? क्या तुम हमारी शादी से खुस नहीं हो??? यदि तुम शादी नहीं करना चाहती तो अभी भी बोल सकती हो. मैं गुरूजी से बात कर लगा.

सलोनी – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. आप hi तो वो है जिसने मेरे दिल को चुरा लिया है. आपको तो मैं अपना पति मन चुकी हु.

पब (सलोनी के पास जा कर उसके सर पैर हाथ पेरते हुए) – फिर क्या बात है जान इस सुन्दर से मुखड़े पैर ये उदासी किसी???

पब की प्यार भरी बात सुन कर सलोनी ने भी अपने दिल की बात बोल दी. सलोनी – वो बात ये है की मैं भी और दुल्हन की तरह सजना चाहती हु. मैं भी आज सबसे सुन्दर दिखना चाहती हु. पैर अभी मेरे पास कोई भी ऐसा सामान नहीं है. यदि आज माँ होती तो क्या वो मुझको ऐसे hi विदा करती?? क्यों मर गयी मेरी माँ?? माँ आप कहा हो देखो आज आपकी बेटी की शादी है और तब भी वो दुल्हन जैसी नहीं दिख रही. माँ आओ न अपनी बेटी को सजाओ न माँ… ये बेटी अपनी माँ से सजना चाहती hai…..(or फिर सलोनी अपनी माँ की याद में रोने लगती है)

इसमें पब भी इस टाइम कुछ नहीं कर सकता था. अब टाइम hi नहीं था. और एक बेटी के लिए माँ क्या होती है ये तो पब भी जनता था. बात केवल सजने की नहीं थी. बात तो माँ के प्यार की थी किसकी कमी सलोनी आज कुछ ज्यादा hi महसूस कर रही थी. सलोनी अपनी माँ को याद करते हुए रो सही थी. तभी वह पैर दस माँ प्रकट हो जाती है. पब उनको देखकर उनके पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है. फिर दस माँ सलोनी के पास जा कर उसे अपने सीने से लगा लेती है.

दस माँ – क्या बात है मेरी बेटी क्यों रो रही है?? क्या मैं माँ नहीं हु अपनी बेटी की??? तो मेरे होते मेरी बेटी को रोने की क्या जरुरत. चल चुप हो देख में अब क्या करती हु.

सलोनी दस माँ की बात सुन का चुप हो जाती है और सवालिया नजरो से दस माँ की और देखती है. तो दस माँ अपना एक हाथ आगे कर देती है. उनके हाथ से एक लाइट निकल कर सलोनी को चारो और से घेर लेती है. इस लाइट ने सलोनी दिखना भी बंद हो चुकी थी. धीरे धीरे जब ये प्रकाश कर होता है. तो सलोनी को देख कर पब उसमे खो जाता है. सलोनी कद कटी से तो पहले से hi पब से भी अच्छी थी. वो उससे भी लम्बी थी. पैर अभी सलोनी के फेस पैर एक अलग hi चमक थी. वो अभी पुरे दुल्हन के गेट उप में थी. और एक अप्सरा के जैसी लग रही थी. पब उसे hi देखे जा रहा था. वो भूल गया की दस माँ भी वही पैर है.

दस माँ – पंकज अब क्या मेरी बेटी को खाने का इरादा है?? कुछ देर और इन्तजार करो फिर ये तुम्हारी हो जाएगी. और चिंता मत करो सलोनी को मेरे चिर यौवन का आशीर्वाद दिया है ये हमेशा इतनी hi सुन्दर बानी रहेगी. चलो अब बहार जाओ मुझको अपनी बेटी से अकेले में कुछ बात करनी है.

पब दस माँ की बात से कुछ झेप जाता है. और बहार की और चल देता है. तभी दस माँ उसे रोकती है. और उसकी और भी एक हाथ आगे कर देती है और पब की ड्रेस भी एक दहले वाली हो जाती है अभी वो भी काफी स्मार्ट लग रहा था. फिर पब बहार आ कर गुरु से मन hi मन बात करके गुरु को बता देता है की वो सलोनी से शादी कर रहा है और कुछ hi देर में हवेली पहुंच जायेगा. और सुहागरात भी हवेली में hi होनी है.

पब दयासुर जी के पास जा कर बेथ जाता है और उनसे पूछता है की गुरूजी मुझको आज क्या वरदान मग्न चाहिए तब दयासुर जी बोले – “हे डलासुर और दक्षसूरी माँ, मैं सभी प्रकार के अश्त्र और शास्त्र चलने में और संसार की सभी प्रकार से लड़ने की विद्या में पारंगत हो जाऊ.”

दयासुर – बीटा ये तुम्हारे लिए बहुत जरुरी है. पता नहीं कब कहा किस्से किस तरह की फाइट करनी पड़े.

पब – जैसी आपकी आज्ञा गुरूजी…

पब हवन पैर बेथ गया और दयासुर की ने मंत्रो का उच्चारद सुरु कर दिया. कुछ देर में दस माँ और माहि के साथ सलोनी बहार आयी. दयासुर अपनी माँ को देख कर चौक गए. सलोनी को पब के पास बिठा दिया गया. दयासुर जी अपने मंत्रो में लगे रहे. कुछ hi देर में दस माँ तो अंतरदायाँ हो गयी. पैर माहि वही बेथ कर हवन को देखती रही. 2 ऑवर के बाद जब पूजा पूरी हुई तो पब ने अपने अगुते को काट कर माहि की मांग भरी.
 
अपडेट 136

पब हवन पैर बेथ गया और दयासुर की ने मंत्रो का उच्चारद सुरु कर दिया. कुछ देर में दस माँ और माहि के साथ सलोनी बहार आयी. दयासुर अपनी माँ को देख कर चौक गए. सलोनी को पब के पास बिठा दिया गया. दयासुर जी अपने मंत्रो में लगे रहे. कुछ hi देर में दस माँ तो अंतरदायाँ हो गयी. पैर माहि वही बेथ कर हवन को देखती रही. 2 ऑवर के बाद जब पूजा पूरी हुई तो पब ने अपने अगुते को काट कर माहि की मांग भरी. और अपना और सलोनी का खून हवन कुंड को अर्पित किया. शादी पूरी होने के बाद भी दयासुर जी ने उन दोनों को हवन पैर hi बैठे रहने को बोलै और खुद डायन में चले गए. कुछ देर बाद कुछ मंत्रो को पद कर आहुति देते रहे. कुछ आहुति देने के बाद एक लाल रौशनी दयासुर में से निकल कर सलोनी में चली जाती है. दयासुर जी फिर भी आहुतिया देते रहते है कुछ देर बाद दयासुर के हार्ट से एक वाइट रौशनी निकल कर पब में समां जाती है. अभी भी दयासुर जी आहुतिया दे रहे थे. थोड़ी hi देर में एक काली (ब्लैक) रौशनी निकल कर सलोनी में चली जाती है. इस रौशनी से सलोनी के सरीर को एक जतका लगता है. पैर कुछ भी पालो में सलोनी रिकवर हो जाती है. अब आहुतिया बंद हो चुकी थी.

दयासुर – बीटा मेने तुमको एक गोले की पावर दी है. ये एक ऐसी पावर है जो इस युद्ध में तुम्हारे बहुत काम आएगी. सबसे पहले जो रौशनी सलोनी में गयी थी उससे मेने उस पावर को सलोनी से जोड़ दिया है. सलोनी hi तुम्हारी इस पावर को सभालेगी. ये गोला दो तरह से काम करता है पहला यदि तुम इससे किसी को कवर का डोज तो वो सेव हो जायेगा. ये एक सेफ्टी शील्ड की तरह उसकी हर खतरे से रक्षा करेगा. इस गोले में मेरी कई 100 सालो के तप का बाल है. इसको कोई भी नहीं थोड़ सकता. कोई महा तपस्वी hi इसे तोड़ पायेगा. और दूसरा यदि तुम इसे किसी दुसमन के उप्पेर उसे करोगे तो ये उसकी पावर को सोखना सुरु कर देगा. और धिरे -2 उसकी मूट हो जाएगी. इसको उसे करने के लिए ये 2 मंत्र है . - ****#####*****### एंड 2ंद *****####****

पब – गुरूजी आपके हार्ट से जो रौशनी मेरे अंदर गयी थी ये उसी से मेरे अंदर आया है न??

दयासुर – हाँ

पब – और जो ब्लैक रौशनी सलोनी के अंदर गयी थी वो क्या है??

दयासुर – वो दानवो की काली शक्ति है. उसे तुम उसे नहीं कर सकते कियोकि तुम जनम से दानव नहीं हो. ये वो hi काली शक्ति है जिससे तुम्हारी वाइट शक्ति टकराने से यहाँ तूफ़ान आया था. आज से वो सलोनी में रहेगी…

पब – पैर गुरूजी अपने अपना सभी तपोबल, अपनी काली शक्ति भी हमको दे दी तो फिर आपके पास क्या बचा?? और क्यों दी अपने ये हमको??

दयासुर – बीटा हर पिता अपनी बेटी को शादी में कुछ तो देता hi है. और मेने तो ये hi कमाया था. तो ये hi तुम दोनों को दे दिया. और रही मेरी बात तो मेरे पास अभी भी मंत्रो को सिद्ध करके पायी हुई बहुत सी शक्तिया है. उनमे से कुछ तुम्हारे पास भी है. और ये मेने इसलिए भी दी है कियोकि तुम्हारा टारगेट hi मेरा टारगेट है मैं तो न जाने कब से ये चाहता था अपने पिताजी को उस कैद से मुक्त करवा दू. पैर माँ ने आज्ञा hi नहीं दी. और एक बात याद रखना की ये गोला एक टाइम में एक hi आदमी के उप्पेर काम कर सकता है.

फिर दयासुर जी पब को और भी कुछ जरुरी बाते बताते है. और फिर इस दोनों को विदा कर देते है. इस टाइम सलोनी और दयासुर दोनों बहुत रोये थे. जैसे की दुनिया के हर बाप बेटी रट है. जब सलोनी दयासुर जी से अलग हो कर पब के पास अति है तो पब माहि और सलोनी को ले कर टेलिपोर्ट हो कर हवेली के बहार पहुंच जाता है. और माहि हवेली में अंदर भाग जाती है. गुरु ने hi कहा था बहार टेलिपोर्ट होने को. गुरु आरती की थाली ले कर आती है और फिर आरती कर के दोनों को अंदर ले आती है. सब सलोनी से मिलने लगते है. पब एक बार जा कर अपनी दानव सेना की तैयारी देख आता है और कल के प्लान को भी समझता है. और उसमे कुछ बदलाब भी करता है.

हसी मजाक के माहौल में सब देंनेर करते है और अपने -2 रूम में रोने जाने की तैयारी करते है. गुरु ने पब के रूम को सुहागरात के लिए डेकोरेट करवा दिया था. सलोनी पहले रूम में जा कर बेथ जाती है और पब गुरु और बाकि सबको कल की हुयी घटना के बारे में बता देता है. पहले सब दर जाते है फिर पब और सभी को सेफ देख कर नार्मल हो जाते है. इसके बाद पब भी अपने रूम में आ जाता है.

सलोनी पब को रूम में देख कर कड़ी हो जाती है और उसके पेअर छूती है. पब उसे गले से लगा लेता है. दोनों hi एक दूसरे को अपनी बांहो में कस्ते चले जाते है. सलोनी के बड़े बड़े चुके पब के सीने में दवने लगते है. तो दोनों hi एक – दूसरे को महसूस करने के लिए एक दूसरे के जिस्म पर हाथ फेर रहते है. फिर पब सलोनी को ले कर बीएड पर बेथ जाता है. और उसके फेस को देखने लगता है. सलोनी का फेस तो दस माँ की वजह से बहुत चमक रहा था. पब भी उसके फेस में कही खो जाता है. सलोनी भी पब की उन आखों में खो जाती है. दोनों एक देसरे को देखते रहते है. सलोनी hi शर्मा कर अपनी गर्दन घुमा लेती है. पब उसका हाथ अपने हाथो में लेता है.

पब – सलोनी माफ़ी चाहतु जान, मैं तुम्हारे लिए मुँह दिखाई में कुछ नहीं ला पाया. तुम्हारा ये गिफ्ट मुज पैर उदार रहा..

सलोनी – नहीं जी उसकी कोई जरुरत नहीं है. मुझको आप मिल गए मुझको दुनिया मिल गयी.

पब को तभी कुछ याद आता है. तो वो मन hi मन किसी को याद करता है. और फिर बोलता है.

पब – सलोनी मैं तुमको एक गिफ्ट देना चाहता हु. क्या तुम कुछ देर के लिए अपनी माँ की फोटो और वो झुमकी मुझको डौगी..??

सलोनी आश्चर्य से पब को देखती है और फिर उड़ कर अपने बैग से वो दोनों चीज पब के हाथ में दे देती है. तभी दूर पैर नॉक होता है. तो पब सलोनी को दूर ओपन करने का इशारा करता है. कामिनी भी बड़े आश्चर्य के भाव से अंदर आ जाती है.

कामिनी – अपने इस टाइम मुझको क्यों बुलाया??

पब – वो क्या है न मैं सलोनी के लिए कोई भी गिफ्ट नहीं लाया था. इसलिए तुमको बुलाया है.

कामिनी चोकते हुए – देखिये आप मेरे सरे गहने सलोनी को दे दो मैं आपसे उफ़ तक नहीं करुँगी. पैर मैं वो झुमकी किसी को नहीं दे सकती…

पब – वो झुमकी मेने देने को नहीं मागै है डार्लिंग, गुस्सा क्यों हो रही हो. उसे एक बार सलोनी को दिखा तो सकती हो न. यदि तुम इसको वो झुमकी दिखा डौगी तो भी इसको जिंदगी का एक बड़ा गिफ्ट मिल जायेगा. और क्या पता तुमको भी कुछ मिल जाये…

पब की बाते दोनों के समाज के परे थी. कामिनी सोच रही थी की एक झुमकी देखने से सलोनी को क्या मिलेगा. वही सलोनी भी एहि सोच रही थी. पैर कामिनी अपने पति की बात को मानते हुए वो झुमकी निकल कर सलोनी को दिखा देती है. उसे देख कर सलोनी की आखें फटी की फटी रहा जाती है. तभी पब सलोनी से ली हुयी और झुमकी को भी दोनों की आगे लहरा देता है. अब दोनों की आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रहती. दोनों के पास एक -2 झुमकी थी और दोनों एक जैसी थी. दोनों को मिला कर झुमकी का जोड़ा पूरा हो चुक्का था.

सलोनी – आआआप्क्क्क्कीी पास ये झुमकी????? कैसे??? कहा से आयी????

कामिनी – (पब की और देखते हुए) ये झुमकी आपके पास कहा से ????

पब सलोनी की और इशारा कर देता है.

सलोनी – ये मेरी माँ की है..

कामिनी – क्या कहा ??? तुम ये क्या बोल रही हो???

तभी पब उस फोटो को कामिनी के सामने कर देता है. कामिनी उस फोटो को देखते hi रुआरु हो जाती है..

कामिनी –(सलोनी की और देख कर) क्या ये फोटो भी तुम्हारी माँ की है????

सलोनी – हैं पैर बात क्या है??? आपके पास कहा से आयी ये झुमकी???

पब – सलोनी कामिनी hi तुम्हारा गिफ्ट है. ये तुम्हारी बड़ी बहन है. बाबा ने बताया था न. याद करो .. तुम्हारी माँ की एक बड़ी बेटी थी जिसका नाम कामिनी था. वो कामिनी ये hi है. (कामिनी की और देख कर) कामिनी ये तुम्हारी छोटी बहन है सलोनी, तुम्हारी माँ तुम्हारे घर को छोड़ कर दयासुर जी के पास पहुंची ( फिर पब कामिनी को सलोनी और कामिनी की माँ की कहानी सुना देता है)

दोनों की आखों से आशु टपक रहे थे. बस एक दूसरे को देख रही थी. और रोये जा रही थी. तो पब सलोनी के पीछे से बांहो में ले कर बोलता है – केसा लगा गिफ्ट जान??

सलोनी और कामिनी दोनों का डायन पब की बात से टूट जाता है. और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगती है. कामिनी बार बार मेरी बहन मेरी बहन बोल कर उसके सर पैर हाथ फेर रही थी. वही सलोनी दीदी -2 बोल कर उससे चिपकी जा रही थी. थोड़ी देर बाद कामिनी उससे अलग होती है और अपने साथ ले जाने लगती है. पब भी उसे नहीं रोकता. कामिनी सलोनी को ले कर अपने रूम में पहुंच जाती है जहा पैर उसके माँ पापा का एक बड़ा फोटो था. सलोनी अपनी माँ की इतनी बड़ी तस्वीर देख कर उसे अपने हाथ से सहलाते हुए रोटी है. वो फोटो को जैसे सहला रही थी जैसे की वो उस फोटो के जरिये अपनी माँ के सपर्श को महसूस करना चाहती हो. कुछ देर तक दोनों बहाने एक दूसरे में hi लगी रहती है. फिर कामिनी को याद आता है की आज तो सलोनी की सुहागरात है तो उसका फेस वाश करवा कर उसे ले कर पब के रूम में पहुंच जाती है. अभी दोनों का फेस किसी ख़ुशी से चमक रहा था.

कामिनी – लो जी ले आयी आपकी दुल्हन… ये बस आज रात के लिए आपके पास रहेगी. फिर 2-3 मंथ तक हमको कोई भी डिस्टर्ब नहीं करना मुझको अपनी बहन से बहुत साडी बाते करनी है.

पब जा कर कामिनी की पीठ पैर हाथ फेरते हुए. – वैसे भी मुझको तुम्हारी बहन आज रात के लिए hi चाहिए. (फिर धिरे से काम में) तुम्हारी बहन है एक नंबर का माल, आज रात तो मज़े आने वाले है.

कामिनी – हाँ आपके तो मज़े है hi… अपना मेरे पुरे खंडन को hi छोड़ कर मानोगे… पहले मेरी बेटी और अब बहन.. सबको hi मेरी सौतन बनाना में लगे हो…

पब – हाय जान खंडन को क्या मैं तो आज तक तुमको hi नहीं छोड़ पाया. पता नहीं वो दिन कब आएगा जब में इस (कामिनी की छूट को मशालते हुए) छेड़ के मज़े होगा….

कामिनी – चलो जी हटो.. मेरी बहन के सामने hi किसी बाते कर रहे हो. आज तो आप केवल मेरी बहन के हो. तो आज रात उसके छेड़ो का मज़ा लो.

पब – क्यों ऐडा की तरह मेरा लुंड अपनी बहन के छेड़ में अपने हाथो से नहीं डालोगी???

कामिनी – चल हैट बेसरम…. मैं तो जा रही हु जो करना है करो…. गुड नाईट…

पब – हाहाहाःहाहा….

सलोनी तो इस दोनों की गरम -2 बातो का मज़ा ले रही थी. उसे भी मज़ा आ रहा था इन बातो में. और कुछ -2 गरम भी हो रही थी. कामिनी के जाने के बाद पब ने सलोनी की और देख तो वो कुछ सोचती हुयी मुस्कुरा रही थी. पब ने उसके पास जाते हुए बोलै – केसा लगा मेरी जान को मेरा गिफ्ट???

सलोनी पब की बात सुन कर इमोशनल हो कर पब से चुपक गयी और उसके दोनों गलो पे किश कर दिया. और बोली – मैं बहुत खुश हु अपनी बहन से मिल कर..
 
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