MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 21 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 158

सदवि – मैं हु मणि शंकर जी की शिष्य मंजिमा… प्यार से मेरे गुरु मुझको मंजू बुलाते थे.

पब और ये दोनों भी इस बात से चौक जाते है की ये मणि जी की शिष्य है. पब (चोकते हुए) – क्या आपस अच् में मणि शंकर जी की शिष्य है जिनके गुरु सत्यानंद जी है. और वो साधु के भी गुरु भाई है.

मंजू – जी हाँ बिलकुल. पैर आप मणि जी को कैसे जानते है??

सलोनी – जी वो हमारे भी गुरु है.

मंजू – ोूहः ये बात है.

पब – पैर यदि आप उनकी शिष्य है तो उनके आश्रम में अपनी सड़ना क्यों नहीं कर रही है. यहाँ क्यों??

मंजू – वो बात ये है की गुरूजी मेरी एक बात मन hi नहीं रहे थे. कितनी बार मेने उनसे कहा उस क्रिया को मुझको भी सीखा दो तो मैं भी वो करके कुछ सिद्धि प् लू. पैर उन्होंने मेरी बात को कभी मन hi नहीं.

पब – कैसे कोण सी क्रिया है जो वो नहीं जानते ये सीखा नहीं सकते??

मंजू – अरे वो तो उसे अच्छे से जानते है. पैर जब मेने कहा की मुझको भी सीखा दो तो बोले की ये समय सम्भोग क्रिया के लिए अनुकूल नहीं है. मैं भी एक बार उस क्रिका को करके कुछ सिद्दी प् लेती.

पब – अच्छा आप उस क्रिया को करना चाहती है. तो उस क्रिया के बारे मैं जानती भी होगी?? वैसे गुरु जी ने सच hi कहा था की ये उस क्रिया के लिए अनुकूल समय नहीं है.

मंजू – आप ये कैसे कहा सकते है??

पब – कियोकि मैं भी सम्भोग क्रिया कर रहा हु. और उसके लिए मुझको और भी कुछ करना पड़ता है.

मंजू – क्या आप ये कर रहे है?? सच में??

पब – हाँ और मैं आपसे भी कुछ पूछना चाहता हु??

मंजू – हाँ बोलिये..

पब – क्या आप मेरे से शादी करके मेरे साथ ये क्रिया करना चाहेगी??

मंजू पब की बात से सोच में पद जाती है और शादी करना?? फिर सम्भोग क्रिया करना?? जहा तक उसने सुना था सम्भोग क्रिया के बारे में शादी की जरुरत नहीं होती (मंजू ने केवल नार्मल क्रिया के बारे में hi सुना था. और उसमे शादी की जरुरत नहीं होती). पैर वो कुछ बोली नहीं. और फिर कुछ सोच कर बोली – 2 दिन तक तो ये नहीं हो सकता कियोकि मेने एक सिद्धि के लिए एक अनुषधन सुरु किया है और ये हवन उसी के लिए कर रही थी. अभी इसको पूरा होने में 2 दिन लग्गे. उसके बाद hi कुछ हो सकता है. और वैसे भी शादी करने के लिए मुझको सोचने का समय चाहिए. तो आप परसो (डे आफ्टर तोमररो) आ कर मिलिए मैं आपको तब hi हाँ या न कहा पाउगी.

पब – जी ठीक है जैसा आप कहे. मैं परसो आपसे मिलता हु.

फिर ये तीनो यहाँ से निकल जाते है और बहार जा कर टेलिपोर्ट हो कर हवेली पहुंच जाते है.

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ीदार सुबह हवेली में, जब नैना रूम से बहार आती है बराक फ़ास्ट करने के लिए. तब वह सब होते है. नैना ब्लेंड थी तो ज्यादा टाइम एक रूम में hi बैठी रहती थी. और उसके मंद में केवल साधु hi घूमता था. या फिर पब के वेयर में सोचती थी. और जितना वो पब के वेयर में सोचती उसे उतना hi लगता की पब और ये फॅमिली सच में बहुत अच्छी है. उसे हवेली में आये 2-3 दिन हो चुके थे पैर उसने एक बार भी किसी के बिच में झगड़ा या मन मुटाव नहीं देखा था. एक आदमी की इतनी पत्निया और वो भी बिना किसी झगडे के एक hi छत के निचे. ये अपने आप में एक बरी बात थी. फिर एक अजनबी लड़की के बदले के लिए साधु जैसे तांत्रिक से लड़ने जाने के लिए कहना भी उसकी अछाइयो को hi बताता था. जब वो टेबल पैर बैठी तो उसने फील किया की आज पब टेबल पैर नहीं है. और गुरु और अंकिता की बातो में एक गम्भीरता है. कियोकि ये दोनों hi जानती थी की पब, माहि और सलोनी इस टाइम कहा गए है. चले दोनों को पता था की साधु को हराना पब के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. पैर फिर भी एक चिंता तो होती hi है. और वही चिंता उनकी आवाज में जलक रही थी.

नैना – अंकिता जी, आज आप बहुत परेशां लग रही है क्या बात है??

अंकिता गुरु की और देखती है जैसे पूछ रही हो की बताऊ या नहीं??

गुरु – नैना बात ये है की ये सुबह माहि और सलोनी के साथ चले गए. तो थोड़ी सी फ़िक्र हो रही है और कोई बात नहीं है.

गुरु की बात सुन कर नैना का मुँह खुल गया. वो समाज गयी की पब माहि और सलोनी के साथ कहा गया होगा. कल hi बोलै और आज उससे लड़ने भी पहुंच गए. नैना सोचने लगी क्या आदमी है यार एक अजनबी के लिए अपनी पत्नियों की जान को खतरे में डालने के लिए चला गया. वो भी इतनी दूर. अब पता नहीं कितने दिन में लौटेंगे. लौटेंगे भी या नहीं. साधु से लड़ना कोई मज़ाक तो नहीं है. जो यु hi चले गए. मुझसे एक बार मिले भी नहीं. पता नहीं क्या होगा? यदि उनको कुछ हो गया तो इस सबका क्या होगा. कैसे जियेंगे ये सब उनके बिना. ये मेने क्या कर दिया अपने बदले की आग में मेने इस हस्ते खेलते परिवार को खतरे में दाल दिया. सच है मैं इनको अच्छे से समाज hi नहीं पायी. आज के ज़माने में ऐसा इंसान कहा मिलेगा. जो एक अजनबी की हेल्प के लिए अपने परिवार को खतरे में दाल कर चला गया हो.

और पता नहीं नैना क्या -2 सोचती रही. एक तरफ उसे पब और इस परिवार की चिंता थी तो दूसरी तरफ वो मन hi मन पब के इस अपनेपन की कायल हो चुकी थी. दिल बैठी वो अपना उस इंसान को जिसने न केवल उसकी जान और इज्जत बचाई. बल्कि उसका बदला लेने के लिए गुजरात जा चुक्का था. नैना टेबल पैर सबके साथ थी पैर वो तो अपनी hi सोचो में अकेली hi घूम रही थी. जैसे वो अकेली बैठी हो. पैर उसका डायन जब टुटा जब अंकिता ने उसे पुकारा

अंकिता – नैना चलोगी न हमारे साथ आज??

नैना (हाड़बते हुए) – कुछ कहा दीदी?? कहा जाना है???

अंकिता – नैना तेरा डायन कहा है?? काजल ने अभी कुछ कहा था तूने सुना या नहीं??

नैना – नहीं वो… वो.. मैं कुछ सोच रही थी.

अंकिता समाज जाती है की नैना को पब की टेंशन हो रही है. इसलिए वो सोच में है. अंकिता – नैना तू कुछ मत सोच वो आज hi सब ख़तम करके आ जायेगे. सब अच्छा hi होगा. फिक्र क्यों करती है. अब सुन ये काजल कहा रही थी की इसको और ऐडा को डॉ. के पास रेगुलर चकूप के लिए जाना है. और तुमको भी आज जाना था तो मैं कहा रही थी की सब चलते है.

नैना (हैरान होते हुए) – क्या कहा अपने आज hi सब ख़तम करके आ जायेगे??? इतनी दूर से?? ये कैसे हो सकता है??

अंकिता – वो सब तू छोड़ ये बता चलेगी न हमारे साथ ..

नैना – हाँ मैं भी फिर से दुनिया देखना चाहती हु.

अंकिता – हम्म गुड फिर रेडी हो जाओ फिर हम चारो चल पड़ते है.

सविता – अंकिता मैं भी चलुगी तुम्हारे साथ. तुम तीनो को अकेले कैसे संभालोगी.

अंकिता – ok तुम भी चलो…

फिर ये 5 देविया चल देती है हॉस्पिटल. पहले अंकिता ऐडा और काजल को ले कर लेडी डॉ. से मिलती है. और सविता को उनके पास छोड़ कर नैना को ले कर ऑय स्पेशलिस्ट के पास पहुंच जाती है. तो डॉ. नैना को देख कर उसकी रिपोर्ट्स निकल कर अंकिता के सामने रख देता है. और फिर अंकिता को वो देखने को बोलता है.

डॉ. – अंकिता ये केस कुछ अलग है. आईज हर तरह से ठीक है. कही भी कोई प्रॉब्लम नहीं है. बस एक बात है जो आज तक मेने न देखि है और न सुनी है.

अंकिता डॉ. की बात सुन कर रिपोर्ट्स को पड़ने लगती है. वो भी एक डॉ. है तो वो भी बहुत कुछ जानती है और समझती भी है. जब रिपोर्ट पड़ती है तो वो भी हैरान हो जाती है. और सोचने लगती है की ये हो कैसे सकता है. सोचते हुए उसके मंद में नैना की स्टोरी आ जाती है की उसकी आईज साधु ने की है. ये सोचते hi उसके सब समाज आ जाता है. अंकिता को इतनी देर से चुप देख कर डॉ. बोलै

डॉ. – है न अजीब, मेरा तो ये 1सत केस है ऐसा. की किसी के ऑय लेंस पैर कुछ कला लिक्वीड जमा हो गया हो. मुझको तो ये केस समाज के बहार है. यदि ऑपरेशन करके इस लिक्वीड को साफ़ भी कर दे तो क्या पता ये फिर आएगा या नहीं??

अंकिता – थैंक यू डॉ. मैं समाज गयी की प्रॉब्लम क्या है. और इसका क्या इलाज है.

डॉ. – व्हाट?? यार यदि तुम समाज गयी हो तो मुझको भी बताओ ये है क्या?? मैं भी कुछ जान जाउगा.

अंकिता – अभी नहीं डॉ. जब ये ठीक हो जाएगी तब कभी फुर्सत में आ कर बात करती हु. अभी हमको चलना चाहिए.

डॉ – ok अस योर विश. पैर बताना जरूर…
 
अपडेट 159

अंकिता – अभी नहीं डॉ. जब ये ठीक हो जाएगी तब कभी फुर्सत में आ कर बात करती हु. अभी हमको चलना चाहिए.

डॉ – ok अस योर विश. पैर बताना जरूर…

फिर ये दोनों बहार आ जाते है. नैना के तो कुछ समाज आया और कुछ उप्पेर से निकल गया. पैर वो चुप hi रही कियोकि अब उसे इतना तो विस्वास हो hi गया था की अंकिता उसके साथ गलत नहीं करेगी. और जब ये दोनों बहार आती है तब तक वो तीनो भी फ्री हो चुके थे. जब अंकिता ने सविता से पूछा की क्या रहा. तब सविता बोली सब नार्मल है. पैर डॉ. ने 5 दिन बाद फिर बुलाया है. और ये लोग वह से चल देते है.

इन कार

सविता – अंकिता डॉ. ने नैना के लिए क्या कहा??

अंकिता – ये केस डॉ. के बस का नहीं है. अस पैर साइंस हेर आईज इस परफेक्ट. केवल एक ब्लैक लिक्वीड है जो आईज लेंस के सामने है और इस वजह से hi नैना को सब ब्लैक hi दीखता है.

सविता – ओह्ह्ह फिर इसका क्या इलाज है??

अंकिता – मेरे हिसाब से इसका इलाज ये (पब), माहि, गुरु दीदी या गुरूजी (मणि) hi कर सकते है. मुझको तो लगता है की इसकी आईज को मंत्रो से बाँध दिया गया है. और ये बंदन मंत्रो से hi खोला जा सकता है. यदि डॉ. ने तरय किया और कुछ और हो गया तो फिर प्रॉब्लम बाद जाएगी.

काजल – तो दीदी इसमें प्रॉब्लम hi क्या है माहि दीदी और गुरु दीदी दोनों hi मंत्रो की इतनी कनौलागे रखते है. और फिर भी ये दोनों नहीं कर पायी तो भैया (पब) तो है hi हर मन्त्र के ज्ञाता.

अंकिता – हाँ ये तो है काजल. और फिर भी कुछ न हुआ तब गुरूजी है, बापू है (दीनदयाल). कोई न कोई तो ये कर hi देगा. एक बार ये घर आ जाये फिर देखते है क्या हो सकता है.

ऐडा – क्या होगा… नैना दीदी फिर से देख सकेगी. हमारे हुब्बी के होते हुए किसी तांत्रिक के मन्त्र ठीक सकते है क्या…

फिर सब ऐसे hi बात करते हुए घर आ जाते है. पैर इन सब बातो से नैना ये तो जान गयी थी की पब के पास भी तांत्रिक शक्तिया है. तो उसका दर भी काम हो गया. और वो ये भी समाज गयी की माहि पब के साथ क्यों गयी है. और जरूर सलोनी के पास भी कुछ पावर्स जरूर होगी नहीं तो वो भी न जाती. नैना अपनी hi सोच में रही और ये सब अपनी बातो में. कुछ hi देर में ये लोग घर भी पहुंच गए. तब गुरु और कामिनी ने भी पूछा की डॉ. से क्या बाते हुई. तो अंकिता ने सब बता दिया. तो गुरु भी सोचने लगी नैना का इलाज. पैर उसको कुछ समाज नहीं आया.

इवनिंग 4.0 पं के अस पास पब, माहि और सलोनी भी बापस आ चुके थे. और घर के सभी लोग इनको घेर कर बैठे थे. नैना की साथ में hi थी. सब के पूछने पैर मणि ने सभी को वह क्या हुआ ये सब बता दिया. माहि की बात सुन कर सब खुश हो गए थे. नैना को तो बहुत ख़ुशी थी. आज उसका बदला पूरा हो चुक्का था. और नैना ये भी समाज आने लगा था की इस घर में सदरद से दिखने वाले और प्यार से रहने वाले ये सभी लोग कोई आम इंसान नहीं है. हर कोई पावर्स रखता है. और पता नहीं किसी -2 पावर्स इनके पास है. और जब इनके पास पावर्स है.

जब माहि चुप होती है तो पब अंकिता से नैना के बारे में पूछता है. तब अंकिता पब को सब बताती है. तो पब भी कुछ देर सोचता रहता है. और फिर डायन में बेथ जाता है. और अपने अंदर मंत्रो की पावर को एक्टिव करके नैना के आखों के ख़राब होने का कारन और उसको ठीक करने के मन्त्र को खोजने लगता है. कुछ देर तक डायन में बैठने के बाद पब जब उड़ता है तो नैना को अपने पास बुला कर उसकी आखों में देखने लगता है. और मन्त्र पड़ता है. फिर मन्त्र पूरा होने के बाद फिर देखता है. तो परेशां हो जाता है. और बोलता है

पब – ये तो बड़बड़ हो गयी. इसकी आखों को साधु ने ऐसे मंत्रो से ख़राब किया है की यदि कोई साथ की साथ मतलब मन्त्र पड़ने से अंधे होने के बिच के टाइम (नैना इस टाइम में hi साधु से बच कर अपने घर की और भाग गयी थी) में hi इसका मंत्रो से इलाज किया जा सकता है. नहीं तो ये सम्भब नहीं है. अब तो कोई और hi तरीका देखना होगा. अंकिता तुम एक बार डॉ. से फ़ोन पैर बात करके देखो…

गुरु – किसी बात कर रहे हो आप. मंत्रो के प्रभाव को डॉ. कैसे ठीक कर सकता है.

पब – सॉरी यार समाज hi नेह आ रहा था कुछ तो मुँह से निकल गया. पैर अब इसकी आखों को कैसे ठीक करवाए?

नैना – आप इतना क्यों परेशां हो रहे है ठाकुर साहब. अपने अब तक जो किया है वो hi बहुत है मेरे लिए. अपने साधु को मर कर मेरे जीवन का टारगेट hi पूरा कर दिया. वैसे भी आज तक तो जी hi रही हु न इस ांदेरे के साथ अब तो आदत सी हो गयी है. आप परेशां न हो मैं ऐसे भी जी सकती हु.

अंकिता – नहीं मेरी बहन हम अपनी पूरी कोसिस करेंगे तुम्हारी आखें ठीक करवाने की. आगे भगवन की मर्जी.

ये बोल कर अंकिता नैना को गले लगा लेती है. अंकिता की आखों में आशु तेर गए थे. अंकिता ने दिल से नैना को बहन मन था.

एरिका – यदि हम ये केस लंदन के dr.’s को दिखाए तो?? वह एक से बाद कर एक डॉ. है.

माहि – कुछ फायदा नहीं होगा एरिका. ये किसी भी डॉ. की सोच से बहार की बात है.

सलोनी – क्यों न बाबा से बात करके देखे शायद वो कुछ कर सकते हो??

कामिनी – हाँ बाबा जरूर कोई न कोई हल दे देंगे.

पब – हम्म इस बात में दम है मैं बात करता हु गुरूजी से..

पब दयासुर जी से बात करने लगता है. और नैना सोचने लगती है की देखो कितनी अच्छी फॅमिली है जो एक साथ हर प्रॉब्लम को सोल्वे करते है. सभी में कितना प्यार है. हर कोई एक दूसरे से कैसे जुड़ा है. क्या तालमेल है. काश एक ऐसी फॅमिली मेरी भी होती. पैर मुज ानाथ के नशीब में परिवार का सुख कहा. नैना अपनी सोच में थी और पब दयासुर जी से मन hi मन बात कर रहा था.

जब बात करके पब उदा तो उसके फेस कर उदासी थी. ये देख कर सभी समाज गए जी दयासुर जी से बात करके भी कोई हल नहीं मिला है. पैर सलोनी ने पूछा – क्या कहा बाबा ने??

पब – एक तरीका बताया है पैर वो मैं कर नहीं सकता. नैना को ये सब पाषाण नहीं आएगा. और उसको लगेगा की मैं उसकी मज़बूरी का फायदा उदा रहा हु.

गुरु – कही आप उस तरीके की बात तो नहीं कर रहे न. जो मैं सोच रही हु. जैसे अपने पारी को ठीक किया था.

पारी – पैर मुझको तो ठीक करने के लिए इन्होने मेरे साथ शादी की थी. और फिर………..

पारी अपनी बात को अधूरा hi रहने दिया. वो भी समाज गयी इस प्रॉब्लम का सलूशन. पैर वो भी जानती थी की पब के केवल ये कहने पैर की “तुम मुझको अच्छी लगती हो”. इतना कुछ कहा दिया था नैना ने तो शादी की बात सुन कर तो पता नहीं क्या करेगी. पारी और गुरु की बात सुन कर वह सभी समाज गए थे की आखें सम्भोग क्रिया से ठीक हो सकती है. पैर नैना को नहीं समाज आया कुछ. कियोकि पारी ने ये तो बोलै hi नहीं था की इलाज कैसे किया था उसका. ये तो वो भी जानती थी की पारी और पब की शादी हो चुकी है. पैर शादी के बाद इलाज के लिए क्या किया ये नहीं पता था.

सभी चुप hi रहे. फिर अंकिता ने hi इशारे से पब को बोलै की मैं नैना से बात करके देखती हु क्या होता है. फिर गुरु बात को ऐडा और काजल के उप्पेर ले आती है. पब भी दोनों के बारे में जान कर ऐडा के सर कर किश करके अपने रूम में चल देता है. सलोनी और माहि भी ये दोनों भी बहुत थक गयी थी लड़ने से. तो ये दोनों फ्रेश हो कर सो गयी. और पब भी फ्रेश हो कर बीएड पैर लेट गया. और फिर गुरु को बुला कर मंजू के बारे में बताने लगा.
 
अपडेट 160

सभी चुप hi रहे. फिर अंकिता ने hi इशारे से पब को बोलै की मैं नैना से बात करके देखती हु क्या होता है. फिर गुरु बात को ऐडा और काजल के उप्पेर ले आती है. पब भी दोनों के बारे में जान कर ऐडा के सर कर किश करके अपने रूम में चल देता है. सलोनी और माहि भी ये दोनों भी बहुत थक गयी थी लड़ने से. तो ये दोनों फ्रेश हो कर सो गयी. और पब भी फ्रेश हो कर बीएड पैर लेट गया. और फिर गुरु को बुला कर मंजू के बारे में बताने लगा.

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त्रिकाल – हाहाहाहाहा मुझको पंकज को ख़तम करने का तरीका मिल गया. अब कोई भी उसको बचा नहीं पायेगा. उसकी मूट पक्की है.

संभु (खुश होते हुए) – मुझको भी बताइये गुरूजी अब आप क्या करने वाले है.

त्रिकाल – जो काम बल (पावर) से न हो वो छल (धोखा) से होता है. मैं भी अब वो hi करुगा जो उसकी माँ ने मेरे साथ किया था.

संभु (कंफ्यूज होते हुए) – मैं समजा नहीं गुरूजी (मन में – अल्पना ने तो सम्भोग क्रिया में अपनी देने से मन कर दिया था. तो गुरूजी की वो हालत हुयी थी. पैर पब गुरूजी की क्यों लेगा?? और यदि गुरूजी मन भी कर देंगे तो उन सा उसका लुंड टूट जायेगा) (जस्ट जोके)

त्रिकाल – हाहाहाःहाहा संभु तू पागल हो गया है. सेल यदि वो सामने आ hi जाये तो मर hi न दू उसको. मुझको नबाबो वाले शोक नहीं है. और न hi पब को है. तेरा दिमाग ख़राब हो गया है जो मेरी बात को नहीं समजा.

संभु – सॉरी गुरूजी में सच में नहीं समजा. पूरी बात बताइये न.

त्रिकाल – तुझको मंजिमा याद है??

संभु (सोचते हुए) – आप उस लड़की की बात कर रहे है न जो मणि की चली थी. और वह रहा कर उसने बहुत सी सिद्धि भी हासिल कर राखी है. फिर साधु जी के पास जा पहुंची और उनके पास रहा कर panch-mahabhuto को वश में करने की सिद्धि को सुरु कर रखा है. और उसके 2-3 चरण तो शायद वो पार भी कर चुकी है.

त्रिकाल – हम्म सही पहचाना.

संभु – पैर वो इन सब में कैसे आ गयी??

त्रिकाल – पहले मेरी पूरी बात सुनो तब तुमको सब समाज आ जायेगा.

संभु – हम्म बताइये

त्रिकाल – आज पब जा पंहुचा था साधु के आश्रम में. और वह पैर मेरे मित्र को हरा दिया. साधु वीरगति को प्राप्त हो गया. पैर पब को वह पैर मंजिमा मिल गयी. और बातो -2 में पब ने उससे सम्भोग क्रिया करने को कहा है. वो उससे शादी करके उसके साथ सम्भोग किरिया करना चाहता है. यदि सच में ऐसा हो गया तो पब एक hi बार में एक सबसे बड़ी शक्ति – पंचमहाभूतों को अपने वश में कर लेगा. यदि ये – अग्नि, पानी, हवा, भूमि, आकाश उसके वश में हो गए. तो वो फिर उस चक्रवेव को टक्कर देने के लायक हो जायेगा. और हमको ऐसा होने से उसको रोकना होगा. और ये काम करोगे तुम. वो भी छल से…

संभु – हम्म ये तो बहुत hi बुरा हुआ गुरूजी. साधु जी मरे गए. और पब की मुलाकात मंजिमा से भी हो गयी ये तो बहुत hi बुरा हुआ. पैर आप तो कहा रहे थे की आपको पब को ख़तम करने का रास्ता मिल गया.

त्रिकाल – हाँ ये हारी हुयी बाजी hi हमको जिताएगी. बस तुमको अपना कमल दिखाना है. देखो मंजिमा ने मणि का साथ इसलिए छोड़ा था कियोकि मणि ने उसको सम्भोग क्रिया के बारे में नहीं बताया था. मणि अपनी जगह ठीक भी था कियोकि जब हमने डलासुर को कैद कर रखा है तो सम्भोग क्रिया से कुछ भी हाशिल नहीं होगा. पैर ये बात मंजिमा को नहीं पता. अब मंजिमा ये जानती है की पब मणि के कहने पर सम्भोग क्रिया कर रहा है. पैर वो नार्मल सम्भोग क्रिया से कितनी अलग है ये मंजिमा नहीं जानती. जब मैं आज तक इसको पूरी तरह नहीं समाज पाया तो मंजिमा कहा से जानेगी. बस तुमको इस बात का फायदा उड़ाना है. और मंजिमा को वही करने के लिए तैयार करना है जो अल्पना ने कभी मेरे साथ किया था.

संभु – वहहह वहहह क्या प्लान किया है गुरूजी. सच में मज़ा आ गया. अब पब को कोण बचाएगा. ये तो गया.

त्रिकाल – हाँ बस तुम अपना काम अच्छे से कर देना. और हाँ मंजिमा जब मणि के आश्रम में थी तो उसके मन में गुरुपित को लेकर भी जलन के भाव थे. कियोकि गुरुपित एक कुरूप और भूदि औरत थी. और मंजिमा जवान और पारी सी सुन्दर. फिर भी मणि दोनों में कभी कोई फर्क नहीं करता था उसकी नजरो में दोनों एक जैसी थी. और मंजिमा को ये अपनी सुंदरता का अपमान लगता था. हर सुन्दर नारी की भाटी वो भी ये चाहती थी की उसकी सुंदरता की लोग प्रशंशा करे. उसकी और ज्यादा दयँ दे पैर मणि ने केसा कभी नहीं किया. तो एक छोटी सी जलन की भावना है मंजिमा के मन में गुरुपित के प्रति. बस अब तुम समाज hi गए होंगे की तुमको क्या करना है. इस छोटी सी जलन भाव और मणि की नाराजगी को हवा देनी है. और पब का खेल ख़तम….. हहहहहहह

संभु भी त्रिकाल की बातो को सोचता हुआ अपना प्लान बना कर निकल गया मंजिमा के पास..

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ीदार manjima(manju) पब और उसकी दोनों पत्नियों के जाने के बाद पब की hi बातो में खोई हुयी थी. जो प्रश्ताव पब ने उसे दिया था वो उसके वेयर में hi सोच रही थी. जब से उसने ये तांत्रिक का चोला पहना था किसी ने भी उसको ऐसी नजरो से नहीं देखा था. जब तक वो मणि की आश्रम में रही थी तब तक तो वो केशरिया रंग की साड़ी पहन कर hi रहती थी. और उस साड़ी में भी वो इतनी अच्छी लगती थी वह के बहुत से चेले और आने जाने वाले लोग उसको घूरते थे. पैर मणि जी पैर उसके रूप सुन्दर्यै का कोई प्रभाव नहीं था. वो उसको भी वैसे hi बात करते जैसे की और सब से करते. उनके अलावा उस आश्रम के बहुत से लोग मंजू की चाप्लूशी करते दिख जाते थे. और जो नहीं करते थे मंजू उनसे बात नहीं करती थी. मणि जी का ये समानता का व्हावार मंजू को कही न कही अखरता था. और जब भी गुरुपित वह आती और मणि जी उससे भी वैसे hi व्हावार करते तब तो उसके मन में अग्ग hi लग जाती. गुरुपित जो उसकी नजर में एक कुरूप और बूढी औरत थी. फिर जब मंजू के कई बार कहने पैर भी मणि जी ने मंजू को सम्भोग क्रिया के वेयर में नहीं बताया तो लास्ट में मंजू ने मणि जी के साथ hi सम्भोग क्रिया का प्रश्ताव रख दिया था. मंजू कैसे भी सम्भोग क्रिया करके पंचमहाभूतों को वश में करने की शक्ति पाना चाहती थी. और उसके जीवन का ये एक मात्रा टारगेट था. जब मणि जी ने ये पूछा की वो ये पावर क्यों हासिल करना चाहती है तब उसने कहा की “ये मेने बचपन की इच्छा है. और इस पावर को प् कर में जान कल्याण का काम करना चाहती हु. मेने अपने गाओं में और अस पास के कई गाओं में देखा है की हर साल या तो पानी की कमी से (बारिश काम होना) या फिर पानी की अधिकता से किशानो की फैशले ख़राब हो जाती है. तो कही बिजली के गिरने से कड़ी फषलों में आग लग जाती है. मैं इस सब से किशानो को बचने के लिए ये सिद्धि पाना चाहती हु.” मणि जी में जब उसकी बाते सुनी और उनको मंजू के आखों में सचाई नज़र आयी तो मणि जी ने उससे कहा की मैं तुम्हारे साथ सम्भोग क्रिया तो नहीं कर सकता और न hi इसके मंत्रो के बारे में बता सकता हु. कियोकि अभी इसको करने से कुछ हासिल नहीं होगा. पैर मैं तुमको ये सिद्धि हाशिल करने का दुशरा तरीका बता सकता हु.”

फिर मणि जी ने मंजू को वो मंत्रो और हवन से इन पंचमहाभूतों को सिद्ध करने का पूरा ज्ञान दिया. मंजू जब उस ज्ञान को ले कर मणि जी के पास से बहार आयी तो उसको अपने ऊपर गुस्सा भी आया और शर्म भी आ रही थी. कैसे एक लड़की हो कर मणि जी से सम्भोग की बात कर ली. ोरगुस्सा इस बात का था की उसके सुन्दर सरीर को भी मणि जी ने टुकड़ा दिया. जिसको पाने की लालशा वो बहुत से लोगो की आखों में देख चुकी थी. उसका अपने सरीर की सुंदरता का घमंड टूट चुक्का था. इसलिए उसने ये तांत्रिको वाला चोला धारण कर लिया. उसे अब मणि जी का सामना करने में भी शर्म आ रही थी. साथ में एक दुःख भी था की मणि जी में उसको सम्भोग क्रिया के वेयर में नहीं बताया. पैर फिर भी उसको अपना लक्ष्य पाने का एक और रास्ता मिल चुक्का था. पैर अब वो मणि जी का सामना नहीं करना चाहती थी. इसलिए उनका आश्रम छोड़ कर चली गयी.

मंजू को पब से बात करके अपना बिता हुआ कल याद आने लगा था की कैसे मणि जी ने उसको शंभोग किरिया के लिया मन कर दिया था. पैर फिर इस लड़के को क्यों वो सब सिखाया. और जब वो पब के वेयर में सोचने लगी तो पता नहीं क्यों उसके मन में एक प्यार की लहार दूध गयी. आज से पहले उसने कभी ऐसा फील नहीं किया था. फिर वो सवाल उसके मन पैर हावी होने लगा की मणि जी ने क्यों इस लड़के को सम्भोग क्रिया के वेयर में बताया. पैर फिर पब की शक्ति याद आयी की कैसे उसने साधु जैसे तांत्रिक को हरा कर उसे मार डाला. वैसे तो साधु उसको भी पाषंड नहीं था पैर उसे इस आश्रम के जैसी आजादी और अपने अनुषधन के लिए शांति और कही नहीं मिली थी. इसलिए hi वो इस आश्रम में रहा कर अपने लक्ष्य की और बाद रही थी. पैर आज उसके दिल और दिमाग में एक जंग छिड़ चुकी थी. दिमाग कहा रहा था की मणि जी ने उसके साथ गलत किया है. यदि वो उस लड़के को बता सकते है तो मुझको क्यों नहीं. वही दिल पब की पावर्स उसके रूप उसके बात काने के तरीके से, उसके साधु से लड़ने के तरीके से घायल हो चुक्का था. दिल कहा रहा था की पब की बात मन कर उससे शादी कर ले. उसके जैसा सिद्ध और पराक्रमी पुरुष उसको कोई दूसरा नहीं मिल सकता. उसके दिल में औरतो की भी कितनी इज्जत है की वो सम्भोग क्रिया करने के लिए भी पहले शादी करके उसे सम्मान से अपना बना रहा है. नहीं तो उसने आज तक तो ये hi सुना था की जिसने भी सम्भोग क्रिया की उसने औरतो को भोग कर छोड़ दिया. (नोट – अभी मंजू को ये नहीं पता है की पब नार्मल सम्भोग क्रिया नहीं कर रहा. और उसकी शक्तियों का बेस उसकी पत्निया है. उसने केवल नार्मल सम्भोग क्रिया के बारे में hi सुना है जो की त्रिकाल ने की थी). यदि वो उससे शादी कर लेती है तो सम्भोग क्रिया करने का सपना भी पूरा हो जायेगा. और वैसे भी 2-3महीनो में उसका अनुषधन भी पूरा हो hi जायेगा. फिर वो पब के साथ रहा कर जान कल्याण के काम को आराम से अंजाम दे सकती है.
 
क्या बात है भाई कल के अपडेट पैर बहुत HI काम रेविएवस आये है....???

कहा है सभी भाई लोग????
 
अपडेट 161

यदि वो उससे शादी कर लेती है तो सम्भोग क्रिया करने का सपना भी पूरा हो जायेगा. और वैसे भी 2-3महीनो में उसका अनुषधन भी पूरा हो hi जायेगा. फिर वो पब के साथ रहा कर जान कल्याण के काम को आराम से अंजाम दे सकती है.

मंजू ने पूरी रात इन सब को सोचते हुए hi बिता दी. सुबह भोर में संभु मंजू के पास पहुंच चुक्का था. पहले भी मंजू ने उसे यहाँ एक –दो बार देखा था. साधु और त्रिकाल सच्चे मित्र थे. तो वो कभी -2 यहाँ आ जाता था. मंजू भी त्रिकाल और संभु को जानती थी. जब संभु वह पंहुचा तब वह कुछ भी नहीं था. मंजू ने अग्नि पावर से सभी लाशो को रात में hi जला दिया था. और वो सुबह उड़ कर अपने हवन की तैयारी कर रही थी. संभु को वह देख कर वो संभु के पास पहुंची और दोनों में पहले व्यहवारिक बाते हुयी फिर संभु अपने मुद्दे की और अत हुआ बोलै –

संभु – मंजिमा जी मुझको साधु जी के बारे में सुन कर बहुत दिख हुआ. यदि मैं यहाँ होता तो मैं कभी भी ऐसा नहीं होने देता.

मंजू – हम्म हो सकता है की आप उस लड़के से लोहा लेते पैर वो भी काम शक्ति शैली नहीं था. और वैसे भी साधु जी के साथ जो भी हुआ वो उनके कर्मो का फल था.

संभु – वैसे कोण था वो लड़का? क्या तुम जानती हो उसे??

मंजू – नहीं मैं नहीं जानती. हाँ पैर जाने से पहले उससे मेरी कुछ बात हुयी थी. पब नाम बताया था उसने.

संभु – ओह्ह कही वो मणि जी का वो चेला तो नहीं था जिस पर मणि जी आज कल कुछ जयादा hi मेहरवान है.

मंजू – क्या मतलब है आपका??

संभु – क्यों तुमने इस बारे में नहीं सुना. पता नहीं मणि जी के किसी मित्र का बीटा है. पहले तो जब करता था. फिर पता नहीं कैसे वो गुरुपित के पास पहुंच गया. गुरुपित पैर तो मणि जी पहले से hi मेहरवान थे. और जब गुरुपित ने उस लड़के को मिलवाया. तो मणि जी ने गुरुपित को उसके साथ रहने का बोलै. और सम्भोग क्रिया भी सीखा दी. वैसे तो कभी तंत्र मंत्र के अस पास भी नहीं था. पैर मणि जी की कृपा से सम्भोग क्रिया करके उसने बहुत साडी शक्तिया प् ली है.

मंजू – क्या कहा अपने उस लड़के ने पहले कभी इस तरह की कोई शिक्षा नहीं ली. और न hi आश्रम में रहा. फिर भी मणि जी ने उसे सम्भोग क्रिया सीखा दी??

संभु – हाँ ये hi सच है. मणि जी केन ा जाने कितने ऐसे चेले है जिन्होंने न जाने कितने दिनों तक आश्रम की सेवा की है. वह शिक्षा ली है. उनके हर काम को किया है. फिर भी मणि जी ने उनको भी ये क्रिया नहीं सिखाई. पैर उस लड़के को पहली मुलाकात में सब सीखा दिया. इतना hi नहीं अपनी सबसे पसंदिता चली को भी उसकी साथ भेज दिया. जिससे उसे कोई भी परेशानी न हो.

मंजू संभु की बातो से बुरी तरह जलने लगी. उसका मणि जी और गुरुपित पैर गुस्सा बढ़ने लगा. जो एक छोटी सी चिंगारी उसके मन में थी उसे संभु ने हवा दे दी थी. मंजू को गुस्सा आना लाजमी भी था कियोकि कोई भी ये कैसे बर्दाश कर रक्त है की उसके गुरु ने इतनी म्हणत करने के बाद भी जो चीज उसको न दी हो. और वही चीज एक नए और अज्ञानी लड़के को दे दी. अब मंजू को पूरा सच कहा पता था की मणि जी ने ये सब दस माँ के कहने पर किया है. और वो भी इस लिए कियोकि वो लड़का hi योग्य है इस क्रिया के लिए. और उसकी योगयता उसके जनाम से hi उसके साथ थी. वो कोई सदर्न मानव नहीं था वो तो दस माँ का बीटा था. वो बीटा जिसको नियति ने खुद दस माँ और डलासुर की मुक्ति के लिए चुना है. मंजू इन सब बातो से अनजान थी. इसलिए उसे मणि जी पैर बहुत गुस्सा आ रहा था. मंजू को यु चुप देख कर संभु समाज गया की तीर ठीक जगह लगा है.

संभु – इतना hi नहीं मणि जी उसके एक बार बुलाने पैर बागे -2 जाते है. जबकि तुम तो जानती hi हो की वैसे वो कही भी जाना पाषंड नहीं करते और शायद hi किसी के घर रुकते हो. पैर उसके घर तो कई -2 दिनों तक रहते है. मतलब ये समाज लो की ऐसा लगता है जैसे की मणि जी उस लड़के के लिए hi जी रहे हो.

मंजू – पैर ऐसे कैसे हो सकता है. गुरूजी ने तो आज तक सबको एक सामान hi समजा है. किसी के साथ कभी भेद भाव नहीं किया.

संभु – ये तुम्हारी भूल है मन्जिना. तुम कभी उनको ठीक से पहचान hi नहीं पायी. तुमको गुरुपित याद है.

मंजू – हाँ है. वही न कृप और बूढ़ी औरत. मुझको देखने में वो कभी अच्छी नहीं लगी. हाँ पैर साफ़ दिल की थी.

संभु – मंजू तुम खुद साफ़ दिल की हो. और बहुत सीडी हो. इसलिए तुमको सब अपने जैसे hi लगते है. तुमको पता है मणि जी ने उसको ऐसी विद्या सिखाई की उसने दस माँ को खुश करके न केवल उनके दर्शन पाए बल्कि दस माँ ने उसे इतना सुन्दर बना दिया है. की उसकी सुंदरता की आगे तुम कुछ भी नहीं हो. वो बूढ़ी आज 18 साल की कुवारी परियो के जैसी दिखती है. (जबकि दस माँ के खुश होने में मणि जी को कोई हाथ नहीं था. ये सब अपने अपडेट 1,2 में पड़ा है)

अब तो संभु ने तीर जैसी जगह चलाया था की मंजू क्या और कोई भी होती तब भी वो भड़क जाती. एक सुन्दर लड़की के सामने दूसरी लड़की की बड़ाई लड़की भड़केगी hi. और इसमें तो मंजू को ये भी पता था की गुरुपित पहले किसी थी.

मंजू (अपने गुस्से को अपने अंदर दबाते हुए) – क्या ये सच है??

संभु – मैं तुमसे झूट क्यों बोलूगा. और वैसे भी तुम्हारा उस लड़के से कोई लेना देना तो है नहीं. और न hi गुरुपित से. अपने गुरु मणि का आशाराम तुम छोड़ hi चुकी हो. तो मैं तुमसे उन सब के वेयर मैं झूट क्यों कहुगा.

मंजू – नहीं संभु जी मुझको उससे लेना देना है. उसने मेरे साथ भी शादी करके सम्भोग क्रिया करने को कहा है और मेने सोच कर जवाब देने को बोलै है.

संभु – ओह्ह्ह ये बात है. तो तुमने क्या सोचा उसके बारे में??

मंजू – सोचना क्या है जिस लड़के ने मेरा हक चीन है मैं उसको कभी माफ़ नहीं करुँगी. इस बार जब वो आएगा तो उसे मुझसे युद्ध करना होगा.

संभु – तुम्हारा हक कब छिना उसने??

मंजू – मेने गुरूजी से न जाने कितनी बार कहा की वो मुझको सम्भोग क्रिया सीखा दे. पैर उन्होंने मेरी जगह उस लड़के को सिखाई. फिर उस गुरुपित पैर भी गुरूजी मेहरवान रहे. जबकि मैं गुरूजी के साथ कुछ भी करने को तैयार थी. फिर भी उन्होंने मुझको ठुकरा दिया. और उस गुरुपित को गले लगाया. अब मैं उनके प्यारे शिष्य को मार कर दिखा दूगी की उनका कोण सा शिख्या ज्यादा काबिल है.

मंजू ने ये बात गरजते हुए कही थी. उसकी बातो में उसका गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था. संभु अपने प्लान में कामियाब होता दिख रहा था. उनकी बाते सुन कर संभु दिल hi दिल बहुत खुश था. अब उसको बस मंजू को पब को मरने का वो तरीका बताना था जो की त्रिकाल ने बताया था. वो अलग बात थी की उस तरीके से मंजू भी जिन्दा नहीं रहती पैर इस बात का पता न त्रिकाल को था और न hi संभु को और न मंजू को.

संभु – न मंजिमा न ऐसा करने की सोचना भी मत. तुम अभी उसको हरा नहीं सकती. जैसे तुम्हारे साथ छल हुआ है वैसे hi तुमको उसके साथ करना होगा. देखा नहीं तुमने कैसे वो साधु जैसे तांत्रिक को हरा कर चला गया.

मंजू – हाँ आप ये तो सच कहा रहे है. ऐसे उससे भिड़ना तो मूर्खता hi होगी. छल के बदले छल गलत नहीं है. आप बताइये क्या आप कोई तरीका जानते है जिससे एक hi बार में अपने गुरु, पब और उस गुरुपित से बदला ले सकू.

संभु (सोचने का नाटक करते हुए) – हाँ एक तरीका मेरे मंद में आ रहा है. पैर शायद तुमको अच्छा न लगे.

मंजू – आप बताइये तो. ये तो मैं देखूँगी की केसा है.

संभु – अब तुम सुन्ना hi चाहती हो तो सुनो. तुम उससे शादी कर लो और ….

मंजू – नहीं मैं उससे शादी हरगिज नहीं करुँगी.

संभु – पहले मेरी बात पूरी सुन लो ठीक लगे तो करना नहीं तो हम फिर कुछ और सोचेंगे.

मंजू – हम्म ok बोलिये.

संभु – तुम उससे शादी कर लो और फिर जब वो तुम्हारे साथ सम्भोग किरिया करने आये तो बिच में hi उसको रोक देना. तुमको उसके साथ सम्भोग नहीं करना है केवल शादी करनी है. फिर उसके बाद क्या होगा ये तुम जानती hi हो. सम्भोग क्रिया यदि बिच में रूकती है तो सम्भोग क्रिया करने वाला बच नहीं सकता. और यदि वो ख़तम तो गुरु तो वैसे hi टूट जाएगी. कियोकि वो अब उसकी पत्नी है. और उसके मरने से मणि जी भी अपना प्रिये शिष्य खो देंगे. और तुम्हारा बदला पूरा हो जायेगा. बस िस्सने तुमको उससे शादी करके अपने झांसे में लेना है. और फिर तुम भी विद्वा हो जाओगी. पैर तांत्रिक दुनिया में इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता ये तुम भी जानती हो.

मंजू संभु की बात को सोचने लगी उसे उसके प्लान में कोई कमी नहीं नजर आयी. उसे सब ठीक लगा. तो उसने भी इसके लिए हाँ कहा दिया तो फिर संभु बोलै – और एक बाद याद रखना की शादी यहाँ अपने आश्रम में करना और यहाँ पैर hi सम्भोग क्रिया करने को कहना. कियोकि यदि तुम उसके साथ उसकी हवेली में चली गयी . और तुम्हारी वजह से पब मारा गया तो तो उसकी पत्निया तुमको जिन्दा नहीं छोड़ेगी. (संभु नहीं जनता की यदि पब मरेगा तो उसके साथ hi उसकी साडी पत्निया मंजू सहित सब मर जाएगी) यदि तुम यहाँ उसके साथ अकेली होगी तो उसको मार कर कही भी जा सकती हो.

मंजू को संभु की ये बात भी ठीक लगी. िफ़र कुछ देर और मंजू और संभु अपने प्लान पैर बात करते रहे. संभु ने मंजू को पूरी तरह अपनी बातो में फसा लिया था. और पब की मूट की पूरी तैयारियां की जा चुकी थी. अब तो बस ये देखना है पब इससे कैसे बचेगा??? या संभु अपने प्लान में कामियाब होगा….
 
भाई इतिहास तो दुबारा दोहराया नहीं जा सकता. कियोकि यदि हीरो मर गया तो स्टोरी फिनिश...

बूत हाँ पब इस प्लान को कैसे फ़ैल करेगा. या कैसे बचेगा मंजिमा के वॉर से ये देखने वाली बात है...

इस बार फिर त्रिकाल ने एक बड़ा गेम खेला है. जब तंत्र और पावर के अटैक फ़ैल हो गए तो धोखे का सहारा ले रहा है....

नैना तो अभी अपने आप मैं HI ुलजी है.... देखिये वो कब मानेगी.....
 
अपडेट 162

मंजू को संभु की ये बात भी ठीक लगी. िफ़र कुछ देर और मंजू और संभु अपने प्लान पैर बात करते रहे. संभु ने मंजू को पूरी तरह अपनी बातो में फसा लिया था. और पब की मूट की पूरी तैयारियां की जा चुकी थी. अब तो बस ये देखना है पब इससे कैसे बचेगा??? या संभु अपने प्लान में कामियाब होगा….

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वह संभु मंजू को बड़का चुक्का था. और यहाँ हवेली में पब, गुरु, कामिनी, सविता, पारी और अंकिता दानव सेना के बेस में bêthe हुए बाटे कर रहे थे. पब ने बेस के गेट को इन सभी के लिए सात कर दिया था. और ये सब भी इस बेस को देख कर खुश थे. आज दानव सेना अपना दूसरा हमला करने जा रही थी. पैर इस बार पब ने साथ जाने से साफ़ मन कर दिया था. और पारी को भी नहीं भेज रहा था. जुली को hi सब सभालना था. सभी एक्सपर्ट के साथ सभी लड़किया बेस में शिफ्ट हो चुके थे. उन एक्सपर्ट्स ने भी कभी ऐसा बेस नहीं देखा था. और उनको पता भी नहीं चल रहा था की ये है कहा पैर. हैकिंग मास्टर बेबी भी इसकी लोकेशन को ट्रेक नहीं कर पायी थी. पैर यहाँ नेट फुल स्पीड से चल रहा था. ये सभी एक्सपर्ट इस बेस में hi रहा कर अपनी ट्रेनिंग दे रहे थे. उन्होंने अपने मतलब की लड़कियों को सलेक्ट कर लिया था. रखा के अड्डे से मिली लड़कियों में से कुछ को जुली ने दानव सेना के लिए चुन लिया था. और बची हुयी लड़किया दानव सेना की सुप्पोटिंग के लिए लगा दे गयी थी. सभी ने ख़ुशी -2 अपने कामो को अपना भी लिया था. पुरे बेस में चहल पहल थी. पैर उस बेस के एक रूम में पब और उसकी पत्निया और जुली, मल्टी आज के अटैक के लिए प्लान को लास्ट टाइम रिव्यु कर रहे थे. साथ जाने वाली लड़किया भी अपनी तैयारी में लगी हुयी थी. सभी में एक जोश देखा जा सकता था. पब ने जुली और मल्टी को सब समजा दिया था. और जुली को हवेली के बहार लगे सभी कक्तव के कण्ट्रोल रूम को बेस में hi शिफ्ट करने को बोल दिया था. और जुली की टीम की एक मेंबर को हर टाइम उस पैर नजर रखने को भी बोलै गया था. जुली आज अपने साथ अपनी टीम की 2 मेंबर को साथ ले जा रही थी.

पब और उसकी पत्निया जुली से बात करके उप्पेर आ चुके थे. और फिर पब ने अपनी पत्नियों को बोल कर अदृश्य हो कर जुली की टीम के साथ जाने को बोल दिया था. ये सब लेडीज अपने काम में बिजी हो गयी. और अंकिता नैना के पास चली गयी. और कुछ देर बाद hi पब भी दानव सेना के दूसरे टारगेट पैर पहुंच चुक्का था. पैर आज वो कुछ करने वाला नहीं था. वो बस इसलिए आया था की यदि कोई गड़बड़ होती है तो वो उसे संभल सके. (फ्रेंड्स में यहाँ पैर उस अटैक को डिटेल में नहीं लिख रहा हु कियोकि ये तो आप सब भी जानते है दानव सेना ने hi जीतना है. और फिर ये स्टोरी के लिए जरुरी भी नहीं)

ीदार अंकिता नैना से बात कर रही थी. वो चाहा कर भी वो इलाज का वे नहीं बता प् रही थी कियोकि एक बार वो नैना का ट्रेलर देख चुकी थी. और अब यदि नैना ने फिर से पब के लिए कुछ उलटा सिदा बोलै तो वो उसको बर्दाश नहीं होना था. इसलिए वो उससे नार्मल hi बाते करने में लगी थी.

अंकिता – नैना मेरी बहन मुझको माफ़ कर देना. मैं तुम्हारी आखों को ठीक नहीं करवा प् रही हु.

नैना – किसी बात करती हो बहाना. तुमने इतनी कोसिस की है ये क्या काम है. पैर मेरे नसीब में ये अंदर hi लिखा है तो तुम भी क्या कर सकती हो.

अंकिता – ऐसी बात मत कर बहन मैं तुझको हर ख़ुशी देना चाहती हु. पैर जो चीज तेरे लिए सबसे जरुरी है वो चाहा कर भी तुझको नहीं दे सकती.

नैना – अंकिता मुझको तुम जैसी बहन मिल गयी और मुझको क्या चाहिए. जो नसीब में है hi नहीं उसके लिए दुःख करने से क्या फायदा.

अंकिता – हम्म ये भी है. अच्छा चल ये बता की आगे के बारे में क्या सोच है क्या करना है अब??

नैना – ऐसा तो कुछ सोचा hi नहीं. मेरा तो जीने का एक hi मकसद था वो तो ठाकुर साहब ने कल hi पूरा कर दिया. अब तो ये जिंदगी बोझ सी लगती है. समाज hi नहीं आता की क्या किया जाये.

अंकिता – पागल तो नहीं हो गयी है. क्या भगवन ने ये जीवन केवल किसी से लड़ने मरने के लिए hi दिया है क्या. जीवन के और भी बहुत से रंग है. शादी, बच्चे अपना घर, अपना परिवार, खुशियों से भरी एक जिंदगी. तू न केवल प्रोब्लेम्स को hi जिंदगी मान कर बैठी है. जबकि जिंदगी तो खुशियों का दूसरा नाम है कोई अपना हो और आप किसी के. किसी के प्यार के साथ जीना hi जिंदगी है.

नैना – न बहन न ऐसे सपने न दिखा जो इस बदकिस्मत के नसीब में हो hi न. इस आदि ानाथ के नसीब में ये सब नहीं है.

अंकिता – ऐसा क्यों बोलती है. भगवन सभी का हमसफ़र भेजता है बस हम उसको पहचान नहीं पते. या कोई है जो तुझको पाषंड हो तो मुझको बता. मैं तेरी शादी उससे करवा दूगी.

नैना – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. मुझको कोई भी पाषंड नहीं है (मन में – कैसे कहु बहन तेरा पति hi भ गया है. उसकी अच्छाइयों ने मेरा दिल जीत लिया है. पैर उसको पाना मेरे नसीब में नहीं है.) हकीकत ये है बहन में शादी hi नहीं करना चाहती. (मन में - अब दिल जिस पैर आया है वो तो मिल नहीं सकता और किसी की शयद अब में हो नहीं पाउगी.)

अंकिता – ऐसी बात नहीं करते एक बार फिर सोचना. यदि शादी नहीं करेगी तो क्या करना है. ये सोचना. वैसे भी कोई भी लड़की जब hi पूरी होती है जब वो किसी की पत्नी और फिर किसी की माँ बन जाती है. सोचना इस बारे में. (मन में – किसी लड़की है मेरी बहन जो शादी hi नहीं करना चाहती. और जब शादी hi नहीं करना चाहती है तो कैसे कहु की मेरे पति से शादी कर ले तो तुझको आखें भी मिल जाएगी और तू हमेशा मेरे साथ भी रहेगी मेरी छोटी बहन की तरह)

फिर अंकिता बातो का रुख बदल देती है. और ीदार उदार की बाते करती रहती है. कुछ हॉर्स में hi पब हवेली लोट आता है. दानव सेना ने एक बार फिर अपने शिकार में कामियाब हो चुकी थी. पैर सबसे बड़ी जो बात थी वो ये थी की पब को किसी भी तरह की हेल्प करने की जरुरत नहीं पारी थी. मल्टी और जुली दोनों ने hi बहुत hi अच्छा वर्क किया था. दानव सेना अपना काम ख़तम करके वह पैर बन्दे बच्चे और लड़कियों को आज़ाद करके लोट लिए थे. वह का कॅश भी ये लूट आये थे. और दानव सेना का खौफ बनाना के लिए एक दिवार पैर फिर वही लाइन लिखी जा चुकी थी. जब ये लोग उस जगह से दूर निकल गए तो जुली ने मीडिया को इन्फॉर्म कर दिया था. एक बार फिर पुलिस के कपडे फटने तय थे.

पब ने हवेली पैर आ कर वह के बारे में सभी को बता दिया (एक्सेप्ट काजल, पेय, ऐडा, माउद). जब बात पूरी हुयी तो जय बोलै – भैया में आपसे कुछ कहना चाहता हु.

पब – हाँ बोलो

जय – भाई में भी दानव सेना ज्वाइन करना चाहता हु. खेत और मिल्स का काम तो लखन ने पूरी तरह संभल लिया है. फिर भी जरुरत होती है तो ऐडा और अवनि उसकी पूरी हेल्प करती है. मेरे पास कोई बहुत काम भी नहीं है. तो में भी दानव सेना में ट्रेनिंग ले कर उन लड़कियों के जैसे समाज के गद्दारो से लड़ना चाहता हु.

पब (कुछ देर सोच कर) – ठीक है आज से तुम, अवनि, जुली, पारी hi पूरी दानव सेना को संभालोगे. जहा भी हेल्प की जरुरत हो मुझको बताना. और हाँ अवनि तुम बेबी से ट्रेनिंग लोगी. और जय तुम शक्ति और रोबर्ट से ट्रेनिंग लोगे. पारी तुम हमक और रोबर्ट से ट्रेनिंग लोगी.

तीनो – ok

पब – अवनि मिल्स का काम एरिका को दे दो. और खेतो का माहि को. वह का हिसाब किताब से दोनों देखेगी. ऐडा और काजल को को भी काम नहीं करवाएगा. कामिनी, सविता और गुरु हवेली को सभालेगी. अंकिता और गुरु तुम दोनों ऐडा और काजल को देखोगी. अंकिता तुम किसी हॉस्पिटल में कांटेक्ट भी कर लो जब भी उनको तुम्हारी जरुरत हो तुम वह जरूर जाओगी. और अपना डॉ. होने का धरम निभाओगी.

सलोनी – और मैं??

पब – सलोनी अभी तुमको मेरे साथ रहना है मेरा साया बन कर. मैं जनता हु की अभी केवल तुम hi मुझको संभल सकती हो.

सलोनी – हम्म ok.

पब – मैं और तुम डायन लगाएंगे. और मेरी दानव प्रवति को कण्ट्रोल करेंगे.

गुरु – हाँ ये बहुत जरुरी है. आपको सभी कुछ छोड़ कर इस पैर फोकस करना होगा.

पब – गुरु जाने क्यों मुझको लग रहा की की कुछ गलत होने वाला है. तो ये तुम्हारी जिम्मेदारी है की सभी सेफ रहे. हम सब एक दूसरे से ऐसे बन्दे है की किसी को भी खरोच आयी तो दर्द सभी को होगा. तो गुरु तुम हवेली की सेफ्टी बड़ा दो. एक सिक्योरिटी एजेंसी हिरे कर लो. जो हवेली के चारो तरफ नज़र रखे. और कोई भी हवेली से बहार जाये तो उसे प्रोटेक्शन दे.

गुरु – हम्म ok. वैसे भी मुझको भी कुछ ऐसी hi फीलिंग आ रही है. और अब आपको जल्द से जल्द डलासुर जी के देव रूप को आज़ाद करवाने के लिए जाना होगा. केवल 75 दिन है हमारे पास. और उस भूलभुलैया को पार करने में कितने दिन लग जाये. इसलिए आपको जल्दी से जल्दी वह के लिए निकलना होगा.

पब – हम्म ठीक कहा रही हो तुम, पैर मैं एक बात तुम सबको बता दू की यदि कभी भी हवेली पैर किसी भी तरह का हमला हो तो तुम सब उस बेस में चली जाना. उस बेस तक कोई नहीं पहुंच पायेगा और तुम वह सेफ रहोगी.

सब – हम्म ok

फिर ऐसे hi बात करते हुए रात को डिनर करके सो गए. अगले दिन भी कुछ खास नहीं हुआ. पब डायन में hi अपना ज्यादा से ज्यादा टाइम दे रहा था. कुछ देर सबके साथ रहा और एक बार खेतो और मिल्स पैर hi हो आया. और वह से लोट कर जय के साथ बेस में गया. और उसको सब समजने लगा. रात को लता जी और सोनल दीदी से बात करके सो गया. नेक्स्ट डे उसको मंजू के पास जाना था. नैना ने अंकिता के प्यार को देख कर अपने प्यार को अपने hi अंदर दबा लिया उसकी सोच थी की कैसे वो अपनी hi बहन के पति को प्यार कर सकती है. उसने तो सोचा था की उसके जैसी ब्लेंड लड़की को कोई भी अपनी पत्नी नहीं बना सकता और फिर वो तो बिलकुल भी नहीं जो खुद इतने पैसे वाला हो और उसके पास इतनी पावर्स हो. जिसको पाने के लिए इतनी लड़किया पहले से hi उसकी रहा देख रही हो और वो किसी को उस नज़र से देखता भी न हो.
 
अपडेट 162 (ओल्ड अपडेट)

मंजू को संभु की ये बात भी ठीक लगी. िफ़र कुछ देर और मंजू और संभु अपने प्लान पैर बात करते रहे. संभु ने मंजू को पूरी तरह अपनी बातो में फसा लिया था. और पब की मूट की पूरी तैयारियां की जा चुकी थी. अब तो बस ये देखना है पब इससे कैसे बचेगा??? या संभु अपने प्लान में कामियाब होगा….

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वह संभु मंजू को बड़का चुक्का था. और यहाँ हवेली में पब, गुरु, कामिनी, सविता, पारी और अंकिता दानव सेना के बेस में bêthe हुए बाटे कर रहे थे. पब ने बेस के गेट को इन सभी के लिए सात कर दिया था. और ये सब भी इस बेस को देख कर खुश थे. आज दानव सेना अपना दूसरा हमला करने जा रही थी. पैर इस बार पब ने साथ जाने से साफ़ मन कर दिया था. और पारी को भी नहीं भेज रहा था. जुली को hi सब सभालना था. सभी एक्सपर्ट के साथ सभी लड़किया बेस में शिफ्ट हो चुके थे. उन एक्सपर्ट्स ने भी कभी ऐसा बेस नहीं देखा था. और उनको पता भी नहीं चल रहा था की ये है कहा पैर. हैकिंग मास्टर बेबी भी इसकी लोकेशन को ट्रेक नहीं कर पायी थी. पैर यहाँ नेट फुल स्पीड से चल रहा था. ये सभी एक्सपर्ट इस बेस में hi रहा कर अपनी ट्रेनिंग दे रहे थे. उन्होंने अपने मतलब की लड़कियों को सलेक्ट कर लिया था. रखा के अड्डे से मिली लड़कियों में से कुछ को जुली ने दानव सेना के लिए चुन लिया था. और बची हुयी लड़किया दानव सेना की सुप्पोटिंग के लिए लगा दे गयी थी. सभी ने ख़ुशी -2 अपने कामो को अपना भी लिया था. पुरे बेस में चहल पहल थी. पैर उस बेस के एक रूम में पब और उसकी पत्निया और जुली, मल्टी आज के अटैक के लिए प्लान को लास्ट टाइम रिव्यु कर रहे थे. साथ जाने वाली लड़किया भी अपनी तैयारी में लगी हुयी थी. सभी में एक जोश देखा जा सकता था. पब ने जुली और मल्टी को सब समजा दिया था. और जुली को हवेली के बहार लगे सभी कक्तव के कण्ट्रोल रूम को बेस में hi शिफ्ट करने को बोल दिया था. और जुली की टीम की एक मेंबर को हर टाइम उस पैर नजर रखने को भी बोलै गया था. जुली आज अपने साथ अपनी टीम की 2 मेंबर को साथ ले जा रही थी.

पब और उसकी पत्निया जुली से बात करके उप्पेर आ चुके थे. और फिर पब ने अपनी पत्नियों को बोल कर अदृश्य हो कर जुली की टीम के साथ जाने को बोल दिया था. ये सब लेडीज अपने काम में बिजी हो गयी. और अंकिता नैना के पास चली गयी. और कुछ देर बाद hi पब भी दानव सेना के दूसरे टारगेट पैर पहुंच चुक्का था. पैर आज वो कुछ करने वाला नहीं था. वो बस इसलिए आया था की यदि कोई गड़बड़ होती है तो वो उसे संभल सके. (फ्रेंड्स में यहाँ पैर उस अटैक को डिटेल में नहीं लिख रहा हु कियोकि ये तो आप सब भी जानते है दानव सेना ने hi जीतना है. और फिर ये स्टोरी के लिए जरुरी भी नहीं)

ीदार अंकिता नैना से बात कर रही थी. वो चाहा कर भी वो इलाज का वे नहीं बता प् रही थी कियोकि एक बार वो नैना का ट्रेलर देख चुकी थी. और अब यदि नैना ने फिर से पब के लिए कुछ उलटा सिदा बोलै तो वो उसको बर्दाश नहीं होना था. इसलिए वो उससे नार्मल hi बाते करने में लगी थी.

अंकिता – नैना मेरी बहन मुझको माफ़ कर देना. मैं तुम्हारी आखों को ठीक नहीं करवा प् रही हु.

नैना – किसी बात करती हो बहाना. तुमने इतनी कोसिस की है ये क्या काम है. पैर मेरे नसीब में ये अंदर hi लिखा है तो तुम भी क्या कर सकती हो.

अंकिता – ऐसी बात मत कर बहन मैं तुझको हर ख़ुशी देना चाहती हु. पैर जो चीज तेरे लिए सबसे जरुरी है वो चाहा कर भी तुझको नहीं दे सकती.

नैना – अंकिता मुझको तुम जैसी बहन मिल गयी और मुझको क्या चाहिए. जो नसीब में है hi नहीं उसके लिए दुःख करने से क्या फायदा.

अंकिता – हम्म ये भी है. अच्छा चल ये बता की आगे के बारे में क्या सोच है क्या करना है अब??

नैना – ऐसा तो कुछ सोचा hi नहीं. मेरा तो जीने का एक hi मकसद था वो तो ठाकुर साहब ने कल hi पूरा कर दिया. अब तो ये जिंदगी बोझ सी लगती है. समाज hi नहीं आता की क्या किया जाये.

अंकिता – पागल तो नहीं हो गयी है. क्या भगवन ने ये जीवन केवल किसी से लड़ने मरने के लिए hi दिया है क्या. जीवन के और भी बहुत से रंग है. शादी, बच्चे अपना घर, अपना परिवार, खुशियों से भरी एक जिंदगी. तू न केवल प्रोब्लेम्स को hi जिंदगी मान कर बैठी है. जबकि जिंदगी तो खुशियों का दूसरा नाम है कोई अपना हो और आप किसी के. किसी के प्यार के साथ जीना hi जिंदगी है.

नैना – न बहन न ऐसे सपने न दिखा जो इस बदकिस्मत के नसीब में हो hi न. इस आदि ानाथ के नसीब में ये सब नहीं है.

अंकिता – ऐसा क्यों बोलती है. भगवन सभी का हमसफ़र भेजता है बस हम उसको पहचान नहीं पते. या कोई है जो तुझको पाषंड हो तो मुझको बता. मैं तेरी शादी उससे करवा दूगी.

नैना – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. मुझको कोई भी पाषंड नहीं है (मन में – कैसे कहु बहन तेरा पति hi भ गया है. उसकी अच्छाइयों ने मेरा दिल जीत लिया है. पैर उसको पाना मेरे नसीब में नहीं है.) हकीकत ये है बहन में शादी hi नहीं करना चाहती. (मन में - अब दिल जिस पैर आया है वो तो मिल नहीं सकता और किसी की शयद अब में हो नहीं पाउगी.)

अंकिता – ऐसी बात नहीं करते एक बार फिर सोचना. यदि शादी नहीं करेगी तो क्या करना है. ये सोचना. वैसे भी कोई भी लड़की जब hi पूरी होती है जब वो किसी की पत्नी और फिर किसी की माँ बन जाती है. सोचना इस बारे में. (मन में – किसी लड़की है मेरी बहन जो शादी hi नहीं करना चाहती. और जब शादी hi नहीं करना चाहती है तो कैसे कहु की मेरे पति से शादी कर ले तो तुझको आखें भी मिल जाएगी और तू हमेशा मेरे साथ भी रहेगी मेरी छोटी बहन की तरह)

फिर अंकिता बातो का रुख बदल देती है. और ीदार उदार की बाते करती रहती है. कुछ हॉर्स में hi पब हवेली लोट आता है. दानव सेना ने एक बार फिर अपने शिकार में कामियाब हो चुकी थी. पैर सबसे बड़ी जो बात थी वो ये थी की पब को किसी भी तरह की हेल्प करने की जरुरत नहीं पारी थी. मल्टी और जुली दोनों ने hi बहुत hi अच्छा वर्क किया था. दानव सेना अपना काम ख़तम करके वह पैर बन्दे बच्चे और लड़कियों को आज़ाद करके लोट लिए थे. वह का कॅश भी ये लूट आये थे. और दानव सेना का खौफ बनाना के लिए एक दिवार पैर फिर वही लाइन लिखी जा चुकी थी. जब ये लोग उस जगह से दूर निकल गए तो जुली ने मीडिया को इन्फॉर्म कर दिया था. एक बार फिर पुलिस के कपडे फटने तय थे.

पब ने हवेली पैर आ कर वह के बारे में सभी को बता दिया (एक्सेप्ट काजल, पेय, ऐडा, माउद). जब बात पूरी हुयी तो जय बोलै – भैया में आपसे कुछ कहना चाहता हु.

पब – हाँ बोलो

जय – भाई में भी दानव सेना ज्वाइन करना चाहता हु. खेत और मिल्स का काम तो लखन ने पूरी तरह संभल लिया है. फिर भी जरुरत होती है तो ऐडा और अवनि उसकी पूरी हेल्प करती है. मेरे पास कोई बहुत काम भी नहीं है. तो में भी दानव सेना में ट्रेनिंग ले कर उन लड़कियों के जैसे समाज के गद्दारो से लड़ना चाहता हु.

पब (कुछ देर सोच कर) – ठीक है आज से तुम, अवनि, जुली, पारी hi पूरी दानव सेना को संभालोगे. जहा भी हेल्प की जरुरत हो मुझको बताना. और हाँ अवनि तुम बेबी से ट्रेनिंग लोगी. और जय तुम शक्ति और रोबर्ट से ट्रेनिंग लोगे. पारी तुम हमक और रोबर्ट से ट्रेनिंग लोगी.

तीनो – ok

पब – अवनि मिल्स का काम एरिका को दे दो. और खेतो का माहि को. वह का हिसाब किताब से दोनों देखेगी. ऐडा और काजल को को भी काम नहीं करवाएगा. कामिनी, सविता और गुरु हवेली को सभालेगी. अंकिता और गुरु तुम दोनों ऐडा और काजल को देखोगी. अंकिता तुम किसी हॉस्पिटल में कांटेक्ट भी कर लो जब भी उनको तुम्हारी जरुरत हो तुम वह जरूर जाओगी. और अपना डॉ. होने का धरम निभाओगी.

सलोनी – और मैं??

पब – सलोनी अभी तुमको मेरे साथ रहना है मेरा साया बन कर. मैं जनता हु की अभी केवल तुम hi मुझको संभल सकती हो.

सलोनी – हम्म ok.

पब – मैं और तुम डायन लगाएंगे. और मेरी दानव प्रवति को कण्ट्रोल करेंगे.

गुरु – हाँ ये बहुत जरुरी है. आपको सभी कुछ छोड़ कर इस पैर फोकस करना होगा.

पब – गुरु जाने क्यों मुझको लग रहा की की कुछ गलत होने वाला है. तो ये तुम्हारी जिम्मेदारी है की सभी सेफ रहे. हम सब एक दूसरे से ऐसे बन्दे है की किसी को भी खरोच आयी तो दर्द सभी को होगा. तो गुरु तुम हवेली की सेफ्टी बड़ा दो. एक सिक्योरिटी एजेंसी हिरे कर लो. जो हवेली के चारो तरफ नज़र रखे. और कोई भी हवेली से बहार जाये तो उसे प्रोटेक्शन दे.

गुरु – हम्म ok. वैसे भी मुझको भी कुछ ऐसी hi फीलिंग आ रही है. और अब आपको जल्द से जल्द डलासुर जी के देव रूप को आज़ाद करवाने के लिए जाना होगा. केवल 75 दिन है हमारे पास. और उस भूलभुलैया को पार करने में कितने दिन लग जाये. इसलिए आपको जल्दी से जल्दी वह के लिए निकलना होगा.

पब – हम्म ठीक कहा रही हो तुम, पैर मैं एक बात तुम सबको बता दू की यदि कभी भी हवेली पैर किसी भी तरह का हमला हो तो तुम सब उस बेस में चली जाना. उस बेस तक कोई नहीं पहुंच पायेगा और तुम वह सेफ रहोगी.

सब – हम्म ok

फिर ऐसे hi बात करते हुए रात को डिनर करके सो गए. अगले दिन भी कुछ खास नहीं हुआ. पब डायन में hi अपना ज्यादा से ज्यादा टाइम दे रहा था. कुछ देर सबके साथ रहा और एक बार खेतो और मिल्स पैर hi हो आया. और वह से लोट कर जय के साथ बेस में गया. और उसको सब समजने लगा. रात को लता जी और सोनल दीदी से बात करके सो गया. नेक्स्ट डे उसको मंजू के पास जाना था. नैना ने अंकिता के प्यार को देख कर अपने प्यार को अपने hi अंदर दबा लिया उसकी सोच थी की कैसे वो अपनी hi बहन के पति को प्यार कर सकती है. उसने तो सोचा था की उसके जैसी ब्लेंड लड़की को कोई भी अपनी पत्नी नहीं बना सकता और फिर वो तो बिलकुल भी नहीं जो खुद इतने पैसे वाला हो और उसके पास इतनी पावर्स हो. जिसको पाने के लिए इतनी लड़किया पहले से hi उसकी रहा देख रही हो और वो किसी को उस नज़र से देखता भी न हो
 
अपडेट 163

मंजू के अनुष्ठान को एक और चरण पूरा हो चुक्का था और वो पब का इन्तजार कर रही थी. आज पब उससे मिलने आने वाला था. और उसके मन में बदले की भावना जोरो पैर थी. पैर फिर भी दिल के एक कोने से वो ये सब नहीं करना चाहती थी. जब उसने बहुत सोचा तो उसने एक डिसिशन लिया की पहले संभु की बातो को कन्फर्म करेगी. और यदि वो सब सच है जो संभु ने कहा है तो फिर वो पब को मूट के घाट उतरने से पीछे नहीं हटेगी. कियोकि धोके के बदले धोखा गलत नहीं है. मंजू ने आज अपना वो तांत्रिक वाला चोला भी उत्तर दिया था. और एक केशरिया साड़ी पहन ली थी. कियोकि उसने सोच लिया था की शादी तो करनी hi है चाहे फिर शादी के बाद सम्भोग हो या नहीं. पब को मरे या खुद उस पैर मर मिठे पैर शादी तो करनी hi है. दिल अभी भी पब पैर मर मिटने को कहा रहा था. पैर जब इन्शान पैर गुस्सा हावी हो जाता है तो वो सही गलत भूल जाता है. और ये hi मंजू के साथ था. सम्भोग क्रिया को न जानने का जो दर्द उसके दिल और दिमाग में था अब वो गुस्से और बदले की भावना में बदल चुक्का था और वो गुस्से में ये भी भूल चुक्का थी की वो बदला अपने hi गुरु से लेने जा रही है.

कुछ देर बाद पब वह गुरु के साथ वह आ पंहुचा था. कियोकि गुरु ने उसे बता दिया था की वो मंजिमा को अच्छे से जानती है और बहुत hi अच्छी लड़की है. मणि जी ने भी मंजिमा से शादी के लिए हाँ कहा दी थी. और ये भी बता दिया था की मंजिमा के सेहत वो पंचमहाभूतों की शक्ति hi मगे. जब पब की नजर मंजू के फेस पैर पड़ी तो उसकी खुब्शुर्ति में खो गया. दिल में उसके लिए एक प्यार उम्दा. वो उसके फेस में खोने लगा. पहले बार पब ने मंजू के फेस को देखा था नहीं तो पहली बार उसके फेस पैर बहुत कुछ पता हुआ था. पैर अभी उसका फेस दमक रहा था. एक माशूम सा सुन्दर सा फेस. एक तेज़ था उसके फेस पैर. जो उसके फेस को बिना मेकअप के भी हसीं बना रहा था. चहरे की मासूमियत से एक छोटी सी बच्ची लग रही थी. वही सरीर के उठाव चढ़ाव इतने प्रीफेस थे की इस सदर्न सी साड़ी में भी मोडल से काम नहीं लग रही थी. मंजू का तेज़ मंजू को सबसे अलग बनता था. उसके तेज़ के कारन फेस पैर से नजर हटाने का मन hi नहीं हो रहा था. मंजू भी पब को उसे ऐसा घूरता देख मन hi मन मुस्कुरा रही थी. साथ में आती बाला की सुन्दर लड़की के होते हुए भी जब पब उसे घर रहा था तो उसे ये अपने रूप सौंदर्य की जीत लग रही थी. आज कई सालो बाद मन में ये ख़ुशी आयी थी. नहीं तो जब से उसने तांत्रिक का चोला लिया था वो ये सब भूल hi चुकी थी. और फिर आज उसको घूरने वाला भी वो था जिसको देख कर उसके दिल ने पहली बार किसी को अपना कहा था. और ये दिल इस बात को अच्छे से जनता था. चाहे दिमाग पैर भरम जाल था. पैर दिल कहा किसी की सनटैन है एक बार जिसको अपना मान ले उसको देख कर जोरो से धधकने लगता है.

मंजू – कैसे है आप..

पब – एक दम अच्छा, और आप किसी है.

मंजू – मैं भी अच्छी हु, ये कोण है.

पब (गुरु की और इशारा करके) – ये भी मणि जी की शिष्य गुरुपित है. और गुरु ये है …..

गुरु – मंजिमा.. अच्छे से जानती हु इसको में. साथ में बहुत कुछ सीखा है गुरूजी से.

मंजू का मुँह तो खुला का खुला रहा गया. कहा वो गुरुपित और कहा ये. यानि की सच में गुरुपित को दस माँ ने वरदान दिया है. और बिना मणि जी के से हो नहीं सकता.

मंजू – आप तो सच में पूरी बदल गयी है. आपको तो कोई पहचान hi नहीं सकता.

गुरु – हाँ सब दस माँ की कृपा है. और तुम्हारा वो अनुषदां पूरा हुआ या नहीं??

मंजू – हाँ कुछ चरण बचे है बस.

पब – तो मंजू अपने क्या सोचा मेरे प्रस्ताव के बारे में? मेरे से शादी करके मेरे साथ सम्भोग क्रिया करना चाहेगी??

मंजू – मैं अपना जवाब बताने से पहले आपसे कुछ जानना चाहती हु.

पब – हाँ बोलो क्या जानना है??

मंजू – आप मणि जी से कब और कहा मिले थे?

पब – मैं मणि जी से 4-5 महीने पहले गुरुपित की गुफा में मिला था. गुरुपित ने hi मुझको उनसे मिलवाया था. पैर मैं उनको पहले से जनता हु. वो मेरे पापा और माँ के फ्रेंड भी थे. और गुरु भी. वो 6-7 साल पहले हमारे घर भी आये थे.

मंजू – क्या वो आपके घर पैर क्यों?? जहा तक मुझको याद है गुरु जी शायद hi किसी के घर जाते थे.

पब – वो मुझको लेने hi गए थे. पैर मैं hi अभागा था जो मेने साथ आने से मन कर दिया. और उसका फल मुझको अपनी माँ के रूप में चुकाना पड़ा.

मंजू मन में – मतलब ये लड़का पहले गुरु जी की बात की अभिलना भी कर चुक्का है. फिर भी गुरूजी इसका साथ दे रहे है. जैसी क्या बात है??

मंजू – फिर गुरूजी ने आपको सम्भोग क्रिया कब सिखाई??

पब – उसी दिन जिस दिन गुरुपित ने मुझको उनसे मिलवाया था. फिर मेरी हेल्प के लिए गुरुपित को भी मेरे साथ भेज दिया था.

मंजू मन में – वहहहह गुरु जी क्या बात है इस लड़के ने आपकी बात नहीं मणि फिर भी अपने पहली hi मुलाकात में वो क्रिया सीखा दी जो मुझको इतने दिन की म्हणत के बाद भी नहीं सिखाई. ये अपने अच्छा नहीं किया. इसका फल आपको भुगतना hi होगा. (मंजू ने अपने मन के भावो को फेस पैर आने नहीं दिया)

मंजू (एक शैतानी मुश्कान के साथ) – मैं आपसे शादी करने को तैयार हु पैर मैं चाहती हु की ये विवहा यहाँ पैर hi हो और सही पैर हम वो सब करे. उसके बाद hi मैं आपके साथ अपनी सुसराल चलुगी.

पब (सोच कर) – ठीक है जैसे तुम कहो. क्यों गुरु इसमें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न.

गुरु – वैसे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर एक तो मेरी सखी को दुल्हन की तरह कैसे सजायेंगे और दूसरा यहाँ कोई साउंड प्रूफ रूम भी नहीं है और आप जानते हो की जब आप किसी के साथ होते हो तो वो कितना चिल्लाती है (ये बोल कर वो हसने लगती है)

गुरु की बात का मतलब समाज कर मंजू शर्मा जाती है पैर मन में सोचती है आज मैं नहीं ये चिल्लायेगा. और मैं हसुगि. फिर ये तड़फ -2 के मरेगा. तब मेरे दिल को सुकून मिलेगा.

मंजू – तैयार तो आप मुझको प्राकृतिक तरिये से भी कर सकती है और रही रात में होने वाली आवाजों की बात तो उसके लिए क्या ऐसा हो सकता है की शादी के बाद यहाँ केवल हम दोनों हो??

गुरु – हम्म ठीक है मैं तुम्हारी शादी करवा कर यहाँ से चली जोगी ये hi मुझको हवेली छोड़ आएंगे. और फिर रात में केवल तुम दोनों hi बचोगे. कियोकि और तो कोई मुझको यहाँ दिख नहीं रहा है. पैर देखना ज्यादा आवाज मत करना कही तुम्हारी आवाजों से जंगल के जानवर भी परेशां हो जाये.
 
अपडेट 164

मंजू एक बार फिर शर्मा जाती है. और फिर ये लोग ऐसे hi हाशि मज़ाक करते हुए शादी की तैयारी करने लगते है. पूजा का सामान तो पहले से hi था मंजू के पास में. बची हुयी चीजों का भी जल्दी से इंतजाम कर लिया जाता है. तो फिर गुरु जंगल से फॉल और कुछ पत्ते ले कर आती है. गुरु उन फॉलो और पत्तो से मंजू को ऐसा सजती है जैसे की वो प्रकृति का सबसे अनमोल तोफा हो. पत्तो से ली लाली होंटो पैर लगाती है तो सुरमा कुछ खाश पत्तो को जला कर उसके धुएं से बनती है. फॉलो का हाल. और फॉलो के hi आभूषण.



पब तैयारियां करके जब फ्री हुआ तो उसने हवेली में कामिनी को कॉन्ट्रैक्ट करके बता दिया की वो आज मंजिमा से शादी कर रहा है और वॉक अल सुबह hi हवेली आएगा. ये सुन कर सभी खुश हो गए. उस टाइम सभी दिंनिंग टेबल पैर बेथ कर लंच कर रहे थे. नैना भी पास में थी. और जब नैना ने सुना की पब एक और शादी कर रहा है और उसकी पत्निया इससे खुश है तो वो कन्फूस हो गयी. उसके हिसाब से सभी को दुखी होना चाहिए था पैर ये तो खुश हो रही है किसी क्या बात है जो ये ऐसे रियेक्ट कर रही है??

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वह गुरु और पब शादी की तैयारी में लगे थे और यहाँ त्रिकाल अपनी कामियाबी की ख़ुशी मन रहा था.

त्रिकाल – वाह वाह्ह्ह क्या बात है संभु तुम्हारा जवाब है. क्या खूब फाशय है मंजिमा को तुमने. साली को पता भी नहीं की उसका कोई इस्तेमाल कर रहा है. जिस तरह से आधा सच तुमने उसके सामने रखा है वो कबीले टैरिफ है. वो कभी सोच भी नहीं सकती की दस माँ के कहने पैर मणि ने पब को वो क्रिया बताई है. और ये बात तो वो जानती hi नहीं की ये वो क्रिया नहीं है जो वो समाज रही है.

संभु – सब आपकी कृपा है गुरूजी..

त्रिकाल – देखा और सुना मेने जब पब उस गुरु के साथ वह पहुंची तो उसने तुम्हारी बातो का सच जानने के लिए पब से कुछ सवाल किये. पैर जो तुमने बताया था वो सच hi था तो गलत कैसे निकलता. पब ने भी तुम्हारी बातो की पुष्टि की. वो भी नहीं जान पाया की वो क्या कहा रहा है. और उसका क्या अक्षर होने वाला है. सच में तुम्हारी बातो ने माजिमा के दिमाग में ऐसा चक्रवेव रचा है की वो अब उससे बहार आ hi नहीं पायेगी. अब अपनी जीत पक्की है.

संभु – हाँ गुरूजी हमारी जीत इस वार जरूर होगी. और वो सब अपनी दिव्या दृष्टि से देख भी सकेंगे. इसके लिए भी में उसको समझा कर आया हु.

त्रिकाल – हाँ तुम्हारे वो तीर भी एक दम ठीक लगे है संभु. उसने पब को बोल दिया है. शादी और सम्भोग वही साधु के आशाराम में करने के लिए.

ये दोनों बहुत खुश थे. और अपनी जीत का जश्न मन रहे थे.

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खुश तो गुरु और पब भी थे कियोकि वो आने वाले खतरे से अनभिज्ञ थे. उनको नहीं पता था की मंजू ने शादी के लिए हाँ क्यों किया है. गुरु तो दोनों की शादी की तैयारी hi कर रही थी. मंजू को सजाने के बाद गुरु ने वह के एक कच्चे रूम को भी उनकी सुहागरात के लिए रेडी कर दिया था. आज गुरु का पति फिर एक बार सुहागरात मैंने जा रहा था. जो पहली पत्नी होने के बाद भी उसने आज तक नहीं मनाई थी. फिर भी दिल में कोई मैल न था. वो तो खुश थी की उसके पति को एक और पावर मिलेगी.

जब सब तैयारी हो गयी तो गुरु ने पब और मंजिमा को अपने पास बुलाया और उनको बताने लगी की क्रिया में कैसे को क्या करना है. पब तो सब जनता था पैर मंजू को तो बताना hi था. और फिर जब गुरु ने बताया की मंजू को भी मनरा पड़ने है तो मंजू चौक गयी

गुरु – मंजू सम्भोग के दौरान जब तुम दोनों पुरे कपडे उत्तर दो तो तुमको और इनको एक -2 मंत्र पड़ना है. और उसको पड़ने से तुम्हारे अंदर उत्तेजना बहुत बाद जाएगी. तो ऐसा मत करना की उस उत्तेजना में आ कर तुर्रंत सेक्स सुरु कर दो. पहले फोरप्ले करना और जब तुमको लगे की तुम्हारा पानी निकले लगा है तब hi सेक्स सुरु करना.

मंजू चोकते हुए – क्या मुझको भी मंत्र पड़ना है?? पैर क्यों?? जहा तक मैं जानती हु मंत्र तो केवल वो पड़ता है जिसको पावर मिलनी है.

गुरु – मंजू तुमको बताया तो था की ये वो सम्भोग क्रिया नहीं है. ये कुछ अलग है. उस क्रिया को करने से कोई भी फल अभी के हालातो में नहीं मिल सकता.

मंजू मन में – यानि गुरूजी ने सच hi कहा था. पैर गुरूजी जब ये क्रिया इसको बता सकते है तो मुझको भी इस क्रिया के वेयर में hi बता देते. पैर नहीं वो तो केवल ये अपने चाहते को hi बतायेगे न. देखो गुरूजी आपके इस धोखे का बदला आज में कैसे लेती हु.

गुरु – कहा खो गयी मंजू मंत्र समाज गयी न…

मंजू – क्या कहा क्या कहा अपने.. सॉरी में कुछ सोचने लग गयी थी.

गुरु फिर से उसे मंत्र बता देती है. और फिर वाकई सब भी समजा देती है. उसके बाद पब से बोलती है की आपको पता है न की क्या मग्न है. तो पब कहता है तुम hi बता दो.

गुरु - “हे डलासुर और दक्षसूरी माँ, मैं पंचमहाभूतो – जल, अग्नि, भूमि, हवा, आकाश सभी पैर नियंत्रण कर सकू. इनको किसी अश्त्र की तरह उपयोग कर सकू.”

पब – हम्म ok

फिर ये लोग हवन पैर बेथ जाते है. गुरु मंत्र पड़ती रहती है और मंजू को दिमाग कही और hi चल रहा था. उसके दिल और दिमाग के बिच में जंग चल रही थी.

म. दिल – है आज मैं अपने सपनो के राजकुमार की हो जोगी. जैसे पति की मैं कल्पना करती थी ये बिलकुल वैसे hi है. देखने में इतने स्मार्ट, मजबूत सरीर, मासूम सी सूरत फिर भी तांत्रिक विद्या में माहिर. कितने पावर फूल है साधु जैसे तांत्रिक को यु hi मार दिया.

म. दिमाग – ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं है. ये कुछ hi गान्तो के लिए जीवित है.

म. दिल – पैर क्यों, कसूर क्या है इनका?? इनकी आखों में देख केवल तेरे लिए प्यार hi नज़र आएगा. इन्होने बिगाड़ा hi क्या है तेरा.

म. दिमाग – देखा दिया है मजुको. और देखे से बड़ा कोई जुरम नहीं होता. यदि ये न होते तो आज गुरूजी ने ये विद्या भी मुझको सिखाई होती. चाहे गुरूजी नहीं सिखाते पैर झूट क्यों कहा की सम्भोग क्रिया से कोई लाभ नहीं होगा. फिर इसके लिए अपने सभी शिष्यों से पक्षपात किया. न इसने आशाराम की सेवा की, न गुरु जी की सेवा की, न पहले कोई तंत्र विद्या सीखी. उप्पेर से गुरूजी की बात न मैंने का पाप भी किया फिर भी इसको प्यार और मुझको दुत्कार. क्यों??? मेरी सेवा में क्या कमी थी. उस कृप गुरुपित को भी दस माँ के दर्शन करवा दिए उनसे वरदान दिलवाने में हेल्प की. और मुझको?? बस मन्त्र सीखा दिए और भटकने को छोड़ दिया. क्यों?? केवल इस लड़के के लिए गुरूजी ने अपने hi बनाये नियम तोड़े है. मैं इसको जिन्दा नहीं छोड़ सकती.

दिमाग की इस दलील का दिल के पास कोई जवाब नहीं था. वैसे भी मंजू का दिमाग संभु के भ्रम जाल में ऐसा फास चुक्का था की वो उससे निकलना hi नहीं चाहता था. गुरु हवन करती रही पैर मंजू अपने अंदर उड़ रहे इस तूफ़ान को शांत करती रही. और पब प्यार से कभी मंजू को तो कभी गुरु को देखता रहा. पब को तो पता भी नहीं था की आज उसके साथ क्या होने वाला है.

शादी की क्रिया पूरी होने के बाद गुरु ने एक बार फिर मंजू को मंत्र संजय. और फिर मुझसे बोली की मैं उसे हवेली छोड़ औ. तो मंजू को रूम में वेट करने का बोल कर पब गुरु को ले कर हवेली पहुंच गया. जब वह पंहुचा तो देखा की कामिनी ने पहले से hi खाना पैक किया हुआ है. जो उसने पब को पकड़ा दिया. उसको ले कर पब टेलिपोर्ट हो कर मंजू के पास पहुंच गया. वह मंजू उस रूम में hi बैठी थी जो गुरु ने इन दोनों के लिए तैयार किया था. फिर वह जा कर पब ने मंजू के साथ प्यार भरी बाते करते हुए खाना फिनिश किया. मंजू पब का प्यार देख कर पिघल रही थी. पैर उसका दिमाग उसे पिघलने से रोक रहा था. उसके दिमाग में तो बस ये चल रहा था की पब और वो दोनों जल्दी से नंगे हो और मंत्रो का जप करे और वो पब को मन करके वह से चली जाये. पैर वो ये बोल नहीं सकती थी तो उसे जब तक पब का पूरा साथ देना था ताकि उसे कोई भी शक न हो. मंजू नहीं जानती थी की इस क्रिया का प्रारम्भ तो उस शादी की क्रिया से hi सुरु हो चुक्का था. जबकि नार्मल क्रिया में मंत्र पड़ने के बाद hi होता था.

जब ये दोनों खाना फिनिश कर लिए तो पब मंजू के पास hi बैठा था और उसे सम्भोग क्रिया को आगे बढ़ाना था. वो अपनी पत्नी के साथ प्यार से सम्भोग करना चाहता था.

पब – मंजू मैं बहुत खुश हु की तुम मेरी जिंदगी में आयी. तुम बहुत सुन्दर हो. और आज तो इन फॉलो के गहनों में कमल की लग रही हो. दिल कहता है की तुमको ऐसे hi देखता राहु.

मंजू (शर्मा के) – मैं भी बहुत खुश हु आज. जो मेने चाहा था वो पा लिया. मैं तो अब आपकी hi हु आप जो चाहे कर सकते है पैर प्लीज ऐसे तो मत देखिये मुझको शर्म आती है. (मन में – और थोड़ी देर खुश हो ले. यदि जरुरी नहीं होता तो तुझको अपना नंगा बदन देखने भी नहीं देती)

पब – है ऐसे शरमाओगी तो काम कैसे चलेगा जान, देखो शर्म की लाली ने अभी से तुमको घेर लिया है.

मंजू पब की बात सुन कर अपनी नजरे जुका लेती है. और पब उससे सात कर बेथ जाता है. फिर उसके नंगे हाथो पैर अपनी फिंगर चलने लगता है. पब के चुने से मंजू के जिस्म में एक कम्पन सा होने लगता है. पब के हाथ उसके कंधो पैर पहुंच गए थे. और उनको सहलाने लगे थे. हाथ गर्दन से होते हुए उसके गलो पैर पहुंच चुके थे. जो उसके पुरे चेहरे पैर घूम रहे थे. हाथ घूमते हुए पब का फेस उसके फेस के नजदीक आ चुक्का था. पब ने धिरे से उसके होंटो पैर अपने होंठ रख दिए. और प्यार से उनको चूमने लगा. मंजू का ये पहला अनुभव था तो उससे ये बर्दाश नहीं हो रहा था उसको एक नशा सा चने लगा था और वो इसमें खोने लगी थी. जब पब ने होंटो को चूसना सुरु किया तो मंजू के हाथ खुद बा खुद पब के सर पर चले गए. और वो भी उसका साथ देने लगी. उसका दिल ख़ुशी और इस प्यार से झूम उदा था. पहले प्यार का पहला चुम्बन, उसके अंदर सोई हुयी उस औरत को जगाने के लिए काफी था जो अपने सपने के राजकूराम पैर अपना सब कुछ लूटना चाहती है. और बदले में उससे प्यार hi प्यार चाहती है. और उसे अभी अपने राजकूराम से वो प्यार मिल रहा था तो उसके अंदर की औरत उसे उस पैर सब लुटाने को कहा रही थी. पैर दिमाग साथ नहीं दे रहा था. जब मंजू अपने अंदर के तूफ़ान में फाशी थी. पब उसके चुके दबाने लगा था. और होंटो को पि रहा था. जब मंजू पैर बर्दाश नहीं हुआ तो वो थोड़ा सा पीछे हो गयी. और किश तोड़ दिया. दोनों हाफ रहे थे.
 
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