MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 22 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 165

जब मंजू अपने अंदर के तूफ़ान में फाशी थी. पब उसके चुके दबाने लगा था. और होंटो को पि रहा था. जब मंजू पैर बर्दाश नहीं हुआ तो वो थोड़ा सा पीछे हो गयी. और किश तोड़ दिया. दोनों हाफ रहे थे. जब सांसे ठीक हुयी तो मंजू को बोलना hi पड़ा.

मंजू (नजरे झुका कर शरमाते हुए) – सुनिए मैं आपसे कुछ कहना चाहती हु.

पब (उसके जिस्म को अपनी फिंगर से छेड़ते हुए) – हाँ मेरी रानी बोलो .

मंजू – वो मैं ये चाहती हु की पहले हम वो मंत्र पद ले फिर आगे बड़े. मुझको दर है की मैं रुक नहीं पाउगी. सालो से प्यासी हु. और आज आपके प्यार में पूरी तरह बहकना चाहती हु. बिच में मंत्र पड़ना भूल गए तो सब गड़बड़ हो जाएगी.

पब ने उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए उसकी बात को मन लिया और ok कहा दिया दोनों 2 मं तक यु hi खड़े रहे. ये शांति सी छ गयी थी. उस शांति को पब ने hi भांग किया.

पब – मंत्र पड़ने के लिए कपडे निकने होंगे.

मंजू सिर्फ हम्म hi कहा पायी और नजरे निचे करके अपने कपडे निकलने लगी. जब उसने अपने पुरे कपडे निकल दिए तो पब उसके नंगे बदन को देखता hi रहा गया. इतनी देर में पब ने भी अपने कपडे उत्तर दिए थे. मंजू की नजरे जोकि हुयी थी. तो वो पब के लुंड से टकरा गयी. मंजू ने अपनी पूरी जिंदगी में इतना बड़ा और सूंदर लुंड नहीं देखा था. आज अपने खड़े लुंड को देख कर पब भी चौक गया था. कियोकि वो अब पहले से भी बड़ा हो चुक्का था. और इसका कारन सलोनी के साथ किया गया वो सेक्स था जिसने उसके सरीर में इतने बदलाव लाये थे की उसकी लम्बाई भी बाद गयी थी. उसके अंदर की दानव शक्ति जागने से उसका लुंड दानवो के जैसा हो गया था. किसी लड़की की कलाई जितना मोटा लग रहा था. और लम्बाई भी 10-11 इंच तो थी hi. उप्पेर से मोटा सूपड़ा जो एक दम लाल था. जो उसके गोर लुंड को और भी दिलकश बना रहा था. लुंड मंजू को सामने नंगा देख कर पूरा खड़ा हो कर जटके मर रहा था. एक बार तो मंजू ने दर के मरे अपना तुक घटक फिर अपने आप पैर कण्ट्रोल कर मंत्रो का जप करने लगी. जब दोनों ने मंत्र जप कर लिया तो पब ने उसके हाथ को पकड़ कर अपनी और खींचा पैर मंजू ने उसके हाथ को छिटक दिया. अभी उसकी सांसे बहुत तेज़ चल रही थी. सेक्स का नशा उसके सर पर चढ़ने लगा था. पैर वो अपनी आखें बंद करके अपने आप को कण्ट्रोल करने के लिए तेज़- 2 सांसे ले रही थी. उसके हाथ छिटकने से पब को दक्का लगा. उसे समाज hi नहीं आया मंजू का ये रिएक्शन. जब उसने मंजू की और देखा तो वो अपनी आखें बंद किये अपने आप को कभू में करने की कोसिस कर रही थी. और कुछ hi देर में कामियाब भी हो गयी थी. पैर ये तो केवल मंजू hi जान सकती है की मंत्र पड़ने के बाद आने वाली उत्तेजना को वो कैसे कण्ट्रोल कर गयी.

कुछ देर बाद जब पब ने फिर उसका कंध पकड़ा तो फिर से उसने उसके हाथ को छिटक दिया. तो पब बोलै – क्या हुआ मंजू कैसे रियेक्ट क्यों कर रही हो?

मंजू – बात ये है की मैं तुम्हारे साथ सेक्स नहीं कर सकती ये मुझसे नहीं हो पायेगा. मैं जा रही हु.

और ये बोल कर उसने कपडे पहनना सुरु कर दिया. पब तो ये सुन कर बूत बन गया था उसके पैरो टेल जमीन निकल गयी थी. उसे अपना और अपनी पत्नियों का अंत दिखाई दे रहा था. उसका तना हुआ लुंड एक hi जटके में बेथ चुक्का था. उसके मंद ने काम करना बंद कर दिया था की ये क्या कहा रही है. फिर भी हिम्मत करके बोलै – पैर बात क्या है मंजू तुम तो सम्भोग क्रिया के बारे में जानती हो यदि ये सेक्स नहीं हुआ तो सब ख़तम हो जायेगा. तुम ऐसा क्यों कर रही हो. ऐसी क्या गलती हो गयी जो तुम ये सब कर रही हो???

मंजू – मैं तुमको कुछ भी नहीं बताना चाहती मैं जा रही हु. तुम जियो या मारो मुझको उससे कोई मतलब नहीं.

मंजू की इतनी रूडली बात करने से पब को भी गुस्सा आ गया – तुम ऐसे नहीं जा सकती. तुमको मेरी बात का जवाब देना होगा ये हम सब की जिंदगी का सवाल है. (पब ने ये बात पुरे गुस्से में गजरते हुए कही थी.)

उसकी गुस्से भरी आवाज से एक बार मंजू दर गयी पैर फिर बोली – तो क्या अब तुम मेरे साथ जबरदस्ती करोगे???

पब की आखों में आशु आ चुके थे. दिल में गुस्सा भरा हुआ था. उसका सरीर गुस्से से कैंप रहा था. आखें दुःख में आशु बहा रही थी. उसकी दानव प्रवाटिया उस पैर हावी होने लगी थी. जिनको वो किसी तरह अपने अंदर दबाने की कोसिस कर रहा था. उसको तो समाज hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे और क्या न करे. उसे केवल अंत नज़र आ रहा था वो भूल गया की वो मंजू को समजने के लिए मणि जी को या गुरु को बुला सकता है. वो भूल गया की वो मंजू के मंद को पद कर पता कर सकता है की ऐसी क्या बात हो गयी जो वो अब पीछे हैट रही है. उसका मंद ब्लॉक हो चुक्का था. यदि उसके मंद में कुछ था तो बस ये की यदि मंजू उसको छोड़ कर चली गयी तो सब मरेंगे. उसके उप्पेर हावी होती दानव प्रवति ने उसकी मंद को ब्लॉक कर दिया था.

जब मंजू ने अपने पुरे कपडे पहन लिए तो पब ने एक बार फिर पागलो की तरह उसकी और देखा और फिर उसे रोकने की कोसिस करते हुए बोलै – बात क्या है ये तो बता दो. मेने तुम्हारी इच्छा से hi ये सब सुरु किया था तुम्हारे साथ न पहले जबरदस्ती की थी और न hi अब कर रहा हु. फिर भी तुम मुझको मरने के लिए छोड़ कर जा रही हो. काम से काम ये तो बता दो की मेरा गुन्हा क्या है किसके लिए मुझको मूट की सजा दे कर तुम जा रही हो.

अब मंजू ने भी अपना रंग दिखाया – मैं तुमको कुछ नहीं बताना चाहती. मुझको भी मेरे सवालो का जवाब नहीं दिया गया था. मुझको भी कभी यु hi ठुकरा दिया गया था. आज तुमको रोटा गिड़गिड़ाता देख कर मेरे दिल को बहुत सुकून मिल रहा है. आज मेरा बदला पूरा हो गया.

पब बस मंजू को देखता hi रहा गया. और मंजू भी उसकी और देख रही थी पैर मंजू उसकी आखों का सामना नहीं कर पायी कियोकि उसके दिल को पता था की वो जो कर रही है वो गलत है. वो पब की आखों में जो दिख रहा है वो सच. इसलिए वो पब की नजरो से नजर हटा कर जाने लगी. और पब घुटनो पैर बेथ कर रोने लगा. कुछ hi देर में उसकी दुनिया ख़तम होने वाली थी. दैविये प्रवति को रोकते रोकते वो ये भी भूल गया की उसके पास इस प्रॉब्लम से निकलने के लिए पावर भी है. जिनके जरिये वो मंजू के मंद को पद सकता है. गुरु या मणि जी को अपनी सहायता के लिए बुला सकता है.
 
अपडेट 166

पब बस मंजू को देखता hi रहा गया. और मंजू भी उसकी और देख रही थी पैर मंजू उसकी आखों का सामना नहीं कर पायी कियोकि उसके दिल को पता था की वो जो कर रही है वो गलत है. वो पब की आखों में जो दिख रहा है वो सच. इसलिए वो पब की नजरो से नजर हटा कर जाने लगी. और पब घुटनो पैर बेथ कर रोने लगा. कुछ hi देर में उसकी दुनिया ख़तम होने वाली थी. दैविये प्रवति को रोकते रोकते वो ये भी भूल गया की उसके पास इस प्रॉब्लम से निकलने के लिए पावर भी है. जिनके जरिये वो मंजू के मंद को पद सकता है. गुरु या मणि जी को अपनी सहायता के लिए बुला सकता है.

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ये सब त्रिकाल अपनी दिव्या दृष्टि से देख रहा था. और बहुत खुश हो रहा था. आज उसके रस्ते का कांटा सदा के लिए निकलने वाला था. उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा जब उसने मंजू को जाते हुए और पब को घुटनो पैर बेथ कर रट हुए देखा. वो ख़ुशी से पागल होते हुए जोर -2 से हसने लगा. और अपनी दिव्या दृष्टि वह से हटा कर संभु से बोलै

त्रिकाल – वाह आज ये गया. आज मैं बहुत खुश हु मेने पब को वैसे hi हरा दिया जैसे इसकी माँ ने मुझको हराया था. एक सिद्ध तांत्रिक त्रिकाल को हरा कर भाग गयी थी वो. पैर उसको उसके कर्मो का फल भी मिला और आज उसके bête की मेरी जैसी हालत होने पैर तो मेरे दिल को बहुत सुकून मिल रहा है. यदि ये मेरे पहले वाले बारो से मार जाता तो शायद में इतना खुश नहीं होता. पैर आज मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं है. संभु मैं आज बहुत खुश हु. तूने बहुत अच्छा काम किया है. बोल क्या मांगता है मुझसे?

संभु – गुरूजी आप खुश है तो मैं भी खुश हु. मैं तो आपकी ख़ुशी से hi खुश होता हु. अपने मुझको सब कुछ दिया है मैं और कुछ नहीं चाहता. मेरा एक परिवार है पैर मैं उससे भी इतना प्यार नहींकरता जितना आपसे करता हु. मैं तो बस ये चाहता हु की आप सदा मुझको अपने साथ रखे.

त्रिकाल – संभु तेरा तो एक परिवार भी है पैर मेरा तो तेरे अलावा कोई और है भी नहीं. मेरे हर गम मेरी हर ख़ुशी का साथी सिर्फ तू है और हमेशा रहेगा. तू मेरा केवल शिष्य नहीं है. तू तो मेरा भाई है. मेरे माँ बाप तो मुझको 12 साल की उमरा में hi मुझको गुरु सत्यानंद जी के पास छोड़ कर चले गए. वो मेरी शैतानियों से परेशां हो चुके थे. मुझको भी अपने माँ बाप से बिजूड़ने का कोई ज्यादा दुःख नहीं था. हाँ पैर एक मेरा भाई था छोटू वो उस टाइम केवल 4 साल का था. मैं उससे बहुत प्यार करता था. पैर मेरे माँ बाप ने मुझको उससे भी जुड़ा कर दिया. तुझको पता है संभु तुझको देख कर मुझको अपने छोटे भाई की याद आती है तू hi मेरे लिए वो भाई है. आज तक नहीं पता की वो कहा है. अब तो बहुत बड़ा भी हो गया होगा. उसके भी बीबी बच्चे होंगे. वो तो मुझको पहचानेगा भी नहीं. पैर तू है मेरा भाई. तुझको कैसे छोड़ सकता हु.

(भाइयो इस बात को याद रखना ये बहुत बड़ा राज है. और सही टाइम पैर सामने आएगा. अब त्रिकाल को वो भाई कोण है? क्या वो इस स्टोरी में अभी तक आ चुक्का है या उसकी एंट्री वाकई है. और उसका क्या रोल है स्टोरी में ये सब आपको बाद में hi पता चलेगा)

संभु – गुरूजी अपने मुझको भाई कहा मेरा तो जीवन hi दांय हो गया. (संभु की आखों में आशु आ गए)

त्रिकाल – अरे पागल आज रोने का नहीं ख़ुशी मानाने का दिन है. जा तू शराब और शबाब का इंतजाम कर में उस कुत्ते को मरते हुए देखता हु.

ये कहा कर त्रिकाल ने अपनी आखें बंद कर ली और साधु की आश्रम में देखने लगा. पैर वह का स्कीन देख कर उसकी साडी ख़ुशी गायब हो गयी और चेहरे पैर गुस्सा आने लगा.

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जैसे hi मंजू रूम से बहार जाने लगी तो पब ने चिल्ला कर कहा – यदि तुम सच में एक तांत्रिक हो और तुमने सच्चे मन से अपने गुरु मणि जी की सेवा की है तो तुमको ये बता कर hi जाना होगा की तुम मेरे साथ केसा क्यों कर रही हो.

पब की बात ने मंजू के सोये हुए गुस्से को जगा दिया और वो पलट कर बोली – क्या टू है एक सच्चा तांत्रिक?? तूने किया hi क्या है विद्या सिखने के लिए??? तूने की है कभी गुरूजी की सेवा??? साला मुझसे पूछता है. यदि ये hi जानना है तो सुन तेरी तरह नहीं हु मैं. मेने आश्रम में पुरे मन से सेवा की है तब जा कर कही ये शिक्षा पायी है. तेरी तरह नहीं हु की बिना म्हणत के hi सब कुछ मिल गया.

पब – तो तुमको इस बात की जलन है. पैर मैं ये नहीं मन सकता की तुम से सब केवल इस जलन की वजह से कर रही हो. मुझको याद है जब मेने साधु को मारा था तो तुमने की कहा था की उसे उसके कर्मो की सजा मिली है. तो ये तो बता दो की मेने ऐसे कोण से कर्म किये है जो तुम मुझको मरने के लिए छोड़ कर जा रही हो.

पब की इस बात ने उसे अंदर तक हिला कर रख दिया. सच में उसके पास पब की इस बात का कोई जवाब नहीं था. एक तो उसकी छूट में इतनी खुजली हो रही थी की वो कुछ सोचने समझने की इस्तिति में नहीं थी. उप्पेर से पब की बाते उसका दिमाग ख़राब कर रही थी. वो बहुत देर तक चुप कड़ी अपनी hi सोच में गम रही. जब बहुत देर तक उसने कोई जवाब नहीं दिया तो पब ने फिर बोलै

पब – कुछ तो बोलो मंजू…… तुम्हारी आखों में जो मेने देखा था क्या वो झूट था. क्या इन्शान की आखें भी झूट बोलने लगी. आखों में जो मेरे लिए प्यार था वो अब कहा गया. और अभी भी क्यों मुझको इस आखों में मेरे लिए प्यार नजर आ रहा है. क्यों????

पब अभी भी नंगा फर्श पैर घुटनो के बल बैठा था. मंजू ने उसकी इस बात पैर अपनी नजरे फेर ली तो उसकी नजर पब के लुंड पैर पड़ी जो अभी भी थोड़ा खड़ा था. कियोकि उस पैर भी मंत्रो का अक्षर था चाहे उसने अपने आप को सेक्स के लिए कण्ट्रोल कर लिया था पैर डलासुर के अंश को अपने सरीर में बुलाने के बाद लुंड खड़ा न हो ये कैसे हो सकता है. उदार मंजू ने भी दस माँ के अंश को मंत्रो से बुला लिया था. और उसकी छूट में बहुत खुजली हो रही थी. लुंड को देख कर तो ये और भी बढ़ने लगी. और जब उससे न रहा गया तो उसने सोच की अब यहाँ से जाना hi ठीक होगा.

मंजू – ठीक है तो सुनो तुमने खुद बताया था न की तुमने गुरूजी (मणि जी) की बात नहीं मानी थी जब वो तुमको बुलाने गए. तो समाज लो के उसी का फल है जो तुमको मिल रहा है. और अब में जा रही हु. (मंजू ने बात को टालने की लिए ये बोल दिया पैर उसको नहीं पता था की पब पैर इस बात का क्या अक्षर होगा. वो उस बात के लिए पहले hi बहुत कुछ खू (माँ) चुक्का था. और आज फिर वही बात जब उसके सामने आयी तो उसकी माँ की यादो ने उसे जकड लिया और अब वो कुछ भी बोलने के लायक hi नहीं बच. वही जमीन पैर पेट के बल लेट गया. और रोने लगा)

मंजू पब को रोटा देख कर वह से जाने लगी. अब पब ने हथियार दाल दिए थे उसने पलट कर मंजू की तरफ देखा भी नहीं था. सर फरओ रहा था. अपनी माँ की यादो में तड़फ रहा था. वो भूल गया की यदि उसने जाती हुई मंजू को नहीं रोका तो वो मर जायेगा. भूल गया की उसके साथ उसकी साडी पत्निया भी मार जाएगी. भूल क्या की जिस माँ के लिए वो तड़फ रहा है उसे उस माँ का बदला लेना है. वो भूल गया की उसे अपनी बहन के हर दर्द का बदला लेना है. वो बस अपने दर्द में तडफता हुआ रो रहा था. ीदार मंजू का दिल भी पब को यु तड़फ कर रोटा हुआ देख कर रो रहा था. उसके मन में भी खलबली मची हुयी थी. छूट की खलबली, फिर दिल में पब के लिए दर्द और फिर दिमाग में पब और मणि के लिए नफरत की आग, उसका सर फटने को हो रहा था. उसने अपनी लाइफ में इतना कुछ एक साथ नहीं जिला था. उसके मंद को आराम चाहिए था. तो वो भर की और चल दी इन सभी चीजों को पीछे छोड़ कर. उसने सोच की यहाँ से चली जाएगी तो सब अपने आप hi शांत तो जायेगा. तो वो बहार को चल दी. पैर तभी –
 
अपडेट 167

गुरु ने कामिनी को पहले hi खाने के लिए बोल दिया था तो जब गुरु और पब वह पंहुचा तो कामिनी ने खाने का पैकेट दे दिया. और पब के जाने के बाद सभी पत्नियों ने गुरु को घेर लिया और उससे पूछने लगी कोण है मंजिमा, किसी है?? क्या ककरति है?? कुछ देर तक गुरु इन सभी की बातो का जवाब देती रही पैर न जाने क्यों गुरु को लग रहा था की जैसे कुछ गलत होने वाला है उसके मन में बुरे बुरे ख्याल आ रहे थे. उसका मन इन सभी के बिच में नहीं लग रहा था. तो वो सबको वही छोड़ कर अपने रूम में चली गयी और अपने डायन में बेथ कर मन को शांत करने लगी. ीदार जब गुरु जैसे बिच में से उड़ कर चली गयी तो सबको बहुत आश्चर्य हुआ. कियोकि गुरु नॉर्मली ऐसा नहीं करती थी. और इन सब ने गुरु के फेस पैर परेशानी के भाव भी देख लिए थे. वह सभी थे. केवल जय और पारी दानव सेना के बेस में थे. और ऐडा और अवनि ऐडा के रूम में. अवनि आज ऐडा को अपने दिल का हाल कहने की कोसिस कर रही थी. पैर वो ऐडा को भी नहीं बता प् रही थी तो पब को कैसे बताती. वह हॉल में सब पब की शादी को ले कर हसी मज़ाक कर रहे थे. नैना भी वह पैर थी. तभी माहि बोली

माहि – सविता क्या गुरु दीदी इस बात से परेशां तो नहीं की उनके पति की एक और शादी हो रही है??

सविता – माहि तू पागल तो नहीं हो गयी. गुरु दीदी इस बात से परेशां नहीं हो सकती यदि ऐसा होता तो क्या हम सब उनकी जिंदगी में आ पते. तुमने नहीं देखा है पैर मेने देखा है गुरु दीदी और इन्होने इस परिवार के लिए और इनके लिए पत्नी खोजने में कितनी म्हणत की है.

कामिनी – हाँ सविता ठीक कहा रही है माहि. जरूर कोई और बात है पैर तुम चिंता मत करो गुरु दीदी अपने आप सब हैंडल कर लेगी और यदि जरुरी हुआ तो हमको जरूर बोलेगी.

अंकिता – हाँ यार, पैर मैं तो बहुत खुश हु की इनको एक और पत्नी मिल गयी. अब बस 3 और खोजनी है. फिर अपनी फॅमिली भी कम्पलीट को जाएगी और ये अपने टारगेट के लिए भी जा सकेंगे.

एरिका – क्या हुआ अंकिता तुझको बड़ी जल्दी हो रही है इनका टारगेट पूरा होने की कही खुजली तो नहीं बाद गयी ज्यादा.

अंकिता – कमीनी क्या मेरे को hi हो रही है जैसे की तू तो सन्यास ले कर बैठी है.

काजल – दीदी आप लोग ये किसी बाते कर रहे है मेरे hi सामने मुझको बहुत शर्म आ रही है.

सलोनी – क्या यार काजल सब लेडीज hi तो है यहाँ पैर और तुझको क्यों शर्म आ रही है तू तो रोज लेती होगी अपने पति को तराश तो हम सब रहे है. पता नहीं कब वो दिन आएगा.

कामिनी – रंडियो अब चुप हो जाओ. क्यों आग में घी दाल रही हो. चलो जल्दी से खाना खा कर रूम में चलो सुबह जल्दी उड़ना है. काळा क और बहन आ रही है इस घर में. उसके वेलकम की तैयारी भी करनी है.

सभी लोग कैसे hi हंसी मजाक करते हुए खाना खा कर अपने -2 रूम में चले गए. नैना इस सबकी बातो से परेशां हो चुकी थी. उसके कुछ समाज नहीं आ रहा था. एक तो अपनी नयी सौतन के आने से खुश थी और सब वासना में जल भी रही थी. फिर भी सब कहती थी की उनका पति उनसे बहुत प्यार करता है. वो ये सब सोचते हुए सो गयी सोचा कर अंकिता से खुल कर बात करेगी.

ीदार जब पब दर्द में तडफने लगा तो ऐडा को भी साँस लेने में प्रॉब्लम होने लगी. कामिनी उसके पास hi थी. जब कामिनी को ये समाज नहीं आया तो वो गुरु के रूम में पहुंच गयी. गुरु अपने रूम में बेचैनी से ीदार से उदार घूम रही थी. कामिनी ने जब ऐडा की हालत बताई तो गुरु भी उसके पास पहुंच गयी. ऐडा के हाल देख कर गुरु को समाजमे आने लगा की जरूर पब पैर को परेशानी आ चुकी है. उसकी घवराहट बाद गयी. उसने पब से मन hi मन बात करने की भी कोसिस की पैर पब तो इस टाइम माँ के दर्द में तड़फ रहा था. जब गुरु से कुछ न बना तो वो दस माँ को याद करने लगी और कहने लगी “हे माँ आपका hi भरोषा है. आप hi मेरे पति और अपने bête की रक्षा कर सकती है. ये तो मुझको आभाष हो चुक्का है की वो इस टाइम किसी बड़े संकट में है और उनको उस संकट से केवल आप hi निकल सकती है.

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एक तरफ गुरु पब की सलामती की दस माँ से दुआ कर रही थी. दूसरी तरफ त्रिकाल संभु को बहार भेज कर अपनी दिव्या दृष्टि से पब को देखने के लिए बैठा था. और तीसरी तरफ मंजू अपनी सर के दर्द से परेशां हो कर पब को रोटा हुआ छोड़ कर बहार की और जा रही थी. ये तीनो काम एक hi समय पैर हुए थे. पैर जैसे hi मंजू रूम से बहार की और निकलने लगी वह एक मदुर आवाज गुंजी – रुक जाओ मंजिमा…..

जब मंजू से ये आवाज सुनी तो चौक गयी. उस रूम में अभी तक केवल वो दोनों hi थे तो ये आवाज किसकी है ये देखने के लिए जैसे hi पीछे पलटी तो उसके सामने एक देवी की तरह दिखने वाली औरत कड़ी थी. उनके मुँह पैर आशिम तेज़ था. ये दस माँ hi थी. जिनको देख कर त्रिकाल को गुस्सा आने लगा था. कियोकि दस माँ का वह होने का मतलब था की उसका प्लान फ़ैल हो चुक्का था वो ये बात अच्छे से जनता था. पैर फिर भी वो अपनी नजर वह पैर बनाये हुए था. मंजू तो दस माँ को देखती hi रहा गयी थी वो उनको पहचान नहीं पायी थी कियोकि उसने दस माँ को पहले कभी नहीं देखा था. केवल उनके दानवी रूप की मूर्तियों को hi पूजा की थी. और अभी दस माँ अपने देव रूप में थी. जिस रूप में वो पब से अपने निवेश िस्थान पैर मिली थी. पैर दस माँ को देख कर मंजू के मन और दिमाग में हो रही उथल पुथल शांत हो चुकी थी. वो अब एक दम शांत कड़ी केवल उनकी और देख रही थी. दस माँ ने मंजू को रुकने का बोल कर पब की और देख जो अभी भी नंगा पड़ा हुआ रो रहा था. दस माँ ने उसे आवाज दी.

दस माँ – पुत्र पंकज ऊधो. क्यों दुखी हो. देखो तुम्हारी माँ आ गयी तुमसे मिलने.

दस माँ की आवाज से पब ने जब नजर उदा कर उनकी और देखा तो पब नंगा hi उड़ कर दस माँ के पैरो को पकड़ कर रोने लगा. और बोलै – माँ ….. माँ……. मेने गलती कर दी …. माँ… मेने गुरूजी की बात न मान कर गलती कर दी…. मेने अपनी माँ को खो दिया. माँ मेरी एक गलती की सजा माँ ने कितने दर्द सहा कर चुके है..

दस माँ – बीटा भूल जाओ उस बाईट हुए कल को नियति को जो मंजूर होता है वो सब हमको भोगना hi होता है. मैं भी तो तुम्हारी माँ हु न पुत्र. और देखो तुम्हारी माँ तुम्हारे सामने है. भूल गए सोनल ने तुमसे क्या कहा था, अपने इस दर्द को अपने अंदर दबा लो और अपने लसखए पैर डायन दो. तुम्हारी माँ की आखरी खुऐश भी भूल गयी. वो क्या चाहती थी. जो ऐसे बच्चो के जैसे रो रहे हो.

पब – हाँ माँ अपने सही कहा नहीं अब में नहीं रोग. मैं अपनी माँ की आखरी इच्छा जरूर पूरी करुगा.

पब ने ये कहा कर खुद को संभाला और फिर जब उसे जब मंजू का याद आया तो उसे गेट पैर खड़े दस माँ को घूरता पाया और फिर उसे अपने नंगे होने का अहशास हुआ तो भाग केर अपना पजामा पहन लिया. ये देख कर दस माँ मुस्कुराने लगी. दस माँ को मुस्कुराता देख कर पब के मन में भी शांति चने लगी. अब वो फिर से मंजू से बात करना चाहता था पैर दस माँ के सामने चुप रहने मैं hi उसे अपनी भलाई नज़र आयी. जब दस माँ ने पब को शांत देखा तो मंजू की और देखा जो ये सब कुछ बड़े डायन से देख रही थी.

दस माँ – अब बोलै मंजिमा तुम मेरे bête को मेंरे के लिए छोड़ कर क्यों जा रही थी??

मंजू – आप कोण है देवी. और ये कोण है?? ये एक मानव है और आप देवी तो ये आपके bête कैसे?? ये केसा राज है??

दस माँ – तुमने मुझको नहीं पहचाना?? इतने दिनों तक मेरी पूजा की है फिर भी?? मैं हु दानवो की रानी दक्षसूरी…

मंजू ये सुनते hi हेंक हो गयी. और एक दम गेट पैर hi दण्डवत प्रणाम काने वाली दशा में आ कर बोली – क्षमा माँ क्षमा… अपनी इस भक्त को क्षमा कर देना. मेने गलती कर दी जो आपके इस रूप को पहचान नहीं पायी. क्षमा माँ… ये बोलते बोलते वो एक फिर से बेथ गयी और बोली – माँ अपने कहा की ये आपके पुत्र है?? ये कैसे हो सकता है ये तो मानव है???

दस माँ – पुत्री तुम ंजको पहचान नहीं पायी ये तुम्हारी गलती नहीं थी. पैर जो तुम करने जा रही थी वो तुम्हारी गलती थी. वो नियति के विरुद्ध था. नियति ने जिसको एक महँ उद्देश्य के लिए चुना है तुम अपनी गलती से उसे हानि पहुंचना चाहती थी.

मंजू – मैं कुछ समाज नहीं प् रही माँ आप क्या कहा रही है.

दस माँ – तुम आप इसकी पत्नी हो. और पत्नी दरम निभाना तुम्हारी नियति. तुम पत्नी धर्म छोड़ कर गलत रिश्ते पैर जा रही थी.

मंजू – पैर माँ जो मेरे साथ हुआ?? क्या वो सही था??

दस माँ – तुम अभी कुछ नहीं जानती पुत्री इसलिए ऐसा कहा रही हो. जब अपने पति के बारे में जान जाओगी तो ये सब नहीं कहोगी. और हाँ जो मणि ने तुम्हारे साथ किया वो एक दम सही था. उसने तुमको कभी देखा नहीं दिया. तुम जानती हो ये जो सम्भोग क्रिया पब कर रहा है ये वो नहीं है जिसके वेयर में तुम जानती हो. और इसको केवल ये hi कर सकता है कियोकि इसको अपने जनम से और मेरी दी हुए शक्तियों से इस क्रिया को करने का वर मिला है. मेरे hi कहने पैर मणि ने इसको ये क्रिया सिखाई थी. उसके बाद गुरु ने इसकी कई परीक्षाएं भी hi की ये इस काबिल है भी या नहीं तब ये आगे बाद सका है. ये एक प्रेम क्रिया है न की वो सम्भोग क्रिया जिसके बारे में तुम जानना चाहती थी. इस क्रिया को ये अपनी पत्नी के साथ hi कर सकता है. और यदि ये कैसे भी मार गया तो इसकी सभी पत्निया भी मार जाएगी उसमे तुम भी शामिल हो चुकी हो. ये क्रिया आज hi पूरी नहीं होगी ये जब पूरी होगी जब पब अपनी सभी पंक्तियों के साथ एक बार में hi सम्भोग करेगा. उससे पहले ये या इसकी किसी भी पत्नी को कुछ हो गया तो तुम सब एक साथ hi मर जाओगे. ये और इसकी सभी पत्निया इस क्रिया के कारन एक दूसरे से ऐसे जुड़ चुके है की एक की मूट hi सबकी मूट बन जाएगी. और हाँ तुम जो सोच रही हो की इस क्रिया से केवल इसको शक्ति मिलेगी ऐसा भी नहीं है. इसको शक्ति तो जरूर मिलेगी पैर उस शक्ति का स्रोत तुम होगी. तुम्हारी ऊर्जा hi इसकी शक्ति का स्रोत होगा. जब भी ये इस शक्ति का उपयोग करेगा तो तुम्हारी hi ऊर्जा से कर पायेगा. यदि तुम नहीं तो इसकी ये शक्ति भी नहीं. और इसकी शक्ति का कुछ अंश तुम्हारे पास भी होगा. तुम तो पलहे से hi इस शक्ति के आनुषदां के बहुत चारदो को पूरा कर चुकी हो. तो इस सम्भोग से तुम्हारा अनुषदां पूरा हो जायेगा. और ये देखो तुम्हारे पति ने क्या -2 किया है और क्या -2 खोया है. और उसका उद्देश्य क्या है.

ये बोल कर दस माँ के साथ से एक रौशनी निकलती है जो मंजू के सर में जाने लगती है और मंजू को पब के बारे में सब पता चलने लगता है की कैसे वो गुरु के पास पंहुचा, उसकी माँ और बहन के साथ क्या -2 हुआ, फिर किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दस माँ ने उससे ये सब करवा रही है. मंजू के दिमाग में अब तक की पब से जुडी हर एक बात जा रही थी. कुछ देर तक ये सब चलता रहा. अब मंजू को अपने उप्पेर गईं आने लगी की उसने कैसे नीच और कमीने आदमी की बातो में आ कर अपने देवता सामान पति का अपमान किया. और उनको मरने की कोसिस की.
 
अपडेट 168

दस माँ के हाथ से एक रौशनी निकलती है जो मंजू के सर में जाने लगती है और मंजू को पब के बारे में सब पता चलने लगता है की कैसे वो गुरु के पास पंहुचा, उसकी माँ और बहन के साथ क्या -2 हुआ, फिर किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दस माँ ने उससे ये सब करवा रही है. मंजू के दिमाग में अब तक की पब से जुडी हर एक बात जा रही थी. कुछ देर तक ये सब चलता रहा. अब मंजू को अपने उप्पेर गईं आने लगी की उसने कैसे नीच और कमीने आदमी की बातो में आ कर अपने देवता सामान पति का अपमान किया. और उनको मरने की कोसिस की.

कुछ देर बाद दस माँ फिर बोली – मंजिमा अपने मन से ये गिलानी निकल दो. उसमे तुम्हारा कोई दोष नहीं था. ये सब उस संभु के बनाये हुए उस भरम जाल का hi नतीजा था. जिसकी गिरिफ्त में तुम आ चुकी थी. (पब की और देख कर) पुत्र तुम भी इस बात का डायन रखना तुम्हारी ये पत्नी भी तुमको तुम्हारी और पत्नियों की तरह hi प्रेम करती है. बस उस भरम जाल ने इसकी बुद्धि को हर लिया था. तो तुम इसके प्रति मन में कोई भी द्वेष मत रखना. तुम्हारा प्रेम hi तुम्हारी सफलता की छवि है.

पब – हाँ में आपकी बातो को सुन केर सब समाज चुक्का हु. पैर माँ बस एक बात समाज नहीं आयी??

दस माँ – और वो बात क्या है पुत्र??

पब – माँ अपने आने ने इतनी देर क्यों कर दी. यदि आप और कुछ देर बाद आती तो शायद ये जा चुकी होती.

दस माँ – उसमे तुम्हारा hi कसूर है मेरे बच्चे. हर dev-danav की एक मर्यादा है और वो ये है की जब तक कोई उन्हें सच्चे दिल से न बुलाये वो वह जाते नहीं है. और तुमने तो मुझको याद किया hi नहीं तो मैं कैसे आती यहाँ बोलो??

पब – फिर अब कैसे???

दस माँ – वो है न तेरी परछाई गुरुपित… उसकी वजह से. वो तेरे पास नहीं थी फिर भी उसे तेरे दर्द का अहशास था. उसके hi मुझको तेरी मदद के लिए याद किया और मैं यहाँ आ गयी. सच में धन्य है वो.. जो तेरे लिए और अपनी भक्ति के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहती है (मन में – पगली है तेरी पहली पत्नी भी बन गयी. जबकि मेने उससे ये कहा था - (भाइयो दस माँ ने ये बात गुरु से ये बात अपडेट 2 में कही थी. मेने वह पैर इन दोनों की बातो में ब्लेंक स्पेस छोड़ा है. अब वो सब पूरा लिख रहा हु.)

अपडेट 2 का कुछ part, जो दस माँ अभी मन में सोच रही है -

बढ़ (गुरु) – जो आज्ञा माँ. पर इसका लक्ष्य क्या है?? और ये आपका बीटा कैसे है?? और इसको मेरी जरुरत क्यों है. और मेरे परिवार को मेरी बहु से कोण बच्येगा यदि माँ इसके साथ रही तो?? और में इसके साथ कैसे……..?

दस –सब समय पर पता चलेगा. और इसका लक्ष्य बहुत बड़ा है और बहुत जरुरी भी है. इसको सबसे पहले कुछ सकतिया को पाना होगा. उसके लिए इसको सम्भोग किरिया करनी होगी. तुम्हारा इसके साथ होना विदी का विद्वान है पुत्रीड. समय आने पर ये तेरे परिवार का भी भला करेगा. और तू इसके साथ पत्नी बन कर रहेगी. वो भी यदि तुम इसकी बनना चाहो तो. तुमको इसकी कुछ परीक्षाएं भी लेनी है. (कोण -2 से टेस्ट गुरु ने पब के लिए ये आप पद चुके है और इसको गुरु ने मणि जी के साथ प्लान किया था) जब तुमको लगे की ये शक्तिया पाने के काबिल है तब hi इसको आगे बढ़ने देना. और सबसे जरुरी बात की इसकी पहली शादी किसी लड़की से करवाना जो दानव राज डलासुर और मेरे (दस माँ) के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हो. चाहे वो लड़की हो या औरत पैर पहली पत्नी वो hi हो जो मरने को तैयार हो.

बढ़ – जैसी आपकी मर्जी माँ. पर ये सम्भोग किरिया क्या है. और कैसे की जाती है. ??? और क्या सच में मुझको इसकी पत्नी बनना है?? और क्या -2 परीक्षाएं लेनी है?? और यदि ये फ़ैल हो जाये तब क्या करना है??

दस माँ – वो सब तुझको मणि बताएगा. बस उसको कहना इस किरिया का समय आ गया है. और ये मेरा आदेश है. तुमको एक और बात बताती हु जो डर्टी पर 3 लोग hi जानते है और तुम 4तह होगी. मणि हमारे बारे पुत्र का पुनर्जन्म है. इसलिए वो सब जनता है. वो तुमको समय पर सब बताएगा.

बढ़ (कुछ देर सोचने के बाद) – माँ मैं भी आपकी भक्त हु. आपके लिए कुछ भी करने को तैयार हु. और मुझको इनकी पत्नी बनना hi है तो क्या मैं hi इनकी 1सत वाइफ बन सकती हु. वैसे भी मेने अपने जीवन के बहुत समय बिता दिया है. अब यदि ये जीवन आपके या समाज के कुछ काम आ सके तो में तो धन्य हो जोगी. (दस की तरफ आशा भरी नजरो से देखती है..)

दस – ये क्या कहा रही हो बेटी अभी मेरे से अपनी जवानी और rup-sundarya मांगा. और अब अपने आराधय के लिए अपनी जान देने की बात कर रही हो??? फिर क्या करोगी इस जवानी का??

बढ़ (गुरु) – नहीं माँ यदि मैं अपने पति की आखों में अपने लिए एक बार भी प्यार देख लू तो मेरा रूप मेरी जवानी मेरा वर सब सफल हो जायेगे. बस मैं अपने पति के उस प्यार को पाना चाहती हु. जो मुझको आज तक नहीं मिला है. उसके बाद मूट भी आ जाये तो कोई गम नहीं.

दस – जैसी तुम्हारी मर्जी बेटी. पैर फिर भी एक बार सोच लेना इसकी पहली पत्नी बनने से पहले. कियोकि उस पैर बहुत सी जिम्मेदारी भी होगी और उसका अंत क्या होगा ये कोई नहीं जनता. (दस माँ जानती है कियोकि उन्होंने ये पहले hi देखा हुआ है इसलिए उन्होंने गुरु को सचेत भी किया. फिर भी गुरु ने पब की 1सत वाइफ बानी. अब दस माँ से ये सब क्यों कहा ये तो स्टोरी के एन्ड में hi पता चलेगा)

एन्ड ऑफ़ अपडेट 2 part………………

दस माँ सोचती है कितनी पागल लड़की है भक्ति के लिए अपनी जान की भी चिंता नहीं है. अब इस पंकज को चाहती है तो इसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है. ये कभी भी अपने लिए नहीं जे. पहले पति ने इसको कोई प्यार कोई अपना पैन नहीं दिया. और आज जब उसने अपने जीवन के लिए कुछ खुशिया मुझसे मांगी तो मेने भी उसको एक दायित्व एक काम सोप दिया. और दिखो अपनी भक्ति और प्यार में डूबी हुयी ये नारी उसे कितनी अच्छी तरह निभा रही है. आज भी वो प्यासी है फिर भी बिना किसी चाहत के अपना सब कुछ डाव पर लगा कर अपना करम किये जा रही है. सच में गुरुपित तुम दांय हो…. !!!!!

दस माँ अपनी सोच से बहार आती है और बोलती है – अब तुम दोनों एक – दूसरे को माफ़ कर देना और एक दूसरे के प्रति बिना किसी गलत विचार के अपने नए जीवन की सुरुवात करो. और इस सम्भोग क्रिया को भी जल्दी से पूरा करो. यदि सुबह हो गयी तो आनर्त हो जायेगा.

ये कहा कर दस माँ वह से चली जाती है. दस माँ के जाने के बाद मंजू पब के पैरो को पकड़ लेती है और बोलती है – प्लीज मुझको माफ़ कर देना उस संभु की बातो में आ कर मेने पाप कर दिया. अपने hi पति के लिए गलत विचार रखे. खुद को और उसको नुकशान पहुंचने की कोसिस की. सच में मैं पापी हु. फिर मुझको कोई सजा दो. पैर मुझको माफ़ कर दो (और फिर मंजू रोने लगती है)

कुछ देर मंजू को रोने के बाद पब उसको अपनी बांहो में ले लेता है और फिर उसको चुप करवाता है. – देखो इसमें तुम्हारी गलती नहीं है जो भी हुआ उस संभु की वजह से हुआ. पैर अब सब ठीक हो गया है. मेरे लिए अब भी तुम वो hi मंजू हो जो आज सुबह थी. बल्कि अब तुम मेरी पत्नी हो. और पति पत्नी में छोटी मोती बाते तो होती रहती है. चलो अब अच्छे बच्चे की तरह चुप हो जाओ…

मंजू – नहीं ये छोटी मोती बात नहीं है. आपको सजा देने hi होगी… मेने पाप किया है paap….(manju फिर रोने लगती है)

मंजू को बहुत गिलटी फील हो रहा था. अब उसके मंद से भ्रम पूरी तरह निकल चुक्का था. वो जान गयी थी की पब क्या है कोण है. और ये सब क्यों कर रहा है. जो उसने पब के साथ किया था उसे सोच सोच कर मंजू को खुद से नफरत हो रही थी
 
थैंक यू बीआरओ... सच में आप पुरे डायन से स्टोरी को पड़ते है. दिल खुस हो गया आपका रिव्यु देख कर....

भाई ऐडा का तो पता HI है आपको की ऐडा का तो पब की जान से जुड़े होने की वजह से HI पता चला...

और दूसरा गुरु की बात तो ये आगे आएगा बीआरओ... मेने तो सोच था की इस बात को शायद कोई नोट HI न करे पर अपने दिल खुश कर दिया....

भाई दस माँ ने पहले भी ऐसा नहीं किया है. 1सत अपडेट में भी उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. और उन्होंने पब को बीटा कहा ये बात सभी को पता भी चल गयी थी. दस माँ, मणि और दयासुर ये तीनो करने को तो बहुत कुछ कर सकते है. और करने की पावर भी रखते है. बूत भाई यदि इनको HI करना होता तो फिर हीरो का क्या होता.

और जो बाते त्रिकाल को पता चली है वो उसको पता चले इसलिए HI ये किरिया हवेली की जगह यहाँ करवाई थी...

पंचतत्वों की पावर - आग, पानी, हवा, आकाश और भूमि को कण्ट्रोल करने की पावर...

हाँ भाई इस स्टोरी को 2 PART में लिकने का सोचा है...

1सत - दयासुर के उस कैद के छूटने तक की

2ंद - त्रिकाल का एन्ड और दयासुर और दस माँ की मुक्ति.....
 
अपडेट 169

मंजू को बहुत गिलटी फील हो रहा था. अब उसके मंद से भ्रम पूरी तरह निकल चुक्का था. वो जान गयी थी की पब क्या है कोण है. और ये सब क्यों कर रहा है. जो उसने पब के साथ किया था उसे सोच सोच कर मंजू को खुद से नफरत हो रही थी. पैर वो अब ये भी जानती थी की खुद को नुकशान पहुंचने से भी पब को hi नुकशान होगा. इस लिए वो रो रही थी और अपने लिए सजा मांग रही थी. जब मंजू पब के समजने पैर भी चुप नहीं होती तो पब उसको शांत करने के लिए उसके होंटो को अपने होंटो में ले लिटा है. उसके होंटो पैर भी उसके आशु लगे थे. उन आशुओ का सबद भी पब के मुँह में जा रहा था. पब उसके होंठ चूस रहा था और उसके आशु बहा रहे थे. मंजू होंठ चुसवाते हुए भी रो रही थी. और पब बहुत प्यार से उसके होंटो को चूस रहा था. मंजू साथ तो नहीं दे रही थी. पैर पब को अलग करने की कोसिस भी नहीं कर रही थी. धिरे धिरे उसकी भी आग बड़कने लगी तो वो भी रोना भूल कर पब का साथ देने लगी. कुछ देर बाद जब दोनों अलग हुए तो पब में कहा – आह्ह्ह्ह मज़ा आ गया. तू तो बड़ी मीठी है यार. पैर ये आशु न टेस्ट ख़राब कर रहे है. अब मत रोना नहीं तो फिर से टेस्ट ख़राब होगा.

पब की बातो से मंजू अपनी नजरे झुका लेती है. और मुस्कुराने अगति है. उस पैर भी वासना फिर से सवार होने लगी थी. वैसे भी उसने अपनी वासना को बड़ी मुश्किल से दबाया हुआ था पैर अब वो भी उसे दबाना नहीं चाहती थी. तो उसके फेस पैर वासना और शर्म के मिले झूले भाव थे जिनको देख कर पब बोलै – हाय्यिययी जान तेरी ये ऐडा तो जान लेवा है. तेरी ये झुकी नज़र तो दिल में उतर गयी… (फिर कुछ देर उसकी और दीखता रहा चुप चाप. और मंजू भी अपनी नजरे झुकाये अपने पेअर के ागुते से जमीन को कुरेदती रही. )

कुछ देर बाद पब ने उसकी थोड़ी (चीन) को पकड़ कर उप्पेर किया और बोलै – अब क्या इरादा है मेरी जान का??

मंजू (धीरे से) – आपके साथ प्यार करना है.

पब – पैर मैं तो तुमको छोड़ना चाहता हु. बोलो चुड़ोगी मुझसे??

मंजू शर्म से अपना सर पब के सीने पैर रख कर – आप जो भी चाहे वो करे. मैं आपके साथ हु..

पब – ऐसे नहीं जान आखों में आखें दाल कर बोलो क्या करना है.

मंजू – मुझको शर्म आती है. आप करिये न जो आपको करना है. मैं कहा आपको रोक रही हु…

पब कुछ सोच कर – हम्म जैसे नहीं, पहले हम दोनों फ्रेश हो कर आते है फिर करेंगे. देखो अभी दोनों की हालत ख़राब है तो मज़ा नहीं आएगा.

मंजू को पब की बात रही लगती है. तो दोनों फ्रेश होने चले जाते hai.or जब फ्रेश हो कर आते है तो पब मंजू से बोलता है – मंजू तुम सजा की बात कर रही थी न. तो बोलो तैयार हो सजा पाने के लिए??

पब की बात से मंजू एक दम बोलती है – हाँ आप जो भी सजा देंगे को मुझको मंजूर होगी.

पब – तो तुम्हारी सजा ये है की अब से तुम मेरे साथ बेशर्म बन कर रहोगी. और मेरे साथ इस चुदाई का पूरा मज़ा लोगी और मुझको भी मज़ा डौगी.

पब की बात सुन कर मंजू शरमते हुए मुश्कुरा कर – अब अपने सजा दी है तो आपको कोई भी सिककायत का मौका नहीं मिलेगा.

पब – तो अब बोलो चुड़ोगी मुझसे??

मंजू पैर भी वासना सवार थी तो – हाँ आपसे hi छोडूगी. अब छोड़िये न…

पब – ऐसे चुड़ोगी??

मंजू – पलग पैर लेट कर, कड़े -2, कुत्तिया बना कर जैसे मर्जी अपना लुंड मेरी छूट में घुसा दो. मैं सब तरह से छोड़ने को तैयार हु.

मंजू की बात सुन कर पब का लुंड जटके मरने लगता है और वो मंजू की एक चुकी को भींच देता है. मंजू की सिसकी निकल जाती है – अह्ह्ह्ह

पब – ये हुई न बात मंजू डार्लिंग… चलो अब अपने कपडे उत्तरो.

मंजू (शरमाते हुए) – मुझको शर्म आती है आप hi उत्तर दो न..

पब – फिर से ???

मंजू बिना कुछ बोले अपने कपडे उतरने लगती है और फिर से पब के सामने नंगी हो जाती है. पब भी उसे कपडे उतरते हुए देखता रहता है. रूम में दियो की hi रौशनी थी. तो इस डिम लाइट में मंजू का हाहाकारी बदन चमक रहा था. पब मंजू की ठोस और बड़ी चूचियों को देख कर उनको घूरने लगता है. तो मंजू अपनी चूचियों को अपने हाथो में ले कर बोली – ऐसे क्या घर रहे है ये आपके लिए hi है. छू कर बताइये किसी लगी.

पब मंजू की दोनों चूचियों को पकड़ कर सहलाते हुए – वाह तेरे चुके.. हिमालये से भी ुचे… गजब की चुकी है तेरी मंजू, इनको खाने का दिल कर रहा है.

मंजू – तो रोका किसने है खा जाइये इनको. निचोड़ दो… आअह्ह्ह धिरे राजा… आअह्ह्ह्ह (मंजू के बोलते हुए hi पब ने उनको मशलना सुरु कर दिया. )

फिर पब मंजू की चुकी पैर अपना मुँह रख कर उनको चाटने लगा. मंजू को ऐसे बोलने में शर्म भी आ रही थी. पैर उसने इसे अपने पति की इच्छा समझते हुए खुल कर बोल रही थी. जोर -2 से सिसकिया ले रही थी. और पब उसकी चोचीयो से खेल रहा था एक निप्पल मुँह में था तो दूसरे को खींच रहा था. मशाल रहा था. मंजू दर्द और मजे में सिसक रही थी. – ोुह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्ह जान और जोर से चुसो…. अह्ह्ह्ह… काटो मत आह्हः दर्द होता है… नहीं… आह्हः.. दबाओ… ोुह्ह्ह

पब - सच में जान तू बड़ी मीठी है. (फिर से चुकी को मुँह में ले लिया )

जब चूचियों पैर 10-12 मं म्हणत हो गयी तो पब ने अपने हाथ को उसकी छूट पैर रख दिया और उसको सहलाने लगा. छूट बहुत गर महो रही थी. आग छोड़ रही थी. छूट पैर मर्द के हाथ के पहले अनुभव ने मंजू को पागल कर दिया. मंजू ने पब का सर पकड़ कर उसके होंटो को जंगली की तरह चूसने लगी. और पब भी उसकी छूट को मशलने लगा. पब ने अपनी उंगलियों से उसके छूट के डेन को मशाल दिया तो ये वो सहा नहीं पायी और उसकी छूट से पानी आने लगा. जब पब के हाथ में उसकी छूट का रसा ा गया तो उसने मंजू को अपने से अलग करके बोलै – जान मेरा पजामा उत्तरो और मेरा लुंड चुसो..

मंजू ने भी तुर्रंत उसकी आज्ञा का पालन किया और घुटनो के बाल बेथ कर उसका पजामा उत्तर दिया. और उसके लुंड पैर जीव फिरने लगी. पब – आअह्ह्ह्ह जानेमन इनको मुँह में ले कर चुसो…

मंजू से अपना पूरा मुँह खोल कर पब के लुंड के टोपे पैर अपने होंठ रख दिए और उसको अपने मुँह में लेने लगी. बड़ी मुश्किल से वो टोपा hi अपने मुँह में ले प् रही थी. लुंड हो hi इतना मोटा गया था की टोपे से hi उसका मुँह पूरा भरने लगा. उसके गरम मुँह में गीली जीव उसके टोपे पैर चल रही थी. मज़े में पब की आअह्ह्ह निकल रही थी. पब ने उसके बालो को समेटते हुए पकड़ कर उसके मुँह ने लुंड को और अंदर करने लगा और बोलै – मेरी रानी मेरी आखों में देखते हुए चूस इस लुंड को देख ये ऐसे तेरे मुँह में जाने की कोसिस कर रहा है. आअह्ह्ह मंजू मेरी जान और ले अंदर…. अह्ह्ह्हह चूस साली जोर -2 से चूस अपने खशम के लुंड को…..

minor-latin;mso-fareast-font-family:"Times नई Roman";mso-fareast-theme-font:

minor-fareast;mso-hansi-theme-font:minor-latin;mso-bidi-font-family:"Times नई रोमन";

mso-bidi-theme-font:minor-bidi">Manju उनकी आखों में देखती हुई लुंड को चूसने लगी थी. पब एक हाथ से उसके बालो को पकडे हुए था तो दूसरे हाथ से उसके गालो को सहला रहा था. और अपनी कमर को चला रहा था. कमर के चलने से लुंड मंजू के मुँह में और उदरने लगा. कुछ hi देर में जटके तेज़ होते गए और लुंड हलक से टकराने लगा. मंजू की आखों में आशु आने लगे पैर फिर भी मंजू उसकी और देखती रही और पब भी उसकी आखों ने देखते हुए हुंकार भरते हुए दकके मार रहा था. जब मंजू को साँस लेने में प्रॉब्लम होने लगी तो पब की जंगो पैर हाथ रख कर उसे पीछे करने लगी. जैसे hi पब ने ये फील किया तुर्रंत अपनी कमर पीछे करके लुंड मुँह से बहार निकल लिया मंजू खास रही थी और उसके मुँह से उसकी लार बहा रही थी. पब ने उसके बालो को पकड़ कर hi उसे खड़ा कर दिया. और अपना एक हाथ निचे ले जा कर उसकी छूट को मशाल दिया. और फिर उसकी गांड पैर 2-3 तप्पड़ मर कर उसे गोद में उदा कर बीएड पैर ले गया. बीएड पैर लेट कर मंजू अपनी साँस ठीक करती रही और पब उसकी छूट को मशलता रहा जब मंजू की साँस ठीक हो गयी तो पब बोलै – मंजू तेरी छूट तो बहुत पानी बहा रही है. तेरी इस मलाई को चाट लू??

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minor-fareast;mso-hansi-theme-font:minor-latin;mso-bidi-font-family:"Times नई रोमन";

mso-bidi-theme-font:minor-bidi">Manju – चाट लो न राजा … चूस लो मेरी छूट का रास … खा जाओ इसको.. बहुत परेशां कर रही है ये मुझको…

minor-latin;mso-fareast-font-family:"Times नई Roman";mso-fareast-theme-font:

minor-fareast;mso-hansi-theme-font:minor-latin;mso-bidi-font-family:"Times नई रोमन";

mso-bidi-theme-font:minor-bidi">Manju की बात सुन कर पब ने अपने होंठ उसकी छूट के होंटो से मिला दिए और उनको चूसने लगा. जीव से डेन को छेड़ने लगा. छूट के होंटो पैर अपने दन्त रगड़ने लगा. दांतो के इस मीठी चुंबन से, डेन की छेद चढ़ से मंजू बीएड पैर अपना सर ीदार उदार पटकते हुए सिसकने लगी. कुछ hi देर में मंजू की सिसकिया तेज़ हो गयी. वो बस जड़ने hi वाली थी की पब ने अपने होंठ हटा लिए. तो मंजू ने उसे नाराजगी भरी नज़रो ने देखते हुए बोलै – रुक क्यों गए जी. मेरा होने hi वाला था. छतो न इस निगोड़ी ko..aaahhh कुछ करो न …

minor-latin;mso-fareast-font-family:"Times नई Roman";mso-fareast-theme-font:

minor-fareast;mso-hansi-theme-font:minor-latin;mso-bidi-font-family:"Times नई रोमन";

mso-bidi-theme-font:minor-bidi">PB – इतनी जल्दी क्या है जान जड़ने की एक बार मेरे मुशल से इसकी कुटाई तो सुरु होने दे. फिर देखना कैसे खली होती है ये…

मंजू – तो फिर कूटना hi सुरु करो अब रुका नहीं जा रहा है. घुसा दो अपना ये मुशल जैसा लुंड मेरी छोटी सी काली में. बना दो औरत मुझको आज.. लगा दो इस पैर अपने नाम की मोहर…. आह्हः मैं जल रही हु कुछ तो करो न..

मंजू की बात सुन कर पब ने भी अब देर करना सही नहीं समजा. और अपना लुंड उसकी छूट के मुँह पैर रख कर एक जोरदार दक्का मर दिया. पैर ये क्या इतने जोर के दकके के बाद भी केवल टोपा hi अंदर गया. पैर दकके की तेज़ी मंजू की चीख बता रही थी. मंजू इतनी जोर से चीची थी की अस पास के जंगल में पेड़ो पैर बैठे पंछी भी उड़ गए होंगे दर के मरे. मंजू की आखों से पानी बहा रहा था. छूट का चला लुंड को जैसे जकड़े हुए था जैसे उसके गर्दन hi दबाना चाहता हो. छूट के होंटो पैर 2-3 जगह पैर कट लग चुक्का था. पब को भी लगा की उसका लुंड कुछ ज्यादा hi बड़ा हो चुक्का है इसलिए मंजू को प्रॉब्लम ज्यादा हो रही है. और ये शायद उसकी दानव प्रवति जागने से हुआ था. उसका सरीर भी पहले से बढ़ गया था. पैर अभी मंजू अपना सर ीदार उदार पटकते हुए रोये जा रही थी. उसको बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था. उसका दर्द काम करने के लिए पब उसके चूचियों को भिचने लगा था. कभी उसके आशुओ को छत्ता तो कभी होंटो को चुस्त. चूचिया मशलने से लाल हो चुकी थी. अब पब को भी रुकना मुश्किल हो रहा था. और मंजू को थोड़ी रहत महसूस हो रही थी. पैर ये रहत कुछ पालो की hi थी. जैसे hi पब ने देखा की मंजू का दर्द कुछ काम हुआ है उसने फिर से एक जोर दर दक्का मर दिया. ¾ लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर जा धसा. छूट से खून निकलने लगा. मंजू का मुँह खुला रहा गया. आवाज तक न निकल पायी. साँस hi अटक गयी थी गले में दर्द के मरे. यदि पब को वंदान न होता तो मंजू कबकी बेहोश हो चुकी होते. पैर होश में होते हुए भी वो बेजान सी मुँह फाडे उसके निचे पड़ी थी. केवल आखों से आशु वह रहे थे. मुँह खुला पड़ा था. और पब को रुकना मुश्किल हो रहा था. तो उसने एक और दक्का दे मारा और लुंड जड़ तक मंजू की छूट में बेथ गया. और मंजू की आखें भी बहार को आ गयी. जब पब का लुंड पूरा छूट में बेथ गया तब उसने अपना मंत्र पड़ा. अब वो रुक सकता था. तो वो वैसे hi अपना पूरा लुंड मंजू की छूट में घुसाए मंजू की चूचियों को पिने लगा. और उसके पुरे जिस्म पैर हाथ फेरने लगा. कुछ देर में पब की म्हणत रंग ले और मंजू की संसे नार्मल होने लगी तो वो दहाड़ मर-2 कर रोने लगी. किसी तरह मंजू को चुप करवा कर मंजू का डायन बताने के लिए पब बोलै – अब हो गया जान अब क्यों रो रही हो. देखो तुम्हारी छूट मेरा पूरा लुंड ले गयी है. अब तो तुमको बस मज़ा hi मज़ा आएगा.

मंजू – अहह बहुत जयादा दर्द हो रहा है मेरी छूट में. क्या घुसा दिया अपने उसमे. हाय्यियी जान निकल रही है मेरी…

पब – जान तेरी छूट hi इतनी कमाल की है. मेरे लुंड पैर पूरी कैशा हुयी है. मैं अपना लुंड हिला भी नहीं प् रहा हु. लुंड अंदर जल रहा है. सच में बहुत कमल की चीज है तू मंजू. तेरा ये जिस्म बहुत कमल का है.

पब ये बोल कर फिर से चुके चूसने लगता है. मंजू पब की बात का जवाब देती है – अह्ह्ह्ह हिलना भी मत बहुत दर्द है जी. ऊऊओह्ह्ह्हह और जोर से चुसो मेरे चुचो को पि जाओ पूरा इनको… ये पूरा जिस्म आपका है खेलो इससे… अह्ह्ह्ह धिरे … काटो मत … चुसो… अह्ह्ह्ह

मंजू की छूट में फिर से थोड़ा पानी आने लगता है. और मंजू अपनी कमर हिलने लगती है. ये देख कर पब उसके चुचो को छोड़ कर उसके होंटो से अपने होंठ भिड़ा देता है. और लुंड को धिरे -2 अंदर बहार करने लगता है. मंजू को इसमें भी दर्द हो रहा था पैर मज़ा भी आने लगा था. तो वो भी पब के होंटो को चूसने में साथ देने लगती है. पैर उसकी कमर रुक गयी थी. पब धिरे -2 hi दकके मर रहा था. कुछ देर बाद जब पब ने अपनी स्पीड थोड़ी बड़ाई तो मंजू ने भी उसका साथ देते हुए अपनी कमर को हिलना सुरु कर दिया

पब – देख मेरी जान मंजू देख तेरी इस छूट में मेरा लुंड कैसे जा रहा है. कैसे मैं तुजको छोड़ रहा हु. देख जाआनंनंन्न आअह्ह्ह्हह कितनी गर्म चीज है टूउउउउ…..

मंजू – हहहहाआनंनं मेरे रराज्ज्जाआँ केईसीए hi चहहुदोऊ अपनी मंजू कोऊ… बहुउउत्तत मज़ाआ आ रहा हैई अब. थोड़ा और तेज़ छोड़ो न… फाड् दो मेरी छूट कोऊ…. तुम्हारा मुसल बहुत अच्छा हैई पहली तो दर्द दे रहा था पैर अब मज़ाआ आ रहा हीी… हाय्यएईए कीटनाए ससुखःहः हैई छुउड़णनी मई… चहहुदूऊ और जोर se….aahhhh

पब भी मंजू की मस्ती बरी आवाज सुन कर अपनी स्पीड तेज़ कर देता है. और दोनों अगले 40 मं तक ऐसे hi लगे रहते है. जो मन में आ रहा था वो बोल रहे थे. मंजू एक बार पानी बहा चुकी थी. इस लिए लुंड फच -2 करता हुआ किसी पिस्टन की तरह मंजू की छूट में अंदर बहार हो रहा था. छूट पूरी तरह फेल चुकी थी. लुंड ने अपने साइज के हिसाब से छूट को छोड़ा कर दिया था. अब मंजू को कोई दर्द नहीं था. वो केवल अपने पहले सम्भोग का आनंद ले रही थी. पब ने पोजीशन चेंज करने की सोची थी पैर मंजू की हालत वो नहीं थी की यदि वो उसकी छूट से लुंड बहार निकल ले तो कही वो बेहोश hi न हो जाये. चाहे उत्तेजना में वो पुरे मज़े से चुद रही थी. पैर जितना खून उसकी छूट बहा चुकी थी उससे उसके बेहोश होने के पुरे चांस थे. मंजू मस्ती में आ कर फिर से चिल्लाने लगी

मंजू – आअह्ह्ह्ह जान ोोुर्ररर तेज़ छोड़ो मुझको….. और तेज़…… अह्ह्ह्हह कितना मज़ा है अह्ह्ह्हह ऊऊऊह्ह्हह्ह ममममआगररररा फफफ्फ़ीीरररर ससीईए होओओओ राहहहहाआ हहहहाआईई जजजजजीयी…. तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ दकके मम्मारूओ ना… आह्ह्ह्हह नंन्तआह्ह्ह्हीीी

और ये बोलते हुए मंजू झड़ने लगी. मंजू का गरम वीर्य अपने लुंड पैर फील करके पब भी अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया और अपनी फुल स्पीड से मंजू की छूट की दाजिया उडाता हुआ जड़ने लगा. कुछ पालो तक वो उनकी छूट को अपने वीर्य से भरता रहा और फिर उसके उप्पेर लेट गया. मंजू और पब दोनों hi अपने परम सुख को फील कर रहे थे. दोनों की आखें बंद थी और एक रौशनी उनको घेरने लगी थी. कुछ देर बाद पब मंजू के उप्पेर से साइड में लेट गया. जैसे hi पब का लुंड मंजू की छूट से निकला वो बेहोश सी होती हुयी सो गयी. पब भी उसको बहा में ले कर सो गया. अभी 3-3.30ऍम हो चुके थे.
 
अपडेट 170

दोनों की आखें बंद थी और एक रौशनी उनको घेरने लगी थी. कुछ देर बाद पब मंजू के उप्पेर से साइड में लेट गया. जैसे hi पब का लुंड मंजू की छूट से निकला वो बेहोश सी होती हुयी सो गयी. पब भी उसको बहा में ले कर सो गया. अभी 3-3.30ऍम हो चुके थे.

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पब तो मंजू के साथ सेक्स करने में लग गया था. पैर त्रिकाल और संभु का प्रोग्राम उसकी वजह से बेकार हो चुक्का था. त्रिकाल बहुत देर तक अपनी दिव्या डर्स्टी से देखता रहा. और जब ये एक दूसरे के साथ सेक्स करने लगे तो उसने अपनी आहें खोल दी. बहार संभु ने सरब और सबब दोनों का इंतजाम कर लिया था. और वो त्रिकाल के उड़ने का इंतजार करते हुए 2-3 पेग ले भी चुक्का था. और लड़की के जिस्म से खेल रहा था. पैर जब त्रिकाल बहार आया तो वो सब देख कर जल भून गया. और उसने उस लड़की को लत मार दी. गुस्से से त्रिकाल का फेस लाल हो रखा था. त्रिकाल के फेस को देख कर संभु का नशा भी छूमंतर हो गया. और उसने इशारा करके सब लड़कियों को भगा दिया. फिर बोलै

संभु – क्या हुआ गुरु जी आप इतने गुस्से में??? क्या कोई भूल हो गयी क्या मुझसे??

त्रिकाल (गुस्से में)– नहीं संभु तेरे से कोई भूल नहीं हुयी. पैर हमारी किस्मत हमको फिर धोका दे गयी. एक बार फिर वो बच गया. फिर से बच गया हरामी साला. पता नहीं क्या किस्मत है उसकी हार बार कोई न कोई उसे बचने आ hi जाता है. साला हरामी….

संभु तो ये सुन कर शोकेड हो गया. उसके हिसाब से तो अब तक पब को मर जाना था फिर कोण आ गया उसे बचने – कोण था वो???

त्रिकाल – और कोई नहीं खुद दस माँ hi पहुंच गयी. साला में ये कैसे भूल गया की वो बिच में आ सकती है. उन्होंने मंजू को सब सच बता दिया. और मंजू उनकी बात सुन कर रट हुए अपनी गलती मैंने लगी… साली कुत्तिया को पति मिल गया. तो चुद गयी randi…Sali…. (त्रिकाल हार बर्दाश नहीं कर प् रहा था. वो गली दे कर अपने दिल को ठंडक देने की कोसिस कर रहा था.)

संभु (अपने हाथ पैर हाथ मर कर अपने हाथ मशालते हुए) – सच में गुरूजी ये साला बहुत लकी है हर बार बच जाता है. अब तो लगता है की हमको अभी इसको भूल कर पहले आपको अपनी शक्ति पानी होगी ताकि उसके बाद हम उसे अशनि से मार सके.

त्रिकाल – नहीं संभु वो तो हार मैंने वाली बात है. साला मैं आज तक किसी से नहीं हरा पैर इस आज के लड़के ने मेरी नाक में दम कर दिया है. पैर अब मुझको वो रास्ता मिल चुक्का है जिससे इसका लक भी काम नहीं आएगा.

संभु – क्या सच में गुरूजी?? कहा से मिला वो रास्ता आपको??? और उसके लिए क्या करना होगा??

त्रिकाल – हाँ संभु ये सच है कहते है न की एक रास्ता बंद होता है तो दूसरा अपने आप खुल जाता है. और ये hi हुआ है. चाहे इस बार हम उसको मार नहीं पाए दस माँ ने उसे बचा लिया पैर दस माँ खुद मुझको वो रास्ता बता गयी. जो मेरी समाज में पहले नहीं आया था. उससे पब को मरना बहुत ाशन है.

संभु (हैरान होते हुए) – क्या कहा रहे हो गुरु जी दस माँ आपको वो रास्ता बता गयी. यकीं नहीं हो रहा..

त्रिकाल – नहीं उन्होंने बताया नहीं पैर जब वो मंजू को समजा रही थी तब वो एक ऐसी बात बोल गयी जिससे मुझको पब को मरने का रास्ता मिल गया. वो पता मुझको भी था पैर आज तक उस पैर डायन hi नहीं गया. उन्होंने कहा की इस सम्भोग क्रिया के पूरा होने से पहले यदि पब की कोई भी पत्नी मर गयी तो ये सब के सब मरे जायेगे.

संभु (होंटो को गोल करते हुए) – ोुह्ह्ह्ह ये बात है क्या?? फिर तो हमको अब पब को टारगेट करने की जगह उसकी पत्नियों को टारगेट करना होगा. और उन नाजुक सी लड़कियों को मरना कोई बड़ी बात नहीं. सच में गुरूजी ये तो बहुत ाशन है.

त्रिकाल – हाँ ये सच में बहुत ाशन है. अब तू लग जा इसके पीछे. कांटेक्ट कर हर उस आदमी से जो पैसो के लिए किसी की जान ले सकता हो. 10 कर. का इनाम रख दे. जो भी उसकी किसी भी पत्नी को मरेगा उसे 10 कर. दे.

संभु ा पाप पब के बारे में सोचना छोड़ दो. उसको अब मैं देखूगा. आप अपनी सड़ना पैर दयँ दे गुरूजी. बाकि मैं देख लगा.

फिर और कुछ देर कैसे hi वो पब की पत्नियों को मरने की प्लानिंग करते रहे और फिर संभु इस काम को अंजाम देने के लिए चला गया. उसे पहले सारा डाटा भी कलेक्ट करना था.

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उदार हवेली में 4-4.30 ऍम को सब जागने लगे. सभी अपनी -2 ट्रेनिंग के लिए जाने लगे. और आज सब ट्रेनिंग से जल्दी लोट आये थे कियोकि सबको मंजू के आने की तैयारी भी करनी थी. अभी सुबह के 6 ऍम hi हुआ था और अंकिता जैसे hi अपने रूम में आयी तो उसने अपने रूम में नैना को बैठा देखा. वो उसे देख कर ख़ुशी से उसके गले मिली. नैना ने भी उसको गुड मार्निंग विश किया. अंकिता 2 मं बोल कर फ्रेश होने चली गयी और 15 मं बाद बाथ रूम से निकली पैर अभी भी नैना वही पैर बैठी थी. और अपनी किसी सोच में गम थी. उसे अंकिता का बाथरूम से बहार आने का भी अहसास नहीं हुआ. अंकिता भी नुदे hi बहार आ गयी थी नैना तो वैसे भी अंधी थी तो कोई प्रॉब्लम hi नहीं थी. अंकिता ने बहार आ कर अपने कपडे पहनते हुए नैना को hi देख रही थी. उसके फेस से hi पता चल रहा था की वो किसी सोच में है. जब अंकिता तैयार हो गयी तब अंकिता में बोलै – क्या हुआ नैना में बहुत देर से देख रही हु की तुम किसी सोच में गम हो. क्या परेशानी है?? अपनी बहन को नहीं बताओगी.

नैना – अंकिता कुछ बाते है जो मेरे समाज के बहार है. और उन बातो ने hi मुझको परेशां किया हुआ है. पैर ये समाज नहीं आ रहा की तुमसे वो पुछु भी या नहीं..

अंकिता – ऐसी क्या बात है जिसने तुमको इतना परेशां किया हुआ है. और तुम मुझसे पूछने में भी जीजाक रही हो. तुम मुझसे कुछ भी पूछ सकती हो.

नैना – और आप बुरा मान गयी तो??

अंकिता – देखो नैना मेने तुमको बहन मन है तुम मुझसे कुछ भी पूछ सकती हो. बोलो क्या बात है.

नैना – देखो अंकिता जो मैं बोल रही हु उसका बुरा मत मन्ना. और यदि कोई बात बुरी लगे तो बोल देना.

अंकिता – हम्म ok

नैना – अंकिता ये सब क्या है इस हवेली में?? आज तुम्हारा पति एक और लड़की से शादी करके ला रहा है और तुम सब खुश हो. जबकि ये तो तुम्हारे लिए गलत hi है न.

अंकिता – ओह्ह्ह ये बात है. तुम जिस तरह से सोच रही हो वो भी अपनी जगह ठीक है कियोकि तुम अभी इनको (पब) को जानती नहीं हो. हम सभी को पता है वो जो कर रहे है सही कर रहे है वल्कि हम भी चाहते है की ये सब करे.

नैना चौक कर – पैर क्यों?? जबकि तुम सब सेक्स के लिए तड़फ रही हो. मेने सुना है तुम सबकी बातो को. वो तुम सब के उप्पेर डायन देने की जगह और लड़कियों से शादी कर रहे है. और फिर भी तुम कहती हो की वो तुम सबसे प्यार करते है.

अंकिता – मैं तुमको जयादा तो नहीं बता सकती पैर इतना समाज लो की वो एक युद्ध की तैयारी कर रहे है और ये सब उसका hi एक हिस्सा है. और रही सेक्स की बात तो बता दू की अभी तक उन्होंने अपनी किसी भी पत्नी के साथ दुबारा सेक्स नहीं किया है. और उसके पीछे भी एक वजह है. जो मैं तुमको नहीं बता सकती.

नैना – युद्ध किस्से?? और क्यों?? (मन में - और क्यों कर रहे है वो ऐसा… यदि उनके अंदर हवस होती तो एक बार से वो नहीं भुजती. शादी करके एक बार उसे करके उसे अपनी पत्नी बना कर अपने साथ रखने की क्या वजह हो सकती है. और वो भी ऐसी की जिसको उनकी हर पत्नी है कर मान भी रही है. जबकि ये सब भी एक से बाद कर एक है. कोई भी मेरी तरह बेबस और लचर नहीं है. अंकिता तो खुद इंडिया के सबसे अमीर आदमी की बेटी है. खुद डॉ. है)

नैना अपनी सोच में थी. अंकिता उसके फेस को देख रही थी. उसके फेस से लग रहा था की उसकी परेशानी काम होने की जगह और बाद गयी है. अंकिता सोच रही थी की क्या बात है जो नैना इन सब में इतना इंट्रेस्ट ले रही है. कही इसका दिल भी तो नहीं आ गया मेरे पति पैर. यदि ऐसा है तो बात बन सकती है वैसे भी जब दयासुर जी कहा चुके है तो शादी तो इसकी होगी hi. चलो इसको थोड़ा बहुत बता कर इसके दिल का हाल जानने की कोसिस करती हु.

अंकिता – नैना तुमको पता है साधु के जैसा hi एक तांत्रिक है – त्रिकाल. वो बहुत hi शक्तिशाली है. साधु के कई गुना ज्यादा पावर्स है उसके पास. और उसको हारने के लिए hi वो ये शादिया कर रहे है. उनको इससे पावर मिलती है. और ….

नैना (बिच में hi)– शादी करने से पावर??? पैर ये कैसे हो शक्ति है?? यदि ये बात है तक तो कोई भी कितनी भी शादी कर लेगा. और ठाकुर साहब के पास तो लड़कियों की लाइन लगी हुयी है. वो तो फिर उन सबसे शादी कर लगे..

अंकिता – हाहाहाहा.. नहीं यार ऐसा नहीं है. उनको दानवो की रानी से वंदान मिला है. और ये भी कहा सकते है की उस वरदान की वजह से hi वो हमारे साथ अभी दुव्हारा सेक्स नहीं कर सकते. और वो हर लड़की से शादी भी नहीं कर सकते. कुछ खाश लड़कियों से hi कर सकते है. और न hi बहुत साडी से कर सकते है. आज के बाद उनको 3 शादी hi और करनी है.

नैना – क्या मतलब? क्या खाश होता है उन लड़कियों में जिनसे वो शादी कर सकते है.??

अंकिता – जिनको देख कर उनके दिल में प्यार आता है. नियति खुद hi उनको इशारा करती है की ये वो लड़की है वो तुम्हारी पत्नी बनने लायक है. पैर मेरी एक बात समाज नहीं आ रही की उत्तम से सब क्यों पूछ रही हो?? क्या इरादा है मैडम?? मेरे पति की इतनी तहकीकात वो भी मुझसे hi?? इरादे तो नक् है न आपके??

अंकिता के सवाल से नैना हड़बड़ा जाती है उसको जवाब दिए नहीं बनता. – वो … वो… ऐसी कोई बात नहीं है अंकिता…. बस मुझको थोड़ा बुरा लगा तुम्हारे लिए इसलिए पूछ लिया.

अंकिता – थैंक यू माय लवली सिस्टर फॉर केयरिंग में… बूत यार मुझको भी पता है उनको शादी तो करने है hi. और वैसे भी तुमने देखा होगा की हम सब सौतन होते हुए भी कितने प्यार से बहनो की तरह रहते है.
 
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अंकिता के सवाल से नैना हड़बड़ा जाती है उसको जवाब दिए नहीं बनता. – वो … वो… ऐसी कोई बात नहीं है अंकिता…. बस मुझको थोड़ा बुरा लगा तुम्हारे लिए इसलिए पूछ लिया.

अंकिता – थैंक यू माय लवली सिस्टर फॉर केयरिंग में… बूत यार मुझको भी पता है उनको शादी तो करने है hi. और वैसे भी तुमने देखा होगा की हम सब सौतन होते हुए भी कितने प्यार से बहनो की तरह रहते है.

नैना – हाँ वो तो है. तो तुमको सच में बुरा नहीं लगता ये सब??

अंकिता – नहीं बिलकुल भी नहीं पहले लगा था. पैर अब उनका प्यार देख कर बिलकुल भी नहीं लगता. वो तो ये अभी उस युद्ध की वजह से थोड़ा बिजी है. टाइम काम बचा है हमारे पास. नहीं तो इनके साथ रानियों वाली फीलिंग आती है यार, जैसे ये राजा है और हम सब इनकी रनिया. इतना डायन रखते है हम सबका… तुमने भी सायद फील किया हो…

नैना – हाँ ये तो है. ठाकुर साहब फॅमिली में सब का पूरा दयँ रखते है. और सब को पूरा महत्व भी देते है.

अंकिता – नैना मेने तुमसे कुछ कहा था तुमने सोच आगे क्या करना है??

नैना – हाँ अंकिता तुम्हारी बात मेने सोची थी तुम ठीक कहा रही थी. जिंदगी जेने का सही मतलब फॅमिली के साथ hi है. ये मुझको यहाँ आ कर hi पता लगा. नहीं तो आज तक तो अकेले hi ये जीवन गुजरा है. कभी जाना hi नहीं फॅमिली क्या होती है. बस एक छोटा भाई था. आज वो भी नहीं है. अब मैं भी थक गई हु अकेले लड़ते -2. अब मुझको भी लगता है की काश तुम्हारी जैसी मेरी भी कोई फॅमिली होती. प्यार करने वाला एक परिवार होता. जिसके साथ अपना हर दुःख सुख बता सकू ऐसा लाइफ पटनेर होता. पैर मुज आंधी को अपनाएगा कोण??

अंकिता – तुम इतनी खूबसूरत हो. और साफ़ और नेक दिल की हो तुमको भी अच्छा लाइफ पटनेर मिल सकता है नैना. क्या तुमको कोई पसंद है?? कोई है जिसको तुम चाहती हो??

नैना अंकिता के इस सवाल को सोचती है तो उसके दिल में केवल एक hi नाम आता है और वो था पब का. पैर उसको हिचक थी की अंकिता बुरा न मन जाये. और फिर अंकिता ने कहा भी था की पब अपनी पत्नी खुद चुनता है. तो कैसे कहती की वो भी पब से प्यार करने लगी है. नैना को सोच में देख अंकिता फिर बोली

अंकिता – किस सोच में हो नैना?? यदि कोई है तो बताओ मुझको में बात करती हु उससे..

नैना – नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. वैसे भी मुझको आज तक जो भी मिला है जिस्म का भूखा hi मिला है किसी ने कभी भी मुझसे प्यार से बात तक नहीं की. तो कोण होगा मेरी जिंदगी में..

अंकिता – नैना यदि तुम सच में शादी करना चाहती हो और कोई भी नहीं है आज तक तुम्हारी जिंदगी में तो मैं एक नाम बताऊ. यदि तुम बुरा न मनो तो..

नैना – हाँ तुम hi बता दो. पैर क्या वो एक अंधी लड़की से शादी करने को तैयार हो जायेगा??

अंकिता – हाँ हो जायेगा. बल्कि यदि तुम उससे शादी कर लोगी तो हो सकता है की तुम्हारी आखो की रौशनी भी आ जाये. कियोकि तुम्हारी आखों का वो hi ये मात्रा इलाज गुरूजी ने बताया था.

नैना – क्या -2 ये हो सकता है?? कोण है वो जिससे शादी करने से मेरी आखों की रौशनी आ सकती है..

अंकिता – और कोई नहीं मेरे पति – पब…………….. ( 2 पल रुक कर) सोचना यदि तुमको मंजूर हो तो बताना और वो भी तुमसे शादी करना चाहते है. पैर तुमसे बोल नहीं पाए उस दिन मॉर्निंग के हदीस के कारन…

नैना को तो जैसे किसी ने जागते हुए hi सपना दिखा दिया हो.. नैना अंकिता की बात से बहुत खुश हो गयी. अंकिता के खुद कहने का मतलब था की वो भी ये चाहती है. और नैना के दिल में तो ये था hi. आज पहली बार नैना की मन की कोई मुराद पूरी होती दिख रही थी. नहीं तो आज तक उसने जो भी चाहा था कभी भी उसने पाया hi नहीं था. हमेशा अपनी इच्छा का गाला घोट कर hi जीती आयी थी. इच्छा की तो दूर की बात है उसने तो कभी पेट भर खाना भी हवेली में आने के बाद hi खाया था. नहीं तो झुटान और रुख सूखा खा कर hi जीवन गुजरा था. किसने पुरे जीवन केवल दुःख और दर्द hi देखा हो. उसके लिए मन चाहा वर मिलना किसी भी सपने से काम नहीं था. जिसे किसी ने कभी नौकर होने का सम्मान न मिला हो उसके लिए इस हवेली की रानी बनना उसने खवाबो में भी नहीं सोचा था. ये ख़ुशी नैना बर्दाश न कर पायी और उसकी आखों से आशु बहाने लगे. पहली बार उसकी आखों से ख़ुशी के आशु बहे थे. नहीं तो हमेशा वो दर्द या दुःख के hi खून के ाखू रोटी आयी थी.

नैना के बहते आशुओ को देख कर अंकिता गलत समाज बैठी और बोली – नैना तुम रोने क्यों लगी. यदि तुम उनसे शादी नहीं करना चाहती तो कोई बात नहीं है. हम को और लड़का देख लगे. पैर प्लीज तुम रो मत.

नैना – नहीं नहीं मेने कब कहा की मैं शादी नहीं करना चाहती. ये तो उस ख़ुशी के आशु है जो जीवन में पहली बार मुझको मिली है. आज पहली बार मुझको लग रहा है की मैं भी जिन्दा हु. मैं भी इंसान हु. मुझको भी हक़ है की मैं सपने देखु. पहली बार कोई मुझको सामान नहीं समाज रहा. पहली बार कोई मेरे से पूछ रहा है की तुम क्या चाहती हो. पहली बार है की कोई मुझसे प्यार करना चाहता है. न की मेरा जिस्म नोचना. अंकिता आज पहली बार इस आखों से ख़ुशी के आशु गिरे है. मेरी बहन आज से पहले लगा hi नहीं की मेरा कोई वजूद भी है. अंकिता सच में मैं आज बहुत खुश हु. (और फिर नैना रोने लगती है)

नैना की इस बातो ने अंकिता के भी आशु निकल दिए. वो भी नैना के साथ रोने लगी. पैर फिर नैना को सम्भाने लगी. और जब नीना शांत हुयी तो महल को ठीक करने के लिए अंकिता बोली – तो इसका मतलब है की मेरी बहन मेरी सौतन बनने को तैयार है.

नैना (सर निचे करते हुए) – हम्म्म

अंकिता – एक बार फिर सोच लेना उनका न बहुत मोटा है. और जब वो अंदर जाता है तो बहुत दर्द होता है.

पहले तो नैना सामजी hi नहीं पैर जब उसके समाज में आया तो मरे शर्म के बिस्तर में अपना मुँह चुक्का लिया. उसके फेस पैर अब एक मुस्कान थी और फेस रेड हो चुक्का था. अंकिता ने उसको गले लगा लिया और बोली – ारे मेरी सौतन तो अभी से शर्माने लगी. और जब ये सब वो करेंगे तब क्या होगा तेरा??

नैना – ाआनंनकीटा (और शर्म के मरे अपना फेस उसके चुचो पैर रख देती है) प्लीज ऐसी बात न करो न..

अंकिता - हाहाहाहाहा चल अब नहीं करती. जा तू भी तैयार हो जॉव ो भी आने वाले होंगे. उनके आने के बाद hi बताते है सबको….

नैना – हम्म ok.. (फिर नैना अपने रूम की और जाने लगती है. जो अंकिता के पास वाला hi था. नैना अंधी होते हुए भी थोड़ा बहुत काम खुद कर लेती थी. यदि न करती तो करने वाला था hi कोण उसके पास.)


ये दोनों खुश थी. और अपनने अपने रूम में जा कर फ्रेश हो कर पब के इन्तजार में थी. और कोई भी था इस हवेली में जिसको अपने दिल का हाल पब को बताना था और वो कोई नहीं अवनि थी. जो न जाने कितने दिनों से अपने दिल का हाल पब को बताने के लिए तड़फ रही थी. अब उसको सब मंजूर था. वो बस कैसे भी पब की होना चाहती थी. अपने पहले प्यार को पाना चाहती थी. वो भी जानती थी की उसके लिए पब के मन में क्या है. फिर भी एक जीजाक थी. वो उसने पब के साथ किया था उसको ले कर वो आज भी खुद को माफ़ नहीं कर पायी थी. उसने अपने प्यार कर विस्वास न करके ऐडा की हालत के लिए पब को रेपिस्ट कहने का जो गुन्हा किया था. और उस पैर हाथ उदय फिर सबके सामने न जाने कितनी जेल कटी सुनाई. चाहे पब वो सब भूल चुक्का था पैर अवनि के मन में वो बात आज भी थी और वो एहि सोचती थी की पता नहीं पब ने उसको माफ़ किया भी है या नहीं. कहने को पब उससे कहा चुक्का था की उसने उसे माफ़ कर दिया है पैर मन में फिर भी एक हिचक थी. और उप्पेर से उसकी किस्मत भी शायद उसके साथ नहीं थी. कियोकि वो पहले भी पब को अपने दिल का हाल बताना चाहती थी पैर जब भी वो पब के पास जाती उससे ये बात कहा hi नहीं पति. बल्कि और बाटे करने लगती. शायद इसका एक कारन ये भी था की पब की उससे केवल काम की hi बात करता था. पैर ऐसा नहीं था की उसका ख्याल न रखता हो. या उसको और फॅमिली मेंबर की तरह न चाहता हो. वो उसको हर वो हक़ देता था जो उसकी फॅमिली के और सभी मेंबर के पास थे. अवनि तो वैसे भी उसके दिल में नहीं रूह में बषती थी. और अवनि से अपने प्यार का इजहार भी वो कर चुक्का था पैर कभी अवनि ने उसके प्यार को अपनाया hi नहीं. फिर वो सब होने के बाद तो पब ने ये सोचना hi छोड़ दिया की अवनि उसकी होगी भी या नहीं. बस एक उम्मीद थी एक आशा थी की शायद कभी अवनि उसे अपना ले. पब खुद को अवनि के बिना अधूरा hi महशुश करता था और ये हाल अब अवनि का भी था. पैर समय ने जो इन दोनों के बिच में एक दिवार कड़ी कर दी थी उसको अवनि को hi तोड़ना था जो वो जब भी करने जाती खली हाथ hi बापिस आती. पैर आज उसने पूरा मन बना लिया था की चाहे कुछ भी हो आज वो अपने दिल की बात पब से कहा कर hi रहेगी. कियोकि वो भी जानती थी की इसके बाद पब केवल 3 शादी hi और करेगा. और यदि वो अब भी चुप रही तो ऐसा न हो की दिल की बात दिल में hi रहा जाये और फिर पब उसे अपनाने से भी मन कर दे.
 
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पब खुद को अवनि के बिना अधूरा hi महशुश करता था और ये हाल अब अवनि का भी था. पैर समय ने जो इन दोनों के बिच में एक दिवार कड़ी कर दी थी उसको अवनि को hi तोड़ना था जो वो जब भी करने जाती खली हाथ hi बापिस आती. पैर आज उसने पूरा मन बना लिया था की चाहे कुछ भी हो आज वो अपने दिल की बात पब से कहा कर hi रहेगी. कियोकि वो भी जानती थी की इसके बाद पब केवल 3 शादी hi और करेगा. और यदि वो अब भी चुप रही तो ऐसा न हो की दिल की बात दिल में hi रहा जाये और फिर पब उसे अपनाने से भी मन कर दे.

ये तीनो अपनी -2 सोच में थी और बहार हॉल में वाकई के सब मस्ती करते हुए. पब का इन्तजार कर रहे थे. कामिनी और सविता ने मिल कर लंच की तैयारी भी कर ली थी. और बहुत कुछ बनाया भी था. गुरु भी उनके साथ थी. पैर गुरु का मंद रात में हुयी घटना को सोच -2 कर hi परेशां था. हलाकि ऐडा की कंडीशन थोड़ी देर बाद hi ठीक हो गयी थी. पैर सोचने वाली बात ये थी की हुआ क्या ?? जब सब कुछ ठीक छोड़ कर आयी तो फिर ऐसा क्या हुआ की पब की जान पर बन आयी. सभी लड़किया मस्ती कर रही थी की पहले अवनि और फिर अंकिता और नैना भी उनके साथ शामिल हो गयी. काजल तो शांति से बैठी थी पैर ऐडा तो फुल मस्ती में उच्छल कूद कर रही थी. सबके मन करने के बाद भी कहा मानती है वो, बचपना जो था. और उम्र भी तो बच्चो वाली hi थी. फिर चाहे एक नहीं सी जान उसके पेट में पल रही थी.

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सुबह के 11 बज चुके थे पैर पब और मंजू दोनों अभी भी सोये हुए थे. कुछ hi देर में मंजू की नीड खुल गयी. जब वो जगी तो अपने आप को नंगा देख कर चौकी फिर रात की सुहागरात याद आयी और फिर याद आया की कैसे उसने अपने पति और खुद को मरने वाली थी. एक गलत आदमी की बातो में आ कर अपनी दुनिया hi ख़तम करने वाली थी ये याद आते hi उसके 2 आशु बहा गए. जो सीधा पब के फेस पैर गिरे आशुओ किट अपिश से पब की भी नीड खुल गयी. और मंजू को रोटा देख कर पब ने उसे अपनी बांहो में भर लिया और बोलै – क्या हुआ जान क्यों रो रही हो सुबह सुबह??

मंजू – मुझको माफ़ कर दो सच में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी रात ko…please ..म…

मंजू आगे कुछ कहती पब ने उसका मुँह अपने होंटो से बंद कर दिया और उनके होंटो को चूसने लगा. पहले तो मंजू उसका साथ नहीं दे रही थी पैर जल्दी hi वो भी पब पैर अपना प्यार लुटाने लगी. जब पब ने देखा की अब मंजू शांत है तो उसको छोड़ा और फिर बोलै – देखो डार्लिंग जो हुआ सो हुआ, पैर अब सब ठीक है न तो भूल जाओ वो सब. उसमे तुम्हारी गलती नहीं थी. वो जो भी हुआ उसके पीछे संभु का हाथ था. और वैसे भी (स्माइल के साथ) तुम तो रात को अपने किये की सजा भी भोग चुकी हो…

पब की बात से मजनू शर्मा जाती है. उसको भी यद् आता है की सेक्स के टाइम के ुत पत्ताग बाते कर रही थी. और वो शर्मा कर पब के सेने में अपना मुँह छुपा लेती है. तो फिर पब बोलता है – सच में यार रात को तुम्हारी बातो ने कमल कर दिया. मुझको तो बहुत मज़ा आया. तुमको आया की नहीं???

मंजू शर्म के कारन कुछ बोल नहीं प् रही थी. तो पब फिर उससे बोलै – बोलो न जान अब क्यों शर्मा रही हो..

मंजू – हम्म मुझको भी आया. आप बहुत गंदे हो कैसे मुझसे वो सब बुलवा रहे थे.

पब – हाहाहाहा मुझको तो ये सब बहुत पसंद है सेक्स में दोनों का बेशर्म होना जरुरी होता है.

मंजू – हम्म ये तो है.

पब – चलो फिर जब दुबारा करेंगे तब तुम शर्मा नहीं.

मंजू – हम्म (मंजू को अभी भी शाम आ रही थी)

पब - चलो जान घर चलते है. घर पर सब हमारा इन्तजार कर रहे होंगे.

फिर मंजू बिना कुछ कहे चादर लप्पेट कर कड़ी हो जाती है. और कपडे पहने लगती है. अभी भी उसके मंद में रात का वो हसीं मंजर चल रहा था जब पब ने उसकी छूट पड़ी थी. उस टाइम के दर्द को याद करते हुए मंजू के सरीर में एक बार सिरहन सी दूध जाती है. फिर उसको अहशास होता है की अब तो बिलकुल भी दर्द नहीं है. इसलिए वो अपनी छूट पैर हाथ रख कर चक करतीहै. फिर अपनी छूट को देखने लगती है. उसको भी समाज नहीं आया की उसकी छूट का दर्द कैसे चला गया और कैसे उसकी छूट पहले जैसी हो गयी. वो ये सब करते हुए ये भूल गयी की पब भी वही बैठा उसे देख रहा है. जब पब उसको ुलजान में देखता है तो बोलता है – ज्यादा मत सोचो ये सब सम्भोग क्रिया के कारन hi है. तुम सच में काली से फॉल तब बनोगी जब हम दुवारा सेक्स करेंगे.

मंजू के हाल भी और पत्नियों जैसा hi था की खुश हो या दुखी एक बार तो सील टूटने का दर्द बड़ी मुश्किल से सहा था ये दुबारा फिर मिलेगा. और खुश होने की बात ये थी की उसका अनमोल खजाना अभी भी उसके पास था जो वो अपने पति को फिर से सपने का सौभाग्य फिर से प् सकेगी. ये सोचते हुए hi वो तैयार हो जाती है पब भी तैयार हो चुक्का था. तो दोनों हवेली में टेलिपोर्ट हो जाते है. वो हॉल में सब उसका hi वेट कर रहे थे.

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सुबह संभु सबसे पहले ल्म रवि को कांटेक्ट करता है और उसे मिलने को बुलाता है. फिर संभु उस राज्य के डॉन सलीम को कांटेक्ट करता है. और ऐसे hi वो 3 और डॉन को कोण्टार्कट करके एक गुप्त िस्तान पैर मिलने को बुलाता है. ये सब संभु के प्यूरीन कॉन्ट्रैक्ट में थे. और संभु के कहने पैर बहुत से काम भी कर चुके थे. पैसे का दम और फिर रतन का नाम कोई भी संभु से जल्दी hi मिलने को तैयार हो जाता था. फिर संभु एक और को फ़ोन करता है.

कॉल –

संभु – गुड मॉर्निंग सर कैसे है??

***** - मैं ठीक हु अंकल. आपसे कितनी बार कहा है आप मुझको सर मत कहा करो. बोलिये कैसे याद किया.

संभु – वो सर कुछ पैसो की जरुरत थी.

***** - फिर सर, बीटा बोलिये न अंकल. बोलिये कितने भेजने है.

संभु – ok बीटा जी, 20 कर. चाहिए. गुरूजी ने एक आदेश दिया है. उस पब को सबक सीखने के लिए सुपारी देनी है.

**** - क्या उसके लिए चाहिए. मैं 25 कर भेज रहा हु. उसका नाम घर पैर सुन -2 कर पाक चुक्का हु. अब तो घर में उसकी वजह से पापा भी नहीं सुनते कुछ भी. जल्दी hi इसका किस्सा ख़तम करो अंकल. और आप मुझको कुछ पावर देने वाले थे उसका क्या हुआ??

संभु – बीटा जी उसमे कुछ टाइम और है एक बार गुरूजी की ये सड़ना पूरी हो जाये. फिर वो खुद तुमको पावर्स देंगे.

**** - मैं भी तो उस दिन का कबसे इन्तजार कर रहा हु. एक बार पावर ाजे हाथो में फिर आएगा maza..hahaha

संभु – हाँ तुमको गुरूजी ने किसी पावर देने का बोलै है की तुम खुद यकीं नहीं करोगे की ये पावर्स भी हो सकती है किसी के पास…

***** - मैं तो उस दिन का hi इन्तजार कर रहा हु कबसे.. उसके लिए hi मेने वो लड़कियों का ट्रेनिंग सेण्टर के लिए भी आपकी मदद की थी. कब से मैं बस इन्तजार hi कर रहा हु.

संभु – तुम्हारा इन्तजार जल्दी hi ख़तम होने वाला है. और उस सेण्टर से मज़े तो तुम भी पुरे ले रहे हो. वह का ट्रेनर बता रहा था अब तक 20-25 लड़कियों को तो तुम मशाल चुके हो. हाहाहाहा

***** - हाहाहाहा ये तो है अंकल. वह की त्रिनेड लड़कियों के साथ जो मज़ा है न वो और किसी भी लड़की के साथ नहीं आया. साली इशारो पैर चलती है. मज़ा आ जाता है. चलिए मैं पैसे भेज रहा हु. और रखता हु.. bye अंकल..

फिर कॉल कट हो जाता है. संभु भी एक सेठानी हाशि हस्ता है. और सोचता है कितना पागल लड़का है साला खुद hi फस गया. सेल को पावर्स चाहिए. एक बार गुरूजी को पावर मिलने दे फिर तुझको दूध में पड़ी मक्खी की तरह न निकल फेका तो मेरा नाम भी संभु नहीं.

अब ये कोण है ये तो आगे hi पता चलेगा. पैर ये जो भी है इसने hi संभु की मदद की थी दूसरा सेक्स ट्रेनिंग सेण्टर (जस्ट लिखे भानु ठाकुर बेसमेंट) खोलने में. और पब का हवेली कर कब्ज़ा करने के बाद त्रिकाल को इस सेण्टर से hi लड़किया मिल रही थी बलि के लिए.

इसके बाद संभु सबका इन्तजार करते हुए अपना प्लान बनाना लगता hai.PB की पत्नियों पैर कब और कैसे हमला करना है. उसके लिए उसे बहुत कुछ जानना था. और इस लिए hi उसने रवि को बुलाया था.
 
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