MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 24 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

हाँ भाई वो ट्रेनिंग HI काम आने वाली है. और फिर सबके पास अपनी पावर्स भी है. पैर अटैक भी बहुत सोच समाज कर किया गया है. और इससे कोण कोण घायल हुआ है या मारा है नेक्स्ट अपडेट में होगा.....

भाई जैसे HI उपदतर लिख जाता है तो मैं पोस्ट कर देता हु. बूत कई बार रेविएवस न होने पैर अपडेट लिखने में भी मज़ा नहीं आता. लगता है कुछ कमी है. और वो कमी भी पता नहीं चलती.

आप सभी के रेविएवस से बहुत कुछ समाज आता है. जो मैं मिस कर रहा होता हु वो सब ऐड कर देता हु...

थैंक यू फॉर लवली कमेंट एंड सपोर्ट...............
 
अपडेट 179

तुर्रंत hi गोलियों की आवाजों ने बेसमेंट की शांति को भांग कर दिया. ये सब लेट पते उससे पहले hi गोलिया चल चुकी थी. और कई चीखे उन गोलियों की आवाजों में डाब गयी. इनको लेटता देख कर गुंडे गोलिया चलना बंद करके इनकी और बढ़ने लगे पैर तभी वह पैर चारो और धुआँ hi धुआँ हो गया. किसी को कुछ नहीं दिखाई दे रहा था. सभी गुंडे धुएं में ीदार उदार हाथ पेअर मरने लगे. तभी बॉस की आवाज एक बार फिर गुजी - बहार जाने के सभी रस्ते रोक लो इनमे से कोई भी बच कर नहीं जाना चाहिए…

अब देखते है गोली चलने पैर गोली किस किस को लगी. 1 गोली मूड के पेट में घुस चुकी थी. 1 गोली अंकिता के कंडे में घुस चुकी थी. 1 गोली मंजू की जांघ ने दस गयी. तो 2 गोलिया पेय के पैरो पैर लगी थी. उसकी दोनों पिंडलियों में गोली लगी थी. 1 गोली नैना के एक कुण्डल को ले कर चली गयी इससे उसके कान की लौ घायल थी. तो 1 गोली उसकी गंदन को छू कर निकल गयी. गर्दन से खून निकल रहा था. पेय, माउद और नैना बेहोश हो कर जमीं पैर गिरी थी. तो अंकिता और मंजू दर्द में तड़पती हुयी जमीं पैर लेती थी. माहि और गुरु ठीक थी. गुरु ने एरिका को खींच कर जमीन पैर लिटाया था तो एरिका भी ठीक थी. पैर उसका दर उसके फेस पैर साफ़ दिखाई दे रहा था. माहि ने hi मंत्रो से ये धुआँ फैलाया था. गुरु, माहि और मंजू तो इस धुएं भी भी देख प् रही थी. तीनो के पास अपनी -2 तांत्रिक सकतिया थी. पैर अंकिता और एरिका को कुछ नहीं दिख रहा था. धुआँ होते hi गुरु ने जब सब को एक बार देखा तो उसकी आखों से आशु निकल गयी. पेय और मूड का बहुत खून बह रहा था. गुरु और माहि, पेय और माउद को गोद में ुधा कर चल दी. मंजू और अंकिता ने भी नैना को अपने कंदो पैर उसके दोनों हाथ ले कर ुधा लिया और गुरु और माहि के पीछे चल दी. एरिका भी उनके पीछे हो ली. और नैना को सपोर्ट करने लगी. गुरु सबको ले कर एक सर्विस रूम के साइड में ले गयी. वह कोई भी गुंडा नहीं था. गुरु ने ये जगह पहले hi देख ली थी.

गुरु और माहि सबको वह छोड़ कर लड़ने के लिए जाने लगे. तो मंजू भी लगड़ाती हुयी उनके पीछे आने लगी. गुरु ने मन किया तो मंजू गुस्से में बोली – दीदी ये मेरा भी परिवार है. और इन लोगो में मेरे परिवार पैर वॉर करके अच्छा नहीं किया. आज ये देखिये की एक तांत्रिक जब गुस्से में होता है तो मूट का केसा तांडव करता है.

गुरु – पैर मंजू तुमको गोली लगी है तुम कैसे लड़ पाओगी??

मंजू – दीदी में कहा हाथ पेअर चलने वाली हु मैं तो इनको अपनी तांत्रिक शक्ति से hi मूट का ऐसा खेल दिखाउंगी की ये समाज hi नहीं पाएंगे की मूट कहा से और कैसे इनकी जान ले गयी.

माहि – हाँ दीदी आज इन सबको बता दो की एक तांत्रिक क्या कर सकता है.

गुरु – ठीक है तो आज अपनी शक्तिया आजमाने का वक्त आ चुक्का है. पैर डायन रहे इनमे से एक भी बच कर नहीं जाना चाहिए…

मंजू – ये क्या और सालो को आने दो सबकी लाशो का ढेर आज इस बेसमेंट में hi लगेगा….

गुरु – हाँ पैर ये सब जल्दी से जल्दी करना होगा. माउद और पेय की हालत बहुत ख़राब है.

फिर ये तीनो बाद चली उन गुंडों की तरफ. एरिका तो माउद और पेय को अपनी गुड में रख कर रो रही थी. अंकिता ने नैना को एक साइड में लिटा कर खुद बहार की और नजर रखने लगी. अंकिता ने इन सबकी सेफ्टी के लिए यहाँ रुकना hi ठीक समजा था. अभी धुआँ भी काम हो चुक्का था. तो ये तीनो छुपते हुए उस जगह से थोड़ी दूर हो कर अपनी तांत्रिक विद्याओ को जागृत करने लगी. सबसे पहले माहि ने एक मंत्र फुक कर वह एक भरम जाल फैला दिया. सभी गुंडों को अपने हाथ में पकडे हुए हथियार साप नजर आने लगे. और सब सापो से बचने के लिए चीखते हुए अपने हतियारो को फेकने लगे. कुछ hi पालो में चीख पुकार के साथ सब निहत्ते हो चुके थे.

मंजू ने इतनी hi देर में हाव् अक एक भबंदार तैयार कर दिया. और वो बभंडार उन गुंडों की और छोड़ दिया. बहुत से गुंडे उस बबंडर में फंस गए. और उड़ते हुए कभी बेसमेंट की रूफ से टकराते तो कभी कॉलम से. 15-20 गुंडे उससे मर गयी. तभी गुरु ने अपना कमल दिखाया. और अपने हाथो से एक रौशनी निकलने लगी. और वो रौशनी चारो और फैलने लग गयी. जैसे किसी बल्ब को जला दिया गया हो. और उस रौशनी में जो भी गुंडा आ रहा था. वो आपस में hi लड़ना सुरु हो रहे थे. बहुत सरे गुंडे इसकी चपेट में आ चुके थे. माहि अपना मंत्र पड़ने hi वाली थी की एक गुंडे की आवाज आयी – बॉस यहाँ देखो जिनको गोली लगी थी वो सब यहाँ छुपे है.

इस गुंडे ने इतना hi बोलै था की उसके पेट पैर एक किक पड़ी और ये किक अंकिता ने मरी थी. उस गुंडे की आवाज सुन कर 15-20 गुंडे अंकिता की और भागे. तो मंजू ने अंकिता और गुंडों के बिच में पत्थर बसरने चलो कर दिए. इन पत्थरो से गुंडे घायल होने लगे. इतने में hi माहि ने अपना एक मंत्र दूसरी और मारा तो उस दिशा में बहुत से तीर जाने लगे. जो भी गुंडा उनकी चपेट में आया वो वही देर हो गया. अब तक अंकिता अपने दर्द को सहते हुए भी उस गुंडे को मार दिया था. पैर कुछ गुंडे उन पत्थरो से घायल हो कर भी अंकिता से लड़ने पहुंच चुके थे. ये देख कर गुरु अंकिता की और बाद गयी. और उसने एक तलवार ुधा ली जो की इन गुंडों की hi थी.

गुरु किसी भी मंत्र का उसे अंकिता की तरफ नहीं करना चाहती थी. कियोकि इसने अंकिता और उन सबको खतरा हो सकता था. इस लिए गुरु ने अब तलवार से उनको मरने को सोचा. माहि और मंजू भी गुरु को जाता हुआ देख रही थी. की पता नहीं कहा से वो बॉस एक तलवार ले कर आया और पीछे से माहि के पथ में घुसा दी. पैर तलवार पार हो पति उससे पहले hi माहि ने उसे दक्का दे दिया. और उसके मुँह से एक चीख निकल गयी. उसकी चीख सुन कर गुरु तो दूर से केवल देख सकती थी कियोकि वो खुद गुंडों से गिरी थी. माहि तो पेट के बल जमीन पैर गिर चुकी थी. तरवर उसकी पथ में घुशी हुयी थी.

पैर मंजू ये देख कर गुस्से से पागल हो गयी. जैसे hi बॉस दुवारा वॉर करने को आगे भाड़ा मंजू ने अपनी घायल तंग से hi उसको एक किक दी तो वो फिर से दूर जा कर गिरा. फिर मंजू ने गुस्से में अपने हाथ आगे कर दिए और उसके हाथो से आग निकलने लगी. आग में जाल कर वो बॉस वही दम थोड़ गया. ीदार गुरु से भी उन सब गुंडों को ख़तम कर दिया था. पैर मंजू गुस्से में लगड़ाती हुयी आगे बढ़ने लगी. उसे जहा भी कोई गुंडा दीखता उसकी और आग फेक देती और और जाल कर मर जाता. ीदार गुरु भी एक -2 गुंडे को अपनी तलवार की भेट छडा रही थी. दोनों उन गुंडों का काल बन चुकी थी. कुछ hi देर में सभी गुंडे मारे जा चुके थे. पैर 4-5 गुंडे भागने में भी कामियाब रहे थे. इन गुंडों ने बेसमेंट में हो रही घटनाओ को देख कर वह से भागना hi ठीक समजा था.

सभी को मर कर गुरु और मंजू ने कार को सब लोगो के पास लगाया और सभी को कार में बैठा कर कार को हॉस्पिटल की और भगा दिया. एक साथ इतने लोगो को घायल देख कर हॉस्पिटल में भी भाग डेढ़ मच गयी. और जैसे hi अंकिता डॉ. से मिली. फिर तो हॉस्पिटल का स्टाफ तेज़ी से भागने लगा. मूड और पेय को ऑपरेशन के लिए ले जाया जा चुक्का था. तो अंकिता और मंजू की भी गोली निकली जा रही थी. वही एक डॉ. माहि को ट्रीटमेंट दे रहा था. घाव ज्यादा गहरा नहीं था. डॉ. ने माहि को टांके लगा कर पट्टी कर दी थी. नैना की ड्रेसिंग भी इस रूम में hi दूसरा डॉ कर रहा था. सभी का खून बहुत बहा चुक्का था. तो ये सब बेहोश हो चुकी थी. केवल अंकिता को छोड़ कर.

गुरु और एरिका बहार बैठे थे. और ये सब अंदर थे. एरिका अभी भी दर के मारे कैंप रही थी. और लगातार रोये जा रही थी. गुरु उसको चुप करवाने की कोसिस कर रही थी. पैर वो दर से रोये जा रही थी. जब बहुत देर तक एरिका चुप नहीं होती तो गुरु उसके गाल कर एक तप्पड़ मार देती है. तप्पड़ लगते hi एरिका एक दम चुप. उसके समाज hi नहीं आया की हुआ क्या??
 
सभी को गोली लग गयी... गुरु और माहि को छोड़ कर कियोकि केवल बही सतर्क थी. और गुंडों ने इनको इतना मौका नहीं दिया की वो और लोगो को भी सचेत कर सके. बूत इन दोनों की सतर्कता ने सभी को मरने से बचा लिया.....

भाई हीरो का सेक्स सोर्स तो PART 2 में HI खुलेंगे. जब तक ये अपनी 11 पत्नी बना कर उनसे दुवारा सेक्स नहीं कर लेता तब तक किसी और के साथ सेक्स पॉसिबल नहीं है......................

थैंक यू फॉर लवली कमेंट...........
 
पब की वाइव्स के लिए सहायक होगी उनकी वो ट्रेनिंग जो पब ने सुरु में HI करवाई थी. माहि की तांत्रिक शक्ति और मंजू का वर्षो का तप... गुरु का गुरुज्ञान तो अंकिता के मंद की पावर...... सविता का बहुबाहि सरीर तो सलोनी की फाइटिंग स्किल्स...

हाँ पब के लिए स्टोरी के स्टार्ट से HI एक बड़ी प्रॉब्लम रही है की इस लड़कियों को ठीक करने की. ये कब और कैसे ठीक होगी ये पब के लिए एक चुनौती है.

थैंक यू बीआरओ फॉर लवली कमेंट एंड सपोर्ट...............
 
हाँ भाई संभु को तो मरना HI है. बूत अभी तक उसे आदेश नहीं मिला है. और फिर संभु का अंत त्रिकाल को पागल कर देगा... अभी तो पब ने अपनी तरफ से अटैक किया HI नहीं है. वो तो डिफेन्स से HI टाइम नहीं निकल प् रहा. उसे संभु तक पहुंचने के लिए बहुत म्हणत करनी होगी..........

भाई पब को तलवार मिलने का टाइम नजदीक है. एंड सॉरी बीआरओ इस स्टोरी में मानव और दानव HI होंगे... या होंगे देवता... इतर थें और कोई पावर इस स्टोरी में एंट्री नहीं करेगी......... सॉरी बीआरओ....

थैंक यू फॉर योर एक्सीलेंट सुग्गेस्टिव एंड कमेंट....
 
अपडेट 180

गुरु और एरिका बहार बैठे थे. और ये सब अंदर थे. एरिका अभी भी दर के मारे कैंप रही थी. और लगातार रोये जा रही थी. गुरु उसको चुप करवाने की कोसिस कर रही थी. पैर वो दर से रोये जा रही थी. जब बहुत देर तक एरिका चुप नहीं होती तो गुरु उसके गाल कर एक तप्पड़ मार देती है. तप्पड़ लगते hi एरिका एक दम चुप. उसके समाज hi नहीं आया की हुआ क्या??

गुरु – एरिका ये क्या है?? तुम इतनी कमजोर कैसे हो सकती हो?? तुम क्यों दर रही हो?? सब मरे जा चुके है. तुमने मंदिर में इससे भी बड़ा हमला देखा था तो आज क्या हुआ?? तुम तो पब की बीबी कहलाने के लायक भी नहीं हो. देखो और सब को. तुम ठीक हो फिर भी रो रही हो दर रही हो. अंकिता, माहि, मंजू को देखो कैसे घायल होते हुए भी सबका डट कर सामना किया है. और तुम एक जगह चुप कर रही फिर भी दर से कैंप रही हो.. क्यों???

एरिका – दीदी क्या करू main…(rote हुए) उन्होंने माउद को गोली मर दी. वो मेरी जिंदगी है दीदी. उसके बिना मैं कैसे जी सकती हु. मुझको लड़ाई झगडे से बहुत दर लगता है. मैं खून देख कर दर जाती हु. क्या करू मैं दीदी.. क्या करू…

गुरु – अपनी हिमत को बढ़ाओ एरिका.. ऐसे रोने से क्या होगा… सोचो यदि हम लोग नहीं होते तो तुम क्या करती?? यदि कभी माउद के साथ कही गयी और कोई माउद पैर हमला कर दे तो क्या तुम बस दर से रोटी रहोगी. ?? मार जाने डौगी अपनी जान से प्यारी बहन को?? बोलो क्या करोगी??

एरिका कुछ पल चुप रही फिर बोली – नहीं दीदी मुझको बचाना होगा… हाँ मेने उसकी जिम्मेदारी ली है तो हर खतरे से अपनी बहन को बचाना होगा. आप सच कहा रही हो दीदी मुझको हिम्मत दिखानी hi होगी. आज मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी. माउद की उस हालत को देख कर मेने अपनी हिम्मत hi खो दी थी. सच में यदि आप सब नहीं होते तो आज मैं और माउद दोनों hi मार चुके होते. अब मैं भी हिम्मत से काम लगी. दीदी आज से मेरी बहुत टफ ट्रेनिंग सुरु करवा दो… मुझको अब अपनी बहन को खुद को बचने के लिए. आप सब का साथ देने के लिए ये सब करना hi होगा….

गुरु एरिका की बात सुन कर खुश हो जाती है – ठीक है कल से तुमको खुद मैं त्रिनेड करुँगी. और लगता है की तुम सब को कुछ तांत्रिक पावर भी देनी होगी. कियोकि आज जैसी कंडीशन में बिना तांत्रिक पावर के बचना मुश्किल था.

फिर गुरु एरिका को समजा कर उसकी साथ यहाँ वह की बात करती रहती है. इतनी hi देर में पेय और माउद के रूम से डॉ बहार आ जाते है

गुरु – डॉ अब किसी है वो दोनों??

डॉ – गोलिया तो निकल दी है पैर खून बहुत बहा चुक्का है. अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. हम लोग खून तो दे रहे है पैर अभी कुछ भी कहना मुश्किल है.

ये लोग बात hi कर रहे थे की अंकिता के रूम से भी डॉ. बहार आ कर कहता है – आप लोग अंकिता से मिल सकते है. केवल थोड़ी कमजोरी है. वैसे वो अब ठीक है. और होश में भी है. जो की अपने आप में बहुत बड़ी बात है. उनका मंद कुछ जयादा hi एक्टिव है.

गुरु – डॉ. आप भूल रहे है वो भी एक डॉ है. और वो भी मंद की hi…

डॉ. – हम्म ये तो है. पैर फिर भी उनका मंद और लोगो से ज्यादा एक्टिव है. ok मैं चलता हु.. bye..

एरिका और गुरु अंकिता के रूम में चले जाते है. और अंकिता से 2-4 प्यार भरी बाते कर के बहार आ जाती है. तो देखती है की माहि, नैना और मंजू के रूम भी ओपन थे. डॉ. जा चुके थे. पैर वो तीनो अभी बेहोश थी. गुरु बहार आ कर बेथ जाती है. तो उसके मन में कामिनी की आवाज गूजती है. – दीदी आप सब कहा हो?? हम तो बाबा से मिल कर लोट भी आये और आप लोग शॉपिंग करके अभी तक नहीं आये. शादी की कोई तैयारी भी नहीं हुयी है. केवल सविता ने सब सामान एक जगह रखा हुआ है. आपके बिना शादी की तैयारी कैसे हो सकती है.

गुरु मन hi मन – कामिनी बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी है. एक काम करो तुम पब को ले कर तुर्रंत ****** हॉस्पिटल आ जाओ.

कामिनी घबराते हुए – क्या हुआ दीदी हॉस्पिटल क्यों?? किसी को चोट लगी है क्या??

गुरु सकती से – मेने कहा न यहाँ आ जाओ उनको ले कर. जितना कहा है उतना करो अभी…

कामिनी भी समाज गयी की बात कुछ बड़ी है. नहीं तो गुरु कभी भी उससे ऐसे बात नहीं करती. गुरु इस तरह से बात तब hi करती थी जब कोई बहुत बड़ी बात हो चुकी हो. इसलिए कामिनी ने बिना कुछ कहे hi अपनी आखें खोल कर पब के पास चल दी. और उसको भी बता दिया की गुरु ने उन दोनों को तुर्रंत हॉस्पिटल बुलाया है. पब भी ये सब सुन कर घबरा जाता है. दयासुर जी ने भी आज hi उसे बताया था की उसकी पत्नियों की अग्नि परीक्षा सुरु हो चुकी है. पैर वो इतना जनता था की किसी को कुछ नहीं हुआ होगा कियोकि वो भी अभी जिन्दा है. पब कामिनी को ले कर टेलिपोर्ट हो जाता है और उस हॉस्पिटल के बहार पहुंच जाता है. और कुछ hi पल में ये दोनों गुरु और एरिका के पास थे. गुरु इन दोनों को आज की पूरी कहानी बताती है. पब को गुस्सा भी अत है तो दुःख भी हो रहा था. पब की आखों में पेय और माउद की हालत सुन कर आशु आ गए थे. वो अपने आप को संभल कर एक शांत जगह बेथ कर दयासुर से बात करता है – गुरु जी क्या आप इस अग्निपरीक्ष की hi बात कर रहे थे?? पैर इसमें उन दोनों माशूम बच्चियों का क्या दोष था जो वो दोनों मूट से जज रही है??

दयासुर – हाँ मैं इस की hi बात कर रहा था पैर ये मत सोचना ये सब अब नहीं होगा. ये सब अब लगातार चलेगा. कियोकि त्रिकाल को पता चल चुक्का है की तुम्हारी सम्भोग क्रिया पूरी होने से पहले यदि वो किसी एक को भी मार दे तो सब ख़तम हो जायेगा. इसलिए ये सब इतनी आसानी से रुकने वाला नहीं है. और रही उन बच्चियों की बात तो ये समाज लो वो तो गेहू के साथ गन पिश गया है.

पब – तब तो हम सब को अब बहुत चौकन्ना रहना होगा. पैर अभी यहाँ सब बीएड पैर है. और वो दोनों बच्चिया तो अभी भी खतरे में है..

दयासुर – तो सब को हीलिंग पावर के मंत्रो से ठीक कर दो… पैर याद रहे dr.’s को शक न हो…

पब – हम्म ok गुरूजी. अपने सही याद दिलाया में अभी उन सब को ठीक करता हु.

फिर पब कुछ सोच कर उड़ता है और पेय और माउद के रूम में जा कर पहले पेय का हाथ अपने हाथ में ले कर मंत्रो को पद कर उसको ठीक कर देता है केवल कुछ बाहरी चोट और कमजोरी रहा जाती है. फिर ये hi माउद के साथ करता है. और बहार आ कर पहले माहि, नैना और मंजू को भी हील करता है और अंकिता के रूम में जाता है तो वह पैर hi गुरु और एरिका भी होती है. उन सब से वो घर चलने को बोलता है. और दिसचंगे की बात करने को डॉ. के कविं में चला जाता है. डॉ. तो किसी को भी दिसचंगे करने को तैयार नहीं था. पैर वो पब की बात को मन भी नहीं कर सकता था. इसलिए सबको डिस्चार्ज कर दिया जाता है. सभी घायल 2 एम्बुलेंस से और बाकि सब उनके पीछे कार से घर पहुंच जाते है. रस्ते में पब नोट करता है की अभी भी एक कार उनका पीछा कर रही है.

घर जा कर पब सभी को हीलिंग मंत्रो से ठीक कर देता है. जिससे सब होश में आ चुके थे. केवल कुछ कमजोरी थी. पब सबको ठीक करके हवेली की सुरक्ष के लिए दानव सेना के बेस में जा कर जुली की टीम के 10 मेंबर को हवेली के चारो और सेफ्टी के लिए लगाने को बोल देता है. और फिर से हवेली में आ जाता है. हवेली में आज पिन ड्राप साइलेंट था. इस घटना ने सबको हिला कर रख दिया था. नैना से पब की शादी की बात तो सब भूल hi चुके थे.

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जब तक यहाँ मातम का माहौल है तब तक एक बार त्रिकाल और संभु को भी देख लेते है की वो दोनों क्या कर रहे है.

संभु – गुरूजी एक बार फिर बच गए. सेल की पत्निया भी एक से बाद कर एक है. मेने तो सोचा भी नहीं था की ये सब इतनी खतरनाक हो सकती है. उन सब ने हमारे सभी ामियो को बड़ी hi आसानी से मार दिया. इतना अच्छा जाल बिछाया था. और सब फस भी गयी थी. पैर हमारी किस्मत hi ख़राब है जो एक भी गोली सही जगह पैर नहीं लगी. मेरे हिसाब से डॉ. ने सभी को बचा लिया होगा.

त्रिकाल – होगा नहीं संभु बचा लिया है. उस पंकज ने हीलिंग पावर से सब को बचा लिया. समाज नहीं आता की पंकज ने इतने सरे मंत्रो को इतनी जल्दी कैसे सिद्ध कर लिया. मंत्रो का पता होना अलग बात है. पैर इतनी जल्दी मंत्रो को सिद्ध करना बहुत hi मुश्किल है. पता नहीं कोण है जो पब की इस सब में मदत कर रहा है. (त्रिकाल और संभु को नहीं पता है की दयासुर ने पब की हेल्प की है. या सलोनी दयासुर की बेटी है. कियोकि वो एरिया दिव्या दृष्टि से सेफ है. वह दस माँ खुद रहती है. तो खुद इंद्रा देव ने hi उस एरिया को किसी समय पैर डर्टी का सबसे सेफ जाने बनाया था ताकि दस माँ और डलासुर जी को डायन लगाने में कोई प्रॉब्लम न हो)

संभु – और कोण होगा. मणि जी के अलावा.??

त्रिकाल – नहीं संभु ये मणि का काम नहीं हो सकता मणि और मेने साथ में शिक्षा ली है. वो ये सब इतनी जल्दी नहीं कर सकता कोई और है जो पब को सपोर्ट कर रहा है.

संभु – कही दस माँ तो नहीं कर रही??

त्रिकाल – नहीं वो चाहा कर भी ऐसा नहीं कर सकती कियोकि वो दानवो की रानी है. और एक दानव रानी मानव की भक्ति से खुश हो कर उसे वरदान तो दे सकती है पैर उसे कुढ़ उसे शिक्षा नहीं दे सकती. ये दानवो के रूल के खिलाफ है.

संभु – हो सकता है की दस माँ ने रूल तोड़ कर ये सब किया हो??

त्रिकाल – नहीं संभु ऐसा तो सम्भब hi नहीं है. दानव अपने रूल्स के बहुत पक्के होते है. चाहे कितने भी पाप कर ले पैर जो नियम उन्होंने खुद बनाये है उनको नहीं तोड़ते. और यदि केसा होता तो अभी तक हम दोनों जीवित नहीं होते. तुमको क्या लगता है दानव राज या दानव रानी हमसे कमजोर है. वो जब चाहे जैसे चाहे कुछ hi मीन्स में ये सब ख़तम कर सकते है. दस माँ अकेले hi मेरा, तुम्हारा, सरे मानवो का, सभी तांत्रिको का कुछ hi देर में नाश कर सकती है. उनके पास माता काली की वो शक्ति है. जिसके उपयोग से पूरी पृथ्वी का नाश किया जा सकता है. पैर वो ऐसा करती नहीं कियोकि वो खुद अपने hi बनाये कुछ नियम को तोडना नहीं चाहती. (कियोकि माता गोरी (नियति) ने दस माँ और डलासुर जी को संसार की किसी भी घटना में हस्तक्षेप करने से रोका हुआ है) यदि उनकी जगह कोई और दानव रानी होती तो जब हमने दानव राज को बंदी बनाया था उसी टाइम वो यहाँ आ कर हम दोनों को मर देती. एक दानव रानी को दानवो की वो काली शक्ति उनके सिंगसॉन पैर बैठते hi मिल जाती है जिसका सामना कोई भी मानव कभी भी नहीं कर सकता. (ये वो hi काली शक्ति है जो दयासुर ने पब पैर छोड़ी थी या दयासुर ने सलोनी को दी थी).
 
अपडेट 181

त्रिकाल – नहीं संभु ऐसा तो सम्भब hi नहीं है. दानव अपने रूल्स के बहुत पक्के होते है. चाहे कितने भी पाप कर ले पैर जो नियम उन्होंने खुद बनाये है उनको नहीं तोड़ते. और यदि केसा होता तो अभी तक हम दोनों जीवित नहीं होते. तुमको क्या लगता है दानव राज या दानव रानी हमसे कमजोर है. वो जब चाहे जैसे चाहे कुछ hi मीन्स में ये सब ख़तम कर सकते है. दस माँ अकेले hi मेरा, तुम्हारा, सरे मानवो का, सभी तांत्रिको का कुछ hi देर में नाश कर सकती है. उनके पास माता काली की वो शक्ति है. जिसके उपयोग से पूरी पृथ्वी का नाश किया जा सकता है. पैर वो ऐसा करती नहीं कियोकि वो खुद अपने hi बनाये कुछ नियम को तोडना नहीं चाहती. (कियोकि माता गोरी (नियति) ने दस माँ और डलासुर जी को संसार की किसी भी घटना में हस्तक्षेप करने से रोका हुआ है) यदि उनकी जगह कोई और दानव रानी होती तो जब हमने दानव राज को बंदी बनाया था उसी टाइम वो यहाँ आ कर हम दोनों को मर देती. एक दानव रानी को दानवो की वो काली शक्ति उनके सिंगसॉन पैर बैठते hi मिल जाती है जिसका सामना कोई भी मानव कभी भी नहीं कर सकता. (ये वो hi काली शक्ति है जो दयासुर ने पब पैर छोड़ी थी या दयासुर ने सलोनी को दी थी).

संभु – तो फिर कोण हो सकता है??

त्रिकाल – ये तो पता लगाने वाली बात है. अब तुम जाओ मैं कुछ सोचता हु क्या करना होगा हमें इस पंकज से निपटने के लिए. (त्रिकाल मन में – लगता है मुझको आज फिर अपने उस सहायक को याद करना होगा. जो बचपन से hi मेरा मार्गदर्शन करता आया है)

संभु – जो आज्ञा गुरूजी. फिर कल आता हु आपकी सेवा में…

संभु वह से निकल कर अपने घर चला जाता है. जहा उसकी बीबी और बच्चे रहते थे. पैर उनको भी पता था की संभु तांत्रिक है और अपनी सड़ना में कई -2 दिन घर नहीं आ पता. उन सबको तो ये hi पता था की संभु एक अच्छा तांत्रिक है जो गरीबो और जरुरतमंदो की हेल्प करता है. ये सब संभु की सच्चाई को नहीं जानते थे. (संभु की फॅमिली की डिटेल और उनका रोले बाद में आएगा)

त्रिकाल संभु के जाने के बाद मन hi मन अपने उस सहायक को याद करने लगता है जिसको वो जनता भी नहीं था. आज तक उसने उसका फेस भी नहीं देख था. बस एक कला साया आता और उसकी हर परेशानी को दूर करके चला जाता. त्रिकाल हर बार उसे पूछता भी की आप कोण हो. पैर उसने न तो कभी अपने बारे में कुछ बताया और न hi कभी अपना फेस दिखाया. पैर उस साये के पास त्रिकाल की हर प्रॉब्लम का सलूशन होता था. आज भी जब त्रिकाल के मंद ने उसे जवाब दे दिया तो त्रिकाल ने उससे hi हेल्प लेने की सोची. त्रिकाल के याद करने से कुछ hi देर में एक साया वह पहुंच गया. ये तो त्रिकाल को भी नहीं पता था की ये साया उसकी सेफ्टी शील्ड को कैसे पास कर आता है.

साया – कहो त्रिकाल कैसे याद किया आज मुझको??

त्रिकाल – दोस्त तुम्हारा आने का बहुत बहुत दन्यवाद. आज फिर एक समस्या आ कड़ी हुयी है जिसने मुझको परेशां किया हुआ है.

साया – बोलो ऐसी कोण सी समस्या है जिसके लिए तुमने मुझको बुलाया है.

त्रिकाल – एक लड़का है पंकज. वो डलासुर के देव रूप को छुड़वाने के लिए शक्तिया ले रहा है. और इस काम में मणि भी उसके साथ है. दस माँ ने भी उसको अपना बीटा कहा कर hi पुकारा है. और जहा हो रक्त है वह उसकी हेल्प भी कर रही है. मेने कई बार उसको मरने की कोसिस की पैर हर बार वो बच गया. समाज hi नहीं आ रहा की क्या करू मैं??

साया – उस लड़के की बात बाद में करते है पहले ये बताओ की जिस सड़ना के लिए मेने तुमको बोलै था उसका क्या हुआ?? कहा तक पहुंची वो सड़ना?? कब पूरी हो रही है तुम्हारी वो सड़ना??

त्रिकाल – मैं तो उस सड़ना में hi लगा हुआ हु. और 3 मंथ की बलि बची है. तुम्हारे hi बताये हुए तरीके से इस सड़ना को कर रहा हु.

साया – क्या कहा केवल 3 मंथ की बलि बची है?? तब तो कुछ पावर तुम्हारी तुमको मिल गयी होगी. पैर यहाँ के वातावरण को देख कर के तो नहीं लगता की तुम कोई सड़ना कर भी रहे हो और वो लास्ट स्टेज में है.

त्रिकाल – नहीं दोस्त, ऐसा कभी हुआ है की तुमने मुझसे कुछ करने को कहा हो और मेने न किया हो. मैं पुरे नियम से वो सड़ना कर रहा हु. पैर मुझको तो अभी तक कोई भी शक्ति नहीं मिली अभी तक.

साया – ये कैसे हो सकता है. 7 लड़कियों की बलि वो भी लगातार इतने महीनो तक देने के बाद भी अभी तक कुछ नहीं मिला??? ये तो हो hi नहीं सकता. दानव राज केसा कभी कर hi नहीं सकते. कुछ तो गलती हुयी है.

फिर कुछ देर तक साया कुछ नहीं बोलता और अपना डायन लगा कर सब देखने लगता है. कुछ hi देर में उस साये को सब पता चल जाता है. त्रिकाल ने अभी तक जो भी किया वो सब वो साया जान लेता है. फिर बोलता है

साया – त्रिकाल तुम पागल हो चुके हो. तुम अपने सालो की म्हणत को खुद hi बर्बाद कर रहे हो. …

त्रिकाल – ऐसा क्या कर दिया मेने दोस्त??

साया – तुम उस लड़के को मरने के लिए अपनी खोयी हुयी साडी शक्तियों को डाव पैर लगा कर पूछते हो क्या किया है मेने???

त्रिकाल उस साये की बात सुन कर चौक जाता है. त्रिकाल का मुँह खुला का खुला रहा जाता है. और मुँह से निकलता है तो बस – “क्या…”

साया – हाँ ये सच है. तुमने दानव राज को विवश कर उनके साये को पब को मरने भेज कर एक बहुत बड़ी गलती कर चुके हो. वो दानव राज है. और उनके पास शक्तियों का भंडार है. वो तुम्हारी कैद में होते हुए भी मुक्त है. ये तुम भी जानते हो की तुम्हारी साडी पावर्स दानव राज के दानव रूप के पास hi है. और वो तुम्हारे सामने कैद है. फिर भी तुम उनसे वो पावर बिना अपनी सड़ना को पूरी किये नहीं ले सकते. और तुम अपनी सड़ना छोड़ कर, दानव राज के साये को भेजना मतलब सड़ना के प्रताप को काम करना है. नहीं तो लास्ट के 5 मंथ की बलि से हर बार तुमको तुम्हारी कुछ पावर मिल जनि थी. क्यों मरना चाहते हो तुम उस लड़के को?? क्या उसका मरना तुम्हारी शक्ति पाने से भी ज्यादा जरुरी है?? क्या तुम उसको मरने के लिए कुछ महीने और नहीं रुक सकते?? एक बार अपनी साडी पावर फिर से प् लो फिर तुम उसको कुछ hi मं में मार डोज ये तुम भी जानते हो.

त्रिकाल (दुखी और चिंता के साथ) – तुम ठीक कहा रहे हो दोस्त. मैं पागल हो गया था. पैर अब मैं क्या करू?? कैसे अपनी सड़ना को सफल करू?? कब कैसे मिलेगी मुझको मेरी खोयी हुयी पावर्स???

साया – अभी भी ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ा है. भूल जाओ सब. और बचे हुए टाइम केवल सड़ना में लगाओ. वैसे भी तुमने दानव राज के बेटो को बातो में फशा कर एक वरदान प् लिया है. अब सबसे पहले अपनी खोयी हुयी शक्ति पाने का प्रयाश करो. और फिर उस लड़के को मरना. उसके बाद तुमको संसार में वासना का एक एक्स तूफ़ान लाना है की इस संसार का हर प्रादि सम्भोग के लिए पागल हो जाये. पुरे संसार में केवल वासना हो. यदि तुम ये करने में कामियाब हो गए तो दानव राज का देव रूप खुद hi ख़तम हो जायेगा. और दानव रूप तुम्हारी कैद में होगा. और अपनी वासना की पिरती के लिए दानव राज को तुम्हारी गुलामी करनी hi होगी. उनकी वासना की पूर्ति के बदले तुम दानव राज से उनकी सभी शक्तिया भी मांग लोगे तब भी वो तुमको मन नहीं कर पाएंगे. कियोकि दानव राज की एक hi कमजोरी है और वो है – वासना… और तुमको इस वासना को hi अपना हतियार बना कर दानव राज को गुलामी के लिए विवश करना होगा. एक बार दानव राज तुम्हारे वश में हो गए तो स्वर्ग तुम्हारा होगा. तुम्हारा बचपन का वो सपना पूरा हो जायेगा जिसके लिए आज तक तुम न जाने क्या -2 करते आये हो…..

त्रिकाल साये की बातो से बहुत खुश हो गया उसे लगने लगा की उसने स्वर्ग जीत लिया हो. उसका सपना सच हो गया हो. त्रिकाल खुली आखो से सपना देख रहा था. साये की बातो ने त्रिकाल को अपने वश में कर लिया था. साये की आवाज ने त्रिकाल को फिर से दुनिया में ला दिया नहीं तो वो तो स्वर्ग में hi घूम रहा था.

साया – कहा खो गए त्रिकाल??? सपना पूरा करने के लिए तुमको अभी बहुत कुछ करना होगा.

त्रिकाल – हाँ दोस्त मैं स्वर्ग जीत कर hi रहुगा. मैं सब करने को तैयार हु तुम्हारी हर बात मैं आज तक मंटा आया हु. और हमेशा फायदे में रहा हु. तुम बताओ मुझको अब क्या करना है.

साया – सबसे पहले तो पब या दुनिया सब को भूल कर इस घर में कैद हो कर अपनी सड़ना पूरी करो. संभु को भी मन कर देना अब सड़ना पूरी होने तक आने के लिए. अपनी सड़ना का पूरा सामान और 11 लड़कियों के हिसाब से 33 लड़कियों को इस घर में कैद कर लो. और उनसे hi अपने सभी काम करवाओ. पैर भूल से भी किसी के साथ कुछ कर मत देना. अब तुमको केवल और केवल अपनी सड़ना करनी है. संभु को उस लड़के के पीछे लगा दो. यदि संभु उसे या उसकी किसी पत्नी को मर पाए तो अच्छा नहीं तो पावर प् कर सबसे पहले तुम उस लड़के को hi मरना.

त्रिकाल – ठीक है दोस्त मैं ऐसा hi करुगा.

साया – देखो त्रिकाल मैं ये तुमको पहले भी बता चुक्का हु और आज फिर बता रहा हु. दानव राज डलासुर और उनकी पत्नी दोनों देव थे. केवल वासना के एक सराप के कारन वो दानव बन गए. उन्होंमे दानव के गन और शक्ति के साथ -2 देव गन भी है. और देव शक्तियों का बन्दर है. और ये दोनों देव गन होने के कारन अपने नियम और वचन के बहुत पक्के है. कलयुग के होते हुए भी दानव शांत है तो केवल इन दोनों के कारन hi है. तो तुम हमेशा एक बात का डायन रखना – “ कभी भी कोई भी दानवो का या डलासुर का बनाया नियम मत तोड़ देना.” डलासुर अपने वचन और नियम के लिए कुछ भी कर सकते है. और नहीं तो वो हमेशा शांत किसी तपश्वी के जैसा जीवन बताते है. जैसे के ऋषि एक तपश्वी सब जानते हुए भी भगवन के डायन में रहता है वैसे hi ये भी रहते आये है. और इस लिए hi शांति से तुम्हारी कैद में भी है. ये केवल तब उग्र (गुस्सा) होते है जब कोई इनके नियमो से छेद – चढ़ करे. और इनकी कमजोरी भी मैं तुमको बता चुक्का हु – वो है वासना..

(भाइयो साये की ये बात स्टोरी में बहुत इम्पोटेंट है. भूलना नहीं इस बात को)


त्रिकाल – हाँ दोस्त ये सब मैं जनता हु. उस आदर पर hi तो मेने योजना बनाई थी. और इनको कैद भी कर लिया. वो तो अल्पना की वजह से मैं आज तक अपना सपना पूरा नहीं कर सका. पैर इस बार मुझको कोई नहीं रोक सकता. बस दोस्त तुम मेरा साथ देते रहना…

साया – वो तो मैं हमेशा से हु तुम्हारे साथ ……..अच्छा अब में चलता हु. महाकाल तुमको कामियाबी दे.

त्रिकाल – एक मं दोस्त.. क्या आज भी नहीं बताओगे की कोण हो तुम??

साया – अभी ये जानने का सही वक्त नहीं आया है. जिस दिन तुम दानव राज को अपना गुलाम बना लोगे. में तुमको अपना परिचय दे दुगा.

त्रिकाल – अच्छा पैर ये तो बता सकते हो न की तुम मेरी hi मदद क्यों कर रहे हो?? संसार में इतने आदमी है. न जाने कितने बच्चे है. पैर तुमने मेरा बचपन से hi साथ दिया. मुझको आज भी याद है जिस दिन मेरे पिताजी मुझको गुरु सत्यानंद जी के आश्रम में छोड़ कर आये थे. उस दिन hi रात को में उनके आश्रम से भाग निकला. पैर तुमने रस्ते में hi मुझको रोका और समजा कर फिर से आश्रम में भेज दिया. तब से आज तक न जाने कितनी बार मेरी मदद की है. क्यों कर रहे हो मेरी मदद?? केसा नहीं है की मैं नहीं चाहता की तुम मेरी मदद करो. पैर मैं ये जानना चाहता हु की तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? केवल मेरी hi मदद करते हो या किसी और की भी??

साया – चलो ठीक है आज तुम्हारे कुछ सवालो का जवाब दे hi देता हु. इस संसार में तुम अकेले हो जिसकी मैं हेल्प करता हु. और उसके पीछे भी एक कारन है. और वो कारन है तुम्हारे जनम का समय. जब तुम्हारी माँ तुमको पैदा करने के लिए तड़फ रही थी. वो टाइम ऐसा था की उस टाइम में पैदा हुआ बच्चा बहुत ज्यादा महत्वकांशी, और तेज़ दिमाग का होगा. (साया मन में – वो मानव हो कर भी दानवो जैसी सोच का होगा.) पैर तुम्हारे पैदा होने में कुछ देर थी. पैर उतनी देर में वो घडी वो वक्त ख़तम हो जाना था. इसलिए मेने अपनी शक्ति से तुम्हारा जनम उसी पल करवा दिया. (मन में – कियोकि यदि वो टाइम निकल जाता तो फिर से मुझको इस महूरत का बर्षो इन्तजार करना होता). इस लिए hi तुम्हारा नेचर तुम्हारे घर के सभी मेंबर से अलग था. और इसलिए hi तुम्हारे पिता तुमसे प्यार नहीं करते थे. (ये झूट था). इसलिए hi तुम्हारे पिता ने hi तुमको गुरु सत्यानंद के आश्रम में भेज दिया. तुम्हारी कुंडली में स्वर्ग के राजा बनने के योग है. (मन में – एहि तो है मेरा सपना, उन देवताओ को हरा कर किसी अपने को किसी दानव को स्वर्ग का राजा बनाना.) और तुम्हारे उस योग को पूरा करने के लिए hi मैं तुम्हारा साथ दे रहा हु.

त्रिकाल – पैर मेरे स्वर्ग का राजा बनने या न बनने से आपको क्या फायदा होगा??

साया – क्यों राजा बन कर मुझको भूल जाओगे क्या??

त्रिकाल – नहीं नहीं ऐसा तो होगा hi नहीं. आपके बताये मार्ग पैर चल कर hi तो मैं वो सब प् सकूगा.

साया – तो बस फिर लग जाओ अपनी सड़ना में. और रहा मेरे फायदे का सवाल तो जिस दिन तुम मेरा परिचय जान लोगे. उस दिन तुम मुझसे ये सवाल नहीं करोगे… चलो अब में चलता हु….

साये के जाने के बाद त्रिकाल अपनी तैयारी में लग गया. और इन्तजार करने लगा सुबह होने का. जिससे वो संभु को सब समजा कर अपनी सड़ना में लीं हो सके.

(अब कोण है ये साया?? कहा से ये है आया??? कोई बता सकता है क्या भाई लोगो?? एक हिंट है – इसका जिक्र डलासुर के फ़्लैश बैक में हुआ था. और वैसे भी ज्यादा मंद मत लगाना भाइयो ये कोण है ये तो स्टोरी के part -2 में hi पता चलेगा…..)
 
थैंक यू फ्रेंड्स फॉर योर कमेंट एंड योर सपोर्ट

अपडेट पोस्टेड...

भाइयो एक नयी एंट्री है. और इस अपडेट से स्टोरी ने एक नया टर्न आया है. पब को त्रिकाल की सड़ना पूरी होने से पहले दयासुर के देव रूप को छुड़ाना HI होगा. नहीं तो त्रिकाल सड़ना पूरी होते HI उसको फिनिश कर देगा.

अब एक रेस है त्रिकाल और पब के बिच हु विल दो 1सत .....
 
अपडेट 182

साये के जाने के बाद त्रिकाल अपनी तैयारी में लग गया. और इन्तजार करने लगा सुबह होने का. जिससे वो संभु को सब समजा कर अपनी सड़ना में लीं हो सके.

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हवेली में मातम का सा माहौल था. किसी को खाने की भी सूद न थी. ऐसे में गुरु ने एक बार फिर अपना फ़र्ज़ निभाया और सबसे पहले कामिनी और सविता को ले कर किचन में पहुंच गयी. ठीक तो सब हो चुके थे पैर एक दर और एक आतंक उनके मंद पैर था. मूट को इतने करीब से देख कर सभी का हाल बुरा था. पेय और माउद की हालात तो बहुत ख़राब थी. ये दोनों पब को छोड़ने को hi तैयार नहीं थी. दोनों के लिए पब उनकी माँ और बहन से ज्यादा प्यारा हो गया था. ये दोनों बच्चिया पब के पास hi खुद को महफूज़ फील कर रही थी.

गुरु टेबल पैर खाना लगा कर सभी को टेबल पैर ले जाती है. गुरु और मंजू के समजने से सब टेबल पैर पहुंच गए थे. काजल और जय ने भी अपने गम को साइड में रख कर सभी को समजने और खाना खेलने में गुरु के साथ थे. अवनि ने ऐडा को सँभालने का जिम्मा अपने उप्पेर ले लिया था. ऐडा तो पेय की हालत से hi टूट गयी थी. मंजू के मंद में दर नहीं था. वो गुस्सा थी अपने आप से. उसे दुःख था की वो अपने परिवार को hi नहीं बचा पायी तो दुसरो की क्या हेल्प करेगी. सभी के मंद में कुछ न कुछ चल रहा था. पैर सब चुप थे और खाना खा कर सोने जा चुके थे. पब, माउद और पेय का खाना रूम में hi पहुंच गया था. पेय और सभी की इस हालत को देख कर ऐडा और काजल भी दुखी थी. जय तो अभी भी पब से नजरे निलने से कटरा रहा था. यहाँ ये सब दुःख और दर के महल में सो चुके थे.

दानव सेना के बेस में भी इस खबर से हलचल मच चुकी थी. वो सब लड़किया इन्तजार कर रही थी की कब पब उनको बदला लेने के लिए बोले और वो हमला करने वालो को मूट के घाट उत्तर दे. जुली ने पब से बिना पूछे hi 4 लड़कियों की एक टीम को हमला करने वालो के बारे में पता करने के लिए भेज दिया था. ये चारो पालवी की बेस्ट स्टूडेंट थी. इनको जासूसी का बहुत शोक भी था और इनका मंद भी बहुत तेज़ था इन सब में.

दानव सेना के बेस में कोई था जो इस हमले से खुश था और वो थी बेबी. बेबी के साथ जो हुआ था उसने बेबी को तोड़ कर रख दिया था. 1 दिन की ट्रेनिंग से hi बेबी की हालत ख़राब हो चुकी थी. और अब उसके मंद में केवल एक hi बात थी – बदला. पैर अभी तक वो पब को जितना जान पायी थी उस हिसाब से उसे ये पता था की वो पब का कुछ नहीं बिगड़ सकती. और वैसे भी उसे अभी इस बेस में रुकना था. नहीं तो पुलिस ने उसे पकड़ लेना था. बेबी अपने विचारो में थी की क्या करे की उसका बदला पूरा हो सके. पैर वो जो भी करना चाहती थी वॉक ऍम से काम 3 मंथ के बाद hi करना चाहती थी कियोकि यदि यहाँ से भागना भी पड़े तो उसे कोई प्रॉब्लम न हो. और इस हमले की खबर ने बेबी के घायल दिल पर एक मलहम का काम किया था.

देंनेर करके सब सो चुके थे. लगभग आदि रात हो चुकी थी. माहि भी अपने रूम में सो रही थी. तभी माहि को लगा की कोई उसके रूम में दूर खोल कर आया है और माहि के पास आ कर बेथ गया है. माहि नीड में थी फिर भी माहि को लग रहा था की कोई उसे आवाज दे कर उड़ाने की कोसिस कर रहा है. जब कुछ देर में माहि जगती है. तो सामने बैठे इन्शान को देख कर चौक भी जाती है और खुश भी होती है. पैर उसकी नीड उड़ चुकी थी.

माहि – शशि मेरी बहन तू यहाँ कैसे?? कहा थी तू अभी तक??

शशि – दीदी आप तो मुझको भूल hi गयी न. जीजू क्या मिले आपको आप तो सभी को भूल गयी. आपको हम सब की याद नहीं आती क्या??

शशि की बात से माहि का दिल तड़फ उड़ता है. माहि – ये किसी बात कर रही है मेरी बहन?? भला कोई भी लड़की अपने मायके को भूल सकती है. मैं अपनी जान से प्यारी बहन को भूल सकती हु क्या???

शशि – अच्छा ऐसा है तो बताओ कितने दिन हो गए आपको बापू से मिले?? और मुझको तो अभी याद भी नहीं किया अपने??

शशि की बातो ने एक बार फिर माहि के दिल को तरफ़ा दिया. माहि शशि की बात का कोई जवाब नहीं दे प् रही थी. कियोकि ये सच था की माहि बहुत दिन से न तो बापू से मिली थी और न hi अपनी बहन को याद किया था. माहि की आखों से आशु बहने लगे.. पैर वो बोल कुछ नहीं पायी..

शशि – ारे दीदी आप तो रोने लगी… रोइये मत मैं जानती हु आप बहुत बिजी है. और जब से आपकी शादी हुयी है कुछ न कुछ हो hi रहा है. आप कोण सा चेन से बैठी है घर में. आप मेरे पास न सही पैर मैं तो हमेशा आपके साथ hi रहती हु.

माहि – सच मेरी बहन, तू मुझसे नाराज नहीं है न.. हमेशा मेरे साथ hi रहेगी न..

शशि – हाँ दीदी अब तो हमेशा आपके साथ hi रहूगी. बस आपको ऐडा माँ से परमिशन लेनी होगी. नहीं तो ऐडा माँ ने मुझको डांटा तो…. और उन्होंने पापा से मेरी शिकायत कर दी तो …

माहि – तू ये क्या बोल रही है??? ऐडा तेरी माँ कब से हो गयी?? ……. अरे जा कहा रही है तू…. रुक न मेरी बहन…. रुक जा… मुझको तुजसे बात करनी है…

शशि रूम से जाते हुए – दीदी अब तो मैं इस घर में हु.. आपके साथ hi रहूगी….. फिर मिलेंगे… अभी ऐडा माँ के पास जा रही हु….

माहि चीखते हुए – रुक जा शशि रुक जा पहले मेरी बात sun…..ruk जा….

“श्हाशीय” ये बोलते हुए माहि की आखें खुल गयी. और वो बेथ गयी. उसने अपने चारो और देखा जैसे शशि को धुन रही हो. पैर वो तो एक सपना था. जो माहि के जागते hi ख़तम हो गया. पैर ये सपना माहि को हजम नहीं हो रहा था. उसके दिल में शशि के लिए एक तड़फ जग गयी थी. अपने बाबा से मिलने के लिए उसका मन मचल रहा था. शशि अब इस दुनिया में नहीं है ये याद करके वो रो रही थी.

माहि की आवाज सुन कर माहि के पास के रूम में सो रही मंजू भी जग गयी. और वो माहि के रूम में आ गयी. माहि को रोटा देख कर उसके पास में बेथ कर उसे गले से लगा उसे चुप करवाने लगी. जब माहि कुछ शांत हुयी तो मंजू ने पूछ – क्या हुआ माहि क्यों रो रही हो?? कोई बुरा सपना देखा क्या??

सपना शब्द सुन कर माहि के मंद में पूरा सपना फिर से घूम गया और वो फिर से रोने लगी. मंजू को लगा की वो माहि को शांत नहीं कर पायेगी. इस लिए मन hi मन पब को पुकारने लगी. पब भी सो रहा था. वो कहा से आवाज सनटैन. मंजू ने फिर माहि से कहा – माहि में अभी पानी ले कर आती हु..

और ये कहा कर वो रूम से निकल गयी. और माहि अपनी यादो में रोटी रही. कुछ hi देर में मंजू पब के साथ, हाथ में पानी ले कर आ गयी. माहि ने जैसे hi पब को देखा तो भाग कर उससे लिपट गयी. और रोने लगी. पब उसको चुप करवाता रहा. कुछ देर में जब माहि शांत हुयी तो पब ने पूछा – क्या हुआ मेरी माहि को?? क्यों रो रही है??

माहि – वो शशि….

पब समजा की माहि को शशि की याद आ रही है. इस लिए उसे चुप करवाते हुए बोलै – मत रो माहि जाने वाले को कोण रोक सकता है. तुम रो कर उसकी आत्मा को तकलीफ hi डौगी माहि…

फिर कुछ देर समजने के बाद जब माहि शांत हुयी तो बोली – वो शशि सपने में आयी थी. मुझसे बोली की मैं बापू को भूल गयी हु. प्लीज मुझको बापू के पास ले चलो. मुझको बहुत याद आ रही है बापू की…

पब – ठीक है माहि. अब मेरी माहि कहा रही है तो मैं मन कैसे कर सकता हु. सुबह चलते है गुरूजी की आश्रम. वैसे भी गुरूजी से मिले भी टाइम हो गया है.

मंजू – गुरूजी की आश्रम?? माहि के बापू कहा रहते है??

पब – वो बापू गुरूजी के साथ उनके आश्रम में रहते है. उनके साथ hi अपने गुरु सत्यानंद जी के बताये मार्ग पैर चल कर लोक हिट में लगे है.

मंजू – क्या?? मतलब माहि के बापू गुरु मांईजी के साथ उनके आश्रम में रहते है?? पैर मेने तो कभी उनको नहीं देख वह??

पब – वो अभी कुछ दिन पहले hi तो गए है.

मंजू – सुनिए जी… क्या मैं भी चालू आप दोनों के साथ?? मुझको गुरूजी से अपनी भूल के लिए माफ़ी मागणी है. मैं भी गुरूजी से मिलने को बेताब हु.

पब – हाँ हाँ क्यों नहीं… सुबह दोनों तैयार रहना साथ चलते है..

माहि – क्यों अभी चलते है न….

पब – माहि… अभी रात के 2 बजे है. इस टाइम आश्रम जाना ठीक नहीं होगा. सुबह जल्दी चलेंगे. कियोकि उसके बाद और भी बहुत से काम है.

माहि – हम्म ूक सुबह 6 बजे चलेंगे….

पब – ok… चलो अब सो जाओ… (और जाने लगता है)

माहि – आप भी मेरे साथ सोइये न…

पब (कुछ सोच कर) – हम्म ok…
 
अवसोमेनेस्स ????

एक्स्ट्राऑर्डिनरी अपडेट Bhai..trikal को अपनी गलती का एहसास हुआ...

त्रिकाल के गलत रस्ते पर जाने का सारा क्रेडिट साया को जाता है. साया बचपन से हाउ त्रिकाल को वही बनया जो वो बनाना चाहता था.

[/QUOTE]

यस भाई त्रिकाल को गलती का अहसास करवाने के लिए HI साया आया था. इस साये ने HI त्रिकाल को ऐसा बनाया.

थैंक यू फॉर लवली कमेंट एंड सपोर्ट......
 
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