अपडेट 187
एक नजर त्रिकाल पैर
सुबह संभु त्रिकाल के अड्डे पैर रोज की तरह hi पहुंच गया था. और अपने गुरु की सेवा में लगा हुआ था. उनके सभी कामो को पुरे मन से कर रहा था. और त्रिकाल भी अपने डेली के काम निपटा रहा था. पैर उसके मन में साये की बाते घूम रही थी. कुछ देर में जब दोनों फ्री हुए तब त्रिकाल संभु से बोलै
त्रिकाल – संभु अब अगले 70 डेज की सड़ना मुझको अकेले hi करनी है. इसमें मैं किसी की भी हेल्प नहीं ले सकता. तो तुमको उसकी तैयारी करनी होगी. इतने दिन का राशन, पूजा का सभी सामान, 33 लड़किया और वाकई सभी जरुरत का सामान तुमको इस घर में रख कर जाना होगा. उसके बाद हमारी मुलाकात सड़ना पूरी होने के बाद hi होगी.
संभु – यी एई क्या कहा रहे है आप गुरूजी… मैं इतने दिन बिना आपके ??? आपके दर्शन के बिना तो मेरा दिन hi नहीं होता फिर इतने दिन?? मैं आपकी साडी तैयारी कर दुगा. हर वो इंतजाम हो जायेगा जिससे आपको अपनी सड़ना पूरी करने में कोई प्रॉब्लम न हो. पैर प्लीज ऐसा मत कहिये की मैं आपके दर्शन के लिए भी नहीं आ सकता.
त्रिकाल – समझने की कोसिस करो संभु. इतने सालो की म्हणत को सफल करने के लिए कुछ दिन तो दूर रहना hi होगा. और फिर जब एक बार मेरी शक्तिया मेरे पास होगी. तो हम पुरे मजे से साथ में इस दुनिया पैर राज करेंगे.
संभु – ठीक है गुरूजी आपकी आज्ञा को तो नहीं ताल सकता. पैर ये दिन में कैसे काटूगा ये मैं hi जनता हु.
त्रिकाल – इसलिए हम तुमको एक काम दे रहे है जो तुमको बिना मेरी हेल्प के करना है.
संभु – आज्ञा करे गुरूजी…
तरकाल – संभु इतने दिन में तुमको पब की फॅमिली और पब दोनों को ख़तम करना है. तुम सब जानते हो उसकी कमजोरी भी और उसकी पावर्स भी. तो तुम लग जाओ इस काम पैर…..
संभु (दन्त पीष्टे हुए)– ठीक है गुरूजी… अब मेरा केवल एक hi लक्ष्य होगा पब के परिवार की मूट…
त्रिकाल – संभु मुझको तुमसे ये hi उम्मीद थी. तो आज और कल में तुम पहले मेरे लिए सरे अरेंजमेंट करो और फिर अपने लाक्षा की और लग जाना…
फिर कुछ देर संभु और त्रिकाल ारेंगमेट के बारे में बात करते रहते है और फिर संभु त्रिकाल को सड़ना पैर छोड़ कर बहार आ जाता है. और जैसे hi जंगल की वो बढ़ता है तो उसकी कार के आगे एक बूढ़ा साधु आ जाता है. संभु तुर्रंत कार को रोक देता है और उस साधु को देख कर उसके पेअर पकड़ लेता है.
संभु – महाराज आप, इतने दिन बाद अपने दर्शन दिए है. आप ने तो पहले भी मुझको थैंक्स बोलने का मौका भी नहीं दिया था. आप hi है जिनके बताये रस्ते पैर चल कर मैं अपने गुरूजी को कोमा से बहार ला पाया. आपके बातये रिश्ते से hi मेवों सब कर पाया. मैं आपका किस सब्दो में दन्यबाद करू ये मेरी समाज के बहार है.
साधु – उधो संभु.. यदि त्रिकाल तुम्हारा गुरु है तो मेरा भी कुछ है. तुम दोनों को सही मार्ग दिखाना hi मेरा कर्म है. और आज भी मैं तुम्हारे लिए एक लसखाया ले कर आया हु..
संभु – आज्ञा करे महाराज..
साधु – तुम्हारा टारगेट है पब और उसके परिवार की मूट..
संभु – वो तो मुझको गुरूजी ने पहले hi बोल दिया है…
साधु – हम्म अच्छा तो सुनो उसको पाने के लिए मैं तुम्हारी हेल्प करने आया हु.. मैं बताउगा की तुम वो सब कैसे कर सकते हो…
संभु – मैं आपके इस उपकार का सदा आभारी रहुगा…
साधु कुछ देर मंत्रो का जप करता है तो वह पैर 4 दानव प्रकट हो जाते है.
साधु – सभु ये वो 4 शक्तिया है जो तुमको तुम्हारा टारगेट पाने में मदत करेगी.
- अगनासुर – ये अग्नि से पल भर में कुछ भी जला सकता है.
- परसुर – ये किसी भी मानव की परछाई को अपने वश में करके उसे मार भी सकता है और उससे कुछ भी करवा सकता है.
- अंधकासुर – ये कभी भी डेरा पेला सकता है. रौशनी को निगल जाता है. और उस रौशनी के साथ hi सामने वाले की साडी शक्ति को भी खींच लेता है. ये जिसको चाहे उसको कुछ hi मं. में शक्तिहीन कर देता है और फिर वो मर जाता है. बड़े से बड़े देवता भी इसके सामने आने से डरते है.
- मोहिनी – ये वो दानव कन्या है जो किसी को भी अपनी और आकर्षित कर सकती है. और अपना गुलाम बना लेती है. एक बार इसकी मोहिनी शक्ति में आया व्यक्ति सदा के लिए इसका हो जाता है.
संभु – ये तो सच में बहुत बलशाली है. इनको तो पब भी नहीं हरा पायेगा…
साधु – तुम फिर मूर्खता करने की सोचने लगे. पब का ये 4रो मिल कर भी कुछ नहीं बिगड़ सकते. दानवरानी के वरदानो के चलते ये उसका कुछ भी बिगड़ने में सफल नहीं होंगे. पैर उसकी पत्निया इन 4रो का कुछ भी नहीं कर सकती.
संभु – हम्म यानि की इसको उनकी पत्नियों के पीछे लगाना है. तो कल hi मैं सही टाइम देख कर उनकी पत्नियों पैर अटैक कर देता हु.
साधु – फिर जल्दवाजी… तुम दोनों सयम से काम क्यों नहीं करते?? पब कुछ दिन में दानव राज के देव रूप को छुड़वाने के लिए उस चक्रवेव में जायेगा. तब उसके पीछे से तुम इन 4रो की हेल्प से उसकी पत्नियों को मार देना. वो चाहा कर भी अपनी पत्नियों की हेल्प के लिए नहीं आ पायेगा. और यहाँ उसकी एक भी पत्नी मरी वह वो अपने आप मर जायेगा. उस चक्रवेव के अंतिम सिरे को छोड़ कर किसी भी भाग से भहर नहीं आ सकते. और अंतिम सिरे की खाशियत तो तुम पहले से hi जानते हो. एक बार जिसने वह पेअर रखा उसको वासना का ऐसा बुखार चढ़ता है की उसका मंद hi उसके कण्ट्रोल से बहार हो जाता है. और बाकि के हमले उसको मूट के घाट उतरने में कुछ hi पल लगते है. तो जब वो वह होगा तब तुम यहाँ वॉर करना.
संभु – सच में आपका प्लान तो बहुत अच्छा है. तो फिर मैं तब तक शांत रहता हु.
साधु – नहीं ऐसा भूल से भी मत करना. नहीं तो दुश्मन चल को भाप सकता है. छोटे बड़े हमले करवाते रहो. दुश्मन को सोचने का मौका hi मत दो. हो सकता है कोई छोटा सा हमला hi कामियाब हो जाये. और नहीं भी हुआ तो उसकी आध में इस बड़े हमले की तैयारी करो.
संभु – सच में आप महँ है. युद्ध निति में आप बेस्ट है.
साधु – हहहहहहहह.. बच्चे तुम मेरी अश्लियत नहीं जानते न इसलिए ये कहा रहे हो नहीं तो मेरी पहचान hi है युद्धनीति बनाना.