MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 34 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

थैंक यू फॉर योर लवली कमेंट एंड योर सपोर्ट...

भाई अभी तो सोनल HI है पब के परिवार में. बाकि तो कोई है नहीं... और सोनल ने जिंदगी के इतने रंग देख लिए है की वो अपनी उम्र से ज्यादा सिख चुकी है..

सोनल की एडवाइस से पब क्या करेगा ये देखना होगा. और सच में बुरे लोगो को कैसे ठीक करेगा ये भी देखने वाली बात है...
 
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भाई इस लिए HI वो रिमाइंडर अपडेट दिया ताकि सब कुछ फिर से सभी को याद आ जाये... एंड 2ंद थिंक अब इन सबकी जरुरत भी पड़ने वाली है.

हाँ पति को मानाने के लिए पत्नियों के पास दो बह्रमास्त्र है - आशु और उनका रूप सौन्दर्य...

भाई - बहन का प्यार HI ऐसा होता है भाई सच में मुझको भी लिखते हुए बहुत मज़ा आया था...

मणि जी अब बहुत से राज खोलेंगे...
 
अपडेट 225

आज मणि जी सभी की क्लास ले रहे थे. मणि जी की बाते सभी को एक कड़वे सच का आईना दिखा रही थी. सभी अब बहुत सर्मिन्दा थे. पब ने सभी की आखों में अपने लिए फिर से वो hi प्यार देख कर मणि जी को 1-2 बार रोकने की कोसिस भी की पैर मणि जी तो जैसे सोच कर hi आये थे की उनको क्या करना है. जब सभी को दन्त कर मणि जी का मन भर गया तब मणि जी बोले – तुम सब का कुछ नहीं हो सकता. इतना सुनने के बाद भी अभी तक ये याद नहीं आया की तुम्हारे पति ने अभी तक सुबह से कुछ खाया नहीं है. वो सुबह से भूखा है. चलो तुम सब अब बर्फ करो तब तक मैं अपने रूम में आराम कर रहा हु. …

मणि जी के ये बोलते hi सविता किचन की और चल दी और मणि जी अपने रूम की और. कुछ hi देर में सविता बर्फ ले कर पब के पास पहुंच गयी तब तक सभी पब को देख रही थी तरसती निगाहो से. किसी को बोलने की हिम्मत नहीं थी. मणि जी की सुनने के बाद तो किसी में अब बोलने की हिम्मत hi नहीं बची थी. पब भी जान चुक्का था की अब उनके बिच की ये गलत फेमि दूर हो चुकी है. सविता ने पब को बर्फ का एक बाईट अपनी हाथो से खिलाना चाहा तो पब ने उसको रोक दिया. सविता को लगा की पब अभी भी उससे नाराज है तो उसकी आखें फिर भर गयी. तो पब ने भी उस मोंक ो तोड़ते हुए बोलै – ऐसे नहीं सविता, मैं जनता हु तुम सब ने भी बर्फ नहीं किया होगा. तो सब साथ में hi करेंगे. टेबल पैर सभी का बर्फ लगाओ.

ये सुन कर सविता रोटी हुयी पब के गले लग गयी और बोली – मुझको माफ़…

पब ने बिच में hi उसकी बात को काट कर बोलै – नहीं सविता अब उसकी जरुरत नहीं है. यदि गलती तुम्हारी थी तो मेरी भी थी. बूत तुम सबको एक बार मेरी बात तो सुन्नी चाहिए थी. बिना कुछ सुने बिना कुछ जाने तुम सभी ने मुझको गुन्हेगार मान लिया. एक बार मुझको मौका तो देते तुम सब के बिना मैं ादुरा हु… तुम सब से मैं हु तुम सबके बिना मैं कुछ भी नहीं…

पब की बात सुन कर सभी पब से चुपक गयी एक के उप्पेर एक थी. फिर पब ने सभी को हटाया और खड़े हो कर सभी को अपने आगोश में ले लिया. सब एक दूसरे से चुके हुए थे. कोई बोल नहीं रहा था. सब बस एक दूसरे को फील कर रहे थे. कुछ देर में जब सभी के दिल शांत हो गए. जो कई दिनों से तड़फ रहे थे. पैर एक दिल में बेचैनी अभी भी थी और वो थी अवनि. वो सभी को दूर खड़े हो कर सभी को देख रही थी. और अवनि के दिल में मणि जी की बाते तीर की तरह लग रही थी. जहा एक तरफ उसे ख़ुशी थी की उसकी फॅमिली में फिर से कोई मन मुटाव नहीं है. तो दूसरी तरफ वो मणि जी की बातो को सोचने में लगी थी. “क्या सच में मेरा प्यार इतना कमजोर है. क्या सच में मेरे दिल में पब के लिए प्यार नहीं. यदि है तो ऐडा को मुझे समजने की जरुरत क्यों पड़ी. शायद मैं hi अपने आप को समाज hi नहीं पायी मैं खुद नहीं जानती थी की मेरा दिल और मैं क्या चाहते है. जिस पल मुझको लगा की मेने पब को खो दिया है तब hi मुझको अपने प्यार का अपने अस्तित्व का ज्ञान हुआ. पब को खोने के दर से hi मुझको समाज आ गया की पब के बिना मेरा कोई बजूद hi नहीं hai.sach में इन 2 दिनों ने hi मुझको वो संजय जो मैं कभी भी फील नहीं कर पायी थी और न hi करना चाहती थी .”

अवनि अपनी सोच में गम वह से अपने रूम में चली गयी और किसी का डायन अवनि पैर था hi नहीं तो किसी को पता भी नहीं चला. अभी तो ये सब पब से चुपक कर खड़े थे. पैर गुरु को इतनी आतम गिलमि हो रही थी की उससे अब पब के सामने खड़े होने में भी शर्म आ रही थी. तो गुरु सभी को पब के साथ देख कर ख़ुशी से अपने आशु साफ़ करके वह से अपने रूम की तरफ जाने लगती है. पैर पब उन सबके बिच में से भी गुरु का हाथ पकड़ लेता है

पब – गुरु अब भी नाराज हो??

गुरु (नज़रे निचे किये हुए) – नहीं (बहुत धिरे से)

पब – तो फिर अब मुझको छोड़ कर कहा जा रही हो?? मैं तुम्हारे बिना कुछ नहीं हु गुरु…

गुरु – नहीं मेने पाप किया है. और पाप की सजा तो मिलनी hi चाहिए. अब मैं अपनी hi साजरो में गिर चुकी हु. हो सके तो मुझको माफ़ कर देना. अब तो आपको आपकी सभी पत्निया भी मिल चुकी है. और इतना बड़ा पाप करने के बाद मुज्ने हिम्मत नहीं है की मैं आपको अपना चेहरा फिर दिखा पाव.

पब (गुरु को अपनी तरफ चीचते हुए) – हाँ पाप तो तुमसे हुआ है. और अब तुम्हारी आखों में पश्चाताप के आशु भी है. और तुम जानती हो गुरु की इससे बड़ी कोई बात नहीं होती. और यदि फिर भी तुम यदि मुझको छोड़ कर चली जाओगी तो ये तो मेरे लिए सजा होगी न… क्या तुम इस सबके लिए मुझको सजा देना चाहती हो???

गुरु – नहीं मैं आपको कैसे सजा दे सकती हु. पैर क्या करू मैं इतना बड़ा पाप करके मैं तुमको फेस भी नहीं कर सकती.

पब – गुरु देखो मेरी इन आखों में तुमको यहाँ क्या दीखता है. गुरु गलतिया सभी से हो जाती है. पैर गलती होने से जीना तो नहीं छोड़ देते न. गुरु तुम आज भी मेरे लिए वो hi हो जो पहले थी. आज भी तुम मेरी 1सत वाइफ हो. और हमेशा रहोगी. तुम्हारे बिना क्या हम सब खुश रहा पाएंगे??

सभी – दीदी आप ये क्या करने का सोच रही है?? आपके बिना ये घर घर नहीं रहेगा. हम सभी को आपकी जरुरत है. हम सब आपको कही नहीं जाने देंगे. यदि अपने गलती की है तो हम सबने भी की है तो केवल आपको hi सजा क्यों??

पब (गुरु को अपनी बांहो में बार लेता है) – गुरु भूल जाओ उन कड़वी बातो को. वो एक बुरा सपना था जो अब ख़तम हो चुक्का है. अब हमको फिर से एक नयी सुरुवात करनी चाहिए…

गुरु – नहीं मैं नहीं भूल… (गुरु इससे आगे बोल hi नहीं पायी कियोकि गुरु का मुँह पब ने अपने होंटो से बंद कर दिया था)

पब बड़े प्यार से गुरु के होंटो को चूस रहा था. गुरु कोई रिस्पांस नहीं दे रही थी पैर धिरे -2 गुरु भी पिगले लगी. और वो भी पब का साथ देने लगी. अभी 5-7 मं हो चुके थे दोनों को किश करते हुए बाकि सभी अपने होंटो पैर मुस्कान लिए हुए ये माज़रा देख रहे थे. तो ऐडा ने सिटी मार दी. और गुरु तो जैसे होश में आयी तो वो मरे शर्म के पब के सीने में चुप गयी. पब ने फिर एक बार सभी की तरफ अपनी बांहे फैला दी. तो सभी ख़ुशी -2 एक बार फिर पब के गले लग गयी. पारी ने तो किश hi कर दिया. पारी को देख कर ऐडा ने भी पब के फेस को अपनी तरफ किया और उसके होंठ चूसने लगी. फिर जब ये अलग हुए तो सविता, ेबेचा, कामिनी, गुरु किचन में चली गयी. और बाकि टेबल पैर बर्फ की तैयारी करने लगी. पब तो अपने चेयर पैर बेथ कर सभी को एक साथ काम करते देख कर अपने दिल को सकूँ दे रहा था. 2-3 दिन के बाद पब के दिल को ये स्कूल मिल रहा था. कुछ hi मं में सभी के लिए बर्फ टेबल पैर लग चुक्का था. और सभी साथ में कहते हुए अपने गीले सिकबे दूर कर रहे थे.

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जब तक ये लोग आपस में बिजी है एक नज़र सोनल पैर. सोनल अपने ऑफिस पहुंच चुकी थी. और एडिटर के साथ बेथ कर बाटे कर रही थी.

सोनल – तो एडिटर सर अपने क्या सोच है दानव सेना के उप्पेर किस तरह से रियेक्ट किया जाना चाहिए.

एडिटर – इसमें सतचने वाली क्या बात है मम. उसने कितने लोगो को मारा है और कितने hi पुलिस वालो को भी मारा है तो है तो क्रिमिनल hi. तो हमको भी इसको क्रिमिनल की तरह hi ट्रीट करना है.

सोनल – पैर एडिटर सर मेने तो सुना है की वो केवल क्रिमिनल्स को hi मर रहा है किसी भी शरीफ या आम आदमी को नहीं मरता. उसने करप्ट पुलिस वालो को hi मारा था और जो पुलिस वाले ईमानदार थे उनको जिन्दा छोड़ दिया.

एडिटर – सुना तो अपने ठीक है मम, इसलिए पूरी क्रिमिनल लॉबी थम गयी है. पैर हमरे पास कोई प्रूफ नहीं है की वो सब गुंडे थे.

सोनल – हम्म ये तो है और एक दम गोवत. और पुलिस के खिलाफ जा कर दानव सेना को सही कहना भी अपने चेंनल के हिट में नहीं होगा. जबकि हमारे पास न तो कोई प्रूफ है और न hi कोई गव्हा है.

एडिटर – गव्हा के तोर पैर तो मम वह के आस पास के लोगो के इंटरव्यू बहुत से चेंनल पैर आ रहे है पैर वो भी खुल कर कुछ नहीं बोल रहे. सर्कार केखिलाफ कोई जाना नहीं चाहता और दानव पुत्र का दर इतना है की कोई उसकी बुराई करने से भी दर रहा है. तो हर चेंनल पैर गोल मोल बाते hi हो रहे है.

सोनल – हम्म चलो मैं कुछ सोचती हु. अच्छा वो जो नई प्रोग्राम सुरु करने का सोच था. तो कोई आईडिया आया की क्या सुरु करे? हमको कुछ तो करना hi होगा नहीं तो अपनी टॉप काम होती hi जाएगी.

एडिटर – मम मेने और अदिति ने इस बारे में सोचा है. और एक नई प्रोग्राम का प्लान बना रहे है.

सोनल – ये अदिति कोण है??

एडिटर – मम है तो रिपोर्टर बूत मंद बहुत शार्प है. तो मेने उसको hi इस काम पैर लगा रखा है.

सोनल – हम्म ok एक बार उसको यहाँ बुलाओ मैं देखना चाहती हु की क्या प्रोग्रेस है.

एडिटर अदिति (शम्भू की बेटी) को बुला लेता है और सोनल से उसका इंट्रो करवाता है. फिर सोनल देखती है की अभी तो प्लान ठीक से तैयार नहीं है. तो वो अदिति को बोलती है की तुम इसको जल्दी से जल्दी कम्पलीट करो…

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यहाँ हवेली में सभी के बिच में अब फिर से पहले वाली बात आ गयी थी. बर्फ ख़तम करके सभी हॉल में hi बैठे हसी ख़ुशी बाते कर रहे थे. तभी पारी बोली

पारी – वैसे अपने अपना विचार ेबेचा के लिए लास्ट मोमेंट पैर चेंज किया क्यों था. सलोनी ने बताया की आप ेबेचा को मन कर चुके थे.

पब – गुरूजी के कहने पैर. उनका hi आदेश था ये. और उन्होंने ये भी कहा था की शादी होने से पहले ये बात किसी को न बताऊ.

मंजू – क्या गुरूजी ने बोलै था, तब तो जरूर कोई बड़ी बात होगी.

गुरु – हाँ और वो बात मैं अब कुछ -2 समाज रही हु. और शायद इसमें सबसे बड़ी गलती मेरी hi है.

ेबेचा ये सुन कर पब को घूरने लगी थी. उसको विश्वास नहीं हो रहा था की केवल गुरूजी के कहने पैर उसे अपनाया है नहीं तो वो उसको मरने के लिए छोड़ कर चला आता.

पब – ेबेचा ऐसा मत सोचो, तुम मुझको पहली नज़र में hi पसंद आ गयी थी. पैर मैं तुमसे शादी क्यों नहीं करना चाहता था ये अब तुम अच्छे से जानती हो. पैर तुमको वह मरने के लिए छोड़ कर आना भी गवारा नहीं था. इसलिए गुरूजी से बात करके तुम्हारे वेयर में रे ले रहा था. पैर उन्होंने तुमसे शादी करने का आदेश दे दिया. और शायद अब मैं जनता भी हु की वो सब गुरूजी ने क्यों किया.

ऐडा – तो हमको भी बातो न क्यों किया ये सब गुरूजी ने…

तभी पीछे से मणि जी की आवाज आती है. मैं बाटता हु बेटी. मैं आज तुम सब के सवालों के जवाब देने hi आया हु. और अब वो टाइम भी आ गया है जब पब को अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा सुरु करनी है. और अपनी अंतिम पत्नी से अपनी अंतिम शक्ति को भी पाना है.

गुरूजी के मुँह से अंतिम शब्द सुन कर सब चौक गए कियोकि सभी ने ये तय किया था की पब और अवनि की शादी बाद में करवादी जाएगी. बूत यदि गुरूजी ने मन कर दिया तब तो ये हो hi नहीं सकेगा. सभी के फेस पैर एक बार फिर चिंता के बदल छ गए. इसलिए गुरु बोली – गुरूजी और वो अंतिम पत्नी कोण होगी. कियोकि उसका अपने पहले hi कहा था की इनकी 11वि पावर वाइफ के वेयर में आप hi बतायेगे.

गुरु की और गुरूजी की बातो को सुन पब एक दम बोल पड़ा. मणि जी के बोलने से पहले hi बोल पड़ा था – क्या गुरूजी मेरी 11वि पावर वाइफ अवनि हो सकती है?? आप सब जानते है इसलिए आपसे मेरी ये विनती है की यदि ऐसा हो सकता हो तो मैं अवनि से अपनी अंतिम शादी करना चाहुगा. वाकई जो आप आज्ञा दे.
 
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हाँ भाई ये तो सच है. माँ और पापा से बड़ा गुरु कोई नहीं होता...

यस सोनल है वाकई में. पैर पब सोनल की बात को कैसे मानेगा ये देखने की बात होगी...

भाई पब की फॅमिली का स्टोरी में रोले नहीं है. सो ज्यादा दिया नहीं है. कुछ आगे आएगा... भाई उसकी वजह भी है की पब के माँ बाप सभी से 27-28 साल पहले HI दूर हो गए थे...

भाई मणि जी को अभी तो और भी लेनी है.................... इन सभी की .............. क्लास....
 
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यस बीआरओ इसलिए HI तो मणि जी से HI डायरेक्ट मिलवाया सभी को यदि गुरूजी से पहले पब से मिलती तो गुरूजी की दांत का और पब के इस प्यार का मज़ा काम हो जाता. इन्होने सच का आइना भी देखा किये के लिए सुना भी .. तो पब को अपने हाथ इनको दर्द भी नहीं देना पड़ा....

हाँ भाई अवनि की सोच अभी लास्ट 2 डेज से HI चेंज हुयी है. जब उसको लगा की उसमे पब को खो दिया है तब HI उसे उसकी वैल्यू का अहसास हुआ है.. देखिये आगे क्या होता है....

अपडेट पोस्टेड
 
अपडेट 226

गुरु की और गुरूजी की बातो को सुन पब एक दम बोल पड़ा. मणि जी के बोलने से पहले hi बोल पड़ा था – क्या गुरूजी मेरी 11वि पावर वाइफ अवनि हो सकती है?? आप सब जानते है इसलिए आपसे मेरी ये विनती है की यदि ऐसा हो सकता हो तो मैं अवनि से अपनी अंतिम शादी करना चाहुगा. वाकई जो आप आज्ञा दे.

मणि जी पब की बात सुन कर सोचने लगे और फिर बोले – ठीक है तुम जो चाहते हो वो हो सकता है पैर ये इतना आसान नहीं है. अवनि को इसके लिए बहुत कुछ करना होगा. और एक सबसे बड़ी बात अवनि की जिंदगी डाव पैर लगनी होगी.

पब चोकते हुए – पैर क्यों गुरूजी??

मणि जी – बीटा अब तुम्हारी अंतिम शादी हवेली में नहीं होगी वल्कि वो उस गाओं में होगी जो त्रिकाल का बसाया हुआ चक्रवेव है. और तुमको अवनि को अपने साथ ले कर वह जाना होगा. ये चक्रवेव बहुत खतरनाक है और इसके हर पथ पैर मूट इन्तजार में बैठी है. तुमको तो डलासुर जी के देव रूप को छुड़वाने वह जाना है और साथ में अपनी अंतिम पत्नी को भी अपने साथ ले कर जाना होगा. क्या तुम अवनि के जीवन को खतरे में दाल सकते हो?? तुम्हारा hi वह से जिन्दा लूटने के केवल 20% चांस है तो सोचो अवनि वह कैसे बचेगी.

पब मणि जी की बातो से दर गया. उसे अवनि से दूर रहना तो मंजूर था पैर वो अवनि को संकट में नहीं दाल सकता था. तो बोलै – नहीं गुरु जी मैं अवनि को वह ले कर नहीं जा सकता. मैं इसके लिए तैयार नहीं हु.

पैर तभी पीछे से अवनि की आवाज आयी जो कुछ देर से वह कड़ी सब सुन रही थी – पैर मैं जाने के लिए तैयार हु. यदि मुझको अपने प्यार को पाने के लिए आग के दरिया में भी कूदने को कहोगे तो में अब उसके लिए भी तैयार हु. पैर अब में पब के बिना जिन्दा नहीं रहा सकती.

पब – अवनि समझने की कोसिस करो वह बहुत ज्यादा खतरा है. पता नहीं मैं भी जिन्दा आ पाव या नहीं…

अवनि – और यदि आप जिन्दा नहीं लोटे तो क्या मैं जिन्दा रहा पाउगी?? आपके साथ ये सब भी मुझको छोड़ कर चली जाएगी. (पब की पत्नियों की और इशारा करते हुए) और जब आप सभी में से कोई बचेगा hi नहीं तो ये जिंदगी तो वैसे भी मूट के सामान होगी. इसलिए आपके साथ मैं hi जोगी.

मणि जी – एक बार और सोच लो. पब के उप्पेर आने वाली मूट को भी तुमको अपने उप्पेर लेना पद सकता है उस िस्थति में ये सब तो रहेंगे पैर तुम इनके बिच नहीं होगी.

अवनि – मेने सोच लिया है गुरूजी. और यदि ऐसा हुआ तो ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात होगी. यदि मैं एक बार भी इस परिवार को बचा सकीय तो मेरा पूरा जीवन दांया हो जायेगा. पैर इन सब के बिना अब जिन्दा रहा पाना मुश्किल है.

पब – सविता तुम hi समजाओ न इसको मेरे साथ मरने को जाना चाहती है. नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता..

सविता – क्या नहीं कर सकते आप ये?? जब हम सब आपके साथ मरने को तैयार है तो अवनि क्यों नहीं?? यदि ेबेचा की जगह आपकी शादी अवनि से होती तो क्या फिर वो भी आपके साथ नहीं मरती?? तो अब क्या बदल गया.

सविता की बात ने पब को चुप कर दिया. तो अवनि फिर बोली – तब ये तय रहा की मैं hi इनके साथ उस यात्रा पैर जोगी और अपने प्यार को पति के रूप में प् कर लौटूंगी. अब आप बताइये गुरूजी मुझको इसके लिए क्या करना होगा??

मणि जी कुछ देर सोच केर बोले – पब अब वो समय आ चुक्का है की तुमको और अवनि को वह जाने की तैयारी करनी चाहिए. अब केवल 60 दिन बचे है. और तुमको अवनि को तैयार करने में काम से काम 10 दिन का समय तो लगेगा hi. और वो तैयारी कैसे करनी है वो मैं अकेला नहीं बता सकता. उसके लिए तुमको दयासुर जी से प्राथना करनी होगी की वो भी यहाँ आ कर तुम सबका मार्गदर्शन करे.

मणि जी की बात सुन कर पब और सभी लोग खड़े होकर हाथ जोड़ कर दयासुर जी को याद करने लगे. थोड़ी hi देर में वह दयासुर जी पहुंच गए. और दयासुर जी मणि जी को वह देख कर hi समाज गए की उनको यहाँ क्यों बुलाया गया है. इसलिए सबसे पहले उन्होंने आखें बंद करके मंत्र पड़े और हवेली के चारो और एक पावर फूल शील्ड बना दी. ताकि यहाँ होने बलि कोई भी बात किसी को भी कैसे भी पता न चल सके.

दयासुर – मणि जी हम आपसे रुष्ट है. अपने हरारे मन करने के बाद भी वो hi तलवार पब को दिलवा दी. और हमको पता भी नहीं चलने दिया.

मणि – क्यों झुड़ा इल्जाम लगा रहे है दयासुर जी. ये सब आपकी hi इच्छा से हुआ है. और अब इल्जाम मुज गरीब पैर. ये तो na-inshafi है.

दयासुर – मेने आपसे कहा था की पब को चंद्र हंस तलवार जैसी तलवार की जरुरत है ये नहीं कहा था की आप उसी को hi हम दानवो से चीन कर पब को दे दे.

मणि – पैर ये तो आप भी जानते है उसके जैसी केवल एक तलवार है जो श्री हरी विष्णु के पास है और उनको इतने काम टाइम में खुश करके उनसे वरदान में वो तलवार पाना आशम्भव था. तो मेने वो hi किया जो पब के लिए उचित था.

इन दोनों की बात सुन कर सलोनी बिच में बोली – बाबा आप किस तलवार की बात कर रहे है और वो इनके पास कहा से आ गयी?? हमको भी तो बताइये.

दयासुर – बीटा ये तुम अपने गुरूजी से hi पूछो. इन्होने दानवो की मान और सम्मान समाजी जाने वाली तलवार को hi पब को दिलवा दिया है.

मणि – तो इसमें गलत क्या है पब भी तो दस माँ का पुत्र है और एक दानव hi तो है. और वैसे भी वो तलवार सदा से दानवो के पास hi रही है तो आज भी एक दानव के पास hi है. (फिर मांईजी उस तलवार के बारे में सब कुछ सभी को बता देते है)

दयासुर – नहीं वो दानव नहीं. वो मानव और दानव दोनों है.

गुरु – गुरूजी अब आप hi सब कुछ बताइये न. क्या जो मैं समाज रही हु क्या वो सच है?? क्या सच मैं मेने इतनी बड़ी भूल कर दी है? क्या सच मैं मैं दस माँ की आज्ञा का भी पालन न कर सकीय? क्या सच में मैं अपने सर्वश्रेष्ठ गन नियति की चाहा को भी नहीं पहचान सकीय? ये मुझसे कोण सा पाप हो गया guruji..ye कैसे हो गया मुझसे??

मणि – हाँ गुरु तुम जो सोच रही हो वो सब सच है. तुम अपने घमंड में अपने झूठे अहंकार में इतनी आदि हो गयी की ये भी भूल गयी की दस माँ ने तुमको पब के साथ क्यों भेजा था. दस माँ जानती थी की तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ गन है नियति को पहचानना. जहा हर कोई नियति की चाहा को पहचान नहीं पता और गलती कर बैठता है वही तुम नियति का हर इशारा भली भाटी पहचान जाती हो. जहा तुमने नियति के इशारे को समाज कर पब की शादी सविता से करवाई अवनि को छोड़ कर, वही तुम नियति की चाहा को अनदेखा कर ेबेचा की जगह अवनि की शादी करवाना चाहती थी. तुम्हारे घमंड ने तुम्हारे अंदर की उस महँ शक्ति को छुपा कर तुमको एक सदर्न नारी बना दिया था.

मंजू – पैर गुरूजी नियति ने ऐसा कोण सा इशारा किया था जो हम समाज नहीं सके?? मुझको तो नहीं लगा कही भी नियति ये चाहती हो की पब और ेबेचा के शादी हो..

मंजू की बात पैर मणि जी एक बार मुस्कुरा कर मंजू की और देखे तो फिर गुरु की और देखे जैसे कहा रहे हो उत्तर दो गुरु मंजू के सवाल का…

गुरु – मंजू गुरूजी ने जो कहा वो 100% सही है. नियति ने कई इशारे किये – 1. इनका (पब) बिना किसी बड़ी वजह के स्कूल के इवेंट में जाने के लिए उतावला होना. फिर गुरूजी का उसमे समर्थन होना.

2. इनका (पब) ेबेचा को देखते hi वो फीलिंग का आना जो केवल उसके लिए hi आती है जिसको नियति इनकी पत्नी चुनती है.

3. सलोनी का ेबेचा से फाइट हारना. जबकि सलोनी को हारना ेबेचा क्या किसी भी मानव के बस की बात नहीं है.

4. ेवेचा की प्रतिज्ञा के बारे में पुरे स्कूल को पता होते हुए भी इनको लास्ट तक पता न चलना.

मंजू ये वो सब बाते है जो नियति की इच्छा को बताती है की ेबेचा को पब की होना hi था.

मंजू – हम्म आपकी बात से अब मुझको भी लग रहा है हमने नियति की इच्छा के विरुद्ध हो गए थे. पैर ेबेचा में ऐसा क्या है जो ेबेचा को hi नियति ने चुना?? मैं ये नहीं कहना चाहती की ेबेचा से मुझको कोई प्रॉब्लम है बूत ये सोचने की बात तो है न की ेबेचा hi क्यों???

मणि जी – मंजू तुम सच में अभी तक नहीं सामजी हो या गुरुपित का टेस्ट ले रही हो??

मंजू – नहीं -2 गुरूजी सच में नहीं सामजी हु.

माहि – ये तो मैं भी जानना चाहुगी.

मणि जी – शायद तुम सबने धयान नहीं दिया. देखो आज मैं तुम सबको पूरा सच बताता हु पब से तुम सबकी hi शादी क्यों हुयी. जबकि हवेली में आने के बाद पब के पास लड़कियों की कमी नहीं थी. हर इंसान की एक खूबी होती है जो उसको बचपन से hi मिल जाती है. और ये hi खूबी उससे या कहो उसकी जीवन शक्ति से जुडी होती है. और तुम सब की खुबिया तुम सब में बहुत आदिक थी. और तुम्हारी जीवन शक्ति तुम्हारी उस खूबी के लिए hi बानी हुयी थी.

सविता से सुरु करते है – सविता ने बचपन से hi बहुत फिजिकल म्हणत की थी. तो पब को सविता से फिजिकल पावर मिली.

अंकिता – ये तो डॉ. है मंद की इसलिए मंद कण्ट्रोल करने की पावर अंकिता से मिली.

पारी – पारी ने योग से अपने आप को भानु के सेक्स टार्चर से बचा कर रखा था. उसने अपना सेक्स कण्ट्रोल करने की बहुत पावर थी इसलिए पारी से सेक्स कण्ट्रोल पावर मिली.

ऐडा – ऐडा ने अपनी जान पैर खेल कर पब की जान बचायी है इसलिए ऐडा और पब की जीवन शक्ति (लाइफ एनर्जी) एक हो गयी है.

एरिका – एरिका ने बचपन से hi घूम गम कर अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है इसलिए इससे टेलिपोर्ट होने की शक्ति मिली है.

माहि – दीनदयाल ने बचपन से hi माहि को वेद पुराणों का ज्ञान दिया इसलिए इससे शास्त्रों का ज्ञान मिला.

सलोनी – दयासुर जी से बचपन से hi युद्ध कला सीखते हुए उसमे माहिर थी इसलिए इससे सभी प्रकार की युद्ध कला में निपुरता मिली है.

मंजू – मंजू ने पहले से पंचमहाभूत को सिद्ध कर रहा था. तो इससे ये hi शक्ति मिली है.

नैना – नैना ने अपनी आखें ख़राब होने पैर अंधे होते हुए भी अपने मन की आखों से देखते हुए दुनिया से लड़ती रही. इसलिए hi इससे दिव्यदृष्टि मिली.

ेबेचा – तलवारबाजी में निपुर, दर्द सहने की अद्भुत क्षमता, मजबूत सरीर इसके कारन hi इससे वो तलवार मिली वो इस ब्रमांड में किसी के पास नहीं है.

तुमको पता है इस तलवार की इतनी आदिक शक्ति थी की कोई भी सदर्न नारी उसकी शक्ति को संभल नहीं सकती थी. पैर ये काम ेबेचा ने बहुत अच्छे दांग से किया. शायद तुम सब नहीं जानती की उस दिन ेबेचा की क्या हाल थी. ेबेचा को पब अपनी हीलिंग पावर से भी ठीक नहीं कर सका था. ेबेचा की जगह कोई और होती तो या तो वो मर जाती या पब के पास ये तलवार होते हुए भी वो बिना पावर के होती.

अंकिता – और वो क्यों गुरूजी??
 
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सॉरी बीआरओ पैर अदिति की शादी नहीं हो रही, शादी तो अवनि की HI होगी... सोचने की बात है भाई संभु त्रिकाल की माया को तोड़ने के लिए अदिति को जाने देगा???

पैर ासिटी और पब के बिच में कुछ तो होगा और वो समय आने पैर आएगा..... अभी तो अदिति की एंट्री हुयी है. अभी तो बहुत कुछ करना है उसको....
 
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भाई हाँ भी और न भी... अदिति को संभु ने इसलिए OK कहा इस न्यूज़ चैनल के लिए कियोकि ये रतन का है. और रतन त्रिकाल का पुराण चेला... पैर रतन ने इस चैनल को सँभालने को दे दिया सोनल को.... पब की बहन को...

अदिति खुद तो अच्छी है और संभु को भी अच्छा HI मानती है. पैर एक बात है भाई सोनल को नहीं पता की अदिति किसकी बेटी है. सोनल ने इनको अप्पोइंट नहीं किया है.

सोनल क्या करेगी.. या पब इसमें सोनल का कुछ साथ देगा या नहीं ये सब आगे....

स्टे तूने...

अवनि होगी पब की लास्ट वाइफ ....
 
अपडेट 227

अंकिता – और वो क्यों गुरूजी??

मणि जी – इसके पीछे की वजह बहुत बड़ी है. और ये hi वो वजह है जिससे तुम सब यात्रा में बिना जाये हुए भी पब की पूरी मदत करते रहोगे. पैर उससे पहले पब तुम ये बताओ की दिव्यदृष्टि पाने के बाद तुमने कभी डायन लगाया हो तो तुमने क्या महसूस किया.

पब – गुरूजी उसके बाद मेने कई बार डायन लगाया है और मुझको अपने अंदर बहुत तरह की शक्तियों का मनुभव हुआ है. हर शक्ति अलग रंग की है. और जिस शक्ति पैर भी मैं अपना धयान लगता हु. तो मुझको हर बार अलग hi अनुभव होता है.

मणि जी – तो अब सुनो तुम्हारी हर पत्नी तुमसे उन शक्तियों से hi जुडी है. तुमने जो अलग -2 कलर की एनर्जी अपने अंदर फील की है वो सब तुम्हारी पत्नियों से मिली वो शक्तियों है जो तुमको डलासुर जी से वरदान में मिली है. और इन सभी शक्तियों का मैं सौरोत तुम्हारी सभी पत्निया है. इनकी जितनी जीवन शक्ति होगी उतनी hi पावर फुल तुम्हारी उस पत्नी से जुडी वो शक्ति होगी. यदि ये कमजोर हो गयी तो संजो की तुम कमजोर. और यदि इनकी जीवन शक्ति पूरी है और तुमने अपनी जीवन शक्ति खो भी दी तो तुम अपनी पत्नियों की जीवन शक्ति से युद्ध कर सकोगे. तुम जब भी कोई अपनी पावर उसे करोगे तो उस पावर से जुडी तुम्हारी पत्नी की जीवन शक्ति काम होगी. और जब तुम्हारी जीवन शक्ति काम होगी तो ऐडा की जीवन शक्ति तुम्हारे काम आएगी. इस तरह आज की डेट में तुम्हारे अंदर 11 जीवन शक्तियों की ताकत है. 10 तुम्हारी पत्नियों की और 11वि तुम्हारी खुद की. पैर उसके इलावा तुम्हारे शरीर में 12वि शक्ति ब्लैक एनर्जी भी होगी. कियोकि तुमको दुवारा जिन्दा काने के लिए दस माँ ने वो तुम्हारे अंदर डाली थी. पैर अभी कोई भी शक्ति तुम्हारे कभू में नहीं है. तुम उनका उसे तो कर रहे हो पैर उनको कण्ट्रोल नहीं कर प् रहे हो. इसलिए तुमको अपनी उस यात्रा पैर जाने से पहले उन सभी पैर कण्ट्रोल करना होगा.

अंकिता – इसका मतलब ेबेचा में उस तलवार की शक्ति को सँभालने के लिए जरुरी जीवन शक्ति आदिक मात्रा में थी??

मणि जी – हाँ बिलकुल ये hi सच है उतनी जीवन शक्ति या तो सलोनी में है या फिर ेबेचा में जो वो उस तलवार की शक्ति को संभल सके. अंकिता तुम्हारी जीवन शक्ति मंद की शक्ति सँभालने में सक्षम थी तभी तुमसे पब को मंद की पावर मिली थी.

सलोनी – गुरूजी यदि मैं उस तलवार की पावर को सँभालने में सक्षम थी तो इनको वो तलवार मुझसे क्यों नहीं मिली.

गुरु – सलोनी शायद तुमको याद नहीं होगा पैर ेबेचा से पब की शादी की रात को तुम बेकाबू हो गयी थी. तुमको खुद होश नहीं था की तुम क्या कर रही हो और क्यों कर रही हो. और शायद तुमको उस तलवार के बारे में पता न चले इसलिए गुरूजी में पब को आदेश दिया होगा की तुमको किसी को कुछ नहीं बताना है तलवार हासिल करने से pehle.or यदि पब तुमसे hi वो तलवार पाना चाहता तो तुम सब कुछ भूल कर पब को मार देती या खुद मार जाती पैर अपने दवरा पब को वो तलवार कभी भी पाने न देती. (भाइयो वो इसलिए कियोकि सलोनी दानव है. और उसका दानव अंश उसे ऐसा कभी नहीं करने देता. सलोनी का दानव अंश hi उस टाइम इतना भड़क गया था की उसको गुरु और कामिनी में मिल कर काबू किया था)

पारी – अब मेरे समाज आया की इन्होने हम सब को बिना कुछ बताये hi ेबेचा से शादी क्यों की. सच में हम सब ने टिपिकल इंडियन वाइफ की तरह बिना कुछ सुने hi इनसे लड़ना सुरु कर दिया था. हम सब भूल गए थे की न तो ये आम पति है और न hi हम आम पत्निया.

सलोनी – हाँ शायद पारी तुम एक दम ठीक कहा रही हो. और शायद मेरा दानव अंश hi मुझको ेबेचा के खिलाफ किये हुए था.

मणि जी – अब तुम सब ठीक सोच रही हो. अब तुम सब फिर से भटक मत जाना. और आज से तुम सबको भी पब के साथ डायन में बैठना है और सभी को अपनी लाइफ एनर्जी बदनी है. कियोकि तुम सबकी शक्ति hi पब को उस युद्ध में जीत दिलवा सकती है. पब के जाने के बाद भी तुमको ज्यादा से ज्यादा टाइम धयान में hi लगाना है ताकि पब वह कमजोर न पड़े. ऐडा तुम्हारे लिए सबसे ज्यादा मुश्किल आने वाली है. कियोकि तुमको इस अवस्था में भी अपनी जीवन शक्ति को बनाये रखना है. तुम सबसे छोटी हो पैर तुम पैर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.

गुरु – गुरूजी अपने मुझको ये तो उसी टाइम बता दिया था की ऐडा और पब की जीवन शक्ति एक हो चुकी है. पैर में आज तक ये नहीं समाज पायी की ऐसा क्यों हुआ. ऐडा और पब की शादी के टाइम और न hi उनके सम्भोग के टाइम किसी भी मंत्र का उच्चारण नहीं हुआ फिर भी ऐडा और इनकी जीवन शक्ति एक हो गयी.

मणि जी – गुरु ये सब हुआ डलासुर जी के दानव अंश के कहे शब्दों को पूरा करने के लिए. उन्होंने ऐडा को बोल दिया की वो भी झंडा रहेगी. और जल्दी hi ठीक होगी. पैर सच तो ये था की अड़ अक उस टाइम पैर बचना नामुनकिन था. पैर ऐडा का पब के लिए अटूट प्यार के कारन दलसुरजी ऐडा से खुश थे. तो उन्होंने ऐडा और पब की जीवन शक्ति को इस तरह से जोड़ा की यदि पब भी ऐडा से उतना hi प्यार करता होगा तो पब की जीवन शक्ति ऐडा के प्राणो की रक्षा करेगी. और यदि पब ने ऐडा से केवल अपने जिस्म की वासनापूर्ति के लिए शादी की है तो फिर पब की सम्पूर्ण जीवन शक्ति ऐडा में समां जाती और ऐडा बच जाती पैर पब का अंत हो जाता. पैर पब के दिल में भी ऐडा के लिए बहुत प्यार था. तो दोनों की जीवन शक्ति एक हो गयी. याद रखना जब तक पति पत्नी के रिश्ते में प्यार और विश्वास है तब तक hi वो रिश्ता अटूट है नहीं तो वो उन दोनों की दुनिया लूट सकता है.

मंजू – यानि की हम सभी की जीवन शक्ति से वो युद्ध में हमरे मिली शक्तियों का उसे करेंगे. एनर्जी हमारी होगी और वह युद्ध में उस एनर्जी को वो (पब) उसे कर रहे होंगे. अपनी ेनांगी को बिना उसे किये hi दुस्मन से लड़ते रहेंगे. और हम यहाँ घर में बेथ कर अपनी एनर्जी बढ़ाते रहे ताकि उनको इसकी कमी न हो.

मणि जी – हम्म बिलकुल ठीक, तुम सब युद्ध के मैदान में न हो कर भी अपनी एनर्जी से युद्ध में पब की मदत करते रहोगे. और ऐडा पब की खुद की एनर्जी को संभालेगी.

पारी – इसका मतलब तो मैं फ्री hi रहूगी. लड़ाई में मेरी पावर का तो उसे होने से रहा. तो मेरी एनर्जी तो उसे होगी hi नहीं…

मणि जी – पारी ये भूल से भी मत सोचना. तुम वो कड़ी हो जिस पैर जीत और हार निर्भर करेगी. जिस टाइम तुम्हारी शक्ति का इस्तिमाल पब को करना होगा वो अंतिम युद्ध होगा उस यात्रा का. सलोनी से पूछना केवल उस अंतिम पड़ाव को दिव्या दृष्टि से देखने बार से सलोनी की क्या हाल हुआ था. जबकि पब को तो वह रहा कर अपनी वाष्ण को कण्ट्रोल करके युद्ध करना है. और वो वाष्ण अनियंत्रित न हो जाये. और पब वाष्ण में अँधा हो कर कोई गलत कदम न ुधा ले इसके लिए hi अवनि इसके साथ जा रही है. उस तमे अवनि के प्रेम की परीक्ष होगी की अवनि का प्रेम वाष्ण को कण्ट्रोल कर सकता है या नहीं.

गुरु – मतलब गुरूजी ये पहले से hi तय था की अवनि को पब की अंतिम पत्नी बनना है तो फिर पहले क्यों नहीं बताया. बेकार में इतना झगड़ा करवा दिया…

मणि जी – हाहाहाहाहा गुरु तुम सब डायन hi नहीं दे पाए इसमें मेरी गलती नहीं है. नियति ने पब के मुँह से वो hi वादा करवाया था जो की सत्य है. पब ने सलोनी से वादा किया था की अवनि hi उसकी अंतिम पावर वाइफ होगी. और देखो वो हो रही है.

गुरु – सच में गुरूजी इस बार मैं अपनी सभी खूबियों को भूल कर एक आम नारी हो गयी. और जो इतना दर्द इतना दुःख सभी में सहा उसकी सबसे बड़ी कमी मेरी hi थी. यदि मैं समय रहते समाज गयी होती तो ऐसा कभी नहीं होता.

मणि जी – हाँ गुरु तुमने एक दम सच कहा. पैर अब जो बीत गया वो तो नहीं बदल सकता पैर आज से तुम सब इस बात को हमेशा डायन रखना की संसार में जो भी हो रहा है उसके पीछे नियति का कोई बड़ा उद्देश्य जरूर होता है. और यदि तुम उसको समाज लोगे तो जीवन में कभी दुखी नहीं होना पड़ेगा. बस कर्म किये जाओ नियति अपना खेल अपने आप खेलती रहेगी. और तुमको तुम्हारे हर कर्म का फल भी देती रहेगी.

इतनी देर से चुप बैठे दयासुर जी बोले – पब और अवनि अब तुम मेरी बात डायन से सुनो. अब जो तुम्हारी यात्रा सुरु होने वाली है ये कोई सदर्न यात्रा नहीं है. यदि तुम्हारा वह पैर जीतने के चांस है तो वो कव्वाल इसलिए है की तुम 10 जीवन शक्तियों और रखते हो. और वो 10 जीवन शक्ति तुमसे दूर बेथ कर भी तुम्हारी उन शक्तियों को हमेशा बड़ा और घटा सकती है. इसलिए आज से hi तुमको अपनी सभी पत्नियों के साथ बेथ कर डायन लगाना है. ताकि तुम अपनी सभी शक्ति पैर कण्ट्रोल कर सको. और उनको और अच्छे से पहचान सको. उसके बाद तुमको वो यत्र प्रारम्भ करनी है. वो चक्रवेव 8 चरण में बना है. पैर हम केवल अंतिम 8तह चरण के वेयर में hi जानते है. और तुमको मेने उन अंतिम चरण को दिखाया भी था. और अब तुम भी उसको खुद देख सकते हो. पहले 7 चरण तुमको बहुत hi सवदानी से पार करने होंगे. हर कदम पैर मूट मिलेगी. वह किसी भी बात पैर विश्वास मत करना और किसी भी बात को सत्य मत मन्ना. कहा कोण सा मूट का जाल है ये तुमको वही पैर समाज कर उससे बचते हुए आगे जाना है.

पब – गुरूजी इन 7 चरणों को पार करने में कितना टाइम लग सकता है.??

दयासुर – ये तो कोई नहीं बता सकता. ये तो तुम्हारी शक्ति और बुद्धि पैर निर्भर करेगा.

पब – पैर गुरूजी यदि कई दिनों का टाइम लगा तो वह अवनि खायेगी क्या?? और मेरी जीवन शक्ति कब तक मेरा साथ देगी??

दयासुर – हम्म अवनि को तो तुमको वह जंगल से hi कुछ खिलाना पिलाना पड़ेगा. और रही जीवन शक्ति की बात तो हर चरण के ख़तम होने और नए चरण के सुरु होने के बिच में कुछ दुरी होगी. तुमको उस जगह पैर डायन में बेथ कर hi अपनी जीवन शक्ति को फिर से पाना होगा. और डायन रहे ाष्टिका देवी, पहाड़ो के देव से वर में मिली शक्तिया और मंत्रो से सिद्ध की गयी शक्तियों को काम से काम hi इस्तिमाल करना कियोकि इस शक्तियों के उसे से hi तुम्हारी जीवन शक्ति ज्यादा खर्च होगी. जबकि तुम्हारी पत्नियों से मिली पावर को उसे करने से तुम्हारी पत्नियों की जीवन शक्ति उसे होगी जिसको वो यहाँ हवेली में रहा कर कभी भी कवर कर सकती है.

पब – हम्म समाज गया गुरूजी. अब आप अंतिम यानि 8तह चरम के बारे में बताइये.

दयासुर – उससे पहले तुम खुद एक बार अपनी दिव्या दृष्टि से उसको फिर से देख लो.

पब अपनी दिव्या दृष्टि से उसको देखने बेथ जाता है. (ये मेने एक बार लिखा है फिर से कॉपी पेस्ट कर रहा हु ताकि आप सभी को याद आ जाये)

ये स्कीन एक गाओं का लग रहा था. उसके पास में एक तालाब था. तालाब से कुछ दुरी पैर 2 दानव खड़े थे. और उस तालाब के पास में खुला एरिया था. उस खुले एरिया में बहुत सरे लोग सेक्स कर रहे थे. वो सब केवल सेक्स करने में मग्न थे. कोई भी किसी के भी साथ कर रहा था. इनके तगड़ 100 से तो ज्यादा hi थी. उस तालाब के एक और कुछ घर बने हुए थे. ये स्कीन किसी घटिया ब्लू फिल्म का ग्रुप सेक्स स्कीन जैसा था. ये सब देख कर पब अपनी आखें खोल लेता है.

दयासुर – बीटा जब तुम यहाँ पहुंचोगे तो तुमको बिना उन गाओं वालो पैर डायन सबसे पहले उन दोनों दानवो को युद्ध के लिए ललकारना है. याद रहे वो दोनों मेरे hi बड़े भाई है. उनको हराना बहुत hi मुश्किल होगा. पैर जैसे तुमने मुझको हार मैंने पैर मजबूर कर दिया था वैसे hi उनको भी करना होगा. पैर इस बात का डायन रखना अपनी जीवन शक्ति से जुडी किसी भी पावर का उसे काम से काम hi करना. उनको हारते hi दानवराज का दिया एक वरदान भांग हो जायेगा. (त्रिकाल ने डलासुर जी से वरदान लिया था की उनके 4 बेटे उनके दोनों रूपों की सदा सुरक्षा करेंगे. और इनके हारते hi वो वरदान खुद hi बेकार हो जायेगा कियोकि उनके bête वो करने में सक्षम नहीं रहे) जो की बहुत जरुरी है. उसके बाद मेरे भाइयो से hi प्राथना करनी है की वो तुम्हारी और अवनि की शादी करवा दे. शादी होने के बाद तुमको उन गाओं वालो को (जो की वह सेक्स कर रहे है) दूर से hi अपनी शक्ति से मार डालना है. और उस तालाब में उत्तर जाना है. उस तालाब में तुमको एक बड़ा बॉक्स मिलेगा जिसमे डलासुर जी का देव रूप कैद है. उस बॉक्स को बहार ला कर उसको खोल देना है. उसके खोलते hi वो सारा चक्रवेव ख़तम हो जायेगा. सब कुछ ख़तम हो जायेगा. और डलासुर महाराजा का देव रूप आजाद होगा.

पब – उसके बाद क्या करना है??

दयासुर – उसके बाद तुमको अवनि के साथ वह पैर hi सम्भोग किरिया को पूरा करके वरदान लेना और घर आ जाना.
 
अपडेट 228

दयासुर – उसके बाद तुमको अवनि के साथ वह पैर hi सम्भोग किरिया को पूरा करके वरदान लेना और घर आ जाना.

पब – तो इसमें अवनि से वह शादी करने की और वरदान वही पाने की जरुरत क्या है?? ये वरदान तो में यही पैर अवनि से शादी करके भी प् सकता हु. और उसके बाद अकेला जा कर डलासुर जी को आज़ाद करवा सकता हु.

दयासुर – नहीं बीटा, तुमको जो मग्न है वो मेरे दोनों भाइयो को बिना हरये पाना नामुनकिन है.

पब – हम्म्म … यदि ऐसे बात है तो वह से आ कर अवनि से शादी कर लगा..

दयासुर – ये भी नहीं हो सकता कियोकि अभी मेने कहा न. और तुमने भी अभी फील किया होगा की वह कितनी वासना है. और उस तालाब के पानी में तो वासना की चार्म सीमा से भी बहुत ज्यादा वासना है. पता नहीं वॉक ों सा पल होगा जब तुम अपनी वासना पैर से अपना कण्ट्रोल खो डोज. और तुम पैर वासना का भूत साबरा होगा. तो उन पालो में अवनि को hi अपनी प्यार की अचूक शक्ति से तुमको उस वासना से बहार निकलना है. और यदि अवनि तुम उसमे भी फ़ैल होने लगो तो तुमको सम्भोग क्रिया पूरी करके पब की वासना को शांत करना होगा. उस टाइम तुमको hi याद रखना होगा की पब क्रिया में बोले जाने वाले मंत्रो को पड़े. और अपना वरदान भी मगे. मेरे भाइयो से युद्ध जीतने के बाद पारी और अवनि तुम दोनों की अग्नि परीक्षा होगी. तुम दोनों पैर hi तुम सभी की जिंदगी और जीत तिकी होगी. तुम दोनों hi इस यात्रा का परिदम (रिजल्ट) घोषित करोगी.

मणि जी – अवनि आज से तुमको भी अपने आप को इस यात्रा के लिए तैयार करना होगा. तुमको इतनी कदिन ट्रेनिंग करने होगी की 10 दिन में hi तुमको बहुत कुछ आ जाये.

अवनि – गुरूजी आज से अवनि दिन में 18 हॉर्स अपने आप को इस यात्रा के काबिल बनाने में hi लगाएगी. मैं अब प्रेम का सही ार्थ समाज चुकी हु. यदि मेरा प्रेम मेरी परीक्षा लेना चाहता है तो मैं इस परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हु. अवनि इस यात्रा में अपने प्रेम को हरने नहीं देगी.

दयासुर – अवनि हमको तुमसे ये hi उम्मीद थी. और पब तुमको इसकी सुरक्षा के लिए मेरे दिए उस गोले (शील्ड) का इस्तमाल करना होगा. और सलोनी को यहाँ उसकी एनर्जी को संभालना होगा. ये यात्रा पब तुम्हारे अकेले की नहीं है. इस यात्रा में तुम सभी का पूरा योगदान hi इसे सफल बना सकता है.

बहुत देर से अपने मन में एक सवाल को दवाये बेटी कामिनी अब बोल hi पड़ी – बाबा गुरूजी ने पब की सभी पत्नियों का पब के जीवन में महत्त्व बता दिया. और इस युद्ध में उनकी भूमिका अपने बता दी. पैर मैं और गुरु दीदी का आप दोनों में से किसी ने कुछ नहीं बताया. क्या हम दोनों इनके जीवन में बिना मतलब के hi है? क्या हर्रा इनके जीवन में कोई महत्व नहीं है?

दयासुर – नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है. गुरु को दस माँ ने पब का मार्गदर्शक बनने को बोलै था पैर खुद इसने hi पब की 1सत पत्नी बनना चाहा. और ये क्यों किया ये बात दस माँ और ये दोनों hi जानते है (मंजू वाले केस में अपडेट 2 का बैलेंस part लिखा था, गुरु का 1सत वाइफ होने का कारन के रूप में) और इसका काम इस युद्ध में भी मार्गदर्शक का hi होगा. कियोकि हम दोनों तो यहाँ से चले जायेगे. और फिर उसके बाद आने वाली हर मुश्किल में गुरु hi तुम सबका मार्गदर्शक करेगी. और रही तुम्हारी बात तो बीटा तुम्हारा पब के जावन में आने का क्या कारन है ये हम आज नहीं जानते है पैर ये मत सोचना की नियति ने तुमको पब की जिंदगी में बिना मतलब के hi भेज दिया है. तुम्हारी और पब की शादी भी नियति का एक खेल hi है. और भविष्य में क्या होना है ये तो नियति hi जाने. इसलिए कभी भी खुद को काम मत समझना. तुम्हारे कारन hi पब को वो मार्ग मिला है जिस पैर चल कर वो आज यहाँ तक पंहुचा है. ये हवेली और दानव सेना की लड़कियों के कल्याण के लिए लड़ने के कारन hi उसको ये सभी पत्निया मिली है. तुम hi वो माद्यं हो जिसने इस सबको पब से मिलवाया है.

ये सब लोग बहुत देर तक ऐसे hi सवाल जवाब करते रहे और किसी को होश hi नहीं था की शयाम का वक्त भी हो चुक्का है. होश जब आया जबकि दयासुर जी ने बोलै की अब मेरा जाने का टाइम हो चुक्का है. तो मणि जी ने भी पब को बोल दिया की वो उनको भी आश्रम तक छोड़ आये और अवनि को अपने साथ ले चले. दयासुर जी के जाने के बाद अवनि, पब और मणि जी टेलिपोर्ट हो कर मणि जी के आश्रम के रूम में पहुंच गए. वह बेथ कर मणि जी ने अपनी कुछ पावर अवनि को दी. और उनको कहा की आज से 10 दिन बाद तुमको इस यात्रा पैर जाना है.

वह से पब और अवनि हवेली आ जाते है. तो घर पैर अभी डिनर की कोई तैयारी नहीं थी. और आज किसी का मान भी नहीं था डिनर बनाने का तो पब ने सभी को कहा दिया की आज डिनर के लिए बहार चलेंगे. पहले शॉपपिंग फिर डिनर. पब की बात सुन कर सब खुस हो गए. आज बहुत दिन बाद इन घर में खुशियों का माहौल था. पहले काजल का बच्चा और फिर आपसी मतभेद. अब जा कर घर में खुशियों को माहौल था. पब ने दीपक को फ़ोन करके बता दिया था की आज वो लोग डिनर के लिए आ रहे है. कुछ hi देर मैं सब तैयार हो कर बहार आ चुके थे. सभी के फेस पैर एक चमक थी जो कई दिन बाद पब ने देखि थी.

कुछ देर में hi घर से काफिला चल दिया सिटी में मॉल की तरफ. पब, उसकी सभी पत्निया, पेय, माउद, काजल और जय आज सभी एक साथ जा रहे थे. ये सब तीन कार्स में थे. पैर 1 कार आगे और 1 कार पीछे उनको कवर करके चल रही थी. इसमें वो hi टीम थी जो पब ने जुली को बोल कर इस सभी की सेफ्टी के लिए रखवा राखी थी. थोड़ी hi देर में ये सब मॉल में पहुंच गए. और फिर सुरु हुआ सभी का शॉपपिंग का दुआर. इन सभी में मिल कर पुरे मॉल को सर पैर ुधा लिया था. मॉल का मैनेजर खुद उन सभी को शॉपपिंग करवा रहा था. और पब तो बस खड़ा सभी को एक जगह से दूसरी जगह भागता हुआ देख रहा था. या फिर कभी कोई उसको अपने लिए ड्रेस पसंद करने को खींचता तो कभी कोई. पब ने अपनी दिव्या दृष्टि से पहले hi देख लिया था की अभी कोई भी गलत आदमी इनके आस पास नहीं है. जब पब की खींच तान थोड़ी काम हुयी तो वो कॉफ़ी शॉप में बेथ कर कॉफ़ी पिने लगा.

वह बेथ कर पब ने अपने साथ आयी उन लड़कियों को देखा जो सेफ्टी के लिए उनके साथ आयी थी. पैर उनकी निगाहे भी माल्स की शॉप्स को देख कर दोल रही थी. उनकी आखें बता रही थी की वो भी शॉपपिंग करना चाहती है. चाहे किसी लड़की को उसकी जरुरत का हर सामान आप उसको घर पैर hi ला कर दे दो फिर भी शॉपपिंग करने की इच्छा तो हर लड़की के दिल में होती है. और आज ये इच्छा इनके दिल में भी हो रही थी. जो पब ने पहचान ली थी. तो पब ुध कर उनके पास गया और सभी को अपने साथ एक शॉप में आने को बोलै वो भी पब के साथ शॉप में घुस गयी. और फिर पब – देखो यहाँ पैर सभी तरह की ड्रेसेस है. तुम लोगो को जो भी पाषंड हो वो तुम ले सकती हो. अपने लिए भी और बेस में रहने वाली और लड़कियों के लिए भी. जितनी चाहे उतनी ड्रेस की तुम सब शॉपपिंग कर सकती हो.

लड़किया – पैर हम…. हम कैसे शॉपपिंग कर सकते है… नहीं ठाकुर साहब हम यहाँ शॉपिंग के लिए नहीं वल्कि आप सभी की सेफ्टी के लिए आपके साथ आये है ये हम नहीं कर सकते.

तो पब उनमे से एक लड़की का हाथ पकड़ कर बोलै – देखो यदि तुम सब मुझको कुछ मानती हो. और तुम लोगो के दिल में मेरे लिए इज्जत है तो तुम सब मेरा कहा जरूर पूरा करोगी. और यदि नहीं तो कोई बात नहीं है. पैर प्लीज फोर्मल्टी के लिए 1-2 ड्रेस खरीद कर ये मत कहना की शॉपिंग हो गयी. आगे तुम लोगो की इच्छा. मैं तुम सबको फाॅर्स नहीं करुगा. पैर यदि तुम सब शॉपिंग करोगे तो मुझको भी अच्छा लगेगा.. और शायद तुमको भी ये करना पाषंड आये.

पब की बातो से सभी लड़किया भाबुक हो गयी. और उन्होंने हाँ में गार्डन हिला दी. मुँह से शब्द तो निकले नहीं थे उनमे से किसी के. फिर पब भी बहार चला गया. और फिर वो सब भी लग गयी शॉपपिंग में उनके फेस की चमक hi बता रही थी की वो आज ये सब करके कितनी खुश है. अब तो ऐसा लग रहा था की शायद शॉप वालो के पास कपडे काम न पद jaye…hahahaha… पैर फिर ये सिलसिला भी पूरा हो गया. पब के हाथ में केवल ऐडा, पेय, माउद की शॉपिंग के बैग्स थे. तब भी वो पूरा धक् गया था. वाकई एक बैग्स तो सभी ने अपने खुद hi ले रखे थे. सभी आज की शॉपिंग से बहुत खुश थे. तो ये लोग कुछ hi देर में अपने होटल में पहुंच गए जहा दीपक इनका वेट कर रहा था. दीपक ने सभी के डिनर को बहुत hi मस्त इंतजाम किया था. एक छोटे हॉल में इन सभी के लिए टेबल लगी थी. पब उन सभी लड़कियों को भी अपने साथ hi ले गया था डिनर के लिए. डिनर पैर पब ने अपनी पत्नियों के साथ पूरी मस्ती की थी. कभी किसी को छेड़ता तो कभी किसी को. सभी ने इस संदर डिनर का भरपूर लुफ्त उड़ाया. वो लड़किया आज बहुत ज्यादा खुश थी. कियोकि एक लम्बे समय के बाद उन्होंने ये खुशियों के पल जीए थे.

डिनर करते हुए सभी लेट हो गए तो रात के 12 बाये के अस पास घर पहुंचे. सभी बहुत खुश थे. इस बिच पब की पत्नियों ने सोनल को भी फ़ोन किया था. पेय और माउद अपने किये गयी बत्तमीजी की माफ़ी मांग चुकी थी. सभी उन पालो को भूल कर आज में जी रहे थे. घर पहुंच कर सभी लोग हॉल में बैठे रहे और फिर सभी ने कल से अपनी प्रैक्टिस कैसे करनी है इस पैर बात की. गुरु, कामिनी और जुली को अवनि को त्रिनेड करने का काम मिला. तो पब और उसकी बाकि 10 पत्नियों को आदिक से आदिक टाइम धयान में बेथ कर अपनी जीवन शक्ति को बढ़ाने को कहा गया. काजल को घर की और जय को दानव बेस की जिम्मेदारी मिली थी. ये मस्ती केवल आज के लिए थी कल से तो सभी को आने वाले युद्ध की तैयारी में लग्न था.

रात को करीब 1 बजे सो कर सुबह 5 बजे फिर सभी ुध गए. और लग गए अपनी ट्रेनिंग पैर. आज से अवनि की सहमत आने वाली थी और अवनि भी इसके लिए तैयार थी. सुबह 10 बजे तक सभी अपनी अपनी ट्रेनिंग पैर लगे रहे. पब और उसकी 10 पत्निया तो डायन में बैठे रहे. पैर गुरु, कामिनी और जुली ने मिल कर अवनि की हालत पतली कर दी. मणि जी की दी हुयी पावर से उसकी सहन शक्ति बाद गयी थी. फिर भी इन तीनो ने अवनि की हालत ऐसी कर दी की अवनि का बेस से हॉल तक आना भी मुश्किल हो गया. काजल ने सभी का नास्ता तैयार कर लिया था. कामिनी ने सभी को बर्फ सर्वे किया और फिर खुद भी साथ में बेथ गयी. बर्फ के बाद पब जुली ने मिलने बेस में चला गया. तो जुली ने बताया की वो सब लड़किया बहुत खुश थी कल शॉपिंग करने से. तो पब ने जुली को बोलै की आज तुम सभी लड़कियों को ले कर सिटी चली जाओ. और जिसको जो शॉपिंग करनी है करवाओ. फिर सब को मूवी दिखा देना मेने **** मॉल 6 बजे वाले शो की सभी टिकिट्स बुक कर दी है. लंच और डिनर भी ये जहा चाहे वह करवाना यदि अपने होटल में जाना हो तो मुझको बोल देना मैं दीपक को बोल दुगा. जुली इन सब लड़कियों को लग्न चाहिए की ये भी नार्मल लड़कियों के जैसी hi है ये भी वो सब कर सकती है जो और सभी लोग करते है. इनसे पूछना यदि किसी और को कुछ और भी करना हो तो… मैं इनकी ख़ुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार हु. यदि ये किसी से शादी करके घर बषाना चाहती हो तो वो भी हम करेंगे. इन लड़कियों की ख़ुशी hi मेरे लिए सब कुछ है. ये हमारी गुलाम नहीं है. और न hi मैं किसी को अपना गुलाम बना कर रखना चाहता हु. जुली भी पब की बात से बहुत खुश हो गयी. और सभी को आज के प्रोग्रमम के बारे में बता दिया. फिर क्या था बेस में हंगामा सा हो गया सब जल्दी -2 तैयार होने लगी. फिर पब ने जय और हमक को नए आये सभी लोगो का डायन रखने का बोलै और फिर से आ कर डायन में बेथ गया. इस बार सभी का 11 ऍम से 2पं तक फिर एक ट्रेनिंग सेस्सों चला. पैर गुरु और कामिनी ने अवनि को 3 बजे छोड़ा. और फिर लंच के बाद कुछ रेस्ट थें फिर से श्याम 5पं से 9पं तक का एक सेस्सों था. बूत अवनि रात के 11 बजे तक लगी रही. अवनि को गुरु और कामिनी ने न केवल फिजिकल ट्रेनिंग, बल्कि फाइटिंग स्किल्स, तांत्रिक मंत्रो का ज्ञान, योग, डायन लग्न सभी कुछ सिखाया था. अब टाइम काम था तो थोड़ा -2 सभी कुछ सीखा रही थी. ताकि यात्रा में पब की हेल्प कर सके.
 
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