MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 39 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

थैंक्स बीआरओ फॉर लवली कमेंट

यस भाई मानव की तरह जीना है तो चुनौती भी आम मानव के जैसी hi होगी.

एक्चुअल में ये पड़ाव त्रिकाल ने उन देवता और अधूरी के लिए बनाया है जो जनम से hi शक्तियों के साथ जेते है.

त्रिकाल की नजर में एक मानव तो इस चक्रवेव में घुस hi नहीं सकता था. पैर त्रिकाल की ये गलत फेमि पब की पावर्स को देख कर हो गई थी. ये चीज त्रिकाल और संभु की एक बतलाप में दिखाया था
 
अपडेट 251

बहुत देर से पेड़ के निचे बैठे पब और अवनि को अब कुछ रहत लग रही थी. पैर अब रात होने लगी थी. और रात होने के साथ साथ ठण्ड भी बढ़ने लगी थी. जहा ये दिन में सूरज की गर्मी से परेशां थे तो अब इनको ठण्ड ने परेशां किया हुआ था. एक तो पेट खली फिर थकन और फिर ठण्ड का कहर.. हर बीतते पल के साथ इनकी परेशानी बाद रही थी.

रात पूरी तरह से हो चुकी थी. और ठण्ड ने भी अपने पुरे पेअर पशर लिए थे. दोनों वही पैर एक दूसरे से चिपक कर बैठे थे. पैर फिर भी गर्मी नहीं मिल प् रही थी. पैर दोनों की वाष्ण जरूर भड़कने लगी थी. जिस पैर काबू पाने के लिए दोनों को अलग होना था पैर वो भी नहीं कर सकते थे. तो दोनों में बहुत सोच केर फेशला लिया की किसी घर में चला जाये शायद वह कुछ रहत मिले.

दोनों एक छोटे से घर के बहार खड़े थे. पब ने ठण्ड से सुकड़ते हुए भी मजबूती से अपनी तलवार को पकडाहुआ था. और अवनि को अपने पीछे छुपा रखा था. पब ने धिरे से उन घर का गेट खोला. और अंदर झक कर देखा की कोई है या नहीं. पैर जब उसको कोई नहीं दिखा तो वो अवनि को साथ ले कर अंदर चला गया. फिर धिरे -2 पूरा घर देखा पैर वह कोई नहीं था. ये एक 1भक फ्लैट जैसा छोटा घर था. और 1 मंजिल का hi था. जब घर में कोई नहीं मिला तो दोनों ने रहत की सास ली. अंदर बहार के मुकाबले ठण्ड बहुत काम थी. भूखे और प्यासे दोनों घर क ीक कोने में लेट गए. उस कोने में हवा बिलकुल भी नहीं लग रही थी.

लेते लेते hi सुबह हो गयी नीड तो आयी नहीं ठण्ड, भूख और प्यास के कारन. सुबह जब सूरज निकला तब मौसम थोड़ा गरम हुआ तो दोनों को नीड आ गयी पैर कुछ गान्तो के बाद hi इनकी नीड भी खुल गयी. गर्मी जो बाद गयी थी. दोनों अभी पशीने में तर थे. अभी दोनों को बहुत कमजोरी फील हो रही थी. पैर आगे बढ़ना था. तो दोनों में काफी देर सोचने विचरने के बाद फेशला किया की पेड़ो से फलो को तलवार से काट कर खाया जाये हो सकता है की वो जहरीले न हो. देखने में तो वैसे भी जेहरीले नहीं लग रहे थे.

दोनों किसी तरह हिम्मत जूता कर बहार आये और एक अमरुद के पेड़ के पास खड़े हो कर अमरुद तोड़ कर तलवार से काट कर पहले सुंघा. सुघने में भी ठीक लगा तो पहले पब ने खाया और फिर अवनि में भी. पैर दोनों को कुछ नहीं हुआ तो दोनों बहुत खुश हुए. और फिर तो खाने में जुट गए. पेट भर खाने के बाद दोनों पानी की तलाश में चल दिए तो दोनों को एक तालाब मिल गया. शांत और साफ़ पानी का तालाब था. वह पैर नाहा दो कर फ्रेश हो कर दोनों को एक नयी शक्ति मिल गयी. अब उनको आगे का रास्ता खोजना था.

आज पुरे 3 दिन हो गए थे दोनों को उन नगर में, जहा जो मिलता खा लेते और जहा पानी मिलता अपनी बोत्तल भर लेते. पैर अभी तक उनको बहार जाने का रास्ता नहीं मिला था. रात में किसी भी घर में आग जला कर चुप कर सो जाते तो दिन में पेड़ो के निचे छाया में षाले हुए अपनी मंजिल की तलाश करते. न तो कोई पावर थी और न hi दोनों को अपनी मंजिल का पता मालूम था. तो बस ीदार से उदार भटकते फिर रहे थे.

अवनि – पब और कब तक ऐसे hi भटकते रहेंगे यार यहाँ से बहार जाने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है.

पब – अवनि भटकना तो पड़ेगा hi और कोई राष्ट भी नहीं है हमारे पास, बिना पावर्स के पाश गए है यहाँ पैर. वैसे एक बात है अवनि त्रिकाल है बहुत शातिर, क्या प्लानिंग से सब कुछ बनाया है. सच में इस चक्रवेव से निकलना बहुत कठिन है.

अवनि – तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो??

पब – देखो सबसे पहले वो जेह्रीला जंगल मिला. उस जंगल को पार करने के लिए हवा में उड़ कर hi जाना था. और ये काम कोई भी मानव नहीं कर सकता. हाँ दानव और देवताओ के पास ये पावर होती है. तो फिर वो जहरीला बैग, कोई भी ये hi सोचेगा जैसे की पहले हवामे उड़ कर जांगले पार किया है वैसे hi ये भी पार होगा. और कोई भी खुद जहर खाने की भूल नहीं कर सकता.

अवनि – हाँ ये तो है, कोई भी खुद से जहर नहीं खता. वो तो तुम्हारी चाँद हंस तलवार ने जहर ख़तम कर दिया नै तो हम दोनों मरे जाते.

पब – हाँ अवनि और यदि तुमने खाने की जींद न की होती तो मैं उस फल को काट कर खता भी नहीं. तुम्हारे प्यार ने hi उस टाइम मुझको बचा लिया.

अवनि – मेरे नहीं हमारे प्यार ने हम दोनों को बचाया है. और ये प्यार hi हमको इस लड़ाई में जिताएगा भी.

पब – हाँ ठीक कहा, पैर सोचो फिर वो तांत्रिक जो साधु के भेष में लोगो के मंद को अपने कण्ट्रोल में कर लेते है. कोई भी देवता या मानव उनसे इतनी आसानी से नहीं बच सकता. फिर साले सब एक साथ मिल कर मरने की कोसिस करते है.

अवनि – पैर उस टाइम तुमको क्या हो गया था, वैसे तो तुमको सभी मन्त्र और तंत्र आते है. पैर मंत्रो का जवाब देने की जगह तुम बचते फिर रहे थे.

पब – बताया तो था तुमको तुम्हारी सभी सोटानो की एनर्जी बहुत डाउन हो गयी थी. तब मुझको अपनी hi एनर्जी से उन सभी से लड़ना पड़ा और एक दानव बनना पड़ा.

अवनि (झूठे गुस्से से) – पंकज??? उनमे एक मेरी माँ है सौतन नहीं है वो मेरी बहाने है. समजे..

पब – तो क्या हुआ अब कुछ hi दिनों में सौतन hi हो jayegi..hahahaha.. फिर तुम भी अपनी माँ के साथ मेरी हो जाओगी..

अवनि – तुमको तो यहाँ भी मस्ती सूज रही है. गंदे कही के..

पब – यहाँ कहा मस्ती तो बीएड रूम में होगी जब तुम और सविता दोनों एक साथ नंगी मेरी बांहो में होगी…

अवनि को ये सुन कर बहुत शर्म आती है. तो वो झूठे गुस्से से चीची – पंकज.. गंदे .. जाओ मैं तुमसे बात नै करती.

पब – सॉरी सॉरी.. यार प्लीज गुस्सा मत हो में तो मजाक कर रहा था. (बात को बदलते हुए) देखो न हम यहाँ इस मानव नगरी में फास गए है और कोई रास्ता भी नहीं मिल रहा.

अवनि – मेने कुछ सोच है यहाँ से निकलने के लिए..

पब – तो ाताओ न 3 दिन से तो बोली नहीं और अभी भी नहीं बोल रही..

अवनि – देखो यहाँ पैर ीदार उदार भटकते रहने से कुछ नहीं होगा. हमको एक hi दिशा में आगे बढ़ते रहना होगा. तो जाहिर सी बात है एक टाइम हम इस नगर की बाउंड्री तक पहुंच जायेगे. और फिर बाउंड्री को छोड़ेगे hi नहीं, बाउंड्री के सहारे सहारे षाले हुए हमको बहार जाने का मार्ग मिल जायेगा, ठीक वैसे hi जैसे हमने इस छवरविएव में गुस्ते टाइम किया था.

पब – बहुत बढ़िया… ये बात मेरे मंद में पहले क्यों नहीं आयी?? अब हमको ये hi करना है.

अवनि – आती कहा से तुम्हारा मंद डर्टी हो गया है. उसमे केवल गन्दी गन्दी बाते hi आती है. तो ये सब कहा से आएगा..

पब - क्या कहा मेरा मंद डर्टी है, रुक आज तुझको डर्टी कर देता हु.

ये बोल कर पब अवनि की और भागता है तो अवनि भी आगे भागने लगती है. दोनों ऐसे hi मस्ती मजाक करते हुए आगे बढ़ने लगते है. पैर अब दोनों को एक दिशा मिल चुकी थी. तो जोश भी नया पैदा हो गया था. दोनों तेज़ी से एक hi दिशा में षाले जा रहे थे. 3 दिनों में दोनों को गर्मी सहने की आदत हो गयी थी.

5-6 हॉर्स षाले रहने के बाद उन दोनों को नगर की बाउंड्री नजर आ hi गयी. दोनों ख़ुशी से उछाल पड़े. अब दोनों को मंजिल का रास्ता दिखने लगा था. तो दोनों अपनी मांजी की और चल दिए. बाउंड्री के सहारे चलते हुए जब रात होने लगी तो दोनों ने पास के घर में hi अपना डेरा जमा लिया. और नेक्स्ट डे सूरज के निकलने के साथ hi दोनों फिर से सफर पैर निकल पड़े. ये टाइम दोनों को पेडल चलने के लिए सबसे अच्छा लगता था. इस टाइम न गर्मी होती थी और न hi ठण्ड. तो दोनों तेज़ी से आगे बढ़ने लगे. रस्ते में एक जगह पानी मिला तो डेली के कामो से भी निपट लिए थे.

4-5 हॉर्स चलने के बाद दोनों को एक गेट दिखाई देने लगा दोनों ख़ुशी से डांस करने लगे. पैर ऐसे hi गेट पैर पहुंचे दोनों की ख़ुशी कटा हो गयी. उस गेट को बंद किया हुआ था. और वह पैर एक nakabposh(NP) बैठा हुआ था. दोनों जैसे hi गेट की तरफ बाद उसने दोनों को रोक दिया.

नप – रुको कहा जा रहे हो…

पब – हमको यहाँ से बहार जाना है. तो इस गेट से बहार जा रहे है.

नप – नहीं इस गेट से तुम लोग बहार नहीं जा सकते. यदि तुम्को इस मानव नगरी से बहार जाना है तो तुमको सिद्ध करना होगा की तुम सच में मानव हो. या मानवो के बारे में बहुत कुछ जानते हो.

पब – हम सच में मानव hi है. तुमको देखने से लगता है क्या की हम लोग मानव नहीं है.

नप – हाहाहाहा ये तो है hi मानव नगरी यहाँ आ कर देवता भी मानव बन जाते है और दानव भी और सब तुम्हारे जैसे मानव hi दिखाई देते है.

पब – तो फिर बताओ हमको क्या करना होगा की तुम हमको यहाँ से बहार जाने का राष्ट दे सको..

नप – देखो लड़के मानव के पास hi गयां का बन्दर है तो तुमको मेरे कुछ सवालों का जवाब देना होगा..

पब – कैसे सवाल??

नप – वो सवाल इनके जवाब मानव hi जानते है या मानवो को जानने वाले जानते है. और मानव नगरी से मानवो को जानने वाला hi बहार जा सकता है.

पब – ठीक है आप पूछिए मैं जवाब देने को तैयार हु.

नप – एक बार और सोच लो, कियोकि यदि कल का सूरज निकलने से पहले तुम जवाब नहीं दे पाए या गलत जवाब दिए तो फिर तुम कभी यहाँ से बहार नहीं जा पाओगे.

पब कुछ देर सोच कर बोलै – ठीक है मुझको मंजूर है वैसे भी तो यहाँ पैर फास hi गए है हो सकता है की जवाब दे कर बहार जा सके.

नप – तो सुनो तुमको 5 सवालो के जबाव देने है –

  • देवी तारा और रानी तारा में क्या अंतर है??
  • तुमने विज्ञानं पड़ा होगा, रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) की सबसे छोटी यूनिट है – परमाडु (एटम), और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की सबसे छोटी यूनिट है – कोशिका (थे सेल), बताओ दोनों में में कोण छोटा है??
  • तुम मैथ भी जानते hi होंगे – मैथ में 2+2 = 4 और 2क्ष2 = 4 होता है, “+” की जगह “क्ष” होने पैर भी जवाब शामे है. जबकि और किसी भी अंक (नंबर) के साथ ऐसा नहीं होता, 3+3=6, 3क्ष3=9… बताओ क्यों??
  • तुम दोनों भारत से हो न?? तो तुम जानते होंगे की भारत में एक विद्वान थे – चाणक्य, चाणक्य ने तक्षशिला से अपनी शिक्षा ले थी. और यदि तुमको वह जाना हो तो तुमको क्या करना होगा.
  • अंतिम सवाल तुम्हारे जीवन से जुड़ा है मैं जनता हु तुम्हारी 12 पत्निया है और अब इस लड़की से भी शादी करना चाहते हो, तो मैं ये जानना चाहता हु की तुम अपनी किस पत्नी को सबसे जयादा प्रेम करते हो? और क्यों??
इस आदमी के सवालो ने दोनों को हिला कर रख दिया था दोनों को लग रहा था की ये सभी सवालो को जानते है. पैर सटीक ाँस फिर भी मंद में नहीं आ रहा था. अभी तो दिन के करीब 12 hi बजे थे. तो दोनों के पास करीब 16 हॉर्स थे. तो दोनों एक साइड में बेथ कर उन क्यू. की नस. सोचने लगे.
 
भाइयो आप लोग भी बताइयेगा जरूर. मैं जनता हु की आप सभी बहुत पड़े लिखे लोग है तो आप लोगो को ज्यादा प्रॉब्लम नहीं होगी ाँस. देने में. पैर मेने बहुत सी स्टोरी में वो दरम और नैतिकता के क्यू. hi पड़े है तो मेने यहाँ कुछ हैट कर क्यू पूछे है. ताकि आप लोगो को कुछ नए क्यू. मिले.

आप सभी के आंसर का इन्तजार रहेगा ............. वेटिंग.......
 
अपडेट 252

संभु अपनी हार और गुरु की गलियों से पगला गया था वो किसी भी तरह बदला लेना चाहता था. पैर उसके पास वह की कोई इनफार्मेशन नहीं थी. उसके एक दूसरे no. से किसी को कॉल करके पता भी किया. पैर जो उसने सुना उसे उस बात पैर यकीं नहीं हुआ था. उसको पता चला की पब की फॅमिली के सभी मेंबर विदेश जा चुके है. कहा गए है ये किसी को नहीं पता. पैर संभु को इस बात पैर यकीं नहीं था.

अभी संभु ने अपने 2-3 आदमियों को हवेली भेजा था सच का पता करने के लिए. और वो उनके कॉल का hi वेट कर रहा था. वो सच जानने को बहुत बेचीं था. कियोकि सदी उन सभी का पता नहीं चला तो वो अपने गुरु कैद ऑय हुए काम को कैसे पूरा करेगा. और त्रिकाल ने संभु को कोई काम दिया हो और संभु ने उसको न किया हो ऐसा तो हो hi नहीं सकता था.

यहाँ जब संभु के आदमी हवेली पहुंचे तो दानव सेना की स्पाई गर्ल्स ने गुरु और जुली को बताया की 3 लोग हवेली के बहार से अंदर झाकने की कोसिस कर रहे है. और हवेली में घुसने की भी कोसिस कर रहे है. गुरु समाज गयी की ये उसके दुसमन के hi आदमी है जो दोबारा हमला करने से पहले यहाँ का हाल जानने आये है. इसलिए गुरु ने उन लड़कियों को बोल दिया की उन पैर दूर से hi नजर रखे और वो जो करते है करने दे.

वो लोग हवेली के चारो और गुमे और फिर हवेली में घुस गए. हवेली को अच्छे से देखा. पैर कुछ नहीं मिला अपनी पूरी कोसिस करने के बाद वो लोग वह से गाओं की और चले गए और गाओं वालो से पूछने लगे. पैर वह भी लोगो ने ये hi बताया की हवेली पैर कोई नहीं है हवेली के सभी लोग घूमने गए है.

अपने आदमियों की बात सुनने के बाद संभु का दिमाग ख़राब हो गया. बहुत देर सोचने के बाद संभु से फिर से उन आदमी को hi फ़ोन मिला कर कुछ करने को बोलै. एक तो अदिति के घर से चले जाने से संभु दुखी हो गया था. वो उसकी जान थी. उसके घर में होते हुए भी वो अपनी जान से प्यारी बेटी को खुद से दूर प् कर दुखी था. और फिर यहाँ पब की तरफ से भी उनको हर बार शिकश्त hi मिल रही थी.

अदिति के जाने पैर भी संभु ये नहीं समाज पाया की अदिति अब संभु से नफरत करती है. उसे उसके सच का पता चल चुक्का है. समझता भी कैसे वो अपनी बेटी को हद से ज्यादा प्यार जो करता था. उसके दिल का सुकून थी अदिति. त्रिकाल के बाद अदिति hi थी जिसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहता था संभु. और अदिति भी पहले संभु यानि अपने पापा को अपना भगवन मानती आयी थी. अदिति का भ्रम तो सोनल के कारन टूट चुक्का था. पैर संभु आज भी पहले की तरह अपनी बेटी को चाहता था. और अदिति ने जाते हुए भी बुल्कुल नार्मल बेहवे hi किया था. अदिति ने ये hi बोलै था की न्यूज़ चेंनल ने उसके काम से खुश हो कर उसको साउथ का हेड बना दिया है. और अब वह की टीम को वो hi लीड करेगी. अपनी बेटी की तैराकी के खातिर संभु चुप रहा गया. वो तो पहले भी नहीं चाहता था की अदिति कोई भी जब करे वो उसको अपनी राजकुमारी की तरह रखना चाहता था. पैर ादितीत की जींद के कारन hi उसको अदिति को नौकरी काने की परमिशन देनी पड़ी थी. और अब उसकी तैराकी के लिए उसे बहार जाने की भी परमिशन देनी पड़ी.

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पब और अवनि दोनों जाने बहुत देर से उन सवालो के बारे में hi बाते कर रहे थे. उनके मोबाइल भी ऑफ था तो वह से हेल्प मिलने का कोई चांस नहीं था. हर सवाल को बहुत -2 देर तक सोच कर दोनों ने एपनिया नस सेट कर लिए थे. पैर सबसे ाशन दिखने वाला लास्ट सवाल hi बचा था. और इन सवाल पैर आते hi अवनि चुप हो गयी.

पब – अवनि अब बस ये लास्ट क्यू. बचा है. की मैं किस्से सबसे ज्यादा प्यार करता हु?

अवनि – ये तो तुम hi जानते होंगे न की तुम किस्से सबसे ज्यादा प्यार करते हो. मैं कैसे बता सकती हु.

पब – यार मेने तो आज तक सोचा hi नहीं की मैं किस्से सबसे ज्यादा प्यार करता हु. मेरे लिए तो तुम सब एक जैसी हो. सब मेरे दिल का एक हिस्सा हो. वैसे यदि सच कहु तो मैं तुम सबसे ज्यादा अपनी माँ को प्यार करता था. बूत सवाल ये है की मैं किस पत्नी को सबसे ज्यादा प्यार करता हु.

अवनि – हम्म तो बताओ कोण सबसे ज्यादा करीब है तुम्हारे???

अवनि का दिल भी जोरो से धड़क रहा था. पब किसका नाम लेगा. कोण है जो उसके दिल के सबसे नजदीक है. ऐडा तो कहती है की पब मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करता है. मैं उसकी आत्मा से बस्ती हु. क्या सच में ये मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करते है?? आज ये सच भी सामने आ hi जायेगा. हे भगवन पता नहीं कोण है जो इनके सबसे नजदीक है. मैं तो ये दुआ भी नहीं कर सकती की मैं hi हु. काश माँ इनके सबसे नजदीक हो. पैर ऐडा को तो इनको बहुत चाहती है. काश वो हो. पैर ये सलोनी को ले कर hi जाते है हर जगह कही सलोनी तो इनके दिल में नहीं?? पैर ये गुरु दीदी की बात कभी नहीं टालते. हर काम उनसे पूछकर hi करते है. ऊऊफफफफफफ ये बड़ा hi अजीब सवाल है. ये मुझको पागल कर देगा. मैं नहीं सोच सकती की कोण इनके सबसे नजदीक है. कोण है जो इनके दिल में बस्ती है.

अवनि अपनी सोच में गम थी तो पब की सोच का तो कोई अंत hi नहीं हो रहा था. कभी किसी पत्नी के बारे में सोचता तो कभी किसी, कभी किसी के साथ बिताये हसीं लम्हे याद आते तो कभी किसी और के साथ, सभी के बारे में सोच सोच कर पब को उन सभी की याद भी आने लगी. उसका मन उन सभी से मिलने को करने लगा. पैर क्या करे मज़बूरी थी. मिलना तो दूर की बात है, आवाज भी नहीं सुन सकता था. कभी सोचता की कैसे गुरु एक गुरु की तरह उनका मार्ग दर्शन करती आयी है तो कभी सोचता की सविता कैसे पत्नी से माँ और माँ से पत्नी दोनों की तरह उसका डायन रखती है. कभी कामिनी की गम्भीरता में छुपे उसके उस सेक्सी और चुलबुले फेस को याद करता, तो कभी ऐडा की वो दिलकश अदाए उसको पागल करने लगती. कभी कोई तो कभी कोई बस उसके मंद में उसकी पत्निया और उनकी यादे hi घूम रही थी.

जब काफी देर तक सोचते रहने के बाद भी पब कुछ नहीं बोलै तो अवनि और भी बेचें हो ुधि. उसने पब को हिल्या और फिर पूछा – क्या हुआ तुमने अभी तक जवाब नहीं दिया. कुछ तो बोलो रात हो चुकी है. हमको उस नप को जवाब बताने है और यहाँ से बहार जाना है.

पब – अवनि में कुछ भी तय नहीं कर प् रहा हु. मेरे लिए ये तय करना बहुत कठिन है.

अवनि – अच्छा चलो मैं कुछ हेल्प करती हु. यदि तुम ये नहीं सोच प् रहे की तुम किस्से सबसे जयादा प्यार करते हो तो ये सोचो की तुमको गुस्सा किस पैर सबसे ज्यादा आता है. तुम किस्से नफरत करते हो.

पब (थोड़े गुस्से में) – तुम पैर आता है गुस्सा… पागल वाली बात मत करो यार, तुमको लगता है की मैं अपनी किसी भी पत्नी से गुस्सा हो सकता हु. तुमने मुझको किसी पैर भी गुस्सा करते आज तक देखा है??

अवनि – हाँ ये भी है. पैर कुछ तो करना hi होगा न. (कुछ सोच कर) आईडिया…. एक काम करो अपनी आखें बंद करके ध्यान में बैठो. और फिर अपना मन बिलकुल शांत कर लो. और जब मन शांत हो जाये तो फिर मन में झको की कोण है इस दल में.

पब कुछ सोच कर – हम्म आईडिया तो अच्छा है. चलो एक बार तरय करता हु.

फिर पब अपनी आखें बंद करके धयान में बेथ जाता है. और कुछ hi देर में अपने मन को भी शांत कर लेता है. धयान लगाना तो आता hi था उसको, फिर जैसे hi वो अपनी प्रिये पत्नी के बारे में सोचता है तो उनको वो स्कीन याद आता है जब उसकी सभी पत्निया उनके गले लगे हुयी थी उन man-mutav के बाद.

वो ये क्रिया कई बार करता है पैर हर बार उसको अपनी सभी पत्निया hi नज़र आती है. हार कर जजलाता हुआ ुध जाता है और बोलै – अवनि ये आईडिया भी काम नहीं कर रहा कुछ और सोचो..

अवनि – मैं क्या सोचु, ये तो तुमको तय करना होगा की तुम्हारे दिल के करीब कोण है. किसके साथ तुमको ज्यादा अच्छा लगता है.

पब अवनि में बहुत देर से ये hi सोच रहा हु और देखो आधी रात बीत चुकी है. पैर अभी तक मैं किसी नतीजे पैर नहीं पहुंच पाया हु. मेरे लिए ये तय करना सम्भब नहीं है.

अवनि – फिर क्या करे क्या अब हमको हर्षा के लिए यहाँ पैर hi रहना होगा??

पब (कुछ सोचते हुए बोलै) – अवनि क्यों न एक बार उस नकाब पॉश से hi बात करे. उसे रिक्वेस्ट करे की वो ये क्यू. बदल दे. या केवल 4 ाँस देने पैर hi हमको बहार जाने दे.

अवनि – हम्म तुम ठीक कहा रहे हो एक बार तरय करके देखते है यदि वो नहीं मन तो फिर कुछ और सोचेंगे.

पब – हाँ हम पहले उसको उन 4 कका ाँस देंगे. फिर उसे रिक्वेस्ट करेंगे. वैसे भी एग्जाम में भी 80% मार्क पैर पास हो जाते है. और हो सकता है की वो ज्यादा कुछ नहीं तो क्यू hi बदल दे.

अवनि – हाँ चलो चलते है उसके पास..

पब और अवनि ुधा कर उसके पास चले जाते है. और फिर पब बोलता है.

पब – hello सर.. हम आपके ाँस देने को तैयार है.

नप – तो बताओ, पैर एक बार और सोच लेना गलत ाँस. बहार जाने के सरे रस्ते बंद कर देगा.

पब – हाँ हमने सोच लिया है. आप ाँस सुनिए –

  • देवी तारा माँ काली या कहु माँ गोरी का एक रूप है. उनकी एक कला का नाम है. जबकि रानी तारा हमारे सत्यवादी राजा हरिश्चंद की पत्नी का नाम है. और इनकी कथा के बिना कोई भी देवी का जागरण पूरा नहीं होता.
  • परमाणु कोशिका से छोटा होता है. कई परमाणु का समहू एक कोशिका (सेल) को बनता है.
  • गुना करने का अर्थ है पहले नंबर को दूसरे नंबर जितनी बार जोड़ना. मतलब 2 को 2 बार जोड़ना hi 2 को 2 से guna(x) करने के बारे बार है. जबकि 3 को 3 बार जोड़ना 3 को 2 बार जोड़ने के बराबर नहीं होता.
  • तक्षशिला जाने के लिए सबसे पहले मुझको पाकिस्तान गोवत से परमिशन लेनी होगी. मतलब पाकिस्तान का वीसा अप्लाई करना होगा. कियोकि आज तक्षशिला पाकिस्तान का एक सहर है.
पब 4 ाँस देने के बाद चुप हो गया. पब के चुप होते hi नप बोलै – बहुत खूब सभी जवाब एक दम ठीक है. अब अपना अंतिम जवाब दो और यहाँ से चले जाओ..
 
यस बीआरओ 0 भी वैसा hi होता है जैसा की 2 इस कंडीशन में. बूत सवाल ये नहीं है की और कोण ऐसा होता है सवाल है की इनके अलावा किसी और के साथ ऐसा क्यों नहीं होता... और एक बात भाई 0 अकेला किसी भी नंबर में नहीं आता. जब हम काउंटिंग सीखते है तो वो भी 1 से hi सुरु होती है. 0 अपने आप में बहुत कुछ है और कुछ भी नहीं...................

पैर अपने सोच सच में बहुत hi अच्छा आज तक मुझको ये जवाब किसी ने नहीं दिया. मेने ये क्यू बहुत से लोगो से पूछा है आज तक.. रियली ग्रेट थिंक.....
 
भाई लोगो टाइम ख़राब चल रहा है. जॉब में बहुत सरे प्रॉब्लम एक साथ आ गए है. मंद स्टोरी लिखने के लिए सेट hi नहीं हो पता... पता नहीं कब जॉब फिर से नार्मल होगी. पैर जब भी होगी तब स्टोरी को आगे बदउगा. मेरा बहुत मन है अपनी स्टोरी को कम्पलीट करने का. पैर कोरोना ने सब कुछ हिला कर रख दिया है.

केवल 10-15 मं के लिए आता हु साइट पैर सोने से पहले मंद फ्रेश करने को और फिर पूरा दिन जॉब ले कर रखती है
 
अपडेट 253

पब – सर मैं अंतिम सवाल का जवाब नहीं दे सकता. कियोकि मैं अपनी सभी पत्नियों को सामान रूप से hi प्यार करता हु. मेरे लिए वो सब एक जैसी hi है. मेरे लिए वोन ा बड़ी है और न छोटी है. सब केवल मेरी पत्नी है. मेने बहुत सोचा पैर मैं इसके जवाब तक न पहुंच सका. क्या आप हमारी एक मदत करेंगे?? क्या आप इसके बदले कोई और सवाल पूछने की कृपा करेंगे??

नप (मुस्कुराते हुए) – नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता और न hi इसकी कोई जरुरत है. पैर तुम बहार जा सकते हो..

पब और अवनि चोकते हुए – पैर कैसे?? जब आप सवाल नहीं बदल रहे तो कैसे?? क्या आप 4 ाँस में hi गेट खोल रहे है??

नप – नहीं तुमने 5 के 5 जवाब एक दम ठीक दिए है. इसलिए खोल रहा हु.

पब और अवनि नप की बात सुन कर सर खुजाने लगते है. उनके समाज hi नहीं आया की उन्होंने 5व जवाब कब दिया??

नप – इतना सोचने की जरुरत नहीं है. तुम्हारे 5तह सवाल का जवाब ये hi है की तुम अपनी सभी पत्नियों से सामान hi प्यार करते हो. और ये 100% सच है. और तुमने सभी सवालो के जवाब ठीक दिए है. इसलिए तुम जा सकते हो.

नप की बात सुन कर दोनों ख़ुशी से झूम ुढे. अवनि तो इतनी खुश हुयी की वो पब के गले लग गयी और उसकी आखों में 2 बून्द आशु भी आ गए. जिस सवाल के किसी भी जवाब को सोच कर hi उसका दिल धड़क जाता था. उसको बेचैनी हो रही थी की इसका जवाब क्या होगा. और फिर जब पब ने क्यू. बदलने की बात करि तो दिल टूट सा गया उसको लगा की वो फिर कभी इसका जवाब नहीं प् सकेगी की उसका होने वाला पति किसको सबसे ज्यादा प्यार करता है. इस सवाल के जवाब में पब जिसका भी नाम लेता उसका और सभी के लिए दिल टूटना तय था. उसको इस बात की उम्मीद hi नहीं थी की वो सभी से एक जैसा hi प्यार करता होगा. इस जवाब ने उसको वो ख़ुशी दी थी जो शायद पब का उसका नाम लेने पैर भी उसे न मिलती. कियोकि तब उसको अपनी माँ सविता, कामिनी, ऐडा और बाकि सभी के लिए बुरा जरूर लगता.

पब के दिल की बेचैनी ख़तम हो गयी थी. उसको भी ये सुन कर बहुत सकूँ आया था. दोनों एक दूसरे से चुके कब किश करने लगे दोनों को पता hi न चला. और दोनों का किश जब टुटा जब नप में उनको पुकारा.

नप – क्या बात है ये जगह ज्यादा पसंद आ गयी है क्या जो गेट खुलने के बाद भी नहीं जा रहे हो. यदि ये गेट बंद हो गया तो फिर में इसको खोल नहीं पाउगा फिर साडी जिंदगी यहाँ पैर hi रहना और ये सब करते रहना.

नप की बात सुनके दोनों झटके से अलग हुए और ऐसे भागे और गेट को पास किये जैसे गाढ़े के सर से सींग गायब हुए हो.

जैसे hi दोनों गेट के बहार आये दोनों को फिर झटका लगा और पब एक बार फिर गिर गया. और बेहोश हो गया. जब होश में आया तो वो अपने पुराने रूप में था. मतलब उसकी पावर लूट आयी थी. ये देख कर तो दोनों बहुत खुश हो गए. दोनों थड़ा hi आगे बड़े थे की आवाज हुए – “दूसरा चरण समाप्त”

ये आवाज सुनते hi दोनों की ख़ुशी और भी बाद गयी. दोनों वही पैर हरी घास पैर लेट गए. रात करीब 2 बजे थे. तो दोनों में hi वह पैर hi सोने का फेशला किया और दोनों सो भी गए. सुबह जब आखें खुली तो सूरज निकल चुक्का था. तो दोनों अपने नित कर्मो से फ्री हो कर बेथ गए धयान में अपनी लाइफ एनर्जी फुल करने को. कुछ देर डायन में बैठने के बाद पब ने मन hi मन गुरु को पुकारा. गुरु भी पब की आवाज अपने मन में सुन कर ख़ुशी से झूम ुधि. 7-8 दिनों के बाद आज पब ने उनसे बात की थी.

दोनों लोग अपने अपने साथ हुयी घटनाओ को बताने लगे. जब पब को पता चला की संभु ने उसके पीछे क्या किया है तो उसको संभु पैर बहुत गुस्सा आया. और जब गुरु ने सुना की उस टाइम उन लोगो की वजह से पब दुसमन के सामने कमजोर पद गया था. और अवनि ने hi उस टाइम पब को बचाया तो उसे अवनि पैर बहुत प्यार आया और इस बात का दुःख भी बहुत हुआ की उनकी वजह से पब कमजोर पद गया. फिर गुरु ने पब को बताया की वो सब अब दानव बेस में hi रहा रहे है. तो पब को पहले तो बुरा लगा की उसकी पत्निया ऐसे दर कर चुप गयी है पैर फिर बात की घमिरता को समझते हुए वो चुप हो गया.

पब ने जब गुरु को मानव नगर के बारे में बताया तो गुरु को भी अचम्भा हुआ की पब की शक्तिया कहा चली गयी थी. गुरु ने इस बात को पता करने के लिए गुरूजी से बात करने को बोलै. फिर गुरु के मन में अवनि की आवाज सुनाई दी जो इतनी देर से और सभी से बात कर रही थी. अवनि से बात करने पैर गुरु को उन सवालो और उनके जवाबो के बारे में पता चला तो गुरु भी खुश हो गयी. अवनि ये सब पहले hi सभी को बता चुकी थी. और गुरु को बताते हुए उसकी ख़ुशी अलग hi जलक रही थी. तो गुरु भी इस बात से बहुत खुश थी की उनका पति सभी से सामान रूप से hi प्यार करता है.

गुरु से बात करने के बाद पब ने मणि जी से बात की तो उन्होंने बताया की तुम्हारी शक्तिया कभी भी कही नहीं जा सकती जब तक तुम्हारी सभी पत्निया और तुम जिन्दा हो. हाँ त्रिकाल ने वह माया का कुछ ऐसा जाल बिछाया होगा की तुम्हारी शक्तिया तुम्हारे अंदर hi बंद हो गयी होगी. किसी की शक्तियों को बंदना बहुत hi बड़ी बात है. पैर त्रिकाल के पास मौजूद पावर्स को देखते हुए त्रिकाल के लिए ये बड़ी बात नहीं थी.

सभी से बात करते करते दोपहर हो गयी. दोनों ने कहा मौजूद पेड़ पैर से फलो को तोड़ कर खा लिया और आगे की और चल दिए. जैसे hi वो थोड़ा आगे गे ीक बार फिर आवाज हुए – “ तीसरा चरण प्रारम्भ” थोड़ा और आगे जाने पैर फिर एक बार एक गेट नजर आया. उस गेट को देख कर दोनों एक पल के लिए चौक गए. पैर फिर जल्दी hi नार्मल भी हो गए वो जानते थे की वो जिस यात्रा पैर है वह ऐसी चीजे तो मिलेगी hi. और अभी तक वो बहुत कुछ देख भी चुके थे.

वो गेट तो था एक नगर का पैर गेट के दोनों हिस्सों पैर 2 अकारतीय बानी थी. जो बहुत hi डरावनी थी. दिन में भी उनको देख कर दर लगे. और उप्पेर बड़े बड़े शब्दों में लिखा था – दानव नगर.

दानव नगर का नाम पद कर पब सोच में पद गया. कियोकि पहले वो मानव नगर में थे तो उनकी पावर को छुपा कर उनको मानव बना दिया गया था. कही ऐसा तो नहीं है न की यहाँ दानव बनाना वाले हो. और इसके लिए hi दस माँ के कहने पैर सलोनी ने मेरी दानव प्रवर्तियों को एक्टिव केर उन पैर कभू पाना सिखाया था. हो न हो ये hi वो कड़ी है जिसके लिए दस माँ ने सलोनी के जरिये ुजको पहले hi तैयार किया था. वो अपनी इन सोचो में गम था की अवनि उसको सोचता हुआ देख कर बोली – क्या हुआ किस सोच में पद गए?? अंदर चलना नहीं है क्या ये भी मानव नगर की तरह hi होगा. इसमें इतना सोचने वाली क्या बात है??

पब – नहीं अवनि हम इसके अंदर अभी नहीं जा सकते. अंदर जाने से पहले हमको कुछ करना होगा. जहा तक मुझको लगता है ये hi वो जगह है जिसके लिए दस माँ ने मुझको सलोनी के जरिये सचेत किया था.

अवनि चोकते हुए – क्या ?? कब किया था ये?? मुझको तो पता भी नहीं??

पब – तुमको याद है मेरी सलोनी की शादी के बाद हम रखा को मरने गए थे. सलोनी जान कर मेरे साथ गयी थी. और जब वो लूटी थी तब उसकी पथ घायल थी. ये सब हुआ था कियोकि सलोनी ने दस माँ के कहने पैर मेरे अंदर की दानव प्रवतियो का जगा दिया था. मैं दानव बनने लगा था. फिर दयासुर जी ने hi मुझको उन पैर कण्ट्रोल करना सिखाया. कियोकि जब में आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होता था तब केवल सलोनी hi मुझको संभल पति थी और उसको भी बहुत दर्द सहना पड़ता था. इसलिए तो मैं हर जगह सलोनी को अपने साथ सख्त था.

अवनि – ो माय गॉड!!!! तो ये बात थी उन सबके पीछे मुझको ये सब पता नहीं था. और मैं सोचती थी पता नहीं क्यों हर बार सलोनी hi तुम्हारे साथ जाती है. पैर अब क्या करना चाहते हो??

पब बिना कुछ बोले दयासुर जी के बताये हुए तरीके से धयान में बैठता है और इशारे से अवनि को भी वैसे hi बैठने को कहता है. दोनों जाने धयान में खो जाते है.

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अविनाश ने सोनल को कॉल करके अर्जेंट में एक होटल में बुलाया था. ये होटल रतन ग्रुप का hi था. और अविनाश hi इसको देखता था. पैर आज तक कभी भी सोनल ने होटल के काम में इंटरफारे नहीं किया था. इसलिए सोनल को समाज नहीं आ रहा था की इतना अर्जेंट में क्यों बुलया है. वो कार को ढुढती हुयी होटल तक पहुंची तो उसको अविनाश बहार hi खड़ा मिला. और उसके पीछे कुछ स्टाफ मेंबर भी थे. अविनाश को देख कर सोनल वही पैर कार से उतर कर कुछ बोलने को हुयी तो अविनाश ने उसको चुप रहे का इशारा किया. और उसका हाथ पकड़ कर अंदर ले जाने लगा. आज सके हाथ एक अलग ढंग से पकड़ा था एक मजबूती थी पकड़ में. एक अपना पैन था. सोनल भी चुपचाप उसके साथ चल दी. जब दोनों अंदर पहुंचे तो होटल का मैं हॉल खली था केवल स्टाफ मेंबर थे. हॉल के बिच में पहुंच कर अविनाश घुटनो पैर बेथ गया और सोनल को प्रोपोज़ कर दिया. तभी चारो और से फूलो की बर्षा होने लगी. एक लाइट म्यूजिक प्ले हो चुक्का था. हॉल में अंदर भी हो चुक्का था केवल 1 फोकस लाइट उन दोनों को रोशन कर रही थी. सोनल पहले तो कुछ समाज hi नहीं पायी पैर जब वो सामजी तो कृषि से झूम ुधि और उसने अविनाश को यस कहा दिया. ये सुन कर अविनाश भी ख़ुशी से झूम ुधा और हॉल तालियों के शोर से भर गया. बहुत hi रोमांटिक अंदाज में अविनाश ने सोनल को प्रोपोज़ किया था. दोनों एक दूसरे को hi देख रहे थे. एक दूसरे में खो गए थे. पैर जब सोनल को होश आया तो सोनल ने नजरे झुका ली.

कुछ देर बाद होटल की कुछ लेडीज स्टाफ सोनल को अपने साथ ले गयी और उसका मेकअप करने लगी. और यहाँ अविनाश भी तैयार होने लगा. तो मनगर में होटल के हॉल को बहुत hi खूबसूरती से सजवा दिया. अविनाश आज सोनल के साथ डेट करने वाला था तो उसका इंतजाम खास तो होना hi था.

दोनों ने बहुत hi खूबसूरत शयाम एक दूसरे के साथ बितायी. और लास्ट में दोनों ने एक छोटा सा लिप किश भी किया. सोनल आज बहुत खुश थी. उसे आज वो मिल गया था जो उसकी तमन्ना थी. जाने कब से अविनाश को दिल में बसाये बैठी थी. पैर अविनाश आगे बाद hi नहीं रहा था. पैर आज अविनाश ने एक कदम आगे बड़ा दिया था. और इस कदम ने सोनल के दिल को खुश कर दिया था. डिनर के दौरान दोनों ने ये भी फाइनल किया की अभी घर पैर यानि लता और रतन को इस बारे में न बताया जाये ताकि दोनों अपने इस नए रिश्ते को टाइम दे सके और एन्जॉय कर सके. सोनल को भी कोई जल्दी नहीं थी और न hi अविनाश बेसब्र था तो दोनों ने हाँ कर दी. (भाइयो जान कर शार्ट में लिखा है ताकि पब पैर ज्यादा धयान दिया जा सके)

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नेक्स्ट डे पब और अवनि जब ध्यान से ुढे तो दोनों अपने अपने अंदर अपना बहुत काबू महसूस कर रहे थे. जी हाँ दोनों जाने लास्ट 16 हॉर्स से धयान में hi थे. और इसका कारन था की जिस काम के लिए दस माँ ने खुद पब को सचेत करवाया हो तो वो छोटी बात नहीं हो सकती. इसलिए दोनों ने गेट के बहार hi इतना टाइम लगा दिया था. दोनों जाने धयान से उड़ कर गेट की तरफ चल दिए.

गेट के अंदर पहुंचते hi यहाँ भी दोनों को झटका लगा और दोनों गिर गए. फिर दोनों के शरीर को एक काळा धुएं ने घेर लिया. दोनों को ऐसा लगने लगा की कोई पावर दोनों की अभी पायी कण्ट्रोल पावर को ख़तम कर दोनों की दानवीय प्रवतियो को जगाने की कोसिस कर रही है पैर अभी तो दोनों ने उस पर काबू पाया था तो इतनी जल्दी हार कैसे मान लेते. एक –एक करके बहुत सी दानवीय परवतिया जैसे – करोड़, घृणा, वासना, लालच, आलश्य उन पैर हावी हो रहे थे पैर वो उनको अपने उप्पेर हावी नहीं होने दे रहे थे.

पब ने तो किसी भी बुराई को अपने उप्पेर हावी नहीं होने दिया पैर अवनि पैर करोड़ और घृणा ने कुछ हद तक अपना कब्ज़ा कर लिया था. पैर ये बात न पब जनता था और न अवनि. पर जब दोनों खड़े हुए तो एक दूसरे को देख कर दर गए दोनों के फेस दानवो जैसे हो गए थे. शायद अपने अंदर की लड़ाई को तो फिर भी दोनों जीत गए थे पैर शरीर दानवो के जैसा हो गया था.

दोनों वह से उड़ कर आगे बड़े तो वो भी मानव नगर के जैसा hi एक छोटा सा क़स्बा था पैर यहाँ के हालत बहुत अलग थे. यहाँ पैर हर घर में दानव रहते हुए दिखाई दे रहे थे तो हवा में एक दुर्गन्ध फैली हुयी थी. पेड़ो पैर जानवरो के कंकाल पड़े हुए थे. तो कुछ पेड़ो पैर मानव कंकाल भी नज़र आ रहे थे. और जगह जगह खून बिखरा पड़ा था. ये सब देख कर अवनि को गुस्सा आ रहा था तो पब शांति से आगे बाद रहा था.

अभी थोड़ा hi आगे आये थे की एक दानव ने उनको आवाज दी.

दानव – ारे सुनो.. कोण हो तुम?? हमारी नगरी के तो नहीं लगते कहा से आये हो??

पब उसके पास जाते हुए – हम रास्ता भटक गए थे परदेशी है. अब हमको बहार जाने का रास्ता नहीं मिल रहा है.

दानव – ोुह्ह्ह पसदेशी हो तब तो मैं तुमको मार कर खा सकता हु. हाहाहाहा .. बड़े दिनों के बाद कोई हाथ आया है जिसको खा कर मेरी भूक mitegi…hahahahaha

अवनि – सेल 2 कोड़ी के कीड़े तेरी इतनी हिमत की हमको खायेगा. अभी 2 मं में hi यहाँ मारा हुआ नजर आएगा तू समजा. जा भाग जा यदि जिन्दा रहना चाहता है तो नहीं तो तेरी मूट मेरे हाथो अभी हो जाएगी.

अवनि की बात सुन कर पब चौक गया. अवनि खुद लड़ने की बात कर रही थी. शांत रहने वाली अवनि मरने मारने को तैयार थी. उसको कुछ गड़बड़ लगी. पता नहीं क्यों उसका दिल कहा रहा था की यदि वो इस दानव से उलझा तो मुसीबत में पद सकता है.
 
अपडेट 254

अवनि की बात सुन कर पब चौक गया. अवनि खुद लड़ने की बात कर रही थी. शांत रहने वाली अवनि मरने मारने को तैयार थी. उसको कुछ गड़बड़ लगी. पता नहीं क्यों उसका दिल कहा रहा था की यदि वो इस दानव से उलझा तो मुसीबत में पद सकता है. पैर तब तक वो दानव बोलै – हाहाहाहाहा तुज जैसे कोमल काली मुझको maregi…hahahahaaha तू मरने के लिए नहीं बल्कि मरवाने के लिए बानी है. साली मुझको मरने को बोलती है न देख अब पहले तेरे इस कमशीन बदन को भोगूँगा फिर तुझको मार कर खा जाउगा.. हाहाहाहाहा

उस दानव की बात सुन कर अवनि का गुस्सा सातवे आश्मान पर पहुंच गया. अवनि उस दानव पैर वार hi करने वाली थी की पब ने उसको पकड़ कर वह से टेलिपोर्ट हो कर दूर पहुंच गया. जब अवनि ने देखा की वो उस दानव से दूर एक शांत जगह कर कड़ी है तो गुस्से में पब की तरफ देखने लगी और गुस्से में बोली – ये क्या बतमीजी है पंकज वो दानव मुझको मरने को और मेरी इज्जत लूटने को बोल रहा था तुम उसको सजा देने की जगह मुझको यहाँ ले कर आ गए. यदि तुम्हारे में दम ख़तम हो गया है तो उनको मैं सजा देती. मैं उसको जान से मार देती…

अवनि गुस्से में और पता नहीं क्या क्या बोलती पैर उसे पलहे hi पब ने अवनि को अपनी बांहो में कास लिया और उनसके बालो पैर प्यार से हाथ फेरते हुए बोलै – नहीं अवनि नहीं शांत हो जाओ.. क्या हो गया था तुमको क्यों इतना गुस्सा कर रही हो शांत अवनि शांत.. तुम भूल रही हो हम कहा है. हमको हर कदम सोच समाज कर उधना hoga..jaan शांत…

पब की बातो से और उसके प्यार से अवनि शांत होने लगी. पैर फिर भी उसके फेस पैर गुस्सा दिख रहा था. तो पब ने अवणि को अपने आखों में देखने को बोलै तो अवनि प्यार में भाषिभूत पब की आखों में देखने लगी और पब उसके मंद को पड़ने लगा. पब जैसे hi अवनि के मंद में घुसा उसको दिख गया की वह उस काळा दुए का ाशर है. यानि अवनि पूरी तरह अपने आप पैर कण्ट्रोल नहीं रख पायी है. और यहाँ की हवा का उस पैर ाशर हो रहा है. इसलिए वो इतने गुस्से में है. पब उसके मंद से उस असर को हटाने की कोसिस की पैर सफल नहीं हुआ. तो पब ने सोच की अब क्या किया जाये??

दोनों इस टाइम एक बड़े से पेड़ के निचे बैठे थे. और कुछ इस तरह थे की किसी की नजर उन पैर न पड़े. पब बैठा हुआ सोचने में लगा था की इस नगरी और इस चरम को पार कैसे किया जा सकता है. उसको ऐसा क्यों लगा की उस दानव से लड़ना उनके लिए ठीक नहीं होगा. पब अपने विचारो में था की अवनि ने फिर उसको ठोका – पब हम यहाँ क्यों बैठे है. चलो हमको चलना चाहिए. यहाँ की गंध से मेरा बुरा हाल हो रहा है.

पब – हम्म ok ठीक है चलो चलते है. पैर तुम धयान रखना तुम किसी भी बात पैर किसी पैर भी गुस्सा मत होना. अभी 2मं रुको पहले अपनी तलवार से पूछते है की हमको कहा जाना है.

फिर पब तलवार से आगे जाने के लिए दिशा पता करता है और दोनों ु दिशा में आगे बढ़ने लगते है. थोड़ी आगे बड़े hi थे की फिर एक दानव ने उनको आवाज लगाई. पैर इस बार पब उसको इग्नोर करके आगे चलता रहा. तो उन दानव ने फिर से आवाज लगाई और जोर से अपने साथियो को भी पुकारा. उस दानव की आवाज से और भी कई दानव वह पब और अवनि की और बड़े. ये देख कर पब ने एक बार फिर भागने का hi सोचा. कियोकि अभी भी उसका दिल लड़ने को नहीं कर रहा था. जब से उसने अपनी सभी दानवी प्रवतियो को कण्ट्रोल किया था उसके दिल और दिमाग का अच्छा तालमेल बन गया था और वो अपने किसी भी बात का फैसला भी तुरंत कर प् रहा था.

पब एक बार फिर दानवो से दूर एक पेड़ के निचे अवनि के साथ बैठा हुआ था अवनि गुस्स में पता नहीं क्या क्या बड़बड़ाये जा रही थी. वो तो कैसे भी उन दानवो से लड़ना चाहती थी. और पब को भी उन दानवो से लड़ने को कहा रही थी. और पब अपनी सोच में था. जब अवनि चुप नहीं हुयी तो पब ने अवनि के गले की एक नस दवा कर उसको सुला दिया. और यहाँ से निकलने के बारे में सोचने लगा.

“ये अवनि भी आज बहुत गुस्सा हो रही है पैर इसमें इसकी भी गलती नहीं है. ये सब उस काळा दुए का hi अक्षर है इसलिए hi वो ये सब कर रही है. वो तो अच्छा है की दस माँ ने मुझको पहले hi इसके लिए तैयार कर दिया था. नहीं तो मैं भी इस तरह hi गुस्सा होता रहता और गुस्से में अभी तक उन दानवो से लड़ने लगता. पैर एक बात सोचने की है की मेरा दिल दानवो से लड़ने का क्यों नहीं कर रहा जबकि उन्होंने अवनि के लिए इतनी गठिया बात बोली थी यदि पहले भी कभी मेने ऐसी बात किसी के लिए भी सुनी होती तो बोलने वाले को में मार देता. पैर आज क्या हो रहा है मुझको? क्यों मैं उन दानवो से लड़ने की जगह भाग रहा हु? ….. ोोू… कही ऐसा तो नहीं की त्रिकाल का ये hi जाल हो. कियोकि जो भी यहाँ आएगा वो उसके दुए से दानव प्रवति का हो hi जायेगा. वो तो दस माँ की कृपा थी जो मैं खुद पैर कण्ट्रोल कर पाया. नहीं तो अवनि को hi देख लो वो दानवो से हर हाल में लड़ना चाहती है और वो दानव भी बिना बात के hi लड़ने को आतुर है. और मैं इसलिए hi बच रहा हु कियोकि उस दुए का अक्षर मुज पैर नहीं है. इसका मतलब इस दानवो से लड़ाई करना खतरनाक हो सकता है. हम्म कोसिस करुगा जब तक लड़ाई न करनी पड़े. और यदि खुद की या अवनि की जान पैर बन आयी तो फिर छोड़ूगा भी नहीं इन दानवो को.”

पब बहुत देर तक बैठा ये सब सोचता रहा फिर उसने यहाँ से बहार निकलने के लिए सोचना सुरु किया. “ यहाँ से बहार जाने के लिए बहार जाने का रास्ता खोजना पड़ेगा. पैर रास्ता कैसे खोजै जाये रास्ता खोजने के लिए दानवो के बिच से निकलना होगा और दानवो के पास से गुजरे तो दानवो से लड़ाई होने के पुरे चांस है. फिर क्या किया जाये चुप कर बैठने के भी बात नहीं बनेगी. कुछ तो करना hi होगा. तो किया क्या जाये?? क्यों न एक बार दिव्या दृष्टि से देखु उस दिशा में जहा तलवार ने आगे का रास्ता बताया है. शायद कोई रास्ता मिल जाये.

ये सोच कर पब दिव्या दृष्टि से उस दिशा में देखने लगता है और जैसे जैसे वो आगे बढ़ता दानवो की गिनती भी बढ़ती जाती. और थोड़ी आगे जाने पैर पब को एक महल नजर आया. उस महल के चारो तरफ दानवो का सख्त पहरा था. पब ने उस महल को अंदर से देखने की कोसिस की तो पब उस महल में अपनी दिव्या दृष्टि से नहीं देख पाया. काफी देर तक महल के चारो और देखने के बाद पब ने आगे देखने का सोच तो आगे भी उसको दानवो के घर और दानव hi नजर आये. जब थोड़ा और आगे बड़ा तो उसको जांगले में एक साफ़ जगह दिखाई दी. वह दानवो का ज्यादा आना जाना नहीं था तो वो जगह थोड़ी साफ़ थी. उस जगह को देख कर पब ने वह रुकने का सोचा.

पब बहुत देर से दिव्या दृष्टि का उसे कर रहा था. तो अभी उसको अपने अंदर नैना की जीवन शक्ति बहुत काम होती नजर आयी. तो फिर पब ने वह से ुध गया और एक नज़र अवनि पैर दाल कर उसको अपनी गौड़ी में ुधा लिया और उसको ले कर टेलिपोर्ट हो कर जंगल के उस हिस्से में पहुंच गया. अवनि की एक नस दवा पैर उसको होश में लाया तो अभी अवनि का गुस्सा शांत था. और दिन भी ढले लगा था. तो पब ने वही पैर रात बिताने का अवनि को बोल कर खाने के लिए जंगल में खोज सुरु की और फिर फल खा पि कर पब और अवनि उस जांगले में hi सो गए.

वह जब दानव बेस में नैना को बहुत कमजोरी हुयी तो वो तुर्रंत धयान में बेथ गयी. और उसका गुरु धयान रखने लगी. वैसे आज कल सभी दानव बेस में ट्रेनिंग कर रही थी. और वो सब दानव बेस की लड़कियों को भी अपने अपने हुनर सीखा रही थी. हमक वह से जा चुक्का था मास्टर की हेल्प के लिए. तो हमक का काम सलोनी और ेबेचा ने अपने उप्पेर ले लिया था.

नेक्स्ट डे जब वो सो कर ुढे फिर नित्यकरम से फ्री हो गए. अवनि का गुस्सा अभी शांत था पैर उसके दिल में बेचैनी थी उसका मन उसको लड़ने के लिए उकसा रहा था. और वो अपने अंदर की इस भड़ास को झगड़ालू औरत की तरह पब पैर निकल चुकी थी. पैर पब शांति के साथ उसकी सभी बातो को इग्नोर कर रहा था. जब पब धयान में बैठने लगा तो अवनि ने उसको फिर से लड़ने वाली टोन में बोलै – अब क्या यहाँ पैर hi सन्याशी बनना है. चलो मेरे साथ हमको यहाँ से बहार भी जाना है.

अवनि की बात सुन कर पब ने अवनि कोई शेयर से अपने पास बुलाया और बहुत प्यार से बोलै – अवनि थोड़ी देर रुको में दिव्या दृष्टि से देखता हु की बहार जाने का रास्ता कहा है. फिर हम दोनों यहाँ से टेलिपोर्ट हो कर चलेंगे.

पब के प्यार ने अवनि के गुस्से को काम कर दिया जो पल पल बाद राह था ो कुछ काम हो गया तो अवनि चुप बेथ गयी. और पब ने एक बार फिर दिव्या दृष्टि से देखने लगा. अभी थोड़ी hi देर में उसको बहार जाने का गेट भी दिखाई दे गया गेट को देखते hi पब खुश हो गया. और धयान से बहार आ गया.

अभी दोनों उस गेट के सामने खड़े थे पैर वह कोई नहीं था न कोई दानव और न कोई नकाबपोश. जहा मानव नगरी ने नगर में कोई नहीं था पैर गेट पैर एक नप था वही दानव नगरी ने गेट खली था तो नगर आबाद था दानवो से. पब ने आगे बढ़ कर गेट को खोलने की कोसिस की पैर गेट खुला नहीं फिर जब पब ने धयान दिया तो उस गेट पैर एक उभरा हुआ सकुरे part था और उस सकुरे में एक खांचा बना हुआ था जो देखने से लग रहा था की कोई 3” दी अक डायमंड का उसके जैसी किसी चीज को घुसाने के लिए है. पब समाज गया की वो डायमंड hi इस गेट की चाभी (के) है. पैर अब ये के कहा मिलेगी ये उसको पता नहीं था तो पब ने इसके लिए अपनी तलवार की मदत ली. तलवार ने उस दिशा में hi संकेत किया जहा से वो टेलिपोर्ट हो कर अभी आये थे. पब फिर से उस जगह पैर टेलिपोर्ट हो गया. और फिर से उस के को खोजने के लिए तलवार को उसे किया तो इस बार तलवार ने उस महल की और इशारा कर दिया जिसमे पब दिव्या दृष्टि से देख नहीं पाया था. अशल में पहले भी तलवार ने उस महल की और hi इशारा किया था और वो महल और ये जंगल एक hi दिशा में थे तो पब को लगा की तलवार जंगल की और इशारा कर रही है.

महल में जाने के लिए पब सोच में पद गया कियोकि महल पैर दानवो का पहरा था और जिस महल में दिव्या दृष्टि से नहीं देखा जा सकता हो. उस महल में घुसना खतरनाक तो था hi. कुछ देर सोचने के बाद पब ये फेशला करता है की महल में रात में जायेगा. कियोकि रात में दानव और महल में रहने वाले सोते तो होंगे hi तो जाना शायद ाशन हो. वैसे भी उसको महल में को के खोजनी थी. और उसको चुराना था. पब किसी से भी लड़ना नहीं चाहता था कियोकि पब समाज चुक्का था त्रिकाल ने यहाँ के वातावरण को ऐसा बनाया है की जॉब hi आये वो लड़ने लगे. और यदि त्रिकाल की माया में फसोगे तो उसे निकलोगे कैसे.

दिन में पब ने उस महल में कैसे जाना है ये सोच लिया था और अवनि को भी प्यार से समजा दिया था. अब उस महल में अवनि की सुरक्षा करनी थी. पैर अवनि को महल के अंदर ले कर जाते हुए पब को दर लग रहा था. पता नहीं क्या नयी समस्या कड़ी हो jaye.pura दिन अवनि के बारे में hi सोचता रहा. और लास्ट में पब ने सोच कर दयासुर जी का गोले को याद किया. और उसे अवनि पैर सुरक्षा के लिए उसे किया. अवनि जैसे hi गोले में अंदर गयी अवनि पैर वह के वातावरण का असर काम होने लगा. और अवनि का गुस्सा बहुत काम हो गया. अभी वो नार्मल hi लग रही थी. धिरे -2 वो बड़ा गोला सुकड़ कर अवनि के चारो और ऐसे फिट हो गया जैसे अवनि ने कोई ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक के कपडे पहन लिए हो. अब अवनि सेफ थी. कोई भी अवनि का कुछ नहीं बिगड़ सकता था.

रात होते hi दोनों टेलिपोर्ट हो कर महल के बहार पहुंच गए. और वह पहुंच कर दोनों ने अपनी इनविजिबल होने की पावर को उसे किया और महल के गेट की और बाद गए. गेट पैर करीब 25-30 दानव पहरा दे रहे थे पैर पब और अवनि के इनविजिबल होने के कारन उनको पता hi नहीं चला की कोई उनके सामने से हो कर गेट में बने छोटे गेट से अंदर जा चुक्का है.

जब दोनों अंदर पहुंचे तो गेट से महल की मैं बिल्डिंग के बिच एक राष्ट था. वो उसी पैर खड़े थे रस्ते के दोनों और फूलो के बहुत hi सूंदर भाग थे. उस भाग को देख कर दोनों के दिल को बहुत सकूँ मिल रहा था इन पूरी नगरी में इतना सूंदर और खुसबूदार माहौल केवल यहाँ पैर hi था. थोड़ी hi आगे बड़े थे की उनको कुछ चीखे सुनाई देने लगी. जब दोनों उन चीखो का पीछा करते हुए आगे बड़े तो गंदे को पर करके वो एक ऐसे हॉल में पहुंचे जिसके चारो तरफ वाल्स तो थी पैर छत (रूफ) नहीं थी. केवल कुछ हिस्सा hi कवर्ड था. उस हॉल में जब दोनों घुसे तो एक बार दोनों को उलटी आने को हुयी फिर दोनों को गुस्सा आने लगा पैर पब का गुस्सा कुछ hi पल में ख़तम हो गया और वो अवनि का हाथ पकड़ केर उस हॉल में बने दूसरे गेट से बहार ले गया.
 
अपडेट 255

अशल में वो कॅशे खाना था. वह पैर जिन्दा जानवरो को hi भुना जार अहा था तो वह कोई जानवरो की खाल उतर कर उसके पिक्स कर रहा था. ये दोनों वेग थे तो इनको वो बहुत बुरा लगा. और गुस्सा भी आया पैर पब का गुस्सा ये सोच कर ख़तम हो गया की ये दानवो का खाना है तो वो ये करेंगे hi न. वैसे भी इन्शान भी तो खता hi है. तो ये कोण सा गलत कर रहे है.


पैर अवनि का गुस्सा काम नहीं हुआ तो अवनि ने बोलै – पंकज तुमको हो क्या गया है तुमने उन लोगो को सबक क्यों नहीं सिखाया?? देखा नहीं कैसे जिन्दा जानवरो को आग के उप्पेर लटका कर तड़पा रहे थे. कैसे जिन्दा जानवरो के सरीर में सिक घुसा रहे थे. कैसे जिन्दा जानवर की खाल उतर रहे थे. क्या हुआ तुमको उन जानवरो पैर दया नहीं आयी??

पब – अवनि शांत.. तो वो लोग यदि ये कर रहे थे तो तुम सोचो वो क्या गलत कर रहे थे. क्या इन्शान नहीं खता?? क्या इन्शान ये सब नहीं करता जो ये कर रहे थे. जब फर्क इतना है वो मार कर करता है ये जिन्दा के साथ कर रहे थे. तो क्या दानवो को उनका खाना बनाना के लिए भी सजा दुगा क्या?? सोचो अवनि यदि मुझको इनको सजा देनी चाहिए तो सजा तो फिर हर इन्शान को भी मिलनी चाइये…

पब की बातो से अवनि शांत हो गयी वो समाज गयी की उसका गुस्सा गलत है. वैसे भी अभी अवनि पैर वह के वातावरण का असर नहीं था पैर उसके अंदर घुसे उस दुए का असर तो था hi. इसलिए अवनि को गुस्सा जल्दी आ गया था. अभी वो दोनों महल क ीक गलियारे में खड़े थे. और वह पैर उनको 2 रूम नजर आ रहे थे. तो दोनों उन रूम्स की तरफ बढ़ गए. पहले रूम में पहुंचे तो वह पैर मीट्स से बानी बहुत साडी खाने की डिश रही हुयी थी उनकी महक पुरे रूम में थी. डिश देखने में बहुत सी ाचे से सजा कर राखी हुयी थी की बस अभी वो डिनर टेबल पैर पहुंचने वाली हो. और 2 दानव उनको ले जाने में लगे भी हुए थे. उन डिश को देख कर अवनि ने नाक मुँह सकोड़ने सुरु कर दिए. और नजरे फेरने लगी. तो पब उसे बोलै – अवनि ये गलत बात है तुम वेग हो तो इसका मतलब ये तो नहीं है न की तुम दूसरे का खाना देख कर मुँह बनाओगी. यहाँ तो कोई ऐसी भी नहीं कर रहा जैसा की अभी हमने देखा था फिर क्यों ऐसे मुँह बना रही हो. सभी का अपना अपना भोजन है. ये नियति का चक्र है की कोण किसको खायेगा. और कोण किसका भोजन बनेगा. किसी दूसरे का भोजन देख कर घिन करना गलत बात है.

अवनि पब की बात सुन कर उसकी और देखने लगी. वो पब की बातो में छुपे सच को समाज गयी थी और सोच रही थी की पब कितना सही सोचता है.

वह से निकल कर दोनों नेक्स्ट रूम में गए तो वह पैर सभी वेग खाने रखे थे. और उनकी खुसबू दोनों की भूक को बड़का रही थी. अवनि पैर जब नहीं रुका गया तो वो खाने की तरफ बढ़ने लगी तो पब ने फिर उसको रोक लिया – नहीं अवनि हम यहाँ नहीं खा सकते.

अवनि – पैर क्यों?? आज कितने दिनों बात तो ीनता अच्छा खाना मिला है. और फिर भी तुम खाने को मन कर रहे हो.

पब – अवनि उसकी 2 वजह है. एक तो हम यहाँ खाना खाने नहीं अपने बहार निकलने के लिए उस डिमांड को खोजने आये है और दूसरी ये की यदि हम यहाँ खाना कहते है तो ये चोरी कहलाएगी. वैसे चोरी तो हम उस डिमांड की भी करने वाले है पैर वो हमारी मज़बूरी है. चोरी किये बिना हम यहाँ से बहार नहीं जा सकते पैर चोरी से खाये बिना जा सकते है.

एक बार फिर अवनि पब की बातो को सुन मुँह लटका कर बहार आ गयी. फिर ये दोनों डिमांड की तलाश में यहाँ से वह भटकते रहे. कुछ रूम्स तो खली मिले मतलब वह कुछ भी नहीं था. तो कुछ रूम में दानव सोते या अपना कुछ काम करते मिले. फिर वो नेक्स्ट मंजिल पैर चले गए. वह बहुत से रूम्स में देखने के बाद ये एक रूम में पहुंचे. वो रूम बहुत hi सुन्दर ढंग से सजा हुआ था. रूम के बिच में एक किंग साइज बीएड भी था. रूम में एक मदहोश करने वाली महक भी थी. रूम का टेम्प. भी जैसा था की तुर्रंत नीड आ जाये. वह उस रूम में जा कर दोनों को ालश आने लगा. सबसे बड़ी बात ये थी की रूम के बहार कोई दानव भी नहीं था. मतलब ये रूम महल के किसी अदिकारी का रूम भी नहीं था.

एक बार तो पब के मन में आया की यार कुछ देर आराम कर hi लिया जाये. इतने दिनों से जांगले में जमीन पैर सो कर मज़ा नहीं आयातः वो आराम कभी मिला hi नहीं था जिसको वो रोज अपने रूम में लेता था. पैर फिर उसने अपनी मन को जतका की उसके पास रात का टाइम hi है. यदि किसी को भी पता चल गया तो उनको या तो दानवो से युद्ध करना होगा या दानव बिना युद्ध के hi बंदी बना लगे.

अवनि तो खड़े खड़े पब के कंडे पैर सर रख कर सो गयी थी. तो पब ने अवनि को उड़ाया और उस रूम से भी बहार आ गए. कियोकि इस रूम में भी कुछ ऐसा नहीं था जहा उनको वो डिमांड मिल सके. इतनी देर से इतने रूम्स को देखने के बाद भी जब कुछ हाथ नहीं आया तो पब ने एक बार फिर अपनी दिव्या दृष्टि को तरय करने का सोचा. पैर इस बार भी उसे महल के अंदर कुछ भी नहीं दिखाई दिया. यहाँ दिव्या दृष्टि काम hi नहीं कर रही थी. तो पब ने तलवार सा उसे किया तो उसने एक दिशा की और इशारा कर दिया अब इस दिशा में भी बहुत से रूम्स थे.

पब उस रूम के सभी रूम्स को देखता हुआ आगे बढ़ने लगा पैर किसी में भी कुछ नहीं मिला. तभी जब उसने एक रूम कोला तो उसकी आखें फटी की फटी रहा गयी. वह पैर चुदाई का प्रोग्रॅमम चालू था और लड़किया इतनी हाशिन थी की उनको देखते hi पब कलुण्ड औकात पैर आ गया. 3 लड़किया केवल देख रही थी तो 3 लड़किया 2 जवान सुन्दर ताकतवर दानवो स चुद रही थी. अवनि की छूट से भी पानी आने लगा. और पब को भी चुदाई की तालाब होने लगी. पैर पब ने खुद को कण्ट्रोल करते हुए गेट को बंद कर दिया. पैर अवनि की आग जो बादक गयी थी उसने अपनी आग को भुजने के लिए पब को पकड़ लिया को अपनी छूट को उसके लुंड पैर रगड़ते हुए उसके होंटो को चूसने लगी. पब को भी इस खेल में मज़ा आने लगा. तो पब ने भी अवनि के बूब्स को एक हाथ से दबाना सुरु कर दिया और दूसरा हाथ अवनि के पीछे ले जा कर उसकी छूट को अपने लुंड पैर रगड़ने लगा. अवनि तीन तरफ के हमले से बेहाल हो कर जोर जोर से सिसकने लगी पैर उसकी सिसकिया पब के मुँह में hi दम तोड़ रही थी. और अवनि की छूट से निकला रास पब के लुंड के उप्पेर की पेण्ट को गिला कर रहा था. दोनों कपड़ो के उप्पेर से hi एक दूसरे के जिस्म का मज़ा ले रहे थे. पैर अवनि का ये पहला अनुभव था तो वो जल्दी hi झाड़ गयी और हाफने लगी. पब का नहीं हुआ था पैर उसने खुद को कण्ट्रोल कर लिया.

जब अवनि नार्मल हुयी तो पब की और देख कर शर्माने लगी. अभी वो पब से नजरे नहीं मिला प् रही थी. पब भी अवनि के दिल का हाल समाज रहा था तो उसने अवनि को परेशां न करते हुए आगे बढ़ने लगा. नेक्स्ट रूम में देखा तो वो रूम खली था. तो पब ने अपने कंडे से बैग उतर कर उसमे से अवनि की दूसरी जीन्स और एक पंतय निकल कर उसे पकड़ा दी और बोलै – तुम फ्री हो कर आओ में तुम्हारा बहार वेट कर रहा हु.

ये सुन कर अवनि को ख़ुशी तो बहुत हुयी की पब को उसकी कितनी केयर है पैर मारे शर्म के तो जमीन में hi गाड़ गयी और भाग कर उस रूम में घुस गयी. पब बहार वेट करता रहा कुछ hi देर में जब अवनि बहार आयी तो अवनि ने पब से बैग मांगने का इशारा किया तो पब ने बैग खोल कर उसके उतरे हुए कपडे मांगे रकने के लिए. अवनि ने शरमाते हुए खुद hi वो कपडे बैग में रख दिए. अवनि को इतना शर्माता देख पब को एक सररत सूजी. उसने बैग के अंदर नाक घुसा कर बोलै – व्वाःह्ह्ह्ह क्या मस्त महक है…

ये सुन कर अवनि और ज्यादा शर्मा गयी. और गुस्सा देखते हुए बोली – ययययोूऊऊऊ… ी किल्ल्ल्ल ोुउउउउ…

पैर पब ने उसको चुप रहने का इशारा किया और इशारे से याद दिलाया की वो लोग कहा है. अवनि को अभी भी शर्म आ रही थी. तो पब ने अवनि के फेस को अपने हाथो से पकड़ कर उसकी आखों में देखते हुए बोलै – अवनि मेरी जान इतना शर्माने की जरुरत नहीं है. तुम मेरी हो और मैं तुम्हारा तो क्या हो गे यदि हमने कुछ पालो को एन्जॉय कर लिया तो. वैसे भी ये सब एक न एक दिन तो हम दोनों के बिच होना hi है तो शर्माना छोड़ो और डिमांड खोजना सुरु करो…

पब की बात से अवनि के दिल को बहुत रहत पहुंची थी. एक बार उसने पब को अपनी बांहो में बिछा और फिर उसका हाथ पकड़ कर आगे को चल दी. इस घटना से एक फायदा तो हुआ था और वो ये था की अवनि का गुस्सा और भी काम हो गया था. अभी ये दोनों रूम्स को चक करते हुए आगे बढ़ hi रहे थे की एक रूम को देख कर को खुश हो गए. कियोकि ये रूम उस दिशा में बने रूम्स से थोड़ा सा हैट कर बना था और बहार पहरे पैर 4 दानव खड़े थे. रूम का गेट भी और रूम्स से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा था. और वो लॉक्ड भी लग रहा था. तो दोनों hi समाज गए की ये hi उनकी मंजिल है.

पहले पब ने 2 दानवो की गर्दन पैर वॉर किया. तो दोनों एक वॉर में hi बेहोश हो गए. वो दानव उन दोनों को देख नहीं प् रहे थे. तो बचे हुए दोनों दानव उन बेहोश पड़े दानवो की और हड़बड़ा कर बड़े पैर तभी पब ने ुको भी एक hi वॉर में बेहोश कर दिया. और फिर गेट को खेलने की कोसी करने लगा पैर गेट खुला नहीं. तो पब ने अपने अग्नि तत्व को याद किया और एक बारीक़ पैर बहुत तेज़ अग्नि की लाज़र उस गेट के लॉक वाले हिस्से पैर मरी (जस्ट लिखे गैस वेल्डिंग) तो लॉक वाला हिस्सा गेट से कट कर अलग हो गया. और गेट को खोल कर दोनों अंदर चले गए.

अंदर का नजारा दोनों की कल्पना से भी परे था. दोनों में से किसी ने भी कभी भी इतने हेरे मोती, रतन, एक साथ नहीं देखे थे. वह पैर एक से एक बेशकीमती हीरा पड़ा हुआ था. रूम में चारो तरफ एक से एक बाद कर रतन पड़े थे. कुछ रतन तो इतने चमक रहे थे की चमक के कारन उनके आस पास के रतन भी नहीं दिख रहे थे. उन सभी दौलत के बिच एक बॉक्स पैर एक हीरा अलग से रखा था जो की बिलकुल उस गेट में फिक्स होने के लायक लग रहा था. प ने आगे बढ़ कर उसको ुधा लिया और बहार को आने लगा. पैर जैसे hi वो दोनों बहार आये तो बहार का नजारा डरा देने वह था.

बहार एक बहुत hi सुन्दर सी दानव कन्या सर पैर मुकुट लगाए गुस्से में कड़ी थी. और उसके पीछे दानवो की एक बड़ी फौज थी जिनको देख कर hi लग रहा था की वो केवल अपनी रानी के आर्डर का वेट कर रहे है नहीं तो अभी तक तो वो पब और अवनि को मार hi चुके होते. पैर पब ये सोच रहा था की वो उसको देख कैसे प् रहे है. कियोकि वो दोनों इनविजिबल थे. पैर जब पब ने खुद पैर घर किया तो वो दोनों विज़िबल हो चुके थे. और ये हुआ था उस के के कारन…

तभी वो रानी बोली – कोण हो तुम और यहाँ आ कर चोरी करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी??

पब (बिना डरे रानी की आखों में देखते हुए) – मैं हु – पंकज भट्ट. और मैं इस चक्रवेव से निकलना चाहता हु उसके लिए मुझको इस के (चुराया हुआ दिअमोद दिखा कर) की जरुरत है. मंटा हु मेने चोरी की है पैर वो मेरी मज़बूरी थी. मुझको ये के चाहिए थी.

रानी (गुस्से से) – ये लड़के तू बहुत बोल रहा है भूल मत तू अभी मेरे रहमो करम पैर है मेरे एक इशारे पैर ये सभी दानव तुझको पल भर में मार देंगे. से

पब (मुस्कुराता हुआ) – देखिये रानी साहिबा मंटा हु मेने चोरी की है पैर आप ये मत सोचना की मैं आपके रहमो करम पैर हु. मैं लड़ना नहीं चाहता था कियोकि किसी को भी बिना वजह मरना या उसे लड़ना मेरी आदत नहीं है पैर यदि बात आतम रक्षा की हो तो आपके ये क्या इनके जैसे और 500 बुला लो वो भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ पाएंगे.

रानी – तुझको अपनी शक्तियों पैर बहुत घमंड है न बालक देख अभी मैं तेरा ये घामड़ कैसे दूर करती हु.

पब – न न रानी साहिबा घमंड नहीं है. घमंड होता तो चोरी से नहीं सभी को मरता हुआ महल में आता और ये के ले कर चला जाता. मुझको अपनी शक्तियों पैर विश्वास है. मुझको अपनी दस माँ पैर विश्वास है मुझको दानव राज के दिए हुए उन वरदानो पैर विश्वास है जो मेरी शक्ति है. और मुझको अपने गुरु दयासुर पैर विश्वास है की उनकी दी हुयी शिक्षा से में किसी को भी हरा सकता हु.

रानी एक बार चौंक जाती है. और फिर एक पल के लिए उसके फेस पैर मुस्कान भी आती है पैर फिर वो पल भर में अपना गुस्सा दिखते हुए बोली – अच्छा तुझको इतना विश्वास है तो तू मेरे इन दानवो से बच कर दिखा.

पब – एक मं रानी जी. आप क्यों इनको मुझसे लाडवा कर इनको मूट की नीड सुलाना चाहती है. यदि लड़ना है तो क्यों न अप्प और हम दो –दो हाथ कर ले आपको भी पता चल जायेगा की मैं क्या चीज हु और मुझको भी पता चल जायेगा की मैं यहाँ से जिन्दा जा पाउगा भी या नहीं. इस सब की बलि देने से क्या फायदा?? और यदि आप नहीं लड़ना चाहती है तो आप अपने उस दानव को भेजिए जो आपकी नजर में महावीर हो.

रानी – चल यदि तेरी ये hi इच्छा है तो ये hi सही आ जा मैदान में देखु तुजमे कितना दम है.

ये बोलते hi रानी और पब जा पहुंचे एक खुले मैदान में जो महल का hi एक हिस्सा था. और फिर सुरु हुई दोनों की जंग. क्या जंग थी. यहाँ अवनि की दिल की धड़कन तेज़ हो चुकी थी तो दूसरी तरफ उस मैदान के चारो तरफ खड़े दानव अपनी रानी का होशला बढ़ाने को चिल्ला रहे थे.

पहला वॉर रानी ने hi किया उसने सबसे पहले आग के छोटे छोटे गोले फेके. तो पब ने पानी से उनको भुजा दिया. फिर रानी ने आग का एक बड़ा सा गोला बना केर फेका तो पब ने हवा का एक तेज़ जुका रानी के गोले की तरफ कर दिया हवा और आग के गोले को ले कर रानी के पास hi पहुंच गयी वो तो टाइम से रानी वह से टेलिपोर्ट हो गयी नहीं तो वो hi उस गोले की चपेट में आ जाती. फिर रानी ने कुछ मंत्र पद कर एक ब्लैक रौशनी का गोला बलाया और पब की और छोड़ा तो पब ने ब्लू कलर का गोला फेका. जैसे hi दोनों टकराये हवा में बिस्फोट हो गया और चारो और आग hi आग हो गयी. तो रानी ने उस आग को हवा से पब की और कर दिया. पब ये समाज नहीं पाया और उस आग के चंगुल में आ गया. पैर पब को नुकशान कुछ नहीं हुआ केवल उसके कपडे कुछ जगह से जल गए थे. ये देख कर रानी की आखों की चमक बाद गयी. एक बार फिर रानी ने उस पैर हमला किया. पब ने उसका भी जवाब दिया. पैर अभी जो लड़ाई हो रही थी उसमे पब को अपनी एनर्जी उसे करनी पद रही थी इसलिए पब को चिंता थी की ज्यादा एनर्जी लोस्स न हो जाये और वो कमजोर पद जाये.

पैर रानी लगातार पब पैर वॉर कर रही थी. मंत्रो को पद कभी किसी कलर की रौशनी की लाज़र छोड़ती तो कभी गोले के रूप में. कभी मायाजाल बनाना की कोसिस करती तो कभी तरह तरह की आवाजों से पब को ब्रमित करती. पैर पब ये सब दयासुर से सीखा हुआ था तो रानी की कोई भी शक्ति पब को नुकशान नहीं पंहुचा प् रही थी. पैर पब को अब कमजोरी लगने लगी थी. लड़ते हुए 4 हॉर्स हो चुके थे.

एक बात थी रानी का कोई भी वॉर ऐसा नहीं था जिसका जवाब दयासुर जी से पब ने न सीखा हो. ये बात पब को भी बड़ी अजीब लग रही थी की केवल वो मंत्रो की शक्ति से hi लड़ रही थी. और वो भी उन्ही मंत्रो से जो दयासुर जी से पब को सिखाये थे. पैर कुछ hi देर में पब का ये भ्रम भी टूट गया. इस बार रानी ने कोई ऐसा मंत्र पड़ा था की चारो और से तलवार पब पैर आने लगी. पब को इनको रोकने का मंत्र नहीं आता था. तो पब ने अपनी तलवार को याद किया और अपनी तलवार से उन आती हुई तलवारो से बचने लगा.


पैर जैसे hi उस रानी ने पब के हाथ में चंद्र हंस तलवार देखि उसकी आखें बड़ी हो गयी. कुछ पल के लिए तो मुँह खोल कर पब को तलवारो से लड़ते हुए देखती रही. पैर जैसे hi उसको होश आया उसने तुर्रंत एक चुटकी बजायी और वह का पूरा hi नजारा बदल गया.
 
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पैर जैसे hi उस रानी ने पब के हाथ में चंद्र हंस तलवार देखि उसकी आखें बड़ी हो गयी. कुछ पल के लिए तो मुँह खोल कर पब को तलवारो से लड़ते हुए देखती रही. पैर जैसे hi उसको होश आया उसने तुर्रंत एक चुटकी बजायी और वह का पूरा hi नजारा बदल गया. तलवारे आणि बंद हो गयी थी. दानव गायब हो चुके थे. रानी अपने घुटनो पैर बैठी हुयी थी. नजरे निचे थी, सर झुका हुआ था. ये सब देख कर पब और अवनि दोनों चौक गए की ये क्या हो रहा है.

पब – रानी साहिबा क्या हुआ आपको आप ऐसे क्यों बेथ गयी?? क्या आप अपनी हार काबुल करती है??

रानी – गलती हो गयी मुझसे मेरे मालिक, मुझसे अनजाने में वो पाप हो गया है जिसके लिए मेरे पूर्वज मुझपर थूक रहे होंगे. आज उनकी आत्मा को इतना दुःख हो रहा होगा की उनकी आत्मा खून के आशु बहा रही होगी.

पब – ये क्या कहा रही है आप?? अपने ऐसा क्या कर दिया की आप इतनी दुखी हो गयी एक दम और मैं कबसे आपका मालिक हो गया. मैं तो एक सदर्न मानव हु और आप इस नगर की रानी है.

रानी – आप ऐसी बात न कहे मालिक. जिस प्राणी के हाथ में ये महँ और दिव्या तलवार हो वो सदर्न हो hi नहीं सकता. और अपने जिस दिन इस तलवार को पाया उस दिन या कहु उस पल से hi मैं और मेरा पूरा खंडन आपका गुलाम हो गया है और आप हमारे मालिक.

पब – क्या??? मतलब ऐसा क्यों?? कोण हो आप?? आपका मेरा गुलाम होने का क्या मतलब है??

रानी – मेरा नाम मयति है. मैं और मेरे पूर्वज सदा से इस महँ तलवार के और इसके मालिक के गुलाम रहे है. विभीषण जी के ज़माने में मेरे पूर्वज वह के राज पुरोहित हुआ करते थे. जब विभीषण जी ने इस तलवार की पूजा सेवा का कार्य सपा. तब मेरे पूर्वजो ने प्रतिज्ञा ली की वो और उनके वंशज इस तलवार और इस तलवार के मालिक के हमेशा गुलाम बन कर रहेंगे. तब से हमारे घर का हर दानव इस तलवार के मालिक को अपना मालिक मंटा आया है. जब दानव राज डलासुर इस तलवार के मालिक बने तो मेने उनकी गुलाम हो गयी. उन्होंने मुझको तलवार की सेवा के साथ दानव रानी की दासी बना दिया. वो दोनों तो अपनी वासना में खोये रहे पैर मैं सदा इस तलवार की पूजा सेवा करती रही. और साथ hi दानव रानी के सभी पुत्रो को मेने hi पला. उनको शिक्षा भी मेने hi दी. आप जिनको अपना गुरु मानते है वो दयासुर मेरी hi गॉड में खेल कर बड़ा हुआ है. वो मेरा सबसे प्रिये था. पैर जब दानव राज और दानव रानी ने पटल लोक छोड़ कर यहाँ पृथ्वी पैर रहने का फेशला किया तो मेने अपना पूरा टाइम इस तलवार की सेवा में लगा दिया. और मेरी भी शादी हो गयी और मेरे 2 बेटे भी हो गए. दानव रानी तो मुझको छोड़ कर चली आयी पैर मैं वह हमेशा इस तलवार की सुरक्षा और पूजा सेवा करती रही और मेने अपने इस काम ने अपने दोनों बेटो को भी लगा दिया.

पब – पैर यदि आप पटल लोक में थी तो यहाँ कहा से आ गयी?? और जब आप सदा इस तलवार के साथ थी तो जब मेने इसको पाया तो आप मेरे पास क्यों नहीं आयी??

मयति – ये भी एक बुरी घटना है. जब मैं दानव राज की सेविका बन कर इस तलवार की सेवा कर रही थी तो त्रिकाल ने अपने एक वरदान में मुझको मांग लिया और अपने मालिक की आज्ञा के अनुरास मुझको त्रिकाल की गुलामी माननी पड़ी. त्रिकाल के पास जाने से पहले में दानव रानी से मिली मुझको बहुत दुःख था इस तलवार से दूर होने का. तो दानव रानी ने मुझको कहा की तुम चिंता मत करो ये बस कुछ hi सालो की बात है उसके बाद एक ऐसा टाइम आएगा जब कोई मेरा अपना तुमको त्रिकाल की कैद से मुक्त करा देगा. त्रिकाल ये जनता था की मेरे पास मायाजाल की आशिम शक्ति है. और मैं एक बड़ी दानव तांत्रिक भी हु. और उसको ये भी पता था की ये तलवार जब तक डलासुर के पास है तब तक hi मैं उसकी गुलाम हु. फिर त्रिकाल ने एक दिन मुझको इस चक्रवेव के इस चरण को बनाने और इसकी सुरक्षा का काम दिया. तब मुझको भी नहीं पता था की त्रिकाल इस चक्रवेव में दानव राज को hi कैद करने वाला है. मैं इस बात से अनजान थी और मेने इस नगर का निर्माण किया. इस नगर ने प्रवेश करने वाले हर प्राणी की दानव परवतिया उस पैर हावी हो जाती है. और यदि कोई उनको अपने कण्ट्रोल में कर भी ले तो इस महल में उसको गेट की के के लिए आना hi होता है. और जब कोई यहाँ आता है तो हार्प रानी को अपनी उन दानवीय प्रवतिये को अपने वश ने करना पड़ता है जिन पैर केवल एक सच्चा और अच्छा प्राणी hi कण्ट्रोल कर पता है.

पब – पैर मेने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया. फिर भी मैं उस के तक पहुंच गया.

मयति – आप भूल रहे है आप सभी दानव प्रवतियो पैर विजय प् कर hi के तक पहुंचे थे. सबसे पहले अपने अपने गुस्से पैर विजय पायी और उन जानवरो की चीख की सही वजह को पहचान कर अपने गुस्से को काबू किया. फिर अपने घृणा पैर विजय पायी शाकाहारी होते हुए भी दूसरे के खरे में दोष नहीं निकला. फिर अपने अपने पेटूपन (अच्छे खाने की चाहा) को जीता. सामने खाना होते हुए भी खाने को हाथ नहीं लगाया कियोकि वो आपका नहीं था. उसके बाद उस ालशी रूम में पहुंच कर भी अपने खुद के लक्ष्य की और जाने से अपने अपने आलश्य को भी हरा दिया. पैर वासना में आप थोड़ी देर के लिए बहक गए थे पैर फिर भी जल्दी hi खुद को कण्ट्रोल कर लिया. फिर जब आप खजाने वाले रूम में पहुंच गए और अपने इतने खजाने को देख कर भी केवल अपने काम की के को ले कर बहार आ गए तो ये सिद्ध हुआ की आपके मन में लालच नहीं है. उसके बाद मेने आपको डरने की कोसिस की पैर आप न तो डरपोक निकले और न hi कायर. और अपने उन सेनिको से न लड़ कर ये भी बता दिया की आप नये प्रिये भी है. सच में एप क सच्चे युद्ध है और मुझको यकीं है की आपके जैसा युद्ध hi दानव राज को कैद से आजाद करवा सकता है. और उनके आजाद होते hi मैं भी आजाद हो जोगी और फिर आपकी और इस महँ तलवार की सेवा करुँगी.

पब – सच में ये चरण तो बहुत hi खतरनाक था. दानव नगरी से वो hi पार जा सकता है जो दानव प्रवति को कण्ट्रोल कर सकता हो. ये तो बहुत hi खतरनाक सोच है नहीं तो कोई भी दानव, देव या मानव ये hi सोचेगा की दानव नगरी है तो दानवो जैसे काम करना या दानवो को मरना कोई गलत बात नहीं है. मुझको तो दानव रानी (दस माँ) ने पहले से hi अपनी दानव प्रवतियो को कण्ट्रोल करना सिखाया था. इसलिए मैं बच गया. और मैं ये भी समाज गया की जब यहाँ दानव प्रवतियो को भड़का रहे है तो उनको कण्ट्रोल करने से hi जीता जा सकता है.

मयति – अपने क्या कहा की आपको दानव रानी से सिखाया था. मतलब आप उनसे मिल चुके है??

पब – हाँ और वो मुझको अपना बीटा मानती है. और मैं दयासुर जी की बेटी सलोनी का पति भी हु. उन्होंने सलोनी के जरिये hi उनको ये शिक्षा दी थी.

मयति – यानि आप hi है वो जिसके वेयर में दानव रानी ने मुझको बोलै था. आशा करुँगी की आप जल्दी hi जीत जाये. आपकी ये गुलाम आपकी जीत का इन्तजार करेगी.

पब – मयति आप अब खुद को गुलाम कहना बंद करो. आप मुझसे बड़ी है और बहुत ताकतवर भी, तो उस नाते आप मेरे लिए पूजनीय भी है.

मयति – नहीं नहीं आप ऐसा नहीं कहा सकते. यदि अपने मुझको अपना गुलाम नहीं मन तो मेरे पूर्वजो की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी. एक गुन्हा में पहले hi कर चुकी हु. आप मुझको मेरी hi नजरो में इतना भी मत गिराइये की मैं खुद को hi ख़तम करने पैर मजबूर हो जायु.

पब – हम्म्म्म यदि ये बात है तो ठीक है आज से तुम मेरी गुलाम हो. तो क्या अब मैं ये के ले कर जा सकता हु??

मयति – हाँ हाँ बिलकुल पैर धयान रहे ये के बहुत काम की है इसको अपने साथ ले जाना..

पब – हम्म ok और कुछ??

मयति – नहीं.. पैर क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हु??

पब – हम्म बोलो

मयति – आपको ये तलवार कैसे मिली. कियोकि यदि कोई इस तलवार को अपनी विश में भी मांगता है तो भी हमको पता चल जाता है. पैर हमको पता hi नहीं चला//

पब उसको फिर ेबेचा से शादी होने से तलवार पाने तक की साडी कहानी सुना देता है तो मयति भी मांईजी की प्लानिंग को मान जाती है. मयति पब और अवनि की मेहमान नाबाजी करने के लिए रुकने को बोलती है पैर ये दोनों मन कर देते है. फिर भी मयति दोनों को उनकी पाषंड का खाना खिला केर hi जाने देती है. कियोकि ये दोनों रात को महल में घुसे थे और अब नेक्स्ट डे की दोपहर हो चुकी थी. खाना पीना होने के बाद अवनि और पब वह से टेलिपोर्ट हो कर गेट पैर पहुंच गए. और उस के से गेट खोल कर बहार आ गए. और पब ने के को अपने पास अपने बैग में रख लिया. थोड़ी hi दूर चलने के बाद एक बार फिर आवाज हुयी – “ तीसरा चरण समाप्त”

पब और अवनि ये सुन कर बहुत खुश हो गए. अवनि का गुस्सा भी ख़तम हो गया था और पब ने उस गोले को भी अवनि से हटा दिया था. अवनि को अब अहसास हो रहा था की वो दानव नगरी में कितनी गलतिया कर रही थी. और उसकी हर गलती को पब सुधर रहा था. दोनों दानव नगरी के वेयर में बात करते रहे और फिर दोनों ने हवेली में भी सभी से बात की वो सब भी खुश हो गए. 3 चरण पार हो चुके थे अब केवल 4 चरण और थे. तीसरे चरण की सभी बातो को सुन कर सभी को जोश सा आ गया. एक मायावी दानव कन्या ने खुद पब को अपना मालिक मन था ये सभी के लिए ख़ुशी की बात थी. सलोनी भी मयति को नहीं जानती थी तो सलोनी में उसका सच जानने के लिए दयासुर जी से बात करने की सोची. ये चरण सलोनी की म्हणत और दस माँ की कृपा से hi पार हुआ था. यदि उस टाइम सलोनी ने पब की दानवीय प्रवतियो को जागृत कर उन पैर कण्ट्रोल करना नहीं सिखाया होता तो आज यहाँ ये दोनों इस चरण में hi मरे जाते.

अभी शयाम का वक्त हो चला था और कल रात को भी दोनों सोये नहीं थे तो दोनों आज रात वही सो जाते है. नयी सुबह नए चरण की सुरुवात करने की सोच केर. नेक्स्ट डे फ्रेश हो कर दोनों आगे बढ़ जाते है तो फिर आवाज होती है “ चौथा चरण प्रारम्भ”

जैसे जैसे पब और अवनि अंदर बढ़ रहे थे वैसे वैसे जंगल खूबसूरत होता जा रहा था. जंगल में बहुत तरह के फल और फूलो के पेड़ थे. चिड़िया चहक रही थी. कोयल की आवाज कानो को सकूँ पहुंच रही थी. एक हरा भरा और शांत जांगले नजर आ रहा था. छोटे मोठे जानवर जैसे – खरगोश (रेबिट), मंकी, डियर, कैट ेट्स. यहाँ से वह भागते नजर आ रहे थे. दोनों को उस जंगल में बहुत hi अच्छा लग रहा था. थोड़ी और आगे बड़े तो एक झरना पड़ा वह का नजर तो इतना मधुर था की वो उस नज़ारे में खो गए. कुछ देर वह झरने के पास रुक कर दोनों ने वह के पेड़ो से फल तोड़ कर खा लिए. और चल दिए आगे की और. दिशा तो तलवार से वो जान hi चुके थे. करीब 25-30 मं चलने के बाद एक बार फिर एक गेट सामने आया. ग्रीन कलर का गेट जिस पैर फूल और पत्तियों की डिज़ाइन बानी थी बहुत hi सुन्दर लग रहा था और गेट के सेण्टर में एक शेर की आकृति बानी हुयी थी. गेट के उप्पेर लिखा था – वन विहार. दोनों जब गेट पैर पहुंचे और गेट को खोलना चाहा तो गेट खुला नहीं. गेट को खोलने की बहुत कोसिस की पैर नहीं खुला. अब ये क्या चक्कर है अभी तक तो अंदर जाने वाला हर गेट आसानी से खुल जाता था. पैर ये क्यों नहीं खुल रहा. दोनों ने गेट को धयान से देखा तो उसमे एक साइड में फॉलो की डिज़ाइन के बिच एक वेश्या hi खचा बना था जैसा की दानव नगरी के बहार जाने वाले गेट में था.

कुछ सोच कर पब ने वो के निकली और उस गेट में लगा दी. और के लगते hi वो गेट खुल गया. पब को समाज आ गया की मयति ने उसको वो के अपने साथ ले जाने को क्यों बोलै था. गेट के खुलते hi दोनों अंदर चले गए. अंदर भी बहार जैसा hi जंगल था एक खूबसूरत जंगल. दोनों आगे बढ़ने lage.dono सोच रहे थे की यहाँ कोण सी चुनौती का सामना करना पड़ेगा. इस जंगल में त्रिकाल ने कोण सा जाल बिछाया होगा. थोड़ी आगे आने के बाद पब ने सोचा की पहले देख तो ले किस दिशा में आगे जाना है तो उसने अपनी तलवार को उसे किया पैर ये क्या?? तलवार दिशा बताने की जगह गोल – 2 घूमने लगी. अब ये क्या है?? तलवार काम नहीं कर रही या इस बार भी उस भाग जैसा कोई रहश्य है?? पब ने चक किया तो तलवार और उसकी पूरी पावर्स थी. न तो कोई पावर काम हुयी थी और न hi इस वॉर किसी तरह का कोई झटका लगा था.

जब कुछ समाज नहीं आया तो दोनों एक तरफ बेथ गए. जाते भी कहा?? जहरीले फलो के भाग में घूम कर देख चुके थे बिना दिशा को जाने भटकने से कोई फायदा नहीं था. दोनों बेथ कर सोच रहे थे की कहा जाये. क्या करे और कैसे इस चरम को पार करे. की तभी एक दम अवनि चीख पड़ती है

अवनि – aaaiiiiiiiiii…ohhhh…

पब – क्या हुआ अवनि चीखी क्यों??
 
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