MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 40 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 257

अवनि – aaaiiiiiiiiii…ohhhh…

पब – क्या हुआ अवनि चीखी क्यों??

अवनि – मेरी झांग पैर किसी ने कटा..

पब (मजे लेते हुए) – दिखाओ किसने किया. किसकी हिम्मत जो मेरे रहते तुमको हाथ भी लगा दे. दिखाओ कहा कटा है.

अवनि (झूठे गुस्से से) – हटो में बात नहीं करती तुमसे. मेरे दर्द हो रहा है और तुमको मस्ती सूज रही है.

अवनि जब झांग पैर से अपना हाथ हटती है (जीन्स के उप्पेर से hi) तो देखती है की उसके हाथ पैर 2-3 मरी हुयी चिति (अंत) थी. अवनि के हाथ में चिति देख कर पब जोर से हसने लगता है. की चिति के काटने पैर भी इतनी तेज़ चीखी थी. पैर तभी अवनि अपना हाथ फिर से अपनी झांग पैर (जीन्स के उप्पेर से hi) फिर से रख कर देखती है तो उसे कुछ गिला गिला लगता है तो अवनि अपना हाथ आगे करके देखती है और चौंक जाती है. अब पब भी चौंक जाता है. कियोकि अवनि के हाथ पैर खून लगा था. जीन्स के उप्पेर से चिति के काटने पैर खून से हाथ गिला होना बहुत बड़ी बात थी. दोनों तुर्रंत खड़े हो जाते है. तो पब के मुँह से भी चीख निकलती है – आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह एआईईईई… ये क्या हो रहा है मुझको… और फिर पब अपने पेट को एक साइड से पकड़ कर बेथ जाता है. और जब हाथ आगे करता है तो उस पैर खून की कुछ ड्राप थी और 4-6 अंत भी थी मरी हुयी. पब का खून देख कर दोनों बुरी तरह चौंक जाते है. किसके सरीर पैर कोई भी हथियार, कोई भी गोली, बारूद, कुछ भी काम न करता हो उसके शरीर से खून एक चिति के काटने से?? पैर ये कैसे हो सकता है जबकि उसके पास वरदान है जो सविता खेतीमे मिला था. फिर उसको याद आता है की वो वरदान सुर, अशूर और मानव के लिए था जानवरो का तो जिक्र hi नहीं था. इसका मतलब जानवर पब को हानि पंहुचा सकते है.

अभी पब ये सब सोच hi रहा था की एक बन्दर (मंकी) आ कर पब के कंडे पैर बेथ जाता है और अपना पंजा उसके गाल पैर चाप कर पेड़ पैर जम्प मर देता है. ये सब इतनी तेज़ी से हुआ की पब जब तक कुछ समाज पता मंकी भाग चुक्का था. और पब का गाल लाल हो गया था. ये देखने में जितना फनी था उतना hi खतरनाक भी. अवनि हंस रही थी पैर तभी फिर से एक मंकी पब के कंडे पैर और 2 मंकी अवनि के दोनों कंदो पैर जम्प करते है और पब के बाल खींच कर और अवनि के 3-4 थप्पड़ मर कर भाग जाते है ये दोनों कुछ समझते उसे पहले चीटिया को डांस करने पैर मजबूर कर देती है कियोकि चीटिया दोनों के कपड़ो में घुस चुकी थी और दोनों को जगह -2 काट रही थी. दोनों डांस में लगे थे की जगली पिग्स का एक झुण्ड भागता हुआ उनकी तरफ आता है और दोनों को गिरा कर उनको कुचलता हुआ चला जाता है. दोनों को कई जगह चोट लग चुकी थी. चीटिया अभी भी शरीर पैर काट रही थी. की एक और हमला होता है और इस बार 4-5 डॉग्स उन दोनों पैर पैर जम्प करते है. और उनको काटने वाले होते है की तभी पब भी वॉर करता है अपने उप्पेर के 2 कुत्तो की गंदन पकड़ कर उनके सर को आपस में बजा देता है और फिर उन दोनों को अवनि के उप्पेर वाले कुत्तो पैर फेक कर मरता है. सभी कुत्ते दर्द में बिलबिलाते हुए भाग जाते है तो पब अपने सभी दर्दो को भूल कर अवनि का हाथ पकड़ कर टेलिपोर्ट हो जाता है. अभी वाओ अहा से थोड़ी hi दूर टेलिपोर्ट हुआ था. पैर अभी वह के हमलो से बच गया था.

पैर ये सोच भी कुछ hi पल की थी कियोकि एक बार फिर पेड़ पैर से मंकी उनके उप्पेर जम्प कर देता है. पब भी अलर्ट था तो मंकी को पटक देता है ये पटकी इतनी तेज़ थी की मंकी की की करके चिलता हुआ मार जाता है. मंकी को चिल्लाता देखा पब फिर से अवनि का हाथ पकड़ कर वह से फिर टेलिपोर्ट होता है कियोकि वो जनता था की मंकी के ऐसे चिल्लाने से बहुत सरे मंकी इखठठे हो जाने है.

जहा पहुंचते hi पब पेड़ की एक दाल तोड़ कर उसमे आग लगा कर अवनि को पकड़ता है और आग का एक बड़ा घेरा अपने चारो को भी बना देता है. (आग से जानवर डरते है) फिर पब आखें बंद करके देखता है की कहा पानी का तालाब या झरना कहा है. कियोकि चीटिया अभी भी दोनों को खा रही थी. पानी का एक तालाब पब को कुछ hi दुरी पैर दिखाई देता है. और जब आखँ खोलता है तो देखता है की अवनि चारो तरफ के पेड़ो पैर बैठे जानवरो को डरा रही थी. पैर वो उसको ऐसे घर रहे थे जैसे अभी खा hi जायेगे.

साला ये जांगले को बहुत hi खतरनाक है यहाँ तो हर पल हर घडी हमला हो रहा है. पूरा जंगल hi दुसमन बना पड़ा है. पब को वह रुकना ठीक नहीं लगा तो वो वह से सिद्ध पानी के तालाब के अंदर hi टेलिपोर्ट हो गया. पानी में दुप्की लगाने से दोनों को कुछ रहत मिली और दोनों वही कड़ी हो कर अपने कपडे खोल कर चीटियों को हटाने लगे दोनों इस टाइम शर्ट लेस्स थे. अवनि ने ब्रा पहनी थी पैर पब का सीना नंगा था. दोनों को इस टाइम न कोई मस्ती सूज रही थी और न hi शर्म. वो बस चीटियों को हटा रहे थे की तभी पब एक बार फिर चीख पड़ा. वो पानी में गिरने hi वह था की अवनि ने उसका हाथ पकड़ लिया पैर कोई पब के पेअर को पकड़ कर पानी में खींच रहा था. और अवनि पब को बहार खींचने की कोसिस कर रही थी. इस दर्द में पब ने खुद को सँभालते हुए अपनी तलवार को याद किया और अगले hi पल तलवार हाथ से थी पब ने बिना टाइम वास्ते किये तलवार उस मगरमछ के पेट में घुसा दी. चंद्र हंस तलवार मगर के उप्पेर से भी आर पार हो गयी.

पब ने तलवार को हाथ में लिए hi हीलिंग मंत्र पड़ा और पहले दोनों को हील किया और फिर तालाब के एक किनारे पैर आ केर बेथ गए. और जब कपडे चेंज करने के लिए बैग देखा तो याद आया की वो तो पिग की टक्कर से वह गिर गया था. तो पब अवनि को वह छोड़ कर बैग ले कर आ गया. अभी दोनों कपडे चेंज hi कर रहे थे की एक बार फिर उन पैर हमला हो गया. पैर इस बार हमला उड़ने वाले कीड़ो ने किया था. वो जहा भी बैठते वह की खाल को नोच कहते. जब पब को बर्दाश नहीं हुआ तो पब ने आग की लपटे हाथ से निकल कर और कीड़ो को जलना सुरु कर दिया. और सभी को जला कर रख कर दिया.

पब ने फिर से दोनों को हील किया. अभी हील करके चुक्का hi था की फिर एक हमला हो गया इस वॉर मच्छरों ने हमला किया. पब को खीज आने लगी. एक पल को भी शांति नहीं थी इस जांगले में. पब को फुल गुस्सा आ चुक्का था मच्छरों ने अपने डंको से अवनि और पब को सुजा दिया था. और दोनों को बहुत जलन हो रही थी. पब ने गुस्से में आग का एक बड़ा गिला तैयार करके हवा के साथ छोड़ दिया और वो आग जंगल में फैलती चली गयी. और पूरा जंगल धु धु करके जलने लगा. जानवरो के चिकने की आवाजे आने लगी. पैर इतने बड़े गोले को तैयार करने में मंजू की बहुत साडी एनर्जी लग गयी. और उसका एनर्जी लेवल डाउन हो गया.

पब और अवनि ने अब जा कर रहत की सास ली. जला हुआ जंगल खयानक लग रहा था पैर ये उस खूबसूरत जंगल से अच्छा था. पैर दोनों की ये रहत भी ज्यादा देर न रहा सकीय. जंगल कुछ hi मं. में रिकवर होने लगा और देखते hi देखते फिर से वैसा hi हो गया. अब दोनों को दर लगने लगा की क्या करे?? साला हर मं पैर हमला यहाँ से बचो तो वह से और वह से बचो तो यहाँ से. कुछ hi देर में फिर हमला हुआ. पैर पब ने इस बार एक सेफ्टी शील्ड बना कर दोनों को बचा लिया. और पब शील्ड को नष्ट होने से पहले hi सुरक्षित जगह खोजने के लिए धयान में बेथ गया.

जंगल के एक कोने में पब को एक गुफा दिखी जिसमे एक भालू (बेयर) सो रहा था. पब को वो जगह ठीक लगी कियोकि वह पेड़ भी न के बराबर थे. और गुफा पत्तर की थी. वाकई के सुरक्षा इंतजाम के बारे में पब सोच चुक्का था की उसको अपने मंत्रो से उस जगह को सुरक्षित करना होगा.

दोनों अभी तक शील्ड ने थे और बहार तरह तरह के जानवर उस शील्ड पैर हमला कर रहे थे. पब वह से टेलिपोर्ट हो कर उस गुफा के बहार पंहुचा और उसने अपनी तलवार को अपने हाथ में ले लिया. जैसे hi वो अंदर पंहुचा भालू कदमो की आहात को मानव खुसबू से जग गया और जागते hi उसने हमला कर दिया. पैर पब भी तैयार था उसने तुर्रंत अपनी तलवार को उसके पेट में गुसा दिया. और उसका पेट फाड़ दिया. और वो मार गया. पब उसको ुधा कर बहार फेक दिया और भी मंत्रो से उस गुफा के चारो और कुछ शील्ड बनाना लगा. उसने एक ऐसी शील्ड बनाई की उनकी या कोई भी खुशबु वह से न जा सके. कियोकि यदि खुसबू नहीं जाएगी तो जानवरो को पता hi नहीं चलेगा की कोई वह है भी. और फिर एक सेफ्टी शील्ड भी बनाई. पैर ये सेफ्टी शील्ड मजबूत नहीं थी. कियोकि पब के पास न ो इतनी एनर्जी थी और न hi उसने किसी शील्ड को सिद्ध कर रखा था. केवल मंत्रो के गायन से जो हो सकता था ो उसने कर hi दिया था. और फिर दोनों उस गुफा में बेथ गए. और सोचने लगे की यहाँ से बहार कैसे निकला जाये. और उसे भी बड़ी बात की यहाँ जिन्दा कैसे रहा जाये कियोकि यदि जानवर हर कुछ देर में हमला करेंगे तो कभी भी वो मरे जा सकते है. खतरा हर तरफ है. पब पहले भी जंगल में घुमा था पैर जानवर बिना किसी बात के हमला नहीं करते थे. और इंसानो से दर कर भागते भी थे. पैर एक तो यहाँ छोटे से छोटा जानवर भी इतना खतरनाक है की जान ले सकता है और उप्पेर से सभी ऐसे पीछे पड़े है जैसे किसी ने उनकी गांड में आग लगा दी हो और वो आग इन दोनों को मार कर hi शांत होनी हो.

बहुत देर तक ये सोचते रहने पैर भी किसी भी बात का जवाब नहीं मिला. कोई आईडिया नहीं था दोनों में से किसी के भी पास की अब किया क्या जाये. रात बहुत हो चुकी थी. और इतने हमलो से हुयी थकन के कारन दोनों उस गुफा में सो गए. पैर वो ये भूल गए की उनके जान की दुश्मन बहार घूम रहे है. रात के ांदेरे में बहुत सरे वुल्फ (भेड़िया) ने उस गुफा को चारो तरफ से घेर लिया. पैर शील्ड के कारन अंदर नहीं जा प् रहे थे. पैर वो सब वह से हाट भी नहीं रहे थे. और उस शील्ड पैर लगातार अटैक भी कर रहे थे. कुछ hi घंटो में वो शील्ड टूट गयी. तो कुछ भेड़िये तो उस भालू की लाश को चीरने और फाड़ने लगे और कुछ गुफा में घुस गए. अंदर दोनों को सोता देख उनको चारो तरफ से घेर लिया.

जैसे hi वुल्फ ने दोनों के उप्पेर जम्प मरी तभी वह एक आदमी आया और दोनों के हाथ पकड़ कर टेलिपोर्ट हो कर बहार आ गया. बहार आते hi पब और अवनि की आखें भी खुल गयी. पैर अपने चारो और का नजारा देख कर अवनि के तो रोंगटे खड़े हो गए. उसने आज से पहले कभी इतने खतरनाक वुल्फ नहीं देखे थे. दर पब को भी लगा कियोकि ये वुल्फ नार्मल वुल्फ से बड़े थे. पैर उसको दर से ज्यादा हैरानी थी की वो दोनों बहार कैसे आ गए और उनके साथ में खड़ा ये आदमी कोण है. पैर अभी परिचय का टाइम नहीं था. वो आदमी भी वुल्फ से लड़ने के लिए पोजीशन ले चुक्का था. तो पब ने भी अपनी तलवार को याद किया और टूट पड़ा उन वुल्फ पैर. पब की तलवार के हर वॉर से वुल्फ काम हो रहे थे. पब इतनी तेज़ी से अपनी तलवार चला रहा था और इतनी आसानी से उन वुल्फ को मार रहा था की वुल्फ न हो कर को वेगीटाब्ले काट रहा हो.

उसके फेस पैर गुस्सा साफ़ था. कल पुरे दिन वो इन जानवरो पैर जान केर hi जानलेवा हमला नहीं कर रहा था पैर अब पानी सर के उप्पेर जा चुक्का था. वो तो उन आदमी ने इन दोनों को बचा लिया नहीं तो वुल्फ इनको फाड़ hi देते. कुछ hi मं में सभी वुल्फ को मरने के बाद पब उस आदमी की तरफ बड़ा पैर पब अभी भी सवदान था पता नहीं कोण हो. त्रिकाल की कोण सी नयी माया हो. पैर उसने दोनों को बचा केर ये तो सिद्ध कर दिया था की वो उनकी जान नहीं लेना चाहता है नहीं तो वोल्फ्स से उनको बचता hi नहीं.

पब (उन आदमी को धयान से देखते हुए) – कोण है आप?? और यहाँ कहा से आ गए?? देखने में तो कोई दिव्या आत्मा लगते है?? क्या आप इस जंगल के रक्षक है??

अवनि – पब दूर रहो इनसे ये भी त्रिकाल के चक्रवेव का हिस्सा hi लग रहे है मुझको. जैसे की मयति थी.

आदमी कुछ देर तक पब को देखा और बोलै – परिचय करने का ये सभी िस्थान नहीं है. यहाँ हर तरफ खतरा है. पहले हमको सुरक्षित िस्थान पैर चलना चाहिए.

अवनि (धिरे से पब के कान में) – पब मुझको ठीक नहीं लग रहा इसके साथ जाना पता नहीं कोण है ये.

पब (धिरे से) – अवनि ये जो भी है हमको मरना नहीं चाहता नहीं तो अभी हमारी मदत नहीं करता. और वैसे भी हमको यहाँ से बहार निकलने के लिए कुछ तो करना hi होगा. जंगल में तो हर तरफ खतरा है hi हो सकता है इसके साथ जाने पैर कोई रास्ता hi मिल जाये.

अवनि को पब की बात सही लगी दोनों उसके साथ चल दिए थोड़े देर चलने के बाद पब बोलै – क्या हम टेलिपोर्ट हो कर नहीं जा सकते. इस टाइम जंगल के बिच में से जाना बहुत खतरनाक हो सकता है.

आदमी – जा तो सकते है पैर मेरे पास इतनी शक्ति नहीं बची की टेलिपोर्ट हो सकू. यदि तुम्हारे पास है तो हम टेलिपोर्ट हो सकते है. हमको वह जाना है जहा से तुम गेट के अंदर घुसे होंगे.

उन आदमी की बात सुन कर पब वह उन दोनों के साथ टेलिपोर्ट हो जाता है. फिर वो आदमी वह से दूसरी दिशा में थोड़ा आगे बढ़ता है और एक जगह जा कर रुक जाता है. वो एक सुनसान सी जगह थी. उस वन की बाउंड्री के पास कुछ hi पेड़ थे उनके बिच में लकड़ियों का छोटा सा घर बना हुआ था. और घर के चारो तरफ गहरी खाई थी. घर और खाई के बिच में 4-5 फलो के पेड़ थे. देखने से hi लग रहा था ये सब उन जानवरो से बचाव के लिए किया गया है

कोण है ये आदमी??? अन्य ओने हैवे अन्य आईडिया??? हे वास् केस फ्रॉम पास्ट....
 
अपडेट 258

घर और खाई के बिच में 4-5 फलो के पेड़ थे.

वो आदमी पब और अवनि को ले कर उस घर में टेलिपोर्ट हो जाता है. पब उसे घूरने लगता है तो वो आदमी बोलै – हाँ मैं टेलिपोर्ट हो सकता हु. पैर अब इतनी पावर मेरे पास नहीं है की इतनी दूर से टेलिपोर्ट हो पता. मैं कई सालो से इस जंगल में हु. अब तुम बताओ तुम कोण हो और यहाँ तक कैसे पहुंचे. देखने में तो मानव लगते हो. फिर ये पावर्स कहा से आयी?? और क्यों और किसके कहने पैर आये हो यहाँ??

पब कुछ डियर सोचा तो उसके मन ने कहा की अपना सत्य बताने में कोई बुराई नहीं है. न जाने क्यों उनको देख कर पब को लग रहा था की वो एक अच्छा आदमी है. इसलिए पब बोलै – मैं प्रतिक और अल्पना का पुत्र पंकज हु. और दस माँ और अपने गुरु मणि शंकर के कहने पैर दानव राज डलासुर को कैद से मुक्त करवाने के लिए यहाँ आया हु.

पब की बात सुन कर वो आदमी ख़ुशी से झूम ुधा. उसकी आखों में आशु आ गए. पैर फिर किसी सनका से बोलै – क्या तुम सच ने उस अल्पना के hi bête हो जिसको त्रिकाल ने देखे से अपने निचे…… (वो अपनी बात पूरी न कर सके)

पब गुस्से में – हाँ … पैर तुम कोण हो?? और कैसे जानते हो मेरी माँ को??

आदमी – सॉरी में शायद गलत बोल गया. पैर यदि तुम वही हो तो तुम यहाँ कैसे तुमने तो मणिशंकर को मन कर दिया था न?? फिर तुम उसके पास कैसे पहुंच गए??

पब अजीब नजरो से – तुम कोण हो?? कैसे जानते हो इतना कुछ?? पहले आप अपना परिचय दो तब hi मैं आपको कुछ बता पाउगा.

आदमी – मैं तुमको बता नहीं सकता पुत्र तुमको आज यहाँ देख कर में कितना खुश हु. तुमने एक बाप को फिर से वो आशा दी है जिसके सहारे वो और कई 100 सालो तक जी सकता है. तुमको यहाँ देख कर मैं समाज गया हु की तुमको अपने जनम का मूल उद्देश्य मणि से पता चल hi गया होगा. और शायद तुमको ये पावर्स भी मणि की बताई विदी से डलासुर से मिली होगी. तुम दक्षसूरी से भी मिल hi लिए होंगे. तो उसने भी तुमको बहुत कुछ बताया hi होगा. हे भोलेनाथ अब तो मेरे bête पैर रहम कर उसको इस दानव योनि से मुक्त करवा hi दो…

पब बस उस आदमी को घूरता hi रहा जाता है और सोचने लगता है की कोण हो सकता है ये आदमी जो इतना कुछ जनता है. और दानवराज और रानी के नाम कैसे ले रहा है जैसे वो दोनों इससे छोटे हो.

शायद वो आदमी पब की मनोदशा को समाज गया इसलिए मुस्कुराते हुए बोलै – बीटा ऐसे मत देखो. डलासुर तुम्हारे लिए पूजनीय है. पैर मैं उसके लिए पूजनीय हु. इसलिए ऐसे बात कर रहा हु. वो मेरा बीटा है. मैं हु देव सेना का देवदूत – दिव्यांश….. और मेरा पुत्र – दाल्भया और पुत्रवधु – दक्षणा… हाँ मैं hi वो अभागा पिता हु जिसके तेजश्वी bête दाल्भया को समय चक्र ने दानव राज बना दिया और आज वो कई सालो से यहाँ कैद में बंद है. जब तुमने मणिशंकर से मन कर दिया तो मुझसे रहा नहीं गया और मेने खुद अपने bête को बहार निकलने की ठानी. तो जब से आज तक यहाँ से निकने की hi सोच रहा हु.

जी हाँ फ्रेंड्स ये डलासुर के पिता hi है. अब इनका भी थोड़ा सा रोले है. शायद किसी ने नहीं सोचा होगा की ये यहाँ मिल सकते है. चलिए पब के रिएक्शन को देखते है. पब उसका परिचय सुन कर चौक जाता है और उनके पेअर पकड़ लेता है. अवनि ये सब नहीं जानती थी. सुनी तो उसने भी थी वो स्टोरी बूत उसने इतना धयान नहीं दिया था उस टाइम. पैर पब को तो याद था की दिव्यांश कोण है.

पब – मुझको माफ़ कर दे देव. मैं आपको पहचान नहीं पाया और आप पैर शक किया. पैर क्या करू सोच भी नहीं था की आपसे यहाँ पैर भेट हो सकती है. और मैं अपने उस कार्य के लिए माफ़ी मांगता हु जिसके कारन आप यहाँ पैर है. (फिर पब उनको वो सब बताता है जो पब के मणि जी को मन करने के बाद स्कूल जाने से ले कर और यहाँ तक पहुंचने के बिच हुआ था. ये सब सुन कर दिव्यांश ने अल्पना की मूट पैर दुःख प्रकट किया.)

फिर दिव्यांश भी पब को बताता है की कैसे उन्होंने पहले चरण पार किये थे. – अशल में दिव्यांश से पहले भी कुछ देवता इंद्रा भगवन के कहने पैर आ चुके थे. पैर कोई भी 3रद चरण hi पार नहीं कर पाया था. और दिव्यांश 4तह में पहुंचने वाले 1सत प्राणी थे.

दिव्यांश ने जहरीले जांगले को उड़ कर आसानी से पार कर लिया और उस फलो के बैग में जेह्रीला फल खा कर उनके अंदर का देव होने के कारन जो अमरत्व था वो ख़तम हो गया था. अब दिव्यांश एक मारे जा सकने वाले देव बन गए थे. त्रिकाल ने वो भाग बनाया hi इसलिए था. फिर 2ंद चरण के बारे में वो जानते थे की वह तांत्रिको से भिड़ना पद सकता है इसलिए वो तांत्रिको के उप्पेर से उड़ते हुए निकल गए तांत्रिको ने रोकने की भी कोसिस की पैर वो सफल नहीं हुए. दिव्यांश के लिए दानव नगरी का सफर सबसे ज्यादा काश कारी था. एक देवता को इन्शान की तरह जीने की आदत नहीं होती. और वह पैर इन्शान की तरह जीने में उनकी हालत ख़राब हो गयी.

पब – देव अपने मानव नगरी के क्यू के ाँस कैसे दिए??

दिव्यांश – बीटा देवराज ने मुझको दानव राज और यहाँ पृथ्वी की खवार रखने का काम सपा था. एक तो में उसका पिता था तो इस काम को करने से मेरी नजर हमेश मेरे bête पैर रहती. और मैं यहाँ के बारे में बहुत कुछ जान गया. तो उनके जवाब देना कोई कदिन नहीं था.

पब – फिर अपने 3रद चरण में मयति को कैसे मात दी??

दिव्यांश – बीटा मेरे पास जो मुख्या शक्ति है वो है एनर्जी ट्रांसफर की. मैं किसी भी ऊर्जा को किसी और तरह की ऊर्जा में बदल सकता हु. किसी की भी पावर निकल कर किसी और में दाल सकता हु.

पब बिच में – ारे वह यदि ये बात है तब तो आपको त्रिकाल की पावर्स निकल कर मणि जी के सरीर में दाल देना था साडी कहानी उसी टाइम ख़तम हो जाती.

दिव्यांश – हाहाहाहा मैं देव हु असुर नहीं जो किसी की पावर्स को चीन लू. मैं ये तभी कर सकता हु जब पावर्स देने वाला और पावर्स लेने वाला दोनों राजी हो. और करता भी तभी हु बस इसमें जनकल्याण की सम्भाबना हो. देवो का काम पृथ्वी पैर शक्ति का बैलेंस बनाये सकना है न की तभाही लाना. हाँ पैर यदि कोई किसी पैर अपनी किसी तरह की एनर्जी से अटैक करे तो उसकी उस एनर्जी को मैं चेंज करके अपने लिए उपयोगी (उसेअबले) बना सकता हु. और ये hi मेने 3रद चरण में किया. उस काळा दुए को मेने अपने पैर हावी होने देने से पहले hi चेंज कर दिया था. कियोकि मानव नगरी से इसका सबक में ले चुक्का था. और फिर जब महल से के लेने की वरि आयी तो मेने मयति के साथ धोखा किया और के ले कर भाग गया और इस भाग ढूढ़ में वो के मेरे पास में hi रहा गयी. और मैं इस नगरी में आ गया तब से यहाँ पैर hi हु.

पब – ओह्ह्ह तो आप तब से यहाँ से निकल hi नहीं पाए??

दिव्यांश – नहीं..

पब – पैर हमको अब जल्दी hi निकलना होगा नहीं तो त्रिकाल के पास उसकी साडी शक्तिया लुओत आएगी. (फिर पब दिव्यांश को त्रिकाल की साधना के बारे में बता देता है. और ये भी बता देता है की की त्रिकाल उसको मरना चाहता है. और बायीं बार कोसिस भी कर चुक्का है)

दिव्यांश – ओह्ह्ह फिर तो जल्द hi कुछ करना होगा. चलो छोडो अभी वो सब बाते अभी तो यहाँ से निकलने का सोचना है पहले, अभी तुम दोनों थोड़ी देर आराम करो जब तक मैं खाने के लिए फल ले कर आता हु.

कुछ देर बाद वो सब फल कहते हुए बात करने लगे तब दिव्यांश ने बताया की वो ये तो जान गए है की इस चरण को पार कैसे करना है पैर वो कर नहीं प् रहे. इस जंगल को पार करने के लिए यहाँ के सभी जानवरो को अपने आधीन करना होगा. जब ये सभी जानवर किसी को अपना राजा मान लगे तब hi इस जंगल के राजा की आज्ञा से यहाँ से बहार जाने का राष्ट खुलेगा. पैर इस जानवरो को न तो मारा जा सकता है और न hi समोहित किया जा सकता है. मरने के कुछ देर बाद वो फिर जीवित हो जाते है.

पब – पैर जब मेने उस भालू को मारा तो वो तो जीवित नहीं हुआ??

दिव्यांश कुछ सोच कर – हो सकता है की वो इस तलवार की शक्ति के कारन जिन्दा न हुआ हो..

पब – हम्म पैर इतने सरे जानवरो को मरने से भी कुछ नहीं होगा. और पता नहीं जंगल में कितने जानवर है. और छोटे मोठे कीड़े लिखे – चिति, मच्छर ेट्स इनको कैसे मारा जायेगा??

दिव्यांश - नहीं मरना इसका हल नहीं है कुछ और सोचना होगा.

फिर ये दोनों इसके बारे में सोचने लगते है. अवनि को तो थोड़ा बहुत hi समाज आया. तो अवनि ने साडी बात पब से बात में पूछ ली. दिव्यांश ने ये घर बहुत hi अच्छा बनाया था. छोटा तो था पैर कोई भी जानवर एक आईडीई यहाँ हमला नहीं करते थे. जानवर सभी जंगल में hi रहते थे. कोई आ भी जाता तो वो उस खाई को पार नै कर पता.

ये तीनो उस घर में रहते हुए सोच कुछ न कुछ सोच कर उन जानवरो पैर तरय करते. पैर कोई अक्षर नहीं पब ने बहुत से मंत्रो से जानवरो को वश में करने की कोसिस करि. कुछ देर के लिए कुछ जानवर होते पैर फिर नार्मल पहले जैसे.

देखते hi देखते 20 दिन गुजर गए. हवेली में भी सभी को बेचैनी होने लगी और मणि जी और दयासुर जी को भी. पैर कोई कुछ कर नहीं सकता था. पब की पत्निया जिन्दा थी ये इस बात का साबुत था की पब अभी जिन्दा है. और कुछ कर सकता है. आज पब को अपने उप्पेर बहुत गुस्सा आ रहा था वो कुछ भी नहीं कर प् रहा था. गुस्से में पब ने अपनी तलवार ली और जंगल में मार काट सुरु कर दी. न जाने कितने hi जानवर मरे गए. पैर फिर भी जानवर ख़तम होने का नाम नहीं ले रहे थे. जानवरो की लाशो के देर लग गए. पैर न तो जानवरो ने हमला करना छोड़ा और न hi पब ने अपनी तलवार से मरना. न जाने कितने – साप, अजगर, मंकी, पिग, कैट, हॉर्स, सियार, वुल्फ, डॉग, डिअर, बेयर, रैबिट मरे जा चुके थे. पब अपनी दानवपुत्र की ड्रेस ने था तो इस पैर कीड़ो का अक्षर नहीं हो रहा था. कीड़ो ने पब को जकड़ा हुआ था. सुबह से शयाम हो गयी पैर जानवर काम न हुए.

थक हार कर पब फिर उस घर में लुओत आया. पैर उसका गुस्सा काम न हुआ. अवनि ने किसी तरह पब को शांत किया. परेशां तो अवनि भी थी. कियोकि अब टाइम काम था और ये सब अभी तक 4तह चरण में hi फंसे हुए थे. क्या करे और क्या नहीं तीनो में से किसी के समाज में नहीं आ रहा था.

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यहाँ हर बीतते दिन के साथ सोनल और अविनाश का प्यार बढ़ता hi जा रहा था. दोनों हर सम्भब कोसिस करते साथ रहने की और ये बात लता और रतन ने भी नोट कर ली थी दोनों खुश थे अविनाश और सोनल के रिश्ते से. पैर सोनल और अविनाश दोनों hi अपनी जिंदगी के कुछ दिन एन्जॉय करना चाहते थे इसलिए दोनों में से कोई भी लता या रतन को ये सब बताना नहीं चाहते थे. और सोनल को पब का इन्तजार था वो बिना पब के इस रिश्ते को अंजाम नहीं देना चाहती थी. ीदार लता ने अंकिता को भी सब बता दिया था. जब एक दिन अंकिता ने लता को बताया की उसे लगा की सोनल दीदी और अविनाश के बिच उसे कुछ लग रहा है तो लता ने अंकिता को वो सब बता दिया जो उसने फील किया था. अंकिता ने हवेली में सभी को बता दिया था. सोनल के लिए सभी खुश थे. अंकिता और नैना की बाते अविनाश से होती hi रहती थी. बाकि भी सोनल से तो बात करते hi थे पैर कभी कभी अविनाश से भी बात कर लेते थे. पैर अभी फ़िलहाल हवेली में सभी को पब की बहुत चिंता थी इतने दिनों में भी वो 4तह चरण से बहार नहीं आया था. सभी के दिल में घवराहट थी. पैर इन्होने सोनल को इस वेयर में नहीं बताया था कियोकि सोनल न तो उन सभी से मिल सकती थी और न hi पब से तो वो भी बिना मतलब परेशां होती इसलिए इन सभी ने सोनल को कुछ भी नहीं बताया था.

आज सोनल और अविनाश एक 5 स्टार होटल के पवत. केबिन में bêthe डिनर कर रहे थे. और अपनी प्यार भरी बातो में लगे थे. तो अविनाश ने सोनल का हाथ पकड़ कर उसको अपनी गौड़ में बिठा लिया और उसे अपने हाथो से खिलने लगा. सोनल भी अविनाश को खिलने लगी. डिनर फिनिश होने के बाद जैसे hi आइसक्रीम का आर्डर किया तो सोनल अपनी सीट पैर ठीक से बेथ गयी. कुछ hi देर में वेटर 1 आइसक्रीम रख कर चला गया.

सोनल – ये क्या 1 hi?? अपने मेरे लिए नहीं मगई क्या??

अविनाश (मुश्कुराते हुए) – नहीं जी ये तुम्हारी hi है. मैं तो जब hi खाऊंगा जब तुम खिलाओगी.

ये सुन कर सोनल मुस्कुराती हुयी फिर से अविनाश की गॉड में बेथ गयी और एक स्पोने में आइसक्रीम ले कर उसको खिलने लगी तो अविनाश ने गर्दन गुमा ली.

सोनल – अब क्या हुआ जनाब को. अब तो मैं hi खिला रही हु फिर क्यों नहीं खा रहे??

अविनाश सोनल के होंटो की तरफ इशारा करके बोलै – यदि इनसे खिलाओ तो hi खाऊंगा.

ये सुन कर सोनल का पुआ सरीर रोमांस से कैंप गया. दिल में गुदगुदी होने लगी. उसका मन किया की अभी खिला दे वो एपीआई होंटो को उसे. किश तो दोनों में अभी तक कई बार हो चुक्का था पैर ये सब पहली बार था. अपनी चाहत को छुपा कर सोनल झूट गुस्सा दिखते हुए अविनाश को घूरने लगी. तो अविनाश ने उसकी आखों में देखते हुए आइसक्रीम को ुधा लिया और एक फुल स्पोने अपने मुँह में ले कर सोनल के होंटो की तरफ बढ़ने लगा. सोनल उसकी गौड़ में बैठी मुँह को पीछे करने लगी. पैर चाहती तो वो भी थी तो मिल गए दोनों के होंठ और फिर आइसक्रीम एक मुँह से दूसरे मुँह में जाने लगी. और माल्ट हो कर होंटो की साइड से निचे गिरने लगी. दोनों को इतना मज़ा आ रहा था की पूछो hi मत…

इस बार ये काम सोनल ने किया तो अविनाश खुश हो गया. फिर दोनों ने मिल कर ऐसे hi आइसक्रीम को फिनिश किया. पैर अब तब दोनों गरम होने लगे थे. दोनों एक दूसरे के होंटो में घुसे थे. की अविनाश के हाथ सोनल के बूब्स पैर पहुंच गए. और वो उनको धिरे -2 दबाने लगा. सोनल भी गरम थी पैर बूब्स दबाने से पता नहीं उसको क्या हुआ की एक बार वो बिलकुल ढीली पद गयी. उसने रिस्पांस करना बंद कर दिया. अविनाश ने अपने होंठ उसके होंटो से हटा केर उसकी आखों में देखा तो वह आशु थे. आशु देख कर अविनाश गहरा गया. अविनाश का एक हाथ अभी भी उसके एक बूब्स पैर hi था. पैर सोनल न तो उसको मन कर रही थी न रोक रही थी केवल रो रही थी.

कुछ देर अविनाश भी सोनल को रोटा देखता hi रहा गया उसको समाज hi नहीं आया की क्या हुआ. पैर जैसे hi सोनल ने अपने बूब्स पैर से उसका हाथ जितका वो समाज गया सोनल क्यों नाराज है. पैर तब तक सोनल बहार जा चुकी थी. कार में बैठते hi सोनल बहुत तेज़ी से रोने लगी. और रट हुए hi घर आ गयी.

अविनाश को तो समाज hi नहीं आया की हुआ क्या है. जब इतनी वाइल्ड किश में प्रॉब्लम नै है तो बूब्स दबाने पैर रोना. क्या कोई जबरदस्ती की थी?? नहीं वो खुद बैठी थी मेरी गौड़ में. खुद भी तो किश को इतना एन्जॉय कर रही थी तो जोश ने आ कर यदि बूब्स दबा दिए तो कोण सी बड़ी बात हो गयी?? कुछ देर तक अवनीश सोचता रहा फिर घर आ कर सो गया. लता ने दोनों को आते हुए देखा था दोनों hi दुखी थे. एक बार तो लता भी परेशां हुयी फिर उसने सोचा की प्यार में रुदन मन्ना तो चलता hi रहता है.
 
अपडेट 259

ऐसे सोच विचार में कुछ दिन और बिट गए. आज केवल 17 दिन बचे थे त्रिकाल को अपनी सड़ना पूरी करने में. पब, अवनि और दिव्यांश तीनो hi गहन सोच में थे.

पब – देव अब आप hi कोई रास्ता बताइये नहीं तो त्रिकाल की सड़ना पूरी हो जाएगी और हम यहाँ पैर hi फंसे रहा जायेगे. और यदि त्रिकाल की सड़ना पूरी हो गयी तो वो सबसे पहले मुझको hi मरने आएगा.

दिव्यांश – बीटा मेरे भी कुछ समाज नहीं आ रहा की क्या करू. तुमने इतने जानवरो को मार कर भी देख लिया कुछ नहीं हुआ.

अवनि – हाँ मेरे भी कुछ समाज नहीं आ रहा है पैर पंकज तुमको इतने जानवरो को नहीं मरना चाहिए था. वो सब तो मासूम जानवर है. त्रिकाल ने उनको अपनी पावर से खूंखार बना दिया है. नहीं तो इतना खूंखार तो शेर (लोइन) भी नहीं होता. वो भी जब hi हमला करता है जब कोई उसको नुकशान पहुंचने की कोसिस करे यौ ो बहुत भुः हो.

अवनि की बात सुन कर पब के मंद में एक बात आयी – देव अपने गुर किया की इस जंगल में एक भी शेर नहीं है.

दिव्यांश – हाँ ये तो है.. पैर इसकी क्या वजह हो सकती है??

अवनि – कोई भी वजह हो पैर शेर नहीं है तो अच्छा hi है न नहीं तो वो भी हमारे पीछे पढ़ जहा.

पब – नहीं अवनि ये सोचने की बात है. हम बचपन से पड़ते आये है की शेर (लोइन) जंगल का राजा होता है. और यहाँ गेट भी जंगल के राजा के कहने पैर hi खुलेगा.

दिव्यांश की आखों में चमक आ गयी – ोुह्ह्ह यस .. बीटा तुम ठीक सोच रहे हो. यदि कोई शेर हो और हम उसको अपने काबू में कर ले तो हम बहार जा सकते है…

अवनि – मतलब अब शेर को खोजना होगा. पैर लगता तो नहीं की यहाँ कोई शेर है. िते दिनों से जंगल में है आज तक तो दिखा नहीं और न hi कभी शेर की आवाज सुनी है.

पब कुछ देर अपने आप में hi खोया रहा और फिर ाष्टिका देवी के धयान में बेथ गया. पब को धयान में बैठा देख कर दोनों समाज गए की वो कुछ ऐसा कर रहा है जिससे समस्या हल हो सकती है. पब अस्तिका देवी को मंत्रो का उच्चारद करता हुआ देवी को पुकार रहा था. कुछ देर मैं hi उसे अपने मन में देवी की आवाज सुनाई दी. तो उसने देवी से खुद को शेर के रूप में बढ़ाने की इच्छा जताई तो देवी मुस्कुरा कर बोली – पुत्र इसके लिए hi तो मेने तुमको ये वरदान दिया था. शायद तुम ये समजे की तुम किसी भी मानव का रूप ले सकते हो. पैर मेने तुमको वरदान में बोलै था की किसी का भी रूप मतलब किसी भी प्राणी का रूप ले सकते हो. तुम शेर भी बन सकते हो.

देवी की बाते सुन कर पब बहुत खुश हो गया. देवी को उसने धन्यवाद किया. और फिर देवी की आवाज आणि बंद हो गयी. पब ने भी अपनी आखें खोल दी और ख़ुशी से बोलै – ययययआह्ह्हुउउउ यहाँ से जाने का रास्ता मिल गया… चलो avni….aaiye देव जल्दी कीजिये..

अवनि और दिव्यांश भी पब के साथ चल दिए पब की ख़ुशी देख कर वो ये तो समाज hi गए थे की कोई न कोई बात तो है नहीं तो पब इतना खुश नहीं होता. पब जंगल के बिच में टेलिपोर्ट हो गया. और वह जा कर उन दोनों से थोड़ी दूर हो कर एक शेर का रूप धारण कर लिया. ये देख कर एक बार अवनि भी दर गयी. पैर दिव्यांश के होशला देने पैर शांति से कड़ी रही. और पब शेर की आवाज में जोर से दहाड़ने लगा. पब ने भी शेर का रूप लेते हुए माँ दुर्गा के उस शेर को याद किया था जिस पैर माँ विराजमान है. तो पब शेर नहीं बल्कि बबरशर के रूप में था और उसकी धहद से पूरा जांगले कैंप रहा था. कुछ hi देर मैं सभी जानवर शेर से दर कर छुपने लगे. और उसके दिल में शेर के लिए बैठा दर शेर को अपना राजा मैंने पैर मजबूर कर दिया.

पब ने शेर की तरह hi दहाड़ते हुए वह के गेट को खोलने का आदेश दिया. तो गेट खुल गया ये पब ने अपनी दिव्या दृष्टि से देख लिया था कियोकि इतने दिनों में वो गेट तक कई बार जा चुके थे तो पब को पता था की गेट कहा है. गेट के खुलते hi पब टेलिपोर्ट हो गया और गेट पैर पंहुचा. पब अभी भी शेर के रूप में hi था कियोकि क्या पता रूप बदलते hi गेट बंद हो गया तो.

गेट से बहार आते hi तीनो खुश हो गए. अवनि ने शेर के hi गाल को चुम लिया ख़ुशी के मारे. तो पब कुछ बोलने को हुआ तो पब के मुँह से शेर hi धहद hi निकली. अवनि गाल चुम रही थी एक दम धहद सुन कर दर गयी. पैर फिर पब को मरने लगी. पब को सताने के लिए शेर के उप्पेर hi चढ़ गयी. और उसके उप्पेर बेथ गयी जैसे दुर्गा माँ अपने शेर पैर हो. ये देख कर दिव्यांश हंस दिए और बोले – आज तक तो सुना था आज देख भी लिया की मर्द जो है वो शेर होता है और उसे सब डरते है पैर घर में आते hi उस शेर पैर उसकी घरवाली दुर्गमा की तरह सवार हो जाती है. और शेर किसी पालतू जानवर की तरह पंच हिलता hi रहा जाता है. हाहाहाहाहा

फिर पब अपने अश्ली रूप में आ गया और अवनि पैर झपटा कियोकि वो उसके उप्पेर बैठी थी. यु hi मस्ती करते ये तीनो जा पहुंचे इस चरण के अंत के पास. और आवाज हुयी “ छुअतहा चरण समाप्त”

वह पहुंच केर सभी एक तरफ बेथ गए. तो पीपीबी दिव्यांश से बोलै – हे देव अब आप यहाँ से जा सकते है. हम दोनों ये यात्रा पूरी करके hi जायेगे.

दिव्यांश – नहीं मेरे बच्चे अब मैं पीछे नहीं हैट सकता मेने यहाँ तक पहुंचने में अपना बहुत टाइम लगया है. अपना अमरत्व खोया है. मैं तुम दोनों के साथ आगे चलुगा. पैर अभी कुछ देर हमको यहाँ पैर hi बेथ कर अपनी जेवण शक्ति को फिर से पाना होगा नए चरण के लिए.

तीनो धयान में बेथ गए और अपनी जीवन शक्ति को पूरा करने लगे. शयाम के टाइम जब तीनो धयान से ुढे तो पब ने हवेली में सभी से बात की. फिर पब ने मणि जी से बात की उनको दिव्यांश के बारे में बताया तो मणि जी खुश हो गए की और बोले की तुमको उनसे बहुत सहायता मिलेगी इस यात्रा में. पैर अब तुम्हारे पास केवल 15 दिन बचे है कियोकि आज से ठीक 15वे दिन चाँद ग्रहण है. और त्रिकाल इस ग्रैहम काल में अपनी आखरी बलियो को दे कर अपनी सड़ना को जरूर पूरी कर लेगा. कियोकि ग्रहण काल में दी गयी बलि बहुत फायदेमंद होती है काली शक्तियों के लिए.

सभी से बात करते करते रात हो जाती है पैर फिर भी ये तीनो अभी नए चरण में जाने की सोचते है कियोकि टाइम बहुत काम था इन सब के पास. जैसे hi थोड़ा आगे चलते है तो आवाज होती है – “पांचवा चरण प्रारम्भ”

ये लोग थोड़ा hi आगे बड़े थे की वो एक सिटी में पहुंच जाते है देखने से hi लग रहा था की कोई अच्छा शहर है. चारो और लाइट जगमगा रही थी. दुकानों पैर इस टाइम भी भीड़ थी. चारो तरफ रौनक hi रौनक नजर आ रही थी. ये सब देख केर तीनो सोचते है की यहाँ कोण सी मुश्किल है और जाना कहा है. तो पब अपनी तलवार को दिशा के वेयर में पूछता है तो तलवार एक बार फिर देखा दे देती है और गोल घूम जाती है. मतलब फिर कोई ऐसी मुश्किल मिलने वाली है जॉय अहा चारो और है.

ये तीनो वह के रास्तो पैर चल hi रहे थे की तभी देखते है की कुछ लोग एक लड़की के पीछे भाग रहे है ऐकोर चोर चीला कर. और फिर उसको पकड़ कर मरने लगते है. तो ये देख कर पब उस लड़की की और बढ़ता है और दिव्यांश भी बढ़ जाता है. अवनि दूर से hi देखने लगती है रात में इतने आदमियों के पास जाना उसको ठीक नहीं लगता. पब वह जाता है तो देखता है की उस लड़की ने किसी का एक कंगन चुराया था तो एक आदमी उसे पूछता है – ये लड़की क्यों चुराया तूने कंगन??

लड़की – मैं चोर नहीं हो मैं 2 दिन से भूखी थी इस लिए ये कंगन चुराया.

आदमी – यदि भूखी थी तो किसी से भी खाना मांग लेती इस नगर में कोई मन करता है क्या किसी से?? क्यात ु नयी आयी है इस नगर में??

लड़की – जी अभी 2 दिन पहले hi आयी हु..

आदमी – ला कंगन दे और जा किसी से भी खाना मांग ले या मेरे साथ चल में देता हु तुझको खाना.

तभी पब को लगता है की अवनि उसे कही दूर जा रही है. वो पचे पलट कर देखता है तो उसके पीछे और लोग खड़े थे. पब जब उस भीड़ से बहार आता है तो अवनि उसको सामने hi कड़ी दिखाई देती है. पैर फिर भी अवनि को खोने का दर उसके दिल को परेशां कर रहा था पैर वो उसको इग्नोर कर देता है.

तभी दिव्यांश भी बहार आ जाते है तो ये तीनो आगे बाटने लगते है. रात ज्यादा होने लगती है तो ये सभी रोड के किनारे फुटपाथ पैर hi सो जाते है. और सुबह फिर से भटकने लगते है. भटकते हुए वो एक कॉलोनी में पहुंचते है तो पब को वह कुछ ऐसा दीखता है की पब को अपनी आखों पैर विश्वास नहीं होता. पब एक औरत को घूरे जा रहा था. वो एक मंदिर के बहार कड़ी बच्चो को खाना बाँट रही थी. तभी एक आदमी उसको दिखाई देता है. वो उस औरत के पास अभी पंहुचा था उसको देख कर तो पब गिरने को हो जाता है.

सामने उसके पापा प्रतिक और उसकी माँ अल्पना खड़े थे. उनको देख कर पब की आखों से ख़ुशी के आशु बहा रहे थे. पब सब भूल कर उनके पास पहुंच जाता है और अल्पना से कथा है – माँ मैं भी भूखा हु मुझको नहीं खिलाओगी खाना..
 
अपडेट 260

सामने उसके पापा प्रतिक और उसकी माँ अल्पना खड़े थे. उनको देख कर पब की आखों से ख़ुशी के आशु बहा रहे थे. पब सब भूल कर उनके पास पहुंच जाता है और अल्पना से कथा है – माँ मैं भी भूखा हु मुझको नहीं खिलाओगी खाना..

अल्पना मुद कर जब पब को देखती है तो मरे ख़ुशी के उसे अपने गले लगा लेती है. तभी प्रतिक किन अजर भी पब पैर पद जाती है. तो वो भी पब को अपने सीने से चिपका लेता है. बहुत देर तक तीनो एक दूसरे से चिपके रहते है.

पब – माँ आप जिन्दा है?? पापा आप भी यकीं नहीं हो रहा की ये सब सच है पापा आपकी बॉडी का तो हम खुद अंतिम संस्कार करके आये थे..

अल्पना – बीटा तू नहीं जनता तेरे और हमारे साथ कितना चल हुआ है. वो तो त्रिकाल गुरूजी की कृपा है जो आज हम सब जिन्दा है और मिल गए.

पब – पैर माँ किसने किया है हमारे साथ देखा??

अल्पना – उस मणि और दानव रानी दखासुरी ने. तू नहीं जनता बीटा कितना कुछ हो चुक्का है. वो तो त्रिकाल गुरूजी ने हमको बचा लिया नहीं तो हम भी मार गए होते.. चल घर चल तब तुझको सब बताती हु.

तब तक वह अवनि और दिव्यांश भी पहुंच गए थे. दिव्यांश को ये सब चीजे खटक रही थी. पैर वो फिर भी बोल नहीं प् रहा था. और वो ये जानना भी चाहता था की सच क्या है?? रस्ते में दिव्यांश को 2 लोग दिखाई देते है उनको देख कर दिव्यांश खुश हो जाता है. ये लोग वो देव दूत थे जो इस चक्र्विएव में इंद्रा देव की आज्ञा से आये थे. घर छोटा था पैर बड़ा hi सुन्दर था. घर पर पब को एक लड़की मिलती है पब को लगता है की उसने उसे कही देखा है पैर उसे याद नहीं आ रहा था की ये कोण है.

पब – माँ ये कोण है??

अल्पना – ारे तूने पहचाना नहीं ये अपने पडोशी शर्मा जी की बेटी सुरभि है. जिसके साथ तू बचपन में खेलता रहता था. भूल गया इसको भी?? ये तो तेरा कबसे इन्तजार कर रही है कहती है की जब पंकज आएगा तो उसी से शादी करुँगी नहीं तो कुवारी hi साहूजी. और एक तू है जो इसको पहचान भी नहीं रहा…

अल्पना की बात सुन कर वो शर्मा कर अपने घर भाग जाती है वो लोग भी पास में hi रहते थे. ये सभी ये देख कर हसने लगते है और पब अपने अतीत में उस लड़की सुरभि को देखने लगता है की कैसे वो उसके साथ रहता था वो सोनल और पब के साथ hi खेलती थी. पैर प्रतिक के मरने से कुछ दिन पहले hi वो लोग गाओं छोड़ कर चले गए थे. क्यों ये उसको याद नहीं था.

अल्पना पब को होश में लती है और फिर सभी बेथ जाते है और अल्पना सभी के लिए टिया और बर्फ ले आती है. पब फिर अल्पना से पूछने को होता है तो अल्पना कहती है की जा जा कर पहले नाहा धो ले फिर आराम से बेथ कर बाते करेंगे. तेरे पापा तो काम पैर जायेगे. तब हम बेथ केर बाते करेंगे.

जब सभी फ्रेश हो कर बैठते है तो पब बोलै – अब बताओ माँ क्या हुआ था?? ये सब क्या चक्कर है???

अल्पना – बीटा दानव रानी और मणि मिल कर डलासुर को ट्रिकल की कैद से आजाद करवाना चाहते है ताकि दुनिया को फिर से दानवो का गुलाम बना सके. दुनिया में तभी मचा सके.

दिव्यांश – नहीं आप झूट बोल रही है मेरा बीटा ऐसा नहीं है.

अल्पना – नहीं आपका बीटा ऐसा hi है पहले वो ऐसा नहीं था जब तक वो देव था वो ऐसा नहीं था पैर दानव बनने के बाद वो ऐसा hi है. उसने आपको और इंद्रा को बेवकूफ बनाना के लिए वो सब टोंग किया था. और अंदर hi अंदर अपने दानवो से संसार में आतंक फैला रह था. यकीं न हो तो उन देवदूतों से भी पूछ लेना को यहाँ पैर डलासुर के bête दयासुर से चुप कर रहा रहे है. कियोकि उनको उनकी सचाई पता चल गयी थी तो वो दोनों देवराज इंद्रा को सब बताने जा रहे थे. पैर बिच में hi दयासुर ने उनको मरना चाहा तो वो यहाँ आ कर चुप गए. वैसे भी ये सब आपके कारन hi हो रहा है आपको लगता है की आपका बीटा बहुत अच्छा है इस वजह से आप ये कभी देख hi नहीं पाए की वो क्या -2 गलत कर रहा है. और फिर उस चक्रवेव से अपने bête को आजाद करवाने के लिए चल दिए. आपकी नजर हट्टे hi मणि और दस अपना खेल खुल कर खेलने लगे. और अब मुझको लगता है की मेरे bête को उन्होंने अपना हथियार बना कर भेजा है डलासुर को मुक्त करवाने के लिए.

पब – हाँ माँ मैं तो डलासुर को मुक्त करवाने के लिए hi आया हु. उसके लिए hi तो मेने इतनी शक्तिया हाशिल की है.

अल्पना – बीटा ये काम भूल कर भी मत करना. वो एक दानव है. और दानव कभी मानवो के लिए अच्छे नहीं होते. त्रिकाल गुरूजी एक अच्छे मानव है उन्होंने संसार को बचने के लिए hi उस दानव को यहाँ बांध कर रखा है.

पब – नहीं माँ त्रिकाल अच्छा आदमी नहीं हो सकता. उसने आपके और दीदी के साथ कितना कुछ गलत किया है. और आप उसको hi अच्छा बता रही है.

अल्पना – नहीं बीटा उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया. बल्कि समय ने hi उनके साथ गलत करवा दिया. और उसको ठीक करने के लिए मुझको और संभु को बहुत कुछ करना पड़ा.

पब – तो क्या जो लता माँ ने और मणि जी ने मुझको बताया वो सच नहीं था?? क्या जो दीदी ने बोलै वो सच नहीं है??

अल्पना – मुझको नहीं पता की तुझको किसने क्या बताया है. और तूने क्या कहा सोनल जिन्दा है?? वो ठीक है?? कहा है मेरी बच्ची?? मेने तो सुना था की मणि ने उसको मार दिया है. पैर वो है कहा?? क्या वो तेरे साथ नहीं आयी. क्या वो तेरे साथ नहीं रहती??

अल्पना एक दम से बेचें हो गयी. तड़प ुधि अपनी बेटी के लिए. तो पब एक दम से बोलै – हाँ माँ दीदी ठीक है और जिन्दा भी है मैं मिल चुक्का हु उनसे. पैर उन्होंने कहा था की माँ की आखरी खवाइश थी की जब तक मैं संभु को नहीं मार देता तब तक उनसे नहीं मिल सकता. इसलिए वो लता माँ के साथ रहा रही है.

अल्पना – तू बार बार उस कुटिया लता को माँ क्यों कहा रहा है?? वो तेरी माँ कब से हो गयी. मैं ह उतेरी माँ वो नहीं समजा. लगता है अब तुझको सब सच बताना hi होगा. किकोकि मेरे हिसाब से अब मेरी बच्ची सोनल की जिंदगी भी खतरे में है.

पब – माँ लता की बेटी से मेरी शादी हुयी है. और वो तो आपको अपनी छोटी बहन मानती है. तो दोनों hi तरह से वो मेरी माँ हुयी न??

अल्पना – सुन बीटा लगता है तुझको बहुत कुछ गलत बताया है. लता की बेटी तो बचपन में hi मर गयी थी और इसलिए वो सोनल को बेटी की तरह प्यार करने लगी. पैर उसने मुझको धोखा दिया और संभु को कहा की मैं धंधा करती हु. इसलिए संभु मुझको त्रिकाल जी के पास ले गया. पैर सम्भोग क्रिया होने से पहले hi मैं वह से भाग आयी और फिर तेरा जनम हुआ. मैं और तेरे पापा दोनों दर गए तो हम गाओं में जा कर रहने लगे. एक बार तेरे पापा दुवारा शहर गए तो मणि ने उनके जरिये मुज तक पहुंचने की कोसिस की और तेरे पापा को मारने की कोशिश की पैर संभु ने उनको बचा लिया और यहाँ छुपा दिया. फिर तुझको याद होगा की एक बार मणि घर आया था और तूने उसको मन कर दिया. उस दिन वो मुझको डंका कर गया था की यदि तूने उसकी बात नहीं मणि तो वो हम सबको मार देगा. वो तेरे जरिये डलासुर को आजाद करवाना चाहता था. पैर एक दानव फिर इस संसार को नष्ट न कर दे. ये सोच केर मैं संभु से मिलने गयी. तो संभु ने बताया की त्रिकाल को जिन्दा करने का केवल एक hi तरीका है जो काम सालो पहले ादुरा रहा गया था उसे पूरा किया जाये. पैर मैं ये कैसे कर सकती थी. पैर फिर जनकल्याण के लिए मैं ये भी करने को सजी हो गयी. तो संभु ने मेरी और सोनल की जुली के पास ट्रेनिंग करवाई. कियोकि ये तो टब hi समझता hi होगा की एक सटी सावित्री कैसे तेरी माँ वो सब नहीं कर सकती थी बिना उस ट्रेनिंग के. फिर मैं और त्रिकाल एक रूम में बंद हो गए. सोनल का पूरा धयान तब संभु ने रखा था. मेने त्रिकाल की पूरी सेवा की बहुत दिनों की सेवा से जब वो ठीक हो गए तो उन्होंने मेरे मरने की खबर फैला दी और मुझको यहाँ भेज दिया पैर इन सब में एक गलती हो गयी संभु से की एक दिन सोनल को अकेली छोड़ कर कुछ ज्यादा देर के लिए चला गया इस बिच में hi मणि के आदमी सोनल को ुधा कर ले गए. और फिर मुझको पता चला की मणि ने उसको मार दिया है. पैर अब तू कहा रहा है की सोनल जिन्दा है तो हो सकता है मणि और लता ने उसको त्रिकाल गुरूजी के खिलाफ तुझको भड़काने के लिए जिन्दा रखा होगा. तभी तो वो तेरे पास नहीं रही.

अल्पना की बातो को सुन कर पब का सर hi घूम गया था कहानी लगभग वो hi थी बस उसमे हीरो और विलन बदल गए थे एक दूसरे से. पैर पब अपनी माँ पैर शक भी नहीं कर सकता था माँ hi तो थी जो उसके लिए सब कुछ थी. माँ के लिए hi तो वो ये सब कर रहा था और आज उसकी माँ hi उसे बता रही थी की वो जो कर रहा है वो गलत है.

अल्पना तो खाना बनाना चली गयी पैर पब अपनी सोच में वह पैर hi बैठा रहा और जब उसने अवनि से इस बारे में बात की तो अवनि ने भी अल्पना की बात को सही मन.

अब पब वह अपनी माँ और पापा के साथ मजे से रहने लगा. अवनि और पब के बिच कुछ दूरिया आ गयी थी इन बाईट हुए 10 दिनों में. और पब और सुरभि का प्यार जवान हो रहा था. पब अक्सर सुरभि के साथ रहता था. और दिव्यांश भी उन देवदूतों के साथ रहने लगे थे उनकी कहानी सुन कर दिव्यांश का भी मन न हुआ कही जाने का. कियोकि आज तक वो जॉब hi करता आया था उसको वो एक दम गलत दिखाई दे रहा था. और उसका सबसे प्यारा बीटा hi उसको अपने और मानव जाती के खिलाफ दिखाई दे रहा था.

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यहाँ सोनल का हाल भी ठीक नहीं था. सोनल और अविनाश के बिच में भी दूरिया आ गयी थी. और ये सब सोनल की वजह से hi था अविनाश ने तो कोसिस की थी एक घटना के बाद बात करने की पैर सोनल ने hi उसे दूरिया बना ली थी. उस दिन के बाद आज तक दोनों के बिच में कोई बात नहीं हुयी थी. अविनाश ने कई तरह से सोनल को सॉरी भी बोलै पैर सोनल ने पहले उसके किसी सॉरी का जवाब नहीं दिया. और जब एक दिन अविनाश ने गुस्से में उसको रोक कर जोर दे कर पूछा तो उसने साफ़ कहा दिया – अविनाश जी अब मैं आपके साथ कोई भी रिस्ता नहीं रकना चाहती तो आप भी मुझको परेशां करना छोड़ दो. और किसी और को अपने लिए देख लो. हमारे बिच में जो भी कुछ था अब वो ख़तम हो चुक्का है.

अविनाश – ठीक है पैर क्या में इसकी वजह जान सकता हु??

सोनल – अविनाश जी यदि अपने सच में कभी एक पल के लिए भी मुझसे प्यार किया है तो आपको उसका वास्ता है की आप इसकी वजह कभी नहीं पूछेंगे. गलत आप नहीं है गलत मैं हु और मैं उस गलती को आपके सामने कहा सकू इतनी हिम्मत मुजमे नहीं है. तो प्लीज अपने दिल में इसके लिए कोई मलाल मत रखना. और मुझको किसी बुरे सपने की तरह भूल जाना. मैं जानती हु की मुझको सामने देखते हुए आप कभी मुझको भूल नहीं पाएंगे. इस लिए मैं अपने केवल कुछ दिन का वक्त मांगती हु. जैसे hi पंकज लूट आएगा मैं यहाँ से दूर चली जोगी की आपको कभी दिखाई भी न दू.

उस दिन के बाद अविनाश ने भी कभी सोनल से बात करने की कोसिस नहीं की पैर उसकी आखें सोनल को हमेश ये hi याद दिलाते थी की क्यों??? क्यों किया तुमने ये मेरे साथ??

यहाँ लता भी बहुत परेशां थी सोनल और अविनाश के बिच की दूरियों से. वो रतन को भी कई बार कहा चुकी थी की वो पता करे की क्या हुआ वो दोनों के बिच में दूरिया आ गयी. पैर रतन भी ये कैसे पता कर सकता था जब दूरियों ककरण तो केवल सोनल के दिल में कैद था.

अंकिता को भी इसकी खबर हो चुकी थी. उसने भी कोसिस की थी की सोनल शायद उसको कुछ बता दे पैर सोनल ने अंकिता को भी कुछ नहीं बताया था. और फिर फ़ोन पैर दिल की बाते कहा हो पति है. अंकिता ने सोच लिया था की वो जब भी सोनल से मिलेगी वो उसे बात जरूर करेगी.

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डी. गुरु और वो 15 डॉ फिर एक बार हॉल में बेथ कर मीटिंग कर रहे थे. आज एक लम्बे टाइम के बाद ये सभी साथ बैठे थे.

डॉ2 – गुरूजी पानीपुर और उसके आस पास के सभी रय रेडी हो चुके है. कब भेजना है उनको??

डी. गुरु – कल hi भेज दो. पर अभी तक केवल वो hi रेडी हुए है?? और नहीं??

डॉ1 – नहीं गुरूजी बहुत से रय रेडी है बस हम उनको चक कर रहे है की उनके चेंज ठीक है या नहीं..

डी. गुरु – चक करने की जरुरत नहीं है वो मशीन नहीं है वो सब दानव hi है. और जब तुमने उनके मंद में दरिंदगी भर hi दी है तो उनको आतंक मचने के लिए पुरे देश में फैला दो. हर तरफ से दरिंदगी की hi खवारे आणि चाहिए.

डॉ3 – जैसा आप कहे गुरूजी.

डॉ1 – पैर गुरूजी इस आतंक से हमको क्या फायदा??

डी. गुरु – होगा बहुत होगा. त्रिकाल की शदना बस कुछ दिनों की है जैसे hi वो शदना से उड़ेगा. उसे इस दरिंदगी से बहुत फायदा होगा. और हो सकता है दुनिया में मचे आतंक को देख कर पब की पत्निया भी बिल से बहार आ जाये…

डॉ1 – हाँ ये हो सकता है गुरूजी…

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संभु भी पब की पत्नियों खोज न पाने के कारन बहुत परेशां हो चुक्का था उसने बहुत सरे चलो को इस काम पैर लगा दिया था. उन विदेशियों को भी बोलै था की पता करे की ये किसी और देश में तो नहीं है. पासपोर्ट और वीसा ऑफिस से भी पता करवाया था की पब की पत्निया कहा गयी है. पैर वह भी इनके जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं था. मतलब उनके हिसाब से ये सब इंडिया में hi थे. और यदि इंडिया में है तो संभु को क्यों नहीं मिल रहे ये संभु को समाज नहीं आ रहा था. और इस बार डी. गुरु भी संभु की हेल्प के लिए नहीं आये थे.

संभु उन सबको खोजने में और अपने काळा डंडे फिर से सुरु करने में इतना उलझ गया था न तो उसे घर का होश था और न अदिति और अपनी पत्नी का. अदिति 2-3 बार घर आ चुकी थी संभु के बहार होने पैर. और उसने धयान से संभु की सभी अलमारी या कहो पुरे रूम को और उसके पूजा रूम को बारीकी से देखा था पैर उसको कुछ हाथ नहीं लगा था.
 
अपडेट 261

कार में लगे बग्स से उसको संभु के एक टिकने का और पता चला था. पैर वो उसने जा नहीं सकती थी कियोकि एक तो वो भी सुनशान एरिया में था और वह जाना किसी को भी अल्लोव नहीं था. ये एक बड़ा फार्म हाउस था और यहाँ पैर सिक्योरिटी भी बहुत टाइट थी. पैर पता नहीं क्यों अदिति को लग राह था की संभु अपनी जान से प्यारी उस चीज को ऐसे किसी ठिकाने पैर नहीं रख सकता कियोकि संभु वह इतने दिनों में 6-7 बार hi गया था. और अदिति को ये भी पता चला था की ये फार्म हाउस सभी काळा डंडो का अड्डा है. और इसके मालिकों के बारे में कोई नहीं जनता. अदिति भी खुल कर कोसिस नहीं कर सकती थी कियोकि वो अपने बाप किन अजर में नहीं आना चाहती थी.

जिसकी जान जहा पैर हो वो वह 5-6 वीक में केवल 6-7 बार hi जाये ये उसको हजम नहीं हो रहा था. घर पैर कही मिला नहीं था ऐसा कुछ और कही होने का उसको शक भी नहीं था. आज रात को ये सब hi सोच रही थी की अदिति के मंद में एक बात आयी और उसने तुर्रंत सोनल को फ़ोन लगाया. नार्मल और ऑफिस की बात होने के बाद अदिति बोली

अदिति – मम अपने मुझको कुछ खोजने को बोलै था. जिसमे संभु की शील्ड की पावर छुपी हो. क्या ये चीज कोई लॉकेट भी हो सकती है??

सोनल – अदिति मैं कहा नहीं सकती मन एक बार माहि को लाइन पैर लेती हु वो तुमको बताएगी.

फिर सोनल माहि को भी लाइन पैर ले लेती है और अदिति और माहि की बात करवाती है.

माहि – हाँ अदिति जी वो चीज लॉकेट भी हो सकती है. पैर आपको ऐसा क्यों लगा की वो एक लॉकेट hi है??

अदिति – माहि जी बात ये है की संभु के गले में सालो से एक hi लॉकेट है और वो उसको न तो कभी उतर कर कही रखते है और न hi किसी को हाथ लगाने देते है. एक बार मेरे छोटे भाई से गलती से वो लॉकेट खींच गया और उनके गले से अलग हो गया था तो वो एक दम बहुत गुस्से में आ गए. नहीं तो मेने कभी उनको इतने गुस्से में नहीं देखा था हम भाई बहनो पैर..

माहि – अदिति जी आपकी बात से तो ये hi लगता है की वो लॉकेट hi है जिसने उस शील्ड की साडी शक्तिया छुपी है. पैर जरुरी नहीं की ये वो hi हो. मैं आज hi देखती हु इसको कैसे चक किया जा सकता है. कियोकि यदि गलती से भी ये वो नै हुआ और तुम्हारा सच तुम्हारे पापा के आगे आ गया तो फिर तुम तो गयी.

सोनल – ok माहि तुम इसके बारे में पता करो फिर मुझको बताना.. ok bye..

कॉल एन्ड…

अदिति फ़ोन रकने के बाद सोचती रहा टी है और फिर उसके मंद में पब का ख्याल आ जाता है और पब के बारे में सोचते hi उसकी छूट भी फड़क उड़ती है. जी हाँ भाई छूट… और वो इसलिए हुआ क्योकि जब से अदिति चेन्नई आयी थी उसमे बहुत बदलाव आ चुके थे. जिस अदिति ने घर में रहते हुए सेक्स की तरफ कोई ध्यान नहीं था आज वो अदिति सेक्स में बहुत रूचि लेने लगी थी. और उसका एक कारन था उसकी बाप की अयाशियो की खबरे. संभु हर वीक में 2-3 बार तो कही और पानी गिराने जाता hi था और अदिति उस पैर नजर रख रही थी तो उसको पूरा तो नहीं फिर भी इतना तो पता चल hi गया था की उसका बाप क्या करता फिर रहा है. और इस काम में उसकी हेल्प की थी उसके एक फ्रेंड ने जो उसके साथ hi सोनल के ऑफिस में काम करती थी और अदिति के बाप पैर नजर राकेने का भी काम करती थी. पैर उसका काम केवल ये होता था अदिति के लगाए बग्स और ऑडियो एंड वीडियो को देख कर उनके बारे में अदिति को बताना.

इसके इलावा जो सबसे बड़ा कारन थी वो थी उसकी रूम पार्टनर रूही. रूही उसकी जर. थी और उसके साथ hi रहती थी. रूही एक बहुत कामुक लड़की थी पैर फिर भी किसी से छुड़वाई नहीं थी. उसको उसके मन का बर्फ नै मिला था. वो अपने बर्फ कपड़ो के साथ बदलती थी पैर बिलो जॉब, रोब्बिंग, किसिंग से आगे नै जा पायी थी उसको किसी इंडियन लड़के का अफ्रीकन लड़को जीतनेय बड़े लुंड की तलाश थी. वो चाहती थी की जब पहली बार चूड़े तो उस चुदाई में पैदा हुए दर्द को कभी न भूल पाए. मतलब की वो अपना 1सत सेक्स एक तगड़ा सेक्स एनकाउंटर के रूप में चाहती थी वो हर लड़के के बस की बात नहीं थी तो उनके लुंड को चक करके hi उनको bye bye कर देती थी.

जूही ने अपनी ये खवाइश अदिति को भी बता दी थी. अदिति पहले तो कभी उसकी बातो पैर धयान नहीं देती थी. रूही रात को अक्सर फ़ोन पैर बुले फिल्म देख -2 कर फीगरिंग करती तब जा कर उसको नीड आती थी. ये रूही का लगभग रोज का काम था. अदिति कुछ दिन तो बची रही पैर एक जवान लड़की कब तक सेक्स से दूर भाग सकती है. तो फिर रूही के साथ छेद चढ़ और मस्ती में उसको भी मज़ा आने लगा. रूही पहले तो अपनी लिमिट में hi मज़ाक करती थी पैर जब अदिति उसे खुलने लगी तो रूही तो जैसे उस पैर चढ़ने को hi तैयार हो गयी. अदिति बाला की खूबसूरत, गोरी और सॉलिड फिगर वाली लड़की थी. जिसको देख कर किसी का भी दिल मचल जाये. जबकि रुली श्यामली, तीखे nain-naksh वाली गदराई घोड़ी थी. जिसको अपने घोड़े का सालो से इन्तजार था. अब दोनों के बिच में माहौल बहुत खुल गया था. सेक्स के टॉपिक पैर दोनों घंटो बाटे करती रहती थी उसमे अदिति अक्सर सुनने का काम करती थी. और रूही अदिति की आग को भड़का देती थी. और फिर अदिति के बूब्स को कपड़ो के उप्पेर से hi दबा देती तो अदिति भी उसकी गांड पैर चपत लगा देती. दोनों एक दूसरे की हरकतों से सिसक कर रहा जाती थी.

अदिति को जब से दानवपुरता का सच पब के रूप में पता चला था तब से उसके दिल में पब के लिए एक खाश जगह बन गयी थी. और जब भी वो सेक्स की बातो में ज्यादा उत्तेजित हो जाती तो वो अपने सेक्स पार्टनर के रूप में पब को hi देखती. और ये सब कैसे हुआ उसको भी पता नहीं चला. धिरे धिरे अदिति के मन में एक सेक्स फंसती बन गयी थी की वो पब के साथ सेक्स कर रही है. और पब भी उसको किसी रंडी की तरह पेल रहा है. रूही को मोठे लुंड से छोड़ना था और वो भी एक रफ़ सेक्स के खवाब देखती थी. तो अदिति को भी खवाओ में पब के साथ रफ़ सेक्स hi करती थी. समय ने अदिति को क्या बना दिया था ये अदिति को भी पता नहीं चला था.

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मास्टर ये हंबा, हमक और दीपक में मंजू और ेबेचा की मदत से अपने स्कूल समुराई स्कूल ऑफ़ मार्टिकल आर्ट्स को यूनिवर्सिटी की मान्यता दिलवा दी थी. तो पब की बताई हुयी जगहों पैर जा कर स्कूल के लिए लैंड खरीद ली थी. और वह पैर स्कूल के कंस्ट्रक्शन का काम भी सुरु हो गया था. मास्टर ने अपने स्कूल से निकले सभी बेस्ट स्टूडेंट्स की एक लिस्ट बना ली थी और एक लिस्ट वो भी बनाई थी जो स्कूल से निकलने के बाद किसी सरकारी जॉब में है. मास्टर से स्कूल्ज के लिए स्टाफ के लिए भी बहुत साडी तैयारी कर ली थी. जुली के साथ मंजू ने कुछ आदमियों को उन कंस्ट्रक्शन साइट पैर पहुँचवा दिया था जहा काम चल रहा था. (ये वो आदमी है जो जुली को 3 दिन के हमले में मिले थे और इनको जुली और पब अपने साथ दानव बेस में लाये थे)

यहाँ मंजू ने बेबी से कुछ सॉफ्टवेयर भी बनवाये थे जो स्कूल और लोगो की हेल्प के लिए काम आने थे. इस सभी कामो में पैसा पानी की तरह खर्च हो रहा था पैर किसी को इस बात की कोई टेंशन नहीं थी कियोकि पब का टारगेट hi था देश को खुशाल बनाने का जहा किसी के साथ भी अन्याय न हो. मंजू ने बेबी क साथ में मिल कर एक मोबाइल अप्प भी बनाया था जिससे कोई भी परेशां आदमी अपनी परेशानी को उस अप्प में डिटेल के साथ एंटर कर दे तो वो सर्वर और पब के उस एरिया के स्कूल में अप्पोइंट लोगो को मिल जाये. एक तरह से ये पब की पुलिस की फ्री थी. जहा पब के लोगो से केवल न्याय hi मिलने की उम्मीद थी.

दीपक ने एक समाज सेवी संस्ता “आप जनकल्याण संस्था” का रजिस्टशन करवा दिया था. और ये नाम दीपक को पब की सभी पत्नियों ने दिया था. आप – अल्पना प्रतिक. नई स्कूल का काम भी इस संस्था के अंडर में hi हो रहा था. और अप्प भी आप अप्प के नाम से hi आणि थी.

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एक अंदर रूम में एक लड़की बंदी हुयी थी उसकी शक्ल भी दिखाई नहीं दे रही थी. वो लड़की एक दम मरने वाली हालत में लग रही थी. की तभी रूम का गेट खुला तो उसकी रौशनी में लड़की का फेस नजर आया. ये क्याआ???? ये तो अवनि थी. यदि अवनि यहाँ कैद है तो पब के साथ कोण है??

गेट से एक औरत का साया अंदर आया और उसने अवनि के बाल पकड़ कर उसके सर को ुचा किया – ये लड़की कब तक भूखी रहेगी?? क्या फायदा समय से पहले hi मार जाएगी. इससे अच्छा ये है की जितना दिन तेरी जिंदगी के बचे है उतने दिन तो जे ले मरना तो तुझको है hi….

अवनि एक दम मरी हुयी आवाज में – नहीं तुम मुझको नहीं मार सकती मेरा पब मुझको बचने जरूर आएगा. उसको आना hi होगा मेरा प्यार इतना भी कमजोर नहीं की उसको आने पैर मजबूर न कर सके. ुएको अपने प्यार को बचने के लिए आना hi होगा. सामजी या नहीं…

औरत – हाहाहाहाहा… वो कभी नहीं आएगा…. तू जानती है की मैं कोण हु… चल आज तेरा ये भ्रम भी में दूर कर देती हु. की तेरा प्यार तुझको बचने आएगा. वैसे भी तू बस 2-3 दिन hi जिन्दा है फिर तो तुझको मरना hi है. देख मेरा चेहरा पहचान पायी की मैं कोण हु?? (ये बोल कर औरत ने ताली बजायी तो वो रूम रौशनी से नाहा गया. और दोनों के फेस साफ़ दिखाई देने लगे)

अवनि उस औरत का फेस देख कर कुछ सोच में पद गयी कियोकि उसने ये फोटो में देखा था हवेली में. जी हाँ दोस्तों ये अल्पना hi थी….

अवनि – तुम तो.. तुम तो पंकज की माँ जैसी दिख रही हो?? कोण हो तुम??

अल्पना – मैं उसकी माँ hi हु अल्पना… और सुन अब मेरा बीटा तुजसे प्यार नहीं करता अब वो सुरभि से प्यार करता है और बहुत जल्द दोनों की शादी होने वाली है.

अवनि – नहीं तुम पब की माँ नहीं हो सकती. वो तो बहुत hi अच्छी महिला थी. तुम कोई बहरूपिया हो.. तुम हो hi नहीं सकती उनकी माँ…

तभी गेट से तालियों की आवाज के साथ एक आदमी अंदर आता है और ये प्रतिक था. प्रतिक – हहहहह ठीक पहचाना लड़की न ये उसकी माँ है और न मैं उसका बाप ये सब मेरे रूप है और मैं हु – छलावा.. एक छल.. जो किसी के भी सबसे प्रिये और उसके नजदीक लोगो का रूप ले कर उनको अपने जाल से फंशा लेता हु. तेरा प्यार पब भी मेरे छल में फंस चुक्का है वो इसको अपनी माँ और मुझको अपना बाप मंटा है. तुझको पता है मेरे एक तेरा रूप भी उसके साथ रखा हुआ है और उसने तेरे और उसके प्यार को ख़तम कर दिया है अब वो मेरे एक छल सुरभि के प्यार में पागल है और जैसे hi वो दोनों एक होंगे वैसे hi तेरे प्यार की साडी शक्तिया मुझको मिल जाएगी. हाहाहाहाहा

अवनि – तो मुझको क्यों जिन्दा रखा है मार दो मुझको भी (Pratik/chhalawe की बात सुन कर अवनि टूट सी गयी थी)

छलावा – चिंता न कर तेरी मूट भी जल्दी hi होगी. (मन में – यदि सुरभि का छल फ़ैल हो गया तो मुझको तेरी जरुरत होगी लड़की इसलिए तो तुझको अभी तक जिन्दा रखा है)

फिर अल्पना और प्रतिक हस्ते हुए वह से चले गए और अवनि रोटी रहा गयी.
 
अपडेट 262

दिन बीतते गए और मणि जी और दयासुर जी की चिंताए बढ़ती गयी. पब और अवनि को 5तह चरण में गए कई दिन हो चुके थे. और अब केवल 2 दिन बाकि थे. त्रिकाल की शदना कल के चंद्र ग्रैहम के साथ पूरी होने वाली थी. और वह पब और अवनि दोनों 5तह चरण के छलावे में फंसे हुए थे. और दिव्यांश भी उस छलावे को नहीं पहचान पाए थे वो भी उन देवदूतो के छल में फंस कर उनके साथ hi दिन गुजर रहे थे. मणि जी और दयासुर जी दस आ से प्राथना कर रहे थे की पब जल्दी hi उस चक्रवेव को भेद दे. और हवेली में भी कुछ ये hi हाल था सभी के दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी. अंत सामने था. ये 2 दिन 48 हॉर्स में कुछ भी हो सकता था. सभी एक दूसरे को समजते और भगवन से प्राथना करते की पब 2 दिन में अपना लक्ष्य प् ले. सभी को ये न मुंकिन लग रहा था. कियोकि जब इतने दिनों में 5 चरण पार न हुए तो 2 दिन में ये सब कैसे हो सकता था. पैर सभी को भगवन पैर विश्वास था तो बस भगवन से इस आशम्भव को संभव करने की प्रत्न में लगे थे.

एक तो पब की चिंता और उप्पेर ने सरपंच और उसकी पत्नी लीलादेवी ने पब की सभी पत्नियों को परेशां किया हुआ था. सरपंच ने पुरे गाओं में आतंक मचा रखा था. सरपंच ने गाओं में बहुत गरीब लोगो को कर्ज़ा दे रखा था और कुछ दिन से अपना कर्ज़ा न देने पैर उन गरीबो को अपने गुंडों से पिटवाता तो कभी उनकी बहु बेटियों को जलील करवाता. गाओं के मुखिया और काजल के बाप ने उसको रोकने की कोसिस करि तो उसको भी अपने आदमियों से पिटवा दिया. लीलादेवी ने काजल की माँ रेखा को भी मारा. गाओं में सभी लोग परेशां थे. सभी को पता था की उनका ठाकुर और ठकुराइन तो है नहीं और कोई मदत करने से रहा तो सभी उनके वापिस आने की hi कामना कर रहे थे. काजल की माँ की इतनी हिमत नहीं थी की काजल को फ़ोन करके पूछ ले की वो कब तक आएंगे. कियोकि काजल ने आज भी उनको माफ़ नहीं किया था.

पुरे देश से इस तरह की बहुत सी घटनाओ की खबर आ रही थी पैर उनको रोकने वाला कोई नहीं था. पुलिस अपना काम कर रही थी पैर आतंकी पकड़ में नहीं आ रहे थे वो पुलिस को मार कर भाग जाते. बहुत से पुलिस वाले मारे जा चुके थे. पूरा देश जाल रहा था. जो शांति दानवपुत्र के दर या उसके इंटरव्यू के बाद देश में छ गयी थी वो शांति आज तार तार हो कर लोगो को खौफ और दहशत में जीने पैर मजबूर कर रही थी. देश के कई इलाको में कर्फु लग चुक्का था फिर भी घटनाये रुकने का नाम नहीं ले रही थी. और सबसे बड़ी बात ये थी की करने वाले ये मार काट क्यों कर रहे है ये कोई नहीं जनता था. ये सब डी. गुरु के भेजे उन रय का hi काम था. और इनकी आड़ में बहुत सरे पुराने गुंडे फिर अपने रंग में आ गए थे. कियोकि इतने आतंक के बाद भी दानवपुत्र का कोई पता नहीं था. लोगो को अब विश्वास हो गया था की अब दानवपुत्र कभी नहीं आएगा.

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पब का मन यहाँ बहुत लग रह था. सब कुछ अच्छा भी था उसको ऐसा लग रहा था की जैसे उसका बचपन फिर से लौट आया हो. पैर फिर भी दिल में एक दर्द सा था. अवनि का उसे दूर होना उसके दिल को भ नहीं रहा था अवनि से बात करते हुए या उसके साथ होते हुए भी उसको कोई फीलिंग नहीं आती थी. और दिल में एक काशक थी की अवनि उसे बहुत दूर हो रही है. उसका दिल उसके प्यार को पुकार रहा था सुरभि के साथ एक अट्रैक्शन था बूत दिल में प्यार और सकूँ न था. दिल तड़फ रहा था जैसे अवनि और उसकी पत्नी मुसीबत में हो. पैर अभी तक पब को ये समाज नहीं आया थकी ऐसा क्यों हो रहा है. उसका प्यार उसको क्यों पुकार रहा है. क्यों सुरभि के साथ होते हुए भी उसका दिल केवल उसकी पत्नियों को क्यों याद करता है जबकि सुरभि और अल्पना ने उसके मन में उन सभी के खिलाफ बहुत जहर भरने की कोसिस की थी.

अभी पब और सुरभि एक पार्क में बैठे थे सुबह का टाइम था दोनों ीदार उदार की बाते कर रहे थे. बाते करते हुए सुरभि न पब के लुंड को सहलाना सुरु कर दिया. पब को भी इसमें मज़ा आ रहा था. तो कुछ hi देर में उसने सुरभि को खींच कर अपनी गाड़ी में बैठा लिया. और उसके चुके कपड़ो पैर से सहलाने लगा. और सुरभि भी अपनी छूट उसके लुंड पैर घिसने लगी. दोनों को इसमें बड़ा hi मज़ा आ रहा था धिरे -2 दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. की तभी पब ने अपने होंठ सुरभि के होंटो की तरफ बढ़ाये तो सुरभि ने अपना एक हाथ उसके होंटो पैर रख कर न में सर हिलाया. और उसके सर को पकड़ कर उसके मुँह को अपनी छतियो के उप्पेर कर दिया.

बात ये थी की पब और सुरभि ये सब कई दिन से करने की कोसिस कर रहे थे. पैर हर बार पब उसके होंटो को चूस कर hi उसे छोड़ कर चल देता था. इसलिए आज सुरभि ने होंटो को किश करने hi नहीं दिया. होता ये था जैसे hi पब सुरभि को किश करता और अपनी आँखें बंद करने लगता उसको रोटी हुयी अवनि और उसकी चिंता में परेशां पत्नियों का फेस दिखाई देता. और वो सब देख कर वो विचलित हो जाता और सुरभि को छोड़ कर चला जाता. अब कोई कितना भी छल क्यों न कर ले छल से सच्चा प्यार तो नहीं मिट सकता न. ये इनका प्यार hi था जो बार बार पब की आँखों के आगे आ रहा था. और पब को उस छल से बचने की कोसिस कर रहा था. पैर पब इस बात को समाज hi नहीं पाया था अभी तक..

पैर आज ये आगे बढ़ गए थे. पब पैर उत्तेजना हावी होने लगी थी और पब सुरभि के बूब्स मशलता हुआ उसकी गर्दन को चाट रहा था. अब पब से रहा नहीं गया तो उसने सुरभि का कुरता उत्तर दिया. तो सुरभि उसके सीने से चिपक गयी. और पब सुरभि किप ेथ पैर हाथ फेरने लगा. और झुक कर सुरभि की पथ को चूमने और चाटने लगा. एक हाथ निचे ले जा कर उसने ब्रा में कैद चुचो को दबाने लगा. सुरभि की आह्ह्ही निकलने लगी.

तभी पब के मंद में एक बात आयी और वो सुरभि को पूरा एक साइड झुका दिया और उसकी पथ को देखने लगा. और फिर कुछ सोचने लगा. फिर उसकी पथ पैर एक जगह हाथ रख कर अपनी उंगलियों से एक जगह को सहलाने लगा जैसे पथ में कुछ धुन रहा हो. पैर जब वह कुछ नहीं मिलता तो कुछ सोचता हुआ वो सुरभि को अपने उप्पेर से हाथ कर चल देता है आज फिर सुरभि न कामियाब रही थी और उसको गुस्सा भी बहुत आ रहा था पैर अभी वो कुछ कर भी नहीं सकती थी. पैर पब के मंद में एक शक का कीड़ा घुस गया था. और इस कीड़े ने उसके मंद में हलचल मचा राखी थी.

पब वह ने निकल कर घर की छत पैर पहुंच गया. और बहुत देर तक सोचता रहा तो कुछ सोच कर धयान में बेथ गया. और दिव्या दृष्टि से चारो और देखने लगा. पैर ये क्या वह तो उसे कुछ दिखाई hi नहीं दे रहा था केवल एक सपाट मैदान के इलावा. और वो खुद भी हवा मैं बैठा हुआ दिख रहा था न कोई घर, न शहर, न माकन, न माँ, न अवनि कुछ नहीं केवल सपाट मैदान और कुछ नहीं.

ये देख कर पब का दिमाग hi हिल गया. उसने चारो और और आगे की तरफ बढ़ने लगा तो उसे कुछ दुरी पैर hi दिव्यांश जी सोते हुए दिखाई दिए. जो हवा में hi सो रहे थे. ये देख कर एक बार पब ने आँखें खोल दी तो फिर से वो सब दिखाई देने लगा. तो पब ने खुली आँखों पैर hi दिव्या दृष्टि एक्टिव की तो फिर उसको वो सपाट मैदान के इलावा कुछ नहीं दिखाई दिया. बहुत देर सोचने के बात भी पब को ये समाज नहीं आया की जब दिव्यांश उसको दिखाई दे रहे है तो अवनि क्यों नहीं???

वो छत से उतर कर निचे आया तो अवनि अपने रूम में दिखाई दी वो सो सही थी. तो पब ने अवनि को उड़ाया और उसे बिना मतलब की बाते करने लगा. फिर कुछ सोच कर चुप अवनि की आँखों में देखने लगा तो उसका मन फिर उस सभी बातो को झूट मैंने लगा.

पब के मंद की हिली पड़ी थी. उसको अपने आप के 3 हिस्से होते लगने लगे. एक उसका मंद जो उसको कहा रहा था की यहाँ कुछ भी सच नहीं है सब झूट है फरेब है. उसका दिल 2 हिस्सों में बाँट गया था. एक हिस्सा दिल का जो कहा रहा था की ये hi सच है. और आँखों का देखा और दिमाग की सोच सब बेकार है. और दिल का दूसरा हिस्सा केवल अवनि और उसकी पत्नियों को पुकार रहा था. वो अपने प्यार के लिए तड़फ रहा था. पब का प्यार hi था जो उसके दिल पैर छलावे का पूरा असर नहीं होने दे रहा tha.uske दिल में बसा प्यार hi उसके मंद को बार बार सूचित कर रहा था की वो मुसीबत में है कभी बेचें हो कर तो कभी उसकी पत्नियों की याद में तो कभी उनके फेस को उसकी आखों के आगे ला कर उसके दिल में बसा प्यार उसको बचने की कोसिस कर रहा था. नहीं तो यहाँ इस चरण में आते hi छलावे ने उसके दिल को अपना गुलाम बना लिया था और मंद कुछ कर नहीं पाया था. वो दिल की बातो को सच मन कर शांत पड़ा था. पैर आज बचपन की एक याद ने उसके मंद को हिला कर रख दिया. और वो याद थी सुरभि किप ेथ पैर मौजूद एक चोट के निशान के रूप में. जो देखने में दिल की शाप में था. तो बचपन में पब सुरभि को ये कहा कर अक्षर चिडता था की तुम्हारा दिल तो पथ पैर है. तो कभी उसके चोट के निशान को किश करता था ये बोल कर की मैं तुम्हारे दी को प्यार कर रहा हु. उस टाइम दोनों नहीं जानते थे की प्यार क्या होता है. या ये क्या अहसास है बस पब को सुरभि को छेड़ना और उसके चोट के निशान पैर उसका दिल बोल कर उसे प्यार करना पसंद था.

जब वो ज्यादा परेशां होने लगा तो अल्पना से सुरभि से मिलने जाने का बोल कर घर से निकला और अवनि को याद करने लगा. और फिर अवनि को मन hi मन याद करके बोलने लगा की अवनि कहा हो तुम तुम क्यों बदल गयी. तुम्हारी आँखों में अब मुझको अपने लिए प्यार क्यों नहीं नजर आता. जवाब दो अवनि क्या कमी थी मेरे प्यार में?? क्या सुरभि के आने से तुम फिर से वो सब सोचने लगी जो ेबेचा के आने पैर सोच रही थी.??

अवनि को याद करते हुए अवनि से hi सवाल कर रहा था. या कहो की अवनि की जगह अवनि को याद करते हुए खुद से hi बात कर रहा था. पैर इसका ाशर हुआ और उसको अवनि की आवाज उसके मन में सुनाई दी. – पंकज कहा हो तुम?? मेरी आवाज भी नहीं सुन रहे हो?? कब से पुकार रही हु मैं तुमको?? प्लीज मुझको बचा लो. बचा लो अपनी अवनि को. प्लीज बचा लो अपने प्यार को?? वो कहता है की तुम अब मुझसे प्यार नहीं करते. पैर ये दिल नहीं मंटा ये हो hi नहीं सकता की हमारा प्यार इतना कमजोर पद जाये.. दिखा दो इस छलावे को की प्यार से बाद कर कुछ नहीं……

पब तो चौक hi गया ये सब सुन कर उसका दिल और दिमाग दोनों हिल गए थे. कहा अवि उसकी नहीं सुन रही थी और कहा अवनि उस कहा रही थी की वो उसकी नहीं सुन रहा. कहा अवनि ने उसके प्यार से दूर हो रही थी और कहा अवनि अपने प्यार की दुहहि दे रही थी. हो क्या रहा है?? अवनि की आवाज ने आज दिल को जो ठंडक दी थी वो उसको यहाँ आने के बाद आज hi महसूस हुयी थी. पब ने फिर से अवनि से कॉन्ट्रैक्ट किया तो दोनों के बिच में बाते होने लगी.

पब – अवनि तुम कहा हो अभी?? क्या हुआ है तुमको?? और किस्से बचा लू?? अभी थोड़ी देर पहले hi तो घर पैर ठीक थी तुम फिर ऐसी बाते क्यों कर रही हो??

अवनि – ऊऊह्ह्ह्ह पंकज आखिर तुमने मेरी आवाज सुन hi ली. कब से पुकार रही थी तुमको. पंकज तुम एक बड़े छल का शिकार हो. तुम जिस अवनि की बात कर रहे हो वो अश्ली अवनि नहीं है वोन ा hi वो तुम्हारी माँ है और न hi वो तुम्हारे पापा.. उन लोगो ने hi मुझको यहाँ कैद किया है एक अंदर रूम में.. और ये कहा है ये मैं नहीं जानती. तुम जल्दी से यहाँ पहुँचो नहीं तो बहुत देर हो जाएगी पंकज.. वैसे भी अब केवल कुछ घंटे hi है हमारे पास…

पब – ये तुम क्या कहा रही हो अवनि?? ये कैसे हो सकता है?? मैं अपने माँ बाप को न पहचानू ये तो नामुनकिन है. मेरा दिल कहता है की वो मेरे माँ बाप hi है…

अवनि – पंकज तुम भूल रहे हो हम त्रिकाल के चक्रवेव में है और यहाँ कुछ भी हकीकत नहीं है. पहचानो खुद को. क्या मैं तुमसे झूट बोल सकती हु?? वो तुम्हारी शक्तियों को पाना चाहता है और तुम्हारी शक्तिया मिलते hi वो तुमको मार देगा.

पब कुछ सोच कर बोलै – ठीक है अवनि मैं पहले तुमको खोजने की कोसिस करता हु पहले तुमको बचता हु फिर देखेंगे की ये सब है क्या…

पब फिर सोचने लगता है की अवनि की बाते और दिव्या दृष्टि से कुछ न दिखना दोनों में बहुत समानता है. यदि सच में ये सब छल है तो हमको जल्दी hi यहाँ से बहार निकलना होगा. हाँ हम त्रिकाल के चक्रवेव के 5तह चरण में थे तो हो सकता है छल hi हो ये 5तह चरण. ये सोच कर पब धयान में बेथ कर अवनि को खोजने लगता है बहुत देर की कोसिस के बाद उस सपाट मैदान में कुछ सूखे हुए पेड़ो के बिच अवनि दिखाई देती है. जो पब से लगभग दूसरे चोर पैर hi थी. अवनि की कंडीशन भी बहुत ख़राब लग रही थी.

पब तुरंत hi वह टेलिपोर्ट हो कर पहुंच जाता है. अवनि वह रूम में एक चेयर से बंदी थी पब उस रस्सी को खोलने लगता है तो खोल नहीं पता पब अपनी साडी शक्ति लगा कर भी उस रस्सी को नहीं तोड़ पाया था. तो पब दिव्या दृष्टि से देखता है तो अवनि उन सूखे हुए पेड़ो से मंत्रो से बंदी हुयी थी. अब पब अपनी दिव्या दृष्टि को एक्टिव hi कर लेता है कियोकि छल की इस दुनिया में हकीकत इससे hi पता चलनी थी.

पब माहि की एनर्जी को उसे करके उस मन्त्र के तोड़ को खोजता है और अवनि को आजाद करवा लेता है. फिर अवनि उसको वो सब बताती है जो उस छलावे ने उसको बताया था.
 
अपडेट 263

पब तुरंत hi वह टेलिपोर्ट हो कर पहुंच जाता है. अवनि वह रूम में एक चेयर से बंदी थी पब उस रस्सी को खोलने लगता है तो खोल नहीं पता पब अपनी साडी शक्ति लगा कर भी उस रस्सी को नहीं तोड़ पाया था. तो पब दिव्या दृष्टि से देखता है तो अवनि उन सूखे हुए पेड़ो से मंत्रो से बंदी हुयी थी. अब पब अपनी दिव्या दृष्टि को एक्टिव hi कर लेता है कियोकि छल की इस दुनिया में हकीकत इससे hi पता चलनी थी.

पब माहि की एनर्जी को उसे करके उस मन्त्र के तोड़ को खोजता है और अवनि को आजाद करवा लेता है. फिर अवनि उसको वो सब बताती है जो उस छलावे ने उसको बताया था.

यहाँ जैसे hi पब अवनि को आजाद करवाता है वह अल्पना और प्रतिक (छलावों) को पता चल जाता है की अवनि आजाद हो चुकी है और उसको आजाद करवाने वाला पब hi है.

अल्पना – मालिक मेने आपसे पहले hi कहा था की उस लड़की को मार दो पैर आप नहीं मने

प्रतिक – और मेने भी तुझको कहा था यदि वो मार गयी तो उसके दिल ने मौजूद उसके लिए प्यार हमारे सभी जाल को तोड़ देगा. और उसका दिल हमारी गुलामी से आजाद हो जायेगा. इसलिए तो उसके प्यार को काम करके सुरभि के जरिये उसकी शक्तियों को अपने वश में करने की सोची थी. पैर ये सुरभि भी कुछ नहीं कर पायी.

सुरभि – मालिक मेने पूरी कोसिस की थी. आज तो उसने खुद मुझको नंगी करना भी सुरु कर दिया था फिर पता नहीं क्या हुआ मेरी पथ को कुरेद कर मुझको ardh-nangi hi छोड़ कर चला गया.

प्रतिक कुछ सोच कर आँखें बंद कर पब के दिल का हाल लेने लगता है कियोकि उसका दिल अभी तक पूरा उसके जाल से छूटा नहीं था. उसके दिल में ुढे अवनि के लिए प्यार और सुरभि के लिए मन में ुधि सनका ने उसको सब बता दिया की क्या हुआ है. फिर वो कुछ सोच कर बोलै – देखो वो जब तक हरमे छल को ख़तम नहीं कर देता तब तक तो वो यहाँ से जा नहीं सकता. और उसके लिए उसको अवनि को ले कर हमारे पास hi आना होगा. अल्पना तुम जानती हो उसके यहाँ आने पैर तुमको क्या करना है. उसके दिल तुम्हारे लिए सबसे कमजोर है. यहाँ आते hi मैं उसके दिल को फिर अपने वश में करने की कोसिस करुगा और तुमको उसके हाथो से hi उस अश्ली अवनि को मरवाना होगा. अब ये hi एक तरीका है उसके दिल से प्यार ख़तम किये बिना उसको छल से जीतने का.

अल्पना – ठीक है मालिक मैं ऐसा hi करुँगी. पैर इतने झंझट की क्या जरुरत थी उसको सीडी hi मार देते है न.

प्रतिक – अल्पना तू पागल हो तुमको क्या लगता है जो शख्स 4 चरण पार कर यहाँ तक पंहुचा है उसको हम फिजिकल या तांत्रिक शक्ति से हरा सकते है. या उसके मंद पैर अटैक कर सकते है. नहीं अल्पना जो वो 4 चरण पार करके आया है यदि उसका अपने मंद पैर, अपनी तांत्रिक विद्या पैर और अपनी फिजिकल पावर पैर कमांड नहीं होता तो वो वह hi मार जाता. अब उसका दिल hi है जिसके हाथो वो हार सकता है. पैर उसके दिल में सभी के लिए इतना प्यार भरा है की मेरे जाल के बाद भी उसका प्यार उसको बचने की कोसिस करता रहा. और आज उसके कारन hi ये अवनि तक पहुंच पाया है.

अल्पना – हाहाहा मालिक आप प्यार से कबसे डरने लगे. आप पता नहीं कितनो को अपने छल से प्यार करवाते हो और कितनो के दिल से खेलते हो. प्यार तो आपके छल का hi एक हिस्सा था न..

प्रतिक – नहीं अल्पना वो प्यार नहीं वो हवस है. जिसको लोग प्यार बोलते है. या के मतलब होता है 2 लोगो के बिच जिसको लोग प्यार का नाम देते है. पैर यहाँ सच्चा प्यार है जो छल से नहीं मरता. सच्चा प्यार बहुत काम लोगो को मिलता है देखो इसको इसकी 12 पत्निया है और उनके प्रति न तो इसके दिल में हवस है और न उनसे कुछ पाने की चाहा. और इसकी पत्निया भी इससे केवल प्यार चाहती है ये सब एक दूसरे से न तो मरने से डरते है और न मरने से. इसके पवित्र प्यार को ये छलावा भी नहीं छल प् रहा.

अल्पना – आपकी बातो से तो लगता है की आप इस लड़के से हार मान चुके है ये तो मेरे मालिक छलावे के सुर नहीं है.

प्रतिक – हाहाहा तुम गलत सामजी, इसको छलने के लिए हमको कुछ नया करना पड़ेगा. और लोगो की तरह ये प्यार और वासना के झूठे खेल में नहीं फसेगा मैं तुमको ये समजने की कोसिस कर रहा हु. इस लिए hi तो हम उसके माँ बाप के रूप में है. और इसकी भावनाये अपनी माँ के लिए सबसे कमजोर है तो तुमको उसका फायदा उठाना है. कोई रंडियो वाली हरकत मत कर देना उसके साथ तुम माँ के गेटउप में हो समझी. नहीं तो सुरभि से पूछ लो साला इसकी नंगी चूचियों को भी छोड़ कर चला गया था वो.

सुरभि, अल्पना और प्रतिक अपने प्लान पैर hi डिसकस करते रहे. प्रतिक ने नकली अवनि को ख़तम कर दिया था कियोकि अब उसका कोई काम नहीं था.

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पब और अवनि वह से सीधे दिव्यांश जी के पास पहुंचे. तो वो पब को हवा में सोते हुए दिखाई दिए. और कोई दिखाई नहीं दे रहा था. अब पब के साथ प्रॉब्लम ये थी की यदि वो दिव्या दृष्टि को इनएक्टिव करता है तो उसको पता नै चलेगा की क्या सच है और क्या झूट. और यदि एक्टिव रखता है तो उसको देखेगा hi नहीं की छलावे के रूप में सामने कोण है. उसे दिव्यांश को किस्से सावधान करना है. अपने मंद को स्टार्क करके उस्सने दिव्या दृष्टि को इनएक्टिव कर hi लिया. तो उसको वापिस सब दिखाई देने लगा जो हकीकत नहीं केवल छल था.

पब और अवनि अभी एक रूम में थे जहा पैर दिव्यांश जी सोये हुए थे. और कोई नहीं था वह तो पब ने दिव्यांश जी को उड़ाया और उनसे बोलै – देव ूढ़ेए हम लोग एक बड़ी मुश्किल में है. ये जो देवदूत है न ये देवदूत नहीं केवल छलावा है त्रिकाल का बषय एक ब्रम्ह.

दिव्यांश – ये क्या कहा रहे हो तुम बीटा. क्या मेरा दिल मेरा दिमाग मेरे साथियो को भी नहीं पहचानेगा. तुमसे कोई गलती हुयी है.

पब – नहीं देव गलती तो हम पहले कर रहे थे पैर अब अवनि के प्यार ने मुझको सब साफ़ देखा दिया है. यदि आपको विस्वास नहीं तो आप अपनी दिव्या दृष्टि से खुद देखिये. कुछ देर दिल किन ा सुन कर दिमाग से काम लीजिये आपको सब पता चल जायेगा.

दिव्यांश भी पब की बात सुन कर सोच में पद गया. उनके मन के एक कोने में ये तो सुरु से था की उसका बीटा डलासुर गलत नहीं हो सकता. पैर उसके साथ के देवदूत और अल्पना की बातो ने उसको ब्रमित कर दिया था. या कहो की छलवे के छल से उनका दिल भी उसका गुलाम हो चुक्का था. तो दिव्यांश जी भी पब के कहे अनुषा अपनी दिव्या दृष्टि से देखते है और फिर अपने साथियो के पास जा कर अपनी एक दिव्या एनर्जी उन पैर छोड़ते है. कियोकि वो ये जानते थे की इस एनर्जी से किसी भी देव को कभी कोई नुकशान नेह हो सकता और यदि ये छल होगा तो उस एनर्जी से जाल का रख हो जायेगा.

दिव्यांश के एनर्जी छोड़ते hi वो देवदूत जाल जाते है और दिव्यांश वह से गायब हो जाते है. दिव्यांश को गायब होते देख दोनों घवरा जाते है की ये कहा गए??

पब बहुत देर तब दिव्यांश को अपनी दिव्या दृष्टि से खोजता है पैर उसको वो कही नहीं मिलते. अब दोनों बहुत परेशां थे की क्या किया जाये. आखिर दिव्यांश जी को हुआ क्या है. वो कैसे गायब हो गए?? बहुत देर तक पब दिव्यांश जी के बारे में सोचता रहता है जब कुछ समाज नहीं आता तो वो आगे बढ़ने का फैसला करता है कियोकि अभी शयाम हो चुकी थी. अब पब के पास केवल 26 हॉर्स का टाइम था. और मंजिल बहुत दूर.

पब अपना रास्ता खोजने के लिए एक बार फिर अपनी तलवार की मदत लेता है तो तलवार उसको उसके घर (छलवे यानि अल्पना और प्रतिक का घर) की और इशारा कर देती है. तो ये दोनों भी ये सोच कर उस तरफ चल देते है की एक बार उन छलवो को ख़तम कर दिया जाये फिर यहाँ से बहार निकलने का भी सोचेंगे.

दोनों के मन में दर भी था. पब अपनी दिव्या दृष्टि एक्टिव रखता तो कुछ दीखता hi नहीं और in-active करने पैर फिर से छल में फसने के पुरे चांस थे. पैर फिर भी रिस्क तो लेनी hi थी तो दोनों टेलिपोर्ट हो कर पहुंच गए वह जहा अल्पना और प्रतिक अपना जाल बिछा कर बैठे थे.

पब और अवनि के वह पहुंचते hi दोनों के दिलो पैर प्रतिक की शक्तियों ने अपना काम करना सुरु कर दिया. पब को फिर वह अपने माँ बाप hi देखे देने लगे. और अवनि को लगने लगा की पब और अवनि बहुत प्यार करते है पैर पब के माँ बाप उसकी शादी नहीं होने देना चाहते इसलिए वो उनको मानाने के लिए यहाँ आये है.

अल्पना पब को देख कर उसके गले लग गयी और उस पैर प्यार और ममता की बारिश करने का दिखावा करती रही. और फिर बोली – बीटा तुम इस लड़की को अपने साथ ले आये हो. ये अच्छी लड़की नहीं है. ये धोखेवाज है.

अवनि – ऐसा न कहो माजी मैं तो पंकज से बहुत प्यार करती हु और इससे शादी करना चाहती हु. यदि आप दोनों आशीर्वाद दे तो हम दोनों शादी करना चाहते है.

प्रतिक – नहीं बीटा शादी तो पब की सुरभि से होगी. ये बचपन से hi तय है. तुम पंकज को भूल जाओ…

अवनि (गुस्सा होते हुए) – ये यदि मेरी शादी पंकज से नहीं हुयी तो यहाँ सभी को मार दूगी. कोई नहीं बचेगा यहाँ. या तो मेरी शादी पंकज से करवा दो नहीं तो सब मेरे हाथो मरने को तैयार हो जाओ….

अल्पना – देख रहा है बीटा इस लड़की को. ये हम सबको मरना चाहती है ये हमको मारे उसे पहले तू hi इसको मार दे.

अवनि और पब दोनों hi प्रतिक के जाल में फस चुके थे. पैर अभी भी पंकज का दिल पूरी तरह प्रतिक (छलावा) के कब्जे में नहीं था कियोकि वो अवनि के होते हुए अवनि के प्यार को फील कर राह था. और वो प्यार पब को अवनि के खिलाफ होने से रोक रहा था. अवनि को मरने की बात सुन कर उसके दिल में दर्द होने लगा था. पैर प्रतिक का मायाजाल पब के दिल पैर अपना ाशर दिखा रहा था. दिमाग फिर एक बार शुन्य (जीरो) हो चुक्का था. और दिल के दो हिस्से हो चुके थे. दिल के दर्द को इग्नोर करके तड़फते दिल के साथ पब अवनि के पास पंहुचा – अवनि ये किसी बात कर रही हो. तुम मेरे माँ बाप को मरने को बोल रही हो. उनको जो मेरे लिए सब कुछ है.

अवनि – और मैं ??? क्या मेरे कोई जगह नहीं तुम्हारे जीवन में?? ये दोनों मार भी जाये तो क्या फरक पड़ता है हम दोनों ख़ुशी से रहेंगे.

अल्पना – बीटा तू क्यों सुन रहा है इसकी बात, मार दे इसे ये डायन है डायन ….

अवनि – डायन में नहीं तू है जो अपने bête के प्यार के बिच आ रही है. तेरा बीटा तो तुझको पहले भी मारा हुआ मंटा था तब ये अपनी सभी पत्नियों के साथ कितने प्यार से रहता था. और अब तेरे आने से इसकी अच्छी भली जिंदगी बेकार हो गयी है.

अवनि को भी नहीं पता चला की वो क्या बोल गयी. वो शव्द उसके मुँह से कैसे निकले ये उसको भी नहीं पता था. ये शायद अंतर्मन की आवाज थी जो शव्द बन कर बहार आ गए the.alpna इस बात को समाज नहीं पायी. केवल प्रतिक ये बात सुन कर चौक गया और अपनी शक्तियों को पब और अवनि के उप्पेर और बढ़ाने लगा. अवनि के मुँह से गुस्से और प्रतिक (छलावे) के जाल के होते हुए भी वो सच्चाई निकल गयी जो इस माया जाल का अंत कर सकती थी. पब को फिर से याद दिला सकती थी की वो कोण है और कहा है. और हुआ भी कुछ ऐसा hi. पब को अपनी पत्नियों की याद आने लगी. तो उसके दिल में उनसे मिलने की तड़फ पैदा होने लगी. इस तड़फ से और उस प्यार से छलावे का जाल कमजोर होने लगा. तो उसको याद आया की ये मेरी माँ नहीं है ये तो छलावा है त्रिकाल का फैलाया एक जाल….

पब को ये याद आते hi उसने अपनी तलवार को याद किया और तलवार ले कर अल्पना की और बढ़ने लगा. उसको अपनी और आता देख कर अल्पना ने एक बार फिर उसको प्यार से पुकारा – bête अब आ मेरे पास और मुझसे आशीर्वाद ले कर इस लड़की का अंत कर दे. ये हमको मरना चाहती है. तू इसको बता दे किट ु मेरा बीटा है.

पब का दिल अल्पना के प्यार से फिर बेचें होने लगा उसके मन के 2 हिस्से फिर होने लगे. और इस बार कनफुसतिओं इतना हो गया की एक दिल कहता की माँ को मार दे ये एक छलावा है और एक दिल उसे कहता की वो तेरी माँ है तू इस लड़की अवनि को मार दे. पब वह जमीन पैर बैठा अपने आप से लड़ने में लगा था. तो अल्पना और अवनि दोनों एक दूसरे को मरने को बोल रही थी. प्रतिक अपना जाल में अपनी शक्ति को बढ़ाता जा रहा था.

प्रतिक की बढ़ती शक्ति के साथ पब अल्पना के पास पहुंच कर उसके पेअर छू कर अपनी तलवार सड़ता हुआ अवनि की तरफ बढ़ गया. अवनि के पास पहुंच कर उसने अपनी तलवार को अवनि की गर्दन पैर टिका कर बोलै – अब बोल्ट ु मेरी माँ को मरने को बोल रही थी न.. अब बोल… देख फिर मैं तेरा क्या हसरा करता हु.

ये देख कर अल्पना और प्रतिक के फेस पैर विजयी मुस्कान ठहर गयी. दोनों को अपनी जीत चाँद पालो की दुरी पैर दिखाई दे रही थी. यहाँ अवनि अंदर से दर गयी थी पैर उसने मुँह से कुछ नहीं बोलै केवल पब की आँखों में देखने लगी.

पब ने जब अवनि की आँखों में देखा तो उसके अंदर प्यार hi प्यार दिखने लगा. न कोई मरने का गम था और न कुछ खोने का दर, दर था उसकी आँखों में तो वो भी उसे अपने प्यार के लिए hi दिखाई दिया. आँखों की भाषा दिल समझने लगा और दिल में भाषा अवनि का प्यार उसको फिर उस जाल से बहार लेन लगा. कुछ hi पल में उसको अवनि के मन की आवाज आने लगी – पंकज या कर रहे हो. अपने प्यार को अपने hi हाथो से मार रहे हो?? क्या हमारा प्यार इतना कमजोर था??

जब पब का दिल अवनि की आंखों और दिल की आवाज में छुपे प्यार को संभल नहीं पाया. और पब ने अपनी आखें बंद करके अपनी तलवार को पीछे किया वॉर करने की मुद्रा में. और 2 पल में hi एक जानना आवाज फ़िज़ा में गूंज गयी – आआअह्हह्ह्ह्ह…
 
अपडेट 264

जब पब का दिल अवनि की आँखों और दिल की आवाज में छुपे प्यार को संभल नहीं पाया. और पब ने अपनी आँखें बंद करके अपनी तलवार को पीछे किया वॉर करने की मुद्रा में. और 2 पल में hi एक जानना आवाज फ़िज़ा में गूंज गयी – आआअह्हह्ह्ह्ह…

ये आवाज अवनि की नहीं वल्कि अल्पना की थी. और उसके अगले hi पल प्रतिक की आवाज भी फिजा को छू गयी. और ये दोनों भी वह से गायब हो कर कही और पहुंच गए. तो फिर एक आवाज हुयी – “पंचम चरण समाप्त”

हुआ ये था की अवनि के प्यार के आगे छलावे की शक्तिया कमजोर होने लगी और पब को वास्तिविकता का ज्ञान होने लगा. तो उसने बिना देरी करे अवनि को मरने का डाँग करते हुए एक दम टेलिपोर्ट हो कर अल्पना के सामने पंहुचा और उसकी गर्दन ुधा दी. जब तक छलावा (प्रतिक) कुछ समझता पब ने उसके पास टेलिपोर्ट हो कर उसकी गर्दन को भी जमीन दिखा दी. इन दोनों के मरते hi ये अपने आप यहाँ आ गयी.

यहाँ पहुंचते hi इनकी नजर दिव्यांश पैर गयी जो बेचैनी से वह टहल रहा था. दिव्यांश ने जैसे hi अपने छल को ख़तम किया था वो तो उस पल hi वह से गायब हो कर यहाँ आ गया था. और ये भी अपने छल को ख़तम कर बहार आ चुके थे. तीनो एक दूसरे से मिलने लगे. अभी शयाम का टाइम हो गया था. पब को पता था की अब टाइम बहुत काम है तो उसने सबसे पहले मणि जी से बात करना सुरु किया. 2-4 नार्मल बातो के बाद मणि जी बोले

मणि – पब तुम अभी तक केवल 5 चरण hi पार कर पाए हो. यही 2 और बाकि है और टाइम केवल 24 हॉर्स से भी काम है. और जिस पल त्रिकाल अपनी सभी शक्तियों को प् लेगा उसी पल वो तुमको मरने को निकल पड़ेगा और उसका सामना करना तो दूर की बात है पावर्स आने के बाद पल भर में hi तुमको ख़तम कर देगा.

पब – हाँ ये तो है गुरु जी अब तो केवल एक hi मार्ग बचा है और वो है की हम यहाँ से टेलिपोर्ट हो कर सेदे वह जाना होगा जहा दानवराज कैद है. और वह उनको कैद मुक्त करने की कोसिस करनी होगी.

मणि – पागल तो नहीं हो गए हो तुम?? वह पैर पहले भी कई लोग टेलिपोर्ट हो कर जा चुके है पैर आज तक कोई 5 मं से ज्यादा जिन्दा नहीं रहा है. वह साइड जाना मूट के मुँह में जाने के बराबर है.

पब – क्या वह पैर त्रिकाल से भी ज्यादा खतरा हो सकता है?? त्रिकाल के हाथो 24 जानते बाद मरने से अच्छा है की कोसिस करते हुए मरू. 1% तो चांस है न की मैं वह कुछ कर सकता हु. त्रिकाल से लड़ने में तो वो भी चांस नहीं है न गुरूजी?? और वैसे भी मेने 5 चरण पार कर लिए है हो सकता है इसका फायदा हो हमे तो जीतने के चांस और भी बाद जायेगे.

मणि – (कुछ सोचने के बाद) हम्म कहा तो तुम ठीक रहे हो. 24 हॉर्स में 2 चरण पार करना पॉसिबल नहीं है और न hi त्रिकाल को हारना. हाँ पैर यहाँ कुछ उमीदे है तो तुम्हारा फेशला सही लग रहा है. और वैसे भी अभी तक तुमने अपने 5 चरणों के आये संकटो के बारे में जो बताया है वो कुछ -2 वैसा hi है जैसे वह टेलिपोर्ट हो कर पहुंचे लोगो के साथ होता है. तो हो सकता है की तुमको ये 5 चरण पार करने का फायदा मिले.

पब – ठीक है गुरूजी तो हम तीनो अभी निकलते है कियोकि टाइम काम है आप अपना आशिर्बाद बनाये रखियेगा. जीत हमारी hi होगी.

मणि – विजयी भाव!!!!!

उसके बाद पब गुरु से संपर्क करता है. गुरु को बताता है की वो अब टेलिपोर्ट हो कर वह जा रहा है गुरु पहले तो मन करती है पैर फिर वो भी समाज जाती है की और कोई रास्ता नहीं है पैर अगले 24 हॉर्स में अभी की जान डाव पैर थी और सभी को बचने के लिए जरुरी था की डलासुर के देव रूप को आजाद किया जाये. और फिर अवनि से शादी करके वो शक्ति पाए जाये जो उन 5 दानव पुत्रो में है. बस ये hi ये तरीका था जिससे पब, उसकी पत्नी और समाज को त्रिकाल की टैंक से बचाया जा सकता था. अगले 24 हॉर्स बहुत कुछ बदलने वाले थे. इसलिए पब गुरु को समजा रहा था की उसकी 10सो पत्निया इन 24 हॉर्स के लिए केवल डायन में बैठे एक दूसरे का हाथ पकड़ कर और फिर गुरु को वो मंत्र भी बताता है जिससे हाथ पकड़ कर बैठने से उन सभी की जीवन सकती एक दूरसे से जुड़ जाएगी और एक दूसरे की जीवन शक्ति को बैलेंस कारगी.

पब ने ये सब इसलिए किया था कियोकि वो भी नहीं जनता था की वह पैर क्या होगा कैसे होगा. जीवन शक्ति की जरुरत किस मात्रा में कितनी पड़ेगी. ये 24 हॉर्स पब और उसकी पत्नियों की परीक्षा की घडी थी. पब के पास होने पैर सभी को एक भेत्रिन जीवन मिलना था तो फ़ैल होने पैर मिलनी थी केवल और केवल मूट…..

जहा पब, उसकी पत्निया, दयासुर, मणि, दीनदयाल सभी बहुत ज्यादा चिंतित थे. इन सभी को अपनी मूट hi नजर आ रही थी वही अपने महल में बैठी दानव रानी के mukh-mandal पैर चिंता की एक भी लकीर न थी. और एक दम निश्चिन्त हो कर ये सब होते हुए देख रही थी. और इसका सबसे बड़ा कारन था की उन्होंने फ्यूचर देख रहा था. उनको पता था की क्या होना है. बस रह -2 कर उनकी आखों से आशु निकल रहे थे जिनको वो तुरंत साफ़ कर रही थी. जैसे खुद को एक बड़े दुःख के लिए तैयार कर रही हो. जिससे उस दुखद घडी में वो कमजोर न पद जाये.

पैर उनके होंठ उनकी आँखों का साथ नहीं दे रहे थे. होंटो पैर एक छोटी मुस्कान थी. जो की निकट भविष्य में होने वाली एक सुखद घटना का संकेत थी. दानव रानी जानती की की क्या होना है. और वो उसको बदल भी सकती थी पैर नहीं वो तो वचन दे चुकी थी नियति को की वो उसके किसी भी काम में कोई भी ह्क्तक्षेप नहीं करेगी. अगले 24 हॉर्स में कुछ सुखद तो कुछ दुखद होना था दस माँ के लिए. पैर जॉब hi होना था ये कुछ बड़ा hi था कियोकि उनका डायन भी आज केवल पब पैर hi टिका था वो अपने सभी काम छोड़ कर केवल पब पैर hi नजर रख रही थी………

दानव बेस में गुरु सभी को पब के बारे में बताती है तो सभी के फेस पैर चिंता की लकीरे नजर आने लगती है. गुरु सभी को फ्रेश हो कर डायन में बैठने को बोलती है. करीब 30मं में hi सभी गुरु के बताये तरीके से डायन में बेथ जाती है सभी ने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर एक गोल गेरा बनाया हुआ था और गुरु मंत्रो से उनकी जीवन शक्ति को जोड़ने लगती है ताकि वो एक दूसरे की जेवण शक्ति को बैलेंस कर सके. गुरु कामिनी को बुला कर उनका डायन रखने का बोल कर खुद एक हवन पर बेथ जाती है आज गुरु को भी लग रहा था की वो टाइम आ गया है जब उसको भी अपनी सालो के तप से कमाई शक्ति का प्रयोग करना पद सकता है. गुरु की जीवन शक्ति और बहुत से मंत्रो पैर उसकी पकड़ अच्छी थी तो वो अपनी शक्तियों को भी जागृत करने के लिए हवन पैर बेटी थी की तभी मणि जी गुरु से संपर्क करते है

मणि – गुरु पब को वह युद्ध करते हुए करीब 30 मं हो चुक्के है और दस माँ की कृपा से उसको 5 चरण पर करने का फायदा भी हुआ है. तो मुझको लगता है की अब वो टाइम भी नजदीक है जब सब कुछ पारी और अवनि पैर hi डिपेंड करेगा. तुमको उनकी हेल्प करनी होगी हर हाल में…

गुरु – आप आज्ञा दीजिये गुरूजी मैं कुछ भी करने को तैयार हु. यदि अपनी जान दे कर भी इस संकट से बचा जा सकता है तो मैं उसके लिए भी तैयार हु..

मणि – गुरु तुमको सबसे पहले तो उत्तेजना काम करने की दवा तैयार करनी है. जितनी ज्यादा कर सको. और फिर तुमको पारी के साथ अपनी जीवन शक्ति जोड़नी होगी. मंत्र मैं तुमको बता देता हु.

गुरु – पैर गुरूजी यहाँ तो पब पहले hi सभी की जीवन शक्तिया आपस में जुड़वाँ चुक्का है. ये काम मेने hi किया था पब के कहने पैर.

मणि – ओह्ह ये अच्छा किया तुमने.. पैर तुमको डायन रखना होगा जब ये सब उत्तेजित होने लगे तो तुमको उनको कण्ट्रोल करना होगा. मैं भी तुम्हारे संपर्क में सहगा. कुछ भी प्रॉब्लम लगने लगे तुर्रंत मुझको बताना.. और अवनि को भी एक बार फिर से सब याद करवा दो की उसको इस अंतिम युद्ध में क्या क्या और कैसे कैसे करना है. कियोकि यदि कुछ भी अलग हुआ तो भटट कुछ बदल सकता है. और उसको कहना की वो एक बार मुझसे संपर्क करे तो फिर में उसको हर समय सचेत करता रहुगा…. (अपडेट 227-228)

मणि जी और भी कुछ समजा कर गुरु से संपर्क तोड़ कर पब के युद्ध पैर धयान देने लगते है और वह एक भयानक युद्ध चल रहा था. और गुरु भी अवनि से संपर्क करने की कोसिस करती है पैर उसका भी संपर्क नहीं हो प् रहा था कियोकि अवनि और पब का पूरा डायन इस टाइम युद्ध में था.
 
अपडेट 265



मणि जी और गुरु से बात करने के बाद पब, दिव्यांश और अवनि वह से उस तालाब (जिसमे दलरस का देव रूप कैद है) के पास टेलिपोर्ट हो जाते है. पैर वो तीनो तालाब के पास न पहुंच कर वो तीनो एक खुले मैदान में पहुंचते है. और उनके पहुंचते hi वह तेज़ हवाओ के साथ बहुत शोर होने लगा था. मणि जी की नज़र पब और वह पैर बदल रहे दर्शया पैर hi थी.

एक तो पब तालाब के पास नहीं पंहुचा था वो उसी से सॉकेड था दूसरा 2 मं बीत जाने पैर भी हवाओ और शोर के इलावा कोई भी खतना न आने से और भी सॉकेड हो रहा था ये 2 मं पब ने 2 ऑवर की तरह बिताये थे. ये तीनो पूरी तरह से हर खतरे से लड़ने को तैयार खतरे का इन्तजार कर रहे थे और हर पल के साथ बढ़ता हुआ शोर उनकी दिल की धड़कन को और भी तेज़ क्र रहा था. पब अपनी दिव्या दृष्टि से चारो और देख रहा था. पैर 1 मं और बीतने पैर जब उसको आश्मान में कुछ नज़र आया तो उसकी रूह hi कैंप गयी. अभी ाशमणि खतरे को देख hi रह था की जामें और भगति सेना को देख कर पब का हलक सूखने लगा. उसने अपने बाईट हुए जीवन में बहुत कुछ देख लिया था तो उसको ये तो विश्वास था की जो वो देख रहा है वो सच है पैर वो है क्या ये उसको अभी तक समाज नहीं आया था. तो पब ने दिव्यांश को उस और देखने का इशारा किया दिव्यांश ने जैसे hi उस और देख तो उनके फेस का रंग भी उड़ गया. और बड़बड़ाने लगे – ये ड्रैगन कैसे जिन्दा हो गए और ये दानवो की कोण सी प्रजाति है जो आज तक नहीं देखि??

कियोकि आश्मान में कई ड्रैगन आग उगलते हुए उनकी और बाद रहे थे और जमीन पैर दवानो की वो सेना थी जिसके बारे में दिव्यांश भी कुछ नहीं जनता था. ये दानव काम और मिक्सर ज्यादा लग रहे थे – मानव, दानव और जानवरो के. कियोकि किसी का फेस दानव जैसा भयानक था तो उनका शरीर घोड़े का था. तो कोई मानव के शरीर पैर दानव जैसा भयानक फेस था तो किसी का दानवो जैसा 10-12 फ़ीट का मजबूत शरीर था और फेस शेर (लोइन) का था. बहुत hi भयानक सेना थी और इस सेना के भावो से लग रह था की ये सब बहुत गुस्से में किसी को मरने के लिए hi भागे आ रहे है.

पब तो उनको देखने में hi खोया था की डिवेंश की आवाज से वो हकीकत में वापिस आया और इस आवाज से अवनि का डायन भी उस तरफ गया जो अभी तक पीछे की और देख रहे थी. – पब इन दानवो पैर आग के गोलों से हमला करो कियोकि यदि ये पास आ गए तो सभी के साथ युद्ध करना बहुत कदिन होगा. तब तक मैं इन ड्रैगन्स से युद्ध करता हु…

पब ने तुर्रंत बात मानते हुए आग के गोले उन दानवो पैर फेकने सुरु कर दिए. तो सेना में भी हड़कम मच गया. पैर उन्होंने भी उत्तर में एक साथ कई हमले किये. एक साथ इतने हमलो का जवाब देना पब के वश में न था तो वो अवनि का हाथ पदाद कर टेलिपोर्ट हो कर वह से हैट गया. दिव्यांश तो पहले hi हवा में ड्रैगन से भीड़ चुक्का था अपनी तलवार से उनको चोटिल करने की कोसिस कर रहा था पैर उन ड्रैगन्स पैर इसका कोई बड़ा अक्षर नहीं दिखाई दे रहा था. बल्कि ड्रैगन्स ने उनको चारो और से घेर कर उन पैर हमले सुरु कर दिए थे और दिव्यांश यहाँ से वह हमलो से खुद को बचने में hi लगा था. पैर दिव्यांश ड्रैगन्स को अपने में उलझाने में कामियाब जरूर था.

पब ने दूसरी तरफ टेलिपोर्ट होते hi उन दानवो पैर पथरो की बारिश कर दी. उससे दानव घायल तो हुए पैर वो आगे बढ़ते रहे. पब ने उनको रोकने के लिए हवा का एक बड़ा बबंडर उनकी तरफ बड़ा दिया और फिर उसमे ाशमणि बिजली से हमला करना सुरु कर दिया और इस बार पब को कुछ सफलता भी मिली और बहुत से दानव उसके लपेटे में आ कर अपनी जान गवा बैठे. ीदार अवनि ने भी मणि जी की दी हुयी शक्तियों से उन दानवो पैर हमला कर दिया. पैर अवनि तो 8-10 दानवो से युद्ध hi करती रही वो उसको पूरी तकर दे रहे थे. पैर यहाँ तो पूरी एक सेना थी और इतने दानवो को पब को hi मरना था. पब के लगातार हमलो के बाद भी वो पब के नजदीक पचने लगे थे. पब उनके हमलो से टेलिपोर्ट हो कर बचता तो कभी जवाबी वॉर करके खुद को बचता. पैर ये भी ज्यादा देर न चल सका. और दानवो की सेना ने पब और अवनि और चारो तरफ से घेर लिया था. और दोनों hi अपनी पूरी तगत लगा कर उनको मरने की कोसिस कर रहे थे. और मार भी रहे थे पैर वो इतने ज्यादा थे की एक मरता तो दूसरा आ जाता. मैदान में लाखो का देर लगने लगा था.

अब अवनि की हिम्मत जवाब दे चुकी थी वो करीब 1 ऑवर से उन दानवो का सामना कर रही थी. सरीर के हर हिस्से से खून निकल रहा था. पुरे शरीर पैर अनगिनत घाव थे. पब को भी लगा की अवनि को कुछ हो न जाये पैर उसके मंद में hi नहीं आ रहा था की वो अवनि को ऐसे बचाये. वो तो खुद hi अपने आप को बचने और उन दानवो को मरने में लगा था. पैर अवनि भी उसकी hi जिम्मेदारी थी.

तभी पब को दयासुर के उस गोले का डायन आया तो उसने तुर्रंत दानवो के बिच से टेलिपोर्ट हो कर अवनि को ले कर तोड़ा दूर पहुंच गया. और उस गोले को याद करके अवनि को उसमे सुरक्षित कर दिया. अवनि उस गोले में जाते hi बेहोश हो चुकी थी उसका खून इतना बहा गया था की वो कमजोरी से बेहोश हो गयी. पैर पब को भी पता था की अवनि इस गोले में सेफ है और अभी उसको हील करने का टाइम नहीं है. कियोकि दानव वह पाउच चुके थे कुछ तो उस गोले को तोड़ने में लगे थे तो बाकि पब को मरने की कोसिस कर रहे थे. और पब भी अपनी तलवार और मंत्रो की शक्ति से अपनी फाइटिंग स्किल्स को उसे करता हुआ लड़ रहा था फिर भी उसको बचने के लिए टेलिपोर्ट भी होना पड़ता था. उसके शरीर पैर अभी तक सेकड़ो वॉर हो चुके थे. और कपड़ो के कुछ टुकड़ो को छोड़ कर उसका शरीर नंगा हो चुक्का था जो दानवो के खून से तर था. कभी कोई दानव उसे बच्चो की तरह ुधा कर फेकता तो कोई अपनी तलवार उसके शरीर में घूरने की कोसिस करता तो कोई उसे चिपक कर अपने दांतो से उसको घायल कर देता. एक हमलावर को मरता तो दूसरा उस पैर टूट पड़ता एक साथ पता नहीं कितनो से लड़ रहा था. जिस दानव को उसके उप्पेर वॉर करने का जहा मौका मिलता वो वह से hi वॉर कर देता. पैर आज पब भी जीवन और मूट के खेल के बिच में फशा था जहा हार उसके सभी अपनों को मूट तो संसार में सदा के लिए आतंक इस्तापित करने वाली थी. और जीत की चाहा में वो बस लाडे hi जा रहा था.

पब तो मैदान में लड़ रहा था पैर एक जंग यहाँ दानव बेस में भी चल रही थी. सविता, ेबेचा, एरिका, सलोनी, मंजू, माहि की हालत पल प्रति पल ख़राब होती जा रही थी. वही ऐडा, अंकिता, पारी, नैना इनकी जीवन शक्ति को बैलेंस काने में लगी थी. पैर मैदान में जिस गति से पब जीवन शक्ति उसे कर रहा था उस गति से ये सब धयान में बेथ कर भी उसको बड़ा नहीं प् रहे थे. इनकी हालत ख़राब होने का अक्षर पब पैर पद रहा था.

अब पब भी लड़ते हुए लहूलुहान होने लगा था. तलवार की चमक काम होती जा रही थी. पैर आज हौशले बुलंद थे लगातार 3 ऑवर तक युद्ध करने के बाद भी पब ने हार नहीं मणि थी. पैर दानवो की गिनती बहुत काम हो चुकी थी. और उनके हौशले टूटने लगे थे. और उनका खेल ख़तम होने की कगार पैर hi था. पैर उससे भी बड़ा काम दिव्यांश जी कर रहे थे जिन्होंने 3 ऑवर तक उन ड्रैगन्स को उलझा रहा था चाहे वो उनको कोई बड़ी हानि न पंहुचा पाए हो पैर खुद घायल होते हुए भी उनको पब और दानवो के बिच में नहीं पड़ने दिया था.

पब की इस कामियाबी के पीछे की कहानी अभी पब को पता नहीं थी. ये तो दानव बेस में मौजूद उसकी पत्निया hi जानती थी की वो आज कैसे जिन्दा बची थी. पैर शायद इसमें भी पब की सूज भुज hi काम आयी थी. वो सभी जिन्दा थी और पब को लड़ने के लिए लगातार जीवन शक्ति दे रही थी तो उसका कारन था उनके एक साथ होना. और एक दूसरे को बैलेंस करना. पब अब सुस्ता रहा था पैर तभी उसकी नजर दिव्यांश जी पैर गयी जो अभी भी उन ड्रैगन्स से लड़ रहे थे. पूरा शरीर लहूलुहान था पैर हिम्मत की कमी इनमे भी न थी. अभी भी उन्होंने ड्रैगन्स को उलझा रखा था. पैर पब तो उड़ नहीं सकता था तो उनकी हेल्प कैसे करता. और एक वो भी शक्ति विहीन hi हो रखा था.

कुछ देर तक तो पब दिव्यांश जी को देखता रहा पैर जब वो इतनी देर में उन ड्रैगन्स का कुछ नहीं बिगड़ पाए थे तो अब कुछ देर में hi क्या कर लेना था. पब ने अब उन ड्रैगन्स से लोग लेना का मन बना लिया था पैर समस्या ये थी की वो आश्मान की उचाईयो पैर थे और पब जमीन पर खड़ा उनको मरने की सोच रहा था. सबसे पहले तो पब ने हीलिंग मंत्र से अपने घाव ठीक किये. कमजोरी तो शरीर से जाने वाली थी नहीं कियोकि जीवन शक्ति न के बराबर बची थी. यदि वो खड़ा था तो उसका कारन था की पब से इस युद्ध में अपनी जवान शक्ति न के बराबर hi उसे की थी. जैसा की दयासुर जी ने उसको संजय था की अपनी जीवन शक्ति का उसे काम से काम करना इस जगह पैर पब भी वैसे hi कर रहा था.

पब ने अब ड्रैगन्स से भिड़ने के लिए कुछ सोच और अपनी तलवार को हाथ में ले कर एक ड्रैगन की पीठ पैर टेलिपोर्ट हो गया. आकाश की उस उचाई पैर से निचे का कुछ भी नजर नहीं आ रहा था. हवा की स्पीड भी इतनी थी की पब का उस ड्रैगन किप ेथ पैर खुद को संभल पाने में भी मुश्किल हो रही थी. किसी तरह से खुद को सँभालते हुए पब ने अपनी तलवार का एक वॉर ड्रैगन किप ेथ पैर किया. वो तो ये चाँद हंस तलवार थी इसलिए पथ पैर एक घाव कर गयी नहीं तो इतनी देर के युद्ध में किसी भी ड्रैगन किप ेथ पैर दिव्यांश जी एक भी घाव नहीं दे पाए थे. पैर जैसे hi घाव हुआ ड्रैगन ने अपनी पूछ को कुछ ऐसे घुमाया जैसे मक्खी ुधा रहा हो और पब उन उचाई से निचे गिरने लगा. वो तो ठीक वक्त पैर पब ने गिरते हुए खुद को टेलिपोर्ट पैर के जमीन पैर उत्तर लिया था नहीं तो इतनी ूछै से गिरने से उसकी हड्डियों का चुरा होना निश्चित था. पब को गिरता देख कर दिव्यांश भी उसको बचने आया. पैर पब को सुरक्छित देख कर फिर से ड्रैगन्स के पास आने लगा तो उसने देखा की पब पैर ड्रैगन्स ने आग उगल दी है जिसका पता भी नहीं है पब को. तो वो तुर्रंत टेलिपोर्ट हो कर पब को वह से हटा कर सुरक्षित जगह पैर पहुंच गए. दिव्यांश भी पूरी तरह से घायल थे. पैर अभी भी उन्होंने हिम्मत नहीं हरी थी. अब पब और दिव्यांश टेलिपोर्ट हो कर ड्रैगन्स को भ्रमित करते हुए उनको मरने की योजना बनाने लगे. तो दिव्यांश ने अपनी उड़ने की शक्ति को पब को दिया और अपनी योजना पैर काम करने के लिए फिर से ड्रैगन्स के सामने आ खड़े हुए. इतनी देर से ड्रैगन्स को ीदार से उदार घूमने से ड्रैगन्स गुस्से में थे. तो उन्होंने तुरंत दिव्यांश पैर हमला कर दिया और इनका फायदा ुधा कर पब ने उड़ते हुए पीछे से ड्रैगन्स पैर वॉर कर दिया. योजना सफल रही थी पैर चाँद हंस तलवार भी उन ड्रैगन्स को घायल hi कर प् रही थी. तलवार सरीर के नाजुक हिस्से को भी चिर नहीं पायी. पब ने अपनी पूरी जान लगा कर कोसिस कर ली थी. पैर वो 1 ड्रैगन्स को घायल करने से ज्यादा कुछ नहीं कर पाया और ड्रैगन ने भी पलट वॉर कर अपनी पूछ से इतना तगड़ा वॉर किया की पब को बेहोशी होने लगी. पब अपने आप को अम्भालते हुए टेलिपोर्ट हो कर जमीन पैर आ गया . और इन ड्रैगन्स को ख़तम करने का सोचने लगा. कियोकि अब ड्रैगन्स भी गुस्से ने छीलते हुए दिव्यांश पैर बहुत भरी पद रहे थे.

कुछ देर सोचने के बाद पब कुछ फेशला करके ड्रैगन्स के सामने जा खड़ा हुआ. उड़ने की पावर तो दिव्यांश की वजह से मिल hi गयी थी तो वो हवा में एक जगह खड़ा हो कर आखें बंद किये भोले नाथ को याद करने लगा. और ाष्टीय देवी की दी हुए शक्ति को याद करने लगा. अब केवल ये hi एक शक्ति बची थी जो इन ड्रैगन्स को मार सकती थी. पैर इसके उसे करने से पब बिलकुल खली हो जाने वाला था और अभी ये इस यात्रा का अंतिम युद्ध नहीं था. पैर यदि अभी जान बचानी है तो ये करना भी बहुत जरुरी हो चुक्का था.

पब के हाथो से जैसे hi वो वाइट रौशनी निकल कर ड्रैगन्स पैर गिरने लगी तो उनके दर्द में चिल्लाने की आवाजों से आकाश दहल ुधा. एक -2 करके सभी ड्रैगन्स उस शक्ति से जानने लगे और कुछ hi देर में सभी ड्रैगन जल कर ख़तम हो गए. पैर साथ hi पब भी हवामे hi बेहोश हो कर निचे गिरने लगा जिसको दिव्यांश जी ने एक बार फिर बचा लिया. अवनि भी गोले में बेहोश थी पब भी बेहोश हो चुक्का था. और दिव्यांश जी भी घायल थे तो वो भी धिरे धिरे बेहोश होने लग गए.

यहाँ ये तीनो बेहोश हो चुके थे वह वो 10 पत्निया भी बेहोश पड़ी थी. पैर हाथ अभी भी सभी ने एक दूसरे के पकडे हुए थे. सदा hi चमकते रहने वाले फेस मुरझा चुके थे. सभी कई दिनों की बीमार नवर आ रही थी. कामिनी चाहा कर भी कुछ नहीं कर प् रही थी और गुरु अपने हवन को ख़तम करने में लगी थी. जब गुरु उनके पास पहुंची तो सभी की हालत देख कर उसकी आखों में आशु आ गए. उसने तुर्रंत मणि जी को यहाँ का सारा हाल कहा सुनाया तो मणि जी ने भी पब और अवनि के बारे में सब बता दिया. तो गुरु का दर्द और भी बाद गया. इस युद्ध में चाहे ये सभी जीत चुके थे पैर अगले युद्ध के लिए उनके पास कुछ नहीं बचा था और समय तेज़ी से हाथो से निकलता जा रहा था.

गुरु को भी पता था की जब तक ये सभी होश में नहीं आएगी पब को भी होश नहीं आ सकता है. और पब के शरीर में फिर से एनर्जी भरने के लिए इनका होश में आ कर धयान में बैठना जरुरी है. पैर अभी तो सभी की नब्ज (दिल की धड़कन) hi कमजोर हो चुकी थी सरीर में जान होने के संकेत भी मुश्किल से hi मिल रहे थे. अब इस सभी को इस इस्थिति से बचने के लिए hi गुरु को समय चाहिए था तो धयान में बैठना तो दूर की बात थी.

जब गुरु और कामिनी के किसी भी प्रयास से उन सभी को होश नहीं आया तो गुरु और बेचें होने लगी. हाँ पैर इस प्रयासों से उन सभी की धड़कन पहले से ठीक हो गयी थी. गुरु को ये पता था की वो इन सभी को ठीक कर लेगी पैर उसमे टाइम लग्न था और आज यदि इन सभी के पास नहीं था तो वो था – वक्त. जब गुरु एक बार फिर हताश होने लगी तो उसने मणि जी को याद किया. मणि जी ने जैसे hi सुना की 2 हॉर्स बीतने के बाद वो सभी बेहोश है तो मणि जी ने कहा – गुरु अब तो यदि ये युद्ध जीतना है तो केवल एक hi तरीका है की कोई इनको अपनी जीवन शक्ति दान कर दे. अपने बर्षो की तपश्या के फल को उन्हें दे दे. पैर तुम्हारे पास ऐसा कोण है जो ये कर सकता है. यदि आज में वह होता तो मैं ये काम कर देता. पैर मुझको तो पहुंचते -2 hi सब ख़तम हो चुक्का होगा.

गुरु – और यदि मैं अपनी जीवन शक्ति दान कर दू तो??

मणि – नहीं गुरु तुम ऐसा बिलकुल नहीं करोगी कियोकि ऐसा करने से तुम्हारी जान को भी खतरा हो जायेगा..

गुरु – गुरु जी ये बताइये की मेरी जीवन शक्ति से ये सभी होश में आएगी या नहीं…

मणि – आ तो जाना चाहिए.. पैर तुम करोगी नहीं..

पैर गुरु उसके बात मणि जी से संपर्क तोड़ कर एक फेशला लेती है की यदि एक के मरने से सभी को बचाया जा सकता है तो उस एक की मूट से कोई नुकशान नहीं है. और वो अपनी जीवन शक्ति को अड़ अक हाथ पकड़ कर उसमे ट्रांसफर करने लगती है. कामिनी ये होते हुए केवल देख hi सकती थी कियोकि उसके तो आज कुछ भी समाज नहीं आ रहा था और वो खुद को बहुत कमजोर और लचर फील कर रही थी. और देखते hi देखते गुरु का रंग उड़ने लगा. ऐसा लगने लगा जैसे गुरु अपने शरीर का खून ऐडा को दे रही है और ऐडा के जरिये वो उन सभी में जा रहा है. गुरु की सांसे दिमि पड़ने लगी थी कामिनी बस दूर कड़ी देख रही थी उसको क्या करना चाहिए ये उसके समाज के बहार था. पैर तभी उसके मन में दयासुर जी की आवाज आती है – बेटी गुरु क्या कर रही है??

कामिनी – बाबा दीदी अड़ अक हाथ पकड़ कर बैठी है और ऐसा लग रहा है जैसे उसके शरीर से खून ऐडा के शरीर में जा रहा हो उनकी हालत हर पल के साथ कमजोर होती जा रही है.

दयासुर – बेटी सबसे पहले गुरु का हाथ ऐडा से छुड़वाओ नहीं तो अनर्थ हो जायेगा.

कामिनी ये सुनते hi फुर्ती से गुरु को पकड़ कर खींच लेती है पैर अभी तक गुरु की हालत नाजुक हो चुकी थी. गुरु की हालत देख कर कामिनी का दिल भी बैठने लगता है. आँखों से पानी गिरने लगता है. पैर अभी वक्त था हिम्मत से काम लेने का कियोकि यहाँ वो अब अकेली थी जो होश में थी. और इन सभी की जिम्मेदारी अब केवल और केवल कामिनी पैर hi थी. न तो उसको इसका कोई आईडिया था और न hi उसके पास कोई शक्ति थी इतने दिनों में वो फैसिकालय तो स्ट्रांग हो चुकी थी और कुछ मंत्र भी सिख चुकी थी पैर ये सब उसके लिए नया था. किसी को ठीक करना उसके बस में न था. पैर कामिनी को कुछ hi देर में एक बड़ी रहत मिली जब उसने देखा की ऐडा और बाकि सकीय कहराते हुए आँखें खोल रही है तो उसमे भी भाग कर सभी के फेस पैर पानी छिड़कना सुरु किया. जब वो सब पुरे होश में आ गयी तो कामिनी ने उसको गुरु के बारे में बताया और गुरु की हालत देख कर सभी की आँखों में आशु आ गए. वो सभी समाज चुकी थी की उनके शरीर में जो नयी जान आयी है ये गुरु की hi दें है तो सभी वह से उड़ कर गुरु के पास आने लगी पैर वो एक दूसरे का हाथ छोड़ कर गुरु के पास आती उससे पहले hi एक आवाज आयी – रुक जाओ तुम सभी गुरु के तयाग को वास्ते मत करो गुरु अब मेरी जिम्मेदारी है तुम सभी अपने धयान में बैठो ताकि वह पब को भी होश आ सके. समय बिट रहा है यदि जल्दी hi पब को होश नहीं आया तो सब ख़तम हो जायेगा.

जब सभी ने आवाज की देखा में देखा तो सामने दयासुर जी खड़े थे. दयासुर जी को देख कर और उसकी बाते सुन कर सभी वैसे hi बैठी रहा गयी. पलकों में आशु और दिल में दर्द लिए वो एक बार फिर धयान में बेथ चुकी थी. वो सब जानती थी की ये समय भावनाओ का नहीं बल्कि सयम से युद्ध लड़ने का नहीं एक छोटी सी भूल भी आज तक की साडी म्हणत को बराबर कर सकती थी.


दयासुर जी गुरु के बेहोश शरीर को ले कर उस हवन खुद के पास जा चुके थे जहा कुछ हॉर्स पहले गुरु अपनी सभी शक्तियों को जागृत कर रही थी. ये सभी पत्निया अपने धयान में बेथ चुकी थी. और कामिनी दयासुर जी की हेल्प के लिए जुली को बोल कर फिर से उन सभी के पास पहुंच गयी.
 
अपडेट 266

यहाँ पब, अवनि और दिव्यांश जी को बेहोश हुए काफी देर हो चुकी थी. देर खड़े नकसुर और भलासुर उनको बेहोश देख कर चिंतित ो रहे थे कियोकि उनको भी लगा था की आज उनके पिताजी इस कैद से मुक्त हो सकते है.

वह जैसे -2 वो सभी अपनी जीवन शक्ति प् रही थी वैसे -2 पब में भी शक्ति का संचार सुरु हो चुक्का था और कुछ hi देर में उसको होश भी आ गया. जब पब ने दिव्यांश जी को बेहोश देखा तो उसने पहले उनको हील किया और फिर अवनि को उस गोले से निकल कर हील किया. कुछ hi देर में उन दोनों को भी होश आ गया.

दिव्यांश – पुत्र अब क्या करना है?? न तो तुम्हारे पास ताकत है और न मेरे पास फिर आगे कैसे बड़ा जाये??

पब – हे देव मैं अपने अंदर फिर से जीवन शक्ति का संचार महसूस कर रह हु लगता है की मेरी सभी पत्निया फिर से धयान में बेथ चुकी है. मैं फिर से लड़ने के लिए तैयार हु..

दिव्यांश – पागलो जैसी बात मत करो पुत्र सामने 2 दानव राजकुमार है वो भी वरदान से बन्दे हुए. उनको बिना मरे तुम डलासुर को आज़ाद नहीं करवा सकते. और वो दोनों hi अत्यंत शक्तिशाली है.

पब – पैर देव कुछ तो करना hi होगा न?? समय hi कहा है अपने पास अब??

दिव्यांश – हम्म्म ये भी है पैर पहले हमको कुछ देर धयान में बेथ कर अपने आप को मजबूत कर लेना चाहिए नहीं तो हमारा मरना तय है..

पब – हम्म बात आपकी ठीक है पैर देव मेरी एक विनती है आपसे और वो आपको माननी hi होगी..

दिव्यांश – हाँ बोलो मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हु???

पब – हे देव मैं चाहता हु की नकसुर और भलासुर जी से युद्ध केवल मैं करू. आप उनसे युद्ध न करे. आप उनके दादा है और एक दादा पोते की बिच युद्ध हो ये ठीक नहीं. जबकि मेरे लिए वो मेरे गुरु के बड़े भाई है और मैं पहले भी अपने गुरु से युद्ध कर चुक्का हु. तो मेरे लिए ये नयी बात नहीं होगी..

पब की इस बात को दिव्यांश जी मैंने को तैयार नहीं थे. पैर पब के समजने पैर वो मान गए पैर उन्होंने भी कहा दिया की यदि मेने तुमको किसी संकट में देखा तो तुम मुझको अपनी सहायता करने से नहीं रोकोगे. पब को उनकी ये बात माननी hi पड़ी. फिर पब, दिव्यांश और अवनि धयान में बेथ गए. पब के लिए तो वो सभी भी डायन में बैठी हुयी थी और अब पब भी बेथ गया तो पब 4 हॉर्स में अपनी जीवन शक्ति फिर से प् लिया था. पैर दिव्यांश और अवनि अभी भी डायन में hi बैठे थे. अब दिन भी निकलने लगा था. और पब के पास केवल 14 हॉर्स hi बचे थे. और उसका सबसे जरुरी काम युक ा तू hi बचा हुआ था. अब उसको दोनों दानवपुत्रो को युद्ध में हराना था.

पब ने टाइम वास्ते न करते हुए उस मैदान से निकल कर उस तालाब वाले एरिया में उन दोनों दानवो के सामने जा खड़ा हुआ और बोलै – आप दोनों मेरे गुरु दयासुर के बड़े भाई है तो उस नाते आप भी मेरे गुरु hi हुए तो अपने इस शिष्य पब का प्रदम स्वीकार करे…

नकसुर – सदा सुखी रहो पुत्र!!

भलासुर – तुमने अपना केवल एक hi परिचय दिया है जबकि हम तुम्हारे तीन परिचय जानते है. तो तुमने केवल एक hi क्यों दिया??

पब – हे गुरुवार!!! आप सच कहा रहे है मेरा एक परिचय ये भी है की मैं आपकी भतीजी (सलोनी) का पति हु. और मेरा प्रथम परिचय ये है की मैं आपकी माँ अक दत्तक पुत्र हु. और उस नाते आपका छोटा भाई भी हु. पैर मेरे ये दोनों परिचय हमरे बिच होने वाले युद्ध के लिए ठीक नहीं थे. इसलिए मेने केवल अपना एक hi परिचय दिया था. कियोकि मैं जनता हु बिना युद्ध की प मुझे दानवराज को मुक्त करवाने नहीं देंगे. इसलिए हे गुरुवार अपने शिष्य को क्षमा कर उससे युद्ध कर…. मैं आपको युद्ध के लिए ललकारता हु…….

दोनों भाई – वाह क्या बात है…. हम भी तुमसे युद्ध करने को तैयार है… और दिल से ये hi चाहते है की ये युद्ध तुम hi जीतो पैर ये मत सोचना हम अपनी चाहत के लिए खुद hi हार जायेगे… नहीं हम अपनी तरफ से पूरी कोसिस करेंगे तुमको हारने और मरने की.. तुम केवल और केवल अपने बल पैर hi ये युद्ध जीत सकते हो…..

पब – मैं भी ये hi चाहता हु…

पब में 1सत हमला किया आग के गोलों के रूप में. जिसको उन दानवो ने फुक मर कर hi ुधा दिया. पब ये देख कर चौक गया और समाज गया की ये दोनों दयासुर से भी बहुत आदिक शक्तिशाली है. पब के सामने दो महा वीर थे और साथ में पब को यहाँ आते hi वासना ने घेरना सुरु कर दिया था. वो उत्तेजित होने लगा था पैर उसके पास भी वरदान की शक्ति थी तो वो उत्तेजना उस पैर हावी नहीं हो प् रही थी. पैर पब का मन भटक रहा था और उसका मन सेक्स करने को बोल रहा था पैर उंसने अपने आप को सँभालते हुए उन दानवो पैर हमला सुरु कर दिया था.

आग के गोलों को विपल देख कर पब ने एक हवा का बड़ा बवंडर बना कर उनकी तरफ फेका तो नकसुर ने उस बवंडर को उसकी तरफ hi मोड़ दिया पब को बचने के लिए अपनी जगह से कूदना पड़ा और इतने में hi भलासुर ने एक बड़ा पत्तर उसके उप्पेर फेक दिया और वो पब से टकरा कर चूर चूर हो गया. ये देख कर उन दोनों भइओ के फेस पैर भी पब के लिए प्रशंशा के भाव आ गए. फिर पब ने मन्त्र पड़ते हुए एक पिली रौशनी उन दोनों की तरफ फेकि तो उन्होंने भी एक लाल रौशनी से उसको नष्ट कर दिया.

बहुत देर तक ऐसा hi चलता रहा दोनों तरफ से बराबर हमले हॉट रहे पैर इन हमलो से दानवो का कोई नुकशान नहीं हुआ था पैर पब जरूर घायल होने लग गया था. जब पब ने देखा की इन दोनों को मंत्रो से नहीं हरा सकता है तो उसने अपनी चाँद हंस तलवार को याद किया और तलवार उसके हाथ में आते hi दोनों भइओ के भाव hi बदल गए. और उस तलवार के खिलाफ युद्ध करने में संकुचा रहे थे. और इसका फायदा ुधा कर पब अपनी युद्ध कला की निपुरता दिखते हुए उन दोनों पैर लगातार हमले किये जा रहा था जिससे दोनों बहुत घायल हो गए.

जब दोनों भइओ ने देखा की वो हरने लगे है तो नकसुर ने भलासुर को कुछ इशारा किया तो उसने भी इशारे में hi जवाब दे दिया. भलासुर इशारा मिलते hi पब पैर अपनी तलवार से घातक प्रहार करने लगा जिसका जवाब पब भी पूरी कुशलता से देने लगा. पैर इन हमलो की वजह से पब का धयान नकसुर पैर से हैट गया और नकसुर ने इसका फायदा उड़ाते हुए पब को एक जोरदार टक्कर मर दी. वो टक्कर इतनी तेज़ थी की नकसुर और पब दोनों hi 2-3 कलमन्दी कहते हुए एक तरफ गिर गए और पब के हाथ से तलवार गिर गयी. नकसुर ने तुर्रंत पब को सँभालने का मौका दिए बिना ुधा कर एक पत्तर पैर दे मारा पब उड़ता उससे पहले hi भलासुर ने उसके पेट में एक किक जमा दी. दोनों भाई एक साथ पब को मरने में लग गए. और पब पीटने के इलावा कुछ कर भी नहीं प् रहा था. पैर उसकी कोसिस जारी थी. और इन कोसिसो के कारन उसके हाथ में एक पेअर आ गया जो की नकसुर का था पब ने भी देर न करते हुए पेअर को पकड़ कर घुमा दिया काट काट की आवाज के साथ नकसुर की चीख भी फिजा में गूंज गयी और भलासुर नकसुर को देखने लग गया. और पब ने इतनी देर में hi नकसुर को भलासुर पैर फेंक दिया. दोनों भाई उत्तम उठता हुए जमीन पैर गिर गए. और पब फुर्ती से खड़ा हो कर अपनी तलवार को याद किया तो वो तुर्रंत फिर उसके हाथो में चमकने लगी. पब ने उन दोनों को भी मौका न देते हुए तलवार से दोनों पैर हमला कर दिया दोनों फिर से घायल होने लगे. जब दोनों को लगा की यदि उन्होंने कुछ नहीं किया तो उनकी हार निश्चित है तो नकसुर ने वो वॉर किया जो पब के लिए सम्भाना मुश्किल था.

नकसुर ने पब पैर अपनी ब्लैक पावर (दानवो की मैं पावर) से हमला किया तो पब हवा में उछलता हुआ दूर जा कर गिरा. ये hi वो शक्ति थी जो दयासुर ने भी अंत में hi उसे की थी. तो पब भी समाज गया की यदि इस शक्ति से बच गया तो जीत पक्की है. पैर पब को क्या पता था की इससे बचना उसके लिए मुंकिन नहीं है.

पब जब तक खड़ा हो पता तब तक वो दोनों भाई भी खड़े हो चुके थे. और पब के खड़े होते hi फिर से एक बार उस शक्ति से हमला कर दिया पैर पब इस वॉर सचेत था तो उसने भी भोलेनाथ को याद कर अपनी वाइट रोजिन को उस तरफ छोड़ दिया. जैसे hi दोनों शक्तिया टकराई एक भयानक आवाज के साथ धरती कैंप गयी. तो दिव्यांश और अवनि को धयान भी टूट गया. दिव्यांश अवनि हो वही रहने का बोल कर पब की और बाद गया.

उस धमाके ने उन दोनों भाइयो को भी हिला कर रख दिया कियोकि इस शक्ति को काटने की ताकत हर किसी के पास नहीं थी. पैर फिर भी वो हार मैंने को तैयार न हुए और कुछ सोच कर दोनों भइओ ने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर दोनों की उस काली शक्ति को एक साथ जोड़ कर पब पैर लगातार फेकने लगे. तो पब भी अपनी उस वाइट शक्ति को लगातार छोड़ता रहा और वातवरद में धमाकों की गूंज बढ़ती hi चली गयी जमीन किसी झूले की तरह हिलने लगी थी. पैर पब की जीवन शक्ति उन दोनों भाइयो की जीवन शक्ति से बहुत कर्त hi तो पब कुछ hi देर में कमजोर पड़ने लगा और वो काली शक्ति पब की तरफ बढ़ने लगी थी उसकी सफ़ेद रौशनी काम होती जा रही थी और उनकी काली रौशनी पब के नजदीक आती जा रही थी. पैर जैसे hi ब्लैक रौशनी पब तक पहुंचने वाली थी तभी दिव्यांश जी रौशनी और पब के बिच में खड़े हो गए. और उस ब्लैक पावर को चेंज करके वाइट पावर में कन्वर्ट करके पब के शरीर में डालने लगे. दिव्यांश जी की ये hi मुख्या शक्ति थी और वो उसका अभी पूरा फायदा पब को दे रहे थे. उन दोनों भाइयो की जीवन शक्ति पब में समां रही थी और उअके शरीर से कमजोरी पल प्रति पल काम होती जा रही थी वही ये दोनों भाई कमजोर होते hi जा रहे थे.

अब ऐसा लग रहा था की दिव्यांश जी उन दोनों भाइयो की जीवन शक्ति उनके शरीर से खींच कर पब के शरीर में दाल रहे है. और कुछ hi देर में वो दोनों शक्ति विहीन होने लगे और मरने की कगार पैर पहुंच गए. और ये देख कर पब ने दिव्यांश जी को hi दक्का दे दिया और इस दकके से ये चारो hi अलग -2 दिशाओ में जा गिरे. नकसुर और भलासुर तो गिरते hi बेहोश हो गए थे. पैर पब को कोई फरक नहीं पड़ा था. तो वो उड़ कर दिव्यांश जी के पास पहुंच गया. वो जमीन पैर पड़े तड़फ रहे थे. उनको तडफता देख कर पब ने उनको अपनी गॉड में ुधा कर एक साफ़ पत्तर पैर लिटा दिया.

पब – हे देव आपको क्या हुआ है आप इतना क्यों तड़फ रहे है???

दिव्यांश – पुत्र एक तो इस हवा की वाष्ण और फिर मेरे पोटो की नेगेटिव एनर्जी जो मेने अपने पास रख कर तुमको उनकी पुरे जीवन शक्ति दी दोनों hi मेरे शरीर को फाड़ने में लगी है. मुझको नहीं लगता की अब मैं ज्यादा देर जिन्दा रहा पाउगा….

पब (आँखों में आशु लेट हुए) – नहीं देव आपको कुछ भी नहीं हो सकता आप देव है देव… मैं आपको कुछ नहीं होने दुगा.. चलिए पहले आपको इस वाष्ण की हवा से दूर ले चालू.

फिर पब दिव्यांश जी को ले कर अवनि के पास मैदान में टेलिपोर्ट हो जाता है जहा वाष्ण की हवा का कोई अक्षर नहीं था. वह पहुंचते hi दिव्यांश जी और पब दोनों को रहत मिलती है. फिर पब वह से टेलिपोर्ट हो कर नकसुर और भलासुर के पास पंहुचा और दोनों को भी बही ले कर आ गया. दोनों की सांसे दिमि हो रही थी.

दिव्यांश – पुत्र तुम इन दोनों को यहाँ क्यों ले आये??

पब – देव ये दोनों hi आपकी समस्या का हल है. और आपके अपने भी है..

दिव्यांश – कहना क्या चाहते हो तुम??

पब – देव आप इनके नेगेटिव एनर्जी को संभल नहीं प् रहे है. तो क्यों न आप अपनी कुछ जीवन शक्ति के साथ इनके वो एनर्जी इनको लोटा दे तो ये भी बच जायेगे. और आप भी… और मुज पैर भी दादा और पोते का एक दूसरे की हत्या करवाने का दोष नहीं लगेगा..

दिव्यांश (चोकते हुए) – पुत्र तुम इनको बचाना चाहते हो जो थोड़ी देर पहले तुमको मर्रा चाहते थे?? तुम जानते हो न यदि मैं बिच में नहीं आता तो तुम इन दोनों के हाथ मरे जा चुके होते फिर भी तुम इनको बचाना चाहते हो??

पब – हाँ देव.. और वो इसलिए कियोकि ये दोनों मेरे गुगु के सामान है. और इन्होने मुझको मरने की कोसिस भी एक मज़बूरी में की थी. उन टाइम वो इन दोनों का फर्ज था और अब इन दोनों की जान बचाना हम दोनों का फर्ज है. आप इनके दादा है और हर दादा अपने पोटो के लिए न जाने क्या क्या करता है और आप इतना भी नहीं करेंगे क्या???

पब की बात सुन कर दिव्यांश की आखों में आशु आ गए. वो पब को गले लगा कर बोले – तुमने मुझको इसलिए hi दक्का दिया था न ताकि ये दोनों जीवित रहे?? तुम अपने प्रतिदव्न्दी को भी सम्मान भाव से देखते हो. तुमने ये नहीं देखा की वो तुमको मरना चाहते है बल्कि ये सोच की इसके पीछे वजह क्या है. सच में पुत्र तुम एक महँ इन्शान हो एक महा मानव हो….

पब – नहीं देव मैं इतना भी महँ नहीं हु. मैं तो बस एक पोते को उसके दादा के हाथो जीवन दान दिलवाना चाहता हु. आप देंगे न इनको जीवन दान..??

दिव्यांश – काश की हर मानव तुम्हारी जैसी सोच रखना तो पृथ्वी hi स्वर्ग बन जाती. मैं ये काम जरूर करुगा मेरे बच्चे. तुमने एक देव को उसका फर्ज याद दिलवाया है इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है.

फिर दिव्यांश उन दोनों के शरीर में अपनी जीवन शक्ति के साथ उनकी नेगेटिव एनर्जी भी दाल देता है जिससे कुछ hi देर में दोनों भाई होश में आ जाते है. और होश में आते hi फिर से पब पैर हमला करने को तैयार होने लगते है. तो बिच में दिव्यांश hi उनको टोकता है
 
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