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फिर दिव्यांश उन दोनों के शरीर में अपनी जीवन शक्ति के साथ उनकी नेगेटिव एनर्जी भी दाल देता है जिससे कुछ hi देर में दोनों भाई होश में आ जाते है. और होश में आते hi फिर से पब पैर हमला करने को तैयार होने लगते है. तो बिच में दिव्यांश hi उनको टोकता है
दिव्यांश – अब क्या करने वाले हो तुम दोनों???
नकसुर – इस लड़के से युद्ध और क्या??
दिव्यांश – पैर तुम दोनों वो युद्ध हार चुके हो और तुम दोनों मरने hi वाले थी पैर इस लड़के ने hi तुम दोनों को बचाया है. और अब तुम दोनों की पूरी जीवन शक्ति इस लड़के के पास है न तो तुम इसको हरा सकते हो और न hi अब वो वरदान बचा है जिसके चलते तुम दोनों यह पहरा दे रहे थे…
भलासुर – पैर वो कैसे दादाजी??? हम जब तक जीवित है तब तक उस तालाब की रक्षा करना हमारा धर्म है.
दिव्यांश – वो इसलिए कियोकि तुम दोनों मूट के मुँह से वापिस लोटे हो और तुमको जीवन देने वाला भी वही है जिसको तुम हराना चाहते थे. तो तुम्हारा ये जीवन अब सदा इस लड़के का कर्जदार है. तुम अपने पिता का वचन निभाते हुए मरे जा चुके हो तो तुम्हारे पिता का वचन भी उसके साथ hi मार गया है. अब तुम्हारे जीवन पैर केवल और केवल इस लड़के का हक़ है.
नकसुर – आप सच कहते है दादाजी. आज से हम इसके कर्जदार है. और इस कर्ज को उतरने के लिए हम सदा इसके साथ इसका साया बन कर रहेंगे.
पब – नहीं गुरूजी आप मेरे कर्जदार नहीं है. और न hi आपको मेरे साथ रहने की जरुरत है. अब आप लोग उस वचन से आज़ाद है तो जा कर अपना राज पढ़ सम्भालिये. बस मेरी आप दोनों से एक विनती है.
भलासुर – बोलो पुत्र यदि हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सके तो हमको बहुत ख़ुशी होगी.
पब अवनि को अपने पास बुलाता है और फिर कहता है – आपको हम दोनों की शादी यहाँ पैर hi करवानी है. ताकि मैं अपना अंतिम वरदान मांग कर त्रिकाल जैसे पापी का अंत कर सकू.
नकसुर – हम्म ये तो बहुत hi अच्छी बात है. हम इसके लिए तैयार है पैर तुम अंतिम वरदान में मांगने क्या वाले हो जो यहाँ पैर इससे शादी करना चाहते हो…
पब फिर नकसुर और भलासुर को दयासुर और मणि जी का पूरा प्लान बता देता है जिसको सुन कर दोनों बहुत खुश होते है. और दिल से अपने छोटे भाई और मणि शंकर जी की टैरिफ करते है. (अभी इस दोनों को नहीं पता की मणि शंकर इन दोनों का बड़ा भाई भी है)
पब – गुरूजी मेने सुना था की यहाँ पैर जो भी सीडी टेलिपोर्ट हो कर आता है उसका बचना नामुनकिन है. पैर हम तीनो पैर इतना बा संकट तो नहीं आया की हम उसको ताल न सके. और देवता तो हमसे बहुत शक्ति शैली है तो उन्होंने यहाँ आ कर अभी तक इस काम को क्यों नहीं किया…
नकसुर – पुत्र तुम पैर बड़ा संकट इसलिए नहीं आया कियोकि तुमने 5 चरण पार किये थे. यदि तुम या दादाजी भी टेलिपोर्ट हो कर यहाँ आते तो 2 मं में मारे जाते..
पब – इसका मतलब हमको 5 चरण पार करने का फायदा हुआ. वैसे गुरूजी यदि हम डायरेक्ट आते तो हमको और क्या भुगतना होता किस्सा हम 2 मं भी सामना नहीं कर सकते थे?? (पब को विश्वास नहीं हो रहा था की कुछ भी इतना खतरनाक हो सकता है की वो उसके सामने 2 मं भी न टिक सके)
नकसुर – पुत्र जो चुनोतिया तुमने 5 चरणों में पार की है न वो एक साथ तुम्हारे सामने कड़ी होती…
पब - ??????
नकसुर – देखो जब भी कोई यहाँ टेलिपोर्ट हो कर आता है तो वो होता तो तालाब के पास टेलिपोर्ट पैर पहुँचता है उस मैदान में. और उस टाइम उस मैदान में जहरीले तीर वाले और फल वाले पेड़ होते है (चरण 1). और उस जहरीले जांगले में तुम पैर एक साथ तांत्रिक (चरण 2), दानव (चरण 3), जानवर (चरण 4) और कृतिम दानव (चरण 6) हमला करते है. और आकाश से ड्रैगन्स (चरण 7) आग बर्शते है. इसके अलग तुम्हारा कोई प्रिये जान तुमको मदत के लिए पुकारता दिखाई देता है (चरण 5). और इन सभी का सामना आपको करना होता है बिना किसी शक्ति के करना होता है कियोकि आपकी सभी शक्तिया ब्लॉक हो चुकी होती है (चरण 2) और आपके दिमाग पैर करोड़, घ्रादा और न जाने किसी किसी भावनाये हावी होने लगती है (चरण 3). यदि सीडी सीडी कहु तो आपकी शक्ति छीन कर आपको दरिंदो से बारे जलिरिले जांगले में छोड़ दिया जाता है. और उससे भी बड़ी बात ये की उस जांगले को पार करने के लिए उस जहरीले फल को खाना जरुरी है. और ये बात कोई जनता भी नहीं था अभी तक…
पब ये सब सुन कर सुन्न पद जाता है उसके पुरे शरीर में दर की एक तीव्र लहार बहाने लगती है. आज उसको पता चला था की क्यों उसके गुरुओ ने उसको टेलिपोर्ट हो कर यहाँ आने से मन कर दिया. क्यों वो अभी भी दर रहे थे जब पब ने 5 चरण पुरे होने पैर यहाँ टेलिपोर्ट होने के लिए बोलै था. शायद वो ये जानते होंगे की यहाँ कितना खतना है पैर शायद वो भी ये नहीं जानते होंगे की 5 चरण पार करने का फायदा मिलेगा. यदि कहा जाये तो ये पब की किस्मत hi थी की उसको दिव्यांश जी का साथ मिला नहीं तो न तो वो ड्रैगन्स को हरा पता और न hi दोनों दानव भइओ से जीत पता. यदि दूसरे शवादो में कहे तो पब की जीत निकटि चाहती थी इसलिए hi हुयी थी नहीं तो वो इतना कबूल नहीं था की ये सब कर पता. नियति के खेल में सब मोहरे hi होते है और नियति की चाहत को अपने कर्मो से बदलना hi उन कर्मो का फल होता है जो की हर किसी के बस में नहीं होता.
फिर ये सब शादी की तैयारियों में लग जाते है. वह उस वीराने में कुछ भी तो नहीं था पैर जो जरुरी चीजे थी उनका तो इंतजाम किया hi जा सकता था और वो इंतजाम उन वाष्ण से भरे गाओं से किया था नकसुर और भलासुर ने. इस गाओं के सभी लोग उस तालाब के दूसरी साइड सम्भोग में लगे रहते थे गाओं में तो केवल खाने का इंतजाम करने hi जाते थे. इन सभी का काम था भी केवल सम्भोग और खाना…
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जब तक शादी की तैयारियां हो रही है तब टेक क बार त्रिकाल को भी देख लेते है. त्रिकाल की सड़ना पूरी हो चिकि थी उसका हवन आज सुबह hi पूरा हुआ था. और उसका शिरर 25 साल पहले जैसा हो गया था या कहो की उससे भी ज्यादा मजबूत हो चुक्का था. शरीर एक अलग hi चमक दे रहा था और अब त्रिकाल अपने अंतिम काम की तैयारियां कर रहा था इस काम के होते hi उसको उसकी सभी पुराणी शक्तिया मिलने वाली थी. और ये काम था नंगी लड़कियों की बलि दें अक. लड़कियों का इंतजाम तो संभु पहले hi करके गया था और ये सब त्रिकाल की गुलाम थी. वो सब खुद hi अपनी बलि की तैयारियां कर रही थी. जैसा त्रिकाल उनको कहता वैसा hi ये सब करती जा रही थी. ये तैयारियां भी जल्दी पूरी हो जनि थी. बस त्रिकाल को इन्तजार था तो शयाम के उस खाश पल का जब उसको बलि देनी थी. त्रिकाल ने बाईट हुए कुछ महीनो में अपनी शदना पैर बहुत म्हणत की थी. और उसका फल भी देखे दे रहा था. अब केवल कुछ घंटो की बात थी और वो टाइम होते hi त्रिकाल को फिर से सबसे जयते शक्तिशाली तांत्रिक हो जाना था. और त्रिकाल को पता था की उसकी शक्तियों के उसके पास आते hi वो अपने सपने को भी पूरा कर सकेगा. स्वर्ग का राजा बनने से कोई देवता भी उसको नहीं रोक सकेगा….
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मणि जी जहा पब पैर हर पर नजर रखे हुए थे वही दयासुर जी ने भी अपनी विद्या से गुरु को फिर से ठीक कर दिया था. वो बात अलग थी की इसके लिए उसको अपने कुछ महीनो का tap-bal गुरु को देना पड़ा था एक बार फिर दयासुर जी तप बल से विहीन हो चुके थे. पहले भी उन्होंने पब को अपनी सभी जीवन शक्ति और तप बल दिया था.
पब की सभी पत्नियों को भी अब एक बड़ी रहत मिली थी. युद्ध के दौरान तो इनकी हालत फिर से बिगड़ने लगी थी. पैर जैसे hi दिव्यांश जी ने उन दोनों भाइयो की जीवन शक्ति को पब में ट्रांसफर करना सुरु किया तो इसकी हालत में तेज़ी से सुंदर होने लगा था. अब ये सब भी स्वस्थ थी और अपने डायन में मग्न थी.
जहा इस टाइम सभी नार्मल थे. पब, अवनि और वो तीनो शादी की तैयारियों में थे. त्रिकाल भी खुश था की उसकी साधना आज पूरी हो जाएगी. पब की पत्निया भी स्वस्थ हो कर अपने डायन में थी पैर वही दस माँ के फेस के रंग बदले हुए थे उसके फेस को देख कर ऐसा लग रहा था की उनको कोई बहुत बड़ा झटका लगा हो और वो उस बात पैर विश्वास न कर प् रही हो. फिर भी होंटो पैर फैली मुस्कान बता रही थी की वो इस झटके के बाद भी बहुत खुश है. वो अभी भी पब पैर hi अपनी नज़रे जमाये हुए थी. और पब और अवनि की शादी की तैयारियों को देख रही थी. की एक दम बड़बड़ा ुधि – पब तुम वाकई सच्चे इन्शान हो जिसके प्यार, दया और इन्शानियत ने नियति को भी मजबूर कर दिया की वो अपना फैसला बदल दे. पैर पुत्र सवदान रहना नियति यदि कुछ बड़ा देती है तो कुछ छीन भी लेती है… पता नहीं अब नियति ये कोण सा खेल खेल रही है जिससे मेरे देखे हुए भविष्य में भी बदलाव आ रहा है. ये बदलाव एक सच्चा इन्शान hi कर सकता है और वो तुम हो पब जिसने नियति को बदल दिया है….
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यहाँ शादी की तैयारियां हो चुकी थी. मैदान पैर hi कुछ लकडिया जला कर नकसुर पब और अवनि उसके पास बैठे हुए थे. पब को उस गोअन में एक पुराण पजामा मिल गया था तो उसने अपने वो पत्ते कपडे निकल कर उस पजामा को पहन लिया था तो अवनि को एक पटिपोट और चुनरी मिल गयी थी पुराणी. उसने अपनी फटी T-shirt के उप्पेर hi वो चुनरी ोड ली थी और अपनी फटी जीन्स की जगह ये पटिपोट पहन लिया था. इनका बेग तो भ्रम की दुनिया (चरण 5) में hi कही रहा गया था. अवनि के अपनी शादी को ले कर पता नहीं कितने सपने होंगे. पैर आज जब शादी हो रही थी तो पहने को कपडे भी नहीं थे. मेक उप की एक्सपर्ट अवनि, अपनी शादी में मिटटी, खून और घावों का मेक उप किये बैठी थी. शादी का कोई भी अरमान पूरा नहीं हुआ था फिर भी वो बहुत खुस थी कियोकि वो आज अपने प्यार अपने पब की पत्नी बनने वाली थी. उसकी प्रेम कहानी में न जाने कितने मोड़ आये थे. पैर आज ये प्रेम कहानी पूरी होने जा रही थी. अवनि को पता था की शादी होते hi उसको एक बहुत बड़ी परीक्षा देनी है अपने प्रेम की और वो उसके लिए तैयार भी थी. अवनि की बात गुरु से हो गयी थी जब पब ने उन दानवो से लड़ती हुए अवनि को गोले में सुरक्षित किया था तब अवनि की गुरु से कुछ पालो की बात हुए थी पैर बात करते हुए hi अवनि बेहोश हो गयी थी. पैर अवनि को दयासुर जी की वो बात याद थी की इस युद्ध का अंतिम पड़ाव प्रेम से hi जीता जा सकेगा. अब शादी के बाद पब को वासना की आंधी को झेलना था जिसमे यदि वो बहक गया तो मूट hi मिलनी थी. पैर पब की वासना के अंत के लिए hi अवनि अपने प्रेम नमक हतियार के साथ मैदान में जाने वाली थी. और मणि जी और दयासुर जी का अवनि को यहाँ भेजने का अश्ली मकशद भी ये hi था की अवनि अपने प्रेम से पब की वासना को हारते हुए पब को अंतिम और सबसे जरुरी शक्ति – 5 दानव राजकुमारों की जीवन शक्ति दिलवा सके.
कुछ hi देर में विवहा भी पूरा हो चुक्का था और अभी दोपहर का 1 बज चुक्का था मतलब इनके पास केवल 6 हॉर्स hi बचे थे. तभी नकसुर जी बोले - पुत्र तुम दोनों का विवहा हो चुक्का है अब तुमको सम्भोग क्रिया करनी होगी. और उससे पहले उन वासना के भरे तालाब में जा कर पिता जी के उस बॉक्स को निकल कर लाना होगा..
पब – गुरूजी क्या आप बता सकते है की वो बॉक्स मुझको तालाब की किस दिखा में मिलेगा. और इसमें अब और भी कोई चुनौती है क्या??
नकसुर – पुत्र अब जो चुनौती है वो बहुत खतरनाक है पैर लगता है तुम्हारा खुद पैर अच्छा कण्ट्रोल है. उस तालाब के एरिया में जाते hi तुम दोनों वासना की आग से घिर जाओगे. और उस वासना को संभालना बहुत मुश्किल होगा तुम दोनों के लिए. और सबसे बड़ी बात तुमको तालाब में उतरना है और उस तालाब का पानी वह की हवा में पहेली वासना से भी 10 गुना खतरनाक है. यदि में तुमको मानवो की तरह बहु तो उस पानी की एक बून्द का तुहरे शरीर पैर गिरना भी 100 वियाग्रा टेबलेट से भी ज्यादा खतरनाक है. ये समाज लो यदि किसी आम मानव के सरीर पैर 1 बून्द पानी उसके मरने के लिए बहुत है. और तुमको उस पानी में उतर कर उस बॉक्स को खोजना है.
अवनि – गुरूजी पैर गुरूजी (दयासुर) ने तो कहा था की बॉक्स निकलने जाने से पहले वह जीतनेय भी गोअन के लोग है उनको मार देना. और फिर बॉक्स लेने जाना..
भलासुर – हाँ पुत्री उसने ठीक कहा था कियोकि उन सभी गोअन वालो के मरते hi हवा में पहेली वासना बहुत काम हो जाएगी. पब का सयम तो हम देख चुके है पैर मुझको नहीं लगता की तुम खुद को उस हवा में रोक पाओगी कुछ मं से ज्यादा..
पब – गुरूजी मेरा वासना पैर कण्ट्रोल दानवराज से पायी शक्तियों में से एक है. इसलिए आप दोनों से युद्ध करते हुए मुझको ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुयी. और अपने ठीक कहा अवनि उस वासना को नहीं झेल पायेगी. तो मैं सोच रहा हु की इसको यहाँ छोड़ कर ाकेगा hi उस तालाब में जा कर वो बॉक्स निकल लौ.
नकसुर – नहीं बिलकुल भी नहीं तुम दोनों की शादी का उद्देश्य hi ये है की तुम जब वासना से बहक जाओ तुमको अवनि संभाले. और तुम अपनी साडी वासना इसके प्रेम से ख़तम कर दो. अवनि की एक अग्नि परीक्षा होगी. कियोकि तुमको तालाब में उतरना है और अवनि को केवल बहार हवा में बैठना है इसलिए तुम पहले उन गोअन वालो को मार कर फिर तालाब में उतरना तो अवनि को खुद पैर काबू रखने में ज्यादा परेशनी नहीं होगी.
पब (कुछ संकोच के साथ) – गुरूजी क्या उन गोअन वालो को मरना जरुरी है कुछ ऐसा नहीं हो सकता की उनकी जान बचाई जा सके. वो सब भी तो त्रिकाल के जाल में फंसे बोले भले लोग है. किसी नितदोष की हत्या करना क्या ठीक होगा??
भलासुर – तुम्हारी सोच अच्छी है पुत्र पैर मरे हुए को मुक्ति देना पाप नहीं पुण्य होता है. ये जो गाओं वाले तुमको दिख है है न ये सब पिछले 26-27 साल से लगातार सम्भोग कर रहे है वो तो त्रिकाल के मायाजाल से न तो इनकी उम्र बढ़ती है और न hi ये मरते है. जिस दिन ये माया जाल टूटेगा तो तुमको इनकी सदी हुयी लाशे hi देखे देगी.
पब को भलासुर की बात ठीक लगी पैर कुछ सोच उसके मन में अभी भी थी – पैर गुरूजी मेरे समाज में ये नहीं आया की त्रिकाल ने इन सभी को यहाँ ये सम्भोग करने के लिए क्यों रखा है?? इससे उसको क्या फायदा हुआ??
भलासुर – बीटा जो भी दिव्या दृष्टि से यहाँ देखता है उनको पहला झटका वासना का तुरंत लग जाता है. जो इसके कारन hi है. और फिर तुम्हारे पास वरदान था नहीं तो हमसे युद्ध करने की जगह तुम वासना की इन हवाओ की चपेट में आ कर उन गोअन वालो में hi शामिल हो जाते. या फिर हमसे युद्ध करने में तुम धयान hi नहीं दे पता.
पब – हम्म ये तो है. पैर गुरूजी आप दोनों को ये हवाएं क्यों कोई अक्षर नहीं की?? क्या आपके पास भी वरदान है?? मेरे पास वरदान होने के बाद भी कुछ hi देर में अक्षर तो हुआ था चाहे को बहुत काम था. पैर आप दोनों तो 26-27 साल से hi यहाँ हो तो आप दोनों पैर इसका अक्षर क्यों नहीं हुआ??
नकसुर – वो इसलिए कियोकि त्रिकाल ने हमको एक शील्ड से सेफ कर दिया था. तुमसे युद्ध हारते hi टूट गयी. वो तो अच्छा हुआ की तुम हम दोनों को बेहोशी में hi यहाँ ले आये नहीं तो हम दोनों तो कुछ hi देर में पागल हो जाते हम 4 भाइयो का वासना पैर बिलकुल भी कण्ट्रोल नहीं है. इसलिए हम सब इससे दूर hi रहते है. और शायद ये हमारे माता पिता के कारन hi है. पैर दयासुर का अपने पैर पूरा कण्ट्रोल है. हम चारो ने वासना से दूर रहने के लिए hi शादी नहीं की थी. और जीवन बार केवल अपने फर्ज को hi निख़ते रहे..
पब – आप तो उल्टा बोल गए गुरूजी .. आप 4रो भाइयो का अपने आप पैर बहुत कण्ट्रोल है तभी तो ब्रह्मचर्य जीवन जेते हुए भी अपने कर्म पथ से नहीं हेट…
नकसुर – हाहाहाहाहा.. अच्छा चलो अब तुम जाओ और विजयी हो कर लोटो.. हम तीनो तुम्हारा यहाँ मैदान में hi इन्तजार करते मिलेंगे…
दिव्यांश – नहीं मैं भी इनके साथ hi जाउगा. जब तक मेरा बीटा आज़ाद नहीं हो जाता तब तक मैं इनका साथ नहीं छोड़ सकता.
पब – नहीं देव अब आप हरमे साथ आ कर क्या करेंगे?? अब उन गोअन वालो को मरना इतना भी कदिन नहीं की आपकी मदत की जरुरत पड़े. और फिर आप उन तालाब में उतर नहीं सकते कियोकि अब इतना कण्ट्रोल नहीं कर पाएंगे. और न hi आपके साथ कोई है. बॉक्स निकलना जब मुझको है तो फिर आपका क्या काम??
दिव्यांश – फिर भी यदि कोई और संकट आ गया तो मैं होगा तुम्हारी साक्षा के लिए..
नकसुर – दादाजी ये ठीक कहा रहा है. और हो सकता है की इनको अपने आप पैर कण्ट्रोल करने के लिए बिच में hi सम्भोग करना पड़े तो आपके सामने ये करना भी तो इनको ठीक नहीं लगेगा न..
पब – हाँ देव अब आप यहाँ रुकिए हम दोनों जल्दी hi काम ख़तम करके आपके पास आते है…
दिव्यांश को न चाहते हुए भी उनकी बात माननी पड़ी. फिर अवनि और पब उन तीनो से आशीर्वाद ले कर तालाब की और चल दिए.
फिर दिव्यांश उन दोनों के शरीर में अपनी जीवन शक्ति के साथ उनकी नेगेटिव एनर्जी भी दाल देता है जिससे कुछ hi देर में दोनों भाई होश में आ जाते है. और होश में आते hi फिर से पब पैर हमला करने को तैयार होने लगते है. तो बिच में दिव्यांश hi उनको टोकता है
दिव्यांश – अब क्या करने वाले हो तुम दोनों???
नकसुर – इस लड़के से युद्ध और क्या??
दिव्यांश – पैर तुम दोनों वो युद्ध हार चुके हो और तुम दोनों मरने hi वाले थी पैर इस लड़के ने hi तुम दोनों को बचाया है. और अब तुम दोनों की पूरी जीवन शक्ति इस लड़के के पास है न तो तुम इसको हरा सकते हो और न hi अब वो वरदान बचा है जिसके चलते तुम दोनों यह पहरा दे रहे थे…
भलासुर – पैर वो कैसे दादाजी??? हम जब तक जीवित है तब तक उस तालाब की रक्षा करना हमारा धर्म है.
दिव्यांश – वो इसलिए कियोकि तुम दोनों मूट के मुँह से वापिस लोटे हो और तुमको जीवन देने वाला भी वही है जिसको तुम हराना चाहते थे. तो तुम्हारा ये जीवन अब सदा इस लड़के का कर्जदार है. तुम अपने पिता का वचन निभाते हुए मरे जा चुके हो तो तुम्हारे पिता का वचन भी उसके साथ hi मार गया है. अब तुम्हारे जीवन पैर केवल और केवल इस लड़के का हक़ है.
नकसुर – आप सच कहते है दादाजी. आज से हम इसके कर्जदार है. और इस कर्ज को उतरने के लिए हम सदा इसके साथ इसका साया बन कर रहेंगे.
पब – नहीं गुरूजी आप मेरे कर्जदार नहीं है. और न hi आपको मेरे साथ रहने की जरुरत है. अब आप लोग उस वचन से आज़ाद है तो जा कर अपना राज पढ़ सम्भालिये. बस मेरी आप दोनों से एक विनती है.
भलासुर – बोलो पुत्र यदि हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सके तो हमको बहुत ख़ुशी होगी.
पब अवनि को अपने पास बुलाता है और फिर कहता है – आपको हम दोनों की शादी यहाँ पैर hi करवानी है. ताकि मैं अपना अंतिम वरदान मांग कर त्रिकाल जैसे पापी का अंत कर सकू.
नकसुर – हम्म ये तो बहुत hi अच्छी बात है. हम इसके लिए तैयार है पैर तुम अंतिम वरदान में मांगने क्या वाले हो जो यहाँ पैर इससे शादी करना चाहते हो…
पब फिर नकसुर और भलासुर को दयासुर और मणि जी का पूरा प्लान बता देता है जिसको सुन कर दोनों बहुत खुश होते है. और दिल से अपने छोटे भाई और मणि शंकर जी की टैरिफ करते है. (अभी इस दोनों को नहीं पता की मणि शंकर इन दोनों का बड़ा भाई भी है)
पब – गुरूजी मेने सुना था की यहाँ पैर जो भी सीडी टेलिपोर्ट हो कर आता है उसका बचना नामुनकिन है. पैर हम तीनो पैर इतना बा संकट तो नहीं आया की हम उसको ताल न सके. और देवता तो हमसे बहुत शक्ति शैली है तो उन्होंने यहाँ आ कर अभी तक इस काम को क्यों नहीं किया…
नकसुर – पुत्र तुम पैर बड़ा संकट इसलिए नहीं आया कियोकि तुमने 5 चरण पार किये थे. यदि तुम या दादाजी भी टेलिपोर्ट हो कर यहाँ आते तो 2 मं में मारे जाते..
पब – इसका मतलब हमको 5 चरण पार करने का फायदा हुआ. वैसे गुरूजी यदि हम डायरेक्ट आते तो हमको और क्या भुगतना होता किस्सा हम 2 मं भी सामना नहीं कर सकते थे?? (पब को विश्वास नहीं हो रहा था की कुछ भी इतना खतरनाक हो सकता है की वो उसके सामने 2 मं भी न टिक सके)
नकसुर – पुत्र जो चुनोतिया तुमने 5 चरणों में पार की है न वो एक साथ तुम्हारे सामने कड़ी होती…
पब - ??????
नकसुर – देखो जब भी कोई यहाँ टेलिपोर्ट हो कर आता है तो वो होता तो तालाब के पास टेलिपोर्ट पैर पहुँचता है उस मैदान में. और उस टाइम उस मैदान में जहरीले तीर वाले और फल वाले पेड़ होते है (चरण 1). और उस जहरीले जांगले में तुम पैर एक साथ तांत्रिक (चरण 2), दानव (चरण 3), जानवर (चरण 4) और कृतिम दानव (चरण 6) हमला करते है. और आकाश से ड्रैगन्स (चरण 7) आग बर्शते है. इसके अलग तुम्हारा कोई प्रिये जान तुमको मदत के लिए पुकारता दिखाई देता है (चरण 5). और इन सभी का सामना आपको करना होता है बिना किसी शक्ति के करना होता है कियोकि आपकी सभी शक्तिया ब्लॉक हो चुकी होती है (चरण 2) और आपके दिमाग पैर करोड़, घ्रादा और न जाने किसी किसी भावनाये हावी होने लगती है (चरण 3). यदि सीडी सीडी कहु तो आपकी शक्ति छीन कर आपको दरिंदो से बारे जलिरिले जांगले में छोड़ दिया जाता है. और उससे भी बड़ी बात ये की उस जांगले को पार करने के लिए उस जहरीले फल को खाना जरुरी है. और ये बात कोई जनता भी नहीं था अभी तक…
पब ये सब सुन कर सुन्न पद जाता है उसके पुरे शरीर में दर की एक तीव्र लहार बहाने लगती है. आज उसको पता चला था की क्यों उसके गुरुओ ने उसको टेलिपोर्ट हो कर यहाँ आने से मन कर दिया. क्यों वो अभी भी दर रहे थे जब पब ने 5 चरण पुरे होने पैर यहाँ टेलिपोर्ट होने के लिए बोलै था. शायद वो ये जानते होंगे की यहाँ कितना खतना है पैर शायद वो भी ये नहीं जानते होंगे की 5 चरण पार करने का फायदा मिलेगा. यदि कहा जाये तो ये पब की किस्मत hi थी की उसको दिव्यांश जी का साथ मिला नहीं तो न तो वो ड्रैगन्स को हरा पता और न hi दोनों दानव भइओ से जीत पता. यदि दूसरे शवादो में कहे तो पब की जीत निकटि चाहती थी इसलिए hi हुयी थी नहीं तो वो इतना कबूल नहीं था की ये सब कर पता. नियति के खेल में सब मोहरे hi होते है और नियति की चाहत को अपने कर्मो से बदलना hi उन कर्मो का फल होता है जो की हर किसी के बस में नहीं होता.
फिर ये सब शादी की तैयारियों में लग जाते है. वह उस वीराने में कुछ भी तो नहीं था पैर जो जरुरी चीजे थी उनका तो इंतजाम किया hi जा सकता था और वो इंतजाम उन वाष्ण से भरे गाओं से किया था नकसुर और भलासुर ने. इस गाओं के सभी लोग उस तालाब के दूसरी साइड सम्भोग में लगे रहते थे गाओं में तो केवल खाने का इंतजाम करने hi जाते थे. इन सभी का काम था भी केवल सम्भोग और खाना…
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जब तक शादी की तैयारियां हो रही है तब टेक क बार त्रिकाल को भी देख लेते है. त्रिकाल की सड़ना पूरी हो चिकि थी उसका हवन आज सुबह hi पूरा हुआ था. और उसका शिरर 25 साल पहले जैसा हो गया था या कहो की उससे भी ज्यादा मजबूत हो चुक्का था. शरीर एक अलग hi चमक दे रहा था और अब त्रिकाल अपने अंतिम काम की तैयारियां कर रहा था इस काम के होते hi उसको उसकी सभी पुराणी शक्तिया मिलने वाली थी. और ये काम था नंगी लड़कियों की बलि दें अक. लड़कियों का इंतजाम तो संभु पहले hi करके गया था और ये सब त्रिकाल की गुलाम थी. वो सब खुद hi अपनी बलि की तैयारियां कर रही थी. जैसा त्रिकाल उनको कहता वैसा hi ये सब करती जा रही थी. ये तैयारियां भी जल्दी पूरी हो जनि थी. बस त्रिकाल को इन्तजार था तो शयाम के उस खाश पल का जब उसको बलि देनी थी. त्रिकाल ने बाईट हुए कुछ महीनो में अपनी शदना पैर बहुत म्हणत की थी. और उसका फल भी देखे दे रहा था. अब केवल कुछ घंटो की बात थी और वो टाइम होते hi त्रिकाल को फिर से सबसे जयते शक्तिशाली तांत्रिक हो जाना था. और त्रिकाल को पता था की उसकी शक्तियों के उसके पास आते hi वो अपने सपने को भी पूरा कर सकेगा. स्वर्ग का राजा बनने से कोई देवता भी उसको नहीं रोक सकेगा….
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मणि जी जहा पब पैर हर पर नजर रखे हुए थे वही दयासुर जी ने भी अपनी विद्या से गुरु को फिर से ठीक कर दिया था. वो बात अलग थी की इसके लिए उसको अपने कुछ महीनो का tap-bal गुरु को देना पड़ा था एक बार फिर दयासुर जी तप बल से विहीन हो चुके थे. पहले भी उन्होंने पब को अपनी सभी जीवन शक्ति और तप बल दिया था.
पब की सभी पत्नियों को भी अब एक बड़ी रहत मिली थी. युद्ध के दौरान तो इनकी हालत फिर से बिगड़ने लगी थी. पैर जैसे hi दिव्यांश जी ने उन दोनों भाइयो की जीवन शक्ति को पब में ट्रांसफर करना सुरु किया तो इसकी हालत में तेज़ी से सुंदर होने लगा था. अब ये सब भी स्वस्थ थी और अपने डायन में मग्न थी.
जहा इस टाइम सभी नार्मल थे. पब, अवनि और वो तीनो शादी की तैयारियों में थे. त्रिकाल भी खुश था की उसकी साधना आज पूरी हो जाएगी. पब की पत्निया भी स्वस्थ हो कर अपने डायन में थी पैर वही दस माँ के फेस के रंग बदले हुए थे उसके फेस को देख कर ऐसा लग रहा था की उनको कोई बहुत बड़ा झटका लगा हो और वो उस बात पैर विश्वास न कर प् रही हो. फिर भी होंटो पैर फैली मुस्कान बता रही थी की वो इस झटके के बाद भी बहुत खुश है. वो अभी भी पब पैर hi अपनी नज़रे जमाये हुए थी. और पब और अवनि की शादी की तैयारियों को देख रही थी. की एक दम बड़बड़ा ुधि – पब तुम वाकई सच्चे इन्शान हो जिसके प्यार, दया और इन्शानियत ने नियति को भी मजबूर कर दिया की वो अपना फैसला बदल दे. पैर पुत्र सवदान रहना नियति यदि कुछ बड़ा देती है तो कुछ छीन भी लेती है… पता नहीं अब नियति ये कोण सा खेल खेल रही है जिससे मेरे देखे हुए भविष्य में भी बदलाव आ रहा है. ये बदलाव एक सच्चा इन्शान hi कर सकता है और वो तुम हो पब जिसने नियति को बदल दिया है….
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यहाँ शादी की तैयारियां हो चुकी थी. मैदान पैर hi कुछ लकडिया जला कर नकसुर पब और अवनि उसके पास बैठे हुए थे. पब को उस गोअन में एक पुराण पजामा मिल गया था तो उसने अपने वो पत्ते कपडे निकल कर उस पजामा को पहन लिया था तो अवनि को एक पटिपोट और चुनरी मिल गयी थी पुराणी. उसने अपनी फटी T-shirt के उप्पेर hi वो चुनरी ोड ली थी और अपनी फटी जीन्स की जगह ये पटिपोट पहन लिया था. इनका बेग तो भ्रम की दुनिया (चरण 5) में hi कही रहा गया था. अवनि के अपनी शादी को ले कर पता नहीं कितने सपने होंगे. पैर आज जब शादी हो रही थी तो पहने को कपडे भी नहीं थे. मेक उप की एक्सपर्ट अवनि, अपनी शादी में मिटटी, खून और घावों का मेक उप किये बैठी थी. शादी का कोई भी अरमान पूरा नहीं हुआ था फिर भी वो बहुत खुस थी कियोकि वो आज अपने प्यार अपने पब की पत्नी बनने वाली थी. उसकी प्रेम कहानी में न जाने कितने मोड़ आये थे. पैर आज ये प्रेम कहानी पूरी होने जा रही थी. अवनि को पता था की शादी होते hi उसको एक बहुत बड़ी परीक्षा देनी है अपने प्रेम की और वो उसके लिए तैयार भी थी. अवनि की बात गुरु से हो गयी थी जब पब ने उन दानवो से लड़ती हुए अवनि को गोले में सुरक्षित किया था तब अवनि की गुरु से कुछ पालो की बात हुए थी पैर बात करते हुए hi अवनि बेहोश हो गयी थी. पैर अवनि को दयासुर जी की वो बात याद थी की इस युद्ध का अंतिम पड़ाव प्रेम से hi जीता जा सकेगा. अब शादी के बाद पब को वासना की आंधी को झेलना था जिसमे यदि वो बहक गया तो मूट hi मिलनी थी. पैर पब की वासना के अंत के लिए hi अवनि अपने प्रेम नमक हतियार के साथ मैदान में जाने वाली थी. और मणि जी और दयासुर जी का अवनि को यहाँ भेजने का अश्ली मकशद भी ये hi था की अवनि अपने प्रेम से पब की वासना को हारते हुए पब को अंतिम और सबसे जरुरी शक्ति – 5 दानव राजकुमारों की जीवन शक्ति दिलवा सके.
कुछ hi देर में विवहा भी पूरा हो चुक्का था और अभी दोपहर का 1 बज चुक्का था मतलब इनके पास केवल 6 हॉर्स hi बचे थे. तभी नकसुर जी बोले - पुत्र तुम दोनों का विवहा हो चुक्का है अब तुमको सम्भोग क्रिया करनी होगी. और उससे पहले उन वासना के भरे तालाब में जा कर पिता जी के उस बॉक्स को निकल कर लाना होगा..
पब – गुरूजी क्या आप बता सकते है की वो बॉक्स मुझको तालाब की किस दिखा में मिलेगा. और इसमें अब और भी कोई चुनौती है क्या??
नकसुर – पुत्र अब जो चुनौती है वो बहुत खतरनाक है पैर लगता है तुम्हारा खुद पैर अच्छा कण्ट्रोल है. उस तालाब के एरिया में जाते hi तुम दोनों वासना की आग से घिर जाओगे. और उस वासना को संभालना बहुत मुश्किल होगा तुम दोनों के लिए. और सबसे बड़ी बात तुमको तालाब में उतरना है और उस तालाब का पानी वह की हवा में पहेली वासना से भी 10 गुना खतरनाक है. यदि में तुमको मानवो की तरह बहु तो उस पानी की एक बून्द का तुहरे शरीर पैर गिरना भी 100 वियाग्रा टेबलेट से भी ज्यादा खतरनाक है. ये समाज लो यदि किसी आम मानव के सरीर पैर 1 बून्द पानी उसके मरने के लिए बहुत है. और तुमको उस पानी में उतर कर उस बॉक्स को खोजना है.
अवनि – गुरूजी पैर गुरूजी (दयासुर) ने तो कहा था की बॉक्स निकलने जाने से पहले वह जीतनेय भी गोअन के लोग है उनको मार देना. और फिर बॉक्स लेने जाना..
भलासुर – हाँ पुत्री उसने ठीक कहा था कियोकि उन सभी गोअन वालो के मरते hi हवा में पहेली वासना बहुत काम हो जाएगी. पब का सयम तो हम देख चुके है पैर मुझको नहीं लगता की तुम खुद को उस हवा में रोक पाओगी कुछ मं से ज्यादा..
पब – गुरूजी मेरा वासना पैर कण्ट्रोल दानवराज से पायी शक्तियों में से एक है. इसलिए आप दोनों से युद्ध करते हुए मुझको ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुयी. और अपने ठीक कहा अवनि उस वासना को नहीं झेल पायेगी. तो मैं सोच रहा हु की इसको यहाँ छोड़ कर ाकेगा hi उस तालाब में जा कर वो बॉक्स निकल लौ.
नकसुर – नहीं बिलकुल भी नहीं तुम दोनों की शादी का उद्देश्य hi ये है की तुम जब वासना से बहक जाओ तुमको अवनि संभाले. और तुम अपनी साडी वासना इसके प्रेम से ख़तम कर दो. अवनि की एक अग्नि परीक्षा होगी. कियोकि तुमको तालाब में उतरना है और अवनि को केवल बहार हवा में बैठना है इसलिए तुम पहले उन गोअन वालो को मार कर फिर तालाब में उतरना तो अवनि को खुद पैर काबू रखने में ज्यादा परेशनी नहीं होगी.
पब (कुछ संकोच के साथ) – गुरूजी क्या उन गोअन वालो को मरना जरुरी है कुछ ऐसा नहीं हो सकता की उनकी जान बचाई जा सके. वो सब भी तो त्रिकाल के जाल में फंसे बोले भले लोग है. किसी नितदोष की हत्या करना क्या ठीक होगा??
भलासुर – तुम्हारी सोच अच्छी है पुत्र पैर मरे हुए को मुक्ति देना पाप नहीं पुण्य होता है. ये जो गाओं वाले तुमको दिख है है न ये सब पिछले 26-27 साल से लगातार सम्भोग कर रहे है वो तो त्रिकाल के मायाजाल से न तो इनकी उम्र बढ़ती है और न hi ये मरते है. जिस दिन ये माया जाल टूटेगा तो तुमको इनकी सदी हुयी लाशे hi देखे देगी.
पब को भलासुर की बात ठीक लगी पैर कुछ सोच उसके मन में अभी भी थी – पैर गुरूजी मेरे समाज में ये नहीं आया की त्रिकाल ने इन सभी को यहाँ ये सम्भोग करने के लिए क्यों रखा है?? इससे उसको क्या फायदा हुआ??
भलासुर – बीटा जो भी दिव्या दृष्टि से यहाँ देखता है उनको पहला झटका वासना का तुरंत लग जाता है. जो इसके कारन hi है. और फिर तुम्हारे पास वरदान था नहीं तो हमसे युद्ध करने की जगह तुम वासना की इन हवाओ की चपेट में आ कर उन गोअन वालो में hi शामिल हो जाते. या फिर हमसे युद्ध करने में तुम धयान hi नहीं दे पता.
पब – हम्म ये तो है. पैर गुरूजी आप दोनों को ये हवाएं क्यों कोई अक्षर नहीं की?? क्या आपके पास भी वरदान है?? मेरे पास वरदान होने के बाद भी कुछ hi देर में अक्षर तो हुआ था चाहे को बहुत काम था. पैर आप दोनों तो 26-27 साल से hi यहाँ हो तो आप दोनों पैर इसका अक्षर क्यों नहीं हुआ??
नकसुर – वो इसलिए कियोकि त्रिकाल ने हमको एक शील्ड से सेफ कर दिया था. तुमसे युद्ध हारते hi टूट गयी. वो तो अच्छा हुआ की तुम हम दोनों को बेहोशी में hi यहाँ ले आये नहीं तो हम दोनों तो कुछ hi देर में पागल हो जाते हम 4 भाइयो का वासना पैर बिलकुल भी कण्ट्रोल नहीं है. इसलिए हम सब इससे दूर hi रहते है. और शायद ये हमारे माता पिता के कारन hi है. पैर दयासुर का अपने पैर पूरा कण्ट्रोल है. हम चारो ने वासना से दूर रहने के लिए hi शादी नहीं की थी. और जीवन बार केवल अपने फर्ज को hi निख़ते रहे..
पब – आप तो उल्टा बोल गए गुरूजी .. आप 4रो भाइयो का अपने आप पैर बहुत कण्ट्रोल है तभी तो ब्रह्मचर्य जीवन जेते हुए भी अपने कर्म पथ से नहीं हेट…
नकसुर – हाहाहाहाहा.. अच्छा चलो अब तुम जाओ और विजयी हो कर लोटो.. हम तीनो तुम्हारा यहाँ मैदान में hi इन्तजार करते मिलेंगे…
दिव्यांश – नहीं मैं भी इनके साथ hi जाउगा. जब तक मेरा बीटा आज़ाद नहीं हो जाता तब तक मैं इनका साथ नहीं छोड़ सकता.
पब – नहीं देव अब आप हरमे साथ आ कर क्या करेंगे?? अब उन गोअन वालो को मरना इतना भी कदिन नहीं की आपकी मदत की जरुरत पड़े. और फिर आप उन तालाब में उतर नहीं सकते कियोकि अब इतना कण्ट्रोल नहीं कर पाएंगे. और न hi आपके साथ कोई है. बॉक्स निकलना जब मुझको है तो फिर आपका क्या काम??
दिव्यांश – फिर भी यदि कोई और संकट आ गया तो मैं होगा तुम्हारी साक्षा के लिए..
नकसुर – दादाजी ये ठीक कहा रहा है. और हो सकता है की इनको अपने आप पैर कण्ट्रोल करने के लिए बिच में hi सम्भोग करना पड़े तो आपके सामने ये करना भी तो इनको ठीक नहीं लगेगा न..
पब – हाँ देव अब आप यहाँ रुकिए हम दोनों जल्दी hi काम ख़तम करके आपके पास आते है…
दिव्यांश को न चाहते हुए भी उनकी बात माननी पड़ी. फिर अवनि और पब उन तीनो से आशीर्वाद ले कर तालाब की और चल दिए.