Pyaar Nafrat or Kismat - Page 5 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 38

बचपन की यादें

वहीँ कनु और मनु अपनी अपनी ज़िन्दगी इतने बिजी थे की दोनों एक दूसरे से किये हुए अपने बचपन के वेड और बचपन की दोस्ती को भूल चुके थे. या यूँ समझो दोनों एक तरह से एक दूसरे से पूरी तरह अंजान हो गए थे. अब दोनों के शहर भी बदल गए थे दिल्ली और राजनगर अब मिलना बिछड़ना तोह किस्मत के हाथ में hota.or किस्मत का खेल किसी को कोई पता nahi.manu अपनी ज़िन्दगी में आनेवाले तूफ़ान से बेखबर tha.tufaan जो उसकी सोच से ज्यादा तेज़ी से उसके पास आ रहा था

टाइम अपने हिसाब से चलता जा रहा था मनु का चिंटू के साथ स्कूल उसके बाद पुष्पी के साथ पड़े और उसके बाद बाबा के पास बिज़नेस की ट्रेनिंग…

उस घटना के बाद मनु को चिंटू की सोच काफी हद तक समझ आ चुकी thi..per उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया जिसकी वजह थी पुष्पी दीदी का प्यार उसने सोचा की अगर चिंटू को कुछ कहा जायेगा तोह पुष्पी दीदी जो उसकी सगी बहिन है श्याद उनको अच् आना लगे ..

यह सोचना उसकी ज़िन्दगी में ाचा सबक देने वाला था..

वहीँ एक तरफ जय चाँद और कमलेश राजिंदर से बड़का हुआ था जिसके लिए म्हणत करके खाना बड़ी टेडी खीर थी.

जिसमे काफी हद तक राजिंदर जिम्मदार था .. जी हाँ राजिंदर क्युकी राजिंदर ने उसे बड़े लाड प्यार से पला था ,उसे कभी छोटा भाई मानकर काम करने नहीं दिया ,जो जैचंद मांगता उसके सामने राजिंदर पेश के deta,yeh सोचकर की छोटा है ,बिना माँ का hai..jahaan राजिंदर उसके लिए म्हणत करके जिम्मेदार बनता चला गया वहीँ जैचंद म्हणत से दूर होकर अलसी निकम्मा और नालायक बन गया tha..jahan राजिंदर उसके लिए जय चाँद की ख़ुशी पूरा करना अचे भाई का धरम था वहीँ निक्मे और दुरथ जैचंद के लिए राजिंदर का प्यार एक परमानेंट ड्यूटी था, उसके लिए राजिंदर एक ऐसा एटीएम था जिसको जब चाहे भाई बोलके जैचंद चुना लगा देता tha..jiska सिद्ध असर राजिंदर और सुमित्रा की फॅमिली पैर पड़ता था..

खैर साल पूरा होने को आया था हर स्कूल की तरह यहाँ भी एग्जाम की अनाउंसमेंट हो चुकी थी.

जिसके बाद हर रोज़ कहनेवाले भी अब पड़ने में लगे थे ,,मनु को कोई टेंशन नहीं थी इसकी क्युकी उसकी टूशन टीचर पुष्पी जीतनेय प्यार से मनु को खिलाती थी उतने hi सख्ती से मनु को पड़ती thi..padai में उसे उसके आगे कोई बहाने नहीं चलता tha.shuru में मन ऊके हाल पुष्पी से पड़ने में बड़े बुरे हुए पैर बाद में धीरे धीरे हु भी राफ्तेर के साथ कोर्स कम्पलीट कर चूका था, सो उसे एग्जाम की ज्यादा चिंता नहीं थी..

खैर जब एग्जाम की डेट आनेवाली थी तोह स्कूल के सब दोस्तों ने मनु से पूछा उसकी पड़े का क्या

हाल है. मनु ने पुष्पी की बात याद की और बोल दिया यार बुरा हाल है …”पता नहीं इस बार क्या होगा”

उसकी इस बात से बाकी के दोस्तों को जहाँ लगा यार सबका एक जैसा हाल है वहीँ कोई एक था जिसके चेरे पैर शैतानी मुस्कराहट तेर gayi.jisko मनु ने बखूबी देख लिया और मैं hi मैं में कुछ सोचकर वहाँ से चला गया ..

वापसी में चिंटू उसके साथ tha.manu ने चिंटू से पूछा “यार तेरी तयारी कैसी hai.exam में अचे नंबर लेन हैं तुझे”

चिंटू “अबे पढ़कर कोनसा मुझे कोई मॉडल मिलने वाला hai.abhi तोह छोटी क्लास है 10तह या 12तह होती तोह सोचता भी पासिंग मार्क आजाये तोह भी काफी हैं मेरे लिए तू अपना सोच और बता कैसा चल रहा है “

Manu”kya चलेगा यार तुझे तोह पता है ,स्कूल उसके बाद अजय की पड़े उसके बाद बाबा के पास चला जाता हूँ कुछ खास नहीं है ,और इस बार टेंशन हैं पता नहीं पास हो भी पाउँगा या nahi,per अगर मैं फ़ैल होगया तोह और तू पास हुआ तोह भी सुच कहता हूँ चिंटू मुझे तेरे लिए बहुत ख़ुशी होगी”

चिंटू ने सोचा लगता है सचमे मनु की बुरी हालत है ,,मैं में बड़ा खुश हुआ पैर उपपरके मैं से बोलै “यार तू कैसी बात करता hai,,tu टेंशन न ले पड़ना शुरू करदे पास हो जायेगा और अगर तू फ़ैल भी हुआ तोह भी मेरा प्यार मतलब यारी ख़तम थोड़ी न hogi,,tut ओह भाई ह अपना “

मनु ने आगे कुछ नहीं kaha.dono अपने अपने घर पुँहचे और दिन बीतने लगे .

एग्जाम की डेट पास आयी तोह बाबा ने कहा पड़े पैर ध्यान दो ..

सो मनु अब सिर्फ अपनी रेविसिओं करता और अजय की पड़े करवाता पुष्पी के अजय को पड़ने से अजय भी काफी हद तक लाइन पैर था, उधर पुष्पी भी अपने एग्जाम की तयारी में लगी थी..

चिंटू हो या बाकी सब अपने तयारी में लगे the.time हुआ और एग्जाम चलने लगे मनु और चिंटू की क्लास में अल्फबेटिक के हिसाब से रोल नंबर पड़ता था. सो दोनों के रोल नंबर दूर पड़ते थे एग्जाम पैर दोनों एक hi रूम में थे एग्जाम के बिच में मनु बिच में कभी चिंटू को देखता तोह चिंटू अपना आंसर लिख रहा होता …

जब एग्जाम ओवर हुआ तोह सब लोग क्वेश्चन पेपर के आंसर डिसकस करने लगे जो अधिकतर की आदत होती है मनु को यह सब अजीब लगता tha,kyuki उसका मन्ना था की आपके आंसर डिसकस करने से आंसर जो अपने लिखा है उसपर से भी आपका कॉन्फिडेंस चला जेगा और वैसे भी एग्जाम में जो लिख दिया सो लिख दिया उसके बाद में टेंशन लेने से दिमाग परेशान hi hoga,yeh सब पुष्पी दीदी की सिख थी की पड़ना है तोह एग्जाम से पहले पदों बाद में आंसर को डिसकस करना फ़िज़ूल है.

सो मनु चुप hi रहा बाकि सब ने उससे पूछा कैसा गया एग्जाम मनु का जवाब सिंपल tha”bhai जो दिया सो दिया न ज्यादा ाचा था न ज्यादा बुरा”

उसके बाद सबने चिंटू से पूछा उसने बड़े स्टाइल से कहा “भाई तुम्हारे भाई ने 100% पेपर किया है ..”

जिसको सुनकर सब लोग सोच में पड़गए ..की चिंटू शायद इस बार फर्स्ट आये ..क्युकी चिंटू उनके लिए तोह नया था सो जो चिंटू ने कहा सबने मान लिया जिसमे कुछ अपने न पड़ने को कोस रहे थे कुछ अपने घरवालों की टूशन बेकार था हमरे घरवालों ने गलत जगह पैसा दिया.

खैर मनु और चिंटू अपने घर ए वहीँ रूटीन रोज़ का फॉलो किया दिन ख़तम …

ऐसे hi एग्जाम ओवर हुए बाकि सब का वही आंसर मिलाना और मनु का शामे जवाब और चिंटू का अपने स्टाइल में वही राटा हुआ डायलॉग “भाई तुम्हारे भाई ने 100% पेपर किया है ..” .

एग्जाम ओवर हुए उधर जय चाँद भी राजिंदर से मिलने आया और उसने राजिंदर को एक जगह ाचा माकन बताया . सुमित्रा तोह जैचंद को देखना भी पसंद नहीं करती थी पैर उसे दोनों भाइयों के बिच में कुछ बोलना अच् आना laga.so हु चुप hi रही ..

उसने राजिंदर से साफ़ कहा सोच समझ कर जगह देखना और बचूं के भविष्य को देखकर जगह लेना.

राजिंदर ने हामी भरी और जगह देखि उसे जगह पसंद आयी उसके बाद उसने सुमित्रा को जगह दिखयी तोह सुमित्रा ने भी जगह को ठीक कहा .पैर कहीं न कहीं सुमित्रा का मैं जय चाँद की बातें मानने को नहीं मैं रहा था सो उसने मनु को सब बताया ..मनु ने सब सोचा और सुमित्रा से कहा “मम्मी सिंपल hai..main और आप पापा को मानते हैं की जगह आपके नाम पैर ली जाये ,उससे कल को आपको यह टेंशन नहीं होगी की जगह पैर चाचा पापा को मनाकर अपने नाम कर सके..”

इस बात पैर सुमित्रा भी त्यार होगयी ,,दोनों माँ बेटे ने राजिंदर को इस बात के लिए मनाया की जगह पैर राजिंदर की जगह सुमित्रा के नाम हो …

राजिंदर को क्या दिक्कत होती उसने कहा ठीक है ,,,चाहे मेरे नाम हो या सुमित्रा के नाम रहेगा तोह हमारा hi न …

पैर सुमित्रा ने मनु के कहे मुताबिक राजिंदर को इस बात के लिए राज़ी किया की जब तक सब कुछ नहीं हो जाता यह बात किसी को पैट आना चले …

इसपर मनु ने राजिंदर को अपनी कसम दे di.rajinder इस पैर भी मान गया..

जब जगह की रजिस्ट्रेशन की बात आयी तोह सब थे वहां जय चाँद ने राजिंदर से कहा “भाई देखलो सब ठीक है न ,,”

राजिंदर ने आगे की कारवाही की और पैसे के लेनदेन के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए कोर्ट चल दिए जहाँ राजिंदर ने कहा यह जगह सुमित्रा के नाम होगी ,,,,

इस बात से जय चाँद पैर तोह जैसे बिजली गिर पड़ी .पैर हु उप्पेर से कुछ बोलै नहीं जिसकी सब हरकतोओं को मनु और उसकी माँ ने अचे से नोट किया था…

खैर जगह सुमित्रा के नाम हुई जिसके बाद जैचंद ने राजिंदर को बधाई दी और अपने घर चला गया..

उधर राजिंदर और उसकी फॅमिली भी अपने घर आगयी …

राजिंदर थकन के मारे नहाने चला गया ..जीके जाते hi दोनों माँ बीटा खूब जोज़ से हास्पदे .

सुमित्रा “तूने मेरे नाम जगह करने को क्यूक कहा मेरी अब समझ आया …जब तेरे चाचा की रोनी सूरत देखि तोह सब समझ आया उसे की अब चिडया उड़ gyi…hihihihihihihihihiiiiiii”

Manu”mujhe पहले hi लगा था की चाचा जो बिना किसी मतलब के हमसे बात तक नहीं करता हु पापा पैर मेहरबान कैसे hogya,,jab सोचा की अगर पापा के नाम जगह हुई तोह पापा को प्यार से माखन लगा कर हु बाद में जगह हड़प लेगा ,,उसकी यह बात दिमाग में आते hi मैं आपके नाम जगह करवाने को कहा tha.or साथ में इसलिए की उसे अगर पहले hi पता छलग्या toh..ho सकता है हु यह सब सुनकर कोई चाल चले इसलिए पहले से उसे यह बात पता नहीं चलने दी की जगह आपके नाम hogi..nahi तोह चाचा कोई न कोई जुगाड़ लगा लेता..

सुमित्रा “चलो ाचा है तूने इतना सब सोच रखा tha.varna मैं तोह जगह को hi मन कर देती …वैसे तेरे दिमाग की डाटा देनी होगी जो इतना सब सोच लिया तूने…”

Manu”mummy यह सब बाबा के साथ रहने असर है उन्होंने बिज़नेस के बारे में कहा था की अगर आपके कम्पटीशन में शामे माल ह तोह उसके माल से पहले hi अपना माल किसी सीक्रेट ऑफर के साथ दे दो या उसके ऑफर के बारे में पता रखो ताकि आप उससे ाचा कोई और ऑफर दे सको ..मैं उसी चीज़ को यहाँ अप्लाई किया की चाचा को आखिर तक पता न चलने दूँ की मालिक कोण hai..simple”

इस पैर सुमित्रा ने मनु को अपनी तरफ कीच कर अपने गले से लगा कर kaha”dekhle मैंने कहा था न बाबा ने कुछ सोच कर hi तुझे अपने पास सिखने को कहा hai,,yahan कुछ ाचा हुआ न बाबा के पास जाने से ,मैं चाहती हूँ इसी तरह तू अपने सामनेवाले से दो कदम आगे रहे “

मनु “मम्मी बहुत भूक लगी है “

सुमित्रा “आज सब तेरी पसंद का होगा मेरे प्यारे बचे ..”

उधर जय चाँद घर आया तोह कमलेश ने पूछा क्या हुआ ..

जय चाँद ने जब सब बताया तोह कमलेश “तू चुटिया था ,तू चुटिया है , और चुटिया hi मरेगा साले …”

जय चाँद उसके लिए बीवी से गाली सुन्ना नयी बात नहीं thi.chup रहा ..

कमलेश “गांडू साले तुझे इतना ाचा माकन मेरे बाप ने बताया था ,,ताकि उसे अपने भाई से खरीद व ले और बाद में कोई भी बहाना बनाकर उसे मेरे नाम करवा देता हमारे बचूं का भी दिन सुधर जाता ,,,बहनचोद कैसा गांडू मादरचोद आदमी मिला है मुझे जो साला चुटिया hi है,,,

साले माकन मेरे बाप ने ढूंढा सिर्फ तुझे तेरे भाई के नाम माकन करवाना tha…tujhse इतना भी नहीं हुआ गंडमारे …

अगर तू इतना कर देता तोह बाद में मैं खुद hi तेरे चुटिया भाई को रो -धो कर उस माकन के कागज़ अपने नाम करवा leti..per मादरचोद तेरी वजह से मेरे और मेरे बाप के सारे सपने मिटटी में मिल गए…”

कमलेश “साले इसकी सजा तुझे मिलेगी आज से तू मेरे साथ नहीं सोयेगा ….मेरा पति जरूर है तू पैर अब छूट चुने नहीं दूंगी तुझे..”

यह कमलेश को अचे से पता था की जैचंद छूट का बहुत है यानि छूट का गुलाम है …

ऐसा नहीं था की जैचंद के लिए दुनिआ में सिर्फ कमलेश की hi एक लौटी छूट ho…per कमलेश जय चाँद की बिस्तर पैर हर ख्वाहिश पूरी करती थी ,,,चाहे लैंड को चूसना हो , अलग पोज़ में छूट की chudai,ya बिना तेल के गांड मरवाना …कमलेश ने अचे से जय चाँद को सब दिया था और बदले में उसकी भी अचे से सब नस दबा देती thi…matlab जैचंद देखने में भले hi पहलवान सा था पैर जब कमलेश बिगड़ जाती थी तोह

जय चाँद उसके आगे भीगी बिल्ली सामान होता था…

खैर कमलेश की बात का सिद्ध असर जय चाँद पैर हुआ “बोलै देख गलती मेरी नहीं है ,तू खुद सोच की जब इतना सब किया तोह किसको पता था की जगह भाभी के नाम हो जाएगी ,दिमाग से सोच तू मेरी बीवी है मेरा परिवार hai..tumhare लिए खुद के भाई को फसने में लगा हुआ हूँ फिर भी तू मुझे उल्टा बोल रही है ,,,खुद सोचकर देख अगर मुझे पहले से पता होता तोह क्या किसी वकील को सेट करके यह जगह मैं तेरे नाम नहीं करवाता …मुझे तोह कोर्ट में अचानक से पता चला की जगह राजिंदर के नाम नहीं होगी ,,बिच कोर्ट में क्या कर सकता tha..kya मैंने कभी तेरा कहा नहीं मन हो तोह बता????’”

इस बात पैर कमलेश चुप हुई और सोचने लगी “बात तोह जय चाँद की सही hai.plan जो था उसके हिसाब से सब सही था उसमे चूक की गुंजाईश नहीं बनती ,पैर अचानक से सुमित्रा का नाम बिच में आना इत्तेफाक नहीं हो सकता क्युकी राजिंदर सिद्ध है …और सुमित्रा को जगह पसंद आ भी जाती तोह भी अगर उसे जरा सब hi शक्क होता तोह हु जगह लेने hi नहीं देती …सो इस तरह से सोचना उस घर में किसी के लिए पॉसिबल नहीं hai,,per जो हुआ है हु भी साफ़ साफ़ खुद बता रहा है की अचानक से यह सब हुआ इसका मतलब उस घर में किसी को पहले से hi यह सब पता tha,,or उसकी प्लानिंग भी साफ़ साफ़ बता रही है की उसका दिमाग आगे पीछे सोचने वाला hai.or जिस तरह से सब हमारे हाथ ताका एते हुए चला गया उसके हिसाब से कोई पहुंचा हुआ खिलाडी hai,jisne सब सोचकर समझकर सही मौके पैर सही चाल चलकर ,,साबित कर दिया की राजिंदर और सुमित्रा उसके लिए कितने मायने रखते hain..or अगर इनको आगे कुछ करने का सोचा तोह हु छोडेगा नहीं ..””

यह सब सोचते हुए कमलेश सोचने लगी कोण हो सकता है who,kyuki हु अचे से राजिंदर और सुमित्रा को जानती thi..or मनु से उसका मिलना कभी हुआ नहीं था ,,जैचंद ने राजिंदर के बचूं की आगे कमलेश को बताई हुई थी जिसकी वजह से कमलेश का मन्ना था की बचूं को खेलने से फुर्सत नहीं होती हु क्या खख इतना दिमाग लगा पाएंगे.. सो उसके लिए यहां कोई दिमाग वाला था जो उसके और उसके बाप की दुइबुद्धि को टक्कर देता था..

यह सब होने के बाद जय चाँद से उसने कुछ नहीं कहा ..और आगे के लिए सोचने लग गयी..

वहीँ दूसरी तरफ रजिनि के आजकल बुरे हाल थे अनिल आजकल खूब चुदाई करता था पैर जब भी उसके प्रेग्नेंट होने का नंबर आता तोह हु गाओं जाकर चेक करवाती की बीटा है या नहीं ..उसकी फूटी किस्मत उसे बीटा नहीं होने देती thi..koi दो बार हु एबॉर्शन करवा चुकी thi..so अब अनिल से ज्यादा उम्मीद नहीं लगाती thi…or यहां वहाँ घूमकर अपना टाइम पास किया करती थी…

कभी किसी कैग हर बैठना तोह कभी किसी कैग हर बैठना …ऐसे hi जब अपनी मुँहबोली ननद यानि सुमित्रा कैग हर आना जाना होता तोह हु मनु को देखकर यही सोचती काश मेरा भी ऐसा बीटा hota,,kyuki मनु पड़ता भी था और क्लैम नेचर का हसने बोलने वाला इंसान था जो पल भर में किसीको भी अपना बना लेता tha..rajini जब भी मनु से मिलती तोह बदले में मनु उसे इज़्ज़त से पेश आता था …जहाँ उसकी बेट्यून को सही से बात करना नहीं आता था ,वहीँ मनु का किसीके साथ भी मुस्कुराकर बात करना कुछ अलग tha..ya यूँ कहिये मनु का चार्म कुछ अलग tha..uski आगे के बचूं से ..रजिनि से मनु एक निचित दुरी बनाकर बात करता tha..kyuki सुमित्रा का रजिनि और अनिल को पीटने वाला इंसिडेंट उसे याद tha,,kyuki उस टाइम मनु स्कूल में था और जब घर आया तोह अजय ने सब बता दिया tha,,,tab से मनु रजिनि और उसकी फॅमिली से दुरी बनाकर रखता था.

खैर ऐसे hi टाइम बिता और स्कूल का रिजल्ट आज्ञा …जिसमे अधिकतर दोस्त पास हो गए थे क्युकी प्राइवेट स्कूल था सो जो पास नहीं भी होता था तोह स्कूल वाले उस बचे को प्रमोटेड पास कर देते थे क्युकी इतनी अछि फीस लेते थे तोह पास करना भी बनता था…

इस साल मनु पहली बार फर्स्ट आया tha..jo खुद मनु के liye.chunkane वाली बात thi…kyuki मनु पहले भी ाचा स्टूडेंट tha.jo पास हो जाया करता tha..padai में भी ठीक थक था पैर रैंक और हु भी फर्स्ट खुद मनु के लिए भी नया था..

मनु के सब दोस्त पास होगये थे हमारे चिंटू को छोड़कर उसकी दो सब्जेक्ट में कम्पार्टमेंट आयी थी..

चिंटू बड़ा टेंशन में tha,kyuki जैसा उसने सोचा था वैसे रिजल्ट नहीं ए थे उसके ,,क्युकी चिंटू भैया खेलने और में मनु के खिलाफ दुसरऊँ को भड़काने में अपना टाइम लगा देते the,,so पड़े करते कब और जो करते उसमे पास होना hi सभव हो सके ऐसी किस्मत और ऐसा एग्जाम चिंटू भइया जी ने दिया नहीं था..

मनु को जब चिंटू का पता चला तोह उसने सबसे पहले चिंटू से बात की “यार तू टेंशन न ले पास हो जायेगा और मैं तेरे साथ हंट ु फ़िक्र न कर तू मेरा बेस्ट फ्रेंड है मैं खुद तेरी तयारी करवाऊंगा …”

मनु ने अपने फर्स्ट आने का चिंटू को नहीं बताया क्युकी उसके लिए इस समय चिंटू की परेशानी उसकी ख़ुशी से ज्यादा बड़ी थी..

चिंटू ने स्कूल जाना काम कर दिया tha…kyuki रिजल्ट के दो दिन बाद hi उसके कम्पार्टमेंट के एग्जाम the..pushpi को जब मनु का फर्स्ट आने का पता चला तोह हु भी खुश हुई और जब चितु का रिजल्ट का पता चला तोह उसने कुछ रियेक्ट नहीं किया क्युकी उसे श्याद पहले से hi पता था ,,और वैसे भी उसे चिंटू के फ़ैल होने से ज्यादा मनु का फर्स्ट आने की ख़ुशी हुई थी…

उधर मनु ने भी दो दिन लग कर चिंटू को अचे से पद्य और उसकी पड़े में काफी हेल्प की ,,जिसे देखकर द्याल वर्मा और चिंटू की माँ दोनों को काफी ाचा लगा की मनु उनके बेटे की जाफी चिंता करता है ..सो उन्हें भी ाचा लगा की उनके नालायक बेटे का मनु अचे से धयान रखता है…

दो दिन बाद मनु और चिंटू की म्हणत रंग लायी और चिंटू भी पास होकर नेक्स्ट क्लास में चला गया …

जहां जाकर उसे जब यह पता लगा की मनु क्लास में फर्स्ट आया hai..so उसके दिल दिमाग में बहुत धमाके हुए …चिंटू को खुद के पास होने से ज्यादा गुस्सा इस बात पैर आया की मनु फर्स्ट आया hai..usne कुछ सोचा और उसके चेहरे पैर एक शैतानी स्माइल आगयी…

मनु इन सबसे बेखबर अपनी डेली लाइफ में लगा हुआ tha..is बात से बेखबर की आने वाले समय में दो सरप्राइज उसकी लाइफ में आने वाले हैं.

और हु दोनों सरप्राइज क्या हैं और क्या करने वाले हैं ..यह तोह वक़्त hi बता सकता है …:हिंट:
 
अपडेट 39

बचपन की यादें

मनु इन सबसे बेखबर अपनी डेली लाइफ में लगा हुआ tha..is बात से बेखबर की आने वाले समय में दो सरप्राइज उसकी लाइफ में आने वाले हैं.

और हु दोनों सरप्राइज क्या हैं और क्या करने वाले हैं ..यह तोह वक़्त hi बता सकता है …

मनु इन सब से बेखबर अपनी लाइफ में बस्सी था जहां उसे इस बात की ख़ुशी थी की चिंटू भी उसी के साथ अगली क्लास में मूव कर गया था. वहीँ उसे अचे से पता था की चिंटू कहीं न कहीं मनु से थोड़ा छिड़ने लगा था, जहां मनु ने सोचा था की चिंटू की कम्पार्टमेंट की पड़े में हेल्प करना कहीं न कहीं चिंटू को उसके लिए सॉफ्ट कार्नर या दोस्त की अहमियत समझा सकेगी ,और उसे कहीं न कहीं यह भी समझ आजायेगा की मनु उसका दोस्त है,

पैर हुआ उसका ठीक उल्टा चिंटू को मनु का उसकी पड़े में हेल्प करने से उसे लगा की मनु अपने आपको उससे ज्यादा ाचा साबित करना चाहता है . और साथ hi मनु के चिंटू कैग हर पैर पड़ने से उसके खुद के maa-baap उसे रात -दिन कहीं न कहीं मनु के साथ पड़ने को कहते तोह उसे और बुरा लगता क्युकी उसे लगता की उसके maa-baap उसकी जगह मनु को ज्यादा चाहते हैं,

जबकि ऐसा थान यही कोनसे maa-baap यह चाहेंगे की उनके खुद के बचे का साल ख़राब हो ..सो दयाल और उसकी बीवी चिंटू को समझने की बजाये दांत देते थे ,,क्युकी चिंटू समझने वालों में से थान यही क्युकी उसके पहले उसका बड़ा भाई बस जैसे तैसे पास हुआ करता तहत ओह दोनों maa-baap चिंटू को उसके जैसा नहीं बनने देना चाहते थे , या आप यूँ संजय की चिंटू का मनु से दोस्ती उसके बाकि का परिवार (दोनों बेटों को छोड़कर, क्युकी एक की शादी हो गयी thi,or पुश्पीर दिलसे मनु को भाई मानती थी )सिर्फ मनु से अपने लांच से जुड़ा हुआ था.

खैर जबसे चिंटू को पता चला की मनु इस बार फर्स्ट आया है तोह उसका गुस्से के मारे बुरा हाल tha,kyuki अब मनु की स्कूल में और ज्यादा अछि इमेज बन गयी थी ,सो चिंटू को लगभग सब सिर्फ मनु के दोस्त की तरह ट्रीट करते थे …

क्युकी सब उसकी एग्जाम में बड़ी बातें सुन चुके थे और रिजल्ट को देखकर समझ भी चुके थे सो चिंटू से लगभग सब hi एक लिमिट से बात करते थे …जिससे चिंटू को अब मनु से और ज्यादा hi नफरत हो चुकी थी.

हु रात दिन प्लान करता था कैसे मनु को निचा दिखया जाये…

(हाँ जनता हूँ आपसब कहेंगे की यार चिंटू इतना म्हणत मनु को निचा दिखने में करता है उससे ाचा अपनी पड़े और अछि इमेज बनाना में करे तोह कुछ ाचा हो चिंटू के लिए भी …पैर चिंटू ऐसा तब करता जब उसका दिमाग सही होता नफरत इंसान को कभी कभी इतना अँधा कर देती hai.ki उसे अपने खुद बारे में सोचना या अपना ाचा या बुरा समझना नज़र hi नहीं आता क्युकी उसके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ नफरत उसे दूसरों के खिलाफ उकसाती रहती है..)

चिंटू सिर्फ और सिर्फ अचे मौके की तलाश में tha.ki कहीं से कोई मौका मिले जिसे हु मनु के खिलाफ

इस्तेमाल करके उसे निचा दिखा कर अपने दिल की नफरत को सुकून दे सके. और चिंटू अपनी तयारी में लगा गया.

इस बिच में सुमित्रा को शालिनी का एक गिफ्ट मिला जो उसने बेह्जा था, सुमित्रा ने डेट देखा तोह उसमे शालिनी से बात होने से पहले की डेट लिखी थी ..और एक गिफ्ट बॉक्स था..

सुमित्रा ने जब गिफ्ट बॉक्स खोला तोह उसमे एक लत्तेर भी tha..jo सुमित्रा के नाम था और जिसमे कुछ लिखा हुआ था..

मेरी प्यारी दोस्त और मेरी होनेवाली फ्यूचर सम्बन्धी सुमित्रा,


सुमित्रा तू सोच रही होगी की ऐसी क्या वजह पड़ी जिसकी वजह से मैंने यह गिफ्ट भेजा है और इस गिफ्ट में क्या hai..'toh मेरी प्यारी बहिन तुझे याद होगा की मनु और कनु के बचपन में हम दोनों ने एक खाश वडा किया था, की आगे जाकर मनु मेरा beta(damad) और कनु तुम्हारी beti(bahu ) होगी …

अब पता नहीं आगे क्या होगा पता नहीं हमरा सपना पूरा होगा भी या नहीं ,,,यह सब आगे
किस्मत के हाथ में hai..per आगे जो भी हो ??तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हमेशा रहोगी इसमें तेरे लिए मैंने सिर्फ एक सपना भेजा है जो हम दोनों ने मिलकर देखा था…

इस में एक बॉक्स है जिसमे मैंने अपने लादले मन ऊके लिए एक चैन विथ लॉकेट बेहजी है ….जिसमे एक तरफ मनु के नाम का म है और दूसरी साइड कनु के नाम का क hai..or मैंने यह दो चैन लिए थे ताकि एक मन ऊके पास रहे और एक कनु के पास. मैंने पूजा करवाकर कनु को पहना दिया है और पूजा करवा कर hi तुम्हे भेजा है ताकि मेरे लादले को यह हम दोनों का सपना और आनेवाले कल में उसकी रक्षा कर सके …बस अछि कामना और उज्जवल भवइया के लिए मेरे लादले को पहना देना …तुम्हारी प्यारी सहली शालिनी..


सुमित्रा ने अब लॉकेट का बॉक्स खोला तोह देखा की सोने की चैन में एक छोटा सा लॉकेट था जिसपर कैपिटल लेटर में म बना हुआ था लॉकेट के पीछे कुछ नहीं tha..sumitra ने ध्यान से देखा तोह पाया की लॉकेट हार्ट शेप में है और बहुत ध्यान लगाने पैर पता चलता है की लॉकेट खुलता भी है ..जब सुमित्रा ने उसे खोलकर देखा तोह उसमे बहार का हिस्सा जहां म लिखा हुआ था ठीक उसके अपोजिट में कैपिटल में क लिखा था जो श्याद hi किस को पता चले .

सुमित्रा ने जब यह देखा तोह अंडर से उसे शालिनी की समझदारी और उसकी बूढी पैर बड़ी ख़ुशी हुई की कैसे उसने बड़ी चालाकी के साथ दोनों मनु और कनु का नाम एक दूसरे के साथ जोड़ दिया …जहाँ दोनों hi माये लगभग आपस की बात चित लागबहग भूल hi चुकी थी वहाँ ऐसा कुछ होगा सोचना सुमित्रा के लिए बड़ा अलग था..

खैर सुमित्रा बाईट दिनों को याद करने लगी और उसने हु लॉकेट विथ चैन को संभलकर रख लिया और जब मनु आया तोह उसे उपपरवाले का नाम लेकर पहना दिया मनु ने जब देखा की मम्मी ने उसे चैन और लॉकेट दिया है तोह बड़ा खुश हुआ उसने देखा उसपर उसका नाम का पहला वर्ड म था पीछे देखा तोह कुछ नहीं था क्युकी हु लॉकेट लगता hi कुछ ऐसा था की जिसे पता नहीं हो की हु बिच में से ओपन होता है कहना मुश्किल था की श्याद कुछ अंदर हो…

टाइम अपनी रफ़्तार से बाद रहा था अब अजय मनु का भाई भी बड़ा होरहा था सो अजय आम तुअर पैर मन ऊके आगे पीछे hi रहा करता था क्युकी हु छोटा था और मनु उसका ध्यान रखता था सो उसके लिए मनु mummy-papa और पुष्पी दीदी यह सब hi अधिकतर उसके aas-paas होते थे सो बिचारा मम्मी- और पापा से लगभग डरता था क्युकी सुमित्रा अगर कोई बात समझ न ए तोह सख्ती से दो चार लगा दिया करती thi..papa तोह शाम को hi आते थे और पुष्पी दीदी भी सुमित्रा की तरह पड़े में सख्ती के साथ अजय को टाइट रखती थी सो बचा मनु जो शायद बिचारे अजय के लिए हमशा उसके ज़रूरत के टाइम उसके साथ होता था …

अब क्युकी अजय मनु को बहिया कहता था और बाबा के यहाँ से वापसी में आते हुए अजय के लिए कुछ न कुछ लता रहता था सो अजय के लिए उसका बहिया बेस्ट भाई था..

खैर अजय कभी कभी स्कूल में लड़ पड़ता था, जिसकी वजह से मनु की क्लास लगती thi.kyuki मनु को सब जानते थे की मनु नर्सरी से उसी स्कूल में पद रहा था और पड़ने में ाचा था और सबको पता भी था की अजय और मनु दोनों भाई हैं सो वाईस – प्रिंसिपल मम जोकि उस स्कूल की बड़ी सख्त लेडी थी ,,जिनसे लागबहग सारा स्कूल कंपता था ,,,क्युकी अगर कोई गलती हो तोह वाईस प्रिंसपल मैडम किसी बचे को डंडे से पिटे बगैर छोड़ती नहीं थी..

वाईस -प्रिंसिपल मम का नाम चअरुणिता था जिसे सब नीता मम कहते थे ,,,लोगो को हु सख्त लगती थी क्युकी उसकी अपनी वजह थी, क्युकी नीता मम की शादी के कुछ दिन बाद एक एक्सीडेंट में उनके पति और उनके पेट में जो बचा था हु मर गया tha..or doctor’s ने साफ़ साफ़ कहा था की आगे श्याद hi कभी हु माँ नहीं बन पाएंगी ,,सो आगे शायद कभी कोई शादी करता उनसे और अगर कोई रिश्ता भी अत तोह हु पहले बता देती की हु आगे माँ नहीं बनसक्ति सो रिश्ते आना बंद हो गए थे …और इसी दर्द के चलते उनके माँ और बाप दुनिआ छोड़ गए थे …क्युकी अब नीता मम अकेली रहती थी सो खाने पीने का ध्यान न रखने की वजह से उनका सेक्सी फिगर अब फुल ों जीरो साइज यानि गोल मटोल हो चूका tha..kyuki उनकी हाइट भी लगभग 5,10 के आस पास थी तोह आप इमेजिन कर सकते हैं की क्या लगती होंगी नीता मम जब गुस्से में आती होंगी, बचे तोह डरते hi थे उनसे साथ hi स्कूल के टीचर भी उनसे थोड़ा खौफ कहते थे…

सो जब अजय स्कूल में कोई गलती करता तोह स्कूल टीचर, सिद्ध नीता मम को बतादेति और नीता मम उसके पेरेंट्स को बुलाकर उस बचे की अचे से क्लास लगा देती thi,kyuki अजय के साथ यहां उसका बड़ा भाई मनु पड़ता था सो अजय की कोई गलती होती तोह नीता मम मनु को अपने ऑफिस में बुलाती थी,,

उनका ऑफिस जो स्कूल के मैं गेट के सामने पड़ता था. और दो साइड से खुलता था जिसके दरवाज़ों में टिंटेड शीशे लगे हुए थे मतलब नीता मम अपने ऑफिस से आराम से दोनों साइड देख सकती थी पैर अंडर नीता मम को देखपाना मुश्किल था..

सो अजय की गलती के लिए नीता मम ने मनु को बुलाया और kaha”manu तुम इतने लापरवा कैसे हो सकते हो देखो आजकल अजय स्कूल में होमवर्क नहीं करके आता hai.or आजकल इसने स्कूल में साथवालों के साथ लड़ना शुरू कर दिया hai..isk जिमेम्वरी किसकी है..”

मनु को अचे से पता था की अगर बात घर गयी तोह अजय अचे से पिटेगा और कुछ बोलै तोह यहां नीता मम (जोकि अपने ऑफिस में डंडा रखती thi..or गलती पैर हाथ पैर अचे से सिकाई करती है ) यहां अचे से अजय को पीटेंगी सो उसने कहा “सो सॉरी मम मेरी गलती है आगे से ध्यान रखूंगा अजय का “

क्युकी अजय अभी गेट के बहार था सो नीता मम ने मनु से कहा “अगर अभी तुम्हे छोड़ दिया तोह आगे तुम अजय को बिगाड़ डोज तुम्हारी लापरवाही तुम्हारे छोटे भाई का आनेवाला फ्यूचर बना भी सकती है और बिगड़ भी सकती है सो आगे से अजय जब कोई गलती करेगा तब मुझे उसे समझाना होगा डंडा हिलाते हुए”

मनु समझ गया समझाना matlab”danda और समझाना क्या बोलता एक hi भाई था और अजय को गेट के बहार कुछ पता नहीं ..सो नीता मम के kaha”phir “

मनु समझ गया “फिर” का मतलब चुप चाप हाथ आगे कर दिए नीता मम ने कोई 20 बार अचे से मनु भैया की हाथों की सिकाई कर दी ,,,

मनु chup-chap पिता और सॉरी बोलकर गेट के बहार गया अजय के सर पैर नॉर्मली हाथ पहरा और अजय को साथ लेकर चला गया ,,,अंदर से नीता मम ने यह सब अचे से देखा उन्हें बड़ी हैरत हुई की अजय की गलती पैर मनु chup-chap पिता पैर अजय से कुछ नहीं कहा ,,उन्हें एक तरफ गुस्सा आया और दूसरी तरफ हैरत भी हुई की जहाँ उनके खुद के भाई योन ने माँ- बाप के मरने के बाद उनका आजतक हाल तक नहीं पकः वहाँ मनु बिना किसी गलती के अजय के पिता बलिकी अजय से कुछ जीकर तक नहीं किया.

खैर क्युकी अजय को कुछ पता hi नहीं था की क्या हुआ सो बेचारा अपनी लाइफ में मस्त रहने लगा क्युकी पुष्पी जब पड़ती थी तोह सुमित्रा भी वहीँ रहा करती थी सो वहां काम न करने का सवाल नहीं tha,per अजय को टीवी में कार्टून और खेलने का शॉक था पैर क्युकी स्कूल और पुष्पी के साथ में टाइम निकल जाता था कहलने का सो ,,,अजय कार्टून में अचे से टाइम लगा देता था सो होमवर्क करना पॉसिबल या भूल जाना उसके लिए अब कमान हो चूका tha..har रोज़ तोह नहीं पैर कभी कभी अक्सर अजय कुछ गड़बड़ करदेता था सो होता वही था नीता मम वस मनु जिसमे मनु हार्बर चुप चाप पीटकर अजय को लेकर चला जाता नीता मम को और गुस्से में छोड़ कर की यह पिट ता क्यों है और इतना पित्तजन्य के बाद भी अपने भाई को कुछ कहता क्यों नहीं है..

उधर राजिंदर की कंपनी जिसमे हु काम करता था हु आजकल कुछ घाटे में चल रही थी सो मजबूरन कंपनी ने वर्कर्स की सलारिएस काम या काटकर देना शुरू कर दिया ..अब क्युकी मन ऊके घर में कमाने वाला सिर्फ राजिंदर था और दोनों बचे प्राइवेट स्कूल में पद रहे थे ..और प्राइवेट स्कूल का मतलब है की बचे की बस , ड्रेस किताब यहां तक की लैब का चार्ज भी बचे की फीस में ऐड होता है…

वैसे मनु बाबा के पास जहां सिख रहा था सो हु भी कोई 2 हज़ार की अस पास दे देते थे हु सब यहाँ वहां की थोड़ी बहुत सेविंग में चला जाता था क्युकी मिडिल या लोअर क्लास का घर एक बजट के साथ चलता है ,,और बजट अगर थोड़ा भी इधर हो या उधर हो सो घर की बहुत सी ज़रूरतें चेंज करनी पद जाती hain.per यहां केस थोड़ा अलग था यहां बचूं की फीस थी क्युकी लगभग साल से ज्यादा बिट चूका था सो किसी गोवत स्कूल में बेहजना दोनों बचूं को पॉसिबल नहीं था सो राजिंदर और सुमित्रा दोनों बड़ी टेंशन में थे की अब क्या किया जाये …

जब बचे मनु जैसे हो मतलब घर और बहार सबका ध्यान देने वाले हो तोह किसी का परेशान चेहरा देखकर उसे समझना कोई बड़ी बात नहीं थी..

मनु ने कई बार दोनों से पूछने की कोशिश की पर दोनों ने कुछ नहीं बताया ..क्युकी दोनों maa-baap नहीं चाहते थे की मानव अक मनु अजय की पड़े पैर कोई असर हो?

पैर दो महीने बाद जब बजट बहुत बिगाड़ा तोह राजिंदर की परेशानी देखकर मनु ने फिर पूछा तोह राजिंदर ने एक मज़बूर बाप की तरह सब सुच बता दिया और कहा की “बीटा अपने इस बाप को माफ़ कर देना की मैं तुम दोनों को शायद आगे और न पढ़ा सकूँ क्युकी मेरी सैलरी बढ़ने की जगह काम हो गयी hai,,main जनता हूँ की शायद तुम मुझपे अभी शायद गुस्सा करो पैर बीटा यकीं मन्ना मैंने हमशा यही सोचा की मैं तुम दोनों भाईओं को ाचा पदाओर लिखा सकूँ ,,पैर क्या करूँ यहां शायद किस्मत ने कुछ करने लायक hi नहीं चॉदरहा hai..pehle जैचंद को अचे से पद्य पैर हु नालायक tha.per अब तुम दोनों को पढ़ालिखा कर ाचा इंसान बनते देखना चाहता हूँ ,,,पैर मेरे सोचने से क्या होगा ..और तुम्हारी मम्मी का साफ़ कहना है की तुम दोनों अगर पड़ोगे तोह प्राइवेट में hi बीटा ,,,मैं भी अपने बचूं से बेइंतेहा प्यार करता हूँ क्युकी तुम दोनों मेरे बचे हूँ ,,हाँ क्युकी मैंने बचपन से तुम्हारे चाचा को पला tha,,so उसे भूल पाना मेरे लिए आसान नहीं hai,per इसका यह मतलब बिलकुल नहीं है की मैं अपने बचूं से प्यार नहीं करता .बीटा तुम्हारे इस बाप ने अपने बचपन से सिर्फ कामना शुरू कर दिया tha…pehle अपने भाई के नाम पैर और अब अपने बचूं के लिए सो कुछ और सिखने का कभी कोई मौका मिला nahi..or अब कुछ और करना मतलब परिवार को रोड पैर ले आना. तुम श्याद अभी न समझो पैर बड़े होकर समझोगे की आज तुम्हारा यह पापा क्या कह रहा hai..main लगभग पूरी ज़िन्दगी कमाता अयाह उन जो अपने बचपन में नहीं देख पाया हु सब मैं तुम दोनों भाइयों को देना चाहता hun,,per क्या करूँ मज़बूर hun,,waise तोह मैं सिर्फ और सिर्फ इतना चाहता हूँ की तुम दोनों भाई अचे से अछि पड़े करो पैर बीटा तुमसे झूट कहना सही नहीं है क्युकी तुम भी बड़े हो रहे हो आज नहीं तोह कल समझ जाओगे ..क्युकी जो भी आजतक जोड़ा था उसका माकन ले लिया हु भी तुम दोनों भाइयों के भविष्य के लिए .सो अभी मेरे हाथ खली हैं..”

मनु भी कहीं न कहीं अपने बाप की लाचारी समझ गया की कैसे उसके बाप ने उससे सुच कहा hai,,ki उसके बाप ने सुच में पूरी ज़िन्दगी काम hi किया tha..pehle उसके चाचा के नाम पे और अब खुद अपनी फॅमिली यानि उन्सबके नाम पैर सो मनु ने यहां अपनी किस्मत को याद किया और सोचने लगा पैर जब उसे अपने बाप के शब्द याद आये की” शायद मैं तुम दोनों भाइयों को आगे पड़ा न सकूँ” तोह मनु को बहुत दुःख हुआ क्युकी उसे अचे से पता था की बिना एजुकेशन के आगे शयद hi कोई नौकरी उसे मिले और रही बात बिज़नेस की तोह बेशक बाबा उसे पूरा माहिर खिलाडी बना दे पैर बिना पड़ा लिखा और बिना पैसे के बिज़नेस भी संभव नहीं है ..और रही बात पैसे किट ओह उसे भी पता था की उसके पापा ने सुच कहा था की मकान में उसकी साड़ी सेविंग चली गयी thi..so पैसा बिज़नेस के नाम पैर उसके पास था नहीं सो मनु के लिए पड़े छोड़ने का सिद्ध मतलब उसका आनेवाला फ्यूचर पुरे अंधरे में था सो मनु को कुछ समझ नहीं आ रहा था ..उसके बाप की हु बातें की” शायद मैं तुम दोनों भाइयों को आगे पड़ा न सकूँ” बार बार उसके दिमाग में घूम रही thi..manu किसी से कुछ नहीं बोलै पैर इसका सिद्ध असर उसके बर्ताव पैर साफ़ साफ़ दीखता था मतलब हु हस्ता था ताकि कोई न समझे पैर उसकी आन्ह्कों में एक उदासी च गयी थी…

ऐसे hi 3 दिन बिट गए मनु घर पैर नार्मल रहने को कोशिश करता था पैर कहीं न कहीं उसके अंदर एक डर भी च गया tha..shayad आगे न पड़ने का डर ..बहार हु लिमिट से बात करता tha.so बहार किसी का ध्यान देना पॉसिबल नहीं tha..per माँ से भला कभी कुछ छुपा है क्या सो सुमित्रा ने 3 दिन से मनु का काम खाने का कारन पूछा तोह मनु ने कहा की “मम्मी जितनी भूक थी उतना hi ख्य है” सुमित्रा ने पूछा की तबियत तोह ठीक hai,manu ने तबियत ठीक होने का कहा सो सुमित्रा ने फिर मनु को अपनी कसम देकर सुच बोलने को कहा .तब मन ऊके लिए सुच छुपाना पॉसिबल नहीं रहा ,उसने राजिंदर से हुई साड़ी बात बता दी की क्या क्या हुई थी सुमित्रा को पता था की शायद ऐसी कोई बात होगी, पैर जब उसने सुना की राजिंदर ने कैसे मनु को सब बताया और अपने बचूं से माफ़ी मागि तोह सुमित्रा को बहुत बुरा लगा राजिंदर के लिए क्युकी राजिंदर बेशक अपने भाई से प्यार करता tha,,kyuki बचपन से उसे पला tha.or अगर आप कोई कुत्ता भी पालो तोह उससे भी लगाव होना सव्भाविक है पैर यहाँ तोह उसका भाई था सो लगाव होना लाज़मी tha.per यह भी सुच था की राजिंदर ने बचपन से hi काम किया था और अगर हु ऐसे टाइम में कोई और काम करता या दूसरी नुकरि करता तोह एक तोह उन्हें यह घर कहली करना पड़ता जिसका सिद्ध असर बचूं के स्कूल पैर पड़ता क्युकी उनका नया माकन स्कूल से कोई 20 कम आगे था और दूसरा एक रेगुलर बजट पूरा बिगड़ जाता सो राजिंदर की मज़बूरी साफ़ समझने लायक thi..wahin मनु की टेंशन भी सुमित्रा को साफ़ दिख रही thi.sumitra ने एक फैसला लिया और मनु से कहा “मेरे प्यार बचे तू अभी से गबरा गया अभी तोह पूरी ज़िन्दगी पड़ी है ऐसे hi टेंशन लेने लगा तोह आगे क्या करेगा और कैसे जी पायेगा क्युकी ज़िन्दगी तोह हर मोड़ पैर एक नयी जुंग लिए मिलती hai.zindagi में जुंग से अगर भागोगे तोह हु जुंग तुम्हारे पीछे लगी rahegi..tab तक जब तक तुम रुक नहीं जाते और जब रुकते हो तोह हु जुंग जो तुम्हारे पीछे थी हु घूमकर फिर आगे आजायेगी सो भागना बेकार है ,,,लड़ना सीखो …”

मनु “मम्मी बात मेरे अकेले की नहीं है यहां ..अजय का और हम सब का फ्यूचर डाव पैर लगा है ,,और आप अचे से जानती हैं बिना पड़े आगे कुछ भी करना मुश्किल होगा ..”

सुमित्रा “तू टेंशन न ले अभी मैं हूँ न तोह तू सिर्फ पड़ने पे ध्यान दे “

मनु “मतलब”

सुमित्रा “मतलब सिर्फ अचे नंबर ला और अजय का धयान रख तेरा जो काम है उसे देख यह मेरी और तेरे पापा की टेंशन है की तुम आगे कैसे पड़ोगे तुम्हारा काम सिर्फ और सिर्फ पड़ना है ok प्रॉमिस कर अचे से पड़ेगा “

मनु “प्रॉमिस तोह ठीक है पैर आप करने क्या वाली हो “

सुमित्रा “हु मेरी टेंशन है”

मनु समझ गया अभी बोलना मतलब मम्मी का मूड खराब करना है ..सो चुप रहा ..सुमित्रा त्यार होकर अग्गरवाल अन्त्य कैग हर गयी अग्गरवाल अन्त्य का सुमित्रा से सिर्फ और सिर्फ राजिंदर के नाम का रिस्ता था अग्गरवाल अन्त्य राजिंदर के बॉस के भाई की बीवी थी जो राजिंदर को अपने बेटे जैसे और सुमित्रा को बहु जैसा मानती थी…

सुमित्रा अग्गरवाल अन्त्य के घर गयी और उनके पेअर छुए अन्त्य ने भी सुमित्रा को बहु की तरह ट्रीट किया क्युकी अन्त्य के बचे नहीं थे मतलब शादी के बाद अभी तक 50 की आगे के बाद भी कोई बचा हुआ नहीं था सो उनका खालीपन राजिंदर और सुमित्रा के लिए अपनापन जगा गया था क्युकी कभी रोड क्रॉस करते हुए अन्त्य को ट्रक की टक्कर से राजिंदर ने बच्या था और जब अन्त्य को पता चला की राजिंदर के माँ बाप चल बेस हैं तोह अन्त्य ने राजिंदर को अपना बीटा मान लिया था ..सो जब सुमित्रा की शादी हुई थी तोह सास का सारा काम अग्गरवाल अन्त्य ने hi देखा था .सो सुमित्रा भी उन्हें सास सामान आदर देती थी सो अन्त्य और सुमित्रा का अपना एक बांड था जो सास और बहु का कह सकते हैं बस अंतर यह था की दोनों अपने अपने घर में रहा करती थी अन्त्य के हस्बैंड अधिकतर टूर पैर रहा करते थे और घर पैर पैसे की कोई कमी नहीं थी सो एक पूरी नौकरो की फौज अन्त्य के लिए त्यार हुआ करती thi..anty ने भी अपनी एक कंपनी खोली हुई थी बूटीक्वेस को रेडीमेड गारमेंट्स त्यार करवा कर भेजने का काम था ..जिसकी सप्लाई इंटरनेशनल लेवल तक हुआ करती थी..

सो सुमित्रा ने अन्त्य से हाल चाल पूछा बहुत देर तक दोनों में बात चित हुई फिर सुमित्रा से वहां के हाल चल पूछने पैर सुमित्रा अन्त्य के गले लगकर रो पड़ी तोह अन्त्य ने सब पूछा तोह आगे सुमित्रा ने भी सुच बता दिया ..अन्त्य ने कहा “बहु तू पागल है क्या इतनी सी बात पैर रो रही है …अभी तेरी यह सास जिन्दा है तू टेंशन न ले चल मेरे साथ..”

सुमित्रा का हाथ पकड़कर अन्त्य घर के बहार आगयी जहाँ कार के साथ ड्राइवर भी था ड्राइवर को इशारा किया ..

ड्राइवर ने गेट खोला और दोनों गाड़ी में बेथ गयी ..उसके बाड़े अन्त्य ने कड़क आवाज़ में ड्राइवर से ऑफिस चलने को कहा. ड्राइवर ने कार ऑफिस पुछाड़ि दोनों ऑफिस के अंडर एंटर हुए जहाँ स्टाफ काम में लगा हुआ tha..anty सुमित्रा के साथ अपने ऑफिस गयी ..और कंपनी के मंजर को बुलाया और कहा” यह मेरी बहु है …यह कल से यहां काम सीखेगी और अगर किसी ने इससे ुचि आवाज़ में बात की तोह फिर मेरी आवाज़ हु सुनेगा आखिर बार .ok “

मंजर ने हाँ में सर हिलाया और चला गया ..पुरे स्टाफ को समझने के लिए ..सुमित्रा जो अभी तक देख रही थी अग्गरवाल अन्त्य को उसने डूअड़ कर अन्त्य को गले लग आलिया और रोने लगी ..क्युकी एक घरेलू औरत चाहे कितनी बहुदूर क्यों न हो पैर काम करने के लिए पहला कदम बढ़ाते हुए …थोड़ा घबराती है ..और सिर्फ औरत hi क्युकी सब पहला कदम लेते हुए घबराते हैं …जिसपर किसी का सिर्फ साथ होना हिम्मत देता hai..wahin अन्त्य ने तोह पुरे ऑफिस में पहली बार आयी सुमित्रा को अपनी बहु से ुचा बोलने पैर hi बहार कर देने की बात कहकर सुमित्रा को ऑफिस सूप दिया था..

खैर दोनों एक दूसरे के गले मिली अन्त्य ने बहुत कुछ सुमित्रा को सिख्या और बहुत सी बातें भी सिखयी ,,की कैसे ऑफिस में लोगो से काम बात करनी hai..yeh सब हुआ और दोनों कार से वापस घर आ गयी ..शाम को सुमित्रा ने राजिंदर से काम करने को कहा राजिंदर ने पहले मन किया ,,जिसपर सुमित्रा ने दोनों बचूं के भीवशिये के कहा तोह राजिंदर ने सिर्फ इतना कहा “देखो मैं भी बाप हूँ अचे से जनता हूँ की अभी हालत हमदोनो के हाथ से बहार हैं तुम काम सिर्फ बचूं के लिए कर रही ho,,per बच्चों को तुम्हारे बिना सही सिख कोण देगा और तुम खुद आज तक बहार अकेली घूमने नहीं गयी काम कैसे करोगी”??

सुमित्रा ने अग्गरवाल अन्त्य के साथ की साडी बात बता di.rajinder क्युकी उनको अचे से जनता था और समझता था की सुमित्रा अगर उनके साथ रेहगी तोह सेफ रहेगी ..सो क्या कहता हाँ कर दी..

दोनों ने बचूं को बुलाया और दोनों को अचे से समझया की अब उनकी मम्मी भी काम करेगी ,,अजय ने सुना तोह भैया की तरफ देखा मन ऊके लिए तोह यह सब बिलकुल समझ से परे था की उसकी घर में रहने वाली माँ सिर्फ उन दोनों के लिए काम karegi..usne अजय से टीवी देखने को कहा ,,अजय ने सर हिलाया और चला गया ..

मनु “मम्मी यह सब और कैसे करोगी आप रोड तोह आप पार कर नहीं पति ho..akele और हम दोनों गोवत स्कूल में भी पद सकते हैं..”

सुमित्रा “बीटा आज तोह गोवत का नाम ले लिया है ..आगे यह गलती से भी मत kehdena..jo कर रही हूँ सही कर रही हूँ बस तुमको अजय को देखना थोड़ा ज्यादा होगा और खाना सुबह बनाकर जाया करुँगी तुम सिर्फ गरम करके खा lena..baki तुम्हारी दीदी आती है hi ..”

मनु समझ गया की उसकी मम्मी ने सोच समझकर फ़ासिला ले लिया hai.or उसे भी अग्गरवाल अन्त्य का पता tha.kyuki उसने थोड़ा पहले hi maa-baap को बात करते हुए सुना tha.woh अचे से समझता था की उसकी माँ सेफ है .

पैर रात दिन साथ में रहना और सिर्फ रात और दिन में मिलना दो अलग बातें होती हैं ,,मनु समझ गया था ki..aage का टाइम चेंज होगा ..मनु ने अपनी माँ के गले लगकर इतना कहा “मम्मी आप अजय और घर की टेंशन मत लेना बस अपना ध्यान rakhna..main सबका ध्यान रखूँगा ..मतलब आपका भी..

सुमित्रा “मेरा भी रकेहगा मतलब “

मनु “मम्मी आप समझ जाओगी”

खैर अगले कुछ दिन सुमित्रा के बड़े टाइट बीते क्युकी पुरे दिन भर की भाग दौड़ सुमित्रा को अचे से निचोड़ देती thi..jisper शाम को मनु तेल गरम करके उसके पैरो की मालिश कर देता था..

तब सुमित्रा भी समझ गयी की मनु का उसका ध्यान रखने से क्या मतलब tha…aise hi कुछ दिन बीत एक दिन सुबह सुमित्रा त्यार होकर बहार निकल hi रही थी की …रजिनि रस्ते में उसे मिली सो सुमित्रा ने चलते हुए थोड़ी बात की क्युकी रजिनि को भी पता चल गया था की ,सुमित्रा आजकल काम करने लगी hai,so उसने सिर्फ हाल चाल पूछे .

सुमित्रा ने जल्दी चलते हुए सिर्फ उसे इतना कहा ki”agar बचूं को कोई जरूरत पड़े तोह धयान रखना ..”इतना बोलकर सुमित्रा चली गयी.

जिसपर रजिनि के चेहरे पैर एक शैतानी मुस्कराहट फ़ैल gayi..jise अपनी माँ को छोड़ ने आये मनु ने साफ़ साफ़ देख लिया..

अब रजिनि के मुस्कराहट में क्या राज़ है यह तोह आनेवाला वक़्त hi बता सकता hai..:hint::hint:
 
अपडेट 40

बचपन की यादें

सुमित्रा ने जल्दी चलते हुए सिर्फ उसे इतना कहा ki”agar बचूं को कोई जरूरत पड़े तोह धयान रखना ..”इतना बोलकर सुमित्रा चली गयी.

जिसपर रजिनि के चेहरे पैर एक शैतानी मुस्कराहट फ़ैल gayi..jise अपनी माँ को छोड़ ने आये मनु ने साफ़ साफ़ देख लिया..

अब रजिनि के मुस्कराहट में क्या राज़ है यह तोह आनेवाला वक़्त hi बता सकता है..

रजिनि की मुस्कराहट को देखकर मनु ने कोई रिएक्शन नहीं दिया. जिसके बहुत से मतलब हो सकते हैं..

रजिनि अपने रस्ते चली गयी और सुमित्रा अपने रस्ते . रजिनि की आजकल मनु के नए पडोसी श्रवण की बीवी शशि से बहुत बनने लगी थी ..

क्युकी श्रवण को राजिंदर ने hi बहुत पहले काम पैर लगया था. और जब हु लोग वहाँ शिफ्ट हुए थे सो राजिंदर के लिए श्रवण एक बड़े भाई के जैसे tha.shashi भी एक हद तक सुमित्रा से एक जेठानी जैसा ट्रीट करती थी और उनके बचे लगभग रात दिन मनु के घर के आँगन में hi कहला करते थे क्युकी दोनों के घर के बिच में सिर्फ कुछ फ़ीट का hi फासला था ..और श्रवण के मुकाबले राजिंदर का घर का आंगन बड़ा और पका भी था सो बचे क्या चाहेंगे सो लगे रहते थे मनु के आंगन में कह्लैने में.

और श्रवण के बचे सुरभि और सोनू जो थोड़े छोटे थे उनसे थोड़ा बड़ा अजय था और जिसकी अधिरतर पसंद कार्टून थे सो बचूं को और क्या चाहिए था सो लगे रहते थे अजय के साथ …याय उन कहिये की अजय उन दोनों का लीडर था ..

खैर रजिनि शशि के घर आने जाने लगी थी. और शशि और रजिनि की अछि दोस्ती हो गयी थी..

क्युकी सुमित्रा के साथ शशि एक बड़े के जैसा बर्ताव था और उसपर भी सुमित्रा अब काम पैर लग गयी thi.so शशि और रजिनि की अछि छानने लग गयी थी…

सो रजिनि जब शशि कैग हर आयी तोह शशि ने भी उसका सौगात गर्म जोशी के साथ किया और रजिनि भी जाकर शशि के गले लग गयी जिस पैर शशि ने उसे एक दोस्त की तरह गले लगया पैर रजिनि थेइर थोड़ी तेज़ तरार औरत उसने मज़े से शशि को और ज़ोर से गले लगा लिया सो दोनों की चूचियां ज़ोर से भींच गयी जिस से शशि कसमसा गयी और रजिनि को दूर हटाने लगी और यूँ कहो की धक्का hi दे दिया.

जिपर रजिनि दूर हो गयी और हसने लगी शशि जोर से चूचियां बिछने के बाद अपनी चुकी सहलाती हुई बोली “यह सब क्या है दोस्त समझ कर गले लगया था पैर तुम तोह गले hi पद गयी mere,yeh सब क्या है थोड़ा तोह सरम करो की तुम भी औरत हो ..”

जिसपर बेशर्मी से रजिनि ने जवाब दिया “हे मेरी जान तू तोह मेरी दोस्त है और दोस्त के गले लगकर थोड़ा मज़्ज़ा न आया तोह दोस्ती किस काम की”

शशि “दोस्ती का मतलब यह नहीं है की हम अपनी हद भूल jayene.kitni जोर से भीचा है कुछ तोह शर्म लिहाज़ है नान यही तुम्हे साड़ी छाती दुखने लगी है मेरी ”

रजिनि “हे मेरी जान तू है hi इतनी मस्त आदमी तोह आदमी मैं औरत होकर बहक जाती hun..kya मस्त है तेरे यह मस्त कबूतर जिन्हे देखकर मुझसे भी रहा नहीं जाता “

शशि जो शादीशुदा थी जिसने शायद कभी ऐसी बात किसी से नहीं की थी, उसने ऐसे रियेक्ट किया जैसे किसी ने उससे अचे से बड़का दिया ..

शशि “दोस्ती का मतलब यह नहीं है की तुम अपनी हद्दें भूल जाओ दोस्त हो दोस्ती की लिमिट में रहो “

रजिनि जो समझ गयी की शशि अभी गुस्से में आने वाली है कोई और बात न करे इस पहले hi रजिनि ने कान पकड़ लिए और boli”sorry मेरी जान गलती हो गयी आगे से ध्यान rakhungi,per एक बात कहूं तू सुच में बड़ी मस्त है जिससे मैं खुद को रोक नहीं पाई अब इस में मेरा कसूर क्या है “

वैसे तारीफ किसे पसंद नहीं है शशि भी उसकी बात में आगि ..और boli”koi बात नहीं आगे से धयान रखना वर्ण मुझसे बात करने की कोई ज़रूरत नहीं है “

रजिनि boli”meri जान तू मुझसे रूठना न वर्ण मेरा बुरा हाल हो जायेगा ाचा बाबा गलती हो गयी आगे से ध्यान रखूंगी “और कान पकड़ लिए फिर से .

शशि इस पैर मुस्कुरा कर बोली “कोई बात नहीं तुमने गलती मान ली बात ख़तम पैर आगे से ऐसा कुछ किया तोह भूल जाना कोई दोस्त थी तुम्हारी..”

रजिनि boli”meri जान कैसे भूल सकती हूँ तुझे एक तू hi तोह है जिसके पास मेरा दिल लगता है और वैसे ज्यादा ज़ोर से दबा दिया kya”rajini उसकी चुकी छूटे हुई बोली ..

जिसपर शशि ने उसे दूर हटा दिया .और बोली “दोस्ती अपनी जगह है और लिमिट अपनी जगह और तुम लिमिट क्रॉस कर रही हो दूर से बात करो “

रजिनि थोड़ा दूर होते हुए बोली “मेरी जान अब तू है है एंटी मस्त की तुझे देखते hi मैं लाचा जाता है ..पैर मैं समझ गयी की मुझे अपनी लिमिट में रहना है पैर मैं तोह देख रही थी की कहीं मैंने ज्यादा ज़ोर तोह नहीं लगा दिया तुझपर कहीं कोई चोट तोह नहीं लगी मेरी जान को ???”

Shashi”who सब ठीक है ..पैर तुम थोड़ा लिमिट में रहा करो और यह मेरी जान क्या लगा रखा है …मैं तुम्हारी दोस्त हूँ .. तुम्हारी कोई माशूका नहीं सो थोड़ा तमीज़ में बात किया करो मुझसे “

रजिनि “यार तुम तोह गुस्सा हो गयी ..मेरी जान मैं तुमको hi कहती हूँ इसका मतलब है की तुम मेरी जान हो मतलब मेरे लिए मेरी जान के बर्बर कीमती ho.iska माशूका से कोई लेना देना नहीं hai.yahaan सिर्फ तुम hi मेरी एक प्यारी दोस्त हो और मेरे लिए सब कुछ हो इसलिए तुम्हे मैं मेरी जान कहती हूँ,,”

शशि थोड़ा नार्मल होगयी और बोली “ठीक है पैर मुझे यह लापता चिपटी पसंद nahi..aage से ध्यान रहे”

Rajini”waise तू है बड़ी मस्त तू है दो बचूं की माँ पैर तेरा मस्त फिगर देखकर किसी भी बुड्ढे का भी दिल मचल सकता है ,,तोह मैं तोह इंसान हूँ ..”

शशि हसकर “दिल मचल सकता है ,,पैर तुम भी औरत हो और मैं भी औरत hun..jo तुम्हारे पास है वही मेरे पास है ..सो उसमे अनोखा क्या भला???”

रजिनि ने देखा शशि भी थोड़ा मज़्ज़ा ले रही है सो उसने अगला डाव चला “मेरी जान जानती हूँ की मैं भी औरत हूँ जो सामन तेरे पास है वही सामन मेरे पास है ,,पैर जो तेरे पास है तुझे खुद को नहीं पता किट ु चीज़ क्या hai..kasam से तेरा फिगर ऐसा है की कोई देख ले तोह सिर्फ बात करने के लिए hi खुद को कुर्बान कर le…hey मेरी जान तुझे देखने के लिए लोग एक दूसरे का क़त्ल तक कर दें ,,मैं भी अगर तुझे देखकर बहक जॉन तोह इसमें मेरा कसूर नहीं तेरी जवानी का कसूर hai.main जानती हूँ किट ु भी औरत है और मैं भी औरत hun..per जो बात तुझे है और हु किसी और कहाँ भला..”

शशि समझ गयी बात अब बढ़ने वाली है सो बोली “ाचा ठीक है और सुनाओ क्या हाल चल है ..”

रजिनि “बस जी काट रही है ज़िन्दगी …पहले बूर हुआ करती थी अब जबसे तू मिली है तबसे मस्त काट रही है ..”

शशि ने देखा की रजिनि फिर कुछ न कुछ आगे कहेगी सो पहले hi बोल padi”acha सुनो मुझे कुछ काम है बाद में बात करते हैं,,”

रजिनि समझ गयी अब चलने का टाइम आ गया है सो चलते हुए एक बार फिर से शशि से गले लगी ,,पैर इस बार पहले की तरह ज़ोर से नहीं थोड़ा आराम से वहीँ शशि ने भी बिच में थोड़ी दुरी बांये राखी थी..

रजिनि अब उसके घर के बहार आयी और दरवाज़े से दूर होकर मन ऊके घर की तरफ खेल रहे शशि के बचूं की तरफ देखकर एक शैतानी मुस्कराहट के साथ एक बार मन ऊके घर की तरफ देखा और खुद से बात करते हुए boli”meri जान जानती हूँ तू इतनी आसानी से हाथ नहीं आने वाली ,,पैर तू देखती जा तू कैसे मेरे इशारे पैर नाचेगी और अभी तोह तुझे मेरे बहुत से काम करने हैं जो मेरा आनेवाला मककसड पूरा करने में मदद करंगे ,,,और अभी तू आगे आगे देख कैसे कैसे मेरी इन उंगलियों पैर nachegi.tu तोह मेरा हु मोहरा है जो टाइम पैर अपनी चाल chalega.or उस सुमित्रा को इतनी आसानी से में छोड़ दूँ यह न कभी हुआ था और न कभी होगा ,,बदला तोह लुंगी मैं उस सुमित्रा से अपने साथ जो हुआ है उससे मैं भूल जॉन यह हो नहीं सकता .

एक शैतानी मुस्कराहट के साथ उसने शशि के बचूं की तरफ देखा फिर घूमकर शशि के गेट की तरफ देखा वहां कोई नहीं tha..phir आखिर में राजिंदर और सुमित्रा के घर की तरफ देखा और एक शैतानी हस्ती हसकर वहाँ से चली गयी.

तभी गेट के बगल में कुछ झाड़ियाँ थी उनमे सरसरहाट हुई जहां से कोई निकल कर आया. जब हु निकल कर आया तोह शशि के बचे उसे देखकर बोले” भैया आ जाओ और कितनी देर लगा दी बॉल मिली या नहीं”

जिस पैर उसने कहा “हाँ मिल गयी बॉल आ रहा हूँ “और बाउंड्री जो दोनों घरो के बिच में थी कोई 4 या 5 फ़ीट की उसे कूदकर उनके पास चला गया ..

सुरभि “अजय भैया कहाँ चली गयी थी बॉल इतना टाइम लगा दिया आपने बॉल ढूंढ़ने में “

जी हाँ हु इंसान अजय hi था जो वहाँ झाड़ियों में बॉल ढूंढ़ने गया tha..kyuki सुबह देर से उठा था सो आज स्कूल नहीं गया tha..or शशि के बचे आज श्रवण के छोड़ ने में दरी होने की वजह से उनकी भी छुट्टी होगयी थी सो तीनो एक साथ खेल रहे थे..

और जब बॉल जो सोनू ने ज़ोर से बॉल फेंकी तोह हु शशि के आंगन के पास में जो छोटा सा गलियारा था जिसमे बहुत सी झाड़ियाँ ूगी हुई थी उनमे जा गिरी थी ..झाडी यान काफी बड़ी थी उन में अगर कोई बैठ्जाता तोह उसे देखपाना किसी दूसरे के लिए संभव नहीं होता सो रजिनि ने भी नहीं देखा था अजय को..

अजय ने रजिनि की साड़ी बातें सुनली थी क्युकी उससे सब पता था की उसके और उसकी मम्मी के साथ रजिनि का क्या झगड़ा हुआ tha..or जब रजिनि ने उसकी माँ का नाम लिया तोह बेशक हु छोटा था पैर ,,उसके भी कान खड़े हो गए थे ,,पैर हु क्युकी रजिनि की साड़ी बातें सुन चूका tha,so उसने सोचा की यह बात घर पैर बतानी चाहिए की usne(rajini ने )उसकी माँ का नाम लिया है..

खैर सुबह बीती दुपहर हुई मनु स्कूल से घर आया तोह अजय ने सोचा पहले भैया को बता देता हूँ …और वैसे भी अजय के लिए मम्मी पापा में सबसे ज्यादा मनु से बनती थी ,,,मम्मी से बेशक्क बनती थी पैर जबसे सुमित्रा ने काम करना शुरू किया tha..so अजय का ख्याल अधिकतर मन ऊके जिम्मे रहता tha..or अजय ने बचपन से मनु को फॉलो किया था सो उसके लिए मनु एक बड़ा भाई के साथ हु था जिसपर अजय छोटा होने के बावजूद अपनी माँ के बाद सबसे ज्यादा बहरोसा करता था.

अजय के लिए मनु का प्यार इस बात से पता लगा सकते हैं की जहां दयाल वर्मा के बेटे एक दूसरे को नाम से बुलाते थे वहीँ अजय ने बचपन से मनु को सिर्फ “””भैया “””के शिव उसका कभी नाम नहीं लिया tha..isme उनकी माँ का भी एक ाचा योगदान था की उसने शुरू से अजय को मनु को भैया कहना सिख्या tha.kyuki माँ की सिख hi बचूं को ाचा या बुरा बनती है सो उसका सिद्ध असर भी बचूं पैर पड़ना लाज़मी है..

खैर मनु जब आया तोह अजय ने रजिनि से जो सुना था सो पूरा जैसा सुना था वैसा बता दिया..

जिसे सुनकर मनु को अंदर से गुस्सा तोह बहुत आया पैर उसने जय से नार्मल वे में कहा “कोई बात नहीं अजय तूने यह बात किसी को बताई तोह नहीं न ?”””

अजय “नहीं बहिया आप को hi पहले बताया hai,,or किसको कहता “

जिसपर मनु ने प्यार से उसके सर और गाल पैर हाथ फिरकर उसे kaha”or किसी से कहना भी नहीं सुना न क्या कहा मैंने अजय मानोगे अपनी भैया की बात ..???”

अजय “भैया आप कह रहें हैं तोह मानुगा पैर और किसी को क्यों नहीं कहूं उस गन्दी अन्त्य के बारे में ..??”

मनु “देखो अजय तुम अचे से जानते हो अभी हमारे हालत क्या हैं ..मम्मी ने अभी नया काम करना शुरू किया hai..or पापा भी रात -दिन हम दोनों के लिए म्हणत कर रहे hain,,agar उनमे से किसी को भी यह बात पता चली तोह दोनों कहीं न कहीं पहले से परेशान हैं और ज्यादा परेशान हो जायेंगे ..उससे उन दोनों का भी चैन सुकून दूर हो जायेगा ..क्या तुम मम्मी और पापा को पेरशान होते हुए देखना चाहते हो ..मेरे प्यारे भाई ????

अजय मुसुमियत के साथ “नहीं भैया पैर उनको पता भी तोह होना चाहिए न की लोग वैसे नहीं हैं जैसे ेओह दीखते हैं..????

इस बात पैर मनु थोड़ा चूंकि भी क्युकी अजय अभी से एक समझदारी की बात कर रहा था ,,जो की सिर्फ अधिकतर कार्टून और खेलने में बस्सी रहा करता tha..or वैसे भी अजय अभी छोटा था कोई 4 साल मनु से छोटा था.

जब इंसान परेशानिओं में रहता है तोह उसकी सोच उसकी उम्र से काफी बड़ी हो hi जाती है ,,जब इंसान अधिकतर अपने फैसले खुद लेने लगता है ,,,तोह काफी जगह गलती करता है ..और काफी जगह साहिब hi निकलता है …अपने फैसले खुद लेने से सिद्ध असर इंसान की बुद्धि और उसकी सोच पैर पड़ता है ..जैसा मनु और अजय के साथ हुआ tha..jaise मनु जब थोड़ा बड़ा हुआ तोह उसने धीरे धीरे अपने फैसले खुद लेने शुरू कर दिए थे ,,जहां उसको गाइड करने के लिए सुमित्रा रहा करती thi..wahin अब अजय जैसे hi बड़ा होने लग रहा था सो hi सुमित्रा ने काम करना शुरू कर दिया था अपने घर के हालात के चलते ,,जिस कारन अजय की लगभग साड़ी जिम्मेदारी मनु पैर आगयी thi.jise मनु भी पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करता tha.kyuki मनु का भी लगभग काफी टाइम अजय के और बाबा के साथ बिट जाता था सो उसमे रोज़ अजय को हु भी अपने फैसले खुद लेने के लिए हिम्मत बढ़ाता tha.jis कारन अजय भी पूरा तोह नहीं पैर काफी हद तक समझदार हो गया था.

जब मनु ने अजय के मुँह से ऐसा सवाल सुना तोह उस बड़े प्यार से samjhya”dekho अजय अगर अभी मम्मी या पापा को कुछ पता चला तोह तुम खुद सोचकर देखो क्या हो सकता hai..mummy और पापा जब यह बात सुनेगे तोह उन दोनों को चिंता होगी, क्युकी दोनों काम करते hain..upperwala न करे अगर कहीं कोई काम में गलती हुई या कोई एक्सीडेंट होगया टेंशन में toh..ya सोचो मम्मी को अगर गुस्सा आया उस रजिनि पैर और उससे पहले की तरह से फ़ूड डाला तोह पुलिस केस होगा ,,और आगे और बात बाद सकती है या मम्मी के हथून हु मर गयी toh…rajini का जो होगा सो होगा पैर हमारे घर का क्या होगा ..सोचकर देखना इसीलिए तुमको मन किया की घर में किसी से न कहना ….”

अजय “भैया मैंने तोह यह सब सोचा hi नहीं ,,पैर आपने जो कहा सही hai,jo आप कहेंगे वैसे hi करूँगा पैर अगर उसने कुछ किया तोह..??”

मनु “अरे टूट ओह मेरा बहादुर भाई hai,,tu यह सब मत सोच और आगे पीछे ध्यान रखना की हु रजिनि घर न आसके और अगर आये तोह उसकी हरकतोओं पैर ध्यान रखना और कुछ कहने को दे तोह गलती से भी मत कहना ,,अगर मेरे न रहने पैर घर में आने की बात करे तोह साफ़ साफ़ केहडेना भैया ने कहा है ,,की जब तक भैया नहीं आजाते दरवाज़ा न kholun..itna तोह कर hi लोगे न मेरे बहादुर भाई..????””

अजय “भैया बिलकुल वैसे hi करूँगा जैसे आपने समझया hai,or आगे से उसकी हरकतोओं पैर और धयान रखूँगा ताकि पता चले की उसका प्लान क्या है..???”””

मनु इस बात पे हास्पदा और अजय के सर पैर धीरे से मारते हुए बोलै” बाबू हु सब ठीक है ,,,धयान रखने को कहा hai..per तू तोह पूरा सीक्रेट एजेंट की तरह जासूस न बन जाना पता लगे तू रात दिन उसके पीछे लगा हुआ hai..or खुद रजिनि आकर तुझे गाल पैर किश karde..hahahahah”???

अजय “भैया …..कैसी बात करते हो उस कामिनी से मैं बचपन से सिर्फ नफरत करता हूँ क्युकी मैं भुला नहीं हूँ की उसने कैसे बचपन में कैसे मुझे डांटा था और बाद में मम्मी से लड़ाई …भुला नहीं हूँ आप तोह स्कूल में थे पैर मैं वहीँ tha,main उस कामिनी को अचे से जनता हूँ सो उससे किश मिलने से पहले उसका मुँह तोड़ दूंगा main..”””ajay ने गुस्से में कहा ..

जिसपर मनु ने उसे समझते हुए कहा “””देख मेरे प्यारे भाई इस दुनिआ का एक उसूल है ,,की दोस्तों को साथ रखो पैर दुश्मनो को उससे ज्यादा पास ..मतलब उनकी हर हरकत से चौकाने रहो ताकि तुम उसकी किसी चाल में न फास sakoo,or रही किश की बात तोह ,,तू खुद सोच जब उसने इतना खुद के और उस अनिल के पीटने के बाद भी हमारे परिवार के साथ मेलजोल बढ़ाया tha..tab तुझे नहीं दिखा की उसका मतलब क्या है..??”””

अजय हैरानी से उसकी बात सुन रहा था..

मनु ने आगे kaha”dekh दुनिआ बड़ी अजीब है यहां लोग गले मिलकर पीछे पीठ में चुरा (नाइफ) घोप देते हैं ..इस से सिख की तुझे चाहे कितना भी गुस्सा आये तू सामने वाले को अपना गुस्सा मत दिखा क्युकी गुस्से तुम्हारी ताकत होना चाहिए कमज़ोरी nahi..kuch लोग गुस्से में अंधे होकर गलती kardete..mera मतलब कोई गलत कदम उठा लेते hain,or जब गुस्सा ठंडा होता है ,,तब खूब पछताते हैं की यह गलती कैसे हुई ..सो मेरे कहने का मतलब है गुस्सा जितना भी हो उसमे अपना दिमाग सही rakho..or आगे पीछे सोचकर कदम uthao..warna सब कुछ लूट कर रोने के शिव कुछ नहीं हो सकता ..समझ रहे हो न तुम मेरे प्यारे भाई..””

अजय ने हाँ में सर हिलाकर बात मैंने का इशारा किया ..

मनु “अजय आगे ज़िन्दगी में बहुत से टाइम तुम्हे कई ऐसे लोगो से मिलना पड़ेगा जिनसे तुम्हे काम पद सकता है और जिनको तुम पसंद नहीं करते ho..toh क्या सब के सर फोड़ डोज ,,नहीं न यहां भी ऐसा hi है उससे रजिनि से सीखो की कैसे अपने गुस्से को दबा कर हमारे घर आती hai…agar कुछ सिखने को मिले तोह दुश्मन से भी sikho..tumhare लिए ाचा rahega..samjh गए न …???’’

अजय “जी भैया समझ गया की कितना भी गुस्सा आये उसे उस रजिनि पैर कभी दिखने नहीं दूँ मुस्कुरा कर बात करूँ ..और उस पैर नज़र रहूँगा अपनी पड़े का भी ध्यान rakhunga..per ???””

मनु “पैर क्या ??”

अजय “पैर क्या हम उस रजिनि नाम की नागिन को ऐसे hi छोड़ दे,,??”

मनु “अजय तुम अभी छोटे हो एक बात अचे से समझ जाओ सिर्फ किसी को बात करते हुए सुनने से आप गलत साबित नहीं कर सकते ,,सो इसलिए कहा है की उसपर नज़र रखो ताकि पता चल सके की हु आखिर क्या प्लान कर रही hai.taki उसके प्लान की अचे से बंद बजायी जा सके .और यह भूल से भी मत सोचना की उस नागिन को ऐसे hi छोड़ दूंगा .पैर तुम्हारा काम अभी सिर्फ डिल आगा कर पड़ना है सो तुम सारा धयान वहाँ लगाओ..!!! ”

अजय की लगभग साडी बातें क्लियर हो गयी thi..so हु मुस्कुरा कर मन ऊके गले लग गया ..

जिसपर मनु भी उसे गले लगा कर हसने लगा ..पैर मनु की आंखों में अभी कोई अलग सी चमक thi..jo आगे क्या रंग लेन वाली थी यह तोह आने वाला टाइम hi बता सकता है....
:हिंट:
 
अपडेट 41

बचपन की यादें

अजय की लगभग साडी बातें क्लियर हो गयी thi..so हु मुस्कुरा कर मन ऊके गले लग गया ..

जिसपर मनु भी उसे गले लगा कर हसने लगा ..पैर मनु की आंखों में अभी कोई अलग सी चमक thi..jo आगे क्या रंग लेन वाली थी यह तोह आने वाला टाइम hi बता सकता है....

मनु इन सबके साथ अपनी ज़िन्दगी में बस्सी था, सुबह को चिंटू के साथ स्कूल उसके बाद पुष्पी के साथ उसके बाद में बाबा के पास रोज़ की training.uski लाइफ का यही रूटीन हो गया था.

उधर चिंटू के दिल में मनु के लिए गुस्सा भरा हुआ था ..टाइम अपनी राफ्तेर से बिट रहा था.. इस बिच हाफ ईयर के एग्जाम आये जिसमे मनु फिर बस्सी हो गया ,इस बार चिंटू भी लगा हुआ था पड़े में और बाकी सब भी लगे हुए थे ..क्युकी पिछली बार का रिजल्ट सबको कुछ ाचा सबक सीखा गया tha,sabak न बोलने वाला सबक जिससे हर किसी ने कुछ न कुछ सीखा था..

मनु ने यह सीखा था की अगर आप रात दिन किसी चीज़ के लिए म्हणत करो तोह कहीं न कहीं आपको उसका

फल ज़रूर मिलता hai.wahin मनु के बाकी दोस्त भी यह सिख चुके थे की अगर आपने खेलने के साथ पड़ने में ध्यान नहीं दिया तोह उसका असर आपकी एजुकेशन पैर पड़ता है ..और अपना प्यारा चिंटू

उसे भी सबक मिल गया था. की अगर आप अपनी पड़े को लेकर ज़रा भी चुके तोह रिजल्ट के साथ अछि बातीं आप कितनी भी करलो आंत में सब रिजल्ट देखकर बदल जाते hain..kyuki रिजल्ट कहीं न कहीं आपकी साल बहार की म्हणत बता देता hai..aisa नहीं है की रिजल्ट सब कुछ होता है ..पैर कहीं न कहीं आपके रिजल्ट को लेकर लोग आपका करैक्टर का इमेज बिल्ड उप कर लेते हैं..

जैसा अपने चिंटू के साथ हुआ tha.jab उसके घरवालों ने मतलब उसके माँ बाप ने उसका रिजल्ट देखा तोह उसका रिजल्ट में कम्पार्टमेंट आना उसके लिए एक डरवाना सपना साबित हुआ क्युकी हर maa-baap चाहते तोह अपने बचे को पास hi देखना चाहते hain.usper मनु का पास हो जाना और चिंटू का कम्पार्टमेंट लाना उसके माँ बाप को मनु से सिखने को कहना कहीं न कहीं चिंटू के घर में चिंटू की इमेज नेगेटिव कर रहा tha..jabki ऐसा थान यही हर नार्मल माँ बाप की तरह दयाल और ललिता सिर्फ अपने बेटे को नोर्मल्ली पास होते देखना चाहते थे .क्युकी प्रसाद और चिंटू के बारे में उन्दोनो को अचे से पता था किध वो पड़ने में कितने तेज़ hain.so दोनों माँ बाप सिर्फ उन्दोनो के पास होने पैर hi सतंतुस्ट हो जाते the.per यहाँ तोह चिंटू कम्पार्टमेंट के साथ मनु की हेल्प से पास हुआ था जिसके लिए उसके माँ बाप जब भी मौका मिलता मन ऊके जैसा बनने की सिख dete.un दोनों बेचारो को तोह मनु ने किसी भी तरह अपने फर्स्ट आने का कुछ बताया था nahi..kyuki उसे पता था अगर उसने ऐसा कुछ बताया तोह कहीं न कहीं दयाल और ललिता के मैं में अपने बचे को मनु से इन्सेक्युरित्य फील हो जाती …जो एक कमान सी बात है . की आपका बचा कमज़ोर हो वहीँ उसका साथी दोस्त बोलने चाल में ाचा हो जो आसानी से पास हो जाता हो ..तोह कहीं न कहीं उससे थोड़ी बहुत अपने बचे का कपरिसों करना हो hi जाता है ..और अगर कपरिसों हो तोह कहीं न कहीं दूसरा काबिल हो आपके अपने से ज़ादा सो जलन होना भी ज़ाहिर सी बाद है …और जब जलन हो तोह कब हु नफरत में बदल जाये किसे पता है..

सो यह सब बाते देखते हुए मनु ने अपनी रैंक के बारे में चिंटू कैग हर पैर कुछ बताया नहीं था..

और चिंटू अपने घर में जो रोज़ मन ऊके नाम से कपड़े होता रहता था हु अगर बता दे की घर में मनु फर्स्ट आया है सो उसके लिए तोह ताने और कपरिसों और बाद जाता और उसका अपने खुद के घर में जीना और मुश्किल हो जाता सो चिंटू ने ऐसा कुछ लिया नहीं tha..per फिर भी मनु ने जो हेल्प किट hi उसकी वजह से चिंटू पास हो गया tha..kyuki मनु जब चिंटू को पढ़ाया करता था कम्पार्टमेंट के टाइम पैर तोह चिंटू की माँ ललिता चिंटू और मनु पैर बराबर नज़र रखती थी ..क्युकी उसे चिंटू के बारे में अचे से पता था की अगर हु ध्यान न दे तोह चिंटू जोकि प्रसाद की तरह पड़े में काम ध्यान रखने वाला इंसान था हु श्याद hi पड़ने में ध्यान दे सो ललिता पूरी सकती के साथ दोनों पैर नज़र रखती thi..so चिंटू को भी अपनी मर्ज़ी न होते हुए भी मनु के साथ मज़बूरी में पड़ना पड़ता tha..kyuki अगर उसकी माज़री चलती तोह हु किसी भी कीमत पैर मनु से पड़ता नहीं …

ललिता ने अचे से देखा था की मनु ने कितनी म्हणत किट hi चिंटू की पड़ने में यहां तक की सारा एग्जाम पेपर सेट करके चिंटू को प्रेपर किया था जिससे की हर हाल में चिंटू पास हो जाये ...मनु तोह इसे कहीं न कहीं पुष्पी से जोड़कर चिंटू की मदद कर रहा था क्युकी उसे पुष्पी ने पुरे साल म्हणत से पढ़ाया tha.or मनु नहीं चाहता था की पुष्पी का खुद का सागा भाई फ़ैल होकर दुबारा उसी क्लास में रह जाये सो उसने पुरे जी जान से चिंटू को पढ़ाया था. ललिता ने खुद यह सब देखा था सो हु अचे से समझ गयी थी. की अगर चिंटू पास हुआ है तोह उसमे मनु की कितनी म्हणत शामिल hai.lalita हर रोज़ शाम को मन ऊके जाने के बाद पुरे दिन भर की बातें द्याल वर्मा को बताता थी ,,और यह सब दयाल भी अछि तरह से जनता था की उसके दोनों बेटे कितने नालायक hain.so दयाल बाबू को जब पता चला की चिंटू पास हो गया सो उन्हें अपने उस दिन के फैसले पैर जो उन्होंने मनु को चिंटू का दोस्त बनाकर सोचा था सुच होता नज़र आया जिसे उन्होंने ललिता से भी कहा की “देखो तुम उस दिन सोच रही thi,ki अनजान लड़का हमारे बेटे के साथ रहेगा तोह क्या होगा, अब तोह तुम अपनी आँखों से देख रही हो की वही अनजान लड़का खुद पास होने के बावजूद हमारे बेटे के लिए कितनी ईमानदारी के साथ म्हणत कर रहा hai??kya अब भी तुम्हे मेरा हु फैसला गलत लग रहा है? काश अपना बीटा भी उसकी संगती में सुधर जाए. ”

जिसपर ललिता ने कहा “हाँ जी मैं खुद अपनी इन आंखों से देख रही हूँ की मनु कैसे चिंटू के लिए म्हणत कर रहा hai.warna जब हु पास हो गया tha.toh हु यह भी सोच सकता था की उसे क्या ज़रूरत चिंटू की पैर देखो कैसे बेचारा चिंटू के लिए म्हणत कर रहा hai..kasam से आपने जब पहली बार मनु के लिए बताया था तोह मेरा दिमाग सोच में पद गया था पैर अब जब खुद देख रही हंट ओह समझ में आया की आपका हु फैसला बिकुल ठीक था. चिंटू अगर मन ऊके साथ रहेगा तोह कहीं न कहीं सुधर जायेगा.”

और जब चिंटू पास हुआ तोह उसके माँ बाप ने चैन की साँस ली की चलो पास तोह होगया .पैर क्युकी ललिता ने मनु की म्हणत देखि थी अपनी आंखों से सो अब मनु की बातें “की मनु से सीखो कुछ ..या अब मनु को hi देखलो “ ऐसी बातें चिंटू के घर में होना कमान हो गया था ,,जो चिंटू को अब मनु के लिए अब नफ़रत को अगले लेवल पैर ले गया tha.kyuki मनु यह मनु हु सुन सुनकर मनु से रात दिन आगे बढ़ने और मनु को निचा दिखने का कोई भी मौका जाने नहीं देना चाहता था.

खैर जब हेल्प इयरली एग्जाम हुए तोह इस बार सब अपने अपने हिसाब से त्यार थे सो इस बार रिजल्ट पहले के मुकाबले ाचा था चिंटू भी इस बार आराम से पास हो गया था जिसपर दयाल और ललिता की सुकून था की चलो अब लड़का पड़े को सीरियस ले रहा है ..मनु ने इस बार भी अचे नंबर लेकर सब दोस्तोव को चौंका दिया था. जब सब ने इसका कारन पूछा तोह मनु ने सिम्पली kaha”yaar कुछ स्पेशल नहीं किया बस जो थोड़ा बहुत पड़ा था सो याद रह गया था सो लिख दिया एग्जाम में ..बाकी तुम सब तोह अचे से जानते हो की यार मैं कोनसा पड़ने में जीनियस hun..Kismat है सो अचे नंबर आगये.”

जिसपर बाकियों ने भी सोचा यार हो भी सकता इस बार किस्मत साथ दे गयी हो इस बार मनु का.

खैर अजय भी अचे नंबर से पास हुआ था ..

पैर अभी भी अजय की होमवर्क न करने के वजह से मनु को सुन्ना पड़ता था . पैर मनु को जब भी नीता मम डंडे लगाती मनु हु hi करता था ..अजय को बहार रखना और चुपचाप पीटना .पैर मनु ने अब एक नया काम सीखा था जब भी नीता मम डंडे बजती तोह मनु पीटने के बाद नीता मम के पेअर चुकार चला जाता ..नीता मम को उसका यह बर्ताव बहुत हैरत से भर देता था की मैं इस इतना पिट देती हूँ न तोह यह अपने भाई को कुछ कहता है ..और न कभी मुझे गुस्से से देखता है और उल्टा मेरे पेअर चुकार जाता है. यह मनु है किस तरह का इंसान ..

वहीँ अजय भी अब बड़ा हो रहा था ..सो उसकी आजकल स्कूल में कभी कभार लड़ाई भी हो जाती थी अपने साथयूं से जिसपे कोई कहता की “तू एक नंबर का भाई का चमचा है …कुछ भी कहो तोह भाई का नाम बिच में ले आता है “ जो अजय को बिलकुल बर्दास्त नहीं होता था की कोई उसके भाई को कुछ kahe,kyuki उसका भाई उसके लिए क्या था यह उसने तब देखा था जब हु और मनु उनके घर के पास मौजूद आइस फैक्ट्री में खेलने गए थे उस दिन आइस फैक्ट्री में लोग काम थे मनु तोह अजय को बार बार मन कर रहा था की आइस फैक्ट्री कहलने की जगह नहीं है ..पैर क्युकी अजय ने जिद की थी सो मनु भी उसके साथ चला गया था.. वहाँ पूछ कर अजय एक पानी की टैंक के दिवार पैर चलने लगा था ..मनु उसे बार बार मन कर रहा थकी अजय अगर पेअर फिसला तोह पानी में गिर जायेगा पैर अजय नहीं mana.hua वही जिससे मनु डर रहा था अजय पानी में गिर गया ..तोह मनु आस पास देखने लगा की कैसे खिच्चून अजय को तब ताका जय दो बार डुबकी अलग चूका था. जब मनु ने देखा अजय डुबकी लगा रहा है तोह हु बिना कुछ सोचे पानी में उत्तर गया और अजय को खींच का निकला जिसके चाकर उसके पेअर में कांच भी घुस गया .अब क्युकी हु पानी का बड़ा टैंक था सो उसमे लोग शराब पिने के बाद कभी कभार बोतल फेंक दिया करते थे तोह वही कांच मन ऊके पेअर में लग गया था पैर मनु ने अजय को बहार निकला और नार्मल होने पैर इतना कहा की “अजय यार कभी तोह मान जाया कर “जिसपर अजय ने सॉरी कहा और घर पैर किसी को भी बताने से मन किया सो मनु ने वही किया था .जब उसने देखा की मन ऊके पेअर से खून निकल रहा है तोह उसने पूछा क्या हुआ तोह मनु ने बताया की अंदर कोई बोतल टूटी होगी सो लग गया जिस पैर अजय को बहुत बुरा लगा tha..use चोट के चलते मनु 1 हफ्ते लंगड़ाता रहा पैर उसने अजय से छू तक नहीं की ..सो अजय के लिए मनु की िज़ात क्या होगी आप समझ hi सकते हैं..

सो जब अजय को कोई मनु का नाम लेकर कुछ कहता तोह अजय उसे अचे से पिट डालता जिसकी कभी कभी नीता मम तक शिकायत पूछ जाती तोह फिर वही शामे haal…ajay बहार मनु अंदर और धंदे मनु पैर और पीटने के बाद मनु नीता मम के पेअर छूटा और निकल जाता …नीता मम को हैरत के साथ..

उधर चिंटू ने स्कूल में मनु खिलाफ क्लास में और मन ऊके दोस्तोव को रोज़ किसी न किसी बात पैर बड़कना शुरू कर दिया tha..har छोटी बात को बड़ा बनाकर उसने मन ऊके खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था, चिंटू की नज़र अब अजय पैर पड़ी तोह चिंटू ने अजय पैर गौर करना शुरू कर दिया था .उसने नोटिस किया की अजय अब लड़ने लगा था कोई मन ऊके बारे में कुछ भी बोलता तोह अजय उसे लडजाता था.

सो चिंटू ने अजय के क्लास में कुछ लड़को को मन ऊके बारे में कुछ झूंठ कहकर अजय को उसकसता और लाडवा देता था ..और उसके बाद वही नीता मम की क्लास जिससे मनु को गुज़ारना पड़ता था.

इस बार जब नीता मम ने मनु को पिता तोह मनु पेअर चुकार जाने लगा तोह नीता मम ने उसे रोका और kaha”manu इतने दिन से तुम पिट रहे हो पैर अजय को कुछ कहते नहीं हो जानते हो की आगे जाकर अजय बिगड़ सकता है..”

मनु शांति से bola”mam मैं जनता हूँ अजय छोटा hai.galtiyaan करता hai.per आज नहीं तोह कल हु समझदार हो jayega,kyuki अभी थोड़ा नासमझ है सो गलतियां करदेता hai.kyuki उसका बड़ा भाई होने के नाते उसकी जिम्मेदारी मेरी है सो उसकी गलतिओं की जिम्मेदारी मेरी होती हैं सो जब गलती की जिम्मेदारी लेते हुए उसकी जगह में पिट लेता हूँ ..”

नीता मम” अजय तुम्हारी जिम्मेवारी कैसे हुआ हु तुम्हरे माँ बाप की जिम्मेदारी बनती hai.uski पड़े लिखे पैर ध्यान dena.agli बार से अगर अजय ने कुछ किया तोह तुम अपने पेरेंट्स को लेका आना”

मनु “मम मेरे फादर और मदर रात दिन म्हणत करते हैं हमदोनो बहियूं के liye,,meri मदर जो की होममेकर हुआ करती thi.unhone भी अब वर्क करना शुरू कर दिया hai.so अजय मेरी hi जिम्दारी हुआ न! सो जब भी उसकी गलती हुई तोह पीटना मेरा hi बनता है क्युकी मैं उसे सही सीखा नहीं पाया.”

नीता mam”tum अपने आपको समझते क्या हो ??”

मनु “मम आपका मतलब”

नीता mam”yeh कोई फिल्म चल रही है क्या???”

मनु”????”

नीता मम” मेरा मतलब है तुम अजय को सिद्ध भी तोह कह सकते हो की अपना काम करे और शैतानी काम करे पैर तुम ऐसा कुछ नहीं करते हो उल्टा उसकी जगह खुद पिट ते हो ..इससे अजय पैर क्या असर पड़ेगा क्युकी की उसे अपनी कमी पता hi नहीं chalti.per तुम तोह हीरो बनना चाहते हो?”

Manu”mam ऐसा कुछ भी नहीं है हु अभी छोटा है मैं जनता हूँ की कमियां हर इंसान में होती हैं हर इंसान अपनी कमियों को लेकर थोड़ा सेंसिटिव होता hai.agar मैंने उसे कहा की तुम्हारी यह गलती है ..तोह हो सकता है उस बात को हु उल्टा hi ले ले और समझने के बजाये ज़िद्दी बन जाये सो उसे उसकी कमियां दूर नहीं होंगी मगर जब हु खुद रीलीज़ करेगा की उससे गलती हुई है तोह हु खुद उसे सुधरे तोह ाचा hoga..usse उसे आगे चलकर सही गलत का अंतर समझ आ jayega.so मैं इसलिए उसे कुछ कहकर निचा नहीं दिखाना चाहता हूँ”

नीता mam”so उसके बदले तुम पिटोगे ..तुम हीरो हो क्या? या कोई पुराने ज़माने से आये हो??”

मनु “जी नहीं मम उससे जो गलती होती है तोह किसी न किसी को जिमेवारी लेनी होगी …तोह मैं लेता हूँ उसकी jimewari..or किसी न किसी को पीटना है तोह ..उसकी जगह मैं पिट लेता hun..isme गलत क्या है?”

नीता mam”ek बात का जवाब दो तुम्हे मुझपर पैर गुस्सा नहीं अत की अजय की जगह मैं तुम्हे डंडे लगाती hun..or कुछ दिनों से देख रही हूँ की डंडे खान ेके बाद तुम मेरे पेअर और चुकार जाते ho..tum इससे मेरा मज़ाक उड़ाते हो??”

मनु “मम आप पैर गुस्सा होने का सवाल hi नहीं ..बनता आप तोह गलती की सजा देती hain..galti की सजा देने वाला गलत कैसे hua??.is स्कूल में हुम्हे यह सिख्या जाता है की कैसे एकलव्य की तरह गुरु की इज़्ज़त करो ..सो हम आपकी इज़्ज़त करते hain..or रही पेअर चुने की बात तोह मम आपकी हमारे प्रति चिंता की हम सभी आपके बचे हैं ..हम सभी गल्त्यां न करे और आगे जाकर अचे इंसान बने इसी सीख्शा देने वाले गुरु को मैं सिर्फ पेअर चुकार अपना आभार प्रकट कर सम्मान देता हूँ…”

नीता mam”toh तुम को मुझपर गुस्सा नहीं आता की इतना पीटते हो मुझसे और उल्टा पेअर चुकार सम्मानित करते ho..bullshit सीधे सीधे तुम मेरा मज़ाक बनाते हो पेअर चुकार..”

मनु “मम आपका मज़ाक बनाना मेरे लिए तोह पॉसिबल नहीं hai,kyuki आपके पीटने से सिर्फ हम गलती करने से बचेंगे तोह उसमे तोह हमारा hi भला हुआ na..per एक बात सच कहूं अगर आपको बुरा न लगे तोह..”

नीता मम “बोलो”

मनु “मम कोई साल भर से आपसे पिट रहा हूँ उसमे कहीं न कहीं आपसे मेरा एक रिस्ता सा बणग्या hai..aap मेरी गुरु तोह हैं hi ..पैर पता नहीं क्यों आपको देकता हूँ तोह कुछ अलग सा लगता है..”

नीता mam”kya अलग लगता hai??such सुच बोलो”

मनु “मम रहने दीजिये आप इस बात को जाने दीजिये मुझे आप गलत समजेंगी “


:हिंट:
 
अपडेट 42

बचपन की यादें

मनु “मम कोई साल भर से आपसे पिट रहा हूँ उसमे कहीं न कहीं आपसे मेरा एक रिस्ता सा बणग्या hai..aap मेरी गुरु तोह हैं hi ..पैर पता नहीं क्यों आपको देकता हूँ तोह कुछ अलग सा लगता है..”

नीता mam”kya अलग लगता hai??such सुच बोलो”

मनु “मम रहने दीजिये आप इस बात को जाने दीजिये मुझे आप गलत समजेंगी “

नीता mam”mujhe अचे से पता है तुम कितने चालू हो यह बाद बनाकर भी तुम मेरा मज़ाक बना रहे ho..kya बताओगे जबकि बताने को कुछ है hi नहीं..”

मनु “मम रहने दीजिये अगर आप ऐसे समझना चाहे तोह ऐसे सही..”

नीता mam”nahi आज तुम सब क्लियर करके जाओ वर्ण मैं समझ जाउंगी की तुम मेरा मज़ाक hi बनाते थे पेअर चुकार .”

मनु “मम हु तोह मैं अपने सपने में भी नहीं सोच सकता हूँ आपके बारे में की मैं आपका मज़ाक उड़ाकर आपका अपमान करूँ..”

नीता mam”toh साफ़ साफ़ कहो. तुम अगर गुरु की इतनी इज़्ज़त करते हो तोह इस मेरा आर्डर समझ लो “

मनु “मम आपने कहा की आपका यानि गुरु का आर्डर है तोह मैं केहड़ेटा हूँ की बाद में आप मुझे प्ल्ज़ जज न करना ??”

नीता मम “ok बोलो“

मनु “मम साल भर से पीटते हुए आपकी आँखों में एक चीज़ देखि मैं जो मेरे नोटिस में आयी..”

नीता mam”kya”

मनु “जब भी आपकी आंखों में देखा तोह एक ऐसा एहसास हुआ मुझे की मेरे मम्मी मुझे कुछ सीखा रही hain..kyuki आप बेसकॉक मुझे मरती thi..per मुझे आप में माँ का प्यार नज़र आता tha.ek ऐसी माँ जो अपने बचूं को गलत रस्ते पैर जानने से राकोने का पूरा हक़्क़ रखती hai..kyuki आप में मुझे माँ का hi एक रूप नज़र आता tha..jiske साथ hi मुझे यह भी पता है की आप हमारी टीचर या गुरु भी हैं सो मैं कभी कहकर कह नहीं सकता tha..per जब आपके अंदर की माँ को देखता तोह सचमे ाचा लगता tha..janta हूँ की आपको अजीब लगेगा यह की आप मुझे मरती हैं और मैं ऐसा सोचता hun..kyuki मेरी मम्मी और पापा कितनी तकलीफ से हमे पड़ा रहें हैं यह मैं जनता hun…raat को जब मम्मी ठक्कर आती हैं तब मैं उनके पैरो की मालिश करता हुआ …आपके अंडर छुपी माँ को याद करता tha..ki आप उप्पेर से बेहद सख्त रहती hain..per बाकी सब आपके अंदर छिपे माँ के इस रूप को देख hi नहीं पाते ..पैर मैं देख पता tha..so माँ उस रूप में पीटने से बचे का कैसा अपमान और जब कभी मेरी गलती पैर अगर मेरी मम्मी मुझे मारे तोह क्या मैं उनसे गुस्सा हो सकता हूँ भला ..कभी नहीं सो आपसे भला कैसा गुस्सा किस बात का गुस्सा ..जब मैं मम्मी का मज़ाक नहीं बना सकता तोह आपके अंदर माँ को देखकर क्या आपको लगता है की आपका मैं मज़ाक बना सकता हूँ कभी nahi…mam कभी नहीं आप मेरी टीचर हैं मेरी गुरु हैं आपका सम्मान हमसब का सम्मान है””

नीता मम ने यह सुना की मनु को उनमे माँ दिखती है …रोने पैर मज़बूर कर दिया …एक ऐसी सख्त औरत जिसके डर से बच्चों का पेशाब निकला जाया करता था ..टीचर तोह टीचर parent’s भी नीता मम से घबरया करते थे ..नीता मम जैसी सख्त औरत जिसके चेहरे पैर शायद hi किसी ने कभी स्माइल देखि हो.

उनकी आंखों में ाशूँ आना सोचना hi पॉसिबल नहीं tha..per आज हु सख्त औरत बिना रुके रो रही thi..bina रुके रो रही थी ..क्युकी मनु ने कहीं न कहीं सही कहा था नीता मम उप्पेर से बहले hi सख्त रहती थी बेशक्क डंडे बरसाती thi..per इसमें उनका मक़सद सिर्फ इतना था की बचे बिगड़ने से ज्यादा सुधरने पैर धयान दें..

पैर आज उनके अंडर हु माँ जो अंदर चिप्पी रहती थी …जिसने एक्सीडेंट में अपने बचे और पति को खो दिया tha..jiske बाद खुद के परिवार से भी प्यार मिलना कभी पॉसिबल नहीं हुआ पैर आज एक छोटे बचे ने उसकी ममता को जगा दिया tha..jo सख्ती का नक़ाब हु अपने चेहरे पैर रात दिन लिए घूमती थी उसके पीछे किसी ने झांक कर उसके पीछे छिपी माँ को देख लिया tha..so नीता मम का सबर टूट गया उनकी आंखों से रुका हुआ गम बह रहा था..

जबकि मनु की हवा टाइट हो गयी thi..ab क्युकी उसके लिए भी यह अजीब और अनोखी बात थी की नीता मम जैसी सख्त औरत रो रही thi..use लगा कोई बहुत बड़ी गलत बात कही है उसने जिससे नीता मम को हर्ट हुआ है सो manu”mam मुझे माफ़ कर दिज्ये मुझसे गलती हो gyi.mujhe लगता है ..आपको मेरी बात बुरी लगी हैं प्ल्ज़ मम आप रोयें नहीं ..”अब मनु को क्या पता भला नीता मम की लाइफ में क्या क्या बिता tha.so बेचारा टेंशन में सुख रहा था.

नीता मम जो अपनी चेयर पैर बेटी अपनी डेस्क पैर हाथ रखे अपने ऑफिस में मनु के सामने बैठी रो रही थी ,,मनु जिनसे बार बार माफ़ी मांग रहा tha..ki नीता मम कहीं कुछ मतलब फिर से उसे धंदा प्रसाद न दे दे सो उसकी हवा भी उड़ गयी थी.

नीता मम रोटी हुई अचानक कड़ी हुई और मनु की तरफ बड़ी और दुअडकर मनु को अपने साइन से लगा लिया नीता मम ne.manu हैरान और परशान मम के गले लगा हुआ था याय उन समझिये शॉक में था जो मम अचे से डंडे बरसती थी आज हु उसे गले लगये रो रही thi..sochna तोह दूर सपने में भी किसी ने नहीं सोचा होगा ..मनु का भी वही हाल था पर नीता मम उसे और कशकर आज अपने में समां लेना चाहती थी. मनु के लिए तोह शॉक से बहार आना अभी तक संभव hi नहीं हुआ tha.so बिचारा चुप चाप उनके साइन से लगा हुआ खड़ा था.

नीता मम रट हुए hi boli”beta एक बार फिर से माँ कहो न “.

मनु जो अब थोड़ा इस्थिति समझ गया था bola”maa”

नीता mam”ek बार फिर “

मनु “माँ”

नीता मम ने माँ सुना तोह मनु के पुरे चेहरे को चूमकर यह साबित करदिया की उन्हें कितना ाचा लगा hai..jab थोड़ा नार्मल हुई तोह मन ऊके सर पैर प्यार से हाथ फिरकर boli”manu बीटा मुझे गलत मत samjhna..tumne बिलकुल सही कहा था ..तुम्हारी सोच बिलकुल सही hai..per जब तुमने मेरे अंदर झांकर मेरे अंदर की माँ को देखा तोह मैं खुद को रोकक नहीं पायी …आज अगर मेरा कोई बीटा होता तोह बिलकुल तुम्हारे बराबर hota.so जब तुमने मुझे बताया की तुम्हे मुझमे अपनी मम्मी दिखती हैं तोह मैंने भी तुम में अपना बीटा देखा ..बीटा अगर तुम्हे बुरा लगा हो तोह मुझे माफ़ कर देना ..”

मनु “ मम कैसी बात कर रही हैं आप बाइलकी मैं तोह डर गया tha..kyuki मुझे लगा की मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है ,कोई गलत बात मेरे मुँह से निकली है जिसकी वजह से आपको हर्ट हुआ hai..aap मुझे अपना बीटा hi समझिये मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है बल्कि मेरे लिए तोह ाचा hi होगा की मैं कितना खुसनसीब हूँ की मुझे दो माँ मिली hain..or दोनों की सेवा कर सकूंगा ..”

नीता मम ने जब सुना की मनु उसे माँ मैंने लगा है तोह उन्होंने भी उसे कसकर अपने साइन से लग आलिया और kaha”such में आज मैं बहुत खुश हूँ मुझे मेरा बीटा मिल गया hai.ab तुम देखना कैसे अब मैं भी अपने बेटे को खूब प्यार करुँगी ..”नीता मम ख़ुशी के मारे न जाने क्या क्या कह रहीं thi..or न जाने कितनी बार मनु का सर और चेहरा ख़ुशी में उन्होंने चूमा ..मनु बस मुस्कुराकर उन्हें खुश होते देख रहा था..

नीता मम जो थोड़ी देर बाद नार्मल हो चुकी thi.asliyat में आकर boli”beta पैर तुम्हारे तोह अपने माँ -बाप हैं मैं कहांकहां तुम्हारी माँ बन रही hun…jab तुम्हारी अपनी माँ है तोह मैं भला क्या अहमियत rakhungi..tumhare लिए मैं बिना वजह hi ख़ुशी मन रही thi..mujhe माफ़ कर देना बीटा …”

मनु ने जब देखा की नीता मम फिर से पुराणी दुखियारी ज़िन्दगी में वापस लौटने वाली थी ..मतलब जो ख़ुशी उनके चेहरे पैर थी अब उसने एक उदासी का रूप ले लिया tha..jo मनु को कहीं न कहीं ाचा नहीं लगा जिसपर मनु ने नीता मम को एक बार फिर गले लगया और बोलै “ माँ आ पैसा क्यों सोच रही हैं प्यार तोह बांटने से बढ़ता है न की काम होता है और आपने यह कैसे सोच लिया की मैं सिर्फ अपने माँ बाप के बारे में hi सोचूंगा जिस पल आपको माँ कहा था उसी पल आपको माँ मान भी लिया tha..per अगर आपको यह बीटा पसंद नहीं तोह कोई बात नहीं ..मैं अपनी इस माँ का अपनी उस माँ के जैसा hi सम्मान करता रहूँगा अपनी आखिरी साँस तक ..”

चटककककककक!

यह चांटा पड़ा था मनु के गाल पैर नीता मम के हाथ से “खबर दर अगर आखिरी साँस के जैसी कोई भी वाहियात बात की तोह अचे से समझा दूंगी तुझे हाँ तुझे जब तू मुझे माँ मान चूका है तोह उस हिसाब से तुम मेरे बेटे हुए और मेरे बेटे ने कोई उलटी सीधी बात किट ओह उसे अचे से पीटकर समझने का हक़ बनता है मेरा …सो समझ लेना यह बात अपने दिमाग में”

मनु जिसके गाल पैर जोर दार चांटा लगा था ..अब क्युकी नीता मम थी भी लाभ चौड़ी सो जब मारा तोह ज़ोर से hi मारा था मनु को कुछ सेकण्ड्स के लिए तोह कान में siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii सुनाई दे रहा था उस कान से गाल सहलाता हुआ हंसकर बोलै” मेरी माँ आप जो चाहे कर लेना पैर आगे से चांटा मत मरना धंदा ज्यादा सेफ था कमसे काम सुनाई तोह बराबर देता tha..per अभी तोह कुछ कबूतर एक साथ उड़ते सुनाई दे रहे हैं”””

नीता मम को अब लगा उन्होंने गुस्से में ज्यादा ज़ोर से मारा था …मनु के गाल को देखकर उनकी आँखों में एक बार फिर से ाँसों आगये रोटी हुई boli”beta मुझे माफ़ कर दो बहुत ज़ोर से मारा है न मैंने मैं एक अछि माँ श्याद कभी बन hi नहीं सकती ..मैं हूँ hi ऐसी मनहूस जब कोई ख़ुशी मुझे मिली हमेशा दुःख साथ लायी ..मुझे माफ़ कर दो “नीता मम ने मनु का गाल सहलाते हुए भीगी आन्ह्कों से कहा ..

मनु ने जब नीता मम को रट हुए देखा तोह उस बहुत बुरा लगा की उसके ज़रा से कहने से नीता मम कैसे रोने लगी thi.usne आज महसूस किया की यह सख्त नीता मम इतनी सेंसिटिव भी हो सकती हैं उसे भी झटके लग रहे the..usne नीता मम के अंशु पूछकर कहा “माँ इससे ाचा तोह और मार लो पैर ऐसे रोकर मेरा दिल चलनी न karo,aapko यूँ रोटा देखकर मेरे दिल का हाल कसम से बहुत बुरा hai..meri माँ मेरे सामने रोये तोह मेरे लिए कितनी सर्मिंदगी की बात hogi.plz चुप हो जाओ”

नीता मम ने जब यह सुना तोह मनु को एक बार फिर अपने सीने से लगा कर उसे अपने अंदर समेत लेने की कोशिश ki..unke लिए दुनिआ का सबसे ाचा दिन था इस दिन में पहली बार कोई उन्हें माँ कहने वाला मिला था ..एक औरत के लिए औलाद का क्या मतलब होता है यह तोह कोई औरत hi बता सकती hai,,ek बार सोचकर देखना जिस माँ ने अपने पैदा होने वाले बचे के लिए कितने सपने सजाये होंगे ..पैर किस्मत का खेल देखो बेचारी ने न सिर्फ अपने अजन्मे bache(unborn child)ke साथ अपने प्यार करनेवाले पति को खो दिया बल्कि किस्मत ने उससे एक औरत को कम्पलीट करने का हक़ यही माँ बनने का हक़ भी चीन लिया ..कहने को तोह नीता मम जी रही thi..per ज़िंदा जैसी कोई बात नहीं थी उनकी ज़िन्दगी में जो नीता कभी खूबसूरती की मिसाल हुआ करती थी आज पति बचे और माँ बाप के मरने के बाद भाइयों के दुत्कारने के बाद कितनी मोती हो गयी थी क्युकी उसने एक बार को जीने की ीचा hi छोड़ दी थी पैर ज़िन्दगी से हर मान लेना कुछ लोगो की फितरत नहीं होती ,,,नीता भी उनमे से hi थी. पैर जहां उसे उसके पति का इन्शुरन्स का ाचा खाशा पैसा मिला और साथ में क्युकी हु अछि पढ़ी लिखी थी सो वाईस प्रिंसिपल थी स्कूल में तोह कमाई भी अछि खासी थी सो खाने पिने की टेंशन नहीं थी .अब क्युकी अकेली रहती थी सो मर्ज़ी का खाना और उसमे कोई रोकटोक न होने के कारन कब वेलोमे की कटरीना से कब डर्टी पिक्चर की विद्या बालन हुई खुद उस पता नहीं लगा ..और वैसे भी था कोण उसकी ज़िन्दगी में जिसके लिए परवाह करती सो हो गयी डबल साइज..

पैर आज उसके डबल सल साइज के पीछे किसे ने झंकार कर उसकी आत्मा को हिल्या tha..na केवल हिल्या था बल्कि उसकी सोई ज़िन्दगी में हर रोज़ की उदासी के अंधेरे से किसी ने उसकी ममता को एक नया 1000वाट का फ़्लैश लाइट जैकलर बहार निकल लिया था.

नीता की ख़ुशी का आप अब श्याद समझ गए होंगे सोचकर देखिये की मनु को कितनी बार उसने चूमा होगा की उसे मनु ने माँ कहा है..

खैर जब नीता नार्मल हुई तोह उसने मनु से उसकी फॅमिली के बारे में पूछा मनु ने सब सुच बताया क आइकॉन कोण है उसकी फॅमिली में और उसके माँ बाप कैसे सिर्फ और सिर्फ अपने दोनों बचूं के लिए म्हणत कर रहें hain..use तब समझ आया की मनु अपने माँ बाप को बुलाने की बजाय खुद पिट लिया करता था ,,,बिना कुछ बोले और कैसे हु अपने छोटे भाई की प्यार करता था ..तोह उसे भी ाचा लगा की ऐसा अचे संस्कार का लड़का जिसका दिमाग और नज़र भी तेज़ है कैसे उसके अंदर की साड़ी ीाचून को उसने देख लिया जिसे इतने साल गुजरने के बाद शायद hi किसी ने देखा ho..nita ने मनु के बारे में उसके दिमाग से लेकर उसके बॉडी लैंग्वेज के साथ उसके संस्कारो का भी अचे से हिसाब लगया और पाया की शायद उसका खुद का बीटा भी होता तोह शायद ऐसा नहीं होता ..अब जो है नहीं उससे कम्परिंग कैसी पैर क्या कर सकते हैं हमलोग ..

नीता ने अपने बारे में सिर्फ इतना बताया मनु को की हु एक विधवा hai.or उसका कोई बचा नहीं है ..जिसके बाद हु अपनी पुराणी ज़िन्दगी के बारे में सोचकर hi रो padi..jisper मनु को बुरा लगा मनु ने उसके बाद कोई सवाल नहीं किया की आएगी नीता से पैर जब हु रोई तोह उसके सर को अपने कंधे पैर रखकर उसके आंसू पूछे और प्यार से उसके माथे पैर किश करके बोलै “माँ तुम अब अपने बेटे की बात नहीं मानोगी ..जो बिता है उसका कोई कुछ नहीं कर सकता पैर जो आने वाला उसे आज हम हसी ख़ुशी रहकर सवार सकते hain..apne बेटे पैर भरोसा रखो आज के बाद आप अकेली नहीं हो आज के बाद आपके अकेलेपन और आपकी हर तकलीफ के बिच में आपका यह बीटा खड़ा मिलेगा पैर अगर आप ऐसे hi रोटी रहोगी तोह कहीं न कहीं मैं खुद को कसूरवार मानुगा क्या आप चाहती हो की मैं खुद को कसूर वार मानु..”???

नीता ने न में सर हिला दिया और चुप होकर सुकून से मनु कंधे पैर सर रखे लेती rahi.nita को आज बड़ा सुकून मिल रहा था ..उसे भी लग रहा था की आज उसका भी अपना कोई है जो उसके आंसू पूछ सकता है जिसके कंधे पैर हु सर रखकर सुकून से रह सकती hai..tabhi अचानक से उसे याद आया की स्कूल टाइम चल रहा hai..so हु दूर हटकर बोली “बीटा मैं तोह भूल hi गयी थी की यह स्कूल टाइम भी है और तुम्हरी शायद एक पीरियड मेरी वजह से मिस होगया होगा अब तुम jao.or एक बात ध्यान से याद रखना की मैं तुम्हारी माँ हूँ और तुम मेरे प्यारे बेटे पैर बीटा स्कूल में कभी किसी को यह बात पैट आना लगे क्युकी मैं अचे से जानती हूँ अपनी किस्मत को जब भी मुझे कोई ख़ुशी मिली है उसके साथ मैंने हर दफा किसी अपने को खोया है ..और मैं तुम मेरे प्यारे बेटे कैसे hi भी खोना नहीं चाहती hun..dunia की नज़र न लगे कभी मेरे बचे को ..समझ रहे हो न …अब जाओ वार्ना मैं ख़ुशी के मारे फिर भूल न जॉन की तुम्हारी क्लास भी हैं..??”

मनु ने नीता से सिर्फ सर हिल्या और kaha”aap रति भर फ़िक्र न करे माँ जैसा मेरी माँ कहेंगी वैसा hi hoga..”manu ने सिर्फ इतना कहा और पेअर चुकार नीता के माथे को चूमकर उसने उसे यह अशअस दिल्या की हु अपनी इस नयी माँ को भी सुमित्रा के जितना hi प्यार और सम्मान देगा..

इस के बाद मनु अपनी क्लास में चला गया . नीता की ख़ुशी आज अगर कोई वहाँ होता तोह साफ़ देख सकता tha.per सिर्फ आया और सिक्योरिटी गार्ड था जो ऑफिस रूम से दूर आपने कामो में लगे हुए थे ..

खैर दिन बिट गया ..कुछ कहती कुछ मीठी यादो के साथ शामको जब सुमित्रा काम से आयी तोह पूरी फॅमिली ने साथ में खाना खाया और बाद में मनु सुमित्रा के मन करने के बाद भी अपनी माँ के पेअर से घुटनो की मालिश कर देता है क्युकी मनु जनता था सुमित्रा बेशक मन कर देती है पैर उसके पेअर दिन भर खड़े रहकर काम करने की वजह से सूज जाया करते थे पैर माँ तोह माँ होती है खुद के दर्द से ज्यादा माँ को इस बात की फ़िक्र होती है की कहीं ज्यादा मालिश करने से उसके बेट ेके हाथ में दर्द न हो जाये पैर मनु अपनी माँ को अचे से समझता tha..so बिना कुछ बोले सुमित्रा के मन करने के बावजूद मालिश कर देता tha…sumitra उप्पेर से नहीं कहती थी पैर यह भी जानती थी की मनु की मालिश hi शायद हु वजह थी जिसके चलते हु सुकून से सो जाती थी और अगले दिन फिर नयी जंग मतलब काम पैर जाने के लिए त्यार हो पति थी..

इस मालिश से एक और नयी चीज़ हुई थी हु थी दोनों माँ बेटे अपने पुरे दिन के अचे और बेकार एक्सपीरियंस शेयर किया करते the..aise hi बात करते हुए मनु ने अपनी माँ पैर एक बम फोड़ दिया “मम्मी आज मुझे एक नयी माँ मिली है”

यह सुनकर सुमित्रा अपना दर्द भूलकर लेती हुई से उठकर बेथ gayi.bechaini उसके चेहरे से कोई भी समझ सकता था .. मनु जनता था की सुमित्रा की क्या हालत हो गयी है सुनकर की सुमित्रा को अब डर लगा था की ऐसा कोण आज्ञा जो उसके लादले बेटे को अपना बीटा बना रहा है ,,,

यूँ कहो की एक बार तोह सुमित्रा के पैरो के निचे से जमीं निकल गयी ..की उसको किसके साथ अपना हक़ बाँटना पड़ेगा .मनु अचे से समझ रहा था मम्मी की halat..usne बात न खींचते हुए साडी दिन की बात और नीता मम के और अपने नए रिश्ते के बारे में सब कुछ बता दिया जिसपर सुमित्रा को नीता के बारे में जानकार बुरा लगा की हु इस पूरी दुनिआ में अकेली है ..उसने मनु को गले से लगा कर उसका माथा चूमकर कहा “मेरे प्यारे बचे आज मुझे सुच में तुझपर फक्र है की तूने किनता ाचा काम किया hai..pehle तोह मैं डर गयी थी की पता नहीं तू क्या कह रहा hai..per जब तूने सब बताया तोह समझ आया की उस बेचहरी ने कितना कुछ सहा है ..कोई बात नहीं मेरे बचे ाचा hi किया तूने की उसे माँ मान liya.use भी जीने की नयी वजह मिल गयी मुझे कोई दिक्कत नहीं है किट ु उसे भी माँ कहे ..पैर मेरे बचे तू एक माँ बना चाहे 1000 माँ पैर तेरी इस माँ को भूलना नहीं ..तू नहीं जनता की मुझपर क्या बीती थी जब तूने कहा की मुझे नयी माँ मिल गयी..”

मनु “मम्मी फालतू में इमोशनल न ho..aapko अचे से पता है की ऐसा कुछ होनेवाला नहीं hai.mere लिए आज से दोनों बर्बर हो मैं दोनों से प्यार करूँगा और एक तरह से ाचा hi हुआ माँ दो हो गयी अब आपको भी कम्पटीशन मिलेगा.”

सुमित्रा हसकर बोली “ाचा बच्चू तोह अपनी माँ में कम्पटीशन लगाना चाहता hai..koi बात नहीं बीटा टब hi क्या याद रखेगा जा ले मज़े दोनों माँ के ”

ऐसे hi हलकी फुल्की नोक झोक में दिन ख़तम हो गया..

जहां किसी की आंखों में आज नए बीटा पाने की ख़ुशी थी ..तोह किसी को नयी माँ पाने ki..wahi सुमित्रा को इस बात का सुकून tha..chahe जो भी हो काम से काम मनु पैर को कोई धयान रखेगा..


वहीँ दो आंखों में मनु के लिए नफरत उसे सोने नहीं दे रही thi..kyuki उसके अपने घर में मनु हीरो सा बना हुआ था जिसकी वजह से उसकी नफरत एक लेवल क्रॉस कर चुकी thi.per उसने घर में एक भी शब्द नहीं कहा tha..kyuki उसे अचे से पता था की ..अगर उसने सिर्फ मनु का नाम भी लिया तोह उसके माँ बाप उसे मनु के जैसा बनने की सिख देंगे ..जो उसे गवारा नहीं tha..usne कुछ नयी प्लानिंग ाकर्णी शुरू कर दी थी मन ऊके खिलाफ …पैर उसकी प्लानिंग क्या मनु पैर सक्सेसफुल हो पायेगी या nahi…iska जवाब तोह आनेवाले कल पैर hi निर्भर था …:हिंट:
 
अपडेट 43

बचपन की यादें

वहीँ दो आंखों में मनु के लिए नफरत उसे सोने नहीं दे रही thi..kyuki उसके अपने घर में मनु हीरो सा बना हुआ था जिसकी वजह से उसकी नफरत एक लेवल क्रॉस कर चुकी thi.per उसने घर में एक भी शब्द नहीं कहा tha..kyuki उसे अचे से पता था की ..अगर उसने सिर्फ मनु का नाम भी लिया तोह उसके माँ बाप उसे मनु के जैसा बनने की सिख देंगे ..जो उसे गवारा नहीं tha..usne कुछ नयी प्लानिंग ाकर्णी शुरू कर दी थी मन ऊके खिलाफ …पैर उसकी प्लानिंग क्या मनु पैर सक्सेसफुल हो पायेगी या nahi…iska जवाब तोह आनेवाले कल पैर hi निर्भर था…

चिंटू सिर्फ और सिर्फ आनेवाले कल पैर ध्यान लगाना चाहता था …उसका सोचना और उसकी साड़ी इच्छा सिर्फ अब मनु को बार बर्बाद करने में या हर हालत में मनु को निचा दिखने में लगा गयी थी …

मनु भी कहीं न कहीं इससे अनजान नहीं था हु जनता था की चिंटू उससे कहीं न कहीं थोड़ा जेलस फील करता है .पैर मनु इस बात को सिर्फ इतना समझता था की चिंटू अपने घर में मनु के नाम का कम्पटीशन की वजह से थोड़ा बहुत जलना कमान सी बात थी ..पैर मनु को इस बात का अंदाज़ा है था की चिंटू को मनु की वजह से रात दिन ताने झेलने पड़ते थे जो चिंटू को उसकी मनु की उसके प्रति नफरत हर रोज़ बड़ा रहे थे ..

मनु इन सब से अनजान अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ने में लगा हुआ tha.udhar भानु का बिज़नेस दिल्ली में शिफ्ट हो गया था और शालिनी और कनु और नैना अपनी ज़िन्दगी में भी आगे बाद चुके थे ..क्युकी भानु की म्हणत और उसका इतने साल का एक्सपीरियंस और सही समय पैर सही फैसले लेने की सोच उसे एक कामयाब बिज़नेस मन बनने मैं काफी हेल्प कर रही thi..or कनु और नैना भी अपनी नयी ज़िन्दगी में आगे बाद रही thi..or शालिनी ने कुछ ंगो के साथ जुड़कर समाज में हेल्प करने का सोचा था …सो हु कई ंगो के साथ जुड़कर बस्सी रहने लगी thi.unki लाइफ कुल मिलकर काफी अलग हो चुकी थी …जिसमे उनके पुराने साथयूं को हु सभी hi अपनी ज़िन्दगी में दिल्ली की बेगमबाग में पीछे छोड़ चुके थे..

खैर अजय की लड़ाई थोड़ी ज्यादा होने लगी तोह मनु ने उसे समझया की यह सब बंद करके एपनिया आगे के बारे में सोचे और पड़ने पैर ध्यान दे …

अजय ने वैसे hi किया और अपनी पड़े और लिखे में बस्सी हो गया ….जिससे सबसे ज्यादा चिंटू को गुस्सा आया क्युकी अजय की होनेवाली लड़ाई में आजकल चिंटू का कोई न कोई हाथ होता था..

खैर टाइम बिता और एग्जाम हुए जिसमे सभी दोस्त पास हुए साथ में अपना चिंटू पायरा भी ..पैर मनु इस बार भी फर्स्ट आया जिससे सभी दोस्त कहीं न कहीं हैरान थे जिस पैर मनु ने वही पुराण किस्मत का राग छेड़कर बात कहातम की पैर ..इस बार चिंटू का शैतानी दिमाग त्यार था एक नयी खुराफाती चाल के साथ …

इस बार जब मनु बात अपने दोस्तोव से बात करके अलग हुआ तोह चिंटू ने सबको कहा “तुम सारे लगता है बेवक़ूफ़ हो जो मनु कहता है मान लेते हो ..कभी खुद का दिमाग लगया है या nahi..soch कर देखो जिसकी इससे पहले कोई रैंक नहीं आती थी आजकल फर्स्ट आता है और पुछू तोह कहता है ..किस्मत में था सो आज्ञा ..साले चिउटियूं उसकी किस्मत में क्या कुछ स्पेशल है जो फर्स्ट आता है हम्हारी किस्मत में फर्स्ट आना लिखा नहीं है kya???saalo हु तुम सभी को चुटिया बनता है …और तुम सभी बनते हो …कभी खुद सोचकर देखो क्या तुम्हे कुछ गड़बड़ नहीं लगती यह साला स्कूल के बाद कहाँ गयाब हो जाता है …सोचा है कभी और आजकल तोह सुना है वाईस प्रिंसिपल के रूम में इसका आना जाना लगा रहता hai..saalo मुझे तोह कुछ गड़बड़ लगती hai..per तुम सिर्फ अंधे और उन चूतिये कबूतरों की तरह ऑंखें बंद करके सोचो की आंख बंद करने से शिकारी उन्हें नहीं मरेगा ..पैर शिकारी चुटिया नहीं होता है हु उन चूतिये कबोतरूण को न सिर्फ मरता है बल्कि उनके मरने के बाद उनकी छुटियापन्ति पैर हस्ता अलग से hai..tum खुद सोचो की तुम्हे कबूतर बनाना है या शिकारी..

चिंटू बेशक पड़ने में ध्यान नहीं देता था पैर बात चित करने में तेज़ tha…use पड़ने में आप बेशक कमज़ोर कह सकते हैं पैर चिंटू को चुटिया समझना पॉसिबल नहीं hai.kyuki चिंटू लोगो को अपने उसे के हिसाब से जज करता था जब जिसकी ज़रूरत तब उसका साथ ,,किसी से बिगड़ ने आलू में से चिंटू नहीं था ..उसकी जजमेंट और मनु से उसने यह सीखा था की कब कोनसे टाइम पैर काम आजाये किसे पता ….

जी हाँ मनु से …

चिंटू मनु से बेशक नफरत करता था .क्युकी उसके माँ बाप का सख्त आर्डर था की चिंटू मनु के साथ रहे उससे सीखे ..जिस वजह से न चाहते हुए भी चिंटू अपने माँ बाप की वजह से मन ऊके साथ रहा करता था. चिंटू प्यारा बेशक मनु से नफरत करता था पैर मन ऊके बात करने और लोगो को ट्रीट करने के तरीके को अचे से ऑब्सेर्वे किया करता था ..जिससे उसे फ़ायदा hi हुआ लोगो के करीब आने में और लोगो को समझने में जहां मनु अपने बस्सी लाइफ में दोस्तोव को टाइम नहीं दे पता था वहीँ चिंटू अब काफी हद तक मनु के सब दोस्तों के साथ ज्यादा अचे से ताल मेल बैठा ने काफी हद तक सफल होने लगा था …

मनु भी चिंटू की नफरत समझता था ..पैर उसे नहीं पता था की चिंटू उसके बरदादि के प्लान हर रोज़ बनता hai…chintu को हु सिर्फ ाचा दोस्त समझता था ..उसका मन्ना था की अभी बेशक चिंटू उसे न समझे पैर एक नए क दिन उसे समझेगा ज़रूर …और चिंटू को हु अगर छोड़ भी देता तोह …पुष्पी के बारे में सोच कर मनु चिंटू को हर बार माफ़ कर देता था …या आप यूँ समझिये की पुष्पी की वजह से चिंटू को मनु झेल रहा था ..या धो रहा था मनु के पास बहुत सी वजह थी चिंटू से अलग होने की पैर सिर्फ एक वजह थी उससे जुड़े रहने की और हु वजह थी पुष्पी …

पुष्पी मनु और चिंटू के बीच की हु कड़ी थी जिसकी वजह से चिंटू को मनु हमेशा झेला करता tha..jahan मनु को पुष्पी के लिए प्यार और सम्मान उसके दिल में था .क्युकी मन ऊके कोई सगी बहिन नहीं थी सो पुष्पी को जबसे उसने बहिन मन था तोह कहीं न कहीं पुष्पी उसके लिए मायने रखती थी ..और क्युकी पुष्पी की वजह से हु ाचा पड़े कर प् रहा था ..बल्कि अजय का जिम्मा भी पुष्पी ने ले रखा tha..jiski वजह से मनु बाबा के पास अपना टाइम पूरी ईमानदारी से सिखने में लगा सकता tha..so आप समझ hi सकते हैं की मनु पुष्पी की वजह से कैसे चिंटू को झेल रहा था ..वहीँ चिंटू किन ाज़ार में मनु हु चुटिया इंसान था जिसको हु सिर्फ और सिर्फ अपने बाप और माँ का आर्डर मान कर मज़बूरी के साथ बर्दास्त करता tha..un समझिये दोनों में से शायद hi कोई खुश था इस दोस्ती में दोस्ती जिसमे सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे का भला सोचा जाता है ..वही दोस्ती इन दोनों के लिए सिर्फ और सिर्फ आर्डर या मज़बूरी बन गयी थी..

खैर जब मनु के दोस्तोव ने येह सब सुना तोह उनको गुस्सा बहुत आया की चिंटू उनको चुटिया कह रहा है और मनु जो उन सबका बचपन का दोस्त था उसके बारे में यह सब कह रहा था ..पैर क्युकी अब चिंटू भी उनसब के साथ काफी टाइम से रह रहा था और चिंटू ने जो बातें बोली थी उसमे बहुत कुछ नोट करने लायक था …जो लागबहग सबके दिमाग में गूंज रहा था.

(क्युकी उनसब के बारे में बताने जैसा कुछ स्पेशल नहीं है तोह उनसब को मैं दोस्त नंबर के हिसाब से लिखूंगा..)

उनमे से एक दोस्त ने चिंटू से कहा दोस्त no 1 …”चिंटू तोह तेरे नज़र में हमसब चूतिये हैं तोह हमसब चूतियों के बिच में तू हर रोज़ अपनी गांड मरवाने क्यों आता है ,…??

जिसपर उनमे से एक ने उस रोक्का और कहा दोस्त no 2”चिंटू तूने जो कहा है सोचने लायक तोह है पैर इसका यह मतलब नहीं की हम तेरी बातों में आकर मनु पैर शक करे …पैर तेरी बातों में कुछ पॉइंट थे जो सोचने लायक हैं..1 मनु आजकल कहाँ बस्सी रहता है.

2 मनु आजकल कोनसी पड़े कर रहा है जो मनु आजतक सिर्फ हमसब के जैसा पास होता था पैर आजकल रैंक लता है और हु भी कोई छोटी रैंक नहीं 1सत पोजीशन..

3 मनु का वाईस प्रिंसिपल के ऑफिस में क्या काम जो बार बार जाता hai…per तेरी बातों से कोई प्रोवे तोह नज़र नहीं अत …एक बात धयान रखना अगर झूठा निखा तू तोह सोच लेना आगे से हमारे साथ नहीं होगा …तू और तेरी हमारी कोई बात नहीं होगी इस बारे में …

तभी उनमे से एक बोलै “बाकी सबका तोह नहीं पता पैर लास्ट बात जो चिंटू ने कही हु सही है …”

सब उसकी तरफ देखने लगे की कोनसी बात चिंटू ने कही थी …

दोस्त no 3 “चिंटू ने कहा था की मनु आजकल वाईस प्रिंसिपल के ऑफिस में जा रहा था पहले जब मैंने पूछा था की मनु इतने चक्कर तेरे वाईस प्रिंसिपल के ऑफिस में क्यों लगते हैं तोह मनु ने बताया था की अजय के चक्कर में उसके चक्कर लगते हैं जिसपर मैंने भी मान लिया था की हो सकता है अजय की वजह से उसके चक्कर लगते हो पैर ..एक बार मैं कुछ ऐसा देखा जो मेरे दिमाग में आज तक खटक रहा है …पहले तोह मुझे विश्वाश नहीं हुआ की ऐसा हो सकता है पैर आज जब चिंटू ने यह सब कहा है तोह मैं भी इस बात पैर यकीं करने को मज़बूर हूँ कोई वाईस प्रिंसिपल और मनु के बिच में कोई रिस्ता है …??

चिंटू ने जब यह सब सुना तोह उसके दिल के तार बजने लगे की इतने दिन में आज उसका तीर सही निसाहने पैर लगा है..

सब दोस्त no 3 की तरफ देखने लगे और सोचने लगे ऐसा क्या देख लिया है इसने मन ऊके बारे में कहीं चिंटू सही तोह नहीं कह रहा है..

दोस्त no 3 “मैं एक दिन वाईस प्रिंसिपल के रूम के पास से जा रहा था की आया कोई सामान या कोई फाइल लेकर बहार आ रही थी ..उस टाइम के लिए दरवाज़ा खुला था क्युकी तुमको तोह पता है वाईस प्रिंसिपल के रूम में शीश ेके दरवाज़े हैं जिसकी शायद स्प्रिंग लूसे है सो दरवाज़ा बंद एपनिया आप होने में टाइम लेता है ..तोह मैंने देखा वाईस प्रिंसिपल उठी और उसने मनु को अपने गले से लगा liya…main शॉक हो गया ऐसा लग रहा था की मनु ने कुछ ऐसा बोलै था जो वाईस प्रिंसिपल को बहुत ाचा लगा था.”

दोस्त no 3 की बात ने सबको सोच में दाल दिया tha..sab अपने अपने हिसाब से सोचने में याय उन कहो की सब अपने अपने हिसाब से मनु और वाईस प्रिंसिपल की थ्योरी अपने दिमाग में बना रहे थे ..

जैसा की आप सभी को पता है मनु नीता मम (वाईस – प्रिंसिपल) को माँ मंटा है ..जिसपर नीता मम भी उसे बेटे जैसा ट्रीट करती थी ..आजकल दोनों माँ बेटे का प्यार उस वाईस प्रिंसिपल के रूम में हुआ करता tha…jahaan नीता मम कभी कभी मनु को अपने हाथ से बनाकर कुछ स्पेशल खिलाती thi..ya कुछ बहार से माँगा कर खिलाया करती थी एक माँ की हैसियत से मनु और नीता मम का रिश्ता उस ऑफिस का रूम जनता tha,,jisme नीता मम मनु को जब ज्यादा खुश होती थी तोह गले लग आलिया करती thi..jisme दोनों माँ बेटे दिल खोलकर एक दूसरे से पुरे दिन भर का हाल सुनते जिसमे कभी नीता मम रूत जाया करती जान बूझकर ताकि मनु मनाये उन्हें और मनु भी सब कुछ वैसे hi किया करता था जैसे नीता मम मनु से करवाना चाहती thi.or दोनों में माँ बेटे की तरह गले मिलना दोनों को सुकून देता tha..us रूम से बहार निकलते hi दोनों वापस स्टूडेंट और वाईस प्रिंसिपल होते थे जैसा की नीता मम का मन्ना था की मनु सबके सामने उन्हें मम hi कहे ताकि उनके रिश्ते पैर किसी की नज़र न lage,kyuki नीता मम का मन्ना था की उनकी ज़िन्दगी में कोई ख़ुशी ज़ादा देर ठहर नहीं पाती ..और मनु को जबसे उन्होंने बीटा मन था सो मनु पैर हु चाहती थी की सिर्फ उनका बीटा रहे जिसका किसी को पता न चले ताकि कहीं मनु भी किसी तरह उनसे अलग न हो पाए . मनु भी एक माँ की तरह उनका आदर और सम्मान करता tha.jo नीता मम कहती मनु हु मन जाता tha..woh भी सिर्फ नीता मम की ख़ुशी का ध्यान रखता tha.nita मम और मन ऊके बिच में एक अछि बॉन्डिंग हो चुकी थी माँ बेटे वाली ..

पैर उनके हिसाब से उनके रिश्ते के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था पैर जहां प्यार हो वहाँ दुश्मन न हो ऐसा तोह होना श्याद खुद प्यार को भी गवारा nahi..shyaad खुद प्यार भी खुद को साबित करने के लिए हर परीक्षा देने को त्यार रहता hai…ya यूँ कहो जहां प्यार है वहां प्यार के दुश्मन भी होते हैं.

पैर यहां प्यार माँ बेटे का था ..जिसको दोस्त no 3 ने देखा था ..उसके लिए भी विशवास करना मुश्किल था की जो नीता मम अपने सख्त बिहेवियर के लिए जानी जाती हैं उनहूँ मनु को गले लगा रखा था हु भी मुस्कुराते हुए उसके सर पैर हाथ फेरते हुए …नीता मम को देखकर पुरे स्कूल के बचे चाहे लड़का हो या लड़की (co-education स्कूल था बता चूका हूँ फिर भी याद करा रहा हूँ) का मुट्ठ निकल जाया करता था …पेरेंट्स तो पेरेंट्स टीचर्स की भी हवा निकल तित hi नीता मम की सख्ती के aage…is बात से अंदाजा आप लगा लीजिये की जब अस वाईस प्रिंसिपल की तरह नीता मम राउंड के लिए स्कूल में निकल तित hi तोह पूरा शोर मचने वाला स्कूल ऐसे सन्नाटे में चला जाता था जैसे गब्बर सिंह के आने पैर राम गर्ध में सन्नाटा हुआ करता था शोले मूवी में …

नीता मम की क्लास में जाने से पहले क्लास में कोई न कोई बोलता हुआ निकल जाया करता था की वाईस प्रिंसिपल राउंड पैर hai..bache चुप हो जाते थे टीचर भी ऐसे ईमानदारी से पड़ने लग जाते थे की शायद नीता मम इन्ही की क्लास न लेले ..कुल मिलकर अब आप समझ गए होंगे की नीता मम अक वाईस प्रिंसिपल का क्या खौफ था स्कूल में ..???

और जब दोस्त no 3 ने नीता मम को मनु को गले लगाकर उनके मन ऊके सर में हाथ फिरने की बात की तोह एक बार को सभी के कान के पास से कोई चील सी उड़ कर चली गयी …मतलब शॉक लगा ..खुद चिंटू की हवा निकल गयी यह सब सुनकर पैर अब जो बोल्दिया था सो पीछे नहीं हैट सकता tha..kyuki अगर हु अभी पीछे हैट जाता तोह पुरे दो साल से जो इतनी चापलूसी इन सबकी किट hi उसका फ़ायदा मिलता nahi..so भले hi उसकी अंडर से कितनी भी पहात गयी हो पैर चिंटू अपनी साड़ी पहटि हुई गांड समेटकर बोलै “साले चुतियूं अब तोह यकीं करो नहीं तोह नहीं तोह अपनी गांड मारो मुझे जो कहना था कह diya..tumhari मर्ज़ी मानो या बने रहो कबूतर, मैं कहता तोह तुमको यकीं नहीं आता पैर यह तोह तुम्हारे साथी ने खुद देखा हैकि मनु के और वाईस प्रिंसिपल के बिच में कुछ है.“

जिसपर दोस्त no 1 ने कहा “लकिन यार वाईस प्रिंसिपल कहाँ मनु kahan.socho एक बार कहाँ हु कहदोष औरत जिसे देखकर पूरा स्कूल यहाँ तक की हमारे पेरेंट्स भी स्कूल जाने से बचते hain..manu का और उसका गले लग्न समझ नहीं आया yaar..age का अंतर भी कुछ होता है या नहीं..??”

जिसपर चिंटू ने सोचा यह साला तोह बात बिगाड़ न दे सो बिच में hi बोल pada”chutiye हमेशा चूतिये hi रहेंगे सालो हमसब हैं hi कितने बड़े अभी 12 या 13 साल के. उसपर कहाँ हु वाईस प्रिंसिपल की आगे हमारी माओं के barabar,Saalo इस आगे में कर hi क्या सकते hain.abe सोचना एक बार यह भी तोह हो सकता है मनु उस वाईस प्रिंसिपल का जसस हो उस स्कूल में ??”

दोस्त no 2 “चिंटू लगता है तू कोई मूवी की कहानी अचे से लगा रहा है यहां साले चूतिये मनु भला जासूस बैंकर करेगा क्या उसे क्या जरूरत है जासूसी की ..उसका क्या फ़ायदा इसमें ??”

इसका जवाब चिंटू ने अचे से दिया “चूतिये हमेशा चूतिये जैसे hi सोचते हैं सालो भूल गए मनु आजकल फर्स्ट आ रहा है..”??

दोस्त no 2 “तोह उसमे क्या हुआ और उसका इससे क्या लेना देना hai,jassosi से”??

इस पहले चिंटू कुछ कहता दोस्त no3 bola”chintu का मतलब है मनु को जस्सोसि के बदले में रैंक मिल रही hai..yahi कहना चाहता है न तू”??

Chintu”saale बड़ा चालक है तू सही से कैच कर रहा है ..तूने बिलकुल सही कहा मनु को जासूसी के बदले में रैंक मिलती है हो सकता है वाईस प्रिंसिपल उसे कोई क्वेश्चन पेपर hi दे देती ho..sochna एक बार ??

चिंटू ने मैं में सोचा “साले चूतिये तुम चिंटू के बारे में समझे hi कहाँ ho.main अचे से जनता हूँ जितना सोचोगे उल्टा उलझ जाओगे ..तुम्हारे दिमाग को समझ में आ भी जाता पैर आये कैसे मनु तोह कहीं और होगा सो तुम्हे समझने के लिए मैं हूँ न ..न मनु होगा और रहा मैं तोह तुम्हे ऐसे hi उलझा कर रख दूंगा जिससे मन ऊके बारे में तुमसब सोच सोच कर पगला jaoge..ki मनु कहीं सुच में जासूस तोह nahi..or मनु को क्या पड़ी है जासूसी की …और बची वाईस प्रिंसिपल उसने पक्का मनु की को तारीफ वाली बात पैर उसे प्यार किया होगा जनता हूँ मैं उस मनु को अचे से जनता हूँ की कैसे हु अगर प्यार से बोले तोह पत्थर भी उसी की साइड ले लेता hai.usme भी प्यार जाग जाता hai.itna तोह अचे से समझ चूका हूँ उस मनु को ..

चिंटू ने यह बात बोलकर सचमे सबके दिमाग में अपना आखिरी वार कर दिया था जिसने अपना असर अचे से दिखाया जहाँ सब दोस्त मनु को एक अचे और सूची दोस्त की नज़र से देखते थे हु सब आज चिंटू की बातों में आकर मनु की गैर मोजुदगी में उसे गुन्हेगार की तरह समझ रहे थे ..इस आप मनु की किस्मत समझ सकते हैं की जब चिंटू अपने जाल में मन ऊके सब दोस्तोव को फसा रहा tha..toh मनु कहीं दूर आने वाले कल के लिए म्हणत से जूता हुआ था..

खैर दिन बिता पैर चिंटू ने जो कहा था सच कहा था …चिंटू ने सुच में सबके दिमाग में एक ऐसा बीज डाला था जिसके चलते सारे दोस्त अचे से दिमागी कसरत करने के बाद भी किसी नतीजे पैर नहीं आ प् रहे थे ..सबके दिमाग में मनु के वाईस प्रिंसिपल का जासूस वाला पॉइंट हथोड़े की तरह बज़्ज़ रहा था..

अगला दिन आया जिसपर सबने मनु से उसके बार बार वाईस प्रिंसिपल के रूम में जाने को पूछा तोह मनु भल कैसे बता ता की उसका और वाईस प्रिंसिपल नीता मम का माँ बेटे का रिश्ता hai.kyuki उसकी नयी माँ ने कहा था की उनके बारे में किसी को न पता चले ..और मनु ने खुद देखा था की कैसे नीता मम सेंसिटिव हैं सो अपनी माँ का आर्डर मानकर और ताकि कहीं फिर उसे नयी माँ को रट हुए न देखना पड़े तोह मनु ने kaha”yaar अजय के चक्कर में ऑफिस के चक्कर लगते हैं..”

जिसपर दोस्त no 1 ने कहा “तू हमेशा लंच हमारे साथ किया करता था पैर आजकल तू लंच में गायब हो जाता hai..baat क्या hai..sab ठीक तोह हैना “

मनु लंच की बात पैर सकपका गया उसे लगा कहीं उनमे से किसी ने उसे नीता मम के साथ खाना कहते हुए देख तोह नहीं लिया hai..so सँभालते हुए bola”yaar आजकल बस्सी रहता हंट ओह लंच नहीं ला पता घर से hi लंच करके आता hun.or जब लंच टाइम होता है तोह गुमने चला जाता hun.yahin कहीं स्कूल में hi गम लेता हूँ ..”

जैसे मनु ने सकपक्का कर जवाब दिया था .उस तरीके को उसके साथ बचपन से साथ रहनेवाले दोस्तोव ने अचे से गौर kiya,,,per बात जासूसी किट hi जो बिना सबूत सिद्ध पूछना मतलब सरासर बेवकूफी होता क्युकी अगर मनु जासूस है तोह हु जरूर नीता मम से कहता और नीता मम से पन्गा लेना उस स्कूल में शेरनी से पन्गा लेने बराबर hota..so मनु पैर शक और गहरा हो गया सबका …जिसमे चिंटू के चेहरे के रंग को देखकर कोई भी साफ़ साफ़ कह सकता था की चिंटू पायरा कितना खुश hai..manu ने भी देखा चिंटू के चेहरे के रंग को तोह मनु अचे से समझ गया की चिंटू ने hi यहां अचे से प्लानिंग करके उसे फसा दिया hai.or क्युकी यहां पैर मनु कोई और बात कह नहीं सकता था क्युकी मनु नीता मम और अपना रिश्ता तोह इनको बता नहीं सकता था …सो उनसब को मनु उनके दिमाग से लड़ने के लिए अकेला छोड़ गया..

अब क्युकी सभी ने गौर से मनु को सकपकाते हुए देखा था तोह सवाल hi नहीं उठता की कोई उसे मासूम samjhe..so बिना कुछ किये मनु उन्सब्कि नज़रों में गुन्हेगार बनगया था चिंटू की चालाकी के चलते..

आज के दिन कुछ ख़ास हुआ नहीं पैर मनु और दोस्तोव के बिच आज से एक ऐसे लकीर खींच गयी थी ..जिसपर चिंटू की आगे की साड़ी चालें और क्या रंग देखती यह तोह वक़्त hi बता सकता है..

खैर नया साल था तोह नए बचूं ने भी एडमिशन लिया था जिनमे लड़के लडकियां सभी शामिल थे ऐसे hi अगले दिन में कुछ एक लड़की ने मनु की क्लास में कदम रखा जिसके क्लास में कदम रखते hi हर लड़के का दिल उसकी छाती से बहार निकले को त्यार हो gya..tha और साड़ी लडकियां उस लड़की को देखकर गुस्से से जल बन रही थी क्युकी हु लड़की किसी प्यारी सी गुडिअ के जैसी प्यारी thi..jiski ऑंखें नीली थी ..जिसके होठ पतले और नाज़ुक थे बिलकुल किसी गुलाब की सुबह उस से भीगी हुई नरम और अधखुली पंखुड़ियों की तरह ..और बाल हलके सुनहरे the(light ब्राउन )टाइप के उसपर शर्दियों के दिन में उसकी स्कूल ड्रेस में होने बावजूद कोई भी उसे पसंद कर सकता था..

जैसे hi उसने क्लास में एंटर किया सारे लड़के उसे देखने लगे लड़कियों का भी यही हाल था पैर दो आंखें अपनी बुक में बस्सी थी ..और हु लड़की अचे से देख रही थी उन दो आंखों को जो बुक में बस्सी थी उस लड़की को जहां पूरी क्लास देख रही thi..wahin हु लड़की सिर्फ उन दो आँखों वाले शक्श को देख रही thi..jo बिलकुल भी उसकी तरफ देख नहीं रहा tha.us लड़की के लिए यह उसके ईगो को हर्ट करने वाली बात thi..ki कोई उसे इग्नोर कैसे कर सकता hai..or हु शक्श कोई और नहीं अपना मनु था..


उसलड़की के गुस्से से अनजान मनु बुक में ुलजः हुआ tha…ab यह नयी लड़की और उसका ईगो मनु को कैसे दिन दिखानेवाला था यह तोह टाइम hi बता सकता hai……..:hint:
 
अपडेट 44

बचपन की यादें

जैसे hi उसने क्लास में एंटर किया सारे लड़के उसे देखने लगे लड़कियों का भी यही हाल था पैर दो आंखें अपनी बुक में बस्सी थी ..और हु लड़की अचे से देख रही थी उन दो आंखों को जो बुक में बस्सी थी उस लड़की को जहां पूरी क्लास देख रही thi..wahin हु लड़की सिर्फ उन दो आँखों वाले शक्श को देख रही thi..jo बिलकुल भी उसकी तरफ देख नहीं रहा tha.us लड़की के लिए यह उसके ईगो को हर्ट करने वाली बात thi..ki कोई उसे इग्नोर कैसे कर सकता hai..or हु शक्श कोई और नहीं अपना मनु था..

उसलड़की के गुस्से से अनजान मनु बुक में ुलजः हुआ tha…ab यह नयी लड़की और उसका ईगो मनु को कैसे दिन दिखानेवाला था यह तोह टाइम hi बता सकता है……..

मनु इन सब बातून से अनजान अपनी बुक में ध्यान लगाए खोया हुआ था ,,क्युकी उसकी लाइफ में पहले से hi बहुत कुछ चल रहा था. जैसे उसे खुद भी महसूस हो रहा था उसके फर्स्ट आने से कहीं न कहीं उसके और बाकी बचूं में एक अनकही रेस लग चुकी थी. उसके खुद के दोस्त भी इस रेस में लगे हुए थे पैर मनु सिर्फ पड़े में लगा रहता था, उसे आजकल फ़ालतू में यहां वहाँ की बातों से कोई लेना देना नहीं था ..क्युकी उसे अचे से पता था की उसके माँ बाप उसके और उसके भाई के लिए कितनी म्हणत कर रहे थे ..

खैर जब उसे लड़की ने देखा जहां पूरी क्लास उस लड़की को देख कर कहीं न कहीं इम्प्रेस थी, जी हाँ काम से काम उसका तोह यही मन्ना tha,jabki लड़के सिर्फ उसकी पर्सनालिटी से इम्प्रेस थे और लड़कियां उसकी परफेक्ट बॉडी से इम्प्रेस और जलन दोनों में थोड़ी कन्फ्यूज्ड thi.per उस लड़की को तोह यही लग रहा था की कहीं न कहीं उसने सबका अटेंशन अपनी तरफ खींच लिया है ..जो की काफी हद तक सही था …

खैर क्लास टीचर सर आये उन्होंने कहा “अटेंशन एव्री बॉडी”

तोह मनु का भी ड़याँ टुटा उसने सर की तरफ देखा जो क्लास में एंटर कर चुके थे उन्होंने कहना शुरू किया ..

sir”jaisa की आप लोगों को पता होगा नयी क्लास शुरू हो गयी है तोह जाहिर सी बात है की नए बचे भी एडमिशन लेंगे”

जिस पैर सबने सर की और उस नयी लड़की को देखा ,,

सर ने आगे कहना शुरू किया “सो स्टूडेंट्स वे हैवे आल्सो नई स्टूडेंट हेरे , नाउ वेलकम थिस नई गर्ल हेर नाम इस निशा sharma.pleasewelcome हेर हेरे इन आवर क्लास . “

जिसपर सबने ताली (क्लैपिंग) से उसका सौगात किया.

“सो निशा प्ल्ज़ बे सीटेड हेरे “ सर ने कहा जिसके बाद निशा खाली सीट पैर बेथ गयी.

क्युकी स्कूल co-ad (कंबाइन गर्ल्स बॉयज बोथ) था जिसमे कोई कहीं भी बेथ सकता था. पैर फिर भी लडकियां एक साइड की रौ में बैठती थी और लड़के अलग साइड की रौ में सो निशा लकियों के साथ किसी कहली सीट पैर बेथ गयी जिसके बाद लड़कियों से उसने hi hello किया . और क्लास शुरू हो गयी. जिसपर सभी ने अपना धयान क्लास में लग्न शुरू कर दिया. जब पीरियड ख़तम हुआ तोह निशा ने बाकि लड़कयूँ से अपना इंट्रो दिया और कुछ एक तोह उसने अपने चार्म से अपना फ्रेंड भी बना लिया..

जिसमे जब उसने कुछ से पूछा की मनु की तरफ पॉइंट करके जो अपने आगे से दूसरे नंबर की बेंच पैर बेथ था पाने दोस्तों के sath.jo सिर्फ अपनी बुक में लगा हुआ tha.jise न किसी से कोई लेना था न कोई मतलब.

निशा “यह लड़का कोण है इसे देख रही हूँ की कुछ ज्यादा hi बुक में लगा हुआ है लगता है कुछ ज्यादा hi दिखावा करने की आदत है इसे …”

(लड़कयूँ के नाम नहीं लिख रहा हूँ क्युकी ज्यादा कोई स्पेशल रोले नहीं है उनका सो नंबर से समझ लेना आप लोग )

लड़की no 1 “ यह तोह शुरू से hi ऐसा है. उसे दुनिआ से कोई लेना देना नहीं है उसके लिए सिर्फ बुक्स hi उसकी दुनिआ हैं.”

Nisha”acha जी हाँ तुमने सही कहा हर क्लास में ऐसे नमूने होते hi हैं, जो सिर्फ बुक्स में दुबे रहते hain.per जब रिजल्ट आता है तोह पता चलता है.. की बुक में डूबने का तोह वह सिर्फ नाटक करते हैं”

निशा ने कहा था क्युकी उसे अचे से पता था किसी से कैसे बात निकलवाई जाती है…

जिसपर लड़की no 2 ने kaha”are तुम कहाँ की बात कर रही हो हु हमारी क्लास का टॉपर है पिछले दो साल से फर्स्ट आ रहा hai.or वह कोई दिखावा नहीं कर रहा यह उसकी आदत है ,होती है कुछ लोगों की आदत जो सिर्फ बुक्स में खोये रहते हैं.

निशा ने सुना की जिसे हु सिर्फ कोई लालू लड़का समझ रही थी हु तोह दो साल से टोपर है क्लास का सो उसे मन ऊके बारे में जाने की और इच्छा हुई सो उसने फिर नया तीर मारा..

निशा “टॉपर है तोह क्या हुआ है लगता तोह मुझे यह पूरा घमडी है ,,जो आस पास के लोगून से कोई वास्ता नहीं रखता होगा..”

जिसपर लड़की 1 ने जवाब दिया “निशा तुम जानती hi क्या हो उसके बारे में लगता है तुम कुछ ज्यादा hi चालाक बन रही हो अगर तुम्हे उसके बारे में जाना है तोह सीधे सीधे पूछ लो पैर उसके बारे में एक भी लफ्ज़ अगर गलत कहा तोह नए दोस्त दंड लेना हमसे बात करने की ज़रूरत नहीं hai..tumhe “

निशा ने जब यह सब सुना तोह उसके कान से धुआं hi निकल गया की कहा तोह एक hi लड़की ने था पैर गुस्सा सभी लड़कियों के चेहरे पैर बराबर tha..jiski उसने कोई कल्पना भी नहीं की thi..usne डाव बदला नरमी से उसने कहा “यार तुम लोग गलत समझ रही हो जो मैंने समझा बोल दिया सॉरी अगर तुम लोगों को हर्ट हुआ हो toh..main तोह यहां नयी हूँ मुझे क्या पता उसके बारे मैं..???”

लडकियां उसके सॉरी बोलने पैर नरम हो गयी thi.unhoone भी सोचा की नयी लड़की है उसे क्या पता मनु के बारे में सो उन्होंने भी माफ़ कर दिया.

जब सब नार्मल हो गयी तोह निशा ने फिर पूछा “ाचा तुमसब अगर बुरा न मनो तोह एक बात पूछ सकती hun,ki अगर कोई एक लड़की अगर किसी लड़के के लिए गुसा हो तोह समझ आता है . पैर तुम सब एक साथ उस लड़के के लिए अपनी नयी दोस्ती तोड़ने के लिए भी त्यार हो गयी इसकी वजह अगर सही समझो तोह पूछ सकती हूँ तुम सब से”

लड़की no 2 “बिलकुल पूछ सकती हो अगर तुम्हारे दिल में उसके लिए मेल नहीं है तोह “उसने निशा के चेहरे से उसके अंडर झांकते हुए कहा.

निशा उसकी बात का मतलब समझ गयी और boli”dekho तुम सब मेरी बातों को गलत सोच रही हो .हमसब अब जवानी में कदम रख रहे हैं और ऐसे में लड़के लड़कियों को रिसझाने में लग जाते hain..wahin यह लड़का मुझे थोड़ा अजीब लगा पैर जब तुमसब ने बताया की हु क्लास का टोपर है तोह थोड़ा और अजीब लगा क्युकी हमारी आगे के लड़के कितने एक्टिव होते हैं वहीँ उसका लेम बिहेवियर देखकर थोड़ा अटपटा लगा सो पूछ लिया तुमसब से “

लड़कियों को उसके जवाब से उसका मतलब समझ आज्ञा tha.ki निशा मन ऊके बारे में जानना चाहती है..

लड़की no 3 “देखो अगर तुम सिर्फ उसके बारे में जानना चाहती हो तोह ठीक है..”

लड़की no 2 “उसका नाम मानव सिंह है और हु क्लास का टोपर है यह तुम्हे पता चल चूका hai..or बस “

निशा “और बस “

लड़की no 2 “हाँ “

निशा “अरे बस कैसे मुझे तोह यह जानना है की जहां आजकल लड़के लड़को का साथ नहीं देते वहाँ सिर्फ उस मानव के बारे में सिर्फ पूछने से तुम साड़ी लडकियां मुझपे इतनी भड़क क्यों गयी thi,,kya इतना ख़ास है तुम सबके लिए हु मानव ..??की तुमने अपनी नयी दोस्ती की परवाह भी नहीं की उसके लिए???”

लड़की no 1 “ हाँ ख़ास है ..तुम तोह आज आयी हो हम बचपन से इस स्कूल में उसके साथ पद रहे हैं हु क्या है हमे अचे से पता hai..uske सिर्फ उसके उप्पेर तुम्हारे जैसी हज़ारो नयी दोस्त कुर्बान फिर भी हम कोई गम न करें ..”

निशा “यार ऐसा क्या हैं उसमे ज़रा मैं भी तोह सुनु की जिसके लिए तुमसरी लड़कियों का क्रेज इतना है, कहीं लव शुवे का चक्कर तोह नहीं है..?? हम्म”

लड़की no 3 “ अरे अगर हु एक बार बोले तोह हम सब उसकी हो जाएँ पैर हु एक नंबर का शरीफ hai..kehte हैं की लडकियां कभी अपनी सौतन बर्दास्त नहीं कर सकती पैर उसके कहने भर की देर है हमसब आप में उसके लिए एक दूसरे की सौतने भी बन जाएँ..”

निशा के लिए यह किसी झटके से काम नहीं था क्युकी उसने देखा था की मनु तोह बुक्स से ज्यादा मतलब नहीं रखता पैर यहां उसके लिए लड़कियां न केवल उसकी दोस्ती कुर्बान करने की बात कर रही थी बल्कि उसके लिए एक साथ बल्क ऑफर में गर्लफ्रेंड बनने को रेडी थी ..और हु भी बिना आपस में लाडे एक sath..ek के साथ कई फ्री वाले ऑफर के साथ.

निशा “सूचि ऐसा क्या है उस मानव में की तुम सब उसके पीछे पागल हो..??”

लड़की no 1 “एक खूबी हो तोह गानों उसकी तोह कई खूबियां है जैसे तुम्हे अब पता है की हु टोपर hai.sath में उसकी फिटनेस बड़ी मस्त है, बात चित करने का तरीका ऐसा है की आप नाब hi चाहो तोह भी उससे प्यार कर बैठोगे usse.or उसका हेल्पिंग नेचर उसके तोह कहने hi kya,,???hey क्लास में कितनी बार उसने मेरी उसकी और न जाने किस किस की हेल्प की है. जब भी उससे कोई भी हेल्प मांगे तोह हु पूरी हेल्प करता hai..ek बार मैं अपना प्रैक्टिकल बीमारी की वजह से नहीं बना पायी thi..yeh जो सामने कड़ी है न ..”

उसने सामने खड़ी लड़की की तरफ इशारा करके कहा.

लड़की no 1 “उससे कहा की मेरी हेल्प कार्डो प्रैक्टिकल फाइल में तोह कामिनी ने साफ़ मन कर दिया. जिसपर मैंने पहली बार मानव से बात की की मुझे प्रैक्टिकल फाइल में प्रॉब्लम है ..जब उसने मेरी बीमारी का सुना तोह उसने सिर्फ मुझसे प्रैक्टिकल फाइल मांगी मैं सोच में पद gayi..jis प्रैक्टिकल फाइल का काम 1 हफ्ते में नहीं होता हु उसने सिर्फ 2 दिन में खुद करके दे दिया. और पता है जब मैंने थैंक ु कहा तोह क्या बोलै ??”

निशा हैरत के साथ “क्या??”

लड़की no 1 “बोलै थैंक ु की क्या ज़रूरत है. इंसान इंसान के काम आता hi hai.tum मेरी क्लास फेलो ho.usme थैंक ु जैसा क्या hai,tumhari हेल्थ ठीक नहीं thi,so मैं ने फाइल कम्पलीट kardi.agar आगे कभी ज़रूरत पड़े तोह बिना किसी हिचकिचाहट के बोल देना जितना होगा हेल्प कर दूंगा..”

निशा इस बात से हैरत में पद gayi..jisper अगली लड़की ने कहा ..

लड़की no 2 “मेरी फिगर और दिअगरामस कम्पलीट नहीं थे मैंने अपने बड़े भाई से कहा तोह उसने कहा खुद करो मेरे बस की बात नहीं hai..agle दिन फाइल सबमिट करनी thi.main लंच में बैठी रो रही थी. मानव लंच में जब क्लास में आया तोह उसने मुझे रट हुए देखा. उसकी वजह puchi.tab मैंने साड़ी बात बताई जिसपर उसने मुझसे मेरी फाइल मांगी और अगले दिन मुझे सारे दिअगरामस के साथ सब कम्पलीट करके दे diya..or जब उसे थैंक्स कहने गयी तोह बोलै की आगे से रोने की बजाये अगर कोई प्रॉब्लम हो तोह उसे बता दूँ हु हेल्प कर देगा पैर अकेले बैठकर मैं रोऊँ नहीं..”

लड़की no 3”हु ऐसा hi है बिना किसी मतलब के सबकी हेल्प करदेता hai..na केवल लड़कियों की लड़कुँ की भी हेल्प करता hai.khud सोच कर देखो हमारे भाई या साथ के दोस्त भी आजके टाइम में बदले में कुछ न कुछ चाहते हैं पैर उसे तोह बदले में थैंक्स भी नहीं चाहिए.”

लड़की no 1 “क्लास टोपर हैं. हेल्पिंग नेचर है. बात करने का सलीका hai,,acha हैंडसम है, अछि फैसिक hai.aisa परफेक्ट लड़का आजके ज़माने में मिलता है भला. और अगर मिले तोह बेशक्क हम लडकियां शेयरिंग में अछि न हो पैर इसे तोह बिना किसी सवाल के शेयर कर लेंगी”

निशा ने जब सुना की मानव से हु सब लडकियां कितनी इम्प्रेस हैं तोह उसे अचे से समझ आ गया की क्यों उन सबने मानव के बारे में सुनने पैर उसे सुना दिया tha..or मनु के बारे में भी उसे आईडिया हो गया.

निशा भी उन सभी लड़कियों की बातों से मनु से इम्प्रेस हो गयी …

निशा को लंच में उन लड़कियों ने मनु से मिलवा दिया और निशा ने जब मनु से बात की तोह पाया की हु सभी लस्कियाँ सही थी, हु खुद भी मनु से अछि खासी इम्प्रेस हो गयी उसने मनु से तुरंत दोस्ती का हाथ बड़ा कर दोस्ती कर ली ..मनु ने भी निशा को दोस्त बना लिया. निशा में और मनु में एक hi दिन में अछि पत्नी लगी …

वहीँ आज एक दिन के लिए चिंटू बेचारा स्कूल नहीं आया था, अगले दिन जब हु स्कूल आया तोह उसने निशा को देखा और निशा अब मनु के साथ ज्यादा टाइम स्पेंड करने लगी थी. जिसपर टीचर ने भी निशा को मनु की हेल्प करने को कहा था..

और जब निशा को चिंटू ने देखा तोह एक बार तोह उसके मुहसे लार hi टपकने lagi..per जब निशा को उसने मनु के आगे पीछे नाचते हुए देखा तोह फिर से उसके दिल में मन ऊके खिलाफ नफरत ने बगावत कर di..use अपने कल स्कूल न आने पैर बड़ा गुस्सा आया की कल वो क्यों स्कूल नहीं आया ..वर्ण आज निशा उसके साथ होती. उसे लगा की मनु ने निशा को उससे चीन लिया ..जबकि मनु सिर्फ निशा को एक दोस्त की तरह ट्रीट करता था..

खैर मनु ने चिंटू से निशा को मिलवाया की चिंटू उसका दोस्त है और जब निशा ने चिंटू से हाथ मिलाया तोह चिंटू निशा को देखकर hi दिल हार गया tha.usne जब निशा का हाथ अपने हाथ में लिया तोह उसके दिल में निशा को पाने का ख्याल आने लगा.

(जानता हूँ 12 या 13 साल के हैं पैर जवानी भी आरही है और जवानी अपना रंग न दिखाए यह होना पॉसिबल नहीं है.)

खैर चिंटू से जब निशा मिली तोह उसने भी चिंटू को मन ऊके दोस्त की तरह ट्रीट kiya..chintu के लिए तोह निशा जैसी लड़की के साथ होना hi सपने से काम नहीं था. एक निशा का रूप दूसरा निशा का जॉली नेचर और साथ में निशा का ाचा ख़ासा बैकग्राउंड…

जी हाँ निशा के फादर का ाचा कहसा बिज़नेस tha.nisha के फादर अशोक शर्मा जोकि उस शहर के अचे नामी गिरामी बिजनेसमैन थे और उसकी माँ मंजू शर्मा जोकि एक होम मेकर थी. निशा जिनकी एक लौटी बेटी थी निशा अपने माँ बाप की एक लौटी बेटी होने की वजह से दोनों की लाड़ली thi.jiski हर ख़ुशी पूरा करना अशोक और मंजू की आदत बन गयी थी ..पैर निशा इतने अचे घर से होने के बावजूद भी रति भर घमंड से कोसो दूर थी.

चिंटू तोह निशा को देखते hi पागल हो गया tha.nisha तोह उसके लिए किसी पारी से काम नहीं thi.din अपनी रफ़्तार से बिट रहे थे मनु और निशा की दोस्ती भी और अछि होती जा रही थी. जिसमे चिंटू का निशा के लिए प्यार भी दिन रात बढ़ता जा रहा tha.woh लगातार कोशिश में लगा रहता था की कैसे हु निशा के करीब और करीब जा सके . वहीँ निशा जिसके लिए चिंटू सिर्फ और सिर्फ मनु का दोस्त था. चिंटू लगातार निशा से फ़्लर्ट करने की कोशिश करता रहता था. पैर निशा जिसे एक मज़ाक की तरह लेती thi.chintu उसके लिए हमशा आगे पीछे घूमकर अपनी मजनू गिरी झड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ता था.

इसी बिच में कई बार निशा को कई प्रॉब्लम आयी तोह मनु ने अपने नेचर के मुताबिक उसकी हेल्प ki.or बदले में थैंक्स भी नहीं कहने दिया निशा ko,kyuki निशा उसकी दोस्त thi,or दोस्ती के थैंक्स कैसा? कमसे काम मनु तोह यही मंटा tha.jabki निशा ने आजतक जिसकी भी हेल्प ली थी उन्होंने हमेशा बदले में कोई न कोई चीज़ की डिमांड रख दी thi.kyuki निशा पैसेवाली थी तोह जो भी उसकी हेल्प करता था बदले में निशा से कोई न कोई चीज़ (लिखे books,koi dress,koi gadget,ya कोई आइटम) की डिमांड कर दिया कर करते the.jabki मनु ने ऐसा कुछ भी उससे नहीं karwaya.balki थैंक्स भी नहीं liya.nisha के लिए अब मनु की तरफ एक नया लगाव सा होने लगा tha.kahin न कहीं मनु इसके दिल में एक नयो जगह बना चूका था.

जबकि मनु सिर्फ निशा को अपने दोस्त की तरह hi देखता था पैर निशा हर बेटे दिन के साथ मनु को पसंद करने लगी थी.

एक दिन निशा ने मनु को अपने घर पैर इन्विते किया. चिंटू भी वहीँ था, चिंटू को हैरत हुई की निशा ने उसे एक बार भी नहीं कहा पैर मनु को सिद्ध घर आने का इनविटेशन दे दिया. मनु को थोड़ी हैरत हुई क्युकी उसने निशा के बारे बहुत सी गॉसिप सुन राखी थी. की निशा एक रिच फॅमिली से आती hai.or खुद निशा ने जब उसके पिता अशोक शर्मा का जिक्र किया तोह क्युकी मनु बाबा के यहां यह नाम सुन चूका था और अचे से समझ चूका था की निशा कितनी अमीर hai.so हु अब निशा के साथ कैसे जाता उसके ghar.kyuki उसे अपने फॅमिली प्रोब्लेम्स के बारे में भी अचे से पता tha.so मनु ने आगे पीछे सोचा और मन कर दिया पैर निशा क्युकी अपनी फॅमिली की लाड़ली बेटी thi.or माँ बाप ने बड़े लाड प्यार से उसकी परवरिश की thi.jiske एक इशारे पैर उसकी माँ बाप के साथ पुरे नौकरो की फुआज नाचने को त्यार हो जाती thi.woh भला इतनी आसानी से कैसे मान जाती.

सो अड़ गयी ज़िद पैर थक हार कर मनु ने बहाना बनाया “देखो मैं अकेला नहीं आ सकता हूँ चिंटू भी अगर मेरे साथ आएगा तोह आ जाऊंगा “मनु जानता था की चिंटू उससे कहीं न कहीं नफरत करता hai.or किसी भी कीमत पैर चाहे कुछ भी हो जाये चिंटू उसके साथ नहीं आएगा, पैर चिंटू तेरा निशा के प्यार में दीवाना उसके लिए तोह यह भी एक नया मौका था निशा के और करीब जाने का, हु भला ऐसा मौका छोड़ता क्या???

चिंटू तुरंत bola”kaisi बात करता है मनु भला मुझे क्या प्रॉब्लम hogi,ek एंजेल मुझे अपने घर आने का इनविटेशन दे और मैं मन कर दूँ ,तोह उपपरवाला मुझे कभी माफ़ नहीं karega.main ज़ोरोर आऊंगा”

मनु के लिए यह कोई चम्तकार सा tha,ki चिंटू उसके साथ आने को हाँ कह रहा था जब मनु ने चिंटू का डाव उल्टा पड़ता देखा तोह उसके पास कोई बहाना hi नहीं बचा था .सो हु निशा से बोलै ..

Manu”thik है निशा हम दोनों आएंगे तुम्हारे घर”

निशा को तोह मैं मांगी मुराद पूरी हो गयी thi.usne देखा की चिंटू ने हाँ कहा तोह मनु भी उसके घर आ रहा है ..ख़ुशी में उसने चिंटू को गले लगा लिया और थैंक्स kaha.chintu के लिए तोह यह टाइम hi रुक गया था जिसके सपने उसे रात दिन सोने नहीं देते the..uske गले हु कभी लगेगा ऐसा तोह सपने में भी पूरा नहीं हो पाया tha..jabki आज निशा ने खुद उसे गले लगाया हुआ tha..use तोह उसकी पूरी दुनिआ हवा में उड़ने का एहसास करा रही थी.

निशा ने तोह चिंटू को सिर्फ इसलिए गले लगया tha.ki मनु सिर्फ उसकी वजह से उसके घर आएगा ..और उसके लिए मॉडर्न होने की वजह से गले लग्न बड़ी कॉमन सी बात thi,per चिंटू ने तोह पता नहीं क्या क्या सोच लिया था.

खैर अगले दिन स्कूल के बाद तीनो निशा कैग हर गए तोह मनु और चिंटू ने देखा की कितने बड़े और आलिशान घर में निशा रहती hai.manu को तोह आईडिया था क्युकी उसे निशा के फादर के बारे में अचे से पता था की हु कितने रिच hain..so उसने कुछ ख़ास रिएक्शन नहीं diya..per चिंटू प्यारे किट ओह आँखें hi खुली रह गयी निशा का घर देखकर उसने तोह पता नहीं क्या क्या सपने सजा लिए की निशा अगर पैट गयी तोह उससे शादी करेगा और अगर शादी हो गयी तोह ghar-jamai बैंकर यहीं पैर ऐश करेगा..

खैर निशा उन्हें अंदर ले गयी गार्ड ने निशा के साथ जब देखा की कोई आया है तोह गेट खोला और अंडर इनफार्मेशन दी.

निशा जैसे hi अंदर गयी तोह दरवाज़े पैर hi उसकी माँ मंजू शर्मा ने उसका सौगात किया ..जिसपर मनु ने आगे बढ़कर आदत के हिसाब से मंजू के पेअर छू लिए. चिंटू ने सिर्फ हाथ जोड़ कर नमस्ते की.

जब मंजू ने दो लड़कों के साथ में निशा को आते देखा तोह कुछ सोच में पद gayi..or बोली

मंजू “बीटा तुम दोनों में से मनु तुम हो न “मंजू ने मनु की तरफ इशारा करके पूछा.

मनु हैरत के साथ bola”anty जी आपको कैसे पता की मैं hi मनु हूँ..”??

मंजू “बीटा अचे से जानती हूँ तुमको बेशक तुमसे कभी मिली नहीं पैर आजकल मेरे घर में रात दिन तुम्हारा नाम आजकल ट्रेंडिंग में है..”

मनु हैरत के साथ देखने लगा. चिंटू भी इस समय हैरत में tha.ki मनु को निशा की माँ कैसे जानती हैं..

मंजू ने फिर चिंटू की तरफ इशारा किया “तुम जरूर चिंटू हो है न…??”

चिंटू ने भी हाँ में सर हिला दिया.

Nisha”mom क्या सब बातें गेट पैर hi करनी है आज कमसे काम अंदर तोह आनेदो प्ल्ज़”

मंजू “ओह्ह! सॉरी बीटा भूल गयी थी आओ चलो “

मंजू सबको अंदर ले gayi.jahaan एक दर्जन (dozen)naukar हाथ बन्दे खड़े the,manju ने निशा की तरफ देखा..

निशा ने चिंटू और मनु से पूछा “सम refreshment’s और सम स्टार्टर्स और सम स्नैक्स “

चिंटू “पिज़्ज़ा मिलेगा तोह हु hi बनवा दो..”

जिसपर निशा ने इशारा किया एक 3 नौकर एक साथ चले gaye..nisha ने अब मनु से पूछा ..

मनु मंजू की तरफ देखकर बोलै “मैं सिर्फ माँ के हाथ का आजतक खता आया hun..plz अन्त्य जी आप मुझे गलत न संजना मुझे इंसबकी आदत नहीं hai.per अगर आपके प्यार भरे हथून से बानी चाय या आपके प्यारे हथून से एक गिलास पानी भी चल जायेगा..”

मंजू ने जब मनु की यह बात सुनी तोह उसके चेहरे पैर एक मुस्कराहट आ gayi,ki कैसे मनु ने फर्स्ट टाइम उससे मिलते hi उसके पेअर छू लिए और अब बड़े सम्मान के और तारीफ के साथ उसके हाथ की चाय की डिमांड कर di..or तारीफ किसे पसंद नहीं hoti..bhala सो मंजू के दिल में भी मनु ने अपनी आते hi एक जगह बना ली..

मनु ने देखा की मंजू उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही है ..तोह उसे लगा की इतने बड़े घर की मालकिन को उसने अपने लिए चाय के लिए सिद्ध बोल diya..kahin उन्हें बुरा न लगा हो..

तोह मनु उठा और मंजू के पास जाकर bola”sorry अन्त्य जी मुझे माफ़ करना मैंने आपको देखा तोह माँ सामान समझा आपको देखकर माँ की याद आयी सो आपके इंप्यारे hathoon(hath की तरफ इशारा करके )की चाय की डिमांड कर बैठा यह भी भूल गया की आपके इतने सारे नौकरो की फौज hai..i म सो सॉरी अन्त्य ji..agar आपको मेरी बातों से हर्ट हुआ हो तोह माफ़ करदेना …”

मंजू ने बड़े प्यार से उसके सर पैर हाथ फेरा और कहा “इसमें सॉरी की क्या बात hai..tumne कोई इतनी बड़ी डिमांड भी नहीं की जो की पूरी न हो sake..tum बैठो अभी चाय बनाकर लाती हुन्न”

मनु “अन्त्य जी वैसे मेरा विशवास है जो मज़्ज़ा आपके इन प्यारे हथून से बानी उस प्यारी चाय में होगा हु किसी 5 स्टार रेस्टोरेंट के टॉप क्लास पिज़्ज़ा या बर्गर में कहाँ ??

जिस बात पैर निशा और मंजू के साथ मनु जोर से हसने लगे पैर चिंटू को बहुत बुरा लगा क्युकी कहीं न कहीं यहां पैर मंजू पैर भी मनु का चार्म चल रहा था ..और दोनों माँ बेटी उसका स्पेशल ख्याल रख रही thi.jabki हु सिर्फ अपना पिज़्ज़ा खा रहा था उसे सिर्फ भूले बिसरे निशा या मंजू में से कुछ बोल देता तोह बोल देता पैर मनु तोह इस समय सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन था.. दोनों माँ बेटी का ..

खैर चाय खुद मंजू बनाकर लायी और सर्वे की मनु ने चाय पि तोह अपने स्टाइल में kaha”such में माँ के हाथ से बढ़कर कुछ नहीं hai..kya स्पेशल चाय बनाई है अन्त्य जी मेरा अंदाजा बिलकुल ठीक था की आपके इन प्यारे हथून से बानी चाय में जो मज़्ज़ा है हु किसी और चीज़ में कहाँ .???”मनु ने चिंटू की तरफ देखकर kaha..jisper सब हास्पदे चिंटू भी सबका साथ देते हुए हसने लगा पैर अंदर से हु गुस्से के मारे उब्बल रहा tha..use निशा और उसकी माँ का मनु को इतना स्पेशल ट्रीट देना ाचा नहीं लग रहा tha..use तोह ऐसा लग रहा था की उसके वहां होने न होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने wala..khudko इग्नोर होता हुआ महसूस कर रहा tha..chintu और चुपचाप पिज़्ज़ा खा रहा था..

या यूँ कहो बजती अपनी जगह और कभी कभी मिलनेवाला स्पेशल शेफ के हथून बना पिज़्ज़ा अभी अपनी jagah.chintu भी बजती के साथ पिज़्ज़ा पचने में लगा हुआ था..

मनु जब चाय का सिप लेता तभी तारीफ करता मंजू ki…”kya बनाई है आपने चाय आंटीजी वह इसके लिए साड़ी दुनिआ के पिज़्ज़ा कुर्बान ..”

सब फिर चिंटू को पिज़्ज़ा खता देखकर हसने lage..ki तभी एक आवाज़ आयी ..”कोण पिज़्ज़ा कुर्बान कर रहा है bhai,hume भी तोह पता चले “”
 
अपडेट 45


बचपन की यादें

सब फिर चिंटू को पिज़्ज़ा खता देखकर हसने lage..ki तभी एक आवाज़ आयी ..”कोण पिज़्ज़ा कुर्बान कर रहा है bhai,hume भी तोह पता चले “”

यह आवाज़ अशोक शर्मा किट hi जो अभी हाथ में एक फाइल लिए आये the..jisko देखकर निशा उथल कर अशोक के गले लग गयी और अशोक को अपने साथ कीचकर ले आयी और बोली “पापा यह है मनु और चिंटू मेरे स्कूल फ्रेंड्स “

चिंटू ने अपनी आदत के मुताबिक दूर से hi हाथ जोड़कर नमस्ते अंकल कर diya..per मनु ने आगे बढ़कर अशोक के पेअर छुए जिसपर अशोक ने खींच कर उसे गले से लगा लिया और kaha”so तुम हो मनु भाई तुमसे मिलने का हमारा भी बड़ा मैं tha..pata है तुमको हमारी राजकुमारी साहिबा रात दिन तुम्हारा नाम कितना लेती हैं मनु यह मनु who..aaj जब तुमसे मिला तोह समझ aaya.tumhare संस्कार और तुम्हारा यह चारिस्मैटिक नेचर साफ़ साफ़ बता रहा है की तुम में कितनी खूबियां हैं..”

मनु हैरत से अशोक को देखने लगा निशा और चिंटू भी हैरत से देख रहे थे की अशोक का मतलब क्या है और मनु से पहली बार मिलकर उसने ऐसे कैसे उसका नेचर जान liya..per मंजू अभी भी अशोक के साथ मुस्कुरा रही थी..

निशा से जब रहा नहीं गया तोह उसने पूछ hi liya”papa आप तोह पहली बार मिल रहे हैं मनु से तोह आपको उसका नेचर कैसे पता चला..???”

अशोक “बीटा तुम्हारी माँ को तुमने कितनी बार चाय बनाते हुए देखा है..??

निशा “पापा ऐसा तोह मैंने कभी ध्यान नहीं दिया..”

अशोक “तुम्हारी माँ सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे पापा यानि मेरे लिए चाय बनती hai..or जब मैंने उसे मनु के हाथ में उसके हाथ की चाय को देखा तोह इससे भी तुम्हारी समझ में नहीं आया की तुम्हारी माँ ने उसे कितना स्पेशल ट्रीटमेंट दिया hai.bina मंजू के दिल को छुए कोई उससे आजतक कुछ नहीं करवा पाया hai..yahaan तक की उसने आजतक अपने खुद के घर में भी कभी चाय नहीं बनाई, किसी के लिए तोह अब तुम समझी मैं क्या कह रहा था..”

अशोक की बात सुनकर मनु को भी समझ आज्ञा की अशोक की सोच और समझ कितनी तीखी hai..jo की एक अचे बिजनेसमैन की निशानी hai.jisne सिर्फ उसके हाथ में चाय से hi उसके नेचर के बारे में इतना कुछ समझ liya.wahin बाकी सब भी अशोक के दिमाग की डट दे रहे the,,jisme चिंटू उप्पेर से तोह सबके साथ मुस्कुरा रहा tha.per अंडर से मनु से जलभुनकर राख हुआ जा रहा था..

खैर मनु ने अशोक से kaha”uncle सिर्फ चाय से आपने मेरा नेचर कैसे डीडे कर liya..yeh कुछ समझ नहीं आया..”???

Ashok”beta उसकी एक नहीं कई वजह हैं एक मेरी बेटी जिसके दिमाग में hi जगह बनाना कितना मुश्किल है यह हमसे पुछू और दूसरी वजह बता hi चूका हूँ मेरी ओने एंड ओनली वाइफ जिसने अपने हाथ से तुम्हे चाय बनाकर दी और रही तीसरी वजह मैंने खुद तुम्हे देखा की तुम कितने संस्कारी हो .फर्स्ट टाइम मिलने के बावजूद तुम्हारा जेस्चर मेरे साथ उसे देखने के बाद hi मैंने इतना सब kaha..so श्याद अब तुम समझ सकते हो मेरा मतलब”??

मनु ने हाँ में सर hilaya..jiske तुरंत बाद hi गेट पैर कोई आया मंजू ने खुद hi जाकर गेट खोला ..

मंजू ने थोड़ी देर के बाद आकर अशोक से कहा “सुनिए ऑफिस से कोई आया है केहरहा hai..ki फाइल कब तक कम्पलीट होगी.”

जिसपर जो अब तक अशोक हसकर बात कर रहा था. थोड़ा परेशान सा हुआ और उठकर चला gaya..manju को कुछ गड़बड़ लगी तोह हु भी उसके पीछे चली गयी..

अशोक “अरे तुम क्यों आगयी आराम से बैठो बच्चों के साथ..”

मंजू “आपको अचे से जानती हूँ बीवी के साथ मैं आपका फर्स्ट लव भी हूँ सो आप बोलो या न बोलो मैं अचे से जानती हूँ की आप कब टेंशन में हैं बात क्या है”???

अशोक “जनता हूँ तुमसे कुछ छुपा नहीं पाउँगा तभी उठकर अंडर चला आया ,तुम जानती हो न की मैं किसी प्रोजेक्ट को लेकर साल भर से म्हणत कर रहा hun.uski फाइल लाया हूँ उसमे कई मिस्टेक hai..or आज जो उसे ठीक करता हु एक्सीडेंट की वजह से हॉस्पिटल में hai..pata नहीं कितने लोग इस प्रोजेक्ट के लिए लाइन में खड़े hain..mujhe तोह यह समझ नहीं आ रहा की अचानक से एक साथ कैसे इतनी प्रॉब्लम आ गयी ,,और प्रोजेक्ट भी कोई छोटा मोटा नहीं है कई क्रोर्स का hai..kya करूँ कुछ समझ नहीं आरहा.??”

उधर निशा भी अशोक और मंजू के टेंशन में देखकर उनके पीछे पीछे चली गयी थी और वहीँ दरवाज़े के पास कड़ी थी ताकि कुछ समझ सके की प्रॉब्लम क्या है..

चिंटू ने पिज़्ज़ा के बाद सीफ़ूड के लिए बोल दिया tha..jo श्याद उसने लाइफ में पहली बार देखा tha..so उसे खाने में भुक्कड़ की तरह बस्सी था..

मनु की चाय तोह कबकी ख़तम हो चुकी थी ..सो उसने सामने पड़ी फाइल उठाई और देखने लगा…

खैर टाइम बिता और अशोक और मंजू के साथ निशा भी बहार आ gaye..manu ने भी उनके आने से पहले फाइल रख दी थी..

अशोक आया तोह मनु ने उससे जाने की इज़ाज़त mangi,askhok बोलै “बीटा आते रहना ाचा लगा तुम सब से मिलकर “उसका ध्यान मनु की तरफ था. मनु ने भी अशोक और मंजू के पेअर चुकार उनसे विदा ली और वापस चले गए..

अशोक भी बेमन से फाइल उठाकर काम पैर लग gaya..or माँ बेटी अपने काम में ला गयी ..काम क्या अब यह तोह वही जाने …

खैर कुछ दिन बाईट निशा ने एक बार फिर दोनों को साथ बुलाया मनु और चिंटू को साथ में…

जिसपर चिंटू के तोह फिर से पिज़्ज़ा और सीफ़ूड याद आज्ञा हु तोह तुरंत रेडी हो gya..manu अब बेचारा क्या बहाना बनता चल दिया चुप चाप निशा और चिंटू के साथ..

घर पहुंचे तोह आज अशोक भी घर पैर hi tha..manu ने अपनी आदत के हिसाब से बड़ो के सम्मान में अशोक और मंजू के पेअर छुए कर नमस्कार kaha..chintu प्यारा उसके लिए पेअर चुना ओल्ड फैशन था सो उसने दूर hi hello कहा ..

अशोक ने आते hi मनु से pucha”manu बीटा कैसे हो आज क्या खाओगे”

मनु अपने स्टाइल में “अंकल जी साड़ी दुनिआ की चीज़ एक तरफ अन्त्य जी हथून की चाय की एक सिप एक तरफ अब आप hi सोचिये क्या कह सकता हूँ …??”

जिसपर अशोक ने थका मर कर हास्पदा और मंजू की भी मुस्कराहट रुक नहीं रही thi..manju ने एक बार अशोक की तरफ देखा तोह अशोक ने kaha”are मेमसाहब देखलो सिर्फ हम hi दीवाने नहीं हैं आपकी चाय के यहाँ तोह मनु भी आपकी चाय की तारीफ कर रहा है.”

मनु “अंकल आप बेशक अन्त्य जी के हाथ की चाय के दीवाने हैं ,पैर हमको तोह हमारी माँ के हाथ का स्वाद अगर कहीं और मिला है तोह हु अन्त्य जी के हाथ की चाय में, उसमे जो आंटीजी अपने प्यार और ममता से बनाकर पिलाती hain..so एक बेटे की तरह पीना क्या गलत हैं..””???

अशोक “भाई अगर बात माँ और बेटे की हो तोह क्या सही क्या गलत..??”

मंजू “बीटा तुम इनकी बातों में न आओ जब भी तुम्हे चाय पिने का मैं करे बिना सोचे बोल्डेन अगर तुम मेरे बेटे की तरह चाय पिटे हो तोह तुम्हारे लिए यह माँ बिना किसी की परवाह किये तुम्हारे लिए चाय तोह क्या खाना भी खुद बनाकर khilayegi..”yeh बात उसने मनु के खुद को माँ का दर्ज़ा देने के बाद और अशोक के ताने के जवाब में कहा था..

Ashok”manju अब तुम जानो और तुम्हारा beta…bhai मैं बिच में पड़ने वाला नहीं और आज तोह वैसे भी तुमज्जयन्ती हो न मैं खुश हूँ”

मंजू ने भी हाँ में सर हिलाया और बोली “तभी तोह आप चाय का ताना दे रहें हैं देख रही हूँ उस दिन से कई बार ताना दे चुके हैं की कल तक तोह मैं hi था अब मेरे लिए बननेवाली चाय में भी कम्पटीशन मिलने लगा …अब सुनलिया मनु मुझे माँ सम्मान दर्ज़ा दे रहा है ..और अगर बीटा सामान उसको न दर्ज़ा दूँ तोह क्या हु सही रहेगा..???”

अशोक “महारानी साहिबा मुझे माफ़ कर दिज्ये ..जो मैंने आपके सामने मुँह खोला बड़ी गुस्ताखी हुई हम तोह डर गए थे की कहीं महारानी जी का कहीं और ध्यान चला गया तोह हमारा क्या होगा..””

मनु ने सोचा कहीं बात न बिगड़ जाये बोल pada”sorry अंकल आपको मेरी वजह से हर्ट हुआ तोह मुझे माफ़ कर देना की मैंने अन्त्य जी से चाय के लिए kaha.aage से कुछ नहीं kahunga..”manu ने उदासी से कहा ..”

जिसपर दोनों हसने लगे मनु शॉक में दोनों को देखने laga…tab अशोक ने kaha”beta तुम गलत समझ रहे हो हम दोनों में से कोई लड़ नहीं रहा हम दोनों एक दूसरे से ऐसे hi कभी कभी छोटी मोती बात पैर जानबूझकर थोड़ा मैं बेहला लेते हैं …तुम टेंशन न लो कोई बड़ी बात नहीं है और वैसे भी हमारी महारानी जी अपनी मर्ज़ी की मालिक हैं ..जब उसने खुद तुम्हारे लिए कुछ बांया तोह उसमे कोई सवाल नहीं क्युकी में अचे से जनता हूँ की बिना उसकी मर्ज़ी के कोई उससे कोई काम नहीं करवा सकता सो कूल बीटा …”

मंजू “हाँ बीटा तुम इनकी टेंशन न लो यह तोह हैं hi ऐसे तुम्हारे लिए आज मैं खुद अपने हाथ से खाना और चाय दोनों बनाउंगी जिसको जलना है जलता rahe…main भी तोह देखूं भला की मेरे मनु और मेरे बिच में आने की भला किसीकी हिम्मत है..

चिंटू और निशा भी इनकी बातें सुन रहे थे ..जिसमे निशा तोह चिल थी क्युकी उसे अपने माँ बाप का नेचर अचे से पता था पैर चिंटू के लिए भी मनु की तरह शॉकिंग hi था..

खैर खाना खुद मंजू ने अपने हाथ से बनाया और सबने पेट भरकर खाया जिसके बाद सबने मंजू की तारीफ की खाना कितना ाचा बना hai.manju वास्तव में अछि गृहणी thi..jisko घर का काम अचे आता tha..per निशा की इच्छाओं और उसके मूड के चलते घर में नौकर hi लगे रहते थे कुकिंग में सो अब मंजू ने खाने का डेप्ट उसने लगभग chef’s को दे दिया था.

जब खाना हो गया तोह अशोक ने kaha”Nisha बीटा तुमने इनको बताया था न की मैंने बुलाया है..”

निशा “जी पापा बताया था”

मनु और चिंटू हैरानी के साथ देख रहे थे दोनों थोड़े सोच में थे की अब कोण सा बम्ब फूटने वाला अशोक के मुँह से ..

Ashok”manju तुम्हे याद है न जब यह दोनों लास्ट टाइम आये the,,toh मैं एक प्रोजेक्ट को लेकर टेंशन में tha..ek फाइल लाया था साथ में ..याद करो””

मंजू “जी हाँ याद हैं तोह उसका इन सब बातों से क्या लेना देना अब कोई बात नहीं जी अगर इस बार नहीं मिला तोह अगली बार ज़रूर मि जायेगा आप टेंशन न लो जी..??”

अशोक “अरे पगली अगली बार की बात कर रही हो अगले पांच सालो के लिए उनका प्रोजेक्ट हमरे साथ हो इसके लिए उन्होंने खुद कॉन्ट्रैक्ट त्यार करके दिया है हमे …हु जिसकी टेंशन में साल भर से परेशान tha..an मौके पैर जिसको फाइल चेक करनी थी उसका एक्सीडेंट होगया tha..uske बाद भी प्रोजेक्ट हुम्हारा हो गया..”

मंजू “भगवान का शुक्र हैं की आपने रात भर जो म्हणत की उसी का नतीजा है यह,,”

अशोक “यह मेरी म्हणत काम किसी और के टैलेंट का नतीजा है यह जिसका क्रेडिट तुम मुझे दे रही ho..jiska हक़दार कोई और है..”

मंजू “अगर आपकी म्हणत नहीं तोह कोण है हु इंसान जिसका टैलेंट आपको प्रोजेक्ट दिला gaya..main भी जानना चाहती हुनक ों है हु फरिश्ता जिसके चलते आपकी साल भर की म्हणत बेकार नहीं हो पाई”

अशोक “निशा बीटा यह हैंड राइटिंग पेहचानति हो tum..”ashok ने एक कागज़ देते हुए निशा से पूछा..

निशा “जी पापा यह तोह मनु की हैंड राइटिंग hai..kyun क्या हुआ”??

अशोक “महारानी साहिबा आप जिस फरिस्ते की बात कर रही थी हु कोई और नहीं मनु hai..aapko माँ सामान मैंने वाला वही है जिसके टैलेंट से यह प्रोजेक्ट न केवल हमे मिला बल्कि अगले 5 सालो तक का कॉन्ट्रैक्ट भी bangya..humra उनके साथ..”

मंजू उठी और मन ऊके पास सर पैर प्यार से हाथ फिरकर बोली “मैं जानती थी की मन ऊके अंदर कोई ऐसी बात है जो इसके मुझे माँ सामान कहते hi मुझे भी इसमें अपना बीटा नज़र आने laga,per यह कैसे हुआ मुझे तोह अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा है.. “

अशोक “जिस फाइल में बहुत साड़ी मिसकलकलशं थी और साथ में कोटशन जो भेजनी थी उसमे रेट के साथ और भी कुछ कमियां thi..toh जब मैं उस रात फाइल खोलकर काम करने बैठा तोह मुझे यह पेपर मिला था जिसमे कहाँ मिसकलकलशं हुई थी और सही क्या hai.usme था और साथ में कोटशन का सही रेट जिस पैर सही प्रॉफिट मिल सके लिखा tha..or जब मैंने क्रॉस चेक किया तोह बिलकुल सही tha..so मैं उपपरवाले का नाम लेकर फाइल का काम इस पेपर hi हेल्प से किया tha…or इसमें हैंड राइटिंग से तुम समझ hi गयी हो मेरा मतलब क्या था..”???

अब सबकी समझ में आज्ञा की अशोक का मतलब क्या था ..जिसमे सब खुश थे मंजू ने तोह मनु का माथा चूमकर अपना प्यार जाता दिया ..

इसके साथ hi निशा भी बड़ी कुश हुई की मनु की वजह से उसके पापा का इतना बड़ा प्रोजेक्ट बच सका और कहीं न कहीं उसके दिल में मनु के लिए प्यार और गहरा हो गया …

पैर उन सबके बिच में जहां सब खुश थे पैर एक दिल अपने दिल में अपना प्यार खोता हुआ महसूस कर रहा tha…jiske लिए यह खुश खबरि किसी मनहूस खबर thi…jiske दिल में एक ढकती हुई लपटे उठ रही thi..per इतना सब होने के बाद भी उसके चेहरे पैर मुस्कराहट बरक़रार thi..ji हाँ चाहे झूठी hi सही पैर उसके चेहरे से कोई और पता hi नहीं लगा सकता था की उसके दिल में कितनी लपटे उठ रही हैं…

और हु कोई और नहीं हमारा चिंटू था ,,,जो मनु के यहां पैर भी अपने से ज्यादा तवाज़ो मिलने से नफरत से भर चूका था …उसके लिए आजका दिन काळा दिन के सामान था ….जहाँ उसे निशा से प्यार हुआ tha..per निशा और उसके माँ- बाप को सिर्फ मनु नज़र आता tha…usne गुस्से में यह भी नहीं देखा की उसी का sathi..quotation के रेट बहार रहा hai..or एक अचे प्रोजेक्ट की फाइल मिस्टेक को देख सकता ..मतलब उसके मुकाबले मनु की दिन रात की म्हणत अब उसे कहीं का कहीं काम आने लगी thi.per उसे तोह सिर्फ और सिर्फ जलन और नफरत thi..manu के खिलाफ ..पैर क्या कर सकते hain…hote हैं कुछ लोग जिनकी फितरत होती है खुद के लिए म्हणत न करके दूसरे की कामयाबियों से जलना..

मनु ने भी चिंटू को एक नज़र देखा तोह अचे से समझ गया की चिंटू के अंदर का क्या हाल hai..or चिंटू कभी न रुकनेवाले नफरत के रस्ते पैर एक अंधे घोड़े पैर बैठा दौड़ रहा है जिसे अब न खुद के मिटने की परवाह बची है न अपने अंधे घोड़े के रस्ते के भटकने का गम…

अब चिंटू की नफरत का यह अँधा घोडा क्या करवाने वाला यह तोह किस्मत के हाथ hai..ya आने वाले कल ले hath……:hint:
 
अपडेट 46

बचपन की यादें

मनु ने भी चिंटू को एक नज़र देखा तोह अचे से समझ गया की चिंटू के अंदर का क्या हाल hai..or चिंटू कभी न रुकनेवाले नफरत के रस्ते पैर एक अंधे घोड़े पैर बैठा दौड़ रहा है जिसे अब न खुद के मिटने की परवाह बची है न अपने अंधे घोड़े के रस्ते के भटकने का गम…

अब चिंटू की नफरत का यह अँधा घोडा क्या करवाने वाला यह तोह किस्मत के हाथ hai..ya आने वाले कल ले हाथ……

टाइम अपने हिसाब से चल रहा था मनु और निशा की दोस्ती अशोक के बिज़नेस हेल्प के बाद से और अछि हो गयी thi..nisha के घर में भी अब मनु का चार्म चल चूका tha..manju जो केवल निशा की आगे पीछे घूमकर सिर्फ निशा को देखा करती थी. उसके दिल में भी मनु अपनी एक नयी जगह बना चूका tha…jiske कारन मंजू भी निशा से मनु का हाल चल पूछा करती थी. और टाइम टाइम पैर मनु को घर बुलाकर खुद अपने हाथ से बनाकर खुद अपने हाथ से खिलाया करती थी जिससे निशा को तोह कोई प्रॉब्लम नहीं थी ..क्युकी मनु के लिए उसके दिल में जो प्यार था, उस में उससे लगता था की अगर मनु को उसके माँ बाप पसंद करें तोह उसके लिए तोह आगे का रास्ता और आसान होनेवाला था …

अशोक भी अपनी उस हेल्प से मनु से अलग hi जुड़ सा गया था ,,मनु ने जो हेल्प किट hi ,उससे उसके बिज़नेस में प्रॉफिट hi हुआ tha,,ashok शर्मा ने मनु को कई बार उसके लिए थैंक्स कहने की कोशिश की और कई बार बदले में कोई गिफ्ट देने की ीचा जताई पैर मनु तेरा मनु उसने थैंक्स कहने से भी अशोक को मन किया यह कहकर की “आप मेरी दोस्त के पिता हैं उसमे मैंने कोनसा अनोखा काम किया hai.agar निशा के पिता की कोई हेल्प हुई है तोह मेरे लिए इससे बढ़कर कोई ख़ुशी की बात नहीं hai…kyuki एक तरह से मैंने निशा की hi हेल्प की है …क्युकी अगर आप सब खुश रहेंगे तोह निशा भी तोह खुश रह sakegi..or यदि आप सब hi खुश नहीं हैं तोह उसका असर निशा पैर भी hoga.or अगर निशा खुश नहीं तोह हमारी दोस्ती का faida..ki जिसमे हम अपने दोस्त को खुश hi नहीं रख sakte..”is बात से अशोक के दिल में मनु के लिए और इज़्ज़त बाद gayi..usne बदले में गिफ्ट देना चाहा तोह मनु ने kaha”uncle मैं आपके पेअर चुकार सम्मान करता हूँ आप निशा यानि मेरी अछि दोस्त के पिता hain..maine सिर्फ छोटी सी हेल्प की है ..बदले में सिर्फ आप सबकी ख़ुशी चाही थी …यदि मैं आपसे बदले में कोई चीज़ या कोई गिफ्ट की इच्छा रखकर आपकी मद्दद करता तोह इसमें दोस्ती जैसा क्या बचा भला?? क्युकी बदले में अगर कुछ लें दें की इच्छा हो तोह दोस्ती नहीं हु बिज़नेस hoga.or दोस्ती में फ़ायदा या नुक्सान नहीं देखा जा सकता .दोस्ती में सिर्फ हेल्प हो सके तोह हेल्प कर देनी चाहिए बिना किसी गिफ्ट या return-back के प्रॉफिट के सो मैंने सिर्फ और सिर्फ दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया है.”

जिसपर अशोक लाजवाब हो गया था फिर भी उसने आखिरी कोशिश की कहा “बीटा कुछ तोह हमारा मान rakhlo…beshaq तुमने बदले में कुछ नहीं चाहा पैर क्रोरोडों (मिलियंस )का फ़ायदा भी हुआ है उसे देखकर अगर तुम्हे कुछ नहीं दिया तोह मेरा दिल मुझे माफ़ नहीं करेगा “

मनु “अंकल आप प्रॉफिट को देख रहे हैं ..पैर मेरे लिए तोह इतना hi काफी है की मैं आपके काम आ सका और अगर मैंने अभी कुछ ले लिया तोह खुद मुझे मेरा ज़मीर दिक्कारता रहेगा की मैंने आपसे मदद के बदले में कुछ लिया hai..agar मैं अभी आपसे कुछ ले लूंगा तोह आनेवाले टाइम में दोस्ती सिर्फ अलफ़ाज़ज़ बैंकर रह जाएगी क्युकी बदले में कुछ लेना बिज़नेस है दोस्ती nahi….acha अगर कल को अगर मुझे कोई मदद की ज़रूरत हुई तोह क्या अआप मेरी मदद करेंगे ???

अशोक “यह भी कोई पूछने की बात है bhala..bilkul करेंगे बीटा”

मनु “पैर अगर मैंने बदले में कुछ ले लिया तोह तोह आपको भी यह लगेगा की मैं भी रेतुर्न फेवर दे दिया है तोह आप भी खुद को फ्री समझेंगे और मैं भी क्युकी आपसे गिफ्ट ले चूका हूँ सो मैं भी मदद मांगने में 100 बार sochunga..so प्ल्ज़ मुझे अपने दिल में जगह जो आपने दी है मेरे लिए उतनी जगह काफी hai..mujhe आपके दिल में पर्स के मुकाबले ज्यादा सुकून है.”

इस जवाब से अशोक ने भी आगे कुछ कहा नहीं क्युकी मनु के इस जवाब ने उसे लाजवाब कर दिया tha…kyuki बदले में कुछ मांगना या चाहना इंसानी फितरत hai..per दोस्ती में हम बिना किसी लालच के दोस्त की हेल्प करते hain…badle में कुछ मिला हु अपना नसीब और खुद मांगना दोस्ती नहीं सौदा है…

खैर मनु के इस बर्ताव ने जहां निशा और उसके माँ बाप का दिल जीत लिया था. अब मनु का नाम उसके घर में किसी फॅमिली मेंबर की तरह लिया जाता tha..uske घर में मनु के नाम पैर चर्चा होना अब आम सी बात थी और निशा ठहरी मनु से प्यार करने वाली उसे भला मनु के नाम से क्या प्रॉब्लम होती ..

मंजू को तोह निशा के होने के बाद जो बेटे की कमी हो गयी थी हु अपने मनु ने पूरी करदी thi..manju को मनु को अचे खिलाना पिलाना उसकी ममता tha..jise हु अचे से कोशिश के साथ पूरा किया करती थी…

अशोक ने मनु को जब कुछ लेने से इंकार किया तोह उसने मनु के आगे एक इनविटेशन diya”ki मनु चाहे तोह बिज़नेस के मैनेजमेंट को अगर सीखना चाहे तोह उसकी कंपनी में उसको सीखा सकता hai…”manu को भला इससे क्या प्रॉब्लम होती उसके लिए तोह और ाचा tha..ki एक तरफ हु बाबा के यहां बिज़नेस की बारिकयाँ सिख रहा था वहीँ अशोक की इतनी बड़ी कंपनी में उसे मैनेजमेंट को कैसे हैंडल किया जाता है हु सिखने को मिल जेगा ..सो उसने भी हाँ कर दी …और अशोक की कंपनी में अपने टाइम के हिसाब से जाने लगा जहां अशोक ने अपने सबसे करीबी और सबसे टैलेंटेड मैनेजर कृष्ण सूंदर Bhatnagar(short K.S भटनागर आगे से इनको भटनागर hi लिखूंगा को मनु मैनेजमेंट अचे से सीखने को कहा भटनागर कोई छोटा मोटा मैनेजर नहीं था. यह बिज़नेस मैनेजमेंट को ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से सिख कर आया tha..jisme उसे अचे से महारत हासिल thi.jiske साथ भटनागर का 7 साल का एक्सपीरियंस अलग कम्पनीज के साथ ,

उसने अशोक से पूछा “सर यह किस बचे को आप मेरे सर पैर दाल रहे हो यह ठहरा 12 या 13 साल का बचा इससे थोड़ा छोटा hi मेरा खुद का बीटा इससे कोई 4 साल छोटा होगा ..जिस दिन क्रिकेट मैच आएगा यह उस दिन आएगा नहीं …कहलने कूदने की उम्र है इसकी यह क्या सीखेगा सर प्ल्ज़ मुझे बक्क्स दो …मेरे पास बहुत काम है..” क्युकी अशोक की और भटनागर की आगे लगभग शामे हो थी और भटनागर अशोक के फादर के दोस्त का बीटा था सो अशोक और भटनागर का यूँ कहिएः एक तरह से फॅमिली रिलेशन सा था सो अशोक की अगर किसी बात से भटनागर को कोई प्रॉब्लम होती तोह हु अशोक को अलग ले जाकर साफ़ साफ़ बता देता था..

खैर अशोक ने कहा “भटनागर बेशक यह बचा है ,,पैर कोई ऐसा वैसा बचा नहीं hai..uske बॉडी लैंग्वेज को देखो उसकी बात सुनो और फिर भी तुम्हे लगे तोह इसे बिलकुल मन कर सकते हो मुझे तुम्हारे फैसले पैर कोई प्रॉब्लम नहीं है” अशोक ने यह बात एक साइड में सीधे खड़े हुए मनु को पॉइंट करके कही थी..

भटनागर भी अशोक की बात सुनकर हैरत में पद गया की अशोक जो सिर्फ बिज़नेस से मतलब रखता था उसे एक बचे की क्या पड़ी जो उसने उस बचे को उसके सर पैर दाल दिया उसने सोचा की प्रॉब्लम hi क्या है एक बार देखने में सो उसने कहा “सर ठीक है मैं उससे बात करके देखता हूँ अगर समझ आया तोह ठीक वार्ना सॉरी सर”

अशोक “दोने ु क्नोव बेटर थान में …ी विल नॉट इंटरफेरे विथ ुर डिसिशन..”

भटनागर मनु के पास गया क्युकी मनु को अशोक ने पहले hi बता दिया था उसके टैलेंट के बारे में सो मनु ने उसके पेअर छुए. Bhatnagar”aare यह क्या कर रहे हो यह co-operated ऑफिस है यहां यह सब क्यों कर रहे हो …”

मनु “सर आप सहीह ै बेशक यह co-operated ऑफिस hai..worldclass भी होगा पैर क्युकी मुझे आपके अंडर सीखना है सो उस हिसाब से आप मेरे गुरु हुए सो यह मेरे गुरु को मेरा सम्मान tha..or कुछ नहीं”

जब भटनागर ने यह सुना तोह हैरत में पद गया की इतना छोटा बचा इतना समझदार कैसे ..उसने अब मनु से कुछ बातें की और मनु ने उसे सुच में इम्प्रेस किया …अशोक अचे से दोनों को देख रहा था..

उसके बात भटनागर ने मनु से बिज़नेस से रिलेटेड कई बातें की जिसमे उसे मनु ने और इम्प्रेस किया क्युकी इतने दिन जो बाबा के यहां उसकी म्हणत थी उसका उसे ाचा फैयदा हुआ tha..knowledge वाइज और किसको अचे से समझना है उसमे भी क्युकी आपकी बॉडी लैंग्वेज में आपका कॉन्फिडेंस दुनिआ को साफ़ पता चलता है की आपका होमवर्क और आपकी फील्ड में आपकी कितनी पकड़ है ..और मन ऊके केस में भी ऐसा hi था ..भटनागर बेशक ऑक्सफ़ोर्ड रेतुर्न था उसे बिज़नेस की इंटरनेशनल लेवल पैर अचे से समझ थी पैर मनु ने लोकल मार्किट के मास्स डिस्ट्रीब्यूशन के head’s बिज़नेस सीखा tha..or क्युकी बोर्ड रूम में मीटिंग और ग्राउंड लेवल पैर इम्प्लीमेंटेशन दो अलग -अलग चीज़ हैं सो मनु उसकी नज़र में ाचा खासा नॉलेज रखता tha…uska फर्स्ट इम्प्रैशन भटनागर पैर सॉलिड था…

सो उसने अशोक से kaha”sir यह कोण है कहाँ मिला आपको इससे कुछ साल hi छोटा है मेरा बीटा और उसे अभी भी टीवी और गेम्स से फुर्सत नहीं पैर इस लड़के के पास सिर्फ डिग्री की कमी है वार्ना इस टाइम में भी यह अपने टैलेंट के दम पैर अछि से अछि कंपनी में मुँह मांगी सैलरी पैर लग सकता है …कहाँ मिला यह सुच में मुझे अभी भी यकीं नहीं होता की ऐसा भी कोई बात चित के साथ बिज़नेस मंद रखनेवाला 12 या 13 साल का बचा है..”

अशोक “थोड़ी देर पहले तुमने hi कहा था की 12 या 13 साल का बचा है …और थोड़ी देर में उससे बात करने के बात वही 12 या 13 साल का बचा बदल गया ..हम्म्म!”

भटनागर अशोक का ताना अचे से समझ गया और बोलै “ सॉरी सर मुझे लगा शयद आप मेरी कोई खिचाई कर रहे hain.itne छोटे बचे की जिम्मेदारी मुझ पैर दाल कर पैर मैं समझ गया की आपका क्या फैसला है और kyu..i म विथ ु sir..main रेडी हूँ इसे सीखने को और जैसा उसका नॉलेज है डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर उसमे मेरा भी फ़ायदा है की हम भी कुछ नया सिख जाएँ सो …उसे बता दीजिएगा की जब फ्री हो आजाये…”

अशोक “तुमको क्या लगता है …की मेरे पास इतना टाइम है की मैं तुम्हारी खिचाई के लिए किसी बचे का इस्तेमाल करूँ …उसके लिए मेरी सिर्फ पेओन बेल्ल hi काफी hai…or जिसे तुम बार बार बचा कह रहे हो उसी की वजह से लास्ट मेहता ग्रुप्स का टेंडर हम मिला hai…or न सिर्फ टेंडर मिला बल्कि लॉन्ग टर्म का कॉन्ट्रैक्ट भी हो गया सो खुद सोचना की उसके हमारे पास रहकर सिखने में किसका फ़ायदा ज्यादा hai…or हाँ ताकि तुम उसे समझ सको तोह यह भी सुन लो की इतने बड़े कॉन्ट्रैक्ट के बदले में उसने एक सिक्का तक नहीं लिया है ..सो उसकी इस बात से समझ जाना की उसके अंडर बिज़नेस टैलेंट के साथ भी दुनिआ दारी क अछि समझ hai….mere लिए हु मेरे बेटे सामान है ..तोह ध्यान रहे की कोई बचा hi नहीं है ..”

भटनागर ने सुना की मेहता ग्रुप्स का कॉन्ट्रैक्ट मनु की वजह से मिला है तोह उसे बार को तोह यकीं नहीं हुआ की .मनु की वजह से उसकी कंपनी अगले आनेवाले कई सालो के लिए मार्किट में सेफ हो गयी थी बल्कि इतने बड़े ग्रुप के साथ जुड़ने के वजह से और ग्रुप्स का भी इंटरेस्ट इनकी कंपनी में बाद गया tha..so उसने kaha”bilkul सर मैं धयान से धयान में रखूँगा की मैं उस लड़के के साथ सही जस्टिस कर सकूँ ..”

अशोक “भटनागर मैं एक बार को भूल भी जॉन की तुम उसके ट्रेनर हो फिर भी अगर तुमने कोई गड़बड़ मेरा मतलब है उससे गुस्से में कुछ कहा तोह मंजू तुमसे एपनिया आप पूछ लेगी ..फॉर ओनली ुर काइंड इनफार्मेशन में बता दूँ की मंजू उसे अपना बीटा मानती hai,,or खुद अपने हाथ से पकती भी है …और उसे अपने हाथ से खिलाती भी hai…so बेटर रेमेम्बेर this..”muskurakar बहार चला गया …

भटनागर ने मंजू का नाम सुना तोह उसकी हवा hi निकल गयी क्युकी मंजू एक तोह उसके रिश्ते में बड़ी बहिन लगती thi(dur के रिश्ते में लिखे नॉट ब्लड रिलेटेड cousin)or दूसरा मंजू घर पैर बहले hi मुस्कुराने वाली सीधी सधी घरनि हो पैर कंपनी में उसका शेयर 53% था …और हु कभी कभी hi ऑफिस में आती थी पैर जब आती थी तोह उसकी सख्ती देखकर मोस्टली पर्सन दुआ करते थे की गलती से भी उनसे कोई गलती न हो क्युकी मंजू कोई बहाना नहीं सुनती थी ,,,उसके लिए गलती मतलब ों थे स्पॉट सलूशन या गलती सुधारो या रिजाइन उसके अलावा कोई 3रद ऑप्शन नहीं होता था उसके पास..

और भटनागर जैसा लम्बा छोड़ा इंसान भी मंजू से डरता था क्युकी एक तोह रिश्ते में मंजू दीदी उसपर सख्त boss..bachpan में एक बार उसने झूट में बहाना बनाया था स्कूल न जाने का और बाद में मूवी के लिए चला गया tha..or मंजू को उसके किसी दोस्त ने बता दिया तहत ओह मंजू उस वहीँ मूवी थिएटर से बजाते हुए लायी thi..kyuki उसकी गलती थी और उसकी पड़े का जिम्मा (जैसे पुष्पी मनु को पड़ती है वैसे hi मंजू उस पड़ती thi)manju का तहत ओह भटनागर के माँ बाप ने उसे पीटने के साथ और पित्त जिससे उसदिन के बाद मंजू से भटनागर की फूक सरक जाती thi…ashok अचे से जानता था की मंजू का नाम क्या काम करेगा क्युकी जहां अशोक भटनागर से ज्यादा तंग हो जाता था तोह मंजू का नाम भटनागर से सब कुछ चुपचाप करवा देता था सो यहाँ भी उसने सोच कर hi मंजू का नाम लिया tha…bhatnagar को भी समझ आगया क्या मतलब है मंजू से पंगे का ..

खैर अशोक और मनु वापस अपने अपने घर चले गए ..उधर क्युकी मनु को निशा के करीब और उसके maa-baap का लगाव मनु के लिए कुछ अलग लेवल पैर था सो चिंटू ऐसे में कैसे मनु को निशा के पास अकेला छोड़ देता ,अब उसका निशा को अकेला छोड़ ने का मतलब था मनु और निशा का लव जो काम से काम उसका मन्ना था मनु जहां निशा को सिर्फ और सिर्फ एक दोस्त की तरह देखता tha.wahin निशा के चेहरे पैर मन ऊके लिए चाहत साफ़ दिकने लगती थी ..जिसका सिद्ध असर चिंटू के कलेजे पैर किसी ारी से काम नहीं होता tha.woh निशा को चाहता था क्युकी एक निशा सूंदर और उसका बैकग्राउंड सो चिंटू के लिए निशा को चाहना एक मज़बूरी भी थी …एक सिक्योर फ्यूचर का जो हु सपना देखता था हु सिर्फ निशा के साथ संभव था चिंटू के liye..at-least चिंटू तोह यही मंटा tha..ab चिंटू मन ऊके साथ निशा कैग हर जाने का कोई मौका नहीं छोड़ता था और मनु इस बात से खुश था की चलो चिंटू उसके साथ रहने लगा है ..वह उसकी निशा पैर लाइन बाज़ी को उसका मज़ाक समझता tha..kyuki चिंटू अक्सर निशा के साथ कुछ न कुछ बात करता रहता tha..so उसकी नज़र में चिंटू की बातें एक मज़ाक के अलावा कुछ नहीं क्युकी हु रियल्टी में रहता था क्युकी मनु जनता था की निशा और उन्दोनो की लाइफस्टाइल में ज़मीं आस्मां का अंतर hai..so बातचीत चल सकती है पैर आगे क्या होगा किसे पता ??

खैर यह सब चलता रहता था तीनो me..wahin एक दिन पुष्पी मनु को जब पड़ा रही थी तोह उसकी बुक गिर गयी जिसमे से कोई लत्तेर निचे गिरा जिसे मन्नू ने हाथ में लिया और पड़ा और ख़ुशी के मारे उथल पड़ा ..

Manu”wah दीदी क्या बात hai..aapko स्कालरशिप मिली hai..aage आपका टीचर बनने का सपना भी जल्द पूरा हो जायेगा “

Pushpi”bhai मुझे लगता है इसमें कोई गड़बड़ हुई hai.yeh तोह एअसे और रिसर्च पैर मिलनेवाली स्कालरशिप है पता नहीं मुझे कैसे मिल gai…mujhe इस्पे थोड़ा डाउट है..”

मनु “अरे दीदी आप फ़ालतू न सोचो आपको मिल गयी और इसमें आपका नाम लिखा है और एड्रेस भी है सो डाउट कैसा??

पुष्पी “पैर “

मनु “पैर वॉर कुछ nahi,,scholarship मिली है आपको खुश होना चाहिए पैर आप उल्टा टेंशन ले रही हो..

पुष्पी “हाँ भाई तू सही कह रहा शायद ाचा चल आज की पड़े हो गयी तुम दोनों की मैं अब चलती हुन्न कल के लिए दो chapter त्यार करना और अजय तुमभी ok bye..”or पुष्पी चल गयी..

Ajay”bhaiya यह सब क्या ड्रामा है “

मनु “मतलब”

अजय “भैया वही सब जो आपने किया रात भर जाग कर दीदी की रिसर्च देखकर उस कम्पटीशन में दीदी के लिए म्हणत की और जब दीदी का नाम आया तोह आपने दीदी को कुछ क्यों नहीं bataya..yeh बात समझ नहीं आयी..??”

मनु “अजय देखो बेशक मैं दीदी के रूम से उनके असाइनमेंट में से रिसर्च और एअसे दीदी के नाम पैर भेजे तोह उसमे क्या गड़बड़ हुई भला और दीदी को न बताने की अपनी वजह है..”

अजय “क्या भैया”

Manu”ajay तुमसे ज्यादा दीदी को मैं अचे से जानता हूँ दीदी का सपना है एक ची टीचर बनने का और उनके घर में इस बात की कोई सपोर्ट नहीं करनेवाला क्युकी तुम चिंटू और प्रसाद की हालत पड़े में क्या है अचे से जानते हो और अगर ऐसे में दीदी अगर टीचर बनगयी तोह अन्त्य जी (ललिता चिंटू की maa)shyaad यह बात गुस्से में बर्दास्त न कर सकें क्युकी उनकी और दीदी में बोलचाल है नहीं और उनके लिए दीदी के सपने से ज्यादा चिंटू और प्रसाद की ज्यादा अहमियत है सो ,,,ऐसे में दीदी की पड़े पैर असर पड़ना लाज़मी है और क्युकी दीदी की फीस को रोक कर शायद हु दीदी का सपना कुचलने की कोशिश भी कर सकती hain..so मैं यह सब किया “

Ajay”per भैया जब इतना सब किया तोह दीदी को बताने में क्या प्रॉब्लम “

Manu”problem यह है अजय की अगर दीदी को यह पता चलता की यह सब मैंने किया है उससे उनके दिल में अपने खुद की फॅमिली के लिए कोई गलत ख्याल न बने और सुच कहूं तोह दीदी को तुमसे ज्यादा मैं जनता हूँ की दीदी कितनी खुद्दार हैं ..उनको बताना ठीक नहीं lagega..waise भी जिस लिए म्हणत किट hi हु पूरी हो गयी ..मैं तोह डर रहा था की दीदी पता नहीं स्कालरशिप एक्सेप्ट करेंगी भी या nahi..per उन्होंने कर ली मेरे लिए काफी है..”

अजय “तोह आप क्या चाहते हो दीदी को आपकी म्हणत का पैट आना चले”

Manu”ajay मेरे बारे में पता चले उससे ज्यादा जरूरी मेरी और तेरी प्यारी दीदी का फ्यूचर और उनका सपना है …”

मनु ने अजय को उसको अपने गले से लगते हुए कहा

अजय “भैया आप सही हो दीदी हमारे लिए कितना करती हैं उनके लिए हम इतना तोह कर hi सकते हैं..”

मनु “लगता है मेरा छोटा भाई समझदार हो गया है…”

अजय “भैया सब आपसे सिख रहा हूँ”

इतने में दरवाज़ा खुला और दोनों भाई जो अभी तक खुश थे अचानक से डर गए….

दरवाज़े पैर पुष्पी आंसूं से तर चेहरे के साथ लगा तर रो रही thi…manu और अजय ने देखा तोह उन दोनों को समझ आ गया की पुष्पी ने सब सुन लिया है …

पुष्पी जो रट हुए अचानक से अंदर आयी और मन ऊके गले लगकर और जोर से रोने लगी जिसपर मनु टेंशन से बोलै “सॉरी दीदी गलती हो गयी आप चाहे तोह मार लो पैर ऐसे आंसूं न बहाओ आपके इन आंसूं ने दिल को चलनी का देना है mere…didi प्ल्ज़ मुझे मार लो पैर चुप हो जाओ..”

जिसपर पुष्पी ने मनु के दोनों गैलन और माथे को चूमना शुरू कर दिया और चूमने के बाद उससे बोली “पागल है क्या तू मैं भला तुजे मार सकती हूँ भला अगर तुझे मारने का सोचा भी तोह खुद को ख़तम कर सकती हूँ मैं..”

मनु ने सिद्ध पुष्पी के होतोओं पैर हाथ रख diya”didi ख़बरदार जो मरने जैसे फ़ालतू बात की आपने मैं भूल जाऊंगा की आप मेरी दीदी हो अगर आएगी से कभी मरने का नाम लिया तोह मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगा.”

पुष्पी “नहीं भाई तू मत रूठना वर्ण मेरे लिए तोह मेरी ज़िन्दगी रूत जाएगी…”

अजय “मतलब मेरे रूठने से आपको कोई फरक नहीं पड़ेगा हे भगवन कैसे दीदी है हमारी एक भाई की परवाह है दूसरे से कोई मतलब नहीं ….हे भगवन मैं तोह लूट गया ….”

पुष्पी ने जब यह सुना तोह रट हुए भी है पड़ी और अजय को खींचकर अपने साइन से लगा कर बोली “बस कर नौटकी जानती हूँ कितना लुटा है तू और भूल से भी मत भूलना की मेरे लिए मेरे दोनों भाई यानि तुम दोनों (अजय के सर पैर मार कर )हाँ दुफर तू भी मेरे लिए सब कुछ हो”

अजय “याहू दीदी खुश है प्रॉब्लम साल्व्ड”

पुष्पी अजय का कान खींचते hue“bachu कल दो chapter अगर नहीं याद मिले तोह याद है न मुर्गा डांस करना पड़ेगा…”

अजय “दीदी थिस इस नॉट फेयर आप को अभी भी याद है”

पुष्पी “तुमको क्या लगा की तुमको भाई कहकर गले लगया तोह तुम पैर कालको कोई रेहम करनेवाली हूँ no नेवर सोचना भी मत..”

पुष्पी मनु से “वैसे मुझे शक तोह शुरू से hi था क्युकी उस लेटर पैर तुम्हरी हैंड राइटिंग थी जिसमे तुमने मेरा एड्रेस लिखा tha…or शक यकीं में तब बदला जब तुमने मुझे स्कालरशिप वापस करने के बजाये उल्टा रखने को कहा तभी समझ गयी thi..yeh तुम्हारा काम hai..per यह सब किस लिए इतना सब करने की क्या ज़रूरत है”

मनु सख्ती के sath“zarorat है …बिलकुल ज़रूरत hai..har बार मेरी दीदी अपने सपने डाव पैर न लगये ज़रूरत है isliye…har बार किसी और के नाम पैर मेरी दीदी निचे न जूक उसकी ज़रूरत hai..or किसी के भी आपको फ्यूचर में पैसे देने से आपके फ्यूचर में आपके सपनो पैर आपका हक़ हो उसकी ज़रूरत hai…so जो जरूरी लगा मैंने किया और कोई आप पैर एहसान नहीं किया अपनी दीदी पैर हक़ से किया और जब जरूरी लगेगा आगे भी करूँगा आपको कोई प्रॉब्लम है ???”

मनु ने पहली बार इतने सख्त लहज़े में किसी से कुछ कहा था जिससे एक तरफ अजय हैरान था वहीँ पुष्पी अपने लिए मनु का प्यार जो उसने अपने हक़ के साथ कहा था देखा कर उसने सिर्फ न में सर हिल्या और मनु को अपने गले से लगा लिया.

जिसपर मनु थोड़ा नार्मल हुआ और उसे बुरा लगा पुष्पी से उसने ुचि आवाज़ में कहा था ..सो bola”sorry दीदी मैं ज्यादा बोल गया था मुझे माफ़ कर देना पैर गलत न समझना “

जिसपर पुष्पी ने उसके मुँहपर अपनी ऊँगली रखकर चुप कर दिया और boli”nahi मनु मैं तुम्हारे बोलने से नहीं बल्कि तुम्हारे हक़ के साथ बोलने से मेरे दिल में जो ख़ुशी हुई उससे मेरी आँखें भर आयी हैं मेरे लिए तोह यह ख़ुशी की बात है की मेरा भाई न केवल मेरे सपना की इज़्ज़त करता है बल्कि मेरे भाई के चलते मेरे सपने को नए पंक मिल गए …इससे बढ़कर और क्या चाहिए mujhe…bas भाई ऐसे hi प्यार करना mujhe”or जोर से मनु को अपने सीने से लगाकर कहती है”

अजय “फिर वही hi बात यह छोटा बचा नहीं दीखता तुम लोग को क्या यहाँ बचे की क्यूटनेस भी कोई मायने नहीं तुम दोनों आपस में गले लग जाते हो मुझ गरीब को भी लगा लो …”

चटाक !!!!!!!!!!चटकककक!!!!!

अजय के सर पैर पुष्पी की तपली “आजा नौटकी टब hi आजा और क्या क्यूटनेस कहीं नहीं देखती तेरी क्यूटनेस “

ऐसे hi तीनो गले लगे हुए अपनी खुशियां सेलिब्रेट कर रहे the…jahan पुष्पी की आने वाली लाइफ में उसके स्कालरशिप से उसकी पूरी पड़े का खरचा उठाकर उसकी लाइफ स्वर्ण वाली थी…

पुष्पी के दिल में भी मन ऊके लिए इज़्ज़त और बाद चुकी thi…kyuki मनु ने उसके सपनो को उसकी माँ के चंगुल से और बाप के फीस के बहनो से आज़ाद करवा कर एक नए पंख दिए थे.


जिससे पुष्पी के दिल के हर कोने से मन ऊके लिए दुआ और सिर्फ दुआ निकल रही thi….wahin कहीं कोई और जला भुना हुआ मनु को कोस रहा था… :हिंट:
 
अपडेट 47


बचपन की यादें

पुष्पी के दिल में भी मन ऊके लिए इज़्ज़त और बाद चुकी thi…kyuki मनु ने उसके सपनो को उसकी माँ के चंगुल से और बाप के फीस के बहनो से आज़ाद करवा कर एक नए पंख दिए थे.

जिससे पुष्पी के दिल के हर कोने से मन ऊके लिए दुआ और सिर्फ दुआ निकल रही thi….wahin कहीं कोई और जला भुना हुआ मनु को कोस रहा था…

अब आगे ....

मनु की लाइफ आजकल और बस्सी हो चली थी सुबह स्कूल उसके बाद पुष्पी के साथ पड़ना और उसके बाद बाबा के पास और उसके बाद भटनागर के पास ओल्ड और नई वे के साथ बिज़नेस की ट्रेनिंग जिसमे बाबा के यहां उसे कोर लेवल का और मास्स लेवल पैर वर्किंग और टीम हैंडलिंग, डिस्ट्रीब्यूशन के साथ मार्किट हैंडलिंग सिखने को मिल रही thi,,or वहीँ भटनागर से उसे बिज़नेस के ऑफिस मैनेजमेंट और ऑफिस स्टाफ के साथ क्लाइंट्स हैंडलिंग और क्लाइंट्स ट्रीटमेंट जिसके साथ खुदकी बॉडी लैंग्वेज को कैसे मेन्टेन किया जाता है सिखने को मिल रहा था..

सो एक तरह से उसकी लाइफ में सुबह से शाम बस्सी हो चली थी …इन सब के बाद भी हु रात को एक बार अजय के साथ उसकी स्टडी पैर धयान देता और उसके बाद में सुमित्रा की थकन के लिए उसके पैरों की मालिश करता tha..jisme कई बार सुमित्रा उसे यह बोलकर रोकने की कोशिश करती की “बीटा तू खुद भी थका होगा“ पैर मनु को अपने से ज्यादा मम्मी की थकन देखती थी….

और मन करने के बाद भी यह बोलकर अपना काम करता था की ”मम्मी यह मेरा हक़ है की हर दुःख में हर दर्द में मैं तुम्हारे साथ रहूं खुशियूं में अजय और पापा हैं न पैर तुम्हारे और मेरी फॅमिली के हर मेंबर के दुःख और दर्द पैर मेरा और सिर्फ मेरा हक़ रहना चाहिए और किसी का नहीं” मनु की यह बात सुमित्रा को भी la-jawab कर देती थी बदले में मनु को सीने से लगा कर चोरी से अपनी आँखों से दो आंसू बहकर जल्दी से पूछ देती ताकि मनु न देख सके …सुमित्रा के लिए मनु की अलग अहमियत thi..kyuki साडी दुनिआ सुख के पीछे भगति है पैर मनु ने दुख में साथ देने की बात की thi..jo काम लोगो के मुँह से hi निकलती है..

खैर जहाँ इतने लोग मनु के साथ खुश थे वहीँ कोई जलन और नफरत जो मनु के लिए उसके दिल में थी उसे रात दिन सोने नहीं देती thi..usse परेशान tha…or

हु था अपना चिंटू जिसको अपने खुद के घर में मनु की वजह से आजकल काम इज़्ज़त मिलने लगी thi,or बहार जिसे हु चाहता था या जिसे हु प्यार करता था हु लड़की निशा जिसके उसने सपने देखे थे मनु के आस पास भरे की तरह मडराती रहती थी ,,जिसे देखकर साफ़ पता चलता था की मनु के लिए उसका प्यार और कितना घेरा है, जिसे भले hi मनु एक दोस्ती समझता था पैर ..

जो मनु की ऑंखें नहीं देख पति थी हु चिंटू की आँखों से साफ़ दीखता tha,,use निशा का मनु के aas-pass होना और मनु के लिए उसका प्यार देखकर मनु के लिए नफरत और गहरी होती जा रही thi,,uske लिए घर और बहार दोनों जगह मनु को देखना और सुन्ना बर्दाश्त से बहार हो चला था,

जिसमे निशा को देखकर चिंटू को जो सुकून मिलता था हु सुकून भी जब निशा मनु से प्यार से बात करती तोह नफरत में तब्दील हो जाता tha,,usper आजकल श्याद निशा ने भी आग में घी डालने का काम कर दिया था ..जबसे मनु को नीता मम (उसकी नयी माँ ) ने अपने साथ खाना खिलाना शुरू किया tha..tabse मनु ने घर से लंच लाना बंद कर दिया था ..और जब यह बात निशा को पता चली तोह निशा अब मनु के लिए अपने घर से लंच लेन लगी थी..

हाँ लंच तीनो फ्रेंड चिंटू, निशा ,मनु में शेयर होता था पैर चिंटू जब कभी मनु को निशा से स्पेशल ट्रीटमेंट मिलता देखता तोह हु गुस्से से पागल हो जाता था,,

स्पेशल ट्रीटमेंट मतलब कभी कभी निशा ज़िद करके मनु को अपने हाथों से खिलने लगती थी, मनु के लिए भी यह सब अजीब था उसे बड़ा ावक्वार्ड फील होता tha.khud जब क्लास में जब सबने निशा को अपने हाथों से मनु को खिलते देखा तोह सबकी निगाहे निशा और मनु पैर जैम गयी थी ,,

जिसे निशा ने आज स्पेशल ट्रीट है मनु की बोलकर सबको चुप करा दिया tha,,per लोग तोह बातें न करें ऐसा हो नहीं सकता पैर क्युकी तीनो एक साथ hi रहा करते थे सो बाकी क्लास ने इतना गौर नहीं किया ,,बाकि सब अपने में मगन हो गए the,,per इस बात ने चिंटू को गुस्से से लाल कर दिया था, उसने जब निशा ने मनु को अपने हाथ से खिलाया तोह उसे लगा की मनु ने उसका हक़ उससे चीन लिया hai..aap किसी को प्यार करो और हु आपके दोस्त (चिंटू के दिल में उसके सबसे बड़े दुश्मन) को अपने हाथ से खाना खिलये तोह गुस्सा न ए ऐसा कैसे हो सकता था..

चिंटू कुछ कहता उससे पहले hi मनु ने रियेक्ट किया निशा पैर” निशा यह सब क्या तरीका है ,,देखा न सब कैसे देख रहे थे ..मुझे यह सब ाचा नहीं लगता तुम दोस्त हो दोस्त की तरह रहो ,,मैं नहीं चाहता की कल को कोई मेरी दोस्त को बदनाम करे ,,और तुम तोह समझदार हो तोह यह सब इसका क्या मतलब है…”

निशा श्याद जानती थी की मनु का ऐसा hi रिएक्शन होगा ..”तुम फालतू की बातों पैर ध्यान न दो मेरे जो दिल में आता है .मैं करती हूँ मुझे किसी के बोलने से कोई लेना देना नहीं hai,tum बस चुपचाप खाना kaho..baki सबको जो बोलना है बोलने दो…! एक दिन बोलेंगे दो दिन बोलेंगे फिर किसी दिन कोई नयी बात होगी तोह उसमे बस्सी होकर यह सब इग्नोर कर देंगें ..सो उनकी परवाह क्यों karun…jise जो करना जो कहना है कहे मुझे किसी की कोई टेंशन नहीं है..”

मनु ”दोस्ती का यह मतलब नहीं की तुम कुछ भी करो और गलत को भी सही बोलो मैं मंटा हूँ दूसरों के बेमतलब की बात से हमे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए पैर इसका यह मतलब नहीं हम सभी को इग्नोर करते रहें .हम समाज में रहतें हैं और समाज के नियम हम सभी पैर लागो होते हैं .क्युकी बिना नियम के इंसान और जानवर में कोई अंतर नहीं रह जाएगा ..और मैं और तुम सभी नियम के अंदर आते हैं ..सो बे इन लिमिट..! माय डिअर निशा ”मनु ने उसे पोलाइट वे में समजने की कोशिश की थी..

पैर निशा ने इसे अपनी तोहिं hi समझा और kaha”samaz के नियम एक टाइम के बाद इंसान की बेड़ियाँ बन जाते हैं सो ऐसे नियम मैंने से इंसान की अपनी ख़ुशी पैर जो असर पड़ता है उसका क्या??”

मनु समझ गया इसे समझाना बेकार hai..nisha फिर बोली “अगर तुमने आगे से कोई ड्रामा दिखाया तोह मम्मी से कह दूंगी की आपका बनाया खाना मनु को पसंद नहीं खुद जवाब दे देना उन्हें …!”

मनु ”ाचा जी गलती हो गयी मुझसे !...मेरी दादी अम्मा.. तुम्हको अन्त्य जी से कुछ कहने की ज़रूरत नहीं जो करना है करो पैर प्ल्ज़ आगे से सबके सामने नहीं…”

चिंटू से अब चुप रहना मुश्किल tha..”manu सही कह रहा है आगे से हम कहीं और बैठकर लंच करेंगे..”

निशा को और क्या चाइये था ..हो गयी खुश …पैर चिंटू को तोह और आग लग गयी ..की उसका प्यार यानी निशा अब खुद अपने हाथ से मनु को खिलने लगी थी..

खैर जैसे तय हुआ था वैसे hi हुआ तीनो में …अगले दिन से तीनो ने लुक में एक खाली पड़े क्लास रूम में लंच करना शुरू कर दिया ..जहां निशा जोर के साथ मनु को अपने हाथ से खिलाया करती थी और जब चिंटू से सेहन करना मुश्किल हो जाता तोह निशा के हाथ के निवाले मनु के मुँह तक पहुँचने से पहले रस्ते में hi चीन कर खा jata..jis पैर मनु और निशा एक दोस्त की तरह उसकी इस हरकत पैर हसकर रह जाते पैर कभी कभी कभी निशा चिंटू को दांत देती “चिंटू यह अछि बात नहीं है अगर खाना hi है तोह टिफ़िन से लेकर खालो “

पैर चिंटू कहाँ मंटा भला जो मज़ा उसे निशा के हाथ से आता सो टिफ़िन से लेकर कहाँ सो बेशर्मी से कह देता “मनु तोह पागल है मैं नहीं की कोई एंजेल खुद अपने हाथ से खिलाये और मैं न कहूं..”

जिसपर निशा अपनी तारीफ समझ कर इग्नोर करती क्युकी उसके लिए मनु का प्यार चिंटू की इन हरकतों से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट था..

वहीँ मनु को डबल खाना पड़ता था एक नीता मम के साथ और दूसरा निशा के साथ सो उसने भी तरीका निकल रखा था थोड़ा इधर से खता थोड़ा उधर से सो मनु का काम चल जाता ..

ऐसे hi टाइम बिट रहा था ..जिसमे चिंटू को सिर्फ मौके की तलाश थी जिसके चलते हु मनु को निशा से दूर कर सके ..और कहते हैं न जहाँ चाह वहीँ राह …श्याद मनु की बुरी किस्मत कहो या चिंटू का सही टाइम ..

एक दिन की बात है चिंटू सुबह रेडी होकर स्कूल जा रहा था ..रस्ते में उसे राजिंदर का ऑफिस दिखा जहां राजिंदर काम करता tha..wahaan से चिंटू गुज़रा जिसमे राजिंदर उसे बहार साफ़ सफाई करता हुआ dikha…(kyuki उस दिन सफाई वाला बाँदा काम पैर नहीं आया था ..सो राजिंदर खुद काम कर रहा था ..क्युकी उसका मन्ना था की कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता..)

एक बार को तोह चिंटू हैरान हो गया राजिंदर को यह सब करते देख कर …फिर अचानक से उसके चेहरे पैर एक शैतानी स्माइल आयी और जोर से चिल्लाकर बोलै “अंकल जी नमस्ते “

जिसपर राजिंदर ने भी हसकर उसे जवाब diya…”namste बीटा”.

उसके बाद चिंटू चला गया अपने रस्ते खुद से बात करते हुए “साले मनु बहुत बनता है न अब देखूंगा तुझे अगर तुझे ऐसे hi छोड़ दिया तोह मैं चिंटू किस नाम का ???”

उसके बाद स्कूल गया चिंटू और उसने स्कूल में अपनी शैतानी चाल फैलाना शुरू कर दिया की…

राजिंदर मनु का बाप एक जमादार है जोकि एक झूंठ hi tha,per चिंटू यह झूंठ भी मौके की तरह इस्तेमाल करना चाहता tha…taaki कैसे भी मनु को पुरे स्कूल में निचा दिखा sake...or निशा से दूर कर sake..or मनु को सबकी नज़रों में गिराकर अपनी नफरत और अपना बदला पूरा कर सके..

बात बढ़ने लगी …इस बात से नार्मल लोगो का क्या होना था पैर चिंटू ने मोस्टली लोगो को अपने साथ कर लिया था और जो बचे हुए थे हु मनु से जलते थे सबकी अपनी अपनी वजह thi…jaise किसी को उसके baat-chit करके लोगो पैर चार्म से प्रॉब्लम थी ,(जिसको जो नहीं अत दूसरे की वही ऐडा से जलना फितरत हो जाती है).

तोह कोई उसके फर्स्ट आने से जलता था ,,तोह किसी को उसके नीता मम के स्पेशल रिश्ते से जोकि उन्हें पता नहीं था उससे प्रॉब्लम थी …सबकी अपनी -अपनी वजह थी जलने की मनु से और उनमे से मोस्टली को सिर्फ बहाना चाहिए था की कैसे हु अपने दिल की भड़ास निकल कर मनु को निचा दिखा सकें ….और यह मौका दिया चिंटू ने उन सबको …

चिंटू ने एक अपना हर एक सेकंड लोगो के कान भरने में लगा दिया …जिस कारन हु लुक में निशा और मनु के साथ

नहीं पुछूँछा …जिस पैर मनु ने सोचा भी यह तोह चमत्कार हुआ की चिंटू लुक पैर नहीं आया???

जब उसने निशा से कहा “आज तोह लगता है दिन कहीं और से निकला है ..की चिंटू अपनी एंजेल को भूल गया..”

निशा “ाचा जी और एंजेल तोह जैसे उसी के लिए पागल है ..न हीहीहीहीहीहीहीही! अगर नहीं आया तोह ाचा hi है na..jaane दो रोज़ तंग करता tha..aaj कितना सुकून है मैं और तुम बस..”

आज का दिन तोह निशा के लिए स्पेशल था उसके लिए तोह मनु और उसके बिच में आज कोई नहीं था …उसने आज दिल खोलकर मनु को खिलाया और बाद में उसके कंधे पैर सर रखकर यह boli”hey भगवन कितना थक गयी हूँ main..”manu ने सोचा की शायद सुच में थक गयी होगी ..सो उसने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया और उसे सर रखकर लेते रहने दिया..

निशा के लिए आज का दिन बड़ा हसीं था की जइसे हु प्यार करती है ..उसके कंधे पैर सर रखकर लेती हुई है …हु मन ऊके सीने की हर धड़कन साफ़ सुन सकती thi…jisme उसे एक असीम सुख मिलरहा था वहीँ उसके हसीं चेहरे पैर यह सोच कर लाली चा गयी थी ki…uska प्यार उसके कितने करीब है ,,हर रोज़ हु नए नए सपने सजाती थी मनु के और करीब आने के पैर आज जो मौका उसे मिला tha…who कुछ स्पेशल था..

खैर निशा तोह टाइम भूल hi गयी थी जब लंच ओवर होने की बेल्ल बजी तोह मनु ने कहा ”निशा चलो लंच ओवर हो गया है..”

निशा अचानक से jaagi..or अपने मुँह में बड़बड़ाने लगी ”यह लंच भी कितना छोटा होता hai..kitne सुकून से thi..na आज हु बेहूदा चिंटू था बिच में डिस्टर्ब करने ko..or एक यह है अकड़ू जिसे इतना भी समझ नहीं ात की एक लड़की किसी लड़के के कंधे पैर सार्क अब रखती है…” खुद में बुडडा रही thi..dhire धीरे..

मनु ”तुम कुछ कह रही हो क्या”???

निशा “नहीं मैं क्या कहूँगी भला यही कह रही थी की चिंटू के न आने से कितना शांत लग रहा है???”

मनु “ओह्ह! इसका मतलब तुम उसे मिस कर रही हो कोई बात नहीं कह दूंगा उससे की तुमने उसे आज मिस किया ..बहुत ज्यादा मिस किया..”.

निशा “ऐसा मैंने कब कहा और भला मैं क्यों करने लगी मिस उस बेहूदा इंसान को (चिंटू को निशा बेहुंडा कहती थी उसके पीछे) और खबरदार अगर उसको मरे बारे में कुछ भी कहा तोह उसे याद और मिस करे मेरी jutti..mere इतने बुरे दिन नहीं आये की मैं किसी बेहूदे इंसान को मिस करूँ मैं उसे तुम्हारे चलते जेहलती हूँ वर्ण निशा शर्मा के आस पास भटकने वाले kide(insect और बुग्ग) भी क्लासी होते hain…hmmphh””

मनु ”यस निशा शर्मा जी अचे से समझ गया की आप कहाँ और हम कहाँ हम तोह किडून से भी बेकार hain…chaleye जल्दी चलए वार्ना क्लासी का तोह पता नहीं पैर हम दोनों की क्लास मिस जरूर हो जाएगी…”

निशा ने लगबाह मनु को खींच कर उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और उसकी आँखों में ऑंखें दाल कर कहा ”निशा के लिए तुम्हारी अहमियत क्या है इन आँखों में देख सकते हो और उस बेहूदा इंसान से कभी अपनी तुलना मत करना ..उस में और तुम मैं ज़मीन और आस्मां जितना अंतर है..”

मनु ने उसकी आँखों में देखा तोह उस कुछ नज़र आया शायद हु यह सब नहीं देखना चाहता tha..so उसने नज़ारे चुरा ली और खुद को निशा से छुड़ाकर अपने हाथ निशा के सामने जोड़कर बोलै “ok निशा जी आप जीती और मैं हरा अब चलो भी..”

बहार एक कोने से दो ऑंखें अंगार भरकर उन्दोनो को देख रही थी …एक शैतानी हंसी उनके जाने के बाद हंसी गयी और

एक आवाज़ आयी “जिसे तुम बेहूदा इंसान कहती हो निशा शर्मा उसका प्यार नहीं दीखता तुम्हे न अपने लिए दीवानगी दिक्ति है ..आखिर क्या है उस दो ताके के मनु में जिसके चलते तुम अपने सबसे बड़े दीवाने को बेहूदा इंसान कहती ho…tumhare प्यार की कसम उस मनु को तुम्हारी ज़िन्दगी से न निकल कर फेंका और न तुम्हे इसी बेहूदा इंसान से प्यार करने पैर मज़बूर किया तोह देख लेना चिंटू नाम नहीं मेरा…

“हस्ता हूँ हस्ता hun..kabhi जोकर तोह कभी मंदरी हूँ..

नाम मेरा चिंटू hai..per मैं एक बाज़ीगर तोह कभी शिकारी हूँ..”

और अब मनु को हु हर आंसू वापस करूँगा जो उसने मुझे दिए the…abse हर रोज़ खून के ांसो रोयेगा मनु ……हाहाहाःहाहा

जी हाँ यह कोई और नहीं चिंटू hi था जो न आने का बहाना करके छुपा हुआ था और देखना चाहता था की निशा और मनु उसके बारे में बात करते हैं ,,और बात करते हैं भी तोह क्या.??.

और जब उसने निशा को खुद को बेहूदा इंसान कहते हुए सुना तोह उसका दिमाग सांक गया ..पैर फिर भी शांति से देकता raha..ab चिंटू की कसम क्या रंग लेन वाली है यह तोह किस्मत और टाइम hi बता सकते हैं..

खैर दिन बिता मनु ने वही अपना रेगुलर रूटीन फॉलो किया …और सो गया अगले दिन के इंतज़ार में .उस कसम से बेखबर जो चिंटू ने खाई थी उसे (मनु को) बर्बाद करने की खून के आंसू रुलाने की..

अगला दिन मनु की ज़िन्दगी में बहुत कुछ बदलने वाला था…

मनु सुबह उठा नास्ता किया सुमित्रा की हेल्प की और खुद को और अजय को रेडी किया ..और चल दिया स्कूल में …

स्कूल जहां आज बहुत कुछ बदलने वाला था..

मनु ने अजय को उसकी क्लास के बहार छोड़ा और अपनी क्लास की तरफ चल पड़ा …आज जब हु अपनी सीट पैर गया तोह वहाँ कुछ अजीब tha..wahan कोई और hi उसकी जगह पैर बैठा हुआ था…

चिंटू के साथ बैठे हुए ने उस लड़के से मनु ने कहा “कमल है यार आज तू यहां कैसे तू तोह कहीं और बैठता था na…chal वापस अपनी जगह पैर जा यह सीट तोह मेरी है“??

Ladka”yeh सीट तोह आज से मेरी है और आगे से भी मैं hi बैठूंगा यहां ! ..और तेरा क्या स्पेशलय नाम लिखा hai.??yahaan जा कहीं और जाकर मर चल भाग यहां से “

मनु को गुस्सा तोह बहुत आया पैर सुबह का टाइम था सो बहस नहीं करना चाहता tha..so पीछे चल पड़ा ..पैर आज तोह जैसे किस्मत और शायद साड़ी क्लास उसका इम्तिहान लेने पे hi लगे थे …

मनु जिस सीट पैर बैठने को होता वहीँ से सब यह कहकर भगा देते “chal-chal आगे बाद”

मनु पूरी क्लास के तेवर देखकर हैरान tha..aaj निशा शायद स्कूल नहीं आयी thi..usne लड़कियों की रौ की तरफ देखा वहाँ निशा नहीं थी और तोह और उसे यकीं नहीं हुआ जो लडकियां जिनकी उसने न जाने कितनी बार हेल्प किट hi..or बदले में कभी कुछ सोचा भी नहीं हु साड़ी लडकियां उसे hi देख रही thi…ek अलग सी नज़र से हु नज़र उसे अंदर तक हिला चुकी thi..kyuki उनकी नज़रो में आज एक धिकार की भावना thi..jo किसी भिखारी को देख कर भागने पैर आती thi…manu आज इतना हैरान था की उसे खुद समझ नहीं आ रहा tha..ki कल तक उसके साथ रहने वाले उसकी हेल्प से आगे बढ़ने वाले और हु साथी जिनको जब जरूरत पड़ी हु उनके साथ tha..har बार बिन किसी बहाने के हु सभी एक दिन में कैसे उसे धिक्कारने वाली नज़र से देख सकते hain..aakhir एक दिन में उसमे क्या बदल gaya..usne कई बार अपनी ड्रेस को चेक किया सब सही लगी कई बार रुमाल से अपना चेहरा देखा सब सही hi था ..पैर आज हु सबसे पीछे बैठा tha..or जब भी कोई मौका मिलता साड़ी क्लास के लोग उसे उसी चीरने वाली नज़र से देखते the..jo शायद मनु के लिए सहन करनी मुश्किल thi..or मनु सब समझने की कोशिश करता पैर कुछ समझ न आता …

खैर ..क्लास टीचर सर आये अटेंडेंस लगी ..एक बार तोह सर भी हैरान हुए मनु को सब पीछे की बेंच पैर अकेला बैठा देखकर ..उन्होंने पूछा “मनु तुम सबसे पीछे क्यों बैठे हो???”

मनु इस बात का क्या जवाब देता जब उसे खुद पता होता तोह ..वहीँ सबसे आगे के लड़के ने सर के कान में कुछ कहा जिसके बाद सर ने भी उसी धिक्कारनेवाली नज़र से मनु को देखा …मन ऊके लिए सोचने वाली बात थी की यह सब है ..क्या उसने देखा सब उसकी तरफ hi देख रहें हैं उसी नज़र से पैर उसने जब गौर से देखा तोह पाया जहां सब के चेहरे पैर एक सा एक्सप्रेशन है वहां सिर्फ एक चेहरे पैर मुस्कराहट hai..manu उस चेहरे और उस मुस्कराहट को अचे से पहचानता था की हु सब किसकी दें है क्युकी उसके साथ तोह काफी पुराण साथ था मनु का और मनु उस चेहरे और उसपर रहनेवाली खुद के लिए नफरत को अचे से पहचानता था और हु चेहरा था चिंटू का मनु को समझ आज्ञा की जरूर चिंटू hi इसका मास्टरमाइंड है ..पैर मनु इस बात से परेशान था की सबकी नज़र में धिकार और एक नफ़रत जो आखिकतार जो सिर्फ उसने चिंटू की आँखों में देखि thi.woh अचानक से सबकी आँखों में कैसे आ गयी ..और ऐसा क्या हुआ की कोई भी उसके साथ बैठना नहीं चाहता..

खैर इस बात का जवाब भी उसे मिलना hi था …हु मिला उसे नेक्स्ट पीरियड के स्टार्ट होने पैर जब नेक्स्ट टीचर मम आयी तोह शामे क्वेश्चन मनु पीछे क्यों??

अब क्युकी बचे बड़े हो रहे थे और सर के मुकाबले मम थोड़ी नरम रुख रखती थी बचूं के लिए मतलब बिना वजह पिटाई nahi..so उन्होंने पूछा की मनु पीछे क्यों?

तोह कोई चिल्लाकर बोलै “जमादार अरे नॉट अल्लोव विथ us..”jiske बाद सब हसने लगे और मनु हैरान यह सब क्या बकवास hai..jamadar कोण जमादार ??

मम को आगे बैठी लड़कों ने पूस पूस करके कुछ कहा तोह सर के जैसा मम ने भी लुक दिया मनु हैरान tha..ki साला यह सब ड्रामा क्या hai..uska पूरा दिन इस ड्रामे के साथ बिता जिसमे हु नीता मम के पास भी गया पैर मम से उसने कुछ कहा nahi…who मम के साथ टाइम स्पेंट करके वापस आया और खुद से समझने लगा की कैसे सबकी नज़ारे एक दिन में बदल गयी जहां कल तक सब उसके आगे पीछे नाचते थे कभी काम के नाम पैर तोह कभी बेमतलब वहीँ आज सब ने उसे ऐसे इग्नोर मारा था की जैसे उसका उस क्लास ,उस स्कूल यहाँ तक की दुनिआ में hi कोई वजूद नहीं है..

इन सब से मनु एक चीज़ समझ गया था ,,दुनिआ के लिए आप लाख ाचा काम करलो पैर अगर आपके बारे में कोई एक चीज़ अगर किसी को चुभ जाये तोह उस एक चीज़ से हु दुनिआ आपके सारे अचे और भले कामो को नज़रअंदाज़ कर देती hai..manu की जगह शायद कोई और होता तोह शायद घर बहग जाता पैर मनु कहीं न कहीं जनता tha..ki उसके साथ उससे जलते hain..kyuki उसने जो जलन और नरफत चिंटू की आँखों में देखि थी हु शामे रिएक्शन उसने कई आँखों में महसूस किया tha..use अचे से पता था की नफरत कभी न कभी अपना रंग दिखती है ..चिंटू के साथ पहले कई बार हु देख भी चूका tha..toh शायद उसे पता था की यह सब भी कभी न कभी मौके पैर अपनी नफरत को हवा देने में कोई कसार नहीं रखेंगे ..और शयद वैसा हुआ भी पैर उसे इतना मेजर रिएक्शन होगा यह उसकी कल्पना भी से परे था..

खैर दिन बिता आज शायद राजिंदर भी जल्दी घर आज्ञा tha.so सबने खाना खाया और मनु ने अपनी माँ की मालिश की और जब जाने लगा तोह राजिंदर ने उसे रोका “क्या बात है बीटा सिर्फ माँ hi दिखती है तुम्हे बाप से भी कभी दो बातें कर लिया करो …”

मनु “पापा कैसी बात कटे हो ,,मैं तोह बात कर भी लूँ पैर आप जब आते हैं उसके बाद मम्मी का खाना और इसी सब में आप लोग दिन भर की थकन के साथ सो जाते हैं तब मैं भला किस टाइम बात करूँगा आप दोनों से मम्मी से तोह मालिश के टाइम बात हो जाती है ,पैर आपसे तोह हु भी नहीं,,”

राजिंदर “ऐसी बात है तोह चल आज दोनों बाप बेटे वाक पैर चलते hain..jahan दोनों बात करेंगे ..यहां बात करेंगे तोह शयद तेरी मम्मी की नींद ख़राब ho…”Sumitra के चेहरे को देखकर कहा था क्युकी सुमित्रा दिन भर की थकन और मनु की मालिश से मिले सुकून से चैन से सो गयी थी..

जिस पैर दोनों बाप बेटे बहार चल दिए क्युकी अजय टीवी में लगा हुआ था सो दोनों ने उसे वहीँ छोड़ दिया ..और रोड पैर घूमने लगे ..

दोनों बाप बेटे घर से निकले तोह थे बात करने के लिए पैर बहार निकल कर सिर्फ चुप चाप चल रहे the..Raat का टाइम था ठंडी हवाएं चली रही थी दोनों बाप बेटे सिर्फ एक ख़ामोशी के साथ चल रहे the..jisme शायद दोनों बात करने के लिए कोई टॉपिक ढूंढ रहे थे…

ऐसे में राजिंदर ने खुद hi पहल करते हुए मनु से कहा “और बीटा स्कूल लाइफ कैसे चल रही है तुम्हारी ..”??

मनु “सब thik-thak है ..पापा ”

राजिंदर “बीटा बेशक तुम बड़े हो रहे हो पैर अभी इतने बड़े नहीं हुए की अपने बाप से झूंठ बोल sako,baap हूँ तुम्हारा जनता हूँ टाइम नहीं दे पता पैर इसका मतलब यह नहीं की मुझे अपने बचूं की फ़िक्र नहीं hai..such सुच बोलो बात क्या है????”

मनु को श्याद अपने बाप से इस बात की उम्मीद नहीं थी उसने छुपाते हुए kaha“papa कोई बात नहीं है और मैं झूंठ क्यों बोलूंगा आपसे भला“ मनु ने क्वेश्चन मार्क अपने बाप के पीला में दाल दिया..

राजिंदर “तुम मेरा खून हो, सो बीटा यह मत भूलना की बीटा बीटा hi होता है और बाप हमशा baap.yeh जो लच्छेदार बातें तुम करते हो हु तुम्हे मुझसे hi डीएनए में मिली हैं सुच बोल दो क्युकी शाम से hi नोटिस कर रहा हूँ तुम्हे क्या प्रॉब्लम hai,,,koi पैसे की टेंशन है या कोई लड़की पसंद आगयी hai..agar पैसे की टेंशन है तोह bol…or अगर स्कूल में प्रॉब्लम है हु भी बता …और किसी लड़की पैर दिल हार गया है तोह हु भी बतादे बाप हूँ तेरा तोह तेरी ..जैसे भी होगा हेल्प hi करूँगा …वैसे पैसे की प्रॉब्लम लगती नहीं तुझे क्युकी तू खुद पैसे को अचे से समझता है और बची लड़की की बात तोह मैं अचे से जानता हूँ तुझे क्युकी तुझमे तेरी माँ और मेरे दोनों के अचे संस्कार हैं तोह तू लड़की वाला प्रॉब्लम पालने वाला इंसान है nahi..pyaar का क्या है कभी भी और किसी से भी हो सकता है तोह कभी प्रॉब्लम आये तोह बोल देना तेरा बाप सब हैंडल करलेगा ..पैर अभी लगता नहीं की बात लड़की की hai???…toh इसका सिर्फ एक hi मतलब बनता है की स्कूल में hi कोई बात हुई hai..bol क्या बात है??”

मनु हरैं सा राजिंदर का मुँह देख रहा tha..woh इस बात पैर हैरान था की मम्मी को तोह मैंने पता चलने नहीं दिया पैर पापा ने कैसे पता लगा लिया की मैं टेंशन मैं हूँ और अचे से समझा भी दिया की कोई भी प्रॉब्लम है तोह हु मेरे साथ hain..or कितनी आसानी से यह भी पता लगा लिया की प्रॉब्लम स्कूल की hai..”such में बीटा हमेशा बीटा होता है बाप हमेशा बाप “ मैं में मनु ने अपने बाप की अकाल और अपने बाप के प्यार को सलूट मार diya..ab क्युकी राजिंदर ने उसकी प्रॉब्लम को स्कूल तक पता लगा लिया था सो राजिंदर से छुपाने का कोई फ़ायदा नहीं था क्युकी आगे जाकर राजिंदर पता चल hi जाता और अगर बहार के इंसान से कुछ पता चलता तोह राजिंदर को और बुरा लगता सो मनु ने सब बताने का फैसला किया..

और दिन भर क्या हुआ था और कैसे सब उसे कैसे और क्या बोलकर ट्रीट कर रहे थे सब राजिंदर को उसने बता दिया …और यह भी बताया की उसे डायरेक्ट और इंदिरेक्ट वे में चिंटू पैर शक है..

राजिंदर इसकी बात सुनने के बात कुछ देर तक सोचता रहा और bola”tumhara शक सही hai..kyuki तुम अचे से जानते हो की मैं एक सुपरवाइजर के साथ में केयर टेकर भी hun..kyuki कंपनी में कॉस्ट कटाई के नाम पैर बहुत लोगों की नुआकरियाँ गयी हैं जिसके चलते जहां में सिर्फ सुपेर्विसिओं पैर ध्यान देता था पैर अब मुझे एक्स्ट्रा इनकम के लिए केयर टेकिंग भी करनी पड़ती है ..और करेटकिंग में अगर कोई नहीं आता है तोह मुझे खुद hi उसका काम करना पड़ता है ..क्युकी बीटा तुम जानते हो हाँ जी की Naukri..or न जी का घर और अगर मैं नौकरी छोड़ दूंगा तोह उसका असर तुम्हारी माँ पैर पड़ेगा जो एक मर्द होते तुम्हारे बाप को यानी मुझे शोभा नहीं देता पहले hi हु बेचारी इस घर के लिए रात दिन लगी रहती है सो उसके चलते hi मैं भी अकेले तीन आदमियूं के काम में लगा रहता हूँ …खैर तुम्हारा शक बेवजह नहीं है ..कल सुबह चिंटू आया था मेरे ऑफिस मैं उस टाइम मैं साफ़ सफाई खुद hi कर रहा था क्युकी सफाई वाला बाँदा आया नहीं था सो मुझे चिंटू को वहाँ पैर देखकर हैरत भी हुई पैर क्युकी तुम्हारे साथ रहता है सो मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया पैर जाते हुए उसके चेहरे पैर एक अलग सी शैतानी चमक थी जिसने मुझे थोड़ा हैरत में डाला tha,per अब तुमने जो कहा है उससे उसका मतलब समझ आगया है..”

मनु “क्या मतलब पापा”

राजिंदर “बेटे दुनिआ उतनी सीधी नहीं है जितना तुम समझते हो हर बार प्यार के बदले प्यार मिले यह ज़रूरी नहीं hai…so प्यार के बदले प्यार पाने की इच्छा मत पालो क्युकी दुनिआ में सब तरह के लोग हैं और सब अचे हों यह ज़रूरी तोह नहीं हर कोई दुनिआ में आगे बढ़ने में लगा है सो तुम हर किसी से सामान इज़्ज़त के बारे में सोचकर इंतज़ार करके अपना टाइम बेकार नहीं कर सकते जानता हूँ की बचपन से सिर्फ हर बचे को ाचा बनने के लिए त्यार किया जाता hai…or तुम्हे भी वही संस्कार मिले हैं …पैर बड़े होने पैर दुनिआ के साथ इंसान की ज़िन्दगी में भी बहुत अलग बदलाव भी होते हैं जिसका असर उसके संसकारो और दुनिआ के टकराव से मिलता है …जिसमे या तोह संस्कार जीत जाते हैं या दुनिआ पैर दोनों सूरत में इंसान हार जाता hai..yahan मैं तुम्हे न hi अपने संस्कार बदलने को कह रहा हूँ न hi दुनिआ से लड़ने को बस मैं सिर्फ तुमको लोगो से सावधान रहने को और बदले में वापस तुम्हे प्यार और सम्मान मिले इसकी उम्मीद ना रखो यह इसलिए कह रहा हूँ क्युकी इंसान दुखी होता है जब उसकी उम्मीद नहीं पूरी होती ..सो चिंटू तोह सिर्फ अभी एक hi है आनेवाले टाइम मैं तुम्हे ऐसे लोग मिलेंगे जो तुम्हारी आखों में आँख दाल कर तुमसे झूठ कहेंगे की तुम्हारी परवाह hai..unhe पैर वही लोग अपने दिलों में तुम्हे बर्बाद करने का सपना पीला होंगे ..और तुम्हे इन सब से डरना और रुकना नहीं है …हर कदम पैर दुनिआ में लोग एक दूसरे को निचा दिखते हैं …अब अपने खुद के चाचा को देख hi लो उसकी नज़र में मैं हु बेवक़ूफ़ इंसान हूँ जो उसकी परवाह करता hun…jiske लिए मैं कुछ भी कर सकता hun..per बीटा ऐसा नहीं है की मैं उसकी गन्दी फितरत से अनजान नहीं हूँ अचे से समझता हूँ मैं हु मेरे बारे में क्या सोचता hai??..per मैं चुप इसी लिए रहता हूँ क्युकी मुझे तुम दोनों को भी पड़ना लिखना है सो मैं उस सी उसी बेवक़ूफ़ की तरह मिलता हूँ जैसा हु मुझे समझता है..”

Manu”papa इसका मतलब चाचा की सोच अचे से जानते हैं तोह कुछ करते क्यों नहीं???”

राजिंदर “तुमने चिंटू का कुछ क्यों नहीं किया अब tak??tum भी तोह कर सकते थे न चिंटू का ??”

मनु चुप tha..kyuki सही बात थी दोनों बाप बेटे चिंटू और जय चाँद को अपने रिस्टोन की वजह से hi डोह रहे थे …जहाँ जैचंद राजिंदर का सागा भाई था वहीँ मनु चिंटू को सिर्फ पुष्पी की वजह से बर्दास्त करता tha..so मनु क्या जवाब देता अपने बाप को…. उसे अचे से समझ आ गया की उसके बाप का क्या मतलब है..

उसे बहुत बुरा भी लगा की उसके पापा राजिंदर को कॉस्ट कटाई के नाम पैर कितनी म्हणत और कितना छोटा काम करना पड़ता tha..or राजिंदर ने उसे दुनिआ का सबसे कड़वा ज्ञान उसे समझा दिया tha..ki प्यार के बदले प्यार मिले जरूरी नहीं इज़्ज़त के बदले आपको बदले में इज़्ज़त hi मिले यह भी हर जगह नहीं हो सकता और लोगो से धयान रखना होगा और सबके बिच में बैलेंस बैंकर रखना होगा की कब कोण किसे उसे कर ले किसी सिद्धि (स्तैर की tarah)so मनु ने सोचना शुरू किया क्या करना है..

राजिंदर “बीटा तुम चाहो तोह मैं चिंटू के बाप को चिंटू की हरकरत बता सकता हूँ पैर अगर मैंने ऐसा किया तोह तुम श्याद कुछ दिन चैन से रह सकते हो पैर बाद में चिंटू फिर कुछ न कुछ करेगा कब तक उसके बाप से शिकायत करता रहूँगा ….या फिर अपने तरीके से उसका हल निकल ाचा टाइम देख और उसके इस चाल को मुँह तोड़ जवाब de..dono ऑप्शन हैं तेरे पास””

मनु “पापा अगर आपने उसके पापा से कहा तोह होगा क्या उससे चिंटू बदलने वाला है नहीं ..चाचा जैसा सन है ..यहां भी पैर आप में और मुझमे एक अंतर है…”

राजिंदर हस्ते हुए “हु क्या बीटा ??”

मनु “मैं हर बार आपके चाचा की तरह उसे हर बार माफ़ नहीं कर सकता ..सो जवाब तोह दूंगा और जरूर दूंगा पैर अपने तरीके से क्युकी अगर आपने उसके पापा से कुछ कहा तोह मैं ज़िन्दगी भर के लिए आपके नाम की बैशाखी पैर आ जाऊंगा जो मुझे बिलकुल मंजूर nahi…ek वडा है मेरा आपसे पापा की आगे से आप अकेले नहीं हो अभी थोड़ा टाइम लगेगा तोह ज़रूर पैर आगे न आपको और न hi मम्मी को कुछ करने की ज़रूरत padegi…yeh आपके बेटे का वडा hai..or मुझे बहुत प्राउड है की मैं आपका और मम्मी का बीटा hun…I लव ु बोथ ..”

राजिंदर ने इस बात पैर उसे अपने सीने से लग आलिया और कहा “ी लव ु तू beta!.....mera बीटा अब बड़ा हो रहा है और जिम्मेदार भी बीटा तू अचे से समझ गया मेरा मतलब लोग आगे भी तेरे रस्ते में हर तरह से तुझे रोकने के लिए तेरे हर रस्ते पैर नयी मुश्किल डालेंगे पैर तू कब तक लोगो से उम्मीद करेगा की सब अचे हों तेरे संस्कारो जैसे असलियत में दुनिआ बहुत अलग है बीटा सो जो जैसा हो उसे बिलकुल वैसे जवाब देना सीखो या फिर रट रहो की हमको धोखा मिलता hai..tu समझदार है aage..aage तू जो कुछ भी फैसले लेगा उसमे मेरा कोई इंटरफेरे नहीं hoga…so खुश रहना सिख मेरे शेर ..की तू तयारी कर आगे के लिए क्युकी आगे हर कदम पैर एक नयी जुंग शुरू होगी..”

मनु “पापा आपने जो कहा है हु समझ गया हूँ अब अपना रास्ता साफ़ hai…apni ज़िन्दगी को मैं खुद के हिसाब से जीऊंगा और चिंटू को भी सही टाइम आने पैर सही जवाब भी dunga..per आप भी यह सब मम्मी से मत कहना ..ok “

राजिंदर “मेरा शेर बचा मम्मी से क्यों कहूंगा जब लेडीज की “”गर्ल्स टॉक”” हो सकती है तोह हम मर्दून की “”boy’s टॉक “” क्यों नहीं don’t वोर्री फादर और सोन की बातें हम दोनों तक hi रहेंगी अपनी मम्मी से तू भी मत बताना की मैं अपने काम में क्या झेल रहा हूँ ,,वह पगली और दुखी हो jayegi..so डील”????

मनु “डील done”jise सुनकर दोनों हंस पड़े..

दोनों बाप बेटे अपने घर वापस लौट गए और ,,अजय को राजिंदर ने दन्त कर टीवी बंद करने को बोलै ,,,अजय बाप की आगे क्या बोलै ,,उसने एक बार मनु की तरफ देखा मनु ने भी चुपचाप सोने का इशारा किया ,सो अजय भी चुप चाप चल दिया sone…or राजिंदर ,अजय, मनु आज के दिन के दुनिआ भर के उतार चढाव के साथ सो गए..

आज दोनों बाप बेटे में शायद पहली दफा इतनी बात हुई थी जिसमे राजिंदर ने अपने लाइफ के एक्सपीरियंस से मनु को दुनिआ की हु कड़वी सुचै बताई थी की लोग केस ीक दूसरे को इस्तेमाल करके आगे बढ़ते हैं ,,और इस्तेमाल होनेवाला इंसान कैसे खुद को लुटा हुआ महसूस करता है राजिंदर ने मनु को खुद के भाई जय चाँद की सोच और खुद की फॅमिली की वजह से क्यों हु जय चाँद को बर्दास्त करता था ..सब बताया था…

आज एक नया बांड भी बना था राजिंदर और मन ऊके बिच में एक बाप बेटे का स्ट्रांग bond..kyuki राजिंदर और मनु ने इससे पहले सर एक लिमिट से hi बात की थी पैर आज राजिंदर ने कहीं न कहीं दुनिआ के साथ अपना तज़ुर्बा और आनेवाले कल के लिए एक बाप की तरह अपने बेटे को हर जुंग के लिए त्यार रहने को कहा था..

उसके इन सब बातों को बताने से मनु को क्या सिख मिली और आगे मनु कैसे चिंटू को जवाब देगा …क्युकी चिंटू ने अपनी तरफ से नफरत की जुंग साफ़ लहज़े में शुरू कर दी थी ….राजिंदर के काम का सहारा लेकर जो उसने मनु को पुरे स्कूल में निचा दिखने की कोशिश थी उससे .साफ़ इशारा था की मनु …चिंटू की नफरत ने elaan-e-jung कर दिया hai…baari अब मनु की थी जवाब देने ki.or निशा का क्या रिएक्शन होगा मन ऊके लिए चिंटू के इस झूंठ से और मनु का क्या जवाब होगा चिंटू और आनेवाले कल के हर दुश्मन को यह अब चिंटू की किस्मत और टाइम पैर निर्भर
था...... :hint::hint:
 
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