- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 145,354
अपडेट 38
बचपन की यादें
वहीँ कनु और मनु अपनी अपनी ज़िन्दगी इतने बिजी थे की दोनों एक दूसरे से किये हुए अपने बचपन के वेड और बचपन की दोस्ती को भूल चुके थे. या यूँ समझो दोनों एक तरह से एक दूसरे से पूरी तरह अंजान हो गए थे. अब दोनों के शहर भी बदल गए थे दिल्ली और राजनगर अब मिलना बिछड़ना तोह किस्मत के हाथ में hota.or किस्मत का खेल किसी को कोई पता nahi.manu अपनी ज़िन्दगी में आनेवाले तूफ़ान से बेखबर tha.tufaan जो उसकी सोच से ज्यादा तेज़ी से उसके पास आ रहा था
टाइम अपने हिसाब से चलता जा रहा था मनु का चिंटू के साथ स्कूल उसके बाद पुष्पी के साथ पड़े और उसके बाद बाबा के पास बिज़नेस की ट्रेनिंग…
उस घटना के बाद मनु को चिंटू की सोच काफी हद तक समझ आ चुकी thi..per उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया जिसकी वजह थी पुष्पी दीदी का प्यार उसने सोचा की अगर चिंटू को कुछ कहा जायेगा तोह पुष्पी दीदी जो उसकी सगी बहिन है श्याद उनको अच् आना लगे ..
यह सोचना उसकी ज़िन्दगी में ाचा सबक देने वाला था..
वहीँ एक तरफ जय चाँद और कमलेश राजिंदर से बड़का हुआ था जिसके लिए म्हणत करके खाना बड़ी टेडी खीर थी.
जिसमे काफी हद तक राजिंदर जिम्मदार था .. जी हाँ राजिंदर क्युकी राजिंदर ने उसे बड़े लाड प्यार से पला था ,उसे कभी छोटा भाई मानकर काम करने नहीं दिया ,जो जैचंद मांगता उसके सामने राजिंदर पेश के deta,yeh सोचकर की छोटा है ,बिना माँ का hai..jahaan राजिंदर उसके लिए म्हणत करके जिम्मेदार बनता चला गया वहीँ जैचंद म्हणत से दूर होकर अलसी निकम्मा और नालायक बन गया tha..jahan राजिंदर उसके लिए जय चाँद की ख़ुशी पूरा करना अचे भाई का धरम था वहीँ निक्मे और दुरथ जैचंद के लिए राजिंदर का प्यार एक परमानेंट ड्यूटी था, उसके लिए राजिंदर एक ऐसा एटीएम था जिसको जब चाहे भाई बोलके जैचंद चुना लगा देता tha..jiska सिद्ध असर राजिंदर और सुमित्रा की फॅमिली पैर पड़ता था..
खैर साल पूरा होने को आया था हर स्कूल की तरह यहाँ भी एग्जाम की अनाउंसमेंट हो चुकी थी.
जिसके बाद हर रोज़ कहनेवाले भी अब पड़ने में लगे थे ,,मनु को कोई टेंशन नहीं थी इसकी क्युकी उसकी टूशन टीचर पुष्पी जीतनेय प्यार से मनु को खिलाती थी उतने hi सख्ती से मनु को पड़ती thi..padai में उसे उसके आगे कोई बहाने नहीं चलता tha.shuru में मन ऊके हाल पुष्पी से पड़ने में बड़े बुरे हुए पैर बाद में धीरे धीरे हु भी राफ्तेर के साथ कोर्स कम्पलीट कर चूका था, सो उसे एग्जाम की ज्यादा चिंता नहीं थी..
खैर जब एग्जाम की डेट आनेवाली थी तोह स्कूल के सब दोस्तों ने मनु से पूछा उसकी पड़े का क्या
हाल है. मनु ने पुष्पी की बात याद की और बोल दिया यार बुरा हाल है …”पता नहीं इस बार क्या होगा”
उसकी इस बात से बाकी के दोस्तों को जहाँ लगा यार सबका एक जैसा हाल है वहीँ कोई एक था जिसके चेरे पैर शैतानी मुस्कराहट तेर gayi.jisko मनु ने बखूबी देख लिया और मैं hi मैं में कुछ सोचकर वहाँ से चला गया ..
वापसी में चिंटू उसके साथ tha.manu ने चिंटू से पूछा “यार तेरी तयारी कैसी hai.exam में अचे नंबर लेन हैं तुझे”
चिंटू “अबे पढ़कर कोनसा मुझे कोई मॉडल मिलने वाला hai.abhi तोह छोटी क्लास है 10तह या 12तह होती तोह सोचता भी पासिंग मार्क आजाये तोह भी काफी हैं मेरे लिए तू अपना सोच और बता कैसा चल रहा है “
Manu”kya चलेगा यार तुझे तोह पता है ,स्कूल उसके बाद अजय की पड़े उसके बाद बाबा के पास चला जाता हूँ कुछ खास नहीं है ,और इस बार टेंशन हैं पता नहीं पास हो भी पाउँगा या nahi,per अगर मैं फ़ैल होगया तोह और तू पास हुआ तोह भी सुच कहता हूँ चिंटू मुझे तेरे लिए बहुत ख़ुशी होगी”
चिंटू ने सोचा लगता है सचमे मनु की बुरी हालत है ,,मैं में बड़ा खुश हुआ पैर उपपरके मैं से बोलै “यार तू कैसी बात करता hai,,tu टेंशन न ले पड़ना शुरू करदे पास हो जायेगा और अगर तू फ़ैल भी हुआ तोह भी मेरा प्यार मतलब यारी ख़तम थोड़ी न hogi,,tut ओह भाई ह अपना “
मनु ने आगे कुछ नहीं kaha.dono अपने अपने घर पुँहचे और दिन बीतने लगे .
एग्जाम की डेट पास आयी तोह बाबा ने कहा पड़े पैर ध्यान दो ..
सो मनु अब सिर्फ अपनी रेविसिओं करता और अजय की पड़े करवाता पुष्पी के अजय को पड़ने से अजय भी काफी हद तक लाइन पैर था, उधर पुष्पी भी अपने एग्जाम की तयारी में लगी थी..
चिंटू हो या बाकी सब अपने तयारी में लगे the.time हुआ और एग्जाम चलने लगे मनु और चिंटू की क्लास में अल्फबेटिक के हिसाब से रोल नंबर पड़ता था. सो दोनों के रोल नंबर दूर पड़ते थे एग्जाम पैर दोनों एक hi रूम में थे एग्जाम के बिच में मनु बिच में कभी चिंटू को देखता तोह चिंटू अपना आंसर लिख रहा होता …
जब एग्जाम ओवर हुआ तोह सब लोग क्वेश्चन पेपर के आंसर डिसकस करने लगे जो अधिकतर की आदत होती है मनु को यह सब अजीब लगता tha,kyuki उसका मन्ना था की आपके आंसर डिसकस करने से आंसर जो अपने लिखा है उसपर से भी आपका कॉन्फिडेंस चला जेगा और वैसे भी एग्जाम में जो लिख दिया सो लिख दिया उसके बाद में टेंशन लेने से दिमाग परेशान hi hoga,yeh सब पुष्पी दीदी की सिख थी की पड़ना है तोह एग्जाम से पहले पदों बाद में आंसर को डिसकस करना फ़िज़ूल है.
सो मनु चुप hi रहा बाकि सब ने उससे पूछा कैसा गया एग्जाम मनु का जवाब सिंपल tha”bhai जो दिया सो दिया न ज्यादा ाचा था न ज्यादा बुरा”
उसके बाद सबने चिंटू से पूछा उसने बड़े स्टाइल से कहा “भाई तुम्हारे भाई ने 100% पेपर किया है ..”
जिसको सुनकर सब लोग सोच में पड़गए ..की चिंटू शायद इस बार फर्स्ट आये ..क्युकी चिंटू उनके लिए तोह नया था सो जो चिंटू ने कहा सबने मान लिया जिसमे कुछ अपने न पड़ने को कोस रहे थे कुछ अपने घरवालों की टूशन बेकार था हमरे घरवालों ने गलत जगह पैसा दिया.
खैर मनु और चिंटू अपने घर ए वहीँ रूटीन रोज़ का फॉलो किया दिन ख़तम …
ऐसे hi एग्जाम ओवर हुए बाकि सब का वही आंसर मिलाना और मनु का शामे जवाब और चिंटू का अपने स्टाइल में वही राटा हुआ डायलॉग “भाई तुम्हारे भाई ने 100% पेपर किया है ..” .
एग्जाम ओवर हुए उधर जय चाँद भी राजिंदर से मिलने आया और उसने राजिंदर को एक जगह ाचा माकन बताया . सुमित्रा तोह जैचंद को देखना भी पसंद नहीं करती थी पैर उसे दोनों भाइयों के बिच में कुछ बोलना अच् आना laga.so हु चुप hi रही ..
उसने राजिंदर से साफ़ कहा सोच समझ कर जगह देखना और बचूं के भविष्य को देखकर जगह लेना.
राजिंदर ने हामी भरी और जगह देखि उसे जगह पसंद आयी उसके बाद उसने सुमित्रा को जगह दिखयी तोह सुमित्रा ने भी जगह को ठीक कहा .पैर कहीं न कहीं सुमित्रा का मैं जय चाँद की बातें मानने को नहीं मैं रहा था सो उसने मनु को सब बताया ..मनु ने सब सोचा और सुमित्रा से कहा “मम्मी सिंपल hai..main और आप पापा को मानते हैं की जगह आपके नाम पैर ली जाये ,उससे कल को आपको यह टेंशन नहीं होगी की जगह पैर चाचा पापा को मनाकर अपने नाम कर सके..”
इस बात पैर सुमित्रा भी त्यार होगयी ,,दोनों माँ बेटे ने राजिंदर को इस बात के लिए मनाया की जगह पैर राजिंदर की जगह सुमित्रा के नाम हो …
राजिंदर को क्या दिक्कत होती उसने कहा ठीक है ,,,चाहे मेरे नाम हो या सुमित्रा के नाम रहेगा तोह हमारा hi न …
पैर सुमित्रा ने मनु के कहे मुताबिक राजिंदर को इस बात के लिए राज़ी किया की जब तक सब कुछ नहीं हो जाता यह बात किसी को पैट आना चले …
इसपर मनु ने राजिंदर को अपनी कसम दे di.rajinder इस पैर भी मान गया..
जब जगह की रजिस्ट्रेशन की बात आयी तोह सब थे वहां जय चाँद ने राजिंदर से कहा “भाई देखलो सब ठीक है न ,,”
राजिंदर ने आगे की कारवाही की और पैसे के लेनदेन के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए कोर्ट चल दिए जहाँ राजिंदर ने कहा यह जगह सुमित्रा के नाम होगी ,,,,
इस बात से जय चाँद पैर तोह जैसे बिजली गिर पड़ी .पैर हु उप्पेर से कुछ बोलै नहीं जिसकी सब हरकतोओं को मनु और उसकी माँ ने अचे से नोट किया था…
खैर जगह सुमित्रा के नाम हुई जिसके बाद जैचंद ने राजिंदर को बधाई दी और अपने घर चला गया..
उधर राजिंदर और उसकी फॅमिली भी अपने घर आगयी …
राजिंदर थकन के मारे नहाने चला गया ..जीके जाते hi दोनों माँ बीटा खूब जोज़ से हास्पदे .
सुमित्रा “तूने मेरे नाम जगह करने को क्यूक कहा मेरी अब समझ आया …जब तेरे चाचा की रोनी सूरत देखि तोह सब समझ आया उसे की अब चिडया उड़ gyi…hihihihihihihihihiiiiiii”
Manu”mujhe पहले hi लगा था की चाचा जो बिना किसी मतलब के हमसे बात तक नहीं करता हु पापा पैर मेहरबान कैसे hogya,,jab सोचा की अगर पापा के नाम जगह हुई तोह पापा को प्यार से माखन लगा कर हु बाद में जगह हड़प लेगा ,,उसकी यह बात दिमाग में आते hi मैं आपके नाम जगह करवाने को कहा tha.or साथ में इसलिए की उसे अगर पहले hi पता छलग्या toh..ho सकता है हु यह सब सुनकर कोई चाल चले इसलिए पहले से उसे यह बात पता नहीं चलने दी की जगह आपके नाम hogi..nahi तोह चाचा कोई न कोई जुगाड़ लगा लेता..
सुमित्रा “चलो ाचा है तूने इतना सब सोच रखा tha.varna मैं तोह जगह को hi मन कर देती …वैसे तेरे दिमाग की डाटा देनी होगी जो इतना सब सोच लिया तूने…”
Manu”mummy यह सब बाबा के साथ रहने असर है उन्होंने बिज़नेस के बारे में कहा था की अगर आपके कम्पटीशन में शामे माल ह तोह उसके माल से पहले hi अपना माल किसी सीक्रेट ऑफर के साथ दे दो या उसके ऑफर के बारे में पता रखो ताकि आप उससे ाचा कोई और ऑफर दे सको ..मैं उसी चीज़ को यहाँ अप्लाई किया की चाचा को आखिर तक पता न चलने दूँ की मालिक कोण hai..simple”
इस पैर सुमित्रा ने मनु को अपनी तरफ कीच कर अपने गले से लगा कर kaha”dekhle मैंने कहा था न बाबा ने कुछ सोच कर hi तुझे अपने पास सिखने को कहा hai,,yahan कुछ ाचा हुआ न बाबा के पास जाने से ,मैं चाहती हूँ इसी तरह तू अपने सामनेवाले से दो कदम आगे रहे “
मनु “मम्मी बहुत भूक लगी है “
सुमित्रा “आज सब तेरी पसंद का होगा मेरे प्यारे बचे ..”
उधर जय चाँद घर आया तोह कमलेश ने पूछा क्या हुआ ..
जय चाँद ने जब सब बताया तोह कमलेश “तू चुटिया था ,तू चुटिया है , और चुटिया hi मरेगा साले …”
जय चाँद उसके लिए बीवी से गाली सुन्ना नयी बात नहीं thi.chup रहा ..
कमलेश “गांडू साले तुझे इतना ाचा माकन मेरे बाप ने बताया था ,,ताकि उसे अपने भाई से खरीद व ले और बाद में कोई भी बहाना बनाकर उसे मेरे नाम करवा देता हमारे बचूं का भी दिन सुधर जाता ,,,बहनचोद कैसा गांडू मादरचोद आदमी मिला है मुझे जो साला चुटिया hi है,,,
साले माकन मेरे बाप ने ढूंढा सिर्फ तुझे तेरे भाई के नाम माकन करवाना tha…tujhse इतना भी नहीं हुआ गंडमारे …
अगर तू इतना कर देता तोह बाद में मैं खुद hi तेरे चुटिया भाई को रो -धो कर उस माकन के कागज़ अपने नाम करवा leti..per मादरचोद तेरी वजह से मेरे और मेरे बाप के सारे सपने मिटटी में मिल गए…”
कमलेश “साले इसकी सजा तुझे मिलेगी आज से तू मेरे साथ नहीं सोयेगा ….मेरा पति जरूर है तू पैर अब छूट चुने नहीं दूंगी तुझे..”
यह कमलेश को अचे से पता था की जैचंद छूट का बहुत है यानि छूट का गुलाम है …
ऐसा नहीं था की जैचंद के लिए दुनिआ में सिर्फ कमलेश की hi एक लौटी छूट ho…per कमलेश जय चाँद की बिस्तर पैर हर ख्वाहिश पूरी करती थी ,,,चाहे लैंड को चूसना हो , अलग पोज़ में छूट की chudai,ya बिना तेल के गांड मरवाना …कमलेश ने अचे से जय चाँद को सब दिया था और बदले में उसकी भी अचे से सब नस दबा देती thi…matlab जैचंद देखने में भले hi पहलवान सा था पैर जब कमलेश बिगड़ जाती थी तोह
जय चाँद उसके आगे भीगी बिल्ली सामान होता था…
खैर कमलेश की बात का सिद्ध असर जय चाँद पैर हुआ “बोलै देख गलती मेरी नहीं है ,तू खुद सोच की जब इतना सब किया तोह किसको पता था की जगह भाभी के नाम हो जाएगी ,दिमाग से सोच तू मेरी बीवी है मेरा परिवार hai..tumhare लिए खुद के भाई को फसने में लगा हुआ हूँ फिर भी तू मुझे उल्टा बोल रही है ,,,खुद सोचकर देख अगर मुझे पहले से पता होता तोह क्या किसी वकील को सेट करके यह जगह मैं तेरे नाम नहीं करवाता …मुझे तोह कोर्ट में अचानक से पता चला की जगह राजिंदर के नाम नहीं होगी ,,बिच कोर्ट में क्या कर सकता tha..kya मैंने कभी तेरा कहा नहीं मन हो तोह बता????’”
इस बात पैर कमलेश चुप हुई और सोचने लगी “बात तोह जय चाँद की सही hai.plan जो था उसके हिसाब से सब सही था उसमे चूक की गुंजाईश नहीं बनती ,पैर अचानक से सुमित्रा का नाम बिच में आना इत्तेफाक नहीं हो सकता क्युकी राजिंदर सिद्ध है …और सुमित्रा को जगह पसंद आ भी जाती तोह भी अगर उसे जरा सब hi शक्क होता तोह हु जगह लेने hi नहीं देती …सो इस तरह से सोचना उस घर में किसी के लिए पॉसिबल नहीं hai,,per जो हुआ है हु भी साफ़ साफ़ खुद बता रहा है की अचानक से यह सब हुआ इसका मतलब उस घर में किसी को पहले से hi यह सब पता tha,,or उसकी प्लानिंग भी साफ़ साफ़ बता रही है की उसका दिमाग आगे पीछे सोचने वाला hai.or जिस तरह से सब हमारे हाथ ताका एते हुए चला गया उसके हिसाब से कोई पहुंचा हुआ खिलाडी hai,jisne सब सोचकर समझकर सही मौके पैर सही चाल चलकर ,,साबित कर दिया की राजिंदर और सुमित्रा उसके लिए कितने मायने रखते hain..or अगर इनको आगे कुछ करने का सोचा तोह हु छोडेगा नहीं ..””
यह सब सोचते हुए कमलेश सोचने लगी कोण हो सकता है who,kyuki हु अचे से राजिंदर और सुमित्रा को जानती thi..or मनु से उसका मिलना कभी हुआ नहीं था ,,जैचंद ने राजिंदर के बचूं की आगे कमलेश को बताई हुई थी जिसकी वजह से कमलेश का मन्ना था की बचूं को खेलने से फुर्सत नहीं होती हु क्या खख इतना दिमाग लगा पाएंगे.. सो उसके लिए यहां कोई दिमाग वाला था जो उसके और उसके बाप की दुइबुद्धि को टक्कर देता था..
यह सब होने के बाद जय चाँद से उसने कुछ नहीं कहा ..और आगे के लिए सोचने लग गयी..
वहीँ दूसरी तरफ रजिनि के आजकल बुरे हाल थे अनिल आजकल खूब चुदाई करता था पैर जब भी उसके प्रेग्नेंट होने का नंबर आता तोह हु गाओं जाकर चेक करवाती की बीटा है या नहीं ..उसकी फूटी किस्मत उसे बीटा नहीं होने देती thi..koi दो बार हु एबॉर्शन करवा चुकी thi..so अब अनिल से ज्यादा उम्मीद नहीं लगाती thi…or यहां वहाँ घूमकर अपना टाइम पास किया करती थी…
कभी किसी कैग हर बैठना तोह कभी किसी कैग हर बैठना …ऐसे hi जब अपनी मुँहबोली ननद यानि सुमित्रा कैग हर आना जाना होता तोह हु मनु को देखकर यही सोचती काश मेरा भी ऐसा बीटा hota,,kyuki मनु पड़ता भी था और क्लैम नेचर का हसने बोलने वाला इंसान था जो पल भर में किसीको भी अपना बना लेता tha..rajini जब भी मनु से मिलती तोह बदले में मनु उसे इज़्ज़त से पेश आता था …जहाँ उसकी बेट्यून को सही से बात करना नहीं आता था ,वहीँ मनु का किसीके साथ भी मुस्कुराकर बात करना कुछ अलग tha..ya यूँ कहिये मनु का चार्म कुछ अलग tha..uski आगे के बचूं से ..रजिनि से मनु एक निचित दुरी बनाकर बात करता tha..kyuki सुमित्रा का रजिनि और अनिल को पीटने वाला इंसिडेंट उसे याद tha,,kyuki उस टाइम मनु स्कूल में था और जब घर आया तोह अजय ने सब बता दिया tha,,,tab से मनु रजिनि और उसकी फॅमिली से दुरी बनाकर रखता था.
खैर ऐसे hi टाइम बिता और स्कूल का रिजल्ट आज्ञा …जिसमे अधिकतर दोस्त पास हो गए थे क्युकी प्राइवेट स्कूल था सो जो पास नहीं भी होता था तोह स्कूल वाले उस बचे को प्रमोटेड पास कर देते थे क्युकी इतनी अछि फीस लेते थे तोह पास करना भी बनता था…
इस साल मनु पहली बार फर्स्ट आया tha..jo खुद मनु के liye.chunkane वाली बात thi…kyuki मनु पहले भी ाचा स्टूडेंट tha.jo पास हो जाया करता tha..padai में भी ठीक थक था पैर रैंक और हु भी फर्स्ट खुद मनु के लिए भी नया था..
मनु के सब दोस्त पास होगये थे हमारे चिंटू को छोड़कर उसकी दो सब्जेक्ट में कम्पार्टमेंट आयी थी..
चिंटू बड़ा टेंशन में tha,kyuki जैसा उसने सोचा था वैसे रिजल्ट नहीं ए थे उसके ,,क्युकी चिंटू भैया खेलने और में मनु के खिलाफ दुसरऊँ को भड़काने में अपना टाइम लगा देते the,,so पड़े करते कब और जो करते उसमे पास होना hi सभव हो सके ऐसी किस्मत और ऐसा एग्जाम चिंटू भइया जी ने दिया नहीं था..
मनु को जब चिंटू का पता चला तोह उसने सबसे पहले चिंटू से बात की “यार तू टेंशन न ले पास हो जायेगा और मैं तेरे साथ हंट ु फ़िक्र न कर तू मेरा बेस्ट फ्रेंड है मैं खुद तेरी तयारी करवाऊंगा …”
मनु ने अपने फर्स्ट आने का चिंटू को नहीं बताया क्युकी उसके लिए इस समय चिंटू की परेशानी उसकी ख़ुशी से ज्यादा बड़ी थी..
चिंटू ने स्कूल जाना काम कर दिया tha…kyuki रिजल्ट के दो दिन बाद hi उसके कम्पार्टमेंट के एग्जाम the..pushpi को जब मनु का फर्स्ट आने का पता चला तोह हु भी खुश हुई और जब चितु का रिजल्ट का पता चला तोह उसने कुछ रियेक्ट नहीं किया क्युकी उसे श्याद पहले से hi पता था ,,और वैसे भी उसे चिंटू के फ़ैल होने से ज्यादा मनु का फर्स्ट आने की ख़ुशी हुई थी…
उधर मनु ने भी दो दिन लग कर चिंटू को अचे से पद्य और उसकी पड़े में काफी हेल्प की ,,जिसे देखकर द्याल वर्मा और चिंटू की माँ दोनों को काफी ाचा लगा की मनु उनके बेटे की जाफी चिंता करता है ..सो उन्हें भी ाचा लगा की उनके नालायक बेटे का मनु अचे से धयान रखता है…
दो दिन बाद मनु और चिंटू की म्हणत रंग लायी और चिंटू भी पास होकर नेक्स्ट क्लास में चला गया …
जहां जाकर उसे जब यह पता लगा की मनु क्लास में फर्स्ट आया hai..so उसके दिल दिमाग में बहुत धमाके हुए …चिंटू को खुद के पास होने से ज्यादा गुस्सा इस बात पैर आया की मनु फर्स्ट आया hai..usne कुछ सोचा और उसके चेहरे पैर एक शैतानी स्माइल आगयी…
मनु इन सबसे बेखबर अपनी डेली लाइफ में लगा हुआ tha..is बात से बेखबर की आने वाले समय में दो सरप्राइज उसकी लाइफ में आने वाले हैं.
और हु दोनों सरप्राइज क्या हैं और क्या करने वाले हैं ..यह तोह वक़्त hi बता सकता है …:हिंट:
बचपन की यादें
वहीँ कनु और मनु अपनी अपनी ज़िन्दगी इतने बिजी थे की दोनों एक दूसरे से किये हुए अपने बचपन के वेड और बचपन की दोस्ती को भूल चुके थे. या यूँ समझो दोनों एक तरह से एक दूसरे से पूरी तरह अंजान हो गए थे. अब दोनों के शहर भी बदल गए थे दिल्ली और राजनगर अब मिलना बिछड़ना तोह किस्मत के हाथ में hota.or किस्मत का खेल किसी को कोई पता nahi.manu अपनी ज़िन्दगी में आनेवाले तूफ़ान से बेखबर tha.tufaan जो उसकी सोच से ज्यादा तेज़ी से उसके पास आ रहा था
टाइम अपने हिसाब से चलता जा रहा था मनु का चिंटू के साथ स्कूल उसके बाद पुष्पी के साथ पड़े और उसके बाद बाबा के पास बिज़नेस की ट्रेनिंग…
उस घटना के बाद मनु को चिंटू की सोच काफी हद तक समझ आ चुकी thi..per उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया जिसकी वजह थी पुष्पी दीदी का प्यार उसने सोचा की अगर चिंटू को कुछ कहा जायेगा तोह पुष्पी दीदी जो उसकी सगी बहिन है श्याद उनको अच् आना लगे ..
यह सोचना उसकी ज़िन्दगी में ाचा सबक देने वाला था..
वहीँ एक तरफ जय चाँद और कमलेश राजिंदर से बड़का हुआ था जिसके लिए म्हणत करके खाना बड़ी टेडी खीर थी.
जिसमे काफी हद तक राजिंदर जिम्मदार था .. जी हाँ राजिंदर क्युकी राजिंदर ने उसे बड़े लाड प्यार से पला था ,उसे कभी छोटा भाई मानकर काम करने नहीं दिया ,जो जैचंद मांगता उसके सामने राजिंदर पेश के deta,yeh सोचकर की छोटा है ,बिना माँ का hai..jahaan राजिंदर उसके लिए म्हणत करके जिम्मेदार बनता चला गया वहीँ जैचंद म्हणत से दूर होकर अलसी निकम्मा और नालायक बन गया tha..jahan राजिंदर उसके लिए जय चाँद की ख़ुशी पूरा करना अचे भाई का धरम था वहीँ निक्मे और दुरथ जैचंद के लिए राजिंदर का प्यार एक परमानेंट ड्यूटी था, उसके लिए राजिंदर एक ऐसा एटीएम था जिसको जब चाहे भाई बोलके जैचंद चुना लगा देता tha..jiska सिद्ध असर राजिंदर और सुमित्रा की फॅमिली पैर पड़ता था..
खैर साल पूरा होने को आया था हर स्कूल की तरह यहाँ भी एग्जाम की अनाउंसमेंट हो चुकी थी.
जिसके बाद हर रोज़ कहनेवाले भी अब पड़ने में लगे थे ,,मनु को कोई टेंशन नहीं थी इसकी क्युकी उसकी टूशन टीचर पुष्पी जीतनेय प्यार से मनु को खिलाती थी उतने hi सख्ती से मनु को पड़ती thi..padai में उसे उसके आगे कोई बहाने नहीं चलता tha.shuru में मन ऊके हाल पुष्पी से पड़ने में बड़े बुरे हुए पैर बाद में धीरे धीरे हु भी राफ्तेर के साथ कोर्स कम्पलीट कर चूका था, सो उसे एग्जाम की ज्यादा चिंता नहीं थी..
खैर जब एग्जाम की डेट आनेवाली थी तोह स्कूल के सब दोस्तों ने मनु से पूछा उसकी पड़े का क्या
हाल है. मनु ने पुष्पी की बात याद की और बोल दिया यार बुरा हाल है …”पता नहीं इस बार क्या होगा”
उसकी इस बात से बाकी के दोस्तों को जहाँ लगा यार सबका एक जैसा हाल है वहीँ कोई एक था जिसके चेरे पैर शैतानी मुस्कराहट तेर gayi.jisko मनु ने बखूबी देख लिया और मैं hi मैं में कुछ सोचकर वहाँ से चला गया ..
वापसी में चिंटू उसके साथ tha.manu ने चिंटू से पूछा “यार तेरी तयारी कैसी hai.exam में अचे नंबर लेन हैं तुझे”
चिंटू “अबे पढ़कर कोनसा मुझे कोई मॉडल मिलने वाला hai.abhi तोह छोटी क्लास है 10तह या 12तह होती तोह सोचता भी पासिंग मार्क आजाये तोह भी काफी हैं मेरे लिए तू अपना सोच और बता कैसा चल रहा है “
Manu”kya चलेगा यार तुझे तोह पता है ,स्कूल उसके बाद अजय की पड़े उसके बाद बाबा के पास चला जाता हूँ कुछ खास नहीं है ,और इस बार टेंशन हैं पता नहीं पास हो भी पाउँगा या nahi,per अगर मैं फ़ैल होगया तोह और तू पास हुआ तोह भी सुच कहता हूँ चिंटू मुझे तेरे लिए बहुत ख़ुशी होगी”
चिंटू ने सोचा लगता है सचमे मनु की बुरी हालत है ,,मैं में बड़ा खुश हुआ पैर उपपरके मैं से बोलै “यार तू कैसी बात करता hai,,tu टेंशन न ले पड़ना शुरू करदे पास हो जायेगा और अगर तू फ़ैल भी हुआ तोह भी मेरा प्यार मतलब यारी ख़तम थोड़ी न hogi,,tut ओह भाई ह अपना “
मनु ने आगे कुछ नहीं kaha.dono अपने अपने घर पुँहचे और दिन बीतने लगे .
एग्जाम की डेट पास आयी तोह बाबा ने कहा पड़े पैर ध्यान दो ..
सो मनु अब सिर्फ अपनी रेविसिओं करता और अजय की पड़े करवाता पुष्पी के अजय को पड़ने से अजय भी काफी हद तक लाइन पैर था, उधर पुष्पी भी अपने एग्जाम की तयारी में लगी थी..
चिंटू हो या बाकी सब अपने तयारी में लगे the.time हुआ और एग्जाम चलने लगे मनु और चिंटू की क्लास में अल्फबेटिक के हिसाब से रोल नंबर पड़ता था. सो दोनों के रोल नंबर दूर पड़ते थे एग्जाम पैर दोनों एक hi रूम में थे एग्जाम के बिच में मनु बिच में कभी चिंटू को देखता तोह चिंटू अपना आंसर लिख रहा होता …
जब एग्जाम ओवर हुआ तोह सब लोग क्वेश्चन पेपर के आंसर डिसकस करने लगे जो अधिकतर की आदत होती है मनु को यह सब अजीब लगता tha,kyuki उसका मन्ना था की आपके आंसर डिसकस करने से आंसर जो अपने लिखा है उसपर से भी आपका कॉन्फिडेंस चला जेगा और वैसे भी एग्जाम में जो लिख दिया सो लिख दिया उसके बाद में टेंशन लेने से दिमाग परेशान hi hoga,yeh सब पुष्पी दीदी की सिख थी की पड़ना है तोह एग्जाम से पहले पदों बाद में आंसर को डिसकस करना फ़िज़ूल है.
सो मनु चुप hi रहा बाकि सब ने उससे पूछा कैसा गया एग्जाम मनु का जवाब सिंपल tha”bhai जो दिया सो दिया न ज्यादा ाचा था न ज्यादा बुरा”
उसके बाद सबने चिंटू से पूछा उसने बड़े स्टाइल से कहा “भाई तुम्हारे भाई ने 100% पेपर किया है ..”
जिसको सुनकर सब लोग सोच में पड़गए ..की चिंटू शायद इस बार फर्स्ट आये ..क्युकी चिंटू उनके लिए तोह नया था सो जो चिंटू ने कहा सबने मान लिया जिसमे कुछ अपने न पड़ने को कोस रहे थे कुछ अपने घरवालों की टूशन बेकार था हमरे घरवालों ने गलत जगह पैसा दिया.
खैर मनु और चिंटू अपने घर ए वहीँ रूटीन रोज़ का फॉलो किया दिन ख़तम …
ऐसे hi एग्जाम ओवर हुए बाकि सब का वही आंसर मिलाना और मनु का शामे जवाब और चिंटू का अपने स्टाइल में वही राटा हुआ डायलॉग “भाई तुम्हारे भाई ने 100% पेपर किया है ..” .
एग्जाम ओवर हुए उधर जय चाँद भी राजिंदर से मिलने आया और उसने राजिंदर को एक जगह ाचा माकन बताया . सुमित्रा तोह जैचंद को देखना भी पसंद नहीं करती थी पैर उसे दोनों भाइयों के बिच में कुछ बोलना अच् आना laga.so हु चुप hi रही ..
उसने राजिंदर से साफ़ कहा सोच समझ कर जगह देखना और बचूं के भविष्य को देखकर जगह लेना.
राजिंदर ने हामी भरी और जगह देखि उसे जगह पसंद आयी उसके बाद उसने सुमित्रा को जगह दिखयी तोह सुमित्रा ने भी जगह को ठीक कहा .पैर कहीं न कहीं सुमित्रा का मैं जय चाँद की बातें मानने को नहीं मैं रहा था सो उसने मनु को सब बताया ..मनु ने सब सोचा और सुमित्रा से कहा “मम्मी सिंपल hai..main और आप पापा को मानते हैं की जगह आपके नाम पैर ली जाये ,उससे कल को आपको यह टेंशन नहीं होगी की जगह पैर चाचा पापा को मनाकर अपने नाम कर सके..”
इस बात पैर सुमित्रा भी त्यार होगयी ,,दोनों माँ बेटे ने राजिंदर को इस बात के लिए मनाया की जगह पैर राजिंदर की जगह सुमित्रा के नाम हो …
राजिंदर को क्या दिक्कत होती उसने कहा ठीक है ,,,चाहे मेरे नाम हो या सुमित्रा के नाम रहेगा तोह हमारा hi न …
पैर सुमित्रा ने मनु के कहे मुताबिक राजिंदर को इस बात के लिए राज़ी किया की जब तक सब कुछ नहीं हो जाता यह बात किसी को पैट आना चले …
इसपर मनु ने राजिंदर को अपनी कसम दे di.rajinder इस पैर भी मान गया..
जब जगह की रजिस्ट्रेशन की बात आयी तोह सब थे वहां जय चाँद ने राजिंदर से कहा “भाई देखलो सब ठीक है न ,,”
राजिंदर ने आगे की कारवाही की और पैसे के लेनदेन के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए कोर्ट चल दिए जहाँ राजिंदर ने कहा यह जगह सुमित्रा के नाम होगी ,,,,
इस बात से जय चाँद पैर तोह जैसे बिजली गिर पड़ी .पैर हु उप्पेर से कुछ बोलै नहीं जिसकी सब हरकतोओं को मनु और उसकी माँ ने अचे से नोट किया था…
खैर जगह सुमित्रा के नाम हुई जिसके बाद जैचंद ने राजिंदर को बधाई दी और अपने घर चला गया..
उधर राजिंदर और उसकी फॅमिली भी अपने घर आगयी …
राजिंदर थकन के मारे नहाने चला गया ..जीके जाते hi दोनों माँ बीटा खूब जोज़ से हास्पदे .
सुमित्रा “तूने मेरे नाम जगह करने को क्यूक कहा मेरी अब समझ आया …जब तेरे चाचा की रोनी सूरत देखि तोह सब समझ आया उसे की अब चिडया उड़ gyi…hihihihihihihihihiiiiiii”
Manu”mujhe पहले hi लगा था की चाचा जो बिना किसी मतलब के हमसे बात तक नहीं करता हु पापा पैर मेहरबान कैसे hogya,,jab सोचा की अगर पापा के नाम जगह हुई तोह पापा को प्यार से माखन लगा कर हु बाद में जगह हड़प लेगा ,,उसकी यह बात दिमाग में आते hi मैं आपके नाम जगह करवाने को कहा tha.or साथ में इसलिए की उसे अगर पहले hi पता छलग्या toh..ho सकता है हु यह सब सुनकर कोई चाल चले इसलिए पहले से उसे यह बात पता नहीं चलने दी की जगह आपके नाम hogi..nahi तोह चाचा कोई न कोई जुगाड़ लगा लेता..
सुमित्रा “चलो ाचा है तूने इतना सब सोच रखा tha.varna मैं तोह जगह को hi मन कर देती …वैसे तेरे दिमाग की डाटा देनी होगी जो इतना सब सोच लिया तूने…”
Manu”mummy यह सब बाबा के साथ रहने असर है उन्होंने बिज़नेस के बारे में कहा था की अगर आपके कम्पटीशन में शामे माल ह तोह उसके माल से पहले hi अपना माल किसी सीक्रेट ऑफर के साथ दे दो या उसके ऑफर के बारे में पता रखो ताकि आप उससे ाचा कोई और ऑफर दे सको ..मैं उसी चीज़ को यहाँ अप्लाई किया की चाचा को आखिर तक पता न चलने दूँ की मालिक कोण hai..simple”
इस पैर सुमित्रा ने मनु को अपनी तरफ कीच कर अपने गले से लगा कर kaha”dekhle मैंने कहा था न बाबा ने कुछ सोच कर hi तुझे अपने पास सिखने को कहा hai,,yahan कुछ ाचा हुआ न बाबा के पास जाने से ,मैं चाहती हूँ इसी तरह तू अपने सामनेवाले से दो कदम आगे रहे “
मनु “मम्मी बहुत भूक लगी है “
सुमित्रा “आज सब तेरी पसंद का होगा मेरे प्यारे बचे ..”
उधर जय चाँद घर आया तोह कमलेश ने पूछा क्या हुआ ..
जय चाँद ने जब सब बताया तोह कमलेश “तू चुटिया था ,तू चुटिया है , और चुटिया hi मरेगा साले …”
जय चाँद उसके लिए बीवी से गाली सुन्ना नयी बात नहीं thi.chup रहा ..
कमलेश “गांडू साले तुझे इतना ाचा माकन मेरे बाप ने बताया था ,,ताकि उसे अपने भाई से खरीद व ले और बाद में कोई भी बहाना बनाकर उसे मेरे नाम करवा देता हमारे बचूं का भी दिन सुधर जाता ,,,बहनचोद कैसा गांडू मादरचोद आदमी मिला है मुझे जो साला चुटिया hi है,,,
साले माकन मेरे बाप ने ढूंढा सिर्फ तुझे तेरे भाई के नाम माकन करवाना tha…tujhse इतना भी नहीं हुआ गंडमारे …
अगर तू इतना कर देता तोह बाद में मैं खुद hi तेरे चुटिया भाई को रो -धो कर उस माकन के कागज़ अपने नाम करवा leti..per मादरचोद तेरी वजह से मेरे और मेरे बाप के सारे सपने मिटटी में मिल गए…”
कमलेश “साले इसकी सजा तुझे मिलेगी आज से तू मेरे साथ नहीं सोयेगा ….मेरा पति जरूर है तू पैर अब छूट चुने नहीं दूंगी तुझे..”
यह कमलेश को अचे से पता था की जैचंद छूट का बहुत है यानि छूट का गुलाम है …
ऐसा नहीं था की जैचंद के लिए दुनिआ में सिर्फ कमलेश की hi एक लौटी छूट ho…per कमलेश जय चाँद की बिस्तर पैर हर ख्वाहिश पूरी करती थी ,,,चाहे लैंड को चूसना हो , अलग पोज़ में छूट की chudai,ya बिना तेल के गांड मरवाना …कमलेश ने अचे से जय चाँद को सब दिया था और बदले में उसकी भी अचे से सब नस दबा देती thi…matlab जैचंद देखने में भले hi पहलवान सा था पैर जब कमलेश बिगड़ जाती थी तोह
जय चाँद उसके आगे भीगी बिल्ली सामान होता था…
खैर कमलेश की बात का सिद्ध असर जय चाँद पैर हुआ “बोलै देख गलती मेरी नहीं है ,तू खुद सोच की जब इतना सब किया तोह किसको पता था की जगह भाभी के नाम हो जाएगी ,दिमाग से सोच तू मेरी बीवी है मेरा परिवार hai..tumhare लिए खुद के भाई को फसने में लगा हुआ हूँ फिर भी तू मुझे उल्टा बोल रही है ,,,खुद सोचकर देख अगर मुझे पहले से पता होता तोह क्या किसी वकील को सेट करके यह जगह मैं तेरे नाम नहीं करवाता …मुझे तोह कोर्ट में अचानक से पता चला की जगह राजिंदर के नाम नहीं होगी ,,बिच कोर्ट में क्या कर सकता tha..kya मैंने कभी तेरा कहा नहीं मन हो तोह बता????’”
इस बात पैर कमलेश चुप हुई और सोचने लगी “बात तोह जय चाँद की सही hai.plan जो था उसके हिसाब से सब सही था उसमे चूक की गुंजाईश नहीं बनती ,पैर अचानक से सुमित्रा का नाम बिच में आना इत्तेफाक नहीं हो सकता क्युकी राजिंदर सिद्ध है …और सुमित्रा को जगह पसंद आ भी जाती तोह भी अगर उसे जरा सब hi शक्क होता तोह हु जगह लेने hi नहीं देती …सो इस तरह से सोचना उस घर में किसी के लिए पॉसिबल नहीं hai,,per जो हुआ है हु भी साफ़ साफ़ खुद बता रहा है की अचानक से यह सब हुआ इसका मतलब उस घर में किसी को पहले से hi यह सब पता tha,,or उसकी प्लानिंग भी साफ़ साफ़ बता रही है की उसका दिमाग आगे पीछे सोचने वाला hai.or जिस तरह से सब हमारे हाथ ताका एते हुए चला गया उसके हिसाब से कोई पहुंचा हुआ खिलाडी hai,jisne सब सोचकर समझकर सही मौके पैर सही चाल चलकर ,,साबित कर दिया की राजिंदर और सुमित्रा उसके लिए कितने मायने रखते hain..or अगर इनको आगे कुछ करने का सोचा तोह हु छोडेगा नहीं ..””
यह सब सोचते हुए कमलेश सोचने लगी कोण हो सकता है who,kyuki हु अचे से राजिंदर और सुमित्रा को जानती thi..or मनु से उसका मिलना कभी हुआ नहीं था ,,जैचंद ने राजिंदर के बचूं की आगे कमलेश को बताई हुई थी जिसकी वजह से कमलेश का मन्ना था की बचूं को खेलने से फुर्सत नहीं होती हु क्या खख इतना दिमाग लगा पाएंगे.. सो उसके लिए यहां कोई दिमाग वाला था जो उसके और उसके बाप की दुइबुद्धि को टक्कर देता था..
यह सब होने के बाद जय चाँद से उसने कुछ नहीं कहा ..और आगे के लिए सोचने लग गयी..
वहीँ दूसरी तरफ रजिनि के आजकल बुरे हाल थे अनिल आजकल खूब चुदाई करता था पैर जब भी उसके प्रेग्नेंट होने का नंबर आता तोह हु गाओं जाकर चेक करवाती की बीटा है या नहीं ..उसकी फूटी किस्मत उसे बीटा नहीं होने देती thi..koi दो बार हु एबॉर्शन करवा चुकी thi..so अब अनिल से ज्यादा उम्मीद नहीं लगाती thi…or यहां वहाँ घूमकर अपना टाइम पास किया करती थी…
कभी किसी कैग हर बैठना तोह कभी किसी कैग हर बैठना …ऐसे hi जब अपनी मुँहबोली ननद यानि सुमित्रा कैग हर आना जाना होता तोह हु मनु को देखकर यही सोचती काश मेरा भी ऐसा बीटा hota,,kyuki मनु पड़ता भी था और क्लैम नेचर का हसने बोलने वाला इंसान था जो पल भर में किसीको भी अपना बना लेता tha..rajini जब भी मनु से मिलती तोह बदले में मनु उसे इज़्ज़त से पेश आता था …जहाँ उसकी बेट्यून को सही से बात करना नहीं आता था ,वहीँ मनु का किसीके साथ भी मुस्कुराकर बात करना कुछ अलग tha..ya यूँ कहिये मनु का चार्म कुछ अलग tha..uski आगे के बचूं से ..रजिनि से मनु एक निचित दुरी बनाकर बात करता tha..kyuki सुमित्रा का रजिनि और अनिल को पीटने वाला इंसिडेंट उसे याद tha,,kyuki उस टाइम मनु स्कूल में था और जब घर आया तोह अजय ने सब बता दिया tha,,,tab से मनु रजिनि और उसकी फॅमिली से दुरी बनाकर रखता था.
खैर ऐसे hi टाइम बिता और स्कूल का रिजल्ट आज्ञा …जिसमे अधिकतर दोस्त पास हो गए थे क्युकी प्राइवेट स्कूल था सो जो पास नहीं भी होता था तोह स्कूल वाले उस बचे को प्रमोटेड पास कर देते थे क्युकी इतनी अछि फीस लेते थे तोह पास करना भी बनता था…
इस साल मनु पहली बार फर्स्ट आया tha..jo खुद मनु के liye.chunkane वाली बात thi…kyuki मनु पहले भी ाचा स्टूडेंट tha.jo पास हो जाया करता tha..padai में भी ठीक थक था पैर रैंक और हु भी फर्स्ट खुद मनु के लिए भी नया था..
मनु के सब दोस्त पास होगये थे हमारे चिंटू को छोड़कर उसकी दो सब्जेक्ट में कम्पार्टमेंट आयी थी..
चिंटू बड़ा टेंशन में tha,kyuki जैसा उसने सोचा था वैसे रिजल्ट नहीं ए थे उसके ,,क्युकी चिंटू भैया खेलने और में मनु के खिलाफ दुसरऊँ को भड़काने में अपना टाइम लगा देते the,,so पड़े करते कब और जो करते उसमे पास होना hi सभव हो सके ऐसी किस्मत और ऐसा एग्जाम चिंटू भइया जी ने दिया नहीं था..
मनु को जब चिंटू का पता चला तोह उसने सबसे पहले चिंटू से बात की “यार तू टेंशन न ले पास हो जायेगा और मैं तेरे साथ हंट ु फ़िक्र न कर तू मेरा बेस्ट फ्रेंड है मैं खुद तेरी तयारी करवाऊंगा …”
मनु ने अपने फर्स्ट आने का चिंटू को नहीं बताया क्युकी उसके लिए इस समय चिंटू की परेशानी उसकी ख़ुशी से ज्यादा बड़ी थी..
चिंटू ने स्कूल जाना काम कर दिया tha…kyuki रिजल्ट के दो दिन बाद hi उसके कम्पार्टमेंट के एग्जाम the..pushpi को जब मनु का फर्स्ट आने का पता चला तोह हु भी खुश हुई और जब चितु का रिजल्ट का पता चला तोह उसने कुछ रियेक्ट नहीं किया क्युकी उसे श्याद पहले से hi पता था ,,और वैसे भी उसे चिंटू के फ़ैल होने से ज्यादा मनु का फर्स्ट आने की ख़ुशी हुई थी…
उधर मनु ने भी दो दिन लग कर चिंटू को अचे से पद्य और उसकी पड़े में काफी हेल्प की ,,जिसे देखकर द्याल वर्मा और चिंटू की माँ दोनों को काफी ाचा लगा की मनु उनके बेटे की जाफी चिंता करता है ..सो उन्हें भी ाचा लगा की उनके नालायक बेटे का मनु अचे से धयान रखता है…
दो दिन बाद मनु और चिंटू की म्हणत रंग लायी और चिंटू भी पास होकर नेक्स्ट क्लास में चला गया …
जहां जाकर उसे जब यह पता लगा की मनु क्लास में फर्स्ट आया hai..so उसके दिल दिमाग में बहुत धमाके हुए …चिंटू को खुद के पास होने से ज्यादा गुस्सा इस बात पैर आया की मनु फर्स्ट आया hai..usne कुछ सोचा और उसके चेहरे पैर एक शैतानी स्माइल आगयी…
मनु इन सबसे बेखबर अपनी डेली लाइफ में लगा हुआ tha..is बात से बेखबर की आने वाले समय में दो सरप्राइज उसकी लाइफ में आने वाले हैं.
और हु दोनों सरप्राइज क्या हैं और क्या करने वाले हैं ..यह तोह वक़्त hi बता सकता है …:हिंट: