RAJ -The mystery man (thriller & Magic) - Page 2 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

RAJ -The mystery man (thriller & Magic)

अपडेट-9

प्लान तो बना लिया था मैंने अब बस इसको अंजाम देना था मई चल दिया अपने जरुआत की चीजें ढूंढने ...

पर इधर...

Boss...ladki भी जवान हो चुकी है सेल की इसे चखने मैं बहुत मज़ा आने वाला है...

kalu...sahi कहा बॉस क्या मस्त गांड है साली ki...agar एक बार हिला दे तो किसी का भी पानी देखकर hi निकल जाये...

आदमी... अहह मेरा तो वैसे hi निकल जायेगा...

उसकी बात पे सभी हसने लगे ...

kalu...boss जल्दी करो na...hamara no भी आ जायेगा फिर आपके बाद...

boss...hmmm..ja बोतल निकल ला पहले मुझे नशा हो जाये ...फिर इन दोनों का रास nichodunga...bada मज़ा आएगा????

kalu...sahi कहा बॉस... अभी लता हूँ

फिर कालू जाता है और एक गाड़ी लेकर आता है और उस गाड़ी को उधर hi बॉस के पास खड़ा कर देता ...

kalu...ye लो बॉस आ गया ब्लैक snake(kali नाग्नि)...

और उसमे से एक पूरी ट्रे निकल कर बहार बॉस के सामने रख देता है...

boss...ab आएगा मज़ा ....चल कालू इन्हे जल्दी से खोल कर पेग बना ...

कालू 2 बोतल निकल लेता है पेग बनता है... और एक एक बोतल सभी को दे देता है जितने भी आदमी वहां the...aur बॉस के लिए पेग बनाने लग जाता है...

boss...abe जल्दी कर कितना टीम लगाएगा ...अब इंतजार नहीं होता है...

और वो ये कहकर उस लड़की की तरफ बढ़ने लगता है... उसके पास पहुंचकर...

boss...ee छमियाँ एक चुम्मा देना ??

ladki...hamne तुम्हारा क्या बिगाड़ा है प्ल्ज़ हमें छोड़ दो...

boss...ha है ha...tumne हमारा कुछ नहीं बिगाड़ा ...पर तेरे उस हरामज़ादे बाप ने बहुत कुछ बिगाड़ा hai...jiski सजा तुम दोनों माँ- बेटी को मिलेगी इसे तो तुमसे ज्यादा जानबरों से प्यार hai......maine पहले hi कहा था hi हमारे काम में तंग न ada...par कुत्ते की दम सीढ़ी कहाँ होती है...

तभी बॉस को कोई आवाज़ देता hai...ye कोई और नहीं कालू था ...

kalu...boss पेग तैयार है आ जाओ...

boss...sali तुझे छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा ...अभी आया बस...

फिर बॉस जेक गटा- गाठ पेग पीते जाता है और उसने कोई 2&1/2 बोतल खली कर दी थी अब उसको चढ़ने लग गयी थी...

अब तक वहां जितने भी लोग थे वो अपनी अपनी बोतल ख़तम कर चुके थे और बॉस ने भी अब सीधा बोतल से दारू पीना शुरू कर दी क्योंकि अब उसको चढ़ चुकी thi...aur वो अब बोतल लेके लड़खड़ाते हुए a.c.p की तरफ बढ़ने लगा था...

boss...(nashe में झूमते हुए) अरे भाई कालू कोई a.c.p साहिब को भी दारू pilao...dekho बिचारे के मुंह में पानी आ रहा है हमें देखकर...

kalu...nashe में हकलाते hue...boss इस सेल की औकात नहीं है हमारे साथ पिने की...

boss...idhar आ कालू...

कालू बॉस के पास चला जाता है की तभी chattak...chattak... दो थप्पड़ कालू के गाल पे पड़ते हैं

(भाईलोग कालू कला है तो उसके गाल लाल नहीं hue...par नशे में था इसलिए पानी के ड्रम में जेक गिरा. )

ये थप्पड़ किसी और ने नहीं बल्कि बॉस ने मारे थे...

बॉस... सेल यही संस्कार दिए हैं tujhe...jangal में आये अरे नहीं लाये गए मेहमान के साथ तू ऐसा सलूक करेगा...

कालू तो बस मुंह फाडे बॉस को देखने लग रहा tha...aur बाकि सब का भी यही हाल था

boss...chal जा a.c.p के लिए बोतल ले के आ...

कालू का नशा तो थप्पड़ और पानी में गिरने की बजह से उतर गया tha...to कालू गया और बॉस को बोतल ला कर दे दी...

boss...bottle को खोलते हुए ...सुना है सरब सरे दर्द और गम मिटा देती hai...chal आज तू भी पि ले ...क्योंकि में अब तेरी बीबी और बेटी को छोडूंगा तो तुझे दर्द तो बोहोत hoga....haha??

boss...bottle से दारू पीते कर कुछ सोचने लगता hai...aur फिर एक घूंट दारु पीकर वो a.c.p के मुंह पर कुल्ला कर देता hai...aur कहता है...

boss...dekh a.c.p यही है तेरी aukat...yahi तो में चाहता हूँ की तू दर्द sahe...jo दर्द मैंने सहा था 7 साल पहले तेरी बजह से में चाहता हूँ तू भी सही...

a.c.p...tujhe तो मई देख लूंगा बस एक बार तू मुझे खोल दे फिर बताता हूँ में क्या चीज हूँ...

boss...hahaha???rassi जल गयी पर बल नहीं गया ...क्या कर लेगा रे तू (a.c.p के बालों को पकड़ते hue)tu देख अब में तेरी आंखों के सामने तेरी बेटी की सील तोडूंगा और तेरी बीबी की गांड मरूंगा ...(थप्पड़ मरते हुए) क्या कर लेगा रे तू...

लड़खड़ाते हुए वो उस a.c.p की बीबी के पास पहुँच जाता है और उसके पल्लू को निचे गिरा देता hai....aur जो बची हुई सरब थी उसे वो उस औरत के क्लीवेज में दाल देता है ...सरब औरत की गहरी खाई से होती हुई उसके गुदाज़ न पतले न मोठे पेट से बहते हुए नाभि तक आ रही थी और बॉस ने अपना मुंह औरत के पेट पर रख दिया और मुलाम पेट से दारु पीने का मज़ा लेने लगा....

वो औरत जोर जोर से रो रही थी किसी भी तरह से बस अपने आप को छूटना चाहती थी...

अब बॉस खड़ा हो गया था और उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी थी ...और जैसे hi वो अपना हाथ उस औरत की चुकी पर रख कर दबाता है एक विस्फोट होता है...

तो बे कॉन्टिनोएड....

नोट

1...मुझे पता है शायद स्टोरी पसंद न आ रही हो क्योंकि मेरी राइटिंग स्किल्स ज्यादा बढ़िया नहीं है इसलिए में सुधर करने की कोशिश करता राहुनाग...

2...अगर किसी की इच्छा हो तो वो बता सकता है की ये कैसा विस्फोट हुआ और कहाँ हुआ होगा...
 
अपडेट-10

जैसे hi धमाका हुआ सब के सब हिल गए एक तो वैसे hi नशे में थे ऊपर से धमाके को awaj...boss भी हड़वड़ा पीछे हैट गया...

हुआ ये था की कुछ दूर जो गाड़ियां कड़ी थी उनमे से दो गाड़ी ब्लास्ट हो गयी thi...ye किया था राज ने...

एक छोटा सा फ्लैशबैक

जब बॉस दारू माँगा कर पीने लग गया tha...tab में उनकी गलदियों की तरफ चला गया था और मैंने वहां जाकर पहले कुछ सुखी लकड़ियां और घासफूस इक्कठा किया और दो गाड़ियों की टंकियों के नीचे उसे रख दिया...

और फिर मैंने वहां कड़ी सभी गाड़ियों के टायरों की हवा निकल di...taki वो जब हम भागें तो हमारा पीछा न कर payein...sabhi गाड़ियों की हवन निकलने में बहुत टाइम लग गया...

और फिर मैंने एक गाड़ी में से डीजल निकल कर उन लकडिओं पर छिड़क दिया ...जो मैंने उन दो गाड़ियों के नीचे लगाई थी...

और आग लगा di...wahan से निकल कर जहाँ बॉस का अड्डा था वहां पहुँच gya...mai वहां पहुंचा hi था की एक जोर दर धमाके के साथ दोनों गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए ...

images-12.jpg


जब हम वहां से भागते तो वो हमारा पीछा भी नहीं कर पते ....इसका इंतजाम भी मैंने पहले hi कर दिया था हवा निकल कर दिया था...

बैक तो प्रेजेंट

जैसा मैंने सोचा था हुआ भी कुछ ऐसा hi...dhamake की आवाज़ सुन कर सभी उसी तरफ bhage...dhamake की बजह से 2-3 गाड़ियों में और बिस्फोट हो गया था ...

अब मेरे पास काम से काम 5 मिनट तो थी इन्हे आज़ाद करने के लिए...

जैसे hi वहां कोई नहीं रहा मैं वहां पहुँच gya...aur वो सब मुझे देख कर सोचने लगे की अब ये कोण है...

पर इतनी देर में मैंने a.c.p की बीबी की रस्सियों को खोल दिया था...

mai...aap अपनी ें दोनों को खोलो तब तक में उन्हें खोलता हूँ

aurat...hmm...ham तुम्हारे एहसान मंद हैं

mai...in सब बातों का बक्त नहीं है जाओ जाकर उन्हें जल्दी से खोलो हमारे पास ज्यादा वख्त नहीं है...

और फिर वो उन दोनों को खोलने चल di...aur में a.c.p की तरफ चल पड़ा...

a.c.p को खोना आसान था क्योंकि वो इस तरह बंधा हुआ था की उसे निचे से रस्सी को ढीला छोड़कर पानी में डुबोया जा सके और रस्सी को खींचकर उसे ऊपर किया जा सके ...

मैंने रस्सी को पूरा एक hi बार में खोल दिया और a.c.p धड़ाम की आवाज़ के साथ पानी से भरे में जा गिरा...

मैंने जेक उसे पानी के ड्रम से बहार निकला... और मैंने पीछे मुद कर देखा तो a.c.p की बीबी ने लड़की को तो खोल दिया पर लड़के को नहीं खोल पायी थी...

a.c.p इतनी देर से लटका हुआ था इसलिए वो अभी खड़ा नहीं हो प् रहा था ...तो में उस लड़के की तरफ बाद गया उसे खोलने के लिए...

में अभी उसके पास पहुंचा hi था की वहां कालू आ गया ...

kalu...kon है रे तू...

मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं tha...mein वहां डीएलओगे बाज़ी मैं लग जाता तो और भी लोग जाते इसलिए मैंने उस से मुँहचोदि करने के बजाय एक सुपरमैन पंच उसके जबड़े पर जड़ दिया...

images-11.jpg


पंच पड़ते hi वो एक दर्द भरी आह के साथ गिर गया...

मैंने जल्दी- जल्दी उस लड़के की रस्सियां खोली और उसे आजाद किया में पीछे पलटा भी नहीं था पूरी तरह से की मेरे पेट में एक लात पड़ी... और में गिर गया...

ये लात मरी थी बॉस ने ...जब कालू वहां आया तो बॉस भी उसके पीछे पीछे आ गया था...

बॉस ...तू यहाँ तक कैसे आया ... और तूने मेरे आदमी को कैसे मारा...

मई... खड़े होकर बॉस की तरफ दौड़ते हुए kaha''aise''...aur एक पंच बॉस के जबड़े पर भी जड़ दिया पर बॉस गिरा नहीं... तो मैंने उसे कंधे

images-9.jpg


पर उढ़ाकर एक फ5 दे दिया...

images-13.jpg


mai...a.c.p साहब आप इस जड़ी में बैठकर निकालिये यहाँ से...

(ये गाड़ी वही है जिस मैं कालू बॉस के लिए सरब लेकर आया था)

a.c.p...beta में तुम्हारा सुक्रिया किस तरह करूँ... आज तुमने मुझे और मेरे परिवार को बचा लिया...

a.c.p...tumhara नाम क्या है..

और तुम भी हमारे साथ क्यों नहीं चलते यहाँ से...

mai...ye जान पहचान करने का वख्त नहीं है आप यहाँ से nikaliye..jaan पहचान तो बाद में भी होते rahegi...aur आप मेरी चिंता न करिये आप बस जल्दी nikaliye...inke आदमी आते hi होंगे...

फिर वो सभीगाड़ी में बैठ रहे होते हैं की कालू ने नीचे पड़े- पड़े hi मेरी तंग पर एक लड़की से mara...jis बजह से में गिर गया...

और वो उस गाड़ी की तरफ bhaga...gadi में सभी बैठ चुके थे बस a.c.p की बीबी अंदर बैठ hi रही थी की कालू के हाथ में उसकी सदी का पल्लू खींचा और वो गाड़ी से बहार गिर पड़ी...

अब तक में संभल चूका था और उठ के कालू की तरफ भगा जो की मेरी आवाज़ सुनकर मेरी तरफ पलटा और मैंने उसे स्पीयर दे diya...jiski बजह से हम दोनों पानी के ड्रम से जाकर टकराये और पानी से भीग गए...

images-10.jpg


मई उठ कर खड़ा हुआ और a.c.p की बीबी को उठा कर गाड़ी में बैठाया और उन्हें वहां से रवाना किया ...

जब मैंने वहां का जायजा लिया तो मैंने वहां बॉस मो नहीं पाया और में समझ गया की वो अपने आदमियों को बुलाने गया होगा ...तो मैंने वहां से निकलने में hi अपनी भलाई समझी

...

अभी निकलने में अपनी भलाई समझी hi थी ???की वो लोग भागते हुए इधर की तरफ आ रहे the...maine भी अब अपनी साइकिल की तरफ भगा जो की मैंने झाड़ियों में छुपा के राखु थी...

में साइकिल उठा के भगा की एक गोली चलने की आवाज़ आयी और में दर gya...par उन लोगों ने अब हवा में तीर (गोली) मारा था क्योंकि एक तो वो लोग नशे में थे दूसरा में अब रात के अँधेरे में...

मैंने फुल स्पीड में साइकिल चलाई और थोड़ी hi देर ने जंगल से बहार पहुँच gya...tab जा कर मैंने चैन की साँस ली और निकल पड़ा अपने गाओं के खेतों की और ....

में सुबह होने से पहले वहां पहुँच गया...

मई खेत पर बने घर के अंदर gya...baba अब तक जाग चुके थे...

mai...bag से पत्ते निकलते hue...dekhana बाबा यही हैं क्या...

बाबा ने एक पत्ता हैट में लिया और उसे अपने अंगूठे और ऊँगली के बीच में रहक कर महसूस करके देखते हैं ...

बाबा ...हाँ बीटा यही hai...mai तुम्हारा ये अहसान कैसे चुकाऊंगा समझ नहीं आ रहा है...

mai...are बाबा इसमें अहसान की क्या बात है ये तो हर इंसान का फ़र्ज़ है की दुसरे इंसान की मदद करे...

mai...theek है baba...ab में सोने जा रहा हूँ...

तो बे कॉन्टिनोएड....
 
अपडेट-11

इन मॉर्निंग

में देर से सोया था इसलिए सुबह जागने में देर हो गयी...

जिस बजह से में स्कूल नहीं जा paya...aur खेत पर अपने सरे काम निपटा के में घर की तरफ निकल गया...

घर पहुंचकर मैंने एक प्लेट में खाना लिया क्योंकि रानी दीदी तो पड़ने गयी हुई थी और शांति चची से खाना मांगना मतलब घर की शांति भांग करना होता इसलिए मैंने अपने आप लेकर खाना hi मुनासिब समझा...

लेकिन जिस का दर था हुआ भी vahi...maine पहला निबला तोड़ कर अपने लबों के पास पहुंचा hi था की शांति चची आ गयी...

वो मेरे पास पहुंची तब तक निबल मेरे मुंह में था...

बी chachi...(bohot प्यार se)are साहेब खाना खा रहे हैं...

बी chachi...vaise कल कहाँ थे सारा din...ghar hi नहीं आये...

mai...man mein...aaj ये ज्वालामुखी से पानी कैसे निकल रहा है कुछ to...hai इसके पीछे बात...

mai...khana कहते hue...khet पर hi तो था ...

बी chachi...(apne असली रंग में आये hue)...jyada होसियार बन ने कोशिश न कर कल रात में कहा गया था...

मुझे तो झटका लगा की इन्हे कैसे पता चला की में कल खेतो पर नहीं था...

mai...kahin नहीं ...वो पास में hi गया था एक जड़ी बूटी लेने....

बी chachi...are हाँ तू तो बहित पैसे बाला हो गया है जो उस बिखरी को बिठाकर खिला रहा है...

बी chachi...gussa mei...yahan कोई आश्रम नहीं चल रहा है जो तू सभी को फ्री में खिलता rahega...do पैसे कमा के देख कभो जब पता चलेगा की पैसा केस इ कमाया जाता है...

अभय भैया घर में आते हुए...

अभय भाई= A.B

A.B...maa खाना दो जल्दी बोहोत भूक लगी hai...aur आ के चारपाई पर बैठ गए ...

बी chachi...haa हां बीटा अभी ले तू सुबह से भूका है...

और फिर वो खाना लेने चली जाती हैं

A.B ...पड़ने कैसे नहीं गया आज तू...

(ये दिल के तो बोहोत अच्छे हैं पर बी चची के सामने ज्यादा बात नहीं करते मुझ से वैसे तो मेरी बोहोत मदद कर देते hein...mujhe भी कभी कभी कुश्ती सीखा देते हैं ...ववे का शौक भी इन्ही की दें hai...aur ये भी एक बोहोत अच्छे पहलवान हैं...)

mai...bhai वो तुम्हे तो पता hi होगी वो बाबा वाली बात ...बस उन्ही की बजह से कल रात थोड़ा बहार गया था ...तो सुबह देर से नींद खुली....

A.B...koi न ...वैसे तूने आज कल ाखडे में भी आना बंद कर दिया है ...

mai...tym नई मिलता भाई...

तब तक शांति चची खाना ले कर आ गयी

बी chachi...aaj में तुझे अपने हाटों से खाना khilaungi...aur voA.B को खाना खिलने लगी...

बी chachi...abhay आज आशा (स chachi)ka फ़ोन आया था ...तू उसे जाकर ले आना ...

A.B...mere पास इतनी दूर जाने का टीम नहीं है ...वहां से आने जाने में 2 तो दिन लग जाते हैं ...

मैंने अब तक खाना खा लिया था ...और मई अब वहां से उठकर जाने hi वाला था की...

A.B...(chachi के सामने नफरत दिखते hue)ise भेज दो पुरे दिन इधर उधर घूमते रहता है ...कुछ काम तो करता नहीं है ये चला जायेगा...

papa...kon कहाँ चला जायेगा...

A.B...vo क्या है की आशा चची का फ़ोन आया था की कोई उन्हें ले जाये...

papa..han तो फिर तुम चले जाओ...

A.B...mai तो जा नहीं पाउँगा तो ...मई कह रहा था की राज चला जाये तो कैसा rahega...ghum भी आएगा वैसे भी कहीं जाता नहीं है

papa..ha यही सही rahega...tum चले जाना शाम की ट्रैन से...

mai...theek है papa...chala जाऊंगा ...(थोड़े से उत्साह से साथ)

papa...abhay तुम इसे छोड़ आना शाम को स्टेशन तक...

A.B...chhod आऊंगा...

उसके बाद में वहां जाने की तैयारी करने लग गया क्योंकि 1 रत वहां जाने में और 1 रात आने में लगती और 1 दिन वहां रहना भी पद सकता था...

इसलिए मैंने अपना बैग पैक कर liya...aur निकल गया गाओं में घूमने... जब वापस घर आया तो रानी दीदी घर आ चुकी थी और उनको मेरे जाने के बारे में पता चल चूका था...

जब मैंने रानी दीदी की तरफ देखा तो वो काफी उदास लग रही थी...

mai...kya हो गया क्यों उदास हो दीदी...

Rani...kah तो ऐसे रहे हो जैसे तुम्हे कुछ पता hi न हो...

mai...mere पास अब कोई सुपर पावर तो गई नहीं की मई आपका मन पड़के पता लगा loon...batao न क्या हुआ है...

रानी दीदी ने कुछ नहीं कहा और अपने कमरे की तरफ चल padi...mai भी उसी तरफ हो लिया...

कमरे में पहुंचर वो तकिये में मुंह देकर रो रही thi...jab मैंने उनकी आँखों में ांशों देखे तो में भी रो पड़ा...

जैसे hi उन्होंने मुझे रोटा हुआ देखा तो वो बैठ गयी और मुझे अपने सीने से लगा लिया...

Rani...mai तेरे बगैर कैसे rahungi...mujhe तेरी चिंता हो रही है...

mai...rah तो मई भी नहीं पाउँगा पर पापा ने कही है इसलिए जाना पड़ेगा...

अभी हम दोनों एक दूसरे गले लगे , हुए थे पर अब हम दोनों ने hi रोना बंद कर दिया कर diya...mera तो मन नहीं था उनसे अलग होने का ...बहुत सुकून मिल रहा था उनके गले लग कर..

हम थोड़ी देर ऐसे hi रहे क्योंकि दोनों को hi बहुत सुकून मिल रहा था...

फिर में अलग हो गया क्योंकि मुझे जाने के लिए तैयार भी होना था...

थोड़ी देर बाद में तैयार हो गया ...अब तक शाम हो चुकी थी ...और अब स्टेशन की और निकलना था...

मई अपना बैग लेने के लिए कमरे में गया की वहां रानी दीदी उसमे और सामान रख रही थी....

mai...didi आप क्या कर रही हो...

didi...tune कुछ रखा भी है की बस चल दिया मुंह uthake...mujhe तो चिंता हो रही है की तू वहां तक अकेला कैसे जायेगा...

mai...mai क्या कोई बच्चा थोड़ी हूँ...

didi...dhekho तो सही कितना बड़ा हो गया hai...aur कहकर वो फिर से मेरे गले लग गयीं...

बहार से किसी के कदमो को आवाज़ aayi...to हम दोनों अलग हो गए...

A.B...chal जल्दी ट्रैन का टीम हो रहा है...

mai...han चोलो में बस अभी आया..

फिर वो वहां से चले gye...aur मैंने भी अपना बैग उठा लिया....

रानी didi...phone करते रहना और इसी के साथ एक बार फिर से गले लग गयी...

mai...theek है कर लूंगा ...पहले जाने तो दो....

फिर हम चल पड़े स्टेशन की और ...रस्ते में अभय भाई से भी इधर - उदार की बातें होती रहीं... और इसी के साथ हम लोग स्टेशन पाहून गए...

वहां जाकर हमने टिकट ली और दोनों फिर ट्रैन का इंतजार करते- करते वहां के नज़ारे देखने लगे...

कुछ देर बाद पता चला की त्रिम 1 घंटा लेत है तो मैंने A.B से कह दिया वो चले जाएं उन्हें लेत हो रहा है ...
 
अपडेट-12

वहां जाकर हमने टिकट ली और दोनों फिर ट्रैन का इंतजार करते- करते वहां के नज़ारे देखने लगे...

कुछ देर बाद पता चला की त्रिम 1 घंटा लेत है तो मैंने A.B से कह दिया वो चले जाएं उन्हें लेत हो रहा है ...

अब्ब आगे

A.B के जाने के बाद में ट्रैन का इंतजार करने लगा और कुछ देर इंतजार करने के बाद hi ट्रैन आ गयी...

ट्रैन में इस वख्त ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं थी इसलिए सीट आसानी से मिल gyi...thodi देर में बैठा रहा...

कोई करीब एक घंटे बाद ट्रैन रुकी और अबकी बार ट्रैन के मेरे वाले डिब्बे में बहुत से लोग आये और बैठ गए...

उनके आपस में बातचीत करने पर पता चला की ये किसी स्कूल के स्टूडेंट्स हैं जो की किसी ट्रिप पर जा रहे हैं...

उनमे बोहोत से लड़के लड़कियां थे जो एक दूसरे के बर्फ- गफ मालूम होते हैं...

पर मुझे इन बातों से kya...mai तो बस सोना चाहता था क्योंकि में कल रात बजी नहीं सो पाया tha...na hi दिन में बिल्किल भी सो पाया था...

इसलिए मैंने सम में hi अपनी भलाई समझी क्योंकि मेरी आँखों ने जवाब दे दिया था...

और थोड़ी hi देर में मई सो गया....

रात में करीब कोई 11 बजे मेरी आँख khuli...mai वाशरूम गया ...फ्रेश हो आया अब मुझे बड़ी जोर की भूक लगी थी...

मई अपनी सीट पे पहुंचा तो वहां एक लड़की बैठी पायी जो की इस वख्त ईरफ़ोन लगा के गाने सुन रही थी और विंडो की साइड बैठी थी...

(उसके बारे में कोई डिटेल देना में जरुरी नहीं समझता...)

mai...apni सीट पर बैठकर अपने बैग से खाना निकलने लगा जो की घर ऐ hi अपने साथ लाया था....

उसी वख्त वो लड़की कण में से ईरफ़ोन निकलते हुए कहती है...

ladki...excuse में!

mai...(uski तरफ देखे बगैर) ग कहिये...

ladki...agar आपको कोई परेशानी न हो तो क्या में यहाँ बैठ सकती हूँ थोड़ा tym...mujhe ऊपर नींद नहीं आ रही...

mai...kyon नहीं बैठिये ,मुझे क्या परेशानी होने वाली है...

ladki...thanks ..

mai...koi न...

और खाना निकल कर खाने लगा फिर सोचा इस लड़की से भी पूछ लूँ...

mai...khana खाया तुमने ...

उसने कोई जवाब नहीं दिया...

mai...agar आपको कोई परेशानी न हो तो आप मेरे साथ खाना खा सकती हैं...

ladki...are नहीं आप खाइये...

लेकिन मेरे एक- दो बार और कहने पर वो खाना खाने को मन गयी शायद उसने कुछ खाया न हो...

फिर हमने साथ में खाना ख्य उसने भी खाने की बहुत तारीफ की...

खाना खाने के बाद हम दोनों बात करने लगे तो मुझे पता चला की वो 12 में पड़ती है और उनके स्कूल का ट्रिप शिमला जा रहा है...

तभी हमारे कानो में कुछ सिसकारियों की आवाज़ aayi...maine देखा तो आवाज़ हमारे से पीछे वाले सेक्शन में से आ रही थी...

वहां पर एक आदमी करीब 35 साल की उम्र का एक औरत की चूचियों को मसल रहा था ...औरत कोई करीब 30 के आस पास की होगी...

तभी मेरे पीछे मुझे किसी के होने का अहसास हुआ ...ये कोई और नहीं वही लड़की थी जो की मेरी सीट पर बैठी हुई थी...

उसने मुझे चुप रहने का इशारा किया और मेरे आगे आकर कड़ी हो gyi...ham दोनों ऐसे खड़े थे की वो हमें न देख सकें लेकिन हम उन्हें देख सकें...

लेकिन तब तक उस आदमी ने उस औरत के ब्लाउज के बटन खोल दिए थे और वो औरत सिसकियाँ ले रही थी क्योंकि वो आदमी उसकी गर्दन और कन्धों पर किश करते हुए उसके ब्लाउज को उसके सरीर से अलग कर रहा था...

मैंने सेक्स के बारे में ज्यादा नहीं जनता था बस कुछ बातें hi पता थी और ये मेरा फर्स्ट टाइम था की में कोई ऐसा सन देख रहा था ...

मेरे सरीर में हलचल होना लाज़मी था ..मतलब मेरा लुंड खड़ा हो चूका था... जो की उस लड़की की गांड से टच हो रहा था क्योंकि वो बिलकुल मुझसे सत्कार कड़ी थी...

अब वो आदमी उसके निचले होंठ को कुश रहा था और वो औरत उस के ऊपर वाले होंठ के कुश रही thi...aur puchh...puchh....puchhh...ki मादक आवाज़ आ रही थी... ये होंठ चूसै की रस्म कोई 5-7 मं चली...

और अब वो आदमी ब्रा खोलने hi वाला था की किसी की कदमो की आहात ने हमें और उन दोनों को चौकन्ना कर दिया ...

अब तक मेरे साथ कड़ी हुई लड़की भी गरम हो चुकी thi...aur शायद झाड़ भी चुकी थी ...

वो कोई बुद्धा आदमी था जिस वजह से उन सोनो के कार्यक्रम में बढ़ा आयी ...वो बुद्धा आदमी शायद वाशरूम रहा था ...

ान उस औरत और आदमी ने अपने आप को संभाला और अपने कपडे ठीक कर के शायद सोने चले gye...par अब शायद उनको नींद कहाँ...

मई भी आकर अपनी सीट पर बैठ गया... पर वो लड़की नहीं आयी मैंने वहां जाकर देखा तो वहां भी नहीं थी...

फिर से जाकर में अपनी सीट पर बैठ gya...par मेरे लुंड में तनाब की बजह से मुझे दर्द हो रहा था ...अब तक वो लड़की भी आ चुकी थी...

mai...kahan चली गयी थी तुम...

ladki...sharmate हुए ...वाशरूम गयी थी...

फिर हम दोनों ने hi उस वाक़ेय के बारे में कोई बात नहीं की...

mai...chalo अब सो जातें हैं...

ladki...hmm..theek है..

मई सोने की कोशिश कर रहा था पर मुझे तमब की बजह से नींद hi नहीं आ रही thi...aur ये बात शायद उस लड़की लड़की को भी पता चल चुकी thi...kyonki गर्मियों के दिन से इसलिए हम बिना किसी चादर के सो रहे थे ...और अँधेरे में भी पंत में से लुंड के उभर को साफ देखा जा सकता था...

लेकिन उसने कुछ कहना उचित नहीं समझा sayad...aur उस टीम मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं था...

फिर बोहोत मुश्किल से मुझे नींद आयी फिर तो में सीधा सुबह hi जगा...

अभी जगा hi था की चची का फ़ोन आ gya...unhone पूछा की कहाँ तक पहुँच gye...fir मैंने लोगोने से पता कर के बता दिया की अभी कोई 45 मं लग जाएंगे वहां पहुँचने में...

फिर चची ने कहा की वो मुझे लेने आ जाएंग station...maine उन्हें ok kaha...tab तक एक चाय वाला आ गया फिर में चाय पीने लग गया वो लड़की भी वहीँ बैठी thi...us से भी इधर उधर की बातें होती रही....

उसके बाद मेने फ़ोन कर के रानी दीदी के भी हल चल liye...aur फिर अपनी मंज़िल का इंतज़ार करने लगा...

तो बे कॉन्टिनोएड

 
अपडेट-13

फिर चची ने कहा की वो मुझे लेने आ जाएंग station...maine उन्हें ok kaha...tab तक एक चाय वाला आ गया फिर में चाय पीने लग गया वो लड़की भी वहीँ बैठी thi...us से भी इधर उधर की बातें होती रही....

उसके बाद मेने फ़ोन कर के रानी दीदी के भी हल चल liye...aur फिर अपनी मंज़िल का इंतज़ार करने लगा...

अब्ब आगे

थोड़ी देर बाद वो मंज़िल भी आ गयी जहाँ मुझे उतरना tha...aur मई ट्रैन से उतर कर स्टेशन से बहार आ गया...

फिर मैंने चची को कॉल लगाया और उनसे उनका लोकेशन पूछ तो उन्होंने जहाँ बताया था में उधर की तरफ चला गया...

(जब तक राज वहां पहुँचता तब तक हम जरा चची के बारे में जान लेते हैं ,नाम है आशा ये 30 साल की अतियंत hi सुन्दर महिला हैं ...फिगर भी बोहोत अच्छा है ...बोहोत hi मस्त माल हैं...

images-3.jpg


इनका विबाहर राज के लिए ज्यादा बुरा भी नहीं है तो अच्छा भी नहीं hai-bajah है बड़ी चची शांति देवी ...वो इसके कान भर्ती hi रहती हैं...)

मई वहां पहुंचा तो देखा की दो लड़की एक ब्लैक महिंद्रा थार के पास कड़ी हैं...

41787773-156431718617714-7738143291351285762-n.jpg


एक को तो मैंने पहचान लिया था जिसने थोड़ा ग्रे कलर का का सूट पहन रखा था वो तो मेरी चची थी...

पर दूसरी वाली को नहीं पहचान पाया tha...tab तक चची मेरे पास आ गयीं...

मैंने उनके पेअर छुए...

स chachi...aur कोई परेशानी तो नहीं हुई...

mai...nhi बिलकुल ठीक थक पहुँच गया...

स chachi...thak गए होंगे तुम ...चलो कुछ खा lete...hamne भी कुछ नहीं खाया सुबह से...

फिर हम सभी गाड़ी में बैठ गए... जो लड़की चची के साथ थी वो थार ड्राइव कर रही thi...mai उसको नहीं पहचान पाया की कोण है तो मैंने चची से पूछ उसके बारे में...

mai...chachi ये कोण है....

स chachi...(ankhen दिखते हुए) क्यों तुम्हें क्या करना है...

mai...vo मैंने पहचाना नहीं इसलिए पूछ रहा था...

स chachi...to खुद hi पूछ ले...

फिर मई चुप हो गया और तब तक हम रेस्टोरेंट पहुँच चुके थे और फिर वहां जाकर खाना आर्डर किया...

स chachi...mai जरा वाशरूम होकर आती हूँ..

फिर वहां हम दोनों hi रह गए the...vo मेरी तरफ देख रही थी में उसकी तरफ देख रहा पर दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था...

फिर मैंने सोचा पूछ hi लेता हूँ किन है...

mai...kya मई तुम्हारा नाम जान सकता हूँ...

ladki...naam जान के क्या करोगे...

mai...nhi बस जान पहचान हो जाती , करना तो कुछ नहीं है...

ladki...kya तुमने सच में मुझे नहीं पहचाना...

mai...nhi तो तभी तो पूछ रहा हूँ...

ladki...tum न बिलकुल लल्लू, तभी कहूं की अब तक शांत कैसे है...

mai...mtlb क्या है तुम्हारा...

तब तक चची आ गयी....

ladki...bua ग इसका ''ढक्कन'' कभी खुलेगा की नहीं ये ऐसा hi रहेगा...

चची ने कुछ नहीं कहा बस हल्का सा मुस्कुरा दें और बैठ गयी...

ladki...vaise तू ढक्कन hi है बस लम्बाई बाद गयी है... दिमांग तो अभी भी घुटनो में hi है...

ढक्कन सुन के मेरे को कुछ याद सा आरहा था... पर तब तक खाना आ गया था और फिर हम तीनो खाना खाने लगा ...

मई उसी की तरफ देख कर खाना खा रहा था और यद् करने की कोशिश कर रहा था की ये कोण है...

फिर हमारा खाना हो गया और बिल पाय कर के हम घर की तरफ निकल पड़े...

वो दोनों आपस में बातें कर रही thi...bo चची को बुआ ग कह रही थी जिस से इतना तो पता चल गया था की ये चची की भतीजी है...

पर उसका नाम याद नहीं आ रहा tha...ab भी उन दोनों की बातें चल रही थी की हम घर पहुंचा गए...

चची घर में जा चुकी थी मैंने बैग उतर लिए और वो लड़की गाड़ी पार्क करके घर में अंदर जाने को हुई तो मैंने आवाज़ लगाई...

''ो बिल्ली'' तो उसने तुरंत पीछे मुद कर dekha...is वक्त उसके चेहरे पे हलकी से मुस्कान थी जो कह रही हो की चली पहचान तो लिया और फिर वो मुझे गुस्से में आँखें दिखते हुए घर के अंदर चली गयी...

मई भी उसके पीछे -पीछे हो liya...aur जा कर अपना सामान हॉल में रख दिया और सोफे पर बैठ gya...safar का थका हुआ था तो थोड़ा लेता हुआ सा था...

स chachi...aise क्यों पड़ा hai...neend आ रही है तो सजा... चल में तुझे कमरे तक पहुंचा दूँ...

mai...vo तो ठीक hai...par वाकई सब कहाँ हैं कोई दिख नहीं रहा है...

स चची... वो भाभी की रिस्तेदारी में किसी की डेथ हो गयी है सभी वहां गए हैं...

mai...hmm ठीक है...

अब तक हम एक कमरे में पहुँच चुके the...kamra बड़ा था क्योंकि स चची के घर वाले बोहोत आमिर इंसान थे और ये घर भी कोठी जैसा बना हुआ था बोहोत hi बड़ा था...

फिर में कपडे बदल कर सो गया...

( जब तक राज की नींद पूरी होती है हम स चची के परिवार के बारे में जान लेते हैं...

चची के परिवार में इनके....

पिता ग

माता ग

2 भाई जिनमे से एक अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहता है

यहाँ इनके बड़े भाई -देवराज और भाभी चारु रहते हैं

जिनकी एक बेटी है -प्रिय की आगे 20 के करीब है ये बोहोत hi खूबसूरत लड़की है

[URL=']
Screenshot-2018-11-11-09-52-00-1.png


)

fir mein seedha sham ko 3: 30 ke kareeb kisi ke jagane par jaga...

jagane wala koi aur nhi billi hi thi

mai...kon hai yaar thoda aur sone do na...

aur fir se so gya...

vo...lagta hai aise nhi manega...

aur fir vo bahar chali gyi aur mai aram se so gya...lekin kuchh der baad mai hadbadate hue jaga ...

wajah thi vo billi...usne bin mausam barsat ki aur pura balti ka pani mere upar udhel diya...

mai kuchh kah pata us se pahle hi vo wahan se nikal gyi...mujhe to bohot gussa aaya us par nind kharab kar ke jo rakh di usne...

ab kar bhi kya sakta tha...fir mein nahane chala gya ....uske baad kapde pahan kar bahar gya to c chachi mil gyi unhone khana ke liye bola...

bhuk to bohot jor ki lagi thi isliye maine khana khane lag gya...khana vohot hi tasty tha...maine khane ke baad jamkar khane ki tarif ki kyonki mujhe laga khana c chachi ne banaya hai...

mai...chachi khana to bohot shandar banaya hai apne...maza aa gya...

c chachi...maine nhi banaya...priya ne banaya hai...

maine uski taraf dekha to vo muskura rhi thi...par mujhe gussa sa aa rha tha us billi par...

mai...ye billi bhi khana banana janti hai...

priya...teri tarah dhakkan nhi hun...

c chachi...tum dono ab ladna band bhi karo... aur han ghar par to kuchh hai nhi karne ko to tum dono kheton par ghum aana...

c chachi...aur mujhe meri saheli ke ghar chhod dena mujhe thoda kaam hai ...

maine aur priya ne ok kah diya...fir ham kheton par jane ke liye tayar hone chale gye...

TO BE CONTINUED

[/URL]
 
अपडेट-14

स chachi...aur मुझे मेरी सहेली के घर छोड़ देना मुझे थोड़ा काम है ...

मैंने और प्रिय ने ok कह diya...fir हम खेतों पर जाने के लिए तैयार होने चले गए...

अब्ब आगे

मई तो जल्दी hi तैयार हो गया और बाकि स्टोरीज की औरतों की तरह तरह तैयार होने में कितना टाइम लेंगी शायद ये बताने की जरुरत नहीं है मुझे...

पर फिर भी भगवन ने मुझ पर थोड़ा सा तरस खा लिया और क्योंकि प्रिय जल्दी तैयार होकर आ gyi....par चची का अभी तक कोई अत पता नहीं था...

जैसे hi मेरी नज़र प्रिय पर गयी मेरा तो मुंह hi खुला रह गया क्योंकि बो थी hi इतनी खूबसूरत...

प्रिय ...उसकी खूबसूरती बयां कर सकूँ इतना बड़ा में लेखक नहीं...

वो इस समय एक सलवाल सूट में आयी थी और बेहद hi खूबसूरत लग रही थी...

मन तो कर रहा था अभी जेक इस ले लिपट jaun...mai अभी ख्यालों में hi था की...

priya...oye ऐसे क्या घर रहा hai...pahle क्या कभी कोई खूबसूरत लड़की नहीं देखि क्या...

mai...ladki तो बोहोत देखि हैं पर कभी कोई खूबसूरत बिल्ली नहीं देखि...

priya...???tu समझता क्या है अपने आप को dhakkan...mujhe बिल्ली kahega...teri इतनी हिम्मत...

और वो मेरे पीछे bhagi...mai भी भागने लगा और एक रूम में घुश gya...or दरवाजे की पीछे छुप गया...

वो भी रूम में आ गयी और इधर उधर देखने लगी....

कहीं नहीं दिखा तो बीएड के नीचे देखने लगी... तभी मेरे दिमाग में एक खुरापात सूझी और में उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया...

जैसे hi वो कड़ी हुई और पलटी मैंने जोर से डरावनी आवाज़ निकली और एक बुरी सी सकल banai...vo भी आवाज़ सुनकर दर gyi...aur चीखते हुए बीएड पर गिर गयी पर...

इंसानी स्वभाब के अनुसार जब वो गिर रही तो उसने किसी चीज़ को पकड़ने की कोशिश की, तो उसके हाथ में मेरा हाथ आ गया...

ये सब इतनी जल्दी हुआ की मई बजी अपने आप को संभल नहीं पाया और उसजे वपर गिर गया...

मई बिलकुल उसके ऊपर था और हर कहानी की तरह यहाँ भी यही सन बन न था की मेरी सांसें उसकी सांसो से टकरा रही thi...aur हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे...

images-15.jpg


सांसों का मिलना किसी को भी मदहोश कर देता hai...hamare साथ भी यही hua...kyonki एक तो हम दोनों एक दुसरे की आँखों में देख रहे थे और हमारर दरमियान बहोत hi काम या कहो की न के बराबर दूरी थी ....

जिस की बजह से प्रिय के पतले और गुलाबी होंठ हलके हलके कैंप रहे थे और यही हाल मेरा था.... (पर मेरे होंठ उसकी बराबर पतले और गुलाबी नहीं थे)...

प्रिय के होंठों के देख कर मुझ पर एक मदहोशी सी छ रही थी और में उनकी तरफ आकर्षित हो रहा था...

मेरा मन उसको चूमने का कर रहा था... और में धीरे धीरे उसके होठों की तरफ बाद रहा...

प्रिय ने अब तक अपनी प्यारी प्यारी दोनों आँखों को बन कर लिया tha...ab मेरी नज़र उसके कांपते हुए होठों की तरफ थी ...

मुझे ऐसा लगा जैसे उसके होंठ कह रहे हों की आओ और चूसो hame...uske होंठों की तरफ देखते हुए मुझसे न रहा गया और मैंने अपने होंठ उसके कांपते हुए लबों पर रख दिए....

images-3.jpg


uske honth fool ki tarah komal aur rui ki tarah mulayam the...mujhe us bakt jo ahsas ho rha tha vo mai kya shayad hi koi bta paye kyonki us ahsas ko sirf mahsus kiya ja skta...

''अपने महबूब के होठों की क्या मैं तारीफ करूं।

उस अहसास के लिए तो जिंदगी भी कुर्बान करूं।''

maine uske hothon ko halka chuma aur fir dekhne laga ....usne na to aankhein kholi aur na hi kuchh aur react kiya...to maine ek or baar apne honth uske honthon par rakh diye

aur choosne laga par priya ne koi pratikya nhi ki...uske hothon ka ras bohot hi meetha tha...mai to uske hothon ko choosne mein sab kuchh bhul gya tha....ek alag hi duniyan mein pohonch gya tha...wo ehsash hi kuchh alag tha...

lekin tabhi kisi ke phone ☎ ki ghanti baz gyi or ham dono ko hosh aaya aur alag ho gye...

ye ghanti thi priya ke phone ki jis pe kisi ka phone aaya tha usne kuchh batein ki aur bahar chali gyi...mai to abhi bhi usi lamhe ko yaad kar rha tha ...

fir jab mein hosh mai aaya to meri g**d fatne lagi...kahin ye chachi se kuchh kah na de ...lekin aisa kuchh nhi hua kyonki chachi aur priya baat kar rhi thi -

chachi...kahan hai kab se dhundh rahi hun...mil hi nhi rhi...

Priya...us dhakkan ko bulane gyi thi pta nhi kitna tym lagata hai tayar hone mein...

uski is baat ko sunke meri jaan mein jaan aayi...

chachi...kahan hai vo ab...

priya...us kamre mei hai...jao thida aur saza aao pta nhi kitna tym lega...

vo phone chachi ka tha jisne hamare bich mai khalal dali kyonki vo bhi phone ke sath sath wahan aa gyi thi...

bahar dono ke baat karne ki awaz jo aa rhi thi...phir mai apne aap ko thik karne lag gya...aur tabhi chachi aa gyi...

chachi...ladkiyan to vaise hi badnaam hei unse jyada tym to tu le rha hai sazne mein...

mai...sorry! bas abhi aaya...

chachi...to phir jaldi kar na...mai yahi hun....

phir ham dono nikal kar bahar aa gye ...wahan priya black thar mein baithi hui kisi pari ki tarah lag rhi thi...

6e06cfc38f93a1c6ee33f2b58b132f05.jpg


मैंने उसकी तरफ देखा तो वो भी मेरी hi तरफ देख रही thi...par अब हम दोनों मई hi एक दुसरे से आँखें मिलाने लायक हिम्मत नहीं थी...

फिर हम तीनो थार में बैठ गए जिस को की प्रिय चला रही thi...aur थोड़ी देर प्रिय ने चची से इधर उधर की बातें की और जिस पास hi के गाओं में चची को जाना था वहां पहुँच गए...

वहां पहुँच कर चची को हमने चची की सहेली के घर तक छोड़ा और चची की सहेली हमें भी ले गयी अपने घर और थोड़ी देर जान पहचान हुई और नास्ता पानी के बाद हम दोनों निकल लिए खेतों की तरफ...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अन्नोउंसमेंट्स

भाई लोग मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है जिस बजह से आ भी अपडेट बोहोत मुश्किल से दिया है...

तो हो सकता है की 2-4 दिन तक अपडेट न आये इसलिए माफ़ी चाहूंगा...

और एक बात मेरा तो कोई इरादा नहीं है प्रिय और राज के बारे में फ्लैशबैक लिखने का इसलिए अगर आपलोगों को कोई परेशानी हो तो कमैंट्स में बता दें की लिखूं के नहीं...
 
अपडेट-15

फिर हम तीनो थार में बैठ गए जिस को की प्रिय चला रही thi...aur थोड़ी देर प्रिय ने चची से इधर उधर की बातें की और जिस पास hi के गाओं में चची को जाना था वहां पहुँच गए...

वहां पहुँच कर चची को हमने चची की सहेली के घर तक छोड़ा और चची की सहेली हमें भी ले गयी अपने घर और थोड़ी देर जान पहचान हुई और नास्ता पानी के बाद हम दोनों निकल लिए खेतों की तरफ...

अब्ब आगे

उसके बाद उसने मुझे आगे बैठने के लिए कहा और जड़ी को आगे खेतों की तरफ बड़ा दिया...

अभी गाड़ी में बिलकुल शांति थी न वो कुछ कह रही थी और न hi मई...

फिर मैंने हिम्मत कर के बोलना चाहा...

mai...priya...

priya...hmm बोलो

उसने मेरी तरफ देखा और फिर से गाड़ी चलने लगी...

mai...wo ..वो mai..wo

priya...bolo bhi...kya कह रहे हो...

mai...wo mai...jo..bhi...hua...wo अचानक हो gya...(ye बात बोहोत रुक रुक कर बोली थी..)

mai...uske लिए मुझे माफ़ कर do...mai बहक गया था...

प्रिय के चेहरे पर कोई भाव नहीं the...wo बस एक नज़र मेरी और देख लेती और फिर से अपने काम मई लग जाती...

mai...kuchh तो bolo...aise नाराज़ न raho..mujhe बुरा लग रहा है...

की तभी प्रिय जोर से ब्रेक लगा देती hai...mai उसकी तरफ आश्चर्य भरी नज़रों से देखने लगा...

priya...(thide रूखे स्वर mein)...utro

mai...Par kyon...kya हो गया कोई गलती हो गई हो तो सजा दे lo...par ऐसा न करो...

priya...ek बार कहा न उतरो तो उतरो (चिल्लाते हुए)

मई उतर गया और मन में सोचने लगा की इसे क्या hua...ab तक तो ठीक थी अचानक पता नहीं क्या हो गया... मुझे अंदर से बोहोत बुरा लग रहा था...

बेइजत्ती सी मह्सुश हो रही थी गुस्सा भी आ रहा था... ये नहीं पता की ये गुस्सा उसपर आ रहा था की अपने ऊपर...

पल- पल पर मेरे चेहरे के भाव बदल रहे the...tabhi किसी के जोर से हसने की आवाज़ आती hai...ha है है

ये कोई और नहीं थी प्रिय hi थी ...उसके इस तरह हसने से मुझे बोहोत ज्यादा गुस्सा आ रहा था...

लेकिन उसने हसने में कोई रुकाबट नहीं aayi...ek मन तो कर रहा था की इसका गाला दवा दूँ पर....

Priya...tum तो इतने बुरे बुरे मुंह बना रहे हो जैसे किसी ने तुमसे एक नहीं बल्कि दोनों किडनी मांग ली hon...aur फिर जोर जोर से हसने लगी...

mai...(jhunjhlate hue)...kya हुआ क्यों उतरा mujhe...aur हैश क्यों रही हो...

Priya...tum इतनी बुरी बुरी सकल बना रहे हो की मई क्या कोई भी हैश सकता है...

मुझे और ज्यादा गुस्सा सा आ रहा था...

mai...ab हो ह्या तुम्हारा ...तो बताओ...

प्रिय पहले तो हस्ती रही जोर जोर से फिर बोली...

Priya...are यार यही हमारे खेत हैं अब यहाँ उतरना तो था hi...aur ये इतनी बुरी -बुरी सकल न banao...mere तो हस्ते हस्ते पेट में दर्द हो गया...

मुझे बोहोतथागा - ठगा सा मह्शूशाह हो रहा था...

mai...(rudely )तो फिर तुमने इतने रौदे तरीके से क्यों कहा...

Priya...bas ऐसे hi...par जो भी हुआ अच्छा हुआ...

mai...kyon

प्रिय... वो इसलिए की मुझे तुम्हारे और रूप के बारे में पता चल गया...

mai...kaisa rup...mai तो जैसा हूँ बैसा hi हूँ...

priya...yahi की तुम ढक्कन के साथ बन्दर भी हो...

वो दोनों हाथों के अंगूठे को डुबो कानो के ऊपर रखते हुए , उँगलियों को आसमान की तरफ कर के और मेरी तरफ जीभ निकल के चिढ़ाते हुए भागने

लगी...

मुझे भी उसकी इस तरह की हरकत पर हाशि आ गयी और झूठा गुस्सा दिखते हुए मई भी उसको पकड़ने को भागने लगा...

भागते भागते उसका दुपट्टा मेरे हाथ में आ गया और उसके गले से अलग हो गया और वो गिरते- गिरते bachi...mera ऐसा करने का कोई मूड नहीं था बस अचानक हाथ में आ गया और आगे का सभी लोग समझ hi सकते हैं....

दुपट्टा जैसे hi उसके सरीर से अलग हुआ एक तो वो गिरते- गिरते बची और दूसरा वो रुक गयी...

और पीछे की तरफ जैसे hi वो मुड़ी मई तो उसको बिना दुपट्टे क्र देख के हैंग सा हो गया....

क्योंकि उसने एक बोहोत hi डीप गले का सूट पहना हुआ था एक तो बो वैसे hi खूबसूरत थी कोई भी उसे ऐसे hi देख ले तो उसमे खो जाये...

मैंने तो उसे फिर भी बिना दुपट्टे के देखा था तो हैंग होना तो लाज़मी था...

क्योंकि उसका फिगर गज़ब का था और उसके सूट का गाला खुला सा होने के कारन उसके क्लीवेज की घाटी दिख रही thi...jo किसी को भी उत्तेजित करने के लिए काफी है...

पर मेरे इस वक्त उत्तेजित होने के अलावा मेरी नज़ारे उसकी इस घाटी में दुब सी गयी थी ...

इतने में hi प्रिय आयी और मेरे हाथ से दुपट्टा छीन लिया ...और ओढ़ लिया

Priya...meri आँखों के सामने चुटकी बजाते hue...aise क्या देख रहे हो...

उसकी इस हरकत hi बजह से मेरी तन्द्रा टूटी...

प्रिय थोड़ा शर्मा रही थी और मेरी इस हरकत hi बजह से शर्म तो मुझे भी बोहोत आ रही थी...

Priya...kya हुआ..पहले कभी मुझे देखा नहीं क्या जो ऐसे देख रहे हो...

mai...nahi...mtlab देखा तो बोहोत बार है पर ऐसे नहीं देखा जैसे आज देखा है...

priya...()aaj ऐसा क्या खाश देख लिया... चलो तुम भी क्या याद रखोगे बच्चा ...मई तुम्हे एक फोटो दे dungi...aur हसने लगी...

mai...g अम्मा g...aur मई भी हसने लगा...

priya...he हे हे बड़ी हसी आ रही है...

mai...or नहीं तो क्या ...

प्रिय ...चलो यार बोहोत मज़ाक हो गया ...मई तो थक गयी hun...kahin बैठ ते हैं ...

mai...hmmm...ab ये तुम्हारा एरिया है तो तुम्ही बताओ कहाँ बैठने लायक जगह है...

फिर वहां खेतों पर हमें कुछ मज़दूर दीखते hein...to प्रिय पूछती है गन्ने खाओगे क्या...

mai...mujhe तो आम बोहोत पसंद हैं...

priya...ab में गन्ने का पूछ रही हूँ ये आम बिच में कहाँ से आ गया...

mai...nazaz क्यों हो रही ho...vaise गन्ने को खाया नहीं जाता...

priya...to किस काम आता है ये जनाब...

mai...mtlb गणना खाया नहीं चूसा जाता है...

priya...oh ऐसा kya...jo भी हो अब बताओ भी मांगों की नहीं...

mai...theek है जैसे तुम्हारी इच्छा...

फिर वो मज़दूर को इशारा कर के गणना लेन को बोल देती है...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट-16


mai...mtlb गणना खाया नहीं चूसा जाता है...

priya...oh ऐसा kya...jo भी हो अब बताओ भी मांगों की नहीं...

mai...theek है जैसे तुम्हारी इच्छा...

फिर वो मज़दूर को इशारा कर के गणना लेन को बोल देती है...

अब्ब आगे

गन्ने खाने ोू सॉरी सॉरी चूसने के बाद हाथ थोड़े chip-chipe हो गए the...isliye हम उन्हें धोने के लिए टूबवेल पर गए जो की एकांत में बना हुआ था...

वहां पर जाकर हमने हाथ धोये वो टूबवेल कुछ इस तरह था

तो प्रिय ने कहा यहीं बैठ लेते हैं बोहोत शांति है यहाँ...

mai...kahan है मुझे तो दिख नहीं रही...

priya...(gusse se)tu दहेक्कन पैंटी छोड़े गए की नहीं...

mai...are यार मज़ाक कर रहा था...

फिर हम दोनों वहीँ बैठ जाते हैं ...हम कुछ इस तरह बैठे थे की हमारे पेअर नीचे से पानी से लग रहे थे...

या यूँ कहिये की एंकल तक पेअर पानी में दुबे हुए the...in गर्मी के दिनों में पैरों का ठन्डे पानी में दोबा होना ये कुछ अलग hi अहसाह hi था...

हम दोनों के बीच में इस वख्त कुछ दुरी तो थी...

फिर हमने इधर उदार की बातें शुरू की थोड़ी देर तो मैंने उसकी बातों को सुना लेकिन जैसे hi मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो मई उसी मई खो सा गया...

उसके हिलते हुए होठों मई कुछ जादू सा था मई बस उसी की तरफ देखा था...

उसने मुझे हिलाया और शरत से पूछ ''कहाँ खो जाते हो यार तुम मई यहाँ तुमसे बात कर रही हूँ और तुम्हारी पता नहीं कहाँ खोये हुए हो''...

mai...uski आँखों में देखते hue...kahin नहीं मई तो यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को देख रहा था...

priya...ha वो तो hai...yahan की हर चीज़ में सुंदरता है

mai...ha वो तो है...

priya...tumhe यहाँ सबसे ज्यादा अच्छा लगा...

mai...tum...

अभी इतना hi कहा था की प्रिय ने जोर से कहा ''kya''...us वख्त उसके चेहरे पर कुछ अलग तरह के बाव थे जिन्हे मई समझ नहीं प् रहा था की यर किस लिए हैं...

mai...sun तो लिया करो पूरा मई कह रहा था की तुम्हारे ये खेत ...और यहाँ की खूबसूरती कुछ अलग hi hai...aur...

Priya...aur '' क्या''?

mai...auurr '' तुम भी कुछ काम नहीं हो''

मेरी इस बात पर वो शर्मा जाती है...

mai...vaise अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो सॉरी!...

Priya...kis बात के लिए ?...

mai...jo कुछ भी घर पर हुआ उसके लिए...

mai...maine वो जानबूझ कर नहीं किया बस पता नहीं अचानक कैसे हो गया...

वो ये बात सुनकर शर्मा जाती है और शायद थोड़ा थोड़ा मुस्कुरा रही थी...

प्रिय ...(मन mein-ye तो सही मई hi ढक्कन है...)

Priya...chhodo यार जो भी हुआ, वैसे जब तुम आये थे तो तुमने मुझे पहचान ने से मन क्यों कर दिया था...

मई इस बात पर कुछ बोलै नहीं और थोड़ी से पुराणी यादों में खो gya...jis से मेरे चेहरे पर कुछ दुःख के भाव आ गए the...lekin मैंने अपने आपन को संभाला...

और पानी की बहते पानी की तरफ देखने लगा...

प्रिय ने मेरे हाथ को अपने हाटों में पकड़ा और बोहोत hi मासूम hi सकल के साथ poocha''kya हुआ''

mai...kuchh nhi...pahli बार तो मई तुम्हे पहचान hi नहीं पाया tha...itna बदल जो गयी ho...aur दूसरी बजह तुम hi हो....

इस बात को सुनकर शायद प्रिय को पता चल गया था की मई क्या कहना छठा हूँ...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
आप सभी लोगों का बोहोत बोहोत सुक्रिया सपोर्ट करने के लिए.

कुछ करने क्र चलते में रेगुलर उपदतरस नहीं दे प् रहा हूँ जिस की बजह से इस स्टोरी के लिए लोगो का इंट्रेस्ट ख़तम हो गया है...

रेगुलर अपडेट न देने के लिए में माफ़ी मांगना चाहता hun:thanks::thanks::thanks: फॉर रीडिंग स्टोरी...

आज शाम तक एक अपडेट तो मिल hi जायेगा शायद दो भी दे दूँ.
 
Back
Top