Romance भंवर (पूर्ण) - Page 30 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-69

ध्रुव:- वाउ अब एक्शन शुरू होगा…

आरव:- इतने पर कुछ ना होगा, उसे थप्पड मारो या डंडा अभी अपने धुन में है वो..

ध्रुव:- लेकिन उसने गीरेवान पकड़ रखा है..

आरव:- कोई फर्क नहीं पड़ता भाई.. देखते जाओ..

तभी उस माहोल में पहला गीत बजना शुरू हुआ… "पीले पीले ओ मेरे राजा।".. और सिन्हा जी बार काउंटर से 2 बोतल सर पर उठाकर नाचते हुए चल दिए अपस्यु के पास…

"ले छोटे एक तेरे लिए।"… "ना बापू मुझे मेरा कॉकटेल ही चाहिए".. "अरे बोल दिया है, बीच-बीच में वो सर्व करता रहेगा तू तो क्लासिक बेवड़ा सोंग का मज़ा ले और मेरे साथ ठुमके लगा।"..

फिर क्या था अपस्यु भी बॉटल उठाया, और अपने सिर पर रखकर नाचने लगा और नाचते-नाचते पीने लगा। उनका नाचना और पीना देखकर क्या गुस्साए और क्या जिज्ञासा से देखने वाले, सभी जोड़-जोड़ से ठहाका लगाकर हंसने लगे।

डांस फ्लोर कर अब भीड़ ना के बराबर हो चुकी थी। कबीर और नीरज के दोस्त बस साइड होकर बड़बड़ा रहे थे, बीच में केवल ध्रुव के 2-3 दोस्त ही बचे थे जो इनके देसी डांस को पूरा एन्जॉय करते हुए इनको कॉपी कर रहे थे और नाच रहे थे। इतने में कबीर गुस्साए हुए आया और अपस्यु को पकड़ कर धक्का देकर गिरा दिया।

ध्रुव:- अब तो पक्का यहां बवाल होगा।

ऐमी:- वहां देखिए क्या हो रहा है..

डीजे को पहले से निर्देश मिला हुआ था, जैसे ही कोई गिरे, नागिन की धुन शुरू होनी चाहिए। और सामने जो डांस फ्लोर पर चल रहा था, उसे देखकर ध्रुव भी खुद को रोक नहीं पाया, अपनी जगह छोड़ने से। सब अपस्यु के ऊपर अपने रुमाल से बीन बजा रहे थे और अपस्यु नीचे लेटकर सबको नागिन डांस दिखाते हुए डसने की कोशिश कर रहा था।

ध्रुव भी उनके बीच सामिल होता बीन बजाने लगा और अपना एक हाथ देकर अपस्यु को उठाया.. अपस्यु उठकर उसके गले लगाते हुए नाचने लगा.. और साथ में सिन्हा जी भी झूम रहे थे। कुछ देर नाचने के बाद ध्रुव फिर से सबके बीच बैठते हुए कहने लगा…. "ये पक्का क्रेज़ी है। मै भी किसी दिन फुल टल्ली होकर इनकी महफ़िल ज्वाइन करूंगा।

ध्रुव इतना बोल ही रहा था कि आरव, ऐमी और स्वस्तिका चौंक कर खड़े हो गए। डांस फ्लोर पर एक लड़का अपस्यु का गिरेवान पकड़ कर उसे एक थप्पड लगा चुका था और दूसरा लड़का सिन्हा जी के गीरेवां पर हाथ डाले हुआ था।

ध्रुव:- चिल यार ये दोनों काफी फ्रैंडली है…

अभी ध्रुव इतना कह ही रहा था कि साउंड बॉक्स पर बज रहे इतने लाउड म्यूज़िक के बीच एक जोरदार तमाचा पड़ने की आवाज़ सबने सुनी। जिस लड़के ने सिन्हा जी का कॉलर पकड़ा था, वो बेहोश नीचे परा था और इसी के साथ वहां गाना बजना बंद हो चुका था। … "साले बापू का कॉलर पकड़ने की हिम्मत।"…. "सबश छोटे, कब से कह रहा था एक्शन कर तू सुन ही नहीं रहा था।"..

इतना कहकर सिन्हा जी बार काउंटर पर आ गए और बैठकर हवा में जाम लहराते हुए शाबाश-शाबाश करने लगे। एक-एक करके कबीर के दोस्त आते रहे और अपस्यु का एक पॉवर पंच खाकर नीचे बेहोश होने लगे। इतने में कबीर भी चिल्लाते हुए अपस्यु को मारने पहुंचा… अपस्यु ने उसका हाथ पकड़ा और मारने के लिए हाथ उठाया ही था कि साची और लावणी दोनों "नहीं" करती खड़ी हो गई।

अपस्यु ने एक नजर साची को देखा, कुछ पल के लिए उसकी नजर साची पर रुकी और वो अपना चश्मा निकालकर आखों पर लगा लिया… "तू तो घर का आदमी लगता है। साले ये तेरे ही दोस्त है जो मार खाकर पड़े हैं? जा उठाकर ले जा, वरना देर हुई तो हड्डियां जुड़ने में समस्या भी होगी…. अरे बापू पूरा मूड ऑफ हो गया। रूको मै भी आया।"..

अपस्यु जब उस जगह को छोड़कर जा रहा था, नीचे जमीन पर कई लड़के पड़े-पड़े कररह रहे थे। अपस्यु बार काउंटर से अपना फेवरेट को कॉकटेल लिया और उसकी चुस्कियां लेते हुए सबके बीच आ गया… "तुम लोगों को क्या हुआ? कुंजल, बेटा तेरा मुंह क्यों उतरा है? कितने खुश होकर तो तू निकली थी ऐमी और स्वस्तिका के साथ।"

कुंजल:- आप की ये बेवेडे वाली हरकत मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आ रही। ऊपर से यहां झगड़ा भी कर रहे हो।

अपस्यु:- अरे अरे अरे.. बेटा उन लड़कों ने बापू का कॉलर पकड़ा था। अब मुझ तक रहता तो कोई बात नहीं थी, लेकिन हिम्मत तो देखो उनकी…

कुंजल:- अच्छा और आप दोनों ने क्या किया, यहां आकर पहले तो माहौल को आप दोनों ने ही खराब किया था ना… जाओ मुझे बात ही नहीं करनी आप से..

"आह ये लड़कियों का इमो ड्रामा… ओय बापू बहना नाराज हो गई है।"… "क्या बोल रही है वो।"….. "कह रही है हम बेवड़े है।"…

ऐमी समझ गई अब इनकी जुगलबंदी खत्म नहीं होगी और ये दोनों यहां से सबको भागकर ही मानेंगे। ऐमी अपनी हाई हिल उतार कर खाली पाऊं डांस फ्लोर तक पहुंची और बिना म्यूज़िक के ही उसने अपना पहला मूव दिया.. उसके हवा में किए फ्लिप को देखकर डीजे ने तुरंत ही रॉकिंग म्यूज़िक शुरू कर दिया और ऐमी उसके धुन पर नाचती हुई इशारों में अपस्यु को बुलाने लगी..

अपस्यु भी 20 फिट का घुटनों पर स्लाइड करता हुआ ऐमी के पास पहुंच गया। अब तक लोगों ने बेवड़ों को देखा था, अब दातों तले उंगलियां दबाकर 2 प्रोफेशनल डांसर्स को देख रहे थे। जो ही माहौल ऐमी ने वहां बनाया.. अपस्यु उसके इशारे पर बस नाचता जा रहा था और उनके हर मूव पर लोग हूटिंग करते हुए उन्हें घेर लिए।

आरव के मायूस चेहरे पर भी वापस से खुशियां छा गई। वो भी लावणी को लेकर पहुंच गया… एक-एक करके वापस से वहां फिर से महफ़िल जमने लगी। अपस्यु ऐमी को देखकर मुस्कुराया और मुस्कुराते हुए कहने लगा… "अपनी जादूगरी दिखा ही दी ना तुमने।"..

ऐमी:- आज फिर नशे में होने का नाटक दिखा ही दिया तुमने… पूछ सकती हूं आज किसे टारगेट किया था।

अपस्यु:- साची के भाई को, उसने आरव को सबके बीच जो मारा था।

ऐमी:- फिर छोड़ क्यों दिए, साची के खातिर क्या?

अपस्यु:- हां कह सकती हो, जाने दिया उसे…

ऐमी:- अच्छा किया इन्हे मारकर, वरना मै प्लान कर रही थी, पार्टी खत्म होने के बाद।

अपस्यु:- किसके साथ किया था इन लोगों ने अपनी ऊटपटांग हरकते..

ऐमी:- छोड़ो ना क्या करोगे जानकर, गलती की बराबर सजा मिली है। वैसे भी बदला लेने आएंगे ही, बाकी हिसाब तब पूरा करेंगे..

अपस्यु:- मैंने दूर से ही कुंजल का चेहरा पढ़ लिया था, चिंता मत करो दोबारा नहीं आने वाले। होगा तो पुलिस ही आएगी, क्योंकि सबको तोड़ा हूं।

ऐमी:- उसकी नजरें तो पढ़ लिए, मेरी नजर नहीं पढ़ पाए..

अपस्यु:- उसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, वैसे ध्रुव की क्या रिपोर्ट है।

ऐमी:- क्लीन है, अपने बाप का बिजनेस बस देखता है, शक इसके दीदी और जीजा पर है।

अपस्यु:- मुझे भी उन्हीं कर शक है। देखो अब क्या होता है। आग तो लगा ही दिया हूं अब बस उसकी जलन देखनी है।

ऐमी:- लास्ट मूव..

दोनों ने फिर एक फाइनल मूव दिया डांस का और सब लोग तालियां बजाते हुए थके नहीं। … पार्टी पूरी तरह से खत्म हो गई, अपस्यु सिन्हा जी को लेकर उन्हीं के कमरे में सोने चला गया। उसके पीछे पीछे बाकी सब लोग भी आ रहे थे।

साची भी ध्रुव के साथ चल रही थी और चलते-चलते बस अपस्यु के बारे में ही सोच रही थी। ध्रुव भी अपस्यु के तारीफों के कसीदे पढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। उसकी फाइटिंग, उसका डांस, उसका बेवड़ा रूप, हर बात का वो फैन हुआ जा रहा था। साची अपने कमरे में पहुंची और ध्रुव को बाय बोलकर अपने बिस्तर पर बैठ गई।

कुछ ही देर में लावणी भी वहां पहुंच गई और साची को ऐसे अकेले सोच में डूबा देखकर उससे पूछने लगी… "क्या हुआ दी, आप ऐसे मायूस क्यों बैठी हो।"..

साची:- यहां भी वो किसी लड़की को देखता तक नहीं। उसकी अपनी ही दुनिया है और उसी में खुश रहता है। मेरा दिल आज भी उसके लिए धड़कता है, लेकिन उसका दिल शायद सबके लिए धड़कता है।

लावणी:- ये आप क्या बडबडा रही हैं, मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।

साची, लावणी को देखकर हंसती हुई कहने लगी… "आज तू बहुत प्यारी लग रही थी। ऐसा लगा जैसे अचानक से बड़ी हो गई, पहले तो बच्ची ही दिखती थी।"

लावणी:- ओह हो तो आप ने है आरव को ये सब सिखाया था हां।

"क्या, आरव भी तुझे यहीं बात बोला क्या?" .. साची हंसती हुई पूछने लगी

लावणी:- हां बिल्कुल दीदी.. आप की हंसी बता रही है कि आपने ही उसे सब सिखाया होगा…

साची उसकी बात कर फिर से हंसती हुई कहने लगी…. "अच्छा एक बात बता, तुझे पता है कि मैं, तुम्हे ऐसा क्यों कही।"

लावणी:- मुझे क्या पता, आप को लगा होगा इसलिए आप ने ऐसा बोला…

साची फिर से हंसती हुई उसे आइने के पास ले जाकर खड़ी कर दी और लावणी के बदन पर प्वाइंट करती हुई कहने कहीं…. "जब तू अपने ऊपर वो पूरे ढिले कपड़े दिन भर डाले रहती थी तब कुछ पता भी नहीं चलता था कि तू कितनी बड़ी हो गई.. और आज देख खुद को। अब समझी तुम्हे ऐसा क्यों कहा जा रहा है।" बेचारी को जब समझ में आया तब शर्म के मेरे उसका चेहरा शूर्ख लाल हो गया। वो तो सीधा अपना बिस्तर ही पकड़ ली।…

अगली सुबह जब नंदनी जागी… उसके पास कोई नहीं पहुंचा सोने। रात में ना तो स्वस्तिका उसके पास लौटी और ना ही कुंजल। नंदनी समझ गई कि तीनों ऐमी के कमरे में सोई होगी। नंदनी तीनों को ढूंढ़ते उसके कमरे में पहुंची, लगातार बेल बजाने के बाद भी कोई जवाब नहीं।

काफी देर वहां खड़े रहने के बाद जब कोई भी जवाब नहीं मिला, फिर नंदनी आरव के कमरे में गई लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं। एक-एक करके नंदनी ने ने सारा कमरा छान मारा, लेकिन किसी का कुछ पता ही नहीं था। आखरी में केवल एक कमरा बचा था वो था सिन्हा जी का कमरा।

यहां तो कमाल हो गया। कमरा खुला था और सभी एक ही कमरे में, कोई यहां परा था कोई वहां परा। नंदनी ने कमरा लॉक किया और वीरभद्र को सबके ऊपर पानी डालने बोली… सब लोग लगभग रात के 1 बजे सोए थे और सुबह के 5 बजे नंदनी सबके ऊपर पानी डलवा रही थी।

कच्चे नींद से उठकर सब वीरभद्र को गालियां ही दे रहे थे, और वीरभद्र अपनी उंगली नंदनी के ओर इशारा करते दिखा देता… अब सामने नंदनी को देखकर कोई क्या ही कहे… सभी जाग रहें थे और सर पकड़ कर वापस सो जाते। नंदनी अनपर लगातार बारिश करवाती रही, अंत में ना चाहकर भी सबको उठना ही परा। नंदनी ने बिना देर किए सबको आधे घंटे में अपने कमरे पहुंचने के लिए बोली ..

ठीक आधे घंटे बाद सभी लोग नंदनी के कमरे में इकट्ठा हो गए, सिवाय अपस्यु के। नंदनी ने अपस्यु को ना देखकर वीरभद्र को उसे बुलाकर लेने के लिए कहने लगी और बाकी इधर के लोगों को देखने लगी…

आरव, थोड़ा चिढ़ते हुए… "ये अजीब दादागिरी है, सुबह-सुबह हम सबको जगा कर क्या यहां सत्संग करवाएंगी।"…

नंदनी:- तू इधर आ..

आरव:- नहीं, मै यहीं ठीक हूं, आप वहीं से जो बोलना है वो बोलिए…

नंदनी:- ये बताओ कि कल तुमलोग में से किसने नहीं पिया था?

सबने एक साथ हाथ ऊपर उठा दिया… नंदनी होटल से मंगवाएं सीसी टीवी फुटेज चलाती हुई पूछने लगी… "अब बताओ किस-किस ने नहीं पिया था?"

इस बार केवल एक हाथ आरव का उठा बाकी सारे हाथ नीचे…. "मतलब जो पियक्कड़ था उसने शराब हाथ नहीं लगाई, और तुम तीनों ने पिया था।"..

"नहीं आंटी दरअसल हुआ ये था कि कल आरव के एंगेजमेंट की पार्टी थी तो थोड़ा मस्ती के लिए हमने लिया था… बस थोड़ा।"…. ऐमी अपनी बात कहती हुई आगे चली आयी और जैसे ही नंदनी के पास पहुंची उसका एक झन्नाटेदार थप्पड खाकर अपनी जगह पर…

ऐसे ही कुछ हाल कुंजल और स्वस्तिका का भी हुआ, दोनों को भी नंदनी के हाथ का गुड मॉर्निंग विश मिल गया था। अंत में नंदनी ने सबको चेतावनी देती हुई कहने लगी…. "दोबारा यदि किसी को भी मैनें शराब पीते हुए पाया, तो उसे 21 दिनों के लिए घर में बंद कर दूंगी। 21 दिन तक घर से क्या अपने कमरे से भी वो बाहर निकल नहीं पाएगा या पाएगी। जरा भी शर्म है तीनों को, पीने के बाद बेहोश होकर अपने कमरे तक नहीं पहुंच पाई। और अभी तक वो बेवड़ा कहां परा हुआ है। कहां है तुम सबका गुरुजी अपस्यु, उसे तो मै आज बताती हूं।"

आरव:- वो हमारे साथ कमरे में कहां था?

सब एक दूसरे का मुंह देखते हुए सोचने लगे और वहां से दौड़े-दौड़े होटल के अपने सभी कमरों में ढूंढ़ने लगे.. अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। हर किसी को कॉल लगाकर पूछ लिया, अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। उसका फोन भी सिन्हा जी के कमरे में ही परा था। सब लोग वापस नंदनी के कमरे में पहुंचे और हर किसी के नजरों से साफ पता चल रहा था कि किसी को भी अपस्यु का पता नहीं।

अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….
 
Update:-70

अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….

कोई समझ नहीं पा रहा था कि हुआ क्या है? नंदनी तो अलग ही डर के शाये में चली गई, उन्हें अपस्यु की बातें याद आने लगी, "हमारे परिवार कुछ कातिल यहां है।".. एक अनचाहा डर की कहीं उन कातिलों में से किसी को अपस्यु के बारे में पता तो नहीं चल गया, जिसने अपस्यु के साथ कुछ बहुत ही बुरा किया हो।

नंदनी सदमे से धम्म से गिरी। सभी लोग नंदनी के ओर दौड़े, उन्हें संभला और होश में लाने की कोशिश करने लगे। इधर सभी लोग नंदनी को संभालने में लगे हुए थे, उधर कुंजल गुस्से में निकली और सीधा कबीर के कमरे का दरवाजा खटखटाने लगी। वो भी देर रात सोया था, नींद में ही उसने दरवाजा खोला, और दरवाजे पर कुंजल को देखकर उसे कहने लगा… "तू है, क्या चाहिए।"

कुंजल पर गुस्सा पहले से सवार था, उसने दरवाजे पर जोड़ की एक लात मारी और पूरा दरवाजा खुल गया। दरवाजा तेज से खुलने के कारन कबीर के पाऊं में चोट लगी और वो तेज दर्द में चिल्लाते हुए कुंजल के कंधे को पीछे से पकड़ा।

कुंजल अपने हाथ कंधे तक लाती उसके उंगली को पकड़ी और तेजी से मुड़ते हुई, उसके पकड़ में आयी उंगलियों को उल्टा घुमा कर तोड़ दी। फिर नजर ईधर-उधर दौड़ाती हुई उसे मारने के लिए कोई हथियार ढूंढ़ने लगी। पास में ही पर्दे के ऊपर रोड लगा हुआ था। कुंजल उसे तेजी के साथ निकाली और पहले तो दरवाजा बंद की, फिर कबीर के पाऊं पर इतना तेज मारी की वो जहां था वहीं बैठ गया।

कबीर जैसे ही बैठा, उसे एक लात मारकर कुंजल ने लिटाया और जो ही उसके पीठ को उधेड़ी वो, अपनी चैरिटी में उसने फिर कोई कसर नहीं छोड़ी। कुंजल रोड वहीं पटकती हुई उसे कहने लगी…. "अभी सिर्फ शक है कि कल रात तुमने कुछ ऐसा किया कि मेरा भाई अभी हॉस्पिटल में है। मेरे दोनों भाई केवल परिवार और रिश्तों का लिहाज करके तुझे छोड़ते आ रहे है, लेकिन मै आरव या अपस्यु नहीं हूं। एक बार यदि मुझे पता चला ना की तेरे वजह से मेरा भाई हॉस्पिटल में है तब तो तू सोच लेना, आज बंद कमरे में मारी हूं, बाद में जहां मिलेगा वहां मारूंगी मारकर हॉस्पिटल भी खुद ही पहुंचाऊंगी और जब तू ठीक होकर आएगा तो फिर मारकर तुझे हॉस्पिटल में एडमिट करवाऊंगी।"

कुंजल बड़े गुस्से में वहां से निकली और वापस कमरे में आ चुकी थी। नंदनी पर छींटे मारकर उसे जगाया गया। जैसे ही वो जागी अपने बेटे को देखने के लिए छटपटा गई। लगभग रोई सी आवाज़ में वो जल्दी से अपने बेटे के पास ले चलने की विनती करने लगी। जो जिस हाल में थे, वैसे ही वहां से भागे-भागे निकले। पार्थ के दिए हुए पते पर सभी पहुंचे।

तेजी के साथ भागते हुए सभी अंदर पहुंचे।अंदर पहुंचकर जैसे ही थोड़ा आगे बढ़े, अचानक ही आरव के कदम रुके। 2 कदम अभी ऐमी और स्वस्तिका भी बढ़े थे कि वो दोनों भी जहां थे वहीं रुके…. "कुंजल, मां, आप दोनों जहां है वहीं रुको।".. आरव वहां के माहौल का चारो ओर से जायजा लेते हुए कहने लगा।

नंदनी और कुंजल पीछे मुड़ कर जिज्ञासावश पूछने लगी… "कहां है सोनू (अपस्यु)"…

स्वस्तिका:- आप समझी नहीं यह एक जाल है, हमे फंसाया गया है, आप दोनों हमारे पीछे आ जाइए।

कुंजल:- क्या कुछ ऐसा है जो हम सीधे-सीधे समझ जाए या फिर ज़िन्दगी हमारी पजल सॉल्व करने में ही बीत जाएगी।

आरव:- मां, कुंजल.. अपस्यु बिल्कुल ठीक है, इसलिए दोनों अपना चिंतन छोड़ दीजिए। अब ये सब क्यों हो रहा है उसका इकलौती वजह वो पार्थ है, अंत में ही पता चलेगा वो ऐसा कर क्यों रहा है?..

"यहां जो दिखता है, मात्र एक भ्रम है, अभी एक पल में कोई पास है, तो अगले पल ना जाने कहां।"….. आरव, नंदनी और कुंजल से बात कर ही रहा था, इसी बीच उस जगह की रौशनी चली गई और उस जगह पर ये बातें गूंजने लगी। आवाज़ गूंजना बंद हुआ और पास में ही एक लड़के की इमेज उभरी जो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा…

सभी लोग उस उस इमेज के पीछे चल दिए और आगे अंधेरा ही अंधेरा था। किसी को कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, बस एक दूसरे को सुन रहे थे। तभी उस जगह एक फोकस लाइट जली…. जो सीधा स्वस्तिका के ऊपर थी।

"मिलिए हमारे बीच की सबसे खूबसूरत और प्यारी सी लड़की से, जिससे आप जितनी बार भी मिलो कुछ नया देखने जरूर मिलेगा। मासूम लेकिन खतरनाक, जिद्दी लेकिन तय ना कर सको की जिद भी किया इसने, मोस्ट फैशनेबल लेकिन कभी सजती संवरती नहीं.. मिलिए हमारी बर्थडे गर्ल …. स्वस्तिका से।"…

बैकग्राउंड से इतना चलने के बाद वहां पूरी रौशनी हुई। हैप्पी बर्थडे का म्यूज़िक बजता हुआ, ठीक सामने पार्थ और अपस्यु जो खड़ा-खड़ा मुस्कुरा रहा था। स्वस्तिका दोनों के सरप्राइज पर मुस्कुराती हुई सबको देख रही थी और सभी लोग उसे घेर कर बधाइयां देने लगे। दीप जले, केक कटा, सबने खूब सेलीब्रेट किया और जब सब खुशियां बांटा जा रहा था उसी बीच नंदनी पार्थ के पास पहुंची।

पार्थ नंदनी को देखते ही उसके पाऊं छु लिए और दोनों कान पकड़ कर माफी भी मांगा। नंदनी उसे इशारों में थोड़ा नीचे झुकने कहीं, जैसे ही वो नीचे हुआ… एक थप्पड उसे चिपका दी। उसकी हालत देखकर सब हंसने लगे…. फिर सब जोर जोर से चिल्लाने लगा.. कल रात का सबसे बड़ा मुजरिम अभी बाकी है…

फिर क्या था नंदनी उसका स्वागत भी उसी अंदाज़ में कि। इतने थप्पड अपस्यु को आज तक कभी एक साथ नहीं पड़े थे। वहां जैसे एक परिवार, पूरा हो रहा था। सब लोग आपस में मिल रहे थे, गले लगकर खुशियां बांट रहे थे। पूरा दिन सभी लोग बाहर ही रहे। पूरा परिवार एक होकर आज स्वस्तिका के लिए खुशियां माना रहा था। सबके बीच आज वही स्पेशल गर्ल बनी हुई थी।

शाम के 4 बजे सभी लोग वापस आए। वापस आने के क्रम में ही ध्रुव का संदेश अपस्यु को मिला जिसमें उसे और ऐमी को शाम का खास आमंत्रण मिला हुआ था। ठीक यही संदेश ऐमी के पास भी पहुंचा हुआ था।.. खैर दोनों ही ये संदेश देखकर बिना किसी प्रतिक्रिया के सभी के साथ वापस लौट गए।

सभी रात देर से सोए थे और सुबह जल्दी ही उठकर निकले, सब लोग थकान में चूर अपने अपने कमरे में चले गए सोने। शाम को तकरीबन 7 बजे ऐमी उठकर बिल्कुल कातिलाना अंदाज में तैयार होने लगी, जब वो आधी तैयार हुई थी तभी कुंजल उसके कंधे के ऊपर लटकती हुई कहने लगी… "कहीं बाहर जा रही हो क्या?"..

ऐमी:- हां बाहर तो जा रही हूं, लेकिन इतना चहक कर मेरे पास खड़ी हुई और सिर्फ इतना सा सवाल तुम्हारे मन में कैसे?

कुंजल:- ठीक है मै सीधा-सीधा कह देती हूं। तुम में मुझे अपनी भाभी नजर आ रही है, और मुझे कुछ नहीं समझना कि तुम दोनों दुनिया को क्या बताते हो।

ऐमी, कुंजल की बात पर मुस्कुराती हुई अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की और तुरंत ही तैयार होकर अपस्यु के पास निकल गई। लॉबी के आधे रास्ते में ही थी कि अपस्यु भी तैयार होकर उसी के पास आ रहा था। दोनों एक दूसरे को दूर से ही देखकर हसने लगे और ध्रुव के घर निकल लिए।

ऐमी के जाते ही कुंजल भी थोड़ा बहुत तैयार हुई और वो स्वस्तिका को सोते छोड़कर आरव के कमरे में चली आयी। आरव अब तक सोया हुआ था, वो अपने भाई को एक नजर देखी और उसे भी सोते हुए छोड़कर वीरभद्र के कमरे में चली आयी।

कुंजल:- क्या वीरे जी, क्या कर रहे है।

वीरभद्र:- कुछ नहीं बस ऐसे ही बैठा हुआ था, आप सब आज सुबह से कहां गए थे।?

कुंजल:- मेरी बहन का आज बर्थडे है, वही सुबह से सेलीब्रेट कर रहे थे।

वीरभद्र:- ओह ! और मुझे छोड़ गए.. यहां मै पूरा दिन ऊब गया बैठे-बैठे, कोई काम ही नहीं था।

कुंजल:- सॉरी वीरे जी, वो भाई ने ऐसा सरप्राइज प्लान किया था कि हमलोग बिना प्लान के ही निकाल गए होटल से। वैसे कोई बात नहीं है जी, आप दिन भर बोर हुए लेकिन शाम आप की हसीन होगी। चलिए..

वीरभद्र:- कहां चलना है?

कुंजल:- आप सवाल बहुत करते है वीरे जी, अब जल्दी से तैयार होते है या फिर मै नाराज हो जाऊं आपसे।

वीरभद्र:- तैयार ही तो हूं, अब और कितना तैयार हो जाऊं।

कुंजल वीरभद्र के साथ बार में चली आयी। बार को देखकर ही वीरभद्र को चक्कर आने शुरू हो गए, वो घबराकर कुंजल से पूछने लगा… "कुंजल जी, सुबह का भूल गई, जो यहां आयी है।"

कुंजल:- अरे घबरा क्यों रहे है वीरे जी, अभी सिर्फ 7.30 बजे है, 3-4 घंटे में तो पूरा नशा ही उतर आना है।

वीरभद्र:- एक बात मै सच सच कहना चाहूंगा, मैंने आज से पहले इतनी खतरनाक लड़की से पहले कभी नहीं मिला।

कुंजल:- अच्छा, ऐसा है क्या? तो जरा बताइए किस तरह की लड़कियों से आज तक आपकी मुलाकात हुई है।

वीरभद्र:- आप को छोड़कर मेरी मां, मेरी बहन और गांव की कुछ लड़कियां बस।

कुंजल:- "हीहीहीहीहीही… ऐसी बात है क्या? अच्छा ये बताइए की वो लड़की कैसी लग रही है।"… कुंजल सामने एक हॉट लड़की के ओर इशारे करती हुई पूछने लगी।

वीरभद्र थोड़ा शर्माते हुए… "क्या कुंजल जी आप भी ना"…

कुंजल:- अरे इतना शर्मा क्यों रहे है, थोड़ा मर्दों वाली फीलिंग लाइए…

"और मर्दाना जोश भी इसे दिखाओ, कोई मिल नहीं रहा तो छटपटा रही है।"… कबीर दोनों के बीच दखलंदाजी करते हुए कहने लगा…

वीरभद्र उसकी बदतमीजियों पर आग बबूला होता अपनी जगह से उठकर उसकी ओर बढ़ा ही था… "बैठ जाओ वीरे जी, इसकी कुटाई आज मैंने की है, उसी का भड़ास निकल रहा है, एक लड़की से पीटा है, किसी तरह भड़ास तो निकलेगा ही।"

वीरभद्र:- हाहाहाहा.. ओह ऐसी बात है क्या, वैसे कुंजल जी खातिरदारी पूरी तरह की या कुछ कमी रहा गई थी?

कुंजल:- इसकी बहनों के वजह से छोड़ दी वीरे जी, वरना खातिरदारी में तो कोई कमी नहीं छोड़ने वाली थी। वैसे भी इसके जगह पर, इसी में घर में घुस कर मैंने इसे मारा है वीरे जी, अब इससे ज्यादा और क्या मै और क्या हाईलाइट बताऊं। लगता है थोड़ा कम मार खाया था, इसलिए ऐसी छिछोड़ी हरकत पर उतारू है।

कबीर:- तुझे तो मै वो सबक सिखाऊंगा की तू भी क्या याद रखेगी?

वीरभद्र:- सुन बे छिपकली की कटी हुई दुम, ज्यादा फड़फड़ा नहीं। तू सबक सीखाने की सोचने से पहले जरा इनके बैकग्राउंड का इतिहास उलट लेना। जब इनकी मां ने दहरा था तब तेरा बाप की घिघी नहीं निकली थी। कुंजल जी ने तेरे घर में घुस कर मारा। अभी तो तूने केवल औरतों का जलवा देखा है तो बिलबिला गया, कहीं इसके भाई ने तुझे सीरियसली ले लिया ना, फिर तू खुद को कोसेगा "की मैंने अपने बड़बोलेपन के कारन ये क्या कर दिया।" अब इससे पहले कि मेरा माथा घूम जाए और मै भूल जाऊं की तू आरव का कोई रिश्तेदार है कट ले यहां से।

कुंजल सिटी बजती हुई कहने लगी… "लव यू वीरे जी क्या डायलॉग मारा है। अब बस भी करो, वरना डर के मारे कहीं इसकी सूसू ना निकल आए।

दोनों कबीर पर हंसते हुए लगातार तंज कसे जा रहे थे। कबीर एक बात बोलता और दोनों मिलकर उसे छिल देते। इस शित युद्ध में तो कबीर कहीं दूर-दूर तक खड़ा ना हुआ इन दोनों के सामने और ऐसी भारी बेइज्जती दोनों ने कर डाली कि कबीर बिलबिला कर वहां से भाग गया।

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इधर कुंजल जब आरव के कमरे से निकली, उसके कुछ देर बाद ही लावणी चुपके से आरव के कमरे में दाखिल हुई। आरव वहां अकेला लेटा हुआ था। लावणी उसे सोते देख, वो भी उसके पास जाकर लेट गई और अपना चेहरा बिल्कुल आरव के चेहरे के सामने रखकर, उसे सुकून से सोते हुए देखने लगी।

बहुत दिलकश और मासूम लग रहा था आरव। आरव के सकून से सोने को मेहसूस करती हुई लावणी अपनी उंगलियां उसके चेहरे पर चलाने लगी। उंगलियों के स्पर्श से अराव की आखें खुल गई, और अपने नजरों के सामने अपने कम्बल में लावणी को देखकर, उसने अपनी पलकें 2 बार झपकी, और उसे प्यार से देखते हुए मुस्कुराने लगा। लावणी भी खामोशी से उसे देखती हुई प्रतिक्रिया में मुस्कुरा रही थी। आरव मुस्कुराते हुए धीमी आवाज़ में "आई लव यू" कहकर उसके चेहरे पर अपनी उंगलियां चलाने लगा।

लावणी के गुदगुदाते अरमान, और वो खिलकर कुछ पल के लिए हंसी। हंसती हुई वो अचानक ही खामोश हो गई और ध्यान से आरव का चेहरा देखती हुई, उसके होंठ पर अपने होंठ रख उसे प्यार से चूमने लगी। आरव भी उसे चूमते हुए अपने हाथ और पाऊं के बंधन में उसे जकड़ते हुए, धीरे-धीरे पकड़ बनाने लगा। "आऊच! ऐसे कौन करता है।"… लावणी आरव की जकड़ में कसमसाती, किस्स को तोड़ती हुई अपनी आखें दिखाती उसे डांटने लगी।

आरव अपने बंधन खोलते उसके होंठों पर किस्स करते हुए अपने हाथ उसके पीछे रखते, उसके नितम्बों को अपने हाथों से जकड़ दिया। लावणी फिर से किस्स तोड़ती हुई उस घूरने लगी… "ये आज चल क्या रहा है, हां।"..

आरव:- ऑफ ओ.. जो भी कहना है वो किस्स करती हुई कहो, ऐसे अधूरे किस्स में मज़ा नहीं आता।

लावणी:- अच्छा जी, होटों के लिए किस्स और हाथों के लिए बम.. बहुत मस्ती चढ़ी है हां…

आरव बिना कुछ बोले कम्बल के अंदर जाकर, उसके गले के नीचे चूमने लगा और अपना हाथ उसके टी शर्ट के अंदर डालकर लावणी के पेट पर अपने हाथ फेरते, धीरे-धीरे हाथ ऊपर ले जाते.. ब्रा को छू रहा था…. "इशशशशशश… बेबी नो.. प्लीज … छोड़ो भी…"

आरव रुका और उसके ऊपर आकर उसकी आखों में देखते हुए कहने लगा…. "ओह बेबी येस.. आज मै नहीं रुकने वाला।"… इतना कहकर अपना चेहरा उसके सीने में घुसा कर उसे चूमने लगा…. "हीहीहीही.. छोड़ो भी आरव कोई आ जायेगा… उफ्फ … आरव नो.. हटो भी बाबा.. कोई आ जाएगा.. दरवाजा खुला है… आरव.. आरव…"

अचानक ही लावणी उसे तेज तेज हिलाती, हुई कहने लगी… बेबी रुको भी कोई बेल बजा रहा… ऑफ ओ.. आरव स्टॉप एंड लिसेन।" .. लावणी थोड़ा तेज बोली और आरव रुकते हुए उसके ऊपर आया और गुस्से से अभी उसको देख ही रहा था, कि इतने में दरवाजा खुला और नंदनी अंदर… "कब से बेल बजा रही हूं तू दरवाजा क्यों नहीं खोल रहा।"… दरवाजा खुलने के आवाज़ के साथ ही लावणी कम्बल के अन्दर घुस गई और आरव करवट लेकर पलटा और नंदनी के ओर देखने लगा….
 
Aman ji to purane update par apni samikhsa de rahe .. ab agar aise me main 1 update par 4 comment ko dekhun tab meri bhi ikchha katai nahi hoti agla update likhne ka.. chhapna to dur ki baat hai ..
 
Hahaha .. koi nahi har kamino ke liye yahan alag alag upchar hai.. bus upchar pasand na aaye to bata dijiyega usme jaroor shudhar karenge :D .. baki abhi to pariwar pura hi hua hai... Aur bhi kuch jodiyan hai.. jinke bare me abhi aana baki hai :D

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
:D bewadon ki jodi hai na chunmun bhai... Ye jodi to calssic se lekar new era ki movie tak me famous hai.. aur jitni baar bhi dekh lo ye kabhi purana nahi hota ... Bus isi concept ko copy maar liya hun :D

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Ab itna bada scam kar raha hau Apasyu to hospital ka muh nahi dekhga to aur kya dekhega .. raat me bhi 15-20 ko mar kar giraya tha :dazed:..

Sachi ko confuse kahan kar raha hun.. bus uski feeling thi aur wo share kar rahi hai.. itna hi hai.. kahan rg gahraeyon me ja rahe ho :declare:

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Are are are .. aman bhai kya yaar .. bechari ladki ro rahi hai aur aap hai ki use kandha ka sahara dene ke badle yahan uske bare me kah rahe hai ki roti hi rahti hai... Aise kaam thode na chalega babu.. jakar chup karwakar use santwana dijiye :D

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Haan kah sakte hain... Filhaal kuch to situation sambhal liya gaya hai :D .. baki aage ka dekhna hoga ki sachi khud ko kaise sambhalti hai...

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I just missing old classical rona dhona .. isliye aise scene creat kiye ja rahe hain meena kumari style :D.. abhi to jyada fayda nahi dikha hai but aage long term me jyada benifit dikhne wala hai... :D

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Jk aur Pallavi mere agli kahani me bhi hai... "Me & My Husband series".. wahin ke charecters ki timeline match karke yahan. Milaya hun .. baki abhi shreya aa gayi hai .. dekhte hain aage ye kya rang bharti hai inke jeevan me :declare:
 
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