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Update:-69
ध्रुव:- वाउ अब एक्शन शुरू होगा…
आरव:- इतने पर कुछ ना होगा, उसे थप्पड मारो या डंडा अभी अपने धुन में है वो..
ध्रुव:- लेकिन उसने गीरेवान पकड़ रखा है..
आरव:- कोई फर्क नहीं पड़ता भाई.. देखते जाओ..
तभी उस माहोल में पहला गीत बजना शुरू हुआ… "पीले पीले ओ मेरे राजा।".. और सिन्हा जी बार काउंटर से 2 बोतल सर पर उठाकर नाचते हुए चल दिए अपस्यु के पास…
"ले छोटे एक तेरे लिए।"… "ना बापू मुझे मेरा कॉकटेल ही चाहिए".. "अरे बोल दिया है, बीच-बीच में वो सर्व करता रहेगा तू तो क्लासिक बेवड़ा सोंग का मज़ा ले और मेरे साथ ठुमके लगा।"..
फिर क्या था अपस्यु भी बॉटल उठाया, और अपने सिर पर रखकर नाचने लगा और नाचते-नाचते पीने लगा। उनका नाचना और पीना देखकर क्या गुस्साए और क्या जिज्ञासा से देखने वाले, सभी जोड़-जोड़ से ठहाका लगाकर हंसने लगे।
डांस फ्लोर कर अब भीड़ ना के बराबर हो चुकी थी। कबीर और नीरज के दोस्त बस साइड होकर बड़बड़ा रहे थे, बीच में केवल ध्रुव के 2-3 दोस्त ही बचे थे जो इनके देसी डांस को पूरा एन्जॉय करते हुए इनको कॉपी कर रहे थे और नाच रहे थे। इतने में कबीर गुस्साए हुए आया और अपस्यु को पकड़ कर धक्का देकर गिरा दिया।
ध्रुव:- अब तो पक्का यहां बवाल होगा।
ऐमी:- वहां देखिए क्या हो रहा है..
डीजे को पहले से निर्देश मिला हुआ था, जैसे ही कोई गिरे, नागिन की धुन शुरू होनी चाहिए। और सामने जो डांस फ्लोर पर चल रहा था, उसे देखकर ध्रुव भी खुद को रोक नहीं पाया, अपनी जगह छोड़ने से। सब अपस्यु के ऊपर अपने रुमाल से बीन बजा रहे थे और अपस्यु नीचे लेटकर सबको नागिन डांस दिखाते हुए डसने की कोशिश कर रहा था।
ध्रुव भी उनके बीच सामिल होता बीन बजाने लगा और अपना एक हाथ देकर अपस्यु को उठाया.. अपस्यु उठकर उसके गले लगाते हुए नाचने लगा.. और साथ में सिन्हा जी भी झूम रहे थे। कुछ देर नाचने के बाद ध्रुव फिर से सबके बीच बैठते हुए कहने लगा…. "ये पक्का क्रेज़ी है। मै भी किसी दिन फुल टल्ली होकर इनकी महफ़िल ज्वाइन करूंगा।
ध्रुव इतना बोल ही रहा था कि आरव, ऐमी और स्वस्तिका चौंक कर खड़े हो गए। डांस फ्लोर पर एक लड़का अपस्यु का गिरेवान पकड़ कर उसे एक थप्पड लगा चुका था और दूसरा लड़का सिन्हा जी के गीरेवां पर हाथ डाले हुआ था।
ध्रुव:- चिल यार ये दोनों काफी फ्रैंडली है…
अभी ध्रुव इतना कह ही रहा था कि साउंड बॉक्स पर बज रहे इतने लाउड म्यूज़िक के बीच एक जोरदार तमाचा पड़ने की आवाज़ सबने सुनी। जिस लड़के ने सिन्हा जी का कॉलर पकड़ा था, वो बेहोश नीचे परा था और इसी के साथ वहां गाना बजना बंद हो चुका था। … "साले बापू का कॉलर पकड़ने की हिम्मत।"…. "सबश छोटे, कब से कह रहा था एक्शन कर तू सुन ही नहीं रहा था।"..
इतना कहकर सिन्हा जी बार काउंटर पर आ गए और बैठकर हवा में जाम लहराते हुए शाबाश-शाबाश करने लगे। एक-एक करके कबीर के दोस्त आते रहे और अपस्यु का एक पॉवर पंच खाकर नीचे बेहोश होने लगे। इतने में कबीर भी चिल्लाते हुए अपस्यु को मारने पहुंचा… अपस्यु ने उसका हाथ पकड़ा और मारने के लिए हाथ उठाया ही था कि साची और लावणी दोनों "नहीं" करती खड़ी हो गई।
अपस्यु ने एक नजर साची को देखा, कुछ पल के लिए उसकी नजर साची पर रुकी और वो अपना चश्मा निकालकर आखों पर लगा लिया… "तू तो घर का आदमी लगता है। साले ये तेरे ही दोस्त है जो मार खाकर पड़े हैं? जा उठाकर ले जा, वरना देर हुई तो हड्डियां जुड़ने में समस्या भी होगी…. अरे बापू पूरा मूड ऑफ हो गया। रूको मै भी आया।"..
अपस्यु जब उस जगह को छोड़कर जा रहा था, नीचे जमीन पर कई लड़के पड़े-पड़े कररह रहे थे। अपस्यु बार काउंटर से अपना फेवरेट को कॉकटेल लिया और उसकी चुस्कियां लेते हुए सबके बीच आ गया… "तुम लोगों को क्या हुआ? कुंजल, बेटा तेरा मुंह क्यों उतरा है? कितने खुश होकर तो तू निकली थी ऐमी और स्वस्तिका के साथ।"
कुंजल:- आप की ये बेवेडे वाली हरकत मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आ रही। ऊपर से यहां झगड़ा भी कर रहे हो।
अपस्यु:- अरे अरे अरे.. बेटा उन लड़कों ने बापू का कॉलर पकड़ा था। अब मुझ तक रहता तो कोई बात नहीं थी, लेकिन हिम्मत तो देखो उनकी…
कुंजल:- अच्छा और आप दोनों ने क्या किया, यहां आकर पहले तो माहौल को आप दोनों ने ही खराब किया था ना… जाओ मुझे बात ही नहीं करनी आप से..
"आह ये लड़कियों का इमो ड्रामा… ओय बापू बहना नाराज हो गई है।"… "क्या बोल रही है वो।"….. "कह रही है हम बेवड़े है।"…
ऐमी समझ गई अब इनकी जुगलबंदी खत्म नहीं होगी और ये दोनों यहां से सबको भागकर ही मानेंगे। ऐमी अपनी हाई हिल उतार कर खाली पाऊं डांस फ्लोर तक पहुंची और बिना म्यूज़िक के ही उसने अपना पहला मूव दिया.. उसके हवा में किए फ्लिप को देखकर डीजे ने तुरंत ही रॉकिंग म्यूज़िक शुरू कर दिया और ऐमी उसके धुन पर नाचती हुई इशारों में अपस्यु को बुलाने लगी..
अपस्यु भी 20 फिट का घुटनों पर स्लाइड करता हुआ ऐमी के पास पहुंच गया। अब तक लोगों ने बेवड़ों को देखा था, अब दातों तले उंगलियां दबाकर 2 प्रोफेशनल डांसर्स को देख रहे थे। जो ही माहौल ऐमी ने वहां बनाया.. अपस्यु उसके इशारे पर बस नाचता जा रहा था और उनके हर मूव पर लोग हूटिंग करते हुए उन्हें घेर लिए।
आरव के मायूस चेहरे पर भी वापस से खुशियां छा गई। वो भी लावणी को लेकर पहुंच गया… एक-एक करके वापस से वहां फिर से महफ़िल जमने लगी। अपस्यु ऐमी को देखकर मुस्कुराया और मुस्कुराते हुए कहने लगा… "अपनी जादूगरी दिखा ही दी ना तुमने।"..
ऐमी:- आज फिर नशे में होने का नाटक दिखा ही दिया तुमने… पूछ सकती हूं आज किसे टारगेट किया था।
अपस्यु:- साची के भाई को, उसने आरव को सबके बीच जो मारा था।
ऐमी:- फिर छोड़ क्यों दिए, साची के खातिर क्या?
अपस्यु:- हां कह सकती हो, जाने दिया उसे…
ऐमी:- अच्छा किया इन्हे मारकर, वरना मै प्लान कर रही थी, पार्टी खत्म होने के बाद।
अपस्यु:- किसके साथ किया था इन लोगों ने अपनी ऊटपटांग हरकते..
ऐमी:- छोड़ो ना क्या करोगे जानकर, गलती की बराबर सजा मिली है। वैसे भी बदला लेने आएंगे ही, बाकी हिसाब तब पूरा करेंगे..
अपस्यु:- मैंने दूर से ही कुंजल का चेहरा पढ़ लिया था, चिंता मत करो दोबारा नहीं आने वाले। होगा तो पुलिस ही आएगी, क्योंकि सबको तोड़ा हूं।
ऐमी:- उसकी नजरें तो पढ़ लिए, मेरी नजर नहीं पढ़ पाए..
अपस्यु:- उसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, वैसे ध्रुव की क्या रिपोर्ट है।
ऐमी:- क्लीन है, अपने बाप का बिजनेस बस देखता है, शक इसके दीदी और जीजा पर है।
अपस्यु:- मुझे भी उन्हीं कर शक है। देखो अब क्या होता है। आग तो लगा ही दिया हूं अब बस उसकी जलन देखनी है।
ऐमी:- लास्ट मूव..
दोनों ने फिर एक फाइनल मूव दिया डांस का और सब लोग तालियां बजाते हुए थके नहीं। … पार्टी पूरी तरह से खत्म हो गई, अपस्यु सिन्हा जी को लेकर उन्हीं के कमरे में सोने चला गया। उसके पीछे पीछे बाकी सब लोग भी आ रहे थे।
साची भी ध्रुव के साथ चल रही थी और चलते-चलते बस अपस्यु के बारे में ही सोच रही थी। ध्रुव भी अपस्यु के तारीफों के कसीदे पढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। उसकी फाइटिंग, उसका डांस, उसका बेवड़ा रूप, हर बात का वो फैन हुआ जा रहा था। साची अपने कमरे में पहुंची और ध्रुव को बाय बोलकर अपने बिस्तर पर बैठ गई।
कुछ ही देर में लावणी भी वहां पहुंच गई और साची को ऐसे अकेले सोच में डूबा देखकर उससे पूछने लगी… "क्या हुआ दी, आप ऐसे मायूस क्यों बैठी हो।"..
साची:- यहां भी वो किसी लड़की को देखता तक नहीं। उसकी अपनी ही दुनिया है और उसी में खुश रहता है। मेरा दिल आज भी उसके लिए धड़कता है, लेकिन उसका दिल शायद सबके लिए धड़कता है।
लावणी:- ये आप क्या बडबडा रही हैं, मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।
साची, लावणी को देखकर हंसती हुई कहने लगी… "आज तू बहुत प्यारी लग रही थी। ऐसा लगा जैसे अचानक से बड़ी हो गई, पहले तो बच्ची ही दिखती थी।"
लावणी:- ओह हो तो आप ने है आरव को ये सब सिखाया था हां।
"क्या, आरव भी तुझे यहीं बात बोला क्या?" .. साची हंसती हुई पूछने लगी
लावणी:- हां बिल्कुल दीदी.. आप की हंसी बता रही है कि आपने ही उसे सब सिखाया होगा…
साची उसकी बात कर फिर से हंसती हुई कहने लगी…. "अच्छा एक बात बता, तुझे पता है कि मैं, तुम्हे ऐसा क्यों कही।"
लावणी:- मुझे क्या पता, आप को लगा होगा इसलिए आप ने ऐसा बोला…
साची फिर से हंसती हुई उसे आइने के पास ले जाकर खड़ी कर दी और लावणी के बदन पर प्वाइंट करती हुई कहने कहीं…. "जब तू अपने ऊपर वो पूरे ढिले कपड़े दिन भर डाले रहती थी तब कुछ पता भी नहीं चलता था कि तू कितनी बड़ी हो गई.. और आज देख खुद को। अब समझी तुम्हे ऐसा क्यों कहा जा रहा है।" बेचारी को जब समझ में आया तब शर्म के मेरे उसका चेहरा शूर्ख लाल हो गया। वो तो सीधा अपना बिस्तर ही पकड़ ली।…
अगली सुबह जब नंदनी जागी… उसके पास कोई नहीं पहुंचा सोने। रात में ना तो स्वस्तिका उसके पास लौटी और ना ही कुंजल। नंदनी समझ गई कि तीनों ऐमी के कमरे में सोई होगी। नंदनी तीनों को ढूंढ़ते उसके कमरे में पहुंची, लगातार बेल बजाने के बाद भी कोई जवाब नहीं।
काफी देर वहां खड़े रहने के बाद जब कोई भी जवाब नहीं मिला, फिर नंदनी आरव के कमरे में गई लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं। एक-एक करके नंदनी ने ने सारा कमरा छान मारा, लेकिन किसी का कुछ पता ही नहीं था। आखरी में केवल एक कमरा बचा था वो था सिन्हा जी का कमरा।
यहां तो कमाल हो गया। कमरा खुला था और सभी एक ही कमरे में, कोई यहां परा था कोई वहां परा। नंदनी ने कमरा लॉक किया और वीरभद्र को सबके ऊपर पानी डालने बोली… सब लोग लगभग रात के 1 बजे सोए थे और सुबह के 5 बजे नंदनी सबके ऊपर पानी डलवा रही थी।
कच्चे नींद से उठकर सब वीरभद्र को गालियां ही दे रहे थे, और वीरभद्र अपनी उंगली नंदनी के ओर इशारा करते दिखा देता… अब सामने नंदनी को देखकर कोई क्या ही कहे… सभी जाग रहें थे और सर पकड़ कर वापस सो जाते। नंदनी अनपर लगातार बारिश करवाती रही, अंत में ना चाहकर भी सबको उठना ही परा। नंदनी ने बिना देर किए सबको आधे घंटे में अपने कमरे पहुंचने के लिए बोली ..
ठीक आधे घंटे बाद सभी लोग नंदनी के कमरे में इकट्ठा हो गए, सिवाय अपस्यु के। नंदनी ने अपस्यु को ना देखकर वीरभद्र को उसे बुलाकर लेने के लिए कहने लगी और बाकी इधर के लोगों को देखने लगी…
आरव, थोड़ा चिढ़ते हुए… "ये अजीब दादागिरी है, सुबह-सुबह हम सबको जगा कर क्या यहां सत्संग करवाएंगी।"…
नंदनी:- तू इधर आ..
आरव:- नहीं, मै यहीं ठीक हूं, आप वहीं से जो बोलना है वो बोलिए…
नंदनी:- ये बताओ कि कल तुमलोग में से किसने नहीं पिया था?
सबने एक साथ हाथ ऊपर उठा दिया… नंदनी होटल से मंगवाएं सीसी टीवी फुटेज चलाती हुई पूछने लगी… "अब बताओ किस-किस ने नहीं पिया था?"
इस बार केवल एक हाथ आरव का उठा बाकी सारे हाथ नीचे…. "मतलब जो पियक्कड़ था उसने शराब हाथ नहीं लगाई, और तुम तीनों ने पिया था।"..
"नहीं आंटी दरअसल हुआ ये था कि कल आरव के एंगेजमेंट की पार्टी थी तो थोड़ा मस्ती के लिए हमने लिया था… बस थोड़ा।"…. ऐमी अपनी बात कहती हुई आगे चली आयी और जैसे ही नंदनी के पास पहुंची उसका एक झन्नाटेदार थप्पड खाकर अपनी जगह पर…
ऐसे ही कुछ हाल कुंजल और स्वस्तिका का भी हुआ, दोनों को भी नंदनी के हाथ का गुड मॉर्निंग विश मिल गया था। अंत में नंदनी ने सबको चेतावनी देती हुई कहने लगी…. "दोबारा यदि किसी को भी मैनें शराब पीते हुए पाया, तो उसे 21 दिनों के लिए घर में बंद कर दूंगी। 21 दिन तक घर से क्या अपने कमरे से भी वो बाहर निकल नहीं पाएगा या पाएगी। जरा भी शर्म है तीनों को, पीने के बाद बेहोश होकर अपने कमरे तक नहीं पहुंच पाई। और अभी तक वो बेवड़ा कहां परा हुआ है। कहां है तुम सबका गुरुजी अपस्यु, उसे तो मै आज बताती हूं।"
आरव:- वो हमारे साथ कमरे में कहां था?
सब एक दूसरे का मुंह देखते हुए सोचने लगे और वहां से दौड़े-दौड़े होटल के अपने सभी कमरों में ढूंढ़ने लगे.. अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। हर किसी को कॉल लगाकर पूछ लिया, अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। उसका फोन भी सिन्हा जी के कमरे में ही परा था। सब लोग वापस नंदनी के कमरे में पहुंचे और हर किसी के नजरों से साफ पता चल रहा था कि किसी को भी अपस्यु का पता नहीं।
अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….
ध्रुव:- वाउ अब एक्शन शुरू होगा…
आरव:- इतने पर कुछ ना होगा, उसे थप्पड मारो या डंडा अभी अपने धुन में है वो..
ध्रुव:- लेकिन उसने गीरेवान पकड़ रखा है..
आरव:- कोई फर्क नहीं पड़ता भाई.. देखते जाओ..
तभी उस माहोल में पहला गीत बजना शुरू हुआ… "पीले पीले ओ मेरे राजा।".. और सिन्हा जी बार काउंटर से 2 बोतल सर पर उठाकर नाचते हुए चल दिए अपस्यु के पास…
"ले छोटे एक तेरे लिए।"… "ना बापू मुझे मेरा कॉकटेल ही चाहिए".. "अरे बोल दिया है, बीच-बीच में वो सर्व करता रहेगा तू तो क्लासिक बेवड़ा सोंग का मज़ा ले और मेरे साथ ठुमके लगा।"..
फिर क्या था अपस्यु भी बॉटल उठाया, और अपने सिर पर रखकर नाचने लगा और नाचते-नाचते पीने लगा। उनका नाचना और पीना देखकर क्या गुस्साए और क्या जिज्ञासा से देखने वाले, सभी जोड़-जोड़ से ठहाका लगाकर हंसने लगे।
डांस फ्लोर कर अब भीड़ ना के बराबर हो चुकी थी। कबीर और नीरज के दोस्त बस साइड होकर बड़बड़ा रहे थे, बीच में केवल ध्रुव के 2-3 दोस्त ही बचे थे जो इनके देसी डांस को पूरा एन्जॉय करते हुए इनको कॉपी कर रहे थे और नाच रहे थे। इतने में कबीर गुस्साए हुए आया और अपस्यु को पकड़ कर धक्का देकर गिरा दिया।
ध्रुव:- अब तो पक्का यहां बवाल होगा।
ऐमी:- वहां देखिए क्या हो रहा है..
डीजे को पहले से निर्देश मिला हुआ था, जैसे ही कोई गिरे, नागिन की धुन शुरू होनी चाहिए। और सामने जो डांस फ्लोर पर चल रहा था, उसे देखकर ध्रुव भी खुद को रोक नहीं पाया, अपनी जगह छोड़ने से। सब अपस्यु के ऊपर अपने रुमाल से बीन बजा रहे थे और अपस्यु नीचे लेटकर सबको नागिन डांस दिखाते हुए डसने की कोशिश कर रहा था।
ध्रुव भी उनके बीच सामिल होता बीन बजाने लगा और अपना एक हाथ देकर अपस्यु को उठाया.. अपस्यु उठकर उसके गले लगाते हुए नाचने लगा.. और साथ में सिन्हा जी भी झूम रहे थे। कुछ देर नाचने के बाद ध्रुव फिर से सबके बीच बैठते हुए कहने लगा…. "ये पक्का क्रेज़ी है। मै भी किसी दिन फुल टल्ली होकर इनकी महफ़िल ज्वाइन करूंगा।
ध्रुव इतना बोल ही रहा था कि आरव, ऐमी और स्वस्तिका चौंक कर खड़े हो गए। डांस फ्लोर पर एक लड़का अपस्यु का गिरेवान पकड़ कर उसे एक थप्पड लगा चुका था और दूसरा लड़का सिन्हा जी के गीरेवां पर हाथ डाले हुआ था।
ध्रुव:- चिल यार ये दोनों काफी फ्रैंडली है…
अभी ध्रुव इतना कह ही रहा था कि साउंड बॉक्स पर बज रहे इतने लाउड म्यूज़िक के बीच एक जोरदार तमाचा पड़ने की आवाज़ सबने सुनी। जिस लड़के ने सिन्हा जी का कॉलर पकड़ा था, वो बेहोश नीचे परा था और इसी के साथ वहां गाना बजना बंद हो चुका था। … "साले बापू का कॉलर पकड़ने की हिम्मत।"…. "सबश छोटे, कब से कह रहा था एक्शन कर तू सुन ही नहीं रहा था।"..
इतना कहकर सिन्हा जी बार काउंटर पर आ गए और बैठकर हवा में जाम लहराते हुए शाबाश-शाबाश करने लगे। एक-एक करके कबीर के दोस्त आते रहे और अपस्यु का एक पॉवर पंच खाकर नीचे बेहोश होने लगे। इतने में कबीर भी चिल्लाते हुए अपस्यु को मारने पहुंचा… अपस्यु ने उसका हाथ पकड़ा और मारने के लिए हाथ उठाया ही था कि साची और लावणी दोनों "नहीं" करती खड़ी हो गई।
अपस्यु ने एक नजर साची को देखा, कुछ पल के लिए उसकी नजर साची पर रुकी और वो अपना चश्मा निकालकर आखों पर लगा लिया… "तू तो घर का आदमी लगता है। साले ये तेरे ही दोस्त है जो मार खाकर पड़े हैं? जा उठाकर ले जा, वरना देर हुई तो हड्डियां जुड़ने में समस्या भी होगी…. अरे बापू पूरा मूड ऑफ हो गया। रूको मै भी आया।"..
अपस्यु जब उस जगह को छोड़कर जा रहा था, नीचे जमीन पर कई लड़के पड़े-पड़े कररह रहे थे। अपस्यु बार काउंटर से अपना फेवरेट को कॉकटेल लिया और उसकी चुस्कियां लेते हुए सबके बीच आ गया… "तुम लोगों को क्या हुआ? कुंजल, बेटा तेरा मुंह क्यों उतरा है? कितने खुश होकर तो तू निकली थी ऐमी और स्वस्तिका के साथ।"
कुंजल:- आप की ये बेवेडे वाली हरकत मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आ रही। ऊपर से यहां झगड़ा भी कर रहे हो।
अपस्यु:- अरे अरे अरे.. बेटा उन लड़कों ने बापू का कॉलर पकड़ा था। अब मुझ तक रहता तो कोई बात नहीं थी, लेकिन हिम्मत तो देखो उनकी…
कुंजल:- अच्छा और आप दोनों ने क्या किया, यहां आकर पहले तो माहौल को आप दोनों ने ही खराब किया था ना… जाओ मुझे बात ही नहीं करनी आप से..
"आह ये लड़कियों का इमो ड्रामा… ओय बापू बहना नाराज हो गई है।"… "क्या बोल रही है वो।"….. "कह रही है हम बेवड़े है।"…
ऐमी समझ गई अब इनकी जुगलबंदी खत्म नहीं होगी और ये दोनों यहां से सबको भागकर ही मानेंगे। ऐमी अपनी हाई हिल उतार कर खाली पाऊं डांस फ्लोर तक पहुंची और बिना म्यूज़िक के ही उसने अपना पहला मूव दिया.. उसके हवा में किए फ्लिप को देखकर डीजे ने तुरंत ही रॉकिंग म्यूज़िक शुरू कर दिया और ऐमी उसके धुन पर नाचती हुई इशारों में अपस्यु को बुलाने लगी..
अपस्यु भी 20 फिट का घुटनों पर स्लाइड करता हुआ ऐमी के पास पहुंच गया। अब तक लोगों ने बेवड़ों को देखा था, अब दातों तले उंगलियां दबाकर 2 प्रोफेशनल डांसर्स को देख रहे थे। जो ही माहौल ऐमी ने वहां बनाया.. अपस्यु उसके इशारे पर बस नाचता जा रहा था और उनके हर मूव पर लोग हूटिंग करते हुए उन्हें घेर लिए।
आरव के मायूस चेहरे पर भी वापस से खुशियां छा गई। वो भी लावणी को लेकर पहुंच गया… एक-एक करके वापस से वहां फिर से महफ़िल जमने लगी। अपस्यु ऐमी को देखकर मुस्कुराया और मुस्कुराते हुए कहने लगा… "अपनी जादूगरी दिखा ही दी ना तुमने।"..
ऐमी:- आज फिर नशे में होने का नाटक दिखा ही दिया तुमने… पूछ सकती हूं आज किसे टारगेट किया था।
अपस्यु:- साची के भाई को, उसने आरव को सबके बीच जो मारा था।
ऐमी:- फिर छोड़ क्यों दिए, साची के खातिर क्या?
अपस्यु:- हां कह सकती हो, जाने दिया उसे…
ऐमी:- अच्छा किया इन्हे मारकर, वरना मै प्लान कर रही थी, पार्टी खत्म होने के बाद।
अपस्यु:- किसके साथ किया था इन लोगों ने अपनी ऊटपटांग हरकते..
ऐमी:- छोड़ो ना क्या करोगे जानकर, गलती की बराबर सजा मिली है। वैसे भी बदला लेने आएंगे ही, बाकी हिसाब तब पूरा करेंगे..
अपस्यु:- मैंने दूर से ही कुंजल का चेहरा पढ़ लिया था, चिंता मत करो दोबारा नहीं आने वाले। होगा तो पुलिस ही आएगी, क्योंकि सबको तोड़ा हूं।
ऐमी:- उसकी नजरें तो पढ़ लिए, मेरी नजर नहीं पढ़ पाए..
अपस्यु:- उसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, वैसे ध्रुव की क्या रिपोर्ट है।
ऐमी:- क्लीन है, अपने बाप का बिजनेस बस देखता है, शक इसके दीदी और जीजा पर है।
अपस्यु:- मुझे भी उन्हीं कर शक है। देखो अब क्या होता है। आग तो लगा ही दिया हूं अब बस उसकी जलन देखनी है।
ऐमी:- लास्ट मूव..
दोनों ने फिर एक फाइनल मूव दिया डांस का और सब लोग तालियां बजाते हुए थके नहीं। … पार्टी पूरी तरह से खत्म हो गई, अपस्यु सिन्हा जी को लेकर उन्हीं के कमरे में सोने चला गया। उसके पीछे पीछे बाकी सब लोग भी आ रहे थे।
साची भी ध्रुव के साथ चल रही थी और चलते-चलते बस अपस्यु के बारे में ही सोच रही थी। ध्रुव भी अपस्यु के तारीफों के कसीदे पढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। उसकी फाइटिंग, उसका डांस, उसका बेवड़ा रूप, हर बात का वो फैन हुआ जा रहा था। साची अपने कमरे में पहुंची और ध्रुव को बाय बोलकर अपने बिस्तर पर बैठ गई।
कुछ ही देर में लावणी भी वहां पहुंच गई और साची को ऐसे अकेले सोच में डूबा देखकर उससे पूछने लगी… "क्या हुआ दी, आप ऐसे मायूस क्यों बैठी हो।"..
साची:- यहां भी वो किसी लड़की को देखता तक नहीं। उसकी अपनी ही दुनिया है और उसी में खुश रहता है। मेरा दिल आज भी उसके लिए धड़कता है, लेकिन उसका दिल शायद सबके लिए धड़कता है।
लावणी:- ये आप क्या बडबडा रही हैं, मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।
साची, लावणी को देखकर हंसती हुई कहने लगी… "आज तू बहुत प्यारी लग रही थी। ऐसा लगा जैसे अचानक से बड़ी हो गई, पहले तो बच्ची ही दिखती थी।"
लावणी:- ओह हो तो आप ने है आरव को ये सब सिखाया था हां।
"क्या, आरव भी तुझे यहीं बात बोला क्या?" .. साची हंसती हुई पूछने लगी
लावणी:- हां बिल्कुल दीदी.. आप की हंसी बता रही है कि आपने ही उसे सब सिखाया होगा…
साची उसकी बात कर फिर से हंसती हुई कहने लगी…. "अच्छा एक बात बता, तुझे पता है कि मैं, तुम्हे ऐसा क्यों कही।"
लावणी:- मुझे क्या पता, आप को लगा होगा इसलिए आप ने ऐसा बोला…
साची फिर से हंसती हुई उसे आइने के पास ले जाकर खड़ी कर दी और लावणी के बदन पर प्वाइंट करती हुई कहने कहीं…. "जब तू अपने ऊपर वो पूरे ढिले कपड़े दिन भर डाले रहती थी तब कुछ पता भी नहीं चलता था कि तू कितनी बड़ी हो गई.. और आज देख खुद को। अब समझी तुम्हे ऐसा क्यों कहा जा रहा है।" बेचारी को जब समझ में आया तब शर्म के मेरे उसका चेहरा शूर्ख लाल हो गया। वो तो सीधा अपना बिस्तर ही पकड़ ली।…
अगली सुबह जब नंदनी जागी… उसके पास कोई नहीं पहुंचा सोने। रात में ना तो स्वस्तिका उसके पास लौटी और ना ही कुंजल। नंदनी समझ गई कि तीनों ऐमी के कमरे में सोई होगी। नंदनी तीनों को ढूंढ़ते उसके कमरे में पहुंची, लगातार बेल बजाने के बाद भी कोई जवाब नहीं।
काफी देर वहां खड़े रहने के बाद जब कोई भी जवाब नहीं मिला, फिर नंदनी आरव के कमरे में गई लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं। एक-एक करके नंदनी ने ने सारा कमरा छान मारा, लेकिन किसी का कुछ पता ही नहीं था। आखरी में केवल एक कमरा बचा था वो था सिन्हा जी का कमरा।
यहां तो कमाल हो गया। कमरा खुला था और सभी एक ही कमरे में, कोई यहां परा था कोई वहां परा। नंदनी ने कमरा लॉक किया और वीरभद्र को सबके ऊपर पानी डालने बोली… सब लोग लगभग रात के 1 बजे सोए थे और सुबह के 5 बजे नंदनी सबके ऊपर पानी डलवा रही थी।
कच्चे नींद से उठकर सब वीरभद्र को गालियां ही दे रहे थे, और वीरभद्र अपनी उंगली नंदनी के ओर इशारा करते दिखा देता… अब सामने नंदनी को देखकर कोई क्या ही कहे… सभी जाग रहें थे और सर पकड़ कर वापस सो जाते। नंदनी अनपर लगातार बारिश करवाती रही, अंत में ना चाहकर भी सबको उठना ही परा। नंदनी ने बिना देर किए सबको आधे घंटे में अपने कमरे पहुंचने के लिए बोली ..
ठीक आधे घंटे बाद सभी लोग नंदनी के कमरे में इकट्ठा हो गए, सिवाय अपस्यु के। नंदनी ने अपस्यु को ना देखकर वीरभद्र को उसे बुलाकर लेने के लिए कहने लगी और बाकी इधर के लोगों को देखने लगी…
आरव, थोड़ा चिढ़ते हुए… "ये अजीब दादागिरी है, सुबह-सुबह हम सबको जगा कर क्या यहां सत्संग करवाएंगी।"…
नंदनी:- तू इधर आ..
आरव:- नहीं, मै यहीं ठीक हूं, आप वहीं से जो बोलना है वो बोलिए…
नंदनी:- ये बताओ कि कल तुमलोग में से किसने नहीं पिया था?
सबने एक साथ हाथ ऊपर उठा दिया… नंदनी होटल से मंगवाएं सीसी टीवी फुटेज चलाती हुई पूछने लगी… "अब बताओ किस-किस ने नहीं पिया था?"
इस बार केवल एक हाथ आरव का उठा बाकी सारे हाथ नीचे…. "मतलब जो पियक्कड़ था उसने शराब हाथ नहीं लगाई, और तुम तीनों ने पिया था।"..
"नहीं आंटी दरअसल हुआ ये था कि कल आरव के एंगेजमेंट की पार्टी थी तो थोड़ा मस्ती के लिए हमने लिया था… बस थोड़ा।"…. ऐमी अपनी बात कहती हुई आगे चली आयी और जैसे ही नंदनी के पास पहुंची उसका एक झन्नाटेदार थप्पड खाकर अपनी जगह पर…
ऐसे ही कुछ हाल कुंजल और स्वस्तिका का भी हुआ, दोनों को भी नंदनी के हाथ का गुड मॉर्निंग विश मिल गया था। अंत में नंदनी ने सबको चेतावनी देती हुई कहने लगी…. "दोबारा यदि किसी को भी मैनें शराब पीते हुए पाया, तो उसे 21 दिनों के लिए घर में बंद कर दूंगी। 21 दिन तक घर से क्या अपने कमरे से भी वो बाहर निकल नहीं पाएगा या पाएगी। जरा भी शर्म है तीनों को, पीने के बाद बेहोश होकर अपने कमरे तक नहीं पहुंच पाई। और अभी तक वो बेवड़ा कहां परा हुआ है। कहां है तुम सबका गुरुजी अपस्यु, उसे तो मै आज बताती हूं।"
आरव:- वो हमारे साथ कमरे में कहां था?
सब एक दूसरे का मुंह देखते हुए सोचने लगे और वहां से दौड़े-दौड़े होटल के अपने सभी कमरों में ढूंढ़ने लगे.. अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। हर किसी को कॉल लगाकर पूछ लिया, अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। उसका फोन भी सिन्हा जी के कमरे में ही परा था। सब लोग वापस नंदनी के कमरे में पहुंचे और हर किसी के नजरों से साफ पता चल रहा था कि किसी को भी अपस्यु का पता नहीं।
अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….