Romance भंवर (पूर्ण) - Page 29 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Romance भंवर (पूर्ण)

Hahahaha.. ye daru ka side effect tha .. kaise chadha aur kisne uske ander hawa bhar di jo chadh gaya kise pata .. jara aap ke reaction dekh lun aage ke update par ... Kyonki ab to kahani shuru hogai hai ;)

:thanks: for such a tremendous support
 
:D hahaha ... Ye filop.. si.. aap ko bhi padesan karti aman bhai bach gaye kyonki samne pura update pari hai jigyasa mitane ke liye :hehe:

:thanks: for such a tremendous support
 
Update bahut hi kaufnak tha aur mujhe apne reader ko rulane me katai hi dilchapi nahi thi isliye ye taiyar kiya gaya...warna pahle 4 update ki planning thi 14 June 2007 ka update .. par mujhe laga no .. past ko utne detail me nahi balki to the point short me niptane chahiye wo bhi emotionless tarike se ...

:thanks: for such a tremendous support
 
Isi ke sath meri tarif me 8-10 line jod dena tha apna dil khush ho jata :D .. khali surprise pasand aata hai par likhne wale ki mehnat ko bhi lambe chaude para me appraisal ki jaroorat thi yahan par :D

Mai to fir yahi kahunga .. ye story koi suspence nahi .. sab kuch open hai... Hope you are enjoying now
 
Oh ho ho hooo .m matlab samjh me aa gaya wo line kiske liye likha hua tha :lol: ..

Aur wo scene utna b lovely na tha ... Becharon ke bich kahe ruston ki diwar ladwa rahin hain
 
Update:-67

भावनाओ का समागम ऐसा था कि पहले जो केवल एक पहचान की लड़की थी अब वही सबसे खास नजर आने लगी। जिस लड़की को आज पहली बार कुंजल और नंदनी ने देखा था, वो अपनी सी लगने लगी। और एक जिसका केवल नाम सुना था, ऐसा लग रहा था, वो ना जाने कितने दिनों से घर के बाहर रह रहा है, बस जल्दी घर लौट आए, एक सदस्य की कमी सी मेहसूस हो रही है।

अपस्यु के उस रात की घटना के जिक्र के बाद ऐमी, स्वस्तिका और पार्थ खुद-व-खुद करीब हो गए नंदनी और कुंजल के। निकले थे तो चारों 2 बजे के करीब लेकिन अपस्यु 4 बजे तक होटल लौट आया और तीनों वहीं से कहीं और निकल लिए।

रात के तकरीबन 8 बजे तीनों लौटी। और जब तीनों लौटी तो तय कर पाना मुश्किल था कि तीनों में सबसे खूबसूरत कौन है। ऐमी के रंग में ही कुंजल भी रंगी नजर आ रही थी। कुंजल के टॉम बॉय लूक को पूरा बदल कर क्या हॉट और क्लासी लूक दिया था ऐमी ने। इससे भी ज्यादा गजब तो नंदनी थी। वो जब अपने पुराने रॉयल तौर-तरीके में लौटी और बिल्कुल किसी महारानी वाले एटिट्यूड के साथ अपने पहनावे और चाल को बदली, तब ऐसा लग रहा था जैसे 2 खूबसूरत राजकुमारी के साथ कहीं की महारानी चली आ रही है।

आज उन तीनों की एंट्री पर, फिर से दरवाजे पर वीरभद्र अटक गया। जैसे ही दरवाजा खोला और तीनों को ऐसे तैयार होकर अपने सामने पाया, वो फिर से दरवाजे पर खड़े-खड़े देखता रह गया। तीनों एक साथ अंदर आयी और इस बार तीनों को देखकर स्वस्तिका ने सिटी बजाते हुए उनका स्वागत किया।

नंदनी और कुंजल का हुलिया देखकर, आरव, ऐमी को ताने देते हुए कहने लगा… "बंदरिया अपने जैसी सबको नचनिया बना कर ले आयी है।" … आरव का ऐसा कहना था, कि उसके ऊपर नंदनी और कुंजल बरसना शुरू कर चुकी थी। आरव को घिरते दिख स्वस्तिका आरव के ओर से आ चुकी थी बोलने…

दरअसल स्वस्तिका, आरव और पार्थ एक टीम के थे और अपस्यु, ऐमी एक टीम से, और इनके बीच तू-तू, मै-मै की कहानी चलते रहती थी। आज लेकिन ऐमी के साथ अपस्यु ना होकर कुंजल और नंदनी थी। इधर सिन्हा जी की नजर जब नंदनी पर गई तो भावनाओं मै बहते हुए अचानक ही बोल परे…. "क्या दिख रही है नंदनी, एक दम मेग रयान (American actress Meg Ryan) लग रही है।"

अपस्यु, हैरानी से सिन्हा जी को देखते हुए…. "ओए सर जी ये सब क्या हो रहा है, खबरदार हो जाओ। और आपका ये मेग रयान का भूत उतरा नहीं है अब तक। यूएस आए हुए हो, जाकर मिल क्यों नहीं लेते?

सिन्हा जी:- अरे मेग रयान मेरी नजरें के सामने खड़ी है और तू कहां मुझे हॉलीवुड भेज रहा है।

अपस्यु, सिन्हा जी को देखा फिर अपनी मां को…. "ओए बुढऊ, ये क्या चल रहा है। मेरे ही सामने मेरी मां को घूर रहे।"

सिन्हा जी:- अब खूबसूरत लग रही है तो देख रहा, मुझे डिस्ट्रूब ना कर।

अपस्यु:- वो नंदनी रघुवंशी है, गुस्सा जब उनके सर पर हावी होता है तो चिपकाने में देर भी नहीं लगाती। संभालो, वरना सर जी आप का भविष्य खतरे में लग रहा मुझे।

सिन्हा जी:- चल चल, बच्चा है तू अभी, बड़ों के मामले में टांग ना अरा…

सिन्हा जी का इतना कहना था कि अपस्यु उसे घूरने लगा… "हद है यार, नहीं देखता तेरी मां को, खुश। अच्छा सुनना आज मूड बन रहा है, चल ना चलकर पीते हैं।

अपस्यु सिन्हा जी मना करते हुए, सबका ध्यान अपनी ओर खींचा….. "मां आप और सिन्हा जी अभी बैंक्वेट हॉल जा रहे है, वहां तीनों परिवार के मुखिया मिलकर आपस में कुछ चर्चा करेंगे… बाकी के सारे लोग प्राइवेट डिस्को यार्ड में पहुंचेंगे, जहां धमाल मचाने का कर्यक्रम रखा गया है। एक बात और, आप लोगों को ज्वाइन करने मिश्रा फैमिली और जिंदल फैमिली के यंगस्टर भी होंगे। सभा समाप्त कीजिए और जाकर तैयार हो जाइए।"

सभी लोग वहां से निकल गए अपने-अपने कमरे में, हालांकि कुंजल और ऐमी पहले से तैयार होकर आए थे, तो दोनों ऐमी के कमरे में ही जाकर वहीं बातें करने लगे। आरव तो बेचैन था लावणी से मिलने के लिए.. इसलिए वो भी पूरे लगन से तैयार हो रहा था।

कुछ देर जबतक ऐमी और कुंजल बातें कर रही थी, वहां स्वस्तिका भी तैयार होकर पहुंच गई। कुंजल उसे देखती हुई पूछने लगी… "हम अब बहने है, तो मुझे एक सवाल खाए जा रही है।"

स्वस्तिका, मुस्कुराती हुई… "बिल्कुल पूछो।"

कुंजल:- यहां हर कोई सज-संवर रहा है केवल तुम्हे छोड़ कर, ऐसा क्यों?

स्वस्तिका:- हिहिहीही… जिस दिन मै सज-संवर कर निकलूं, समझ लेना तुम्हे तुम्हारे जीजाजी मिल गए.. अब चलें…

कुंजल:- एक मिनट, एक मिनट… मुझे कंफ्यूज ना करो। इस हिसाब से तो मुझे भी नहीं संवरना चाहिए।

ऐमी:- नहीं ऐसा नहीं है। बस उसके दिल की तमन्ना ऐसी है कि किसी के लिए उसे जबतक संवरने की इक्छा ना हो, वो नहीं संवर सकती।

कुंजल:- फिर तो लगता है मुझे ही कोई चक्कर चलना होगा। वैसे भी कई सारी फैमिली के यंगस्टर जमा हो रहे है… चलें क्या?

ऐमी:- हां, हां क्यों नहीं, चलो चलकर धमाल मचाया जाए….

तीनों कमरे से निकलकर डिस्को एरिया में पहुंचे, पार्टी के माहौल को शुरू करने से पहले तीनों ही लड़कियां बार काउंटर पर पहुंची, 4 टकीला शॉट के लगाकर अभी रुके ही थे, कि ऐमी कहने लगी…. "अरे यार उस छछूंदर की एंगेजमेंट सेलीब्रेट करने आए हैं या नॉर्मल किसी डिस्को में, अभी सब 2 शॉट और लेंगे।"..

कुंजल:- वुहू… ये हुई ना बात…

स्वस्तिका:- दोनों पागल हो गई हो, पूरा घर कुछ देर में यहां होगा। और फिर मां भी तो होगी।

ऐमी:- अरे नंदनी रघुवंशी को आरव और अपस्यु संभालेगा, हम तो एन्जॉय करेंगे.. वैसे भी झूमने के लिए थोड़ा नशा तो होना चाहिए ना…

कुंजल ऐमी के साथ ताली देती हुई कहने लगी…. "बिल्कुल सही।"… दोनों ने 2 टकीला शॉट और खिंचा और साथ में स्वस्तिका को भी जबरदस्ती खिंचवाया। तीनों सबसे पहले पहुंचने वालों में से थे और उसके बाद उस जगह पर ध्रुव और साची एंट्री मार रही थी। …

साची को देखकर ऐमी कहने लगी… "लगता है अपस्यु को जलाने आयी है। इसे अपस्यु देखेगा तो जरूर अपने ऊपर चश्मा चढ़ा लेगा।"…

स्वस्तिका:- हिहीहिही… वो तो चश्मा ना भी चढ़ाएगा तो फर्क ना पड़ना, लेकिन ये क्या करेगी अपस्यु को देखकर।

कुंजल:- एक लड़की होकर तुमलोग दूसरी लड़की के लिए हंस रही, क्या तुम दोनों को उसके दर्द का एहसास भी है।

कुंजल थोड़े गुस्से में वहां से उठकर साची के पास चली गई और बिल्कुल किसी करीबी दोस्त की तरह उससे मिलती हुई, उसके और ध्रुव के साथ हंसी मज़ाक करने लगी… कुंजल और साची के रिश्ते को परखते हुए स्वस्तिका एक टकीला शॉट और लेती कहने लगी…. "ऐमी ये रिश्ता आगे जाकर हमे बहुत परेशान करने वाला है।"

ऐमी भी एक टकीला शॉट खींचती हुई कहने लगी…. "हां मै भी देख रही हूं। लेकिन कुंजल ने गलत क्या कहा, ये मासूम बेचारी अनजाने में ही एक बड़े गेम का हिस्सा बन गई, जिसके बारे में शायद इसे कभी पता भी ना चले।"

स्वस्तिका:- दर्द या तो हौसला देगा या फिर इसे तोड़ देगा। यहां हर किसी की किस्मत एक दूसरे से जुड़ी है ऐमी, हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। हौसला रहा तो किनारे लग ही जाना है… वरना घुट तो वो अब भी रही है…

ऐमी:- स्वस्तिका ऐसा नहीं है कि "हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते।" यदि चाह ले तो साची के लिए भी कुछ किया जा सकता है।

स्वस्तिका:- हम्मम !! ठीक है अब जब तुम्हे ऐसा लग रहा है तो मै तुम्हारे साथ हूं, अब छोड़ भी उसको वो आगे आने वाले कामों में से एक है, अभी तो एन्जॉय कर ले…..

इधर सब जब तैयार होने गए... अपस्यु भी तैयार होने चला गया लेकिन वो तुरंत ही तैयार होकर अपनी मां के पास पहुंचा…. "चलें मां"

नंदनी:- तुम मेरे साथ जा रहे.. तुम्हे तो उनके साथ होना चाहिए सोनू।

"अरे मां, अब मेरा आप के साथ जाने का मन है, चलो भी…" अपस्यु अभी बात कर ही रहा था कि पीछे से सिन्हा जी पहुंच गए…. "तुम भी चल रहे हमारे साथ क्या?"…. "हां चल रहा हूं, और कोई बहस नहीं इसपर।"

तीनों वहां से निकले बैंक्वेट हॉल के लिए… नंदनी की चाल में पूरा रौब और रुतबा नजर आ रहा था, जो की एक रॉयल ब्लड के मुखिया में होना चाहिए। वहीं उसके एक ओर सिन्हा जी थे तो दूसरी ओर नजरों का आकर्षण बना अपस्यु।

एक ओर से ये तीनों बैंक्वेट हॉल की ओर बढ़ रहे थे, दूसरे ओर से प्रकाश जिंदल अपने ताम-झाम के साथ चला आ रहा था। प्रकाश जिंदल को देखकर अपस्यु ने एक पल के लिए अपनी पलकें झपकाई और आखों पर काला चश्मा लगाकर अपनी मां के साथ बढ़ने लगा। दोनों के कदम अलग-अलग दिशा से एक ही ओर बढ़ रहे थे, जैसे-जैसे दोनों करीब आ रहे थे, उस माहोल में जैसे किसी युद्ध नगाड़े की धुन छेड़ रखी हो। युद्ध का बिगुल फूका जा रहा था। इतनी कड़ी मेहनत और सफल योजना से, जिस पड़ाव तक पहुंचना था, वो पड़ाव खुद सामने से कदम बढ़ाते हुए उन्ही के ओर चला आ रहा था।

एक औपचारिक परिचय के बाद सभी अपनी जगह पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। कितनी सही थी उस लोमड़ी की कहानी जिसे अपस्यु सुना चुका था। प्रकाश जिंदल अपने हाव-भाव से सबको प्रभावित करता जा रहा था। एक अरबपति जो बिल्कुल जमीन से जुड़ा हुआ था।

अपस्यु ठीक नंदनी के पास बैठकर उसकी बातें ध्यान से सुन रहा था और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए बस उसे पूरी तरह भापने की कोशिश कर रहा था। वो भी लगभग दूसरा चन्द्रभान ही था, जिसके असली चेहरे के बारे में किसी को सोचना तो दूर, ऐसा ख्यालों में भी नहीं ला सकते।

उसके पास में ही उसकी बड़ी बेटी मेघा और उसका दामाद हाड़विक बैठा हुआ था। शक्ल से दोनों घमंडी और पैसे के नशे में चुर दंपत्ति, जो बस अपना मुंह केवल जरूरत के वक़्त ही खोल रहे थे।

"हे यू सर्वेंट, मेरे साथ आओ"… मेघा अपने फोन के संदेश को चेक करती हुई कहने लगी। मेघा का ऐसा कहना था और नंदनी के चेहरे का भाव बदलते देर ना लगे। अपस्यु तुरंत नंदनी का हाथ थामकर उसे बस शांत रहने का इशारा किया।

"मेघा जी, मै कोई फ़्री सर्विस नहीं देता।" अपस्यु अपना चश्मा हटाते हुए कहने लगा…

हाड़विक:- तुम जैसे हम कई सर्वेंट अफोर्ड कर सकतें है, अपनी सर्विस चार्ज बताओ।

सिन्हा जी:- एक काम के 2 करोड़ भारतीय रुपया, अभी कुछ दिन पहले ही तय हुआ है। और हां कोई अनैतिक काम नहीं करता…

सिन्हा जी की बात सुनकर दोनों दमापती चौंकते हुए कहने लगे … "व्हाट"..

अपस्यु:- फोन से बाहर निकालिए मैडम और ढंग से परिचय सुन लिया कीजिए।

प्रकाश जिंदल:- माफ़ करना बेटा, उसने ध्यान नहीं दिया। उसके लिए मै माफी मांगता हूं।

मेघा:- डैड इतनी भी बड़ी गलती नहीं थी कि आप इन लोगों से माफी मांगो।

प्रकाश जिंदल थोड़े आवेश में आते हुए….. "यदि बात करने की तमीज नहीं तो अपना मुंह मत खोला करो। हम परिवार के बीच बैठे है तुम्हारे ऑफिस के कर्मचारियों के बीच नहीं। मुझे लगता है तुम दोनों को डिस्को जाना चाहिए। हाड़विक तुम दोनों डिस्को अरीना में जाओ।"

दोनों अपने ही एटिट्यूड में वहां से निकल गए, और नंदनी गुस्से के घूंट को पी रही थी जो उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था। प्रकाश जिंदल माहौल को थोड़ा मजाकिया बनाते हुए, नंदनी को थोड़ा सामान्य करने की कोशिश में जुट गया। इसी क्रम में एक इमोशनल कहानी गढ़ते हुए.. "बीन मां की बच्ची, विदेश में पली बढ़ी" वाली कहानी सुनाने लगा। जिसे सुनने के बाद नंदनी थोड़ी नॉर्मल होते हुए उसके साथ बातों में लग गई।

कुछ वक़्त बाद प्रकाश जिंदल अपस्यु से अकेले में कुछ बात करने का प्रस्ताव रखा, जिसे अपस्यु खुशी-खुशी स्वीकार करते हुए दोनों उसी हॉल के दूसरे हिस्से तक पहुंचे। और हॉल के कोने में जाकर दोनों बातें करने लगते है।…

जिंदल:- नए लड़कों में इतना ज्यादा धैर्य बहुत कम देखने मिलता है। मैंने देखा कैसे तुमने अपनी मां का हाथ थामकर उन्हें शांत रहने के लिए कहा।

अपस्यु:- मैंने भी देखा कैसे आपने हमे अपमानित करने वाली अपनी बेटी को, आपने बाहर भेज दिया। बहुत हिम्मत चाहिए होती है अपने बिगाड़े बच्चों को शांत करने के लिए…

जिंदल:- मै तो जमीन से जुड़ा हूं, क्योंकि मेरे पिताजी एक बहुत छोटे से सहर में रहा करते थे, और मैंने उनकी गरीबी की परवरिश देखी है। लेकिन मेरे बच्चों ने एक आलीशान परवरिश में पले और हमेशा बुलंदियों को ही देखा है। उनके लिए किसी का अपमान करना कोई नई बात नहीं।

अपस्यु:- मेरी मां राज परिवार से है, और उनके पुस्तों ने केवल राजशाही ही देखी है। बच्चो में थोड़ा समझदारी डालिए की देखकर अपमान किया करे।

जिंदल:- तुम्हारे बातों से गुरूर झलकती है।

अपस्यु:- मेरे तेवर में भी गुरूर है, बस दिखता नहीं कभी..

जिंदल:- तुम मुझे उकसा रहे हो क्या?..

अपस्यु:- नहीं मै बस सच्चाई बता रहा हूं।

जिंदल:- हम्मम ! बहुत दिनों के बाद ऐसा लग रहा है हिंदुस्तान का कोई जानदार परिवार के सामने खड़ा हू। तुम्हारे अंदर मेरी बेटी से ज्यादा गुरूर होना चाहिए, तुम्हारे स्वभाव के ऊपर वो और भी जचता…. कमाल के हो तुम, बातों में संतुलन, चेहरे पर तेज, और तुम्हारा अंदाज़… वाह!! तुमने मुझे काफी प्रभावित किया है।

दोनों अभी बात कर ही रहे थे कि आरव, अपस्यु को ढूंढता हुआ हॉल में पहुंच गया, और दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा। आरव को देखकर अपस्यु ने प्रकाश जिंदल को वहीं नमस्ते किया और सिन्हा जी के साथ बाहर…

आरव थोड़ा चिढ़ते हुए… "लावणी कहां है।"

अपस्यु:- मतलब तू मुझे ढूंढ़ने नहीं, बल्कि लावणी का पता पूछने आया था। वहीं उसके माता पिता बैठे थे, उनसे क्यों नहीं पूछा?

आरव:- ज्यादा होशियार मत बन, मैंने पूछा था सासू मां से, उन्होंने बोला सब अपस्यु का किया है वहीं जाने…

अपस्यु और सिन्हा जी दोनों एक साथ… "ओय होए, सासू मां"… फिर अपस्यु, आरव के गाल को थपथपा कर कहने लगा… "तू बेटा पार्टी एन्जॉय कर, वो भी आ जाएगी। हम दोनों जरा तुमलोग को देर से ज्वाइन करते है।"

आरव:- और वजह जान सकता हूं क्यों?

"छोड़ उसे बताने से क्या फायदा है छोटे, हम चलते है।"….. "हां सही ही कहा बापू।"….

दोनों आपस में बात करते आरव को छोड़ कर बार के ओर चल दिए। दोनों को एक साथ बार में जाते देखकर आरव जोर से चिल्लाते हुए कहने लगा… "दोनों, सीधा अपने कमरे में जाना, डिस्को में अाकर नौटंकी किए तो फिर देख लेना। दोनों का आज सर फोड़ दूंगा।"..

आरव दूर खड़ा चिल्लाता रहा और दोनों पीछे से उसे टाटा करते हुए बार में पहुंच गए….
 
Ye baat hum sab jante hai na ki praksh ki sachai pata hai... Prakash ko thode na pata hai ki uski sachai pata hai .. to milna b wais hi hoga na.. but never mind jugad lagaya ja raha hai iska bhi :yo: :yo:

Koi na Megha ka thappad udhar raha .. aage jakar dilwa deta hu .. waise bada hansi aaya update padhkar itni comedy to nahi dala tha maine :D
 
Kya karen use story me rakha hi isi ke liye :D

:D to kam akal dushman thode na hai.. dono ke bich ek chhoti si tashan to dekhne ko hi milegi Na : De
 
Dekhte hain .. Dhruv to abhi hai kahani me hi .. kya hota hai wo to aage hi pata chalega... Oar jo bhi hai jindal family abhi to aayi hai story line me .. thoda waqt dijiye abhi to....

Swastika ki fantasy halke me na lijiye.. ballki uske liye koi susil ladka dhundh lijiye .. kaho to aap ka naam hi dal dun :D
 
Update:-68

आरव दूर खड़ा चिल्लाता रहा और दोनों पीछे से उसे टाटा करते हुए बार में पहुंच गए…. इधर दोनों बार में गए और आरव डिस्को में वापस आ गया। सोचा तो था कि ऐमी और स्वस्तिका से मिन्नतें करके बार में भेजेंगे, और दोनों को बार से उठाकर वापस लाएंगे। लेकिन यहां तो माहौल ही कुछ और था।

"मै शराबी, मैं शराबी" गाने की धुन बज रही थी और सभी पागलों की तरह नाचे जा रहे थे। तीनों लड़कियों का टकीला शॉट अपना काम कर रहा था। कुंजल, ध्रुव के साथ डांस करने में खोई थी और साची दोनों को नाचते देख हंस रही थी। वहीं स्वस्तिका और ऐमी को कोई पार्टनर नहीं मिला तो दोनों अकेले-अकेले ही नाचे जा रही थी।

आरव ऐमी को कहने तो आया था कि दोनों को बार से उठा कर यहां लाओ, लेकिन बेचारा ऐमी के हत्थे चढ़ गया। ऐमी उसके टाय को खींचकर अपने साथ पकड़ ली, वो चिल्ला-चिल्ला कर अपनी बात कहने की कोशिश रहा, लेकिन ऐमी कुछ सुनने के बजाय उसके साथ नाचने लगी…

एक तो आरव को उन दोनों के नौटंकी की टेंशन हो रही थी और ऊपर से लावणी कहीं नजर नहीं आ रही थी। आरव, ऐमी के साथ उसके कमर में हाथ डालकर गोल-गोल घूम ही रहा था कि उसे सामने से लावणी आती हुई नजर आयी। लावणी को देखकर ही, आरव सारी बातें भूलकर, बस उसे ही देखने लगा। आरव जब रुका, तब ऐमी उसे देखती हुई पूछने लगी कि क्या हुआ? प्रतिउत्तर में आरव के केवल मुस्कुरा रहा था।

उसके चेहरे की चमक सारी कहानी बयान कर गई। ऐमी पीछे पलट कर देखी और मुस्कुराती हुई आरव के कान में कहने लगी…. "बहुत प्यारी लग रही है, तू जा…" आरव ऐमी के पास से हटा और लावणी को आते हुए देखने लगा।

क्या लग रही थी वो, जैसे-जैसे लावणी अपने कदम बढ़ा रही थी, आरव का दिल जोड़-जोड़ से धड़कना शुरू हो चुका था। पारंपरिक भारतीय परिधान, लहंगा चुन्नी, काले भूरे रंग का मिश्रण, हाथों में लाल और हरे रंग की चूड़ियां, गले में वो चमचमाती हार, कान के बड़े बड़े झुमके जिसकी लड़ियां गालों को छुती हुई, चेहरे पर हल्की पाउडर और लाली, उसके ऊपर उसकी प्यारी मुस्कान… बन संवर कर ऐसे निकली कि वो आरव को घायल सी किए जा रही थीं।

मुस्कुराती वो आरव के ओर बढ़ने लगी, आरव भी मुस्कुराता उसके ओर बढ़ने लगा। इतने में ही बीच में जैसे भीड़ सा उमर आया हो। कुछ कबीर के दोस्त, कुछ ध्रुव के दोस्त और कुछ नीरज के। कुल मिलाकर एक ही वक़्त में 20-21 लड़के लड़कियां पहुंचे। कुछ तो डांस फ्लोर पर पैशन के साथ नाचने लगे और कुछ मुफ्त के दारू का मज़ा लेने लगे।

आरव इन सब को अनदेखा कर वापस से अपने लावणी का ध्यान करते हुए आगे बढ़ा, लेकिन भीड़ जब छंटी तब 2 लड़के लावणी के पास खड़े थे और लावणी का हाथ पकड़कर उसे डांस के लिए जिद कर रहे थे। आरव दोनों के बीच से, ठीक सामने से लावणी के पास पहुंचा और उसे गले लगाते हुए दोनो से कहने लागा… "दोस्त किसी और पार्टनर को ढूंढो, ये मेरी सोलमेट है।".. दोनों लड़के वहां से "सॉरी ब्रो" करते हुए निकल लिए।

लावणी, आरव के सीने से लगती हुई कहने लगी…. "ये हमारा फैमिली फंक्शन था ना फिर ये लड़के कहां से आ गए।"

"ये लोग भी फैमिली का ही हिस्सा होंगे इसलिए तो आए है, जान पहचान तो बाद में होती रहेगी।"… इतना कहकर आरव घुटनों पर बैठ गया और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।

लावणी मुस्कुराती हुई उसका हाथ थाम ली और आरव खड़ा होकर उसके उंगलियों को पकड़ कर एक पूरा रोल करते हुए अपने बाहों में लिया और उसके आखों में देखकर उसके होंठ को छूते हुए उसे खड़ा किया। इधर दोनों को साथ देखकर ऐमी ने म्यूज़िक का मूड बदला और रोमांटिक थीम चलने लगी।

दोनों गले में एक दूसरे के बाहें डाले एक दूसरे में डूबकर नाचने लगे। सब अपने पार्टनर के साथ डांस में खोए हुए थे, सिवाय साची के जो बस सबको नाचते हुए देखकर एन्जॉय कर रही थी। म्यूज़िक का मूड उप-डाउन हो रहा था और उसी के साथ नाचने वालों का पैशन भी उप-डाउन होता जा रहा था।

बीच-बीच में जान बूझकर कुंजल को टारगेट भी किया जा रहा था जिसे ध्रुव और साची दोनों ने देखा। ध्रुव को शायद ये सब अच्छा ना लगा। उन लोगों का रवैया देखकर वो कुंजल को लेकर डांस फ्लोर से बाहर आ गया और उससे माफी मांगने लगा। कुंजल मुस्कुराती हुई कहने लगी…. "कोई बात नहीं, पीए हुए हैं क्या किया जा सकता है।" फिर जबरदस्ती वो साची को ध्रुव के साथ भेज दी डांस करने।"..

अब कुंजल अकेली बैठे सबका नाचना एन्जॉय कर रही थी, और बीच-बीच में किसी के अति आग्रह पर डांस फ्लोर पर पहुंच जाती, लेकिन आज जैसे कुछ लोग तय करके आए हुए थे कि कुंजल को परेशान करना है, यह बात शुरू से साची और ध्रुव भी देख रहे थे और नोटिस कर रहे थे। ध्रुव एक बार आक्रोशित होकर उठा भी लेकिन साची ने उसे रोक लिया। साची, ध्रुव और कुंजल को लेकर तीनों साथ में ही बैठकर बातें करने लगी और तीनों ही लोगों का डांस एन्जॉय करने लगे।

कुंजल को लगा कहां वो कपल के बीच में आ रही है इसलिए वो उठने लगी वहां से, लेकिन साची उसका हाथ पकड़कर अपने पास बिठाती हुई कहने लगी…. "तू कहां चली। अपने अंदर जो सोच लेकर यहां से हट रही है वैसा सोचना भी नहीं। ध्रुव और मेरे लिए तुम यहां सबसे क्लोज हो, और तुम्हारे होने से हमारा हर मोमेंट्स हैप्पी ही होता है। क्यों ध्रुव?

ध्रुव:- बिल्कुल सही, वैसे भी हम दोनों को पास लाने का क्रेडिट तुम्हे ही तो जाता है कुंजल।

साची:- अरे ऐसी कोई बात नहीं। बस मेरा भी मन कर रहा है नाचने का, अपने भाई का एंगेजमेंट है, मुझे भी एन्जॉय करना है।

ध्रुव:- हे सेक्सी, तुम मेरे पास बैठी रहो, वहां जाने की जरूरत नहीं है।

कुंजल:- ओह हो, तो मुझे सेक्सी कहा जा रहा है, कहां कल तक तो ध्यान ना देते थे। साची देख ले अभी से ही चांस मारा जा रहा है।

साची:- अब बेचारा करे भी तो क्या करे। मेरे साथ होने के कारण किसी बाहर वाली के साथ चांस तो मार नहीं सकता। एक साली थी तो वो भी अपने होनेवाले के साथ बिज़ी हो गई। ले दे कर बेचारे के पास तू ही इकलौती ऑप्शन बची है।

साची की बात सुनकर तीनों ही हसने लगे और सामने के डांस का लुफ्त उठाने लगे। डांस फ्लोर पर तो ऐमी और स्वस्तिका ने आग लगाया हुआ था। दोनों की एनर्जी और डांस उसके पार्टनर भी एन्जॉय कर रहे थे जो शायद ध्रुव के ही दोस्तो में से थे।

डांस करके सब थक चुके थे। एक-एक करके सब वापस आने लगे और तीनों को ही घेरकर बैठने लगे। हर कोई थका था लेकिन आरव और लावणी बस एक दूसरे में खोए, एक दूसरे के गले लगकर, बस अपने इस पल को जी रहे थे, संगीत कैसा था वो तो शायद उनके कानों में भी नहीं जा रहा था।

सब लोग आरव और लावणी को ही देखने लगे और उनका एक दूसरे में खोना देखकर बस मुस्कुराए जा रहे थे।… "दोनों साथ में कितने प्यारे लग रहे है ना।".. साची खुश होती हुई कहने लगी…

स्वस्तिका:- कमाल के तो तुम दोनों भी लग रहे थे जब डांस कर रहे थे। वैसे साची तुम्हे देखकर तो आज मुझे, तुम्हे लाइन मारने का मन हो गया है।..

स्वस्तिका की बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे। तभी वहां के संगीत में अचानक से तब्दीली आ गई और कुछ जाना पहचाना धुन जो ऐमी और स्वस्तिका सुन रही थी। जैसे ही ये धुन बजी, ऐमी और स्वस्तिका अचानक ही नजर इधर-उधर करके अपस्यु को ढूंढ़ने लगी…

कुंजल:- क्या हो गया, इतने टेंशन में क्यों आ गई अचानक?

स्वस्तिका:- ये बताओ अपस्यु कहां है?

ध्रुव:- अरे हां, आज हीरो तो दिखा ही नहीं मुझे भी, कहां है?....

ऐमी अपने सर कर हाथ दिए, सर को झुकाए कहने लगी… "आने वाले है दोनों, यह म्यूज़िक उसी के आने के पहले का संकेत है।"

साची:- कौन दोनों मै समझी नहीं।

ऐमी:- वो दो जो पहुंचते ही यहां के माहौल को जंग का मैदान बना देंगे।

कुंजल:- कौन दोनों ऐमी क्यों पहेली बुझा रही…

स्वस्तिका:- ऐमी के पापा, सिन्हा अंकल और अपस्यु ।

कुंजल:- हां तो उनके आने से तुम दोनों इतने परेशान क्यों हो? वैसे भी भाई ने कितना कुछ मिस कर दिया, काश वो यहां शुरू से होता, तो हम तीनो भी पूरा एन्जॉय कर लेते।

ऐमी मुस्कुराती हुई कहने लगी… "कुंजल चिल मार, तो पेश होने वाला है आप लोगों के सामने दुनिया कि सबसे एंटीक जोड़ी… जिसने अगर साथ में बैठकर बैठक लगा लिया, तो समझो कि बेड़ा गर्क। ये महफ़िल में कितने देर से ही क्यों ना पहुंचे, लेकिन जितनी देर भी रुकेंगे, पूरा अगला पिछला कवर कर देंगे…

साची:- इस तरह के इंट्रो के बाद तो मेरी जिज्ञासा अपने चरम पर है।

ध्रुव:- मै भी एक्साइटेड हूं।

कुंजल:- मुझ से तो बर्दास्त नहीं हो रहा है। ऐमी की बच्ची अगर तूने जैसा इंट्रो दिया है वैसा ना हुए ना तो देख लेना..

स्वस्तिका:- जितना बोले है उससे ज्यादा ही होगा, कम या ना होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

वहां के बैकग्राउंड म्यूजिक में तब्दीली आना शुरू हो चुका था। ना तो रोमांटिक सोंग बज रहा था, ना ही पॉप, ना ही पार्टी सोंग.. बल्कि इंटेसे म्यूज़िक वहां बजने लगा....

सबलोग डांस करते-करते रुक गए, और हल्ला करने लगे। सभी लोग डीजे बजाने वाले पर बरसने लगे और उनके जगह को घेर कर हल्ला करने लगे। लेकिन डीजे वाला भी अपने जगह से सबको खाली करवाते हुए इतना ही कहा… "अभी सर ने मैसेज किया है, वो आ रहे है। हमे जो निर्देश मिले है हम बस उन्हीं का पालन कर रहे।"… सभी नवजावं निराश होकर आने वाले को ही देख रहे थे… जिसमे कबीर और उसके दोस्त कुछ ज्यादा ही खफा लग रहे थे।

"बेबी ये कैसा म्यूज़िक बज रहा है, मुझे जरा भी अच्छा नहीं लग रहा।".. लावणी खोई सी आवाज़ में कहने लगी।

"तुम मुझे फील करो ना, ये तुम्हारी आवाज़ मुझे परेशान कर रही है। खामोशी को सुनो, ये कितनी प्यारी है।"… आरव लावणी के गले को चूमते हुए कहने लगा।

"उफ्फ ! अच्छा था ये, एक बार और।"… लावणी, आरव के किस्स के को फील करती मदहोश होती हुई कहने लगी..

"चटाक"… किस्स करने होंठ बढ़ रहे थे और कंधे के साइड से जो आरव का दायां गाल था उसपर अपस्यु एक थप्पड चिपका दिया… आरव को थप्पड करते ही बाहर बैठे सभी लोग अपना बड़ा सा मुंह खोलकर पहले तो अपनी प्रतिक्रिया दिए "कैसे इतने प्यारे कपल को कोई दिस्ट्रूब भी कर सकता है।" फिर अगले ही पल लावणी को लज्जकर वहां से भागते देख सब हसने लगे।

इधर अपस्यु और सिन्हा जी, अपने ही धुन में अंदर चले आ रहे थे। सिन्हा जी आगे डीजे के पास पहुंचे अपनी फरमाइश लगवाने और इधर जबतक आरव के गाल पर एक तमाचा पर गया। तमाचा पड़ते ही आरव तिलमिला कर हटा, लावणी भी चौंककर अपने अासपास देखी और अपस्यु को अपने करीब देखकर वो बेचारी मारे लाज के भाग गई।

इधर आरव, अपस्यु को गुस्से भरी नजरों से देखकर तेज तेज सासें लेने लगा…. "ओए लूक मत दे … लव यू भाई। तू तो मेरी जान है।"… अपस्यु, आरव के गले लगते उसे चूम लिया… आरव यहां कर भी क्या सकता था, वो बेचारा वहां से हटने में ही अपनी भलाई समझा और अाकर सबके पास बैठ गया।

जबतक आरव सबके पास आया, तबतक स्वस्तिका और ऐमी सबको इनके किस्से सुना चुकी थी। ऐमी और स्वस्तिका को छोड़कर तो बाकी सभी लोग जिज्ञासावश देखने लगे कि आगे ये दोनों क्या करते है। और इधर तीनों आरव, ऐमी और स्वस्तिका मुंह लटकाए आने वाले तूफान को सोचकर परेशान हो रहे थे।

ऐमी:- ध्रुव, क्या आप अपने दोस्तों को वहां से हटा लेंगे, मैं नहीं चाहती कि यहां कोई बात बिगड़े।

ध्रुव:- बात बिगड़ती है तो बिगड़ने दो ऐमी, वो मेरे दोस्त है, यदि मेरी बात ना समझ पाए तो फिर किस बात के दोस्त। उस दिन मैंने तुम दोनों का देसी राउडी गर्ल को खूब एंजॉय किया था, आज इन्हे करूंगा।

आरव, अपने सर पर हाथ रखते… "कोई ना, तुम नहीं भी चाहोगे तो भी ये तुम्हारी इक्छा पूरी कर देंगे।"

इधर सिन्हा जी जबसे गाना बजवाना बंद करवाए थे, वहां के कुछ लड़के-लड़कियां हल्ला करने पर उतारू हो गए थे, खासकर कबीर के दोस्त जो बार काउंटर पर पी भी रहे थे और हल्ला भी कर रहे थे। तभी उनमें से एक ने अपस्यु का कॉलर पकड़कर पूछने लगा… "डीजे क्यों बंद है।"..
 
Back
Top