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सुबह को रोशन मामूल तौर से स्कूल के लिए तैयार हुवा मगर वह कोयल को दबे ेंखों देख रहा था हर वक़्त के कहीं कोयल को कल रात वाली बात का पता तो नहीं…. वह सोच रहा था अगर कोयल ने अपनी पंतय पर उस्सकी पानी का दाग देखि होगी तो कुछ समझ sakegi…issi बात का फ़िक्र था रोशन को मगर कोयल बिक्लुल नार्मल था और हर रोज़ की तरह दोनों स्कूल के लिए एक साथ निकले.
मगर रोशन चुपचाप किसम का लड़का था और कोयल हमेशा बकबक किया करती थी और रोशन की टांगें खिंचा करती थी aksar…ab इस दिन को रोशन कुछ ज़्यादा hi बातें कर रहा था कोयल से तो कोयल ने पुछा, “आज सूरज पश्चिम से निकला है किआ?...... » इस बात पर रोशन सिर्फ मुस्कुराया….. अब तो उस्सकी नज़र कोयल की जिस्म पर thi….woh वैसे कभी अपनी छोटी बेहेन को नहीं देखता था, ामगर जो कल रात को हुवा तो अब तो उस्सकी नज़रें कोयल को नंगी कर रहे थे…. अपनी यूनिफार्म में कोयल हॉट दिखती थी, चलते वक़्त कभी कभी हवा की तेज़ रफ़्तार कोयल की स्कर्ट उठा देती और रोशन की ेंखें उस्सकी घुटनों के ऊपर जल्दी से जाते और कोयल की खूबसूरत कुंवारी जांघ का दीदार करते….. कोयल की ब्लाउज कुछ तंग थी और उस्सकी चूचियां उभरे हुवे नज़र आते उस तंग ब्लाउज के ऊपर वह भी रोशन अब निहारता गया….. कोयल ने कुछ ऐसा वैसा नहीं नोटिस किया रोशन की नज़रों के बारे में……
उधर घर में पायल सुबह सुबह राजें के जाने के बाद जल्दी से धानंद की राह में थी….. ऐसा लगता था वह उस्सकी दीवानी है, प्यार जो कर बैठी अपने जेठ को….. धानंद को डर था के कहीं उस्सकी पत्नी न देखेहले के वह पायल से बातें कर रहा है काम पर जाने से pehley….Paayal मुख्या दरवाज़े के बाहर वेट कर रही थी अपने जेठ जी को….. हाथ में कुछ लिए कड़ी थी पायल, जब धानंद निकला तो झट से उसस्के सामने आयी और उस्सको एक छोटा सा पार्सल दिया और कहा, “यह मेरी तरफ से दिन में खाना तो मेरी याद आएगी दिन भर” यह कहकर पायल ने अंदर झांकी के कोई दिख तो नहीं रहा, और क्यों के कोई नहीं था जल्दी के धानंद के गालों पर किश किया मुस्कुराते हुवे और उस्सको ‘bye’ कहकर दौड़ते हुवे वापस अंदर चली गयी अपने बालों को हाथों में झुलाते…..
एकदम छनकहल दिख रही थी इस सुबह को अपनी Paayal…..aur ससुर की नज़र उस पर पड़ी, उस्सको दाल में कुछ कला लग रहा था क्यों के पायल कुछ ज़्यादा hi चंचल लग रही थी….. अब क्यूंकि पिछले रात को बूढ़े ने पायल को खुश नहीं किया था पायल नाराज़ सी थी उस के साथ और ससुर जी उस्सको वह ख़ुशी देना चाहता था जो रात को नहीं दे पाया!.
इस दिन को धानंद की पत्नी का रसोई में रहने का दिन था. पद्मिनी फ्री थी और सरजू उस वक़्त उस्सकी के साथ थी उसस्के कमरे में. सासु जी मंदिर गयी हुवी थी… पायल अपने कमरे को साफ़ करने गयी तो बूढ़े ने सोचा चाह मौका है. आहिस्ते से पायल के कमरे में दाखिल हुवा, पायल झुकी हुवी दरवाज़े से पीठ किये झाड़ू लगा रही थी. उस ने एक छोटा सा चोली और एक लेहंगा पहना हुवा था, चोली में से तो झुकने से आधा बूब्स बाहर निकलना चाहते थे, और गांड तो उस लहंगे में बड़ा मस्त नज़ारा दे रहा था, बूढ़ा देखते hi खड़ा होगया और जल्दी से पीछे से hi पायल को जकरा बाहों में और अपने लुंड को कपडे समेत दबाया पायल के खूबसूरत गांड par…Paayal क्यूंकि ग़ुस्सा थी कल रात वाली बात से, नहीं देना चाहती थी बूढ़े को और नीचे बैठ गयी और बूढ़े का लुंड तो बेचारा उस गांड को दबा न सका, तो बूढ़ा बोलै, “ आरी पायल चाह मौका है ऋ, सासु तेरी मंदिर गयी है और सरजू पद्मिनी के पास है, हम दोनों अकेले है, वक़्त कम है चल थोड़ा मज़ा करलें यार”
मगर पायल ने कहा थोड़ा घुसे में, “नहीं, जब मेरा मैं कर रहा था तब तो आप नहीं कर पाए अब क्यों करने दूँ आप को? बड़े मतलबी हो आप, सिर्फ अपने मतलब से काम रखते हो जी, जाओ यहाँ से कुछ नहीं मिलेगा….” मगर ससुर का तो बहोत मैं कर रहा उस्सको छोड़ने को, और जिस ड्रेस में वह थी उस वक़्त सिर्फ छुड़वाने की तरह ड्रेस हुवी थी, उस वक़्त कोई भी मर्द अगर उस कमरे में ग़ुस्ता तो उस्सको छोड़ना चाहता…. कुछ देर तक छोटा सा बेहेज़ जैसे हुवा दोनों mein….phir बूढ़े ने झपट कर पायल को ज़बरदस्ती से पकड़ा और ताकत इस्तेमाल करते हुवे उस्सको उठाकर उस्सकी बिस्तर पर pakta…..Paayal हैरान होगयी के यह किआ कर रहा है बूढ़ा?!!
पायल ने कहा, “देखो आप ऐसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकते यह ठीक नहीं ….” बूढ़ा पायल को नहीं सुन रहा था पर अपना पंत उतार रहा tha…Paayal खुले मुंह उस्सको देखती रही और सोचा, “यह बूढ़ा तो मेरा रपे करने जा रहा है!!” पायल बिस्तर से उठ hi रही थी के ससुर ने उस्सकी टांगें पाकर कर ज़ोर से खिंचा और ताकत से उस्सकी लेहंगा को ऊपर उठाया…… पायल की बड़ी बड़ी मोती मोती गोरी गोरी जांघें ससुर को दिखा और उस्सने तेज़ी के साथ अपने सर्र लहंगे के नीचे घुसाया और पायल की जाँघों को चाटने लगा….. पायल अब भी उस्सको ढाका दे रही थी और वापस जाने को कह रही थी….. उस्सकी जाँघों को चाटते वक़्त बूढ़े ने अपने हाथों को उस्सकी चोली के ऊपर से hi उस्सकी चूचियों को मसलना शुरू kiya…phir हौले हौले चोली उतर गयी और लेहंगा भी ज़मीन पर पायी गयी…. पायल न न करते करते हाँ हाँ करने लगी…… ससुर इतना मज़ा दे रहा था उस्सको के पायल और मांग करने lagi…uss वक़्त ससुर उस्सकी छूट का रस निचोड़ रहा था और दोनों चूचियों को दीवानों की तरह मसलता जा रहा tha…aur पायल बिस्तर पर एक सांप की तरह रेंग रही थी तड़पते huwe…usski ेंखें जैसे शराब पी राखी है, उस्सकी होंठ लरज़ते हुवे पैमानों की तरह और ससुर का मुंह ने छूट चोर कर उन् होंठों को चाटना और चुस्सना शुरू किया, जब के पायल ने ेंख मुंध ली और अपने बाहों को ससुर के जिस्म को दोनों तरफ से जाकर लिया और अपने नाख़ून को उसस्के पीठ पर गर्ने लगी कसमसाती हुवी…… ससुर ने आहिस्ते आहिस्ते पायल की गालों को चाटते हुवे उस्सकी गले के तरफ बढे और पायल ने अपना सर पीछे के तरफ करदी अपनी लम्बे घने गेसुओं को झटकते हुवे और उस्सकी पूरा छाती बूढ़े के सामने थे तो उस्का मुंह गले के शुरू से चूमते चाटते चूचियों तक गए और एक एक करके दोनों बूब्स और निप्पल्स को उस ने चूसा जब के पायल पागलों की तरह तृप्ति और रैगंटी गयी ससुर के बाहों में….
ाअखिर में बूढ़े ने पायल को गॉड में लिया बिस्तर पर बैठकर, पायल की दोनों जाँघों को दोनों तरफ करके उस्सको अपने लुंड पर बिठाया, छूट लुंड के ऊपर, लुंड को भीगा रही थी और पायल ने अपने दोनों हाथों को ससुर के कांधों पर सपोर्ट के लिए रख कर खुद वही अपना गार्डन हिलने लगी ससुर के लुंड पर और छूट रगड़ती गयी ुसस्स मोठे लौड़े पर यहाँ तक के उस्सने खुद अपने हाथों से लुंड को अपनी छूट में घुसाया और ऊपर निचे उठने बैठने लगी जल्दी जल्दी हम्प्टी हुवे….. बहोत तेज़ी के साथ पायल ससुर के लुंड पर उठक बैठक करती गयी फिर बूढ़े ने भी ज़ोर लगाना शुरू किया और पायल ने महसूस किया के उस्का लुंड उसस्के छूट के अंदर और मोटा होता जा रहा है और लम्बा भी…. पायल को बहोत मज़ा अन्य लगा और वह उछलती गयी मस्ती में उस लौड़े पर जो एक पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रही थी पायल की भीगे हुवे छूट में…… दोनों एक दूसरे को अपने बाहों में जाकर हुवे थे और पायल की छाती ससुर के छाती से रागढ खा रही थी, उस्सकी चूचियां ससुर के सफ़ेद छाती के बालों पर रगड़ते हुवे पायल को दुगना मज़ा दे रही थी…… ऊपर से ससुर के जीब उस्सकी गले और गालों को चाटते जा रहे थे तो पायल ने भी अपने जीब से ससुर के गले और कांधों को छाता और दन्त भी काटे जमके…. आखिरकार ऐसे मज़े ज़्यादा देर तो नहीं theherte…to दोनों एक साथ अपने मंज़िल तक पोंछे और एक साथ hi दोनों झड़ने लगे पायल आवाज़ के साथ “आहहहाआअह श्श्श्शस्स्सस्स्स्सस्स हाआआआ बहोत मज़ाआआ आआरहा haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ोूउउउइइइइ maaaaaaaaaa मैं मर gayiiiiiiiiiii” और बूढ़ा भी दबाए आवाज़ में एक बूढ़े शेर की तरह गहराया, “आआगघघघघघघहहहहह हाआआ shshshssssssss”…aur हुवी दोनों की ख्वाहिश पूरी सासु के आने से पहले……. उधर से पद्मिनी सरजू को वापस करने आरही थी दरवाज़े के पास उस्सने दोनों को मज़ा का इन्तहा पर पोहोचते सुना तो दबे पाऊँ वापस सरजू को अपने hi कमरे में लगाई फिर से…….
तो बे कॉन्टिनोएड……………………..
सुबह को रोशन मामूल तौर से स्कूल के लिए तैयार हुवा मगर वह कोयल को दबे ेंखों देख रहा था हर वक़्त के कहीं कोयल को कल रात वाली बात का पता तो नहीं…. वह सोच रहा था अगर कोयल ने अपनी पंतय पर उस्सकी पानी का दाग देखि होगी तो कुछ समझ sakegi…issi बात का फ़िक्र था रोशन को मगर कोयल बिक्लुल नार्मल था और हर रोज़ की तरह दोनों स्कूल के लिए एक साथ निकले.
मगर रोशन चुपचाप किसम का लड़का था और कोयल हमेशा बकबक किया करती थी और रोशन की टांगें खिंचा करती थी aksar…ab इस दिन को रोशन कुछ ज़्यादा hi बातें कर रहा था कोयल से तो कोयल ने पुछा, “आज सूरज पश्चिम से निकला है किआ?...... » इस बात पर रोशन सिर्फ मुस्कुराया….. अब तो उस्सकी नज़र कोयल की जिस्म पर thi….woh वैसे कभी अपनी छोटी बेहेन को नहीं देखता था, ामगर जो कल रात को हुवा तो अब तो उस्सकी नज़रें कोयल को नंगी कर रहे थे…. अपनी यूनिफार्म में कोयल हॉट दिखती थी, चलते वक़्त कभी कभी हवा की तेज़ रफ़्तार कोयल की स्कर्ट उठा देती और रोशन की ेंखें उस्सकी घुटनों के ऊपर जल्दी से जाते और कोयल की खूबसूरत कुंवारी जांघ का दीदार करते….. कोयल की ब्लाउज कुछ तंग थी और उस्सकी चूचियां उभरे हुवे नज़र आते उस तंग ब्लाउज के ऊपर वह भी रोशन अब निहारता गया….. कोयल ने कुछ ऐसा वैसा नहीं नोटिस किया रोशन की नज़रों के बारे में……
उधर घर में पायल सुबह सुबह राजें के जाने के बाद जल्दी से धानंद की राह में थी….. ऐसा लगता था वह उस्सकी दीवानी है, प्यार जो कर बैठी अपने जेठ को….. धानंद को डर था के कहीं उस्सकी पत्नी न देखेहले के वह पायल से बातें कर रहा है काम पर जाने से pehley….Paayal मुख्या दरवाज़े के बाहर वेट कर रही थी अपने जेठ जी को….. हाथ में कुछ लिए कड़ी थी पायल, जब धानंद निकला तो झट से उसस्के सामने आयी और उस्सको एक छोटा सा पार्सल दिया और कहा, “यह मेरी तरफ से दिन में खाना तो मेरी याद आएगी दिन भर” यह कहकर पायल ने अंदर झांकी के कोई दिख तो नहीं रहा, और क्यों के कोई नहीं था जल्दी के धानंद के गालों पर किश किया मुस्कुराते हुवे और उस्सको ‘bye’ कहकर दौड़ते हुवे वापस अंदर चली गयी अपने बालों को हाथों में झुलाते…..
एकदम छनकहल दिख रही थी इस सुबह को अपनी Paayal…..aur ससुर की नज़र उस पर पड़ी, उस्सको दाल में कुछ कला लग रहा था क्यों के पायल कुछ ज़्यादा hi चंचल लग रही थी….. अब क्यूंकि पिछले रात को बूढ़े ने पायल को खुश नहीं किया था पायल नाराज़ सी थी उस के साथ और ससुर जी उस्सको वह ख़ुशी देना चाहता था जो रात को नहीं दे पाया!.
इस दिन को धानंद की पत्नी का रसोई में रहने का दिन था. पद्मिनी फ्री थी और सरजू उस वक़्त उस्सकी के साथ थी उसस्के कमरे में. सासु जी मंदिर गयी हुवी थी… पायल अपने कमरे को साफ़ करने गयी तो बूढ़े ने सोचा चाह मौका है. आहिस्ते से पायल के कमरे में दाखिल हुवा, पायल झुकी हुवी दरवाज़े से पीठ किये झाड़ू लगा रही थी. उस ने एक छोटा सा चोली और एक लेहंगा पहना हुवा था, चोली में से तो झुकने से आधा बूब्स बाहर निकलना चाहते थे, और गांड तो उस लहंगे में बड़ा मस्त नज़ारा दे रहा था, बूढ़ा देखते hi खड़ा होगया और जल्दी से पीछे से hi पायल को जकरा बाहों में और अपने लुंड को कपडे समेत दबाया पायल के खूबसूरत गांड par…Paayal क्यूंकि ग़ुस्सा थी कल रात वाली बात से, नहीं देना चाहती थी बूढ़े को और नीचे बैठ गयी और बूढ़े का लुंड तो बेचारा उस गांड को दबा न सका, तो बूढ़ा बोलै, “ आरी पायल चाह मौका है ऋ, सासु तेरी मंदिर गयी है और सरजू पद्मिनी के पास है, हम दोनों अकेले है, वक़्त कम है चल थोड़ा मज़ा करलें यार”
मगर पायल ने कहा थोड़ा घुसे में, “नहीं, जब मेरा मैं कर रहा था तब तो आप नहीं कर पाए अब क्यों करने दूँ आप को? बड़े मतलबी हो आप, सिर्फ अपने मतलब से काम रखते हो जी, जाओ यहाँ से कुछ नहीं मिलेगा….” मगर ससुर का तो बहोत मैं कर रहा उस्सको छोड़ने को, और जिस ड्रेस में वह थी उस वक़्त सिर्फ छुड़वाने की तरह ड्रेस हुवी थी, उस वक़्त कोई भी मर्द अगर उस कमरे में ग़ुस्ता तो उस्सको छोड़ना चाहता…. कुछ देर तक छोटा सा बेहेज़ जैसे हुवा दोनों mein….phir बूढ़े ने झपट कर पायल को ज़बरदस्ती से पकड़ा और ताकत इस्तेमाल करते हुवे उस्सको उठाकर उस्सकी बिस्तर पर pakta…..Paayal हैरान होगयी के यह किआ कर रहा है बूढ़ा?!!
पायल ने कहा, “देखो आप ऐसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकते यह ठीक नहीं ….” बूढ़ा पायल को नहीं सुन रहा था पर अपना पंत उतार रहा tha…Paayal खुले मुंह उस्सको देखती रही और सोचा, “यह बूढ़ा तो मेरा रपे करने जा रहा है!!” पायल बिस्तर से उठ hi रही थी के ससुर ने उस्सकी टांगें पाकर कर ज़ोर से खिंचा और ताकत से उस्सकी लेहंगा को ऊपर उठाया…… पायल की बड़ी बड़ी मोती मोती गोरी गोरी जांघें ससुर को दिखा और उस्सने तेज़ी के साथ अपने सर्र लहंगे के नीचे घुसाया और पायल की जाँघों को चाटने लगा….. पायल अब भी उस्सको ढाका दे रही थी और वापस जाने को कह रही थी….. उस्सकी जाँघों को चाटते वक़्त बूढ़े ने अपने हाथों को उस्सकी चोली के ऊपर से hi उस्सकी चूचियों को मसलना शुरू kiya…phir हौले हौले चोली उतर गयी और लेहंगा भी ज़मीन पर पायी गयी…. पायल न न करते करते हाँ हाँ करने लगी…… ससुर इतना मज़ा दे रहा था उस्सको के पायल और मांग करने lagi…uss वक़्त ससुर उस्सकी छूट का रस निचोड़ रहा था और दोनों चूचियों को दीवानों की तरह मसलता जा रहा tha…aur पायल बिस्तर पर एक सांप की तरह रेंग रही थी तड़पते huwe…usski ेंखें जैसे शराब पी राखी है, उस्सकी होंठ लरज़ते हुवे पैमानों की तरह और ससुर का मुंह ने छूट चोर कर उन् होंठों को चाटना और चुस्सना शुरू किया, जब के पायल ने ेंख मुंध ली और अपने बाहों को ससुर के जिस्म को दोनों तरफ से जाकर लिया और अपने नाख़ून को उसस्के पीठ पर गर्ने लगी कसमसाती हुवी…… ससुर ने आहिस्ते आहिस्ते पायल की गालों को चाटते हुवे उस्सकी गले के तरफ बढे और पायल ने अपना सर पीछे के तरफ करदी अपनी लम्बे घने गेसुओं को झटकते हुवे और उस्सकी पूरा छाती बूढ़े के सामने थे तो उस्का मुंह गले के शुरू से चूमते चाटते चूचियों तक गए और एक एक करके दोनों बूब्स और निप्पल्स को उस ने चूसा जब के पायल पागलों की तरह तृप्ति और रैगंटी गयी ससुर के बाहों में….
ाअखिर में बूढ़े ने पायल को गॉड में लिया बिस्तर पर बैठकर, पायल की दोनों जाँघों को दोनों तरफ करके उस्सको अपने लुंड पर बिठाया, छूट लुंड के ऊपर, लुंड को भीगा रही थी और पायल ने अपने दोनों हाथों को ससुर के कांधों पर सपोर्ट के लिए रख कर खुद वही अपना गार्डन हिलने लगी ससुर के लुंड पर और छूट रगड़ती गयी ुसस्स मोठे लौड़े पर यहाँ तक के उस्सने खुद अपने हाथों से लुंड को अपनी छूट में घुसाया और ऊपर निचे उठने बैठने लगी जल्दी जल्दी हम्प्टी हुवे….. बहोत तेज़ी के साथ पायल ससुर के लुंड पर उठक बैठक करती गयी फिर बूढ़े ने भी ज़ोर लगाना शुरू किया और पायल ने महसूस किया के उस्का लुंड उसस्के छूट के अंदर और मोटा होता जा रहा है और लम्बा भी…. पायल को बहोत मज़ा अन्य लगा और वह उछलती गयी मस्ती में उस लौड़े पर जो एक पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रही थी पायल की भीगे हुवे छूट में…… दोनों एक दूसरे को अपने बाहों में जाकर हुवे थे और पायल की छाती ससुर के छाती से रागढ खा रही थी, उस्सकी चूचियां ससुर के सफ़ेद छाती के बालों पर रगड़ते हुवे पायल को दुगना मज़ा दे रही थी…… ऊपर से ससुर के जीब उस्सकी गले और गालों को चाटते जा रहे थे तो पायल ने भी अपने जीब से ससुर के गले और कांधों को छाता और दन्त भी काटे जमके…. आखिरकार ऐसे मज़े ज़्यादा देर तो नहीं theherte…to दोनों एक साथ अपने मंज़िल तक पोंछे और एक साथ hi दोनों झड़ने लगे पायल आवाज़ के साथ “आहहहाआअह श्श्श्शस्स्सस्स्स्सस्स हाआआआ बहोत मज़ाआआ आआरहा haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ोूउउउइइइइ maaaaaaaaaa मैं मर gayiiiiiiiiiii” और बूढ़ा भी दबाए आवाज़ में एक बूढ़े शेर की तरह गहराया, “आआगघघघघघघहहहहह हाआआ shshshssssssss”…aur हुवी दोनों की ख्वाहिश पूरी सासु के आने से पहले……. उधर से पद्मिनी सरजू को वापस करने आरही थी दरवाज़े के पास उस्सने दोनों को मज़ा का इन्तहा पर पोहोचते सुना तो दबे पाऊँ वापस सरजू को अपने hi कमरे में लगाई फिर से…….
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