Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani - Page 5 - SexBaba
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Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani

अपडेट 23 अशिता विथ इंस्पेक्टर राणे

इंस्पेक्टर राणे वो शख्स था जिस्सके नाम से बड़े बड़े क्रिमल डरते थे. 55 साल का बहुत hi कड़क और मज़बूत आदमी था जो क्राइम के खिलाफ बहोत hi ाचा काम कर रहा था पिछले 30 सालों से. उस्का नाम इज़त से लिया जाता था शहर में. बड़े बड़े माफिया के लोग उस से घबराते थे, क्यूंकि जब वो एक केस लेता था तो उसस्के अंजाम तक ज़रूर पहुँचता था. इंस्पेक्टर राणे से वकील लोग भी घबराते थे, क्यूंकि जो वकील पैसों के खातिर वैसे माफिया वालों को बचते थे, राणे उन् वकीलों पर भी केस करता और कई बार वकील को भी जेल भेजा है उस्सने.

खुद वकालत भी कर चूका था राणे साहब मगर सीड ब्रांच में उस से बेहतर कोई था hi नहीं तो सर्कार ने उस्सको ज़्यादा तनख्वा देकर अपने पोस्ट पर कायम रखा था.

अशिता जब प्रिय के घर पहुंची तब तक प्रिय ने अपने मां को बता दिया था के अशिता उन् से मिलने आरहे हैं तो वो वेट कर रहा था अशिता का और जब वो मिले तो अशिता ने बुसस इतना बताया के उस डॉक्टर ने उस्सको मोलेस्ट किया और उसस्के प्राइवेट पिक्स जीन में कुछ तक़रीबन नुदेस थे, डॉक्टर ने अपने मोबाइल में ट्रांसफर किये हैं और इंटरनेट पर लगाने की धमकी दे रहा है.

राणे साहब समझ गया क्यूंकि उस्सने ऐसे सेंकरों केस आलरेडी हैंडल कर लिए थे इन् दिनों; क्यूंकि आये दिन ऐसे केस उस्सको मिलता रहता था तो उसस्के लिए यह एक खेल जैसा था हैंडल करना.

अशिता के पेरेंट्स ने कुछ नहीं सुना क्यूंकि राणे साहब समझ गए के एक जवान लड़की कुछ बताना चाहती है और प्राइवेट हैं तो उस से अपनी कार में बात किया उस्सने ताके प्रिय के घरवालों को कुछ पता नाह चले. अशिता ने दरख्वास्त किये राणे साहब से के इस बात को रफ्फा दफा करें ताके उस्का नाम उसस्के पेरेंट्स तक नाह पहुंचे और डाब कर रह जाए, डॉक्टर को दर्राने धमकाने को कहा अशिता ने और कुछ भी ऑफिसियल नहीं करने की मांग किये उस्सने इंस्पेक्टर साहब से – मतलब अगर कोर्ट का केस हुआ तो अशिता को कोर्ट जाना पड़ेगा, उसस्के पेरेंट्स को सब पता चल जाएगा, इस लिए अशिता ने समझाया के डॉक्टर बस सबक मिलना चाहिए और उस्सको कुछ इस तरह से डराएं के कभी भी वो किसी और के साथ ऐसा बर्ताव नाह करें.

राणे सब समझ गया और कहा,

“बेटी तुम फ़िक्र मत करो मैं सब समझ गया. उस्सको तो मैं ऐसा सबक सिखाऊंगा के अपने ज़िन्दगी में अब वो किसी भी औरत या लड़की के तरफ ेंख उठा कर भी नहीं देखेगा. इस्सके लिए कोर्ट जाना या उस्सको जेल होना ज़रूरी नहीं है. बहोटों को मैं ने ठीक किया है ऐसे hi कोर्ट कचेरी लेजाए बिना. मैं सब समझ गया और तुम बेफिक्र रहो नाह तो वो कभी किसी और को मोलेस्ट करेगा और नाह तेरी पिक्स को अपलोड करेगा.”

प्रिय वेट कर रही थी बरामदे में और जब दोनों कार से निकले तो प्रिय जल्दी से अशिता को बाहों में भरके पूछा के ऐसा किआ हो गया. अशिता ने कहा के उस्सको बाद में सब बतएगी फिलहाल राणे साहब के साथ जाना है उससे. तो प्रिय ने कहा के वो भी आएगी साथ में. प्रिय के मां ने कहा,

“ठीक है तू भी चलना चाहती है तो चल साथ अपने सहेली की.”

राणे साहब ने सोच लिया था के कैसे केस को हैंडल करना है बिना ऑफिसियल केस बनाते हुए, यह उसस्के बाएं हाथ का खेल था. पहले वो दोनों लड़कियों को लेकर अपने ऑफिस गया और 3 और ऑफिसर्स को साथ में लिया, जो राणे साहब के पीछे अपने कार में फॉलो करते हुए गए, और सब हॉस्पिटल पहुंचे.

राणे साहब ने अपने उन् 3 ऑफिसर्स को बात समझा दिया और सब उस डॉक्टर के ऑफिस गए और खुशकिस्मती से वो वहीँ मिला. अशिता सोच रहा था के कहीं वो घर वापस तो नहीं चला गया होगा क्यूंकि उस वक़्त शाम के 5.30 हो चुके थे.

खुद राणे साहब और उनके 3 ऑफिसर्स सिविल ड्रेस में थे, किसी ने भी यूनिफार्म नहीं पहना हुआ था, मगर रिवाल्वर और हड़कड़ी थे उनके साथ और उनके ईद कार्ड्स भी सीड वाला. वो पेओन जिसस्ने अशिता को उस हालत में निकलते देखा था वो अब भी वहीँ मौजूद था और अशिता को इतने आदमियों के साथ देख कर समझ गया के लफड़ा होने वाला है. तो अशिता ने उस पेओन के तरफ ऊँगली दिखाते हुए राणे साहब से कहा के उस आदमी ने सब देखा था जब वो बाहर निककली थी अपने खुले हुए ब्लाउज में, वो विटनेस है.

तो डॉक्टर से मिलने से पहले hi राणे साहब ने सबसे पहले उस पेओन से कहा,

“सुन भाई हम सीड वाले हैं, तुम ने जो कुछ भी देखा मुझे अभी इस वक़्त बता वार्ना तुझे भी उठा के लेजाऊंगा!”

पेओन थरथर कांपने लगा और कहा,

“साहब मैं ने तो कुछ नहीं किया हाँ बुसस देखा था एहि!”

राणे: “अबे किआ देखा था वही पूछ रहा हूँ और किआ जानता है तू अभी बता वार्ना देख हत्कडी तेरे कलाई में जाने के लिए बेचैन है!”

पेओन: “साहब यह डॉक्टर ने इस लड़की को शायद कुछ किया अंदर, क्यूंकि यह निकली तो उस्सको गाली देते हुए निकली और इस्सके कपडे खुले हुए थे छाती पर!”

राणे: “हाँ ठीक है ाचा तुझे कुछ नहीं करूँगा, मगर फिलहाल तू भी चल अंदर डॉक्टर के सामने कहना जो अभी मुझसे कहा! या वो तुझे अंदर देख कर समझ जाएगा के तू विटनेस है वही काफी होगा मेरे लिए”

पेओन ने दररते हुए हां में सर हिलाया.

और जब ऑफिस के दरवाज़े को नॉक किया गया तो डॉक्टर ने जैसे ओपन किया सख्ती से तीनों अफसर ने उस्सको अंदर धकेला और सबके सब अशिता, प्रिय, अग्रवाल और पेओन अंदर ग़ुस्से.

हैरत की बात यह थी के वो डॉक्टर इंस्पेक्टर राणे को जानता था और उसस्के कारनामों को भी. राणे एक सेलिब्रिटी था क्राइम वर्ल्ड में और उस्का ज़िक्र अक्सर हुआ करता था मीडिया में तो डॉक्टर उस्सको पहचान गया देखते hi और बहोत घबरा गया सब समझते हुए के अशिता ने उस्सको रिपोर्ट कर दिया है.

राणे ने अपना एक पेयर को उसस्के सोफे पर रख कर उसस्के तरफ झुकते हुए पूछा,

“क्यों डॉक्टर? सब उगलता है या घसिटके ठाणे लेचल कर पीतून तुझे?!”

डॉक्टर ने कहा,

“सर, मैं ने कुछ नहीं किया वो खुद आयी थी मेरे पास!”

राणे ने एक सरकास्टिक हंसी हँस्ते हुए कहा,

“साला डॉक्टर है तो लाखों पेशेंट्स और उनके रिलेटिव्स तो आएंगे hi तेरे पास, तो तू किआ उंनका फायदा उठाएगा मादरचोद, अभी दिखता हूँ तुझे” और एक घूंसा मारा उसस्के छाती पर!”

फिर तुरंत उसस्के हाथ मैं हड़कड़ी लगाया, उसस्के मोबाइल ज़प्त किया और पूछा के और कितने मोबाइल हैं उसस्के, जब सिर्फ एक hi कहा डॉक्टर ने तो उसस्के मोबाइल को राणे ने अपने जेब में रखा और ऑफिस से बाहर निकला उस्सको घसीटते हुए.

वो गिड़गिड़ाने लगा,

“सर मेरा इज़त है हॉस्पिटल में हड़कड़ी तो निकल दीजिये मैं जाने को तैयार हूँ मगर इज़त से लेचलो भाई!”

राणे ने कहा,

“और इस लड़की की इज़त नहीं थी जब तेरे पास आयी थी तब?”

फिर राणे ने एक अफसर से एक काला कपडा लिया और डॉक्टर के हड़कड़ी को ढँक दिया और तीनों ऑफिसर्स, उसस्के काँधे पर हाथ रख के जैसे सब पुराने दोस्त हैं, चलते हुए कार के तरफ गए. हाँ वो तीन ऑफिसर्स अपने कार में आये थे पीछे फॉलो करते हुए, और अब जाते वक़्त भी उनके कार में लेजाया गया डॉक्टर को.

और राणे साहब दोनों लड़कियों को अपने अपने घर चौररने गया.

अशिता ने फरमाईश किये राणे साहब से के कोर्ट का केस नाह करें बुसस डॉक्टर के मोबाइल से उसस्के पिक्स डिलीट करवादे और उस्सको चितवनि दे के कभी एक भी पिछ लीक हुआ तो उस्का खैर नहीं.

राणे साहब समझ गया अशिता की बात को और उस्सको बेफिक्र रहने को कहा. उस्सने यह भी नहीं पूछा के किश ने पिक्स लिए कैसे वो पिक्स डॉक्टर के हाथ लगा ेट्स…. क्यूंकि राणे साहब बहोत तजुर्बेकार आदमी था और उस्सको पता था के आज कल के जवान लड़के और लड़कियां हर तरह के पिक्स लेते हैं और मोबाइल में सेव करते हैं अपने. और उस्सको जान्ने की ज़रुरत भी नहीं थी उस्सको बुसस उस डॉक्टर से डील करना था और उस्सको पिक्स को इंटरनेट पर अपलोड करने से रोकना था. तो उस्सको पता था के उस्सको किआ करना है.

अशिता ने उनको थैंक्स कहा, और ख़ुशी से उसस्के गाल पर एक किश किया और प्रिय को bye कहा कल कॉलेज में मिलकर सब बात बताने की प्रॉमिस करते हुए.

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घर आने के बाद अशिता के पेरेंट्स ने हज़ारों सवाल किये उस से और अशिता ने बड़े होशियारी से दोनों को बहाना बना कर झूट बात बतायी के प्रिय को किसी लड़के ने मोलेस्ट किया था और उसस्के मां के साथ उस लड़के को अस ा विटनेस पहचानना था उससे इसी लिए उसस्के मां ने अशिता को बुलवाया था. यह बात खुद राणे ने अशिता को अपने घरवालों को बोलने के लिए कहा उस्सको बचाने के लिए और प्रिय के सामने कहा ताके अगर अशिता के पेरेंट्स प्रिय से पूछे तो दोनों एक hi जवाब दें.

और फिर विहान के बारे में बातें हुई तो अशिता ने सब समझाया के स्पेशलिस्ट डॉक्टर अग्रवाल जो ब्रेन सर्जन है वो विहान का केस ले चूका है और अब वही सब फॉलो करेगा.

सर्जन का नाम सुनकर अशिता की माँ रोने लगी यह कहते हुए के विहान बहोत सीरियस है और अब उस्का ब्रेन ऑपरेशन होगा…….

मगर अशिता ने सब बात समझाया के ब्लड क्लॉट्स हैं ब्रेन में जो इंजेक्शन और दवा से मिट सकते हैं, इस लिए ऑपरेशन की ज़रुरत नहीं अभी हाँ अगर क्लॉट्स नहीं मिठे तब शायद ऑपरेशन करना पड़ेगा…..

अशिता की माँ बेहाल थी उस वक़्त.

फिर अशिता भी अपने कमरे में जाकर विहान को सोचते हुए रोने लगी. उस से आज अछि तरह से मिल भी नहीं पायी, उसस्के पास ठीक से बैठ भी नहीं पायी उस्सको जी भरके देख नहीं पायी इस्सके ग़म था अशिता को और अपने भाई की याद में काफी देर तक रोटी रही.

रात को बारह बजने के बाद बीएड पर अशिता ने विहान की मोबाइल की गैलरी ओपन किया और अपने खुद के पिक्स देखने लगी. वो बहोत हैरान हुई के कब कब विहान ने उसस्के पिक्स लिए थे के उस्सको पता भी नहीं था बिल्कुल. सच में टोटल 2000 से ज़्यादा पिक्स थे. अशिता डर रही थी के कहीं उस डॉक्टर ने इंटरनेट पर उन् पिक्स को अपलोड तो नहीं कर दिया जिस वक़्त वो राणे साहब से मिलने गयी हुई थी. इस बात का बहोत डर था अशिता को. और मोबाइल की बैटरी ऑफ होने वाली थी तो अशिता ने चार्ज पर लगा दिया और रेस्ट करने गयी विहान को ख्यालों में बसाये हुए….

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट अपडेट इम्मेडिएटली….
 
अपडेट 24 विजिटिंग विहान थें कॉलेज

अगले दिन सुबह को आशिता विहान को देखने गयी हॉस्पिटल और बहोत खुश हुई विहान को जाएगा हुआ देख कर.

विहान को अशिता ने बाँहों में भर लिया और उसस्के चेहरे को चूमती रही हज़ारों बार अपने पेरेंट्स के सामने. अशिता अपनी माँ को विहान से मिलने भी नहीं दे रही थी, उस्सने विहान को अपने बाहों में भरा रखा था करीबन 20 मिनट तक और विजिटिंग हॉर्स सुबह को सिर्फ आधे घंटे का था.

विहान कुछ भी नहीं बोल रहा था, बुसस सब को देख रहा था और कुछ नहीं समझ रहा था. अशिता विहान से बार बार कहती जा रही थी,

“मुझे माफ़ कार्डो भाई, प्लीज मुझे माफ़ कार्डो, मैं ने ज़्यादती की है तुम पर भाई मुझे माफ़ कार्डो प्लीज. अब वैसा कुछ भी नहीं होगा हम एक हैं भाई,” और आहिस्ते से विहान के कान में कहा, “मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ भाई, मुझे तुमसे कोई अलग नहीं कर सकता, इतने दिनों तक तुमको बहोत दुःख दिए हैं मैं ने भाई अब देखना उन् सभी दुखों को मैं hi मिटाऊँगी.”

अशिता तो मगन थी विहान को उस तरह से बाहों में भर कर के उस्सको ख्याल नहीं था के विहान ने एक वर्ड भी नहीं कहा था पिछले 15 मिनटों में और जिस तरह से अशिता ने विहान को अपने सीने से सताया हुआ था विहान का पूरा चेहरा अशिता के बूब्स पर दबे हुए थे, इतना के उस्सकी ब्रा की स्ट्राप बाहर लटक गए थे और सुमन ने देखते हुए अनिरुद को इशारा करते हुए दिखाया!

तब अनिरुद ने धीरे से अशिता से कहा, “अपनी ड्रेस सम्भालो आशु!”

सिर्फ तब अशिता ने विहान को अपने सीने से अलग करते हुए अपने ड्रेस को ठीक किया और तब माँ मिल पायी अपने बेटे से.

विहान ने अपने माँ के सीने से लगते हुए कहा,

“मेरा सर पहात रहा है माँ! बहोत दर्द हो रहा है, सहा नहीं जाता लगता है अब पहात के दो टुकड़े हो जाएगा मेरा सर का…. क्यों इतना दर्द हो रहा है माँ और मैं तुम सब को ठीक से देख भी नहीं पा रहा हूँ, सब कुछ हिल रहे हैं और डबल, ट्रिपल दिख रहे हैं मुझे!!”

यह सुनकर अशिता दौड़ती हुई नर्स के रूम गए और सब बताया नर्स लोगों को. वो लोग आये और विहान को इंजेक्शन लगाया और वो सो गया!!!

अब अशिता ज़ोरों से रोने लगी यह कहते हुए के विहान ने उस से बिल्कुल भी बात नहीं किया.

बाप ने उस्सको सीने से लगाते हुए उसस्के सर पर हाथ फरते हुए कहा,

“आरी इतनी देर तो तुम ने उस्सको अपने बाँहों में भरा था तो कैसे बोलता वो, तू hi तो सब बोले जा रही थी उस्सको बोलने का मौका दिया hi कहाँ तुमने, चुप कर अब!”

अशिता बिलकते हुए बोली,

“उस्सने मम्मी से बात किये, मम्मी से बोलै उस्का सर दुःख रहा है मगर मुझसे एक लव्ज़ भी नहीं बोलै, बिल्कुल खामोश था, मुझको गले से भी नहीं लगाया, सिर्फ मैं ने उस्सको गले लगाया, मैं ने उस्सको किश किया उस्सने तो नहीं किया, किआ उस्सने मुझको नहीं पहचाना पापा? क्यों मुझसे बात नहीं किया उस्सने? मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा पापा, उस डॉक्टर अग्रवाल से मिलकर पूछना चाहिए, कहीं ऐसा नाह हो के उस्सकी याद्दाश में कोई प्रॉब्लम हो, उस्सकी मेमोरी डैमेज तो नहीं हुई है नाह? पापा चलो डॉक्टर अग्रवाल को ढूंढ़ते हैं अभी इसी वक़्त!”

सुमन ने भी जैसे आग में तेल डालते हुए कहा,

“सच में मुझे भी बहोत ताहजुब हुआ के मेरे विहान इतना खामोश क्यों था जब अशिता उस से लिपटी हुई थी? कहीं उस्सने इस्को नहीं पहचाना किआ? हे राम अब किआ होगा?!”

अनिरुद ने सुमन के तरफ मुड़कर दिक्क़ते हुए कहा,

“आरी तू चुप कर क्यों डरा रही हो अशिता को?” और फिर अपनी बेटी के गाल सहलाते हुए अनिरुद ने कहा,

“बीटा इतनी सुबह को स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आये होंगे, उस्सको दिन में 10 बजने के बाद मिला जा सकता है, वो आएगा यहाँ विहान से मिलने नाह, तब मिल पाएंगे उस से, अभी कहाँ मिलेगा वो?”

रट हुए अशिता घर वापस गयी और कॉलेज के लिए तैयार होते वक़्त भी विहान को याद कर कर के रोटी रही. जब अपने कपडे बदल रही थी तो उस दिन को बहोत याद किया जिस दिन विहान ने उस्सको उसस्के सामने कपडे बदलने को कहा था और अशिता ने उसस्के ख़ुशी के लिए सारे कपडे उतारे थे उसस्के सामने और बस में कॉलेज जाते वक़्त एक साथ बैठे थे और विहान ने उस्सको अपनी गर्लफ्रेंड कहा था और पूछा था “तू मेरी गर्लफ्रेंड है नाह” और अशिता ने हाँ में सर हिलाया था, कितना प्यार था उन् दोनों में उन् दिनों को यह सब सोच सोच कर अशिता बहोत रो रही थी.

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कॉलेज में मौका पा कर प्रिय ने अशिता से सब कुछ उससे बताने को कहा. और अशिता ने सब कुछ डिटेल में बता दिया प्रिय को उसस्के और उसस्के भाई के बारे में.

प्रिय ने उस्सको थोड़ा चेररते हुए कहा,

“हम्म्म तू तो बड़ी चुप्पी रुस्तम निकली ऋ, तेरा भाई hi तेरा बॉयफ्रेंड है और इतने दिनों तक तू मुझसे छुपाती रही, साली, कामिनी कहीं की, पता है; मुझे शक था बहोत पहले से hi…. मगर मैं तुझसे कहने से दरर्ति थी के तू कहीं नाराज़ नाह हो जाए…. सब दीखता था कॉलेज में जिस तरह तुम दोनों गफ बर्फ की तरह रहा करते थे हर वक़्त एक साथ, खाना एक साथ, आना एक साथ, बस में जाते वक़्त बैठना एक साथ मुझे थोड़ा शक तो था. और तुम दोनों के अदाओं से कुछ तो ज़रूर दीखता था… हम्म्म और वो तेरे गर्दन पर और छाती पर लोवेबिट्स उसी ने किये थे नाह और मुझको चार्ज लेने को कह रही थी और कहा था के तेरा एक बॉयफ्रेंड है हम्म्म? कुट्टी चीज़ है टब hi साली! हाँ मगर सही कहा था मुझसे के तेरे बॉयफ्रेंड ने तेरे चूचियों पर लोवेबिट्स किये थे हीहीहीहीही…. आरी बता मुझे कब करता था वो ये सब तेरे साथ? रात को सोते वक़्त, हाय कितना मज़ा अत होगा तेरे को नाह? रात को भैया बने सैन्य के बाहों में चुम्मा छाती करना हाय रे मैं तो गीली हो गयी रे तेरी और तेरे भाई के उन् हरकतों से …. मगर यार तू ने इतने दिनों तक सच में बहोत ज़ुल्म किया उस बेचारे पर, क्यों साफ़ साफ़ नहीं बता दिया उससे के तेरे पापा ने तुझसे दूरी रखने को कहा था या सेक्स नहीं करने को कहा था इस लिए तू बचना चाहती थी के कहीं वो तुझे प्रेग्नेंट नाह करदे? साफ़ साफ़ बता देती तो किआ हो जाता, उस्सको इतना दुःख तो नहीं सहना पड़ता नाह? और आज वो हॉस्पिटल में नहीं होता, तेरी वजह से उस्सने पीना शुरू किया और ज़रूर तेरे याद में उस रात को लड़खड़ाते ारः होगा के कार ने थोक दिया उससे….. तू भी नाह पागल है इतना प्यार मिल रहा था तुझे घर में hi, और तू उस से दूर भाग रही थी, अरे यार काश मेरा ऐसा भाई होता तो मैं तो हर रात और दिन उसस्के साथ बुसस मज़ा करती, उस्सको खूब मज़ा देती और खुद भी बहुत एन्जॉय करती मैं… मगर साला मेरी किस्मत में तो सिर्फ बहनें hi लिखी है, सबके सब जेलस सिस्टर्स!”

अशिता ने जवाब में सफाई देते हुए कहा,

“तू नहीं समझेगी के मैं ने क्यों उस्सको नहीं बताया था के मैं ने पापा को सब बता दिया था के हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं और सेक्स के कितना करीब हैं सब कुछ करते हुए. मैं ने सोचा वो किआ सोचेगा के पापा को अपने सीक्रेट के बारे में बता दिया, वो सोचता के मैं ने उससे धोका किया हमारे बीच के प्राइवेट बातों को बता कर, मुझे डर भी लग रहा था के उस्सको कैसे बताऊँ के हम दोनों के बीच इतना कुछ होता है, कैसे उस्सको बताऊँ के मैं ने पापा से कह दिया के मेरे बूब्स को उस्सने चूसा था और हमेशा चुस्ता है और मुझ पर अपना डिक रगड़ता है रात को और ेजकुलाते करता है मेरे बॉडी पर? मैं किआ उस्सको यह सब बता पाती? मुझे खुद शर्म आती बहोत यह सब कुछ उस्सको बताते हुए. और वो किआ सोचता? कहीं वो यह नाह सोचने लगता के मेरे और पापा के बीच भी कुछ है तभी मैं ने पापा को सब कुछ इतनी आसानी से बता दिया, यह डर था मुझे, और यार तब उम्र भी कम थी मेरी, मैं नादान भी तो थी नाह तब यार! पता नहीं शायद तू ठीक कहती है के मुझे तभी उस्सको सब बोल देना चाहिए था मगर मुझसे नहीं बुआ यार… और पापा के उस बात से मैं बिल्कुल डर गयी थी के मैं प्रेग्नेंट हो गयी तब किआ होगा? और जिस तरह से विहान मुझसे क्लोज हो गया था सच में वो मुझको पेनेत्रते भी करता तो मैं करने देती क्यूंकि मुझे भी उस्सकी ज़रुरत महसूस होने लगी थी, और पेनेत्रते करता और अंदर ेजकुलाते करता तो मैं तो कण्ट्रोल नहीं कर पाती यार और सच में प्रेग्नेंट हो जाती तब किआ होता उस बाली उम्र में, बाप रे यह सब सोच कर मैं ने दूरी रखना बेहतर समझा इसी लिए कुछ नहीं बताया उस्सको!! बुसस एहि मेरी ग़लती थी!”

प्रिय अपनी प्यारी सहेली की बात को समझ गयी. और उस्सको गले से लगाते हुए फिर से उसे चेररते हुए कहा,

“okay यार मगर यार तू बहुत लकी है ऋ, अपने खुद के भाई के साथ इतना कुछ करना कितना मज़ा अत होगा तुझे नाह ऋ?! ….. और सुन, कहीं पापा को भी खुश तो नहीं करने लगी तू? हम्म्म? हीहीहीहीहीही”

अशिता: “देखा नाह? अब तू ने hi ऐसा सोचा, तो विहान किआ कुछ ऐसा नहीं सोचता? इसी लिए मैं ने उस्सको नहीं बताया!”

प्रिय: “अरे सीरियस मत ले मैं तो मज़ाक कर रही हूँ यार!”

अशिता ने उदास होते हुए कहा,

“यार 2 साल से ज़्यादा हो गए हमने कुछ नहीं किया है, उस्सको कितना मैं करता होगा मगर मैं ने उस्सको एक भी मौका नहीं दिया, वो कितना तड़पा होगा यार! रोना अत है मुझे जब यह सब सोचती हूँ तो!”

और यह कहकर अशिता रोने लगी अपनी सहेली के गले से सट्टे हुए. प्रिय उसस्के पीठ पर हाथ फरते हुए उस्सको दिलाशा दिलाया के सब ठीक हो जाएगा.

और अशिता ने प्रिय को उसस्के साथ लंच में हॉस्पिटल चलने को कहा डॉक्टर अग्रवाल से मिलने के लिए, कहा के प्रिंसिपल को बता के जाएंगे के हॉस्पिटल जा रहे हैं और हाफ डे का परमिशन ले लेंगे.

और वही किया दोनों ने. प्रिंसिपल ने दोनों को रिलीज़ दे दिया दिन के 12.30 को, और दोनों हॉस्पिटल पहुंचे.

तो बे कॉन्टिनोएड….. (3600 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
कोई बात नहींभई आप का ओपिनियन सर ेंखों पर यार

आप सही भी ह एक हद तक, ऐसी बातें कोई शेयर नहीं करता. मगर इन् दोनों की फ्रेंडशिप इतनी गहरी है के अशिता को पता है 100% के प्रिय कभी किसी को नहीं bataegi...eise दोस्त भी होते हैं मगर नहुत kum...story के लिए एहि बेहतर था भाई... बूत स्टिल ी सर्टेनली एग्री विथ यू अस इन रियल लाइफ no ओने एवर टॉक्स अबाउट सुच ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप विथ ओठेर्स,. थिस इस केपट सीक्रेट टिल डेथ, ी क्नोव तहत.
 
अपडेट 25 – मीटिंग डॉक्टर अग्रवाल (ा)

उधर इंस्पेक्टर राणे ने डॉक्टर को इतना दररया के उस्का मेडिकल कौंसिल से डॉक्टरी की लाइसेंस ज़प्त करवा देगा, पूरा लाइफ वो कभी डॉक्टर का काम नहीं कर पाएगा, उस्सको 15/25 साल जेल करवा देगा एक कॉलेज की स्टूडेंट को एटेम्पट तो रपे के इलज़ाम में. वहीँ का पेओन ऑय विटनेस होगा, और ऊपर से उसस्के आदमी उस्सको इतना मरेगा के उसस्के हड्डी कहाँ और पसली किधर है समझ में नहीं आएगा और तो और डॉक्टर की एनकाउंटर भी करवा सकता है, उस्सको रिवाल्वर दिखाते हुए यह सब धमकियाँ दिया राणे ने उस डॉक्टर को.

डॉक्टर पैरों में गिर्र के माफ़ी मांगने लगा और बच्चे की तरह रोने लगा. यह कहते हुए के अपने बाकि के पूरी लाइफ में कभी भी किसी लड़की या औरत को बुरी नज़र से नहीं देखगे, हमेशा इज़त करेगा. वो थार्र्थरर कांपने लगा था उस रूम में जो बहोत hi भयानक लग रहा था. वो ेस्पेशलय मुजरिमों को दर्राने धमकाने के लिए माहौल वैसा बनाया गया है उस रूम का. और तीनों अफसर और राणे जिस तरह से उसस्के साथ सवालात कर रहे थे कोई भी सुरमा होता तो पिघल जाता और माफ़ी मांगता. और कसमें खता अपने बीवी बच्चों की ज़िन्दगी भर कोई बुरा काम नहीं करेगा.

डॉक्टर से बात करने से पहले राणे ने उस्सकी मोबाइल को साइबर क्राइम डेप्ट वालों को दे दिया था चेक करने के लिए किआ उस्सने कोई अपलोड किया है इंटरनेट पर. जब रिजल्ट आये तो पता चला के कोई भी अपलोड नहीं किया गया है इंटरनेट पर पिछले एक साल में. तब राणे उसस्के गैलरी खोल कर ढूंढ़ने लगा के किधर अशिता के पिक्स को रखा है उस्सने मगर कहीं नहीं दिखा तो राणे डॉक्टर से फिर पूछ ताज करने गया के किश मोबाइल में अशिता की पिक्स को रखा है….

डॉक्टर साहब ने रट हुए कहा,

“अरे सर मैं ने कोई फोटो अशिता की अपने मोबाइल पर सेव किया hi नहीं था, माँ कस्सम, मैं ने उस्सको बुसस झूट बोलै था उस्सको दर्राने के लिए, अगर सेव किया होता भी तो कभी भी इंटरनेट पर अपलोड नहीं करता साहब.”

राणे और उसस्के ऑफिसर्स को एक पल में पता चल जाता है जब कोई झूट बोलता है तो, उन् सबको इतना तो एक्सपीरियंस था. राणे को खुद दिख गया के वो सच बोल रहा है और उस्सने सच में कोई अशिता की तस्वीर नहीं सेव किया था. फिर भी राणे ने कहा,

“तुम्हारे पास ज़रूर दूसरा मोबाइल होगा जिस में तुमने सेव किया होगा, जल्दी बता वार्ना इस बार ऐसी जगह मरूंगा के तेरा लुंड खड़ा होना hi भूल जाएगा!”

डॉक्टर फूट फूट कर रट हुए अपनी माँ की कसम, भगवान् की कस्सम, अपनी डॉक्टरी की कस्सम खाते हुए कहा के उसस्के पास और कोई भी मोबाइल नहीं है.

रआने को दिख गया के वो सच बोल रहा है. और उस्सको रात भर उसी रूम में रखा गया बिना खाना पानी के और सुबह को राणे ने उस्सको जाने दिया वारं करते हुए के अगर कभी भी किसी ने उसस्के खिलाफ कोई भी सिंपल सा रिपोर्ट किया तो उस्सकी खैर नहीं, उसस्के मोबाइल उस्सको वापस किया और वापस जाने को कहा.

दूसरे सुबह को राणे ने अशिता को विहान की मोबाइल पर फ़ोन करके बता दिया के डॉक्टर ने झूट कहा था उस्सने कोई भी पिछ सेव नहीं किया था उस्सकी, और उस्सको कोई फ़िक्र करने की ज़रुरत नहीं सब ठीक है और डॉक्टर अब ज़िन्दगी में किसी भी लड़की को मोलेस्ट नहीं करेगा.

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अशिता और प्रिय हॉस्पिटल पहुंचे और थोड़ा तलाश करने के बाद डॉक्टर अग्रवाल के कंसल्टेशन में जा पहुंचे.

अशिता ने खुद को इंट्रोडस करते हुए सारे बात को बताया और डॉक्टर अग्रवाल ने दोनों को आराम से अपने डेस्क के सामने बैठने को कहा.

डॉक्टर अग्रवाल एक विलायती दीखता था, हद से ज़्यादा गोरा, बल्कि चेहरे पर उसस्के गाल कुछ लाल रंग के दिख रहे थे, उसस्के ठाठ से दिख रहा था के बहोत hi बड़ा व्यक्ति है. उसस्के चेहरे में जैसे एक नूर था, और एक बहोत प्यारी मुस्कराहट के मालिक थे अग्रवाल साहब.

अशिता और प्रिय दोनों उसस्के हाथ और उँगलियों को देख रहे थे जिस में एक पेन लिया हुआ था डॉक्टर साहब, और पेन का रंग कला था और उसस्के सफ़ेद हाथ में पेन ऐसा दिख रहा थे जैसे दूध में माखी. दोनों लड़कियां उस डॉक्टर को अदमीरे कर रहे थे क्यूंकि डॉक्टर अग्रवाल में बात hi कुछ ऐसी थी. उस्का मिज़ाज तो इतने अचे थे, इतना नरम दिली से बात करता था और इतने मीठे बोलते थे के मानलो एक फ़रिश्ते से मुलाकात हो गयी हो. उसस्के हाथ पर उनके काळा काळा बाल, पतले पतले, महीन साफ़ नज़र आरहे थे हाथ का रंग कुछ इस कदर सफ़ेद था.

दोनों लड़कियां जैसे अपने सामने शाहरुख़ खान या सलमान खान को देख लिया हो, इस कदर उस्सको देखते hi जा रहे थे बिना कुछ बोले.

तो डॉक्टर साहब hi बे बोलना शुरू किया,

“तुम दोनों कॉलेज से छूती लेकर मुझसे मिलने आये हो गर्ल्स?”

अशिता ने प्रिय के चेहरे में हैरानी से देखते हुए डॉक्टर से शॉकेड आवाज़ में पूछा,

“मगर आप को कैसे पता चला?”

डॉक्टर ने अपनी वही प्यारी सी मुस्कराहट में जवाब दिया,

“तुम दोनों के यूनिफार्म से!”

तब अशिता ने शर्मिंदा होते हुए सोचा के कितना बेहूदा सवाल कर दिया उस्सने ! और फिर भी पूछा,

“आप फॉरेन से हो? किश कंट्री से आये हो आप?”

डॉक्टर: “क्यों मैं फोरेनर लगता हूँ? मैं 100 % देसी हूँ गर्ल्स. मेरे रंग को देख कर तुम लोगों को लगता है के मैं फोरेनर हूँ? मैं कश्मीर के वादियों में पैदा हुआ और पला पोसा गया हूँ शायद इसी लिए रंग थोड़ा सफ़ेद पर आगया है मेरा. तुम्हारा कसूर नहीं, मुझसे लाखों लोग यह सवाल कर चुके हैं तुमसे पहले, सब एहि समझते हैं के मैं यूरोप का रहने वाला हूँ क्यूंकि मेरा रंग उन् लोगों की तरह है. खैर चोर्रो और बताओ के तुम एक्साक्ट्ली जानना किआ चाहती हो?

अशिता ने तब बहोत उदास होते हुए कहा के विहान ने क्यों वैसा बेहवे किया और क्यों उस से बात नहीं किया, और क्यों उसस्के सर दर्द से पहात रहा है उस्सकी किआ प्रॉब्लम है हेड के अंदर. उस्सको डिटेल में सब जानना था.

डॉक्टर साहब ने तब पूछा,

“तुम दोनों विहान के बहनें हो किआ?”

अशिता और प्रिय ने हँस्ते हुए एक दूसरे का चेहरा देखा पहले तब प्रिय ने जवाब दिया,

“नूवो!! मैं इस्सकी सहेली हूँ यह विहान की बेहेन है!”

तब डॉक्टर ने उसी प्यारी सी मुस्कुराहट में कहा,

“ओह! ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी, मुझे लगा तुम दोनों सिस्टर्स हो. हाँ तो लिसेन तो में वेल, बे अटेंटिव तो व्हाट ी ऍम गोइंग तो से okay गर्ल्स?”

दोनों ने फिर एक दूसरे को देखा और तवज्जोह से डॉक्टर के चेहरे में देखते हुए सुनने लगे के उस्सको किआ कहना था विहान के बारे में.

डॉक्टर ने एक डायग्राम दिखाते हुए अपने पेन से अनेक जगहों पर उस ब्रेन की तस्वीर पर पेन चलाते हुए समझाया.

“यह देखो, यह ब्रेन का वो हिस्सा है जहाँ पर विहान को ब्लड क्लॉट्स जमाह हुए हैं चोट लगने की वजह से. पुलिस के रिपोर्ट के अनुसार उस्का सर कार से ढाका लगने के बाद गिरते हुए पेवमेंट से टकराया था और पेवमेंट का वो हिस्सा टूट गया था और हिचकोले खाते हुए विहान दोबारा रोड के दूसरे साइड के पेवमेंट से सर के बल hi गिरा था. स्कल बहोत सॉलिड होता है वैसे यहाँ तक के एक पत्थर या कंक्रीट को भी तोड़ सकता है जैसे विहान के स्कुल ने किया, मगर वो करते वक़्त ब्रेन के अंदर डैमेज होता है, नेर्वेस टूटता है, और ब्लड क्लॉट ऑटोमेटिकली जम्मेह हो जाता है.

अब जिस जगह पर ब्लड क्लॉट्स हुए हैं उस जगह इंसान के सेंसेस काम करते हैं, बल्कि उस्सकी शुरुवात होता है, जैसे सूंघने की, देखने की, समझने की, याद करने और सुनने का भी. बहोत चौथे छोटे नेर्वेस होते हैं, सेंसोरिअल, जो दिमाग़ के अनेक हिस्सों में इनफार्मेशन भेजते हैं. जैसे के आप के ेंखों ने पीला रंग देखा, तो ेंखें ये मैसेज ब्रेन तक पहुंचता है के जो ेंखों ने देखा उस्का रंग पीला है. तो अब अगर वो नेर्वेस जहाँ से मैसेज को गुज़र के जाना है वहां पर ब्लड क्लॉट जमा हुए हैं तो मैसेज नहीं जाता ब्लॉक हो जाता है. और अगर जाता भी है तो देर से, इस लिए विहान लेट रिएक्शंस दे सकता है बहोत सारे चीज़ों का. या कोई रिएक्शन hi नहीं देगा बिल्कुल. कुछ चीज़ों को पहचानेगा hi नहीं. कुछ चीज़ों को समझेगा hi नहीं. जैसे के टाइम किआ हुआ है पूछोगे तो उस्सको पता भी नहीं होगा के घडी में देखना चाहिए टाइम का पता लगाने के लिए…..”

जब डॉक्टर ने इतना कुछ कह दिया तो अशिता का रोना शुरू हुआ…. और प्रिय उस्सको छुप करा रही थी और डॉक् ने कहा के शायद उस्सको नहीं बताना चाहिए था यह सब बल्कि उसस्के पेरेंट्स को सब कुछ बोलना चाहिए था. तब अशिता ने रोना बांध करते हुए पूछा,

“डॉक्टर सर, तो इस्सके इलाज तो होगा नाह?”

डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए आशिता के चेहरे में नम्रता से देखते हुए जैसे उस्सको दिलाशा देते हुए कहा,

“वही तो बताने जा रहा था के तुम रोने लगी बेटी.!”

फिर असिता ने सिसकते हुए कहा, “ठीक है सॉरी आप बताओ नाह कब तक विहान ठीक हो जाएगा?”

डॉक्टर: “ग़ौर से सुनों; 3 दिन के बाद मैं उस्सको डिस्चार्ज कर दूंगा, अभी ऑब्जरवेशन पर है मुझे कुछ और मालूमात करना है उसस्के ब्रेन को लेकर. फिलहाल यह समझ लो के मैं मेडिसिन्स से उसस्के ब्रेन के अंदर वाले ब्लड क्लॉट्स को मिटा रहा हूँ. 3 दिन बाद पता चल जाएगा मुझे के क्लॉट्स मिट रहे हैं के नहीं. अभी बताना मुश्किल है. वो सब क्लॉट्स लिक्विड बनकर खून में शामिल होक बाद ब्लड ग्रुप में जाकर किडनी उस्सको थ्रो आउट कर देगा.”

अशिता ने डॉक्टर को बीच में रोकते हुए पूछा,

“कितने दिन में सब साफ़ हो जाएगा सर?”

डॉक्टर ने कहा, “it’s ा लॉन्ग प्रोसेस माय गर्ल, 3 से 6 महीने लग सकते हैं सारे क्लॉट्स को दिसृप्त होने में. मगर उस दौरान विहान को कम्पलीट रेस्ट लेना चाहिए, no फिजिकल एफ्फोर्ट्स, no डीप थिंकिंग, no हेड अब्रप्ट मूवमेंट्स. ”अशिता ने फिर डॉक् को रोकते हुए पूछा”

“एंड सेक्स?”

यह पूछ लिया झट से तब रीलीज़ किया के किआ कह गयी, और चेहरा लाल हो गया अशिता का! और तुरंत प्रिय ने अशिता के हाट पर एक तमाच मारा.

तो डॉक् ने अशिता से पूछा,

“इस हे मैरिड?”

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली
 
अपडेट 26 - मीटिंग डॉक्टर अग्रवाल- (बी) विहान बैक.

अशिता और प्रिय एक दूसरे के चेहरे में हकबकाए देखने लगे बिना जवाब दिए, तो डॉक् ने खुद दोनों के हैरान चेहरे में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा,

“ओह उस्का गर्लफ्रेंड होगा फिर वेल इतस ok, सबके गिएर्लफ्रैंड्स होते हैं!”

तो जल्दी से अशिता ने अपनी ऊँगली को कुछ इस तरह से प्रिय के तरफ किया डॉक् को देखते हुए खुले मुंह के साथ जैसे रिवाल्वर ताना हुआ है प्रिय के कनपट्टी पर. और वो देख के प्रिय का रिएक्शन बिल्कुल वैसा hi था के जैसे उस्सको कोई गोली मारने वाला है अभी तुरंत!!

डॉक्टर दोनों को अपने डेस्क सामने उस पोजीशन में शॉकेड देखते हुए मुस्कुराकर कहा,

“ओह, तो तुम्हारी सहेली hi विहान की गर्लफ्रेंड है, ठीक है मैं समझ गया, मतलब तुम्हारी होने वाली भाबी के साथ आयी हो तुम!”

अशिता ने हाँ में सर हिलाया जल्दी जल्दी, और प्रिय का मुंह खुला का खुला hi रहा अशिता को हाँ में सर हिलाते हुए देख कर, वो कभी डॉक् को देखती तो कबि प्रिय को जैसे उस्सको सांप सुंग गया था.

तब प्रिय ने अशिता के हाथ पर ज़ोर से पिंच किया और दोनों हथेली को मुंह पर रख कर ज़ोर से “खीखीखीखीखी” करने लगे अपने अपने चेहरे पर दोनों हाथ रख कर हँस्ते हुए.

डॉक्टर दोनों के उस हंसी को देख कर खुद हँस्ते हुए कहा,

“तुम लोग बिल्कुल मेरे पोतियों के जैसे हरकतें कर रहे हो, वही शरारती अदाएं, और नटखटपन हैं तुम दोनों में अभी तक बची हो तुम दोनों हाहाहा!”

अशिता ने तब शॉकेड होते हुए डॉक् के चेहरे में देखते हुए सवाल किआ.

“व्हाट? आप के पोतियां भी हैं? आप इतने उम्र के तो बिल्कुल भी नहीं दीखते हो सर?” प्रिय ने हाँ में सर हिलाया मतलब डॉक्टर उतने उम्र के नहीं दीखते थे.

डॉक्टर ने फिर मुस्कुराते हुए दोनों से कहा,

“ी हैवे 5 ग्रैंड दौघतेर्स एंड 3 ग्रैंडसंस फ्रॉम तवो डिफरेंट संस, एंड ओने डॉटर.”

दोनों लड़कियां बहोत हैरान चेहरे से डॉक्टर अग्रवाल के आकर्षित करने वाले मुस्कराहट को देखते रहे और प्रिय ने कहा,

“सर आप को देख कर बिल्कुल भी नहीं लगता के आप के इतने बड़े बेटे बेटी और उनके बचे भी होंगे….”

और अशिता ने प्रिय के बात को जोड़ते हुए कहा,

“हमें लगा के आप कोई 30 या 35 या ज़्यादा से ज़्यादा 40 साल के करीब होंगे!”

डॉक्टर ने एक हलकी हंसी में कहा,

“थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट, हाँ हर कोई एहि कहता हैं मुझसे, वेल ी ऍम 56 यरस ओल्ड यंग गर्ल्स! और मेरे पोतियों में से एक का नाम भी प्रिय hi है, 17 साल की है और बहोत hi नटखट है, वो मेरी बेटी की बेटी है, मैं उस्का नाना हूँ और बाकी पोतियां मेरे बेटे की बेटियां हैं. और एक बीटा है मेरी बेटी की और बाकी बेटों के हैं. सो तहत वास् माय फॅमिली हेहेहे एंड यू नॉटी गर्ल प्रिय सो यू वांटेड तो क्नोव अबाउट थे सेक्सुअल हेल्थ ऑफ़ योर बॉयफ्रेंड राइट?”

तुरंत प्रिय ने नाह में सर हिलाते हुए अपनी ऊँगली को अशिता के तरफ किया.

डॉक् ने अपनी हलकी हंसी में कहा,

“हाँ ok ठीक है मैं समझ गया तुमको पूछने में शर्म आ रही है तो अपने सहेली को पूछने को कहा होगा तुमने इसी लिए उस्सने वो सवाल किया जो तुम करना चाहती थी, सब समझता हूँ मैं तुम लड़कियों की शरारतें!”

प्रियं ने अपने सर पर हाथ रखते हुए सोचा “धत तेरी की, साला डॉक्टर को नहीं पता के वो उल्टा कह और समझ रहा है उस्सको नहीं पता के अशिता hi विहान की बेहेन है और गर्लफ्रेंड भी उफ़!”

तब डॉक्टर साहब ने कहा,

“ाचा किया तुम दोनों ने मुझसे यह सवाल पूछ कर क्यूंकि मैं तो तुम्हारे पेरेंट्स से पूछने वाला था के किआ विहान को कोई इमोशनल ट्रामा या इशू से गुज़ारना पड़ा पिछने महीनों में”

अब अशिता का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा डॉक् की बातों को सुनकर और पूछा,

“हाँ सर उस्का ब्रेक उप हुआ था और पिछले 18 महीनों से वो बहोत स्ट्रेस में था टेंशन में था क्यूंकि उस्सकी गर्लफ्रेंड उस्सको इग्नोर कर रहा था….”

डॉक् ने तब प्रिय के तरफ देखते हुए कहा,

“क्यों? क्यों तुम्हारा ब्रेक उप हुआ था विहान से?!”

इस बार अशिता ने अपने माथे को पीटते हुए अपने ख्यालों में कहा,

“ओह माय गॉड किआ कन्फूसिओं है यह डॉक् साहब विहान का गफ मैं हूँ प्रिय नहीं रे बाबा उफ़!”

अब जब डॉक् ने सवाल प्रिय से किया तो प्रिय को hi रिप्लाई करना पड़ा और अशिता अपनी सहेली का मुंह देख रही थी के वो किआ जवाब देती है डॉक् को और सहेली ने कहा,

“बुसस… सर…. ऐसे hi, वो… हम….. हम दोनों में….. ईईईईईन्न्नण……. वोओओओओ…..” और तब तक हेल्प के लिए प्रिय ने फिर अशिता को पिंच किया तब जल्दी से अशिता ने कहा,

“हाँ सर वही इन् दोनों का ब्रेक उप सेक्स की वजह से hi हुआ tha…aur िस्सने 18 महीनों तक इग्नोर किया मेरे भाई को और वो बहोत उदास रहता था और पीने भी लगा था, हम सब एक hi कॉलेज जाते थे सर और इन दोनों का वहीँ से शुरू हुआ था और ब्रेक उप भी!”

प्रिय हकबते हुए अशिता के चेहरे में देखते हुए उस्सको अपने मैं में गालियां देते हुए कह रही थी,

“साली कुट्टी कामिनी अपने सारे इलज़ाम मुझ पर थोप रही है बहार निकल तुझे बताती हूँ मैं!”

डॉक्टर ने फिर मुस्कुराते हुए कहा,

“okay मैं समझ गया, देखो इस बारे में मुझे इम्पोर्टेन्ट बात करना है तुम लोगों से, वो यह है के इमोशनल ट्रामा दिखा मुझे उसस्के ब्रेन सिस्टम में, और मुझको एहि लगा था के इश्क का चक्कर हुआ होगा या मैं ने सोचा कहीं वो ड्रग एडिक्ट तो नहीं, अब तुम लोगों ने इस बारे में बता दिया तो ी ऍम सूरे इसी वजह से उसस्के उस इमोशनल ट्रामा हुआ है. हे मिस्ड समवन एंड वास् अफेक्टेड. उस्सको प्यार से, उल्फत से उस्सको ज़्यादा जल्द अच्छा किया जा सकता है. तहत विल वर्क फास्टर थान मेडिसिन. समझे तुम लोग?” यह डॉक् ने प्रिय के तरफ देखते हुए कहा. और जवाब अशिता ने दिया,

“हाँ सर मैं समझ गयी उस्सको तो अब बेशुमार प्यार मिलने वाला है सर.”

इतने तजुर्बेकार डॉक्टर, वो कोई स्टुपिड नहीं था, वो खुद समझ गया के अशिता और उसस्के खुद की भाई में कोई ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप है इसी लिए सभी सवालों का जवाब वो खुद दे रही है और अपने सहेली को इन्वॉल्व कर रही है खुद उंनसे बचने के लिए. डॉक्टर समझ गया के अशिता अपने और अपने भाई के बीच के रिश्ते को उनको नहीं बता सकती थी इसी लिए अपनी सहेली को साथ लायी थी विहान की गर्लफ्रेंड बना कर.

तो इस बार डॉक्टर ने अशिता को देखते हुए कहा,

“अगर उस्सको तकलीफ हुई है ब्रेकअप की वजह से तो उस ब्रेकअप को एन्ड करना होगा और उस्सको उस्का प्यार वापस दिलाना होगा, उसस्के दिमाग़ में एक बात बैठ गयी है के उस्का प्यार उस से चीइन गया है और उसस्के दिमाग़ के उस हिस्से में जहाँ इमोशनल ब्लीडिंग होते हैं वो part बहोत कमज़ोर है इस वक़्त और ऊपर से चोट लगने की वजह से और ब्लड क्लॉट से उसस्के दिमाग़ पर और भी गहरा सदमा जैसा एस्सार हुआ है तो तुमको उस का ध्यान 100 गुना ज़्यादा रखना होगा समझी?”

ेंखों में ेंसू लिए अशिता ने हाँ में सर हिलाया. और प्रिय खुद से सवाल करने लगी के डॉक् क्यों अब अशिता से सब कुछ कह रहा है, जैसे के वही विहान की गर्लफ्रेंड है, किआ डॉक् समझ गया हम उस्सको उल्लू बना रहे हैं?!”

और निकलने से पहले अशिता ने डॉक् से फिर पूछा,

“प्लीज आप बताएं के किआ विहान जल्दी ठीक हो जाएगा नाह सर?”

डॉक् ने रिप्लाई किया,

“जैसे मैं ने कहा, 3 से 6 महीने लग सकते हैं मगर, अगर उस्सको अच्छी तरह से इमोशनल सपोर्ट दिया गया तो और भी जल्दी ठीक हो सकता है. मैं उस्सको अपॉइंटमेंट देता रहूँगा फॉलो उप के लिए, मेडिसिन्स भी दूंगा फुल उसस्के ब्लड क्लॉट्स को दिस्सोल्वे करने के लिया, तुम अपने प्यार से उस्सको सही करना और मेडिसिन अपना काम करेगा. और हाँ सेक्सुअली वो फुल फिट है और जिस part को ब्रेन सेक्सुअली एक्टिव करता है वो बिल्कुल भी डैमेज नहीं हुआ है, मगर रेमेम्बेर आईटी वेल, इन् पहले कुछ हफ़्तों में अगर सेक्सुअल रिलेशनशिप हुआ तो उसस्के सर में बहोत hi दर्द होगा उस ब्लड क्लॉट की प्रजेंस की वजह से. जैसे जैसे वो ब्लड क्लॉट कम होता जाएगा उसस्के सर के दर्द भी कम होते जाएंगे. मैं पैन किलर्स फुल दूंगा उस्सको ताके जब भी दर्द हो वो पैन किलर्स से आराम पा सके. और एक बहोत इम्पोर्टेन्ट बात सुनलो, हो सकता है पहले दो महीनों में विहान को पार्शियल ामनेसिअ हो, वो कुछ भूल सकता है फिर याद कर सकता है.”

अशिता ने पूछा,

“तो किआ कल उस्सने मुझको नहीं पहचाना सर? किआ वो मुझको भूल गया है?”

डॉक्: “नूवो, वो बात नहीं है, मैं कहना चाहता हूँ बात करते वक़्त फॉर एक्साम्प्ले वो लेट से किसी चीज़ का नाम याद करेगा कभी कभी, बहोत वक़्त लगेगा उस्सको किसी चीज़ का नाम याद करने में. जैसे के समझ लो उस्सको एक सेंटेंस कहना है जिस में ऑफिस नाम लेना है तो वो सेंटेंस फुल कहेगा मगर उस ऑफिस वर्ड को लम्बा टाइम लेगा याद करने में उस्सको वो वर्ड लेट याद आएगा. कभी हकला भी सकता है, और कभी उस्सको एपिलेप्टिक फिट भी आ सकता है. सबसे बड़ी बात यह है के उसस्के ेंखें अभी ठीक से वर्क नहीं कर रहे हैं, उस्सको डबल दिख रहा होगा, और एक सिम्प्टम है, उस्सको V-syndrome कहते हैं जिस से उस्सको तुम्हारा चेहरे डबल दिखेगा, एक ऊपर और एक निचे. तुम उस्सको दो दिखोगे एक थोड़ा ऊपर एक थोड़ा निचे उस्सको एक ेंख को बांध करना पड़ेगा तब एक दिखेगा….. यह तब तक होगा जब तक ब्लड क्लॉट एन्ड नहीं होगा. मैं ने उस्सको ेंखों के डॉक्टर को भी रेफेर किया है उस साइड का फॉलो वो डॉक्टर करेगा, और वो भी ठीक हो जाएगा बिल्कुल कोई 6 महीनों में. उस के सर पर कोई भी चोट बिल्कुल नहीं लग्न चाहिए इन 6 महीनों के दौरान. हिज हेड इस ात प्रेजेंट वैरी सेंसिबल एंड वीक. ी विल गिव आल इम्पोर्टेन्ट विटामिन्स एंड सप्लीमेंट्स फॉर थे रिकवरी बूत आल थे वे तहत विल टेक थे नेक्स्ट 3 तो 6 मोनथस तो बे बैक तो नार्मल. 6 महीनों के बाद विहान बिल्कुल वही विहान बन जाएगा जो पहले था.”

अशिता को तस्सली हुई और अब प्रिय के तरफ देखते हुए चलने का इशारा किया.

मगर अशिता ने लास्ट में निकलते वक़्त डॉक् से कहा,

“एक रिक्वेस्ट करनी थी आप से, प्लीज यह बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड वाले बात मेरे मम्मी पापा से मत कहना अगर आप उन् से मिले तो प्लीज.”

डॉक् ने कहा,

“बिल्कुल भी नहीं करूँगा, मगर तुम मुझे अपने घर का और मोबाइल नंबर देती जाओ, सो तहत अगर विहान के बारे में कुछ ख़ास डेवलपमेंट हुई या उसस्के बारे में कुछ बताना भूल गया हूँ तो तुमको फ़ोन करके बता दूंगा तब तुमको डिस्टर्ब होक यहाँ नहीं आना पड़ेगा. अगर तुमको ऐतराज़ नाह हो तो मुझको नंबर दे सकती हो, मैं सेव करता हूँ अपने पास.”

और अशिता ने भी डॉक् का नंबर सेव किया विहान के मोबाइल पर ताके अगर उस्सको भी डॉक् से विहान के बारे में कुछ कहना या पूछना है तो डिसकस कर सके.

और दोनों सहेली रिलैक्स फील करते हुए उस डॉक्टर के कंसल्टेशन से निकले.

रास्ते में जाते वक़्त प्रिय अशिता को मारते हुए बोलती जा रही थी,

“साली, कामिनी, अपने बाई का गर्लफ्रेंड बनाया मुझे तुम ने, और ऊपर से सेक्स के बारे में भी डॉक् को मेरे तरफ इशारा किया मैं तेरी मुंह नोच लुंगी कुट्टी कहीं की!”

अशिता प्रिय की मार से बचते हुए आगे आगे भाग रही थी ज़ोरों से हँस्ते हुए. लोग उन् दोनों को मस्ती करते हुए रोड पर जाते देख रहे थे. दो कॉलेज गर्ल्स यूनिफार्म में उस तरह से मस्ती करते हुए किसी को ाचा लग रहा था देखना किसी को बुरा.

प्रिय ने डॉक् की सेंटेंस दोहराते हुए कहा, “तो तुम अपने होने वाली भाबी के साथ आयी हो हीहीहीहीहीहीहीही”

दोनों फिर ज़ोरों से हंससने लगे….

और थोड़ी देर बाद दोनों नार्मल बात करते हुए जाने लगे तो प्रिय ने कहा,

“तुम समझती हो के डॉक्टर उल्लू है किआ? उस्सको सब समझ में आगया तेरे और विहान के बारे में. तुमने देखा नहीं लास्ट में वो साडी बातें सिर्फ तुमसे कहने लगे थे मुझसे नहीं?”

अशिता ने कहा,

“मुझे भी लगा के वो समझ गया मगर हे इस ा वैरी गुड ह्यूमन, हे ुन्देरस्टंडस लाइफ. कुछ भी नहीं कहा उस्सने.”

और प्रिय ने कहा,

“कितना हैंडसम है यार मैं तो उस से प्यार कर लूँ अभी hi, हे लुक्स सो यंग, अगर वो बताते नहीं तो बिल्कुल नहीं लगता के हे इस 56 इयर्स ओल्ड, हे इस ा वैरी लवली एंड हैंडसम पर्सन एंड ा वैरी गुड ह्यूमन बीइंग.”

अशिता प्रिय के बात से सहमत थी……

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3 दिन के बाद विहान घर आगया था.

अशिता ख़ुशी से झूम रही थी और अपने पापा की हेल्प से अपने बीएड को भी विहान के रूम में लगायी और कह दिया के रात भर वो विहान के कमरे में hi रहेगी उस्का देख भाल करने के लिए.

मगर रात को वो विहान के बीएड पर उसस्के साथ सोते हुए नज़र आयी बिल्कुल पहले की तरह विहान को अपने बाहों में भरके, और अपने टांगों को उसस्के टांगों में जाकर कर.

तो बे कॉन्टिनोएड……(3940 वर्ड्स फ्रॉम तवो लास्ट उपदटेस )
 
अपडेट 27 इस विहान रेकवरिंग?

3 दिन के बाद विहान घर आगया था.

अशिता ख़ुशी से झूम रही थी और अपने पापा की हेल्प से अपने बीएड को भी विहान के रूम में लगायी और कह दिया के रात भर वो विहान के कमरे में hi रहेगी उस्का देख भाल करने के लिए.

मगर रात को वो विहान के बीएड पर उसस्के साथ सोते हुए नज़र आयी बिल्कुल पहले की तरह विहान को अपने बाहों में भरके, और अपने टांगों को उसस्के टांगों में जाकर कर.

अब आगे…..

उस रात को अशिता को सुकून की नींद आयी. उस ने उल्टा सोचा था सोने से पहले, सोचा था के विहान को दर्द होगा, वो तड़पेगा या इर्रिटेट होगा, इस लिया अशिता को रात में कई बार जागना होगा. मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और बिल्कुल चैन की नींद सोई अशिता सुबह तक.

और सुबह अशिता की ेंख खुली तो सबसे पहले विहान को hi देखा और पाया के विहान पहले से जाएगा हुआ है और ऊपर छत्त टाक रहा है, चुप चाप.

अशिता का सर उस वक़्त विहान के छाती पर था और अशिता विहान के चेहरे में देखती रही काफी देर तक तब धीरे से धीमी आवाज़ में कहा,

“भाई, तुम कब से जागे हुए हो? मुझको जगाया क्यों नहीं?”

विहान खामोश था, मगर उसस्के चेहरे में एक ख़ुशी झलक रही थी. एक हलकी सी मुस्कान थी उसस्के होंठों पर ऐसा अशिता ने महसूस किया. घर बिल्कुल खामोश था, कोई भी आवाज़ नहीं सुनाई दे रहे थे केवल कुछ चिडयों की आवाज़ दूर से आरहे थे. विहान को कल रात को सोने से पहले उस्सकी हर वो दवाई दिया गया था जो डॉ. अग्रवाल ने प्रेस्क्रिबे किया था. अशिता उन् सब दवाओं को स्ट्रिक्टली फॉलो कर रही थी क्यूंकि विहान की हेल्थ और ब्लड क्लॉट का सवाल था. मगर उन् दवाओं में से कुछ ड्रग टाइप भी थे विहान को सोने के लिए और ड्रग्स वह थे जो ड्रग एडिक्ट्स इस्तेमाल करते हैं ब्लैक मार्किट में खरीद कर. अगर वो दवाईआं कम या ज़्यादा दिया गया विहान को तो बुरा एस्सार पर सकता था उसस्के रिकवरी में.

तो अशिता विहान को उस तरह से खामोश देखते हुए सोच रही थी के उन् दवाओं का एस्सार होगा इसी लिए विहान वैसे खामोश लेता हुआ था छत्त को देखते हुए. अशिता वैसे hi उसस्के छाती पर सर रखे हुए hi विहान से बात करने की कोशिश कर रही थी. वो चाहती थी के विहान उस से बात करे, उस्सको पहचाने, उस से प्यार करे, उस को अपने बाहों में भरे…. मगर जबसे विहान वापस आया था उस्सने बिल्कुल भी बात नहीं किया था अशिता से. सिर्फ अपने माँ को रिप्लाई करता था विहान वो भी बहोत कम. ऐसा लगता था विहान एक गंगा इंसान है. लगता था उस्सको बोलना अत hi नहीं.

अशिता तरस रही थी विहान की आवाज़ सुनने के लिए. वो चाहती थी के विहान उस से बात करे, उस्सको ‘मेरी आशु, माय गर्लफ्रेंड कह कर बुलाये’ मगर विहान ख़ामोशी की मूर्ति बना हुआ था इन दिनों. अशिता ने उसस्के गाल पर अपना हाथ फरते हुए उसस्के चेहरे में देखा के वो कुछ रिएक्शन देगा, मगर विहान वैसे के वैसे hi छत्त ताकता रहा बिना पलकें झपकाए. जब अशिता ने नोटिस किया के विहान ेंखें नहीं झपका रहा था, बिल्कुल फिक्स देख रहा था तो वो घबरा गयी और उठ बैठी बीएड पर विहान के ेंखों में देखते हुए. उस्सने अपनी हथेली को विहान के ेंखों के सामने कई बार फेर्रा मगर कोई एस्सार नहीं हुआ विहान के ेंखों पर.

तो अशिता ने खुद से बड़बड़ाते हुए कहा,

“किआ यह खुले ेंखों सो रहा है? किआ यह मुमकिन है? भाई अभी नींद में है किआ? उफ़ इस्सके बारे में तो डॉक्टर साहब ने कुछ नहीं बताया था? मैं पापा को बुलाती हूँ देखने को!”

अशिता अपने पापा को लेकर रूम में आयी तो उस्सकी मम्मी भी पीछे आयी देखने किआ माजरा था. और दोनों हैरान हुए विहान को वैसे देख कर.

जब कोई नींद में होता है तो उस्सकी सांसें भरी होता है, डीप ब्रेथ लेता है और जैसे सोने के वक़्त हार्टबीट का रदम होता है वैसे बिल्कुल विहान की सांसें चल रही थी बाप ने ग़ौर से सुना और अशिता को सुनने को कहा. हाँ सच में वैसा hi था मतलब विहान गहरी नींद में था मगर उसस्के ेंखें खुले हुए थे….. यह सब शायद उस ब्लड क्लॉट्स की वजह से था अशिता ने सोचा. सुमन बहोत फ़िक्र करने लगी तो अशिता ने कहा फ़िक्र करने की कोई बात नहीं वो दिन में डॉक्टर को फ़ोन करके पूछेगी.

सुमन और अनिरुद काम पर जाने के लिए तैयार हो रहे थे और तब अशिता ने ब्रश करने के बाद पूछा,

“तो भाई घर पर अकेला रहेगा?!”

अनिरुद और सुमन एक दूसरे के तरफ देखते हुए इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे. दोनों ने सोचा था के अशिता कुछ दिनों तक कॉलेज नहीं जाएगी और अपने भाई के साथ रहेगी. मगर अब, जबकि अशिता ने यह सवाल किया तब उन् दोनों को एक प्रॉब्लम दिखने लगे!

सुमन ने अपनी बेटी से कहा,

“बीटा हमने सोचा था तुम रहोगी विहान के देख भल के लिए….”

अशिता ने कहा, “मम्मी मुझे बेहद ख़ुशी होती भाई के साथ रहना दिन भर, मगर मेरे स्टडीज का किआ होगा एग्जाम सर पर है मुझको कॉलेज जाना बहोत ज़रूरी है, अभी मैं क्लास नहीं मिस कर सकती मम्मी. और फिर मैं 3 बजे वापस आजाऊंगी तबसे लेकर कल सुबह तक मैं भाई के साथ hi तो रहूंगी नाह?!”

सुमन ने कहा के वो भी काम से छूती नहीं ले सकती. तो माँ बेटी में लड़ाई हुई. अशिता ने कहा,

“किसी माँ हो तुम? अपने बेटे का हेल्थ ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट है या वो काम? आप चोरर दो उस काम को और घर पर रहो पहले की तरह और मेरे भाई का ख्याल रखो!”

दोनों में इस बात को लेकर बहोत बेहेज़ हुई, झगड़ा हुआ और अनिरुद ने कहा के आज वो घर पर रहेगा वो लीव ले लेगा काम से.

और सुमन और अनिरुद ने फैसला लिया के एक दिन वो घर पर रहेगा तो एक दिन सुमन, और सैटरडे को तो अशिता रहेगी hi, और फिर 2 हफते बाद अशिता को हॉलीडेज मिल जाएगी स्कूल से तब वो दिन भर विहान के साथ रह पाएगी.

जब सुमन काम के लिए चली गयी तो कॉलेज के लिए रेडी होते वक़्त अशिता ने देखा के विहान ने एक करवट लिया बीएड पर, और अब उसस्के ेंखें बढ़ थे, और उस्सकी आवाज़ निकली गले से पोजीशन चेंज करते वक़्त. अशिता उस से मिलना चाहती थी कॉलेज जाने से पहले. उस से बात करना चाहती थी. अशिता ने सोचा था विहान उठ जाएगा उस्सको जाने से पहले और वो उस्सको ब्रश करवाती, दवाएं देती, ब्रेकफास्ट देती मगर क्यूंकि विहान सोया हुआ था और अशिता के जाने का टाइम हो गया था तो वो रेडी होने लगी थी.

अशिता ने याद किया के विहान को उससे कपडे बदलने देखा पसंद था तो सोचा के उस्सको जगा कर उसस्के सामने अपना यूनिफार्म पहनें!

तो अशिता ने लाख कोशिश किये विहान को जगाने के लिए मगर विहान की सिर्फ गले से आवाज़ कुछ ऐसे आरहे थे, “ह्म्म्मम्म ीेहहहह ेईईईन्न्नण!” लगता था जैसे वो नाशी में है, जैसे जब कोई बहोत शराब पिने के बाद नशे में होता है बेखबर कुछ उस तरह से विहान की रिस्पांस आरही थी जगाने पर.

तो अशिता समझ गयी के सब उन् दवाओं का एस्सार है, और सोचा के शायद 10 बजे तक विहान नींद से जागेगा, और उस्सको स्कूल केलिए निकलना था 9 बजे तो वो तैयार हुई और जाने से पहले, विहान को अपने बाहों में भरके खूब चुम्मियाँ दिए अपने भाई के गालों पर, गर्दन पर और खूब प्यार किया उस से सोते हुए में hi. लगता था एक माँ अपने सोते हुए बचे को प्यार कर रही है जिस तरह से अशिता ने विहान को बाहों में भरके प्यार कर रही थी.

अशिता ने अपने पापा को समझा दिया के कौन सी दवाई किश टाइम पर विहान को देना है और कहा के डॉक्टर से बात करने के बाद वो घर पर फ़ोन करके उस्सको बता देगी, और यह भी कहा के अगर विहान अपने मोबाइल को ढूंढे तो कह देना के वो लगाई है अपने डेथ.

फिर लास्ट में अशिता ने अपने पापा को हुग किया, उस्सको को पुप्पियाँ दिए बाप के मांगने पर और एक 100 का नोट अपने डैड से लेकर हँस्ते हुए कॉलेज के लिए निकल गयी.

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कॉलेज में पहली ब्रेक में अशिता ने डॉक्टर अग्रवाल को फ़ोन करके बताया के विहान के ेंखें खुले हुए थे जबकि वो नींद में था. तो डॉक्टर साहब ने कहा के हाँ वो नार्मल है, इस हालत में ऐसा होता है, और कोई चिंता की बात नहीं है, और अशिता ने अपने पापा को घर पर फ़ोन करके बता दिया सरे बात.

अब अशिता क्यूंकि अपने पापा से बात कर रही थी, तो पूछा,

“भाई जाग गए होंगे नाह वो किआ कर रहा है पापा? ब्रेकफास्ट लिया उस्सने किआ?”

अनिरुद ने एक बड़ा सरप्राइज दिया अशिता को उस वक़्त. अशिता अपने पापा की जवाब का वेट कर रही थी के उस तरफ से विहान की आवाज़ आयी अशिता के कान में और यह कहा,

“तुम ने मेरा मोबाइल क्यों लिया? वापस करो जल्दी!”

अशिता ख़ुशी के मारे रो पारी, उसस्के ेंखों से ेंसू निकल परे और चिल्ला कर प्रिय से कहा के विहान उस से बात कर रहा है.

अशिता ने टूटते हुए आवाज़ में विहान को रिप्लाई किया,

“भाई तुम बोल रहे हो, मतलब तुम बीएड से उतर कर टेलीफोन के पास आये हो भाई मुझे बहोत ख़ुशी हो रही है भाई, बताओ तुम कैसा फील कर रहे हो अब?!”

विहान शायद कुछ नहीं समझा और कहा,

“मेरा मोबाइल कैसा है? किश रंग का है? तुमको कहाँ से मिली? मेरा नंबर किआ है?!”

अशिता ने तब उदास आवाज़ में कहा,

“ोफो भाई, चलो आराम करो बीएड पर जाओ, मैं शाम को आउंगी तब अपने मोबाइल को देख लेना और तुमको उस्का नंबर बताउंगी. Okay?”

तो विहान ने okay कहा और कॉल एन्ड कर दिया.

अशिता समझ गयी के विहान को कुछ याद नहीं ारः उसस्के पिता ने विहान से कहा होगा के फ़ोन पर बात करें तो उस्सने बिना जाने समझे बात किया. अशिता ने सोचा, ‘पापा ने ज़रूर भाई से कहा होगा के मैं उसस्के मोबाइल से फ़ोन कर रही हूँ तो भाई के ज़हन में वही बात आयी पूछने को’

दिन भर अशिता के दिमाग़ में विहान बसा रहा. और उधर घर में अनिरुद उस्का बड़ा ख्याल रख रहा था उस से बात कर रहा था, उस्सको बहोत सारे चीज़ों को याद दिलाने की कोशिश कर रहा था. विहान बात कर तो रहा था अपने डैड से मगर बहोत कम और एक बार तो उस्सने अनिरुद से पूछा,

“तुम कब से मेरे पापा हो?!”

अनिरुद को बड़ी हंसी आयी और हँस्ते हुए उस से कहा,

“तुम्हारे पैदा होने से पहले मैं तेरा पापा हूँ. क्यों तुमको शक है बीटा?!”

विहान ने जैसे एक सोच में डूबे हुए कहा,

“पता नहीं कुछ नहीं समझ में ारः के तुम कैसे मेरे पापा हो, और वो लड़की जिस ने अभी बात किया मुझसे वो कौन है?!”

बाप के ेंख भर आये और कहा,

“बीटा वो तेरी बेहेन है यार! अब यह तो मत बोल के तेरी यादाश चली हगाई है विहान बीटा!”

विहान ने पूछा,

“उस्का किआ नाम है?”

अशिता नाम है उस्का हम घर में उस्सको ‘आशु’ बुलाते हैं!

तब विहान ने मुस्कुराते हुए कहा,

“हाँ आशु को तो मैं जानता हूँ वो मेरा दोस्त है हम एक साथ खेलते थे स्कूल में!”

अनिरुद को बहोत दुःख हुआ विहान के बातों को सुनकर, और सोचने लगा के आशु नाम विहान के ज़हन में है मगर उस से किआ रिश्ता है वो क्लियर नहीं है विहान के दिमाग़ में अभी.

विहान कभी नार्मल दीखता तो कभी एक छोटे बचे की तरह बेहवे करता और बात भी बच्चों जैसे hi करता. अनिरुद को लगा के उस्का विहान वापस 5 साल का लड़का बन गया है, अनिरुद को उसस्के सवाल वैसे hi लग रहे थे जैसे जब वो 5 साल का था तब किया करता था. बाप का प्यार उभरके फिर से उन् दिनों का प्यार बन गया और अपने बेटे को ज़ोर से अपने सीने से लगाते हुए रोने लगा.

एक बाप के लिए एक जवान बीटा एक सहारा होता है और, और बाप को उस बेटे से बहोत उमीदें होते हैं. मगर इस वक़्त अपने उस जवान बेटे को एक छोटे बचे के रूप में देख कर बाप का मैं भर आया था और उस्का रोना बांध नहीं हो रहा था तो विहान ने पूछा,

“आप क्यों रो रहे हो किआ आप को चोट लगी है कहीं पर?!”

यह सुनकर अनिरुद और भी रट हुए कुछ टूटी हुई आवाज़ में कहा,

“हाँ बीटा यहाँ चोट लगी है” उस्सने अपने छाती को ठोकते हुए अपने दिल पर इशारा किया तो विहान अपने हाथ से उसस्के छाती को सहलाने लगा जैसे उसस्के चोट को हल्का कर रहा था.

दिन के खाना खाने के बाद अनिरुद ने विहान को उस्सकी दवाइयां दिए और कुछ देर बाद विहान सो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली…….
 
अपडेट 28 – अशिता सेदूसेड विहान

शाम को अशिता वापस आयी तो दौड़ कर सीधे विहान के पास गया तो देखा के वो बीएड पर बैठा हुआ था और उसस्के हाथ में एक किताब था जिस्सके पन्नों को विहान घुमा रहा था.

अशिता आहिस्ते आहिस्ते उस्सको देखते हुए उसस्के पास गयी और कहा,

“अरे वह, मेरा भाई तो कुछ पढ़ रहा है!”

विहान ने सर उठा कर अशिता के तरफ देखा भी नहीं और किताब के पन्नों को पलटता रहा बिना अशिता को देखे.

अशिता ने उस से बात किया मगर विहान ने कोई भी जवाब नहीं दिया और अपना चेहरे उस किताब से नहीं हटाया. फिर अशिता ने पूछा,

“तुमको सब साफ़ दिख रहा है भाई? पढ़के मुझे एक दो लाइन सुनाओ बुक में से!”

तो विहान ने बुक को बंद किया और, चादर के निचे अपने चेहरे को छुपा लिया.

अशिता वहीँ कड़ी उसस्के उस हरकत को देखते हुए सोचने लगी.

“किआ भाई को पता है के मैं अशिता हूँ? किआ वो मुझसे नाराज़ है अब तक? किआ उस्सको सब बातें याद है? किआ वो समझ रहा है के मैं अभी तक उस से रूठी हुई हूँ? किआ वो अभी तक उन् दिनों को जी रहा है जब मैं उस्सको इग्नोर किया करती थी? हे भगवान् अब मैं किआ करूँ? कैसे उस्सको अपने तरफ करूँ? मुझे किआ करना चाहिए अब?!”

अशिता एक कस्मकश में थी उस वक़्त और उसस्के समझ में नहीं ारः था के वो कैसे विहान को एप्रोच करें.

वो बीएड पर चढ़ी और आहिस्ते से विहान के चेहरे से चादर को हटाया, तो विहान ने अपने चेहरे को तकिये में छुपा लिया. तब अशिता ने उस्सको कसके बाहों में भरते हुए उसस्के गर्दन पर पीछे के तरफ किश करते हुए कहा,

“किआ हुआ मेरे भाई को किआ वो मुझसे नाराज़ है? मुझसे बात नहीं करोगे किआ भाई? क्यों अपना चेहरे छुपा रहे हो, देखूं, ज़रा देखूं तो क्यों इस चेहरे को तकिये में छिपाया हुआ है भाई ने हम्म्म!”

और तब विहान ने ज़ोर से कहा,

“चोर्रो मुझे मुझको चोरर दो मुझे नहीं पसंद जब कोई मुझे ऐसे पकार्टा है तो तुम जाओ यहाँ से मैं तुमसे बात नहीं करता, चले जाओ तुम!”

विहान की बोलने की ऐडा बिल्कुल एक छोटे बचे जैसे था उस वक़्त. उस्सकी आवाज़ में दुलार भी था और एक छोटे बचे वाला नखरें भी थे, बचपन की झलक दिख रहे थे.

अशिता को लगा के विहान उस्का छोटा भाई है उस वक़्त. उस्सको अफ़सोस भी हो रहा था और बहोत प्यार भी ारः था उस वक़्त विहान पर. उस सिचुएशन में अशिता को किआ करना चाहिए यह उसस्के समझ में नहीं ारः था बिल्कुल.

अनिरुद ने जब विहान की ऊंची आवाज़ सुनी तो कमरे में आया देखने के क्यों वो ज़ोर से बोल रहा था. और जब देखा के अशिता उस से लिपटी हुई है बीएड पर तो अनिरुद ने पूछा किआ हुआ, तब अशिता ने विहान को चोररटे हुए समझाया अपने पापा को के विहान कैसे बेहवे कर रहा है उसस्के साथ.

तो अनिरुद ने अशिता से कहा के शायद बेहतर एहि होगा के उस्सको अकेला चोरर दिया जाए. अशिता ने भी वही सोचा मगर फिर उस्सकी मोबाइल को सोचते हुए अशिता ने अपने पापा से धीरे कहा,

“वेट पापा मैं उस्सको उसस्के मोबाइल देकर देखती हूँ किआ करता है okay?”

फिर विहान की मोबाइल हाट में लेकर अशिता ने विहान को देते हुए कहा,

“लो, यह रहा तुम्हारा मोबाइल पहचानते हुए इससे?”

और विहान ने उसी ऊंची आवाज़ में कहा,

“मुझे कोई खिलौना नहीं चाहिए ले जाओ इससे भी!”

तो अनिरुद ने इशारे से अशिता को निकलने को कहा.

अशिता उदास होकर निकली उसस्के कमरे से और बाहर आकर रोने लगी अपने पापा के सीने से लग कर. बाप ने बेटी के सर पर हाथ फरते हुए कहा,

“फ़िक्र मत करो, ठीक हो जाएगा, अभी उसस्के दिमाग़ में पता नहीं किआ चल रहा है इसी लिए वो ऐसा कुछ कर रहा है, उस्सको थोड़ा वक़्त दो सँभालने के लिए बेटी… और तुम तो उस्सको बेहतर जानती हो तो जब तुम दोनों बिल्कुल अकेले हो तो तुम कुछ ऐसा करो जो उस्सको पसंद था, आहिस्ते आहिस्ते सब याद आजाएगा उसे, फ़िक्र मत करो, जस्ट गिव हिम थे टाइम नीडेड!”

उस रात को जब अशिता विहान के बीएड पर सोने जा रही थी तो विहान को उसस्के पिल्स देने से पहले, मतलब वो ड्रग वाले गोलियां देने से पहले अशिता ने कुछ सोचा अपने दिमाग़ में और वो करके विहान की रिएक्शन देखना चाहती थी….. क्यूंकि अगर वो गोलियन पहले विहान को दे देती तो उस्सको नींद आजाता, मगर अशिता विहान से जागते हुए में एक एक्सपीरियंस करना चाहती थी….

विहान लेता हुआ था बाकी के देवियां को खाकर, लास्ट दवाई लेने से पहले उस ने नखरें भी किये के नहीं लेगा, मगर बड़े प्यार से फुसलाते हुए अशिता ने उस्सको खिलाया. अशिता ने तब रूम के दरवाज़े को लॉक किया और विहान के सामने अपने कपडे बदले उसस्के चेहरे में देखते हुए…. अपनी ब्रा को उतरा अशिता ने और एक खूबसूरत महीन निघ्त्य पहना वैसे hi विहान के चेहरे में देखते हुए. जब अशिता वो सब कर रही थी तो विहान उसी को गहरे जा रहा था और अशिता को ाचा लग रहा के वो उसी को देख रहा है. फिर अशिता अलमारी के मिरर के पास कुछ बलखाती हुई चल के गयी और मिरर में विहान को देखने लगी अपने बाल बनाते हुए. मतलब अशिता विहान को सडके करने की कोशिश कर रही थी, उस्सको ारोउसे करने की कोशिश में लगी थी.

विहान देख तो रहा था अशिता को वो सब करते हुए मगर जैसे थोड़ा शर्माते हुए, कभी चादर को अपने ेंखों के सामने कर लेता, तो कभी एक मुस्कान से देखता और कभी एक तरफ देख कर फिर तुरंत वापस अशिता को देखता. फिर अशिता ने नोटिस किया के एक बार विहान ने एक ेंख को बांध करके, सिर्फ एक ेंख से उस्सको देखा कुछ देर तक. अशिता को डॉक्टर अग्रवाल की बात याद आयी के कभी जब उस्सको डबल दिखेगा तो वो एक ेंख को बांध करके एक hi ेंख से देखेगा साफ़ दिखने के लिए….

तो अशिता मुस्कुराते हुए, कुछ सेदूसिंग अदाओं से चल कर विहान के पास बीएड पर चढ़ी, जिस वक़्त उस्सने बीएड के ऊपर एक तंग को किया, तो ऑफ़ कोर्स उस्सकी निघ्त्य जाँघों के ऊपर हुई और वो एक तंग जो बीएड पर था, उस्सकी जांघ बिल्कुल विहान के चेहरे के करीब किया जान बुझ कर अशिता ने. और अपनी आकर्षित मुस्कान से विहान के ेंखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा,

“क्यों भाई किआ देख रहा मेरा बॉयफ्रेंड इस वक़्त? हम्म्म? बताओ मुझे, तुमको यह बहोत पसंद है नाह? बोलो मुझे! हम्म्म्म मेरी जाँघों को तुम बहोत पसंद करते थे नाह? तो लो; यह अब सिर्फ तुम्हारा है, जो जी में आये करो इस्सके साथ”

उस वक़्त अशिता की निप्पल्स दो अंगूर के दानों की तरह उस्सकी पतली निघती पर कुछ इस तरह से दिख रहे थे के उस्सको बुसस अपने मुंह में लेकर अंगूर के रस को चुस्सना बाकी था, और विहान की नज़र तब जांघ से हट कर अशिता की छाती पर पड़े और उस्सने फिर एक ेंख को बांध करके अशिता के बूब्स को ग़ौर से देखा…..

तो तुरंत अशिता ने अपने भाई के गर्दन को अपने हाथ से अपनी छाती पर किया और खुद एक गहरी सांस लेते हुए अशिता की आह निकली जिस दम विहान का चेहरा उसस्के बूब्स पर डब्बे!

विहान के सांसें तेज़ चलने लगे थे और वो थोड़ा बहोत जैसे कांपने लगा था तो अशिता को कुछ डर सा लगा के कहीं वो उसस्के हेल्थ को नुक्सान तो नहीं पंहुचा रही है.

फिर अशिता ने सोचा के वो कुछ नाह करे बुसस देखे के विहान किआ करता है उस वक़्त. तो अशिता अपनी जगह पर बीएड पर लेट गयी विहान के बगल में और वेट करने लगी के खुद विहान कुछ करे उसस्के साथ. चादर को हत्ता दिया अशिता ने और लेते हुए hi अपनी एक तंग को जान बुझ कर ऊपर उठाया ताके उस्सकी निघ्त्य हट जाए और उस्सकी जांघ विहान को अछि तरह से नज़र आये.

जब कोई 10 मिनट्स तक विहान ने कुछ नहीं किया बुसस देखता रहा कभी एक ेंख से तो कबि छुप छुप कर चादर से ेंख छुपाते हुए तब अशिता ने सोचा के यह देखना चाहिए के किआ विहान का डिक ेरेक्ट हुआ के नहीं उस्सको वैसे देखने से…… विहान के ऊपर उस जगह पर चादर था, वो चादर ओढ़ा हुआ था मगर अशिता ने अपने ऊपर चादर नहीं डाला था, तो अशिता ने धीरे धीरे विहान के चादर को हटाया, और देखा के विहान का एकदम मस्त खड़ा हुआ है उसस्के पयजामे के अंदर और फनफना रहा है.

विहान खुद के इरेक्शन को देख कर जैसे शर्मा गया और जल्दी से चादर को वापस अपने ऊपर किया अपने इरेक्शन को छुपाने के लिए. उस्सको शर्म आ रहा था शायद.

इतने वक़्त में विहान ने एक लव्ज़ भी नहीं कहा था, सिर्फ टुकुर टुकुर सब कुछ देखते जा रहा था. और जब बोलै तो किआ बोलै के अशिता एक तो बहोत सरप्राइज हुई और उसस्के ेंखें भर आये…. विहान ने वही एक छोटे बचे की आवाज़ में पूछा,

“किआ तुम मेरी पत्नी हो? किआ हमारी शादी हो गयी है? हम हस्बैंड वाइफ हैं किआ?!

तो बे कॉन्टिनोएड…… (3750 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 29 अशिता विथ विहान ों बीएड

विहान खुद के इरेक्शन को देख कर जैसे शर्मा गया और जल्दी से चादर को वापस अपने ुइपर किया अपने इरेक्शन को छुपाने के लिए. उस्सको शर्म आ रहा था शायद.

इतने वक़्त में विहान ने एक लव्ज़ भी नहीं कहा था, सिर्फ टुकुर टुकुर सब कुछ देखते जा रहा था. और जब बोलै तो किआ बोलै के अशिता एक तो बहोत सरप्राइज हुई और उसस्के ेंखें भर आये…. विहान ने वही एक छोटे बचे की आवाज़ में पूछा,

“किआ तुम मेरी पत्नी हो? किआ हमारी शादी हो गयी है? हम हस्बैंड वाइफ हैं किआ?!

अब आगे….

(दोस्तों मैं एक बात बताना या तो भूल गया या जान बुझ कर नहीं बताया था अब बता देता हूँ के डॉक्टर अग्रवाल का इस कहानी में एक बहोत ख़ास रोले है जो वक़्त आने पर मालूम होगा )

अशिता ने जब विहान के उस सवाल को सुना तो उसस्के समझ में नहीं आया के विहान को किआ जवाब दें, प्यार भरे नज़रों से उसस्के चेहरे में देखने लगी कुछ देर तक, और तब तक विहान अशिता के निघ्त्य के स्ट्राप को देख रहा था और हलके से अपने हाथ से उसस्के कांधों को छुआ.

तो अशिता ने उस से पूछा,

“हम्म क्यों छह रहे हो कंधे को? यह तुमको ाचा लगता है?”

विहान ने कुछ और कहा,

“तुम ने जवाब नहीं दिया किआ वे अरे मैरिड?”

तब अशिता ने उसस्के सर को अपने सीने से लगाते हुए ऊपर छत्त देखते हुए इमोशनल होकर अपनी मीठी आवाज़ में कहा,

“हाँ भाई हाँ वे अरे मैरिड सीन्स ागेस, हम बहोत चौथे थे तब से हम मैरिड hi हैं, हम एक साथ सोते थे, एक साथ उठते बैठते थे, एक साथ स्कूल जाते थे, एक साथ सब कुछ करते थे, तो हस्बैंड वाइफ hi हुए नाह भाई, वो अलग बात है के मैं तुमसे कुछ महीनों के लिए दूर चली गयी थी इस लिए तुम तो मुझे भूल hi गए. नाराज़ हो गए मेरे उस बेरुखी से और मुझको भगवान् ने उस्सकी सज़ा दिया तुमको सब भुलवा कर. हाँ भाई वे अरे मैरिड.”

अपनी बेहेन के सीने से उस तरह से चिपके हुए रहकर विहान ने धीरे से अपनी नार्मल आवाज़ में कहा,

“तुमको वापस तो आना hi था बी हुक और बी क्रूक!”

अशिता को उस्सकी नार्मल आवाज़ सुनकर झटका लगा और एक झटके में उसस्के सर को सीने से अलग करके विहान के चेहरे में ग़ौर से देखते ख़ुशी से कहा,

“भाई तुमने नार्मल बात किया अभी, भाई तुम ठीक हो गए नाह? अभी अभी तुमने किआ कहा, बी हुक और क्रूक और किआ कहा मुझे ठीक से सुनाई नहीं दिया फिर से कहो नाह, कहो नाह भाई प्लीज, तुम्हारी आवाज़ बिल्कुल वैसा था जैसे पहले था अभी अभी वापस वो बात बोलो नाह भाई!”

मगर अशिता निराश हुई जब विहान ने वही बचे वाले हरकत करते हुए कहा,

“किआ बोलूं मैं? मैं ने कुछ नहीं कहा तुम क्यों उदास हो अब?”

अशिता कुछ देर तक सोचती रही के किआ उस्सने विहान की आवाज़ को अच्छी तरह से सुना या वो उस्सकी वेहम थी? उसस्के कान में हु पहले जैसे विहान की आवाज़ गूँज रही थी मगर क्यूंकि विहान का चेहरे और मुंह उस वक़्त अशिता के सीने पर दबे हुए तो तो अशिता ठीक सा सारे बातों को सुन नहीं पायी थी, सिर्फ ‘हुक और बी क्रूक, याद आरहे थे अशिता को. मगर कुछ पल बाद अशिता ने उस बात को नज़रअंदाज़ कर दिया यह सोच कर के वो उस्का वेहम था.

और तब अशिता ने वापस विहान के डिक के तरफ अपना नज़र किया तो देखा के अब वो इरेक्शन नहीं था जो कुछ देर पहले देखि थी उस्सने. और अशिता वापस उस्सको खड़ा हुआ देखना चाहती थी तो सोचा विहान को अब करेस करके और ज़्यादा सडके करके देखे किआ होता है….

सहित ने हलके से अपने एक हाथ को विहान के छाती से फरते हुए धीरे धीरे उसस्के पथ से होकर उस से और निचे हाथ बढ़ाती गयी. विहान अपने हाथ में चादर को ज़ोर से जाहक कर अशिता के उस हाथ को hi देख रहा था और एकांत बात अशिता के चेहरे में भी देख रहा था और जब अशिता का हाथ विहान के अंडरवियर को छुआ तो विहान ने सर को नाह में हिलाते हुए कहा,

“no, no, no, वहां नहीं, वहां नहीं!”

तब अशिता ने “हीहीहीहीही” करते हुए पूछा,

“क्यों भाई वहां क्यों नहीं हम्म्म्म?”

विहान ने वैसे सर को हिलाते हुए hi अशिता के हाथ को कुछ इस तरह से देख रहा था जैसे वहां कोई खतरनाक इन्सेक्ट या जानवर था, या एक सांप था और कहा,

“no, no, no, मुझे बहोत गुदगुदी होगा वहां, वहां नहीं, वहां नहीं, हत्तो हत्तो नाह तुम!”

विहान का फिर से जैम के खड़ा हो गया था, और अशिता का हाथ विहान के अंडरवियर के ऊपर उस्सको छह रहा था और विहान कसमसाते जा रहा था….

अशिता की दिल की धड़कन तेज़ हुई जब उसस्के पांचों उँगलियाँ विहान के लुंड की फॉर्म को अंडरवियर में छुआ. वो विहान के चेहरे में देखते हुए हलके हलके, हौले हौले अपने हाथ से अंडरवियर के ऊपर hi सहलाने लगी.

विहान ने अपने मुंह को कुछ तोड़ मोड़ करते हुए, एक चूहे की तरह मुंह बना कर अशिता के हाथ को अपने लुंड के ऊपर देख रहा था और अपने दोनों टांगों को एक दूसरे पर क्रॉस करने की कोशिश करने में लगा था, मगर अशिता ने दूसरे हाथ का इस्तेमाल करते हुए उस्सको वैसा नहीं करने दिया और मुस्कुराते हुए विहान के दोनों टांगों के बीच खुद चली गयी अपने छाती से उसस्के जाँघों को दबाते हुए.

जिस वक़्त अशिता के दोनों बूब्स विहान के जाँघों पर डब्बे तब विहान ने उफ़ किया और धीरे से कहा,

“किआ कर रही हो तुम? ऐसा नहीं करते हैं यह ग़लत है नाह?!”

अशिता जैसे एक जोश में थी और विहान को देखते हुए मुस्कुराकर अपने जीब को खुद के होंठ पर फिरते हुए कहा,

“कुछ ग़लत नहीं है भाई, तुम सब भूल गए यह सब तुम मेरे साथ करते थे जब मैं सो जाती थी, तुम समझते थे के मैं नींद में हूँ मगर मुझे सब पता होता था तुम जो कुछ भी करते थे मेरे साथ और मुझे बहोत अच्छा लगता था, हम्म अब खामोश रहो और मुझे करने दो जो करना है!”

विहान ने एक गहरी सांस लिए और अशिता के चेहरे में देखता रहा जबकि अशिता ने विहान के पाजामे की इलास्टिक को उसस्के कमर में उँगलियों से निचे किया और विहान के जांघ तक पाजामे को रोका, फिर उसस्के अंडरवियर की इलास्टिक को अपने उँगलियों में फंसाया और विहान को देखते हुए धीरे धीरे उसस्के अंडरवियर को निचे के तरफ खिस्काने लगी.

कुंके विहान का तन्न के खड़ा हुआ था अंडरवियर फंस गया था निचे नहीं जा रहा था तो अशिता ने एक हलकी सी हंसी चोररटे हुए इलास्टिक को ऊपर किया और विहान का मोटा लुंड एक स्प्रिंग की तरह झट से बाहर निकला, तो अशिता अपने होंठों के बीच जीब दबाते हुए एक मुस्कान के साथ अंडरवियर को निचे किया विहान के घुटनों तक, और उसस्के हैरान चेहरे में देखते हुए अशिता के उसस्के लुंड पर हलके से अपने उँगलियों को चलाया.

विहान ने अपने जिस्म को बिल्कुल सीधा कर दिया जैसे स्ट्रेच कर रहा था और टांगों को जैसे थरथराते हुए अशिता को रोकने की कोशिश कर रहा था, फिर कहा,

“यह ठीक नहीं है नाह? सवाल कर रहा हूँ, कोई आगया तो? मम्मी पापा मरेंगेउय दोनों को!”

अशिता ने उसस्के होंठों पर अपने ऊँगली रख कर कहा,

“सशह्ह्ह” कुछ नहीं बोलते अब सिर्फ फील करो, अरे बाबा दरवाज़ा लॉक है कोई नहीं आ सकता अंदर, तुम दर्रो मत एन्जॉय करो अब नाह भाई! देखना अभी तुमको कितना मज़ा आएगा”

विहान खामोश हो गया मगर अशिता के चेहरे में देखता रहा. अशिता थोड़ा मुस्कुरा रही थी और थोड़ा हैरान भी दिख रही थी, यह सब वो पहली बार कर रही थी विहान के साथ. वैसे तो बरसों से उस्सने विहान के लुंड को अपने टांगों और जाँघों के बीच फील करते आयी है, उस्सको अपने जाघों के बीच झड़ते हुए फील किया है, उसस्के स्पर्म को अपने पंतय पर सूखते हुए फील किया है मगर आज पहली बार वो खुद उसस्के लुंड को अपने हाथ से छह रही थी.

तब आशिता ने बिल्कुल नहीं सोचा था विहान वो कहेगा जो उस्सने कहा, विहान बोलै,

“अपने निघ्त्य के दोनों स्ट्रैप्स को काँधे से निचे कर दो और जैसे मेरे जांघों पर दबा हुआ है डायरेक्ट दबाओ बिना निघ्त्य के!”

अशिता का मुंह खुला के खुला रह गया विहान को सुनकर. वो उस्सको देखती रही कुछ पल तक फिर कहा,

“अरे वह भाई! तुमको तो पता है किआ करना चाहिए, हम्म मेरे बूब्स को अपने जाँघों पर फील करना चाहते हो? बोलो?”

विहान जैसे हकबकहाये हुए अशिता को देखते हुए कुछ बोलै नहीं मगर हाँ में सर हिलाया.

तो अशिता ने कहा,

“तो जाँघों पर क्यों? अपने चेहरे पर क्यों नहीं भाई? अपने होंठों से क्यों नहीं लगाना चाहते हो मेरे बूब्स को फिर?”

विहान ने बड़े भोली सी आवाज़ में जवाब दिया,

“पता नहीं”

तब तक अशिता अपने कांधों से दोनों तरफ के स्ट्रैप्स को निचे कर रही थी और विहान ने ेंखों को हे मोटा मोटा खोला हुआ था देखते हुए के अब बूब्स बहार निकलेंगे…. और जब अशिता के दोनों मुलायम बूब्स बाहर दिखाई दिए तो ऐसा लग रहा था के जैसे लुंड खड़ा होता है नाह उस्सकी चूचियां भी कुछ वैसे तन्ने हुए और खड़े थे और दोनों निप्पल्स जैसे विहान को hi देख रहे थे दो ेंखों की तरह. अशिता ने उस वक़्त नोट किया के विहान का लुंड हिल्ला जैसे और एक स्प्रिंग हिलता है वैसे कुछ हरकतें हो रहे थे उसस्के लुंड पर और मुस्कुराते हुए अशिता ने विहान का एक हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने बूब्स तक लाया.

विहान की सांसें बढ़ने लगे थे और वो सुनाई दे रहा था अशिता को, जैसे उसस्के हाथ ने अशिता के बूब को छुआ तो विहान के गले से एक आवाज़ निकली जैसे उस्सने कोई बर्फ जैसा चीज़ छुआ हो, एक कांपते हुए आवाज़ में विहान ने कहा,

“मैं इस्को दबा सकता हूँ किआ?”

अशिता ने डब्बे हुए आवाज़ में एक अंगराई के साथ कहा,

“हाँ दबाओ और जो मैं में आये वो करो”

तब विहान ने अपनी बेहेन की मुलायम बूब को दबाया और अपने ऊँगली को निप्पल पर किया फिर वहां भी दबाया, तो अशिता की आह निकली और उस्सने भी एक लम्बी सांस लेते हुए अपने हाथ को विहान के तन्ने हुए लुंड पर किया.

तब विहान ने बूब से खेलते हुए पूछा,

“मैं इस्को किश कर सकता हूँ किआ?”

अशिता ने हाँ में सर हिलाया, तो विहान का मुंह अशिता के बूब पर आये और उस्सने उस्सको चूमा फिर बिना पूछे निप्पल को अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगा और अशिता बेहाल होने लगी विहान के लुंड को ज़ोर से अपने मुठी में दबाते हुए.

अशिता बीएड पर बैठी हुई थी विहान के बगल में और विहान भी अब बैठा हुआ था अपनी बेहेन के बूब चूस्ते हुए जबकि एशिया की मुठी अब विहान के लुंड पर धीरे धीरे चलने लगी थी. विहान धीरे धीरे अपने कमर को ऊपर उठाते हुए जैसे अशिता की मुठी में धक्का देने की कोशिश कर रहा था तब अशिता ने कहा,

“वेट मैं तुमको और भी ख़ुशी देती हूँ, तुम लेट जाओ मैं कुछ और करती हूँ बाद में चुस्सना इधर okay?”

विहान हाँ में सर हिलाते हुए लेट गया और अशिता ने झुक कर विहान के लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चुस्सना शुरू किया.

विहान का जिस्म और भी ज़्यादा स्ट्रेटचेड लगा उसस्के बाद और वो अपने कमर को ऊपर उठाते हुए जैसे अशिता के मुंह में और भी ज़्यादा अंदर अपने लुंड को पुश करने की कोशिश कर रहा था तब अशिता ने उस्सको घुटनों पर होने को कहा, उस ने किया और अशिता बीएड से निचे उत्तरी और उस्सको चुस्सना जारी रखा, चुस्ती गयी उसस्के बॉल्स को हाथ से सहलाते हुए, और विहान ढाका देने लगा अशिता के मुंह में कमर को हिलाते हुए, तब उस्सने कहा,

“मुझे तुमको किश करना है, रुको, रुको नाह अपने मुंह को मेरे मुंह के पास लाओ नाह अब!”

अशिता ने जल्दी से उठकर अपने भाई के बाहों में बाहें डाला और दोनों एक दूसरे को जाकर कर किश करने लगे, जिस दौरान किश कर रहे थे विहान का लुंड अशिता के पथ के निचे उस्सकी पंतय पर डब्बा हुआ था तो अशिता ने विहान को बीएड के ऊपर लेटाया किश को बरकरार रखते हुए और खुद विहान के ऊपर चढ़ गयी उस डरुअन विहान का लुंड डायरेक्ट उस्सकी पुसी पर था और पंतय पर रब हो रहा था, विहान का हाथ अशिता के नितम्बों पर गए और उसको दबाते हुए किश को कंटिन्यू करते हुए hi विहान अपने लुंड को रगड़ने लगा अशिता की पंतय पर hi और झड़ने को आया तो किश रोक कर ज़ोर से,

“आआह्ह्ह्हह स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह ायघघघघघघघ”

कुछ ऐसे आवाज़ में उस्का वीर्य अशिता के पंतय को और उसस्के खुद के पथ को लतपथ कर दिया……

फिर तुरंत अशिता ने अपने हाथ में उसस्के लुंड को लिया, मुठी बांध करके बाकी के वीर्य को पेरॉय और अपने भाई के लुंड को किश किया हांफते हुए, फिर जल्दी से विहान ने भी हांफते हुए अशिता के मुंह को फिरसे अपने मुंह में लिया और किश करते हुए उस्सको ज़ोर से अपने बाहों में जाकर के बीएड पर लेट गया.

अशिता भी पूरी तरह से गीली हो गई थी और उससे खुद पता नहीं चला के वो ओर्गास्म रीच हो पायी के नहीं मगर बेहद खुश थी के विहान का सेक्सुअल सिस्टम में सब कुछ बिल्कुल वैसा hi है जैसे था एक्सीडेंट से पहले.

दोनों बिल्कुल संतुष्ट होकर गहरी नींद में सो गए बिना कपडे के, कम्बल के निचे एक दूसरे को बाहों में भारी. दरवाज़ लॉक hi रहा.

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 30 थे नेक्स्ट मॉर्निंग

अगले सुबह को दोनों एक साथ जागे. अशिता को याद आयी के उस्सने लास्ट वाला मेडिसिन्स नहीं दिया था विहान को, लव मेकिंग के बाद दोनों सो गए थे. अशिता ने देखा के विहान शर्मा रहा था कल वाले गुज़रे प्यार करने की वजह से. वो उस से अपना चेहरा छुपा रहा था, तो अशिता ने उसस्के चेहरे से चादर हत्ता कर बच्चों की तरह शर्माने से मन किया और उसस्के चेहरे में देख कर सामना करने को कहा, और तुरंत उस्सको वह दवाइयन दिए लेने को. और उस से कहा के हो सकता है उस्सको नींद आएगी तो सोने चले जाना.

फिर सब कुछ जल्दी जल्दी हुआ, वाशरूम, टूथब्रश, अशिता ने शावर लिया, उस्सकी माँ ने विहान के लिए नाश्ता तैयार किया और जब अनिरुद काम के लिए निकल रहा था तो विहान से मिला और उस से बात करके निकला. उस से कहा के उस्सकी माँ आज रहेगी उसस्के साथ तो विहान अपने माँ के पास गया और उस्सको काम पर जाने को कहा.

अशिता हैरान हुई और कहा के क्यों मम्मी को काम पर जाने को कह रहा है. तो विहान ने जवाब दिया के वो अपना ख्याल खुद रख सकता है किसी को उसस्के साथ रहने की ज़रुरत नहीं है. सुमन ने भी कहा के हाँ अगर वो अकेला रहना चाहता है तो वो भी जा रही है अपने काम पर और चली गयी.

अशिता को अजीब लग रहा था के विहान अकेले किआ करेगा घर पर, तो एक बार फिर एक पल के लिए विहान ने नार्मल आवाज़ में कहा,

“ी ऍम ग्रोन उप एंड कैन टेक केयर ऑफ़ माइसेल्फ.”

जिस वक़्त उस्सने यह कहा तो अशिता ने उस से पीठ किया हुआ था और हैरत में मुड़कर विहान को देखा, फिर चल कर उसके पास जाकर उसस्के चेहरे में देख कर कहा,

“तुम कभी कभी बिल्कुल ठीक फील करते हो नाह भाई? एक पल के लिए तुम नार्मल हो जाते हो बोलो सच है नाह भाई? अभी अभी तुमने बिल्कुल नार्मल बात किये वो भी इंग्लिश में सही वर्ड्स बोले तुमने, दोहराओ जो अभी तुमने कहा प्लीज!”

विहान ने अब बचे वाली आवाज़ में पूछा,

“किआ बोलूं मैं? मुझे नहीं याद मैं ने किआ कहा अभी!”

अशिता ने ेंसू भरे ेंखों से कहा,

“भाई तुम ने कहा, ‘ी ऍम ग्रोन उप एंड कैन टेक केयर ऑफ़ माइसेल्फ’”

तब विहान ने कहा,

“ी don’t क्नोव”

तो आशिता बोली,

“देखा तुमको इंग्लिश भी सब याद है नाह भाई?”

विहान ने कहा,

“हाँ स्कूल में पढ़ा था मैं ने तो थोड़ा याद होता है हेहेहे, तुमको इंग्लिश अति है किआ?”

अशिता ने फिर उदास होते हुए कहा,

“अरे भाई हम एक साथ स्कूल जाते थे याद है तुमको? हम बस में एक साथ बैठते थे, एक साथ लंच करते थे याद है?”

विहान ने नाह में सर हिलाते हुए कहा,

“झूट. तुम झूट बोल रही हो!”

अशिता ने कहा,

“okay जब याद होगा तब पूछूँगी तुमसे, तुम नाह, मुझे तुम्हारे बातों को रिकॉर्ड करना चाहिए तब ठीक हो जाओगे तो तुमको सुनाऊँगी.”

विहान मुंह बनाते हुए एक तरफ देखने लगा तो अशिता ने कहा,

“ाचा भाई घर पर अकेले रहोगे तो दरवाज़ा अंदर से लॉक रखना और मैं फ़ोन करुँगी तो फ़ोन लेने आना ok? मैं बार बार फ़ोन करुँगी जान्ने के लिए के तुम किआ कर रहे हो और कैसे हो ok? समझे नाह? फ़ोन यहाँ है, मैं तुम्हारे मोबाइल से hi फ़ोन करुँगी, lol ये मोबाइल तुम्हारा है मगर उसे मैं कर रही हूँ हीहीहीहीहीही!”

विहान ने अचानक कहा,

“मेरा फब अक्स चाय उस में!”

अशिता चिहुँकि, और उस्सको फिर देखते हुए कहा,

“रियली? फब पर हो तुम? मैं ने कभी चेक नहीं किया, पासवर्ड बोलो मैं अप्प ओपन कर रही हूँ…”

विहान खामोश रहा. अशिता ने दोबारा पूछा फिर भी वो खामोश था, तो अशिता समझ गयी के उस्सको पासवर्ड नहीं याद होगा, और खुद सोचने लगी के किआ पासवर्ड रखा होगा उस्सने.. कुछ नंबर जैसे उसस्के बिर्थ्दते, अपनी खुद की बिर्थ्दते सब तरय किया मगर नहीं ओपन हुआ, तब तक अशिता की जाने का टाइम हो रहा था तो उस्सने सोचा बाद में तरय करेगी.

फिर अशिता ने जल्दी से विहान के सभी दवाइयों को टेबल पर रखा और जो जो उस्सको लेना चाहिए था सब एक तरफ उस्सको बता के रखा और उस्सको टाइम लिख कर दीवार पर बताया के कौन सा वाला कितने बजे लेना चाहिए. विहान ने कहा के हाँ वो समझ गया और उसी टाइम पर लेगा मेडिसिन्स को.

अशिता तब रेडी होने गयी और विहान को रूम में बुलाया और कहा,

“तुमको याद है के तुम मुझको कपडे बदलना देखना पसंद करते थे जब मैं यूनिफार्म पहनती थी, तो बैठो आज मैं फिर से तुम्हारे सामने चेंज करती हूँ और यूनिफार्म पहनती हूँ, यह लो अपना मोबाइल इस से मुझे रिकॉर्ड करना okay? ऐसे इस बटन को दबाओ, ok, देखो रिकॉर्ड हो रहा है, तुम यहाँ बैठो बीएड पर मैं वहां चेंज करती हूँ तुम रिकॉर्ड करना और देखना मुझे समझे भाई?!”

विहान ने हाँ में सर हिलाया और अशिता को रिकॉर्ड करने लगा और उस्सको अपने सारे कपडे उतारते हुए देखा, फिर यूनिफार्म पेहेनते हुए देखा और उस्का खड़ा हो गया तो, जब अशिता पुरे यूनिफार्म पेहेन कर उसस्के पास आयी तो विहान ने उस्का हाथ पाकर के अपने सेक्स पर रखा दिखाने को के वो खड़ा हो चूका था.

अशिता ने मुस्कुराते हुए उस से कहा,

“अरे बाबा अभी मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकती, अभी मुझे स्कूल जाना है.”

तो विहान ने उस से कहा.

“कॉलेज”

तब आशिता ने हँस्ते हुए कहा,

“अरे हाँ वही मतलब कॉलेज जाना है!”

विहान ने कहा,

“किश”

अशिता ने पूछा किआ किश?

तो विहान ने अपने होंठ पर हाथ रखते हुए अशिता के चेहरे में देखते हुए कहा,

“यहाँ, किश हम्म्म”

अशिता मुस्कुरायी और कहा,

“हाँ हम हर सुबह जाने से पहले किश करते थे वो याद है तुम्हें?”

विहान ने फिर कहा,

“No, ी वांट किश नाउ!”

तो बड़े प्यार से अशिता ने अपने बाहों को उसस्के गले में डाला और कहा.

“यह वाला किश तो मैं खुद करने hi वाली थी तुमको भाई, यू दो नॉट नीड तो आस्क नाह!”

तब विहान ने अचानक फिर नार्मल आवाज़ में कहा,

“झूट तुमने करना रोक दिया था!”

अशिता फिर चिहुंक कर विहान के चेहरे में फिक्स देखते हुए पूछा,

“तुमको सब याद है भाई?! बोलो नाह भाई?”

और अशिता विहान को ज़ोर से अपने बाहों में भर कर रोने लगी और रट हुए hi कहा,

“मैं ने तुमको बहोत सताया है नाह भाई बहोत दुःख दिया नाह भाई? तुमको बहोत तकलीफ हुई होगी नाह भाई, मुझे माफ़ कार्डो नाह भाई, मुझे अब सब एहसास होता है भाई के तुम पर किआ गुज़रा होगा मैं अब सब समझ रही हूँ भाई, ी ऍम वैरी सॉरी भाई प्लीज फॉरगिव में भाई.”

और अशिता ने सुना विहान की नार्मल आवाज़ ने कहा,

“फॉरगिवें”

अशिता रट रट हंस पारी और ज़ोरों से विहान के गालों पर हज़ारों चुम्बन देती गयी और लास्ट में उसस्के मुंह को अपने मुंह में लेकर एक लम्बी फ्रेंच किश किये….

और लास्ट में अशिता ने bye कहा उस्सको ज़ोर से हुग करते हुए कॉलेज के लिए निकल गयी.

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
भाई अशिता ने डॉक्टर को चूसा नहीं था. सिर्फ उस्सको नंगा करके रिलैक्स करवा रही थी ताके उस्सको टाइम मिले दरवाज़ा को अनलॉक करने को क्यों के अशिता क समझ में नहीं ारः था के वो लॉक कैसे खुलता है. जब उस्सको नंगा कर hi दिया था तो लुंड को हाथ में पकड़ना तो पारा वार्ना डॉक्टर को शक होता क क्यों उस्सको नंगा करके कुछ नहीं कर रही है. डॉक्टर उस्सको मुंह में लेने क लिए कह रहा इस लिए बस होंठ लगाया था अशिता ने ताके डॉक्टर को लगे क अब चुस्सने वाली है और आराम से लेट जाए तब अशिता उस मौके का फायदा उठा कर वहां से निकल सके. और एक्साक्ट्ली वही किया जैसे उसस्के होंठ डॉक्टर क लुंड को छुआ तो अशिता की ेंखें डॉक् पर hi था तब तुरंत अशिता निकली वहां से.... कितना टाइम लगा उस्सको लॉक को अनलॉक करने में फिर भी. ....

प्रिय की मां को उस वक़्त तो बिल्कुल नहीं बताना था. उस्सको तो सिर्फ मोबाइल लेकर वहां से निकलना था. मगर जब जाने लगी थी तब डॉक्टर ने कहा क उस्सकी पिक्स को इंटरनेट पर अपलोड करेगी ओनली तब अशिता ने प्रिय क मां को सोचा. अंदर डॉक् क पास उस्सने नहीं सोचा था राणे क बारे में.

फ्राइडे भाई कभी ऐसे सिचुएशन में परे हो आप क समझ में नहीं आये क किआ करना चाहिए और अकाल कुछ काम नहीं करता, फिर भी एक आईडिया मिले किसी को नंगा करके वहां से भागने का एक मौका मिले और एक लॉक ऐसा हो क खुलेगा क नहीं उस्का पता नहीं? आप सोचिये उस वक़्त अशिता किश सिचुएशन में थी फिर भी वहां से निकली
 
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