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अपडेट 63 स्टिल इन थे विलेज
विहान अशिता एक दूसरे के कमर में हाथ डाले हुए धीरे धीरे चल रहे थे के अशिता ने मुंह लटकाते पानी भरी हुए ेंखों में कहा,
“शायद आखरी बार हम ऐसे एक साथ हैं, कल मैं चली जाउंगी भाई!”
अब आगे….
उस रात को अनिरुद ने अपने माता पिता और बड़ी बेहेन के साथ अपने 3 भाइयों को भी बुलाया बात करने के लिए. बात तो झूट करना था मगर सबने बहोत सीरियस लिया उसस्के बातों को. भाई तो 7 थे अनिरुद के मगर अब यहाँ 3 hi रहते थे बाकी के अलग घर थे पास के गाओं में, और 2 इसी गाओं में थे, क्यूंकि उन् लोगों ने अपने शेयर ले लिए थे. बाकी के 3 और अनिरुद ने अभी तक कुछ अपना हिस्सा नहीं लिया था फॅमिली हेरिटेज से. अनिरुद को इस बारे में भी बात करना था अपने पिता से मगर वो अकेले mein.(isske बारे में बाद में पता चलेगा)
उस्सने समझाया सबको के विहान को शहर में कुछ बड़े संघात का एस्सार पड़ा हुआ है जिस्सके लिए वो कुछ सालों तक, 2 या 3 साल तक उस्सको यहाँ रहने के लिए चोरर्ण चाहता है.
अनिरुद के पिता ने सुनकर अपने मंच को हाथ से सीधा करते हुए, अपने छाती को आगे करते हुए सिर्फ यूँ कहा,
“हम्म्म्म मुझे कुछ ऐसा लग रहा था!”
तब अनिरुद के सबसे छोटे भाई ने पूछा,
“ऐसा किआ किया विहान ने भाई?!”
अनिरुद ने कहा,
“कुछ किया तो नहीं बुसस पढ़ाई नहीं कर पाया, हमारे मोहल्ले में आज कल ड्रग एडिक्ट्स बहोत बढ़ गए हैं और इनके बहोत सारे दोस्त ड्रग्स लेते हैं और यह रात रात भर उन् लोगों के साथ रहने लगा है, मुझे डर है कहीं इस्को भी वो लेथ नाह लग जाए इस लिए मैं ने डीडे किया इस्को आप लोगों के पास चौररने के लिए कुछ दिनों तक, किआ वो यहाँ रह सकता है?”
अनिरुद की माँ ने कहा,
“क्यों नहीं रह सकता उम्र भर रह सकता है, मैं तो कहती हूँ के तुम पुरे परिवार के साथ यहीं बास जाओ बीटा, यह तुम्हारा hi घर है, विहान का भी घर है यह मेरा लाल क्यों यहाँ नहीं रह सकता भला!”
अनिरुद के पिता अपनी पत्नी को देख रही थी जब वो यह सब कह रही थी और हाँ में सर हिल्ला रहे थे फिर कहा,
“बेशक यहाँ रह सकता है क्यों नहीं? उसी का तो घर है, मेरा खून है वो, मेरी औलाद है, तुम सब भी रह सकते हो चाहो तो, इस में पूछने की किआ बात है? जब चाहो आओ और यहीं रहो.!”
जिस वक़्त हॉल में बैठे यह सब बातें कर रहे थे उस वक़्त सुमन, विहान और अशिता कमरे के अंदर थे और इनके बातों को सुन्न रहे थे. तीनों खुश हुए जब दादा और दादी ने पॉजिटिव में रिस्पांस दिए तो.
अनिरुद ने तब कहा,
“मगर सोच रहा हूँ यहाँ वो करेगा किआ? वहां शहर में एक cyber-café में काम करता था, यहाँ आप लोग hi देखें किआ कर पाएगा, कोई काम वग़ैरा मिलता तो वो सब आप लोगों को hi देखना पड़ेगा….”
दादा ने कहा,
“उस्सको क्यों काम करने की कोई ज़रूरत है? हमारा बच्छा है, आराम रहे, मज़ा करे, घूमें फर्रे, क्यों काम करना होगा उससे?!”
तो अनिरुद का सबसे छोटा भाई ने कहा,
“भाई आप फ़िक्र मत करो मैं लगा दूंगा कहीं, कुछ नाह कुछ तो हो hi जाएगा आप बेफिक्र रहे!”
अनिरुद ने कहा,
“अब शहर में पला बढ़ा है उस्सको शायद शुरू में यहाँ पर मिलने घुलने में वक़्त लगे आप सब संभाल लेना”
सब ने अनिरुद को बेफिक्र रहने को कहा और कहा के ख़ुशी ख़ुशी वो विहान को अपनाएंगे और सब सुविधा देंगे उस्सको.
उस छोटी से मीटिंग के बाद सब अपने अपने कमरे में चले गए.
अनिरुद अपने परिवार केक साथ अपने रूम में था और दो बीएड थे सिर्फ सोने के लिए उस रूम में. अशिता और विहान एक साथ एक बीएड पर लेते हुए थे, और अनिरुद और सुमन एक बीएड पर थे तब सुमन ने कहा,
“अशिता को मेरे पास आना चाहिए और आप को विहान के बीएड पर जाना चाहिए!”
यह सुनकर अशिता बोली,
“मम्मी, भाई से मैं कल अलग हो जाउंगी अभी तो हम दोनों को साथ रहने दो नाह!”
तो सुमन ने मुस्कुराते हुए अनिरुद को देखा और अनिरुद ने कहा,
“okay ठीक है तुम दोनों वही सो जाओ एक साथ मगर दरवाज़े को लॉक करना होगा क्यूंकि अगर कोई अंदर आया तो सब चौपट हो जाएगा…. और सुनों अगर किसी ने नॉक किया तो आशु तुम जल्दी से वहां से उठकर अपनी माँ के पास चली जाना इस से पहले के मैं दरवाज़ा खोलूं समझी?!”
अशिता ने बहोत खुश होते हुए हंस कर कहा,
“थैंक्स वैरी मच स्वीट पापा मऊवः!”
और रात के बीच में दोनों ने जब देखा के उनके मम्मी पापा गहरे नींद में हैं तो इन् दोनों ने एक दूसरे को जकरा और किश करना शुरू किया और फुसुर फुसुर बात करते हुए दोनों एक दूसरे में डूबते गए……
अपने माँ बाप के एक hi रूम में होने के बावजूद दोनों ने सेक्स किये. बहोत सावधानी बरकते हुए आहिस्ते आहिस्ते सब कुछ किये दोनों ने बार बार अपने पेरेंट्स के बीएड के तरफ देखते हुए खुद को चादर से धक् कर…. एक इलाज मज़ा ारः था दोनों को उस तरह से प्यार करते हुए, जैसे के कोई छोर्री कर रहे थे छुप कर. एक अलग सी कशिश थी उस तरह से प्यार करने में. जिस वक़्त विहान अशिता में समाया उस वक़्त अशिता ने खुद पर बहोत काबू रखते हुए सिसकारियों को दबाते हुए एक नज़र अपनी पेरेंट्स के बीएड के तरफ करके विहान के गर्दन को चूमते हुए उस्सको रिस्पांस किया…. विहान भी अपने कमर आहिस्ते आहिस्ते हिलाते हुए बार बार अपने मम्मी पापा के बीएड के तरफ देखे जा रहा था, हांफ रहा था और हांफने की आवाज़ को खुद दबाने की कोशिश कर रहा था….. इस तरह से दोनों ने संतुष्टि प्राप्त किये एक दूसरे को खुश करके. और आखिर में दोनों को भी गहरी नींद आगयी.
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अगले सुबह को घर में बाकी के सदस्यों के चेहेल पहल सुनाई दे रहे थे अनिरुद को कमरे में. गाओं के लोग सुबह को सवेरे उठ जाते हैं, बचे लोग शोर कर रहे थे घर के अंदर दौड़ते हुए और चिल्लाते हुए एक दूसरे से लड़ते झगड़ते.
सुबह के 5 बजे थे तब. अनिरुद ने सबसे पहले अशिता को हिल्ला कर जगाया और अपने मम्मी के बीएड पर जाने को कहा जो उस्सने किया ेंखें मलते और उबासी लेते हुए.
विहान बाकी के कम्बल में खुद को लपेट कर फिर से सोगया.
अनिरुद कमरे से बाहर निकला और ब्रश करने और चाय के बाद अपने घर के आँगन में गया सूरज की पहली किरणों को महसूस करने के लिए. पीपल के पेड़ के निचे बैठा पूजा की याद में कुछ देर खोकर. और चलते चलते उस जगह फिर से चला गया जहाँ पूजा से छुप छुप कर मिला करता था 20 साल पहले. वहां अकेले बैठ कर पूजा से हवा में बातें किये अनिरुद ने. कुछ ेंसू के कतरे भी बहाये और वापस घर को गए.
संडे था तो सब घर पर थे, सभी बचे खेल रहे थे बड़ी सी आँगन में, शोर बहोत थे, घर के अंदर गए तो सुमन किचन में अपने सास के साथ थी बर्तनों को मांजते हुए, तो अनिरुद का मैं खटका के कहीं विहान और अशिता रूम में अकेले फिर से एक hi बीएड पर तो नहीं हैं…..
जब वो कमरे में दाखिल हुआ तो उस्सकी जान में जान आयी देख कर के दोनों अलग अलग बीएड पर अब भी नींद में the……ussne दोनों को जगाया, सुबह के 8 बज गए थे.
अशिता उठ कर अपने पापा से गले मिले और तुरंत विहान के पास चली गयी उसस्के गले में बाहें दाल कर उसस्के गालों पर किश किये, अनिरुद देख रहा था और कहा,
“बुसस अब तुम दोनों अलग hi रहो हम अपने घर में नहीं हैं अभी भूलना मत!”
अशिता ने कहा,
“पापा मगर हम भाई बेहेन होकर भी तो साथ साथ रह सकते हैं नाह? मैं यहाँ किश के साथ रहूंगी अगर भाई के साथ नहीं रहा तो?”
अनिरुद ने सीरियस टोन में कहा,
“तुम अपने ज़िद पर आधे रहे तो मैं अभी hi वापस चलने की तैयारी कर लूँ?!”
विहान ने तब अशिता को अलग होने को कहा.
तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट….
विहान अशिता एक दूसरे के कमर में हाथ डाले हुए धीरे धीरे चल रहे थे के अशिता ने मुंह लटकाते पानी भरी हुए ेंखों में कहा,
“शायद आखरी बार हम ऐसे एक साथ हैं, कल मैं चली जाउंगी भाई!”
अब आगे….
उस रात को अनिरुद ने अपने माता पिता और बड़ी बेहेन के साथ अपने 3 भाइयों को भी बुलाया बात करने के लिए. बात तो झूट करना था मगर सबने बहोत सीरियस लिया उसस्के बातों को. भाई तो 7 थे अनिरुद के मगर अब यहाँ 3 hi रहते थे बाकी के अलग घर थे पास के गाओं में, और 2 इसी गाओं में थे, क्यूंकि उन् लोगों ने अपने शेयर ले लिए थे. बाकी के 3 और अनिरुद ने अभी तक कुछ अपना हिस्सा नहीं लिया था फॅमिली हेरिटेज से. अनिरुद को इस बारे में भी बात करना था अपने पिता से मगर वो अकेले mein.(isske बारे में बाद में पता चलेगा)
उस्सने समझाया सबको के विहान को शहर में कुछ बड़े संघात का एस्सार पड़ा हुआ है जिस्सके लिए वो कुछ सालों तक, 2 या 3 साल तक उस्सको यहाँ रहने के लिए चोरर्ण चाहता है.
अनिरुद के पिता ने सुनकर अपने मंच को हाथ से सीधा करते हुए, अपने छाती को आगे करते हुए सिर्फ यूँ कहा,
“हम्म्म्म मुझे कुछ ऐसा लग रहा था!”
तब अनिरुद के सबसे छोटे भाई ने पूछा,
“ऐसा किआ किया विहान ने भाई?!”
अनिरुद ने कहा,
“कुछ किया तो नहीं बुसस पढ़ाई नहीं कर पाया, हमारे मोहल्ले में आज कल ड्रग एडिक्ट्स बहोत बढ़ गए हैं और इनके बहोत सारे दोस्त ड्रग्स लेते हैं और यह रात रात भर उन् लोगों के साथ रहने लगा है, मुझे डर है कहीं इस्को भी वो लेथ नाह लग जाए इस लिए मैं ने डीडे किया इस्को आप लोगों के पास चौररने के लिए कुछ दिनों तक, किआ वो यहाँ रह सकता है?”
अनिरुद की माँ ने कहा,
“क्यों नहीं रह सकता उम्र भर रह सकता है, मैं तो कहती हूँ के तुम पुरे परिवार के साथ यहीं बास जाओ बीटा, यह तुम्हारा hi घर है, विहान का भी घर है यह मेरा लाल क्यों यहाँ नहीं रह सकता भला!”
अनिरुद के पिता अपनी पत्नी को देख रही थी जब वो यह सब कह रही थी और हाँ में सर हिल्ला रहे थे फिर कहा,
“बेशक यहाँ रह सकता है क्यों नहीं? उसी का तो घर है, मेरा खून है वो, मेरी औलाद है, तुम सब भी रह सकते हो चाहो तो, इस में पूछने की किआ बात है? जब चाहो आओ और यहीं रहो.!”
जिस वक़्त हॉल में बैठे यह सब बातें कर रहे थे उस वक़्त सुमन, विहान और अशिता कमरे के अंदर थे और इनके बातों को सुन्न रहे थे. तीनों खुश हुए जब दादा और दादी ने पॉजिटिव में रिस्पांस दिए तो.
अनिरुद ने तब कहा,
“मगर सोच रहा हूँ यहाँ वो करेगा किआ? वहां शहर में एक cyber-café में काम करता था, यहाँ आप लोग hi देखें किआ कर पाएगा, कोई काम वग़ैरा मिलता तो वो सब आप लोगों को hi देखना पड़ेगा….”
दादा ने कहा,
“उस्सको क्यों काम करने की कोई ज़रूरत है? हमारा बच्छा है, आराम रहे, मज़ा करे, घूमें फर्रे, क्यों काम करना होगा उससे?!”
तो अनिरुद का सबसे छोटा भाई ने कहा,
“भाई आप फ़िक्र मत करो मैं लगा दूंगा कहीं, कुछ नाह कुछ तो हो hi जाएगा आप बेफिक्र रहे!”
अनिरुद ने कहा,
“अब शहर में पला बढ़ा है उस्सको शायद शुरू में यहाँ पर मिलने घुलने में वक़्त लगे आप सब संभाल लेना”
सब ने अनिरुद को बेफिक्र रहने को कहा और कहा के ख़ुशी ख़ुशी वो विहान को अपनाएंगे और सब सुविधा देंगे उस्सको.
उस छोटी से मीटिंग के बाद सब अपने अपने कमरे में चले गए.
अनिरुद अपने परिवार केक साथ अपने रूम में था और दो बीएड थे सिर्फ सोने के लिए उस रूम में. अशिता और विहान एक साथ एक बीएड पर लेते हुए थे, और अनिरुद और सुमन एक बीएड पर थे तब सुमन ने कहा,
“अशिता को मेरे पास आना चाहिए और आप को विहान के बीएड पर जाना चाहिए!”
यह सुनकर अशिता बोली,
“मम्मी, भाई से मैं कल अलग हो जाउंगी अभी तो हम दोनों को साथ रहने दो नाह!”
तो सुमन ने मुस्कुराते हुए अनिरुद को देखा और अनिरुद ने कहा,
“okay ठीक है तुम दोनों वही सो जाओ एक साथ मगर दरवाज़े को लॉक करना होगा क्यूंकि अगर कोई अंदर आया तो सब चौपट हो जाएगा…. और सुनों अगर किसी ने नॉक किया तो आशु तुम जल्दी से वहां से उठकर अपनी माँ के पास चली जाना इस से पहले के मैं दरवाज़ा खोलूं समझी?!”
अशिता ने बहोत खुश होते हुए हंस कर कहा,
“थैंक्स वैरी मच स्वीट पापा मऊवः!”
और रात के बीच में दोनों ने जब देखा के उनके मम्मी पापा गहरे नींद में हैं तो इन् दोनों ने एक दूसरे को जकरा और किश करना शुरू किया और फुसुर फुसुर बात करते हुए दोनों एक दूसरे में डूबते गए……
अपने माँ बाप के एक hi रूम में होने के बावजूद दोनों ने सेक्स किये. बहोत सावधानी बरकते हुए आहिस्ते आहिस्ते सब कुछ किये दोनों ने बार बार अपने पेरेंट्स के बीएड के तरफ देखते हुए खुद को चादर से धक् कर…. एक इलाज मज़ा ारः था दोनों को उस तरह से प्यार करते हुए, जैसे के कोई छोर्री कर रहे थे छुप कर. एक अलग सी कशिश थी उस तरह से प्यार करने में. जिस वक़्त विहान अशिता में समाया उस वक़्त अशिता ने खुद पर बहोत काबू रखते हुए सिसकारियों को दबाते हुए एक नज़र अपनी पेरेंट्स के बीएड के तरफ करके विहान के गर्दन को चूमते हुए उस्सको रिस्पांस किया…. विहान भी अपने कमर आहिस्ते आहिस्ते हिलाते हुए बार बार अपने मम्मी पापा के बीएड के तरफ देखे जा रहा था, हांफ रहा था और हांफने की आवाज़ को खुद दबाने की कोशिश कर रहा था….. इस तरह से दोनों ने संतुष्टि प्राप्त किये एक दूसरे को खुश करके. और आखिर में दोनों को भी गहरी नींद आगयी.
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अगले सुबह को घर में बाकी के सदस्यों के चेहेल पहल सुनाई दे रहे थे अनिरुद को कमरे में. गाओं के लोग सुबह को सवेरे उठ जाते हैं, बचे लोग शोर कर रहे थे घर के अंदर दौड़ते हुए और चिल्लाते हुए एक दूसरे से लड़ते झगड़ते.
सुबह के 5 बजे थे तब. अनिरुद ने सबसे पहले अशिता को हिल्ला कर जगाया और अपने मम्मी के बीएड पर जाने को कहा जो उस्सने किया ेंखें मलते और उबासी लेते हुए.
विहान बाकी के कम्बल में खुद को लपेट कर फिर से सोगया.
अनिरुद कमरे से बाहर निकला और ब्रश करने और चाय के बाद अपने घर के आँगन में गया सूरज की पहली किरणों को महसूस करने के लिए. पीपल के पेड़ के निचे बैठा पूजा की याद में कुछ देर खोकर. और चलते चलते उस जगह फिर से चला गया जहाँ पूजा से छुप छुप कर मिला करता था 20 साल पहले. वहां अकेले बैठ कर पूजा से हवा में बातें किये अनिरुद ने. कुछ ेंसू के कतरे भी बहाये और वापस घर को गए.
संडे था तो सब घर पर थे, सभी बचे खेल रहे थे बड़ी सी आँगन में, शोर बहोत थे, घर के अंदर गए तो सुमन किचन में अपने सास के साथ थी बर्तनों को मांजते हुए, तो अनिरुद का मैं खटका के कहीं विहान और अशिता रूम में अकेले फिर से एक hi बीएड पर तो नहीं हैं…..
जब वो कमरे में दाखिल हुआ तो उस्सकी जान में जान आयी देख कर के दोनों अलग अलग बीएड पर अब भी नींद में the……ussne दोनों को जगाया, सुबह के 8 बज गए थे.
अशिता उठ कर अपने पापा से गले मिले और तुरंत विहान के पास चली गयी उसस्के गले में बाहें दाल कर उसस्के गालों पर किश किये, अनिरुद देख रहा था और कहा,
“बुसस अब तुम दोनों अलग hi रहो हम अपने घर में नहीं हैं अभी भूलना मत!”
अशिता ने कहा,
“पापा मगर हम भाई बेहेन होकर भी तो साथ साथ रह सकते हैं नाह? मैं यहाँ किश के साथ रहूंगी अगर भाई के साथ नहीं रहा तो?”
अनिरुद ने सीरियस टोन में कहा,
“तुम अपने ज़िद पर आधे रहे तो मैं अभी hi वापस चलने की तैयारी कर लूँ?!”
विहान ने तब अशिता को अलग होने को कहा.
तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट….