Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani - Page 10 - SexBaba
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Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani

अपडेट 63 स्टिल इन थे विलेज

विहान अशिता एक दूसरे के कमर में हाथ डाले हुए धीरे धीरे चल रहे थे के अशिता ने मुंह लटकाते पानी भरी हुए ेंखों में कहा,

“शायद आखरी बार हम ऐसे एक साथ हैं, कल मैं चली जाउंगी भाई!”

अब आगे….

उस रात को अनिरुद ने अपने माता पिता और बड़ी बेहेन के साथ अपने 3 भाइयों को भी बुलाया बात करने के लिए. बात तो झूट करना था मगर सबने बहोत सीरियस लिया उसस्के बातों को. भाई तो 7 थे अनिरुद के मगर अब यहाँ 3 hi रहते थे बाकी के अलग घर थे पास के गाओं में, और 2 इसी गाओं में थे, क्यूंकि उन् लोगों ने अपने शेयर ले लिए थे. बाकी के 3 और अनिरुद ने अभी तक कुछ अपना हिस्सा नहीं लिया था फॅमिली हेरिटेज से. अनिरुद को इस बारे में भी बात करना था अपने पिता से मगर वो अकेले mein.(isske बारे में बाद में पता चलेगा)

उस्सने समझाया सबको के विहान को शहर में कुछ बड़े संघात का एस्सार पड़ा हुआ है जिस्सके लिए वो कुछ सालों तक, 2 या 3 साल तक उस्सको यहाँ रहने के लिए चोरर्ण चाहता है.

अनिरुद के पिता ने सुनकर अपने मंच को हाथ से सीधा करते हुए, अपने छाती को आगे करते हुए सिर्फ यूँ कहा,

“हम्म्म्म मुझे कुछ ऐसा लग रहा था!”

तब अनिरुद के सबसे छोटे भाई ने पूछा,

“ऐसा किआ किया विहान ने भाई?!”

अनिरुद ने कहा,

“कुछ किया तो नहीं बुसस पढ़ाई नहीं कर पाया, हमारे मोहल्ले में आज कल ड्रग एडिक्ट्स बहोत बढ़ गए हैं और इनके बहोत सारे दोस्त ड्रग्स लेते हैं और यह रात रात भर उन् लोगों के साथ रहने लगा है, मुझे डर है कहीं इस्को भी वो लेथ नाह लग जाए इस लिए मैं ने डीडे किया इस्को आप लोगों के पास चौररने के लिए कुछ दिनों तक, किआ वो यहाँ रह सकता है?”

अनिरुद की माँ ने कहा,

“क्यों नहीं रह सकता उम्र भर रह सकता है, मैं तो कहती हूँ के तुम पुरे परिवार के साथ यहीं बास जाओ बीटा, यह तुम्हारा hi घर है, विहान का भी घर है यह मेरा लाल क्यों यहाँ नहीं रह सकता भला!”

अनिरुद के पिता अपनी पत्नी को देख रही थी जब वो यह सब कह रही थी और हाँ में सर हिल्ला रहे थे फिर कहा,

“बेशक यहाँ रह सकता है क्यों नहीं? उसी का तो घर है, मेरा खून है वो, मेरी औलाद है, तुम सब भी रह सकते हो चाहो तो, इस में पूछने की किआ बात है? जब चाहो आओ और यहीं रहो.!”

जिस वक़्त हॉल में बैठे यह सब बातें कर रहे थे उस वक़्त सुमन, विहान और अशिता कमरे के अंदर थे और इनके बातों को सुन्न रहे थे. तीनों खुश हुए जब दादा और दादी ने पॉजिटिव में रिस्पांस दिए तो.

अनिरुद ने तब कहा,

“मगर सोच रहा हूँ यहाँ वो करेगा किआ? वहां शहर में एक cyber-café में काम करता था, यहाँ आप लोग hi देखें किआ कर पाएगा, कोई काम वग़ैरा मिलता तो वो सब आप लोगों को hi देखना पड़ेगा….”

दादा ने कहा,

“उस्सको क्यों काम करने की कोई ज़रूरत है? हमारा बच्छा है, आराम रहे, मज़ा करे, घूमें फर्रे, क्यों काम करना होगा उससे?!”

तो अनिरुद का सबसे छोटा भाई ने कहा,

“भाई आप फ़िक्र मत करो मैं लगा दूंगा कहीं, कुछ नाह कुछ तो हो hi जाएगा आप बेफिक्र रहे!”

अनिरुद ने कहा,

“अब शहर में पला बढ़ा है उस्सको शायद शुरू में यहाँ पर मिलने घुलने में वक़्त लगे आप सब संभाल लेना”

सब ने अनिरुद को बेफिक्र रहने को कहा और कहा के ख़ुशी ख़ुशी वो विहान को अपनाएंगे और सब सुविधा देंगे उस्सको.

उस छोटी से मीटिंग के बाद सब अपने अपने कमरे में चले गए.

अनिरुद अपने परिवार केक साथ अपने रूम में था और दो बीएड थे सिर्फ सोने के लिए उस रूम में. अशिता और विहान एक साथ एक बीएड पर लेते हुए थे, और अनिरुद और सुमन एक बीएड पर थे तब सुमन ने कहा,

“अशिता को मेरे पास आना चाहिए और आप को विहान के बीएड पर जाना चाहिए!”

यह सुनकर अशिता बोली,

“मम्मी, भाई से मैं कल अलग हो जाउंगी अभी तो हम दोनों को साथ रहने दो नाह!”

तो सुमन ने मुस्कुराते हुए अनिरुद को देखा और अनिरुद ने कहा,

“okay ठीक है तुम दोनों वही सो जाओ एक साथ मगर दरवाज़े को लॉक करना होगा क्यूंकि अगर कोई अंदर आया तो सब चौपट हो जाएगा…. और सुनों अगर किसी ने नॉक किया तो आशु तुम जल्दी से वहां से उठकर अपनी माँ के पास चली जाना इस से पहले के मैं दरवाज़ा खोलूं समझी?!”

अशिता ने बहोत खुश होते हुए हंस कर कहा,

“थैंक्स वैरी मच स्वीट पापा मऊवः!”

और रात के बीच में दोनों ने जब देखा के उनके मम्मी पापा गहरे नींद में हैं तो इन् दोनों ने एक दूसरे को जकरा और किश करना शुरू किया और फुसुर फुसुर बात करते हुए दोनों एक दूसरे में डूबते गए……

अपने माँ बाप के एक hi रूम में होने के बावजूद दोनों ने सेक्स किये. बहोत सावधानी बरकते हुए आहिस्ते आहिस्ते सब कुछ किये दोनों ने बार बार अपने पेरेंट्स के बीएड के तरफ देखते हुए खुद को चादर से धक् कर…. एक इलाज मज़ा ारः था दोनों को उस तरह से प्यार करते हुए, जैसे के कोई छोर्री कर रहे थे छुप कर. एक अलग सी कशिश थी उस तरह से प्यार करने में. जिस वक़्त विहान अशिता में समाया उस वक़्त अशिता ने खुद पर बहोत काबू रखते हुए सिसकारियों को दबाते हुए एक नज़र अपनी पेरेंट्स के बीएड के तरफ करके विहान के गर्दन को चूमते हुए उस्सको रिस्पांस किया…. विहान भी अपने कमर आहिस्ते आहिस्ते हिलाते हुए बार बार अपने मम्मी पापा के बीएड के तरफ देखे जा रहा था, हांफ रहा था और हांफने की आवाज़ को खुद दबाने की कोशिश कर रहा था….. इस तरह से दोनों ने संतुष्टि प्राप्त किये एक दूसरे को खुश करके. और आखिर में दोनों को भी गहरी नींद आगयी.

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अगले सुबह को घर में बाकी के सदस्यों के चेहेल पहल सुनाई दे रहे थे अनिरुद को कमरे में. गाओं के लोग सुबह को सवेरे उठ जाते हैं, बचे लोग शोर कर रहे थे घर के अंदर दौड़ते हुए और चिल्लाते हुए एक दूसरे से लड़ते झगड़ते.

सुबह के 5 बजे थे तब. अनिरुद ने सबसे पहले अशिता को हिल्ला कर जगाया और अपने मम्मी के बीएड पर जाने को कहा जो उस्सने किया ेंखें मलते और उबासी लेते हुए.

विहान बाकी के कम्बल में खुद को लपेट कर फिर से सोगया.

अनिरुद कमरे से बाहर निकला और ब्रश करने और चाय के बाद अपने घर के आँगन में गया सूरज की पहली किरणों को महसूस करने के लिए. पीपल के पेड़ के निचे बैठा पूजा की याद में कुछ देर खोकर. और चलते चलते उस जगह फिर से चला गया जहाँ पूजा से छुप छुप कर मिला करता था 20 साल पहले. वहां अकेले बैठ कर पूजा से हवा में बातें किये अनिरुद ने. कुछ ेंसू के कतरे भी बहाये और वापस घर को गए.

संडे था तो सब घर पर थे, सभी बचे खेल रहे थे बड़ी सी आँगन में, शोर बहोत थे, घर के अंदर गए तो सुमन किचन में अपने सास के साथ थी बर्तनों को मांजते हुए, तो अनिरुद का मैं खटका के कहीं विहान और अशिता रूम में अकेले फिर से एक hi बीएड पर तो नहीं हैं…..

जब वो कमरे में दाखिल हुआ तो उस्सकी जान में जान आयी देख कर के दोनों अलग अलग बीएड पर अब भी नींद में the……ussne दोनों को जगाया, सुबह के 8 बज गए थे.

अशिता उठ कर अपने पापा से गले मिले और तुरंत विहान के पास चली गयी उसस्के गले में बाहें दाल कर उसस्के गालों पर किश किये, अनिरुद देख रहा था और कहा,

“बुसस अब तुम दोनों अलग hi रहो हम अपने घर में नहीं हैं अभी भूलना मत!”

अशिता ने कहा,

“पापा मगर हम भाई बेहेन होकर भी तो साथ साथ रह सकते हैं नाह? मैं यहाँ किश के साथ रहूंगी अगर भाई के साथ नहीं रहा तो?”

अनिरुद ने सीरियस टोन में कहा,

“तुम अपने ज़िद पर आधे रहे तो मैं अभी hi वापस चलने की तैयारी कर लूँ?!”

विहान ने तब अशिता को अलग होने को कहा.

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट….
 
अपडेट 64 थे सेपरेशन

जब विहान अशिता चाय पी रहे थे तो उसस्के दो चाचियां मंदिर से आये और दोनों को परशाद दिए. तब अशिता ने पूछा,

“चची यहाँ पर मंदिर किधर हैं? हम विजिट करने जायेंगे हैं नाह भाई?!”

उस वक़्त दादा जी बगल में बैठा हुआ था और सुन रहा था तो चाचियों के बजाए उस ने कहा,

“चलो मैं उधर hi जाने वाला था, चलोगे मेरे साथ दोनों?”

यह सुनकर अनिरुद का दिल धड़का और अशिता के समझ में नहीं आया के किआ जवाब दें अपने दादा जी को क्यूंकि वो तो विहान के साथ अकेली रहना चाहती थी. तब अनिरुद ने hi बचाया अशिता को यह कहते हुए,

“मगर पिता जी हमें अब जाने के लिए तैयार भी होना है, अभी निकलेंगे तो शाम तक घर पहुँच पाएंगे”

मगर अनिरुद के पिता ने कहा,

“बुसस 15/20 मीन्स में वापस आजाएंगे चलो बीटा!”

यह कहकर दादा जी खड़े हुए तो अशिता और विहान अपने पापा को देख hi रहे थे और अनिरुद इशारे से कुछ कहने की कोशिश कर hi रहा था मगर अशिता नहीं समझ पायी के उसस्के पापा उस्सको किआ कह रहे थे, विहान ने सब देखा तो कहा,

“आशु तुम दादा के साथ निकलो मैं अभी आया!”

जब दादा जी और अशिता घर के आँगन तक गए तो विहान जल्दी से अपने पापा के पास गया पूछने के वो किआ कहना चाहता था तब अनिरुद ने कहा,

“उसस्के सामने तुम दोनों नाह एक दूसरे का हाथ पकड़ना, नाह सत् के रहना, बल्कि जितना दूर हो सके उतना दूर रहना तुम अशिता से समझे? बिल्कुल कोई भी फिजिकल कांटेक्ट नहीं तुम दोनों के बीच! अपने दादा को बिल्कुल भी कोई शक मत होने देना तुम वार्ना सब कुछ बिल्कुल गड़बड़ हो जाएगा!”

विहान ने हाँ कहा और उन् दोनों के पीछे निकल पड़ा मंदिर के तरफ जाने के लिए.

विहान ने जान बुझ कर अपने दादा के लेफ्ट में वाक किया क्यूंकि अशिता उनके राइट में चल रही थी. मंदिर सिर्फ 10 मीन्स के वाक के बाद आगये. विहान की नज़र एक बहोत hi खूबसूरत लड़की पर पड़ी जो मंदिर से निकल रही थी, वो लड़की उम्र में अशिता की उम्र की hi लग रही थी या शायद एक साल कम…. एक छोटा सा मंदिर था और वहां से होने के बाद दादाजी ने कहा,

“मंदिर के उस तरफ एक तालाब है कल तुम्हारे पापा लगाए थे किआ वहां तुमको?

दोनों ने नाह कहा तो उसस्के कहा वहां से होकर घर वापस जाते हैं, और उस खूबसूरत तालाब के पास गए तीनों.

तालाब के पास तीनों बैठे, तो अशिता उठकर तालाब के ज़्यादा करीब गयी और कहा,

“भाई आओ नाह देखो कितने खूबसूरत मछलियां हैं रंग बिरंगे…”

विहान अपने दादा जी के पास बैठा था एक पत्थर के ऊपर, तो दादा जी विहान को जाने को कहा. और वो वहीँ से दोनों को देख रहा था.

विहान को पता था के दादा जी उसस्के पीछे से दोनों को hi देख रहे थे तो अशिता के पास गया और धीरे से कहा,

“शहहह मुझे छूना मत वो हम दोनों को hi देख रहा है, बिल्कुल मेरे पास मत आना, नोर्मल्ली बात करो मुझसे okay!”

अशिता समझ गयी और कहा,

“अरे भाई वो देखो कितना बड़ा मछली है वो वाला, और इस्को देखो ब्लू और रेड दोनों कलर के हैं हीहीहीहीही कितने प्यारे हैं नाह?”

फिर अशिता पीछे मुड़कर अपने दादा जी से कहा,

“दादा जी आप भी आओ नाह देखो कितने खूबसूरत फिशेस हैं!”

दादा जी वहीँ से बैठे हुए मुस्कुराकर कहा,

“हम ने hi उन् मछलियों को इस तालाब में डाला है बची, और हर सुबह इनको खाना डालने अत हूँ आज सुबह hi आया था, मछिलयां इस लिए आ रहे हैं क्यूंकि वह समझ रहे हैं के तुम उस्सको खाने को कुछ डोज अभी हाहाहा!!”

तब अशिता ने विहान के चेहरे में देखा और धीरे से कहा,

“देखा मैं ने उस्सको हंसा भी दिया हीहीहीही!”

पता नहीं दादाजी किआ देखना चाहते थे उन् दोनों के बीच, किआ उस्सको कोई शक था के यह दोनों भी कहीं अनिरुद और पूजा की तरह प्यार के रिश्ते में तो नहीं बंधे हुए हैं इसी लिए अनिरुद विहान को यहाँ चोरर्ण चाहता है, यह यह उस्का वेहम था, या बुसस ऐसे hi दादा का प्यार उभर आये थे के दोनों के साथ घूमने का मैं किया उस्सको, यह वही जाने! यह बात तो थी के उस्सको अशिता में अपनी बेटी पूजा दिख रहे थे. तो हो सकता है के वो इस लिए अशिता के साथ वहां आया था क्यूंकि अस्सल में वो पूजा के साथ अक्सर इस तालाब पर आया करता था 20 साल पहले.

कुछ देर बाद सब वापस घर आ चुके थे. जब दोनों बचे अपने दादा के साथ तालाब गए हुए थे तो अनिरुद ने सुमन से जल्दी तैयार होने को कहा इस से पहले के दोनों किसी शक के घेरे में आये यह कोई ग़लती कर बैठे, अनिरुद ने सोचा जितनी जल्दी वहां से निकल लें बेहतर होगा. तो सुमन तैयार हो चुकी थी और अशिता के वापस आने के बाद उस्सको तैयार होकर निकलने को कहा गया.

दिन के ग्यारह बजे थे और अशिता का मैं बैठ गया क्यूंकि उस्सने सोचा था के शाम तक वो विहान के साथ रहने वाली है. कमरे के अंदर वो अपनी मम्मी पापा से और देर तक रुकने के लिए कहा मगर सुमन नाराज़ होते हुए कहा उस्सको जितनी जल्द हो सके तैयार होने को या जैसे है वैसे hi चलने को कहा!

मजबूरन अशिता को रेडी होना पड़ा और आधे घंटे के बाद तीनों कमरे से निकले वापस जाने के लिए.

विहान बहोत उदास था और वो कमरे से कुछ देर बाद निकला, अशिता रोने लगी थी. सब फॅमिली मेंबर्स से मिले सब ने एक एक करके, और आखिर में अशिता से रहा नाह गया और वो विहान से लिपट गयी और बिलकते हुए कहा,

“भाई अपना खूब अछि तरह से ख्याल रखना, मैं अब नहीं रहूंगी तुम्हारा ख्याल रखने के लिए, मैं तुमको बहोत याद करुँगी भाई, हो सके तो मुझसे मिलने ज़रूर आना भाई, मैं जा रही हूँ भाई, ी ऍम गोइंग टेक केयर भाई!!”

जिस वक़्त अशिता उस तरह से विहान के गले में बाहें दाल कर रो रही थी फॅमिली के सभी मेंबर्स के नज़र उन् दोनों पर hi थे ख़ास कर दादा जी के नज़रें दोनों को hi घुर्र रहे थे, चाचियां और दादी भी रो पड़े थे उन् दोनं का प्यार देख कर मगर दादा जी अजीब नज़रों से hi घुर्र रहा था दोनों को. अनिरुद ने कई बार अपने पिता के तरफ देखा और उस्सको भी दिख गया के किश तरह से उसस्के पिता उन् दोनों को घुर्र रहा था.

शुक्र है के विहान ने कुछ ऐसा नहीं किया जिस से लगे के दोनों आशिक हैं. विहान ने बुसस अशिता के काँधे पर हाथ रख कर उस्सको खुद से अलग करते हुए कहा,

“तुम फ़िक्र मत करो नाह पगली, मैं बचा थोड़ा hi हूँ, मैं अपना ख्याल खुद रख सकता हूँ तुम जाओ अब ट्रैन मिस हो जाएगा, तुम लोगों को दूर जाना है अभी….”

अस्सल बात तो यह थी के विहान को बहोत ज़ोर से अशिता को बाहों में भर कर उस्सको चूमने का मैं कर रहा था मगर उस्सको अपने पापा से किया हुआ वादा याद था के इस घर में सिर्फ भाई बेहेन की तरह hi पेश आना है, ख़ास कर सब के सामने!

जब विहान ने उस तरह जवाब दिया अशिता को तब दादा जी के नज़र और चेहरे पर बदलाव आया वो अनिरुद ने नोटिस किया और उसस्के जान में जान आयी.

आँगन में पीपल के पेड़ तक सब लोगों ने ैकपेनी किये तीनों को मगर विहान रास्ते तक गया जहाँ बुसस लेनी थी. तभी अनिरुद का बड़ा भाई एक 4क्ष4 में वहां आया और तीनों को लिया स्टेशन चौररने के लिए. वो भाई अलग गाओं में रहता था और जिस वक़्त सब निकल रहे थे एक घर के भाई ने उस्सको फ़ोन करके बता दिया था के यह लोग जा रहे हैं इनको स्टेशन तक चोरर्ण है.

अशिता ने कहा,

“भाई तुम भी चलो हमको स्टेशन तक चौररने फिर चाचा जी के साथ वापस आना नाह!”

बड़े चाचा ने भी कहा चलने को मगर विहान ने मन किया, अपने ेंसू पोंछते हुए उस्सने पीठ कर लिया सब से और वापस जाने लगा… अशिता ने ज़ोर से रट हुए उस्सको फुकरा मगर विहान ने मुड़कर नहीं देखा अशिता को और उस पीपल के पेड़ के निचे आकर बैठ गया 4क्ष4 को जाते हुए देखते.

कुछ देर बाद अशिता की मेस्सगे आयी विहान के मोबाइल पर,

“भाई तुम क्यों नहीं आये?!

मैं जानती हूँ मेरे बाद खूब रोयेगा

रवाना कर तो रहा है वो हँस्ते हँस्ते मुझे”

विहान ने पीपल के पेड़ के निचे बैठे हुए रिप्लाई लिख कर सेंड किया,

“बिछड़ने के वक़्त किसी के आँख में जो अत है

तमाम उम्र वो इनसो बहोत रुलाता है”

अशिता ने सफर करते हुए अपनी ेंसुओं को पोंछते हुए लिखा और सेंड किया,

“आ के तुझ बिन इस तरह घबराती हूँ मैं

जैसे हर शै में किसी शै की कमी पाती हूँ मैं”

विहान ने तब लिख कर सेंड किया,

“यह एक पेड़ है, आ इस से मिलके रोले हम

यहाँ से तेरे मेरे रास्ते बदलते हैं”

अशिता ने सेंड किया,

कलेजा उस वक़्त रह गया पहात कर

कहा जब उस्सने अलविदा पलट कर”

विहान ने सेंड किया,

“उस्सको रुखसत तो किया था, मुझे मालूम नाह था

सारा घर लगाया घर चोरर के जाने वाला”

अशिता बहोत रोने लगी और लिखा,

“भाई मैं वापस आऊं तुम्हारे पास किआ? मुझसे अभी से hi नहीं रहा जाता भाई!!”

विहान ने बहते ेंसुओं को रोक कर लिखा,

“आँख से दूर सही, दिल से कहा जाएगा

जाने वाले तू हमें याद बहोत आएगा”

और इस तरह से दो प्रेमी एक दूसरे से जुड़ा हो गए….

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 65 थे फर्स्ट नाईट आफ्टर सेपरेशन

ट्रैन में जाते वक़्त अशिता रट रट सो गयी अपनी माँ के गॉड में सर रख कर.

जब वह लोग ट्रैन से उतरे तो रात हो चुके थे और अशिता ने अपने मोबाइल देखा तो हैरान हुई के विहान ने एक भी मैसेज नहीं सेंड किया था. चलते चलते उस ने विहान को टेक्स्ट किया के वो अब घर पहुंचने hi वाले हैं और पूछा के क्यों उस्सने कोई मैसेज नहीं भेजा जब वो ट्रैन में सोई हुई थी.

कोई भी जवाब नहीं आया यहाँ तक के अशिता घर पहुँच गयी. लास्ट मैसेज सेंड किये हुए आधा घंटा हो गया था.

अशिता को कुछ ाचा नहीं लग रहा था घर में, उस्सको विहान की कमी खाल रही थी, इधर से उधर घर में घूम रही थी मोबाइल हाथ में लिए उस पर नज़रें जमाये हुए, और अनिरुद और सुमन उस्सको देख रहे थे.

अनिरुद सोफे पर बैठा हुआ था तो कहा,

“आशु इधर औ तो ज़रा मेरे पास!”

अशिता को होश भी नहीं था के उस का पापा वहीँ बैठा हुआ था वो चाहूँकि और अपने पापा के तरफ देखते हुए कहा,

“पापा भाई ने अभी तक रिप्लाई नहीं किया, उस्का लास्ट मैसेज 3 घंटे पहले आया था मेरे सोने से पहले ट्रैन में!”

यह बोलते हुए अशिता अपने पापा के पास जा चुकी थी और अनिरुद ने उस्सको सीने से लगाते हुए उसस्के सर पर अपना हाथ फरते हुए कहा,

“बीटा वो सो गया होगा, उस्सको नींद आगयी होगी, वो भी तो अकेला है नाह और रात हो गयी है, जैसे तुम ट्रैन में सो गयी थी उस्सको भी नींद आगयी होगी नाह? उस्सको गुड नाईट विश करो और केहदो के तुम सोने जा रही हो कल मॉर्निंग को मैसेज करोगी बोल्दो!”

सुमन भी पास आकर अशिता के माथे को चुम कर उससे जा कर सोने को कहा.

अशिता अपने कमरे में गयी तो मगर उस्सको नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी और वो सिर्फ विहान के ख्यालों में खोयी हुई थी. कुछ देर बीएड पर बैठने के बाद आशिता ने विहान के उन् कपड़ों को निकला बैग से जिस्सको विहान ने उतारे थे, और अशिता उन् कपड़ों को अपने चेहरे पर लगा कर बीएड पर लेट गयी और उन् कपड़ों को सुघने से उस्सको विहान की खुशभू आ रहे थे और महसूस हो रहा था के विहान उसस्के पास है. अशिता सोचने लगी किआ भाई ने भी उसस्के कपड़ों को वैसे hi लेकर सोया होगा किआ?

फिर नाह चाहते हुए भी अशिता ने एक लास्ट मैसेज सेंड किया विहान को यह कहते हुए के वो उसस्के कपड़ों को सूंघ रही है उस्सको याद करते हुए और पूछा के किआ उस्सने भी वैसा hi किया के नहीं. विहान को गुड नाईट विश किया और लिखे के वो उस्सको कितना मिस कर रही है, और चाहती है के वो इस वक़्त उसस्के पास होते बीएड पर और दोनों एक साथ सोते.

कोई 3 घंटे तक अशिता वैसे hi बीएड पर लेती रही मगर उस्सको नींद नहीं आयी बिल्कुल और सोचने लगी के विहान को कैसे उसस्के बिना इतनी आसानी से नींद आगयी. किआ वो उस्सको मिस नहीं कर रहा था? किआ उस्का वो हाल नहीं था जो अशिता का था? अशिता यह सब सोचते हुए रोने लगी.

सिसकती जा रही थी के अचानक मैसेज टोन बजा और झट से अशिता ने मोबाइल उठाया और इतनी खुश हुई विहान के मैसेज देख कर के उछाल पड़ी कमरे में!

रात के बारह बज चुके थे और विहान ने लिखा था,

“बहोत उदास हूँ तुम्हारे बिना, कुछ भी ाचा नहीं लग रहा यहाँ, यह कमरा मुझे काटने को दौड़ रहा है, नींद कैसे आगयी समझ में नहीं आया, शायद गोवा की थकान की वजह से, बहोत खामोशियाँ है इस घर में, और ठण्ड भी ज़्यादा है इधर, मैं अभी कम्बल के निचे हूँ, जब तू ट्रैन में थी और मुझको रिप्लाई करना बांध कर दिया था तो मैं समझ गया के तू सो गयी होगी, तो मैं डिनर करने के बाद कमरे में आगया और लेता hi था के ेंख लग गयी. ी ऍम मिसिंग यू लिखे हेलल बेबी, लव यू वैरी मच मुउउउउआअह”

मैसेज के साथ सेंकरों किश वाले, मिस यू वाले, लव यू वाले समिलेस थे.

अशिता बहोत खुश हुई और उस्का रोना बांध हुआ और कमरे से निकली पेरेंट्स से कहने के लिए मगर दोनों अपने कमरे में चले गए तो वापस अपने कमरे में गयी अशिता और विहान को रिप्लाई किया,

“भाई, ी लव यू तू, एंड लव यू तू तू मच. तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी समझ में नहीं ारः है, अभी शुरुवात है शायद इस लिए ऐसा फील हो रहा है और शायद धीरे धीरे आदत सी हो जाएगी फिर भी भाई तुम कैसे भी करके मुझसे मिलने ज़रूर आना छुप छुप कर hi सही नहीं तो मैं पागल हो जाउंगी भाई!”

विहान ने लिख कर सेंड किया,

“आरी पगली यहाँ से वहां पहुँचने में 6 घंटे लगते हैं, कब और कैसे आऊंगा? अभी तो एक दिन भी नहीं हुआ किआ काऊंगा यहाँ इन् सबसे के कहाँ जा रहा हूँ? इम्पॉसिबल हैं वहां आना अभी… हाँ कुछ दिनों बाद शायद कोई जुगाड़ कर पौन मगर अभी के लिए मिलना नामुमकिन है स्वीटहार्ट.”

अशिता टेक्स्ट लिख hi रही थी के विहान की वीडियो साल आगयी, व्हाट्सअप पर और अशिता ने बड़े ख़ुशी से कॉल लिया. विहान बीएड पर बैठा कम्बल के निचे हाथ में मोबाइल लिए स्कीन पर देख रहा था मुस्कुराते हुए.

अशिता ने अपनी सबसे खूबसूरत मुस्कान में कहा,

“हम्म्म मैं एहि टेक्स्ट करने वाली थी के हम बात क्यों नहीं कर रहे क्यों टेक्स्ट कर रहे हैं, यू नॉटी बॉय!”

विहान: “मऊवः लव यू, मुझे एक किसी दो जल्दी से अब”

तुरंत अशिता ने स्क्रीन को किश किया और ज़ोर से मुउउउउआअह की आवाज़ आयी अशिता की.

फिर अशिता ने पूछा,

“किआ तुमने मेरे कपड़ों को सुंघा भाई?”

तुरंत विहान ने कम्बल के निचे से उस्सकी पंतय और ब्रा निकाल कर दिखाया अशिता को.

अशिता हंससने लगी और उस्सने विहान की टीशर्ट और अंडरवियर को दिखाया विहान को.

तब विहान ने कहा,

“चल अब अपनी कपडे उतार और मुझे दिखा सब कुछ, सब कुछ देखना है mujhe….come ों स्वीटहार्ट..”

अशिता ने थोड़ी सी नटखटी अदा से डेंटन में होंठों को दबाते हुए पूछा,

“हम्म नॉटी होने लगे तुम भाई, ाचा किआ दिखाऊं, कहाँ से स्टार्ट करूँ तुम बोलो”

विहान: “ऊपर से, तुम्हारे छाती से धीरे धीरे निचे के तरफ सब दिखाती जाओ आआह बेबी के ों शो में….”

अशिता अब भी उसी ड्रेस में थी जिस में वहां से निकली थी, और उस्सको खोलने के लिए पीछे के ज़िप को खोलना था, तो उस्सने जब हाथ पीछे किया ज़िप निकलने के लिए तो मोबाइल एक तरफ हो गयी तो विहान ने ज़ोर से कहा,

“किआ दिखा रही हो तुम मुझे? मुझे कर्मा नहीं देखना है!”

तब अशिता ने ज़ोर से हँस्ते हुए मोबाइल में देख कर कहा

“अरे तो मैं किआ करूँ ज़िप खोलना है, एक हाथ से कैसे खोलूं?”

विहान ने कहा,

“वेट, एक हाथ से मोबाइल को लेकर अपने से थोड़ा दूर कर नाह, और दूसरी हाथ को पीठ के पीछे करके ज़िप खोल!”

अशिता: “ह्म्म्मम्म काश तुम यहाँ होते तो तुम्ही खोलते नाह मेरे ज़िप को भाई!”

और अशिता ने वैसा hi किया जो विहान ने कहा था और विहान को स्क्रीन पर अशिता के काँधे पर उस्सकी ब्रा की स्ट्राप दिखने लगे और उस्का धीरे धीरे खड़ा होने लगा, तो उस्सने अपने मोबाइल को अपने लुंड के पास किया और अशिता को दिखाया के वो किश तरह से जमके खड़ा हो गया था सिर्फ उस्सकी ब्रा की स्ट्रैप्स को देख कर….

अशिता ने स्क्रीन पर उसस्के लुंड देख कर अपने होंठ को स्क्रीन से लगाते हुए किश किया. और तुरंत विहान ने लुंड पर अपना हाथ रखा और धीरे धीरे हाथ चलाने लगा….

तब तक अशिता की ड्रेस उतरने लगी और उस्सकी ब्रा नज़र आयी और उस्सकी आधे बूब्स ब्रा से जैसे बाहर निकलने के लिए मचल रहे थे, तो अशिता ने फिर हाथ पीछे करके ब्रा को उन्हुक किया, और ब्रा लटक गयी उसस्के कांधों पर तब तक विहान का हाथ ज़ोरों से उसस्के लुंड पर चलने लगा अशिता को दिखाते हुए…..

अशिता की जिस्म में जैसे एक लेहेर दौड़ी वो सब देखते हुए और उस्सने एक लम्बी सांस लेते हुए एक सिसकारी छोड़ी और ड्रेस को पूरा निकल फेंका और बीएड पर लेट गयी विहान को मुठ मारते हुए देखते…..

विहान ने तब कहा,

“बेबी जल्दी से पंतय भी निकालो नाह और अपने हाथ को अपने पुसी पर फेर्रो धीरे धीरे मुझको दिखाते हुए के ों हुर्री उप स्वीटहार्ट….”

अशिता के जिस्म में जैसे एक आग भड़क चुकी थी और उस्सने बिल्कुल वही किया जो विहान ने कहा, अपने टांगों को फैला दिया आशिता ने और उस्का हाथ खुद के पुसी को सहलाने लगी थी एक हाथ से मोबाइल की कैमरा को वहां दिखाते हुए जो विहान देख कर ज़ोरों से अपने लुंड पर हाथ चला रहा था…..

इधर अशिता को वही दिख रहा था जो विहान उस्सको दिखा रहा था मतलब मुठ मारते हुए उस्का हाथ उसस्के लुंड पर और उधर विहान देख रहा था अशिता का हाथ उस्सकी पुसी पर रघड़ते हुए…

अशिता की धीमी धीमे आवाज़ सुनाई दे रहा था विहान को जो उस्सको और भी आकर्षित करने लगा था, तो विहान ने कहा, अब कैमरा को अपने चेहरे पर करो स्वीटहार्ट मैं तुम्हारे एक्सप्रेशंस को भी देखना चाहता हूँ, थोड़ा हाथ दूर करो ताके तुमको फुल देख सकूँ मैं भी वही करता हूँ अब…..

दोनों ने एक दूसरे के हाफ बॉडी को देख रहे थे सर से सेक्स तक और दोनों के हाथ एक दूसरे के सेक्स पर थे काम करते हुए….

अशिता बेहाल हो रही थी खुद मस्टुर्बते करते हुए उधर विहान का भी वही हाल था…

विहान ने तब कहा,

“आशु अपने हाथ को अपने बूब पर भी दबाओ फिर वापस निचे करो फिर बूब पर और वापस निचे….”

अशिता ने वही किया और खुद अपने आप को नहीं संभाल पा रही थी वो सब करते हुए…. तो विहान ने पूछा,

“अरे यू नॉट वेट डाउन तेरे बेबी?”

जिस्सके जवाब अशिता ने अपने भीगे हुए उँगलियों को दिखाया विहान को और एक सिसकती आवाज़ में कहा,

“भाई ी ऍम क्युम्मिंग स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह आआआआहहहहह bhaaaaaaaiiiiiiiiiiiii”

उधर विहान ने कैमरा को अपने लुंड पर किया और हाथ को ज़ोरों से चालते हुए कमरे में अपने वीर्य की पिचकारी को दिखाया अशिता को निकलते हुए खुद तड़पती आवाज़ में, “अअअअअगगगठ्ठ” करते हुए, फिर हांफते हुए कैमरा को अपने चेहरे पर करके अशिता से कहा,

“woooooooooooow थिस वास् फैंटास्टिक नाह बेबी? लगता है तुमसे डायरेक्ट सेक्स किया अभी अभी क्यों आया नाह वही फील तुझे भी माय लव?!”

अशिता ढीली हो चुकी थी और वो भी हांफने लगी थी और हांफते हुए hi जवाब दिया,

“एस भाई शामे फीलिंग, बूत स्टिल ी मिस यू ा लोट स्वीटहार्ट. लव यू, लव यू एंड लव यू लोड्स भाई.”

और इस तरह से सेपरेशन की पहली रात बिठाये इन् दोनों ने.

तो बे कॉन्टिनोएड……
 
अपडेट 66 थे नई ओने

अगले सुबह को अनिरुद और सुमन काम पर निकलने से पहले अशिता को कई बार उठाने को गए क्यूंकि अब उस्सको अकेले उठ कर तैयार होना था कॉलेज जाने के लिए. विहान तो था नहीं अब घर में, इस लिए सुमन को थोड़ा फ़िक्र भी होने लगा था और उस्सने अनिरुद से कुछ यूँ कहा,

“कैसे भी हो विहान यहाँ था तो अपनी बेहेन का ख्याल तो रखता था, उस्सको कॉलेज नहीं तो रस्ते में उसस्के साथ चलता किसी का कोई डर नहीं था तब उसस्के लिए एक बॉडी गार्ड की तरह था वो नाह? अब अकेली कॉलेज जाएगी, अकेली वापस आएगी, पता नहीं कौन कौन उस्सको छेड़ेगा, पता नहीं बीते हुए काण्ड को लेकर किसी ने उस्सको सताया या कुछ हुआ तो?!”

अनिरुद ने कहा,

“तुम फ़िक्र करना चोर्रो वो बची नहीं है खुद की देख भाल कर सकती है!

सुमन: “फिर भी हमें उस से इस बारे में बात करनी चाहिए थी, आप hi कुछ केहदो, समझा दो उस्सको के कोई कुछ कहे तो इग्नोर करे और सीधे रास्ता देखे और सीधा कॉलेज जाए और वापस घर आये. कुछ तो बोलो उस्सको नाह!”

अनिरुद: “ठीक है मैं बात करता हूँ उस से.”

तो अनिरुद गया अशिता को उठाने काम पर जाने से पहले, वो नहीं उठना चाहती थी मगर अनिरुद ने ज़बरदस्ती उठाया उससे. अशिता उठ बैठी बीएड पर उबासी लेते हुए और कहा,

“उफ़ पापा आप जाओ नाह काम पर मैं टाइम पर उठ कर तैयार हो जाउंगी नाह! अभी और एक घंटे तक सो सकती हूँ नाह मैं!”

अनिरुद ने बड़े प्यार से ाहिता को समझाया,

“सुन नाह मेरी गद्य, देख तू अकेली होगी अब तेरा विहान तेरे आस पास नहीं होगा इस लिए…..”

अशिता ने बीच में अनिरुद की बात को काटते हुए कहा,

“ओह पापा आप ने क्यों याद दिला दिया यह बात मैं भूल hi गयी थी के भाई यहाँ नहीं है मैं ने रात भर उस्सको ड्रीम किया, उफ़ अब मेरा दिन कितना भारी गुज़रेगा ओह माय गॉड मैं कैसे किआ करुँगी……!”

अनिरुद ने अशिता का पीठ सहलाते हुए कहा,

“देख लास्ट केस को लेकर मावली, गुंडा टाइप लड़के लोग तुम्मो चढ़ सकते हैं, कोई ऐसी वैसे बातें कह सकता है के तुम अपने भाई के साथ गुलछर्रे उड़ाती थी ये कुछ ऐसा समझ रही हो नाह बीटा, तो तुमको उन् सबके बातों को बस इग्नोर करते हुए आगे बढ़ना है, किसी को कोई रिप्लाई मत करना, बुसस अपना रास्ता देखना समझ गयी तुम?!”

अशिता ने आराम से कहा,

“अरे पापा आप क्यों वोर्री करते हो मैं किसी से नहीं डर्टी यह मेरा पर्सनल मटर है, किसी ने कुछ कहा तो मुझे उनके मुंह बांध करना भी अत है, आप मुझे जानते नहीं हो पापा मैं किआ चीज़ हूँ बड़े बड़ों को ठीक कर सकती हूँ मैं यू हैवे ा स्ट्रांग डॉटर यू क्नोव डिअर पापा?! हीहीहीहीही!”

अनिरुद: “जानता हूँ मेरी माँ, इसी लिए कह रहा हूँ के दूर रहना इन् सब इश्यूज से यार, don’t मिंगले विथ थेइर टॉक्स जस्ट इग्नोर एंड वाक अवे…”

अशिता ने कुछ सोचा और कहा,

“okay okay ी विल इग्नोर आप जाओ दो हैवे ा ग्रेट डे पापा, मम्मी को भी गुड डे कह देना.”

यह कहकर अशिता फिर कम्बल के निचे घुस गयी और अंदर से ऊंची आवाज़ में कहा,

“मम्मी गुड मॉर्निंग एंड गूऊऊडड़डडडड ड्डआआआआययययययय!”

अनिरुद मुस्कुराया और कम्बल के ऊपर से उसस्के सर को चूमा और घर से निकले दोनों दरवाज़े को लॉक करते हुए यह भी कहा अनिरुद ने आवाज़ बुलंद करते हुए,

“और हाँ घर की मैं दूर को लॉक करना मत भूलना निकलने से पहले एक चाभी तुम्हारे पास है अभी मैं लॉक करके निकल रहा हूँ bye आशु, लव यू”

और अपनी बीएड से अशिता ने ऊंची आवाज़ में कहा

“लव यू तू papaaaaaaaaaa”

अशिता की नींद जा चुकी थी और बीएड पर अंगराई लेते हुए बैठी और मोबाइल लेकर चेक किया तो देखा विहान ने गुड मॉर्निंग मैसेज सेंड किया था सुबह 5.30 बजे, तो हैरान होते उस्सको रिप्लाई करते हुए खुद से कहा,

“अरे व्हाट ा सरप्राइज, भाई इतनी सवेरे उठ गया किआ? वो तो 10 बजे तक सोता है जब कोई काम नहीं होता इतने सवेरे कैसे जाग गया वो?”

उस्सने गुडमॉर्निंग विश सेंड किया ी लव यू लाइन के साथ और ब्रश करने चली गयी.

फ्रेश होकर वापस आयी तो अपनी यूनिफार्म पेहेनते हुए विहान को याद किया और खुद को यूनिफार्म में सेल्फी लेकर व्हाट्सअप किया दो, तीन पिक्स को विहान को.

उधर विहान ने जैसे पिक्स देखे तुरंत वीडियो कॉल किया और दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे.

विहान ने कहा,

“अरे यार मैं ने सोचा था तुम यूनिफार्म पेहेनते वक़्त मुझको कॉल करोगी तो मैं तुमको यूनिफार्म पेहेनते हुए देखूंगा मगर तुमने पेहेन्ने के बाद पिछ सेंड किया किआ यार!”

बात करते वक़्त अशिता इस कमरे से उस कमरे, तो कभी टिफ़िन लेते हुए किचन में तो कभी अपनी बुक्स लेते हुए, रेडी होते हुए घर के चाकर लगा रही थी क्युके उस्सको देर हो रही थी कॉलेज के लिए.

विहान ने कहा,

“तुमने तो मुझे पुरे घर का सेर करा दिया अपनी मोबाइल से आशु”

अशिता ने कहा,

“भाई अब मैं निकलती हूँ bye हैवे ा गुड डे, खूब घूमना गाओं में ज़्यादा दूर मत जाना, एन्जॉय योरसेल्फ मऊवः”

विहान ने कहा,

“अरे यार वे कैन स्टिल कंटिन्यू टॉकिंग नाह जब तुम बाहर भी निकलो तो!”

अशिता ने कहा,

“रियली? बुद्धू बाहर कहाँ से विफई होगा वीडियो कॉल के लिए यहाँ?!”

तो विहान ने कहा,

“okay no वीडियो कॉल बूत नार्मल कॉल तो कर सकते हैं, स्विच ऑफ फ्रॉम वीडियो कॉल तो नार्मल कॉल, वेट मैं कट करके तुमको कॉल करता हूँ कॉलेज तक तुमसे बात करता रहूँगा okay?”

अशिता ने घरके दरवाज़े को लॉक करते हुए कहा,

“okay ी ऍम गेटिंग आउट नाउ, कॉल में!”

और अशिता चल रही थी रास्ते में तो विहान ने कॉल किया तो बात करते हुए अशिता बस स्टॉप तक पहुंची.

विहान ने पूछा,

“कहाँ तक रीच हुई हो अब?!”

अशिता: “बस स्टॉप पर हूँ, बस नहीं आयी है अभी और तुम कहाँ हो इस वक़्त घर के अंदर या बाहर?”

विहान: “मैं पीपल के पेड़ के निचे बैठा हुआ हूँ हेहेहे!”

अशिता: ”तुम इतने सवेरे कैसे जाग गए आज?”

विहान: “यह गाओं है बेबी यहाँ सब सवेरे उठ जाते हैं, बचे बहोत शोर कर रहे थे, दौड़ते, कुड़ते हुए तो नींद टूट गयी तो किआ करता आठ गया सवेरे hi!”

अशिता: “हम्म सही है अब दिन में सो जाना जब सब बाहर चले जाए तो, रेस्ट करना…. बस आगयी भाई ी ऍम गेटिंग इन नाउ, वे कंटिन्यू तो टॉक और लीव?!”

विहान: “कंटिन्यू तो टॉक स्वीटहार्ट…..”

विहान जानता था के वो किआ कर रहा है, उस्सको भी शक था के कोई अशिता को चढ़ेगा या इधर उधर के बात करेगा उस्सको लेकर, और मोहल्ले वाले कांड को लेकर, तो वो चाहता था के अशिता के साथ रहे किसी तरह से भी और उस्सको पता चले के अशिता साफल्य कॉलेज रीच हुई के नहीं इसी लिए वो अशिता से बात कर रहा था.

और जब अशिता कॉलेज के गेट तक रीच हुई तब bye कहा अशिता को और कॉल एन्ड किया दोनों ने.

जिस दौरान विहान अशिता से बात कर रहा था तो उस्सने तीन लड़कियों को गाओं में कॉलेज यूनिफार्म में बस स्टॉप के तरफ जाते हुए देखा, उस्सको उस वक़्त उनके पीठ दिख रहा था, मगर जिस दूरी पर विहान था वहां से अंदाज़ा लगा सकता था के उन् में से दो सांवली थे और एक बहोत गोरी, क्यों के उस्सकी बाहें दिख रहे थे उस्सको…. तो जैसे hi कॉल एन्ड किया वो बस स्टॉप के तरफ बढ़ा. कोई 15 मेट्रेस था पीपल के पेड़ से बस टॉप तक जाने को, वहीँ जहाँ शाम को अनिरुद उतरता था और पूजा दौड़ कर उस से मिलने जाती थी, उसी जगह पर जाते वक़्त भी बस रुकता था पैसेंजर्स को लेने के लिए भी. वैसे बस स्टॉप तो था नहीं, मगर वो एक स्टॉप पॉइंट था गाओं वालों के लिए और सभी वहीँ बस का वेट करते थे.

जब तक विहान वहां रीच हुआ तो बस आगया और तीनों लड़कियां बस में चढ़ने लगे थे. विहान बस के बाहर खड़ा उनको देख रहा था, क्यूंकि बस में और कुछ लोग चढ़ रहे थे तो इस से पहले के बस जाता, उन् लड़कियों को बस के अंदर बैठते हुए देखा विहान ने और उन् में से जो गोरी लड़की थी यह वही थी जिस्सको कल विहान ने मंदिर में देखा था.

विहान का दिल मचला उस्सको देख कर, वो बहोत hi खूबसूरत थी, और कुछ शर्मीली टाइप थी, वो उसी साइड में बैठी जहाँ विहान बाहर खड़ा उस्सको देख रहा था, उस लड़की के पास उन् दो लड़कियों में से एक बैठी थी और उस ने उस खूबसूरत लड़की की केहुनी को छह कर कहा के कोई बाहर उस्सको देख रहा है, लड़की ने सर निचे झुकाते हुए धीरे से कहा,

“मुझे पता है, कल मैं ने उस्सको मंदिर में देखा था किसी और लड़की के साथ!”

दूसरी लड़की ने कहा,

“तुझको घुर्र रहा है ऋ, वाओ कितना हैंडसम है, देख ले तू भी एक बार उस्सको यार!”

“नहीं मैं नहीं देखती उससे, पता नहीं कौन है कल यहाँ के ठाकुर के साथ था और एक लड़की चिपकी हुई थी उसस्के साथ शायद उस्सकी fiancée या पत्नी हो!”

सांवली लड़की ने कहा,

“देख हाथ उठा रहा है, तुझको bye कर रहा है देख ले नाह एक बार!”

तो उस गोरी लड़की ने बुसस थोड़ा सा हलके से नज़रें तिरछी करके बाहर के तरफ किया सर झुकाये हुए hi, तो देखा विहान मुस्कुराते हुए उस्सको bye कर रहा था.

और बस तभी स्टार्ट हो गयी थी जाने के लिए… उस लड़की की हंसी चुत गयी और विहान ने देखा के वो हंसी तो खुद से कहा,

“हंसी तो फांसी… हहहहए” और वहां से मुस्कुराते हुए विहान खुश दीखते हुए गुनगुनाते हुए पीपल के पेड़ के तरफ गया…

वो यह गीत गुनगुना रहा था,

“एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा….

जैसे खिलता गुलाब,

जैसे शायर का ख्वाब,

जैसे उजली किरण,

जैसे बन में हिरन,

जैसे चांदी रात,

जैसे नग़में की बात

जैसे मंदिर में हो एक जलता दियाआ

एक लड़की को देखा तो ऐसा लगायआ!”

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 67 रूचि…

दोनों लड़कियां बस में जा रहे थे और गोरी वाली ज़ोर से हस्ती जा रही thi.Saanvli लड़की ने पूछा,

“क्यों अब किआ हो गया तुझे जो इतना हंस रही है, बहुत ख़ुशी हो रही है किआ के उस्सने तुझे वेव किया?”

“आरी नहीं ठीक जब मैं ने उसस्के तरफ देखा बस स्टार्ट हो गयी और उस्का वेव जैसे आधा hi रह गया उस्का चेहरा देखने लायक था हीहीहीही” गोरी लड़की ने कहा.

सांवली: “तेरी तरह गोरा और हैंडसम भी है जोड़ी खूब जमेगी.”

गोरी: “क्यों तुमको वो नहीं पसंद किआ? कहते है न के अपोजिट ाट्रक्ट्स! किआ पता के उस्सको तुझ में इंटरेस्ट है?”

सांवली: “हाँ मुझे तो पसंद है तो किआ मैं अपना लून उसे? तू बुरा नहीं मानेगी? और किआ वो मुझको पसंद करेगा किआ?”

गोरी: “आरी काल चोरर उस्सकी बात, पता नहीं कौन है कहाँ से आया है, किआ कर रहा है गाओं में, अजनबी है, पाएदेस्सी है वापस चला जाएगा!”

सांवली ने गाना गया: “परदेसियों से नाह आंखियां मिलाना, परदेसियों को है एक दिन जाना….”

गोरी: “हाँ इसी लिए तो मैं आँख नहीं मिलाना चाहती थी तुमने फाॅर्स किया मुझे, बुसस थोड़ा सा देखा उस्सको!”

सांवली: “ी बेट के वो शाम को हमारा वेट करेगा किआ कहती है तू?”

गोरी: “हो सकता है के वो वापस चला भी जाए शाम होने तक, किआ पता!”

सांवली: “मैं कहती हूँ के शाम को जब हम बुसस से उतरेंगे तो वो सामने होगा चल शर्त लगाती हैं!”

गोरी: “नाह मैं नहीं लगाती शर्त व्रत, देख लेंगे शाम को फिर!”

********************************************************

अशिता कॉलेज से निकली और तुरंत विहान का कॉल आया. विहान को पता था एक्साक्ट्ली कितने बजे वो निकलती है.

विहान ने उस से बात किया जब तक के वो घर वापस नहीं रीच हुई. तब उस्सको bye किया और घर के काम करने को कहकर विहान पीपल के पेड़ के निचे बैठ कर बस को आने का वेट करने लगा इस उम्मीद से के कॉलेज की वो लड़कियां जिस को उस्सने सुबह देखा था वह लोग बस से उतरे.

अब क्यूंकि कोई 10 कंस तक बुसस को गाओं के पास वाले छोटे शहर से आना था, तो टाइम तो लगता है, वार्ना होता यह के ठीक जिस वक़्त अशिता कॉलेज से निकलती है अगर उसी वक़्त यह लड़कियां भी आते तो विहान नहीं मिल पता गाओं के लड़कियों से, उसस्के लिए टाइमिंग सही था दोनों तरफ के.

और कुछ देर वेट करने के बाद विहान को बस नज़र आयी आते हुए तो वो उठकर चला गया जहाँ बस पैसेंजर्स को उतारते हैं. धुप था तो विहान ने सनग्लासेस पहना हुआ था. बस के अंदर से लड़कियों ने उस्सको देख लिया और सांवली लड़की ने गोरी वाली को केहुनी मारते हुए कहा,

“देख देख तेरा वो वेट कर रहा है, चल मैं ने कहा था नाह, अब फॉलो करेगा, रोमियो कहीं का हेहेहे!”

दो पेहेर के तक़रीबन 3 बजे थे और उस वक़्त उस छोटे से गाओं में कोई नज़र भी नहीं आरहे थे, विहान अकेला खड़ा था वहां, दूर दूर तक कोई नज़र नहीं ारः था, सिर्फ विहान और तीन लड़कियां जो बस से उतरे चल रहे थे और विहान बगल में चलते हुए बात कर रहा था मगर तीनों लड़कियां आपस में बात करते हुए चल रहे थे. गोरी लड़की का सर निचे झुका हुआ था और सांवली लड़की उस से कह रही थी,

“आरी एक नज़र देख ले बेचारे को तुझसे hi बात कर रहा है, तेरा नाम पूछ रहा है बता दूँ किआ?!”

विहान ने सुना और सांवली लड़की से कहा,

“हाँ चल तुहि बतादे इस्सके नाम अगर इस्को बोलना नहीं अत तो, बता दे नाह यार किआ जाएगा अगर नाम जान लिया तो!”

सांवली लड़की ने कहा,

“रूचि”

तो गोरी लड़की ने ज़ोर से केहुनी मारा सांवली वाली को. अब तीसरी लड़की जो थी वो इसी गाओं की थी और उस्का घर आगया तो वो चली गयी. यह देख कर विहान ने सोचा पता नहीं यह दोनों कहाँ तक चैलेंज, और उस्सको फ़िक्र हो रहा था के कहीं इनके घर भी नाह आजाये तो बात तो कर hi नहीं पायेगा.

अस्सल में यह दोनों दूसरी गाओं के थे जहाँ बस नहीं जाता और कोई 500 मेट्रेस चलना था दोनों को मगर विहान को पता नहीं था.

जब नाम बताया उस लड़की ने तो विहान ने कहा, रुचि, कैसे लिखते हैं रुचि या रूचि? प्लेए स्पेल करो नाह!

तो सांवली लड़की ने स्पेल किया R-U-C-H-I!

तब विहान ने थैंक्स कहा और मुस्कुराते हुए आशिकाना अंदाज़ में कहा,

“और तेरा नाम किआ है जी यह भी बता दे नाह, तुझसे hi इस्सके इन्फो निकलना पड़ेगा नाह अब!”

रूचि ने अब तक सर झुकाया हुआ था और फिर से केहुनी मारते हुए सान्वी लड़की से धीरे से कहा,

“ले अब बता अपना भी नाम इस्को तू, हंसेगा देख लेना!”

सान्वी लड़की ने विहान को देखा और कहा,

“मेरा नाम ओल्ड है जी मेरी दादी ने रखा था कहीं हँसियो मत अगर बताया तो!”

विहान ने उसी ऐडा में कहा,

“नहीं हँसेंगे जी, नाम तो नाम होता है ओल्ड हो या नई आखिर नाम होता है नाह तो किआ नाम है तुम्हारा??”

सांवली लड़की ने कहा,

“फूलवती” और तुरंत विहान के चेहरे में देखा के वो हंस्ता है या नहीं.

विहान मुस्कुराया और कहा,

“गाओं के हिसाब से नाम तो सही है, इस में हनस्सना किआ है फूलवती डिअर, चलो तुमसे मिलकर ख़ुशी हुई”

और विहान ने हाथ बढ़ाया शेक हैंड्स के लिए

फूलवती ने चरों तरफ देखा पहले और कहा,

“गाओं में हम हाथ नहीं मिलते लड़कों से, यह शहर नहीं है!”

रूचि निचे देखते हुए hi चल रही थी और धीरे से फूलवती से कहा,

“अब इस्को बोल वापस जाने को कहीं किसी ने देख लिया तो मुसीबत!”

तो फूलवती ने कहा,

“अरे इस्सके नाम भी तो पूछना है नाह वेट कर भगाती हूँ इससे अभी!”

फूलवती: “हमारा नाम तो पूछ लिया मगर अपना कब बताओगे रिक्वेस्ट सेंड करना पड़ेगा किआ तुम्हारा नाम जान्ने के लिए?”

विहान ज़ोर से हंसा और कहा,

“बन्दे को विहान कहते हैं, मगर यार तुम्हारी यह दोस्त ने तो एक बात भी नहीं किया मुझसे, एक वर्ड भी नहीं कहा यह बहोत ना इंसाफ़ी है, है नाह?”

तो फूलवती ने रूचि से कहा,

“आरी कुछ तो बोल देख यह पीछा नहीं चौररने वाला वार्ना”

तब रूचि का सर थोड़ा सा ऊपर उठा और विहान को देखते हुए कहा,

“आप हमारा पीछा क्यों कर रहे हो, वापस जाओ आप, यह गाओं है बाबू किसी ने देख लिया तो हम मुसीबत में पर सकते हैं प्लीज जाओ आप!”

विहान बहोत खुश हुआ और कहा,

“इतनी प्यारी, इतनी सुरीली आवाज़ है और तुम इस्को छुपा रहे थे, इस आवाज़ से प्यार हो गया मुझे तो”

रूचि का चेहरा लाल हो गया और अपने क़दमों की रफ़्तार बढ़ा दिया उस्सने. ठीक तभी विहान का फ़ोन बजा.

विहान ने कॉल लिया ऑफ़ कोर्स अशिता थी,

“भाई कहाँ हो? मुझसे बात करलो थोड़ा सा वीडियो कॉल करती हूँ, यूनिफार्म उतारने जा रही हूँ, देखोगे नहीं?!”

अब बारी थी विहान का चेहरा लाल होने का और उस्सने कहा,

“अरे नहीं बाहर हूँ विफई नहीं है इधर, तू उतार ले बाद में कॉल करता हूँ okay?!”

और विहान ने कॉल कट कर दिया और रूचि से कहा,

“हे अपना नंबर तो देती जा नाह प्लीज!”

रूचि ने कहा,

“मैं मोबाइल नहीं रखती!”

विहान ने कहा,

“ी don’t बिलीव के इस मॉडर्न ज़माने में तुम्हारे पास मोबाइल नहीं है देदे नाह किआ जाएगा यार!”

रूचि ने कहा,

”फूलवती के पास है मेरे पास नहीं है!”

तो विहान ने फूलवती से कहा,

“ठीक है तो तू देगी अपना नंबर मुझे, दे नाह प्लीज!”

फूलवती ने धीरे से रूचि से कहा,

“अपना क्यों नहीं दिया, तू किआ इस्को उल्लू समझती है इस्को पता है के तेरे पास भी मोबाइल ज़रूर होगी”

रूचि ने धीरे से “सष्ठ” कहा

और विहान ने कहा,

“बोलना फूलवती तेरा नंबर तुरंत मिसकॉल करता हूँ तब तू सेव कर लेना मेरा वाला!”

फूलवती ने बता दिया और विहान ने कॉल किया तो फूलवती के बैग में उस्सकी मोबाइल बजी…

तब तक दूसरा गाओं आगया और रूचि ने कहा,

“अब जाओ प्लीज हमारा घर पास है अब! कोई देख लेगा!”

विहान ने कहा,

“यह मौका तो नहीं खोना चाहता हूँ, कम से कम तुम्हारा घर तो देख लून मैं!”

रूचि ने अपना कांधा उचकाते हुए कहा,

“तो देखलो मगर दूर रहो हमारे साथ मत चलो प्लीज ी बेग ऑफ़ यू!”

विहान ने कहा,

“okay ठीक है पीछे रहता हूँ तुम दोनों आगे जाओ…”

और विहान ने अपना कदम रोका, दोनों को आगे भढने दिया. फिर आहिस्ते आहिस्ते चलने लगा और पहले फूलवती का घर आया वो अपनी आँगन में जाते हुए मुड़कर विहान को वेव किया, विहान ने मुस्कुराते हुए उस्सको देखा, और नज़रों को रूचि पर जमाये रखा तो देखा वो चलती जा रही है और कोई भी घर नहीं दिख रहा था उस तरफ तो क़दमों को तेज़ करके उसस्के पास आया और पूछा,

“हे सुनों इस तरफ तो कोई घर भी नहीं तुम जा कहाँ रही हो आखिर?!”

रूचि रुक गयी और चारों तरफ देखने के बाद कहा,

“तुम समझ क्यों नहीं रहे? मुझे प्रॉब्लम होगी घर में अगर किसी ने भी मुझे तुमसे बात करते हुए देखा, मत फॉलो करो मुझे प्लीज!”

विहान: “यार मगर ात लीस्ट बतादो के कितना दूर और जाना है तुम्हें?”

रूचि ने अपने ऊँगली से कुछ दूर पहाड़ी के तरफ दिखाते हुए कहा,

“वो देख रहे हो वहां उस पहाड़ी के पास, एक लाल चाट वाला मकान दिखा वहां रहती हूँ अब प्लीज यहीं से मूढ़ जाओ और पीछा करना बांध करो मेरे घर वाले बहोत सख्त है, मेरा कॉलेज जाना बांध करवा देंगे अगर मुझे किसी भी लड़के से बात करते हुए देख लिया तो, okay प्लीज रेतुर्न फ्रॉम हेरे इटसेल्फ नाउ!”

रूचि के माथे पर सिकंजह देख कर विहान समझ गया के वो कितना परेशान है और डर भी रही है तो कहा,

“okay okay मैं तुमको कोई प्रॉब्लम नहीं देना चाहता बुसस दोस्ती करना चाहता था, थैंक्स रूचि कल सुबह मिलेंगे बस स्टॉप के पास, मैं वेट करूँगा.”

तब रूचि के चेहरे में एक राहत दिखी और हलकी सी मुस्कान नज़र आया और वो जाने लगी अपने घर के तरफ, विहान मूढ़ गया मगर बार बार मुड़कर रूचि को देखता गया जब तक के वो अपनी घर तक नहीं पहुंची. विहान वेट कर रहा था के रूचि मूढ़ कर उस्सको देखे, मगर होता यह था के जब रूचि मुड़कर उस्सको देखती तो विहान आगे देख रहा होता था और जब विहान मुड़कर उस्सको देखता तो रूचि आगे बढ़ रही होती थी. फिर विहान खड़ा हो गया एक पल ठीक जब रूचि घर के आँगन में दाखिल हुई, और विहान को बहोत ख़ुशी हुई देख कर के रूचि पीछे मूढ़ कर उस्सको देख रही थी आँगन में दाखिल होते वक़्त.

वहां से विहान बड़े खुश होते हुए वापस अपने गाओं गया और इतना खुश था के डांसिंग स्टेप करते हुए गया….

जिस वक़्त बस स्टॉप के पास से कुछ दूर तक विहान उन् तीनों लड़कियों के साथ साथ जा रहा था तो उसके दादा जी बालकनी से सब देख रहा था और दादा जी ने खुद से कहा,

“लो किशन कन्हैया आगया गाओं में और उसस्के गोपियाँ भी साथ हैं!”

पीपल के पेड़ के निचे बैठ कर विहान ने फूलवती को मैसेज किया,

“hello मैं विहान, प्लीज मुझे रूचि का नंबर दो नाह प्लीज!”

फूलवती ने तुरंत रिप्लाई किया,

“मुझे पता था तुम उस्का नंबर मांगोगे, मगर मैं नहीं दे सकती उसी से मांग लेना!”

विहान: “अरे दो नाह यार उस्सको सरप्राइज करूँगा!”

फूलवती: “कैसे दूँ वो मुझ पर भड़केगी अगर उस्का नंबर दिया तो!”

विहान: “देख मैं तेरे मोबाइल को रिचार्ज करवा दूंगा बदले में, जब भी चाहे तू रिचार्ज करवा लेना, तेरा सेविंग हो जाएगा दे दे नाह यार!”

फूलवती: “अरे किआ करुँगी रिचार्ज करवाके, मैं मोबाइल उतना उसे hi नहीं करती हूँ यार!”

Vihaan:”kyun तेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है?”

फूलवती: “नहीं है तू बनेगा किआ मेरा बॉयफ्रेंड?”

विहान खामोश हो गया…. रिप्लाई नहीं किया कुछ देर सोचता रहा के किआ कहें उस्सको, तो फूलवती ने hi मैसेज सेंड किया,

“क्यों किआ हुआ? नहीं बन सकता नाह मेरा बॉय फ्रेंड तू? ऐसे hi कोई नहीं बनता मेरा बर्फ इस लिए के काली हूँ नाह? हर किसी को गोरी लड़की चाहिए होता है हम जैसों को नहीं मिलता बॉयफ्रेंड वॉयफ्रैंड”

विहान ने उस्सको कॉल किया.

फूलवती ने कॉल लिया और कहा,

“लो अब तू फ़ोन करने लगा मुझे, अभी किसी ने सुन लिया तो शामत आजाएगी, क्यों फ़ोन किया तुम ने?”

विहान: “सुन फूलवती, बॉयफ्रेंड नाह सही तेरा फ्रेंड तो बन सकता हूँ है के नहीं? तो एक दोस्त अपने दोस्त को फ़ोन तो कर सकता है नाह? चल कोई तुझे टेक्स्ट या फ़ोन नहीं करता तो मैं करूँगा, हर रोज़ तेरे मोबाइल पर मेरे टेक्स्ट्स भी आएंगे और कॉल्स भी तब तो रिचार्ज करवाना पड़ेगा नाह तुझे?”

फूलवती ने हँस्ते हुए जवाब दिया,

“बुद्धू है किआ तू? तू मुझे कॉल और टेक्स्ट करेगा तो मुझे क्यों रिचार्ज करना पड़ेगा? जब मैं तुझे कॉल करुँगी तब नाह मुझको रिचार्ज करना पड़ेगा?”

विहान: “अरे बाबा, तो तू मुझको रिप्लाई करेगी टेक्स्ट की तो तेरा पैसा जाएगा नाह?!”

फूलवती: “मेरा एक रिचार्ज 3 महीनों तक रहता है, मैं ज़्यादा नहीं करने वाली तुझको टेक्स्ट वेक्स!”

विहान: “उफ़ किआ मुसीबत है यार! ाचा बता दे नाह रूचि का नंबर यार प्लीज!”

फूलवती: “अरे उस्सको पता चल जाएगा नाह के मैं ने hi दिया तुझे उस्का नंबर? नहीं दे सकती!”

विहान: “मगर उस्सने क्यों कहा के उसस्के पास मोबाइल नहीं है?”

फूलवती: “उसस्के घर के लोग बहोत स्ट्रिक्ट है, उस्का कॉलेज जाना बांध करवा देंगे अगर उस्का को बर्फ या किसी लड़के के साथ उस्का कोई चक्कर हुआ तो, उस्का एक बड़ा भाई और भाबी हैं जो उस्सको बहोत डोमिनाते करते हैं घर में, उस्सकी माँ बाप नहीं है, उस्सकी भाबी तो उस से घर के सभी काम करवाती है बेचारी कभी कॉलेज के वर्क्स भी नहीं कर पाती क्यूंकि लेट रात तक घर के काम करती है, नौकरानी बना के रखा है उस्सको उस्सकी भाबी ने!... अब अगर मैं ने तुमको उस्का फ़ोन नंबर दिया और उस्सकी भाबी या भाई ने सुन लिया या देख लिया उस्सको टेक्स्ट करते हुए तो उस पर किआ बीतेगी इस्सके अंदाज़ा है तुमको? अगर उस से नंबर ले सको तो ले लेना मैं तो नहीं दे सकती!”

विहान हैरान होते हुए कहा,

“कमाल है, आज के ज़माने में भी ऐसे लोग हैं इस दुन्या में जो एक लड़की को इस तरह से उसे करते हैं घर में कमाल है यार!”

फूलवती: “हम्म अगर रूचि को कॉलेज जाना और पढ़ना है तो एहि शर्त है उस्सकी भाबी की के वो उस्का ग़ुलाम बांके रहे, वार्ना कॉलेज जाना बांध!”

विहान: “हद है यार उफ़!”

फूलवती: “अब मैं रखती हूँ वार्ना मेरा भी बंद बज जाएगा अगर किसी ने देख लिया के मैं किसी से बात कर रही हूँ, यह गाओं है विहान यहाँ यह सब नहीं चलता, चाट करना या बर्फ से ऐसे बात वग़ैरा करना….”

विहान: “अरे सुन तो, किआ रूचि का कोई बर्फ वग़ैरा है?”

फूलवती: “किआ सवाल है यह? अभी इतना समझाया नाह के अगर वो हुआ तो किआ होगा उस्का?!”

विहान: “नहीं मेरा मतलब है के किसी को दिल hi दिल में वो पसंद करती होगी, कॉलेज में या उस तरफ कहीं कोई होगा किआ?”

फूलवती: “बिल्कुल नहीं, कोई भी नहीं है, वो चाहती भी नहीं!”

विहान: “okay थैंक्स फॉर थे इन्फो स्वीट फूलवती, तुम पक्का दोस्त हो मेरा. मुउउउउउह!”

फूलवती: “यह किआ था मऊवः? यह सब नहीं चलता इधर, आगे से ऐसा मत करियो हाँ!”

विहान ने ज़ोर से हँस्ते हुए कॉल को एन्ड किया!

तो बे कॉन्टिनोएड…. (2600 वर्ड्स)
 
अपडेट 68 विहान एंड रूचि

विहान जब घर के अंदर गया तो दादा जी को अपने सामने पाया जिसस्ने उस से कहा,

“क्यों मियां मजनू? आते hi लग गए कुड़ियों के पीछे? बहोत तेज़ निकले बीटा तुम तो!”

विहान का चेहरा लाल हो गया और गाला जैसे सुख गया और बिना कुछ कहे थोड़ा शर्मा सा गया अपने दादा की बात सुनकर.

दादा जी सोफे पर बैठे हुए थे अपने लाठी को खुद के सामने रख कर उस पर तक लगाते हुए, सर पर पगड़ी, चस्मा अपने ऊँगली से बार बार नाक के ऊपर करते हुए और अपने सफ़ेद मंच को हर बार ऊँगली से मड़ोड़ते हुए विहान के चेहरे में देखते उस्सको कोई जवाब देने का जैसे इंतज़ार कर रहे थे. और कोई भी नहीं था वहां उस वक़्त. विहान ने अपने सर के पीछे हाथ फरते हुए कुछ झिझक के साथ कहा,

“दादा जी आप मुझे देख रहे थे? किधर थे आप? मैं ने तो आप को नहीं देखा, आप उधर थे किआ उस वक़्त?!”

दादा जी ने थोड़ा सा मुस्कुरा कर फिर मच को सीधा करते हुए कहा,

“यह मेरा इलाका है बीटा, कहीं से भी तुमको देख सकता हूँ, क्यों नहीं देखना चाहिए था किआ मुझे? हाहाहा! अरे नहीं बुसस ऐसे hi तुम पर नज़र पर गए थे उस वक़्त, अच्छा यह बता कौन थे वह लड़कियां उन् में से एक को तो पहचान लिया मैं ने वो यहीं की है, किशनवा की बेटी है बाकि दो को नहीं पहचाना मैं ने कौन थे?!”

दादा जी के बात सुनकर विहान का हौसला बढ़ा और अपने दादा के पास गया और आवाज़ धीमी करके बोलै,

“अरे दादा जी वो पीछे वाले गाओं की लड़कियां थे दोनों बुसस ऐसे hi बात करते हुए चले गए थे दोनों से! मुझे खुद पता नहीं कौन हैं दोनों…..”

दादा जी ने कहा,

“हम्म्म जीन, टीशर्ट, नाइके मार्क के जुटे, सनग्लास, और ज़रा सुन्घुं तो, हाँ परफ्यूम भी लगाया हुआ है, ऐसे बन ठान के तुम बुसस ऐसे hi चले गए थे या खूब अछि तरह से सज संवर कर गए थे लड़कियों के पीछे हीरो बनकर हैं, तू किआ समझता है अपने ज़माने में हम लोगों ने नहीं किया है यह सब किआ? तुम लोग समझते हो के यह रोमांस फ्लिर्टिंग सिर्फ तुम लोगों की ज़माने की बातें हैं किआ? अरे हम भी आशिक हुआ करते थे, तेरी दादी से पहले हम ने भी यह सब किया था जो तुम कर रहे हो, फरक बुसस इतना है के अब लड़कियां कॉलेज से वापस आ रहे हैं और हमरे जमाने में घांस की बोडियां सर पर लेकर वापस आ रहे थे, या पनघट से पानी भर कर आ रहे थे लड़कियां हाहाहाहा!!”

विहान हंस पड़ा और अपने दादा जी के सामने ज़मीन पर बैठ गया, और ज़्यादा सुनाने को कहा.

दादा जी ने अपने ज़माने की लड़कियों के बारे में कुछ बातें बतायी विहान को और उस्का भी एक असफल प्यार था उन् दिनों को वो सुनाया दादा जी ने. तो विहान के दिल में आया के रूचि के भाई और भाबी के बारे में कुछ कहे और पूछे के किआ वो उस्सकी मदद कर सकता है, मगर फिर सोचा के अभी नहीं बाद में रूचि के और भी ज़्यादा करीब होने के बाद अगर ज़रुरत पड़े तो अपने दादा से रूचि के बारे में बताएगा के किश तरह से उस्सकी भाबी उस पर ज़ुल्म करती है.

उसस्के बाद, अपने दादा के साथ थोड़ा और हंसी मज़ाक के बाद विहान अपने कमरे में गया और अशिता को कॉल किया. वीडियो कॉल नहीं क्यों के उस्सको पता था के अशिता उस वक़्त या तो होमवर्क्स कर रही होगी या किचन में कुछ पका रही होगी तो नार्मल कॉल किया बीएड पर लेट कर.

अशिता सच में किचन में थी, और कॉल लेते हुए कहा,

“किआ भाई तुम अब किधर रहते हो सूरज ढलने को है और अब मैं याद आयी तुमको?”

विहान ने मुस्कुराते हुए फ़ोन को चूमते हुए कहा,

“मूकः मुआह मुआह किआ कर रहे है मेरी विफिए?”

अशिता ने मुंह बनाते हुए कहा,

“पका रही है तुम्हारी विफिए, खाना बना रही हूँ खाओगे हस्बैंड जी?”

विहान: “विफिए खिलाएगी तब कहूंगा”

अशिता: “मुंह खोलो सेल में hi ठुस्स देती हूँ वहां तुम्हारे गले में उतर जाएगा हीहीहीहीही”

विहान: “हाहाहाहाहा! बहोत स्वादिष्ट है तेरा पकाया हुआ खाना विफिए!”

अशिता: “तुम किधर थे जब मैं यूनिफार्म चेंज कर रही थी के विफई नहीं था उधर?!”

विहान: “अरे बुसस थोड़ा टहलने गया था उस तालाब के तरफ”

अशिता: “सच बोल रहे हो नाह भाई?”

विहान: “और नहीं तो किआ तुमको क्यों झूट बोलूंगा मैं? क्यों? तू किआ सोच रही थी के मैं कहाँ था?”

अशिता: “हम्म कुछ नहीं ऐसी hi बुसस सोच रही थी के तुम खुद मुझको यूनिफार्म उतारते हुए कितना देखना पसंद करते हो और आज जब मैं खुद तुमको वो दिखाना चाहती हूँ तो जनाब अवेलेबल hi नहीं है!”

विहान ने बीएड पर एक करवट लेते हुए कहा,

“आरी कोई बात नहीं, आज रात को सब कुछ उतार के दिखा देना नाह तेरे हुब्बी को हम्म्म!”

अशिता ने अचानक कहा,

“अरे मम्मी पापा आगये, चल रखती हूँ, रात को बात करते हैं bye, मूकः!”

विहान बीएड पर लेट गया और एक लम्बी सांस चोररटे हुए सोचने लगा के अशिता को कैसे बताये रूचि के बारे में, बताये या नहीं बताये, या बाद में बताये….. उस्सको पता था के पहले अशिता अपनी मुंह कैसे बनाएगी, तब ग़ुस्सा करेगी, तब कहेगी, ‘मैं तुम्हारा मुंह नोच लुंगी अगर किसी लड़की से बात की तो’.. यह सोचते हुए विहान हंससने लगा अशिता को सोचते हुए और उस्सकी नखरें, अदाएं और ग़ुस्से को याद करके.

रात को दोनों ने कल रात की तरह सेक्स चाट किये, वीडियो कॉल पर एक दूसरे को सेक्सुअल ख़ुशी दिए दोनों ने और रात के 2 बजे तक लगे रहे थे वीडियो कॉल पर.

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सुबह को विहान ने सोच लिया था के आज वो भी उस बस में रूचि और फूलवती के साथ जाएगा उन् दोनों को कॉलेज तक चौररने, तैयार हो गया था और आज पीपल के पेड़ के निचे नहीं बल्कि उस बस स्टॉप पर खड़ा रूचि का वेट कर रहा था. फूलवती से फ़ोन पर बात करके कह दिया था के बुसस में वो रूचि के सीट से हट जाए और उस्सको रूचि के पास बैठने दे, फूलवती मान गयी और हाँ कह दिया था विहान को.

विहान बहोत खुश हुआ रूचि को आते हुए देख कर. वो काफी दूर थी और विहान ने उस्सको देख लिया था, विहान के इलावा आज तीन और लोग बस का इंतज़ार कर रहे थे.

और उधर से रूचि और फूलवती ने भी विहान को देख लिया था तो रूचि ने ांसाते हुए फूलवती से कहा,

“ोफो यार वो आज हमसे पहले वहां आगया है देखो नाह हमारे तरफ hi देख रहा था, किआ मुसीबत है यार इस से कैसे छुटकारा मिलेगा अब!”

“अपना नंबर देदे उससे सब आसान हो जाएगा!” फूलवती ने हँस्ते हुए कहा रूचि से.

रूचि ने फूलवती को मारते हुए कहा,

“किआ कह रही है, सब आसान होगा या और बिगड़ जाएगा अगर इस्को नंबर दिया तो?”

फूलवती: “यार कल मुझे कॉल किया कितनी बार तेरा नंबर माँगा मैं ने नहीं दिया, मैं ने तो कह दिया के नंबर लेना है तो तुझी से मांगे, तो अब मांगने आया होगा तो तू दे देना बात ख़तम!”

तब तक दोनों बस स्टॉप के पास आ चुके थे और क्यूंकि और लोग थे वहां विहान ने बात तो नहीं किये उन् लड़कियों से मगर सर झुका कर सिग्न किया.

रूचि ने विहान को देखा भी नहीं, वो एक तरफ देख रही थी. विहान उस्सको घुर्र रहा था, और वो तीसरी इसी गाओं वाली लड़की भी विहान को देख रही थी और फूलवती से पूछा,

“कौन है वो?”

फूलवती ने धीरे से लड़की से कहा,

“रूचि का लवर है हीहीहीही”

तब वो लड़की विहान को ऊपर से निचे देखने लगी.

बस शायद लेट था. उन् लोगों में से एक आदमी ने बड़बड़ाते हुए कहा,

“साला कभी भी टाइम पर नहीं अत यह बस ससुरा ड्राइवर बतया रहा होगा उस गाओं के लोगन से, अरे भाई टाइम पर अजय करो मेरे बाप!”

फूलवती हंस पड़ी उस आदमी को सुनकर और विहान को देख कर मुस्कुरायी.

विहान इशारे से फूलवती को सीट चेंज करने को कह रहा था और फूलवती हाँ में सर हिल्ला रही थी.

अब उस आदमी ने विहान से पूछा,

“तुम कोण हो बिटवा इस गाओं के नहीं लग रहे हो?”

तब रूचि की अचानक कान जैसे ज़्यादा खुला विहान का जवाब सुनने के लिए और थोड़ा सा सर उठा के उसस्के तरफ देखा रूचि ने.

विहान के समझ में आगया के अगर उस्सने जवाब दिया तो रूचि और फूलवती भी सुनेंगे, इस लिए उस ने सही जवाब नाह देते हुए कहा,

“चाचा मैं बुसस घूमने आया हूँ इस गाओं में थोड़ा तसवीरें ले रहा हूँ यहाँ के लोगों की और पेड़ पौधों की!”

इतना कहने के बाद विहान ने खुद से कहा,

“साला एक भी पिछ नहीं लिया मैं ने रूचि की, कमाल है मैं और पिछ नहीं लिया कैसे यह बात नहीं आयी मेरे दिमाग़ में, अब ले लेता हूँ….”

और उस्सने मोबाइल की कैमरा को रूचि के तरफ किया, रूचि ने देख लिया और जल्दी से फूलवती के पीछे हो गयी नज़रें झुकाते हुए.

विहान ने नज़रों के इशारे से जैसे प्लीज कहा रूचि से मगर रूचि ने उस्सको नहीं लेने दिया उस्सकी पिछ, फिर भी विहान ने कई क्लिक्स किये जिस में छुपी हुई रूचि दिखे फूलवती के पीछे, उसस्के चेहरे का एक तड़का, उस्सकी लेफ्ट साइड की बाज़ू, उस्सकी थोड़ा सा गेसू, उस्सकी एक ेंख नज़र आये कोई 5 पिक्स में जो विहान ने लिया उस वक़्त.

अशिता की कॉलेज यूनिफार्म, एक वाइट ब्लाउज और डार्क ब्लू स्कर्ट थी, जिस्सकी विहान को आदत थी अस ा यूनिफार्म. मगर यहाँ की लड़कियों की यूनिफार्म बिल्कुल वैसा नहीं था. अशिता बैठती थी तो उस्सकी घुटनों से ऊपर थोड़ा सा उस्सकी जांघ दीखते थे जो विहान बेहद पसंद करता था और उस्सकी सेक्सुअल अरौसल बढ़ता था अशिता को उस तरह से देख कर. मगर यहाँ विहान रूचि को एक अलग किसम की यूनिफार्म में देखता था जो शायद उस्सको एक अलग तरह से रूचि के तरफ खींचता था.

रूचि की जिस्म बिल्कुल भी नहीं दीखता था, सिर्फ उस्का चेहरा और बाहें दीखते थे, बाकी सब ढके हुए थे क्यूंकि यूनिफार्म सर्वर और कमीज़ के जैसे थे ऊपर से गले में दुपट्टा भी था. ग्रे कलर की कमीज़, और वाइट सर्वर और दुपट्टा.

विहान अपनी अशिता से कपड़े कर रहा था रूचि को. अशिता 100 गुनाह ज़्यादा हॉट, सेक्सी लड़की थी और उस्सकी फिगर भी कमल की थी, और रूचि थोड़ी पतली थी, मगर कमाल की खूबसूरत शकल की मालकिन थी रूचि और उस्सकी sharm-o-haya बिल्कुल, अलग थी अशिता से कपड़े किया जाता तो. अशिता बिल्कुल खुली हुई थी क्यूंकि एक तो वो विहान की बेहेन थी और बचपन से एक साथ रहे थे और एक दूसरे को जानते थे मगर यहाँ रूचि बिल्कुल सेहमी सी, शर्मायी हुई थी विहान से क्यूंकि वो उस्सको एक तो जानती नहीं थी, एक अजनबी था विहान उसस्के लिए और दूसरी ये के रूचि को परवाह था अपने घर में भाई और भाबी की इस लिए वो बिल्कुल दूरी रख रही थी विहान से, और यह दूरी विहान को रूचि के तरफ और भी ज़्यादा खींच रहा था…

विहान अपने मैं में रूचि के जिस्म के अंदर देखने लगा, वो भी अशिता की तरह hi गोरी थी और विहान अशिता की जिस्म को याद करते हुए रूचि की ड्रेस के ऊपर उस्सकी गोआल गोआल उभरे हुए बूब्स को देख कर दिमाग़ के अंदर यह सोचने लगा के किआ उस्सकी बूब्स भी अशिता वाले जैसे दीखते होंगे या अलग होंगे…. बूब्स के साइज सोच रहा था अशिता की बूब्स को याद करके यहाँ रूचि के कपडे के ऊपर उस्सकी बूब्स के फॉर्म देखर मासुरेमेन्ट्स कैलकुलेट कर रहा था विहान और सोचने लगा के किआ उस्सको उन् खूबसूरत बूब्स को कभी अपने हाथ से छह भी पाएगा, उनको किश कर पाएगा कभी? और यह सब सोचते हुए उस्सकी पंत के अंदर हरकतें हुई तो विहान अपने टांगों को एक दूसरे से दबा कर एक तरफ देखा के बस सामने आगयी…

बुसस में सब को अंदर जाने दिया विहान ने और आखिर में अंदर गया…. फूलवती को तो पता था के वो अंदर आएगा मगर रूचि की दिल की धड़कनें बहुत तेज़ हुई जब विहान को बस में चढ़ते हुए देखा तो, वो जैसे हकबका सी गयी और विहान के चेहरे में सीधे देखने लगी… विहान भी बस के अंदर आते हुए सीधे रूचि को hi देख रहा था, दोनों के नज़रें मिले और विहान की मुस्कराहट ने रूचि के दिल में और भी हलचल मचाये…. रूचि को लगा के जैसे विहान की नज़रें उस से कह रही थी, “देख मैं आगया, जिस्का तुझे इंतज़ार था आज वो खुद तेरे पास आया है मत वापस जाने दे इससे, चला गया तो ढूंढ़ने से नहीं मिलूंगा तुझे, रोक ले मुझे… मैं यहाँ तेरे लिए hi आया हूँ!”

रूचि ने अपने सीने पर हाथ रखा और खुद अपने दिल को तेज़ रफ़्तार में धड़कते हुए फील किया. उस्सकी नज़रें विहान को बस के अंदर चलते हुए फॉलो कर रहे थे और विहान जब उसस्के सीट के पास आया तो उस्सने फूलवती से कहा,

“किआ मुझको यह सीट मिल सकता है प्लीज?”

यह सुन कर रूचि ने फूलवती का हाथ पकड़ा उस्सको उठने से रोकने के लिए मगर फूलवती ने उठते हुए कहा,

“आरी बैठने दे नाह तेरे पास शायद वो तेरे लिए hi बस में आया है, मैं पीछे बैठ रही हूँ!”

रूचि को ऐसा फील हुआ के उस्सकी जान निकलने वाली थी उस पल जब फूलवती वहां से उठ गयी और विहान फूलवती के जगह बैठा उसस्के पास तवो सीट वाले सीट पर… रूचि ने बस के विंडो से सर सत्ता दिया और उस्सको जैसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी इतनी घबराहट होने लगी थी उस्सको. उस्सकी लाइफ में आज पेहलकी बार एक लड़का उसस्के पास बैठा था बस में.

विहान ने पहले hi फूलवती से फ़ोन पर बात करते वक़्त पूछ लिया था के यहाँ से कॉलेज तक रीच होने में कितना टाइम लगता है, और उस्सको अब पता था के 40 मीन्स था उसस्के पास रूचि से बात करने के लिए.

बस कंडक्टर जब पास आया पैसे लेने के लिए तो विहान ने रूचि और फूलवती के फारे पाय किये, रूचि इंकार कर रही थी मगर कंडक्टर ने विहान से पैसे ले लिए और टिकट थमा दिए उस्सको.

कंडक्टर पीछे के पैसेंजर्स से पैसे लेने गए तो रूचि विहान को उस्का पैसा वापस करने लगा तो विहान ने कहा,

“एक बस का टिकट भी नहीं पाय कर सकता मैं तेरे लिए?”

रूचि ने बहोत सीरियस होते हुए पूछा,

“किआ चाहते हो आप? क्यों मेरे पीछे पड़े हो? मैं कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं हूँ, मेरा पीछा करना चोर दो प्लीज.”

विहान ने बड़े आराम से जवाब दिया,

“तुम ऐसी वैसी नहीं हो इसी लिए तो तुम्हारा पीछा कर रहा हूँ, अगर तुम ऐसी वैसी होती तो तुमको देखता तक नहीं मैं!”

रूचि ने तब अपना सर झुका लिया.

विहान उस्सकी बाहों को देख रहा था, छूने का बहोत मैं कर रहा था उस्सको, रूचि की उँगलियों को देखा, तब उस्सकी गाल पर नज़र दौड़ाया विहान ने, फिर उस्सकी बाल को देखा और उस्सकी खुस्भू सूंघने की कोशिश किया अपने चेहरे को रूचि के गर्दन के पास करके. जब रूचि ने महसूस किया के विहान का चेहरा उसस्के गर्दन के करीब हो रहा है तो उस्सने अचानक मूढ़ कर विहान के चेहरे में देखते हुए पूछा,

“किआ कर रहे हो आप? बस में और भी लोग हैं पीछे जो हमें घुर्र रहे होंगे!”

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2600 वर्ड्स)
 
अपडेट 69 विहान ैकपेनी हेर

“किआ कर रहे हो आप? बस में और भी लोग हैं पीछे जो हमें घुर्र रहे होंगे!”

अब आगे….

विहान ने तब एक बार पीछे देखा तो फूलवती हाथ में मुंह दबाये विहान को देख कर हंस रही थी और जब उस्सने देखा के विहान पीछे देख रहा है तो उसको हाथ से इशारा करते हुए कहा,

“उस्का नंबर मानगो नाह!”

विहान ने हाँ में सर हिलाया फूलवती से और वापस रूचि के कान के पास मुंह करके कहा,

“हमारे तरफ सिर्फ एक इंसान देख रही है और वो है तुम्हारी सहेली फूलन देवी जी”

रूचि ने कहा,

“क्यों उस्का नाम बिगाड़ रहे हो, वो बहोत अच्छी है, फूलवती है वो सच में एक फूल hi है वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है मत बिगाड़ो उस्का नाम.”

विहान ने कहा,

“मैं नहीं मंटा के वो अच्छी है वार्ना कल मेरे इतना मांगने से तुम्हारा नंबर दे दिया होता मुझे और कल रात मैं ने तुमको बता दिया होता के आज मैं बस में तुम्हारे साथ जाऊंगा!”

रूचि के होंठों पर हलकी सी मुस्कान आयी और थोड़ा सा नज़रें चुराते हुए विहान का हाथ देखा और उसस्के कलाई में वाच देखि, फिर उस्सकी बारी थी विहान के कपडे और जूते देखने की और कहा,

“वो अच्छी है इसी लिए तो मेरा नंबर नहीं बताया आप को, अगर अच्छी नहीं होती तो बता देती नाह!”

विहान ने थोड़ा खुश होकर ज़ोर से हँस्ते हुए कहा,

“यह पकड़ा, हाहाहा पकरि गयी नाह मतलब तुम्हारे पास मोबाइल है कल तो कहा था के नहीं है हाहाहाहा पकरि गयी देखा कैसे फंसाया तुमको मैं ने!!”

अपनी बेवकूफी पर रूचि ने सर निचे कर दिया और उस्का चेहरा लाल हो गया और निचे देखते हुए hi दांत पीसते हुए कहा,

“ोफो धीरे बोलो नाह सब लोग सुन रहे हैं किआ मुसीबत है उफ़!”

विहान ने तब रीलीज़ किया के बस के सभी पैसेंजर्स ने उस्सको सुन लिया होगा, वो इतना खुश हुआ अपनी जीत पर के उस ख़ुशी में उस्सको लगा के जैसे वो अशिता से बात किया करता है वैसे hi करे और वही किया उस्सने मगर अब रूचि के कहने पर वो शर्मिंदा हुआ और सॉरी कहा रूचि को.

सॉरी कहने के बाद कहा,

“तो अब तो बता दो नाह नंबर किआ है, मैं तुमसे बात करना चाहता हूँ नाह…”

रूचि ने कहा,

“बात तो कर रहे हो तो करो, नंबर क्यों चाहिए बात करने के लिए?”

विहान ने कहा,

“देखो मैं तुम्हारे बैग में हाथ दाल कर तुम्हारे मोबाइल खुद निकल लूंगा अगर तुमने नहीं बताया तो!”

रूचि के चेरे का रंग और भाव बदल गए विहान के उस बात को सुनकर और एक बार नज़र उठा कर उसस्के चेहरे में देखा.

विहान समझ नहीं पाया के जो लुक रूचि ने दिया उस्सको एक पल के लिए उस में खौफ्फ़ था या ग़ुस्सा, या फिर घबराहट. तो उस से पूछा,

“किआ हुआ? कुछ कहना चाहती हो? बोलो नाह”

रूचि ने धीमी आवाज़ में कहा,

“मेरे बैग में हाथ डालोगे आप? मेरे परमिशन के बग़ैर? बतमीज़ लोग ऐसा करते हैं और आप बद्तमीज़ तो नहीं दीखते बिल्कुल, वही देख रही थी आप के चेहरे में के किआ आप बद्तमीज़ भी हो?”

विहान को बहोत ाचा लगा जब रूचि ने कहा के उसस्के चेहरे से वो बद्तमीज़ नहीं दीखता, फिर भी कहा,

“तो एक लड़का जो बद्तमीज़ नहीं है वो तुम्हारा फ़ोन नंबर तो डेसेर्वे करता होगा नाह?

आप को मैं जानती तक नहीं, अभी तक आप एक अजनबी हो तो मैं क्यों किसी अजनबी को अपना नंबर दूँगी?”

विहान के कहा,

“कमाल है यार, यह किआ बात हुई कल से तो हम दोनों एक दूसरे को जान गए हैं तो अजनबी कैसे हुए? किआ यार अगर नंबर नहीं देना है तो मत दो ऐसे hi हर रोज़ तुमसे मिलता रहूँगा और बात करूँगा तब मत कहना के तुमको तंग कर रहा हूँ!”

रूचि ने कहा,

“तंग तो अब भी कर रहे हो आप. क्यों आये बस में आप? क्यों बैठे मेरे पास? क्यों फूलवती को यहाँ से हटाया आप ने?

विहान: “तुमको नहीं पसंद के मैं यहाँ बैठूं? चला जॉन और फूलवती को वापस भेज दूँ यहाँ? एहि चाहती हो?”

रूचि ने कोई जवाब नहीं दिया, सिर्फ बस के बाहर देखती रही. विहान उसस्के चेहरे में देखता रहा काफी देर तक बिना कुछ कहे. एक पल के लिए विहान को ऐसा लगा के वो उन् दिनों से गुज़र रहा है जीन दिनों अशिता उस से बात नहीं कर रही थी और शामे बस में कॉलेज जाता था अशिता के साथ, और तरसता था अशिता के पास बैठने के लिए मगर अशिता जान बुझ कर किसी और के पास बैठ जाती थी ताके विहान को उसस्के पास सीट नाह मिले, वही वाला फीलिंग हुआ विहान को कुछ पल के लिए और एक घुटन सी महसूस हुई उससे और लगा के वो अशिता के पास बैठा हुआ है उस वक़्त और अशिता उस से रूठा हुआ है…. विहान का मैं कर रहा था के वो अब उठकर पीछे चला जाए और फूलवती को वापस भेज दे उसस्के सीट पर. वो सोच hi रहा था के किआ करे…. 10 मीन्स तक किसी ने कोई भी बात नहीं किया और रूचि बाहर देखती रही.

फिर विहान की नज़र फिरसे रूचि की कलाई पर पड़े, वो उस्सकी गोरी चमड़ी को अदमीरे करने लगा, उस्सकी पतली पतली उँगलियों को देखने लगा, रूचि ने अपने दोनों हाथों के उँगलियों को एक साथ क्रॉस किये हुए अपने बैग के ऊपर रखा हुआ था, और उस्सकी अंगूठा दूसरे अंगूठे पर गोआल गोआल घुमा रही थी…. और तब विहान ने नोटिस किया के रूचि ने चूड़ियां पहनी हुई थी…. उस्सने सोचा के कभी भी अशिता चूड़ियां नहीं पहनती, हरे और लाल रंग के चूड़ियां रूचि के दोनों कलाइयों को और भी खूबसूरत कर रहे थे, तब विहान ने रूचि के नाक में उस्सकी नाथ को देखा, एक छोटी सी चमकती हुई हीरे जैसी सफ़ेद रंग की चीज़ रूचि की नाक की दाएं तरफ लगी हुई थी जो उस्सकी चेहरे पे जैसे चार चाँद लगाती थी. अशिता की नाक में नाथ नहीं थी, हालां के चढ़ किया गया था बचपन में विहान को पता है.

विहान उस तरह से रूचि के हर एक चीज़ को ग़ौर से देखता रहा कोई 15 मीन्स तक तो बहार देखते हुए hi रूचि ने कहा,

“मुझे इस तरह से घूर्णा बंद कीजिये आप सब लोग देख रहे होंगे पीछे से”

विहान ने जवाब दिया,

“तुमको लोगों की बड़ी परवाह है, मेरी परवाह नहीं? और तुमको कैसे पता के मैं तुमको घुर्र रहा हूँ तुम तो बाहर देख रही हो पिछले 15 मीन्स से जैसे के मैं यहाँ हूँ hi नहीं, तुमको डिस्टर्ब कर रहा हूँ तो केहदो चला जाता हूँ!”

रूचि फिर छुप हो गयी और बाहर देखती रही. और अचानक विहान ने अपने हाथ को उसस्के हाथ पर रख दिया उस्सकी बांध मुठी को अपने मुठी में थामते हुए.

रूचि चाहूँकि और अपने हाथों को अपनी तरफ खींचते हुए विहान के चेहरे में एक घबराहट के साथ देखते हुए और हाथ चुराते हुए कहा,

“छोड़िये, प्लीज छोड़िये नाह मेरा हाथ, चोरडिये नाह मुझे चाह नहीं लगता यह सब, आप छोड़िये नाह मेरा हाथ प्लीज!”

विहान ने ज़ोर से उस्का हाथ पकड़ा हुआ था और उस्सकी नज़रों में देखता जा रहा था बिना कुछ कहे, के रूचि ने खुद अपनी नज़रों को निचे करते हुए बिनती करती गयी के विहान उस्का हाथ चोरे!

विहान ने बिना हाथ चोरे कहा,

“तुम मुझे बहोत बहोत अछि लगती हो…”

रूचि ने निचे देखते हुए धीमी आवाज़ में जवाब,

“मुझे पता है मगर आप हाथ तो चोरडिये नाह प्लीज ी बेग ऑफ़ यू!”

तब विहान ने उस्का हाथ चोर्रा और बहोत खुश फील किया के रूचि ने कहा के उस्सको पता है.

तब रूचि ने उसी धीमी आवाज़ में अपने एक हाथ से दूसरे हाथ को मसलते हुए कहा,

“थैंक यू”

विहान ने पूछा,

“किश बात के लिए थैंक यू?”

रूचि ने सर झुकाये हुए hi कहा,

“मेरा हाथ चौररने के लिए”

उस्सकी आवाज़ और अदा इतनी प्यारी थी के किसी को भी उस से उस पल को प्यार हो जाता. विहान उसस्के चेहरे में देखता गया ार पूछा,

“और कितने मीन्स में तुम्हारा कॉलेज आजाएगा?”

“कोई 12 मीन्स में लगभग” रूचि ने निचे देखते हुए hi जवाब दिया और उस्सकी आवाज़ में जैसे एक तड़प सुनाई दिए विहान को तो झुक कर विहान ने उसस्के चेहरे में देखा तो पता चला के रूचि के ेंखों से ेंसू टपक रहे हैं!”

विहान बहोत हैरान हुआ और रूचि के चेहरे को अपने हाथ से ऊपर के तरफ उठाते हुए पूछा,

“किआ हुआ? हो किआ गया अचानक, तुम रोने क्यों लगी? किआ हुआ किआ?

रूचि ने अपना चेहरा अपने दोनों हाथों में छुपा लिया और रोटी रही और ेंसू पोंछती रही.

विहान के समझ में नहीं आया के अब किआ करें तो पीछे मुड़कर फूलवती को देखा, और उठ गया उस्सको अपना सीट देने के लिए तो झट से रूचि ने विहान का हाथ पाकर लिया और वापस बैठने को कहा.

तब तक फूलवती ने पीछे से सब कुछ देखा और चल कर उन् दोनों तक आगयी थी तो विहान ने उस से कहा,

“देखो अपनी सहेली को पता नहीं क्यों रोने लगी!”

फूलवती ने कहा,

“इस्सकी आदत है, छोटी छोटी बातों पर रोने लगती है, बहोत इमोशनल है, कभी कभी बिना बात के रोने लगती है और कुछ बताती भी नहीं तुम इस्सके रोना सीरियस मत लो!”

विहान ने एक लम्बी सांस लिया तब और फूलवती वापस अपनी सीट पर चली गयी और विहान ने रूचि से कहा,

“मैं तो घबरा गया था, सोचा के तुम इस लिए रो रही थी क्यूंकि मैं ने तुम्हारा हाथ पकड़ा था!”

ऋषि ने अपना नाक पोंछते हुए कहा,

“इसी लिए रोना आया था मुझे!”

विहान ने पूछा,

“मेरे हाथ पकड़ने की वजह से रोना आया था?!”

रूचि ने हाँ में सर हिलाते हुए अपनी रुमाल से अपने चेहरे को साफ़ किया

विहान बहोत हैरानी से रूचि के चेहरे में देखते जा रहा था और पूछा,

“जब मैं उठ गया था तब तुमने मेरा हाथ थामकर मुझको वापस बैठने को कहा, क्यों?”

रूचि ने काँधे को उचकाते हुए कहा,

“पता नहीं!”

विहान: “देखा तुमने भी मेरा हाथ पकड़ा था नाह? वैसे hi मैं ने भी तुम्हारा हाथ पकड़ा था तो इस में किआ बुराई है? कोई गुनाह तो नहीं किया था नाह मैं ने? तो रोने की किआ बात हुई भला?”

रूचि ने कहा,

“मैं इस लिए नहीं रो रही टी के आप ने मेरा हाथ पकड़ा था!”

विहान ने कहा,

“अभी अभी तो तुमने वही कहा!”

रूचि ने एक बार विहान के चेहरे में देखा, फिर अपनी बैग पर देखते हुए कहा,

“ोफो कैसे समझों आप को अब? मुझे रोना इस लिए आया के आज पहली बार किसी लड़के ने मेरा हाथ पकड़ा और मैं खुश होने की बजाए आप को हाथ चौररने के लिए कहती गयी जबकि कितनी लड़कियां चाहते हैं के कोई उस्का हाथ pakre…yeh सब सोचकर मुझे रोना आगया!”

विहान ने मुस्कुरा दिया और उसस्के सर पर अपना हाथ फेर्रा और कहा,

“तुम बाहत अच्छी हो, तू गुड, यू अरे ा वैरी गुड गर्ल.”

पहली बार विहान ने रूचि को मुस्कुराते हुए देखा और किआ बात है किआ मुस्कराहट थी उस्सकी. मुस्कुराते हुए वो 100 गुनाह ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी जैसे एक गुलाब खिलने लगा था और विहान का दिल पिघलने लगा था और अब उस्का मैं किया रोने को रूचि की उस मुस्कराहट को देख कर क्यूंकि उसस्के समझ में नहीं आया के उस्सको रूचि से प्यार हो गया या वो उस्का दीवाना हो गया और सोचने लगा के क्यों उस्सकी ज़िन्दगी में रूचि पहले नहीं आयी, क्यों वो तब नहीं आयी उस्सकी ज़िन्दगी में जब अशिता उस से बेरुखी से पेश आरही थी, क्यों तब वो रूचि से नहीं मिला जीन दिनों वो कॉलेज जाता था और फ़ैल होने लगा था, जीन दिनों को उस्सने शराब पीना शुरू किया था तब रूचि कहाँ थी…. यह सब सोचते हुए बस कॉलेज तक आ पहुंचा और रूचि ने धीरे से कहा,

“मुझे अब उतरना है!”

उस्सकी आवाज़ सुनकर विहान अपने ख्यालों से निकला और जैसे एक सपने से वापस आते हुए चारों तरफ देखने लगा और रूचि से धीरे से कहा,

“तुमने नंबर तो दिया hi नहीं रूचि!”

और बस रुक गयी कॉलेज के पास, रूचि सीट से उठी, विहान बैठा hi रहा, मगर रूचि अंदर वाले सीट पर थी तो विहान को हटना था ताके रूचि निकल सके, मगर जान बुझ कर विहान बैठा रहा, और रूचि ने उसस्के चेहरे में देखते हुए अपने घुटनों से विहान के घुटनों को टकराया और तब विहान ने कहा,

“नंबर दो वार्ना नहीं उतरने दूंगा!”

रूचि ने कहा,

“आप कोई गुंडा मावली नहीं हो जो ऐसे हरकत करोगे!”

तो विहान खुद अपने आप खड़ा हुआ और रूचि को रास्ता दिया निकलने के लिए और उसस्के पीछे उतरा बस से.

अब चलते वक़्त रूचि निचे देखते हुए hi विहान से कहा,

“अब फॉलो करना बांध करो प्लीज मेरा कॉलेज सामने है, bye!”

मगर विहान कॉलेज की कंपाउंड के अंदर उसस्के बगल में चलते हुए दाखिल हो गया, और रूचि के पसीना छूठ गए तो रुक कर विहान के चेहरे में देखते हुए कहा,

“किआ चाहते हो आप कॉलेज के अंदर चले आये देखो सब लोग मुझे देख रहे हैं, मैं किआ जवाब दूंगी प्लीज अब आप जाओ नाह शाम को मिल लेना मुझसे!”

विहान ने पहले मुस्कुराकर कहा नंबर देदो चला जाऊंगा, मगर देखा के रूचि कितना परेशान दिखने लगी तब कहा,

“स्टॉप वारयिंग, मैं यहाँ के प्रिंसिपल से मिलने जा रहा हूँ मुझे एक काम है उंनसे!”

तब रूचि ने हैरान होते हुए पूछा,

“प्रिंसिपल साहेबा से मिलना है क्यों? आप कौन हो? कोई इंस्पेक्टोरते के तरफ से आये हो किआ? मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट से हो आप?”

तब तक फूलवती भी पास आगयी और विहान से कहा,

“अब तुम ज़्यादती करने लगे जाओ यहाँ से अब!”

तो रूचि ने फूलवती से कहा,

“ये कह रहे हैं के प्रिंसिपल से मिलने आये हैं!”

तब तक रूचि आगे बढ़ने लगी अपनी क्लास के तरफ और मूढ़ कर कई बार विहान को देखा. विहान जहाँ खड़ा था वहीँ रह गया फूलवती से बात करते हुए और पूछा के प्रिंसिपल की ऑफिस किधर है, फूलवती ने दिखाया तो विहान जाते जाते फूलवती से कहता गया,

“अपनी सहेली से कहो नंबर देने को मुझे, मैं ने ज़बरदस्ती नहीं किया वार्ना उसस्के बैग से निकाल लेता मोबाइल और पता कर लेता उस्का नंबर, bye हैवे ा गुड डे, उस्सको भी विश कर देना मेरे तरफ से, जाता हूँ!”

फूलवती ने चाँद कदम चल कर उसस्के पास जाते हुए पूछा,

“अरे मगर बता तो दो क्यों मिलना है तुम्हें प्रिंसिपल से?”

विहान ने मुस्कुराते हुए कहा,

“यह सरप्राइज है बाद में बताऊंगा”

फूलवती ने कहा,

"ठीक है जाती हूँ मगर तुम ऐसे मत मुस्कुराया करो मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है हाँ!!”

और हँस्ते हुए फूलवती अपनी क्लास के तरफ बढ़ने लगी मुड़कर विहान को देखते हुए….

तो बे कॉन्टिनोएड…..
 
अपडेट 70 रैपिड चेंज इन Vihaan’s लाइफ (ा)

अब सब एहि सोच रहे होंगे इन् दो लड़कियों की तरह के विहान आखिर एक कॉलेज की प्रिंसिपल से मिलने क्यों गया है? तो चलिए हम भी देखते हैं…..

विहान ने प्रिंसिपल के ऑफिस की दरवाज़े को नॉक किया और अंदर से एक महिला की आवाज़ ने आने को कहा.

विहान अंदर दाखिल होते हुए गुड मॉर्निंग मां कहा तो लेडी ने पूछा,

“यस, वैरी गुड मॉर्निंग, दो ी क्नोव यू, यंग मन?”

विहान कुछ दर्रा हुआ सा लगा फिर भी बोलै जो बोलना था, और मैडम जी ने कहा,

“वेल आईटी इस असेंबली टाइम मैं असेंबली अटेंड करके वापस आती हूँ, विल टॉक तो यू थें, प्लीज बे सीटेड.”

विहान अकेला रह गया ऑफिस में और इंतज़ार किया; कोई 15 मीन्स के बाद मैडम वापस आयी और विहान से बात किये.

विहान ने प्रिंसिपल साहेबा को समझाया अपने स्टडीज के बारे में और कहा के अब वो अपने एक्साम्स देना चाहता है और डिग्री हासिल करना चाहता है तो एडवाइस के लिए आया था और पूछने के किआ कोई उपाए है उस्सको सक्सीड होने के लिए. मैडम जी ने बहोत सारे सवाल किये विहान से के किश कॉलेज का स्टूडेंट था, क्यों फ़ैल हुआ, किश सब्जेक्ट में ावल था, कहाँ चूक गया ेट्स.

विहान के अंसवेरस के बाद मैडम जी ने अपने असिस्टेंट को और दो सीनियर टीचर्स को बुलवाया ऑफिस में. एक इंटरव्यू के जैसा लिया गया विहान के साथ. सवाल जवाब चल रहा था उन् लोगों के और विहान के बीच. उस दौरान एक बार जब पूछा गया के किश सब्जेक्ट में विहान ने सबसे ज़्यादा पॉइंट्स हासिल किये थे पिछले 3 साल में तो सब्जेक्ट्स के बीच विहान ने फ्रेंच कहा… फ्रेंच सुनकर प्रिंसिपल, उस्का असिस्टेंट एंड दोनों सीनियर टीचर्स शॉकेड हुए और एक दूसरे के चेहरे को देखने लगे, उन् में से प्रिंसिपल सब से खुश दिखने लगी थी और, मुस्कुरा रही थी.

प्रिंसिपल मैडम से विहान से पूछा,

“आप फ्रेंच जानते हो और सबसे ज़्यादा पॉइंट्स फ्रेंच में रहे हैं आप के लास्ट 3 इयर्स में?”

विहान ने कहा,

“हाँ 100% हमेशा लाया हूँ फ्रेंच में.”

असिस्टेंट ने पूछा,

“डिग्री आप किश फील्ड में करने वाले थे?”

विहान ने कहा,

“फाइनेंस विथ लॉ”

प्रिंसिपल ने पूछा,

“तो मैथ्स और एकाउंट्स में कितने पॉइंट्स आते थे आप के?”

विहान ने कहा,

“एकाउंट्स में 98% और मैथ्स में 90% मगर लास्ट 2 बार इन्ही दो सब्जेक्ट्स में मैं फ़ैल हुआ था इसी लिए चोरर दिया था कॉलेज जाना मगर अब कम्पलीट करना चाहता हूँ इससे मैं!”

विहान से पूछा गया के वो कहाँ रहता है तो जब उस्सने अपने दादा की गाओं का नाम बताया तो अपने में टीचर ने कहा,

“वे हैवे स्टूडेंट्स हेरे फ्रॉम तहत प्लेस, राइट?”

तो विहान ने उन् से कहा,

“यस थ्री स्टूडेंट्स फ्रॉम तेरे के तो थिस कॉलेज, आल गर्ल्स!”

प्रिंसिपल ने पूछा, “और आप किश फॅमिली से हो? मतलब वे वोउल्ड लिखे तो क्नोव अबाउट योर पेरेंट्स”

विहान ने बताया के अभी वो 3 साल के लिए अपने दादा के यहाँ रह रहे हैं, और दादा का नाम बताया, “रघुवंश ईश्वर”

यह नाम सुनकर प्रिंसिपल के साथ सबके सब और एक बार शॉकेड हुए और प्रिंसिपल ने पूछा,

“यू अरे मिस्टर रघुवंश ग्रैंडसन? यू अरे ा “ईश्वर” थें यू मैं?

“विहान ने कहा,

“यस मां ी ऍम विहान ईश्वर”

प्रिंसिपल मैडम ने मुस्कुराते हुए पूछा,

“दीद मिस्टर ईश्वर सेंड यू हेरे तो सी उस?”

विहान: “िफ़ यू मैं तो आस्क ऐथेर माय ग्रांडफादर सेंत में हेरे, थे आंसर इस no, ी चामे ों माय ओन हे डस नॉट इवन क्नोव िफ़ ी ऍम हेरे ात थिस मोमेंट, बूत व्हाई यू आस्किंग थिस?!”

प्रिंसिपल मैडम और उस्सकी असिस्टेंट और बाकि सब हंससने लगे.

विहान के समझ में नहीं आया के क्यों वह लोग उसस्के दादा को लेकर हंस रहे थे और उस्सको लगा के कुछ गड़बड़ ज़रूर हुआ होगा.

तब प्रिंसिपल मैडम ने विहान को मुस्कुराते हुए देखा और कहा,

“योर ग्रांडफादर इस थे प्रिंसिपल ट्रस्टी ऑफ़ थिस कॉलेज, हिज नाम इस ात थे टॉप ऑफ़ थे लिस्ट ऑफ़ डोनेशंस, हे हेल्प्स उस ा लोट फिनांकिअल्ली तो मूव ों यू अरे नॉट अवेयर ऑफ़ थिस आईटी सिम्स!”

विहान को यह सुनकर ख़ुशी भी हुई और बहोत तःजब भी हुआ, उस्सको इस बारे में कुछ भी नहीं पता था.

प्रिंसिपल ने विहान को कुछ देर बाहर वेट करने को कहा क्यूंकि उनको आपस में कुछ बात करने थे….

ऑफिस के बाहर एक बेंच लगा हुआ था जिस पर विहान बैठ कर वेट करने लगा के उस्सने एकांत स्टूडेंट्स को आते जाते देखा, लोअर क्लासेज के बचे थे. कुछ छोटे लड़के और लड़कियों को एक साथ देखा, फिर कुछ एल्डर क्लासेज के लड़कियां एक साथ लाइब्रेरी जा रहे थे, लाइब्रेरी जाने के लिए उसस्के पास से गुज़ारना था सब को, और उन् में एक लड़की थी, रूचि!

रूचि ने पहले से विहान को देख लिया था, और उन् लड़कियों के बीच छुपने की कोशिश कर रही थी मगर विहान ने उस्सको देख लिया और खड़ा हो गया. फूलवन्ती उस ग्रुप में नहीं थी. विहान का दिल ज़ोरों से धड़का और जब सब उसस्के पास आये तो विहान ने रूचि का नाम फुकरा… रूचि का चेहरा लाल हुआ फिर भी रुक गयी और बाकी के सब लड़कियां चले गए.

रूचि वहां ठहर कर विहान से पूछा,

“किआ हुआ? आप बाहर क्यों है, मैडम से नहीं मिले?

विहान ने रूचि के चेहरे में प्यार भरी नज़रों से देखते हुए कहा,

“हम्म नहीं मिल लिया हूँ उन्हों ने मुझे वेट करने को कहा फिर वापस अंदर बुलाएँगे….”

रूचि के हाथ में उस्सकी मोबाइल थी, बैग नहीं थी और एक किताब के निचे रूचि ने मोबाइल छिपाये हुआ था. विहान को मोबाइल नज़र आगया था मगर कुछ नहीं कहा, रूचि ने पूछा,

“मगर आप क्यों मिलने आये हो प्रिंसिपल जी से?”

विहान ने मुस्कुराकर कहा,

“वो तुमको कल तक पता चल जाएगा, फ़िक्र क्यों करती हो?!”

रूचि ने कहा,

“कहीं मेरी वजह से तो नहीं आये हो नाह? होप के मुझको नहीं बुलाया जाएगा अंदर.”

विहान ने हलकी सी हंसी में कहा,

“अरे नहीं तुमको क्यों बुलाया जाएगा, it’s ओनली रिलेटेड तो में.”

तभी रूचि की मोबाइल बजी, उसस्के फ्रेंड्स लाइब्रेरी पहुँच गए थे और उस्सको बुला रहे थे वहां.

विहान ने रूचि को मोबाइल को कान से लगाते हुए देखा और उस्सको बात करते हुए सुना के उस्सने कहा,

“हाँ आती हूँ नाह तुम लोग स्टार्ट करो मैं अभी आयी बाबा!”

विहान ने तब अपने एक ऊँगली को मोबाइल के तरफ करते हुए कहा,

“अछि मोबाइल है, नई दिख रहा है, किआ है? ी मैं मेक किआ है?!”

रूचि विहान के चेहरे में देखते हुए हलकी सी मुस्कराहट में थोड़ा सा सर निचे झुकाते हुए, मोबाइल को विहान के तरफ किया, मतलब विहान को अपना मोबाइल दे दिया देखने के लिए के कौन सा मेक की मोबाइल है.

विहान ने मोबाइल को हाथ में लेकर देखा और पूछा,

“अब नंबर ले सकता हूँ किआ? मैं इस से अपने मोबाइल को कॉल करूँ?”

रूचि निचे देखती रही बिना कुछ कहे. विहान ने सवाल दोहराया, फिर भी रूचि ने कुछ नहीं कहा. तब विहान ने कहा,

“परमिशन मांग रहा हूँ, नहीं तो कहोगी के तुम्हारे परमिशन के बिना क्यों तुम्हारे नंबर लिया मैं ने.”

वो किआ था? क्यों रूचि ने अपना मोबाइल थमा दिया था विहान को? किआ वो चाहती थी के अब विहान उस्का नंबर लें? मगर क्यों कह नहीं रही थी के हाँ लेलो? और विहान क्यों जल्दी से खुद को कॉल नहीं कर रहा था उस्सकी नंबर सेव करने के लिए, यह तो एक ाचा मौका था उसस्के लिए रूचि का नंबर लेने के लिए फिर भी क्यों विहान नहीं ले रहा था?

विहान इस लिए परमिशन मांग रहा था रूचि से क्यूंकि बुसस में रूचि ने कहा था के उसस्के बैग में हाथ दाल कर तो वो मोबाइल नहीं ले सकता उस्सकी परमिशन के बिना क्यूंकि वो बद्तमीज़ नहीं दीखता, इसी लिए अब भी विहान उस्का नंबर नहीं ले रहा था उसस्के इजाज़त के बग़ैर. मगर रूचि कह नहीं पा रही थी के हाँ लेलो, बस मोबाइल दे दिया था विहान को और सोच रही थी के वो खुद मौके का फायदा उठाते हुए मोबाइल से खुद को कॉल करेगा और उस्सको नंबर मिल जायेगा.

मगर ठीक तभी ऑफिस का दूर खुला और विहान को असिस्टेंट ने अंदर बुलाया. रूचि ने जब दरवाज़ा खुलते हुए देखा तो झट से मोबाइल ले लिया विहान के हाथ से और लाइब्रेरी की तरफ जाने लगी पीछे मुड़कर विहान को देखते हुए. रूचि नहीं चाहती थी के प्रिंसिपल या कोई यह देखे के रूचि ने अपनी मोबाइल विहान को दिया हुआ था इस लिए उस्सने झट से मोबाइल वापस लिया.

ऑफिस के अंदर विहान से और सवालात किये गए. इस बार डिफरेंट बात हुए उसस्के साथ. प्रिंसिपल ने कहा,

“मिस्टर विहान ईश्वर, वे हैवे ा डील फॉर यू नाउ! हमारे यहाँ पिछले 3 महीनों से एक फ्रेंच टीचर की ज़रुरत है, आवर ओल्ड फ्रेंच टीचर पास्ड अवे थ्री मंथ एगो एंड वे अरे स्टिल लुकिंग फॉर ओने, वे दो नॉट हैवे मान्य स्टूडेंट्स स्टुडियंग फ्रेंच एंड आईटी इस तौह्त ओनली उप तो थे 12तह क्लास, सो वे वांट तो क्नोव िफ़ यू कैन टीच फ्रेंच तो स्टूडेंट्स ऑफ़ क्लासेज फ्रॉम 10तह तो 12तह? यू हैवे पास्ड योर 12तह विथ 100% इन फ्रेंच यू साइड, सो ी विश तो आस्क यू फ्यू क़ुएस्तिओन्स इन फ्रेंच जस्ट तो असुरे माइसेल्फ ऐथेर यू कैन रियली स्पीक, थें टुमारो वे विल आस्क यू तो ब्रिंग योर रिजल्ट्स तो शो उस आफ्टर व्हिच वे विल अप्पोइंट यू अस ा टीचर हेरे, बूत ात थे शामे टाइम यू विल बे गिवेन ा क्रैश कोर्स फॉर योर फाइनेंस विथ लॉ व्हिच विल बे फ्री ऑफ़ कोर्स, यू विल नॉट हैवे तो पाय फॉर एनीथिंग, 1 साल के अंदर तुम अपने डिग्री हासिल कर पाओगे, क्यूंकि यू आलरेडी हैवे दोने तहत फॉर पास्ट 3 इयर्स सो आईटी विल बे इजी फॉर यू तो कैच उप, सो ा part टाइम कोर्स दिया जाएगा तुमको अपने डिग्री के लिए, वे आलरेडी हैवे क्वालिफाइड टीचर्स तो हेल्प यू फॉर तहत. एंड यू विल गेट योर सैलरी अस अन्य टीचर गेट्स हेरे फॉर योर टीचिंग!”

विहान अपने कानों पर यकीन नहीं कर पा रहा था जो कुछ उस्सने सुना, ख़ुशी के मारे उसस्के ेंखें भर आये और उसस्के समझ में नहीं ारः था के किआ कहें वो. एक गहरी सांस लेने के बाद विहान ने पूछा,

“कम्बिएन्स d’eleves दे फ्रांसेस ावेज़ वॉयस इसी?!”

यह फ्रेंच जुबां में उस्सने सवाल किया था के यहाँ पर कितने फ्रेंच पढ़ने वाले स्टूडेंट्स हैं.

प्रिंसिपल कुश हुए और फ्रेंच में hi जवाब दिया,

“िल य ें ा पास बेओकूप, मैस qu’environ उन त्रेन्ताइन्स!”

मतलब ज़्यादा नहीं कोई 30 के आस पास स्टूडेंट्स हैं फ्रेंच पढ़ने वाले.

प्रिंसिपल ने तब एक सीनियर टीचर से कहा के जा कर सभी फ्रेंच वाले स्टूडेंट्स को एक क्लास में एकता करने को कहा उसस्के बाद वो विहान को उन् से मिलाने वाले थे अभी hi और कल से विहान को क्लासेज ज्वाइन करना था.

कुछ देर तक ऑफिस में विहान बातें करता रहा प्रिंसिपल और उसस्के अस्सिस्टेंड के साथ और जब वो टीचर वापस आया और कहा के फ्रेंच वाले स्टूडेंट्स एक क्लास में जमा हो गए हैं तो प्रिंसिपल ने विहान को उसस्के साथ चलने को कहा.

जब क्लास में दाखिल हुए, सब स्टूडेंट्स, जिस में बॉयज और गर्ल्स मिक्स थे, वैसे बॉयज सिर्फ 5 थे बाकी सब लड़कियां थे, सब ने एक आवाज़ में “गुड मॉर्निंग मां कहा”

क्लास के सामने मैडम और विहान खड़े हुए, और मां ने विहान को इंट्रोडस करते हुए कहा,

“डिअर स्टूडेंट्स, अब हमको आप का फ्रेंच टीचर मिल गया है, थिस इस मिस्टर विहान ईश्वर एंड हे इस योर नई फ्रेंच टीचर, कल से यह आप सबको फ्रेंच पढ़ाएंगे!”

विहान कुछ घबराया सा था और क्लास में देख रहा था सभी को एक एक करके जैसे उस्सकी नज़रें किसी की तलाश कर रहे थे, और वो उन् स्टूडेंट्स के बीच नहीं थी. हाँ विहान रूचि को ढूंढ रहा था उन् स्टूडेंट्स के बीच, और वो नहीं थी उन् करीब 30 स्टूडेंट्स में.

स्टूडेंट्स ने सब को hello कहा और सब ने “गुड मॉर्निंग सर” कहा. विहान को बहोत अजीब लगा के उस्सको ‘सर’ कहा गया और उस्का चेहरा लाल हो गया… ठीक तभी किसी ने क्लास का दरवाज़ा खोल कर अंदर aye….wo रूचि थी….. विहान का दिल ज़ोरों से धड़का, और रूचि ने अंदर आते हुए कहा,

“सॉरी मैडम मैं लाइब्रेरी में थी इस लिए मुझको पता नहीं चला, अभी मुझसे कहा गया के सभी फ्रेंच स्टूडेंट्स को यहाँ बुलाया गया है!”

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट अपडेट….
 
अपडेट 71 रैपिड चेंज इन Vihaan’s लाइफ (बी)

प्रिंसिपल ने कहा,

“Hello रूचि ओह यस तुम भी फ्रेंच स्टूडेंट हो नाह? सो, मीट मिस्टर विहान ईश्वर, हे इस योर नई फ्रेंच टीचर!”

रूचि उस वक़्त क्लास के बीच नहीं थी, वो तब भी दरवाज़े के पास hi कड़ी थी, मतलब विहान अब क्लास के तरफ नहीं रूचि को देख रहा था और रूचि विहान को… दोनों के दिल ज़ोरों से धड़क रहे थे और दोनों के चेहरे लाल हो गए थे और धीरे से रूचि ने कहा,

“Hello सर!”

तो मैडम ने कहा,

“रूचि यू अरे फ्रेंच स्टूडेंट तो अपने टीचर को फ्रेंच में वेलकम करो!”

तब रूचि ने एक लम्बी सांस लेने के बाद कहा,

“सोयेज ला बीएनवेनुए चीज़ नॉस मॉन्सियोर”

मतलब, “वेलकम तो आवर स्कूल सर”

तब तक, रूचि भी क्लास के बीच चली गयी और विहान ने फ्रेंच में पुरे क्लास के तरफ देखते हुए कहा,

“जे वॉयस रेमेरइ टॉस ेट j’espere ेत्रे ा ला होटेउर दे वॉयस इंसिग्नेर ेट वॉयस फेरे पास्सेर वोस ेक्समेंस”

मतलब, “आप सभों का शुक्रिया मुझे उम्मीद है के मैं आप सभी लोगों को अपने एक्साम्स में कामयाब करा पौन!”

रूचि अपने होंठों को डेंटन में दबाये हुए एक हलकी सी मुस्कान से विहान को घुर्र रही थी, उस्सको उस वक़्त विहान बेहद स्मार्ट और हैंडसम दिख रहे थे और वही पल था जब रूचि ने विहान को बहोत प्यार भरी नज़रों से देखा था पहली बार!!

प्रिंसिपल ने तब सभी को अपने अपने क्लासेस में वापस जाने को कहा यह कहते हुए के कल से सबके फ्रेंच क्लासेज स्टार्ट होगी और टाइम टेबल सबको दे दी जाएगी.

और वहां से प्रिंसिपल ने विहान को अपने असिस्टेंट से मिलने को कहा जाने से पहले. उन् से मिलकर विहान को पता चला कॉलेज की ड्रेस कोड किआ है टीचर्स के लिए, कितने बजे सुबह को ज्वाइन करना है और कब क्लासेज एन्ड होते हैं वग़ैरा वग़ैरा…. विहान को यह भी कहा गया के जल्द से जल्द अपने सर्टिफिकेट्स और रिजल्ट्स भी लेन को ऑफिस के रिकॉर्ड में भरने के लिए……

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वहां से विहान वापस घर गया, दादा जी को सब बताया, और कहा के अभी के अभी उस्सको शहर वापस जाना होगा अपने स्कूल सर्टिफिकेट्स और कुछ कपडे खरीदने के लिए… तो दादा जी ने उसस्के चाचा को फ़ोन किया जिस्सके पास 4क्ष4 है वो विहान को लेकर उसस्के शहर गए, वहां विहान ने अशिता को कॉल किया कॉलेज के बाहर वो विहान को घर की कीस देने आयी, विहान घर गया, अपने ज़रुरत के चीज़ें liye,ATM से पैसे निकाले, कुछ कपडे और टाइस, नए जूते ख़रीदे और वापस गाओं चला गया शाम तक.

अशिता से मिल नहीं पाया बुसस उसी वक़्त मिला कॉलेज के गेट के पास जाते वक़्त और उस्सको कीस वापस करते वक़्त. अशिता उसस्के बाहों में समा गयी थी और उस्सको चोरर नहीं रही थी, रोने लगी थी, विहान बड़ी मुश्किल से अशिता के बाहों से जुड़ा हुए. विहान ने अशिता को नहीं बताया के वो क्यों आया था, घर वालों को सरप्राइज देना चाहता था, अपने दादा से भी कह दिया था के किसी को भी कुछ भी बिल्कुल नहीं बताने को. सिर्फ इतना कहा के सभी से कहना के एक नौकरी कर रहा है किसी प्राइवेट कंपनी में. दादा ने भी कहा के हाँ किसी को कुछ भी बताने की कोई ज़रुरत नहीं.

अशिता से मिलना तो चाहता था विहान मगर बड़े चाचा के 4क्ष4 में गया था और वो वेट कर रहा था कार में, इस लिए विहान को सब कुछ जल्दी जल्दी करना पारा….

अब उस शाम को जिस वक़्त विहान अपने शहर में खरीदारी कर रहा था, एक तरफ अशिता उस्सको कॉल करके घर आने को कह रही थी और दूसरी तरफ रूचि और फूलवन्ती जब बस से उतरे थे तो विहान को एक्सपेक्ट कर रहे थे मगर वो नहीं दिखा था, पुरे रास्ते घर वापस जाते वक़्त रूचि पीछे मुड़कर बार बार देख रही थी के उस्सको विहान दिखे, मगर वो तो शहर में था उस वक़्त कैसे मिलता रूचि से….

उधर अशिता ने जब फ़ोन किया था विहान को तो विहान ने बताया के वो उसी शहर में है उस वक़्त जिस वक़्त अशिता कॉलेज से वापस घर आयी थी तो अशिता बहोत रोने लगी थी यह कहते हुए,

“भाई तुम यहीं हो इसी शहर में मैं भी यहीं हूँ फिर भी एक पल के लिए तुमसे मिल नहीं सकती यह कैसा दिन आगया है भाई ाजाओ नाह 5 मीन्स के लिए मुझसे मिलकर चले जाना प्लीज आओ नाह भाई!”

विहान ने तड़पती आवाज़ से अशिता को जवाब दिया,

“नहीं आ सकता बेबी, चाचा को वापस अपने कारोबार संभालना है उस्सने मेरी हेल्प किया यहाँ तक मुझे ड्राइव करके, उसस्के काम में हरकत हो रहे हैं मेरी वजह से मैं एब्यूज तो नहीं कर सकता नाह? कैसे उंनसे वापस घर जाने के लिए कहूं मैं? हमको वापस गाओं जाना है और कितने लॉन्ग ड्राइव करना है तुझे पता है नाह, सॉरी माय लव हम नहीं मिल सकते, मुझे भी अफ़सोस हो रहा है मगर किआ करूँ?!”

अशिता बिलक बिलक कर रोने लगी थी उस वक़्त.

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और दूसरी तरफ जब फूलवती और रूचि चलते हुए अपने घर जा रहे थे तो विहान को नहीं मिलने पर रूचि बहोत उदास हो गयी थी, दोनों विहान के बारे में hi बात करते हुए जा रहे थे, उस्का कॉलेज आना, उस्का फ्रेंच टीचर होना, कल से उस्का कॉलेज में टीच करना, यह सब बात करते हुए जा रहे थे दोनों. जब रूचि बार बार मुड़कर देख रही थी तो फूलवती ने कहा,

“तेरी नज़रें उसी को ढूंढ रही है नाह? मुझे पता है, तू उस्सको चाहने लगी है मगर छुपा रही है, क्यों अपना नंबर नहीं दिया तुमने उससे? अभी बात तो कर सकती थी नाह उस से?!”

रूचि ने कहा,

“कैसे बात करुँगी? घर पर भाबी को पता चल जाएगा!”

फूलवन्ती ने कहा,

“आरी पगली मोबाइल को साइलेंट पर रखना, और रात को सोने के वक़्त टेक्स्ट करके बात करना किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा!”

रूचि ने कहा,

“आज कॉलेज में मैं ने उस्सको अपना मोबाइल दिया था, सोचा था के वो नंबर ले लेगा मगर नहीं लिया!”

फूलवन्ती: “व्हाट? नहीं लिया? कैसा बुद्धू है?!”

रूचि ने शर्माते हुए कहा,

“मेरा परमिशन का वेट कर रहा था हीहीही!”

फूलवन्ती: “पागल है वो भी! ऐसा मौका हाथ से जाने दिया उस्सने?”

रूचि: “हम्म्म बहोत शरीफ है मेरे परमिशन के बिना नहीं लिया मेरा नंबर हालां के मेरा मोबाइल उसस्के हाथ में था सिर्फ अपने नंबर डायल करके मेरा नंबर लेना था मगर नहीं लिया उस्सने क्यूंकि मैं ने परमिशन नहीं दिया था”

फूलवन्ती: “तू कहे तो मैं दे दूँ तेरा नंबर उससे?!”

रूचि ने कुछ नहीं कहा और तब तक फूलवती का घर आगया था…..

रूचि अपने घर तक चलती गयी मगर बार बार पीछे मुड़कर देखती गयी के शायद उस्सको विहान दिख जाए, मगर नहीं दिखा और उदास होकर वो घर गयी…. और शाम को रूचि ने फूलवन्ती को टेक्स्ट किया,

“हे फूल तू नाह उस्सको मेरा नंबर देदे यार!”

फूलवन्ती, रूचि की मैसेज पढ़कर ज़ोर से हंस पड़ी और विहान को टेक्स्ट किया,

“हेरे इस थे नंबर ऑफ़ रूचि क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स…. रूचि टोल्ड में तो गिव यू हेर नंबर, हैप्पी नाउ? बूत don’t कॉल हेर, जस्ट टेक्स्ट हेर ोथेरविसे शी कैन गेट ट्रबल ात होम. Bye”

विहान उसी वक़्त गाओं रीच हो रहा था जब फूलवट्टी की मैसेज मिला उस्सको.

शाम के 6 बज चुके था और सूरज ढल रहा था. विहान बहोत बहोत खुश हुआ, उस्सको ज़ोर से चीला कर अपने ख़ुशी को इज़हार करने का मैं कर रहा था मगर चाचा के साथ कार में था तो अपनी ख़ुशी को दबाये रखा उस्सने और घर जाते है सबसे पहले वो कमरे में सारे सामान को रख कर रूचि को टेक्स्ट किया,

“hello रूचि, विहान हेरे, थैंक्स वैरी मच फॉर गिविंग में योर नंबर”

रूचि का जवाब यह आया,

“कहाँ थे आप? ऐसे तो पीछा करते हो और जब आप से मिलने को मैं किया तो आप ग़ायब थे, यह जान बुझ कर किया नाह आप ने मुझे सताने के लिए, बताइए!?”

तो बे कॉन्टिनोएड…… (3500 वर्ड्स फ्रॉम लास्ट 2 उपदटेस)
 
अपडेट 72 विहान चैट्स विथ रूचि

“hello रूचि, विहान हेरे, थैंक्स वैरी मच फॉर गिविंग में योर नंबर”

रूचि का जवाब यह आया,

“कहाँ थे आप? ऐसे तो पीछा करते हो और जब आप से मिलने को मैं किया तो आप ग़ायब थे, यह जान बुझ कर किया नाह आप ने मुझे सताने के लिए, बताइए!?”

अब आगे….

रूचि की मैसेज पढ़कर विहान हंससने लगा और सांस संभालने के बाद टाइप करके सेंड किया,

“लगता है आज ऊपर वाला मुझसे बहोत ज़्यादा खुश है इसी लिए मुझको इतने सारे खुशियां एक साथ दे दिया!”

रूचि ने विहान के मेसज पढ़कर खुद से कहा,

“यह किआ कह रहे हैं फ्रेंच टीचर सर? मेरे क्वेश्चन को अवॉयड कर रहे हैं…” और उस्सने लिख कर सेंड किया,

“चाह जी, तो आप को इतनी ख़ुशी मिली के आज आप ने मेरा वेट नहीं किया मुझको चारों तरफ आप को ढूंढ़ने को चोर्रा और जान बुझ कर मुझको सताया, इस्स्में आप को इतनी ख़ुशी मिली?!”

विहान फिर से हंसा उस्सकी मेसज पढ़ कर और यह लिख कर सेंड किया रूचि को,

“आरी क्यों उल्टा मतलब निकाल रही हो तुम? मैं बिजी था आज हाहाहाहा!”

रूचि: “बिजी? क्लास तो कल स्टार्ट कर रहे हो आप और बिजी हो गए? क्यों आप ने आज मेरा वेट नहीं किया? कहाँ से छुप कर मुझको देख रहे थे आप जब मैं कॉलेज से वापस गाओं आयी शाम को बताओ!”

विहान और भी ज़ोर से हँस्ते हुए टेक्स्ट किया,

“अरे मैं शहर गया हुआ था”

रूचि: “शहर तो वहां है जहाँ कॉलेज है!”

विहान: “नहीं मैं अपना घर गया था सर्टिफिकेट्स वग़ैरा लेने कल ऑफिस में देना है”

रूचि: “आप का घर कहाँ है?”

विहान: “यहाँ से बहोत दूर, कोई 450 कंस दूर”

रूचि: “और अभी कहाँ हो आप?”

विहान: “इसी गाओं में”

रूचि: “ोफो मैं कुछ नहीं समझी”

विहान: “ठीक है कल समझाऊंगा”

रूचि: “संडे को आप के साथ एक बहोत खूबसूरत अध्कि थी, कौन है वो?”

Vihaan:”kyun? तुम्हारे ख्याल से कौन हो सकती है?”

रूचि: “आप की मांगितर”

विहान: “क्यों ऐसा लगता है के मेरा मागणी हो गया है? मेरे ऊँगली में कभी अंगूठी देखा है किआ?”

रूचि अपने डेंटन में होंठों को दबाते हुए यह लिख कर सेंड किया,

“तो आप की दुल्हन भी तो हो सकती है नाह!”

विहान मुस्कुराया और लिखने वाला था के हाँ मेरी वाइफ है, और अशिता को याद किया, सोचा वो भी फ़ोन करने hi वाली होगी, कितना रो रही रही कुछ देर पहले और रूचि को टेक्स्ट किया,

“चाह बाद में टेक्स्ट करता हूँ कुछ काम है अभी ok?”

रूचि: “हाँ मैं भी एहि कहने वाली थी मैं अभी किचन में हूँ, रात को अपने रूम से टेक्स्ट करुँगी, मगर अभी इतना बताते जाओ के आप हो कौन और गाओं में किश के यहाँ ठहरे हो आप? आप का कोई रिश्तेदार है किआ गाओं में?”

विहान: “आज प्रिंसिपल ने जब मेरा सुर्नामे बताया तो तुमने नहीं सुना था किआ?”

रूचि: “नहीं याद नहीं सिर्फ विहान नाम याद है.”

विहान: “रघुवंश ईश्वर मेरा दादा है मैं उन्ही के यहाँ रहता हूँ!”

Ruchi:”WHAT? आप इतने बड़े आदमी हो? OMG. मैं तो बहोत छोटी हूँ आप के सामने.”

विहान: “व्हाट नॉनसेंस? कोई बड़ा या छोटा नहीं होता सब इंसान शामे होते हैं!”

रूचि: “तो अब बता दो वो लड़की कौन थी आप के साथ संडे को मंदिर के पास? आप से चिपकी हुई थी जैसे एक गर्लफ्रेंड चिपकी रहती है अपने बॉयफ्रेंड के साथ”

विहान: “हाँ मेरी गर्लफ्रेंड hi समझो उससे, वो मेरी एक लौटी बेहेन है अशिता!”

रूचि बहोत खुश हुई यह जान कर के वो उस्सकी बेहेन थी और टेक्स्ट किया,

“हम्म्म आप की बेहेन है, आप से बहोत प्यार करती है, मेरा तो एक भाई है बिल्कुल जलाद है!”

फिर विहान ने कहा रात को उस्सको मैसेज करेगा क्यूंकि अशिता की कॉल आने वाला था तो विहान ने मोबाइल फ्री रखा.

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उधर घर में अशिता ढूंढ़ने की कोशिश में लगी थी के विहान ने किआ लिया होगा घर से… बहोत ढूंढा उस्सने घर में, विहान के अलमारी में मगर उस्सको कुछ समझ में नहीं आया के विहान क्यों घर आया था और किआ लगाया. बहोत ढूंढ़ने के बाद अशिता ने देखा के विहान के दो ब्लैक क्लासिक शूज नहीं है, और अशिता ने सोचा के विहान तो स्पोर्ट शूज जैसे नाइके और एडिडास ज़्यादा टर्र पहनता है मगर वो क्लासिक ब्लैक शूज तो सिर्फ ोक्सासिओं पर जैसे शादी, मांगनी या किसी इम्पोर्टेन्ट पार्टी वग़ैरा में जाता है तब पहनता है तो अभी क्यों उन् शूज को लगाए वो?

अशिता ने विहान को फ़ोन नहीं किया. वो अपने मम्मी पापा को वापस आने की वेट करने लगी उनको बताने के लिए के विहान घर से पता नहीं किआ लेने आया था….

और जब उसस्के पेरेंट्स आये तो अशिता ने सब कुछ बताया के कैसे विहान कॉलेज आया था उस से घर के कीस लेने और वापस करने….

अनिरुद को ताहजुब हुआ और खुद विहान से बात करने के लिए फ़ोन किया.

विहान ने कॉल रिसीव करते हुए अपने पापा से पूछा के वो कैसे हैं ेट्स मगर अनिरुद ने सीधे मुद्दे की बात की तो विहान ने कहा के एक छोटा सा ऑफिस में काम मिला है गाओं के पास वाले शहर में तो सर्टिफिकेट्स और क्लासिक कपडे और शूज लेने आया था. कहा के कल से काम करने जा रहा है.

बुसस इतनी hi बात हुई तो अनिरुद ने वो बात बताये अशिता और सुमन को, तब अशिता समझी और उस्सको चैन आयी.

गाओं में दादा जी ने विहान से बात किये कॉलेज की नौकरी और उसस्के पढ़ाई के बारे में और उस से कहा के उस्सने बहोत ाचा डिसिशन लिया अपने डिग्री को हासिल करने के लिए. दादा बहुत प्राउड फील कर रहा था के उस्का पोता अब कॉलेज में टीचर है.

डिनर के बाद अशिता ने अपने रूम से विहान से बात किये कुछ देर. अशिता खुश थी के उस्सको नौकरी मिला और दोनों ने थोड़ी देर बात किये और विहान ने कहा के आज के भाग दौड़ में वो बहोत थक गया है और आराम करना चाहता है तो कॉल एन्ड किये गए, मगर विहान को रूचि से भी बात करना था इसी लिए उस्सने अशिता से जल्दी बात एन्ड किया.

और रात के 10 बजे रूचि ने खुद विहान को मैसेज भेजा,

“आप सो तो नहीं गए नाह?”

विहान ने तुरंत रिप्लाई किया

“इतनी खूबसूरत और प्यारी सी लड़की से बात करना है तो कौन बुद्धू सो सकता है, नींद तो तुम्हारे पास छली गयी है रूचि!”

रूचि ने मुस्कुराते हुए लिखा,

“कल आप को क्लासेज लेने है आप को सो जाना चाहिए अब!”

विहान ने लिख कर सेंड किया,

“ी वांट तो सी यू!”

रूचि: “कल देख लेना!”

विहान: “नहीं मुझे अभी तुमको देखने का मैं कर रहा है रूचि”

रूचि: “वो तो नामुमकिन है जी!”

विहान: “और मैं नामुमकिन को मुमकिन करके दिखा दूँ तो?”

रूचि: “वो कैसे हो सकता है, मैं यहाँ पहाड़ों के पास हूँ आप कोई 1000 मेट्रेस के दूरी पर हो कैसे मुमकिन है?”

विहान: “मैं अभी इसी वक़्त वहां आ तो सकता हूँ नाह!”

रूचि घबरा गयी और जल्दी से लिख कर सेंड किया,

“ओह no! हरगिज़ नहीं ऐसा मत करना प्लीज, वैसे इस अँधेरी रात में कैसे यहाँ तक आ पाओगे, स्ट्रीट लाइट्स भी नहीं है इधर यह शहर नहीं है बाबू!”

विहान: “तुमको देखने के लिए मुझे नाह तो स्ट्रीट और नाह hi लाइट की ज़रुरत है डिअर, तुम बीच समुन्दर में भी होती तो मैं चला अत तुमको देखने के लिए, तुम्हारी एक झलक के liye!Tum में कुछ है जो मुझे खींचता है, तुम्हारे चेहरे में कुछ मुझे अपनी तरफ बुलाता है, तुम्हारी आवाज़ सुनने को मैं करता है, तुमको छूने को मैं करता है, सच कहूं तो तुम्मो अपने बाहों में भरने को मैं कर रहा है अभी इसी वक़्त, मैं अत हूँ रूचि!”

रूचि को लगा के गर्मी का मौसम है और उसस्के माथे से पसीने टपक पड़े, घबरा गयी और सोचने लगी के किआ जवाब लिखे….. एक गहरी सांस लेने के बाद यह लिख हर सेंड किया विहान को,

“आप क्यों मुझे इतना परेशान करना पसंद करते हो जी? आप यहाँ आये तो घर में सबको पता चल जाएगा और मुझे मारा जाएगा, मुझ पर तोहमत लगाया जाएगा, किआ आप यह चाहते हो?”

विहान: “तुम पगली hi हो! अभी 11 बजने को है, थोड़ी देर में बारह बज जाएगा, सब सो जाएंगे, सब गहरी नींद में होंगे तब आऊंगा तो कैसे किसी को पता चलेगा?”

रूचि: “OMG. मुझे आप को नंबर नहीं देना चाहिए था आप मेरे लिए मुसीबत hi बनोगे लगता है. आज पहली बार टेक्स्ट करना शुरू किया के आप अब यहाँ आने की बात करने लगे उफ़!”

विहान: “आज तुमसे शाम को नहीं मिला नाह इस लिए लगता है बरसों से नहीं देखा तुमको, सिर्फ कॉलेज में थोड़ा सा मिले थे!”

रूचि: 45 मीन्स तक तो मेरे पास बैठे आज आप बस में, इतने देर तक मेरे साथ थे तो?!”

विहान: “सिर्फ बैठा था नाह? हाथ तक नहीं पकड़ने दिया था तुमने…..”

रूचि: “फॉर ा फर्स्ट टाइम उतना काफी था!”

विहान: “तो अब फॉर थे सेकंड टाइम वाला पूरा करने के लिए आऊंगा नाह!”

रूचि: “उफ़ मेरी माँ! प्लीज कुछ और बात करो नाह!”

विहान: “और कोई बात hi नहीं करने को तुमको देखने का बड़ा मैं कर रहा है, तुम्हारे गाल पर हाथ फरने को मैं कर रहा है, उस्सको हलके से किश करने को मैं कर रहा है…..”

रूचि: “प्लीज रुको रुको रुको नाह, इस्स्स्सस्छ्हः किआ किआ कहते जा रहे हो आप…. यह बताइये के अगर मान लो आप आरहे हो तो घर से निकलोगे तो किआ बताओगे वहां सबको इतने रात को कहाँ जा रहे हो? आसमान में तारे गिनने?”

विहान: “किसी को बताऊंगा थोड़ा hi के मैं घर से निकल रहा हूँ?”

रूचि: “मतलब?”

Vihaan:“arey सब गहरी नींद में होंगे तक निकलूंगा.”

रूचि: “आप को रात के बारह बजे इस जंगल वाले सड़क पर अकेले चलने को डर नहीं लगेगा?”

विहान: “मैं किसी भी चीज़ से बिल्कुल भी नहीं डरता!”

रूचि: “और अगर आप यहाँ तक आये भी तो मैं तो घर के अंदर हूँ, मुझसे कैसे मिलोगे आप? कैसे मुझको देख पाओगे?”

विहान: "वो तुम खुद मुझे बताओगे के तुम किश कमरे में हो और मुझे किश तरफ आना चाहिए!”

रूचि: “और अगर मैं ने वैसा नहीं किया तो?”

विहान: “ऐसा तो नहीं हो सकता के मैं यहाँ से उतना दूर आऊं और तुम मुझे बिना मिले वापस भेजदो”

Ruchi:”aap को बहोत भरोसा है मुझ पर?”

विहान: “100%”

रूचि: “कहीं ऐसा नाह हो के वापस लौटना पड़े और आप का भरोसा टूट जाए!”

विहान: “टाइम देखो, 5 मिनट्स रह गए हैं बारह बजने में!”

रूचि: “आप क्यों इस तरह से मेरा दिल ज़ोरों से धड़का रहे हो? मेरी सांसें रुक सकती है!”

विहान: “उस से पहले मैं तुम्हारे अंदर अपनी सांसों को भर दूंगा!”

रूचि: “उफ्फ्फ आप सच में मजनू हो!”

विहान: “और तुम लैला”

रूचि: “मुझे मत दो इतना बड़ा नाम मुझ में वो ताक़त नहीं के आप के लिए खुद को क़ुर्बान कर सकूँ, मैं बहोत कमज़ोर हूँ, नाज़ुक हूँ मैं किसी मुसीबत के सामने नहीं टिक सकती, हार जाना पसंद करती हूँ, मैं फाइटर टाइप नहीं हूँ, मुझ पर आप इतना यकीन मत कीजिये प्लीज.”

विहान: “वो सब मैं तुमको सीखा दूंगा नाह!”

रूचि: “नहीं सीखा पाओगे आप मुझे कुछ भी बाबू, मैं अचानक आप की लाइफ से ग़ायब हो सकती हूँ”

विहान: “यह किआ बात हुई भला? ऐसे कैसे हो सकता है, तुम नामुमकिन बात कर रही हो अब तो!”

रूचि: “याद रखना मेरे इस बात को सर. आज हूँ कल अचानक से ग़ायब हो जाउंगी तब मत कहना के मैं ने बताया नहीं था आप को!”

विहान: “रूचि देखो अब मुझको इतना सस्पेंस में मत डालो नाह प्लीज, अभी जियो, अभी का फायदा उठाओ नाह. अभी हम ज़िंदा है, हम मिल सकते हैं, हम बात कर रहे हैं, हम एक दूसरे को देख सकते हैं, छह सकते हैं तो क्यों पहेलियाँ बुझा रही हो अब? ऐसे बहाने तो नहीं चैलेंज माय डिअर!”

रूचि: “विहान सर, आप इस अन्डेहरे में अगर अभी घर से निकले और यहाँ पहुँच hi नहीं पाए तो मैं खुद को कैसे माफ़ करुँगी? आप को कुछ भी हो सकता है, यह शहर नहीं है बाबू, आप को कुछ भी हो सकता है, इस जंगल और पहाड़ी इलाकों का कोई भरोसा नहीं के कब किआ हो जाए!”

विहान: “जैसे के? यू मैं भूत वग़ैरा?”

रूचि: “कुछ भी, हाँ वह भी!”

विहान: “हाहाहा, अब यह तो मत कहो के तुम ऐसे बातों पर यकीन करती हो, भूत वोट कुछ नहीं होता माय डिअर, यह सब इंसान के अंदर बसा हुआ वेहम होता है, सब झूट है… इतना तो मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ के मैं अभी तुम्हारे यहाँ बिना किसी भूत से मिले आ सकता हूँ मुझे बिल्कुल डर नहीं है इन् सब चीज़ों का!”

रूचि: “अच्छा, मान लो के आप यहाँ आगये, मैं आप से मिली और मेरी भाबी या भाई जाग गए और मुझे आप के साथ इस बीच रात में देख लिया या किसी भी तरह उनको पता चल गया तो मेरा किआ हाल होगा वो आप बर्दाश्त कर पाओगे? अपने आप को नहीं कोसोगे के अगर आप नहीं आते तो अच्छाह होता?!”

विहान: “रूचि प्लीज ऐसा तो मत कहो, कुछ नहीं होगा हमको कोई नहीं देखेगा, एक काम करते हैं तुम घर से बाहर निकलना मुझसे मिलने, मैं तुमको अपनी बाहों में भर लूंगा इस काली रात में तो खुश हो जाऊंगा, इस से ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए मुझे.”

रूचि: “और इस काली रात में आप मुझको देख कैसे पाओगे, आप तो मुझे देखना चाहते हो नाह?”

विहान: “मोबाइल की टोर्च ों करूँगा तुम्हारे चेहरे पर, और वैसे तुम इतनी गोरी हो के अँधेरे में भी तुम्हारा चेहरा दिखेगा मुझे! तुम्हारी रंगत काली रात में उजाला फैला देगा… एक बात बताओ, इस वक़्त किआ पहना हुआ है तुमने? निघ्त्य पहनती हो नाह?!”

रूचि: “इतनी भी तारीफ़ मत करो आप मेरा, गोर तो आप भी हो, तो क्यों मेरे रंग की इतना तारीफ़ करते रहते हो आप? फूलवती ने भी कहा था, किआ आप को सांवली लोग बिल्कुल नहीं पसंद? आप की बेहेन भी गोरी है, आप भी गोर हो तो सांवले लोग किआ खूबसूरत नहीं होते? मुझे तो फूलवती बहुत खूबसूरत दिखती है!”

विहान: “अरे किश ने कहा के मुझे सिर्फ गोर लोग पसंद है? और किश ने कहा के मुझे फूलवती नहीं पसंद? इंसान दिल से खूबसूरत होना चाहिए और फूलवती का दिल बेहद खूबसूरत है, तुमको वो खूबसूरत इस लिए दिखती है क्यूंकि तुम्हारा दिल साफ़ है और तुम्हारे देखने का नज़र्या खूबसूरत है. मुझे भी तो वो खूबसूरत दिखती है…. वैसे तुमने बताया नहीं के निघ्त्य पहनती हो के नहीं?!”

रूचि: “हाँ पहनती हूँ, उसी में हूँ अभी!”

विहान: “वह, तब तो तुमको बाहों में भरने का इरादा और भी बुलंद हो गया मेरा अभी निकलता हूँ…. वैसे एक पिछ तो सेंड कर सकती हो ात लीस्ट मुझे मैं सेव करूँगा….”

रूचि: “हम संस से बात कर रहे हैं यह व्हाट्सअप नहीं, मेरे यहाँ विफई नहीं है सर जी”

विहान: “कोई बात नहीं कल तुम्हारे मोबाइल पर इंटरनेट पैकेज डलवा दूंगा तो कल कुछ पिक्स सेंड कर देना मुझे सौवेनीर्स बना के रखूँगा! वेल ी ऍम गेटिंग आउट नाउ, ारः हूँ सच में okay!”

“रूचि: “मुझे बहोत बहोत डर लग रहा है, मत आओ नाह प्लीज!”

विहान: “डरो मत रूचि तुझे देखने को बहोत मैं कर रहा है, किआ पता रात में मैं मर जॉन फिर ज़िन्दगी भर खुद को तुम कोसस्ती रहोगी के तुमने मुझे क्यों मिलने से मन किया! अभी वक़्त है तो मिल लेते हैं नाह!”

रूचि: “बातें बनाना कोई आप से सीखे देखो तो किआ बात कर डाले आप ने, अब तो मैं नहीं रोकूंगी आप को मगर मेरे दिल के धड़कन इतने तेज़ हो गए हैं के खुद मुझे सुनाई दे रहे हैं! उफ्फ्फ!”

विहान: “मैं निकल रहा हूँ, थोड़ी देर में तुम्हारे घर के पास आने के बाद टेक्स्ट करता हूँ तुमको!”

रूचि: “बे वैरी केयरफुल, अपने आगे पीछे अच्छी तरह से देखना, कहीं कोई भी नज़र आये तो आगे मत बढ़ना, और कहीं कोई लाइट दिखे, टोर्च, या लैंटर्न तो बहोत होशियार रहना, और तुरंत वापस मूढ़ जाना या छुप जाना, okay?”

विहान घर से चुपके से निकला सावधानी बरकते हुए. सब लोग सोये हुए थे. दरवाज़े को बहोत आहिस्ते से खोला और निकल पड़ा. पीपल के पेड़ तक रीच होकर वापस घर के तरफ देखा, के कहीं किसी ने उस्सको देखा तो नहीं, सब क्लियर लगा तो आगे बढ़ा. बढ़ता गया, फूलवट्टी के घर के पास से गुज़रा तो उस्सको उसस्के घर के अंदर एक छोटा सा लाइट जलते हुए दिखा, जैसे कोई निघटलैम्प हो विहान ने सोचा शायद वो फूलवन्ती का hi कमरा होगा, और आगे बढ़ता गया…. दूर कुछ कुत्तों की भोंकने की आवाज़ें सुनाई दे रहे थे, हवा से पत्तों के सरसराहट सुनाई दे रहे थे पेड़ों के ऊपर यहाँ तक के घांस भी सर सर किये जा रहे थे ऐसा लगता था के विहान के चलने की रफ़्तार से घांस हिल रहे थे….

चलते हुए विहान अपने दिमाग़ में रूचि को निघ्त्य में सोचने लगा था और सेक्सुअल फीलिंग ने उसस्के मैं में घर बना लिए थे जिस से विहान बहोत उत्तेजित होने लगा था, उस्सने हरकतें फील किये अपने पंत के अंदर और रूचि को चूमने चाटने का बड़ा मैं किया उस्सको, सब्र नहीं हो रहा था उस से. सिर्फ एहि सोच रहा था के इतनी रात गए एक इतनी खूबसूरत लड़की उस से मिलने को राज़ी हुई तो एक hi बात हो सकती है के वो उसस्के साथ हमबिस्तर होने के लिए तैयार है, यह सोच कर विहान बहोत खुश हो रहा था और रूचि के जिस्म को ख्यालों में बसाये हुए आगे बाहड़ता चला गया पहाड़ियों के करीब रूचि के घर के तरफ….

तो बे कॉन्टिनोएड….. (3005 वर्ड्स)
 
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