Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani - Page 11 - SexBaba
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Vihaan Aur Ashita - Bhai Behen ki kahani

अपडेट 73 एंड थे मेट

विहान वहां पहुंचा तो हांफ रहा था तेज़ रफ़्तार से चलने की वजह से. रूचि के घर के दरवाज़े के पास आया और झुक कर अपने दोनों हाथों को अपने घंटों पर रख कर चारों तरफ देखने लगा के एक खम्बे के पीछे से रूचि सामने आयी. वो विहान के रीच होने से पहले से hi बाहर थी और विहान को आने का वेट कर रही थी. विहान ने सोचा था कुछ भी नहीं दिखाई देगा मगर रूचि की सिल्होउएत्ते साफ़ नज़र आरही थी, क्यूंकि हलकी सी चांदनी थी. विहान अब भी हांफ रहा था और मुस्कुराते हुए रूचि के तरफ बढ़ा….

रूचि ने फुसफुसाते हुए कहा,

“आप बहोत ज़ोरों से हांफ रहे हैं सब सुनाई दे रहे हैं, मैं दूर से आप का हांफना सुन रही हूँ.”

विहान दो कदम रूचि से दूर था और अपने बाहों को खोल दिया रूचि को उसस्के बाँहों में आने के लिए.

रूचि ने एक कदम उसस्के तरफ बढ़ाया और रुक गयी अपने दोनों हाथों को अपने काँधे पर क्रॉस किये हुए वो विहान के चेहरे में देखने की कोशिश में लगी हुई थी क्यूंकि साफ़ तो नहीं दिख रहा था फिर भी दिख रहा था. रूचि ने देखा के विहान ने अपने बाहों को खोला हुआ था और इंतज़ार में था के वो उसस्के बाँहों में सिमट जाए.

और उसी पोजीशन में खड़े विहान वेट कर रहा था के रूचि उसस्के बाहों में आये और तब तक विहान अशिता की निघ्त्य को देख रहा था जो उस्सकी घुटनों तक रीच होती थी और काँधे पर पतली सी स्ट्रैप्स थे और विहान निघ्त्य की रंग को जान्ने की कोशिश कर रहा था, रात में रंग साफ़ नहीं दिख रहा था मगर उस वक़्त विहान को लगा के निघ्त्य का कलर पीला ब्लू था.

रूचि थोड़ा कांप रही थी, और बार बार दरवाज़े को देह रही थी. घर के अंदर बिल्कुल अँधेरा था और रूचि सोच रही थी के अगर अचानक उस्सको लाइट ों दिखाई दिए अंदर तो तुरंत विहान को भागना पड़ेगा मगर सोचने लगी के किधर छूपने को कहेगा विहान को…

विहान अब भी बाहें फैलाये हुए खड़ा था रूचि के इंतज़ार में और लगातार उस्सकी निघ्त्य को देखे जा रहा था. उस्सने हमेसाह रूचि को यूनिफार्म में देखा था, सलवार कमीज़ और दुपटे में आज पहली बार उस्सकी टांगें नज़र आरहे थे, वो भी अँधेरे में अच्छी तरह से नज़र नहीं ारः था उससे.

कितनी तमन्नाह थी विहान को रूचि के जिस्म अंदर देखने को, कितना सोच रहा था के किआ उस्सकी जिस्म अंदर अशिता जैसी होगी या नहीं, कितनी बार अपने तस्सवुर में उस्सने रूचि को वैसे सोचा था पहले दिन से और आज मौका मिला भी रूचि को उस तरह से देखने को तो अँधेरा था, उस्सकी जिस्म अच्छी तरह से दिख भी नहीं रहे थे मगर विहान ने सोचा फील को कर सकेगा, उस्सको अपने बाहों में तो ले पायेगा और उस्सकी जिस्म की खुशभू, उस्सकी मुलायम स्किन को तो फील कर पाएगा सब महसूस कर पाएगा….

रूचि अब भी एक कदम विहान के सामने अपने हाथों को काँधे पर क्रॉस किये हुए कड़ी थी, और विहान ने अब वैसे hi फुस्फुसाते हुए कहा,

“नहीं होगी मेरे बाँहों में तो मैं खुद एक कदम तुम्हारे पास अत हूँ, हमारे पास ज़्यादा वक़्त भी तो नहीं है, मुझको वापस भी जाना है तो गले तो लग जाओ अब….”

और रूचि ने उस एक कदम के फासले को मिटाया विहान के सीने से लग कर. विहान ने उस्सको अपने बाहों में जाकर तो लिया मगर रूचि ने अब भी अपने हाथों को अपने हांड़ों पर क्रॉस किये हुए थे, तो विहान के सीने पर रूचि के दो बाज़ू डब्बे हुए थे उस वक़्त. विहान ने सर ऊपर उठाकर एक लम्बी सांस छोर्रा रूचि को अपने बाहों में महसूस करते हुए और अपने मुंह को रूचि के काँधे से अपने होंठों से उस्सकी नंगी काँधे को चूमा रूचि को फिर दोबारा सांस बाहर चोर्रा. विहान के लम्बे कद होने के कारण रूचि के काँधे पर उस्का सर झुका हुआ था, रूचि का चेहरा विहान के चेस्ट के थोड़ा ऊपर जहाँ गर्दन शुरू होता है वहां रीच हुआ था. विहान ने एक जॉगिंग वाला ट्रॉउज़र पहना हुआ था और एक टीशर्ट.

विहान ने तब अपने हाथ को हलके से रूचि के बाहों पर फेर्रा, रूचि और भी कांप उठी, तो विहान ने कहा,

“मैं ने तो तुमको सीने से लगाया, मगर तुमने मुझको अपने बाहों में नहीं लिया क्यों? तुम्हारे बाहें तो मेरे सीने पर क्रॉस इस तरह हुए हैं जैसे मेरे और तुम्हारे बीच एक दीवार है!”

रूचि ने धीरे से कहा,

“दो कारण है इस्सके. 1. मुझको बहोत ठण्ड लग रही है, 2. आप से इस ड्रेस में सटने को अजीब लग रहा है, मैं तो चेंज करने वाली थी, मगर आप से कह दिया था के निघ्त्य में हूँ इस लिए सोचा के आप मुझको इसी में देखना चाहते होंगे तो ऐसे hi रही, हाथ को काँधे पर क्रॉस करने से ठण्ड कम लगती है! देखो कैसे मेरे होंठ, थोड़ी, और आवाज़ कांप रहे हैं बात करते हुए!”

विहान ने उसस्के दोनों बाहों को अपने हाथ में लेकर अपने शोल्डर के ऊपर लपेटा और रूचि को ज़ोर से अपने सीने से चिपकाया, तो अब रूचि की छाती विहान के छाती पर चिपक गयी थी और उस्सने भी विहान को ज़ोर से बाँहों में जाकर कर अपने सर को उसस्के सीने पर सत्ता दिया.

दोनों एक दूसरे के बाहों में थे, और रूचि की दिल की धड़कन इतनी तेज़ धड़क रहे थे के विहान उस्सकी धड़कन को अपने सीने पर महसूस कर रहा था और सुन भी रहा था धक् धक् धक् धक् धक् धक्…. इतना सन्नाटा था, इतनी ख़ामोशी थी के सब कुछ आराम से सुनाई दे रहे थे, दोनों के सांसें सुनाई दे रहे थे….

रूचि ने कहा,

“मुझे बहोत डर लग रहा है विहान!”

विहान ने उसस्के चेहरे पर अपना हाथ हलके से फरते हुए कहा,

“ष्ष्हह, डरने का नहीं है, प्यार करने का टाइम है रूचि, यू अरे ा रियल डार्लिंग, ी वांट तो किश यू….”

रूचि ने अपना सर उठा दिया और विहान का मुंह रूचि के होंठों से टकराया और रूचि ने ेंखें बांध कर liye….uss दौरान विहान का हाथ रूचि के पीठ पर फरने लगा था और उसस्के जांघें रूचि के जाँघों के बीच घुस रहा था, रूचि चुप चाप सब करने दे रही थी बल्कि खुद भी विहान के जिस्म पर रूचि ने अपने हाटों को चलना शुरू कर दिया था…..

विहान ने कुछ देर रूचि के होंठों को किश किया और अपने जीब को उसस्के होंठों पर फर्र्ना शुरू किया तो रूचि ने खुद बा खुद अपना मुंह खोल दिया और विहान का जीब उसस्के मुंह के अंदर गया तो रूचि उससे चुस्सने लगी और विहान ने भी रूचि का जीब अपने मुंह में ले लिया और एक दूसरे के जीब का रस दोनों चुस्सने लगे….

उस दौरान विहान का कमर रूचि के पथ के निचे डब्बा और उस्का तना हुआ गुड्डा रूचि के जाँघों के बीच में डब्बा और विहान ने एक रागढ दिया वहां पर….. रूचि जैसे अपने होश ो हवास खो बैठी थी विहान को सब कुछ करने दे रही थी गहरी सांसें लेते हुए…. विहान का हाथ तब रूचि के नितम्बों पर गया और रूचि के ऊपर अपने लुंड से और भी ज़ोर से दबाया उस्सने…..

कुछ पल बाद विहान का हाथ रूचि के निघ्त्य के निचे गया और उस्सकी नितम्बों को फील करते हुए उस्सकी पंतय को छुआ….. यह वो लम्हा था जब रूचि ने एक झाकते में विहान का हाथ थामा और ेंखें खोल दिए और विहान के चेहरे में हांफते हुए देख कर कहा,

“किआ कर रहे हो आप!”

विहान ने घुर्राटे हुए कहा,

“प्यार! प्यार कर रहा हूँ तुमसे मैं, मत रोको मुझे प्लीज, मुझे इस्सकी ज़रुरत है रूचि, मुझे इस्सकी सख्त ज़रुरत है, मुझसे संभाला नहीं जा रहा, मेरी प्यास बुझादो रूचि, इधर एक तुम्ही हो जो मेरी प्यास बुझा सकती हो, मैं और किसी को भी नहीं जानता जो मेरी प्यास को बुझा सके प्लीज रूचि, प्लीज……” विहान ने यह सब कुछ थोड़ा हांफते हुए, रुक रुक कर भरी आवाज़ में अपने चेहरे को रूचि के कांधों में दबाते हुए एक तड़प भरी आवाज़ में कहा था…..

रूचि के समझ में नहीं आया के वो किआ करें और किआ कहें विहान को….. विहान अपना निचे वाला part रूचि के सेक्स के ऊपर ड्रेस के ऊपर से hi दबाते हुए रगड़ता जा रहा था कन्टिन्यूसली नॉन स्टॉप खड़े हुए hi…. और रूचि सब फील कर रही थी मगर जैसे होश में नहीं थी…..

रूचि ने फिर एक मातुरे औरत की तरह सीरियस हो कर विहान के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसस्के ेंखों में देखते हुए कहा,

“ठीक है विहान सर, मुझे पता है आप किआ चाहते हो मुझसे, आप जो करना चाहते हो मैं आप को करने देती हूँ मगर एक शर्त है, िफ़ अस ा ट्रू मन यू एक्सेप्ट थे कंडीशन, ी ऍम आल योर्स!”

विहान ने खुश होते हुए कहा,

“सब मंज़ूर है मुझे कोई भाई शर्त हो मुझे बिल्कुल मंज़ूर है”

रूचि ने कहा,

“अपनी अशिता की कस्सम खाओ, अपने दादा, माँ और पिताजी की कस्सम कहो के जो शर्त होगा उस्सको रेस्पेक्ट करोगे और ज़िन्दगी भर उस्का उलंघन नहीं करोगे”

विहान ने कहा,

“मैं अपनी मम्मी, पापा, अशिता और दादा की कस्सम खता हूँ के शर्त को रेस्पेक्ट करूँगा, ठीक है अब बताओ किआ शर्त है?!”

रूचि ने कहा,

“शर्त यह है के मेरे साथ सब कुछ करने के बाद आप मुझसे कोई भी सवाल नहीं करोगे, कभी भी नहीं एक सवाल भी नहीं ज़िन्दगी भर - एहि शर्त है अरे यू okay विथ थिस? िफ़ यस, ी ऍम आल योर्स, टेक में!”

उस पल को विहान इतना खोया हुआ था रूचि के गर्दन को चूमते हुए और अपने कमर को कसके उस्सकी जिस्म पर दबाते, रगड़ते हुए के उस्सको और कुछ होश था hi नहीं के रूचि किआ कह रही है, उस्का किआ मतलब है, बस विहान को उस पल को सिर्फ उस्सको इश्क करना था, उस पल को ुसस्पर जैसे एक जूनून संवार था इश्क करने के लिए, उस्सकी सांसें बहोत तेज़ हो चुके थे और वो किसी और दुन्या में जा चूका था फिर रूचि ने खुद उस्सको अपने बाहों में और ज़ोर से भर लिया और वो खुद विहान के गर्दन पर अपना जीब फरने लगी…..

विहान का एक हाथ एक बार फिर रूचि के ड्रेस के निचे गए उसस्के नितम्बों पर उस्सकी पंतय को टटोलते हुए और खुद अपने तने हुए लुंड को विहान ने अपने ट्रॉउज़र की इलास्टिक को निचे करके लुंड को दबाया उसस्के जाँघों के दरमियान और रूचि की आह निकली….

तब रूचि ने उस्सको रुकने के लिए कहकर घर के दरवाज़े को खोला आहिस्ते से….. विहान हैरान हुआ और पूछा के किआ कर रही है तो रूचि ने कहा अंदर उसस्के कैमरे में चलने को.

विहान ने उसस्के भैया भाबी के बारे में पूछा तो रूचि ने कहा के बुसस शोर नहीं करना चाहिए, और बिना लाइट ों किये रूचि ने विहान का हाथ थाम कर उस्सको अपने कमरे के तरफ गाइड किया और दोनों रूचि के बीएड पर पाए गए…..

विहान का जैसे एक सपना पूरा होने जा रहा था, जब बीएड पर बैठे तो रूचि ने नाईट लैंप को ों किया और विहान के बाहों में समा गयी. विहान से इंतज़ार नहीं हो रहा था, उस्सने बहोत जल्दी से अपने कपडे उतार दिया, बिल्कुल नंगा हो गया, और रूचि को बाहों में भरके, किश करते हुए उस्सको बीएड पर लेता दिया और उस्सकी निघ्त्य निकाल फेंका, रूचि ने ब्रा पहनी हुई थी तो विहान ने पूछा,

“ब्रा क्यों पहनी हुई हो? निघ्त्य में नहीं पेहेनते है नाह इस्को?”

रूचि ने कहा,

“नहीं पहनती हूँ सिर्फ तुम आरहे थे और तुमसे बाहर मिलना था, ठण्ड थी इस लिए पहना था, वार्ना निघ्त्य में कभी नहीं पहनती हूँ…”

विहान अब रुक गया और रूचि के जिस्म को निहारने लगा, अपने मैं में रूचि के कर्व्स को देखते हुए अशिता की जिस्म को सोचने लगा, उस्का जमके खड़ा हुआ था और विहान ने रूचि का हाथ पाकर के अपने लुंड पर रखा, वो सोच रहा था रूचि हाथ खिंच लेगी मगर नहीं, रूचि ने उसस्के लुंड को थामा, और सहलाया, आराम से उसस्के लुंड को देखा और झुक कर उस्सको चूमा जिस से विहान की आह निकलने की बारी थी……

रूचि की पंतय अब भी उस के जिस्म पर थी, तो विहान ने रूचि को उस्सकी गर्दन से किश करते हुए धीरे धीरे उस्सकी छाती से होकर उस्सकी पथ को चाटते हुए उस्सकी नबी तक गया, वहां अपने होंठ को गोआल गोआल घुमाया और अपने डेंटन से रूचि की पंतय को निचे करने लगा…. रूचि सिमट गयी और उस्सकी जिस्म बीएड पर एक सांप की तरह रेंगने लगी… विहान नज़रें ऊपर के तरफ करके रूचि के चेहरे में देखते हुए उस्सकी पंतय को बिल्कुल बाहर निकल फेंका और इस बार उस्सने अपने लुंड को रूचि के चेहरे के पास करते हुए उसस्के गालों पर दबाया और तड़पती आवाज़ में एक आह के साथ रूचि को चुस्सने के लिए मिनतें किये विहान ने….

रूचि ने उसस्के लुंड को हाथ में लिया, और विहान के चेहरे में देखते हुए उस्सने पहले लुंड को चूमा, फिर जीब से छाता और मुंह में लेकर चुस्सने लगी….. विहान तड़प उठा और अपने दोनों हाथों से रूचि के सर को पाकर के उसस्के बाल में उँगलियाँ फरते हुए तड़पते और घुर्राटे आवाज़ में आहें भरने लगा तो रूचि रुकी और उस्सको सावधान किया के उस्सकी आवाज़ नहीं निकालनी चाहिए….

विहान लेट गया और रूचि को अपना काम करने दिया, रूचि विहान के ऊपर झुकी हुई थी और उसस्के मुंह में विहान का लुंड था जिस्सको वो बड़े आराम से चूस रही थी…. विहान खुद को किसी जन्नत का सेर करते हुए महसूस कर रहा था….. पिछले बार गोवा में यह सब किया था अशिता के साथ उसस्के बाद सिर्फ आज उस्सको यह आनंद मिल रहा था और वो बेहद खुशनसीब फील कर रहा था अपने आप को.

आखिर में उस से सेहेन नहीं हुआ उस्सको डर था के कहीं वो झाड़ नाह जाए तो झट से रूचि को अपने ऊपर खिंचा, वो पीठ के बल बीएड पर था और रूचि को अपने ऊपर लेकर उस्सकी जीब चुस्सने लगा…. रूचि ने खुद अपने टांगों को फैला दिया और विहान ने डब्बे आवाज़ में कहा,

“स्वीटहार्ट, मैं तुम्हारे गहराई में जाना चाहता हूँ प्लीज मन मत करना, अंदर जाने दो प्लीज….”

रूचि की सांसें भी बिल्कुल भारी हो गयी थी और उसी डाबी हुई आवाज़ में उस्सने भी जवाब दिया विहान के गर्दन को चूमते हुए,

“हमें पता है आप को ज़रुरत है इसी लिए तो हम अंदर आये हैं, आप को जो भी करना है करए मैं ने मन नहीं किया बुसस अपने प्रॉमिस को याद रखना, मुझसे एक भी सवाल मत करना इस्सके बाद…..”

बुसस इतना hi कहा था रूचि ने के विहान ने अपने टोएस के ऊपर थोड़ा ज़ोर लगा के लुंड को निचे से रूचि के गीली योनि के अंदर पुश किया और वो आराम से फिसलते हुए रूचि के अंदर समा गए….. अपने लुंड पर रूचि की जिस्म की गर्माहट को महसूस करते हुए विहान की आह निकली और उस्सने तुरंत रूचि को अपने निचे किया और वो रूचि के ऊपर हो गया लुंड को रूचि के अंदर रखे हुए hi….

क्यूंकि विहान बहोत ज़्यादा उत्तेजित हो गया था और उस से सब्र नहीं हो रहा था तो बिल्कुल भी देर नहीं लगा बुसस कुछ धक्कों के बाद hi विहान झड़ने को आया कमर हिलाते हुए, ज़बरदस्त ढाका देते हुए, रूचि के गर्दन और बूब्स चूस्ते हुए उस्सको जल्दी से अपने लुंड को बाहर निकालना पड़ा ेजकुलाते होने के लिए……

उस दौरान रूचि जैसे सातवे आसमान पर जा चुकी थी, अपने होश ो हवास में बिल्कुल नहीं थी जिस वक़्त से विहान ने उस्सको पेनेत्रते किया था रूचि कहीं खो गयी थी विहान को अपने अंदर महसूस करते हुए, ेंखों को बांध करके वो लुफ्त उठा रही थी विहान के जिस्म से अपनी जिस्म को उस तरह से मिला कर एक करते हुए रूचि किसी और दुन्या में थी, के उस्सको पता hi नहीं चला के कब विहान उस्सकी गहराई से निकल भी चूका था और जब विहान के गरम वीर्य रूचि के पथ के ऊपर कतरों में गिर्री तब उस्सको पता चला के विहान झाड़ रहा था उसस्के ऊपर…..

दोनों हांफ रहे थे, और अब एक दूसरे के चेहरे में प्यार से देख रहे थे, विहान के चेहरे में वो ख़ुशी देख कर रूचि को बड़ा ाचा लगा और वो एहि देखना चाहती थी, जैसे एक ग़रीब को उस्सने खाना खिला दिया था, एक प्यासे को सेहरा में जैसे पानी पीला दिया था उस्सने उस वक़्त तो रूचि को ख़ुशी हो रही थी विहान को इतना ख़ुशी देकर…. वो खुश थी के विहान को उस्सने खली हाथ नहीं लौटाया, वो संतुष्ट थी के उस्सने विहान को वो दे दिया जिस्सकी उस्सको ज़रुरत थी उस वक़्त.

बिस्तर पर बैठ कर अपने बालों को समेटते हुए रूचि अब बालों में एक बंद लगा रही थी और विहान बीएड पर लेट कर उस्सकी जिस्म को निहार रहा था, वही कर्व्स, वही गदराये बदन, वही मुलायम बूब्स जो उस्सने हर बार अशिता के देखे थे, वही जिस्म की गर्माहट, वही जिस्म की खुशभू… आज विहान को किसी और के साथ भी वही चैन और सुकून हासिल हुई थी जो सिर्फ अशिता से होते थे, वो सोचने लगा के सिर्फ एक लड़की के जिस्म के अंदर जाने के लिए क्यों उस्सको इतना कुछ करना पड़ा, क्यों उस्सको इतनी ज़रुरत महसूस हुई रूचि के जिस्म की गहराई में उतरने के लिए, और क्यों रूचि ने इतनी आसानी से सब कुछ होने दिया, और सबसे बड़ी बात विहान यह सोच रहा था के रूचि यह सब पहले कर चुकी है, रूचि वर्जिन नहीं थी!!!

लेकिन उस्सकी वर्जिन नाह होने से विहान को ज़रा सा भी फरक नहीं पड़ा था. उस्सको कोई परवाह नहीं था के रूचि वर्जिन हो या नहीं, उस्सको बुसस अपनी ज़रुरत पूरा करना था जो हुआ, और इस वक़्त रूचि को अपने निघ्त्य पेहेनते हुए देख रहा था खुद उस्सकी बीएड पर लेते हुए और निहारे जा रहा था रूचि की अदाओं को, उस्सकी कोमलता को, उस्सकी नरम मिज़ाज को, उस्सकी जान लेवा मुस्कराहट को….

और जब रूचि ने कपडे पेहेन लिए तो विहान से कहा,

“नाउ यू मस्ट जो सर!”

विहान ने उस्सको बाहों में भर लिया अपने ऊपर बीएड पर खिंच कर. वो अब भी नंगा था, रूचि उसस्के जिस्म के ऊपर थी और विहान ने उसस्के कानों में कहा,

“तुम्हारे साथ hi सो जाने को मैं कर रहा है अब तो!”

रूचि ने आराम से मुस्कुराते हुए कहा,

“आप को जो चाहिए था वो तो अब मिल गया आप को, अब मेरे लिए मुसीबत मत बनिए, मेहेरबानी करके अब आप जाइये, सोना भी तो है नाह, और वहां आप ने घर को बाहर से लॉक नहीं किया हुआ है, वापस जाइये जल्दी कहीं कोई चोरर नाह घुस जाए आप के दादा जी के घर में!”

विहान ने एक छोटे बचे की तरह मुंह बनाते हुए कहा,

“मुझे सिर्फ यह चाहिए था? नहीं तो; मुझे तुम चाहिए फुल, कम्प्लीटली, अब यह करके तुम्हारा साथ और भी ज़्यादा चाहिए मुझे, हर रोज़ चाहिए मुझे यह तुमसे अब तो!”

रूचि ने उस्सको प्यार से किश करते हुए कहा,

“हर रोज़ तो मुमकिन नहीं हाँ कहभी कभी मिल सकता है यह आप को! – अब टाइम देखिये आप, 1.30 हो गए हैं, सुबह उठना है नाह, कल आप का कॉलेज में पहला दिन है, सुबह हम बस स्टॉप पर मिलते हैं नाह, अब आप जाओ, मुझे भी सोना है अब. बुसस इतना बताते जाओ के आप खुश हुए के नहीं?!”

विहान ने बहोत ज़ोर से रूचि को बाहों में जाकर कर कहा,

“यह भी कोई पूछने की बात है के मैं खुश हुआ के नहीं दिख नहीं रहा तुम्हें के मुझको जैसे दुन्या भर की दौलत मिल गयी इस एक पल में, मैं ने तो सिर्फ तस्सवुर किया था के ऐसा कुछ होगा आने से पहले रास्ते में बुसस एक ख्याल आया था के तुमको निघ्त्य में देखूंगा तो तुमसे हमबिस्तर हो सकूंगा, सच में ऐसा होगा इस्सकी तो उम्मीद नहीं थी बिल्कुल, बस दिमाग़ में सोचा था ऐसा कुछ…. तुमने उस सपने को पूरा करके मुझे इतनी ख़ुशी दिया है के मैं बयां नहीं कर सकता…. प्यार हो गया मुझे तुमसे रूचि, बहोत प्यार हो गया है तुमसे… नहीं रह पाउँगा अब तुम्हारे बिना…. मत भेजो नाह मुझे, तुम्हारे साथ hi सोने दो नाह!”

रूचि ने विहान को उस्सकी टीशर्ट पहनाते हुए, और उस्सकी ट्रॉउज़र उस्सको देते हुए कहा,

“पागल हो आप किआ? नतीजा सोचा है किआ होगा अगर यहाँ सोये तो? इधर भाई और भाबी, उधर आप का दादा, उफ़ किआ इम्पॉसिबल बात कर रहे हैं हम बुसस चलिए जाइये अब…… और सुनए दरवाज़े से नहीं इस खिरकी से बाहर कूद जाइये, फिर कभी आना हो तो यहीं इसी विंडो के पास आना तब मैं अंदर से ओपन करुँगी और आप अंदर आ जाना…. मगर जब तक फ़ोन से तय नहीं करुँगी के हाँ आ सकते हो तब तक कभी भी मत आना समझे आप!”

विहान खुश हुआ यह सुनकर के फिर कभी भी आ सकता है, और ख़ुशी से मुस्कुराकर कहा,

“वाओ, मस्त आईडिया है, यस याआह!! ऑफ़ कोर्स बेस्ट होगा ऐसे आना विंडो क्रॉस karke…how रोमांटिक एंड अडवेंचरउस है नाह?!”

रूचि ने कहा,

“जाने से पहले एक और वादा करना होगा आप को अभी इसी वक़्त.”

विहान ने रूचि के गाल को चूमते हुए कहा,

“कोई भी वादा लेलो, मैं वाडे का पक्का हूँ”

“तो प्रॉमिस करो के बिना मुझे बताये कभी भी इस खिरकी के पास नहीं आओगे, जब तक मैं फ़ोन से हाँ नाह कहूं कभी भी यहाँ नहीं दिखोगे कभी भी नहीं! प्रॉमिस में अस ा मन”

विहान ने रूचि को प्रॉमिस किया के कभी भी वहां नहीं आएगा जब तक वो नाह कहे. और खिरकी से बाहर निकल गया. बाहर अन्डेहरा था इस लिए अपने मोबाइल की टोर्च को ों किया कुछ दूर तक चलते हुए और वापस जाने लगा. रूचि ने खिरकी वापस बांध कर ली.

अब जाते वक़्त विहान सोचने लगा और खुद से कहा,

“तो मेमसाब की कोई आशिक ज़रूर है पहले से और वो बताना नहीं चाहती. वर्जिन तो नहीं है यह पक्का है इसी लिए पहले मुझसे वादा लिया के सब कुछ करने के बाद मैं उस से कोई सवाल नाह करूँ. मतलब उस्सको पता था के मुझे पता चल जाएगा के वो वर्जिन नहीं है तो ऑब्वियस्ली मेरा सवाल एहि होता के तुम ने किसी से पहले भी सेक्स कर लिया है तो इस सवाल को प्रॉमिस से रोक लिया पहले hi उस्सने….. मगर किश के साथ सेक्स करती होगी रूचि? देखने में तो इतनी भोली और मासूम दिखती है के कोई भी यह नहीं सोच सकता के यह सेक्स भी करती है….. वाओ किआ लड़की है यार!!! चलो कोई बात नहीं मेरा तो मज़ा hi मज़ा है अब…. मगर साला यह दिल चाहने लगा है उससे….. प्यार जैसा हो गया है उस से….. अशिता को अगर पता चला के मैं ने किसी और लड़की के साथ सेक्स किया तो मार डालेगी मुझे… धोका दिया मैं ने अशिता को अभी नाह? ओह माय गॉड… अशिता को कभी भी नहीं पता चलना चाहिए इस बात का….. मुझे माफ़ करना आशु मुझसे रहा नाह गया…..”

तो बे कॉन्टिनोएड…… (4001 वर्ड्स)
 
अपडेट 74-फर्स्ट डे ात कॉलेज

सुबह जल्दी उठ गया था विहान क्यूंकि तैयार होकर कॉलेज जाना था. नाहा धोकर, शेव करके नया डार्क ब्लू पंत और एक वाइट शर्ट पहना और एक डार्क रेड टाई. ब्लैक शूज, वाच कलाई में, एक फाइल लिया और एक हाथ में दो बुक्स, फाइल में उसस्के सर्टिफिकेट्स वग़ैरा थे.

दादा जी और दादी से आशीर्वाद लिया, पूजा के प्रसाद लिए जो चची ने दिए और निकल पड़े अशिता से बात करते हुए क्यूंकि उस वक़्त अशिता बस में थी कॉलेज जाते हुए.

घर के द्वार पर दादा जी अपने मंच को सीधा करते हुए गर्व से विहान को जाते देख रहा था. उसस्के लिए बहोत बड़ी और ख़ुशी के बात थी.

विहान जब तक बस स्टॉप रीच हुआ उधर अशिता कॉलेज जा चुकी थी तो अब विहान रूचि की राह देखने लगा कल रात की एनकाउंटर को याद कटे हुए. वो सोचने लगा था किश तरह से रूचि ने उस्सको चूमा छठा था और कितनी एक्सपेरिएंस्ड लग रही थी सब करते हुए रात को. विहान यकीन नहीं कर रहा था; जैसे कल रात एक सपना देखा वैसा लग रहा था उस्सको.

हर सुबह को फूलवती अपने घर के सामने रूचि का वेट करती है, और रूचि उसस्के घर के पास रीच होती तब वहां से दोनों चल कर बस स्टॉप तक आते हैं एक साथ. कभी भी किसी ने रूचि को अकेली चलते हुए नहीं देखा कॉलेज जाते वक़्त. सिर्फ उस हिस्से को अकेली आती है, अपने घर से फूल के घर तक बाकी हमेशा रूचि के साथ फूलवन्ती होती है. मगर संदेस को मंदिर जाती है तब अकेली होती है, जैसे पहली बार विहान ने उस्सको मंदिर से निकलते देखा था, उस रोज़ वो एक हाफ साडी में थी और इस वक़्त विहान उस्सको उस ड्रेस में सोच hi रहा था के रूचि, फूलवन्ती और इस गाओं वाली एक लड़की आते हुए दिखाई दिए उस्सको कोई 300 मेट्रेस ेंखों के सामने.

अब जहाँ बस रूकती थी वो एक चौराहा जैसा था वहां से 4 नहीं बल्कि 6 सड़क एक दूसरे के बगल में थे, सब लगभग कच्चे सड़क थे सिर्फ एक ाचा था जिस से बस गुज़रता था. तो जिस सड़क से रूचि, फूलवती और तीसरी लड़की आ रहे थे उसस्के दोनों तरफ बड़े बड़े दरखतें थे, दोनों साइड में, और उन पेड़ों के पीछे जंगल थे फिर जंगल के उस तरफ दूसरे गाओं थे, उस इलाके में जहाँ विहान का दादा रहता था कुल मिलाके 7 गाओं थे दूर दूर तक. सब छोटे छोटे गाओं थे, एक यह गाओं उन् सब गाओं से बड़ा था और जैसे एक मैं गाओं था.

उस दूरी से रूचि ने भी विहान को देख लिया था क्यूंकि बस स्टॉप पर आज वो अकेला खड़ा था.

फूलवती ने जब 300 मेट्रेस दूर से विहान को देखा नए पंत और वाइट शर्ट और टाई में तो रूचि से कहा,

“अरे वाओ देख कितना हैंडसम लग रहा है, टाई पहना है आज तेरे सर ने तो, बिल्कुल साहब लग रहा है, हीरो के जैसा दिख रहा है नाह रूचि हम्म?”

तब उस तीसरी लड़की ने पूछा,

“कल कॉलेज आया था वो, हमारे कॉलेज में पढ़ाने ा रहा है किआ फूल?”

फूल ने जवाब दिया,

“आरी तुझे नहीं पता किआ? फ्रेंच पढ़ाने ा रहा है, रूचि का टीचर और लवर भी है, आशिक हो गया है रूचि का यह नया टीचर हीहीहीही!”

तीसरी लड़की ने कहा,

“वो तो मैं ने पहले hi दिन से देख लिया के वो रूचि का दीवाना है, बस में कल कैसे चेरर रहा था रूचि के पास बैठ कर, क्यों रूचि?!”

रूचि सर निचे झुकाये अपने दोनों सहेलियों को सुनते हुए चल रही थी मुस्कुराते हुए और कल रात को विहान के साथ जो कुछ किया वो सब सोचते हुए उसस्के तरफ बस टॉप पर पहुँच रही थी.

विहान रूचि को अपने तरफ आते हुए देख रहा था, और उस्का मैं किया के फिर से कल रात की तरह बाहें फैला दे उस्सको अपनी बाहों में जकरने की लिए, अपनी यूनिफार्म में अलग hi दिख रही थी रूचि, कल रात वाली बीएड पर सेक्सुअल एनकाउंटर वाली लड़की बिल्कुल नहीं दिख रही थी. अभी उस्का एक अलग hi रूप था. विहान खुद यकीन नहीं कर पा रहा था के कल रात इस लड़की के साथ उस्सकी बिस्तर पर वक़्त बिताया था उस्सने. अगर विहान किसी से भी यह कहे के कल रात वो रूचि के साथ उस्सकी बीएड पर उस्सको छोड़ रहा था तो कोई भी यकीन नहीं करेगा, लोग कहेंगे के फेंक रहा है….

अगर इस वक़्त विहान के साथ उस्का कोई दोस्त होता और उस दोस्त से विहान कहता,

“देख उस लालड़की को आते हुए, रूचि, कल रात मैं ने उस्सको खूब छोड़ा उसी की कमरे में रात को बारह बजे उस्सने मुझे रिसीव किया था और खिड़की से बाहर निकलने को कहा था उस्सने….”

तो विहान का दोस्त कहता, “चल बे फेंकना बांध कर!”

जब रूचि कुछ करीब आगयी तो एक नज़र ऊपर उठा कर विहान को देखा, फिर नज़रें झुका लिए उस्सने और एक हल्का सा मुस्कराहट थी उस्सकी चेहरे पे, वो अभ भी चल रही थी, बिल्कुल पास नहीं रीच हुई थी…. उस पल को अचानक विहान के दिमाग़ में यह बात आयी के किश के साथ रूचि और सोती होगी, तब तक रूचि उसस्के पास आगयी और धीरे से विहान को hello कहा निचे देखते हुए, उस से नज़रें नहीं मिला रही थी….

बाकी के दो लड़कियों ने विहान को एक आवाज़ में “hello सर “ कहा.

विहान ने उन् दोनों को “गुड मॉर्निंग“ कहा और रूचि के चेहरे में देखते हुए पूछा,

“क्यों डिअर, सिर्फ hello? मैं ने सोचा था एक किसी मिलेगा गाल पर ात लीस्ट!”

यह सुनकर फूलवती और तीसरी लड़की हंस पड़े और फूल ने कहा,

“आरी हाँ तू तो एक किसी दे भी सकती है अपने सर को, अगर तू नहीं देती तो मैं तेरी जगह सर के गाल पर एक चिपका दूँ किआ बोल नाह!”

तब तीनों हंस पड़े और रूचि ने अपने केहुनी से फूल को मारा उसस्के बाज़ू पर.

और फूलवट्टी बोली,

“चल यार आज के बाद मैं तो तेरे पास नहीं बैठ सकती क्यूंकि तुझको तो सर मिल गया साथ बैठने के लिए बस में अब, हमारी बस में बैठने की जगह बदल गया आज से तो!”

विहान ने फूलवन्ती से कहा,

“अरे नहीं अगर चाहो तो तुम उसी के पास बैठो, मैं उस से कॉलेज में मिलता hi रहूँगा नाह क्लासेज में भी!”

जब विहान फूलवती को यह बात कह रहा था तो रूचि ने सर उठाकर विहान के चेहरे में देखा. और विहान को पता चला के उस बात पर रूचि उस्सको देख रहा था इस लिए उस्सने झुक कर रूचि के कान के पास कहा,

“मैं नहीं चाहता के अब कॉलेज में यह बात फैले, यह फूल सबको बता देगी हमारे बारे में!”

रूचि ने कहा,

“नहीं बताएगी मैं ने मन किया है उससे!”

तो विहान ने पूछा,

“और वो दूसरी लड़की वो नहीं कहेगी सब से?”

रूचि ने फिर कहा,

“नहीं उस से भी कह दिया है मैं ने के मेरे और आप केक बारे में किसी से कुछ नाह कहें, तो नहीं कहेगी वो भी!”

बस आगया और सब अंदर गए, रूचि और विहान एक सीट पर बैठे और विहान ने फिर तीनों के फारस पाय किया.

बस जाने लगे तो विहान ने आज रूचि का हाथ अपने हाथ में जकरा और आज रूचि ने हाथ नहीं खिंचा बल्कि उस्सने भी विहान के उँगलियों को अपनी मुठी में कसके जाकर लिया.

रूचि ने धीरे से कहा,

“आप आज कुछ ज़्यादा hi हैंडसम लग रहे हो, यह वाइट शर्ट और डार्क रेड टाई बहोत hi सूट कर रहा है आप पर. एक कोट भी पहनना चाहिए था नाह?”

विहान को अपने गर्दन को झुका कर उस्सको रिप्लाई करना पर रहा था क्यूंकि उस्सकी ऊंचे कद की वजा से अगर सीधा बैठ कर रिप्लाई करता तो बाकी लोगों को उस्का जवाब सुनाई देता, तो उस्सने कहा,

“ड्रेस कोड में कोट ओब्लिगेटरी नहीं है, सिर्र्फ टाई लिखा हुआ है, वैसे कोट मुझको पसंद भी नहीं और यह टाई भी डिस्टर्ब कर रहा है, आदत नहीं है पेहेन्ने की…. क्लास में जाते hi शायद निकल लूंगा टाई को भी…”

रूचि ने धीरे से कहा,

“नाह, मत निकालना बहोत hi अच्छे दिख रहे हो, साहब लग रहे हो आप”

विहान मुस्कुराया और रूचि के कान में कहा,

“रात को आराम से नींद आयी नाह मेरे जाने के बाद? मैं ने सोचा था एक गुड नाईट वाली मैसेज सेंड करोगी!”

रूचि ने भी मुस्कुराते हुए कहा,

“मैं तो वेट कर रही थी के आप विश करोगे मुझे तब मैं रिप्लाई करती, मगर आप ने नहीं किया तो मुझे नींद आगयी, हाँ आराम से नींद आयी और मैं बहोत खुश थी कल रात को, थैंक यू.”

विहान ने पूछा,

“थैंक यू क्यों?”

रूचि ने जवाब दिया,

“मुझे इतनी ख़ुशी देने के लिए”

विहान: “मगर थैंक यू तो मुझे बोलना चाहिए, बेग तो मैं ने किया था के मुझे ज़रुरत है और ज़रुरत तो तुम ने मेरी पूरी की थी नाह?”

रूचि ने सर नाह में हिलाते हुए सर झुका कर कहा,

“नाह, ख़ुशी आप ने मुझे दिया कल रात को, आप की उस ज़रूरत में मेरी भी ज़रुरत पूरी हुई, थैंक यू अगेन!”

विहान रूचि के चेहरे में कुछ देर घुररता रहा सोचते हुए के किआ ख़ुशी दिया उस्सने रूचि को? उस्सने तो अपने जिस्म की प्यास को बुझाया था….. रूचि की तो शायद ओर्गास्म भी नहीं हुई थी क्यूंकि वो बहोत hi जल्दी झाड़ गया था तो कौन सी ख़ुशी की बात कह रही थी वो! विहान सोचता रहा मगर सवाल नहीं किया कोई रूचि से.

कुछ देर बाद रूचि ने कहा,

“आप की वाच भी आप के कलाई में बहोत खूबसूरत लग रहे हैं कल भी मई देख रही थी”

विहान ने खुद अपने वाच को देखते हुए कहा,

“और मैं तुम्हारी कलाई के चूड़ियों को देख रहा था कल और अब भी कहना है के बेहद खूब सूरत लगते हैं यह तुम्हारे कलाई में हमेशा ऐसे चूड़ियों को पेहेनना तुम आईटी सुइट्स यू प्रीटी वेल, तुम्हारी गोरी गोरी कलायिओं में ये लाल और हरे हरे चूड़ियां वाओ, यू लुक गॉर्जियस….”

रूचि उस तरह से अपने बारे में तारीफ सुनकर थोड़ा ब्लश किया और दांतों में अपने होंठ को दबा लिया.

विहान ने नोट किया के रूचि के कलाई में वाच नहीं थे, तो सोच लिया के एक वाच खरीदेगा और उस्सको गिफ्ट करेगा मगर कुछ नहीं कहा रूचि से उस्सको सरप्राइज गिफ्ट देगा सोचा विहान ने.

फिर कुछ देर बाद विहान ने रूचि के कान में कहा,

“तुमको बाँहों में भरने को मैं कर रहा है, कैसे करूँ बस में?!”

रूचि ने उसस्के उँगलियों को और ज़ोर से दबाते हुए सर निचे झुका कर कहा,

“सस्शह्ह्ह ऐसे बातें तो मत कीजिये बस में प्लीज!”

विहान ने पूछा,

“किआ कॉलेज में यह मौका मिल सकता है तुमको बाहों में ले सकूँ या किश कर सके हम?!”

रूचि ने सर झुका कर ख़ुशी से मुस्कुराते हुए, बल्कि थोड़ा सा हँस्ते हुए कहा,

“ठीक है मौका नज़र आया तो आप को बताउंगी कॉलेज में”

और ऐसे hi प्यार में डूबे, प्यार की बातें करते हुए बस शहर आगया और सब बस से उतरे और कॉलेज की यार्ड में दाखिल हुए.

सिर्फ 10 मीन्स बाकी रहता था क्लासेज शुरू होने में हर रोज़ जिस टाइम को बस वहां रीच होता था.

विहान ने रूचि से कह दिया के बाद में मिलेंगे क्यूंकि उस्सको ऑफिस में ज्वाइन करना था कुछ पेपर वर्क्स करने थे ऑफिशियली.

विहान ने रूचि को यह नहीं बताया था के वो खुद भी पढ़ने वाला था मगर उस्का पढ़ना अलग था, उस्सको क्लासेज में नहीं जाना था बाकी के स्टूडेंट्स के साथ मगर उस्का अलग इंतज़ाम किया गया था हर रोज़ के लिए क्यूंकि फ्रेंच क्लास तो पुरे दिन नहीं होनी थी तो कॉलेज की एडमिनिस्ट्रेशन वालों ने विहान के फ्री टाइम के हिसाब से उस्सकी ट्यूशन और कोर्स के इंतज़ाम किये थे, यह देखते हुए के जो टीचर उस्सको ट्यूशन देंगे क्रैश कोर्स के लिए वह भी उस वक़्त फ्री हो जब विहान फ्री होता हो!! एडमिन्स ने सब इंतज़ाम कर दिए थे इस मामले को लेकर.

क्लासेज स्टार्ट हुई तो विहान को लोअर क्लासेज में फ्रेंच सीखना था. रूचि 12 में थी, और उस वक़्त विहान 10तह की स्टूडेंट्स के साथ था क्लास में…. विहान को एक टाइम टेबल दिया गया था उस हिसाब से उस्सको क्लासेज ज्वाइन करने थे. और रूचि की फ्रेंच क्लास आफ्टरनून में था. वही टाइम टेबल रूचि को भी मिला था और हर फ्रेंच स्टडी करने वाले स्टूडेंट्स को भी. तो सब को पता था के किश टाइम को विहान के क्लास में जाना है.

रूचि को भी पता हो गया था के आफ्टरनून में वो विहान के क्लास में जाएगी और 3 पीरियड्स एक साथ थे 12तह के स्टूडेंट्स की क्यों के उनको 12तह करना था लास्ट ईयर था, इस लिए हर रोज़ रूचि की 2 या 3 पीरियड्स थे फ्रेंच क्लास की. कुल मिलके विहान को हर रोज़ सिर्फ 5 पीरियड्स टीच करना था बाकी खुद अपना कोर्स लेना था, और हफ्ते में दो दिन सिर्फ 3 पीरियड टीच करना था.

टोटल 34 स्टूडेंट्स थे फ्रेंच पढ़ने वाले. 12 स्टूडेंट्स 10तह क्लास से थे, वो एक पीरियड. 11तह क्लास के सिर्फ 9 स्टूडेंट्स थे, वो एक पीरियड. और 12तह में 13 स्टूडेंट्स थे और इस क्लास की पीरियड को डिवाइड किया गया था हफते में किसी दिन 3 पीरियड्स तो किसी दिन 2 पीरियड्स थे. मतलब रूचि के साथ ज़्यादा लम्बा टाइम क्लास लेना था विहान को और सिर्फ 13 स्टूडेंट्स थे उस क्लास में और सिर्फ 2 लड़के थे बाकी सब लड़कियां. लैंग्वेज क्लासेज में अक्सर देखा गया है के लड़कियों की संख्या ज़्यादा होते हैं.

लंच टाइम में विहान कैंटीन से कुछ खाने के लिए खरीदने गया और रूचि को ढूंढ रहा था. मगर वो कहीं नहीं दिखी तो उस्सको कॉल किया विहान ने. तब पता चला रूचि कभी भी कैंटीन नहीं जाती, कॉलेज के पीछे वाले हिस्से में फूलवती के साथ रहती है हर रोज़.

बेशक विहान वान गया उस से मिलने. विहान को हैरानी हुई के वहां सिर्फ रूचि और फोल्ल्वात्ति थे और कोई भी नहीं था. उस्सने सोचा था के बहोत सारे स्टूडेंट्स होंगे चारों तरफ मगर विहान हैरान रह गया. वो जगह एक ल शेप का था, वहां से कॉलेज की कैंपस दिख hi नहीं रहे थे; जैसे वो एक सीक्रेट प्लेस था.

विहान उन् दोनों के साथ कुछ देर रुक कर बात किया तो फूलवट्टी ने बताया के उस जगह पर ख़ास कर लड़के लड़कियां जो लव में हैं वहां किश विस्स करने आते हैं छुप कर जब कोई नहीं आता वहां. मगर जब रूचि और फूलवट्टी वहां रहते हैं तो कोई भी नहीं अत. विहान ने फूलवती के बातों को सुनकर एक ेंख मारा रूचि को. ेंख मारने का मतलब साफ़ था के विहान रूचि को किश करना चाहता था और वो जगह सही था दोनों के लिए…..

अब किआ जान बुझ कर रूचि वहां रुकी थी के विहान उस्सको ढूंढ़ते हुए वहां आये और किआ फूलवती और रूचि के बिच यह बात हो गयी थी पहले से के विहान रूचि को किश करना चाहता था इस लिए दोनों की मिली भगत थी के विहान को वहां बुलाया जाए ताके उस्सको रूचि को बाहों में जकरने और किश करने का मौका मिले? यह रूचि और फूल hi जाने के किआ पकाया था दोनों ने मिलकर. मगर हुआ यह के फूल ने कहा,

“मैं वहां कड़ी वाच करती हूँ अगर कोई आये तो सिग्नल करुँगी तुम दोनों लगे रहो!!”

तो रूचि ने विहान का हाथ पकड़ा और उस ल शेप कार्नर में लगाई जहाँ से फूल भी नहीं नज़र आरहे थे, मगर उस्सकी आवाज़ साफ़ सुनाई देगी जब वो किसी के आने पर कहेगी तो…..

खड़ा होना था दोनों को और रूचि ने खुद अपने बाहों को विहान के काँधे पर करके उस्सको अपने बाहों में जाकर लिया और विहान को उसी ने किश किया, विहान तो नया था कॉलेज में तो उस्सको पता नहीं था के वो जगह सेफ है या नहीं और थोड़ा घबराया सा था उस वक़्त.

मगर जब विहान ने रूचि की जिस्म को अपने जिस्म से उस तरह से चिपके हुए पाया तो खुद बा खुद उस्सने भी अपने होंठों को रूचि के मुंह पर किया और एक दूसरे को जाकर हुए दोनों एक लम्बी किश में खो गए….. रूचि ने धीरे से कहा,

“मुझे आप से मिलने का बहोत मैं कर रहा था सुबह से….”

विहान ने कहा,

“मुझे भी, मैं इस इंतज़ार में था के कब तुमको अपने बाहों में ऐसे जकरून….” और फिर दोनों के मुंह एक दूसरे में खोये रहे काफी देर तक, एक दूसरे का हाथ एक दूजे के जिस्म पर फरने लगे थे और विहान निचे रूचि के जिस्म पर अपना दबा रहा था हलके हलके रघड़ते हुए, दोनों के सांसें बढ़ने लगे थे दिल की धड़कनें तेज़ होने लगे थे के अचानक फूल की आवाज़ आयी,

“हो गया के नहीं लंच टाइम एन्ड होने को है आशिको!”

उस्सकी आवाज़ सुनकर रूचि की हंसी चुत पड़ी और दोनों उस ल कार्नर से निकले फूल के तरफ बढ़ कर उस्सको थैंक्स करते हुए…..

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2902 वर्ड्स)
 
अपडेट 75 थे क्लास

लंच के बाद विहान की फ्रेंच क्लास 12तह के स्टूडेंट्स के साथ था मतलब रूचि के साथ.

सभी स्टूडेंट्स प्रेजेंट थे तो विहान ने सब को एक एक करके वाइट बोर्ड पर अपने नाम सुर्नामे के साथ लिखने को कहा फ्रेंच में खुद को इंट्रोडस करते हुए.

सब ने अपने नाम इस तरह से लिखे

“जे सुइस क्सक्सक्सक्सक्स क्सक्सक्सक्सक्स” (मैं क्सक्सक्सक्सक्सक्स क्सक्सक्सक्स हूँ”

या किसी ने ऐसा लिखा

“जे m’appelle क्सक्सक्स क्सक्सक्स” (मेरा नाम क्सक्सक्स क्सक्सक्स है)

विहान ने रूचि को लास्ट में वाइट बोर्ड पर जाने को कहा और रूचि ने लिखा,

“जे m’appelle रूचि दासगुप्ता” (मेरा नाम है रूचि दासगुप्ता)

यह पहली बार था जब विहान को रूचि की सुर्नामे का पता चला, और यह सुर्नामे सुनकर विहान को लगा के वो इस सुर्नामे को जानता है, सुना हुआ है कहीं, या कभी, मगर कब और कैसे और कहाँ?

जब रूचि अपना नाम लिख रही थी उस वक़्त विहान क्लास में उस्सकी जगह पर बैठ कर उस्सको लिखते हुए देख रहा था और उस्सकी हैंडराइटिंग अदमीरे कर रहा था, उस्सकी हैंडराइटिंग बहोत खूबसूरत थी.

सुर्नामे जान्ने के बाद कुछ देर तक विहान सोचता रहा याद करने की कोशिश करते हुए के उस्सने यह दासगुप्ता सुर्नामे कहाँ सुना है या पढ़ा हुआ है, ऐसा लग रहा था विहान को जैसे एक बहोत बड़ा जाना पहचाना हुआ नाम है जैसे एक नेता की या एक मशहूर एक्टर, या क्रिकेट प्लेयर या किसी जाने मने हस्ती की….

क्लास लेना था तो उस्सको अपने क्लास पर ध्यान देना था इस लिए उस्सने उस सुर्नामे को उस वक़्त इग्नोर किया और वापस अपने क्लास के सामने गए और स्टूडेंट्स से फ्रेंच ग्रामर के बारे में कुछ लेसंस दिए और आखिर में वापस क्लास के सामने बुलाया रूचि को hi कुछ लिखने के लिए.

एक डिस्कशन चल रही hi क्लास में 2 वर्ड्स को लेकर और उस्सको क्लियर करने के लिए विहान ने रूचि को व्हाइटबोर्ड पर कुछ लिखने को कहा फ्रेंच में. लिखना यह था – ी लव यू - मगर फ्रेंच में. विहान ने जान बुझ कर रूचि को पहले लिखने को बुलाया क्यूंकि उस्सको पता था के रूचि कैसे लिखेगी और उसस्के बाद उस्सने एक लड़के को बुलाया वही लिखे के लिए फ्रेंच में hi.

विहान ने रूचि को इस लिए पहले लिखने को कहा क्यों के जिस मुद्दे पर बेहेस हो रहे थे वो था दो लव्ज़ (आप) और (तुम या तू) इन् दो लव्ज़ों को फ्रेंच में कहने और लिखने के बारे में डिसकस किया जा रहा था…. तो क्यूंकि रूचि विहान को आप कहकर बुलाती है इस लिए विहान को पता था के रूचि ी लव यू लिखेगी तो आप वर्ड उसे करेगी, और वो लड़का तू वर्ड उसे करेगा. तो नतीजा यह हुआ लिखने के बाद; रूचि ने यूँ लिखा

“जे वॉयस ैमे” – मतलब “मैं आप से प्यार करती हूँ

और लड़के ने लिखा,

“जे t’aime” – मतलब “मैं तुम से प्यार करता हूँ”

तो विहान ने दोनों को वापस बैठने को कहा और क्लास के सामने समझाने गया, और कहा,

“जैसे के हम हिंदी में किसी को आप कहकर बात करते हैं, फ्रेंच में आप को वॉयस कहते हैं, और जब तू टरका करके बात करते हैं उस्सको फ्रेंच में तू कहा जाता है, मगर फ्रेंच वाला तू प्राणोँके अलग किया जाता है जैसे चिउ. अब वॉयस सेकंड पर्सन प्लुरल भी होता है और तू सेकंड पर्सन सिंगुलर – तो जैसे के आप लोगों ने देखा के एक hi सेंटेंस को इन् दोनों ने लिखा मगर डिफरेंट तरीके से लिखा हुआ है और दोनों सहीह है. रूचि ने आप मतलब सेकंड पर्सन प्लुरल उसे किया और इस लड़के ने सेकंड पर्सन सिंगुलर उसे किया, दोनों का मतलब एहि है के ी लव यू. अब हैरानी की बात यह है के इंग्लिश में आप वर्ड नहीं है. थर्ड पर्सन प्लुरल है hi नहीं ेंगिस में. इंग्लिश में सेकंड पर्सन सिंगुलर भी यू है और सेकंड पर्सन प्लुरल भी यू hi है! हिंदी, उर्दू और फ्रेंच में थर्ड पर्सन प्लुरल होते हैं और जैसे हम किसी बड़े की इज़त करते हुए उस्सको आप कहकर बुलाते हैं उसी तरह फ्रेंच में भी वॉयस किसी को इज़्ज़त देने से इस्तेमाल किया जाता है, किसी बड़े को या किसी अजनबी से बात कारण तो वॉयस कहकर बात करते हैं.

अब जैसे के फर्स्ट सेकंड एंड थर्ड पर्सन ऑफ़ इंग्लिश सिंगुलर हैं

ी am-YOU अरे - HE/SHE इस

और फर्स्ट सेकंड और थर्ड पर्सन प्लुरल हैं,

वे अरे – यू अरे -थे अरे --- ेंडलीश में इस यू को अब आनरेरी यू कहा जाता है, और पहले यू को इंटिमेट यू…..

तो जैसे के आप लोगों ने देखा के इंग्लिश में सेकंड पर्सन सिंगुलर और सेकंड पर्सन प्लुरल दोनों में यू है, मगर हिंदी, उर्दू और फ्रेंच में सेकंड पर्सन प्लुरल VOUS/AAP है….

होप ी ऍम क्लियर एनफ एंड यू गोत आईटी नाउ डिअर स्टूडेंट्स.”

सभी स्टूडेंट्स इन्क्लूडिंग रूचि बड़े दिलचस्पी से सुन रहे थे और विहान को उस तरह से एक्सप्लेन करते हुए क्लास के सामने अदमीरे कर रहे थे. रूचि उस वक़्त जैसे विहान की और भी दीवानी हो गयी. विहान एक बहुत hi अच्छा टीचर साबित हुआ.

क्लास के बाद सभी स्टूडेंट्स ने अपने आप में बात किये के उनको एक बेस्ट टीचर मिल गया इस बार और उनको पूरा यकीन था के फ्रेंच में बाध्य मार्क्स मिलेगा सबको. सब बहोत खुश थे ऑफ़ कोर्स रूचि भी.

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शाम को कॉलेज रिलीज़ होने के बाद रूचि और विहान एक साथ बस में वापस लौटे और विहान ने चल कर रूचि को करीब उसस्के घर तक चौररने गया पहले दिन की तरह, उतने hi दूर तक गए के रूचि ने उस्सको मुड़कर वापस जाने को कहा…

अब वहां से जब विहान वापस लौट रहे थे तो फूलवती विहान का वेट कर रही थी अपने आँगन में. विहान करीब आया तो फूल ने उस्सको चेररते हुए कहा,

“क्यों सर जी चोरर ए अपनी गर्लफ्रेंड को? हमारे तरफ भी थोड़ा निगाहें करम करते जाइये नाह!”

विहान रुक गया फूलवती के आंगन के सामने और पूछा,

“तुम्हारे घर पर कोई नहीं है? मुझसे बात कर रही हो तो तुमको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी एक लालड़के से बात करने से?”

फूलवती: अरे सर आप कोई थोड़े hi हो? आप तो मेरे टीचर हो, तो टीचर से कौन मुझे मन करेगा बात करने को भला? वैसे मैं अकेली हूँ अभी कोई नहीं है घर पर, आना है किआ जी?” यह कहकर फूल ने एक ेंख मारा विहान से, ऑफ़ कोर्स मज़ाक कर रही थी, शैतानी कर रही थी….

विहान हंस पड़ा और कहा,

“तुम बहोत बोल्ड हो, तुमको दर नहीं लगता कुछ भी कह देती hi बेशर्मों की तरह धत!”

फूलवती: “थोड़ा बेशरम होना पड़ता है विहान जी, वार्ना आप जैसा कोई मेरी ज़िन्दगी में आये तो बात बन जाए, हे बात बन जाए” और फूल ने एकांत डांस स्टेप भी कर दिए इस गाने को गाते हुए विहान के सामने….

विहान ने और भी हँस्ते हुए कहा,

“एक बात बता, वो कमरा तुम्हारा है किआ और रात को उस में नाईट लैंप ों रहता है रात भर?!”

फूलवती ने अपने मुंह पर हाथ रख कर विहान को चहूंकने वाली ऐडा में कहा,

“हाय, किआ सर मेरी बैडरूम तक चले गए तुम तो, कैसे पता चला तुमको के वो मेरा बैडरूम है और रात को लाइट ों रहता है? रात को मुझसे मिलने का मैं किया है किआ जी? अजैयो मैं करे तो मैं तो ख़ुशी खुसी आप को अंदर आने दूंगी!”

विहान: “छुप कर तू बहोत नॉटी लड़की है की ऐसी बातें लड़कियां करती है किआ?”

फूल: “की कहे का साहेब, एक बार आजाना खिड़की से अगर मेरे बैडरूम का पता चल hi गया है तो, इस में की काहे को, एन्जॉय करना है और मस्त मजा करना है और किआ, वैसे रूचि के यहाँ कभी गए हो के नहीं, चले जाना बहुत एन्जॉय करोगे सर!”

विहान डर गया और सोचा के कहीं कल रात वाले बात रूचि ने बता तो नहीं दिया फूल को और पूछा,

“क्यों तेरे खिड़की से अगर मैं अंदर आया तो किसी को पता नहीं चलेगा किआ? तेरे घर पर तेरे पेरेंट्स नहीं होते किए?”

फूल: “अरे रात की बात कर रही हूँ, तुमने कहा के लाइट ों रहती है रात को इसी लिए रात की बात कहा मैं ने रात को आने को कहा, और रात में मेरे कमरे में पेरेंट्स किआ करेंगे? – वैसे तुमको कैसे पता चला के रात को नाईट लैंप ों रहती है मेरे कमरे में? हम्म्म? किआ इरादा है? तुम कहीं रात को मुझे झाँकने तो नहीं आते हो? आते हो तो बता देना मैं खिड़की खोल दूंगी तुम्हारे लिए आराम से आना नाह! हीहीहीही”

विहान ने दिल में सोचा के इस गाओं के सभी लड़कियां रात को किसी को अपने कमरे में बुलाते हैं किआ जो फूल भी ऐसे बातें कर रही थी.

मगर अस्सल बात तो यह थी के फूलवती सिर्फ टांग खिचाई कर रही थी उस्का कोई मतलब नहीं था उस्सने जो कुछ भी कहा बस ऐसे hi कह दिया था…. अब कौन जाने के दिल hi दिल में फूलवती भी चाहने लगी थी विहान को, यह वही जाने!!

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट अपडेट इम्मेडिएटली….
 
अपडेट 76 अशिता के साथ यह हुआ किआ?

विहान इतना कुछ छुपा रहा है अशिता से तो किआ अशिता भी कुछ छुपाने लगी है विहान से? किआ वो अपने जिस्म की आग को कण्ट्रोल कर पा रही है? इतने दिनों से किआ अशिता की जिस्म की प्यास नहीं बड़की?

जानना है के किआ हुआ अशिता के साथ? चलो देखते हैं.

लास्ट सैटरडे की बात है. अनिरुद बैंक से 1 बजे वापस आजाता है और सुमन तो शाम के 5 बजे hi वापस अति है.

अशिता बीएड पर लेती हुई थी उस्सको नींद जैसे आरही थी, उसकी पलकें भरी हो चुके थे और उस्सको कुछ अच्छा नहीं फील हो रहा था.

घर में अशिता अक्सर एक शार्ट में रहती है, कभी जीन्स शार्ट तो कभी सिंपल शार्ट में जिस में उसकी उभरे हुए जांघें साफ़ नज़र आते हैं. अब वो बीएड पर लेती हुई थी तो वैसे लेटने से पोज़ कुछ ऐसा दिख रहा था कोई उसस्के दरवाज़े से उसस्के कमरे में देखे तो…



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अशिता ने एक करवट लिया और उस्सकी ेंख लग गयी, उसस्के दरवाज़े की रूम खुला हुआ था. अनिरुद घर में दाखिल हुआ और अशिता को आवाज़ दिया मगर किसी की रिप्लाई नहीं आयी.

तो अनिरुद उस्सकी कमरे के दरवाज़े के पास गया एहि नज़ारा उसस्के ेंखों के सामने आया जो इस पिछ में हैं ऊपर… कुछ देर खड़ा होकर वो देखता रहा, और धीरे से चल कर उस्सकी बीएड तक गया और आहिस्ते से, हलके से अशिता के तंग पर हाथ फेर्रा जिस से चहुँक कर अशिता उठ बैठी और अपने पापा के चेहरे में देखने लगी….

अनिरुद ने मुस्कुराते हुए अशिता के चेहरे में देखा बिना कुछ कहे और अपने हाथ को दोबारा अशिता के जाबघों पर फेर्रा. अशिता ने नज़रें निचे झुका लिए, तो अनिरुद ने कहा,

“मैं तुम्हारे लिए एक चीज़ लाया हूँ आओ वहां उस चेयर के पास….”

अशिता ने मुस्कुराते हुए पूछा,

“किआ लाये हो पापा देखूं तो…”

और वो आराम से मुस्कुराते हुए बीएड से उठी और उठते वक़्त अनिरुद ने उस्सको देखा तो अशिता ऐसी दिखी उससे

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घर में अशिता को ब्रा पेहेन्ने की आदत नहीं थी शुरू से hi यह बहोत पहले शुरू के उपदटेस में बता दिया गया है, इस वक़्त उस्सकी टॉप ऊपर हो गयी थी तो अशिता अपने टॉप को निचे कर रही थी बीएड से उतारते वक़्त मगर अनिरुद ने देखा….

और जब टॉप को ठीक कर लिया अशिता ने तब ऐसी दिखी जो अनिरुद ने फिर देखा

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अशिता अपने पापा के तरफ बढ़ी जब तक अनिरुद चेयर पर बैठ चूका था…. चलते हुए जब अशिता अपने पापा के तरफ बढ़ रही थी तो अनिरुद अशिता को ऊपर से निचे तक देखते हुए अपने जीब को अपने होंठों पर फेरर रहा था और अशिता मुस्कुराते हुए उसस्के तरफ गयी.

जब अशिता अपने पापा के करीब आगयी तो अनिरुद ने अपने बाज़ू को उसस्के कमर पर करके अपने आप से सट्टे हुए थोड़ा दुलार किया, प्यार किया और अशिता ने अपने बाहों को अनिरुद के काँधे पर करके उसस्के गाल पर किश करते हुए पूछा,

“किआ हुआ पापा आज आप को मुझपर बहोत प्यार ारः है?!”

अनिरुद ने धीरे से अपने होंठों को अशिता के गर्दन पर फरते हुए कहा,

“आज एक बात बता तू मुझे मेरी गद्य”

अशिता ने बड़े प्यार से अपने पापा के गाल पर अपना होंठ फरते हुए पूछा,

“हम्म्म किआ पापा?”

अनिरुद ने अपना हाथ उस्सकी जांघ पर फरते हुए कहा,

“तू इतने दिनों से अब अकेली है, विहान तेरे पास नहीं है मुझे पता है तुम दोनों ने सेक्स कर लिया है तो किआ तुझे उस्सकी कमी महसूस नहीं होती, तुमको करने का मैं नहीं करता?”

तब तक अनिरुद ने अशिता को अपने गॉड में बिठा लिया था उसी चेयर पर और वो भी कैसे बिठाया अपनी लाड़ली को, दोनों अशिता के टांगें दोनों तरफ फैला कर…. अशिता जैसे एक घोड़े के ऊपर बैठते हैं वैसे अपने टांगों को दोनों तरफ करके अपनी पापा के गॉड में बैठी जिस से अनिरुद का लुंड अपने पंत के अंदर खड़ा हो गया और अशिता के निचे अशिता ने अपने पापा का मोटा लुंड फील किया उसस्के ऊपर बैठने से…. और अशिता ने खुद अपने छाती को अपने पापा के छाती पर दबाया…

अब क्यूंकि अशिता ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी तो उस्सकी बूब्स चिपक गयी अनिरुद के छाती पर और अनिरुद से रहा नाह गया तो उस्सने अशिता की मुंह को अपने मुंह में ले लिया और उस्सकी जीब चुस्सने लगे क्यूंकि अशिता ने खुद मुंह खोल कर अपने पापा के मुंह में दे दिया और उस्सकी जिस्म खुद बा खुद अपने पापा के जिस्म से रगड़ने लगे….

अशिता का हाथ उसस्के पापा के सर को थामे हुए थी और किश बड़े जोश से जारी था दोनों के बीच… अशिता के जिस्म में जैसे एक आग भड़की हुई थी जैसे उसस्के अंदर एक तूफ़ान उठ रहे थे और अशिता झट से उठ कर अपनी बीएड पर गयी अपने पापा को बीएड पर इन्विते करते हुए और यह कहते गयी बीएड के तरफ,

“हाँ पापा मुझे ज़रुरत तो है, अब विहान नहीं है आप तो हो नाह पापा, उस ज़रुरत को आप hi अब पूरा कर सकते हो, के पापा के….!”

और अशिता ने अपने बीएड पर जाकर कुछ ऐसे पोज़ दिए अनिरुद को जब वो बीएड के तरफ बढ़ रहा था…

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मतलब अशिता बीएड के ऊपर चढ़ कर अपनी टॉप उतारने लगी अपने पापा को अपने पास बुलाते हुए… उस्सकी जिस्म की आग भड़क चुकी थी और वो तैयार थी अपने पापा को अपने अंदर लेने के लिए…..

अनिरुद ने अपने पंत उतारते हुए, शर्ट निकलते हुए बीएड के पास पहुंचा और अशिता को बाहों में भर के लेता दिया और उसस्के ऊपर चढ़ गया उस्सकी बूब्स को मुंह में लेकर चूस्ते हुए….

अचानक अशिता की आँख खुली और वो झट से उठी और खुद से कहा,

“ओह माय गॉड मैं यह किआ सपना देख रही थी…. पापा के साथ ओह no!! मुझे यह किआ हो गया है…. विहान को आना चाहिए था सपने में पापा क्यों आये और मैं भी किआ कर रही थी पापा के साथ? तभी फिर अनिरुद की आवाज़ आयी,

“आशु बीटा तू सो रही है किआ? ी ऍम बैक होम स्वीटहार्ट, आओ देखो मैं किआ लाया हूँ!”

अशिता ने बीएड से उतारते हुए सोचा के उस्सको आज विहान से सेक्स चाट ज़रूर करना चाहिए, उसस्के जिस्म में बहोत गर्मी हो रही थी और उस्सको सेक्स की ज़रुरत पढ़ने लगी थी…..

अस्सल बात यह थी के इतने दिनों से सेक्स नाह करने के कारण अशिता को सच में ज़रुरत पढ़ने लगी थी सेक्स की और ऐसे हालत में आँख लग जाए तो अक्सर ऐसे सपने आते रहते हैं…..

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कल रात को अशिता ने याद किया के उस्सने ऐसे hi एक और ख्वाब देखे थे. देखा था के वो कॉलेज से घर आयी तो अमित यहाँ उस्का वेट कर रहा था. अशिता ने उस्सको घर केक अंदर रिसीव किया और अमित उस्सको बाहों में भरके किश करने लगा यह कहते हुए के वो उस्सको अब ज़्यादा चाहने लगा है क्यूंकि उस्सको पता है के अब विहान उसस्के पास नहीं और उस्सको छोड़ने की ज़रुरत है तो वो अशिता की प्यास बुझा सकता है और अशिता का भी मैं कर रहा था इस लिए वो भी राज़ी हो गयी थी और अमित ने उस्सकी यूनिफार्म उतारते हुए उस्सको नंगा किया और बीएड पर लेजाकर उस्सको छोड़ा… और अशिता ने भी खूब एन्जॉय किया अमित के साथ….

अशिता ने सोचा के आज दूसरी बार उस्सने किसी और के साथ सेक्स करते हुए सपना देखा, मगर ऐसे सपने क्यों आने लगे थे अशिता को, पहले तो कभी भी वो ऐसे सपने नहीं देखती थी……

तो बे कॉन्टिनोएड….
 
किआ मैं ने अशिता को किसी और से छुड़वाया? नहीं नाह? एक सपना आया उस्सको उस सपने को लिखा. एक चुटिया रीडर जो कभी किसी भी अपडेट पर रिप्लाई नहीं करता और उस्सको पढ़ना भी नहीं अत वो यहाँ आकर मुझे गली दे गया और उस्सकी पोस्ट को डिलीट किया गया. वो इस लिए महा चुटिया है के उस्सने अपडेट को पढ़ा hi नहीं के वो एक सपना था वो समझा के अस्सल में अशिता और उसस्के बाप क बीच चुदाई हो रहे हैं . वैसे रीडर सिर्फ थ्रेड को बिगार्ने और तमाशा करने आते हैं और मुझे वैसे रीडर्स की कोई ज़रुरत भी नहीं. मुझको मेरी कहानी को गांड में डालने को कहा उस्सने तो कौन सा बड़ा सपोर्ट किया है उस्सने मेरी इस कहानी को?

रीडर्स वो होते हैं जो हर एक अपडेट पर कमेंट करता है और साथ बने रहता है एन्ड तक नाह के वो चुटिया जो 75 उपदटेस क बाद 1 अपडेट करके गली देता है. कहानी मेरी है अपने hi गांड में डालूंगा उस्का गांड बहुत गन्दा है मेरी लिखी हुई कहानी क लिए नापाक है वो मेरी कहानी क लिए

थैंक्स
 
अपडेट 77 एंड थिस हप्पेनेड

विहान का अब रूटीन हो गया था हर सुबह को बस स्टॉप पर रूचि का वेट करना, एक साथ बस में चिपक के बैठना, कॉलेज में फ़्लर्ट करना, किश करना, हर शाम को रूचि को उसस्के घर के आस पास चोरर के वापस आना, आते वक़्त फूलवती का विहान का वेट करना और हर रोज़ फूलवती से उसस्के आँगन के सामने रुक कर 15/20 मिनट्स तक बात करना, फूलवती का उठ पटांग बात फ़्लर्ट स्टाइल में करना….. यह सब हर रोज़, पूरा हफता चलता था ऐसा विहान की रूटीन में….

अब इस के इलावा रात को बारह बजे 5/6 बार और विहान रूचि के कमरे में गया खिड़की से और रूचि के साथ 2/3 घंटे बिताये. सेक्स एडवांस हो गया था दोनों के बीच, और ज़रुरत एक दूसरे की एडवांस लेवल की हो गए थे… सब कुछ जो आशिता के साथ करता था, वही सब कुछ रूचि के साथ भी करने लगा था विहान. और दिल से प्यार भी करने लगा था, मतलब विहान के लिए अब रूचि के बिना रहना नामुमकिन हो गया था. रूचि के बग़ैर नाह उस्का सुबह होता, नाह दिन गुज़रता और नाह रात. अशिता को जैसे उस्सने कार्नर hi कर दिया था, जब मैं करे कॉल करता वार्ना अशिता को खुद उससे फ़ोन करके उस से बात करना होता था.

विहान के पास वक़्त कम पढ़ने लगे थे, 24 हॉर्स उसस्के लिए अब काफी नहीं था अपने सभी एक्टिविटीज को निपटाने के लिए. कॉलेज जाना, पढ़ना, खुद पढ़ना और अपने एक्साम्स की तैयारी करना, रूचि के साथ टाइम बिताना, रात को या तो उस से चाट करना, या अशिता की कॉल अटेंड करना, या बीच रात में रूचि के कमरे में उसस्के साथ सेक्स करना, फिर वापस आना, सोना, सुबह को उठना जल्दी से तैयार होना और फिर कॉलेज जाना!!

तक़रीबन हर रोज़ उसस्के सर में दर्द होता था, ेंखें दर्द करने लगे थे, उस्सको सांस लेने के लिए टाइम काफी नहीं था…. हर रात सिर्फ ढाई या 3 घंटे सो पाटा था. उसस्के सेहत पर एस्सार होने लगे थे और एक दिन कॉलेज में विहान बेहोश गिर पड़ा बीच क्लास में.

उस्सको सीधा हॉस्पिटल लेजाया गया कॉलेज के तरफ से hi. रूचि को उस दिन पता भी नहीं चला के विहान को कॉलेज से हॉस्पिटल लेजाया गया क्यूंकि विहान अपने खुद के क्लास अटेंड करते हुए गिर्रा था.

उस रोज़ रूचि हैरान हुई विहान को यार्ड में ढूढंते हुए क्यूंकि ऐसा पहली बार हुआ था के कॉलेज एन्ड होने के बाद विहान एब्सेंट था. अब बस वेट कर रहे थे और रूचि को बस में जाना था मगर उसस्के समझ में नहीं आरही थी के कैसे जाएँ विहान के बिना. किसी ने तो बताया भी नहीं था के विहान होस्पिटलिसे हुआ है, एडमिनिस्ट्रेशन वालों को पता था मगर स्टूडेंट्स को नहीं.

रूचि और फूलवती बस में बैठे और दोनों बाहर देखते रहे और जब बस जाने के लिए स्टार्ट हुए तो रूचि चिल्ला उठी, कंडक्टर से रुकने के लिए कहा. बस रुका तो रूचि बस से उतर गयी और भागते हुए ऑफिस के तरफ गयी, और उधर फूलवती ने बस को रोके रखा.

रूचि वापस आयी तो रोने लगी फूलवती से कहते हुए के विहान बेहोश गिर्र गया था और हॉस्पिटल में एडमिट हुआ है ऑफिस वालों ने उस्सको बताया जब वो पूछने गयी तो. फूलवती ने कहा के बस से उतरें और हॉस्पिटल चलें मगर रूचि ने कहा के वो हॉस्पिटल नहीं जा सकती उसस्के पर्सनल रेअसोंस थे हॉस्पिटल नाह जाने का. और उस्सने फूलवती को अकेली जाने को कहा, वो मान गयी और बस से उतर गयी.

फूलवती हॉस्पिटल जाते वक़्त खुद से कहती गयी के उस्सने नोटिस किया पिछले कुछ दिनों से के विहान बहोत थक्का हुआ दिख रहा था, जैसे बहोत ज़्यादा काम करने के बाद कोई थका हुआ दीखता है वैसा hi विहान दिख रहे थे पिछले कुछ दिनों से, यह फूलवती ने नोटिस किया था पिछले कुछ दिनों से. तो सोचने लगी के क्यों विहान उतना थक्का हुआ दिखने लगा था? किआ वजह थी के वो आराम नहीं करता था, सोच लिया उस ने के हॉस्पिटल में विहान से मिलकर सवाल करेगी उस से.

हॉस्पिटल पहुँच कर जब फूलवती विहान से मिली तो विहान की नज़रें रूचि को ढूंढ रहे थे, और पूछा फूल से के रूचि क्यों नहीं आयी.

बहरहाल, विहान को 4 दिन के लिए हॉस्पिटल में रहने को कहा गया क्यूंकि उसस्के ब्रेन में ब्लीडिंग्स होने लगे थे. पिछली बार की ब्लड क्लॉटिंग की वजह से अभी जो स्ट्रेस विहान ले रहे थे अपने ओवरलोड एक्टिविटीज की वजह से उसस्के ब्रेन में नेगेटिव इफेक्ट्स हुए. उस्सको रेस्ट की ज़रुरत थी, डॉक्टर ने उस्सको ज़बरदस्ती रेस्ट करने को कहा वार्ना ब्रेन में सीरियस प्रोब्लेम्स हो सकते थे.

अब जब डॉक्टर ने विहान से पूछा की वो सेक्सुअली एक्टिव है तो विहान ने हाँ में जवाब दिया, डॉक्टर ने पूछा कितने घंटा सोता है तो उस्सने कहा 3 या 4 घंटे तो डॉक्टर ने कहा अगर वो 7 घंटे नहीं सोया तो पागल हो सकता है!! और डॉक्टर ने उस्सको समझाया के सेक्सुअल एक्टिविटीज ब्रेन से डायरेक्ट कनेक्ट होता है और ज़्यादा एक्ससिटेमेंट और सेक्स को लेकर अगर बहोत एक्टिव रहा तो उसस्के ब्रेन को तकलीफ हो सकते हैं इस लिए फिलहाल के लिए कुछ दिनों तक सेक्स से भी दूर रहने को कहा गया था उससे, ात लीस्ट इन् 4 दिनों तक रेस्ट करने को कहा डॉक्टर ने.

फूलवती के सवाल करने पर विहान ने यह सब कुछ नहीं बताया उससे बुसस इतना कहा के उस्सको रेस्ट की ज़रुरत है. वो कम सोता है इस लिए बेहोश गिरा था. मगर फूलवती होशियार लड़की थी उस ने खुद विहान से कहा,

“तुम यह रूचि से मिलना और ेश करना थोड़ा कम करो इस से भी दिमाग़ खराब होता है, उस से थोड़ा कम मिला करो, घर पर आराम भी किया करो, सोया करो, हर वक़्त सिर्फ उसस्के पीछे मत लगा रहो, वो है तो यहीं नाह आराम से वक़्त निकाल कर मिलो, हर रात क्यों जाते हो उस से मिलने, तुम किआ समझते हो मुझे नहीं पता के तुम रात रात भर उसस्के बिस्तर पर होते हो? सब पता है मुझे. जिस दिन तुम ने पूछा था के मेरे बैडरूम में रात को नाईट लैंप जलती रहती है तभी मैं समझ गयी थी के तुम उस से मिलने जाते होंगे रात को तभी मेरे रूम की लाइट ों देखा होगा तुमने. रूचि नहीं बताती पर उसस्के हाव भाव से मैं सब समझ जाती हूँ जिस रात को तुम उस से मिलते हो….”

विहान ने आराम से मुस्कुराते हुए फूल की बातों को सुना और उससे लगा के अशिता उस्सको दांत रही है, तो फूल से कहा,

“ठीक है मेरी माँ ठीक है आराम करूँगा, तुम अब घर जाओ, हाँ आज मैं नहीं रहूँगा उधर तुम्हारे आँगन के सामने तुमसे चाट करने के लिए, मत रोना मैं वापस आजाऊंगा 4 दिन के बाद हाहाहा!”

फूल ने मुंह बनाते हुए कहा,

“मैं क्यों रोने लगी भला रो तो वो रही थी तेरा रूचि, अब भी घर जाकर रो रही होगी!”

इतना hi कहा था फूल ने के रूचि की मैसेज आयी फूल की मोबाइल पर तो फूल ने कहा,

“लो, तेरे बारे में hi पूछ रही है के मैं मिला या नहीं तुझसे और तू कैसा है पूछ रही है किआ बोलूं?”

विहान ने कहा,

“उस से पूछ के आयी क्यों नहीं मैं उस्का वेट कर रहा था बोल दे!”

तब फूल ने रूचि को कॉल किया और मोबाइल विहान को दे दिया बात करने के लिए.

रूचि ने रट हुए विहान से पूछा के किआ हुआ उस्सकी तबियत किसी है, तो विहान ने उस्सको तस्सल्ली देते हुए कहा के फ़िक्र करने की कोई बात नहीं उस्सको आराम की ज़रुरत है. और विहान ने पूछा के वो क्यों नहीं आयी उस से हॉस्पिटल मिलने को?

रूचि ने समझाया के वो अगर ठीक वक़्त पर घर नहीं पहुंची तो उस्सको प्रॉब्लम होगी, हर रोज़ एक्सएक्ट टाइम पर उस्सको घर पर होना ज़रूरी होता है वार्ना उस्सको बहोत मुश्किलों से गुज़ारना पड़ता है. विहान समझ गया के उस्सकी भाबी भैया की वजह से वो नहीं आ पायी हॉस्पिटल.

आखिर में फूल वापस चली गयी और विहान रूचि के बारे में घंटों तक सोचता रहा, फिर आखिर में अशिता को सोचा तो उस्सको कॉल किया. शाम का वक़्त था तो उसे पता था अशिता किचन में काम कर रही होगी. विहान अशिता को नहीं बताना चाहता था के वो हॉस्पिटल में एडमिट है नहीं तो वो बहोत फ़िक्र करती और विहान की मम्मी पापा भी परेशां होते इस लिए विहान ने वीडियो कॉल नहीं नार्मल कॉल किया अशिता को.

अशिता से कोई एक घंटे तक बात किया फ़ोन के थ्रू विहान ने और कहा के ऑफिस के काम में बिजी है ओवरटाइम कर रहा है इस लिए अगले 4 दिनों तक वो उस्सको फ़ोन नहीं करेगा इस लिए फ़िक्र नहीं करना.

अपने दादा जी को फ़ोन करके विहान ने बता दिया के वो हॉस्पिटल में एडमिट है और अपने मम्मी पापा को बताने को मन किया.

दादा जी, चाचा और चची और एकांत कौसिन्स उस्सको रात को दक्खने आये हॉस्पिटल में और जब पता चला के ज़्यादा सीरियस नहीं है बुसस उस्सको रेस्ट की ज़रुरत है तो वापस चले गए और दादा जी ने हर रोज़ उस से मिलने का वादा कर गया.

रूचि ने फ़ोन किया रात को विहान से बात किया मगर उस से कहा के अगले चार दिन वो भी उस से बिल्कुल, भी कांटेक्ट नहीं करेगी इस लिए के वो नहीं चाहती के उस्सकी वजह से उस्सको तकलीफ हो. रूचि समझ गयी थी के उस से रात रात भर मिलने की वजह से उसस्के सात रात गुज़ारने की वजह से विहान की सेहत पर बुरा एस्सार पर रहा था, समझदार थी वो, रूचि समझ गयी के उसस्के साथ इतना सेक्स करके, रातों को जाग के, कम सोकर विहान का यह हाल हुआ है, और उस्सने अब एक और वादा लिया विहान से के इन् 4 दिनों तक दोनों बिल्कुल भी कांटेक्ट नहीं करेंगे जैसे एक दूसरे को जानते भी नहीं.

विहान नहीं मान रहा था, उस्सने कहा के कम से कम मेस्सगेस तो कर सकते हैं… मगर रूचि ने कहा के 4 दिन बिना कोई बात किये, बिना मेसज किया मिलेंगे तो उस्का मज़ा अलग होगा, तब विहान मान गया और कहा के ठीक है 4 दिन बाद दोनों वापस मिलेंगे.

इन् 4 दिनों को विहान बिल्कुल अकेला रहा, नाह अशिता को कांटेक्ट किया और नाह रूचि को. जैसे 4 दिनों का व्रत रख लिया था उस्सने. मगर सिर्फ फूलवती से कांटेक्ट रखा उस्सने. फूलवती के ज़रिए रूचि की खबर लेता रहता था, मगर दूसरे दिन को जब विहान ने रूचि के बारे में पूछा फूल से तो उस्सने बताया के रूचि उस दिन कॉलेज नहीं आयी. विहान ने सोचा शायद रूचि को ाचा नहीं लग रहा कॉलेज में क्यूंकि वो नहीं जा रहा इसी लिए रूचि भी नहीं गयी कॉलेज.

चौथे दिन को भी फूल ने कहा के रूचि कॉलेज नहीं आयी थी. अब भी विहान ने सोचा के रूचि विहान को बहोत मिस कर रही होगी कॉलेज में इसी लिए वो नहीं आयी… और चौथे दिन के बाद जब विहान को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज मिला तो वो सैटरडे का दिन था और जो पहला चीज़ उस्सने किया वो था रूचि को फ़ोन करना, पहले टेक्स्ट किया घंटा भर वेट किया मगर रूचि की कोई जवाब नहीं आयी तो उसकसो विहान ने कॉल किया मगर रूचि की मोबाइल स्विच ऑफ आरही थी…..

क्यों? क्यों रूचि की मोबाइल ऑफ आरही थी? ऐसा तो पहले कबि भी नहीं हुआ था? कहाँ गयी रूचि? किआ जैसे उस्सने कहा था के एक दिन अचानक से ग़ायब हो जाएगी, तो किआ वो ग़ायब हो गयी? कैसे? कहाँ गयी?

विहान अब किआ करेगा? उसस्के खिड़की के पास जाकर उस से मिलने की कोशिश करेगा रात को? मगर जब रूचि जवाब hi नहीं देगी तो कैसे जाएगा उधर? अब किआ होगा?

अगले अपडेट में पता चलेगा!!

तो बे कॉन्टिनोएड………..
 
कमेंट करने को मैं किसी को बोलता नहीं हूँ. तुम ने मुझे पं करके इतने सारे तारीफ़ किये थे लव विथ ा रेपिस्ट का और कहा था क मेरे सभी नए स्टोरीज का वेट करोगे तब मैं ने तुमको इस कहानी को पढ़ने और रिप्लाई करने को कहा. वार्ना मैं कभी भी किसी को रिप्लाई करने को नहीं कहता हूँ. सिर्फ मेरे रीडर्स को hi कहता हूँ और सोचा था तुम एक हो इस लिए कहा था नहीं पता था नाह क िम्मातुरे 10 साल का बचा हो. अब पता चला कहानी फोरम पर है जिस्सको पढ़ना है वो पढ़े जिस्सको रिप्लाई करना है वो करे. तुम्हारे उस पं को यहाँ पोस्ट करके दिखाऊं किआ?

और अभी तो मैं ने तुम्हारे उस कमेंट को रिप्लाई भी नहीं किया हूँ जिस्सके बारे में तुम बात कर रहे हो. मैं ने तो तुम्हारे उस कनेण्ट को रिप्लाई किया जिस्सको तुमने मोनिका को रिप्लाई किया. और तुम तो उस कमेंट क बारे में बात कर रहे हो जिस में तुमने बुरा नाह मानने की बात किया है. ग़ौर से देखो किआ उस कनेण्ट की रिप्लाई किया मैं ने तुमको??

जी हुज़ुर्री मुझे चाहिए भी नहीं. हरगिज़ नहीं. किसी ने आज तक वर्स्ट नहीं कहा मेरे किसी भी अपडेट को. अगर वो अपडेट वर्स्ट होता तो तुम अकेले को क्यों लगा? बाकी के मातुरे रीडर्स क कमैंट्स को भी पढ़ा करो, उन् लोगों को क्यों वर्स्ट नहीं लगा? िम्मातुरित्य दीखता है जिस्सको पढ़ना hi नहीं अत वो साफ़ दीखता है.

रिप्लाई करना है करो, न करना है नाह करो ये तुम्हारी मर्ज़ी.

जब मैं ने अभी तक अशिता को साफ़ पाक रखा है, उस्सको किसी ने छोड़ा hi नहीं वो अपने विहान क लिए है और रहेगी कई बार कह चूका हूँ इसी थ्रेड पर शुरू से फिर भी अंधों को मैं ेंखें तो नहीं दे सकता नाह?

रियेक्ट ऐसे करते हैं जैसे अशिता की छूट में किसी और का लुंड घूसस्ते और निकलते देख लिया. राइटर का काम है दिमाग़ इस्तेमाल करके पाठकों को घूमना और तुम घूम गए तो मैं कामयाब हुआ :लोटपोट:
 
अपडेट 78 लुकिंग फॉर रूचि

विहान को झटका लगा जब रूचि की मोबाइल स्वतिक ऑफ पाया. उस्सको यकीन नहीं हुआ के रूचि की मोबाइल s.off है तो मोबाइल को हाथ में लेकर चेक किया के उसी की नंबर को डायल किया उस्सने या किसी और की. तो दोबारा कॉल किया, करते गया बार बार मगर हर बार स्विच ऑफ ारः था. उसस्के अंदर एक बैचैनी हुई और तुरंत फूलवती को कॉल किया डायरेक्ट.

दिन के 1 बजे थे उस वक़्त. फूल ने कॉल लिया और विहान ने घबराहट वाले आवाज़ में पूछा,

“कहाँ हो? घर पर किआ?”

फूल: “अरे डिअर सैटरडे है तो घर पर hi रहूंगी नाह आप क्यों हॉस्पिटल से कॉल करने लगे जी? मेरी याद आरही है किआ? ठीक है चलो थोड़ी बातें करते हैं!”

विहान: “नहीं मुझे डिस्चार्ज मिल गया वापस आगया हूँ, फूल मुझे बहुत फ़िक्र हो रही है….”

फूल को जब विहान की आवाज़ में घबराहट महसूस हुई तो सीरियस होकर पूछा,

“विहान? किआ हो गया, क्यों इतने घबराये हुए हो तुम तबियत फिरसे खराब हो गयी किआ?!”

विहान ने टूटते आवाज़ में कहा,

“रूचि कहाँ है फूल? किआ तुमने उस से कांटेक्ट किया?”

फूल: “अपनी घर पर होगी नाह बाबा! नहीं मेरी उस से फिलहाल कोई बात नहीं हुई है क्यों?”

विहान ने ऑलमोस्ट रट हुए कहा,

“फूल उस्सकी मोबाइल ऑफ आरही है कब से तरय कर रहा हूँ मैं!”

फूल: “ोफो विहान, उस्सने चार्ज करने को डाला होगा, बैटरी लौ हो गयी होगी, थोड़ा वेट करो नाह तुम!”

Vihaan:”nahin कुछ और hi हुआ है ऐसा कभी नहीं हुआ है पहले, उस्सको पता है के मैं कभी भी उस्सको कांटेक्ट कर सकता हूँ तो मोबाइल ऑफ नहीं रहने देगी कभी, फूल मुझे बहोत डर लग रहा है और फ़िक्र होने लगी है मैं कैसे उस से अभी कांटेक्ट करूँ?!”

फूल: “वो तो इम्पॉसिबल है के उस से किसी और तरीके से कांटेक्ट कर सकें विहान यू विल हैवे तो वेट टिल नाईट तो जो तो सी हेर उनलेस यू जो राइट नाउ!”

विहान: “राइट नाउ? अभी? मगर रूचि ने कभी भी वहां आने से मन किया है जब तक वो फ़ोन से आने को नाह कहे!”

फूल: “वो क्यों? तुमने पूछा नहीं उस से?”

विहान: “मई बे अपने बहिया भाबी की वजह से नाह?!”

फूल यह सुनकर कुछ देर खामोश रही, कुछ सोच रही थी…

तो विहान ने खुद पूछा,

“किआ तुम उसस्के घर गयी हो कभी?”

फूल: “नाह बाबा नाह, मुझे उसस्के भाई भाबी से डर लगता है, जितना रूचि ने मुझे बताया है उन् दोनों के बारे में मुझे वैसे लोगों से मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं है, मैं तो उन् दोनों को जानती भी नहीं, कभी देखा भी नहीं!”

विहान: “अजीब बात है फूल, तुम इसी गाओं में रहती हो 18 साल से और इसी गाओं के लोगों को नहीं जानती हो? यह कैसे हो सकता है इतने कम लोग हैं इस गाओं में!”

फूल: “विहान डिअर यह गाओं है, और हम लड़कियों को या तो लड़कियों के साथ थोड़ा बहोत तालाब या नदी के पास टहलने दिया जाता है वो भी पेरेंट्स के निग्रहणी में, और फिर उस पहाड़ी इलाके के तरफ हम लोग कभी जाते भी नहीं हमारे पेरेंट्स हमको उधर जाने से सख्त मन करते हैं, बचपन से इधर के सभी बच्चों को उस तरफ जाने से मन किया गया है, सभी बच्चों को उस पहाड़ के बारे में बुरी बातें बतायी गयी है! मेरी माँ तो मुझे रूचि के साथ कॉलेज जाने को भी मन कर रही थी, मुझसे उस से दूर रहने को कहती थी….”

विहान: “रूचि से दूर रहने को कहती थी? क्यों? किश लिए?”

फूल: “हमको पेरेंट्स से सवाल करने का हक़ hi नहीं, जो वो कहते हैं हमें सुन्ना पड़ता है, उनके पास कोई नाह कोई रीज़न होते हैं हमेशा.”

विहान: “तो फिर तुमको कब और कैसे रूचि के साथ जाने दिया गया और कबसे तुम रूचि को जानती हो?”

फूल: “सिर्फ एक साल से!”

विहान: “व्हाट? सिर्फ एक साल से? तो इस से पहले रूचि कहाँ कॉलेज जाती थी, और प्राइमरी स्कूल में किआ तुम उसस्के साथ नहीं थी?”

फूल: “अरे विहान डिअर, रूचि यहाँ सिर्फ एक साल से रहती है!”

विहान: “व्हाट? हाउ इस आईटी पॉसिबल? तो इस से पहले वो कहाँ रहती थी?”

फूल ने कहा, “अपने पापा के साथ!”

विहान फिर हैरान होते हुए कहा,

“अपने पापा के साथ? व्हाट नॉनसेंस, उसस्के पेरेंट्स तो मर चुके हैं नाह? फिर उसस्के भाई भाबी ने उस्सको पाला पोसा नाह?!”

फूल: “ोफो व्हाट ा कन्फूसिओं विहान. एक काम करो तुम मेरे यहाँ आओ हम बात करते हैं, कैन यू के हेरे? किआ पता रूचि कहीं आते जाते दिख जाए ाजाओ मेरे पास.”

विहान को आईडिया ठीक लगा और वो घर से निकला ये कहकर के वो थोड़ा ठंडी हवा खाने जा रहा है नदी के तरफ. उसस्के दादा जी ने उसे जाने को कहा तालाब के पास.

विहान जाते वक़्त यह सोचते गया के एक दिन उसस्के दादा जी ने उस से पूछा था के इस गाओं की जो लड़की यूनिफार्म में थी उस्सको वो जानता है मगर बाकी के दो लड़कियों को नहीं जानता, तो मतलब इसी लिए उसस्के दादा जी भी रूचि को नहीं पहचाना था क्यूंकि वो सिर्फ एक साल से यहाँ रहने आयी थी….. विहान बहोत hi कन्फ्यूज्ड था और बहोत hi परेशान, उस्सको रूचि से मिलने और बात करने का बड़ा मैं था मगर उस्सको लगने लगा था के अब रूचि नहीं मिलने वाली जब वो उस्सकी बात को याद करता था के रूचि एक दिन अचानक से घायब हो जाएगी. विहान को डर था के कहीं रूचि सच में हमेशा के लिए ग़ायब तो नहीं हो गयी…..”

जब वो फूल के आँगन के पास रीच हुआ तो फूल वहीँ आँगन में उस्का वेट कर रही थी, हर रोज़ तो विहान सड़क पर खड़े होकर फूल से बात करता था मगर आज फूल ने विहान को आँगन के अंदर आने को कहा, और एक पेड़ के निचे कुछ पत्थर थे उन् पर बैठ कर बात करने लगे दोनों.

विहान ने समझाने को कहा के कैसे रूचि अपने पापा के पास रहती थी और कैसे अब अपने भैया भाबी के पास है जब उनके पेरेंट्स के डेथ हो गए हैं?!

तो फूल ने समझाया यह कहते हुए,

“रूचि के भैया उस्का सौतेला भाई है. माँ एक है लेकिन बाप रूचि की अलग है और उसस्के भाई का अलग बाप है. जब रूचि के भाई का बाप की डेथ हो गयी थी तब उस्सकी मम्मी ने रूचि के पापा से शादी की थी तब रूचि पैदा हुई थी. जब रूचि की मम्मी की डेथ हो गयी, तो उस्सकी पापा की डेथ तो नहीं हुई नाह? उस्सकी बड़े भाई की मम्मी और पापा के डेथ हो गए मगर रूचि का पापा इस अलाइव टिल नाउ!”

विहान ने सर झटकते हुए पूछा,

“और रूचि का पापा कहाँ रहता है?!”

फूल: “यह तो किसी को नहीं पता और रूचि ने कभी बताया भी नहीं”

विहान: “व्हाट इस थिस यार? रूचि ने कभी मुझे यह सब बताया क्यों नहीं? और तुम इस बात को कबसे जानती हो?”

फूल: “जब से रूचि ने मुझे बताया.”

विहान: “और तुम्हारे पेरेंट्स क्यों तुमको उसस्के साथ जाने के लिए मन कर रहे थे और कब और क्यों उस से दोस्ती करने के लिए राज़ी हुए?”

फूल: “वो जब रूचि ने मुझे बताया के वो अपने भाई की स्टेप सिस्टर है और मैं ने घर में मम्मी पापा को समझाया तबसे उन् लोगों ने मुझे उसस्के साथ दोस्ती करने दिए मगर फिर भी उस से ज़्यादा क्लोज होने से मन किया; आज भी मुझे उस से ज़्यादा पास जाने के लिए मन करते हैं और उसस्के घर के तरफ तो जाने को सख्त मन है; सिर्फ मुझे नहीं बल्कि इस गाओं के और बाकी के 7 गाओं को कोई भी लोग उस पहाड़ के घर के आस पास भी नहीं जाते हैं!”

विहान: “मगर क्यों? व्हाई? किआ है वहां?? मैं तो गया हूँ कितने रातों को उस घर में. सब नार्मल है किसी भी घर की तरह!”

फूल: “मेरी मम्मी बता सकती है, तुम चलो घर के अंदर मम्मी से पूछते हैं!”

विहान को फूल अपने घर के अंदर लगाई. एक करीबन 50 साल के उम्र की औरत को अपनी माँ बताते हुए फूल ने विहान को अपने टीचर कहकर इंट्रोडस किया. और विहान ने सवाल किया पहाड़ वाले घर, रूचि और उसस्के खादान के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए.

तो फूल की माँ ने अपने मुंह पर हाथ रख कर घबराई हुई दीखते हुए कहा,

“हे राम, तू कोण हवा बाबू? इधर की बात हम नहीं बता सकत है. खतरा है बाबू, हवन की पहाड़ की बात नहीं करते हैं, खतरा है बाबू, फिर कभी मत पूछियो हाँ!”

विहान निराश होते हुए पूछा,

“माता जी रूचि के बारे में तो कुछ बता सकती हो, वो मेरी स्टूडेंट है मुझसे पढ़ती है कॉलेज में!”

फूल की मम्मी ने कहा,

“बात तो एक hi होए है नाह बाबू. ू लड़की से हम ने इस्को मिलने से मन भी किया मगर यह उस के साथ दोस्ती किये अपनी सहेली बनाया उस को जो कभी नहीं करना चाहिए था, बहुत बुरा हो सकता है बाबू, चोर्रो इस बात को फिर कभी भी नाह करना भूल जाओ सब कुछ!”

तब तक फूल अपनी मोबाइल से रूचि की नंबर तरय करती जा रही थी और विहान से कहा,

“no रिस्पांस, इतस डेड!”

विहान ने फूल से कहा,

“No रिस्पांस फ्रॉम योर मदर आल्सो, इतस उसेलेस तो टॉक अबाउट आईटी!”

फूल ने कहा,

“अपने दादा जी से पूछो उस्सको सब पक्का पता होगा, वो बड़े हैं और इतने सालों से इस गाओं में है उस्सको सब ज़रूर पता होगा. पहाड़ की सीक्रेट के बारे में वो ज़रूर जानता होगा.”

विहान के ेंखें बार आये रूचि को याद करते हुए और भरे हुए ेंख से फूल को देखा तो फूल ने उसस्के काँधे पर हाथ रखते हुए कहा,

“अले अले प्याले टीचर जी लो लहे हैं किआ अले अले मत लोवो विहान… भूल जाओ रूचि को वो नहीं मिलने वाली अब!”

यह सुनकर विहान के ेंखें चालक गए और आँगन के तरफ बढ़ते हुए फूल को थैंक्स कहा मगर फूल विहान से लिपट गयी आउट कहा,

“मुझको तुम ऐसे अचे नहीं लगते, एक लड़की के लिए कोई ऐसे रोटा है किआ? मैं हूँ नाह, मुझसे भी थोड़ा प्यार करलो, तुम्हारे ग़म को मिटा दूंगी….”

विहान ने फूल के बाहों को अपने ऊपर से निकालते हुए कहा,

“सॉरी फूल ी मस्ट जो, प्लीज जाने दो यार!”

फूल ने उसस्के काँधे से हाथ हटात्ते हुए विहान के गाल को चूमा और कहा,

“ठीक है जाओ, मगर मेरी ज़रुरत पड़े तो मैं अन्य्तिमे हाज़िर हूँ तुम्हारे लिए, कभी भी अजना ी विल वेट फॉर यू तो शेयर योर पाइनस!”

विहान ने फिर थैंक्स कहा और आँगन से निकला, मगर तुरंत पलटा और कहा,

“किआ तुम मेरे साथ अभी इसी वक़्त रूचि के घर तक चल सकती हो?”

फूल चहुँक गयी और अब उस्सकी बारी थी अपने मुंह पर हाथ रख कर हैरानी से विहान के चेहरे में देखने को….. फिर पीछे मुड़कर फूलवती ने अपने घर के तरफ देखा और धीरे से कहा,

“okay ठीक है चलती हूँ…”

और दोनों बाहड़ने लगे रूचि के घर के तरफ…..

तो बे कॉन्टिनोएड………..
 
अपडेट 79 थे माउंटेन पीपल

दोनों रूचि के घर करीब जैसे जैसे भढ़ते गए फूल की सांसें बढ़ती गयी और उस में एक खौफ्फ़ सा पैदा हुआ क्यूंकि बचपन से उस्सको उस तरफ जाने से मन किया गया था तो उसस्के दिल में एक डर बैठा हुआ था बचपन से hi, और जब पास आगये तो विहान ने बताते हुए कहा ,

“यह देखो पहली बार मैं आया था तो यहाँ वो मेरा वेट कर रही थी”

फूल ने पूछा,

“रात के अँधेरे में वो यहाँ बाहर वेट कर रही थी तुमको?!”

विहान: “हाँ और निघ्त्य में थी!”

फूल: “ाचा एक लड़की आप को निघ्त्य में बीच रात में यहाँ वेट कर रही तो मतलब साफ़ है के किश लिए बुलाई थी आप को…”

विहान: “इधर आओ और यह है उस्सकी रूम की खिड़की जहाँ से बाकी के रातों को मैं अंदर गया था और वापस निकला भी था!”

फूल: “okay ी सी तो अब आप दरवाज़े पर नॉक तो करो, या खिड़की के पास उस्सको आवाज़ देकर तो देखो नाह मुझे गब्रहत हो रही है!”

विहान ने खिड़की के पास आवाज़ दिया धीरे से रूचि के नाम फुंकार के मगर कोई जवाब नहीं आयी तो घर के सामने वाले दरवाज़े को नॉक करने गया विहान, और फूल उसस्के पीछे कड़ी विहान के बाज़ू को थामे कड़ी थी कुछ कांपते हुए.

दस्तक देने के कोई 3 मिनट्स बाद एक खूबसूरत औरत ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा,

“ओह! विहान जी, और तुम ज़रूर फूलवती होगी है नाह? आओ अंदर आओ, हाँ सुन रहे हो आप रूचि की सहेली और विहान आये हैं मिलने आप आइये तो!”

जब उस औरत ने किसी और को आवाज़ देकर बुलाया घर के अंदर से तो विहान और फूल एक दूसरे के चेहरे में हैरत से देखने लगे के रूचि की भाबी को कैसे पता दोनों के बारे में और इनको कैसे पता थे के यह दोनों वही लोग हैं!

दोनों को बैठने को कहा गया तो विहान ने उस औरत से पूछा,

“आप रूचि की भाबी होंगे नाह? किआ मैं ने सही पहचाना?!”

भाबी ने एक खूबसूरत मुस्कराहट के साथ हाँ में सर हिलाते हुए दोबारा किसी को अंदर से आवाज़ देकर बुलाया.

तो फूल ने अब भी विहान के बाज़ू को पकड़ते हुए धीरे से विहान से कहा,

“पूछो नाह के यह हम दोनों को कैसे पहचानती है!”

विहान ने धीरे से फूल से कहा,

“अरे रूचि ने बताया होगा नाह? बल्कि पूछना चाहिए के रूचि किधर है, मैं उस्सको रूचि को बुलाने को कहता हूँ या किआ पता वो उसी को आवाज़ दे रही है अभी!”

तब तक एक आदमी आया घर के अंदर से और कहा,

“hello मिस्टर विहान थे फ्रेंच टीचर, एंड फूलवती, तो आज इधर कैसे आना हुआ?!”

विहान और फूल दोनों को ज़बरदस्त शॉक लगा के यह भी दोनों को अछि तरह से जानते हैं मगर कैसे. फूल तो आज ज़िन्दगी में पहली बार देख रही थी दोनों को. इन् दोनों को कैसे पता है फूल और विहान के बारे में और वो भी इतने डिटेल में? कैसे इनको पता के विहान फ्रेंच टीचर है?

विहान और फूल दोनों बौखलाए जैसे थे और रूचि की भैया और भाबी को घुर्र रहे थे, देखने से दोनों बिल्कुल वो नहीं दिख रहे थे जैसे रूचि ने उन् दोनों के बारे में बताया था, बहोत नेक और अचे इंसान दिख रहे थे दोनों. भाबी जी ने कहा,

“आप बैठिये मैं कुछ खाने पिने को लाती हूँ.”

विहान के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा था, और सिर्फ सोच में डूबा हुआ था के यह हो किआ रहा था…

उनके लिविंग रूम में सोफे बहोत खूबसूरत सजाये हुए थे, कुशीओंस लगे हुए थे, ज़मीन पर निचे कालीन थे, सोफे बहोत कीमती लग रहे थे, घर में काफी रौशनी थी, और एक खुशभू जैसे किसी फूल की फ्रैग्रैंस फैली हुई थी.

विहान ने हिम्मत करके कहा,

“हम रूचि को ढूंढ़ते हुए यहाँ आये हैं, प्लीज आप हमें बताएं के कहाँ है वो?”

रूचि के भाई ने मुस्कुराते हुए कहा,

“वेट कीजिये उस्सकी भाबी को आने दीजिये नाह साथ मिलकर बात करते हैं”

फूल विहान से सत् कर बैठी थी, उसस्के बाज़ू को अब भी वैसे hi थामे हुए जैसे किसी चीज़ को देख कर जब कोई लड़की दरर्ति है तो कैसे चिपक कर किसी के बाज़ू को पाकर लेती है, उस वक़्त फूल कुछ वैसी लग रही थी. और भाबी जी एक ट्रे पर कुछ पीने की चीज़ें और कुछ बुसकिट्स लेकर आयी और टेबल पर रख कर अपने पति के पास बैठी और सबको सर्वे करते हुए कहा,

“प्लीज हैवे ा ड्रिंक.”

विहान और फूल दोनों ने सोचा के यह दोनों अछि इंग्लिश में बात कर रहे हैं, पढ़े लिखे लगते हैं और आज के मॉडर्न ज़माने के लोग लग रहे हैं, और बिल्कुल भी बुरे इंसान नहीं दिख रहे, यह वो बिल्कुल नहीं थे जैसे रूचि ने इनको डेस्क्रिबे किया था.

इस बार फूल ने भाबी से पूछा,

“रूचि 3 दिन कॉलेज नहीं आयी और उस्सकी मोबाइल भी बंद आ रही है किआ आप बता सकती है के वो कहाँ है?”

इस सवाल को सुनकर भाबी जी ने अपने हस्बैंड के तरफ देखा और दोनों एक दूसरे से मुस्कुराये. विहान और फूल दोनों के चेहरे में देखते हुए एक जवाब को एक्सपेक्ट कर रहे थे.

रूचि के भाई ने कहा,

“हमको यह बताने की बिल्कुल इजाज़त नहीं है के रूचि कहाँ है, यह वो खुद आप दोनों को बताएगी वक़्त आने पर!”

विहान ने हैरानी में कहा,

“देखिये हम बहोत परेशान हैं और हमको उस से बात करना बहोत ज़रूरी है प्लीज बता दीजिये नाह, और यह भी बताईये के आप हम दोनों को कैसे इतनी अछि तरह से जानते हैं? हम तो पहली बार आप से मिल रहे हैं!”

और तुरंत फूल ने ऐड किया,

“हाँ और मैं इस गाओं में 18 साल से रहती हूँ और आप दोनों को तो आज पहली बार देख रही हूँ तो आप कैसे मुझको पहचानते हो?!”

रूचि के भाई ने कहा,

“अरे फूलवट्टी तुम उस गाओं में रहती हो, हम उस तरफ के गाओं से बिलोंग करते हैं, तो हमारा सभी ट्रांसक्शन्स उस तरफ के गाओं से डील होता है हम तुम्हारे गाओं के तरफ कभी नहीं जाते , इस खिड़की के उस तरफ देखो, उस ढलान को देख रही हो? इधर से उस तरफ जाना बहोत ज़्यादा इजी है, इधर से कार, वन, व्हीकल्स सब आते है ैसिलय मगर जहाँ तुम रहती हो उस चौराहे पर जाना पड़ता है तब बस का वेट करना पड़ता है तब शहर जाती हो नाह? मगर हम इधर से जाते हैं और बस वहां उस बड़े से मकान के पास रुकता है उसस्के बाद बस मुड़कर तुम्हारे यहाँ उस चौराहे पर जाती है…..”

विहान ने पूछा,

“तो रूचि क्यों उस तरफ से नहीं जाती थी वो क्यों इस तरफ से हमारे यहाँ के चौराहे पर बस लेती थी?”

तब भाबी ने जवाब दिया,

“इस लिए के रूचि को इस ढलान से उतरने में तकलीफ होती थी और वापस ऊपर चढ़ने में उसस्के पेयर दुखते थे जबकि तुम्हारे तरफ जाने से फ्लैट रास्ता है इस लिए वो उस तरफ जाती थी!”

विहान का दिमाग़ ने जैसे काम करना बांध कर दिया था, फूल और भी बौखलाई हुई थी. और फूल ने धीरे से विहान के कान में कुछ कहा, तब विहान ने रूचि के भाई से कहा,

“आप मुझे रूचि की दूसरी कांटेक्ट नंबर दे द्जिये प्लीज हम उस से बात तो कर सकते हैं!”

भाई ने कहा,

“कोई कांटेक्ट नंबर नहीं अउ उस्सकी फिलहाल तो हमसे भी कोई कांटेक्ट नहीं.”

तब भाबी ने कहा,

“हम तो उस्सको आप लोगों से बहोत ज़्यादा मिस कर रहे हैं, हमारी दुलारी थी वो, हमारे ेंखों का तारा थी वो, हम खूब रोये थे जब वो हमसे जुड़ा हुई!”

विहान ने फूल के तरफ हैरत से देखा और फूल की ेंखें जैसे और भी मोती हो गयी भाबी की बात को सुनकर.

तो अब विहान ने फूल के कानों में कुछ कहने को कहा. तो फूल ने कहा,

“मगर रूचि ने तो हमको आप के बारे में कुछ और hi बताया था…”

भाई ने कहा,

“हाहाहा एहि नाह के हम दोनों उस पर अत्याचार करते हैं, के हम उस पर जुलुम करते हैं, इस में उस्सकी कोई ग़लती नैन उस्सको वैसा कहने को कहा गया था!”

विहान ने अपने पेशानी पर शिकंजह लाते हुए पूछा,

“और किश ने उस्सको वैसा कहने को कहा था, आप लोगों ने?”

भाबी जी ने जवाब दिया,

“हमारा कहाँ चलता है सर, हम तो कटपुतली हैं किसी और के हाथ में डोर हैं!”

विहान को थोड़ा ग़ुस्सा आया और कहा,

“आप लोग यह पहेलियाँ बुझाना बांध करेंगे प्लीज और सीधा बात बताओगे हमें?”

भाबी जी ने कहा,

“वक़्त आने पर आप को सब डिटेल में पता चल जाएगा, फिलहाल हमको कुछ भी बताने को अल्लोवेद नहीं है, खतरा है खतरा समझ सकते हो आप?”

विहान ने आवाज़ को थोड़ा ऊंचा करते हुए कहा,

“व्हाट नॉनसेंस इस थिस? कौन सा खतरा किआ खतरा? किआ हो जाएगा मुझे कुछ समझ में नहीं अत मुझे रूचि से मिलना है बुसस!”

रूचि का भाई ने कहा,

“कूल डाउन मिस्टर विहान, आवाज़ ऊंचा करने से कुछ नहीं हासिल होने वाला, कीप कूल प्लीज. हमें पता है के आप रूचि से प्यार करते हैं, रूचि आप से उस से 50 गुनाह ज़्यादा प्यार करती है, आप कितने बार उस से यहाँ रात को मिलने आये हैं यह भी पता है हमें, हम दोनों को सब पता है मगर हमको साइलेंट किया गया है, म्यूट किया गया है हमको वॉल्यूम नेगेटिव करके, कण्ट्रोल किसी और के हाथ में है, समझ लो के कोई है जिस्सके हाथ में रिमोट कण्ट्रोल है और वो सब उस रिमोट से कण्ट्रोल कर रहा है और हम मजबूर हैं!”

यह सब सुनकर फूल और विहान को और जबरदस्त झटका लगा के इन् दोनों को कैसे सब पता है, रूचि इन् दोनों को सब बताती थी? मगर क्यों? रात में हुए प्राइवेट बातें रूचि अपने भैया और भाबी को बताती थी? यह कैसे हो सकता है विहान ने सोचा. रूचि तो विहान से चोरी छुपके मिलने को बुलाती थी और किसी को भी नहीं जान्ने देती थी दोनों के मुलाकात के बारे में तो यह भैया भाबी को कैसे इतने डिटेल्स का पता है?!

विहान ने अपने सरके बालों पर हाथ दबा कर फरते हुए, फिर अपने चेहरे पर अपने दोनों हाथों को ज़ोर से रगड़ते हुए खड़ा हुआ और कहा के वो घर का मुआएना करना चाहता है के कहीं रूचि अंदर कहीं बांध तो नहीं है!

उस्सको इजाज़त दे दिया गया घर में ढूढ़ने के लिए. फूल उसस्के साथ गयी और जब घर के अंदर दाखिल हुए दोनों तो बिल्कुल शॉकेड हो गए अंदर देखते हुए. घर अंदर से जैसे एक आलिशान होटल के कमरे होते हैं वैसे था. एक लम्बा कॉरिडोर था, दोनों तरफ कमरे थे, जगमग चमचमाते हुए झूमर लगे हुए थे चारों तरफ , हाई क्वालिटी के लैम्प्स दीवारों पर सजे हुए थे, निचे चारों तरफ महंगी बेस्ट क्वालिटी के कालीन बिछे हुए थे… एक एक कमरे को ओपन करके हर एक कमरे के अंदर महंगे सामान दिखे दोनों को, किसी कमरे में तो बीएड ऐसे थे जैसे राजा महाराजाओं के ज़माने में हुआ करते थे, लगता था mugal-e-aazam की शूटिंग के सेट सजाये गए थे कहीं पर… और दोनों जीतनेय अंदर जा रहे थे घर उतना hi बड़ा होता जा रहा था ऐसा लग रहा था दोनों को, जैसे घर का एन्ड hi नहीं था, एक ढलान सी महसूस हो रही थी जैसे एक अंडरग्राउंड में दाखिल हो रहे थे दोनों, वो फील ारः था जैसे ज़मीन के निचे धंसे जा रहे थे…. तो फूल ने कहा,

“कितना खूबसूरत घर है, एक हवेली की जैसी है अंदर नाह विहान? बाहर से तो एक छोटा सा घर दीखता है मगर अंदर से कितना बड़ा है यह कैसे हो सकता है? इतने बड़े घर में सिर्फ तीन लोग, मतलब दो लोग रहते हैं किआ? यह तो बहुत hi आमिर लोग हैं विहान!”

विहान ने फूल की कलाई थामे हुए कहा,

“कुछ तो गड़बड़ है फूल ये एक रहस्य लगने लगा है मुझे, कुछ तो है जो हम बिल्कुल नहीं समझ रहे हैं, इस लिए गाओं वाले इस मकान के बारे में अजीब बातें करते हैं यह मकान नहीं एक हवेली hi है मगर किस्सका है, कौन कण्ट्रोल करता है इस्सके पता लगाना होगा हमें फूल, यह भैया और भाबी सच में कटपुलि हैं, रूचि भी कटपुतली hi होगी, उस पर किसी और का कण्ट्रोल है….. फूल मुझे अब यह शक हो रहा के वे अरे बीइंग वाटचेड!!! ी ऍम सूरे तहत वे अरे बीइंग वाटचेड!! पिछले जितने दिनों से मैं यहाँ आया हूँ आल हैवे बीन वाटचेड ी फील तहत इन्तेंसेलय नाउ!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 80 विहान एंड फूलवट्टी

आखिर में दोनों को कुछ भी पता नहीं चला और फूल और विहान को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा, क्यूंकि रूचि के भाई और भाबी को भी पता नहीं था और उन्हों ने कहा के रूचि खुद बताएगी विहान को अपने बारे में, मगर विहान जाते वक़्त फूल से पूछता गया के कब और कैसे रूचि उस से कांटेक्ट करेगी. फूल ने कहा,

“रूचि शायद अपने नई मोबाइल नंबर से या किसी और नंबर से तुमको सब कुछ बताएगी, थोड़ा धीरज भी तो रखो इतना उतावले क्यों होना है भला?!”

विहान: “मगर यह सब किआ राज़ है यार? ऐसा कोई करता है किआ?!”

फूल: “तुम घर जाओ और अपने दादा से कुछ सवाल करो शायद कुछ पता चले इस पहाड़ वाले घर के बारे में.”

विहान का सर दर्द करने लगा था और फूल से कहा, तो फूल ने कहा,

“ाचा तो मेरे घर चलो मैं तुम्हारे सर को दबाती हूँ, तुमको आराम मिलेगा, कहीं ऐसा नाह हो के फिर से तुमको हॉस्पिटल जाना पड़े!”

विहान: “तुम मेरे इतने ख्याल क्यों करती हो फूल? मैं अंदर से अब टूट चूका हूँ मेरे कुछ समझ में नहीं ारः, मैं पागल हो जाऊंगा, रूचि को इतना चाहा मैं ने उस्सकी आदत सी हो गयी है उसे देखने को मैं कर रहा है, मैं कैसे सम्भालूं खुद को?!”

फूल ने विहान के कमर को अपने बाज़ू में थामते हुए आगे बढ़ने लगी और उस से मज़ाक करते हुए कहा,

“देखो इस वक़्त मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं लग रही हूँ, तो अभी मुझको hi रूचि समझ लो, कुछ देर के लिए मुझे भी लगेगा के मेरा कोई बॉयफ्रेंड तो है हम्म किआ ख्याल है ाचा है नाह खुद को खुश करने के लिए?”

विहान: “रूचि तुम क्यों इतना मज़ाक करती हो मेरे साथ?!”

फूल: “मैं रूचि नहीं फूल हूँ!”

विहान: “किआ मैं ने तुमको रूचि कहा अभी?"

फूल: “और नहीं तो किआ, उसी का भूत संवार है तुम्हारे ऊपर! कभी मुझे भी ग़ौर से देख लिया करो नाह विहान फ्रेंच टीचर जी!”

फिर दोनों हंससने लगे और फूल अपने आँगन में दाखिल होते हुए विहान का हाथ पाकर के अपने आंगन के तरफ खिंचा मगर विहान सीधा जा रहा था सड़क पर तो फूल ने कहा,

“आओ तो, सर दबाती हूँ नाह!”

विहान: “रहने दो मैं घर जाकर कोई गोली ले लूंगा.”

तब तक फूल की माँ घर से निकली और फूल से कहा के उस्सको बाजार से कुछ सामान खरीदना है कोई घंटे बाद वापस आएगी और फूल को चावल पकाने को कहती गयी.

माँ चली गयी तो फूल ने विहान का हाथ पाकर के और ज़ोर से खींचते हुए कहा,

“देखो अब मैं अकेली हूँ घर में आते हो या मैं रूत जॉन तुमसे?!”

विहान ने मुस्कुराते हुए फूल को देखा और कहा,

“तुम मेरी सबसे अछि दोस्त हो इस गाओं में तो तुमको क्यों मैं रूठने का मौका दूंगा, ठीक है अत हूँ मेरे सर को दबा देना!”

और फूल विहान को एक बार फिर अपने घर के अंदर ले गयी.

घर छोटा सा था लकड़ी और तीन का बना हुआ मगर साफ़ सुथरा था और तीन कमरे थे जिस में से एक कर्मा फूल की थी. वही जिस में रात को बाहर से विहान ने नाईट लैंप को ों देखा था. फूल विहान को अपने कमरे में ले गयी, मगर जाने से पहले विहान लिविंग में hi बैठने को कहा पर फूल ने ज़िद करके विहान को अंदर लगाई, और एक स्टूल पर विहान को बिठाया और उसस्के पीछे खड़े होकर विहान के सर की मालिश करने लगी अपने उँगलियों को उसस्के बालों में फरते और और हथेली से उसस्के सर को दबाते और रघड़ते हुए. विहान को सच में बहोत ाचा फील होने लगा था और भुनभुनाते हुए कहा,

“हम्म्म आईटी फीलस सो गुड यार, कितनी अचे से दबा रही हो बहोत आराम मिल रहा है, किआ तुम अक्सर ऐसा करती को किसी के सर पर?!”

फूल ने विहान के सार की मालिश करते हुए जवाब दिया,

“हाँ पापा और मम्मी दोनों के सर ऐसे hi दबाती हूँ हफते में एक बार, उनके सर में तेल लगा कर मालिश करती हूँ उनको नींद भी आजाती है मेरा वैसे करने से हेहेहे!”

विहान ने अपने ेंखों को बांध कर लिया था और कहा,

“नींद तो मुझे भी आजाएगा ऐसे!”

फूल: “तो किआ हुआ यहीं सो जाना थोड़ी देर, डॉक्टर ने तुमको आराम करने को कहा है नाह, और तुम हो के और स्ट्रेस लिए जा रहे हो, आराम करो टीचर जी आराम! सब कुछ भूल जाओ कुछ देर के लिए और अपने दिमाग़ को फ्री करो सभी बातों से तो देखो कितना ठंडक पहुंचेगा आप के दिमाग़ को, सब ठंडा हो जाएगा और स्ट्रेस फ्री हो जाओगे बिल्कुल.”

विहान: “तुम्हारे पापा किआ करते हैं? उस्सको नहीं देखा कभी मैं ने.”

फूल विहान के सर दबाते हुए कहा,

“मज़दूर है विहान, खेतों में दिन भर अपने चमड़ी को झुलस्ता है, उसस्के स्किन क्रोकोडाइल के स्किन के जैसा सख्त हो गया है, मुझे बहोत दुःख होता है उस्सको देखती हूँ तो.”

विहान का सर उस वक़्त फूल के सीने से दबा हुआ था, वैसा फूल ने खुद किया था उसस्के सर दबाते हुए, विहान के सर के पीछे का हिस्सा फुल फूल के बूब्स पर दबा हुआ था और फूल को पता था मगर विहान उस वक़्त कोई अटेंशन नहीं दे रहा था के उस्का सर फूल के बूब्स पर है, वो तो सर में आराम पाने का लुत्फ़ ले रहा था ेंखें बांध किये हुए.

फूल ने आज तक किसी भी मर्द या लालड़के को अपने सीने से नहीं चिपकाया था, उस्का कोई बॉयफ्रेंड नहीं हुआ था कभी और अंदर hi अंदर वो विहान को बहोत पसंद करती थी और विहान के सर दबाने के बहाने वो उसस्के करीब रहना चाहती थी इसी लिए जान बुझ कर वो विहान को अंदर लगाई थी और इस पल को अछि तरह से महसूस कर रही थी विहान के सर को अपने सीने से दबाते हुए. इस वक़्त यह एक तरफ़ा था, सिर्फ फूल वैसा फील कर रही थी और उस्सकी साँसों में एक सिसकारी जैसी आवाज़ आयी मगर उस्सने खुद को संभालते हुए विहान से कहा,

“कैसा लग रहा है? आराम मिला के नहीं विहान?” उस्सकी आवाज़ में एक ताप जैसी थी उस वक़्त. और फूल ने इस बार अपने पूरा जिस्म को hi सत्ता दिया था विहान के पीठ से.

विहान के ेंखें बांध थे और उस्सको जैसे नींद आगये थे क्यूंकि उस्सने फूल को जवाब नहीं दिया, तो फूल ने झुक कर विहान के चेहरे में देखा उसस्के सर के ऊपर से क्यूंकि बैठने से विहान तो फूल से ऊंचाई में निचे था, और जब फूल ने उसस्के ेंखों को बांध देखा और उसस्के साँसों को भारी होते हुए देखा तो फूल समझ गयी के विहान की आँख लग गयी है तो वो विहान के चेहरे को अदमीरे करने लगी, बड़े प्यार से उस्सको देखने लगी… उस्सको लगा के जैसे एक मासूम छोटा सा बचा सो रहा है और वो उसस्के छाती से लगा हुआ है तो फूल को फील हुआ के वो बचा उसस्के गॉड में है जिस्सको उस ने अपने हाथों में लिया हुआ है…..

फूल ने उस वक़्त एक घागरा चोली टाइप कुछ पहना हुआ था जो गाओं के लड़कियां अक्सर पहना करते हैं, मगर वो घागरा लम्बा नहीं था, फूल के घुटनों तक hi अत था और उस्सकी चोली काफी तंग थी उस्सकी चेस्ट पर जिस में उस्सकी क्लीवेज दीखते थे मगर विहान उस्सको उस नज़र से नहीं देखता था…. फिर भी फूल ने नोट किया था के रूचि के घर में उस्का भाई बार बार फूल की छाती पर नज़र फेरर रहा था…. और अब विहान का सर उसी क्लीवेज पर दबा हुआ था और फूल की सांसें तेज़ होने लगे थे और उस्सको विहा को किश करने का मैं किया….

तो फूल ने, झुक कर धीरे से अपने उँगलियों को विहान के गर्दन से फरते हुए हलके से उसस्के कान के पीछे किया और उसस्के जबड़े पर हाथ करके विहान के मुंह को अपने तरफ उठाया, और अपने मुंह को विहान के होंठों तक किया था के विहान ने आंख्ने खोल लिया और पूछा,

“हो गया तेरा मालिश करना? सच में सोने का मैं कर रहा है यार?”

फूल का दिल बड़े ज़ोरों से धड़क रहा था उस वक़्त और वो विहान के चेहरे में घुर्र रही थी बिना कुछ बोले और थोड़ी देर बाद, उस्सने विहान का हाथ पाकर के उस्सको बीएड के पास लगाई और धीरे से कहा,

“तुम लेट जाओ यहाँ कुछ देर, नींद आ भी गयी तो कोई बात नहीं आराम करो, तुमको आराम की साख ज़रुरत है.”

विहान इंकार कर रहा था, मगर फूल ने थोड़ा ग़ुस्सा दिखाया और रूठने वाली ऐडा में कहा,

“अगर नहीं लेते तो मुझसे कभी भी बात मत करना, चुप चाप लेट जाओ और एक नींद मार लो तब जाना वापस हाँ!”

तब तक विहान को फूल बीएड पर बिठा दिया था और अब लेता रही थी तो विहना ने कहा,

“ोफो तेरी मम्मी या पापा आया तो किआ कहोगी अगर उन्हों ने मुझको तुम्हारे बीएड पर सोते हुए देखा तो?!”

फूल ने तककिये को विहान के सिरहाने लगाते हुए कहा,

“कुछ नहीं कहेंगे, इस से पहले वो कुछ कहे मैं उनको बता दूंगी के तुम्हारा तबियत ठीक नहीं तो मैं ने आराम कहने को कहा है तुम्हें तुम उस्सकी फ़िक्र मत करो, वो करो जो मैं कह रही हूँ समझे!”

और विहान लेट गया. जिस वक़्त विहान लेता तो फूल उसस्के ऊपर झुकी हुई थी जिस से फूल की क्लीवेज 70% दिख रहे थे और वो होती है नाह सांवली लड़की के क्लीवेज का वो part जो छुपे रहते हैं ब्रा के अंदर, वो हिस्सा कुछ ज़्यादा सफ़ेद रंग का होता है और ब्रा की स्ट्राप जहाँ पड़ता है वहां एक ब्रा की स्ट्राप की मार्क होते हैं और जहाँ ब्रा का कप होता है वो और भी सफ़ेद होते हैं और मर्दों को वो सब बहोत एक्साइट करते हैं, विहान की नज़र उस वक़्त फूल के उन् हिस्सों पर पड़े, और फूल झुकी भी थी कुछ इस तरह से के उस्सकी बूब्स hi विहान के ठीक चेहरे के पास थे…..

विहान ने अपने नज़रों को वहां से हटाया क्यूंकि उस्सको अशिता और रूचि के जिस्म याद आये उस पल को, मगर फूल ने विहान को वहां घुररते हुए देखा अछि तरह से, तो उस्सने कहा,

“क्यों पसंद नहीं है इस लिए के मैं सांवली हूँ नाह? कहा था नाह मैं ने के मैं सांवली हूँ इस लिए कोई बॉयफ्रेंड नहीं है मेरा, कोई देखता hi नहीं मेरे तरफ, और लो अब तुमने भी नज़रें फेरर लिए!”

विहान को तरस आया उस्सकी बात पर तो उस्सकी हाथ पाकर कर कहा,

“तुम बहोत खूबसूरत हो फूल, तुम्हारी जिस्म भी बहोत खूबसूरत है, तुम्हारा दिल उस से भी और भी खूबसूरत है क्यों तुम ऐसा सोचती हो के सांवली हो इस लिए तुम खूबसूरत नहीं हो सकती?!”

तो फूल ने विहान के सर को अपने हाथ में झट से लेकर अपने क्लीवेज पर ज़ोर से दबाते हुए कहा,

“अगर खूबसूरत हूँ तो एक बार बुसस एक बार इससे चुम लो, मुझे बहोत ख़ुशी होगी, रूचि hi समझ कर कुछ देर मेरे साथ प्यार करलो मुझे ज़िन्दगी भर की ख़ुशी मिल जाएगी, मैं नहीं कहती के मुझसे हमेशा प्यार करो, मैं तुमको बांधना नहीं चाहती बुसस एक पल की ख़ुशी देदो मुझे; मुझे फील कराओ के मैं भी लड़की हूँ, के कोई मुझे भी पसंद कर सकता है, के कोई मेरे भी जिस्म को छह सकता है प्लीज मुझे प्यार करो कुछ देर के लिए विहान, प्लीज….”

यह सब कहते हुए फूल ने विहान के चेहरे को अपनी क्लीवेज पर ज़ोर से दबाया हुआ था और विहान को उस्सकी सॉफ्ट क्लीवेज अपने चेहरे पर महसूस हो रहा था, और उस्सकी भी सांसें तेज़ हो चुके थे और विहान को बहोत तरस आया फूल के उन् बातों को सुनकर तो उसस्के समझ में नहीं आया के वो करें भी तो किआ करें, किआ जवाब दें फूल को, उस्का दिल नहीं तोडना चाहता था विहान, उस्सको अफ़सोस हो रहा था फूल के बातों को सुनकर….

तो विहान ने बस अपने बाहों में सिमट लिया फूल को और हलके से चूमा उसस्के क्लीवेज को और वहीँ पर दबे हुए होंठ से विहान ने कहा,

“तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए फूल, मैं तुमको पसंद करता हूँ मगर मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है तुमको लेकर डिअर….”

फूल अपने साँसों को संभालते हुए विहान के चेहरे को अपने हाथों में लिया और कहा,

“तुम्हारे इरादे से मेरा कोई मतलब नहीं विहान इस वक़्त मुझे जो चाहिए वो सिर्फ तुम दे सकते हो किआ अब मैं तुमसे इस्सकी भीक मांगूं किआ?”

विहान ने कहा,

“आरी पगली मगर यह ठीक नहीं लग रहा मुझे, तुम मेरी दोस्त हो, दोस्तों के बीच यह सब नहीं होता नाह फूल!”

फूल बीएड के ऊपर चढ़ गयी और विहान के बगल में लेट गयी उसस्के जिस्म पर अपना हाथ फरते हुए और कहा,

“गोली मारो दोस्ती को विहान इस वक़्त एक लड़की को तुम्हारी ज़रुरत है प्लीज मुझे रोको मत….”

इतना कहकर फौल अपनी चोली उतारने लगी, और उस्सकी ब्रा की स्ट्राप काँधे से सरक गयी और विहान के सामने उस्सकी एक बूब लगभग बाहर आगयी थी और फूल ने उस बूब को विहान के मुंह पर दबा दिया ब्रा को उन्हुक करते हुए….. और सिसकारियां लेते हुए…..

विहान ने किश किया उस्सकी गोआल, सख्त बूब को, तब तक फूल का हाथ विहान के पंत पर उसस्के लुंड पर जा पहुंचे उस्सको करेस करते हुए, और फूल ने अपने जीब विहान के कान के पीछे करके चाटते हुए उसस्के गाल पर फरते हुए उसस्के मुंह तक गयी….

तो विहान ने सर उठाकर दरवाज़े के तरफ देखते हुए कहा,

“योर दूर इस ओपन फूल कोई भी आ सकता है!”

फूल झपट कर दूर क्लोज करने गयी और इस बार अपनी घागरा उतार कर सिर्फ अपनी पंतय में बीएड पर चढ़ कर विहान के ऊपर दोनों टांगों को फैला कर ठीक उसस्के लुंड के ऊपर बैठी और झुक कर विहान के मुंह में अपने मुंह को दाल दिया…..

विहान अपने कपड़ों में था, और उसस्के पंत के ऊपर उस्का लुंड मोटा, लम्बा खड़ा हो चूका था जिस्सके ऊपर फूल बैठी हुई अपने नितम्बों को हिलाते हुए रागढ रही थी विहान के जीब को चूस्ते हुए…..

विहान करना तो कुछ नहीं चाहता था मगर जिस तरह से फूल उस पर टूट पड़ा था कोई भी मर्द होता उस से कण्ट्रोल नहीं होता… अस्सल में फूल की वर्जिन बूब्स जिस्सको किसी ने आज तक छुआ नहीं था बहोत hi आकर्षित करने वाले थे, सांवली जिस्म पर दो सफ़ेद गोआल गोआल गुबारों की तरह विहान के ेंखों के सामने नुमाईश होते हुए, उस्सकी ब्रा की स्ट्राप की मार्क्स काँधे से होकर फूल के छाती से होते हुए ब्रा की निशाँ उसस्के छाती से पीठ पर पूरा ब्रा कह नक्शा छापा हुआ था जो विहान को एक्साइट करने लगे थे….

विहान ने अपने जीब को उन् सफ़ेद हिस्सों पर फर्र्ना शुरू किया जैसे ब्रा अब उस्का जीब बन रहा था, और फूल सिसकारियां लेते हुए अपने ेंखों को बांध कर लिया था और अपने कमर को विहान के लुंड पर हिलती जा रही थी फिर झट से विहान की पंत को ोारत्ने लगी, सब कुछ बहोत hi फ़ास्ट किया फूल ने और एक पल में विहान पूरा नंगा लेता हुआ था बीएड पर उस्का लुंड बिलककोल खड़ा हुआ छत्त टाक रहा था जिस्सको फूल ने बड़े प्यार से अपने हाथों में लिया और एक नज़र विहान को देख कर लुंड पर अपना जीब चलाया जिस से विहान की आह निकलने की बारी थी….

विहान ने अपने हाथों से फूल की बूब्स को दबाया और पोजीशन लेकर अपने मुंह में लिया और चुस्सने लगा, तब तक उस्का लुंड फूल के मुंह में चला गया और वो उस्सको चुस्सने लगी तेज़ साँसों के साथ….

फिर कुछ पल बाद फूल ने अपनी पंतय उतारी और खुद विहना का हाथ अपने हाथ में लेकर अपनी योनि पर किया, जब विहान का हाथ फूल की योनि पर पड़े तो उस्सने देखा के वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी तो विहान ने उस्सकी पंतय को देखा वो बिल्कुल भीग चुकी थी जिस part पर उस्सकी योनि होती है…. फूल 100% गरम हो चुकी थी और लुंड को अपनी गहराई में लेने के लिए तड़प रही थी….

विहान ने कहा,

“no पेनेट्रेशन, बिकॉज़ यू अरे ा वर्जिन!”

फूल ने तड़पती आवाज़ में कहा,

“ी वांट आईटी विहान, ी बदली नीड आईटी, फॉर हाउ लॉन्ग विल ी रेमें ा वर्जिन ी रियली नीड आईटी, फॉर वन्स इन माय लाइफ ी वांट आईटी, के ों don’t रेफुसे में प्लीज….”

विहान ने कहा,

“ोफो ी कैन प्लीज यू विथाउट पेनेट्रेटिंग यू फूल, कीप योर विर्जिनिटी फॉर थे ओने यू विल मर्री, ी क्नोव व्हाट ी ऍम टेलिंग यू, यह एक आदत हो जाएगी और तुम मेरे बग़ैर नहीं रह पाओगी, हर रोज़ एहि चाहोगी मुझसे, वो ठीक नहीं होगा फूल….”

फूल ने ग़ुस्सा होते हुए कहा,

“मैं कुछ नहीं जानती मुझे अभी चाहिए, या तो मुझे छोड़ो या मैं खुद इस्को अपने अंदर डालती हूँ, मुझसे और इंतज़ार नहीं होता है विहान के दो आईटी ढूढे कैसा मर्द हो तुम, फ्री में मिल रहा है तो लो नाह यार!!”

विहान के हंसी चुत पड़े, और उस्सने फूल को बाहों में भरके उस्सको अपने निचे किया बीएड पर और फूल के टांगों को फैला कर उसस्के बीच हुआ और अपने लुंड को उस्सकी गीली योनि पर रगड़ा फिर आहिस्ते से, बड़े आराम से लुंड को फूल के छूट की चढ़ पर दबाया और धीरे धीरे लुंड फूल के अंदर ग़ुस्ता चला गया जिस दौरान फूल की आवाज़ निकली,

“आआह्ह्ह्हह ऊऊफफफफफफ ुयी माआआ इस्स्स्सस्छ्हःहःह, हआ एसससस विहान पूत आईटी आल इनसाइड में….. और डालो नाह आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ विहाआआआंनंन्न!!!”

अंदर डालते हुए विहान फूल के चेहरे में उस्सक्कि ख़ुशी और तड़प दोनों एक साथ देख रहा था और जब उस्का लुंड पूरा फूल के अंदर समा गया तो विहान ने फूल के गालों को छत्ते हुए उसस्के जीब को अपने मुंह में लिया और ढाका देने लगा एक के बाद एक ज़बरदस्त ढाका देते भुए उस्सने फूल की पहली ओर्गास्म दिया जिस से फूल की आवाज़ ज़ोर से निकली और उस्का जिस्म विहान के निचे थरथराते hue,gaand हिलाते हुए, विहान को दबोचते हुए, विहान के गर्दन में दांत काटते हुए, अपन दोनों टांगों को विहान के कमर पर कसके बढ़ कर फूल ने एक लम्बी सांस लेकर बीएड पर फ्लैट हो गयी…..

विहान ने ढकों का सीसलसीला जारी रखा जब आखिर में उस्सकी बारी आयी झड़ने को तो झट से अपने लुंड को बाहर निकला और तमान वीर्य को फूल के पथ से लेकर उस्सकी गर्दन, बूब्स, यहाँ तक के गाल और चेहरे पर प्रेशर चोर्रा और लास्ट में अपने लुंड को फूल के गाल पर रगड़ते हुए उस्सको आखरी वीर्य के कतरों को चुस्सने को कहा तो फूल ने इंकार करते हुए “की” kaha…to विहान ने हँस्ते हुए कहा,

“तू अनारी है तुझे नहीं पता लास्ट में मर्द को इसी में सबसे बड़ी ख़ुशी मिलती है पागल लड़की….. कोई बात नहीं फिर किसी दिन तू खुद करेगी यह बिना मेरा कहे….”

फूल ने कहा,

“याय, इस्सके मतलब तुम फिर करोगे मेरे साथ ी ऍम हैप्पी याय!”

और विहान ने अपने लुंड के टिप को फूल के होंठों पर रागढ के साफ़ किया, फूल ने मुंह बिल्कुल बांध रखा… और उसस्के बाद फूल ज़ोर ज़ोर से हंससने लगी जब विहान अपने कपडे पेहेन रहा था….. उस्सको हँस्ते हुए देख कर विहान ने पूछा क्यों हंस रही है तो फूल ने कहा के पता नहीं उस्सको बुसस ख़ुशी से हंसी आरही है शायद जैसे ख़ुशी के ेंसू होते हैं तो यह ख़ुशी के हंसी थे…..

विहान ने कहा,

“देख ब्लड लगे हुए हैं बीएड पर जल्दी साफ़ कर वार्ना तेरी मम्मी आगयी तो कहेगी –“हाय में लूट गयी मैं बर्बाद हो गयी मेरी बेटी की बलात्कार कर दिया इस टीचर ने….”

फूल और ज़ोर से हंसी और कहा,

“नहीं तब मैं कहूँगी के टीचर ने नहीं किया बल्कि मैं ने टीचर का बलात्कार किया हीहीहीहीहीही!”

और फूल लिपट गयी विहान से, उसस्के बाहों में सिमट गयी और धीरे से कहा,

“थैंक यू वैरी मच फॉर मेकिंग में ा वुमन टुडे!”

तो बे कॉन्टिनोएड…. (3400 वर्ड्स)
 
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