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अपडेट 73 एंड थे मेट
विहान वहां पहुंचा तो हांफ रहा था तेज़ रफ़्तार से चलने की वजह से. रूचि के घर के दरवाज़े के पास आया और झुक कर अपने दोनों हाथों को अपने घंटों पर रख कर चारों तरफ देखने लगा के एक खम्बे के पीछे से रूचि सामने आयी. वो विहान के रीच होने से पहले से hi बाहर थी और विहान को आने का वेट कर रही थी. विहान ने सोचा था कुछ भी नहीं दिखाई देगा मगर रूचि की सिल्होउएत्ते साफ़ नज़र आरही थी, क्यूंकि हलकी सी चांदनी थी. विहान अब भी हांफ रहा था और मुस्कुराते हुए रूचि के तरफ बढ़ा….
रूचि ने फुसफुसाते हुए कहा,
“आप बहोत ज़ोरों से हांफ रहे हैं सब सुनाई दे रहे हैं, मैं दूर से आप का हांफना सुन रही हूँ.”
विहान दो कदम रूचि से दूर था और अपने बाहों को खोल दिया रूचि को उसस्के बाँहों में आने के लिए.
रूचि ने एक कदम उसस्के तरफ बढ़ाया और रुक गयी अपने दोनों हाथों को अपने काँधे पर क्रॉस किये हुए वो विहान के चेहरे में देखने की कोशिश में लगी हुई थी क्यूंकि साफ़ तो नहीं दिख रहा था फिर भी दिख रहा था. रूचि ने देखा के विहान ने अपने बाहों को खोला हुआ था और इंतज़ार में था के वो उसस्के बाँहों में सिमट जाए.
और उसी पोजीशन में खड़े विहान वेट कर रहा था के रूचि उसस्के बाहों में आये और तब तक विहान अशिता की निघ्त्य को देख रहा था जो उस्सकी घुटनों तक रीच होती थी और काँधे पर पतली सी स्ट्रैप्स थे और विहान निघ्त्य की रंग को जान्ने की कोशिश कर रहा था, रात में रंग साफ़ नहीं दिख रहा था मगर उस वक़्त विहान को लगा के निघ्त्य का कलर पीला ब्लू था.
रूचि थोड़ा कांप रही थी, और बार बार दरवाज़े को देह रही थी. घर के अंदर बिल्कुल अँधेरा था और रूचि सोच रही थी के अगर अचानक उस्सको लाइट ों दिखाई दिए अंदर तो तुरंत विहान को भागना पड़ेगा मगर सोचने लगी के किधर छूपने को कहेगा विहान को…
विहान अब भी बाहें फैलाये हुए खड़ा था रूचि के इंतज़ार में और लगातार उस्सकी निघ्त्य को देखे जा रहा था. उस्सने हमेसाह रूचि को यूनिफार्म में देखा था, सलवार कमीज़ और दुपटे में आज पहली बार उस्सकी टांगें नज़र आरहे थे, वो भी अँधेरे में अच्छी तरह से नज़र नहीं ारः था उससे.
कितनी तमन्नाह थी विहान को रूचि के जिस्म अंदर देखने को, कितना सोच रहा था के किआ उस्सकी जिस्म अंदर अशिता जैसी होगी या नहीं, कितनी बार अपने तस्सवुर में उस्सने रूचि को वैसे सोचा था पहले दिन से और आज मौका मिला भी रूचि को उस तरह से देखने को तो अँधेरा था, उस्सकी जिस्म अच्छी तरह से दिख भी नहीं रहे थे मगर विहान ने सोचा फील को कर सकेगा, उस्सको अपने बाहों में तो ले पायेगा और उस्सकी जिस्म की खुशभू, उस्सकी मुलायम स्किन को तो फील कर पाएगा सब महसूस कर पाएगा….
रूचि अब भी एक कदम विहान के सामने अपने हाथों को काँधे पर क्रॉस किये हुए कड़ी थी, और विहान ने अब वैसे hi फुस्फुसाते हुए कहा,
“नहीं होगी मेरे बाँहों में तो मैं खुद एक कदम तुम्हारे पास अत हूँ, हमारे पास ज़्यादा वक़्त भी तो नहीं है, मुझको वापस भी जाना है तो गले तो लग जाओ अब….”
और रूचि ने उस एक कदम के फासले को मिटाया विहान के सीने से लग कर. विहान ने उस्सको अपने बाहों में जाकर तो लिया मगर रूचि ने अब भी अपने हाथों को अपने हांड़ों पर क्रॉस किये हुए थे, तो विहान के सीने पर रूचि के दो बाज़ू डब्बे हुए थे उस वक़्त. विहान ने सर ऊपर उठाकर एक लम्बी सांस छोर्रा रूचि को अपने बाहों में महसूस करते हुए और अपने मुंह को रूचि के काँधे से अपने होंठों से उस्सकी नंगी काँधे को चूमा रूचि को फिर दोबारा सांस बाहर चोर्रा. विहान के लम्बे कद होने के कारण रूचि के काँधे पर उस्का सर झुका हुआ था, रूचि का चेहरा विहान के चेस्ट के थोड़ा ऊपर जहाँ गर्दन शुरू होता है वहां रीच हुआ था. विहान ने एक जॉगिंग वाला ट्रॉउज़र पहना हुआ था और एक टीशर्ट.
विहान ने तब अपने हाथ को हलके से रूचि के बाहों पर फेर्रा, रूचि और भी कांप उठी, तो विहान ने कहा,
“मैं ने तो तुमको सीने से लगाया, मगर तुमने मुझको अपने बाहों में नहीं लिया क्यों? तुम्हारे बाहें तो मेरे सीने पर क्रॉस इस तरह हुए हैं जैसे मेरे और तुम्हारे बीच एक दीवार है!”
रूचि ने धीरे से कहा,
“दो कारण है इस्सके. 1. मुझको बहोत ठण्ड लग रही है, 2. आप से इस ड्रेस में सटने को अजीब लग रहा है, मैं तो चेंज करने वाली थी, मगर आप से कह दिया था के निघ्त्य में हूँ इस लिए सोचा के आप मुझको इसी में देखना चाहते होंगे तो ऐसे hi रही, हाथ को काँधे पर क्रॉस करने से ठण्ड कम लगती है! देखो कैसे मेरे होंठ, थोड़ी, और आवाज़ कांप रहे हैं बात करते हुए!”
विहान ने उसस्के दोनों बाहों को अपने हाथ में लेकर अपने शोल्डर के ऊपर लपेटा और रूचि को ज़ोर से अपने सीने से चिपकाया, तो अब रूचि की छाती विहान के छाती पर चिपक गयी थी और उस्सने भी विहान को ज़ोर से बाँहों में जाकर कर अपने सर को उसस्के सीने पर सत्ता दिया.
दोनों एक दूसरे के बाहों में थे, और रूचि की दिल की धड़कन इतनी तेज़ धड़क रहे थे के विहान उस्सकी धड़कन को अपने सीने पर महसूस कर रहा था और सुन भी रहा था धक् धक् धक् धक् धक् धक्…. इतना सन्नाटा था, इतनी ख़ामोशी थी के सब कुछ आराम से सुनाई दे रहे थे, दोनों के सांसें सुनाई दे रहे थे….
रूचि ने कहा,
“मुझे बहोत डर लग रहा है विहान!”
विहान ने उसस्के चेहरे पर अपना हाथ हलके से फरते हुए कहा,
“ष्ष्हह, डरने का नहीं है, प्यार करने का टाइम है रूचि, यू अरे ा रियल डार्लिंग, ी वांट तो किश यू….”
रूचि ने अपना सर उठा दिया और विहान का मुंह रूचि के होंठों से टकराया और रूचि ने ेंखें बांध कर liye….uss दौरान विहान का हाथ रूचि के पीठ पर फरने लगा था और उसस्के जांघें रूचि के जाँघों के बीच घुस रहा था, रूचि चुप चाप सब करने दे रही थी बल्कि खुद भी विहान के जिस्म पर रूचि ने अपने हाटों को चलना शुरू कर दिया था…..
विहान ने कुछ देर रूचि के होंठों को किश किया और अपने जीब को उसस्के होंठों पर फर्र्ना शुरू किया तो रूचि ने खुद बा खुद अपना मुंह खोल दिया और विहान का जीब उसस्के मुंह के अंदर गया तो रूचि उससे चुस्सने लगी और विहान ने भी रूचि का जीब अपने मुंह में ले लिया और एक दूसरे के जीब का रस दोनों चुस्सने लगे….
उस दौरान विहान का कमर रूचि के पथ के निचे डब्बा और उस्का तना हुआ गुड्डा रूचि के जाँघों के बीच में डब्बा और विहान ने एक रागढ दिया वहां पर….. रूचि जैसे अपने होश ो हवास खो बैठी थी विहान को सब कुछ करने दे रही थी गहरी सांसें लेते हुए…. विहान का हाथ तब रूचि के नितम्बों पर गया और रूचि के ऊपर अपने लुंड से और भी ज़ोर से दबाया उस्सने…..
कुछ पल बाद विहान का हाथ रूचि के निघ्त्य के निचे गया और उस्सकी नितम्बों को फील करते हुए उस्सकी पंतय को छुआ….. यह वो लम्हा था जब रूचि ने एक झाकते में विहान का हाथ थामा और ेंखें खोल दिए और विहान के चेहरे में हांफते हुए देख कर कहा,
“किआ कर रहे हो आप!”
विहान ने घुर्राटे हुए कहा,
“प्यार! प्यार कर रहा हूँ तुमसे मैं, मत रोको मुझे प्लीज, मुझे इस्सकी ज़रुरत है रूचि, मुझे इस्सकी सख्त ज़रुरत है, मुझसे संभाला नहीं जा रहा, मेरी प्यास बुझादो रूचि, इधर एक तुम्ही हो जो मेरी प्यास बुझा सकती हो, मैं और किसी को भी नहीं जानता जो मेरी प्यास को बुझा सके प्लीज रूचि, प्लीज……” विहान ने यह सब कुछ थोड़ा हांफते हुए, रुक रुक कर भरी आवाज़ में अपने चेहरे को रूचि के कांधों में दबाते हुए एक तड़प भरी आवाज़ में कहा था…..
रूचि के समझ में नहीं आया के वो किआ करें और किआ कहें विहान को….. विहान अपना निचे वाला part रूचि के सेक्स के ऊपर ड्रेस के ऊपर से hi दबाते हुए रगड़ता जा रहा था कन्टिन्यूसली नॉन स्टॉप खड़े हुए hi…. और रूचि सब फील कर रही थी मगर जैसे होश में नहीं थी…..
रूचि ने फिर एक मातुरे औरत की तरह सीरियस हो कर विहान के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसस्के ेंखों में देखते हुए कहा,
“ठीक है विहान सर, मुझे पता है आप किआ चाहते हो मुझसे, आप जो करना चाहते हो मैं आप को करने देती हूँ मगर एक शर्त है, िफ़ अस ा ट्रू मन यू एक्सेप्ट थे कंडीशन, ी ऍम आल योर्स!”
विहान ने खुश होते हुए कहा,
“सब मंज़ूर है मुझे कोई भाई शर्त हो मुझे बिल्कुल मंज़ूर है”
रूचि ने कहा,
“अपनी अशिता की कस्सम खाओ, अपने दादा, माँ और पिताजी की कस्सम कहो के जो शर्त होगा उस्सको रेस्पेक्ट करोगे और ज़िन्दगी भर उस्का उलंघन नहीं करोगे”
विहान ने कहा,
“मैं अपनी मम्मी, पापा, अशिता और दादा की कस्सम खता हूँ के शर्त को रेस्पेक्ट करूँगा, ठीक है अब बताओ किआ शर्त है?!”
रूचि ने कहा,
“शर्त यह है के मेरे साथ सब कुछ करने के बाद आप मुझसे कोई भी सवाल नहीं करोगे, कभी भी नहीं एक सवाल भी नहीं ज़िन्दगी भर - एहि शर्त है अरे यू okay विथ थिस? िफ़ यस, ी ऍम आल योर्स, टेक में!”
उस पल को विहान इतना खोया हुआ था रूचि के गर्दन को चूमते हुए और अपने कमर को कसके उस्सकी जिस्म पर दबाते, रगड़ते हुए के उस्सको और कुछ होश था hi नहीं के रूचि किआ कह रही है, उस्का किआ मतलब है, बस विहान को उस पल को सिर्फ उस्सको इश्क करना था, उस पल को ुसस्पर जैसे एक जूनून संवार था इश्क करने के लिए, उस्सकी सांसें बहोत तेज़ हो चुके थे और वो किसी और दुन्या में जा चूका था फिर रूचि ने खुद उस्सको अपने बाहों में और ज़ोर से भर लिया और वो खुद विहान के गर्दन पर अपना जीब फरने लगी…..
विहान का एक हाथ एक बार फिर रूचि के ड्रेस के निचे गए उसस्के नितम्बों पर उस्सकी पंतय को टटोलते हुए और खुद अपने तने हुए लुंड को विहान ने अपने ट्रॉउज़र की इलास्टिक को निचे करके लुंड को दबाया उसस्के जाँघों के दरमियान और रूचि की आह निकली….
तब रूचि ने उस्सको रुकने के लिए कहकर घर के दरवाज़े को खोला आहिस्ते से….. विहान हैरान हुआ और पूछा के किआ कर रही है तो रूचि ने कहा अंदर उसस्के कैमरे में चलने को.
विहान ने उसस्के भैया भाबी के बारे में पूछा तो रूचि ने कहा के बुसस शोर नहीं करना चाहिए, और बिना लाइट ों किये रूचि ने विहान का हाथ थाम कर उस्सको अपने कमरे के तरफ गाइड किया और दोनों रूचि के बीएड पर पाए गए…..
विहान का जैसे एक सपना पूरा होने जा रहा था, जब बीएड पर बैठे तो रूचि ने नाईट लैंप को ों किया और विहान के बाहों में समा गयी. विहान से इंतज़ार नहीं हो रहा था, उस्सने बहोत जल्दी से अपने कपडे उतार दिया, बिल्कुल नंगा हो गया, और रूचि को बाहों में भरके, किश करते हुए उस्सको बीएड पर लेता दिया और उस्सकी निघ्त्य निकाल फेंका, रूचि ने ब्रा पहनी हुई थी तो विहान ने पूछा,
“ब्रा क्यों पहनी हुई हो? निघ्त्य में नहीं पेहेनते है नाह इस्को?”
रूचि ने कहा,
“नहीं पहनती हूँ सिर्फ तुम आरहे थे और तुमसे बाहर मिलना था, ठण्ड थी इस लिए पहना था, वार्ना निघ्त्य में कभी नहीं पहनती हूँ…”
विहान अब रुक गया और रूचि के जिस्म को निहारने लगा, अपने मैं में रूचि के कर्व्स को देखते हुए अशिता की जिस्म को सोचने लगा, उस्का जमके खड़ा हुआ था और विहान ने रूचि का हाथ पाकर के अपने लुंड पर रखा, वो सोच रहा था रूचि हाथ खिंच लेगी मगर नहीं, रूचि ने उसस्के लुंड को थामा, और सहलाया, आराम से उसस्के लुंड को देखा और झुक कर उस्सको चूमा जिस से विहान की आह निकलने की बारी थी……
रूचि की पंतय अब भी उस के जिस्म पर थी, तो विहान ने रूचि को उस्सकी गर्दन से किश करते हुए धीरे धीरे उस्सकी छाती से होकर उस्सकी पथ को चाटते हुए उस्सकी नबी तक गया, वहां अपने होंठ को गोआल गोआल घुमाया और अपने डेंटन से रूचि की पंतय को निचे करने लगा…. रूचि सिमट गयी और उस्सकी जिस्म बीएड पर एक सांप की तरह रेंगने लगी… विहान नज़रें ऊपर के तरफ करके रूचि के चेहरे में देखते हुए उस्सकी पंतय को बिल्कुल बाहर निकल फेंका और इस बार उस्सने अपने लुंड को रूचि के चेहरे के पास करते हुए उसस्के गालों पर दबाया और तड़पती आवाज़ में एक आह के साथ रूचि को चुस्सने के लिए मिनतें किये विहान ने….
रूचि ने उसस्के लुंड को हाथ में लिया, और विहान के चेहरे में देखते हुए उस्सने पहले लुंड को चूमा, फिर जीब से छाता और मुंह में लेकर चुस्सने लगी….. विहान तड़प उठा और अपने दोनों हाथों से रूचि के सर को पाकर के उसस्के बाल में उँगलियाँ फरते हुए तड़पते और घुर्राटे आवाज़ में आहें भरने लगा तो रूचि रुकी और उस्सको सावधान किया के उस्सकी आवाज़ नहीं निकालनी चाहिए….
विहान लेट गया और रूचि को अपना काम करने दिया, रूचि विहान के ऊपर झुकी हुई थी और उसस्के मुंह में विहान का लुंड था जिस्सको वो बड़े आराम से चूस रही थी…. विहान खुद को किसी जन्नत का सेर करते हुए महसूस कर रहा था….. पिछले बार गोवा में यह सब किया था अशिता के साथ उसस्के बाद सिर्फ आज उस्सको यह आनंद मिल रहा था और वो बेहद खुशनसीब फील कर रहा था अपने आप को.
आखिर में उस से सेहेन नहीं हुआ उस्सको डर था के कहीं वो झाड़ नाह जाए तो झट से रूचि को अपने ऊपर खिंचा, वो पीठ के बल बीएड पर था और रूचि को अपने ऊपर लेकर उस्सकी जीब चुस्सने लगा…. रूचि ने खुद अपने टांगों को फैला दिया और विहान ने डब्बे आवाज़ में कहा,
“स्वीटहार्ट, मैं तुम्हारे गहराई में जाना चाहता हूँ प्लीज मन मत करना, अंदर जाने दो प्लीज….”
रूचि की सांसें भी बिल्कुल भारी हो गयी थी और उसी डाबी हुई आवाज़ में उस्सने भी जवाब दिया विहान के गर्दन को चूमते हुए,
“हमें पता है आप को ज़रुरत है इसी लिए तो हम अंदर आये हैं, आप को जो भी करना है करए मैं ने मन नहीं किया बुसस अपने प्रॉमिस को याद रखना, मुझसे एक भी सवाल मत करना इस्सके बाद…..”
बुसस इतना hi कहा था रूचि ने के विहान ने अपने टोएस के ऊपर थोड़ा ज़ोर लगा के लुंड को निचे से रूचि के गीली योनि के अंदर पुश किया और वो आराम से फिसलते हुए रूचि के अंदर समा गए….. अपने लुंड पर रूचि की जिस्म की गर्माहट को महसूस करते हुए विहान की आह निकली और उस्सने तुरंत रूचि को अपने निचे किया और वो रूचि के ऊपर हो गया लुंड को रूचि के अंदर रखे हुए hi….
क्यूंकि विहान बहोत ज़्यादा उत्तेजित हो गया था और उस से सब्र नहीं हो रहा था तो बिल्कुल भी देर नहीं लगा बुसस कुछ धक्कों के बाद hi विहान झड़ने को आया कमर हिलाते हुए, ज़बरदस्त ढाका देते हुए, रूचि के गर्दन और बूब्स चूस्ते हुए उस्सको जल्दी से अपने लुंड को बाहर निकालना पड़ा ेजकुलाते होने के लिए……
उस दौरान रूचि जैसे सातवे आसमान पर जा चुकी थी, अपने होश ो हवास में बिल्कुल नहीं थी जिस वक़्त से विहान ने उस्सको पेनेत्रते किया था रूचि कहीं खो गयी थी विहान को अपने अंदर महसूस करते हुए, ेंखों को बांध करके वो लुफ्त उठा रही थी विहान के जिस्म से अपनी जिस्म को उस तरह से मिला कर एक करते हुए रूचि किसी और दुन्या में थी, के उस्सको पता hi नहीं चला के कब विहान उस्सकी गहराई से निकल भी चूका था और जब विहान के गरम वीर्य रूचि के पथ के ऊपर कतरों में गिर्री तब उस्सको पता चला के विहान झाड़ रहा था उसस्के ऊपर…..
दोनों हांफ रहे थे, और अब एक दूसरे के चेहरे में प्यार से देख रहे थे, विहान के चेहरे में वो ख़ुशी देख कर रूचि को बड़ा ाचा लगा और वो एहि देखना चाहती थी, जैसे एक ग़रीब को उस्सने खाना खिला दिया था, एक प्यासे को सेहरा में जैसे पानी पीला दिया था उस्सने उस वक़्त तो रूचि को ख़ुशी हो रही थी विहान को इतना ख़ुशी देकर…. वो खुश थी के विहान को उस्सने खली हाथ नहीं लौटाया, वो संतुष्ट थी के उस्सने विहान को वो दे दिया जिस्सकी उस्सको ज़रुरत थी उस वक़्त.
बिस्तर पर बैठ कर अपने बालों को समेटते हुए रूचि अब बालों में एक बंद लगा रही थी और विहान बीएड पर लेट कर उस्सकी जिस्म को निहार रहा था, वही कर्व्स, वही गदराये बदन, वही मुलायम बूब्स जो उस्सने हर बार अशिता के देखे थे, वही जिस्म की गर्माहट, वही जिस्म की खुशभू… आज विहान को किसी और के साथ भी वही चैन और सुकून हासिल हुई थी जो सिर्फ अशिता से होते थे, वो सोचने लगा के सिर्फ एक लड़की के जिस्म के अंदर जाने के लिए क्यों उस्सको इतना कुछ करना पड़ा, क्यों उस्सको इतनी ज़रुरत महसूस हुई रूचि के जिस्म की गहराई में उतरने के लिए, और क्यों रूचि ने इतनी आसानी से सब कुछ होने दिया, और सबसे बड़ी बात विहान यह सोच रहा था के रूचि यह सब पहले कर चुकी है, रूचि वर्जिन नहीं थी!!!
लेकिन उस्सकी वर्जिन नाह होने से विहान को ज़रा सा भी फरक नहीं पड़ा था. उस्सको कोई परवाह नहीं था के रूचि वर्जिन हो या नहीं, उस्सको बुसस अपनी ज़रुरत पूरा करना था जो हुआ, और इस वक़्त रूचि को अपने निघ्त्य पेहेनते हुए देख रहा था खुद उस्सकी बीएड पर लेते हुए और निहारे जा रहा था रूचि की अदाओं को, उस्सकी कोमलता को, उस्सकी नरम मिज़ाज को, उस्सकी जान लेवा मुस्कराहट को….
और जब रूचि ने कपडे पेहेन लिए तो विहान से कहा,
“नाउ यू मस्ट जो सर!”
विहान ने उस्सको बाहों में भर लिया अपने ऊपर बीएड पर खिंच कर. वो अब भी नंगा था, रूचि उसस्के जिस्म के ऊपर थी और विहान ने उसस्के कानों में कहा,
“तुम्हारे साथ hi सो जाने को मैं कर रहा है अब तो!”
रूचि ने आराम से मुस्कुराते हुए कहा,
“आप को जो चाहिए था वो तो अब मिल गया आप को, अब मेरे लिए मुसीबत मत बनिए, मेहेरबानी करके अब आप जाइये, सोना भी तो है नाह, और वहां आप ने घर को बाहर से लॉक नहीं किया हुआ है, वापस जाइये जल्दी कहीं कोई चोरर नाह घुस जाए आप के दादा जी के घर में!”
विहान ने एक छोटे बचे की तरह मुंह बनाते हुए कहा,
“मुझे सिर्फ यह चाहिए था? नहीं तो; मुझे तुम चाहिए फुल, कम्प्लीटली, अब यह करके तुम्हारा साथ और भी ज़्यादा चाहिए मुझे, हर रोज़ चाहिए मुझे यह तुमसे अब तो!”
रूचि ने उस्सको प्यार से किश करते हुए कहा,
“हर रोज़ तो मुमकिन नहीं हाँ कहभी कभी मिल सकता है यह आप को! – अब टाइम देखिये आप, 1.30 हो गए हैं, सुबह उठना है नाह, कल आप का कॉलेज में पहला दिन है, सुबह हम बस स्टॉप पर मिलते हैं नाह, अब आप जाओ, मुझे भी सोना है अब. बुसस इतना बताते जाओ के आप खुश हुए के नहीं?!”
विहान ने बहोत ज़ोर से रूचि को बाहों में जाकर कर कहा,
“यह भी कोई पूछने की बात है के मैं खुश हुआ के नहीं दिख नहीं रहा तुम्हें के मुझको जैसे दुन्या भर की दौलत मिल गयी इस एक पल में, मैं ने तो सिर्फ तस्सवुर किया था के ऐसा कुछ होगा आने से पहले रास्ते में बुसस एक ख्याल आया था के तुमको निघ्त्य में देखूंगा तो तुमसे हमबिस्तर हो सकूंगा, सच में ऐसा होगा इस्सकी तो उम्मीद नहीं थी बिल्कुल, बस दिमाग़ में सोचा था ऐसा कुछ…. तुमने उस सपने को पूरा करके मुझे इतनी ख़ुशी दिया है के मैं बयां नहीं कर सकता…. प्यार हो गया मुझे तुमसे रूचि, बहोत प्यार हो गया है तुमसे… नहीं रह पाउँगा अब तुम्हारे बिना…. मत भेजो नाह मुझे, तुम्हारे साथ hi सोने दो नाह!”
रूचि ने विहान को उस्सकी टीशर्ट पहनाते हुए, और उस्सकी ट्रॉउज़र उस्सको देते हुए कहा,
“पागल हो आप किआ? नतीजा सोचा है किआ होगा अगर यहाँ सोये तो? इधर भाई और भाबी, उधर आप का दादा, उफ़ किआ इम्पॉसिबल बात कर रहे हैं हम बुसस चलिए जाइये अब…… और सुनए दरवाज़े से नहीं इस खिरकी से बाहर कूद जाइये, फिर कभी आना हो तो यहीं इसी विंडो के पास आना तब मैं अंदर से ओपन करुँगी और आप अंदर आ जाना…. मगर जब तक फ़ोन से तय नहीं करुँगी के हाँ आ सकते हो तब तक कभी भी मत आना समझे आप!”
विहान खुश हुआ यह सुनकर के फिर कभी भी आ सकता है, और ख़ुशी से मुस्कुराकर कहा,
“वाओ, मस्त आईडिया है, यस याआह!! ऑफ़ कोर्स बेस्ट होगा ऐसे आना विंडो क्रॉस karke…how रोमांटिक एंड अडवेंचरउस है नाह?!”
रूचि ने कहा,
“जाने से पहले एक और वादा करना होगा आप को अभी इसी वक़्त.”
विहान ने रूचि के गाल को चूमते हुए कहा,
“कोई भी वादा लेलो, मैं वाडे का पक्का हूँ”
“तो प्रॉमिस करो के बिना मुझे बताये कभी भी इस खिरकी के पास नहीं आओगे, जब तक मैं फ़ोन से हाँ नाह कहूं कभी भी यहाँ नहीं दिखोगे कभी भी नहीं! प्रॉमिस में अस ा मन”
विहान ने रूचि को प्रॉमिस किया के कभी भी वहां नहीं आएगा जब तक वो नाह कहे. और खिरकी से बाहर निकल गया. बाहर अन्डेहरा था इस लिए अपने मोबाइल की टोर्च को ों किया कुछ दूर तक चलते हुए और वापस जाने लगा. रूचि ने खिरकी वापस बांध कर ली.
अब जाते वक़्त विहान सोचने लगा और खुद से कहा,
“तो मेमसाब की कोई आशिक ज़रूर है पहले से और वो बताना नहीं चाहती. वर्जिन तो नहीं है यह पक्का है इसी लिए पहले मुझसे वादा लिया के सब कुछ करने के बाद मैं उस से कोई सवाल नाह करूँ. मतलब उस्सको पता था के मुझे पता चल जाएगा के वो वर्जिन नहीं है तो ऑब्वियस्ली मेरा सवाल एहि होता के तुम ने किसी से पहले भी सेक्स कर लिया है तो इस सवाल को प्रॉमिस से रोक लिया पहले hi उस्सने….. मगर किश के साथ सेक्स करती होगी रूचि? देखने में तो इतनी भोली और मासूम दिखती है के कोई भी यह नहीं सोच सकता के यह सेक्स भी करती है….. वाओ किआ लड़की है यार!!! चलो कोई बात नहीं मेरा तो मज़ा hi मज़ा है अब…. मगर साला यह दिल चाहने लगा है उससे….. प्यार जैसा हो गया है उस से….. अशिता को अगर पता चला के मैं ने किसी और लड़की के साथ सेक्स किया तो मार डालेगी मुझे… धोका दिया मैं ने अशिता को अभी नाह? ओह माय गॉड… अशिता को कभी भी नहीं पता चलना चाहिए इस बात का….. मुझे माफ़ करना आशु मुझसे रहा नाह गया…..”
तो बे कॉन्टिनोएड…… (4001 वर्ड्स)
विहान वहां पहुंचा तो हांफ रहा था तेज़ रफ़्तार से चलने की वजह से. रूचि के घर के दरवाज़े के पास आया और झुक कर अपने दोनों हाथों को अपने घंटों पर रख कर चारों तरफ देखने लगा के एक खम्बे के पीछे से रूचि सामने आयी. वो विहान के रीच होने से पहले से hi बाहर थी और विहान को आने का वेट कर रही थी. विहान ने सोचा था कुछ भी नहीं दिखाई देगा मगर रूचि की सिल्होउएत्ते साफ़ नज़र आरही थी, क्यूंकि हलकी सी चांदनी थी. विहान अब भी हांफ रहा था और मुस्कुराते हुए रूचि के तरफ बढ़ा….
रूचि ने फुसफुसाते हुए कहा,
“आप बहोत ज़ोरों से हांफ रहे हैं सब सुनाई दे रहे हैं, मैं दूर से आप का हांफना सुन रही हूँ.”
विहान दो कदम रूचि से दूर था और अपने बाहों को खोल दिया रूचि को उसस्के बाँहों में आने के लिए.
रूचि ने एक कदम उसस्के तरफ बढ़ाया और रुक गयी अपने दोनों हाथों को अपने काँधे पर क्रॉस किये हुए वो विहान के चेहरे में देखने की कोशिश में लगी हुई थी क्यूंकि साफ़ तो नहीं दिख रहा था फिर भी दिख रहा था. रूचि ने देखा के विहान ने अपने बाहों को खोला हुआ था और इंतज़ार में था के वो उसस्के बाँहों में सिमट जाए.
और उसी पोजीशन में खड़े विहान वेट कर रहा था के रूचि उसस्के बाहों में आये और तब तक विहान अशिता की निघ्त्य को देख रहा था जो उस्सकी घुटनों तक रीच होती थी और काँधे पर पतली सी स्ट्रैप्स थे और विहान निघ्त्य की रंग को जान्ने की कोशिश कर रहा था, रात में रंग साफ़ नहीं दिख रहा था मगर उस वक़्त विहान को लगा के निघ्त्य का कलर पीला ब्लू था.
रूचि थोड़ा कांप रही थी, और बार बार दरवाज़े को देह रही थी. घर के अंदर बिल्कुल अँधेरा था और रूचि सोच रही थी के अगर अचानक उस्सको लाइट ों दिखाई दिए अंदर तो तुरंत विहान को भागना पड़ेगा मगर सोचने लगी के किधर छूपने को कहेगा विहान को…
विहान अब भी बाहें फैलाये हुए खड़ा था रूचि के इंतज़ार में और लगातार उस्सकी निघ्त्य को देखे जा रहा था. उस्सने हमेसाह रूचि को यूनिफार्म में देखा था, सलवार कमीज़ और दुपटे में आज पहली बार उस्सकी टांगें नज़र आरहे थे, वो भी अँधेरे में अच्छी तरह से नज़र नहीं ारः था उससे.
कितनी तमन्नाह थी विहान को रूचि के जिस्म अंदर देखने को, कितना सोच रहा था के किआ उस्सकी जिस्म अंदर अशिता जैसी होगी या नहीं, कितनी बार अपने तस्सवुर में उस्सने रूचि को वैसे सोचा था पहले दिन से और आज मौका मिला भी रूचि को उस तरह से देखने को तो अँधेरा था, उस्सकी जिस्म अच्छी तरह से दिख भी नहीं रहे थे मगर विहान ने सोचा फील को कर सकेगा, उस्सको अपने बाहों में तो ले पायेगा और उस्सकी जिस्म की खुशभू, उस्सकी मुलायम स्किन को तो फील कर पाएगा सब महसूस कर पाएगा….
रूचि अब भी एक कदम विहान के सामने अपने हाथों को काँधे पर क्रॉस किये हुए कड़ी थी, और विहान ने अब वैसे hi फुस्फुसाते हुए कहा,
“नहीं होगी मेरे बाँहों में तो मैं खुद एक कदम तुम्हारे पास अत हूँ, हमारे पास ज़्यादा वक़्त भी तो नहीं है, मुझको वापस भी जाना है तो गले तो लग जाओ अब….”
और रूचि ने उस एक कदम के फासले को मिटाया विहान के सीने से लग कर. विहान ने उस्सको अपने बाहों में जाकर तो लिया मगर रूचि ने अब भी अपने हाथों को अपने हांड़ों पर क्रॉस किये हुए थे, तो विहान के सीने पर रूचि के दो बाज़ू डब्बे हुए थे उस वक़्त. विहान ने सर ऊपर उठाकर एक लम्बी सांस छोर्रा रूचि को अपने बाहों में महसूस करते हुए और अपने मुंह को रूचि के काँधे से अपने होंठों से उस्सकी नंगी काँधे को चूमा रूचि को फिर दोबारा सांस बाहर चोर्रा. विहान के लम्बे कद होने के कारण रूचि के काँधे पर उस्का सर झुका हुआ था, रूचि का चेहरा विहान के चेस्ट के थोड़ा ऊपर जहाँ गर्दन शुरू होता है वहां रीच हुआ था. विहान ने एक जॉगिंग वाला ट्रॉउज़र पहना हुआ था और एक टीशर्ट.
विहान ने तब अपने हाथ को हलके से रूचि के बाहों पर फेर्रा, रूचि और भी कांप उठी, तो विहान ने कहा,
“मैं ने तो तुमको सीने से लगाया, मगर तुमने मुझको अपने बाहों में नहीं लिया क्यों? तुम्हारे बाहें तो मेरे सीने पर क्रॉस इस तरह हुए हैं जैसे मेरे और तुम्हारे बीच एक दीवार है!”
रूचि ने धीरे से कहा,
“दो कारण है इस्सके. 1. मुझको बहोत ठण्ड लग रही है, 2. आप से इस ड्रेस में सटने को अजीब लग रहा है, मैं तो चेंज करने वाली थी, मगर आप से कह दिया था के निघ्त्य में हूँ इस लिए सोचा के आप मुझको इसी में देखना चाहते होंगे तो ऐसे hi रही, हाथ को काँधे पर क्रॉस करने से ठण्ड कम लगती है! देखो कैसे मेरे होंठ, थोड़ी, और आवाज़ कांप रहे हैं बात करते हुए!”
विहान ने उसस्के दोनों बाहों को अपने हाथ में लेकर अपने शोल्डर के ऊपर लपेटा और रूचि को ज़ोर से अपने सीने से चिपकाया, तो अब रूचि की छाती विहान के छाती पर चिपक गयी थी और उस्सने भी विहान को ज़ोर से बाँहों में जाकर कर अपने सर को उसस्के सीने पर सत्ता दिया.
दोनों एक दूसरे के बाहों में थे, और रूचि की दिल की धड़कन इतनी तेज़ धड़क रहे थे के विहान उस्सकी धड़कन को अपने सीने पर महसूस कर रहा था और सुन भी रहा था धक् धक् धक् धक् धक् धक्…. इतना सन्नाटा था, इतनी ख़ामोशी थी के सब कुछ आराम से सुनाई दे रहे थे, दोनों के सांसें सुनाई दे रहे थे….
रूचि ने कहा,
“मुझे बहोत डर लग रहा है विहान!”
विहान ने उसस्के चेहरे पर अपना हाथ हलके से फरते हुए कहा,
“ष्ष्हह, डरने का नहीं है, प्यार करने का टाइम है रूचि, यू अरे ा रियल डार्लिंग, ी वांट तो किश यू….”
रूचि ने अपना सर उठा दिया और विहान का मुंह रूचि के होंठों से टकराया और रूचि ने ेंखें बांध कर liye….uss दौरान विहान का हाथ रूचि के पीठ पर फरने लगा था और उसस्के जांघें रूचि के जाँघों के बीच घुस रहा था, रूचि चुप चाप सब करने दे रही थी बल्कि खुद भी विहान के जिस्म पर रूचि ने अपने हाटों को चलना शुरू कर दिया था…..
विहान ने कुछ देर रूचि के होंठों को किश किया और अपने जीब को उसस्के होंठों पर फर्र्ना शुरू किया तो रूचि ने खुद बा खुद अपना मुंह खोल दिया और विहान का जीब उसस्के मुंह के अंदर गया तो रूचि उससे चुस्सने लगी और विहान ने भी रूचि का जीब अपने मुंह में ले लिया और एक दूसरे के जीब का रस दोनों चुस्सने लगे….
उस दौरान विहान का कमर रूचि के पथ के निचे डब्बा और उस्का तना हुआ गुड्डा रूचि के जाँघों के बीच में डब्बा और विहान ने एक रागढ दिया वहां पर….. रूचि जैसे अपने होश ो हवास खो बैठी थी विहान को सब कुछ करने दे रही थी गहरी सांसें लेते हुए…. विहान का हाथ तब रूचि के नितम्बों पर गया और रूचि के ऊपर अपने लुंड से और भी ज़ोर से दबाया उस्सने…..
कुछ पल बाद विहान का हाथ रूचि के निघ्त्य के निचे गया और उस्सकी नितम्बों को फील करते हुए उस्सकी पंतय को छुआ….. यह वो लम्हा था जब रूचि ने एक झाकते में विहान का हाथ थामा और ेंखें खोल दिए और विहान के चेहरे में हांफते हुए देख कर कहा,
“किआ कर रहे हो आप!”
विहान ने घुर्राटे हुए कहा,
“प्यार! प्यार कर रहा हूँ तुमसे मैं, मत रोको मुझे प्लीज, मुझे इस्सकी ज़रुरत है रूचि, मुझे इस्सकी सख्त ज़रुरत है, मुझसे संभाला नहीं जा रहा, मेरी प्यास बुझादो रूचि, इधर एक तुम्ही हो जो मेरी प्यास बुझा सकती हो, मैं और किसी को भी नहीं जानता जो मेरी प्यास को बुझा सके प्लीज रूचि, प्लीज……” विहान ने यह सब कुछ थोड़ा हांफते हुए, रुक रुक कर भरी आवाज़ में अपने चेहरे को रूचि के कांधों में दबाते हुए एक तड़प भरी आवाज़ में कहा था…..
रूचि के समझ में नहीं आया के वो किआ करें और किआ कहें विहान को….. विहान अपना निचे वाला part रूचि के सेक्स के ऊपर ड्रेस के ऊपर से hi दबाते हुए रगड़ता जा रहा था कन्टिन्यूसली नॉन स्टॉप खड़े हुए hi…. और रूचि सब फील कर रही थी मगर जैसे होश में नहीं थी…..
रूचि ने फिर एक मातुरे औरत की तरह सीरियस हो कर विहान के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसस्के ेंखों में देखते हुए कहा,
“ठीक है विहान सर, मुझे पता है आप किआ चाहते हो मुझसे, आप जो करना चाहते हो मैं आप को करने देती हूँ मगर एक शर्त है, िफ़ अस ा ट्रू मन यू एक्सेप्ट थे कंडीशन, ी ऍम आल योर्स!”
विहान ने खुश होते हुए कहा,
“सब मंज़ूर है मुझे कोई भाई शर्त हो मुझे बिल्कुल मंज़ूर है”
रूचि ने कहा,
“अपनी अशिता की कस्सम खाओ, अपने दादा, माँ और पिताजी की कस्सम कहो के जो शर्त होगा उस्सको रेस्पेक्ट करोगे और ज़िन्दगी भर उस्का उलंघन नहीं करोगे”
विहान ने कहा,
“मैं अपनी मम्मी, पापा, अशिता और दादा की कस्सम खता हूँ के शर्त को रेस्पेक्ट करूँगा, ठीक है अब बताओ किआ शर्त है?!”
रूचि ने कहा,
“शर्त यह है के मेरे साथ सब कुछ करने के बाद आप मुझसे कोई भी सवाल नहीं करोगे, कभी भी नहीं एक सवाल भी नहीं ज़िन्दगी भर - एहि शर्त है अरे यू okay विथ थिस? िफ़ यस, ी ऍम आल योर्स, टेक में!”
उस पल को विहान इतना खोया हुआ था रूचि के गर्दन को चूमते हुए और अपने कमर को कसके उस्सकी जिस्म पर दबाते, रगड़ते हुए के उस्सको और कुछ होश था hi नहीं के रूचि किआ कह रही है, उस्का किआ मतलब है, बस विहान को उस पल को सिर्फ उस्सको इश्क करना था, उस पल को ुसस्पर जैसे एक जूनून संवार था इश्क करने के लिए, उस्सकी सांसें बहोत तेज़ हो चुके थे और वो किसी और दुन्या में जा चूका था फिर रूचि ने खुद उस्सको अपने बाहों में और ज़ोर से भर लिया और वो खुद विहान के गर्दन पर अपना जीब फरने लगी…..
विहान का एक हाथ एक बार फिर रूचि के ड्रेस के निचे गए उसस्के नितम्बों पर उस्सकी पंतय को टटोलते हुए और खुद अपने तने हुए लुंड को विहान ने अपने ट्रॉउज़र की इलास्टिक को निचे करके लुंड को दबाया उसस्के जाँघों के दरमियान और रूचि की आह निकली….
तब रूचि ने उस्सको रुकने के लिए कहकर घर के दरवाज़े को खोला आहिस्ते से….. विहान हैरान हुआ और पूछा के किआ कर रही है तो रूचि ने कहा अंदर उसस्के कैमरे में चलने को.
विहान ने उसस्के भैया भाबी के बारे में पूछा तो रूचि ने कहा के बुसस शोर नहीं करना चाहिए, और बिना लाइट ों किये रूचि ने विहान का हाथ थाम कर उस्सको अपने कमरे के तरफ गाइड किया और दोनों रूचि के बीएड पर पाए गए…..
विहान का जैसे एक सपना पूरा होने जा रहा था, जब बीएड पर बैठे तो रूचि ने नाईट लैंप को ों किया और विहान के बाहों में समा गयी. विहान से इंतज़ार नहीं हो रहा था, उस्सने बहोत जल्दी से अपने कपडे उतार दिया, बिल्कुल नंगा हो गया, और रूचि को बाहों में भरके, किश करते हुए उस्सको बीएड पर लेता दिया और उस्सकी निघ्त्य निकाल फेंका, रूचि ने ब्रा पहनी हुई थी तो विहान ने पूछा,
“ब्रा क्यों पहनी हुई हो? निघ्त्य में नहीं पेहेनते है नाह इस्को?”
रूचि ने कहा,
“नहीं पहनती हूँ सिर्फ तुम आरहे थे और तुमसे बाहर मिलना था, ठण्ड थी इस लिए पहना था, वार्ना निघ्त्य में कभी नहीं पहनती हूँ…”
विहान अब रुक गया और रूचि के जिस्म को निहारने लगा, अपने मैं में रूचि के कर्व्स को देखते हुए अशिता की जिस्म को सोचने लगा, उस्का जमके खड़ा हुआ था और विहान ने रूचि का हाथ पाकर के अपने लुंड पर रखा, वो सोच रहा था रूचि हाथ खिंच लेगी मगर नहीं, रूचि ने उसस्के लुंड को थामा, और सहलाया, आराम से उसस्के लुंड को देखा और झुक कर उस्सको चूमा जिस से विहान की आह निकलने की बारी थी……
रूचि की पंतय अब भी उस के जिस्म पर थी, तो विहान ने रूचि को उस्सकी गर्दन से किश करते हुए धीरे धीरे उस्सकी छाती से होकर उस्सकी पथ को चाटते हुए उस्सकी नबी तक गया, वहां अपने होंठ को गोआल गोआल घुमाया और अपने डेंटन से रूचि की पंतय को निचे करने लगा…. रूचि सिमट गयी और उस्सकी जिस्म बीएड पर एक सांप की तरह रेंगने लगी… विहान नज़रें ऊपर के तरफ करके रूचि के चेहरे में देखते हुए उस्सकी पंतय को बिल्कुल बाहर निकल फेंका और इस बार उस्सने अपने लुंड को रूचि के चेहरे के पास करते हुए उसस्के गालों पर दबाया और तड़पती आवाज़ में एक आह के साथ रूचि को चुस्सने के लिए मिनतें किये विहान ने….
रूचि ने उसस्के लुंड को हाथ में लिया, और विहान के चेहरे में देखते हुए उस्सने पहले लुंड को चूमा, फिर जीब से छाता और मुंह में लेकर चुस्सने लगी….. विहान तड़प उठा और अपने दोनों हाथों से रूचि के सर को पाकर के उसस्के बाल में उँगलियाँ फरते हुए तड़पते और घुर्राटे आवाज़ में आहें भरने लगा तो रूचि रुकी और उस्सको सावधान किया के उस्सकी आवाज़ नहीं निकालनी चाहिए….
विहान लेट गया और रूचि को अपना काम करने दिया, रूचि विहान के ऊपर झुकी हुई थी और उसस्के मुंह में विहान का लुंड था जिस्सको वो बड़े आराम से चूस रही थी…. विहान खुद को किसी जन्नत का सेर करते हुए महसूस कर रहा था….. पिछले बार गोवा में यह सब किया था अशिता के साथ उसस्के बाद सिर्फ आज उस्सको यह आनंद मिल रहा था और वो बेहद खुशनसीब फील कर रहा था अपने आप को.
आखिर में उस से सेहेन नहीं हुआ उस्सको डर था के कहीं वो झाड़ नाह जाए तो झट से रूचि को अपने ऊपर खिंचा, वो पीठ के बल बीएड पर था और रूचि को अपने ऊपर लेकर उस्सकी जीब चुस्सने लगा…. रूचि ने खुद अपने टांगों को फैला दिया और विहान ने डब्बे आवाज़ में कहा,
“स्वीटहार्ट, मैं तुम्हारे गहराई में जाना चाहता हूँ प्लीज मन मत करना, अंदर जाने दो प्लीज….”
रूचि की सांसें भी बिल्कुल भारी हो गयी थी और उसी डाबी हुई आवाज़ में उस्सने भी जवाब दिया विहान के गर्दन को चूमते हुए,
“हमें पता है आप को ज़रुरत है इसी लिए तो हम अंदर आये हैं, आप को जो भी करना है करए मैं ने मन नहीं किया बुसस अपने प्रॉमिस को याद रखना, मुझसे एक भी सवाल मत करना इस्सके बाद…..”
बुसस इतना hi कहा था रूचि ने के विहान ने अपने टोएस के ऊपर थोड़ा ज़ोर लगा के लुंड को निचे से रूचि के गीली योनि के अंदर पुश किया और वो आराम से फिसलते हुए रूचि के अंदर समा गए….. अपने लुंड पर रूचि की जिस्म की गर्माहट को महसूस करते हुए विहान की आह निकली और उस्सने तुरंत रूचि को अपने निचे किया और वो रूचि के ऊपर हो गया लुंड को रूचि के अंदर रखे हुए hi….
क्यूंकि विहान बहोत ज़्यादा उत्तेजित हो गया था और उस से सब्र नहीं हो रहा था तो बिल्कुल भी देर नहीं लगा बुसस कुछ धक्कों के बाद hi विहान झड़ने को आया कमर हिलाते हुए, ज़बरदस्त ढाका देते हुए, रूचि के गर्दन और बूब्स चूस्ते हुए उस्सको जल्दी से अपने लुंड को बाहर निकालना पड़ा ेजकुलाते होने के लिए……
उस दौरान रूचि जैसे सातवे आसमान पर जा चुकी थी, अपने होश ो हवास में बिल्कुल नहीं थी जिस वक़्त से विहान ने उस्सको पेनेत्रते किया था रूचि कहीं खो गयी थी विहान को अपने अंदर महसूस करते हुए, ेंखों को बांध करके वो लुफ्त उठा रही थी विहान के जिस्म से अपनी जिस्म को उस तरह से मिला कर एक करते हुए रूचि किसी और दुन्या में थी, के उस्सको पता hi नहीं चला के कब विहान उस्सकी गहराई से निकल भी चूका था और जब विहान के गरम वीर्य रूचि के पथ के ऊपर कतरों में गिर्री तब उस्सको पता चला के विहान झाड़ रहा था उसस्के ऊपर…..
दोनों हांफ रहे थे, और अब एक दूसरे के चेहरे में प्यार से देख रहे थे, विहान के चेहरे में वो ख़ुशी देख कर रूचि को बड़ा ाचा लगा और वो एहि देखना चाहती थी, जैसे एक ग़रीब को उस्सने खाना खिला दिया था, एक प्यासे को सेहरा में जैसे पानी पीला दिया था उस्सने उस वक़्त तो रूचि को ख़ुशी हो रही थी विहान को इतना ख़ुशी देकर…. वो खुश थी के विहान को उस्सने खली हाथ नहीं लौटाया, वो संतुष्ट थी के उस्सने विहान को वो दे दिया जिस्सकी उस्सको ज़रुरत थी उस वक़्त.
बिस्तर पर बैठ कर अपने बालों को समेटते हुए रूचि अब बालों में एक बंद लगा रही थी और विहान बीएड पर लेट कर उस्सकी जिस्म को निहार रहा था, वही कर्व्स, वही गदराये बदन, वही मुलायम बूब्स जो उस्सने हर बार अशिता के देखे थे, वही जिस्म की गर्माहट, वही जिस्म की खुशभू… आज विहान को किसी और के साथ भी वही चैन और सुकून हासिल हुई थी जो सिर्फ अशिता से होते थे, वो सोचने लगा के सिर्फ एक लड़की के जिस्म के अंदर जाने के लिए क्यों उस्सको इतना कुछ करना पड़ा, क्यों उस्सको इतनी ज़रुरत महसूस हुई रूचि के जिस्म की गहराई में उतरने के लिए, और क्यों रूचि ने इतनी आसानी से सब कुछ होने दिया, और सबसे बड़ी बात विहान यह सोच रहा था के रूचि यह सब पहले कर चुकी है, रूचि वर्जिन नहीं थी!!!
लेकिन उस्सकी वर्जिन नाह होने से विहान को ज़रा सा भी फरक नहीं पड़ा था. उस्सको कोई परवाह नहीं था के रूचि वर्जिन हो या नहीं, उस्सको बुसस अपनी ज़रुरत पूरा करना था जो हुआ, और इस वक़्त रूचि को अपने निघ्त्य पेहेनते हुए देख रहा था खुद उस्सकी बीएड पर लेते हुए और निहारे जा रहा था रूचि की अदाओं को, उस्सकी कोमलता को, उस्सकी नरम मिज़ाज को, उस्सकी जान लेवा मुस्कराहट को….
और जब रूचि ने कपडे पेहेन लिए तो विहान से कहा,
“नाउ यू मस्ट जो सर!”
विहान ने उस्सको बाहों में भर लिया अपने ऊपर बीएड पर खिंच कर. वो अब भी नंगा था, रूचि उसस्के जिस्म के ऊपर थी और विहान ने उसस्के कानों में कहा,
“तुम्हारे साथ hi सो जाने को मैं कर रहा है अब तो!”
रूचि ने आराम से मुस्कुराते हुए कहा,
“आप को जो चाहिए था वो तो अब मिल गया आप को, अब मेरे लिए मुसीबत मत बनिए, मेहेरबानी करके अब आप जाइये, सोना भी तो है नाह, और वहां आप ने घर को बाहर से लॉक नहीं किया हुआ है, वापस जाइये जल्दी कहीं कोई चोरर नाह घुस जाए आप के दादा जी के घर में!”
विहान ने एक छोटे बचे की तरह मुंह बनाते हुए कहा,
“मुझे सिर्फ यह चाहिए था? नहीं तो; मुझे तुम चाहिए फुल, कम्प्लीटली, अब यह करके तुम्हारा साथ और भी ज़्यादा चाहिए मुझे, हर रोज़ चाहिए मुझे यह तुमसे अब तो!”
रूचि ने उस्सको प्यार से किश करते हुए कहा,
“हर रोज़ तो मुमकिन नहीं हाँ कहभी कभी मिल सकता है यह आप को! – अब टाइम देखिये आप, 1.30 हो गए हैं, सुबह उठना है नाह, कल आप का कॉलेज में पहला दिन है, सुबह हम बस स्टॉप पर मिलते हैं नाह, अब आप जाओ, मुझे भी सोना है अब. बुसस इतना बताते जाओ के आप खुश हुए के नहीं?!”
विहान ने बहोत ज़ोर से रूचि को बाहों में जाकर कर कहा,
“यह भी कोई पूछने की बात है के मैं खुश हुआ के नहीं दिख नहीं रहा तुम्हें के मुझको जैसे दुन्या भर की दौलत मिल गयी इस एक पल में, मैं ने तो सिर्फ तस्सवुर किया था के ऐसा कुछ होगा आने से पहले रास्ते में बुसस एक ख्याल आया था के तुमको निघ्त्य में देखूंगा तो तुमसे हमबिस्तर हो सकूंगा, सच में ऐसा होगा इस्सकी तो उम्मीद नहीं थी बिल्कुल, बस दिमाग़ में सोचा था ऐसा कुछ…. तुमने उस सपने को पूरा करके मुझे इतनी ख़ुशी दिया है के मैं बयां नहीं कर सकता…. प्यार हो गया मुझे तुमसे रूचि, बहोत प्यार हो गया है तुमसे… नहीं रह पाउँगा अब तुम्हारे बिना…. मत भेजो नाह मुझे, तुम्हारे साथ hi सोने दो नाह!”
रूचि ने विहान को उस्सकी टीशर्ट पहनाते हुए, और उस्सकी ट्रॉउज़र उस्सको देते हुए कहा,
“पागल हो आप किआ? नतीजा सोचा है किआ होगा अगर यहाँ सोये तो? इधर भाई और भाबी, उधर आप का दादा, उफ़ किआ इम्पॉसिबल बात कर रहे हैं हम बुसस चलिए जाइये अब…… और सुनए दरवाज़े से नहीं इस खिरकी से बाहर कूद जाइये, फिर कभी आना हो तो यहीं इसी विंडो के पास आना तब मैं अंदर से ओपन करुँगी और आप अंदर आ जाना…. मगर जब तक फ़ोन से तय नहीं करुँगी के हाँ आ सकते हो तब तक कभी भी मत आना समझे आप!”
विहान खुश हुआ यह सुनकर के फिर कभी भी आ सकता है, और ख़ुशी से मुस्कुराकर कहा,
“वाओ, मस्त आईडिया है, यस याआह!! ऑफ़ कोर्स बेस्ट होगा ऐसे आना विंडो क्रॉस karke…how रोमांटिक एंड अडवेंचरउस है नाह?!”
रूचि ने कहा,
“जाने से पहले एक और वादा करना होगा आप को अभी इसी वक़्त.”
विहान ने रूचि के गाल को चूमते हुए कहा,
“कोई भी वादा लेलो, मैं वाडे का पक्का हूँ”
“तो प्रॉमिस करो के बिना मुझे बताये कभी भी इस खिरकी के पास नहीं आओगे, जब तक मैं फ़ोन से हाँ नाह कहूं कभी भी यहाँ नहीं दिखोगे कभी भी नहीं! प्रॉमिस में अस ा मन”
विहान ने रूचि को प्रॉमिस किया के कभी भी वहां नहीं आएगा जब तक वो नाह कहे. और खिरकी से बाहर निकल गया. बाहर अन्डेहरा था इस लिए अपने मोबाइल की टोर्च को ों किया कुछ दूर तक चलते हुए और वापस जाने लगा. रूचि ने खिरकी वापस बांध कर ली.
अब जाते वक़्त विहान सोचने लगा और खुद से कहा,
“तो मेमसाब की कोई आशिक ज़रूर है पहले से और वो बताना नहीं चाहती. वर्जिन तो नहीं है यह पक्का है इसी लिए पहले मुझसे वादा लिया के सब कुछ करने के बाद मैं उस से कोई सवाल नाह करूँ. मतलब उस्सको पता था के मुझे पता चल जाएगा के वो वर्जिन नहीं है तो ऑब्वियस्ली मेरा सवाल एहि होता के तुम ने किसी से पहले भी सेक्स कर लिया है तो इस सवाल को प्रॉमिस से रोक लिया पहले hi उस्सने….. मगर किश के साथ सेक्स करती होगी रूचि? देखने में तो इतनी भोली और मासूम दिखती है के कोई भी यह नहीं सोच सकता के यह सेक्स भी करती है….. वाओ किआ लड़की है यार!!! चलो कोई बात नहीं मेरा तो मज़ा hi मज़ा है अब…. मगर साला यह दिल चाहने लगा है उससे….. प्यार जैसा हो गया है उस से….. अशिता को अगर पता चला के मैं ने किसी और लड़की के साथ सेक्स किया तो मार डालेगी मुझे… धोका दिया मैं ने अशिता को अभी नाह? ओह माय गॉड… अशिता को कभी भी नहीं पता चलना चाहिए इस बात का….. मुझे माफ़ करना आशु मुझसे रहा नाह गया…..”
तो बे कॉन्टिनोएड…… (4001 वर्ड्स)