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- Dec 5, 2013
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मेघा:- थोड़ा स्लो chalaao...Raasta ठीक नहीं है और तुम इतना फ़ास्ट चला रहे हो?
डरते हुए मेघा बोली.
सुमित:- ठीक hi तो है...70 kmph...Isse स्लो चलाऊंगा तो लगेगा बाइक नहीं साइकिल चला रहा हूँ.
सुमित की इस बात पर मेघा सुमित को घूरती hai...Lekin कुछ फर्क नहीं padta...Sumit की नजर आगे रास्ते पर था.
मेघा:- स्पीड इतना है की लग रहा है मई किसी तूफ़ान की सैर कर रही हूँ.
अभी भी मेघा की बातों में दर था.
सुमित:- Tufaan...Wo तो हमेशा करोगी क्यों की तूफ़ान का दूसरा नाम hi सुमित hai...Yaa फिर यूँ कहो तूफ़ान मेरा करीबी रिश्तेदार hai...Jaha जहा मई जाता हूँ तूफ़ान मेरे साथ hi आता है.
अलग hi घमंड था सुमित की बातों में.
मेघा:- लेकिन मुझे ना hi तुम्हारे साथ रहना है और ना hi तूफ़ान के saath...Abhi मज़बूरी है इस लिए.
सुमित:- ऐसे कैसे? हमने साथ जीने और साथ मरने की कसम खाया है साथ mein...Uska क्या?
मेघा:- अभी भी नशे में हो तुम? मई तुमसे बात तक नहीं करती और तुम कहते हो की मैंने तुम्हारे साथ जीने मरने की कसम खाया है.
मेघा की आवाज में इस बार गुस्सा था.
सुमित:- मई तो खा चूका hun...Bas तुम्हारी बारी का इंतजार है.
सुमित हँसते हुए बोलै.
मेघा:- बहुत hi घटिया जोके था.
सुमित:- क्या करू तुम्हारा जोक्स का चॉइस hi घटिया hai...Tumhe पसंद आये इस लिए घटिया जोक्स सुनाना पड़ता है.
अफ़सोस की तुम्हे मेरा घटिया जोक्स पसंद है लेकिन मई नहीं.
इस बार मेघा कुछ नहीं बोलती है और सुमित भी चुप हो जाता है.
सुमित:- एक बात kahu...Gussa तो नहीं होगी तुम?
दोनों के बिच की खामोशी को तोड़ कर सुमित ने कहा.
मेघा:- पहले बताओ.
सुमित:- दरोगी तो नहीं?
मेघा:- अब्ब बोलो भी.
मेघा की गुस्सा भरी बातें सुन सुमित मुस्कुराता है और कहता है.
सुमित:- ये मेरा फर्स्ट एक्सपीरियंस hai...Raat में बाइक चलाने ka...Aur काफी मजा आ रहा है इतना तेज चलाते हुए पहली बार.
ये सुनते hi...
मेघा:- बाइक रोको.
दर में इतना तेज चीख निकला मेघा की की सुमित को डिस्क ब्रेक लगाना पड़ा.
मेघा बाइक से उतर कर सुमित को गुस्से से देखती है और सुमित मासूम सा शक्ल बना कर.
सुमित:- ी ऍम जोकिंग.
अब्ब मेघा का गुस्सा इतना बढ़ गया की वो कुछ बोल hi नहीं पा रही थी.
सुमित:- तुमसे ज्यादा प्यार मई खुद से करता hun...Tumhare चक्कर में खुद को मार नहीं सकता.
काफी एक्सपीरियंस है रात में बाइक चलाने की...4-5 बार हाथ पेअर तुड़वा चूका hun...Abb वो मिस्टेक फिर से नहीं hoga...Tum निश्चिंत रहो.
सुमित मुस्कुरा कर बोलै.
मेघा बाइक में बैठ जाती है और बस इतना hi कहती है.
मेघा:- चलो.
फिर सुमित बाइक स्टार्ट कर देता है.
मेघा:- वो मजाक की क्या जरुरत था?
अभी भी मेघा की बातों में गुस्सा था.
सुमित:- बोर हो रहा था तो सोचा थोड़ा मजा तुम्हारा hi ले लू.
अब्ब ऐसे hi चुप रही तो ऐसे hi खतरनाक मजाक करूँगा.
सुमित की बातों में एक वार्निंग tha...Fir भी मेघा कुछ नहीं bolti...Shayad वो सुमित से चिढ गयी thi...Sumit भी अब्ब मजाक नहीं करता क्यों की उसने देख लिया था मेघा बहुत दर चुकी थी.
वो बस गाना गन गुनाते हुए बाइक चला रहा था की तभी...
मेघा:- Sumit...Bike रोको.
सुमित:- अब्ब तो बाइक ज्यादा तेज नहीं चला रहा hun...Fir क्यों?
इस बार सुमित खुद hi हैरान रह गया.
मेघा:- थक गयी hun...Thodi देर रेस्ट karenge...Fir चलेंगे.
सुमित फिर बाइक को एक फील्ड के पास रोक देता hai...Megha बाइक से उतर कर फील्ड के एक पत्थर पर बैठ जाती hai...Sumit भी उसके साथ बैठ जाता है.
दोनों के बिच एक खामोशी tha...Sumit को चुप देख मेघा को हैरानी तो हो रहा था लेकिन वो कुछ नहीं bolti...Sumit भी मेघा को और डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था.
कुछ देर ऐसे hi बैठने के बाद सुमित को कुछ महसूस हुआ और वो उठ कर बाइक की तरफ जाने लगा.
मेघा:- कहा जा रहे हो?
लेकिन सुमित ने कोई जवाब नहीं diya...Aur बाइक में अपने बैग से कुछ निकाल कर मेघा को दे दिया.
ब्रेड और जैम देख मेघा का सारा गुस्सा ख़त्म हो गया.
सुमित:- जानता हूँ बहुत भुक्खड़ हो tum...Dekha है कॉलेज में तुम्हे थुश थुश कर खाते हुए.
हमेशा की तरह सुमित की होंठो में मुस्कान था.
लेकिन इस बार मेघा सुमित की इस बात का बुरा नहीं मानती और वो ब्रेड पर टूट पड़ती है.
खुद तो खाती है और जबरदस्ती सुमित को भी खिलाती hai...Ye देख सुमित को कुछ अजीब सा लगता है.
मेघा:- थैंक यू सुमित.
सुमित:- ये थैंक यू कहा से आ गया बिच mein...Pyar में no थैंक यू no सॉरी.
और अपनी ब्यूटी क्वीन के बारे में मुझे नहीं तो किस्से पता होगा.
मेघा:- बात तो तुम सही करते हो लेकिन प्यार को छोड़ kar...Naa hi अभी मई तुमसे प्यार करती हूँ और ना hi कभी करुँगी.
कुछ भी कर lo...Lekin तुम्हारी किस्मत में मई नहीं हूँ.
सुमित:- Kismat...Sumit अपना किस्मत खुद लिखता hai...Dekhti jaao...Naa चाहते हुए भी तुम मुझसे प्यार कर बैठोगी.
मेघा:- इतना कॉन्फिडेंस.
सुमित:- मेघा को पता रहा hun...Itna कॉन्फिडेंस तो चाहिए hi.
मेघा:- देखते है.
इस बार मेघा भी मुस्कुरा कर बोली.
मेघा:- अब्ब कहा जा रहे हो?
सुमित अपना सिगरेट दिखा कर.
सुमित:- तुम्हे प्रॉब्लम hoga...Iss लिए.
फिर सुमित थोड़ा दूर आगे जा कर सिगरेट जलाता है.
चांदनी रात था तो दोनों एक दूसरे के नजर के सामने hi thhe...Sumit कभी मेघा को देखता तो कभी अपने सिगरेट ko...Aaj चाँद की इस रौशनी में मेघा काफी खूबसूरत लग रही thi...Sach में सुमित की ब्यूटी क्वीन hi थी वो.
सुमित दो पल मेघा को देख लेने के बाद अपना नजर मेघा से खुद हटा लेता.
मेघा सुमित से ज्यादा सुमित के सिगरेट को देखती है.
Ek...Do...Teen...Chaar...Paanch...Paanch सिगरेट फंक चूका था Sumit...Aur भी फूंकता सुमित लेकिन बिच में मेघा आ गयी.
मेघा:- और कितना स्मोकर करोगे?
सुमित:- चार hi तो हुआ hai...Kam से काम 10...वर्ण रिलैक्स्ड नहीं होता.
मेघा:- चार नहीं पांच.
सुमित:- अब्ब इतना कौन याद रखता है?
मेघा:- क्या ये स्मोकिंग तुम छोड़ नहीं सकते?
सुमित:- नौपे.
मेघा:- मेरे कहने पर भी नहीं.
इस बार मेघा ने प्यार से कहा.
सुमित:- कुछ बातें ऐसी है की अपने मर्जी से भी नहीं छोड़ सकता.
दूसरी तरफ
आकाश:- यार Raj...Tere लिए कीर्ति को मनाने गया tha...Lekin वो तो मुझसे भी बात नहीं करती.
मनीष:- शामे here...Mere साथ भी वही hua...Wo सच में बहुत नफरत करती है तुझसे.
इतना नफरत की हम तेरे दोस्त है इस वजह से हम से भी बात नहीं करती.
आकाश:- अब्ब तो सुमित भैया hi कुछ कर सकते hai...Sirf उनका दोस्ती है कीर्ति se...Aur किसी का नहीं.
राज:- मुझे भी यही लगता है.
बस एक बार कीर्ति मुझसे बात karti...Maj खुद मन लेता उससे किसी हाल में.
लेकिन वो मुझे एक मौका भी नहीं दे रही hai...Har एक रास्ता बंद कर रही है जिससे हो कर मई उसके पास जा सकता था.
काश एक मौका milta...Usse समझाने ka...Apni बातें कहने ka...Usse मनाने ka...Sirf एक मौका.
हमेशा की तरह राज की बातों में दर्द tha...Dard अपनी असफलता का.
सुमित:- अच्छा तो अब्ब तुम jaao...Mai चलता हूँ.
मेघा को उसके घर के पास छोड़ कर सुमित ने कहा.
मेघा:- कहा जा रहे हो?
सुमित:- वापस हॉस्टल.
मेघा:- सच में पागल हो tum...Raat के 1 बज रहा hai...Aur तुम वापस जाओगे इतनी रात को.
काम से काम 2 दिन रुकना padega...Wo कहते है ना "अतिथि देवो भाव."
सुमित:- (विथ स्माइल) Waah...Itna sanskaar...Kahi और प्यार ना हो जाए.
वैसे 2 दिन क्या 2 जन्म भी काफी नहीं hai...Tumhaare साथ रहने के लिए.
लेकिन क्या तुम्हारे घर वाले मानेंगे?
मेघा:- गांव है इसका मतलब ये नहीं की हर इंसान हद्द से ज्यादा पुराने ख़यालात के honge...Haan थोड़ा बहुत पुराने ख्याल तो है लेकिन पापा समझदार भी है.
तुमने मेरा हेल्प किया है ये जान कर वो बहुत खुश honge...Baaki तुम पापा से बात कर के उन्हें जान लो.
सुमित:- अभी जान गया कितना महान है wo...Apni बेटी का हाथ मेरे हाथ में 2 जन्म के लिए दे diya...Aise ससुर मिलना मेरा खुश किस्मती है.
मेघा:- 2 जन्म नहीं...2 din...Ghar में रहने के लिए.
सुमित:- मई सोच रहा था 2 जन्म के लिए.
मेघा:- किस्मत की बात hai...Tum किस्मत लिख सकते हो naa...Fir लिख लो.
मेघा मुस्कुरा कर बोली और आगे बढ़ गयी.
सुमित:- (इन हिज मंद) काश किस्मत लिखना अपनी बस की बात होती.
मेघा:- थोड़ा स्लो chalaao...Raasta ठीक नहीं है और तुम इतना फ़ास्ट चला रहे हो?
डरते हुए मेघा बोली.
सुमित:- ठीक hi तो है...70 kmph...Isse स्लो चलाऊंगा तो लगेगा बाइक नहीं साइकिल चला रहा हूँ.
सुमित की इस बात पर मेघा सुमित को घूरती hai...Lekin कुछ फर्क नहीं padta...Sumit की नजर आगे रास्ते पर था.
मेघा:- स्पीड इतना है की लग रहा है मई किसी तूफ़ान की सैर कर रही हूँ.
अभी भी मेघा की बातों में दर था.
सुमित:- Tufaan...Wo तो हमेशा करोगी क्यों की तूफ़ान का दूसरा नाम hi सुमित hai...Yaa फिर यूँ कहो तूफ़ान मेरा करीबी रिश्तेदार hai...Jaha जहा मई जाता हूँ तूफ़ान मेरे साथ hi आता है.
अलग hi घमंड था सुमित की बातों में.
मेघा:- लेकिन मुझे ना hi तुम्हारे साथ रहना है और ना hi तूफ़ान के saath...Abhi मज़बूरी है इस लिए.
सुमित:- ऐसे कैसे? हमने साथ जीने और साथ मरने की कसम खाया है साथ mein...Uska क्या?
मेघा:- अभी भी नशे में हो तुम? मई तुमसे बात तक नहीं करती और तुम कहते हो की मैंने तुम्हारे साथ जीने मरने की कसम खाया है.
मेघा की आवाज में इस बार गुस्सा था.
सुमित:- मई तो खा चूका hun...Bas तुम्हारी बारी का इंतजार है.
सुमित हँसते हुए बोलै.
मेघा:- बहुत hi घटिया जोके था.
सुमित:- क्या करू तुम्हारा जोक्स का चॉइस hi घटिया hai...Tumhe पसंद आये इस लिए घटिया जोक्स सुनाना पड़ता है.
अफ़सोस की तुम्हे मेरा घटिया जोक्स पसंद है लेकिन मई नहीं.
इस बार मेघा कुछ नहीं बोलती है और सुमित भी चुप हो जाता है.
सुमित:- एक बात kahu...Gussa तो नहीं होगी तुम?
दोनों के बिच की खामोशी को तोड़ कर सुमित ने कहा.
मेघा:- पहले बताओ.
सुमित:- दरोगी तो नहीं?
मेघा:- अब्ब बोलो भी.
मेघा की गुस्सा भरी बातें सुन सुमित मुस्कुराता है और कहता है.
सुमित:- ये मेरा फर्स्ट एक्सपीरियंस hai...Raat में बाइक चलाने ka...Aur काफी मजा आ रहा है इतना तेज चलाते हुए पहली बार.
ये सुनते hi...
मेघा:- बाइक रोको.
दर में इतना तेज चीख निकला मेघा की की सुमित को डिस्क ब्रेक लगाना पड़ा.
मेघा बाइक से उतर कर सुमित को गुस्से से देखती है और सुमित मासूम सा शक्ल बना कर.
सुमित:- ी ऍम जोकिंग.
अब्ब मेघा का गुस्सा इतना बढ़ गया की वो कुछ बोल hi नहीं पा रही थी.
सुमित:- तुमसे ज्यादा प्यार मई खुद से करता hun...Tumhare चक्कर में खुद को मार नहीं सकता.
काफी एक्सपीरियंस है रात में बाइक चलाने की...4-5 बार हाथ पेअर तुड़वा चूका hun...Abb वो मिस्टेक फिर से नहीं hoga...Tum निश्चिंत रहो.
सुमित मुस्कुरा कर बोलै.
मेघा बाइक में बैठ जाती है और बस इतना hi कहती है.
मेघा:- चलो.
फिर सुमित बाइक स्टार्ट कर देता है.
मेघा:- वो मजाक की क्या जरुरत था?
अभी भी मेघा की बातों में गुस्सा था.
सुमित:- बोर हो रहा था तो सोचा थोड़ा मजा तुम्हारा hi ले लू.
अब्ब ऐसे hi चुप रही तो ऐसे hi खतरनाक मजाक करूँगा.
सुमित की बातों में एक वार्निंग tha...Fir भी मेघा कुछ नहीं bolti...Shayad वो सुमित से चिढ गयी thi...Sumit भी अब्ब मजाक नहीं करता क्यों की उसने देख लिया था मेघा बहुत दर चुकी थी.
वो बस गाना गन गुनाते हुए बाइक चला रहा था की तभी...
मेघा:- Sumit...Bike रोको.
सुमित:- अब्ब तो बाइक ज्यादा तेज नहीं चला रहा hun...Fir क्यों?
इस बार सुमित खुद hi हैरान रह गया.
मेघा:- थक गयी hun...Thodi देर रेस्ट karenge...Fir चलेंगे.
सुमित फिर बाइक को एक फील्ड के पास रोक देता hai...Megha बाइक से उतर कर फील्ड के एक पत्थर पर बैठ जाती hai...Sumit भी उसके साथ बैठ जाता है.
दोनों के बिच एक खामोशी tha...Sumit को चुप देख मेघा को हैरानी तो हो रहा था लेकिन वो कुछ नहीं bolti...Sumit भी मेघा को और डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था.
कुछ देर ऐसे hi बैठने के बाद सुमित को कुछ महसूस हुआ और वो उठ कर बाइक की तरफ जाने लगा.
मेघा:- कहा जा रहे हो?
लेकिन सुमित ने कोई जवाब नहीं diya...Aur बाइक में अपने बैग से कुछ निकाल कर मेघा को दे दिया.
ब्रेड और जैम देख मेघा का सारा गुस्सा ख़त्म हो गया.
सुमित:- जानता हूँ बहुत भुक्खड़ हो tum...Dekha है कॉलेज में तुम्हे थुश थुश कर खाते हुए.
हमेशा की तरह सुमित की होंठो में मुस्कान था.
लेकिन इस बार मेघा सुमित की इस बात का बुरा नहीं मानती और वो ब्रेड पर टूट पड़ती है.
खुद तो खाती है और जबरदस्ती सुमित को भी खिलाती hai...Ye देख सुमित को कुछ अजीब सा लगता है.
मेघा:- थैंक यू सुमित.
सुमित:- ये थैंक यू कहा से आ गया बिच mein...Pyar में no थैंक यू no सॉरी.
और अपनी ब्यूटी क्वीन के बारे में मुझे नहीं तो किस्से पता होगा.
मेघा:- बात तो तुम सही करते हो लेकिन प्यार को छोड़ kar...Naa hi अभी मई तुमसे प्यार करती हूँ और ना hi कभी करुँगी.
कुछ भी कर lo...Lekin तुम्हारी किस्मत में मई नहीं हूँ.
सुमित:- Kismat...Sumit अपना किस्मत खुद लिखता hai...Dekhti jaao...Naa चाहते हुए भी तुम मुझसे प्यार कर बैठोगी.
मेघा:- इतना कॉन्फिडेंस.
सुमित:- मेघा को पता रहा hun...Itna कॉन्फिडेंस तो चाहिए hi.
मेघा:- देखते है.
इस बार मेघा भी मुस्कुरा कर बोली.
मेघा:- अब्ब कहा जा रहे हो?
सुमित अपना सिगरेट दिखा कर.
सुमित:- तुम्हे प्रॉब्लम hoga...Iss लिए.
फिर सुमित थोड़ा दूर आगे जा कर सिगरेट जलाता है.
चांदनी रात था तो दोनों एक दूसरे के नजर के सामने hi thhe...Sumit कभी मेघा को देखता तो कभी अपने सिगरेट ko...Aaj चाँद की इस रौशनी में मेघा काफी खूबसूरत लग रही thi...Sach में सुमित की ब्यूटी क्वीन hi थी वो.
सुमित दो पल मेघा को देख लेने के बाद अपना नजर मेघा से खुद हटा लेता.
मेघा सुमित से ज्यादा सुमित के सिगरेट को देखती है.
Ek...Do...Teen...Chaar...Paanch...Paanch सिगरेट फंक चूका था Sumit...Aur भी फूंकता सुमित लेकिन बिच में मेघा आ गयी.
मेघा:- और कितना स्मोकर करोगे?
सुमित:- चार hi तो हुआ hai...Kam से काम 10...वर्ण रिलैक्स्ड नहीं होता.
मेघा:- चार नहीं पांच.
सुमित:- अब्ब इतना कौन याद रखता है?
मेघा:- क्या ये स्मोकिंग तुम छोड़ नहीं सकते?
सुमित:- नौपे.
मेघा:- मेरे कहने पर भी नहीं.
इस बार मेघा ने प्यार से कहा.
सुमित:- कुछ बातें ऐसी है की अपने मर्जी से भी नहीं छोड़ सकता.
दूसरी तरफ
आकाश:- यार Raj...Tere लिए कीर्ति को मनाने गया tha...Lekin वो तो मुझसे भी बात नहीं करती.
मनीष:- शामे here...Mere साथ भी वही hua...Wo सच में बहुत नफरत करती है तुझसे.
इतना नफरत की हम तेरे दोस्त है इस वजह से हम से भी बात नहीं करती.
आकाश:- अब्ब तो सुमित भैया hi कुछ कर सकते hai...Sirf उनका दोस्ती है कीर्ति se...Aur किसी का नहीं.
राज:- मुझे भी यही लगता है.
बस एक बार कीर्ति मुझसे बात karti...Maj खुद मन लेता उससे किसी हाल में.
लेकिन वो मुझे एक मौका भी नहीं दे रही hai...Har एक रास्ता बंद कर रही है जिससे हो कर मई उसके पास जा सकता था.
काश एक मौका milta...Usse समझाने ka...Apni बातें कहने ka...Usse मनाने ka...Sirf एक मौका.
हमेशा की तरह राज की बातों में दर्द tha...Dard अपनी असफलता का.
सुमित:- अच्छा तो अब्ब तुम jaao...Mai चलता हूँ.
मेघा को उसके घर के पास छोड़ कर सुमित ने कहा.
मेघा:- कहा जा रहे हो?
सुमित:- वापस हॉस्टल.
मेघा:- सच में पागल हो tum...Raat के 1 बज रहा hai...Aur तुम वापस जाओगे इतनी रात को.
काम से काम 2 दिन रुकना padega...Wo कहते है ना "अतिथि देवो भाव."
सुमित:- (विथ स्माइल) Waah...Itna sanskaar...Kahi और प्यार ना हो जाए.
वैसे 2 दिन क्या 2 जन्म भी काफी नहीं hai...Tumhaare साथ रहने के लिए.
लेकिन क्या तुम्हारे घर वाले मानेंगे?
मेघा:- गांव है इसका मतलब ये नहीं की हर इंसान हद्द से ज्यादा पुराने ख़यालात के honge...Haan थोड़ा बहुत पुराने ख्याल तो है लेकिन पापा समझदार भी है.
तुमने मेरा हेल्प किया है ये जान कर वो बहुत खुश honge...Baaki तुम पापा से बात कर के उन्हें जान लो.
सुमित:- अभी जान गया कितना महान है wo...Apni बेटी का हाथ मेरे हाथ में 2 जन्म के लिए दे diya...Aise ससुर मिलना मेरा खुश किस्मती है.
मेघा:- 2 जन्म नहीं...2 din...Ghar में रहने के लिए.
सुमित:- मई सोच रहा था 2 जन्म के लिए.
मेघा:- किस्मत की बात hai...Tum किस्मत लिख सकते हो naa...Fir लिख लो.
मेघा मुस्कुरा कर बोली और आगे बढ़ गयी.
सुमित:- (इन हिज मंद) काश किस्मत लिखना अपनी बस की बात होती.