Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 13 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 102

राहुल सर की बात सुमित की दिमाग में छाप चूका tha...Sahi तो थे वो, 3 साल से वो एक फैसला नहीं ला पा रहा tha...Aur जी दागी के पिछले 8-9 साल में भी वो काफी पीछे रह गया tha...Sahi फैसला ना ले पाने की कारण.

ऐसे hi 2 महीने और बीत gaye...Kal कॉलेज का आखिरी दिन था.

इस बिच मेघा का दिल तो टूट hi गया tha...Jab कही सुमित और उसकी नजर टकरा जाता तो वो भी सुमित से मुंह फेर लेती थी.

ये सब देख सुमित को और भी दर्द हो रहा tha...Sumit ने फैसला तो ले hi लिया था की वो मेघा से दूर हो jaayega...Lekin मेघा की यादों से वो दूर नहीं हो पा रहा था.

मेघा की यादें उससे और तड़पाने लगा tha...Thik वैसा hi हाल था जैसा कीर्ति के समय हो गया था.

मेघा से मिलने की, बातें करने की मन तो बहुत था लेकिन अब्ब ये सब संभव नहीं था.

सुमित:- मेघा से इस सोच से दूर हुआ की मई उससे वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai खुद संभल जाऊँगा.

लेकिन संभल नहीं पा रहा hun...Ulta दर्द बढ़ता hi जा रहा hai...Abb तो ये दर्द असहनीय होता जा रहा है.

जब कीर्ति से अलग हुआ संभालने के लिए तुम thi...Tumne मेरा दर्द को बांटा tha...Lekin जब तुमसे अलग हो रहा हूँ तो अब्ब संभालने के लिए कोई नहीं है.

मुझे तुम्हारी आदत पद चूका है Megha...Pata नहीं ये कैसा फैसला था तुम भी दुखी हो मई भी dukhi...Lekin खुश कौन है?

बाद की ख़ुशी बाद mein...Filhaal जो दर्द है वही तो संभाला नहीं जा रहा है.

इतना कह कर सुमित सर्जरी के वार्ड से निकल कर अपने रूम की तरफ जा hi रहा था की कॉलेज के गेट में मेघा मिल गयी.

सुमित:- मेघा.

सुमित से और रहा नहीं गया...6 महीने बाद उसने आखिर मेघा को बुला hi लिया.

लेकिन मेघा का जवाब.

मेघा:- एवरीथिंग इस ओवर Sumit...Tumhari शकल तक देखना पसंद नहीं करती हूँ मई.

नफरत भरी मेघा की ये आवाज सुमित की कान में मानो उबले हुए तेल की काम कर गया.

सुमित:- सुनो तो....

लेकिन मेघा वह से निकल gayi....Lekin सुमित के दिमाग में बहुत कुछ छोड़ गयी सोचने के लिए.

रूम में आने के 1 घंटा तक भी सुमित का मन अशांत tha...Baar बार वो अपने फैसले पर सोच रहा था.

दिमाग में चल रहे हलचल को शांत करने का कोई तरीका न मिलता देख सुमित शावर लेने चला गया.

एक तो ठण्ड का मौसम ऊपर से बर्फ की तरह ठंडा paani...Sumit का दिमाग ने अब्ब काम करना hi बंद कर दिया.

कुछ देर बाद जब होश में आया तब ठन्डे दिमाग से सोचना सुरु kiya...Aise hi एक ख्याल उसके दिमाग में आया.

सुमित:- 2 दिन मई मेघा यहाँ से चली jayegi...Hamesha हमेशा के liye...Jab मैंने मेघा से अलग होने का फैसला लिया तो मेघा मेरे पास thi...Mere साथ thi...Vishwash था एक आवाज लगाऊंगा वो दौड़ कर मेरे पास आ jaayegi...Lekin abb...Abb तो वो जा रही hai...Mujhse नफरत करने लगी hai...Ek बहार चली गयी तो हमेशा के लिए चली जायेगी.

फिर मेरा क्या होगा?

यही काफी था सुमित को अंदर से हिलाने के लिए.

सुमित:- पता नहीं क्या फैसला ले लिया? मई खुश नहीं hun...Wo खुश नहीं है.

मई तो बिलकुल भी खुश नहीं हूँ और शायद hi कभी ख़ुशी मिलेगा इस फैसला se...Megha भी कैसे खुश होगी बाद में? अगर उससे प्यार करने वाला नहीं मिला तो?

मई तो करता हूँ न उससे प्यार.

ये सोचते hi सुमित को रेअलिज़तिओन हुआ की वो कितना प्यार करता है मेघा से.

सुमित:- सहित yaar...Ye क्या ब्लंडर कर diya...Mujhe मेघा से प्यार hai...Aur प्यार करने या दिखने की चीज थोड़ी न है महसूस करने की hai...Megha महसूस करती थी मेरा pyaar...Issi लिए तो साथ थी.

यही प्यार तो चाहती थी wo...Kirti से ब्रेकअप क्या हुआ मई तो प्यार का मतलब hi भूल गया tha...Pyaar के नाम में सोचता था मेघा को कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी टाइप का प्यार dunga...Jo की होता hi नहीं है.

लेकिन ये बात पहले क्यों समझ में नहीं आया?

अगले hi पल सुमित को अपने सवाल का जवाब मिल गया.

सुमित:- शायद उस वक्त मेघा साथ thi...Wo तो हमेशा से साथ thi...Issi लिए समझ नहीं paaya...Lekin वो जा रही है अब्ब मुझे छोड़ kar...Aur शायद यही दर उसकी एहमियत और मेरा प्यार मुझे समझ में आ रहा है.

कुछ देर रूम में टहलने के बाद.

सुमित:- अब्ब बहुत hua...Kal hi मई जा कर मेघा से बात karunga...Usse वक्त मांगूंगा की थोड़ा वक्त लग सकता है उससे पुराना सुमित मिलने के liye...Lekin मिलेगा जरूर.

प्यार करती है वो mujhse...Jarur हाँ कहेगी.

बेवकूफ था mai...Shaadi के कुछ hi टाइम बाद अपना पुराना रूप में आ hi jaata...Megha की प्यार hi तो है जो मुझे बदल रहा था और पूरी तरह से बदल सकता hai...Kuch टाइम बाद मई भी उससे वो प्यार देता जो वो डेसेर्वे करती hai...Lekin उस वक्त ये समझ क्यों नहीं आया?

प्यार की बातें दिमाग में आते hi सुमित मुस्कुरा उठा.

बस ऐसे hi हसीं ख्याल के साथ सुमित सू गया.

अगले दिन अपना ड्यूटी ख़त्म करने के बाद सुमित सीधा मेघा से मिलने gaya...Bahut कोशिश के बाद भी वो नहीं mili...Phone भी नहीं लगा.

बहुत मुश्किल के बाद आशा (मेघा की रूममेट) मिली.

सुमित:- मेघा कहा है?

आशा सुमित को गुस्से से देखती है.

आशा:- अब्ब क्या चाहिए तुम्हे?

सुमित:- उस वक्त गलती हो gaya...Samajh नहीं पाया अपने प्यार को?

आशा:- अब्ब समझ में आया?

सुमित:- हाँ.

आशा इस बात पर थोड़ा हंसती है.

आशा:- लेकिन देर कर दिया tumne...Megha आज सुबह hi यहाँ से चली गयी.

सुमित:- क्या?

सुमित को तो विश्वाश hi नहीं हुआ.

आशा:- बहुत देर और बेवकूफी कर दिया तुमने.

सुमित:- मई उसका घर का पता जानता hun...Abhi जाता हूँ उससे मिलने.

आशा:- लेकिन तुम उसकी दिल की बात नहीं जान पाए और ना hi अब्ब क्या है वो जानते हो.

सुमित:- जानता हूँ वो भी मुझसे प्यार करती थी और करती है.

आशा:- करती है?

सुमित:- Haan...Naaraj है wo...Manaa लूंगा.

आशा:- अगर मई कहु की वो नफरत करती है तो?

सुमित:- वो मुझसे नफरत नहीं कर sakti....Agar करनेकागि है तो फिरसे प्यार में बदल दूंगा उसकी नफरत.

सुमित की आवाज में इस बार आत्मविश्वाश था.

आशा:- 1 मं.

फिर आशा अपने रूम में जा कर 1 डेरी के कर आती है.

आशा:- ये lo...Megha का आखिरी सामन इस हॉस्टल में.

सुमि ने जब डेरी का 1सत पेज पलटाया उसके होंठो में एक मुस्कान आ गया.

मेघा की खूबसूरत अक्सर में लिखा था "माय लव स्टोरी"
 
अपडेट 103

माय लव स्टोरी

बचपन के ज्यादातर वक्त तो दादा और दादी के साथ hi gujra...Khas कर के दादा जी के saath...Hamesha उनकी कहानी सुनती thi...Aur वो भी बहुत साड़ी कहानिया सुनाते थे.

राजा और रानी की kahaniya...Kaise एक राजा अपने रानी के लिए सब कुछ करता hai...Uska अपने रानी के प्रति pyaar...Bahut मजा आता था ऐसी कहानिया सुनने mein...Maa की लोरी के बाद दादाजी की कहानिया सुन कर hi सोती thi..Aur जिस दिन दादाजी कहानी नहीं सुनाते थे उस दिन खाना खाये बिना hi मुंह फुला लेती thi...Fir क्या tha...Mujhe मनाने के लिए एक अच्छी सी कहानी सुनाते थे. :)

जब भी वो राजा रानी के कहानी सुनाते थे. मई हमेशा खुद को एक रानी के रूप में कल्पना karti...Jab उनसे राजा के बारे में पूछती तो वो प्यार से कहते.....

"तू तो मेरी राजकुमारी hai...Ek राजकुमार आएगा और तुझे उड़ने वाले घोडा में बिठा कर ले जाएगा." ये सुनते hi मई काफी खुश हो jaati...Bas इंतजार करती की कब मेरा राजकुमार aayega...Aur जब उनसे पूछा तो....

तू अच्छे से पढ़ लिख कर बड़ी हो jaa...Fir एक क्या बहुत राजकुमार तेरे लिए आएगा अपना रिश्ता ले kar...Unn में से एक hi वो खुसनसीब होगा.

फिर क्या था मई बहुत म्हणत से पढाई करने lagi...Dadaji से एक बार पूछा भी tha...Mujhe बाद में क्या बनना चाहिए?

बहुत प्यार से उन्होंने जवाब diya...Jo तेरी marji...Bas अभी मन लगा कर पढ़ना.

दादाजी भी मेरी पढाई में कोई कमी नहीं rakhte...Jab भी वो सेहर जाते मेरे लिए नए किताब कॉपी, पेंसिल, पेन laate...Aur साथ hi कुछ खिलौना और चॉकलेट्स भी.

दादाजी के अलावा दादी, माँ और पापा भी मुझे बहुत प्यार करते thhe...Lekin मई दादाजी की बहुत करीब थी.

पता नहीं किस का नजर लग gaya...Jab मई 6तह क्लास मई पहुंची तो दादाजी की तबियत बिगड़ने lagi...Unke लिए बहुत प्राथना भी kiya...Lekin उनकी तबियत बिगड़ती hi गयी.

उनके आखिरी वक्त में...

मेघा:- दादा जी आपके लिए पूजा किया hai...Ye लड्डू खा लीजिये.

मुश्कुराते हुए उन्होंने लड्डू का एक टुकड़ा अपने मुंह में रख कर.

दादाजी:- अब्ब शायद मेरा वक्त आ गया है.

मेघा:- अगर आपको कुछ हो गया तो मई भगवान् जी से हमेशा के लिए नाराज हो जाउंगी.

दादाजी:- ऐसा नहीं kehte...Unki वजह से hi तो आज तक मई जिन्दा hun...Jab तू अपने माँ की कोख में थी तभी मुझे कैंसर tha...High ग्रेड ka...Doctor भी कहते थे की अब्ब ज्यादा वक्त नहीं है मेरे पास.

लेकिन तुझे देखने की और तेरे साथ खेलने की इच्छा सकती की वजह से hi मैंने ऑपरेशन कराया और कैंसर को भी मात दे दिया.

तब से hi तेरे और अमित (मेघा की भाई) के साथ खेलते आया hun...Budhaapa में भी तुम दोनों के साथ बच्चा बन गया हूँ. :डी

जितना भी जिंदगी है एक वरदान जैसा hai...Ek दिन तो सभी को जान hi hai...Abhi रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) भी काफी ज्यादा hai...Kuch hi समय है मेरे पास.

मई कुछ बोल नहीं paayi...Bahut उदास थी दादाजी की हालत देख कर.

दादाजी:- और हाँ तुझे बहुत पढ़ लिख कर अपना नाम कमाना hai...Logon के काम आना hai...Shiksha में बहुत ताकत होती hai...Issi के जरिये तुझे काफी ऊपर जाना hai...Samajh रही है न मेरी बात.

मेघा:- हाँ दादा जी.

दादाजी:- अब्ब कुछ hi समय बचा है मेरे paas...Kya मेरे साथ नहीं खेलेगी?

मेघा:- खेलूंगी दादाजी.

उनका मन पसंद खेल था लुका chipi...Aur इसी खेल में वो एक दिन लता नहीं कहा छुप gaye...Kabhi मिले hi नहीं :क्राई:

उनके जाने के बाद मई बहुत royi....Bahut दिन उदास rahi...Dadaji के जाने के बाद पापा ने samjhaya...Mujhe दादाजी की सपना ुरा करना है.

बहुत वक्त के बाद खुद को संभाला दादाजी की सपना पूरा करने के लिए.

उनकी दो बात मेरे दिमाग में छाप गया tha...Padh लिख कर मुझे काफी आगे जाना है और अच्छे से पढ़ने के बाद मुझे मेरा राजकुमार मिल जाएगा जो मुझे उड़ने वाले घोड़े में अपने साथ ले जाएगा.

बाद में पता चला दादा जी को स्ट्रोक (ब्रेन हेमोरररहगे) था ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह se....Unhe तो बचा नहीं पायी लेकिन सोच लिया की बाकी लोगो को जरूर bachaungi...Dada जी ने hi तो कहा था मुझे लोगो का काम भी आना है.

सुना था डॉक्टर बनने के लिए बहुत पढाई करनी पड़ती hai...Tabhi से और म्हणत करना सुरु कर दिया.

जब 10तह क्लास में आयी तो मुझे मेरे जिंदगी का राजकुमार भी मिल gaya...Jiski मई हर रोज कल्पना करती thi....Mera सुमित.

बात दरअसल ये है की जान में 8तह क्लास में थी तब हमारे स्कूल और सेहर के एक स्कूल के बिच क्रिकेट मैच का फाइनल tha...Match सेहर मई hi tha...Aur में पहली बार सेहर मई आयी थी.

जब स्टेडियम मई पहुंची तो देखा दोनों स्कूल की और से ठीक ठाक भीड़ था.

टॉस के दौरान पहली नजर सुमित पर padi...Opponent टीम का captain...Kaafi अच्छा पर्सनालिटी था uska....Thoda लम्बा बाल जैसे फिल्मों में हीरो का होता hai...Uss पर से चलने का andaaz...Kaafi प्रभावशाली था.

और जब टॉस के वक्त उसने अंग्रेजी बोलै तो मई उसका फैन hi हो gayi...Aawaj से भी वो हीरो nikla...Aur ऐसी अंग्रेजी आज तक कभी सुना hi नहीं tha...Bhale hi वो 10तह मई था लेकिन हमारे स्कूल के 10तह के कोई भी स्टूडेंट उसके आस पास भी नहीं था.

क्रिकेट की बात थी तो कुछ समझ में नहीं आय लेकिन मन कर रहा था की सुनती जाओ और वो बस यूँही बोलता hi jaaye...Pata नहीं कैसा जादू था उसकी बोली मई.

खैर टॉस सुमित ने hi jeeta...Hero कभी हार ाक्त है भला :डी

और टॉस जीतने के बाद खुद सुमित बैटिंग करने aaya...Aur आते hi धमाल मचा दिया.

मैदान की हर तरफ चौका और छक्कों की barsaat...Mai तो देखते hi रह gayi...Mai अपना टीम को छोड़ सुमित की सपोर्ट में उछालने lagi...Shayad तभी से था ये दीवानगी. :लव:

मन करता था सुमित ऐसा hi खेलता रहे और मई देखती राहु.

आखिर में सुमित ने 152 रन बनाया वो भी 57 बॉल में और कोई उससे आउट भी नहीं कर paaya...Hamaare टीम को जीत के लिए चाहिए था 230 रन्स 20 ओवर में.

अब्ब मैच से किसे मतलब tha...Meri नजर बार बार फील्डिंग कर रहा सुमित पर hi jaata...Ummeed तो था की बोलिंग कर के 2, 4 डंडा भी उड़ा de...Lekin वो बोलिंग करने नहीं आया.

मैच तो वो काफी पहले जीत चूका tha...Aakhiri बॉल में जीत के लिए चाहिए था हमारे टीम को 140 runs...Lekin ाखी बॉल में बाउंड्री में उसने उड़द कर ऐसा कैच पकड़ा की मुझे दादा जी की कहानी की उड़ने वाला घोडा का याद आ गया.

सुमित के लिए काफी खुश thi...Lekin थोड़ा उदास भी की सुमित की एक नजर भी मुझ पर नहीं pada...Match के बाद सोचा एक ऑटोग्राफ तो ले कर रहूंगी लेकिन वो मौका भी नहीं मिला.

यही था सुमित के लिए मेरी पहली मुलाकात जो अफ़सोस दो तरफा न हो saka...Lekin इसी मुलाकात में मई सुमित की दीवानी बन चुकी थी.

धीरे धीरे वक्त तो अपने हिसाब से आगे बढ़ hi रहा tha...Mai भी उसी हिसाब से अपना म्हणत कर रही थी पढ़ाई में.

10तह बहुत अच्छे नंबर से पास kiya...Papa ने भी मेरी म्हणत देख मुझे सेहर भेज दिया एक ृष्टिसार के पास जो दूर के चाचा thhe...Lekin जाते वक्त पापा ने समझाया की सिर्फ पढाई पर ध्यान देना है.

11तह और साथ में कोचिंग क्लास भी अच्छे से पढ़ रही thi...Aur उसी बिच एक दिन ऐसा भी आया की मई ख़ुशी से पागल हो उठी.

श्रवण महीना का अंतिम सोमबार tha...Puja करने जब वही के भोलेनाथ की मंदिर मई गयी और पूजा कर के वापस लौटने पर मुझे वही शख्स mila...Shayad ये भोलेनाथ का वरदान hi tha...Jiska व्यक्तित्वा (पर्सनालिटी) के प्रति मई आकर्षित thi...Wohi आकर्षक चेहरा हुए वही लम्बे बाल जो काफी हंसमुख दिख रहा tha...Abb तो उसके चेहरे में आये छोटे दाढ़ी और मुछ उससे और भी खूबसूरत दिखा रहा tha...Hero था wo...Mera हीरो.

सोचा इस बार तो बात करके hi rahungi...Aur जब हिम्मत जुटाया तो उसी बिच मेरी दोस्त कीर्ति मिल gayi...Jo मेरे साथ hi कोचिंग में. पढ़ती thi...Ek बार फिर से सुमित से मुलाकात होते होते रह gaya...Dukh तो बहुत हुआ.

लेकिन हार नहीं maani...Thoda म्हणत करने के बाद पता लगा hi लिया की सुमित रश्मि का भैया hai...Rashmi कीर्ति की दोस्त hai...Rashmi को एक या दो बार hi देखा था कीर्ति की वजह se...Kabhi बात नहीं हुआ उससे.

लेकिन सुमित के लिए सोचा उससे दोस्ती कर hi लेती hun...Sumit को देख सकुंगी शायद बातें भी हो jaaye....Aur बातों hi बातों mein...Kuch ज्यादा hi सोच रही hun..Shayad इंट्रोवर्ट हूँ इस वजह से सोचती ज्यादा हूँ करती काम.

रश्मि से दोस्ती करती उससे पहले hi 11तह के एग्जाम का डेट आ gaya...Dadaji और अपने सपना पूरा करने के लिए तैयारी में लग gayi...Ek परीक्षा ख़त्म होता की दूसरा आ jaata...Aur रश्मि से दोस्ती भी नहीं कर पा रही थी.

12तह का एग्जाम भी अच्छा hi gaya...Aur एंट्रेंस एग्जाम में तो सपना hi पूरा हो गया.

मेरा बचपन का एक सपना पूरा हो gaya...Full स्कालरशिप मिल hi गया मब्ब्स mein..Aur जब कॉलेज ज्वाइन किया तो एक हफ्ते बाद उससे भी बड़ा सपना पूरा हो गया.

Sumit...Haan मेरा हीरो Sumit...Wo भी मेरे hi क्लास में tha...Aur एंट्री भी उसका हीरो जैसा hi tha...Anatomy के प्रोफेसर से जैसे उसने बात किया मई तो देखते hi रह गयी.

और क्लास ख़त्म होने के बाद तो मानो मेरा सपना सच हो hi gaya...Khud उसने मुझसे बात kiya...Lekin ये kya..."Beauty क्वीन"

भला कोई पहले hi मुलाकात में ऐसा फ्लिर्टिंग करता है? अच्छा तो लग रहा था लेकिन ऐसे कैसे दिखाती :D...Thoda मेरा भी तो दबदबा होना चाहिए.

अभी के लिए इतना hi...Fir बाद मई लिखूंगी आगे की kahani...Abhi तो मेरी प्रेम कहानी की सुरुवात hai...Mai सुमित से कितना प्यार करती हूँ और उसके लिए क्या क्या किया है ये तो सुमित को भी नहीं pata...Kabhi बताया hi नहीं maine...Aur बताओ भी क्यों? वो भी तो मुझसे प्यार करता है लेकिन उसने कभी बताया?

सुमित तो मेघा की डेरी में hi खो गया tha...Dadaji वाले भाग में वो भी इमोशनल हो गया था बाकी की भाग पढ़ते वक्त उसका होंठो में एक मुस्कान था.

सुमित:- इतना प्यारररररर!!!! वो भी मेरे लिए.

सुमित खुद को बहुत किस्मतवाला समझ रहा tha...Aakhir वो था भी.

जल्दी से सुमित ने अगला पेज को paltaya...Uss में भी बहुत कुछ लिखा था.

बिना कोई देरी किये सुमित ने आगे पढ़ना जारी रखा.
 
अपडेट 104

सुमित का मेरे इतने पास मेरे hi क्लास में देखना किसी सपना से काम नहीं tha...Aur ऊपर से उसने hi मुझसे बात की सुरुवात kiya...Isse ज्यादा ख़ुशी की बात क्या हो सकती थी?

हैरानी की बात भी था की उसने मुझसे hi बात क्यों किया? खूबसूरती? क्लास में और भी लड़कियां खूबसूरत thi...Padhai? मुझसे भी ज्यादा पढ़ाकू thi...Dil? पहली नजर में कोई कैसे दिल पढ़ लेता है?

खैर मेरे लिए यही काफी था की सुमित ने मुझसे बात kiya...Hairaani से भरे सपनो की ये जिंदगी काफी अच्छा लग रहा tha...Man करता था इसी जिंदगी में जीती राहु.

धीरे धीरे क्लास चलने laga...Sumit की साड़ी अच्छाई में से एक बात खटकने laga...Beauty क्वीन नहीं उसका बंक maarna...Hafte में एक बार hi दर्शन होता है :(...लेकिन जब भी होता है कमाल का मुलाक़ात होता tha...Uska मुझसे छेड़ना और मेरा रूठने की नाटक karna...Kaafi अच्छा लगता था.

उसकी baatein...Pata नहीं कहा से सीखा hai...Bahut अच्छी बातें करता hai...Agar उससे पहले से प्यार ना भी करती तो भी उससे प्यार करने लग जाती.

दिल करता है की वो बस बोलता रहे और मई सुनती rahu...Bhale hi आवाज कौवा का थालेकिन मेरे लिए कोयल से काम nahi...Majaak कर रही हूँ आवाज भी कोयल जैसा hi है :लव:

हर चीज में वो मेरे सपनो का राजकुमार tha...Kisi चीज में कोई कमी nahi...Padhaai, खेलकूद, बातें, क्रिएटिविटी और Pyaar...Bas सिगरेट और दारु की आदत को छोड़ kar...Khair बड़ी बात नहीं है ye...Kuch hi दिन की बात hai...Chutki बजा कर छुड़वा दूंगी :lol1:

वो भी मुझसे प्यार करता है इस बात का अंदाजा मुझे तब हुआ जब प्यार की परीक्षा में वो सफल हो गया.

जब घर जा रही थी और मेरा आखिरी बस भी छूट गया तो दिमाग में सुमित hi aaya...Aur उससे बुलाते hi वो नशे की हालत में भी आ pahuncha...Aur बिना अपनी कोई परवाह किये वो मेरे लिए 100 कम से भी ज्यादा का सफर के लिए राजी हो गया वो भी इतनी नशे mein...Agar प्यार न होता तो ऐसा क्यों करता?

और जब उसकी पीछे बाइक में बैठी और उसने जो तेज गति में बाइक चलना सुरु किया तो दादाजी की वो बात याद आ गयी और सच में अब्ब तो सुमित राजकुमार लगने laga...Mera राजकुमार :लव: और उसका बाइक वो उड़ने वाला घोडा.

सपनो की इस दुनिया में थोड़ा दर तो लग रहा था लेकिन उससे ज्यादा विश्वाश था अपने सुमित पर.

और जब घर पहुंचे तो सुमित ने सारे घरवालों को भी अपने बस में कर liya...Pata नहीं कुछ तो बात है उस mein...Jo किसी को भी बातों से अपनी और कर लेता hai...Maa और दादी तो काफी प्रभावित थी hi लेकिन हैरानी की बात तो ये था की पापा भी.

मन में एक दर था की पापा ने मुझे सेहर पढ़ने के लिए भेजा था और साफ़ कहा था की प्यार वीआर की चक्कर से दूर rehna...Yahi दर था की बाद में कैसे उन्हें बताउंगी की मई सुमित से प्यार करती हूँ?

लेकिन सुमित और उनको साथ देख कर ये दर भी दूर हो gaya...Abb तो विश्वाश था की सुमित को वो मन नहीं कर पाएंगे.

सोच लिया था अब्ब तो सुमित को प्रोपोज़ कर hi dungi...Lekin तभी एक ख्याल आया की उससे hi प्रोपोज़ karwaungi...Thoda स्पेशल फील करने को मिलेगा खुद के लिए :डी

घर की ये सफर के बाद सफर आयी तो शायद ये सुहाने दिन भी ख़त्म हो gaye...Jo सुनहरे ख्याल में जीने लगी थी एकदम से उसमें अंधकार छा gaya...Jab पता चला की वो मेरा इस्तेमाल कर रहा है मेरी दोस्त कीर्ति को पाने के लिए.

कितना गलत है वो :( प्यार शब्द से hi नफरत होने lagi....Kya सोचा था उसको और क्या निकला wo...Socha था अब्ब उससे कभी बात नहीं करुँगी.

लेकिन जब उसने मुझसे कहा की एक आखिरी कोशिश करने की उसको कीर्ति से मिलाने की फिर वो मेरी जिंदगी से निकल jayega...Mai मान gayi....Usse पीछा छुड़ाना तो चाहती थी लेकिन इससे ज्यादा ये देखना चाहती थी की ये इंसान और कितना निचे गिर सकता है?

टूर की सुरुवात में तो उससे मकार इंसान कोई नहीं लगता tha...Accha भी लग रहा था की कीर्ति ने इस धोखेबाज़ के साथ सही किया और जो कहानी कीर्ति ने सुनाया उससे पता चल रहा था की ये कितना घटिया इंसान है.

लेकिन जब एक दिन सुमित को रट हुए उसकी बातें सुनी कीर्ति के लिए उससे मेरा ख्याल एकदम से बदल gaya...Mujhe कीर्ति समझ कर जो भी उसने कहा उसकी एक एक बात में सच tha...Sach और झूठ को न पहचान सकू इतना मुर्ख भी नहीं थी.

जिस इंसान की वजह से प्यार से विश्वाश उठ गया था उसी इंसान की वजह से वापस सच्चा प्यार पर विश्वाश होने लगा.

सुमित से प्यार तो बहुत पहले से करती thi...Jab उससे मुलाक़ात हुआ तो उसकी इन्ही अच्छाई से प्यार गहरा हो gaya....Acchayi सिर्फ देखने से hi पता नहीं चलता महसूस भी कर सकते hai...Aur ये सुमित की हर चीज में दीखता tha...Aur सुमित की कीर्ति के लिए जो प्यार देखा उससे पता चला की सुमित एक सच्चा आशिक़ है.

बहुत hi अजीब हालात था मेरे liye...Mai जिससे प्यार करती हूँ वो मेरी दोस्त से प्यार करता है और मेरी दोस्त कीर्ति अब्ब सुमित को बिलकुल भी पसंद नहीं करती.

फिर भी कभी ये ख्याल नहीं आया की कोई साजिश कर के सुमित को कीर्ति से हमेशा अलग कर दू और सुमित के दिल में अपने लिए जगह banau...Shayad सुमित का कीर्ति के लिए सच्चा प्यार hi था की ऐसी घटिया सोच कभी दिमाग में आया hi नहीं.

भले hi कितना भी दर्द हो मेरे दिल में सुमित को कीर्ति से hi मिलाना चाहती thi...Shayad सुमित का ख़ुशी मेरा भी ख़ुशी बन गया tha...Suna था सच्चा प्यार ऐसा hi होता है आज महसूस कर रही thi...Apne प्यार की hi ख़ुशी में अपना ख़ुशी.

हर एक कोशिश किया सुमित को कीर्ति से मिलाने ki...Lekin कीर्ति अब्ब सुमित को देखना भी पसंद नहीं करती thi...Abb जबरदस्ती भी तो नहीं कर सकती thi...Bas सुमित पर तरस आता था.

सुमित का जैसा पेरवालित्य था उससे अब्ब वो काफी अलग बन चूका tha...Itna मजबूर कभी नहीं देखा usse...Fir भी वो बेचारा प्यार करता hi रहा कीर्ति से.

और धीरे धीरे वो वक्त भी आ गया जब सुमित को पूरी तरह से टूट ते हुए dekha...Kirti की shaadi...Sumit का ये हालत देख मुझे भी बहुत बुरा लग रहा tha...Hamesha सुमित को खुश देखना चाहती थी लेकिन इतने सालो से सिर्फ मजबूर और हारा हुआ देख रही थी.

आखिरी वक्त में भी कीर्ति की बेरुखी ने सुमित को तोड़ कर रख diya...Galti भले hi सुमित की थी कीर्ति की मन करने के बाद भी उसके पीछे लगा रहा लेकिन कीर्ति ने भी अच्छा नहीं kiya...Acche से इग्नोर भी कर सकती थी जब सुमित नहीं मान रहा tha...Lekin उसकी बेरुखी ने सुमित को न जाने कितने साल पीछे धकेल दिया.

उसके बाद सुमित ने इंगेजमेंट के दिन जो किया उससे उसके लिए मेरा प्यार और भी बढ़ गया.

सुमित एक सच्चा परवमई था और उसने उस दिन साबित भी कर diya...Kirti के ख़ुशी के लिए वो हमेशा हमेशा के लिए कीर्ति की जिंदगी से चला गया बिना कोई इमोशनल ब्लैकमेल और तमाशा कर ke...Kaafi पहले hi चले जाना चाहिए tha...Lekin एक उम्मीद था शायद की कीर्ति मान hi जायेगी.

लेकिन जब एहसास हुआ तो कीर्ति की ख़ुशी के लिए चला गया उसकी जिंदगी से दूर.

सुमित को ऐसा टूटा देख मुझे भी काफी बुरा लग रहा tha...Dar था की कही कुछ गलत कदम न उठा le...Lekin मेरा सुमित इतना भी कमजोर नहीं है की मुशीबत से लड़ने की जगह मुशीबत से भाग jaaye...Dil के दर्द के बावजूद अपनों के लिए इस हालात से भी लड़ने को तैयार था.

कीर्ति ना सही मई hun...Bas इसी ख्याल के साथ सुमित को फिरसे संभालने में लगी थी.

वो मेरे सामने कमजोर नहीं दिखना चाहता था लेकिन फिर भी उसका दर्द समझ सकती थी.

उसका और मेरा पोस्टिंग अलग गाँव में tha...Sumit को संभालने के लिए हमेशा उससे बातें करती थी फ़ोन par...Padhne के लिए प्रेरित karti...MBBS से hi क्या होगा? आगे की पढाई भी तो जरुरी hai...Aur वो सर्जन बनना चाहता है.

उससे किसी भी हाल में सर्जन बना कर hi rahungi...Bas इसी सोच के साथ फ़ोन में उससे पढाई की बातें hi karti...Jo मुझे आता था वो सुमित को पढ़ाती थी और जो मुझे कन्फूसिओं था या फिर पता था वो भी सुमित से पूछती थी.

सुमित को कीर्ति की ख्याल से अलग कर के पढाई और जिम्मेदारी की और डाइवर्ट करना चाहती थी.

पग की पहली परीक्षा में तो सुमित का नतीजा नहीं aaya...Usse उसका कॉलेज ऑफ़ चॉइस नहीं mila...Lekin दूसरी बार तो उसने वो कमाल कर दिया की किसी भी कॉलेज अफ़्फोर्ड नहीं कर सकता था उससे मिस करने की.

सुमित बहुत खुश tha...Kehta था की उसने कर dikhaya...Apna और अपने Maa-Papa का सपना पूरा कर diya...Mujhe भी बराबरी का क्रेडिट diya...Kaafi खुश था wo...Lekin उससे भी ज्यादा खुश मई थी. :हैप्पी:

अब्ब मेरा सुमित कोई हारा हुआ प्रेमी नहीं था एक जिम्मेदार इंसान बन गया था.

दिल में एक ख्याल आया की काश ऐसे hi सुमित का ख्याल जिंदगी भर रख पाउ :ब्लश: लेकिन ये सही वक्त नहीं tha...Abhi अभी तो सुमित अपने दर्द से बाहर निकला है.

मैंने भी वही कॉलेज में ज्वाइन कर लिया अस मेडिसिन रेजिडेंट.

हमारे बिच वैसे hi बातें होने लगा जैसे होता tha...Wohi बॉन्डिंग वही understanding...Uska care...Uski baatein...Pyaar तो वक्त के साथ बढ़ता hi जा रहा था.

फिर से लगने लगा की सुमित भी मुझसे प्यार करता hai...Bas इंतजार था की कब वो प्रोपोज़ करेगा.

लेकिन इस साइलेंट लव स्टोरी की मजा hi कुछ और था.

ना वो अपनी दिल की बात बता रहा था और ना mai...Bas यार के दो पल साथ bitaate...Iss में भी अलग hi मजा था.

लेकिन वो मजा कहा जो प्रेमी जोड़ी की बातों में होती है.

जब और इंतजार नहीं हुआ तो सोचा अब्ब मई hi उससे अपनी दिल की बात बताउंगी.

लेकिन अचानक से क्या हुआ उसको, वो मुझे इग्नोर करने laga...Pata नहीं क्या हुआ उससे ये अचानक.

और हद्द तो तब हुआ जब उसने संजना को प्रोपोज़ कर दिया वो भी मेरे सामने.

जबरदस्ती उसका प्यार हासिल करना कभी नहीं chaha...Khwahish तो हमेशा था की मुझे उसका प्यार मिले लेकिन उसके इच्छा के खिलाफ nahi...Ek बार फिर मेरा दिल टूट गया.

मुझसे प्यार करना या नहीं करना ये उसका फैसला hai...Lekin दोनों बार उसने हे गलती किया की मेरे दिल में प्यार दो बार प्यार जगा कर बिच रास्ता में छोड़ diya...Ye उसने बहुत गलत किया.

अब्ब तो सच में विश्वाश उठ गया प्यार se...Abb उसको कभी माफ़ नहीं कर paaungi...Bhale hi कोई मज़बूरी hoga...Lekin मुझे बताना भी सही नहीं समझा.

मेरा विश्वाश, मेरा प्यार, मेरा इंतजार और मेरा धैर्य, मेरा सपना सबका मजाक उड़ाया है सुमित ने. कभी उससे अपने सपनो का राजकुमार माना था और aaj...Aaj जो किया उससे सपना मई भी नहीं सोचा था.

इतना गलत तो तुम नहीं थे Sumit...Shayad तुम्हे समझ नहीं सकीय ये मेरी गलती thi...Jiska मुझे हमेशा पछतावा रहेगा.

अब्ब तो बस यही दुआ है की तुम हमेशा मेरी जिंदगी से दूर चले jaao...Ek बार को तो इस दर्द से उभर जाउंगी लेकिन तुम्हारा शकल कभी देखना नहीं चाहूंगी.

किस्से शिकायत करू? उपरवाले से? किस्मत से? जिससे भी शिकायत करुँगी तो भी जवाब यही aayega...Bewkoofi में hai...Jo तुम पर दुबारा से भरोषा कर लिया.

बस यही थी मेरी kahani...Haar गया मेरी यार और मेरा सपना. :क्राई:

थे एन्ड

आखिरी के कुछ लाइन्स पढ़ते hi सुमित के दिल में दर बैठ gaya...Megha सच में बहुत नाराज है उससे.

आशा:- एक बात तो मेघा ने डेरी में लिखा hi नहीं.

सुमित:- क्या?

आशा:- जब तुम्हारा 1सत एंट्रेंस में तुम्हे कॉलेज ऑफ़ चॉइस नहीं mila...Ussi एंट्रेंस में मेघा का रिजल्ट कुछ ऐसा था की उससे अन्य कॉलेज अन्य सब्जेक्ट मिल jaata...Yaha तक की रेडियोलोजी bhi...Lekin उसने तुम्हारे लिए इंतजार किया.

तुम्हारे साथ पढ़ना चाहती thi...Jitna हो सके जिंदगी के उतना वक्त तुम्हारे साथ बिताना चाहती thi...Aur दूसरे साल भी उसका रिजल्ट वैसा hi tha...Aur जब तुमने इस कॉलेज में एडमिशन लिया तो उसने भी यही ले लिया.

सुमित को ये सुन कर सच में हैरानी हुआ उसने कभी सोचा भी नहीं था की मेघा प्यार में अपना करियर दाव पर लगा सकती hai...Megha का प्यार तो सुमित देख चूका था आज जूनून भी देख लिया.

सुमित ने मेघा की डायरी में "थे एन्ड" को क्रॉस करके वह पर लिख दिया "इंटरवल".

जिसे देख आशा भी मुस्कुरा कर बोली.

आशा:- मन पाओगे?

सुमित:- मनाना hi पड़ेगा.

सुमित की आवाज में. वही पुराना आत्मविश्वाश लौट आया था.
 
अपडेट 105

बीटा कुछ दिन तो रुक jaata...Abhi तो आया है घर.

सुमित को रेडी होता देख उसकी माँ बोली.

सुमित:- नहीं Maa...Pehle hi बहुत लेट कर चूका hun...Aur आपको तो खुश होना chahiye...Aapki बहु लाने जा रहा हूँ.

और आप hi तो परेशां कर रही थी बार बार की शादी कब कर रहा है?

स. माँ:- हाँ तो कब तक कुंवारा बैठा rahega...Budhaape देहलीज में आ चूका hai...Aur रश्मि की शादी की भी 2 साल हो गया है.

सुमित:- बुढ़ापा :ीक: आज भी 20-25 साल के बच्चों से ज्यादा जवान हूँ. :स्मार्त्य:

कुछ देर से साइड में बैठी रश्मि भी सुमित के पास आ कर. उसके बालों को हाथ लगाती है.

रश्मि:- आपका बुढ़ापा का सबूत आपके फूल रहे बाल बता रहे है.

सुमित रश्मि से थोड़ा दूर हैट कर.

सुमित:- तू मेरी फ़िक्र chhod...Apne पति को sambhaal...Kuch hi साल में तकला हो जाएगा.

रश्मि:- खबरदार जो मेरे रोहन के बारे में कुछ कहा.

सुमित:- अच्छा अब्ब मेरा रोहन!!! शादी के वक्त तो पूरा घर में बवाल मचाया था.

रश्मि:- Wo...wo अरेंज्ड मैरिज कौन करना चाहता है.

सुमित:- और अब्ब?

रश्मि:- अरेंज्ड मैरिज में प्यार नहीं हो सकता है क्या?

सुमित:- और अब्ब मुझे प्यार के बारे में सीखा रही है?

रश्मि:- आपको कैसे...

फिर रश्मि को कुछ याद आया...

रश्मि:- वैसे भैया आपने सही कहा....35 की उम्र में भी आप 20-25 से काम नहीं wo...Ladkiyan के पीछे भागने mein...Abhi भी वही कर रहे हो?

सुमित:- पहली बात तो मई 35 का नहीं 33 hun...Aur दूसरी बात मेघा के पीछे nahi...Usko वापस लाने जा रहा हूँ.

सुमित का सामान लगभग पैक हो hi गया था ki...Rashmi को कुछ नजर aaya...Usse उठा कर.

रश्मि:- ये क्या है?

सुमित:- इससे विग कहते है?

रश्मि:- ये तो मुझे भी पता hai...Lekin किस लिए? आपके बाल तो ठीक ठाक है.

सुमित:- बाद में बताऊंगा.

स. माँ:- ले चाय पी कर jaana...Apna ख्याल तो रखता hi nahi...Pata नहीं गांव में कैसे रहेगा.

सुमित:- फ़िक्र मत कीजिये Maa...Gaanw में आपकी बहु है ख्याल रखने के लिए.

रश्मि:- देखिये Maa...Shaadi हुई भी नहीं और अभी से भैया आओकी बात काटने के लिए भाभी को ला रहे hai...Shaadi के बाद तो आपको भूल hi जाएंगे. :lol1:

सुमित:- ये भी देखिये माँ की 2 साल में 2 hi बार घर आयी hai...Abb बताइये कौन किसको भूल रहा है? :हिंतहिंट:

रश्मि:- आप जाइये जल्दी se...Kahi ट्रैन मिस न हो जाये? वर्ण पूरा दिन भाभी को याद hi कर्रे रह जाएंगे. :lol1:

सुमित:- जा रहा hun...Lekin ट्रैन से nahi...Mera 8तह लव मेरे बाइक से.

सुमित निकलने hi वाला था की उसके पापा वह आ गए.

स. डैड:- विश्वाश तो पूरा है और कहने की जरुरत तो नहीं hai...Lekin फिर bhi..."All थे बेस्ट."

सुमित:- थैंक यू.

सुमित:- (तो रश्मि) वैसे ये विग बाद में तेरा टकलू रोहन के hi काम आएगा.

रश्मि:- भैया आप....

सुमित:- ठीक hai...Wig की जरुरत nahi...Lekin 2 साल बाद जब पूरी तरीके से तकला हो जाएगा तो भेज देना मेरे paas...Dermatology की भी ठीक थक नॉलेज है और सर्जन भी hu...Kar दूंगा हेयर ट्रांसप्लांट.

सुमित रश्मि का चेहरा देख हसने लगा और अपने माँ और पापा के पेअर छू कर निकलने hi वाला था की.

रश्मि:- सोचा था आप वापस आये है तो मई भी आ गयी कुछ दिनों के liye...Lekin आप तो एक दिन भी ढंग से नहीं रुके.

सुमित:- इस बार सच में वक्त नहीं है.

रश्मि:- ये तो हर डॉक्टर का एक्सक्यूज़ है :डी

सुमित कुछ कहता उससे पहले hi...

रश्मि:- आल थे best...Abb मुलाकतापकी शादी में hi होगी :तूहैप्पी:

फिर सुमित बाइक में वह से निकल gaya...Aur हमेशा की तरह सुमित की बाइक इस बार भी हवा से बातें कर रहा था.

लेकिन मेघा का ख्याल आते hi...Bike की स्पीड नार्मल कर दिया.

सुमित:- सेफ्टी first....Waise भी साड़ी जिंदगी तो है hi मेघा के साथ गुजारने के लिए. :)

थोड़ी और देय पहुंचने के बाद सुमित ने बाइक की स्पीड और भी काम कर दिया.

सुमित:- इन् रास्तो में मेघा के साथ यादें hai...Har एक याद को फिरसे जीना है.

और थोड़ा देर hi sahi...Thoda और intejaar...Waise भी इंतजार का फल मीठा होता है.

और ऐसे hi अपने ख्यालों में खोया सुमित जब आधा राष्ट पार कर चूका था.

भूख तो सुमित को नहीं tha...Lekin सामने मौजूद ढाबा को देख उससे मेघा के साथ का वो पल याद आ गया जब वो चोला भटूरा खाने यहाँ मेघा के साथ आया था.

सुमित:- अरे yaar...Mujhe पसंद नहीं है.

मेघा:- कभी खाया है?

सुमित:- हाँ 2-3 बार.

मेघा:- कहा?

सुमित:- घर के पास के hi होटल में.

मेघा:- कही भी खा लेते हो और कहते हो की चोला भटूरा पसंद nahi...Yaha बेस्ट मिलता hai...Try करना hi पड़ेगा.

सुमित:- अरे नहीं.

सुमित की मेघा के सामने कुछ नहीं chala...Aakhir हार मान कर सुमित को खाना hi pada...Aur खाने के बाद सुमित ऊँगली चाटता hi रह गया.

मेघा:- अब्ब बोलो.

सुमित:- बोलने के लिए कुछ है hi nahi...Bas खाने के लिए थोड़ा और भूख है. :डी

सुमित की इस बात पर हँसते हुए मेघा ने एक और आर्डर किया.

सुमित:- (इन हिज मंद) कुछ तो बात है मेघा में जो बहुत साड़ी बातों में मुझे गलत साबित कर देती है :). बहुत चीजों के लिए मेरा नजरिया बदल गया.

शायद इन्ही बातों की वजह से उसके इतने करीब आ गया. :हैप्पी:

अपने इन्ही ख्यालों में खोया हुआ सुमित चोला भटूरा खा hi रहा था की कुछ दूर आगे बैठे लड़कियों की आवाज सुमित के कान में पड़ा.

लड़की 1:- अच्छा तो ये bata...Kab प्रोपोज़ कर रही है सुमित को फिर से.

लड़की 2:- पता nahi...Abb तो शायद वो मुझसे नाराज हो गया होगा.

ये सुनते hi सुमित के मन में ख्याल आया.

सुमित:- हर बार सुमित का hi चुटिया काट ता है.

मुस्कुराते हुए सुमित वह से उठ गया और मेघा के लिए भी एक चोला भटूरा आर्डर कर के वह से निकल गया.

अपने hi धुन में बाइक चला रहे सुमित जब मेघा की गांव में प्रवेश किया तो अलग hi उत्साह उसके मन में भर आया.

सुमित:- बस कुछ पल aur...Fir तो मेरे इस आँख और दिल को सुकून पहुँचने के साथ hi तुम्हारे हर गीले शिकवे को दूर कर दूंगा. :लव:
 
अपडेट 106

सुमित गांव में पहुँचने के बाद मेघा के घर के कुछ दूर में रहने की जगह तलाश करने लगा.

थोड़ी मुश्किल के बाद उसने एक जगह 2 हफ्ते के लिए किराए का रूम ले लिया.

ये सब काम में उससे शाम तक का वक्त लग गया.

मेघा से मिलने का इच्छा तो बहुत tha...Lekin ऐसे hi वो मेघा के सामने जाना नहीं चाहता tha...Ek बार फिर से सरप्राइज देना चाहता था.

जब शाम थोड़ा और गहरा हो gaya...Wo मेघा के घर पहुँच gaya...Ghar के थोड़ी दूर में जा के बैठ गया जहा उससे घर के आँगन और घर के बाहर का नजारा अच्छे से दिख सके.

होंठो में मुस्कान और खुली आँखों से सुहावना सपना देखते हुए वो मेघा की इंतजार करने लगा.

कुछ पल का इंतजार कब 2 घंटे का हो गया उससे खुद पता नहीं chala...Macchar ने काट काट कर उसके हाथ पाँव फुला दिया था लेकिन फिर भी वो हार मानने को तैयार नहीं था.

अचानक hi उससे ख्याल आया...

सुमित:- अगर ऐसे hi मच्चर काटता रहा तो पक्का मलेरिया और डेंगू हो jaayega...Yaa फिर फाइलेरियासिस, जापानीज इन्सेफेलाइटिस...

कुछ ज्यादा hi ज्ञान आ रहा है :डोह:

अभी के लिए निकलना hi बेहतर hai...Swasthya अच्छा रहेगा तो 2 हफ्ते अच्छे से मेघा के साथ वक्त बिताऊंगा. :हैप्पी:

फिर सुमित निकलने hi वाला था की कुछ सोचते हुए वो फिर रुक गया.

मेघा का इंतजार तो था hi लेकिन साथ में किसी और का भी.

कुछ देर में एक बच्चा मेघा के घर जाते dikha...Sumit उसके पास गया और...

सुमित:- मेरा एक काम karoge...Ek चॉकलेट दूंगा.

चॉकलेट सुनते hi बच्चा खुश हो गया और अपना सर हां में हिलाया.

सुमित:- ये मेघा को do...Aur कहना उसके शुभचिंतक ने दिया है.

फिर सुमित अपने हाथ में प्लास्टिक में पैक किया हुआ सामान उस बच्चे को देता है और एक चॉकलेट उस बच्चे को.

फिर सुमित अपना रूम लौट आया और रात के खाना के बाद मेघा की यादों में hi सू गया.


अगली सुबह


मेघा अपने 2 सहेलियों के साथ घर से थोड़ा दूर एक तालाब के पास टहलने आयी थी.

तालाब के पास में hi एक आदमी को देख वो तीनो hi हैरान रह gaye...Wo आदमी का हुलियाबहुत अलग tha...Apne चेहरे को मफलर से कुछ बिचित्र तरीके से ढाका tha...Aur उसके कारनामे तो और भी बिचित्र था.

वो आदमी बांस से बना एक लम्बी लकड़ी को पानी में डूबा रहा था और निकाल रहा tha...Nikaalte वक्त वोलकडी को गौर से देखता और उसके चेहरे में एक निराशा आ जाता.

मेघा:- ये क्या कर रहे है आप?

आदमी:- मछली मार रहा हूँ.

आवाज भी अत्त्पत्ति लग रहा था उसका.

मेघा:- ये कैसा तरीका है?

आदमी:- मई अपना इस बलची से मछली मार रहा hun...Lekin एक भी अभी तक हाथ नहीं लगा.

मेघा:- ये कैसी बेवकूफी भरी बातें कर रहे है aap...Macchli मारने के लिए बलची में धागा होना chahiye...Fir एक काँटा और खाने के लिए भी कुछ रखना चाहिए.

आदमी:- वो सब तो पुराना तरीका है.

मेघा:- Kya!!!!:eek: फिर ये कौनसा नया तरीका है?

तीनो बहुत हैरान हो गए.

आदमी:- कुछ दिन पहले टीवी में देखा tha...Baans में फेविकोल लगा कर मछली मार सकते hai...Macchli चिपक जायेगा.

दूकान वाले ने डुप्लीकेट फेविकोल पकड़ा दिया.

अब्ब दोनों को ये आदमी पागल लग रहा था लेकिन मेघा को कुछ गड़बड़.

कुछ देर से मेघा उस आदमी की आँखों में देख रही थी और बोलने का तरीका तो बहुत hi अजीब लग रहा था.

सहेली 1:- पागल हो क्या?

आदमी:- हाँ मेघा के प्यार में.

आवाज एकदम से बदल gaya...Aur साथ hi उस आदमी ने अपना मफलर भी खोल लिया.

तीनो की हैरानी की कोई ठिकाना नहीं tha...Khaas कर मेघा ke...Lambe लम्बे बाल जो वास्तविकता से थोड़ा दूर लग रहा tha...Chhota सा मंच और उससे भी छोटा daadhi...Megha तो कुछ देर के लिए देखती hi रह गयी. :ीक:

सहेली 1:- कौन हो तुम?

उसकी आवाज में थोड़ा दर भी था.

रिश्ते में तो तुम दोनों के जीजा lagunga...Aur नाम है सुमित सफस.

सहेली 2:- ये सफस क्या है?

सुमित:- मेघा hi बेहतर बता सकती है.

सहेली 2:- (तो मेघा) तू hi बता de...Aur इससे कैसे जानती है?

मेघा:- बेकार की चीज और लोगो पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए अनीता.

सुमित:- बेकार लोग :डी

सुमित को मुस्कुराता देख मेघा अपना मुंह घुमा लेती है.

अनीता:- मेघा को देख कर लगता है की वो आपको पसंद नहीं करती hai...Behtar यही होगा आप मेघा के पीछा छोड़ दे.

सुमित:- न पसंद होना और नाराज होने में बहुत फर्क hai...Megha की नाराजगी भी जायज hai...Khair उससे मनाके hi मानूंगा.

सुमित की आवाज आत्मविश्वाश से भरा था लेकिन ये काफी था मेघा को भड़काने के लिए.

मेघा:- अच्छा अब्ब तुम तय करोगे की तुम मुझे ना पसंद हो या फिर नाराज हो.

तुम जानते हो सुमित तुम्हारा समस्या क्या है? तुम अपने बारे में और दूसरे के बारे में भी खुद hi एक ालय राय बना लेते हो और फैसला भी खुद कर लेते हो.

और दूसरी baat...Ziddi तो तुम हो hi...Abb मुझे मनाने की ज़िद्द पकड़ रखा hai...Ye जानते हुए भी की मुझे तुम में कोई इंटरेस्ट नहीं है abb...Afsosh की बात है की कीर्ति वाली बात के बाद भी तुम समझ नहीं पाए की हर बार ज़िद्द सही चीज नहीं है.

खैर इस बार समझ जाओगे.

मेघा ने अपना सारा गुस्सा एक hi सांस में निकाल दिया.

मेघा का गुस्सा तो सुमित को पहले भी पता tha...Lekin इस बार का गुसा देख उससे अंदाजा हो गया की मेघा सच में नाराज hai...Bahut नाराज.

फिर मेघा अपने सहेलियों के साथ वह से जाने lagi...Sumit भी मेघा के पीछे चलते हुए कहने लगा.

सुमित:- समझता हूँ...

सुमित अपनी बात पूरा कर पाटा उससे पहले hi...

मेघा:- क्या अब्ब मुझे अकेला छोड़ डोज.

इस बात से सुमित को एहसास हो गया की मेघा को फिलहाल अकेला छोड़ देना hi ठीक है.

सुमित:- कुछ पल के लिए hi अकेला छोड़ रहा हूँ जिंदगी में तो साथ रहना hi है. :डी

मेघा आँखों से अपना गुस्सा दिखाते हुए वह से निकल गयी.

सुमित कुछ देर वही तालाब के पास बैठा रहा.

सुमित:- (इन हिज मंद) अब्ब आगे क्या करना चाहिए?

सुमित:- कुछ nahi...Pehle भी प्लानिंग करने के चक्कर में सब कुछ बिगाड़ चूका हूँ.

कुछ चीजें अपने आप होना चाहिए.

जब मेघा को यकीं होगा की मुझे अपने भूल का एहसास है तो माफ़ कर देगी.

बस उसके करीब रहने की कोशिश करना है.

फिर सुमित वह से अपने किराये वाला घर की और जाने laga....Raashte में मेघा का घर भी था.

घर के बाहर hi मेघा के पापा और मेघा थे.

जैसे hi सुमित वह से गुजरने लगा.

कैसे हो सुमित?

मेघा की पापा की आवाज सुनते hi सुमित रुक गया.

सुमित:- ठीक हूँ Uncle....Aapne मुझे पहचान लिया?

मुस्कुराते हुए सुमित ने जवाब दिया.

म. डैड:- अभी उतना बुद्धा भी नहीं हूँ की मुझे अल्झाइमर (इंसान धीरे धीरे सब कुछ भूलने लगता है) हो जाए.

सुमित कुछ जवाब दे पाटा उससे पहले hi....

म. डैड:- मेरी बेटी भी डॉक्टर hai...Bataati रहती है बीमारी और इलाज के बारे में.

लेकिन तुम यहाँ इस गांव में क्या कर रहे हो?

यही वो सवाल था जिससे सुमित बचना चाहता था.

सुमित:- जी वो रिसर्च करना था.

म. डैड:- कैसा रिसर्च?

सुमित:- अब्ब सर्जन बन चूका हूँ तो एक रिसर्च करने का socha...Surgery के बाद कॉम्प्लीकेशन्स के टाइप के बारे में.

म. डैड:- लेकिन इस गांव में क्यों?

सुमित:- अपने सेहर में तो बहुत रिसर्च कर चूका hun...Socha बाहर किया जाए एक research...Pehla ख्याल इसी गांव के बारे में आया.

कुछ दूर कड़ी मेघा भी यही सोच रही थी की ये लड़का झूठ भी कितना विश्वाश के साथ बोल लेता है.

म. डैड:- चलो अच्छा hai...Abb यहाँ आये hi हो तो आओ चाय पी लो.

सुमित:- अरे नहीं अंकल.

म. डैड:- क्यों?

सुमित:- मेघा मुझसे नाराज है.

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा और मेघा सुमित को हैरानी से घूरने लगी.

म. डैड:- क्यों?

अब्ब वो मेघा की तरफ देखते hai...Lekin जवाब सुमित ने दिया.

सुमित:- आखिरी साल में अपने करियर पर ज्यादा ध्यान देने laga...Megha को नजरअंदाज कर दिया.

जब एहसास हुआ तो माफ़ी मांग लिया लेकिन मेघा अभी भी नाराज है.

म. डैड:- (तो मेघा) दोस्ती में तो छोटे मोठे समस्या होता रहता hai....Isko इतना बड़ी बात नहीं बनाना चाहिए.

मेघा:- (इन हेर मंद) छोटी बात :माध:

मेघा:- छोटी बात नहीं है पापा ye...Swarthi इंसान किसी के सागा नहीं होते है.

ये बात सुमित को चुभ gaya...Lekin उससे भी मेघा की बातों में सच्चाई दिख रहा था.

म. डैड:- लेकिन एहसास होना उससे भी बड़ी बात hai...Kabhi कभी माफ़ करना भी सीखना चाहिए.

आओ सुमित andar...Chai पीने.

सुमित:- एक hi शर्त पर अंकल.

म. डैड:- क्या?

सुमित:- चाय मेघा बनाएगी.

मेघा ने गुस्से से सुमित को घुरा तो सुमित ने मुस्कुरा कर जवाब दिया.

मेघा:- नहीं पापा.

म. डैड:- देखो मेघा ऐसी बातों में जिद्द नहीं करते.

फिर मेघा की पापा अंदर चले gaye...Sumit भी जा hi रहा था मुस्कुराते हुए लेकिन रास्ते में hi.

मेघा:- अब्ब तो झूठ भी बोलने लगे.

सुमित ने मेघा की तरफ देखा और कहना सुरु किया.

सुमित:- अब्ब हमारे प्यार में कोई झूठ नहीं.

मुंह से निकल hi गया है तो वो रिसर्च सच में करूँगा.

फिर मुस्कुराते हुए सुमित अंदर चला गया जिससे देख मेघा बुरी तरह से छिड़ गयी. :माध:
 
अपडेट 107

सुमित घर के अंदर जाते hi मेघा की माँ और दादी का पेअर छू कर उनका आशीर्वाद लेता hai...Aur उनसे बातें करने लगता है.

तभी दो लड़का भी वही हॉल में आते hai...Ek के कंधे में हाथ रख कर सुमित ने पूछा.

सुमित:- कैसे हो सूरज?

इस बात को सुन कर सभी हैरान रह gaye...Yaha तक की सूरज भी.

मेघा:- तुम सूरज को कैसे जानते हो?

सुमित:- बस जानता हूँ.

सूरज:- लेकिन कैसे.

सुमित:- Socho...Sochne से hi बड़े बड़े अविष्कार होता hai...Mujhe पहचानना तो मामूली बात है.

सूरज कंफ्यूज हो कर वह से अपने फॉस्ट के साथ निकल गया.

मेघा हैरानी से सुमित को देख रही thi...Sumit मेघा को देख बस मुस्कुरा रहा tha...Jaise hi मेघा को कुछ याद aaya...Wo सवालिया नजरो से सुमित को देखती है.

सुमित का मुस्कान और बढ़ गया जिससे मेघा का अनुमान सही साबित हो गया.

फिर सुमित बात को बदल देता है और मेघा की माँ और दादी से बात करने लगता hai...Megha किचन में चाय बनाने जाती है.

चाय बना लेने के बाद.

मेघा:- ये लो स्पेशल कॉफ़ी तुम्हारे लिए.

म. डैड:- हम सब के लिए चाय और सुमित के लिए coffee...Wo भी special....Kya ख़ास बात है?

एक घूंट चाय पी कर मेघा के पापा ने पूछा.

तभी सूरज और उसका दोस्त वापस आ जाते है.

मेघा:- 2 दिन का मेहमान है Sumit...Acche से ख्याल रखना तो बनता है.

सुमित की आँखों में देख 2 दिन पर ज्यादा जोर दे कर मेघा ने कहा.

म. डैड:- ये भी सही बात है.

सुमित:- नहीं uncle....Megha को शायद अल्झाइमर (भूलने वाली बीमारी) हुआ है. :डी

सुमित ने भी मेघा की आँखों में देखा.

म. डैड:- और ऐसा क्यों?

सुमित:- बाहर hi तो बताया था यहाँ मई रिसर्च करने आया हु.

अब्ब रिसर्च ख़त्म होने में 2 हफ्ते भी लग सकता है और 2 साल भी.

म. डैड:- बोरिंग होता होगा इतना वक्त लग रहा है तो? वो भी गांव में.

सुमित:- बिलकुल नहीं Uncle...Apna hi गांव है.

और रिसर्च भी ऐसा है की मुझे अपना ये रिसर्च टॉपिक बहुत पसंद hai...Pehle भी कर चूका hun...Bhale hi असफलता हाथ लगा ho...Lekin इस बार मजा आ रहा hai...Research सफल करके hi मानूंगा.

ये कहते हुए सुमित कभी कभी प्यार से मेघा की आँखों में देख लेता tha...Megha भी छिड़ रही thi...Lekin कुछ कर पा नहीं रही थी.

सुमित:- (इन हिज मंद) रिसर्च से ज्यादा तो ये मिशन लग रहा hai...Khair इस मिशन में सफल होना hi है.

म. डैड:- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ये तुम्हारा research...Khair तुम्हे तुम्हारा सफलता mile...Yahi आशीर्वाद है.

सुमित:- बहुत बड़ी आशीर्वाद दे दिया aapne...Koshish करूँगा आपके इस आशीर्वाद का मान राखु.

सुमित उत्शुक हो कर मेघा की और देखते हुए बोलै और इसी उत्शुकता में कॉफ़ी का एक घूंट पिया.

सारा उत्शुकता एक hi पल में khatm...Kuch बोल भी नहीं सकता था सब के bich...Lekin उसके चेहरे का भाव देख सभी को समझ में आ गया.

मेघा:- ओह्ह सॉरी Sumit...Cheeni (शुगर) रखना hi भूल गयी.

फिर वो सभी से नजर बचा कर सुमित की और देख मुस्कुराती hai...Wo जानती थी सुमित को कड़वा कॉफ़ी से कितनी नफरत है.

सुमित मेघा की और देख कर सारा कॉफ़ी एक hi घूंट में पी लेता है.

ये देख कर मेघा को थोड़ा अजीब तो लग रहा tha...Abhi भी मेघा को याद था सुमित ने एक साफé में जब कॉफ़ी आर्डर किया था तो एक कड़वी फ्लेवर डिलीवर हुआ tha...Waiter को अच्छे से बताने पर भी जब उसने मानने से इंकार कर दिया तो मैनेजर तक को घुटने में ला दिया था उस दिन.

लेकिन aaj...Aaj तो मुस्कुराते हुए एक hi घूंट में पी गया.

म. माँ:- चीनी के साथ पी लेते बीटा.

सुमित:- नहीं aunty....Cheeni काम कर रहा हु खाने में.

अचानक से सुमित को सिर्फ यही जवाब मिला.

म. दादी:- चीनी वाली बीमारी (डायबिटीज) है क्या तुम्हे?

सुमित:- Nahi...Jab भी कुछ वक्त के लिए चीनी खाता hun...Motaa होने लगता हूँ.

म. दादी:- मोटा होना तो अच्छी बात hai....Dekho कितना कमजोर लग रहे हो.

म. माँ:- ये खुद डॉक्टर hai...Jise हमसे सेहत के बारे में पता है. :डी

म. दादी:- ये बात भी ठीक hai...Pata नहीं मई भी किसे सीखा रही हूँ.

मेघा:- ठीक है Sumit...Har तेज सुबह यहाँ aao...Tumhe करेले की जूस pilaaungi...Tumhare सेहत के लिए अच्छा रहेगा. :ेविलौगह:

ये सुनते hi सुमित की हालत ख़राब हो gaya...Swaad में कड़वा उससे कभी बर्दास्त नहीं था.

सुमित:- तुम कहती हो तो जरूर आऊंगा. :लव:

सुमित और मेघा की बहुत देर से बात सुन रहा सूरज की दोस्त को ये देख बहुत गुस्सा आ रहा था.

सुमित:- अच्छा तो अब्ब चलता हूँ.

म. माँ:- फुर्सत माइक तो जरूर आना बीटा.

सुमित:- जरूर aunty...Abb तो आना जाना लगा रहेगा.

ये बात भी मेघा को देख कर कहा सुमित ने.

Suraj's फ्रेंड:- लगता है डॉक्टर साहब बहुत फ़ालतू बैठे hai...Bahut फुर्सत है इनके पास.

उसका गुस्सा आखिर बाहर निकल hi गया.

सुमित:- आपका नाम जान सकता हूँ?

Raju...Dusri तरफ से जवाज आया.

सुमित:- अच्छा राजू ji...Bhale hi डॉक्टर hun...Lekin आँखें जासूस से काम नहीं hai...Aur मेरा ये जासूस नजर बता रहा है की आपको कोई बहुत बड़ी बीमारी hai...Dua कीजिये कैंसर न हो.

सुमित को राजू का बोलने का तरीका बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था.

राजू:- Cancer...Loot मचने का बहुत अच्छा तरीका है.

सुमित:- आईने में देखिये.

राजू:- आईने में देखने की जरुरत आपको है.

सुमित:- अगर नहीं देखा तो ये आपका जो पीला आँखें है वो उस हद्द तक बढ़ जाएगा जिसके बाद मई भी इलाज नहीं कर पाऊंगा.

ये सुनते hi राजू आईना की और bhaaga...Aankhein सच में पीला था.

सुमित:- ये जॉन्डिस hai...Kuch भी कारण हो सकता hai...Agar सही समय पर पता नहीं चला तो परिणाम कुछ भी हो सकता है.

राजू को थोड़ा दर लगने लगा था लेकिन फिर भी.

राजू:- किसी अच्छे डॉक्टर से इलाज karunga...Lekin आपसे नहीं.

ये सुनते hi...

म. डैड:- ये क्या बदतमीज़ी है Raju...Tabhi से तुम्हारे बोलने के तरीका देख रहा hun...Koi ऐसे बात करता है?

और जिस डॉक्टर ने इतने दूर से hi तुम्हारे आँखों को देख कर क्या गड़बड़ है बता दिया जो तुम्हे खुद नहीं दिख रहा tha...Usse कितना अच्छा डॉक्टर चाहिए?

और ये कितना बड़ा डॉक्टर है जानते हो? तुम्हारे पड़ोस के hi राजेंद्र chacha...Koi उनके पेट के दर्द का वजह पता नहीं कर पा रहे thhe...Maine hi मेघा से बात करके सुमित के पास भेजा था.

10 मिनट में बीमारी पता कर के अच्छे से सर्जरी कर दिया.

राजू ये सुन कर और भी गुस्सा हो जाता है जिससे दिखा नहीं पा रहा tha....Jis सुमित को वो सभी के नजरो में निचा दिखाना चाहता था उसका कद और ऊँचा कर दिया.

म. डैड:- सुमित ये बातें बताना जरुरी नहीं samjha...Tum काफी अच्छे डॉक्टर ho...Vishwash था बिना जान पहचान के भी किसी मरीज का अच्छे से इलाज कर डोज.

सुमित:- शुक्रिया अंकल.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ.

गेट के पास.

सुमित:- Raju...Mujhse भी बहुत अच्छे डॉक्टर्स hai...Kisi से भी दिखा सकते ho...Dikha lo...Baad में पछताना न pade...Aur वैसे भी अभी छूती में हु मई कुछ वक्त के liye...Tumhara इलाज तो मई चाह कर भी नहीं कर पाऊंगा.

इतना कह कर सुमित एक नजर मेघा को देख कर वह से चला gaya...Kaafi खुश था wo...Megha की पापा, माँ और दादी का विश्वास आज भी उस पर वैसा hi था.

राजू:- (इन हिज मंद) इलाज तो तेरा मई karunga...Mai पछताओ या न pachtaau...Tu जरूर पछतायेगा. :माध:

सुमित कुछ आगे गया hi था की फिर वापस आ गया.

सुमित:- Megha....Research के लिए सोच रहा हु कैंडिडेट्स के बारे में तुमसे बात करू.

क्या तुम मदद करोगी?

मेघा कुछ बोलती उससे पहले hi.

म. माँ:- इस में पूछने वाली बात क्या है? जरूर मदद करेगी.

सुमित:- शुक्रिया Megha...Shaam को तैयार रहना. :)

इस मुस्कान से मेघा छिड़ gayi...Lekin घर वालो के सामने ज्यादा रियेक्ट भी नहीं कर पा रही थी.

सुमित अब्ब वह से निकल गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) अच्छा हथियार है ये research...Megha के घर की गेट पास :lol1:
 
अपडेट 108

ये भिंडी कितने का है?

एक बुजुर्ग ने तरकारी वाला से पूछा.

300 रुपैया किलो.

इतना मेहेंगा? ठीक ठाक दाम लगाओ? :माध:

यही दाम है दादा जी. :)...बहुत ख़ास भिंडी है ये.

अच्छा ऐसी क्या बात है इस भिंडी में?

ये जमीन में ुंगता है.

ये सुनते hi वो बुजुर्ग गुस्सा हो gaye...Aas आस के सभी लोग उस तरकारी वाला को घूरने lage...Thodi दूर खरीद दारी कर रही मेघा ने ये सुनते hi.

मेघा:- क्या बदतमीज़ी है ये?

अरे मैडम ji....Aap क्यों गुस्सा हो रही है? आप को तो 5 रुपैया किलो दूंगा.

ये आवाज सुनते hi मेघा का गुस्सा और बढ़ gaya...Iss बार गुस्से से तरकारी वाले को देखती hai...Jo झुका हुआ चेहरा को कैप धक् रहा tha...Iske बावजूद मेघा को सामने बैठा शख्स को पहचानने में बिलकुल भी दिक्कत नहीं हुआ.

भिंडी की और नजर पड़ा तो सामने 2 किलो के आस पास के hi भिंडी था.

सुमित....

गुस्से में इतना hi निकला मेघा के मुंह से.

मेघा को गुस्से में जाता देख उसकी दोनों hi सहेली हँसते हुए मेघा के पीछे जाने लगी.

सुमित:- दादा जी ये भिंडी आप रख लीजिये.

दादा जी:- लेकिन पैसे?

सुमित:- जरुरत nahi...Mai तो ऐसे बी वक्त बिता रहा था.

फिर सुमित वह से निकल जाता है मेघा के पीछे.

अरे Megha...Suno तो?

अनीता:- ले आ गया तेरा आशिक़.

मेघा:- बकवास बंद कर और चल चुप चाप.

सहेली 2:- काफी तेज है jeeju...Unse तेज नहीं भाग पाएगी तू.

मेघा वही रुक जाती है और गुस्से से.

मेघा:- Anjali...Tu अपनी बकवास बंद कर.

तब तक सुमित भी वह आ जाता hai...Sumit को देख मेघा भड़क जाती है.

मेघा:- बहुत बार कह चुकी हूँ मेरा पीछा छोड़ do...Sumit तुम सीधी बात नहीं समझते हो क्या?

सुमित:- तुम तो जानती hi ho...Mujhe मुझसे भी भी ज्यादा :लव:.

मेघा गुस्से से बस सुमित को देखती है.

सुमित:- बहुत दिन हो gaye...Tumhara तारीफ़ किये.

गुस्से में तो तुम और भी खूबसूरत लगती हो. :लव:

मेघा:- बस...

तभी सड़क में चल रहे 2 लोग वह पहुँचते है.

क्या हो रहा है?

एक आदमी ने पूछा.

सुमित:- आपसी मामला है.

आदमी 2:- ऐसा लग तो नहीं रहा hai...Ye तुम लोगो को परेशान कर रहा है क्या?

मेघा और मेघा के दोस्तों की तरफ देख उस आदमी ने पूछा.

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया.

आदमी 2:- देख ladke...Pyaar से समझा रहा हूँ निकल जा यहाँ से.

सुमित:- अब्ब मेरा दिमाग ख़राब हो रहा hai...Agar तुम दोनों यहाँ से नहीं गए तो पक्का बुरी तरह से पीट जाओगे.

इस बार सुमित की आवाज में भी गुस्सा था.

आदमी 1 सुमित की तरफ अपना हाथ बढ़ा hi रहा था की सुमित उसको पकड़ कर वही गिरा देता hai...Aur एक तेज मुक्का उस आदमी की चेहरे के बिलकुल पास जम्में में मारता hai...Ek जोरदार आवाज के साथ सुमित के जाता से खून बहने लगता hai...Dusra पंच उससे भी तेज उस आदमी के नाक के बिलकुल पास आ कर रुक जाता है.

सुमित फिर उठ कर दूसरे आदमी की तरफ देखता है.

सुमित:- ले जा isko....Warna तुम दोनों का क्या हालत करूँगा मुझे खुद नहीं पता.

वो दोनों आदमी वह से निकल जाते है.

मेघा:- और करो गुंडागर्दी.

इतना कह कर मेघा वह से चली जाती hai...Sumit भी सड़क के पास बैठ जाता है.

क्या तुम सच में मरघा से प्यार करते हो?

आवाज की तरफ देखा तो अनीता थी.

सुमित:- क्या लगता है तुम्हे?

अनीता:- लगता तो यही है की प्यार करते ho...Lekin प्यार का तरीका सही नहीं है.

सुमित:- पहले तो मेघा को ये सब बहुत पसंद tha...Uske पीछे lagna...Usse थोड़ा परेशान करना और बहुत साड़ी तारीफ़ करना. :)

मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Megha का ख्याल आते hi अपना सारा गुस्सा भूल गया वो.

अनीता:- वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता hai...Insaan bhi...Picchle कुछ दिनों से मेघा बहुत बदल गयी है.

सुमित:- अब्ब समझ में आ रहा hai...Aur इस बदलाव का वजह भी मई hi हूँ :वेरिसद:

सब कुछ ठीक कर dunga...Megha का गुस्सा उसकी दिल का ghaaw...Sab kuch...Bas एक मौका तो mile...Wo तो मुझसे hi दूर भाग रही है.

अनीता:- नहीं कर पाओगे.

सुमित:- क्यों?

अनीता:- ऐसी छोटे बातों में छिड़ जाते ho....Megha तो बहुत नाराज hai...Itni जल्फी नहीं मानने wali...Agar तुम ऐसे hi हर बात से छिड़ने लगे तो खुद hi थक हार कर यहाँ से निकल जाओगे.

सुमित:- ये बात तो सही hai...Shayad कभी खुद को हारता हुआ देख नहीं पाटा hun...Koshish कर रहा hun...Iss बार सोचा है मेघा के लिए कुछ bhi...Agar थोड़ा बहुत आत्मा सम्मान को चोट भी लगा तो कोई बात nahi...Maine भी मेघा का बहुत बार दिल दुखाया है.

अनीता:- देखते है.

इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.


अगला दिन


सुबह सुमित तालाब के पास बैठ कर तालाब में पत्थर फेंक रहा था.

मुझे तुमसे कुछ बात करनी है?

ये सुनते hi सुमित एकदम से खुश हो utha..Yahi तो वो चाहता tha...Kuch देर मेघा के साथ बैठ कर बात करने के लिए.

मेघा:- मेरा पीछा छोड़ do....Tang आ चुकी हूँ अब्ब मई.

सुमित:- तुम्हे अब्ब परेशान नहीं करूँगा.

मेघा:- क्यों बात नहीं समझ रहे हो? जब तक तुम यहाँ हो हर वक्त परेशान रहूंगी mai...Tum hi हो मेरी परेशानी.

ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Lekin इस पर कोई भी प्रतिकिरिया नहीं दिया उसने.

मेघा:- कब जाओगे तुम यहाँ से?

सुमित:- जब तुम साथ चलोगी.

मेघा:- फिर वही baat...Har बार अपने जिद्द पर hi लगे रहते ho....Ye भी नहीं समझना चाहते हो की मेरी क्या इच्छा है.

सुमित:- तुम्हारे इच्छा का सम्मान करता hun...Jab तुम मुझे माफ़ कर डौगी और मेरे साथ चलने को तैयार होगी मेरी पत्नी बन kar...Tab hi यहाँ से जाऊँगा. :लव:

मेघा:- सपना पर इतना विश्वाश भी ठीक नहीं है.

गुस्से में मेघा ने जवाब दिया.

सुमित:- कुछ लोग सपना देखते है उससे हकीकत बनाने के लिए.

मेघा:- और तुम वो कुछ लोग में से नहीं हो?

सुमित:- और ऐसा क्यों?

मेघा:- पापा मेरे लिए रिश्ता देख रहे hai...Kuch hi दिन में मेरी शादी हो jaayegi...Fir तुम मनाते रहना मुझे.

ये बात सुमित के लिए किसी झटका से काम नहीं tha...Usse भी ज्यादा दुःख इस बात का था की मेघा की आवाज में कोई भी दुःख नहीं था इस रिश्ते की बात se...Wo कुछ बोल भी नहीं पाया.

मेघा:- इसी लिए समझा रही hun...Mera पीछा छोड़ दो.

ऐसे hi जिद्द करते रहे तो तुम्हारा ये जिद्द तुम्हे hi चोट पहुचायेगा.

इतना कह कर मेघा वह से निकल gayi...Megha के जाते hi सुमित निचे जमीन पर गिर gaya....Aankhon में एकदम से आंसू भर आया.
 
अपडेट 109

Hello

दूसरी तरफ से आ रहा फ़ोन को उठाते हुए सुमित ने कहा.

कहा हो तुम?

सुमित:- मेघा की गांव में.

जानती थी.

सुमित:- कुछ काम था क्या?

अब्ब तुमसे बात करने के लिए भी काम की जरुरत है.

सुमित:- Nahi...Lekin ऐसा फीलिंग आ रहा है की जिस वजह से तुमने फ़ोन किया है वो शायद ठीक नहीं है.

संजना ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित भी चुप हो गया.

संजना:- मेघा मान गयी?

सुमित:- नहीं.

निराशा भरी आवाज में सुमित ने जवाब दिया.

संजना:- क्या सच में इतनी नाराज है?

सुमित:- पता nahi...Lekin जैसा सोचा था मामला उससे भी गंभीर लग रहा है.

संजना:- कोशिश करते raha...Maan hi jaayegi...Aakhir कौन लड़की तुम्हे मन कर सकती है.

इस बात पर सुमित को हंसी आता hai...Hansi में भी व्यंग था.

सुमित:- ऐसी बेवकूफी कर बैठता हूँ प्यार के मामला mein...Aaj तक किसी ने प्यारनहि किया जब भीमाई किसी से प्यार करता हूँ.

संजना:- मेघा को जितना भी जानती hun...Bahut प्यार करती है tumse...Aaj नहीं तो कल मान hi जायेगी.

सुमित:- उम्मीद तो यही है. :)

संजना:- वैसे सुमित एक बात कहु.

सुमित:- हाँ.

संजना:- वैसे तो तुम्हारा भला hi चाहती हूँ की मेघा तुम्हे मिल jaaye...Lekin कभी कभी ये ख्वाहिश भी है की काढ़ मेघा तुम्हे मन कर de...Shayad तुम मेरे हो जाओगे.

इतना कह कर संजना चुप हो gayi...Dar भी लग रहा था की सुमित कही गुस्सा ना हो जाए.

सुमित को भी ये बात पसंद नहीं आया लेकिन...

सुमित:- समझ सकता हूँ तुम्हारी baat...Tumhari जगज होता तो शायद मई bhi...Nahi नहीं वही चाहता था मई bhi...Kaas कीर्ति विवेक से अलग हो जाती.

लेकिन वक्त के साथ सब कुछ बदल गया.

अगर सच कहु तो मेघा मेरी नहीं हुई तो भी मई तुम्हारा नहीं बन पाऊंगा.

संजना:- लेकिन क्यों?

सुमित:- जब भी किसी से प्यार ho...Wo प्यार सच्चा होना chahiye...Naa की कोई ऑप्शन.

मैंने जब भी किसी से प्यार किया मेरे पास हमेशा से ऑप्शन thhe...Isse ब्रेकअप हुआ तो चल दूसरा hi sahi...Backup तो hai...Aise hi 4 ब्रेअकूपस हुआ.

जब कीर्ति से भी अलग हो रहा था मेघा अच्छी लगती thi...Ata नहीं kyu...Shayad हमेशा वो मेरे साथ thi...Mere सबसे मुश्किल वक्त में bhi...Vishwas था अगर कीर्ति चली भी गयी तो बहुत दर्द होगा लेकिन शायद उस दर्द में बजी मेघा मेरे साथ hogi...Ek दोस्त के रूप में या फिर दोस्त से भी ऊपर....

उस वक्त तो इससे ज्यादा सोचना नहीं चाहता था लेकिन अंदर hi अंदर दिल शायद सब कुछ जानता था.

उस वक्त भले hi पता नहीं था लेकिन मेघा भी एक बैकअप hi thi...Lekin अब्ब nahi...Abb कोई बैकअप नहीं.

शायद आखिरी बार प्यार हो रहा hai...Megha को मनाने के लिए एक और आखिरी बार प्यार के उस पागलपन से गुजरना चाहता hun...Agar मेघा मान गयी तो जिंदगी भर के लिए सच्चा प्यार और नहीं मानी तो कुछ वक्त बाद घरवालों के लिए किसी और से शादी कर lunga...Pyaar होगा नहीं होगा इस बारे में सोचा नहीं hai...Lekin हर एक जिम्मेदारी जरूर निभाउंगा.

लेकिन ये बैकअप का झूठा दिलाशा कभी नहीं दूंगा.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Sanjana भी चुप hi थी.

सुमित:- तुम्हारा हाल समझता hun...Kai बार ऐसा होता है की जो चीज हमसे दूर होने लगता है वो चीज हमे और प्यारा लगने लगता hai...Shayad मेरे लिए भी तुम्हारा ऐसा hi होगा.

अभी मेरा कहना बहुत आसान लग रहा hoga...Lekin ये मैंने भी महसूस किया hai...Jo प्यार नहीं मिल सकता उसके पीछे भागना बेवकूफी hai...Dard hi मिलता है.

मुझे भूल कर आगे बढ़ने की कोशिश karo...Suru में मुश्किल हो सकता hai...Lekin बाद में यही सही लगेगा.

कुछ देर के खामोशी के बाद.

संजना:- कोशिश करुँगी.

सुमित कुछ कहने hi वाला था की....

सनजना:- लेकिन वादा karo...Tum हमेअह मेरे दोस्त बने रहोगे.

सुमित:- वादा रहा.

फिर ऐसे hi बातें करने के बाद सुमित ने फ़ोन रख दिया.

मेघा की वो बात उसके घरवाले रिश्ता देख रहे hai...Raat भर ये बात सुमित को परेशां करता raha...Jab भी नींद लगता सोने के कुछ hi देर बाद दर कर उठ जाता.

मेघा को खोने की बात से hi अब्ब वो कांपने लगा.

रात तो बहुत बुरा kata...Ek पल को भी छैन nahi...Megha को देखने के लिए आँखें तरस गया था.

जब सुबह हुआ तो एक पल भी सुमित से रहा नहीं gaya....Sidhe चल दिया वो मेघा की घर की aur....Raashte में तो थोड़ा खुश भी था की मेघा को देख उसकी आँखों को सुकून मिलेगा.

लेकिन कब तक?

ये सवाल आते hi उसका दिल कांप उठा.

किसी तरह एक बहुत मुश्किल फैसला किया और बिना रुके मेघा की घर पहुँच गया.

आओ Sumit...Bataao रिसर्च में. क्या मदद कर सकता हूँ?

सुमित को देख मेघा की पापा मुस्कुराते हुए बोले.

सुमित:- एक बार घर के सभी सदस्य को यहाँ bulaiye...Kuch जरुरी बात करनी है?

म. डैड:- सब ठीक तो है?

सुमित:- Haan...Bas कुछ बातें करनी है.

कुछ hi देर में सब वह जमा हो गए.

म. डैड:- हाँ बताओ Sumit...Kya बात है?

सुमित:- मेघा ने कहा की आप लोग उसके लिए रिश्ता देख रहे है.

म. माँ:- हाँ सही hi तो hai...Abb शादी नहीं करेगी तो कब karegi...Waise भी पढाई के चक्कर में पहले hi देरी हो चुकी है.

म. डैड:- कहो Sumit..Jo भी कहना है.

सुमित की आँखों में देख कर उन्होंने पूछा.

सुमित:- उस रिश्ते के लिए मई कैसा हूँ?

सुमित की इस बात ने सबको चौंका diya...Sabse ज्यादा तो मेघा ko...Itna डिरेकीलय सुमित ये बात कह देगा उसको यकीं नहीं था.

म. डैड:- मजाक तो नहीं कर रहे हो?

अब्ब वो भी सीरियस हो गए.

सुमित:- Nahi...Aaj नहीं तो कल ये बात करना hi tha...Aur आप सब के अनुमति बिना बात आगे भी तो नहीं बढ़ सकता.

म. डैड:- Megha...Sumit क्या सच बोल रहा है?

मेघा:- मई कुछ नहीं जानती.

हैरानी में मेघा बस इतना hi बोल पायी.

मेघा की ये जवाब सुमित को थोड़ा बुरा जरूर लगा लेकिन इसके लिए वो पहले hi तैयार था.

म. डैड:- (तो सुमित) मेघा का जवाब मिल गया होगा तुम्हे.

सुमित:- अभी मेघा नाराज hai....Lekin मुझे विश्वास है की मई इससे जरूर मन लूंगा.

म. डैड:- Megha...Iski बातों से लगता है की तुम दोनों सिर्फ दोस्त नहीं thhe...Iss बारे में बातें तो बाद में karenge...Lekin क्या ये तुम्हे परेशान तो नहीं कर रहा है?

मेघा:- अभी तक तो नहीं.

म. डैड:- देखो Sumit...Tum मेघा के दोस्त हो इसी लिए तुमसे अच्छे से बात कर रहा हूँ और अगर मेघा के साथ थोड़ा भी गलत हुआ होगा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था.

सभी हैरानी से कभी सुमित को देख रहे थे तो कभी मेघा ko...Paas में hi नेता सूरज और राजू बस गुस्से से सुमित को देख रहे थे.

म. डैड:- सुमित अभी तुम जा सकते हो.

राजू;- ऐसे नहीं Kaka...Munhe तो पहली बार hi इस पर शक हो गया था.

इतना कह कर राजू सुमित की तरफ बढ़ने लगा.

म. डैड:- राजू...

राजू:- नहीं काका...

म. डैड:- राजूउउ

ये आवाज इतना तेज था की राजू भी डरते हुए रुक गया.

राजू:- पर Kaka...Isse सबक.

म. डैड:- अपनी जगह जा कर baith...Aur मई हूँ यहाँ अपने बेटी के लिए फैसला करने के liye...Tera इस मामले में कोई लेना देना नहीं.

राजू को ये बात अच्छा तो नहीं laga....Lekin कुछ कर भी नहीं सकता था.

सुमित:- अच्छा अंकल चलता hun...Megha को मनाने के बाद आपको भी मना लूंगा.

म. डैड:- अच्छा तो बीटा तुम अब्ब खुली आँखों से सपना देखने लगे.

गुस्सा थोड़ा अभी भी उनकी आवाज में tha...Sumit फिलहाल बात को यही तक रखना चाहता था.

गेट से निकलते वक्त सुमित ने एक नजर मेघा को देखा जो गुस्से से उससे hi घर रही थी.
 
अपडेट 110

अभी से धंधा सुरु कर दिया आपने जीजू?

सुमित ने गांव के एक कोने में अभी छोटा सा क्लिनिक सेट किया था.

ये जीजू किसे बोल रही है?

अनीता की बात पर मेघा बुरी तरह से भड़क गयी.

अनीता:- जिसके साथ बात कर रही hu...Saamne hi तो है सुमित सफस.

सुमित:- सफस :D...Ye तो खुद मई भी भूल गया tha...Megha तुम्हे अभी भी याद है और सभी को सुनाती भी हो.

सही है.

मेघा:- फ़ालतू चीज पर मई ध्यान नहीं देती.

अनीता:- झूठ बोल रही है ये जीजू.

अनीता की और मेघा गुस्से से देखती है.

मेघा:- पहले तो इससे जीजू कहना बंद kar...Aur ये जीजू बना kab?..Abb सच में इर्रिटेट हो रही हु मई.

अनीता:- जीजू तो ये उसी दिन बन गए है जिस दिन तेरे घर तेरा हाथ मांगने गए थे.

बिलकुल हीरो की अंदाज़ में.

मेघा:- उसके लिए मेरा मंजूरी भी तो chahiye...Jo ना मुमकिन है.

सुमित:- वैसे भी ससुर जी की मंजूरी तो मिल hi चूका है. :डी

मेघा:- और जीयो अपने इस देलुसिओं में.

सुमित:- देलुसिओं :डी. देलुसिओं ऑफ़ लव के साथ तो हमेशा jeeyunga...Bas तुम्हारा साथ मिल जाए.

मेघा:- देलुसिओं ऑफ़ ग्रान्डीओसीटी.

अनीता:- ये क्या बात कर रहे हो तुम dono...Kuch समझ में आये ऐसा बोलो.

मेघा:- देलुसिओं ऑफ़ Grandiosity...Ek ऐसा साइकियाट्रिक बीमारी जिसमें इंसान को लगता है उसके पास स्पेशल पावर hai...Wo भगवन hai...Wo जो चाहेगा वैसा hi होगा.

सुमित तुम्हे तो हमेशा से ऐसा hi लगता है ना?

सुमित:- अगर अब्ब भी मई तुम्हे एक्सप्लनेशन दू तो मई खुद hi अपने आप को बेवकूफ samjhunga...Mujhse भी ज्यादा जानती हो तुम mujhe...Jo तुम कहो वही सही.

अनीता:- (तो मेघा) अब्ब काम की बात भी करेगी या ऐसे hi इश्क़ लड़ाती रहेगी.

मेघा:- सुमित आज तो तुमने सच में हद्द पार कर di...Apna ना सही मेरी इज्जत का तो ख्याल karo...Tum तो पागल हो बेवकूफ ho...Pata नहीं मेरे घर वाले क्या सोच रहे होंगे? मुंह उठा के आ गए घर और कर दिया बकवास की मेरा हाथ मांगने आये हो.

मेघा की गुस्से में कही ये बात सुमित को चुभ gaya...Lekin वो जानता था की ऐसा कुछ जरूर hoga...Wo तैयार था.

सुमित:- जब विश्वाश होता है तो वह पर शक नहीं होता hai...Aur वैसे भी वो तुम्हारे घर वाले hai...Kyu कुछ सोचेंगे तुम्हारे बारे में?

मजाक से बाहर निकल कर अब्ब सीरियस हो कर सुमित ने कहा.

मेघा:- फिर से वही फ़िल्मी बातें? कभी तो ढंग से बात करो.

मेघा का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

सुमित:- सॉरी.

मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- सॉरी तुम्हारे दिल दुखाने के liye...Lekin मैंने जो किया सही किया.

मेघा:- अभी भी तुम्हे ऐसा लगता है?

सुमित:- कभी न कभी तो कहना hi था ये baat...Yaa फिर भाग कर शादी करने की फंतासी है तुम्हारी? :lol1:

मेघा:- फिर से बकवास :माध:

सुमित:- अच्छा सॉरी sorry...Chalo अब्ब मुद्दे पर आता हूँ.

तुम्हारे परिवार मुझे कुछ साल पहले से जानते hai...Thik थक जान पहचान hai...Mai कैसा हूँ ये भी वो जानते hai...Agar वो मुझे अपने दामाद के रूप में स्वीकार करना चाहते है तो जरूर करेंगे वर्ण शायद नहीं.

और tum...Tumse ज्यादा मुझे कौन जानता है? बस नाराजगी दूर करनी hai...To सोचा अगर वो मना कर देते है तो सभी को मनाने के लिए जो पापड बेलना पड़ेगा वो एक साथ बेल लेता हूँ.

अनीता:- वाह jiju...Kya कैलकुलेशन है? :क्लाप्स:

सुमित कुछ जवाब देता उससे पहले सूरज और राजू भी वह आ जाते है.

सूरज:- ये क्या है?

सुमित की छोटा सा क्लिनिक का सेटअप देख कर सूरज ने पूछा.

राजू:- देखने में hi झोला छाप डॉक्टर लग रहा hai...Clinic भी ऐसा hi होगा na...Aur मजे की बात तो ये है की इस झोला चाप के पास कोई अपना इलाज के लिए आ भी नहीं रहा है.

अगर कोई और वक्त होता तो सुमित राजू को उसकी बातो से hi मजा ले लेता लेकिन अभी मूड ख़राब था सुमित का.

सुमित:- क्या बात है Raju...Pura बत्तीसी दिखा रहा है.

राजू:- सच मिर्ची सा लगता है.

सुमित:- अगर ये बत्तीसी hi नहीं रहा to...Naa रहेगा दांत न सुनाई देगा तेरा ये हंसी.

सुमित का गुस्सा देख राजू एक पल के लिए चुप हो गया.

सूरज:- Didi...Ye आप को परेशान कर रहा है?

सुमित:- Suraj...Abhi मूड ठीक नहीं hai...Abhi मई और तेरा दीदी बात कर रहे hai...Tum जाओ यहाँ से.

सूरज:- एक तो मेरे दीदी को परेशां कर रहे हो और ऊपर से...

सुमित:- तेरी दीदी है wo...Tujhse बहुत samajhdaar...Agar परेशान होती तो यही एक पल और नहीं tikti...Abhi के लिए जाओ यहाँ से.

राजू:- इसकी जुबान बहुत चलती hai...Sabak सीखना पड़ेगा.

इतना कह कर राजू सुमित की तरफ बढ़ता hai...Paas पहुँच कर सुमित को एक पंच मारता है.

लेकिन राजू का मुक्का सुमित अपने चेहरे के पास hi रोक लेता hai...Aur उसके हाथ को ऐसे घुमाता है की दुनिया भर की दर्द का चीख राजू के मुंह से निकलता है.

वो जम्में पर अपने हाथ को पकड़ कर चीखने लगता है.

मेघा:- क्या हुआ उसको? कही हाथ फ्रैक्चर तो नहीं कर दिया?

मेघा की आवाज में दर था.

सुमित:- नहीं.

मेघा:- फिर?

राजू को ऐसे तड़पता देख लग रहा था की कुछ ज्यादा हो चोट आया है उसको.

सुमित:- पहले इसको उठाओ.

सूरज राजू को उठाता है.

मेघा:- क्या किया इसके saath...Abb तो बताओ?

सुमित:- राइट एआरएम इस इन अब्दुक्तिओं पोजीशन विथ एक्सटर्नल रोटेशन ऑफ़ शोल्डर जॉइंट.

मेघा:- मतलब?

सुमित:- इतना भी नहीं pata...Ye तो ऑर्थोपेडिक्स का बेसिक्स है. क्या डॉक्टर बनोगी रे तुम? :डी

अचानक से सुमित का मूड मजाकिया हो गया.

मेघा:- इसकी हालत करब हो रही है और तुम्हे मजाक सूझ रहा है.

सुमित:- एंटीरियर शोल्डर जॉइंट डिस्लोकेशन.

मेघा का चिंता और बढ़ गया.

सुमित:- ओर्थपेडीक emergency...Agar कुछ घंटा और इलाज नहीं हुआ तो इसका जॉइंट किसी काम का nahi...Bekaar हो jaayega...Agar किस्मत और भी खराब रहा तो इसके हाथ का hi कोई काम नहीं रहेगा.

सुमित ने तो हँसते हुए कहा लेकिन वह मौजूद सभी के दर के मारे हालत खराब था.

मेघा:- सर्जरी करना padega...Sumit कुछ karo...Majaak का टाइम नहीं है ये.

सुमित:- लेकिन मुझे क्या मिलेगा?

मेघा को प्यार से देखते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- अब्ब ब्लैकमेलिंग पर उतर आये?

सुमित:- नहीं nahi...Itna भी कमजोर नहीं है मेरा प्यार.

जो तुम कहो वो बिना शर्त के कर दूंगा.

मेघा:- अब्ब डायलाग बाज़ी बंद karo...Jaldi से ले चलो hospital..Surgery जरुरी है.

सुमित:- सर्जरी की जरुरत नहीं पड़ेगा.

मेघा:- जॉइंट डिस्लोकेटेड है और तुम कह रहे हो सर्जरी की जरुरत नहीं?

इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा था.

सुमित:- सर्जन तुम हो या मैं?

मेघा:- Tum..Lekin तुम जनरल सर्जन हो ओर्थपेडीक सर्जन नहीं.

सुमित:- लेकिन सर्जरी का प्रिन्सिपले बहुत हद्द तक मैच करता है?

अब्ब मेघा सुमित के सामने हाथ जोड़ लेती है व्यंग के रूप में.

मेघा:- अब्ब तुम्हारा हो गया तो इलाज पर ध्यान doge...Pehle hi टाइम लोस्स हो चूका है.

सुमित:- मेघा मेघा Megha...Bahut बड़ी डॉक्टर हो tum...Internal मेडिसिन ki...Apni फील्ड ki...Lekin ओर्थपेडीक का सिंपल सा बेसिक भूल gayi...Ye एक्सपेक्टेशन नहीं tha..Khair होता hai...Aage से ध्यान देना.

मेघा:- मतलब?

सुमित:- मॉडिफाइड कोचर Maneuver..Kuch याद आया?

मेघा एकदम से चौंक गयी तब तक सुमित राजू का हाथ फिर से पकड़ लेता है.

सुमित:- Traction..Itna कह कर सुमित राजू का हाथ जोर से बाहर खिंच लेता hai...Raju का दर्द सेहन शक्ति के बाहर जा रहा था.

एक्सटर्नल Rotation...Raju और जोर से chillaya...Adduction...Abb चीखने की भी ताकत नहीं था राजू mein...Internal Rotation...Abb राजू निचे जमीन में गिर गया.

फिर सुमित मेघा की तरफ देखता है.

सुमित:- लो हो गया काम.

राजू हिम्मत कर के अपने उस हाथ को चलाने की कोशिश करता hai...Usse भी लगता है शायद ठीक हो गया hai...Haath अपनी जगह पर वापस आ गया hai...Bas दर्द के मारे हाथ चला नहीं पा रहा था.

सुमित फिर प्रिस्क्रिप्शन के पेपर में कुछ लिख कर राजू को देता है.

सुमित:- झोला चाप डॉक्टर का ये दवाई जरूर काम करेगा कुछ hi मिनट में.

सूरज तू ले कर जा इससे और फार्मेसी से दवाई खरीद कर खिला देना.

सूरज राजू को उठाता है.

सुमित:- और सुन बे chirkut...Tera सोच क्या है और क्यों मुझसे पन्गा ले रहा है सब समझता hun...Isse बस वार्निंग समझ.

और एक baat...Mai हमेशा से अपने लाइफ का हीरो hun...Abhi रोमांटिक हीरो बना हूँ यो रोमांस करने दे अपने अंदाज़ mein...Action हीरो बन गया तो तेरा खैर नहीं.

सूरज राजू को ले जाता है.

अनीता:- वाह jiju...Kya डायलाग hai...Filmi हीरो वाला.

सुमित:- वो तो एक्टिंग करते है साली sahiba...Mai नेचुरल hun...Apne और मेघा की लाइफ का hero...Kyu मेघा? याद आया kuch...Wo डायरी? तुम्हारे लाइफ का हीरो? :डी

अब्ब तो ये हीरो विलन से भी लड़ गया? क्लाइमेक्स आ गया है स्टोरी ka...Kab समझोगी इस हीरो के प्यार को?

मेघा:- तुम बिलकुल hi पागल हो?

इतना कह कर मेघा वह से निकल gayi...Saath hi अनीता भी.

मेघकी लास्ट की ये लाइन सुमित को समझ में नहीं aaya...Megha गुस्सा है या खुश है?

सुमित अभी भी वही अटका था मेघा मान जायेगी या नाराज hi rahegi...Lekin आज की घटना के बाद उसका कॉन्फिडेंस जरूर बढ़ गया.
 
अपडेट 111

अगली सुबह जब सुमित फ्रेश हो कर क्लिनिक में बैठा hi था की कुछ दूर से एक शख्स आता हुआ dikha...Thoda जाना पहचाना था.

सुमित की नजर उस पर hi टिक gaya...Jab वो थोड़ा और पास आया तो उस शख्स का चेहरा और साफ़ होने laga...Usse पहचानते hi थोड़ा हैरानी भी हुआ.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) ये यहाँ क्यों आया?

शख्स:- कैसे हो भैया आप?

आज उस शख्स की आवाज में अपने लिए इज्जत देख सुमित की हैरानी बढ़ने लगा.

सुमित:- ठीक हु Aarav...Tu bata...Yaha कैसे?

कही कोई दादा जी के टाइम से कोई प्रॉपर्टी का पेपर सिग्न करने तो नहीं आया? :हिंतहिंट:

आरव:- क्या आपके नजर में अब्ब मई इतना नालायक हो गया हु?

सुमित:- सच कहु तो तेरे बारे में कोई आईडिया नहीं hai...Kabhi तुझसे ढंग से बात हुआ भी नहीं है और ना hi तेरे बारे में किसी से कुछ ख़ास सुना है.

तुझे मुझसे कभी मतलब रहा भी नहीं और मुझे भी कोई लगाव है तुझसे.

सुमित की आवाज में कोई भाव नहीं था.

आरव:- क्या इससे बदल नहीं सकते है हम?

सुमित:- क्या?

अब्ब तो सुमित पूरी तरह से हैरान रह गया.

सुमित:- अगर कुछ काम हो तो सीधे सीधे बता? ऐसे घुमा फिर कर नहीं.

आरव:- सीधा hi सुन्ना चाहते है तो suniye...Mujhe आप की जरुरत है भैया?

ये कहने के बाद आरव की आँखें थोड़ा भींग gaya...Sumit को अजीब तो लग रहा था लेकिन इस बार वो कुछ नहीं बोलै.

आरव:- बहुत देर से hi सही लेकिन अब्ब मुझे समझ में आया किस चीज की कमी खाल रहा है मुझे.

सुमित बस सुन रहा था.

आरव:- भैया एक बात बताइये, आपको क्या लगता है, मेरा सोच आपको ले कर क्या हो सकता है?

सुमित:- पहले भी कह चूका hun...Koi आईडिया नहीं है तेरे बारे mein...Naa कभी ढंग से बात चित ना कभी ढंग से mulaakaat...Agar कभी मिलते भी थे और जब भी तू बदतमीज़ी करता था वैसा hi जवाब दे देता tha...Bas इससे ज्यादा कुछ नहीं.

पिछले कुछ सालों में तो तुझसे भूल hi गया tha...Aaj इतने दिनों बाद तुझे देखा तो थोड़ा हैरानी है की यहाँ क्या कर रहा है?

आरव:- आपसे नफरत था या नहीं ये तो पता nahi...Lekin आपसे एक छिड़ जरूर था जो बढ़ता hi चला gaya...Aur इतना बढ़ गया की आपको भैया के रूप में ना देख कर एक कॉम्पिटिटर के रूप में देखने लगा.

सुमित:- और आज एकदम से बदलाव आ गया?

आरव:- Nahi..Ekdum से nahi...Dhire धीरे हो सही लेकिन आ hi gaya...Shayad बहुत देर से.

अभी तक जितनी बातें आरव का सुमित ने सुना था उससे समझ में आया की आरव के मन में बोझ है.

सुमित:- चल बैठ.

इतना कह कर सुमित ने एक चेयर आरव की तरफ badhaya...Aarav बैठ गया.

सुमित:- चल अब बता.

आरव:- पैदा होने के बाद जब से होश संभाला है तब से खुद को काम बोलने वाला और शांत hi पाया hai...Aap को देखता था तो आप हमेशा से ओवरएक्टिव thhe...Mujhse ठीक ulta...Issi लिए शायद हमारे बिच कभी अच्छे से बना नहीं.

धीरे धीरे जब बड़ा होने laga..Papa की परवरिश तो सही hi था लेकिन एक चीज गलत या फिर सही नहीं था वो था कम्पटीशन की feeling...Papa को हमेशा एक चीज का अफसोश था पहले वो हमेशा किसी न किसी चीज में किसी से पीछे रह जाते थे.

मुझे हमेशा सबसे आगे देखना चाहते thhe...Har चीज में हर किसी se...Jo वो नहीं कर पाए वो मुझ में देखना चाहते थे.

और जब रिश्तेदार आपकी तारीफ़ करते थे और कभी मुझे अनदेखा कर देते थे तो बहुत बुरा लगता tha...Man hi मन एक कम्पटीशन सुरु हो चूका tha...Aapse अच्छा दिखाने का.

कम्पटीशन की सुरुवात पढाई से hua...Aapse और बाकी बच्चों से आगे निकलना चाहता tha...Man लगा कर पढता था लेकिन आप काम पढ़ कर भी मुझसे अच्छा परफॉर्म करते thhe...Ye हमेशा चुभता रहा.

जब भी मई आपका मजाक उड़ाने की कोशिश करता सबके सामने आप उल्टा मेरा hi मजाक उड़ा देते थे ... इससे और भी ज्यादा ढिढने लगा आपसे.

मेडिकल में जब स्कालरशिप नहीं मिला तो डोनेशन में hi पढ़ लिया सोचा बाद में आपसे अच्छा कर के दिखाऊंगा.

जब हम दोनों मब्ब्स कर रहे थे और आपका परफॉरमेंस डाउन हुआ तो बहुत ख़ुशी मिला ... साथ hi एक झटका भी ... आपको तो कोई फर्क hi नहीं padta...Fir मेरा इतना म्हणत का क्या?

धीरे धीरे आपके ऊपर जो लीड बन चूका था उससे बढ़ाने के लिए मस करने में उसे चला गया.

बहुत खुश tha...Socha आपसे जीत gaya...Aapse तो जीत गया था लेकिन खुद से?

अब्ब खुद से हारने लगा tha...Sabhi से कम्पटीशन hi तो कर रहा tha..Lekin खुद से? खुद का hi अस्तित्वा भूल गया tha...Mai कौन हूँ, क्या कर रहा हूँ और आगे क्या करूँगा कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Frustration इतना था की कभी कभी सवाल करता था खुद से, जी भी क्यों रहा हु?

विदेश में एक खालीपन, ना किसी के साथ ना sahara...Mera पढ़ाई तो चौपट हो hi गया, रिलेशनशिप में प्रॉब्लम आया और यहाँ तक की anti-depressant भी लेने लगा?

जब परेशानी हद्द से ज्यादा बढ़ गया तो एक दिन ऐसे hi इंटरनेट में स्पिरिचालित्य ने ध्यान आकर्षण kiya..For समझ में आया मेरे अंदर कितना लोभ, नफरत, अहंकार और ईर्ष्या भरा हुआ hai...Dhire धीरे hi सही उससे अपने अंदर से हटाता gaya...Sukhi रहने के लिए मेरे जो बड़े बड़े सपने थे जिनका कोई मतलब नाजी उन्हें त्याग diya...Jitna था उसी में खुश rehta...Fir योग और मैडिटेशन की आदत से वो मानसिक शान्ति भी मिल गया.

जब शांत मन से सोचा तब पता चला आपका कोई गलती hi नहीं tha...Balki कई ऐसे मौका भी आया था जब आपने मुझे समझाया भी tha...Lekin मई अपने घमंड में आ कर सब कुछ अनसुना कर दिया.

मन में कुछ बोझ tha...Unn में से एक आपसे माफ़ी माँगना भी है.

और जब वापस आया तो सबसे पहले आपके घर gaya...Aur जब पता चला की आप यहाँ इस गांव में है तो बिना समय नष्ट किये यहाँ आ गया.

इतना कह कर आरव चुप हो गया.

सुमित:- पहले अपने घर जाना चाहिए था तुझे.

आरव:- नहीं बोझ इतना था मन में की शान्ति नहीं मिल रहा था.

सुमित:- तेरे लिए कभी शिकायत नहीं tha...Haan तुझे उतना पसंद तो नहीं करता था लेकिन तुझे सामने hi चुप कर देता tha...Waise भी किसी बात को अपने मन में दबा कर कभी नहीं रखता हु मई.

आरव:- आपने मुझे माफ़ कर दिया न?

सुमित:- तुझे अपना गलती दिखा वही बहुत hai...Waise भी सिर्फ ये बात गलत लगता था की तू बड़ो के साथ भी बद्तमीज़ hai...Khair अब्ब ये बात समझ गया है तो माफ़ न करने की सवाल hi नहीं आता.

कुछ देर की शान्ति के बाद,

आरव:- वैसे आप यहाँ क्या कर रहे है इस गांव में?

सुमित:- है एक मिशन.

आरव:- बताइये ना?

सुमित:- अभी किस चीज की जल्दबाज़ी hai...Ek पूरी की पूरी कहानी hai...Aaram से सुनाऊंगा.

आरव:- ये क्लिनिक आपने यहाँ क्यों खोला?

सुमित:- टाइम पास के लिए.

आरव:- मतलब?

सुमित:- कुछ हफ्ता और यहाँ रहना hai...Jisse मिलने आया हूँ वो hi दिन भर गायब रहती है तो बैठे बैठे बोर हो जाता हूँ.

सोचा क्यों न क्लिनिक खोल lu...Log आएंगे तो वक्त किसी तरह काट जाएगा.

आरव:- आप सर्जन है, और सर्जरी के इंस्ट्रूमेंट्स ना के बराबर है?

सुमित:- यहाँ डॉक्टर बन कर थोड़ी न आया hun...Wo तो बस किसी तरह वक्त गुजारने के liye...History और एग्जामिनेशन अच्छे से कर सकता hun...Dawaai का नाम प्रेस्क्रिबे कर hi सकता हूँ और अगर लगा की सीरियस बीमारी है तो रेफेर.

आरव:- वैसे सिर्फ सर्जिकल केस या और भी?

सुमित:- सब kuch...MBBS अच्छे से पढ़ा था तो बाकी डिपार्टमेंट का भी अच्छा ख़ासा नॉलेज है.

आरव:- सर्जरी से याद aaya...Ek बात पूछना था आपसे.

सुमित:- पूछ.

आरव:- मैंने आपको बताया था की फ़्रस्ट्रेशन की वजह से मस की पढ़ाई अच्छे से नहीं हो पाया.

थ्योरी तो अच्छा hai...Lekin सर्जरी सिर्फ ठीक ठाक hi कर पाटा hun...Wo आपसे सीखना tha...Seher भर आपका तारीफ़ सूना hai...Aapke सर्जिकल स्किल्स के बारे mein...Jab भी आप सर्जरी करेंगे मुझे असिस्ट करने के लिए बुला lijiye...Kuch केसेस प्रैक्टिस करने के बाद अच्छे से सिख जाऊँगा.

सुमित:- चल ठीक hai...Lekin वक्त lagega...Abhi अलग hi मूड में हूँ.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

आरव:- मतलब?

सुमित:- Bataunga...Abhi तो पूरी कहानी बाकी है.

आरव:- मूड से याद आया.

आरव वोडका की बोतल बैग से निकालता है.

आरव:- अब्ब मना मत kijiye...Mai जानता हूँ आप पीते है.

सुमित:- लेकिन अब्ब छोड़ दिया है.

आरव:- आज तो पीना hi पड़ेगा.

सुमित:- नहीं bhai...Nafrat है मुझे इस चीज se...Pehle भी tha...Bas दुःख को भुलाने के लिए पीटा tha...Nasha हो गया iska...Iss वजह से छोड़ नहीं paaya...Aur जब से छोड़ा है नफरत और बढ़ गया है.

तू क्या कोई भी बोलेगा तो भी इस चीज को हाथ नहीं लगाऊंगा.

आरव:- ठीक hai...Company तो dijiye...Aapke लिए कोक है.

सुमित:- चल लगा.

फिर आरव दो शीशा की गिलास निकालता hai...Ek में वोडका और दूसरे में कोक.

तभी वह मेघा और अनीता पहुँचती है.

चियर्स करने के बाद सुमित ने एक घूंट पीया hi था की...

मेघा:- आदत दाल lo...Fir यादों में हमेशा इसी का सहारा लेना पड़ेगा.

ये सुनते hi सुमित मेघा की तरफ मुस्कुराते हुए देखता है और एक घूँट में पूरा गिलास खाली कर देता है.

मेघा की आँखों में नफरत था.

सुमित:- इतनी ख़ास हो क्या तुम?

सुमित ने आँखें नचाते हुए kaha...Jaise वो दिखाना चाहता था की नशे में है वो.

मेघा गुस्से में मुंह दूसरी और घुमा लेती है.

आरव:- ये कौन?

आरव को आँख दिखा कर...

सुमित:- इज्जत se...Bhabhi है तेरी. :लव:

आरव:- मेघा भाभी.

ये सुन कर सुमित और मेघा दोनों हैरान रह गए.

सुमित:- तू कैसे जानता है.

आरव:- इन्हे देखा तो नहीं tha...Naam जरूर पता tha...Aapke बारे में थोड़ा पता करता था कॉलेज टाइम mein...Uss वक्त सुना था की आप रिलेशनशिप में है मेघा के साथ.

सुमित:- अबे खुद मुझे नहीं पता था की मई रिलेशनशिप में hun...Mere अलावा सभी को पता था.

शायद मुझे भी पता चल जाना चाहिए था.

मेघा की तरफ देख हँसते हुए सुमित ने कहा.

सुमित:- और Megha...Ye है Aarav...Tumhara ओने एंड ओनली देवर.

मेघा:- मुझे लगा तुम्हारी तरह hi एक और बेवड़ा होगा.

इस बात का कोई जवाब सुमित और आरव नहीं दे पाया.

सुमित:- मेघा वैसे तुम इतनी subah...Mujhe देखे बिना छैन नहीं मिला क्या?

मेघा:- इतना फ़ालतू समय नहीं है मेरे paas...Kuch जरुरी बात tha...Issi लिए आयी हूँ.

सुमित:- अच्छा अब्ब बोल भी दो वो 5 जादुई शब्द. :डी

मेघा बस गुस्से से सुमित को देखती है.
 
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