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- Dec 5, 2013
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ये भिंडी कितने का है?
एक बुजुर्ग ने तरकारी वाला से पूछा.
300 रुपैया किलो.
इतना मेहेंगा? ठीक ठाक दाम लगाओ? :माध:
यही दाम है दादा जी.
...बहुत ख़ास भिंडी है ये.
अच्छा ऐसी क्या बात है इस भिंडी में?
ये जमीन में ुंगता है.
ये सुनते hi वो बुजुर्ग गुस्सा हो gaye...Aas आस के सभी लोग उस तरकारी वाला को घूरने lage...Thodi दूर खरीद दारी कर रही मेघा ने ये सुनते hi.
मेघा:- क्या बदतमीज़ी है ये?
अरे मैडम ji....Aap क्यों गुस्सा हो रही है? आप को तो 5 रुपैया किलो दूंगा.
ये आवाज सुनते hi मेघा का गुस्सा और बढ़ gaya...Iss बार गुस्से से तरकारी वाले को देखती hai...Jo झुका हुआ चेहरा को कैप धक् रहा tha...Iske बावजूद मेघा को सामने बैठा शख्स को पहचानने में बिलकुल भी दिक्कत नहीं हुआ.
भिंडी की और नजर पड़ा तो सामने 2 किलो के आस पास के hi भिंडी था.
सुमित....
गुस्से में इतना hi निकला मेघा के मुंह से.
मेघा को गुस्से में जाता देख उसकी दोनों hi सहेली हँसते हुए मेघा के पीछे जाने लगी.
सुमित:- दादा जी ये भिंडी आप रख लीजिये.
दादा जी:- लेकिन पैसे?
सुमित:- जरुरत nahi...Mai तो ऐसे बी वक्त बिता रहा था.
फिर सुमित वह से निकल जाता है मेघा के पीछे.
अरे Megha...Suno तो?
अनीता:- ले आ गया तेरा आशिक़.
मेघा:- बकवास बंद कर और चल चुप चाप.
सहेली 2:- काफी तेज है jeeju...Unse तेज नहीं भाग पाएगी तू.
मेघा वही रुक जाती है और गुस्से से.
मेघा:- Anjali...Tu अपनी बकवास बंद कर.
तब तक सुमित भी वह आ जाता hai...Sumit को देख मेघा भड़क जाती है.
मेघा:- बहुत बार कह चुकी हूँ मेरा पीछा छोड़ do...Sumit तुम सीधी बात नहीं समझते हो क्या?
सुमित:- तुम तो जानती hi ho...Mujhe मुझसे भी भी ज्यादा :लव:.
मेघा गुस्से से बस सुमित को देखती है.
सुमित:- बहुत दिन हो gaye...Tumhara तारीफ़ किये.
गुस्से में तो तुम और भी खूबसूरत लगती हो. :लव:
मेघा:- बस...
तभी सड़क में चल रहे 2 लोग वह पहुँचते है.
क्या हो रहा है?
एक आदमी ने पूछा.
सुमित:- आपसी मामला है.
आदमी 2:- ऐसा लग तो नहीं रहा hai...Ye तुम लोगो को परेशान कर रहा है क्या?
मेघा और मेघा के दोस्तों की तरफ देख उस आदमी ने पूछा.
किसी ने कोई जवाब नहीं दिया.
आदमी 2:- देख ladke...Pyaar से समझा रहा हूँ निकल जा यहाँ से.
सुमित:- अब्ब मेरा दिमाग ख़राब हो रहा hai...Agar तुम दोनों यहाँ से नहीं गए तो पक्का बुरी तरह से पीट जाओगे.
इस बार सुमित की आवाज में भी गुस्सा था.
आदमी 1 सुमित की तरफ अपना हाथ बढ़ा hi रहा था की सुमित उसको पकड़ कर वही गिरा देता hai...Aur एक तेज मुक्का उस आदमी की चेहरे के बिलकुल पास जम्में में मारता hai...Ek जोरदार आवाज के साथ सुमित के जाता से खून बहने लगता hai...Dusra पंच उससे भी तेज उस आदमी के नाक के बिलकुल पास आ कर रुक जाता है.
सुमित फिर उठ कर दूसरे आदमी की तरफ देखता है.
सुमित:- ले जा isko....Warna तुम दोनों का क्या हालत करूँगा मुझे खुद नहीं पता.
वो दोनों आदमी वह से निकल जाते है.
मेघा:- और करो गुंडागर्दी.
इतना कह कर मेघा वह से चली जाती hai...Sumit भी सड़क के पास बैठ जाता है.
क्या तुम सच में मरघा से प्यार करते हो?
आवाज की तरफ देखा तो अनीता थी.
सुमित:- क्या लगता है तुम्हे?
अनीता:- लगता तो यही है की प्यार करते ho...Lekin प्यार का तरीका सही नहीं है.
सुमित:- पहले तो मेघा को ये सब बहुत पसंद tha...Uske पीछे lagna...Usse थोड़ा परेशान करना और बहुत साड़ी तारीफ़ करना.
मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Megha का ख्याल आते hi अपना सारा गुस्सा भूल गया वो.
अनीता:- वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता hai...Insaan bhi...Picchle कुछ दिनों से मेघा बहुत बदल गयी है.
सुमित:- अब्ब समझ में आ रहा hai...Aur इस बदलाव का वजह भी मई hi हूँ :वेरिसद:
सब कुछ ठीक कर dunga...Megha का गुस्सा उसकी दिल का ghaaw...Sab kuch...Bas एक मौका तो mile...Wo तो मुझसे hi दूर भाग रही है.
अनीता:- नहीं कर पाओगे.
सुमित:- क्यों?
अनीता:- ऐसी छोटे बातों में छिड़ जाते ho....Megha तो बहुत नाराज hai...Itni जल्फी नहीं मानने wali...Agar तुम ऐसे hi हर बात से छिड़ने लगे तो खुद hi थक हार कर यहाँ से निकल जाओगे.
सुमित:- ये बात तो सही hai...Shayad कभी खुद को हारता हुआ देख नहीं पाटा hun...Koshish कर रहा hun...Iss बार सोचा है मेघा के लिए कुछ bhi...Agar थोड़ा बहुत आत्मा सम्मान को चोट भी लगा तो कोई बात nahi...Maine भी मेघा का बहुत बार दिल दुखाया है.
अनीता:- देखते है.
इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.
अगला दिन
सुबह सुमित तालाब के पास बैठ कर तालाब में पत्थर फेंक रहा था.
मुझे तुमसे कुछ बात करनी है?
ये सुनते hi सुमित एकदम से खुश हो utha..Yahi तो वो चाहता tha...Kuch देर मेघा के साथ बैठ कर बात करने के लिए.
मेघा:- मेरा पीछा छोड़ do....Tang आ चुकी हूँ अब्ब मई.
सुमित:- तुम्हे अब्ब परेशान नहीं करूँगा.
मेघा:- क्यों बात नहीं समझ रहे हो? जब तक तुम यहाँ हो हर वक्त परेशान रहूंगी mai...Tum hi हो मेरी परेशानी.
ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Lekin इस पर कोई भी प्रतिकिरिया नहीं दिया उसने.
मेघा:- कब जाओगे तुम यहाँ से?
सुमित:- जब तुम साथ चलोगी.
मेघा:- फिर वही baat...Har बार अपने जिद्द पर hi लगे रहते ho....Ye भी नहीं समझना चाहते हो की मेरी क्या इच्छा है.
सुमित:- तुम्हारे इच्छा का सम्मान करता hun...Jab तुम मुझे माफ़ कर डौगी और मेरे साथ चलने को तैयार होगी मेरी पत्नी बन kar...Tab hi यहाँ से जाऊँगा. :लव:
मेघा:- सपना पर इतना विश्वाश भी ठीक नहीं है.
गुस्से में मेघा ने जवाब दिया.
सुमित:- कुछ लोग सपना देखते है उससे हकीकत बनाने के लिए.
मेघा:- और तुम वो कुछ लोग में से नहीं हो?
सुमित:- और ऐसा क्यों?
मेघा:- पापा मेरे लिए रिश्ता देख रहे hai...Kuch hi दिन में मेरी शादी हो jaayegi...Fir तुम मनाते रहना मुझे.
ये बात सुमित के लिए किसी झटका से काम नहीं tha...Usse भी ज्यादा दुःख इस बात का था की मेघा की आवाज में कोई भी दुःख नहीं था इस रिश्ते की बात se...Wo कुछ बोल भी नहीं पाया.
मेघा:- इसी लिए समझा रही hun...Mera पीछा छोड़ दो.
ऐसे hi जिद्द करते रहे तो तुम्हारा ये जिद्द तुम्हे hi चोट पहुचायेगा.
इतना कह कर मेघा वह से निकल gayi...Megha के जाते hi सुमित निचे जमीन पर गिर gaya....Aankhon में एकदम से आंसू भर आया.
ये भिंडी कितने का है?
एक बुजुर्ग ने तरकारी वाला से पूछा.
300 रुपैया किलो.
इतना मेहेंगा? ठीक ठाक दाम लगाओ? :माध:
यही दाम है दादा जी.
अच्छा ऐसी क्या बात है इस भिंडी में?
ये जमीन में ुंगता है.
ये सुनते hi वो बुजुर्ग गुस्सा हो gaye...Aas आस के सभी लोग उस तरकारी वाला को घूरने lage...Thodi दूर खरीद दारी कर रही मेघा ने ये सुनते hi.
मेघा:- क्या बदतमीज़ी है ये?
अरे मैडम ji....Aap क्यों गुस्सा हो रही है? आप को तो 5 रुपैया किलो दूंगा.
ये आवाज सुनते hi मेघा का गुस्सा और बढ़ gaya...Iss बार गुस्से से तरकारी वाले को देखती hai...Jo झुका हुआ चेहरा को कैप धक् रहा tha...Iske बावजूद मेघा को सामने बैठा शख्स को पहचानने में बिलकुल भी दिक्कत नहीं हुआ.
भिंडी की और नजर पड़ा तो सामने 2 किलो के आस पास के hi भिंडी था.
सुमित....
गुस्से में इतना hi निकला मेघा के मुंह से.
मेघा को गुस्से में जाता देख उसकी दोनों hi सहेली हँसते हुए मेघा के पीछे जाने लगी.
सुमित:- दादा जी ये भिंडी आप रख लीजिये.
दादा जी:- लेकिन पैसे?
सुमित:- जरुरत nahi...Mai तो ऐसे बी वक्त बिता रहा था.
फिर सुमित वह से निकल जाता है मेघा के पीछे.
अरे Megha...Suno तो?
अनीता:- ले आ गया तेरा आशिक़.
मेघा:- बकवास बंद कर और चल चुप चाप.
सहेली 2:- काफी तेज है jeeju...Unse तेज नहीं भाग पाएगी तू.
मेघा वही रुक जाती है और गुस्से से.
मेघा:- Anjali...Tu अपनी बकवास बंद कर.
तब तक सुमित भी वह आ जाता hai...Sumit को देख मेघा भड़क जाती है.
मेघा:- बहुत बार कह चुकी हूँ मेरा पीछा छोड़ do...Sumit तुम सीधी बात नहीं समझते हो क्या?
सुमित:- तुम तो जानती hi ho...Mujhe मुझसे भी भी ज्यादा :लव:.
मेघा गुस्से से बस सुमित को देखती है.
सुमित:- बहुत दिन हो gaye...Tumhara तारीफ़ किये.
गुस्से में तो तुम और भी खूबसूरत लगती हो. :लव:
मेघा:- बस...
तभी सड़क में चल रहे 2 लोग वह पहुँचते है.
क्या हो रहा है?
एक आदमी ने पूछा.
सुमित:- आपसी मामला है.
आदमी 2:- ऐसा लग तो नहीं रहा hai...Ye तुम लोगो को परेशान कर रहा है क्या?
मेघा और मेघा के दोस्तों की तरफ देख उस आदमी ने पूछा.
किसी ने कोई जवाब नहीं दिया.
आदमी 2:- देख ladke...Pyaar से समझा रहा हूँ निकल जा यहाँ से.
सुमित:- अब्ब मेरा दिमाग ख़राब हो रहा hai...Agar तुम दोनों यहाँ से नहीं गए तो पक्का बुरी तरह से पीट जाओगे.
इस बार सुमित की आवाज में भी गुस्सा था.
आदमी 1 सुमित की तरफ अपना हाथ बढ़ा hi रहा था की सुमित उसको पकड़ कर वही गिरा देता hai...Aur एक तेज मुक्का उस आदमी की चेहरे के बिलकुल पास जम्में में मारता hai...Ek जोरदार आवाज के साथ सुमित के जाता से खून बहने लगता hai...Dusra पंच उससे भी तेज उस आदमी के नाक के बिलकुल पास आ कर रुक जाता है.
सुमित फिर उठ कर दूसरे आदमी की तरफ देखता है.
सुमित:- ले जा isko....Warna तुम दोनों का क्या हालत करूँगा मुझे खुद नहीं पता.
वो दोनों आदमी वह से निकल जाते है.
मेघा:- और करो गुंडागर्दी.
इतना कह कर मेघा वह से चली जाती hai...Sumit भी सड़क के पास बैठ जाता है.
क्या तुम सच में मरघा से प्यार करते हो?
आवाज की तरफ देखा तो अनीता थी.
सुमित:- क्या लगता है तुम्हे?
अनीता:- लगता तो यही है की प्यार करते ho...Lekin प्यार का तरीका सही नहीं है.
सुमित:- पहले तो मेघा को ये सब बहुत पसंद tha...Uske पीछे lagna...Usse थोड़ा परेशान करना और बहुत साड़ी तारीफ़ करना.
मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Megha का ख्याल आते hi अपना सारा गुस्सा भूल गया वो.
अनीता:- वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता hai...Insaan bhi...Picchle कुछ दिनों से मेघा बहुत बदल गयी है.
सुमित:- अब्ब समझ में आ रहा hai...Aur इस बदलाव का वजह भी मई hi हूँ :वेरिसद:
सब कुछ ठीक कर dunga...Megha का गुस्सा उसकी दिल का ghaaw...Sab kuch...Bas एक मौका तो mile...Wo तो मुझसे hi दूर भाग रही है.
अनीता:- नहीं कर पाओगे.
सुमित:- क्यों?
अनीता:- ऐसी छोटे बातों में छिड़ जाते ho....Megha तो बहुत नाराज hai...Itni जल्फी नहीं मानने wali...Agar तुम ऐसे hi हर बात से छिड़ने लगे तो खुद hi थक हार कर यहाँ से निकल जाओगे.
सुमित:- ये बात तो सही hai...Shayad कभी खुद को हारता हुआ देख नहीं पाटा hun...Koshish कर रहा hun...Iss बार सोचा है मेघा के लिए कुछ bhi...Agar थोड़ा बहुत आत्मा सम्मान को चोट भी लगा तो कोई बात nahi...Maine भी मेघा का बहुत बार दिल दुखाया है.
अनीता:- देखते है.
इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.
अगला दिन
सुबह सुमित तालाब के पास बैठ कर तालाब में पत्थर फेंक रहा था.
मुझे तुमसे कुछ बात करनी है?
ये सुनते hi सुमित एकदम से खुश हो utha..Yahi तो वो चाहता tha...Kuch देर मेघा के साथ बैठ कर बात करने के लिए.
मेघा:- मेरा पीछा छोड़ do....Tang आ चुकी हूँ अब्ब मई.
सुमित:- तुम्हे अब्ब परेशान नहीं करूँगा.
मेघा:- क्यों बात नहीं समझ रहे हो? जब तक तुम यहाँ हो हर वक्त परेशान रहूंगी mai...Tum hi हो मेरी परेशानी.
ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Lekin इस पर कोई भी प्रतिकिरिया नहीं दिया उसने.
मेघा:- कब जाओगे तुम यहाँ से?
सुमित:- जब तुम साथ चलोगी.
मेघा:- फिर वही baat...Har बार अपने जिद्द पर hi लगे रहते ho....Ye भी नहीं समझना चाहते हो की मेरी क्या इच्छा है.
सुमित:- तुम्हारे इच्छा का सम्मान करता hun...Jab तुम मुझे माफ़ कर डौगी और मेरे साथ चलने को तैयार होगी मेरी पत्नी बन kar...Tab hi यहाँ से जाऊँगा. :लव:
मेघा:- सपना पर इतना विश्वाश भी ठीक नहीं है.
गुस्से में मेघा ने जवाब दिया.
सुमित:- कुछ लोग सपना देखते है उससे हकीकत बनाने के लिए.
मेघा:- और तुम वो कुछ लोग में से नहीं हो?
सुमित:- और ऐसा क्यों?
मेघा:- पापा मेरे लिए रिश्ता देख रहे hai...Kuch hi दिन में मेरी शादी हो jaayegi...Fir तुम मनाते रहना मुझे.
ये बात सुमित के लिए किसी झटका से काम नहीं tha...Usse भी ज्यादा दुःख इस बात का था की मेघा की आवाज में कोई भी दुःख नहीं था इस रिश्ते की बात se...Wo कुछ बोल भी नहीं पाया.
मेघा:- इसी लिए समझा रही hun...Mera पीछा छोड़ दो.
ऐसे hi जिद्द करते रहे तो तुम्हारा ये जिद्द तुम्हे hi चोट पहुचायेगा.
इतना कह कर मेघा वह से निकल gayi...Megha के जाते hi सुमित निचे जमीन पर गिर gaya....Aankhon में एकदम से आंसू भर आया.