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राहुल सर की बात सुमित की दिमाग में छाप चूका tha...Sahi तो थे वो, 3 साल से वो एक फैसला नहीं ला पा रहा tha...Aur जी दागी के पिछले 8-9 साल में भी वो काफी पीछे रह गया tha...Sahi फैसला ना ले पाने की कारण.
ऐसे hi 2 महीने और बीत gaye...Kal कॉलेज का आखिरी दिन था.
इस बिच मेघा का दिल तो टूट hi गया tha...Jab कही सुमित और उसकी नजर टकरा जाता तो वो भी सुमित से मुंह फेर लेती थी.
ये सब देख सुमित को और भी दर्द हो रहा tha...Sumit ने फैसला तो ले hi लिया था की वो मेघा से दूर हो jaayega...Lekin मेघा की यादों से वो दूर नहीं हो पा रहा था.
मेघा की यादें उससे और तड़पाने लगा tha...Thik वैसा hi हाल था जैसा कीर्ति के समय हो गया था.
मेघा से मिलने की, बातें करने की मन तो बहुत था लेकिन अब्ब ये सब संभव नहीं था.
सुमित:- मेघा से इस सोच से दूर हुआ की मई उससे वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai खुद संभल जाऊँगा.
लेकिन संभल नहीं पा रहा hun...Ulta दर्द बढ़ता hi जा रहा hai...Abb तो ये दर्द असहनीय होता जा रहा है.
जब कीर्ति से अलग हुआ संभालने के लिए तुम thi...Tumne मेरा दर्द को बांटा tha...Lekin जब तुमसे अलग हो रहा हूँ तो अब्ब संभालने के लिए कोई नहीं है.
मुझे तुम्हारी आदत पद चूका है Megha...Pata नहीं ये कैसा फैसला था तुम भी दुखी हो मई भी dukhi...Lekin खुश कौन है?
बाद की ख़ुशी बाद mein...Filhaal जो दर्द है वही तो संभाला नहीं जा रहा है.
इतना कह कर सुमित सर्जरी के वार्ड से निकल कर अपने रूम की तरफ जा hi रहा था की कॉलेज के गेट में मेघा मिल गयी.
सुमित:- मेघा.
सुमित से और रहा नहीं गया...6 महीने बाद उसने आखिर मेघा को बुला hi लिया.
लेकिन मेघा का जवाब.
मेघा:- एवरीथिंग इस ओवर Sumit...Tumhari शकल तक देखना पसंद नहीं करती हूँ मई.
नफरत भरी मेघा की ये आवाज सुमित की कान में मानो उबले हुए तेल की काम कर गया.
सुमित:- सुनो तो....
लेकिन मेघा वह से निकल gayi....Lekin सुमित के दिमाग में बहुत कुछ छोड़ गयी सोचने के लिए.
रूम में आने के 1 घंटा तक भी सुमित का मन अशांत tha...Baar बार वो अपने फैसले पर सोच रहा था.
दिमाग में चल रहे हलचल को शांत करने का कोई तरीका न मिलता देख सुमित शावर लेने चला गया.
एक तो ठण्ड का मौसम ऊपर से बर्फ की तरह ठंडा paani...Sumit का दिमाग ने अब्ब काम करना hi बंद कर दिया.
कुछ देर बाद जब होश में आया तब ठन्डे दिमाग से सोचना सुरु kiya...Aise hi एक ख्याल उसके दिमाग में आया.
सुमित:- 2 दिन मई मेघा यहाँ से चली jayegi...Hamesha हमेशा के liye...Jab मैंने मेघा से अलग होने का फैसला लिया तो मेघा मेरे पास thi...Mere साथ thi...Vishwash था एक आवाज लगाऊंगा वो दौड़ कर मेरे पास आ jaayegi...Lekin abb...Abb तो वो जा रही hai...Mujhse नफरत करने लगी hai...Ek बहार चली गयी तो हमेशा के लिए चली जायेगी.
फिर मेरा क्या होगा?
यही काफी था सुमित को अंदर से हिलाने के लिए.
सुमित:- पता नहीं क्या फैसला ले लिया? मई खुश नहीं hun...Wo खुश नहीं है.
मई तो बिलकुल भी खुश नहीं हूँ और शायद hi कभी ख़ुशी मिलेगा इस फैसला se...Megha भी कैसे खुश होगी बाद में? अगर उससे प्यार करने वाला नहीं मिला तो?
मई तो करता हूँ न उससे प्यार.
ये सोचते hi सुमित को रेअलिज़तिओन हुआ की वो कितना प्यार करता है मेघा से.
सुमित:- सहित yaar...Ye क्या ब्लंडर कर diya...Mujhe मेघा से प्यार hai...Aur प्यार करने या दिखने की चीज थोड़ी न है महसूस करने की hai...Megha महसूस करती थी मेरा pyaar...Issi लिए तो साथ थी.
यही प्यार तो चाहती थी wo...Kirti से ब्रेकअप क्या हुआ मई तो प्यार का मतलब hi भूल गया tha...Pyaar के नाम में सोचता था मेघा को कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी टाइप का प्यार dunga...Jo की होता hi नहीं है.
लेकिन ये बात पहले क्यों समझ में नहीं आया?
अगले hi पल सुमित को अपने सवाल का जवाब मिल गया.
सुमित:- शायद उस वक्त मेघा साथ thi...Wo तो हमेशा से साथ thi...Issi लिए समझ नहीं paaya...Lekin वो जा रही है अब्ब मुझे छोड़ kar...Aur शायद यही दर उसकी एहमियत और मेरा प्यार मुझे समझ में आ रहा है.
कुछ देर रूम में टहलने के बाद.
सुमित:- अब्ब बहुत hua...Kal hi मई जा कर मेघा से बात karunga...Usse वक्त मांगूंगा की थोड़ा वक्त लग सकता है उससे पुराना सुमित मिलने के liye...Lekin मिलेगा जरूर.
प्यार करती है वो mujhse...Jarur हाँ कहेगी.
बेवकूफ था mai...Shaadi के कुछ hi टाइम बाद अपना पुराना रूप में आ hi jaata...Megha की प्यार hi तो है जो मुझे बदल रहा था और पूरी तरह से बदल सकता hai...Kuch टाइम बाद मई भी उससे वो प्यार देता जो वो डेसेर्वे करती hai...Lekin उस वक्त ये समझ क्यों नहीं आया?
प्यार की बातें दिमाग में आते hi सुमित मुस्कुरा उठा.
बस ऐसे hi हसीं ख्याल के साथ सुमित सू गया.
अगले दिन अपना ड्यूटी ख़त्म करने के बाद सुमित सीधा मेघा से मिलने gaya...Bahut कोशिश के बाद भी वो नहीं mili...Phone भी नहीं लगा.
बहुत मुश्किल के बाद आशा (मेघा की रूममेट) मिली.
सुमित:- मेघा कहा है?
आशा सुमित को गुस्से से देखती है.
आशा:- अब्ब क्या चाहिए तुम्हे?
सुमित:- उस वक्त गलती हो gaya...Samajh नहीं पाया अपने प्यार को?
आशा:- अब्ब समझ में आया?
सुमित:- हाँ.
आशा इस बात पर थोड़ा हंसती है.
आशा:- लेकिन देर कर दिया tumne...Megha आज सुबह hi यहाँ से चली गयी.
सुमित:- क्या?
सुमित को तो विश्वाश hi नहीं हुआ.
आशा:- बहुत देर और बेवकूफी कर दिया तुमने.
सुमित:- मई उसका घर का पता जानता hun...Abhi जाता हूँ उससे मिलने.
आशा:- लेकिन तुम उसकी दिल की बात नहीं जान पाए और ना hi अब्ब क्या है वो जानते हो.
सुमित:- जानता हूँ वो भी मुझसे प्यार करती थी और करती है.
आशा:- करती है?
सुमित:- Haan...Naaraj है wo...Manaa लूंगा.
आशा:- अगर मई कहु की वो नफरत करती है तो?
सुमित:- वो मुझसे नफरत नहीं कर sakti....Agar करनेकागि है तो फिरसे प्यार में बदल दूंगा उसकी नफरत.
सुमित की आवाज में इस बार आत्मविश्वाश था.
आशा:- 1 मं.
फिर आशा अपने रूम में जा कर 1 डेरी के कर आती है.
आशा:- ये lo...Megha का आखिरी सामन इस हॉस्टल में.
सुमि ने जब डेरी का 1सत पेज पलटाया उसके होंठो में एक मुस्कान आ गया.
मेघा की खूबसूरत अक्सर में लिखा था "माय लव स्टोरी"
राहुल सर की बात सुमित की दिमाग में छाप चूका tha...Sahi तो थे वो, 3 साल से वो एक फैसला नहीं ला पा रहा tha...Aur जी दागी के पिछले 8-9 साल में भी वो काफी पीछे रह गया tha...Sahi फैसला ना ले पाने की कारण.
ऐसे hi 2 महीने और बीत gaye...Kal कॉलेज का आखिरी दिन था.
इस बिच मेघा का दिल तो टूट hi गया tha...Jab कही सुमित और उसकी नजर टकरा जाता तो वो भी सुमित से मुंह फेर लेती थी.
ये सब देख सुमित को और भी दर्द हो रहा tha...Sumit ने फैसला तो ले hi लिया था की वो मेघा से दूर हो jaayega...Lekin मेघा की यादों से वो दूर नहीं हो पा रहा था.
मेघा की यादें उससे और तड़पाने लगा tha...Thik वैसा hi हाल था जैसा कीर्ति के समय हो गया था.
मेघा से मिलने की, बातें करने की मन तो बहुत था लेकिन अब्ब ये सब संभव नहीं था.
सुमित:- मेघा से इस सोच से दूर हुआ की मई उससे वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai खुद संभल जाऊँगा.
लेकिन संभल नहीं पा रहा hun...Ulta दर्द बढ़ता hi जा रहा hai...Abb तो ये दर्द असहनीय होता जा रहा है.
जब कीर्ति से अलग हुआ संभालने के लिए तुम thi...Tumne मेरा दर्द को बांटा tha...Lekin जब तुमसे अलग हो रहा हूँ तो अब्ब संभालने के लिए कोई नहीं है.
मुझे तुम्हारी आदत पद चूका है Megha...Pata नहीं ये कैसा फैसला था तुम भी दुखी हो मई भी dukhi...Lekin खुश कौन है?
बाद की ख़ुशी बाद mein...Filhaal जो दर्द है वही तो संभाला नहीं जा रहा है.
इतना कह कर सुमित सर्जरी के वार्ड से निकल कर अपने रूम की तरफ जा hi रहा था की कॉलेज के गेट में मेघा मिल गयी.
सुमित:- मेघा.
सुमित से और रहा नहीं गया...6 महीने बाद उसने आखिर मेघा को बुला hi लिया.
लेकिन मेघा का जवाब.
मेघा:- एवरीथिंग इस ओवर Sumit...Tumhari शकल तक देखना पसंद नहीं करती हूँ मई.
नफरत भरी मेघा की ये आवाज सुमित की कान में मानो उबले हुए तेल की काम कर गया.
सुमित:- सुनो तो....
लेकिन मेघा वह से निकल gayi....Lekin सुमित के दिमाग में बहुत कुछ छोड़ गयी सोचने के लिए.
रूम में आने के 1 घंटा तक भी सुमित का मन अशांत tha...Baar बार वो अपने फैसले पर सोच रहा था.
दिमाग में चल रहे हलचल को शांत करने का कोई तरीका न मिलता देख सुमित शावर लेने चला गया.
एक तो ठण्ड का मौसम ऊपर से बर्फ की तरह ठंडा paani...Sumit का दिमाग ने अब्ब काम करना hi बंद कर दिया.
कुछ देर बाद जब होश में आया तब ठन्डे दिमाग से सोचना सुरु kiya...Aise hi एक ख्याल उसके दिमाग में आया.
सुमित:- 2 दिन मई मेघा यहाँ से चली jayegi...Hamesha हमेशा के liye...Jab मैंने मेघा से अलग होने का फैसला लिया तो मेघा मेरे पास thi...Mere साथ thi...Vishwash था एक आवाज लगाऊंगा वो दौड़ कर मेरे पास आ jaayegi...Lekin abb...Abb तो वो जा रही hai...Mujhse नफरत करने लगी hai...Ek बहार चली गयी तो हमेशा के लिए चली जायेगी.
फिर मेरा क्या होगा?
यही काफी था सुमित को अंदर से हिलाने के लिए.
सुमित:- पता नहीं क्या फैसला ले लिया? मई खुश नहीं hun...Wo खुश नहीं है.
मई तो बिलकुल भी खुश नहीं हूँ और शायद hi कभी ख़ुशी मिलेगा इस फैसला se...Megha भी कैसे खुश होगी बाद में? अगर उससे प्यार करने वाला नहीं मिला तो?
मई तो करता हूँ न उससे प्यार.
ये सोचते hi सुमित को रेअलिज़तिओन हुआ की वो कितना प्यार करता है मेघा से.
सुमित:- सहित yaar...Ye क्या ब्लंडर कर diya...Mujhe मेघा से प्यार hai...Aur प्यार करने या दिखने की चीज थोड़ी न है महसूस करने की hai...Megha महसूस करती थी मेरा pyaar...Issi लिए तो साथ थी.
यही प्यार तो चाहती थी wo...Kirti से ब्रेकअप क्या हुआ मई तो प्यार का मतलब hi भूल गया tha...Pyaar के नाम में सोचता था मेघा को कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी टाइप का प्यार dunga...Jo की होता hi नहीं है.
लेकिन ये बात पहले क्यों समझ में नहीं आया?
अगले hi पल सुमित को अपने सवाल का जवाब मिल गया.
सुमित:- शायद उस वक्त मेघा साथ thi...Wo तो हमेशा से साथ thi...Issi लिए समझ नहीं paaya...Lekin वो जा रही है अब्ब मुझे छोड़ kar...Aur शायद यही दर उसकी एहमियत और मेरा प्यार मुझे समझ में आ रहा है.
कुछ देर रूम में टहलने के बाद.
सुमित:- अब्ब बहुत hua...Kal hi मई जा कर मेघा से बात karunga...Usse वक्त मांगूंगा की थोड़ा वक्त लग सकता है उससे पुराना सुमित मिलने के liye...Lekin मिलेगा जरूर.
प्यार करती है वो mujhse...Jarur हाँ कहेगी.
बेवकूफ था mai...Shaadi के कुछ hi टाइम बाद अपना पुराना रूप में आ hi jaata...Megha की प्यार hi तो है जो मुझे बदल रहा था और पूरी तरह से बदल सकता hai...Kuch टाइम बाद मई भी उससे वो प्यार देता जो वो डेसेर्वे करती hai...Lekin उस वक्त ये समझ क्यों नहीं आया?
प्यार की बातें दिमाग में आते hi सुमित मुस्कुरा उठा.
बस ऐसे hi हसीं ख्याल के साथ सुमित सू गया.
अगले दिन अपना ड्यूटी ख़त्म करने के बाद सुमित सीधा मेघा से मिलने gaya...Bahut कोशिश के बाद भी वो नहीं mili...Phone भी नहीं लगा.
बहुत मुश्किल के बाद आशा (मेघा की रूममेट) मिली.
सुमित:- मेघा कहा है?
आशा सुमित को गुस्से से देखती है.
आशा:- अब्ब क्या चाहिए तुम्हे?
सुमित:- उस वक्त गलती हो gaya...Samajh नहीं पाया अपने प्यार को?
आशा:- अब्ब समझ में आया?
सुमित:- हाँ.
आशा इस बात पर थोड़ा हंसती है.
आशा:- लेकिन देर कर दिया tumne...Megha आज सुबह hi यहाँ से चली गयी.
सुमित:- क्या?
सुमित को तो विश्वाश hi नहीं हुआ.
आशा:- बहुत देर और बेवकूफी कर दिया तुमने.
सुमित:- मई उसका घर का पता जानता hun...Abhi जाता हूँ उससे मिलने.
आशा:- लेकिन तुम उसकी दिल की बात नहीं जान पाए और ना hi अब्ब क्या है वो जानते हो.
सुमित:- जानता हूँ वो भी मुझसे प्यार करती थी और करती है.
आशा:- करती है?
सुमित:- Haan...Naaraj है wo...Manaa लूंगा.
आशा:- अगर मई कहु की वो नफरत करती है तो?
सुमित:- वो मुझसे नफरत नहीं कर sakti....Agar करनेकागि है तो फिरसे प्यार में बदल दूंगा उसकी नफरत.
सुमित की आवाज में इस बार आत्मविश्वाश था.
आशा:- 1 मं.
फिर आशा अपने रूम में जा कर 1 डेरी के कर आती है.
आशा:- ये lo...Megha का आखिरी सामन इस हॉस्टल में.
सुमि ने जब डेरी का 1सत पेज पलटाया उसके होंठो में एक मुस्कान आ गया.
मेघा की खूबसूरत अक्सर में लिखा था "माय लव स्टोरी"