अपडेट - 59
अब तक...
दोनों बहनो ने लुंड के सुपाड़ी से मुठ को चूस चूस के पूरा निकाल लिया और एकदम साफ़ कर दिया. राहुल लेते हुए दोनों के चेहरे देख रहा था. आज वो ये जान गया था की वो कितना लकी है.
लुंड की चुसाई के बाद अंशु उठ बैठी,
"तोह भाई अब मेरी बारी..."
अब आगे...
वंशु की ठुकाई के बाद बेचारी वो पास्ट पड़ गयी, थकान में बेचारी निढाल हो गयी और बीएड पर hi सो गयी. इधर अंशु ने अपना खज़ाना खोल दिया और अब केवल राहुल का hi इंतज़ार कर रही थी.
राहुल ने अंशु की छूट देखि जो बिलकुल क्लीन शवेद थी, एक भी बाल नहीं था. गुलाबी रंग की क्लाइटोरिस साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी जो राहुल को बोहत ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी.
उसने फौरन झुक के अपना मुँह सीधा अंशु की गुलाबी छूट पर दे मारा. राहुल की गरम जीभ का अपनी छूट पर एहसास होते hi अंशु की एक लम्बी सिसकी निकल गयी, आज पहली बार किसी ने उसकी छूट पर मुँह मारा था और वो भी कोई और नहीं उसका भाई, उसका प्यार, उसके अपने राहुल ने hi. मैं में ये सोच कर की अभी उसकी छूट पर उसके भाई का मुँह लगा हुआ है, अंशु और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी और सामान्य से हट के वो आज ज़्यादा hi जल्दी चूत गयी.
आज राहुल ने अपनी दोनों बहनो का पानी चख लिया. जैसे hi अंशु ने पानी चोर्रा राहुल ने धीरे धीरे सारा का सारा पानी चाट कर साफ़ कर दिया, उसकी ये हरकत देख अंशु के गाल लाल हो गए. उससे अभी राहुल पे इतना प्यार आ रहा था, की यदि राहुल उस से यदि उसकी जान भी मांगता तोह अंशु ख़ुशी ख़ुशी दे देती. इतना समर्पित हो गयी थी वो इस वक़्त राहुल के लिए. उसकी आँखों में hi प्यार झलक रहा था.
आगे बढ़ के अंशु ने फौरन राहुल के होंठ अपने होंठो में कस लिए और अपने hi पानी का स्वाद चखने लगी. अब चुकी वो वंशु की छूट का पानी पहले hi चख चुकी थी, इसलिए उससे राहुल को किश करने में कोई घिन नहीं आयी और उल्टा वो बड़े hi पैशनेट तरीके से राहुल के होंठ चूस रही थी.
राहुल : अंशु! दर्द hoega...tum
अंशु : में रेडी हु. आप सोच भी नहीं सकते भाई की मुझे इस दिन का कबसे इंतज़ार था. हर्र बार आप के करीब आने की कोशिश करती थी पर आप हर्र बार मुझे दूर कर देते थे, उस वक़्त मेरे दिल पर क्या बीत टी थी ये में hi जानती हु. अब और नहीं. आज! आप यहाँ मेरे पास हो... मेरे saamne...mere saath...apna लो मुझे भाई. अपनी इस छोटी बहिन को अपना बना लो बिलकुल वैसे hi जैसे अभी आपने वंशु दी को अपना बनाया. बना लो मुझे अपनी प्रेमिका भाई...
बना दो मुझे एक औरत... आइये भाई...
कहते हुए अंशु अपनी बाहें खोल बिस्तर पर लेत गयी और अपने परर फैला के छूट के दर्शन देते हुए राहुल को आमंत्रण देने लगी.
"पता नहीं मेने अपने पिछले जनम में ऐसे कोनसे काम किये थे जो मुझे आज अंशु जैसी बहिन मिली और वो भी एक प्रेमिका के रूप में...",
राहुल ने मैं में सोचा. वाक़ई! हुस्न की मल्लिका थी अंशु. उस ख़ूबसूरत चेहरे से कोई भी मंत्र मुग्ध हो जाए. आज राहुल खुद को लकी फील कर रहा था. सोच रहा था की कितना बेवक़ूफ़ था वो जो अंशु जैसी बहिन को खुदसे दूर कर रहा था.
राहुल ने अपना सख्त जैसा मुस्सल लुंड अंशु की नन्ही अनछुई छूट की एंट्री पर रखा और एक हाथ ले जाके उसके मुँह पे रख दिया ताकि शोर न हो पाए और एक गहरी सास लेते हुए ज़ोर का झटका दे मारा.
"Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh" एक ज़ोरदार चीख अंशु के मुँह से निकली पर राहुल के हाथ ने फौरन hi उससे अपने हाथ से दबा दी. दर्द की एक तेज़्ज़ लहर अंशु की छूट में दौड़ गयी.
लुंड का 1/4 भाग hi गया था अंदर पर दर्द से अंशु पूरी तरह तड़प रही थी.
अंशी की छूट वंशु से भी छोटी और टाइट थी. लुंड इतनी कस के छूट में फसा था की आगे पीछे करने की राहुल अभी सोच भी नहीं सकता था. उसने 2 मिनट ऐसे hi गुज़र जाने दिया, अपना हाथ हटा के वो अंशु को गुलाबी होंठ चूसने में लग गया, करीब 2 मिनट बाद उसने एक और तेज़्ज़ झटका मारा और 3/4 भाग अब अंदर घुस गया. ऐसे hi उसने 2 मिनट बाद एक आखिरी झटका दिया और पूरा का पूरा लुंड अब जड़ तक अंशु की छूट में समां चूका था. लुंड बिलकुल बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था, मतलब एकदम परफेक्ट फिट बैठ रहा था.
होंठ चूमते हुए राहुल ने अंशु के ासु भी पोछे जो दर्द के कारण निकल रहे थे. आज वो भी एक लड़की से औरत बन्न चुकी थी. सांत्वना देते हुए राहुल ने उससे थोड़ी देरर तक किश किया उसके बाद धीरे धीरे आगे पीछे होना उसने स्टार्ट कर दिया.
"Ummmmmmmmmmmmmm... Yeahhhhhhhhhhh भईईई"
अंशु को अब मज़ा आने लगा था, हल्का दर्द था पर वो सेह रही थी और मज़े भी ले रही थी.
करीब 2 मिनट के हलके धक्को के बाद तोह अंशु की सूरत hi बदल गयी,
"Oooooooohhhhhhhhhhh एआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाआईई
एसससससससससज़्ज फफ्फूऊऊऊक्कक्ककककककक meeeeeeeeee
फुसक्कककककककक मइईईई भाआईई छोड़ूऊऊओ
Aur.....aur.. और जोरर.. se...chodo भाईईई"
उत्तेजना में भरकर राहुल ने ताबड़तोड़ धक्के लगाना शुरू कर दिए, नीचे से अंशु भी अपनी कमर उचका उचका के चुद रही थी. आज वो बोहत hi ज़्यादा खुश थी. उसकी छूट में उसके भाई का लुंड था ,उसका भाई राहुल जिससे वो सबसे अधिक प्यार करती है. ख़ुशी के मारे ासु निकल आए उसकी आँखों से जो राहुल ने आगे बढ़ कर पी लिए और उससे किश करने लगा.
थोड़ी देरर के धमाकेदार धक्को के बाद अब राहुल स्खलित होने वाला था, अंशु तोह दो बार पहले hi स्खलित हो चुकी थी और अब तीसरी बार होने जा रही थी. उसने राहुल की कमर में परर कस लिए, जो राहुल समझ गया था की उससे क्या करना है. उसने सारा का सारा वीर्य अंशु की छूट के अंदर hi भर दिया, उसी वक़्त अंशु भी जहर गयी और दोनों के मुँह से तेज़्ज़ "आअह्ह्ह" निकली जो शायद बहार तक भी चली गयी थी. दोनों को कण्ट्रोल hi नहीं रहा. पर रात के 1 बज रहे थे इसलिए राहुल ने ज़्यादा परवाह नहीं की और ऐसे hi अंशु के ऊपर निढाल होक लेत गया. अंशु ने भी प्यार से उसके बालो को सहलाते हुए अपने दूध के ऊपर लिटा लिया और दोनों थकान के मारे नींद की वादियों में चले गए.
सुबह करीब 7 बजे राहुल की नींद खुली, उसके अलार्म के कारण और उसने देखा की वह अंशु के ऊपर hi सोया हुआ है, और सभी लोग नंगे hi पड़े हुए है. फौरन उठ के उसने जब अंज़र फिराई तोह देखा की बेडशीट पर खून है ढेर सारा, उसने बेडशीट को जैसे तैसे खींच के निकाला और वाशरूम में जाके फटाफट उससे धोया और खुद भी नाहा धोकर फ्रेश हो गया.
बाहर आते hi उसने दोनों अंशु और वंशु को प्यार से नींद से उठाया और उन्हें कपडे पहन ने को दिया.
राहुल : आप दोनों ने hi कल रात... ी मैं... वो अंदर hi गिरवा लिया... सब ठीक तोह है न?
वंशु (स्माइल्स) : कुटी! मेरा तोह सेफ था. छोटी का नहीं पता मुझे. अगली बार से पिल उसे कर लुंगी, जब तक तू नहीं चाहेगा तब तक बच्चा नहीं होएगा. ठीक??
राहुल : *नॉड्स*
अंशु : मेरा भी सेफ था दीदी. It's okay भाई. यदि प्रेग्नेंट हो भी जाउंगी तोह मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.
वंशु : छोटी... प्रॉब्लम तुझे भलाई न हो, पर हमारे घरवालों को तू क्या बताएगी? उनके सामने क्या कहेगी? इसलिए कुटी घबरा गया था समझी? उससे अपनी चिंता नहीं है, तेरी चिंता है.
अंशु (नम्म आँखों से) : भाआईईईई
और आगे बढ़ अंशु उससे हुग कर लेती है.
राहुल : अच्छा! यदि आपको अभी भी आराम करना है तोह आराम कर लीजिये, में नई बेडशीट बिछा देता हु. फिर आप लोग उठने के बाद फ्रेश हो लेना. यदि ज़्यादा दर्द है तोह बता दीजिये में आते वक़्त पेनकिलर लेता आऊंगा.
वंशु : दर्द तोह है पर हम मैनेज कर लेंगे, तुम ये बताओ की तुम किधर जा रहे हो कुटी?
राहुल : बस ये समझ लीजिये की गयम ज्वाइन किया है.
सच तोह ये था की राहुल गयम नहीं, मास्टर के घर जा रहा था क्युकी आज से उससे हर रोज़ उनके घर पर ट्रेनिंग जो लेनी थी. अब मास्टर उससे क्या नया सिखाने वाले थे ये उससे भी नहीं पता था, पर उन्होंने आखिरी मुलाक़ात के वक़्त कुछ जानलेवा मूव्स के बारे में बात करि थी, क्या पता क्या सीखेगा राहुल इन् 6 महीनो में?
राहुल फिर नीचे उतर के लिविंग रूम में आ जाता है. किचन में निशा काम कर रही थी तोह राहुल पीछे से जाके निशा को हुग कर लेता है.
राहुल : गुड मॉर्निंग माँ!
निशा : गुड मॉर्निंग बेतु? तोह रात किसी थी?
राहुल : हँ??
निशा : ahem...mera मतलब है नींद तोह आयी न अच्छे से?
राहुल : एकदम मस्त माँ!
निशा : (हां हां क्यों न आएगी एकदम मस्त? दो दो कुवारी छूट को जो पेला है तुमने रात में. बस कही मेरा बेतु मुझे न भूल जाए... अंशु ने प्रॉमिस तोह किया है की वो मेरे साथ है और मेरी मदद करेगी. मुझे तोह बस यही चाहिए की मेरा बेतु मुझसे प्यार करे. और कुछ नहीं) चल अच्छा! नाश्ता लगा देती हु.
नाश्ता कर के राहुल उठता है और बाइक लेके चल देता है मास्टर के घर, वह से वापस करीब 12 बजे वो घर आता है तोह उससे निकिता का कॉल आ जाता है जिसने उससे दिन में 1 बजे कैफ़े में बुलाया हुआ था.
समय गुज़रा और राहुल 1 बजे कैफ़े की और hi जा रहा था की तानिया उस से सवाल करने लगी की किधर जा रहे हो? क्या काम से जा रहे हो? और कहने लगी की वो भी साथ में चलेगी. अब क्युकी राहुल निकिता से hi बस मिलने जा रहा था इसलिए उससे इस बात से कोई आपत्ति नहीं हुई और उसने तानिया को भी अपने साथ बाइक पे बैठाया और दोनों चल दिए कैफ़े की तरफ.
कैफ़े पॅहुचते hi दोनों अंदर गए तोह निकिता पहले से hi बैठी हुई थी, तानिया को देख के वो थोड़ी हैरान थी पर उसने ज़्यादा मंद नहीं किया.
राहुल : हां तोह बोलो निकिता क्या बात है?
निकिता : भैया वो बात ये है की... कोई मुझे प्रोपोज़ करना चाहता है?
राहुल : हँ? तोह इसमें प्रॉब्लम क्या है?
निकिता : प्रॉब्लम hi प्रॉब्लम है भैया! ी don't वांट हिम तो प्रोपोज़.
राहुल : तुम्हे वो पसंद नहीं?
निकिता : भैया वो मेरा फ्रेंड है बोहत पहले से, उसका नाम है पियूष. और वो मेरी और नेहा की hi क्लास में है. में उससे स्कूल से जानती हु.
राहुल : तोह फिर प्रॉब्लम क्या है?
निकिता : प्रॉब्लम ये है की मुझे मेरे फ्रेंड्स से पता चला है की वो मुझे प्रोपोज़ करने वाला है. मुझे उस से कोई प्यार व्यार नहीं है पर शायद वो मुझसे करता है. में उससे एक फ्रेंड की तरह hi देखती हु. दरअसल, उससे एक बार हार्ट अटैक आ चूका है. वो दिल का बड़ा hi कमज़ोर hai...mein नहीं चाहती की यदि में उससे रिजेक्ट करू तोह वो किसी डिप्रेशन में न चला जाए और उससे कुछ हो न जाए. में नहीं चाहती की मेरी फ्रेंडशिप उस से टूटे भैया...
राहुल : .....
निकिता : राहुल भैया! जब इंसान एक बार कोई चीज़ खो देता है, तोह फिर वो चीज़ हमेशा हमेशा के लिए उस इंसान से दूर चली जाती है. में नहीं चाहती की में भी ये दोस्ती खो दू और हम कभी भी वापस से फ्रेंड्स न रह पाए. में उस से कोई प्यार नहीं करती. ना hi में किसी के साथ रिलेशनशिप रखना चाहती हु अभी... क्या आप इसमें कुछ कर सकते हो? ऐसा कुछ जिसके चलते हमारी फ्रेंडशिप ना टूटे और साथ hi साथ उससे पता भी चल जाए की में अभी किसी के साथ रिलेशनशिप में नहीं आना चाहती.
राहुल काफी देरर बैठ के सोचता रहा और तानिया भी उससे hi घर रही थी. सोच रही थी की राहुल क्या करेगा. दोनों लड़किया अपनी प्यारी आँखों से जिनमे क्यूरोसिटी भरी हुई थी राहुल को देखे जा रही थी.
राहुल : जो तुमने अभी अभी कहा... यही बात बाद में तुम फिरसे मुझसे कहना. सही समय आने पर तुम्हे पता चल जाएगा तुम्हे कब कहना है ये सब.
और राहुल तानिया को लेके जाने लगता है,
निकिता : wh...what??? एक मिनट, कहा जा रहे हो आप? मुझे कुछ समझ नहीं aaya...wait...
पर राहुल नहीं रुका. निकिता के दिमाग में राहुल के कहे हुए शब्द घुमते रहे. उसने कहा था की जो अभी निकिता ने कहा है वही वो बाद में राहुल को कहे? क्या मतलब था इस बात का?
इधर बाइक पे तानिया भी बड़ी hi क्यूरियस थी ये बात जान ने के लिए की राहुल क्या करने वाला है.
तानिया : तुमने ऐसा क्यों कहा उस से?
राहुल : समय आने पर पता चल जाएगा.
तानिया को ड्राप कर के राहुल पियूष से मिलने कॉलेज जाता है. आज नेहा और निकिता दोनों hi कॉलेज नहीं गयी थी. पर पियूष कॉलेज में hi था. राहुल जैसे hi नेहा की क्लास में घुसता है तोह सब उससे hi घूरने लगते है.
"अरे ये तोह वही सीनियर भैया है... है न?"
"हां हां! वाओ! देखो कितना हैंडसम है"
"ये गांडू फिर आ गया अपनी वज़नदारी पटकने!?"
"भाई अब ये किसी को मारेगा तोह नहीं न?"
"He's सो hot...omg!!"
"काश ये मेरा बर्फ होता"
"ारी ये तोह नेहा का भाई है न? लास्ट ईयर में है"
कुछ ऐसी hi बातें सुनाई दे रही थी क्लास में,
राहुल : तुम सब में से पियूष कोण है?
पियूष (खड़े होकर) : j...ji में हु
राहुल : बाहर आओ तुमसे कुछ बात करनी है.
फिर राहुल उससे लेकर कैंटीन में चला जाता है.
राहुल : मेने सुना है तुम निकिता को प्रोपोज़ करने वाले हो?
पियूष (शॉकेड) : aap...aapko कैसे पता चला?
राहुल : मुझे कैसे पता चला वो जान ने की तुम्हे ज़रुरत नहीं है. तुम्हे सिर्फ इतना जान न है की वो मेरी छोटी बहिन जैसी है और में नहीं चाहता की कोई उससे नुक्सान पोहचए.
पियूष : में उस से प्यार करता हु. में उससे कोई नुक्सान कैसे पहुचा सकता हु. में उससे बचपन से जानता हु.
राहुल : हम्म! गुड! यदि तुम सच में उससे पसंद करते हो तोह में तुम्हारी मदद कर सकता हु.
पियूष : हँ? क्या?
राहुल : हां! यदि तुम चाहो तोह में तुम्हारी मदद कर सकता हु.
पियूष : बिलकुल बिलकुल! राहुल भैया! में चाहता हु की आप मेरी मदद करो.
राहुल : तुम मुझे जानते हो? नीस!! हां तोह मेने प्लान बनाया है. तुम्हे बिलकुल वैसा hi करना है जैसा में बताने जा रहा हु. Okay?
पियूष : हां राहुल भैया!
राहुल : तुम निकिता को शाम को पार्क क्सक्सक्सक्स में बुलाओगे. और अपना कॉन्फेशन करोगे. Okay?
पियूष : क्या में ये कर पाउँगा?
राहुल : बिलकुल! अब निकिता को कॉल करो और उससे कहो की शाम 7 बजे पार्क क्सक्सक्सक्स में मिले, तुम्हे कुछ काम है उस से.
और राहुल उससे समझा कर घर आ जाता है. इधर नेहा को सब पता चल चूका था क्युकी निकिता उसकी बेस्ट फ्रेंड जो ठहरी, इसलिए उसने नेहा से कोई बात नहीं छुपाई.
नेहा (मैं में) : ये साला बास्टर्ड क्या करने वाला है? और ये चोमू कही की, पूरे संसार में इससे यही मिला मदद मांगने के लिए? जा के मुझे भी देखना पड़ेगा.
समय कब गुज़र गया पता hi नहीं चला और शाम के 6:30 बज चुके थे. राहुल और तानिया पहले hi पार्क में पहुँच चुके थे. बोहत hi ख़ूबसूरत पार्क था. पार्क के साइड में एक छोटा सा लकड़ी का ब्रिज टाइप का बना हुआ था और नीचे पानी भरा हुआ था. अक्सर पार्क्स में ये सब कॉमन hi होता है. दोनों राहुल और तानिया उस ब्रिज पर hi खड़े हुए थे.
हलकी हलकी पीली लाइट्स ब्रिज की रेलिंग्स पर लगी हुई थी जो उसकी सुंदरता को और भी बढ़ा रही थी.
पियूष भी तैयार होक अच्छे से कपडे पहन के आ गया,
पियूष : राहुल भैया!?? मेरा दिल बोहत ज़ोरो से धड़क रहा है.
राहुल : हम्म! ये बताओ, यदि तुम रिजेक्ट हो गए तोह क्या करोगे?
पियूष : अरे भैया, आप मुझे दर्रा क्यों रहे हो? अभी तोह मेने उससे प्रोपोज़ भी नहीं किया है.
राहुल : सीधे सीधे जवाब दो बस. निकिता आती hi होगी.
पियूष : mein...mein शायद मेरा दिल टूट जाए और में फिरसे किसी लड़की को प्रोपोज़ भी न कर पाव. में बोहत जल्दी सेंटी हो जाता हु.
राहुल : (सिर्फ सेंटी hi नहीं.. इससे कही कुछ हो न जाए मुझे इस बात की फ़िक्र है बस) हैं?? चलो! गुड लक...
पियूष : बिलकुल! थैंक यू भैया! आप बेस्ट सीनियर हो. आप बोहत hi अच्छे हो. आपके जैसा कोई नहीं...
राहुल : शट उप इडियट! मेरी तारीफ मत करो. में कोई ख़ास नहीं हु.
इतना बोल राहुल तानिया को लेकर ब्रिज के पीछे पेड़ के पास छुप गया.
तानिया : तुम bhi...tum भी कभी कभी अच्छा बेहवे कर लेते हो!
राहुल : ऐसा कुछ भी नहीं है. पियूष वैसे भी रिजेक्ट होने वाला है.
तानिया : उम् हां...
राहुल : पर एक तरीका है जिस से में सब कुछ बदल सकता हु.
तानिया : क्या है वो??
राहुल : .......
तानिया : वेल! देखते है क्या करते हो तुम.
तभी कोई एक शख्स और आया और उनके साथ वही पेड़ के पीछे खड़ा हो गया.
ये नेहा hi थी.
राहुल और तानिया साथ में : तुम... तुम यहाँ?
नेहा (राहुल को देख) : शट उप यू बास्टर्ड! में यहाँ सिर्फ घूमने आयी थी.
राहुल : घूमने आयी थी या ड्रामा देखने आयी हो?
नेहा : शट उप!
इस से पहले की इनकी बहस और चलती निकिता सामने ब्रिज की तरफ आने लगी. राहुल और बाकी सभी लोगो को निकिता का चेहरा सामने से दिख रहा था और पियूष की पीठ दिखाई दे रही थी.
पियूष : *हार्ट बीटिंग फास्टर*
धीरे धीरे निकिता के कदम आगे की और बढ़ रहे थे और वो कुछ hi पल बाद पियूष के सामने आके कड़ी हो गयी.
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आज के लिए इतना hi दोस्तों!
पिक्स में अगले अपडेट से डालूंगा.
मुझे पता चल गया है पिक्स कैसे अपलोड करनी है.
थैंक यू!