इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 10 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

बोहत बोहत धन्यवाद् भाई आपने आ कर इतना अच्छा रिव्यु दिया अपना.

सिर्फ इतना कहूंगा की जल्द hi कहानी को नया मोड़ मिलेगा. और उस मोड़ के बाद जो उपदटेस आएँगे वो बोहत hi इमोशनल होने वाले है.

शुक्रिया!!
 
अपडेट - 56

अब तक...

मास्टर : मेने तुम्हे जितना भी अभी कुछ सिखाया है उसमे मेने तुम्हे कही भी कोई भी जानलेवा मूव नहीं सिखाया. पर उस दिन तुम एक लड़के से चोटिल हो गए थे. इसलिए ये शहर चोरर के जाने से पहले, इन् 5-6 महीनो में में तुम्हे बोहत कुछ सिखाने वाला हु. तुम तैयार हो?

राहुल : जी मास्टर!

मास्टर : गुड! अब बात आती है गुरु दक्षिणा की. तोह वह में तुमसे तब मांगूंगा जब तुम ये शहर चोरर के जाने लगोगे.

राहुल : जी मास्टर...

अब आगे...

राहुल को यु थोड़ी देरर खामोश पा कर मास्टर ने उसकी दुविधा के बारे में पूछा,

"क्या हुआ? क्या सोच रहे हो?"

राहुल : मेरे मैं में बोहत सारे सवाल है मास्टर. मुझे तोह यकीन hi नहीं हो रहा है ये सब सुन्न कर. ऐसा लग रहा है में किसी फिल्म की स्क्रिप्ट सुन्न रहा हु. पर ये सच्चाई है, और इसलिए मेरा दिमाग हिल सा गया है.

मास्टर : कैसे सवाल है? यदि मैं में कोई सवाल है तोह उससे अभी पूछ लो.

राहुल : हम्म! मास्टर ख़ुशी की माँ यानी मिस सुजय जब इस दुनिया से चली गयी और आप यहाँ आ गए. तोह फिर ख़ुशी का क्या? उससे तोह बचपन से hi माँ और बाप का प्यार नहीं मिला होगा. आपने ऐसा क्यों किया उसके साथ? अकेली होगी वह कितनी...

मास्टर राहुल की बात सुन्न थोड़ी देरर तक उससे देखते है और फिर मुस्कुरा देते है,

मास्टर (मैं में) : मेरा निर्णय सही था जो मेने तुम्हे चुना.

मास्टर : ऐसा इसलिए क्युकी मेरे भी कई दुश्मन है और में नहीं चाहता वो सब मेरी बेटी को टारगेट करे, इसलिए मेने उससे इन् सब से दूर रखा है. यहाँ तक की स्कूल में भी वो मेरी बेटी है ये नहीं बताती. सारा काम माइक संभालता है, और माइक को hi उसका पिता बताते है.

राहुल : अच्छा! पर आपने कहा की 18 साल के होते hi ख़ुशी को आप यहाँ ले आवेगे. तब उसकी जान को खतरा नहीं होगा?

मास्टर (मैं में) : इसलिए तोह तुम्हे चुना है राहुल.

मास्टर : वो बाद की बाद में देखेंगे. अब तुम जाओ, मोनिका तुम्हारा बोहत देरर से इंतज़ार कर रही है.

राहुल : j...jii मास्टर

मास्टर : और सुनो... वो... वो ऋचा किसी है अब?

राहुल : हम्म? ऋचा? वो ठीक है मास्टर.

मास्टर : हम्म! अब भी तुम्हारी गफ है?

राहुल (ब्लश) : उम् हां...

मास्टर : ठीक है! जाओ अब.

नीचे आते hi मोनिका राहुल पे टूट पड़ती है और अपना सरप्राइज मांगने लगती है.

मोनिका : कहा है मेरा सरप्राइज? दो जल्दी.

"बाप रे! मिस मोनिका तोह पीछे hi पद गयी. अब इन्हे कहा से सरप्राइज दू? क्या दू? इनके पास तोह वैसे भी पैसा बोहत है. तोह भला में क्या गिफ्ट दे सकता हु इनको? हम्म!... ारी हां! चलो यही करता हु. यदि वो खुश नहीं हुई तोह माफ़ी मांग लूंगा" राहुल ने मैं में सोचा.

राहुल : आप चलिए! रेडी हो जाइये. हम बाहर चल रहे है.

मोनिका : कहा?

राहुल : आप रेडी तोह हो जाइये पहले.

जब तक मोनिका रेडी हो रही थी तब तक राहुल बंगला के पीछे जाकर उस बुज़ुर्ग और उसकी पोती से भी मिलता है.

थोड़ी hi देरर में मोनिका रेडी होक आ जाती है और जो ड्रेस उसने पहनी थी वो उसपे बोहत hi ख़ूबसूरत लग रही थी

मोनिका को देख राहुल की आँखें hi चौंधिया जाती है

राहुल (मैं में) : यस. She's डेफिनिटेली आउट ऑफ़ माय लीग. ी वंडर कोण वो लकी हस्बैंड होगा जो इनसे शादी करेगा

मोनिका : क्या हुआ? ऐसे क्या देख रहे हो?

राहुल : आप ...आप बोहत hi ख़ूबसूरत लग रही हो.

मोनिका (ब्लश) : चल अभी मेरे साथ फ्लिर्टिंग nahi...okay?

राहुल : मेने सिर्फ सच कहा.

मोनिका (ब्लश) : o...ok. थैंक यू.

फिर राहुल अपनी बाइक पे मोनिका को बैठा के ले जाता है, रास्ते भर राहुल को उसकी पीठ पर दो अनमोल रत्नो का एहसास होता रहा जिसके मज़े उसने भरपूर लिए बाइक को बार बार ब्रेक लगा कर और ऐसे करते करते वो अपनी मंज़िल पहुँच hi गए.

मोनिका : सुन सिटी?

राहुल : जी हां! आप आयी हो यहाँ?

मोनिका : हां! सिर्फ एक बार.

राहुल (सुरप्रीसेड) : सिर्फ एक बार?

मोनिका : हां! कभी समय hi नहीं मिलता

राहुल : चलिए आप मेरे साथ

राहुल मोनिका को पकड़ के रोलर कोस्टर राइड के पास ले जाता है, जिससे देख मोनिका को थोड़ा डर लगने लगता है.

मोनिका : तुम ये मत कहना की हम इसमें बैठने वाले है!?

राहुल : और नहीं तोह क्या!? तोह क्या में आपको सिर्फ यहाँ दिखाने लाया हु क्या?

अब चलिए

मोनिका : न्यूऊऊ वेट!!! राहुल! मुझे मुझे हाइट्स से बोहत डर लगता है. ये राइड नहीं करते है न... कही और चलते है.

राहुल : आज आपका डर भी निकाल दूंगा और आपको एन्जॉय भी करवाऊंगा.

मोनिका के कई बार मन करने के बाद भी राहुल ने उसकी एक न सुनी और उसके हाथ को पकड़ के खींच के ले गया. ठीक वैसे hi जैसे एक छोटा बच्चा स्कूल के पहले दिन न जाने के लिए विरोध करता है, वैसे hi अभी मोनिका विरोध कर रही थी.

अंत में दोनों रोलर कोस्टर पर सवार थे और मोनिका का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था. उसने आज से पहले कभी किसी राइड की सवारी नहीं की थी, पहली बात उससे डर लगता था, दूसरी बात उसके पास इन् सब के लिए टाइम hi नहीं रहता था और तीसरी बात यदि आती भी तोह किसके साथ? मास्टर और भीमा के अलावा उसके सारे कॉन्टेक्ट्स बिज़नेस से hi रिलेटेड थे. No फ्रेंड्स, no बेस्ट फ्रेंड्स, no लवर, no फॅमिली. काफी अकेली थी. और मास्टर और भीमा के साथ राइड लेने तोह आ नहीं सकती थी. उससे एक फ्रेंड की ज़रुरत थी, ये बात उसका दिल जानता था पर दिमाग नहीं.

इसलिए वो राहुल से जब पहली बार मिली थी तोह उसके साथ फ्लिर्टिंग किया करती, उससे लगता की राहुल के साथ उसका कुछ रिलेशन तोह है काम से काम. भले hi राहुल फ्लिर्टिंग का जवाब नहीं देता था पर दोनों में काम से काम बात तोह होती थी. मोनिका ये सब अनजाने में hi करती थी या यु कहे की ये सब उसका दिल करवाता था जो की तन्हाई में कद्द था

मोनिका ने राहुल का हाथ कस के थाम लिया. एक लड़की होने के बावजूद उसकी पकड़ वाक़ई बोहत मज़बूत थी. राहुल भी सुरप्रीसेड था इस बात से. वो मैं में सोच रहा था की यदि मोनिका ने कभी किसी को कस के हुग किया या कस के किसी को जकड़ा तब उसकी हालत क्या होएगी? ऐसी पकड़ में उस इंसान को मज़ा आएगा या फिर उससे दर्द होएगा? उसने सारे थॉट्स को अलग किया, सोचा की ये सब क्या सोचने लगा वो यहाँ पर?

उसने गहरी सास लेकर सारा का सारा फाॅर्स जो मोनिका उसके हाथ को भींच कर लगा रही थी उससे हस्ते हुए एक्सेप्ट किया और फिर चालु हुई राइड.

रोलर कोस्टर के आगे बढ़ते hi मोनिका की जैसे जान निकल गयी हो. उससे यही ख़याल आ रहा था की यदि गलती से वो कही नीचे टपक गयी तोह वो तोह पक्के से हमेशा के लिए ऊपर पहुँच जाएगी.

मोनिका (मैं में) : पागल कही का... कहा आ गयी में इसके साथ. ुवाआआआ

*क्रिस* में गयी... में गयी...

ऊपर रोलर कोस्टर आते hi एकदम से धीरे हो गया. और अब बारी थी सबसे खतरनाक पल की. आप सभी तोह जानते hi होंगे. जब राइड ऊपर से एकदम से नीचे आती है.

मोनिका : स्लो हो गया? क्या हुआ? ख़तम हो गया क्या?

राहुल (हस्ते हुए) : हहहहहआ

तभी एकदम से राइड सीधे नीचे की और तेज़्ज़ी से पलट जाती है और फुल स्पीड में नीचे गिरने लगती है,

मोनिका (चिलाते हुए) : waaaaaaaaaaaaaa

जैसे तैसे राइड ख़तम हुई तोह मोनिका की शकल देखने लायक थी. राहुल की हस्सी hi नहीं ृक्क रही थी. मोनिका को और तेज़्ज़ गुस्सा आने लगता है. तोह राहुल उसके लिए कुछ खाने के लिए स्नैक्स ला कर देता है.

मोनिका : इतना बेकार सरप्राइज देते हुए तुम्हे शर्म नहीं आयी?

राहुल : अभी कहा बेकार? अभी तोह एक बार और बचा है

मोनिका (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त?

राहुल : हां! तभी तोह आपका डर काम होएगा. वर्ण ऐसे तोह और बढ़ेगा.

और मोनिका के फिरसे कई बार मन करने के बाद भी राहुल मोनिका को थाम के एक बार और राइड करवा देता है. पर हैरानी वाली बात ये थी की वाक़ई इस बार मोनिका को डर काम लगा. जिस कारण वो बोहत खुश थी.

फिर राहुल मोनिका को लेके हॉरर हाउस के सामने आ जाता है. एक बार फिर मोनिका सामने हॉरर हाउस की एंट्रेंस को देख घबरा जाती है.

और लाख मन करने के बाद भी राहुल फिरसे उससे खींच कर ले जाता है. मोनिका राहुल से किसी बेल की तरह लिपट गयी थी. उसके उरोज राहुल के बदन से ऐसे चिपके थे मानो वो राहुल के hi शरीर का अंग हो.

हर्र जुंपसकारे पे मोनिका उछाल जाती और राहुल से चिपक जाती, मैं hi मैं राहुल अपने आईडिया की तारीफ कर रहा था और खुद पर उससे बड़ा प्राउड हो रहा था. इतनी ख़ूबसूरत लड़की उसके साथ चिपक के चल रही थी. कई लोग उससे जलन भरी नज़रो से देख रहे थे.

राहुल ने हॉरर हाउस में भी दो बार मोनिका को एंटर करवाया जिसके चलते मोनिका का वो डर भी काम हो गया. एन्ड में दोनों ने मस्ती की, झूले भी झूले और खाना पीना खाया, टोटली एन्जॉय किया. फिर एक पार्क में आके बैठ गए.

मोनिका : तोह ये था तुम्हारा सरप्राइज?

राहुल : जी!

मोनिका : तोह? तुम्हे पता कैसे चला की मुझे भूतो से और उचाई से डर लगता है?

राहुल : यहाँ आने से पहले मास्टर से पूछा था.

मोनिका : ओह्ह! मुझे तोह लगा था तुम मुझे कुछ गिफ्ट डोज या फिर कोई ट्रीट डोज.

राहुल : वो भी कर सकता था. पर आपके पास तोह वैसे भी मुझ से ज़्यादा पैसा है. आप को भला में क्या गिफ्ट दे सकता था? मेरा गिफ्ट कोई सस्ता hi होता. मुझे पता था की आप हमेशा काम में hi लगी रहती हो और खुद आप कभी एन्जॉय नहीं करती. मेने तोह कभी नहीं देखा आपको. इसलिए मेने सोचा, आपको यहाँ लाऊंगा, आपका डर भी काम हो जाएगा, और आप एन्जॉय भी कर लोगी. आप को भी अपने काम से थोड़ा रिलैक्सेशन मिलेगा. यदि आप को नहीं पसंद आया हो तोह कोई बात नहीं, में माफ़ी मांगता हु.

*साइलेंस*

थोड़ी देरर की चुप्पी के बाद मोनिका की आंख में ासु आ जाते है और वो अपना रुमाल निकल उससे पोछने लगती है.

राहुल : शायद आपको वाक़ई पसंद नहीं आया

उसके इतना कहते hi मोनिका उससे बाहो में जकड लेती है. राहुल को इसकी उम्मीद नहीं थी. कुछ देरर बाद मोनिका उससे चोरर के उसके गालो को पकड़ती है और फिर आगे बढ़ के राहुल के गाल को चुम लेती है.





मोनिका : तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया की मुझे पसंद नहीं आएगा? आज का दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे यादगार दिन रहेगा. थैंक्स फॉर गिविंग में सुच ा ब्यूटीफुल सरप्राइज राहुल.

मोनिका राहुल को प्यार भरी नज़रो से देख रही थी और उसके गाल सेहला रही थी. आस पास बैठे कपल्स भी राहुल और मोनिका को ताड़ रहे थे, लड़के तोह जलन भरी नज़रो से hi देख रहे थे. वो सब यही सोच रहे थे की साला इतनी बड़ी आइटम इसके प्यार में गिरी कैसे?

राहुल (ब्लश) : वैसे आपने कभी अपनी फॅमिली के बारे में नहीं बताया... आपके माँ डैड कहा है?

मोनिका : वो अब इस दुनिया में नहीं है. मेरे पिता जी अंडरवर्ल्ड माफिया में जरर कानूनी काम करते थे. पर मेरी माँ को इसकी कोई खबर नहीं थी और ना hi मुझे. एक बार उन्होंने किसी ऐसे आदमी से पन्गा ले लिया, जिसने हमारा पूरा घर उजाड़ दिया. उस वक़्त में 20 साल की थी. में भी नहीं बचती पर शायद उपरवाले को कुछ और hi मंज़ूर था. तब मास्टर ने hi मुझे बचाया था. और आज में यहाँ तुम्हारे सामने हु.

उसकी बात सुन्न राहुल एकदम चौंक जाता है.

राहुल (मैं में) : मतलब मिस मोनिका 6 साल से बिना माँ डैड के है? उनका तोह कोई फ्रेंड भी नहीं है... एक मिनट!! मतलब मोनिका मिस मेरे साथ इसलिए फ्लिर्टिंग करती थी? ताकि वो मेरे साथ फ्रेंडशिप कर सके? और में यहाँ उन्हें इग्नोर मारता रहता था ये सोचके की वो मेरी औकात से बाहर है... कितना बेवक़ूफ़ हु यार में. उन्हें तोह बस... बस एक दोस्त की ज़रुरत थी. और में.. उन्हें वो भी न दे सका. पर उन्होंने डायरेक्ट मुझसे क्यों नहीं कहा? शायद यही इनका अंदाज़ है? उन्होंने मुझे हिंट करने की कोशिश की थी, जिससे में समझ न सका. Waqai...mein सच में बोहत hi ना समझ हु.

मोनिका (मैं में) : नहीं चोरडूंगी उस हराम जाड़े को... अपने माँ डैड की मौत का बदला में लेके रहूंगी.

इधर राहुल के घर से जाने के बाद वंशु रोटी हुई राहुल के कमरे में आयी और बीएड पर बिलखते हुए रोने लगी. आज के पहले उससे इतनी पीड़ा कभी नहीं हुई थी. पीछे पीछे तनीषा भी उसके पीछे आयी क्युकी राहुल ने इशारा किया था उससे, मतलब ये था की वंशु को मनाना है.

तनीषा ने प्यार से वंशु के सर पर हाथ फेरा तोह वंशु ने सर उठा के देखा, तनीषा को सामने देख के उसके दिल की पीड़ा और भी बढ़ गयी और उसने वापस से सर झुका कर रोना शुरू कर दिया.

कोई आ न जाए और ये न पूछने लगे की वंशु क्यों रो रही है इसलिए तनीषा ने उठ के दूर को अंदर से hi लॉक कर दिया और फिर उसके पास जा कर बैठ गयी.

तनीषा : बाप रे बाप, इतने सारे मोठे मोठे ासु?? ऐसे भी कोई रोटा है भला? पूरी आँखें और नाक भी लाल हो गयी है तुम्हारी तोह.

वंशु (रट हुए) : प्लीज आप जाइये यहाँ से. मुझे अकेला चोरर दीजिये.

तनीषा : अच्छा? में चली जाऊ? मुझे तोह लगा था की तुम राहुल से प्यार करती हो इसलिए में तुम्हे एक खुश खबरि देने आयी थी. पर लगता है तुम्हे मेरी बात hi नहीं सुन्न न तोह...

ठीक है चली जाती हु.

तनीषा उठने को हुई तोह वंशु ने उसका हाथ पकड़ लिया. चेहरा पूरा आसुओ से भीगा हुआ था. वंशु की ये हालत देख तनीषा को उसपे बड़ा hi तरस आया आखिर वो भी तोह कभी अपनी फीलिंग्स को दबाने की कोशिश करती थी, वो भी तोह राहुल को भाई मानती थी. तनीषा समझ सकती थी की एक भाई को प्यार करने पर कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ता है, और वंशु तोह कजिन बहिन थी राहुल की. अपने प्यार का इज़हार कैसे कर सकती है सबके सामने? शायद उसमे अभी इतनी हिम्मत नहीं थी.

वंशु : ke..kesi खुश खबरि?

तनीषा : तोह तुम सुन्न न चाहती हो?

वंशु : *नॉड्स*

तनीषा (स्माइल्स) : खुश खबरि ये है की तुम राहुल से प्यार कर सकती हो.

वंशु : ?????

तनीषा आगे बढ़ वंशु को अपने गले से लगा लेती है और फिर कहना स्टार्ट करती है,

"मुझे पता है की तुम भी राहुल से बेहद प्यार करती हो वंशिका. जब हम मेरे क्लिनिक में पहली बार मिले थे. उस वक़्त hi मुझे इस बात का आभास हो गया था. बल्कि यदि सच कहु, तोह तुम्हारा हक़ उसपे मुझसे पहले है. मुझे पता है तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो, राहुल ने ये बात मुझे बताई है पहले भी. तोह इसलिए में तुम्हे ये बताना चाहती हु की... मेरी तरफ से कोई भी बंदिश नहीं है वंशिका. तुम खुल के राहुल से प्यार कर सकती हो. में तुम्हारा पूरा सपोर्ट करुँगी. आज से तुम मेरी छोटी बहिन जैसी हो."

तनीषा की बात सुन्न वंशु हैरानी से उससे देखती है.

वंशु : toh...toh क्या आप कुटी से प्यार नहीं करोगी?

तनीषा : उसके प्यार के बिना तोह में जी hi नहीं सकती अब. में भी उससे प्यार करती हु. मेरे कहने का मतलब ये है की हम तीनो hi राहुल से प्यार करेंगे और हम तीनो hi इसमें एक दूसरे को सपोर्ट करेंगे.

वंशु : तीनो??

तनीषा : हां! तुम , में और ऋचा.

वंशु : ri...richa?

फिर तनीषा वंशु को साड़ी बात समझाती है की ऋचा और राहुल के बीच का रिलेशनशिप क्या है. वंशु उदास ज़रूर थी पर खुश भी थी क्युकी उससे राहुल से प्यार करने का मौक़ा जो मिल गया था.

तनीषा : देखो! ी क्नोव की तुम थोड़ी पोस्सेस्सिवे हो राहुल को लेकर. पर तुम्हे एक बात अभी से अपने दिमाग में बैठानी पड़ेगी वंशु. वो ये की हम सब राहुल की है. सिर्फ राहुल तुम्हारा है ऐसा बिलकुल भी नहीं है. तुम्हे ये बात मैं से हटानी पड़ेगी की राहुल सिर्फ तुम्हारा है समझी? तुम्हे बस ये सोच के चलना है की तुम भी राहुल की प्रेमिका में से एक हो और राहुल सबको एक्वाली प्यार करेगा. किसी से काम या किसी से ज़्यादा नहीं. Okay!?

तनीषा के अच्छे से समझाने पर वंशु काफी हद्द तक समझ चुकी थी की वो राहुल को बाँध कर अपने पास नहीं रख सकती. वो सब राहुल की है और राहुल भी सब का है. किसी एक का नहीं.

तनीषा : वैसे!? तुम्हे कब राहुल से प्यार हुआ वंशु?

वंशु : t..teen साल पहले दीदी.

तनीषा : ओह्ह्ह! ऐसा क्या हुआ था?

वंशु एक नज़र तनीषा की तरफ घुमाती है जो प्यार से उसकी तरफ देख रही थी. कोई भी छल कपट वाले भाव नहीं थे उन् आँखों में.

तनीषा (स्माइल्स) : तुम मुझसे शेयर कर सकती हो. अब तोह तुम मेरी छोटी बहिन हो न?

वंशु : मुझे एंड्रोफोबिअ था.

तनीषा (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त?

{एंड्रोफोबिअ का मतलब है पुरुषो से डर. किसी भी मेल से अत्यंत दररना. उनके पास आने से उनकंफर्टबले फील करना, उन्हें देख के डर जाना. आप अधिक जानकारी के लिए गूगल कर सकते है}

तनीषा : तोह फिर?? फिर??

वंशु : तीन साल पहले में सेक्सुअल असाल्ट का शिकार हो गयी थी, कुछ दरिंदे मेरे साथ ज़बरदस्ती करना चाहते थे. उस वक़्त कुटी hi था जिसने मुझे बचाया था. पर उस दौरान कुटी को बोहत चोट आयी थी और उससे एडमिट भी होना पड़ा था. उसका असर ये था की मुझे हर एक आदमी से डर लगता, उनसे नफरत होने लगी थी. बस कुटी से hi में थोड़ा बात करती थी. पर डर मुझे उस से भी लगता था.

तनीषा : फिर?

वंशु : फिर उसने मेरे साथ रह रह के मुझे इतने पेशेंस से संभाला और मुझे उस दलदल से बाहर निकाला. मुझे ब करने बाहर जाना पड़ा, में जाना नहीं चाहती थी पर फिर भी गयी. मेने कैसे 3 साल गुज़ारे है ये में hi जानती हु. उसने सब कुछ मेरे लिए किया था. मुझे... मुझे उसके साथ एक स्पेशल अटैचमेंट सा फील होता है. में चाहती हु की सिर्फ वही मेरे पास रहे. पर में अब समझ चुकी hu...ki... कुटी हम सबका है.

तनीषा वंशु को बाहो में भर लेती है और दोनों एक दूसरे से बातें कर और भी क्लोज होते जाते है.

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इधर जब तनीषा और वंशु अंदर थी तोह निशा भी अपने रूम में आ चुकी थी. तानिया और नेहा टीवी देखने में व्यस्त थी पर दोनों का मैं कही और था.

नेहा (मैं में) : तोह इसकी शादी ये तनीषा दीदी से होएगी? हम्फ! चलो अच्छा है, बेचारी ऋचा दीदी तोह बच गयी इसके चंगुल से. वर्ण मुझे निक्की के लिए बुरा लगता. पर उस दिन की बात भूली नहीं हु में. उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरा हाथ मरोड़ने की?? इतनी हिम्मत उसमे कब से आ गयी?? कहता है में उस से कभी बेहतर नहीं हो सकती? अभी में दिखाउंगी तुझे की बेटर होना किसे कहते है... इसका कुछ करना पड़ेगा साला ज़्यादा हवा में उड़ने लगा है. माँ से छुप कर कुछ करना पड़ेगा.

इधर निशा के रूम में अंशु एंटर करती है जो अपने पेर्रो पर नेल पोलिश लगा रही थी

निशा : अंशु? क्या हुआ बीटा?

अंदर आते hi अंशु दूर को अंदर से लॉक कर देती है और निशा के पास आकर बैठ टी है,

अंशु (मैं में) : अब मेरे प्लान का फर्स्ट स्टेप शुरू करने का सही मौका है.

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आज के लिए इतना hi गाइस!!

शुक्रिया!!
 
जब अपडेट रेडी हो जाता है, में फौरन hi उससे पोस्ट कर देता हु. ऐसा नहीं है की में सेव करके रखा रहता हु और पोस्ट नहीं करता. यदि आपको मज़ाक उड़ाने में ख़ुशी मिलती है तोह उड़ाइये. पर में अपनी तरफ से पूरी आनेस्टी रखता हु. मेरे पास कोई उपदटेस पहले से लिखे हुए नहीं रहता है. में उन्हें फ्रेश्लय लिखता हु, शब्दों का सही चयन करना , सही पिक्स ढूंढ़ना, सब करता हु. हो सकता है आप लोगो के वह होली हलकी फुलकी मनाई जाती हो पर हमारे यहाँ बड़े hi धूम धाम से मनाई जाती है और ऐसे में स्टोरी लिखने के लिए समय ना के बराबर रहता है. ड्रामे ज़रूर लगेंगे आप सभी को क्युकी कोई देखने वाला नहीं है न यहाँ पर. पर में अपने आप से एटलीस्ट ऑनेस्ट हु और उस बात के लिए मुझे ख़ुशी है. अपडेट एक घंटे के अंदर आ जाएगा.
 
अपडेट - 57

अब तक...

इधर निशा के रूम में अंशु एंटर करती है जो अपने पेर्रो पर नेल पोलिश लगा रही थी

निशा : अंशु? क्या हुआ बीटा?

अंदर आते hi अंशु दूर को अंदर से लॉक कर देती है और निशा के पास आकर बैठ टी है,

अंशु (मैं में) : अब मेरे प्लान का फर्स्ट स्टेप शुरू करने का सही मौका है.

अब आगे...

निशा : बीटा क्या हुआ?

अंशु (स्माइल्स) : बड़ा hi सज रही हो चची? किस के लिए?

निशा (स्माइल्स) : ऐसा कुछ नहीं है बीटा. बोहत दिनों से नेल पोलिश नहीं लगायी थी इसलिए सोचा आज लगा लू

अंशु : न न न... कुछ तोह बात है, बताइये न चची? किस के लिए इतना सज रही हो? हहै

निशा (ब्लश) : अरे बीटा और किस के लिए सजूंगी?

अंशु : चाचा के लिए या फिर भाई के लिए?

अंशु की बात सुन्न निशा को एक झटका सा लगता है और वो नेल पोलिश चोरर अंशु को घर घर के सवालिया भरी नज़रो से देखने लगती है

अंशु (स्माइल्स) : ी क्नोव चची

निशा : k..k..ky..kya... क्या बात कर रही हो तुम बीटा?

अंशु : वही बात जो आप अभी मुझ से छुपा रही हो

निशा (हकलाते हुए) : m..m..mein k..kuch समझी नहीं बीटा?

अंशु : चची... आप और भाई एक दूसरे के साथ सेक्स करते हो न?

*बूम*

अंशु की बात किसी बेम की तरह निशा के दिमाग में फटी. और उसका सीधा असर निशा के दिल पर हुआ. जिस बात को वो किसी से शेयर नहीं करना चाहती थी वो पकड़ी गयी. और वो भी किसके सामने? अपनी hi जेठानी की छोटी लड़की अंशिका के सामने. क्या सोच रही होगी अभी वो? की चची किसी माँ है? जो अपने hi बेटे के साथ रातें रंगीन करने लगी. क्या होगा जब वो ये बात सभी घरवालों को बता देगी? ये ख़याल सोच के hi उसका शरीर काँप उठा. और पल भर में hi उसकी आँखों में ासु धार की तरह उमड़ आए और लबालब बहने लगे.

अपना चेहरा हाथो में छुपाए निशा सिसक सिसक कर रोने लगी. जिस चेहरे पर थोड़ी देरर पहले लाली थी वही चेहरा अब आसुओ से भरा हुआ था. और ये बात भी सच hi तोह थी. वो नेल पोलिश भला राजेश के लिए थोड़ी न लगा रही थी वो तोह राहुल के लिए hi इतना सज धज रही थी.

निशा का मान न था की जब राजेश उसकी परवाह नहीं करते तोह वह भला क्यों करे? प्यार दोनों तरफ से होता है न की एक तरफ से. निशा ने ठान लिया था की अब वो अपने शरीर को राजेश के साथ सम्भोग करने नहीं देगी. निशा पूरी तरह से अपना शरीर, दिल और आत्मा राहुल को hi सूप चुकी थी. पर क्युकी राजेश उसके पति थे, और एक पतिव्रता स्त्री होने के नाते वो राजेश का साथ ज़रूर देगी पर शारीरिक सम्बन्ध राजेश के साथ हमेशा हमेशा के लिए बंद कर चुकी थी वह.

पर क्या रह गया अब? जो आनंद, जो कमी राहुल ने पूरी की उसकी, जो नया जोश राहुल ने उसके जीवन में अभी अभी भरा था, जिसकी अनुभूति उसको पहले कभी नहीं हुई थी, अब क्या उसका? वह तोह धरा का धरा रह गया न सब? अंशिका ने उसको और उसके बेटे को एक दूसरे के साथ रात में रंग रेलिया मनाते जो देख लिया. अब कैसे फेस कर सकती है वह अंशिका को? उससे इस बात से कोई शर्मिंदगी नहीं थी की वो अपने बेटे के साथ बिस्तर गरम करती है. उससे इस बात से शर्मिंदगी थी की अंशिका ने उससे ऐसा करते देख लिया है. निशा उसकी नज़र में तोह पूरी गिर चुकी थी न? क्या जवाब देती उसको? ये बोलती.. ? की नहीं ये क्या बकवास कर रही हो तुम?

हरगिज़ नहीं! ये तोह बोल hi नहीं सकती थी वह. अंशिका ने साफ़ साफ़ कह दिया की आप और भाई सेक्स करते हो. मतलब साफ़ था की उसने देखा है.

इधर अंशु को बोहत बुरा लगा की उसने अच्छी भली चची जो अपना मोमेंट एन्जॉय कर रही थी उनको रुला दिया उसने. आगे बढ़ अंशु निशा को गले से लगा लेती है.

अंशु : अरे अरे चची? आप रो क्यों रही हो? प्लीज आप चुप हो जाइये सबसे पहले. और सुनिए...

निशा थोड़ी देरर तक रोटी hi रहती है, अंशु की बात का कोई असर नहीं हो रहा था उसपर. थोड़ी देरर बाद काफी देरर तक अंशु के मनाने पर निशा शांत हुई पर अभी भी उसकी नज़रे नीचे hi थी और ासु अभी भी आँखों में थे.

अंशु : चुप हो गयी? गुड! अब सुनिए..

में आपसे बिलकुल भी नाराज़ नहीं हु. और ना hi में ये बात किसी को बताउंगी. ये बात सिर्फ मेरे और आपके बीच hi रहेगी. हमेशा के लिए!

अंशु की बात सुन्न एक बार फिर निशा सन्न रह गयी. पहले कहती है मेने आपको भाई के साथ सेक्स करते देखा है और अब कह रही है की नाराज़ नहीं है और किसी को नहीं बताएगी? चल क्या रहा है ये?

वो घर के अंशु को देखने लगती है. बदले में अंशु सिर्फ मुस्कुरा देती है.

अंशु : अब आप मेरी पूरी बात सुनिए उसके बाद आप कहना okay? तोह उस रात जब आप और भाई एक दूसरे के साथ वो कर रहे थे तब में नेहा और तानिया दीदी के साथ उसके रूम में hi सो रही थी. पर रात में बोतल में पानी ख़तम हो गया था और इस लिए में किचन जाने के लिए बाहर निकली. पर भाई के रूम से आवाज़ें सुन्न में थोड़ा कन्फ्यूज्ड थी की अंदर चल क्या रहा है. इसलिए... इसलिए मेने कीहोल से झांक कर देखने की कोशिश की. और जो मेने सामने देखा, उससे देख के मेरे तोह होश hi उड़द गए थे.

अंशु के इस तरह कहने से फिरसे निशा की रुलाई फूट पड़ती है. क्या सब कुछ बिखर गया? क्या अब सब ख़तम?

अंशु : उस रात मुझे नींद hi नहीं आयी. पर अगली hi सुबह में बोहत खुश थी. आपको याद है चची? आपने मुझसे दिवाली वाले दिन पूछा था सुबह सुबह की में आज इतनी खुश क्यों लग रही हु. तोह मेने कहा था की आज दिवाली है इसलिए में खुश हु

निशा : *नॉड्स*

अंशु : पर सच ये है की में... में दिवाली की वजह से खुश नहीं थी. दिवाली तोह हर साल आती है. में आपकी वजह से खुश थी.

निशा (सुरप्रीसेड) : k...kya?

अंशु : हां चची! आपने एकदम सही सुना. में आपकी वजह से hi खुश थी. मुझे पता है की आपके और भाई के रिलेशनशिप की शुरुआत तोह आपने hi की होगी. क्युकी वो तोह इसकी शुरुआत कर hi नहीं सकता. में उससे अच्छे से जानती हु. (अब जो बाँदा अपनी बहिन के कहने पर उससे किश तक नहीं कर रहा था वो अपनी माँ के साथ अपनी मर्ज़ी से सेक्स कैसे कर सकता है भला? हम्फ! बताती हु भाई को बाद में... पहले मुझे चची को अपनी टीम में लेना होगा)

अंशु की बात सुन्न एक बार फिर निशा पूरी शर्मिंदगी के मारे नीचे सर झुका लेती है.

अंशु : पर में खुश हु. और इसमें आपकी कोई गलती नहीं है चची. में आपको बचपन से जानती हु. आपने बिना कोई कारण के ये सब नहीं किया होगा बोलिये है न?

निशा धीरे से हां में सर हिला देती है,

अंशु : ी कनेव आईटी. मेरी चची बेस्ट चची है. और आपको उदास होने की या शर्मिंदा होने की या गिलटी फील होने की कोई ज़रुरत नहीं है. में आपसे ना hi नाराज़ हु और ना hi मुझे आपसे कोई शिकायत है.

निशा : *कन्फ्यूज्ड*

अंशु : आप ने जो भी किया वो सोच समझ कर hi किया होगा. और भाई भी तोह राज़ी हो गया न? मतलब इसमें आप दोनों की सहमति थी. (मुझे चची को बड़े hi प्यार से समझाना होगा)

निशा : tum...tum मुझसे नाराज़ नहीं हो? Tumm...tumhe हैरानी नहीं हुई ये जान कर?

अंशु : हैरानी हुई थी चची पर अगले दिन सब सही हो गया. और में बोहत खुश हु अब.

निशा : क्यों? तुम खुश क्यों हो? तुम्हे तोह मेरी हस्सी उड़ानी चाहिए. मेरे ऊपर इलज़ाम लगाना चाहिए. मेरी हरकत सबको बताना चाहिए. फिर क्यों? तुम ऐसा क्यों कर रही हो?

अंशु का बेहेवियर वाक़ई निशा की समझ से बहार हो रहा था. उसने ऐसा कभी नहीं सोचा था की अंशु सच जान ने के बाद भी ऐसे रियेक्ट करेगी. उसका मक़सद क्या था आखिर?

अंशु : क्या बोल रही हो चची? में क्यों अपनी इतनी प्यारी चची की बदनामी होने दूंगी? में तोह उन्हें उल्टा इस बात से उन्हें बचाऊंगी, न की उन्हें बर्बाद होने दूंगी?

निशा : wa..wahi मेरी समझ में नहीं आ रहा है. की क्यों?

अंशु : क्यों?? वेल!! सच कहु तोह बदले में मुझे भी आपसे कुछ चाहिए

निशा : k...kya चाहिए!?

अंशु : wo...wo...mujhe bhi...mujhe भी भाई चाहिए.

निशा : हँ!?

अंशु : में आपको सब बताती हु. वंशु दी और में... भाई से... भाई से प्यार करते है. सच्चा वाला प्यार. भाई बहिन वाले से बढ़ कर.

*साइलेंस*

निशा : kyaaaaaaaaaaaa?????

अंशु : हां चची

निशा : ek...ek मिनट वंशु को तोह मुझे समझ में आता है पर तुम...!?

अंशु : व्हाट? वंशु का क्या समझ में आता है? आपको कैसे पता वंशु दी भाई से प्यार करती है?

निशा : wo...mujhe आभास हो गया था. जिस तरह से वो बेतु को देखती है और हरकते करती है मुझे शक था की दोनों के बीच कुछ है और में सही nikli...par तुम!?

अंशु : chachi...sach बात ये है की वंशु दी तोह प्यार करती hi है भाई से पर में भी करती हु. बोहत ज़्यादा. मेने उन्हें बोहत मनाया पर वो हमेशा मुझसे दूर जाने की कोशिश करते रहते है. इसलिए... इसलिए मुझे आपका सपोर्ट चाहिए चची.

निशा : k..kesa सपोर्ट?

अंशु : आपको बस राज़ी होना है की आप मेरे और भाई के रिलेशनशिप के खिलाफ नहीं हो.

निशा : ये tu...kya कह रही है? तुम dono...bhai बहिन हो

अंशु : चची क्या आप भूल गयी? आप और भाई तोह माँ बेटे हो. फिर में और भाई क्यों नहीं? में भी तोह भाई से बोहत प्यार करती हु. प्लीज चची. आपको परमिशन देनी hi होगी... ज़रा सोचिये... बदले में में आपकी कितनी मदद कर सकती हु. में सभी को दूर सकती हु जब आपको और भाई को अकेले रहना होगा. में निगरानी रख सकती हु हम दोनों कितनी साड़ी बातें शेयर कर सकते है. प्लीज चची. मान जाइये. मुझे भाई से अलग मत कीजिये. में और वंशु दी दोनों hi उनसे जी जान से प्यार करते है.

निशा इतनी भी स्वार्थी नहीं थी. उससे पता था की अंशु का मक़सद यही था. अब निशा कैसे मन कर सकती थी? अंशु ने उसको राहुल के साथ सेक्स करते देखा था. और अब बदले में अंशु को राहुल चाहिए तोह भला निशा कैसे मन कर सकती है? या यु कहे की वो उस पोजीशन पे नहीं थी की अंशु को मन कर सके.

निशा : में उस ओहदे पे नहीं हु बीटा की में तुम्हे मन कर सकू...

अंशु : चची आप भाई की माँ हो. मुझे आपका सपोर्ट चाहिए. बदले में में आपकी पूरी मदद करुँगी. तोह अब बताइये की क्या आप मेरी टीम में हो?

निशा : *नॉड्स*

अंशु (हुग करते हुए) : ओह्ह्ह छाछी

ी लव यू सूऊओ मच. आप दुनिया की बेस्ट चची हो. फाइनली अब में भाई के साथ खुल के प्यार कर सकती हु. और मेरा आपको पूरा सपोर्ट है चची. जब भी आपको मेरी ज़रुरत हो आप बिना झिजक के मेरी हेल्प मांग लेना. अब आप और में बेस्ट फ्रेंड्स है. हहै!

दोनों अंशु और निशा इस दौरान अब नए दोस्त बन चुके थे. अब क्या रंग लाएगी इनकी ये दोस्ती? अंशु की टीम में निशा जो आ गयी है. और किसको अंशु अपनी टीम में लेगी?

खर्र! इधर राहुल मोनिका को ड्राप करके घर आया तोह लिविंग रूम में उससे वंशु और तनीषा दिखाई दी. नेहा और तानिया नहीं थी. और ना hi निशा और अंशु मौजूद थी.

राहुल के घर आते hi वंशु दौड़ के उसकी बाहो में चली गयी, "कुटी..."

राहुल को डर था की क्या तनीषा वंशु को समझा पाएगी? उसके जाने के बाद दोनों के बीच क्या बातें हुई और क्या फ़र्क़ पड़ा उन् बातो का वंशु पर यही बात राहुल को जान नई थी.

अभी वो कुछ पूछता उसके पहले hi वंशु ने राहुल के होंठ अपने क़ब्ज़े में ले लिए.

"Ummmmmmmmmmmmmm mmmmmmmmmmm"

करीब 5 मिनट की इस धमाकेदार किसिंग के बाद तनीषा जो वही कड़ी थी कैसे पीछे हट सकती थी?

वंशु के साइड होते hi वो राहुल के पास आयी और उससे झपट के अपनी और खींच के उसके होंठ अपने मुँह में भर लिए,

"ओह्ह्ह्ह डार्लिंग...."

इधर तनीषा और राहुल को किसिंग कार्टर देख वंशु को थोड़ी जलन तोह हो रही थी पर अभी कुछ देरर पहले hi तनीषा ने उससे समझाया था की वो सब राहुल की है, राहुल किसी एक का नहीं है

और तनीषा तोह उसकी अब बड़ी बहिन सामान थी. इसलिए उसने अपने जलन वाले भाव को ख़तम किया और मुस्कुराते हुए दोनों को देखने लगी.

राहुल ने एक एक हाथो में दोनों की कमर पकड़ी और अपने सीने से लगा लिया.



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तनीषा : डार्लिंग? तुम्हे डर नहीं लग रहा की किसी ने यदि देख लिया तोह क्या होगा?

राहुल : में तोह अपनी बीवियों से प्यार कर रहा हु, तोह फिर केसा डर.

ये बात सुन्न तनीषा तोह खुश हुई hi थी पर वंशु की ख़ुशी सातवे आस्मां पर थी. क्या अभी अभी राहुल ने 'बीवियों' कहा? मतलब? मतलब राहुल ने उससे बीवी के रूप में स्वीकार कर लिया?

ख़ुशी के मारे उसके ासु निकल आये और वो राहुल से यु hi चिपकी रही.

तनीषा : डार्लिंग! अब मुझे चलना चाहिए.

राहुल : इतनी जल्दी?

तनीषा : इतनी जल्दी कहा? पूरी रात रुकी थी में.

राहुल : हां पर...

राहुल तनीषा के साथ एन्जॉय hi नहीं कर पाया था इसलिए उस को बड़ा hi अफ़सोस हो रहा था की काश थोड़ा समय वो तनीषा के साथ बिता पाटा, इधर तनीषा समझ गयी थी की राहुल किस बात से नाराज़ है इसलिए वो राहुल के कान में बोली,

"तुम घर आ जाना डार्लिंग... जो चाहे कर लेना वह."

उसकी बात सुन्न राहुल के लुंड महाराज फौरन उठ खड़े हुए. एक नशा सा था तनीषा के शब्दों में. बाद में तनीषा एक और किश देते हुए अपने घर की और चल देती है.

वंशु : क्या कहा था दीदी ने तुम्हारे कान में?

राहुल : दीदी?

वंशु (ब्लश) : हां! अब वो मेरी दीदी है.

राहुल : (लगता है मेरी तनीषा ने वंशु दी को बड़े hi प्यार से समझाया है. थैंक्स तो हेर. में सोच रहा था की दिवाली में मेरी बंद न बज्ज जाए बूत ी गोत सेव्ड. ी लव आल थ्री ऑफ़ थम) वैसे... अब आप नाराज़ तोह नहीं हो न ?

वंशु : नहीं... I'm हैप्पी नाउ.

दोनों आगे बढ़ एक दूसरे को जकड के एक स्वीट किश में खो जाते है तभी उनके कानो में एक आवाज़ पड़ती है,

"ओह्ह्ह होऊ क्या रोमांटिक सन चल रहा है यहाँ तोह!?"

ये आवाज़ अंशु की थी. उसको यहाँ देख वंशु की हालत थोड़ी पतली हो गयी. उससे पता था की अंशु कुछ नहीं बताएगी किसी को पर फिर भी उससे उनकंफर्टबले तो फील हो hi रहा था.

राहुल : अंशु तुम...!?

वो बड़े hi अदा से कमर मटकाती हुई आयी और राहुल के कानो में बोली,

"बे प्रेपरेड़ फॉर टुनाइट बीआरओ. You'll गेट ा हूजे सरप्राइज."

और अगले hi पल उसने राहुल के गाल पे एक पापी चिपकायी और आँख मारते हुए चली गयी.



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इधर राहुल तोह सुरप्रीसेड था hi पर वंशु तोह हक्की बक्की सी कड़ी हुई थी.

तब तक आइये नेहा के कमरे की तरफ चलते है,

नेहा लेती हुई कुछ सोच रही थी की तभी उससे निकिता का कॉल आया,

नेहा : hello?

निकिता : hello नेहु... अरे यार बोहत प्रॉब्लम हो गयी है

नेहा : क्या हुआ अब?

निकिता : अरे यार... वो... पियूष यार

नेहा : पियूष क्या? क्या हुआ?

निकिता : अरे यार मुझे खबर मिली है की वो मुझे प्रोपोज़ करने वाला है

नेहा : हाहाहाहा! तोह जा न, बना ले उससे अपना बर्फ

निकिता : जस्ट शट उप नेहु! क्या बक्क रही है. वो मेरा बस अच्छा फ्रेंड है पुराना. में उस से कोई प्यार व्यार नहीं करती. समझी? यदि उसने मुझे प्रोपोज़ किया toh...tujhe पता है न? हमारी फ्रेंडशिप खराब हो जाएगी. हो सकता है की हम फिर से वापस फ्रेंड्स न बन्न सके. में वो फ्रेंडशिप टूटने नहीं देना चाहती. में चाहती हु की जैसा चल रहा है वैसा चलने दू.

नेहा : तोह उसको कह दे की तुझे बर्फ नहीं चाहिए है अभी.

निकिता : तू पागल है क्या? में एकदम से उससे ये कैसे कह सकती हु? वो सोचेगा की मेने जान बुझ के उसके लिए ऐसा कहा. नहीं नहीं... तू कुछ आईडिया निकाल न जल्दी...

नेहा : अबे मेरे से क्या पूछ रही है. में क्या कोई लव गुरु हु? में भी तोह तेरी तरह कबसे सिंगल hi हु न.

निकिता : यार तू किसी काम की नहीं है. में राहुल भैया से hi बात करती हु. हपंच! वो मेरी हेल्प ज़रूर करेंगे.

नेहा : ोईए... धोकेबाज़ कही की... हपंच!

और कॉल एन्ड हो जाता है.

इधर नेहा का कॉल एन्ड होते hi राहुल का फ़ोन बजने लगता है, कॉलर थी निकिता,

राहुल : hello?

निकिता : hello राहुल भैया! मुझे आपसे बोहत ज़रूरी बात करनी है और आपकी हेल्प भी चाहिए है.

राहुल : क्या हो गया निकिता?

निकिता : पहले आप प्रॉमिस करिये की आप मेरी हेल्प करोगे.

राहुल : ok ok... ी प्रॉमिस. अब बताओ तोह.

निकिता : फ़ोन पे नहीं. कल आप मुझे क्सक्सक्सक्सक्स कैफ़े में मिलना. Okay?

राहुल : okay फाइन!

ये शाम भी यु hi गुज़र गयी और रात में सभी ने भोजन किया और अब बारी थी सोने की. रात में थोड़ी देरर टीवी देखने के बाद जब राहुल अपने रूम के लिए ऊपर पहुचा और उसने दूर खोला तोह सामने का दृश्य देख के उसके होश hi उड़द गए.

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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स.

थैंक्स!
 
अपडेट - 58

अब तक...

निकिता : फ़ोन पे नहीं. कल आप मुझे क्सक्सक्सक्सक्स कैफ़े में मिलना. Okay?

राहुल : okay फाइन!

ये शाम भी यु hi गुज़र गयी और रात में सभी ने भोजन किया और अब बारी थी सोने की. रात में थोड़ी देरर टीवी देखने के बाद जब राहुल अपने रूम के लिए ऊपर पहुचा और उसने दूर खोला तोह सामने का दृश्य देख के उसके होश hi उड़द गए.

अब आगे...

Saamne...saamne उसके बीएड पर अंशु सिर्फ ब्लैक कलर की ब्रा और पंतय में लेती हुई थी और बगल में वंशु बैठी हुई थी पर उसने कपडे पहने हुए थे और उसकी नज़रे नीचे थी और चेहरे पर लाली.





व्हाट थे फ़क? मैं में राहुल के यही शब्द गूंजे. क्या चल रहा है? उससे अपनी आँखों पर विश्वाश hi नहीं हुआ. आज पहली बार वो अंशु को ब्रा और पंतय में देख रहा था. सामने का नज़ारा देख राहुल के लुंड महाराज खड़े न हो ऐसा कही हो सकता है?

वाक़ई! अंशु सच में बेहद ख़ूबसूरत थी. यदि सबसे ज़्यादा सुन्दर किसी का चेहरा था तोह वह अंशु का hi था.

अंशु और मिस मोनिका का चेहरा एक दूसरे को टक्कर दे सकता था. सुंदरता इतनी की पूछो मत. ऐसा नहीं था की बाकी लड़किया सुन्दर नहीं थी पर अंशु और मोनिका का चेहरा थोड़ा हट के hi था. पूरा परफेक्ट. तीखे नैन, पतली और एकदम परफेक्ट नाक, गुलाबी गाल बिना कोई एक्स्ट्रा फैट के, और ख़ूबसूरत गुलाबी होंठ जिनमे ऊपर का होंठ पतला और नीचे का थोड़ा बड़ा, किश करने में तोह आदमी उन् रसीले होंठो में hi खो जाए.

राहुल के मुँह से शब्द hi नहीं निकल रहे थे, उसकी कुछ समझ में hi नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. बस शांत और शॉकेड होक वो वही खड़ा हुआ था.

इतने में अंशु उठी और अपनी कमर मटकाती हुई राहुल के पास आयी, दूर को लॉक किया अंदर से और उसका हाथ अपने हाथो में थाम उससे बीएड की तरफ ले गयी और उसकी छाती पे धक्का देके बीएड पे बैठा दिया.

अंशु : भाई!! अब किस बात का इंतज़ार कर रहे हो? सब कुछ आपके सामने तोह है.

राहुल : ......

अंशु आगे बढ़ राहुल का हाथ थाम लेती है. बेचारा राहुल, उसकी नज़रे अंशु की छाती से अलग hi नहीं हो पा रही थी.

राहुल : वंशु dii...aap? ये सब..!?

अंशु : वंशु दीदी की टेंशन मत लो आप. वो बस थोड़ा शर्मा रही है और कुछ नहीं. क्यों है न दीदी?

अंशु के सवाल पर वंशु शर्म के मारे सर नीचे कर ली. सामने उसकी छोटी बहिन ब्रा पंतय में कड़ी हुई थी और उसका कुटी भी उसके सामने बैठा हुआ था, उससे समझ नहीं आ रहा था वो कैसे रियेक्ट करे.

अंशु : यार! ऐसे hi चलता रहा तोह कभी कुछ नहीं हो पाएगा. भाई, दीदी! I'll बे फ्रैंक. भाई! ी लव यू. में आपसे प्यार करती हु और दीदी भी आपसे प्यार करती है. में आपके और दीदी के बारे में सब कुछ जानती हु और आप सब भी ये जानते है की में भाई से बोहत प्यार करती हु. तोह अब इसमें इतना क्या झिझकना? और इतना क्या शर्माना दीदी?

हम सब साथ में रहेंगे, दीदी आप और में भाई से खूब प्यार करेंगे. तोह फिर आप ऐसे क्यों झिजक रही हो?

वंशु : छोटीइ...

अंशु : आप ये मत सोचिये की आप अपनी छोटी बहिन के सामने प्यार कैसे करेंगी... कुछ मत सोचिये. बस भाई से प्यार करिये. अब में और कुछ नहीं बोलूंगी.

अंशु इतना बोल सीधे राहुल पे टूट पड़ती है और एक hi झटके में उसके होंठ अपने होंठो में भर लेती है.

"Mmmmmmmmmmmmmmmmm"

(Omg!! बिलकुल वही एहसास! भाई के honth...kitna तड़पना पड़ा मुझे इनको पाने के लिए. पर आखिर... मुझे जो चाहिए था वो मिल hi गया. भैई...)





इधर वंशु फटी आँखों से दोनों भाई बहिन को किश करते हुए देख रही थी. दोनों पैशनेट किश में डूबे हुए थे. राहुल कोई विरोध नहीं कर रहा था, या यु कहे की उसमे विरोध करने की कोई आत्म शक्ति hi नहीं बची थी. अंशु का आधा नग्न होना और उसके होंठ चूसना, और उसकी बातो के बाद, शायद इन् सबसे राहुल विरोध के बारे में भूल hi चूका था.

अंशु ने राहुल को धक्का देके बीएड पे लिटाया और उसके होंठ फिरसे एक बार चूसने लगी. इधर वंशु स्तब्ध सी बस सामने हो रहे दृश्य को देखे जा रही थी. जलन? उत्तेजना? प्यार? कुछ मिले जुले भाव उसके मैं में चल रहे थे.

इधर अंशु एग्रेसिव हो गयी और स्मूचिंग के दौरान hi उसने राहुल की शर्ट उतार फेकि.

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सामने राहुल की मस्त बॉडी थी जिसपर अंशु ने धावा बोल दिया था और उसके सीने की हर एक जगह को चूम और चाट रही थी.

अंशु : ी लव यू भाई!! कितना तड़पाया है आपने मुझे...

राहुल : अंशु...

राहुल कहते हुए एक बार वंशु की तरफ देखता है जो उन्ही दोनों को घर रही थी. पर अंशु उसके चेहरे को थाम के अपनी तरफ कर लेती है,

अंशु : मत देखिये उधर. उन्हें आपसे प्यार नहीं करना तोह मत करने दो. में यहाँ आपको पूरा प्यार दूंगी. आपको हर ख़ुशी दूंगी. आ जाओ भाई...!! मुझ को दबोच लो...

कहते हुए अंशु अपनी ब्लैक ब्रा उतार देती है और उसके गोर गोर सुडोल स्तन उछालते हुए राहुल की आँखों के सामने आ जाते है. लुंड महाराज भी एक्साइट होक एक और झटका मार देते है.

वंशु हर्र एक दृश्य को फटी आँखों से देख रही थी. ये उसकी छोटी बहिन थी? और उसकी छोटी बहिन के साथ उसका प्यार - कुटी..!?

आगे बढ़ के अंशु राहुल का हाथ थाम के अपने गोर गोर उरोज पर रखवा लेती है. उफ्फफ्फ्फ़!! क्या फीलिंग थी! राहुल के पूरे हाथ में एक बड़ा सा दूध था और उसकी हथेली पर वो कड़क गुलाबी निप्पल किसी तीर की तरह चुभ रहे थे.

उस से रहा न गया और उसने आगे बढ़ अंशु के दुसरे दूध को अपने मुँह में झट से भर लिया,

"आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह" एक सिसकी अंशु के मुँह से निकल गयी और उससे इतना आनंद आया. ये पहली बार था जब राहुल ने खुदसे पहल करते हुए अंशु से प्यार किया. अंशु को आज अपने स्तनों पर बड़ा hi गर्व महसूस हो रहा था.

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इधर उसकी बड़ी बहिन वंशिका की हालत अब बिगड़ने लगी थी. निचला होंठ दातो टेल दबाए अब उसकी सासें तेज़्ज़ हो चली थी. अंशु और राहुल तोह वंशु की तरफ ध्यान hi नहीं दे रहे थे. शायद अंशु अपनी बड़ी बहिन को जान बुझ कर जला रही थी ताकि उसकी शर्म हया ख़तम होये और वो खुल के राहुल से प्यार कर सके.

अंशु : omg! भाई... एससससस ssssssssss ummmmmmmmmmmmmm सूचक थम भाई. सूचक माय टिट्स!!! और जोरर से चुसोऊ... ओह येअहहहहहह!!!

इधर अब वंशु से रहा नहीं गया और उसने भी अपना टॉप और पयजामा उतार दिया और अब वो केवल ब्रा और पंतय में थी. वंशु के बूब्स अंशु से बड़े थे और थोड़े मुलायम थे.

वंशु अपने निचले होंठ को दबाते हुए अपनी छूट को पंतय के ऊपर से hi मसल रही थी और उखड़ी उखड़ी सासें ले रही थी.

"किश में भाई..." कहते हुए अंशु राहुल के होंठ पागलो की तरह चूसने लगी और फिर शुरू हुआ जुबां का खेल. काफी देरर तक दोनों एक दूसरे की जुबां से थूक का मेल मिलाप कर गहरी किश में खो चुके थे.

एकदम से अंशु ने फिर राहुल को दूर किया और सीधे वंशु की तरफ धक्का दे दिया. अचानक हुई इस हरकत से राहुल और वंशु की आँखें एक दूसरे से जा मिली. दोनों की आँखों में एक तालाब और एक प्यास दिखाई दे रही थी. और अगले hi पल दोनों एक दूसरे के ऊपर टूट पड़े.

जोरर जोरर से एक दूसरे के होंठो को चूस *स्लुर्प स्लुर्प* की आवाज़ें निकाल रहे थे. अब न तोह कोई शर्म का ध्यान था वंशु को और ना hi कोई झिजक थी

पीछे से अंशु भी राहुल से चिपक गयी, उसके नंगे दूध राहुल की पीठ पर मस्सगे कर रहे थे और अंशु के होंठ राहुल की गर्दन और कान की चुसाई में लग जाते है.

कुछ देरर की यु चुसाई के बाद अंशु झुक के वंशु की पंतय एकदम से खींच के निकाल देती है और सामने हलके बाल से सजी हुई छूट राहुल और अंशु की आँखों के समक्ष हाज़िर थी. बिलकुल भी देरर न करते हुए अंशु ने वंशु की छूट को अपने मुँह में भर लिया, जिस कारण वंशु को एक तेज़्ज़ झटका लगा और उसकी एक दमदार सिसकी राहुल के होंठो में hi डब्ब गयी.

वंशु : छोटी??? ये तू क्या...??

अंशु : अब से हम तीनो ऐसे hi एक दूसरे से प्यार करेंगे. ी लव यू भाई? ी लव यू दीदी!!

वंशु (नम्म आँखों से) : छोटीई... ी लव यू तू! ी लव यू कुटी...

राहुल : ी लव यू वंशु दी! लव यू तू अंशु...

राहुल इतना बोल वंशु की ब्रा निकाल फेक देता है और आज उसके सामने वही दूध थे जिन्हे वो कुछ दिनों पहले जम्म के चुस्त था. पर वंशु के जाने के बाद तोह जैसे वह तनहा से हो गए थे.

राहुल : कितना मिस किया मेने इन्हे...

वंशु : अच्छा? सिर्फ इन्हे hi मिस किया?

राहुल : आपको भी मिस किया, आपके बिना तोह में अकेला अकेला सा फील करता था. आपने बिना में अधूरा हु दी...

वंशु (नम्म आँखों से) : तोह देख क्या रहा है कुटी? चूस न इन्हे...

और राहुल मुस्कुरा कर आगे बढ़ वंशु के दूध मुँह में भर लेता है. जोरर जोरर से चुसाई कर उनको मसलते हुए राहुल किसी भूके भेड़िये की तरह उन् उरोजों को खा रहा था. कभी निप्पल को मुँह में भरता, कभी जीभ फिराता, कभी उन्हें काट लेता, कभी पूरा का पूरा दूध मुँह के अंदर कर लेता.

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वंशु तोह दो दो हमलो से पागल हुई जा रही थी. ऊपर राहुल के मुँह का हमला और नीचे उसकी बहिन अंशु के मुँह का हमला.

वंशु से रहा नहीं गया और उसका ओर्गास्म हो hi गया जो अंशु को स्वाद में थोड़ा अजीब लगा पर फिर भी उसने चाट लिया.

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उसने पीछे से फिर राहुल का लोअर भी उतार दिया और फिर उसकी और खुदकी अंडरवियर भी. अब तीनो लोग कम्प्लीटली नंगे हो चुके थे. अंशु पीछे से राहुल की चूतड़ दबाने लगती है और बीच बीच में अपनी गोरी छूट को राहुल के चूतड़ों से घिसने लगती है,

"आआह्ह्ह...."

वो तोह अच्छा था की वंशु और राहुल किश करे जा रहे थे तोह आवाज़ सिर्फ हलकी हलकी hi आ रही थी. वर्ण अब तक तोह तानिया और नेहा को पता चल गया होता की क्या हो रहा है अंदर. अंशु भी अपनी सिसकियों पर कण्ट्रोल की हुई थी.

तभी पीछे से अंशु लेत जाती है और राहुल की टांगो के नीचे आ जाती है. अब उसके सामने राहुल का लुंड था. लुंड देख अंशु की आँखें बड़ी हो जाती है. और वो पहले राहुल के टोपे को एक चुम्मी देती है. आखिर ये पहली बार था जब वो किसी जवान लड़के का लुंड देख रही थी और पहली बार ब्लोजॉब देने जा रही थी. सुपाड़ी पर एहसास होते hi राहुल को झटका लगा और उसकी एक आह निकल गयी. वंशु ने भी राहुल का लुंड देखा और उसकी आँखें बड़ी हो गयी.

और फिर शुरू किया अंशु ने ब्लोजॉब देना. मुँह में थोड़ा सा भर के वो आगे पीछे करती, कभी राहुल के तत्तो को मुँह में भर्ती, उससे चाट टी, शुरू शुरू में उससे बड़ा hi अजीब लगा पर जब थूक की मात्रा लुंड पर बढ़ गयी और एक स्वाद सा बन्न गया, उसके बाद तोह अंशु को इतना मज़ा आने लगा की वह लोल्लिपोप की तरह उससे चूसने लगी, कभी अपने होंठो पर रगड़ती, कभी मुँह में भर्ती.

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अंशु : ओह्ह्ह्हह g*d ये क्या है भाई?? इतना अच्छा लग रहा है, मैं कर रहा है आपका लुंड खा जाऊ भाई... मुझे कुछ हो रहा है भाई...

अंशु अब हॉर्नी हो चुकी थी. उसके मुँह से 'लुंड' सुनते hi राहुल का लुंड झटका मार दिया.

अंशु : omg भाईयो!! इससे रगड़ो न प्लीज... मेरे चेहरे पर रगड़ो न... मेरा पूरे चेहरे पर फिराओ भाई... भाई प्लीज... ओह्ह्ह g*d... मुझे क्या हो रहा है.

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उसकी बातें सुन्न राहुल को भी बोहत जोश चढ़ जाता है और वो अंशु का चेहरा पकड़ अपना लुंड जोरर जोरर से उसके इतने ख़ूबसूरत चेहरे पर रगड़ने लगता है. उससे विश्वाश hi नहीं हो रहा था की इतने सुन्दर चेहरे वाली ख़ूबसूरत लड़की जो उसकी बहिन थी, वो उस से उसके लुंड की भीख मांग रही थी की वो अपना लुंड उसके चेहरे पर रगड़े. आज राहुल को अपने लुंड पे बोहत गर्व हो रहा था.

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राहुल की सिसकिया निकलना चालु हो गयी थी. वो लुंड को अंशु के पूरे चेहरे पर रगड़ रहा था, कभी सुपाड़ी को उसके होंठो से रगड़ता, कभी उसकी नाक से, कभी आँखों से, कभी गालो से, कभी लुंड उसके मुँह के अंदर ठूस देता और जोरर से आगे पीछे करने लगता.

और अब टाइम आ गया था मैं काम का.

अंशु : दीदी! आप पहले

कहते हुए अंशु ने राहुल के लुंड को एक बार और पूरा अच्छे से चूस के गीला किया और वंशु की छूट भी चाट की एकदम गीली कर दी. अब यहाँ से गाडी राहुल को सम्भालनि थी. अंशु जाके अपनी बहिन के चेहरे के पास बैठ गयी ताकि यदि चींख निकले तोह वो उससे किश करके दबा दे.

राहुल : kya...aap...!??

इस से पहले की वो कुछ बोलता अंशु उसके होंठो पर ऊँगली रख उससे चुप करा देती है,

"में और दीदी दोनों hi तैयार है भाई हम दोनों आपसे प्यार करते है. आज आप हमे अकेले न चोर्रो भाई. अपना लो हमे. हमे अपना बना लो भाई. फ़क उस भाई"

राहुल हां में सर हिलाता है,

"वंशु दी! दर्द होएगा शुरू में बूत बाद में अच्छा लगने लगेगा. आप तैयार हो न"

बदले में वंशु भी हां में सर्र हिलाती है, और राहुल लुंड को छूट की एंट्री में रखता है और एक नज़र वंशु पर डालता है और फिर एक तेज़्ज़ शॉट मारता है, जिस से वंशु की चींख निकलती है पर अंशु उससे किश करके चींख को मुँह में दबा लेती है. लुंड का टोपा घुस झुका था. 1 मिनट बाद राहुल एक और धक्का मारता है तोह उसका लुंड करीब आधा अंदर चला जाता है. और इसी शॉट से वंशु एक औरत में बदल जाती है. विर्जिनिटी टूट चुकी थी. वंशु का हैमेन टूट चूका था. और उससे अतयंत दर्द की अनुभूति हो रही थी.

आँखों से ासु निकलना स्टार्ट हो चुके थे पर अभी भी उसके होंठ अंशु के होंठो में क़ैद थे. इधर राहुल को ऐसा फील हो रहा था जैसे उसका लुंड किसी भट्टी में घुस गया हो. इतनी तिघटनेस, और इतना ज़्यादा तापमान. ऐसा लग रहा था छूट लुंड को कच्चा चबा जाएगी.

2 मिनट बाद एक गहरी सास लेके राहुल ने पूरा का पूरा लुंड अंदर पेल दिया जिस के चलते बेचारी वंशु की आँखें hi पलट गयी और उसकी पीठ किसी चउरवे की तरह हो गयी थी. राहुल ने उसकी ऊपर लेत उससे सांत्वना दी की बस हो गया जितना दर्द होना था और उससे किश करने लगा और दूध दबाने लगा.

अंशु ऊपर से हटके राहुल के पीछे आयी. उसके सामने राहुल की गांड थी और सिर्फ उसके टट्टे hi नज़र आ रहे थे बाकी पूरा का पूरा लुंड उसकी बहिन वंशु की छूट में समा चूका था. वो यही सोच रही थी की इसके बाद यही लुंड उसकी छूट में भी जाएगा. सामने का नज़ारा देख उसकी उत्तेजना इतनी बढ़ गयी की वो झुक के राहुल के टट्टे और लुंड और छूट के कनेक्टेड part को चाटने लगी. इस कारण दोनों राहुल और वंशु को इतना मज़ा आने लगा की धीरे धीरे वंशु का दर्द भी काम हो गया.

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करीब 10 मिनट बाद वंशु थोड़ा सा हिली और अपनी कमर चलायी जिस से उससे बोहत hi अच्छा लगा. ये देख राहुल ने थोड़ा लुंड बहार निकला तोह वंशु की आह निकल गयी. राहुल हलके हलके धक्को से छोड़ना स्टार्ट कर दिया. और वंशु इधर मस्ती में खो गयी.

वंशु : ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह माय g*d.. कुटीऐई

क्या यही है सेक्स??? Haaayeeee....ssssss

कतीईई! ी लव यू सोऊ मछःह.....

फ़क me...fuck योर सीस कुटी.... और.. आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.......

Ummmmmmmmmmmmmm hmmmmmmmmmmmmmmmm......

Yesssssss....oooo yessssss.....haaa....

और धीरे धीरे शुरू हुए ताबड़तोड़ धक्के, लुंड किसी पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था. वंशु की आँखों से ासु निकल रहे थे. पर ये ख़ुशी के थे. उससे आज वो प्राप्त हो गया था जिससे उसकी तलाश थी. अब वो पूरी तरह से राहुल की थी. उससे अपना प्यार मिल चूका था और इस बात के लिए आज उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था

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अब उससे समझ आ गया था, की अंशु क्यों उससे आगे बढ़ने के लिए कह रही थी. तोह ये आनंद छुपा हुआ था?? हाय! कितनी बुद्धू थी वह! जो पहले ये सब नहीं करि.

छोड़ते छोड़ते राहुल झड़ने के करीब जब आ जाता है तोह वंशु समझ जाती है और उसकी कमर को टांगो से बाँध लेती है, इशारा था की छूट में hi झरो. राहुल कुछ और ताबड़तोड़ धक्को के बाद वंशु की छूट में hi जहर जाता है. और लुंड बाहर निकल कर वंशु की साइड में लेत जाता है.

दोनों जहर चुके थे और दोनों की सासें तेज़्ज़ चल रही थी. तभी वंशु को अपनी छूट पर किसी की जीभ का एहसास होता है, आँखें खोल कर देखती है तोह पाती है की अंशु उसकी छूट से बह रही क्रैंपी को चाट रही है और खा रही है. ये पहले बार था जब अंशु क्रैंपी टास्ते कर रही थी. चाहे कितना भी बेकार स्वाद क्यों न हो वो ये कर रही थी. उससे पता था की एक बार जब आदत दाल गयी उसके बाद उससे ये स्वाद अमृत की तरह लगने लगेगा. इसलिए वो अभी से प्रक्टिसे कर रही थी

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वंशु सिसकी लेते हुए राहुल से चिपक गयी और उसके गालो पर किश करने लगी.

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जब अंशु ने छूट को साफ़ कर दिया उसके बाद वो राहुल के लुंड को मुँह में भर ली और उससे साफ़ करने लगी.

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ये देख वंशु भी ज्वाइन हो गयी. वो भी पहली बार राहुल का छुम जो टास्ते करने जा रही थी.

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दोनों बहनो ने लुंड के सुपाड़ी से मुठ को चूस चूस के पूरा निकाल लिया और एकदम साफ़ कर दिया. राहुल लेते हुए दोनों के चेहरे देख रहा था. आज वो ये जान गया था की वो कितना लकी है.

लुंड की चुसाई के बाद अंशु उठ बैठी,

"तोह भाई अब मेरी बारी..."

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आज के लिए इतना hi गाइस!

अब ये मत कहना की कलपद कर दिया. अंशु का यहाँ नहीं दिखा सकता क्युकी अपडेट फिर हद्द से ज़्यादा बड़ा हो जाता. इसलिए यहाँ तक वंशु के सन को एन्जॉय करिये. नेक्स्ट अपडेट में अंशु को करना और कहानी का प्लाट भी आगे बढ़ेगा.

थैंक यू!!!
 
अपडेट - 59

अब तक...

दोनों बहनो ने लुंड के सुपाड़ी से मुठ को चूस चूस के पूरा निकाल लिया और एकदम साफ़ कर दिया. राहुल लेते हुए दोनों के चेहरे देख रहा था. आज वो ये जान गया था की वो कितना लकी है.

लुंड की चुसाई के बाद अंशु उठ बैठी,

"तोह भाई अब मेरी बारी..."


अब आगे...

वंशु की ठुकाई के बाद बेचारी वो पास्ट पड़ गयी, थकान में बेचारी निढाल हो गयी और बीएड पर hi सो गयी. इधर अंशु ने अपना खज़ाना खोल दिया और अब केवल राहुल का hi इंतज़ार कर रही थी.

राहुल ने अंशु की छूट देखि जो बिलकुल क्लीन शवेद थी, एक भी बाल नहीं था. गुलाबी रंग की क्लाइटोरिस साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी जो राहुल को बोहत ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी.

उसने फौरन झुक के अपना मुँह सीधा अंशु की गुलाबी छूट पर दे मारा. राहुल की गरम जीभ का अपनी छूट पर एहसास होते hi अंशु की एक लम्बी सिसकी निकल गयी, आज पहली बार किसी ने उसकी छूट पर मुँह मारा था और वो भी कोई और नहीं उसका भाई, उसका प्यार, उसके अपने राहुल ने hi. मैं में ये सोच कर की अभी उसकी छूट पर उसके भाई का मुँह लगा हुआ है, अंशु और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी और सामान्य से हट के वो आज ज़्यादा hi जल्दी चूत गयी.

आज राहुल ने अपनी दोनों बहनो का पानी चख लिया. जैसे hi अंशु ने पानी चोर्रा राहुल ने धीरे धीरे सारा का सारा पानी चाट कर साफ़ कर दिया, उसकी ये हरकत देख अंशु के गाल लाल हो गए. उससे अभी राहुल पे इतना प्यार आ रहा था, की यदि राहुल उस से यदि उसकी जान भी मांगता तोह अंशु ख़ुशी ख़ुशी दे देती. इतना समर्पित हो गयी थी वो इस वक़्त राहुल के लिए. उसकी आँखों में hi प्यार झलक रहा था.

आगे बढ़ के अंशु ने फौरन राहुल के होंठ अपने होंठो में कस लिए और अपने hi पानी का स्वाद चखने लगी. अब चुकी वो वंशु की छूट का पानी पहले hi चख चुकी थी, इसलिए उससे राहुल को किश करने में कोई घिन नहीं आयी और उल्टा वो बड़े hi पैशनेट तरीके से राहुल के होंठ चूस रही थी.

राहुल : अंशु! दर्द hoega...tum

अंशु : में रेडी हु. आप सोच भी नहीं सकते भाई की मुझे इस दिन का कबसे इंतज़ार था. हर्र बार आप के करीब आने की कोशिश करती थी पर आप हर्र बार मुझे दूर कर देते थे, उस वक़्त मेरे दिल पर क्या बीत टी थी ये में hi जानती हु. अब और नहीं. आज! आप यहाँ मेरे पास हो... मेरे saamne...mere saath...apna लो मुझे भाई. अपनी इस छोटी बहिन को अपना बना लो बिलकुल वैसे hi जैसे अभी आपने वंशु दी को अपना बनाया. बना लो मुझे अपनी प्रेमिका भाई...

बना दो मुझे एक औरत... आइये भाई...

कहते हुए अंशु अपनी बाहें खोल बिस्तर पर लेत गयी और अपने परर फैला के छूट के दर्शन देते हुए राहुल को आमंत्रण देने लगी.

"पता नहीं मेने अपने पिछले जनम में ऐसे कोनसे काम किये थे जो मुझे आज अंशु जैसी बहिन मिली और वो भी एक प्रेमिका के रूप में...",

राहुल ने मैं में सोचा. वाक़ई! हुस्न की मल्लिका थी अंशु. उस ख़ूबसूरत चेहरे से कोई भी मंत्र मुग्ध हो जाए. आज राहुल खुद को लकी फील कर रहा था. सोच रहा था की कितना बेवक़ूफ़ था वो जो अंशु जैसी बहिन को खुदसे दूर कर रहा था.

राहुल ने अपना सख्त जैसा मुस्सल लुंड अंशु की नन्ही अनछुई छूट की एंट्री पर रखा और एक हाथ ले जाके उसके मुँह पे रख दिया ताकि शोर न हो पाए और एक गहरी सास लेते हुए ज़ोर का झटका दे मारा.

"Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh" एक ज़ोरदार चीख अंशु के मुँह से निकली पर राहुल के हाथ ने फौरन hi उससे अपने हाथ से दबा दी. दर्द की एक तेज़्ज़ लहर अंशु की छूट में दौड़ गयी.

लुंड का 1/4 भाग hi गया था अंदर पर दर्द से अंशु पूरी तरह तड़प रही थी.

अंशी की छूट वंशु से भी छोटी और टाइट थी. लुंड इतनी कस के छूट में फसा था की आगे पीछे करने की राहुल अभी सोच भी नहीं सकता था. उसने 2 मिनट ऐसे hi गुज़र जाने दिया, अपना हाथ हटा के वो अंशु को गुलाबी होंठ चूसने में लग गया, करीब 2 मिनट बाद उसने एक और तेज़्ज़ झटका मारा और 3/4 भाग अब अंदर घुस गया. ऐसे hi उसने 2 मिनट बाद एक आखिरी झटका दिया और पूरा का पूरा लुंड अब जड़ तक अंशु की छूट में समां चूका था. लुंड बिलकुल बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था, मतलब एकदम परफेक्ट फिट बैठ रहा था.

होंठ चूमते हुए राहुल ने अंशु के ासु भी पोछे जो दर्द के कारण निकल रहे थे. आज वो भी एक लड़की से औरत बन्न चुकी थी. सांत्वना देते हुए राहुल ने उससे थोड़ी देरर तक किश किया उसके बाद धीरे धीरे आगे पीछे होना उसने स्टार्ट कर दिया.

"Ummmmmmmmmmmmmm... Yeahhhhhhhhhhh भईईई"

अंशु को अब मज़ा आने लगा था, हल्का दर्द था पर वो सेह रही थी और मज़े भी ले रही थी.

करीब 2 मिनट के हलके धक्को के बाद तोह अंशु की सूरत hi बदल गयी,

"Oooooooohhhhhhhhhhh एआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाआईई

एसससससससससज़्ज फफ्फूऊऊऊक्कक्ककककककक meeeeeeeeee

फुसक्कककककककक मइईईई भाआईई छोड़ूऊऊओ

Aur.....aur.. और जोरर.. se...chodo भाईईई"

उत्तेजना में भरकर राहुल ने ताबड़तोड़ धक्के लगाना शुरू कर दिए, नीचे से अंशु भी अपनी कमर उचका उचका के चुद रही थी. आज वो बोहत hi ज़्यादा खुश थी. उसकी छूट में उसके भाई का लुंड था ,उसका भाई राहुल जिससे वो सबसे अधिक प्यार करती है. ख़ुशी के मारे ासु निकल आए उसकी आँखों से जो राहुल ने आगे बढ़ कर पी लिए और उससे किश करने लगा.

थोड़ी देरर के धमाकेदार धक्को के बाद अब राहुल स्खलित होने वाला था, अंशु तोह दो बार पहले hi स्खलित हो चुकी थी और अब तीसरी बार होने जा रही थी. उसने राहुल की कमर में परर कस लिए, जो राहुल समझ गया था की उससे क्या करना है. उसने सारा का सारा वीर्य अंशु की छूट के अंदर hi भर दिया, उसी वक़्त अंशु भी जहर गयी और दोनों के मुँह से तेज़्ज़ "आअह्ह्ह" निकली जो शायद बहार तक भी चली गयी थी. दोनों को कण्ट्रोल hi नहीं रहा. पर रात के 1 बज रहे थे इसलिए राहुल ने ज़्यादा परवाह नहीं की और ऐसे hi अंशु के ऊपर निढाल होक लेत गया. अंशु ने भी प्यार से उसके बालो को सहलाते हुए अपने दूध के ऊपर लिटा लिया और दोनों थकान के मारे नींद की वादियों में चले गए.

सुबह करीब 7 बजे राहुल की नींद खुली, उसके अलार्म के कारण और उसने देखा की वह अंशु के ऊपर hi सोया हुआ है, और सभी लोग नंगे hi पड़े हुए है. फौरन उठ के उसने जब अंज़र फिराई तोह देखा की बेडशीट पर खून है ढेर सारा, उसने बेडशीट को जैसे तैसे खींच के निकाला और वाशरूम में जाके फटाफट उससे धोया और खुद भी नाहा धोकर फ्रेश हो गया.

बाहर आते hi उसने दोनों अंशु और वंशु को प्यार से नींद से उठाया और उन्हें कपडे पहन ने को दिया.

राहुल : आप दोनों ने hi कल रात... ी मैं... वो अंदर hi गिरवा लिया... सब ठीक तोह है न?

वंशु (स्माइल्स) : कुटी! मेरा तोह सेफ था. छोटी का नहीं पता मुझे. अगली बार से पिल उसे कर लुंगी, जब तक तू नहीं चाहेगा तब तक बच्चा नहीं होएगा. ठीक??

राहुल : *नॉड्स*

अंशु : मेरा भी सेफ था दीदी. It's okay भाई. यदि प्रेग्नेंट हो भी जाउंगी तोह मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

वंशु : छोटी... प्रॉब्लम तुझे भलाई न हो, पर हमारे घरवालों को तू क्या बताएगी? उनके सामने क्या कहेगी? इसलिए कुटी घबरा गया था समझी? उससे अपनी चिंता नहीं है, तेरी चिंता है.

अंशु (नम्म आँखों से) : भाआईईईई

और आगे बढ़ अंशु उससे हुग कर लेती है.

राहुल : अच्छा! यदि आपको अभी भी आराम करना है तोह आराम कर लीजिये, में नई बेडशीट बिछा देता हु. फिर आप लोग उठने के बाद फ्रेश हो लेना. यदि ज़्यादा दर्द है तोह बता दीजिये में आते वक़्त पेनकिलर लेता आऊंगा.

वंशु : दर्द तोह है पर हम मैनेज कर लेंगे, तुम ये बताओ की तुम किधर जा रहे हो कुटी?

राहुल : बस ये समझ लीजिये की गयम ज्वाइन किया है.

सच तोह ये था की राहुल गयम नहीं, मास्टर के घर जा रहा था क्युकी आज से उससे हर रोज़ उनके घर पर ट्रेनिंग जो लेनी थी. अब मास्टर उससे क्या नया सिखाने वाले थे ये उससे भी नहीं पता था, पर उन्होंने आखिरी मुलाक़ात के वक़्त कुछ जानलेवा मूव्स के बारे में बात करि थी, क्या पता क्या सीखेगा राहुल इन् 6 महीनो में?

राहुल फिर नीचे उतर के लिविंग रूम में आ जाता है. किचन में निशा काम कर रही थी तोह राहुल पीछे से जाके निशा को हुग कर लेता है.

राहुल : गुड मॉर्निंग माँ!

निशा : गुड मॉर्निंग बेतु? तोह रात किसी थी?

राहुल : हँ??

निशा : ahem...mera मतलब है नींद तोह आयी न अच्छे से?

राहुल : एकदम मस्त माँ!

निशा : (हां हां क्यों न आएगी एकदम मस्त? दो दो कुवारी छूट को जो पेला है तुमने रात में. बस कही मेरा बेतु मुझे न भूल जाए... अंशु ने प्रॉमिस तोह किया है की वो मेरे साथ है और मेरी मदद करेगी. मुझे तोह बस यही चाहिए की मेरा बेतु मुझसे प्यार करे. और कुछ नहीं) चल अच्छा! नाश्ता लगा देती हु.

नाश्ता कर के राहुल उठता है और बाइक लेके चल देता है मास्टर के घर, वह से वापस करीब 12 बजे वो घर आता है तोह उससे निकिता का कॉल आ जाता है जिसने उससे दिन में 1 बजे कैफ़े में बुलाया हुआ था.

समय गुज़रा और राहुल 1 बजे कैफ़े की और hi जा रहा था की तानिया उस से सवाल करने लगी की किधर जा रहे हो? क्या काम से जा रहे हो? और कहने लगी की वो भी साथ में चलेगी. अब क्युकी राहुल निकिता से hi बस मिलने जा रहा था इसलिए उससे इस बात से कोई आपत्ति नहीं हुई और उसने तानिया को भी अपने साथ बाइक पे बैठाया और दोनों चल दिए कैफ़े की तरफ.

कैफ़े पॅहुचते hi दोनों अंदर गए तोह निकिता पहले से hi बैठी हुई थी, तानिया को देख के वो थोड़ी हैरान थी पर उसने ज़्यादा मंद नहीं किया.

राहुल : हां तोह बोलो निकिता क्या बात है?

निकिता : भैया वो बात ये है की... कोई मुझे प्रोपोज़ करना चाहता है?

राहुल : हँ? तोह इसमें प्रॉब्लम क्या है?

निकिता : प्रॉब्लम hi प्रॉब्लम है भैया! ी don't वांट हिम तो प्रोपोज़.

राहुल : तुम्हे वो पसंद नहीं?

निकिता : भैया वो मेरा फ्रेंड है बोहत पहले से, उसका नाम है पियूष. और वो मेरी और नेहा की hi क्लास में है. में उससे स्कूल से जानती हु.

राहुल : तोह फिर प्रॉब्लम क्या है?

निकिता : प्रॉब्लम ये है की मुझे मेरे फ्रेंड्स से पता चला है की वो मुझे प्रोपोज़ करने वाला है. मुझे उस से कोई प्यार व्यार नहीं है पर शायद वो मुझसे करता है. में उससे एक फ्रेंड की तरह hi देखती हु. दरअसल, उससे एक बार हार्ट अटैक आ चूका है. वो दिल का बड़ा hi कमज़ोर hai...mein नहीं चाहती की यदि में उससे रिजेक्ट करू तोह वो किसी डिप्रेशन में न चला जाए और उससे कुछ हो न जाए. में नहीं चाहती की मेरी फ्रेंडशिप उस से टूटे भैया...

राहुल : .....

निकिता : राहुल भैया! जब इंसान एक बार कोई चीज़ खो देता है, तोह फिर वो चीज़ हमेशा हमेशा के लिए उस इंसान से दूर चली जाती है. में नहीं चाहती की में भी ये दोस्ती खो दू और हम कभी भी वापस से फ्रेंड्स न रह पाए. में उस से कोई प्यार नहीं करती. ना hi में किसी के साथ रिलेशनशिप रखना चाहती हु अभी... क्या आप इसमें कुछ कर सकते हो? ऐसा कुछ जिसके चलते हमारी फ्रेंडशिप ना टूटे और साथ hi साथ उससे पता भी चल जाए की में अभी किसी के साथ रिलेशनशिप में नहीं आना चाहती.

राहुल काफी देरर बैठ के सोचता रहा और तानिया भी उससे hi घर रही थी. सोच रही थी की राहुल क्या करेगा. दोनों लड़किया अपनी प्यारी आँखों से जिनमे क्यूरोसिटी भरी हुई थी राहुल को देखे जा रही थी.

राहुल : जो तुमने अभी अभी कहा... यही बात बाद में तुम फिरसे मुझसे कहना. सही समय आने पर तुम्हे पता चल जाएगा तुम्हे कब कहना है ये सब.

और राहुल तानिया को लेके जाने लगता है,

निकिता : wh...what??? एक मिनट, कहा जा रहे हो आप? मुझे कुछ समझ नहीं aaya...wait...

पर राहुल नहीं रुका. निकिता के दिमाग में राहुल के कहे हुए शब्द घुमते रहे. उसने कहा था की जो अभी निकिता ने कहा है वही वो बाद में राहुल को कहे? क्या मतलब था इस बात का?

इधर बाइक पे तानिया भी बड़ी hi क्यूरियस थी ये बात जान ने के लिए की राहुल क्या करने वाला है.

तानिया : तुमने ऐसा क्यों कहा उस से?

राहुल : समय आने पर पता चल जाएगा.

तानिया को ड्राप कर के राहुल पियूष से मिलने कॉलेज जाता है. आज नेहा और निकिता दोनों hi कॉलेज नहीं गयी थी. पर पियूष कॉलेज में hi था. राहुल जैसे hi नेहा की क्लास में घुसता है तोह सब उससे hi घूरने लगते है.

"अरे ये तोह वही सीनियर भैया है... है न?"

"हां हां! वाओ! देखो कितना हैंडसम है"

"ये गांडू फिर आ गया अपनी वज़नदारी पटकने!?"

"भाई अब ये किसी को मारेगा तोह नहीं न?"

"He's सो hot...omg!!"

"काश ये मेरा बर्फ होता"

"ारी ये तोह नेहा का भाई है न? लास्ट ईयर में है"

कुछ ऐसी hi बातें सुनाई दे रही थी क्लास में,

राहुल : तुम सब में से पियूष कोण है?

पियूष (खड़े होकर) : j...ji में हु

राहुल : बाहर आओ तुमसे कुछ बात करनी है.

फिर राहुल उससे लेकर कैंटीन में चला जाता है.

राहुल : मेने सुना है तुम निकिता को प्रोपोज़ करने वाले हो?

पियूष (शॉकेड) : aap...aapko कैसे पता चला?

राहुल : मुझे कैसे पता चला वो जान ने की तुम्हे ज़रुरत नहीं है. तुम्हे सिर्फ इतना जान न है की वो मेरी छोटी बहिन जैसी है और में नहीं चाहता की कोई उससे नुक्सान पोहचए.

पियूष : में उस से प्यार करता हु. में उससे कोई नुक्सान कैसे पहुचा सकता हु. में उससे बचपन से जानता हु.

राहुल : हम्म! गुड! यदि तुम सच में उससे पसंद करते हो तोह में तुम्हारी मदद कर सकता हु.

पियूष : हँ? क्या?

राहुल : हां! यदि तुम चाहो तोह में तुम्हारी मदद कर सकता हु.

पियूष : बिलकुल बिलकुल! राहुल भैया! में चाहता हु की आप मेरी मदद करो.

राहुल : तुम मुझे जानते हो? नीस!! हां तोह मेने प्लान बनाया है. तुम्हे बिलकुल वैसा hi करना है जैसा में बताने जा रहा हु. Okay?

पियूष : हां राहुल भैया!

राहुल : तुम निकिता को शाम को पार्क क्सक्सक्सक्स में बुलाओगे. और अपना कॉन्फेशन करोगे. Okay?

पियूष : क्या में ये कर पाउँगा?

राहुल : बिलकुल! अब निकिता को कॉल करो और उससे कहो की शाम 7 बजे पार्क क्सक्सक्सक्स में मिले, तुम्हे कुछ काम है उस से.

और राहुल उससे समझा कर घर आ जाता है. इधर नेहा को सब पता चल चूका था क्युकी निकिता उसकी बेस्ट फ्रेंड जो ठहरी, इसलिए उसने नेहा से कोई बात नहीं छुपाई.

नेहा (मैं में) : ये साला बास्टर्ड क्या करने वाला है? और ये चोमू कही की, पूरे संसार में इससे यही मिला मदद मांगने के लिए? जा के मुझे भी देखना पड़ेगा.

समय कब गुज़र गया पता hi नहीं चला और शाम के 6:30 बज चुके थे. राहुल और तानिया पहले hi पार्क में पहुँच चुके थे. बोहत hi ख़ूबसूरत पार्क था. पार्क के साइड में एक छोटा सा लकड़ी का ब्रिज टाइप का बना हुआ था और नीचे पानी भरा हुआ था. अक्सर पार्क्स में ये सब कॉमन hi होता है. दोनों राहुल और तानिया उस ब्रिज पर hi खड़े हुए थे.

हलकी हलकी पीली लाइट्स ब्रिज की रेलिंग्स पर लगी हुई थी जो उसकी सुंदरता को और भी बढ़ा रही थी.

पियूष भी तैयार होक अच्छे से कपडे पहन के आ गया,

पियूष : राहुल भैया!?? मेरा दिल बोहत ज़ोरो से धड़क रहा है.

राहुल : हम्म! ये बताओ, यदि तुम रिजेक्ट हो गए तोह क्या करोगे?

पियूष : अरे भैया, आप मुझे दर्रा क्यों रहे हो? अभी तोह मेने उससे प्रोपोज़ भी नहीं किया है.

राहुल : सीधे सीधे जवाब दो बस. निकिता आती hi होगी.

पियूष : mein...mein शायद मेरा दिल टूट जाए और में फिरसे किसी लड़की को प्रोपोज़ भी न कर पाव. में बोहत जल्दी सेंटी हो जाता हु.

राहुल : (सिर्फ सेंटी hi नहीं.. इससे कही कुछ हो न जाए मुझे इस बात की फ़िक्र है बस) हैं?? चलो! गुड लक...

पियूष : बिलकुल! थैंक यू भैया! आप बेस्ट सीनियर हो. आप बोहत hi अच्छे हो. आपके जैसा कोई नहीं...

राहुल : शट उप इडियट! मेरी तारीफ मत करो. में कोई ख़ास नहीं हु.

इतना बोल राहुल तानिया को लेकर ब्रिज के पीछे पेड़ के पास छुप गया.

तानिया : तुम bhi...tum भी कभी कभी अच्छा बेहवे कर लेते हो!

राहुल : ऐसा कुछ भी नहीं है. पियूष वैसे भी रिजेक्ट होने वाला है.

तानिया : उम् हां...

राहुल : पर एक तरीका है जिस से में सब कुछ बदल सकता हु.

तानिया : क्या है वो??

राहुल : .......

तानिया : वेल! देखते है क्या करते हो तुम.

तभी कोई एक शख्स और आया और उनके साथ वही पेड़ के पीछे खड़ा हो गया.

ये नेहा hi थी.

राहुल और तानिया साथ में : तुम... तुम यहाँ?

नेहा (राहुल को देख) : शट उप यू बास्टर्ड! में यहाँ सिर्फ घूमने आयी थी.

राहुल : घूमने आयी थी या ड्रामा देखने आयी हो?

नेहा : शट उप!

इस से पहले की इनकी बहस और चलती निकिता सामने ब्रिज की तरफ आने लगी. राहुल और बाकी सभी लोगो को निकिता का चेहरा सामने से दिख रहा था और पियूष की पीठ दिखाई दे रही थी.

पियूष : *हार्ट बीटिंग फास्टर*

धीरे धीरे निकिता के कदम आगे की और बढ़ रहे थे और वो कुछ hi पल बाद पियूष के सामने आके कड़ी हो गयी.

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आज के लिए इतना hi दोस्तों!

पिक्स में अगले अपडेट से डालूंगा.

मुझे पता चल गया है पिक्स कैसे अपलोड करनी है.


थैंक यू!
 
अपडेट है बीन पोस्टेड गाइस!

Don't वोर्री! पिक्स में नेक्स्ट अपडेट से अपलोड करने लगूंगा, मुझे पता नहीं था यहाँ कैसे अपलोड करनी है पिक्स क्युकी पिक्स अपलोड करने का पुराण ऑप्शन हट चूका है. अब मुझे मैन्युअली पिष्बब पे जाके अपलोड करना होगा. काम और भी लम्बा हो गया है ಥ‿ಥ
 
थैंक यू गाइस!!

नेक्स्ट अपडेट कल रात्रि में आ जाएगा.

आधा अपडेट रेडी हुआ है, आधा बाकी है.

अगले 3 उपदटेस में आपको बोहत hi इंटरेस्टिंग सा प्लाट देखने को मिलेगा.
 
भाई फोरम का वर्शन एकदम से बदल गया था और अपलोड करने का ऑप्शन भी चला गया था, तोह में मजबूर था. मुझे और कोई तरीक़ा नहीं पता था. पर अब ऑप्शन आ गया है तोह अब अपलोड हो जाएंगे.
 
बोहत बोहत धन्यवाद् भाई!

राहुल के दिमाग में जो भी चल रहा है ये तोह वही जाने.

पर हां! आपको याद होगा राहुल ने ऋचा को कैसे उसके ऐटिटूड से बहार निकला था. अभी राहुल फिरसे अपनी बुद्धि का प्रयोग करके वैसा hi कुछ करेगा. जो भी होगा, इंटरेस्टिंग ज़रूर होगा.
 
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