इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 12 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अपडेट-63

मेगा अपडेट



अब तक...


राहुल : में कुछ समझा नहीं मास्टर!?

मास्टर : अब कैसे कहु तुमसे राहुल... मुझसे कहा भी नहीं जा रहा है.

राहुल : इसमें इतने सोचने वाली क्या बात है मास्टर? कह दीजिये! आप अपनज hi गुरु दक्षिणा मांग रहे है, किसी और की नहीं.

मास्टर : हम्म!! राहुल... में चाहता हु की...


अब आगे...



राहुल : ????

मास्टर : में चाहता हु ki...ki तुम ख़ुशी के साथ 3 महीने tak...usko प्रोटेक्ट करो.

राहुल : ख़ुशी??

मास्टर : ख़ुशी! मेरी बेटी!

राहुल (शॉकेड) : पर? मेरी कुछ समझ में नहीं आया मास्टर. ख़ुशी? Mein...protect?

मास्टर : समझाता हु! *गहरी सास लेकर* देखो! राहुल! तुम जानते हो की अभी हाल hi में आये कोरोना जैसे खतरनाक वायरस से दुनिया उभर hi रही है. मेरी बेटी भी चीन में hi थी पर इस से पहले की कोरोना उस तक पोहचता वो इंडिया आ चुकी थी अपनी आगे की पढ़ाई के लिए. अभी वो मुंबई में है, वो डॉक्टर बन्न न चाहती है इसलिए आगे की पढ़ाई मुंबई में hi रहकर करेगी.

राहुल : हां! तोह ये तोह अच्छी बात है मास्टर. इसमें दिक्कत क्या है?

मास्टर : जितना सरल ये दीखता है राहुल उतना है नहीं. कोरोना के चलते पूरी दुनिया अस्त व्यस्त हो गयी. इसका असर उन् अमीर लोगो पर भी है जिनका बड़ा बिज़नेस है. आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने से सभी परिणाम भुगत रहे है. और उसमे में भी शामिल हु.

राहुल : पर में अब भी नहीं समझ पाया मास्टर की इसमें मेरा ख़ुशी को प्रोटेक्ट करने से क्या लेना देना है?

मास्टर : लेना देना है राहुल. लेना देना है!!

बात सिर्फ इतनी सी नहीं है. अच्छा मेरे एक प्रश्न का उत्तर दो राहुल.

राहुल : जी पूछिए!

मास्टर : यदि शत्रु पे वार करना हो तोह कब करना चाहिए?

राहुल : जब उससे बिलकुल भी उम्मीद न हो वार की, या जब वो सबसे ज़्यादा कमज़ोर हो, या जब उसका ध्यान कही और केंद्रित हो.

मास्टर : एकदम सही जवाब!

राहुल : ????

मास्टर : वैसे hi मेरे अपने समय की दुश्मनी जो अब तक चली आ रही है, उनमे से मेरे कुछ दुश्मन है जो मेरी बेटी को हानि पोहचाना चाहते है. ये में पहले भी तुम्हे बता चूका हु.

राहुल : जी हां मास्टर! मुझे अच्छी तरह से याद है!

मास्टर : हां! तोह अभी मेरा भी ध्यान केंद्रित है, यानी की वायरस के कारण बिज़नेस उथल पुथल होने से यही सबसे सही मौका है उनके लिए मेरी बेटी को नुक्सान पहुचाने के लिए. पर में नहीं चाहता की ऐसा हो. में चाहता हु की में अपना बिज़नेस भी संभाल लू और अपनी बेटी को भी कुछ न होने दू.

राहुल : मास्टर! मेरे ख्याल से आपको पहले ख़ुशी के बारे में सोचना चाहिए. बिज़नेस तोह दुबारा भी खड़ा हो सकता है.

राहुल की बात सुन्न मास्टर मंद मंद मुस्कुराए और फिर कहे,

मास्टर : हम्म! तुमने सही कहा. पर में जानता हु की में दोनों काम एक साथ कर सकता हु. और इसलिए गुरु दक्षिणा में मेने तुमसे ये माँगा है राहुल.

राहुल : पर में अकेला एक 21 साल का लड़का भला उन् माफिया गुंडों से ख़ुशी को कैसे प्रोटेक्ट कर सकता है? और आप ने ये काम किसी सर्वश्रेष्ठ बॉडीगार्ड को क्यों नहीं दिया?

मास्टर : तुम्हे क्या लगता है राहुल? की में अपनी बेटी के लिए बॉडीगार्ड भी नहीं रख सकता? घबराओ नहीं राहुल! तुम्हारे अलावा वह और भी बोडीगार्ड्स होंगे जो ख़ुशी की रक्षा करेंगे. पर तुम्हे इसलिए चुना है क्युकी...

राहुल : ???

मास्टर : क्युकी ख़ुशी बोडीगार्ड्स से नफरत करती है. उससे ज़रा भी पसंद नहीं है की काले कपडे पहन के हट्टे काटते लोग उसके अगल बगल घूमे. वो कहती है की उसकी फ्रेंड्स डर जाती है.

राहुल : पर लाइफ तोह इम्पोर्टेन्ट है न मास्टर?

मास्टर : हां! क्या करू राहुल? थोड़ी ज़िद्दी है, यदि बॉडीगार्ड उससे दूर से प्रोटेक्ट करे तोह वो बुरा नहीं मानती. पर तुम तोह जानते हो न, दुश्मन ये सब नहीं सोचता. उससे तोह जब मौका मिलेगा वो कही पे भी कभी भी अपना वार कर सकता है. और इसलिए, में चाहता हु की तुम उसके साथ 3 महीने तक रहो. उसके कॉलेज जाओ, उसकी क्लास में रहो, आगे पीछे hi घूमना पड़ेगा तुम्हे.

राहुल : पर...??

मास्टर : मन मत करना राहुल. में जानता हु की ख़ुशी तुम्हे पक्का एक्सेप्ट कर लेगी. क्युकी तुम उसकी उम्र से ज़्यादा बड़े नहीं हो. वो तुमसे सिर्फ 3 साल hi छोटी है. वो पक्का तुम्हे मन नहीं करेगी. इनफैक्ट! में तोह चाहता हु की तुम दोनों अच्छे से घुल मिल जाओ.

राहुल : मतलब?

मास्टर (मैं में) : मतलब ये की काश तुम दोनों अच्छे से घुल मिल जाओ. में ख़ुशी पर अपने फैसले नहीं थोप सकता. आखिर वो मेरी एकलौती बच्ची है. पर उपरवाले से दरखास्त है मेरी की काश वो तुम्हे पसंद कर ले. मेरा काम आसान हो जाएगा.

राहुल : मास्टर? आपने जवाब नहीं दिया मेरी बात का?

मास्टर चेन की तन्द्रा भांग होती है और वो राहुल को देखते है और फिर हलकी हस्सी हस्ते हुए कहते है,

मास्टर : अरे! ः!!... अरे असल में ख़ुशी ज़िद्दी है न, तोह isliye...isliye मेने ऐसा कहा. की तुम दोनों घुल मिल जाओ, झगड़ा न होए तुम्हारे बीचे. ः!!

राहुल : क्या वो ज़्यादा hi ज़िद्दी है?

मास्टर : उम्! हां है तोह. पर दिल की बड़ी hi अच्छी है. एक बार यदि तुमने उसके दिल में जगह बना ली न तोह वो अपना सब कुछ डाव पे लगा देगी तुम्हारे लिए देखना.

राहुल : हम्म?

मास्टर (मैं में) : अरे कुछ ज़्यादा बोल दिया लगता.

मास्टर : मेरा मतलब, उससे प्यार से ट्रीट करोगे तोह बदले में वो भी प्यार लौटाएगी.

राहुल : हम्म्म!!

मास्टर : क्या हुआ? कुछ चिंतित लग रहे हो?

राहुल : मास्टर! में ये शहर चोरर कर अपना बिज़नेस खड़ा करने की सोच रहा था पर अब आपकी गुरु दक्षिणा भी देनी है. मुझे 3 मोनथस और वेट करना पड़ेगा मतलब.

मास्टर : हम्म! तब क्या तुम दे पाओगे? जो मेने माँगा है.

राहुल : बिलकुल मास्टर! में ख़ुशी को 3 महीने प्रोटेक्ट करने के लिए रेडी हु. पर क्या में ये जान सकता हु की 3 महीने hi क्यों?

मास्टर : क्युकी मुझे अपना बिज़नेस और बाकी काम संभालने में 3 महीने लग जाएंगे.

राहुल : ok! तोह मेरी जान को भी खतरा है न?

मास्टर : *गहरी सास लेकर* हां राहुल! माफ़ करना! पर मुझे पता नहीं क्यों अंदर से एक अनुभूति हो रही है की तुम ये काम कर लोगे. डरो नहीं! तुम्हारी जान बोहग महत्वपूर्ण है. में बाकी बोडीगार्ड्स भी तुम्हारे हवाले कर दूंगा. उनको तुम hi इंस्ट्रक्शंस देना. बीच बीच में में मोनिका को भी भेज दिया करूँगा. वो तुंहारी हेल्प भी कर दिया करेगी और मुझे वह की रिपोर्ट भी दिया करेगी.

राहुल : जी! पर यदि मेरी जान चली गयी तोह?

मास्टर : में ऐसा हरगिज़ होने नहीं दूंगा. तुम बिलकुल फिक्र मत करो राहुल. और अब तक तुम्हे जो जो सिखाया है, समझ लो की उसका असली प्रयोग करने का समय आ गया है. इससे एक परीक्षा की तरह hi ट्रीट करो.

राहुल : जी!

मास्टर : तोह तुम्हे मुंबई जाना होगा!

राहुल : जी!! कब?

मास्टर : कल ही!

राहुल (सुरप्रीसेड) : कल hi?

मास्टर : हां! तुंहारी फ्लाइट बुक करवा दू न?

राहुल : मास्टर!! मेरे साथ एक फ्रेंड भी रहेगा. क्या आप उसका और मेरा रुकने का बंदोबस्त कर सकते है?

मास्टर : ये भी कोई कहने की बात है? तुम टेंशन मत लो. उसका रुकने का बंदोबस्त हो जाएगा. पर तुम्हे ख़ुशी के साथ hi रहना होगा 3 मोनथस तक. जहा जहा वो जाएगी तुम्हे उससे hi फॉलो करना है, हर्र वक़्त.

राहुल : j...ji! चलिए में चलता हु फिर.

मास्टर : हम्म!

राहुल फिर बाहर निकल अपनी बाइक उठा के घर की और जाने लगता है. एकदम से सब कुछ बदल चूका था. उससे एक नया टास्क मिल गया था. जिसके लिए शायद वो तैयार नहीं था.

राहुल (मैं में) : तोह इसलिए मास्टर ने मुझे इन् 6 महीनो में बॉडीगार्ड की ट्रेनिंग दी और वो जानलेवा मूव्स सिखाए ताकि में उनका उसे ख़ुशी को प्रोटेक्ट करने में कर सकू. मतलब मास्टर ने ये बोहत पहले hi सोच लिया था. हम्म!

पर में उन्हें मन कैसे कर सकता था? गुरु दक्षिणा तोह देनी hi होती है, ऊपर से उन्होंने मेरी कितनी मदद भी की है. बस प्रॉब्लम है तोह केवल 2 बातो की.

यदि मेरी जान चली गयी तोह? मेरे घरवालों का क्या होगा? और दूसरी बात मेरा बिज़नेस? अरे हां! में और सौरभ तोह वैसे भी मुंबई hi जाने वाले थे. एक बिज़नेस की शुरुआत मुंबई जैसे शहर से hi तोह होती है. और अब तोह हमारा रहने का ठिकाना भी सेट हो गया. ना hi हमारे पैसे रेंट पे खर्च होंगे और न hi कोई टेंशन. हम्म! में समझ गया मुझे क्या करना है. सौरभ से बात करता हु घर जाके.

इधर राहुल अपने घर की और प्रस्थान कर रहा था और इधर एक बंगला में एक व्यक्ति बैठे नेवसपपेर पढ़ रहा था और अचानक उसने नेवसपपेर गुस्से में मरोड़ते हुए फेक दिया.

आदमी : धत्त तेरी की... साला सब हिजड़े की औलाद है.

ये लकी का बाप था.

लकी : क्या हुआ डैड!?

Lucky's डैड : बीटा! हमारी एक दारु की दूकान ाहर बंद हो सकती है. साला इन् निकाम्बो नौकरो से कुछ संभाला नहीं जाता. दिमाग खराब कर के रखा है.

लकी : डैड! वो सब सही हो जाएगा. आप मेरे बारे में तोह सोचिये कुछ. कब तक में इस घर में पड़े पड़े सड़ता रहूँगा. उस राहुल की गांड मारनी है मुझे. बस एक मौका मिल जाए.

लड़ : अभी तुझे बाहर नहीं निकला है इसलिए तू बचा हुआ है. साला कमिश्नर भी मिला हुआ है उस राहुल से. तू हवालात में होता यदि घर पर नहीं रखा होता तुझे समझा? थोड़े दिन और ृक्क जा, में कुछ करता हु.

इधर राहुल अपने घर पहुचा और सीधे अपने रूम में चला गया और सौरभ को कॉल किया,

सौरभ : बोल भाई!

राहुल: तैयारी करो कल हम मुंबई चल रहे है!

सौरभ (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त? अचानक? ऐसे? एकदम से?

राहुल : हां! बी फ्लाइट! तू बस तैयारी कर में सब कुछ समझा दूंगा बाद में.

सौरभ : अच्छा ठीक है यार!

*कॉल एंड्स*

राहुल अब सोच में था की निशा को कैसे बताये ये बात की कल वो जा रहा है. और ये बात कब बताई जाए?

तभी वो निर्णय लेता है की सभी को बता दे ताकि आज रात वो सभी से अच्छे से बात करने के बाद. कल इस शहर को अलविदा कह सके.

जब राहुल ने सबको बताया की वो कल ये शहर चोरर के चला जायेगा तोह सभी शॉकेड थे, उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं थी की एकदम से राहुल उन सब को चोरर दूसरे शहर जाएगा और वो भी मुंबई जैसे बड़े शहर में. सबसे ज़्यादा चिंतित और कोई नहीं निशा hi थी, एक माँ जो थी. उसका बीटा कैसे रहेगा, क्या खाएगा, क्या पियेगा, कहा रहेगा ये साड़ी बाते उससे अंदर से खाए जा रही थी. वही दूसरी तरफ नेहा जो थी वो सबसे ज़्यादा खुश थी, उसकी ख़ुशी का तोह कोई ठिकाना hi नहीं था.

राहुल की जाने की बात अंशु और वंशु को भी पता चली तोह वो दोनों भी शाम के वक़्त hi राहुल के घर आ गयी ताकि उसके जाने से पहले कुछ पल बिता सके. तनीषा को भी जब पता चला तोह वो भी एकदम से उदास हो गयी और उससे बेचैनी से होने लगी. उसने कल फ्लाइट के समय आकर मिलने का वादा किया.

इधर नेहा दौड़ती हुई निकिता के घर पर पहुची और उसके रूम में घुस गयी सीधे.

नेहा : ोये कमीनी! उठ!

निकिता : क्या हुआ यार? दिन में भी सोने नहीं देता कोई

नेहा : एक चमाट लगाउंगी न... शाम के 6 बज रहे है. चल उठ! एक मस्त न्यूज़ है!

निकिता (उठते हुए) : क्या हुआ? बर्फ बना लिया क्या?

नेहा : चल हॉट! पहले ये मिठाई खा तू.

कहते हुए नेहा एक पीेछे मिठाई का निकिता के मुँह में hi ठूस देती है,

निकिता : aaawweeeee....tyaa तर रही hai...unmmmm

निकिता मिठाई खाने के बाद सास लेती है, पानी पीती है और फिर बोलना स्टार्ट करती है,

निकिता : पागल है क्या? ऐसे कोण मिठाई खिलाता है? और क्या मस्त न्यूज़ है? तेरे सपनो का रजखमार मिल गया क्या?

नेहा : अरे हट! उस से भी मस्त न्यूज़ है!

निकिता : उस से भी मस्त न्यूज़ क्या हो सकती है?

नेहा (ख़ुशी से झूमते हुए) : वह बास्टर्ड शहर चोरर के जा रहा है. Omg!! I'm सो हैप्पी!!!!

कहते हुए वो खुद hi एक पीेछे मिठाई का खा लेती है.

इधर निकिता की आँखें फटी की फटी रहती है, और थोड़ी देरर के सन्नाटे के बाद वो कहती है,

निकिता : क्या कहा तूने? राहुल भैया? शहर चोरर के?

नेहा : हां मेरी बेबी! वो बास्टर्ड जा रहा है! I'm फ्री नाउ! में आज़ाद हु! मुझे फाइनली छुटकारा मिला.

निकिता : par...par क्यों? कैसे?

नेहा : अबे तू क्या उदास हो रही? तू मेरे साइड है या उसके साइड? जा रहा होगा कही. सुना है मुंबई जा रहा है. हाहाहाहा! पैसा है नहीं, मुंबई में रहेगा? भीख मांगेगा वह. मुंबई क्या गांव है? ज़िन्दगी भर पड़ा रहे वही पे. में तोह आज़ाद हो गयी. हास्सः!! कल मेरी तरफ से पार्टी सभी डार्लिंग लड़कियों को. हाहाहा

निकिता यहाँ टेंशन में कुछ सोच विचार कर रही थी की तभी वो दौड़ के ऋचा के पास जाती है,

निकिता : दी! दी दरवाज़ा खोलिये!

ऋचा (दूर ओपन करते हुए) : क्या हुआ निक्की?

निकिता : दी! राहुल भैया शहर चोरर के मुंबई जा रहे है?

ऋचा (थोड़ी देरर चुप रहने के बाद) : हां! राहुल मुंबई जा रहा है.

निकिता : और आपने उन्हें रोका भी नहीं?

ऋचा : निक्की तू पागल हो गयी है क्या? उससे में क्यों रोकूंगी? क्या तुम नहीं चाहती वो भी एक बड़ा आदमी बने? आखिर उससे भी तोह अपना नाम कमाना है न?

निकिता : par...par वो यहाँ रह के भी तोह पैसे कमा सकते है न?

ऋचा : अभी तुम नहीं समझोगी. और यदि राहुल ने ऐसा किया है तोह कुछ सोच समझ कर hi किया होगा. ी बिलीव इन हिम.

नेहा : हम्फ!

निकिता : तोह? तोह हम कल चल रहे है न? उनसे मिलने?

ऋचा : हां! एयरपोर्ट पे मिलने चलेंगे.

निकिता : o...ok!

............................

इधर रात में राहुल ने अंशु और वंशु के साथ रातें रंगीन की. दोनों बोहत ज़्यादा hi उदास थी की राहुल कल जा रहा है. बेचारी निशा को कोई मौका नहीं मिल पाया इस बार.

आखिर वो दिन आ hi गया. जिसका राहुल को तोह बेसब्री से इंतज़ार था साथ hi साथ नेहा को भी. राजेश को पता था की राहुल ने यदि ये डिसिशन लिया है तोह कुछ सोच समझ कर hi किया होगा. इसलिए राजेश ने ख़ुशी ख़ुशी राहुल का डिसों एक्सेप्ट किया पर उसके अकाउंट में पैसे भी दाल दिए. ये उनका फ़र्ज़ था उनके हिसाब से.

आज निशा ने खाने में राहुल की फवौरीते डिशेस बनायीं थी. उसकी उदासी सभी के सामने झलक रही थी. जैसे तैसे वो खुद को रोने से रोके हुए थी. नेहा सबसे ज़्यादा खुश थी, वो सोच रही थी कब शाम होए और राहुल ये घर से निकले और वो अपनी फ्रेंड्स को पार्टी दे.

शाम हुई, सभी लोग कार में बैठ के पहुचे एयरपोर्ट. निशा तोह फुट फुट कर रोने hi लगी. अंशु और वंशु भी उदास सी कड़ी हुई थी. सौरभ भी अपने घरवालों के साथ आ गया, उसके घरवालों को राहुल ने पहले hi मन लिया था उसके साथ जाने के लिए.

तभी ऋचा भी निकिता के साथ आ गयी, और उसके तुरंत बाद hi तनीषा भी आ गयी. सभी ने एक दूसरे से मिला और राहुल को गुडबाय कहने के लिए ृक्क गए.

सभी लोग मौजूद थे. ये पल सभी के लिए कष्टदायक था, सिवाए नेहा के. वो तोह बिलकुल hi उल्टा फील कर रही थी. सबसे ज़्यादा खुश तोह वही थी. राहुल ने सभी के गले लगे, नेहा सबसे दूर साइड में कड़ी हुई थी.

वो भी सोच रही थी की कब ये ड्रामा शामा ख़तम होये और वो घर जाके पार्टी की तैयारी करे.

अभी राहुल इस से आगे बढ़ता, तभी वह मोनिका आ गयी. और राहुल को कस के हुग कर दिया. मोनिका को केवल ऋचा जानती थी क्युकी उसने hi मास्टर और मोनिका को देखा हुआ था इस से पहले. पर बाकी सब के लिए ये नज़ारा नया था. अंशु वंशु तनीषा के लिए तोह चौकाने वाला था.

अंशु : अरे दीदी! ये हुस्न की पारी कोण है? देखो तोह! भाई के गले लगी है.

न चाहते हुए भी अंशु को मान न पड़ा की मोनिका उसकी टक्कर की थी खूबसूरती में.

वंशु : छोटी! मुझे नहीं पता! कोई नयी गफ तोह नहीं बना ली इस कुटी ने?

अंशु : नहीं दी! ऐसा होता तोह भाई हमें बताते.

तनीषा : मेरे ख़याल से वो डार्लिंग की ख़ास फ्रेंड में से एक है.

अंशु और वंशु साथ में : डार्लिंग??????

तनीषा बेचारी शर्म से लाल होकर अपना चेहरा छुपा लेती है.

अंशु : ओह हो! क्या बात है! डार्लिंग हां?? डार्लिंग???

तनीषा : बस बस! अब बोहत हुआ! उस पर ध्यान दो तुमलोग! हम तोह आलरेडी टीम में है. पर वो हमारी कॉम्पिटिटर बन सकती है.

वंशु : कुटी को में उसके चंगुल में नहीं जाने दूंगी

तनीषा : वंशिका! तुम भूल गयी क्या? हम सब राहुल के है.

वंशिका (साद होकर) : हां! राहुल सिर्फ मेरा नहीं है. में जानती हु ये...

मोनिका : मास्टर ने कहा है की वो बीच बीच में मुझे तुम्हारे पास भेजेंगे.

राहुल : हां! बताया था उन्होंने!

फ्लाइट आ चुकी थी, राहुल जाने hi वाला था की निशा ने उससे बुलाया और अगले hi पल उसने नेहा को पीछे से धीरे से धकेल के राहुल की तरफ आगे कर दिया,

नेहा सुरप्रीसेड सी कड़ी पलट के निशा को देखि जैसे पूछ रही हो की माँ ये आप क्या कर रही हो?

निशा (रुवासे स्वर में): जा के गले लगो अपने भाई से

नेहा (फटी आँखों से) : माँ????????

निशा (गुस्से में) : मेने कहा जाके गले मिलो उस से.

नेहा : पर? पर...?? डैड??

राजेश : माँ ने सही कहा. जाके गले मिलो अपने भाई से नेहा.

नेहा : नहीं! कभी नहीं! Mein...mein कैसे?

निशा : नेहाआआ!!! जाती हो या नहीं??

Neha(mann में) : माँ डैड को अचानक क्या हो गया है? वो मुझे फाॅर्स क्यों कर रहे है?

नेहा का मंद : अरे सोच क्या रही है? मिल ले गले एक आखिरी बार. ये क्यों नहीं सोचती की इसके बाद तू फ्री हो जाएगी. यदि एक बार गले मिल लेने से तुझे आज़ादी मिल रही है तोह जा न!

Neha(mann में) : हां! बात तोह सही है! ऐसे में माँ डैड भी नाराज़ नहीं होएंगे और में भी इस से हमेशा के लिए पीछा चुर्रा लुंगी.

तभी नेहा राहुल की तरफ आगे बढ़ती है और बिना मैं के अजीब सा मुँह बनाते हुए उससे गले लगाने के लिए आगे बढ़ने लगती है, तभी राहुल उसको कंधो से पकड़ता है, एक हाथ उसके गाल पर रखता है और आगे बढ़ के उसके कान में ऐसा कुछ कहता है, जिससे सुनकर नेहा की आँखें फटी की फटी रह जाती है और उसका शरीर सिहर उठता है.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi दोस्तों!!


धन्यवाद्!!
 
इंडेक्स है बीन अपडेटेड!

वैसे तोह में करने वाला था

पर शायद सिराज भाई ने अपडेट कर दिया है.

धन्यवाद् भाई!

पर आपको कष्ट लेने की ज़रुरत नहीं है, में समझ गया हु कैसे अपडेट करना है. ( ꈍᴗꈍ)
 
हर्र राइटर, एक राइटर बन्न ने से पहले एक रीडर hi था. तोह एक असली राइटर hi सबसे अच्छे से जानता है रीडर्स की फीलिंग्स. में आपकी बात से सहमत हु. पर में उन् वरिटेरस में से नहीं हु जो एक कहानी को पकड़ के उससे ज़बरदस्ती लम्बा खींचते रहते है, मेरी स्टोरी सितम्बर में स्टार्ट हुई थी, और ी थिंक इस सितम्बर में hi, या मय्बे उसके पहले hi समाप्त भी हो सकती है. तोह मात्र एक साल hi मान लीजिये आप दरशन इसका. रही बात स्टोरी चौररने की, तोह यदि रीडर्स को स्टोरी दिल से पसंद आती है तोह वो एन्ड तक उसके साथ बनने रहते है भले hi बीच में थोड़े बोहत उतार चढ़ाव क्यों न आए. में भी पहले एक रीडर hi था, में जानता हु स्टोरी के लिए वेट करना कितना मुश्किल होता है, पर अब जब एक राइटर हु तोह समझ में आता है की लिखना और टाइम पे लिखना कितना कठिन है.
 
ः!!

ऐसा इसलिए है मित्र क्युकी नेहा निकिता की बचपन की दोस्त है. और सबसे ख़ास दोस्त. उससे बुरा लगता है पर भला क्या कहेगी वो नेहा को? यदि नेहा को कुछ कहती भी है तोह क्या नेहा मानेगी? बिलकुल नहीं! इसके चलते वह अपनी दोस्ती तोह नहीं खो सकती न? और वैसे भी नेहा के पास अपना रीज़न है की वो राहुल से बुरा व्यव्हार क्यों करती है.
 
अपडेट - 64

अब तक...

Neha(mann में) : हां! बात तोह सही है! ऐसे में माँ डैड भी नाराज़ नहीं होएंगे और में भी इस से हमेशा के लिए पीछा चुर्रा लुंगी.

तभी नेहा राहुल की तरफ आगे बढ़ती है और बिना मैं के अजीब सा मुँह बनाते हुए उससे गले लगाने के लिए आगे बढ़ने लगती है, तभी राहुल उसको कंधो से पकड़ता है, एक हाथ उसके गाल पर रखता है और आगे बढ़ के उसके कान में ऐसा कुछ कहता है, जिससे सुनकर नेहा की आँखें फटी की फटी रह जाती है और उसका शरीर सिहर उठता है.

अब आगे...



बेचैनी! एक अजीब सा एहसास, एक पीड़ा, नेहा को अभी खाए जा रही थी. फटी आँखों से वो सामने देख रही थी, पर न तोह उससे कुछ सुनाई दे रहा था और सामने क्या चल रहा है नेहा उस से भी वंचित थी क्युकी राहुल ने जो कहा उससे सुनके उसके होश hi उड़द चुके थे.

राहुल तोह कुछ कदमो के बाद hi धीरे धीरे सबकी आँखों से ओझल हो गया और कब उसकी फ्लाइट ने उड़ान भरी और कब वो प्लेन भी सबकी आँखों से ओझल हो गया, समय का पता hi नहीं चला. नेहा तोह तब से स्तब्ध सी कड़ी सामने देखे जा रही थी जबकि वह कुछ देखने लायक था hi नहीं. उससे तोह होश तब आया जब निशा की रोने की सिसकिया थोड़ी तेज़्ज़ हुई और उसके कानो में पड़ी. पीछे पलट कर नेहा ने देखा तोह पाया निशा रो रही थी और राजेश उन्हें शांत करवा रहे थे, बाकी सब की आँखें भी नाम थी. इधर वो शांत सी कड़ी कुछ देरर हुई पहले की घटना के बारे में सोच रही थी. तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ी और सबकी तन्द्रा भांग हुई,

राजेश : चलो बीटा!

राजेश के कहने पर जैसे सभी गम से बाहर निकले और वापस घर की और जाने लगे. सब अपने अपने घर को लौट गए, अब राहुल तोह था नहीं तोह फिर भला अंशु और वंशु क्या करती घर पर? वो दोनों भी शाम होते hi निकल गयी अपने घर. नेहा की समझ नहीं आ रहा था, उसका सर चक्र रहा था, और उससे गुस्सा भी बोहत आ रहा था.

नेहा (मैं में) : उसने ज़रूर ये जान बूझ के किया था, सोच रहा होगा ऐसा करने से में पिघल जाउंगी, ya...ya ये भी हो सकता है की मेरा मज़ाक उड़ाने के लिए ये सब किया हो? सहित! मेरा तोह दिमाग फटा जा रहा है. जाते जाते भी ये मेरा पीछा नहीं चोरर रहा.

यहाँ राहुल और सौरभ जब मुंबई पहुचे. तोह उन्हें स्टेशन पे धेरर सारे टैक्सी ड्राइवर्स ने घेर लिया,

"साब किधर जाने का?"

"आओ न साब, में लेके चलता है आपको".

"अरे भौ, कहा जाना है?"

कुछ ऐसे hi सवालों से राहुल और सौरभ को घेरते हुए टैक्सी ड्राइवर्स ने भीड़ लगा दी. पर राहुल तोह जैसे सब के लिए तैयार था. उसने एक टैक्सी ड्राइवर को एक पर्ची दी, जिसमे पूरा एड्रेस डिटेल्स में लिखा हुआ था, की कहा से मुड़ना है, कोण सी रोड से जाना है, कितना भाड़ा लगेगा, कितना समय लगेगा.

ये पर्ची मास्टर ने hi उससे बना के दी थी, जब टैक्सी वाले ने पर्ची देखि तोह उसका सर hi चक्र गया. चुना लगाने का प्रश्न hi नहीं उठता. पर्ची पर एड्रेस की हर एक डिटेल्स लिखी हुई थी. कोई चाह कर भी राहुल और सौरभ को चुना नहीं लगा सकता था.

खर्र! राहुल और सौरभ दोनों hi एक सोसाइटी में पहुचे, जहा पर चौथी मंज़िल पे उनका फ्लैट था, अभी उनके पास कोई भी के नहीं थी तोह दोनों फ्लैट के बाहर खड़े हुए थे और किसी का वेट कर रहे थे,

सौरभ : तू सूरे है न की यही घर है?

राहुल : हां!!

सौरभ : बूत यार अभी तक कोई आया hi नहीं.

राहुल : बात हो गयी है मेरी, कोई न कोई आता hi होगा.

तभी कुछ देरर में एक व्यक्ति आया और राहुल को फ्लैट की के दिया और वापस चला गया, अंदर से फ्लैट पूरा फर्निश्ड था, राहुल और सौरभ दोनों फ्रेश हुए उसके बाद राहुल नाहा के रेडी हो गया, क्युकी यहाँ उसका काम था 3 महीने तक ख़ुशी को प्रोटेक्ट करना. उससे ये बात सताए जा रही थी की ये ख़ुशी कही ज़िद्दी लड़की न निकले, पता नहीं किसी होगी? क्या नेचर है उसका? मानेगी भी या नहीं?

सौरभ : भाई अब तू कहा चल दिया?

राहुल : में यहाँ नहीं रहूँगा! मुझे एक इम्पोर्टेन्ट काम निपटना है, 3 महीने तक उसी में बिजी रहूँगा.

सौरभ : wtf? अबे तोह में यहाँ अकेला क्या करूँगा?

राहुल : तू टेंशन मत ले, 3 महीने तू सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के और कोर्सेज कर लेना.

सौरभ : में पहले hi दो कर चूका हु, और मेरे से आता है सॉफ्टवेयर डेवेलोप करना.

राहुल : हां पर अभी और एडवांस्ड वाले कर. समझा? अब में चलता हु.

सौरभ : मेरी तोह कुछ समझ नहीं आ रहा यार

राहुल : don't वोर्री! मुझे पता है में क्या कर रहा हु.

वो वह से निकल के एक और बताये गए अड्रेस पर जाता है तोह सामने एक बोहत बड़ा घर था.

इस से पहले की वो आगे बढ़ पाटा, घर के बहार खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने उससे रोक दिया,

"किस से मिलना है आपको?"

"ओह्ह हां! एक मिनट..", राहुल ने अपना फ़ोन निकाला और वापस से वो एड्रेस पढ़ा और उस सिक्योरिटी गार्ड को दिखाया.

अड्रेस पढ़ने के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने कुछ अजीब निगाहो से राहुल को नीचे से ऊपर तक देखा, राहुल एक सिंपल वाइट टी शर्ट और जीन्स में था और कुछ भी नहीं. कही से भी वो कोई ऐसा व्यक्ति नहीं लग रहा था जो इस बंगला के मालिक से कोई रिलेशन रखता हो.

"यहाँ किस काम से आये हो?" उसने पूछा.

"ओह्ह हां! मास्टर चेन ने मुझे भेजा है, ये घर तोह उन्ही का है न? आप लोगो को बताया नहीं क्या किसी ने?" राहुल ने कहा.

सिक्योरिटी गार्ड 1: मास्टर चेन? ये कोण है? तुम जानते हो क्या?

सिक्योरिटी गार्ड 2 : ना भाई न! इसको भगाओ ये फ़ालतू टाइम पास कर रहा है यहाँ.

राहुल : आप दोनों का हो गया हो तोह में अंदर जाऊ?

उसी बंगला में ऊपर साइड, खिड़की के पास एक व्यक्ति बैठा हुआ था जो कुछ सोच रहा था,

व्यक्ति (मैं में) : मास्टर ने कहा था राहुल नाम का लड़का मुंबई आने वाला है. अब तक आया नहीं?

तभी उसने खिड़की से पर्दा हटा कर देखा तो पाया नीचे एक लड़का सिक्योरिटी गार्ड्स से बहस कर रहा है और वो फौरन नीचे देखने चला गया.

अभी यहाँ राहुल आगे बढ़ने hi वाला था की एक आवाज़ ने तीनो को रोक दिया,

"क्या चल रहा है यहाँ?"

सभी ने उसकी और देखा, जब व्यक्ति ने राहुल को देखा तोह उसने फौरन पूछ लिया,

व्यक्ति : राहुल? क्या तुम राहुल हो?

राहुल : जी हां! पर आप कोण?

तभी उस व्यक्ति को समझ में आ गया और उसने आगे बढ़कर राहुल का हाथ बड़े hi आदर के साथ मिलाया,

व्यक्ति : नीस तो मीट यू! में, रजनीश. मास्टर का सेक्रेटरी. में आपको लेने स्टेशन hi आने वाला था.

राहुल : अरे इसकी कोई ज़रुरत नहीं, में वैसे भी मुंबई को अच्छे से देख रहा था, थोड़ा घूम hi लिया.

रजनीश : जी! प्लीज फॉलो में!

रजनीश (सिक्योरिटी गार्ड्स से) : और तुम दोनों! क्या बकवास कर रहे थे? जानते भी हो ये कौन है?

मालिक की दांत सुन्न दोनों सिक्योरिटी गार्ड्स चुप होकर नज़रे नीचे कर लिए, अंदर आते आते राहुल बंगला की बनावट को देख रहा था और सोच रहा था की एक दिन उसके पास भी खुद का बड़ा सा घर होएगा.

बाहर खड़े 2 सिक्योरिटी गार्ड्स मुँह hi ताकते रह गए,

सिक्योरिटी गार्ड 1 : अरे भाई ये तोह सच में मालिक को जानता है

सिक्योरिटी गार्ड 2 : मालिक खुद से बाहर आके हाथ मिलाए उस से...

रजनीश : आप यहाँ बैठिये! में अभी आया!

राहुल को रजनीश के मुँह से 'आप' सुन्न बड़ा hi अटपटा लग रहा था, क्युकी रजनीश उम्र में वैसे hi मास्टर से भी बड़े लग रहे थे. रजनीश की उम्र 50 तोह होगी hi, ये अनुमान राहुल ने लगाया.

थोड़ी hi देरर में रजनीश ट्रे में पानी लेकर आया तोह राहुल ये देख अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ,

राहुल : अरे ये...?

रजनीश : जी पानी पीजिये!

राहुल : देखिये सबसे पहले आप मुझे "आप" कहना बंद कर दीजिये. मुझे अच्छा नहीं लगता की कोई मुझसे बड़ा मुझे ऐसे बुलाए. और आपको मेरे लिए ये सब पानी लाने की कोई ज़रुरत नहीं है.

रजनीश : अच्छा चलिए ठीक है! में आपको मिस्टर राहुल कहकर बुलाऊंगा. रही बात पानी देने की तोह उसका तोह कोई इलाज नहीं है क्युकी यही तोह मेरा काम है.

राहुल : क्या मतलब?

रजनीश : मतलब ये की... मेरा काम यही है मिस्टर राहुल. मिस ख़ुशी के लिए उनका पूरा खाना और बाकी सारे घर के काम में hi करता हु.

राहुल : पर आपने कहा की आप सेक्रेटरी हो मास्टर के?

रजनीश : हां! बिलकुल हु!

राहुल : पर मास्टर की सेक्रेटरी तोह मोनिका दीदी है न?

रजनीश : हां! पर ये किसने कहा आपको की मास्टर के पास सिर्फ एक hi सेक्रेटरी है?

राहुल : तोह फिर आप ये खाना बनाना?

रजनीश : जी! अब में वैसे hi 52 बरस का हो गया मिस्टर राहुल. तोह उन्होंने मुझे मिस ख़ुशी के साथ रखा है. उनकी dekh-bhaal के लिए. वर्ण पहले में भी मोनिका मिस की तरह मास्टर का बिज़नेस hi संभालता था.

राहुल : ओह्ह! अब समझ आया. तोह फिर वो बहार सिक्योरिटी गार्ड्स मास्टर चेन को क्यों नहीं जानते?

रजनीश : वो इसलिए क्युकी उन्होंने कभी मास्टर चेन को देखा hi नहीं है. सारा काम यहाँ पर में संभालता हु. और इसलिए उन्हें लगता है की में hi मालिक हु.

राहुल : ओह्ह! ी सी!

रजनीश : मिस्टर राहुल. आप अपना बैग उतार दीजिये और खाना रेडी है, में लगा देता हु.

राहुल : ओह्ह! तोह मुझे यही रुकना है न तीन महीने?

रजनीश : जी हां! तोह अब कुछ ज़रूरी बात कर ली जाए मिस्टर राहुल?

राहुल : ज़रूरी बात? वेल! कहिये!

रजनीश : तोह आपकी पेमेंट रहेगी 50,000 रूपए एक महीने के हिसाब से. और मिस ख़ुशी पर आप जो भी खर्च करेंगे वो भी आपको दिया जाएगा. ी होप मास्टर ने तोह आपको बता hi दिया होगा?

राहुल : वेट... kyaaaaaaaaaaaa??? पेमेंट??

रजनीश : हां! पेमेंट! आप मिस ख़ुशी को प्रोटेक्ट करेंगे, तोह आपको पाय तोह करना hi पड़ेगा न? बिना पेमेंट के कोण बॉडीगार्ड काम करता है?

राहुल (मैं में) : ोोू भाईसाहब!!! ये सब क्या चल रहा है? कही मास्टर ने जान बुझ के तोह नहीं पेमेंट राखी? मेरी बिज़नेस में हेल्प करने के लिए? यदि ऐसा है तोह थैंक यू मास्टर!

रजनीश : वेल! में आपको ये बताना चाहता हु की कल से आप मिस ख़ुशी के साथ उनके कॉलेज जाएंगे और उनकी क्लास में hi रहेंगे. आप उनका ख़याल रखेंगे और उनकी ज़रूरतों का ख़याल भी रखेंगे. वेल, सरल भाषा में कहे तोह आप उनके पार्टनर रहेंगे. मास्टर चाहते है की कोई उनकी बेटी के साथ घुल मिल सके, उनके दिन और भी khush-haal कर सके. वो यकीन करते है की आप और मिस ख़ुशी एक दूसरे से कई सारे विषयो पर बात चीत कर सकते हो.

Ek...ek मिनट!! लड़की का ख़याल रखना? उसकी ज़रूरतों का? बात चीत? पार्टनर? तोह फिर परीक्षा का क्या? मास्टर ने तोह कहा था की ये सब एक परीक्षा की तरह hi लो. फिर ये सब क्या है? राहुल को ये सब किसी शादी की तरह लगने लगा था.

राहुल : ओह्ह्ह्ह! J...jii!

रजनीश (स्माइल्स) : मिस ख़ुशी थोड़ी गुस्से वाली ज़रूर है, पर वो एक बोहत hi प्यारी लड़की है. मुझे पूरा यकीन है की आप और मिस एक दूसरे के साथ बोहत जल्द घुल मिल जाएंगे.

राहुल : j..ji में कोशिश करूँगा ः..!

रजनीश : मिस ख़ुशी का कॉलेज भी ऑलमोस्ट छूटने वाला होगा, आप चलिए मेरे साथ, आप कॉलेज भी देख लेना.

राहुल : अहम!! Okay!

थोड़ी देरर बाद एक जैगुआर में राहुल और रजनीश दोनों बैठे हुए कॉलेज की और जा रहे थे. और इधर राहुल विंडो से बाहर मुंबई की बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स को देख सोच विचार में पड़ा हुआ था. उससे अपनी माँ निशा और बाकी सभी घरवालों की याद आ रही थी. उससे अभी बोहत आगे जाना था. उसका मक़सद सिर्फ यहाँ आके hi ख़तम नहीं होता. गहरी सास लेकर उसने इन् खयालो को दूर किया और मुंबई की खूबसूरती देखने में व्यस्त हो गया.

थोड़ी hi देरर में कॉलेज भी आ गया. कॉलेज का नाम क्सक्सक्सक्सक्स मेडिकल कॉलेज था और ये मुंबई का टॉप मेडिकल कॉलेजेस में से एक है. पार्किंग तोह एक से बढ़कर एक कार्स से भरी हुई थी, मेरसेदेज़ से लेकर बंव तक, ऑडी से लेके पॉर्श तक. वाक़ई! एक बड़े शहर की बात hi अलग होती है. राहुल देख रहा था की ये सब कार्स यहाँ के लोगो के लिए कितनी नार्मल है और जिस हिसाब से कार्स कस्टोमीसेड थी, राहुल समझ गया था की ये किसी कंपनी की कार्स नहीं है, सबकी अपनी प्राइवेट कार है. पैसा! पैसा हो तोह क्या कुछ नहीं हो सकता?

राहुल आगे की सीट पर रजनीश के बगल से बैठा हुआ था जो ड्राइवर सीट पर थे. राहुल सब कुछ अंदर कार के शीशे से hi देख रहा था.

रजनीश : वैसे!? आप ड्राइव करते हो क्या कार मिस्टर राहुल?

राहुल : उम्! हां! कभी कभी!

रजनीश : आपके पास लाइसेंस है?

राहुल : हां!

रजनीश : चलिए! ये बड़ी hi अच्छी बात है!

तभी एक जानी पहचानी घंटी की आवाज़ आयी मतलब की आखिरी लेक्चर समाप्त हुआ और कुछ hi देरर बाद स्टूडेंट्स निकल कर आने लगे.

कुछ स्टूडेंट्स ग्रुप बना कर निकल रहे थे, हस्सी मज़ाक करते हुए. राहुल को ये सब देख अपने कॉलेज के दिन याद आ गए. जब वो सृष्टि और ऋचा ऐसे hi साथ में कॉलेज की छुट्टी होने के बाद निकला करते थे. उसके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी और ऋचा का चेहरा उसके मैं में आ गया.

"वो रही मिस", बगल में बैठे रजनीश ने ऊँगली दिखाते हुए स्टूडेंट्स के आ रहे झुण्ड की और पॉइंट किया जिस से राहुल का ध्यान भांग हुआ और उसने ऊँगली के डायरेक्शन का पीछा करते हुए देखा तोह पाया की...

.

.

.

.

.

.

.

.


आज के लिए इतना hi गाइस!
 
आप लोगो को ये बताना चाहता हु की में थोड़ा दुविधा में था ,ख़ुशी के करैक्टर को लेकर. मुझे समझ नहीं आ रहा था की उसकी पर्सनालिटी किसी राखी जाए. और बोहत सोच विचार करने के बाद मेने फाइनली डीडे कर लिया है, अब कल अगले अपडेट में आपको उसकी पर्सनालिटी दिखाई दे जाएगी. इसलिए मुझे थोड़ा समय लग गया. धन्यवाद्!
 
बोहत बोहत शुक्रिया भाई! आपने यहाँ आकर अपने विचार रखे एक साइलेंट रीडर होने के बावजूद. आपके पहले कमेंट का थ्रेड में स्वागत है! ी होप आगे भी आप रिव्यु देंगे जब आपका मैं करे.
 
बिलकुल सही कहा आपने. ख़ुशी तोह अभी अभी कहानी में आयी है, तोह एकदम से ये ासुमे करना की वो राहुल की है ये सही नहीं है. भले hi मास्टर राहुल को ख़ुशी के साथ देखना चाहते है पर ये बात ध्यान रखने वाकई है की राहुल अपनी लाइफ के बारे में खुद से hi डीडे करेगा न की किसी और के कहने पर.
 
बोहत बोहत शुक्रिया भाई!

आपने दो दिन में hi 64 उपदटेस पढ़ डाले, यहाँ में खुद होता तोह शायद नहीं पढ़ पाटा. आपका मेरे थ्रेड में स्वागत है भाई.

कहानी आपको इतनी पसंद आयी इस बात की मुझे बेहद ख़ुशी है. आगे भी ऐसे hi इंटरेस्टिंग और थ्रिलिंग उपदटेस आएँगे. बनने रहिएगा!

धन्यवाद्!
 
भाया यदि आप ये कहना चाह रहे है की कहानी में कुछ चीज़े ऐसी है जिनकी आवश्यकता नहीं है तोह आप गलत है. एक्चुअली, कहानी में जितना जो भी दिखाया गया है वो बिलकुल भी फ़िज़ूल नहीं है, और आगे पता चलेगा की ये सब छोटे छोटे सीन्स क्या महत्व रखते है. लोग पढ़ते ज़रूर है, इमेजिन भी करते है पर अक्सर छोटी डिटेल्स भूल जाते है. इसलिए में ब्रैकेट में हमेशा उस अपडेट को मेंशन करता हु जिसमे वो डिटेल दिखाई गयी है, ताकि आप सभी अपनी मेमोरी में वो डिटेल्स वापस से रिफ्रेश कर सके.
 
Back
Top