- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 94,144
महीन किचन मैं स्टोव देखनी लगी ....... उसी पहनी होइ विनोद की शर्ट सी विनोद की परफ्यूम की खुसबू आ रही थी ......... महीन की नंगी जिसम पी सिर्फ विनोद की शर्ट थी ....... अपनी नंगी बदन पी विनोद की शर्ट का टच उसी फील हो रहा था ......... जैसी hi वह इस बारी मैं सोचती तो उसी अजीब सा अहसास होता ........ की एहि शर्ट पहली विनोद की जिसम पी थी ...... और अब उसकी नाज़ुक मुलायम जिसम को टच क्र रही है ............. वह अपनी ख्याल पी खुद hi मुस्करा दी और ोमलते बनानी लगी ............
थोड़ी देर मैं विनोद किचन मैं आज्ञा .......... उसनी फ्लोर पर सारा मेस देखा तो खुद सी hi एक सफाई वाला कपड़ा लय क्र फ्लोर साफ़ करनी लगा ........
विनोद की अन्य की बाद महीन को अब थोड़ा अजीब लग रहा था ....... वह उनकंफर्टबले महसूस क्र रही थी ........... विनोद की लाइट ब्लू कलर की शर्ट की नीची उसकी निप्पल सख्त होनी लगी थय ...... आकर रही थय .......... जितना वह कौन्सियस होती जा रही थी ....... उतना hi उसकी निप्पल्स और भी हार्ड हो रही थय .......... विनोद न्य फ्लोर साफ़ किआ और फिर इधर उधर की बातें कृत्य होय महीन का हाथ बतानी लगा ब्रेकफास्ट बनानी मैं ........ आहिस्ता आहिस्ता महीन का विनोद की मौजूदगी को महसूस करना काम हो गया ....... और वह रिलैक्स होनी लगी .......... और विनोद की बातों पी हंसती होय ब्रेकफास्ट त्यार करनी लगी .........
महीन को अभी भी विनोद की पहनी होइ शर्ट सी उसकी परफ्यूम की खुसबू आ रही थी .............
महीन मुस्करा की बोली ......... विनोद वैसी एक बात है ....... तुम्हारी परफ्यूम की चॉइस बुहत अछि है .......
विनोद मुस्कराया ........ थैंक्स महीन .......
महीन भी मुस्करा दी ..........
ब्रेकफास्ट बनानी की बाद दोनों न्य टेबल पी लगाया ..... और मिल क्र नाश्ता करनी लगी .......... महीन विनोद की बिलकुल सामन्य बैठी होइ थी ........ विनोद की नज़रें भी बार बार महीन की सीने पी जा रही थीं ........ उसी अपनी शर्ट की ऊपर सी महीन की निप्पल्स की निशाँ साफ़ महसूस हो रही थय ....... और वह महीन सी नज़र बचा की उनको बार बार देख रहा था ....... उसी ाचा लग रहा था ............
नाश्ता करनी की बाद महीन बोली ....
महीन ....... विनोद िफ़ यू डोंट मंद तो मैं चेंज करनी सी पहली तुम्हारी शर्ट पहनी होय hi घर की डस्टिंग क्र लोन .......... फिर एक hi बार नहा की चेंज करों गई ड्रेस ........
विनोद मुस्कराया ........ आर्य इस मैं पूछनी की क्या बात है ...... जैसी मर्ज़ी .... जब तक मर्ज़ी पहनो ...... no इशू ........
महीन मुस्कराई ........ और तुम उतनी देर मैं डिशेस वाश क्र की चाय बना लो .........
विनोद मुस्कराया ....... okay बॉस ..........
महीन बनवाती गुस्से सी बोली ....... वह जी बॉस बॉस कहती रहती हो और बनाया होआ घर की माइड है मुझी ........
दोनों इस बात पी हंस पारी ........
महीन न्य डस्टिंग का कपड़ा उठाया और डस्टिंग करनी लगी ........ डस्टिंग कृत्य होय महीन कार्नर मैं बानी होइ छोटी सी शेल्फ पर राखी होइ गणेश जी की मूर्ती की पास पोहंची ......... वह शेल्फ क़रीब 4 फुट ऊंची थी .. .. शेल्फ पर गणेश जी की मूर्ती राखी होइ थी ........... महीन न्य पहली तो सोचा की वह इसी ऐसी hi रहंय दी ........ उसी अपनी फेथ और अपनी घर की माहोल न्य हमेशा इन सुब सी दूर रहना सिखाया था ........... मगर उस मूर्ती की खूबसूरती को देखती होय महीन न्य उसी भी साफ़ करनी का इरादा क्र लय .......... महीन उसी कपड़े की साथ साफ़ करनी लगी ...... मगर फिर उसी ख्याल आया की नहीं ...... यह तो कपड़ा साफ़ नहीं है ......... उसनी एक साफ़ कपड़ा उठाया और उसकी साथ गणेश जी की मूर्ती को साफ़ करनी लगी ......... बुहत hi प्यार सी .......... उसी भी अहसास था की ....... उसकी रेलगिओं का ना सही मगर विनोद की लय तो वह सुब मुकदस है न .......... इसलय उसी लगा की विनोद का दिल रखनी की लय वह यह क्र सकती है बिना कुछ भी और सोची ........ मगर इस सुब की करनी का महीन पी कुछ न कुछ असर ज़रूर हो रहा था .......... उसी बुरा फील नहीं हो रहा था ....... उसी अहसास हो रहा था की दूसरों की रेलगिओं और मुकदस चीज़ों की रेस्पेक्ट ज़रूर करनी चाहिए ...... और यह तो उसकी अपनी रेलगिओं न्य भी उसी सिखाया था ......
महीन गणेश जी की मूर्ती को साफ़ क्र रही थी की विनोद चाय बना की लय आया ........ उसनी महीन को वह सुब कृत्य होय देखा तो मुस्करा की बोलै .......
विनोद ........ क्या बातें हो रही हैं गणेश जी की साथ ....
महीन चूँकि ..... और वह सी हैट की विनोद की तरफ आती होइ बोली ...... कुछ नहीं ...... बस साफ़ क्र रही थी मैं .............. महीन मुस्करा की बोली ........ सॉरी अगर आप को बुरा लगा तो ........
विनोद मुस्कराया .......... आर्य नहीं नहीं ....... ऐसी कोई बात नहीं है ........ आप जो चाहो क्र सकती हो ............
महीन मुस्कराई ........ और फिर दोनों बेथ क्र चाय पीने लगी .........
चाय पीनी की बाद महीन उठ क्र अपनी कमरे मैं चली गए और विनोद कप लय क्र किचन मैं ............ महीन न्य अपनी रूम सी अपनी कपड़े लय और बाथरूम की तरफ जांय लगी ........ विनोद भी किचन सी निकला और महीन को बाथरूम की तरफ जाती होय देखा ...... दोनों की नज़रें मिलीं ....... और महीन थोड़ा सा शर्मा गए ........ और फिर बाथरूम मैं चली गए ............
थोड़ी देर मैं विनोद किचन मैं आज्ञा .......... उसनी फ्लोर पर सारा मेस देखा तो खुद सी hi एक सफाई वाला कपड़ा लय क्र फ्लोर साफ़ करनी लगा ........
विनोद की अन्य की बाद महीन को अब थोड़ा अजीब लग रहा था ....... वह उनकंफर्टबले महसूस क्र रही थी ........... विनोद की लाइट ब्लू कलर की शर्ट की नीची उसकी निप्पल सख्त होनी लगी थय ...... आकर रही थय .......... जितना वह कौन्सियस होती जा रही थी ....... उतना hi उसकी निप्पल्स और भी हार्ड हो रही थय .......... विनोद न्य फ्लोर साफ़ किआ और फिर इधर उधर की बातें कृत्य होय महीन का हाथ बतानी लगा ब्रेकफास्ट बनानी मैं ........ आहिस्ता आहिस्ता महीन का विनोद की मौजूदगी को महसूस करना काम हो गया ....... और वह रिलैक्स होनी लगी .......... और विनोद की बातों पी हंसती होय ब्रेकफास्ट त्यार करनी लगी .........
महीन को अभी भी विनोद की पहनी होइ शर्ट सी उसकी परफ्यूम की खुसबू आ रही थी .............
महीन मुस्करा की बोली ......... विनोद वैसी एक बात है ....... तुम्हारी परफ्यूम की चॉइस बुहत अछि है .......
विनोद मुस्कराया ........ थैंक्स महीन .......
महीन भी मुस्करा दी ..........
ब्रेकफास्ट बनानी की बाद दोनों न्य टेबल पी लगाया ..... और मिल क्र नाश्ता करनी लगी .......... महीन विनोद की बिलकुल सामन्य बैठी होइ थी ........ विनोद की नज़रें भी बार बार महीन की सीने पी जा रही थीं ........ उसी अपनी शर्ट की ऊपर सी महीन की निप्पल्स की निशाँ साफ़ महसूस हो रही थय ....... और वह महीन सी नज़र बचा की उनको बार बार देख रहा था ....... उसी ाचा लग रहा था ............
नाश्ता करनी की बाद महीन बोली ....
महीन ....... विनोद िफ़ यू डोंट मंद तो मैं चेंज करनी सी पहली तुम्हारी शर्ट पहनी होय hi घर की डस्टिंग क्र लोन .......... फिर एक hi बार नहा की चेंज करों गई ड्रेस ........
विनोद मुस्कराया ........ आर्य इस मैं पूछनी की क्या बात है ...... जैसी मर्ज़ी .... जब तक मर्ज़ी पहनो ...... no इशू ........
महीन मुस्कराई ........ और तुम उतनी देर मैं डिशेस वाश क्र की चाय बना लो .........
विनोद मुस्कराया ....... okay बॉस ..........
महीन बनवाती गुस्से सी बोली ....... वह जी बॉस बॉस कहती रहती हो और बनाया होआ घर की माइड है मुझी ........
दोनों इस बात पी हंस पारी ........
महीन न्य डस्टिंग का कपड़ा उठाया और डस्टिंग करनी लगी ........ डस्टिंग कृत्य होय महीन कार्नर मैं बानी होइ छोटी सी शेल्फ पर राखी होइ गणेश जी की मूर्ती की पास पोहंची ......... वह शेल्फ क़रीब 4 फुट ऊंची थी .. .. शेल्फ पर गणेश जी की मूर्ती राखी होइ थी ........... महीन न्य पहली तो सोचा की वह इसी ऐसी hi रहंय दी ........ उसी अपनी फेथ और अपनी घर की माहोल न्य हमेशा इन सुब सी दूर रहना सिखाया था ........... मगर उस मूर्ती की खूबसूरती को देखती होय महीन न्य उसी भी साफ़ करनी का इरादा क्र लय .......... महीन उसी कपड़े की साथ साफ़ करनी लगी ...... मगर फिर उसी ख्याल आया की नहीं ...... यह तो कपड़ा साफ़ नहीं है ......... उसनी एक साफ़ कपड़ा उठाया और उसकी साथ गणेश जी की मूर्ती को साफ़ करनी लगी ......... बुहत hi प्यार सी .......... उसी भी अहसास था की ....... उसकी रेलगिओं का ना सही मगर विनोद की लय तो वह सुब मुकदस है न .......... इसलय उसी लगा की विनोद का दिल रखनी की लय वह यह क्र सकती है बिना कुछ भी और सोची ........ मगर इस सुब की करनी का महीन पी कुछ न कुछ असर ज़रूर हो रहा था .......... उसी बुरा फील नहीं हो रहा था ....... उसी अहसास हो रहा था की दूसरों की रेलगिओं और मुकदस चीज़ों की रेस्पेक्ट ज़रूर करनी चाहिए ...... और यह तो उसकी अपनी रेलगिओं न्य भी उसी सिखाया था ......
महीन गणेश जी की मूर्ती को साफ़ क्र रही थी की विनोद चाय बना की लय आया ........ उसनी महीन को वह सुब कृत्य होय देखा तो मुस्करा की बोलै .......
विनोद ........ क्या बातें हो रही हैं गणेश जी की साथ ....
महीन चूँकि ..... और वह सी हैट की विनोद की तरफ आती होइ बोली ...... कुछ नहीं ...... बस साफ़ क्र रही थी मैं .............. महीन मुस्करा की बोली ........ सॉरी अगर आप को बुरा लगा तो ........
विनोद मुस्कराया .......... आर्य नहीं नहीं ....... ऐसी कोई बात नहीं है ........ आप जो चाहो क्र सकती हो ............
महीन मुस्कराई ........ और फिर दोनों बेथ क्र चाय पीने लगी .........
चाय पीनी की बाद महीन उठ क्र अपनी कमरे मैं चली गए और विनोद कप लय क्र किचन मैं ............ महीन न्य अपनी रूम सी अपनी कपड़े लय और बाथरूम की तरफ जांय लगी ........ विनोद भी किचन सी निकला और महीन को बाथरूम की तरफ जाती होय देखा ...... दोनों की नज़रें मिलीं ....... और महीन थोड़ा सा शर्मा गए ........ और फिर बाथरूम मैं चली गए ............