महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 4 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

अपडेट NO: 14

नेक्स्ट मॉर्निंग महीन उठी और अपनी रूम सी बहार आई ......... विनोद अभी नहीं उठा था ...... महीन जल्दी सी वाशरूम मैं गए और नहा क्र विनोद की hi शॉर्ट्स और अपनी शर्ट पहन क्र बहार आई तो देखा की विनोद अपनी छोटी सी मंदिर की सामन्य खरा होआ पूजा क्र रहा है ...... और टीवी पर बुहत hi मधुर आवाज़ मैं भजन चल रही हैं ...... जिनकी आवाज़ पूरी घर मैं गूँज रही थी ............ महीन मुस्कराई और अपनी गीले बलून की साथ hi विनोद की क़रीब सी गुज़रती होइ किचन मैं आगये .............. और नाश्ता बनानी लगी .......... घर मैं भजन की मधुर आवाज़ गूँज रही थी ....... ऐसी आवाज़ें महीन न्य कभी भी अपनी घर मैं नहीं सुनी थीं ........ ना hi कभी कोई दिलचस्पी थी उसको या उसकी फॅमिली को दूसरी फेथ की इन सुब चीज़ों सी .......... मगर पता नहीं क्यों महीन को ऐसा महसूस हो रहा था की जैसी पूरी घर माँ शान्ति और सुकून की लहर दौड़ रही हो ............ महीन को पता भी नहीं चला की कब वह अपना काम कृत्य होय भजन की आवाज़ की ले मैं आहिस्ता आहिस्ता हिलनी लगी ......... उसी अपन ाजिसम और दिमाग़ बुहत हल्का होता होआ महसूस हो रहा था .................. मगर अपना काम कृत्य होय उसका दिमाग़ उन सुब की तरफ नहीं था ............. इतनी मैं विनोद किचन की दूर पी आया ......

महीन न्य उसी देखा ........ ाजाओ जल्दी नाश्ता तैयार है बस ...

विनोद ......... महीन मैं नहंय जा रहा हों बस अभी आया ........ और तुम्हारी लये पार्षद वहीँ रखा है ........ लय लेना

महीन का जवाब लये बिना hi विनोद नहानी जा चूका होआ था ....... महीन नास्ति की प्लेट्स लय क्र बहार आई ....... और उनको टेबल पी रख दया .... वापिस जाती होय उसकी नज़र गणेश जी की मूर्ती वाली शेल्फ पर पारी .......... जब उसकी पास सी गुज़र रही थी ........ महीन की नज़र आरती वाली थाली पी गए ...... जिस मैं दया जल रहा था ...... कुछ फूल और एक लाडू रखा होआ था .......... महीन की क़दम वहीँ रुक गए ........... गणेश जी की सामन्य ...... भजन की मधुर आवाज़ें उसकी कानों मैं रूस घुल रही थीं ........ महीन न्य गणेश जी की मूर्ती को देखती होय आहिस्ता सी अपना हाथ बढ़ाया ........ और वह लाडू उठा लय ......... और गणेश जी की मूर्ती की तरफ देखती होय ....... बिना कुछ भी सोचे ..... वह लाडू कहानी लगी ........ दूसरी बाईट मैं लाडू मुंह मैं दाल की वह किचन की तरफ बढ़ गए ...........

चाय की कप ला क्र टेबल पर बेथ गए और विनोद का वेट करनी लगी ...... टीवी पर चल रही होय भजन को सुनती और देखती होय ......... इतनी मैं विनोद बाथरूम सी बहार निकला ... उसनी शॉर्ट्स पहने होय थय और अपनी बलून को अपनी टॉवल सी ड्राई क्र रहा था ..... वह अपनी बैडरूम की तरफ बढ़ा तो महीन न्य आवाज़ दी ....

महीन ... विनोद....... पहली नाश्ता क्र लो ....... ठंडा हो रहा है

विनोद न्य महीन की आवाज़ सुनी और ऐसी hi उसकी तरफ आज्ञा ........ टॉवल सोफे पर फेंका और सिर्फ शॉर्ट्स पहनी होय hi आ क्र दिंनिंग टेबल पर बेथ गया ........ महीन उसकी ऊपरी जिसम को देख क्र घबरा गए .........

महीन हंसती होय बोली ... बिहाराम आदमी ..... ऐसी hi आ गए हो तुम तो ...... कुछ पहन तो लेती ......

विनोद ..... ओह ी ऍम सॉरी महीन .......... ख्याल नहीं रहा ...... अभी आता हों पहन की .........

विनोद यह कह क्र उठा तो महीन को अहसास होआ की उसनी बुहत hi रौदे बात की है ........ वह फौरन hi बोली .....

महीन ...... नहीं अब बेथ जाओ और करो नाश्ता ...... पहली hi ठंडा हो रहा है ........

विनोद मुस्करा क्र उसकी सामन्य बेथ गया और महीन न्य नाश्त्य की लय प्लेट उसकी तरफ बढ़ा दी .. नाश्ता करनी लगा ...... उसका ध्यान टीवी पर था ...... और महीन का उसकी नंगी जिसम पी ....... विनोद का सांवला जिसम .... बुहत सॉलिड .... चेस्ट की मसल्स बुहत टाइट और प्रॉमिनेंट थय ....... निप्पल्स छोटी छोटी .. काली और बिलकुल सख्त ........ पॉइंटेड ....... शोल्डर मज़बूत और चौराय ............ बाज़ूओं की मसल्स भी मज़बूत ..... बुहत सॉलिड जिसम लग रहा था विनोद का ......... महीन नाश्ता कृत्य होय नज़रें बचा क्र विनोद की जिसम को hi टाक रही थी ......... विनोद को पता था मगर वह उसी अहसास नहीं होनी देना चाहता था .......... विनोद को देखती होय महीन विनोद की बॉडी को आसिफ सी कपड़े क्र रही थी ..... जिसका रंग बिलकुल सुफैद था ..... बॉडी फिट थी मगर विनोद की तरफ मस्कुलर और सॉलिड नहीं दिखती थी ......... अगर रंग देखा जाय तो विनोद आसिफ की कपरिसों मैं काला hi लगता था ...... मगर फिर भी उसकी बॉडी काफी अट्रैक्टिव थी ........ महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी .......... सुच मैं बुहत hi मज़बूत जिसम है विनोद का ........... पता नहीं यार क्यों ऐसी शानदार बॉडी होती है इन हिंद्डु मर्दून की .......... कभी मैं न्य ऐसी जिसम की साथ किसी अपनी मज़हब वाले को नहीं देखा ........... ऐसी hi मुस्लिम्म लड़का इन काफिर मर्दो पी नहीं मार्टिन ..... कुछ तो ख़ास होता hi है इन काफिरों मैं ............... यह मुझी क्या हो रहा है ....... मैं कैसी बातें सोच रही हों ............ वह खुद सी बोली .... और दिल hi दिल मैं खुद सी शर्मिंदाह भी होइ .............

विनोद ....... महीन अब तुम्हारा पाऊँ कैसा है ...

विनोद की आवाज़ सुन क्र महीन चौंक क्र अपनी खयालो सी बहरा आई .... अहहं .... हाँ ..... हाँ .... ठीक है अब बिलकुल ..... बकज़ ऑफ़ योर केयर ..... विनोद ... महीन मुस्कराई .... उसका चेहरा लाल हो रहा था ....

फिर महीन नाश्ता क्र की उठी और प्लेट्स किचन मई रख की अपनी रूम की तरफ चली गए ....... मगर जाती होय विनोद की पिच्य सी उसकी सॉलिड कमर पर नज़र डालनी सी खुद को ना रोक सकीय ......

ऊऊफफफफफफफफफ ...... क्या हो गया है मुझी ...... महीन खुद सी बोली और जल्दी सी चेंज करनी लगी ऑफिस जांय की लय .........

शाम मैं घर आय और दोनों चेंज करनी अपनी अपनी रूम मैं चली गए ......... महीन न्य अपनी घर की कपड़े निकली ....... फिर उसी विनोद की बात याद आई ....... की उसनी उसी कहा था की वह घर पी भी कम्फर्टेबले कपड़े पहन सकती है क्यों की पहली भी वह इसी वजह सी स्टूल सी गिरी थी ............. महीन न्य अपना नाईट पजामा और शर्ट निकाली और उसी पहन लय ........ आज विनोद की शॉर्ट्स नहीं पहनी थय तो उसकी लेग्स कवर थीं पूरी ....... और शर्ट तो वही थी .... हाफ स्लीव और थोड़ा चेस्ट सी ओपन ......... महीन लाउन्ज मैं आई और खाना लगानी लगी ....... विनोद आया तो उसनी आज भी शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी होइ थी ........... मगर वह महीन को उस लॉन्ग पजामा मैं देख क्र थोड़ा मायूसी वाला चेहरा बनानी लगा ....... जो महीन न्य नोट क्र लय .........

महीन मुस्करा की ....... क्या होआ तुम्हारी मूड को .......

विनोद ........ वह आज मेरी वाले शॉर्ट्स नहीं पहनी तुम न्य .....

महीन उसकी बात समझ क्र मुस्कराई और उसी तैसे करती होइ बोली ............. यू can't बे लकी एवरीडे ............ हहहह ...........

विनोद न्य फिर सी मुंह लटकानी की एक्टिंग शुरू क्र दी .... और महीन हंसनी लगी ............. फिर दोनों न्य हंसी मज़ाक़ कृत्य होय खाना खाया ....... महीन अब काफी हद तक कम्फर्टेबले हो चुकी होइ थी विनोद की साथ ..... और इसी लय उसको तैसे भी करनी लगी थी और मज़ाक़ भी .......
 
नेक्स्ट मॉर्निंग

महीन उठी और नाहा क्र निकली तो विनोद अभी भी नहीं जगा था ..... महीन न्य मुस्कराती होय उसका दूर नॉक क्या ........ और विनोद को आवाज़ दी क्र किचन मैं आगये ...... थोड़ी देर मैं विनोद अपनी रूम सी निकला और भागती होय किठें की दूर पी आया ........

महीन हंसती होय ..... उठ गए देखो तो कितनी देर क्र ली है ...... रात भर क्या प्रिय सी बातें कृत्य रहती होय ....... महीन हंसती होय बोली ........

विनोद ........ हहहह ....... आर्य नहीं यार बस आँख नहीं खुली ... मैं जल्दी सी नहा क्र आता हों ....... तुम प्लीज आरती की थाली तो प्रेपर क्र दो ...... यह बोल क्र विनोद बाथरूम मैं भाग गया ........

विनोद की बात सुन क्र महीन का दिल ज़ोर सी धारक उठा ..... वह यह सुब एक्सपेक्ट नहीं क्र रही थी की विनोद उस सी यह करवाय गए .... और वह अपनी फेथ की अगेंस्ट कुछ क्रय गई ....... उसी थोड़ी झिझक और अंदर सी गिल्ट फील रही थी .......... मगर फिर भी विनोद का दिल रखनी की लये ..... वह गणेश जी की मूर्ती की तरफ बरही ..... वह राखी होइ थाली उठा क्र किचन मैं लाइ ..... और चाँद फूल और मिठाई का एक टुकड़ा उस मैं रख दया ......... फिर उसी कुछ ख्याल आया .......... की उसनी अपनी लय पार्षद की मिठाई नहीं राखी ..... और अगर वह ऐसा क्रय गई की अपनी लय नहीं रखी गई तो विनोद को बुरा लगी गए और उसी ऐसा लगी गए की जैसी वह उसी पार्षद ज़बरदस्ती खिला रहा है ........ विनोद को हर्ट ना करनी का सोच क्र महीन न्य थाली मैं मिठाई का दूसरा टुकड़ा भी रख दया ........ और थाली वहीँ किचन मैं hi रख ली ......... यह सुब कृत्य होय उसकी दिल की धरकन बुहत तेज़ हो रही थी ..... और उसी अपना जिसम और हाथ कांम्पत्य होय महसूस हो रही थय ........ जल्दी सी इस काम सी फ़ारिग़ हो कर महीन नाश्ता बनानी लग गए .......... और फिर नाश्ता टेबल पर रख की विनोद का वेट करनी लगी ....... यह उसकी रूटीन बन गए होइ थी की वह अपना खाना विनोद की अन्य पी hi शुरू करती थी ...... पता नहीं क्यों ......

थोड़ी देर मैं विनोद अपनी शॉर्ट्स और संदू बुनयान पहनी होय आया और जल्दी सी गणेश जी की छोटी सी मंदिर की सामन्य खरा हो की पूजा करनी लगा जल्दी जल्दी ........... महीन मुस्कराती होइ उसी देख रही थी .......... जल्दी सी पूजा क्र की विनोद न्य पार्षद का लाडू मुंह मैं डाला और टेबल पी आज्ञा ............... नष्त्य की लय .......

महीन उसकी तरफ प्लेट बढ़ती होइ बोली ................ जल्दी उठ जाय करो न गणेश जी क्या सोचें गए की कैसी भागती भागती पूजा करनी आती हो तुम ...........

विनोद उसकी बात पी हंसा ........ हाँ कह तो ठीक रही हो तुम ..............

महीन की नज़रें उसकी जिसम पर थीं ........ वह उसी फिर सी तैसे करनी की लय बोली ........ शुक्र है आज तुमको कुछ पहन न्य का ख्याल आज्ञा .......

विनोद मुस्कराया ...... और उसी आँख मारती होय बोलै .......... सिम्स लिखे समवन इस मिसिंग समथिंग ............. हाहाहाहा

महीन ब्लश करनी लगी .......... जी नहीं .......... बल्कि सुच तो यह है की समवन वास् मिसिंग समथिंग लास्ट इवनिंग ............ हहहह

विनोद महीन की बात समझ क्र फौरन hi मुंह बसूर्ती होय बोलै ........ हाँ रियली ............. ी वास् मिसिंग समथिंग ........... महीन वैसी दोबारा कब गिरो गई तुम स्टूल सी ..........

महीन नाश्ता ख़तम क्र चुकी थी वह विनोद की बात पी हंसती होइ उठी और विनोद की शोल्डर पी हल्का सा एक थप्पड़ मारती होइ बोली ......... इन योर ड्रीम्स ओनली ....... बुहत बिहाराम होती जा रही हो तुम ............ रेमेम्बेर वे अरे कलगुएस ओनली .........

विनोद हंसनी लगा ........

महीन किचन सी हो कर अपनी रूम मैं जांय लगी तो विनोद बोलै ....... महीन वह तुम्हारा पार्षद ...........

महीन गणेश जी की मूर्ती की सामन्य रुक गए ........... वह पारी होइ थाली मैं रखे होय मिठाई की टुकड़ी को देखा .......... फिर विनोद की तरफ देखा .......... वह उम्मीद भरी नज़रों सी महीन को hi देख रहा था .......... महीन न्य वह मिठाई का टुकड़ा उठाया और उसी विनोद की तरफ देखती होय उसी मुंह मैं दाल लय ................ और जल्दी सी अपनी रूम मैं चली गए तैयार होनी .................

ऑफिस सी वापिस आ की महीन न्य अपनी रूम मैं चेंज क्या ...... और फिर वाशरूम की तरफ गए .......... दरवाज़ा बंद था ...... महीन वेट करनी लगी ...... थोड़ी देर मैं विनोद वाशरूम सी बहार आया और महीन को देखा ......... महीन मुस्करा की उस सी नज़रें चुराती होइ अपनी उतारी होय कपड़े लय क्र वाशरूम मैं चली गए ............ वाशरूम सी फ़ारिग़ हो क्र महीन न्य अपनी लौंडरी बकेट सी अपनी कपड़े निकल क्र वाशिंग मशीन मैं दाल डाई ....... फिर उसी कुछ ख्याल आया ........ उसनी विनोद की बकेट खोली ..... उसकी धोनी वाले कपड़े भी रखी होय थय ........... महीन न्य कुछ सोचा और फिर उनको भी उठा क्र अपनी कपड़ों की साथ hi धुलनय की लय दाल दया .............. उसी ाचा नहीं लगा की विनोद न्य उसकी लय इतना कुछ क्या है ....... उसकी कपड़े तक खुद hi वाश क्र डाई हैं तो अब वह उसकी कपड़ों को ऐसी hi चोर दी ...........

अब यह डेली की मॉर्निंग रूटीन होती जा रही थी की विनोद महीन को पूजा की लय कुछ न कुछ हेल्प मांगता .......... आरती की थाली बनाना तो जैसी अब महीन की लय रूटीन का काम हो गया होआ था ...... जैसी वह अब उसकी hi ज़िम्मा दरी हो ............ शुरू मैं विनोद की पूजा मैं उसकी हेल्प करनी मैं महीन को थोड़ा गिल्ट फील होता था ....... मगर आहिस्ता ाहसिता उसका गिल्ट काम होता जा रहा था .......... उसकी दिल मैं यही ख्याल रहता की वह यह सुब कुछ सिर्फ विनोद की लय क्र रही है ............. कभी दिंनिंग टेबल पी और कभी सोफे पी बैठी होय वह विनोद को पूजा कृत्य होय देखती .......... उसकी नज़रें भी गणेश जी पी जैम जातीं ........ वीर्य वीर्य उसी भी अपनी अंदर शान्ति सी फील होती ............ काफी रिलैक्स फील करती पता नहीं क्यों .......... आहिस्ता आहिस्ता वह इन सुब बातों की आदि होती जा रही थी ............... एक और बात जिसकी उसी विनोद न्य आदत दाल दी थी वह था उसका सिर्फ शॉर्ट्स मैं घर मैं घूमना .......... पहली तो वह उसी थोड़ा रोकती मगर फिर उसनी मन करना चोर दया ............. मगर जब भी वह बिना शर्ट की उसकी सामन्य फिर रहा होता तो महीन अपनी नज़रों को उसकी जिसम को देखनी सी बाज़ नहीं रख पाती थी ........... वाशिंग भी अब दोनों hi एक दूसरी की करनी लगी ....... अगर महीन कपड़े वाश करती तो वह विनोद की कपड़े भी मशीने मई दाल देती ....... और विनोद मशीन लगाता तो वह महीन की कपड़े दाल देता इन्क्लूडिंग महीन की ब्रा और पंतय ........ दोनों मैं इतनी ोपेन्नेस्स हो चुकी होइ थी ...... अब महीन कुछ भी झिझक या शर्म महसूस नहीं करती थी .......... काफी हद तक उसकी साथ रहंय और डेली रूटीन मैं कम्फर्टेबले होती जा रही थी ......... और इसकी साथ साथ विनोद की रेस्पेक्ट भी बढ़ती जा रही थी उसकी नज़र मैं ......... क्यों की हंसी मज़ाक़ की इलावा उसनी कभी भी महीन को टच करनी की कोई कोशिश नहीं की थी ............ और हमेशा महीन की रेस्पेक्ट करता और उसकी केयर करता था ............

थर्सडे इवनिंग को वह विनोद की साथ टीवी लाउन्ज मैं बैठी चाय पी रही थी .............

महीन ........ विनोद वह मुझी एक बात करनी थी .......

विनोद ...... हाँ हाँ बोलो ......

महीन थोड़ा झिझकती होय ...... विनोद ..... वह नीतू कुछ बात क्र रही थी ........

विनोद ........ अब क्या बोल दया उसनी ........

महीन ....... कुछ नहीं वह बस यह कह रही थी की मुझी अपनी ऑफिस की ड्रेसिंग थोड़ी चेंज करनी चाहिए ...........

विनोद महीन की तरफ देखती होय ....... क्या मतलब

महीन अपनी नज़रें चुराती होइ .......... उसका मतलब है की मुझी थोड़ी वेस्टर्न और मोड़ कपड़े पहन न्य चाहिएं ..........

विनोद ........ हम्म ........ सही पूछो तो वह बिलकुल ठीक कह रही है ....... यह तुम्हारी अपनी लय भी ाचा है और करियर की लय भी ज़रूरी है ..... ी होप तुम अंडरस्टैंड क्र रही हो मेरी बात को ......

महीन ....... हम्म्म ..... मैं समझ रही हों ........ पर ..... वह ..... आसिफ ...

विनोद ...... आर्य यार फिर सी आसिफ ........... यार उसको यह बात बतानी की ज़रूरत hi क्या है ............

महीन .......... हम्म्म ......... लकिन विनोद फिर भी .......... यहाँ की कल्चर की मुताबिक़ ड्रेसिंग कुछ ज़्यादा नहीं हो जाय गई .........

विनोद .... नहीं कुछ भी ज़्यादा नहीं है ........ जब यहाँ रह रही हैं तो यहाँ की कल्चर को भी अडॉप्ट करना हो गए न ........

महीन वीर्य सी कुछ सोचती होय .......... हम्म्म ......

विनोद ....... तो कब जाओ गई शॉपिंग करनी ......

महीन आहिस्ता सी .......... वह कल वीकेंड है न तो नीतू न्य कल ऑफिस की बाद जांय का बोलै है और जेएनय भी साथ जा रही है ........ मैं न्य उसी बोलै था की मैं विनोद सी पूछ की बताऊँ गई जांय का ... महें विनोद सी ऐसी बोल रही थी जैसी उस सी इजाज़त मांग रही हो नीतू की साथ जांय की ........

विनोद ...... तो फिर ........ जा रही हो उसकी साथ ......

महीन ...... विनोद की तरफ देखती होइ ............ अगर तुम बोलो तो ......

विनोद महीन को तैसे कृत्य होय बोलै ...... और अगर मैं मन क्र डॉन तो ..........

महीन मुस्कराई ........ तो नहीं जाऊँ गई ..........

विनोद ........ क्यों ....??? मेरी रोकनी पी क्यों रुक जाओ गई ??

महीन मुस्कराई .......... इस लय की तुम इस घर की हेड हो न तो तुम्हारी बात मान नई तो पारी गई hi न .............

विनोद को एक झटका सा लगा महीन की बात सुन क्र ........ और ाचा भी लगा ........... मज़ाक़ क्र रहा था मैं .......... ज़रूर जाओ ................... बल्कि अगर तुम कहो तो मैं भी चलता हों साथ ..........

महीन हंसी और थोड़ा शर्माती होइ बोली ........ नहीं जी .......... कोई ज़रूरत नहीं है ....... यह सिर्फ गर्ल्स की शॉपिंग है ............ तुम्हारा कोई काम नहीं है ........

विनोद मायूस मुंह बनाती होय ........... ाचा ठीक है .......... लकिन एक शर्त पी तुमको उनकी साथ जांय की इजाज़त डॉन गए ...........

महीन उसी घूरती होइ .......... अब वह क्या .......

विनोद ...... तुम अपनी शॉपिंग मुझी दिखाओ गई आ की ......

महीन हंसनी लगी और उसी तैसे करती होइ बोली .......... सोचूँ गई .............
 
नेक्स्ट डे

ऑफिस टाइम ख़तम होनी की बाद महीन विनोद की पास जाती है .......

महीन ...... विनोद मैं जा रही हों नीतू और जेनी की साथ .....

विनोद ... ठीक है ..... हैवे ा गुड टाइम और जल्दी आजाना ....

महीन सर हिलाती होय ....... हाँ ठीक है ...... उसी विनोद का ऐसी बोलै ाचा लगा था .......... अभी दोनों बातें क्र hi रही थय की नीतू और जेनी उनकी पास यज्ञ ......

नीतू मुस्कराती होइ ....... विनोद महीन को थोड़ा टाइम हमारी साथ भी स्पेंड क्र लेनी दया करो .......

विनोद हंसा.... तो मैं न्य कब रोका है ....

जेएनय उन दोनों को तैसे करती होइ बोली ........ विनोद वे बोथ अरे टेकिंग योर महीन आउट फॉर शॉपिंग .......

महीन बलुशेड ...... और विनोद भी मुस्कराया .... हाँ हाँ क्यों नहीं

नीतू ...... फ़िक्र नहीं करना तुम टाइम सी घर पोहंचा डैन गए हम तुम्हारी महीन को .....

महीन न्य नीतू की बाज़ू पी हल्का सा थप्पड़ मारा ....... शर्म करो नीतू .........

जेएनय ...... विनोद विल यू लिखे तो शेयर योर स्पेशल लाइक्स फॉर हेर ड्रेसेस ......

विनोद हंसा ....... no no ..... जो महीन का दिल करता है वह लय लय ..... जिस मैं वह कम्फर्टेबले फील क्रय .......

जेएनय तैसे करती होइ हंसी ....... वववववववव..... व्हाट ा केयर एंड अंडरस्टैंडिंग बिटवीन यू तवो ..........

महीन शर्मा गए .........

सुबही हंसती होय ऑफिस सी निकले और महीन, नीतू और जेएनय की साथ शॉपिंग मॉल मई आगये ........... लंदन मई अन्य की बाद शॉपिंग मॉल मई शॉपिंग की लय अन्य का उसका पहला मौका था ..... वह काफी इम्प्रेस्सेड हो रही थी वह की एनवायरनमेंट सी ......

जेएनय ...... सो फ्रॉम टुडे ...... आईटी विल बे ा चेंज ऑफ़ योर ऑफिस वियर महीन, एंड no मोरे शलवार कमीज फ्रॉम टुमारो

महीन वीर्य सी मुस्कराई ........ लकिन मैं कुछ भी बुहत ज़्यादा बोल्ड और रेवेलिंग नहीं लोन गई .......... यह ख्याल रखना .....

नीतू .... हाँ हाँ वे क्नोव यार ...... तुम फ़िक्र नहीं करो .... तुम देखना ऑफिस मैं सब की नज़रें तुम पर hi हों गई ..........

महीन मुस्कराई ........

जेनी महीन को कोहनी मारती होइ बोली ........ और घर मैं विनोद की भी ..........

महीन ........... इतस तू मच यार ....... हे इस जस्ट माय कलेग .... एंड अपार्टमेंट मात ओनली ... ... नथिंग ेल्स ..........

नीतू न्य तैसे क्या ....... तो अपार्टमेंट मातेस कब बेड़माटेस बन जाईं इसकी किसी खबर .............. जेनी हंसनी लगी ........ और महीन शर्मा गए ........

कापरी देखती होय नीतू न्य एक नेवी ब्लू कलर का ब्लेजर उठाया ....... इसी चेक करो ..... ी थिंक यह ज़बर्द्सस्त है ऑफिस की लय .... पहन की देखो इसी .........

महीन न्य वह ब्लेजर पहना ..........

जेएनय ...... इतस कलर इस सो कूल ........ यू अरे लुकिंग इनक्रेडिबल इन थिस .....

नीतू ....... यस ........ चलो अब इसकी साथ पहन न्य की लय कुछ देखती हैं ........

जेएनय न्य एक सॉफ्ट, क्रीम कलर्ड टॉप निकला जिस पी हलकी सी लास डिटेलिंग होइ थी ............ और बोली ........ ी थिंक आईटी विल कॉम्प्लीमेंट थे ब्लेजर बेऔतिफुल्ली ........

महीन ...... लकिन यह बुहत ज़्यादा मोडरें लुक दी रहा है ....... मुझी नहीं लगता की मैं इसी पहन सकें गई ..........

नीतू ....... तुम इसी तरय तो क्र की देखो ........ नीतू महीन को तरय रूम की तरफ पुश करती होइ बोली ...........

महीन अंदर गए ...... जा की अपनी शर्ट उतारनी लगी ........ महीन को इसतरह सी मॉल की शॉप मैं ड्रेस तरय कृत्य होय अजीब सा लग रहा था ...... थोड़ी झिझक महसूस हो रही थी ........ मगर उसनी अपनी शर्ट उतारी ...... और फिर अपनी ब्लैक कलर की ब्रा की ऊपर सी वह क्रीम कलर का टॉप पहन लय .......... और उसकी साथ hi उसकी ऊपर वह ब्लू ब्लेजर ........... महीन न्य खुद को आंय मैं देखा तो खुद की तारीफ कए बिना नहीं रह सकीय ........ और उसकी होंठों पी हलकी सी मुस्कराहट फैल गए .......... अभी महीन खुद को देख रही थी की ट्रायल रूम का दरवाज़ा नॉक होआ ..........

नीतू ...... महीन यह भी लो ......

महीन न्य दरवाज़ा खोला तो नीतू न्य उसी एक पंत दी पहन न्य को .... ब्लैक कलर की ........ इसी भी साथ hi पहनो ......

महीन न्य उसकी तरफ देखा और फिर दूर बंद क्र लय .......... महीन न्य अपना ट्रॉउज़र उतर की वह पंत पहनी ...... टैलोरेड ब्लैक ट्रॉउज़र था ..... जो उसकी जिसम पी बुहत फिटिंग मैं था ........... उसकी हिप्स और निचली जिसम की कॉन्टूर्स को प्रॉमिनेंट क्र रहा था ............ पैन्ट्स सामन्य सी बिलकुल फ्लैट थी ज़िप वाले हिस्से मैं ....... और ाग्य सी भी बुहत hi सेक्सी लुक दी रही थी .......... महीन न्य पिच्य मुद की देखा तो उसकी हिप्स उस पंत मैं बहार को निकली होय लग रही थय ........... महीन शर्मा गए .......... फिर ब्लेजर पहन क्र बहार आई तो नीतू और जेनी दोनों की मुंह खुली की खुली रह गए ...........

नीतू ....... वंडरफुल ........ यू अरे लुकिंग जस्ट लिखे ा प्रोफेशनल लेडी ..........

जेनी ...... यस इतस वंडरफुल ......... आईटी इस सिलेक्टेड ....... नाउ लेटस मूव अहेड ...... फॉर समथिंग ेल्स ......

महीन वह ड्रेस चेंज क्र की आई ...... और फिर उनकी साथ कुछ और कपड़े देखनी लगी ........

कुछ देर ढूंढ़नी की बाद जेनी न्य महीन को एक वाइट शर्ट निकाल की दी ....... जिसकी सामन्य बटन्स लगी होय थय ........

महीन ....... हम्म ........ लुक्स गुड ........

नीतू न्य एक लॉन्ग स्कर्ट उठाई .......... ी थिंक इसकी साथ यह बुहत अछि लगी गई ...........

महीन ........ नहीं नहीं ........... मैं स्कर्ट नहीं पहनो गई .......

नीतू ....... आर्य क्या हो गया है यार ......... यह कोनसी मिनी स्कर्ट है ..... लॉन्ग पेंसिल स्कर्ट है जो बुहत एलिगेंट लगी गई तुम पी ........ एक बार पहन की तो देखो .......

महीन झिझकती होय फिटिंग रूम मैं गए ........ और अपनी कमीज उतार की वह शर्ट पहनी ...... बिलकुल फिटिंग मैं थी ..... उसकी जिसम पी .......... और फिर नीची जब उसनी स्कर्ट पहनी तो वह उसकी नीज सी नीची hi थी ...... मगर उसी समझ नहीं आ रही थी की वह कैसी ऑफिस मैं यह स्कर्ट पहन सकती है ........... फिर भी वह उसी पहन क्र बहार आई ........ झिझकती होय ............

नीतू ........ वह ........... मैं न्य कहा था न की बुहत अछि लगी गई तुम पी यह ड्रेस ..........

महीन ाहसिता सी बोली ....... नहीं नीतू ...... लकिन मैं यह स्कर्ट नहीं लून गई ........... ी ऍम सॉरी ...........

जेएनय भी उसकी झिझक को समझ रही थी ........... इतस okay .... रिलैक्स .......... लकिन इसकी साथ ात लीस्ट तुम ा लाइन स्कर्ट तो लय सकती हो न ........ फुल लंघत की ....... यह देखो ..........

उसनी महीन को एक और स्कर्ट दिखाई .......... और उसी तरय करनी को बोलै ........ यह फ्रॉक टाइप की स्कर्ट थी ....... और उसकी एंकल तक जा रही थी ........... महीन को यह ठीक लगी ........ और उसनी इस शर्ट और स्कर्ट को okay क्र दया ..............

ऐसी hi नीतू और जेनी की बार बार इसरार करनी पर महीन न्य 2 ब्लाउज और जीन्स भी खरीद ली ............. उसी समझ नहीं आ रही थी की वह यह कपड़े ऑफिस मैं कैसी पहनी गई ..........

यह फॉर्मल शॉपिंग करनी की बाद वह मॉल मैं hi एक कॉफ़ी हाउस मैं कॉफ़ी की लय बेथ गए .............. और गुप्षुप कृत्य होय कॉफ़ी पीने लगी ........

जेनी महीन को तैसे कृत्य होय ......... महीन ी ऍम सूरे तहत विथ ठोस नई आउट फिट्स यू अरे गोइंग तो बे ट्रनिंग हेड्स ात थे ऑफिस ........ हहहहह ....

महीन बलुशेड ........

नीतू मुस्कराई ....... एंड ी ऍम सूरे की निक भी अब महीन को ज़्यादा सी ज़्यादा देर तक अपनी पास रोके गए असाइनमेंट्स की बहानी ............ ाःहाहा .............

दोनों हंसनी लगीं ........ और महीन शर्मा रही थी उनकी तैसिंग सी ........ बस भी करो तू दोनों .............. महीन बोली ............

अचानक महीन को आसिफ का ख्याल आया ............ नीतू ....... मुझी लगता है की आसिफ को मेरी यह ड्रेस चेंज पसंद नहीं आय गई ........ वह काफी कन्सेर्वटिवे है न ......

जेनी न्य अपना हाथ महीन की हाथ पी रखा ........ महीन तुम कुछ भी ग़लत नहीं क्र रही हो ........ जस्ट यहाँ की एनवायरनमेंट की मुताबिक़ ऑफिस की ड्रेसिंग को अडॉप्ट क्र रही हो .........

नीतू ....... बिलकुल ठीक ...... और इस मैं कुछ भी खराबी नहीं है जो तुम न्य सेलेक्ट कए हैं ड्रेस ....... कुछ भी एक्सपोसिंग ड्रेसेस नहीं हैं .... और जिस एनवायरनमेंट मैं अब तुम हो तो तुमको इसकी मुताबिक़ अडॉप्ट करनी और खुद को इवॉल्वे करनी का पूरा हक़ है ........

महीन .......... ठीक कह रही हो ...... लकिन अगर आसिफ को पता चला तो .....

नीतू ....... कोण बताय गए उसी ........ ??? तुम या विनोद ....... ???

महीन ............. हम्म्म्म ...... ठीक कह रही हो ........

जेनी ........ महीन यू अरे ा मातुरे एडल्ट एंड इंडेपेंडेंट लेडी ........ तुम को थोड़ा बुहत एन्जॉय करनी और खुद की बारी मैं सोचनी का पूरा राइट है .........

महीन .......... हम्म्म .......... ठीक है ........... लकिन यह मेरी लये बुहत बरी तब्दीली है ........

नीतू ........... बुहत बरी नहीं ..... अभी तो यह स्टार्ट है तुम्हारी तबील होनी का ........... हहहह ...........

सुब न्य कॉफ़ी ख़तम क्र ली ........... तो नीतू बोली ........ नाउ let's मूव फॉर थे सेकंड राउंड ऑफ़ आवर शॉपिंग .......

महीन ......... सेकंड राउंड ...... ??? अब और क्या रह गया है लेनी वाला ..........

नीतू ........ के ों यार ......... क्या घर मैं तुम हर वक़्त इसी शलवार कमीज मैं hi रहो गई ........ तुमको कुछ न कुछ कम्फर्टेबले ड्रेस लेना चाहिए .............

महीन ........ नहीं मेरी पास है न घर मैं पहन न्य की लय लाउन्ज वियर ........ शर्ट और पजामा ........... वह पहन लेती हों .......

नीतू ....... रियली ......... इन्फ्रोन्ट ऑफ़ विनोद ??????

महीन थोड़ा शरमाई ........... ठोस अरे फुल्ली कवरिंग ........ नॉट शार्ट ओने यार ............

नीतू ....... okay ...... okay ........ लकिन मेरा ख्याल है की तुम को थोड़ा बुहत तो ओपन होना hi चाहिए ........... ऐसी तो नहीं हर वक़्त इतनी ज़्यादा कपड़ों मई रहा जा सकता न ...........

वह दोबारा सी एक शॉप मई आचुकी होय थय ......... नीतू न्य महीन को एक सॉफ्ट, फ्लोवी मैक्सी ड्रेस निकल क्र दी ........ लाइट सॉफ्ट कॉटन फैब्रिक की ..... जो उसकी नीज तक थी ....... और ऊपर सी व्- नेकलिने और शार्ट स्लीव्स थीं ............

महीन .......... नीतू .......... Isn't तहत ा बिट तू रेवेलिंग फॉर होम ......... स्पेशलय इन प्रजेंस ऑफ़ विनोद ..... ???

जेनी ......... रेवेलिंग ?????? प्लीज महीन ...... अब खुद को विनोद की साथ एडजस्ट करो ....... कब तक तुम दोनों ऐसी अजनबिओं की तरह रहो गए .......... यू बोथ अरे एडल्ट्स .......... और रिलैक्स और रेवेलिंग ड्रेसेस मैं होती होय भी तुम लोग खुद पी कण्ट्रोल रख सकती हो ...........

महीन न्य उसकी बात सुन क्र सर झुका लय ........ और नीतू न्य वह मैक्सी ट्राली मैं रख दी ...........

फिर नीतू न्य महीन की लय एक सॉफ्ट बॉडी हग्गिंग ऑफ शोल्डर टॉप और शॉर्ट्स सेलेक्ट कए .......... महीन न्य फिर ऐतराज़ क्या ....

नीतू ......... ी क्नोव ........... जब भी तुम यह पहनो गई तो विनोद तुम पर सी नज़रें नहीं हटा पाय गए ........

महीन शरमाई .......... मैं यह नहीं पहन सकती ............ ी डोंट वांट तो गिव हिम रॉंग सिग्नल्स ..........

जेनी .......... यू अरे राइट ............ बूत बीइंग सुच ा हॉट वुमन .......... ी थिंक ा लिटिल तैसिंग विल नॉट हर्ट एनीवन ............. इतस जस्ट फन तो सरप्राइज हिम .............

नीतू .......... यार तुमको एन्जॉय करना चाहिए ........ जब तुम वापिस चली जाओ गई इंडिया तो एक बार फिर सी उसी माहोल मैं रहो गई ....... तब तुम इन सुब चीज़ो को मिस करो गई ...........

नीतू न्य महीन की लय एक और लुंगी सूट/ नाईट ड्रेस सेलेक्ट क्या ...... जो शर्ट और शॉर्ट्स की साथ था ....... शर्ट की बुहत hi छोटी स्लीव्स थीं ...... और काफी डीप व् नैक थी विथ फ्रंट बटन्स ....... जो उसकी बूब्स की दरम्यान सी शुरू होती थय ........... उसका सीना और बूब्स का दरम्यान हिस्सा नंगा होता था ........... और शार्ट उसकी हाफ तइस तक थीं ............. महीन न्य ख़ामोशी की साथ वह ड्रेस भी रख ली ........ उसी भी दिल मैं ख्याल आ रहा था की विनोद उसी इन ड्रेसेस मैं देख की ज़रूर तैसे हो गए ............ वह मुस्कराई .......

जेनी ............ नाउ इतस टाइम तो हैवे सम इनर वियर .......

महीन की आंखें फैल गईं ....... no वे ........ मई कुछ नहीं लोन गई ऐसा .......

नीतू ...... आर्य यार वे अरे गर्ल्स ...... हमारी साथ क्या शर्म .......

महीन ........ नहीं वह बात नहीं है लकिन मेरी पास पहली hi हैं बुहत .......

जेनी न्य एक डीप बरगंडी कलर की डेलिकेट लास ब्रा दिखाई ........... और उसकी साथ मैचिंग पंतय ............. और बोली ........ ी थिंक आईटी इस परफेक्ट तो सरप्राइज विनोद ......

महीन बलुशेड ........... जस्ट शट उप यार ............. ी ऍम नॉट गोइंग फॉर मॉडलिंग इन थिस फॉर हिम ....... लकिन अंदर सी उसी पता था की विनोद वाशिंग कृत्य होय ज़रूर देख लय गए उसकी यह ब्रा भी .... और no डाउट की उसी पसंद भी आय गई .......... महीन समिलेड .....

तीनों हंसनी लगीं ............ महीन को इंकार करनी की बावजूद भी 3 सेट ब्रा और पंतय की लेनी पारी .................

वहां सी नीतू गेट्स सेक्शन मैं आगये ............ राजीव की लय शर्ट लेनी ........... उसनी राजीव की लय एक टी शर्ट सेलेक्ट की ........ घर मैं पहन न्य की लय ........ और उसकी साथ hi शॉर्ट्स भी ............... फिर उसनी महीन को आँख मारी .......... विनोद की लय कुछ लो गई क्या तुम ............ ी होप वह खुश हो गए तुम्हारी उसकी लये शॉपिंग करनी पर ..........

महीन न्य नीतू की तरफ देखा ...... उसी उसकी बात सही लगी ........... वह वीर्य सी बोली ....... क्या लोन .......

नीतू ........ ऑफिस ड्रेसेस तो हैं उसकी पास ी थिंक कुछ कम्फर्टेबले लाउन्ज वियर खरीद लो ............ महीन न्य भी नीतू की तरह hi एक टी शर्ट ली ............ उसी विनोद की शर्ट का साइज याद था .......... महीन न्य टाइट फिटिंग मैं शर्ट सेलेक्ट की ... ......... उसी लगा की इस टाइट टी शर्ट मैं उसका मज़बूत मस्कुलर जिसम और भी हॉट लगी गए ......... महीन यह सोच क्र मुस्कराई और उसका चेहरा ब्लश करनी लगा ..........

जेनी मुस्करा क्र उसी तैसे करती होइ बोली .... वव्वव्वव्वव्व ........ यू क्नोव hi साइज ............

महीन बलुशेड और मुस्करा की बोली .......... हिज शर्ट साइज ओनली ..........

तीनों इस बात पी हंसनी लगीं .......... फिर महीन न्य विनोद की लय एक शॉर्ट्स भी लय ली ........ कॉटन शॉर्ट्स ........ वह भी लेंथ मैं शार्ट थी ....... विनोद की हाफ तइस तक अन्य वाली थीं वह ............ महीन न्य विनोद को उन कपड़ों मैं इमेजिन क्या तो मुस्करानी लगी ............

आखिर तीनों मॉल सी बहार निकलीं .......... जेनी न्य उनको गुड bye कहा .......... नीतू न्य एक कैब बुलाई ............ और पहली महीन को उसकी बिल्डिंग पी ड्राप क्या और फिर खुद ाग्य चली गए ............. महीन अपनी बैग्स उठाय होय लिफ्ट सी अपनी अपार्टमेंट मैं पोहंची ............. और दरवाज़ी पी नॉक क्या ...........
 
अपडेट NO: 15

विनोद न्य दरवाज़ा खोला ............. और महीन की तरफ देखनी लगा ........... इतनी देर ............

महीन जैसी थोड़ा दर गयी ........... वह आहिस्ता सी बोली ....... ी ऍम सॉरी विनोद थोड़ी देर हो गए मुझी .......... वह उन दोनों न्य देर करवा दी बस ........

विनोद आहिस्ता सी it's okay ........ मुझी फ़िक्र हो रही थी ............ मैं न्य सोचा की कॉल करों तुमको ...... लकिन फिर उन दोनों की वजह सी hi नहीं की ............ एक मश्ग तो क्र सकती थी न तुम .........

महीन सर झुकाय होय ......... ी ऍम रियली सॉरी विनोद ........ मुझी खुद कॉल करनी चाहिए थी ........... लकिन मुझी याद नहीं रहा ........ महीन को विनोद का इतना कंसर्न होना ाचा लग रहा था ......... उसकी फ़िक्र करना ..... जैसी आसिफ उसका ख्याल करता था इंडिया मैं ...........

विनोद ........ ाचा चोरो .......... जाओ जल्दी सी चेंज क्र की आओ और खाना खाओ ............... मैं न्य भी नहीं खाया अभी तक .......

विनोद की यह बात सुन क्र महीन चूँकि ....... मगर उसी ाचा लगा ........... वह आहिस्ता सी मुस्कराई ........... okay मैं अभी आई ........... महीन न्य शॉपिंग बैग वहीँ लाउन्ज मैं रखी और अपनी रूम मैं चली गए ............ महीन न्य अपनी रूम मैं hi अपनी कपड़े चेंज कए ......... अपना नाईट पजामा और शर्ट पहन ली ............ और कपड़े बीएड पी hi फेंक की बहार आगये .......... वाशरूम जा की फ़ारिग़ होइ और जल्दी सी टेबल पी आगये......... विनोद उसका वेट क्र रहा था .......

महीन .......... तुम तो खाना खा लेती .......

विनोद ....... बस तुम्हारा वेट क्र रहा था की ीखती hi खाएं गए ...........

महीन ........ हम्म्म्म ........... थैंक्स ................ और मुस्करा क्र खाना कहानी लगी ............... शॉपिंग की बातें कृत्य होय ........... चहकती होय .......... वह बुहत खुश लग रही थी आज ............. और उसकी ख़ुशी को विनोद भी महसूस क्र रहा था ................. और वह भी उसी देख क्र खुश हो रहा था ...................

कहानी की बाद बर्तन समेत क्र महीन लाउन्ज मैं वापिस आई तो विनोद वहीँ बैठा होआ था .......

विनोद .... कैसा रहा यहाँ की फर्स्ट शॉपिंग का एक्सपीरियंस .......

महीन ...... विनोद सुब कुछ उन्हों न्य अपनी मर्ज़ी सी दिलवाया है ........ मैं न्य ऐसी ड्रेस पहली कभी नहीं पहनी

विनोद ........ क्यों बुहत बोल्ड ड्रेसेस हैं क्या ......

महीन ..... पता नहीं लकिन ..... आसिफ कभी भी ऐसी ड्रेसेस मुझी ना पहन न्य दी ......... और अगर आप को भी ाचा ना लगी तो ी ऍम सॉरी ......... महीन न्य आहिस्ता सी बोलै .........

विनोद ....... पहली दिखाओ तो सही .....

महीन न्य एक बैग ओपन क्या और उस मैं सी पंत, शर्ट और लॉन्ग स्कर्ट दिखाई .........

विनोद ...... ववव .............. इतस सो वंडरफुल ...... तुम तो कह रही थी की ठीक नहीं हैं ......

महीन बी यक़ीनी सी ...... तुमको यह ठीक लगी हैं ......

विनोद ... हाँ महीन ...... थी अरे परफेक्ट फॉर थे ऑफिस ... तुम बुहत अछि लगो गई इन ड्रेसेस मैं .......

महीन .... यह काफी बोल्ड नहीं हैं क्या .....

विनोद ... बिलकुल भी नहीं ...... बस तुम न्य पहली कभी ऐसी ड्रेसेस नहीं पहनी न इसलय तुमको ऐसा लग रहा है ....... तुम बुहत अछि लगो गई इस ड्रेस मैं ........ प्लीज पहन की दिखाओ न

महीन शर्माती होय ...... नहीं विनोद प्लीज ......... मुझी शर्म आती है .......

विनोद ...... आर्य यार यहाँ तो सिर्फ हम दोनों hi हैं न .... और हम तो ीखती hi रह रही हैं तो मुझ सी क्या शर्माना ...... प्लीज पहन की आओ जा की ........

विनोद न्य उसी एक टी शर्ट और जीन्स की पंत दी पहन न्य को ....... महीन उठी और झिझकती होय अपनी बैडरूम मैं चली गए ........

अपनी रूम मैं जा की महीन न्य दरवाज़ा लॉक कए बिना अपनी कपड़े चेंज करनी शुरू क्र डाई ......... महीन अब कभी भी अपनी रूम का दूर लॉक नहीं करती थी ...... क्यों की उसी विनोद पी मुकमल ऐतबार हो चूका था की वह उसकी साथ कुछ भी ग़लत हरकत नहीं क्र गए ....... महीन न्य बारी आराम सी अपनी शर्ट उतारी, फिर अपना पजामा उतर दया .... महीन न्य पंतय की साथ जीन और ऊपर सी टी शर्ट पहन ली ........ खुद को आंय मैं देखा तो बुहत सेक्सी लग रही थी ........ टी शर्ट उसकी जिसम की साथ चिपकी होइ थी ..... उसकी बूब्स बिलकुल प्रॉमिनेंट हो रही थय ..... टाइट ब्रा की वजह सी ऊपर को उठी होय ....... और ुणस्य नीची उसका स्पॉट पेट ........ शर्ट का गाला भी व् शेप्ड था और थोड़ा डीप था ... जिस सी महीन का सुफैद सीना साफ़ दिख रहा था ....... और व् नीची को उसकी बूब्स की तरफ जा रहा था .......... नीची जीन्स की पंत भी उसकी तइस की साथ चिपकी होइ थी ........ पिच्य मुद की देखा तो उसकी गांड भी पंत मैं वाज़ेह हो रही थी ..... उसी शर्म आ रही थी ऐसी ड्रेस मैं विनोद की सामन्य जांय मैं ........... मगर हिम्मत क्र की ...... झिझकती होय अपनी रूम सी बहार निकली ......

विनोद न्य महीन को देखती hi सीटी बजा दी .......... महीन शर्म सी लाल हो गए ........... वववववव ...... महीन सुच मई तुम तो बुहत hi खूबसूरत लग रही हो इस ड्रेस मैं .........

महीन मुस्करा रही थी ...... मगर उसका दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था .......... विनोद की सामन्य खरी होय ...... विनोद ऊपर सी नीची तक उसको देख रहा था ........ उसकी नज़रें महीन की बूब्स पर जातीं और कभी नीची उसकी जीन्स की सामन्य वाले हिस्से पर ....... महीन न्य शर्माती होय अपना चेहरा अपनी दोनों हाथों मैं छुपा लय .........

विनोद ...... आर्य महीन शर्माओ नहीं ........ और थोड़ा पिच्य को घूम जाओ .......

महीन ना चाहती होय भी दूसरी तरफ घूम गए ....... और अब महीन की कमर और उसकी गांड विनोद की सामन्य थी ........ उसकी टी शर्ट की नीची उसकी पहनी होइ ब्रा की स्ट्रैप्स साफ़ दिख रही थय .......

महीन ....... बुहत ज़्यादा बोल्ड है न यह .....

विनोद ..... नहीं बिलकुल भी नहीं ..... बुहत अछि लग रही है .......

महीन ..... पर बहार तो नहीं जा सकती न पहन की ...... सुब की सामन्य .........

विनोद ...... कुछ नहीं होता ..... देखा नहीं है की बहार लडक्यां कैसी कैसी कपड़े पहनती हैं ............ चोरो इन बातों को और मुझी दिखाओ और क्या लाइ हो .........

महीन दूसरी तरफ पारी होय एक बैग की तरफ मुड़ी ..... और झुक की नीची सी बैग उठानी लगी ....... नीची झुकनी सी उसकी गांड विनोद की तरफ को निकल आई ........ और उसकी टी शर्ट भी थोड़ी ऊपर को चढ़ गए ...... जिस सी उसकी कमर का थोड़ा सा हिस्सा नंगा हो गया ......... विनोद की आंखें चमक उठीं ............ महीन जल्दी सी सीढ़ी होइ ....... और अपनी शर्ट को ठीक करती होइ विनोद की तरफ बरही .........

महीन ....... विनोद ....... यह आप की लये ........

विनोद खुश हो क्र ........ क्या कहा .... मेरी लये ????

महीन मुस्कराती होइ ... हाँ आप की लये ........

विनोद न्य उस मैं सी कपड़े निकाली ..... एक टी शर्ट और एक शॉर्ट्स थय ..........

विनोद ..... थैंक्स महीन ...... विनोद खुश हो की बोलै ........ साफ़ लग रहा था की उसी बुहत ाचा लगा था महीन का उसकी लय गिफ्ट लय क्र आना ..........

महीन ..... पहन की चेक करो आप भी .......

विनोद ... यू मैं तो से पहन की दिखाऊँ तुमको ......

महीन उसी घूरती होइ बोली .... नहीं नेइबोर्स को दिखाओ जा की

......

विनोद हंसा ...... हाहाः ......... अभी लो ....... यह कहती होय विनोद न्य अपनी पहनी होइ टी शर्ट उतार दी ......... उसका ऊपरी जिसम बिलकुल नंगा हो गया ....... मगर यह महीन की लय अब कोई नै बात नहीं थी ....... मगर फिर भी .....

महीन चीखी ......... आर्य आर्य ...... बी शर्म इंसान यहाँ नहीं ...... अपनी रूम मैं जा की चेंज करो ......... उतनी देर मई मैं भी चेंज क्र की आती हों .......

विनोद जल्दी सी ....... नहीं नहीं अभी नहीं चेंज करना ...... ाचा लग रहा है यही ड्रेस ........

महीन शरमाई और हंसी .... ाचा बाबा तुम तो जाओ ......

विनोद नै टी शर्ट को वहीँ चोर की सिर्फ शॉर्ट्स लय क्र अपनी रूम मैं गया और एक मिनट की बाद hi उसी पहन की बहार आज्ञा ........ शॉर्ट्स उसकी हाफ तइस तक थय ...... और उसकी तइस और लेग्स बिलकुल नंगी थीं ....... ऊपर सी उसनी शर्ट भी नहीं पहनी थी ........ जिस सी उसका ऊपरी जिसम भी नंगा हो रहा था ....... शॉर्ट्स स्ट्रेटचेब्ले क्लॉथ का था ....... और उसकी तइस पी बुहत टाइट था .... जिस सी उसकी लुंड का उभार भी बुहत प्रॉमिनेंट हो रहा था ........ महीन की नज़रें उसकी जिसम का जायज़ा लय रही थीं ..... ऊपर सी नीची तक ....... ऊपर की नंगी जिसम सी नीची आती होय उसकी नज़रें कुछ देर की लय विनोद की लुंड की उभार पी रुक गईं ......... और उसका जिसम कैंम्प सा गया ....... और उसकी दिल की धरकन तेज़ हो गए ....... वह विनोद की शॉर्ट्स मैं उसकी लुंड की उभार को देख रही थी ....... जो ाचा ख़ासा बारे लग रहा था .......... यह तो आसिफ सी भी बारे लग रहा है ............ क्या सुच मैं hi विनोद का यह ....... लुंड आसिफ सी बारे हो गए ....... जैसी मैं न्य अक्सर अपनी फ्रेंड्स सी सुना है की हिन्द्दू मर्दों की लुंड मुस्लिममस सी बारी होती हैं ........ तो क्या विनोद का भी ............ इसी सोच की साथ hi महीन को अपनी टांगों की बीच मैं कुछ महसूस होनी लगा ............. अचानक वह विनोद की आवाज़ सी चूँकि ......
 
विनोद ...... महीन कैसा लग रहा है .......

महीन चौंक क्र विनोद की चेहरी की तरफ देखा .... उसका चेहरा सुराख़ हो रहा था ........ शर्ट तो पहनो इसकी साथ ......

विनोद मुस्कराया ..... और शर्ट उठा की पहन ली .... वह भी उसकी जिसम पी टाइट थी .......... अब बोलो ..

महीन .... थोड़ा झिजाहकती होय ........ मुझी लग रहा है की साइज ठीक नहीं है ........

विनोद .......... किस का ......??

महीन उसकी लुंड की उभार की तरफ चोर नज़रों सी देखती होइ बोली ..... शर्ट और शॉर्ट्स दोनों का ...... चेंज करवा लाइन गए

विनोद उसी तैसे करनी की लय मुस्कराया ....... मुझी तो बिलकुल परफेक्ट लग रहा है .......

महीन उस सी नज़रें चुराती होइ ...... ठीक है तुम्हारी मर्ज़ी .........

विनोद ..... थैंक्स महीन फॉर योर गिफ्ट ......

महीन मुस्करा दी ........

विनोद ...... अब वह भी तो दिखाओ न उन मैं क्या है .... विनोद दूसरी बैग्स की तरफ इशारा कृत्य होय बोलै .......

महीन शर्माती होय ...... कुछ नहीं ......

विनोद ...... ऐसी नहीं करो .... प्लीज दिखाओ न ......

महीन न्य शर्माती होय एक बैग उठाया ...... नाईट ड्रेसेस हैं और कुछ घर पी पहन न्य की लय ......

विनोद ...... दिखाओ तो सही .....

विनोद न्य महीन की हाथ सी वह बैग लय लय ..... महीन न्य उसी नहीं रोका ....... विनोद न्य उस मैं सी एक नाईट सूट निकला ..... उसकी शार्ट शर्ट और छोटा सा शॉर्ट्स था ..... दूसरा एक शार्ट सी टॉप और उसकी साथ जेएस शॉर्ट्स थीं ... हाफ तइस लेंथ की ...... वव्वव्वव्वव्व. महीन ..... यह तो बुहत हॉट है ........

महीन शर्माती होइ ..... यह नीतू की काम हैं ..... बोली की घर पहन न्य की लय ठीक है ......

विनोद ......... हाँ बिलकुल ठीक कहा है उसनी ........ घर पी तो पहन hi सकती हो .........

महीन ..... जी नहीं ..... मैं तुम्हारी तरह बी शर्म नहीं हों .......

विनोद ...... हाहाहा ....... ाचा यार इसी पहन की तो दिखाओ ......

महीन ........ नहीं न प्लीज ......

विनोद ........ प्लीज महीन .......

महीन ........ बुहत ज़िद्दी हो आप ...... यह कहती होइ महीन न्य नाईट शर्ट और शॉर्ट्स उठाई और अपनी रूम मैं चली गए ....... अपनी जीन्स और टी शर्ट उतार की उसनी वह शार्ट नाईट सूट पहन लय ....... अब तो वह पहली सी भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी इस शार्ट लेंथ शॉर्ट्स और स्माल फिट फ्रंट बुटोनेड शर्ट की साथ ..... उसकी हिप्स इस मैं भी शर्ट सी कवर नहीं हो रहे थय ....... महीन की गोरी गोरी थिंग्स और लेग्स नंगी हो रही थीं ..... उसी हिम्मत नहीं हो रही थी बहार जांय की ...... आखिर जब बहार गए तो....... विनोद न्य फिर सी ुकि तारीफ की ....... और महीन को ाचा लगा .... थोड़ा कम्फर्टेबले फील होआ ......

विनोद ...... बुहत अछि लग रही हो ......

महीन ..... आसिफ को पता चल गया न की मैं यहाँ ऐसी कपड़े पहन रही हों तो फिर देखना क्या हाल करता मेरा ..... महीन हंसी ...

विनोद ..... कुछ पता नहीं चली गए ....... तुम रिलैक्स करो और एन्जॉय करो अपनी लाइफ को ..............

महीन मुस्करा की उसकी पास बेथ गए ....... उसी इस शार्ट लेंथ शॉर्ट्स मई विनोद की सामन्य बेथ तय होय अजीब भी लग रहा था और एक्ससिटेमेंट भी फील हो रही थी ...... क्यों की उसकी गोरी तइस और लेग्स बिलकुल नंगी थीं विनोद की सामन्य ....

विनोद...... अब वह लास्ट बैग भी दिखा दो ......

महीन उसी थोड़ा बनवटी गुस्सा दिखती होइ बोली ........ ख़बरदार जो इसको हाथ लगाया तो .........

विनोद हंसती होय उसी तैसे करनी को बोलै......... लगता है इस मैं कुछ ख़ास चीज़ है ......

महीन ........ हाँ है तो .........

विनोद ..... दिखाओ न प्लीज ........

महीन ........ नहीं दिखाऊँ गई .......

विनोद हंसती होय उसी आँख मार की बोलै ..... चलो ना दिखाओ लांड्री कृत्य होय पता तो लग hi जाना है मुझी ....

महीन हंसी और उसी गुस्से वाला मूड बनाती होय वह बैग उसकी तरफ फैंका लो देख लो ........... इसी देखी बग़ैर तुमको चैन तो आना नहीं है ..........

विनोद को भी पता था की महीन गुस्सा नहीं क्र रही ....... वह हंसा और फिर बैग पाकर की उस मई सी महीन की लाइ होइ ब्रा और पंतय को निकला और उसी देखनी लगा ........... बुहत प्यारी हैं .......

महीन ........ थैंक्स ......

विनोद उसी तैसे कृत्य होय ....... महीन अब इनको भी तरय क्र की दिखा दो ........

महीन चीखी........... विनाऊओऊडड़डडडडड ........... और अपनी पास पारा होआ सोफे का कुशों उठा ाक्य विनोद को मारा ...... फिर दूसरा भी उस पी फेंक दया ......... और विनोद हंसनी लगा ...... और साथ hi महीन भी ........... फिर विनोद न्य महीन की साथ मिल की सारी कपड़े समेत्य महीन न्य 2 बैग उठाय और अपनी रूम की तरफ बरही ....... विनोद भी बाक़ी एक बैग उठा की उसकी पिच्य पिच्य उसकी रूम मई आज्ञा ..... और बैग वहां एक तरफ रख दया ...... और फिर बीएड पी पारी होय महें की कापरी उठा की बहार जांय लगा ...... इनको लांड्री मैं दाल देता हों ......... यह बोल की विनोद रूम सी निकल गया ........ और महीन उसी जाती होय देख की मुस्करा दी ........ उसी विनोद का बेहेवियर बोहत ाचा लग रहा था .... वह कभी भी उस का कोई ग़लत फ़ायदा उठानी की कोशिश नहीं क्र रहा था ............ महीन न्य मुस्कराती होय कपड़े कप्बोर्ड मैं रखी और उसी शार्ट लेंथ शॉर्ट्स और शर्ट मैं hi बीएड पी लेट गए ............

शाम मैं महीन उठी और उसी ड्रेस मैं hi अपनी रूम सी बहार आगये .......... वही शार्ट लंघत शॉर्ट्स और शर्ट ........ महीन न्य किचन मैं जा की चाय बनाई ........ और फिर विनोद की रूम का दूर नॉक क्या .......

विनोद की आवाज़ आई ........ के इन प्लीज ..........

महीन न्य दरवाज़ा खोला और अंदर दाखिल हो गए ........ विनोद की रूम मैं चाय लय क्र जाना अब उसकी लय कोई नै बात नहीं थी ........ मगर ऐसी इतनी शार्ट ड्रेस मैं वह पहली बार आई थी ....... महीन रूम मैं दाखिल होइ तो विनोद बीएड पी लेता होआ अपना मोबाइल देख रहा था ....... महीन न्य उसकी क़रीब जा की साइड टेबल पी उसका चाय का कप रखा ....... और खुद अपना कप लय क्र बीएड सी थोड़ा दूर सोफे पर बेथ गए .......... विनोद न्य भी मोबाइल रख दया और महीन सी बातें करनी लगा ......... विनोद न्य भी अभी वही शॉर्ट्स पहनी होइ थी मगर शर्ट उतार दी होइ थी ........ मगर महीन की लय उसका ऊपरी जिसम नंगा होना कोई उन कम्फर्टेबले चीज़ नहीं रही थी .............. महीन की नज़रें भी उसी की जिसम को देख रही थीं ........... उसकी नज़र विनोद की शॉर्ट्स की सामन्य की हिस्से पर गए ........ वह अभी पहली सी भी फोला होआ लग रहा था ....... महीन की दिमाग़ मैं ख्याल आया ............... कितना मोटा लग रहा है न इसका ................. फिर वह खुद hi अपनी ख्याल पी झीणम्प सी गए ..........

विनोद उसी तैसे कृत्य होय ....... इतस गुड की तुम न्य कपड़े चेंज नहीं कए ........ ी थिंक तुमको भी ाचा लग रहा है ......

महीन मुस्कराई ........ नहीं बस वैसी hi .........

विनोद मुस्कराया ........ महीन एक बात बोलों ....... िफ़ यू don't मंद ......

महीन ......... हम्म्म ......

विनोद ........ महीन यू अरे रियली ब्यूटीफुल ...........

महीन को उसकी बात सुन क्र बुरा नहीं लगा बल्कि ाचा लगा ...... और वह थोड़ा शर्मा गए .......... फिर उस सी बोली ........ अभी फ़ोन क्र की बताती हों मैं प्रिय को ...........

विनोद फौरन ह एक्टिंग कृत्य होय अपनी कान पकर्त्य होय बोलै ........ आर्य आर्य ना बिलकुल भी नहीं ....... क्यों मुझी उस सी दांत पारवानी है ..........

महीन भी उसकी एक्टिंग पी हंसनी लगी ........... फिर बोली ............. विनोद वैसी आसिफ और प्रिय कभी इमेजिन भी नहीं क्र सकती की हम लोग इसतरह सी रह रही हैं एक hi फ्लैट मैं ...........

विनोद बोलै ...... और वह कभी इस बात का भी यक़ीन नहीं क्र सकती की हमारी बीच मैं कुछ भी ग़लत नहीं होआ है ......

महीन विनोद की बात सुन क्र शर्मा गए ....... ठीक कह रही हो .......

विनोद ........ ी don't क्नोव ........... क्यों लोग ऐसा सोचती हैं की जब भी मर्द और ायरत ीखती हों गए एक रूफ की नीची तो वह ज़रूर कुछ ग़लत करें गए .............

महीन अपनी नज़रें विनोद की चौड़े सीने पी दौड़ाती होइ बोली ........ हाँ बिलकुल .......... मातुरित्य तो एहि है न की खुद पी कण्ट्रोल रखा जाय ................

दोनों ऐसी hi बातें कृत्य रही .......... फिर विनोद का मोबाइल बजा ........... महीन सोफे सी उठ टी होइ मुस्करा की बोली ........... लो आगये तुम्हारी लाड़ली की कॉल ............. विनोद मुस्करा दया ........... और महीन उस सी कप लय क्र रूम सी बहार जांय लगी .......... तुम बात क्र लो प्रिय सी ........ फिर खाना खाती हैं .............

विनोद अपना मोबाइल महीन की तरफ क्र की हिलाती होय बोलै ........... सॉरी महीन .............

महीन मुस्कराई .......... इतस okay ........... और उसकी रूम सी बहार चली गए .................

शाम मैं भी महीन उन्ही कपड़ों मैं थी ..... अपनी गोरी चिकनी तइस और लेग्स विनोद को शो करती होइ.......... उसनी पहली बार ऐसी कपड़े पहनी थय ........ मगर उसी एक अलग hi सुकून और आज़ादी का अहसास हो रहा था .......... उसी ाचा लग रहा था ........ आहिस्ता ाहसिता उसकी झिझक ख़तम हो गए थी ........ और वह विनोद की नज़रों की आदि हो गए थी .......

रात की कहानी की बाद महीन अपनी रूम मई आई ..... अपनी ब्रा और पंतय उतार की दोबारा सी वही शार्ट वाला नाईट ड्रेस पहन लय और बीएड पी लेट क्र सो गए ........
 
नेक्स्ट डे सैटरडे था ........... वीकेंड ......... महीन की सुबह 10 बजाय आँख खुली ........... लकिन नार्मल वे सी नहीं .......... बल्कि तकलीफ सी ............. वह कराहती होइ उठी .......... उसकी पेट मैं शदीद दर्द हो रहा था .......... सीवियर क्रैम्प्स ........... महीन न्य अपनी पाऊँ फोल्ड कए और अपनी जिसम को फोल्ड करनी लगी ........ अपनी पेट को दबाती होइ .............. uuuuuuuuuuuffffffffffffff ................. aaaaaahhhhhhhhhh .............. वह अपनी पेट को पाकर की अपनी आवाज़ को मुफ्फ्ले करती होइ तकलीफ सी चीखी .............. ओह्ह्ह्ह माय गॉड ........... मुझी याद hi नहीं था इसका तो .......... उफ्फ्फ्फ़ ............ फिर सी वही तालीफ़ ............. महीन खुद सी बोली ........ वह जानती थी इस तकलीफ को ........... यह उसकी पीरियड्स की पैन थी ......... जी ...... उसकी पीरियड्स स्टार्ट हो रही थय ...... और अब दो दिन की लय उस को इस शदीद तकलीफ को बर्दाश्त करना था ...........

महीन बरी मुश्किल सी उठी और पेट को पाकर क्र रूम सी बहार निकली ..... और आहिस्ता आहिस्ता चलती होइ वाशरूम मई गए ........ अपनी शॉर्ट्स को नीची क्या और कमोड पी बेथ गए ...... अभी ब्लीडिंग स्टार्ट नहीं होइ थी ......... मगर पाइनस स्टार्ट हो चुकी होइ थीं ....... वाशरूम सी फ़ारिग़ हो क्र महीन बहार निकली ...... तो अचानक सी hi दर्द की शिद्दत मई इज़ाफ़ा हो गया ...... महीन अपनी रूम मई भी नहीं जा सकीय और वहीँ लाउन्ज मई hi सोफे पर बेथ गए ........ अपन पेट को पाकर की ...... अपनी पेट पी हाथ रखी वह अपनी घुटनो पी झुकी होइ थी .......... तकलीफ की मारी उसकी आँखों सी आंसू निकल रही थय ........

महीन अभी लाउन्ज मैं hi बैठी होइ थी की विनोद अपनी बैडरूम सी निकला ......... वाशरूम जांय की लय ....... की उसकी नज़र सोफे पर बैठी होइ महीन पर पारी ....... वह कसुआलय वहीँ रुक गया और बोलै .......

विनोद ...... महीन ...... क्या होआ ...

महीन न्य अपना सर उठाया ........ कुछ नहीं .....

विनोद न्य उसका चेहरा देखा तो घबरा गया ....... और जल्दी सी उसकी तरफ आया ......... महीन दोबारा सी अपनी पेट पी हाथ रखी होय अपनी घुटनो पी झुक गए .......... विनोद जल्दी सी ाग्य आया और उसकी क़रीब hi सोफे पर बेथ गया ....... अपना हाथ उसनी महीन की कमर पी रखा ......

विनोद ...... अरे यू okay महीन ....... क्या हो रहा है ..... बताओ मुझी ......... तुम ठीक नहीं लग रही ........

विनोद का हाथ महीन की कमर पर था .... और वह आहिस्ता आहिस्ता उसकी कमर को सहला रहा था ...... उसी साफ़ फील हो रहा था की महीन न्य नीची सी ब्रा नहीं पहनी होइ ......... क्यों की उसी महीन की ब्रा की स्ट्रैप्स फील नहीं हो रही थय ............. विनोद की सख्त हाथों को अपनी जिसम पर महीन भी फील क्र पा रही थी .... उसी अजीब सा अहसास हो रहा था ........... मगर उस वक़्त वह जिस तकलीफ मैं थी उसकी वजह सी वह उस अहसास को एन्जॉय नहीं क्र पा रही थी .......

विनोद न्य एक हाथ महीन की कमर पी रखा और दूसरा उसकी कंधी पर रख की उसी ऊपर को उठानी लगा ........ महीन न्य अपना चेहरा उठाया तो उसकी आँखों सी आंसू निकल रही थय .....

विनोद फ़िक्र मंद हो गया ....... ओह माय गॉड ...... महीन तुम तो रो रही हो ........... बताओ प्लीज क्या होआ है ........

महीन न्य बुहत hi कमज़ोर सी आवाज़ मैं कहा ..... आअह्हह्ह्ह्ह ....... उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.......... पेट मैं दर्द है ......

विनोद न्य अपना एक हाथ महीन की कमर पी hi रखी रहंय दया और दूसरा हाथ उसकी थिगह पी रख दया ......... महीन की मुंह सी तकलीफ की बावजूद भी हलकी सी सिसकारी निकल गए ...... जब विनोद का हाथ महीन की नंगी थिगह पी आया .........

विनोद ...... आओ डॉक्टर की पास चलती हैं ......

महीन फौरन बोली ........ नहीं नहीं ..... कहीं भी जांय की ज़रूरत नहीं है ........

विनोद उसकी थिगह पी हाथ रखी होय hi बोलै ....... तो फिर ... यह दर्द ...... कैसी ठीक हो गए ...... कैसी पता चली गए की क्यों हो रहा है .......

महीन न्य अपनी नज़रें झुकें और बुहत hi वीर्य सी बोली ........ विनोद ..... इतस माय पीरियड्स .......

विनोद चौंक पारा ....... उसी महीन की बात सुन की जैसी करंट सा लगा ......... ओह्ह्ह ..... ी ऍम सो सॉरी ......... मुझी नहीं पता था .......... लकिन फिर भी यह पैन क्यों इतना ज़्यादा ....

महीन न्य विनोद सी नज़रें चुराती होय hi आहिस्ता सी कहा ..... मेरी पीरियड्स की पहली दो दिन ऐसी hi शिद्दत का पैन होता है की बर्दाश्त नहीं होता .......

विनोद अभी भी फिकरमंद था ....... तो फिर अब कैसी ठीक हो गए .....

महीन तकलीफ की साथ भी मुस्कराई ..... उसी विनोद की फिक्रमंदी का अहसास ाचा लग रहा था ........... हो जाय गए ठीक ....... कल तक ......

विनोद उसकी कमर को सहलाती होय बोलै ..... लकिन तुम सी बर्दाश्त तो हो नहीं रहा है ........ महीन की चिकनी थिगह का अहसास भी उसी अपनी हाथ की नीची हो रहा था ........

महीन न्य उसकी आँखों मैं देखा और मुस्कराई ..... क्र लोन गई बर्दाश्त ...... आप इतनी परेशां न हो .......... यह रूटीन है मेरी लय .......

विनोद ...... हम्म्म ठीक है ........ लकिन महीन ी ऍम हेरे फॉर यू ... किसी भी किसम का कोई भी काम हो तो ज़रूर बता देना ...... चलो तुमको रूम मई चोर देता हों फिर तुम्हारी लये चाय बनाता हों .....

महीन मुस्करा की उठी .... बरी मुश्किल सी ...... विनोद न्य उसकी कमर मैं बाज़ू दाल की उसी सहारा दया ..... और विनोद उसी आहिस्ता आहिस्ता उसकी बैडरूम की तरफ लय जांय लगा ......... विनोद का हाथ महीन की बाज़ू की नीची था ...... और उसी महीन की ब्रा लेस्स बूब की साइड का अहसास हो रहा था ....... और महीन की भी .... जिस सी उसकी अपनी आंखें भी बंद हो रही थीं ...........

विनोद महीन को लय क्र उसकी बैडरूम मैं आज्ञा ........ और बीएड की क़रीब पोहंची तो विनोद की नज़र उसकी नंगी हो रही तइस पर पारी ..... और वह चिल्ला उठा .....

विनोद ....... ओह गॉड ....... महीन ......... यह देखो .......... महीन की तइस पर उसकी पीरियड्स का थोड़ा सा ब्लड एक पतली सी लकीर की शकल मैं बेहटा होआ नीची आ रहा था ........ महीन न्य भी नीची को देखा ... और वह भी शर्म सी पानी पानी हो गए ............ उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ........

महीन शर्मिंदाह होती होइ बोली ........ विनोद ी ऍम सॉरी ....... आप जाओ मैं देख लेती हों ......

विनोद ...... नहीं महीन प्लीज ........

विनोद न्य जल्दी सी वह पारी होआ टिश्यू पेपर बोस और एक डस्टबिन महीन की क़रीब बीएड की नज़दीक रख दी ...... और बोलै ..... मैं चाय बना क्र लाता हों .........

यह बोल क्र विनोद महीन की रूम सी निकल गया .......... और उसका दरवाज़ा बंद क्र गया .......... महीन को बुहत hi शर्म आ रही थी ....... उसनी टिश्यू बॉक्स सी टिश्यू पेपर्स लये और अपनी थिगह पी बहती होइ ब्लड की लकीर को साफ़ क्या ...... और टिश्यू पेपर डस्टबिन मैं दाल दया ...... फिर महीन न्य अपनी शॉर्ट्स को नीची सिरकाया ....... और अपनी छूट पर सी ब्लड को साफ़ करनी लगी ....... जो हल्का हल्का सा वह सी निकल रहा था ............ माही न्य ाच्य सी अपनी पीरियड्स की ब्लड को साफ़ क्या और पैड्स रखनी का सोचा ............ तभी उसी याद आया की उसकी पास तो पैड्स है hi नहीं ........ उसकी तो जैसी फिर सी होश उड़द गए ............. वह परेशां हो गए की अब वह किआ क्रय गई ............... महीन बीएड की बजाय बीएड की क़रीब राखी होइ एक चेयर पी बेथ गए ............ अपना सर पाकर की ...........

इतनी मैं दूर नॉक होआ .......... महीन न्य आवाज़ दी .......... ाजाओ विनोद ........

विनोद चाय की 2 कप लये होय महीन की बैडरूम मैं दाखिल होआ ....... महीन उस सी नज़रें नहीं मिला पा रही थी ....... विनोद न्य उसकी क़रीब आ की चाय का कप उसको पकरया ........... महीन न्य उसी थैंक्स बोलै ......

विनोद .... यहाँ क्यों बेथ गए हो ....... बीएड पी लेटना था न ......

महीन वीर्य सी बोली ....... नहीं .. वह ...... बीएड पी नहीं ......

विनोद ....... क्यों क्या होआ ........... अब क्या प्रॉब्लम है ......
 
अपडेट NO: 16

महीन न्य चाय का एक सिप लय ..... और अपनी नज़रें झुका क्र कप की किनारों पर अपनी ऊँगली फेरती होइ बुहत hi धीमी आवाज़ मैं बोली .............. विनोद ....... वह ...... पपपपप ....... पप्पाडससससस ........

विनोद चौंका ........... व्हाट ............. यू मैं तो से यू don't हैवे पैड्स फॉर योर पीरियड्स .......

महीन न्य शर्मिंदाह हो कर अपनी नज़रें झुका लीन ....... याद नहीं रहा ........

विनोद ...... इतस okay ...... रिलैक्स मैं अभी लय आता हों स्टोर सी ........ विनोद उठ की दूर की तरफ बढ़ा .........

महीन ....... विनोद रुको ..... पहली चाय पी लो .......... फिर जाना प्लीज .......

विनोद न्य हाँ मैं सर हिलाया ..... और फिर महीन की सामन्य बेथ क्र चाय पीनी लगा ....... और महीन की दर्द की बारी मैं पूछनी लगा ........ महीन की रात को उतारी होइ ब्रा और पंतय भी उसकी क़रीब hi सोफे पर पारी होइ थी ............... चाय ख़तम क्र की विनोद उठा और बहार जाती होय उसनी अपनी क़रीब hi सोफे पर पारी होइ महीन की ब्रा और पंतय भी उठाई और रूम सी बहार लय गया ........... महीन उसी नहीं रोक सकीय ............

महीन कुर्सी की बैक सी टेक लगाय होय सुबह सी अब तक होइ सुब बातों को सोच रही थी ........... और शर्मिंदाह हो रही थी की कैसी बिना चाहती होय भी वह विनोद की सामन्य खुलती जा रही है ........ कैसी उनकी दरम्यान सुब कुछ ओपेन होता जा रहा है ........... और कैसी उनकी दरम्यान सुब कुछ कम्फर्टेबले होता जा रहा है ............ खुद सी hi . बिना किसी की कोई कोशिश की ....... बिना किसी की कुछ चाय ..............

कुछ देर की बाद महीन की रूम का दूर फिर सी नॉक होआ ........ महीन न्य विनोद को अंदर अन्य को बोलै ............ विनोद हाथ मैं पैड्स का पैकेट लये होय अंदर दाखिल होआ ........... विनोद की क़रीब आ क्र उसनी वह सेनेटरी पैड्स का पैकेट महीन की क़रीब रख दया ........... और बोलै ......

विनोद ....... पैंतीस कहाँ हैं तुम्हारी .......... बताओ निकाल देता हों .......... उसी पता था की महीन को पैड्स रखनी की लय पंतय चाही हो गई ......

महीन ............ नहीं प्लीज विनोद आप जाओ मैं लय लोन गई ........

विनोद ..... मैं न्य कहा है न बता दो .... तुम सी हिला तो जा नहीं रहा है दर्द सी ............ वह महीन की कपबओर्ड की तरफ जाती होय बोलै .....

महीन न्य शर्माती होय आहिस्ता सी कहा .......... वह सामन्य दराज़ मैं ..........

विनोद न्य जा की दराज़ खोला ..... उसी दराज़ मैं महीन को पैंतीस और बरस राखी होइ दिखीं ......... विनोद न्य अपनी मर्ज़ी सी एक पंतय निकाली और फिर कप्बोर्ड खोल की महीन का नाईट सूट निआल लाया ...... और उसी महीन की क़रीब बीएड पी रख दया ............

विनोद ........ महीन आप चेंज क्र लो ........ मैं ब्रेकफास्ट बनाता हों .......... यह बोल क्र विनोद रूम सी जांय लगा .........

महीन ाहसिता सी बोली ........... विनोद वह ब्रा ............. प्लीज .....

विनोद न्य दराज़ सी महीन की एक ब्रा भी निकाल की महीन की पास रख दी .......... और उसकी रूम सी निकल गया ..........

महीन उसी जाता होआ देख रही थी ....... की इस किसम की सिचुएशन मैं भी वह किस क़दर शराफत का मुज़ाहिरा क्र रहा है ..... और बिना कुछ भी ग़लत हरकत कए वह सी चला गया है ........... महीन की दिल मैं विनोद की इज़्ज़त और भी बढ़ रही थी ............ महीन अपनी दिल मैं सोच रही थी ........... कितना ाचा है न यह विनोद ........ मैं न्य तो अपनी घर वालों सी हमेशा यही सुना था की काफिर मर्द ाच्य नहीं होती .......... ..ज़ालिम होती हैं ...... बुरे होती हैं ........ गंदी होती हैं ....... मगर विनोद न्य तो यह ग़लत साबित क्र दया है ................. ना सिर्फ इन की पर्सनालिटी अछि होती है बल्कि बिहेवियर भी ाचा होता है ........... महीन को राजीव का भी याद अन्य लगा ........ की वह भी कितना हैंडसम और गुड लुकिंग ओर उसकी साथ hi कितनी ाच्य मज़ाज का मर्द है ............... उसी लगा की उसकी बाप न्य जो कुछ भी उसको आज तक हिंदडू मर्दों की बारी मैं बताया था वह ग़लत था ........... वह विनोद सी दिल सी मुतासिर हो रही थी ................ जैसी नादर hi अंदर उसी विनोद ाचा लगनी लगा हो .............. जैसी विनोद न्य उसका दिल जीत लय हो ............. एक काफिर न्य एक मुस्लिमा का दिल ..............

महीन न्य अपनी शॉर्ट्स और शर्ट उतार की अपनी ब्रा और पंतय पहनी पद रख की .......... और फिर अपना नाईट ट्रॉउज़र और शर्ट पहन ली ......... उतारी होइ शॉर्ट्स पी थोड़ा ब्लड लगा होआ था ...... शर्ट और शॉर्ट्स दोनों hi उसनी बीएड सी नीची रख डाई ...... फर्श पर ..... और बीएड पी लेट गए ...........

फिर विनोद महीन की लये ब्रेकफास्ट भी उसकी रूम मैं hi लय आया और उसी बीएड पी hi दया .......... और खुद बहार जांय लगा .......... महीन को ाचा नहीं लगा ........ वह बोली ......

महीन ........... विनोद ...... क्या मेरी पास ब्रेकफास्ट नहीं करो गए ....... इस आईटी सो बाद ........ ???

विनोद महीन की बात को समझ गया .......... और जल्दी सी बोलै ...... नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है ............ मैं न्य सोचा की शायद तुम कम्फर्टेबले नहीं हो गई ........... मैं अभी लाया अपना ब्रेकफास्ट ......

फिर विनोद बहार सी जा की अपना ब्रेकफास्ट भी लय आया और महीन की पास hi बीएड पी बेथ गया ऊपर चढ़ की .......... महीन भी उसी देख क्र एक शर्मीली सी मुस्कराहट की साथ मुस्करानी लगी ....... और फिर दोनों नाश्ता करनी लगी ......... नष्त्य की बाद विनोद महीन की लय एक रबर बोतल मैं पानी गरम क्र की लय आया ............. महीन उसी देख क्र मुस्करा दी ............. बस भी करो अब विनोद ............. वह बोली ....... विनोद मुस्कराया और उसी बोतल दी क्र उसकी रूम सी बहार जांय लगा ...... उसकी नज़र नीची फर्श पर पारी होय महीन की शॉर्ट्स और शर्ट पी पारी ........ विनोद न्य ाग्य बढ़ की उनको उठा लय ............

महीन को बुहत शर्म आई ...... की विनोद को उसकी गंदी कपड़े उठानी पर रही हैं ........ वह फौरन बोली ..

महीन ...... विनोद प्लीज आप इसी रहंय दो ...... मैं वाश क्र लोन गई ......... इनको अलग सी वाश करना है न ....

विनोद मुस्कराया ....... इतस okay महीन ...... तुम बस रेस्ट करो ...... यह बोल की विनोद रूम सी चला गया ............ और महीन उसी जाता होआ देखती रही .........

सारा दिन विनोद बार बार आ की उसकी तबियत का पूछता रहा ...... और उसकी कहानी पीने का ख्याल रखता रहा ........... बार बार उसी पानी गरम क्र की दया ............ रात तक महीन की तबियत काफी बेहतर थी ............ उसी खुद भी इस बात का अहसास था की विनोद की इतनी ज़्यादा केयर करनी की वजह सी उसकी यह पीरियड पैन जल्दी बेहतर हो गए है .......... जो पहली दो दिन तक उसी तकलीफ मैं रखती थी ........... इन 2 दिंनो मैं hi उनकी बीच चीज़ें और भी ओपन हो चुकी होइ थीं ......... की महीन अपनी पीरियड्स तक की डिटेल को उसकी साथ डिसकस क्र रही थी .......... बिना किसी झिझक की ............

विनोद ......... तुम न्य कभी किसी लेडी डॉक्टर को चेक उप नहीं करवाया क्या इस पैन की लय .......

महीन ......... करवाया था ....... अम्मी की साथ गए थी कई बार ......

विनोद ..... फिर ..

महीन .... कुक्न भी नहीं ......... उन्हों न्य कहा की यह नैचुरली कुछ लेडीज मैं होता है ........ इसकी लय ज़्यादा मेडिसिन लेनी की ज़रूरत नहीं है ...... बस थोड़ा सा बर्दाश्त करो और हीटिंग क्र लय करो ..........

विनोद ....... हम्म्म .......... लकिन तकलीफ तो बुहत होती हो गई न शुरू की दिनों मैं ......

महीन वीर्य सी मुस्कराई ....... हाँ ......... वह तो तुम न्य देख hi लय है ......... एंड थैंक्स तो यू विनोद मेरा इतना ख्याल रखनी का ........... तुम सुच मई बुहत ाच्य हो ........

विनोद भी मुस्करा दया ...........

शाम मई विनोद और महीन दोनों लाउन्ज मई बैठी होय टीवी देख रही थय और बातें क्र रही थय ......... की प्रिय की कॉल आगये ...... महीन न्य मुस्करा क्र विनोद की तरफ देखा और उसी कॉल अटेंड करनी को बोल दया ........

विनोद उस सी कुछ फसली पी hi अलग सोफे पी बैठा प्रिय की साथ वीडियो कॉल करनी लगा ....... महीन को भी प्रिय की आवाज़ सुनाई दी रही थी ....... इधर ुधा रकि बातों की बाद प्रिय बोली ..

प्रिय ....... विनोद याद है तुम्हें नेक्स्ट सैटरडे को तुम्हारा बर्थडे है ........

विनोद ......... तुमको याद है प्रिय ........ ???

विनोद न्य महीन की तरफ देखा तो वह भी मुस्करा क्र विनोद को देख रही थी और उसी ऐसा इशारा क्या जैसी पूछ रही हो की क्या यह सुच है .........

विनोद न्य आहिस्ता सी हाँ मैं सर हिला दया ........... थोड़ी देर बात करनी की बाद कॉल एन्ड हो गए .........

महीन ...... विनोद तुम न्य बताया hi नहीं की तुम्हारा बर्थडे आ रहा है ..........

विनोद ..... आर्य यार इस मैं बतानी वाली कोनसी बात है ......... कोनसा हम न्य सेलिब्रेट करना है ........

महीन एक्ससिटेड होती होइ ........ क्यों नहीं करना भला ....... ज़रूर करें गए ............

विनोद ....... आर्य चोरो यार ...... क्या ज़रूरत है .....

मगर महीन न्य उसकी बात को इग्नोर क्र दया ........ और दिल मैं सोच लय की वह विनोद की लय बर्थडे पार्टी ज़रूर अर्रंगे क्रय गई ......... उसकी ख़ुशी थी और उसका दिल छह रहा था की वह भी विनोद की लय कुछ क्रय ..... उसकी ख़ुशी की खातिर ........
 
अपडेट NO: 17

नेक्स्ट डे

महीन को ऑफिस जाना था ....... महीन टाइम पी उठी ...... और किचन मैं आगये ............ नाश्ता बनानी की लय .......... उसनी विनोद की अन्य सी पहली उसकी पूजा की लय थाली प्रेपर क्र की रख दी ........... विनोद आया तो महीन को देख क्र खुश होआ ......... और उसी पूजा की थाली प्रेपर करनी की लय थैंक्स बोल क्र थाली लय क्र पूजा की लय चला गया ......... और महीन नाश्ता बनानी लगी ............

वक़्त की साथ साथ विनोद की पूजा को लय क्र महीन और विनोद की दरम्यान एक बीनाम सा तालुक बन चूका होआ था ........ महीन विनोद की साथ उसकी फेथ की मुताबिक़ पूजा और ऋतुअल्स को नहीं अपना रही थी ...... मगर उसकी बावजूद भी वह विनोद को उसकी पूजा मैं पूरा साथ देती थी .......... थाली तैयार करना, कभी अगर बाटी वग़ैरा पकड़ना और पार्षद लय क्र खाना ....... वह खुद को समझा रही थी यह सब कृत्य होय ...... की वह यह सब काम विनोद को यह जतानी की लय क्र रही है की उसकी लये उसकी दोस्ती और उसकी साथ होनी की कितनी ाहमयत है .......... और वह उसकी दोस्ती की क्तिनी क़दर करती है ............ विनोद को ाहमयत देती होय उसकी पूजा मैं उसकी हेल्प कृत्य होय वह अपनी hi फेथ, अपनी मज़हब, अपनी तरबियत और अपनी रूटीन की खिलाफ भी काम क्र रही थी ....... मगर जो कुछ विनोद उसकी लय क्र रहा था ........ उसी लगता था की वह यह सुब कृत्य होय कुछ भी ग़लत नहीं क्र रही है ........ ऐसा नहीं था की वह अपनी मजभी नज़रियात मैं कोई तब्दीली ला रही थी ....... लकिन वह अपनी अक़ायद की खिलाफ.......... विनोद की ृत्ति रिवाज, उसकी पूजा मैं उसका साथ दी क्र उसी और खुद को इस बात का अहसास दिला रही थी की उसकी लय अपनी नजरयत सी ज़्यादा ज़रूरी और अहम् विनोद की ख़ुशी है ...........

ऑफिस मैं भी दिन ाचा गुज़रता है ........... वहां भी कई बार विनोद महीन की पास आ की उसकी तबियत का पूछ की गया ............ और महीन उसकी फ़िक्र मंडी सी बुहत खुश थी .........

विनोद उसकी पास आ की आहिस्ता सी बोलै ...... महीन ...... तुम ठीक महसूस क्र रही हो न ...... वह पेट मैं दर्द तो नहीं हो रहा न अब ..........

महीन मुस्कराई ...... और ब्लश करती होइ वीर्य सी बोली ....... नहीं अब मैं ठीक हों ....... आप इतना परेशान न हों .......

विनोद न्य भी एक सुकून की लम्बी सांस ली ....... जिस पी महीन मुस्करा दी ........

महीन को पैन वाघ्यारा तो अब नहीं थी मगर फिर भी वह काफी थकी होइ लग रही थी ........... नीतू उसकी पास आई और उसकी तबियत का पुछा तो महीन न्य उसी बता दया की पीरियड्स की वजह सी उसका मूड थोड़ा डिस्ट्रेस्सेड है .............. नीतू मुस्करा दी ..........

इतनी मैं महीन को जेनी न्य आ की बताया की महीन को बॉस न्य बुलाया और कोई असाइनमेंट उसकी ज़िम्मे लगा दी ....... जो उसी अगली hi दिन कम्पलीट करनी थी ........ एक इम्पोर्टेन्ट असाइनमेंट थी ........ और उसी यह भी बताया था बॉस न्य की यह उसका समझो तो टेस्ट केस है .............

महीन अपनी टेबल पर आ क्र वह असाइनमेंट कम्पलीट करनी लगी ....... ऐसी प्रोजेक्ट उसनी इंडिया मैं अपनी ऑफिस मैं भी काफी बार कए थय ...... मगर इस नए जगा पी ........ नए ऑफिस मैं ........ नए बॉस की सामन्य काम करनी मैं वह बुहत घबरा गए थी ........... उसकी दिल की धरकन भी तेज़ हो गए थी की वह कैसी यह सुब मुकमल क्र सकी गई ....... काम कृत्य होय उसकी हाथ कैम्प रही थय ............ उस असाइनमेंट की काम सी ज़्यादा उसको उन सुब चीज़ों की वजह सी घबराहट हो रही थी की अगर वह ना क्र सकीय तो क्या हो गए .......... उसी कितनी शर्मिंदगी का सामना करना हो गए ............... ऑफिस टाइम ख़तम होनी तक वह असाइनमेंट का ओने थर्ड हिस्सा hi कम्पलीट क्र पाई ........

घर आ की चेंज क्र की दोनों खाना खाया कहानी की दौरान विनोद न्य महीन सी उसकी असाइनमेंट की बारी मैं पुछा ....... तो महीन न्य उस सी डिसकस भी क्या ............

विनोद .... मेरी कोई हेल्प चाहिए हो तो बता दो ....

महीन ....... नहीं इतस okay मैं क्र लोन गई ........ मगर उसकी चेहरी पी अभी भी थोड़ी परेशानी लग रही थी .........

कहानी की बाद दोनों अपनी रूम मैं चली गए ......... महीन आराम करनी की बजाय अपना लैपटॉप लय क्र वापिस लाउन्ज मई आ क्र बेथ गए ....... दोबारा सी काम करनी ........... उसी पता भी नहीं चला की कब 7 पं हो गए ........ और विनोद भी बहार आ गया अपनी रूम सी सोनी की बाद ...........

विनोद ....... गुड इवनिंग महीन ........ सोइ नहीं तुम ...

महीन ...... नहीं वही असाइनमेंट का काम क्र रही थी ... .....

विनोद ........ okay मैं चाय बना की लाता हों तुम्हारी लये .......

महीन मुस्कराई ........... यस प्लीज ........... बुहत तालाब हो रही है .......

थोड़ी देर मैं विनोद चाय बना लाया और महीन को दी और खुद भी उसकी सामन्य बेथ क्र पीनी लगा ............. ............ विनोद को महीन काफी परेशां लग रही थी .......

विनोद ......... महीन तुम परेशां लग रही हो .......... तबियत तो ठीक है न ...........

महीन ज़बरदस्ती मुस्कराती होइ ........ नहीं नहीं कुछ प्रॉब्लम नहीं है .. मैं ठीक हों ........

विनोद ...... फिर क्या पीरियड्स को लय की मसला है कोई .....

महीन थोड़ा शरमाई ............. नहीं पीरियड्स का अब कोई इशू नहीं है .......... वही बस असाइनमेंट दी है न निक न्य आज .......... तो उसी को लय क्र थोड़ा घबराहट हो रह है ..........

विनोद मुस्कराया ....... आर्य यार तुम यह सुब तो इतनी बार क्र चुकी हो तुम्हारी लय कोनसा यह काम नया है ............. और मैं भी हों न तुम्हारी हेल्प करनी की लय ..............

महीन मुस्कराई .......... हाँ बुहत बार क्या होआ है काम ..... मगर आज पता नहीं क्यों घबराहट होती जा रही है ........ हाथ कैंम्प रही हैं मेरी ............. बैचैनी सी हो रही है ............. बुहत टेंशन हो रही है ..........

विनोद उसको बुक्क उप करनी की लय मुस्कराया ........... महीन मुझी पता है तुम यह क्र सकती हो .............. लकिन अगर तुम्हारी ऐसी hi कैफियत हो रही है जैसी तुम बोल रही हो तो पता है ऐसी वक़्त मैं थोड़ी सी मदद भी बुहत कुछ चेंज क्र देती है ............ थोड़ी सी आशीर्वाद ......

महीन ...... मैं समझी नहीं ..........

विनोद ........ प्लीज मेरी बात का बुरा नहीं मनाना ....... लकिन ी विल सुग्गेस्ट यू की तुम को गणेश जी सी आशीर्वाद लेनी चाहिए ....... ....... वह तमाम रुकावटें और परेशान्यां दूर क्र देती हैं .......... और मन को शान्ति देती हैं ..........

महीन विनोद की बात सुन क्र चौंक पारी .......... वह रोज़ विनोद को पूजा कृत्य होय देखती थी ...... उसकी हेल्प भी करती थी ....... मगर उसनी कभी भी यह नहीं सोचा था की वह कभी खुद भी गणेश जी सी उनकी आशीर्वाद मांग सकती है अपनी लये ........ अपनी फेथ और मज़हब की खिलाफ जाती होय ............ उसनी कभी सोचा भी नहीं था की वह ऐसा क्र सकती है कभी ...........

महीन ........ विनोद ........ व्हाट अरे यू सयिंग .......... तुम जानती होय न की मैं यह नहीं क्र सकती ........... यू क्नोव माय ओन रेलगिओं ..........

विनोद ....... आर्य यार तुम कुछ ज़्यादा hi सोच रही हो .......... देखो तुम कुछ भी ग़लत नहीं करनी जा रही हो ........... सिर्फ अपनी मन की शान्ति की लय गणेश जी को बोलो गई न ............ और तो कुछ भी नहीं न ........ इस सी तुम्हारी फेथ और तुम्हारी रेलगिओं को कुछ भी इफ़ेक्ट नहीं हो गए ....... बिलीव में ........... तुम्हारी मन को शान्ति मिले गई और तुम अपना काम आसानी सी क्र पाओ गई ..........

महीन .......... लकिन विनोद ........

विनोद ......... देखो तुम उनकी लय पहली भी तो पार्षद रेडी करती हो न ....... और अब भी कुछ ज़्यादा नहीं है ....... वैसी hi उनको पार्षद की थाली पेश करनी है ........ और उन सी अपनी मन की शान्ति और उनकी ब्लेस्सिंग्स की प्रेयर करनी है ............. और यक़ीन करो तुम इस सी बुहत ाचा फील करो गई ........ और देखना तुम्हारी असाइनमेंट भी कितनी अछि हो जाती है ......... विनोद मुस्कराया ....... तुम रुको मैं पार्षद की थाली बना की लाता हों ............

विनोद उठ की जल्दी सी किचन मैं चला गया ........... और चाँद मिनटों मैं hi अपनी हाथ मैं थाली लये होय वापिस आज्ञा ........ महीन न्य देखा उस मैं फूल, मिठाई और एक दिया रखा होआ था ........... विनोद न्य महीन का हाथ पाकर की उसी उठाया .......... और गणेश जी की मूर्ती की सामन्य लय जांय लगा ............ महीन को अपनी पाऊँ बुहत भारी लग रही थय ........... उसकी घबराहट मई इज़ाफ़ा होता जा रहा था ....... उसको अंदर सी गिल्ट फील हो रहा था ............... मगर विनोद न्य उसी गणेश जी की सामन्य खरा क्र दया ..........

महीन वीर्य सी बोली .......... विनोद मुझ सी नहीं हो पाय गए यह ....... प्लीज ........

विनोद भी आहिस्ता सी महीन की कान की पास मुंह ला की बोलै .......... महीन प्लीज ........... मेरी कहनी पी एक बार करो .......... मेरी लये ........... प्लीज .........

महीन न्य एक नज़र विनोद की तरफ देखा ...... और फिर उसकी नज़रें गणेश जी की मूर्ती पी टिक गईं ........... उनकी आँखों मैं देखनी लगी ............. उसी लगा की उसकी नज़रें किसी मैगनेट की तरह मूर्ती की आँखों सी जुड़ गए होइ हैं .......... वह अपनी नज़रें हटा नहीं पा रही थी ...........
 
विनोद की आवाज़ आई ........... यह लो महीन और इसी गणेश जी की सामन्य रख दो .......

महीन न्य मूर्ती सी नज़रें हटाय बिना विनोद सी वह थाली ली और उसी मूर्ती की सामन्य रख दया ............

विनोद ...... अब दया जलाओ .......... विनोद न्य उसी माचिस दी ......

महीन न्य माचिस की तीली जलाई और कांम्पत्य हाथों की साथ दिया जला दया गणेश जी की सामन्य ........... उसकी हलकी हलकी सी रौशनी महीन की आँखों मैं उतरण्य लगी ........... महीन को महसूस हो रहा था की जैसी उस रौशनी की साथ उसकी अंदर कुछ जा रहा है ............

विनोद .......... अब अगर बाटी भी जला दो ...........

महीन न्य साथ hi रखी होय स्टैंड मई लगी होइ अगर बातों को भी जला दया ........... और कमरे मैं उनकी खुसबू फैलनी लगी ........

विनोद ........... अब थाली सी फूल उठा की गणेश जी को पेश करो .......

महीन न्य थाली सी फूल उठाय .... और कांम्पत्य हाथों की साथ उनको मूर्ती की ऊपर दाल दया .......... गिल्ट की वजह सी उसका दिल बैठा जा रहा था ............

विनोद .......... अब अपनी आंखें बंद क्र की गणेश जी को बोलो की तुम्हारी मन को शान्ति डैन ........ और तुमको शक्ति डैन की तुम अपना काम पूरा क्र सको ..........

महीन न्य अपनी आंखें बंद नहीं किन ........ बिना अपनी हाथों को बाँधी ............ गणेश जी की मूर्ती की आँखों मैं दकनी लगी ........ साथ hi दिल hi दिल मैं विनोद की बताई होइ बातें वह जैसी गणेश जी सी करनी लगी ......... मूर्ती की आँखों मई देखती होइ .......... उसी कुछ फील हो रहा था ................. उसकी आंखें बंद होनी लगीं ............ गणेश जी ........ मुझी शान्ति चाहिए मन की ............ मेरी काम मैं आप की मदद चाहिए ................... वह दिल hi दिल मैं जैसी मूर्ती सी बातें करनी लगी ............ उसी अब अहसास नहीं रहा था की वह कुछ ग़लत क्र रही है ........... बस वह मूर्ती की सामन्य खरी थी आंखें बंद कए होय ......... और अगर बाटी की खुसबू उसकी अंदर उतरती जा रही थी ............ महीन को महसूस हो रहा था की जैसी उसकी घबराहट ख़तम होती जा रही है ........... उसी शान्ति महसूस हो रही थी .......... सुकून सा फील हो रहा था ............... वह अपनी hi बातों मई गम थी की उसी विनोद की आवाज़ सुनाई दी ...........

विनोद ....... महीन अब आंखें खोल लो .........

महीन न्य घबरा की अपनी आंखें खोलीं और शर्मिंदाह नज़रों सी विनोद को देख क्र अपनी नज़रें झुका लीन ................

विनोद ........ महीन अब वह पार्षद खाओ और मुझी भी दो ..........

महीन न्य उस थाली सी मिठाई उठा क्र अपनी मुंह मैं डाली ....... और फिर दूसरा टुकड़ा विनोद को दी दया ............ और फिर वापिस अपना लैपटॉप लय क्र बेथ गए ........

थोड़ी देर मैं hi महीन को फील होनी लगा की जैसी उसका मन हल्का हो रहा है ........... उसकी बैचैनी ख़तम हो गए होइ थी ........... असाइनमेंट का काम तो था अभी भी मगर अब उसी जैसी सुब कुछ आसान hi लग रहा था ............ कोई बूझ नहीं महसूस हो रहा था ........... उसी अंदर सी थोड़ी गिल्ट भी फील हो रही थी ........... मगर बुहत hi काम ......... वह खुद को समझा रही थी ........ यह मैं न्य सिर्फ विनोद की खातिर क्या है ........ और कुछ भी ग़लत नहीं है ............ और मैं न्य कोनसा अपना फेथ अपना मज़हब चोर दया है ......... और ना hi चोर रही हों .......... बस थोड़ा उसकी कहनी पी यह क्या है .......... हाँ मगर इसकी साथ थोड़ी शान्ति तो मिली है ............. थोड़ा कॉन्फिडेंस भी बढ़ गया है ........... वह मुस्करा दी ...........

विनोद दोबारा उसकी पास आया और उसको अब खुश और रिलैक्स देख क्र मुस्करानी लगा ............. महीन भी उसी देख क्र मुस्करा दी ........ और 10 पं तक उसनी अपनी असाइनमेंट कम्पलीट क्र ली .............. और फिर डिनर करनी लगी ......

विनोद ........... कैसा रहा महीन ...... अब कैसा फील हो रहा है .....

महीन मुस्कराई ........ ाचा है अब ............

विनोद .......... गुड ...... मैं न्य कहा था न की गणेश जी की आशीर्वाद सी सुब ठीक हो जाय गए .........

महीन मुस्करा दी ........ हम्म्म ....... महीन को भी फील हो रहा था की विनोद न्य ठीक hi कहा था ........... सुच मैं hi उसकी मन को शान्ति दी थी गणेश जी न्य ..............

खाना खा की विनोद न्य बर्तन किचन मैं रखी ...... और फिर अपनी रूम मैं चला गया ............. महीन न्य बर्तन वाश कए और फिर अपनी रूम मैं जांय लगी ........ छोटी सी मंदिर की पास सी गुज़री तो उसकी नज़र गणेश जी की मूर्ती पी पारी ............ महीन एक लम्हे की लय रुक गए ................ फिर उसी कुछ ख्याल आया ........... उसनी मूर्ती की सामन्य रखा होआ दिया जला दया .............. और वीर्य सी बोली ............ गणेश जी ............. सुबह सुब ठीक ठीक हो जाय बस मेरी असाइनमेंट का ........... यह बोल की महीन मुस्कराई और जल्दी सी अपनी कमरे मैं चली गए ..............

सुबह अपनी रूटीन की मुताबिक़ नाश्ता क्र की दोनों ऑफिस जांय लगी तो विनोद बोलै .............. महीन जांय सी पहली गणेश जी सी आशीर्वाद नहीं लो गई ..............

महीन मुस्कराई ............ और फिर ना चाहती होय भी ....... पता नहीं क्यों गणेश जी की सामन्य जा की खरी हो गए ............ बिना अपनी हाथ बाँधी या सर को झुकाय ........... उसनी दिल hi दिल मई गणेश जी की आशीर्वाद मांगी .......... और फिर विनोद की साथ ऑफिस चली गए ........

जैसी जैसी उसकी प्रेजेंटेशन का टाइम क़रीब आ रहा था तो उसकी घबराहट बढ़ रही थी ........... विनोद उसकी क़रीब आया ......

विनोद ........ बेस्ट ऑफ़ लक महीन ........

महीन न्य घबराय होय उसकी तरफ देखा ........... पता नहीं ठीक हो गई प्रेजेंटेशन की नहीं ........... विनोद मुझी तो घबराहट हो रही है .....

विनोद बोलै ........... महीन क्यों घबरा रही हो ............ याद है न गणेश जी का आशीवाद है तुम्हारी साथ ........... देखना सुब ठीक हो जाय गए ...........

फिर विनोद न्य कुछ सोचा ........ फिर उसनी अपनी गली मैं पहना होआ गणेश जी की मूर्ती वाला लॉकेट उतारा और उसी महीन की गले मैं दाल दया ............

महीन घबरा की ........... विनोद ........... यह क्या ........... नहीं नहीं ...... प्लीज मैं यह नहीं पहन सकती ............

विनोद .......... महीन कुछ नहीं हो गए ............ जो तुमको घबराहट हो रही है न तो तुमको गणेश जी अपनी साथ मिलाएँ गए ............

महीन अपनी गले मैं लटक रही गणेश जी की मूर्ती को देखती होइ बोली ....... पर विनोद ........... अगर किसी न्य देख लय इसी तो ...........

विनोद ...... नहीं कोई नहीं देखी गए ........ और किसी न्य देख भी लय तो कोई कुछ नहीं कही गए ............. तुम इसको अपनी शर्ट की अंदर क्र लो ..........

महीन की दिल की हालत अजीब हो रही थी ........... उसनी कभी यह नहीं किआ था .............. मगर फिर भी नाजन्य क्यों उसनी खामोशी सी उस लॉकेट को अपनी शर्ट की अंदर क्र लय ........ और मर. निक को प्रेजेंटेशन देंय चली गए ..............
 
अपडेट NO: 18

नेक्स्ट डे इन ऑफिस

महीन अपनी कंप्यूटर की सामन्य बैठी होइ थी ........... मगर काम नहीं क्र रही थी ...... उसका ध्यान किसी और hi तरफ था ........ जैसी वह कुछ सोच रही हो ............. महीन की दीमघ मैं अभी तक विनोद की जनम दिन को लय क्र बातें चल रही थीं .......... उसी याद आ रहा था जो बातें उसकी प्रिय की साथ होइ थीं ........ और कैसी वह उसी उदास और डिस्ट्रेस्सेड लग रहा था ........... प्रिय की ना होनी सी ..... अपनी लाइफ की इतनी अहम् दिन को उसकी साथ ....... महीन को साफ़ लग रहा था की विंड प्रिय की कमी महसूस क्र रहा है ...... ......... विनोद की उसकी साथ अब तक की होय सुलूक और बेहेवियर की बाद जो तालुक अब उसका विनोद की साथ बन चूका होआ था उसकी बाद उसी सुच मैं hi विनोद की फ़िक्र हो रही थी ....... उसी विनोद का इस तरह सी उदास होना ाचा नहीं लग रहा था .......... जितना उसनी उसकी लय किआ था ............ जितनी उसकी तकलीफ मैं विनोद न्य उसकी केयर की थी ........ उसी अंदर सी फीलिंग हो रही थी की उसी भी कुछ न कुछ विनोद की लय करना चाहिए ........... विनोद को अपनी जनम दिन पी ऐसी उदास नहीं रहना चाहिए ........

नीतू न्य उसी ओबेसेर्वे क्र रही थी ........... और फिर उठ की उसकी पास आगये ......

नीतू ....... महीन क्या बात है ?? तुम ठीक तो हो न ...........

महीन न्य मुस्करा क्र नीतू की तरफ देखा और फिर अपनी कंप्यूटर की स्क्रीन लॉक क्र की उठी और नीतू को लय क्र टिया रूम मैं आगये .......... टिया रूम खाली था ........ दोनों अपनी कॉफ़ी लय क्र बेथ गईं ........

नीतू ....... हाँ महीन अब बोलो ...... क्या चीज़ डिस्टर्ब क्र रही है तुमको ..........

महीन ाहसिता सी बोली ............. नीतू ........ थिस सैटरडे को विनोद का जनम दिन है ........

नीतू खुश होती होइ ........ वववववव ......... यह तो बुहत अछि न्यूज़ है ............ लेट में विश हिम ........

महीन ...... नहीं रुको .......... सुनो मेरी बात .......

नीतू रुक गए ............. हाँ बोलो ......

महीन .......... कल रात विनोद प्रिय की साथ वीडियो कॉल पी बात क्र रहा था ......... और वह दोनों अपनी लास्ट ईयर की बिरथ डे सेलेब्रेशन्स को hi डिसकस क्र रही थय .......... और ुकस्य बाद विनोद काफी लौ और उदास लग रहा था मुझी ........ जैसी वह प्रिय सी दूर होनी की वजह सी परेशान हो ....... और अकेला फील क्र रहा हो ......... अपनी जनम दिन मैं ....... उसकी कमी फील क्र रहा हो ........ मुझी यह बात बुहत खुल रही है ...... मुझी ाचा फील नहीं हो रहा है विनोद की लय ..............

नीतू ......... हम्म्म ........ बात तो तुम ठीक क्र रही हो ..... उसकी जनम दिन पी उसका प्रिय सी दूर होना सुच मैं hi डिस्टर्बिंग हो गए उसकी लय ......

महीन ........ हम्म्म ....... लकिन हम क्र भी क्या सकती हैं ......

नीतू ....... क्या मतलब क्यों कुछ नहीं क्र सकती ........... हम मिल क्र एक पार्टी रखती हैं और विनोद का जनम दिन सेलिब्रेट करें गए .....

महीन ......... मैं न्य बोलै था उसी ...... लकिन विनोद इंटरेस्टेड नहीं है पार्टी मैं ...........

नीतू कुछ सोचती होइ बोली ........ हम्म्म्म ............. हे इस रियली मिसिंग Priya's कंपनी यार ....... यू विल हैवे तो दो समथिंग महीन ..........

महीन ........... थोड़ी हैरानी की एक्सप्रेशंस की साथ नीतू को देखती होइ ....... मैं ...... ?? मैं कैसी ..........????

नीतू ....... देखो महीन तुमहिं पता है न की वह तुम्हारी लय कितना क्कुह क्र रहा है ........... तुम्हारी कितनी केयर करता है ........ तुम इस बात सी इंकार नहीं क्र सकती .....

महीन ............ हाँ बिलकुल .............. हे इस सो काइंड तो में ........ और बुहत ख्याल रखता है मेरा ............ बुहत फ़िक्र करता है मेरी .......

नीतू ........ तो फिर तुमको भी उसकी लय कुछ करना हो गए

महीन ........... वह क्या ........

नीतू ........ कुछ ऐसा की जिस सी उसी अपनी जनम दिन पी प्रिय की कम्मी फील न हो ...... वह उदास ना हो ..........

महीन चौंक क्र ...... और घबराय होय ........... क्या बोल रही हो तुम नीतू ............ इतस नॉट पॉसिबल यार ........... यह ज़रूर है की मैं काफी हद तक विनोद की साथ एक hi अपार्टमेंट मैं रहंय मैं कम्फर्टेबले हो चुकी होइ हों ........ लकिन अभी भी हमारी दरम्यान बॉउंड्रीज़ और लिमिट्स सेट हैं ............ जिनको किसी न्य भी लांगंय की कोशिश नहीं की ..........

नीतू हंसती होइ ............ बौंडरीएस ........... बिटवीन ा कपल स्टेइंग टुगेदर ........... हाहाहा ......... महीन .... यू अरे इन ुक .......... और तुमको भी यहाँ पर एक साल सी ज़्यादा रहना है ... अपनी हस्बैंड की बिना hi .......... विनोद की साथ hi ............ तो फिर कब तक तुम खुद को इतना रिज़र्व रख सको गई विनोद सी .............. कैसी उसकी ख़ुशी और उसकी घमी सी खुद को दूर रख सको गई ........... जब की वह तुम्हारी लय ...... तुम्हारी तकलीफ की लय सुब कुछ करता है ........... तो अगर तुम उसकी लय कुछ करो गई ........ या थोड़ी सी अपनी बौंडरीएस को क्रॉस क्र भी लो गई तो उस मैं कोई हर्ज नहीं है ............. अपनी इतनी ाच्य कल्लेगे और इतनी केयरिंग फ्रेंड की ख़ुशी की लय ............. थोड़ा फ्रेंडली एनवायरनमेंट क्रिएट करो उसकी लय .............

महीन सर झुका क्र नीतू की बात सुनती रही फिर बोली ...... फ्रेंडली ........ ?? क्या मतलब ....... ????

नीतू हंसी ...... महीन ...... ी ऍम नॉट आस्किंग यू तो एक्ट लिखे हिज वाइफ .... लकिन तुम उसका ख्याल थोड़ा इस तरह ज़रूर रख सकती हो की उसी प्रिय की कम्मी फील न हो ........ या काम सी काम हो ...........

महीन ........ हम्म्म ...

नीतू ...... देखो तुम और विनोद दोनों hi तनहा हो ..... अपनी अपनी स्पोसेस सी दूर ....... और तुमको चाहिए की तुम विनोद को उसकी जनम दिन की मौके पी थोड़ी कंपनी दो ....... जस्ट लिखे प्रिय ..... उसकी साथ केक काटो ........ उसकी साथ बहार आउटिंग की लय जाओ ........ उसकी साथ मंदिर जाओ .......... उसकी साथ डिनर करो .......... एक बुहत hi ाचा और रिलैक्सिंग भरपूर दिन गुज़ारो विनोद की साथ ........... जिस सी उसी यह अहसास ना हो की लास्ट ईयर प्रिय उसकी साथ थी तो उसका जनम दिन ाचा गुज़रा था ........ तुम्हें कुछ न कुछ ज़रूर करना हो गए उसकी लय यार ..........

महीन की आंखें फैल ........ नहीं नीतू ...... यह ठीक नहीं है ....... तुम्हें पता है की मैं मैरिड हों ....... और इस तरह विनोद की साथ लिमिट्स क्रॉस नहीं क्र सकती ....... ना hi उसकी साथ इस तरह का फ्लिर्टिंग रिलेशन रख सकती हों ............. की उसकी साथ बहार घूमों फिरों ..........

नीतू हंसी ....... who's टॉकिंग अबाउट फ्लिर्टिंग??? मैं तो सिर्फ यह कह रही हों की तुम विनोद को उसकी जनम दिन पर थोड़ी अटेंडटिन दो ....... उसका उसी तरह सी ख्याल रखो जैसी वह वह तुम्हारा करता है .......... कुछ ऐसा करो जिस सी ............ उसी लगी की कोई उसकी खुसयों मैं ...... उसकी जनम दिन को मनानी मैं उसकी साथ शामिल है ............ उसकी ख़ुशी मैं खुश है .......... जिस सी उसी लगी की उसका जनम दिन किसी और की लय भी माइनि रखता है .............

महीन कुछ सोचती होइ .......... ह्म्म्मम्म ............ ी ... don't क्नोव ...... नीतू लकिन मैं विनोद को कुछ भी ग़लत इम्प्रैशन या सिग्नल नहीं देना चाहती ........ महीन शर्माती होइ बोली ......

नीतू महीन की हाथ पी अपना हाथ रखती होइ आहिस्ता आवाज़ मैं बोली ........... देखो महीन ......... तुम्हारा कुछ भी लोस्स नहीं है इस सुब मैं ........ तुम दोनों एक hi कश्ती की सवार हो ........ दोनों hi अपनी स्पोसेस सी दूर .......... और फिर यह जस्ट एक नाईट की लय hi तो है ........ जस्ट ओने नाईट सेलिब्रेशन फॉर विनोद .......... तो तुमको भी थोड़ा अपनी फॅमिली सी दूरी को भूलनी का मौका मिली गए ......... थोड़ा बहार घूमनी का टाइम मिली गए ........... और बिलीव में आईटी इस नॉट हार्मफुल ात आल .......

महीन नज़रें झुकाय होय ....... लकिन ............ लकिन अगर विनोद को लगा की मैं उस मैं इंटरेस्ट लय रही हों तो ........ ??? तुम्हें पता है न की मैं पहली hi उसकी साथ अपार्टमेंट शेयर क्र की कितनी मुश्किल सी हाईड क्र रही हों इस बात को आसिफ सी ........ और विनोद की साथ रहना भी तो आसान नहीं है न ...... एक दूसरी मर्द की साथ .....

नीतू ........ ओह प्लीज महीन ............ तुम कुछ ज़्यादा hi सोच रही हो .......... वह महीन को आँख मारती होइ बोली ....... वैसी मुझी नहीं पता की तुम लोग एक साथ रहती होय किस हद तक लिमिट्स क्रॉस क्र चुकी होय हो ........... लकिन इस ख़ास मौकय पी तुमको कुछ न कुछ लिमिट्स को क्रॉस करना hi हो गए मेरी जान ........... और इसका यह मतलब नहीं है की तुम खुद को विनोद को पेश क्र रही हो ............. यह बस उसकी किंडनेस और केयर की बदली मैं तुम्हारा रिस्पांस हो गए .............

महीन .......... हम्म्म .......... ठीक है ........ लकिन मैं कुछ बुहत ज़्यादा नहीं करनी वाली उसकी लय ..........

नीतू ........... हम्म .......... लकिन यह तो इस पी देपेंद करता है न की तुम को विनोद की कितनी केयर है ...... या फिर तुम्हारी नज़र उसकी तुम्हारी लय केयर और फ़िक्र मंडी की कितनी ाहमयत है ...........

महीन न्य यह सुन क्र अपना सर झुका लय .........

नीतू ......... देखो महीन ......... तुम्हें उसकी साथ स्पेशलय त्यार हो की जाना हो गए बहार घूमनी की लय ........ थोड़ा कंपनी देंय की लय ........... और उसी अहसास दिलाना हो गए की उसकी साथ की ...... उसकी वजूद की तुम्हारी लय कितनी ाहमयत है ..............

महीन आहिस्ता सी बोली ........... और आसिफ .......

नीतू ....... कुछ नहीं हो गए आसिफ को ...... वह यहाँ तुम्हारी पास नहीं है ........... मैं एक बार फिर तुम सी यही कहौं गई की तुम इस वक़्त को एन्जॉय करो जो तुम यहाँ ुक मैं गुज़ार रही हो ............... पता भी है अगर तुम विनोद की साथ ना होती तो मैं कब का उसी पता चुकी होती जितना वह हैंडसम हुनक है.......... नीतू न्य महीन को आंख मार की बोलै ..........

महीन भी उसकी बात पी हंस पारी ........... बी शर्म .......... और राजीव का क्या .....

नीतू ........ राजीव का क्या ...... वह घर पी hi रहता .......... मेरा हस्बैंड hi रहता .................

महीन वीर्य सी ......... अरे यू सीरियस ...........

नीतू ........ महीन ...... मैं कुछ ऐसी बात नहीं क्र रही हों जो यहाँ नै हो ........... यह सुब कुछ तो यहाँ पी आम है ..... हर कोई अपनी लाइफ को एन्जॉय क्र रहा है ........ सिवाय तुम्हारी ............ हहहह .........

महीन भी हंस पारी और फिर दोनों उठ क्र अपनी वर्किंग प्लेस पर जांय लगीं तो रास्ती मई महीन बोली .......

महीन ..... प्लीज क्या तुम मेरी साथ चलो गई ...... विनोद की लय कुछ गिफ्ट लेंय की लय

नीतू मुस्कराई ............. और महीन की एक चुटकी काट टी होइ बोली ......... हाँ हाँ क्यों नहीं मेरी जान ........ महीन हंस पारी ........

नीतू ....... और हाँ अपनी विनोद जी को बता देना की तुम मेरी साथ जा रही हो ..... वर्ण ऐसी hi परेशान हों गए वह ....... नीतू महीन को तैसे करती होइ उसी आँख मार की बोली .......

महीन शरमाई और फिर अपनी काम मई मसरूफ हो गए ........... अब वह खुद को काफी हल्का महसूस क्र रही थी ...........
 
Back
Top