अपडेट 56
जनुअरी के आखरी फ्राइडे का दिन थी और सुप्रिया विक्रम के मैं ऑफिस के केबिन मैं बैठी थी. पिछले कई हफ्तों से वह विक्रम से मिलना अवॉयड सा hi कर रही थी. उसने सोच रखा था की जो भी वह अपने और विक्रम के बीच में सब कुछ प्रोफेशनल hi रखेगी. पर कल शाम को जब अतुल ने उसे बताया की उसे विक्रम की कंपनी से जॉब इंटरव्यू का लिए कॉल आया है तोह वह विक्रम सर का पर्सनली थैंक यू बोलने आयी थी.
अतुल काफी खुश था की एक महीने की जॉब सर्च के बाद आखिर फाइनली उसे एक इंटरव्यू का कॉल तोह आया था. उसे नहीं सोचा की सुप्रिया का इसमें कोई हाथ है, आखिर वह तोह एक छोटी पोस्ट पर एक एम्प्लोयी थी, वह कैसे उसका इंटरव्यू करवा सकती थी. पर सुप्रिया जानती थी की हो न हो इसमें विक्रम का हाथ था.
सुप्रिया इसलिए विक्रम को प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य थैंक यू बोलने उसके ऑफिस पहुंच गयी थी. हालाँकि रखना सब कुछ प्रोफेशनल था फिर भी सुप्रिया काफी अचे से तैयार होकर hi आयी थी, जैसे विक्रम को हल्का हल्का तैसे करना में उसे मजा सा आने लग गया हो. दोनों कुछ देर से ऑफिस की बातें कर रहे थे की सुप्रिया ने अपने आने का असली कारण बताया.
सुप्रिया - विक्रम एक्चुअली यहाँ आपको थैंक यू करने आयी थी....
विक्रम - किस बात के लिए?
सुप्रिया - आपको पता है किस बात के लिए... अतुल को इंटरव्यू का कॉल आ गया था...
विक्रम - ओह ाचा... पर ट्रस्ट में उसमे मेरा कोई हाथ नहीं.. ी ऍम सूरे हर और हायरिंग मैनेजर्स ने अपना काम काफी फेयर तरीके से किया होगा...
सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की विक्रम सच बोल रहा था की नहीं - ओह ाचा... पर खैर जो भी हो... मैं फिर भी आपको पर्सनली थैंक यू करना चाहती थी...
विक्रम - अगर वह सेलेक्ट होगा तोह अपनी कपाबिलिटी पर होगा...
सुप्रिया - उसे ये जानकार काफी ख़ुशी होगी... प्लीज आप उससे नहीं मेंशन करना की मैंने आपसे इस बारे में कोई बात की थी..
विक्रम - सूरे.. थैंक्स फॉर किंग इन थौघ, काफी दिनों बाद तुम्हे यहाँ देख कर ाचा लगा...
विक्रम सुप्रिया के पास hi बैठा था और उसने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ पर हलके से रखा. सुप्रिया ने अपना हाथ झट से पीछे खींच लिया.
सुप्रिया - विक्रम... मुझे एक और बात करनी थी...
विक्रम - हाँ.. बोलो न...
सुप्रिया ने थोड़ा सा इत्र के कहा - उस दिन जो भी पार्टी में हमारे बीच हुआ.... ी थिंक वह ठीक नहीं था.. प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य और पर्सनली दोनों तरह से... और मैं नहीं चाहती की लोगो को ऐसा लगे की आप और मैं...
विक्रम ने हलके से मुस्कुरा के कहा - इस तहत हाउ यू फील?
सुप्रिया ने हिचकिचाते हुए कहा - हाँ... और क्या...
विक्रम - ठीक है... ी रेस्पेक्ट योर फीलिंग...
सुप्रिया ने विक्रम से इस जवाब की उम्मीद नहीं की थी, और वह संकोच में कुछ पल वहीँ बैठी रही. उसे लगा था विक्रम बाकी मर्दो की तरह उसके पीछे पड़ेगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ.
सुप्रिया - आप को और कुछ नहीं कहना था?
विक्रम - उम्... ी विल सी यू नेक्स्ट वीक इन थे इतर ऑफिस...
सुप्रिया थोड़ा डिसअप्पोइंटेड होते हुए बोली - Ok... ठीक है... मैं चलती हूँ अभी...
सुप्रिया बहार आयी तोह उसने देखा की जय वेट कर रहा था. आज वह दूसरी बार hi जय को मिली थी और उसे जय की शकल देख कर अछि सी फीलिंग नहीं आती थी.
सुप्रिया को देखते hi जय के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी - Hello मस. सुप्रिया...
सुप्रिया ने उसे बिना स्माइल के बोलै - Hi...
जय - कैसी रही आपकी मीटिंग विक्रम के साथ...
सुप्रिया - गुड...
जय - आज तोह दिशा ने मुझे रोक लिया बहार, नहीं तोह हम तीनो साथ मीटिंग कर सकते थे...
सुप्रिया को समझ नहीं आया - क्या मतलब?
जय ने एक गन्दी सी स्माइल दी - जब मीटिंग होगी तब समझ जायेगी...
सुप्रिया को ाचा नहीं लग रहा था - Ok सर... मुझे अभी जाना है... नीस तो सी यू अगेन...
जय - सूरे... सी यू लेटर...
जय सुप्रिया को जाते हुए देख रहा था और फिर वह विक्रम के केबिन में आ गया.
जय ने अंदर आते hi कहा - तोह... कब कर रहे है हम?
विक्रम अपने काम में बिजी था - क्या कर रहे है?
जय - मन्ना पड़ेगा, सही खेल गए तुम गुरु... पहले उसके लोसर हस्बैंड को जॉब से निकलवा दिया... और अब ये तुम्हारे आगे पीछे घूम रही है... अब तोह रेडी लग रही है...
विक्रम - मेरा उसमे कोई हाथ नहीं था...
जय - के ों, मुझसे तोह सच बोल hi सकते हो... एनीवे... इतना स्लो क्यों चल रहे है इसके मामले में... उफ़ साली के सेक्सी कर्व्स देख कर मैं करता है की बस निचोड़ दू अचे से...
विक्रम अपने कंप्यूटर में देखता रहा - अभी रुक जायो... ज्यादा बेताबी मत दिखायो...
जय - रुका hi तोह नहीं जाता... इसकी साड़ी शर्म निकलने में कितना मजा आएगा... हम दोनों एक साथ... तुम मुँह में... मैं पीछे गांड में... या फिर मैं मुँह में.... उसके उस अकड़ू से चेहरे को सफ़ेद रेंज में भरने में कितना मज़ा आएगा.. उफ्फ्फ....
विक्रम ने एक उनकंफर्टबले सा मुँह बनाया - जय... जरूरी है क्या ये सब बोलना...
जय - क्यों, हमने कितनी बार तोह ये सब किया है... फिर इसमें इतनी प्रॉब्लम क्यों है?
विक्रम - वह मेरी एम्प्लोयी है... कुछ भी गड़बड़ हो गयी तोह काफी शोर मच जायेगा...
जय - हम्म्म... पर तुम सेट तोह कर रहे हो इसे अचे से... तुम पहले कर लेना अकेले... आखिर इतना हार्ड वर्क कर रहे हो, तुम्हारा बनता भी है... पर फिर बाद में दोनों मिल कर…
विक्रम - ये सब छोडो.. बताया किस काम से आये थे...
जय - बात को घुम्यो मत… अगर तुमने जल्द कुछ नहीं किया तोह बात मुझे अपने हाथ में लेनी पड़ेगी…
विक्रम ने एक कड़क सी आवाज़ में कहा - जय… तुम जल्दबाज़ी में कोई गलत कदम मत उठाना.. लीव आईटी विथ में..
जय उसकी आवाज़ सुनकर समझ गया था की विक्रम को और गुस्सा दिलाना ठीक नहीं था, और वह और विक्रम दूसरी बातों में लग गए.
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सुप्रिया इस सब से अनजान वापस अपने घर पहुंच गयी, उसने आज की छुट्टी ली हुई थी. अतुल घर से बहार गया हुआ था, उसे मंडे को अपने इंटरव्यू के लिए अपने आप को थोड़ा प्रेसेंटाब्ले बनाना था. पिछले एक महीने से वह घर से निकला hi नहीं था. करुणा अभी भी घर का काम कर रही थी. घर का गेट खुलते hi वह छौंक सी गयी.
करुणा - दीदी... आप...
सुप्रिया ने शरारत भरी आवाज़ में कहा - हाँ... क्यों क्या हुआ? किसी और का इंतज़ार कर रही थी क्या?
करुणा की शकल उतर गयी - नहीं दीदी... कहाँ कोई और... जबसे भैया ने घर पर रहना शुरू किया है... कुछ भी नहीं हो पाटा...
सुप्रिया - हम्म्म.... बस उनकी जॉब लग जाएगी जल्द hi... फिर तुम और इक़बाल... फिर से..
करुणा की आँखों में चमक सी आ गयी - सच!!
सुप्रिया - देख तेरी शकल, जैसे पता नहीं जैसे क्या hi मिस कर रही है...
करुणा - आपको पता नहीं है दीदी... अगर आपके अंदर इतना बड़ा लुंड जायेगा न तब आप समझोगे की मेरी हालत क्या है.
सुप्रिया करुणा की शकल देख रही थी, पता नहीं क्या बोले जा रही थी वह बिना सोचे समझे. करुणा भी समझ गयी थी की वह कुछ ज्यादा hi बोल गयी थी.
करुणा - सॉरी दीदी... मेरा वह मतलब नहीं था...
सुप्रिया - हम्म्म... ठीक है ठीक है... पर वैसे इतनी घबराई हुई सी क्यों थी जब मैं आयी...
करुणा - मुझे लगा भैया आ गए...
सुप्रिया - तोह... उनसे क्यों घबराना?
करुणा - मुझे बोलना तोह नहीं चाहिए पर वह अजीब तरह से देखते है मुझे... मैं गौर किया है...
सुप्रिया - कुछ भी!! अतुल क्यों देखेंगे तुझे...
करुणा - क्यों? सुन्दर नहीं हु मैं? इतनी तोह सुन्दर हूँ... सब मर्द देखते है सुन्दर लड़कियों को... और फिर पता नहीं आप दोनों के बीच सब...
सुप्रिया को करुणा की बातें अब थोड़ी इर्रिटेटिंग लगने लगी थी. जबसे उसने सुप्रिया को इक़बाल और उसके बीच सेक्स होते देखा था, तबसे जैसे उसकी कैंची जैसी जुबान और भी खुल गयी थी. उसे अब घबराहट hi नहीं होती थी की वह सुप्रिया को क्या बोल रही है.
सुप्रिया - हमारे बीच सब ठीक है... ऐसा कुछ नहीं...
करुणा - दीदी... जवानी बस एक बार आती है... और फिर चली जाती है... और आपकी जवानी पर तोह पता नहीं कितने मर्द टाक लगाए बैठे होंगे...
सुप्रिया - तोह? क्या करू? अपने आप को उनके सामने परोस के रख दू?
करुणा - नहीं... पर कोई ाचा लगे तोह इसमें कोई हर्ज़ भी नहीं है... कोई ऐसा जो आपको सब कुछ दे सके...
करुणा - चल तू अपना काम पूरा कर. फालतू बातों में मत लग.
सुप्रिया अंदर कमरे में चली गयी, उसे करुणा की बातें और नहीं सुन्नी थी. अब बस अतुल की जॉब लग जाये तोह शायद उनके बीच फिर से सब कुछ ठीक हो जायेगा.
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अगले कुछ दिनों में अतुल को विक्रम की कंपनी में जॉब मिल गयी. वह थोड़ा हैरान हुआ था की ये विक्रम की कंपनी है, पर विक्रम खुद उससे पर्सनली एक बार भी नहीं मिला था. उसने इस नयी जगह एक नयी शुरुवात कर दी थी. अतुल की जॉब लगने से सुप्रिया भी काफी खुश थी, आखिर उसे लगा था की उसका इसमें काफी बड़ा हाथ था. पर उसने अतुल को ये ज़ाहिर नहीं होने दिया.
फेब्रुअरी का महीना तोह छोटा hi था, और सुप्रिया फिर से काम में काफी बिजी सी रही. उसके उस वाले क्लाइंट्स - माइक और डनण्य, इंडिया आने वाले थे, तोह उन लोगो की ट्रिप के लिए थोड़ी सी प्लानिंग चल रही थी. उनकी ट्रिप का साड़ी प्लानिंग कृति कर रही थी. विक्रम से भी सुप्रिया की मुलाकात कभी कभी अपने ऑफिस में हो जाती. विक्रम को देखते hi उसे थोड़ा अजीब सा लगता, इतना स्मार्ट हैंडसम सक्सेसफुल इंसान जो शायद उसे चाहता था, पर उसने उसे मन कर दिया. और सुप्रिया के मन करने के बाद एक बार भी उसने भी कोई रेखा नहीं लाँघि.
दूसरी तरफ कृति और राहुल अभी भी साथ थे, और राहुल की तोह जैसे जिंदगी में लाटरी hi लग गयी थी. कृति जैसी स्मार्ट, खूबसूरत और अमीर लड़की जो उसे मिल गयी थी. अतुल ने जॉब लगने के कुछ दिन बाद राहुल को घर बुलाया था. दोनों काफी दिनों बाद मिल रहे थे और अपने अपने ऑफिस की कहानी बता रहे थे. अतुल जानना चाहता थी की राहुल ने ऑफिस में क्या क्या सुना था, पर जब तक उसके पास जॉब नहीं थी वह राहुल से मिलने से कटरा रहा था. पर अब तोह वह भी दिक्कत नहीं थी.
राहुल की एक आँख तोह अभी भी सुप्रिया पर hi तिकी थी और अतुल से बातचीत के बाद वह किसी बहाने से किचन में आ गया.
राहुल - कैसी हो सुप्रिया...
सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में कहा - मैं ठीक हूँ...
राहुल - मुझसे नहीं पूछोगी की मैं कैसा हूँ...
सुप्रिया - नहीं... ठीक hi होंगे..
राहुल - बहुत hi बढ़िया... कृति सच में लाखो में एक लड़की है... सच में हर मामले में...
सुप्रिया - तोह मैं क्या करू?
राहुल - ये देखो, कृति ने मुझे ये वाच गिफ्ट की थी मुझे..
सुप्रिया - तुम जैसा बेशरम इंसान नहीं देखा जो अपनी गर्लफ्रेंड से गिफ्ट लेता है...
राहुल - तुमने भी तोह ले hi रही हो, अतुल की जॉब लगवा दी... ये काम था क्या...
सुप्रिया ने गुस्से में पलट के राहुल की और देखा - मैंने किसी की जॉब नहीं लगवाई... अतुल को खुद ये जॉब मिली है...
राहुल हस्ते हुए - कोई नहीं, मैं अतुल को नहीं बतायूंगा... मुझे पता है उसे ाचा नहीं लगेगा... क्या करवाया वैसे विक्रम ने तुमसे जॉब के लिए...
सुप्रिया - शट उप... और ज्यादा बकवास की तोह ाचा नहीं होगा....
राहुल ने सुप्रिया के कंधे पर हाथ रखा - बकवास नहीं है... तुम भी जानती हो...
सुप्रिया - Don't टच में...
सुप्रिया राहुल का हाथ हटते हुए किचन से निकल कर बहार आ कर बैठ गयी. उसे पता था की राहुल अतुल के सामने कुछ गलत नहीं बोलेगा. राहुल के जाने के बाद वह बार बार विक्रम के बारे में सोचने लगी. क्या विक्रम सच में उससे कुछ चाहता था. और वह विक्रम से क्या चाहती थी.
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इस साल मार्च के शुरू में hi होली थी, और सुप्रिया विक्रम के घर पर होली पार्टी में इन्वितेद थी. वैसे तोह सुप्रिया इस पार्टी में न जाती पर विक्रम सर ने उसे बोलै था की उन्होंने काफी काम लोगो को इन्विते किया है. और फिर कृति ने भी सुप्रिया को काफी पुश किया था की जब तक सुप्रिया नहीं जाएगी वह वहां नहीं जाने वाली थी. कृति के इमोशनल ब्लैकमेल के चक्कर में सुप्रिया को हाँ करनी hi पड़ी. वह देखना भी चाहती की विक्रम सर का घर कैसा था.
जो कुछ नई ईयर पार्टी में हुआ था उसके बाद अतुल तोह बिलकुल नहीं जाना चाहता था. सुप्रिया ने किसी तरह से कन्विंस किया की वह बस थोड़ी देर hi वहां जायेंगे, और अतुल चाहे तोह बहार hi वेट कर सकता था. अतुल से बहुत साड़ी मिन्नतें करने के बाद कहीं वह माना था.
वहां पहुंच कर सुप्रिया ने देखा की विक्रम का घर कोई घर नहीं, एक बड़ा सा बंगला था. और छोटी सी पार्टी के बावजूद वहां बहुत सारे लोग मजूद थे. सुप्रिया ने सफ़ेद रंग की कुर्ती पहनी हुई थी. जब सुप्रिया वहां पहुंची तोह कृति उसे कहीं नहीं दिखी, और वैसे भी होली के इस महुअल में शक्ल पहचानना भी मुश्किल था.
अतुल एक कोने में बिलकुल अलग बैठा था और सुप्रिया उनके लॉन में लोगो की भीड़ के बीच में थी. आता जाते लोग सुप्रिया के ऊपर बिना झिझक के रंग फैके जा रहे थे. सुप्रिया का चेहरा एंड बाल रंगो में भर चुके थे. तभी उसे दूर से विक्रम लोगो से घिरा हुआ दिखाई दिए. वह उनकी और चल पड़ी.
सुप्रिया विक्रम के अकेले होते hi उनके पास गयी - हैप्पी होली विक्रम...
सुप्रिया ने अपने हाथ से गुलाल लेते हुए विक्रम के मुँह पर लगाया.
विक्रम के चेहरे पर एक स्माइल आ गयी थी - हैप्पी होली सुप्रिया... गुड तो सी की तुम यहाँ आयी...
सुप्रिया - हाँ पर थोड़े टाइम के लिए hi आयी हु.. कृति ने काफी इंसिस्ट किया था, पर वही hi अब नहीं दिख रही...
विक्रम - हाँ उसने मुझे मैसेज किया था की वह लेट हो जाएगी... उसे यहाँ से पहले कहीं और जाना था...
सुप्रिया - ओह... पर अब मैं यहाँ...
विक्रम - तुम पहली बार यहाँ आयी हो... चलो मैं तुम्हे अपना घर दिखता हूँ..
सुप्रिया - पर सर... आपके बाकी गेस्ट्स...
विक्रम - इतस ok... के विथ में...
विक्रम ने सुप्रिया का हाथ पकड़ा और भीड़ में से उसे खींचते हुए अपने घर के अंदर ले गया. अंदर सिवाए कुछ हाउस स्टाफ के कोई और नहीं दिख रहा था. सुप्रिया विक्रम का घर अंदर से देख कर दांग रह गयी थी, इतना आलिशान घर, इतनी अछि तरह से सजा हुआ.
सुप्रिया - वाओ... क्या घर है आपका... ओह सॉरी थोड़ा रंग नीचे गिर गया फ्लोर पर...
विक्रम - कोई नहीं वह क्लीन हो जायेगा... के...
विक्रम घर के अंदर से ले जाते हुए सुप्रिया को घर के पीछे ले गया जहाँ एक बड़ा सा स्विमिंग पूल था, जहाँ कोई भी नहीं था. सुप्रिया के लिए तोह किसी रिसोर्ट से काम नहीं था. वह इधर उधर देखने में खोयी हुई थी की उसने ध्यान नहीं दिया की विक्रम ठीक उसके पीछा खड़ा था
विक्रम से पीछे से सुप्रिया के चेहरे पर गुलाल लगते हुए कहा - मैंने तोह तुम्हे हैप्पी होली बोलै hi नहीं...
सुप्रिया मुड़ी और उसने भी विक्रम के चेहरे पर गुलाल फेक दिया. उसकी आँखों में इस समय काफी मस्ती झलक रही थी. विक्रम ने सुप्रिया को पकड़ते हुए उसकी गर्दन पर अचे से रंग लगाना शुरू.
सुप्रिया - अह्ह्ह... छोड़िये न...
सुप्रिया ने किसी तरह अपने आप को विक्रम की पकड़ से निकाला और उनसे बचने के लिए इधर उधर होने लगी. सुप्रिया की आँखों में इस खेल की शहरात जाग चुकी थी और वह भी अब पीछे नहीं हटने वाली थी. उसने स्विमिंग पूल के पास जाकर थोड़ा सा पानी अपने हाथ में लिया और विक्रम पर उछाल दिया. विक्रम की शर्ट थोड़ी सी गीली हो गयी थी और वह बिना रुके सुप्रिया के पास आने लगा. सुप्रिया के ठीक पीछे बस पानी hi था और कहीं और जाने को नहीं था.
सुप्रिया सोच hi रही थी की वह क्या करे, की विक्रम ने एकदम से उसके पैरो और बाँहों से पकड़ते हुए अपनी गोदी में उठा लिया. सुप्रिया विक्रम की गोदी में झटपटी सी रही थी और विक्रम उसकी आँखों में घूर रहा था.
सुप्रिया - विक्रम... मुझे नीचे उतरिये न...
विक्रम - नीचे उतार दू पानी में...
सुप्रिया - नहीं... प्लीज पानी में नहीं... काफी ठण्ड हो रही है...
विक्रम - शुरुवात तोह तुमने hi की थी... अब क्यों पीछे हैट रही हो...
विक्रम स्विमिंग पूल के बिलकुल किनारे पर खड़ा हो गया और सुप्रिया को पानी के ठीक ऊपर पकड़ा हुआ था. उसने सुप्रिया को गिराने का इशारा करते हुए उसे पूल की तरफ किया. सुप्रिया ज़ोर के विक्रम से चिपक गयी ताकि वह पानी में न गिरे.
विक्रम - तुम्हे स्विमिंग आती है न...
सुप्रिया - हाँ.. पर...
विक्रम ने सुप्रिया की आगे न सुनते हुए झट से सुप्रिया को पानी में फेक दिया. सुप्रिया स्विमिंग पूल के पानी के अंदर थी और वह 1-2 सेकंड बाद बहार निकली. उसके चेहरे और कपड़ो का रंग सारा स्विमिंग पूल के पानी से उतर गया था.
सुप्रिया - विक्रम!! ये क्या किया.... उफ्फ्फ... पानी कितना ठंडा है..
विक्रम - मैं आकर चेक करता हूँ...
विक्रम भी पानी में उतर गया और सुप्रिया से थोड़ा सा दूर पानी में खड़ा था.
सुप्रिया ने विक्रम की और पानी फैकना शुरू किया - ये गलत किया आपने...
विक्रम ने भी सुप्रिया की और हाथ से पानी उछाल दिया - और तुम क्या कर रही हो अभी...
सुप्रिया विक्रम को रोकने के लिए उसकी और बड़ा और पानी के इस खेल में सुप्रिया विक्रम की पकड़ में आ गयी. जैसे hi विक्रम का हाथ सुप्रिया की पीठ पर पड़ा वह उसके बेहद नज़दीक आ गयी.
सुप्रिया कुछ पल के लिए वहीँ रुकी रह गयी, फिर एक डैम से उसने अपने आप को विक्रम की कैद से आज़ाद किया और पानी के अंदर गोटा लगा दिया. उसने कॉलेज के दिनों में स्विमिंग सीखी थी जो आज काम आ रही थी. विक्रम भी उसके पीछे पीछे पानी में अंदर घुस गया.
सुप्रिया पानी के अंदर थी और उसने महसूस किया की विक्रम उसके ठीक पीछे था, बेहद नज़दीक.
विक्रम ने सुप्रिया के कमर पर अपना एक हाथ लपेट कर उसे पकड़ा और ऊपर की और स्विम करने लगा. दोनों ऊपर स्विमिंग पूल के किनारे पर पहुंच गए. सुप्रिया खुद के साथ अपनी साँसों को भी समेत रही थी.
विक्रम ने अपनी पकड़ उस पर ढीली करते हुए कहा - इतना डीप जाने की क्या जरूरत थी...
सुप्रिया - मुझे स्विमिंग आती है... आपकी हेल्प की जरूरत नहीं थी..
विक्रम बहार के शोर से जैसा थोड़ा होश से में आया और पूल से निकलते हुए बोलै - चलो.. तुम भी बहार निकल जायो... ठण्ड लग जाएगी...
सुप्रिया ने सोचा की पहले खुद hi पूल में फेका और अब बहार निकलने के लिए कह रहा है. विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया की और बढ़ाया और सुप्रिया उसे पकड़ कर बहार आने लगी. जैसे hi वह बहार आ रही थी, विक्रम की नज़र उस पर रुक सी गयी. पानी से गीले होने की वजह से सुप्रिया के उन्देर्गर्मेन्ट्स और बदन साफ़ साफ़ दिख रहा था. विक्रम को अपनी और यूँ घूरते देख सुप्रिया ने अपने कपड़ो की और देखा और वह समझ गयी की विक्रम क्या देख रहा था.
सुप्रिया - ओह गॉड... विक्रम!! प्लीज दूसरी और देखिये न...
विक्रम थोड़ा सा मुद गया - क्या हुआ? कुछ प्रॉब्लम है...
सुप्रिया - आपको नहीं पता? मेरे कपडे देखे है...
विक्रम फिर से सुप्रिया की और मुदा - डीडे कर लो देखु या नहीं?
सुप्रिया - उफ्फ्फ... नहीं दूसरी और देखो प्लीज... अब मैं ऐसी हालत में बहार कैसे जयुंगी...
विक्रम - तुम मेरे साथ मेरे रूम में चलो... वहां बाथरूम में ड्रायर है... उसमे कपडे ड्राई कर लेंगे...
विक्रम ने घर में वापस घुसने से पहले इधर उधर झाँक के देखा की कहीं कोई वहां था या नहीं, और फिर सुप्रिया को लेकर घर के दुसरे फ्लोर पर लांड्री रूम में ले आया. सुप्रिया उसके पीछे पीछे एक पानी की हलकी सी लकीर छोड़ते हुए जा रही थी. वह दोनों ऊपर एक बड़े से रूम में आ गए. रूम में ईशा और विक्रम की फोटो लगी हुई थी जो सुप्रिया समझ गयी की ये विक्रम का बैडरूम होगा.
विक्रम ने बाथरूम में ड्रायर मशीन की तरफ इशारा करते हुए कहा - तुम इसमें कपडे सूखा लो...
सुप्रिया ने विक्रम की और देखा - मुझे ये मशीन चलनी नहीं आती...
विक्रम - कुछ नहीं बस कपडे डालने है और ये नॉब घूमना है... ी थिंक 10 मिनट में सूख जायेंगे..
सुप्रिया को अजीब लग रहा था की उसे ऐसे किसी और के घर पर कपडे उतारने पड़ेंगे. पर कपडे इतनी जल्दी नहीं सूखने वाले थे तोह उसे ये करना hi पड़ेगा. उसने विक्रम की और देखा की वह बाथरूम से बहार चला जाये पर विक्रम तोह बस सुप्रिया की और hi देख रहा था. भीग जाने की वजह से सुप्रिया की कुर्ती उसके बदन से अचे से चिपक गयी थी और उसके बूब्स की बीच की लकीर साफ़ दिख रही थी.
सुप्रिया - विक्रम... आप बहार जायो न प्लीज...
तभी बहार से किसी औरत की कड़क सी आवाज़ आयी - ओह सहित... ये पानी कैसे है यहाँ फ्लोर पर... कहाँ है सब... अभी की अभी क्लीन करो इसे...
विक्रम ने सुप्रिया को चुप रहने का इशारा किया और हलके से बाथरूम का डॉक लॉक कर दिया.
सुप्रिया ने हलकी आवाज़ में पुछा - कौन है?
विक्रम - ईशा... शठ... (विक्रम ने वहीँ रखा एक तौलिया सुप्रिया की और फेका) ... तुम स्टार्ट करो...
सुप्रिया सोच में पद गयी की वह क्या करे - आपके यहाँ होते हुए कैसे...
विक्रम - मैं तुम्हारी साइड नहीं देख रहा... और बस 4-5 मिनट बाद में निकल जायूँगा.. अगर अभी बहार ईशा मिल गयी तोह गड़बड़ हो जाएगी...
सुप्रिया - Ok... प्लीज इधर मत देखना...
विक्रम ने दरवाज़े की तरफ मुँह कर लिया, सुप्रिया ने अब तक सोचा नहीं था की वह भी तोह भीगा hi हुआ था. सुप्रिया ने अपने ऊपर टॉवल लपेटा और कुर्ती उतारने की कोशिश करि पर वह ऐसे नहीं उतर रही थी. उसका ध्यान बस विक्रम की और hi था. उसने कुछ पल सोचने के बाद डीडे किया की जो होगा देखा जायेगा, पर यहाँ ज्यादा वेट करना सही नहीं था. उसने अपनी कुर्ती उतार दी और ड्रायर में दाल दी. और फिर अपनी पजामी भी, और आपने आपको टॉवल से धक् लिया. उसने तौलिया सँभालते हुए पीछे पलट कर देखा तोह विक्रम अपनी भी दरवाज़े की और hi देख रहा था.
सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की सच में काफी शरीफ था विक्रम. एक बिना कपड़ो की जवान लड़की के साथ ऐसे बाथरूम में बंद पर मुद के एक बार भी उसकी तरफ नहीं देख रहा था. कड़ी तपस्या थी शायद. सुप्रिया को हलकी सी हसी आ गयी. उसकी निगाहें विक्रम पर hi तिकी थी. ड्रायर की आवाज़ चलते hi विक्रम समझ गया था की सुप्रिया ने अपने कपडे उतार दिए थे. उसने दरवाज़ा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तभी सुप्रिया की आवाज़ आयी.
सुप्रिया - विक्रम नहीं... दरवाज़ा मत खोलो... प्लीज मुझे यहाँ अकेले छोड़ कर मत jaana...agar कोई आ गया तोह
विक्रम ने पलट के सुप्रिया की और देखा. उसके आधे गीले आधे सूखे बाल, गोर गोर कंधे और पीठ, और उसकी भोली सी शकल किसी को भी पागल कर सकती थी.
सुप्रिया - ीीे... इधर देखने के लिए नहीं कहा मैंने.
विक्रम फिर से मुद गया - सॉरी... पर तुम मुझे समझ hi नहीं आती हो... कभी कहती हो बहार जायो, कभी कहती हो एहि रुक जायो... समझ hi नहीं आता की चाहती क्या हो...
सुप्रिया की हलके से आवाज़ आयी - शायद मुझे भी नहीं पता.
ड्रायर की आवाज़ उन दोनों के सन्नाटे के बीच में घूम रही थी. टाइम जैसे बहुत hi धीरे चल रहा था. वह बिना कपड़ो के किसी गैर मर्द के साथ एक छोटे से रूम में टॉवल लपेटे कड़ी थी, पर पता नहीं क्यों उसे कोई घबराहट नहीं हो रही थी.
सुप्रिया ने hi छुपी को थोड़ा तोडा ताकि विक्रम उनकंफर्टबले न फील करे - आप दिवार के इतना पास क्यों खड़े है, थोड़ा पीछे हो सकते है... बस कोई लाइन मत क्रॉस करना उस दिन के तरह...
विक्रम ने मीठी सी आवाज़ में कहा - कहाँ है ये लाइन...
सुप्रिया - इनविजिबल है... दिखेगी नहीं...
विक्रम - इनविजिबल है तोह मैं कैसे समझ पायूँगा की कहाँ है...
सुप्रिया - ठीक आपके पीछे है, पर आप मुड़ना मत...
विक्रम - तुम मुझे मुड़ने के लिए उकसा रही हो क्या?
सुप्रिया झेपते हुए - नहीं... ऐसा तोह कुछ नहीं... एक बार तोह आप मुद hi चुके हो...
विक्रम - इस बार मुदा तोह शायद अपनी नज़रें नहीं हटा पायूँगा...
सुप्रिया ने विक्रम को चिढ़ाने के लिए एकदम से बोलै - उफ्फ्फ्फ़ मेरा टॉवल गिर गया...
विक्रम ने एकदम से पलट के सुप्रिया की और देखा, आखिर वह भी इंसान hi था. पर सुप्रिया अभी भी टॉवल लपेटे हुए थी हलके से मुस्कुरा रही थी. विक्रम को भी उनकी इस शरारत पर हलकी सी स्माइल आ गयी.
तभी ड्रायर के रुकने की आवाज़ आयी, सुप्रिया ने जल्दी से ड्रायर से अपनी कुर्ती निकाली.
सुप्रिया - थैंक गॉड... कपडे ड्राई हो गए..
विक्रम - ाचा... मुझे लगा अभी शायद थोड़ा और टाइम लगेगा...
सुप्रिया ने विक्रम को पलट कर देखा - क्यों? और टाइम क्यों लग्न चाहिए था?
विक्रम - ताकि मैं यहाँ थोड़ी देर और रह सकता तुम्हारे साथ...
सुप्रिया के गाल लाल हो चुके थे- अब शायद ईशा ma'am बहार नहीं है...
विक्रम ने हलके से दूर खोला और रूम में इधर उधर देख कर बहार की और आ गया. वह रूम में बीएड पर बैठ कर सुप्रिया के आने का इंतज़ार करने लगा. सुप्रिया जैसे hi बहार आयी उसकी सफ़ेद कुर्ती सूख कर नयी जैसी हो गयी थी. विक्रम उसे ऊपर से नीचे तक देखा रहा था.
सुप्रिया विक्रम को अपनी और देखते हुए - क्या हुआ? सही से ड्राई नहीं हुआ क्या?
विक्रम - नहीं कुछ ज्यादा hi ड्राई हो गया...
विक्रम ने एकदम से दूसरी और देखते हुए कहा - ईशा तुम?
सुप्रिया जैसे hi उस और देखने के लिए पलटी विक्रम ने पीछे से आते हुए सुप्रिया को पकड़ा और उसके कंधे पर हलके से किश किया.
सुप्रिया - विक्रम...
विक्रम - क्यों? सिर्फ तुम hi मजाक कर सकती हो क्या? काफी तैसे कर लिया तुमने मुझे आज... ी रियली लव यू...
सुप्रिया कुछ बोलने की हालत में नहीं थी. उसे यकीं सा नहीं हो रहा था की विक्रम उसे ी लव यू बोल रहा था. सुप्रिया की हलकी सी अह्ह्ह सुन कर विक्रम अब रुकने के मूड में नहीं था, उसने हलके से सुप्रिया को गाल को किश किया. सुप्रिया का चेहरा विक्रम को बयां कर रहा था की वह भी अब विक्रम के लिए तैयार थी.
सुप्रिया का सब्र का बाँध अब टूट रहा था. इतने महीनो से उनके बीच चल रही ये आँख मिचोली शायद अब ख़तम होने वाली थी.
विक्रम ने उसे अपनी और मोड़ा - सुप्रिया... ी हैवे वाइटेड फॉर ा लॉन्ग टाइम फॉर थिस...
विक्रम ने अपने होंठ सुप्रिया के होंठों पर जड़ते हुए उसे एक लम्बी सी किश कर दी. Ek-do पालो के बाद सुप्रिया भी विक्रम को वापस किश कर रही थी. सुप्रिया ने अपने हाथों से विक्रम का चेहरा पकड़ लिया.
जैसे hi उनके होंठ अलग हुए, सुप्रिया ने विक्रम की आँखों में झाँक कर देखा. उसे वहां हवस की भूक नहीं दिखाई दी जो उसे कई मर्दो में दिखाई देती थी, बल्कि एक सॉफ्ट रोमांटिक फीलिंग लगी.
किश ख़तम होने पर दोनों ने गहरी सांस भरी. सुप्रिया को बिलकुल नहीं पता था की विक्रम अब आगे क्या करने वाला था.
सुप्रिया की सांसें तेज़ थी, और वह थोड़ा पीछे होते हुए दीवार से टकराई. विक्रम ने उसके पीछे आते हुए उसके कंधे के ऊपर दीवार पर हाथ रखा. विक्रम ने अपना गाल सुप्रिया के गाल पर लगते हुए उसके कान को हलके से किश किया. सुप्रिया इस पूरे माहौल में जैसे खो hi गयी थी की तभी बहार की आवाज़ उसे होश में लायी.
सुप्रिया हलके से बोली - यहाँ नहीं... अभी नहीं...
सुप्रिया विक्रम के हाथ के नीचे से निकलते हुए जल्दी से रूम से बहार निकली और सीढ़ियों से नीचे चली गयी. उसका दिल ज़ोर से धक् धक् कर रहा था. वह बस घर से बहार निकलने hi वाली थी की सुप्रिया को एक आवाज़ ने रोका.
ईशा - हु इस थिस? एंड हाउ दीद यू एंटर इनसाइड?
सुप्रिया ने देखा ये तोह ईशा थी और उसे देख कर वह घबरा सी गयी - Ma'am hello... ी ऍम सुप्रिया... मैं बस...
ईशा - हु?
सुप्रिया ये नहीं बोलना चाहती थी की वह विक्रम के ऑफिस में काम करती थी, पता नहीं ईशा इसका क्या मतलब निकाले - मैं... कृति की फ्रेंड...
ईशा ने उसकी और गौर से देखा - कृति की फ्रेंड!! ओह्ह.... ी क्नोव हु यू अरे... तुम वह नई ईयर पार्टी में भी थी न...
सुप्रिया और भी शर्मिंदा सी होती जा रही थी, ईशा शायद अतुल की बात सामने लेन वाली थी.
ईशा - यू वेरे डांसिंग विथ विक्रम इन थे पार्टी...
सुप्रिया हैरान सी रह गयी, ईशा ने ये भी गौर किया था - हाँ... वह बस विक्रम ने इंसिस्ट किया था...
ईशा ने चुभती हुई आवाज़ में कहा - काफी इंसिस्ट करता है न वह... आज क्या इंसिस्ट किया उसने?
सुप्रिया - नहीं कुछ नहीं... मैं तोह बस पानी पीने अंदर आयी थी...
ईशा - एंड फिर? पिया पानी?
सुप्रिया छुप हो गयी बिलकुल, और ईशा उसे छुप देख कर हस्ते हुए बोली - डार्लिंग... अगर स्टोरी को थोड़ा कन्विंसिंग बनाना है तोह कलर तोह लगा लो अपने फेस पर... वैसे तुम्हे देख कर ी कैन सी व्हाई... तुम टोटली उसकी टाइप हो... दीद यू क्नोव हे है ा टाइप?
सुप्रिया - सॉरी आप क्या...
ईशा - It's ok... don't वोर्री... मैं उन वाइव्स में से नहीं हु जो इस सब के बारे में वोर्री करती है... इतस फाइन... इतस चिल...
ईशा की बातों से सुप्रिया के पसीने छूटने शुरू हो गए थे, कृति सच hi कह रही थी, ये डेविल hi थी.
ईशा - वैसे यू स्मेल नई... ी मस्ट वारं यू... जब वह मूड में होता है न वह देखता नहीं है की वह कहाँ क्या किस होल में कर रहा है...
सुप्रिया की आँखें नीचे हो गयी - ी थिंक मुझे चलना चाहिए.... कृति...
सुप्रिया जल्दी से ईशा से दूर होते हुए बहार आ गयी. अभी जो कुछ हुआ था उसने उसे बुरी तरह बेचैन कर दिया था. विक्रम सर और वह, पता नहीं वह क्या सोच रही थी और कहाँ बह चली थी. और ईशा ma'am पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी. वह काफी कन्फ्यूज्ड सा फील कर रही थी, पता नहीं क्यों वह विक्रम की तरफ खींची चली जाती थी.
वह अपने खयालो में भटक hi रही थी की उसे कृति की आवाज़ है - सुप्रियाआ.... वेयर वेरे यू? मैं तुम्हे कब से ढून्ढ रही thi...aur कॉल भी किया था...
सुप्रिया - सॉरी मैं बस यहीं hi तोह थी... फ़ोन वह मैंने कार में छोड़ दिया था..
सुप्रिया ने सोचा की उसे बहुत देर से अतुल भी नहीं दिखा और न वह उसे ढूंढ़ने आया. उसने इधर उधर नज़रे दौड़ाई तोह उसे दूर एक कोने में चेयर पर बैठा अतुल दिखाई दिया और उसके साथ दिशा बैठी हुई थी!! दिशा??!! सुप्रिया थोड़ा हैरान सा हो गयी. इससे पहले वह उनकी और ज्यादा देखती, कृति ने उस पर रंग लगाना शुरू कर दिया था, और वह दोनों आपस में होली खेलने लगे.
थोड़ी देर कृति के साथ होली खेलने के बाद, सुप्रिया अतुल की तरफ बड़ी, उसी अपनी तबियत बहुत अछि नहीं लग रही थी और वह घर जाना चाहती थी. जैसे जैसे वह अतुल के पास पहुंच रही थी उसने देखा की दिशा और अतुल आपस में बात कर रहे थे. दिशा और अतुल, दो लोग जो वह सोच भी नहीं सकती थी की वह कभी बात भी कर सकते थे.
सुप्रिया अतुल के पास पहुंच कर बोली - अतुल... चले घर...
अतुल - हाँ... मैं तुम्हारा hi वेट कर रहा था... ये दिशा है, मेरे ऑफिस में है...
सुप्रिया - हाँ मैं जानती हु इन्हे... Hi दिशा..
दिशा ने हलके से कहा - Hi....
अतुल खड़ा हुआ और उसने दिशा को bye वेव किया और वह और सुप्रिया साथ में होली पार्टी से निकल गए. रास्ते भर सुप्रिया सोच रही थी की आज जो हुआ वह क्यों हुआ, और अब वह कैसे विक्रम को फेस करेगी. पहली किश की शुरुवात तोह चलो उसने की थी, पर आज तोह शायद उसने कई साड़ी सीमाएं लाँघि दी थी. अभी भी रह रह कर वह विक्रम के बारे में hi सोच रही थी और वह छुप सी hi रही.