सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 8 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

@आयुष01111 - आप पूरे पोस्ट को कोटे मत करे…

@कैनिप एंड @एक्सबीएक्सोसिप - आप मुझ पर ट्रस्ट करे, स्टोरी कुछ उपदटेस बाद एक अलग hi मोड़ लेगी. पर अभी अगले 3 उपदटेस तोह विक्रम रिलेटेड hi होने वाले है. बूत ट्रस्ट में, इतस नॉट थे शामे अस राहुल. एंड स्टोरी एक अलग मोड़ लेगी उसके बाद.
 
अपडेट 56

जनुअरी के आखरी फ्राइडे का दिन थी और सुप्रिया विक्रम के मैं ऑफिस के केबिन मैं बैठी थी. पिछले कई हफ्तों से वह विक्रम से मिलना अवॉयड सा hi कर रही थी. उसने सोच रखा था की जो भी वह अपने और विक्रम के बीच में सब कुछ प्रोफेशनल hi रखेगी. पर कल शाम को जब अतुल ने उसे बताया की उसे विक्रम की कंपनी से जॉब इंटरव्यू का लिए कॉल आया है तोह वह विक्रम सर का पर्सनली थैंक यू बोलने आयी थी.

अतुल काफी खुश था की एक महीने की जॉब सर्च के बाद आखिर फाइनली उसे एक इंटरव्यू का कॉल तोह आया था. उसे नहीं सोचा की सुप्रिया का इसमें कोई हाथ है, आखिर वह तोह एक छोटी पोस्ट पर एक एम्प्लोयी थी, वह कैसे उसका इंटरव्यू करवा सकती थी. पर सुप्रिया जानती थी की हो न हो इसमें विक्रम का हाथ था.

सुप्रिया इसलिए विक्रम को प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य थैंक यू बोलने उसके ऑफिस पहुंच गयी थी. हालाँकि रखना सब कुछ प्रोफेशनल था फिर भी सुप्रिया काफी अचे से तैयार होकर hi आयी थी, जैसे विक्रम को हल्का हल्का तैसे करना में उसे मजा सा आने लग गया हो. दोनों कुछ देर से ऑफिस की बातें कर रहे थे की सुप्रिया ने अपने आने का असली कारण बताया.

सुप्रिया - विक्रम एक्चुअली यहाँ आपको थैंक यू करने आयी थी....

विक्रम - किस बात के लिए?

सुप्रिया - आपको पता है किस बात के लिए... अतुल को इंटरव्यू का कॉल आ गया था...

विक्रम - ओह ाचा... पर ट्रस्ट में उसमे मेरा कोई हाथ नहीं.. ी ऍम सूरे हर और हायरिंग मैनेजर्स ने अपना काम काफी फेयर तरीके से किया होगा...

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की विक्रम सच बोल रहा था की नहीं - ओह ाचा... पर खैर जो भी हो... मैं फिर भी आपको पर्सनली थैंक यू करना चाहती थी...

विक्रम - अगर वह सेलेक्ट होगा तोह अपनी कपाबिलिटी पर होगा...

सुप्रिया - उसे ये जानकार काफी ख़ुशी होगी... प्लीज आप उससे नहीं मेंशन करना की मैंने आपसे इस बारे में कोई बात की थी..

विक्रम - सूरे.. थैंक्स फॉर किंग इन थौघ, काफी दिनों बाद तुम्हे यहाँ देख कर ाचा लगा...

विक्रम सुप्रिया के पास hi बैठा था और उसने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ पर हलके से रखा. सुप्रिया ने अपना हाथ झट से पीछे खींच लिया.

सुप्रिया - विक्रम... मुझे एक और बात करनी थी...

विक्रम - हाँ.. बोलो न...

सुप्रिया ने थोड़ा सा इत्र के कहा - उस दिन जो भी पार्टी में हमारे बीच हुआ.... ी थिंक वह ठीक नहीं था.. प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य और पर्सनली दोनों तरह से... और मैं नहीं चाहती की लोगो को ऐसा लगे की आप और मैं...

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विक्रम ने हलके से मुस्कुरा के कहा - इस तहत हाउ यू फील?

सुप्रिया ने हिचकिचाते हुए कहा - हाँ... और क्या...

विक्रम - ठीक है... ी रेस्पेक्ट योर फीलिंग...

सुप्रिया ने विक्रम से इस जवाब की उम्मीद नहीं की थी, और वह संकोच में कुछ पल वहीँ बैठी रही. उसे लगा था विक्रम बाकी मर्दो की तरह उसके पीछे पड़ेगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ.

सुप्रिया - आप को और कुछ नहीं कहना था?

विक्रम - उम्... ी विल सी यू नेक्स्ट वीक इन थे इतर ऑफिस...

सुप्रिया थोड़ा डिसअप्पोइंटेड होते हुए बोली - Ok... ठीक है... मैं चलती हूँ अभी...

सुप्रिया बहार आयी तोह उसने देखा की जय वेट कर रहा था. आज वह दूसरी बार hi जय को मिली थी और उसे जय की शकल देख कर अछि सी फीलिंग नहीं आती थी.

सुप्रिया को देखते hi जय के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी - Hello मस. सुप्रिया...

सुप्रिया ने उसे बिना स्माइल के बोलै - Hi...

जय - कैसी रही आपकी मीटिंग विक्रम के साथ...

सुप्रिया - गुड...

जय - आज तोह दिशा ने मुझे रोक लिया बहार, नहीं तोह हम तीनो साथ मीटिंग कर सकते थे...

सुप्रिया को समझ नहीं आया - क्या मतलब?

जय ने एक गन्दी सी स्माइल दी - जब मीटिंग होगी तब समझ जायेगी...

सुप्रिया को ाचा नहीं लग रहा था - Ok सर... मुझे अभी जाना है... नीस तो सी यू अगेन...

जय - सूरे... सी यू लेटर...

जय सुप्रिया को जाते हुए देख रहा था और फिर वह विक्रम के केबिन में आ गया.

जय ने अंदर आते hi कहा - तोह... कब कर रहे है हम?

विक्रम अपने काम में बिजी था - क्या कर रहे है?

जय - मन्ना पड़ेगा, सही खेल गए तुम गुरु... पहले उसके लोसर हस्बैंड को जॉब से निकलवा दिया... और अब ये तुम्हारे आगे पीछे घूम रही है... अब तोह रेडी लग रही है...

विक्रम - मेरा उसमे कोई हाथ नहीं था...

जय - के ों, मुझसे तोह सच बोल hi सकते हो... एनीवे... इतना स्लो क्यों चल रहे है इसके मामले में... उफ़ साली के सेक्सी कर्व्स देख कर मैं करता है की बस निचोड़ दू अचे से...

विक्रम अपने कंप्यूटर में देखता रहा - अभी रुक जायो... ज्यादा बेताबी मत दिखायो...

जय - रुका hi तोह नहीं जाता... इसकी साड़ी शर्म निकलने में कितना मजा आएगा... हम दोनों एक साथ... तुम मुँह में... मैं पीछे गांड में... या फिर मैं मुँह में.... उसके उस अकड़ू से चेहरे को सफ़ेद रेंज में भरने में कितना मज़ा आएगा.. उफ्फ्फ....

विक्रम ने एक उनकंफर्टबले सा मुँह बनाया - जय... जरूरी है क्या ये सब बोलना...

जय - क्यों, हमने कितनी बार तोह ये सब किया है... फिर इसमें इतनी प्रॉब्लम क्यों है?

विक्रम - वह मेरी एम्प्लोयी है... कुछ भी गड़बड़ हो गयी तोह काफी शोर मच जायेगा...

जय - हम्म्म... पर तुम सेट तोह कर रहे हो इसे अचे से... तुम पहले कर लेना अकेले... आखिर इतना हार्ड वर्क कर रहे हो, तुम्हारा बनता भी है... पर फिर बाद में दोनों मिल कर…

विक्रम - ये सब छोडो.. बताया किस काम से आये थे...

जय - बात को घुम्यो मत… अगर तुमने जल्द कुछ नहीं किया तोह बात मुझे अपने हाथ में लेनी पड़ेगी…

विक्रम ने एक कड़क सी आवाज़ में कहा - जय… तुम जल्दबाज़ी में कोई गलत कदम मत उठाना.. लीव आईटी विथ में..

जय उसकी आवाज़ सुनकर समझ गया था की विक्रम को और गुस्सा दिलाना ठीक नहीं था, और वह और विक्रम दूसरी बातों में लग गए.

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सुप्रिया इस सब से अनजान वापस अपने घर पहुंच गयी, उसने आज की छुट्टी ली हुई थी. अतुल घर से बहार गया हुआ था, उसे मंडे को अपने इंटरव्यू के लिए अपने आप को थोड़ा प्रेसेंटाब्ले बनाना था. पिछले एक महीने से वह घर से निकला hi नहीं था. करुणा अभी भी घर का काम कर रही थी. घर का गेट खुलते hi वह छौंक सी गयी.

करुणा - दीदी... आप...

सुप्रिया ने शरारत भरी आवाज़ में कहा - हाँ... क्यों क्या हुआ? किसी और का इंतज़ार कर रही थी क्या?

करुणा की शकल उतर गयी - नहीं दीदी... कहाँ कोई और... जबसे भैया ने घर पर रहना शुरू किया है... कुछ भी नहीं हो पाटा...

सुप्रिया - हम्म्म.... बस उनकी जॉब लग जाएगी जल्द hi... फिर तुम और इक़बाल... फिर से..

करुणा की आँखों में चमक सी आ गयी - सच!!

सुप्रिया - देख तेरी शकल, जैसे पता नहीं जैसे क्या hi मिस कर रही है...

करुणा - आपको पता नहीं है दीदी... अगर आपके अंदर इतना बड़ा लुंड जायेगा न तब आप समझोगे की मेरी हालत क्या है.

सुप्रिया करुणा की शकल देख रही थी, पता नहीं क्या बोले जा रही थी वह बिना सोचे समझे. करुणा भी समझ गयी थी की वह कुछ ज्यादा hi बोल गयी थी.

करुणा - सॉरी दीदी... मेरा वह मतलब नहीं था...

सुप्रिया - हम्म्म... ठीक है ठीक है... पर वैसे इतनी घबराई हुई सी क्यों थी जब मैं आयी...

करुणा - मुझे लगा भैया आ गए...

सुप्रिया - तोह... उनसे क्यों घबराना?

करुणा - मुझे बोलना तोह नहीं चाहिए पर वह अजीब तरह से देखते है मुझे... मैं गौर किया है...

सुप्रिया - कुछ भी!! अतुल क्यों देखेंगे तुझे...

करुणा - क्यों? सुन्दर नहीं हु मैं? इतनी तोह सुन्दर हूँ... सब मर्द देखते है सुन्दर लड़कियों को... और फिर पता नहीं आप दोनों के बीच सब...

सुप्रिया को करुणा की बातें अब थोड़ी इर्रिटेटिंग लगने लगी थी. जबसे उसने सुप्रिया को इक़बाल और उसके बीच सेक्स होते देखा था, तबसे जैसे उसकी कैंची जैसी जुबान और भी खुल गयी थी. उसे अब घबराहट hi नहीं होती थी की वह सुप्रिया को क्या बोल रही है.

सुप्रिया - हमारे बीच सब ठीक है... ऐसा कुछ नहीं...

करुणा - दीदी... जवानी बस एक बार आती है... और फिर चली जाती है... और आपकी जवानी पर तोह पता नहीं कितने मर्द टाक लगाए बैठे होंगे...

सुप्रिया - तोह? क्या करू? अपने आप को उनके सामने परोस के रख दू?

करुणा - नहीं... पर कोई ाचा लगे तोह इसमें कोई हर्ज़ भी नहीं है... कोई ऐसा जो आपको सब कुछ दे सके...

करुणा - चल तू अपना काम पूरा कर. फालतू बातों में मत लग.

सुप्रिया अंदर कमरे में चली गयी, उसे करुणा की बातें और नहीं सुन्नी थी. अब बस अतुल की जॉब लग जाये तोह शायद उनके बीच फिर से सब कुछ ठीक हो जायेगा.

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अगले कुछ दिनों में अतुल को विक्रम की कंपनी में जॉब मिल गयी. वह थोड़ा हैरान हुआ था की ये विक्रम की कंपनी है, पर विक्रम खुद उससे पर्सनली एक बार भी नहीं मिला था. उसने इस नयी जगह एक नयी शुरुवात कर दी थी. अतुल की जॉब लगने से सुप्रिया भी काफी खुश थी, आखिर उसे लगा था की उसका इसमें काफी बड़ा हाथ था. पर उसने अतुल को ये ज़ाहिर नहीं होने दिया.

फेब्रुअरी का महीना तोह छोटा hi था, और सुप्रिया फिर से काम में काफी बिजी सी रही. उसके उस वाले क्लाइंट्स - माइक और डनण्य, इंडिया आने वाले थे, तोह उन लोगो की ट्रिप के लिए थोड़ी सी प्लानिंग चल रही थी. उनकी ट्रिप का साड़ी प्लानिंग कृति कर रही थी. विक्रम से भी सुप्रिया की मुलाकात कभी कभी अपने ऑफिस में हो जाती. विक्रम को देखते hi उसे थोड़ा अजीब सा लगता, इतना स्मार्ट हैंडसम सक्सेसफुल इंसान जो शायद उसे चाहता था, पर उसने उसे मन कर दिया. और सुप्रिया के मन करने के बाद एक बार भी उसने भी कोई रेखा नहीं लाँघि.

दूसरी तरफ कृति और राहुल अभी भी साथ थे, और राहुल की तोह जैसे जिंदगी में लाटरी hi लग गयी थी. कृति जैसी स्मार्ट, खूबसूरत और अमीर लड़की जो उसे मिल गयी थी. अतुल ने जॉब लगने के कुछ दिन बाद राहुल को घर बुलाया था. दोनों काफी दिनों बाद मिल रहे थे और अपने अपने ऑफिस की कहानी बता रहे थे. अतुल जानना चाहता थी की राहुल ने ऑफिस में क्या क्या सुना था, पर जब तक उसके पास जॉब नहीं थी वह राहुल से मिलने से कटरा रहा था. पर अब तोह वह भी दिक्कत नहीं थी.

राहुल की एक आँख तोह अभी भी सुप्रिया पर hi तिकी थी और अतुल से बातचीत के बाद वह किसी बहाने से किचन में आ गया.

राहुल - कैसी हो सुप्रिया...

सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में कहा - मैं ठीक हूँ...

राहुल - मुझसे नहीं पूछोगी की मैं कैसा हूँ...

सुप्रिया - नहीं... ठीक hi होंगे..

राहुल - बहुत hi बढ़िया... कृति सच में लाखो में एक लड़की है... सच में हर मामले में...

सुप्रिया - तोह मैं क्या करू?

राहुल - ये देखो, कृति ने मुझे ये वाच गिफ्ट की थी मुझे..

सुप्रिया - तुम जैसा बेशरम इंसान नहीं देखा जो अपनी गर्लफ्रेंड से गिफ्ट लेता है...

राहुल - तुमने भी तोह ले hi रही हो, अतुल की जॉब लगवा दी... ये काम था क्या...

सुप्रिया ने गुस्से में पलट के राहुल की और देखा - मैंने किसी की जॉब नहीं लगवाई... अतुल को खुद ये जॉब मिली है...

राहुल हस्ते हुए - कोई नहीं, मैं अतुल को नहीं बतायूंगा... मुझे पता है उसे ाचा नहीं लगेगा... क्या करवाया वैसे विक्रम ने तुमसे जॉब के लिए...

सुप्रिया - शट उप... और ज्यादा बकवास की तोह ाचा नहीं होगा....

राहुल ने सुप्रिया के कंधे पर हाथ रखा - बकवास नहीं है... तुम भी जानती हो...

सुप्रिया - Don't टच में...

सुप्रिया राहुल का हाथ हटते हुए किचन से निकल कर बहार आ कर बैठ गयी. उसे पता था की राहुल अतुल के सामने कुछ गलत नहीं बोलेगा. राहुल के जाने के बाद वह बार बार विक्रम के बारे में सोचने लगी. क्या विक्रम सच में उससे कुछ चाहता था. और वह विक्रम से क्या चाहती थी.

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इस साल मार्च के शुरू में hi होली थी, और सुप्रिया विक्रम के घर पर होली पार्टी में इन्वितेद थी. वैसे तोह सुप्रिया इस पार्टी में न जाती पर विक्रम सर ने उसे बोलै था की उन्होंने काफी काम लोगो को इन्विते किया है. और फिर कृति ने भी सुप्रिया को काफी पुश किया था की जब तक सुप्रिया नहीं जाएगी वह वहां नहीं जाने वाली थी. कृति के इमोशनल ब्लैकमेल के चक्कर में सुप्रिया को हाँ करनी hi पड़ी. वह देखना भी चाहती की विक्रम सर का घर कैसा था.

जो कुछ नई ईयर पार्टी में हुआ था उसके बाद अतुल तोह बिलकुल नहीं जाना चाहता था. सुप्रिया ने किसी तरह से कन्विंस किया की वह बस थोड़ी देर hi वहां जायेंगे, और अतुल चाहे तोह बहार hi वेट कर सकता था. अतुल से बहुत साड़ी मिन्नतें करने के बाद कहीं वह माना था.

वहां पहुंच कर सुप्रिया ने देखा की विक्रम का घर कोई घर नहीं, एक बड़ा सा बंगला था. और छोटी सी पार्टी के बावजूद वहां बहुत सारे लोग मजूद थे. सुप्रिया ने सफ़ेद रंग की कुर्ती पहनी हुई थी. जब सुप्रिया वहां पहुंची तोह कृति उसे कहीं नहीं दिखी, और वैसे भी होली के इस महुअल में शक्ल पहचानना भी मुश्किल था.

अतुल एक कोने में बिलकुल अलग बैठा था और सुप्रिया उनके लॉन में लोगो की भीड़ के बीच में थी. आता जाते लोग सुप्रिया के ऊपर बिना झिझक के रंग फैके जा रहे थे. सुप्रिया का चेहरा एंड बाल रंगो में भर चुके थे. तभी उसे दूर से विक्रम लोगो से घिरा हुआ दिखाई दिए. वह उनकी और चल पड़ी.

सुप्रिया विक्रम के अकेले होते hi उनके पास गयी - हैप्पी होली विक्रम...

सुप्रिया ने अपने हाथ से गुलाल लेते हुए विक्रम के मुँह पर लगाया.

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विक्रम के चेहरे पर एक स्माइल आ गयी थी - हैप्पी होली सुप्रिया... गुड तो सी की तुम यहाँ आयी...

सुप्रिया - हाँ पर थोड़े टाइम के लिए hi आयी हु.. कृति ने काफी इंसिस्ट किया था, पर वही hi अब नहीं दिख रही...

विक्रम - हाँ उसने मुझे मैसेज किया था की वह लेट हो जाएगी... उसे यहाँ से पहले कहीं और जाना था...

सुप्रिया - ओह... पर अब मैं यहाँ...

विक्रम - तुम पहली बार यहाँ आयी हो... चलो मैं तुम्हे अपना घर दिखता हूँ..

सुप्रिया - पर सर... आपके बाकी गेस्ट्स...

विक्रम - इतस ok... के विथ में...

विक्रम ने सुप्रिया का हाथ पकड़ा और भीड़ में से उसे खींचते हुए अपने घर के अंदर ले गया. अंदर सिवाए कुछ हाउस स्टाफ के कोई और नहीं दिख रहा था. सुप्रिया विक्रम का घर अंदर से देख कर दांग रह गयी थी, इतना आलिशान घर, इतनी अछि तरह से सजा हुआ.

सुप्रिया - वाओ... क्या घर है आपका... ओह सॉरी थोड़ा रंग नीचे गिर गया फ्लोर पर...

विक्रम - कोई नहीं वह क्लीन हो जायेगा... के...

विक्रम घर के अंदर से ले जाते हुए सुप्रिया को घर के पीछे ले गया जहाँ एक बड़ा सा स्विमिंग पूल था, जहाँ कोई भी नहीं था. सुप्रिया के लिए तोह किसी रिसोर्ट से काम नहीं था. वह इधर उधर देखने में खोयी हुई थी की उसने ध्यान नहीं दिया की विक्रम ठीक उसके पीछा खड़ा था

विक्रम से पीछे से सुप्रिया के चेहरे पर गुलाल लगते हुए कहा - मैंने तोह तुम्हे हैप्पी होली बोलै hi नहीं...

सुप्रिया मुड़ी और उसने भी विक्रम के चेहरे पर गुलाल फेक दिया. उसकी आँखों में इस समय काफी मस्ती झलक रही थी. विक्रम ने सुप्रिया को पकड़ते हुए उसकी गर्दन पर अचे से रंग लगाना शुरू.

सुप्रिया - अह्ह्ह... छोड़िये न...

सुप्रिया ने किसी तरह अपने आप को विक्रम की पकड़ से निकाला और उनसे बचने के लिए इधर उधर होने लगी. सुप्रिया की आँखों में इस खेल की शहरात जाग चुकी थी और वह भी अब पीछे नहीं हटने वाली थी. उसने स्विमिंग पूल के पास जाकर थोड़ा सा पानी अपने हाथ में लिया और विक्रम पर उछाल दिया. विक्रम की शर्ट थोड़ी सी गीली हो गयी थी और वह बिना रुके सुप्रिया के पास आने लगा. सुप्रिया के ठीक पीछे बस पानी hi था और कहीं और जाने को नहीं था.

सुप्रिया सोच hi रही थी की वह क्या करे, की विक्रम ने एकदम से उसके पैरो और बाँहों से पकड़ते हुए अपनी गोदी में उठा लिया. सुप्रिया विक्रम की गोदी में झटपटी सी रही थी और विक्रम उसकी आँखों में घूर रहा था.

सुप्रिया - विक्रम... मुझे नीचे उतरिये न...

विक्रम - नीचे उतार दू पानी में...

सुप्रिया - नहीं... प्लीज पानी में नहीं... काफी ठण्ड हो रही है...

विक्रम - शुरुवात तोह तुमने hi की थी... अब क्यों पीछे हैट रही हो...

विक्रम स्विमिंग पूल के बिलकुल किनारे पर खड़ा हो गया और सुप्रिया को पानी के ठीक ऊपर पकड़ा हुआ था. उसने सुप्रिया को गिराने का इशारा करते हुए उसे पूल की तरफ किया. सुप्रिया ज़ोर के विक्रम से चिपक गयी ताकि वह पानी में न गिरे.

विक्रम - तुम्हे स्विमिंग आती है न...

सुप्रिया - हाँ.. पर...

विक्रम ने सुप्रिया की आगे न सुनते हुए झट से सुप्रिया को पानी में फेक दिया. सुप्रिया स्विमिंग पूल के पानी के अंदर थी और वह 1-2 सेकंड बाद बहार निकली. उसके चेहरे और कपड़ो का रंग सारा स्विमिंग पूल के पानी से उतर गया था.

सुप्रिया - विक्रम!! ये क्या किया.... उफ्फ्फ... पानी कितना ठंडा है..

विक्रम - मैं आकर चेक करता हूँ...

विक्रम भी पानी में उतर गया और सुप्रिया से थोड़ा सा दूर पानी में खड़ा था.

सुप्रिया ने विक्रम की और पानी फैकना शुरू किया - ये गलत किया आपने...

विक्रम ने भी सुप्रिया की और हाथ से पानी उछाल दिया - और तुम क्या कर रही हो अभी...

सुप्रिया विक्रम को रोकने के लिए उसकी और बड़ा और पानी के इस खेल में सुप्रिया विक्रम की पकड़ में आ गयी. जैसे hi विक्रम का हाथ सुप्रिया की पीठ पर पड़ा वह उसके बेहद नज़दीक आ गयी.

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सुप्रिया कुछ पल के लिए वहीँ रुकी रह गयी, फिर एक डैम से उसने अपने आप को विक्रम की कैद से आज़ाद किया और पानी के अंदर गोटा लगा दिया. उसने कॉलेज के दिनों में स्विमिंग सीखी थी जो आज काम आ रही थी. विक्रम भी उसके पीछे पीछे पानी में अंदर घुस गया.

सुप्रिया पानी के अंदर थी और उसने महसूस किया की विक्रम उसके ठीक पीछे था, बेहद नज़दीक.

विक्रम ने सुप्रिया के कमर पर अपना एक हाथ लपेट कर उसे पकड़ा और ऊपर की और स्विम करने लगा. दोनों ऊपर स्विमिंग पूल के किनारे पर पहुंच गए. सुप्रिया खुद के साथ अपनी साँसों को भी समेत रही थी.

विक्रम ने अपनी पकड़ उस पर ढीली करते हुए कहा - इतना डीप जाने की क्या जरूरत थी...

सुप्रिया - मुझे स्विमिंग आती है... आपकी हेल्प की जरूरत नहीं थी..

विक्रम बहार के शोर से जैसा थोड़ा होश से में आया और पूल से निकलते हुए बोलै - चलो.. तुम भी बहार निकल जायो... ठण्ड लग जाएगी...

सुप्रिया ने सोचा की पहले खुद hi पूल में फेका और अब बहार निकलने के लिए कह रहा है. विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया की और बढ़ाया और सुप्रिया उसे पकड़ कर बहार आने लगी. जैसे hi वह बहार आ रही थी, विक्रम की नज़र उस पर रुक सी गयी. पानी से गीले होने की वजह से सुप्रिया के उन्देर्गर्मेन्ट्स और बदन साफ़ साफ़ दिख रहा था. विक्रम को अपनी और यूँ घूरते देख सुप्रिया ने अपने कपड़ो की और देखा और वह समझ गयी की विक्रम क्या देख रहा था.

सुप्रिया - ओह गॉड... विक्रम!! प्लीज दूसरी और देखिये न...

विक्रम थोड़ा सा मुद गया - क्या हुआ? कुछ प्रॉब्लम है...

सुप्रिया - आपको नहीं पता? मेरे कपडे देखे है...

विक्रम फिर से सुप्रिया की और मुदा - डीडे कर लो देखु या नहीं?

सुप्रिया - उफ्फ्फ... नहीं दूसरी और देखो प्लीज... अब मैं ऐसी हालत में बहार कैसे जयुंगी...

विक्रम - तुम मेरे साथ मेरे रूम में चलो... वहां बाथरूम में ड्रायर है... उसमे कपडे ड्राई कर लेंगे...

विक्रम ने घर में वापस घुसने से पहले इधर उधर झाँक के देखा की कहीं कोई वहां था या नहीं, और फिर सुप्रिया को लेकर घर के दुसरे फ्लोर पर लांड्री रूम में ले आया. सुप्रिया उसके पीछे पीछे एक पानी की हलकी सी लकीर छोड़ते हुए जा रही थी. वह दोनों ऊपर एक बड़े से रूम में आ गए. रूम में ईशा और विक्रम की फोटो लगी हुई थी जो सुप्रिया समझ गयी की ये विक्रम का बैडरूम होगा.

विक्रम ने बाथरूम में ड्रायर मशीन की तरफ इशारा करते हुए कहा - तुम इसमें कपडे सूखा लो...

सुप्रिया ने विक्रम की और देखा - मुझे ये मशीन चलनी नहीं आती...

विक्रम - कुछ नहीं बस कपडे डालने है और ये नॉब घूमना है... ी थिंक 10 मिनट में सूख जायेंगे..

सुप्रिया को अजीब लग रहा था की उसे ऐसे किसी और के घर पर कपडे उतारने पड़ेंगे. पर कपडे इतनी जल्दी नहीं सूखने वाले थे तोह उसे ये करना hi पड़ेगा. उसने विक्रम की और देखा की वह बाथरूम से बहार चला जाये पर विक्रम तोह बस सुप्रिया की और hi देख रहा था. भीग जाने की वजह से सुप्रिया की कुर्ती उसके बदन से अचे से चिपक गयी थी और उसके बूब्स की बीच की लकीर साफ़ दिख रही थी.

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सुप्रिया - विक्रम... आप बहार जायो न प्लीज...

तभी बहार से किसी औरत की कड़क सी आवाज़ आयी - ओह सहित... ये पानी कैसे है यहाँ फ्लोर पर... कहाँ है सब... अभी की अभी क्लीन करो इसे...

विक्रम ने सुप्रिया को चुप रहने का इशारा किया और हलके से बाथरूम का डॉक लॉक कर दिया.

सुप्रिया ने हलकी आवाज़ में पुछा - कौन है?

विक्रम - ईशा... शठ... (विक्रम ने वहीँ रखा एक तौलिया सुप्रिया की और फेका) ... तुम स्टार्ट करो...

सुप्रिया सोच में पद गयी की वह क्या करे - आपके यहाँ होते हुए कैसे...

विक्रम - मैं तुम्हारी साइड नहीं देख रहा... और बस 4-5 मिनट बाद में निकल जायूँगा.. अगर अभी बहार ईशा मिल गयी तोह गड़बड़ हो जाएगी...

सुप्रिया - Ok... प्लीज इधर मत देखना...

विक्रम ने दरवाज़े की तरफ मुँह कर लिया, सुप्रिया ने अब तक सोचा नहीं था की वह भी तोह भीगा hi हुआ था. सुप्रिया ने अपने ऊपर टॉवल लपेटा और कुर्ती उतारने की कोशिश करि पर वह ऐसे नहीं उतर रही थी. उसका ध्यान बस विक्रम की और hi था. उसने कुछ पल सोचने के बाद डीडे किया की जो होगा देखा जायेगा, पर यहाँ ज्यादा वेट करना सही नहीं था. उसने अपनी कुर्ती उतार दी और ड्रायर में दाल दी. और फिर अपनी पजामी भी, और आपने आपको टॉवल से धक् लिया. उसने तौलिया सँभालते हुए पीछे पलट कर देखा तोह विक्रम अपनी भी दरवाज़े की और hi देख रहा था.

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सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की सच में काफी शरीफ था विक्रम. एक बिना कपड़ो की जवान लड़की के साथ ऐसे बाथरूम में बंद पर मुद के एक बार भी उसकी तरफ नहीं देख रहा था. कड़ी तपस्या थी शायद. सुप्रिया को हलकी सी हसी आ गयी. उसकी निगाहें विक्रम पर hi तिकी थी. ड्रायर की आवाज़ चलते hi विक्रम समझ गया था की सुप्रिया ने अपने कपडे उतार दिए थे. उसने दरवाज़ा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तभी सुप्रिया की आवाज़ आयी.

सुप्रिया - विक्रम नहीं... दरवाज़ा मत खोलो... प्लीज मुझे यहाँ अकेले छोड़ कर मत jaana...agar कोई आ गया तोह

विक्रम ने पलट के सुप्रिया की और देखा. उसके आधे गीले आधे सूखे बाल, गोर गोर कंधे और पीठ, और उसकी भोली सी शकल किसी को भी पागल कर सकती थी.

सुप्रिया - ीीे... इधर देखने के लिए नहीं कहा मैंने.

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विक्रम फिर से मुद गया - सॉरी... पर तुम मुझे समझ hi नहीं आती हो... कभी कहती हो बहार जायो, कभी कहती हो एहि रुक जायो... समझ hi नहीं आता की चाहती क्या हो...

सुप्रिया की हलके से आवाज़ आयी - शायद मुझे भी नहीं पता.

ड्रायर की आवाज़ उन दोनों के सन्नाटे के बीच में घूम रही थी. टाइम जैसे बहुत hi धीरे चल रहा था. वह बिना कपड़ो के किसी गैर मर्द के साथ एक छोटे से रूम में टॉवल लपेटे कड़ी थी, पर पता नहीं क्यों उसे कोई घबराहट नहीं हो रही थी.

सुप्रिया ने hi छुपी को थोड़ा तोडा ताकि विक्रम उनकंफर्टबले न फील करे - आप दिवार के इतना पास क्यों खड़े है, थोड़ा पीछे हो सकते है... बस कोई लाइन मत क्रॉस करना उस दिन के तरह...

विक्रम ने मीठी सी आवाज़ में कहा - कहाँ है ये लाइन...

सुप्रिया - इनविजिबल है... दिखेगी नहीं...

विक्रम - इनविजिबल है तोह मैं कैसे समझ पायूँगा की कहाँ है...

सुप्रिया - ठीक आपके पीछे है, पर आप मुड़ना मत...

विक्रम - तुम मुझे मुड़ने के लिए उकसा रही हो क्या?

सुप्रिया झेपते हुए - नहीं... ऐसा तोह कुछ नहीं... एक बार तोह आप मुद hi चुके हो...

विक्रम - इस बार मुदा तोह शायद अपनी नज़रें नहीं हटा पायूँगा...

सुप्रिया ने विक्रम को चिढ़ाने के लिए एकदम से बोलै - उफ्फ्फ्फ़ मेरा टॉवल गिर गया...

विक्रम ने एकदम से पलट के सुप्रिया की और देखा, आखिर वह भी इंसान hi था. पर सुप्रिया अभी भी टॉवल लपेटे हुए थी हलके से मुस्कुरा रही थी. विक्रम को भी उनकी इस शरारत पर हलकी सी स्माइल आ गयी.

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तभी ड्रायर के रुकने की आवाज़ आयी, सुप्रिया ने जल्दी से ड्रायर से अपनी कुर्ती निकाली.

सुप्रिया - थैंक गॉड... कपडे ड्राई हो गए..

विक्रम - ाचा... मुझे लगा अभी शायद थोड़ा और टाइम लगेगा...

सुप्रिया ने विक्रम को पलट कर देखा - क्यों? और टाइम क्यों लग्न चाहिए था?

विक्रम - ताकि मैं यहाँ थोड़ी देर और रह सकता तुम्हारे साथ...

सुप्रिया के गाल लाल हो चुके थे- अब शायद ईशा ma'am बहार नहीं है...

विक्रम ने हलके से दूर खोला और रूम में इधर उधर देख कर बहार की और आ गया. वह रूम में बीएड पर बैठ कर सुप्रिया के आने का इंतज़ार करने लगा. सुप्रिया जैसे hi बहार आयी उसकी सफ़ेद कुर्ती सूख कर नयी जैसी हो गयी थी. विक्रम उसे ऊपर से नीचे तक देखा रहा था.

सुप्रिया विक्रम को अपनी और देखते हुए - क्या हुआ? सही से ड्राई नहीं हुआ क्या?

विक्रम - नहीं कुछ ज्यादा hi ड्राई हो गया...

विक्रम ने एकदम से दूसरी और देखते हुए कहा - ईशा तुम?

सुप्रिया जैसे hi उस और देखने के लिए पलटी विक्रम ने पीछे से आते हुए सुप्रिया को पकड़ा और उसके कंधे पर हलके से किश किया.

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सुप्रिया - विक्रम...

विक्रम - क्यों? सिर्फ तुम hi मजाक कर सकती हो क्या? काफी तैसे कर लिया तुमने मुझे आज... ी रियली लव यू...

सुप्रिया कुछ बोलने की हालत में नहीं थी. उसे यकीं सा नहीं हो रहा था की विक्रम उसे ी लव यू बोल रहा था. सुप्रिया की हलकी सी अह्ह्ह सुन कर विक्रम अब रुकने के मूड में नहीं था, उसने हलके से सुप्रिया को गाल को किश किया. सुप्रिया का चेहरा विक्रम को बयां कर रहा था की वह भी अब विक्रम के लिए तैयार थी.

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सुप्रिया का सब्र का बाँध अब टूट रहा था. इतने महीनो से उनके बीच चल रही ये आँख मिचोली शायद अब ख़तम होने वाली थी.

विक्रम ने उसे अपनी और मोड़ा - सुप्रिया... ी हैवे वाइटेड फॉर ा लॉन्ग टाइम फॉर थिस...

विक्रम ने अपने होंठ सुप्रिया के होंठों पर जड़ते हुए उसे एक लम्बी सी किश कर दी. Ek-do पालो के बाद सुप्रिया भी विक्रम को वापस किश कर रही थी. सुप्रिया ने अपने हाथों से विक्रम का चेहरा पकड़ लिया.

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जैसे hi उनके होंठ अलग हुए, सुप्रिया ने विक्रम की आँखों में झाँक कर देखा. उसे वहां हवस की भूक नहीं दिखाई दी जो उसे कई मर्दो में दिखाई देती थी, बल्कि एक सॉफ्ट रोमांटिक फीलिंग लगी.

किश ख़तम होने पर दोनों ने गहरी सांस भरी. सुप्रिया को बिलकुल नहीं पता था की विक्रम अब आगे क्या करने वाला था.

सुप्रिया की सांसें तेज़ थी, और वह थोड़ा पीछे होते हुए दीवार से टकराई. विक्रम ने उसके पीछे आते हुए उसके कंधे के ऊपर दीवार पर हाथ रखा. विक्रम ने अपना गाल सुप्रिया के गाल पर लगते हुए उसके कान को हलके से किश किया. सुप्रिया इस पूरे माहौल में जैसे खो hi गयी थी की तभी बहार की आवाज़ उसे होश में लायी.

सुप्रिया हलके से बोली - यहाँ नहीं... अभी नहीं...

सुप्रिया विक्रम के हाथ के नीचे से निकलते हुए जल्दी से रूम से बहार निकली और सीढ़ियों से नीचे चली गयी. उसका दिल ज़ोर से धक् धक् कर रहा था. वह बस घर से बहार निकलने hi वाली थी की सुप्रिया को एक आवाज़ ने रोका.

ईशा - हु इस थिस? एंड हाउ दीद यू एंटर इनसाइड?

सुप्रिया ने देखा ये तोह ईशा थी और उसे देख कर वह घबरा सी गयी - Ma'am hello... ी ऍम सुप्रिया... मैं बस...

ईशा - हु?

सुप्रिया ये नहीं बोलना चाहती थी की वह विक्रम के ऑफिस में काम करती थी, पता नहीं ईशा इसका क्या मतलब निकाले - मैं... कृति की फ्रेंड...

ईशा ने उसकी और गौर से देखा - कृति की फ्रेंड!! ओह्ह.... ी क्नोव हु यू अरे... तुम वह नई ईयर पार्टी में भी थी न...

सुप्रिया और भी शर्मिंदा सी होती जा रही थी, ईशा शायद अतुल की बात सामने लेन वाली थी.

ईशा - यू वेरे डांसिंग विथ विक्रम इन थे पार्टी...

सुप्रिया हैरान सी रह गयी, ईशा ने ये भी गौर किया था - हाँ... वह बस विक्रम ने इंसिस्ट किया था...

ईशा ने चुभती हुई आवाज़ में कहा - काफी इंसिस्ट करता है न वह... आज क्या इंसिस्ट किया उसने?

सुप्रिया - नहीं कुछ नहीं... मैं तोह बस पानी पीने अंदर आयी थी...

ईशा - एंड फिर? पिया पानी?

सुप्रिया छुप हो गयी बिलकुल, और ईशा उसे छुप देख कर हस्ते हुए बोली - डार्लिंग... अगर स्टोरी को थोड़ा कन्विंसिंग बनाना है तोह कलर तोह लगा लो अपने फेस पर... वैसे तुम्हे देख कर ी कैन सी व्हाई... तुम टोटली उसकी टाइप हो... दीद यू क्नोव हे है ा टाइप?

सुप्रिया - सॉरी आप क्या...

ईशा - It's ok... don't वोर्री... मैं उन वाइव्स में से नहीं हु जो इस सब के बारे में वोर्री करती है... इतस फाइन... इतस चिल...

ईशा की बातों से सुप्रिया के पसीने छूटने शुरू हो गए थे, कृति सच hi कह रही थी, ये डेविल hi थी.

ईशा - वैसे यू स्मेल नई... ी मस्ट वारं यू... जब वह मूड में होता है न वह देखता नहीं है की वह कहाँ क्या किस होल में कर रहा है...

सुप्रिया की आँखें नीचे हो गयी - ी थिंक मुझे चलना चाहिए.... कृति...

सुप्रिया जल्दी से ईशा से दूर होते हुए बहार आ गयी. अभी जो कुछ हुआ था उसने उसे बुरी तरह बेचैन कर दिया था. विक्रम सर और वह, पता नहीं वह क्या सोच रही थी और कहाँ बह चली थी. और ईशा ma'am पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी. वह काफी कन्फ्यूज्ड सा फील कर रही थी, पता नहीं क्यों वह विक्रम की तरफ खींची चली जाती थी.

वह अपने खयालो में भटक hi रही थी की उसे कृति की आवाज़ है - सुप्रियाआ.... वेयर वेरे यू? मैं तुम्हे कब से ढून्ढ रही thi...aur कॉल भी किया था...

सुप्रिया - सॉरी मैं बस यहीं hi तोह थी... फ़ोन वह मैंने कार में छोड़ दिया था..

सुप्रिया ने सोचा की उसे बहुत देर से अतुल भी नहीं दिखा और न वह उसे ढूंढ़ने आया. उसने इधर उधर नज़रे दौड़ाई तोह उसे दूर एक कोने में चेयर पर बैठा अतुल दिखाई दिया और उसके साथ दिशा बैठी हुई थी!! दिशा??!! सुप्रिया थोड़ा हैरान सा हो गयी. इससे पहले वह उनकी और ज्यादा देखती, कृति ने उस पर रंग लगाना शुरू कर दिया था, और वह दोनों आपस में होली खेलने लगे.

थोड़ी देर कृति के साथ होली खेलने के बाद, सुप्रिया अतुल की तरफ बड़ी, उसी अपनी तबियत बहुत अछि नहीं लग रही थी और वह घर जाना चाहती थी. जैसे जैसे वह अतुल के पास पहुंच रही थी उसने देखा की दिशा और अतुल आपस में बात कर रहे थे. दिशा और अतुल, दो लोग जो वह सोच भी नहीं सकती थी की वह कभी बात भी कर सकते थे.

सुप्रिया अतुल के पास पहुंच कर बोली - अतुल... चले घर...

अतुल - हाँ... मैं तुम्हारा hi वेट कर रहा था... ये दिशा है, मेरे ऑफिस में है...

सुप्रिया - हाँ मैं जानती हु इन्हे... Hi दिशा..

दिशा ने हलके से कहा - Hi....

अतुल खड़ा हुआ और उसने दिशा को bye वेव किया और वह और सुप्रिया साथ में होली पार्टी से निकल गए. रास्ते भर सुप्रिया सोच रही थी की आज जो हुआ वह क्यों हुआ, और अब वह कैसे विक्रम को फेस करेगी. पहली किश की शुरुवात तोह चलो उसने की थी, पर आज तोह शायद उसने कई साड़ी सीमाएं लाँघि दी थी. अभी भी रह रह कर वह विक्रम के बारे में hi सोच रही थी और वह छुप सी hi रही.
 
अपडेट 57

सुप्रिया अपने ऑफिस में बैठी काम कर रही थी. होली को हुए 3-4 दिन हो चुके थे पर वह छह के भी विक्रम के साथ हुए वाकिये को नहीं भुला पा रही थी. उस दिन तोह वह किसी तरह विक्रम को "अभी नहीं, यहाँ नहीं" कह कर वहां से निकल गयी थी, पर पता नहीं अगली बार वह उसका कैसे सामना करने वाली थी.

उस दिन होली से जब वह घर पहुंची तोह करुणा भी काफी लंगड़ा के चल रही थी, जिससे उसे पता चल गया की होली का असली मज़ा तोह उसने लिया है इक़बाल के साथ. वह तोह ाचा हुआ की वह थोड़ी देर बाद पहुंचे नहीं तोह अतुल को भी उस दिन सब कुछ देखने को मिल जाता.

सुप्रिया अपने खयालो में खोयी हुई थी की उसे पता नहीं चला की कृति उसके ठीक पीछे कड़ी है. उसने सुप्रिया को आवाज़ दी - मैडम... कहाँ खोयी हुई हो...

सुप्रिया - कुछ नहीं, तुम बताया... क्या चल रहा है...

कृति - बस वह दिल्ली वाले ट्रेड शो की प्लानिंग... मैंने साड़ी टिकट्स बुक कर दी है... तुम बस रेडी रहना...

सुप्रिया - मैं क्यों रेडी रहूंगी????

कृति ने आँख मारते हुए कहा - तुम तोह चल hi रही हो... लास्ट ट्रेड शो में तुमने जो जलवा दिखाया था, उसके बाद तोह तुम्हारा चलना बनता hi है...

सुप्रिया को पिछले ट्रेड शो याद आ गया जब प्रताप उसे ब्लैकमेल करने में लगभग कामयाब हो गया था - नहीं, मैं नहीं जा रही...

कृति - सिर्फ 2 दिन की hi तोह बात है... एंड कितना फन करेंगे वहां...

सुप्रिया - हाँ पर..

कृति - पर वॉर कुछ नहीं, तुम्हे चलना hi पड़ेगे, मैंने टिकट्स बुक कर ली है...

सुप्रिया - और कौन कौन जा रहा है... साहिल सर?

कृति - नहीं वह नहीं जा रहे... बस तुम और मैं और आकाश, और भैया का अभी थोड़ा डीसी सा है... अगर वह नहीं आये तोह बस हम तीनो को hi सब संभालना होगा..

सुप्रिया - ठीक है मैं अतुल से बात करती हु... पता नहीं वह मानेंगे या नहीं...

कृति - तुम एक इंडिपेंडेंट गर्ल हो यार... किसी की परमिशन क्यों लेनी... एंड वैसे अतुल ने जो कुछ किया उसके बाद हे इस no पोजीशन तो से एनीथिंग तो यू..

सुप्रिया ने शर्मिंदा होते हुए कहा - ऐसा भी कुछ नहीं किया उन्होंने..

कृति - सुप्रिया... मुझे कहना नहीं चाहिए... बूत हे इस नॉट थे राइट...

सुप्रिया ने कृति को बीच में रोकते हुए कहा - Ok.. Ok.. मुझे फिगर आउट करने दो...

कृति - फिगर आउट नहीं करना, मैंने फ्लाइट्स एंड होटल्स सब बुक कर दिए है.. अगर तुम अब बैकऑउट हुई तोह तुम्ही समझाना साहिल सर को...

सुप्रिया सोच में पद गयी की वह क्या करे. आज तक वह कभी प्लेन में नहीं गयी थी तोह उसका मैं तोह बहुत था जाने का. पूरे दिन सोचने के बाद उसने आखिर अतुल के सामने शाम को ये बात छेड़ दी, और उसे काफी सरप्राइज हुए की अतुल ने उसे जरा भी मन नहीं किया जाने के लिए. उसने भी एहि कहा की सिर्फ 2 दिन की hi तोह बात थी. सुप्रिया ने ये सुन कर ख़ुशी ख़ुशी अपने जाने की तैयारी शुरू कर दी.

अब अतुल फिर से जॉब करने लगा था तोह वह थोड़ा और खर्चा कर सकती थी और उसने वहां जाने के लिए कुछ ड्रेसेस खरीद ली, पर भी ऐसा कुछ नहीं जिससे वह बहुत ज्यादा खुश हो. अगले दो हफ्ते वह और कृति काफी एक्ससिटेड हो कर दिल्ली की ट्रिप के बारे में बातें करते रहे. और फिर आखिर दिल्ली जाने का दिन भी आ गया. अतुल ने सुप्रिया को लखनऊ के एयरपोर्ट ड्राप किया जहाँ उसे कृति और आकाश मिल गए, और वह तीनो साथ में प्लेन से दिल्ली चले गए.

सुप्रिया अपनी पहली प्लेन ट्रिप के लिए काफी एक्ससिटेड थी, और उसे ऐसा लग रहा था की जैसे वह बिलकुल आज़ाद सी हो गयी हो. किसी चीज़ की कोई फ़िक्र नहीं. हालाँकि फ्लाइट छोटी सी hi थी, पर सुप्रिया को फ्लाइट में बैठ कर काफी ाचा सा लगा. दिल्ली पहुंच कर उन तीनो ने एयरपोर्ट के पास hi के एक होटल में check-in किया. ट्रेड शो अगले दिन था तोह उनके पास पूरी शाम थी रिलैक्स करने के लिए.

सुप्रिया ने सोचा था की वह और कृति साथ घूमेंगे, पर कृति तोह वहां पहुंचते hi अपने कुछ दोस्तों से मिलने निकल गयी. और आकाश भी कहीं गायब सा hi था. सुप्रिया अपने रूम में अकेले बैठी सोच रही थी की वह क्या करे, ट्रिप की इतनी अछि शुरुवात भी नहीं हुई थी. तभी उसके फ़ोन पर विक्रम का कॉल आने लगा.

सुप्रिया ने झिझकते हुए फ़ोन उठाया - Hello...

विक्रम - सुप्रिया... मैं कृति को कॉल कर रहा था पर उसका कॉल नहीं लग रहा था... तुम लोग कहाँ हो, मैं अभी होटल पंहुचा...

सुप्रिया को नहीं पता था की विक्रम सर भी आज hi आने वाले थे, वह उनके साथ फ्लाइट में तोह नहीं थे - विक्रम... मैं तोह अपने रूम में हु... कृति और आकाश नहीं पता कहाँ है.. शायद वह अपने फ्रेंड्स से मिलने...

विक्रम - ओह ok... मैं भी अभी check-in कर रहा हूँ... उसके बाद, अगर तुम फ्री हो तोह कहीं चल सकते है... ी डोंट हैवे एनीथिंग तो दो थिस इवनिंग.

सुप्रिया थोड़ा सा हिचकिचाई पर उसके पास मन करने का कोई ख़ास रीज़न नहीं था - ठीक है... मैं नीचे लॉबी में आती हूँ..

विक्रम - Ok, ी विल सी यू इन 30 मिनट्स...

सुप्रिया फ़ोन रख कर जल्दी से तैयार होने लगी. विक्रम हमेशा कितनी स्मार्टली ड्रेस्ड रहता था, और आज वह पहली बार उसके साथ कहीं जाएगी, तोह वह भी अचे से hi ड्रेस हो कर जाना चाहती थी. उसने अपनी बेस्ट ड्रेस निकाल के पेहेन ली, एक मखमली सी सॉफ्ट रेड ड्रेस, जिसमे वह काफी ज्यादा एलिगेंट सी लग रही थी. और अचे से टाइम लगा कर नीचे आयी. जैसे hi वह नीचे आयी उसने देखा की विक्रम दूर गार्डन में खड़ा था, और वह उसकी तरफ मुस्कुराते हुए बड़ी. उसे पता था की उसकी ये लुक देख कर विक्रम उसका दीवाना हो जायेगा.

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सुप्रिया धीरे धीरे विक्रम की और आ रही थी, और विक्रम ने जैसे hi उसे देखा उसकी नज़रे बस उस पर hi टिक गयी. आज तक उसने ज्यादातर सुप्रिया को बस ट्रेडिशनल इंडियन कपड़ो में hi देखा था, और वह इसमें बहुत hi अछि भी लगती थी, पर इसमें तोह वह गज़ब hi लग रही थी.

विक्रम - हे... लुकिंग किते डिफरेंट टुडे...

सुप्रिया - डिफरेंट ाचा, या बुरा?

विक्रम ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा - अमेजिंग...

सुप्रिया मुस्कुराती हुई नीचे देखने लगी - मेरे पास एहि बेस्ट ड्रेस थी, और एहि मैंने आज पेहेन ली...

विक्रम - ठीक है, तोह चलते है शॉपिंग के लिए... पास में hi एक मॉल है...

सुप्रिया - नहीं नहीं... मैं तोह ऐसे hi मजाक कर रही थी...

विक्रम - बूत, ी ऍम सीरियस... लेट में बुय समथिंग फॉर यू... लेटस जो...

विक्रम सुप्रिया को साथ लेते हुए एक कार की तरफ गया और उसने ड्राइवर को अम्बिएंस मॉल जाने के लिए कहा. सुप्रिया और विक्रम पीछे की साथ पर साथ बैठे थे, और सुप्रिया कोशिश कर रही थी की वह विक्रम की और न देखे. सुप्रिया खिड़की से बहार दिल्ली की ट्रैफिक की भीड़ को देख रही थी. जल्दी hi वह पास के मॉल पहुंच गए, और सुप्रिया ने पहले कभी इतना बड़ा मॉल नहीं देखा था. इतनी भीड़, इतने सारे स्टोर्स, सब कुछ जैसे नया सा था.

विक्रम और वह एस्कलेटर से ऊपर जाते हुए एक सुप्रिया को एक महंगे से स्टोर में ले गया. सुप्रिया वहां के प्राइस टैग्स देख कर hi हैरान थी, कोई भी ड्रेस 10 हज़ार से काम की नहीं थी.

विक्रम ने उसे एक ड्रेस देते हुए कहा - ये लो... ये तरय करो... तुम पर अछि लगेगी..

सुप्रिया - विक्रम, ये स्टोर तोह कितना महंगा है... मैं यहाँ कैसे...

विक्रम - Don't वोर्री अबाउट थे प्राइस.. तरय तो करो...

सुप्रिया - हम्म्म... पर...

विक्रम ने कुछ और ड्रेसेस उठाते हुए सुप्रिया को दिया और एक फीमेल सेल्समेन को बुलाते हुए सुप्रिया को उसके साथ चेंज रूम में भेज दिया. सुप्रिया एक एक करके ये महंगी ड्रेसेस तरय करने लगी. विक्रम की साड़ी चोइसस काफी अछि थी, ये ड्रेसेस उस पर काफी अछि लग रही. सब कुछ एक डैम परफेक्ट फिट का था, और सुप्रिया उन्हें पेहेन कर अलग सी hi लग रही थी. पर इतनी महंगी ड्रेसेस वह कैसे एक्सेप्ट कर ले विक्रम से.

बहार निकल कर उसने वह ड्रेसेस सलेसगिरल को दे दी.

विक्रम - हाउ वास् आईटी?

सुप्रिया - अछि थी... पर इतस सो एक्सपेंसिव.. मैं नहीं ले सकती..

विक्रम - पर मैं तोह ले सकता हूँ न...

विक्रम ने सलेसगिरल को इशारा किया की वह साड़ी ड्रेसेस पैक कर दे. सुप्रिया कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थी. वह दोनों थोड़ी शॉपिंग के बाद एक महंगे से रेस्टोरेंट में बैठे कॉफ़ी पी रहे थे और बातें कर रहे थे. हमेशा की तरह विक्रम की बातें काफी इंटरेस्टिंग होती थी, और सुप्रिया भी न जाने क्यों अपने मैं की बात खुल के बोल पा रही थी.

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ऑफिस की बातें जैसे थमने सी लगी थी और उन दोनों के बीच एक खामोशी सी आ गयी थी. सुप्रिया की नरम उंगलियां कॉफ़ी के कप के किनारे पर गोल गोल घूम रही थी. विक्रम की नज़र भी अपनी कॉफ़ी से ज्यादा सुप्रिया की और थी. वह अपना हर शब्द जैसे काफी सोच समझ के बोल रहा हो, और सुप्रिया को अचे से परख रहा हो. सुप्रिया उसकी नज़रो को अपने ऊपर फील कर पा रही थी, उनके बीच की टेंशन जैसे दोनों के मैं में चल रही हो.

सुप्रिया - आपको कभी लगता है की कहीं चीज़े इतनी न उलझ जाये की ूँजे सुलझाना मुश्किल हो...

विक्रम के चेहरे पर हलकी सी मुस्कुराहा थी - चीज़े इतनी भी उलझी हुई नहीं है जितनी तुम उलझा रही हो.

सुप्रिया थोड़ा सा नकली गुस्सा करते हुए - तोह मैं चीज़े कम्पलीकाते कर रही हु?

विक्रम - शायद... मैं तोह बस तुम्हे डिकोड करनी की कोशिश कर रहा हूँ...

सुप्रिया - वह तोह काफी मुश्किल है. कई बार सोचती हु की अगर मैंने ये जॉब नहीं की होती तोह शायद मेरी लाइफ इतनी कॉम्प्लिकेटेड न होती आज...

विक्रम - और मैं कई बार ये की अगर तुमने ये जॉब नहीं ज्वाइन की होती तोह मुझे पता hi नहीं चलता की मैं क्या ढून्ढ रहा था..

सुप्रिया - शायद हमे ये बात एहि रोक देनी चाहिए...

विक्रम - और उस दिन होली में... तब क्या हमे सब नहीं रोक देना चाहिए था..

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो रहे थे - प्लीज उस दिन को भूल जाइये... वह बस एक गलती थी...

विक्रम - मुझे तोह नहीं लगा की वह एक गलती थी.. वह तोह बस शुरुवात थी...

सुप्रिया - आप और मैं दोनों hi मैरिड है.... फिर गलती कैसे नहीं थी...

विक्रम - कई बार हम सही टाइम पर सही इंसान से नहीं मिल पाते... उस पहली गलती को ठीक करने के लिए जो कदम बढ़ाया जाये उसे गलती कैसे कह सकते है...

सुप्रिया - शायद हमे अब वापस चलना चाहिए... पर अगर आप चाहे तोह थोड़ी देर और रुक सकते है...

विक्रम - जैसा तुम चाहो वैसा hi होगा...

सुप्रिया विक्रम का ये जवाब सुन कर फ़्रस्ट्रेटेड सी हो गयी, क्यों नहीं विक्रम आगे कदम बड़ा कर कुछ कह सकता था. बातें इतनी क्यों उलझी हुई सी थी. विक्रम ने कॉफ़ी का बिल पाय किया और दोनों होटल की तरफ चल दिए, तब तक रात हो चुकी थी. होटल पहुंच कर दोनों लिफ्ट से अपने अपने रूम में चले गए.

सुप्रिया के मैं में बहुत hi हलचल हो रही थी. उनकी बीच की साड़ी टेंशन उसे पागल सा कर रही थी. वह कैसे विक्रम को मन कर सकती थी, सब कुछ तोह था उसके पास जो उसे लाइफ में चाहिए था. वह अपने अंदर के तूफ़ान को काबू में नहीं ला पा रही थी. कुछ hi पालो में सुप्रिया कमज़ोर पद चुकी थी और उसने तय कर लिया की उसे क्या करना था.

उसे तोह विक्रम का रूम नंबर भी नहीं पता था. वह जल्दी से नीचे फ्रंट डेस्क पर गयी और उसने विक्रम का रूम नंबर पता किया और फिर अपने तेज़ धड़कते हुए दिल के साथ विक्रम के कमरे के बहार पहुंच कर उस पर नॉक किया.

विक्रम ने दरवाज़ा खोला, उसके चेहरे पर ज़रा सी भी हैरानी नहीं थी. सुप्रिया विक्रम को हलके से धकेलते हुए कमरे के अंदर आ गयी. सुप्रिया ने दरवाज़ा बंद किया और अपनी पीठ दरवाज़े पर लगते हुए कड़ी हो गयी.

सुप्रिया ने विक्रम की और गुस्से में देखते हुए कहा - आप मुझे सीधे सीधे क्यों नहीं बता देते की आप चाहते क्या है…

विक्रम तोह जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रहा था की सुप्रिया खुद उसके पास चल कर आ जाये. उसने सुप्रिया की बात को अनसुना करते हुए उसे कमर से पकड़ लिया और अपनी और खींचते हुए उसके होंठों पर एक ज़ोर की किश करि. सुप्रिया पल भर के लिए तोह हक्की बक्की रह गयी, पर इस बार वह भी पीछे नहीं हटी और उसने भी विक्रम को तुरंत hi वापस किश कर दी, वह भी तोह अपने आप को कबसे रोके बैठी थी.

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विक्रम - फ़िक्र मत करो... आज हम दोनों hi अपने दिल की साड़ी बातें पूरी कर लेंगे...

विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया के पूरे बदन पर घूमने शुरू किये. सुप्रिया विक्रम के हर्ष स्पर्श से और बेचैन होती जा रही थी. दोनों अब बिना किसी झिझक के एक दुसरे को चूम रहे थे. सुप्रिया ने विक्रम के होंठ को अपने दांतों के बीच में काँटा. वह अब अपने आप को पूरी तरह से खो चुकी थी. शायद आग दोनों तरफ बराबर सी लगी थी.

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सुप्रिया के अपने दांत काटने से विक्रम और भी एक्ससिटेड हो गया और उसने सुप्रिया को दूसरी और मोड़ते हुए उसकी ड्रेस को नीचे सरका दिया. ड्रेस उतारते hi सुप्रिया एक सफ़ेद सी लास्य ब्रा में कड़ी रह गयी थी. सब कुछ इतनी जल्दी जल्दी हो रहा था की सुप्रिया को यकीं hi नहीं हो रहा था. विक्रम के हाथ सुप्रिया की ब्रा के नीचे उसकी नंगी कमर पर थे.

सुप्रिया शर्म के मारे सोच रही थी की वह कहाँ छिपे, और उसकी ये हालत देख कर विक्रम से कमरे की लाइट का स्विच बंद कर दिया. लाइट बंद होने से सुप्रिया की शर्म थोड़ी सी काम हुई, पर अभी भी बहार की रौशनी से दोनों एक दुसरे को अचे से देख पा रहे थे.

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विक्रम ने सुप्रिया को पीछे से कास के पकड़ लिया और वह दोनों हलकी हलकी आहें भरने लगी. सुप्रिया विक्रम की सांसें अपनी गर्दन पर महसूस कर पा रही थी. विक्रम ने सुप्रिया के नीचे हाथ रखते हुए उसे उठाया और बीएड की तरफ ले जाकर उसे बीएड पर हलके से गिरा दिया. सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद कर ली, वह विक्रम के बिस्तर पर थी, और आगे जो होने वाला था अब वह उसे रोक नहीं सकती थी.

विक्रम सुप्रिया के ऊपर आते हुए फिर से उसे किश करने लगा. सुप्रिया ने आखें बंद करते हुए अपने हाथ विक्रम की गर्दन में दाल दिए. सुप्रिया के चिकने गालों पर विक्रम अपनी दादी को रगड़ रहा था जो सुप्रिया को चुभ तोह रही थी, पर साथ hi उसे एक अजीब सा मजा भी आ रहा था.

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विक्रम ने अपनी सांसें सँभालते हुए कहा - सुप्रिया... ी लव यू...

विक्रम ने अपनी शर्ट उतार फेकि और सुप्रिया का चेहरे को अपनी और खींचते हुए अपनी जीब उसके होंठों के बीच में घुसा दी. विक्रम सुप्रिया के होंठों को जैम के चूस रहा था, और सुप्रिया भी इस सब का पूरा मज़ा ले रही थी. शायद वह इसी का तोह कबसे इंतज़ार कर रही थी की विक्रम उसे पूरी तरह अपने काबू में ले ले. विक्रम जानता था की सुप्रिया को इस समय क्या चाहिए था, और वह उस पर पूरी तरह से हावी होना शुरू हो गया था.

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विक्रम जिस तरह से उसे प्यार कर रहा था, सुप्रिया अंदर से बुरी तरह काँप रही थी. उसे ईशा की कही बात याद आ रही थी. अगर विक्रम सच में वैसे hi प्यार करेगा तोह उसकी तोह हालत बुरी होने वाली थी. विक्रम ने सुप्रिया की आँखों में हल्का सा डर देखा, और वह थोड़ा सा धीरे हो गया.

विक्रम - घबरायो मत... ी विल बे जेंटल विथ यू...

विक्रम के हाथ कभी सुप्रिया की नाभि, कभी पेट और कभी बूब्स पर घूम रहे थे. विक्रम सुप्रिया के ब्रा के ऊपर से उसके सुडोल बूब्स को आराम से मसलने लगा. बूब्स इस कदर ब्रा में कैद थे की वह बस आज़ाद होते hi उछालने वाले थे.

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विक्रम ने हलके से ब्रा के एक कप को नीचे खींचा और फिर सुप्रिया की तानी हुई चुकी पर अपनी ऊँगली फेरने लगा. सुप्रिया विक्रम का हाथ रोकने की कोशिश कर रही थी, पर विक्रम ने अपने दुसरे हाथ से दुसरे कप को भी नीचे कर दिया. सुप्रिया की दोनों चूचियां ब्रा से बहार निकली हुई थी, और सुप्रिया ने शर्म के मारे अपने बूब्स को अपने हाथों से धक् लिया, पर उसके अंदर की ज्वाला बढ़ती hi जा रही थी. इतने महीने हो गए थे उसे अचे से सेक्स करे हुए.

राहुल के मुकाबले विक्रम के प्यार में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी, वह बहुत आराम से सुप्रिया के जिस्म के हर हिस्से को प्यार से चूमता रहा. और सुप्रिया की ाँहें तेज़ होती गयी. जैसे जैसे मामला आगे बढ़ता जा रहा था, सुप्रिया hi शायद विक्रम से ज्यादा बेताब होती जा रही थी.

विक्रम ने मौका मिलते hi अपने हाथ सुप्रिया की पीठ के नीचे किये और उसकी ब्रा को बड़ी आराम से खोल दिया. ब्रा खुलते hi सुप्रिया के मुँह से ज़ोर की एक आह निकली, और विक्रम ने अपने बड़े बड़े हाथों से सुप्रिया के बूब्स को भींच लिया. सुप्रिया की सिसकियाँ तेज़ होती जा रही थी.

सुप्रिया - Ahhh...ahhh...ahhh... विक्रम....

विराम - सुप्रिया.....

विक्रम ने सुप्रिया की छोटी सी चूचियों को अपने ऊँगली से ज़ोर के मसला, जिसकी सुप्रिया की हलकी से चीख निकल गयी..

सुप्रिया - ोुछः.... उफ्फ्फ्फ़....

विक्रम हस्ते हुए - अभी तोह कुछ भी नहीं किया....

सुप्रिया - सब कुछ तोह कर रहे हो... अह्ह्ह.....

विक्रम - अभी तोह बहुत कुछ बाकी है?

विक्रम ने अपने होंठ सुप्रिया के बूब्स पर लगते हुए उन्हें चूसना शुरू कर दिया. सुप्रिया बीएड में विक्रम के नीचे झटपटा सी रही थी. विक्रम बिलकुल आराम से उसकी चूचियों को अपने मुँह में दबाये से धीरे धीरे चूस रहा था.

सुप्रिया - अह्ह्ह... अह्ह्ह्हह ....अह्ह्ह्ह.. मममममम

सुप्रिया ने कभी सपने में नहीं सोचा था की वह और विक्रम ऐसे एक दुसरे के साथ ये सब कर रहे होंगे. बूब्स चूसते चूसते विक्रम ने हलके से अपने दांत सुप्रिया के कोमल से बूब्स पर गदा दिए, पर फिर एक डैम से हटा लिए, जैसे वह अपने आप को रोक रहा हो.

सुप्रिया - अह्ह्ह... Vikram...mmmm....

विक्रम का मुँह नीचे जाते हुए सुप्रिया की पंतय की तरफ गया. सुप्रिया ने विक्रम के बाल पकड़ लिए, उसे वहां जाने से रोकने के लिए. विक्रम ने सुप्रिया की पंतय के ऊपर हलके से चूमा, जिससे सुप्रिया का पूरा शरीर काँप उठा.

विक्रम ने अपने दोनों हाथ पंतय के ऊपर लगाये और एकदम से सुप्रिया की पंतय को नीचे खींचते हुए उतार दिया. सुप्रिया एक डैम सन्न सी रह गयी थी, विक्रम उसके साथ सब कुछ hi करने वाले तहत. इससे पहले वह कुछ और कहती, विक्रम ने सुप्रिया को अपनी बाहों में भरते हुए घुमाया और उसे अपने ऊपर कर लिया. सुप्रिया के नंगे पर्वत, विक्रम के छाती से सटे हुए थे, और विक्रम सुप्रिया की नंगी गांड को अपने हाथ से महसूस कर रहा था. दोनों अभी भी एक दुसरे को चूम रहे थे.

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सुप्रिया अब चाहती थी की विक्रम उसके अंदर अपना लुंड दाल दे, वह कब से तरस रही थी इस पल के लिए. उसने भी शरारत करके विक्रम का अंडरवियर नीचे खींच दिया. विक्रम का लुंड पूरा खड़ा था, एक डैम साफ़ सफ़ेद, बाल बिलकुल छोटे छोटे से, और लुंड भी ठीक साइज का था, न ज्यादा बड़ा, न ज्यादा छोटा. आज तक जितने लुंड सुप्रिया ने देखे थे, ये लुंड उनसे थोड़ा सा मोटा था.

विक्रम और सुप्रिया के दुसरे की बाहों में फिर से लिपट गए, कभी विक्रम सुप्रिया के ऊपर, और कभी सुप्रिया विक्रम के ऊपर. एक दुसरे को चूमते हुए, दोनों अपने होश बुरी तरह खो चुके थे. सुप्रिया की आवाज़ें तेज़ होती जा रही थी, और वह चाहती थी बस अब विक्रम उसे तृप्त कर दे.

विक्रम ने सुप्रिया के हाथों को ज़ोर से जकड़ते हुए अपने नीचे किया और फिर से उसके ऊपर आ गया. अब बस सुप्रिया के अंदर लुंड डालने का समय आ hi गया था.

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अपडेट 58

विक्रम का लुंड सुप्रिया की छूट के ठीक बहार खड़ा था. विक्रम सुप्रिया की आँखों में देख रहा था, जैसे उससे अंदर जाने की परमिशन मांग रहा हो. सुप्रिया बुरी तरह घबराई भी हुई थी पर वह यहाँ तक पहुंचने के बाद वह भी चाहती थी की विक्रम का लुंड उसके अंदर चला जाये. वह फिर से एक और रेखा लांघने जा रही थी, पर फिलहाल तोह उसका दिमाग चलना बंद हो चूका था.

विक्रम ने सुप्रिया की आँखों में देख कर फिर से कहा - डोंट वोर्री, मैं बहुत जेंटली करूँगा...

सुप्रिया ने हलके से सर हिलाया और अपनी आँखें बंद कर ली. विक्रम ने आगे झुक कर सुप्रिया की बाहों के नीचे अपने हाथ डालते हुए उसे पकड़ा और धीरे से अपना मोटा लुंड उसकी छूट के अंदर घुसा दिया. जैसे hi लुंड छूट के अंदर जाना शुरू हुआ, सुप्रिया की चीख निकालनी शुरू हो गयी थी.

सुप्रिया - आईईईई ...उफ्फ्फ...... ुह्ह्ह्ह.....

इतने दिनों से उसकी बंद गुफा में विक्रम का मोटा लुंड घुसने से सुप्रिया की तोह जान hi निकल रही थी. उसने अपनी आँख बंद राखी और विक्रम के कन्धों को कास के पकड़ लिया.

सुप्रिया - Ahhhh....mmmmmmmm.....ahhh... विकररआयंम...

विक्रम ने भी सुप्रिया को कास के पकड़ा हुआ था और धीरे धीरे अपना लुंड और अंदर ले कर जा रहा था. सुप्रिया उसके लुंड को अपनी छूट को फैलते हुए महसूस कर पा रही थी. उसके नाख़ून विक्रम के हाथ पर गड रहे थे, पर विक्रम को तोह जैसे कुछ महसूस hi नहीं हो रहा था.

सुप्रिया - Ahhhhhh.....ahh.ahhh... अह्ह्ह... मममममम....

विक्रम ने हलके से सुप्रिया को किश किया - बस थोड़ा सा और...

सुप्रिया ने दर्द में अपना सर फिर से हलके से हिलाया. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे विक्रम का कड़क लुंड उसके अंदर जाते हुए और भी बड़ा होता जा रहा था. लुंड थोड़ा और अंदर जाने के बाद विक्रम ने हलके हलके से उसे बहार निकाला. जैसे जैसे लुंड बहार निकल रहा था सुप्रिया एक अलग hi सुख की अनुभूति कर रही थी. उसने विक्रम पर अपनी पकड़ थोड़ी सी ढीली करि.

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सुप्रिया की शकल देख कर विक्रम उसकी हालत समझ गया था, और उसने फिर से अपना लुंड अंदर घुसा दिया, इस बार थोड़ा और गहरा. सुप्रिया ज़ोर से चिल्लाई और उसकी कमर खुद hi थोड़ा ऊपर उठ गयी. विक्रम ने सुप्रिया के पैरो को थोड़ा सा फैलाया ताकि उसे अचे से जगह मिल जाये सुप्रिया के अंदर धक्के मारने के लिए.

विक्रम ने सुप्रिया के अंदर हलके से झटके मारने शुरू किये. हर धक्के से सुप्रिया के मुँह से हलकी से अह्ह्ह निकलती जिससे विक्रम की गति हलकी सी और बाद जाती. सुप्रिया को अपने अंदर विक्रम का मोटा लुंड अंदर बहार जाते हुए महसूस हो रहा था. विक्रम की बढ़ती हुई स्पीड उसी बुरी तरह पागल कर रही थी और उसने अपने पेअर उठाते हुए विक्रम को जकड लिया. विक्रम भी उसे शांत करने के लिए बीच बीच में उसके सर पर हलके हलके से हाथ फेर रहा था.

सुप्रिया बुरी तरह सिसक रही थी - ममममम..... अह्ह्ह्ह.... नहीं..... उफ्फ्फ....

विक्रम - शहहह.... अह्ह्ह्ह....

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सुप्रिया की टाइट छूट ऐसी थी जैसे उसमे आज तक कोई लुंड hi न गया हो, और ये विक्रम को बहुत hi ज्यादा एक्साइट कर रहा था. जैसे जैसे विक्रम की स्पीड तेज़ होती गयी वह सुप्रिया के और अंदर तक पहुंचने लगा, और सुप्रिया की सिसकियाँ और चीखे तेज़ होती गयी. पूरे कमरे में सुप्रिया की चीखे और उसके शरीर की थप थप गूँज रही थी.

विक्रम ने आवाज़ों को दबाने के लिए सुप्रिया के मुँह में अपनी ऊगली दाल दी. विक्रम की ऊँगली अपने मुँह में जाते hi सुप्रिया ने उसे अपने होंठों में टाइट दबा ली और उसे चूसने लगी.

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सुप्रिया भी अब अपनी कमर को विक्रम की और धकेल रही थी, जिससे विक्रम की स्पीड और तेज़ हो गयी थी. विक्रम ने सुप्रिया की पैरो को हलके से ऊपर उठाया ताकि वह और गहरा अंदर जा सके.

जितना गहरा वह अंदर जा रहा था उतना hi विक्रम का लुंड भी बेकाबू होता जा रहा था - उफ्फ्फ... अह्ह्ह... अहह....

विक्रम ने अपना लुंड बहार निकाला और सुप्रिया की पोजीशन बदलते हुए उसे घुमा कर उसके घुटनो पर बिठा दिया. सुप्रिया भी एक डैम से हैरान सी रह गयी और उसने पीछे मुद कर विक्रम की और देखा. उसकी आँखों में एक अलग सा नशा चढ़ा हुआ था जो उसने आज से पहले नहीं देखा था.

सुप्रिया ने कांपती हुई आवाज़ में कहा - विक्रमममम....

विक्रम अपने आप को सँभालते हुए बोलै - रिलैक्स... तुम बस कुछ पकड़ लो...

विक्रम बीएड से उतरा और सुप्रिया को बीएड के साइड पर खींचते हुए फिर से अपना लुंड फिर से उसकी छूट में दाल दिया. विक्रम ने हलके से सुप्रिया की गांड पर हाथ मरते हुए उसे हलके से नोचा. वह किसी तरह अपने आप को संभाले हुए था की सुप्रिया के साथ सब कुछ आराम आराम से करे.

सुप्रिया - ोुछ.... अह्ह्ह्ह.....

विक्रम ने वहां पर मसल दिया - दर्द हो रहा है...

सुप्रिया - हाँ... अहह... अहह...

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विक्रम - बस तुम मेरा साथ देती जायो.. अह्ह्ह.....

सुप्रिया ने विक्रम को पीछे देखते हुए अपनी गर्दन हाँ में हिलायी.

विक्रम आगे की और झुक कर सुप्रिया के अंदर फिर से धक्के मारने लगा. इस डोग्गिस्टीले पोजीशन में सुप्रिया को विक्रम का लुंड और भी ज्यादा महसूस हो रहा था. सुप्रिया ने बीएड के दुसरे कोने को ज़ोर के पकड़ लिया और वह अपनी गांड को आगे पीछे कर रही थी, जिससे विक्रम का पूरा साथ मिलने लगा.

विक्रम भी बीएड पर चड्डे हुए सुप्रिया की ठीक ऊपर आ गया था, ताकि वह अचे से फाॅर्स लगा पाए. सुप्रिया के बाल पसीनो में बुरी तरह भीग चुके थे.

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काफी देर इसी पोजीशन में रहने के कारन सुप्रिया के हाथों में दर्द होना शुरू हो गया था और उसने अपना शरीर बीएड पर नीचे कर लिया, जिससे उसकी गांड ऊपर उठ गयी. इतनी देर तक तोह आज तक उसे किसी ने नहीं छोड़ा था. वह बस अपने चरम पर पहुंच hi गयी थी पर विक्रम तोह रुकने का नाम नहीं ले रहा था. विक्रम ने सहारे के लिए सुप्रिया की कमर को पकड़ लिया.

सुप्रिया - विक्रम.... अहह.... अह्ह्ह.... मेरा बस होने वाला है....

विक्रम हाँफते हुए बोलै - रुको अभी... बस थोड़ा सा और....

विक्रम ने एकदम से सुप्रिया के बालो को पकड़ के खींचा जिससे सुप्रिया की ज़ोर की चीख निकल गयी.

विक्रम - बस थोड़ा सा सपोर्ट के लिए पकड़ा है... डरो मत... अहह... अहह..

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विक्रम ने सुप्रिया के बालो को पकडे हुए तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए. सुप्रिया बीएड की चद्दर को पकडे हुए ज़ोर ज़ोर के दर्द में करहा रही थी. इससे पहले की विक्रम अपना विरए सुप्रिया में निकाल पाटा उसे सुप्रिया का गरम गरम माल अपने लुंड पर महसूस हुआ. उस गर्माहट के महसूस होते hi, वह भी सुप्रिया के अंदर झाड़ गया, उसका मुँह से तेज़ आवाज़ निकलते हुए सुप्रिया के अंदर सारा माल छोड़ दिया. सुप्रिया बिखर कर बीएड पर लेट गयी, और विक्रम अपना लुंड अभी भी सुप्रिया के अंदर लिए उसके ठीक ऊपर लेट गया.

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विक्रम ने सुप्रिया का हाथ थामते हुए अपना भर उस पर दाल दिया और सुप्रिया को अपने नीचे दबोच लिया. सुप्रिया की तेज़ सांसें इस भार से धीमी होती गयी. विक्रम ने हलके से सुप्रिया की पीठ मसलनि शुरू करि.

सब कुछ हो जाने के बाद, सुप्रिया के चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी. धीरे धीरे उसकी टेंशन बढ़ती जा रही थी. अपनी शादी के बहार आज वह एक दुसरे मर्द के साथ सब कुछ कर बैठी थी. पता नहीं वह क्यों ये सब कर बैठी थी विक्रम के साथ. उसकी आँखों से आंसू बहने शुरू हो गए.

विक्रम ने उसे छुप करते हुए कहा - शहहहहह..... क्या हुआ सुप्रिया...

सुप्रिया रट हुए बोली - विक्रम.... हमने... अभी... जो किया...

विक्रम ने सुप्रिया को होंठों को हलके से चूमते हुए कहा - सुप्रिया... ी लव यू... तुम शायद यकीं नहीं करोगी, पर मैंने अपनी लाइफ में सिर्फ ये दूसरी बार hi किसी को कहा है...

सुप्रिया ने विक्रम की आँखों में झाँक कर देखा, क्या वह सच कह रहा था, और कह भी रहा था तोह उनका फ्यूचर क्या था. विक्रम उसकी फीलिंग्स को समझ गया था और वह धीरे धीरे उसके मैं में उठ रहे तूफ़ान को शांत करता गया. विक्रम अपना दिल खोल के अपनी फीलिंग्स सुप्रिया के सामने रख रहा था, जो देख सुप्रिया भी काफी हैरान थी. उसने पहले कभी विक्रम को ऐसे नहीं देखा था. उसने सुप्रिया को बताया की कैसे उसके मैं में ईशा के लिए अब कोई भी फीलिंग्स नहीं थी, और वह कब से किसी ख़ास की तलाश कर रहा था.

विक्रम - सुप्रिया... मेरे लिए बस तुम hi सब कुछ हो... तुम परेशान मत हो, मैं सब फिगर आउट कर लूंगा...

सुप्रिया - और मैं अतुल को क्या बोलूंगी...

विक्रम - किसी को अभी कुछ भी बोलने की ज़रुरत नहीं है, लीव एवरीथिंग विथ में...

सुप्रिया - पर विक्रम...

विक्रम - दो यू ट्रस्ट में? मैंने कभी तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं होने दिया है, और आगे भी कभी नहीं होने दूंगा...

दोनों काफी देर तक हाथों में हाथ लिए, एक दुसरे की बाहों में लेते हुए, बात करते रहे. विक्रम की बातों से सुप्रिया धीरे धीरे नार्मल हो रही थी. और फिर उसे पता hi नहीं चला की वह कब सो गयी.

सुबह बहार से आती हुई रौशनी ने सुप्रिया को जगाया. सुप्रिया का पूरा बदन अकड़ा सा हुआ था, और जब वह उठी तोह उसने पाया की वह बीएड पर अकेली लेती हुई थी. उसने इधर उधर देखा और फिर अपने कपडे पेहेन्ने शुरू कर दिए. विक्रम बाथरूम में भी नहीं था. वह जल्दी से अपने कमरे के तरफ चल पड़ी, उसके मान में बस एहि चल रहा था की कोई उसे देख न ले. वह अपने रूम पहुंची और घडी में टाइम देखा तोह 8 बजने hi वाले थे. उसके फ़ोन पर कृति के कई मेस्सगेस आये हुए थे.

उसने जल्दी से कृति को मैसेज किया - बस 15-20 में नीचे मिलती हूँ..

और फिर वह नहाने घुस गयी. उसकी छूट में काफी दर्द हो रहा था कल के सेक्स के बाद. नहाते हुए उसका हाथ बार बार अपनी छूट के आस पास hi घूम रहा था. पर ये समय देर करने का नहीं था, और सुप्रिया जल्दी से नाहा कर बहार निकली और विक्रम के साथ खरीदी गयी ड्रेसेस में से एक पेहेन्ने लगी. उसने एक पर्पल रंग की फुल बॉडी ड्रेस चुनी, जिसमे उसके शरीर के कर्व्स खूब अचे से दिख रहे थे. उसने अपने आप को आईने में देखा, आज तोह वह गजब धने वाली थी.

कृति का मैसेज था की वह होटल के पीछे की साइड कार के पास वेट कर रही थी, तोह सुप्रिया पीछे की एग्जिट से वहां आ गयी. पीछे कुछ लोग बहार बैठे हुए थे और वह सुप्रिया को जाते देख बस उसकी hi गांड को घूर रहे थे.

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कृति उसे देखते hi बोली - वाओ.... हॉट!!... ये ड्रेस कब खरीदी...

सुप्रिया खिलखिलाती हुई उनके पास आ कर कड़ी हो गयी - बस... तुमने जब देखि...

आकाश भी बस सुप्रिया को hi ऊपर से नीचे तक देख रहा था. इस ड्रेस में उसके बूब्स और हिप्स इतनी साफ़ साफ़ जो दिख रहे थे.

कृति ने आकाश का खुला मुँह देख कर मजाक में उसकी आँखें अपने हाथों से धक् दी - तू मत देख... और मुँह बंद कर ले...

आकाश झपटा हुआ कार की आगि की सीट पर बैठ गया. कृति और सुप्रिया पीछे वाली सीट पर बैठ गए.

कार चलने hi वाली थी की सुप्रिया ने पुछा - विक्रम नहीं आ रहे क्या?

कृति - तुमने देखा क्या भैया को? मुझे तोह कॉल शाम को उनका कॉल आ रहा था, पर उनसे बात hi नहीं हो पायी...

सुप्रिया ने नीचे देखते हुए कहा - नहीं.. मुझे भी नहीं दिखे...

कृति - शायद किसी मीटिंग में बिजी होंगे... हम लोग मैनेज कर लेंगे न...

सुप्रिया मैं hi मैं सोच रही थी की उसे पता था की विक्रम कौनसी मीटिंग में तहत पूरी शाम और रात. ये सोचते hi उसके चेहरे पर एक दबी हुई सी मुस्कान आ गयी, पर उसने किसी तरह से अपने उछालते हुए मैं को कण्ट्रोल किया. कृति और सुप्रिया इधर उधर की बातों में लग गए और आकाश बीच बीच में पीछे नज़र घुमा के दोनों की बातों में शामिल होने की कोशिश कर रहा था. उससे भी ज्यादा उसका इरादा सुप्रिया को देखने का था, जो आज क्या कमल लग रही थी.

थोड़ी देर बाद वह ट्रेड शो वाली जगह पर पहुंचे और उनकी हेल्प करने के लिए पहले से लोग मजूद थे. आज तोह वैसे भी सुप्रिया को देख कर लोग उनकी हेल्प करने को और भी बेताब थे. उनके काउंटर पर भी सबसे ज्यादा इनक्विरिएस हुई और सुप्रिया सब से है कर बात कर रही थी. पर उसकी नज़रे तोह अभी भी विक्रम को hi ढून्ढ रही थी जो उसे कल रात के बाद दिखा नहीं था.

बीच में एक न्यूज़ वाला उनके काउंटर पर आया, और कृति और सुप्रिया की और देख कर बोलै - एक्सक्यूज़ में मैडम, हम आपका एक छोटा सा इंटरव्यू ले सकते है क्या?

कृति - येह सूरे...

न्यूज़ वाला - नहीं आपका नहीं, ये दूसरी वाली मैडम का...

कृति - ओह सुप्रिया का... हम्म्म... सुप्रिया तुम कर लोगी इंटरव्यू?

सुप्रिया को कृति का उसको अंडर एस्टीमेट करना ाचा नहीं लगा, पर वह मुस्कुरा के बोली - मैं कर लुंगी... कंपनी के प्रोडक्ट्स के बारे में hi तोह बोलना है... वह तोह मैं अचे से कर लुंगी...

न्यूज़ वाला सुप्रिया को एक साइड में ले कर चला गया और उसे अपने सामने बिठा कर सवाल करने लगा और सुप्रिया आराम से बैठी उसके सवालो के जवाब देने लगी. कृति दूर से उन्हें देख रही थी, पता नहीं क्यों, उसे आज सुप्रिया का ये कॉन्फिडेंस देख कर इतना ाचा नहीं लग रहा था.

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इंटरव्यू ख़तम होने के बाद सुप्रिया मुस्कुराती हुई वापस आ गयी और बस शाम हो hi चली थी. उनकी घर वापस की फ्लाइट आज रात की थी, और उन लोगो ने जल्दी से होटल पहुंच कर अपना सामान लिया.

सुप्रिया अपने कमरे में अपना सामान पैक कर रही थी, उसका मैं कल रात के बारे में hi सोच रहा था. कभी वह उसके बारे में सोच कर खुश सी हो जाती और कभी परेशान. विक्रम भी तोह गायब से हो गए थे सुबह से. वह अपने कपडे चेंज करके कड़ी hi हुई थी की तभी उसके रूम पर एक हलकी सी नॉक हुई. सुप्रिया ने चौंकते हुए हल्का सा दरवाज़ा खोला, बहार विक्रम खड़ा था.

विक्रम - कैन ी के इन?

सुप्रिया - उम्म्म... हाँ....

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोल कर विक्रम को अंदर आने दिया. विक्रम ने अंदर आ कर दरवाज़ा बंद किया और सुप्रिया का हाथ पकड़ लिया. सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, उसके मैं में कई सवाल थे, और कुछ अनकही बातें.

विक्रम - सॉरी मैं सुबह बिना बताये गायब हो गया. कुछ जरूरी काम था.

सुप्रिया - हम्म्म... मुझे लगा....

विक्रम - क्या लगा?

सुप्रिया - जाने दो... आपने ट्रेड शो भी मिस कर दिया...

विक्रम - मुझे पता है तुम उसमे कितनी खूबसूरत लग रही होंगी...

सुप्रिया - पर आपने तोह मुझे देखा भी नहीं वहां...

विक्रम ने सुप्रिया के गाल पर बिना किसी झिझक के एक किश कर दी. किश से सुप्रिया के अंदर फिर से कल रात की गर्मी जैसे जागने लगी थी.

सुप्रिया - मुझे पैकिंग पूरी करनी है... सब नीचे वेट कर रहे है...

विक्रम - बस 2 मिनट...

विक्रम ने अपने होंठ फिर से सुप्रिया के होंठों पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा. अपनी जीब सुप्रिया के मुँह में घुसते हुए वह उसकी जीब को महसूस कर रहा था. सुप्रिया ने खुद को उस पल में बह जाने दिए.

किश ख़तम होते hi विक्रम ने हलके से सुप्रिया के बाल सहलाये - ी लव यू...

सुप्रिया - विक्रम.... ी लव यू तू... पर मुझे डर लग रहा है....

विक्रम - कैसा डर.. मैंने कहा न... मैं सब फिगर आउट कर लूंगा...

सुप्रिया - और जब तक फिगर आउट करोगे, तब तक? उस बीच हम कहाँ होंगे...

विक्रम - तुम और मैं अब हम हैं... और बस तुम ये समझ लो की अब बस हमारे बीच और कोई भी नहीं है...

विक्रम ने हलके से सुप्रिया के माथे को चूमा - तुम पैकिंग फिनिश करके नीचे जायो... मैं तुम्हे कॉल करता हूँ लखनऊ पहुंच कर...

विक्रम ने हलके से सुप्रिया का हाथ दबाया और फिर रूम से बहार निकल गया. सुप्रिया के चेहरे पर एक मुस्कान थी, विक्रम के यहाँ आकर उस से प्यार से बात करने से सुप्रिया का घबराया हुआ मैं थोड़ा शांत सा हो गया. उसने जल्दी जल्दी पैकिंग पूरी करि और अपना सामान ले कर नीचे आ गयी.

रात का सफर थोड़ा सा शान्ति में hi गुज़रा, और सुप्रिया ढेर सारे नए सपने लिए अपने घर की और वापस चल पड़ी. कृति उसे उसके घर ड्राप करते हुए गयी, और जब सुप्रिया अपने घर की बिल्डिंग के बहार पहुंची तोह रात के 11 बज चुके थे. ड्यूटी पर आज रात इक़बाल hi था. काफी दिन हो गए थे सुप्रिया को इक़बाल से बात करे हुए.

सुप्रिया को इतनी रात आते देख इक़बाल थोड़ा सा परेशान हो गया - मैडमजी... कैसी है आप?

सुप्रिया - मैं ठीक हु... तुम कैसे हो इक़बाल...

इक़बाल - मैं भी ठीक hi हु मैडमजी... आप ये सामान लेकर.... कहीं बहार से आ रही है क्या?

सुप्रिया - हाँ... ऑफिस के किसी काम से बहार गयी थी...

इक़बाल - मैडमजी... इतना लेट आना... लोग गलत बातें बना सकते है....

सुप्रिया का मिज़ाज़ आज थोड़ा बदला हुआ था - तोह!?? मुझे नहीं फरक पड़ता लोग क्या सोचते है... सोचने दो उन्हें...

इक़बाल - पर मैडमजी... आप अचे घर की लड़की है...

सुप्रिया - तोह मैंने क्या गलत काम किया है... और आदमी लोग करे तोह सब ठीक है, कोई औरत कुछ छह ले तोह वह गलत है...

इक़बाल - नहीं मैडमजी.. मेरा मतलब....

सुप्रिया - तुम्हारा मतलब भी मैं सब समझती हु... तुम अपने काम से काम रखा करो... समझे...

इक़बाल उसका ये बदला हुआ रूप देखता hi रह गया और सुप्रिया उसे गुस्से में झाड़ते हुए ऊपर अपने घर चली गयी. वह मैं hi मैं सोच रही थी की पता नहीं ये इक़बाल खुद को समझता क्या था जो उससे इतने सवाल जवाब करता रहता था. उसने शायद कुछ ज्यादा hi सर चढ़ा दिया था उसे. सुप्रिया ऊपर घर पहुंची तोह उसने पाया की अतुल सो चूका था. सुप्रिया भी चेंज करके जल्दी hi सो गयी. अब तोह वह जागते सोते बस विक्रम के बारे में hi सोच रही थी.
 
मैं लिख रही हु अपडेट पर पिछले 2-3 दिन से साइट डाउन थी. एक बार तोह काफी अपडेट लिख दिया था फिर सेव किया तोह वेबसाइट डाउन थी. आल्सो अब गर्मियों के हॉलीडेज की वजह से थोड़ा और मुश्किल हो गया है लिखना, एंड मई पोस्ट विथाउट इमेजेज एंड गिफ्स फॉर नाउ.
 
अपडेट 59

अगले कुछ हफ्ते सुप्रिया और विक्रम की बातें और मुलाकाते बढ़ती रही. जब मौका लगता, सुप्रिया और विक्रम किसी बहाने से मीटिंग रूम में साथ चले जाते. कभी कभी विक्रम शाम को सुप्रिया को उसके घर ड्राप कर देता. क्यूंकि अब अतुल विक्रम के मैं ऑफिस में काम करता था, सुप्रिया वहां जाने से थोड़ा कतराती.

अपने पहले के एक्सपीरियंस से सुप्रिया को इतनी तोह समझ थी की जब तक विक्रम आगे का प्लान फिगर आउट कर रहा था तब तक उसे तरसाये रखना hi बेहतर था. विक्रम भी हमेशा की तरह ऑफिस में शालीनता की रेखा का उलंघन नहीं कर रहा था. वह भी अपने और सुप्रिया की तरफ लोगो का ज्यादा ध्यान नहीं आकर्षित करना चाहता था. तोह दोनों की मुलाकाते ज्यादातर बातों तक hi सिमट थी.

सुप्रिया के कपडे दिन पर दिन बदलते जा रहे थे, और जिस दिन विक्रम को ऑफिस आना होता उस दिन वह जान बूझ कर उसे छिड़ने के लिए और भी बोल्ड कपडे पेहेन कर आती. ऑफिस में भी उसका स्वाभाव पहले से थोड़ा सा बदल सा गया था, और वह अब लोगो से थोड़ा और सख्ती से बात करती थी. ये बात और लोग भी महसूस कर रहे थे, और कुछ ने तोह कृति से भी इस बारे में बात की. पर जब ऐसा होता, तोह कृति अपनी फ्रेंड को पूरी तरह डिफेंड करने में लग जाती.

इसी तरह विक्रम और सुप्रिया एक दिन मीटिंग रूम में बैठे हाथों में हाथ लिए बात कर रहे थे. विक्रम अपने हाथों से सुप्रिया के कोमल हाथों को हलके से मसल रहा था. कितने दिन हो गए थे उन्हें कुछ भी करे हुए और आग दोनों तरफ बराबर सी लगी थी.

विक्रम - आजकल तोह मुझे ये मीटिंग रूम hi सबसे अछि जगह लगती है..

सुप्रिया ने परेशां होते हुए कहा – इतनी अछि की लोग भी नोटिस करने लगे है… आकाश मुझ से पूछ रहा था की आजकल मेरी और आपकी काफी मीटिंग्स होती है..

विक्रम – ाचा, तुमने क्या कहा?

सुप्रिया – मैंने कह दिया की वह उस वाले क्लाइंट्स से रिलेटेड प्लानिंग कर रहे है.. पर हम लोग कब तक यूँ मीटिंग रूम्स में ऐसे मिलते रहेंगे…

विक्रम ने एक दबी सी स्माइल के साथ कहा – मीटिंग रूम में hi क्यों, तुम जहाँ चाहो मिल सकते है…

सुप्रिया – मुझे काफी टेंशन हो जाती है ये रोज़ के झूठ से, घर पर भी और ऑफिस में भी… पता नहीं मैं क्या सोच रही थी… अब तोह ऐसा लगता है जैसे अतुल से झूठ बोलने में माहिर हो गयी हूँ…

विक्रम ने अपनी कुर्सी सुप्रिया के थोड़ा और पास खींची- हे…. रिलैक्स… तुम इतनी स्ट्रेस मत लो…

सुप्रिया अपने मैं का स्ट्रेस बहार निकाल रही थी - घर पर, ऑफिस में, हर जगह बस आप hi अब मेरे खयालो में रहते हो… पर पता नहीं हम लोगो का फ्यूचर क्या है… भाभी ने कहा था की शादी के बाद प्यार अपने आप हो जाता है, पर ये नहीं कहा था की किसी और से प्यार भी हो सकता है…

विक्रम - जब तुम इतनी परेशान होती हो न तोह और भी क्यूट लगती हो… तुम कहो तोह तुम्हारी भाभी से मैं बात कर लू?

सुप्रिया - और क्या कहोगे उनसे? (विक्रम की आवाज़ की एक्टिंग करते हुए) भाभी.. हम दोनों मैरिड है, पर एक दुसरे से प्यार करते है… और फिर?

विक्रम की स्माइल बड़ी हो गयी - एक्साक्ट्ली एहि कहूंगा…

सुप्रिया - पता नहीं लोग क्या कहेंगे हमरे बारे में… मेरे बारे में… आपको कोई कुछ नहीं कहेगा…

विक्रम हस्ते हुए बोलै - तुम कहो तोह मैं ट्वीट कर देता हूँ की - #ीामिनलोवे #वितसुप्रिया.

सुप्रिया – विक्रम मजाक मत करो… आपके लिए शायद इतनी बड़ी बात नहीं होगी, पर मेरे लिए ये बहुत बड़ा स्टेप है… आप सीरियस तोह हो न हमारे बारे में, मैं कहीं आपके लिए कोई टाइम पास तोह नाह….

विक्रम ने सुप्रिया का हाथ कास के पकड़ लिया - इतना सीरियस तोह मैं कभी नहीं हुआ लाइफ में... मेरे लिए भी ये उतनी hi सीरियस बाद है, बहुत कुछ सटाके पर है, मैं तुम्हे समझा नहीं सकता… तुम्हे यकीं नहीं है मेरी बात पर?

सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, उसका मैं कहता था की विक्रम उसे सच में प्यार करता था, पर उसका दिमाग कुछ और hi कहता था. फिलहाल तोह हु अपने मैं की hi सुन रही थी.

विक्रम – यू don’t नीड तो आंसर तहत... चलो मैं ये प्रॉब्लम भी सोल्वे कर देता हूँ... अगले संडे मेरे पेरेंट्स के घर पर पूजा है नवमी की, तुम्हे उसमे आना होगा... वहां मैं तुम्हे किसी से मिलवाना चाहता हूँ...

सुप्रिया - किस से?

विक्रम - ये तोह संडे तक के लिए सस्पेंस रखते है…

सुप्रिया - पर वहां ओड नहीं लगेगा मेरा आना…

विक्रम – ओड क्यों लगेगा... सिर्फ घर के ख़ास लोग होंगे.. कुछ ओड नहीं लगेगा…

सुप्रिया – क्या??? फिर तोह और भी ओड लगेगा!!

विक्रम – ट्रस्ट में… सब ाचा होगा… तुम्हे आना होगा… मैं ऐसे hi तुम्हे अपने पेरेंट्स के घर पर इन्विते नहीं करता…

सुप्रिया ने अपने घबराये हुए मैं को शांत किया, और हलके से बोली – मैं भी उन ख़ास लोगो में आती हु क्या?

विक्रम ने सुप्रिया के हाथ पर एक किश करि - तुम मेरे लिए सबसे ख़ास हो...

विक्रम और सुप्रिया एक दुसरे की आँखों में खोये हुए एक दुसरे के पास आ hi रहे थे की तभी मीटिंग रूम पर एक हल्का सा नॉक हुआ, और सुप्रिया और विक्रम जल्दी से एक दुसरे का हाथ छोड़ कर पीछे हो गए. बहार साहिल सर थे और वह दुबारा नॉक करके अंदर आ गए. उन्हें आता देख सुप्रिया उनसे आँखे चुराती हुई बहार की और निकल गयी.

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सुप्रिया संडे के लिए काफी एक्ससिटेड थी. उस दिन अपने घर की पूजा ख़तम करने के बाद सुप्रिया अचे से तैयार होने लगी. उसने एक लाल रंग की हलकी सी ट्रांसपेरेंट साड़ी पेहेन ली जिसमे वह क्यूट, संस्कारी और हॉट तीनो hi लग रही थी.

सुप्रिया तैयार होकर अतुल से बोली - अतुल, मैं थोड़ी देर के लिए मंदिर जा रही हु…

अतुल - ाचा… चलो… मैं भी चलता हूँ…

सुप्रिया ने बिना हिचकिचाए कहा - नहीं, आप वहां क्या करोगे? वैसे भी मैं अपने ऑफिस की कुछ लेडीज के साथ hi जा रही हु…

अतुल – मंदिर में क्या करते है? मैं तोह तुम्हे वहां ड्राप करके तुमसे अलग जाकर बैठ जायूँगा थोड़ी देर… और फिर पास में hi जो कचौड़ी मिलती है वहां…

सुप्रिया – सब अकेली hi आ रही है, किसी का हस्बैंड नहीं आ रहा है, और मुझे किसी को रास्ते में पिचकूप भी करना है… आपको कचौड़ी खाने जाना है तोह वैसे भी जा सकते हो…

अतुल - ओह ाचा… ठीक है चलो तुम हो आयो. कब तक आयोगी?

सुप्रिया - नहीं पता… थोड़ा टाइम लग सकता है…

अतुल – मुझे तुमसे कुछ कहना था…

सुप्रिया – हाँ बोलो न…

अतुल ने सुप्रिया की और देखा, वह अभी भी आईने में देखती हुई अपनी साड़ी फिक्स कर रही थी – अभी रहने दो… बाद में कभी…

अतुल वहां से हैट कर अपने फ़ोन में लग गया, और जल्द hi सुप्रिया गाडी की चाबी ले कर नीचे आ गयी. वह गाडी चलते हुए बिल्डिंग से बहार निकल गयी. बहार दरवाज़े पर इक़बाल खड़ा था, पर सुप्रिया ने उसकी और पलट कर भी नहीं देखा.

थोड़ी देर बाद सुप्रिया विक्रम के बताये एड्रेस पर पहुंच गयी. ये घर, विक्रम के घर जितना बड़ा तोह नहीं था, पर ये घर भी लखनऊ के एक पॉश से शांत से एरिया में था. घर क्या, एक कोठी थी. बहार काफी साड़ी गाड़ियां परकेड थी.

सुप्रिया को गाडी पार्क करने में दिक्कत हो रही थी, तभी उसे वह ड्राइवर दिखा जिसने उसे एक बार पहले उसके घर से पिक किया था.

ड्राइवर - मैडम… आप पूजा के लिए आये हो….

सुप्रिया - हांजी भैया… पर समझ नहीं आ रहा कहाँ लागयु गाडी…

ड्राइवर - आप ऐसा करो चाबी मुझे दे दो और अंदर चले जायो… मैं लगा दूंगा…

सुप्रिया ने उसे थैंक यू बोलै और गाडी के निकल कर निर्वसली घर की एंट्रेंस की तरफ चल पड़ी. घर बहार से काफी ाचा तरह सजा हुआ था. जैसे hi वह घर के अंदर घुसी उसने देखा की अंदर बहुत ज्यादा लोग नहीं थे, शायद 30-35 लोग होंगे. विक्रम ने जब कहा था की ख़ास ख़ास लोग होंगे सुप्रिया को लगा था की काम से काम 100 लोग तोह होंगे hi, पर इतने काम लोगो में तोह सुप्रिया को और भी ज्यादा अजीब सा लग रहा था.

सुप्रिया के अंदर आते hi, काफी सारे लोग मुद कर सुप्रिया की और देखने लगे. थोड़ी सी फुसफुसाहट भी थी, जैसे सब आपस में पूछ रहे हो की ये कौन है. सुप्रिया को कोई भी जानी पहचानी शकल नहीं दिख रही थी और उसकी निगाहें तोह बस विक्रम को hi ढून्ढ रही थी. हु मैं hi मैं सोच रही थी शायद उसे यहाँ नहीं आना चाहिए था.

तभी किसी ने हलके से उसकी पीठ पर हाथ रखा. सुप्रिया ने तुरंत hi पलट कर देखा, और ये हाथ किसी औरत का था - तुम सुप्रिया हो न…

सुप्रिया ने चौंक कर उनकी और देखा, पता नहीं वह उसे कैसे जानती थी. सभी लोगो में वह औरत काफी अलग सी लग रही थी. उसने एक भरी सी साड़ी पहनी हुई थी, और उसकी उम्र काम से काम 60 साल की तोह होगी, पर फिर भी काफी फिट दिख रही थी. उसके चेहरे पर एक मिठास और अपनापन सा था, जो सुप्रिया को अनजान लोगो की भीड़ में भी सहज महसूस करा रही थी.

सुप्रिया ने सोफ़्त्ल्य कहा - जी… आप कौन?

औरत – विक्रम ने मुझे कहा था की मैं तुम्हे देखते hi पहचान जयुंगी… और देखो पहचान भी

लिया… मैं विक्रम की मम्मी, नलिनी…

सुप्रिया की एक डैम से सांस hi अटक गयी - ओह्ह्ह सॉरी… नमस्ते आंटी!! मुझे पहचान लेना चाहिए था आपको… आपकी शकल विक्रम से बिलकुल मिलती है.. नहीं मेरा मतलब…. विक्रम की शकल आपसे मिलती है…

सुप्रिया की घबराई हुई बातें सुन कर विक्रम की मम्मी की शकल पर एक मुस्कान आ गयी - जितना विक्रम ने बताया था, तुम उससे भी ज्यादा क्यूट हो…

उनके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर सुप्रिया का चेहरा लाल हो गया. पर उसके मैं में कई सवाल चल रहे थे. विक्रम ने अपनी मम्मी से उनके बारे में क्या कहा था? और क्यों? उनके बीच जो भी था, अभी तक तोह वह पूरी दुनिया से एक राज़ hi था. क्या विक्रम ने उन्हें उनके बारे में सब बता दिया था? पर फिर वह उससे इतने अचे से बात क्यों कर रही थी.

सुप्रिया ने देखा की विक्रम भी घर के दुसरे कोने से उनकी और तेजी से आने लगा, एक बड़ी सी स्माइल लिए. उसने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा – सॉरी! सॉरी, मैं चाचू से बात कर रहा था, वह बस पहुंच hi रहे है… इमम्म…. पर लगता है मेरा सरप्राइज रुइन हो गया… माँ, ये …

माँ ने विक्रम को बीच में रोकते हुए कहा - हम लोग मिल चुके है… और मुझे एक बात बिलकुल अछि नहीं लगी…

विक्रम और सुप्रिया की नज़रे एक सेकंड के लिए मिली, जैसे एक दुसरे से पूछ रही हो की क्या बा ताकि नहीं लगी – क्या हुआ माँ?

माँ ने गहरी सांस लेते हुए कहा – तुम्हे सही से सुप्रिया की खूबसूरती डेस्क्रिबे करनी भी नहीं आती है…

ये सुन कर सुप्रिया की आँखें नीचे हो गयी और विक्रम ने रहत की सांस ली – Mom…aap भी न…

माँ – सुप्रिया, सही कह रही हूँ न?

सुप्रिया हलके से है कर बोली - हाँ बिलकुल….

विक्रम - सही है, मैं दो मिनट के लिए गायब होता हूँ और यहाँ आप लोग ने गैंग hi बन लिया…

विक्रम ने शरारत भरी आँखों से मुस्कुरा के सुप्रिया की और देखा. सुप्रिया ने भी आअंखें उठा कर विक्रम से नज़रे मिलायी, सुप्रिया की आँखों में कई सवाल तैर रहे थे विक्रम के लिए. विक्रम की माँ मानो दोनों के बीच की सिचुएशन को समझ गयी हो.

माँ - सुप्रिया, तुम मेरे साथ चलो, पूजा की तैयारी में थोड़ा हेल्प कर दो… विक्रम, मैं इसे ले जा सकती हु न?

विक्रम - हाँ माँ, सूरे, ये भी कोई पूछने की बात है…

माँ सुप्रिया का हाथ पकड़ कर उसे घर के मंदिर की और ले गयी. विक्रम उन दोनों की और hi देख रहा था, कैसी उसकी माँ उसे पूजा में अचे से इन्वॉल्व कर रही थी, और कैसे सुप्रिया अपनी नर्वस्नेस भूलते हुए उनकी अचे तरह से हेल्प कर रही थी.

विक्रम को एकदम से आभास हुआ की उसकी वाइफ, ईशा उसके बराबर में आ कर कड़ी हो गयी है.

ईशा गहरी सांस लेते हुए बोली - विक्रम… कैन ी प्लीज लीव नाउ…

विक्रम - अभी तोह पूजा शुरू भी नहीं हुई है, बस एक घंटा और रुकना पड़ेगा…

ईशा ने दबी आवाज़ में पर गुस्से में कहा - व्हाई दो ी नीड तो बे हेरे?

विक्रम - यू क्नोव हाउ स्पेशल थिस इस फॉर माय माँ यार… साल में दो बार तोह मुश्किल से तुम उनसे मिलती हो…

ईशा - No ओने इवन लाइक्स में हेरे… और तुम्हारी माँ तोह बिलकुल भी नहीं..

विक्रम - That’s नॉट ट्रू…

ईशा - जस्ट लुक ात एवरीवन हेरे… लुक ात योर माँ, सो बिजी तहत शी can’t इवन टॉक तो में (तभी उसकी नज़र सुप्रिया पर पड़ी) … हे, वह कौन है… मैंने देखा है इसे कहीं…

विक्रम समझ गया था की ईशा की नज़र कहाँ है, पर वह अनजान बनते हुए - कौन?

ईशा - तहत ओने, इन रेड, विथ योर माँ… हु इस शी? दो यू क्नोव हेर?

विक्रम - उम्म्म्म… मय्बे…

ईशा - ओह गॉड, माय शिट्टी मेमोरी.. शी इस योर सिस्टर्स’ फ्रेंड, that’s थे बीच फ्रॉम थे नई ईयर पार्टी…

विक्रम - हे… लैंग्वेज कण्ट्रोल करो यार…

ईशा - व्हाटएवर… वह यहाँ क्या कर रही है?

विक्रम - मुझे क्या पता… मय्बे कृति ने इन्विते किया होगा..

ईशा - गॉड… लुक ात हेर एंड योर माँ… ी ऍम सूरे तुम्हारी माँ एहि सोच रही होंगी की काश उनकी “बहु” वास् मोरे लिखे हेर….

विक्रम ने ईशा की तरफ मुस्कुरा के देखा - तोह बन जायो न उसकी तरह… सिर्फ आज के लिए…

ईशा ने पलट कर गुस्से में विक्रम को देखा - Don’t… don’t यू डरे… कपड़े में…

विक्रम - ाचा बाबा… कलम डाउन… लॉट्स ऑफ़ पीपल हेरे…

ईशा की तीखी नज़रे सुप्रिया पर hi तिकी थी - ी जस्ट don’t गेट गुड वाइब्स फ्रॉम हेर. वह हमारे घर एक अंदर थी होली पर… तेल्ल में, अरे यू फूकिंग हेर?

विक्रम ने इधर उधर देखा, उनके आस पास कोई नहीं था- ईशा… बेहवे यार… थिस इस नॉट थे प्लेस…

ईशा जैसे विक्रम की बात सुन hi नहीं रही थी - No, it’s फाइन िफ़ यू अरे… प्लीज तुम मेरे लिए उसका ये क्यूट सा चेहरा अचे से बिगाड़ डोज न… मेक हेर ा सलूट… यू क्नोव व्हाट ी मैं…

विक्रम काफी उनकंफर्टबले सा फील कर रहा था ईशा की इस बातचीत से, और उसे तभी कृति की फॅमिली अंदर आती दिखी. उसे ाचा बहाना मिल गया ईशा के पास से हटने का - चाचू इस हेरे… वे विल टॉक लेटर…

विक्रम ने जाकर कृति की फॅमिली को वेलकम किया, और हु कृति के पापा को लेकर एक साइड हो गया. कृति आगे बाद कर मंदिर की तरफ आ रही थी की अचानक से उसकी नज़र सुप्रिया पर पड़ी और वह हैरान रह गयी. उसे नहीं पता था की घर की पूजा में सुप्रिया भी इन्वितेद थी.

सुप्रिया का मुँह दूसरी और था तोह वह कृति को आते नहीं देख पायी - सुप्रिया!! Hi!! तुम यहाँ???

सुप्रिया भी चौंक सी गयी, उसने भी नहीं सोचा था कृति के बारे में, पर उसे ये तोह सोच hi लेना चाहिए था की कृति विक्रम की कितनी ख़ास है. विक्रम ने भी तोह सुप्रिया को इस बारे में कुछ नहीं बोलै. सुप्रिया अपने आप को सँभालते हुए बोली - Hi कृति!! कितनी सुन्दर लग रही हो तुम इस ड्रेस में…

कृति - यू तू!! तुम यहाँ कैसे… ी डिडन्ट क्नोव ऑफिस के लोग इन्वितेद है… और भी कोई आया है क्या?

सुप्रिया - उम्म्म्म वह…

विक्रम की माँ पास hi बैठी उनकी बातें सुन रही थी. हु उनके बीच में बोल पड़ी - कृति बीटा… मैंने इन्विते किया है सुप्रिया को…

कृति – तेजी आपने? पर आप कैसे जानती हो सुप्रिया को?

माँ - इतना छोटा सा संसार है न ये.. सुप्रिया मुझे कई बार मंदिर में मिली थी और मुझे इसकी प्यारी सी शकल देख कर इससे लगाव हो गया. मुझे क्या पता था की तुम्हारे और विक्रम के साथ काम करती है…

कृति - वाओ.. तहत इस सो वीयर्ड… सच में…

माँ - सब ऊपर वाले की लीला है बीटा… तुम ये सब छोडो, जायो जरा किचन से थोड़ा पानी ले आयो…

सुप्रिया ने विक्रम की माँ की तरफ देखा, आँखों hi आँखों में उन्हें थैंक यू बोलने के लिए. सुप्रिया को आभास हुआ की शायद विक्रम की माँ बहुत कुछ जानती थी उन दोनों के बारे में. सुप्रिया के मैं के सवाल बढ़ते जा रहे थे.

थोड़ी देर बाद पूजा शुरू हो गयी और सुप्रिया सबसे आगे विक्रम के परिवार के साथ कड़ी थी. पूजा पूरी होने के बाद विक्रम की माँ ने सुप्रिया को आरती दी और फिर उसे आरती की थाली पकड़ा कर सबको आरती देने को बोलै. विक्रम तोह इस समय सुप्रिया को बस देखता hi रह गया था.

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पूजा ख़तम होते hi ईशा वहां से जल्दी से निकल गयी, पर विक्रम अभी भी वहीँ था. जैसे hi सुप्रिया अकेली हुई, वह उसके पास पहुंच गया.

विक्रम – लगता है तुम तोह रॉकस्टार बन गयी हो यहाँ… सब तुम्हारे बारे में hi पूछ रहे है..

सुप्रिया - हम्म्म… आपकी माँ काफी स्वीट है… हु hi मुझे सबसे मिलवा रही थी…

विक्रम - वह तोह है… वहीँ से तोह मुझे मेरी स्वीटनेस मिलती है…

सुप्रिया विक्रम को छिड़ते हुए बोली- आप उनके जितने स्वीट तोह नहीं हो… पर हाँ अब पता चल रहा है की आपको आपकी स्मार्टनेस कहाँ से मिलती है…

विक्रम हस्ते हुए - चलो ये तोह मन की मैं स्मार्ट हु…

सुप्रिया - नहीं… मेरा मतलब उस सेंस में नहीं…

विक्रम – जिस भी सेंस में था… वैसे अगर अब फ्री हो तोह चलो मेरे साथ.. तुम्हे कुछ दिखाना है…

सुप्रिया – क्या दिखाना है?

विक्रम – तुम सवाल बहुत करती हो… मैं ऊपर जा रहा हूँ, तुम कुछ मिनट बाद आ जाना…

सुप्रिया - कोई मुझे ऊपर जाते देख लेगा तोह…

विक्रम - सब खाने में बिजी है, कोई नहीं देखेगा…

सुप्रिया ने इधर उधर देखा, सच में सब लोग काफी बिजी से hi थे, और कोई भी उस साइड नहीं था. विक्रम के ऊपर जाने के कुछ मिनट बाद सुप्रिया भी ऊपर के फ्लोर पर आ गया जहाँ कोई भी और नहीं था. ऊपर आते hi विक्रम ने सुप्रिया का हाथ पकड़ा और उसे एक कमरे में आ आया. सुप्रिया रूम में इधर उधर देख रही थी, दीवार पर कुछ पोस्टर्स लगे हुए थे, एक्ट्रेसेस के, कार्स के. पर ऐसा लग रहा था की काफी टाइम से उसे नहीं हुआ था.

विक्रम ने दरवाज़ा बंद करते हुए कहा - कैसा लगा ये रूम…

सुप्रिया - ये आपका रूम है न…

विक्रम - हम्म्म…. था, बहुत पहले… अब नहीं है…

विक्रम बे सुप्रिया के पास आते हुए सुप्रिया को पकड़ लिया.

सुप्रिया एक डैम उछाल सी पड़ी - विक्रम! क्या कर रहे हो आप….

विक्रम – तुम लग hi इतनी स्वीट रही हो… चख कर तोह देख लू…

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विक्रम ने सुप्रिया की गर्दन पर चूमने लगा. सुप्रिया भी इस सब से एक्ससिटेड हो रही थी और उसने अपने दांतों से अपने नीचे के होंठ को हलके से कटा. पर फिर रीलीज़ करते हुए की हु कहाँ थे, उसने विक्रम को पीछे धकेला.

सुप्रिया - प्लीज… यहाँ नहीं… कोई भी आ सकता है…

विक्रम - कोई नहीं आएगा…

सुप्रिया - पहले आप मुझे ये बताया की आपने अपनी माँ को मेरे बारे में क्या बताया है?

विक्रम - एहि की ी लव यू…

सुप्रिया - क्या!????!!! विक्रम! मजाक कर रहे हो न आप…

विक्रम – नहीं, बिलकुल सच.. उनसे पुछवा दू?

सुप्रिया – नहीं… और उनका रिएक्शन क्या था?

विक्रम - वह तुमसे मिलना चाहती थी… और आज जिस तरह से वह तुमसे मिली है, ी ऍम सूरे शी लाइक्स यू…

सुप्रिया - विक्रम पर… आप मैरिड हो, वह भी ये बात अचे से जानती है, और मेरे गले में मंगलसूत्र भी उन्होंने देख hi लिया होगा…. फिर???

विक्रम - फिर क्या?

सुप्रिया - उन्हें ये सब बताना हमारे बारे में… ये ठीक था क्या? वह क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में?

विक्रम - मैं उनसे कुछ नहीं छिपता… वेल ऑलमोस्ट… और इस मटर में मुझे उनका ओपिनियन तोह चाहिए hi था. एंड वह काफी प्रैक्टिकल है इस सब चीज़ो के बारे में… वह हमारी इस मटर को सोल्वे करने में हेल्प कर सकती है…

सुप्रिया पहले hi विक्रम की माँ की समझदारी देख चुकी थी - सच में काफी लकी हो आप की आपको ऐसी माँ मिली है…

विक्रम - ये तोह है… एंड मैं चाहता था तुम उनसे मिलो ताकि तुम्हारी नर्वस्नेस थोड़ी काम हो सके… ी ऍम माडली इन लव विथ यू… मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता..

सुप्रिया की नर्वस्नेस सच में दूर होती जा रही थी - विक्रम… ी लव यू तू…

विक्रम ने सुप्रिया को पीछे से कमर पर हाथ रखते हुए पकड़ लिया और फिर से उसकी गर्दन को हलके से चूमने लगा.

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सुप्रिया आहें भर रही थी - अह्ह्ह.... विक्रम....

विक्रम के हाथ साड़ी के ऊपर से hi सुप्रिया के बूब्स पर पहुंच गए थे. सुप्रिया विक्रम की और मुद गयी ताकि उसके हाथ उसे वहां न छुए. पर सुप्रिया के मुड़ते hi विक्रम ने उसे गले लगा लिया और अपने हाथ सुप्रिया की पीठ के नंगे हिस्से पर घूमने लगा.

तभी उसने जाने अनजाने सुप्रिया की ब्लाउज की दूरी खींच दी और उसके गाल चूमने लगा. डोरी खुलते hi सुप्रिया की मुँह से ज़ोर की अह्ह्ह निकल गयी, और अब विक्रम के हाथ बेकाबू होते हुए सुप्रिया की पीठ को हलके हलके नोचने लगे. सुप्रिया भी विक्रम के इस प्यार में बहती जा रही थी.

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सुप्रिया – Uffffff….mmmmm

तभी नीचे से किसी के बुलाने की आवाज़ सुप्रिया को होश में लायी – विक्रम.... छोडो प्लीज... कोई हमें ढून्ढ रहा है नीचे… प्लीज हमे नीचे चलना चाहिए…

विक्रम ने भी आवाज़ सुन ली थी, और उसने बेमन से अपने आप को रोका - हम्म्म्म… ठीक है, पर यू ोवे में ओने, इतनी आसानी से तुम्हे जाने जो दे रहा हूँ…

सुप्रिया ने विक्रम को जीब दिखाई और फिर अपने कपडे और बाल ठीक करने शुरू करे – प्लीज मेरी ब्लाउज की डोरी बांध डोज क्या? आपको डोरी नहीं खोलनी नहीं चाहिए थी…

विक्रम अपने उंगलियां उसकी पीठ पर नाचते हुए उसकी ब्लाउज की डोरी बाँधने लगा - इतनी सेक्सी पीठ है तुम्हारी, और उसमे ये डोरी बीच में आ रही थी, तोह क्या करता...

सुप्रिया को गुदगुदी हो रही थी और वह विक्रम के स्पर्श से सिहर उठी. विक्रम ने सुप्रिया की पीठ पर एक हलकी सी किश करि, और उसकी डोरी को बाँध दिया. सुप्रिया की तोह हालत ख़राब हो रही थी इस टाइम.

कुछ पल बाद वह दोनों साथ में नीचे उतर hi रहे थे की कृति सीढ़ियों के नीचे कड़ी दिखाई थी.

कृति ने उन्हें ऊपर से आते देखा - आप लोग कहाँ से आ रहे हो…

विक्रम - बस सुप्रिया को घर दिखा रहा था…

कृति - ओह ाचा… नीस… भैया, मुझे तोह अभी भी यकीं नहीं हो रहा है की तै जी सुप्रिया से मंदिर में मिली और उन्होंने उसे यहाँ इन्विते कर लिया. कैन यू बिलीव आईटी?

विक्रम - हाँ.. बिलकुल बेलिएवाबले है… मय्बे ऊपर कोई चाहता था की सुप्रिया इस घर में आये…

कृति – हाँ मय्बे… चलो, ी हैवे तो जो नाउ, राहुल वेट कर रहा है मेरा बहार… पापा को मत बताना प्लीसीई…

विक्रम - सूरे सूरे.. जो, जो…

कृति बहार की और निकल गयी और सुप्रिया विक्रम के साथ कड़ी रह गयी.

सुप्रिया ने धीरे से कहा- ी थिंक मुझे भी चलना चाहिए… काफी टाइम हो गया है..

विक्रम – इतनी जल्दी क्या है? अब तोह लोग काम हो रहे है…

सुप्रिया उदास होते हुए बोली– अतुल मेरा वेट कर रहे होंगे…

विक्रम – ठीक है, एक सेकंड रुको, मैं माँ को बुलाता हूँ…

विक्रम ने अपनी माँ को आवाज़ दी और वह वहां आ गयी. उनकी आखों में एक अलग सी ख़ुशी झलक रही थी. इस बार सुप्रिया के झुक कर उनके पेअर छू लिए, और उन्होंहे सुप्रिया को उठाते हुए उसे गले लगा लिया.

माँ - जब मैं करे तब आ जाना यहाँ, विक्रम नहीं भी हो तोह हम लोग बैठ कर बातें कर सकते है…

सुप्रिया - जी… सूरे…

माँ - और विक्रम की कोई शिकायत करनी हो तोह तुम मुझे कॉल कर सकती हो, इसको सीधा करना मुझे अचे से आता है, तुम्हे भी टिप्स दे दूंगी…

सुप्रिया के गाल शर्म से बुरी तरह लाल हो रहे थे. विक्रम की माँ तोह ऐसे बात कर रही थी जैसे वह और विक्रम हस्बैंड वाइफ हो.

माँ - तुम्हारा टीका मिट गया है, विक्रम, ठीक कर दे जरा…

विक्रम ने सर हिलाते हुए, पास में राखी थाल से अपनी ऊँगली पर रोली लगायी और सुप्रिया के माथे पर फिर से टीका लगा दिया.

माँ सुप्रिया के गले लगी और उसके कान में हलके से बोलै - ये सिन्दूर तोह नहीं था, पर ऐसा hi कुछ समझ लो… वह दिन भी दूर नहीं होगा. तुम डरना मत, और दोनों साथ में बने रहना.

सुप्रिया तोह विक्रम की माँ से आँखें भी नहीं मिला पा रही थी. इस समय तोह उसे कुछ ऐसा hi लग रहा था की उसकी और विक्रम की अभी अभी शादी हुई हो, और ये औरत उसकी सास हो. विक्रम और सुप्रिया बहार चलते हुए आ गए.

विक्रम - माँ ने क्या कहा तुम्हारे कान में?

सुप्रिया छिड़ते हुए बोली - आपको क्यों बतायु? वह हमारा सीक्रेट है…

विक्रम - ाचा ठीक है, रख लो अपना सीक्रेट… मेरे पास भी काफी सीक्रेट्स है जो मैं शेयर नहीं करूँगा…

सुप्रिया – नहीं, प्लीज आप ऐसा नहीं करना… कुछ नहीं कहा उन्होंने सच में… बस एहि की हम दोनों…

सुप्रिया ने आँखें झुका ली और विक्रम के चेहरे पर सुप्रिया को ब्लश करते देख एक बड़ी सी स्माइल आ गयी.

विक्रम - वैसे, नेक्स्ट वीक मैं मुंबई जा रहा हूँ 3 दिन के लिए… मैं चाहता हूँ तुम भी मेरे साथ चलो…

सुप्रिया - आपके साथ?

विक्रम - हाँ… अब तोह माँ ने परमिशन दे hi है तोह इसे हनीमून भी समझ hi सकती हो…

सुप्रिया ने हलके से विक्रम के हाथ पर मारा - आप भी कुछ भी बोलते हो…

विक्रम - सच तोह कह रहा हूँ… मैं टिकट्स बुक कर दूंगा, और don’t वोर्री अबाउट अतुल… वह मैं मैनेज कर लूंगा…

सुप्रिया इससे पहले कोई जवाब देती, ड्राइवर सुप्रिया की कार लेकर उनके सामने आ गया - ये लीजिये मैडम, आपकी गाडी…

सुप्रिया ने विक्रम को bye बोलै और मुस्कुराती हुई अपने घर की और चल पड़ी. आज का दिन कितना ाचा गया था उसके लिए, विक्रम को लेकर उसके मैं की साड़ी टेंशन ख़तम सी हो गयी थी.
 
सॉरी सभी को, मैं काफी बिजी थी पिछले हफ्ते... मैं जल्द hi अपडेट पोस्ट करती हु. कल तक होपफ़ुल्ली.

@आदित्य - कोई ऐटिटूड नहीं है, बस पर्सनल लाइफ में बिजी थी... और आजकल ये साइट भी बहुत ाचा साथ नहीं देती कभी कभी
 
अपडेट 60

सुप्रिया एयरप्लेन में बिज़नेस क्लास में खिड़की से बहार देख रही थी. उसके बराबर में विक्रम बैठा हुआ था, और वह दोनों मुंबई जा रहे थे. सुप्रिया काफी एक्ससिटेड थिस इस बार की ट्रिप के लिए, एक तोह वह पहली बार बिज़नेस क्लास में ट्रेवल कर रही थी, दूसरी बात वह पहली बार मुंबई जा रही थी और तीसरी बात अब तोह जैसे उसे विक्रम के साथ जाने में जरा सी भी गिलटी फीलिंग नहीं हो रही थी.

बल्कि उसे ऐसा लग रहा था की वह सच में अपना हनीमून मानाने hi जा रही हो. ये सोचते hi उसे काफी शर्म सी आ जाती पर साथ hi एक्ससिटेमेंट और भी बाद जाती. अतुल एक हफ्ते के लिए ऑफिस के किसी काम से ट्रेवल कर रहा था तोह सुप्रिया को उसकी भी कोई टेंशन नहीं थी. अतुल तोह उसे शादी के बाद कहीं घूमने नहीं ले जा पाया था, तोह एक तरह से उसका ये पहला हनीमून hi था. विक्रम उसे बिलकुल किसी नेवली वेद वाली फीलिंग से काम नहीं दे रहा था. ये सोचते hi उसके गाल और लाल हो गए.

अभी फ्लाइट में एक घंटा और बचा था और सुप्रिया को अब ठण्ड सी लगने लग गयी थी. उसने अपने आगे रखे ब्लैंकेट को खोला और अपने ऊपर दाल लिया. विक्रम ने भी उसी ब्लैंकेट को और खोलते हुए एपनिया आप को भी धक् लिया. दोनों एक hi ब्लैंकेट के अंदर थे, और विक्रम के हाथ सुप्रिया पेट पर हलके हलके से चलने लगे. सुप्रिया ने भी शरारत भरी नज़र से विक्रम को देखा और अपना हाथ विक्रम की पंत के ऊपर रख दिया.

विक्रम ने एक दबी हुई स्माइल से सुप्रिया की और देखा, जैसे उससे पूछ रहा हो की क्या उसमे सच में इतनी हिम्मत आ गयी थी. सुप्रिया ने अपना हाथ विक्रम की पंत पर हल्का सा मसला, जिससे विक्रम की पंत में हलचल सी शुरू हो गयी.

सुप्रिया ने मासूमियत से पुछा – ये क्या था…

विक्रम – तुम्हे नहीं पता क्या था…

सुप्रिया – नहीं… मुझे कैसे पता होगा…

विक्रम – थोड़ा और रब करो वहां… फिर पता चल जायेगा…

सुप्रिया ने हलके से और मसला वहां और विक्रम ने अपनी आँखें बंद कर ली और अपने होंठ अपने मुँह में दबा लिए. उसे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की सुप्रिया ऐसा कुछ कर सकती थी.

सुप्रिया ने फिर से शरारत से कहा – क्या हुआ… रुक जायु क्या?

विक्रम – नहीं… करो न…

सुप्रिया ने इस बार थोड़ा और ज़ोर से वहां रगड़ा और उसे विक्रम का लुंड और अचे से महसूस होने लगा. विक्रम के मुँह से हलकी सी सिसकी निकली, जो सुप्रिया को और ज्यादा कुछ करने के लिए उकसा रही थी. उसने पंत के ऊपर से विक्रम का लुंड को हलके से पकड़ लिया. उसके ऐसा करते hi विक्रम पूरा तन के सीट पर बैठ गया. सुप्रिया ने विक्रम के लुंड को पंत के ऊपर से पकडे हुए हल्का सा दबाया.

विक्रम – अहह… रुको.. मैं ज़िप खोलता हूँ ताकि तुम और अचे से सब कर पायो…

सुप्रिया ने अपना हाथ झट से पीछे खींच लिया – नहीं प्लीज… ज़िप मत खोलना… मैं तोह मज़ाक कर रही थी…

विक्रम – अब तोह ये मज़ाक महंगा पड़ेगा तुम्हे…

सुप्रिया ने भोला सा चेहरा बनाते हुए कहा – प्लीज विक्रम… इतना भी कोई सताता है क्या…

विक्रम – वह… कौन किसको सत्ता रहा है… ठीक है, बस लैंड करने hi वाले है… फिर होटल रूम में पहुंच कर सब हिसाब ले लूंगा…

सुप्रिया ने हलके से जीब निकाल कर विक्रम को चिदायी – मैं तोह सो जयुंगी रूम में जाकर… वैसे भी रात हो चुकी है…

विक्रम – आज रात तोह हम दोनों में से कोई नहीं सोने वाला…

सुप्रिया की सांसें तेज़ हो रही थी, पता नहीं विक्रम आज क्या करने वाला था उसके साथ. वह थोड़ा बेचैन सी थी, और थोड़ा एक्ससिटेड. उसने मुस्कुराते हुए फिर से बहार देखना शुरू कर दिया. प्लेन बस लैंड hi करने वाला था और मुंबई शहर की रौशनी साफ़ दिख रही थी.

प्लेन लैंड करने के बाद थोड़े टाइम दोनों एक टैक्सी पकड़ कर होटल आ गए. रात का समय था तोह सुप्रिया को साफ़ साफ़ नहीं पता चल रहा था की वह कहाँ थे, पर शायद समुद्र पास में hi था. चेक इन पर विक्रम ने होटल स्टाफ को जब ये कहा – मर एंड मरस. सिंह… तोह सुप्रिया ने विक्रम की हाथ को अचे से जकड लिया, जैसे सच में वह उसकी बीवी हो.

दोनों ऊपर रूम में पहुंचे, और ये काफी बड़ा रूम था, सुप्रिया इससे पहले इतने बड़े होटल रूम में कभी नहीं रुकी थी. सुप्रिया ने खिड़की के बहार देखा तोह हाँ सच में वह बिलकुल समुद्र किनारे hi थे. सुप्रिया को इतना खुश और एक्ससिटेड देख विक्रम मंद मंद मुस्कुरा रहा था.

विक्रम खिड़की से बहार देख रही सुप्रिया के पीछे आया और उसके बूब्स के थोड़ा नीचे अपने हाथ रखते हुए उसे पकड़ लिया. और फिर अपना चेहरा उसके चेहरे से सत्ता लिया. सुप्रिया को विक्रम की दादी अपनी मुलायम से गाल पर महसूस हो रही थी.

विक्रम – तुम फ्रेश होकर चेंज कर लो… मैं 10 मिनट में नीचे से आता हूँ..

सुप्रिया – चेंज क्या करना…

विक्रम – उम्… मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ… तुम वह पेहेन लेना…

सुप्रिया ने हलके से सर झुकाते हुए हाँ भर दी. विक्रम ने अपने बैग में से एक बैग निकलते हुए बीएड पर रख दिया और फिर वह कमरे से बहार चला गया. सुप्रिया ने जैसे hi वह बैग खोला, उसके तोह होश से hi उड़द गए. अंदर एक बहुत hi सेक्सी सी नाईट ड्रेस थी, बल्कि ड्रेस क्या, बिकिनी hi थी, और ऊपर से एक पारदर्शी गाउन. बिकिनी इतनी छोटी थी की सुप्रिया देख रही थी की उसे फिट भी कैसे आएगी.

सुप्रिया बाथरूम में गयी और अपने कपडे उतारने लगी, और फिर उसने किसी तरह से वह बिकिनी ड्रेस पहनी. नीचे की पंतय तोह कहाँ उसकी गांड की दरार में खो गयी थी उसे पता hi नहीं चल रहा था, बस किसी तरह से उसकी छूट का आगे का हिस्सा ढाका हुआ था. और ब्रा के नाम पर भी पर उसकी चूचियां hi ढकी हुई थी, बाकी उसकी गोलियां तोह बहार hi झलक रही थी. बाथरूम के आईने में अपने आप को इस ड्रेस में देख कर सुप्रिया को शर्म भी आ रही थी और ाचा भी लग रहा था.

उसने वह पारदर्शी गाउन ऊपर से पेहेन लिया, जो ज्यादा कुछ धक् नहीं रहा था. पता नहीं हु इस हाल में विक्रम का सामना कैसे करेगी. वह जल्दी से बाथरूम से निकलती हुई बीएड में घुस गयी और ऊपर से कम्बल ोड लिया, और बेचैनी से विक्रम के वापिस आने का इंतज़ार करने लगी.

कुछ hi पल बाद विक्रम कमरे में नॉक करके अंदर आया और उसने सुप्रिया को बीएड में घुसे हुए देखा. सुप्रिया के चेहरे पर एक नटखट सी मुस्कान थी.

विक्रम – ये क्या… तुम तोह अंदर छिप गयी…

सुप्रिया – हाँ तोह क्या… बहार कड़ी रहती इस ड्रेस में… ये कैसी ड्रेस चुनी है आपने…

विक्रम – क्यों? ये भी नहीं लानी चाहिए थी क्या… मैं भी तोह देखु की इसमें क्या प्रॉब्लम है…

सुप्रिया – नहीं… बस ठीक है ऐसे hi…

विक्रम – अब तोह देखनी पड़ेगी hi…

सुप्रिया – विक्रम…. आप लाइट ऑफ कर दो न प्लीज…

विक्रम – पहले देख तोह लू… फिर कर दूंगा लाइट भी ऑफ..

विक्रम बीएड पर आते हुए सुप्रिया के कम्बल के ऊपर लेट गया और कम्बल को नीचे खींचने की कोशिश करने लगा. पर दूसरी और सुप्रिया भी कम्बल में ढके रहने की कोशिश कर रही थी. विक्रम ने सुप्रिया के गालो पर किश करना शुरू किया और खींचा तानी में कम्बल थोड़ा सा नीचे किया. उसे अब सुप्रिया के कंधे उस लाल ड्रेस में दिखाई दे रहे थे. उसने ड्रेस को साइड खींचते हुए सुप्रिया के कंधो पर किश किया.

सुप्रिया की सांसें तेज़ होती जा रही थी – ममममम….. विक्रम….

विक्रम – करो न नीचे इसे…

विक्रम उसके ऊपर आते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. सुप्रिया भी विक्रम का सर पकडे उसका पूरा साथ दे रही थी.

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अगले hi पल विक्रम ने सुप्रिया को घुमा कर अपने ऊपर लिटा लिया, और उसकी पतली सी ड्रेस के ऊपर से उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा. उसके दूसरा हाथ बेचैनी से सुप्रिया की पीठ को मसल रहा था, जो सुप्रिया को भी बहुत उत्तेजित कर रहा था.

विक्रम - ी लव यू डार्लिंग....

सुप्रिया - ी लव यू तू...

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विक्रम ने सुप्रिया की गांड को कास के दबाया जिससे सुप्रिया के मुँह से ज़ोर की अह्ह्ह्ह निकल गयी.

विक्रम – जो प्लेन में अधूरा रह गया था उसे पूरा करते है अब…

सुप्रिया विक्रम का मतलब समझ गयी थी की वह क्या चाहता था. वह भी आज विक्रम को अचे से खुश करना चाहती थी. सुप्रिया ने विक्रम की शर्ट के बटन खोलने शुरू करे, और विक्रम आराम से बीएड पर हाथ अपने सर के नीचे दबा कर लेट गया. शर्ट के बटन खुलते hi विक्रम की हैरलेस छाती सुप्रिया के सामने थी और वह उसकी छाती को हलके हलके चूमने लगी.

विक्रम को यकीं hi नहीं हो रहा था की वही शर्मीली सी सुप्रिया थी जो आज खुद hi आगे बाद रही थी. सुप्रिया के बाल उसकी शकल को ढके हुए थे, और विक्रम ने अपने हाथों से उसके बालों को साइड किया ताकि हु उसका चेहरा देख पाए, और उसका चेहरा इस समय लाल पड़ा हुआ था.

विक्रम ने हल्का सा उठ कर अपनी शर्ट उतार दी, और सुप्रिया की ऊपर की ड्रेस भी उतार कर बीएड से दूर फेक दी. सुप्रिया अब एक छोटी सी ब्रा और पंतय में विक्रम के ऊपर बैठी हुई थी. विक्रम आज सुप्रिया से सब कुछ करवाने के मूड में था. उसने आँखों से सुप्रिया को अपने नीचे का इशारा किया. सुप्रिया के हाथ बुरी तरह काँप रहे थे.

सुप्रिया – विक्रम… लाइट अभी भी ों है…

विक्रम – हम्म्म… तोह क्या हुआ? कोई नहीं देख रहा… बस हम दोनों hi तो है…

विक्रम ने अपने पेअर चौड़े किये और सुप्रिया उनके बीच में अपने घुटनो पर बैठ गयी. उसे पता था आगे क्या होने वाला था. सुप्रिया ने कांपते हुए हाथों से विक्रम की बेल्ट खोली और फिर उसके पंत की ज़िप खोल कर उसको थोड़ा सा नीचे किये. अंदर विक्रम के अंडरवियर में उसका लुंड तना हुआ खड़ा था.

विक्रम – प्लेन में तुम इसे hi बहार निकालना चाहती थी न… अब लो तुम्हारे सामने है…

सुप्रिया ने अपने मुँह का थूक अंदर गतका और विक्रम की पंत को हलके से नीचे सरकाया. उसके हाथ पेअर ठन्डे पड़ते जा रहे थे. विक्रम अब बस अंडरवियर में hi लेता हुआ था. सुप्रिया रुक सी गयी, तोह विक्रम ने हल्का सा उठ कर सुप्रिया के हाथ पकडे और बड़ी सोफ़्त्ल्य अपने अंडरवियर के ऊपर से लुंड पर रख दिए. सुप्रिया की सासें भारी होती जा रही थी.

विक्रम ने सुप्रिया के हाथ पकड़ते हुए अपने लुंड को ऊपर से हल्का सा सहलाया, सुप्रिया ने अपने हाथ बिलकुल ढीले छोड़े हुए थे. विक्रम ने सुप्रिया की उँगलियों को पकड़ते हुए अपने अंडरवियर की इलास्टिक पर रखा और उसे खींचने का इशारा किया. सुप्रिया बिना नीचे देखे हलके हलके अंडरवियर को नीचे खींचने लगी. थोड़ा खींचते hi विक्रम का लुंड एक स्प्रिंग की तरह बहार उछला. उस दिन इतनी पास से नहीं नहीं देखा था सुप्रिया ने विक्रम का लुंड, पर आज उसे पता चल रहा था की विक्रम अपना नीचे का एरिया एकदम साफ़ और क्लीन रखता था.

विक्रम ने अपना अंडरवियर पूरी तरह नीचे सरका दिया और अब वह पूरी तरह नंगा लेता था. वह अपने पेअर चौड़े करके लेट गया.

विक्रम ने सुप्रिया की और देखते हुए सोफ़्त्ल्य पुछा – तुमने पहले कभी सूचक किया है?

सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिला दिया.

विक्रम – गुड… मुझे लगा तुमने कभी किया नहीं होगा ये… इसे पकड़ो और प्यार से सेहलायो.

विक्रम की आवाज़ में प्यार के साथ एक ऐसी सख्ती थी जिसे सुप्रिया मन नहीं कर सकती थी. सुप्रिया ने एक एक करके अपनी ऊँगली विक्रम के कड़क लुंड पर राखी और उसे एक हाथ से पकड़ कर मसलने लगी. पहले धीरे से फिर और तेज़ होते हुए उसका हाथ ऊपर से नीचे तक चलने लगा. विक्रम अपना हाथ आगे लेट हुए सुप्रिया के बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.

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सुप्रिया हलके हलके सिसकियाँ लेने लगी. विक्रम ने सुप्रिया की छोटी सी ब्रा को भी साइड कर दिया जिससे उसके बूब्स पूरी तरह आज़ाद हो गए. सुप्रिया ने शर्म से अपनी आखें झुका ली पर विक्रम ने उसका मुँह ऊपर करके अपनी और कर दिया.

विक्रम – ऑय कांटेक्ट बना के रखना…

विक्रम की आँखें बड़ी होती जा रही थी, जैसे उसे बहुत मज़ा आ रहा हो जिस तरह से सुप्रिया उसके लुंड की मालिश कर रही थी – गुड… अब इसे अपने मुँह में लो… बस ऊपर का part थोड़ा सा…

सुप्रिया उसकी बात एकदम से मानते हुए अपने होंठ उसके लुंड की तरफ ले गयी, और उसके लुंड की टिप को अपने होंठों के बीच में ले लिया.

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विक्रम ने उसकी थोड़ी को छूटे हुए उसका मुँह ऊपर कर दिया – ऑय कांटेक्ट…

सुप्रिया ने विक्रम की और देखते हुई लुंड को अपने मुँह में दबाये रखा.

विक्रम – अह्ह्ह… गुड… अब फिर से चूसो…

विक्रम का एक हाथ सुप्रिया के सर पर था और उसने हल्का सा प्रेशर डालते हुए सुप्रिया का मुँह नीचे किया जिससे विक्रम का थोड़ा और लुंड सुप्रिया के मुँह में चला गया.

विक्रम – मममम…. इस बार और अंदर तक जायेगा… ठीक है…

सुप्रिया ने विक्रम की आँख में आँख मिलते हुए सर हिलाया और वह तैयार हो गयी थी की विक्रम का लुंड इस बार और भी अंदर जाने वाला था. विक्रम ने सुप्रिया के सर को पीछे से धकेला और उसका मोटा लुंड सुप्रिया के मुँह को छौड़ा करते हुए और अंदर चला गया.

सुप्रिया के मुँह से दबी हुई आवाज़ें निकल रही थी - मममम.... ह्ह्हह्ह... मपहहहहह...

इस बार विक्रम ने सुप्रिया का सर पीछे से अचे से पकड़ कर धीरे से और अंदर धकेला, जब तक उसका पूरा लुंड सुप्रिया के मुँह में नहीं था. सुप्रिया बस विक्रम की और hi देख रही थी, और मुँह के अंदर उसकी जीब विक्रम के लुंड पर रगड़ खा रही थी.

विक्रम – यस…. जस्ट लिखे तहत…

सुप्रिया ने अपना मुँह थोड़ा पीछे किया और फिर आगे किया और हु विक्रम के लुंड को अचे से अपने मुँह में अंदर बहार करने लगी. उसे कुछ कुछ नमकीन सा अपने मुँह में महसूस हुआ पर विक्रम की और देख कर नहीं लग रहा था की वह रुकने वाला था.

विक्रम ने हलके से सुप्रिया के गले पर हाथ रखा और अपने लुंड को तिरछा करते हुए सुप्रिया के मुँह के साइड में लुंड को डालने लगा. सुप्रिया का मुँह इससे और भी दर्द करने लगा था, आखिर कुछ मिनट हो गए थे उसका मुँह खुले हुए. उसने दर्द में अपना जबड़ा पकड़ा और विक्रम की और देखने लगी की हु रुक जाये.

विक्रम ने अपना लुंड जैसे hi बहार निकाला, सुप्रिया दर्द से करहा उठी – अह्ह्ह… विक्रम… प्लीज और मुँह में नहीं… बहुत दर्द कर रहा है…

एक पल के लिए विक्रम की आँखें और बड़ी हो गयी और उसके हाथ की पकड़ सुप्रिया के बालो पर कास गयी, और ये देख कर सुप्रिया भी थोड़ा गबरा सा गयी. पर जैसे hi विक्रम ने सुप्रिया की घबराई हुई शकल को देखा, उसने अपने आप को कण्ट्रोल किया.

विक्रम – ी अंडरस्टैंड… अभी तुम्हे आदत नहीं है न… के हेरे…

विक्रम ने सुप्रिया को खींचते हुए बीएड पर अपने नीचे लिटाया और बीएड पर अपने घुटने रखते हुए अपना लुंड सुप्रिया के ठीक सामने कर दिया. उसका भर सुप्रिया पर नहीं था, बस उसकी गांड सुप्रिया के पेट को छू रही थी, और उसने अपने आप को बीएड पर अचे से पोजीशन किया हुआ था.

विक्रम का लुंड इतनी पास से देखते hi सुप्रिया के मुँह से हलकी सी चीख निकल गयी – अह्ह्ह्ह….

विक्रम से उसके होंठों को अपने अंगूठे से सहलाया और फिर से अपना लुंड सुप्रिया के मुँह के पास लेट हुए धीरे धीरे से सुप्रिया के मुँह में घुसाने लगा, पूरा अंदर तक. विक्रम के टट्टे सुप्रिया के होंठों को छू रहे थे. सुप्रिया मैं hi मैं सोच रही थी की पता नहीं क्या मज़ा आता है मर्दो को लड़कियों के मुँह में लुंड डालने में. पर वह विक्रम का पूरा साथ देने की कोशिश कर रही थी.

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विक्रम लगभग 5 मिनट तक सुप्रिया के मुँह में ऐसे hi छडा रहा, और अपना लुंड अंदर बहार करता रहा. सुप्रिया की सांस फूलने लगी थी, उसका मुँह जैसे बहुत छौड़ा हो गया था. सुप्रिया की छूट भी इस सब से अब बुरी तरह गरम हो चुकी थी, और वह अपनी उँगलियों से अपने नीचे का हिस्से को बहार से छू रही थी.

सुप्रिया – मममम…. Ghhhhhhh……mmmm….

विक्रम भी उसकी शकल देख कर उसकी हालत समझ गया था, की वह और ज़्यादा उसका लुंड अपने मुँह में नहीं ले पाएगी. सुप्रिया को भी खुश करना जरूरी था.

विक्रम अपना लुंड निकालते हुए सुप्रिया के साइड में लेट गया और उसका लुंड सुप्रिया की गांड पर अपना हाथ हलके मसलने लगा.

विक्रम – अभी भी दर्द हो रहा है मुँह में…

सुप्रिया की आँख से एक ासु निकल गया – अह्ह्ह्हह.. हाँ….

विक्रम उसके गाल पर किश करते हुए – सॉरी… अब से नहीं करूँगा ऐसे…

विक्रम ने अपने पेअर सुप्रिया के पैरो रख दिए और वह उसके और पास आ गया ताकि उसका लुंड सुप्रिया की छोटी सी पंतय तो पीछे से छू रहा था. उसने अपने लुंड को सुप्रिया की आधी नंगी गांड पर लगाना शुरू किया, और फिर अपने हाथ से उसकी पंतय को नीचे खींच दिया.

विक्रम – तुमने कभी अपनी अस्स में लिया है…

ये सुनकर सुप्रिया एकदम से उछाल सी पड़ी और वह विक्रम की और मुद गयी – नहीं… अस्स में नहीं लिया कभी… और प्लीज आप भी वहां नहीं करना….

विक्रम हस्ते हुए – ाचा ठीक है… रिलैक्स… नहीं करूँगा….

सुप्रिया निर्वसली लेती हुई थी विक्रम उसके ठीक ऊपर आ गया और अपने हाथों से उसके हाथ पकड़ कर उसके सर के ऊपर कर दिया. विक्रम ने सुप्रिया के बूब्स को चूसना शुरू किया और सुप्रिया से पूरी तरह चिपक गया. बूब्स चूसने से सुप्रिया भी और ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी, और उसके पेअर विक्रम के पैरो के बीच में फसे हुए झटपटा से रहे थे.

विक्रम अपनी जीब ने कभी सुप्रिया के बूब्स को चाट रहा था, कभी अपने होंठों से उनके हलके हलके चूस रहा था. और दूसरी तरफ उसने अभी भी सुप्रिया के हाथों को ऊपर पकड़ा हुआ था. एकदम से उसका मुँह सुप्रिया की आर्मपिट्स में भी पहुंच गया और उसने वहां उसकी गोरी गोरी पिट्स को अपनी जीब फेरनी शुरू करि. सुप्रिया को ऐसा करने से काफी गुदगुदी हो रही थी और साथ hi हु और भी उत्तेजित होती जा रही थी.

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सुप्रिया – अह्ह्ह…. Vikram…mmmm ….

विक्रम का मुँह सुप्रिया की दूसरी बागली में था – कितनी सॉफ्ट हो तुम… हर जगह… आज अचे से महसूस करने दो…

सुप्रिया – ममममम…. विक्रम… मुझे बहुत गुदगुदी हो रही है… अह्ह्ह….

विक्रम – तुम बाद में मेरे कर देना ऐसा… मैं मन नहीं करूँगा…

विक्रम ने सुप्रिया के गोर गोर बूब्स को पकड़ते हुए अचे से दबा दिया जिससे सुप्रिया की चीख निकल गयी. उसकी छूट अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थी और वह बुरी तरह विक्रम से चिपटने लगी, अपने नीचे का हिस्सा विक्रम के शरीर से रगड़ते हुए. विक्रम इसी पल का तोह इंतज़ार कर रहा था की जब सुप्रिया अपनी हीट में पहुंच जाये.

वह फिर से अपने घुटनो पर बैठ गया और अपना लुंड सुप्रिया की छूट के बहार के हिस्से से टकराने लगा. सुप्रिया भी अब बेचैन हो कर अपनी कमर ऊपर नीचे कर रही थी, जिससे लुंड छूट के बहार के हिस्से पर रगड़ खा रहा था.

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विक्रम ने सुप्रिया की एक टांग ऊपर करके अपने कंधे पर रख दी और धीरे से सुप्रिया की छूट में अपना लुंड घुसाने लगा. सुप्रिया बुरी तरह तड़प उठी और उसने अपने बूब्स ज़ोर से पकड़ लिए.

सुप्रिया – ुह्ह्हहनननन….

विक्रम – अह्ह्ह्ह… आराम से करूँगा… उफ्फ्फ्फ़… बहुत टाइट है…

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सुप्रिया ने ज़ोर से बीएड की चद्दर को पकड़ लिया, पता नहीं आज उस दिन से भी ज्यादा पैन क्यों हो रहा था – अह्ह्ह्ह…. मुम्ममइय्य्य…. उफ्फ्फ….

विक्रम – सुप्रियाआ…. से आईटी… बोलो….

सुप्रिया – अह्ह्ह…. क्या बोलू… मममममम…..

विक्रम ने उसकी आँखों में झांकते हुए बोलै – तुम्हे पता है क्या कहना है तुम्हे…

सुप्रिया दर्द से चिल्लाई – उफ्फ्फ्फ़…. फ्फ्फफ्फ्फ़…. विक्रम…. मुझे…. अह्ह्ह्ह…. फ़क करो प्लीज….

विक्रम जैसे बस एहि सुन्ना चाहता था, और उसने एक डैम से अपनी स्पीड तेज़ कर दी. उसने सुप्रिया का एक पेअर ऊपर पकड़ा हुआ था और उसका दूसरा हाथ सुप्रिया के दुसरे पेअर पर टिका हुआ था. और वह तेज़ तेज़ सुप्रिया के अंदर अपना लुंड घुसा रहा था. सुप्रिया की आवाज़ पूरे रूम में गूँज रही थी.

सुप्रिया – अह्ह्ह्ह… ुह्ह्हह्ह… ुह्णण… ुह्ह्ह्णण….

उसकी आवाज़ से विक्रम की गति थोड़ी और तेज़ हुई, पर वह अभी भी अपने पूरे रूप में नहीं उतरा था. विक्रम ने सुप्रिया की दूसरी टांग को अपने दुसरे कंधे के ऊपर किया और फिर अपने हाथ बीएड पर रखते हुए अपना लुंड उसके और अंदर तक डालने लगा. सुप्रिया को सब कुछ अंदर तक महसूस हो रहा था जैसे कभी नहीं हुआ था, और उसने भी पूरे आनंद में अपने पैरो विक्रम की कमर पर लपेट लिए और अपनी कमर और गांड ऊपर उचका ली.

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कुछ देर ऐसे hi सुप्रिया को छोड़ने के बाद विक्रम ने अपने शरीर को नीचे किया और सुप्रिया को हुग करते हुए उसे थोड़ा धीरे धीरे छोड़ने लगा. सुप्रिया अभी भी विक्रम का लुंड अपने अंदर काफी गहरा महसूस कर पा रही थी और उसने विक्रम को कास के पकड़ा हुआ था.

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विक्रम ने सुप्रिया के चेहरे को देखा जो बुरी तरह एक ओर्गास्म के लिए तड़प रहा था. आखिर दोनों को ये खेल खेलते खेलते एक घंटे से ऊपर हो चूका था और शायद सुप्रिया को इतनी देर इस सब की आदत नहीं थी. विक्रम ने सुप्रिया के बाद पीछे से पकडे और उसने ज़ोर से घुर्राटे हुए सुप्रिया के अंदर कुछ आखिरी झटके मारे. सुप्रिया के दांत बुरी तरह किटकिटा रहे थे, और एक जादुई से फीलिंग के साथ उसकी छूट एक डैम से और टाइट हो गयी और उसका ज्वालामुखी पूरा फुट गया.

विक्रम ने अपना सारा माल सुप्रिया के अंदर निकालते हुए उसे कास के हुग कर लिया और वह अभी भी अपना गीला लुंड सुप्रिया की छूट के अंदर बहार कर रहा था.

सुप्रिया अपनी सांसें वापिस पाने की कोशिश कर रही थी. अगर उसे लगा की वह इस सब के बाद सो पायेगी तोह शायद वह गलत थी, क्यूंकि ये रात और खेल तोह और लम्बा hi चलता रहा.
 
अपडेट 61

उस रात और बाकी दोनों रात सुप्रिया और विक्रम ने अपने बीच की साड़ी झिजक और दूरी मिटा दी थी. विक्रम सुप्रिया के जिस्म को अलग अलग तरीके से तराशता रहा, ज्यादातर नरमी से, पर कभी कभी थोड़ा सा रफ़. पर ऐसा कुछ नहीं जो सुप्रिया झेल न सके. सुप्रिया भी शायद इतना कुछ सीख रही थी विक्रम के तरीको से, और उसे भी बहुत hi ज्यादा मज़ा आ रहा था इस सब में.

दोनों ने रूम में कहाँ कहाँ किस किस तरह से सेक्स नहीं किया. सोफे पर, शावर में, ज़मीन पर, खड़े हो कर, बीएड में अलग अलग पोसिशन्स में. विक्रम को इतना अनुभव था सेक्स का की वह सुप्रिया को हर तरह से पूरा आनंद दे पाया था. सुप्रिया तोह कई बार सोचती hi रह गयी थी क्या विक्रम ने बस उसके और ईशा के साथ hi सेक्स किया है लाइफ में या और लड़कियों के साथ भी. पर उसकी हिम्मत hi नहीं हुई विक्रम से ये पूछने की.

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और इस सब के बाद विक्रम उसे किसी राजकुमारी से काम नहीं महसूस होने देता. उसे शॉपिंग पर ले जाना, महंगे कपडे दिलवाना, महंगे रेस्टोरेंट्स में खाना खाना, साथ में घूमना. विक्रम दिन में थोड़ी देर के लिए ऑफिस के काम से भी चला जाता और सुप्रिया अकेली रूम में विक्रम के बारे में सोचती रहती और उनके अगले सेशन के लिए तैयार होना शुरू कर देती.

उनके आखरी दिन की शाम हो चुकी थी और दोनों अभी साथ में सब कुछ करके चुके थे, और सुप्रिया एक चादर लपेटे सोफे पर बैठी खिड़की से बहार देख रही थी. रात को कितना चमकता था ये शहर, सुप्रिया देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. विक्रम बस अभी शावर ले कर बहार आया था और एक तौलिया लपेटे खड़ा आईने में अपने आप को देख रहा था. तभी दरवाज़ा पर एक नॉक हुई.

सुप्रिया ने चौंकते हुए विक्रम की और देखा, उसकी आँखें पूछती हुई की कौन होगा.

विक्रम – मैं देखता हूँ…

सुप्रिया जल्दी से बीएड में ब्लैंकेट में छुप गयी, बस उसका मुँह ब्लैंकेट से बहार था.

दरवाज़ा खुलते hi बहार से किसी आदमी की आवाज़ आयी – रूम सर्विस सर… आपने खाना आर्डर किया था…

विक्रम – यस यस… के इन….

उफ़ ये अंदर क्यों बुला रहे है वेटर को, सुप्रिया परेशान होते हुए सोचने लगी. वेटर खाने की ट्राली लिए रूम के अंदर आ गया और खाना टेबल पर रखने लगा. अपनी आँख के कोने से वह सुप्रिया की और देख रहा था, और सुप्रिया के हलके से नंगे कंधे उसे दिखे. उसके चेहरे पर एक हलकी सी स्माइल आ गयी, उसे पता था यहाँ क्या हो रहा था. सुप्रिया को भी उसकी मुस्कान दिख गयी थी, और वह काफी ज्यादा ऐम्बर्रास सा फील कर रही थी. पर फिर उसने सोचा की ये वेटर उसे जानता भी नहीं था, वह क्यों उससे इतना घबरा रही थी.

वेटर – सर… खाना लगा दिया है… एनीथिंग ेल्स?

विक्रम अभी भी आराम से सिर्फ टॉवल में खड़ा था, जैसे उसे फरक hi नहीं पड़ता था की रूम में वह और सुप्रिया किस हालत में थे – No, थैंक यू.

विक्रम ने अपने पर्स में से एक नोट निकालते हुए वेटर को दिया – ये लो… थैंक्स… और बहार जाते हुए दो नॉट डिस्टर्ब का सिग्न लगा देना…

वेटर स्माइल करते हुए बोलै – सूरे सर…

वेटर ने जाते जाते सुप्रिया की और अचे से देखा, कितनी क्यूट सी लड़की थी, पर क्या मस्त मजे ले रही थी, उसने सोचा. वह पलटा और बहार जाते हुए दूर को बंद करके चला गया.

उसके जाने के कुछ सेकंड बाद सुप्रिया अभी भी वैसे hi लेती हुई विक्रम से बोली – उसको अंदर तक क्यों आने दिया… बहार से hi ले लेते न खाना…

विक्रम स्माइल करते हुए – ी didn’t रीलीज़ तुम कम्फर्टेबले नहीं थी… ी ऍम सॉरी….

सुप्रिया – वह मुझे कैसे गंदे से देख रहा था…

विक्रम – तुम हो hi इतनी ब्यूटीफुल, किसी की भी नज़र जाएगी hi तुम पर…

सुप्रिया – पर ऐसे??

विक्रम उसके पास आते हुए बीएड पर बैठ गया – ऐसे कैसे?

सुप्रिया धीमी आवाज़ में बोली – आपको पता तोह है…

विक्रम ने हलके से अपने ठन्डे हाथ सुप्रिया की गाल पर रखे और फिर उन्हें उसके होंठों से होते हुए, गर्दन से होते हुए, और नीचे ले जाते हुए उसकी छाती पर रख दिया – पहले खाना खाना है या फिर एक….

सुप्रिया शरमाते हुए बोली – आप थके नहीं अभी तक… मैं तोह गिनती भी भूल गयी हु पिछले 3 दिनों की…

विक्रम का हाथ हलके हलके सरक कर सुप्रिया के बूब्स तक पहुंच गया था – तुम थकने hi नहीं देती हो… क्या करू…

सुप्रिया ने विक्रम का हाथ पकड़ा – पहले खाना खा लेते है…

विक्रम ने आगे झुक कर सुप्रिया के होंठों पर हल्का सा किश किया – जैसे तुम कहो…

सुप्रिया बीएड से खड़े होते हुए खाना सर्वे करने लगी. दोनों टेबल पर बैठ कर खाना खा रहे थे. विक्रम की निगाहें तोह बस सुप्रिया पर hi तिकी हुई थी, टेबल के नीचे उसके पेअर सुप्रिया के कोमल पैरो को हलके हलके मसल रहे थे.

सुप्रिया ने विक्रम की और देखते हुए कहा – आज हमारी आखरी रात है यहाँ…

विक्रम – हनीमून की आखरी रात…

सुप्रिया हस्ते हुए नीचे देखने लगी – और फिर कल? कल फिर से हम लोग वापस अपने घर चले जायेंगे?

विक्रम – मैं कुछ फिगर आउट कर रहा हूँ, काफी क्लोज हु… जल्द hi साड़ी प्रॉब्लम सोल्वे करता हूँ…

सुप्रिया – आप ईशा से डाइवोर्स लेंगे…

विक्रम – सुप्रिया… ी won’t लिए तो यू, मैंने ईशा से डाइवोर्स की बात कभी की नहीं थी, पर तहत doesn’t मैं वे can’t बे टुगेदर.

सुप्रिया ये सुन कर जैसे अपने सपनो के आसमान से नीचे आ गयी हो – पर… मुझे लगा… मैं तोह अतुल को छोड़ने के लिए तैयार हूँ…

सुप्रिया की आँखों से एक आंसू नीचे टपका. विक्रम ने सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए कहा – सुप्रिया… ी लव यू… एंड ी ओनली लव यू… पर चीज़े थोड़ी कॉम्प्लिकेटेड है… ट्रस्ट में, मैं इस सब में एक बेस्ट सलूशन फंड करूँगा…

सुप्रिया – मेरे लिए तोह शादी के बिना कोई भी सलूशन अधूरा hi होगा… शायद आप भी बस मेरे साथ खेल hi रहे हो न…

विक्रम – हम्म्म…. सुप्रिया, तुम बहुत hi स्वीट हो… एंड ी वांट तो हैवे यू बी माय साइड आल माय लाइफ… ी लव यू मोरे थान एनीथिंग… मैं पॉलिटिक्स में एंटर करने का तरय कर रहा हूँ, जो ईशा की फॅमिली के सपोर्ट के बिना नहीं हो पायेगा… बूत तुम्हारी ख़ुशी के लिए, मैं वह सब भी तुम्हारे लिए छोड़ सकता हूँ… हम दोनों यहाँ से दूर कहीं बहार जा सकते है…

सुप्रिया के आंसू बह रहे थे, वह कुछ बोल नहीं पा रही थी. वह क्या hi बोलती, उसने अपने लाइफ का इतना बड़ा फैसला कर लिया था, और विक्रम पर यकीं भी कर लिया था की हु उसे प्यार करता है. पर उसने फ्यूचर के बारे में अचे से सोचा भी नहीं, पुछा भी नहीं.

विक्रम ने अपने होंठ सुप्रिया के गाल पर रखते हुए उसके आंसू पोछे – यू क्नोव… माँ लव्स यू सो मच… उन्हें ईशा कभी पसंद नहीं आयी थी, उन्होंने मुझे भी समझाया था की ईशा मेरे लिए ठीक नहीं है. पर मैं अपनी ज़िद्द पर कायम था, मैंने आर्मी तक छोड़ दी ईशा के लिए. ी हैवे फेल्ट इन्कम्प्लीट आल थी इयर्स… पर तुमसे मिलकर… ऐसा लगता है की मुझे जो चाहिए था हु मिल गया है…

सुप्रिया – विक्रम….

विक्रम – दो यू ट्रस्ट में…

सुप्रिया – हाँ…. पर….

विक्रम – हाँ और पर साथ में नहीं जाते… ी क्नोव तुमने मेरे साथ आ कर अपनी लाइफ का एक काफी बड़ा डिसिशन लिया है… पर, जस्ट गिव में ा लिटिल बिट मोरे टाइम… तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ….

विक्रम ने सुप्रिया को हलके से हुग किया और फिर सुप्रिया को उठाते हुए बीएड पर लिटा दिया. आज रात कोई वाइल्ड सेक्स करने की रात नहीं थी, बस एक बॉन्डिंग वाली रात थी, ये बात विक्रम भी समझता था. दोनों रात भर एक दुसरे की बाहों में चिपके हुए एक दुसरे के साथ लेते रहे. विक्रम हलके हलके उसके बाल सहलाते हुए गहरी सोच में डूबा हुआ था. सुप्रिया भी दूसरी और अपने भविष्य के बारे में सोचती हुई परेशान थी. पर उसे विक्रम का ये केयरिंग रूप भी बहुत ाचा लग रहा था.

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अगली सुबह दोनों फ्लाइट पकड़ कर वापस लखनऊ आ गए. विक्रम की गाडी एयरपोर्ट पर उसे लेने आयी हुई थी. विक्रम का सिर्फ एक hi ख़ास ड्राइवर होता था, सुप्रिया ये बात जान चुकी थी, और उस ड्राइवर ने सुप्रिया को उसके घर पर ड्राप कर दिया. इतनी अछि ट्रिप के बाद ख़तम होने के बाद सुप्रिया थोड़ा सा उदास फील कर रही थी.

वह बिल्डिंग के अंदर घुसी और सामने इक़बाल था, पर अब कुछ महीनो से दोनों hi एक दुसरे से बात नहीं कर रहे थे. सुप्रिया अपना सामान लिए लिफ्ट की तरफ जा hi रही थी की उसे एक चक्कर सा आया और वह एकदम से नीचे गिर गयी. उसकी आँखों के सामने अँधेरा सा हो गया था, और बस उसे कुछ धुंधली सी आवाज़ें आ रही थी.

मैडमजी क्या हुआ… आप ठीक तोह हो…. मैडमजी…. या खुदा… मैडमजी…

फिर उसे ऐसा महसूस हुआ की किसी ने उसे मजबूती से ऊपर उठाया हो और उसे लिफ्ट से ऊपर ले कर जा रहा हो. सुप्रिया बस गहरी गहरी सांसें ले रही थी. जब उसको फिर से सब दिखना शुरू हुआ तब उसने पाया की वह अपने बीएड पर लेती थी और उसके सर पर रुमाल में बंधी बर्फ थी.

सुप्रिया दर्द में करहाई – अह्ह्ह…. मममम…..

इक़बाल – मैडमजी… आप होश में आ गए…

सुप्रिया ने देखा की इक़बाल बीएड के साइड में खड़ा हुआ था. उसे वहां देख कर सुप्रिया थोड़ा कठोर आवाज़ में बोली – इक़बाल तुम यहाँ क्या कर रहे हो…

इक़बाल घबराते हुए बोलै – मैडमजी… वह… माफ़ कीजिये मुझे… आप नीचे गिर गए थे तोह मैं आपको ऊपर ले कर आया था… साहब जी भी नहीं है न यहाँ… पर अब मैं चलता हूँ…

इक़बाल पलट के जा hi रहा था की सुप्रिया ने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे रोका. उसे सब याद आ गया था की कैसे वह चक्कर खा कर नीचे गिर गयी थी और कैसे इक़बाल उसे उठाते हुए ऊपर लाया था. इक़बाल तोह बस उसकी मदद की कर रहा था, और हमेशा से hi उसने उसकी मदद hi करि थी.

सुप्रिया – इक़बाल… सॉरी… मैं तुमसे गंदे से नहीं बोलना चाहती थी… थैंक यू मुझे घर लाने के लिए… थैंक यू आज फिर मेरी हेल्प करने के लिए...

इक़बाल का उतरा हुआ चेहरा सुप्रिया की इन सब बातों से थोड़ा सा खिल गया – मैडमजी… बहार काफी धुप है न… शायद आपको चक्कर आ गया था… आप शायद अचे से पानी नहीं पी रही होंगी… अह्ह्ह... मुझे फिर से माफ़ कीजिये… मैं आपको हमेशा नसीहत देने में लग जाता हूँ… क्या करू आदत है मेरी...

सुप्रिया – तुम मेरी परवाह करते हो न… इसीलिए शायद तुम्हारा मैं नहीं मानता…. मैं उस दिन के लिए माफ़ी माँगना चाहती हु… मुझे तुमसे ऐसे नहीं बात करनी चाहिए थी… मैं काफी ज्यादा शर्मिंदा हु...

इक़बाल – मैडमजी… आप क्यों माफ़ी मांग रहे हो… आप तोह बस आराम करो अब… मैं करुणा को बुलाता हूँ… आप बस आराम करो आज… वह सब काम संभल लेगी...

इक़बाल जल्दी से बैडरूम से बहार जाते हुए करुणा को फ़ोन करने लगा. सुप्रिया बीएड पर लेती सोच रही थी की इक़बाल कितनी फ़िक्र करता था उसकी. शायद वह गलत थी उस दिन उससे इतनी बदतमीज़ी से बात करके. नीचे गिरने से उसके सर पर हलकी सी लग गयी थी और वह वहां हलके हलके मसलने लगी. पता नहीं उसे ये चक्कर क्यों आया था, शायद कल रात वह सो नहीं पायी थी और कितनी स्ट्रेस थी उस पर.

थोड़ी देर बाद करुणा भी वहां आ गयी थी और वह दीदी, दीदी करते हुए सुप्रिया की देखभाल में लग गयी. इक़बाल वहीँ कमरे के बहार खड़ा सुप्रिया की तरफ देख रहा था. एक दो बार उनकी नज़रे भी मिली और हर बार उसने अपनी नज़रे नीचे झुका ली.

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दूसरी तरफ विक्रम ड्राइव करता हुआ कौशल के फोटो स्टूडियो पंहुचा. उसे जय का मैसेज आया था वहां ुरगेंटली आने के लिए. वह मैं में थोड़ा सा झुंझुला सा रहा था की पता नहीं ऐसा क्या अर्जेंट काम था जय को जो उसे यहाँ ुरगेंटली बुलाया था. आखिर उसे और भी बहुत सारे काम थे. शायद उसकी झुंझुलाहट कल जो हुआ उसके कारन भी थी. वह बस सुप्रिया को खुश देखना चाहता था, और इस सब से उसका का भी स्ट्रेस लेवल बड़ा हुआ था.

विक्रम बहार से hi ज़ोर से गुस्से में आवाज़ लगता हुआ अंदर आया – जय! जय! कहाँ हो यार…. क्या अर्जेंट काम….

अंदर आते आते उसके कदम और आवाज़ दोनों रुक गए. स्टूडियो के मैं हॉल में जय बिलकुल नंगा खड़ा था और उसके ठीक नीचे एक लड़की थी जिसके हाथ एक खम्बे के पीछे थे. उस लड़की ने भी कुछ नहीं पहना हुआ था और जय उसके बाल पकडे हुए अपना लुंड उस लड़की के मुँह में दाल रहा था. दूर एक कोने में कौशल खड़ा हुआ वीडियो बना रहा था.

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जय – आयो दोस्त… तुम्हारा hi इंतज़ार था… बस अभी hi शुरू किया था..

विक्रम ने कौशल को इशारे से कैमरा नीचे करने को कहा. पर उसे शायद सही से समझ नहीं आया.

जय कौशल पर चिल्लाया – ोये!! बंद कर न कैमरा भोस्डिके… दिखाई नहीं देता तुझे… सर आये है..

कौशल ने एकदम से कैमरा नीचे कर दिया और वह वहां से हैट कर अंदर चला गया.

जय – इनसे मिलो… ये है… क्या नाम है तुम्हारा… (विक्रम ने नीचे लड़की की तरफ देखा)

जय का लुंड मुँह में होने की वजह से लड़की सही से बोल नहीं पा रही थी.

जय हस्ते हुए – सॉरी सॉरी… बोलोगी कैसे…

जय ने अपना लुंड बहार निकाला और लड़की विक्रम की और देखते हुए बोली – रिया… सर… रिया नाम है मेरा…

जय को उसका नाम सुनते hi बहुत ज़ोर की हसी आ गयी – मज़ा आ गया भाई… हाहाहाहा… सुप्रिया न सही.. रिया hi सही… विक्रम, तुम्हारी सुप्रिया से काम नहीं है ये…

विक्रम चुप चाप खड़ा दोनों की और देख रहा था. जय चलते हुए विक्रम के पास जाकर खड़ा हो गया – क्या हुआ दोस्त… क्या देख रहे हो. वैसे तुमने तोह बताया नहीं पर उड़ती उड़ती खबर आयी थी की सुप्रिया तुम्हारे बिस्तर तक पहुंच चुकी है….

विक्रम उसकी बात को इग्नोर करते हुए बोलै – ये कौन है? मैंने कितना बार समझाया है न की ऐसे hi किसी को… और इसके सामने मेरा और सुप्रिया का नाम क्यों ले रहे हो… तुम जानते हो न अब सब कुछ कितना सेंसिटिव है…

जय – रिलैक्स… तुझे न किसी की कड़क चुदाई की जरूरत है हल्का होने के लिए… मस्त है ये… मॉडल बनना चाहती है… कौशल पता नहीं कहाँ कहाँ से ढून्ढ कर लाता है…. आजा तू भी… मॉडल बना देते है मिल कर इसे…

विक्रम – नहीं… तू कर आज…

जय – मेरी बात को इतना सीरियसली क्यों लेता है… आजा… बहुत दिन हो गए है साथ में कुछ किये हुए…

विक्रम – मुझे इसी लिए बुलाया था तूने यहाँ?

जय – और क्या?.... आएगा या फिर सुप्रिया से तुझे सब मिल गया की इसकी जरूरत नहीं है अब…

जय हस्ता हुआ वापस रिया की तरफ गया और अपना लुंड फिर से उसके मुँह में दाल दिया, और उसके बाल पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से अपना लुंड उसके मुँह के अंदर घुसाने लगा. कुछ hi पल बाद उसे एक हाथ ने साइड धकेला, ये विक्रम का हाथ था जो खुद भी नंगा हो चूका था और उसका लुंड पूरा खड़ा था. जय ये देख कर मुस्कुराने लगा क्यूंकि उसे पता था आगे क्या होने वाला था.

विक्रम ने रिया के सर को पकड़ते हुए झट से अपना लुंड उसके मुँह में दाल दिया और ज़ोर की आवाज़ निकालते हुए उसके मुँह को अचे से छोड़ने लगा. ऐसा लग रहा था जैसे उस पर कोई भूत सवार हो.

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विक्रम - फ़क.... ahhhhh.....ghhhhhh...... फ़क....

जय ने पास आते हुए रिया के हाथों को पीछे खींचा ताकि विक्रम और अचे से सपोर्ट से उसका मुँह छोड़ पाए.

विक्रम ज़ोर से चिल्लाया - ऊपर देख... मेरी आँखों में...

वह लड़की काफी डर गयी और ऊपर विक्रम की आँखों में देखने लगी. विक्रम को उसकी शकल देख कर सुप्रिया की याद आयी और उसकी स्पीड थोड़ी धीरे हुई. ये लड़की सुप्रिया की तरह बिलकुल नहीं थी, हाँ फिगर ाचा थी, पर उसमे न तोह सुप्रिया का चुलबुलापन और न hi मासूमियत और भोलापन.

विक्रम - जय... अंदर कमरे में ले चल इसे... यहाँ थोड़ा रिस्की है... और कौशल को बोल दे की कोई वीडियो नहीं बनाएगा, नहीं तोह साले की पूरी दुकान बंद करा दूंगा...

जय - जो हुकुम सर्कार... चलिए रिया जी... अंदर चलिए.... बाकि सब अंदर करेंगे...

रिया दर्द से अपना मुँह पकडे हुए थे. जय से ज्यादा गंदे से तोह इस विक्रम ने उसके मुँह के अंदर दर्द कर दिया था. पता नहीं आगे और क्या होने वाला था, वह थोड़ी घबराई हुई थी.

उसे चलता न देखा, जय ने एकदम उसे अपने कंधे पर उठाया और उसकी गांड पर एक खींच के मारा, जिससे लड़की की ज़ोर की चीख निकल गयी.

जय - इतनी देर से बोल रहा हु बहनचोद... सुन ले....

जय रिया को उठाये हुए अंदर एक कमरे में आ गया और उसे बीएड पर नीचे पटक दिया. दोनों जय और विक्रम थोड़ा भूके भेड़िये की तरह उसके साइड में अपना लुंड अपने हाथ में हिलाते हुए खड़े हो गए.

जय ने रिया को प्यार से पुचकारा- पुछठ.... रिया डार्लिंग... चलो अब जल्दी से दोनों को चूस डालो... किसी को शिकायत का मौका नहीं मिलना चाहिए...

जय ने उसका सर पर दबाव डालते हुए उसे उन दोनों के बीच में बिठा दिया. रिया ने सर ऊपर उठा के देखा, उन दोनों के लुंड उसके चेहरे से टकरा रहे थे. विक्रम का लुंड थोड़ा मोटा था, और जय का पतला पर लम्बा. रिया ने पहले विक्रम का मोटा लुंड पकड़ा और उसे चूसने लगी, और दुसरे हाथ से जय का लुंड पकडे हुए उसे बीच बीच में सहलाने लगी.

जय ने अपना हाथ नीचे करते हुए उसके सुडोल बूब्स को पकड़ लिया.

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रिया बारी बारी दोनों के लुंड अचे से चूस रही थी, मुँह में अंदर लेकर, जीब से ऊपर से नीचे से छत कर. शायद ये पहली बार नहीं था की ये लड़की लुंड चूस रही थी.

विक्रम बीच बीच में उसके बाल पकड़ और अंदर लुंड दाल देता. विक्रम का लुंड उसके मुँह में था और एकदम से जय ने भी अपना लुंड उसके मुँह में दे दिया. दो लुंड मुँह में होने की वजह से उसका मुँह एकदम से चौड़ा सा गया और उसे उबकाई सी आने लगी.

विक्रम - यार ऐसे नहीं कर... मैं नहीं चाहता की ये मेरे मुँह पर उलटी कर दे... याद है न तुझे एक बार...

जय ने अपना लुंड उसके मुँह से बहार निकाल दिया - Ok Ok.. पॉइंट ताकें... पर फिर दूसरा इंसान क्या करे...

जय ने रिया को बीएड पर धकेला और वह दोनों उसके ऊपर आते हुए उसके बूब्स को चाटने लगे. विक्रम अपने हाथ से रिया की छूट को बुरी तरह मसल रहा था और रिया बुरी तरह गरम हो चुकी थी.

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दोनों उसके एक एक बूब पर अपना मुँह चढ़ाया और बीच बीच में उसके पेट को बुरी तरह नोच रहे थे.

कुछ देर बाद जय ने विक्रम की तरफ देख - कहाँ जायेगा पहले... फेस या अस्स?

विक्रम ने देख लिया था की जय किस तरह रिया की गांड पर नज़र टिकाये था. विक्रम - तू कर ले पहले...

जय हस्ते हुए - अस यू से बॉस...

विक्रम बीएड के सिरहाने पर सर लगा कर बैठ गया और अपने पेअर चौड़े कर लिए. उसने एक हाथ से हलकी सी रिया को बीएड पर उल्टा घुमा दिया और उसके हाथ खींचते हुए उसका मुँह अपने लुंड के पास ले आया.

विक्रम ने उसे आखों से अपना लुंड चूसने का इशारा किया और रिया अब तक अचे से समझ गयी थी की उसे क्या करना था और उसने विक्रम का लुंड अपने मुँह में ले लिया. पर बार बार उसका मुँह पीछे घूम रहा था ये देखने के लिए की जय क्या करने वाला था. उसने अपनी अस्स में पहले लिया था पर ऐसे दो मर्दो के साथ नहीं.

विक्रम ने उसका सर पकड़ते हुए सीधा किया ताकि वह पीछे न देख पाए. और जय रिया की गोरी गोरी गांड पर अपने हाथ मसलने लगा. उसने रिया के गांड के गोलों को अपने हाथ से अलग किया ताकि उसे रिया की गांड का छेड़ अचे से दिख पाए. रिया बुरी तरह मचल रही थी, पर एक साइड से विक्रम उसे पकड़ा हुआ था और दूसरी साइड से जय.

जय ने अपना एक पेअर बीएड पर रखा और रिया के बाल पकड़ते हुए अपने आप को सहारा दिया. और फिर अपना लुंड उसकी गांड के छेड़ पर टिकते हुए अंदर घुसाने लगा. रिया की गांड अभी भी काफी टाइट थी और उसके बुरी तरह पसीने छूटने लगे. वह चिल्लाना चाहती थी पर विक्रम का लुंड उसके मुँह में उसकी आवाज़ को दबा रहा था. रिया की आँखें ऊपर को छड़ आयी.

जय ने बालो को ज़ोर से पकड़ते हुए रिया के अंदर धक्के मारने शुरू किये. रिया का पूरा शरीर हिल रहा था और वह दर्द से रहत पाने के लिए विक्रम का लुंड और ज़ोर से चूसने लगी जैसे वह कोई लोल्लिपोप हो.

रिया - मममम..... आह्ह्ह्हह......

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विक्रम बीच बीच में प्यार से रिया के गाल सेहला रहा था, उसे पता नहीं आज इतना रेहम क्यों आ रहा था इस लड़की पर, जैसे वह उसकी सुप्रिया hi हो. रिया के हाथ विक्रम की टाँगे पकडे हुए थे अपने आप को सहारा देने के लिए और जय की स्पीड तेज़ होती जा रही थी.

थोड़ी देर बाद विक्रम ने कहा - चल अब पोजीशन चेंज कर लेते है....

जय - मुझे नहीं चुसवाना और... करने दे न...

पर विक्रम तब तक उठ चूका था. जय ने बीएड पर लेटते हुए रिया को अपने ऊपर किया और हुग कर लिया.

जय - कैसा लग रहा है डार्लिंग...

रिया को जैसे अभी थोड़ी रहत मिली थी पर वह क्या hi बोलती - मममम.... ठीक हु मैं...

जय - गुड... अब दरियो मत... सब हो जायेगा... ठीक है...

ये सुन कर रिया जैसे और भी घबरा सी गयी और जय ने एक झटके में नीचे से उसकी छूट में अपना लुंड घुसा दिया. छूट में लुंड जाते hi रिया चीख पड़ी पर साथ hi उसे ाचा भी लगने लगा. जैसे उसे अपने ऊपर लिटाये अपना लुंड उसके अंदर बहार कर रहा था. रिया नहीं जानती थी की अब विक्रम क्या करने वाला था.

विक्रम बीएड के ऊपर पेअर चढ़ा और अपने पेअर चौड़े करके दोनों के ऊपर खड़ा हो गया. फिर उसने रिया की पीठ पर हल्का सा प्रेशर डालते हुए उसे जय की और नीचे दबाया.

रिया पीछे पलट कर देखने लगी - अह्ह्ह्हह..... सर......

जय - न... न... ना... इधर देखो...

विक्रम ने अपने हाथ रिया की गांड पर रखते हुए अपना लुंड सही पोजीशन में किया और फिर एक ज़ोर के झटके में अपना लुंड उसकी गांड में दे डाला.

रिया की बहुत hi तेज़ चीख निकल गयी. एक तोह विक्रम ने ये सब इतनी तेज़ी से किया था, दूसरा उसका लुंड जय के लुंड से मोटा था. उसे ऐसा लग रहा था की उसकी पूरी जान hi निकल जाएगी, दोनों लुंड उसके शरीर के अंदर बहार हो रहे थे.

रिया ने दर्द से कराहते हुए चद्दर हो पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी - अह्हह्ह्ह्ह.... फुककककक.... हैट जायो प्लीज.... उफ्फ्फ.....

रिया ने दर्द से रहत पाने के लिए अपना अंगूठा अपने मुँह में दे डाला.

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पर उसे रहत कहाँ मिलने वाली थी. विक्रम के पूरे शरीर में जैसे पता नहीं कितना दम था, वह बिना किसी सहारे के, अपने पैरो के बल पर अपना लुंड रिया की गांड में अंदर बहार कर रहा था. दूसरी और जय पूरी स्पीड में अपना लुंड उसकी छूट में घुसा रहा था और उसके गर्दन पर अपने होंठ गदा रहा था.

रिया ने जय के मुँह से बचने के लिए अपनी गर्दन दूसरी और घुमाई और विक्रम का लुंड इस सब में उसकी गांड से बहार निकल गया. लुंड बहार निकला तोह उसे ऐसा लगा जैसे उसका गांड का छेड़ पता नहीं कितना बड़ा हो गया हो.

रिया - सर.... प्लीज..... रुक जाइये....

विक्रम को इस सब से गुस्सा आने लगा था और उस पर कोई भूत सवार था. उसने एकदम से रिया की गर्दन को अपने हाथों से जकड़ा और अपना पूरा भर उसकी गांड पर डालते हुए उसकी गांड को ज़ोर ज़ोर से फ़क करने लगा.

विक्रम - अह्ह्ह्हह्हह...........

उन दोनों के नीचे जय भी विक्रम का के आतंक महसूस कर पा रहा था - विक्रम... धीरे यार...

रिया की आँखें बंद होनी लगी थी और अब उसके शरीर में जैसे जान hi नहीं बची थी.

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विक्रम रिया को फ़क करते हुए एकदम से ज़ोर से चिल्लाया - सुप्रियाआ......

और वह ये बोलते hi एकदम से होश में आया, और वह रिया को छोड़ कर उसके ऊपर से हैट गया. रिया की गांड बुरी तरह लाल हो चुकी थी. जय भी कबका अपना माल रिया में निकाल चूका था, और उसने रिया को साइड करके बीएड पर लिटा दिया. रिया की आँखें बंद थी और वह जैसे होश में hi नहीं थी. पर उसकी आँखें खुल बंद हो रही थी और वह अपना गाला पकडे हुए थी.

जय - क्या करता है यार... थोड़ा तोह आराम से...

विक्रम बिना कुछ बोले वहां से बहार चला गया, शायद अपने कपडे पेहेन्ने. जय भी कुछ देर बाद उसके पीछे पीछे बहार आ गया और अपने कपडे पेहेन्ने लगा. कौशल भी वहीँ दोनों के पास आ कर खड़ा हो गया.

जय ने कौशल को कहा - अभी थोड़ा आराम करने दे उसे... तू अंदर जाकर मत छड्ड जइयो उस पर... ठीक है?

कौशल - जैसा आप कहो...

जय - उसको बोल दियो की अगर कोई नाम वाम सुना हो तोह भूल जाये... ठीक है... और सुन... ाचा किया उसने... 2-3 अड़ फिल्म करवा दियो... और पोर्न नहीं... ठीक है...

कौशल ने हाँ में सर हिला दिया. जय ने देखा की विक्रम अपने कपडे पेहेन चूका था और बहार की और जा रहा था. जय भी उसके पीछे पीछे हो लिया.

जय - विक्रम... सुन यार...

विक्रम उसकी बात को अनसुना किया बहार चले जा रहा था. जय दौड़ के उसके पास गया - क्या हुआ... इतना गुस्सा किस बात का...

विक्रम - कुछ नहीं... ी ऍम सॉरी....

जय ने मुँह बना कर बोलै - ारी बॉस... सॉरी क्यों... मैंने भी ऐसी बहुत गलतियां की है पहले... पर आज तुम तोह अलग hi मूड में थे...

विक्रम - उस लड़की को... घर ड्राप करवा देना प्लीज... और अगर किसी भी चीज़ की जरूरत हो तोह...

जय - मैं सब संभल लूंगा... तुम परेशां मत हो... ट्रस्ट में सब हो जायेगा...

विक्रम - थैंक्स, मैं चलता हूँ...

जय - वह… सुप्रिया का क्या हुआ? नाटक कर रही है क्या तेरे साथ?

विक्रम सीरियस हो कर बोलै - मैं उसके बारे में बात नहीं करना चाहता...

जय ने गहरी सांस ली - पता नहीं हम लोग इतना ड्रामा क्यों सेह रहे है उसका, दो टेक की लड़की है... तुम कहो तोह उसका भी एहि हाल कर दे...

विक्रम - मैंने कुछ कहा न... वह ऐसी वैसी लड़की नहीं है... और बेटर होगा की हम उसका आईडिया ड्राप कर दे... (घडी में देखते हुए) अभी मुझे लेट हो रहा है... और हाँ आगे से मुझे अर्जेंट बोलने से पहले ये बता देना की मामला क्या है...

विक्रम वहां से जल्दी से अपनी गाडी में निकल गया और जय एक मंद सी मुस्कान लिए अपने फ़ोन पर कुछ फोटोज देखने लगा जिसमे से एक फोटो सुप्रिया और विक्रम की एयरपोर्ट पर साथ में थी.
 
@कैनिप- थैंक यू सो मच! आप कितनी ध्यान से स्टोरी को फॉलो कर रहे हो, मैक्स में वैरी हैप्पी बिकॉज़ ऑफ़ थे एफर्ट पूत इन राइटिंग थिस!!

मैं सोचूंगी आपके आइडियाज के बारे में..
 
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