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- Dec 5, 2013
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घुस गया, धंस गया अंड़स गया --- गन्ने के खेत में

उसकी बहन की बुर अब एकदम गीली हो गयी थी, बुरी तरह पनिया रही थी, बीच बीच में बुर में घुसी ऊँगली की नक्लस से वो प्रेम गली के अंदर की नर्व्स को रगड़ के छेड़ छेड़ के बहन को पागल कर रहा था,...
आज गीता पहली बार गन्ने के खेत का मजा ले रही थी,... बस उसका यही मन कर रहा था की बस अब भैया पेल दे, टांग उठा के,
बहन के मन की बात अगर भाई नहीं समझेगा तो कौन समझेगा, वो भी एकलौती छोटी सगी बहन, कच्ची कली,.... अब तक उसने न जाने कितनी कच्ची कलियों को, लड़कियों को, भौजाइयों को चोदा होगा, लेकिन अपनी बहिनिया गितवा को देख के वो एकदम पागल हो जाता था, मन करता था बस पकड़ के चाप दे ,...
तो बस, लेकिन गीता ने खुद ही अपनी गोरी गोरी लम्बी लम्बी टाँगे उठा के अपने भैया के कंधे पर रख दी, अपनी केले के तने की तरह की चिकनी, मांसल जाँघे फैला दी,
जमीन खुद हल के फाल का इन्तजार कर रही थी,... बेताबी से.
लेकिन अरविंद ने गीता की कसी चूत में लंड नहीं पेला, वो अपने लोहे की रॉड से कड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ के, खुले सुपाड़े से थोड़ी देर तक बहन की फांकों को रगड़ता रहा , तो कभी मजे में खुल गयी, मटर के दाने ऐसी क्लिट पे रगड़ने लगा,... और क्लिट पे सुपाड़े की रगड़,... कित्ती छटी छिनार पागल हो जाती थीं, ये तो अभी नई बछिया थी,
लेकिन बहन को चोदने का मजा तो उसे पागल कर के ही था,... और अरविन्द ने गीता की लसलसाती पनियाई बुर की फांको को फैला के अपना पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाड़ा फंसा दिया,
गीता की चूत परपरा रही थी, फटी जा रही थी लेकिन वो सोच रही थी, भैया अब पेलेगा, अब पेलेगा, ... लेकिन उसने नहीं पेला।
उसने बहन के होंठों पर अपने होठ जमा दिए और हलके हलके चूसने लगा, और जैसे ही गीता ने मुंह खोला, उसने अपनी जीभ अपनी बहन के मुंह में ठेल दी , जैसे थोड़ी ही देर में वो अपना मोटा मूसल बहन की बिल में ठेलने वाला था,... और साथ में कस के अरविन्द ने अपने होंठों से गीता के होंठों को बंद कर दिया ,
अब उसकी चीख नहीं निकल सकती थी,...
वैसे गन्ने के खेत में लड़कियों, औरतों की चीख आम बात थी, बगल के खेत में काम करनेवालियां मुस्कराने लगती, अगल बगल देखतीं कौन इस समय नहीं नजर आ रही है,... और जब थोड़ी देर बाद वो लड़की टांग छितराये कहरती, चिलखती बाहर निकलती तो हंसी और चिढ़ाना शुरू हो जाता, मजा आया गन्ना खाने में, खाली घोंटी हो की चुसवाया भी गन्ना
पर ये उसकी बहन थी, सगी बहन, सहोदर,
और अरविन्द ने दोनों हाथों से गीता की कलाइयों को कस के पकड़ लिया, अब वो लाख चूतड़ पटके, छटक नहीं सकती थी, बिना पूरा लंड खाये,...
और बहन की बुर में फंसे सुपाड़े को पूरी ताकत से पेल दिया, फिर धक्के पर धक्के,.. दो चार धक्के में सुपाड़ा बहन की बुर में घुस गया था, और अटक गया था,... अरविन्द थोड़ी देर के लिए रुका, बहन की जाँघों को फिर फैलाया, उसकी फैली टांगों को अपने कंधे पे फिर से सेट किया,..
गीता ने कस के दोनों हाथों से गन्ने के खेत में घास पकड़ लिया, आँखे बंद कर लीं,...
धक्के, पर धक्के , अरविन्द अपनी पूरी ताकत से बहन की कलाई कस के पकड़ के पूरी ताकत से ठेल रहा था, पेल रहा था, धकेल रहा था, धक्के रुक नहीं रहे थे , रगड़ते, दरेरते, फैलाते, मोटा मूसल अंदर धंस रहा था, था भी तो था उसका बांस बित्ते भर का,
गीता कहर रही थी, तड़प रही थी, उसकी मुट्ठी में घास उखड के आ गयी,
गीता के चूतड़ के नीचे के गन्ने के खेत के बड़े बड़े ढेले, मिट्टी धूल हो गए ,
वो करवटें बदल रही थी, छटकने की कोशिश कर रही थी, किसी मर्द के नीचे आयी लड़की अगर एक बार सुपाड़ा घुस जाए तो बच पाती है,... क्या तो गीता कैसे अरविन्द से बच पाती,... और अरविन्द ने कस के दोनों हाथों से अपनी बहन की मुलायम कलाई जकड़ रखी थी, लंड अंदर घुसा था,
जैसे सांड़ दोनों अगले पैर से बछिया को दबोच लेता था, बस उसी तरह,
दस बीस धक्के और अबकी जो सुपाड़े तक निकाल के अरविन्द ने पेला पूरी ताकत से तो लंड पूरा अंदर और सुपाड़े ने बहन की बच्चेदानी पे वो जबरदस्त ठोकर मारी की गीता की देह तूफ़ान में पत्ते की तरह कांपने लगी, वो गहरी गहरी साँसे ले रही थी, ... जोबन दोनों पथरा गए थे,
भाई और बहन दोनों समझ रहे थे,
गीता झड़ रही थी, बार बार,...रूकती,... फिर झड़ना शुरू हो जाता,...
अरविन्द रुका हुआ था,...पर कुछ देर बाद उसने धक्के तो नहीं शुरू किये पर प्यार से दुलार से अपनी बहन के गुलाबी , गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ हलके हलके किस करना शुरू कर दिया, भाई के हाथ बहन के उभारों को सहलाने लगे, कभी बीच बीच में वो उसके छोटे छोटे बस आ रहे निप्स भी हिला देता, पकड़ के दबा देता और चार पांच मिनट में गीता इतनी गरमा गयी की अपनी बाहों में अरविन्द को भींच के हलके से बोली,
" भैया करो न,... "
कुछ देर तक तो अरविन्द उसके निप्स चूसता रहा, फिर सर उठा के बोला,
'बोल न बहना क्या करूँ,... "
धत्त,एक पल के लिए शरमा गयी, लेकिन चूत की आग,... नहीं रहा गया तो उसकी पीठ पे हलके हलके मुक्के से मारती बोली,
" जो अभी तक कर रहे थे "
" क्या कर रहा था ?" अरविन्द ने छेड़ा, लेकिन साथ साथ बहन की बर में जड़ तक घुसे लंड के बेस से बहना की क्लिट को हलके हलके रगड़ना घिस्से मारना शुरू कर दिया, ... और थोड़ी देर में ही गीता पागल हो गयी वो समझ गयी जब तक बोलेगी नहीं भाई करेगा नहीं।
" चोद न भैया, चोद बहनचोद अपनी बहना को,... स्साले तेरी एकलौती बहन हूँ, ये मोटा घोड़े ऐसा लंड किसके लिए बचा के रखा है, पेल स्साले बहनचोद "
गीता मस्ती में पागल हो रही थी, उसे इसकी भी चिंता नहीं थी की उसकी आवाज कहीं खेत के बाहर काम करने वालियों तक न पहुंचे,...
और अब अरविन्द भी मस्ती में पागल हो रहा था कितनों को उसने चोदा था इसी गन्ने के खेत में, लेकिन सगी छोटी बहन को खुले में गन्ने के खेत में चोदने का मजा ही अलग है और अपनी बहन के मुंह से सुनने का रस भी
कचकचा के अरविन्द ने गितवा के निपल्स काटे और छेड़ा, बोल न बहिनिया जोर से खूब जोर से पूरी ताकत से जो बोल रही थी और गितवा जोर से खूब जोर से बोली, ऐसी चुदवासी हो रही थी की बस,... कुछ भी कर सकती थी भाई के मूसल के लिए, जोर से बोली, बिना इस बात की परवाह किये की बगल के खेत में काम करने वाली हैं,
" चोद न भैया, चोद बहनचोद अपनी बहना को,... स्साले पेल दे लंड अपना अरविन्द भैया चोद न पूरी ताकत से अपनी गितवा को "
जवाब में कचकचा के उसके फूले फूले गोरे गुलाबी गाल , अरविन्द ने काट लिए, बहन की टांगों को मोड़ के उसे दोहरा कर दिया, जिसे अब हर धक्का सीधे बहन की बच्चेदानी पे लगे,... लंड आधा बाहर निकाल के पूरी ताकत से पेल दिया , और बोला,
" ले भाईचोद ले, ले घोंट अपने भाई का लंड , ले आज तेरी चूत न फाड़ी तो कहना,... "
अरविन्द की ये बात सुन के गीता क्यों चुप रही थी उसको भी मज़ा आ रहा था, उसने भी नीचे से धक्के के जवाब में धक्का लगाते हुए जवाब दिया,
" तो पेल न तेरी बहन हूँ सगी, पीछे नहीं हटने वाली, चोद कस कस के," अपने छोटे छोटे उभार भाई की छाती में रगड़ते गीता ने और उकसाया।
और अबकी जवाब में भाई ने जो धक्का मारा तो सीधे बहन की बच्चेदानी में, वो हिल गयी, लेकिन अभी अभी झड़ी थी उसे थोड़ा टाइम तो लगना था।
और उसकी चूँचियो को कस कस रगड़ते मसलते अरविंद के मन की बात मुंह पे आ गयी,...
" जो मज़ा स्साली बहन चोदने में वो किसी और मैं नहीं,... "
गीता खुश हो गयी और भाई को नीचे से चूमते बोली,...
" भैया, तू स्साला समझता तो है, लेकिन देर से,... मैं तो साल भर से तैयार थी, लेकिन तू ही,... "
पर उसकी बात आगे की बात मुंह की मुंह में रह गयी , भाई ने चोदने की रफ़्तार बढ़ा दी थी और धक्कों की ताकत भी। जो ताकत वो अच्छी तरह चुदी चुदाइ खूब खुली, फैली भोंसड़ी वालियों के साथ करता था वो अब मारे जोश के अपनी छोटी टीनेजर बहन के साथ गन्ने के खेत में कर रहा था, धक्कों के जोर से गीता के नीचे की फैली साड़ी तो कब की सिकुड़ मुकुड़ गयी थी और अब वो सीधे मट्टी पर लेटी, पड़ी थी , भाई के धक्कों से उसके चूतड़ों से रगड़ रगड़ कर ढेले धूल हो रहे थे,... पर गीता को भी फरक नहीं पड़ रहा था और वो भाई के साथ गन्ने के खेत में चुदाई का मजा ले रही थी। "
धक्के मारते हुए अरविन्द ने उसकी बात का जवाब दिया,... " स्साली देर से ही सही चल अब सूद के साथ उस देरी को चुकता कर दूंगा , किसी दिन बचेगी नहीं तू मेरे लंड के धक्के से,... "
खिलखिलाते हुए नीचे से धक्के लगाती गीता बोली, " भैया बचना कौन चाहती है , और तेरे बस में है क्या नागा करना, आएगा तो घर में ही न मैं खुद न तुझे चढ़ के चोद दूंगी,... "
वैसे तो अरविन्द को आसन बदल बदल के चोदने में मजा आता था लेकिन आज पहली बार बहन के साथ गन्ने के खेत में तो वो जोश से पागल हो गया था और बस बहन को दुहरा कर के , खेत में लिटा के हचक हचक के पूरी ताकत से,...
गीता चीख रही थी , सिसक रही थी अपने नाख़ून भाई की पीठ में गड़ा रही थी और,...
आधे घंटे बाद जब गीता झड़ी तो उसके अंदर उसका भाई भी, साथ साथ,... देर तक दोनों चिपके रहे और जब झड़ना रुका भी तो भी गीता ने अरविन्द को अपने ऊपर से उठने नहीं दिया, न ही बाहर निकालने दिया, बूँद बूँद करके मलाई बाहर रिस रही थी ,

उसकी बहन की बुर अब एकदम गीली हो गयी थी, बुरी तरह पनिया रही थी, बीच बीच में बुर में घुसी ऊँगली की नक्लस से वो प्रेम गली के अंदर की नर्व्स को रगड़ के छेड़ छेड़ के बहन को पागल कर रहा था,...
आज गीता पहली बार गन्ने के खेत का मजा ले रही थी,... बस उसका यही मन कर रहा था की बस अब भैया पेल दे, टांग उठा के,
बहन के मन की बात अगर भाई नहीं समझेगा तो कौन समझेगा, वो भी एकलौती छोटी सगी बहन, कच्ची कली,.... अब तक उसने न जाने कितनी कच्ची कलियों को, लड़कियों को, भौजाइयों को चोदा होगा, लेकिन अपनी बहिनिया गितवा को देख के वो एकदम पागल हो जाता था, मन करता था बस पकड़ के चाप दे ,...
तो बस, लेकिन गीता ने खुद ही अपनी गोरी गोरी लम्बी लम्बी टाँगे उठा के अपने भैया के कंधे पर रख दी, अपनी केले के तने की तरह की चिकनी, मांसल जाँघे फैला दी,
जमीन खुद हल के फाल का इन्तजार कर रही थी,... बेताबी से.
लेकिन अरविंद ने गीता की कसी चूत में लंड नहीं पेला, वो अपने लोहे की रॉड से कड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ के, खुले सुपाड़े से थोड़ी देर तक बहन की फांकों को रगड़ता रहा , तो कभी मजे में खुल गयी, मटर के दाने ऐसी क्लिट पे रगड़ने लगा,... और क्लिट पे सुपाड़े की रगड़,... कित्ती छटी छिनार पागल हो जाती थीं, ये तो अभी नई बछिया थी,
लेकिन बहन को चोदने का मजा तो उसे पागल कर के ही था,... और अरविन्द ने गीता की लसलसाती पनियाई बुर की फांको को फैला के अपना पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाड़ा फंसा दिया,
गीता की चूत परपरा रही थी, फटी जा रही थी लेकिन वो सोच रही थी, भैया अब पेलेगा, अब पेलेगा, ... लेकिन उसने नहीं पेला।
उसने बहन के होंठों पर अपने होठ जमा दिए और हलके हलके चूसने लगा, और जैसे ही गीता ने मुंह खोला, उसने अपनी जीभ अपनी बहन के मुंह में ठेल दी , जैसे थोड़ी ही देर में वो अपना मोटा मूसल बहन की बिल में ठेलने वाला था,... और साथ में कस के अरविन्द ने अपने होंठों से गीता के होंठों को बंद कर दिया ,
अब उसकी चीख नहीं निकल सकती थी,...
वैसे गन्ने के खेत में लड़कियों, औरतों की चीख आम बात थी, बगल के खेत में काम करनेवालियां मुस्कराने लगती, अगल बगल देखतीं कौन इस समय नहीं नजर आ रही है,... और जब थोड़ी देर बाद वो लड़की टांग छितराये कहरती, चिलखती बाहर निकलती तो हंसी और चिढ़ाना शुरू हो जाता, मजा आया गन्ना खाने में, खाली घोंटी हो की चुसवाया भी गन्ना
पर ये उसकी बहन थी, सगी बहन, सहोदर,
और अरविन्द ने दोनों हाथों से गीता की कलाइयों को कस के पकड़ लिया, अब वो लाख चूतड़ पटके, छटक नहीं सकती थी, बिना पूरा लंड खाये,...
और बहन की बुर में फंसे सुपाड़े को पूरी ताकत से पेल दिया, फिर धक्के पर धक्के,.. दो चार धक्के में सुपाड़ा बहन की बुर में घुस गया था, और अटक गया था,... अरविन्द थोड़ी देर के लिए रुका, बहन की जाँघों को फिर फैलाया, उसकी फैली टांगों को अपने कंधे पे फिर से सेट किया,..
गीता ने कस के दोनों हाथों से गन्ने के खेत में घास पकड़ लिया, आँखे बंद कर लीं,...
धक्के, पर धक्के , अरविन्द अपनी पूरी ताकत से बहन की कलाई कस के पकड़ के पूरी ताकत से ठेल रहा था, पेल रहा था, धकेल रहा था, धक्के रुक नहीं रहे थे , रगड़ते, दरेरते, फैलाते, मोटा मूसल अंदर धंस रहा था, था भी तो था उसका बांस बित्ते भर का,
गीता कहर रही थी, तड़प रही थी, उसकी मुट्ठी में घास उखड के आ गयी,
गीता के चूतड़ के नीचे के गन्ने के खेत के बड़े बड़े ढेले, मिट्टी धूल हो गए ,
वो करवटें बदल रही थी, छटकने की कोशिश कर रही थी, किसी मर्द के नीचे आयी लड़की अगर एक बार सुपाड़ा घुस जाए तो बच पाती है,... क्या तो गीता कैसे अरविन्द से बच पाती,... और अरविन्द ने कस के दोनों हाथों से अपनी बहन की मुलायम कलाई जकड़ रखी थी, लंड अंदर घुसा था,
जैसे सांड़ दोनों अगले पैर से बछिया को दबोच लेता था, बस उसी तरह,
दस बीस धक्के और अबकी जो सुपाड़े तक निकाल के अरविन्द ने पेला पूरी ताकत से तो लंड पूरा अंदर और सुपाड़े ने बहन की बच्चेदानी पे वो जबरदस्त ठोकर मारी की गीता की देह तूफ़ान में पत्ते की तरह कांपने लगी, वो गहरी गहरी साँसे ले रही थी, ... जोबन दोनों पथरा गए थे,
भाई और बहन दोनों समझ रहे थे,
गीता झड़ रही थी, बार बार,...रूकती,... फिर झड़ना शुरू हो जाता,...
अरविन्द रुका हुआ था,...पर कुछ देर बाद उसने धक्के तो नहीं शुरू किये पर प्यार से दुलार से अपनी बहन के गुलाबी , गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ हलके हलके किस करना शुरू कर दिया, भाई के हाथ बहन के उभारों को सहलाने लगे, कभी बीच बीच में वो उसके छोटे छोटे बस आ रहे निप्स भी हिला देता, पकड़ के दबा देता और चार पांच मिनट में गीता इतनी गरमा गयी की अपनी बाहों में अरविन्द को भींच के हलके से बोली,
" भैया करो न,... "
कुछ देर तक तो अरविन्द उसके निप्स चूसता रहा, फिर सर उठा के बोला,
'बोल न बहना क्या करूँ,... "
धत्त,एक पल के लिए शरमा गयी, लेकिन चूत की आग,... नहीं रहा गया तो उसकी पीठ पे हलके हलके मुक्के से मारती बोली,
" जो अभी तक कर रहे थे "
" क्या कर रहा था ?" अरविन्द ने छेड़ा, लेकिन साथ साथ बहन की बर में जड़ तक घुसे लंड के बेस से बहना की क्लिट को हलके हलके रगड़ना घिस्से मारना शुरू कर दिया, ... और थोड़ी देर में ही गीता पागल हो गयी वो समझ गयी जब तक बोलेगी नहीं भाई करेगा नहीं।
" चोद न भैया, चोद बहनचोद अपनी बहना को,... स्साले तेरी एकलौती बहन हूँ, ये मोटा घोड़े ऐसा लंड किसके लिए बचा के रखा है, पेल स्साले बहनचोद "
गीता मस्ती में पागल हो रही थी, उसे इसकी भी चिंता नहीं थी की उसकी आवाज कहीं खेत के बाहर काम करने वालियों तक न पहुंचे,...
और अब अरविन्द भी मस्ती में पागल हो रहा था कितनों को उसने चोदा था इसी गन्ने के खेत में, लेकिन सगी छोटी बहन को खुले में गन्ने के खेत में चोदने का मजा ही अलग है और अपनी बहन के मुंह से सुनने का रस भी
कचकचा के अरविन्द ने गितवा के निपल्स काटे और छेड़ा, बोल न बहिनिया जोर से खूब जोर से पूरी ताकत से जो बोल रही थी और गितवा जोर से खूब जोर से बोली, ऐसी चुदवासी हो रही थी की बस,... कुछ भी कर सकती थी भाई के मूसल के लिए, जोर से बोली, बिना इस बात की परवाह किये की बगल के खेत में काम करने वाली हैं,
" चोद न भैया, चोद बहनचोद अपनी बहना को,... स्साले पेल दे लंड अपना अरविन्द भैया चोद न पूरी ताकत से अपनी गितवा को "
जवाब में कचकचा के उसके फूले फूले गोरे गुलाबी गाल , अरविन्द ने काट लिए, बहन की टांगों को मोड़ के उसे दोहरा कर दिया, जिसे अब हर धक्का सीधे बहन की बच्चेदानी पे लगे,... लंड आधा बाहर निकाल के पूरी ताकत से पेल दिया , और बोला,
" ले भाईचोद ले, ले घोंट अपने भाई का लंड , ले आज तेरी चूत न फाड़ी तो कहना,... "
अरविन्द की ये बात सुन के गीता क्यों चुप रही थी उसको भी मज़ा आ रहा था, उसने भी नीचे से धक्के के जवाब में धक्का लगाते हुए जवाब दिया,
" तो पेल न तेरी बहन हूँ सगी, पीछे नहीं हटने वाली, चोद कस कस के," अपने छोटे छोटे उभार भाई की छाती में रगड़ते गीता ने और उकसाया।
और अबकी जवाब में भाई ने जो धक्का मारा तो सीधे बहन की बच्चेदानी में, वो हिल गयी, लेकिन अभी अभी झड़ी थी उसे थोड़ा टाइम तो लगना था।
और उसकी चूँचियो को कस कस रगड़ते मसलते अरविंद के मन की बात मुंह पे आ गयी,...
" जो मज़ा स्साली बहन चोदने में वो किसी और मैं नहीं,... "
गीता खुश हो गयी और भाई को नीचे से चूमते बोली,...
" भैया, तू स्साला समझता तो है, लेकिन देर से,... मैं तो साल भर से तैयार थी, लेकिन तू ही,... "
पर उसकी बात आगे की बात मुंह की मुंह में रह गयी , भाई ने चोदने की रफ़्तार बढ़ा दी थी और धक्कों की ताकत भी। जो ताकत वो अच्छी तरह चुदी चुदाइ खूब खुली, फैली भोंसड़ी वालियों के साथ करता था वो अब मारे जोश के अपनी छोटी टीनेजर बहन के साथ गन्ने के खेत में कर रहा था, धक्कों के जोर से गीता के नीचे की फैली साड़ी तो कब की सिकुड़ मुकुड़ गयी थी और अब वो सीधे मट्टी पर लेटी, पड़ी थी , भाई के धक्कों से उसके चूतड़ों से रगड़ रगड़ कर ढेले धूल हो रहे थे,... पर गीता को भी फरक नहीं पड़ रहा था और वो भाई के साथ गन्ने के खेत में चुदाई का मजा ले रही थी। "
धक्के मारते हुए अरविन्द ने उसकी बात का जवाब दिया,... " स्साली देर से ही सही चल अब सूद के साथ उस देरी को चुकता कर दूंगा , किसी दिन बचेगी नहीं तू मेरे लंड के धक्के से,... "
खिलखिलाते हुए नीचे से धक्के लगाती गीता बोली, " भैया बचना कौन चाहती है , और तेरे बस में है क्या नागा करना, आएगा तो घर में ही न मैं खुद न तुझे चढ़ के चोद दूंगी,... "
वैसे तो अरविन्द को आसन बदल बदल के चोदने में मजा आता था लेकिन आज पहली बार बहन के साथ गन्ने के खेत में तो वो जोश से पागल हो गया था और बस बहन को दुहरा कर के , खेत में लिटा के हचक हचक के पूरी ताकत से,...
गीता चीख रही थी , सिसक रही थी अपने नाख़ून भाई की पीठ में गड़ा रही थी और,...
आधे घंटे बाद जब गीता झड़ी तो उसके अंदर उसका भाई भी, साथ साथ,... देर तक दोनों चिपके रहे और जब झड़ना रुका भी तो भी गीता ने अरविन्द को अपने ऊपर से उठने नहीं दिया, न ही बाहर निकालने दिया, बूँद बूँद करके मलाई बाहर रिस रही थी ,


