Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 38 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

घुस गया, धंस गया अंड़स गया --- गन्ने के खेत में





उसकी बहन की बुर अब एकदम गीली हो गयी थी, बुरी तरह पनिया रही थी, बीच बीच में बुर में घुसी ऊँगली की नक्लस से वो प्रेम गली के अंदर की नर्व्स को रगड़ के छेड़ छेड़ के बहन को पागल कर रहा था,...

आज गीता पहली बार गन्ने के खेत का मजा ले रही थी,... बस उसका यही मन कर रहा था की बस अब भैया पेल दे, टांग उठा के,

बहन के मन की बात अगर भाई नहीं समझेगा तो कौन समझेगा, वो भी एकलौती छोटी सगी बहन, कच्ची कली,.... अब तक उसने न जाने कितनी कच्ची कलियों को, लड़कियों को, भौजाइयों को चोदा होगा, लेकिन अपनी बहिनिया गितवा को देख के वो एकदम पागल हो जाता था, मन करता था बस पकड़ के चाप दे ,...

तो बस, लेकिन गीता ने खुद ही अपनी गोरी गोरी लम्बी लम्बी टाँगे उठा के अपने भैया के कंधे पर रख दी, अपनी केले के तने की तरह की चिकनी, मांसल जाँघे फैला दी,

जमीन खुद हल के फाल का इन्तजार कर रही थी,... बेताबी से.

लेकिन अरविंद ने गीता की कसी चूत में लंड नहीं पेला, वो अपने लोहे की रॉड से कड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ के, खुले सुपाड़े से थोड़ी देर तक बहन की फांकों को रगड़ता रहा , तो कभी मजे में खुल गयी, मटर के दाने ऐसी क्लिट पे रगड़ने लगा,... और क्लिट पे सुपाड़े की रगड़,... कित्ती छटी छिनार पागल हो जाती थीं, ये तो अभी नई बछिया थी,

लेकिन बहन को चोदने का मजा तो उसे पागल कर के ही था,... और अरविन्द ने गीता की लसलसाती पनियाई बुर की फांको को फैला के अपना पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाड़ा फंसा दिया,

गीता की चूत परपरा रही थी, फटी जा रही थी लेकिन वो सोच रही थी, भैया अब पेलेगा, अब पेलेगा, ... लेकिन उसने नहीं पेला।

उसने बहन के होंठों पर अपने होठ जमा दिए और हलके हलके चूसने लगा, और जैसे ही गीता ने मुंह खोला, उसने अपनी जीभ अपनी बहन के मुंह में ठेल दी , जैसे थोड़ी ही देर में वो अपना मोटा मूसल बहन की बिल में ठेलने वाला था,... और साथ में कस के अरविन्द ने अपने होंठों से गीता के होंठों को बंद कर दिया ,

अब उसकी चीख नहीं निकल सकती थी,...

वैसे गन्ने के खेत में लड़कियों, औरतों की चीख आम बात थी, बगल के खेत में काम करनेवालियां मुस्कराने लगती, अगल बगल देखतीं कौन इस समय नहीं नजर आ रही है,... और जब थोड़ी देर बाद वो लड़की टांग छितराये कहरती, चिलखती बाहर निकलती तो हंसी और चिढ़ाना शुरू हो जाता, मजा आया गन्ना खाने में, खाली घोंटी हो की चुसवाया भी गन्ना

पर ये उसकी बहन थी, सगी बहन, सहोदर,

और अरविन्द ने दोनों हाथों से गीता की कलाइयों को कस के पकड़ लिया, अब वो लाख चूतड़ पटके, छटक नहीं सकती थी, बिना पूरा लंड खाये,...

और बहन की बुर में फंसे सुपाड़े को पूरी ताकत से पेल दिया, फिर धक्के पर धक्के,.. दो चार धक्के में सुपाड़ा बहन की बुर में घुस गया था, और अटक गया था,... अरविन्द थोड़ी देर के लिए रुका, बहन की जाँघों को फिर फैलाया, उसकी फैली टांगों को अपने कंधे पे फिर से सेट किया,..

गीता ने कस के दोनों हाथों से गन्ने के खेत में घास पकड़ लिया, आँखे बंद कर लीं,...

धक्के, पर धक्के , अरविन्द अपनी पूरी ताकत से बहन की कलाई कस के पकड़ के पूरी ताकत से ठेल रहा था, पेल रहा था, धकेल रहा था, धक्के रुक नहीं रहे थे , रगड़ते, दरेरते, फैलाते, मोटा मूसल अंदर धंस रहा था, था भी तो था उसका बांस बित्ते भर का,

गीता कहर रही थी, तड़प रही थी, उसकी मुट्ठी में घास उखड के आ गयी,

गीता के चूतड़ के नीचे के गन्ने के खेत के बड़े बड़े ढेले, मिट्टी धूल हो गए ,

वो करवटें बदल रही थी, छटकने की कोशिश कर रही थी, किसी मर्द के नीचे आयी लड़की अगर एक बार सुपाड़ा घुस जाए तो बच पाती है,... क्या तो गीता कैसे अरविन्द से बच पाती,... और अरविन्द ने कस के दोनों हाथों से अपनी बहन की मुलायम कलाई जकड़ रखी थी, लंड अंदर घुसा था,

जैसे सांड़ दोनों अगले पैर से बछिया को दबोच लेता था, बस उसी तरह,

दस बीस धक्के और अबकी जो सुपाड़े तक निकाल के अरविन्द ने पेला पूरी ताकत से तो लंड पूरा अंदर और सुपाड़े ने बहन की बच्चेदानी पे वो जबरदस्त ठोकर मारी की गीता की देह तूफ़ान में पत्ते की तरह कांपने लगी, वो गहरी गहरी साँसे ले रही थी, ... जोबन दोनों पथरा गए थे,

भाई और बहन दोनों समझ रहे थे,

गीता झड़ रही थी, बार बार,...रूकती,... फिर झड़ना शुरू हो जाता,...

अरविन्द रुका हुआ था,...पर कुछ देर बाद उसने धक्के तो नहीं शुरू किये पर प्यार से दुलार से अपनी बहन के गुलाबी , गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ हलके हलके किस करना शुरू कर दिया, भाई के हाथ बहन के उभारों को सहलाने लगे, कभी बीच बीच में वो उसके छोटे छोटे बस आ रहे निप्स भी हिला देता, पकड़ के दबा देता और चार पांच मिनट में गीता इतनी गरमा गयी की अपनी बाहों में अरविन्द को भींच के हलके से बोली,

" भैया करो न,... "

कुछ देर तक तो अरविन्द उसके निप्स चूसता रहा, फिर सर उठा के बोला,

'बोल न बहना क्या करूँ,... "

धत्त,एक पल के लिए शरमा गयी, लेकिन चूत की आग,... नहीं रहा गया तो उसकी पीठ पे हलके हलके मुक्के से मारती बोली,

" जो अभी तक कर रहे थे "

" क्या कर रहा था ?" अरविन्द ने छेड़ा, लेकिन साथ साथ बहन की बर में जड़ तक घुसे लंड के बेस से बहना की क्लिट को हलके हलके रगड़ना घिस्से मारना शुरू कर दिया, ... और थोड़ी देर में ही गीता पागल हो गयी वो समझ गयी जब तक बोलेगी नहीं भाई करेगा नहीं।

" चोद न भैया, चोद बहनचोद अपनी बहना को,... स्साले तेरी एकलौती बहन हूँ, ये मोटा घोड़े ऐसा लंड किसके लिए बचा के रखा है, पेल स्साले बहनचोद "

गीता मस्ती में पागल हो रही थी, उसे इसकी भी चिंता नहीं थी की उसकी आवाज कहीं खेत के बाहर काम करने वालियों तक न पहुंचे,...

और अब अरविन्द भी मस्ती में पागल हो रहा था कितनों को उसने चोदा था इसी गन्ने के खेत में, लेकिन सगी छोटी बहन को खुले में गन्ने के खेत में चोदने का मजा ही अलग है और अपनी बहन के मुंह से सुनने का रस भी

कचकचा के अरविन्द ने गितवा के निपल्स काटे और छेड़ा, बोल न बहिनिया जोर से खूब जोर से पूरी ताकत से जो बोल रही थी और गितवा जोर से खूब जोर से बोली, ऐसी चुदवासी हो रही थी की बस,... कुछ भी कर सकती थी भाई के मूसल के लिए, जोर से बोली, बिना इस बात की परवाह किये की बगल के खेत में काम करने वाली हैं,

" चोद न भैया, चोद बहनचोद अपनी बहना को,... स्साले पेल दे लंड अपना अरविन्द भैया चोद न पूरी ताकत से अपनी गितवा को "

जवाब में कचकचा के उसके फूले फूले गोरे गुलाबी गाल , अरविन्द ने काट लिए, बहन की टांगों को मोड़ के उसे दोहरा कर दिया, जिसे अब हर धक्का सीधे बहन की बच्चेदानी पे लगे,... लंड आधा बाहर निकाल के पूरी ताकत से पेल दिया , और बोला,

" ले भाईचोद ले, ले घोंट अपने भाई का लंड , ले आज तेरी चूत न फाड़ी तो कहना,... "

अरविन्द की ये बात सुन के गीता क्यों चुप रही थी उसको भी मज़ा आ रहा था, उसने भी नीचे से धक्के के जवाब में धक्का लगाते हुए जवाब दिया,

" तो पेल न तेरी बहन हूँ सगी, पीछे नहीं हटने वाली, चोद कस कस के," अपने छोटे छोटे उभार भाई की छाती में रगड़ते गीता ने और उकसाया।

और अबकी जवाब में भाई ने जो धक्का मारा तो सीधे बहन की बच्चेदानी में, वो हिल गयी, लेकिन अभी अभी झड़ी थी उसे थोड़ा टाइम तो लगना था।

और उसकी चूँचियो को कस कस रगड़ते मसलते अरविंद के मन की बात मुंह पे आ गयी,...

" जो मज़ा स्साली बहन चोदने में वो किसी और मैं नहीं,... "

गीता खुश हो गयी और भाई को नीचे से चूमते बोली,...

" भैया, तू स्साला समझता तो है, लेकिन देर से,... मैं तो साल भर से तैयार थी, लेकिन तू ही,... "

पर उसकी बात आगे की बात मुंह की मुंह में रह गयी , भाई ने चोदने की रफ़्तार बढ़ा दी थी और धक्कों की ताकत भी। जो ताकत वो अच्छी तरह चुदी चुदाइ खूब खुली, फैली भोंसड़ी वालियों के साथ करता था वो अब मारे जोश के अपनी छोटी टीनेजर बहन के साथ गन्ने के खेत में कर रहा था, धक्कों के जोर से गीता के नीचे की फैली साड़ी तो कब की सिकुड़ मुकुड़ गयी थी और अब वो सीधे मट्टी पर लेटी, पड़ी थी , भाई के धक्कों से उसके चूतड़ों से रगड़ रगड़ कर ढेले धूल हो रहे थे,... पर गीता को भी फरक नहीं पड़ रहा था और वो भाई के साथ गन्ने के खेत में चुदाई का मजा ले रही थी। "

धक्के मारते हुए अरविन्द ने उसकी बात का जवाब दिया,... " स्साली देर से ही सही चल अब सूद के साथ उस देरी को चुकता कर दूंगा , किसी दिन बचेगी नहीं तू मेरे लंड के धक्के से,... "

खिलखिलाते हुए नीचे से धक्के लगाती गीता बोली, " भैया बचना कौन चाहती है , और तेरे बस में है क्या नागा करना, आएगा तो घर में ही न मैं खुद न तुझे चढ़ के चोद दूंगी,... "

वैसे तो अरविन्द को आसन बदल बदल के चोदने में मजा आता था लेकिन आज पहली बार बहन के साथ गन्ने के खेत में तो वो जोश से पागल हो गया था और बस बहन को दुहरा कर के , खेत में लिटा के हचक हचक के पूरी ताकत से,...

गीता चीख रही थी , सिसक रही थी अपने नाख़ून भाई की पीठ में गड़ा रही थी और,...

आधे घंटे बाद जब गीता झड़ी तो उसके अंदर उसका भाई भी, साथ साथ,... देर तक दोनों चिपके रहे और जब झड़ना रुका भी तो भी गीता ने अरविन्द को अपने ऊपर से उठने नहीं दिया, न ही बाहर निकालने दिया, बूँद बूँद करके मलाई बाहर रिस रही थी ,
 
अरविन्द भैया के साथ





आधे घंटे बाद जब गीता झड़ी तो उसके अंदर उसका भाई भी, साथ साथ,... देर तक दोनों चिपके रहे और जब झड़ना रुका भी तो भी गीता ने अरविन्द को अपने ऊपर से उठने नहीं दिया, न ही बाहर निकालने दिया, बूँद बूँद करके मलाई बाहर रिस रही थी ,

और जब दोनों अलग भी हुए तो अरविंद ने गीता को अपनी गोद में बैठा लिया, और कुछ देर तक तो दोनों बतियाते रहे फिर चुम्मा चाटी और बहन चूतड़ों से दब दब के खूंटा फिर खड़ा हो गया था , ... और बैठे बैठे ही थोड़ा सा उचका के अपने मोटे खूंटे पे बिठा लिया , बिल में मलाई भरी थी लबालब, तो बस थोड़े ही जोर से मूसल अंदर, कुछ देर तक तो ऐसे ही

लेकिन गन्ने के खेत में वो भी सगी बहन हो तो कौन एक बार छोड़ देगा, ... तो अरविन्द ने गीता को खेत में लिटा के फिर दुबारा पहले से भी कस कस के,...

जब ढाई घंटे बाद गीता खेत से निकली तो दो बार चुदने के बाद चला नहीं जा रहा था , पीठ में दर्द हो रहा था हल्का हलका , लेकिन वही दर्द जो हर लड़की चाहती है, और हो,.. और हो,...

घर पहुंची तो बाहर ग्वालिन भाभी मिलीं, उनकी तेज आँख ने पहचान तो लिया ये खेत जुतवा के आ रही है लेकिन भौजी कौन जो ननद को न छेड़े,...

"कहीं खेत में भहराय गयी थी का जउन इतना माटी,... " गीता की साड़ी में चूतड़ों पर लगी मिट्टी झाड़ते वो बोलीं और लगे हाथ पिछवाड़े की दरार में एक ऊँगली कस के घुसेड़ते उसके कान में बोलीं,

" अकेले गिरी थीं या ऊपर कउनो और चढ़ा था,... "

गीता मुस्कराती खिलखिलाती घर में,..

गन्ने के खेत का किस्सा सुनते छुटकी भी दीदी के गाँव का हाल चाल भी समझ रही थी लेकिन गीता से वो सब हाल खुलासा पूछ लेना चाहती थी,

तो दी फिर किस और दिन अरविन्द भैया के साथ गन्ने के खेत में,

गीता फिर हंसती रही रही खिलखिलाती रही और उसकी छोटी छोटी चूँचियों को मसलती बोली,... अभी तुमको गाँव में आये २४ घण्टे भी तो नहीं हुए, दो चार दिन में सीख जाओगी, कुल राह डगर। अरे यहाँ के लौंडे, और यहाँ के खेत एक दिन भी नहीं छोड़ेंगे भौजी की बहिनी तुमको बिना खेत में घसीटे,... "

छुटकी मुस्करायी लेकिन बात खींच के फिर गीता पे ले आयी,

" दी , अपना बताओ,... फिर किसी दिन और,... "

" ये पूछो किस दिन नहीं,... अब अरविन्द को भी मजा मिल गया था तो, कभी कभी तो वो स्कूल के बाहर ही मेरे बाइक लेके खड़ा रहता और स्कूल की छुट्टी होते ही उठा लेता, और सीधे कभी खेत,कभी बाग़,... गाँव में यही तो फायदा है जगह की कोई कमी नहीं।

खेत बाग़ के अलावा नदी के किनारे जहाँ कटाव है , सरपत के जुट्टे, बांस बँसवाड़ी,... रात में तो छोड़ने का सवाल नहीं था माँ खुद उसे उकसा के , सुबह स्कूल जाने से पहले तो जरूर, ... जब सहेलियां बाहर आ जाती थीं तब,... और कुछ नहीं तो मुंह में मलाई खिला के भेजता था,... और दिन में एक दिन तो ट्यूबवेल पे , स्कूल की छुट्टी जल्दी हो गयी थी और वो स्कूल के बाहर ही, बस सीधे, ट्यूबवेल के कमरे में,... और नहाये भी हम दोनों साथ साथ ट्यूबवेल पे "
 
किस्सा अमराई का ---------------- फुलवा की ननदिया का





"गीता दी, आपने कभी खेत में अमराई में या कहीं और खुले में, अपनी किसी सहेली के साथ, अरविन्द भैया के साथ मस्ती की है " अपनी बड़ी बड़ी गोल गोल आँखे नचा के छुटकी ने गितवा से पूछा।

" तू न बड़ी बदमाश है, चल तेरे साथ करुँगी न मैं तू और तेरा अरविन्द भैया, " दुलराते हुए गितवा ने छुटकी को भींच लिया और उसके बस आते हुए टिकोरे कस के दबा दिए।

" नहीं नहीं बताइये न, आप मेरी बहन हो, बहन से क्या छुपाना,... "

गितवा जिस तरह से मुस्करा रही थी, छुटकी समझ रही थी कुछ तो है बात और गितवा ने बताना शुरू कर दिया,

" मेरी स्कूल वाली सहेलियां, ... वो तो बहुत लिबराती थीं की भैया को एक बार, बस एक बाद दिलवा दूँ, अच्छा कुछ तो नहीं पकड़वा दूँ उनके हाथ में,... लेकिन उन सबों के साथ नहीं, हाँ तभी मेरी क्लास वाली नदीदी, मेरी बिल से निकाल के ऊँगली डाल के भैया की मलाई रोज चखती थीं और मैं भी मना नहीं करती थी, मैं भी तो चाहती थी जलें स्साली सब कमीनी, सब जब अपने भैया बहनोई नाते रिश्तेदारों से चुदवा के आती थीं तो रोज मुझे जलाती थीं, चिढ़ाती थीं,... और अब मैं बिना नागा तो सालियों की झांटे सुलगती थीं ,... "

" तो किसके साथ " एक अच्छे एंकर की तरह छुट्टी बात को सीधे पटरी पर ले आती थी,

" मेरी सबसे पक्की सहेली, रोपनी के बाद फुलवा की छुटकी बहिनिया, चमेलिया बन गयी थी, उमर में मुझसे थोड़ी छोटी क्या समौरिया समझो, और मस्ती में दो हाथ आगे,... और फुलवा की ननद भी, मैं और चमेलिया मिल के उसे चिढ़ाते थे, छेड़ते थे आखिर हम दोनों की भी ननद ही लगती थी उमर में भी हमारी जैसी,... चमेलिया ने तो उसे चमरौटी, भरौटी अहिरौटी, पठान टोला सब घुमा दिया था, कहीं के लौंडे बचे नहीं थे , जो फुलवा की ननद पे चढ़े ना हों। कोई दिन नागा नहीं जाता था जब चमलिया उस के ऊपर चार पांच लौंडो को न चढ़ाये।

चमेलिया मुझे भी बाहर एक एक जगह दिखाती थी जहाँ उस के टोले की लड़कियां, खाली गन्ने के खेत नहीं, बँसवाड़ी के पीछे, नदी के किनारे, सरपत के जुटे के पीछे, बीसों जगह तो गाँव के आसपास ही और फिर मैं अरविन्द भैया के साथ,...

लेकिन छुटकी तो मामला अरविन्द भैया पे लाना चाहती थी उसने फिर स्टोरी को वापस ट्रैक पे किया

" दी मेरा मतलब,... तो क्या आपने कभी चमेलिया के साथ और अरविन्द भैया के साथ गन्ने के खेत या अमराई में मस्ती,... "

" तू स्साली न पिटेगी मेरे हाथ से बल्कि चुदेगी अपने अरविन्द भैया के साथ गन्ने के खेत में अमराई में , ... तुझे सब मालूम करने का शौक है न,... " गितवा झूठ मूठ का गुस्सा करते बोली , फिर हंस के उसे चूम के बोली

" एक बार, फुलवा की ननदिया के साथ मैं और चमेलिया मस्ती कर रही थीं उसी अमराई में जिसमे भैया ने मुझे पेड़ के साथ खड़ा कर के पेला था,... खूब गझिन हम लोगों का बड़ा सा बाग़ डेढ़ दो सौ आम के पेड़ ,... अगले दिन भिन्सारे फुलवा की ननदिया को अपने मायके वापस जाना था, हम दोनों, मैं और चमेलिया उसे छेड़ रहे। आज स्कूल की भी मेरी छुट्टी थी, माँ भी बुआ के यहाँ गयी थीं देर रात को ही आतीं, छुट्टी ही छुट्टी।

" स्साली बिना गाँड़ मरवाये जा रही है ये बड़ी बेईमानी है " चमेलिया ने फुलवा की ननद को गुदगुदाते हुए छेड़ा

और फिर मैंने जोड़ा ' बुर तो हमरे भैया से तो फड़वायी हो गाँड़ का अपने भैया के लिए बचा के ले जारही हो "

छुटकी से नहीं रहा गया वो उछल गयी

" सच में ये तो बहुत नाइंसाफी है क्या अरविन्द भैया ने उसकी गाँड़ नहीं मारी थी , आप कह रही थी चुदवाती तो भैया से खूब चूतड़ मटका मटका के तो पिछवाड़े के मामले "

एक बार फिर फिर उसके रसीले होंठों को चूम के गितवा बोली,

" एक बात समझ ले की ननद का मतलब छिनार, और फुलवा की ननद तो हम सब की पूरे गाँव की लड़कियों की गाँव की लड़कियों की ननद, छिनार नहीं जब्बर छिनार। स्साली नौटंकी करती थी, लेकिन गलती वो स्साले तेरे भाई की अरविन्द की भी कम नहीं। लंड उसका जितना सख्त है दिल उतना मुलायम है और बहनचोद बुद्धू भी बहुत है कोई भी लड़की उसे चरा देगी। मैंने भैया से पूछा भी कई बार , कहा भी तो वो बोला की अरे वो बहुत चिल्लाती है , नौ नौ टसुए बहाने लगती है। जैसे ही मैं पिछवाड़े छुआता भी भी हूँ एकदम उछल जाती है, और टाइट है भी उसकी बहुत। अब वहां खेत में कहाँ तेल "

छुटकी वैसे तो बड़ी बहन की बात कभी नहीं काटती थी लेकिन अब उससे नहीं रहा गया, उफनती हुयी बोली,

" स्साली छिनार, अरे पटक के सूखे पेलना चाहिए था,... "

" यही तो , मैं भी भैया से बार बार कहती थी लेकिन वो सुने तब ना गीता ने अपना दुख सुनाया।

" तो क्या फुलवा की ननद अपना पिछवाड़ा कोरा लेकर चली गयी। " छुटकी उदास हो के बोली।

" अरे नहीं यार तेरी बड़ी बहन किस लिए हैं हम लड़कियों की नाक कट जाती अगर उसकी फटती नहीं और फिर मेरी पक्की सहेली चमेलिया थी न ,... लेकिन तू अब बीच में मत बोलना , वरना नहीं सुनाऊँगी अमराई का किस्सा। "

छुटकी ने दोनों कान पकडे और होंठ पे ऊँगली लगा के चुप रहने का इशारा किया और गितवा ने अमराई का किस्सा आगे बढ़ाया।
 
भाग ५२

गन्ने के खेत में भैया के संग

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जोरू का गुलाम भाग १८२ - कोचिंग, और पार्टी

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जोरू का गुलाम भाग १८६ - कोचिंग, और पार्टीमिसेज मल्होत्रा गुड्डी को समझा रही थी और मुझे याद आ रहा था नीचे सैंडविच , फास्ट फ़ूड की दुकानों पर जितने लड़के लड़कियां थे सब ने गले में ये टांग रखा था। और आर्म्स टैग भी ,गुड्डी अपने आर्म्स टैग को देख रही थी तो मिसेज मल्होत्रा ने मुस्करा कर कहा "...

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गुड्डी ने ना किया लेकिन मिसेज मल्होत्रा ने अनुसनी कर दी और अपनी बात जारी रखी ,

" इस में १०० से सवा सौ लड़के लड़कियां , लेकिन हर सिक्स मंथ में कोई सिर्फ एक बार ही आउटडोर पार्टी ज्वाइन कर सकता है , जिससे सबको चांस मिल जाए ,... वैसे भी तेरे सेक्शन वाले ज्यादा इसमें जाते नहीं उसकी अपनी ही पार्टियां होती रहती हैं। "

" पार्टी का वेन्यू ,... ?" मैंने पूछा।

मिसेज मल्होत्रा मुस्करा के बोलीं सीक्रेट और सरप्राइज।

फिर हंस के कहा कल तक फाइनल हो जाएगा , लेकिन हम सोशल मिडिया पे पर उसे पब्लिश नहीं करते , सिर्फ असेम्बली का प्वाइंट बताते है , वो भी अलग अलग स्टूडेंट्स को अलग ,कुल तीन चार , वहां से बस से हर बस कम से कम २० -२५ किलोमीटर दूर ,... कोई फ़ार्म हाउस , या ऐसी ही जगह ज्यादातर गाँव के माहौल का और जहाँ कम्लीट प्राइवेसी हो , क्योंकि लड़के लड़कियां होंगे तो धमाल होगा ही। हम लोग किसी इवेंट मैनेजर का इस्तेमाल करते हैं जिन्हे इस तरह की युथ ग्रुप्स की पार्टी का एक्सपीरियंस हो , पूरा एरिया सीक्लूडेड , विद आउटर एरिया सिक्योरिटी ,... वीकेंड में , और ये रात भर , अगले दिन दोपहर के पहले , वी इंश्योर दैट एंटायर प्लेस इस वैकेंट एंड एवरीबडी रिटर्न्स सेफ्ली।

मेरी बात काट के मिसेज मल्होत्रा हँसते हुए बोलीं

" ये पूछ क्या नहीं होता,...सब कुछ होता है, यार जहाँ इत्ते टीनेजर्स होंगे, कोई रोक टोक नहीं ड्रिंक्स विंक्स सब और वो भी कम्पलसरी,... पार्टी का मूड बनाने के लिए ,... और पार्टी की कल्चर है कोई किसी को मना नहीं करता, किसी बात के लिए,... " गुड्डी की ओर देख के आँख मार के वो बोलीं,

" हम दोनों की ननद तो बहुत सीधी है ये क्या इसके मायकेवाली कोई भी किसी को मना नहीं करते सबका मन रख लेते हैं " खिलखिला के मैंने गुड्डी की ओर से जवाब दिया,

" और ड्रिंक्स में सॉफ्ट कुछ भी नहीं " मिसेज मल्होत्रा ने हाल खुलासा बताया तो फिर मैंने एक बार गुड्डी की ओर से जवाब दिया,

" हम दोनों की ननद को भी हार्ड ही अच्छा लगता है , ड्रिंक्स भी और पार्टी में लड़के भी लेकिन डिंक्स के साथ विंक्स भी मैंने आँख मार के पूछा

एकदम आज कल के लड़के लड़कियां तो उसके बिना,... सबसे हॉटेस्ट रेव पार्टीज जो आर्गनाइज करते हैं, जहाँ सब कुछ मिलता है और बेस्ट क्वालिटी का और सब आवश्यक सामग्री, वो इवेंट मैनेजर होते हैं हमारी ननद को देख के तो कोई भी हार्ड हो जाएगा,... है ही इत्ती प्यारी हॉट हाट "
 
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भाग ५२

गन्ने के खेत में भैया के संग

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जोरू का गुलाम भाग १८३

रसगुल्ले और छन्दा का फंदा

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जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७ मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में, मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें

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जोरू का गुलाम भाग १८३

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जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७ मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में, मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें

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