फुलवा की ननद-घर वापसी

तीसरी बार अरविन्द ऐसे साइड से फुलवा की ननद के पिछवाड़े झड़ा। फुलवा की ननद अब उठने के लायक भी नहीं रह गयी थी बार बार कह रही थी अब बस
चमेलिया और गितवा बोलीं
" तीन बार नहीं कम से कम चार बार "
एक बार फिर दोनों सहेलियों ने चूस के भाई का लंड मिल के खड़ा किया और फुलवा की ननद की बोला

" चल स्साली चढ़ "
वो समझी की ऊपर चढ़ के चुदवाने की बात हो रही है लेकिन गितवा पहले से तैयार थी उसने ऐन मौके पे अपने भाई का खूंटा बजाय आगे के पीछे की ओर सटा दिया, ऊपर से चमेलिया ने बहन की ननद के दोनों कंधे पकड़ के दबा दिए,...
एक बार फिर से चीख पुकार

कुछ देर तक तो अरविन्द उसकी कमर पकड़ के कभी नीचे करता कभी नीचे से धक्का मारता, लेकिन गीता ने मना कर दिया नहीं अब ये खुद ऊपर नीचे चढ़ उतर के मरवाएँगी,... वरना अंदर ऐसी ही पेल के रखना,

बेचारी फुलवा की ननद , लेकिन कुछ देर के बाद उसने हलके हलके ऊपर नीचे हो के मरवाना शुरू किया दोनों हाथ जमीन पे रख के पुश कर के ऊपर होती, फिर धीरे धीरे सरकती हुयी नीचे, जिस गाँड़ में इस अमराई में आज घुसने के पहले ऊँगली घुसने में मुश्किल होती थी वो आज खुद कलाई ऐसा मोटा ऊपर नीचे कर के घोंट रही थी।
जब अरविन्द चौथी बार फुलवा की ननद की गाँड़ में झडा तो बेचारी खड़ा होने कौन कहे, उठने की हालत में नहीं थी, चमेलिया और गितवा ने उसे कपड़े पहनाये, ...पहनाये क्या देह पर टांग दिए,
लेकिन चमेलिया को एक बदमाशी सूझी वो बोली
" अरे ननद रानी अपने पिछवाड़े क स्वाद तो भैया क खूंटा से हमरे ऊँगली से ले लिया , हमरे पिछवाड़े क खुदे मुंह से चूस के तो ये गितवा बची है,... और जब तक गितवा समझे, चमेलिया की ऊँगली उसके पिछवाड़े और वहां से ननद के मुंह में
और उन दोनों के सहारे से किसी तरह फुलवा की ननद वापस लौटी,
सांझ हो चुकी थी।

जमीन पर एक कदम रखते ही जोर की चीख निकलती,... पिछवाड़े से अभी भी रह रह के सड़का टपक रहा था गालों पर जोबन पर दांतों के नाख़ून के निशान
गितवा की माँ भी फुलवा की माँ के घर के बाहर खड़ी थी,...
समझ तो दोनों गयीं की ये बुरी तरह से गाँड़ मरवा के आ रही है और खुश भी हुयी लेकिन गितवा की माँ ने पूछ ही लिया
" अरे ये का हुआ, ये तोहार हालत,... "

फुलवा की ननद की तो दर्द से हालत खराब थी, गुस्से से फुलवा की माँ की ओर इशारा करते बोली,
" और कौन करेगा, इनके दामाद ने,... चला नहीं जा रहा, कल सबेरे भिन्सारे वापस जाना है , एक कदम तो उठ नहीं रहा है कैसे गाँव जाउंगी अपने "
" अरे तो जिसने ये हालत किया है वही ले जायेगे पहुंचाएगा,... "गितवा की माँ मुस्कराते हुए बोली
तब तक अरविन्द कहीं दिख गया और गितवा की माँ ने उसे जोर से बुलाया,...
" सुन कल भिन्सारे, अपनी फटफटिया पे इसको फुलवा के ससुरारी, पीछे बैठा के, और हाँ बहिनयोरे जा रहे हो खाली हाथ नहीं जाना चाहिए,... अभी जा के पांच सेर मिठाई ले आना , ... "
" बस , हो गया न फटफटिया पे टांग फैलाये रखना दोनों " चमेलिया ने चिढ़ाया

" और अरविन्द भैया को कस के पकडे रखना " गितवा क्यों छोड़ देती।
फुलवा की माँ बोली अरे तो फैलाये रहेगी न टांग कौन बड़ी बात है और बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान दबायी ,...
अगले दिन जब फुलवा की ननद जा रही थी तो गितवा भी आयी और फुलवा की ननद उसे ऐसे गले भेंट के मिली जैसे कोई सगी बहन हो,... और वादा भी किया की बस होली ख़तम होने के चार पांच दिन बाद वो आएगी और फिर महीना भर रहेगी,...
और मामला भी साफ़ किया , दसवे का इम्तहान,... कउनो स्किम है की जो लड़की दस पास कर लेती हैं उनको कउनो कन्या योजना में दस हजार मिलता है तो बड़े मास्टर बोले हैं की बस इम्तहान मैं दे दूँ पास कराने का जिम्मा उनका,...
पीछे से चमेलिया ने अपनी बहन के ननद के दोनों जोबन दबाते हुए कहा, और पास कराई में ये मास्टर जी को दे देना,..
लेकिन इम्तहान के बाद , फुलवा की ननद ने हामी भरते हुए कहा, ... कॉपी वापी पे खाली हम नाम लिखे देंगे बाकी गुरु जी,...

अरविंद इन्तजार कर रहा था और फुलवा की ननद फटफटिया पर पीछे बैठ के चल दी,...
गीता थोड़ी देर चुप रही
फिर मुस्कराते हुए बोली तुम पूछती रहती हो ने ये कहाँ सीखी कैसे तो चलो बता देती हूँ माँ ने ही,...
,... लेकिन मुझे उन्होंने जो चीजें सिखायीं न,... हम लोगों के बीच रिश्ता माँ बेटी से बढ़ के सहेली का हो गया था,... हम दोनों बिना बात के खिलखिलाते रहते थे, देर तक बतियाते, माँ अपने मायके की, शादी के बाद की, और मैं भी स्कूल की, सहेलियों की, कुछ भी माँ से छुपाती नहीं थी। और माँ ने वो बातें बतायीं, वो सिखाया,... जो एक औरत ही,... " ये कह के गीता खिलखिलाने लगी.
और छुटकी के मन में और उत्सुकता बढ़ गयी, बताओ न दीदी, ... मुझसे क्या छिपाना।
गीता ने उसे गले से लगा लिया और चूम के बोली, " बुद्धू, ये बताने से ज्यादा सिखाने की चीज है, लेकिन चल तुझे भी सिखा दूंगी। "
और बताना शुरू किया, की माँ ने उसे कैसे बताया था की क्या क्या जोबन पे लगाएं क्या एक्सरसाइज करें की जोबन हरदम तने कड़े रहें,... चाहे जितना दबवाओ, मिसवाओ,... और माँ के खुद उन्होंने तो हम दोनों को दूध पिलाया था लेकिन अभी भी बिना ब्रा के एकदम टनाटन रहते थे उनके, हरदम तने खड़े,... मालिश का तरीका, बाहर से नीचे की ओर से हलके हाथ से ऊपर की ओर और एक खास् तेल था उनके पास, दस बाहर जड़ी बूटियां पड़ी थी उसमें, और उस तेल को बनाने का तरीका भी मुझे सिखाया था। पहले तो हर दूसरे तीसरे दिन में मेरे उभारों पे वो तेल लगा के, फिर खुद मुझे बोलतीं की मैं उनके सामने करूँ , हफ्ते भर में मैं पक्की हो गयी और चुनमुनिया का भी,.. "
छुटकी अपने को रोक नहीं पायी और बोली, चुनमुनिया का क्या,

" अरे वो असल में माँ का नहीं नानी का था, भैया के होने के बाद,... उनकी माँ ने सिखाया था कैसे क्या करें। उन्होंने मेरी माँ से कहा था की बच्चे होने के बाद औरत की ढीली हो जाती है , और फिर मरदो का मन फिरने लगता है तो उन्होंने कोई मलहम सा देसी दारू में मिला के ऊँगली में लगा के,... तो वही माँ मेरे साथ , ... और बोलती थीं यार तू दिन रात चुदवा, इस उमर में नहीं चुदवायेगी तो कब, और तेरे लिए मैंने सांड़ ऐसा बेटा जना है, तेरा भाई,.... लेकिन चूँची और चूत दोनों खूब टाइट होनी चाहिए,... पहली बार चुद रही लड़की की तरह,.. तो वो अभी भी हफ्ते में एक दो बार,... और रोज दो बार सुबह शाम और कभी कभी दिन में भी,... स्कूल में भी ,... "
" क्या " छुटकी बोली,
" तू भी किया कर ,... " बड़ी बहन की तरह गीता ने समझाया,... जब जोर से मूतवास लगती है न और चूत को भींच के रोकते हैं, बस वही,... बस पूरी ताकत से , लेकिन गिनती गिन के १०० तक रोके रह,... फिर धीरे धीरे टाइम बढ़ा के और देर तक,... फिर ढीला करो, लेकिन एक झटके में नहीं नहीं बहुत धीरे धीरे काम से कम १०० तक गिनती गिन पूरी ढीला होने तक,... और ये काम कम से कम २० बार, सुबह शाम, ... सिखा दूंगी न मैं तुझे सब,... और एक बात माँ ने समझायी मरद की देह में क्या होता है खूंटे के अलावा, उन्हें गरम करने के लिए,
छुटकी कान पारे सुन रही थी,...
गीता खिलखिला के बोली, माँ ने जो बताया तो मैं हंसती रही लेकिन बात उनकी सोलहों आने सही, वो बोलीं की जो जो छूने से लड़कियां गर्माती हैं बस वही, जैसे लड़कियां चूँची दबाते मसलते ही गर्माने लगती है, तो मर्द के भी जो छोटी छोटी टिट्स होती हैं वहां बस सहला दो , नाख़ून से , जीभ से छू दे,...
लेकिन छुटकी हँसते हुए बोली पर दी, उनकी चूत तो नहीं होती न,
" एकदम होती है बस पीछे की ओर होती है " हंसती हुयी गीता बोली और छुटकी को गले लगा के समझा दिया , अरे पीछे वाली दरार छूने से भी बहुत मरद गिनगीना जाते हैं , चूतड़ सहलवाना भी अच्छा लगता है , चल सब सब समझा दूंगी तुझे अभी तो तू तीन चार महीने है न यहां। "
लेकिन एक बात और छुटकी को नहीं समझ में आ रही थी और उसने पूछ लिया,
"माँ नहीं है , कहाँ गयी कब आएँगी "
और अब गीता थोड़ी खामोश हो गयी पर रुक रुक के उसने सब बता दिया