Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 42 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

गीता अब बड़ी हो गयी





गीता रुक गयी, फिर बोली ऐसा नहीं है की मजूर आसानी से गाँव में मिल जाते हैं

अब छुटकी को मौका मिल गया, वो चढ़ गयी, बोली यही बात तो मैं भी कह रही थी की फिर क्यों

लेकिन गीता ने उसे बात पूरी करने का मौका नहीं दिया, बोली अब रहोगी न तीन चार महीने तो पता चला जाएगा, ... अरे जब काम होता तो एकसाथ, सबकी कटाई दँवाई,... और जब नहीं होता तो कुछ नहीं, गर्मी भर देखना,...

पर अब छुटकी हार नहीं मानने वाली थी

बोली दी, लेकिन अब मजूरी का भी तो, गाँव में नहीं रहे लेकिन रेडियो सुनते हैं अखबार पढ़ते हैं , ...कोई स्किम है

गीता जैसे जल बुझ गयी, तू पढ़ी हो हम देखते हैं , १०० दिन मतलब २६५ दिन नहीं मिलेगा। उही में परधान जिसको चाहेगा लगाएगा, मेट की चिरौरी करो, रूपया में चार आना तो हाजिरी लगाएगा, वर्ना काम कोई करे हाजिरी किसी की,... कई तो खाली हाजिरी लगाए अंगूठा निशानी सब कराय के गायब,... अगर जुगाड़ है वरना २०-३० दिन मिल जाए तो बहुत,... और जो बाहर जाते है उनका तो हर महीने मनी आर्डर आएगा आजकल तो मोबाइल से ही,... केतना तो पैसा जोड़ के थोड़ बहुत खेत भी, मनई सोचता है हमारा जो हुआ बच्चो का भी,... अच्छा स्कूल मिल जाये,...

फिर पलट के उसने छुटकी पे ही वार किया,..

अपने दीदी क ससुराल देखो, ... उनके जेठ गए न बाहर, फिर अब जेठानी भी चली गयी,... और अपनी छुटकी ननद को भी ले गयी की वहां अच्छा स्कूल है,... और अब तोहरे घर में केतना आदमी केतना औरत, ... और तुमको ही न अब हम जल्दी जाने देंगे न गाँव के लौंडे,... तो तू, हमार नयकी भौजी, उनकी सास,... और मरद में तोहार जीजू,... अब ये जिन कहना की उ अकेले तीन तीन के लिए काफी हैं,...

हँसते हुए गीता के मुंह से निकला, लेकिन छुटकी के मुंह से हाँ निकलते निकलते रह गया,... उसके सामने ही जीजू ने बारी बारी से उसकी दोनों सहेलियों को क्या रगड़ रगड़ के, फिर मंझली के भी अगवाड़े पिछवाड़े,... बस वो मुस्करा दी।

गीता अब शांत हो गयी थी, फिर उसने अब तक की बातचीत समेटते हुए कहना शुरू किया

सब बातें समझायी गीता ने। वो बोली,

" सबसे पहले गाँव में हम लोगों का अपना ट्यूबवेल लगा,....कैसे बाऊ जी के बंबई के पैसे से, भैया की फटफटिया, , बमबई के पैसे से, हर महीने पांच तारीख को डाकिया खड़ा रहता था बाउ जी का मनीआर्डर,... "

फिर गीता ने खेती की परेशानी बतायी।

पहले तो बारिस का ठिकाना नहीं, और केतनो ट्यूबवेल हो गया लेकिन रोपनी है तो बिना पानी के ,

फिर बारिश नहीं तो गेंहू के लिए जमींन,... और एक दो बार तो फसल हो गयी कट के थोड़ बहुत खलिहान में, ... और बेटाइम क बारिस, ओला पड़ गया,...

तो बस सब मेहनत डाँड़,बीज, खाद क पैसा भी, और बाजार में कउनो चीज बिना पैसा के नहीं, हमरे और भैया के फ़ीस के लिए पैसा, किताब कपडा के लिए पैसा , और सबसे बढ़कर बीज, खाद कउनो चीज नहीं बिना पैसे के ,...

छुटकी ने ज्ञान की बात कर दी और डाँट पड़ गयी, लेकिन दी बैंक से पैसा,... पहले तो गीता ने डांटा और फिर प्यार से बोली,

" माँ नहीं है न नहीं तो दस गारी देतीं तोहरी महतारी के , वैसे भी उनका समधिन का रिस्ता लगता,... बैंक के नाम से मुंह नोच लेती थी, कहती थी हमार पैसा लेते है तो ओनकर कउनो जमीन जायदाद नहीं और हमको जरूरत पड़ी तो कुल गिरवी रखा लेंगे, हमार पैसा लेंगे तोदो टका सूद देंगे और हमें पैसा देंगे तो १२ से पंद्रह टका और लेंगे और टेबल टेबल जाके बिनती करा, परसाद चढ़ावा बाबू लोगन के,...

फिर गीता ने एक साल का किस्सा बताया , हंसती भी रही, साथ साथ

माँ भी न एक साल आलू का दाम खूब बढ़ गया, बस आधे खेत में आलू बोवाय दी , और बाकी लोग भी, फसल भी खूब अच्छी हुयी , लेकिन आलू जब खेत में से खोदा गया तो दाम एक रूपया डेढ़ रुपया किलो,...

"तो कोल्ड स्टोरेज " छुटकी ने फिर सलाह देने की गलती की,...

और एक जोर का हाथ पड़ा पीठ पे,...

" कोल्ड स्टोरेज,.. अरे वो ससुरे चौगुना दाम बढ़ा दिए , फिर ओहु में जगह नहीं, बाद में पता चला की तीन चौथाई जगह कुल बनिया लोग फसल क अंदाज कइके पहले से एडवांस रख लिए और केतना कोल्ड स्टोरेज तो उन्ही सब का,... बस आलू मंडी में पहुंचाने के लिए ट्रक, ट्रैक्टर छकड़ा सब ने दाम दूना तिगुना,... बस और वही बनिया सीधे खेत से उठा रहे थे तो वही एक रूपया दो रूपया,... भैया किसी तरह से ले गया मंडी तो वहां भी गोल बंदी कर के वही दाम और जानती हो शहर में चार पांच महीने बाद वही एक रूपये वाला आलू कितने में बिका,.. "

छुटकी तो हरदम पास की दूकान से ही खरीद के लाती थी , फिर भी उसने पूछा कितने में ,...

एकदम जल के गीता बोली,... २० रूपया में , हमें मिला एक रूपया और तुमको पड़ा २० रूपया।

" फिर खेती में साल भर का काम तो है नहीं , रोपनी, बोआई कटाई जब ज्यादा आदमी लगते हैं , बाकी तो अब मशीन आ गयी है , हरवाह नहीं रहे,... तो आदमी सब का करें कभी पंजाब कभी बंबई और जिसका जुगाड़ लग गया वो खाड़ी में,.. " गीता कुछ रुक के बोली। फिर समझाया,... कउनो गाँव में चल जाओ, आदमी कम है औरतें ज्यादा,..और वही कउनो बड़े सहर में तो उलटा,.... "

छुटकी सुन रही थी और एक बार फिर दोनों चुप थीं।

गीता अब सचमुच बड़ी हो गयी थी।

कुछ देर तक दोनों चुप बैठी रहीं, फिर गीता ने मुस्कराते हुए छुटकी की ओर देखा, फिर उसके बगल में आकर बैठ गयी और उसे चिपका लिया और उसके कान में बोली,....

" तू छोटी है लेकिन बात सही कहती है। "
 
खेत खलिहान





छुटकी सुन रही थी और एक बार फिर दोनों चुप थीं।

गीता अब सचमुच बड़ी हो गयी थी।

कुछ देर तक दोनों चुप बैठी रहीं, फिर गीता ने मुस्कराते हुए छुटकी की ओर देखा, फिर उसके बगल में आकर बैठ गयी और उसे चिपका लिया और उसके कान में बोली,....

" तू छोटी है लेकिन बात सही कहती है। "

छुटकी को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन वो मुस्करा दी,...

गीता उसके बगल में बैठी रही फिर कुछ रुक के बोली,

" दो बाते बता रही हूँ , तुझे , सिर्फ तुझे, तू मेरी असली वाली छोटी बहन है ".

छुटकी को अभी भी कुछ समझ में नहीं आया , लेकिन गीता ने बात साफ़ की,...

" ये बात न मुझे माँ ने बताई, न भैया ने लेकिन थोड़ा बहुत जो देखा समझा उससे अंदाज लगा के कह रही हूँ। जो तू कह रही थी न माँ भी यही चाहती है,... बाहर न जाने वाली बात , जब से बाऊ जी का पता नहीं चल रहा है,.. और पास के गाँव वाले दो जवान लड़के,... क़तर में, अरे वहीँ जहाँ वो फ़ुटबाल मैच,...हाँ हाँ वही,... माँ एकदम चुप्प हो गयी थीं।

गीता और छुटकी दोनों कुछ देर चुप बैठी रहीं फिर गीता ने बोलना शुरू किया, जैसे कोई राज़ की बात कर रही हो।

जानती हो भैया से उन्होंने तीन तिरबाचा भरवाया है, ... मैं बाहर खड़ी सुन रही थी,... बंबई क़तर जाना तो दूर की बात ,… मेरी, अपनी बाऊ सबकी कसम धरायी, बस खेती किसानी,.. पास के शहर में भी कोई नौकरी चाकरी नहीं,... जा सकते हैं काम हो, घूमना हो लेकिन कमाई खेत से ही।

जब से बाऊ जी का पता नहीं चल रहा है,...माँ बोलती तो नहीं,ऊपर से तो बहुत खुश खुश रहती है, लेकिन जब कभी आँगन में अकेले बैठती है तो उसका मुंह एकदम,... और मैं पास जाती हूँ तो बस गोद में दुपका लेती है, जब मैं बहुत छोटी थी एकदम वैसे,...

माँ ने सब काम धीरे धीरे भैया को सौंप दिया था और मेरे सामने मैं देखती थी,

जमीन के कागज़ जो बाऊ जी ने सब माँ के नाम कर दिए थे,... उनमें मेरा और भैया दूनो का नाम जोड़ दिया था और शर्त ये रखी थी की बिना हम तीनों की मर्जी के इंच भी नहीं बिक सकती। और काम धाम सब खेत का भैया के हवाले और चाचा के बंबई जाने के बाद चाची ने भी सब जिम्मेदारी भैया को ही सौंप दी थी,... माँ ने न सिर्फ समझाया बल्कि खेत में भेज के, मजूर मजूरिन का काम सिर्फ देखना नहीं, खुद साथ साथ करो तब अंदाज लगता है, ...

और बाकी गाँव वाले अगर कटनी रोपनी का एक कट्ठा देते थे तो माँ कहती थी भैया से दो नहीं तो डेढ़ से कमी नहीं,.. और माँ पहले खुद खेत में जाती थी लेकिन अब उसने बंद कर दिया था, भैया या मैं । हाँ कउनो टोला में कउनो जाती में अगर बिटिया क बियाह तो माँ सबसे पहले,... हर रस्म में, लड़के की शादी हो तो बरात बिदा करने भी और दुल्हन उतारने भी,...

वही गुन माँ ने धीरे धीरे मुझे भी,..

रोपनी में दो दिन तो गयी ही, कटनी में भी,..

अगर भाई को दो तीन दिन शहर में किसी काम से जाना है तो खेत और बाग़ के एक इंच का काम मैं अकेले देख लेती थी, कहाँ खाद डालनी है , गन्ने में कीड़े तो नहीं लग रहे हैं,... सब कुछ स्कूल के बाद और जिस दिन छुट्टी है तो,.. और नहीं तो घर का सारा काम काज,... गाय भैंस, आधा दर्जन, ...ग्वालिन भौजी ने दूध दुहना सिखा दिया है , माँ तो पहले से ही , शादी के बाद से ही अपनी,... और सानी चारा गोबर,... सब कर लेती हूँ,...

माँ जो गपाष्टक बैठक करती थी आस पड़ोस की औरतों के साथ,... बाद में पता चला,... काम करने वालियां भी उसमें, खूब हंसी मजाक ,... माँ ने प्लान किया था,... अब वो चली गयी तो स्कूल बंद होने के बाद गर्मी में,.. गर्मी बरसात खेत में तो ज्यादा काम होता नहीं तो दुपहरिया, तिझरिया में बड़ी, पापड़, चिप्स ये सब बनाने का प्रोग्राम,... बेचने का काम भैया के जिम्मे, माँ ने पहले से ही कहीं बात कर लिया है,....और अब माँ नहीं है तो मेरे जिम्मे, गर्मी की छुट्टी में, मेरा स्कूल बंद ,... खेती किसानी बंद तो यही सब

गीता एक बार फिर चुप हो गयी थी लेकिन अबकी खुश थी, मुस्करा रही थी।

तो भैया की पढ़ाई, ये सब चक्कर में,... छुटकी को तो हर बात जांननी थी,...

गीता हंसी बोली माँ ने बोल रखा है हम दोनों को अगर इम्तहान में फेल हुए तो कान का पान बनाउंगी।

हाँ भैया ने कालेज छोड़ दिया है लेकिन प्राइवेट बी ए कर रहा है. पर वो एग्रिकल्चर भी पढ़ना चाहता था तो वो तो प्राइवेट में नहीं हो सकता है तो किताब ला के,... क्या मास्टर लोग जानेगे, और वो ऑनलाइन कभी वीडियो कभी पढ़ के,... अरविन्द भैया तो हर चीज में

गीता तो एकदम अपने भाई की फैन थी पर छुटकी को चिढ़ाने से कौन रोक सकता था

किताब पढ़ के कौन खेती करता है, छुटकी हँसते हुए बोली।

गीता भी हंसने लगी बोली तेरी पिटाई करुँगी तो पता चलेगा, पिटाई के लिए मुझे कोई किताब नहीं पढ़नी पड़ेगी,... तूने हम लोगों के गन्ने के खेत तो देखे होंगे,...

छुटकी अब मज़ाक के मूड में थी बोली नहीं दी, जैसे आपने देखा था गन्ने के खेत अंदर से जमीन पे लेट के ऊपर कोई चढ़ा हुआ,

" घबड़ा मत जल्दी देख लेगी और गिनती भूल जाएगी कितने चढ़ेंगे लेकिन मैं दूसरी बात कह रही हूँ, ... भैया गन्ने के खेत के बारे में ,

छुटकी को रोकना मुश्किल था, हँसते हुए बोली, मुझे मालूम है आपके साथ और आपके पहले भी,... गन्ने के खेत में तो मास्टरी है उनकी

और तेरे साथ भी करेंगे घबड़ा मत और मैं बगल में बैठ के देखूंगी, गन्ने के खेत में हँसते हुए गीता बोली,

फिर जो उसने बताया उसका सार संक्षेप यह है की, गन्ने का दाम अच्छा नहीं मिलता था, माँ ने भी बात की मिल वालों से , तो परेशानियां थी,... एक तो सबके गन्ने साथ कटते थे तो पेराई में,... और मिल वाले की मर्जी, ... फिर मिल वाले की मजबूरी ये थी की मिल कुछ महीने ही चलती थी अगर ऐसे गन्ने लोग बोयें जो कुछ पहले हो जाएँ , कुछ बाद में हो तो मिल ज्यादा दिन तक चल पाएगी, और जिसके गन्ने पहले आयंगे उन्हें कुछ ज्यादा मिलेगा,... बस भैया लखनऊ गया था वहां कोई गन्ने का रिसर्च करते हैं इक्षु करके कुछ है, मिल वालों ने ही बताया था,... वहीँ से ले आया है रिसर्च वाले और मिल वाले भी साथ दे रहे हैं दो बीघा हमारा और दो बीघा चाची का ,... और असली फायदा ये होगा की देखा देखी बाद में बाकी गाँव वाले भी,

लेकिन छुटकी अब सीरियस बात करने के मूड में नहीं थी चिढ़ाते हुए बोली

अरे ये सब कहानी है असल में अरविन्द भैया चाहते है की जितनी जल्दी गन्ने के खेत में उतनी जल्दी मेरी दी के ऊपर चढ़ाई,... लेकिन चाची का खेत,...

अरे नहीं उस खेत में तो सबसे पहले तेरे ऊपर चढ़वाऊंगी भैया को , और चाची एक दो महीने पहले चली गयीं, चाचा तो बताया था बाऊ जी का काम पहले बम्बई फिर वो भी क़तर,... तो चाची की एकलौती लड़की मेडिकल कोचिंग कर रही थी, उसका मेडिकल में हो गया, अब वो गाँव आती नहीं। तो जिस शहर में उसका हुआ है वहीँ दो कमरे का मकान लेकर, छोटा सा है लेकिन बेटी के पास है और खेती क काम सब चाची ने अरविन्द भैया को सौंप दिया।

और एक बार फिर से गीता छुटकी से सट के बैठ गयी थी, उसके कंधे पे हाथ रख के जैसे न जाने कब बिछुड़ी सहेलियां हो,एकदम राजदार,... और अपने मन की एक और बात, जो उसने न जाने कब से मन के किसी कोने में सात ताले में बंद कर के रखी हो,... और एकदम धीमे धीमे,...

" एक बात और, न तो माँ ने कभी कही न भैया ने, भैया का तो सवाल ही नहीं वो तो पैदायशी बुद्धू है,... लेकिन मुझे लगता है,... "
 
गीता और माँ





और एक बार फिर से गीता छुटकी से सट के बैठ गयी थी, उसके कंधे पे हाथ रख के जैसे न जाने कब बिछुड़ी सहेलियां हो,एकदम राजदार,... और अपने मन की एक और बात, जो उसने न जाने कब से मन के किसी कोने में सात ताले में बंद कर के रखी हो,... और एकदम धीमे धीमे,...

" एक बात और, न तो माँ ने कभी कही न भैया ने, भैया का तो सवाल ही नहीं वो तो पैदायशी बुद्धू है,... लेकिन मुझे लगता है,... "

छुटकी की बड़ी बड़ी आँखे उसे उकसा रही थीं बिना हिचक आगे की बात बताने के लिए,... और गीता ने उसे और दुबका लिया और मन की बात बताने लगी,...

" मुझे लगता है,... माँ भी,... वो सोच रही थीं,... लेकिन जब उस दिन उन्होंने मुझे और भैया को मामा के यहाँ से लौटने के बाद देखा तो,... पता नहीं पर लगता है माँ के मन की बात... कि मेरे और भैया के बीच जो चल रहा है वो चलता रहे और खूब कस के चले,.. मैं जरा भी न झिझकूं,... इसलिए,... और जानती हो क्यों , उनकी सोच का भी एक कारण है,... "

" क्या दी,... " छुटकी ने हुंकारी भी भरी और उकसाया,...

" माँ सोच चुकी थीं की उन्हें बंबई जा के वहां का काम काज बाऊ जी का देखना है,... चाचा के बस का नहीं है,... लेकिन यहाँ वहां,... और उन्होंने ये भी मन बना लिया था की यहाँ की जिम्मेदारी भैया को,... लेकिन उन्हें चिंता मेरी भी थी,... अकसर गाँव में जब कम उमर में मर्दों के पास जमीन जायदाद तो बजाय जिम्मेदारी के,... और गाँव में चढाने वाले भी बहुत होते हैं,... फिर कोई न कोई लड़की औरत अगर चिपक जाती,... आके घर में बैठ जाती,... अरे शादी नहीं बस ऐसे ही ही तो सब जमीन जायदाद,.... और फिर मेरा क्या होता,... फिर मान लो भैया की शादी भी ,..और इतनी जल्दी न वो तैयार होता न गाँव में भी अब जब तक लड़का कमाए नहीं, सरकारी नौकरी,... और वो सब उन्हें कराना नहीं था,... फिर मेरी शादी तो इस उमर में,...

" एकदम लड़कों की शादी की उमर तो न जाने कब से २१ साल है ,.. " छुटकी ने जताया वो भी कम ज्ञानी नहीं है ,

" एकदम तो अभी तो उसको बहुत टाइम है उस उमर में और मुझसे तीन चार साल ही तो बड़ा है,... तो बस माँ ने मेरे और भैया को आपस में ,... मतलब बल्कि बढ़ावा ही दिया,...

उनको लगा होगा की भैया बाहर चाहे जितना मुंह मारेगा,... लेकिन घर में तो किसी को नहीं लाके बैठायेगा अगर मेरे साथ उसका,... और उनके सामने ही उन्होंने खुद हर काम हम दोनों जोड़े से, चाहे बाहर पूजा हो घर का काम हो,... और खेत के काम में मुझे भी इसी लिए की बाहर की हाल चाल भी मुझे पता रहेगी,... माँ बहुत दूर की सोचती थीं और बंबई से भी हर दूसरे तीसरे मेरे पास उनका फोन आता है,... और भैया भी रोपनी, काम करने वालियों का कभी कभार का चक्कर छोड़ दो, ... वो तो खुद ही उसे उकसा के,... लेकिन मेरी सहेलियों ने बहुत कोशिश की पर वो नहीं,... मेरे अलावा गाँव की किसी लड़की के साथ नहीं,...

लेकिन अब दी आपने ये बात छेड़ दी है तो, माँ ने कभी ये नहीं सोचा की ये गलत है वो गलत है

गीता का चेहरा ख़ुशी से दमक गया बोली तुम माँ से मिली नहीं हो एकदम अलग माटी की है वो,... भइया से तो उतना नहीं जाने के पहले मुझे से एक एक चीज खूब खुल के, बोली मुझसे जानती है गितवा लोग दुइये चीज पे फैसला कर लेते हैं अच्छा बुरा, फिर जीभ निकाल के दिखाया और अपनी जांघ के ऊपर रगड़ के और हम दोनों हंसने लगे, तो फिर सीरियस होके बोलीं , गितवा ये समझ ले की कोई का खाता पीता है, और किसके साथ का करता है , बहुत एही से तय कर लेते हैं कौन अच्छा कौन,... लेकिन मेरे हिसाब से अच्छा वही तो अपना काम ईमान से करे और सब से बढ़ के सबके काम आये, दुःख में सुख में, आदमी आदमी में भेद न करे, ... अरे सब तो भगवान के बनाये,...

छुटकी ने सर हिलाया तो गीता ने बात बढ़ाई,

और माँ हरदम सदन कसाई का किस्सा सुनाती थी हम दोनों को, ... और भैया से तो नहीं लेकिन मुझसे कभी कभी किस्सा सुनाती थी अपने बचपन का,... की काम करने वाली आके बताती हँसते हँसते, ... गलती से कहीं पानी क बर्तन छू गया तो, ....कुंआ से पानी भरना तो दूर,... और उहे बँसवाड़ी खेताडी में पीछे पीछे,...एक बार दे दो,... बस लहंगा पसार देगी तो फिर दुबारा खेत के बाहर पहचानेंगे भी नहीं,... खैर अब तो ये सब का ख़तम हो गया,...

लेकिन वो सब खुद, ग्वालिन भौजी एक बार बीमार पड़ी थीं माँ दो दिन सोई नहीं उनकी चारपाई के पास, और हम लोग भी गाँव में उमर के रिश्ते के हिसाब से भौजी, चाची , काकी , आज तक आस पास के टोला में कोई ऐसी दुल्हिन नहीं उतरी होगी जिसे उतारने माँ नहीं गयी होंगी , ... और कोई बिटिया नहीं बिदा हुयी जिसे बिदा करने माँ नहीं गयी हों, पूजा पाठ सब करती थीं लेकिन कहीं कोई मुसीबत पड़ी तो सब छोड़ के सबसे पहले वहां ,... इसी लिए उन्हें बिस्वास था की बाबू जी को कुछ नहीं होगा।

गीता एक बार फिर चुप हो गयी

तो बाऊ जी का कुछ,... सहमते हुए गीता ने पूछा

गीता का चेहरा एकदम खुश था, बोली,... हाँ बस डेढ़ दो महीना में बंबई आएंगे, माँ से १० दिन पहले ही बात हुयी थी,... पहली बार वीडियो काल, माँ बहुत जिद्द कर रही थी तो वीडियो काल हुयी, वहीँ से हो सकती है,... बोल रही थीं बहुत दुबरा गए हैं। बस आ जाएँ एक बार तो अब खिला पिला के,... माँ बाऊ जी के आने के बाद भी छह सात महीना तो बंबई से नहीं आने वाली और आएगी भी तो बस जल्दी, ... वापस

और दोनों सहेलियां मुस्कराने लगी

लेकिन गीता के मन में कुछ और पक रहा था साथ साथ

फिर एक बात उसने छुटकी के कान में,...

छुटकी के चेहरे पे खूब ख़ुशी छा गयी, वो जोर जोर से खिलखिलाने लगी,और छुटकी ने मुस्करा के चूम लिया गीता को और झट से बोली,... " दी, एकदम बहुत आसान " और गीता के कान में रास्ता बता दिया।

गीता भी अब खुश थी,... पर छुटकी ने गीता से कहा दी मेरी दो छोटी छोटी शर्तें हैं, शर्त नहीं रिवेस्ट,... "

" अरे तू छोटी बहन है , बड़ी बहन की हर चीज पे छोटी का हक होता है बोल न पहेली न बुझा वरना बहुत पिटेगी " गीता हँसते हुए बोली,...

छुटकी ने एक बात तो बता दी और गीता ने तीन तिरबाचा भी भर दिया और दूसरी शर्त वक्त जरूरत के लिए बचा के रख ली।

क्या बात हुयी दोनों सहेलियों के बीच , मतलब बहनों के बीच,... सबका मन करता है न लड़कियों की बातें सुनने का, एकदम प्राइवेट ख़ास बात हो तो भी,...
 
अगली पोस्ट की नन्ही मुन्नी झलक





क्या बात हुयी दोनों सहेलियों के बीच , मतलब बहनों के बीच,... सबका मन करता है न लड़कियों की बातें सुनने का, एकदम प्राइवेट ख़ास बात हो तो भी,...

लेकिन अभी ये सब बाते यही ,

अभी कहानी वापस मुड़ रही है जहाँ से मुड़ी थी या ननद भौजाई के बीच कबड्डी की तैयारी,..बस दो घंटे बचे हैं ,

कब से भौजाइयां लगातार हार रही हैं लेकिन अबकी पासा पलटना है , स्ट्रेटजी बनानी है , टीम का फाइनल करना है और टीम मेंबर्स के साथ बैठ के स्ट्रेटजी सेट करनी है तो बस अगली पोस्ट में

और घड़ाइये मत , गीता और छुटकी की आखिर में क्या कानाफूसी हुयी ,क्या बात छुटकी ने मानी और क्या शर्तें रखीं सब अगली पोस्ट में ,..

छुटकी अभी ननदो से होली खेल के लौटी नहीं पर मैं परेशान थी,

नहीं नहीं छुटकी के लिए नहीं, उसके तो अब खेलने खाने के दिन थे,... और ननद छिनार हों वो भी नैना ऐसी तो,...

मेरी परेशानी ननदों को लेकर ही थी लेकिन दूसरी,...

मंजू भाभी के यहाँ मैंने गाँव की अपनी जेठानियों को बोल तो दिया था की अबकी ननदों को हम लोग न सिर्फ हराएंगे बल्कि खुल के उनकी गाँड़ मारेंगे भी गाँव के बीच में खुले मैदान में और अपने देवरों से भी अगले दिन मरवाएँगे,...

दो चार उमर में थोड़ी बड़ी जेठानियों ने मुंह भी बिचकाया,..सोच रही थी ये नयको नयी आयी आयी है पहली होली है इस गाँव की,... कुछ दिन पहले घूंघट छूटा है बस खाली माँ ने बढ़ बढ़ के बोलना सिखाया है,

पर मंजू भाभी को पूरा भरोसा था मेरे ऊपर जिस तरह से चुन्नू की में थोड़ी देर पहले नथ उतारी थी और एक बहुत बड़ा चैलेंज गाँव की भौजाइयों ननदों सब का पूरा किया था, सुबह सुबह आज, चंदू ब्रह्मचारी देवर से तीन राउंड कुश्ती खेल के आ रही थी , और अब एक बार उसका लंगोट खुल गया तो वो नाग लंगोट में बंद होने वाला नहीं था. और ये भरोसा मंजू भाभी के साथ मेरी बाकी जेठानियों का भी था,...
 
Some facts without comments about Eastern and Central UP, where this story is based

1. Credit deposit ratio ( CDR ) in India is about 70% (2019) but if we move to eastern UP and central UP it is around 40 % and if we further move to rural it will be further reduced and if we break it to those who are marginal farmers, small farmers or landless labor one can understand the limits.

It was in 1980 that the RBI has advised rural and semi urban branches to achieve a CDR of about 80 %.

2. Purvanchal tops with over 84% of agricultural land holdings below one hectare. Eastern Uttar Pradesh, popularly termed as Purvanchal, leads the tally in the state with highest percentage of agricultural land holdings below one hectare, which classifies a farmer as marginal. The all-India average of land holding below one hectare is about 65 per cent.

3. As per 2011 census of UP, there were more females than males in many districts of UP, a result of migration. In Jaunpur it was 1024, in Deoria, it was 1017 and Azamgarh it was 1,019, to name a few. However, job rich districts like Gautam Buddh Nagar ( NOIDA) has only 851 female per 1000 males.

भूख के मारे बिरहा बिसरिगा, बिसरिगा कजरी कबीर



अब देख देख गोरी क जोबनवा उठै न करेजवा में पीर।

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Ballia’s tenant farmers: struggling to subsist - PARI Education


“I have no money, but I work very hard.” Toofani Rajbhar is an agricultural labourer and goat herder. “Farming hardly pays anything so I do dihadi mazdoori [daily wage labour work] to earn some money,” he said. The ‘farming’ that Rajbhar of Akhar village is referring to is an informal...

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जोरू का गुलाम भाग १८७

गुड्डी की कोचिंग

update posted, please read, like, and share your comments.

Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग १८७ गुड्डी की कोचिंग 15.98,102 मैंने अपनी किताब के बैक कवर के अंदर फ्लैप में पिल्स के पैकेट रख दिए , और एक बार फिर छुटकी और बड़ी दोनों को चुम्मी दे कर , नीचे। एक कमरे से कुछ फुसफुसाने की आवाज आ रही थी , मैंने हलके से झाँक कर देखा , मिसेज मोइत्रा पेट के बल लेटी , उनकी...

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भाग ५७- कुश्ती ननद भौजाई की -

छुटकी और गितवा

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weight lifter

अभी कहानी वापस मुड़ रही है जहाँ से मुड़ी थी या ननद भौजाई के बीच कबड्डी की तैयारी,..बस दो घंटे बचे हैं , कब से भौजाइयां लगातार हार रही हैं लेकिन अबकी पासा पलटना है , स्ट्रेटजी बनानी है , टीम का फाइनल करना है और टीम मेंबर्स के साथ बैठ के स्ट्रेटजी सेट करनी है तो बस

और घड़ाइये मत , गीता और छुटकी की आखिर में क्या कानाफूसी हुयी ,क्या बात छुटकी ने मानी और क्या शर्तें रखीं सब ,..

छुटकी अभी ननदो से होली खेल के लौटी नहीं पर मैं परेशान थी,

नहीं नहीं छुटकी के लिए नहीं, उसके तो अब खेलने खाने के दिन थे,... और ननद छिनार हों वो भी नैना ऐसी तो,...

मेरी परेशानी ननदों को लेकर ही थी लेकिन दूसरी,...

मंजू भाभी के यहाँ मैंने गाँव की अपनी जेठानियों को बोल तो दिया था की अबकी ननदों को हम लोग न सिर्फ हराएंगे बल्कि खुल के उनकी गाँड़ मारेंगे भी गाँव के बीच में खुले मैदान में और अपने देवरों से भी अगले दिन मरवाएँगे,...





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दो चार उमर में थोड़ी बड़ी जेठानियों ने मुंह भी बिचकाया,..सोच रही थी ये नयको नयी आयी आयी है पहली होली है इस गाँव की,... कुछ दिन पहले घूंघट छूटा है बस खाली माँ ने बढ़ बढ़ के बोलना सिखाया है, पर मंजू भाभी को पूरा भरोसा था मेरे ऊपर जिस तरह से चुन्नू की में थोड़ी देर पहले नथ उतारी थी और एक बहुत बड़ा चैलेंज गाँव की भौजाइयों ननदों सब का पूरा किया था, सुबह सुबह आज, चंदू ब्रह्मचारी देवर से तीन राउंड कुश्ती खेल के आ रही थी , और अब एक बार उसका लंगोट खुल गया तो वो नाग लंगोट में बंद होने वाला नहीं था. और ये भरोसा मंजू भाभी के साथ मेरी बाकी जेठानियों का भी था,...

मैंने बोल तो दिया और इस बार की कैप्टेन मंजू भाभी थीं तो मेरे मन की बात सुन सोच के उन्होंने टीम भी एकदम से बदल दी,...

४ हमलोगों के टोले की बाहर वाली, काम करने वालियां, लेकिन देह की बहुत कड़ी खूब जांगर वाली,





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दो तीन ऐसी भौजाइयां जो अभी लड़कोर नहीं थीं, तीन चार साल पहले गौना हुआ था,..





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मंजू भाभी और दो उमर में थोड़ी बड़ी लेकिन जो मानती थीं की हाँ हम लोग जीत सकते हैं,... जो मैच के पहले हार मान जाए सिर्फ रस्म रिवाज के लिए मैच खेले,...वैसी एकदम नहीं फायटिंग स्प्रिट हम लोगों से भी ज्यादा और अनुभव भी

जैसे दूल्हे को दुल्हिन लाने पे दूल्हे के मायके में कोहबर में पासा खिलाया जाता है , दूध में अंगूठी डाल के ढुंढवायी जाती है और बगल में बैठी भौजाई कान में देवर को समझा देती है, अगर गलती से भी एक बार जीत गए न,... तो ये मिठाई जो बगल में बैठी है आज रात में नहीं मिलेगी खाने को सोच लो,...





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और वो बेचारा तीनों बार हार जाता है,... फिर मौरी सेरवाने में नयी बहु, उसकी दुल्हन के सामने गांव की भौजाई सब अपनी ननदों को उसकी बहन को उसी का नाम लग लगा के खूब गरियाती है, लेकिन बगल में बैठी 'मिठाई ' के लालच में वो सब कुछ करता है,...

तो मेरी बात मान के टीम भी बदल गयी थी जो नयी नयी चार को शामिल किया गया था वो सब मान भी गयीं थी,... और थोड़ी देर में टीम की मीटिंग थी, पर बारह आने का खेल तो अभी होना था , टीम की स्ट्रेटजी तय करनी थी,... और ये तो मुझे ही करनी थी,...कैप्टेन मंजू भाभी जरूर थीं लेकिन सब जिम्मेदारी मेरे कंधो पर और अब टीम मेरे कहे अनुसार बन गयी थी पुरानी टीम के ६-७ सीनियर खिलाड़ी बदल गए थे तो,... अब तो कोई बहाना भी नहीं

और फिर इस ननद भौजाइयों की कबड्डी की हार जीत पे बहुत कुछ होना था,.... एक तो ननदों का घमंड,... वो भौजाई कौन जो ससुराल में पहुँच के ननद की नाक न रगड़वा दे,... अरे दुश्मन को दुश्मन के किले में हराना ही असली जीत है, अपनी गली में तो,...

लेकिन कैसे, ...

जो जीतता है उसकी बात न सिर्फ होली में, रंगपंचमी में बल्कि साल भर अगली होली तक चलती है अगर हम लोग जीत गए तो बस इस रंगपंचमी में नहीं साल भर,... और ये बात कौन भौजाई नहीं चाहेगी की ननद चुपचाप उसका कहा करती रहे, उसकी चुगली अपनी माँ से भाई से न करे,... और हम लोग जीत गए तो ऐसी रगड़ाई करवाउंगी उन सब की,... और अब तो ननद के भैया मोबाइल लाये हैं जो फोटो भी जबरदस्त आती है और वीडियो भी , बस सब कुछ रिकार्ड होगा,... लेकिन जीते तो सही है और उस के लिए बात थी स्ट्रेटजी की,

मैंने एक बार फिर ठन्डे दिमाग से सोचना शुरू किया,...

मुझे शुन त्जू की बात याद आयी, नो योर एनेमी ,...

और मैं नयी नयी इस गाँव में,... तो सबसे पहले ननदो की टीम की स्ट्रेंथ, ... और अलग अलग खिलाड़ियों की ताकत,....

फिर उनकी स्ट्रेटजी,... और वीकनेस,... वीकनेस का तो खैर मुझे अंदाजा था , उन सबका ओवरकॉन्फिडेंस और बड़बोलापन,... लेकिन अलग अलग खिलाड़ियों की कमजोरी इंडिविजुअल अगर पता चल जाए,...कबड्डी में जब कोई आपके पाले में आता है तो वो अकेला होता है और उस समय अगर उस की कमजोरी मालूम है तो उसे पटकना बहुत आसान है,... फिर पिछले मैचों में उनकी स्ट्रेटजी,...

वो तो खैर मंजू भाभी और बाकी दो मेरी जेठानियाँ जो प्रौढ़ा थीं और पिछले पांच छह साल से कबड्डी का ये मैच खेल रही थीं , उनसे ननदों की ट्रिक्स पता चल जायेगी,... और उनकी स्ट्रेंथ में सबसे बड़ी थी लीडरशिप, अबकी नैना वापस आ गयी थी और नैना की बात सब मानती थीं , वो थी भी बहुत शातिर दिमाग, एकदम असली ननद,...





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लेकिन ऐसी ननद के साथ ही तो ननद भौजाई का मजा आएगा,... लेकिन नैना के बारे में मैंने तय कर लिया था , डिफेन्स इस बेस्ट आफेंस, ... उसके आते ही हम सब पीछे हट जाएंगे और बस बचने की कोशिश करेंगे,... और वो मुझे या किसी तगड़े प्लेयर पे निशाना लगाएगी तो किसी प्रौढ़ा को आगे कर देंगे , सैक्रिफाइस के तौर पे,... लेकिन देर तक छकाने के बाद,... और फिर जो बाकी आएँगी तो उन्हें तो रगड़ रगड़ के,...

और बाद में अगर वो बच भी जायेगी तो क्या,...

लेकिन मेरी सब जेठानियाँ गीता की ताकत की भी तारीफ़ कर रही थीं और काठ की हांड़ी दो बार तो चढ़ती नहीं तो गीता की तो काट तो ढूँढ़नी पड़ेगी और वो मुझे सबसे कठिन लग रहा था,... पिछले साल नैना नहीं थी तो गितवा ने ही भौजाइयों को दौड़ा दौड़ा के,...

और अगर ननदें हार गयीं तो उनसे क्या क्या करवाएंगे,....

कोई कह सकता है की इससे क्या फरक पड़ता है लेकिन ये बहुत जरूरी था प्लान करना मेरी टीम के मेंबर्स को मोटिवेट करने के लिए,...

पहले भी जीतने के बाद सिपाहियों को दो तीन दिन तक लूटने की पूरी छूट मिलती थी , सिर्फ धन सम्पत्ति ही नहीं, लड़कियां औरतें भी,... जितो वा भोक्ष्यते महीम,... और दूसरा ऑप्शन मैंने कभी न दिया न सोचा,...

मैंने अल्टीमेट सरेंडर की लेस्बियन रेसलिंग के बहुत वीडियो देखे थे और इस समय वही दिमाग में नाच रहे थे, जीतने वाली एक फुटा स्ट्रैप ऑन डिलडो बाँध के और हारने वाली की क्या दुर्गत होती थी,... बस वो सब टीम के मेंबर्स को दिखाने थे और उनसे डिस्कस भी करना था क्या होना है ननदों के साथ,.. एक से एक मस्त मस्त ऑप्शन मेरे दिमाग में आ रहे थे

लेकिन तो सब तभी होगा जब गीता की कोई काट निकल जाए ,

उफ़ आप भूल गए कबड्डी वाली बात, चलिए पन्ना पलट के आप को याद दिला ही देती हूँ मंजू भाभी के यहाँ जो बातें हुयी थी फिर ढूंढती हूँ गीता की काट
 
थोड़ा सा फ्लैश बैंक - ननदों भौजाइयों की रंगभरी कबड्डी





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कुछ अंदाज तो मुझे कब्बडी का मेरी ननद ने दे दिया था पर मेरी सास ने पूरा साथ दिया था आखिर वो भी तो इस गाँव की बहू ही थीं, और गाँव में औरतों में जो खुल के बातें किचन में होती हैं, पुरुषों का तो प्रवेश निषेध ही रहता है तो बस वही हाल थी, मेरी ननद पीछे पड़ी थी

" भाभी, पिछले दो साल से होली में ननदें जीतती हैं , अबकी हैट ट्रिक होगी, फिर तो नंगे आपको और आपकी बहिनिया को नचाएंगे।

और अपना हाथ दिखाते हुए ननद ने चिढ़ाया,

" ये देख रही हो, अरे कलाई तक नहीं कुहनी तक पेलूँगी तोहरी गंडिया में, फिर मुट्ठी खोल दूंगी,... अइसन गाँड़ मारूंगी न की सांझी तक ,जो तोहार महतारी क भोंसड़ा है जिसमे से वो तोहैं और तोहरे दुनो बहिनियां ऊगली हैं, उससे भी चौड़ा हो जाएगा, ...





फिर तो गाँव भर क मरदन से, चमरौटी, भरौटी,अहिरौटी कुल से गाँड़ मरवाइयेगा,बिना तेल लगाए। और हाँ आज भले सेर भर तेल अपनी और अपनी बहिनिया की गंडिया में डाल लीजियेगा, लेकिन हम ननद सब पहले हाथ में बोरा लपेट के उहै तेलवा सुखाएँगे, तब ई चाकर गांड मारेंगे जेके देख के तोहार कुल देवर ननदोई लुभाते हैं। हाँ, कल दिन में खाने में, नाश्ते में बस,... हम होली के दिन तो खाली चटनी चटाये थे, ... अब सब हमरे पिछवाड़े से सीधे तोहरे मुंहे से होयके तोहरे पेट में,... "





मुझे जवाब देने की कोई जरूरत नहीं थी, ...मेरी सास थी न। और ननदों के खिलाफ, भले उनकी सगी बेटियां क्यों न हों, वो हरदम मेरा साथ देती थीं, आखिर थीं वो भी तो इस गाँव की बहू, और मैं भी गाँव की बहू, हाँ इनकी बूआ, मेरी बूआ सास हरदम नंदों का साथ देती थीं.

तो मेरी सास ने सराहती नज़रों से मेरी ओर देखा और जो जवाब मैं सोच भी नहीं सकती थी, वो सब दे दिया।

" अरे माना पिछले दो साल से तुम लोग जीत रही थी, लेकिन तब हमारी बहू नहीं थी,... अब अकेले कुल ननदों का पेटीकोट शलवार फाड़ने की ताकत रखने वाली है, तोहरे भाई क ताकत देख रही है इतने दिनों से तो तुम लोगों को भी पक्का हराएगी, और जानती हो जब ननदें हारती हैं तो गाँड़ बुर में मुट्ठी डालने के अलावा भौजाइयां का का करवाती हैं? "





" अरे तो तोहार बहुरिया है तो नैना भी अबकी एही लिए ससुराल से आगयी है हम ननदों का साथ देने " ननद ने अपना तुरप का पत्ता फेंका।

" अरे तो जो छुटकी आयी है असली हरी मिर्च है , बहू की छुटकी बहिनिया,... वो देखना नैना क फाड़ देगी " सास जी भी चुप नहीं होने वाली थीं, लेकिन लगे हाथ उन्होंने अपनी समधन मेरी माँ को भी लपेटा ,...

" और जो इसकी महतारी क भोंसडे क बात कर रही हो न , तो तुमको मालूम नहीं है वो छिनार मायके क लंडखोर है और गदहा, घोडा, कुछ नहीं छोड़ी है , तो ओकर भोंसड़ा तो ताल पोखर अस चौड़ा है, अरे तोहरे भैया क पूरी बरात ओहमें नहायी थी , लेकिन जहाँ तक हमरी बहू की बात है , अबकी वही जीतेगी,.... बस तैयार हो जाओ हारने के लिए। "

मैच के पहले ही अम्पायर ने फैसला सुना दिया।

अगर भाभियाँ जीत जाती हैं तो साल भर नंदों को उनकी बात,





और उस दिन तो जो सारी ननदों की, कुँवारी हों, बियाहिता हों वैसी दुर्गत होगी, लेकिन असली मस्ती आती है अगले दो दिन, ...

जब देवर भी, ... बस भौजाई लोग मिल के किसी भी देवर को, ज्यादातर कच्ची उमर वाला या कुंवारा पकड़ के उसकी आँख में पट्टी बाँध के घर के अंदर, जहाँ ननद भौजाइयों का झुण्ड, बस उस देवर की कोई सगी बहन हो उसी की उम्र की नहीं तो चचेरी पट्टी दारी की, ....

पहले देवर के कपडे फटते थे, फिर उसकी सगी बहन,

जबरदस्ती मुट्ठ मरवाई जाती थी





और एक बार खड़ा हो गया तो, सीधे मुंह में लेकर चूसवाया जाता था, सारी मलाई घोंटनी पड़ती थी,....





और अगर किसी ननद ने ज्यादा नखड़े किये तो भौजाइयां ही चूस चूस के पहले खूंटा खड़ा करती थीं, फिर दो तीन भाभिया मिल के उस ननद को पकड़ के , उसके सगे भाई के खूंटे पे बैठाती थीं, फिर खुद पकड़ के ऊपर नीचे, जबरदस्त चुदाई,... और धमकाती भी थीं , सीधे से चोद नहीं तो तेरी तो गाँड़ फाड़ेंगे ही इसकी भी ,...

मंजू भाभी के साथ मिलकर कल हम लोग यही जोड़ी बना रहे थे, किस देवर पर किस ननद को, सबसे पहले सगी ननदें, ... लेकिन उसके पहले जरूरी था जीतना , और मैं जानती थी, लड़ाई जंग के मैदान में नहीं उसके पहले जीती जाती है, प्लानिंग रिसोर्सेज,...

गाँव में कल कोई मर्द नहीं रहते हैं, तो इसलिए औरतों का राज पोखर के बगल में जो बड़ा सा मैदान है उसी में, ठीक साढ़े बारह बजे से, डेढ़ घंटे की ननद भौजाई की,...

और दो बजे के बाद वहीं बगल में पोखर में घंटे भर तक साथ साथ नहाना, फिर सबके घर से जो खाना आता था वहीं बगिया में खाना, सांझ होने के पहले होली खतम, सब लोग अपने अपने घर और सूरज डूबने के साथ मरद

इसलिए जब मंजू भाभी के यहाँ कबडी की बात चल रही थी मैं सबसे छोटी होते हुए भी बोली भी और पहल भी की

एक मेरी बड़ी उम्र की जेठानी कहने लगीं,... ' अरे इसमें क्या इतना सोचना है,... मौज मस्ती ही तो है , क्या जीत हार, अरे पिछले कितने सालों से तो ननदें ही जीतती आयीं है , इस बार फिर वही जीतेंगी। इसमें क्या प्लानिंग, क्या,... "

और उन की बात में बात जोड़ती उन्ही की उमर की एक जेठानी बोलीं, ' सही कह रही हो , हम तो भुलाई गए कब भौजाई लोगन की टीम जीती थी,... अरे ननदों के आगे,... "

मुझे बड़ा बुरा लगा, मैं तो आयी ही थी अपनी ससुराल, ननदों की गाँड़ मारने, अपने भाइयों, देवरों से सब ननदो को चुदवाने, रगड़ रगड़ कर,...

और यहाँ तो मैच शुरू होने के पहले ही कोच कप्तान सब हार मान के बैठे हैं,... और गबर गबर खाली गुझिया खाये जा रहे हैं, और उसी समय मैंने तय कर लिया की आज चाहे जो हो जाय ननदों को तो हरा के ही रहना है, अरे साल भर स्साली छिनारों की नाक रगड़ने का मौक़ा,..

लेकिन अभी सुनने और समझने का था,

तब तक एक जेठानी और , वही हार में ख़ुशी मनाने वाली ,... बोलीं,...

" अरे थोड़ा बहुत कोशिश करते भी लेकिन अबकी तो नैना भी आगयी है जब्बर छिनार , उसको तो सौ गुन आते हैं,... "





ये बात मैं मान गयी की नैना के आने से मुकाबला थोड़ा टाइट होगया लेकिन ननदों की टाइट को ढीला उनकी भाभियाँ नहीं करेंगी तो कौन कराएगा, फिर अभी अभी दो देवरों को चोद के आ रही हूँ , जिसके आगे सब ने हाथ झाड़ लिया था,...

मंजू भाभी, ने मेरी ओर इशारा भी किया,...

"अरे अबकी मेरी नयकी देवरानी आ गयी है , करेगी न नैना क मुकाबला, अरे तीन दिन पहले होली के दिन , मिश्राइन भौजी के यहाँ कैसे कुल ननदों क बुर गाँड़ सब बराबर,... "





अब माहोल थोड़ा बदला ,

लेकिन मैं अभी भी सुन रही थी और समझने की कोशिश कर रही थी की आखिर क्यों हर बार भौजाइयों की टीम हार जाती है और कोई न कोई तो ननदों में कमजोरी होगी , जिसका हम सब फायदा उठा सकते हैं,... और मुझे कुछ बातें तो समझ में आ गयी,...

पहली बात ये थी की टीम ११ की होती थी,...

और ननदें ज्यादातर टीनेजर, या जो शादी शुदा वो भी २० -२२ वाली,

लेकिन भौजाइयों की औसत उमर तीस से ऊपर और सीनियारिटी के नाम पर जो बड़ी होती थीं वो भी कई टीम में , ४० के पार वाली भी जो चुद चुद के, बच्चे जन जन के घर का काम कर के थकी मांदी ,

तो ताकत और एनर्जी दोनों में ननदों की टीम बीस नहीं पच्चीस पड़ती थी,...

दूसरी बात की मैच का कोई टाइम नहीं होता था तो वो पहले तो मजे ले लेकर , भौजाइयों को दौड़ा के थका देतीं थीं और उसके बाद,...





तीसरी बात जो मैं देख रही थी , भौजाइयों की टीम में बार बार हारने के बाद जीतने की न इच्छा बची थी , न विश्वास

और आखिरी बात, कोई स्ट्रेटजी प्लानिंग भी नहीं होती थी और बेईमानी के कौन जीतता है तो लेकिन बेईमानी के लिए बहुत जुगत लगानी पड़ती है और वो यहाँ दिख नहीं रहा था,... अंत में सब लोगों ने मुझसे पूछा ,

तो मैंने अपनी प्लानिंग, तो बात शुरू की मैंने टीम बदलने से,...





किसी तरह से मुझे ज्यादा जवान , कम उमर वाली खूब तगड़ी औरतें चाहिए थीं और जो एकदम बेसरम हों , ...





और मैंने जुगत लगा ली,... लेकिन मेरी प्लानिंग में दो बड़ी अड़चने थीं एक तो टीम में बदलाव दूसरा थोड़ा बहुत रूल्स , और मैच की अम्पायर को तो मैं सम्हाल लेती , आखिर मेरी सास ही थीं, और उन्हें मैंने छुटकी ऐसी बड़ी सी घूस थमा दी थी, और उनके साथ जो एक दो और होंगी , छुटकी सुबह से ही उनका मन बहला रही थी , लेकिन ज्यादा बड़ी दिक्कत थी मेरी टोली की ही, भौजाइयों की टीम की जो पुरानी खिलाड़ी थी हर बार हारती थीं , उन्हें मनाना,

और इस मामले में मंजू भाभी ने पूरा मेरा साथ दिया, टीम ११ की ही थी,.... तो कम से ४ -५ तो जवान खूब तगड़ी, और ऐसी भौजाइयां होनी चाहिए जो न गरियाने में पीछे हटें न ननदों के इधर उधर छूने रगड़ने उँगरियाने में,... और वैसे भी ननद भौजाई की इस होली वाली कबड्डी में कुछ भी फाउल नहीं होता था, ... कपडे तो सबके फटते थे और पूरी तरह, आधे टाइम तो वैसे ही , लेकिन उस समय कोई मरद चिड़िया भी नहीं रहती थी तो औरतों लड़कियों में क्या शर्म, वो भी होली के दिन,...

लेकिन मैं सोच रही थी की कम से कम आधी ऐसी हों जिनके अभी बच्चे न हों, शादी के चार पांच साल से ज्यादा न हुए हों पर गाँव में पिछले दो तीन साल में तो सिर्फ मेरी ही डोली उतरी थी , और चार पांच साल में पांच छह बहुएं आयी तो थी,... लेकिन मेरे अलावा तीन ही थीं जिन्होंने गाँव को अपना अड्डा बनाया था बाकी की सब अपने मर्दों के साथ, काम पर,....

फिर एक बार दिल्ली बंबई पहुँचने के बाद कौन गाँव लौटता है,...





होली के इस खेल में गाँव में हम लोगो की ही, मलतब भरौटी, अहिरौटी और बाकी सब टोले वाली नहीं,... वैसे तो गाँव में औरतों के बीच के बीच पूरा समाजवाद चलता है, जब मैं आयी थी तो उम्र और रिश्ते के हिसाब से जो भी सास और जेठानी लगती थीं, सब का पैर मैंने हाथ में आँचल ले के दोनों हाथ से पूरा झुक के छूआ था, और गाँव में जो मेरी अकेली देवरानी लगती थी, कुसमा, ...





उस का मर्द कुंए पे पानी भरता था और वो पानी अंदर लाती थी, हाथ पैर भी दबाती और अपने मर्द के किस्से सुनाती थी , कैसे रगड़ रगड़ के, उसे बर्थ कंट्रोल पिल्स भी मैंने ही दिया था और होली के दिन उसके टोले में जा कर होली भी अपने देवर, उसके मरद के साथ खेली थी,... तो उसी की तरह की और भी थीं कुछ अगर दो तीन उस तरह की टीम में हमारी आ जाएँ तगड़ी तगड़ी,...जैसे ही मैंने उसका नाम लिया वही मेरी जेठानी जो हारने में कोई बुराई नहीं देखती थी ४० -४५ की रही होंगी देह भी एकदम ढीली ढाली,... उचक के बोलीं

" अरे उ कलुआ क मेहरारू,... "





मैं तो समझ गयी, गयी भैंस पानी में,... मेरी पतंग की डोर उड़ने से पहले ही उन्होंने काट दी,...

लेकिन मेरी जेठानी मंजू भाभी थी न , उन्होंने अपनी सहेली की ओर देखा, और बस मोर्चा उन्होंने सम्हाल लिया,... और मेरी ओर तारीफ़ की निगाह से देखते बोलीं,

"नयको को इतने दिन में ही कुल बात , ... एकदम सही कह रही है,... अरे बहुत जांगर ओहमें हैं देह दबाती है तो देह तोड़ के रख देती है, एकदम बड़ी ताकत है,... सही है। "





ये तो मुझे मालूम था रोज रात भर मेरे ऊपर इनके चढ़ने के बाद जब उठा नहीं जाता तो कटोरी भर तेल ले के मेरी देह मेरी जाँघों में , दोनों पैर या तो रात भर उठे रहते या निहुरी रहती , और इनके धक्के भी हर धक्के में पेंच पेंच ढीली हो जाती,... और उसकी मालिश के बाद तो मन यही करता की, अब एक दो बार और हो जाए तो कोई बात नहीं,...





असली खेल था जांघ की मालिश की बाद बात बात में वो हथेली से रगड़ रगड़ के सीधे गुलाबो पे , और हर चढ़ाई का किस्सा सुन के ही , फिर उँगलियों से दोनों फांको को रगड़ के, दो ऊँगली एकदम जड़ तक अंदर,... दो चार मिनट में तो कोई भी झड़ने के कगार पर पहुँच जाए , ....





और खाली शादी शुदा ही नहीं कुंवारियां भी , आज स्कूल में मैच है की आज पी टी में कमर पिराने लगी , और पांच मिनट में उस लड़की के पोर पोर का दर्द , मालिश करवाने वाली भी जानती थी और कुसुमा भी की मालिश कहाँ की होनी है,... असल में नाम तो उसका कुसुमा था लेकिन मेरी एक सास लगती थीं उनका भी मिलता जुलता नाम तो अब सबने नाम उसका बदल के चमेली कर दिया था तो मैं भी उसी नाम से पुकार के,...

" हाँ उहे चमेलिया,... अरे गाँव में हमारी अकेली देवरान , हमरे बाद तो वही आयी बियाह के और ओकरे साथ,... '

मैंने बात आगे बढ़ाने की कोशिश की तो एक बार फिर मेरी बात काट दी गयी वही मंजू भाभी की सहेली , मेरी जेठानी और उन्होंने सही बात काटी,...

" अरे छोडो , समझ गए हम सब चमेलिया और ठीक है तू और मंजू आपस में बात करके तय कर लो ,... सही बात है यह बार कुछ नया होना चाहिए और ननदों को हराना चाहिए "

मैं समझ गयी , अगर मैं बाकी का नाम लेती और वो जेठानी जो कुछ भी नए के खिलाफ थीं वो फिर.... अगर किसी के खिलाफ हो जातीं तो ,...

अब मैंने टीम की बाकी मेंबर्स का नाम एनाउंस किया , मेरे अलावा जो तीन भौजाइयों की टीम में वही जो लड़कोर नहीं थीं,... मंजू भाभी , वो जो हमारा साथ दे रहे थी और एक दो और

फिर मैंने जो बड़ी बुजुर्ग भाभी लोग थीं उनकी ओर मुंह कर के बोला, खूब आदर के साथ ५०० ग्राम मक्खन मार के,

" और आप लोग थोड़ा हम लोगों का का कहते हैं उ, मार्गदर्शक रहिएगा,... आप लोगों का जो इतना एक्सपीरियंस है, एक एक ननद क त कुल हाल चाल आप लोगों को मालूम होगा ही, तो बस आप लोग जैसे कहियेगा,... एकदम वैसे वैसे , और आप लोगन क आसीर्बाद और पिलानिंग से कहीं जीत गए,... तो जितने कच्चे टिकोरे होंगे न सब आप लोगों की झोली में,... "





वो भी मेरी बात से सहमत होती बोलीं , " ठीके कह रही हो , अब सांस फुला जाती है, चूल्हा झोंकते बच्चे पैदा करते,... "





तो फिर उन पुरानी जेठानियों ने काफी ज्ञान दिया जिसे मैंने एक कान से सुन के दूसरे कान से निकाल दिया , लेकिन तब तक किसी ने छुटकी का नाम ले लिया,...

" अरे उ नैनवा पक्की छिनार, वो तोहरे छुटकी बहिनिया को भी भौजाई की टीम में जुड़वाएगी , मानेगी नहीं। "

" अरे कैसे उसकी कौन शादी हुयी है यह गाँव में , भौजाई कैसे हुयी वो " मैं भी अड़ गयी , फिर मुस्कराते हुए मैंने तुरुप का पत्ता खोला,..." देखिये पहले तो हम लोग मानेगे नहीं , और मानेगे बहुत कहने सुनने पर तो अपनी तीन शर्तों के साथ ,.... "

अब वो जेठानिया भी मान गयी ,

लेकिन असली वाला तुरुप का पत्ता नहीं खोला था छुटकी जब आठ में थी , -- कैटगरी , ४२ किलो वाली फ्री स्टाइल में , जिले में नहीं पूरे रीजन में , रीजनल रैली में सेकेण्ड आयी थी, फ्री स्टाइल में और तीन साल से अपने स्कूल की कबड्डी टीम में थी और उसका स्कूल भी रीजनल रैली में तीसरे नंबर पर था, उसकी पकड़ तो कोई छूट नहीं सकता , फिर साँस भी डेढ़ दो मिनट तो बहुत आसानी से,... स्टेट के लिए कोचिंग भी की थी दो महीना,... स्पोर्ट्स हॉस्टल में,..

तो अब बचीं मैं मंजू भाभी और तीन चार जेठानियाँ जो टीम में थीं और मैंने पूरी बात बताई।

कुसुमा या चमेलिया का नाम तो मैंने पहले ही बता दिया था, और उसके हाथों के जादू के सब कायल थे उसके बाद दूसरा नाम मैंने लिया रमजनिया, अरे वही जो चंदू देवर , जिसकी सहायता से मैं अपने उस ब्रम्हचारी देवर को फिर से चोदू बना पायी, और मेरे उस के कुछ गुन बखारने के पहले मंजू भाभी बोल पड़ीं ,





" सही बोल रही हो, का ननद का भौजाई का गाँव क कउनो लौंडा सब का एक एक बात का हाल उसको मालूम रहता है ,... ननदों के टीम के एक एक का नस वो पकड़ के बता सकती है , फिर तगड़ी भी बहुत है, दो चार लौंडियों को तो झटक के छुड़ा के,... "

तीसरा नाम मैंने जोड़ा नउनिया क छुटकी बहू , गुलबिया का,





हमसे सात आठ महीने पहले गवना करा के आयी थी, खूब गोरी सुंदर , देह कद काठी जबरदस्त,... लेकिन दो चार महीने बाद मरद पंजाब कमाने चला गया तब से मरद बिना छनछनाई रहती है , गरम तावा पे पानी की बूँद डालने पे जो हालत होती है वही, और आपन कुल जोर कुँवार ननदन पे उतारती है , होली में दस बार मरद को फोन किया, वो बोला भी,... फिर वही बहाना , छुट्टी नहीं मिली , रिजर्वेशन नहीं मिला,... गाडी छूट गयी,... गुस्से में बोलती,

हमको मालूम है उंहा किससे गाँड़ मरा रहे हैं , नहीं आओ तोहरी बहिनिया क चोद के,...

और बहिन उसकी कौन , कजरी , नैना की सहायक,...





होली में कजरी के पिछवाड़े मैंने जो जड़ तक ऊँगली पेली थी दस मिनट तक और निकाल के सीधे उसके मुंह में , गुलबिया खूब खुश हुयी ,... तो आज जब सब एक से एक कच्ची उमर वाली ननदें मिलेंगी तो फिर तो,... और जो काम करने वाली होती हैं रोज चक्की चलाती हैं , कुंवे से पानी निकालती हैं सर पे दो दो घड़ा , बगल में एक घड़ा लेकर चलती हैं , पूरी पिंडलियाँ , जांघें हाथ सब एकदम कसे कसे ,...

और चौथा नाम एक जेठानी ने बताया, और नाम बताते ही मैं समझ गयी, उमर में चमेलिया और गुलबिया से थोड़ी बड़ी,.. लेकिन एक बार रतजगे में वो दुल्हिन बनी थी,... और एक जो दूल्हा बनी थी उसके ऊपर चढ़ के उसी को चोद दिया बेचारी की माँ बहन सब एक कर दी,...

जेठानी ने जोड़ा चूत से चूत पे घिस्सा देने में उसका कोई मुकाबला नहीं , बड़ी से बड़ी उम्र में दूनी हो ताकत में ज्यादा हो तो बस एक बार चढ़ गयी किसी लड़की, के ऊपर तो बस उसका पानी निकाल के दम लेती है और एक साथ दो ,दो तीन तीन , एक को चूत से रगडेंगी, बाकी दो को दोनों हाथ से ,.. और उसके पल्ले कोई पड़ गयी न तो एक दो ऊँगली का तो मतलब ही नहीं, कुँवारी हो, झील्ली न फटी हो , तो भी सीधे तीन ऊँगली, और गरियायेगी भी
 
छुटकी और गितवा





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तो टीम तो बन गयी थी मंजू भाभी के ही यहाँ लेकिन बस अब ये गितवा की झंझट और फाइनल स्ट्रेटेजी

एक बार हम लोग जीत गए और जीतना तो है ही,

मैंने अल्टीमेट सरेंडर की लेस्बियन रेसलिंग के बहुत वीडियो देखे थे और इस समय वही दिमाग में नाच रहे थे, जीतने वाली एक फुटा स्ट्रैप ऑन डिलडो बाँध के और हारने वाली की क्या दुर्गत होती थी,...





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बस वो सब टीम के मेंबर्स को दिखाने थे और उनसे डिस्कस भी करना था क्या होना है ननदों के साथ,.. एक से एक मस्त मस्त ऑप्शन मेरे दिमाग में आ रहे थे

लेकिन तो सब तभी होगा जब गीता की कोई काट निकल जाए ,

और तभी छुटकी आती दिखी, हंसती खिलखिलाती,... उछलती





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और आते ही मेरे गले से चिपक गयी और फिर अपने आप बोलने लगी , .... वो गीता के पास से ही आ रही थी,... ये तारीफ़ ये तारीफ़

और मुझे गीता का हल मिल गया।





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छुटकी गीता और उसके भाई अरविन्द का किस्सा बताती रही और मैं सुनती रही, मुझे कुछ नया नहीं लग रहा था, पहले ही जानती थी ननद का मतलब खाली छिनार नहीं भाईचोद भी होता है और देवर स्साला अगर बहनचोद नहीं है तो उसे बहनचोद बनाना भौजाई क काम है,...

लेकिन मेरे कान खड़े हो गए जब छुटकी ने दो शर्तों की बात की तो उसी समय मैंने उसे टोक दिया, और हड़काया पूरा बोल.

मुझे लगा की गीता की चाभी मिल गयी।

और जब छुटकी ने हाल खुलासा सुनाया तो बस मैंने उसे गले से लगा लिया।

हुआ ये था की स्टेशन पर जब हम लोग थे तो अरविन्द भी था और बस छुटकी को देख के उसका टनटनाने लगा, और उसमें कोई अलग बात नहीं थी। छुटकी थी है ऐसी मेरी और उस दिन तो और रात भर जीजू ने उसके ट्रेन में रगड़ा था, चूँचियों पर ढक्क्न भी नहीं था, बिल में मलाई बजबजा रही थी,...

लेकिन अरविन्द बाबू की हालत तो एकदम ही खराब थी और उसी रात अपनी बहिनिया कम बीबी ज्यादा से अपने दिल का हाल बताया,...

लेकिन परेशानी जो गीता ने बताई वो ये थी की उसके भाई ने कसम खा रखा था की अपनी बहन के अलावा इस टोले में किसी और लड़की के साथ ( हालांकि इस अपवाद में रोपनी कटनी वाली , गाँव की भौजाइयां शामिल नहीं थीं ). बस मैं मान गयी छुटकी को जो उसने रास्ता निकाला,...

वो गीता से बोली, दीदी अरे मैं आपको तो दी ही मान रही हूँ मान क्या रही हूँ आप हैं ही,





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गीता ने छुटकी को गले से लगा लिया आज उसने पहली बार मन की बात किसी से कही थी, बोली, ...

बहन तो हो ही मेरी प्यारी प्यारी छोटी बहन , मेरी कोई छोटी बड़ी बहन नहीं थी, तो आज मुझे एक प्यारी प्यारी सुंदर सी मस्त छोटी बहन मिल गयी, असली वाली सगी से भी बढ़के ...

बस छुटकी ने वहीँ कैच कर लिया और बोली

" दी, पक्का मैं आपकी छोटी बहन हूँ तो भैया की भी तो छोटकी बहिनिया हूँ , फिर क्या, अब बड़ी बहन के साथ उन्होंने बहुत मस्ती कर ली अब छोटी का नंबर है,... और जानती हैं मेरे कोई भाई भी नहीं, सगा भी नहीं चचेरा ही नहीं,... मेरा बड़ा मन करता था भाई चोद होने का बस, ... और भैया को बोल दीजियेगा , अगर उन्होंने जो भी ना नुकुर की जो मैं आपकी बहन हूँ छोटी तो भैया की भी छोटी बहन ही हुयी न बस हम दोनों बहनें मिल के उन्हें चोद देंगे अगर उस बहन चोद ने ज़रा भी नखड़ा किया। "

गीता खिलखिलाने लगी, और हंस के बोली, पक्का,...

" बस अबकी राखी में उन्हें राखी बाँध दूंगी और उसी राखी बंधे हाथ से जुबना दबवाउंगी, तो बोलिये वो है न मेरा भाई"

छुटकी ने हँस के कहा,... और गीता मान गयी और फिर दोनों शर्त , छुटकी ने कहा की अगर वो बहन है तो उसकी बाकी बहने भी भैया की बहन ही लगेगी ,

लेकिन मुझे कोई फरक पड़ता था चाहे मैं उसे देवर समझ के चोदू या है भाई समझ के , सगा तो मेरा कोई था नहीं और सगे की तरह जो ममेरा भाई था चार पांच दिन पहले अपनी जेठानी ननदों के सामने उसी ममेरी भाई से खुल के चुदवाया,... उस समय तो चलिए मैं कच्ची दारु के नशे में थी पर शाम को ट्रेन में तो उसे उकसा के,

बस छुटकी की दूसरी शर्त का मैंने फायदा उठाया और उसे समझा दिया की मैच के दौरान या उसके ठीक पहले, वो गीता को,...

गीता कबड्डी में आएगी तो उसके सामने छुटकी ही ,... बस शर्त के मुताबिक़ वो छुटकी को मार नहीं सकती और छुटकी के आगे हार मान जाती,...

मेरी बड़ी मुश्किल सुलझ गयी

तबतक मंजू भाभी रामजनिया और कजरी की भौजी आ गयीं,... और मंजू भाभी ने और रमजनिया ने ननदों की स्ट्रेटजी के बारे में बताना शुरू कर दिए।

मंजू भाभी ने पिछले चार साल से कबड्डी खेली थी और दो साल तो वो वाइस कैप्टेन भी थीं. रमजनिया खेलती नहीं थी क्योंकि अब तक खाली बबुआने क लड़कियां और औरतें, लेकिन रहती जरूर थी और मुझे उसकी नज़र और अकल दोनों पे भरोसा था. उसी के भरोसे मैंने चंदू का किला जीता था वरना पूरे गाँव की औरतों ने ऐसा चैलेन्ज दिया था की उसका लंगोटा खुलवाना बड़ा मश्किल है और अब ननदो की शलवार स्कर्ट खुलवानी थी, ....
 
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