Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 18 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 111

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


अब तक

ममता कमलनाथ पर बिना ध्यान दिये सामने की टेबल पर खाना रखा और अपने भैया के बगल मे बैठते हुए बडे प्यार से कमलनाथ को पुचकारा

ममता - भैया उठो ,,, भईआआ ऊ

ममता की आवाज रुक गयी ,,उसकी सांसे तेज होने लगी , क्योकि उसकी नजरे इस वक़्त उसके भैया के पैजामे से बाहर निकले लण्ड पर थी । जिसे वो आंखे फाडे देखे जा रही थी ।

अब आगे

ममता तो जैसे मुर्ति बन गयी । उसकी नजर अपने भैया के सोये हुए काले लण्ड कर गयी ,, जिसका चटक कथइ और आलू जैसा मोटा सुपाडा बाहर निकला था।

ममता की सासे बहुत तेज थी ,, वो थुक गटक कर कभी अपने भैया के चेहरे को देखती तो कभी उनके सास लेते लण्ड को ,,,

ममता की चुत ने रस छोडना शुरु कर दिया था , उसने एक बार फिर अपने भैया को हिलाया और जगाने की मालुमी सी कोसिस की । मगर कमलनाथ पूरी तरह से तन कर सोया था ।

ममता का दिल बहुत जोरो से धडक रहा था ,,, वो कमल्नाथ को जांचने के बाद लगातर अब उसके मोटे लण्ड को निहारे जा रही थी । उसकी जीभ ने लार छोड़नी शुरु कर दी थी जिसे वो बार बार गटक रही थी ।

ममता बडी हिम्मत की और कमलनाथ के कन्धे पर रखे हाथ को सरका कर लण्ड पर पास लाई और जैसे ही उसे छूना चाहा तो कमरे मे हवा का हल्का झोका आया और वो सतर्क हो गयी ।

उसे समझ आया कि वो क्या गलती करने जा रही थी । वो उठी और दौड़ कर दरवाजे के बाहर झांकी और फिर दरवाजा अन्दर से बंद कर दी

दरवाजा बंद करने के बाद ममता घूमी और एक बार अपने सोते हुए भैया को देख कर मन ही मन खुश हुई । धीरे धीरे वो कमलनाथ की ओर बढने लगी साथ ही उसकी सासे भी गहरी होने लगी ।

दबे पाव से ममता चल के कमलनाथ के सामने आई और घुटनो के बल बैठ गयी ।

ममता ने एक नजर कमलनाथ को देखा और फिर कापते हुए हाथो को आगे बढ़ाया ।

जैसे ही ममता की हथेली ने कमलनाथ के लण्ड के उपरी सतह को स्पर्श किया, ममता पूरी तरह से गनगना गयी ।

वो मुस्कुरा कर कापते हुए हौले से कमलनाथ के सोये हुए लण्ड को पकड़ा जो काफी भारी था ।

ममता ने दोनो हाथो अपने भैया के लण्ड थामा जो अभी थोडा ढिला था । जिससे ममता को बहुत गुदगुदी सी मह्सूस हो रही थी ।

वो मुस्कुरा कर हल्का हल्का अपने भैया की लण्ड को सहलाना शुरु किया ।

कुछ ही देर मे लण्ड अकडने लगा । लण्ड को कड़ा होता देख ममता की आंखे चमक उठी, उसने एक नजर कमलनाथ की ओर देखा और फिर उसके पाजामे मे हाथ डाल कर उसके मोटे मोटे आड़ो को हलोरते हुए बाहर निकाल दी ।

गरम आड़ो की तपन से ममता को नशा होने लगा और वो झुक कर लगातर कमलनाथ के चेहरे को देखते हुए आड़ो को चूमा ।

तुरंत कमलनाथ के बदन मे हल्की सी हरकत हुई तो ममता डर गयी और सहलाना रोक दिया ।मगर उसने लण्ड से हाथ नही हटाया ।

कुछ सेकेंड रुक ममता ने लगातार कमलनाथ के चेहरे को घूरा और फिर मुस्कुरा उसके सुपाड़े पर अपना अंगूठा फिराते हुए झुक कर ग्प्प्प से उसका सुपाडा मुह मे भर ली ।

ममता ने आधा लण्ड अन्दर लेके अपनी आंखे उपर कर एक बार फिर कमलनाथ को निहारा और फिर धीरे धीरे पुरा लण्ड गले तक उतारती चली गयी ।

फिर हल्का हल्का उसने लण्ड को चूसना शुरु कर दिया मगर उसपे आज एक अलग ही जुनून था ,,उसको ये सब अपने भैया के साथ करके एक नयी ऊततेजना मह्सूस हो रही थी ।

धीरे धीरे ममता की लण्ड चुसने की क्रिया तेज होने लगी और उसका असर कमलनाथ के उपर भी होने लगा था । वो नीद मे ही कुनमुनाने लगा ।

ममता जो अब तक कयी बार कमलनाथ को हरकत करते हुए देख चुकी थी तो उसने अपनी ऊततेजना मे कमलनाथ पर कोई खास ध्यान नही दिया और पहले से ज्यादा कामुक तरीके से अपने भैया का लण्ड निचोड़ने लगी ।

वही कमलनाथ को आभास हो चुका था कि कोई उसका लण्ड चुस रहा है मगर उसकी आंखे नही खुल पा रही थी ,,, तो वो निद मे कुममनाते हुए बड़बड़ाया - उम्म्ंम्म्ं जानू क्या कर रही हो ,,, उह्ह्ह्ह

ममता अपने भैया की आवाज सुन कर जहा थी वही रुक गयी और उसके दिल की धडकने तेज होने लगी । वो अपनी नाक से तेज सासे लेने लगी क्योकि अभी भी उसके मुह मे आधा लण्ड भरा हुआ था ।

ममता को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे ,,, उसकी कुलबुलाती चुत उसे लण्ड छोडने से मना कर रही थी । मगर उससे कही ज्यदा उसे डर सता रहा था कि कही उसके भैया जग ना जाये ।

वही कमलनाथ को थोडी शान्ति मिलने पर वो वापस नीद के आगोश मे चला गया ।

ममता ने मौका देख कर हल्के से अपना मुह खोला और गरदन उपर कर ली । फिर बडे आराम से बिना कोई आहट के वैसे ही लण्ड को छोड दिया ।

फिर वो दबे पाव वैसे ही कमरे से बाहर निकल गयी । उसने दरवाज बन्द किया और फिर सीढियो से निचे की ओर जाने लगी ।

वो हाल मे पहुची ही थी कि उसे अनुज अपने कमरे से बाहर आता हुआ दिखा जो कल रात की तरह आज भी नजारे देखने की आश मे निकला था । मगर ऐन मौके पर ममता निचे आ गयी तो उसकी फट गयी ।

डर तो एक पल को ममता भी गयी थी अनुज को ऐसे सामने पाकर फिर उसने खुद को सम्भाला और बोली - क्या हुआ अनुज तू सोया नही

अनुज की आंखे बडी हो गयी कि क्या बोले ,, उसकी दिल की धडकनें तेज हो गयी थी,,तभी उसकी नजर किचन के खुले दरवाजे पर गयी ।

अनुज मुस्कुरा कर - वो वो मै पानी लेने जा रहा था बुआ

ममता मुस्कुरा कर - ठीक है पानी पीकर सो जाना ।

फिर ममता पल्लवि के कमरे मे चली गयी ।

इधर ममता के जाते ही अनुज ने एक गहरी सास ली और फौरन अपने कमरे मे भाग गया ।

अनुज मन मे - आज तो बच गया ,,,नही तो पकड़ा ही जाता ,,और ये ममता बुआ भी पता नही क्यो निचे आई है अब पता नही कब उपर जायेंगी । आज का सारा मजा खराब हो गया

अनुज भी उदास मन से बिस्तर पर चला गया और सो गया ।

वही एक तरफ धीरे धीरे करके सारे लोग सो गये थे । वही उपर टेरिस के बाथरुम मे रज्जो नहाने के लिए घुस गयी और उसने दरवाजा बंद कर दिया ।

रज्जो की इस हरकत से राजन के उम्मीदो पर पानी फिर गया । रज्जो अन्दर बाथरूम मे मन ही मन खिलखिलाई ।

फिर उसने भी अपने सारे कपडे निकाल कर थोडी देर मे नहा ली ।मगर कपडे तो उसके पास भी नही थे तो उसने वैसे ही नंगी दरवाजे को ओट मे होकर अपनी एक जांघ को थोडा बाहर निकाल कर दरवाजा खोला ।

रज्जो - जीजा जी तौलिया दीजियेगा ।

राजन वो तौलिया ही लपेट कर वही बाथरुम के पास टहल रहा था और रज्जो की आवाज सुन कर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आई और वो बाथरूम के पास गया और रज्जो के सामने ही तौलिया निकाल कर फिर से नंगा हो गया और तौलिया देते समय उसका लण्ड पूरी तरह से तना हुआ था ।

तभी उसकी नजर बाथरुम मे एक किनारे भीगी हुई रज्जो के पेतिकोट ब्लाउज पर गयी तो उसका दिल गदगदा गया ।

क्योकि उसे समझ आ गया कि रज्जो ज्यादा से ज्यदा ये तौलिया ही लपेट कर आयेगी ।

रज्जो ने मुस्कुरा कर एक नजर राजन के खड़े लण्ड को निहारा और फिर उसके हाथ से तौलिया लेके दरवाजे के पीछे हो गयी ।

इस बार रज्जो ने दरवाजा बन्द नही किया । फिर हल्का फुल्का अपने बदन को पोछा

रज्जो ने फिर तौलिया लपेटा और दरवाजे के सामने आई तो उसका उभरा हुआ बदन देख कर राजन की हालत खराब हो गयी ।

फिर रज्जो ने दरवाजे की ओर पिठ कर झुकी और अपना पेतिकोट उठाया ,, इस छोटे से सीन ने राजन को रज्जो के गाड के निचले हिस्से के उभारो की झलक मिली ,,जिससे उसका लण्ड और फुदकने लगा ।

फिर रज्जो ने वही किनारे पर रखे राजन के बनियान और जान्घिये को उठाया

राजन ने मौका देखा और वो फौरन बाथरूम मे घुस गया और रज्जो को रोकते हुए - नही नही भाभी आप ये क्या कर रही है ,,एक तो मेरी गलती के कारण ये सब हुआ ।

रज्जो ने एक नजर बाथरुम मे बलब की रोशनी राजन के तने हुए लण्ड को निहारा और फिर उससे बोली -अरे कोई बात नही भाई साहब,,,बस दो मिंट का ही काम है ।

राजन - लेकिन

रज्जो मुस्कुरा कर - आप चिन्ता ना करिये ,,बस वो टोटी चालू किजीये ।

फिर रज्जो वही निचे बैठ गयी और राजन ने वही खडे होकर टोटी चालू की ।

फिर वही निचे बैठ कर रज्जो ने सारे कपडे कचाडने शुरु कर दिये , ऐसे मे उसने जो मोटा तौलिया लपेटा था उसकी गांठ खुल चुकी और जैसे ही रज्जो सारे कपड़े को लेके एक बालटी मे डाल कर उन्हे गारने के लिए उठी ,,,उसके तौलिये का गांठ खुल गया और वो चिहुक कर फौरन तौलिये को पकडना चाही मगर उसके हाथ मे कपड़े थे । फिर भी उसने वैसे ही भिगे कपड़ो के साथ ही अपना तौलिया चुचियो के पास पकड लिया और तौलिया सरकने से रह गया ।

राजन को ब्डा अफसोस हुआ कि ये मौका भी नही मिला उसे । फिर रज्जो ने बार राजन को देखा तो हसने लगी ।

मगर तबतक वो गीले कपडे से काफी सारा पानी धीरे धीरे तौलिए को भी भीग चुका था ।

रज्जो - जीजा जी ये पकड़ेन्गे जरा , वो मेरा तौलिया खुल रहा है हिहिहिही

राजन बडी बेशरमी से हाथ आगे किया और रज्जो के हाथ से कपडे ले लिये और उसने देखा कि तौलिया भी पूरी तरह से भीगा है ।

रज्जो ने राजन को कपडे देके तौलिया पकडे हुए घूम गयी और अच्छे से उसको लपेट लिया ,,मगर तौलिया ज्यादा होने से वो फिर से खुल रहा था ,,जिसे बार बार रज्जो सही कर रही थी

राजन - भाभी मुझे नही लगता कि वो रुकेगा , क्योकि तौलिया भी भीग गया ।

रज्जो - हा सही कह रहे हैं जीजा जी ,,,

राजन - ऐसा करते हैं कि मै ये बत्ती बुझा देता हू और आप तौलिया निचोड लिजिए

रज्जो मुस्कुरा कर - हम्म्म सही रहेगा

फिर राजन ने वो कपडे को वही एक बालटी मे रख दिया और स्विच बंद करके बाथरुम की लाईट बुझा दी ।

अब वहा पुरा अंधेरा हो चुका वही रज्जो ने अपने जिस्म से तौलिया उतार कर उसे गारने लगी ।

इधर राजन धीरे धीरे अनुमान लगाते हुए रज्जो के करीब जाने लगा

रज्जो ने तौलिया निचोड़ा लेकिन फिर भी वो सही से लिपटा नही रहा था ।

रज्जो - ये तो अब भी नही लिपटा रहा है,,,

राजन - लाईये मुझे दीजिये

रज्जो - हा लिजिए लेकिन आप कहा है दिख नही रहे

राजन ने हाथ आगे करके

हा दीजिये भाभी जी

राजन ने हाथ आगे बढ़ाया लेकिन उसका हाथ रज्जो के नंगे पेट को छुआ ,,इसका अह्सास पाते ही राजन के रज्जो के गुदाज पेट का सहलाने लगा ।

रज्जो गुदगुड़ी से खिलखिलाकर - अरे कहा खोज रहे हैं इधर है उपर मेरा हाथ

राजन समझ रहा था कि रज्जो भी थोडी मस्ती चाहती है इसिलिए वो अपने हाथ को उपर उसकी बड़ी बड़ी चुचियो के पास ले गया और निप्प्ल के पास हथेली को घुमा कर - कहा है भाभी जी मिल नही रहा ,,,

रज्जो अपने नंगे निप्प्ल और चूची पर अपने नंदोई के हाथो का स्पर्श पाकर सिहर सी गयी ।

रज्जो - उम्म्ंम्ं कहा खोज रहे हैं जीजा जी अह्ह्ह्ह य्हाआआ है येईईईई उम्म्ंम्ं इस्स्स्स

राजन जो कि अब रज्जो की सही जगह जान गया था तो वो रज्जो के बगल मे खड़ा होकर अच्चे से उसके चुचो मे ही हाथो को घुमाने लगा ।

राजन - ओहो कहा है भाभी मिल नही रहा है

रज्जो अब पूरी तरह से गरम हो रही थी तो उसका हाथ निचे हो गया था ।

रज्जो सिस्क कर - उम्म्ंम जिजाआआआ जीईई मेरा हाथ निचे है

राजन की मानो लौटरी लग गयी । वो चुचियो पर से हाथ को सहलाते हुए उसके पेट फिर चुत के उपरी हिस्सो को सहलाने लगा । जिस्से रज्जो को कपकपी होने लगी ।

राजन थोडा उंगलियो से रज्जो की हल्की झान्टो वाली चुत का मुआयना करते हुए जांघो को सहलाया - ओह्हो भाभी कहा है मिल नही रहा ,,, आप मुझे परेशान करना चाह रही है ना हिहिहिही

रज्जो सिस्ककर - उह्ह्म्म्ं न्हीईई जीजाआआ जीई वही निचे ही तो है

राजन ने इस बार रज्जो के चुत के फाको के उपर से हथेली को घुमाया और फिर अपना दुसरा हाथ उसके चुतडो की ओर सहलाते हुए ले गया और थोडा आगे होकर अपना नुकीला लण्ड रज्जो की कमर के पास घिसने लगा ।

रज्जो को अब ज्यादा खुमारि होने लगी और वो राजन के गरम लण्ड की तपन अपने मुलायम कमर मे चुबता मह्सूस कर काप गयी और उसके हाथ से तौलिया निचे गिर गया ।

राजन ने मौका पाकर रज्जो की उभरी हुई गाड़ का भरपूर मुआयना करते हुए - ओह्ह भाभी कहा है आगे भी नही ना ही पीछे ।

रज्जो अब थोडा राजन की ओर झुकने लगी ,,,उसका शरीर अब धीरे धीरे अपना सन्तुलन खो रहा था ।

रज्जो कसमसा कर - उम्म्ंम्ं जिजाआअह्ह जीईई वो निचे गिर गया तौलिया सीईईयीयू उह्ह्ह्ह्ह्ंंमम्मम्ंं

राजन रज्जो की गाड पाटो को सहलाते हुए - अच्छा रुकिये मै निचे देखता हू,

राजन फिर रज्जो के पीछे आ गया और उसकी कमर को छुता हुआ ठीक उसकी गाड़ के उभारो के सामने आ गया ।

राजन के हाथ अभी भी रज्जो के कूल्हो पर सरक रहे थे और उसे रज्जो के बदन से एक मादक सी खुस्बु मिल रही थी । उसने एक लम्बी सास लेते हुए अपने नथुनो को रज्जो की गाड़ की गहरी दरारो के करीब लाकर सुँघा और फिर मुह से सास छोड दी ।

रज्जो अपने गाड़ के उभारो पर राजन की सासो की गरमी पाकर अपने पाटो को सख्त कर लेती है और उसके दिल की धड़कने तेज हो जाती है ।

मगर राजन के हाथ जैसे ही वापस उसके कूल्हो पर सरकते है वो अपने चुतड के पाटो को ढिला कर देती है और उसी समय राजन हल्का सा आगे होकर अपने शेविंग हुए गालो को हल्का सा रज्जो के गाड़ के एक पाट पर टच करवाता है और उन्हे घुमाता है ।

जहा राजन को अपने गालो पर रज्जो की नरम गाड की ठंडी चमडी आनन्द दे रही थी वही रज्जो की हालत और खराब होने लगी ,,,उसे राजन का स्पर्श बहुत ही कामुक लगा ।

राजन समझ रहा था कि अगर वो मुह से बोल कर भी रज्जो को सेक्स के लिए प्रस्ताव दे तो भी वो मना नही करेगी ,,मगर वो इस पल का मजा लेना चाह रहा था ।

वही रज्जो जो अब तक राजन के हल्के स्पर्शो से पागल हुई जा रही थी ,,उसको बहुत इच्छा होने लगी कि राजन उसके जिस्मो पर अपनी असली मरदाना छाप छोड़े ,,वो उसके बदन को नोच कर गाव के मर्द की ताकत दिखाये ।

राजन के हाथ रज्जो के कूल्हो से सरकते हुए अब उसके सख्त होते गाड़ के पाटो को थाम चुके थे ,,,राजन ने बहुत हल्का सा ही दबाव बनाते हुए रज्जो के गाड़ के मुलायम पाटो को फैलाया था की रज्जो ने खुद अपनी कमर को पीछे की ओर झुका दिया और राजन की नाक रज्जो के गाड़ के गहरी चौडी दरार मे घुस गयी ।

रज्जो सिसकी - उम्म्ंम्ं जिजाआअजीई

राजन को जब अह्सास हुआ कि रज्जो ने खुद पहल करके अपनी चुतडो को पीछे धकेला है वो बहुत ही उत्तेजित हो गया ।

उसने अब अपनी हथेली को रज्जो के चुतडो पर कसते हुए उसके पाटो को फैलाकर अपनी जीभ को उसके गाड़ के सुराख पर फिराया ।

रज्जो अपनी गाड़ के पाटों को सिकोड़ते हुए - उम्म्ंम्ं जिजाआआह्ह्ह जीईई क्याअह्ह्ह कर रहे है उम्म्ंम्ं सीईईईई अह्ह्ह्ह्ह

राजन बिना कोई प्रतिक्रिया के अपने काम मे लगा रहा और लपालप जीभ को गाड़ के सुराख पर चलाता रहा

रज्जो कसमसा कर खुद का सन्तुलन बनाने के लिए थोडा अगल बगल हाथ घुमा कर बाथरुम की दिवाल पर हाथ रख दिया और सिस्कने लगी

उसकी चुत ने रिसना शुरु कर दिया और एक मादक गन्ध राजन के नथुनो को रज्जो के चुत के निचले हिस्से की ओर खीचने लगी । राजन के अपने हाथों को रज्जो के चुतडो से हटाया और उसके मासल जांघो को सहलाते हुए उसके चुत के उपरी हिस्से और पेड़ू पर अपनी उगलीओ को घुमाया ।

राजन की मजबूत कलाई को अपनी जांघो और उसके ऊँगलीओ को अपने चुत के आस पास रेंगता पाकर रज्जो कापने लगी । वही राजन उसके गाड़ के पाटो को मुह मे भरने की कोसिस करता तो कभी कुत्तो की लम्बी जीभ निकाल कर उनको चाटता ।

धीरे धीरे उसके अपने हाथ को रज्जो के चुत के उपर ले आया और अपनी दो मोटी ऊँगलीयो से रज्जो के भोसडीदार चुत के फन्को को रगड़ा, जिससे रज्जो की चुत ने पिचपिचा कर थोडा रस छोडा ।

राजन वापस रज्जो की कमर को थामा और खड़ा हुआ जिससे रज्जो आगे होने वाले रोमांच को सोच कर और भी सिहर उठी ।

राजन ने एक हाथ से लण्ड को पकड कर रज्जो के गाड़ के पाटो पर घुमाया ,,

रज्जो मन मे - उफ्फ्फ नंदोई जी का सुपादा बहुत मोटा लग रहा है उम्म्ंम कब डालोगे जीजा जीईईई

राजन अपना लण्ड उपर कर रज्जो के गाड़ के दरारो मे फसा कर अपनी गरम छाती रज्जो के मुलायम पिठ से सटा दी , रज्जो को ऐसा मह्सूस हुआ कि मानो गरम तवा उसके बदन को छू गया मगर एक गजब भी ठंडक भी थी और रज्जो ने अपना बदन राजन के उपर ढिला कर दिया ।

राजन ने रज्जो के कमर के आगे हाथो को उसके पेट से होते हुए उपर उसकी तेजी से उपर निचे होती चुचियो के करीब ले गया फिर दोनो हाथो से उसकी भारी मुलायम चुचियो को थाम कर उन्हे प्यार से उठाया और अपनी कठोर खुरदरी हथेली मे उन्हे मिजना शुरु कर दिया ।

रज्जो एक काम कुण्ठा से भर गयी , उसे एक नये जोश का अनुभव हुआ ,,आखिर जिस मजबूत स्पर्श के लिए वो तडप रही थी वो उसे मिला और उसके हाथ खुद ब खुद उसके नदोई के हाथो के उपर आ गये और वो अपने नंदोई के हाथो को दबा मानो उन्हे उकसा रही थी कि उसके चुचियो को और कठोरता से मसला जाये ।

राजन ने इशारा समझा और अपने होठो से रज्जो एक गरदन के पास चुमते हुए उसने रज्जो के छातियो को और भी जोर से भिच्ना शुरु कर दिया ।

ऐसे मे रज्जो ने पहली बार अपनी भावना व्यक्त की - उम्म्ंम्ं अह्ह्ह्ह जीजाआअहह जीईई ऐसे हीईई उम्म्ंमममं

राजन रज्जो के वक्तव्य सुन कर और भी उत्तेजित हुआ और उसने भी अपनी भाव्नाओ के सागर से कुछ शब्दो को रज्जो के जिस्म के तारिफ के रूप मे बोलते हुए कहा - ओह्ह्ह्ह भाभी जी आपके ये जोबन बहुत ही गूलगुले और मोटे है अह्ह्ह्ह्ह , कमल भैया तभी तो नशे मे भी आपको भूल नही पाते उम्म्ंम

रज्जो कसमसा कर - उम्म्ंम जिजाआह्ह्ह जीईई पकड तो आआपकीईई भी बहुतहह मजबूउउउत है अह्ह्ह्ह उम्मममं तभीईई तोओह्ह ममता इतनी निखर गयी है अह्ह्ह्ह

राजन मुस्कुरा कर - मजबूत तो मेरा कुछ और भी है भाभी ,,,कहो तो उसका भी

राजन के बात पूरी होने से पहले ही रज्जो ने अपनी गाड़ आगे कर थोडा साइड हुई और राजन के खड़े लण्ड को हाथ पीछे कर थामकर उसे सहलाते हुए - उम्म्ंम्ं यही ना ,,,लग तो रहा है काफी मजबूत है ,, मगर मेरी भट्टी की गरमी झेल पायेगा कि नही हिहिही

राजन मुस्कुरा कर रज्जो की चूचियो को सहलाता हुआ - आप ही जाच लो ना भाभी एक बार

रज्जो मुस्करा कर घूमी और राजन के लण्ड को मुठियाते हुए - हम्म्म्म देखना तो पडेगा ही एक बार कि मेरे पति ने अपनी बहन के लिए सही माल खोजा है भी या नही।

राजन ने रज्जो की कमर मे हाथ डाल कर उसे अपने ओर खिच कर उसके होठो पर हाथ फिराते हुए कहा- शुरुवात इस्से करिये ना भाभी जी

रज्जो ने थोडी मुस्कुराई और सरकते हुए राजन के कदमो मे बैठ गयी और हाथो को अच्छे से राजन के जांघो और लण्ड के आस पास के एरिया मे सहलाया जिससे राजन के लण्ड मे और भी उत्तेजना आ गयी ।

रज्जो ने मुह खोला और लण्ड के जड़ के पास से उसको एक हाथो से पकडते हुए मुह मे आधा घोट लिया ।

राजन पूरी तरह से हिल गया - उम्म्ंम्ं भाअभीईईई जीईई अह्ह्ह्ह मजा आ गया ओह्ह्ह्ह ऐसे ही उफ्फ़फ्फ्फ अज्झ

इधर धीरे धीरे रज्जो ने राजन का लण्ड अपने मुह मे भरना शुरु कर दिया ,,वही राजन के मन मे ये दृश्य अपनी आँखो से देखने की इच्छा होने लगी ।

उसने अपने हाथ को इधर उधर पास की दिवाल पर रेगाया और स्विच का बटन पाते ही उसे जला दिया ।

बाथरुम मे रोशनी बाते ही रज्जो चौकी और लण्ड को मुह मे भरे ही अपनी बडी बडी आंखो से राजन को उपर की ओर देखी ।

राजन इस दृश्य को देखकर और भी गदगद हो गया और उसने अपने हाथ को रज्जो के बालो मे घुमाया और बोला - ओह्ह्ज्ज भाभी जी ना जाने कब से इस दृश्य के लिए मै लालयित था उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह ऐसे ही और अन्दर लिजिए अह्ह्ह्ह

रज्जो राजन की मनोभाव्ना सुन कर मुस्कुराइ और थोडी शर्माइ भी , फिर वापस लण्ड को मुह मे भरना शुरु कर दिया ।

थोडी देर बाद ही राजन ने रज्जो के सर को थाम कर उसे इशारा किया कि आगे बढा जाये ।

रज्जो ने वही बगल मे गिरा भीगा हुआ तौलिया उठाया और उसे वही बिछा कर सीधा लेट गयी और अपनी चुत को सहलाते हुए राजन को आमन्त्रण देंने लगी ।।

राजन रज्जो के नग्न बदन को इतने करीब से देख पागल सा होने लगा और तेजी से अपना लण्ड हिलाने लगा

रज्जो अपनी खुली हुई चुत को जान्घे फैला कर रगड़ती हुई - ओह्ह्ह जीजा जी आओ ना ,,इस बार भी सुबह की तरफ बस देख कर निकाल दोगे क्या अह्ह्ह

राजन रज्जो के वक्तव्य सम्झ कर मुस्कुराया - नही भाभी ऐसा मौका कैसे जाने दूँगा

राजन अपने घुटनो के बल आया और लण्ड को सहलाते हुए उसे रज्जो के गीले भोस्दे पर रखा और एक बार मे पुरा लण्ड रज्जो के चुत के जड़ मे उतार दिया ।

रज्जो - अह्ह्ह्ह्ह जिजाआअह्ह्ह जीईईई मर गयीईईई ओह्ह्ह्ह झह

रज्जो तेज तेज सांसे लेने लगी - उह्ह्ह अह्ह्ह एक ही बार मे जान ले लोगे क्या आप अह्ह्ह माआ उह्ह्ह्ह अराम से थोडा उम्म्ंम्ं

राजन हस कर - मुझे लगा काफी खुला हुआ माल है तो आराम से चला जायेगा

रज्जो शर्माई- अब खोल दिया है तो रुके क्यू है ,,किजीये ना उम्म्ंम्ं

राजन अपने हाथ आगे ले जाकर उसके चुचियो को सहलाते हुए - क्या कर भाभी जी

रज्जो थोडा शर्मा के - उम्म्ंम्ं अह्ह्ह जीजा जी वही जो आज भोर मे मेरे साथ करने के लिए सोच रहे थे अह्ह

राजन मे रज्जो के दोनो हाथो को पकड कर उपर किया और उसकी एक चुची को मुह मे भरते हुए एक बार फिर एक लम्बा जोरदार ध्क्क्का रज्जो के चुत मे लगाते हुए - मुझे तो आपके इस भोसडीदार चुत मे अपना लण्ड घुसा कर पेलना था भाभी जी अह्ह्ह

रज्जो राजन के मुह से ऐसे खुले और कामुक शब्द सुन कर सिहर गयी और उसने अपनी चुत के अंदर ही लण्ड को कसते हुए - उम्म्ंम तो पेल लिजिए ना जिजाआ जिईई जैसे मन हो अह्ह्ह्ह

राजन मे वैसे ही रज्जो के हाथ उपर किये हुए अपनी कमर को चलाना शुरु किया और लगातर रज्जो की आन्खो मे देखते हुए उसके भावो को पधने की कोशिस करता रहा

रज्जो राजन के तेज धक्के से पूरी हिल्कोरे मारे जा रही थी ,,बाथरुम थ्प्प्प थ्प्प्प की आवाज और रज्जो की सिस्कियो से गूज रहा था ।

राजन - अह्ह्ह भाभी मेरा तो काफी सालो से ये सपना था कि कास आप को ऐसे खोल कर चौद पाऊ अह्ह्ह आज मेरा सपना हकीकत मे हुआ अह्ह्ज

रज्जो कस्मसा कर - अह्ह्ह जीजा जी उम्म्ंम ऐसेही अह्ह्ह ऐसे ही आह्ह चोदिये मूझे जैसे आप चाह रहे हैं उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह उम्म्ंम

राजन - ओह्ह्ह भाभी जी बहुर मजा आ रहा है आपके भोस्ड़े मे उम्म्ंम बहुत गरम हो आप अह्ह्ह

रज्जो - अह्ह्ह मजा तो आपके इस लण्ड मे भी है जीजा जीई अह्ह्ज ऐसे ही ओह्ह्ह

राजन - उम्म्ंम लगता ही नही सिर्फ कमल भैया ने अकेले इसे इतना खुला कर दिया है उम्म्ंम्म्ं अह्ज्ज्ज

रज्जो - उम्म्ंम्ं और कौन करेगा जीजा जीईई मै कोई रंडी थोड़ी हू अह्ह्ह क्या मै आपको रन्डी लगती हू जीजा जी बोलिए ना ,,क्या मेरी चुत आपको रन्डी की चुत लगती है अह्ह्ह्ह जिजाआजहह जीईई

राजन तेजी से रज्जो के भोस्दे मे पेलता हुआ - उन्मममं किसी चुद्क्क्ड रन्डी से कम थोडी ना लग रही हो भाभी अह्ह्ह्ह आपको देख कर ही लगता है कि कितनी चुदवासी हो उम्म्ंम

रज्जो अपनी तारिफ सुन कर सिस्कते हुए - अह्ह्ह सच मे इत्नी कामुक हू मै जीजा जिईई अह्ह्ह

राजन - उम्म्ं हा भाभी जी,,इतनी बड़ी बड़ी चुचिया और ये बड़े बड़े गाड मैने किसी और के नही देखे । ऐसा लगता है कितना ज्यादा गाड़ मरवाति हो आप अपना

रज्जो मुस्कुरा कर -अह्ह्ह हा जीजा जीई मुझे बहुत पसन्द है अपनी गाड मे लण्ड लेना अह्ह्ह्ह आप भी दोगे ना उम्म्ंम्म्ं बोलो ना जीजा जीईई

राजन रज्जो की बातो से बहुत ही उत्तेजीत हो रहा था तो वो और लम्बे धक्के लगाते हुए - हा भाभी आज पूरी रात आपकी चुत और गाड मारने वाला हू उम्म्ंम अह्ह्ह

रज्जो- ओह्ह्ह जिजाआअजीई ये अह्सास उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह और तेज्ज्ज्ज अह्ह्ह मै आ रही हुईई ओह्ह्ह्ह पेलो ना मुझे और तेज्ज्ज्ज अह्ह्ह मै आपको रन्डी जैसी दिखती हू ना अह्ह्ह्ह मुझे रन्डी समझ कर पेल दो अझ्हअह्ह्ब माआ

रज्जो ये बोल कर तेजी से अपनी गाड़ को उच्काने लगी और झड़ने लगी और वही राजन रज्जो के मुह से इतने कामुक और ऊततेज्क शब्दो को सुन कर पागल हो गया,,,उसके सुपाड़े मे वीर्य भरना शुरु हो गया वो तेजी से धक्के लगाने लगा ,,, रज्जो की चुत से पच्च्च्च प्च्च्च्च्च की आवाजे आने लगी

राजन - अह्ह्ह हा भाभी आप एक नम्बर की रन्डी लगती हो मुझे आह्ह्ह कितनी गर्म हो अह्ह्ह मेरी रन्डी अओह्ह्ह ये ले और ले औम्म्ंं अह्ह्ह

रज्जो - अह्ह्ह जीजा जी चोदिये मुझे अह्ह्ह्ह मै रन्डी हउउउऊ अह्ह्ह उम्म्ंम और तेज आह्ह्ह

राजन का खुद को अब रोक पाना बहुत मुस्किल वो झडने के बहुत ही करीब था - अह्ह्ह्व मेरी रन्डी भाभी अह्ह्ह मै आने वाला हूउउऊ अओह्ह्ह मेरी चुद्क्क्कड़ड़ ओह्ह्ह

राजन फौरन लण्ड निकाला और हिलाते हुए उठकर रज्जो के मुह के पास गया - अह्ह्ह मेरी रन्ड़ि ले सारा माल अह्ह्हअह्ह्ह्ह ले सरा पि जाआ हहह

राजन तेजी से रज्जो के मुह पर मुठिया कर झडने लगा और फिर रज्जो के मुह मे लण्ड ठूस दिया जिसे रज्जो ने अच्छे से निचोड दिया ।

राजन वही बगल के दिवाल का सहारा लेके पैर फैला कर बैठ गया । थोडी देर तक दोनो ने अपनी सास बरबार की और फिर दोनो एक दूसरे को देख कर ह्स्से

राजन ने अपने पैर के अंगूठे से रज्जो के चुची को ठेला तो रज्जो शर्मा गयी और उठकर टोटी चालू करने लगी ,,वही राजन रज्जो की फैली हुई गाड़ को देख कर एक बार फिर से सिहर उठा और लण्ड सहलाते हुए खड़ा हो गया ।

जारी रहेगी

पढ कर रेवो जरुर दे और कहानी के लिए अपना विचार जरुर रखे ।बिना उसके लिखने का मजा नही आता ।

आपके प्यार की खासा जरुरत है ।

धन्यवाद
 
सूचना

सादर अभिवादन मित्रो

अवगत कराना है कि मेरे बडे भाई की शादी के सिलसिले में व्यस्त हू तो अगले महीने की 10 फरवरी तक अपडेट देने मे असमर्थ हूँ ।

अगर समय रहा तो जो अपडेट लिख रहा हूँ वो दो एक दिन की अवधि मे दे दू नही तो क्षमा प्रार्थी हूँ ।

कहानी जारी रहेगी ।



साथ बनाये रखे । धन्यवाद 🙏🙏🙏
 
अपडेट 112

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पिछले अपडेट मे आप सभी ने पढा कि कैसे रज्जो और राजन आखिरकार एक दुसरे को पा ही लिये और एक राउंड दमदार चुदाई के बाद भी राजन वापस से रज्जो की गाड़ का दिदार पाते ही अपना लण्ड सहलाने लगा ।

अब आगे

लोकेशन : राजन का बेडरूम

समय : रात के 02:30 बजे

पोजीशन : डॉगी स्टाइल

सेक्स टाइप : एनल

चुदाई का राउंड : चौथा

संवाद : अह्ह्ह्ह जीजा जीईईई उफ्फ्फ्फ्ग उम्म्ंम और तेज अह्ह्ह सच मे आपका एक एक धक्का मेरी गाड का सुराख बहुत ही फैला दे रहा हैअह्ह्ज्ज उफ्फ्फ्फ

राजन रज्जो के गाड पर थपेड जड़ता हुआ तेजी से लण्ड को उसकी गाड़ मे पेलता हुआ - ओह्ह्ह भाभी जी आज तक आप जैसी गरम औरत नही चोदी अह्ह्ह ,,,सच मे बहुत गरम हो आप उह्ह्ह

रज्जो सिस्क कर - हा जिजाआ जीईई उम्म्ंम्ं मुझे लण्ड की चसक बहुत है और आज आपके साथ का ये अनुभव बहुत ही जोशीला है अह्ह्ज उम्म्ंम्ं अह्ह्ह

रज्जो - ओह्ह्ह जीजा जीईई ऐसे ही औम्म्ंं बहुत अच्छा लग रहा है अज्ज्ज मेरी गाड़ फाड़ दो आजजज ओह्ह जीजा जी चोदो ना उम्म्ंम्ं

राजन रज्जो के संवाद से उत्तेजित होकर आखिर के कुछ दमदार धक्को के साथ भलभला कर रज्जो की गाड़ मे झडने लगता है ।

रज्जो राजन का लण्ड अपने चुतड के छल्ले से निचोडते हुए -उह्ह्ह जीजाजीई आपका गरम माल मेरी गाड़ के अन्दर के घावो को बहुत आराम दे रहा है ,,,आपने तो छील ही दी मेरी गाड अन्दर से हिहिहिजी

राजन रज्जो के चुतडो को हिलाते हुए - तूम सच मे एक नम्बर की राड हो भाभी ,,,चुदने मे जरा भी नही शर्माती हाहहहा

रज्जो इतरा कर - वो रन्डी ही क्या जो चुदने मे शर्मा जाये हिहिहिही,,, तो एक और राउंड के लिए तैयार है जीजा जीईई हिहिहिहिह

राजन थक कर चुर हो गया था - अरे अभी तो बहुत समय है भाभी शादी तक कयी राउंड होंगे , हा लेकिन आज जित्ना नही ,,आज जोश जोश मे बहुत ज्यादा हो गया ,, अब थोडा आराम करने की इच्छा है

रज्जो ह्स कर - कोई बात नही हिहिहिही ,,आप भी सो जाईये ,मै अपने कमरे मे जा रही हू ।

फिर रज्जो अपनी साडी लेके अपने कमरे मे आती है और वही राजन भी कपडे पहन कर सो जाता है ।

रज्जो कमरे मे प्रवेश करती है तो उसकी नजर टेबल पर रखे खाने की थाली पर जाती है ।

रज्जो मन मे - ये खाने की थाली कौन लाया ,,,शायद ममता लाई होगी , और ये जनाव उठे नही होगे ना

तभी रज्जो की नजर कमलनाथ के पायजामे से बाहर निकले लण्ड पर गयी

रज्जो मन मे - ये ऐसे क्यू सोये है ,,कही ममता अपने भैया के साथ मजे तो नही ना कर लिये हिहिहिही ,,, नही नही वो इतनी शरमिली है कि इसको देख कर ही भाग गयी होगी ।

फिर रज्जो ने अपने पति के कपडे सही किये और सोने चली गयी ।

अगली सुबह 5 बजे तक ममता की नीद खुली तो वो फ्रेश होकर उपर का हाल देखने गयी तो जैसे ही उसकी नजर अपने भैया के कमरे के बंद दरवाजे पर गयी , उसे रात के वो मस्ती भरे पल याद आ गये और वो शर्मा कर अपने कमरे की ओर बढ गयी जहा राजन रात की चुदाई की थकान से खरराते भर रहा था ।

ममता को कोई अचरज नही हुआ कि अभी 6 बजने वाले है और उसका पति सोया है ,,उसे यही लग रहा था कि रात मे ड्रिंक करने का असर होगा शायद । फिर वो आलमारि से अपने कपडे निकाल कर उपर टेरिस के बाथरूम मे नहाने के लिए चली जाती है ।

वो नहा कर ब्लाउज पेतिकोट मे बाहर निकल रही होती है कि सामने उसके भैया कमलनाथ छत पर टहल रहे होते है। ममता एकाएक सकपका जाती है और उसे अपने भैया के सामने ऐसे अचानक से ब्लाउज पेतिकोट मे आ जाने पर थोडा अटपटा सा लगता है मगर वो क्या कर सकती थी ,, वो बाल्ती लेके कमलनाथ को क्रॉस करके अरगन पर कपडे डालने के लिए चली जाती है ।

इधर कमलनाथ भी अपनी छोटी बहन के भरे ताजे जिस्म की कसावट और कामुक उभार को ब्लाउज पेतिकोट मे देख कर थोडा असहज महसूस करता है और जैसे ही ममता कपड़े फैलाने के लिए अरगन की ओर जाती है वो लपक कर फौरन बाथरूम मे घुस जाता है और दरवाजा बंद कर लेता है ।

दोनो भाई बहन मन ही मन खुद को थोडा शान्त करते है वही ममता धीरे धीरे सारे कपडे फैला देती है तो उसे ध्यान आता है कि उसकी ब्रा और पैंटी तो वही टोटी के पाइप पर टंगी हुई है ।

ममता अपना माथा पिट कर बुदबुदाई- हे भगवान , कही भैया उसे देख ना ले , क्या करु रुकू या निचे चली जाऊ

ममता अपने भैया से इतनी झिझक मह्सूस करने लगी और उसे कमलनाथ का सामना करने मे बहुत ही शर्म आ रही थी इसिलिए वो उपर रुकना ठीक नही समझी और बाद मे आने का सोच कर निचे कमरे मे चली गयी ।

वही कमलनाथ फ्रेश होकर जब हाथ धुलने टोटी के पास गया तो वहा पाइप पर उसे एक सेट ब्रा पैंटी दिखी और उसे समझते देर नही लगी कि वो उसके छोटी बहन ममता की ही है । मगर उस समय कमल्नाथ ने उसपर ध्यान नही दिया और वो हाथ धुल कर बाहर आया ।

कमलनाथ को उम्मीद थी कि शायद ममता अब भी उपर ही हो ,मगर उसको उपर ना देख कर कमलनाथ बुदबदाया - लगता है ममता अपने अन्दर के कपडे नल पर ही भूल गयी ,, चलो मै ही डाल देता हू नही तो गरमी के सीजन मे महकने लगेगा ।

कमलनाथ वापस बाथरूम मे गया और ममता की ब्रा और पैंटी लेके बाहर आया और बकायदा चिमती लगा कर उसने ममता के ब्रा और पैंटी को टांग दिया । तभी कमलनाथ की नजर ममता के ब्रा के लेबल पर गयी और 40 नम्बर का साइज़ देख कर कमलनाथ की आंखे चौडी हो गयी ।

कमलनाथ मुस्कुरा कर मन ही मन बोला - ये ममता के साइज़ कभी ध्यान ही नही गया हाहहहहा ,

फिर कमलनाथ नीचे चला गया । इधर ममता साड़ी पहन कर अपने कमरे मे कमलनाथ के निचे आने का इंतजार कर रही थी और जैसे उसे आभास हुआ कि उसके भैया निचे की सीढि की ओर घुमे वो लपक कर उपर के जीने से छत पर चली गयी ।

तभी ममता की नजर अरगन पर लहराते उसके ब्रा और पैंटी पर गयी और वो शर्म से पानी पानी हो गयी कि उसके भैया ने उसकी ब्रा और पैंटी अपने हाथो से सुखने के लिए डाल दी ।

ममता मन मे सोचते हुए थोडा इतराई- ये भैया भी ना हिहिहिहीही ,

फिर ममता अपनी कल्पनाओ मे खुद के सवालो का जवाब खुद ही देते हुए निचे अपने कमरे मे जाने लगी - क्या भैया ने मेरा साइज़ भी पढा होगा ,,,,, क्या सोच रहे होगे ,हिहिहिही लेकिन वो क्या सोचेंगे रज्जो भाभी का तो मुझसे भी ब्डा है सब हाहाहा । लेकिन अब मै उनके सामने कैसे जाऊ ,हे भगवान ये सब क्या हो रहा है हिहिहिही

ममता ऐसे ही बडबड़ाते हुए अपने कमरे मे आई और फिर राजन को जगा कर निचे किचन मे चली गयी ।

थोडी देर बाद 9 बजे तक लगभग सारे लोग नहा धोकर तैयार होकर नास्ते के लिए एकजुट हुए ।

जहा एकतरफ रज्जो और राजन मे आंखो ही आँखो मे इशारे बाजी हो रही थी ,वही ममता और कमलनाथ आपस मे एक दुसरे से नजरे चुरा रहे थे । वही पल्लवी की कोशिस जारी थी कि वो अनुज से थोडी नजदीकिया बढाए ,,मन तो अनुज का भी था मगर वो पल्लवी जितना जिगरा नही रख पा रहा था ,,उसे जब लगता कि पल्लवि उसे घुर रही है वो इधर उधर की बाते बनाता ताकि घर के बड़ो मे से कोई उसकी चोरी ना पकड ले ।

नास्ते के टेबल पर ही तय हुआ कि सभी लोग तैयार होकर रेडी रहे 11 बजे से सब लोग माल मे जायेंगे खरीदी के लिए । सारे लोग खुशि से चहक उठे खास कर महिला मंडल मे तो काफी उत्साह था शोप्पिन्ग के लिए ।

इधर यहा जानीपुर ये सब हो रहा था वही चमनपुरा मे भी कम काण्ड नही होने वाले थे आज ।

राज की जुबानी

रोज सुबह की दिनचर्या पूरी करके मै किचन मे नास्ते के लिए बैठा था और मोबाइल मे रात के मैसेज , मिस्काल का जवाब दे रहा था क्योकि सोनल और अनुज के जाने के बाद से रात मे मुझे समय ही नही मिल पाता था । ऐसे ही वो whatsaap स्क्रोल कर रहा था कि उसकी नजर status वाले सेक्सन पर गयी और मेरी आंखो मे नयी चमक आ गयी क्योकि कल काजल भाभी मे मेरा नम्बर सेव कर लिया था और उनका WhatsApp status मुझे शो हो रहा था । जो कि एक miss you sad status का गाना लगा था । फिर मुझे ध्यान आया कि कल ही तो शकुन्तला ताई बता रही थी कि काजल भाभी के पति अगले ही हफते आने वाले है ।

तभी मेरे दिमाग मे आइडिया आया और फटाफट अपने whatsaap status की privacy को only share with करते हुए सिर्फ काजल भाभी के नम्बर को सेलेक्ट करके 3 4 न्यू मॉडल ब्रा और पैंटी सेट की तस्वीरे डाल दी जो मेरे पास दुकान मे मौजुद थी । बस अब उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार था ।

मै जानता था ये एक बार मे नही होगा , मुझे और किसी ना किसी तरह से काजल भाभी को लपेटना पडेगा उसके लिए भी मैने सोच लिया ।

फिर मैने नासता किया और दुकान के लिए निकल गया ।

दुकान पर आने थोडी ही देर बाद ही चंदू का फोन आया और उसकी बाते सुन कर मेरा लण्ड अंगड़ाई लेने लगा ।

क्योकि उसने खबर ही ऐसी दी थी । बस अब मम्मी के आने का इन्तजार था ताकि उनकी इजाजत ले सकू ।

मै वापस दुकान के कामो मे लग गया , बीच मे एक दो बार whatsaap चेक कर रहा था और थोडा परेशान हो रहा था कि काजल भाभी ने अभी तक मेरा स्टेटस देखा क्यू नही ।

थोडी ही देर बाद मा दोपहर का खाना लेके आ गयी ।

मै खुश होके - मा मुझे आपसे कुछ बात करनी है

मा - हा बोल ना बेटा क्या बात है

मै - मा वो चंदू के मम्मी पापा दो दिन के लिए उसकी बुआ के यहा गये कोई शादी मे तो घर पर चंपा और चन्दू ही है

मा - हा तो

मै थोडा झिझक दिखाते हुए - तो मै कह रहा था ,,मतलब चंदू मुझसे पुछ रहा था कि मै उसके साथ सोने के लिए आ सकता हु क्या ,,

मा - हा तो चला जा ,, आखिर तेरा दोस्त है और उसने कितनी मदद भी तो की थी सगाई मे

मै हस कर - लेकिन मा वो रात मे हमारा वाला हिहिहिही

मा हस कर - धत्त बदमाश , दो ही दिन की बात है ना , मै कहा भागी जा रही हू हिहिही पागल कही का

मै हसकर - तो आज रात का अभी निबटा लिया जाये हिहिहिही

मा कुछ बोलती उससे पहले ग्राहक आ गये और वो बस हस कर चुप रहने का बोली फिर वो काम मे लग गयी और मै खाना खाने चला गया



लेखक की जुबानी

इधर जहा राज आज रात के लिए चंदू के साथ चम्पा को भोगने का प्लान बना चुका था ,वही जानीपुर मे रज्जो के यहा भी सारे लोग तैयार होकर दो ई-रिक्शा करके निकल गये सिटी के बड़े शॉपिंग मॉल की ओर ।

थोडी देर बाद सारे लोग माल पहुच गये ।

सोनल और पल्लवि तो बहुत ही खुश नजर आ रही थी और पल्लवि की खुशी देखकर अनुज भी खुश था ।

ममता और कमलनाथ दोनो आपस मे नजारे चुराते हुए कभी नजारे मिलती तो मुस्कुरा देते थे । वही रज्जो , राजन के सामने और भी इठला रही थी ।

राजन तो रज्जो के साडी मे थिरकते चुतडो का दीवाना हो चुका था ।

वही रमन और सोनल अपने अपने प्रेमियों के पास मोबाईल के माधय्म से संपर्क बनाये हुए थे

पल्लवि आज बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी क्योकि आज सोनल ने उसे अपना नेवी ब्लू रंग का चूड़ीदार सूटसलवार दिया था पहनने के लिये और एक हिल वाली सैंडल भी ।

चूड़ीदार सलवार की कसावट पल्लवि के चर्बीदार कूल्हो पर साफ दिख रही थी और वही डीप नेक वाली सूट पर सिफान के पतले दुपट्टे से बडी चुचियो की दरारे झाक रही थी ।

पल्लवि कभी घूम कर अपनी लटो को कानो मे सहेजते हुए अनुज को देखती तो कभी सरकते दुपट्टे को कन्धे पर चढ़ाने के बहाने ।

अनुज भी सबकी नजरो से बच कर पल्लवि की कसी जवानी देख कर बहुत ही गदगद हो गया था । बार बार उसकी नजरे पल्लवि के कूल्हो पर कसे हुए सलवार की सिलवटो पर जा रही थी । उसके गोल गोल चुतडो की थिरकन अनुज की सांसो से लय बनाते हुए उपर निचे हो रही थी ।

फिर सारे लोग माल मे घुसते है ।

रज्जो कमलनाथ से - देखिये जी , पहले रमन के लिए शेरवानी और एक दो सूट ले लिया जाये , फिर बाकी सबको उनके हिसाब से जो लेना है ले लेगा ।

फिर सारे लोग उपर की मंजिल पर गये जहा ये वेडिंग ड्रेस की दुकान थी । जब रमन के लिए कपडे लिये जा रहे थे तो पल्लवि ने रज्जो से पहल करके सेम उसी मॉडल की दुसरे रंग की शेरवानी अनुज के लिए कही ।

पल्लवि - देखो मामी ,ये अनुज के लिए अच्छा रहेगा ।

ममता हस कर - अरे अनुज सहबाला बनेगा तो कही दुल्हन इसको ही दूल्हा ना समझ ले हिहिहिहिही

ममता की बाते सुन कर अनुज शर्मा जाता है जिसे पल्लवि भी ध्यान देती है और मजे लेते हुए कहती है ।

पल्लवी - कोई बात नही मम्मी , अनुज को मै पकडे रहूंगी हिहिहिही ताकि भाभी रमन भैया को ही दूल्हा समझे

पल्लवि की चंचलता भरी बातो पर सब हसने लगे ।

थोडी देर बाद अनुज और रमन के लिए ड्रेस ले लिये गये ।

रज्जो कमलनाथ से - चलिये जी अब आपका और जीजा जी के लिए कपडे देख लिया जाये ।

ममता - अरे नही भाभी , हम सबने तो कपडे लेके रखे हैं ।

रज्जो - तू चुप कर मै मेरे जीजा जी को दिला रही हू , तुझे चाहिये तो जा अपने भैया से लेले ।

ममता अपने भैया की चर्चा सुन कर एक नजर कमलनाथ को देखती है और उसे वापस से कल रात और आज सुबह की घटणाए याद आती है तो वो शर्मा कर मुस्कुराने लग जाती है ।

कमलनाथ - अगर ऐसी बात है तो चल ममता , मै तुझे दिलाउँगा

ममता हस कर- नही भैया क्या आप भी ,,भाभी मजाक कर रही हैं हिहिहिहिही

कमलनाथ - क्या नही , लिया जा रहा है कपडा तो सबके लिए खरीद लेते हैं ना , और वैसे भी कितना दिन हो गया मैने तुझे कुछ दिया नही , आ चल

ये बोल कमलनाथ ममता की कलाई पकड कर उसे एक निचे लेडिज वाले सेक्शन मे लेके चला जाता है ।

वही रज्जो - चलिये जीजा जी उधर जेन्स वाला , और ब्च्चो तुम लोगो को जो जो चाहिये लेलो , मै आती हू ।

इधर रज्जो भी राजन के साथ निकल गयी ।

इसी बीच रमन मोबाइल पर कुछ चेक कर रहा था ।

रमन - ऐसा है तुम लोग खरीदारी करो मै एक फोन करके आता हू

पल्लवि हस कर - हा हा जाओ जाओ , भाभी का ही फोन होगा हिहिहिहिह

रमन मुस्कुरा कर दुसरी ओर निकल गया

पल्लवी - तो सोनल दिदी आपको भी बात करनी हो तो कर लो हीहिहिही , देख रही हू काफी बार बज चुका है आपका फोन

सोनल अनुज के सामने थोडी शर्मायी और हा मे सर हिलाते हुए एक ओर निकल गयी ।

पल्लवि अनुज से - चलो अब हम लोग ही बचे हैं, तो अब तुम मुझे कपडे पसंद करने मे मदद करो

अनुज सकपकाकर - म म मै ए ए कैसे ???

पल्लवि थोडा हस अनुज का हाथ पकड कर निचे लेडिज सेक्शन की ओर चल दी ।

इधर कमलनाथ ममता को लेके एक साडी वाले सेक्शन में चला गया ।

कमलनाथ - ये क्या ममता कैसी सिम्पल साड़ीया ले रही है तू , कोई न्यू मॉडल मे ले ना

ममता थोड़ा झिझक कर - वो भैया मै ऐसे ही पहनती हू , गाव मे तो ऐसे ही बाकी की औरते भी पहनती है ना ।

कमलनाथ - ओहो तू भी ना गाव जाकर बदल ही गयी ,, शादी से पहले तू एक से एक नये जमाने के कपडे लेती थी और तेरी पसंद को कोई मना भी नही कर पाता था, मगर अब देख ये सिम्पल साड़ी ले रही है ।

ममता हस कर खुसफुसा कर - हा भैया तब की बात और थी ,मगर अब मुझे ऐसी ही सिम्पल कपड़ो की आदत हो चुकी है ना तो प्लीज

कमलनाथ - ठीक है लेकिन ये साडी मेरी पसन्द की लेनी होगी , तू मना नही करेगी

कमलनाथ एक न्यू चन्देरी प्रिंटेड रेड कलर की साडी ममता की ओर बढाता था ,,साड़ी बहुत ही खुबसूरत थी तो ममता चाह कर भी मना नही कर सकती थी ।

ममता हस कर - हिहिही ठीक है भैया चलिये हो गया अब

कमलनाथ कुछ सोच कर - अब ब हा हा ठीक है लेकिन

ममता अपने भैया को सोचता हुआ देख कर - क्या हुआ भैया

कमलनाथ थोडा हिचकते हुए - वो वो तू अन्दर के कपडे नही लेगी क्या ???

ममता अपने भैया के मुह से ऐसी बाते सुन कर शर्मा कर मुह फेर ली तो कमलनाथ फौरन सफाई देते हुए बोला - वो मैने सुबह देखा तेरे अन्दर के कपडे पुराने हो गये और इस लाल साडी के लिए मैचिंग वाले ही लेने पडेंगे ना इसिलिए मै कह रह था ,,,अगर चाहे तो बाद मे अपनी भाभी के साथ आजाना

कमलनाथ एक ही सास मे अपनी बात खतम कर थोड़ी देर तक ममता की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करता है और उसे लगता है कि वो कुछ गलत बोल गया ।

कमलनाथ मायूस होकर - माफ करना ममता , चल चलते हैं

ममता ने जब देखा कि उसके भैया का चेहरा उतर चुका है तो उसका दिल पिघल गया और उसे समझ आया कि वो फाल्तू मे कितना गलत विचार रखती है, आखिर वो उसके बडे भाई है ,,बचपन से लेकर शादी तक उसकी हर जरुरत का ख्याल रखा है तो इसमे कोई बड़ी बात नही है कि आज वो मेरे अंदर के कपडे के बारे मे बोल दे तो ।

ममता थोडा हस कर शर्माते हुए - नही भैया अब इसमे क्या भाभी को परेशान करना ,,,चलिये मै ले लूंगी हिहिहिहिही

कमलनाथ ममता के जवाब सुन कर खिल उठा - सच मे ममता

ममता अपने भैया को खुश होता देख कर - अब ब हा इसमे कुछ गलत थोड़ी है ,,वैसे भी आप मेरे भैया है ,याद है जब मै छोटी थी तो आप ही मेरे लिए सारे कपडे लाते थे हिहिहिही यहा तक कि ये वाले भी

ममता एक ब्रा पैंटी के सेट की ओर इशारा करके बोली ।

कमलनाथ थोडा झेपा लेकिन वो खुश था कि ममता ने उसकी बातो को नही टाला।

वो दोनो अंडरगार्मेंट्स वाले सेक्शन की ओर बढ गये ।

वही एक ओर रज्जो अपने नदोई के लिए एक अच्छा सा सूट ट्राई करवा रही होती है , जिसमे राजन काफी जवान नजर आता है तो

रज्जो ह्स कर - अरे वाह जीजाजी , आप तो जवान लग रहे है

राजन मौका देख कर रज्जो के कान मे बोला - रात मे इसी जवानी का जोर भी देखने को मिलेगा भाभी जी

रज्जो राजन की बातो से शर्मा जाती है

वही एक तरफ लेडिज वाले कम्पार्ट मे ही पल्लवि और अनुज ट्रायल रूम के बाहर खडे थे और इन्तजार कर रहे थे ।

अनुज इस समय 3 4 सेट कपडे लेके खड़ा था । थोडी ही देर बाद एक लड़की ट्रायल रूम से बाहर निकली तो पल्लवि अनुज के हाथ से एक जीन्स और टॉप लेके अन्दर घुस गयी , अनुज वही बाहर इन्तजार करने लगा

थोडी देर बाद ट्रायल रूम का दरवाजा खुला तो पल्लवि सामने दिखी

अनुज आंखे फाड़ कर पल्लवि के चुचो को उस कसी हुई टॉप मे निहार रहा था और फिर उसकी नजर पल्लवि के जांघो और कूल्हो पर कसे हुए जिन्स पर गयी

अनुज को खुद को ऐसे घुरता देख पल्लवी शर्माइ और अपने बालो को कानो मे सहेजते हुए बोली - कैसी लग रही हू मै अनुज

अनुज तो बस पल्लवि मे खो ही चुका था , पल्लवि को समझ आया कि अनुज कोई जवाब नही दे रहा है तो उसने एक बार लपक कर ट्रायल रूम के गलियारे मे देखा और फिर अनुज को पकड कर अन्दर खीच ली

अनुज कुछ समझ पाता उससे पहले ही पल्लवि ने दरवाजा भिड़काते हुए अनुज के लिप्स को अपने मुलायम पतले होटों मे भर लिया ।

अनुज की आन्खे फैल गयी , उसके हाथ ढीले हो गए और सारे कपडे निचे , उसकी दिल की धड़कने तेज हो गयी थी और वो कुछ भी सोच समझ पाने की स्थिति में नही था ।

वही पल्लवि ने जमकर अनुज के नरम कुवारे होठो को चूसे जा रही थी , फिर उसने अपनी लपल्पाती जीभ को अनुज के होठो के किनारो पर फिराया तो अनुज पूरी तरह से सिहर उठा ,,एक नयी ऊर्जा के साथ उसने अपने होठ खोले और पल्लवि के ऊपरि होठो मे मुह मे दबा लिया ।

अनुज मन मे - ओह्ह्ह कितने मुलायम होठ है इसके उम्म्ं और ये इतना अच्छा कैसे कर रही है

पल्लवि ने जब मह्सूस किया कि अनुज ने भी उसके होठो को पकड रखा है तो उसने किस को और भी गहरा करते हुए एक बार अपनी जीभ को अनुज के मुह मे ले जाकर उसके जीभ को छुते हुए बाहर खिच ली

अनुज एक बार फिर से तडप कर रह गया ।

पल्लवि ने अपने होठ बाहर खिचे और बिना कोई सवाल जवाब के अनुज को बाहर भेज दिया ।

अनुज जहा ढ़ेरो सवालो के साथ ट्रायल रूम के बाहर स्तब्ध होकर खड़ा हुआ अपने गीले होठो को हाथो से पोछ रहा था और सोचे जा रहा था कि अभी क्या हुआ आखिर , ऐसा कुछ अनुज ने पहले कभी मह्सूस ही नही किया था ।

उसे वापस से वही तलब उठ रही थी ,,मानो कुछ बहुत ही कीमती उससे छीन लिया गया हो

इतने मे सोनल उन दोनो को खोजते हुए ट्रायल रूम तक आ गयी ।

सोनल - अरे अनुज कहा था तू , कबसे खोज रही हूँ और पल्ल्वी कहा है ।

तभी पल्लवि दरवाजा खोलते हुए बाहर आई - मै यहा हू दीदी हिहिहिही , वो अनुज ने मेरे लिए जीन्स पसन्द की थी तो वही ट्राई कर रही थी ।

ये बोलकर उसने अनुज को देख कर स्माइल पास की जिससे अनुज सकपका गया ।

सोनल थोडा तुनक कर - क्या बात है अनुज तुने मेरे लिये तो कभी कुछ पसंद नही किया हा

पल्लवी अनुज को छेड़ते हुए - हा सच मे दीदी ,,,ये तो बहुत गलत बात है अनुज , चलो अब आज अनुज ही हम दोनो के बाकी कपड़े ही पसंद करेगा हिहिहिहिही

सोनल अनुज की खिचाई होती देख बोली - हिहिहि हा हा क्यू नही ।

फिर वो तीनो लड़कीयो के वेडिंग सेक्सन मे चले गये और कुछ गाऊन वगैरह देखने लगे ।

वही लेडिज कम्पार्ट मे अंडरगार्मेंट्स वाले सेकसन मे कमलनाथ और ममता दोनो भाई बहन थोडा शर्माते हिचकते एक काउंटर पर गये ।

काऊंटर पर खड़ी एक महिला स्टाफ ने ममता से मुखातिब होकर - जी मैम कहिये क्या दिखाऊ आपको

ममता थोडा हिचक कर कमलनाथ की ओर देखती है क्योकि वो काफी समय से गाव मे रह रही थी तो उसे ज्यादा इनसब कपड़ो के बारे मे जानकारी नही होती थी और जो कुछ भी मगाना होता था वो अपने पति राजन को कह देती थी ।

कमलनाथ अपने बहन की मनोव्य्था समझ कर खुद पहल करते हुए बोला - जी इनके लिए ब्रा पैंटी का सेट दिखाईये ।

अपने भैया के मुह से अपने लिये ब्रा पैंटी की बात सुन कर ममता के दिल की धडकनें तेज हो गयी ।

वो महिला स्टाफ एक बार फिर से ममता से - अच्छा मैम आप अपना साइज़ बताईए

ममता इस बार हिम्मत करके

कुछ बोलने जा रही थी कि कमलनाथ तपाक से बोल पडा - जी वो 40 नम्बर की ब्रा और 42 नम्बर की पैंटी

ममता अपने भैया के मुह से ऐसी बाते सुन कर मुस्कुरा दी और थोडी झेप सी गयी ।

फिर वो स्टाफ घूम कर कुछ मॉडल के ब्रा पैटी निकाल रही थी तो ममता मुस्कुरा कर अपने भैया के कान मे बोली - भैया आपको मेरा साइज़ कैसे पता

कमलनाथ पहले चौका फिर मुस्कुरा कर बोला - वो वो मैने सुबह जब तेरे कपडे अरगन पर डाल रहा था तभी मेरी नजर गयी ,,,,

ममता थोडा इतरा कर - लेकिन मेरी कच्छी पर तो कोई लेबल नही लगा था ना

कमलनाथ थोडा मुस्कुरा कर सीधा देखते हुए धीमी आवाज मे बोला - अब ब वो मैने बस अनुमान लगाया था , क्यू छोटा है क्या

ममता हस कर धीमी आवाज मे - धत्त भैया आप भी ,, सही है साइज़ हिहिहिही

कमलनाथ भी थोडा शरमाते हुए मुस्कुराया ,,उसे एक नया ही अह्सास मह्सूस हो रहा था अपनी सगी बहन के साथ ऐसे प्राइवेट मसलो पर बाते करते हुए ,ना जाने क्यू उसका लण्ड उठने लगा था ।

तभी वो महिला स्टाफ कुछ अच्छे मॉडल मे ब्रा पैंटी सेट के काफी कलर लाई ।

ममता ने मुस्कुरा कर एक नजर कमलनाथ को देखा और उन आये हूए मॉडल मे सबसे सिम्पल वाले सेट की उठा कर देखने लगती है तो कमलनाथ एक बहुत ही खुबसुरत रेड कलर लेस वाली ब्रा पैंटी के सेट को उठा कर ममता को दिखाता हुआ - ममता ये देख ना अच्छा लग रहा है

ममता अपने भैया द्वारा अपने लिये ब्रा पैंटी पसंद किये जाने पर थोडा हिचकी और उसे उसकी भी दिल की धडकनें तेज होने लगी

ऐसे मे ही वो महिला स्टाफ बोल पडी - हा मैडम आपके हसबैंड की पसंद बहुत अच्छी है , ये मॉडल अभी नया आया और बहुत बिक्री भी है इसकी

अब तो चौकने की बारी ममता और कमलनाथ दोनो की थी क्योकी उस महिला स्टाफ को लग रहा था कि वो दोनो पति पत्नी है । ऐसे मे ममता और कमलनाथ की नजरे एक पल टकराई और वो मुस्कुराये ।

कमलनाथ अपनी सफाई मे कुछ बोल्ने जा रहा था कि ममता ने उसका हाथ पकड कर ना मे गरदन हिला दी की वो हमारे रिस्ते के बारे मे कोई जिक्र ना करे ।

कमलनाथ समझ गया कि ऐसे में चुप रहने मे ही भलाई है नही तो वो महिला स्टाफ हम दोनो के बारे मे क्या सोचेगी की एक भाई अपने बहन को ब्रा पैंटी दिला रहा है और उसे साइज़ वगैरह सब पता है ।

ममता - हा ये वाला ठीक है लेकिन एक दो थोडे सिम्पल दिखाईये ,,गरमी के मौसम मे आरामदायक हो

सटाफ- जी मैम ,मै कुछ काटन के भी दिखाती हू

फिर वो स्टाफ वापस से घूम कर अपने काम मे लग गयी

ममता कमलनाथ को घुरते हुए धीमे से फुसफुसाई - भैया क्या करने जा रहे थे आप ,, उसे ये बताने की आप मेरे भैया है और मेरे साथ ये सब खरीद,,,,

कमलनाथ मम्ता के तुनकने से थोडा सहमा और सफाई देते हुए धीमी आवाज मे बोला - सॉरी ममता ,,, लेकिन वो हमे पति पत्नी मान रही थी तो मुझे कुछ अटपटा लगा इसिलिए

ममता थोडा इतरा कर मुस्कुराते हुए - जब सारे काम पति वाले ही करेंगे तो लोग वही समझेंगे ना हिहिहिही

कमलनाथ थोडा कन्फुज होकर - मतलब

ममता खिलखिला कर अप्नी हसी दबाते हुए - हिहिही कुछ नही

कमलनाथ समझ तो रहा था कि ममता बचपन से चंचल है मगर वो उस समय उसका व्यंग समझ नही पाया

फिर वो महिला स्टाफ आयी और उन दोनो को हस्ता मुस्कराता देख कर खुश होते हुए बोली - सच मे आप दोनो की जोडी बहुत प्यारी है ,,नही तो यहा ना जाने कितने जोड़े आते है वो बस खरीदारी को एक बोझ समझ कर जल्दी जल्दी के चक्कर मे झगड लेते है आपस मे ,,,लेकिन आप दोनो तो यहा एन्जॉय कर रहे है हिहिहिही

ममता फिर से कमलनाथ के मजे लेते हुए - हम्म्म अब ये है ही मजेदार

कमलनाथ को फिर से कुछ समझ नही आया तो वो ह्स कर ममता के लिए सहमती दिखाता है ।

स्टाफ - वैसे सर की पसंद की बहुत अच्छी है ,,,देखियेगा ये रेड वाली सेट आप पर जरुर खिलेगी,,,

ममता अब थोडी शर्मायी

स्टाफ फिर से - वैसे मुझे कहने की जरुरत तो नही लेकिन एक बार आप इसे अपने पति को पहन के जरुर दिखाईयेगा ,, इन्हे अच्छा लगेगा

कमलनाथ को लग रहा था कि अब ज्यादा हो रहा और बार बार अब उसके मन मे ममता की छवी सिर्फ ब्रा पैंटी पहने हूए ही आ रही थी ,,,उसके मन मे द्वंद चल रहा था ,,एक ओर उसे बुरा लग रहा था कि उसे अपने बहन के बारे ऐसा नही सुनना चाहिये ,, वही दुसरी ओर उसे एक अन्जानी खुसी मिल रही थी कि काफी समय बाद वो ममता के साथ वक़्त बिता रहा है और वो पल कुछ रोमचक मसलो से जुड़े हुए उसे उत्तेजक बनाये जा रहे थे ।

इसी उधेड़बुन से परेशान होकर कमलनाथ - अब ब ब ममता तुमको जो चाहिये लेलो , मै बाहर रुकता हू

फिर कमलनाथ तुरंत निकल गया सेकसन से बाहर की ओर

उसको भागते जाते देखे ममता खिलखिलाई

स्टाफ ह्स कर - लग रहा है काफी शर्मीले है आपके पति

ममता थोडा इतरा कर हस्ते हुए - हा उनको हमारी प्राइवेट बाते बाहर करनी पसन्द नही है हिहिहिहिही

स्टाफ हस्ते हुए - एक बात कहू मैम अगर आपको ऐतराज ना तो

ममता बड़ी उत्सुकता से - अरे हा हा क्यू नही

स्टाफ - वैसे ये मै अपना अनुभव बता रही हूँ , कि जब भी कभी मै और मेरे पति ऐसी कोई शॉपिंग करते है तो रात बहुत लम्बी होती है हमारी हिहिहिहिहिही ,,तो आप भी आज की तैयारी करके ही रखियेगा

ममता उस स्टाफ की बात समझ कर सिहर गयी और उसके मन मे कलपनाये उठने लगी कि उसके भैया उसे रात भर चोदे तो ,ये सोच के ही उसकी चुत गीली होने लगी ।

वो स्टाफ ममता को खोया देख कर - ओह्ह हो आप तो सच मे खो गयी हिहिहिही

ममता हसते हुए थोडा शर्मायी - हिहिहिही क्या आप भी , लाईये मेरा पैकेट दीजिये वो बाहर रुके है

फिर ममता ह्सते हुए और थोडा उन्ही लम्बी चुदाई की कल्पानाओ के बारे मे सोचते हुए बाहर कमलनाथ के पास चली गयी और वो महिला स्टाफ उसे जाते देख हस्ती रही ।

ममता कमलनाथ के पहुची तो देखा कि रज्जो और राजन भी आ रहे थे और वो लोग भी ममता को अकेले अंडरगार्मेंट सेक्सन से बाहर आते देखते हैं ।

ऐसे मे ममता और कमलनाथ ने राहत की सास ली कि अच्छा हुआ जो कमल्नाथ सही समय पर बाहर आ गया नही तो रज्जो अच्छी खिचाई करती दोनो की ।

रज्जो - ओहो लग रहा है सब खरीदारी हो गयी

ममता - हा भाभी , लेकिन आपने तो कुछ लिया ही नही

रज्जो - अरे नही , वो मैने अपनी सारी खरीदारी चमनपूरा मे ही अपनी छोटी बहन के साथ कर ली है ।

फिर धीरे धीरे सारे लोग इकठ्ठा हुए और फिर बिलिन्ग करवा कर रेस्तराँ में खाना खाने के लिए निकल गये ।

इनकी खरीदारी तो हो गयी थी मगर सबके मन में अपनी अपनी प्लानिंग थी घर जाकर

रमन और सोनल तो अपने अपने हमसफर से संपर्क बनाने मे व्यस्त थे ।

वही रज्जो और राजन की रात मे एक और धमाकेदार चुदाई की तलब हो रही थी ।

पल्लवि अनुज को छेड़ कर मजे लेने की योजना बना रही थी वही अनुज फिर से पल्लवि के होठो से जुड़ने को परेशान हुआ जा रहा था और उसके मन में काफी सारे सवाल थे ।

इधर ममता ने तय कर रखा था कि अब वो जबतक अपने भैया के साथ चुदवा न ले उसे चेन नही पडेगा तो वो भी नयी योजनाये बना रही थी कि कैसे कम्ल्नाथ से नजदीकिया बड़ाई जाये ।

फिर कमलनाथ की हालत कम खराब नही थी वो भी अपनी बहन के साथ समय बिताने को उतावला था और उसे अंडरगरमेंट्स वाले सेक्सन मे हुए वक्तव्यो पर चर्चा करनी थी जो बार बार उसे उत्तेजित किये जा रही थी ।

ना जाने आगे क्या होना था

जारी रहेगी

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अब तक

इनकी खरीदारी तो हो गयी थी मगर सबके मन में अपनी अपनी प्लानिंग थी घर जाकर

रमन और सोनल तो अपने अपने हमसफर से संपर्क बनाने मे व्यस्त थे ।

वही रज्जो और राजन की रात मे एक और धमाकेदार चुदाई की तलब हो रही थी ।

पल्लवि अनुज को छेड़ कर मजे लेने की योजना बना रही थी वही अनुज फिर से पल्लवि के होठो से जुड़ने को परेशान हुआ जा रहा था और उसके मन में काफी सारे सवाल थे ।

इधर ममता ने तय कर रखा था कि अब वो जबतक अपने भैया के साथ चुदवा न ले उसे चेन नही पडेगा तो वो भी नयी योजनाये बना रही थी कि कैसे कम्ल्नाथ से नजदीकिया बड़ाई जाये ।

फिर कमलनाथ की हालत कम खराब नही थी वो भी अपनी बहन के साथ समय बिताने को उतावला था और उसे अंडरगरमेंट्स वाले सेक्सन मे हुए वक्तव्यो पर चर्चा करनी थी जो बार बार उसे उत्तेजित किये जा रही थी ।

अब आगे

शाम 4 बजे तक सारे लोग रेस्तरां से खाना खाने के बाद घर आ गये फिर अपने अपने समानो के साथ अपने अपने कमरो मे चले गये आराम करने के लिए और थकान के कारण लगभग सभी लोग सो जाते है।

शाम को 6 बजे के करीब रज्जो उठती है तो पहले खुद फ्रेश होकर कमलनाथ को जगाती है । फिर शाम के नास्ते की तैयारी करने निचे किचन मे जाती है ,,जहा ममता पहले से चूल्हे पर चाय चढा कर , दुसरे चुल्हे पर चिप्स निकाल रही होती है ।

रज्जो - अरे ममता क्या तू भी अकेले अकेले लग गयी ,, मुझे जगा देती ना

ममता - भाभी ये मेरा भी घर है ना ,, आप सिर्फ अपना हक ना जताया करो

रज्जो हस कर ममता को छेड़ते हुए - हा हा क्यू नही यहा का सब तेरा ही तो है यहा तक कि मेरे पति भी तेरे है हिहिहिहिही

ममता तुनकते हुए - हा तो , वो मेरे भैया मेरे ही रहेंगे ना

रज्जो हस कर ममता के करीब जाकर - हा तो अपने भैया का लण्ड भी लेले फिर हिहिहिही

ममता शर्मा कर - धत्त भाभी आप भी ना , हटिये मै भैया को चाय देके आती हू

रज्जो ह्स कर - एक बार उनको अपना दुध पिला के तो देख ,,,, हिहिहिही

ममता बिना कुछ बोले ह्स्ते हुए उपर निकल गयी और कमलनाथ के कमरे मे घुसती है ।

कमलनाथ सोफे पर बैठा टीवी पर न्यूज़ देख रहा था और ममता को कमरे मे आते देख आवाज स्लो कर दिया

कमलनाथ - अरे ममता आज तू लाई है चाय ,,

ममता हस कर - क्यू भाभी को ही भेजू क्या हिहिहिही

कमलनाथ ह्स कर - अरे नही ऐसी बात नही ,,, आ बैठ बताता हू

ममता ह्स कर ट्रे टेबल पर रख सोफे पर कमलनाथ के बगल मे बैठ गयी - हा बोलो अब हिहिहिही

कमलनाथ - अरे वो मुझे याद आ गया ना शादी के पहले तो तू ही मेरा ख्याल रखती थी और आज कितने सालो बाद तेरे हाथ की चाय मिल रही है इसिलिए बोला

ममता हस कर - ओह्ह्ह ये बात ,मै समझी आपको भाभी की याद आ रही है हिहिहिहिही

कमलनाथ हस कर - हाहहह्हा तू ना बिल्कुल नही बदली ,,अब भी उतनी चंचल है

ममता बस शर्मायी

कमलनाथ थोडा रुका और ममता को निहारा , ममता अपने भैया द्वारा खुद को ऐसे निहारे जाने पर थोडा अटपटा महसूस कर रही थी ,उसकी दिल की तरंगे तेजी से अपनी साइकिल बनाये जा रही थी ।

कमलनाथ ने उसकी ओर से नजर हटा कर चाय का सिप लेते हुए थोड़ा झिझक भरे लहजे मे बोला - ममता वो कपडे तुने नापे , साइज़ सही है ना

ममता की सासे अटक गयी कि भैया ये क्या पुछ रहे है - न न नही भैया क्यू

कमलनाथ चाय की सिप लेते हुए - वो अगर साइज़ छोटा ब्डा हुआ तो बदल सकते है 2 दिन का समय रहता है उसमे

ममता थोडा नजरे नीची करके- नही भैया मैने पहना नही अब तक

कमलनाथ - ठीक है ट्राई करके बताना

ममता हस कर धीरे से फुसफुसाती है जिसे कमल्नाथ सही से सुन नही पाता - क्यू आप देखोगे क्या हिहिहिही

कमलनाथ थोडा अनुमान लगाते हुए - मतलब, मै सुना नही फिर से कहो

ममता इस बार शर्मा कर लेकिन हस्ते हुए -वो वहा दुकान पर क़ो औरत कह रही थी ना कि मै वो पहन कर आपको दिखाऊ ,,,कही आप अब भी तो वही नही सोच रहे है ना हिहिहिही

कमलनाथ ममता की बात सुन कर धक्क सा रहगया लेकिन ममता का खिलखिलाता चेहरा देख कर वो मुस्काराया - क्या तू भी ,,,, मजे ले रही है मेरे हा ,,उसने तो तेरे पति यानी राजन के लिए कहा था ना हिहिहिही

ममता शर्मा कर - हा लेकिन तब उस वक़्त मेरे पति आप थे ना हिहिहिहिही

कमलनाथ के दिल की धड़कने ममता के इस वक्तव्य से और तेज हो गयी औए उस्का लण्ड मे उठाव होने लगा । उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले वही एक ओर अच्छे से ये भी जान रहा था कि ममता उसकी खिचाई कर रही है क्योकि ये उसकी बचपन की आदत थी । मगर कमलनाथ के मन मे कुछ और भी ख्याल थे जो वो ममता से खुले शब्दो मे कह नही सकता था ।

कमलनाथ कुछ विचार किया और सोचा कि अभी फिल्हाल के लिए अपनी भाव्नाओ को किनारे कर थोडा बहुत ममता से हसी मजाक ही कर लिया जाये

कमलनाथ - ह्म्म्ं बात तो सही है ,,, इसका मतलब तुम मेरे सामने

ममता कमलनाथ की बाते पूरी करने से पहले ही ह्स्ते हुए - छीईई भैया क्या आप भी ,, मै कैसे आपके सामने ,,,मतलब सम्झिये ना मुझे शर्म आयेगी ना

कमलनाथ ममता के मुह ऐसे बाते सुन कर उसे मह्सूस हुआ कि मानो एक तल पर ममता उस बात के तैयार है जो वो खुद चाहता है ,,मतलब ममता उसके सामने वो ब्रा पैंटी पहन के आना चाहती है और उसे दिखाना चाहती है मगर रिश्ते की मर्यादा और लाज वस वो ऐसा करने से कतरा रही है ।

इधर ये सब विचार आते ही कमलनाथ का लंड अंगड़ाई लेने लगा ।

कमलनाथ ह्स कर - धत्त पगली , तू ऐसे कह रही है मानो मै कोई गैर हू ,,,याद है बचपन में मा से ज्यादा तू मेरे हाथो से नहाना पसंद करती थी और तुझे मै ही कपडे पहनाता था , स्कूल के लिए तैयार करता था ।

ममता बचपन की उन यादो का अह्सास पाते ही उन्हे अब के समय के हिसाब से जोड कर कल्पना करने लगी कि अगर अभी उस्के भैया उसे नहलाते और तैयार करते तो,,,ममता उस कल्पना मात्र से ही गनगना गयी और उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी ।

ममता नजरे नीची किये शर्मा कर - हा लेकिन भैया तब मै छोटी थी और अब मै

कमलनाथ - अब क्या ???

ममता झिझक कर - अब मै बडी हो गयी हू भैया तो कैसे ??

कमलनाथ हस कर - माना कि तू बडी हो गयी , तेरी शादी भी हो गयी और तेरे बच्चे भी है मगर इनसब के बाद भी हम दोनो का रिश्ता तो वही ही है ना जो तब था । मेरे लिए तू तो आज भी मेरी छोटी बहन है गुड़िया जैसी

ममता अपने भैया के मुह से इतनी गहरी बाते सुन के एक बार नजरे उठा कर उनको देखती है तो वो उसे ही देख रहा था ।

ममता शर्मा कर वापस नजरे निचे करते हुए - आपकी बात ठीक है भैया लेकिन

कमलनाथ हौले से ममत की ठुडी को उठाके उसकी आंखो मे देखता हुआ - लेकिन क्या ममता , माना कि आज तेरे कपड़ो के साइज़ बदल गये है , तू पहले से और सुन्दर दिखने लगी है , मगर इनसब से मेरी वो प्यारी चंचल गुड़िया बदल तो नही गयी ,,,तू तो आज भी वैसी ही है जैसे तब थी ।

ममता कमलनाथ की बातो पर शर्मायी

कमलनाथ उससे कबूलवाते हुए -बोल मै कुछ गलत कह रहा हू

ममता मुस्कुरा कर ना मे सर हिलाती है

कमलनाथ ने मौका देख के अपनी जुठी चाय का कप उसकी ओर देख कर - ले चल तू भी पि ,,याद है तेरी शादी होने तक हम दोनो एक ही ग्लास मे चाय पीते थी और एक ही थाली मे खाते थे

ममता हस कर कमलनाथ के हाथ से चाय का प्याला लेके सिप लेती है - हिहिहिही हा भैया याद है

फिर ममता थोडा सोचते हुए - पर !!!!

कमलनाथ अचरज से - पर क्या ??

ममता शर्मा कर ह्सते हुए - वो आप अपना मोबाईल दे दीजिये मै वो कपडे पहन के फ़ोटो निकाल के दे दूँगी आपको ,,मगर ऐसे आपके सामने नही

कमलनाथ की आंखे चमक गयी मगर वो अपनी भावणाए छिपात हुआ - हाहहाहा तू अब भी उसके बारे सोच रही है ,,, पागल कही की मै यहा हमारे बचपन की बाते कर रहा हु।

ममता को लगा उसने उस्ताह मे कही जल्दी तो नही कर दी ।मगर कमलनाथ के अगले वक्तव्य से उसकी गलतफहमी दुर हो गयी ।

कमलनाथ - ले ये मेरा मोबाइल,,, निकालना हो तो अच्छी तस्वीरे निकालना ,पगली कही की

ममता भी कमलनाथ के साथ हसने लगती है ।

फिर ममता वहा से मोबाईल लेके अपने कमरे मे चली जाती है जहा राजन अभी तक सो रहा होता है ।

वही इनसब के अलग निचे के हाल मे पल्लवि चाय की चुस्कियां लेते हुए बार बार अपने रसिले होठो को कभी दाँतो से चबा कर तो कभी उन्पे अपनी गुलाबी नुकीली जीभ फिरा कर अनुज को उत्तेजित कर रही थी ।

अनुज की हालत खराब हो रही थी और उसे बहुत डर लग रहा था कि कही कोई पल्लवी को ऐसे सब करते हुए देख ना ले

मगर पल्लवी इनसब साव्धानियो के लिए बहुत ही चालाक थी वो सारे पैतरे सोच समझ कर ही चलाती थी ।

थोडी देर मे सारे लोग हाल मे एकजुट हुए और फिर खाने की प्लानिंग होने लगी ।

ऐसे मे कमलनाथ थोडा मूड बनाने की फिराक मे था मगर ममता नही चाह रही थी कि आज उसके भैया कोई नशा करे क्योकि वो आज उन्हे अपनी जवानी का नशा कराणे के मूड मे थी ,,,लेकिन दिक्कत ये थी कि रज्जो और राजन के रहते वो अपने भैया के साथ रात मे कैसे रुके ।

वही रज्जो और राजन इसी फिराक मे थे कि कमलनाथ और ममता के रहते कैसे कोई काम हो ।

इनसब के अलग पल्लवि और अनुज की अपनी बेचैनी थी , वो दोनो भी इस गहरी रात का फाय्दा लेके अपने विचारो और भावानाओ का आदान प्रदान करने की फिराक मे थे लेकिन सोनल जोकि देर रात तक अपने होने वाले पति से बाते करती थी , बिना उस्के सोये उन दोनो का काम अधूरा था

कमलनाथ - चलो राजन छत पर चलते हैं, थोडा टहल लिया जाये

कमलनाथ की बात पर ममता गुस्सा कर बोली - नही भैया आप लोग यही बैठो कही जाने की जरुरत नही है

राजन - क्या बात है तू ऐसे नाराज क्यू हो रही है

राजन के वक्तव्य से ममता को समझ आया कि वो ओवररियेक्शन दे रही है ।

कमलनाथ - हा ममता क्या हुआ बता तो

ममता कुछ सोच कर - क्या भैया आपको तो कुछ पडी ही नही है मेरी ,,,ये नही इतने साल बाद आयी हू कुछ बाते मेरे साथ भी करे ,बस रोज पीकर सो जाते है आप

ये बोलते हुए ममता थोडी रुआसी हो जाती है

कमलनाथ को कुछ समझ नही आता है कि अचानक से क्या हुआ इसको ,,फिर वो ममता को भावुक होता देख उसके पास गया और बोला - ओह्ह्ह सॉरी ना ममता ,, आज से पीना बंद , जबतक तू है हम रोज बाते करेंगे ठीक है

ममता थोडा खुश होते हुए - और सिनेमा

कमलनाथ अचरज से - सिनेमा मतलब

ममता फिर से मुह बनाते हुए - भूल गये ना , जब मै गाव थी तो आप ही बोले थे हम सबको सिनेमा ले जाने के लिए , आपको तो कुछ याद भी नही रहता

पल्लवि - हा मामा , आप बोले , जबसे आये हैं हम लोग बस काम काम काम

कमलनाथ हस कर - अच्छा ठीक है भई, कल हम सब लोग सिनेमा जायेन्गे खुश ।

पल्लवि चहक कर - हिहिहिही जी मामा

कमलनाथ - और ममता तू

ममता इतरा कर - हा वो ठीक है लेकिन बाकी का अभी खाने के बाद बताउन्गी आपसे बाते करते हुए

सारे लोग ममता की मासूमियत और भोलेपन हस रहे थे ,,वही ममता मे ब्ड़ी चालाकी से आज रात अपने भैया के साथ बिताने का प्लान बना चुकी थी ।

फिर कमलनाथ वही हाल मे बैठ कर आगे की तैयारियो के बारे मे बाते करने लगे ।

थोडी देर बाद किचन मे सारी महिला मंडली जमा हुई और खाना बनाने की तैयारियो मे सब लग गये ।

पल्लवि जो कि सिनेमा जाने को काफी आतुर हुए जा रही थी वो सोनल से बोली - दीदी कल आप क्या पहनोगे

सोनल - मै सोच रही हूँ कल जीन्स डाल लू ,,काफी समय से नही पहना हिहिहिही

पल्लवि चहक कर - फिर तो मै भी आज जो नयी जीन्स ली है वही पहन के चलूंगी हिहिहिही

सोनल ममता से - तो बुआ आप लोग क्या पहन मे जाओगे

ममता हस कर - हमारी किस्मत मे जीन्स कहा बेटी हिहिहिहिही ,, कुल्हे चौडे हो गये हैं हमारे , क्यू भाभी

रज्जो हस कर - अरे ऐसी कोई बात नही है, मेरे पास मेरे नाप के जीन्स है हिहिहिही

रज्जो की बात पर पल्लवि सोनल और ममता चौके

सोनल - सच मे मौसी , लेकिन आपको देखा नही कभी ऐसे हिहिहिही

रज्जो हस कर - वो तेरे मौसा लाते रहते है मेरे लिए कभी कभी कुर्ती के साथ डाल लेती हू

सोनल चहक कर - फिर कल आप भी जीन्स ही पहनना मौसी

पल्लवि - लेकिन फिर मम्मी अकेले साड़ी मे रहेगी क्या

रज्जो - अरे ऐसे कैसे ,,,मेरे पास कुछ पुराने जीन्स है वो ममता को फिट आयेन्गे

ममता एक पल को खुश हुई फिर भी अपने दिल की भावनाओ पर नियंत्रण करते हुए - धत्त भाभी क्या आप भी ,,,इस उम्र मे जीन्स पहनूँगी हिहिहिही

रज्जो हस कर - अरे एक बार पहन के निकलो तो मेरी ननद रानी ,,,,, जवाँ लौंडे भी पागल होकर इन कसे चुतडो को घुरेन्गे हिहिहिही

रज्जो की बात पर सोनल और पल्लवि मुह दबा कर हसने लगे ।

ममता रज्जो की बातो का जवाब देते हुए - आपके सामने मेरे कुल्हे को निहारेगा भाभी हिहिहिहिही

रज्जो हस कर - कोई निहारे या ना निहारे तेरे भैया जरुर निहारेंगे हिहिहिहिही

ममता अपने भैया के सामने जीन्स मे जाने के अह्सास से ही सिहर गयी और हस कर बोली - क्या भाभी चूप करो , बच्चे है हिहिहिही

फिर सारे लोग ऐसी ही मस्तिया करते हुए खाना बनाने मे लगे रहे । वही हाल मे जेन्स लोग बैठे हुए आप्स मे बाते कर रहे थे लेकिन सब के सब मानसिक रूप से कही और ही खोये हुए थे ।

थोडी देर बाद सारे बच्चे लोग खाना खाकर अपने अपने कमरो की ओर निकल गये ,,,सोनल के साथ जाते वक़्त पल्लवी ने अनुज को आंख मारी और मुस्कुरा कर उसके साथ निकल गयी । अनुज भी कुछ सोचते हुए अपने कमरे मे गया

फिर रमन भी अपने कमरे मे चला गया ।

स्बके जाने के बाद हाल मे राजन रज्जो ममता और कमलनाथ बैठे हुए थे ।

राजन आज ममता के साथ नही बल्कि रज्जो के साथ थकने के मूड मे था तो वो सोचा कि क्यू ना नीद आने का बहाना किया जाये ताकि ममता सो जाये जल्दी फिर वो और रज्जो

राजन अंगड़ाई लेते हुए - उम्म्ंम्ं चलो ममता सोते है ,,आज ब्ड़ी थकान है

रज्जो राजन के बहाने को समझ कर मुस्कुराई

ममता ने जब ये सुना कि आज राजन जल्दी सोने वाला है तो वो और भी चहक उठी कि अब वो थोडा समय अपने भैया के साथ बिता सकती है ।

लेकिन रज्जो के रहते कैसे ?? कुछ ना कुछ करना ही पड़ेगा

कमलनाथ - हा भाई चलो आराम किया जाय

फिर सारे लोग उपर अपने कमरे मे गये ।

रज्जो औए कमलनाथ कमरे मे जाते ही अपने अपने आरामदायक कपडो मे आ गये ।

रज्जो ने अपनी साडी निकाल दी , वही कमलनाथ सिर्फ़ जांघिया और बनियान मे ।

वही बगल के कमरे मे राजन जाते ही बिस्तर पे लेट गया और सोने का नाटक करने लगा ,,वही ममता को इस्स्से कोई फर्क नहीं पडा वो तो अपने भैया के पास जाने की योजना बनाते हुए अपने गहने उतारे कर सोच रही थी कि उसे एक विचार आया । उसने तय किया कि अब वो जीन्स के बहाने कमलनाथ के पास जायेगी ।

ममता एक नजर राजन को देखी तो बोली - ए जी मै अभी भाभी के पास से आती हू थोडा कुछ काम है

राजन जोकि सोने का नाटक कर रहा था वो हम्म्म्म बोलके वैसे ही लेटा रहा ।

ममता चहकते हुए कमरे से बाहर निकली और रज्जो के कमरे मे घुस गयी ।

ममता के कमरे मे आते ही कमलनाथ स्तर्क हो गया

कमलनाथ फौरन उठ कर एक गम्छा लेके लपेट लिया और बोला - अरे ममता तू यहा ,,,कोई बात है कया

ममता थोडा अटक कर रज्जो को देखते हुए - हा वो भाभी मुझे अपनी एक जीन्स देने वाली थी ट्राई करने के लिए

कमलनाथ चौक कर ममता को देखा कि उसकी बहन इस उम्र मे जीन्स पहनेगी

रज्जो मुस्कुरा कर - अरे हा मै तो भूल ही गयी , रुक देती हू

फिर रज्जो उठ के अपनी आलमारी से कुछ जीन्स निकाल कर बिस्तर पर रखती है

रज्जो - ले इसमे से जो तुझे अच्छा लगे लेले

ममता कुछ सोच के - ये मुझे हो जायेंगे ना भाभी

कमलनाथ - क्या तू भी ममता ,,अरे यही पहन कर देख ले ना

रज्जो कमलनाथ के बात पर मुस्कुराई और ममता को छेड़ने के अंदाज मे बोली - हा क्यू नही , चल उतार साडी हिहिहिही

ममता शर्मा कर एक नजर कमलनाथ को देखा और बोली - हिहिहिही क्या भाभी आप भी

कमलनाथ - अच्छा ठीक है तुम लोग ट्राई कर लो मै उपर से फ्रेश होकर आता हू

फिर कमलनाथ कमरे से बाहर निकल कर जीने की ओर चला गया ।

कमलनाथ के जाते ही रज्जो हस कर - अरे क्या हुआ इतना अच्छा मौका था भैया के सामने नंगा होने का हिहिहिही

ममता शर्मा कर -खुद होती है ना वही काफी है हिहिहिहिही

फिर ममता ने साड़ी निकाली और फिर पेतिकोट निकाल कर सिर्फ बलाउज पैंटी मे आ गयी ।

रज्जो ने मौका देख के फौरन ममता के अधनंगे चुतडो पर चप्प से हाथ से थ्पेड़ा जिससे ममता सिहर गयी

ममता हस कर - आऔउउउच्च्च भाभी क्या कर रही है हिहिहिही लग रहा है

रज्जो - ओह्हो ये गोरे चुतड एक बार अपने भैया को दिखा तो सही पागल हो जाएंगे तुझे चोदने के लिए

ममता जीन्स मे पाव डालते हुए - क्या भाभी कितना गन्दा सोचती है आप हिहिहिही

रज्जो हस के - गन्दा कहा रही है तू ,,कभी कभी तो मै अगर चुदते वक़्त तेरा नाम ले लेती हू तो तेरे भैया दुगनी जोश से मुझे चोदते है हिहिहिही

ममता जीन्स को अपनी कमर पर च्धाते हुए - हिहिहिही क्या भाभी आप भी ना

ममता - देखो ना कैसा लग रहा है

रज्जो - अब ये तू अपने भैया को ही दिखा के पुछ हिहिहिही

ममता - अरे नही नही भैया के सामने ऐसे कैसे मुझे शरम आयेगी और दुपट्टा भी नही है

रज्जो - तू तो ऐसे बोल रही है जैसे कभी तेरे भैया ने चुचिया देखी ही नही ,,

ममता - भक्क भाभी आप भी ना ,,,अच्छा थिक है बुला लो लेकिन पहले आप भी पहनो जिंस फिर

रज्जो ह्स कर - इसमे क्या है

ये बोल कर रज्जो ने फौरन अपना पेतिकोट खोलकर निचे गिरा दिया ।

ममता की नजर रज्जो के पुरे नन्गे खुले गाड और चुत पर गयी तो वो चौककर - भाभी आप ऐसे ही रहती है क्या हिहिहिही

रज्जो जीन्स पहनते हुए - हा तो , तेरे भैया के सिवा किसी की हिम्मत है क्या जो मेर पेतिकोट उठा दे हिहिहिही

ममता ह्स कर - आपसे कोई नही जीत सकता भाभी हिहिहिही

इधर रज्जो ने कमर पर जीन्स कर बटन बंद करते हुए - चल ठीक है अब बुलाऊ तेरे भैया को

ममता थोडा हिचक कर - हम्म्म्म ठीक है

रज्जो लपक कर बाहर दरवाजे के पास आई तो कमलनाथ गलियारे मे टहल रहा था

रज्जो हस्कर - हमम्म आईए

कमलनाथ थोडा मुस्कुरा कर कमरे में घुसता है तो उसकी नजर दरवाजे की ओर पिठ करके बिस्तर के पास खड़ी हुई ममता पर गयी।

जिसके बडे बडे चुतडो के उभार और मास्ल जान्घे जीन्स मे कसे हुए थे । कमर पर चर्बी एक्थ्था हूई थी और उपर कसा हुआ ब्लाउज था ।

कमलनाथ की नजरे ममता के गुदाज गाड से हट ही नही रही थी ।

जिससे उसके मन मे एक उत्तेजना ने जन्म ले लिया था ,, आज सुबह से ही वो अपनी बहन के लिए अगल ही अनुभव महसूस कर रहा था और उसका ऐसा रूप देख कर उसका लण्ड कड़क होने लगा जिससे गमछे के उपर उसका उभार दिखने लगा ।

वही रज्जो ने जब अपने पति को व्यस्त देख कर एक नजर उसके उभरे लण्ड पर गयी तो वो मुस्कुरा उठी ।

वो इतरा कर आगे चल के ममता के बगल के खड़ी हुई और उसे घुमा कर कमलनाथ के सामने करते हुए बोली - तो बताईये जी कैसी लग रही है ननद भौजाई की जोडी हिहिहिहो

कमलनाथ की नजर जब सामने से ममता के खुले सीने और चुचियो के उभारो पर गयी और फिर उसने ममता के गुदाज पेट के गहरी नाभि को देखकर थुक गटकते हुए जीन्स पर चुत वाले जिससे पर नजर मारी तो गनगना गया ।

फिर उसकी नजर रज्जो पर गयी दोनो आज क्यामत लग रही थी ।

कमलनाथ थोडा झिझक कर - अरे वाह बहुत खूब जंच रहा है तुम दोनो पे

रज्जो इतराई और फिर अपना मोबाईल कमलनाथ को देते हुए - फ़ोटो निकालिये ना प्लीज

ममता चौकी और रज्जो को ना मे सर हिला कर मुस्कुराइ

रज्जो - क्या नही ,निकालो जी आप

फिर कमलनाथ ने उन दोनो गदराइ हसिनाओ की तस्वीरे निकालनी शुरु की

रज्जो ने कभी आगे भी पीछे तो कभी साइड से पोज दे देके अपना और ममता की तस्वीरे निकाली ।

रज्जो कमलनाथ के हाथ से मोबाइल लेके - अरे वाह !! देख तो ममता तू कितनी अच्छी दिख रही है हिहिहिही रुक मै नंदोई जी को दिखा के आती हू

ममता - अरे नही भाभी , वो सो रहे है

रज्जो खिलखिला कर - अरे ये फ़ोटो देख के उनकी नीद गायब होने वाली है ।

चुकी रज्जो को समझ आ गया था कि कमलनाथ की हालत उसकी बहन की कसे चुतडो को देख कर खराब है तो क्यू ना इन दोनो को आपस मे फ्से रहने दिया जाये और मै एक राउंड नंदोई जी चुदवा कर फटाफट चली आऊ ।

इसिलिए रज्जो भागते हुए मोबाइल लेके राजन के कमरे मे घुस गयी ,,,ममता लपक कर उसकी ओर गयी उसके पहले रज्जो ने जानबुझ कर दरवाजा अंदर से बन्द कर दिया ।

इधर ममता हस्ते हुए वापस कमलनाथ के कमरे मे आ गयी ।

कमलनाथ हस कर - अरे छोड उसको आ बैठ

ममता - भैया ये भाभी को बाँध के रखिये हिहिहिहिहू बहुत शैतान है

कमलनाथ हस कर - तू भी तो कम नही है

ममता थोडी शर्माइ और बोली - ठीक है भैया मै ये कपडे बदल के आती हू ।

फिर ममता अपना पेतिकोट लेके बाथरुम मे घुस गई । मगर वहा उसका जीन्स उसके कूल्हो पर कस गया था जो निचे हो ही नही रहा था । निराश होकर ममता हाथ मे पेतिकोट लेके वापस कमरे मे आ गयी ।

कमलनाथ - अरे ममता क्या हुआ तुने चेंज नही किया

ममता थोडा शर्मा कर - हा भैया वो जीन्स नही निकल रही है ,,टाइट है बहुत

कमलनाथ - अरे तो इसमे क्या है ,, आ इधर मै मदद करता हू

ममता आंखे बडी करते हुए - लेकिन भैया

कमलनाथ - अच्छा ठीक है भई रुक मै दरवाजा भिड़का देता हू ,,,तू भी ना

ममता अपने सर पर हाथ मारते हुए हसने लगती है ।

कमलनाथ दरवाजा बंद करके वापस ममता के करीब आता है

कमलनाथ वही बेड पर बैठते हुए ममता को सामने किया

कमलनाथ - ला इधर आ

ममता थोडा शर्माते हुए - रहने दो ना भैया

कमलनाथ - तो क्या ऐसे ही रहेगी तू हा

ममता - वो मै निकाल लूंगी ना बाद मे

कमलनाथ थोडा झूठमुट का गुस्सा दिखाते हुए - तू चुपचाप खड़ी रह ,,, देख रहा हू कबसे निकाल ही रही है ।

ममता अपने भैया के इस प्यारे गुस्से पे बहुत दुलार आता है और वो मुस्कुरा देती है ।

इधर कमलनाथ ममता के जीन्स का बटन खोलने की कोसिस करता है लेकिन बार बार उसकी उंगलियाँ ममता के गहरी नाभि को छू रही थी ,, कमलनाथ भी सीधेपन का दिखावा तो कर रहा था मगर उसके दिल की नियत अब काफी हद तक गंदी हो चुकी थी वो अब अपनी बहन को अपने हाथो से नंगी करने के फिराक मे था ।

कमलनाथ - जरा पेट अन्दर कर तो

ममता मुस्कुरा कर पेट को पुरा जोर लगा के पिचकाया और मौका पाकर कमलनाथ ने जीन्स का बटन खोला ।

फिर कमलनाथ ने जीन्स का चैन पकड कर निचे करने लगा,,, हर सरकते खाँचे के साथ दोनो भाई बहनो के दिल की धडकन तेज हो रही थी ।

धीरे से कमलनाथ को चैन के गैप से ममता के गुलाबी पैंटी की झलक मिलने लगी ।

उसके लण्ड ने अंगड़ाई लेनी शुरु कर दी ,,,यहा ममता ने देखा कि उसके भैया की नजरे उसकी चैन के गैप मे ही खोयी हुई है ।

कमलनाथ ने एक नजर उपर किया तो ममता ने फौरन आंखे बन्द कर ली ।

कमलनाथ ने जीन्स के किनारो को पकड़ा और साइड से उतारना शुरु किया । शुरुवाति किनारो से होते हुए जीन्स आधे कूल्हो तक आते आते अटक गयी ।

कमलनाथ के जोर लगाने के बाद भी वो ममता के गाड के उभार से निचे नही उतर रही थी ।

कमलनाथ ने बिना कुछ बोले ममता को उसकी कमर को पकड कर घुमा दिया ,,,जिस्से ममता थोडी सी चहकी फिर कमलनाथ नाथ ने ममता की जीन्स को पीछे से पकड़ कर खींचा लेकिन फिर से उतना जोर नही लग पा रहा था ।

कमलनाथ मन मे - उफ्फ़ ये तो ममता के गाड पर अटक ही गयी है कैसे करु ,,,हा निचे बैठ कर निकालता हू

कमलनाथ फौरन बिस्तर से उतर कर ममता के पीछे घुटनो के बल हो गया और इस बार जोर लगा कर जीन्स को निचे किया और एक ही झटके जिंद जांघो तक आ गया और इस झटके से कमलनाथ का सन्तुलन थोडा बिगडा और उसका चेहरा सीधा ममता के गद्देदार गाड के पाटो से जा लगा ।

ममता सिसकी और कमलनाथ ने खुद को सम्भाला और उसकी नजर पैंटी मे कैद उसकी बहन की फैली हुई गाड़ पर गयी । पैंटी के किनारे से गाड़ की गोरी चमडी पर उभरे हुए खडे रोए ममत की बेचैनी बयां कर रहे थे

कमलनाथ फटी हुई आंखो से ममता के गुदाज गाड़ को निहारते हुए थुक गतकने लगा इधर ममता के बदन मे भी सिहरन सी हो रही थी ।

ममता ने जब जाना कि उसके भैया को रुके ज्यादा समय हो गया तो वो बोली - क्या हुआ भैया निकाल दो ना अब

कमलनाथ चौक के - अब ब ब हा हा तू अब बिस्तर पर बैठ जा इसको खिच कर निकालना पडेगा

ममता थोडी मुस्कुराई और घूम कर बिस्तर पे बैठ गयी ।

कमलनाथ ने अब सामने से ममता के कमर के निचे नजर दौडाई ।

उसकी मासल जांघो के बिच की पैंटी उसके चुत के चिपकी हुई थी और निचले हिस्सो पर पर कुछ गीली थी ।

ममता ने बेड पर हाथो को टिका कर अपने पैर आगे किये

क्मल्नाथ का लण्ड अबतक तन चुका था और गमछे के उपर उसका उभार साफ नजर आ रहा था जिसे ममता भी देख कामुक हुई जा रही थी ।

कमल्नाथ मुस्कुरा कर जीन्स को पकड कर जोर लगा कर खिंचता है और ममता टाँगे उठाते हुए हस्ते हुए बेड पर गिर जाती है ।

ऐसे मे कमलनाथ की नजर ममता के चुत से हटी नही और जब जीन्स निकल गया तो ममता ने एक गहरी सास लेते हुए पैरो को फ़ोल्ड करके लेट गयी ।

जिससे उसकी चुत का हिस्सा कमल्नाथ और भी फुला हुआ नजर आया साथ ही उसकी नजरे ममता के चुत के उन बालो पर गयी जो उसकी पैंटी के बाहर की ओर निकाली थी ।

ममता इनसे अलग आंखे बंद किये आने वाले पल को लेके अपने ही ख्वाब बूने जा रही थी कि इसके आगे भैया क्या करेंगे ।

तभी कमलनाथ ममता के बगल मे आके बैठा तो ममता को अह्सास हुआ और वो फौरन उठ कर बैठ गयी और उसने लपक कर अपनी पेतिकोट को उठाकर अपनी जांघो पर रख लिया जिसे देख कर कमलनाथ हसने लगा

ममता कमलनाथ को हस्ते देख - अब क्यू हस रहे हो आप हम्म्म्म्ं

कमलनाथ - देख रहा हू तू आजकल अपना ध्यान नही रख रही है

ममता अचरज से - मतलब

कमलनाथ धीरे से उसके कान के पास जाकर - वो तेरे निचे अब भी बाल है ,,,गरमी के मौसम मे इससे बिमारी फैलती है

ममता कमलनाथ की बाते सुन कर हस दी और शर्माते हुए - वो मुझे वहा के बाल बनाने नही आते ,,,डर लगता है

कमलनाथ ममता की प्रतिक्रिया पर चहक कर - डर , लेकिन कैसा

ममता - वो कही कट ना जाये इसिलिए

कमलनाथ - अरे तो क्रीम यूज़ किया कर ना

ममता - वो कैसे ,,, मुझे तो नही आता

कमलनाथ मौका देखके - अरे इसमे क्या है ये तो आसान है , चल बाथरुम मे बताता हू तुझे

ममता की आंखे बडी हो गयी और उसकी दिल की धडकनें तेज होने लगी कि अब उसके भैया उसके चुत के बाल बनाने वाले है, मतलब वो निचे से पूरी नंगी होगी और वो उसे सहलायेगे दुलारेंगे ।

इस कल्पना के सोचने से ही ममता की चुत फड़फड़ाने लगी ।

कमलनाथ उठा और ममता की कलाई पकड कर उसे उठाता है तो ममता खुद को रोकने की ताकत लगाते हुए ह्सती है ।

कमलनाथ हस्ते हुए - अब चल नही तो गोदी मे उठा के ले जाऊंगा ह्हाहहहहा

ममता थोडी शर्मा गयी और मौका देखकर कमलनाथ उसे खिच कर बाथरुम की ओर चल दिया ।

इधर जहा इनदोनो भाईबहनो के रंगमच सेट हो रहे थे , वही बगल मे कमरे मे राजन रज्जो की जिंस को जांघो तक करके उसकी कसी हुई गाड़ मे गोते लगाये जा रहा था ।

रज्जो सिसकिया लेते हुए - आह्ह जीजा जी जीन्स निकाल लेने दो ना बहुत टाइट जा रहा है अन्दर उम्म्ंम्ं

राजन - तो चुदवाओ ना भाभी जी ,,,मुझे बहुत मजा आ रहा है ऐसे ओह्ह्ह कितना कसा हुआ लग रहा है

राजन रज्जो के गाड़ पर थ्पेड़ जडते हुए तेजी से लण्ड को गचगच पेले जा रहा था ।

यहा उपर के फ्लोर पर जो चल रहा था उसके अलग निचे के हाल मे दो जवाँ दिल आपस मिलने को बेकरार थे ।

अनुज कुछ सवालो के जवाब में बार बार कमरे से बाहर होकर पल्लवि के कमरे तक जाता और फिर वापस हाल मे चक्कर लगाता ,,,उसे उम्मीद थी की पल्लवि जरुर आयेगी ।

इधर कमरे मे सोनल अमन के साथ कॉल पर धीमी आवाज मे रोमांटिक बाते किये जा रही थी जिससे पल्लवि की तलब और भी बढ रही थी ।

सोनल भी समझ रही थी पल्लवि की हालत कि उसके बात करने से पल्लवि थोडा शर्मा रही है और असहज महसूस कर रही है ,,लेकिन वो उसे चिढा देती कि उसकी शादी तय होगी तो उसको भी मौका मिलेगा ।

पल्लवि ह्स देती है और फिर बाथरूम का बहाना मारकर कमरे से बाहर निकल जाती है ।

वही पल्लवि के दरवाजे पर आहट सुनते ही अनुज अपने कमरे मे घुस जाता है और आगन्तुक का इन्तजार करता है ।

पल्लवि दबे पाव अनुज के कमरे की ओर जाती है और उसके दरवाजे पर जाकर हल्की सी आवाज देती है - अनुज

अनुज खुद दरवाजे के पास खड़ा होता है वो पल्लवि की आवाज सुनते उसकी दिल की धड़कन तेज हो जाती है ,,होठ अचानक से सुखने लग जाते है फिर भी वो हिम्मत करके फौरन दरवाजा खोलता है ।

पल्लवि मुस्कुरा कर बिना कोई आहट के फौरन कमरे मे घुस जाती है ।

अन्दर जाते ही अनुज दरवाजा बंद कर देता है और दोनो की निगाहे एक दुसरे से टकराती है तो पल्लवि मुस्कुरा देती है ।

अनुज भी मुस्कुरा देता है

पल्लवि ह्स कर - आओ ना बैठते है ।

अनुज कापती हुई आवाज हा कहता है और दोनो बिस्तर पर पैर लटका के बैठ जाते है ।

दोनो चुप थे लेकिन उन्के दिल की तेज धडकनें साफ सुनी जा सकती है ।

अनुज ने पहल करते हुए - वो वो मुझे तुमसे कुछ पूछना है

पल्लवि ने एक गहरी सास ली और सोची कि चलो इसने पहल तो की ।

पल्लवि खुद को नोर्मल रखते हुए - हा बोलो ना

अनुज तेज धड़कते दिल के साथ थुक गटकते हुए बडी ही हिम्मत से मुह खोला - वो वो वो,,, तुमने माल मे वो क्यू किया

पल्लवि हस कर - वो क्या

अनुज पल्लवि की आंखो मे देख कर अपने होठो पर एक ऊँगली रखते हुए - यहा पर वो

पल्लवि अनुज की मासूमियत पर पिघल गयी और अपनी गरदन आगे बढा कर एक बार फिर से अनुज के होठो को चुमते हुए - इसकी बात कर रहे हो तुम ना हिहिहिही

अनुज सकपका गया कि ये पल्लवि ने फिर से क्यू किया और इसको डर भी नही लग रहा है ।

अनुज अपने होठ अन्दर कर एक बार उनपर जीभ फिरा कर सीधा किया और अटकते हुए बोला - अ ब ब हा मतलब वही ,, ये गलत है ना

पल्लवि चहक कर - इसमे क्या गलत है पागल हिहिहिहिही

अनुज अपने होठ पोछता हुआ -पता नही लेकिन अगर कोई जान गया तो

पल्लवि अब थोडा अनुज के और करीब आते हुए अपने हाथ उसके जांघो पर रख कर उसकी आंखो मे बडी ही कामुक अदा से देखते हुए बोली - यहा हमारे अलावा कोन है ,,,, बस तुम और मै

पल्लवि के होठ फिर से अनुज के होठो के करीब जा रहे थे और अनुज अपने चेहरे को पीछे किये जा रहा था

अनुज एक अलग ही उत्तेजना और पल्लवि के हाथो के स्पर्श से कपकपा रहा था ,, उसके होठ फड़फ्ड़ा रहे थे ।

उसके पेट मे तितलिया उड़ने लगी और दिल की धडकनें पहले से भी तेज हो गयी ।

पल्लवि ने और आगे होकर उसके होठो पर अपने नरम तपते हुए होठ रख दिये ।

अनुज के बदन पल्लवि के होठो का स्पर्श पाते ही पिघलने लगा ,,उसका लण्ड अकडने लगा और उसने धीरे से अपने होठ को खोला

पल्लवि ने तुरंत उसके निचले लिप्स को मुह मे दबोच लिया ।

अनुज अब भी काप रहा था और ब्स वैसे ही ठहरा हुआ था । पल्लवि पुरे जोर से उसके होठो को चूसे जा रही थी लेकिन काफी समय तक उसने जब अनुज की प्रतिक्रिया नही पाई तो उसने खुद उसका हाथ पकड कर अपनी कमर पर रखा ।

अनुज फिर से सिहर उठा उसने हिम्मत करके टीशर्ट के उपर से पल्लवि के कमर को सहलाया ,,,वो स्पर्श उसे एतना कामुक कर गया कि उसने भी जोश में आकर पल्लवि के उपरी होठ पर पकड बना ली और धिरे धीरे लय बनाते हुए पल्लवि के साथ ही उसके होठ चूसने शुरु कर दिये ।

पल्लवि इस समय सोनल की ही टीशर्ट और लोवर पहने हुए थी ।

धीरे धीरे पल्लवी किस्स को और भी गहरा करने लगी और अनुज धीरे धीरे उसके और करीब आता गया ,,,उसने धीरे धीरे अपना हाथ पल्लवी के टीशर्ट के अन्दर डाल दिया ।

ये अनुज का किसी लडकी के कमर पर पहला स्पर्श था ,,,उसे इतना मुलायम अह्सास कभी नही हुआ ये स्पर्श उसे और भी जोशील किये जा रहा था ।

तभी दरवाजे पर दसटक हुई जो सोनल थी ।

सोनल की आवाज सुनते ही अनुज की फट गयी कि अब क्या होगा और दीदी ने आज उसे रंगे हाथ पकड लिया ,,कही वो पापा या मम्मी को बता ना दे ।

अनुज मन ही मन डरते हुए भगवान को याद कर रहा था कि आज उसे बचा ले फिर आगे वो इस झंझट मे पडेगा ही नही । मन ही मन उसने सुबह मंदिर जाकर पाव भर लड्डु के प्रसाद चढ़ाने की मन्न्त भी माग ली । बस किसी भी तरह से भगवान आज उसे बचा ले ।

वही पल्लवि एकदम सामन्य थी और उसने मुस्कुरा कर अनुज को देखा और एक बार फिर हल्के से उसके होठ को चूम कर खड़ी हुई और दरवाजा खोलने चली गयी ।

दरवाजा खोलते ही सोनल - तू यहा क्यू आ गयी पल्लवि

सोनल के सवाल से अनुज की हालत और खराब हो गयी कि अब तो वो गया ,,,उसके मन मे भगवान के प्रति श्रद्धा और लड्डुओं का वजन और भी बढ गया । पहले पाव भर और अब सवाकिलो । कैसे भी करके अनुज इस झमेले से बचना चाहता था ।

पल्लवी हस्ते हुए - वो क्या है दीदी आप जीजू से बात कर रही थी तो मै बाथरुम आयी थी , फिर अनुज भी जाग रहा था तो हम बाते करने लगे ।हिहिहिही

अनुज ने जैसे पल्लवि के मुह से जवाब सुना उसे बडी राहत मिली और मन ही मन उसने भगवान की धन्यवाद किया कि उसने पल्लवि को सतबुद्धि दी और उसे बचा लिया ।

सोनल थोड़ा मुस्कुरा कर - तू भी ना बडी बदमाश है ,,,चल अब हो गयी मेरी बात ,,,और तू अनुज तू भी सो जा रात हो गयी है ।

अनुज खुश होकर - हा दीदी बाय गुड नाइट

सोनल - ओहो आज गुड नाइट हा

पल्लवि - क्या दीदी आप भी परेशान कर रही है उसको चलो ,,,बाय अनुज

अनुज - हा बाय

फिर पल्लवि और सोनल अपने कमरे मे चले और अनुज ने फौरन दरवाजा बंद करके अपने तेज धडकते दिल को राहत दी और भाग कर कमरे मे लगे एक भगवान की फ़ोटो के सामने खडे होकर उन्का धन्यवाद करने लगा ।

इधर निचे दो जवाँ दिल फिर से तडप कर रह गये वही उपर कमलनाथ के कमरे मे दोनो भाई बहन बाथरुम के पहुच चुके थे ।

ममता इस वक़्त ब्लाउज और पैंटी मे नंगी खड़ी थी और कमलनाथ का लण्ड तनमनाया हुआ था ।

कमलनाथ बाथरूम मे एक दरख्त से रज्जो की रखी हुई हेयर रेमोवर क्रीम का टयूब निकालता है।

ममता बड़े अचरज से उस क्रीम के ट्यूब को देखती है - ये कैसे काम करता है भैया

कमलनाथ - इसको लगाने से पहले वहा निचे पहले पानी से भिगो कर बालो गिला कर लेते है और फिर थोडी सी क्रीम लेके हाथो से अच्छे से लगाते है और फिर थोडी देर बाद पानी डाल के धुल देते है ।

ममता बडे ध्यान से कमलनाथ को सुन रही थी ।

कमलनाथ हस कर - मै जान रहा हू तू नही कर पायेगी ,,,रुक मै ही कर देता हू

ममता की आंखे चौडी हो गयी और वो मुस्कुरा कर बोली - धत्त नही भैया प्लीज रहने दो मुझे वैसे ही शरम आ रही है

कमलनाथ हस कर - तू बड़ा शर्मा रही है ,,भूल गयी छोटी थी तब तेरी चुतड भी मै ही धुला करता था

ममता अपने भाई के मुह से सीधे लफजो मे चुतड शब्द सुन कर झेप सी गयी ।

कमलनाथ हस कर - चल अब निकाल इसको कि ये भी मै ही करू हम्म्म्म

ममता तो चाह ही रही थी कि वो पूरी तरह से अपने भैया के सामने नंगी होकर उनको अपना जिस्म दिखाये , मगर ऐसे सीधे मुह कैसे कह सकती थी कि उसे भी मजा आ रहा है । हालाकि अब तक कमलनाथ ने भले ही ममता पर बडे भाई का हक जताते अपनी मन्शाये पूरी कर रहा था लेकिन फिर भी उसने ऐसी कोई हरकत या वक्तव्य नही रखा जिससे ममता को लगे कि वो हवसी हुआ जा रहा है सिवाय उसके सर उठाते लण्ड के । जो तब से तना हुआ था जबसे ममता को उसने जिंस मे देखा था ।

ममता नुकुराते हुए कमलनाथ की ओर पीठ करके झुकी और एक ही झटके मे पैंटी को निचे करके सीधी खड़ी हो गयी । पैंटी निचे करने से पहले ममता ने एक बार पैंटी के उपर से अप्नी चिपचिपाती चुत को दबा कर साफ कर दिया था ।

ममता की नंगी गोरी चर्बीदार गाड़ को देख कर कमलनाथ का लण्ड ठुमका जिसे कमलनाथ ने हल्का सा दबा दिया ।

कमलनाथ - अब चल उस कमोड पर पैर खोल कर बैठ जा

ममता अपनी चुत के आगे हाथ रखते हुए घूमी और वैसे ही टाँगे सताये हुए कमोड पर बैठ गयी ।

कमलनाथ ममता को शर्माता देख मुस्कुरा कर उसके आगे बैठ गया और टोइलेट सीट के बगल मे लगी छोटी हैण्ड स्प्रे को हाथ मे पकड कर उसका पानी चालू कर दिया ।

ममता पानी के प्रेशर और ठन्डे छीटे अपने पैरो पर पाते ही थोडा चहकी फिर कमलनाथ ने उसके सटे हुए घुटनो को एक हाथ स्पर्श किया और हलका सा जोर लगा कर खोलने लगा ।

ममता अपने नंगे बदन पर भैया के कठोर हाथो का स्पर्श पाकर सिहर गयि और उसने आंखे बन्द करते हुए बिना कोई रोक के टांगो को खोल दिया ।

कमलनाथ को पहली बार ममता के चुत के दाने के उभार की हल्की झलक मिली लेकिन बढ़ी हुई काली झान्टो मे उसकी गोरी जान्घे बहुत खिली खिली दिख रही थी ।

कमलनाथ ने एक नजर ममता को देखा तो मधोश होते हुए आंखे बन्द किये गहरी सासे ले रही थी और उसकी चुचिया ब्लाउज मे ही उपर निचे हो रही थी ।

कमलनाथ ने वो प्रेशर स्प्रे का मुह ममता के चुत पर डाला और एक तेज ठंडी धार ममता के चुत पर जाने लगी जिस्से ममता चिहुक उठी ।

कुछ ही पलो मे ममता के चुत के बाल गीले होकर चीपक गये लेकिन कमलनाथ अभी भी चुत के मुहाने पर धार मारे जा रहा था जिससे कि सारे बाल दोनो तरफ बट गये और चुत की खुली हुई लकीर साफ दिखने लगी ।

फिर कमलनाथ ने ट्यूब से थोडा सा क्रीम लेके हाथो मे फेटते हुए बोला - ममता तू जरा ये अपने पैर मेरे कन्धे पर रख ले ताकि निचे अच्छे से क्रीम लगा दू मै

ममता अपनी हसी और हवस दोनो को दबाए मुस्कुराते हुए बडी ही बेशर्मी से अपनी दोनो टाँगे कमलनाथ के कन्धे पर टिका दी और पीछे दिवाल से टेक ले ली ।

अब कमलनाथ को ममता के की पूरी चुत के साथ साथ उसके गाड़ का भूरा छेद भी दिखा रहा था जिसके आस पास बालो के रोए थे ।

कमलनाथ से क्रीम फेटते हुए अपने हाथ को धीरे से चुत के आस पास घुमना शुरुकीया

ममता को गुदगुड़ी सी मह्सूस हो रही थी साथ चुत के उपर उसके भैया के सख्त हथेलियो के स्पर्श उसे कामुकता से भर दे रहे थे फिर भी वो खुद पर काबू करते हुए हसते हुए बोली - हिहिहिहिही आराम से भैया गुदगुदी लग रही है

ममता को हस्ता देख कमलनाथ मुस्कुरा कर थोडा हल्के हाथो से अच्छे से चुत के आस पास क्रीम लगा कर अंगूठे से गाड के सुराख के पास क्रीम लगाने लगा जिस्से ममता छटकने लगी ।

कमलनाथ उसकी जान्घे थाम कर - ओहो क्या कर रही है अभी गिर जाती तू ,,सही से बैठ

ममता ह्सते हुए - धत्त भैया मुझे गुदगुड़ी हो रही हैं जल्दी से करो ना

कमलनाथ हस कर - हा हो गया है ब्स थोडा सुख जाये 2 मिंट

ये बोल कर कमलनाथ ममता के चुत के उपर फुक मार कर उसे सुखाने लगा । ये सब हरकते ममता को बहुत ही ज्यादा उत्तेजित किये जा रही थी , मगर वो ज्यादा रियेक्शन नही दे सकती थी ना ही खुल कर आहे भर सकति थी ।

वही कमलनाथ की हालात कम खराब नही थी वो भी अपने खडे हुए लण्ड को आजाद करना चाहता था मगर वो भी मजबुर था ।

एक तो क्रीम मे मिण्ट का फ़लेवर था जो पहले से ही ममता के चुत और गाड की सुराख के पास एक ठंडक भरी झुनझुनी दे रहा था उसपे कमलनाथ की ठंडी फुक से वो और भी पागल होने लगी थी ।

दो मिनट के बाद कमलनाथ ने वापस से पानी के स्प्रे ममता के चुत की ओर किया और धीरे धीरे ढेर सारे झाग के साथ सारे बाल निचे गिरने लगे । ममता को काफी ताज्जुब हो रहा था कि इतनी आसानी से बिना कोई दर्द के ये साफ हो गया ।

कमलनाथ फिर प्रेशर स्प्रे का मुह ममता के गाड के सुराख पर किया और फिर से चिहुक उठी लेकिन इस बार वो सामान्य ही रही ,,,धीरे ममता की चुत से सारे बाल हट गये और उसकी चुत चमकने लगी ।

कमलनाथ का मुह और लण्ड दोनो लार से भर गये । ममता की चुत अब बहुत ही मुलायम थी उसके चुत के किनारे वो हल्के भूरे घेरे उसे और भी कामुक बनाये जा रहे थे ।

ममता - हो गया ना भैया

कमलनाथ चौक कर हा हो गया , रुक मै इसे पोछ दू

ममता हस कर खडे होते हुए - अरे मै कर लूंगी

कमलनथ भी उठ कर अपना गम्छा निकाल के उसे देते हुए - हा ये ले इससे पोछना , तू चल मै हाथ धुल के आता हू

ममता ने एक नजर कमलनाथ के लण्ड के उभार को जान्घिये मे उठा देखा फिर उसके हाथ से वो गमछा लिया और कमरे मे आ गयी ।

इधर कमलनाथ ने जलदी से हाथ धुल कर नारियल के तेल की शिशि लेके कमरे आता है तो ममता अपना पेतिकोट बान्ध रही होती है ।

कमलनाथ - अरे ये क्या कर रही है तू

ममता हस के - अब क्या ऐसे ही रहू हिहिहिहिह

कमलनाथ हस कर - अरे मेरा मतलब था कि अभी ये तेल लगाना पडेगा ना ,,नही तो खुजली होगी वहा

ममता - ओह्हो अब क्या फिर से निकलू इसे

कमलनाथ हस कर - अरे नही ,,तू यही बिस्तर पर लेट जा और ये पेतिकोट उपर ले मै लगा देता हू

ममता मुस्कुराई और वही बिसतर पर एक साइड लेट गयी और खुद पेतिकोट को कमर तक चढाते हुए बडी बेशरमी से अपनी जांघो को फ़ोल्ड करते हुए खोल दिया ।

कमलनाथ की नजरे अब ममता की चुत पर जम सी गयी ,,पोछने के बाद से उसकी चुत और भी खिल गयी थी ।

कमलनाथ ने अपनी भावनाओ पर काबू मे रखते हुए तेल की शीशी से कुछ बुन्दे ममाता चुत के बालो वाले हिस्से पर टिपकाई

ममता ने एक बार फिर से आंखे बन्द कर लि और गहरी सासे भरने लगी ,, तेल की बुन्दे टिप टिप टिप गिरते हुए रिसते हुए उसके चुत के किनारो से होते हुए गाड़ के सुराखो तक चली जा रही थी ।

कमलनाथ ने फिर सीसी को किनारे रख कर अपने दाये हाथ से हल्का हल्का चुत के उपरी बालो वाले हिस्से पर तेल को फैलाना शुरु कर दिया और जैसे ही उसके हाथ का खुरदरा स्पर्श ममता के चुत के उभरे हुए दाने को मिलता है वो हलकी सी सिस्क उठती है ।

कमलनाथ ममता की सिसकी सुन कर उसकी ओर देखता है तो ममता उसे आंखे बंद किये बहुत ही तडपती और कामुकता से मदहोश नजर जाती है और फिर वैसे उसने ममता के चेहरे के भावो को पढते हुए उसकी चुत के हिस्सो को सहलाते हुए तेल को हर तरफ पहचाने लगता है और धीरे से एक ऊँगली को उसकी गाड के सुराख के पास ले जाकर छुटा है

जिस्से ममता की आंखे खुल जाती है और उसकी नजरे कमलनाथ से टकराती है ।

ममता शर्मा कर मुस्कुराते हुए मुह फेर लेती है - हो गया भैया

कमलनाथ चौक कर - हा अ ब ब हा हो गया , देख तो कितनी साफ लग रहि है अब

ये बोलते हुए कमलनाथ झुक कर ममता के चुत के उपरी बालो वाले हिस्से पर किस्स कर लेता है ।

ममता खिलखिला कर - हिहिहिही क्या भैया वो कोई जगह है चुम्मी करने की

कमलनाथ वापस से ममता के चुत के पास उंगलिया रेंगाते हुए - हा तो इसमे क्या बुराई है ,, तू मेरे लिए हर जगह से अच्छी लगती है ,, और ये जगह भी प्यारी लग रही है अब ,, मेरा तो मन हो रहा है इसे और भी चुम्मीया दू

ये बोल कर कमलनाथ फौरन निचे बैठ गया और उसकी एक जांघो को खिच के अपने कन्धे पर रखते हुए चुत को थोड़ा अपने सामने किया और बार बार ममता के चुत के उपर चुम्मिया देने लगा

ममता खिलखिला कर - अब ब्स भी करो भैया हिहिहिही गुदगुदी लग रही है ।

कमलनाथ - वैसे ये जगह बहुत ही मुलायम है अह्ह्ह

ये बोलकर कमलनाथ अपना गाल ममता के चुत के पास घुमाता है

ममता मौका देख कर ह्स्ते हुए - उससे भी ज्यादा मुलायम जगह है भैया ,आपने शायद देखा नही हिहिहिहिही

कमलनाथ समझ रहा था फिर भी अंजान बन्ते हुए - कहा है मुझे तो नही लगता कि इससे भी मुलायम जगह कही और है

ममता हस कर - लगा लो शर्त हार जाओगे हिहिहिही

कमलनाथ चहककर - ठीक है लगी शर्त ,,,तू जीती तो जो तू कहेगी मै करने की तैयार हू

ममता ह्स के - सोच लो भैया हार जाओगे हिहिहिही

कमलनाथ उठ कर खड़ा हुआ और ममता भी उठ कर बैठ गयी ।

कमलनाथ - मुझे मंजूर है

ममता ह्स कर - हिहिहिही ठीक है फिर आप आंखे बन्द कर लो

कमलनाथ आंखे बंद करके खड़ा हो गया

ममता हस्ते हुए उसे बिस्तर पर बिठाती है

कमलनाथ - क्या हुआ

ममता ह्स कर - हिहिहिही बस रुको ना भैया थोड़ा सा

ममता ने फिर एक एक करके अपने ब्लाउज और ब्रा निकाल कर उपर से नंगी हो गयी और आगे बढ के कमलनाथ हाथ पकडते हुए बोली - हिहिहिही अभी आंख नही खोलना भैया ठीक है

कमलनाथ हस कर - हा ठीक है लेकिन तू कर क्या रही है

ममता हस कर - बस अभी पता चल जायेगा

इतना बोल कर ममता ने कमलनाथ के हाथ को पकड कर सीधा अपनी नुकीली चुचियो के उपर रख दिया - अब बताओ भैया है ना वहा से भी मुलायम हिहिहिहू

कमलनाथ ने अच्छे से उस जगह को हथेलियों से टटोलता और जब उसे समझ आया कि ये तो ममता की चुची है तो इस्का लण्ड टनटना गया और उसने हौले से उसकी चुची को दबाया और बोला - अह्ह्ह ममता सच मे क्या है ये बहुत ही मुलायम है ये तो

ममता खिलखिलाते हुए - खुद ही देख लिजिए हिहिहिही

कमलनाथ ने जैसे ही आंखे खोली उसकी आंखे फटी की फटी रह गईं और एक कामुक मुस्कान उसके होटो पर छा गयी ।

कमलनाथ एक नजर ममता को हस्ते देखा और वापस से उसकी चूची को निहारते हुए उसके कड़े निप्पल को सहलाया ,,,ममता मचल गयी और उसकी सासे तेज हो गयी ।

कमलनाथ दोनो हाथो से ममता की चुचिया पकडते हुए सहलाने लगा - अह्ह्ह ममता सच मे ये तो उससे भी मुलायम है

ये बोल कर कमलनाथ ने दोनो हाथो से ममता की चुचियो को हल्का जोर देके दबाया ।

ममता सिस्ककर - उम्म्ंम्ं हा भैया इस्स्स्स्स अह्ह्ह

कमलनाथ - मै एक बार इसकी भी चुम्मी लेके देखता हू कैसा लगता है

ममता कमलनाथ की बाते सुन कर सिहर उठी और उस्का बदन कापने लगा ।

कमलनाथ ने अगले ही पल ममता की नंगी कमर को थामा और गरदन आगे बढा कर ममता के निप्प्ल के बगल मे हल्का सा चुम्बन किया ।

ममता गनगना कर रह गई उसकी चुत फिर से रसाने लगी।

कमलनाथ ने एक नजर ममता को देखा जो आंखे बन्द किये सिसकियाँ ले रही थी ।

कमलनाथ ने वापस से अपना खोलते हुए इस बार सीधा ममता के निप्प्ल को मुह भर कर एक बार चुबलाया ।

ममता सिस्क कर - सीईईई अह्ह्ह भैयाआआ उम्म्ंम्ं

कमलनाथ मुह हटा कर ममता को देखते हुए - क्या हुआ ममता

ममता हस कर - कुछ नही ,

कमलनाथ बडे दुलार से उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसे अपनी जान्घ पर बिठाते हुए -बोल ना

ममता शर्मा के ह्स्ते हुए - वो मै शर्त जीत गयी ना हिहिहिहो

कमलनाथ हस कर बगल से साथ निकाल कर उसकी एक चूची को थामते हूए - अरे हा ,, तो बता क्या चाहिये तुझे

ममता कमलनाथ के हाथो को अपने जिस्म पर रेंगता पाकर कसमसा कर बोली - उह्ह्ह्ह भैया मुझे भी भाभी के जैसे प्यार करो ना

कमलनाथ ममता के मुह से ये बाते सुन कर उत्तेजना से भर गया और उस्का दिल तेजी से धडकनें लगा ।

वही ममता ये बोल कर बहुत काप रही थी लेकिन उसके चुचियो पर घुमते उसके भैया के हाथ उसे उम्मीद दिए हुए थे

कमलनाथ जो चाह रहा था वो अब उसके सामने थे अब तक उसने अपने दिल के उठे हवस के तरंगो को रोक रखा था ।

उसने हौले से ममता की चुची को दुलारते हुए उसके गालो को चुम कर बोला - तू चाहती है कि मै तुझे रज्जो के जैसे प्यार करू

ममता सिहर कर नजरे नीची किये हा मे सर हिला कर वही कमलनाथ के गोद मे बैठी रही ।

कमलनाथ ने सामने से अपने हाथ को ममता की चुचिया पर रख कर उसके निप्प्ल पर दरते हुए बोला - तू चाह रही है कि मै तेरे बदन को वैसे स्पर्श करू जैसे तेरी भाभी को करता हू

ममता सिस्ककर - हम्म्म्म्ं भैया अह्ह्ज सीईई उम्म्ंम्ं

कमलनाथ ममता से वापस कबूलवाते हुए - तुझे मेरा स्पर्श अच्छा लगता है क्या ममता ,,,बोल ना

ममता सिस्ककर - उम्म्ंम्ं हा भईयाआआ बहुत अच्चाआआ

कमलनाथ ने अब ममता को आगे कर पीछे से उसकी दोनो चुचिया मिजते हुए - ओह्ह्ह्ह ममता सच मे तेरे दूध बहुत मुलायम है उम्म्ंम्ं अह्ह्ह

ममता सिस्कर अपने हाथ कमलनाथ के हाथो के उपर रख कर उन्हे रगड़ते हुए - ओह्ह आपको पसंद आया ना मेरे दूध उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह भैया ऐसे ही उम्म्ंम्ं रगडो ना भैया जैसे रज्जो भाभी का रगड़ते हो ,,,देखो ना कितना ब्डा कर दिये हो उनका

कमलनाथ और जोर से ममता के चुचियो के मिजता हुआ - उम्म्ंम्ं तुझे भी अपने दूध उसके जैसे करवाने है क्या उम्म्ंम्ं

ममता सिस्कते हुए - उम्म्ंम्ं हा भैया कर दो ना उम्म्ंम्म्ं भाभी के जैसे ओह्ह्ह्ह

कमलनाथ - आह्ह ममता तेरी बात कभी मैने टाली है उम्म्ं तेरे दूध भी मै रज्जो के जैसे मोटे कर दूँगा उफ्फ्फ वैसे ये कम मोटे नही है उम्म्ंम्ं बहुत ही मुलायम दूध है तेरे

ममता सिस्क कर - उम्म्ं भैया सूनो ना उम्म्ंम्म्ं

सीई

कमलनाथ अपने हाथ रोकते हुए - हमम क्या हुआ बोल

ममता थोडा मुस्कुरा कर शर्माते हुए - इनको दूध नही बोलते ,,,सही नाम लो ना उम्म्ंम्म्ं अह्ज्ज्ज

कमलनाथ ममता के वक्तव्य से और भी जोशील होकर एक बार फिर ममता की चुचिया हथेली मे भरते हुए - ओह्ह्ह तू चाह रही है मै इनके वो वाले नाम लू गन्दे वाले

ममता हा मे सर हिलाते हुए सिसकी

कमलनाथ - ओह्ह्ह ममता तेरी चुचिया बहुत ही मुलायम है अह्ह्ज इनको मिजने मे बहुत ही मजा आ रहा है उफ्फ़फ्फ

ममता अपने भैया के मुह से खुले शब्दो को सुन के मचल उथी

वही कमलनाथ धीरे से निचे से ममता के पेतिकोट को उपर करके एक हाथ को उसकी चुत पर लगा दिया और उसे सहलाने लगा

ममता की हालत खराब होने लगी वो अपने भैया की बाहो मे पिघलने लगी ।

कमलनाथ - उम्म्ं तू ऐसे ही चाहती है ना मै इसे सहलाऊ बोल ना

ममता सिस्ककर - उम्म्ंम हाआआ भैयाआआ उफ्फफ़फ़ ऐसे ही मसलो उसे

कमलनाथ - बोल ना क्या मसलवा रही है अपने भैया से उम्म्ंम

ममता सिहर के - उम्म्ंम्ं सीईईई अह्ह्ह्ह च च च चुउउऊऊ त्त्त्त्त्त अह्ह्ह

कमलनाथ अपनी हथेली मे ममता की चुत को दबोचते हुए - मजा आ रहा है अपने भैया से अपनी चुत मसलवा के ,उम्म्ंम्ं बोल ना

ममता सिस्ककर - उह्ह्ह्ह्ह हाआआ भैयाआआ बहुतहहह उम्म्ंम्ं

कमलनाथ - उम्म्ंम तो फिर अपने भैया को मजा नही देगी क्या उम्म्ंम बोल ना

ममता - सीईई ओह्ह्ह हाआआ क्यू नही उम्म्ंम्ं

कमलनाथ ने फौरन ममता को खड़ा करके खुद अपना जांघिया खोल कर निचे कर दिया और उसका मोटा लण्ड तनमना कर खड़ा हो गया ।

ममता अपने भैया का लण्ड देखकर एक गहरी आह्ह्ह भरी और तुरंत घुटने के बल होकर बिना कोई देरी के सीधा मुह मे लण्ड लेके चूसना शुरु कर दिया

कमलनाथ ममता की आतुरता देखकर थोडा मुस्कुराया और अगले ही पल जब ममता ने उसकी चमडी खिच कर सुपाडे ले जीभ फिराया तो कमलनाथ पूरी तरह से हिल गया ।

कमलनाथ - ओह्ह्ह ममता उम्म्ं ऐसे ही अह्ह्ह सच मे तू तो कमाल की है रे अह्ह्ब उम्म्ंम्म्ं

ममता बिना कुछ बोले तेजी से गपगपा लण्ड निचोद्ते हुए चुसे जा रही थी ।

कमलनाथ ज्यादा देर तक रोक नही सकता था खुद को और उसने ममता का सर रोका ।

ममता ने हौले से मुह खोल्कर लण्ड छोड दिया और नजरे उपर कर कमलनाथ को ऐसे देखने लगी कि मानो पुछ रही थी कि मुझे रोका क्यू ।

कमलनाथ - सारा रस यही निचोड लेगी क्या उम्म्ं

ममता शर्माते हुए मुस्कुराई तो कमलनाथ मे उसको पकड कर उठाया और बिस्तर पे लिटा दिया ।

ममता ने शर्माते हुए मुह फेर ली और वही कमलनाथ उसकी जान्घे फ़ोल्ड करता हुआ उस्के पेतिकोट को कमर तक चढा दिया ।

फिर कमलनाथ अपना जान्घिया पैर से निकाल कर एक पैर का घुटना मोड कर बिस्तर पर रखा और ममता की टांगो को पकड के अपनी ओर खिचते हुए लण्ड को उसकी पनियायी चुत पर फिराया और अगले ही पल हचाक से अन्दर पेल दिया

ममता सिसक उठी - उह्ह्ह्ह भैयाआआ अह्ह्ह उम्म्ंम्ं आह्ह्ह्ह अराअमाआम्ंंं से उह्ह्ह

कमलनाथ ममता की आंखो मे देखते हुए - दर्द हुआ क्या तुझे

ममता ह्स के ना मे सर हिलायि

कमलनाथ ने एक और जोर का धक्का देकर पुरा लण्ड जड़ तक पेलते हुए - देख ऐसे ही रज्जो पेलता हू पुरा अन्दर तक

ममता अपनी चुत के जड़ मे अपने भैया का लण्ड पाकर चिहुक उठी और सिस्कते हुए - ओह्ह्ह भैया तो पेलो ना मुझे वैसे ही ,,जैसे रज्जो भाभी को पेलते हो हचक हचक के

कमलनाथ ममता की बातो से और भी जोश मे आ गया और लम्बे लम्बे धक्के ममता की चुत लगाते हुए - तुझे भी ह्चक ह्च्क के पेलवाना है ना तो ले और ले अह्ह्ह आह्ह

ममता सिस्कते हुए अपनी गाड उचका के - ओह्ह्ह हा भैया और तेज्ज अह्ज्ज उम्म्ंम्ं ऐसे ही और हचक के पेलो मुझे अओह्ह्ह भैयाआअह्ह्ह

कमलनाथ जोश मे आते हुए - ओह्ह्ह ममता तू बहुत गरम है अह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम्ं

ममता - ओह्ह भैया आपका वो भी बहुत मोटा है उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह

कमलनाथ तेजी से ममता की चुत मे लण्ड पेलते हुए - अह्ह्ह उम्मममं तेरी चुत बहुत कसी हुई है रे अह्ह्ह इसको भी तेरे भाभी के जैसे कर दूँगा उम्म्ंम

ममता कमलनाथ से कबुलवाते हुए - ओह्ह सच मे भैया मेरी भी चुत भाभी जैसे खोल दोगे उम्म्ंम

कमलनथ तेजी से चुत की गहराइयो मे जाते हुए - हा ममता ,,,तेरी भी चुत का भोसडा बना दूँगा चोद चोद के ओह्ह्ह

ममता - ओह्ह भैया फिर बना दो ना मेरी चुत का भोस्डा उम्म्ं और तेज पेलो अपनी बहन को ओह्ह्ह अह्ह्ह ऐसे ही

ममता के मुह से बहन शब्द सुन कर कमलनाथ के लण्ड मे नयी ऊर्जा आ गयी और वो तेजी से हचाक ह्चाक उसकी चुत मे लण्ड पेलने लगा

कमलनाथ - उम्म्ंम ममता एक नम्बर की अह्ह्ह सीईई

ममता अपनी गाड उचका के कमलनाथ की आंखो मे देख कर - अह्ह्ह भैयाआआ बोलो ना ,, मै एक नम्बर की क्या अह्ह्ह उम्म्ं

कमलनाथ ममता की आंखो मे देखते हुए - सच मे बोल दू उम्म्ंम्ं

ममता - अह्ह्ह हा भैया बोलो ना मै क्या एक नम्बर की उह्ह्ह्ह सीईई अह्ह्ह

कमलनाथ अपने लन्ड़ को ममता की चुत के गहराईयो मे ले जाकर - तू एक न्म्बर की चुद्क्क्ड लगती है रे अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

ममता अपने भैया के मुह से अपने लिये ऐसे लब्ज सुन के और भी पागल होने लगी - अह्ह्ह सच मे भैया उम्म्ंम और क्या लगती हू मै आपको अह्ह्ह्ह सीईई उम्म्म्ं

कमलनाथ बिना कुछ बोले ममता को तडपते हुए देखकर मुस्कुराते हुए लगाताए एक ही लय बनाते हुए उसकी चुत मे गचागच पेले जा रहा था

ममता कमलनाथ को चूप देख कर थोडी परेशान होने लगी - उम्म्ंम भैया क्या हुआआ सीई अह्ह्ह बोलो ना क्या सोच रहे उम्म्ंम्म्ं बोलो ना मुझे गंदे गंदे शब्द उम्म्ंम्ं

कमलनाथ मुस्कुरा के - उम्म्ं तुझे गंदे गन्दे शब्द सुनने है हा

ममता - उम्म्ंम हा ,,भाभी कह रही थी कि जब वो आपको एक गाली देती है तो आप उनको बहुत तेज चोदते हो उम्म्ंम्ं

कमलनाथ मुस्कुरा के - कौन सी बता ना

ममता मुस्कुरा ना मे सर हिलाती है

कमलनथ ममता की टाँगे उठा कर एक जोर का झटका लगाते हुए एक लम्बा शॉट उसकी चुत मे लगाते हुए- बोल ना उम्म्ं

ममता दर्द और मस्ती से सिस्ककर - ओह्ह्ह बहनचोद चोद ना मुझे कस के उम्म्ंम्ं

कमलनाथ ममता के मुह से अपने लिये गाली सुन के उत्तेजना से भर गया और तेजी से धक्के लगाते हुए उसके उपर चढ़ गया और एकदम करिब से उसकी आंखो मे देखते हुए - आह्ह अब तो मै पक्का बहनचोद हो गया हू रे उम्म्ंम

ममता अपने चरम पर थी इसिलिए वो अपने गाड़ को उच्काते हुए अपने चुत के छल्ले को कमलनाथ के लण्ड पर कसटे हुए - तो चोद ना बहनचोद अपनी बहन को खुब हचक हचक के पेल ना उम्म्ंम ऐसे हो अह्ह्ज्ज

कमलनाथ भी अब अपने रंग मे आते हुए - आह्ह्ह्ह साली तू बडी चुद्क्क्ड है उम्म्ंम्ं आज तो तेरी चुत का भोस्दा बना ही दूँगा उम्म्ंम्ं साली रन्डी है तू उम्म्ंम्ं

ममता तो इसी सब के इन्तजार मे थी उसे ऐसे ही बेरहम और गाली गलौज भरी धमाकेदार चुदाई चाहिये थी अपने भैया से

कमलनाथ अब उसे गाली देते हुए तेजी से अपना लण्ड ह्च्च्च ह्च्च उसकी चुत मे उतार रहा था ,,

ममता अब झडने के करीब थी और वो अपनी कमर उच्काते हुए - आह्ह भैया चोदो ना अपनी रंडी बहन को आह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह मै आ रही हुई अओह्ज्ज अह्ह्ह पेलो भैयाबन जाओ ना बहिनचोद उम्म्ंम अह्ह्ह

इधर ममता तेजी से झडने लगी और तेजी से अपने भैया के लंड को निचोडते हुए चुत के अंदर ही कसने लगी

कमलनाथ तेजी से लण्ड को उसकी चुत मे पेल्ते हुए -अह्ह्ह ममता मेरा भी होने वाला है उह्ह्ह्

ये बोलकर कमलनाथ ने तेजी से लण्ड को बाहर निकाला और ममता के मुह के पास जाकर हिलाने लगा

ममता के तुरंत एक करवट होकर लंड को मुह मे भर लिया

अगले ही पल ममता का मुह कमलनाथ मे गरम माल से भरने लगा और कमलनाथ निढ़ाल होने लगा

ममता ने अच्छे से कमलनाथ का लण्ड निचोड के छोड दी

थोडी देर बाद जब दोनो के तन और मन स्थिर हुए तो उनको रज्जो का ख्याल आया ।

ममता हस कर - भैया भाभी को गये काफी समय हो गया हिहिहिही

ममता के सवाल से कमलनाथ का मन भी खटका कि ममता के साथ समय बिताने के चक्कर मे मै रज्जो को भूल ही गया

वो भी तो सिर्फ ब्लाउज और जीन्स मे राजन के पास गयी है ,, आखिर इतना समय तो लगाना नही चाहिये

ममता अपने भैया को सोचते देख कर हस्ते हुए - अरे भैया इतना क्या सोच रहे हैं चलिये कपडे पहन लेते है क्योकि दरवाजा बंद कर दिया था आपने और हम लोगो का कितना समय बाथरूम मे बीत गया था तो

कमलनाथ ने जब ममता के पहलू पर विचार किया तो उसकी फट गयी कि कही रज्जो वापस आई हो और उसने बंद दरवाजा देख कर हमारे बारे मे कोई बात ना बना ली हो ।

इसिलिए फौरान वो भी उठ कर अपने कपडे पहनने लगता है और ममता को बोलत है कि वो बाथरूम मे जाकर अपनी पैंटी लेले ।

यहा इस कमरे मे ये हड़बड़ी मची ही थी कि बगल के कमरे मे रज्जो ने देखा कि कमलनाथ और ममता ने उसकी खोज खबर नही ली तो उसने दुसरी राउंड की चुदाई के आखिरी क्षणो का मजा ले रही थी ।

राजन तेजी से उसकी चुत फाडे जा रहा था और कुछ ही पलो मे वो रज्जो मे मुह मे झड़ भी जाता है ।

रज्जो फटाफट अपना मुह साफ कर जीन्स चढा लेती है और कमरे से निकल रही होती है कि सामने ममता और कमलनाथ नजर आते है ।

ममता अब तक साडी पहन चुकी थी और कमलनाथ बनियान जान्घिये मे गम्छा लपेटे खड़ा था ।

रज्जो जब दोनो को सामने देखा तो पहले थोडी सहमी फिर खुद को सम्भालते हुए हस कर - हम्म्म हो गयी बात आप दोनो की

कमलनाथ रज्जो के बात से थोडा परेशान हुआ लेकिन उसे शाम की वो बात याद आई जब ममता ने उससे बाते करने की जिद की थी - हा हा ,,,हमने तो खुब सारी बाते की और बचपन की यादे भी ताजा की

ममता भी अपने भैया का पक्ष लेते हुए हस कर - हिहिहीहि हा भाभी आप होती ना आपको भी मजा आता

रज्जो हस कर - चल तू खुश है ना ,,,मै तो नंदोई जी को तेरे फ़ोटो दिखाने आई थी और यही बातो मे लग गयी ।

कमलनाथ - चलो कोई बात नही ,, जा ममता तू भी आराम कर

रज्जो - हा जी चलिये

फिर सारे लोग अपने अपने कमरे मे चले जाते है ।

जारी रहेगी

आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा

जितनी अच्छी प्रतिक्रियाए मिलेगी , अगला अपडेट उतना जल्द ही
 
अपडेट 114

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पिछ्ले अपडेट मे आप सबने पढा कि कैसे कमलनाथ और ममता दोनो भाईबहन ने एक दुसरे को तृप्त किया और वही बगल के कमरे मे रज्जो अपने नंदोई से चुदती रही लेकिन कमलनाथ को खबर तक नही पडी । इनसब से अलग अनुज और पल्लवि की नजदीकी बढ़ी तो लेकिन एक छोटी मुसीबत के नाते अनुज ने कुछ फैसले किये है देखते है आगे क्या क्या होने वाला है क्योंकि सिर्फ जानीपुर की रात रंगीन नही थी , चमनपुरा मे भी राज शाम से ही बेचैन बैठा हुआ रहा था कि कब उसे चंदू के यहा जाने का मौका मिलेगा ।

अब आगे



राज की जुबानी


मै शाम होने का इन्तजार करने लगा कि जल्द से जल्द दुकान बढा कर चंदू के यहा जाऊ ।

इधर 6 बजे तक मा चौराहे पर चली गयी और मैने उसे बोल दिया कि मै खाना वही चंदू के यहा ही खाऊंगा ।

मा के जाने के बाद मैने फिर से WhatsApp चेक किया और देखा तो काजल भाभी ने अभी कुछ मिंट पहले ही मेरी ल्गाये हुये ब्रा पैटी के status को सीन किया , मगर उनका कोई रिप्लाई नही आया था । मै जानरहा था कि उनका इतना जल्दी रिप्लाई नही आयेगा ।

फिर वो मुझे ऑनलाइन दिखी तो वापस से मैने एक जोक का फ़ोटो status पर लगा दिया ।

इधर मै ग्राहको मे व्यस्त हुआ था कि उनका उसी status पर रिएक्शन रिप्लाई आ गया ।

मैने फौरन चेक किया तो दो हसने वाली एमोजी आयी थी ।

मैने भी एक हसने वाली एमोजी भेज कर निचे गुड एवनिंग का मैसेज सेंड किया ।

अगले ही पल मैसेज सीन हुआ और उन्होने भी गुड एवनिंग विश किया ।

अब मेरे दिल की इच्छा बढ़ी

मै - kaisi ho bhabhi ji 😄

भाभी - thik hu ji , aur ap

मै - mai bhi , aur kya ho rha hai

भाभी - bs yahi khana bnane ja rahi hu

मै - ohhh , hmaare liye kya bn rha hai 😂

भाभी - 😂 jo kahiye , lekin aap aate hi nhi hai .

मै - are rohan bhaiya ko aane dijiye ,, fir aata hu

भाभी - wo to isi hafate a rahe hai

मै - thik hai , kuch jrurt hogi to msg kariyega

भाभी - ha kyu nhi

मै - hmm bye

भाभी - bye

फिर मैने फोन कट करके आगे के लिए कुछ प्लान किया और दुकान बंद करके चंदू के यहा निकल गया ।

गलियारे से होकर मै सीधा उपर निकल गया जहा चंदू हाल मे बैठा मोबाइल पर बात कर रहा था और मुझे देखते ही चुप रहने को बोला ।

मैने उससे इशारे मे पुछा की कौन है तो उसने भी बस होठो से पापा बोला ।

मै चुप हो गया और इधर उधर देखते हुए चम्पा को खोजते हुए किचन की ओर गया

जहा चम्पा एक टीशर्ट और पैंटी मे खड़ी जल्दी जल्दी पुड़िया तल रही थी ।

चम्पा की हल्की सावली और नंगी जान्घे देख कर मेरा लण्ड अंगड़ाई लेने लगा और मै दबे पाव उसके पास पहुच कर अपना लण्ड लोवर से बाहर निकालते हुए सीधा उसकी गाड़ के पाटो पर सटाते हुए उससे चिपककर - ओह्हो क्या बना रही हो हम्म्म

चम्पा पहले तो चिहुकी फिर मुझे जान कर थोडी इतरा कर - ओह्ह तुम हो , वो मै पुड़िया निकाल रही हू उम्म्ंम्ं रुको नाआह्ह्ह्ह

मै हस कर उसके टीशर्ट के अंदर उसकी नंगी कमर मे घुमते मेरे हाथो को रोकता हुआ - क्या हुआ अच्छा नही लगा हम्म्ंम

चम्पा थोडा शर्मा कर हसी और मुझे ठेलते हुए - धत्त हटो ,,मै जल जाऊंगी

मै वापस अपने हाथ उसकी कमर से सरकाते हुए उसके नंगे चुतडो पर फिराता हुआ - लग रहा है चंदू ने अपना कोटा पुरा कर लिया है हिहिहिहू

चंपा ने आंखे उठा कर मुझे देखा और हसने लगी ।

मै उसको शर्माता देख और उत्तेजना मह्सूस किया और लपक कर उसके गाल चूम लिये ।

फिर मै उसके गाड के पाटो पर एक चपट लगाई और हस्ते हुए बाहर आ गया ।

थोडी देर बाद चंपा ने हम सब के लिए खाना ल्गाया । खाने के बाद मै और चंदू उपर की मंजिल पर टहलने चले गये रात के 8 बज रहे थे और चम्पा निचे बरतन खाली कर रही थी ।

मै आस पास नजर दौडा रहा था रात की बिजली मे सबके छत पर गरमी महीने की चहल पहल दिख रही थी ।

तभी चंदू मुझे पीछे से ठोकता हुआ - तब आज तेरा पहला बार है कोई बात हो तो पुछ ले हाहाहा

मै हस कर - अरे तू होगा ना साथ मे हिहिहीहि

चंदू - नही नही नही ,, पहला राउंड तू अकेले मजा ले फिर मै

मुझे भी उसकी बाते सही लगी

मै हस कर - तो तू यही रुक मै आता हू हिहिहीहि

चंदू - हा ठीक है जा हाहाहा

मै हसते हुए वापस निचे आया

मै वापस किचन मे गया तो वहा चम्पा नजर नही आई और फिर मै वही बगल के बेडरूम मे हल्का सा दरवाजा खोल कर अन्दर झांका तो चम्पा अपना टीशर्ट निकाल दी थी और उसके बडे बडे मोटे चुचे लटके हुए थे ,,वो सिर्फ पैंटी मे थी

वो आल्मारि से कुछ कपडे निकाल रही थी तो मै धीमे से दरवाजे को खोल और दबे पाव उसके पीछे जाकर उसके कंधो के निचे से हाथ डाल कर उसके दोनो मोटे थन जैसे चुचो को दबोच लिया

चंपा सिस्ककर - उम्म्ंं सीईईई ओफ्फ्फ्फ राज्ज्ज उम्म्ं क्या कर रहे उम्म्ंम

मै उसके मुलायम चुचो को हाथो मे भरते हुए - क्या खोज रही हो यहा ,,उम्म्ंम्ं

चंपा कसमसा कर - वो वो उम्म्ंम सिह्ह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ं वो मै मै हहहह अह्ह्ह्म वो मै कपडे बदलने जा रही थीईई उम्मममं

मै उसकी चुचियो को मिज्ते हुए अपना लोवर मे खड़ा लण्ड उसके गाड के उभार मे धसान्ते हुए - जब सब उतारना ही है तो क्या करोगी पहन के उम्म्ंम

चम्पा थोडा हसी और मैने उसे अपनी ओर घुमाते हुए उसकी नशीली आंखो मे देखा और उसके फड़फडाते होठो को मुह मे भर लिया

चंपा के मुलायम होठ धीरे धीरे पिघलने लगे और अगले ही पल चम्पा मुझपर हावी होने लगी ,,,उसने मेरे होठो को निचोडना शुरु कर दिया

मेरे हाथ खुद ब खुद उसके 36 के कूल्हो पर चले गये और मै उन्हे बडी मर्ममता से भिचने लगा ।

नतिजन चम्पा और उत्तेजित होकर अपनी एडिया उच्काते हुए मेरे और करीब आने लगी ।

मैने उसके कूल्हो को छोडते हुए अलग हुआ और एक ही झटके मे अपनी टीशर्ट बनियान सहित निकाल दी और चंपा से चिपक गया ।

उसके मुलायम चुचे मेरे सीने मे दब गया ,,,मेरे बदन मे सिहरन पैदा होने लगी उस स्पर्श से और मै उसके पीठ पर अपने हाथ फेरने लगा ,,ठीक वैसे ही चंपा भी मुझे अपने सीने से चिपकाये मेरे पीठ पर अपने हाथ कड़े करते हुए मुझे ऐसे कसने लगी मानो मेरा बदन ही तोड देगी

हमारे होठ एक फिर से जुड़ गये और उसके हाथ निचे मेरे लोवर मे घुसकर मेरा लण्ड टटोलने लगे ।

अगले ही पल चंपा ने मेरे लण्ड को भिचना शुरु कर दिया और मै उसे पकड कर बिसतर के पास लाया ।

खुद बिस्तर पर बैठते हुए उसकी एक चूची मे मुह लगा दिया

चम्पा पागल सी होने लगी और तेज सिसकिया लेने लगी ,, वो काफी गरम दिख रही थी उसने अपने जांघो को खोलकर मेरे घुटने पर बैठ गयै और अपनी फुली हुई चुत को मेरे जांघो पर घिसना शुरु कर दिया ।

मै इस अह्सास से पागल होने लगा ,,,मैने उसकी कमर मे हाथ डालकर अप्नी ओर खीचा और उसकी दुसरी चूची को थामते हुए ज्यादा से ज्यादा मुह मे भरने लगा ।

मेरा दुसरा हाथ जो उसकी कमर पर वो पीछे उसके गाड की लकीरो की ओर सरक्ने लगा और मेरे जीभ लपालप चम्पा के निप्प्ल पर चलने लगे ।

चम्पा -उह्ह्ह्ह रज्ज अह्ह्ह्ह माआ बहुत मस्त कर रहे ओह्ह्ह्ब उम्म्ंम ऐसे ही और चुसो इसे उम्म्ंम्ं

मै उसकी दोनो चूचियो को बारी बारी से चूसते हुए उसकी गाड की गहरी दरारो मे एक हाथ को ले जाने लगा ,,,जैसे मेरी बीच वाली ऊँगली चम्पा के गाड़ के सुराख की ओर बढ रही थी वो अपने गाड़ को सिकोड़ते जा रही थी और उछलती रहती थी जिस्से उसके चुचे मेरे मुह मे और भर जाते

आखिर कार उसके सख्त हुए पाटो मे अपनी उन्गली घुसेड़ते हुए उसके गाड़ के सुराख पर ऊँगली की टिप छू गयी जिससे चम्पा चिहुक उठी

मैने उसको थामा और अच्छे से वहा पर उन्गली फिराया और चंपा के होठ को वाप्स से मुह मे भर लिया ।

इधर चंपा ने चुत ने पिचपिचाना शुरु कर दिया था और उसके हाथ मेरे लोवर के उपर से लण्ड को सहलाये जा रहा था ।

उसने मेरे होठ से अपने होठ छुड़ाए और मेरे आंखो मे बडी कामुक अदा से देखते हुए खड़ी हुई और मेरे कदमो मे बैठ गयी ।

चम्पा की हरकत देखते ही मुझे कल उसकी लण्ड चूसने की स्टाइल याद आ गयी और मै पूरी तरफ से सीहर उथा ,,,मेरे लण्ड मे एक नया जोश आ गया और मै एक गहरी आआहहहह भरी ।

चम्पा ने मुस्कुरा कर मेरे लोवर की लास्टीक को फैलाया तो मै भी अपनी कमर उचकाया

मौका देख कर चंपा ने लोवर और अंडरवियर एक साथ घुटनो के निचे कर दिया और मेरा लण्ड टनटना कर खड़ा हो गया ।

मैने उसे थामा कर हलके हाथ से सहलाते हुए दुसरे हाथ से चंपा के बालो मे फिराया और उसका चेहरा पकड कर खुद लण्ड के करीब लाया ।

चम्पा एक बार नजर उपर करके मेरे आंखो मे देख कर मुस्कुराइ और मुह खोल्कर अगले ही पल लण्ड को भर लिया ।

मैने एक गहरी सास ली और वही चंपा मेरे लण्ड को गले तक उतारती चली गयी ।

मेरे लण्ड के सतह पर उसके लार का गिलापन और एक ठंडक सी मह्सूस हो रही थी और मै एक आनन्द मे दुबा जा रहा था

तभी चंपा ने मेरे आड़ो को थामा और लण्ड को पुरा निगलने लगी जिससे मेरे लण्ड मे और भी कड़ापन होने लगा

मुझे एक पल को कल की लण्ड चुसाई याद आई और मै वापस से बिना चंपा को चोदे झड़ना नही चाहता था इसिलिए मैने उस्के सर को थामा और उपर की ओर किया

चम्पा ने ढेर सारा लार मेरे लण्ड पर ल्भेड़ लिया था और उसे अपने दोनो हाथो अपने दाँत भींच्ते हुए लण्ड को कस कर चिकना कर रही थी ।

मैने उसका रन्डीपना देखा और मुझे उसके चोदने की इच्छा और भी तेज होने लगी

मैने उसे खड़ा किया और खुद भी खड़ा होकर उसके बिसतर पर धकेल दिया

वो गद्देदार बिछौने पर थोडा उछली और उसके चुचे भी हिले

मैने अपना लोवर निचे निकाल दिया और उपर चढने लगा ,,,मुझे बिस्तर पर आते देख चम्पा ने फौरन अपनी गाड़ उचका कर पैंटी निकाल दी और जांघो को खोलते हुए अपनी गीली चुत को थपथपाने लगी ।

मैने आज तक ऐसे गरम लड़की नही देखी थी जो ऐसे सेक्स के लिए इतनी बेशर्म हो जाती हो

मेरा लण्ड उसके अन्दाज से और फनफना उथा और मैने उसके जांघो को फैलाते हुए अपना लण्ड उसकी चुत के उपर रखा

उसने अगले ही पल अपनी कमर को नचा कर लण्ड को अपनी चुत के मुहाने पर सेट कर लिया ।

मैने अपना एक हाथ उसकी मासल जांघो पर फिराया और अंगूठे से उसके चुत के दाने को फ्लिक किया ,,वो चिहूक कर अपनी गाड पटकते हुए - उम्म्ंम डाल दो ना उम्म्ंम सीई अह्ह्ह

मै उसकी तडपन देख कर हस्ता हुआ उस्से काबूलवाया - क्या डाल दू हा

चंपा थोडा मुस्कुरा कर लेकिन पूरी तरह से उत्तेजित होकर -येएह्ह्ह अपना मोटा लण्ड,,,घुसाओ ना इसे उम्म्ंम्ं

ये बोल कर वो अपनी चुचिया मिजने लगी

मै भी उसकी तडपन बढ़ाने के लिए लण्ड की चमडी खोलकर सुपाडे को उसके चुत के दाने पर रगड़ता हुआ - कहा घुसाऊ बोलो ना उम्म्ंम

चंपा कसमसाइ और अपनी गाड़ उच्काते हुए - यहाहहहआआआ मेरी चुत मे डालो नाआआ उह्ह्ज

मैने देर ना करते हुए एक ही धक्के आधा लण्ड उसकी चुत मे घुसेडा ,,वो थोडा दर्द से सिसकी ,,,क्योकि मेरा लण्ड उसकी तडप और उत्तेजना देख कर पहले से ज्यादा मोटा और टाइट था

मै आधा लण्ड उसकी चुत मे घुमाते हुए - क्या हुआ दर्द हो रहा है क्या उम्म्ंम

चंपा ने वापस से अपनी गाड उचकाई और एक जोर के झटके के साथ चुत को उपर ठेला जिससे लगभग पुरा लण्ड उसकी चुत मे घुसता चला गया

मुझे ध्क्क्क सा हुआ एक पल को और फिर एक हल्का सा दर्द हुआ लण्ड के चमडी मे लेकिन आनन्द बहुत ज्यादा मिला

मैने उसकी आंखो मे देखा और वापस अपने लण्ड को पीछे खिच कर एक जोर का ध्क्क्का देते हुए पुरा लण्ड उसकी चुत के जड़ मे उतारते हुए उसके उपर आ गया ।

वो थोडा सिसकी और फिर मेरी आखो मे देखते हुए मेरे होठो को चूसना शुरु कर दी

मैने भी अपनी कमर को पटकते हुए उसे पेलना शुरु कर दिया ।

मेरे लम्बे धक्के उसके मुह खोल देते और आंखे फैल जा रही थी ,,,उसकी हिलती चुचिया मुझे फिर से ललचाने लगी ।

मैने झुकते हुए एक को मुह मे भरा और तेजी से धक्का लगाते हुए उसके चुत मे पेलने लगा ।

चम्पा मेरे सर को अपनी चुची पर दबाते हुए - उम्म्ंम ओह्ह्ह राज्ज्ज्ज आह्ह ऐसे ही बहुत मजा आ रहा है उम्म्ं हम्म्म

मैने तेजी से घपाघप उसकी चुत मे लण्ड भरे जा रहा था और उसकी चुत अपनी पानी छोड़े जा रही थी ,,,

चम्पा- ओह्ह तुम सच मे माहिर हो चोदाने उम्म्ंम ,,तुमने चंदू से झुट क्यू बोला अह्ज्ज्ज

मै मुस्कुरा कर उसकी आँखो मे देखते हुए - सच बोलता तो क्या चंदू तुमको चोदने देता उम्म्ंम अह्ह्ज बोल ना

चम्पा ने मुस्कुरा कर ना मे गरदन हिलाया और मैने वापस से लण्ड उसकी चुत की गहराई मे ले जाने लगा

चम्पा - उम्म्ंम तो फिर किसे चोदा पहली बार उम्म्ंम ,,कौन है जो रोज इतने मस्त लण्ड से अपना भोसडा बनवाती है उम्म्ंम अओह्ह्ह उम्म्ं

मै ह्स कर - ऐसा कोई नही है ,,,वो सब्बो है ना साली वही कभी कभी आ जाती है उम्म्ंम्ं

चम्पा - उम्म्ंम सच मे या कुछ छिपा रहे हा

मै मुस्कुरा कर - सच यही है उम्म्ंम लेकिन तुम बहुत गरम हो ,,अब सम्झा की बचपन ने चन्दू ने इतनी जल्दी कैसे तुमको पा लिया

चम्पा अपनी कमर घुमा कर मेरे लण्ड को निचोडते हुए - उस समय पहले मेरी नजर तुम पर ही थी लेकिन तुम बडे शरीफ रहते थे तो भाई को ही ओह्ह्ह उम्म्ंम लपेटना पडा मुझे उम्म्ंम ऐसे ही मेरा फिर से आने वाला है उम्म्ंम

मै उसकी बाते सुन कर और भी उतेजीत होने लगा वही चंपा झडने वाली थी तो उसने मेरे लण्ड पर छल्ला बनाते हुए उसे निचोडना शुरु कर दिया

लेकिन फिर भी जोश की कोई कमी नही थी कुछ ही पलो मे फ्च्च्ग फच्च फच्च फच्च की आवाजे आने लगी और चम्पा झड़ रही थी उसकी पकड़ मेरे लण्ड पर अब ढीली थी मगर मै चरम पर था

मैने जलदी से लण्ड को बाहर निकाला और तेजी से हाथ चलाना शुरु किया और वही उसके पेट और चुत पर झडने लगा ।

फिर निढ़ाल होकर वही उसकी जांघो का सहारा लेके हाफता रहा

थोडी देर बाद हमारी नजरे मिली और फिर हम दोनो हस पडे

मै उसके बगल मे जाकर करवट लेते हुए लेट गया और उसकी चुची पर हाथ घुमाते हुए - मजा आया उम्म्ंम

वो शर्माई और हा मे सर हिला दी ।

मै - तो उपर चले

चंपा - ऐसे ही कपडे तो पहन लेने दो

मैने हस कर उसको पकड के खिचते हुए खड़ा हो गया और वो खिलाखिलाती हुई जोर लगाने लगी ।

मै - चलो मा देखते है क्या कर रहा है वो हिहिहिही

चम्पा - हा लेकिन ऐसे छत पर

मै - अरे देखो 9 बजने वाला है और हम लोगो का छत उपर भी है

वो थोडा कुनमनाई लेकिन मै उसे खीचते हुए गुदगुदाते हुए उपर जीने की ओर ले जाने लगा ।

उस्के बदन का स्पर्श और उसे नंगी छत पर घुमाने के अह्सास से मेरा लण्ड फिर से कड़ा होने लगा

मैने उसके नंगे चुतडो पर हाथ फिराया और एक पाट को दबाने लगा वो खिलखिलाकर मेरे हाथ झटकते हुए तेजी से उपर की ओर भागी और जीने के मुहाने पर रुक गयी क्योकि बाहर छत की बिजली जल रही थी ।

मैने वही उसको पीछे से दबोच लिया और अपना लण्ड उस्के गाड़ मे लकीरो मे फसाते हुए उसकी चुचियो को फिर से थाम लिया ।

यहा चंदू ने कानो मे जैसे ही चम्पा के सिस्कियो की आवाज आई वो लपक कर जिने की ओर आया

और अपनी बहन की नंगी चुचिया मेरे हाथो मसल्ता देख उसकी आंखे चमक उठी और वो तभी उसकी नजर अपनी बहन के खुली हुई चुत पर गयी जो हाल की चुदाई से लाल हुई थी

चम्दू फौरान घुटनो के बल होकर अपना मुह चम्पा की चुत मे दे देता है ।

चम्पा अपनी चुत मे कुलबुलाहत से चौक जाती है और उसकी नजर जब निचे बैठे अपने भाई पर जाती है तो उसकी उत्त्जना और बढ जाती है वो उसका सर पकड कर अपनी चुत मे दबाते हुए सिसकने लग जाती है ।

मुझे भी चंदू के इस पैतरे से जोश आता है और मै हाथो मे भर भर के चंपा की चुचिया मसलते हुए उसके गाड़ के सुराख तक लण्ड को उसकी दरार मे घुसेड़ने लगता हू ।

चम्पा को जैसे ही मेरा सुपाडा अपनी गाड के सुराख के पास मह्सूस होता है उसकी सासे अटक जाती है वो तेजी अपने चुतड को सख्त कर लेती है

चम्पा - उम्म्ंम ऐसे नही राज तेल लगा के प्लीज उम्म्ंम दर्द होगा उम्म्ंम सीईई आह्ह

वही चंदू बिना रुके लपालप कुत्ते के जैसे अपनी जीभ को अपनी बहन के चुत पर फिराये जा रहा था और कभी कभी उपर की निकली हुई चम्दी को मुह मे लेके चुबलाने लगता ।

चम्पा से अब रहा नही जा रहा था तो उसने चंदू का सर अलग किया और वो खड़ा हो गया ।

मै और चंदू मे एक दुसरे को देखा और हम मुस्कुराने लगे

चम्पा अब हमारे बिच मे थी

मैने उसे जीने की दिवाल से लगाया और झुक के उसकी एक चूची मुह मे भर ली ,,मुझे देखते ही चंदू कैसे रुकता वो भी फौरान झुक कर अपना मुह अपनी बहन की दुसरी चुची पर लगा दिया ।

हम दोनो मिल के चम्पा की दोनो चुचीया चूसने लगे और वो हमारे सर पर हाथ फिराते हुए आह्ह्ह भरे जा रही थी ।

हमारे हाथ उसकी दोनो जांघो और चुत के किनारे किनारे दोनो तरफ घूम रहे थे जिससे च्मपा को और भी मदहोशि हो रही थी ।

वही चुची चुस्ते हुए मैने चंदू को आंखो मे ही इशारा किया कि इसे निचे हाल मे लेके चलते है ।

वो मुस्कुराया और हमने चंपा को दोनो तरफ से उठा लिया

वो थोडा खिलखिलाई मगर हम दोनो उसे वैसे ही उठाए निचे हाल मे लाकर सोफे पर उतार दिये ।

इधर मै और चम्पा एक गहरे चूम्बन मे खो गये और वही चंदू ने फटाफट अपने सारे कपडे निकाल कर अपना लण्ड सहलात हुआ खड़ा हो गया ।

मै और चम्पा अलग हुए और चम्पा ने बिना कुछ कहे चन्दू मे लण्ड को हाथो से दुलारना शुरु कर दिया

अब ऐसे सुनहरे मौके पर मै पीछे कैसे रह जाता ,,मै भी वही चम्पा की दुसरी ओर खड़ा हुआ

उसने मुस्कुरा कर मुझे देखा और दुसरे हाथ से मेरे लण्ड को थाम लिया ।

अब उसके दोनो हाथो मे खडे लण्ड थे जिन्हे वो आगे पीछे करके और कड़ा किये जा रही थी ।

तभी चम्पा ने मुह खोला और अपने भाई का लण्ड आधा मुह मे भर कर सूरकते हुए बाहर निकाली जिस्से चंदू सिहर गया

उसने वापस चंदू की आखो मे देखा और उसका लण्ड मुह मे भरते हुए इस बार मुह मे ही आगे पिचे करते हुए उसके सुपाड़े पर जीभ घुमाने लगी ।

चंदू फिर से गनगना गया

चंदू - ओह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम्ं सीईई

चंदू की सिसकियाँ सुन कर मेरे लण्ड मे और जोश आने लगा जिससे मेरा लण्ड चम्पा के हाथ मे भरने लगा ,,,इसका आभास होते ही चम्पा ने अपने भाई के लण्ड को अपने मुह से निकाला और मेरा लण्ड ग्पुच लिया ,,,अह्ह्ह फिर से वही मुलाअयं अह्सास उम्म्ंम

चम्पा मेरे लण्ड की जड़ को पकड हुए गुउउऊ गुउउऊ करके मेरे लण्ड को चूसे जा रही थी और दुसरे हाथ से चंदू के आड़ो से खेल रही थी

थोडी देर तक चंपा ऐसे ही हम दोनो के लण्ड चुसती रही ,,कभी एक लण्ड को तो कभी दोनो लण्ड एक साथ सामने लेके अपने जीभ को हमारे सुपाडो पर लपल्पाती जिससे हमे और भी उत्तेजन हो रही थी ।

इधर चंदू को चुत की तलब होने लगी ।

उसने चम्पा को इशारा किया जो मुझे समझ नही आया अगले ही पल चंपा हम दोनो के लण्ड छोड कर खड़ी हो गयी ,,जबकी चंदू फौरान सोफे पर बैठ कर लण्ड को सीधा उपर की ओर करते हुए सहलाने लगा ।

चम्पा मुस्कुरा कर पीछे हुइ और जान्घे खोलकर चंदू की ओर पीठ किये लण्ड पर बैठती चली गयी ।

अगले ही पल मे चंदू का लण्ड उसकी बहन की चुत मे था और मेरा लण्ड उसकी हाथो मे ।

चम्पा अब हल्का हल्का उछलते हुए मेरा लण्ड सहलाए जा रही थी ।

मगर चंदू बहुत जोशीला हुआ जा रहा था वो बार बार निचे निचे से झटके दिये जा रहा था

लेकिन चम्पा के मुह मे अब मेरा लण्ड भरा हुआ था वो झुक कर मेरा लण्ड चुस्ते हुए निचे से झटके खाये जा रही थी ।

तभी मैने चंदू को इशारा किया की वो तेज झटके लगाये ,,,वो मुस्कुराया और अपनी जांघो को एड़ियो के बल उचकाते हुए तेजी से चम्पा की कमर थामते हुए पेलना शुरु कर दिया ।

चंपा गुउउऊ गुउऊ गुऊ करते हुए तेज झटके खाने लगी ,,,मेरा लण्ड उसके गले तक जाने लगा ,,,चम्पा का अब खुद पर नियन्त्रण नही था चंदू के तेज झटके से उसके दाँत भी मेरे लन्ड़ को चुबने लगे थे ,,,ऐसे मे मैने अपना लण्ड बाहर कर लिया

वही चंपा को भी थोडी राहत हुई वो अप्नी चुत सहलाते हुए खुद अपने भाई के लण्ड पर कूदने लगी ।

चम्पा - ओह्ह्ह हा भाई ऐसे ही उम्म्ंम अह्ह्ह्ह भैईई उम्म्ंम और तेज्ज़्ज़ अओह्ह्ह

चंदू भी तेज धक्के लगाते हुए - उम्म्ं मजा आ रहा है ना दीदी तुम्को और लो अह्ह्ह बहत्त चुदकककद हो तुमम उम्म्ं अह्ह्ह

जल्द ही चंदू की रफतार धीमी होने लगी तो मैने चम्पा को इशारा किया,,,वो फौरान उठ कर सोफे का किनारा पकड कर झुक गयी ,,,मै उसकी एक टांग उठा कर सोफे पे टिका दिया और लण्ड को उसकी रसाती चुत के मुहाने पर ल्गाते हुए एक जोर का धक्का दिया

चंपा की गीली और ढीली चुत मे मेरा लण्ड सटसटा कर एक ही बार मे जड़ तक घुस गया

चंपा- अह्ह्ह्ह्माआ माआ मर ज्ञीईई उह्ह्ह

मैने बिना रोके उसके कुल्हे थामते हुए तेज तरार धक्के उसकी चुत मे लगाने शुरु किये

चम्पा की चर्बीदार गाड मेरे हर धक्के को दुगनी गति से वापस भेज देती है और इससे मुझे चोदने का मजा और भी आ जाता है ,,,

चंपा का बदन टुट रहा होता है और मै लगातार तेजी से उसकी चुत मे धकाककमं पेल चोदे जा रहा था ।

वही चंदू फटी आन्खो से तेजी से अपना लण्ड हिलाते हुए चम्पा के साम्ने गया और लण्ड को उसके मुह पर फिराने लगा

चम्पा ने बस मुह खोला और चंदू ने उसके बाल थामते हुए लण्ड को उसके मुह मे डाल दिया ,, इधर मेरे तेज धक्को से चंपा आगे पीछे हिले जा रही थी और चंदू का लण्ड उसके मुह मे अंडर बाहर हुआ जा रहा था ।

मगर चंदू को मानो कोई नशा सा हो गया था इधर मैने अपनी गति धीमी की और वो तेजी चंपा के सर पकडते हुए मुह मे पेलना शुरु कर दिया

चम्पा की हालत खराब होने लगी ,,,लेकिन चंपा जैसी गरम चुद्वासी के लिए ये भी कम ही था

इधर मेरी नजर जब चंदू के हरकत पर गयी तो मै वाप्स दुगनी जोश से उसके कूल्हो को थामते हुए धक्के लगाने शुरु कर दिये

इधर चंदू जोश मे आकर कुछ आखिरी धक्को के साथ लण्ड को अपनी बहन के मुह मे भर कर सर को अपने लण्ड पर दबाते हुए तेजी से झडने लगा

उसका सारा माल च्मपा के लार के साथ निचे फर्श पर टपक रहा था

इधर चंदू को इतनी बुरी तरह से झड़ता देख मै भी आखिरी धक्को के साथ आहह भरता हुआ ,- अह्ह्ह मेरा आने वाला हौ उम्म्ंम्ं

मेरी आवाज सुनते ही चंदू के चम्पा के सर पर ढील दी और मैने भी अपना लण्ड उसकी चुत से बाहर निकाला

मगर वो इतना थक चुकी थी कि सरक कर सोफे का टेक लेते हुए निचे फरश पर बैठ गयी ।

उसके बाल आंखे मुह बुरी तरफ चंदू के माल से लभेदे हुए थे फिर भी ना जाने क्यू मुझे और जोश आ रहा था और मै अपनी एडिया उचकाते हुए तेजी से अपने लण्ड को हिलाना शुरु किया और फिर लगातर मेरा माल चम्पा के मुह और सीने पर जाने लगा

आखीरि बूंद निचोड लेने के बाद मैने अपना लण्ड वीर्य से सने च्मपा के गालो पर पटका और फिर हाफते हुए सोफे पर ढह गया ।

रात मे 2 बार और बुरी तरह से मै चंदू के साथ मिलकर चंपा को चोदा ।

अगली सुबह बहुत सामान्य रही ,,,मैने चंदू के घर ही फ्रेश होकर नासता किया और दुकान पर चला गया ।

इधर चमनपुरा मे ये सब चल रहा था तो वही जानीपुर मे रज्जो के घर मे भी कम चहल पहल नही थी ।



लेखक की जुबानी


रात मे धक्कमपेल चुदाई के बाद सुबह करीब साढ़े 6 बजे सबसे पहले नीद ममता की खुली ।

उसने एक नजर बगल मे सोते अपने पति पर मारी और फिर अंगड़ाई लेते हुए उठ कर बाहर निकल गयी ।

एक नजर उसने अपने भैया के बंद कमरे पर डाली तो रात मे बिताये कुछ हसिन पलो को याद करते हुए उपर छत की ओर जाने लगी ।

वही निचे सोनल के कमरे मे पल्लवि और सोनल उठ चुके थे ,, सोनल जैसे ही बाथरूम के लिए कमरे से बाहर निकाली ,,, पल्लवि मौका देख कर कमरे से बाहर अनुज के कमरे की ओर निकल दी ।

मगर उसे अनुज का कमरा बाहर से बंद मिला और वो तुनक कर वापस अपने कमरे मे चली थी ।

इधर उपर के कमरे मे रज्जो भी थोडी देर बाद उठी और कमलनाथ को आवाज देकर उपर फ्रेश होने के लिए चली गयी ।

उपर ममता पहले से ही बाथरूम मे कब्जा जमाए हुए थी और यहा रज्जो को जोर की पेसाब लगी थी । वो वही खड़ी छटपटा रही थी ,,, उसने बाथरूम का दरवाज भी खटखटाया लेकिन ममता बस दो मिंट दो मिंट बोल के रुकी रही ।

वही निचे कमरे कमलनाथ उठ चुका था और वो अपने कमरे से बाहर आते ही राजन को देखता है जो उपर की ओर जा रहा होता है ।

कमलनाथ - अरे राजन रुको भई हम भी चल रहे है

राजन खुश होते हुए - अरे भाईसाहब आईये ,चलिये

कमलनाथ राजन के साथ सीढ़ीओ से उपर जाता हुआ - आज लग रहा है तुम भी लेट उठे हो हाहहहा

राजन हस कर - हा वो यहा रह के थोडा बहुत बदलाव आ जा रहा है भाईसाहब

कमलनाथ और राजन उपर दरवाजे से बाहर निकलता हुआ छत पर आते हुए - और तब फिर यहा का माहौल कैसा लग रहा है

राजन - ब ब बहुउउउऊतटटत हीईई अअअ अच्चाआआआ

कमलनाथ ने गौर किया कि राजन बोलने मे अटक रहा है तो वो हसते हुए राजन की ओर पलटा, और उसने राजन को देखा जो अपनी फैली हुई आंखो से बाथरूम के दिवाल के बगल मे रज्जो पेतिकोट उठाए मुतता देख रहा था और उसकी नजरे रज्जो के फैली हुई गाड़ से हट ही नही रही थी ।

हुआ दरअसल यू कि रज्जो के बार बार कहने पर जब ममता ने दरवाजा नही खोला तो रज्जो से पेसाब का प्रेसर रोका नही गया और वो वही बाथरूम के बगल मे छत मे बनी एक पानी वाली पाइप के पास अपनी पेतिकोट को कमर तक उठाए गाड फैला कर मूतने लगी और ऐन मौके राजन और कमलनाथ छत पर आ गये थे ।

कमलनाथ ने देखा कि राजन ने अब भी नजर उसकी बीवी के भारी चुतडो से नही हटाई तो वो थोडा गला मे खरास किया जिससे राजन और रज्जो दोनो चौक पड़े ।

रज्जो फौरन उठ गयी और राजन ने मुह फेर लिया ।

रज्जो और राजन दोनो अब कमलनाथ के सामने थोडी झिझक हो रही थी ।

कमलनाथ इस बात को आगे नही ले जाना चाहता था क्योकि राजन उसका जीजा था और ये सब अनजाने मे ही हुआ था ।

मगर फिर एहतियात के तौर पर राजन कमलनाथ से मुखातिब होते हुए - माफ किजीएगा भाईसाहब वो अचानक से

कमलनाथ ने जब राजन के मुह से माफी की बात सुनी तो उसे समझ आया कि शायद राजन भी इसके लिए शर्मीन्दा है तो वो इसे मजाक का रूप देते हुए उसके कन्धे पर हाथ रख कर छत की दुसरी ओर ले जाने लगा ।

कमलनाथ - क्या यार राजन तुम भी , वो बस अचानक से हुआ

राजन - हा लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि मुझे भाभी जी से माफी मांगनी चाहिये

कमलनाथ थोडा सामान्य होकर - हा उस लिहाज से मुझे भी रज्जो से माफी मांगनी चाहिये

राजन हस कर - क्या आप भी भाईसाहब मजाक करते है ,, आप तो उनके पति है , आप तो रोज उनकी.....

इतना बोल कर राजन चुप हो गया मगर कमलनाथ उसका वक्तव्य पुरा समझ गया

कमलनाथ हस्ते हुए - अरे भाई रोज देखता हू इसका मतलब ये नही किसी को दिखाने भी ले जाऊ ,,,कही उसने ये सोच लिया कि मै तुम्हे दिखाने लाया था तो हाहहहहा

राजन हसता हुआ - क्या भाई साहब आप भी हिहिहीहि ऐसा कोई करता है भला

कमलनाथ - नही करता भाई इसिलिए तो माफी मागनी पड़ेगी हिहिहीहि

इधर इन दोनो की बाते चल रही थी उधर रज्जो बाथरूम मे जा चुकी थी और ममता नहा कर निकल चुकी थी । जो इस समय एक ब्लाऊज पेतिकोट मे थी ।

कमलनाथ की नजर जैसे ही अपनी छोटी बहन पर गयी उसको रात की घटनाये याद आने लगी और उसका लण्ड पाजामे में अंगड़ाई लेने लगा ।

राजन ने भी गौर किया कमलनाथ का ध्यान उसकी बीवी के कसे कूल्हो पे ही जमी है । मगर उसने मुस्कुरा कर बात को टाल दिया ।

थोडी देर बाद सभी लोग नहा धोकर निचे हाल मे नासते के लिए एकजुट हुए ।

रज्जो और ममता ने सबको चाय पकोड़े दिये। इस दौरान रज्जो जानबुझ कर कमलनाथ और राजन से शर्माने का दिखावा करती रही ।

रज्जो को ऐसे सामने देख कर कमलनाथ एक बार राजन की ओर देखता और वो दोनो सुबह की घटना को याद करते हुए मुस्कुरा देते है ।

खैर चाय नास्ते का काम चालू था मगर अनुज कही नजर नही आ रहा था ।

पल्लवि बार बार नजर घुमा कर बेचैन हुई जा रही थी ।

इतने मे रमन बोला - अरे मा ये अनुज अभी तक उठा नही

रज्जो का ध्यान भी अनुज के बारे मे गया तो उसने हाल मे नजर घुमाई - पता नही रुक मै उसके कमरे मे देखती हू ।

तभी ममता दरवाजे पर देखती है जहा अनुज अपनी चप्पल निकालते हुए घर मे घुस रहा था - अरे लो ये तो बाहर से आ रहा है ।

रज्जो अनुज को देख कर - कहा गया था तू अनुज सुबह सुबह

अनुज जो कि कल रात मे किये भगवान से वादे को पुरा करने और सवा किलो लड्डु का भोग लगाने मंदिर गया था तो वो ये सब बाते सबको कैसे बताता कि किन कारणो से उसे सुबह सुबह गायब होना पडा ।

अनुज हस कर - अरे मौसी वो आज सवेरे नीद खुल गयी थी बाहर टहलने चला गया था

ममता चौक कर - अकेले ही , देखा भी यहा कुछ कही खो जाता तो

रज्जो ह्स कर - अरे नही रे ,,,अनुज यहा तो आता जाता रहता है उसे घूमने के बस यही बगल का पार्क चाहिये ,,,क्यू अनुज

अनुज हस कर - हिहिहीहि हा आप तो जानती ही हो मौसी

इधर सब वापस नास्ते मे भिड़ गये वही अनुज की नजरे पल्लवि के मुस्कुराते चेहरे पर गयी और उसने वापस से तौबा करते हुए मुह फेर लिया ।

नासता खतम होने के बाद कलनाथ ने एक घन्टे बाद सबको तैयार होने के लिए बोल दिया ,,,उसके बाद सब लोग घूमने लिए जाने वाले थे ।

जारी रहेगी

देखते है आगे क्या होने वाला है

अनुज और पल्लवि की कहानी क्या मोड लेगी ।

आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा ।

धन्यवाद
 
अपडेट 115

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पिछले अपडेट मे आप सभी ने पढ़ा कि एक ओर जहा चमनपुरा मे राज ने चंदू के साथ मिल कर चंपा को पूरी रात बुरी तरह से चोदा और वही जानीपुर शहर मे रज्जो के यहा से सभी लोग घुमने जाने को तैयार हो रहे है ।

अब आगे

नासता करके सोनल और पल्लवि अपने कमरे मे चले , वही अनुज रमन के साथ उसके कमरे मे चला गया क्योकि उसके कपडे वही थे ।

इधर ममता और रज्जो किचन मे काम खतम करने चली थी और वही हाल मे कमलनाथ राजन के साथ बैठा हुआ था ।

उसकी नजर राजन पर थी जो बार बार किचन मे रज्जो को घूमते देख रहा था ।

कमलनाथ को लगा कि राजन अभी भी सुबह की बात को लेके विचलित है

कमलनाथ - क्या राजन ,अरे छोडो ना उस बात को , जो हुआ सो हुआ

राजन की तन्द्रा टूटी और उसे ध्यान आया कि वो कहा खो गया तो वो कमलनाथ की बातो का जवाब देते हुए - नही भाईसाहब मेरा जी नही मान रहा है ,,,और अभी नाश्ते के समय देखा ही ना आपने कि कैसे भाभी जी को हमारे सामने आने मे शर्मींगी हो रही थी । कब तक ये चलेगा आखिर शादी ब्याह का दिन का है

कमलनाथ - हम्म्म बात तो सही है तुम्हारी , रुको मै बुलाता हू उसे

राजन - अरे नही भाईसाहब यहा नही ,, ममता भी है यही और उसकी आतुरता जानते ही है

कमलनाथ हस कर - अच्छा ठीक है तुम उपर चलो मै रज्जो को लिवा के हमारे कमरे मे आता हू।

राजन मुस्कुरा कर उपर चल दिया और वही कमलनाथ रज्जो को अपने लिये कपडे निकलवाने के बहाने उपर कमरे मे लिवा लाया ,, जहा राजन सोफे पर बैठा बेचैन हुआ जा रहा था और उन दोनो के कमरे मे प्रवेश करते ही वो खड़ा हो जाता है ।

राजन को ऐसे अचानक अपने कमरे मे पाकर रज्जो को थोडा अटपटा लगा ,, वही कमलनाथ ने जब रज्जो को उलझते देखा तो मुस्कुरा कर बोला।

कमलनाथ - अरे रज्जो परेशान ना हो ,,,राजन को मैने ही बुलाया है

रज्जो कमलनाथ को देखते हुए - आपने बुलाया लेकिन क्यू

कमलनाथ कुछ बोलता उससे पहले राजन अटकते हुए शब्दो मे - वो वो भाभी जी मै सुबह के लिये माफी चाहता हू वो अचानक से मै और भाईसाहब बाते करते हुए आ गये और वो सब .....

रज्जो पहले तो शर्माते हुए मुस्कुराई पर वो भी इस बात को लेकर अपने पति के सामने थोडी उलझन मह्सूस कर रही थी ।

कमलनाथ - हा रज्जो तुम मुझे भी माफ कर दो ।

रज्जो हस कर - अरे नही जीजाजी ,,,क्या आप भी , इसमे माफी मागने वाली क्या बात है । वो सब बस एक संयोग था ।

कमलनाथ - हम्म्म सही कह रही हो रज्जो ,,

रज्जो ह्स कर - और आप क्यू माफी माग रहे है आप तो रोज ही ....

तभी रज्जो की नजरे राजन से टकराई और वो शर्माते हुए चुप हो गयी ।

राजन - हा भाभी जी मैने भी बोला सुबह मे इनको ,कि आपको क्या जरुरत है माफी मांगने की

कमलनाथ हसता हुआ - अच्छा ठीक है बाबा नही मागता ,,,लेकिन ये तो बताओ तुम बाथरूम के बाहर क्यू ये सब ...

रज्जो ह्स कर - वही आपकी लाडली बहन की वजह से

कमलनाथ चौक कर - ममता ने क्या किया

रज्जो - उसी ने दरवाजा नही खोला समय से और मुझे जोर की पेसाब लगी थी तो वही ...

रज्जों की बात पर राजन अपने होठ दबाते हुए हसे जा रहा था और उसपे कमलनाथ की नजर पडी तो वो रज्जो को राजन की ओर इशारा करके ।

कमलनाथ - हम्म्म चलो कोई बात नही

मगर रज्जो कहा ऐसे मौके पर शांत होने वाली थी - हा हा अब अपने बहन पर बात आई तो चुप कर ,, अरे आप मर्दो का ठिक है बस चैन खोलो और हो गया , लेकिन हमे पुरा खोल कर बैठना पड़ता है ।

कमलनाथ ह्सते हुए - अरे हो गया भाई ,,,माफ कर दे , मै ममता की ओर भी माफी मांगता हू ।

राजन ह्सते हुए - हा भाभी जी मै भी ,,,अच्छा मै अपने कमरे मे जा रहा हू

ये बोलकर राजन अपने कमरे मे निकल गया ।

राजन के जाते ही कमलनाथ - क्या रज्जो ये सब क्या था ,,, क्या सोचेगा वो और तुझे प्रेसर था तो यही कमरे के बाथरूम मे चली जाती , चालू तो करवा दिया है इसे भी ना अब

रज्जो ह्स कर - अरे आप भी ना , वो मेरे नंदोई है हसी मजाक चलता है हिहिहिहिही

कमलनाथ रज्जो की मोटी गाड के उभारो पर हाथ फिराते हुए - हा लेकिन आज तेरे नंदोई की नजर तेरी इस मखमली गाड पर चली गयी है ,,अब थोडा हिसाब से हसी मजाक करना ,,मेरे सामने भले ही वो नही कुछ बोला लेकिन अकेले मे परेशान कर देगा ।

रज्जो इतरा कर -

कमलनाथ से चिपकते हुए उसकी आंखो मे देखते हुए - आप तो ऐसे डर रहे है जैसे नंदोई जी आपको हटा के खुद चढ जायेंगे ।

कमलनाथ रज्जो की नशीली आंखो और उसके कामुक्ता भरे लहजो को सुन कर वो थोडा उत्तेजित मह्सूस करने लगा और रज्जो की आंखो मे देखते हुए उसकी गाड के पाटो को सहलाते हुए बोला - अगर वो मेरी बीवी चोदेगा तो मै उसकी बीवी नही चोद दूँगा ।

रज्जो थोडी मुस्कुराई और एक हाथ निचे ले जाकर अपने पति का खड़ा होता लण्ड कूरते के उपर से जकड़ते हुए - आप भूल रहे हो ,,, उनकी बीवी आपकी बहन है उम्म्ंम्ं ,,, फिर भी चोदोगे क्या हा बोलो ना

कमलनाथ अपने लण्ड पर रज्जो के हाथो का स्पर्श पाकर और ममता को चोदने के अह्सास से एकदम से सिहर उठा और उसका लण्ड सख्त होने लगा । जिस्का आभास रज्जो मे अपनी हथेली मे होने लगा ।

रज्जो वापस से कुरते के उपर से कमलनाथ का लण्ड सहलाते हुए - बोलो ना ,चोदोगे क्या अपनी बहन को उम्म्ंम्ं ,

कमलनाथ कसमसा कर सिहरते हुए - बहन है तो क्या हुआ ,,अगर मेरी बीवी को वो चोदेगा तो मै भी उसकी बीवी को अह्ह्ह उम्म्ंम्ं अराआआम से उम्म्ंम्म्ं

इधर रज्जो कमलनाथ के पजामे मे हाथ घुसा कर लण्ड थाम चुकी थी ।

रज्जो कमलनाथ का लण्ड पकडकर उसकी चमडी खिचते हुए - तो सीधा बोलो ना कि अपनी बहन को चोदने के लिए मुझे नंदोई जी से चुदवाना चाहते हो ।

कमलनाथ रज्जो की बातो को अपनी कल्पनाओ मे जोडने लगा कि काश ऐसा हो जाये और वो खुल कर ममता को चोद पाये ।

रज्जो कमलनाथ पर अपनी बातो का असर होता देख - उम्म्ंम्ं सोचो ना इधर नंदोई जी लण्ड मेरी चुत मे गया नही उधर आपको आपकी बहन मिल जायेगी चोदने के लिए उम्म्ंम्म्ं

कमलनाथ के दिल की धडकनें तेज हुई जा रही थी और वो बस रज्जो की बाते अपनी कल्पनाओ मे जोडते जा रहा था और उसका लण्ड कड़ा हुआ जा रहा था ।

रज्जो ने इस बार अपनी हथेली को कमलनाथ के आड़ो तक सह्लाया और बोली - आप हर रात मेरे साथ बहन को चोदने के ख्वाब देखते हो ,,, फिर हम दोनो आपके लण्ड के निचे होगे और मै खुद आपकी बहन की चुत आपके लिये तैयार करूंगी ।

इधर कमलनाथ की हालत पूरी तरह से खराब हो गयी और रज्जो के साथ अपनी बहन को चोदने का ख्याल उसे चरम पर ले आया। और रज्जो की बाते खतम होते ही कमलनाथ के लण्ड ने खडे खडे ही पिचकारी देनी शुरु कर दी ।

कमलनाथ को झड़ता देख रज्जो ने आखिरी दाव खेला और वो उसके झड़ते लण्ड के आड़ो को सहलाने जिस्से कमलनाथ को और आनन्द आने लगा झडने मे ।

मौका देखकर रज्जो ने कमलनाथ को कबुलवाना शुरु किया - तो बोलो ना चोदोगे ना अपनी बहन को मेरे हाथ बोलो ना उम्म्ंम बोलो

कमलनाथ आंखे बंद किये हुए झड़ते हुए - अह्ह्ह हा रज्जो मै चोदूंगा अपनी बहन को उन्म्म्ं अह्ह्ह ममता उह्ह्ह्ह रज्जो मुझे तुम दोनो को एक साथ चोदन है उम्म्ंम अह्ह्ह

रज्जो कमलनाथ के मुह से अपने काम लायक बाते कबूलवा ली और उसका लण्ड निचोड कर मुस्कुराने लगी ।

कमलनाथ झड़ कर हाफते हुए सोफे पर बैठ गया और रज्जो उसे एक ग्लास पानी देती है और एक खराब कपडे से उसका वीर्य साफ करके कमलनाथ के बगल मे बैठ जाती है ।

कमलनाथ का मन शांत हुआ और उसे अब थोडी शर्म आने लगी थी तो रज्जो मुस्कुरा कर - क्या हुआ जी

कमलनाथ हस कर - तुम ना एक नम्बर की चालू हो क्या क्या कबूलवा ली हमसे

रज्जो कमलनाथ चिपक कर - इसमे कबूलवाना क्या था ,, हमको बहुत पहले से ही आपकी ममता को लेके क्या राय है ये पता था ,,,बीवी हू अपने पति के दिल का हाल नही जानुन्गी हिहिहिही

कमलनाथ रज्जो के कंधे पर हाथ रखकर- तुमको अजीब नही लगा कि मै अपनी बहन को लेके ये सब ... मतलब समझ रही हो ना

रज्जो हस कर - अरे घर के माल पर किसकी नजर नही रहती जी फिर तो ममता है ही इतनी मालदार हिहिहिहिही

कमलनाथ हस कर - फिर तो तुम्हारे राजेश ने भी ट्राई किया होगा तुम पे ,,,

रज्जो हस कर - उससे क्या फायदा ,,उसकी किस्मत आपके जैसे थोडी है हिहिहिही

कमलनाथ रज्जो का व्यंग समझ गया था- लेकिन रज्जो ये सब होगा कैसे ।

रज्जो थोडा इतराइ- पहले तो मुझे मेरी नंदरानी के इरादे जानने है कि वो क्या सोचती हैं अपने भैया को सईया बनाने के बारे मे हिहिहिही

कमलनाथ - और फिर

रज्जो हस कर- फिर नंदोई जी निबटना पड़ेगा हिहिहिही

कमलनाथ के दिल की धडकनें रज्जो की बातो सुन कर तेज होने लगी ।

कमलनाथ हिचक कर - मतलब तुम मेरे लिए राजन के साथ ....

रज्जो - क्यू अपने पति लिए इतना भी नही कर सकती मै ,,हा

कमलनाथ धड़कते दिल के साथ - लेकिन मेरा दिल इसके लिए राजी नही है रज्जो ,,, मै इत्ना स्वार्थी नही बन सकता

रज्जो ने बात को भावनात्मक होते देख थोडा शर्मा कर कमलनाथ के सीने में सर रख कर - धत्त आप तो समझते ही नही

कमलनाथ रज्जो के इस वक्तव्य से उत्तेजना से भर गया और उस्का लण्ड फिर से ठुमक उठा और वो अपने धडकते दिल के साथ रज्जो को अपने आंखो के सामने करता हुआ हिचक कर बोला - तो इसका मतलब तुम भी राजन से ???

रज्जो मुस्कुराते हुए शर्मा कर - हाआआ , नहीईई मतलब वो मै बस देखूँगी समझूँगी कि वो आज सुबह के बात पर क्या सोचते है मेरे बारे मे

कमलनाथ रज्जो के दिल की बात समझ गया और हस कर - मै समझ गया , तू भले ही ना बोल मेरे सामने ।

रज्जो शर्माने लगी ।

कमलनाथ - वैसे मेरे से बड़ा है या मोटा

रज्जो का दिल धक्क कर गया कमलनाथ की बात सून कर और वो आंखे बड़ी कमलनाथ को देखते हुए - क्या मतलब

कमलनाथ हस कर - वही उसका हथियार ,, तुने देख रखा है ना ,, बोल हिहिहिही

रज्जो शर्मा कर - क्या आप बस करिये ना ,,,चलिये अब तैयार हो लिजिए

फिर कमलनाथ हस्ता हुआ कपड़े बदलने के लिए खड़ा होता है ।

इतने मे ममता कमरे के दरवाजे पर खटखट होती है ।

रज्जो दरवाजा खोलती है - अरे ममता तू , आ अन्दर आ

ममता हस कर अन्दर आते हुर - हा भाभी वो कल जी जीन्स ट्राई की थी ना वो दे दीजिये ।

रज्जो एक नजर कमलनाथ को देखती है और हस कर - क्यू सिर्फ जीन्स ही पहन के जायेगी क्या हिहिहिह

ममता अपने भैया को देख कर थोडा शर्मा गयी और हस्ते हुए - हा और उसके उपर का भी चाहिये था हिहिहिही

रज्जो फिर आलमारी से कल वाली जीन्स और एक लॉन्ग टॉप दी मुश्किल से उसके आधे चुतडो तक जाती।

ममता उस टॉप को खोलकर देखते हुए - भाभी और कोई बड़ा नही है इससे

रज्जो - नही रे मै ऐसे ही शॉर्ट वाले ही पहनती हू

कमलनाथ - अरे तो क्या हुआ इसमे क्या बुराई है ,,,तुम भी ना ममता जा पहन कर तैयार हो जा जल्दी कर, दस बजने वाले है भाई

ममता कमलनाथ की बात पर चुप हो गयी और उसे ध्यान आया कि रज्जो ने उसे कोई दुप्प्ता दिया ही नही ।

ममता - हा भाभी इसका दुपट्टा

रज्जो हस कर - क्या ममता तु भी ,, जीन्स पर कोई दुपट्टा लेता है ,,, क्या जी आप ही समझाओ आपनी लाडोरानी को हिहिही

कमलनाथ हस कर - हा ममता ,, ये मॉडर्न कपडे है ना और तुम क्या जब शादी से पहले जीन्स पहनति थी तो दुपट्टा लेती थी हिहिह

ममता हस कर - हा लेकिन ,,, अच्छा ठिक है मै आती हू तैयार होकर ।

फिर ममता वो कपडे लेके अपने कमरे मे चली जाती है ।

रज्जो कमलनाथ को छेड़ते हुए -ओह्हो मतलब शादी के पहले से अपनी माल पर नजर रखे हुए थे ।

कमलनाथ रज्जो की बात पर हस देता है ।

थोडी देर बाद उपर चारो लोग तैयार होकर अपने क्मरे से बाहर निकलते है

इधर जहा कमलनाथ की आंखे ममता को देखकर चमक उठती है वही राजन की आंखे रज्जो को ।

रज्जो ममता की तारिफ करती है तो वो शर्माजाती है ।फिर वो दोनो आगे चलते हुए निचे जाने लगति है वही राजन और कमलनाथ की नजर जीन्स मे कसे हुए उनके भारी मटकते कूल्हो पर जाती है दोनो के मुह से आह्ह्ह निकल जाती है और वो दोनो एक दूसरे को देख कर हस पड़ते है ।

फिर सारे लोग निचे हाल मे आते है जहा सोनल और पल्लवि भी जीन्स और टॉप मे थी , वही अनुज और रमन जीन्स टीशर्ट मे थे ।

कमलनाथ खुद को और फिर राजन को देखता हुआ - भाई आप सब तो एक ग्रुप लग रहे है हमे छोड कर

पल्लवि चहक कर - नही मामा जी ,,आप और पापा दोनो बहुत अच्छे लग रहे है शर्त पैंट मे हिहिहिही

सोनल - हा मौसा ,

रमन - तो चला जाये , ई रिक्सा आ गया है ।

कमलनाथ - हा हा भाई अब काहे की देरी , चलिये सब लोग

फिर सारे लोग निकल पड़े शहर के pvr मे ।

8 टिकिट कराई गयी और एक ही लाईन मे लगभग सबको सीट मिल गयी ।

वही अन्दर घूसने पर अब जो आगे था वो वैसे ही लाईन मे घुसते हुए बैठता चला गया ।

सबसे पहले अनुज फिर पल्लवि फिर सोनल फिर रमन फिर राजन फिर रज्जो फिर ममत और फिर कमलनाथ ।

अनुज सबसे कॉर्नर पर था तो पल्लवी को काफी खुशी थी कि अनुज उसके साथ है । इधर जैसे ही लाईट ऑफ़ हुई वही पल्लवी ने अनुज के हाथ मे हाथ डाल दिया ।

अनुज की हालात खराब होने लगी वो एक नजर आगे झुक कर अपने बाई ओर झाका तो देखा कि सबकी नजरे पर्दे पर है फिर उसे भगवान से किये तौबा को याद किया और पल्लवी को मना करते हुए हाथ खिच लिया अप्ना ।

पल्लवि अनुज के इस व्यवहार से तुनक कर वापस पर्दे की ओर मुह कर ली ।

अनुज ने एक राहत की सास ली ,वही पल्लवि फिर से नोर्मल होते हुए सोचने लगी की आखिर अनुज सुबह से ही क्यू ऐसा व्यवहार कर रहा है ।

तो वो वापस अनुज की ओर लपक कर - मुझसे कोई गलती हुई क्या अनुज

अनुज पल्लवि का चेहरा अपने करीब पाकर परेशान होने लगा उसे डर लग रहा था कि कही सोनल दीदी ना देख ले उसे ।

अनुज - न न नही तो कुछ भी नही

पल्लवि - तो तुम मुझसे दुर क्यू जा रहे हो

ये बोलकर पल्लवी वापस अनुज के कलाई मे हाथ डाल दी ।

अनुज ने सोचा की अगर ये सिर्फ इतने मे ही खुश है तो ऐसे रहने देते है ,,नही तो कही इससे बात करते हुए दीदी ने सुन लिया तो गड़बड़ हो जायेगी ।

वही पल्लवी ने देखा कि अनुज ने इस बार उसे नही रोका तो वो मुस्कुरा कर पर्दे पर देखते हूए अपनी उंगलियाँ अनुज के उंगलियो मे फसा ली और जकड़ ली ।

पल्लवि की इस हरकत से अनुज गनगना गया और उसकी आंखे बन्द हो गयी । वो लम्बी सासे लेनें लगा वही पल्लवि मुह में अपनी हसी दबाने लगी ।

इधर जहा ये दो लैला मजनुओ का शो चालू था वही इसी लाईन मे दो और मजनू अपनी लैला को ताडे जा रहे थे ।

राजन और कमलनाथ ।

दोनो की नजरे रज्जो और ममता की टॉप से झाकती चुचियो की दरारो पर जमी थी ।

सही मायने मे मूवी पर ध्यान किसी का भी नही था ।

सोनल और रमन अपने अपने होने वाले जीवनसाथी से texting मे बिजी थे , बाकी 3 लैला मजनू आप से व्यस्त थे ही ।

इधर पल्लवि सोनल पर बखुबी नजर बनाये हुए थी और उसने मौका देखकर हाथ को निचे अनुज की जांघो तक लेके चली गयी ।

अनुज की हालत अब और पतली हो गयी और डर से कापने लगा , लेकिन पल्लवि का स्पर्श उसे उत्तेजित भी कर रहा था ।

उसे समझ ही नही आ रहा था कि वो क्या करे ,, वही पल्लवि अनुज को परेशान देख कर बहुत चहक रही थी और उसने अपने हाथ उसकी जांघो पर घिसने शुरु कर दिये ,,,नतिजन अनुज का लण्ड अंगदायी लेना शुरु कर दिया ।

वो आंखे बंद करके गहरी सासे लेता रहा और इस नये उत्तेजक अनुभव को मह्सूस करता रहा ।

ये सब काफी समय तक चलता जबतक इंटरवल नही आ गया । बंद लाईट का मजा सिरफ पल्लवि ने लिया ।

हाल की लाईट जल उथी और सब के सब अलर्ट हो गये ।

सब बाहर निकल कर आये और अंगड़ाई लेते हुए एक दुसरे के चेहरे को देखा कोई मूवी के बारे में लेके उत्सुक नही था ,,,यहा तक पल्ल्वी और सोनल भी ।

कमलनाथ - क्या हुआ भाई लग रहा है यहा किसी का मन नही लग रहा है ,,, क्यू पल्लवि बेटा फिल्म अच्छी नही थी

पल्लवि चौकी मगर उसके पहले रज्जो - अरे फिल्म ही अच्छी नही है इससे अच्छा हम लोग घर पर बैठ के देख लेते

ममता - हा भाभी सही कह रही है ,,वहा थोडे पैर फैलाने की जगह तो होती ,,यहा तो बैठे बैठे कमर अकड जा रही है

ममता कमर तोड़ते हुए अंगड़ाई लेते हुए बोली ।

राजन - भाईसाहब चलिये यहा से ,,,कही और कोई जगह चलते है यहा तो मुझे भी नही जम रहा है ,,,ये पर्दे की रोशनी भी आंखो मे चुभ रही थी ।

कमलनाथ - चलो ऐसी बात है फिर चल्ते है ।

फिर सारे लोग हाल से बाहर निकल आये ।

कमलनाथ- भाई अब कहा जाना है ,,,बोल ममता तू ही

ममता की नजर सामने एक कुल्फी वाली स्टाल पर गयी तो वो खिखीयाते हुए रज्जो से धीमी आवाज मे बोली - भाभी चलो ना कुल्फ़ी खाई जाये

रज्जो हस कर - अरे तुझे कुल्फ़ी खानी है तो अपने भैया से बोल ना ,,,वो खिला देंगे तुझे हिहिहिही

रज्जो की दोहरी बाते कमलनाथ और ममता दोनो समझ गये थे ।

कमलनाथ - अरे तू इतना शर्मा क्या रही है ,,हम यहा घुमने खाने हि आये है ,चलो सब लोग कुल्फ़ी खाते है ।

फिर सब ने कुल्फ़ी खाई , इसी दौरान सोनल ने मोबाईल मे सर्च करके पास मे ही एक पार्क को खोज लिया ।

सोनल - मौसा यही बगल मे एक नेशनल पार्क , वहा चला जाये काफी ब्डा दिख रहा है, यहा झूला भी है

इतने मे पल्लवि चहकी - सच मे दिदी , दिखाओ

पल्लवि सोनल के मोबाईल मे देखते हुए - अरे वाअह्ह्ज सच मे ,, चलो ना मामाजी वही चलते हैं मजा आयेगा ।

कमलनाथ - अच्छा ठिक है भाई चलो चलते है पहले ये कुल्फी तो खतम कर लो ।

फिर सबने कुल्फी खतम कर औटो से निकल गये नेशनल पार्क की ओर

गर्मियो का दिन था तो पार्क मे सभी को बहुत आनन्द मिल रहा था, सारे लोग घास पर ही एक बडे पेड़ के नीचे बैठ गये और बाते करने लगे ।

इधर महिलाओ मे सबको बडी दिक्कत हो रही थी कारण था उनकी जीन्स और ऐसे में ममता को जोर की पेसाब लग रही थी ,,क्योकि कुल्फ़ी असर था ।

उसमे धीरे से रज्जो के कान मे बोला तो वो मुस्कुराइ

फिर उसने इधर उधर नजर दौडाई और फिर ममता को लेके तरफ जाने लगी ।

रज्जो - आप लोग बैठो हम अभी आते है ।

सारे लोग समझ गये कि वो सब बाथरूम के लिए ही जा रही है ।

फिर वो रज्जो ममता को लिवा कर बाथरूम खोजते हुए एक ओर निकल गयी ।

इधर बाकी के लोग सब आपस मे बाते करने लगे तो सोनल अपने मोबाईल मे सबकी तस्वीरे निकालने लगी ।

धीरे धीरे 15 मिंट का समय बिता तो राजन को फ़िकर हुइ ।

राजन कमलनाथ के पास होते हुए - भाईसाहब ये ममता और भाभी जी को आ जाना चाहिए था,

कमलनाथ ने भी घड़ी देखी और उसे भी ताज्जुब हुआ ।

कमलनाथ - कही वो लोग आगे तो नही निकल गयी

राजन - चल के देखे भाईसाहब,,मुझे ना जाने क्यू फ़िकर हो रही थी ।

राजन को विचलित होता देख कमलनाथ ने हामी भरी और उठ कर खड़ा हुआ - बच्चो तुम लोग यही रहना हम अभी जरा देख कर आते हैं।

अनुज - क्या हुआ मौसा

कमलनाथ- अरे कुछ नही बेटा, बस हम लोग जरा फ्रेश होकर आते है ,,यही रहो तुम लोग

फिर कमलनाथ राजन को लेके उसी दिशा मे आगे बढ गया जिधर रज्जो और ममता गयी थी ।

धीरे धीरे आगे बढने पर जगह सुनसान होती चली जा रही थी और इधर कोई बाथरूम भी नजर नही आ रहा था ।

आगे की ओर चलने पर रास्ता सकरा था और झाडिया घानी थी ,,लग रहा था जैसे पार्क के उस हिस्से पर कोई रख रखाव नही किया गया हो काफी समय से ।

राजन - भाईसाहब कहा गयी होगी सब आखिर ,,यहा तो कोई नजर ही नही आ रहा है

कमलनाथ उम्मीद भरे लहजे मे - शायद बाथरूम ना मिल्ने की वजह से आगे गयी हो सब,,चलो थोडा बढ के देख लेते है

फिर वो दोनो आगे चल रहे होते हैं कि सामने से दो कालेज के बच्चे हस्ते हुए आप्स मे बात करते हुए जा रहे थे ।

जैसे ही उनहोने राजन और कमलनाथ को क्रॉस किया उनमे से एक ने हस के बोला - याररर उस सावली वाली गाड देखी हिहिहिहो कितना फैला कर बैठी हुई थी यारर

दुसरा लड़का भी उसकी बातो मे सहमती देखे हसता और वो आगे निकलजाते ।

इधर राजन और कमलनाथ के कान खड़े हो जाते हैं उन लड़को की बाते सुनकर,,,वो दोनो एक दूसरे को फैली हुई आन्खो से देखते हैं ।

राजन हिचक कर - मुझे लग रहा है भाईसाहब वो लड़के शायद भाभी जी के बारे मे ही बोल रहे थे ।

कमलनाथ राजन से नजर फेरते हुए - हम्म्म्म सही कह रहे हो राजन ,,चलो आगे चलकर देखते हैं , मुझे बहुत चिंता हो रही है ।

ये बोलकर कमलनाथ तेज कदमो से उसी तरफ आगे बढता है जहा एक तरफ झाडियो के पास उसे कुछ हलचल सुनाई देती है ।

वो अपनी चाल धीमी कर रास्ते से झाडियो के बिच बने मिट्टी के सकरे रास्ते पर चलने लगता है ।

तभी वो अचानक से रुक जाता है और इतने मे राजन उसके पीछे आकर खड़ा होता है ।

राजन - क्याआ हुआआ भाईसाहब मीईइलीईई की नही

राजन के शब्द पुरे होने से पहले उसकी नजर सामने के दृश्य पर गयी । जहा ममता रज्जो की गाड़ पर उसका जीन्स चढवाने मे मदद कर रही थी ,,,मगर वो बहूत टाइट थी और जांघो मे ही कसी थी ।

ममता हाफते हुए - उह्ह्ह भाभीईई ये न्हीई हो रहा है

रज्जो थोडा उछल कर अपनी जीन्स मे गाड़ को घुसाना चाह रही थी मगर उसके फुटबाल जैसी गाड के निचले हिस्से में जीन्स अटक गई थी और उछलने से उसकी गाड़ के पाट बहुत ही कामुकता से हिल रहे थे

कमलनाथ और राजन बडे ही आवाक होकर रज्जो की उछलती गाड़ को निहारे जा रहे थे ।

राजन थोडा गले को खराशा - अह्हूउम्हुहुह्ंमम्म ,

फिर मुह दुसरी ओर करके बोला - मेरे ख्याल से भाईसाहब आपको जाना चाहिए और मदद करनी चाहिए ।

राजन की बात सुन कर कमलनाथ चौका और राजन की ओर घुमा तो राजन उसकी ओर पीठ करके खड़ा था ।

कमलनाथ - अ ब ब हा सही कह रहे हो रुको मै आता हू

ये बोलकर कमलनाथ रज्जो के पास चला गया और कमलनाथ को देख कर रज्जो चौकी - अरे आप उम्म्ंम अच्छा किये आ गये । चलिये थोडी मदद किजीए

कमलनाथ - अरे तुम लोग काफी समय से अये नही तो मुझे चिन्ता हुई मै और राजन खोजते हुए इधर तक आ गये ।

रज्जो राजन का नाम सुन कर चिहुकी - क्याआआ नंदोई जी आये है ,,कही उन्होने देखा तो

कमलनाथ - वो सब छोडो वो बाहर है ,,,ये तुम कैसे अटका ली ।

रज्जो परेशान होते हुए - वो क्या है जी हम लोग पेसाब कर रहे थे कि कुछ आवारा लडके हमे देख लिये और आवाज करने लगे तो जल्दी जल्दी इसको उपर करने के चक्कर मे ये जांघो मे फस गयी ।

कमलनाथ रज्जो के निचे बैठ कर उसकी गाड़ के चर्बीदार पाटो से जीन्स की उल्टी हुई पेति को सीधा करने लगता है जिसे ममता बडे ध्यान से देखती है ।

वही राजन भी झाडियों के पास से अन्दर झाक रहा होता है और रज्जो की मोती गाड़ उसे उत्तेजित किये जा रही थी । तभी ममता की नजर राजन पर गयी और उसने रज्जो का मजा लेने के लिए राजन को आवाज दी ।

ममता - क्या जी छिप छिप कर देख रहे है ,,,यहा आ जाईये

रज्जो - क्याआ नहीईईईई,,,, ममता तू पागल है क्या

रज्जो को परेशान देख ममता हसने लगी

कमलनाथ हस कर - ममता तू भी ना ,,, सुधरेगी नही हाहह्हहा

इधर कमलनाथ ने जीन्स को सही करके वापस से उपर चढा दिया और फिर अपनी उंगलियाँ चटकाई ।

रज्जो ने अपनी कमर बन्द करके कप्डे सही किये और बोली -सच मे नंदोई जी ने देखा क्या

ममता हस कर - हा पुरा खजाना देख लिया भाभी आपका हिहिहिहिही

कमलनाथ ममता के सर पर हल्की चपट लगाते हुए - तू बडी मजे ले रही है हमम्म

ममता तुनक कर - क्या भैया आप क्यू बिच मे आ रहे ,,,ये हम ननद भौजाई की आपस की बात है हिहिहिही

फिर सब लोग वाप्स झाडियो से बाहर आये जहा राजन बाहर खड़ा था और रज्जो उसको देख कर मुस्कुराते हुए ममता के साथ आगे चली गई ।

राजन - माफ कीजिएगा भाईसाहब ये ममता बडी चंचल है हाहह्हा ,,, लग रहा है अब फिर से भाभी जी माफी मांगनी पड़ेगी

कमलनाथ हस कर - तुम भी राजन खुददार आदमी हो भाई हाहह्हह ,,, माग लेना भाई माफी घर चलकर

फिर थोडी देर बाद सारे लोग इक्कठा हुए और सबको भूख लगी थी तो सब पार्क से निकल कर एक रेस्तरां मे गये और खाना खाने के बाद घर के लिए निकल गये ।

एक तरफ जहा जानिपुर मे ये सब घटित हो रहा था ,वही चमनपुरा मे राज भी अपना तिगडम सेट करने की फिराक मे था ।



राज की जुबानी


सुबह उठ कर वही राज नहा धोकर दुकान पर चला गया और काम मे लग गया ।

थोडी देर बाद चंदू नासता लेके दुकान पर आता है ।

मै - अबे साले इनसब की क्या जरुरत थी बे ,,,मम्मी अभी नासता लाती ही होगी

चंदू - साले नाटक मत कर ,,दीदी ने खुश होकर तेरे लिए प्याज़ के पकोड़े बनाये है

मै ह्स कर - लग रहा है तेरी दीदी को मेरा अंदाज पसंद आ गया क्यू ह्हिहिहिहिही

चंदू - अबे जब मुझे तेरे चोदने का तरीका पसंद आया तो उसे क्यू नही आयेगा ,,,क्या हिला हिला के पेल रहा था भाई ,,मजा आ गया तेरे साथ हिहिहिही

मै - तो आज रात भो रेडी रहना

चंदू उखड़े मन से - नही यार शाम को ही मेरा बाप आने वाला है ।

चंदू की बाते सुन कर मेरा भी मन थोडा डाउन हुआ

मै - लेकिन वो लोग तो कल आने वाले थे न

चंदू खीझ कर - हा यार लेकिन मेरे बाप को मै बहुत खटकता हू ,,,हर बात के लिये टोकता है और सूनाता रहता है

मै कुछ सोच कर - देख भाई जहा तक मै समझता हू इस समय तेरी कोई पढाई नही चल रही है और धीरे धीरे तू ब्डा ही हो रहा है उनकी नजर मे ,,,एक तो वो अपने काम से खुद परेशान होते है उपर से तुझे खाली देख के उनका गुस्सा फाल्तू मे तुझ पर ही निकल पडता है ।

चंदू मेरि बात को समझने की कोशिस करता हुआ -हा तो तू ही बता क्या करू मै

मै हस कर - तू अपने पापा के साथ काम पर ही चला जाया कर ,,घर बैठने से अच्छा होगा और फिर तेरी मालती भी तो वही रहती है ना हिहिहिही

चंदू मेरा सुझाव सुन कर चहक उठा - अरे हा भाई ,,,इसके बारे मे तो मैने सोचा ही नही ।

चंदू - लेकिन पापा से ऐसे कैसे कहू काम पर जाने के लिए,,, मुझे तो अजीब सी घबडाहट हो रही है । ये साला अच्छा काम करने मे इतनी दिक्कत क्यू होनी शुरु होती है ।

मै हस कर - तु चिन्ता ना कर मै रजनी दीदी से बात करता हू कल

चंदू खुश हुआ , फिर हमने आगे कैसे चम्पा के साथ मस्ती करनी है उसकी प्लानिंग की और फिर वो घर चला गया ।

मै वापस दुकान के कामो मे लग गया और थोडा ग्राहको से डील करने के बाद करीब 11 बजे तक जब मै फ्री हुआ तो मोबाईल खोलते ही मुझे काजल भाभी का ख्याल आया ।

मै एक से नयी ऊर्जा से भर गया ,,फौरन मैने whatsaap ओपेन किया और काजल भाभी का last seen चेक किया जो अभी कुछ मिंट पहले का ही था ।

फिर मैने वापस से अपनी status setting को only for पर सेट करते हुए काजल भाभी का नम्बर सेलेक्ट किया और वापस से कुछ नये मॉडल के ब्रा और पैंटी की तस्वीरे पोस्ट कर दी ।

फिर मैने उन्ही चारो फ़ोटो को काजल भाभी पर सेंड कर दिया और तुरंत delete for everyone पर क्लिक करके सारी फ़ोटो डिलीट कर दी ।

फिर मैने अपना फोन वापस रख दिया और दुकान के कामो मे लग गया ।

अभी मुस्किल से 10 मिंट ही बीते थे कि मोबाईल पर notification बिप हुआ और मैने चेक किया तो मेरी प्लानिंग तहत काजल भाभी का मैसेज था । मै जानता था कि मेरे मैसेज डिलीट करने पर उन्की जिज्ञासा बढेगी और वो इस बारे मे जरुर पूछेगी ।

हुआ भी वही ।

काजल - hiii suno

मै - hii bhabhi ...good morning 😄 kahiye

काजल - wo kya delete kiye ho bhej ke

मै - kuch nhi bhabhi wo galati se gaya tha...sorry

काजल - are aisa kya tha ki sorry bol rhe

मै - 😁😁 nhi btaunga mai

काजल - ye kya baat hue ...Jaldi btaao kya bheje the

मै - wo kuch photos the

काजल - dikhaao mujhe

मै - rahane do bhaabhi plzz

काजल - ab to bina photo liye mai nhi manungi , jaldi bhejo 🤨

मै - 😁 ok deta hu

फिर मैने वापस से वही तस्वीरे भेज दी जो अपने status पर लगाई थी ।

काजल - are to wahi hai na , jo tum status par lgaaye ho

मै - ha 😁 Wo mai status lga raha tha to galti se apke nmbr par bhi click ho gaya tha

काजल - 😄😄😄 Koi baat nhi ho jata hai....Lekin tum ye sab status par kyu lgaate ho , sharam nhi ati

मै - 😁😁 Dukandar hu bhabhi , jab inhi chizo ka business hai to sharam kahe ki

काजल - to kya koi puchhta bhi hai insb ke baare me jo status par lgaaye ho 😅

मै - are bhabhi mere kafi sare order phone se hi ho jate h ,

kaafi sari ladies hai jo apna saman WhatsApp par order kar deti hai jo market me chaar logo ke samne aise chize kharidne me jhijhak mahsus karti hai

काजल - fir to achcha hai ji ,

मै - aap bhi chaaho to order kar skate ho 😅

काजल - badmaash kahi ke , mujhe chahiye hoga to mummy ji se bol nho dungi

मै - ha lekin aise model ke liye thodi na kah payegi badi mummy se 😅😅😅😅

काजल - chup pagal kahi ke ... bado se aise baat karte hai 😅

मै - dekhiye mujhe apna dewar nhi dukandar samjhiye ... mere paas aur bhi model hai mai unko bhejta hu . Apko chahiye hoga to bata dijiyega

काजल - hey bhagwan tum bhi na .. thik hai bhej dena .. ok abhi mujhe kam hai .. bye

मै - ok bye 😅

मै काफी खुश हुआ कि चलो योजना कामयाब रही बस एक बार इन टॉपिकस पर बात शुरु होने की देरी है ,,,फिर काजल भाभी को कैसे लपेटना है ये मै अच्छे से जानता हू ।

मै वापस खुशी खुशी काम पर लग गया ।

थोडी देर बाद मा खाना लेके आई ।

मा - ले जल्दी से खाना खा ले और पापा को खाना देने चला जा

दुकान मे कोई ग्राहक थे नही और मा खाना रखने पीछे कमरे गयी थी तो मै भी उन्के पीछे जाकर उनको पीछे से पकडते हुए - ओह्ह मा आई मिस्स यू

मा - ऊहह हुउउऊ छोड भाई ,,, बड़ा आया मुझे याद करने वाला

मै मा के गालो को चुमता हुआ - क्या हुआ गुस्सा हो गयी क्या आप

मा - मै क्यू गुस्सा राहु भला ,,तू अकेले ही खुश है अपने दोस्तो मे , मेरी क्या फिक्र है तुझे

मै हस कर पीछे से उसको पकडकर - ओह्ह लग रहा है कल अकेले पापा के साथ मजा नही आया क्या हिहिहिही

मा मुस्कुरा कर - हट बदमश कही का ,,तुझे क्या उससे जब तू था नही हुउउह्ह

मै - आज तो रहूंगा ना तो कल की कमी भी पूरी कर दूँगा ,,,आप नही जानती कितना तडपा हू मै

मा इतरा कर - ओह्हो बड़ा आया तडपने वाला ,, इतनी फिक्र होती तो सुबह ही आ जाता मेरे पास

मै - अब तो आ गया हू ना ,,तो हो जाये एक राउंड हिहिही

मा के चुचो पर हाथ रखते हुए बोला

मा चौकी - नही नही पागल ,, दुकान का समय है ,,जल्दी से खा और पापा भी भूखे है जल्दी उनको भी देके आ ।

फिर मा मुझसे अलग होकर दुकान मे चली गयी और मै खाना खाके पापा के टिफ़िन लेके चल गया दुकान की ओर ।



जारी रहेगी
 
अपडेट 116

चोदामपुर स्पेशल अपडेट


पिछ्ले अपडेट मे आपने पढा जहा एक ओर जानिपुर मे रज्जो और कमलनाथ अपनी योजनाये बना रहे है वही ,, चमनपुरा मे राज काजल भाभी को लपेटे मे ले रहा है ।देखते है उसकी ये कोशिस क्या रंग लाती है ।

अब आगे



राज की जुबानी


मै खाना खाने के बाद पापा को टिफ़िन देके वापस आ गया और वापस दुकान के कामो मे लग गया ।

शाम को 5 बजे तक मा चौराहे वाले घर के लिए निकल गयी ।

इधर मै भी ग्राहको मे व्यस्त था तो काफी समय से मोबाईल चेक नही किया था ।

इसी दौरान काजल भाभी का मुझे फोन आने लगा ।

मुझे खुशी तो बहुत हुई लेकिन ग्राहको की भीड़ की वजह से मै थोडा परेशान भी था ।

इसिलिए मैने उनका कॉल रिसीव करके बोला कि मै दुकान मे व्यस्त हू अभी बात करता हू । उन्होने भी ओके कहा ।

करीब आधे घण्टे बाद मै दुकान से फ्री हुआ और हिसाब किताब मे लगा था कि एक ग्राहक का फोन आया तो मुझे काजल भाभी का काल जहन मे आया ।

उस ग्राहक से बात करके मै फौरन काजल भाभी को फोन घुमा दी ।

फोन पर

मै - हा भाभी जी कहिये

काजल - अरे हा वो तुम अपना whatsaap चेक किये

मै अचरज से - क्यू क्या हुआ ???

काजल मुस्कुरा कर - अरे पहले देखो तो

मै - अच्छा आप लाईन पर रहिये मै देख लेता हू ।

फिर मै फटाफट डाटा ऑन करते हुए whatsaap खोलता हू तो काफी सारे मैसेज मे काजल भाभी का मैसेज सबसे उपर था ।

निचे सोनल के मिस्स यू वाले मैसेज देख कर मै मुस्कुराया और फिर काजलभाभी का चैट ओपन किया ।

उन्होने दो न्यू लेस्स वाली ब्रा पैंटी सेट मे कलर और दाम के बारे मे पुछा था । मै खुशी से मुस्कराया और वापस मोबाइल को कान के पास लगाते हुए

मै - हा भाभी देख लिया

मेरी बातो मे हसी की एक खनक सी थी जिसे पकड़ते हुए काजल भाभी इतरा के बोली - ज्यादा हसो मत दुकानदार हो ना ,,,दाम और कलर बताओ हिहिहिही

मै हस कर - ये दोनो सेम रेंज की है और दोनो मॉडल मे 6 कलर का सेट है ,,रुकिये मै भेजता है तस्वीर उसकी , जो पसंद हो बताओ ,,,ऐसे ही रहिये लाईन पर

काजल - ओके

मै वापस उन्ही ब्रा-पैंटी सेट्स के सभी कलर की दो तसवीर ली और उनको whatsaap कर दिया ।

मै वापस मोबाइल कान पर लगाते हुए - हा भाभी देखो और बताओ

थोडी देर बाद काजल -

हा वो मैने कलर बता दिया है तुम कल दोपहर मे लेके आना , मै पैसे दे दूँगी ।

मै अचरज से - कल दोपहर मे क्यू?? अभी थोडी देर मे आ ही रहा हू चौराहे पर ना ।

काजल हस कर- ज्यादा तहकीकात नही समझे हिहिही ,,, कल दोपहर को ही

मै समझ गया कि शायद कल दोपहर मे शकुन्तला ताई घर पर नही हो और इसिलिए उनसे छिप कर काजल भाभी मे ऑर्डर दिया है ।

खैर मुझे क्या ,,मुझे तो ऐसा ही मौका चाहिये अकेले मे मिलने का , ताकि मुझे अपना काम करने मे कोई दिक्कत न हो ।

मै फोन रख कर वापस दुकान के कामो मे लग गया , मुझे आगे की प्लानिंग करनी थी कि कैसे क्या करना है ।

शाम को 7 बजे मै दुकान बन्द किया और निकल गया चंदू के घर की ओर ,,,

उसके घर पर उसके मम्मी पापा आ गये थे ।

मैने दोनो को नमस्ते किया ,,हाल मे सारे समान और बैग खुले हुए थे। रजनी दीदी और चंदू समान निकाल कर इधर उधर कर रहे थे ।

मै रजनी से - दीदी ,, इस चंदू को आप काम पर क्यू नही भेजती ,दिन भर बैठा रहता है और पढाई भी बंद है इस समय

रामवीर - अरे बाबू किसी काम लायाक नही है ये ,,बस मुफ्त का रोटी तोड रहा है ।

मै इसी मौके की तालाश मे था और तुरंत रामबीर से मुखातिब होकर - अरे जीजा जी फिर आप इसको अपने साथ ही काम पर ले जाया करो ना ,,बोरिया गिनेगा हिहिहिही

रजनी मेरी बातो से प्रभावित हुई -हा जी सही तो कह रहा है राज ,,, जब तक इसकी पढाई नही शुरु होती अपने साथ ही रखिये कुछ काम सिख ही लेगा ।

रामवीर - ठिक है फिर मै कल ठाकुर साहब से बात करता हू ,

मैने चंदू को आंख मारी और वो भी स्माइल किया ।

थोडी देर बाद चाय नासता करके मै निकल गया चौराहे वाले घर के लिए,,



लेखक की जुबानी


एक तरफ जहा चमनपुरा मे राज और अपने दोस्त चंदू की गोटियाँ सेट करने मे लगा था वही जानिपुर मे भी कुछ लोग अपनी अपनी गोटिया सेट करने मे लगे थे।

शाम 4 बजे तक सारे लोग वापस घर आ गये थे ।

सब हाल मे बैठे हुए थे ,,पल्लवि और सोनल सबको ठंडा पानी दे रही थी ।

इधर रज्जो और राजन की आंख मिचौली चालू थी जिसपर कमलनाथ की नजरे बखूबी बनी हुई थी ।

वही अनुज जो कि पल्लवि से जितना दुर जाने की सोचता पल्ल्वी उसके उतने की नजदीक आने के बारे सोच रही थी ।

लगभग सारे लोग थक गये थे । मगन रमन जो की काफी समय से किसी सोच मे था ।

रमन - मम्मी मै दुकान पर जा रहा हू अभी समय बहुत है तो देख लू थोडा

रज्जो - बेटा वहा काम करने वाले है ना फिर तू क्यू

रमन - हा मा लेकिन शादियो का सीजन है और ऐसे खाली बैठना भी सही नही लग रहा

कमलनाथ - अरे जाने दो रज्जो उसको ,, भाई दुकान भी तो जरुरी है ना

अनुज मानो इसी मौके की तालाश मे था - रमन भैया मै भी चलूंगा

अनुज की बात सुनते ही पल्लवि का मुह लटक गया और वही अनुज बेरहम होकर रमन के साथ उसके दुकान की ओर निकल गया ।

सोनल - चल पल्लवी ,,मै सोने जा रही हू ,,तुझे आना है

पल्लवि अकेले क्या ही करती वो भो सोनल के साथ चली गयी ।

राजन भी अंगड़ाई लेते हुए - उम्म्ंम्ं भाईसाहब मै सोच रहा हू थोडा आराम कर लू , और ये तंग कपडे बदल लू

कमलनाथ - हा राजन ठिक कह रहे हो ,,चलो चलते है ।

फिर सारे लोग उपर जाने लगे और अपने कमरे मे पहुच कर कपडे निकाल कर बेड पर लेट गये ।

रज्जो सिर्फ ब्लाउज पेतिकोट मे कमलनाथ के बगल मे लेटते हुए चिपककर - आजकल बहुत अपने नंदोई के साथ मिलकर मेरा पिछवाड़ा निहार रहे ह्म्म्ं

कमलनाथ रज्जो को अपनी ओर खिचकर - अरे मेरी रज्जो जान तेरा पिछवाडा है ही ऐसा की मै चाहू या ना चाहू ,,,सबकी नजरे अटक ही जाती है ।

रज्जो कमलनाथ की बातो से थोडा शरमाने लगती है ।

कमलनाथ - तो आगे के लिए क्या सोचा है तुने

रज्जो आंखे उपर करके कमलनाथ को देखते हुए हस पडी - अभी बुला दू ममता को क्या हिहिहिही

कमलनाथ - क्यू तू नही रहेगी साथ मे

रज्जो इतरा कर - अरे नंदोई जी को भी तो कोई सम्भालने वाला होना चाहिए ना हिहिहिही

कमलनाथ ह्स कर - धत्त बता ना ,,आगे का क्या सोचा है । मुझे पता है तेरी कुछ योजना जरुर होगी ।

रज्जो मुस्कुरा कर - आप आम खाओ ना , गुठलियों के पीछे क्यू हो हिहिहिही । मुझे जो करना है मै कर लूंगी ।

कमलनाथ - मतलब मुझसे चोरी छिपे ही सब करेगी क्या,, हम्म्म बोल

रज्जो धीरे से हाथ बढा कर कमलनाथ के खडे लंड को उपर से जकड़ लिया और इतरा कर बोली - क्यू आप भी ममता को अपने नंदोई के सामने चोदोगे क्या?? हम्म्म्म

कमलनाथ रज्जो की इस हरकत से सिहर गया और उसने फौरान रज्जो के होठ को मुह मे भर लिया ।

इधर इनकी उत्तेजक भरी काम कीड़ा की शुरुवात हुई थी ,,वही बगल के कमरे मे राजन रज्जो की सुबह से दो बार गाड़ देख कर बहुत उत्तेजित था ,, उसने कपडे निकालने के बाद ममता को मौका ही नही दिया की वो कुछ पहने और ध्क्कम पेल चुदाई चल रही थी ।

वही निचे सोनल के कमरे मे पल्लवि भी एक टीशर्ट लोवर मे उदास बेड पर बैठी हुई थी । कारण था कि अनुज उससे दुर था ,,उसने क्या क्या सपने सजाये थे वो सब दुर होता नजर आ रहा था ।

बगल मे सोनल खर्राटे भर रही थी । तुनक कर पल्लवि उठी और कमरे से बाहर निकल गयी ।

उसे लण्ड की बहुत तलब मच रही थी और जब से वो घर से आई थी उसे एक बार भी मौका नही मिला कि वो अपने पापा के साथ भी समय बिता सके । हर समय सोनल उसके साथ ही होती थी ।

उसने तय किया और उपर छत पर चल दी ।

उसने जैसे ही अपने पापा के कमरे का दरवाजा खटखटाया उपर के दोनो कमरो मे अचानक शान्ति छा गयी ।

एक ओर जहा राजन ममता की गाड़ मे आधा लण्ड रोक दिया वही रज्जो के मुह में कमलनाथ का लण्ड रुक गया ।

तभी पल्लवि ने राजन को आवाज लगाई - पापा खोलो मै हू

पल्लवि की आवाज सुनकर कमलनाथ का धडकता दिल थमा और वो मुस्कुरा कर रज्जो के बालो मे हाथ फेरता है जिसको रज्जो एक इशारा समझ कर वापस के लण्ड को गले मे उतारने लगती है ।

वही राजन और ममता के भी तेज धडकते दिल शान्त होते है ।

राजन ममता की गाड़ से लण्ड निकाल अपना गम्छा लपेटे दरवाजे की ओर जाता है ।

वही ममता फौरन एक चादर अपने उपर ले लेती है ।

राजन दरवाजे की कुंडी खोल्कर हल्का सा बाहर झाकता है और पल्लवि को अकेला पाकर पुरा दरवाजा खोल देता है ।

पल्लवी अन्दर आते ही चहक उठती है - ओह्ह मतलब आप लोग अकेले अकेले मजे ले रहे ,,मुझे तो भूल ही गये पापा आप हुउउउह्ह

राजन दरवाजा बंद करके प्लल्वी के कंधे पर हाथ रख कर - ऐसी बात नही है रे पल्ली ,,, ये चोदमपुर थोडी ना है कि हम सब ....

पल्लवि - हा तो क्या हुआ बंद कमरे मे कौन आ रहा है हिहिहिहिही

ममता फटी हुई आंखो से राजन को देखती है और फिर पल्लवी से - अगर सोनल तुझे खोजती हुई आ गई तो

पल्लवि चहक के अपनी मा के चादर के घुसते हुए -वो तो सो गयी है हिहिहिही

ममता हस कर - तू बडी बदमाश है ह्म्म्ं

पल्लवी अपनी मा के मुलायम चुचो को छुते हुए - और आप लोग ये लोग बदमाशी कर रहे हो उसका क्या हिहिहिही

ममता पल्लवी के मुलायम हाथो का स्पर्श अपने चुची पर पाते ही सिहर उठी ।

इधर राजन ने अपना गम्छा हटा दिया और वो भी पल्लवि के बगल मे आकर चादर मे घुस गया ।

पल्लवि - हिहिहिही मा देखो मै अब पापा के साथ बदमाशी करने जा रही हू ।

ये बोलकर पल्लवि ने अपने पापा का खड़ा मोटा लण्ड चादर के निचे से ही थाम लिया ।

राजन पल्लवि के मुलायम हाथो का स्पर्श पाकर बहुत उत्तेज्जीत हो गया ,,,उसे घर पर बिताये वो पल याद आ गये जब आखिरी बार उसने अपने बडे भाई साहब के साथ मिल कर पल्लवि और ममता को चोदा था ।


[ अपडेट 127-एब्स कथा चोदामपुर की ]



ममता - तू कर ले बदमाशी फिर तेरे पापा तुझे सजा भी देंगे हिहिहिही

पल्लवी अपने पापा का लण्ड सहलाते हुए उन्की आँखो मे बडी मदहोसी से देखते हुए - क्या सच मे पापा आप मुझे सजा दोगे ।

राजन कसमसा कर - उम्म्ंम हा तू शरारत करेगि तो तुझे सजा मिलेगी ।

पल्लवि राजन के लण्ड को निचे आड़ो से उपर की ओर सहलाते हुए - इसी डंडे से मारोगे क्या आप मुझे हम्म्म्म्ं बोलो

राजन सिहर के - उम्म्ंम हा इसी मोटे डंडे से मारुंगा

पल्लवि अपने पापा की चमडी खिच कर सुपाडे पर अंगूठे को फिराती हुई - अगर मै इस डंडे को खा जाऊ तो

इधर राजन पहले ही ममता की गाड़ चोद कर अपने आड़ो को बीर्य से भर रखा था । पल्ल्बी के कामुक स्पर्श और उसकी जोश भड़का देने वाली बातो ने उसे इतना उत्तेजित कर दिया कि पल्ल्वी के निचे जाने के पहले ही राजन के लण्ड ने चादर के अन्दर ही पिचकारी मारनि चालू कर दी ।

पल्लवि को लण्ड के झटके का अहसास तब हुआ जब राजन के लण्ड का गरम लावा उसके हथेली को छुने लगा और गीलेपन का अह्सास पाते ही पल्लवि फौरन चादर हटा कर अपने पापा के आड़ो को सहलाना शुरु कर दिया और अगली पिचकारी उसके मुह मे जाने लगी

क्योकि पल्लवि ने अपने पापा का सुपाडा झुक के मुह मे भर लिया था ।

राजन अपनी गाड़ उचका कर लण्ड हिलात हुआ - ओह्ह्ह पल्ली ओह्ह्ह उम्म्म्म्फ और निचोड ले इसे अह्ह्ह उम्म्ंम

इधर पल्लवि ने सब चाटने के बाद सुपाडे के सुराख को भी सिरक कर अच्छे से लण्ड को चाट कर साफ किया ।

वही राजन थक कर दिवाल से टेक लगाये हाफे जा रहा था ।

पल्लवी अपना मुह साफ कर दिवाल से टेक लगा कर बैठ गयी ।

ममता - तुने तो सारा मजा ले लिया ,,, आधे घंटे से खट मै रही थी ।

पल्लवि हस के - अभी पापा जब मुझे सजा देंगे तब आप ले लेना मजे हिहिहुही

राजन अपने उपर से चादर हटा के - नही भाई कोई सजा और मजा नही होगा

पल्लवि चौकी - क्या मतलब आप मुझे ???।

राजन पल्लवि को उदास देख कर - माफ कर दे बेटा वो तेरे आने से पहले ही एक बार मेरा हो गया था और फिर अभी ।

राजन - मै थक गया हू बाद मे कभी ,,,

पल्लवी उदास होके - हम्म्म ठीक है ।

फिर थोडी देर बाद सारे लोग उसी बिस्तर पे लेते थे ।

वही पल्लवि आंखे उपर छत पर चलते पंखे को देख कर कुछ तय कर रही थी ।

वही बगल के कमरे मे भी रज्जो और कमलनाथ एक राउंड चुदाई करके आपस मे चिपके हुए लेते थे ।

कमलनाथ - तो फिल्म वाला ही प्रोग्राम रखा जाये

रज्जो - हा इसी कमरे मे ही

कमलनाथ - लेकिन बच्चे भी होगे

रज्जो - अरे मै मैनेज कर लूंगी ,,बस आप ना कतराना अपनी बहन के नजदीक जाने मे हिहिह्ही

कमलनाथ - मै तो तैयार ही हू मेरी जान बहनचोद बनने के लिए हिहिहिह

खैर समय बिता और शाम के 7 बजे तक रज्जो की आंख खुली ।

वो उठकर अपने कपडे सही करती है और कमलनाथ को आवाज देके बाथरूम मे चली जाती है फ्रेश होने । वही कमलनाथ अपने कपडे पहन कर उपर चल देता है फ्रेश होने ।

इधर ममता की नीद भी जीने का दरवाजा खुलने की आवाज से टुट जाती है ।

वो उबासी लेके कर पल्लवि और राजन को जगाती है ।

फिर पल्लवि को लेके निचे चली जाती है ,,,जबकि राजन थोड़ा रुक कर आराम से उठता है और कमरे से बाहर निकल रहा होता है कि उसकी नजर रज्जो के कमरे की ओर जाती है ।

जहा रज्जो कमरे मे साडी पहन रही होती है ।

राजन लण्ड भी अभी अंगड़ाई ले रहा होता है और रज्जो की उभरी गाड देख के वो एक बार अपने सर उठाते लण्ड को दबाता है ।

इधर ऐन मौके पर कमलनाथ जीने से निचे उतर रहा होता है कि उसकी नजर राजन पर पडती है जो कमरे मे रज्जो को साड़ी पहनते देख कुर्ते के उपर से अपना लण्ड भीच रहा था ।

कमलनाथ मुस्कुराता है और दबे पाव राजन के पास जाकर - अरे राजन खडे क्यू हो अन्दर चलो ।

ये बोल कर कमलनाथ राजन के कन्धे पर हाथ रख कर उसे अन्दर घुसा देता है ।

वही राजन का कालेज धक्क कर जाता है कि कमलनाथ कब उसके पीछे आ गया और कही उसने ये सब करते देखा तो नही ।

उधर रज्जो अचानक से कमरे मे राजन और कमलनाथ को एक साथ आते देख हड़ब्डा गयी और उसकी साडी का पल्लू जिसे वो सहज रही तो सरक कर निचे आ गयी ।

रज्जो ने फौरन झुक कर साड़ी उठाई और सादा पल्लू अपने खुले सीने पर लपेटते हुए - क्या जी आप नंदोई जी से कोई डील किये है क्या ???

कमलनाथ हस कर - मतलब

रज्जो - कही आप लोग बीवी के बदले बीवी दिखाने का सट्टा तो नही लगा लिये ना ।

राजन की आंखे चौड़हिया गयी कि ये क्या बोल रही है रज्जो ।

कमलनाथ हस कर - क्या तुम भी रज्जो , राजन तो बेचारा निचे जा रहा था तो मै ही इसे अन्दर ले आया ,,,वो तो आज संयोग ही ऐसे बन गये कि

कमलनाथ राजन के कन्धे दबात हुआ - क्यू राजन सही है ना

राजन हड़ब्डा कर - अ ब ब हा हा भाभी आज ये तीसरी बार हुआ मेरे साथ ,,

रज्जो जानबुझ कर - तीसरी बार ??? कब कब जी

कमलनाथ राजन को उकसाते हुए -हा भाई राजन 3 बार कब

राजन हिचक कर - वो सुबह मे मे एक बार और एक बार अभी और

रज्जो चौकने का नाटक करते हुए - और एक बार

राजन अटकते हुए - माफ की की किजियेगा भाभी जी वो वो वो एक बार वहा पार्क मे भी अचानक से आप उस हालत मे सामने पड गयी थी ।

रज्जो शर्माने का नाटक करते हुए - क्या आप भी जीजा जी ,,, अगर ऐसी बात थी तो आपको वहा से हट जाना चाहिए था ना ,,आप भी इनकी तरह आंखे सेकने लगे ।

रज्जो की प्रतिक्रिया पर राजन थोडा अट्टाहस करता हुआ - ह ह ह ह नही भाभी मै घूम गया था तुरंत ,,आप भाईसाहब से पुछ लिजिए

रज्जो एक नजर कमलनाथ को देख कर - क्यो जी सही कह रहे है

कमलनाथ स्वार्थ वश बेशर्मो की तरह हस्ता हुआ हा मे सर हिलाया ।

रज्जो राजन को देखते हुए - तो मतलब आपने कुछ नही देखा था

राजन अटकते हुए - न्हीई हा मतलब थोडी देर के लिए,,वो अचानक से सामने आ गया था तो नजर नही फेर पाया मै ,माफ करियेगा भाभी जी

रज्जो इतरा कर - हा पहले आंखे सेक लो फिर माफी माग लो हुउउह्ह

राजन अब बेबस होकर उम्मीद भरी नजरो से कमलनाथ को देखता है कि भाई तेरी बीवी है कुछ कर जुगाड ।

कमलनाथ हस कर आगे बढ कर रज्जो के कन्धे पकड कर - अरे रज्जो , राजन कोई गैर थोडी है जो इतनी छोटी बातो के लिए नाराज हो रही है ।

रज्जो तुनकते हुए - आपको ये छोटी बात लग रही है ।

कमलनाथ - अरे भई उसने माफी माग ली ना ,,अब क्या तु भी उसका पिछवाडा देख कर ही मागेगी हिहिहिहिह

कमलनाथ की बाते सुन कर राजन की सासे अटक गयी कि ये उसका साला क्या बके जा रहा है ।

वही रज्जो अपने नंदोई की खिचाई का बहाना पाकर चहकी और हस्ते हुए - हा मुझे भी बदला लेना है हिहिहिही

कमलनाथ - चलो भाई राजन छुट्टा कर लो अभी

राजन की हालत खराब - ये ये ये क क क्या कह रहे आप भाई साहब,,,,भाभी आप भी ???

रज्जो खिलखिलाते हुए- मुझे तो बदला लेना है बस हिहिहिही

कमलनाथ हस कर - अरे भाई इसमे क्या शर्माना ,,गाव के मर्द मे खेतो मे जाते होगे कितनो ने नजर मारी होगी हिहिहिही

राजन की गाड की सुराख कमलनाथ के वक्तव्य से सिकुडी जा रही थी और उसका गल सुखा जा रहा था ।

राजन समझ रहा था कि ये सब कमलनाथ की चाल है उसने जरुर बदला लेने के लिए ये सब स्वांग रचा है । उसने मुझे कमरे के बाहर रज्जो को कपडे बदलते देख लिया होगा और अब मौका पाकर मजे ले रहा है ।

रज्जो - ओह्ह्हो जी आप बाहर जाओ , जीजा जी आपके सामने शर्मा रहे है ,क्यू जीजा जी

रज्जो के वक्तव्य से राजन के आंखे चमक उठी और मन ही मन वो गदगद हो गया ।

वो अपनी भावनाये छिपाता हुआ - अ ब ब हा भाभी ,, जब बदला आपको लेना है तो भाईसाहब की क्या जरुरत

कमलनाथ - कोई बात नही भाई मै बाहर चला जा रहा हू ,,

ये बोल कर कमलनाथ दरवाजे से बाहर चला गया इस उम्मीद मे की अन्दर रज्जो अपना जादू जरुर चलाएगी ।

वही कमलनाथ के बाहर जाते ही राजन ने दरवाजा बन्द करके रज्जो को पीछे से दबोच लिया ।

राजन - शुक्रिया भाभी जी आपने तो आज मेरी इज्जत बचा ली

रज्जो अपने चुतड़ पर राजन के खडे लण्ड की चुभन को मह्सूस करते हुए - उम्म्ंम जीजा जी आप भी कम नही हो ,,, मेरे पति के सामने ही मेरे माल पर नजर गाड़े हुए थे ।

राजन अपने हाथ रज्जो की चुचीयो पर फेरत हुआ - आप कहो तो उन्के सामने ही चोद दू आपको

रज्जो राजन के शब्दो को सुन कर सिहर गयी ।

रज्जो - अब छोडो हमे नाटक करना है ,,वो दरवाजे पर कान लगा कर सून रहे होगे ।

राजन रज्जो की बात से सहमत होकर उससे अलग हुआ और उसने तय किया कि क्यू जब ये सब चल रहा है तो आगे इसी चीज़ को बढ़ाया जाये क्या पता वो सच मे कमलनाथ के सामने रज्जो को चोद पाये ।

थोडी देर बाद राजन ने हस्ते हुए दरवाज खोला और वापस रज्जो से - ये गलत बात है भाभी जी ,,, बात सिर्फ़ पीछे से ही देखने की हुई थी ।

कमलनाथ राजन के शब्द सुन कर गदगद हो गया कि रज्जो ने मौका ले कर राजन का लण्ड भी देख लिया ।

वही रज्जो भी समझ रही थी राजन जरुर कुछ योजना बना रहा है तभी वो इतना खुल कर कमलनाथ के सामने बोल रहा है ।

रज्जो ह्स्कर - कुछ गलत नही है जीजा जी हिहिहिबी ,,मौका मिला था जाने कैसे देती ।

कमलनाथ हस कर - अच्छा ठिक है अब तो हिसाब बराबर हुआ ना

रज्जो हस कर - अभी कहा

राजन चौकने नाटक करते हुए - मतलब

रज्जो - अभी एक बार बाकी है हिहिहिही

कमलनाथ हस के - हा ठिक है भाइ कर लेना अपने मन की ह,,,,राजन भाई थोडा कोम्प्रोमाईज कर लेना

राजन कमल्नाथ की बात सुन कर मुस्कुरा कर रज्जो को देखता है तो रज्जो उसे आंख मार कर हस देती है ।

कमलनाथ को अपनी नैतिकता भी दिखाणी थी तो वो बात को घुमाते हुए - अरे रज्जो बस कर भई,,,चलो कुछ चाय नसता तैयार करवाओ भूख लग रही है ।

रज्जो हस्कर - हमम ठिक है मै जाती हू ।

रज्जो के जाते ही कमलनाथ हस के - देखा संत बनने के नतिजा ,,,, जिक्र नही करते तो इज्जत बची रहती हिहिही

राजन - हा लेकिन भाईसाहब क्या करु ,,मन मे अपराधि सा मह्सूस हो रहा था

कमलनाथ - हहह्हा तो मिल गयी ना अपराधी को सजा ,,, अब चलो निचे चलते है

राजन हस कर - हहहाहा जी भाईसाहब चलिये



जारी रहेगी
 
UPDATE 117

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE

पिछ्ले अपडेट मे आपने पढा कि एक तरफ जहा राज काजल के मामले काफी हद तक सफल हो रहा था ,,वही राजन की इज्जत बाल बाल बच गयी और इनसब से अलग पल्लवि अपने पापा चुद ना पाने के कारण अनुज के लिए फिर से बेताब होने लगी है ।

अब आगे

सारे लोग निचे हाल मे एकजूट थे सिवाय अनुज और रमन के ।

किचन मे सोनल और पल्लवि आपस मे बाते कर रही थी ।

वही हाल मे पंखे के निचे बैठे हुए चारो लोग भी सादी की आगे की तैयारियो के बारे मे चर्चाये कर रहे थे ।

वही रज्जो अब खुल कर कमलनाथ के सामने राजन से आन्ख मिचौली किये जा रही थी ।

ममता भी अपने भैया कमलनाथ के साथ इशारे बाजी कर रही थी क्योकि ढलती रात मे वो आज भी अपने भैया के साथ चुदने को उतावाली हुई जा रही थी ।

कमलनाथ - अरे रज्जो आज ममता हमारे साथ रहेगी , उसे टीवी पे फिल्म देखनी है

रज्जो मुस्कुरा कर राजन को देखते हुए - अरे तो फिर सिर्फ ममता ही क्यू , जीजा जी भी रहेंगे ।

राजन रज्जो का आमंत्रन सुन कर गदगद हो गया ।

इतने मे सोनल चाय नास्ते का ट्रे लेकर हाल मे आते हुए - ये क्या बात हुई मौसी ,, हम लोग को नही दिखाईंगी क्या

रज्जो - अरे सारे लोग रहेंगे बेटा ,,,

इधर रज्जो की बाते सुन कर पल्लवि मन ही मन कुछ सोच कर खुश हुई कि उसकी योजना शायद अब काम कर जाये ।

सारे लोग चाय का लुफ्त उठाते है , वही रज्जो धीरे से राजन को आंख मारती जिसको कमलनाथ देख लेता है और जब राजन की नजरे कमलनाथ से टकराती है तो इधर उधर नजर फेर कर अटपटा सा मह्सूस करता है ।

खैर चाय नास्ते का समय खतम होता है और फिर सोनल पल्लवि को लेके किचन मे रात के खाने के लिए तैयारी करने चली जाती है ।

रज्जो - ममता आ चल उपर चलते है कुछ काम है थोडा

रज्जो की बात पर राजन - अगर कोई जरुरी काम हो तो हम भी चले भाभी जी

रज्जो ह्स के राजन को छेड़ने के अंदाज मे - आप तो ऐसे परेशान हो रहे है जैसे आपकी बीबी को मै नही मेरे पति कही अकेले मे ले जा रहे हिहिहिहिह

राजन थोडा असहज होकर - हिहिहिहिह क्या आप भी भाभी जी मुझे लगा कोई काम होगा तो मै भी मदद कर दूँगा ,,,क्यो भाईसाहब

राजन अपनी तर्क को कमलनाथ मथ्थे चढाते हुए बोला ।

कमलनाथ भी राजन का साथ देते हुए - हा रज्जो राजन सही कर रहा है ।

रज्जो हस कर - तो आओ आप लोग भी , हमारे ब्लाउज मे हुक टाँक दो हिहिहिही

कमलनाथ अचरज से - मतलब

रज्जो हस कर - अरे भई शादी मे पहनने के लिए जो ब्लाउज सिली है सोनल, उसमे हुक टाकने है ,,,तो चलो आप लोग भी मदद कर देना

ममता रज्जो के बात पर खिलखिला दी ।

कमलनाथ हस कर - क्या तू भी रज्जो हिहिहिही

रज्जो ने अब कमलनाथ का हाथ पकड कर खिच्ते हुए - नही नही आओ आओ चलो अब

रज्जो - ये ममता खिच अपने भैया को मै जरा नंदोई जी को लेके चल्ती हू हिहिही

ममता भी थी चंच्ल और अपने भैया के साथ ऐसी हरकतो से बाज कहा आती उसने भी कमलनाथ का हाथ पकड कर लेके सीढियो की ओर जाने लगी ,,,और कमलनाथ अपनी बहन का स्पर्श पाते ही खुद को ढिला छोड दिया ।

वही रज्जो राजन का हाथ पकड कर - चलिये आप भी अब हिहिही

हालांकि राजन का पुरा मन था उपर जाकर थोडे गप्पे मारने का फिर भी वो थोडा नाटक करके हाथ छुड़ाने की कोसिस करता हुआ - हिहिहिही क्या भाभी,,भाईसाहब जा रहे है ना तो मेरी क्या जरुरत

रज्जो राजन को खिचते हुए - अरे आप चलिये मेरे पेतिकोट मे नाड़ा डाल दिजियेगा हिहिही

राजन रज्जो की बात पर हस पडा और रज्जो इतने मे भी उसपे भारी हुई और उसे खिचकर सीढिओ की ओर ले गयी ।

थोडी देर बाद चारो लोग ममता के कमरे मे थे ।

रज्जो ने अपनी आल्मारि से करिब 6 ब्लाउज और 6 पेतिकोट निकाले ।

रज्जो ने एक ब्लाऊज कमलनाथ को तो एक ब्लाऊज दिया और फिर सुई धागा भी थामा दिया ।

और खुद दोनो भी एक एक ब्लाउज लेके बैठ गयी ।

इधर दोनो ननद भौजाई ब्लाउज मे हुक की टकाई शुरु भी कर दी थी । तभी ममता की नजर अपने भैया पर गयी जो अपनी आन्खो को महीन करके कबसे सुई मे धागा डालने की कोशिश कर रहा था

ममता हस्कर - अरे भैया थुक लगा के डालो ना उसमे हिहिही

रज्जो ने जैसे ही ममता के इस वक्तव्य को सुना वो हस कर - अरे तू ही एक बार थुक लगा के दिखा दे ना अपने भैया को ,,,,

रज्जो की बात सुन कर ममता समझ गयी और मुस्कुरा कर अपने भैया के हाथ से सुई धागा लेके

उसमे डाल के देदी ।

ममता - भाभी मै जरा मेरे कमरे से और ब्लाउज लाती हू उन्के भी हुक ढीले हो गये हैं ।

रज्जो मुस्कुरा कर - हा हा जा लेके आ ,,आज सारे हुक अपने भैया से टाइट करवा ले हिहिहिह

ममता हस्कर उठती हुई - हिहिही क्या भाभी आप भी

इधर ममता अपने कमरे मे गयी और मौका देख कर रज्जो राजन को हुक टाँकते देख हस कर बोली - लग रहा है ममता ने बहुत हुक लगवाये है नंदोई जी से हिहिहिही

राजन -हिहिहिही अरे नही ऐसी कोई बात नही है भाभी जी ,,,ये तो आसान ही है देखीये लग गया है एक ब्लाउज का

राजन ने वो ब्लाऊज रज्जो को देते हुए कहा ।

रज्जो ने जब वो ब्लाउज को देखा तो खिलखिला पडी क्योकि सारे हुक निचे ही लगे थे और उपर चार उंगल खाली ही छोड रखा था । जहा पर दो हुक और लगते

रज्जो हस कर - ये क्या जीजा जी बदला लेने का विचार कर रहे है क्या हिहिहिही

कमलनाथ - मतलब

रज्जो कमलनाथ को ब्लाउज दिखाते हुए - ये देखिये ,,,उपर के दो हुक जानबुझ कर छोड़ दिये इन्होने

राजन सकपका कर - अरे रे रे नही नही भाभी आप गलत समझ रहे ,,,वो मुझे लगा कि चार हुक ही लगते है ब्लाउज मे तो उतने मैने टाक दिये ।

रज्जो- अरे कम से कम साइज़ तो देख लेते एक बार

कमलनाथ - ये क्या भई अरे खुद देख लो चलेगा तूम तो हमारी बीवी को सबको दिखाने की फिराक मे हो ।

रज्जो शर्माने का नाटक करते हुए - क्या जी ये क्या बोल रहे है आप ,,, क्या मतलब नंदोई जी देख सकते है तो चलेगा हम्म्म्म

कमलनाथ पर रज्जो को बरसता देख राजन मुह दबाए हसे जा रहा था ।

रज्जो - और आप क्यू मुह मे ही हसे जा रहे हैं,,, आप भी कोई ऐसा खयाली पुलाव ना पका लिजिएगा जिजाजी, इनके कहने पर ...

राजन हस कर - अरे नही भाभी जी ,,,भला मै क्यू ऐसा कुछ ...

कमलनाथ रज्जो के साथ मिलकर राजन को घेरता हुआ - हा भाई ,,, अरे पहले ही दो बार खुले खजाने पर नजर मार चुके हो ,,,,एक ही दिन मे कितनी बाजी मारना चाहते हो

रज्जो - दो कहा जी , पुरे 3 बार ,,वो अभी थोडी देर पहले जब मै कपडे बदल रही थी तब

राजन सफाई देता हुआ - अरे नही नही भाभी जी तब तो मै कुछ देख ही नही पाया था

रज्जो - देख नही पाया था मतलब,,,हम्म्म

राजन अपनी बात पर उलझ कर रह गया और उसके पास रज्जो की हाजिर जवाब का कोई तर्क ही नही रह गया तो वो हस कर - अ ब ब मतलब हिहिहिही अब मै मै क्या बोलू ,,, माना कि मैने देखा था थोडा लेकिन पुरा नही ,

राजन की बात पर रज्जो आंखे उठा कर देखती है तो राजन सकपका जाता है और वो पहले कमलनाथ को अपनी ओर घुरता हुआ पाता है फिर रज्जो को देखकर हडबड़ा कर - म मे मे मेरा मतलब, मेरी कोई व्यक्तिगत इच्छा नही थी इसमे ,,,ये तो बस इत्तेफाकन हो गया और तो और भाई साहब थे ही ना साथ मे

राजन की गाज कमलनाथ अपने सर आते देख सकपकाया मगर ऐन मौके पर ममता अपनी कुछ ब्लाउज लेके कमरे मे आती हुई - अरे क्या हो गया जी इत्तिफाकन हमे भी बताओ

अचानक ममता के आने से कमरे से सबसे ज्यादा राजन की हालत खराब होने लगी वही रज्जो हसते हुए कुछ बोलने वाली थी तो राजन ने ना मे सर हिलाया तो रज्जो ने इशारे मे हामी भरते हुए एक नजर कमलनाथ को देखा और मुस्कुराने लगी ।

ममता अपने भैया के बगल मे बैठते हुए- अरे क्या हुआ ,,आप ही बताओ न भैया

कमलनाथ हस कर - यही कि आज ये इत्तिफाकन ही है कि हमे ब्लाउज मे हुक लगाने पड रहे है ।

कमलनाथ की बात पर सब हसने लगे

रज्जो भी माहौल का मजा लेते हुए - हा लेकिन इस इत्तेफ़ाक़ मे आपकी चान्दी हो गयी ,,, बहन के ब्लाउज मे हुक लगाने का मौका जो मिल गया हिहिहिही

रज्जो की बात पर कमलनाथ थोडा राजन के सामने झिझका तो वही ममता ने मौका देख कर बोला - और आप जो अपने नंदोई से अपनी पेतिकोट मे नाड़ा डलवा रही है उस्का क्या हिहिहिह्हिही

ममता की बात पर सब के सब मुह मे अपनी हसी दबा और एक दोहरे अर्थ वाले संवाद से जोड कर मजे लेने लगे ।

मगर इनसब के बिच के सबको एक दुसरे के प्रति औपचारिक रूप से नैतिकता भी दिखानी थी तो कोई खास बात आगे नही बढ़ी और थोडी देर बाद सारे काम खतम होने तक ऐसे ही तंज कसने और हसी ठीठौली का मौहोल बना रहा ।

फिर थोडी देर बाद रज्जो ममता को लेके निचे चली जाती है और जाने से रज्जो कमलनाथ को DVD set लगाने के बाद निचे खाना खाने के लिए आने का फरमान सुना के चली जाती है ।

हालाकि रज्जो के कमरे मे पहले से ही केबल वाली टीवी का बन्दोबस्त था लेकिन कभी कभी रज्जो और कमलनाथ का मूड कुछ खास फिल्मो को देखने का होता तो वो उसके लिए बाकायदा पंजाब से एक DVD सेट और कुछ कैसेट रिकॉर्डिंग लाये थे । जिन्हे वो कुछ खास अवसरो पर ही चलाते जब रमन कही बाहर गया होता था। हालाकी उन कैसेटस मे कुछ बेहतरिन और अच्छी फिल्मे भी थी ।

मगर रज्जो जान्बुझ कर रमन के रहते कभी भी उन कैसेट को नही चलने देती क्योकि उसका कारण ये था कि उन कैसेट के बारे मे रमन को पहले से ही पता था और ना जाने कितनी बार रज्जो ने खुद रमन के साथ उन खास कैसेट को प्ले करके कुछ खास पल बिताये थे ।

इधर रज्जो के जाते ही कमलनाथ राजन को लेके स्टोर रूम मे चला जाता है और वहा DVD सेट का बॉक्स लेके अपने कमरे मे आता है ।

इधर कमलनाथ अपने dishTv का कनेक्सन निकाल कर उसकी जगह DvD player सेट करता है ।

इधर राजन की नजर उस dvd बॉक्स मे रखे कैसेटस पर जाती है जिनमे हिन्दी फिल्मो से ज्यादा कूछ ऐडल्ट फिल्मो के कैसेट थे ।

राजन बडे गौर से उन DVD कैसेट के नाम और उस छ्पी नंगी तस्वीरो को निहारता है और उसका लण्ड अन्गडाई लेने लगता है और वही जब कमलनाथ की नजर राजन पर जाती है तो वो मुस्कुराने लगता है ।

कमलनाथ हस्कर -क्यू भाई आज यही देखने का मन है क्या

राजन चौक कर - नही नही भाईसाहब वो तो मै बस देख रहा था ,,,

इतना बोल कर राजन दूसरी अलग अलग फिल्मो की कैसेट निकालने लगा ,,,जिनमे ज्यादातर सेक्स वाली ही भरी पडी थी ।

राजन को बहानेबाजी करता देख कमलनाथ हस कर- अरे भाई इतना परेशान क्यू हो रहे हो , इसमे एक दो को छोड कर सारी कैसेट वही वाली है ।

राजन आंखे चौडी करके कमलनाथ को देखता है ।

कमलनाथ हस कर - अरे इसमे चौक क्यू रहे भाई ,,,, कभी देखी नही क्या

राजन पहले से ही गाव मे रहता था तो कभी कभी त्योहारो या कोई मेले पर ही गाव में कभी कभी पर्दा पर कुछ फिल्मो को देखा था ।

हालाकी उसने काफी बार अपने मित्रो और जानने

वालो से सुना था कि शहर मे कयी सिनेमा घरो मे गन्दी फिल्मे चलती है

मगर उसकी कभी किस्मत नही हुई की वो ऐसी फिल्मे देख पाये। तो उसने कमलनाथ के स्वाल पर बडी सादगी से ना मे सर हिला देता है ।

कमलनाथ राजन की भावना समझ गया तो उसने मुस्कुरा कर एक नजर बाहर देखा और फिर राजन से बोला - देखनी है क्या

राजन कमलनाथ के प्रस्ताव से गदगद हो गया लेकिन फिर भी उसमे हिचक थी कि कैसे वो अपनी भावना अपने ही साले के सामने रखे ।

कमलनाथ राजन को हिचकता देख हस कर - मुझे पता है तुम्हारा मन है ,,रुको मै लगाता हू ,बस दरवाजे पर नजर रखना

राजन बिना कुछ बोले शांत रहा और वो दरवाजे पर नजर रखने लगा । उसका दिल बहुत जोरो से धडक रहा था । एक रोमांच भी कपकपी सी राजन के दिल मे उठ रही थी और उसका लण्ड पाजामे मे टाइट हो रहा था ।

इधर कमलनाथ ने प्यारी भाभी

नाम से एक DVD निकाली और उसे लगा दिया,,, शुरुवाती म्यूज़िक आते ही कमलनाथ और राजन तेज आवाज से चौके ,,,मगर कमलनाथ ने फौरान रेमोट से mute का बटन दबा दिया ।

राजन की सास मे सास आई और वो कमलनाथ को देख कर मुस्कुराने लगा ।

इधर दोनो वही टीवी के सामने खडे खडे ही उस फिल्म को देखने लगे ,,,इधर कमलनाथ ने रेमोट से शुरुवात के क्रेडिट सीन को भगाके एक सिन पर रोक दिया जहा एक मोटी गदराई औरत लाल पेतिकोट ब्लाउज मे खड़ी कमरे मे साडी सहेज रही थी और वही कमरे के बाहर दरवाजे के पास एक आदमी कमरे मे झाकता हुआ जान्घिये के उपर से अपना लण्ड मसल रहा था ।

इस सीन को देख कर कमलनाथ और राजन को सुबह का दृश्य याद आ गया जहा राजन कमरे मे रज्जो को कपडे पहनते देख्कर अपना लण्ड मसला था । वही कमलनाथ ने उसे ये सब करते जीने पर से देख लिया था ।

दोनो आपस एक बार नजरे उठा कर देखते है और मुस्कुरा कर वापस टीवी मे लग जाते है । इधर कमलनाथ फिर से फिल्म को रेमोट के माध्यम से आगे बढाता है जहा वो औरत अपने पति से नंगी होकर चुदवा रही थी और उन दोनो की चुदाई वो

दुसरा आदमी खिडकी के रास्ते देखकर अपना लण्ड हिला रहा होता है ।

आगे की स्टोरी मे पता चलता है कि वो दुसरा आदमी उस औरत के पती का दोस्त है ।

कमलनाथ हर 2 या 3 मिंट के बाद फिम्ल को आगे बढा देता था और जहा सेक्स सीन आते वहा टीवी mute कर देता ।

राजन और कमलनाथ दोनो के दिलो की धडकनें तब और तेज हो जाती है जब वो औरत अपने पति के दोस्त के साथ चुदवाने के लिए राजी हो जाती है और फिर कमलनाथ कहानि को आगे भगा देता है जहा उस औरत का पति उसे अपने दोस्त के साथ चुदते हुए पकड लेता है और फिर भाव्नात्मक दृश्य चल रहे होते है जिनहे देख कर राजन और कमलनाथ दोनो के लण्ड वापस सिकुड़ने लगते है ।

तो राजन मुस्कुरा कर कमलनाथ से आंखो से इशारा करके कहानी आगे बढ़ाने को कहता तो कमलनाथ मुस्कुरा कर फिर से mute बटन दबा कर कहानी को आगे बढाता है और एक सेक्स सीन पर रोक देता है जहा वो औरत अपने पति और उसके दोस्त दोनो के साथ होती है ।

इधर दोनो फिल्म की गतिविधियों मे इतने खो गये थे कि उन्हे दरवाजे का ध्यान ही नही और ऐन मौके पर रज्जो की आवाज सीढियो से आती हुई सुनाई देती है । दोनो की हवा टाइट हो जाती है और उन्हे समझ नही आता है कि क्या करे

तो कमलनाथ तुरंत लपक कर मेन स्विच ऑफ कर देता है जिससे राजन को थोडी तस्ल्ली तो होती है लेकिन फिर उस्का दिल तेजी से धडक रहा होता है ।

रज्जो कमरे मे आते हुए - क्या जी कितना समय लगेगा आपको सेट करने मे ,,,खाना तैयार हो गया है ।

रज्जो की बात पर कमलनाथ हडबडी दिखाते हुए - हा हा बस हो ही गया है ,,, तुम चलो मै आता हू

रज्जो को कमलनाथ की हडबडी और उन्दोनो के पसीने से भिगे चेहरे देख कर कुछ शक होता है और तभी उसकी नजर उस कैसेट के कवर पर जाती है , जिसे कमलनाथ ने DVD मे लगा रखा था ।

रज्जो समझ जाती है कि यहा क्या चल रहा था तो उसे इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला अपने प्लान के लिए ।

तो वो हस कर - अरे तो चालू किजीए मै भी देखू कौन सी फिल्म लगेगी आज

रज्जो की इस वक्तव्य से सबसे ज्यादा परेशानी राजन को होने लगी

वही कमलनाथ बार बार सफाई देने लगा तो रज्जो का शक यकीन मे बदलने लगा ।

रज्जो ने फौरन लपक कर मेन स्विच ऑन कर दिया और सामने सीधा वही सीन चालू मिला जिस पर कमलनाथ ने स्विच ऑफ़ किया था ।

रज्जो की आंखे चौडी हो गयी और क्योकि टीवी मे वो औरत को उसके पति का दोस्त पीछे चोदे जा रहा था और उसका पति उसके मुह मे पेले जा रहा था ।

रज्जो वो सीन देखा और फौरन वापस से मेन स्विच गिरा दिया ।

राजन शर्मिदा होने के भाव मे - माफ कीजिएगा भाभी जी ,,,वो इसिलिए हम लोग मना कर रहे थे ।

कमलनाथ भी मन गिरा कर - अब हा रज्जो सॉरी ,

रज्जो सब समझ रही थी की क्यू ये फिल्म ही कमलनाथ ने चलाई क्योकि ये फिल्म वो और कमलनाथ कयी बार देख चुके थे ।

रज्जो तुनक कर कमलनाथ झूठ कर गुस्सा दिखा कर - हम्म्म तो आज यही सबको दिखाएँगे आप हा

राजन को यहा थोडा बुरा लगने लगा कि रज्जो बेवजह कमलनाथ को डाट लगा रही थी क्योकि फिल्म देखने की इच्छा उसकी ही थी ।

राजन रज्जो को रोकते हुए - अरे नही भाभी जी आप भाईसाहब पर क्यू नाराज हो रही है ,,,वो तो मेरी इच्छा थी कि बस एक बार इसे चला कर देखू ,,क्योकि ...

ये बोल कर राजन चुप हो गया और एक अपराधी के भाव मे सर निचे झुका लिया

रज्जो थोडा आवेश दिखाकर- क्या ,,,,आगे भी बोलिए

राजन सच्चाई बताते हुए - वो मैने कभी ऐसी कोई फिल्म नही देखी तो बस एक बार के लिए मेरा मन हुआ ,,,यकीन मानिये इसमे भाईसाहब की कोई गलती नही है ।

रज्जो राजन की हालत पर मुस्कुराई और फिर खुद को सामन्य करते हुए - अरे तो कम से कम आप लोगो को दरवाज बंद कर लेना चाहिए ना ,,, मान लो मेरी जगह कोई बच्चे आ गये होते या ममता ही आ गयी होती तो

रज्जो की बात पर कमलनाथ और राजन दोनो स्कते मे आ गये ।

रज्जो उन दोनो के उडे हुए चेहरे के भावो को देख कर अपनी हसी रोक ना पाई - और उपर से ये सीन ,,, किसके साथ आजमाने वाले थे ये सब आप लोग हम्म्म्म

रज्जो के रवैये मे अचानक हुए परिवर्तन से दोनो को थोडी राहत हुई और वो दोनो पहले एक दुसरे को देखते है फिर रज्जो पर नजर डालते है और वापस एक दुसरे को देख कर मन ही मन मुस्कुरा कर नजरे चुराने लगते है ,,,जैसे दोनो ने रज्जो के सवाल का जवाब पा लिया हो ।

रज्जो भी उनकी भावनाए भाप लेती है और आन्खे बडी करती हुई हसकर पीछे होने लगती है - नही नही ये नही हो सकता ,,,आप लोगो का दिमाग ठिकाने तो है ना

रज्जो के इस हरकत पर

कमलनाथ थोडी नैतिकता दिखाते हुए आगे बढता है कि वो रज्जो को समझाए कि जो वो सोच रही है वैसा कुछ नही है,,,मगर उसके पहले ही रज्जो हसकर कमरे से बाहर निकल गयी ।

रज्जो के जाते ही कमलनाथ हस कर - ये रज्जो भी ना कितनी पागल है हिहिही

राजन अभी भी हिचक रहा था और वो थुक गटक कर अप्र्त्क्ष्य रुप से अपनी बात कमलनाथ के साम्ने रखा - वो तो ठिक है भाईसाहब लेकिन भाभी जी का ये सोचना उचित नही है कि हम दोनो उनके साथ उस फिल्म जैसा कुछ करने का सोच रहे ।

राजन की बात पर कमलनाथ गदगद हो गया कि चलो कम मे कम राजन के मन मे उस मनमोहक पल का दृश्य को बैठ गया है बस उसकी भावनाओ पर काम करने की जरुरत है ।

कमलनाथ - हा भाई ये बात तो तुम्हारी ठिक है लेकिन अब क्या करे ,,,तुम ही बताओ । मुझे कुछ समझ ही नही आ रहा है ।

राजन थोडा गम्भीर होकर - ऐसा करते है पहले ये कैसेट निकाल कर इसको सुरक्षित रख देते है और फिर एकानत मे हम दोनो भाभी जी से बात करते है ।

राजन - क्योकि मै नही चाहता कि किसी गलतफहमी से हमारे सम्ब्न्धो मे दरार आये ।

कमलनाथ राजन की बातो से सहमत हुआ और उसे भी थोडा डर सा लगा कि कही वो और रज्जो सच मे जल्दीबाजी मे काम ना बिगाड़ दे ,,,पता नही राजन मन से किस मिजाज का आदमी है ।

खैर कमलनाथ ने उस कैसेट को निकाला और 2 3 हिन्दी फिल्मो की DVD निकाल कर वही टेबल पर रख दिया और बाकी का सामान वापस स्टोर रूम मे रख कर निचे खाना खाने के लिए चला गया ।

अब तक निचे अनुज और रमन भी दुकान से वापस आ गये थे ।

सारे लोग साथ मे बैठ कर खाना खा रहे थे । रज्जो और ममता ही खाना परोस रही थी ।

वही राजन थोडा हिचक मह्सूस करके कमलनाथ के सामने रज्जो से नजरे चुरा रहा था तो रज्जो ने मौका देख कर कमलनाथ को एक स्माइल पास की ।

हालांकि कमलनाथ भीतर से गदगद था लेकिन उसने अपनी मनोभावना को भीतर ही रहने दिया ।

वही डायनिंग टेबल पर अनुज के बगल मे बैथी पल्लवि एक हाथ से खाना खाते हुए दुसरे हाथ को निचे ले जाकर अनुज के जांघो पर घूमा रही थी मगर अनुज को बहुत डर सा लग रहा था क्योकि उसके बगल मे ही राजन बैठा हुआ था ।

तभी पल्लवि ने अपनी योजना के हिसाब से अनुज को बताने के बहाने रज्जो से पुछती है ।

पल्लवि - मामी !!!! वैसे कौन सी फिल्म दिखा रही हो हिहिहिही

पल्लवि की बात पर रज्जो कमलनाथ और राजन तीनो चौके और आपस मे एक दुसरे को देखा तो मौका देख कर रज्जो ने तंज कस्ते हुए बोला - अपने मामा से पुछ ले वही सब वयवस्था कर रहे है ।

रज्जो ने तंज से राजन और कमलनाथ आपस मे देखते है और मन ही मन सवाल जवाब देने लगते है कि रज्जो को मनाना ही पडेगा नही तो ना जाने कितने बम फोडेगी ये ।

पल्लवि - हा मामा सच मे ,,,तो बताओ ना कौन सी मूवी है

कमलनाथ खाना खाते हुए - वो अच्छी मूवी है हमारे समय की है , पसंद आयेगी

इधर पल्लवि के सम्वाद से अनुज समझ गया कि रात आज फिल्म वाला प्रोग्राम है लेकिन वो इस झमेले से बचना चाह रहा था मगर कैसे ???

थोडी देर बाद खाने का काम खतम हुआ और सारे लोग हाल मे एक्थ्था हुए

अनुज ने मौका देख कर - मै सोने जा रहा हू बहुत थकान सी लग रही है ।

अनुज के इस हरकत पर पल्लवि का पारा चढ़ गए और अगले ही पल वो मायुश हो गयी मगर वही सोनल ने ऐसा कुछ बोला कि पल्लवि का चेहरा फिर से खिल गया ।

सोनल अनुज को डाटते हुए - क्या करेगा सोके इतना तु,,,ना कोई काम धाम बस अकेले कमरो मे पडा रहता है । ये नही कि यहा आये है तो लोगो से बात करे , चार लोगो मे रहे

सोनल की डांट पर रज्जो उसे रोकती हुई - अरे क्यू डाट रही है इसे ,, चल अनुज तू भी देख लेना फिल्म और निद आये तो सोने आ जाना

अनुज ने हा मे सर हिलाया मगर उसे अपनी दीदी की डांट का असर हो गया था , आज तक ऐसे लहजे मे घर के किसी ने भी उस्से बात नही की थी कि क्यो वो अकेले रहता है और गुमसुम रहता है । हालकि अनुज ने खुद कभी अपनी इस स्थिति पर ध्यान नही दिया और उसकी दीदी के डांटने पर वो एक गम्भीर मसले को लेके सोच मे खोने लगा ।

इधर सारे लोग उपर के कमरे मे गये और बेड के सामने टीवी रखी हुई थी ।

चारो बच्चे बेड के निचे बैठ गये और पल्लवी ने मौका देख कर अनुज के बगल मे जगह बना की हालकी उसके दुसरी ओर सोनल थी ।

वही बेड पर दिवाल के कोने मे सिरहाने से टेक लगाये राजन पाव खोल कर एक फुल बनियान और पाजामे बैठा था और बेड के बिच मे रज्जो साडी पहने पैर पर पैर रख कर बैथी थी ।

वही ममता और कमलनाथ टीवी के पास फिल्म सेलेक्ट कर रहे थे और काफी सोच विचार के बाद ,,, ममता ने सदी के मशहूर महानायक अमिताभ बच्चन जी की फिल्म मर्द को चुना और उसे प्ले कर दिया ।

फिर कमलनाथ रेमोट लेके बेड की ओर आया और मौका देख कर रज्जो से राजन की ओर खिसकने को बोला

रज्जो पहले राजन को देखती है और फिर बिना कुछ बोले उसकी ओर खसक जाती है तो रज्जो के बगल मे कमलनाथ और फिर उसके बगल मे ममता बैठ जाती है ।

फिल्म शुरु हो चुकी ,,कमरे की बत्ती बंद थी बस टीवी की ही रौशनी से हल्का हल्का देखा जा सकता था ।

एक तरफ जहा उपर बेड पर चारो के मन मे हवस अब धीरे धीरे गुप्त रूप से घुसना शुरु कर दिया था ,,,वही बेड के निचे पल्लवि भी अनुज के चिपकने का मौका नही छोड रही थी ।

उसने तो पीछे से हाथ ले जाकर अनुज के कमर मे डाल दिया था ,,जिससे अनुज की हालत खराब थी । हालकी उसके बगल मे कोई नही था क्योकि वो दिवाल से सट कर बैठा था जिसका फायदा पल्लवि बखूबी उठा रही थी ।

वही सोनल और रमन आजू बाजू बैठ कर फिल्म देखते हुए कभी कभी अपने होने वाले पति पत्नीयो को मैसेज किये जा रहे थे ।

धीरे धीरे करीब आधा घंटा बिता और उपर बेड पर लगभग सभी की हाथे हरकत कर रही थी सिवाय राजन के क्योकि वो बस कमल्नाथ के सामने खुद की छवि धूमिल नही करना चाहता था मगर पाजामे के उपर से उसकी जांघो को सहलाते रज्जो के हाथ उसकी बेताबी बढा रहे थे ।

वही कमलनाथ अपना एक हाथ अपनी बहन ममता के कमर मे डाल कर उस्से चिपका हुआ था और वही ममता के हाथ कमलनाथ के लण्ड के उपरी सिरो को छू रहे थे ।

बेड के निचे पल्लवि के हाथो की हरकते काफी आगे बढ़ गयी थी ,,,वो अब तक अनुज के लण्ड पर नाजाने कितनी मरतबा हाथ घुमा चुकी थी और अनुज के हाथो को पकड कर अपनी जांघ पर रखवा दिया था मगर अनुज सोनल के डर से हाथ वापस खिच लेता था ।

इधर रात गहरी होने लगी , लगभग आधी से ज्यादा फिल्म खतम हो चुकी थी और सबसे पहले रमन और फिर सोनल सोने के लिए निकल गये । मगर जो सोने की जिद किये था वो अभी तक वही बैठा फिल्म के बहाने पल्लवि के मुलायम स्पर्श के मजे किये जा रहा था ।

इधर सोनल के जाते ही पल्लवि को मौका मिल गया और उसने तुरंत अप्ना हाथ अनुज के लोवर मे घुसा कर उसका खड़ा लण्ड थाम लिया

अनुज की हवा टाइट हो गयी कि पल्लवि ये सब कैसे कर सकती है ।

वही जब पल्लवि ने अपने हाथो का जादू जब अनुज के लण्ड पर चलने लगा तो वो मदहोश होने लगा और उसकी आंखे बंद होने लगी साथ ही एक मीठी सी सिस्क भरी आह्ह आने लगी जो टीवी के फुल आवाज पर दब गई थी ,,,मगर पल्लवि को अनुज के एक एक सास की खबर थी ।

मौका देख कर पल्लवि ने एक बार फिर अनुज का हाथ अपनी जांघ पर रखा और इस बार अनुज ने वापस नही हटाया बल्कि उसकी अंगुलिया लोवर के उपर से पल्लवि की जांघ पर भरसक ही हिलाने लगी थी ।

पल्लवि भी अनुज के स्पर्श से सिहर उठी और वो उसके आड़ो तक को छुने लगी ,,ये सब अनुज के लिए पहली बार था और वो गुदगुदी भी मह्सूस कर रहा था ,,,मगर उस्से कही ज्यादा वो उत्त्जीत हुआ जा रहा था ।

इधर इन दोनो का रोमांच चरम पर जाने को था कि फिल्म ही खतम हो गयी और वो लोग फौरन अलग हो गये ।

अनुज ने जैसे ही होश सम्भाला उसे समझ आया कि वो बेहोशी मे फिर से वही गलती दुहरा रहा था इसिलिए वो उठा और सोने का बोल कर निचे जाने लगा तो पल्लवि भी उसके पीछे चली गयी ।

वही उपर बेड पर बैठे चारो ने अपनी कमर तोड़ कर अन्गडाई ली और तब तक टीवी पर दुसरी फिलम चल पडी ।

ममता उबासी ली और बिस्तर से उतरते हुए - आह्ह मै जरा पानी लेके आती हू

फिर ममता निचे किचन की ओर चली गयी

ममता के कमरे से बाहर जाते ही रज्जो बोल पडी - मुझे आप लोगो से कुछ बाते करनी है

रज्जो की इस आग्रह पर कमलनाथ और राजन धक्क रहे गये और उन्हे पता था कि क्या बात करने वाली थी रज्जो ।

मगर फिर भी औपचारिकता के तौर पर कमलनाथ बोला - हा हा बोलो क्या बात है ।

रज्जो टीवी देखते हुए - देखीये आप लोग भी जान रहे है मै किस बारे मे बात कर रही हू ,,मगर आप लोग जो चाह रहे वो मै नही कर सकती ।

रज्जो की इस बात पर राजन और कमलनाथ आपस मे आंखे फैलाये देखते है और इस पर राजन जोकि सफाई देने की कोशिस करत है ।

राजन - लेकिन भाभी मेरी बात तो सुनिये ...

रज्जो राजन को टोकते हुए - मै समझ रही हू जीजाजी आप दोनो की बाते ,,मगर आप लोग भी समझिये ये सब मेरे लिए आसान नही है ।

कमलनाथ रज्जो के करीब होकर - ओह्ह तूम तो अपनी ही जिद की हो,,,एक बार हमारी बात भी तो समझने की कोसिस करो ।

रज्जो उदास होने के भाव मे - मै सब समझ रही हू रमन के पापा ,,,लेकिन एक आम औरत के लिए ये आसान नही है ।

रज्जो के वक्तव्य पर कमलनाथ और राजन एक दुसरे के सामने ऐसे दिखा रहे थे , मानो वो बहुत ही अजीब दुविधा मे थे कि रज्जो कितनी बडी गलतफहमी मे है ।

मगर अन्दर ही अन्दर दोनो जान रहे थे कि ये रज्जो की ही चाल है आपस मे मजे लेने के लिये ।

कमलनाथ फिर से दिखावे के तौर पर रज्जो की नासम्झी पर थोडा हस कर उसके कन्धे पर हाथ रखता हुआ - अरे मेरी जान ,,पहले

रज्जो कमलनाथ की बात काटते हुए - देखीये आप मेरे पति है और मै आपके लिए सब कुछ कर सकती हू और अगर आपकी इच्छा है कि मै जीजा जी के साथ वो सब ...... तो मेरी भी एक शर्त है

रज्जो के नये पैतरे से दोनो चौक गये और कमलनाथ हिचक कर - क क क्याआ

रज्जो अटकते हुए सर निचे करके - मेरी शर्त ये है कि वो मै इनके साथ एकान्त मे कर लुन्गी लेकिन आपके सामने नही ।

रज्जो की इस प्रतिक्रिया से दोनो जीजा साले की आन्खे चमक गयी मगर वो दोनो अपनी भावनाये मन मे दबाए खुद को बेबस दिखाते रहे ।

इतने मे ममता कमरे मे पानी लेके आ गयी और वो बातचित वही अटक गयी ।

जारी रहेगी
 
UPDATE 118

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE

अब तक की कहानी मे आप सभी ने पढा कि कैसे रज्जो ने अपने जाल मे कमलनाथ और राजन दोनो को फास लिया और अपने ही पति से किसी और से चुदने की परमिट भी लेली । वही पल्लवि ने भी रात के शो पर अनुज के गुप्तांगों से जमकर खेला और वो इसी तालाश मे आगे बढ़ चूकी थी ।

अब आगे

फिल्म खतम होते ही जैसे ही अनुज निचे आता है , पल्लवि भी उसके पीछे पीछे चल देती है और सीधा अनुज को लेके उसके कमरे मे घुस जाती है ।

अनुज पल्लवि की इस हरकत से सकपका जाता है - ये ये क्या कर रही हो तुम पल्लवि

पल्लवि मुस्कुरा कर - वही जो उपर बाकी रह गया था हिहिही

अनुज उपर कमरे मे उस ऊततेजक अहसास को वापस से याद कर रोमंचीत हो उठा और अटकते हुए - न न नही नही ये गलत है ,,हमे ये सब नही करना चाहिए

पल्लवि अब तक अनुज के सामने आ गई और उसका चेहरा अनुज के सामने था ,,,उसे फड़कते होठ अनुज के गर्म मुलायम होठो से जुड़ने को बेकरार हुए जा रहे थे

पल्लवि को ऐसे अचान्क अपने करीब पाकर अनुज के दिल की धडकनें तेज होने लगी ,,,उसे पल्लवि के जिस्म की खुश्बू ने खीचना शुरु कर दिया ,,,वो अपनी बातो को पुरा करने मे अटकने लगा और उसकी आंखे खुद बा खुद बंद होने और जैसे ही पल्लवि ने होठो ने अनुज के होठो को छुआ ।

अनुज पूरी तरह से काप उठा उसकी दिल की धड़कन बहुत तेज हो गयी और वो एक चित स्थिर हो गया था ।वही पल्लवि ने उसके होठो को अपनी पूरी हवस से चुसे जा रही थी ।

पल्लवि की प्यास बहुत बढ चुकी थी वो अपना जिस्म अनुज के बदन पर रगड़ने लगी और अपने हाथ को लोवर के उपर से ही अनुज के सर उठाते लण्ड पर रख कर उसे भी छेड़ने लगी ।

अनुज की हालात और भी खराब होने लगी ,,,हालांकि वो किस्स करने मे पल्लवि का साथ दे रहा था मगर अब भी उसे पल्लवि का ऐसे उसका छुना उसे एक ओर झिझक कर रहा था वही दुसरी ओर उसकी मुलायम छातियो का स्पर्श उसे पागल किये जा रहा था ।

इधर पल्लवि की तलब बढ चुकी थी वो खुद अनुज के हाथ अपनी जिस्मो पर रख कर उन्हे रगड़ने लगी । कभी अपनी कमर तो कभी मोटी कसी गाड तो कभी मुलायम चुचिया ।

अनुज ने भी अब अपना हाथ लगाना शुरु कर दिया क्योकि उसे भी पल्लवि के मुलायम जिस्म का स्पर्श बहुत ही उत्तेजक किये जा रहा था और उसके लिंग मे तनाव बढता ही जा रहा था ।

इधर पल्लवि बेहद जोश मे बक बकाये जा रही थी -उह्ह्ह अनुज उम्म्ं हा ऐसे ही और कस के पकड़ो ना मेरे दूध को उम्म्ं माआह्ह्ह अह्ह्ह सीईई अह्ह्ह्ह

अनुज बस चुपचाप बिना कोई प्रतिक्रिया के बस हाथो मे पीछे से टीशर्ट के उपर से पल्ल्वि की दोनो चुचिय मिजे जा रहा था और वही पल्लवि अपना एक हाथ पीछे किये अनुज का लण्ड लोवर के उपर से घिस रही थी ।

पल्लवि की तडप बढती ही जा रही थी जिससे अनुज भी जोश के साथ साथ चकित भी था कि क्या सच मे सेक्स मे लड़किया ऐसे ही व्यवहार करती है ।

पल्लवि के अनुज को कमरे के स्टूल पर ले गयी जो दिवाल से लगा था और उसे बिठा कर खुद उसके सामने से गोद मे बैठ गयी ।

और पहले अपना टीशर्ट और फिर दोनो साइड से ब्रा की स्ट्रिप सरका कर अपनी 34 साइज़ की चुचिय खोल दी ।।

अनुज का लण्ड इस न्जारे को देखकर ठुमका और वो आंखे फाडे बस पल्लवि की खुबसूरत गोल बडी चुचिया निहारे जा रहा था ।

पल्लवि ने बडी मदहोशि मे मुस्कुराते हुए अनुज के बालो मे हाथ फेरा और खुद को आगे कर अपनी चुचिया अनुज के मुह के पास ले गयी ।

अनुज को थोडा बहुत जो कुछ भी सेक्स के बारे मे मालूम था वो सब पल्लवि के साथ किये जा रहा था और उसने पल्लवि के चुचियो पर चूममी करना शुरु कर दिया ।

पल्लवि अनुज के गरम होठो का स्पर्श पाकर पागल होने लगी और अनुज का सर अपनी चुचियो मे दबाने लगी । ऐसे मे अनुज को मह्सूस हुआ कि उसे शायद पल्लवि के निप्प्ल को और और तेज चूसना चाहिये ।

फिर क्या अनुज ने पल्लवि के निप्प्ल को सुरकना शुरु कर दिया जिस्से पल्लवि का नशा दुगना हो गया ।

वो अपनी भड़ास अनुज के बाल को नोच कर और उसके सर को अपने चुचियो पर रगड़ कर निकालने लगी ।

और फिर उसने अनुज के सर को अपनी छाती से हटा के उसके होठो को चूसा और फौरन अनुज के पैरो मे बैठ कर उसका लोवर खोलने लगी ।

अनुज समझ रहा था कि पल्लवि आगे क्या करने वाली थी। वो अब उस नये अह्सास के लिए रोमांचित हुआ जा रहा था ।

एक तरफ जहा निचे ये सब चल रहा था वही उपर के कमरे मे सारे लोग वापस से अगली फिल्म देखने मे लग गये।

अभी रात के 10:30 बज रहे थे मगर चारो के उपर सेक्स की खुमारि चढ़ रही थी ।

फिल्म धीरे धीरे आगे बढ रही थी और सब्के हाथ धीरे धीरे वापस अपनी अपनी तय जगहो पर जा चुके थे ।

लेकिन अब किसी का भी मन फिल्मों मे था ही ,,,चारो की उत्तेजना बढ रही थी मगर चाह कर भी वो लोग अपनी दिल की नही कर पा रहे थे ।

इधर रज्जो की चुत कबसे पनियाइ जा रही थी और वही ममता भी कम गरम नही थी ।

दोनो के हाथ लंडो पर घिसे जा रहे थे ।

लेकिन काफी समय तक जब ममता को अपने भैया के साथ कोई बात बनती नहीं दिखी तो उसने अपने पति राजन से ही समागम करने की ठान ली ।

ममता अंगड़ाई लेते हुए - अह्ह्ह भैया मुझे तो नीद आ रही है ,,,मै सोने जा रही हू आप भी आ रहे है क्या

ममता राजन से पुछती है

राजन जो कि रज्जो से ही मजे लेना चाहता था और उसने मना करते हुए कहा- नही ममता तुम चलो ,,,मै अभी ये फिल्म देखकर आता ,काफी समय बाद कोई अच्छी फिल्म देख

रहा हू

राजन की प्रतिक्रिया पर ममता का मन उदास हो गया कि एक तो राजन अभी आयेगा नही और अब वो अपने भैया के लण्ड से भी नही खेल सकती ।

खैर वो अब क्या ही कर सकती थी चुप चाप उठी और निकल गयी अपने कमरे मे ।

इधर ममता के जाते ही रज्जो भी बिस्तर से उठने लगी ।

कमलनाथ चौक कर - अरे जान तुम कहा जा रही हो

रज्जो खुद को समान्य रखते हुए - वो मै जरा फ्रेश होकर आती हू

ये बोलकर रज्जो उठी और आल्मारि से एक दूपट्टा लेके बाथरूम मे चली गयी ।

इधर रज्जो के जाते ही राजन बोल पडा - भाईसाहब ये सब ठिक नही है,,,भाभी जी अनजाने मे क्या बोल गयी , हमे रोकना चाहिए उनको

कमलनाथ भी उदास होने के भाव मे - मै क्या बताऊ राजन ,,,तुम देख ही रहे हो वो हमारी बाते सुन ही कहा रही है ।

राजन - तो अब

कमलनाथ - पता नही यार ,,,

इतने मे बाथरूम से रज्जो की आवाज आती है ।

रज्जो - रमन के पापा जरा इधर आयेंगे क्या

कमलनाथ और राजन चौक कर बाथरूम की ओर देखते है जहा रज्जो बाथरूम से बाहर की ओर झाक रही होती है ।

कमलनाथ फौरन उठ कर बाथरूम मे घुस जाता है ,,,जहा रज्जो सिर्फ ब्रा और पेतिकोट मे थी ।

कमलनाथ - क्या हुआ

रज्जो इतरा कर मुस्कुराते हुए - जरा ये हुक खोल देंगे

कमलनाथ मुस्कुरा रज्जो के ब्रा का हुक खोलते हुए - तो मेरी जान से सारी प्लानिंग कर ही ली

रज्जो - हा लेकिन अभी इतना आसान भी नही है ,,,नंदोई जी बहुत झिझक मह्सूस कर रहे है

कमलनाथ - तो मतलब तुम ये उसकी झिझक कम करने का रास्ता निकाल रही हो हा

ये बोल कर कमलनाथ पीछे से रज्जो के झुलते चूचो को पकड लेता है ।

रज्जो कसमसा कर खिलखिलाते हुए आगे बढ़ जाती है ।

रज्जो - हो गया आपका काम अब जाईये मै आ रही हू ।

फिर कमलनाथ कमरे मे आकर एक किनारे बैठ जाता है और राजन को एक नजर देख कर मुस्कुराता है ।

थोडी देर बाद रज्जो बाथरूम से बाहर आती है और दोनो की नजरे रज्जो के उपर जाती है जो इस समय एक सूती ब्लाउज और पेतिकोट मे थी और उपर से उसने सीने पर सिफान का हल्का दुपट्टा ले रखा था जिसमे से उसकी ज्वानी के उभार साफ दिख रहे थे ।

रज्जो कमरे मे आते ही तुनकते हुए- मै ममता के पास सोने जा रही हू जी आप लोग भी फिल्म देख कर सो जायियेगा ।

रज्जो की बात पर राजन बोला - अरे नही नही भाभी जी आप आराम करिये ,,,मै चला जा रहा हू अपने कमरे मे

कमलनाथ - अरे भाई इतनी जगह है फिर भी तुम लोग परेशान हो ,,, और जान तुम यहा बिच मे सो जाओ ना

कमलनाथ- बेचारा राजन कहा बार बार फिल्म देखने आ रहा है ह्मारे साथ

रज्जो इतरा कर - नही नही मै आपकी चालाकी खुब समझ रही हू बिच मे लाने की ,,,मगर मैने जो कह दिया है बस उस्से अधिक उम्मिद ना कीजिएगा आप

रज्जो की बात पर राजन और कमलनाथ आपस मे देखते है और मुस्कुरा पडते है ।

कमलनाथ हस कर रज्जो को अपने पास लाता हुआ - तू भी ना रज्जो ,,,आ चल बैठ

फिर रज्जो बेड पर चढ़ कर उन दोनो के बिच मे आ जाती है ।

थोडी देर फिर चुप्पी रहती है और तीनो फिल्म देखने के बहाने कनअखियो से एक दुसरे पर नजर बनाये हुए थे ।

इधर कमलनाथ धीरे धीरे रज्जो के कमर मे हाथ डाल देता है और अभी सहलाना शुरु करता ही है कि

रज्जो - सुनिये आप जरा वो दरवाज बंद करके आईये

रज्जो की बात सुन कर कमलनाथ और राजन चौके क्योकि खुद कमलनाथ को भी नही उम्मीद थी कि रज्जो इतनी जल्दी ही शुरु करने वालीथी ।

कमलनाथ आवाक होकर उठा और दरवाजा बंद करने चला गया ।

इधर उपर एक नया रंगमच सेट हो रहा था तो वही निचे अनुज के कमरे मे सिस्कियो धुन सुगबूगाहत लेने लगी थी

क्योकि पल्लवि के मुह मे अनुज का लण्ड था जिसे वो बहुत ही हौले हौले से गिला कर रही थी ।

अनुज - उम्म्ंम्ं सीई उह्ह्ह्ह उम्म्ं पल्ल हहहह एईईई इह्ह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम्ं उफ्फ्फ

पल्लवि ने अनुज का लोवर अंडरवियर के साथ उसके घुटने के निचे कर रखा था और उसके जांघो को खोल कर उसका करीब 6 इन्च का लण्ड मुह मे भर रही थी ।

हालकि अब तक लिये लण्ड मे पल्लवि के लिए ये शायद सबसे छोटा लण्ड था मगर फिर भी उसकी उफनति जवानी की आग बुझाने के लिए काफी था ।

वही अनुज इस नये अह्सास से पागल हुआ जा रहा था

वही पल्लवि अनुज का लन्ड़ चुसते हुए एक हथेली की अपनी चुत पर सहलाए जा रही थी क्योकि उसे अब लण्ड की चाह थी अपनी चुत मे

फिर वो उथी और एक ही झटके मे अपना लोवर और ब्लूमर दोनो निकाल दी

पल्लवि अब पूरी नंगी थी ,,उसके चुत के आस पास के बाल चमक रहे थे

अनुज पल्लवि के इस हरकत से और भी उत्तेजित होने लगा और खुद अपना हाथ अपने लण्ड पर चलाते हुए उसकी चुत के आस पास का गोरा चिकना जगह देखने लगा ।

पल्ल्वी थोडा मुस्कुराई और अनुज को पकड कर बेड तक ले आई और बोली - कैसे करोगे

अनुज बिना कुछ बोले बस आन्खे फैला देता है ।

तो पल्लवि मुस्करा कर बेड पर लेट जाती है और उपर आने का इशारा करती है ।

अनुज अपना लण्ड हाथो मे थामे उसे सहलाता हुआ बेड पर चढ़ कर पल्लवि के जांघो के बिच आता है तो पल्लवि अपनी जान्घे खोल देती है जिससे उसकी चुत का गुलाबी सुराख अनुज को दिखने लगता है ।

पल्लवि आंखो से ही इशारा करके अनुज को आगे बढ़ने को कहती है तो अनुज अपनी सूझ और जितना भी ज्ञान था इस बारे मे उसे याद कर अपने मुह से थोडा लार लेके अपने सुपाडे के मुह पर लगाता है और थोडा सा लार पल्लवि चुत के छेद पर

अपनी चुत पर अनुज के हाथो का स्पर्श पाकर पल्लवि सिहर जाती है और कसमसा कर - उह्ह्ह अनुज डाल दो ना अब उम्म्ंम

अनुज एक नजर पल्लवि के तड़प भरे चेहरे को देखता है और फिर उसकी सास लेती चुचियो को देखता है और अपना लण्ड बडे सावधानी से उसकी चुत पर सेट करके हल्का सा ध्क्क्का देता है ।

शुरुवात मे अनुज के लण्ड की चमडी खीचने पे उसे थोडा दर्द होता है मगर अगले ही पल पल्लवि की खुली चुत मे धीरे धीरे उसका लण्ड उतरने लगता है ।

वही अपनी बुर मे लण्ड आता देख पल्लवि के चेहरे के भाव बदलने लगते है और वो चहक कर - उह्ह्ह अनुज पुरा डालो ना उम्म्ंम

ये बोल कर पल्लवि खुद अपनी कमर उचका कर अनुज का लण्ड लेने लगती है ।

वही अनुज भी पल्लवि के चुत की गरमी से मदहोश हुआ जा रहा था और वो अपने हिसाब से जैसा कि उसने अपने मुह्ल्ले और दोस्तो से सिखा था वैसे ही पहले हल्के हल्के और फिर थोडे तेज धक्के लगाने लगता है ।

पल्लवि को वो सारे आनन्द मिलने लगे जिसके लिये वो पिछले काफी दिनों से तरस रही थी ,,वो तो अनुज के शुरुआती धक्को मे ही एक बार झड़ गयी थी और अब मजे ले ले कर अनुज का लण्ड निचोड रही थी ,,,नतिजन अनुज ज्यादा समय तक खुद को रोक नही पाया

अनुज - अह्ह्ह पल्ल्बी ,,दर्द हो रहा है अह्ह्ह

पल्लवि समझ गयी कि अनुज का होने वाला है ।

पल्लवि जल्दीबाजी दिखाते हुए - निकालो अनुज उसे बाहर जल्दी

इधर अनुज ने पल्लवि के चुत के अपना लंड निकाला और वही पल्लवि उठा कर अनुज के पास आ गयी और वो भी घुटनो के बल होकर हाथो मे उस्का लण्ड लेके हिलाने लगी और अगले कुछ ही पलो ने अनुज तेज्ज अह्ह्हो के साथ पल्लवि के पेट और हथेली पर एक गाढी पिचकारी मारी और निढ़ाल होने लगा ।

आखिरी कुछ झतको तक अनुज थक कर पल्लवि के कंधो पर आ गया और फिर सरक बिस्तर पर लेट गया

वही पल्लवि अनुज की हालात देख कर खिलखिलाई और हाथ मे लगी गाढी मलाई को चाट कर वापस से झुक कर अनुज के लण्ड को निचोड कर छोड दिया और फिर उसके माथे पर एक चम्बन करते हुए उसे एक चादर से ढक कर अपने कपडे पहन कर चहकते हुए उसका दरवाजा बंद कर दिया और सोनल के कमरे का दरवाजा खोल कर सोने चली गयी ।

और अनुज वही थक कर सो गया ।

इधर निचे एक कमरे का दरवाजा खुल रहा था तो वही उपर कमलनाथ अपने कमरे का दरवाजा बंद करके वापस अपनी जगह पर आगया था ।

कमलनाथ - हा कर दिया अब कहो

ये बोल कर कमलनाथ रज्जो की जांघो को उसके पेतिकोट के उपर से सहलात है

रज्जो आंखे उठा कर कमलनाथ को देखती है - ये क्या कर रहे है आप ,,,मैने कहा ना मै सिर्फ़ एक ही लोग से

ये बोल के रज्जो कमलनाथ को उसका रेगता हाथ दिखाती है ।

राजन चुप चाप दोनो के बिच के संवादो को सुन कर एक अलग ही रोमांच मह्सूस कर रहा था ,,उसके दिल की धडकनें तेज थी अब भी ।

कमलनाथ बेशर्मो की तरह हस कर रज्जो के कन्धे पर हाथ रख कर उसे अपनी ओर खिचता है।

तो रज्जो कसमसा कर उससे छुटना चाहती है ,,जिसपर कमलनाथ और जोर लगाता है तो बदले मे रज्जो भी जोर लगा कर जैसे ही कमलनाथ का हाथ हटाती है वैसे ही उसका बैलेंस बिगड़ जाता है और वो राजन के उपर गिरने लगती है ।

वही राजन फौरन रज्जो को सम्भालता है - अरे अरे अरे भाभी सम्भाल के हिहिहिही

मगर तब्तक रज्जो उसकी गोद मे आ चुकी थी और उसका दुपट्टा उसके सीने से हट गया था और राजन की नजर रज्जो के सटी ब्लाउज से झांकते निप्प्लो पर जम जाती है।

थोडे समय के लिए सब कुछ थम सा जाता है कोई भी कोई प्रतिक्रिया नही देता है ,, और ना जाने राजन को क्या सुझता है वो धीरे से एक हाथ रज्जो के चुचियो पर रख देता है ।

जिसका स्पर्श पाकर रज्जो सिहर उठती है और वही कमलनाथ की आंखे चमक उठती है । वो अपना जान्घिये मे कसा लण्ड भीच लेता है ।

वही राजन को कुछ ख्याल आता है तो वो एक नजर कमलनाथ को देखता है तो वो मुस्कुरा कर आंखो से आगे बढ़ने की इजाजत देता है जिसके बाद राजन मुस्कुरा कर अपना हाथ रज्जो के बलाउज पर कसने लगता है और उसकी मोती चुचियो को अपने हाथो मे भरने लगता है ।

रज्जो बस आन्खे बंद किये सिस्कती है - सीई उम्म्ंमममं अह्ह्ह्ह

इधर कमलनाथ भी अपना हाथ आगे कर रज्जो के जांघो पर घुमाने लगता है और नजरे उठा कर एक बार रज्जो के चेहरे के भाव पढता है फिर मुस्करा कर राजन को देखता है ।जो अपना हाथ धीरे धीरे रज्जो के ब्लाउज मे के जाने की कोशिस मे था ।

मगर ब्लाउज कसा होने से वो सफल ना हुआ और उसने धीरे से उपर के एक हुक को खोला तो रज्जो की सासे भारी होने लगी ।

रज्जो अपने दोनो हाथो से राजन का हाथ रोक लेती है और बंद आँखों से ही तेज सासे लेते हुए - न्हीई जीजा जीईई उम्म्ंम्ं

इसपर कमलनाथ लपक कर रज्जो का एक हाथ पकड कर उठाता है जिसे रज्जो बिना किसी विरोध के हटा लेती है और दुसरा हाथ खुद राजन हटाता है और मुस्कुराते हुए कमलनाथ को देखता है ।

फिर वापस से रज्जो के ब्लाऊज के हुक खोलने लगता है और एक एक करके सारे हुक खोलते ही रज्जो की चुची दोनो तरफ फैल जाती है ।

राजन थुक गटक कर रज्जो की सास लेती चुचियो को देखता है और उसका लण्ड अकडने लगता है ।

फिर वो धीरे से अपना हाथ से एक चुची को पकड कर हल्का सा सहलात है

रज्जो - उम्म्ंम्ं जिजाआअजीईई अह्ह्ह

इधर राजन अपनी हथेली को रज्जो के मुलायम चुचो पर घुमा रहा था वही कमलनाथ भी अपना लण्ड भीचते हुए रज्जो की मासल जांघो को पेतिकोट के अन्दर हाथ डाल कर दबोच रहा था।

फिर कमलनाथ ने रज्जो के हाथ को थाम कर खीचा और उसे अपनी ओर चेहरा करके बिठा दिया और वही राजन मुस्कुरा कर पीछे से रज्जो का ब्लाउज उतारने लगा ,,,जिसका रज्जो थोडा भी विरोध नही की बस शब्दो मे ही ना नुकुर की और देखते ही देखते रज्जो उपर से पूरी नंगी हो चुकी थी ।

उसकी तेज सासो से उसकी चुचिया उपर निचे हो रही थी और तभी राजन के उसके नंगे गुदाज कंधो को थाम कर उसे बिस्तर का टेक करके सीधा कर दिया ।

फिर कमलनाथ और राजन दोनो रज्जो के करीब आकर आपस मे देखते है और उसकी एक एक चुची को थाम कर हल्का सा उसकी खडे निप्प्ल पर अपनी हथेलियों को घुमाते है जिससे रज्जो काप उठती है ।

रज्जो - उम्म्ंम्म्ं सीईई अह्ह्ह्ह रमन के पापाआआह्ह्ह उम्म्ंम्ं

फिर दोनो ने अपने हथेलियों की पकड को रज्जो की चुचियो पर मजबूत करते हुए सहलाना शुरु किया ।

रज्जो नशे मे डूबी जा रही थी और बस आह्हो मे असहमति दिखा रही थी ।

थोडे देर तक रज्जो के चुची के साथ खेलने के बाद कमलनाथ ने रज्जो का हाथ उठा कर अपनी जांघिये के उपर खडे हुए लण्ड पर रखा उसे दबाया जिससे उसके लिंग मे खुन का संचार और तेज हो गया और रज्जो के हाथो का स्पर्श कमलनाथ को और भी रोमांचित कर दिया ,,,नतिजन वो रज्जो की चुची को जोर से मसलते हुए उसके गरदन को चूमने लगा ।

वही राजन अब भी उसी मुद्रा मे दोनो मिया बीवी की बढती प्यास को देख कर उत्तेजित मह्सूस कर रहा था और रज्जो के चुचियो पर वो भी अपने पन्जे को कसने लगा ।

इधर रज्जो ने जब देखा कि राजन आगे नही बढ रहा है और हिचक मह्सूस कर रहा है तो वो खुद अप्ना हाथ उसके पाजामे के उपर रख कर उसका लण्ड मसलने लगती है ।

राजन को जैसे ही अपने लण्ड पर रज्जो के हाथो का स्पर्श मह्सूस होता है वो उत्तेजना स्वरुप उसके हाथ को पकड कर अपने लण्ड कर रगड़ने लगता है तो मौका देखकर रज्जो सिस्कती है ।

रज्जो - अह्ह्ह जिजाआजीई न्हीईई उम्म्ंम्ं उह्ह्ह

रज्जो की प्रतिकिया पर कमलनाथ फौरन आंखे खोलकर राजन की ओर देखता है तो उसे लगता है कि राजन ने भी उसकी तरह ही रज्जो का अपने लण्ड पर ले गया और वो उससे और भी ज्यादा उत्तेजित होता है

फिर झुक कर रज्जो के निप्प्ल पर मुह लगा देता है ।

रज्जो चिहुक कर अपने कन्धे झटकने लगती है और वही कमलनाथ कनअखियो से राजन को देखता है और इशारे से पास बुलाता है ।

राजन मानो इसी की ताख मे था और वो भी फौरन झुक कर रज्जो की दुसरी चुची मे मुह लगा देता है ।

रज्जो अपनी दोनो चुचियो पर एक साथ हमले से पागल होने लगती है ,,उसे ऐसी उत्तेजना आजतक नही मह्सूस हुई थी ।

वो अपने दोनो हाथो उन दोनो से सर पर ले जाकर उन्हे अपनी छाती पर दबाने लगती है और प्रतिक्रिया स्वरुप दोनो उसकी चुचियो को और तीव्रता से चूसने लगते है ।

रज्जो - उम्म्ंम सीई उह्ह्ह्ह अराम्म्ंं से रमन केपापा हहह उह्ह्ह्ह धीरे करो न जिजाआजीईई अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ उम्म्ंम्ं

रज्जो की पाजिटिव प्रतिक्रिया पाकर दोनो की उत्तेजना और बढ गयी और उनके हाथ रज्जो की जांघो पर रेंगने लगे।

धीरे धीरे रज्जो की निप्प्ल की चुसाई जारी रखे हुए उसकी पेतिकोट जांघो तक उठ चुकी थी और दोनो के हाथ दोनो तरफ रज्जो की मोटी मुलायम जांघो को सहला रहे थे और उपर की ओर बढे ही जा रहे थे ।

रज्जो की चुत उस स्पर्श का अनुभव पाते ही और भी पानी छोड़ने लगी ।

तभी कमलनाथ ने अपना हाथ रज्जो की जांघ से हटाते हुए उसकी कमर से उसकी पेतिकोट का नाड़ा खोला दिया और पेतिकोट सिमट कर रज्जो के चुत के आसपास ही रह गयी ,,,फिर भी उसकी चुत ढकी हुई थी ।

इधर कमलनाथ खड़ा हुआ और उस ने अपनी बनियान निकालते हुए रज्जो के सामने आ गया ।

बेड पर हलचल होने से रज्जो ने अपनी आंखे खोली तो सामने जांघिये मे कमलनाथ का तना हुआ लण्ड दिखा ।

उसने सिस्कते हुए बडी कामुकता से एक हाथ को अपने पति के जांघो से सहलाते हुए उसके लण्ड को जान्घिये के उपर से पकड ली ।

फिर कमल्नाथ ने अपना जांघिया ढिला किया और अगले ही पल वो उसके पैरो मे था और उसका मोटा काला लण्ड फुकार मारता रज्जो के सामने

रज्जो मधोश होकर आंखे बन्द किये एक बार अपने पति का लण्ड सुँघा और फिर उसके आड़ो को छुते हुए मुह खोलकर आधा लण्ड मुह मे भर लिया

इधर राजन की नजर बराबर दोनो मिया बीवी की हरकतो पर बनी थी तो उस्ने भी आगे बढते हुए अप्ने हाथ को आगे रज्जो की गीली चुत तक ले और अपनी उन्गिलीयो से उसकी चुत के दाने को कुरेदने लगा ।

जिससे रज्जो की सासे अटक गयी और कमलनाथ उसके मुह ने रुक गया ,,,,और जब राजन का उसकी बुर पर हल्का हल्का स्पर्श उसे नशे मे ले जाने लगा तो वो वापस अपने पति का लण्ड मुह मे लेने लगी ।

इधर राजन मौके का फाय्दा लेके भर भर रज्जो की चुचिया चुस्ते हुए अपनी ऊँगली को उसकी चुत के गरम गहराईयो मे ले जाने लगा ,,, जिसपर रज्जो अपनी चुत के छल्ले को कस कर अपनी प्रतिक्रिया भी दिये जा रही थी ।

इधर कमलनाथ को जब लगा कि उसका लण्ड अब चुदाई लायाक प्रयाप्त गिला हो चुका है तो उसने अप्ना लण्ड बाहर निकाल कर बेड से उतरा और रज्जो की टांग खिच कर उसकी जांघो को खोलते हुए एक झटके में अपना लण्ड उसकी चुत मे हचाक से उतार देता है ।

राजन मुस्कुराते हुए वही बैठा हुआ कमलनाथ की हवस और उसकी बेताबी देख रहा था ।

इधर कमलनाथ ने बहुत ही जोश मे ताबड़तोड़ धक्के रज्जो की चुत मे मारे जा रहा था

रज्जो - अह्ह्ह उम्म्ंम उम्म ओह्ह्ह आह्ह रमन के पापा ओह्ह्ह मजा आ रहा है ऐसे ही उम्म्ंम और तेज्ज्ज उम्म्ंं

कमलनाथ रज्जो की आंखो मे देखते हुए - क्या मेरी जान,,,क्या और तेज्ज्ज्ज अह्ह्ह्ह बोल ना ।

रज्जो एक नजर आंखे उठा कर राजन को देखती है और शर्मा कर मुस्कुराने लगती है ।

कमलनाथ जोकी अब पूरी तरह से सेक्स के नशे मे डुबा हुआ था वो रज्जो के चुत मे धक्के लगाते हुए हस्कर बोला - अरे राजन लग रहा है तुमको कपड़ो मे देख कर मेरी जान शर्मा रही है ,,,हिहिहिहीर

राजन कमलनाथ की बात पर मुस्कुरा उठा और अपना बनियान निकालते हुए अपने घुटनो के बल खड़ा हुआ और अपना पाजामा जांघिये के साथ ही निकाल दिया ।

कमलनाथ ने राजन को नंगा देखकर रज्जो को चोदते हुए - अह्ह्ह देखो ना मेरी जान,,,अब वो भी हमारी तरह हो गया ,,अब बोलो ना

रज्जो मुस्कुरा कर वापस अपनी चुत मे झटके खाते हुए और सिस्कते हुए नजरे उपर करती है तो इस बार राजन नंगा होकर अपना लण्ड सहलाते हुए बैठा था ।

रज्जो वाप्स से शर्मा कर बिना कोई प्रतिक्रिया के मुस्कुराने लगती है ।

जिससे कमलनाथ अपने धक्के की गति धीमी कर देता है तो रज्जो सिस्क्ते हुए - उम्म्ं क्या हुआ मेरे राजा अह्ह्ह करो नउन्मममं प्लीज अह्ह्ह

ये बोलकर रज्जो अपनी चुत के दाने को सहलाते हुए खुद कमर उच्काने लगती है ।

कमलनाथ मुस्कुरा कर एक जोर का धक्का लगाते हुए अपना लण्ड रज्जो की चुत की गहराइयों मे ले जाता हुआ - क्या करु बोलो ना मेरी जान

रज्जो उस धक्के से बहुत ही चरम बहुत करती है लेकिन वो क्षणिक ही था और वाप्स से उसकी बेताबी बढ जाती है

रज्जो सिस्क कर - उम्म्ंम चोदो ना मुझे अह्ह्ह कसके अह्ह्ह प्लीज उम्म्ंम

कमलनाथ मुस्कुरा कर रज्जो के चुत मे लण्ड की घुमाता है और उससे कबूल्वाता है - कैसे चोदू मेरी जान को

रज्जो इस सवाल का जवाब जान्ती थी लेकिन राजन के सामने बोलने से कतरा रही थी ।

कमलनाथ वापस से अपना लण्ड उसके चुत मे जड तक ले जाता है और वापस से पुछता है - बोलो ना मेरी जान,,क्यू राजन के सामने शर्म आ रही है क्या

रज्जो मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाया

तो कमलनाथ हस कर - भाइ राजन कुछ करो ,,ये तो शर्मा रही है ।

राजन इसी मौके की तालाश मे था कि कब उसका बुलावा आये और वो फौरन उठ कर रज्जो के सर बगल मे घुटनो के बल खड़ा हो जाता है और उसका लण्ड आदोसहीत वही झूल रहा होता है ।

राजन अपने हाथ रज्जो की चुची पर ले जाते हुए - क्या हुआ भाभी जी बोल दो ना जो भाईसाहब सुनना चाहते है

रज्जो राजन के हाथो का स्पर्श और उसका आग्रह सुन कर आंखे बंद कर आहे भरने लगी ।

इधर कमलनाथ वापस से एक जोर का धक्का लगाते हुए - बोलो ना मेरी जान कैसे चोदू

रज्जो इस बार सिस्क कर - उम्म्ंम अपनी रन्डी की तरह मेरे राजा अह्ह्ह्ह उम्म्ंम

रज्जो के इस वक्तव्य से राजन भी जोश मे आगय

और कमलनाथ पुरे जोश मे आकर तेजी से थपा थपाक की आवाज के साथ रज्जो को पेलने लगा जिससे रज्जो अब खुल कर प्रतिक्रिया देने लगी ।

रज्जो - अह्ह्ह मेरे राजाआअह्ह्ह ऐसे ही चोदो मुझे उह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं और चोदो मुझे ,,,उम्म्ंम्ं जिजाअह्ह जीईई उम्म्ं सीईई

रज्जो राजन के हाथ को पकड कर अपनी चुचियो पर मलने लगी ।

राजन रज्जो के हरकत से और जोश मे आ गया और रज्जो के करीब आकर घुटनो के बल बैठ गया और अपना लण्ड रज्जो के मुह के करिब कर लिया ।

रज्जो ने जब अपने आस पास लण्ड की खुशबू मह्सूस की तो उसने आंखे खोली तो उसे अपनी नाक के उपर ही राजन का लण्ड तना दिखा और वो मुस्कुरा कर एक नजर राजन को अपना लण्ड सहलाते देखती है और खुद अपना एक हाथ उसके झुलते आड़ो पर रख कर उन्हे सहलाने लगति है ।

इधर कमलनाथ रज्जो के इस हरकत पर बहुत खुश हो जाता है और जोश मे रज्जो की एक टांग को कन्धे पर रख तेजी से लण्ड सटासट उसकी चुत मे पेलने लगता है ।

रज्जो भी अपने पति के लण्ड के झतको से हिली जा रही थी और राजन का लंड कभी उसकी नाक तो कभी उसके होठो पर रगड़ खा रहा था ।

रज्जो ने अब अपने होठ खोल दिये और जीभ निकाल कर वैसे ही धक्के खाते हुए राजन के लण्ड के निचले हिस्सो को छूने लगी ।

राजन रज्जो के अदाओ से पागल सा होने लगा ,,उसे अपनी लण्ड की निचली नसो पर रज्जो की घिस्ती जीभ बहुत उत्तेजित किये जा रही थी ,,,प्रतिक्रिया स्वरुप वो रज्जो ने निप्प्ल को भिच्ने लगा और अपनी कमर को सही करते हुए लण्ड को रज्जो के खुले मुह मे साइड से घुसेड़ दिया ,,,जिसे रज्जो ने तुरंत होठो से जकड़ लिया ।

अब रज्जो राजन का आधा लण्ड मुह मे भरे गुउउउऊगऊऊ करते हुए अपने पति के तेज धक्को को अपनी चुत मे खाये जा रही थी ।

वही राजन ने जोश मे आकर रज्जो के सर को पकड कर अपनी ओर करके मुह मे लण्ड पेलना शुरु कर दिया

और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजन ने पहली बार अपनी भावना जाहिर की

राजन - अह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम ओह्ह्ह क्या मस्त चुस रही हो आप उम्म्ंम्म्ं

कमलनाथ रज्जो की चुत मे पेलता हुआ - क्यू भाई राजन अदला-बदली करोगे क्या हिहिहिही

कमलनाथ की बात राजन ने कुछ और सोचा मगर अगले ही पल कमलनाथ बोला - अरे जगह की बात कर रहा हू भाई हिहिही

राजन भी हस कर अपना लण्ड रज्जो की मुह से बाहर निकालता हुआ - हा क्यू नही ,,,अगर आपकी इजाजत हो तो

कमलनाथ अपने धक्को की रफतार कम करता हुआ - अरे घर की बात है भई मिल बाट कर खाने मे ही मजा है

ये बोल कर कमलनाथ पीछे हट गया और वही बगल मे बैठ गया ।

राजन ने वही बेड पर घुटनो के बल खड़ा होकर रज्जो को अपनी ओर खीचा और रज्जो की जांघो को खोलता हुआ

राजन - क्यू भाभी जी आपको कोई ऐतराज तो नही

रज्जो थोदा शर्म कर मुस्कराते हुए - आप लोगो ने अपनी वाली कर ली तो पुछ क्यू रहे है ,,करिये जो मन है

रज्जो की प्रतिक्रया पर राजन रज्जो के चुत के उपर हाथ फेरता हुआ - ओह्ह मतलब मै जो चाहू कर सकता हुआ हम्म्म

रज्जो राजन के हाथ को अपनी चुत पर रेंगता पाकर सिस्कते हुए - उम्म्ंम्ं आह्ह कर लो ना जिजाअजीई उम्सीई अह्ह्ह्ह

राजन वापस कबूलवाते हुए अपना लण्ड रज्जो की चुत मे मुहाने पर घिसता हुआ - अह्ह्ह भाभी जी आपकी चुत बहुत मुलायम है ओह्ह्ह

कमलनाथ वही बगल मे बैठा अपना लण्ड सहलात हुआ - अरे अन्दर और भी मुलायम है ,,एक बार घुस कर तो देखो

अपने पति के मुह से ऐसी बाते सुन कर रज्जो बहुत उत्तेजित मह्सूस करने लगी ।

राजन अपना सुपाडा खोलकर उसे रज्जो के चुत के दाने पर घिस्ता हुआ - क्यू भाभी सच कह रहे है क्या भाईसाहब

रज्जो अपनी चुत पर राजन के लण्ड का सख्त अह्सास पाकर नशे मे डूबी जा रही थी और सिस्कते हुए - अह्ह्ह आअप खुद हीई देखहह लो नाआह्ह जिजाआआज्ज्जीईई उम्म्ंम

रज्जो की रजा मन्दी मिलते ही राजन बिना एक पल के देरी के एक जोर के झटके के साथ हचाक से एक ही बार अपना लण्ड उसकी खुली हुई चुत मे घुसेड़ दिया ,,जिससे रज्जो की चिख निकल कर रह आगयी

रज्जो - अह्ह्ह्ह जिजाआजीईई उम्ह्ह्ह्ह माआ मर गयीईई उम्म्ंम्ं अह्ह्ह

राजन वापस से लण्ड को पीछे लेकर एक और धक्का मारता हुआ - उम्म्ंम क्या हुआ भाभी ज्यादा तेज तो नही लगा ना

रज्जो थोडा मुस्कुराइ और थोडा कसमसाइ- उम्म्ं नही जिजाअजीई पेलो ना अब रुके क्यू हो अह्ह्ह अह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह

राजन ने भी अब अपना दम अपने साले और उसकी बीवी को दिखाने लगा ,,,

वही कमलनाथ भी राजन द्वारा अपनी चुद्ती देख बहुत ही उत्साहित था और कुछ नये विचार उसके मन मे जगह ब्नाने लगे थे ,,जिनहे वो आज रात ही रूप देने की सोच रहा था ।

ये सोच वो उठ कर अपनी चुदती हुई बीवी के बगल मे गया और उसके कान मे कुछ बोला ,,जिसे सुन कर रज्जो की सांसे भारी होने लगी ।

राजन को समझ नही आया कि क्या हुआ तो वो अपने धक्के की रफतार धीमी करने लगा

कमलनाथ रज्जो की रजामंडी पाते ही मुस्कुरा कर - भाई राजन अगर तुमको आपत्ति ना तो क्या कुछ नया आजमाना चाहोगे

राजन अपने धक्के रोकता हुआ मुस्कुरा कर लेकिन संसय के भाव मे - कुछ नया ,,मतलब मै समझा नही

फिर वो रज्जो को देखा जो शर्मा भी मुस्कान लिये उसे ही देखे जा रही थी ।

कमलनाथ - जानू आओ ना जरा

फिर रज्जो राजन को इशारे से उठने को कहती है और राजन चुपचाप अपना लण्ड उसकी चुत ने निकाल कर खड़ा हुआ ।

रज्जो तुरंत बेड से उठ कर निचे खड़ी हुई और कमलनाथ ने उसे अपनी बाहो मे भरते हुए उसके होठ चूसकर उससे अलग हुआ ।

कमलनाथ मुस्कुरा कर - अरे भई राजन वहा क्यू हो ,,यहा आओ ना तुम भी

राजन को कुछ समझ नही आ रहा था वो मुस्कुराता हुआ निचे आया और रज्जो के पीछे थोडा दुर खड़ा हुआ ।

फिर कमलनाथ ने रज्जो को इशारा किया तो रज्जो ने अपने हाथो का हाथ बनाते हुए कमलनाथ के गले मे डाल दिया और अप्नी एक टांग उठा कर बेड पर रख दिया । जिस्से रज्जो को गाड खुल कर राजन के सामने आ गयी ।

अब राजन को सारा खेल समझ आ गया औए उसका लण्ड वाप्स से कसने लगा

कमलनाथ राजन से मुस्कुरा कर - भाई अब देखते रहोगे या ...हिहिहिजी

राजन थोडा शर्माया और अपना लण्ड सहलात हुआ रज्जो के करीब आया और फिर ढेर सारा थुक अपने लण्ड के सुपाडे पर लगाया और फिर थोड़ा से रज्जो के गाड़ के सुराख पे लगा कर उसके छेद को टटोलते हुए अपना लण्ड उसके गाड के मुहाने पर लगा दिया ।

रज्जो ने जैसे ही अपनी गाड की सुराख पर राजन का कड़ा लण्ड मह्सूस किया उसकी सासे तेज हो गयी और अगले ही पल वो थोडा दर्द से तड्पी क्योकि राजन ने अपना आधा लण्ड उसकी गाड मे घुसेड़ दिया ।

रज्जो - अह्ह्ह उह्ह्ह अराआम्म्ंं से उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह

राजन बिना रुके वाप्स से लगातर दो तिन हल्के धक्के लगा कर पुरा लण्ड रज्जो की गाड़ मे भर दिया

रज्जो अब लंबी लम्बी सासे ले रही थी ,,और थोडा मीठा दर्द भी ना मगर अपने पति के सामने उसके जीजा से चुदवाने का मजा ही अलग था ।

राजन ने अब रज्जो के कूल्हो को थामते हुए धक्के लगाना शुरु कर दिया औ रज्जो ने अपनी सिसकिया चालू कर दी।

वही कमलनाथ भी पीछे कहा था वो भी रज्जो को थामे अपने हाथो से खुद रज्जो की गाड़ को फैला कर पकडे हुए था और अपनी बीवी की गाड चुदवा रहा था ।

धीरे धीरे धक्के नोर्मल होने लगे और रज्जो की सिसकिया फीकी होने लगी तो कमलनाथ का मजा कम होने लगा ,,ऐसे मे कमलनाथ ने कुछ सोचा

कमलनाथ - भई राजन जरा अपनी भाभी को सम्भालोगे

राजन रज्जो की कमर को थाम कर उसका भार अपने उपर लेता हुआ - आह्ह हा क्यू नही

इधर रज्जो भी समझ गयी कि आगे क्या होने वाला है मगर राजन इन सब से अन्जान था वो लगातार रज्जो की ढीली हो चुकी गाड़ मे धक्का मारे जा रहा था ,,,

इधर कमलनाथ ने भी अपना मोहरा सेट किया और थोडा सा थुक अपने लण्ड पर लगाते हुए झुक कर अपना लण्ड रज्जो की चुत के मुहाने पर रखा ,,जिससे अचानक से रज्जो की सिसकिया तेज हो गयी और राजन को समझ नही आया

तभी राजन को रज्जो की तेज दर्द भरी आहो के साथ अपने लण्ड के निचले हिस्से मे कुछ घर्षण मह्सूस हुआ और वो समझ गया कि कमलनाथ ने भी अपना लण्ड रज्जो की चुत मे डाल दिया है ।

जिससे वो भी जोश मे आ गया और वाप्स से अपने लण्ड मे एक नया जोश अनुभव किया और धक्को मे ताकत डाल दी ।

रज्जो - अह्ह्ह अराम्ं से जिजाअह्ह्ह जीई उम्म्ं ओह्ह अह्ह्ह

कमलनाथ अपना लण्ड रज्जो की चुत मे घुसेड़ता हुआ - ओह्ह्ह अब यही तो असली मजा आया है मेरी जान,,,, राजन भाई रुकना मत

ये बोलकर कमलनाथ भी अपने धक्के तेज करने लगा

रज्जो की हालत बहुत खराब होने लगी। वही राजन और कमलनाथ अपनी धक्को मे लय बना कर पेले जा रहे थे

रज्जो - ओह्ह्ह माआ मर गयीइज उह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह अह्ह्ह मेरे राजा उह्ह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है ओह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम मै झड़ रही हूउउऊ उम्म्ंम और पेलो मुझे उन्मममं

कमलनाथ अपने लण्ड को कड़ा करता हुआ अपने दाँत पिसता हुआ रज्जो की चुत मे लम्बा लम्बा शॉट लगाता हुआ - क्यू जान मजा आ रहा है ना दो दो लण्ड से चुदने मे अह्ह्ह बोल ना मेरी रन्डी हुउऊ

रज्जो अपनी गाड और चुत मे दोहरे लण्ड की थ्पेड़ सहते हुए - उम्म्ंम आह्ह हा मेरे राजा बहुत ज्यादा ओह्ह्ह सीई और पेलो मुझे उम्म्ंम्ं अह्ह्ह

राजन जो कि काफी समय से रज्जो की गाड़ मार रहा था वो अपने चरम पर पहुचने लगा था वही कमलनाथ भी रज्जो से कामुक वक्तव्यो पर बाते करके भी एक दम से झडने के करीब था ,,

राजन - ओह्ह्ह भाईसाहब मेरा होने वाला है

कमलनाथ - हा राजन मेरा भी उम्म्ंम

रज्जो सिस्ककर - अन्दर नही प्लीज अंदर नही अह्ह्ह उह्ह्ह

रज्जो के बात पर दोनो ने आंखे खोली और अपना अपना लण्ड धक्को को धिमा करते हुए लण्ड बाहर निकाल लिया उसे हिलाने लगे ।

वही रज्जो की एक जांघ अकड गयी थी वो लडखड़ा कर खड़ी हो पा रही थी ।

कमलनाथ तेजी से अपना लण्ड हिलाते हुए - अह्ह्ह आओ न जान जल्दी उह्ह्ह

रज्जो अपनी मेहनत का एक भी बूंद जाया नही करना चाहती थी ,,इसिलिए वो दर्द सहते हुए भी अपने घुटनो के बल बडी मुश्किल मे बैठी और दोनो के आड़ो को छूने लगी ।

राजन और कमलनाथ पहले से ही चरम पर थे और अपना लण्ड हिलाये जा रहे थे । जैसे ही उन्हे रज्जो के हाथो का कोमल अह्सास अपने आड़ो पर मह्सूस हुआ उन्होने अपने सुपाडो से दबाब हटा दिया

राजन - अह्ह्ह भाभीई जीई अह्ह्ह अह्ह्ह

कमलनाथ भी अपना लण्ड हिलात हुआ एडीओ के बल होता हुआ - अह्ह्ह मेरी जान उह्ह्ह अह्ह्ह

दोनो ने लगभग एक सेकेंड के अंतराल पर पिचकारी छोड़ी जो रज्जो के मुह पर गिरी और आखिरी बूद निकलने तक अपना लण्ड हिलाते रहे ।

रज्जो सारा माल चाट गयि और दोनो के लण्ड को अच्छे से चुस कर निचोड़ा मगर दोनो के लण्ड मे अब भी तनाव था और वो तीनो एक दुसरेको देख कर मुस्कुराये जा रहे थे ।

जारी रहेगी
 
मेरे सभी सजीव और गुप्त पाठको को होली की हार्दिक शुभकामनाएं

आप सभी हसी खुशी इस त्योहार का मजा ले और फोरम मे भी खुशिया बाटे ।

🎉 HAPPY HOLI 🎉




 
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