Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 21 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 131

पिछले अपडेट मे आपने पढा कि कैसे एक ओर राज निशा के साथ मिल कर अनुज और राहुल की जासूसी शुरु कर दी है वही दुसरी ओर सोनल के साथ मिल निशा की चुदाई भी की । देखते है आगे क्या होता है ।

राज की जुबानी

निशा और सोनल की चुदाई के बाद मै वापस दुकान पर निकल गया और वहा थोडा उलझन मे ही रहा कि आगे क्या किया जाये ताकि कोई छिपी हुई बात सामने आये ।

काफी सोचने के बाद मैने तय किया क्यू ना इन दोनो का टेस्ट लू और इनदोनो को हिन्दी incest sex story पढवा के इनकी प्रतिकिया देखू ।

मगर कैसे?? कुछ जोरदार विचार लाना पडेगा तभी ये प्लान काम करेगा ।

कुछ सोचने के बाद मुझे एक आइडिया आया और मै मुस्कुरा कर अपने काम मे लग गया ।

शाम को अनुज रोज की तरह घूमने गया और जब वापस आने का समय हुआ तो मै उसका इन्तेजार करने लगा ।

इधर जैसे ही वो वापस आता दिखा मै दुकान के पिछले कमरे मे कान पर फोन लगाये झुटमुट की बात करने लगा ।

अनुज जैसे ही दुकान मे घुसा मुझे फोन पर बात करते हुए पीछे के कमरे मे जाते देखा और मै जानबुझ कर ऐसे बात कर रहा था कि मानो मै किसी से बहस कर रहा हू ताकि अनुज मेरे बातो पर ध्यान दे और हुआ भी वही ।

मै फोन पर - यार तु समझता क्यो नही है ,,रात मे अनुज भी मोबाइल चलाता है और कही उसने वो कहानिया पढ ली तो

मै - हा हा ठिक है ,, हा उस लिंक को मैने बुकमार्क करके रखा है । ठिक है कल तू उसे ले लेना फिर मै उसे डिलीट कर दूँगा

मै थोडा चुप होकर - हा लेकिन तु तो जानता ही है ना कैसी कैसी कहानिया है उसमे अगर कही अनुज ने देख ली तो वो यही समझेगा ना की मै ये सब पढता हू ,,, हा ठिक है रख बाय

मेरे बाय बोलने पर अनुज वापस कमरे से हटकर दुकान के गल्ले पर आगया ।

मै दुकान मे आया तो ऐसे दिखाया कि मानो मेरी कोई चोरी पकड़ी गयी हो ।

अनुज भी मेरे चेहरे के भावो को पढने की कोसिस कर रहा था ।

इधर कुछ ग्राहक आ गये तो हम दोनो दुकान मे व्यस्त हो गये

रात को खाने के बाद मैने एक हिन्दी सेक्स स्टोरी की साइट को बुकमार्क कर दिया ,,जिसमे सिर्फ शॉर्ट हिन्दी सेक्स कहानिया थी ।

शार्ट कहानिया मैने इसलिये चुनी ताकी रात मे अनुज एक से ज्यादा कहानिया पढ सके ।

फिर मैने उसको मोबाईल दे दिया और मम्मी पापा के पास चला गया ।

अगली सुबह जब अनुज ने मुझे मोबाइल वापस किया तो मै बिना चेक किये दुकान आया और फिर यहा चेक किया तो देखा कि कल रात अनुज ने एक भी सेक्स वीडियो नही देखी थी और history मे सब शॉर्ट हिन्दी सेक्स कहानियो के है ।

उसने काफी सारी पारिवारिक कहानियो को भी खोला था ।

खास कर "चचेरि बहन से चुदाई" के काफी सारे पेज खोले गये थे ।

मै समझ गया कि उसने ये कहानि अच्छे से पढी थी ।

फिर एक "जीजा साली की चुदाई" कहानी के काफी सारे पेज खुले थे । "मौसेरी बहन के साथ चुदाई" के भी कुछ पेज उसने पढे थे ।

हालाकी उसने "मा के साथ चुदाई ", "सगी मा को पेला" जैसे पेज भी खोले थे मगर उन कहानियो के सिंगल पेज ही खुले थे । मतलब साफ था कि अनुज ने इन्हे इग्नोर कर दिया था । उसे सगे रिश्तो मे कोई दिलचस्पी नही थी ।

मै सारी history पढ कर खुश हुआ और समझ गया कि आगे क्या करना है ।

मैने तूरन्त उस कहानी की साइट की सारी हिस्ट्री और बुकमार्क डिलीट कर दी ।

क्योकि असली टेस्ट अनुज अभी होना था । अगर वो आज रात को वापस से सेक्स कहानिया खोजगा तो मतलब साफ है कि उसे इनसब मे रुचि है ।

अगले दिन की सुबह मैने फिर से मोबाइल चेक किया तो मेरा अनुमान सही निकला ,,अनुज ने रात मे वही सेक्स कहानिया पढ रहा है । जिसमे चचेरि बहन की चुदाई की कहानीयो के आगे की कड़ीया थी ।

अनुज का रुझान मै समझा गया और ऐसे ही दो रात मैने उसको मोबाईल देके उसकी आदत बढाई । बीते चार दिनो मे अनुज ने सिवाय सेक्स कहानियो के कुछ नही खोला और तो और वो शाम के समय राहुल से चार दिनो से मिलने भी नही गया वो मन लगा कर दुकान मे काम करता और हर समय मेरे फरमान की राह देखता । मै समझ कि इसे जो चाहिये आसानी ने मिल जा रहा है । तो मैने योजना आगे बधाई

फिर अग्ली दो रातो के लिए मैने अनुज को मोबाइल नही दिया । उसकी बेचैनी साफ नजर आ रही थी पुरे एक हफ्ते बाद शाम को अनुज ने घूमने जाने की बात की ।

मै जान गया कि मेरा तीर निशाने पर लगा है ,,,अनुज को उन रोचक कहानियो की चस्क लग गयी है और वो अब राहुल से निशा का मोबाईल जरुर मागेगा ।

इधर अनुज जैसे ही दुकान से गया मैने फौरन निशा को फोन लगा कर सारी बात उसे समझाई और कहा कि अगर आज राहुल मोबाईल मागे दे देना ।

निशा ने मेरे भरोसे हा कर दी ।

शाम को जब अनुज वापस आया तो वो खुश नजर आ रहा था । उसने आज मोबाईल के लिये भी नही कहा मुझसे ।मतलब साफ था कि उसने वो चीजे राहुल से शेयर कर दी है और अब राहुल रात मे भी वो साइट खोल कर कहानिया जरुर पढेगा ।

अगले दिन मैने निशा को दुकान पर बुलाया कि वो कोई बहाना करके आये और मुझे मोबाइल दिखाये ।

दोपहर को जब अनुज खाना खाने के लिए चौराहे पर गया तो मैने निशा को आने को कहा और थोडे समय बाद वो मेरे दुकान पर आ गयी ।

मैने उसके मोबाइल मे ब्राऊजर खोला तो देखा कि सेम वही साइट राहुल ने रात मे खोला था लेकिन उसकी मंशाए अनुज से विपरीत थी । उसने ज्यादातर सगी मा बहन के साथ सेक्स वाली कहानिया पढी थी । अब मै सब क्लियर समझ गया ।

निशा मुझे सोच मे देख कर - क्या हुआ राज बोलो

मै मुस्कुरा कर - अब क्या बोलू मेरी जानेमन तेरे आशिको की लिस्ट लम्बी हो रही है हिहिहिही

निशा अचरज से - मतलब

मै - मतलब ये कि राहुल और अनुज दोनो ने तुम्हे अपनी कल्पनाओ ने भोगना शुरु कर दिया है । मगर ये बात उन्होंने आपस मे छिपा रखी कि वो तुमसे सेक्स करना चाहते है ।

निशा चौकी - क्या ???? त त तु तू तुम इतने यकीन से कैसे कह सकते हो ,,मेरा राहुल ऐसा नही है । वो क्यू मेरे बारे मे ऐसा कुछ सोचेगा

मैने निशा को राहुल की पढी हुई सारी कहानीयो की हिस्ट्री दिखाई और फिर अनुज की भी ।

निशा को अब भी संसय था - हा लेकिन ये कैसे होगा ,,,वो दोनो छोटे है मुझसे

मै हस कर - हिहिही वैसे छोटा तो मै भी हू तुमसे दीदी

निशा हस दी - धत्त तुम्हारी बात अलग है लेकिन खुद के सगे भाई से ,,मतलब कैसे ??

मै - देखो जो सच था वो मैने तुम्हे बता दिया है,,अब अगर तुम्हे यकीन ना हो तो आज रात भी मोबाईल देदो राहुल को और उसपे नजर रखो ।

निशा - हम्म्म ठिक है तो मै आज ये करके रहूँगी ।

फिर निशा वापस घर चली गयी और मै अपने कामो मे लग गया ।


लेखक की जुबानी

इधर जबसे निशा को राहुल और अनुज की सच्चाई पता चली थी वो काफी परेशान थी । उसे समझ नही आ रहा था कि कब राहुल ने उसे इस नजर से देखना शुरु कर दिया ।

निशा अपने कमरे मे सोफे पर बैठी हुई थी । पंखे की हवा भी उसके तन और मन की ज्वाला को शांत नही कर पा रही थी ।

उसका सर दर्द से फटा जा रहा था इसिलिए उसने तय किया कि वो पहले जाकर नहा ले कुछ खा ले फिर शायद इसका कोई उपाय खोज निकालने मे मदद हो ।

निशा ने अपने कपडे लिये और उपर चली गयी ।

आधे घंटे तक शॉवर मे नहाने के बाद उसे थोडा आराम हुआ और वो कपडे बदल कर सीढियो से निचे आ रही थी कि राहुल उसके कमरे से भागता हुआ बाहर गया ।

निशा को पता नही क्या सुझा और वो भाग कर कमरे मे गयी । उसने अपना मोबाइल चेक किया तो समझ गयी कि वो जब नहा रही थी तो राहुल ने उसके मोबाइल पर वापस से सेक्स कहानिया पढी और जैसे ही उसे मेरे आने की आहट मिली वो बन्द करके भाग गया ।

निशा मन मे - आखिर इसमे ऐसा है क्या कि वो इसे पढने के लिए उतावला है । हालकि मैने भी राज के साथ सेक्स किया है लेकिन इतनी भी दिवानगी नही हुई मुझे ।

निशा ने वही खड़े उसी कहानी को खोला जिसे अभी राहुल छोड कर गया था ।

निशा ने दरवाजा बंद किया और उसने कहानी पढनी शुरु की ।

वो एक मध्यम वर्गीय परिवार की कहानी थी । जिसमे चार लोग रहते थे ।


हीरो - अमर , बडी बहन - रेखा , मा और पापा

स्कूल कालेजो और मुहल्ले के दोस्तो से कुछ सेक्स जानकारिया पाकर हीरो का सेक्स के लिए झुकाव बढने लगा था , मगर अपने शर्मिले स्वभाव के कारण हीरो की कभी कोई लड़की दोस्त नही बन पाई । वही उसकी दीदी उसकी अच्छी दोस्त थी और हसी मजाक मे उसको उसकी होने वाली गर्लफ्रेंड को लेके बहुत तंग करती थी । जिससे अमर चिढ़ कर रेखा के साथ मस्ती भरी नोक्झोक और लड़ाईया करता रहता ।

वही रेखा भी अब बडी हो चुकी थी तो आम परिवारो की तरह अब उस पर भी ज्यादा बाहर आने जाने पर रोक होती थी । उसके भी कोई ज्यादा दोस्त नही थे तो घर मे अमर को परेशान करने मे कोई कसर नही छोडती थी ।

समय बदला और अमर के लण्ड की गर्मी ने उसे ऐसी संगत में फसा दिया जहा से उसकी लाइफ बदल गयी ।

उसने अपने दोस्त के घर पर कुछ ऐसा देख लिया था जिससे उसका झुकाव भी उसकी दीदी की ओर होने लगा । अब वो रेखा को एक हुस्न की मल्लिका के तौर पर देखता था ।

धिरे धिरे समय के साथ अमर ने रेखा के साथ मस्ती मजाक मे फलर्टींग शुरु कर दी। कभी कभी रेखा को अच्छा मह्सूस होता तो कभी कभी उसे शक होता कि अचानक से अमर मे ये बदलाव क्यू आ गये । मगर रेखा के साथ अमर का रिश्ता कुछ दोसताना जैसा था तो उसे लगता था कि ये सब नोर्मल ही है । क्योकि अक्सर वो भो अमर को परेशान करती ही रहती थी ।

धीरे धीरे रेखा उसकी भी आदी हो गयी और उसे अमर से अपनी तारिफ सुनना अच्छा लगने लगा । कभी कभी अमर रेखा के बाल बनाता तो हाथो मे मेहन्दी रखने के बहाने उसे छूना चाहता । कभी कभी मालिश के बहाने उसके कन्धे और गले को छुता ।


यहा तक कि वो रेखा के लिए कपडे पसंद करने लगा , उस्के जिस्मो को अच्छे से निहार सके इसके लिये वो उसे बार बार साड़ी पहनने के लिए कहता । जिससे उसे रेखा के नंगी कमर पेट और ब्लाऊज मे कसे चुचो के उभार दिख जाते । साड़ी मे रेखा का कुल्हा भी उभर कर सामने आता था ।

फिर वो तस्वीरो के बहाने रेखा से कुछ मॉडर्न पोज देने को कहता । ऐसे माहौल मे अमर को अक्सर मौका मिल जाता था कि वो रेखा के कपड़े सही करने के बहाने उसे छू पाये और उसे सेक्सी हॉट जैसे शब्दो से उसकी तारिफ कर पाये ।

कयी मौको पर उसने रेखा को खुले बालो मे रहने को कहता और चोरी छिपे रेखा को अपनी जीन्स पहनने को देखा । फिर उनकी भी तस्वीरे निकालता ।

हर रात अमर रेखा के नाम से मूठ मारता था और दिन भर की तडप निकाल देता था ।

वही रेखा भी समय के साथ अमर की आदी हो गयी थी हर चिज़ के लिए उसे अमर का उसपे क्या रियेक्शन होगा ये जानना जरुरी था ।

समय के साथ वो भी अमर की ओर आकर्षित होने लगी थी क्योकि जब कभी अमर घर नही होता वो बेचैन परेशान होती और उसके साथ की हुई मस्तिया याद करती और अनायास वो अपने जिस्मो को सहलाने लगती मानो अभी अमर उसे छू लेगा ।

कभी वो मुस्कुराती तो कभी वो परेशान हो जाती कि ऐसा क्यू हो रहा है । आखिरकार जब उसे समझ आया कि वो अमर से प्रेम करने लगी है ती नेट पर इस रिश्ते को लेके उचित अनुचित जानना चाहा । उसे नेट पर भाईबहन के रिश्ते को लेके काफी सारी कहानीया मिली जिसने उसके जीवन मे कुछ बदलाव लाये और उसकी जिस्मानी ऊर्जा बेकाबू होने लगी ।

वो खुद से अमर के करीब जाने लगी । उसका लण्ड देखने के लिए कभी उसके अंडरवियर गायब कर देती और पुरा दिन अमर परेशान होकर सिर्फ लोवर मे होता फिर मौका पाकर रेखा उसका लोवर खिच देती ,,,फिर उसका मोटा लण्ड देख कर हस्ती ।

अमर भी अब इस बात को समझने लगा था तो उसने अपने दीदी की ब्रा गायब करनी शुरु कर दी जिससे रेखा के चुचे पुरे दिन हिलते थे और रेखा भी समझती थी कि ये अमर का ही काम है ।

अब रेखा ने अपने कपड़ो पर ध्यान देना छोड दिया था और वो अक्सर अमर को अपना जिस्म दिखाने के लिए कुछ ना कुछ तीगड़म लगाती रह्ती थी ।

ऐसे ही एक दिन उसने खुद से साड़ी पहनने और फ़ोटो निकलवाने की योजना बनाई और उस दिन उसने बहुत ही बोल्ड फ़ोटो दिये

अमर की हालात उस दिन बहुत खराब थी बिना अंडरवियर के लोवर मे उसका लण्ड तना हुआ था औ रेखा की नजर उसपे बराबर थी ।

उस दिन रेखा जान बुझ कर फ़ोटो निकलवाते समय अमर के लण्ड पर अपने जान्घे और पिछवाडा स्पर्श करवाति रही और जब वो कपडे बदलने के लिए कमरे मे गयी तो अमर भाग कर बाथरूम मे गया ।

रेखा के पास यही एकलौता मौका था अमर को रंगे हाथ पकड कर उस्से अपनी मनमानी करवाने का ।

वो भी उसके पीछे बाथरूम मे गयी और उसने जो आवाजे सुनी वो बहुत ही सुख्द थी ।

अमर रेखा का नाम लेके झड़ रहा था और रेखा बाथरूम के बाहर से सब सुन कर बिना ब्रा वाली ब्लाऊज के उपर से अपनी 32 साइज़ की चुचिया मसल रही थी ।

मगर रेखा ने खुद को सम्भाला क्योकि वो अभी जल्दीबाजी नही चाहती थी और वो अमर के साथ मस्तीया करना चाहती थी । इसिलिए उसने अमर को बाहर से आवाज दी - कमीने अपनी होने वाली गर्लफ्रेंड को भी याद कर ले ,,कब तक मेरे भरोसे रहेगा हिहिहिही

वो संवाद उन दोनो भाइयो के जीवन को बदलने वाले थे ।


क्योकि अमर और रेखा आमने सामने होने वाले थे ।

निशा ने एक एक करके अब तक की लिखी हुई कहानी के सारे अध्याय पढ लिये और कहानी पूरी ना पाकर उसकी बेचैनी बढने लगी । कि आखिर उस बाथरूम वाली घटना के बाद अमर और रेखा के जीवन मे क्या बदलाव आयेगा होगा । अमर अब कैसे रेखा का सामना करेगा ? क्या इसके बाद रेखा अमर से वो सब करेगी लेकिन कैसे ?? इस कहानी का आगे का भाग कब आयेगा ?

निशा - ओह्ह ये कहानी सच मे बहुत दिलचस्प है किसी को भी ललचा सकती है और बेताब कर सकती है । वैसे इसका लेखक DREAMBOY40 बहुत ही अच्छा लिखता है । कब आएगा अगला अपडेट

निशा परेशान होकर बिस्तर पर लेट गयी ,,उसकी चुत तो कहानी पढने से ही कबसे पनियायी जा रही थी कि तभी उसके दिमाग मे एक विचार कौंधा - क्यू ना इस कहानी मे रेखा ने जो अपने भाई अमर के साथ किया वो मै राहुल के साथ करके देखू । क्या सच मे वो मुझे उस नजर से देखता भी है या बस उसकी रुचि कहानीयो तक ही सिमित है ।

कहानी पढते हुए निशा को पता ही नही चला कि कब चार घन्टे बीत गये

इधर अनुज शाम को टहलने के लिए राहुल को लिवाने आ गया था ।

हाल मे चहल पहल सुन कर वो दुपट्टा लेके बाहर आई और उसके हाथ मे मोबाइल भी था ।

जैसे ही वो बाहर आई राहुल और अनुज दोनो ने एक साथ आहट की ओर ध्यान दिया तो सामने निशा खड़ी थी ।

राहुल खिखी करता हुआ - दीदी वो मोबाइल देदो हिहिही

निशा मन मे - जैसी इसकी बन्दरो वाली हरकते है लगता नहीं हैं कि ये मेरे बारे मे कुछ ऐसा वैसा सोचता होगा ।

निशा अनुज को देखकर( मन मे) - हा ये अनुज बहुत शांत रहता है पता नही इसके मन मे क्या चल रहा होगा ? देखो देखो कैसे निहार रहा है कमीना ।

निशा राहुल को मोबाईल देते हुए - हा लो ,,,लेकिन मेरा डाटा खतम मत करना

राहुल खिखी करके हस्ता हुआ मोबाइल ले लिया - हीहीह्ही ठिक है

निशा को उसकी हरकतो पर हसी आई - बन्दर कही का

फिर वो दोनो घर से निकल कर उसी पुलिया पर गये ।

दोनो भले ही निशा को पाने के लिए परेशान थे मगर दोनो ने अपनी भावनाये छिपाए रखी थी ।यहा तक कि शाम मे जब वो मिलते तो भी वो ऐडल्टरी/रोमांस कहानिया ही पढते जहा ज्यादा से ज्यादा जीजा साली , वाइफ और प्रेमिका के साथ , प्रेमिका की सहेली के साथ वाले सेक्स होते थे ।

जी तो दोनो का करता था कि अपनी अपनी कहानियो के बारे मे एक दुसरे को बता दे और फिर साथ मिलकर मजे से पढे । मगर दोनो के मन मे डर था ।

लेकिन इनसब से अलग राहुल का आत्मविश्वास अनुज के मुकाबले ज्यादा था तो वो बातो ही बातो मे अप्रत्यक्ष रूप से अनुज के साथ incest कहानियो को लेके चर्चा कर ही देता था ।

दरअसल वो भी अनुज का इन कहानीयो को लेके उसकी दिलचस्पी जानना चाहता था ।

राहुल - यार पता है कल रात मे दिदी ने मुझे मोबाइल दिया था तो क्या मस्त कहानी पढी मैने

अनुज की आंखे चमकी - कौन सी भाई बोल ना

राहुल अनुज को टटोलने के अंदाज से - वो कहानी तो मुझे कुछ पसन्द नही आई लेकिन उसमे हीरो कैसे हीरोइन को फसाता है वो बहुत दिलचस्प था ।

अनुज की उत्सुकता बढ़ी - अरे भाई बता ना कौन सी थी ।

राहुल - नही नही तु वो पढ़ेगा ही नही

अनुज - अरे बताओ तब ना

राहुल ने फिर वो कहानी खोली जिसे वो कल रात मे पढ रहा था "बडी बहन के साथ चुदाई का सफ़र "

अनुज ने जैसे ही वो शीर्षक पढा उस्की आंखे फैल गयी और वो सोचने लगा कि राहुल अगर ये कहानी पढ रहा है तो वो पक्का निशा दीदी को चोदना चाहता है ।

राहुल अनुज को सोच मे डुबा देख कर - क्या हुआ बोल ना

अनुज - भाई , कही तु निशा दीदी को ...।

राहुल की आंखे फैल गयी मानो उसकी चोरी पकड़ी गयी ।

राहुल हिचकता हुआ - अररे नही यारर ये ये ये तो बस कहानी है बे । तु ये कैसे सोच सकता है कि मै निशा दीदी को ....।

अनुज राहुल को अटकता देख समझ गया कि उसका अंदेशा सही है - चल चल अब मुझसे ना छिपा । तेरे चेहरे से साफ पता चल रहा है कि तेरे मन मे क्या है ।

राहुल अब जजबाती होने लगा - द द देख अनुज अब ये ज्यादा हो रहा है । तु ये कैसे बोल सकता है ।

अनुज जैसा भी था उसने अपने भाई राज के साथ अच्छा खासा समई बिताया था ,,उसे थोडा बहुत ज्ञान हो ही गया था कि कब किस्से कुछ उगलवाना है ।

अनुज ने राहुल का मजा लेना शुरु कर दिया ताकी वो भड़ास मे सच्चाई उगल दे -हिहिही चल चल रहने दे । जो तेरे बस का नही है तो मेरे पर रोब दिखा रहा है । तू चाहेगा भी तो निशा दीदी तुझे भाव क्यू देगी । हहाहाहाहाआ

राहुल पहले से ही डरा हुआ और जजबातो से घिरा था ऐसे मे अनुज का उससे मजा लेना उसके ईगो को सहा नही गया और हुआ वही जो अनुज चाहता था । राहुल ने कबूल कर ही लिया ।

राहुल आवेश मे - तु क्या मुझे अनाडी समझता है ,, मै तो अब तक इस बात को टाल रहा था लेकिन अब देख मै कैसे निशा दीदी को चोद के दिखाऊँगा

अनुज हस कर - चल रहने दे तेरे बस का नही है तु बस निशा दीदी को देख कर हिला सकता है हिहिहिहिही

राहुल - ठिक है अब तु देखना मै कया करता हू

अनुज - अरे मुझे क्या पता तु सही बतायेगा या झूठ

राहुल - सच झूठ का फैसला तु खुद करेगा ,,जब मै खुद चोद कर दिदी को तुझे भी दिलवा दूँगा

अनुज का दिल गदगद तो हुआ मगर वो अपनी भावनाये छिपाता हुआ - अरे तु कर ले पहले हिहिहिही

दोनो की बहस जारी रही और वो अपने घर वापस आ गये ।

इधर अनुज अपनी दुकान पर आ गया ।

वही राहुल अपने घर जाकर काफी सोच विचार करने लगा क्योकि अब उसका दिमाग थोडा शांत था । उसे समझ नही आ रहा था कि उसने अनुज को बता कर सही किया की नही और उपर से दीदी को उससे चुदवाने के लिए भी कह दिया ।

राहुल मन मे - क्यू ना मै भी उस कहानी के जैसे ही दीदी के साथ विहेव करू क्या पता बात बन ही जाये क्योकि उस कहानी मे और मेरी कहानी मे काफी ज्यादा समानताए भी है ।

राहुल ने कुछ तय किया और निशा के पास जो किचन मे खाने की तैयारी कर रही थी ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 132


पिछले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा राज ने निशा को अनुज और राहुल की चाहतो के बारे मे बताया । वही दुसरी ओर अनुज ने राहुल को चैलेंज कर दिया कि निशा को चोद के दिखाये ।

राहुल ने अनुज की चुनौती को स्वीकार तो लिया है लेकिन क्या वो इसमे कामयाब हो पायेगा ।

अब आगे



लेखक की जुबानी


काफी सोच विचार के बाद राहुल ने तय किया कि वो उसी कहानी के हिसाब से निशा दीदी से नजदीकिया बढाएगा ।

फिर वो अपने कमरे मे गया जहा उसने अपने अंडरवियर निकाले और सिर्फ लोवर पहन कर किचने की ओर चल दिया जहा निशा और उसकी मा शालिनी खाना बना रही थी ।

राहुल किचन के दरवाजे पर आकर अन्दर निशा को काम करते देखा । उसकी नजरे प्लाजो मे कसी हुई निशा के उभरी हुई चुतड के पाटो पर थी ।

राहुल ने आंख बंद की और एक गहरी सास लेते हुए अपना लण्ड से लोवर को नुकीला करता हुआ निशा के बगल मे आकर अपना लण्ड का सिरा बडी हिम्मत के साथ निशा के जांघ पर टच करवाता है ।

निशा ऐसे अचानक से राहुल को अपने पास आकर खड़ा देखी तो चौकी फिर उसे राहुल मुस्कुराता और हल्का हल्का हिल्ता नजर आया ।

निशा ने जैसे ही नजर निचे की उसकी आंखे बडी हो गयी क्योकि राहुल अपने लण्ड को लोवर के अन्दर से उसकी जांघ के पास घिस रहा था ।

निशा तुरंत उस्से दुर हुई और बोली - ला दे मेरा मोबाइल

राहुल खिखी हसा - हिहिही लो दीदी ऐण्ड थैंक यू

ये बोलते हुए राहुल निशा के गालो चूम कर भाग गया

निशा को ये बिल्कुल भी पसन्द न्ही आया और चीखी -चीईई बन्दर कही का ,,,मम्मी देखो ना राहुल ने क्या किया ।

राहुल किचन के बाहर हस रहा था

शलिनी - अरे क्या हुआ ? अब तुम दोनो का झगड़ा फिर से शुरु हो गया । क्या किया उसने ?

निशा अपने गाल पोछते हुए - देखो ना ये मेरे गाल पर चुम्मी करके गया ,,,बन्दर कही का

राहुल हस्ता हुआ - अरे मैने तो मोबाइल देने के लिए थैंकयू बोला मम्मी बस

फिर राहुल बाहर भाग गया कि कही उसकी मा उसे डांट ना लगा दे ।

शलिनी हस कर - अरे तो इसमे क्या हुआ । भाई है तेरा और वैसे भी तुने कम चुम्मिया ली है क्या उसकी छोटे पर हिहिहिही

निशा खीझ कर - मम्मी वो बचपन की बात थी , अब वो गैन्डे के जैसे बड़ा हो गया है ।

शालिनी - ओह्हो तु क्या इस बहस मे लगी हुई है भई,,,जल्दी से सब्जी काट मुझे खाना ब्नाना है । तू और तेरा भाई बाद मे समझ लेना

निशा अपनी मा से कोई बहस नही करना चाहती थी और वो बस मन मे बुदबुदाइ - इसको तो मै अच्छे से सबक सिखाऊन्गी ।

निशा मन मे- राज सही कह रहा था । मुझे चोदना चाहता है ना ,,,ऐसा परेशान करूंगी कि लन्ड अकड कर रह जायेगा उसका

फिर निशा ये सोच कर खिस्स से हस पडी कि क्या होगा जब राहुल का लण्ड की गर्मी से खुब परेशान हो जायेगा और उसे शान्ति नही मिलेगी । दिनभर खड़ा लण्ड लेके घूमेगा हिहिहिही





राज की जुबानी



शाम को अनुज वापस आया और वो काफी खुश लग रहा था तो

मै - क्या हुआ छोटे बहुत खुश लग रहा है ,,,कोई लड़की लाईन दी क्या तुझे हिहिहिही

अनुज शर्मा कर हस्ता हुआ - हिहिहिही नही भैया ,,वो बस ऐसे ही

मै उसे टटोलता हुआ - नही नही देख रहा हुआ आजकल बड़ा मुस्कुराता रहता है तू । हम्म्म्म किसकी याद आ रही है हा , पल्लवि की

अनुज पल्लवि का नाम सुन कर चौका - न न नही तो ,,उसको क्यू याद करुंगा मै

मै हस कर - क्यू वो अच्छी नही लगती क्या तुझे ,,भई मुझे तो बडी मस्त लगी हिहिहिही

अनुज थोडा रुक कर -हा मतलब ठिक ठाक है लेकिन ऐसी भी नही कि याद की जाये हिहिहिही

मै समझ गया कि अनुज कितना चालाक हो गया है कि किस बात को कैसे टाला जाये । बडी सफाई से उसने खुद को बचा लिया और पल्लवि के बारे मे कोई बात ही आगे नही बढने दी ।

मै - ओह्ह लग रहा है कोई और मिल गयी है क्यो छोटे उस्ताद

अनुज हस कर - नही भैया कोई और कैसे .....।

अनुज की आवाज अटक गयी क्योकि दुकान पर एक मस्त जवाँ भरे जिस्मो वाली लडकी सूट सलवार मे आई थी।

मै अनुज की प्रतिक्रिया देख कर मुस्कुरा दिया और सम्झ गया कि लौंडे को बडी चुचिया कितनी पसन्द है ।

मैने उसे चेताया और ग्राहक को समान देने को कहा ।

पहले के मुकाबले अनुज का आत्मविश्वास बदल चुका था ।

मौसी के यहा से आने के बाद इधर हाल ही के दिनो मे अनुज मे जबरदस्त बदलाव मह्सूस किये मैने ।

अब वो हसिन लड़कीयो को देख कर नजरे नही चुराता था बल्कि उनसे नजरे मिला उनके सामानो को घुर कर उन्हे ही शर्मीन्दा कर देता था ।

उस लड़की के जाने के बाद अनुज ने मेरी ओर देखा तो मुझे खुद को घुरता पाया और जैसे ही वो मुझे देखा तो मैने उस लड़की को लेके आंखो से इशारे किया और हस दिया ।

अनुज शर्म से लाल हो गया और हस्ता हुआ - क्या भैया ,मेरे से बहुत बडी है वो

मै हस कर - हा लेकिन तेरा ध्यान तो बडी चीज़ो पर ही रह रहा है हिहिहिही

अनुज शर्म से लाल हो गया और बात बदलते हुए - अच्छा भैया आज भी मोबाईल दोगे ना

मै - अच्छा ठिक है ले लेना । लेकिन तु देखता क्या है , मेरा डाटा खतम ही नही होता ।

अनुज थोडा सकपकाया और कुछ सोच कर - वो भैया मै यूट्यूब से फिल्म देखता हुआ तो वहा नेट कम खर्च होता है ।

मै समझ गया कि ये अब वो पहले वाला भोला अनुज नही रह गया है ये इत्नी आसानी से पाले मे नही आयेगा कुछ और करना ही पडेगा ।

फिर मै दुकान के कामो मे लग गया

रात मे वही रूटीन ।



लेखक की जुबानी


इधर राज तो अपने रोज के काम मे लग गया लेकिन वही निशा परेशान थी ।

क्योकि राहुल अब उसे परेशान करने लगा था । हालाकि निशा सब समझ रही थी कि राहुल क्यू कर रहा है । दिल के एक कोने से वो राहुल की बेवकूफी पर खुश भी होती लेकिन इस बात से परेशान भी होती कि कैसे वो राहुल के साथ इन सब के लिये खुद को राजी करेगी । उसे राहुल की फिकर भी थी ।

रात मे खाने के दौरान भी राहुल का चहकपना जारी रहा । हालाकि पहले भी राहुल निशा को परेशान करता था लेकिन इतना नही कि कोई उसे डाट दे ।

आज खाने के समय राहुल निशा को चिढा रहा था तो उसकी मा ने उसे डाट लगा दी । इस पर निशा के कलेजे को राहत हुई और वो बदले मे राहुल के उपर हसी ।

खाने के बाद निशा अपने कमरे मे गयी अपना प्लाजो निकाल कर एक शोट्स पहन ली जो घुटनो के उपर तक ही थी ।

निशा इस व्क्त मोबाईल खोल कर बैठी हुई थी उसी कहानी को पढने के लिए कि शायद आज रात कोई लेखक ने कोई अपडेट दिया होगा ।

निशा की आंखे चमक उठी क्योकि लेखक ने अपडेट दिये हुए थे ।

निशा चहक कर बिस्तर पर लेट गयी और वो अपडेट पढनी शुरु की ।

" उस बाथरूम वाले व्याख्यान के बाद से अमर खुद को शर्मीन्दा मह्सूस करने लगा था और रेखा से नजरे चुराने लगा था । मगर रेखा ने ताने दे दे कर अमर से मजे लेने लगी थी । हमेशा उसे चिढाती ,,,धीरे धीरे अमर को आभास होने लगा कि उसकी दीदी को उसे छेड़ कर मजा आता है और तो ऐसे ही एक दुपहर दोनो फिल्म दे रहे होते है और उनके मा बाप कही बाहर गये होते है ।



फिल्म का सीन अच्छा था तो अमर ने रेमोट से उसे रोक दिया और बोला - मै बाथरूम से आता हू दिदी फिर देखते है

रेखा ने ऐन मौके पर अमर को टोका - हा हा जा लेकिन मेरा नाम मत लेना हिहिहिही

अमर खीझ कर रहा गया और गुस्से मे - मै तो लूंगा और आपके बारे मे ही सोचूंगा । देखोगे कैसे करूंगा

फिर अमर वही रेखा के सामने से अपना मोटा लण्ड निकाल कर हिलाने लगता है - आह्ह दीदीईई दीईई उह्ह्ह्ह मस्त चुचे है तुम्हारे अह्ह्ह दीदी



रेखा को उम्मिद नही थी कि अमर ऐसी कोई हरकत कर देगा और पहली बार जब उसने अमर का लण्ड देखा उसके चुत ने उससे बेईमानी करनी शुरु कर दी ।"

आखिर की लाईन पढ कर निशा मुस्कुराई और शॉर्ट के उपर से अपनी चुत टटोलते हुए मन मे बोली - चुत तो मेरी भी बेईमानी करने लगी है हिहिहिही इसे पढ कर

निशा अपनी चुत को शॉर्ट्स के उपर से दबा के वापस से कहानी पढना शुरु कर देती है ।

" रेखा हसते हुए - छीईईई गन्दा कही का , सब मेरे साथ कर लेगा तो अपनी बीवी के साथ क्या करेगा



अमर अपना लण्ड हिलाता हुआ रेखा के पास जाकर एकदम मदहोसी मे - अह्ह्ह दीदी वो जब आयेगी तब देखूँगा ,,आप इसे चुस दो ना उम्म्ंम प्लिज्ज्ज्ज

रेखा हस्ते हुए पीछे हटने लगी - ईईई नहीईई धत्त मै नही करने वाली और तु इसे धुलता भी नही

अमर समझ गया कि ये सब रेखा के बहाने है वो बस दिखा रही है

इसीलिये अमर ने जबरदस्ती रेखा के गालो को पकडकर दबाया और उसके होठो पर अपने होठ रगड़ने लगा । वही रेखा ना नुकुर करते हुए मुह मे लण्ड भर ली ।

अमर अपना लण्ड अपनी दीदी के मुह मे भर कर बहुत शांत महसुस करने लगा ,,वही रेखा ने अपने चाव से अपने भाई का लण्ड मुह मे लेने लगी

रेखा - कर ही की आखिर तुने अपने मन की

अमर मुस्कुरा कर - अभी कहा दीदी ,,हिहिही अभी तो ...।

रेखा हस्ते हुए उठ कर भागी - हिहिहिही नही मै अब और कुछ नही करने वाली हिहिहिही



अमर रेखा के पीछे भागते हुए उसके बेडरूम मे घुस गया "

निशा आगे स्क्रीन स्क्रोल करती है मगर अपडेट खतम था

निशा - अरे ये क्या ,,बस इत्ना ही और आगे की कहानी । धत्त यार ये अपडेट भी खतम हो गया ।

इधर निशा ने मोबाइल बगल मे रख दिया और लेटे लेटे ही अपनी चुत को मसल कर अमर और रेखा की आगे की मस्तियो को सोचते हुए कसमसाने लगी ।

ना जाने उसको क्या चाहत हुई, वो उठी और उसने ब्रा निकालकर टीशर्ट डाल लिये और वैसे ही राहुल के कमरे की ओर चल दी ।

निशा राहुल के कमरे मे जाती है दरवाजा बन्द था

निशा ने दरवाजा खटखटाया तो अन्दर हड़बड़ाहट हुई और फिर राहुल ने दरवाजा खोला ।

राहुल ने सामने जैसे निशा को देखा उसकी धडकनें रुक सी गयी ,, उसकी नजरे पहले निशा के नंगी जांघो से उपर उठी और फिर टीशर्ट मे उभरे निप्प्ल के कोनो को देख कर आंखे फैल गयी ।

निशा इतराइ और एक नजर राहुल के लोवर मे तने हुई लण्ड को देख कर हसी और बोली - आज तुझे मोबाईल नही चाहिये क्या ,हम्म्म्म वैसे मेरा आज का सिरियल खतम हो गया है ।

राहुल चौका और हड़ब्डा कर नजरे चुराते हुए - हा दीदी देदो ना ,,,वो मै मागने ही आने वाला था

निशा उसके गाल पकड कर खिचे - लेकिन मै तो तुझे शाम के लिए पिटने आई हू ,,मोबाइल देने थोडी हिहिहिही

राहुल थोडा सिस्का - सीईई अह्ह्ह्ह दिदीईई वो तो मैने थैंकयू बोला था ना हिहिहिही

निशा - हा देखा मैने क्या किया तुने । ये सब अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करना समझा

निशा ने जानबुझ कर उस कहानी मे रेखा के संवाद को दूहाराया ताकि अप्रत्यक्ष रूप से वो राहुल को छेड़ सके ।

राहुल ने जैसे ही वो वक्तव्य अपनी दीदी के मुह से सुने उसे भी कहानी मे अमर और रेखा के बीच के मस्ती भरे संवाद याद आ गये ।

वो भी सोचा क्यू ना इस बात चित को आगे ले जाया जाये - हिहिहीही लेकिन आप किसी गर्लफ्रेंड से कम हो गया ,,कहा मिलेगी इतनी अच्छी और खुबसूरत दोस्त

निशा समझ गयी कि राहुल ने उस कहानी मे अमर वाले डायलाग मारने शुरु कर दिये है ।

निशा - चल हट बड़ा आया मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाने वाला ,,, हाईट तो छोड तेरा तो वो भी ...। हिहिहिहीही

राहुल की आंखे चमकी और वो चहक कर - वो भी कम नही है दीदी हिहिहिही

निशा एक तो पहले ही अपनी बेकाबू जुबान के लिए पछता रही थी उपर से उसे उम्मीद नही थी राहुल सच मे इस बात पर इतना खुल कर बोलेगा ।

निशा वापस से उसके गाल खिचते हुए - क्या बोला तू ,,हम्म्म क्या बोला

राहुल हस कर - अह्ह्ह दिदीईईई वही जो आप सोच रही थी हिहिही

निशा - और क्या सोच रही थी मै ,,हम्म्म बोल

राहुल हस कर बार बार आंखे नीची करके अपने लोवर मे तने लण्ड की ओर इशारा कर रहा था ।

निशा की कुलबुलाती चुत की चल्ती तो अब तक वो निशा को लण्ड पकडवा देती मगर निशा की चेतना अब भी होश मे थी ।

निशा - रुक कर कल मै मम्मी को बोलती हू कि तु मुझे क्या दिखा रहा था

ये बोल कर वो जाने को हुई तो राहुल बोला - हा जाओ कह देना तो मै भी बोल दूँगा जो आपने मेरे बारे मे बोला हिहिहिहिही

निशा हस कर अपने चुतड मटका कर अपने कमरे मे जाने लगी और वही राहुल लोवर के उपर से अपने सुपाडे मे हो रही खुजली को दुर करता हुआ - दीदी मोबाईल तो देदो ना

निशा पलटी और ठेंगा दिखा कर अपने कमरे मे चली गयी

राहुल मन मे - आज तो मजा ही आ गया ,,,यार ये DREAMBOY40 गजब के किरदार लिखता है ,,, अमर वाली ट्रिक सच मे काम कर रही है ।

राहुल मन मे - क्यू ना दीदी को अपना लण्ड दिखा दू ,,लेकिन कैसे ??

राहुल फिर कुछ विचार करते हुए अपने कमरे मे आकर सो गया और वही निशा भी हस्ते हुए अपने कमरे मे आई

निशा मन मे - देखो तो कैसी हिम्मत बढ गयी है उसकी । सीधा दिखा रहा था हिहिहिही मै भी ऐसे थोडी ना हाथ आऊंगी बिना तड़पाए हुउउउह्ह

फिर निशा भी सोने चली गयी

जारी रहेगी
 
आज दोपहर मे अपडेट आयेगा दोस्तो.... कुछ नया और धमाके दार
 
अपडेट 133


पिछले अपडेट मे आपने पढा कि जहा राहुल और निशा के बीच मस्तिया शुरु हो चुकी है और दोनो एक ही कहानी के किरदारो को फॉलो करते हुए आगे बढ रहे है ,,वही दुसरी ओर राज अभी भी अनुज का भेद जानने मे लगा है ।

अब आगे



लेखक की जुबानी


अग्ली सुबह राहुल की नीद खुली । वो और उसका लण्ड अंगड़ाई लेते हुए उठे और राहुल कमरे से बाहर आकर छत पर फ्रेश होने चला गया ।

छत पर निशा ब्रश कर रही थी बाथरूम के बाहर और जैसे ही उसने राहुल को छत पर आते देखा तो उसने ब्रश तेजी से करना शुरु कर दिया

जिस्से टीशर्ट के अन्दर उसकी खुली चुचिया हिलने लगी ।

राहुल का लण्ड उस नजारे को देख कर टनं हो गया और उसके सुपाडे मे खुजली सी होने लगी । तो उसने लोवर के उपर निशा के सामने ही बडी बेशर्मी से अपने लण्ड का मुहाना लोवर के उपर से भिचा और निशा की ओर चल पड़ा ।

निशा ने नजर भर राहुल की हरकतों को निहारा और मुह फेर ली क्योकि उसकी हसी छूटने वाली थी और ब्रश करते हुए मुस्कुरा दी ।

राहुल - दीदी टॉयलेट मे कोई गया है क्या

निशा ब्रश मुह मे घिसते हुए उसकी ओर पल्टी और राहुल की नजर अपनी दीदी की टीशर्ट मे उभरी हुई नुकीली निप्प्ल्स पर गयी और वो थुक गटकने लगा ।

निशा ने ना मे सर हिलाते हुए बेसिन के पास गयी और कुल्ला करने लगी ।

राहुल ने नजर भर निशा के कूल्हो को ताड़ा और वापस से फुकार मारते लण्ड को दबाया

निशा कुल्ला करके - जल्दी फ्रेश हो ले अभी पापा आने वाले है ,,,

ये बोल कर निशा अपना टीशर्ट उठाते हुए बाथरूम मे घुस गयी और दरवाजा बंद कर लिया ।

लेकिन अंदर घुसने से पहले वो राहुल को अपना साइड वियू दे कर गयी । टीशर्ट उठाकर बाथरूम मे घुसते समय राहुल ने निशा की नंगी कमर और गुदाज पेट के साथ साथ उसकी झुल्ती गोरी गोरी चुचियो के निचे की गोलाईयो की हलकी सी झलक भी देखी ली ।

निशा के दरवाजे भिड़काने की आवाज से राहुल होश मे आया और मन ही मन गदगद हो गया । उसके चेहरे पर एक उत्साही मुस्कान थी और लण्ड मे जोर का कड़ा पन

वो भी पाखाने मे घुस गया और फ्रेश होने के बाद भी निशा के नहा कर बाहर आने का वेट करने लगा ।

उसे उम्मीद थी कि उस कहानी के जैसे शायद उसकी दीदी तौलिया और दुप्प्टा लपेटे बाहर आयेगी ।मगर निशा बखूबी जानती थी राहुल उसका बाहर इन्तजार कर रहा था इसिलिए उसने वही टीशर्ट लोवर पहन कर बाहर आई और नहाने के समय जो कल पहनी हुई ब्रा पैंटी और शॉर्ट्स लाई थी उन्हे धुल कर बाहर आई ।

राहुल ने जैसे अपनी दीदी को उन्ही कपड़ो मे देखा उसे थोडी निराशा हुई

मगर जल्द उसका लण्ड टनं हो गया जब निशा ने बाथरूम के बाहर की दिवाल पर लगी अरगन पर अपनी ब्रा पैंटी और शॉर्ट्स फैलानी शुरु कर दी ।

हालाकी पहले ऐसा निशा कभी नही करती थी , वो हमेशा अपने अंडरगार्मेंट्स बाथरूम के अन्दर या अपने किसी कपडे के अंदर रख ही सुखने के लिए डालती थी ।

इधर राहुल अपने मुह मे ब्रश घुमा रहा था और अपनी दीदी को ब्रा फैलाते हुए निहार रहा था । उसके लोवर मे लण्ड तना हुआ था । तभी निशा को एक शरारत सुझी और उसने अपनी पैंटी को निचोड और फिर उसे राहुल के सामने की झाडा जिससे पैंटी के पानी के कुछ छीटे राहुल के चेहरे पर गये । वो बारीक ठंडे छीटे अपने चेहरे पर पाकर राहुल की आन्खे बंद हो गयी । मानो प्यार की बारिश ठंडी फुहार उसके देह पर पड रही हो ।

निशा वही राहुल की हरकतो पर होठ दबा कर हस रही थी और फिर निचे चली गयी ।

इधर राहुल ने आखे खोली तो निशा जा चुकी थी।

वो मुस्कुराया और एक पल को पुरे छत पर निशा को खोजा और फिर उसकी पैंटी के पास जाकर उसकी मियानी को सुँघा । सरफ की खुस्बु मे उसने कुछ पल निशा की चुत की खुशबू को तलाशा और फिर नहाने चला गया ।

इधर निशा निचे आकर कमरे मे अपने कपडे बदले और फिर से बिना ब्रा पैंटी पहने सिर्फ प्लाजो और टीशर्ट मे अपनी चुचिया हिलाती किचन मे नासता बनाने के लिए चली गयी ।

राहुल भी नहाने के बाद दुकान खोलने चला गया क्योकि ये उसका रूटीन था,,रोजाना सुबह दुकान खोलकर साफ सफाई करना ।

राहुल ने भी अंडरवियर का त्याग किया हुआ था और साफ सफाई मे लगा था कि कुछ औरते साडी लेने के लिए आ गयी ।

राहुल जब उन ग्राहको को सम्भाल न्ही पाया फिर उसने अपने पापा को आवाज दे दी ।

किचन मे काम कर रही शालिनी ने जब राहुल की आवाज सुनी तो उसने निशा को उपर छत पर जाकर अपने पापा को बुलाने को बोल दिया । क्योकि सुबह की बोहनी कोई खराब करना नही चाहता ।

इधर उपर जन्गीलाल नहा चुके थे और कमर मे तौलिया लपेटे बाथरूम से बाहर आकर अपना अंडरवियर निचोड कर बाथरूम के दिवाल वाली अरगन की ओर बढ रहे थे ।

जैसे ही उन्होने ने अपना अंडरवियर अरगन पर फैलाया उनकी नजर अपनी दुलारि बिटिया निशा के अन्तरवस्त्रो पर पड गयी और उन्हे आश्चर्य हुआ कि आज निशा ने बाहर क्यू अपने अंडरगार्मेंट्स डाल है ।

पहले तो जंगीलाल ने उससे इंकार किया और फिर ना जाने क्या सुझा कि उन्होंने अपनी बिटिया के ब्रा के लेबल को देखने लगे ।

मगर उन्हे क्या पता था उनकी ये हरकत जीने के दरवाजे पर खड़ी उनकी दुलारि बिटिया निशा देख रही थी ।

निशा शर्म और भय से लाल हो गयी । उसको शर्म से हसी भी आ रही थी और उसका दिल भी जोरो से धडक रहा था । उसके पेट मे तितलिया उड़ रही थी ।

निशा मन मे शर्मा कर - पापा मेरी ब्रा क्यू देख रहे ,,, धत्त मैने उसे बाहर डाला ही क्यू??? इस कमीने राहुल की वजह से हुउह्ह

इधर निशा परेशान थी वही जन्गिलाल ने जब लेबल पढा और निशा ने साइज़ को देखा तो सोचने लगा कि अब उसकी बितिया शयानी हो गयी है । सोनल की शादी के बाद उसके लिए भी कोई रिश्ता देखना पडेगा । लेकिन ये ब्रा बड़ा शोफ्ट है ,,शालिनी क्यू नही पहनति इसमे का ?? आज शालिनी से कहूँगा कि वो भी इसमे का ही ब्रा ले ,,कितना खुबसूरत लगेगा उसके भरे भरे गोल चुचो पर , अह्ह्ह्ह

जंगीलाल उस ब्रा मे अपनी बीवी की कल्पना करके सिस्क उठा और तौलिये के उपर से अपना सर उठाया लण्ड सेट करते हुए बाथरूम मे वापस चला गया ।

इधर जीने के दरवाजे पर खड़ी निशा के जहन मे कुछ गलतफहमीयो मे जगह बना ली थी । कि कही उसके पापा भी तो नही राहुल की तरह उसके बारे मे .....।

निशा ने खुद को झकझोरा - नही नही ऐसा नही हो सकता... अभी तो राहुल ही था मेरे पीछे अब पापा भी ...।

निशा जड होकर जीने के दरवाजे पर अपने सवालो मे खोई हुई थी कि उधर जन्गीलाल बाथरूम से फुल बनियान और तौलिया लपेटे बाहर आता है और उसकी नजर निशा पर जाती है ।

जंगीलाल - क्या हुआ निशा बेटा

निशा ने जैसे ही अपने पापा की आवाज सुनी वो चौकी लेकिन खुद को सम्भाला - हा पापा वो जल्दी चलो ,,दुकान मे ग्राहक आये है

जंगीलाल जो अब तक जीने तक आ चुका था - हा बेटी चलो

निशा तेजी से सरकते हुए सीढियो से निचे भाग गयी और किचन मे चली गयी ।

उसकी तेज सासो से उसकी चुचिया उपर निचे हो रही थी और थोडी देर पहले ही उसके पापा की हरकतो ने उसके निप्प्ल कड़े कर दिये ।

शालिनी की नजर जैसे ही निशा के कड़े जोबनो पर गयी और निप्प्ल की नोख को टीशर्ट फाडते देखा तो उसने निशा को डाट लगाइ- ये क्या है निशा ,,तुने अन्दर कुछ पहना क्यू नही ?? देख सब पता चल रहा है । इस घर मे तेरे पापा और भाई है उनकी नजर गयी तो ।

निशा शर्मायी और मन मे - उसी कमीने भाई के लिए तो खोल रखा है मम्मी हिहिहिही

निशा - मम्मी वो मेरे काटन वाले टेप नही मिल रहे है और गर्मी मे ब्रा से बहुत खुजली होती है ,,,इसिलिए नही पहना

शालिनी भला उसकी बात से इंकार कैसे कर सकती थी । अक्सर वो खुद ही गर्मी मे बिना ब्रा के हल्के रंग के सूती ब्लाऊज पहना करती थी ,,जिसमे पसीना होने पर उसके निप्प्ल का भूरा घेरा साफ दिखता था ।



राज की जुबानी


रोज की तरह मै अगली सुबह उठा और फ्रेश होकर नहाने के बाद जैसे ही कमरे से बाहर आया तो हाल मे आते ही मेरी आंखे चमक उठी ।

हाल मे काजल भाभी ,,रोहन और शकुन्तला ताई आयी थी ।

कारण था आज रोहन की छुट्टी पूरी हो गयी थी । उसे अपनी ड्यूटी पर वापस जाना था ।

मै ये खबर सुन कर गदगद हो गया कि चलो अब काजल भाभी से फिर से नजदीकिया बढाने का मौका मिलेगा और फिर वो पार्सल वाला आईटेम था उसपे बात भी तो करनी थी । बीते एक महिने मे अनुज और राहुल को लेके काफी बिज़ी था और रोहन के कारण काजल भाभी से कोई खास बात चित नही हो पाई थी ।

मगर अब मै खुश था और थोडी देर बाद मै ही रोहन को बस स्टैंड पर ले गया ।

रोहन से बाते करने से मुझे आभास हुआ वो ब्डा ही डिस्पेलिन और शांत स्व्भाव का है । लेकिन उसकी शालीनता मे भी उसका वो ब्रुटल ह्वसी चेहरा मै देख सकता था ।

रोहन को बस पकडवा कर मै वापस अपने घर आया और फिर नाश्ता करके दुकान पर निकल गया ।

आज मेरे जहन बस काजल भाभी को लेके ख्वाब मचल रहे थे ,, नयी नयी कल्पनाओ से मन मचल रहा था ।

ऐसे मे ही निशा का फोन आता है और सहसा मेरा ध्यान वापस से अनुज और राहुल की ओर चला जाता है ।

करीब 10 बजे होगे और निशा के चहकपने से मुझे भी उत्सुकता होने लगी थी । फिर उसने एक एक करके बताया कि कैसे उसने राहुल उस्से उस कहानी के हिसाब से नजदीकिया बढाने मे लगा है और कैसे निशा ने कल रात से आज सुबह नहाने तक राहुल को परेशान किया ।

निशा की सारी बाते और मस्तिया सुन कर मै समझ गया कि ये अब जल्द ही राहुल से चुदने के फिराक मे है ,,मगर मुझे समझ नही आ रहा था कि अनुज इनसब मे कैसे कामयाब होगा ? क्या वो निशा को लपेट पायेगा या मुझे ही उसकी कुछ मदद करनी चाहिये ?

मै मन मे - नही नही ,जल्दीबाजी नही !!! वैसे भी इस खेल मे बहुत मजा आने वाला है हिहिहिही पहले निशा को राहुल के लण्ड का स्वाद लेने दो और फिर अनुज को कैसे उसके उपर लाना ये करूंगा ।

निशा फ़ोन पर - क्या हुआ राज ? क्या सोच रहे हो ?

मै अपनी कलपना से बाहर आकर - हा , याररर मै सोच रहा था कि तुम कितनी शातिर हो अपने छोटे भाई को इतना तडपा रही हो हिहिहिही

निशा इतरा कर - और क्या ,, मै कोई सड़क छाप हू जो ऐसे ही उसके निचे आ जाऊंगी ,,अभी तो बहुत पापड़ बेलने है उसे हिहिहिही

मै - तो अब आगे का क्या सोचा है ?

निशा खिलखिला कर मुझे अपना प्लान बताती है और मै उसकी तारिफ करने से कतरा नही सकता था ।

थोडी बाते हुई और फिर वो दोपहर के खाने मे लग गयी ।

इधर मै भी दुकान मे लग गया ।



लेखक की जुबानी


समय बीता और शाम को अनुज फिर से राहुल से मिलने उसके घर पहुचा तो हाल मे बैठा मोबाईल चला रहा था और नजरे उसकी किचन मे खड़ी निशा के चुतड निहार रही थी ।

अनुज आया और राहुल के पास बैठा और वो समझ गया कि राहुल यहा से क्या कर रहा है और उसने मोबाइल पर नजर मारी तो स्क्रीन पर वही स्टोरी खुली हुई थी , जिसके बारे मे कल राहुल ने उसे बताया था ।

अनुज की नजरे भी उस सिल्क प्लाजो मे उभरी निशा की गाड पर थी और उस हल्के प्लाजो मे कही भी पैंटी की शेप की धारिया नजर नही आ रही थी । अनुज समझ गया कि निशा आज बिना पैंटी के है ।

इधर निशा ने चाय छान कर अनुज और राहुल को दी ।

फिर शालिनी को बोल कर नहाने चली गयी ।

राहुल ने चाय पीते हुए और अपनी मा और दीदी को सुनाते हुए बोला- यार अनुज आज चल छत पर ही टहलते है ।

निशा जो कि अपने कमरे मे कपडे लेने गयी थी वो मुस्कुरा उठी । उसने एक स्कर्ट लिया और एक बडे गले वाला टीशर्ट । फिर अपने चुतड हिलाते उपर चली गयी ।

वही राहुल और अनुज भी अपनी चाय खतम कर उपर चल दिये ।

इधर अनुज को यकीन था कि राहुल से कुछ होने वाला नही है इसिलिए सीढिया चढ़ते हुए वो राहुल का मजा लेने के भाव से - तब भाई कुछ बात बनी या फिर शर्त हार रहा है तू

राहुल मुस्कुरा कर - तू चिंता ना कर एक दिन तेरे सामने दीदी को चोद कर दिखाऊँगा ,वैसे मैने कल उन्हे लोवर के उपर से अपना लण्ड दिखा दिया ।

अनुज की आंखे फैल गयी फिर भी उसने इस बात से इंकार ही किया - चल बे फेक मत ,

फिर राहुल कल रात से लेकर आज सुबह की सारी मस्ती भरे पल को अनुज को बताया और वो भी जब निशा ने खुद अपनी पैंटी निचोड कर राहुल के मुह के सामने झाडा था ।

राहुल की बतायी बाते इतनी दिलचस्प और ऊततेज्क थी कि अनुज चाह कर भी इस्से अब इन्कार नही कर पा रहा था । उस्का लण्ड राहुल की बाते सुन कर तन गया था । उसे यकीन होने लगा था कि राहुल सच मे कामयाब हो सकता है और अगर ऐसी बात है तो इसमे मेरा ही फाय्दा है । मुफ्त की चुत मिल जायेगी ।

राहुल अनुज को खोया देखकर -तुझे यकीन नही होता ना ,,,रुक अभी देखना मै कैसे दीदी को परेशान करता हू ।

इधर निशा बाथरूम मे तो थी लेकिन उसने जानबुझ कर अपने कपडे बाहर ही रखे हुए थे । वो जानती थी कि राहुल और अनुज उपर आने वाले है । वो अपने दोनो दिवानो के साथ मस्ती के मूड मे थी ।

इधर राहुल बाथरूम के पास जाकर अरगन पर टंगी हुई निशा की ब्रा पैंटी उतार कर अपनी जेब मे रख लेता है ।

अनुज बडी हैरानी ने राहुल को देखता है ,,उसका लण्ड ये सोच कर खड़ा हो जाता है कि क्या अब निशा दीदी बिना ब्रा पैंटी के ही कपडे पहनेगी ।

इधर वो दोनो छत पर टहलने लगे ,,वही निशा नहाने के बाद तौलिया लपेटे बाथरूम का दरवाजा खोल कर बाहर झाकी और फिर राहुल को आवाज दी ।

राहुल मुस्कुरा कर - अब देख मेरा कमाल

अनुज वही खड़ा रहा और राहुल चल कर बाथरूम के पास गया ,,जहा निशा दरवजे की ओट मे खड़ी थी- वो मेरे कपडे देना राहुल ,,

राहुल ने मुस्कुरा कर निशा के कपड़े देते हुए - अरे दीदी आपके वो अन्दर वाले कपडे नही है यहा ,

निशा ने मुस्कुरा कर राहुल के लोवर की जेब का फुलाव देखा और समझ गयी कि उसने खुद उसकी ब्रा पैंटी अपने जेब मे रखी हुई है और नाटक कर रहा है ।

निशा मुस्कुरा कर - अरे कोई बन्दर ले गया होगा ,,,जाने दे वैसे भी गर्मी है

ये बोलकर निशा ने दरवाजा बन्द कर लिया

अनुज उन दोनो की खुली बातचित से जड़ हो गया कि कोई भाई बहन सच मे ऐसे बाते कर सकते है ।

इधर थोडी देर मे निशा बाहर निकाली और अनुज की नजरे अब उसके बडे गले वाले टीशर्ट पर थी ।

इधर निशा अपने धुले हुए कपडे निचोड कर उन्हे झाड़ने लगी ,,और झाडते वक़्त उसकी चुचिया हिल्कोरे मारती जिससे अनुज और राहुल दोनो की हालत खराब थी ।

फिर वो कपडे डाल कर मुस्कराते हुए अपनी चुतड मटका कर निचे चली गयी ।

दोनो उसकी स्कर्ट मे नंगी गाड़ की थिरकन देख कर अपना लण्ड मसल कर रह गये ।

थोडे समय बाद अनुज फिर वापस घर चला गया ।

वही राहुल का उसकी दीदी के साथ आंख मिचौली जारी रही । रात को खाना बनाने खाने के बाद निशा अपने कमरे मे चली गयी क्योकि उसे अपनी कहानी की अगली कड़ी पढनी थी जिसमे अमर रेखा को बुरी तरह पेलता है । निशा की चुत पानी पानी हो जाती है और बेताब होकर वो फिर से उथकर राहुल के कमरे की ओर चली जाती है ।

वही एक कमरे मे जंगीलाल और शलिनी के सेक्स कार्यक्रम हो रहे थे और एक राउंड चुदाई के बाद जंगीलाल ने अपने मन की बात शलिनी से कहनी शुरु की ।

जंगीलाल - जानेमन अगर नाराज ना हो तो एक बात कहू ?

अपने पति से सन्तोष जनक चरम सुख पाकर शलिनी खिली हुई थी और वो हुकारि भरते हुए बोली - हम्म्म्म कहो ना मेरे राजा

जन्गीलाल - वो आज सुबह मैने निशा के ब्रा देखे

शलिनी का दिल धड़का - छीई आपको शर्म नही आती जो आप अपनी बेटी के ऐसे कपडे निहार रहे थे ।

जन्गीलाल सफाई देते हुए हस कर - अरे जानेमन मेरी बात तो सुनो ,,,हुआ यू कि मै नहा कर अपना अंडरवियर डालने अरगन के पास गया तो वहा निशा ने ब्रा सुखने के लिए डाली थी ।

शलिनी थोडा चिढ़ कर - हे भगवान क्या हो गया है इस लड़की को !!! आपको पता है आज उसने अपनी ब्रा भी नही पहनी थी और बिना दुपट्टे के घर मे घूम रही थी और उसके वो दिख रहे थे ।

जंगीलाल का दिल धडका और लण्ड मे कसावट होने लगी और वो हिचक कर - क्या ?

शालिनी नजरे फेरते हुए - वो उसके निप्प्ल कड़े थे और वो ऐसे ही घर मे घूम रही थी , कही राहुल की नजर पड जाती तो

जंगीलाल कुछ सोच कर - हम्म्म्म तो तुमने उसे समझाया

शालिनी - हा बोला तो उसने बताया कि उसके पास गर्मियो वाले टेप नही है और ब्रा मे खुजली होती है ।

जंगीलाल कुछ सोच कर - तुम्हे नही लगता शालिनी निशा भी अब बडी हो गयी है उसकी शादी के लिए हमे कोई लड़का देखना चाहिये ।

शालिनी निशा की शादी और उसके दुर होने की बात से भावुक हो गयी - नही नही मुझे नही करनी अभी अपने लाडो की शादी ।

जन्गीलाल शालिनी को अपनी बाहो मे भर कर - अरे शालिनी तु समझ क्यू नही रही । इस उम्र में उसका यू कपड़ो से दुरी बनाना एक इशारा है । अब धीरे धीरे उसके खुले कपडे पहनने के समय आ रहे है । साडी ब्लाउज जैसे कपड़ो मे ही अब उसे आराम मिलेगा ।

शालिनी मुस्कुरा कर नजरे उठा कर- आपको बड़ा पता है औरतो के बारे मे , ऐसे कोई सोचता है अपनी बेटी के बारे मे हम्म्म्म

जंगीलाल - अच्छा ठिक है नही कहता कुछ , लेकिन कम से कम मेरी बिटिया के लिए वो टेप तो लेते आओ जिसे वो आराम से रह सके गर्मी मे और

शलिनी मुस्कुरा कर - और क्या

जन्गीलाल - और वो जिसमे का निशा ब्रा पहनती है उसने का तुम भी लेलो ना अपने लिये

शालिनी शर्म से लाल हो गयी - धत्त आप भी ना

जंगीलाल उसको पकड कर - सच मे जान बहुत खुबसूरत लगेंगे तेरे ये पपिते उसमे और वो जो बिच मे फुल बना हुआ है वो ऐसे लगेगा कि मानो तेरी चुचियो की गिफ्ट पैकिंग की गयी हो ।

शालिनी शर्म से लाल हो गयी और जंगीलाल से चिपक गयी - धत्त आप भी ना ,

जंगीलाल - प्लीज ना जानेमन मेरे लिये

शालिनी - अच्छा ठिक है कल राज के पास से लेते आऊंगी

जंगीलाल - और निशा के लिए वो टेप भी

शालिनी शरारत भरे लहजे मे - हा हा वो भी लेते आऊंगी , नही तो कही आपकी लाडली के चुचे ना लटक जाये हिहिहिही

जंगीलाल का लण्ड निशा के चुचो की चर्चा सुन कर ठुमका और वो शालिनी की मस्ती पर उसके दुध मसलता हुआ - अरे अभी मेरी लाडो के स्तन कोरे है ऐसे कैसे लटक जायेंगे।

ये बोल कर उसने शालिनी के चुची को मूह मे भरते हुए उसके उपर चढ गया

शालिनी हस के मगर सिस्किया लेते हुए - सीई अहहहह आपको कैसे पता कि उसके स्तन कोरे ,,,कभी पकड कर देखा है क्या हिहिहिही

जंगीलाल के लंड मे अपनी बीवी से बेटी के चुचो के बारे मे बाते सुन कर कड़ा होने लगा और वो बडे जोश से शालिनी ने कड़े चुचे मसलने लगा ।

शालिनी - क्या पता किसी ने उसके चुचे चुस कर ढीले कर दिये हो

जंगीलाल चौका और उसका दिल बडी जोरो से धडक रहा था - ये क्या कह रही हो शालिनी तुम

शालिनी जानती थी कि निशा के खिलाफ जंगीलाल एक लफ्ज भी नही सुन सकता था ,,मगर उसे अपनी पति को परेशान करने मे मजा आ रहा था ।

शालिनी मुस्कुरा कर - अरे मेरे कहने का मतलब है कि कही निशा का भी सोनल की तरह कोई बॉयफ्रेंड हुआ तो

जन्गीलाल का दिल अब धक कर गया ,,उसके मन मे शालिनी की बाते घर करने लगी और ढ़ेरो उत्तेजक सवाल उसके जहन मे आने लगे

" क्या सच मे निशा का कोई बॉयफ्रेंड होगा ?

" क्या किसी ने निशा को स्तन को मसला होगा ?

" क्या वो चुदी भी होगी ?

" वो कैसे चुदी होगी , चूदते हुए उसके चेहरे पर क्या भाव आये होंगे ? उसे ज्यादा दर्द तो नही हुआ होगा ना ? क्या सच मे निशा की सील टुट गयी होगी ,,ढेर सारा खुन भी निकला होगा उसकी चुत से , उसकी चुत कैसी दिखती होगी ।

जन्गीलाल ऐसे काफी सारे सवालो से घिर कर जड़ हो गया था ,,वही उसका लण्ड फौलादी हुआ जा रहा था ,,उसकी तपन और कडकपन शालिनी अपनी जांघो पर मह्सूस कर रही थी ।

शालिनी हसी और बोली- क्या जी कहा आप अपनी बेटी के सुहागरात वाले सीन देखने लगे हिहिहिनी ,,,पहले मेरा ख्याल तो कर लो ना

जन्गीलाल चौका कि शालिनी को कैसे पता कि मै ,,,फिर उसने खुद को झिंझोड़ा और शालिनी की खिदमत मे लग गया ।

जारी रहेगी
 
बडे ही दुख की बात है कि अपडेट 133 पोस्ट करने के बाद करीब 1500 VIEWS बढ़े और सिर्फ 3 ही पाठको से प्रतिकियाये मिली ।

गिनती की कुछ ही पाठक है जिनकी संख्या 10 से भी कम है जो रेगुलर टिप्पणी करते हैं। गलती कहा पर हो रही है समझ नही आ रहा है । :think:
 
अपडेट 134


पिछले अपडेट मे आपने पढ़ा कि निशा की मस्ती कैसे उसी पर भारी पड गयी ,,भाई को रिझाने के चक्कर मे बाप भी लाईन मे आ गया । वही राज के जीवन मे रौनक लौट आई है क्योकि रोहन के जाने के बाद अब वो फिर से काजल भाभी से नजदीकिया बढाने के मूड मे है । देखते आगे क्या होता है क्योकि फिलहाल तो अभी निशा अपनी गीली चुत लेके राहुल के पास जा रही है ।

अब आगे



लेखक की जुबानी


निशा की चुत वो कहानी पढने के बाद रसने लगी । उसका मन हो रहा था कि अभी राहुल आये और उसे हचक के चोद दे । मगर इतना आसान था कहा उसने खुद ही अपनी खुशियो पर बंदीसे लगा रखी थी ।

वो कुछ सोच कर राहुल के कमरे मे जाती है और दरवाजा पर हल्का सा खटखट करती है ताकी मम्मी पापा को आवाज ना जाये ।

अन्दर राहुल अपनी दीदी की उसी पैंटी के साथ खेल रहा था जिसे उसने शाम को अरगन से उतारा था और उसे सूंघते हुए अपना लण्ड हिला रहा था ।

दरवाजे पर खट खट से वो समझ गया कि दीदी ही आई होगी ।

उसने वो पैंटी वापस से लोवर मे रख ली और अपना लण्ड सीधा करके लोवर मे टेन्ट बनाते हुए दरवाजा खोला ।

राहुल की नजरे सीधे निशा के कड़े निप्प्ल पर गयी जो उसके ढीले टीशर्ट मे भी बाहर की ओर तने हुए थे ।

निशा ने एक नजर राहुल के तने हुए लण्ड पर मारा और उसकी चुत कुलबुलाने लगी ।

पैंटी ना पहनने की वजह से उसके चुत का रस उसकी जांघो पर रिसने लगा था ।

तभी निशा की नजर राहुल के लोवर की जेब से झाकती उसकी पैंटी पर गयी और उसे बात करने का एक मुददा मिला गया । उसके जहन मे वाप्स से अमर और रेखा की मस्तिया याद आई

राहुल मुस्कराता हुआ - दीदी मोबाइल देने आई हो क्या ?

निशा ने नशीली आंखो से राहुल को निहारा - ना

राहुल की धडकनें तेज हो रही थी

" त त तो क्याआआ देने आई हो ", राहुल ने कापते हुए स्वर मे कहा

निशा मुस्कुरा कर राहुल की जेब से झाकती पैंटी की ओर इशारा करके बोला - मै वो लेने आई हू

पहले तो राहुल की आंखे चमकी की निशा उसके लण्ड की ओर इशारा कर रही है ,,लेकिन जल्द ही उसकी गलतफहमी दुर हो गयी जब निशा ने लपक कर राहुल के जेब से अपनी पैंटी खिच ली

फिर उसे राहुल के सामने फैलाकर देखते हुए - इसमे दाग तो नही लगाया ना

राहुल - नहीं दीदी

निशा - हम्म्म और मेरी ब्रा दे चल।

राहुल ने उसे भी दुसरी जेब से निकाल कर निशा के दिया ।

निशा उसे भी चेक करते हुए - इतना ही मन होता है तो किसी को पटा क्यू नही लेता ।

राहुल मुस्कुरा कर - पटा तो रहा हू लेकिन आप भाव ही नही दे रहे हो हिहिहिही

निशा हस्ते हुए - अच्छा वो कब ट्राई किया तुने मुझे तो पता ही चला कि तु मुझपे लाईन मार रहा था ।

राहुल ने उसके सामने ही अपना लण्ड भीचते हुए अपने होठो पर जीभ फिराने लगा ।

निशा हसकर राहुल के कान के पास चपट लगाते हुए - कमीने इसे हवस कहते है प्यार नही , सुधर जा सुधर जा

राहुल आंखे निशा के चुचो पर गिराते हुए - कैसे सुधरु दीदी कोई चाह्ता ही है कि मै बिगडा रहू

निशा - छीईई कितना कमीना है रे तु , कहा से सिख रहा है ये सब हम्म्म बोल

राहुल बेशरम होकर निशा के चुचो की ओर इशारा करके - बता दू तो ये दिखाओगे

निशा की दिल की धडकनें तेज हो गयी । जी तो उस्का भी यही चाह रहा था कि अभी अपना टीशर्ट खोल कर अपनी चुचिया राहुल के हवाले कर दे ।

निशा आंखे उठा कर - तु तो ऐसे कह रहा है ,,जैसे तुने इन्हे देखा ही नही हो

राहुल निशा की बाते सुन कर अपना सुपाडा मुठियाने लगा , उसकी सासे गहरी होने लगी और दाँत पिसते हुए बोला - कहा दीदी , कभी नसीब ही नही हुआ

निशा इतराइ- मुझे तो लगा कि जब तु मुझे लाईन मार ही रहा है तो तुने चोरी छिपे इन्हे देख ही लिया होगा

राहुल की हालात खराब हो रही थी और वो नशे मे डुबा जा रहा था उसके हाथ खुद निशा के चुचो की ओर बढने लगे - काश दीदी मै इन्हे अह्ह्ह्ह

निशा खिल्खिला के फौरन हट गयी - हिहिहिही पहले बता कहा से सिख रहा है ये फलर्टबाजी हम्म्म फिर

राहुल मुस्कुरा कर - वही तो बता रहा हू दीदी इधर आओ तो

उसने निशा के हाथ पकड कर अपने पास खीचा और उसके कमर से हाथ को सरकाते हुए उसके कूल्हो पर फिराने लगा ।

निशा आंखे बन्द कर गहरी सासे लेने लगी और एक कसमसाहट थी उसकी सिस्कियो मे उसके चुचे अब और फुलने लगे थे ।

राहुल निशा के कूल्हो को सहलाते हुए - दीदी इसको हिलता देखता हू ना तो सब कुछ अपने आप मन मे चलाने लगता है और

निशा - उम्म्ंम्म्ं सीईईई लेकिन कैसेहह अम्म्म्ंं

राहुल निशा के करीब होकर उसके कान के पास जाकर उसके चुतडो को स्कर्ट के उपर से सहलाता हुआ - दीदी ये जो आपकी गाड़ है ना

निशा ऐसे खुले शब्द सुन कर थोडा शर्मायी और राहुल के सीने पर मुक्का मारते हुए - धत्त बेशरम ,,

राहुल थोडा मुस्कुरा कर निशा को अपने करीब खिचकर उसके चुतडो को सहलाते हुए - सुनो ना दीदी पहले ,, ये जो आपके गाड है ना इनको हिलते देखता हू ना तो मेरा वो खड़ा हो जाता है ।

निशा का दिल जोर से धड़का- क क क्याआआ

राहुल के निशा के हाथ को पकड कर अपने लण्ड पर लोवर के उपर से रख दिया - यही मेरा लण्ड

निशा ने फौरन अपना हाथ खिच लिया और राहुल के बाहो से छिटकने लगी ।

राहुल ने वापस उसे खिचते हुए उसका हाथ वापस से अपने खडे लण्ड पर रखते हुए - सुनो ना दीदी , जब ये मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है ना तो अपने आप से सारी बाते दिमाग मे आने लगती है ।

निशा को राहुल का लण्ड अपने हथेली मे महसुस हो रहा था ,,उसे यकीन ही नही था कि सब कुछ ऐसे हो जायेगा ,,,कहा वो राहुल तडपाना चाह रही थी लेकिन अभी खुद तडप रही थी ।

उसने राहुल के लण्ड को पकड कर भीचना शुरु कर दिया ।

निशा - क्या बाते आती है राहुल उम्म्ंम्ं

राहुल समझ गया कि अब निशा उसके लिए तैयार है तो उसने उसे कमरे के अन्दर खिचकर दरवाजा बंद कर दिया और निशा को पीछे से दबोच लिया

राहुल उसके दोनो चुचो को मसलता हुआ - मेरे मन मे आता है ना दीदी

निशा अपने चुचो पर राहुल के स्पर्श पाकर पागल होने लगी ,,वही उसके चुतडो पर राहुल अपना लण्ड भी चुबा रहा था ।

निशा - क्याआह्ह्ह आता है उम्म्ंम्म्ं बोल ना राहुल

राहुल - दिदीईई मेरे मन मे आता है कि मै ऐसे ही आपकी ये चुचिया मिजू और

निशा अपने जिस्म को राहुल के उपर ढिला छोडती हुई - उम्म्ंम और क्याआह्ह राहुल

राहुल ने झटके मे निशा को सामने किया और झुककर टीशर्ट के उपर से ही उसके निप्प्ल को मुह मे भर लिया

निशा - अह्ह्ह्ह सीई उम्म्ं ओह्ह्ह भाईई उम्म्ंम

राहुल थोडा उपर से चुचियो को चुसा और अगले ही पल एक झटके मे निशा के टीशर्ट निकाल दिये और उसे बिस्तर पर गिरा दिया ।

निशा आधी नंगी बिस्तर पर थी और तकिये से अपनी चुचिया छिपा ली

राहुल ने यहा एक एक करके अपने सारे कपडे निकाल दिया और लण्ड मसल्ता हुआ बिस्तर पर आने लगा

निशा मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी - ये क्या कर रहा है तू ,,,इसे क्यू निकाला

राहुल निशा के टांगो को फैलाते हुए अपनी ओर किया और जांघो को खोलकर उसके उपर आ गया

राहुल- अभी ब्ताता हू ना दीदी ,,पहले इन्हे चुस तो लू

राहुल ने निशा की दोनो चुचिता थाम ली और निप्प्ल को मुह मे भर लिया ।

निशा कसमसाने लगी ।

दोनो को देख कर लग ही नही रहा था कि ये उनके बिच पहली बार हो रहा था , किसी के मन मे कोई झिझक ना थी और दोनो ही एक दुसरे को पाने के लिए बेकरार हुए जा रहे थे ।

राहुल अपना लण्ड निचे के जांघो पर घिसता हुआ निशा की चुचिया पी रहा था ,,वही निशा उसके बालो मे हाथ फेर रही थी ।

निशा - राहुल सुन ना भाई ,अह्ह्ज सीईई सुन ना

राहुल ने नजरे उठा कर निशा को देखा

निशा मुस्कुरा कर - वो निचे डाल कर चुस ना इसे

राहुल का लण्ड तन गया और वो निशा के होठो को चुसने लगा और वही निशा अपनी स्कर्ट उथाने लगी ।

राहुल उठा और निशा की जांघो को खोला और लण्ड को अपनी दीदी की चुत पर लगाते हुए - दीदी तैयार हो ना ,, दर्द होगा थोडा

निशा मुस्कुराइ और मन मे बडबड़ाई - अरे तू डाल, तेरी दीदी ने इससे बड़ा वाला लिया है ।

निशा - आराम से डाल ना भाई उम्म्ंम अह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह्ह धिरे धीरे अह्ह्ह हाआ हा सीईईई उफ्फ्फ्फ

राहुल निशा के चेहरे के हाव भाव देखता हुआ बहुत ही आराम से लंड को अपनी दीदी की चुत मे डाल रहा था ,,हालकी उसे उतनी दिक्कत हो नही रही लण्ड घुसाने मे जितना निशा दिखा रही थी ।

राहुल ने जब पुरा लण्ड घुसा दिया तो वो निशा के उपर आकर उसकी चुचिया मिजता हुआ- अब पेलू दीदी

निशा ने एक गहरी सास ली और मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाया

राहुल ने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरु किया और वही निशा ने भी सिसकिया लेना शुरु कर दिया ।

राहुल - उम्म्ं दीदी थैंक्स अह्ह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है हम्म्म्म ओह्ह्ह कितना गरम है

निशा - हम्म्म हा तेरा लण्ड भी तो गरम है भाईई अह्ह्ह चोद मुझे उम्म्ंम सीईई अह्ह्ह्ह थोडा कसके कर ना उम्म्ंम्ं

राहुल मुस्कुरा कर अपनी गती बढाता हुआ - ओह्ह्ह दीदीईई येलो और तेज्ज्झ्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्म्ंम और कस के पेलू उम्म्ं

निशा - हा भाई खुब तेज चोद ना उम्म्ंम अह्ह्ह ओह्ह्ह ऐसे ही हा बहुत खुजली हो रही थी उम्म्ंम अह्ह्ह

राहुल - आह्ह दीदी मै हू ना ,,मै पेल पेल के सारी खुजली मिटा दूँगा उम्म्ंम

निशा मुस्कुराइ और बोली - क्यू तु अकेले ही मजे लेगा ,,अनुज को नही बुलायेगा

राहुल जहा था वही रुक गया

निशा मुस्कुरा के - मुझे पता है तुम दोनो मेरे पीछे हो

राहुल निशा को मुस्कुराता देखा तो उसका डर थोडा कम हुआ और वो वापस से हल्के हल्के धक्को से शुरुवात करने लगा - लेकिन आपको कैसे पता

निशा मुस्कुरा कर - तु मेरे मोबाइल मे क्या देख रहा क्या नही मुझे नही पता चलेगा उम्म्ंम ,अब चोद ना रुक क्यू गया

राहुल समझ गया कि दीदी ने ब्राऊजर से देख लिया होगा और वो धक्के लगाते हुए ।

निशा अब झटके खाते हुए - उम्म्ंम सीईई अह्ह्ह तो बता अनुज के साथ तेरा क्या प्लान है हम्म्म

राहुल थोडा मुस्कुरा कर धक्क लगाता हुआ - वो दीदी ,,,उसका कोई प्लान नही है लेकिन मैने उससे शर्त लगाई कि मै उसके सामने आपको चोदूंगा

निशा राहुल की बातो से उत्तेजित हो गयी और वो लण्ड अपने चुत मे कसते हुए बोली - तु सच मे बहिनचोद है रे ,,,कमीन कही का दुसरे के सामने अपनी दीदी को पेलेगा हम्म्म

राहुल अपना ध्क्का तेज करता हुआ - अह्ह्ह दीदी मान जाओ ना उम्म्ं प्लिज्ज

निशा मुस्कुरा कर - तु तो अनुज को दिखा कर शर्त जीत जायेगा ,,लेकिन मेरा क्या फायदा उम्म्ंम बोल

राहुल थोडा हिचक कर - आप चाहो तो अनुज से भी चुद लेना , हम दोनो मिल कर चोदेंगे दीदी बहुत मजा आयेगा आपको भी

निशा एक साथ दो लण्ड से चुदने का सोच्कर कर पागल सी होने लगी ,,लेकिन अब इत्नी जल्दी इसके लिए राजी नही हो सकती थी ।

निशा - नही मै नही अह्ह्ह सीईई मै नही अनुज से चुदुंगी उम्म्ंम अह्ह्ह

राहुल - अह्ह्ह दीदी प्लीज ना ,,देखो जैसे अभी मै आपको चोद रहा हू ना वैसे अनुज भी चोदेगा

निशा - न्हीई राहुल उम्म्ं अह्ह्ह

राहुल अब कस कस कर धक्के लगाने लगा और मिन्ंते करता हुआ - प्लीज ना दीदी ,,आह्ह प्लीज

निशा अब झड़ने के करीब थी तो उसने सिस्कते हुए हामी भर दी वही राहुल और जोश मे आ गया और तेजी से लण्ड गचागच निशा की चुत मे डाले जा रहा था।

निशा झड़ चुकी थी तो अपनी चुत का छ्लला राहुल के लण्ड पर कसने लगी ।

राहुल बार बार निशा से कबुलवा रहा था अनुज के साथ चुदवाने के लिए उसे एक जबरदस्त उत्तेजना मिल रही थी और वही निशा मुस्कुरा कर ना मे सर हिला रही थी । जिससे राहुल की चरम पर जाने गति और बढने लगी ।

राहुल - दिदीईई अह्ह्ह बोलो ना चुदोगी ना अनुज से भीई अह्ह्ह प्लिज्ज्ज सीईईई बोलो ना दीदी चुदवाओगी ना हम दोनो भाई से

निशा अब राहुल को पूरी तरह से अपने कब्जे मे ले चुकी थी और मुस्कुरा कर बडी अदा से राहुल की बातो को नकार रही थी लेकिन राहुल को उत्तेजना ही मिल रही थि और फीर उसने अपना लण्ड बाहर खीचा- अह्ह्ह दीदीईई अह्हीई ओह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह माआअह्ह उम्म्ह्ह्ह्ह सीईई दीदीईई आई लव युउउउऊ अह्ह्ह्ह

राहुल निशा के पेड़ू पर झड़ने लगा था उसके वीर्य के कुछ छीटे निशा के स्त्नो तक गये थे । फिर वो ढह कर वही लेट गया ।

निशा मुस्कुरा कर उठी और अपने जिस्मो को साफ किया फिर कपडे पहन कर चली गयी अपने कमरे मे ।

राहुल वही उसी हालत मे सो गया ।

अगली सुबह निशा उठी और अपने अपने कामों में लग गयी और जब किचन मे आई तो उसकी मा ने फिर से उसे टोका ।

शालिनी - ये क्या है , तु अब बडी हो गयी है , कम से कम दुपट्टा लेके तो रहा कर

निशा - क्या मा एक इत्नी गर्मी है और उपर से दुपट्टा । घर मे पापा और राहुल ही तो है ना कोई बाहर का तो नही है ना

शालिनी - हा तभी तो कल रात तेरे पापा ने बोला कि तुझे टेप लाकर देदू ,,

निशा चौकी - मतल्ब

शालिनी को लगा कि अगर निशा को उसके पापा के नाम पर थोडा डरायेगी तो शायद वो अपनी आदत सुधार ले और थोडा शालीनता से ढंग के कपड़े मे रहे ।

शालिनी झूठ का गुस्सा दिखाते हुए - और क्या कल तेरे पापा मुझपर गुस्सा हो रहे थे कि निशा के पास अन्दर वाले कपडे नही है क्या जो ऐसे घुमाती है ।

निशा का कालेज धक्क करके रह गया कि उसके पापा ने उसके हिलते चुचो को देख लिया ,,क्या सोच रहे होगे उसके बारे मे ।

निशा - सॉरी मम्मी लेकिन सच मेरे पास फुल टेप नही है और अब से मै ख्याल रखूंगी ।

शालिनी एक विजयी मुस्कुराहट के साथ - अच्छा वो तेरा नम्बर बता मै आज राज के यहा से लेते आऊंगी

निशा थोडा मुस्कुरा कर - वो 34 नम्बर का मम्मी , व्हाईट मे लेना काटन वाला

शालिनी - अच्छा ठिक है और जरा अभी तु मुझे अपनी ब्रा दिखाना तो वो जो तु लाई थी राज के यहा से , वो आरामदायक है ना तुझे

निशा हस्कर - हा मा बहुत कम्फोर्तेबल है ,,लेकिन एक ही है मेरे पास

शालिनी - थिक है मुझे दिखाना उसी माडल मे मै भी लूंगी ,,,, ये मेरी वाली चुबती है सोने पर

निशा - अरे मा तो आप ब्रा पहन के क्यू सोती हो , ब्रा पहन कर नही सोना चाहिये

शालिनी हस कर - अगर मै ना पहनू तो तेरे पापा रोज हिहिही.....।

निशा को शर्म आने लगी - धत्त मम्मी आप भी ना हिहिहिही ....।

शालिनी हस कर - और क्या देखना शादी के बाद तु पहन कर ही सोयेगी ,,,क्योकि इन मर्दो को रात भर टटोलने की आदत होती है हिहिहिही और तेरे पापा तो ....

निशा हसकर शर्म से लाल होती हुई - माआ बस भी करो हिहिहिही मुझे शर्म आ रही है ,,,,,हा नही तो ।

शालिनी - अरे मुझसे क्या शर्माना , बेटी जब बडी हो जाये तो उसकी मा उसकी दोस्त बन जाती है

निशा हस कर - रहने दो मा ,, आपको मेरी दोस्ती मह्गी पड़ जायेगी हिहिहिही

शालिनी - अच्छा वो भल क्यू

निशा - अरे आपसे दोस्ती कर ली तो पापा को जीजू कह के बूलाना पडेगा ना हिहिहिही

ये बोल कर निशा किचन से खिलखिलाकर भागी और शालिनी उसके जवाब सुन के उसके पीछे भागी - रुक बेशर्म कही की ,,, अपने पापा को जीजू बनायेगी हिहिहिही

निशा अन्तत: शालिनी के पकड मे थी ।

निशा हस्ते हुए - क्या मम्मी अब सहेली का पति को जीजू ही कहुन्गी ना हिहिही

शालिनी हस दी - धत्त पागल ,,,तुझसे तो बात ही करना बेकार है

शालिनी किचन मे जाने लगी तो निशा उसके बगल मे आकर उसके कन्धे पर हाथ रख कर - यार शालिनी , जीजू बड़े स्मार्ट लगते है ,,नम्बर देदे ना

शालिनी हस्कर गुस्सा दिखाते हुए निशा के कान ऐंठते हुए -बहुत बोल रही है तू ,,थोडी छूट क्या दी ह्म्म्ं ,,अप्ने बाप को लाईन मारेगी

निशा दर्द मे हस्ते हुए - अरे नही माआ सॉरी ना हिहिहिही प्लीज छोड दो वो तो मै मेरे जीजू का नम्बर माग रही थी हिहिहिह्जी पापा का थोडी

शालिनी वापस से उसके कान खीचते हुए - क्या बोली

निशा हसते हुए माफी मागने लगी - हिहिहिही सॉरी मम्मी प्लीज छोड दो अह्ह्ह दर्द हो रहा ,, नही कहूँगी अब

शालिनी ने उसके कान छोड दिये और निशा हस कर भागते हुए - देखना मै जीजू का नम्बर लेके रहूँगी हिहिहिही

ये बोलकर निशा अपने कमरे मे भाग गयी और शालिनी उसकी चंचलता और बचकानी हरकतो पर हसने लगी । ये सोच कर कि अभी कुछ सालो के लिए ही तो यहा पर है फिर अपने ससुराल चले ही जायेगी । शालिनी ने थोडा अपनी नम होती आंखो को आंचल से पोछा और किचन मे खाना ब्नाने चली गयी ।



राज की जुबानी


रोज की तरह आज भी मै दुकान पर बैठा हुआ था ।

शादियो का सीजन खतम हो गया और काफी सारे स्टॉक्स कम हो गये थे ।

अनुज भी मेरी हैल्प कर रहा था ,हमने सामानो की पर्ची बनानी शुरु की ।

फिर फोन पे ही ओर्डेर दे दिया

क्योकि ज्यादा सामानो के लिए मुझे अब बडे शहर नही जाना होता था । ऑर्डर कर देने पर अगले ही दिन सारा सामान और बिल आ जाता ।

नेक्स डे पर मै बैंक से पेमेंट करवा देता था ।

दोपहर तक हमने पर्ची बनाई और फिर अनुज खाने के लिए घर निकल गया ।

अभी भी मै कुछ बचे खुचे समान पर नजरे मार रहा था कि मेरे मोबाइल की घंटी बजी । ये निशा ही थी ।

दुकान मे कोई ग्राहक था नही तो मै भी मस्ती मे

मै - और जानेमन क्या हाला है ,,,कहातक बात पहुची

निशा हस कर - बिस्तर तक हिहिहिही

मै चहक कर - कर लिया ,,लेकिन कब और कैसे? अभी तो दो ही दिन हुए ना बताये ???

निशा - अब क्या करती वो जो कहानी पढ रही थी मै । उसी ने मेरे जज्बातो को बहला दिया और मै खुद को रोक नही पाई

मै हस कर - तब कितने राउंड हुए कल हम्म्म्म

निशा - धत्त एक ही तो ,,उसका पहली बार था और पता है उसने अनुज से शर्त लगायी है कि वो उसके सामने मुझे .....हिहिहिहिही

मै निशा को छेड़ता हुआ - उंहू एक साथ दो दो हा ...। मजे ले रही हो जानेमन

निशा - धत्त मै नही ऐसा कुछ करने वाली ...।

मै - अरे कर लो ना जान,,ट्राई करने मे क्या है अब ऐसे अपने छोटे भाई का दिल दुखाना अच्छा नही है ।

निशा - ओहोहोहो और मेरा वो दुखेगा तो ,,राहुल का तो एक हिसाब से तुमसे छोटा था पता नही अनुज का कैसा होगा । नही बाबा नही एक साथ दो नही ।

मै हस कर - कोई बात नही जैसी तुम्हारी मर्जी ,,वैसे अब रातो मे तडपना नही पडेगा

निशा शर्मा कर - हा लेकिन तुम्हारी कमी वो नही पूरी कर सकता ना

मै - कोई नही कभी मौका लगा तो मै भी हाथ साफ कर ही लूंगा


मै निशा से बात कर ही रहा था कि मेरे मोबाइल पर मैसेज बिप हुआ , जो काजल भाभी का था । मै मुस्कराया और निशा से बाद मे बात करने का बोल कर जल्दी से WhatsApp खोला

काजल - hey good morning

मै - are dophar ho gayi hai bhaabhi 😁

काजल - 😄😄 Ha ji

काजल - achcha suno ek kaam tha

मै - Ha kahiye na bhaabhi

काजल - wo kal mera ek parcel aayega le loge kya

मै चहक कर - isbaar kya hai

काजल - Wo kapde hi hai aur kya

मै - lekin pichli baar box bada tha , kya tha usme ? 🤔

काजल - 😄 kapde hi the ji

मै - lekin mai us din us box par item details padha tha to

मै - usme koi complete gadgets set ke baare me likha tha .

काजल थोडा रुक कर रिप्लाई की ...

काजल - Nahi to , aisa kuch nahi tha ... aur tum mere samaano ki jaasusi karate ho kya

मै -😄 are nahi nahi wo box bada tha to aise hi man hua dekh lu .

काजल - hmmm

मै - lekin Jab maine uska Barcode scan kiya to 😁 saare aujaar dikhe mujhe jo ap magwayi thi

काजल ने मैसेज देखा और थोडा देर चुप रही ....

मै - aap tensn na lo . Mai kisi ko nahi kahunga , bas mere kuch sawaal hai

काजल - kya ??

मै - wo mai kal parcel leke aaunga to btaaunga abhi bye

काजल - ok bye

मै समझ गया कि काजल भाभी की फट चुकी है और उसकी धडकनें इस समय तेज होगी । वो तो इस समय ये सोच रही होगी कि मुझसे सामना कैसे करेगी और मेरे सवाल क्या होने वाले है ।

जारी रहेगी
 
अगला अपडेट आज दोपहर में मिलेगा
 
अपडेट 135


पिछले अपडेट मे आपने पढा एक ओर जहा राहुल और निशा की चुदाई हो गयी थी , वही राज ने काजल भाभी को लपेटना शुरु कर दिया है देखते है आगे राज का क्या प्लान बनता है ।

अब आगे



राज की जुबानी


निशा से फोन पर और फिर काजल भाभी से whatsaap पर बात की और दुकान के काम मे लगा रहा ।

शाम को अनुज रोज की तरह राहुल से मिलने गया और वापस घर की ओर निकल गया ।

रात के 8 बजने के करीब थे और मै दुकान लगभग बढा चुका था कि शालिनी चाची दुकान पर आई ।

चाची को इस समय अचानक से दुकान पर देख कर मै चौक गया

मै - चाची आप यहा इस वक़्त ? सब ठिक है ना

चाची मुस्कुरा कर - हा रे । मुझे क्या होगा ?

मै - आप इतने टाईम यहा , मा तो घर पर है

चाची मुस्कुरा कर - अरे लेकिन मुझे तो तुझसे काम है ना

मेरी आंखे चमकी कि कही चाची उस दिन दोपहर वाली अधूरी कहानी पूरी करने तो नही आ गयी । क्योकि आखिरी बार जब वो आई थी तो मस्त मुह पेलाई से काम चलाना पडा था ।

मै मुस्कुरा कर - अरे तो ऐसे बोलो ना कि अपने बॉयफ्रेंड से मिलने आई हो

चाची ने इधर उधर देखा और शर्मा कर - धत्त बदमाश ,,कोई सुन लिया तो

चाची - वो तो मै ब्रा लेने आई हू

मै - अच्छा ठिक है आप बैठो मै ये सामान रख दू फिर आपको दिखाता हू

फिर मैने फटाफट समान हटाया और शटर गिरा दिया

चाची - अरे बेटा क्या कर रहा है ये ,,,आस पास की दुकाने खुली है और तु

मै हस कर - आप नही चाची,,, आप अपने घर मे है किसी बाहर के गैर के साथ नही हिहिही और उपर से आपका बॉयफ्रेंड हू मै हिहिहिहिही

ये बोल कर मै चाची की कमर मे हाथ डाल कर उन्हे अपनी ओर खिच कर उनके रसीले होठो को चूसा

चाची पहले तो कसमसायी लेकिन मेरे हाथ जब उनकी नंगी मुलायम कमर पर रेंगते हुए उपर पीठ की ओर बढने लगे तो वो भी अपने आप को ढिला करते हुए मेरे होठ चूसने लगी ।

उनका साथ पाते ही मैने अपने दोनो हाथो को उन्के जिस्म के पीछले हिस्सो को सहलाना शुरु कर दिया ।

उनके उभरे हुए चुतडो से उपर के कन्धे तक कमर पीठ सब

चाची मेरे स्पर्श से सिस्कने लगी और सारा बदला मेरे होठो को निचोड कर निकालने लगी ।

मेरा लण्ड तो उनके आने से ही तना हुआ था और अब तो और भी मोटा हुआ जा रहा था ।

इसिलिए मैने लोवर मे हाथ डाल कर लास्टीक के उपर से लण्ड को निकाला और उनका एक हाथ पकड कर उसपे रख दिया ।

चाची मेरे गरम लण्ड को छुते ही सिहरि मगर उन्के होठ मेरे गिरफ्त मे थे जिससे उनका सीना फुल गया ।

उन्होने उसे आगे की ओर भीचना शुरु कर दिया

मैने उनके होठ छोडता हुआ - अह्ह्ह चाची थोडा आराम से उह्ह्ह्ह सीई उफ्फ्फ

चाची - ओह्ह्ह बेटा कितना मोटा हो गया है रे पहले से उम्म्ंम्ं

मै - ये अपनी जान को देख कर हो गया है ,,,

मै उसके चुचे उपर से मसल कर बोला

चाची आन्खे बन्द करके मेरे हाथो का मर्दन अपने स्तनो पर मह्सूस करके मेरे लण्ड को आगे की ओर मुठियाते हुए सिस्कने लगी ।

मैने उनको घुमाया और पीछे होकर साड़ी का पल्लू हटाते हुए ब्लाउज के उपर से दोनो चुचियो को थामते हुए मसलना शुरु कर दिया ।

क्या मस्त कड़क चुचिया थी चाची की । लगता ही नही कि दो बच्चे जवान हो गये है । जैसे किसी नयी शादीशुदा औरत जितनी कसावट थी इनमे ।

मै एक एक करके बटन खोले और बिना ब्रा वाली चुचियो को नंगी ही हाथो मे भरने लगा

उफ्फ्च ये नुकिले निप्प्स हहह क्या कड़कपन है ,, जैसे ही मेरी हथेलीया चाची के तने हुए निप्प्लो पर घुमे । चाची ने और गहरि सास भरी और कसमसाने लगी ।

मैने वापस से वही दुहराया और फिर उनकी चुचियो को मिज्ने लगा

मै - ओह्ह चाची कितना मस्त चुची है आपकी ,,,इतना कसा कैसे है ओह्ह्ह

चाची - हा लेकिन तु जैसे मसल रहा है ,तेरे चाचा ऐसा करते तो कबकी ढीली हो जाती

मै - ओह्ह तो फिर चाचा को क्या पसन्द है आपमे उम्म्ंम

चाची सिस्क कर - वही जहा तेरा मुसल बार बार ठोकर मार रहा है

मै जोश से भर गया कि चाचा को चाची की गाड़ बहुत पसंद है ।

मै अपना लण्ड अब चाची के गाड़ पर चुभोता हुआ - ओह्ह फिर तो क्या चाचा रोज रोज

चाची - सीई उह्ह्ह हाआअह बेटाहहह रोज मारते है अह्ह्ह ,, आगे से ज्यादाआह्ह तो उन्हे पीछे ही उम्म्ंम ओह्ह अराअम्ंं से बेटाहह ओह्ब माआआह्ह

मै उनकी चुची मस्लता हुआ - तो मुझे नही दोगी चाची उम्म्ंम

चाची - उम्म्ंम क्या लेगा बेटा बोल ना ,,,सब तेरा ही है रे अह्ह्ह उम्म्ंम

मै गहरी आह्ह्ह भरता हुआ - चाची उम्म्ंम मुझे भी आपकी गाड़ चोदनी है

चाची सिहरि - अह्ह्ह तो लेले ना बेटा उम्म्ं लेकिन जल्दी कर उम्म्ंम

मै चहका - तो जल्दी से चुसो मेरा लण्ड फिर मै जल्दी से आपकी गाड़

चाची घूमी और मुझे एक नजर मादकता से देखा और घुटनो के बल होकर बैठ गयी ।

मैने मेरे लोवर और अंडरवियर को थोडा निचे किया । फिर चाची ने हौले से मेरे लण्ड को थामा

चाची - ये तो बड़ा गरम है रे उम्म्ं उम्म्ं सरर्र्र्रृऊऊपपपपप उम्म्ंम गुउउउऊगऊऊउऊ अह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंम

मै - ओह्ह्ह चाची उम्म्ं मस्त चुसते हो आप अह्ह्ह

मेरा लंड तो जैसे चाची के मुह मे घुलने ही लगा था ,, उनकी उंगलिया मेरे आड़ो को छू रही थी । मै जैसे उड़ने को हुआ मेरी एडिया अनायास ही उठने लगी और लण्ड चाची के गले मे उतरता रहा ।

अगले ही पल चाची ने खासते हुए ढेर सारे लार के साथ मेरा लण्ड उगल दिया ।

मगर मै कहा से रुकता ,,उनके बालो को पकड कर चेहरा उपर की ओर करके अपना लण्ड उनके मुह पर रगड़ने ल्गा और दो तिन बार उन्के होठो पर पटका जिससे मेरे शुरुवाती वीर्य की कुछ बुन्दे टपक पडी ।

चाची ने फौरन लपक कर मुह मे लण्ड भर लिया और निचोडने लगी ।

मै - ओह्ह चाची सारा माल ऐसे ही पी जाओगी क्याआह्ह्ह ,,, उठो ना मुझे आपकी गाड़ मे डालना है इसे

चाची मे मुह से लण्ड निकाला और लार से लभेड़ाये मेरे लण्ड को मुठियाते हुए एक कामुक मुस्कुराहट भरी नजरो से मुझे देखा और खड़ी हो गयी ।

चाची - वो तेल वाली शीशी खोल पहले

मै जानता था चाची अपने शरीर को लेके बहुत फोकस औरत है । खासकर सेक्स के दौरान कोई भी लापरवाही नही बरतती है । हमेशा सेफ़ सेक्स के लिए ही जाती है ।

मैने मुस्कुरा कर एक नारियल तेल की छोटी सीसी उठाई और चाची ने भी अपनी साड़ी उठा कर पैंटी निकाल दिया ।

फिर काउंटर के सहारे झुक कर मुझे अपनी कसी हुई मुलायम पाटो वाली गाड़ दिखाते हुए अपने कूल्हो पर हाथ फेरने लगी ।

मैने तेल की पतली शीशी का ढक्कन खोला कर टिप टिप करके एक एक बूंद चाची की गाड़ के दरारो मे गिराने लगा ।

जैसे जैसे तेल दरारो से रिस कर गाड़ की सुराख की ओर जाता वैसे वैसे वो अपने पाटो को सख्त करती जा रही थी ।

फिर मैने अपनी चार उंगलियो मे तेल को च्भोड़ा और चाची के गाड़ के दरारो मे घिसते हुए उन्के गाड़ की छेद पर ले गया ।

चाची सिस्क उठी , उत्तेज्ना तो मुझे भी हो रही थी और लण्ड उनकी गाड़ मे घुसने को बेताब था ।

मैने थोडा सा उनकी गाड़ के सुराख के पास तेल को मलने लगा

चाची - उम्म्ंम्मा अच्छे से लगाना बेटा अह्ह्ह उगली डाल के अह्ह्ह ऐसे ही हा हा और थोडा तेल लेके अच्छे से लगा दे ,,,

मै मुस्कुराया और चाची की गाड़ मे दो ऊँगली पेले हुए उनकी चुतड के दरारो को फैलाये रखा और उपर से टिप टिप करके थोडा तेल और अपनी दोनो उंगलियो पर लिया और खचाखच तेजी से चाची की गाड़ मे ऊँगलीया पेलने लगा

चाची - ओह्ह लल्ला आराम से उह्ह्ह्ह उम्म्ं माआह्ह सीईई ओह्ह

मैने देखा जल्द ही चाची की गाड़ नरम होने लगी । मैने अपने लण्ड पर अब तेल गिराना शुरु किया और अच्छे ल्भेड़ कर पिचिर पिचिर की आवाज से उसे मुठियाते हुए चाची के गाड़ के सुराख पे ले गया।

चाची गहरी सास लेते हुए - उसपे भी अच्छे से तेल लगाया है ना बेटा,,,उम्म्ंम थोडा धीरे धीरे करके डालना

मै अपना अंगूठा चाची के गाड़ मे घुसेड़ कर पेल रहा था और दुसरे हाथ से लण्ड मुठीयाते हुए सोच रहा था - साली अभी देख ऐसे फाड़ दूँगा कि दोबारा से इतने नाटक नही करेगी ,,ये कर वो कर ऐसे कर । पता नही चाचा को कैसे कैसे रोक लगा कर उन्हे चोदने देती होगी । हर बात के लिए टोका टाकी । शायद तभी चाचा ने लव मैरिज करने के बाद भी बडी बुआ को चोदा होगा ।

मैने थोडा आवेश मे लण्ड को भीचता हुआ गाड़ के सुराख पर ले गया और सुपाड़े को दबाते हुए पच्च करके लण्ड घुसेड़ दिया ।

चाची थोडा दर्द से छटकी मगर मैने कोई रहम ना दिखाई और लण्ड को आधा घुसेड़ दिया ।

मै जानता चाची दर्द मे है और मेरा लण्ड उनकी गाड़ मे फसा हुआ है इसिलिए वो बोलती उस्से पहले मैने ही पहल कर दी - चाची थोडा तेल और डाल दू

चाची सिस्कर कर - अह्ह्ह हा बेटा डाल दे आह्ह बहुत दर्द है ,,तेरा तो बहुत मोटा है रे अह्ह्ह माअह्ह

मैने वापस से चाची की गाड़ मे आधा लण्ड ही आगे पीछे करके तेल को गाड़ के छल्ले के पास अपने लण्ड पर गिराने लगा ।जल्द ही मेरा लण्ड फ्री हुआ और अब उनकी गाड़ ने भी जगह देदी थी।

मै अब धीरे धीरे करके लण्ड उनकी गाड़ की गहराई मे ले जाने लगा।

चाची - ओह्ह्ह बेटा अह्ह्ह सीईई अह्ह्ह मस्त लण्ड है रे तेरा अह्ह्ह माआआआ उम्म्ंम पेल ऐसे ही ओह्ह्ह

जब पुरा लण्ड आराम से उनकी गाड़ मे अन्दर बाहर होने लगा तो वो भी अब मजे लेने लगी और कामुक सिसकिया लेने लगी ।

मुझे भी उनकी कसी हुई गाड़ मे लण्ड घुसाने मे बहुत मजा आ रहा था।इतना मजा कभी शिला बुआ की गाड़ मे नही आया । चाची की कमर भले ही पतली थी लेकिन गाड़ की चर्बी बहुत ही फैली हुई थी और जैसे जैसे लण्ड मै उन्के गाड़ मे घुसाता , वैसे ही उन्के पाट दोनो ओर फैल जाते

बहुत ही मजा आ रहा था । लण्ड अपनी गति पर था और फचाफच मै उनकी गाड़ मे पेले जा रहा था । बिच मे एक बार चाची ने फिर से तेल डालने को कहा और इस बार तेल डालकर मैने उनके कूल्हो को थामा और पेलता रहा जोरो से

दुकान मे थपथप की आवाज तेज थी साथ मे चाची के सिसकिया भी ।अगर कोई भी बाहर से मेरे शटर के पास कान लगाता को बडे आराम से उसे हमारी चुदाई का पता चल जाता । क्योकि दुकान का कुलर भी जोरो पर ही चल रह था तो ज्यादा बाहर आवाज जाने की चिंता नही थी ।

चाची तो झड़ रही थी और गाड़ मे लण्ड को कसे जा रही थी । मै भी धक्के की गति बढाई और ताबाड़तोड धक्के लगाते हुए उनकी गाड़ मे झड़ने लगा ।

आखिरी बूंद तक मैने चाची के गाड़ मे झड़ा और जब लण्ड बाहर निकाला तो मेरा माल निचे दुकान की फर्श पर तपक रहा था । निचे तो काफी सारा तेल और चाची की चुत का पानी भी गिरा हुआ था ।

मै मुस्करा कर दुकान पर एक डोरमैट पैर से खिच कर उस जगह पर रख दिया ताकी ज्यादा दाग ना बने और सुबह मे आकर उसे साफ कर दूँगा मै ।

मैने एक रुमाल लिया और चाची के गाड़ मे घुसेड़ दिया । चाची चिहुकी - हीईईए बदमाश कही का ,

मै - हिहिहिही अरे रहने दो ना चाची बहेगा नही हाहहहा

चाची मुस्कुरा कर उस रुमाल को अच्छे से गाड़ से निकाल कर अपनी चुत साफ किया और फिर पैंटी पहन ली ।

फिर हम दोनो उपर गये और हाथ धुल कर निचे आये ।

फिर मैने उन्हे उन्की पसंद के ब्रा और काटन टेप दिये ।

मै मुस्कुरा कर - तब चाची फिर से कब आओगे ब्रा लेने हिहिहिही

चाची थोडा कुल्हे को थाम कर - उम्म्ंम देखती हू ,,लेकिन आज तुने अपने चाचा का हिस्सा ले लिया । उनको तो आज सुखे ही रहना पडेगा

मै हस कर - क्यू आगे वाला है ना हिहिहिहिही

चाची - नही रे उनको तो बिना पीछे से लिये नीद नही आती और आज तुने जो किया है उससे मै आगे भी नही देने वाली

मै हस कर मुठियाने का इशारा करता हुआ - मतलब चाचा को आज .....हिहिहिही।

चाची - धत बदमाश कही का ,चल मै जाती हू बहुत लेट हो गया है

मैने भी घड़ी देखी 8.30 हो गये थे । मतलब पिछले आधे घंटे से चाची की गाड चुदाई ही जारी थी ।

फिर मै भी दुकान मे ताला लगा कर निकल गया चौराहे पर ।

वहा गया तो मा ने थोडी पुछ ताछ की ।आज लेट क्यो हुआ तो मैने भी ग्राहक का बहाना बना दिया ।

खाने के बाद अनुज ने मोबाइल मागा लेकिन मैने मना कर दिया । क्योकि आज मुझे काजल भाभी से बात करनी थी ।

इसिलिए मैने थकावट का बहाना करके मम्मी पापा को मना कर दिया ।

पापा ने थोडी आपत्ति की तो मा ने उन्हे थोडा डाट अपने साथ ले गयी ।

मै अपने कमरे मे गया और लेते हुए मोबाइल चेक करने लगा ।

रात के करीब 10 बज रहे थे और काजल भाभी ऑनलाइन थी ।

मुझे तो पता ही था इनकी मुझसे फटी हुई है तो मैने सोचा क्यू ना थोडा मजा लिया जाये

मैने मैसेज करना शुरु किया

मै - hiii bhaabhi 😍

काजल - hmm kaho

मै जानता था कि ये बहुत सावधानी से ही बात करेगी अब इसिलिए मैने भी सतर्कता रखी ।

मै - aur dinner hua apka

काजल - hmm aur apka

मै - abhi abhi pet full karake aaya hu

काजल - hmmm good

मैने देखा ये तो बस कोटा पुरा कर रही है और शायद कल के बाद से वो जो समान है वो मै इनको देदू तो ये मुझसे बात भी नही करे ,,पूरी तरह इग्नोर कर दे। मतलब इसे बहुत ही सोच समझ कर ही बात आगे बढानी होगी ।

मै - hmm lag raha hai aap mujhse naaraaj hai 🤔

काजल - nahi to 🤨

मै - dekhiye aap wo dophar wali baat ke liye tension na lijiye .

मै -Mujhpe bharosa rakhiye mai kisi se nahi kahunga 😊

काजल- hmmm thank you

मै - achcha ab smile kariye

काजल - 😊😊😊

मै - mujhe nahi lag raha ki aap muskura rahi ho ... rukiye videocall karata hu

मै तुरंत वीडियो कॉल किया लेकिन काजल ने उसे काट दिया ।

मै - kya hua 😓😒

काजल - Wo mai Abhi video call par baat nahi kar sakati

मै - kyu 🤔

काजल - wo maine raat waale kapde pahane hai 😄

मै - ohh sorry sorry bhaabhi please sorry ...lag raha hai aap apne gadgets ke saath 🤭🤭🤭

काजल - nahi paagal , wo maine night gown pahana hai to mana kar rhi hu

मै - Oh , Koi bat nahi

काजल - hmm

मै - achcha fir aap aaraam kariye. Mai kal aata hu parcel leke aapka

काजल - ha mai fone karungi ok

मै - Ha ok ... good nyt bhabhi & enjoy your time 😉😛

काजल - badmash kahi ke ,,,bye gn 😂

मैने थोडा राहत की सास ली चलो अच्छा हुआ ये नाराज नही हुई नही तो पक्का मेरा पत्ता कट जाता । अब कल इसके फोन का इन्तेजार रहेगा फिर देखता हू क्या हो सकता है ।



लेखक की जुबानी


एक ओर जहा निचे के कमरे सोया राज कल काजल के लिए प्लानिंग कर रहा था । वही ठिक उसके कमरे के उपर वाले कमरे मे अनुज बेचैन लेटा हुआ था ।

उसके दिमाग मे वो बाते घूम रही थी जो शाम को राहुल ने उसे बतायी थी । कि कैसे राहुल ने अपनी सगी बहन को पेल दिया कल रात को ।

अनुज का ध्यान एक पल को सोनल की ओर जाता , मगर जल्द ही वो वहा से कतरा जाता था क्योकि उसकी नजर में सोनल बहुत ही शांत और अच्छे विचारो वाली लड्की थी । वैसे भी वो लव मैरिज कर रही है तो मेरे साथ क्या वो किसी और के साथ अपने जिस्मो का सौदा नही करेगी ।

बस यही बाते अनुज को सोनल से काट कर निशा के करीब ले जाती , और उसका लंड उसकी मुठ्ठि मे कसने लगता ।

वो मन ही मन कलपनाये बुनता कि कैसे राहुल निशा को चोदा होगा ।

क्या वो दोनो ने बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बनकर चुदाई की या फिर भाई बहन वाले संवादो के साथ चुदाई की ।

अनुज मन मे - ओह्ह्ह्ह यार कितना मजा आया होगा राहुल को सीईई अह्ह्ह्ह ,,, काश मुझे भी निशा दीदी की चुत मिल जाये । मै तो इत्ना चोदूंगा की चुत फट जायेगी ।

अनुज निशा के संग चुदाई भरे ख्वाब देखता तेजी से लण्ड हिलाए जा रहा था - अह्ह्ह्ह मै तो उन्हे चोदते हूए भी दिदी ही बोलूंगा उम्म्ंम अह्ह्ह निशा दिदीईईई अह्ह्ह । फिर मै भी राहुल की तरह बहिनचोद हो जाऊंगा अह्ह्ह्ह क्या मस्त गाली है याररर

अनुज झडने के करीब था वो तेजी से लण्ड को हिला रहा था और बड़बड़ा रहा था - ओह्ह्ह्ह हाआ मै बहिनचोद हू उम्म्ं निशा दिदी को चोद के बहिनचोद बनूँगा अह्ह्ह्ज सीईई ओह्ह्ह दिदीईईईई मै अपना साराआ माल दिदी की चुत मे भर दूँगा अह्ह्ह्ह दिदीईई देखो ना मै झड़ रहा हू

अह्ह्ह मेरी निशा दिदीईई देखोओह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह

अनुज कमर झटक कर झड़ने लगा और काफी सारा वीर्य उसके लिंग से फुटने लगा

उस्के हाथ मे वीर्य चिपुडने लगा और रिसकर उसका अंडरवियर और जान्घे भीगने लगी ।

जल्द ही शांत हुआ और उसकी सासे अब भी तेज थी ।

मगर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी ।

वो उसी अवस्था मे सो गया । ना उसने हाथ धुले ना ही अंडरवियर निकाला बस अपने ख्वाबो मे निशा को सोचता रहा ।

इनसब से अलग राहुल के कमरे मे निशा घोडी बनी हुई थी और राहुल उसकी चुत मे लण्ड पेले जा रहा था । आज भी उसकी वही विनती थी कि वो अनुज के सामने एक बार सेक्स के लिये राजी हो जाये ।

मगर निशा ने बडी शरारती अंदाज मे उसे झड़ा कर बिना उसके सवालो का जवाब दिये अपने कमरे मे निकल गयी ।

इधर जन्गीलाल आज बहुत उदास था क्योकि आज शालिनी ने उसे चुदवाने से मना कर दिया था ।

शालिनी तो सो गयी लेकिन जंगीलाल की आंखो से नीद गायब थी । महिने 7 8 बार ऐसा जरुर होता था कि शालिनी सेक्स के लिए मना कर देती थी । ऐसे मौके पर जंगीलाल को बहुत गुस्सा आता था क्योकि एक तो शालिनी का चुदाई के लिए अलग ही नखरे और टीटीममे होते थे । दुनिया भर की सुरक्षा सावधानियो से वो तंग आ चुका था । जन्गीलाल की बहुत इच्छा उठती थी वो बडी बेरहमी से एक बार शालिनी को नोच्ज खसोट कर पेले ,मगर लव मैरिज मे बीवी भारी ही रहती है ।

शालिनी को अपने बदन पर खरोच के निशान तक बरदास्त नही थे और वो इनसब मामलो मे बडी सख्त थी । क्योकि वो काफी मोर्डन तरीके से कपडे पहनती थी । ब्लाउज भी स्लिवलेस ही रहता और पीछे का गला भी मुस्किल से 3 से साडे तिन इन्च । ब्रा का चुनाव भी बहुत सोच समझ कर करती थी ।

नाभि से 6 उंगल निचे साड़ी पहनने की आदत ने ना जाने कितनो के लण्ड मे हवा भरी होगी ।

जन्गीलाल भले ही शालिनी को उसके सेक्स रिस्ट्रीक्शन के लिए कोसता लेकिन दिन के उजाले मे समाज मे हमेशा गर्व से छाती चौडी करके रहता था क्योकि उम्र के इस पड़ाव पर शालिनी की टक्कर मे कोई भी औरत नही थी । हा भले ही उससे गदराई जिस्मो वाली और कामुक अदाये दिखाने वाली लाखो मिलती लेकिन शलिनी के जिसमो को कसावट और सपाट पेट के सामने अच्छी अच्छी पानी भरती नजर आती थी । बस यही कारण था कि जन्गीलाल कभी सेक्स का गुस्सा शालिनी पर नही निकालता था ।

समय के साथ उसने अपनी बड़ी बहन शिला के साथ जबसे सम्बंध बना लिये । उसके बाद से उसका रसिकपना बढ गया । काम के बहाने कभी कभी बडे शहरो मे जाता तो वहा हॉटलो मे एक रात के लिये अच्छी से अच्छी और महगी रन्डी चुनता था । पूरी रात उस रन्डी को रौंद कर महिनो की अपनी भड़ास निकाल देता ।

इनसब अलग शालिनी तो थी ही चंचल और हाल के समय मे जबसे वो अपनी जेठानी रागिनी के साथ ज्यादा समय बिता रही थी उसके अन्दर भी बदलाव आने लगे । वो भी रागिनी के बातो मे आकर खुद को नारी सुख देने के लिए तत्पर होने लगी । उसे अब मर्दो को छेड़ कर उन्हे परेशान करने मे मजा आता था । ऐसा तो वो पहले कयी दफा अपने जेठ रंगीलाल के साथ कर ही चुकी थी । मगर राज ने उसे लपेट लिया और आज उसकी जो चुदाई की वो शालिनी अगले कुछ दिनों तक याद करने वाली थी ।

जारी रहेगी
 
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