Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 36 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 185
अमन के घर



बेचैन परेशान मदन तेज कदमो से निचे अपने कमरे मे चला आया और पजामे से मुसल निकाल कर बाथरूम मे जाके उसपे पानी डालने

सुपाड़े की तेज जलन सालो बाद उसके बर्दाश्त से बाहर की थी ।

फड़कती नसे और उसपे बड़ी बहन का स्पर्श अभी भी मह्सूस कर पा रहा था वो ।

बांस की तरह कड़क और सीधा तना हुआ मुसल का सुपाडा लाल हुआ जा रहा था ।

कपालभाति और गहरी प्राणायम विद्या आज धरि की धरि रह गयी थी उसकी कामोत्तेजना के वेग मे ।

पजामा निकाल कर एक कुर्सी लेके मदन कुलर के आगे अपनी टाँगे खोलकर बैठ गया कि ठंडी हवाओ का कुछ तो असर हो

काफी सारे तीगड़म से कुछ नही बना मगर धिरे धीरे समय ने ही उसकी फरियाद समझी और लन्ड की नसो से खुन का वेग हल्का होने लगा , जल्द ही मदन को राहत हुई और दिनभर की भागादौडी मे कुलर के आगे लेटे हुए उसे कब नींद आ गयी पता ही नही चला ।

नीद मे बेखबर मदन को अह्सास ही नही था कि छत से आने की जल्दबाजी मे उसने कमरे का दरवाजा अन्दर से लॉक नही किया था ।

इधर संगीता उपर रस्मो से खाली हुई तो उसकी सरसरी निगाहो ने मदन को खोजा मगर वो कही नजर नही आया ।

सारे लोग भोजन के लिए बगल के हाते मे एकजुट हो रहे थे , संगीता भी अपने प्यारे भैया को खोजती हुई उनके कमरे मे दाखिल हो गयी ।

कुलर के आगे कुर्सी पर पैर फैला कर मदन को सोया देख संगीता को समझते देर ना लगी कि क्या मामला हो सकता था । वो थोडा खिलखिलाइ और धीरे से दरवाजा भिड़का कर मदन के पास आई तो उसकी आंखे बड़ी हो गयी ।

उसे यकीन ही नही हो रहा था मदन ऐसे इस हाल निचे से एकदम नंगा अपना खीरे जैसा मोटा मुसल ऐसे ही खोलकर सोया हुआ होगा ।

काली चमडी से बाहर निकले गुलाबी सुपाड़े की मोटाई देख कर संगीता की लार टपकने लगी ।

जी मे यही आ रहा था कि अभी झुक कर अपने छोटे भैया का सोया हुआ लन्ड चुस ले मगर इतनी जल्दबाजी ठिक नही थी ।

संगीता ने मुस्कुराई और मदन का कुर्ता हल्के उठा कर उसके जान्घो पर फैलाते हुए उसका सोया हुआ मुसल ढक दिया

फिर एक गहरी सास लेते हुए मुस्कुराइ और मदन के कन्धे को हिलाती हुई उसको जगाने लगी ।

मदन ने आन्खे भीचते हुए संगीता का मुस्कुराता चेहरा देखा और अधूरी चेतना भरी हालात मे - दिदीई आप

संगीता हस कर - हा उठिए आप यहा ऐसे क्यू सोये है ?

संगीता के सवाल ने मदन को अपनी हालात के प्रति चेताया और झटके के उसने निचे देखा तो उसका लन्ड कुरते के निचे छिपा था और उसने गहरी सास ली ।

संगीता मदन की हड़बड़ाहट पर मुस्कुराई और बोली - मै तो अभी भी कहती हु शादी कर लो , ये सब की जरुरत नही पड़ेगी

अपनी बहन के शरारती और दोहरे अर्थ वाली बात पर मदन की भौहे तन गयी और उसे लगा कि कही उसकी बहन ये तो नही समझ रही है कि मैने हस्तमैथुन किया हो ।

संगीता उसको ख्यालो मे डुबा देख - कहो तो मेरी छोटी नंद से बात चलवाऊ

मदन लाज के मारे हसता हुआ - क्या दीदी , वो तो मै गर्मी के नाते ऐसे बैठा हुआ था और कब सो गया पता ही नही चला ।

संगीता - अच्छा ठिक है जल्दी आओ पैंट पहन के हिहिही

फिर संगीता हस्ती हुई कमरे से बाहर चली गयी और मदन अपने आप पर शर्मिंदा हुआ कि ये सब क्या हुआ ।

उसके जहन मे कयी सवाल थे , कही उसकी बहन ने ही तो उस्का लन्ड देखने के बाद ढका तो नही, वरना वो दोहरे अर्थ मे बाते क्यू करती ।

उसकी बहन से उसका लन्ड देख लिया ये ख्याल आते ही मदन का लन्ड फिर से तन गया और वो उसको जबरदस्ती पजामे मे घुसाते हुए फ्रेश होकर बाहर खाना खाने के लिए चला आया ।

वही दुर से उसकी नजर संगीता से मिली और वो मुस्कुरा उठे ।

जिसको भोला ने भी नोटिस किया ।

वही अमन खाना खा रहा था कि तभी उसके मोबाइल पर मैसेज बिप होने लगा ।

धडाधड एक एक करके सोनल ने व्हाट्सअप पर मैसेज डाले हुए थे ।

अमन को याद आया कि सोनल नहाने के बाद नये कपडो मे स्नैप्स भेजने वाली ।

अमन एक किनारे हुए और अपना मोबाइल खोलकर जैसे ही मैसेज देखे उसकी आंखे फैल गयी

झट से उसने मोबाइल का ब्राइटनेस कम किया ताकि आस पास मे खड़ा और कोई नही देख ले ।

सोनल ने ढेर सारि तस्वीरो के साथ निचे आखिर मे एक text छोड रखा था

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अमन ने स्क्रोल करके उपर की तस्वीरे देखी

तस्वीरे देखते ही अमन के मुह में पड़ा निवाला अटक गया

उसने जल्दी से निवाला गटका और इधर उधर देखते हुए खाने की प्लेट एक ओर सरकाई और हाथ धूल कर तेजी से भागता हुआ घर मे घुस गया

सरपट जीने से भागता हुआ उपर कमरे मे गया और बिस्तर का कोना पकडते हुए सोनल को वीडियो काल कर दिया

सामने से सोनल मे मुस्कुरा कर वीडियो काल पिक किया

वीडियो कॉल कर सोनल कर जानलेवा रूप देख कर अमन का कलेजा धकधक करने लगा और उसका लन्ड भन्न से कस गया ।

पजामे के उपर से अपना मुसल मसलते हुए अमन मोबाइल मे देखने लगा

सोनल पीले सिफान की साडी मे लिपटी अपने जिस्म की नुमाईश करते हुए बड़े ही कामुक तरीके से इठलाती हुई आगे पीछे घूम कर अमन को अपना कामुक अवतार दिखा रही थी





उसने शॉवर ऑन करते हुए अपनी बड़ी सी गोल गोल चुतड अमन की ओर करके खडी हो गयी ।

धीरे धीरे पानी उसके घने बालो से रिस्ता हुआ उसकी गोरी चिकनी पीठ से होता हुआ उसके साडी को भिगोता उन्हे पारदर्शी बनाता उसकी गुदाज गाड़ पर बहने लगा

जल्द ही उसकी साडी पानी मे भीग कर लसराने लगी और उसकी गोरी गोरी फैली हुई गाड़ उभर कर अमन के सामने थी





तभी सोनल ने अपनी कमर को झटकाते हुए अपने चुतड उछालने लगि और उसे मोटे मोटे चुतडो के फाके पट्ट पट्ट की आवाज के साथ आपस मे तालिया बजाने लगे

और अमन का मुसल फौलादी हुआ जा रहा था

उसने अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसको हिलाने लगा और मोबाइल स्क्रीन के उपर से ही सोनल की चर्बीदार गाड़ को चुमने लगा ।

सोनल वापस घूमी और उसने मुस्कुरा कर अमन को देखा और मोबाईल स्क्रीन को चुमते हुए उसे एक पप्पी दी और फिर बड़े ही शरारती ढंग से बाय बोल कर फोन काट दिया ।

अमन का चढते अरमान धरधरा कर जमीन पर आ गिरे

उसने लगातार 3 4 बार वीडियो काल घुमाया मगर सोनल ने पिकअप नही किया

फिर 20 मिंट बाद एक मैसेज बिप हुआ

Talk u later my sona 😘

अमन को अफसोस हुआ मगर सोनल के सरप्राइज ने उसका दिल खुश कर दिया था । फिर वो निचे चला गया ।

इधर अमन के जाने के बाद

संगीता और भोला आपस कुछ बाते कर रहे थे जिनपर मदन अपनी आंखे गडाए हुए था ।

संगीता ने कजरारी आंखो से निवाला खाते हुए भोला को देखा और भोला थोडा लाज से मुस्कुरा दिया ।

मदन को अपनी बहन की शरारतो को नोटिस करने मे बड़ा ही रोचक अनुभव हो रहा था ।

संगिता और भोला ने अपनी थाली खतम करते हुए साथ ही हाथ धूलने बेसिन पर गये ।

वहा भोला संगीता को कुछ समझा रहा था जो कि उनके नाटक का ही हिस्सा था ।

फिर संगीता मुस्कुरा कर आगे बढ़ गयी , उसने दो बार पलट पलट कर भोला की ओर मुस्कुराहट भरी नजरो से देखा और अपने कुल्हे हिलाते हुए खाने के टेन्ट से निकल कर घर मे घुस गयी ।

मदन चोर नजरो से भोला को निहारे जा रहा था और उसकी सासे तब चढनी शुरु हुई जब भोला भी सबकी नजरो से खुद को बचाता हुआ घर मे घुस गया

मदन ने जल्दी जल्दी चावल चबाना शुरु किया और फटाक से मुह धूल कर घर मे जाने को हुआ कि किसी एक पहचान वाले ने उसको टोका ।

मदन के गर्म तवे पर मानो किसी ने पानी छींटे मार दिये हो ऐसे गुस्से मे उसका कालेज छरछराया ।

मदन घर आये मेहमान की दो बाते सुननी ही थी , जैसे तैसे बातो मे उस आदमी ने मदन के 5 - 7 मिंट खा लिये ।

इधर भोला और संगीता ने अपने कमरे का दरवाजा अधखुला छोड कर अपना रोमान्स चालू कर चुके थे ।

जैसे ही मदन को उस आदमी से फ़ुरसत हुई वो लपक कर तेज कदमो से घर के भीतर दाखिल हुआ

बिना कुछ देखे जीने से होकर सरपट ऊपर की ओर भागा

जीने पर तेज कदमो की आहट ने भोला और संगीता को सतर्क किया और उन्होने अपनी योजना आगे बढ़ाइ ।

मदन हाफ्ता हुआ उपर पहुचा और उसने अपनी सासे बराबर करते हुए खुद को पल भर को शान्त किया और अपना तना हुआ मुसल भींचते हुए दबे पाव आगे बढ़ने लगा ।

कमरे का दरवाजा अधखुला पाकर मदन की आंखे चमक उठी ,

मदन को लगा कि उसकी दीदी से मारे जोश मे दरवाजे का ध्यान ही नही रहा ।

उसकी सासे तो तब अटकी जब उसने कमरे के भीतर झाका ।

तेज उफनाती सासो को थामते हुए उसने अपने नथुनो पर अपना पन्जा रख कर अपना लन्ड पजामे के उपर से कस के भिचा और हल्का हल्का सास छोडने लगा ।

सामने का कामुक दृश्य देखकर मदन के मुह मे पानी आने लगा था





समाने संगीता अपनी साडी कमर तक उठाये एक डेस्क का सहारा लेके आगे झुकी थी और भोला निचे से उसकी टांगो के बीच मे घुसकर उसकी चुत पर अपना मुह दे चुका था ।

सन्गिता अपने चुतड को कसती हुई भोला के सर को अपनी चुत पर दबाती हुई कसमसा रही थी - उह्ह्ह रिन्की के पापा और चुसौह्ह्ह उम्म्ंम माह्ह्ह आज सुबह से बह रही है उम्म्ं खा जाओ मेरी बुर उह्ह्ह मेरे राअज्जाअह्ह्ह

अपने बहन के मुह से ऐसी कामोत्तेजक बाते सुन कर मदन का सुपाडा पुरा फुल गया था और भोला पुरे रस से अपनी बीवी की चुस चाट रहा था ।

इधर खाने के पान्डाल मे घर के मुख्य पात्रो को गायब पाकर ममता को फ़िकर हुई , अमन कही नजर नही आ रहा था ।

वो पता करने के लिए वो घर मे गयी और जीने से होकर जैसे ही उपर पहुचने को थी उसने सामने का नजारा देख कर वापस से दो सीढ़ी निचे उतर गयी ।

फिर थोडा मुस्कुराई और हल्के से गरदन उचका वापस से संगीता के कमरे के बाहर मदन को उसका मोटा खीरे जैसा मुसल मसलते हुए देखा ।

ममता मन मे बुदबुदाइ - ओहो मतलब ननद रानी ने अपना जलवा बिखेर ही दिया मेरे देवर पर हिहिहिही

ममता ने उन्हे इंजॉय करने दिया और खुद निचे आ गयी ।

इधर संगीता कमरे मे चौकी पर साडी कमर तक उठाए हुए झुकी थि और भोला अपना मोटा लन्ड उसकी गाड़ मे खुब हचक हचक कर पेल रहा था ।

संगीता - उह्ह्ह मेरे राजाअह्ह्ह्ह्ह कबसे तरस रही थी मै इस पल को ऊहह फक्क्क मीईई उह्ह्ह येस्स्स्स रिन्की के पापा उह्ह्ह्ह और कस के , आज रात मे भी आप मुझे पेलोगे उह्ह्ह मुझे और चाहिये उह्ह्ह





भोला आज अपने साले के सामने उसकी बहन को पेलता हुआ बहुत उत्तेजित हो गया था , उस्का मुसल पहले से ज्यादा तना हुआ और फुला था ।

संगीता की गाड़ मे लन्ड को ह्चक कर भरता हुआ - हा मेरी रंडी मै भी तुझे आज कस कर पेलुँगा , रात जब सब नाच मे बिजी होंगे तब

मै तेरी बुर मे घुस कर नाचूँगा उह्ह्ह मेरी जाआन्ंं मै आ रहा हुउउउऊ उह्ह्ह ओह्ह्ह्ह






संगीता - अह्ह्ह मेरे राजाह्ह्ह भर दो मेरी गाड़ उह्ह्ह झड़ जाअऊओ उह्ह्ह माअह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं





संगीता की कामोत्तेजक शब्द सुनकर मदन का भी फव्वारा फुट पड़ा और भलभला कर वो भी झड़ने लगा ।

जैसे ही कमोतेजना शान्त हुई उसकी नजरे फर्श पर बिखरी मलाई पर गयी

जेब से रुमाल निकालते हुए उसने जल्दी जल्दी साफ किया और हड़ब्ड़ी मे निकल गया , बिना ये देखे कि उसकी पिचकारि की चम्मच भर मलाई अभी उस बादामी दिवाल से रिसकर निचे टपकने को हो रही थी ।

इधर जब दोनो मिया बीवी उठ कर बाहर आये तो उन्होने आस पास जांचा परखा

और तभी संगीता की नजर दिवाल पर गयी जो फर्श के लगभग कुछ इंच उपर गाढी सफेद थक्केदार मलाई धिरे धीरे सूख रही थी ।

संगीता उकुडू बैठती हुई अपनी एक उंगली से उस मलाई को सूखती लिजलिजी सी परत पर उंगलियों से दबाव बनाया और वो महिन झिल्ली सी परत हटते हुए गुनगुना सा वीर्य संगीता की उंगलियो पर सरक आया ।

संगीता मे उस ऊँगली को अपने नथुनो के पास लाई और उसे सूंघती हुई भोला को देखा ।

भोला ने कौतुक वश आंखो से उसके बारे मे पूछा- क्या हुआ

संगीता मुस्कुराते हुए - भैया आये थे , उनही की है ये

योजना सफल होने का सुनकर भोला का चेहरा चमक उठा और वही संगीता ने वो रस लगी ऊँगली अपने जीभ पर रख कर उसे चुबलाते हुए उठ खडी हुई ।

भोला ने उसकी गाड़ दबोचकर - अब आगे क्या किया जाये

संगीता - भैया की आग हमने भड़का तो दी है अब उन्हे रन्गे हाथ पकडना होगा , वो भी हम दोनो को एक साथ ।

संगीता की बात सुनकर भोला थोडा अटका - हम दोनो ? लेकिन क्यू ?

संगीता मुस्कुराई और उसने अपनी योजना भोला को बताई जिसे सुनते ही भोला खुशी से चहक उठा और वो संगीता के गाल चुमते हुए बोला - सच मे तु बहुत चालू आईटेम है हिहिहिही

संगिता - अब चले , सब राह देख रहे होगे हिहिह्ही ।



राज के घर



मेहमानो से निपटने के बाद रंगी से राज को कहा कि सबसे घर मे पुछ ले कोई खाने को रह तो नही गया

राज ने बारि बारि से सबसे पूछा और उपर जाकर जब सोनल के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो रीना ने दरवाजा खोला

राज - भाभी आपने खाना खा लिया , और कोई है क्या यहा ?

दरवाजा खोलकर सामने राज को देखते ही रीना रिलैक्स होती हुई - हम्म्म्म तो देवर जी आप हो , वैसे हम तो अकेले ही थे

राज रिना की प्रतिक्रिया पर मुस्कराया ने एक नजर रिना को उपर से निचे ताड़ा और तभी उसकी नजर रीना के पेट पर गयी , जहा बीती रात निशा ने उसकी नाभि पर मेंह्दी लगाई थी ।





राज की निगाहे भापते ही रिना ने झट से पल्लू आगे कर लिया

राज मुस्कुरा कर - जब मेरे लिये ही रखवाई हो तो छिपा काहे रही हो भाभी हिहिही

रीना तुनकते हुए - किसने कह दिया कि आपके लिए रखा है हम्म्म

राज ने आस पास नजर घुमाई और हौले से रीना का पल्लू उंगलियो से खोलते हुए रीना की गुदाज गहरी नाभि पर बने टैटू को देख कर उसका लन्ड सर उठाने लगा ।

राज - कल हमने ही तो फरमाईस की थी ।

रीना ने कमरे से बाहर झाका और हल्के से बोली - तो अब हो गया ना फरमाईस पूरी चलो जाओ





राज रीना की नाभि को निहारता हुआ अपनी ऊँगली को उसके पास रेंगाता हुआ थुक गटक कर - अभी कहा भाभी

रीना राज के स्पर्श से कापने लगी और आंखे बन्द करके एडिया उचकाती हुई - सीईईई उम्म्ंम्म्ं फिरररर ??

राज ने नजरे उठा कर रीना का मदहोश चेहरा देखा और निचे बैठते हुए उसने अपने होठ उसकी नरम नरम पेट पर लगाते हुए नाभि पर जीभ फिरा दी ।





रीना कसम्साई और उसने राज के सर को पकड लिया - उम्म्ंम्ममह्ह्ह देवर जीईईई अह्ह्ह न्हीईईई

राज ने अपने सर को रीना के पेट पर दबाव बनाते हुए पीछे की ओर धकेला और कमरे मे घुस गया ।

रीना - आह्ह बदमाश उठो , क्या कर रहे हो

राज उपर उठ कर अपना मुह पोछता हुआ - बस कुछ फरमाईश थी आपसे

रीना थोडा तुनकती हुई - हम्म्म्म बोलो !!

राज ने उसकी कमर मे हाथ डाला और अपने करीब करता हुआ उसकी आंखो मे आंखे डालकर निहारने लगा ,

रीना की सासे अटक गयी उसके होठ कापने लगे ।

राज - और भी कही लगवायि हो मेहंदी उम्म्ंम हमसे छिपा कर

राज की बात सुनते ही रीना लाज के मारे नजरे नीची कर शरमाती हुई हसने लगी - धत्त गंदे छोड़ो

राज ने कसमसाती हुई रीना को अपनी बाहो मे और कसता हुआ- पहले बताओ

रीना हस कर थोडा आत्मविश्वासी होकर - हम्म्म रखा है एक खास जगह , बोलो देखोगे

राज थुक गटक कर - हम्म कहा

रीना - प्क्का ना , बाद मे मुकर तो नही ना जाओगे

राज ना मे सर हिलात हुआ - ऊहु!

रिना - हमने कल रात तुम्हारी दीदी की बुर पर लगाई है मेहंदी कहो तो दिखाऊ हिहिहिही

रीना की मजाक भरी बात सुनते ही राज ने उस्को ढीला छोड दिया - धत्त भाभी मजाक नही !!

रीना राज की प्रतिक्रिया पर खिल्खिलाई - हिहिही सच कह रही हु रुको फोटो दिखाती हुई

रिना ने लपक के बिस्तर पर रखा हुआ मोबाइल उठाया और जल्दी से गैलरी खोलकर सोनल की चुत पर बनी गुलाबी की कलियो की तस्वीरे दिखाती हुई बोली - देखो हिहिहिहिही

राज को अचरज हुआ कि ये कैसे संभव है , मगर रीना भाभी का यू उस्से इस तरह खुल के बाते करना उसे उत्तेजित कर रहा था । ऐसे मे उसने अपना दाव खेला

राज - मै कैसे मान लू ये दीदी का है और आपका नही , उम्म्ं

रीना ने आंखे उठा कर राज को देखा और उसकी चालाकी समझ गयि

रिना - अगर ये तुम्हारी दीदी की हुई तो

राज - मै कैसे मान लू हिहिही पहले आप अपना दिखाओ अगर आपके वहा पर टैटू नही हुआ तो मै मान लूंगा कि आपकी नही दीदी की है ।

रीना राज की चालाकी पर इतराते हुए - लेकिन अगर मै जीती तो वही करना पडेगा जो मै कहुगी

राज को भविष्य के सौदे की फ़िकर नही थी , उसे बस रीना की रसिली गुलाबी चुत देखना था और उसने दरवाजे की चटखनी चढाई और मुस्कुरा कर रिना की ओर घुमा

रीना थोडा लजाती खिलखिलाती हुई , कामोत्तेजक मह्सूस कर रही थी , राज को चुत दिखाने की कल्पना से ही उसकी बुर रसाने लगी थी ।

रीना ने अपनी साडी कमर तक उठाई और पैंटी निचे सरकाने लगी , और बिना कोई झिझक कर राज के सामने अपनी नंगी गुलाबी सेव की हुई चिकनी चुत परोस दी

राज का लन्ड पल भर मे फौलादी हो गया और रिना की चिकनी गुलाबी फाको वाली बुर देख कर उसके मुह मे पानी आने लगा

राज जान रहा था कि किसी भी पल ये नजारा ओझल हो सकता है इसीलिए उसने चतुराई दिखाते हुए एक सिरिअस भाव - अरे भाभी वो क्या है ? वहा !!

रीना भी चौक कर निचे अपनी जान्घे फैलाती हुई बुर को देखने लगी और राज ने मौका पाकर झटके से निचे बैठता हुआ अपनी थूथ रिना की बजब्जाती बुर पर ल्गा दिया

जोर जोर से उसकी रसिली चुत के फाके चुबलाने लगा

रिना चीखी और कसमसाइ - अह्ह्ह नहीईईई देवर्ररर जीईई ओह्ह्ह नहीई हटियेएह्ह्ज उह्ह्ह उम्म्ंम उम्म्ंम

राज ने एक ना सुनी बस उसकी गुदाज नरम जांघो को सहलाता हुआ उसकी बुर को मुह मे भरने लगा और रीना जल्द ही उसकी खुरदरी जीभ के स्पर्श से मदहोश होने लगी





गहराती सासो ने उसकी आवाज मादक सिस्कियो मे बदलने लगी और राज उसकी बुर मे जीभ घुसा कर नचा रहा था औत वो झड़े जा रही

राज के सर को कस कर अपनी बुर से लगाये आहे भरने लगी - उह्ह्ह राज्ज्ज बाबुउउउऊ उम्म्ंम माह्ह्ह सीईई अझ्झ फक्क्क मीई उह्ह्ह

राज ने अच्छे से उसकी बुर चुसाई की और फिर अलग होकर वही बैठ गया ।

उसने खिले हुए चेहरे के साथ हस कर रीना को देखा तो वो शर्माते हुए हस कर अपनी साडी सही करती हुई - चटोरे कही के , बहुत चालू हो तुम

राज उठ कर खड़ा हुआ - आपका ही देवर हु भौजी हिहिही , वैसे अभी एक चीज उधार छोड रहा हु बाद मे उसका हिसाब होगा

रीना अचरज से - क्या ?

राज चहक कर - वही फक्क मीई वाला हिहिहिही

रीना लजाती हुई - धत्त बदमाश चलो जाओ अब हिहिहिहिही

राज हसता हुआ बाहर निकल गया ।

जारि रहेगी
 
अपडेट 185 बी

मेगा


लेखक की जुबानी

राज के घर

इधर हल्दी की रस्मो मे रागिनी और रज्जो ने मिलकर अपनी दोस्ती मे शिला के साथ कुछ ज्यादा ही मस्ती कर दी थी , पेट और गरदन पर रगडाई से उबटन सुख गयी थी जो बिना नहाये नही छुटने वाली थी ।

शिला गेस्ट रूम से जाकर अपने कपडे लेके पहले रागिनी के कमरे मे गयी तो वहा पहले से ही औरते भरी पड़ी थी

अगर वहा वो नहाने जाती तो उसके मायके उसकी जितनी भी भौजाईया रहती , उसकी जम कर खिचाई करती और शरारते होती अलग से ।

शिला ये रिस्क नही लेना चाहती थी इसीलिए वो राज के कमरे मे घुस गयी ।

औचक उसकी नजरे बिस्तर पर करवट लेके लेटे राज के नाना पर गयी और वो ठहर गयी ।

फिर उसने सोचा एक बार को कि उपर वाले बाथरूम मे चले जाये मगर फिर वहा मर्दो का जमघट था ।

वो कपडे लेके बाथरूम मे घुस गयि तो पता चला कि वहा तो बाथरूम की टाइलस वाली दिवालो पर सिर्फ सिर्फ दो स्टीकर वाली खूंटी चिपकायि गयि है जिसपे पहले से ही राज और कमलनाथ के जान्घिये सूख रहे थे और कोई हैंगर नही लगा बाथरूम मे ।

शिला के लिए समस्या बढ़ने लगी वो उलझन मे थी कि क्या करे

फिर उसने तय किया कि वो राज के नाना तो दवा खा कर सो रहे हैं तो गहरी नींद मे ही होंगे इसी भ्रम मे वो कपडे बाथरूम के बाहर एक चेयर पर ही रख दिये और दरवाजा बस भिड़का दिया

ताकि दरवाजे को बार बार खोलना या बन्द ना करना पड़े।

इधर पानी का शॉवर चालू हुआ नही कि बनवारी की आंखे झट से खुल गयी

बनवारी ने दरवाजे पर नजर मारी वो भीतर से चटखनि चढ़ी हुई थी , तभी उसके कान मे बाथरूम से पानी की आवाज आई तो उसने उठ कर बाथ रूम की ओर देखा कि बाथरूम के बाहर एक चेयर पर किसी महिला के कपडे रखे हुए है और सबसे उपर तौलिया रखा हुआ है ।

बाथरूम का दरवाजा हल्का भिड़का हुआ है ।

बन्द कमरे मे ना जाने कौन सी औरत ऐसे दरवाजा खोल कर नहा रही होगी ये सोच कर बनवारि का मुसल तन गया और उससे बेचैनी बर्दाश्त ना हुई

वो हौले से बिना कोई आहट के अपना मुसल खुजाता हुआ बाथरूम के दरवाजे के पास आया और भीतर का नजारा देखकर उसकी आंखे फैल गयी ।





सामने तो राज की बुआ शिला थी तो पूरी नंगी होकर अपने जिस्म पर साबुन मल रही थी ।

ये नजारा देख कर बनवारी का मुसल सर उठाने लगा और उसे मसलते हुए बनवारी के मुह से एक ही शब्द आये - आह्ह शिला तेरी जवानी उम्म्ंम्ं

तभी बनवारी के पाव से प्लास्टिक की चेयर को दबाव बना और आवाज करती हुई थोड़ी सी अपनी जगह से खसक गयी ।

चेयर खसकने की आवाज पर दोनो सतर्क हुए और इससे पहले शिला चौक कर दरवाजे की ओर देखती , बनवारी दरवाजे से हट गया था ।

शिला को समझते देर नही लगी कि राज के नाना उठ गये थे उसे ये आशाम्का भी हो रही थी कि कही वो उसे झाक कर निहार ना रहे हो ।

तभी बनवारी ने बाथरूम का दरवाजा ठोक कर आवाज दी - अरे कोई नहा रहा है क्या भीतर

शिला की तन्द्रा टूटी और वो अपने जिस्म पर साबुन रगड़ने की गति को रोकती हुई आवाज दी - जी बाऊजी हम है शिला , नहा रहे हैं । कुछ चाहिये क्या बाऊजी

बनवारी एक अनुभवी इन्सान था जमींदार और ग्राम प्रधान रहने के नाते वो बहुत मझा हुआ खिलाड़ी, उसने गाव मे पहले ही ऐसे कईयो औरतो को अपने झासे मे ले रखा था ।

बनवारी ने नाटक किया - अह हा बिटिया वो हमे जोरो की पेसाब आई थी , क्या तुम नहा चुकी हो

शिला की हड़बडी बढ़ गयि और वो जल्दी जल्दी शॉवर चालू करके नहाते हुए - हा बाऊजी बस दो मिंट रुकिये

जल्दी से उसने नहाया और हाथ बढा कर उसने तौलिया लेने के लिए अपना पुरा जिस्म छिपाती हुई गरदन बाहर निकाला तो देखा कि बनवारी अपना मुसल मसल रहा है धोती के उपर से

उसे लगा कि शायद राज के नाना को जोरो की पेसाब ही लगी हो

उसने झट से बिना अपना जिस्म पोछे तौलिया लपेट लिया बाथरूम का दरवाजा पुरा खोलते हुए बोली - हम्म्म बाऊजी आ जायिये आप , मुझे अभी कपडे धूलने है तो मै बाहर !!!





बनवारी ने घूम कर शिला की ओर देखा उसकी आंखे फैल गयी , शिला के गदराये जिस्म को तौलिया बडी मुश्किल से ढ़क रहा था

बनवारी ने नजरे फेरने का नाटक किया - अरे बिटिया तुमम ऐसे , नही नही , कपडे पहन लो तूम , हम रुके हुए है ।

शिला मुस्कुरा कर - क्या नही नही , इतनी जोर से लगी है आपको फिर भी

बनवारी मुह फेरे हुए अपने मुसल- नही नही बेटी तुम कपडे पहन लो , किसी ने देख लिया तो गजब हो जायेगा ,

शिला हस कर - एक तो खुद मुझे अपनी बेटी भी मान रहे हो और मेरे सामने लजा रहे हो , और बन्द कमरे मे कौन देखने आयेगा हिहिही आप भी ना

बनवारी ने नजरे उठा कर शिला को मुस्कुराते देखा और बोला - तुम तो सच मे मेरी रज्जो जैसी ही हो

शिला हस कर - क्यू रज्जो भाभी भी आपके सामने ऐसे ही आ जाती थी क्या

बनवारी शिला के मजाक पर हस कर बाथरूम के घुसता हुआ - नही , वो भी तुम जैसी शरारती और जिद्दी है ।

शिला - बेटिया बाप से ही तो जिद करती है ना बाऊजी

बनवारी ने अपना तना हुआ मुसल निकाला और इंग्लिश टॉयलेट मे खडे होकर पेसाब करने के बजाय बाथरूम के एक कोने लगी फर्श की कटोरी मे करने के लिए बैठ गया ,,जहा से बाथरूम का पानी पाइप से होकर जाता है ।

वही बाजू मे शिला के निकाले हुए कपडे हाथ भर की दुरी पर थे ,

शिला की नजर जैसे ही उनपे गयि वो लपक कर अपना कपड़ा उठाने गयी - अरे बाऊजी नीचे क्यू कर रहे है ये है तो

शिला की आवाज इतने करीब पाकर बनवारी चौका और घूम कर पीछे देखा तो शिला उसके बगल मे खडी थी और उसका मोटा काला बैगन जैसा लम्बा मुसल निहार रही थी ।





बनवारी की पेसाब अटक गयी - बेटा तू यह

शिला ने नजरे फेरते हुए - वो बाऊजी यही निचे मेरे कपडे थे ,उसपे लग जाता तो इसीलिए मै , सॉरी बाऊजी

ये बोलते हुए अपनी तेज सांसो को थामते हुए घूम गयी उसके जहन मे बनवारी के तने मुसल को देखकर ये ख्याल आने लगा कि मर्द हर उम्र मे कामुक हो सकता है और वही बनवारी मुस्कुराने लगा ।

बनवारी पेसाब करता हुआ - अरे बेटा मुझे ऐसे ही करने की आदत है खड़े होकर हमसे ना हो पाती है इसीलिए

शिला शर्मा कर अपने होठ चबाती हुई - जी

बनवारी

उठ खड़ा हुआ और अपनी धोती कसते हुए टोटी चालू करके हाथ मुह धूलने लगा ।

हाथ धूलने के बाद वो नजर घुमाते हुए इधर उधर बाथरूम मे कुछ खोजने लगा

शिला - क्या खोज रहे है बाऊजी

बनवारी- बेटा वो कोई तौलिया नही दिख रहा है हाथ पोछने थे

शिला थोडी मुस्कुरा कर - तौलिया तो यही है जो मैने लपेट रखा है

बनवारी- बेटा अगर तुझे ऐतराज ना हो तो मै निचे से पोछ लू , ऐसे ना जाने हाथ कब सूखे

शिला ने हामी मे सर हिलाया

और बनवारि झुक कर शिला के सामने से उसका तौलिये की एक परत उठाई और हाथ पोछने लगा ,

तौलिया उठाते उसकी नजरे शिला की गुदाज जांघो और उसके पैंटी लाईन पर गयी ,

इधर बनवारी जैसे जैसे तौलिये मे अपना हाथ रगड़ र रहा था शिला का जिस्म काप रहा था मानो बनवारी उसके जिस्म पर अपना हाथ पोछ रहा हो

तभी ऐसा कुछ हुआ जिसकी उम्मीद नही थी , बनवारि ने आगे झुक कर तौलिये का कोना थोडा का खिच कर मुह पोछने ल्गा

शिला के पाव पूरे कापने लगे और उस्की चुत पनियाने लगी ,

वही बनवारी ने तौलिया उठा कर शिला के फूली हुई बुर के फाके देखने लगा और उसकी जीभ से लार टपकने लगी ।





हल्की झान्टो से भरी बुर की भूरी फाके बनवारी का मुसल तान चुकी थी । उसे शिला की जिस्म की कपकपी मह्सुस हो रही थी और उसने नजरे उठाकर शिला के चेहरे पर देखा जो अपने आंखे मुंदे और होठो को दबाए गहरी सासे ले रही

बनवारी ने मुस्कुराया नथुने भर कर एक बार गहरी सास लेते हुए शिला के बुर की मादक गन्ध को अपनी सासो मे भरते हुए खड़ा हो गया

बनवारी- आह्ह शुक्रिया बेटी अब तु अपना काम कर ले । मै भी बाहर जा रहा हु

शिला दबी हुई आवाज मे - जी !

बनवारी बिना कुछ जाहिर किये चुपचाप अपनी जीत पर सीना फुलाता हुआ कमरे से बाहर चला गया ।

शिला ने कमरे का दरवजा भीतर से बन्द किया और अभी जो हुआ उसपे विचार करने लगी कि कैसे एक बूढ़े ने आपनी समान्य हरकतो से ही उसकी कामोत्तेजना भड़का दी ,

शिला मुस्कुराई कि राज के नाना कम चालू चीज नही है इसीलिए उसने तय किया - बाऊजी आपने शिला को परेशान किया , इसका जवाब शिला आपको ऐसे देगी कि याद करोगे आप भी हिहुहिही

निचे के हाल मे मर्दो का जमावड़ा अलग ही लगा था ,

राहुल , राज की बुआ के बेटे अरुण के मोबाइल को लेके नये नये गेम्स मे भिड़ा था , वही अनुज का चेहरा उदास था।

राज की नजर अपने भाई अनुज पर गयि और शादी के घर मे ऐसे छोटे भाई का उतरा हुआ चेहरा देख कर उससे रहा नही गया और वो अनुज को बहाने से बुलाके उपर ले गया ।

धीरे धीरे शाम हो रही थी और निचे सड़क और आस पास काफी चहल के बाद भी बाल्किनी मे एक चुप्पी सी थी ।

राज - अब बोल क्या हुआ है तुझे , क्यू ऐसे मुह बना रखा है ??

अनुज बहाना करते हुए - अरे नही भैया कुछ नही ऐसा नही है , बस कल दीदी चली जायेगी इसीलिए

राज उसके चेहरे पर छाये झुठ के साए पढता हुआ - क्यू झूठ बोल रहा है मुझसे , सच सच बता बात क्या है?

अनुज का दिल अब जोरो से धडकने लगा था , उसे समझ नही आ रहा था कि कैसे वो बात करे अपने भैया से और क्या ?

राज थोड़ा कड़े रुख मे भौहे चढा कर- बोल!!

अनुज डरता हुआ असल बात को छिपात हुआ - भैया वो कल रात गलती से मैने चाची का बम्म देख लिया

राज उलझे हुए स्वर मे - क्या देख लिया ??

अनुज धीरे से दबे हुए स्वर मे - गाड़ !!

राज के कान तन गये और वो थोडा ठहरा - तो चाची को पता है इस बारे मे

अनुज - हम्म्म

राज - तो क्या चाची ने कुछ बोला तुझे , डाँटा या फिर और कुछ कहा ।

अनुज - नही नही भैया , वो तो कुछ नही बोली । बस मुझे अच्छा नही लगा ।

राज - बस इत्नी सी बात !!

अनुज - हम्म्म

राज - अरे तो इसमे परेशान क्यू है , गाड़ ही देखी है ना वो मै ऐसे ही कईयो की देख चुका हु हिहिही उसमे क्या है ?

अनुज - वो बात नही है भैया बस मुझे चाची से नजर मिलाने मे झिझक हो रही है ।

राज - अरे तु ऐसे रहेगा तो कैसे आगे बढ़ेगा और जब चाची ने कुछ बोला नही तुझसे बोल बात कर रही है तो तु भी ध्यान मत दे

अनुज - जी भैया

राज - और कुछ बात तो नही है ना

अनुज - नही भैया

राज - हम्म ठिक है अब मुस्कुरा दे भाई और चल मजे कर शादी का घर है ऐसे उदास अच्छा नही लगता ना ।

अनुज मुस्कुराता हुआ - जी भैया ।

फिर दोनो भाई निचे आ गये ।

इस छोटी सी बात चीत से अनुज का मन काफी हद तक साफ हो गया ।

इस पल मे ही सही मगर अनुज के जहन मे फिल्हाल के निशा के साथ किये गये सेक्स को लेके भी थोड़ी ग्लानि सी हो रही थी ।

उसने तय किया कि राहुल के बहकावे मे आकर उसे अपनी और परिवार प्रतिष्ठा से समझौता नही करने देगा ।

शादी के घर जहा उसपे इतनी जिम्मेदारीया है वो उससे मुह मोड कर स्वार्थी होकर सेक्स की राह नही चुन सकता है ।

" ऐसा अक्सर होता ही है कि जब हम उलझे हुए होते है और ऐसे में कोई सुझला हुआ इन्सान मदद कर दे , तो यकायक हम सब मे भीतर क्षणिक भर के लिए ही सही मगर एक संकल्प भरा भाव जरुर आता है कि अब ऐसा कुछ नही करना है कि ये सब दिक्कतें आगे आये ।

मगर जैसा मैने कहा ये संकल्प क्षणिक ही होता है , हम अहंकारवश वापस अपनी कामनाओ मे लिपट हो ही जाते है ।"

वही हाल अनुज का होने वाला है , फिल्हाल तो उसने राहुल की संगति ना करने की प्रतिज्ञा ले ली है और साथ ही ये भी तय किया कि वो सेक्स को लेके सावधान रहेगा इनसब पर ध्यान नही देगा ।

मगर देखते है कि अनुज का ये संकल्प कितने क्षणो तक बना रहता है ।


अमन के घर

शाम ढल रही थी और मेहमानो की चहल पहल , औरतो के लोकगीतों से घर का माहौल खुशनुमा हो गया था ।

ऐसे मे अमन की मा को ध्यान आया कि ढलते सूरज की रोशनी खतम हो उससे पहले वो अमन को उबटन लगा दे । फिर नाच गाना का प्रोग्राम भी होना है ।

ममता ने उबटन की कटोरी और तेल की शीशी लेके अमन के कमरे मे दाखिल हुई

अमन सोफे पर पाव फैला कर वैसे ही बनियान और बॉक्सर मे सोया था ।

ममता अपने लाड़ले को सोया देख मुस्कुराई और कमरे का दरवाजा भीतर से बन्द करते हुए उसके पाव के पास बैठकर सोटे हुए अमन का मासूम सा चेहरा देखा

ममता मन मे - देखो कितने सुकून से सोया है मेरा बेटा हम्म्म

" हिहिहिही और इसको जगा रखा है " , ममता ने अमन के बॉक्सर मे तने हुए मुसल को देखकर हस्ती हुई बड़ब्डाई ।

तभी ममता को कल रात मे भोला की बात याद आई जब उसने बताया था कि कैसे उन्की नादानी का फायदा अमन ने लिया था और ममता की नंगी फैली हुई गाड के दरशन अमन ने किये थे ।

वो पल याद करते ही ममता का बहन सिहर उठा उसके रोए खडे हो गये ।

ममता मन मे - उस वक़्त ना जाने अमन ने मेरे बारे मे क्या सोचा होगा कि मै क्यू वहा ऐसे खड़ी हु और नंदोई जी कह रहे थे कि मेरी जैसी औरत को देख कर घर वालो के अरमान तो जाग ही जाने चाहिये ,तो क्या कभी अमन ने भी मुझे उस नजर से देखा होगा ।

अगले ही ममता ने अपना माथा पीटा और खुद को कोसा कि वो क्या फालतू सोच रही है ।

फिर उसने अमन के पाव हिलाते हुए उसे जगाने लगी

अमन उठ कर बैठ - जी मम्मी

ममता - अरे तु अभी तक सो रहा है ये उबटन नही लगवानी

अमन को उसकी मा बात सुनते ही उसके लन्ड की नसे और फड़क उठी कि उसकी मा उसके लन्ड पर हल्दी लगाने आयी है ।

अमन - हा मा वो मै लेटे लेटे सो गया था

ममता मुस्कुरा कर - ठिक है कोई बात है , लेकिन अब चल निकाल ये कच्छा, जल्दी से लगा दू और फिर मुझे भी बहुत काम है भाई

अमन थोडा झिझका की मा ने सीधे निकालने को बोल दिया

ममता मुस्कुराते हुए - सोच क्या रहा है निकाल ना

अमन वही सोफे पर बैठे हुए अपना बॉक्सर सरकाते हुए निकाल दिया और अपनी टाँगे खोलकर सोफे पर ही बैठ गया ।

ममता की नजर जैसे ही अमन के फौलादी मुसल पर गयी उसकी चुत फड़क उठी और गला सुखने लगा , तभी उसकी नजर क्रीम कलर के सोफे पर गयि ।

ममता - अरे सोफे पर नही , तु निचे फर्श पर लेट जा

अमन - ऐसे फर्श पे चुबेगा नही !!

तभी ममता का दिमाग ठनका और उसने अपनी पीले रंग की चुन्नी को अपने सीने से उतारते हुए निचे फर्श पर फैला दिया

ममता - हम्म अब लेट जा

अमन खड़ा हुआ और अपना तना हुआ मुसल हवा मे लहराता हुआ फर्श पर लेट गग

ममता का कलेजा भी काप रहा था कि वो आज अपने बेटे का मुसल अपने हाथो मे भरेगी और उसे सहलायेगी ।

ममता अमन के पाव के पास बैठ गयि और पास मे ही उबर को कटोरी और तेल की शिसी रख दिया ।

ममता ने उंगलियो मे च्भोड़ते हुए उबटन लिया और उसने कुछ बूंद तेल के मिलाते हुए ठंडी ठंडी उबटन को दोनो पंजो की उंगलियो से अमन के लन्ड के हल्के झान्टो वाले हिस्से पर लगाया और लंड की गोलाई मे उसके बेस के आस पास उंगलियो से मसाज करने लगी ।

अपनी मा के कोमल हाथो का अपने लण्ड के पास स्पर्श से अमन के दिल की धड़कन तेज होने लगी औए उस्क लन्ड और फुलने लगा ।

धीरे धीरे उसके लण्ड की सतहों पर नसे जाहिर होने लगी ।

ममता ने फिर से उबटन और तेल का मिश्रण लिया और इस बार उसने अमन के गर्म तपते आड़ो को पोतने लगी

अमन सिस्का और फिर खिलखिला दिया - उम्म्ंम्ं सीईईई हिहिहिही मा गुदगुदी हो रही है ठंडी ठंडी

ममता मुस्कुरा कर उसके आड़ो को अपने हथेली मे भर कर सहलाती हुई - हम्म्म तो होने दे ,

अमन - आह्ह आउच्च मम्मीईई जोर से नहीईई

ममता ने सावधानी से अमन के आड़ो से हथेली की कसावट ढीली करती हुई सहलाते लगी ,

ममता के मादक स्पर्श से अमन के सुपाड़े की टिप से उसका प्री-कम आ टपका ।

ममता की नजर उस झलकते मोती समान पानी पर गयी तो पल को लजा सी

गयी और मुह मे घुलती लार को घोंटती हुई चोर नजरो से निहारने लगी ।

अमन बीच बीच मे कभी कभी गरदन उठा कर अपनी मा की क्रिया देखता और मारे उत्तेजना के लेट जाता ।

हर बार उसका लन्ड और कसने लगता ।

अमन को ये चुप्पी खल रही थी और उसने बात छेद दी - तब मा कल ट्राई किया था पापा पर हिहिहिही

ममता - क्या ??

अमन - वही जो मैने सिखाया था आपको , समूच हिहिही

ममता शर्माती हुई - धत्त , वो कहा करने वाले ये सब उनको नही पसंद

ममता ने उबटन ली और इस बार अमन का मुसल पकडती हुई उसपे अच्छे से लिपने लगी , लन्ड की सतहो पर अपने मा के हाथो का स्पर्श पाकर अमन गनगना गया और सिस्क पड़ा

ममता - क्या हुआ दर्द हो रहा है क्या ??

अमन अपने होठ दबाते हुए मुस्कुराते हुए ना मे सर हिलाया और एक बार फिर से सिस्का

ममता हस कर - धत्त नौटंकी कितना नाटक करता है रे तु

अमन अपने भींचे हुए चेहरे के साथ - आह्ह्ह नाटक नही कर रहा हु मा , वो कुछ अलग सा फील हो रहा है इसीलिए

ममता अमन की बात पर मुस्कुराई और समझ गयी कि उसका बेटा कैसा मह्सूस कर रहा है इस वक़्त

ममता टटोलते हुए - कैसा मह्सूस हो रहा है बोल

अमन लजाता हुआ मुस्कुरा कर - कुछ नही आप करो





फिर ममता ने हाथ मे तेल लेके अब उबटन छुड़ाने लगी और धीरे धीरे रगड़ रगड़ कर जहा से शुरुवात हुई वहा से लेकर लन्ड के सतहो पर अच्छे से तेल से मल मल कर उबटन छुड़ाने लगी, जल्द ही अमन का लन्ड चमक उठा , उसकी काया की उज्ली हो गयी , सुपाडा पहले ही पानी छोड कर चमक रहा था

फिर ममता ने अपनी चुन्नी के छोर से अमन का जांघ पेड़ू और आड़ सहित लन्ड को साफ किया और फिर तेल लेके थपथपा हुए सब जगह तेल लगाया

फिर उसने अमन के लन्ड की चमडी खोली सुपाडा बाहर आया

अमन फिर सिसका - सीईई अह्ह्ह मम्मीईई

ममता ने उसको हस्ते हुए उसको आंख दिखाई तो अमन हसता हुआ बोला - सच मे फील हो रहा है मा

फिर ममता ने उसको नजरअंदाज किया और लण्ड के सतह पर तेल चभोड़ कर उसको अच्छे से मसलने लगी ।





अमन अपने चुतड उठाता तो कभी एडिया उचका , उसके लन्ड की नशो के वीर्य भरने लगा था

अमन - ऊहह मम्मीईई रुकोह्ह्ह मुझे पेसाब लगी है , जाने दो ,

ममता - नही बस रुक जा दो मिंट बस हो गया है , फिर ममता ने तेल की सिशी से सिधा अमन के सुपाड़े पे तेल टपकाने लगी और अंगूठे को उसका गुलाबी सुपाड़े पर फिराने लगी

अमन ने अपनी कमोतेज्ना बर्दाश्त ना हुई और उसका फव्वारा फूट पड़ा,





अमन - अह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह सीईई ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह इह्ह्ह्ह

सुपाडे की टिप पर अंगूठा होने के कारण अमन का वीर्य तेज फब्बारे जैसे हर तरह जिधर से दाव मिला तेज प्रेशर से बिखरने लगा

ममता भी सकपका गयी कि ये अचानक से क्या हो गया

उसके होठो आंख कान और गालो के साथ साथ उसके छातियों पर वीर्य की गाढी मलाई के मोटी बुन्दे आ गयी ।

वही उसका हाथ लगभग पुरा ही अमन की गाढी मलाई से सन गया , काफी ज्यादा छींटे अपने के जिस्म पर भी यहा वहा गिरे थे

ममता - छीईईई गन्दा, ये क्या किया तुने

अमन - सॉरी मा , मैने बोला तो था आपको जाने दो पेसाब लगी है

ममता वीर्य से सने हुए अपने हाथ अमन को दिखाती हुई मुस्कुराई - इसको पेसाब बोलते है ।

अमन लाज के मारे मुह फेर लिया ।

अमन उठ खड़ा हुआ और बोला - सॉरी , आओ मै आपको धूलवा देता हु ।

ममता हस्ती हुई - हम्म्म चल

फिर अमन उसी हालत मे बाथरूम मे गया और टोटी चालू करके हाथ धुलाने लगा

ममता अमन की ओर मुह करके - चेहरे पर भी लगा है ना

अमन ने हा मे सर हिलाया ।

ममता - कहा कहा है ? एक तो तेरे बाथरूम मे सीसा नही है

अमन - उंगलियो से इशारे करके बताता है आंख और गाल पर

ममता - और कहा है

अमन अपने उपरी होठ इशारा करके बताता है एक जगह पे , जिसे ममता जल्दीबाजी मे ऊँगली से चेक करने के बजाय जीभ फिरा देती है और एक छटाक भर रबड़ी उसके मुह मे

अमन होठ दबा के हस देता और ममता भी लजा जाती है कि अभी अभी उसने क्या किया

ममता - हस मत और बता कहा है

अमन - और आपके दुधू पे है ,

ममता ने गरदन निचे कर अपने छातियो के बीच रिसते अमन के वीर्य को देखा तो झटके से अपना सूट निकाल कर पास की खूंटी पर टांग दिया ।

ममता - कहा है ?

अमन मुस्कुरा कर अपनी मा की ब्रा के कैद कसी हुई खरबुजे जैसी चुचियो को निहारता हुआ उसके खाइयो के बिच मे इशारा करता है - वो बीच मे चला गया शायद

अमन की बात सुनते ही ममता बड़बड़ाई और अमन की ओर पीठ करके बोली - जल्दी से ब्रा खोल मेरी ।

अमन चौका साथ ही उस्का सोता मुसल एक बार फिर से तनने लगा ।

अमन बिना कुछ बोले पीछे खड़ा होकर ब्रा की हुक खोलने लगा , 3 से 4 प्रयास मे आखिर हुक खुल ही गया और ममता ने जल्दी से ब्रा निकालती हुई उसको पलट कर देखा तो भीतर की तरफ वीर्य लगा हुआ था , उसने उसको पास की वाल्ती मे डाल दिया ।

और बेसिन से टोटी चालू कर पानी अंजुली मे लेके अपने गोरे गोरे खरबजे जैसे 44DD के चुचे धूलने लगी , अमन की निगाहे अपनी मा के लटकते काले अंगूर जैसे मोटे निप्प्ल के दानो पर अटकी थी और उसका जीभ लार छोडने लगी ।

इधर पानी ज्यादा गिरने से ममता की आगे से सलवार भी गीली होने लगी और जैसे ही उसने अपने चुत के पास से जांघो पर पानी का गीलापन मह्सूस किया

ममता - हे भगवान हो गया गजब

अमन चौक कर - क्या हुआ मा

ममता अमन की ओर घूम कर पेट पर बन्धी हुई अपनी आधी भीगी हुई सलवार को दिखाती है - ये देख ये भीग गयी





अमन को सामने खुली चुचिया लिये बिना पैंटी वाली भीगी हुई सलवार अपनी मा के बुर पर चिपकी हुई दिखती है तो उसकी सासे अटक जाती है ।

अमन - तो अब

ममता - ऐसा कर तु कच्छा पहन ले और चुपचाप मेरे कमरे से मेरी एक जोडी सूट सलवार लेते आ , किसी को भनक ना लगे । तब तक मै ये धूल लेती हु

अमन तेजी दिखाता हुआ - ओके मा

फिर अमन फौरन कमरे मे आया और अपना बॉक्सर पहन कर वो बिछाई हुई चुन्नी बाथरूम मे अपनी मा को देके सरपट निचे चला गया ।

लोगो से बचते बचाते वो अपनी मा के कमरे मे गया वहा से एक जोड़ी सूट सलवार लेके धीरे से उपर आ गया ।

कमरे मे आते ही उसने बिना कोई आहट के दरवाजा बन्द किया और कपडे को बेड पर रख कर बाथरूम मे झांकता है तो उसकी आंखे फैल जाती है , भीतर उसकी मा पूरी नंगी होकर एक बालटी मे झुके हुए कपडे खन्गाल रही थी और उसकी बड़ी सी नंगी सी फैली हुई 48 साइड का गाड़ एक बार फिर से अमन के सामने थी





पल भर मे अमन का लन्ड फैलादी हो गया और उसने भी देरी नही कि और अपना बॉक्सर बनियान निकालते हुए पुरा नंगा हो गया

फिर ममता के पीछे खडे होकर उसको अपने कपडे देता हुआ - मम्मी ये भी धूल दो ,

ममता ने पहले तो कैजुअली अमन के हाथ से कपडा ले लिया मगर जब अगले ही पल उसको ध्यान आया कि वो बाथरुम मे पूरी नंगी खडी है तो वो चिहुक पड़ी ।

ममता चौकते हुए - तु यहा !!

अमन - आपने ही कपडे लेने भेजा था ना

ममता झेप कर अमन की ओर पीठ किये - हा लेकिन बेटा मैने कुछ पहना नही है ना

अमन - मैने भी कुछ नही पहना देखो

ममता उसकी बात पर हसी और थोडा लजाती हुई - हा ठिक है लेकिन तु बाहर बैठ मै नहा लू

अमन - मम्मी मुझे भी नहाला दो ना ,पुरा तेल तेल लग रहा है

ममता का कलेजा काप रहा था और पहली बार वो और उसका बेटा खुले आम नन्गे बाथरूम मे खड़े थे ।

अमन ममता से कुछ प्रतिक्रिया ना मिलने पर - क्या हुआ मा !! क्या एक बेटा अपनी मा को बिना कपड़ो के नही देख सकता क्या ? मैने तो देखा है कि कई घरो मे माये अपने बेटे के सामने भी नहा लेती है , इसमे कोई बुराई तो नही !!

ममता - हा बेटा तु सही कह रहा है , मै ही पागल हु हिहिही चल तुझे नहला देती हु , क्या पता इसके बाद बहू तुझे हाथ भी नही लगाने दे

अमन खुश हुआ कि उसकी योजना सफल रही और वो शॉवर चालू करके खड़ा हो जाता है ।

शॉवर चालू होने से अमन के बदन से ठंडे पानी के छीटे ममता के जिस्म पर जाने लगे

ममता - हेईई शैतान कहि का मुझे क्यू भिगो रहा है हिहिहिही

अमन अपनी को पकड कर शॉवर के निचे खिंचता हुआ - हिहिहिही तो आप भी आजाओ मा हिहिह मजा आयेगा

ममता भी अगले ही पल शॉवर के निचे अमन के बेहद करीब आके भीगने लगी

ममता - तु बहुत बिगड़ गया है , हिहिही

अमन - वैसे भी पापा तो आपके साथ ऐसे साथ मे नहाने वाले है नही हिहिही तो मेरे साथ इंजॉय करो हिहिही

ममता लजाती हुई - चुप कर बदमाश

अमन अपनी मा के दोनो बाजू पकडता हुआ - मम्मी भीगते हुए समूच करे

अमन की बाते सुनकर ममता की सासे चढने लगी और वो शॉवर की बौछार के बीच से अमन का खिला हुआ मुस्कुरात हुआ चेहरा देख कर खुद को रोक नही पाई और उसके गालो को थामते हुए खुद ही अपने होठ अमन के होठ से जोड दिये ।

अपनी मा का पहल अमन को चौक गया और उसकी मा के रसिले होठो का स्पर्श पाकर अमन का लन्ड पुरा तन गया

जो सीधा ममता के जांघो से टकराने लगा

दोनो भूखे एक दुसरे को होठो को चबा रहे थे , अमन को यकीन नही हो रहा था कि उसकी मा ने एक ही बार मे कैसे इतना अच्छा सिख लिया ,

धीरे धीरे हिम्मत करके अमन के हाथ उसकी मा के पीठ से सरकते हुए कमर तक आ गये ,

अमन ने शॉवर की शोर एक बार अपनी मा की कमर को कसते हुए झटके से अपने औए करीब कर लिया





ममता ने होठ जोड़े जोड़े ही मुस्कुरा कर उसको आंख दिखाई और फिर से दोनो एक दुसरे को चूमने लगे

अमन के मुसल का नोख ममता को अपनी चुत के आसपास मह्सूस हो रहा था कि तभी उसे अपनी गुदाज गाड़ पर अमन का पन्जा सरकर हुआ मह्सूस हुआ





ममता की सासे अटक गयी और उसने अपने चुतड कड़े कर लिया और एडिया उचका ली नतिजन अमन का सुपाडा अब सीधा ममता के बुर के फाको को रगड़ रहा था ।

अमन ने चाव ने अपनी मा के होठो के रस चुस रहा था और उसके पंजे ममता की गाड़ के गुदाज मोटे फाको को भरने की कोसिस मे थे ।

निचे से चूत पर लगातार सुपाड़े की चोट से ममता की चुत बजबजाने लगी और साथ ही उसे भी तेज पेसाब मह्सूस हुई

वो अमन से अलग हुई हसते हुए

अमन ने शोवर ऑफ किया और हस्ते हुए पुछा- क्या हुआ

ममता लजाती हुई अपनी पिंक फिंगर उपर कर दी

अमन ने ओके बोलके घूम गया और ममता वही एक कोने मे बैठी हुई तेज धार से मूतने लगी

अब तक ममता की रही सही शर्म खतम हो चुकी थी जिस तरह से उसके बेटे ने आज उसको दबोचा था वो ये पल नही भूलने वाली थी ।

ममता पेसाब करके उठी - चल अब नहा लेते है लेट हो जायेगा

अमन - अच्छा मा एक बात पूछू

ममता खुश होकर - हा बोल ना बेटा

अमन हसता हुआ - मम्मी जब मै बचपन मे छोटा था और आपके गोद मे ही पेसाब कर देता था तो आपको गुस्सा नही आता था हिहिहिही

ममता - अरे उसने गुस्सा कैसा , बेटा अपनी मा के उपर पेसाब कर दे । ये पुण्य कमाने की बात है । तु ये सब क्यू पुछ रहा है

अमन हस कर - सोच रहा हु एक बार फिर आपको पुण्य कमवा दू हिहिहिही

ममता हस कर - क्या बोला ?

अमन - देखो जब मै छोटा था तो मुझे याद नही कि मै पेसाब करता था तो आप खुश हो जाती थी , अभी मै ब्डा हो गया हु तो देख सकता हु कि ....!! समझ रहे हो ना आप

ममता भीतर ही भीतर अपने लाड़ले के दुसरे धार को अपने जिस्म पर पाने के लिए पागल हुई जा रही थी मगर वो ऐसे कैसे सीधे मान जाती - वो छोटे बच्चो के लिए है बस

अमन बच्चो जैसी जिद दिखाते हुए - क्या मा , अभी कल दुधू पिलाया ना तो ये भी कर लो ना प्लीज प्लीज प्लीज

ममता हस्ती हुई - अच्छा बाबा ठिक है आजा

ममता घुटने के बल बैठ गयी और अपने चुचो को उठाते हुए निचे से दोनो हाथो को बान्ध लिया और खिले हुए चेहरे से बोली - ले कर

अमन ने एक गहरी सास ली और अपने लन्ड का सुपाडा खोलते हुए पेसाब की तेज धार अपनी मा की चुचियो पर मारने लगा

अमन के मूत की गर्म तेज धार से ममता की चुचिया बिलबिला उठी , उनमे खुजली सी होने लगी





ममता अपने चुचे मसलते हुए बड़े ही मादक स्वर मे बोली - उह्ह्ह बेटा मजा आ रहा है ना अपनी मा पर मूत कर उम्म्ंम्ं

अमन - अह्ह्ह हा म्ममीईई अह्ह्ह्ह

ममता - आह्ह बेटा उम्म्ं कर लेह्ह औए कहा करेगा पीछे भी करेगा उम्म्ंम

अमन ने बस हा मे सर हिलाया और अगले ही पहल ममता घोडी बनती हुई अपनी गाड़ फैला दिया

जिससे उसकी गुलाबी छेद वाली गाड़ की सुराख के साथ उसके रसभरे आमो के नरम फाको जैसे गुलाबी बुर के मोटे मोटे फाके भी दिखने

जिसे देख कर अमन की हालत और खराब हो गयी , उसका मुसल बहुत जोर से तना हुआ था , उसकी नजरे अपनी के गुलाबी चुत और गाड़ के खुल बन्द हो रहे सुराख पर थी , अमन ने वही अपनी मा की गाड़ के सुराख पर निशाना बनाते हुए छरछरा कर पेसाब की तेज धार मारने लगा





और वो उसके गाड़ से बुर के फाको से होकर फर्श पर गिरने लगी

ममता अपनी गाड़ की सुराख पर अपने बेटे की गर्म तेज धार पाकर गनगना गयी और अपनी गाड़ फैलाते हुए बोली- हा बेटा कर ले और कर उह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम्ं

अमन ने अपने लन्ड से आखिरी बूँद निचोड दिया और कुछ पल को दोनो अपनी सासे बराबर करने लगे

इस्से पहले की ममता उठकर खडी होती कि अमन ने फिर से शॉवर चालू कर दिया

अमन - आओ मा मै आपका धुला देता हू

ममता समझ गयी कि उसका लाड्ला अपने जन्मस्थान की गुलाबी भूमि का स्पर्श लेना चाहता है

इसीलिए वो वैसे ही घोडी बनी हुई पीछे को घिसट कर ठिक शॉवर के निचे खडी हो गयी और पानी सीधा उसकी गाड़ पर गिरने लगा





अमन घुटनो के बल आकर अपने दोनो हाथो से पहले अपनी मा के चर्बीदार गाड़ को रगड़ कर साफ करने लगा और फिर अपनी चारो ऊँगलीया ले जाकर सीधा अपनी मा के बुर पर रख कर रगड़ने लगा

ममता तेज सिस्किया लेने लगी और उसकी बुर बरी तरह से पनियाने लगी , अमन यही तक नही रुका उसने अपनी मा की गाड़ के सुराख पर अँगूठा रगड़ के उसको साफ करने लगा

जिससे ममता एठने लगी ।

अमन अपना लन्ड लगातार इस दौरान अपनी मा की जांघो पर घिस रहा था

फिर उसने अपनी मा को हाथ देकर शॉवर के आगे खड़ा किया और इस बार पानी सीधा उसके चुचो पर गिरने लगा

ममता ने कुछ नही बोला बस मादक सिसकिया ले रही थी और उसका बेटा बगल मे खड़ा होकर एक ही हाथ से उसकी दोनो चुचियो के उपर रगड़ रगड़ कर अपनी पेसाब के रंग छुड़ा रहा

निप्प्ल के पास रगडाई से ममता सिसकी - उह्ह्ह बेटा आराम से





अमन मुस्कुरा और पीछे खड़ा होकर अपने हाथ आगे करता हुआ हौले हौले दोनो चुचिया सहलाने लगा

पीछे से उसका मुसल ममता बड़ी चर्बीदार गाड़ के फाको पर घिस रहा था ।

अमन ने लपक कर बाथरूम के रैक से शैम्पू की बॉटल लि उसको अपनी मा के बालो मे गिरा कर शैम्पू करने लगा

ममता हसी - तु बस नहलायेगा भी क्या हिहिहिही

अमन - क्यू , एक बेटा अपनी मा की सेवा नही कर सकता

ममता - तु ना हिहिहिही

अमन ने ममता के बालो को अच्छे से शैम्पू किया और फिर एक साबुन लेके हाथ पकड लगाने , कंधे फिर चुचे और पेट फिर पेड़ू से होके चूत के पास अच्छे से साबुन लगाया और सामने का पुरा जिस्म अच्छे से मलने लगा ।

अमन मे अपनी उंगलिया ममता के चिपकी हुई जांघो के चुत के पास घुसाता हुआ - मम्मी खोलो ना





ममता ने हल्का सा पैर खोला और अमन ने साबुन की झाग से भर भर से ममता की चुत मे चभोड़ते हुई उंगलियाँ घुसाने लगा

ममता की हालत खराब होने लगी और वो भी जान रही थी कि उसका बेटा मजे लेने का तरीका बखूबी जानता है।

ममता सिसकी - आह्ह बेटा वहा ज्यादा साबुन नही लगाते उम्म्ंम्ं सीईई उह्ह्ह

अमन ने फौरन हाथ हटा लिया और अपनी मा को सामने बाथरूम की दिवार से लग कर झुकने को कहा और अमन ने फिर ममता की पीठ और दोनो पैरो मे साबुन लगा कर मलने के बाद अपनी के गाड़ की दरारो मे उंगलिया घुसा घुसा कर साबुन लगाया और अंगूठे से एक बार ममता की गाड़ का सुराख मलने लगा





फिर उसने अपनी मा के जिस्म का ही साबुन अपने उपर मला कर शॉवर चालू करके खड़ा हो गया ।

अमन ने एक बार फिर से अपनी मा की चुचिया गाड़ के सुराख के साथ चुत मे भी उंगलिया दबाई और अच्छे से ममता को झाड़ते हुए उसे नहलाया

खुद भी नहा लिया ।

फिर उसने अपने हाथो से अपनी मा का जिस्म पोछा

फिर वो पीछे बैठ कर अपनी मा के चुतड पोछता हुआ बोला - पापा कितने लकि है ना मा

ममता मुस्कुरा कर - क्यू ?

अमन अपनी के ताजा नरम भीनी खुस्बु वाले चर्बीदार गाड़ पर हाथ फेरता हुआ - उनको तो रोज यहा बिना तकिये को सोने को मिलता होगा और वो रोज ही इसको किस्स करते होगे

ममता खिलखिलाई - किस्स्स तेरे पापा वो भी वहा हिहिही वो तो बामुश्किलन गालो पर चुम्मी ले लेते है कभी

अमन - धत्त मै होता तो रोज लेता उम्म्म्म्माआह्ह ऐसे हिहिहिही

अमन के नरम होठो के स्पर्श से ममता एक बार फिर से सिहर गयी ।

अमन का मुसल अभी भी तना हुआ था

ममता आगे बढ़ कर बाथरूम का दरवाजा खोलती हुई - चल आजा कपडे पहन ले

अमन उठा अभी भी उसके दिल के अरमान अधूरे थे , उसका खड़ा लण्ड बैठ नही रहा , ना जाने ये मौका कब मिलने वाला था ।

अमन बाहर आया

ममता - ये क्या तु मेरी ब्रा नही लाया

अमन - आपने कहा बोला था

ममता - धत्त अब क्या ऐसे हिलाती हुई जाऊ निचे हिहिहिही

अमन हस कर आगे बढा और अपनी मा के चिकनी गाड़ को सहलाता हुआ - लेकिन आपको कभी इसका ख्याल नही आया कि ये कितना हिलता है हिहिही

ममता - धत्त शैतान , तु मेरे पिछवाड़े देखता है क्या

अमन - घर मे तो सबकी नजर पड ही जाती है ना और ये है भी कितनी बडी

ममता लाज से अपना सूट उठाई और बाजू मे हाथ डाल कर उसको पहनते हुए मुस्कुराने लगी

ममता ने अब अपनी सलवार उठाने गयी

अमन का दिल बहुत तेज धडक रहा था उसे लग रहा था कि अगर ये सलवार चढ गयी तो पक्का दुबारा मौका नही आयेगा ।

अमन अपनी मा को हग करता हुआ - मम्मा

ममता अपने हाथ मे उल्टी हुई सलवार को सीधा करती हुई - हम्म्म बोल

अमन ने वापस से अपनी मा की गाड़ को सहलाया - मम्मा एक आखिर बार यहा किस्स कर लू

अमन के इस आग्रह से कि एक आखिरी बार किस कर लू ममता को भी अह्सास हुआ कि कल शादी के बाद शायद ये पल दुबारा कभी ना आये

शायद वो और उसका बेटा इसके बाद कभी ऐसे खुल कर ना मिल पाये ।

ममता ने एक गहरी सास ली और सलवार को हाथो मे बटोर कर सामने बेड पर चढती हुई वापस से घोडी बन गयी , क्योकि वो अपने बेटे के अरमान भलीभांति जान चुकी थी

अमन ने अपनी मा का सलवार उपर किया





एक बार फिर उसका मा की गाड़ चुत के फाको सहित रसाती हुई उसके सामने थी

अमन ने अपनी मा के चुतडो को थामते हुए हौले से फैलायाऔर दरारो मे छुपी हुई ममता को गाड का गुलाबी छेद उजला हो गया ।

अमन ने ममता की गाड़ के दरारो के करीब जाकर अपने नथुनो से वहा की भीनी खुशबू ली , जिसके अह्सास से ही ममता की बुर कचोटने लगी ।





अगले ही पल अमन ने जीभ मे ढेर सारा लार लेके अपनी मा की सुखी गाड़ की सुराख पर अपनी टिप स्पर्श की और ममता उछल पड़ी ।

ये उसके लिए पहला अह्सास था कि उसका बेटा आज उसकी गाड़ को अपनी जीभ से गीला कर रहा

ममता बिसतर को अपनी मुठ्ठिओ मे भरती अपनी जांघो को कसती अपने चुतड उचकाती सिसकने लगी - उह्ह्ह बेटा उम्म्ंम उह्ह्ह सीईईई उह्ह्म्ंंं क्याह्ह कर रहा है उह्ह्ह्ह सीई

अमन अपनी पूरी जीभ गाड़ के गुलाबी घेरे पर फिराता हुआ चाट रहा था ।

वही महज कुछ इंच पर ममता की चुत खुब रस छोड़ रही थी ।

अमन के नथुनो पर जैसे ही ममता के बुर के रसो की महक आई उसने अपनी गरदन निचे करते हुए अपनी जीभ को आगे कर अपनी मा की बुर पर फिराया

ममता काप सी गयी और अमन ने अपनी मा के चुत के मोटे मोटे गुलाबी फाको को एक साथ मुह मे भर चुबलाने लगा

ममता की हालत औए खराब थी - उह्ह्ह बेटा उह्ह्ह सीईई अह्ह्ह उम्म्ंम्ं उह्ह्ह ऐसे हु उम्मममंं उम्म्म्ं मेरा राजा बेटा उह्ह्ह मेरा लाल उम्म्ंम्ं चुससससस उम्म्फ्फ्फ ऊहह येस्स्स्स उह्ह्ह





अपनी मा की मादक सिसकिया सुनकर अमन अपनी गरदन औए लफा कर दो इंच जीभ भीतर घुसा दिया और भीतर से मलाई निकालने लगा

ममता का पुरा जिस्म अकड़ कर रह गया और वो अपने मुह पर हाथ रख कर तडप कर रह गयी वो धक्के देके अपने लाडले के मुह पर चुत दबाने लगी और अमन के होठ लगातार अपनी मा के चुत से रस सुरक रहे थे ।

ममता अपनी गाड़ उठा कर झड़ने लगी और अमन सारा सोमरस पीने लगा

जल्द ही ममता थक के बिस्तर पर ढह गयी और अमन भी अपनी सासे बराबर करने लगा

ये चौथी मर्तबा था कि ममता झड़ चुकी थी । उसमे अब हिम्मत नही थी , उसकी सारी वासना उसके दिमाग से उतर गयी थी ।

ममता उठी और जल्दी से अपना सलवार पहन ली और अमन वही वैसे खड़ा रहा इस ताख मे कि शायद उसकी मा बदले मे उसके लिए भी कुछ करे ।

ममता हसकर - देख क्या रहा है चल कपडे पहन मुझे जाने दे हिह्हिही

ममता इठलाती हुई अपना दुपपटता लेके कमरे के बाहर निकल गयी और अमन के साथ वही एक बार फिर से खड़े लन्ड पर धोखा हो गया ।

जारी रहेगी ।
 
अपडेट 186 ा



लेखक की जुबानी


इधर जब राज के कमरे से उसके नाना बाहर आये तो हाल मे सारे मर्द जन बैठे हुए थे ।

शादी को लेके बाते चल रही थी कि कुछ ही बाद शिला नहा कर कपडे बदल कर राज के कमरे से बाहर निकली ।

भिगे बालो और ताजी गोरी स्किन , उसपे से कसा हुआ कुर्ती और लेगी मे अपनी बहन को देखकर जंगी ने अपने भाई रंगी को हल्का सा कोहनी से मारते हुए शिला की ओर तकाया ।

नजर पड़ते ही रन्गी का भी मुसल सर उठाने लगा , तभी वो बालटी के कपड़े लेके उपर छत पर जाने लगी ।

जंगी रंगी के पास होकर उसके कान भुनभुनाती हुई आवाज मे - भैया पक्का दीदी ने पैंटी नही पहनी है आज

रंगी मुस्कुरा कर- कैसे पता तुझे

जंगी - उनकी पैंटी तो मेरी जेब मे है हिहिहिही

रंगी ने उसको आंख दिखाई और खुद भी मुस्कुरा पड़ा ।

इधर शिला कमरे से आई तो उसकी नजर सीधा बनवारी से टकराई और वो लजाती हुई मुस्करा कर जीने से उपर जाने लगी ।

शिला का यूँ मुस्कुराना बनवारी के लिए सिगनल जैसा था , उसने शिला के उपर जाने का इंतजार किया और राज के बारे मे पुछ कर उपर चला गया क्योकि अभी अभी अनुज और राज उपर ही गये थे ।

बनवारी सीढियां चढ कर उपर हाल मे आया और उसी समय राज बाल्किनी मे खड़ा अनुज से बाते कर था उसने बारी बारी शिला बुआ और फिर अपने नाना को उपर जाते देखा तो उसे कुछ शक हुआ ।

क्योकि राज अपने नाना के नियत से बखूबी वाक़िफ़ था और शिला बुआ भी कम नही थी ।

राज ने अनुज से जल्दी से बात खतम की और उसे नीचे भेज दिया ।

खुद दबे पाव उपर चला गया

चुकि हल्की शाम ढली हुई थी और उपर साफ सफाई नही हुई थी तो सारे लोग थके हुए थे तो सब कमरो मे निचे ही थे ।

राज चुपचाप बिना आहट के जीने के दरवाजे पर पहुचा और बाहर आकर धीरे से बाथरूम की ओर देखा तो वहा शिला बुआ और उसके नाना खडे थे ।

शिला बुआ बालटी से झुक कर अपनी बड़ी सी गाड़ फैलाई हुई कपडे निचोड रही थी और वही पीछे से उसके बाउंडरी वाल से खुद को टिका कर अपना मुसल मसलते हुए शिला से बाते कर रहे थे ।

शिला - अरे बाऊजी आप खामखा परेशान हो रहे है , मुझे कोई दिक्कत नही हुई

बनवारी शिला की कसी हुई गाड़ पर चढ़ी हुई लेगी को निहारता हुआ - हम्म लेकिन बेटी अन्जाने मे मुझसे कुछ गलत हो गया है ।

शिला - क्या !!

बनवारी - अह वो मै कैसे बताऊ तुझे , तु बुरा मान जायेगी और ना जाने मेरे बारे मे क्या सोचने लगे ।

शिला कपडे डाल चुकी थि और वो बालटी लेके वापस जीने की ओर आने लगी - बाऊजी आप कहिये ना , अब ऐसे मै क्या बोलूंगी ।

राज वहा झट से निचे आ गया और अनुज के कमरे मे चला गया ।

वही सीढियों से उतरते हुए बनवारी बस शिला को उलझाये हुए रखा था

वही शिला उपर के हाल मे आगयी थी और बालटी साइड रख कर रख स्टोर रूम की ओर बढ़ गयी ।

बनवारी भी उसके पीछे पीछे चल दिया

शिला इतराती हुई स्टोर रूम का दरवाजा खोलकर कमरे मे घुस गयी - आपके पास मोबाइल है बाऊजी , मुझे कुछ समान निकालना है , यहा की लाईट खराब है ।

बनवारी ने अपनी जेब से अपना की-पैड मोबाइल निकाल कर उसका टॉर्च जला कर दिया ।

शिला उस छोटे मोबाइल को देख कर थोडा हसी और फिर बोली - देखीये बाऊजी जब तक आप खुल के बोलोगे नही मै आपकी मदद नही कर सकती हु ।

बनवारी शिला के पीछे खड़ा होकर - दरअसल शिला बेटा वो जब मै तौलिये से अपना मुह पोछ रहा था तो ...!!

शिला जहा खडी थी वही रुक गयी - हा तब क्या ??

बनवारी- बेटा गलती से मैने तुम्हारा वो देख लिया था

शिला बनवारी के जस्त बगल मे खडी थी और इधर उधर टॉर्च जला कर समान खोजने के बहाने ये जाहिर कर रही थी कि उसके लिए वनवारी की बाते उतनी मायने नही रखती ।

शिला उसकी चुप्पी पर - क्या हुआ बाऊजी बोलिये , क्या देखा आपने उम्म्ं

बनवारी हकला कर - वो बेटा वो , आह्ह नही मै नही बोल सकता

शिला वही बगल मे टॉर्च जलाती हुई समान खोजती हुई ऐसा जताया कि उसे बनवारी की बातो को लेके जरा ही इल्म नही है ये इग्नोरेन्स बनवारी की खलबली और उसके दिल की बेताबी को और बढा रहा था

शिला - बोलिए ना जल्दी

बनवारी को कुछ सुझा नहि और उसने हाथ आगे बढ़ा कर शिला की कुर्ती के उपर से उसकी चुत पर उंगलियाँ रखते हुए बोला - ये !!

शिला का जिस्म कपकपा गया और वो सिहर गयी - उह्ह्ह बाऊजी हटाईए क्या कर रहे है सीईईई

शिला की मादक सिसकी ने बनवारी को हिम्मत दी और उसने कुर्ती के उपर से बुर को उंगलियो से दबाते हुए कहा - इसी की वजह से परेशान हु बेटी मै तबसे

शिला - उम्म्ंम बाउउउजीईई अब आप मुझे परेशान कर रहे है उम्म्ंम्ं सीईईई आह्ह

बनवारी समझ गया कि शिला गरम हो रही है - बेटा तुझे मेरी सम्स्या दुर करनी पड़ेगी , मै मिन्न्त करता है

शिला - क्याह्ह करना है बाऊजी उम्म्ं

बनवारी ने शिला की कलाई पकड कर उसका हाथ अपने तने हुए मुसल पर रखते हुए कहा - इसको बैठा दे बेटी , मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा है । शादी वाले घर मे ऐसे कब तक मै छिपाता फिरू, मुझे बहुत लाज आ रही है ।

शिला ने धोती के उपर से बनवारी के मोटे मुसल को हथेली मे भर कर उसको सहलाते हुए - अह्ह्ह बाऊजी नहीईई उम्म्ंम ये मै कैसे अह्ह

बनवारी- बेटा तुझे मेरी कसम है , मान जा ये बात किसी को नही पता चलेगी प्लीज उह्ह्ह

शिला - हम्म्म्म

फिर शिला अन्धेरे मे निचे बैठ कर धोती उठाते हुए मुसल बाहर निकाला और उसकी तपिश अपने पूरे जिस्म मे मह्सूस कर रही थी ।

शिला ने चमडी आगे पीछे की और मुह खोलते हुए आधा लन्ड भर लिया

बनवारी- अह्ह्ह बेटा उम्म्ंम्ं सीईई बहुत राहत है उम्म्ं सीई उफ्फ्फ और चुस बेटी उम्म्ं ऐसे ही

इधर शिला ने बनवारी का मुसल चुस रही थी वही स्टोररूम के दरवाजे पर कान लगा कर खड़ा राज बाहर अपना लन्ड मसलता हुआ मुस्कुरा रहा था ।

वही शिला अपने जीभ की टिप से सुपाड़े के निचे की नसे कुरेदते हुए वापस मुह मे लन्ड भरके चुसने लगी

बनवारी- आह्ह बेटी उम्म्ं तेरा खसम तो बहुत नसीब वाला है उह्ह्ह क्या मस्त चुस्ती है तुह्ह्ह ओह्ह्ह बेटीऊहह

शिला लगातार बनवारी के लन्ड की चुसाई कर रही थी

बनवारी- आह्ह बस बस बेटा रुक जाआह्ह ओह्ह्ह उम्म

शिला ने रुक गयी और मुह से लन्ड निकाल दिया और सोचने लगी कि क्या हुआ क्यू बाऊजी ने रोक दिया

बनवारी ने उसे हाथ पकड कर उठाया और मोबाइल के टॉर्च की रोशनि मे एक बक्से के उपर बक्सा रखा हुआ था ,,झुकने के लिए पर्याप्त उचाई थी

बनवारी - बस बेटा यहा आजा

शिला - उम्म्ं न्हीई बाऊजी वो मै कैसे

बनवारी- बेटा ये ऐसे नही शान्त होगा और मै ज्यादा समय नही लूंगा

शिला -प्लीज बाऊजी किसी से ..।

बनवारी - नही नही बेटा कभी नही

शिला मुस्कुरा कर अपनी कुर्ती उठाते हुए बनवारी के आगे अपनी गाड़ फैलाती हुई लेगी सरकाने लगी ।

बनवारी पीछे खड़ा होकर मोबाईल के टॉर्च की हल्की रोषनी मे शिला की चमकती चर्बीदार गाड़ निहारते हुए अपना लन्ड मसल रहा था और तभी शिला ने आगे झुकते हुए अपनी गाड़ फैला दी





जिससे उसकी गाड़ के साथ साथ उसकी बुर के फाके भी दिखने लगे , जिस्पे बजबजाई रस की बुंदे उस हल्की टॉर्च की रोषनी मे झलक रही थी

बनवारी ने टॉर्च को वही पास के एक ट्रंक पर रखा और अपने सुपाड़े पर थुक लगा कर उसको शिला के बुर के मूहानो पर लगाते हुए हल्का सा जोर दिया

शिला हल्की सी मादक सिसकी ली औए तभी उसे बनवारी का लन्ड आधे से ज्यादा उसकी बुर की चिरता भितर घुसता मह्सूस हुआ , उसकी तेज चिख उसके मुह मे घूंट कर रह गयी

बनवारी शिला की मुलायम गर्म चुत की गहराई मे दो धक्के ल्गाता हुआ पहुचा

शिला - ऊहह बाऊजी कितना गरम है उम्म्ंम सीईई अह्ह्ह आराम से उम्म्ंम्ं अह्ह्ह

बनवारी- हा बेटी तेरी बुर भी भट्टी जैसे तप रही है उह्ह्ह लेह्ह्ह अब्ब्ब

बनवारी ने शिला की कमर पकड कर कस कस के धक्के लगाने लगा

शिला - उह्ह्ह बाऊजी उम्म्ंम कितना ब्डा है आपका ओह्ह्ह माह्ह्ह फ्क्क्क मीईई उह्ह्ह सीईई ओह्ह येस्स्स उम्म्ंम सीई

बनवारी शिला के इंग्लिश संवाद पर मस्त होता हुआ और जोश के साथ पेलता हुआ - ओहो तु तो अंग्रेजन मैडमो जैसे बोल रही है उम्म्ंम्ं अह्ह्ह बेटा सच मे बहुत मुलायाम तेरी बुर है उह्ह्ह्ह

शिला - हा बाऊजी तो पेलो ना कस के उह्ह्ह ऐसे ही और घुसाओ आपका हथियार बहुत कड़ा है ऊहह और चोदो उन्म्ंं





बनवारी को उम्मिद नही थी कि शिला ऐसे इतनी गरम हो जायेगी और वो भी कस कस के धक्के लगाता हुआ - बेटा वो अंग्रेज वाली मैडम जैसा बोल ना उह्ह्ह मजा आ रहा है जैसे लग रहा है कि किसी विदेशी रन्डी के बुर पेल रहा हु मै उह्ह्ह बेटा

बनवारी ने सीधे सरल शब्द भी शिला के जिस्मो मे सिहरन कर देते थे और इसके मोटे लन्ड के साथ ये मजा दुगना था - ओह्ह बाऊजी फक्क्क मीई हार्ड फ्क्क माय पुस्सीई ऊहह ऊहह येस्स्स्स येस्स्स फ़क फ्क्क्क फ्क्क मिह्ह्ह ऊहह बाउजीई पेलिये अपनी विदेशी रन्डी कोह्ह्ह उन्न्ं

ये बोल कर शिला जोर जोर से अपनी बुर बनवारी के लन्ड पर फेकने लगी ,

शिला के कामुक शब्दो और उसकी उछलते गाड़ की मादक रग्डाई से बनवारी से रहा नही गया

और बनवारि का फब्बरा शिला की बुर मे ही फूट पड़ा वो अपने लन्ड को शिला की बुर के जड़ मे ले जाकर झटके खाने लगा - ऊहह बेटी ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा हु मै

शिला ने भी भीतर से चुत का छल्ला बनवारी के मुसल पर कसती हुई लन्ड निचोडने लगी और आखिर बूंद तक चुत मे भर लिया

बनवारी वही अनाज की वोरियो का सहारा लेके हाफने लगा और शिला ने एक पुरानी गठरी से कपडे खिच कर अपनी बुर पोछते हुए अपनी लेगी चढा ली ।

शिला - चले बाऊजी

बनवारी- और वो समान जो तु लेने आई थी

शिला मुस्कुराई - लिया तो अभी

बनवारी- मतलब

शिला - अरे वो मै भाभी से पुछना पडेगा

बनवारी- बेटा शुक्रिया तेरा

शिला - हम्म्म ठिक है वैसे इस उम्र मे आप भी कम नही है

बनवारी ने शिला की चर्बीदार गाड़ मसलता हुआ - कम तो तु भी नही है उम्म्ं

शिला - धत्त छोडिए अब

बनवारी- अच्छा सुन , रात मे भी एक बार क्या तु

शिला हस कर - वही रात की ही तो व्यवस्था करनी है

अभी यहा किसी का कुछ कन्फ़र्म नही है , शायद सारे मर्द जनो को बगल वाले घर मे सुलाया जाये , इसीलिए मुझे बिस्तर निकलवाना है

बनवारी चौका - क्या , लेकिन क्यू?

शिला - वो अपनी लाडो रागिनी से पुछो हिहिही मै चली

फिर शिला कमरे से बाहर निकल आई और राज काफी पहले ही निचे जा चुका था क्योकि उसको उस्के पापा ने फोन कर दिया था ।

वही निचे रागिनी निशा को लेके बगल चंदू के घर मे मर्दो के सोने की व्यवस्था के लिए कमरे से निकाली तो कमलनाथ भी निशा के साथ कुछ पल बिताने के इरादे से मदद के बहाने उन्के साथ हो लिया ।

निशा भी इतराई की मौसा जी अब उसके पीछे लग चुके थे ।

चंदू के घर मे सबसे आगे एक शटर वाला कमरा था हाल नुमा जिसमे कोचिंग क्लास चलती थी लेकिन शादी के नाते फिलहाल उसको भंडारीयो के हवाले कर रखा था और खाना बनाने का काम हो रहा था ।

बगल के लम्बे गलियारे से वो हाल पार करने पर दो कमरे मे थे जिनमे से हाल से सटे हुए कमरे की एन्ट्री हाल से थी और आखिर वाले कमरे की एन्ट्री गलियारे से ही थी ।

फिर जहा गलियारा खतम होता था वहा एक बड़ा सा आंगन था , जिसके एक तरफ दो चौकीयां डाली हुई थी और दुसरी तरफ जीने के नीचे नल और पानी का मोटर सेट था ।

ये वही जगह थी जहां रज्जो और रन्गी-जंगी का थ्रीसम हुआ था ।

आंगन के पीछे भी आखिर मे दो छोटे छोटे कमरे अगल बगल थे ।

रागिनी ने कमरे और उनमे रखी चौकियां गिनी ।

रागिनी - निशा , ये कमरे तो साफ ही है मगर एक बार और थोडा सफाई कर लो , मै बिस्तर भेजवा रही हूं

निशा - जी बड़ी मम्मी

रागिनी - आह्ह आप जीजा जी जरा निशा की हैल्प कर देंगे ये चौकिय सेट करवा दीजिये

कमलनाथ - हा रागिनी तुम फिकर ना करो

फिर रागिनी चली गयी और कमलनाथ की धड़कने तेज हो गयि ।

दोनो की सासे चढ रही थी दोनो भीतर से बेताब थे मगर इग्नोर कर रहे थे खुद को ।

निशा - मौसा जी इसको पकदिये थोडा बीच मे करा दीजिये ताकी पंखे का हवा आ सके

निशा आगे बढ़ी की काठ की चौकी के कोने पर उसकी एक तरफ काँधे पर रखी हुई लम्बी चुन्नी का किनारा फस गया और वो जहा थी वही रुक गयी

महंगी ड्रेस खराब ना हो और मौसा का माहौल भी गरम कर दिया जाये ये सोच कर निशा ने अपने डीप गले वाले सूट से अपनी चुन्नी उतारते हुए उसे कमरे की दिवाल हैनगर पर टांग दिया और चौकी की एक ओर आके झुक कर दोनो हाथो से चौकी को पकड़ा - हम्म्म मौसा जी पकड़ो





कमलनाथ ने पलके झ्पकाय बिना निशा के गहरे गले वाले सूट से झांकती उसकी पपिते जैसी मोटी चुचियो को लटकते देखा और उसका मुसल फड़क उठा ।

उस्ने मुस्कुरा कर चौकी उठाया और बीच मे ले आया फिर वो पीछे के दोनो कमरो मे गये वहा भी सफाई के साथ साथ चौकिया ठिक की ।

फिर निशा अपना दुपट्टा वही छोड़ कर बाहर भण्डार वाले हाल से होकर अन्दर वाले कमरे मे चली गयी और कमलनाथ भी पीछे उसके हिलते चुतड निहारता चला गया ।

यहा का कमरा बडा था और दो चौकिया आराम सेट हो सकती थी ।

निशा ने बारि बारि से कमलनाथ की मदद से चौकिया सेट करवाई और फिर हाफते हुए वही चौकी पर पंखे के निचे बैठ गयी - उफ्फ्फ बहुत मेहनत हो गयी हिहिहिही है ना मौसा जी

कमलनाथ - हा भाई तुमने बहुत हिम्मत दिखाई , वरना मैने तो लड़कियो को ऐसे काम करते नही देखा भाई

निशा ने आगे झुक कर अपने सूट का निचे का हिस्सा उपर करके अपना मुह पर आये पसीने को साफकरते हुए - उफ्फ़ कितनी गर्मी होने लगी ।

ऐसा करने से कमलनाथ को निशा का गोरा पेट और उसकी प्लाजो की इलास्टीक से जस्ट उपर उसकी गुदाज नाभि देखी ।

कमलनाथ के मुह मे पानी आ गया ।

अगले ही पल निशा ने सूट निचे कर लिया - ह्ह चलिये चलते है

कमलनाथ कुछ बोल ना पाया और दोनो बाहर चले आये

निशा बाहर आते ही अपने सीने को टटोला - अरे मेरा दुप्प्टा कहा है

कमलनाथ - अरे वो पीछे कमरे मे ही रह गया रुको बेटा मै ले आता हु

निशा भी उसको रोकने की कोसिस करती है मगर कमलनाथ तेजी से गलियारे से होकर चला जाता है

निशा भी उस्के पीछे हो लेती है क्योकि वो समझ रही थी कि कमलनाथ के उसकी चुन्नी से कुछ तो अरमान होंगे ही

उस्का शक सही निकला , कमरे मे कमलनाथ निशा की चुन्नी के एक छोर को एक हाथ को अपने नथुनो पर भर कर सूघ रहा था तो दुसरे हिससे को कस पर अपने तने हुए मुसल पर दबा रखा था ।

निशा मुस्कुराई औए खिलखिलाकर - बस करिये मौसा जी इतना भी परफ्युम नही है इसमे

कमलनाथ हड़बडाया और बात को घुमाता हुआ - नही इसकी खुस्बु अच्छी है , सोच रहा हु रज्जो के लिए यही परफ्युम लूँ ।

निशा ने कमलनाथ के हाथ से चुन्नी लपकी और अपने सीने पर ओढ़ते हुए इतरा कर बोली - फिर तो भूल ही जाओ

कमलनाथ - क्यू?

निशा - इसमे मेरी खुस्बु है किसी परफ्युम की नही और मुझे कैसे शिसी मे बन्द करोगे हिहिहिही

कमलनाथ - क्या तुम भी मै नही मानता

निशा मुस्कुराई "लिजिए आईये सूंघ लिजिए यहा "

निशा ने कमलनाथ को अपने कन्धे गरदन के पास दिखाया

कमलनाथ की सासे तेज हो गयी और वो पास आके एक गहरी सास ली । उसे वही खुस्बु मिली जो निशा की चुन्नी से आ रही थी और उसने जैसे ही सास वापस छोड़ी ।

कमलनाथ के नथुनो से निकाली गर्म सासों ने निशा के जिस्म को गनगना दिया और उसकी आंखे एक मादक सिसकी ये बन्द हो गयी ।

कमलनाथ- उम्म्ंम बेटा सच मे तेरे बदन से गजब की खुशबू आ रही है , जैसे हिरण से कस्तुरी की ।

निशा लाज से शर्माई और हस कर बोली - बस किजीए मुझे शर्म आ रही है ,

कमलनाथ ने एक बार और निशा के करीब आकर उसके गरदन के पास होकर अपने नथुनो मे सास भरी - उम्म्ंम्म्ं क्या मस्त मदहोश कर देने वाली खुस्बु है ,

निशा हस कर - मौसा जी आपको ये मदहोशि भारी पड जायेगी , जरा पैंट सही कर लिजिए हाहाहाहा

कमलनाथ ने एक नजर निचे तने हुए मुसल पर डाला और उसे निशा की ये शरारत अच्छी लगी ।

कमलनाथ - सच कह रही हु बेटा , ये तुम्हारे बदन की खुशबू का ही असर हो रहा है मुझ पर

निशा हस कर - छीई धत्त , आपको शर्म नही आती मै आपकी बेटी जैसी हु

कमलनाथ मदहोश भरे लहजे मे - ये तो नोर्मल बात है बेटा , कि स्त्री को देख कर पुरुष का कामुक हो जाना और मैने तो तुम्हारे साथ कुछ जबरदस्ती तो नही की ।

निशा - हा वो ठिक है लेकिन प्लीज इसको सही कर लिजिए , ऐसे बाहर जायेंगे तो किसी का ध्यान पड गया तो मेरे उपर ऊँगली उठेगी ना

कमलनाथ - हा बेटा ये बात सही कह रही हो तुम , रुको मै इसको आह्ह बस्स्स एकह्ह मिंट उम्म्ंम अह्ह्ह

कमलनाथ वही निशा की ओर पीठ करके अपना पैंट खोलकर लन्ड को एक तरफ सेट करते हुए पैंट बन्द करके निशा की ओर घूम गया - हा देखो अब सही है ना

निशा ने पैंट के एक ओर उभरे हुए सुपाड़े को देख कर मुस्कुराई - हम्म्म ये चलेगा । चलिये चलते है ।

कमलनाथ - अरे एक मिंट रुको ना , बस एक आखिरी बार सूंघ लेने दो ना

कमलनाथ ने निशा का बाजू पकड कर उसे अपनी को खींचा जिस्से उसकी चुन्नी सरक गयि और झटके से इस बार कमलनाथ निशा के गरदन के बजाय उसके चुचो के उपर आ गया

अपने चुचियॉ पर कमलनाथ के मुह का स्पर्श पाकर निशा उपर से नीचे तक कप्कपा सी गयी और कमलनाथ ने नथुने रगड़ कर निशा के चुचो से उसके जिस्म की मादक गन्ध को अपने सासो मे समेटा - उह्ह्म्ंंंं यहा तो अलग ही न्शा है बेटा अह्ह्ह सीईईई

कमलनाथ ने अपना सुपाडा भींचा ।

निशा - मौसा जी बस करिये कोई आ जायेगा

कमलनाथ - उम्म्ंम बेटा मुझसे कन्ट्रोल नही हो रहा है क्या खुशबू है यहा की उम्म्ंम्ं आह्ह्ह

तभी बाहर गेट कर किसी के आने की आहट हुई निशा हड़बड़ा कर कमलनाथ का चेहरा अपने चुचो से हटाते हुए बोली - मौसा प्लीज मान जाईये , अभी कोई आ रहा है रात मे आपको इस्से भी अच्छी खुस्बु सुँघा दूँगी , अभी छोडिए मुझे उम्म्ंह्ह

कमलनाथ खिला उठा - सच मे

निशा परेशान होकर गलियारे मे बढ़ती हुई परछाई को देख कर जल्दी जल्दी अपना दुपट्टा ठिक करती हुई - हा हा पक्का पक्का

तभी अनुज और अरुण सर पर बिस्तर तकिया लादे हुए आवाज लगाते हुए गलियारे मे आने लगे - दीदी कहा हो

निशा - हा आ गयी बाबू , लाओ इध रख दो कमरे मे , और अरुण बाबू तुम इसको पीछे वाले कमरे मे ले जाओ

फिर निशा ने कमलनाथ को आंख दिखाई की वो बाहर जाये और फिर मुस्कुरा उठी कि मौसा के संग उसने भी थोडे मजे मारे और उन्हे तरसाया भी ।

जल्द ही रात का खाना खाने के बाद

राज के नाना को छोड़ कर सारे मर्द लोगों को चंदू के घर मे शिफ्ट कर दिया गया ।

कारण था कि रागिनी को अपने बाउजि के तबियत की फ़िकर थी ।

भंडार वाले हाल से जुडे कमरे मे रंगी जंगी चले गये ।

उसके पीछे वाले कमरे मे कमलनाथ हो गया ।

पीछे के बाकी दो कमरे थे ।

जिसमे अनुज ने राहुल से खफा था तो वो अपने राज भैया के साथ हो लिया और राहुल को अपनी बुआ के बेटे अरुण के साथ बिस्तर बाटना पड़ा ।

वही इस घर मे गेस्ट रूम को शिला और क्म्मो को दे दिया गया तो

राज की मामी और गीता-बबिता उपर अनुज के कमरे मे सेट हो गयि ।

सोनल - निशा - रीना का कमरा पहले से ही फिक्स था ।

शालिनी और रज्जो को राज का कमरा दे दिया गया

वही रागिनी ने अपने बाऊजी का ध्यान रखने के लिए उन्हे अपने कमरे मे सुलाने का बोल दी ।

अमन के घर

रात के 8 बज रहे थे ।

अपने एक लौटे बेटे की शादी की खुशी मे मुरारी ने एक ऑर्केस्ट्रा का इन्तेजाम किया था , चमनपुरा की भीड उमड़ी हुई थी , घर सब जन औरते महिलाए सब के सब छत के उपर से झाक के ये नजारा देख रहे थे ।

ऐसे मे संगीता और भोला ने अपनी योजना शुरु कर दी ।

मदन को अच्छे याद था कि आज रात मे ऑर्केस्ट्रा के टाईम उसकी दीदी अपने पति से फिर से चुदने वाली है ।

ये मोमेंट मदन के सीने मे हल्चल मचाये हुए थे ।

उसकी चोर निगाहे उन्पे नजर गडाये हुए थी और जैसी ही उसने दोनो को जीने से निचे सरकते हुए देखा तो उसका कलेजा ध्क्क हुआ

उसकी सासे तेज होने लगी

लन्ड उफनाने लगा

वो उठ कर टहलने लगा , बेछैनी उसपे हावी हो रही थी ।

इधर उधर बहटीयाते हुए वो भी करीब 2 3 मिंट के अंतर पर जीने से निचे आया ।

वो भाग कर अपनी बहन ने कमरे मे बाहर गया तो दरवाजा खुला था और वहा कोई नही था ,

अमन के कमरे मे बाहर से कड़ी लगी थी ।

स्टोर रूम भी बाहर से बन्द था , उसने आगे बढ कर पीछे की बालिकिनी देखी वहा भी वो नही थे ।

मदन को हैरानी हुई कि वो लोग कहा गये होगे ,वो सरपट जीने से होकर निचे आया और लपक कर अपनी भाभी ममता के कमरे मे चुपके से झान्का - वहा भी कोई नही दिखा , बल्कि उसने पीछे एक दो कमरो मे गया वहा भी कोई नही दिखा ।

हर कमरे मे झाकने के बाद मदन अपना सबर खो चुका था और उसे समझ नही आ रहा था कि वो कहा गये होंगे ,

तभी उसकी नजर अपने कमरे के भिड़के हुए दरवाजे पर गयी जोकि कमरे से निकलने के बाद उसने कडी लगाई थी बाहर से

मदन की सासे एक बार फिर से चढने लगी और वो चुपचाप दबे पाव अपने कमरे की ओर बढा ।पुरे घर मे एक चुप्प सन्नाटा था बस डीजे से गाने की आवाजे आ रही थी ।

मदन धीरे से अपने कमरे के दरवाजे के पास पहुचा और उसने कान लगाया तो भीतर से सिसकिया आने लगी थी ।

संगीता - उह्ह्ह मेरे राअज्ज्जा आह्ह खाआ जाओ मेरी गाड़ सीई अह्ह्ह माअह्ह्ह

संगीता के शब्द मदन के कानो मे पड़ते ही उसका लन्ड अगले ही पल फौलादी हो गया और उसका दिल कमरे के भीतर का दृश्य देखने के लिए बगावत कर बैठा ।

उसने हल्का सा दरवाजे पर जोर दिया और दरवाजा चुउंं की आवाज किया , इतनी महिन आवाज बड़ी आसानी से डीजे के तेज आवाज मे दब जानी चाहिए थी , मगर भोला और संगीता की योजना कुछ और थी ।

संगीता तेज आवाज के साथ उठकर चिल्लाती हुई दरवाजा खोली - कौन है वहा !!

मदन तेजी से भागना चाहा मगर तभी संगीता ने उसको टोका - मदन भैया आप !!!

जारी रहेगी
 
अपडेट 186 बी



अमन के घर


मदन भैया आप !!!

संगीता ने मदन को पीछे से टोका ।

मदन का कलेजा ध्क्क करके रह गया उसका सारा जोश जस का तस पानी पानी हो गया । वो अपने कर्म पर बहुत लज्जित हो चुका था ।

तभी भोला भी बाहर आया - कौन था संगीता , ओह्ह साले साहब थे ।

संगीता ने तेज फुसफुसाकर भोला को डाँटा- चुप रहिये आप

जिसे मदन ने साफ साफ सुना

संगीता - भैया इधर आईये आप कमरे

मदन - क्याआ मै , क्यू क्या हुआ ?? वो मै बाथरूम आ रहा था तो

संगीता - पहले कमरे मे चलिये और आप उपर जाईये मुझे भैया से कुछ बात करनी है

भोला बिना कुछ बोले निकल गया और दोनो भाई बहन कमरे मे थे ।

संगीता ने मदन को बिस्तर पर बैठने को कहा और खुद भी उसके बगल मे बैठ गयी ।

एक चुप्पी के बाद संगीता ने गहरी सास ली - भैया एक बात सच सच बताईये

मदन - क्या ?

संगीता - क्या दोपहर मे आप ही थे हमारे कमरे के बाहर

संगीता की बाते सुन कर मदन की आन्खे बडी हो गयी और उस्क कलेला मुह मे आ ही गया था

संगीता ने अपना सवाल दुहराते हुए पूछा- देखिये ये बात आपके जीजा को नही पता , मुझे शक था कि उस समय हमे कोई देख रहा था और मैने उसे पकडने के लिए ही ये चारा डाला था और वो आप निकले !! ये सब क्या है भैया ? क्यू?

मदन - सॉरी दीदी , वो बस सब कुछ अनजाने मे हुआ मै स्टोर रूम से समान लेने गया था और बस आपकी आवाजे आई और मै कुछ पल रुक गया

संगीता मुस्कुरा के मदन के झुके हुए उदास चेहरे को देख कर बोली - बस कुछ पल रुके और कुछ नही किया ।

मदन - नही नही दीदी कसम से

सन्गिता - खाईये मेरी कसम

मदन की जबां गले मे अटक सी गयि और वो लज्जित हो गया ।

संगीता - मैने देखा था वो जो दिवाल पर था , छिपायिये मत

मदन - सॉरी दीदी ,

संगीता - बात वो नही कि आपने हमे देखा और वो सब कर लिया , बात ये है कि आप अपनी जरूरतो से कब तक भागोगे बोलो

मदन को इस सवाल की उम्मीद नही थी अपनी बहन से वो भौचका आंखे फाड कर सगीता का चेहरा निहारने लगा ।

संगीता - शुक्र है मै थी , गलती से कोई और देख लेता तो ना जाने क्या गजब हो जाता ।

मदन - सॉरी दीदी , उस वक़्त मै तकलिफ मे था और आप दोनो की बाते मुझे परेशान कर रही थी । मेरे पास कोई चारा नही था कि मै ...।

संगीता ने मदन उदास चेहरे को देख कर उसके हाथ को थाम कर - तो क्या अभी भी तकलिफ है आपको ?

मदन ने चौक कर अपनी बहन की ओर देखा और उसका लण्ड अगले ही पल तन गया और उसका कलेजा कापने लगा ।

संगीता मदन के चेहरे को निहारती हुई अपना सवाल दुहराई - बोलिए ,

मदन - वो मै ...वो हा ...नही वो मै ।

संगीता मुस्कुरा- आपकी यही आदत ने आपकी सारी प्रोब्लम की जड़ है , कभी खुद के बारे मे खुल कर बाते नही करते आप

मदन - हा वो मै , क्या बोलू इसपे आप मेरी बडी बहन हो और मै आपसे ये सब कैसे ? मुझे समझ नही आ रहा है

सन्गिता हस कर - अच्छा तो वो बस कैसे बता लेते थे जब अपनी वाली से मिल कर आते थे और उसकी खुब सारी बाते करते थे मुझसे उम्म्ं

मदन - वो बात कुछ और थी और ये कुछ और है

संगीता - अच्छा आपको लगता है कि अगर मै आपकी बात ना सुनू तो आप किसी और से ये सब कह लोगे

मदन उदास होकर - नही !!!

संगीता - फिर बोलो ना भैया , क्या आपको अभी भी तकलिफ है

मदन एक गहरी आह भरकर - हम्म्म्म

संगिता ने झिझक भरे स्वर मे - क्या उसका कारण मै हु

मदन - ये क्या सवाल हुआ

संगीता - आप जवाब दो , आपको मेरी कसम है झुठ नही बोलोगे

मदन उखड़े हुए लज्जित स्वर मे मुह फेरता हुआ - हम्म्म

संगीता मुस्करा - तो इसमे उदास क्यू हो , अब मै हु ही इतनी सेक्सी तो तुम्हारा क्या कसूर

मदन हस के - दीदी यार मजाक नही

सन्गिता - ऊहु देखो तो दीदी से अब यार हिहिहिही

मदन लाज के मारे हस देता है - आप भी ना हिहिहिही

संगीता - सुनो !..... देखोगे ?

मदन की सासे अटक सी गयी और वो उखड़ती आवाज मे - क्क्याआ !!

संगीता - वही जिसके लिए ताक झाकी लगा रखी है

मदन का लन्ड पल पल फूलता जा रहा था और उसकी बहन मा ऑफ़र उसके सुपाड़े को तान चुका था ।

मदन ने हिम्मत की और मुस्कुरा कर - दिखा दो

संगीता उठी बिस्तर पर घुटने बल चढती हुई आगे आ गयी

मदन का कलेजा वही बैठे हुए धक धक कर रहा था और पजामे मे उसका मुसल फड़फड़ा रहा था ।

तभी संगीता ने अपना पेतिकोट समेट साडी उपर खिंच लिया और उसकी बड़ी सी चर्बीदार गाड़ फैल कर मदन के सामने आ गयी ।





गाड़ का भूरा छेद और निचे बुर की लम्बी फाके देख कर मदन का लन्ड बगावत पर आ गया ।

वो खड़ा हो गया अपनी जगह पर और पजामे के उपर से अपना लन्ड मसलता हुआ थुक गटकने लगा ।

संगीता ने तिरछी नजरो से देख कर मदन से पुछा- देख लिया , कैसी है ??

मदन होश मे आया - आच्छीई है दीदी

संगीता तुन्की - तुझे तो औरतो की कदर ही नही है , अभी तेरे जीजा जी होते तोहहह उम्म्ंम सीईई अह्ह्ह भैयाआअह्ह्ह उम्म्ंम

इससे पहले कि संगीता के शब्द पुरे होते मदन अपना सबर खो चुका था और वो झपक कर अपनी बहन की खुली गाड़ पर अपना मुह दे दिया और जीभ निकाल कर चाटने लगा

संगीता - सीईई उह्ह्ह भैयाआह्ह उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह उह्ह्ह और चुसोह्ह उम्म्ंम्ं ऐसेहहह हुईईई उम्म्ं

मदन - यही कह रही थी ना दीदी तुम कि जीजा तुम्हारी गाड़ देख कर ऐसे ही पागल होके चुसता उम्म्ंम सीईई उह्ह्ह्ह क्या मस्त रस भरी गाड है दिदीईई

संगीता मुस्कुरा - उम्म्ंम देखो तो जीभ सही जगह गयि तो बोलने भी लगे आह्ह आऊच्च उम्म्ंम अराम सेहहह उन्म्म्ं सीई ओह्ह्ह भैयाआ हा निचे भी ले जाओ उह्ह्ह हा बुर मे घुसा दो उन्मममंं माह्ह्ह्ह सीईई ओह्ह्ह फ्क्क्क्क मीईई ऊहह

मदन अपनी गरदन लफा कर संगीता की बुर मे अपना मुह दे दिया और था और उसके रस छोडते फाके चुबलाता हुआ जीभ घुसा के न्चाने लगा

संगीता भलाभला के तेजी से झड़ने लगी और मदन ये मौका अब नही जाने दे सकता था ,

वो अपनी दीदी की बहटी चुत को चाटता हुआ अपना लन्ड बाहर निकाल चुका था वही संगीता के घुटने जवाब दे चुके थे और वो आगे लेट गयी थी

मदन ने बिना वक्त गवाये अपना क्प्दा निकाल कर सीधा अपना मुसल अपने दीदी के मुह के आगे कर दिया और संगीता ने भी करवट लेते हुए अपने भाई का लन्ड मुह मे भर लिया ।





मदन हवा मे तैरने लगा , सालो बाद किसी ने उसके सुपाड़े को चुबलाया था उसके भीतर रह रह कर उसकी उतेजना उबाल खा रही थी और वो अपनी कसर संगिता की चुतड मसल कर निकाल रहा था

फिर संगीता उठ कर घुटनों के बल हुई और मदन बिस्तर पर खड़ा हो गया और संगीता ने उसका लन्ड चुसना शुरु कर दिया





मदन जोश मे उसके सर को अपने लन्ड पर दबाने लगा ।

संगीता अपने ब्लाऊज से चुचिया निकाल के उन्हे मलती हुई मदन के लन्ड को गले तक उतारने लगी और जब उसे लगा कि अब उसकी चुत एक बार फिर से तैयार है तो वो रुक गयी और उसने अपने कजरारी आंखो से मदन के आड़ सहलाते हुई उसको निहारा





मदन समझ गया कि उसकी बहन को क्या चाहिये और अगले ही पल संगीता निचे लेट गयि , उसने अपनी टाँगे हवा मे उठाते हुए अपने भाई के सामने अपना भोस्डा खोल दिया





मदन अपने हाथ मे मुसल मसलता हुआ अपनी बहन की कामोत्तेजना से जला जा रहा था वो भी आगे बढ़ अपना लन्ड अपनी बहन की तपती बुर मे पेल दिया - अह्ह्ह दीदीईई ऊहह कितना गर्म है ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह

सन्गिता - उम्म्ंम भैया कितना मोटा है उह्ह्ह ऊहह औए तप रहा है आपका भी उम्म्ं

मदन ने अगले ही पल एक और झटके के साथ खुली हुई बुर को और फैलाता हुआ तेजी से सटासट लन्ड घुसेड़ने लगा

मदन - ओह्ह्ह दिदीईई क्या मस्त बुर है तुम्हारी उह्ह्ह सीईई ओह्ह्ह





संगीता- अह्ह्ह लन्ड तो तुम्हारा भी मस्त है उम्म्ं और कस के पेलो उह्ह्ह इसीलिए तडप रहे थे ना अब तक उम्म्ंम

मदन कस कस के झटके लगाता हुआ - हा दीदी जबसे आपको चुदते देखा था जीजा से मन कर रहा था कि कास आप मिल जाये तो खुब पेलू आपको

संगीता - आह्ह मेरे राजाआ भैयाआ अब पेलो ना उह्ह्ह उम्म्ंमफ़ाकक्क्क मीईई येस्स्स्स येस्स्स फक्क्क फ्क्क उह्ह्ह्ह येस्स्स फ्क्क्क मीईई भैयाआअह्ह उह्ह्ह

मदन - तुम बहुत गर्म हो दीदीयूह्ह्ह तुम तो एक साथ दो दो मर्दो को सम्भाल लोगि उह्ह्ह सीईई

संगीता - तो तुम्हे तुम्हारी बहन रन्डी लगती है उम्म्ंम बोलो रन्दी को पेल रहो उह्ह्ह अह्ह्ह्ह बोलो मेरे राजाह्ह्ह उह्ह्ह्ह कभी पेला है किसी रंडी को उह्ह्ह बोल ना

मदन - नहीईई दिदीईई लेकिन मुझे यकीन है रंडी भी आपके जैसे नही चुदवाती होगी , कितनी गर्म हो आप , जीजा तो थक जाता होगा पेल पेल के आपको





संगीता ने पोजिसन बदलते हुए मदन को निचे आने का इशारा किया और खुद उसके उपर आके लन्ड को अपनी बुर मे भरती हुई - अह्ह्ह क्या करुउऊ भैयाआ कभी कभी तो खिरा बैगन डाल कर पूरी रात सो जाती हु इस बुर मे

मदन निचे से लन्ड फेकता हुआ - तभी इतनी खुली है आपकी चुत दीदीईई और आप तो जीजा से सिरर्फ़ गाड़ ही मरवाति हो ना उम्म्ंम

संगीता कस कस अपनी चुत मे लन्ड लेते हुए गाड पटकते हुए - अह्ह्ह हा भैया मुझे उनका लन्ड गाड़ मे लेने बहुत मजा आता है और रात मे जब मै एक मोटा बैगन अपने बुर मे घुसा लेती हुई तो वो पीछे से मेरी गाड़ मे लन्ड घुसा के पेलते है उह्ह्ह क्या मजा आता है उह्ह्ह फक्क्क मीईई हार्ड और तेज्ज्ज उह्ह्ह

मदन संगीता की बताई कहानी को एक पल का सोच कर मारे जोश से भर जाता है और निचे से कमर उचका कर तेजी से लन्ड उसकी बुर मे पेलने लगता है





वही दरवाजे के बाहर भोला दरवाजे को हल्का सा खोले हुए भीतर का नजारा देख कर खुश हो रहा था और उसका लन्ड पानी छोड रहा था ।

संगीता - आह्ह हा भैयाअह्ह उह्ह्ह फक्क्क्क मीई ऐसे ही ऐसे ही अह्ह्ह अह्ह्ह मै आ रही हु उह्ह्ह फक्क्क मीई येस्स्स उएस्स्स पेलोपेलो





संगीता तेजी से झड़ते हुए अपनी चुत के छल्ले कसने लगी नतिजन मदन के लन्ड की नसो ने भी फब्बारा छोड दिया और वो काफी देर तक अपनी दीदी के बुर मे पिचकारी छोडता रहा , संगीता सुस्त होकर मदन के जिस्म पर गिर जाती है और उसकी चुत से मदन के लन्ड का रस रिसने लगता है ।

भोला अपनी जगह से हट गया था और नाच का मजा लेने लगा था क्योकि वो जानता था आज की रात उसकी बीवी जम कर चुदने वाली थी अपने भाई ।

वही भोला को अपने सलहज ममता को भी ये खुश खबरी देनी थी ।

वही इनसब से अलग अमन अपने कमरे मे बेचैन हो बैठा हुआ सोच रहा था कि आज कब उसकी मा उसके लिए दूध लेके आयेगी और वो उसके साथ कुछ मस्ती कर पाये ।



राज के घर

शिला - कम्मो

क्म्मो - दीदी आप अपने बर्थडे वाली रात ऑनलाइन क्यू नही आई , पता तबसे हमारे views काफी कम हो गये और उपर से ये न्यू बॉय की डिमांड काफी समय से हो रही है

शिला - अरे क्म्मो मैने उस रात के लिए स्पेशल रज्जो के साथ लाइव जाने सोचा था , मगर वो काफी देर रात तक नही आई कमरे मे और मै इंतजार करके सो गयी ।

क्म्मो - हम्म्म लेकिन हमारे व्यूज कम हो रहे है और आपके इंस्टा पर auntylover69 जो है उससे बात हुई आपकी वो आलरेडी 5000 भेज चुका है आपके बाथरूम शो के लिए

शिला - हा क्म्मो लेकिन यहा शादी वाले घर मे कैसे ?

क्म्मो - देखो दीदी , कुछ भी करके आज ये शो रिकार्ड कर लो , देखो इसके डीएम लागातार आ रहे है आपकी आईडी पर ।

शिला - इसकी टेनसन ना लो तुम क्म्मो ये हो जायेगा , लेकिन टेन्सन न्यू बॉय की होगी , क्यू ना राज को इंट्रो दिया जाये वो समझदार और हमारी बात समझेगा भी ।

क्म्मो - हा लेकिन राज अब ऐडल्ट और बड़ा लगता है हमे एकदम नये लड़के की तलाश है जिसकी उम्र 18 19 की हो ताकि वो मॉम-सन वाला रिलेशनशिप रियल लगे

शिला - अरे तो हम लोग अरुण को ही ले लेते है ना , हमारा पर्फेक्ट मैच होगा

क्म्मो - दीदी आप पगला गयि है अरुण मेरा अपना सगा बेटा है मै उससे कैसे और अभी वो छोटा है ।

शिला - फिर एक काम करे क्यू ना इस auntylover69 वाले लड़के को ही ट्रेस करे और इसको बाहर कही मिल कर इसके साथ डील करे ।

क्म्मो - हा ये सही रहेगा , लेकिन याद रहे, कोई गड़ब्ड ना हो , यहा से घर जाने के बाद हम इसको देखते है ।

शिला - ओके डन!!



राहुल - अरुण

"भाई तेरे मोबाईल के मॉडल देख कर लगता नही कि इसे सिर्फ गेम खेलने के यूज़ करता होगा " , राहुल ने मस्ती भरे लहजे मे अरुण को पूछा ।

राहुल की बात सुनकर अरुण का कलेजा ध्क्क हुआ और वो अटके हुए स्वर मे - मतलब

राहुल हसकर - अरे मतलब कोई gf तो होगी ही जिससे बातें करने के लिए ये फोन लिया है और किस लिये लेते है लौंडे फोन भाई हाहाहाहा

अरुण राहुल की बात पर एक गहरी सास ली और मुस्कुरा कर - नही भाई अपने को लड़कियो मे कोई रुचि नही !

राहुल -चल फेक मत , वो अनुज मे मामा की लड़की वो जो मोटी सी है , जब वो डाँस कर रही थी तो तेरी नजर तो उसके सीने पर ही थी ।

अरुण की एक वार फिर फ़टी - क्क्या यार तुम भी , मै क्यू देखूँगा वो बस अच्छा नाच रही थी

राहुल - अबे

झुठ मत बोल मैने देखा था तुम दोनो की आंख मिचौली

अरुण की चोरी पकड़ी गयी - नही यार ऐसा कुछ नही है हमारे बीच

राहुल - अबे तु डर क्यूँ रहा है , मौका मिल रहा है रगड़ दे ना

अरुण - नही यार ऐसे कैसे ?

राहुल - भाई मै इस शादी मे भरपूर मजे करने वाला हु और अगर गीता मुझे लाईन देती तो साली की गाड़ ही मारता मै , मगर मेरे हिस्से मे तो बबिता आई है

अरुण - तो क्या तुम बबिता को ?

राहुल - और क्या भाई , कल मौका मिल जाये अकेले मे बस

राहुल की बात सुनकर अरुन की भी हिम्मत हुई - वैसे बात तो ठिक ही कर रहे हो भाई , शादी व्याह मे ये सब काम जल्दी जल्दी मे हो भी जाता है क्योकि दोनो जान्ते है कि समय बहुत सीमित ही होगा

राहुल - अब सही समझा तु, वैसे आज रात के लिए कुछ प्रोग्राम लगा ! है कुछ तेरे पास जबरज्स्ट

अरुण मुस्कुराया - ऐसा माल है राहुल भाई कि लौडा निचोड लोगे

राहुल - फिर लगा ना !!



बनवारी - रागिनी



बेड पर हेड बोर्ड से टेक लगाये अपनी जान्घे फैलाये बैठा हुआ बनवारी अपनी रसिली बेटी को कमरे मे ब्लाऊज पेतिकोट मे इधर उधर समान सेट करते हुए निहार रहा था ।





कूल्हो पर कसे हुए पेटीकोट मे चुतडो की थिरकन से बनवारी का लन्ड आसमानी मुह उठाए उसकी हथेली मे फड़क रहा था ।





रागिनी को भी अपने बाऊजी के इरादो की पूरी भनक थी और ये बात उसे उत्तेजित किये हुए थी कि आज रात उसके बाऊजी उसकी जम के चुदाई करेंगे ।

ये सोच कर ही शाम से उसकी चुत बजबजा रही थी ।

कमरे मे बिखरे समानो को सहेजती हुई रागिनी ने मुस्कुरा कर शरारती लहजे मे बोली - दीदी को बुला दू क्या बाऊजी ।

बनवारी अपनी छोटी बेटी के नटखटेपन से वाकिफ था तो हस कर - तु बहुत शरारती है और तुम दोनो बहने आपस मे कुछ नही छिपाती हो

रागिनी - आखिर बहनो मे पर्दा कैसा , आप कहे तो मै और दीदी एक साथ हिहिहिहिही

ये सुनते ही बनवारी की सासे चढने लगी और उस्का लन्ड पुरा अकड़ गया वो थुक गटक कर बहाने से बोला - अच्छा बेटा तुझे अगर टाईम लग रहा है तो रज्जो को बोल दे , वो आज मुझसे रहा नही जा रहा है ।

रज्जो को बुलाने का आग्रह सुनते ही रागिनी मुस्कुरा दी और समझ गयी कि आज उसके बाऊजी का क्या इरादा है !!

जारी रहेगी
 
अपडेट 186 स

लेखक की जुबानी


"धत्त दीदी आप भी ना हिहिहिही " , शालिनी के खिलखिलाते हुए बगल मे सोई रज्जो को अपने बाजू से ठेला ।

रज्जो हस कर - मुझे तो ऐसे मौकों पर ही मजा आता है , मर्द जात कुत्तो के जैसे लार टपकाते हुए बस हमारे जोबन और मटकते कुल्हे निहारते रह जाते है

शालिनी - वैसे आपके कुल्हे है ही ऐसे कि बिना किसी की नजर अटके रहेगा ही नही हिहिहिही

रज्जो इतराती हुई - अरे अभी कल शादी मे देखना बरातियों के पजामे मे तम्बू ना बनाया तो .....!!!!

तभी रज्जो के मोबाईल की रिंग बजी ।

रज्जो करवट लेके हाथ मे मोबाईल पकडती हुई संशय भरे लहजे मे - ये राज का फोन

रज्जो काल पिक करती है - हा बेटा बोल

राज - मौसी आलआउट मिलेगी क्या , यहा सोने मे दिक्कत हो रही है

रज्जो - आह्ह हा हा बेटा रुक मै लेके आती हूँ

फिर रज्जो फोन काट देती है और शालिनी से - जरा मै ये आलआउट देके आती हुई , बेचारे वहा ना जाने कैसे सोये हुए है ।

शालिनी भी फिकर दिखाती हुई - हा दीदी सो तो है ।

वही दुसरी तरफ अनुज उलझन और डर भरे लहजे मे - भैया क्या आप सच मे मौसी को सब बता देंगे

राज - तु फिकर मत कर अब सब सही हो जायेगा ।

अनुज तेज धडकन को थामने की कोसिस मे गहराती सासो को हल्का करता हुआ मन ही मन प्रार्थना करने लगता है कि अब कुछ काण्ड ना हो क्योकि रज्जो मौसी के साथ तो उसके पहले से ही अपने लफड़े चल रहे थे । अगर ये सब बात राज को भनक लग गयी तो क्या होगा बस इसी टेनसन मे अनुज और डरने लगा ।



रंगी - जंगी



बेताब दिल और बौखलाये लन्ड ने दोनो भाईयो के भीतर आग लगा रखी थी ।

बीते पलों के साझा अनुभव ने दोनो भाइयों को काफी खोल दिया था ।

शिला को लेके दोनो भाइयो मे जहन मे बातें साझा करने की व्याकुलता थी , मगर एक ओर जहा रंगी ने अपना संयम बाँधे रखा वही जंगी की व्याकुलता ने उसे अपने बड़बोले पन पर ला ही दिया ।

हिचक भरे लहजे मे जंगी ने अपना मुसल मसलते हुए कहा - भैया आपसे एक बात कहनी है ।

रंगी - क्या !!

जन्गी - बात पुरानी है लेकिन मुझे लगता है आपको बता देनी चाहिए

रंगी - क्या बात है छोटे , कोई टेन्सन

जंगी हल्के हस्ते गालो के साथ - नही नही बात थोड़ी अचरज की है और मुझे समझ नही आ रहा है कि आप इसपे क्या प्रतिक्रिया देंगे

रंगी - अरे भाई बता ना , मुझसे क्या छिपा रहा है

जंगी - भैया बात दरअसल ये है कि शिला दिदी और मै , मतलब हम दोनो ...।

रन्गी की सासे चढने लगी -

तुम दोनो क्या ?

जंगी - भैया बात दरअसल रक्षाबंधन की है उस टाईम शालिनी दोनो बच्चो के साथ मायके गयि थी और तब शिला दीदी आई थी

रंगी को वो समय याद आया और उसकी यादे ताजा हो गयी तभी आखिरी बार उसने भी अपनी दीदी को चोदा था तबसे उसका भी लन्ड अपनी बहन की चुत के रस के लिए प्यासा था ।

रंगी अपने सर उठाते लन्ड को दबाते हुए - हा आई तो थी

जन्गी - तो भैया राखी के एक दिन पहले ही दीदी मेरे लिए खाना लेके आई थी और शालिनी के बिना मै उस समय इतना कामोत्तेजक रहा करता था कि गलती से ग्राहको के जोबनो पर ही अकसर अटक जाया करता था , उस दिन दीदी खाना लेके आई थी और मेरी नादानी से एक औरत मुझ पर भडक गयी क्योकि मै उसके भारी मोटे चुचे निहारने मे खो ही गया था ।

रंगी थोडा मुस्कुराया - फिर

जंगी - मगर जब वो औरत तेज आवाज मे बोलने डांटने लगी तो दीदी भागी भागी बाहर और आस पास दुकान मुहल्ले मे कोई बात ना फैले इस्के लिये दीदी ने बहुत ही नरमी से उस औरत को शान्त करके भेज दिया ।

रन्गी - ये तो बहुत अच्छा किया दीदी ने , दीदी वाकई बहुत अच्छी है बचपन से लेकर अबतक हमेशा अपने भाइयो के लिए खड़ी रही है

जंगी बिसरी हुई कल्पनाओ मे बड़ब्डाया - खड़ी ही क्या भैया वो तो मेरे लिए बैठी भी है ।

रंगी - क्या मतलब

जन्गी हल्का सा हसकर - दरअसल उस दोपहर दुकान वाली घटना के बाद दीदी मुझे लेके भीतर गयी और मुझसे मेरी उस हरकत को लेके बात चित की , सच कह रहा हु भैया मुझे जितना डर लग रहा था दीदी का उन्होने मेरी तकलिफ को समझा अच्छे से ।

रन्गी - हम्म्म फिर

जंगीलाल - फिर उन्होने खुद ही पहल करके मुझे सोफे पर बिठाया और निचे बैठ कर मेरा लन्ड चुस कर उसे शान्त किया ।

रंगी चौका और झटके से घूम कर हस्ते हुए जन्गी को देखा - क्या सच मे !!

जन्गी - जी भैया

रंगी - नही मै नही मानता , दिदी खुद से कैसे

जन्गी - पता नही भैया उस दोपहर उन्हे क्या हुआ था , बा सिर्फ उन्होने चुसा बल्कि मेरे लन्ड की सवारी भी की थी , और अगले 5 रोज हर दुपहर शालिनी के आने तक हमने सेक्स किया ।

रंगी का लन्ड पुरा फौलादी हो गया और उसकी सासे चढने लगी - उफ्फ़ क्या बात है यार तु तो छिपारुस्तम निकला

जंगी - हा भैया मै कबसे बेताब था आपको बताने के लिए , अब दिल को सुकून आया है , सच मे दीदी की गाड़ मे लन्ड घुसाने का सुख मुझे फिर से चाहिये भैया और आपके साथ मिल कर

रंगी इस बात की कल्पना से और भी जोश मे अपना मुसल मसलने लगा - उम्म्ंम्ं भाई दीदी की गाड़ मिल जाये तो क्या ही बात हो जाये , मगर क्या दीदी हम दोनो के लिए एक साथ तैयार होगी ।

जन्गी - होगी ना भैया , दीदी बहुत बडे दिल वाली है , आप बस एक बार उन्हे चोद लो अकेले मे फिर हम दोनो मिल के प्लान करके चोदन्गे

रन्गी मुस्कुराया - वैसे एक बात मुझे तुझसे कहनी थी छोटे

जन्गी - हा भैया बोलो ना

रंगी - उस राखी पर सिर्फ तु ही मै भी लकी था हिहिहिही

जंगी - मतलब ??

रन्गी - मतलब राखी वाली रात मे मैने भी दीदी को चोदा था ।

जन्गी - क्या सच मे भैया , लेकिन कैसे ?

रंगी ने ठहाका लगाते हुए झुठ बोला - भाई सिर्फ तेरी ही बीवी मायके नही गयी थी मेरी भी गयी थी हिहिहिही , रात मे देर तक बाते करते हुए वो सो गयी और फिर मैने फाय्दा लेने का सोचा , नीद मे मगर मेरी चोरी पकड़ी गयी और उन्होने मेरे मुह पर बैठ कर अपनी बुर को चुसवाया फिर मैने जम कर उनकी गाड़ मारी ।

जंगी अपने भैया की बात सुन कर अपना मुसल मसलता हुआ - उह्ह्ह भैयाआह्ह मजा आ गया होगा आपको तो दीदी की बुर चुस के

रन्गी - हा भाई दीदी की बड़ी गाड़ और लम्बे फाके वाली रसिली बुर चुस के मजा आ गया था , और तभी से मै भी प्यासा हु दीदी के लिए

जन्गी एक गहरी सास ली - ओह्ह्ह भैया तब तो हम दोनो ने आधी बाजी मार ली बस अब दीदी के साथ अकेले मौका मिल जाए

रंगी - ये इतना आसान भी नही है छोटे , कुछ योजना बनानी होगी

जंगी - अह्ह्ह भैया योजना जब बनेगी तब बनेगी , अभी तो मुझे बस गर्म गर्म चुत का चसक हो रही है ।

रंगी - हा लेकिन इतनी रात मे कैसे और पता नही कौन कहा सोया होगा ।

जन्गी - भैया एक बार ट्राई करते है ,आप भाभी के साथ हो लेना और मै शालिनी के साथ ,नही तो बिना झडे मुझे नीद नही आने वाली ऐसे

रंगी - हा भाई मुझे भी , चल चलते है

इधर दोनो भाई दबे पाव कमरे से बाहर आने को होते है कि उन्हे पायलो की छनक आती है और दोनो सतर्क हो जाते है कि इतनी रात मे उस घर से यहा कौन आया होगा ।

दोनो ने दबे पाँव भंडार वाले कमरे के दरवाजे से झाका तो रज्जो एक मैकसी मे तेज कदमो के साथ अपनी गाड़ उछालती हुई गलियारे मे भीतर दाखिल होती दिखी ।

रज्जो को गलियारे मे जाता देख जंगी ने मुस्कुरा कर रन्गी को देखा - देखा भैया , आपके साढू भाई ने तो अपना इन्तेजाम कर लिया अब हमे भी अपने बारे मे सोचना चाहिए क्यू ?

रंगी मुस्कराया - चलो देखते है क्या हो सकता है ।

इधर दोनो भाई इस घर से दुसरे घर की ओर चुप चाप सरक लिये और वही राज के घर मे उपर जीने से भी कोई सरकता हुआ निचे आ रहा था ।



रागिनी - बनवारी



उह्ह्ह बाउजीईई सीईई अराम सेह्ह उम्म्ंम्ं सीईई अह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह

बनवारी- बस बस बेटा ऐसे ही रह सही ताल बैठ गया है उह्ह्ह्ह क्या कसी हुईई गाड़ है तेरी ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह





रागिनी ने बिस्तर पर आऊंधे झुके हुए अपनी गाड़ को हवा मे उठा अपने बाऊजी का मोटा मुसल अपनी गाड़ मे भर रखा था और बनवारी उसके कूल्हो को थामे हुए कस कस के उसकी कसी हुई गाड़ मे अपना लन्ड पेल रहा था ।

रागिनी - ऊहह बाऊजी , दीदी नही आई तो सारा बदला मेरे से ही लोगे उम्म्ंम्ं अह्ह्ह सीई उह्ह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ं आअह्ह्ह बाउज्जीई





बनवारी- आज रज्जो नही आई तभी तो ये सुख मेरे नसीब मे था मेरी लाडली उह्ह्ह ओह्ह्ह्ह कितना कसा हुआ चुतड है तेराआह्ह उह्ह्ह अब और नही रुक जायेगा उह्ह्ह उह्ह्ह मै आ रहा हु उह्ह्ह

रागिनी - उह्ह्ह बाऊजी रुकियेआआह्ह्ह आह्ह येह्ह्ह क्यह्ह्ह आप तो अन्दर हीईई ऊहह माह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं उह्ह्ह गर्म है उम्म्ंम्ं उम्म सीईई ओफ्फ्फ उउउउउह्ह्ह्ह्ह्ंंंंंंंं मम्मम्ंम्ं ओह्ह्ह बाउजीईईई आपने तो मेरी गाड़ की भर दी उम्म्ंम्ं

बनवारी मुस्कुराता हुआ अपना मुसल बाहर निकालता है और रागिनी की खुली हुई गाड़ के मोटे गुलाबी सुराख से रस उसकी चुत पर रिसने लगता है ।

रागिनी कुछ पल के लिए वही लेटी रह जाती है ,बनवारी एक तौलिये से अपनी थकी हुई लाड़ली की गाड और चुत पर रख कर अपना रस सुखाता है और फिर रागिनी के पास आकर नंगे ही लेट जाता है ।

रागिनी घिसटते हुए आगे बढ़ कर अपने बाऊजी के गर्म सीने पर सर रख कर लेट जाती है और उसके जहन मे कुछ सवाल चल रहे होते है ।

बनवारी रागिनी की चुप्पी पर सवाल करता हुआ - क्या हुआ बेटी तु कुछ सोच रही है ।

रागिनी हल्का सा मुस्कुरा कर -

कुछ नही बाऊजी बस ऐसे ही कुछ सोच रही थी ।

बनवारी - क्या ?

रागिनी हस कर - नही जाने दिजिये

बनवारी- अरे बता ना ,मुझसे क्या छिपा रही है ?

रागिनी - वो अभी आप बोल रहे थे ना कि लगता है दामाद बाबू ने तेरे पीछे से कभी लिया नही तो वो सोच के मुझे एक बात याद आ गयी हिहिहिही

बनवारी भी रागिनी का खिला चेहरा देख कर मुस्कुरा - क्या बोल ना

रागिनी - यही कि जब मेरी शादी हो गई थी तो भी क्या आपने दिमाग मे ये सब आया था कि आपके दमाद बाबू मेरी पीछे से लेंगे या नही हिहिहिही

बनवारी रागिनी की शरारत पर खिलखिला कर हस दिया - हाहहह्हा तु ना बहुत बदमाश है ।

रागिनी हस कर - बोलिए ना बाऊजी , मुझे विदा करते हुए तो आपको एक बार ही सही जहन मे आया ही होगा ना कि सुहागरात मे आपका दामाद आपकी लाडली की जम कर लेंगे

बनवारी- हाहहहा हा भाई एक ही बार क्यू बहुत बार ध्यान आया था ।

रागिनी - तो आपको कैसा लगा तब , कि आपकी बेटी किसी से चुदेगी उम्म्ं बोलिये ना बाऊजी ।

बनवारी अपने उफनाते लन्ड को मसलता हुआ - तु तो जानती ही है कि तेरे दीदी के बाद मै तुझे भी पाना चाहता था मगर तुने तय कर रखा था कि तु अपना सब कुछ अपने पति को ही सौपेगी तो मुझे उतना कुछ अजीब नही लगा , हा बस इस बात की बेताबी हमेशा से थी कि काश वो उस पल को जब तु खुल कर अपने पति के साथ चुद रही होगी मुझे तेरा वो रूप देखना था ।

वो अपने पति से चुद रही हो और उसके बाऊजी उसे देखे ये सोच कर ही रागीनी के जिस्म मे सिहरन सी दौड़ गयी और उसने कस कर अपने बाऊजी को पकड लिया ।

बनवारी- क्या हुआ बेटी

रागिनी शर्मा कर - कुछ नही बाऊजी ।

बनवारी अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला - वैसे हर मा बाप के जहन मे ये बाते तो आ ही जाती है जब उनकी बेटे या बेटी की शादी होती है ,ले दे के ये रिश्ता दो जिस्मो का ही तो है ना , तु भी तो सोनल को लेके कभी ना कभी ये सब सोची ही होगी ना

रागिनी शर्मा कर हस दी - धत्त बाऊजी आप भी ना

बनवारी उसको छेड़ता हुआ - तु ना सही तो दमाद बाबू के दिमाग मे पक्का आया होगा

अपने बाऊजी के शब्दो को सुनते ही रागिनी एक पल को एक ख्वाब मे खो ही गयी कि उसके पति इतने चोदू है वो भी तो जरुर सोनल को लेके कुछ ना कुछ सोचते होगे , मगर वो भी कितने प्यारे है एक बार मैने क्या डाँटा दुबारा जुबान पर कभी नही लाये सोनल का नाम हिहिहिही ।

बनवारी- क्या हुआ क्या सोच रही है

रागिनी अपने हाथ सरकाते हुए लन्ड को थाम कर सहलाती हुई बोली - सोच रही हु इस बार इसको किधर लूँ हिहिहिही

बनवारी का लन्ड फडका और वो रागिनी को अपने उपर खिंचता हुआ बोला - आगे से

फिर रागिनी उठी और दोनो पैर फेक कर अपने बाउजी के तने हुए लन्ड को अपने बुर मे सेट करती हुई बैठ गयी और सिसकिया भरने लगी

दोनो एक और राउंड की चुदाई मे व्यस्त हो गये ।



राज - रज्जो - अनुज

रज्जो - चलो ठिक है तुम लोग आराम करो , सुबह जल्दी उठना भी है

राज एक बार अनुज को देखा और मुस्कुराते हुए बोला - मौसी रुको ना एक बात करनी है आपसे ।

अनुज की धड़कने तेज हो गयी और वो मिन्नते करता हुआ राज की ओर देखने लगा ।

रज्जो - हा बोल ना बेटा

राज बिस्तर से उतर कर दरवाजे की कड़ी लगाने के लिए बढ़ता हुआ - रुको एक मिंट

रज्जो अचरज से - क्या हुआ क्या बात है और अनुज तु इतना परेशान क्यू है बेटा ।

राज मुस्कुरा कर - इसी की बात करनी है मौसी , ये कल रात से ही परेशान है

रज्जो बड़े दुलार से अनुज के बालों को सहलाया और पुछा- क्या हुआ लल्ला बोल ।

अपनी मौसी के मुलायम स्पर्श से अनुज सिहर गया और उसकी सासे तेज ही गयी ।

वही रज्जो को लग रहा था कि कही उसके और अनुज के बिच जो हुआ उसको लेके अनुज तो परेशान नही है ना क्योकि उसने अनुज से अपना वादा पुरा नही किया था ।

राज हस कर - मौसी ये नही बतायेगा मै ही बोलता हूँ

रज्जो - हा बता

वही अनुज ना मे सर हिलाकर अपने भैया को मना कर रहा था मगर राज खिले हुए चेहरे के साथ बोला - दरअसल मौसी कल अनुज ने गलती से शालिनी चाची को पीछे से नंगी देख लिया और चाची ने भी इसको देख लिया तबसे ये बहुत परेशान है और चाची से नजरे चुरा रहा है ।

रज्जो को अनुज के भोलेपन पर हसी आई मगर वो अपनी हसी को मुस्कुराहत मे छिपाती हुई मन मे बड़बड़ाइ- इसको देखो अभी दो दिन पहले अपनी ही मौसी को चोदने को पागल था अब जब चाची की गाड़ देखते हुए पकड़ा गया तो ड्रामा कर रहा है बचने के लिए हिहिहिही

अनुज नजरे फेरे हुए खुद को रज्जो द्वारा घूरता पा रहा था ।

राज हस कर - मै इसको समझा रहा हु कि कोई बात नही जानअंजान मे कई बार सबसे गलती हो जाती है लेकिन ये है कि अपनी रट मे अड़ा है ।

रज्जो - हा बेटा ऐसा तो होता ही रहता है , शादी का घर है और भीड है कही ना कही ये सब संजोग हो ही जाता है , कोई नहाते हुए दिख जायेवा तो कोई कपड़े बदलते हुए ।

"हा फिर , अभी परसो की ही बात लेलो मैने भी तो मौसी को नहाते हुए देखा था क्यू मौसी " , राज ने रज्जो को आंख मारकर अनुज की ओर इशारा किया ।

रज्जो हस कर - हा उसने भी मेरा पिछवाडा देखा था हिहिहिहिही

राज रज्जो की बात कर खिस्स से हस दिया और अनुज भी इस मजाक भरे म्हौल मे हस दिया ।

राज - लग रहा है मौसी ये तभी मानेगा जब आप इसको अपना पिछवाडा दिखा दो खुद से , तभी इसकी झिझक शर्म दुर होगी ।

रज्जो ने आंखे उठा कर राज को देखा तो राज ने बस इशारा किया कि अनुज के लिए कर दे ।

रज्जो समझ गयी

उसने घूम कर अनुज की ओर देखा जो पहले से ही उलझन मे था रज्जो और राज की कैमेस्ट्री को लेके ।

राज इतना खुल कर कैसे मौसी से बात कर ले रहा था ये अनुज के लिए अनूठी बात थी ।

जैसे ही रज्जो ने आन्खे उठा कर अनुज से उस्का इरादा पूछा वो मारे लाज के मुस्कुराता हुआ मुह फेर लिया और राज खिलखिला पड़ा

रज्जो दोनो भाइयो के बीच से उठ कर बिस्तर के सामने उनकी ओर पीठ करके खडी हुई और कमर के निचे से अपनी मैस्की उठाती हुई धीरे धीरे अपनी गाड़ पीछे से पूरी नंगी कर दी





रज्जो मौसी की नंगी गाड़ अपने भैया के सामने देखने का मौका अनुज के एक नया अनुभव था ।

रज्जो ने मैक्सि उपर चढा कर अपनी नंगे कूल्हो पर हाथ रख कर इतराती हुई पीछे गरदर घुमा कर दोनो भाइयो का रियेक्शन देखा

अनुज का मुसल फड़क था और उसका गल सुखने लगा था , मुह की लार गटक कर गला तर करते हुए उसने शर्माहट भरी मुस्कान के साथ उसने राज को देखा ।

राज ने इशारे से वापस रज्जो की फैली हुई नंगी मोटी गाड़ को तकाया तो वो मुह फेर कर हस दिया ।

राज हस कर - लग रहा है मौसी इसकी शर्म अभी भी गयी नही कुछ और करना पड़ेगा ।

रज्जो घूम कर - हम्म्म्म जरा हटो

रज्जो दोनो के पास से गुजर कर घुटने के चलती हुई बिस्तर पर चढ गयी और इस बार रज्जो को चूत की मोटी फाकों के साथ के साथ उस्के गाड़ ज्यादा फैल कर दोनो के साम्ने थे ।





इस बार अनुज अपना मुसल खुजाने के खुद को रोक नही पाया और राज ने उसको ऐसा करते देख लिया ।

राज धीरे से अनुज के कान मे - है ना मजेदार , और मस्ती करनी है बोल

अनुज ने मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाया ।

राज धीरे से बोला - अब मुझे देखना क्या करता हु

अनुज के दिल की धड़कने तेज हो गयी कि राज आगे क्या करने वाला है ।

राज के मंसूबो से अंजान रज्जो अब बस उठने को थी कि राज उसके पास आकर उसकी नंगी फैली हुई गाड़ पर हाथ फेरने लगा , जिससे रज्जो के जिस्म मे कपकपी सी फैल गयी और गाड़ को सहलाते हुए राज के पंजो ने जब उसके मोटी चर्बीदार गाड़ के गहरे फाको के बीच उंगलियाँ घुसाई तो उसकी आंखे फैल गयी और सासे अटक गयी ।





राज ने बिना हिचक कर अनुज की ओर मुस्कुरा कर देखते हुए अगले ही पल रज्जो की चुत मे उंगलिया पेल दी और उन्हे भीतर खोदने लगा ।

रज्जो सिसकियाँ और रज्जो से ज्यादा अनुज का लन्ड फड़क उठा , उसने भी जोर अपना लन्ड भींच और उसका दिल अभी भी काप रहा था कि कैसे राज ये सब खुलेआम कर रहा है और मौसी ने उस्का जरा भी विरोध किये बिना उसका साथ दिये जा रही है ।

जबकि मौसी के साथ खुद अनुज को मस्ती करने के लिए क्या क्या पापड़ बेलने पड़े थे , कही ऐसा तो नही कि राज भैया रज्जो को पहले ही पेल चुके है ?

ये सवाल अनुज के जहन मे आते ही उसका जोश चार गुना बढ़ गया और मौसी के रन्डीपने पर उसका लण्ड फौलादी हो गया , मगर उसने अपना संयम बनाये रखा , लेकिन खुद का लन्ड मसलने से अपने हाथो को नही रोक पा रहा था ।

राज उंगलिया घुसा घुसा कर रज्जो की चुत कुरेद रहा था और रज्जो आगेझुकी हुई अपनी गाड़ उठाए हुए आहे भर रही थी ।

राज ने एक नजर वापस से अनुज को देखा और उसकी बेताबी और जोश मे तने हुए लन्ड को देखकर मुस्करा कर उसने अनुज को पास आने का इशारा किया

राज ने हौले से उंगली निकाली और अनुज को इशारा किया कि वो घुसाये

अनुज के लिए नया नही था रज्जो की चुत ने उंगलिया पेलना मगर अपने बड़े भाई के सामने ऐसे करने के लिए उसकी धडकने तेज थि, लेकिन जैसे ही उसकी उंगलियों ने रज्जो के चुत के फाकों को स्पर्श किया उसके जिस्म बिजली कौंधी और उसने अपनी बिच वाली उंगली टाइट करते हुए मौसी की चुत मे पेल दी , रज्जो ने एक बार फिर अपना जिस्म ऐठा ।





मौसी के जिस्म मे हरकत देख कर दुसरे हाथ से अपना मुसल मसलते हुए अनुज ने तेजी से अपनी बिच वाली उंगली से रज्जो मौसी की चुत मे उंगलियाँ पेलने लगा

वही रज्जो अनुज के उंगलियों की तेज घर्षण से अपने चुत के छल्ले कसने लगी और उसकी उंगली को अपनी बुर मे दबोचने लगी

अनुज के लिए ये नया अनुभव था मानो उसकी मौसी ने उसकी उंगली नही बल्कि उसके लन्ड पर चुत को कसा हो मारे जोश मे वो पहले से ज्यादा जोर से उंगलिया पेलने लगा और नतिजा जल्द ही रज्जो ने अपनी चुत का फब्बारा छोड दिया ,

गरमागर्म लावा अनुज के उंगलियो से उसके हथेलि पर रिस्ने लगा , अनुज ने झटके से हाथ बाहर खिंच लिया और रज्जो थककर कोहनियों के बल झुक कर अपनी गाड़ को और फैलाते हुए हाफने लगी , उसकी चुत से अभी भी पानी रिस रहा था ।

अनुज का मन था कि वो भी मौसी की चुत का रस चखे मगर राज क्या सोचेगा ये सोच कर अनुज ने एक लाज भरी मुस्कुराहत के साथ राज की ओर देखा और फिर रज्जो की गाड़ पर ही अपनी उंगलियाँ और हथेली पोछने लगा ।

राज - अरे ये क्या कर रहा है , पोछ क्यू रहा है ।

अनुज - तो ?

राज - तुझे तो सब सिखाना ही पडेगा क्या , देख जब ऐसा कुछ बाहर आये तो उम्मममं सुउउउउर्र्र्र्र्र्रृऊऊऊउऊप्प्प्प उम्म्ंम्ं

रज्जो -उह्ह्ह राज बेटा उम्म्ंम्म्ं सीईई अह्ह्ह्ह





राज वही निचे बैठ कर अपना मुह रज्जो के बहते बुर पर दे दिया और सारा रस चाटते हुए निचोडने लगा ।

अनुज अपने भैया को देखते ही अब कन्फ़र्म हो गया कि उसने रज्जो को चोद रखा है और उसका लन्ड पुरा फौलादी हो गया था ।

कच्छे मे कसावट बढ़ने से उससे अब दर्द बर्दाश्त नही थी इसीलिए उसने अपना लन्ड बाहर निकाल कर हाथो से मसलने लगा और सामने राज रज्जो की गाड़ को दोनो हाथो से फैलाये हुए चुत मे अपना मुह देके बुर के मोटे मोटे मुलायम फाको को चुबला रहा था

अनुज अपने सुपाड़े से चमड़ी खिंचता हुआ राज के पास खड़ा हुआ

कमरे से बल्ब की रोशनि से बनी छाया की हरकत ने राज ध्यान तोड़ा और मुह हटाकर बगल मे खड़े अनुज को अपना लन्ड निकाल कर हिलाते हुए देख रहा था ।

उसके चेहरे पर कामुकता टपक रही थी , वही रज्जो पूरी तरह से मदहोश होकर सिस्करही थी ।

राज खड़ा हुआ और अनुज की ओर मुह पर उंगली रख चुप रहने का इशारा करते हुए उसको अपनी जगह खड़ा करके आगे बढ़ने का इशारा किया





अनुज का चेहरा खिल गया और उसने अपना लन्ड को रज्जो मौसी की चुत पर टटोलते हुए लसलसाई बुर मे घुसेड़ते हुए पेलने लगा

रज्जो सिस्किया - अह्ह्ह बच्चो ये क्याअह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ं उफ्फ़फ्फ

अनुज एक पल को रुका और राज की ओर देखा तो राज ने आंख मारकर आगे बढ़ने का इशारा किया और खुद अपने पैंट को खोलता हुआ रज्जो के मुह की ओर चला गया ।

अनुज का डर और हिचक अब छुउउऊ हो गये थे वो अपनी मौसी की चर्बीदार गाड़ को पकड कर कस कस के मौसी की बुर मे लन्ड पेलने लगा ।

वही राज ने अपना बड़ा सा लन्ड निकाल कर रज्जो के सामने परोसा तो रज्जो थोडा तुनकी जिसपे रज्जो ने बड़े दुलार मे अपनी मौसी के गालो को सह्लाया और अपना लन्ड रज्जो के होठो पर लगया

रज्जो ने मुस्कुरा कर अपना मुह खोला आधा लन्ड मुह मे भर लिया ,

मौसी के मुह मे अपने भैया लन्ड देख कर अनुज को और भी जोश आया

वो करारे झटके देते हुए - उह्ह्ह्ह मौसी कित्नाआआह्ह गर्म है आप्काआआह्ह्ह उह्ह्ह्ह फ्क्क्क्क उह्ह्ह्ह





रज्जो ने राज का लन्ड सहलाते हुए मुस्कुराती आंखो से राज की आंखो मे देखा और वापस लन्ड चुसने लगी

राहुल के साथ मस्ती करके और पोर्न सेक्स स्टोरी पढ कर अनुज को सेक्स को लेके काफी तैयारी हो चुकी थी

उसे पता था जब कब और कैसे खुद को झड़ने से रोकना है

राज का लन्ड चुसते हुए रज्जो अपनी चुत मे अनुज के लन्ड के तेज झटके रोकने के लिए अपने बुर का छल्ला उसने अनुज पर कसना शुरु कर दिया और अनुज की हालात खराब हो गयी ।

उसका सुपाडा बुरी तरह से मौसी की बुर के गलियारो मे घिसने लगा था और उसने झड़ने के डर से झटके मे लन्ड बाहर निकाल दिया और हाफने लगा ।

रज्जो अपनी शरारत पर मुस्कुराई और राज का लन्ड हाथ मे पकड कर गरदन घुमा कर अनुज की ओर देखा ।

अनुज थोडा लजा गया और इशारे से घूमने के लिए कहा

रज्जो ने अपने दुलारे भतीजे की बात मान ली और राज का लन्ड छोड कर करवट लेके घूम ती हुई पीठ कर बल लेट गयी

मौका पाते ही अनुज रज्जो के बुर पर टुट पड़ा और अपनी गरदर रज्जो की मोटी जांघो के फसा कर अपनी थूथ उसकी बुर मे रगड़ने लगा

वही राज ने भी आगे बढ़ कर अपना लन्ड वापस रज्जो के मुह दे दिया





रज्जो राज के सुपाड़े को चुबलाते हुए उस्का मोटा लन्ड चुसने लगी

अनुज - उह्ह्ह मौसीईई आपकी बुर बहुत नरम है उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ज

राज - भाई एक बार मुह मे चुस्वा कर देख दुगना मजा आयेगा

अनुज ने रज्जो की बुर मे अपने जीभ फिराने के बाद गरदन उठा कर चहक कर अपने भैया की ओर देखा कि अदला बदली करनी है

राज हस कर अलग हुआ और अनुज की जगह आ गया

और जान्घे खोलते हुए सिधा अपना मुसल रज्जो की चुत मे घुसेड़ दिया और सटासट पेलने लगा ,,वही अनुज रज्जो के मुह के पास घुटने के बल आकर उसके मुह मे लन्ड सीधा उतारता हुआ - लोह्ह्ह मौसीईई मेराआ भी चुसोहहह उह्ंम्ंं सीईई ओह्ह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं





राज - ऊहह मौसी सच मे आपकी बुर बहुत नरम है उम्म्ंम्ं मजा आ रहा है

अनुज - हा भैया मौसी के मुह मे तो दुगना मजा है उह्ह्ह मौसी और लोह्ह ना उम्म्ंम्ं

अनुज - भैया आप और मौसी कबसे मजे कर रहे हो

अनुज के सवाल से रज्जो ने आंखे उठा कर राज को देखा और राज ने भी रज्जो को हैरत भरी नजरो से देखा

इसपे रज्जो ने जवाब देना सही समझा और वो अनुज का लण्ड हाथो मे सहलाते हुए बोली - वही जैसे तुने शुरु किया था चिपक चिपक कर हिहिहिहिही





राज अचरज से - मतलब

रज्जो बात घुमाती हुई - हा राज ऊहह आह्ह ये भी तेरी तरह चिपक चिपक कर अनजाने मे मुझे छूने के बहाने खोजता था एक दिन चोरी पकड़ी गयी और फिर हम दोनो बाथरूम मे ।

राज मुस्कुरा कर अनुज से - तुने मुझे बताया नही इस बारे मे और चाची के लिए बड़ा हरीशचंद्र बन रहा था

अनुज ने ढीठ भरी हसी से खिलखिलाया और बोला - आपने भी तो कभी इस बारे मे नही बताया ना भैया

राज - हा तो तु अभी छोटा है ना इसीलिए,

" मगर मुझे क्या पता था कि तु इतना बड़ा हो गया है " , राज ने अनुज के फुले हुए लन्ड की तारिफ करता हुआ बोला ।





अनुज इतराता हुआ वापस अपना लन्ड मौसी के मुह मे पेल दिया और राज ने भी पोजीशन ने बदलाव करते हुए रज्जो की जांघ उठा कर कस कस के झटके खाने लगा और अनुज के भी रज्जो का गरदन थाम कर अपना मुसल उसके गले तक उतारने लगा था

भैया की तारिफ पाकर अनुज का मुसल पहले से ज्यादा फुल गया था और वो रज्जो की मुह मे लन्ड पेल रहा था - अह्ह्ह मौसी मस्त चुस्ती हो आप उह्ह्ह्ह और लोह्ह्ह उम्म्ं घोट जाओ उह्ह्ह्ह सीईईईई अह्ह्ह्ह्ह

अनुज - भैया अब मुझे चुत चाहिये मौसी की हटो ना आप उह्ह्ह्ह

राज अपना लन्ड बाहर निकाल कर हिलाता हुआ - क्यू सिर्फ चुत ही , गाड़ नही मारेगा

गाड़ मारने का सुनकर ही अनुज का शरिर हिल गया - क्या सच मे , क्या आपने मौसी की ?

राज - तो क्या बिना गाड़ मराये मौसी के अपनी गाड़ फैला रखी है उन्हे तो बहुत पसंद है , क्यू मौसी

रज्जो अपनी बुर मसलती हुई - अरे कमब्ख्तो बाते बाद मे करना पहले मेरी बुर मे लन्ड डालों य्ह्ह्ह्ह बहुत मचल रही है उह्ह्ह्ह

राज ने मुस्कुरा कर अनुज की ओर देखा - तो हो जाये साथ मे

अनुज - हा क्यू नही हिहिहिही

राज फौरन बिस्तर पर आ गया और अपना मुसल मसलते हुए बोला - मौसी आजाओ आपको सवारी कराता हुआ

रज्जो हसती हुई राज के जांघ पर हाथ रखती हुइ पैर फेक कर अपना बुर मे लन्ड को डाल कर बैठ गयी और राज ने उसको पकड कर अपने उपर खिंच लिया





वही पीछे अनुज के सामने रज्जो की गाड़ छेद सहित फैल कर आ गयी ।

अनुज ने भी अपने सुपाड़े पर थुक लगा कर लन्ड को मौसी की गाड़ के सुराख पर सेट किया और लन्ड को जोर देते हुए मौसी की कसी हुई गाड़ मे पेल दिया

रज्जो - अह्ह्ह्ह बेटाअह्ह्ह उह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं आराअम्म्ंं सेह्ह्ह ऊहह

अनुज को भी अपने लन्ड पर कसावट मह्सूस हो रही थी और हलका हल्का झटके लगाते हुए मौसी की चर्बीदार गाड़ को मसलने लगा

अनुज - उम्म्ंम्ं मौसी आपकी गाड़ उह्ह्ह्ह बहुत टाआईईइटह्ह है उह्ह्ह फ्क्क्क्क

राज अपना लन्ड होल्ड किये हुए रज्जो के चुचे मसलता हुआ- एक बार जगह बना ले भाई फिर उह्ह्ह हा ऐसे ही घुसा पुरा हम्म्म्म

अनुज

- आप्को भी फील हो रहा है क्या भैया

राज रज्जो के चुचो से मुह उठा कर खुद भी 3 4 बार लन्ड को झटके देता हुआ - हा भाई मेरे उपर भी रेन्ग रहा है

अनुज ने भी चुत के निचे से अपने भैया के लन्ड को रगड़ मह्सूस की और जोश से भर गया और उसने कस के करारा झटका दिया जिस्से रज्जो की चिख निकलने को थी और राज ने उसके होठो से अपने होठ जोड लिये

अनुज ने मौसी के कूल्हो को थामा और बिस्तर पर चढकर घुटने को फोल्ड करते हुए अपनी मौसी की गाड़ मे जगह बनाने लगा ।

रज्जो की गाड़ मे अनुज का मुसल फुलता ही जा रहा था वो राज के होठ से मुह हटा कर हाफने लगी तो राज ने जबरजस्ती उसके बालो को खिंच कर निचे से अपनी कमर को झटके देने लगा





रज्जो सिस्कने लगी

दोनो भाई पूरे जोश मे पेलाई करने लगे ।

अनुज अपनी मौसी की गाड़ मे सटासट लन्ड पेलने लगा और राज भी कुल्हे उठा उठा कत चोदने लगा

रज्जो ने भी अपना जलवा दिखाया अनुज के लन्ड अपनी गाड़ मे घुसते ही उसपे अपनी छेद को कस लिया

एक बात फिर अनुज की हालत खराब होने लगी ,

उसका सुपाडा बुरी तरह से मौसी की गाड़ मे घिसने ल्गा





अनुज के पैर भी थकने लगे थे और सुपाडा फुलने लगा वो पूरी ताकत से करारे झटके लगाने लगा , निचे से राज भी तेजी से गाड़ उठा कर रज्जो की बुर मे पेले जा रहा था

मौसी की कसी गाड़ मे लन्ड पर अपने भैया के लन्ड की घिसावट अनुज को पागल करने लगी और एक करारे झटके के बाद उसने अपना लन्ड रज्जो की गाड़ मे रोक दिया

अनुज - अह्ह्ह मौसीईई उह ओफ्फ्फ़फ़फ्फ्फ सीईई उम्म्ंमममं फ्क्क्क्क फ्क्क्क्क मेरा हो रहा है ओह्ह्ह सीईईई उह्ह्ह

रज्जो ने भी हाफते सिस्कते मुस्कुरा कर अपने गाड़ का छेद ढीला कर दिया





अनुज को जैसे ही राहत मिली उसने फौरन अपना लन्ड बाहर खिंच लिया और उसका सारा सोमरस मौसी की गाड़ ने बाहर उडेल दिया

राज ने भी मौसी की गाड़ थपथपा कर उठने का इशारा किया

रज्जो उठी और राज फौरन उठ कर रज्जो के चुचो पर हिलाने लगा ,

अनुज ने भी देखा देखी अपना लन्ड हिलाने लगा मगर वो पहले ही झड़ चुका था





वही राज ने आहे भरते हुए अपना गाढ़ा वीर्य अपनी मौसी के चुचो पर टपकाने लगा

फिर रज्जो ने उसको अपने हाथो से दोनो चुचो पर मलकर लगाया फिर बारि बारि से दोनो भाइयो के लन्ड चुस कर साफ किये ।

फिर तीनो बिस्तर पर आ गये

अनुज - आह्ह मौसी मजा आ गया , आज 3 दिन बाद मुझे सुकून मिला है

राज - क्यू भाई 3 दिन बाद क्यू

रज्जो हस कर - 3 दिन पहले ही तो मैने इसको वादा किया था हिहिहिही

अनुज अपनी मौसी से लिपट कर - चलो ने मौसी एक बार और करते है

रज्जो अपनी हालत से वाकिफ थी वो झटके से उठ कर जल्दी जल्दी मैकसी डालती हुई - नही बाबा अब और नही , कल शादी है बहुत काम है थकना नही है मुझे , तुम लोग भो सो जाओ ।

रज्जो जल्दी जल्दी निकल गयी और दोनो भाई खिलखिला कर हस दिये ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 187

लेखक की जुबानी

"शश्श्श्श् !!! चुप कर भाई तू ऐसा उतावला ना हो" , रंगी ने चहकते हुए जंगी को डांट लगाई । फिर दबे पाव चुप चाप गैलरी से बाहर दाखिल हुआ ।

हाल की बत्ती बुझी हुई थी , राज के कमरे से लाईट जल रही थी और रंगी के कमरे के दरवाजे के उपर से लगे रोशनदान से भी भीतर की रोशनी हल्की फुल्की आ रही थी ।

रंगी फुसफुसा कर - जन्गीईई , सुन

जंगी - हा भैया

रंगी - कौन कहा सोया है कुछ पता है

जन्गी - निशा की मम्मी तो ये राज वाले कमरे मे रज्जो भाभी के साथ थी , रज्जो भाभी तो कमल भाई साहब के पास गयी मतलब हिहिहिही

रंगी मुह खीझता हुआ - और तेरी भाभी कहा थी , उसके कमरे मे तो बाऊजी सोये है ना

जन्गी - वो बोल रही थी कि वो बाऊजी के साथ सोयेंगी ,रात मे उनकी तबियत बिगड़ जाती है

रंगी भुन्न्नाता हुआ फुसफुसाया - तु ये सब अभी बता रहा है

जन्गी अपने तने हुए मुसल को रगड़ता हुआ - भैया मुझसे रहा नही जा रहा है , मै जाता हु आप भी ट्राई करो ना किसी बहाने से शायद भाभी आ जाये और देखो अभी उन्के कमरे की बत्ती जल रही है , अभी वो सोई नही होगी ।

ये बोलकर जन्गी लपक कर राज के कमरे के भिड़के हुए दरवाजे भीतर घुस गया ।

रंगी झल्ला कर - ये साला मेरी ही किस्मत के लौडे लगे है क्या आज

रंगी ने दबे पांव रागिनी के दरवाजे पर पहुचा और इधर उधर देख कर हल्का सा दरवाजा थपथपाते हुए फुसफुसाया - रागिनी ।

वही जीने से निचे आने किसी की आहट हुई और रंगी झट से पीछे वाशिंग एरिया की ओर खिसक गया अंधेरे मे ।

वही जीने से वो शक्स दबे पाव चुपचाप हाल के अंधेरे का फायदा लेके घर के बाहर निकल गया ।

रंगी की सासे तेज थी कि वो पकड़ा नही गया और वही उसे उलझन भी हुई कि इतनी रात मे कौन निचे आया होगा उपर से और फिर बाहर क्यू गया ।

इधर रंगी का ध्यान वापस दरवाजे पर गया कि वहा यहा क्यू आया था और जैसे ही वो दरवाजे पर वापस से ठकठक करने गया कि सामने से दरवाजा खुल गया और रागिनी एक नाइटी मे उसके सामने थी ।

रागिनी उबासी लेते हुए - सोनल के पापा आआआप !

रन्गी - शश्श्श !!! बाऊजी जग जायेन्गे

रागिनी - अरे वो जाग ही रहे है उन्ही ने मुझे उठाया है ।

रंगी चौक कर - क्या !!

रागिनी - क्या हुआ बोलिये ना

रंगी खीझ कर अपना तना हुआ मुसल मसलता हुआ - ये हुआ रागिनी देखो ,मै सो नही पा रहा हु आज ।

रागिनी हसी और धिरे से बोली - हा तो हिला ना मेरे राजा एक दो दिन की बात है ।

रंगी - तु नही जानती मै ये सब नही करता

रागिनी - हा लेकिन सोनल के पापा बाऊजी है और मै कैसे ?

रागिनी - प्लीज आप कन्ट्रोल करो प्लीज और सो जाओ , कल शादी है हमारी बेटी की और आप है कि ।

रंगी मन गिरा कर - ठिक है

रंगी मुह गिराये आ गया बाहर और वही रागिनी ने दरवाजा बन्द करके बिस्तर की ओर आने लगी ।

बनवारी- क्या हुआ बेटी , क्या कह रहे थे दामाद बाबू

रागिनी दोनो पैर अपने बाऊजी के कमर के अगल बगल रख कर अपनी नाइटी कमर तक उठाती हुई , बनवारी के लन्ड से चादर हटा कर उसके खडे लन्ड को वापस अपनी बुर मे भरकर - उह्ह्ह्ह बाउजीई बस यही वो भी मागने आये थे ।





बनवारि का लन्ड फडका - क्याअह्ह्ह सच मे दामाद बाबू को !!!

रागिनी अपनी गाड़ उछालती हुई - अह्ह्ह बाऊजी , अब आप ही बताओ एक टाईम पर मै आप दोनो को कैसे खुश कर पाऊंगी उम्म्ंम्ं सीईईई अह्ह्ह्ह





बनवारी का लन्ड रागिनी की बातो से और फुल रहा था - हाह्ह बेटा ये भी सही है उह्ह्ह लेकिन दामाद बाबू का दिल टुट गया मेरी वजह से ना

रागिनी मुस्कुरा कर अपनी चुत मे बनवारी के टोपे को कसती हुई - तो आपकी लाडली उनका दिल जोड देगी हिहिहिही ऐसे ही उन्के टोपे को दुलार करके

बनवारी फड़फडाया - ओह्ह्ह्ह बेटीईईई अह्ह्ह ओह्ह्ह्हू उह्ह्ह आ रहा हौ उह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ंम ओफ्फ्फ उह्ह्ह





रागिनी भी अपनी पेट मे अपने बाप की गर्म पिचकारी छुटती पाकर झड़ने लगी और हाफते हुए उपर ही सो गयी ।


अमन के घर

आर्केस्ट्रा और शादी के लिए मुरारी ने अपने परिचय के काफी लोगो को न्योता दे रखा था । वो उन्ही लोगो से मेलजोल करने मे बिजी था ।

ऐसे मे मेहमानो के स्वागत के लिए उसे मदन की अनुपस्थिति का ध्यान आया ।

उसने दो तीन मरतबा मदन को फोन किया लेकिन फोन पिक नही हुआ , मेहमानो के खातिरदारि मे मुरारी फिर उलझ गया ।

रात के 11 बजने को थे और पिछले घन्टे भर से मुरारी मदन की तलाश मे था ।

डांस का प्रोग्राम खतम हो गया था और लोग वापस अपने घर के लिए निकल गये थे ।

मुरारी ने भी अपनी कुर्सी छोड़ी और घर मे घुसा ।

निचे पुरा सन्नाटा था , मदन को आवाज देने से पहले उसे पेसाब की शंका हुई तो वो सीधा बाथरूम की ओर चल दिया ।

वही डीजे बन्द होने पर मदन और संगीता सजग हुए कि अब उनकी खोज शुरु हो सकती है इसीलिए दोनो भाई बहन आपसी रजा मंदी से अपने कपडे ठिक किये और संगीता अपने बालों का जुड़ा बनाती हुई सीढियों से जाने लगी ।

वही मुरारी जो पेसाब करके वापस हाल मे आ रहा था उसने संगीता को मदन के कमरे से बाहर आते देखा ।

तो वो लपक कर मदन से बात करने के लिए उसके कमरे की ओर बढा,,जैसे ही उसने कमरे मे दाखिल होने के लिए दरवाजे पर पहुचा

भीतर मदन अपने तने हुए लन्ड को झुलाता हुआ पजामा पहन रहा था ।

मदन की ऐसी स्थिति और अभी अभी कमरे से निकली अपनी बहन के चेहरे के हावभाव को देखते ही मुरारी जहन मे शंका के बीज उग आये थे ।

उसका कलेजा कांप रहा था , उसे समझ नही आ रहा था कि दो सगे भाई बहन ऐसे कैसे ?

मुरारी भरे गुस्से मदन से बिना बात किये अपने कमरे मे चला गया । वो शादी के घर मे कोई बवाल नही चाहता था ।

मगर ये बातें उसकी नीद थकान सब उड़ा चुकी थी , उसके जहन मे सवाल भरे हुए थे । उसे समझ नही आ रहा था कि मदन वो आदमी था जिसने अपने प्रेमिका के लिए आजीवन शादी नही कि और अब ऐसे खुद की सगी बडी बहन के साथ कैसे ? और संगीता दीदी भी कैसे ये सब ?

वही इनसब से अलग उपर की छत पर भोला और ममता की इशारे बाजी चल रही थी ।

जब सारे मेहमान निचे जाने लगे तो ममता ने धीरे से भोला को बाल्किनी मे मिलने को कहा ।

सारे मेहमानो को उन्के कमरो मे सेट कर ममता को अपने लाड़ले अमन की याद आई मगर तबतक अमन अपनी मा के इंतजार मे सो चुका था और ममता एक नजर उसको देख कर बाल्किनी की ओर चल गयी ।


निशा - कमलनाथ

उह्ह्ह्ह सीईईई उम्म्ंम्म्ं ओह्ह्ह बेटीईईई कमाल है तुह्ह्ह्हुंंं

निशा - चुप रहिये ना मौसा , कोई सुन लेगा

कमलनाथ वापस से अपना मुसल निशा के होठों पर रगड़ता हुआ - अच्छा सॉरी सॉरी , प्लीज चुसो ना

निशा तुनककर मुस्कुराती हुई मुह खोल कर लन्ड को मुह मे भर लिया।





कमलनाथ सिसकियाँ लेता हुआ अपनी एडिया उचकाने लगा और फुसफुसाते हुए - सुउउउऊ उम्म्ंम्म्ं , बस ऐसे ही उह्ह्ह्ह उम्म्ंम मजा ला दिया तुने उह्ह्ह क्या चुस्ती है तु

निशा ने मुह से लंड निकाल कर उसको सहलाते हुए बोली - क्यू मौसी नही मजा देती ऐसे उम्म्ंम्ं हिहिहिही

कमलनाथ आहे भरता हुआ - तेरी मौसी तोह्ह्ह उह्ह्ह ओफ्फ्फ येस्स्स्स ह और् लेह्ह्ह बेटा उह्ह्ह हा ऐसे ही उह्ह्ह्ह

कमलनाथ - तेरी मौसी से तु कम नही है , उसका भी चुसने मे कोई जवाब नही और और .... ओह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईईई इफ्फ्फ





निशा अपनी नुकीली जीभ से कमलनाथ के सुपाड़े की निचली गांठ को कुरेदते हुए - और क्या मौसा जी उम्म्ंम्ं

कमलनाथ - और तु उससे भी कमाल है उह्ह्ह ओह्ह फक्क्क , अच्छा सुन तु मुझे कुछ अच्छा सून्घाने वाली थी ना , क्या है वो

निशा ने इतरा कर उठी और कमलनाथ को पीछे बिस्तर पर धकेला और अपनी प्लाजो सरकाती हुई अपनी बिना पैंटी की बुर को दिखाती हुई बिस्तर पर आ गयी ।





फिर कमलनाथ के मुह के पास बैठ कर उसके नथुनो पर अपनी बुर रगड़ती हुई - यही है मौसा सूंघ लो ह्ह उम्म्ंम

कमलनाथ का कलेजा ध्क्क ध्क्क कर रहा था कि क्या है ये लडकी, इतनी गर्म इतनी कामुक और बेशर्म

कमलनाथ ने निशा के फाको ने आती गर्मी मह्सूस की और एक गहरी सास लेके अपने फेफडों मे उसके चुत से आती खुसबू को बसाया और जीभ निकाल कर उसके फाको को चाटते हुए होठो से उसके बुर के फाको को दबोच लिया ।

निशा सिसकी - अह्ह्ह मौसा जीईई उह्ह्हुंंं उम्म्ंम सीईईई उह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह येस्स्स्स ऐसे ही उह्ह्ह्ह और चुसूओ उम्म्ंम्ं

निशा कमलनाथ का सर पकड कर अपनी बुर पर दबाये हुए थी और कमलनाथ भी उसकी गाड़ को थामे हुए उसकी बुर को चुसे जा रहा था ।

निशा कमलनाथ के बाल पकड कर उसके थूथ को अपनी कुलबुलाती बुर पर रगड़ रही थी और कमलनाथ उसके फाको को चुब्लाये जा रहा था ।





कमलनाथ ने जल्द ही बाजी अपने हाथो मे लेनी चाही और निसा की चूत चुसते हुए उसने हाथ उपर बढा कर निशा की टीशर्ट के भीतर से उसके ब्रा खोलकर उसकी चुचिया बाहर निकाल दी और उसने मसलने लगा

निशा की सिसकियाँ बढ़ गयि और उसने भी लपक कर अपने हाथ पीछे ले जाकर लण्ड को पकड कर भीचना शुरु कर दीया

कमलनाथ का हाथ एक बार फिर छुट गया और उसने निशा की जांघो को उठाते हुए बुर को अपने मुह के उपर कर उसमे अपनी जीभ घुसेड़ दी और घुमाने लगा





निशा जोर जोर लन्ड भींचती हुई कमलनाथ के सर को अपनी चुत के कसे हुए सिस्कने लगी - उह्ह्ह मौसा जीईई फ्क्क्क्क और चुसो अह्ह्ह अयेगा आयेगा उह्ह्ह मुम्मीईई ओह्ह्ह येस्स्स ऐसे ही पेलोउम्मममं सीईईई ऊहह फ्क्क्क फ्क्क्क्क येस्स्स येस्स उम्म्ंम्ं येस्स्स फ्क्क मीई फ्क्क्मीई अह्ह्ह आह्ह

निशा भलाभ्ला कर झड़ने लगी और कमलनाथ वापस से उसके बुर के फाको को चुसने लगा , गर्म कसैला स्वाद और उसकी भीनी महक से कमलनाथ का मुसल तैयार कर दिया था ,

वो झटके से उठा और निशा को कमर से पकड अपनी ओर खिंचते हुए घोडी बना दिया ।

निशा ने भी अपनी बुर टटोलते हुए अपनी रस को चखा और अपनी गाड़ हिला कर चुत फैलाने लगी ।





कमलनाथ ने उसके खुले हुए फाको अपने मोटे लन्ड का सुपाडा लगाया और उसके बुर के फाको पर सुपाडा रगड़ने लगा

निशा ने चुत कमर गाड़ मे एक झनझनाहट सी होने लगी वो सिस्कते हुए अपनी गाड़ सहलाने लगी

मगत कमलनाथ ने ज्यादा मौका नही दिया और अगले ही पल एक झटके ने अपना पुरा लन्ड निशा की चुत मे उतात दिया ,

निशा की सासे अटक सी गयी और उसकी आंख फैल गयी उसने अपने मुह पर हाथ रख कर अपनी गूंजती चिख को दबा दिया था , वही कमलनाथ का मुसल उसके चुत के दिवारो को फैलाता हुआ उसके जड़ मे जा चुका था

कमलनाथ ने उसकी कमर को पकड कर तगड़े झटके देने शुरु कर दिये और बिस्तर पर झुकी हुई निशा आहे भरने लगी।





निशा - ऊहह मौसा जी उम्म्ंम फक्क्क्क मीईई ओह्ह येस्स्स ऐसे ही ओह्ह्ह अह्ह्ह मस्त लन्ड है आपका , उह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह और दो नह्ह्ह उम्म्ंम्ं फक्क्क

निशा कमलनाथ को उकसाये जा रही थी और कमलनाथ अपने नथुनो को भींचे सटासट उसकी बुर ने अपना मुसल पेले जा रहा था ।

दोनो पूरी तरह बेकाबू हो चुके थे चुदाई के जोश मे , बेधड़क बेखबर होकर आहे भर रहे थे ।

कमरे की मादक सिस्कियों ने दिवालों और रोशन्दानो को फांद कर अब रंगी के कमरे की ओर भी हल्का हल्का गुनगुनाने लगी थी ।

इधर इनकी उत्तेजना चरम पर थी और वही रंगीलाल कमरे मे के लेटा हुआ अपना तना हुआ मुसल मसलते हुए रज्जो के नाम पर झड़ रहा था ।

कमलनाथ भी आखिर कुछ झटको के साथ अपना लन्ड बाहर खिंच लिया और निशा के चुतड को थपथ्पाया

निशा तुरंत समझ गयी कि मौसा का आने वाला और वो उठ कत मौसा जी के पैरो मे बैठ गयी





कमलनाथ तेजी से अपना लन्ड हिला रहा था और उसने अपनी एडिया उच्काई एक - दो फिर तीन चार बार मोटी गाढी रसदार मलाई जैसी पिच्कारी निशा के मुह पर छूटी और वो कमलनाथ के बीर्य से नहा ली थी ।

कमलनाथ आखिरी बूंद तक अपना लन्ड निचोडता रहा और निशा अपने फेस पर लगी मलाई उंगलियो पर लेके चाटने लगी

आखिर मे मुह की सफाई के बाद उसने सामने कमलनाथ के लन्ड को दुलारते हुए उसे अपने होठो गालो पर घिसने लगी ।

कमलनाथ एक गहरी आह भरी और बिस्तर पर आ गया ।

सामने निशा ने अपने कपडे पहन्ने लगी और कमलनाथ उसे निहारते हुए - बेटा अपने मौसा को भूल तो नही जाओगी , कल अगर मौका मिले तो !!!

निशा मुस्कुरा कर - कल का कल देखेंगे मौसा जी , हिहिहिही और आप भुलने वाली शक्सियत थोड़ी है

निशा इठला कर चंदू के घर सम्भल कर राज के घर मे दाखिल हुइ और फिर दबे पाव उपर सोनल के कमरे मे चली गयि ।

जहा रीना और सोनल थक कर पहले ही सोये थे ।

निशा चुपचाप कमरे मे आई और सोनल के बगल लेट गयी ।

तभी सोनल फुसफुसाई- अकेले ही चली गयि ना कमीनी तू

निशा हस कर - तु जाग रही है और मै तो उपर बाथरूम गयी थी ।

सोनल गुस्सा दिखाते हुए एक नजर बगल मे सोई रीना भाभी डाली और बोली - चल साली कुतिया , तु मेरे भाई के पास ही गयी थी ,झुठ क्यू बोल रही है

निशा सोनल की गलतफहमी मुस्कुराई और बोली - हा यरर परसो से ही लन्ड के लिए तरस रही थी और आज रहा नही गया तो हिहिहिही

सोनल उखड़ कर - और उस कमीने को मेरी याद नही आई कि मुझे बुला ले , मेरा भी तो मन है ना यार

निशा बाते बनाती हुई - अरे मै कैसे उसके साथ थी मै ही जान्ती हु , चल बाद मे इसपे बात करेंगे

फिर निशा ने सोनल को रिना की ओर इशारा किया और सोनल ने खुद को नोर्मल किया

फिर दोनो सो गये ।


अमन के घर 02

रात के साढ़े 11 बज रहे थे और ममता अपने सूट मे भोला के बगल मे खड़ी थी ।

दोनो इत्मीनान से रेलिंग पर हाथ रख कर आगे झुके हुए थे

भोला ने जेब से मोबाईल निकाल कर एक वीडियो हल्के आडियो पर चलाते हुए ममता के आगे कर दिया ।

ममता ने मुस्कुरा कर उसको हाथ मे लिया और देखने लगी ,


कमरे मे बेड पर मदन निचे लेटा हुआ था और संगीता उसपे चढ़े हुए उसके लन्ड को हुम्च हुम्च कर अपने बुर मे भर रही थी ।

संगीता की सिसकिया और चुदाई के पागलपन देख कर ममता की बुर पसीजने लगी ।

बिना ब्रा वाली सूट मे उसके चुचो के निप्प्ल तन गये थे ।

तभी उसमे अपने कूल्हो पर भोला के हाथो को रेन्गता मह्सूस किया और वो सिहर गयि ।

भोला ने उसके गाड़ को सहलाते हुए पंजो से दबोचा - मैने अपना वादा पूरा किया अब आपकी बारी भाभी ।

ममता ने भोला की फुसफुसाहट और उसके पंजो का स्पर्श मह्सूस कर अपने धड़कते दिल को थामने की कोसिस मे गहरी सास लेती हुई बोली - हम्म्म करूंगी जल्दी क्या है रुको ना उम्म्ंम्ं इस्स्स्स

भोला ममता को पीछे से जकडता हुआ उसके मुलायम पेट को सहलाते हुए उसके पीठ पर अपना चेहरा घिसटकर - आह्ह्ह ममता मेरी जान , अब और कितना इंतजार करवाओगी ।

ममता - बस एक दिन और

भोला चौक कर अलग हुआ और ममता की ओर देख कर - क्या मतलब एक दिन और

ममता मुस्कुरा कर भोला का मोबाईल उसको देती हुई बोली - मुझे मेरी चुद्क्कड ननदीया के अभी और जलवे देखने है हिहिहिही

भोला अचरज भरे लहजे मे - मतल्ब !!

ममता हस कर - कल शादी मे मेरी ननद को मेरी समधन के रिश्तेदारो मे उनको किसी एक से चुदना होगा । तब मैं पक्का आपकी हो जाऊंगी और इस्के बाद कोई और शर्त नही कसम से

भोला असमंज्स मे था कि ममता ने उसके सामने ये कैसी शर्त रख दी । कही ममता उसके साथ बस खेल तो नही रही , कही मै फस तो नही रहा ।

भोला का चेहरा उलझा हुआ था और वो सवालो के घिरा हुआ चुप हो गया था ।

ममता ने उसकी उलझन समझी और मुस्कुराई - क्या सोच रहे है ? यही ना कि मैने अचानक से ये डिमाण्ड क्यू रख दी

भोला हकला कर - ह्ह हा वही मै !!

ममता मुस्कुरा कर - याद है शादी के टाईम पर जब मै नयी नयी आई थी तो संगीता दीदी ने मेरे साथ खुब शरारत की थी , हमारे यहा ये रस्म होता है वो रस्म होता है करके आल्तू फाल्तू काम करवा के मेरे खुब मजे लिये थे । अब ननद भौजाई का हिसाब किताब रखना ही पडेगा ना , सीधे सीधे ना सही लेकिन आपकी मदद से मै मेरी ननद से बदला ले ही लूंगी हिहिहिही

भोला हस - ओह्ह तो ये बात है ।

ममता - तो दोस्ती निभाएंगे ना उम्म्ं बोलिए

भोला खिले हुए चेहरे के साथ ममता की कमर मे हाथ डालता हुआ - आपको नही लगता कि हमारी दोस्ती कुछ ज्यादा ही एकतरफा सी हो गयी है ।





ममता भोला की बाहो मे आकर उससे लिपटती हुई अपना एक हाथ उसके पजामे के उपर से उसके तने हुए मुसल को थामती हुई बोली - अच्छा ऐसा क्या उम्म्ंम , चलो थोड़ा हिसाब कर देती हूँ

ये बोलकर ममता भोला की बाहों मे से सरकति हुई निचे भोला के कदमो मे बैठ गयी और

अपने हाथो से पजामे का नाड़ा खोलते हुए निचे कर दिया ।

भोला का मुसल उसके अंडरवियर मे तना हुआ था ।

ममता ने थुक गटक कर मदहोश आंखो से नजर भरके भोला के लन्ड़ को निहारा और फिर उसके तने को अंडरवियर के उपर से सहलाती हुई भोला की ओर देखने लगी ।





ममता की कामुकता भरी नजर और उसके मुलायम स्पर्श से भोला सिहर उठा और उसक लन्ड ने अपने नसो को टाइट किया ।

ममता ने भोला को निहारती हुई मुस्कुरा कर उसके अंडरवियर की लास्टीक पकड कर निचे खींचा और भोला का 8इंच का मोटा खीरे जैसा लन्ड उछल कर ममता के सामने हिलने लगा ।





ममता चिहुकी - हाय्य्य दैयाआ उम्मममं

भोला मुस्कुरा कर अपने लन्ड पर इतराया - क्यू है ना आपके टक्कर का उम्म्ं

ममता शर्माई और मुस्कुराकर हौले से लन्ड को थामा तो भोला सिस्क पड़ा- उम्म्ंम्ं भाभी कितना नरम है आपकी हथेली उफ्फ्फ्फ इह्ह्ह

ममता ने हथेली को भोला के लन्ड पर कसते हुए हल्का सा चमडी को खिंचते हुए भोला के टोपे की लाली को देखा ।

खुस्क टोपे से चमडी आधी ही उतर पाई और ममता ने उसके आड़ो को सहलाया ।

भोला ने हौले से ममता ने सर को सहलाया और ममता समझ गयी कि क्या करना है उसने भोला के अंडरवियर को खींचकर घुटनो तक करते बिना हाथो के स्पर्श के भोला के झूलते लन्ड के अधखुले सुपाड़े पर जीभ फिराते हुए आधा लन्ड मुह मे भर लिया ।





भोला ने अपनी एडिया उचकाई - उह्ह्ह भाभीईईई ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह सीईई ओह्ह

ममता ने लन्ड को उतना ही मुह मे भरे हुए भोला के नंगी जांघो पर अपनी हथेली रगड़ती हुई उसके पेड़ू सहलाती हुई अपने दोनो हाथो को उसके लन्ड के दोनो तरफ से सरका कर उसके आड़ो को सहलाया ।

भोला अकड़ कर रह गया ।





ममता ने बाये हाथ से भोला के आड़ो को उसके लन्ड सहित पकड़ा और इस बार ममता ने मुह खोल कर अपनी जीभ से भोला के आड़ो को चाटती हुई उसके पुरे लन्ड को मुह मे भर कर चुसने लगी ।

भोला ने अपने जिस्म को ऐठ कर एक जोर की आह्ह भरी और ममता के बालो को सहलाने लगा ।

ममता अब उसका पुरा लन्ड गले तक घोंट रही थी और भोला के सुपाडा पर घर्षण बढ रहा था ।

ममता के होठ उसके लन्ड की सतह पर उभरे नशों निचोड रही थी ।





भोला की उतेजना बढती जा रही थी उसने ममता के बालो को पकड कर उसके मुह मे पेलना शुरु कर दिया

ममता ने मुह खोल कर पुरा का पुरा लन्ड गले तक घोटने लगी ।

भोला - ईईईयिआआअह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह लेह्ह्ह्ह मेरीईई जान उह्ह्ह्ह तुने तो पागल कर दियाअह्ह्ह है मुझेह्ह उह्ह्ह उम्म्ंम्ं लेह्ह्ह ऊहह

भोला लगातार ममता के मुह मे पेलने और जल्द ही वो झडने को था

उसने कस कर ममता के बालो और उसके गले को पकड़ा और अपना लन्ड उसके गले मे फसा कर अपना सुपाडा खोल दिया





ममता के मुह मे गर्म गर्म लावे के जैसे वीर्य भरने लगा और उसके मुह से बाहर भी आने लगा ।

आखिरी बुन्द तक बिना किसी परवाह के भोला ने ममता के मुह मे लन्ड भरे रखा और फिर बाहर खिंच लिया ।

ममता जोर से खासने लगी और उसके मुह से लार मे घुल कर काफी सारा वीर्य बाहर आ गया ।

ममता की खासी रुकी और उसने अपनी बलगम को सुरका और फिर मुस्कुराते हुए भोला को देखा , जिसका चेहरा अब खिला हुआ था ।

ममता उठी और अपनी चुन्नी से अपना मुह साफ किया ।

भोला ने बगल मे खडे होकर उसको अपनी बाहो मे भरते हुए उसके गालो को चूम लिया - थैंकयू भाभी

ममता - धत्त आप बड़े वो हो , बताना तो चाहिये ना कि ऐसे करना है

भोला हस दिया ।

ममता उसके बाहो मे झुमती हुई - मुझे तो लगता है कि दीदी को भी आपने ही ऐसे बिगाड़ा होगा हिहिही

भोला - ओहो ऐसा है तो फिर कही आप भी ना बिगड़ जाओ मेरे साथ हाहहहहा

ममता खिलखिलाकर - अब और कितना बिगाड़ना है उम्म्ं

भोला ममता के गाल पर किस्स करता हुआ - वो तो परसो बताऊंगा शादी के बाद

ममता - धत्त अब छोडिए ना

भोला - हम्म्म ठिक है जाओ ,


ममता - और शर्त याद रहे हिहिहिही

फिर ममता वहा से निकल कर निचे अपने कमरे मे चली गयी ।

भोला भी अपने कमरे मे आ गया

जहा संगीता उसका इनेजार मे बैठी थी ।

उसकी हालत कुछ ठिक ना थी

भोला ने इशारे से पुछा क्या हुआ तो संगीता लाज मे ना मे सर हिला कर बोली - कुछ नही

भोला उसके करीब आकर - तो कितने राउंड उम्म्ं

संगीता शर्मा कर - 3 हिहिहिही

भोला संगीता के कंधे पर हाथ रख कर उसको अपनी ओर खिंचा - उफ्फ्फ संगीता मेरी जान क्या चीज है तु हाहाहहा

संगीता - सच मे सोचा नही था कि ये हो पायेगा , मगर हमारी योजना सफल रही हिहिही

भोला - तु खुश है ना

सन्गिता - हम्म्म और सबसे बढ़ कर मदन भैया ने भी कहा है कि वो भी अब इस नये जीवन का मजा लेंगे ।

भोला - सच

संगीता - हम्म्म

भोला - फिर तो उनके लिए मै एक से एक रशियन अमेरिकन बुक करवाउन्गा

संगीता - हुउह हा हा बस उन्ही के बारे मे सोचो , मेरा जरा भी ख्याल नही । याद है ना क्या वादा लिया था मैने

भोला ने संगीता के दूध मसलता हुआ - हा मेरी जान याद है आज की रात तेरी गाड़ भरके ही सोउँगा मै उम्म्म्म्माआह

संगीता - ना बाबा आज नही फिर कभी , आज तो भैया ने तोड कर रख दिया हिहिहिही

भोला - हम्म जैसी तेरी मर्जी जान, वैसे मैने कुछ सोच रखा है कल के तेरे लिए हिहिहिही तुझे पसंद आयेगा

संगीता चहक कर - क्या बताओ ना

भोला - कल मेरी जान को बारात मे मस्ती करने की पूरी छूट है , जिसके साथ चाहे मस्ती कर सकती है

संगीता खिलखिला कर - धत्त क्या आप भी वहा मै ये सब करने जाऊंगी

भोला - क्या जान, करते है ना मजा आयेगा । जैसे भैया को छेड़ा वैसे वहा बारात मे किसी एक का मुर्गा बनाते है ना हिहिहिही

संगीता इतराकर - हा लेकिन अगर मुर्गा बनाने के चक्कर मे मै फस गयी तो ,

भोला आंखे उठा कर ममता चहकते चेहरे को देखा तो ममता हस दी ।

भोला - ऊहु देखो तो बेचारी को , "अगर मै फस गयी तो" , नटखट हिहिहिही

संगीता - ठिक है बाबा करेंगे ओके , चलो अब सोते है ।

नीचे कमरे मे ममता सीधे बाथरूम मे गयी और वापस आकर बिस्तर पर लेटे हुए मुरारी को देखा ।

जो एक टक छत को निहार रहा था ।

ममता उसके पास बैठ कर - क्या हुआ जी , कुछ परेशान है

मुरारी चौक कर - अरे अमन की मा तुम , कब आई

ममता - क्या बात है मै तो आपके सामने से बाथरूम मे गयी और आपको पता नही चला , उम्म्ं कही सम्धन से मिलने के लिए उनकी यादो मे खोये तो नही थे हिहिहिही

ममता की नटखट मस्ती से मुरारी के बुझे चेहरे पर मुस्कान फैल गयी - क्या अमन की मा तुम भी , बस ऐसे ही शादी व्याह की बातें कैसे क्या करना है क्या नही वही सब हिसाब लगा रहा था ।

ममता - अरे आप चिंता क्यू करते है , देवर जी है ना उस सब के लिए आप बस समधि बन कर टहलियेगा हिहिहिही

मदन की चर्चा करने पर मुरारी का दबा गुस्सा फिर उभर आया - नही नही नही , उसके भरोसे नही रह सकता है , उसको फुरसत कहा वो तो अपने .....।

मुरारी बोल्ते बोलते चुप हो गया और उसे समझ आया कि वो क्या बोलने जा रहा था गुस्से मे ।

ममता को समझ नही आया कि आखिर क्या हुआ जो ये देवर जी की बात पर इतना झल्ला गये

ममता मुरारी की जांघो पर हाथ रख कर - क्या बात है बतायेंगे प्लीज । आप परेशान है और मुझसे छिपा रहे है क्यू?

मुरारी को डर था कि कही मदन-संगीता के बारे मे ममता को बता दिया तो कही वो भी परेशान ना हो जाये और शादी के घर मे बवाल हो जायेगा ।

मुरारी - ऐसी कोई बात नही है अमन की मा , तुम आराम करो और चिन्ता ना करो । कल बहुत काम है ।

ममता जानती थी अपने पति से जिद करके कोई फायदा नही जो उन्हे नही बताना होता है वो नही कहते है ।

ममता ने संतोष करके बिस्तर पर आ गयी और जल्द ही दोनो सो गये ।

जारी रहेगी
 
UPDATE 187 मे संशोधन करके उसको दुबारा पोस्ट किया गया है

इसको दुबारा से जरुर पढ़ लें सब लोग ।
 
अपडेट 188


सुबह के 7.30 बज रहे थे और इस टाईम राज का घर खाली पड़ा था ,

उबासी-अंगड़ाई लेके बबिता उठी और उसने बगल मे बिस्तर खाली पाया ।

बिस्तर से उतरते हुए उसने अपने बैग से ब्रश तौलिया और कपडे लिये फिर वो उपर चली गयी ।

जहा पहले से ही बॉयज़ की लाईन लगी हुई थी ।

जी हाँ!! बॉयज की

अरुण राहुल अनुज

बबिता इस टाईम सिर्फ टीशर्ट लोवर मे थी और सुबह की सिहरन ने बिना ब्रा वाले उसके मुलायम टीशर्ट को नुकिला कर रखा था ।

उसकी एक चूचि का निप्प्ल साफ उभरा हुआ नजर आ रहा था , जबकी दुसरा वाला कपडो के बीच छिपा था ।

बबिता ने राहुल और अरुण के सामने थोडी सहज हुई कि वो बिना मुह धुले ही इनके सामने थी , कल हल्दी वाली उसकी स्टाइल और रौनक अभी उसके चेहरे और शारिर से नही दिख रही थी ।

मगर फिर भी उसने अपनी उलझी हुई जुल्फो को कानो ने फंसाते हुए अनुज से बोली - अनुज , तुम लोग बगल वाले घर मे चले जाओ यहा अभी लेडिज लोग आयेंगी ना नहाने तो उनको लेट होगा ।

बबिता की बात पर तीनो हस दिये और अनुज बोला - दीदी आपको नही पता ?

बबिता अचरज भरे चेहरे से अपनी ओर ताकते राहुल को देखा और फिर खुद को सहज करती हुई बोली - क्या ?

अनुज मुस्कुरा कर - दीदी घर की सारी लेडिज आज घाट पर नहाने गयी है गांव पर

तभी बबिता को ध्यान आया कि उसकी मा सुबह 5 बजे ही उसको जगा रही थी लेकिन वो नही उठी ।

बबिता को अब और असहज हुआ कि पूरे घर मे वो अकेली लड़की है ।

तभी बबिता का दिमाग ठनका और चहक कर बोली - अरे फिर तो बुआ वाला बाथरूम खाली होगा ना

अनुज - हा होगा ही देख लो

बबिता चहक कर एक नजर राहुल को देखा और तेज कदमो से जीने की ओर बढ़ गयी

वही राहुल उसके हिलते चुतड़ देख कर खुश हो गया ।

तभी उसकी नजर अरुण पर गयि जो मुह मे ब्रश घिसता हुआ उसको घुरे जा रहा था और अनुज की तरफ इशारा किया तो राहुल ने उसको आंख मार दिया कि वो चिंता ना करे ।



अमन के घर



सुबह के 9 बजने को थे , घर मे सभी लोग नहा धोकर तैयार हो रहे थे

नास्ते के लिए भोला ने निचे आकर हाल मे सबको आवाज दी की सब लोग उपर आकर नासता कर लें

वही ममता के कमरे मे संगीता आई थी उसको बुलाने

"अरे चलो ना भाभी अब और कितना सजोगी , भैया तो वैसे ही फीदा है आप पर हिहिही " , संगीता ने ममता के हाथ से लिपस्टिक लेके खुद के होठो को लाली देते हुए बोली ।

ममता मुस्कुरा कर - हा हा लगालो , ये वाला फ्लेवर तुम्हारे भैया को भी पसंद है देखना कही चूम ना ले हिहिही

सन्गिता लजाती हुई मुस्कुराकर - धत्त भाभी !!!

दोनो कमरे से बाहर निकल कर हाल की ओर बढ़ रहे थे तभी ममत की नजर संगीता की चिकनी पीठ पर गयि ।

ममता संगीता के स्लिवलेस ब्लाउज की खुली चिकनी बैक पर हाथ फेरती हुई - उंहू देखो तो इसमे तो बान्धने वाला है ,,

"ये ऐसे खुल जायेगा क्या " , ममता ने संगीता के ब्लाउज का फीता छुते हुए बोली ।

संगीता चिहुक कर हसते हुए कमरे से भागी - नही भाभी अंदर ब्रा नही है प्लीज हिहिहिही

ममता खिलखिला कर - अरे रुको तो मै भी आती हु !!

संगीता हस्ती हुई तेजी से हाल से होकर सीढियों की ओर भागी

उसी समय मदन और मुरारी दोनो भाई भी जीने की ओर जाने बढ रहे थे ।

" भैया जरा हटीयेगा हिहिही" , संगीता मुरारी के बगल से होकर हस्ती हुई तेजी से सीढिया चढ़ने लगी ।

मुरारी और मदन दोनो चौके - अरे!! संगीता आराम से





संगीता हस्ती हुई तेजी से उपर जाने लगी और उसकी गाड़ की थिरकन देख कर दोनो भाइ आपस मे असहज हुए और मुरारी का मन फिर से थोडा अपसेट हो गया ।

मदन हस कर - ये दीदी भी ना हाहहहा बचपन मे ही है अभी

मदन का हसना मुरारी को पसन्द नही आया और वो खीझ कर सीढिया चढते हुए बोला - बचपना तो तुम्हारा भी नही गया मदन अभी तक ।

मदन फीकी हसी भरे चेहरे से - मतलब

मुरारी गुस्से मे भन्नाते हुए - कल रात कहा गायब हो गये थे , सारे मेहमान खोज रहे थे और ना फोन उठा ना कोई सुचना दिये

मदन की हिक्की बध गयी कि क्या जवाब दे , मगर उनके पीछे आ रही है ममता ने मुरारी का हाथ पकड कर उन्हे शान्त रहने का इशारा किया तो मुरारी ने खुद को सम्भाला ।

मदन - सॉरी भैया वो जरा आंख लग गयी थी

ममता ने भी मदन का पक्ष लिया - अरे छोडिए ना चलिये उपर आप लोग ,मै जरा अमन को लिवा के आती हु

मदन ने आंखो ही आंखो मे अपनी भाभी को शुक्रिया किया और दोनो भाई उपर छत की ओर चले गये ।

वही ममता गलियारे से होकर अमन के कमरे मे चली गयी ।

कमरे मे झाक कर उसने देखा तो अमन आईने के सामने खड़ा होकर बालों मे कन्धि कर रहा था ।

नहाने के बाद उसका जिस्म बहुत चमक रहा था , जिस्म पर एक तौलिया था जो उसके कमर मे बंधा था ।

गानो की गुनगुन और लाड़ले का तराशा जिस्म देखकर ममता को बीती शाम की यादे ताजा हो गयी

दरवाजे पर आहट से अमन सतर्क हुआ और उसने आईने ने बालों पर हाथ फिराते हुए दरवाजे पर अपनी मा की झलक देखी जो भीतर झाक रही थी ।

अमन ने एक शरारत भरी मुस्कान के साथ कुछ सोचा और धीरे से तौलिया खोल कर निचे गिरा दिया , अगले ही पल उसका मुसल तन कर फनफनाता हुआ खड़ा हो गया ।





जिसे देखते ही ममता की सासे चढने लगी और वो अमन के ड्रामे पर मुस्कुरा दी ।

तभी अमन घुमा और वैसे ही तने हुए लन्ड के साथ बिस्तर की ओर बढ़ा ।





दरवाजे की ओर अपना नंगा पिछवाडा किये गुनगुनाते हुए आलमारि खोलकर कपड़े निकालने लगा

ममता को हसी आ रही थी जिस तरह से अमन खुद मे बेफिकर था , उसने एक नजर गैलरी मे देखा और चुपचाप हौले से कमरे मे घुस कर दरवाजा भिड़का रही थी कि तभी अमन ने टोका ।

"देखो देखो कैसे एक अबला बेसहारा लड़के को अकेला बिना कपड़ो मे पाकर कमरे मे आ रही है " , अमन ने ममता के पीछे से बोला ।

ममता झेपते हुए हस कर - धत्त बदमाश कही का !! तु ऐसे दरवाजा खोलकर रहेगा तो कोई भी आ जायेगा ।

अमन हाथो मे बनियान फैलाकर उसको अपने सीने पर उतारता हुआ अपनी मा की आन्खो मे देखकर - ऐसे कैसे कोई भी आ जायेगा । यहा तो सिर्फ आप ही आ सकते हो ।

ममता एक टक अमन के फनफनाये लन्ड को निहारती हुई - मान लो कोई आ गया तो तुमको ऐसे देख लिया तो सब यही कहेंगे कि दुल्हे की मा ने तो कुछ संस्कार ही नही दिये है अपने बेटे को ।

अमन अपने जांघो के उपर से अपनी कमर पर अंडरवियर चढाता हुआ - लो हो गया संस्कारी खुश हिहिहिही





ममता की नजरे अभी भी अंडरवियर मे फुले हुए मुसल पर जमी थी , वो मुस्कुराते हुए - संस्कारी बच्चे , इसको ऐसे लेके घूमेगा क्या बाहर हिहिहिही

अमन निचे देख कर अपने हाथ से अपना मुसल दबाता हुआ - ओह्ह ये , ये ऐसे ही रहेगा अब

ममता चौकी - क्या सच मे तु ?? ... ऐसे ??

अमन - हम्म्म , आपकी ही गलती है तो मै क्या कर सकता हु !!

ममता अचरज से - मेरी क्या गलती है भइ ,

अमन हसता हुआ - आप ही तो रोज रोज बादाम केसर का दूध लाके देती हो , उसी की वजह से

ममता थोडी लजाई और हसती हुई - चल बदमाश कही का , कुछ भी ।

अमन - सच बोल रहा हु मम्मी !! तभी से ऐसे हो रहा है और जब तक वो ना करो तब तक ठिक नही होता ।

ममता - क्या ना करो

अमन दाँत दिखा कर हसता हुआ - वो निकालना पड़ता है इसका , जो आप कल निकाले थे हिहिहिही

ममता - धत्त , सच मे ? तेरे पापा का तो ऐसा कुछ नही है

अमन अपनी मा के करीब जाकर - पापा और मेरे मे फर्क न्ही दिखता आपको

ममता अपनी गहराती सासो के साथ हल्की हस्ती हुई - हम्म्म है थो थोड़ा बड़ा ह है त तेरा

अमन थोडा रुक के - मम्मी एक बात पूछू

ममता नजरे चुराती हुई - हा बोल ना

अमन अपनी मा के मुलायमो पीठ से होकर उसके गुदाज कुल्हो पर हाथ फिराता हुआ - क्या आप पापा को ब्लोजॉब देते हो !!

ममता - मतलब

अमन मुस्कुराकर ममता का हाथ पकड कर अपने फुले हुए सुपाड़े पर रखता हुआ - मतलब क्या आप पापा का ये चुसते हो ?

ममता अमन के लन्ड का स्पर्श अपनी उंगलियों पर पाकर सिहर गयी और अमन का सवाल उसके जिस्म को रोम रोम खड़ा कर गया ।

ममता का शरिर थरथरा रहा था , अमन ने उसकी पीठ सहलाते हुए - बताओ ना मम्मी , करते हो

ममता नजरे फेरे हुए मुस्कुरा कर - हम्म्म कभी कभी !

अमन - पापा को पसंद है ?

ममता का चेहरा अब खिलने लगा था - हम्म्म

अमन मुस्कुरा कर - और आपको

ममता लाज से गुलाबी होते गालो के साथ मुस्कुरा कर - चुप पागल , क्या पूछ रहा है ये सब

अमन - बताओ ना प्लीज ?

ममता - क्यू जानना है तुझे ??

अमन - वो मै बस ये जानना चाहता था कि ये गलत तो नही है ना , मेरा मतलब अगर मै सोनल को ...आप समझ रहे हो ना ?

ममता अमन को देख कर हस दी - हा तो उससे पूछ लेना ,हर औरत की पसंद अलग होती है । मै बस तुझे यही सलाह दूँगी कि अगर वो ना बोले तो जिद मत करना ।

अमन उखड़े हुए मन से - लेकिन मेरा तो मन है ना ।

ममता हस कर - तो मै क्या करु इसमे हिहिहिहिही

अमन - आप कर दो ना एक बार प्लीज !!

ममता सतर्क हुई और आंखे बडी करके - क क्या ?? न नही !! तु पागल है क्या ? मै कैसे

अमन - मेरा मन करता है मम्मी और अगर सोनल ने मना कर दिया तो ?

ममता हसी - ठिक है लेकिन जब बहू मना करेगी तब सोचूंगी । अभी कोई जिद नही कपडे पहनो और बाहर आओ ।

ममता झटपट कमरे से बाहर आई और अपनी तेज धड़कती सासो को थामती हुई मुस्कुराई ।

"उफ्फ़ ये लड़का भी ना हिहिहिही"



राज के घर

अनुज के कमरे मे बबिता तैयार होकर अपनी मोबाईल पर किसी से बात कर रही थी ।

उसी समय राहुल उपर से नहा कर तौलिया लपेटे हुए भिगे बालो से पानी झाड़ता हुआ निचे अनुज के कमरे की ओर बढा ।

संजोग की ही बात थी राहुल के कपडे पहले ही अनुज के कमरे मे थे और बीती शाम को ही बबिता की मा भी अपने सारे समान के साथ इसी रूम मे शिफ्ट हो गयी ।

राहुल अभी कमरे का दरवाजा खोलकर भीतर जाने वाला था कि उसको अन्दर से बबिता की आवाज आती है जो फोन पर बाते कर रही थी ।

"बाबू मै यहा रिलेशन मे आई हु ,ओहो क्यू जिद कर रहे हो "

"ये बाबू भोसडी का कौन है बे" , राहुल बड़बडाया और कान लगा कर आगे की बात सुनने लगा ।

" प्लीज यार समझो , मै ये फोन चालू नही रख सकती घर मे किसी ने भी देख लिया तो गड़बड़ हो जायेगी "

"ओह्हो मतलब आशिक़ का दिया फोन है , फिर तो अपना काम हो ही जायेगा ", राहुल ने दिमाग चलाते हुए मुस्करा कर मन मे ही सोचा ।

" अच्छा ठिक है लास्ट वन भेज रही हु इसके बाद मत बोलना और प्लीज देख कर डिलीट कर देना "

"या बेबी लव यू टू "

" बाय हनी "

"हम्म्म बस बस अब मक्खन ना लगाओ , रखोओओ हिहिहिही बाय जान उम्म्म्म्माआह हिहिही बाय"

" बहिनचोद ये कही न्यूड तो नही भेजने वाली है , तभी देख कर डिलीट कर देना , अब तो बबिता मेरी जान मोबाइल खोजना ही पडेगा तुम्हारा " , राहुल ने अपनी योजना बनाते हुए मन मे ही फुसफुसाया ।

कुछ पल की देरी के बाद उसने बबिता को आश्वत हो जाने दिया और फिर

रानी फुलझड़ी बाडू , पापा के परी बाडू

लगलू पसारे तु त पंख पियर फराक वाली

कच कच मारत तारु आंख

पियर फराक वाली

राहुल गाना गुनगुनाते हुए कमरे का दरवाजा खोलकर जानबुझ कर तौलिये मे ही कमरे मे घुसा और बबिता को देख कर चौकने का नाटक किया - येह्ह्ह्ह त त तुम्म्ंम्ं य्हाअह्ह्ह मेरे कमरे मेह्ह्ह

बबिता सख्ती से - नही ये मेरा कमरा है

राहुल - हा लेकिन कपडे तो मेरे यही है

बबिता को अब ध्यान आया कि राहुल सिर्फ तौलिये ने खुके सीने के साथ उसके सामने खड़ा था अब वो थोडा असहज हुई और खुद को शान्त किया ।

वो नजरे फेरते हुए - वो सारा बैग कल बड़ी बुआ (रज्जो) ने एक तरफ कर दिया था , देख लो उसी मे होगा ।

राहुल आगे बढ़ा और एक ब्लैक बैग खोल दिया , जिसमे साडी ब्लाउज ब्रा पैंटी स्ब थी ।

राहुल - ये तो मेरा बैग नही है

बबिता - अरे बुद्दु वो तुम्हारा कैसे होगा वो मेरी मम्मी का बैग है

राहुल मस्ती भरे लहजे मे धीरे से फुसफुसाया - तभी मै सोचू मेरा बॉक्सर ब्रीफ कैसे बन गया

बबिता को राहुल की फुसफुसाहट साफ सुनाई दी और उसने अपनी हसी बड़ी मुस्किल से होठ मे दबाई ।

राहुल ने वो बैग बन्द किया और वही पास मे पड़ा एक एनिमेशन प्रिंट वाला बैग छूने को था कि बबिता बोल पड़ी - वो मेरा बैग है

राहुल ने भी तुनक कर मजाक भरे लहजे मे बोला - बताने की जरुरत नही है देख कर ही लग गया था बच्चो वाला है

बबिता खिझी - सुनो मिस्टर तुम जो भी अपना समान लो और फुटो यहा से , जज मत बनो ज्यादा ।

राहुल को बबिता के जह्कने पर हसी आई और वो अपने बैग से कपडे निकाल कर खड़ा हुआ फिर बबिता को देखा ।

बबिता - क्या ??

राहुल - अरे बाहर जाओ , तुम तो बड़ी बेशर्म हो यार , अभी तक खडी हो । अरे देवी बाहर जाओ कि यही खोल दू तौलिया

बबिता को राहुल की बात पर थोडी लाज आई और वो हस्ते हुए निचे चली गयि ।

राहुल ने झट से दरवाजा बन्द किया और फटाक से बबिता का बैग खोला और बड़ी सावधानी से एक एक कपडे को उसकी तह और जगह ना बिगड़े ये याद रखते हुए बैग खाली किया तो एक साइड ने सैनेटरी पैडस के पैकेट ने उसको मोबाईल छिपा कर रखा हुआ मिल गया ।

उसने झट से मोबाइल ऑन किया और व्हाट्सआप खोल कर देखा तो वहा एक ही कॉन्टैक्ट को मैसेज भेजा हुआ था
माय लव 😘



राहुल ने बिना डाटा ऑन किये उस कॉन्टैक्ट के मैसेज खोले

सबसे लास्ट मे एक वीडियो भेजा हुआ था

राहुल ने उसको क्लिक किया तो उसका लन्ड फड़फडा उठा ,





उस विडियो मे बबिता ने अभी अभी नहाने के बाद जिस टॉप प्लाजो मे थी , उसी ड्रेस मे अपनी टॉप उठाकर अपनी ब्रा मे कसी हुई मुलायम भरी भरी चुचिया दिखा रही थी ।

राहुल अपना लन्ड मसल कर - ऊहह यार क्या कंचा माल है मसलने मे मजा आयेगा ।

देखते हैं और भी कुछ है क्या ?

राहुल ने उपर के मैसेज स्क्रोल किये तभी - ओह्ह बेंचोद सीउईई क्या कड़क पीस है भाई , मजा ही आ जायेगा लेने मे

राहुल ने बबिता की अपने आशिक को भेजी हुई एक हाफ़ न्यूड सेल्फी देख कर अपनी प्रतिक्रिया दी ।





जिसमे उसके तने हुए गुलाबी निप्प्ल और गोरी गोरी मुलायम चुचिया एकदम कोरी और रसभरी दिख रही थी ।

उसके पीछे की चैट्स डिलीट थी तो राहुल ने झट से उसी मोबाइल पर इंस्टा को खोला और अपनी आईडी पर दोनो वीडियो-फोटो भेज कर इन्बोक्स मे डिलीट कर दिया ।

उसने सब कुछ वापस से वैसे ही रख दिया और अपने कपडे पहन कर निचे चला गया ।

निचे हाल मे राज के नाना बैठे हुए थे और किचन मे बबिता चाय बना रही थी ।

राहुल अब पुरे आत्मविश्वासी भाव से मुस्कुरात हुआ - एक चाय मुझे भी मिलेगी ।

बबिता राहुल को देख कर मुस्कुराई - हम्म्म बैठो देती हु

राहुल को बबिता के पास रुकने का बहाना चाहिए था तो वो फ्रिज से पानी निकाल कर पीने लगा ।

बबिता - अरे ठंडा पानी क्यू पी रहे हो ,

राहुल मजाकिया टोन मे - फिर फ्रिज क्यू रखते हैं लोग

बबिता हल्का सा हसी - अरे मेरा मतलब चाय तैयार थी और ठंडा पानी पीने के बाद चाय पिनेसे दाँत गिर जाते हैं

राहुल - तुरंत !!

बबिता हसी - अरे नही मतलब , ब्क्क्क तु लो ये चाय

राहुल ने हस कर चाय ली और एक सिप लेके बोला - अह्ह्ह मजा आ गया ।

बबिता - है ना अच्छी

राहुल - अच्छी तो तुम भी हो , बस उबल मत करो चाय की तरह

बबिता - उबली हुई चाय की कड़क होती हैं समझे हिहिहिही

राहुल - हा हा समझ गया बबिता देवी से कोई नहीं जीत सकता क्यू ?

बबिता ने नमकीन की प्लेट राहुल को देती हुइ हस कर - सही पकड़े है ।

फिर बबिता चाय का ट्रे लेके हाल मे जाने लगी तो राहुल फुसफुसाया - अभी पकड़ा ही कहा

बबिता ने बहुत महीन सा राहुल की फुसफुसाहट को सुना तो उसके पाव रुक गये और वही बबिता को रुकता देख कर राहुल हड़बडाते हुए चाय की सिप लिया और उसकी जीभ जल गयि ।

राहुल - ऊहह मम्मीईई हुउउऊ हुउउऊ अह्ह्ह

बबिता तुन्की - कड़वा बोलोगे यही होगा हिहिही

जारी रहेगी
 
अपडेट 189


10 बजने को हो रहे थे और घर की औरतें वापस आ चुकी थी ।

हाल मे बैठी हुई गप्प ठहाके लगाए जा रहे थे । घर मे मर्द जन सलून मे लाईनें लगवा कर बाल दाढ़ी बनवाने ब्यस्त थे ।

चंदू के घर मे भंडारी दोपहर का खाना बनाने मे लगे थे , जिनकी फिलहाल देखरेख राज के नाना के जिम्मे थी ।

इसी समय सोनल के मोबाइल पर अमन का फोन आता है , सोनल सबके सामने अमन का फोन झिझक मे call you back के मैसेज के साथ काट देती है ।

तभी उधर से अमन का मैसेज आता है कि मम्मी को बात करना है ।

सोनल फटाक से अमन का नम्बर रिडायल कर देती है ।

थोड़ी धीमी बातचीत के बाद सोनल फोन अपनी मा को दे देती है ।

रागिनी फोन लेके थोडा बात करती है और फिर उठकर अपने कमरे मे चली जाती है ।

रागिनी - हा समधन जी बोलिए अब

ममता हस कर - आस पास कोई है तो नही ना ,

रागिनी - नही बोलिए क्या बात है ?

ममता - देखिये ये बात सिर्फ आपके और मेरे बीच ही रहनी चाहिए और हिहिहिही

रागिनी - क्या हुआ बोलिए तो

ममता- दरअसल मुझे आपकी मदद

चाहिये थी

वोह्ह हिहिहिहिही

रागिनी के भी गाल खिल गये ममता की खिलखिलाहट भरी हसी सुन कर - अरे बताईये तो सही

ममता - वो क्या है इस बार सालों बाद मेरी बड़ी ननद आई है और मैने सोचा क्यू ना ननद रानी के साथ उनके मायके में ही थोड़ी मस्ती की जाये

रागिनी हसते हुए - हा हा क्यो नही , ननद की खातिरदारी मायके मे भौजाइयां ना करेगी तो कौन करेगा । तो बतायिये इसमे मै कैसे मदद कर सकती हूँ

ममता थोडा हिचक कर हसते हुए - हिहिही वो मै सोच रही थी कि उनकी खातिरदारी आपके यहा शादी मे हो जाये हिहिहिहिही

रागिनी खिलखिलाकर - हा हा क्यूँ नही ननद रानी पर दो चार छुट्टे सांड छोड़ ही दूँगी हिहिही

ममता - हा लेकिन कौन होगा और कैसे

रागिनी - वो सब मुझपे छोडिए लेकिन अगर आपका ये प्लान मैने सफल कर दिया तो बदले मे आपको भी मेरा एक काम करना पड़ेगा हिहिहिही

ममता - अरे आप जो कहेंगी हिहिही बस ननद रानी की जम कर रग्दाई होनी चाहिए

रागिनी - हम्म्म ठिक है चलिये और सब ठिक है ना

ममता - हा हा

इधर इनकी बातें हो रही थी वही भरी महफिल मे यूँ रागिनी के पास सोनल के ससुराल का सुबह सुबह फोन आने से घर के बाकी मेहमानो को थोड़ी चिंता होने लगी ।

शिला के कहने पर रज्जो उठ कर रागिनी के कमरे मे जायजा लेने पहुची तब तक रागिनी फोन काट चुकी थी ।

रज्जो - सब ठिक तो है ना छोटी

रागिनी मुस्कराते हुए गालों के साथ - हा जीजी क्या हुआ ।

रज्जो - वो सुबह सुबह ये सोनल के ससुराल वालों को फोन आया तो मुझे लगा.... सब कुछ ठिक है ना

रागिनी मुस्कुरा कर - हा जीजी सब ठिक है वो बस

रज्जो - हम्म्म समझ गयी कुछ दहेज की ही बात होगी , बता क्या फरमायिश की है अब सोनल की सास ने ?

रागिनी अपनी बहन के पास आकर उसके कन्धे पर हाथ रखती हुई मुस्कुरा कर बोली - जीजी फरमायिश तो समधन ने की है मगर हिहिहिही लेंगी नही देन्गी ?

रज्जो उलझन भरे लहजे मे - मतलब

रागिनी हस्ती हुई - अरे जीजी सालों बाद उनकी बड़ी ननद मायके आई है तो मेरी समधन ने खास सिफारिश की है कि आज शादी मे उनकी अच्छे से खातिरदारी की जाये हिहिहिहिही ।

रज्जो - ओह ये बात है , फिर तो रग्डाई कर ही देन्गी मिल कर हम औरतें

रागिनी - आँहा , हम औरते नही हमारे यहा के मर्द करेंगे

रज्जो आंखे उठा - तो क्या वो सब भी

रागिनी - समधन की ओर पूरी छूट है और तीनो छेद भरने का हुक्म आया है हिहिहिही

रज्जो - अरे तो फिर तो फिल्म भी शूट होनी ही चाहिए हाहाहहा

रागिनी - वो भी कर लेंगे लेकिन पहले ये सोचो हमारे तरफ किस किस को मैदान मे उतारा जाये , राज के पापा तो मान भी जाये मगर वो और मै तो शादी मे ही फसे रहेंगे ।

रज्जो - तेरे जीजा को मै मना लूंगी

रागिनी - क्या सच मे जीजाजी तैयार हो जायेन्गे

रज्जो - जब उन्होने अपनी बहन नही छोड़ी तो ये फिर हिहिहिहिही

रागिनी - हम्म फिर और किसे आगे रखा जाये

रज्जो - अरे अपने देवर से बात कर ना

रागिनी थोडा असहज होकत - हा

जीजी लेकिन मैंने कभी ऐसा कुछ देवर जी से... मतलब हम लोग उतना आमने सामने खुल कर नही रहते और होली वाली बात के बाद तो और भी नही ।

रज्जो चहक कर - क्या होली पर ऐसा क्या हुआ था

रागिनी लजाती हुई - बस वही होली की मस्ती और देवर भौजाई वाली होली

रज्जो - हा लेकिन क्या ?

रागिनी शर्माती हुई गुलाबी गालो से - दरअसल मैने जब उनको अबीर से नहला दिया तो वो मुझे दौडाते हुए उपर छत पर बाथरूम के पास कोने तक ले गये और फिर उन्होने दबोचा।

रज्जो उत्तेजित होकर - फिर

रागिनी हस्ती हुई - फिर वही खिंचातानी और उन्होने मेरे पेट पर अबीर मलते हुए मुझे अपनी बाहो मे मसल ही डाला, मेरे जिस्म मे सिहरन सी हो गयी । होली की मस्तीयों मे खोई हुई मेरे जुबान भी फिसल गई थी मानो और जब उन्होने मेरी साडी हटा कर मेरे नाभि पर गुलाल मलते हुए कहा- आज मत रोको भौजी आज तो रंग लेने दो

रज्जो तेज सांसो से - तो ??

रागिनी - हिहिही फिर भरी मस्ती मे मेरी जुबान फिसल गयी कि " कहो तो चोली भी खोल दू "

रज्जो हस कर - सच्ची हिहिहिही

रागिनी हस्ते हुए - हा जीजी और फिर उन्होने जबरन मेरे जोबनो को ब्लाउज के उपर से मेरे दूध लाल हरे कर दिये थे और इतना मसला कि उफ्फ़

रज्जो अपनी पनियाती चूत

को जांघो से कस्ती हुई एक गहरी सास लेकर - हा तो फिर अब क्या दिक्कत है ?

रागिनी हस कर - दिक्कत वही है जीजी उस दिन होली की मस्तियो मे हम लोग कुछ ज्यादा ही बहक गये थे और अब हम दोनो एक दुसरे से थोड़ी झिझक होती है कि क्या क्या कह और कर गये थे हम लोग ।

रज्जो - हम्म्म ये भी है और तु तो तेरे देवर के साथ आगे बढ़ने नही वाली तो हिहिहिही

रागिनी - धत्त दीदी क्या आप भी अब क्या मै सबसे वही सब करती फिरू आप ही करो बाबा , मेरे से नही होगा हिहिहिही

रज्जो - अरे मत कर , लेकिन भाई तेरे देवर से तो तु ही बात करेगी ना , अब मेरा बात करना उचित तो होगा नही

रागिनी - हम्म्म वो भी है , अभी आने दो इनलोगो को अभी तो सैलून गये है ये लोग

रज्जो - अरे सैलून से याद आया वो मेकअप वाली कब आ रही है पुछा तुने सोनल से , अरे हम औरतों को भी थ्रेडिंग और वो स्पा और थोडा सा टचअप चाहिये ना ।

रागिनी - हिहिहिही हा जीजी बात हुई है वो दोपहर तक आ जायेगी ।

रज्जो - चल ठिक है फिर



अमन के घर

नास्ते के लिए सब लोग छत पर जमा थे

मगर महफिल की जान तो संगीता ही बनी हुई थी ।

भोला , ममता , मदन और मुरारी सब घूम फिर पर संगीता पर नजरे गडाये हुए थे ।

मुरारी भी बीती रात से मदन और संगीता पर नजरे रखे हुए था ।

नासते के दौरान भोला के कुछ बात चीत हुई तो उसे अपने जीजा के लिए अफसोस हुआ कि उसके साथ धोखा हो रहा है ।

मगर वो ये बात बस खुद के सीने मे दबा कर ही रह सकता था ।

मन मे सवालों और कल्पनाओ का तुफान उठ रहा था मुरारी के मन मे मगर वो खुद के जज्बात कैसे समेटे हुआ था वो ही जान रहा था ।

भोला - अरे भाई साहब मै क्या कहता हु , आप भी चलिये मेरे साथ सलून और फिर पता नही समय मिले ना मिले

मुरारी - नही तुम मदन हो आओ मै रुक के आऊंगा

भोला - अरे नही मदन भाई नही आ रहे है वो थोडा रुक के आयेंगे उन्हे जरा बाथरूम जाना है । दरअसल नाई ने फोन किया था मदन भाई के पास कि अभी वो खाली है तो मैने सोचा कि

मुरारी मदन के ना जाने पर खुश हुआ और भोला के साथ चल दिया , मगर घर के निकलने के बाद उसको शन्का हुइ कि मदन जरुर संगीता के साथ कुछ करेगा ।

ये ख्याल आते ही मुरारी की बेचैनी फिर से बढ गयी , उसके चेहरे पर चिंता की लाली उभरने लगी

उलझन भरे मानसिक हलचल मे वो घर से दूर आ पहुचा और उसके मन मे उठ रहे कल्पनाओ मे सागर ने उसकी चाल धीमी कर दी थी जिस्से भोला कुछ दुर आगे निकल आया था

भोला घूम कर मुरारी को आवाज दी - क्या हुआ भैया रुक क्यूँ गये ।

मुरारी चौका - हा !!

भोला - अरे पुछ रहा हु रुक क्यूँ गये ऐसे आप !!

मुरारी अपनी कुरते का जेब टटोलकर - कुछ नही वो पर्स भूल गया , तुम चलो मै लेके आता हु

भोला - अरे भैया मेरे पास पैसे है चलिये आप !!

मुरारी - नही नही वो नाई की दुकान के पास ही माली वाला है ना उसको पैसे भी देने है , तुम चलो मै जल्दी ही पहुच रहा हु , वैसे भी बैठना पडेगा ही वहा जाकर

भोला - ठिक है भैयया आप आओ मै चलता हू

भोला बजार की ओर निकल गाय

और मुरारी अपनी उफनाती सासो के साथ तेज कदमो से घर की ओर बढ गया ।

उसको घर से निकले अब तक 10 मिन्ट से ज्यादा हो गये थे और घर मे दाखिल होते ही लपक कर वो मदन के कमरे की ओर बढा मगर वहा कोई नही दिखा ।

निचे सब कुछ सुनसान पड़ा हुआ था , सारी चहल पहल उपर छत पर ही थी ।

मुरारी सरपट जीने से होकर संगीता का कमरा चेक किया वहा भी कोई नही , स्टोर रूम , अमन का कमरा , बाकी के दो कमरे सब बाहर से चटखनि लगे हुए थे , वो थोदा सुनिश्चित करने के लिए उपर गया , मगर वहा दोनो गायब दिखे ।

मुरारी की बेचैनी अब बढने लगी , वो एक बार फिर उपर से निचे सब देखता जांचता आया और तभी उसकी नजर सबसे निचे के फ्लोर पर हाल से पीछे बाथरूम की ओर जा रहे गलियारे पर गयि ।

एक बार फिर मुरारी का कलेजा धड़का ।

दबे पाव वो बाथरूम की ओर बढ़ गया और नतिजना उसका शक सही निकला

बाथरूम का दरवाजा बन्द था और मदन की हल्की सिसकियाँ उसे सुनाई दी

बाथरूम के बाहर दरवाजे के पास कान लगाये मुरारी ने आवाज सुनी

" उम्म्ंम्ं दिदीईईई उह्ह्ह ओह्ह्ह क्या चुसते हो आप उम्मममंं सीईईई "

मदन की उखड़ती सासो से निकलती आह सुनकर मुरारी के जिस्म मे भी सिहरन फैल ग्यी

मगर अब भी उसका गुस्सा उस पर हावी था , मुठ्ठियां भीच कर वो गुस्से से तनमनाया दरवाजे पर मुक्का मारने ही वाला था कि संगीता की आवाज आई - पहली बार किसी औरत का स्पर्श पाये हो ना भैया तो ऐसा ही लगेगा , कितनी जिद की हमने की कर लो शादी मगर तुम अपनी प्रेम कहानी के अधूरे पन्ने पटलते रह गये हुउह , अब इस उम्र मे औरत का स्पर्श तो अनोखा लगेगा ही

संगीता के शब्दों मे मुरारी की भीतर से झकझोर कर रख दिया और अगले ही पल मदन का उसके परिवार के लिए समर्पित जीवन का पुरा पोथा ही उलट पुलट होने ल्गा

मुरारी के खुद को रोक लिया और मदन को लेके उसका गुस्सा अब कम हो चुका था । मदन का अकेलापन घर मे जो कोई नही समझा वो उसकी अपनी बहन मे समझा , मगर अभी भी वो दो भाई बहनो के आपस के रिश्ते को लेके आहत था ।

मदन - ओह्ह दीदी मगर आपके छूने का अहसास ऊहह उम्म्ं और लोहहब ओह्ह मेरा आयेगाग्घ उम्म्ंम्ं सीईई ओह्ह दीईईदीईई उम्म्ंम्म्ं

मदन की आहे और संगीता के गले मे फसे लन्ड ही गुगूआहट ने मुरारी के लन्ड को तान दिया और उस्का दिल जोरो से धडकने लगा

बेचैन होकर वो तेज कदमो से बाहर चला गया और सलून की ओर बढ गया ।

इस बार वो अब पहले से ज्यादा उलझा हुआ मह्सुस कर रहा था , मदन को लेके उसकी भावना थोडी नरम हो चुकी थी वही संगीता का उसके भाई के लिए इस हद तक प्रेम उसकी समझ से परे था ।

ना जाने कौन सी परिस्थिति मे वो दोनो कैसे ? सवालों का नया रूप अब उसके जहन पर छा चुका था ।

खैर उलझे विचारो मे वो इस बात के लिए सुकरगुजार था कि सही समय पर उसने खुद को रोक लिया नही तो आज गुस्से वो क्या कर जाता ये उसे खुद नही पता था ।

छोटे भाई की खुशिओं के लिए वो भी चिंतित हुआ मगर उसमे सगी बहन का आना उसे खटक रहा था ।

विचारो मे उलझा मुरारी सलून आ चुका था और उसका न्म्बर भी आ गया था ।



राज के घर

इधर चाय की चुस्कियां चल रही थी वही सीढियों पर बैठे हुए अरुण-राहुल साथ मे गीता बबिता को निहार रहे थे ।

दोनो बहने भी कम ना थी , अच्छे से अपने नये दिवानो के इरादे समझकर मुस्कुरा रही थी आंखो ही आन्खो मे ।

मगर घर के बड़ो के बीच उनसे इतराया भी नही जा रहा था और ना ही अरुण-राहुल से खुल कर आंखे सेका जा रहा था ।

ऐसे मे रंगी-जंगी आते है ।

रंगी अपने कमरे मे चला जाता और जंगी शालिनी को उपर कपडे देने का बोल कर सीढियो से उपर चला जाता है ।

मौका देखकर रज्जो रागिनी को जंगी की ओर इशारा करती है तो रागिनी ने भी आंखो से सहमती दिखाई ।

रागिनी भी हाल से उठ कर जीने की ओर बढी - ओहो भाई तुम दोनो ऐसे रास्ते बाँधे काहे बैठे हो , और जगह नही मिली

अरुण और राहुल को डांट मिलने गीता-बबिता मुह फेर कर हस देती है ।

रागिनी उपर जाकर हाल मे ना रुक कर सीधे जीने से उपर चली जाती है

कुछ ही देर मे जंगीलाल कमर मे तौलिया लपेटे बनियान मे कन्धे पर कुर्ता पजामा रखे हुए उपर आता है और बाथरूम की ओर बढ़ ही रहा होता है कि

रागिनी झिझक भरे लहजे मे - अह देवर जी सुनिये

जंगी चौक कर - भ भाभी अ आप यहा , मतलब कहिये क्या हुआ

रागिनी जन्गी को बनियान और तौलिये मे देख कर असहज होती हुई नजरे फेर कर मुस्कुराने लगी - वो मुझे !! कैसे कहू

जन्गी चिंता के भाव मे - क्या हुआ भाभी कोई परेशानी वाली बात तो नही

रागिनी - नही नही , वो बस हिहिहिही दरअसल आज शादी मे मुझे आपकी एक मदद चाहिये

जंगी - हा भाभी बोलिए इसमे इतना झिझक क्यूँ , हम लोग आपके लिए ही तो है यहा

रागिनी - दरअसल आज मुझे पता चला है कि आज शाम बारात मे दूल्हे की बुआ आ रही है बड़ी वाली

जन्गी - हम्म तो ?

रागिनी हस्ती हुई - तो क्या ? अरे समधि की बहन आयेगी तो मेरे देवर डोरे नही डालेन्गे क्या उनपे हिहिहिही

जन्गी हस कर - हाहाहहा भाभी क्या आप भी !!!

रागिनी - मै मजाक नही कर रही हु

जंगी - मतलब सच मे ? इस उम्र मे ? दूल्हे की बुआ से ?

रागिनी - क्यू नही हो पायेगा ??

जन्गी - हो जायेगा लेकिन अगर बात आगे बढ गयी तो ?

रागिनी लजाती हुई हस कर - तो क्या , आपकी मेहनत का इनाम होगा आप जानो क्या करना है उसका हिहिहिहिही मगर एक शर्त है

जन्गी - क्या ?

रागिनी - अगर कोई मामला सेट हुआ तो उस फिल्म की वीडियो जरुर बना लिजियेगा हिहिहिही

जंगी - क्या वीडियो ? मगर क्यू ?

रागिनी - अरे ननद का वीडियो समधन को अच्छी कीमत पर बेचून्गी और क्या हिहिहिही

जन्गी - क्या भाभी आप भी ना हिहिहिही

रागिनी - ये बात बस हम दोनो के बीच ही रहनी चाहिए और याद रहे मेरी नाक नही कटनी चाहिये हिहिहिही

"पक्का भाभी , आपकी इज्जत को सम्भालना आखिर मेरा भी तो फर्ज है " , जन्गी ने रागिनी के साडी से झाकते जोबनो को निहारते हुए कहा ।

रागिनी जन्गी के शब्दों और उसकी निगाहो को भाप कर अपना पल्लू सही करते हुए बोली - ठिक है आप नहा लो मै जा रही हु

जन्गी - बस जा ही रही हो भाभी !!

रागिनी - क्यूँ कुछ काम था ?

जंगी हस्ता हुआ - जरा पीठ मल देती भाभी तो ...!! हाहाहहा

रागिनी लजाती हुई - धत आप भी ना हिहिहिही

रागिनी सरपट जीने से निचे चली गयी

जन्गी - आह्ह भौजी आज नही तो कल मलोगी मेरे तन को जरुर लेकिन आज रात ये नया माल पेलने को मिल जाये तो क्या ही मजा होगा । इस्स्स्स्स अह्ह्ह



रज्जो - कमलनाथ

कमलनाथ - उह्ह्ह जान ऐसे ही उम्म्ंम्ं सीईईई ओह्ह्ह

रज्जो कमलनाथ का सुपाडा मुह से निकालती हुई - इतने दिन से तडप रहे थे ना मेरे राजाह्ह्ह उह्ह्ह कितना फूल गया है उम्म्ंम जी कर रहा है अभी इसको भर अपनी बुर मे उम्म्ंम





कमलनाथ - तो भर लो ना मेरी जान उम्म्ंम सीईई उह्ह्ह

रज्जो - नही मेरे राजा अभी नही , शादी के बाद घर पर यहा कोई भी आजायेगा कभी भी उम्म्ंम्ं

कमलनाथ - आह्ह मेरी जान तो ऐसे कब तक मै उह्ह्ह उम्म्ं और लो ऊहह आयेगा उह्ह्ह सीईईई

रज्जो ने उसका लन्ड मुह मे भरे हुए आड़ो को मसलती हुई सुपाडा सुरकने लगि और कमलनाथ उसके मुह मे झड़ने लगा ।

उसका लन्ड साफ कर रज्जो इतराई - अगर नही कर सकते इंतजार तो आज रात बारात मे कोई आये उसी को पटा लो हिहिहिहिही

कमलनाथ - अच्छा जी

रज्जो - हम्म सुना है दूल्हे की बड़ी बुआ आ रही है , सगाई मे देखा था मैने पीछे से एकदम कसा माल है। मै तो कह रही हु कि उसी को हिहिहिही

कमलनाथ का मुसल फडका- क्या सच मे जान , तुम्हे कोई ऐतराज नही होगा

रज्जो अपने पति के गाल सहलती हुई - मेरे राजा की खुशी से बढ़ क्या होगा मेरे लिए उम्म्ं

कमलनाथ उसको बाहो मे कसते हुए - मगर क्या वो तैयार होगी

रज्जो - अरे बारात मे तो हम औरते चाह्ती ही है कि कोई हम पर भी फीदा हो और हमे भी निहारे , मगर इस फैशन के जमाने मे सारा गलैमर जवाँ छोरियां और भाभियाँ उड़ा ले जाती है और उस औरत को परखा है मैने सगाई मे वो लोगो की नजरों मे बनी हुई फिर रही थी ।

कमलनाथ - अगर ऐसी बात तो फिर मै तैयार हु

वही बाहर हाल मे धीरे धीरे लोगो की संख्या छट रही थी ।

धीरे धीरे सभी औरतों और लड़कियो का समूह उपर चला गया

जाते हुए भी बबिता और गीता आपस मे हस्ती हुई और राहुल-अरुण का मजाक बनाती हुई उपर जाने लगी ।

राहुल को चिढ़ हुई तो उसने भी वही जिने के पास खड़े खड़े अरुण से बोला - भाई अरुण एक बात ब्ताओगे

अरुण - पूछो भाई

राहुल की बातों पर बबिता का पुरा ध्यान था

राहुल - यार वो कौन सी चीज होती है जो देख कर डिलीट कर देना चाहिए

अरुण सोचने का नाटक करता है और वही बबिता की सासे अटक जाती है और उसे समझते देर नही लगती कि जब वो अपने बाबू सोना से लगी हुई थी तब राहुल ने सब कुछ सुन लिया था ।

उसके चेहरे की चमक अब हल्की हो चूकि थी और राहुल अरुण को लेके बाहर टहलने निकल जाता है ।

वही निचे से कमलनाथ भी नहाने के लिए उपर की छत पर कपडे लेके पहुचा हुआ था , मगर बाथरूम मे जंगी की वजह से वो छत से नजारे सेक रहा था

तभी उसकी नजर दो औरतों पर गयी जो घर से दूर पर ही थी और एक बड़ा बैग लेके टहलती हुई आ रही थी ।

नजदिकियां जब कम हुई तो पता चला कि जो फैशन झारती हुई चेहरे को सजाती अपने डीप गले के शार्ट टॉप और चर्बिदार कूल्हो पर कसी हुई जीन्स मे थी वो असल मे शादी शुदा थी और जबकी उसके साथ मे चल रही लड़की जो साधारण कुर्ती लेगी मे थी उसकी शादी नही हुई थी , मगर जोबन उस्के भी कसे हुए थे ।

उस जीन्स टॉप वाली महिला के कसे हुए गोरे जोबन की घाटी मंजिला छत से साफ साफ नजर आ रही थी

जिस्से कमलनाथ के कमर पर लिपटे गमछे मे तम्बू बन चुका था ।

कमलनाथ - आह्ह क्या माल है यारर

तभी उसके पास आकर खड़ा हुआ जंगी मुस्कुरा कर बोला - माल तो मस्त है ही भैया हाहाहाहा

कमलनाथ सकपकाया - अरे ज जंगी भाई त तुम , वो मै

जंगी हसता हुआ - अरे काहे परेशान हो रहे हो , साली को जानता हु । ये पार्लर वाली एक नम्बर की रन्डी है

कमलनाथ थुक गटक कर एक नजर निचे देखा तो वो राज के घर मे प्रवेश कर रही थी ।

कमलनाथ - मतलब मै समझा नही , आप जानते है इसको

जन्गी कमलनाथ की बात पर हसने लगा ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 190

राज के घर

कमलनाथ असमंजस मे था

क्योकि ऐसी पटाखा और भरे बदन वाली मॉडर्न औरत के बारे मे जंगी इतना स्योर कैसे हो सकता था ।

कमलनाथ - क्या तुम सही कह रहे हो जंगी भाई

जन्गी ठहाका लगाते हुए - हाहाहहा हा भाई बहुत अच्छे से जानता हु इसको

कमलनाथ - अरे मेरा मतलब वो जो तुमने अभी कहा ना की ये एकनम्बर की रन...

जंगी कमलनाथ छेड़ता हुआ - हम्म ह्म्म्ं क्यू भाई साहब भाभी जी से अभी से ऊब गये उम्म

कमलनाथ हस्ता हुआ अपना मुसल खुजा कर - हाहाहा वो बात नही जंगी भाई , वो कहते है ना घर की चिकन तंदूरी के साथ साथ बाहर पिज़्ज़ा भी कभी कभी खा लो तो हरज नही होता कुछ , बस ऐसा ही कुछ

जन्गी हस कर - हाहाहा चिकन तंदूरी वाह क्या बात है भाभी जी है भी वैसे चिकन हिहिहिहिही

कमलनाथ - हम्म वो तो तुम देख ही सकते हो भाई , ऐसी बीवी हो तो उसे दाल रोटी कहना तो बेज्जती ही हुई ना हाहाहा

जंगी ठहाका लगाता हुआ - हाहहाहा बिल्कुल भाई साहब

कमलनाथ आंख दबा कर - वैसे इस पार्लर वाली से आपका कैसे ?परिचय कुछ समझ नही आया ??

जंगी - अरे कमल भाईआपने तो हमारी बीवी को देखा ही है , मैडम को जब भी कही आना जाना होता था बार बार हमे या घर मे किसी को उन्के साथ जाना पड़ता था ।

कमलनाथ - हम्म्म फिर

जन्गी - फिर क्या , बार बार पार्लर का चक्कर लगाने से बिरादरी मे थोड़ी बाते उठने लगी थी इसीलिए मैने कहा कि अगर जरुरत हो पार्लर की तो घर मे आ जाया करेगी ।

कमलनाथ- फिर

जन्गी - भाईसाहब फिर वही हफते दो हफ्ते पर बॉबी जी के दर्शन हो जाते थे घर पर , साली ऐसा कातिल मुस्कुराती थी कि पजामे मे तम्बू बन जाता था

कमलनाथ सिसिक कर अपना मुसल दबाता हुआ- अच्छा!!

जन्गी - फिर हमने भी इसकी शिनाख्त की और बीवी से इसके बारे मे बाते की तो पता चला कि हर रविवार ये बड़े शहर आती जाती है ट्रेनिन्ग देने के लिए

जन्गी - बात मुझे कुछ खास जमी नही फिर कुछ दिनो बाद सन्जोग से मेरा भी बड़े शहर जाना हुआ और दिन रविवार का निकला

बड़े शहर जाने वाली बस का इंतजार ये भी कर रही थी और मै भी , इसने अपनी जवानी के जलवे दिखाने और इतराने के नशे मे मुझे देखा नही और मै पहले ही पीछे बैठ गया ।

शहर उतरते ही इसके लिए एक टैक्सी आई और मैने भी औटो से पीछा किया तो ये होटल सिटी किंग मे पहुची

मुझे समझते देर नही लगी कि ये वहा किस लिये आई थी

कमलनाथ - किस लिये

जंगी हस कर - दरअसल कमल भाई , होटल सिटी किंग एक बदनाम मगर गुप्त अय्याशी का अडडा है । मै भी कभी कभी अपनी चिकन कबाब से बोर होता तो यहा बिरयानी खाने आ जाता था हाहाहा

कमलनाथ हस कर - ओहो चिकन कबाव हिहिहिही , फिर

जंगी - फिर क्या वहा के कुछ स्टाफ से मेरी पहचान थी तो जब मैने बॉबी के बारे मे पूछा तो पता चला कि रविवार वो यहा क्लाइंट देखने और अपना कामों से उपजे अकेलेपन को दुर करने आती है ।

कमलनाथ - अकेलापन मतलब इसका पति कहा है

जंगी - है पति और पान की दुकान है उसकी मगर साला एक नम्बर का नल्ला आदमी है यार

कमलनाथ - फिर क्या हुआ होटल मे मुलाकात हुई

जंगी - हा हुई ना मैने स्टाफ से बोलकर उसको अपने कमरे मे बुलवाया और स्टाफ को खास कहा कि उसे मेरे बारे मे भनक नही होनी चाहिए

कमलनाथ - फिर क्या हुआ

जन्गी हस कर - फिर क्या होना था वो आई और मुझे देख कर चौक गयी मैने मुस्कुरा कर उसका स्वागत किया और उसे तसल्ली दी कि मै उसके इस काम के बारे मे चुप रहूंगा

जन्गी की रस्भरी बाते सुन कर कमलनाथ थुक गटक कर- फिर !!

जन्गी - फिर वही हुआ जो होना था , 2 राउंड वो भी सिर्फ ऐनल

कमलनाथ अपना तनमनाया मुसल भींचता हुआ अपने टांगो को स्ट्रेच किया - अह्ह्ह भाईसाहब तो फिर अभी ये बुलबुल तो अपने आंगन मे आई है , पानी पिलाना चाहिए क्यों ?

जंगी - सीई आह्ह कमल भाई दिल की बात बोल दिये तुम

कमलनाथ - मगर होगा कैसे ?

जंगी - अरे चिड़िया पकडनी है तो दाना डालना ही पड़ेगा ना

कमलनाथ - ठिक है आप थोडा अपनी ओर से तब तक जाल फेकों मै जरा नहा के फटाफट आता हूँ

जन्गी - हा हा क्यो नही हाहाहाहा

**************************************

इधर दोपहर मे खाने पीने का प्रोग्राम शुरु हुआ और सारे लोग चंदू के मकान पर ही एक जूट हुए , वही पर खाने पीने का इंतजाम हुआ था ।

घर की औरतें महिलाएं जल्दी जल्दी खाने पीने मे लगी हुई थी कारण था मेकअप आर्टिस्ट बॉबी का जल्दी आ जाना ।

इधर राहुल अनुज अरुण राज सब मिल कर खाना परोस रहे थे । बबिता का मन अभी एकदम से उतरा हुआ था , वो सहमी हुई थी ।

ऐसे मे राहुल थोड़ा तुनकते हुए पूरी का बर्तन लेके उसके पास पहुचा

राहुल बबिता के पास ख्दा होकर - पूरी पूरी पूरी !!! चाहिये क्या

बबिता खिझी और मुह मे निवाला चबाते हुए एक उंगली उठाइ तो राहुल ने दो गर्मागर्म पूरियां उसके थाली मे रख दी ।

बबिता आंखे उथा कर उसको हस्ता देख रही थी और भितर भड़कती गुस्से की आग उसकी आंखो मे उतर गयी थी कि बगल मे बैठी निशा ने उसको थपथ्पाया - क्या हुआ ??

बबिता अगले ही पल शान्त हो गयी और वही राहुल अपनी मस्ती मे लगा रहा ।

वही इनसब से अलग गीता का पूरा ध्यान खाने पर ही था मगर अरुण को उसका ये रूप भी भा रहा था ।

अरुण सलाद का प्लेट लेके उसके पास गया और उसकी थाली के रखता हुआ

- थोड़ा ये भी दू

गीता खाने के मूड मे - हा हा रखो ना

और जैसे ही उसकी नजर सामने अरुण पर गयी उसके गले से उतरता निवाला मुह मे आ गया और वो मुह फुलाये मारे लाज के नजरे फेरे शर्माने लगी ।

बस इतना ही काफी था दोनो की आंखे चार होने के लिए, गले से निवाला गटक कर गीता अपने गुलगुले गालो की लाली बढ़ाते हुए मुस्कुराई ।

अरुण भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया ।

वही राज ने भी घर की बाकी महिलाओं के साथ अपनी भाभीयों का ख्याल किया ।

इधर खाने का प्रोगाम चल रहा था कि रागिनी ने घर मे सबकी गिनती की तो पता चला कि रन्जू ताई अभी गाव से आई ही नही है ।

रागिनी पंखुडी से - अरे बहू ये तेरी सास क्यू नही आई

पंखुडी- जी चाची वो तो बाऊजी की राह देखने रुक गयी , बाऊजी खेत गये थे ना

रागिनी हस्ती हुई - हुहू बाऊजी की राह देखने रुक गयी ,,अरे क्या बाऊजी की गोद मे आयेगी क्या

रागिनी की बात पर सब औरतें खिलखिलाकर हस दी

रागिनी - राज बेटा जरा देख तो कहा रह गयी तेरी ताई

राज - अरे लेकिन मै जाऊंगा कैसे

रागिनी - अरे वो स्कूटी लेले ना

राज चहका - अरे हां

तबतक भंडारी वाला आदमी जिसकी स्कूटी थी वो बोला - अरे छोटे सेठ चला लेते हो ना

राज हस कर - अरे इसमे क्या है ये तो साइकिल है

भंडारी - हा लेकिन गाव की सड़क थोड़ी सही नही है तो ध्यान से जाना

राज ने उसको आश्वत किया और फिर स्कूटी लेके निकल गया ।

इधर वही खाने वाले टेबल पर एक कोने मेकअप आर्टिस्ट बॉबी और उसकी असिस्टेन्ट रूबी भी खा रहे थे । और उनकी खातिरदारी मे लगा था जंगी खुद

जन्गी - बॉबी जी और कुछ लाऊं

बॉबी ने अपनी कजरारी आंखें उठा कर खीरे का बाईट अपने दूधिया दांतो से काटते हुए मुस्कुराई और ना मे सर हिलाया ।

जन्गी रूबी को - और तुमको बेटा कुछ

रूबी - जी नही अंकल

जंगी - बॉबी जी कुछ चाहिये होगा तो कहिएगा

बॉबी ने बड़ी कातिलाना अदा ने मुस्कुराते हुए और जन्गी के इरादो को भापते हुए हा ने सर हिलाई ।

जंगी का मुसल पजामे मे तन गया और कमलनाथ लपक कर उसकी ओर बढा- क्या हुआ भाई साहब कुछ कहा क्या ? जो ऐसे हिहिहिही

जन्गी फौरन घूम कर अपना लौडा सेट करता हुआ - अरे भाई इसकी आंखे है या अह्ह्ह साली ने देख कर खड़ा कर दिया

जन्गी की स्थिति से कमलनाथ ने जिस्म मे भी सुरसुराहट सी होने लगी - फिर भाई साहब कुछ हो सकता है या नहीं

जन्गी - हम्म करना तो पडेगा ही आओ इधर चलते है

जंगी कमलनाथ को लेके घर की ओर चल दिया और एक शान्त जगज देख कर फोन निकाल कर घुमा दिया

कमलनाथ - किसे फोन कर रहे हो

जन्गी ने बिना कुछ बोले मोबाईल स्क्रीन कमलनाथ की ओर घुमाई जिस्पे लिखा था " BOBBY Parlour"

कमलनाथ का कलेजा थोडा धड़का

तबतक बॉबी ने कॉल पिक किया

बॉबी - हम्म्म बोलिए

जंगी मुस्कुराता हुआ अपना लन्ड भीच कर - और बॉबी जी कैसी है आप

बॉबी इतरा कर बोली - क्यू देखा नही आपके सामने तो थी

जन्गी सिस्क कर - सीईई उह्ह्हुऊऊ देखने तो बवाल लग रही हो आज , क्या इरादा है

बॉबी - हम्म्म आज तो बिज़ी हु और कारण आप समझ ही सकते हो

जन्गी - अरे कुछ पल हमे भी देदो नाह्ह्ह सीईई

बॉबी जन्गी की सिसकियाँ भरी आवाज पर मुस्कुरा कर - देखती हुई अगर टाईम मिला तो , वैसे आप आज रहेंगे कहा

जंगी - जहा आप कहे

बॉबी - ठिक है देखती हु और मैसेज कर दूँगी मै

फिर फोन कट जाता है और जंगी चहक कर - भाई साहब हो गया , बस हमे समय से उप्स्थित होना होगा

कमलनाथ - तो क्या मेरा भी कुछ

जंगी हस कर - मेरे बाप पहले आप हाहाहहा


अमन के घर

भोला सलून से आने के बाद जब वो कमरे मे पहुचा तो कमरे का दरवाजा भिड़का हुआ था उसने दरवाजा बन्द किया और बाथरूम मे जाने लगा , उसे जोरो की पेसाब लगी थी और नहाना भी था ।

जैसे ही उसने बाथरूम का दरवाजा खोला सामने का नजारा देख कर उसकी आंखे फटी की फटी रह गयी

सामने उसकी लाडली बेटी बाथरूम मे पुरी नंगी होकर बाथटब मे बैठी हुई अपने कोमल जिस्म पर पानी से खेल रही थी , उसका जिस्म पानी मे साफ झलक रहा था ।

भोला का लन्ड पूरी तरह से तन गया और वो आवाक हो गया था अपने बेटी की जिस्म पर उभरे हुए गुलाबी निप्प्ल देख कर उसकी गले मे पानी भरने लगा

दरवाजे पर आहट पाकर रिन्की थोड़ा सतर्क हुई और जब उसने सामने अपने पापा को देखा तो- अरे पापा आप हो ? मै तो डर ही गयी थी हिहिही

भोला के लिए उसकी बेटी का यू प्रतिक्रिया देना नयी बात नही थी , क्योकि वो इससे भी कैजुअली होकर भोला से बात करती थी ।

मगर अभी जो उस्का रूप निखरा हुआ था , वो रिन्की का जवानी की दहलिज पर उतरने का साफ साफ निमन्त्रण था ।

भोला ने भी सामान्य होकर ही बोला - वो जरा मै पेसाब करने आया था और बेटी जरा दरवाजा अच्छे से बन्द कर लिया कर

रिन्की ने मासुमियत भरे भाव से - सॉरी पापा

भोला ने टोइलेट सीट के पास खडे होकार अपना मुसल निकाल कर अपनी बेटी के सामने मुतने लगा ।

बाप का उफनाया लन्ड देख कर रिन्की की सासे भी चढने लगी और वो बाथटब से उठकर उसके बारी पर बैठ गयी और हाथो से साबुन की झाग को अपने मुलायम कोरी छोटी छोटी सनतरे जैसी चुचियो प लगाती हुई - पापा ऐसा ही बाथटब घर पर ही लगवाओ ना

भोला अपना लण्ड झाड़ कर पैंट मे डालता हुआ

मुस्कुरा कर - अच्छा तो तु क्या करेगी , नहाना तो शॉवर से भी हो जाता है ना तेरा





रिन्की इतरा कर चहकती हुई बाथटब मे उतरी - ओहो पापा लगवा दो ना प्लीज इसमे देखा ना कित्ना मजा आ रहा है हिहिही ऐसे ऐसे करने मे





रिन्की बाथटब के पानी मे अपने कुल्हे उछालने लगी और उसकी रबर जैसी चिकनी मुलायम गाड़ को पानी मे डूबता उपराता देखा भोला का लन्ड पूरी तरह से तन गया ।

वो रिन्की की गोरी चिकनी गाड़ निहारता हुआ आगे बढ़ा तो रिन्की ने उसके जांघो को सहलाते हुए - प्लीज ना पापा

भोला की सासे उखड़ने लगी अपनी नंगी लाडली के स्पर्श से और वो अपनी लाडली को छूने से खुद को रोक नही पाया





वो आगे झुक कर रिन्की की पीठ सहलात हुआ उसके रबर जैसी मुलायम लचीली गाड़ को फैलाता हुआ उसके गुलाबी बुर के फाको को सहलाया

पापा के उंगलियो का स्पर्श पाकर रिन्की सिसकी और साम्ने दिख रहे अपने पापा का मोटा मुसल पैंट के उपर से ही मस्लने लगी ।

भोला सिस्का - ऊहह उम्म्ं

रिन्की - पापा आप कहो तो मै इसको suck कर दूँगी पर प्लीज पापा लगवा दो ना उम्म्ंम

भोला ने एक गहरी आह भरी और सीधा खड़ा हो गया उसने

अपनी लाडली की आंखो मे देखा और उसे वही कामुक नशा नजर आया जो अक्सर उसे अपनी बीवी संगीता मे आता था ।

भोला - लेकिन ये बात सिर्फ हम दोनो के बिच रहेगी अपनी माअह्ह सेह्ह उम्म्ंम्ं मत कहना





रिन्की ने अपने पापा के मुसल को पैंट के उपर से सहलाते हुए बेल्ट खोलने लगी - उम्म ओके पापा नही कहूँगी

भोला की सासे चढ रही थी और रिन्की के नाजुक हाथ उसकी पैंट की जीप उतार कर पैंट सरकाई ,,जिससे भोला का लन्ड रिन्की के आगे झूलने लगा ।

मदमस्त होकर रिन्की के आगे बढ़ कर उसे सुँघा और मुह खोल्कर मुह मे भर लिया और उसको चुस्ते हुए आंख बंद कर भीतर तक गटकने लगी





भोला -ऊहह बेटा उम्म्ंम सीईईई ओह्ह ऐसे ही सीईई क्या मस्त चूस्ती है तुह्ह्ह अह्ह्ह उम्म्ंम

रिन्की भोला के आड़ो को छेड़ती हुई आन्खे उठा कर अपने पापा को निहारती हुई बड़ी ही कामुकता से लन्ड को गले तक उतार रही थी ।

भोला उसके बालो को सहलाता हुआ एडिया उचकाने लगा और सिस्कता हुआ - उम्म्ं बेटा तुझे ये सबब उह्ह्ह कैसे प्ताअह्ह्ह उम्म्ंम सीईई

रिन्की भोला का लन्ड मुह से निकालती हुई उसकी चमड़ी सहलाती हुई - मम्मी को देखकर पापा उह्ह्ह

भोला - ऊहह बेटी और तु सच मे उसके जैसे ही चुस रही है उह्ह्ह और सिखा है मेरी गुड़िया ने उमम्म

रिन्की मुस्कुराई और सुपाड़े की टिप पर जीभ नचाने लगी जिस्से भोला का शारिर कापने लगा उसके लन्ड की नसे फड़कने लगी - उह्ह्ह बेटाअह्ह्ह उम्म्ंम ऐसे हिह्ह उह्ह्ह येससससस बेटा उम्म्ंम और चुस और लेह्ह और लेह्ह्ह हा हा





भोला ने रिन्की के सर को दबाते हुए उसके गले मे पुरा लन्ड उतार दिया था और एडिया उचका कर झटके खाने लगा और उसका वीर्य उसकी बेटी मे मुह भरने लगा

अभी वो आहे भर रहा था कि बाहर कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई , दोनो सतर्क हुए और भोला ने अपना लन्ड निकाल कर जोरो से भीच कर माल झाड़ने लगा और वही रिन्की अपनी बेकाबू सासो थामती हुई हाफ रही थी ।

इस आधे अधूरे मिलन से दोनो बुरी तरह से तड़प कर रह गये

भोला ने जल्दी से अपना लन्ड पैंट मे भरा और बाथरूम से भागते हुए इतना ही बोला - बेटी ये दरवाजा बन्द कर लेना तु

भोला बाथरूम से निकल कर दरवाजा खोलकर बाहर आया तो सामने देखा मदन था ।

मदन - अरे जीजा कहा रह गये थे

भोला - भाई सलून से आने के बाद नहाने के लिए जा रहा था और तुम दरवाजा पीट दिये , मै सोचा क्या आफत आ गयी ।

मदन हस कर - अरे जीजा नहाना बाद मे ये कुछ समान चाहिए वो अभी कुछ देर बाद दूल्हा तैयार होगा तो लगेंगे

भोला - ठिक है चलो

इधर ये दोनो निकल गये और वही बाथरूम मे रिन्की की चुत पनिया कर रह गयी ।

आज के मौके पर उसे अफसोस भी था तो खुशी भी थी ।

पापा के लन्ड चूसने का मजा था तो नही चुद पाने का गम भी। जैसे तैसे मन रख कर वो नहा कर बाहर निकली और तैयार होकर सिर्फ टीशर्ट और लोवर मे अपने बाल सुखाने के लिए छत पर चली गयी ।

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इधर राज स्कूटी लेके फूलपुर गाव की ओर बढ़ गया था , हाईवे से पक्की सड़क पर उसे दिक्कत तो नही हुई मगर गाव की कच्ची सड़क पर कुल्हे उछलकूद कर उसे बडी दिक्कत सी हुई

जैसे तैसे करके बडी सावधानी करके वो गाव मे आ गया और फिर रंजू ताई के घर की ओर बढ़ गया ।

वही हफ्तों बाद रंजू ताई घर मे खुद को अकेला पाकर अपने कमरे का दरवाजा बन्द किये बिस्तर पर आराम से दिवाल का टेक लिये , अपनी अपनी साडी और पेतिकोट को जांघो तक उठाए एक बड़ा सा मोटा खिरा अपनी बुर मे पेलते हुए सिस्कियां ले रही थी ।

जमुना प्रसाद की ढलती उम्र और खेती बारी की थकान ने उनका सहवास करने की ताकत छीन ली थी , ले देके अपने देवर रंगी से कभी कभार मिलकर अपनी जलती चुत की कामाग्नि बुझा लेती नही तो किसी मोटे ताजे लन्ड की कल्पना मे ऐसे ही खीरे बैगन भरती हुई खुद की प्यास मिटाती ।

बजबजाती बुर मे फचरफचर खीरा पुरा चुत मे कसा हुआ जा रहा था ...





रंजू अपने चरम पे थी उसका जिस्म पसीने से नहाया हुआ था और वो मादक घुटी हुई सिसकियां लेते हुए जोर जोर खिरा अपनी बुर मे पेले जा रही थी कि तभी उसके कमरे के दरवाजे पर दसत्क हुई

"ताई ओ ताई , अरे सो रही हो क्या " , राज ने दरवाजा जोर जोर से खटखटाया ।

भीतर से रंजू की सासे अटक गयी , छोटे कद के वजह से वो दरवाजे की कुन्डी पूरी लगा नही पाती थी , बस उसने अटका कर छोड़ा हुआ था ।

उसकी नजर दरवाजे की कुंडी पर थी और राज के दरवाजा पर जोर से खटखट होने से वो निकल गया और दरवाजा खुलने को हो गया ।

हड़बड़ाई रन्जू ने झट से अपनी साड़ी निचे सरका दी और सामने से राज कमरे मे दाखिल हुआ ।





अस्त व्यस्त और बिखरा पड़ा बिस्तर , घुटनो तक चढा हुआ पेतिकोट और उसपे लिपटी हुई साडी, बिना आंचल का खुला पड़ा जोबन

बिन ब्रा वाले ब्लाउज मे अव्यवस्थित हुए चुचे और उनके उभरे हुए निप्प्ल

इनसब से अलग पसीने से लाल हुआ रंजू ताई का चेहरा देखकर राज को अचरज हुआ ।

राज - क्या हुआ ताई आप ऐसे , अभी तक तैयार नही हुई । मा कबसे आपको राह देख रही है चलिये

रन्जू मुस्कुरा कर - अरे मै तैयार ही हु रे , ये तेरे ताऊ की राह देखते मै सो गयी और कर्मजली बिजली भाग गयी तो ये हाल हुआ पड़ा है ।

राज ने हाथ बढा कर रंजू ताई को खड़ा होने का आग्रह किया , संकोचवश रंजू ताई अपनो जान्घो और चुत के छल्ले मे खीरे को कसते हुए खडी हुई इस भय मे कि कही उसके भतीजे के आगे जांघो के बिच से सफेद मलाई मे लिभडाया खिरा गिर पडेगा तो बड़ी लाज की बात हो जायेगी ।

खड़ा होकर अपने पल्लू से मुह पोछ कर आईने मे खुद को देखये हुए अपने सिने पर आंचल चढाते हुए रंजू मुस्कुरा कर बोली - बेटा बस तु थोड़ी देर रुक मै अभी आई

राज जल्दी दिखाते हुए रन्जू का हाथ पकड कर कमरे से दरवाजे की ओर बढ़ता हुआ - नही नही ताई मै नही रुक सकता आप अभी चलो और मम्मी मुझे ही डाटेगी

रंजू बेबस होकर - अरे बेटा बस 2 मिंट रुक मै जरा बाथरूम से हाथ मुह धूल के आती हु

राज - क्या ताई इतनी सन्दर तो हो आप , मै स्कूटी लेके आया हु आप चलो वहा मेकअप वाली आयी है वो आपको हेरोइन भी बना देगी हिहिहिही

रन्जू हस्ती हुई - धत्त शैतान कही का , अच्छा चल

राज जल्दी जल्दी घर के बाहर आने लगा और रन्जू ने वही साडी के उपर से अपनी जान्घे खोल्कर खीरे को और भीतर घुसेड़ दिया और जांघो को वाप्स कसते हुए धीरे धीरे चल कर बाहर आई इस आश मे की वही राज के यहा ही इसको ठिकाने लगा देगी ।

बाहर आकर उसने घर का दरवाजा बन्द किया और वही सड़क पर राज स्कूटी का एक्सीलरेटर घुरघुराने लगा ।

रंजू आराम आराम से बड़ी सावधानी से चलती हुई राज की स्कूटी पर बैठते हुए बोली - आह्ह बेटा आराम से चलाना थोडा सड़क अच्छा नही है और इस उम्र मे गिराना मत नही तो

राज - अरे ताई अभी आपकी उम्र ही क्या है जो इतना डार रही हो मुझे कसके पकड लो हिहिहिही

रन्जू - चुप बदमाश कही का चल अब

राज ने एक्सीलरेटर बढ़ाया और ज़ूप्प करके स्कूटी गाव से बाहर खड़न्जे तक आ गयी

दो चार हच्के मे रन्जू का खिरा अब और उपर चढने लगा और रन्जू की बुर मे चोट करने लगा ।

रन्जू अपने बुर मे खीरे की चोट पर अपने सासो को थामती लाल हुए चेहरे से होठो के साथ साथ राज का कन्धा भी दबोचने लगी

राज - ओह्ह ताईई डरो मत गिरोगी नही

रंजू - अह्ह्ह उह्ह्ह उम्म्ंम्ं

राज के कान खडे हो गये और वो स्कूटी रोक कर पीछे गरदन फेर कर ताई का परेशान लाल हुआ चेहरा देखा

राज - क्या हुआ ताई

रंजू - आह्ह कुछ नही बेटाआह्ह तु आराम आराम से ले चलह्ह

राज ने इग्नोर किया और स्कूटी स्टार्ट की और फिर कुछ देर मे खड़बड़ खड़ब्ड़ डगर पर स्कूटी उछलने लगी और रन्जू की बुर मे खीरा बच्चेदानी तक चोट करने लगा

रन्जू की सिसकिया और राज के कन्धे पर पकड तेज हुई तो राज ने फिर रोका - ताई क्या हुआ आपको कुछ दिक्कत है

रंजू की चुत बुरी तरह से चोट खा चुकी थी और खीरे की रगड़ ने खुब रस छोड रखा था ।

रन्जू ने आस पास देखा तो सड़क के आस पास कोई नही आ रहा था , और सड़क के बगल मे ही खेत थोडी निचे थी ।

रंजू - बेटा जरा रुक मै पेसाब करके आती हु मुझे दिक्कत हो रही है

राज अफसोस करके - ओह तो घर पर ही लेना था आपको

रन्जू - चुप कर शैतान कही का , बोली तो थी कि बाथरूम जा रही हु

राज हस कर - वो तो आप बोली मुह धुलना था आपको हिहिहिही

राज के हस्ते चेहरे को देखकर रन्जू हस दी और स्कूटी से उतर कर - यही रुक मै आती हु

राज ने ओके बोला और वही रन्जू को लगा कि उसका खिरा अभी भी उत्ना ही कसा होगा मगर उसकी रस छोड़ती बुर ने खीरे को निचे धकेल दिया था और जैसे ही रंजू कुछ कदम आगे बढी उसकी चुत से खीरा सरक गया

रंजू उसे सम्भालने के लिए निचे झुककर चिहुकी जिससे राज की नजर भी उसकी ओर गयि , मगर तब तक देर हो गयी थी ।

रज्जो की साडी के निचे से खिरा सरक कर खडंजे पर गिरा और धूल मे लसरा गया

राज ने जैसे ही ताई की साडी के बिच से खिरा सरक कर निचे गिरता देखा उस्का सुपाडा कुनमनाने लगा ।

रंजू ने घूम कर राज की ओर देखा तो उसे खीरे को घुरता पाया

वो शर्म से सर झुका चुकी थी और राज उसकी ओर बढ़ रहा था ।

रंजू राज को पास आता देख - वो बेटा मै ये वो

राज झुका और खीरे को उठा कर सड़क से दुर खेत मे फेक दिया - ताई आप फ्रेश हो कर आओ मै यही हु ।

राज जेब से रुमाल निकाला और हाथ पोछता हुआ वाप्स अपनी जगह पर आ गया

रंजू स्तब्ध थी और वो राज को निहारे जा रही थी ।

वो राज को समझने की कोसिस कर रही थी मगर नाकाम थी । दिल मे अभी भी भतीजे के आगे लज्जित होने का भाव था ।

रंजू - चल बेटा

राज ने मह्सूस किया कि ताई स्कूटी पर बैठ गयी है और उसने स्कूटी स्टार्ट कर दिया

फिर कुछ देर चुप्पी और हच्के के बाद राज बोला - ताई ये सेफ नही है , ऐसे आपको सीरियस चोट आ सकती थी ।

रंजू लाज मे मुह गिराये सोच रही थी कि इसमे भी राज के मन मे उसके लिये फिकर थी ।

राज - ताई ताऊ आपको प्यार नही करते क्या

रन्जू - नही वो !!

राज - हम्म्म इसीलिए आप पापा के साथ ?

रंजू का कलेजा मुंह को आ गया और उसकी सासे अटक गयी , राज ने आईने मे अपनी ताई का परेशान चेहरा देखा और मुस्कुराया - टेन्सन ना लो मै मम्मी को नही बताने वाला ।

रंजू कापते स्वर मे - तुझे कैसे पता बेटा उस बारे मे

राज हस कर - देखा था एक बार हिहिहिही उस दिन दुकान पर जब पापा आपको गोदाम दिखाने के बहाने हिहिहिही

रंजू मुस्कुराई ।

राज ताई को आईने ने मुस्कुराता देख कर - कभी अपने भतीजे को भी प्यार जताने का मौका दो ताई , पापा से ज्यादा खुशी दूँगा

ताई हसी और राज के सर पर पीछे से चपत लगाती हुई - अच्छा अब तु इतना बड़ा हो गया है कि

राज - आप मौका देके तो देखो ताई

रंजू - चुप बदमाश , सामने देख के चला हम लोग पहुचने वाले है

राज - आ गये ताई ,

राज रंजू को स्कूटी से उतर कर घर मे जाता देख - ताई सुनो ना

रंजू - क्या है बोल

राज इशारे से - प्लीज ना

रंजू हस कर - धत्त !!! हिहिहिही

जारी रहेगी
 
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