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- Dec 5, 2013
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गौरी ममी: ाचा ाचा तू चुप कर मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध ले कर अति हूँ और दवा दीपिका क पास होगी मैं उसे कहती हूँ
मैं अपने कमरे में आ गया और माँ का इंतज़ार करने लगा थोड़ी देर में माँ दूध और दवा ले आयी
मैंने दूध पिया और दवा खा कर सो गया
अब आगे -
अभी मुझे लेते हुए थोड़ी देर hi हुई थी क दीपिका ममी कमरे में आ गयी
दीपिका ममी : अमित क्या सो गए हो तुम ?
अमित : नहीं ममी जी बस अभी लेता hi था आइये
दीपिका ममी : मैं आज बहुत खुश हूँ तुमने आज हम सब क सर ऊँचा कर दिया है
अमित : ये तो सब आपका आशीर्वाद है ममी जी
दीपिका ममी: तो फिर मुझे पार्टी कब मिलेगी ?
अमित : जब आप कहें
दीपिका ममी : जी तो चाहता है अभी पार्टी ले लूँ मगर घर में सब मेहमान मौजूद हैं इस लिए फिर कभी मौका देख कर ले लुंगी
दीपिका ममी बात करती हुई मेरे लैंड की तरफ इशारा कर रही थी और मैं उनका इशारा समझ गया , प्रैक्टिस क चलते मैंने कामिनी ममी और दीपिका ममी को किंतने दिनों से छोड़ा नहीं था इस लिए अब उनकी छूट लैंड क लिए तड़प रही थी
अमित : आप जब कहेंगी आपको पार्टी मिल जाएगी
दीपिका ममी : दीदी कह रही थी तुझे दर्द हो रही है अगर ज़रूरत है तो मैं तेरी अभी मालिश कर देती हूँ
अमित : नहीं ममी जी ये तो नार्मल स बात है आप चिंता का करें वैसे भी अगर किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा
दीपिका ममी : उसकी तू चिंता मत कर मुझे परवाह नहीं है
अमित : नहीं ममी जी मैं नहीं चाहता क कोई आप पर उंगली उठाये अब आप जाइये और मैं भी अब सोता हूँ
उसके बाद दीपिका ममी अपने कमरे में चली गयी और मैं फिर से आँख बंद कर क लेट गया और कोई 15 मिनट्स बाद hi कामिनी ममी भी आ गयी और वो hi सब कहने लगी जो दीपिका ममी कह रही थी मैं जनता था क उनको भी लैंड की प्यास सत्ता रही थी मगर अभी ऐसा कुछ नहीं हो सकता था इस लिए मैंने उनको भी समझा बुझा कर भेज दिया और सो गया
सुबह मैं देर तक सोया शायद दर्द और पैन किलर खाने की वजह से या फिर कल बहुत ज़ोर आज़माइश हो गयी थी उसकी वजह से
सुबह जब मैं सो रहा था तो नाश्ता करता हुए दिव्या मौसी ने वापिस जाने की बात कह दी
दिव्या मौसी : भैया मुझे आज वापिस जाना होगा
विजय मां: ऐसी क्या ज़रूरत ाँ पड़ी अभी तो तुम आयी हो और वैसे भी तुम कहाँ आती हो हमसे मिलने
गौरी ममी : दिव्या क्या तुम्हे हमारे पास रहना ाचा नहीं लगता
दिव्या मौसी : वो बात नहीं है भाभी आप तो जानती हैं शहर में कितनी चोरियां होती हैं उधर घर पर कोई भी नहीं है पीछे से कोई सब लूट कर ले गया तो फिर मैं क्या करुँगी
रजनी मौसी : दिव्या एक दिन और रुक जा कल चली जाना कितनी मुश्किल से तो हम सब इकठ्ठा हुए हैं
दिव्या मौसी : नहीं दीदी 2 दिन से घर टाला लगा हुआ है अब मुझे जाना चाहिए आप आ जाना मेरे पास और रीता दीदी आप भी आ जाना आप लोग तो एते hi नहीं हो
रीता मौसी : तुम तो जानती हो तेरे जीजा जी की नौकरी hi ऐसी है मैं घर से बहार जा hi नहीं पति
रजनी मौसी : दिव्या तू चिंता मत कर अगर भगवन ने चाहा तो शायद हम तेरे शहर में hi आ जाये
दिव्या मौसी : वो कैसे मैं समझी नहीं
रजनी मौसी : तेरे जीजा जी का ट्रांसफर होने वाला है और मैंने उन्हें कहा है क वो तेरे शहर में अपना ट्रांसफर करवा ले फिर तो तेरे पास जब चहु आ जाया करुँगी
दिव्या मौसी : सच दीदी अगर ऐसा हो गया तो कितना ाचा होगा मैं और राधा बस एक दूसरे से hi बातें कर दिल बेहला लेती हैं हमारा कोई रिश्तेदार तो है नहीं मिलने वाला और यहाँ भी भाई भाभी मेरे पास नहीं एते
दिव्या मौसी की बातों से सब उनकी उदासी का अंदाज़ा लगा लेते हैं
गौरी ममी : ऐसा मत कहो दिव्या तुम तो सबकी लाड़ली हो तुम जब कहो हम तुम्हारे पास आ जायेंगे
दिव्या मौसी : अपनों को क्या बुलाना पड़ता है ये तो आपको खुद सोचना चाहिए
विजय मां : अरे मेरी गुड़िया मैं अत तो हूँ जब भी शहर में कोई काम होता है फिर तू दिल क्यों छोटा करती है
दिव्या मौसी : आप hi एते हैं भैया अजय भैया और कमलेश भैया तो नहीं एते मेरे पास . कभी भूले से एक अध् बार आ गए तो आ गए और मेरी तीनो भाभियाँ मुझे तो अपना मानती hi नहीं वर्ण ये भी तो आ सकती हैं
गौरी ममी : अरे बस बस अब ताने मत मारो मैं हर महीने तेरे पास आया करुँगी अब तो अमित ने मोटरसाइकिल ले लिया है वो मुझे ले चलेगा तेरे घर
दिव्या मौसी : मैं लेट हो रही हूँ अब मैं तयारी करती हूँ जाने की , चलो राधा अपना सामान पैक करो
दिव्या मौसी क इस तरह गौरी ममी की बात पर रिएक्शन को रजनी मौसी रीता मौसी और कामिनी ममी अछि तरह समझ गए थे क वो अमित को तो देखना भी पसंद नहीं करती तो उसे अपने घर कैसे आने देगी
थोड़ी देर में दिव्या मौसी और राधा ने अपना सामान पैक कर लिया . सब से मिलने क बाद विजय मां और कमलेश मां दोनों को बस स्टॉप पर बस में बिठा ए
मैं सो hi रहा था क मेरे ऊपर किसी ने पानी दाल दिया
नैना दीदी : उठ जाओ कुम्भ कारन कब तक सोते रहोगे अब तो सूरज भी सर पर आ गया
मैंने पानी पड़ने से हड़बड़ा क उठ गया मेरे सामने नैना दीदी और करुणा दीदी दोनों कड़ी है रही थी और नैना दीदी क हाथ में पानी की बाल्टी पकड़ी हुई थो अभी उन्होंने मुझ पर खली की थी
करुणा दीदी : अभी होश अति या थोड़ा और पानी लॉन तुम्हारे लिए
अमित : ाचा अभी बताता हूँ मैं
मैं जल्दी से बीएड से उठा तो मुझे आगे बढ़ता देख कर दोनों भागने लगी मेरे कमरे से निकल कर दोनों नीचे भागी और में उन दोनों को पकड़ने क लिए उनके पीछे भाग रहा था करुणा दीदी जल्दी से गौरी ममी क कमरे में घुस गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया . नैना दीदी भगति हुई बाथरूम में घुस गयी और जैसे hi दरवाज़ा बंद करने लगी तो मैंने दरवाज़े में तंग फसा कर दरवाज़ा रोक लिया और ज़ोर लगाकर अंदर घुस गया
नैना दीदी : देखो अमित मुझे हाथ मत लगाना हम तो बस तुम्हे जगाने ए थे ममी जी ने कहा था
अमित : जगाने ए थे या नहलाने ए थे अभी मज़ा चखता हूँ
इतना कह कर मैंने बाथरूम में पानी की बाल्टी उठाकर नैना दीदी क ऊपर दाल दी और वो शोर मचने लगी
नैना दीदी : मैं तुझे छोडूंगी नहीं
अमित : पहले पकड़ क तो दिखाओ
इतना कह कर मैं भाग गया . हमारी आवाज़े सुन कर सब आँगन में आ गए थे और हमारी शरारतों का मज़ा ले रहे थे . अब आलम ये था क मैं और नैना दीदी दोनों भीगे हुए थे . मैं आगे दौड़ रहा था और वो मुझे पकड़ने क लिए डी
पीछे दौड़ रही थी
रजनी मौसी : अरे बस करो ये सब क्या हो रहा है . नैना तुम कब बड़ी होगी रुक जाओ
मैं भाग कर गौरी ममी क पीछे छुपने लगा और नैना दीदी मुझे पकड़ने की कोशिश करने लगी
नैना दीदी : ममी जी आप पीछे हटिये मैं इस सांड को अभी मज़ा चखती हूँ
मैं नैना दीदी को चकमा देकर ऊपर भाग गया और नैना दीदी मेरे पीछे पीछे सब हमारी हरकतों से है रहे थे . मैं अपने कमरे में घुस गया और जैसे hi दरवाज़ा बंद करने क लिए पलटा , नैना दीदी भगति हुई सीधा मुझसे टकरा गयी और इस धक्के से हम दोनों गिरते चले गए
मैं पीठ क बल निचे गिरा और नैना दीदी मेरे ऊपर . उनको बचने क लिए मैंने दोनों हाथो से उन्हें थम लिया . गिरते वक़्त मुझे ज़रा भी ख्याल नहीं रहा क मेरे हाथ नैना दीदी क किस हिस्से पर हैं.
हम दोनों hi पानी में भीगे हुए थे जिसकी वजह से हमारे कपडे हमारे जिस्मो से चिपके हुए थे . मेरे हाथो नैना दीदी की पीठ और उनके चूतड़ों पर थे और मैंने अपने दोनों हाथो से उन्हें कास क पकड़ा हुआ था
नैना दीदी को जब सिचुएशन का एहसास हुआ तो उनको अपने नितम्बो पर मेरा हाथ महसूस हुआ . अपने कुंवारे यौवन पर किसी जवान लड़के क हाथों की मजबूत पकड़ का एहसास उनके लिए पहली बार था . वो जल्दी से शर्मा कर मेरे ऊपर से उठ गयी और मुझे डफ्फर कह कर बहार निकल गयी
मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस कर नाहा धोकर तैयार हुआ और नीचे आ गया
गौरी ममी : आ गया मेरा बीटा अब तबियत कैसी है
रजनी मौसी : क्या हुआ इसे
रीता मौसी : हाँ दीदी क्या हुआ इसे आपने हमें बताया नहीं
अमित : अरे मेरी प्यारी प्यारी माताओ मुझे कुछ नहीं हुआ वो बस कल क मैच की वजह से थोड़ा दर्द था बस अब मैं बिलकुल ठीक हूँ
कामिनी ममी मेरे लिए नाश्ता लती है
कामिनी ममी : तभी तो सुबह सुबह इतनी उछाल कूद कर रहा है
करुणा दीदी : उछाल कूद तो करेगा hi बन्दर जो ठहरा
अमित : और बन्दर की बहिन यानि क बंदरिया
मेरी बात पर सब हसने लगे मगर करुणा दीदी ने मुँह बना लिया
करुणा दीदी : मुझे बंदरिया कहा अभी मज़ा चखती हूँ
नेहा दीदी : बस करो करुणा उसे नाश्ता करने दो हर वक़्त मस्ती करती रहती हो
मैं नाश्ता कर रहा था क नैना दीदी भी आ गयी और मुझे पीठ पर चिकोटी काट ली जिसकी वजह से मेरे मुँह से आह निकल गयी
नैना दीदी : डफ्फर तेरी वजह से मुझे दूसरी बार नहाना पड़ा और कपडे बदलने पड़े
रजनी मौसी : ये क्या हरकत है नैना आखिर तुम कब समझदार बनोगी
अमित : ाचा हुआ न दीदी वैसे तो घर पर नहाती hi नहीं हो और यहाँ दो दो बार नहाने को मिल रहा है
नैना दीदी : तुझे तो बाद में देख लुंगी
रीता मौसी : कितना ाचा लगता है बचो को एक साथ मस्ती करते देख कर हम भी बचपन में ऐसे hi करते थे कमलेश और अजय भैया क साथ
रजनी मौसी : कितने अचे दिन थे जब हम सब साथ हुआ करते थे और दामिनी और दिव्या तो सबकी नक् में डैम कर देती थी
रजनी मौसी की बात पर सबकी नज़रें रजनी मौसी की तरफ घूम गयी और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ
मैं ये नाम सुन कर मौसी की तरफ देखने लगा और वो जल्दी से अपने आंसू चिपटी हुई उठ कर चली गयी उनके पीछे पीछे गौरी ममी और रीता मौसी भी चली गयी मगर मेरे हाथ वहीँ रुक गए
आजतक मुझे मेरे माता पिता क बारे में किसी ने कुछ बताया नहीं था और आज दामिनी नाम सुन कर मुझे पता चल गया क ये ज़रूर मेरी माँ का नाम है . माँ का नाम पता चलते hi मेरे दिलो दिमाग में दर्द की लहर उठने लगी और मैं अपने आप में hi खोता चला गया तभी दीपिका ममी ने मुझे हिलाया
दीपिका ममी : क्या हुआ अमित तुम खाना क्यों नहीं खा रहे
मैं कुछ नहीं कह पाया और बस खाना छोड़ कर रजनी मौसी क पीछे चला गया मगर दरवाज़ा अंदर से बंद था अब मुझे अपने माता पिता क बारे में जानने की इच्छा होने लगी . हालाँकि माँ बाबा ने कभी अपने प्यार में कमी नहीं राखी थी और मैं जनता था क उन्होंने ने hi सबको मन कर रखा मुझे कुछ बताने से इसी लिए आजतक मैंने उनकी कोई तस्वीर तक नहीं देखि मगर अब मेरा सबर का बांध टूट रहा था और मेरी आँखों में पानी आने लगा था
मेरी हालत देख कर कामिनी ममी और दीपिका ममी दोनों मेरे पास आ गयी और मुझे सँभालने लगी
दीपिका ममी मुझे अपने कमरे में ले गयी और बीएड पर बिठा कर दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आयी
दीपिका ममी : क्या हुआ अमित तुम कुछ बोल क्यों नहीं रहे
अमित : मुझे आखिर मेरे माता पिता क बारे में क्यों नहीं बताया जाता आखिर क्यों सब मुझसे उनके बारे में हर बात छुपाते हैं
दीपिका ममी : क्या आज तक बड़ी दीदी और बड़े भैया ने क्या माता पिता क प्यार में कमी अनिमे दी है जो तुम ऐसी बातें मर रहे हो
अमित : उनके प्यार में तो कोई कमी हो hi नहीं सकती ममी जी पर क्या मुझे हक़ नहीं है अपने माता पिता क बारे में जानने का आखिर किस वजह से मुझे कोई उनके बारे में नहीं बताता. काम से काम आप hi बता दीजिये
दीपिका ममी : मैं मजबूर हूँ अमित बड़े भैया और गौरी दीदी ने सबको अपनी कसम दे राखी है और तुम क्या चाहते हो क हम उनकी कसम तोड़ दे ?
अमित : ठीक है अगर आप भी मुझे नहीं बताना चाहती तो आज क बाद आप मेरे कमरे में मत आना
इतना कह कर मैं गुस्से में उनके कमरे से निकल गया और सीधा घर से बहार निकल गया मुझे इस वक़्त बहुत गुस्सा आ रहा था और अंदर से मैं बहुत दुखी भी था मैं गुस्से में किधर जा रहा था मुझे कोई खबर नहीं थी और चलते चलते में जंगल की तरफ चला गया
मेरे मन अंदर से बहुत दुखी था और मुझे एकांत चाहिए था जहाँ बैठ कर मैं अपना मन हल्का कर सकू इसी लिए अपने hi ख्यालों में दुबे हुए मेरे कदम जंगल वाले झोंपड़े की तरफ चल पड़े और चलता चलता मैं झोंपड़े क पास पहुँच गया
जैसे hi मैं झोंपड़े क पास पहुँच मुझे एहसास हुआ जैसे कोई अंदर है . झोंपड़े क अंदर से सिसकिओन की आवाज़ आ रही थी . सिसकिओन की आवाज़ सुनते hi मेरे दिमाग सब कुछ भूल कर उस आवाज़ की तरफ हो गया
मैं सोचने लगा क यहाँ कौन हो सकता है यहाँ पर तो मां आया करते थे मीणा को लेकर और अब तो वो यहाँ से जा चुकी है . छोटे मां भी अब सुधर चुके हैं फिर कौन है. ये जानने क लिए मैं छिप कर अंदर देखने लगा
अंदर का नज़ारा देखते hi मुझे गुस्सा आ गया
‘ लगता है ये सुधरने वाले नहीं हैं इन्हे बहार की छूट मरने का चस्का लग चूका है’
अंदर कमलेश मां एक औरत को घोड़ी बना कर पीछे से उसकी छूट में लैंड पेल रहे थे . औरत ने सदी पहनी हुई थी शायद जल्दी जल्दी में दोनों ने ये प्रोग्राम बनाया था इसी लिए तो दोनों ने कपडे नहीं उतरे थे .
औरत का झुकी हुई थी जिसकी वजह से मुझे उसका चेहरा नहीं नज़र आ रहा था मगर उसका जिस्म काबिले गौर था
उसका जिस्म गदराया हुआ था और रंग गोरा था पेट हल्का सा था मगर छोटाड बड़े थे जिसे देख कर किसी का भी लैंड खड़ा हो जाये. धक्को क साथ उस औरत की सिसकिओन क इलावा चूड़ियों और पायल क छनकने की आवाज़ भी आ रही थी
औरत : कक्कक्स आअह्ह्ह आआह्ह्ह आह्हः सीसीसी. ोुह्ह्ह हम्म्म्म जल्दी करो मुझे देर हो रही है कक्कक्स आअह्ह्ह्हह कोई आ गया तो मैं बर्बाद हो जाउंगी कक्कक्स आह्ह्ह्ह और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ आआह्ह्ह्ह आह्हः आह्हः
छोटे मां : बस 2 मिनट और मेरा होने hi वाला है
मां फुल स्पीड में धक्के मर रहे थे ऐसा लग रहा था क उनका काम होने hi वाला है और उनका पानी निकल गया इसके साथ hi मां शांत पद गए जबकि वो औरत अपनी कमर हिला रही थी शायद उसका पानी नहीं निकला था . वो मां को और धक्के मरने को कह रही थी मगर मां अब पास्ट हो चुके थे
पानी निकलते hi मां ने जल्दी से लैंड पेण्ट क अंदर किया और अपने कपडे ठीक कर क बहार निकल गए मैं जल्दी से छिप गया
मां क जाते hi मैंने सोचा क्यों न इस औरत का चेहरा देखूं आखिर ये है कौन. जैसे hi मैंने अंदर झाँका तो वो औरत सीधे लेती हुई अपनी टंगे फैलाकर सदी को उठाये हुए अपनी छूट में तेज़ तेज़ उंगली कर रही थी और अपनी आग को ठंडा करने की कोशिश कर रही थी. मैंने जब उस औरत का चेहरा देखा तो मैं हैरान हो गया
ये तो पूजा भाभी थी जो हमारे गाओं में hi रहती थी 3 साल पहले hi ये ब्याह क हमारे गाओं आयी थी इसका पति विदेश में नौकरी करता था और यहाँ वो अपनी सास ससुर और ननद क साथ रहती थी
पूजा भाभी की उम्र लगभग 25 साल थी रंग गौरा था जिस्म गदराया हुआ था
36 क बूब्स 30 की कमर और 38 क चूतड़
पूजा भाभी देखने में बहुत खूबसूरत थी मुझे हैरानी हो रही थी क इतनी खूबसूरत औरत मां ने कैसे पता ली और पूजा भाभी को मां में क्या नज़र आया वो तो उम्र में उससे कितने बड़े हैं
मैं ये सब सोच hi रहा था क पूजा भाभी की तेज़ सिसकी से मैं अपनी सोच से बहार आया. पूजा का शायद पानी निकल गया था और उसका शरीर झटके ले रहा था .
मैंने सोचा क क्यों न कुछ तस्वीरें उतर लूँ मगर जब जेब में हाथ डाला तो पता चला साला मोबाइल तो घर में hi रह गया था .
पूजा भाभी का मस्त फिगर देख कर मेरा मन मचलने लगा था कितने दिनों से मैंने चुदाई नहीं की थी और ऐसा स्नेहरा मौका मैं हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसी लिए मैंने अंदर जाने का फैसला किया
गौरी ममी: ाचा ाचा तू चुप कर मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध ले कर अति हूँ और दवा दीपिका क पास होगी मैं उसे कहती हूँ
मैं अपने कमरे में आ गया और माँ का इंतज़ार करने लगा थोड़ी देर में माँ दूध और दवा ले आयी
मैंने दूध पिया और दवा खा कर सो गया
अब आगे -
अभी मुझे लेते हुए थोड़ी देर hi हुई थी क दीपिका ममी कमरे में आ गयी
दीपिका ममी : अमित क्या सो गए हो तुम ?
अमित : नहीं ममी जी बस अभी लेता hi था आइये
दीपिका ममी : मैं आज बहुत खुश हूँ तुमने आज हम सब क सर ऊँचा कर दिया है
अमित : ये तो सब आपका आशीर्वाद है ममी जी
दीपिका ममी: तो फिर मुझे पार्टी कब मिलेगी ?
अमित : जब आप कहें
दीपिका ममी : जी तो चाहता है अभी पार्टी ले लूँ मगर घर में सब मेहमान मौजूद हैं इस लिए फिर कभी मौका देख कर ले लुंगी
दीपिका ममी बात करती हुई मेरे लैंड की तरफ इशारा कर रही थी और मैं उनका इशारा समझ गया , प्रैक्टिस क चलते मैंने कामिनी ममी और दीपिका ममी को किंतने दिनों से छोड़ा नहीं था इस लिए अब उनकी छूट लैंड क लिए तड़प रही थी
अमित : आप जब कहेंगी आपको पार्टी मिल जाएगी
दीपिका ममी : दीदी कह रही थी तुझे दर्द हो रही है अगर ज़रूरत है तो मैं तेरी अभी मालिश कर देती हूँ
अमित : नहीं ममी जी ये तो नार्मल स बात है आप चिंता का करें वैसे भी अगर किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा
दीपिका ममी : उसकी तू चिंता मत कर मुझे परवाह नहीं है
अमित : नहीं ममी जी मैं नहीं चाहता क कोई आप पर उंगली उठाये अब आप जाइये और मैं भी अब सोता हूँ
उसके बाद दीपिका ममी अपने कमरे में चली गयी और मैं फिर से आँख बंद कर क लेट गया और कोई 15 मिनट्स बाद hi कामिनी ममी भी आ गयी और वो hi सब कहने लगी जो दीपिका ममी कह रही थी मैं जनता था क उनको भी लैंड की प्यास सत्ता रही थी मगर अभी ऐसा कुछ नहीं हो सकता था इस लिए मैंने उनको भी समझा बुझा कर भेज दिया और सो गया
सुबह मैं देर तक सोया शायद दर्द और पैन किलर खाने की वजह से या फिर कल बहुत ज़ोर आज़माइश हो गयी थी उसकी वजह से
सुबह जब मैं सो रहा था तो नाश्ता करता हुए दिव्या मौसी ने वापिस जाने की बात कह दी
दिव्या मौसी : भैया मुझे आज वापिस जाना होगा
विजय मां: ऐसी क्या ज़रूरत ाँ पड़ी अभी तो तुम आयी हो और वैसे भी तुम कहाँ आती हो हमसे मिलने
गौरी ममी : दिव्या क्या तुम्हे हमारे पास रहना ाचा नहीं लगता
दिव्या मौसी : वो बात नहीं है भाभी आप तो जानती हैं शहर में कितनी चोरियां होती हैं उधर घर पर कोई भी नहीं है पीछे से कोई सब लूट कर ले गया तो फिर मैं क्या करुँगी
रजनी मौसी : दिव्या एक दिन और रुक जा कल चली जाना कितनी मुश्किल से तो हम सब इकठ्ठा हुए हैं
दिव्या मौसी : नहीं दीदी 2 दिन से घर टाला लगा हुआ है अब मुझे जाना चाहिए आप आ जाना मेरे पास और रीता दीदी आप भी आ जाना आप लोग तो एते hi नहीं हो
रीता मौसी : तुम तो जानती हो तेरे जीजा जी की नौकरी hi ऐसी है मैं घर से बहार जा hi नहीं पति
रजनी मौसी : दिव्या तू चिंता मत कर अगर भगवन ने चाहा तो शायद हम तेरे शहर में hi आ जाये
दिव्या मौसी : वो कैसे मैं समझी नहीं
रजनी मौसी : तेरे जीजा जी का ट्रांसफर होने वाला है और मैंने उन्हें कहा है क वो तेरे शहर में अपना ट्रांसफर करवा ले फिर तो तेरे पास जब चहु आ जाया करुँगी
दिव्या मौसी : सच दीदी अगर ऐसा हो गया तो कितना ाचा होगा मैं और राधा बस एक दूसरे से hi बातें कर दिल बेहला लेती हैं हमारा कोई रिश्तेदार तो है नहीं मिलने वाला और यहाँ भी भाई भाभी मेरे पास नहीं एते
दिव्या मौसी की बातों से सब उनकी उदासी का अंदाज़ा लगा लेते हैं
गौरी ममी : ऐसा मत कहो दिव्या तुम तो सबकी लाड़ली हो तुम जब कहो हम तुम्हारे पास आ जायेंगे
दिव्या मौसी : अपनों को क्या बुलाना पड़ता है ये तो आपको खुद सोचना चाहिए
विजय मां : अरे मेरी गुड़िया मैं अत तो हूँ जब भी शहर में कोई काम होता है फिर तू दिल क्यों छोटा करती है
दिव्या मौसी : आप hi एते हैं भैया अजय भैया और कमलेश भैया तो नहीं एते मेरे पास . कभी भूले से एक अध् बार आ गए तो आ गए और मेरी तीनो भाभियाँ मुझे तो अपना मानती hi नहीं वर्ण ये भी तो आ सकती हैं
गौरी ममी : अरे बस बस अब ताने मत मारो मैं हर महीने तेरे पास आया करुँगी अब तो अमित ने मोटरसाइकिल ले लिया है वो मुझे ले चलेगा तेरे घर
दिव्या मौसी : मैं लेट हो रही हूँ अब मैं तयारी करती हूँ जाने की , चलो राधा अपना सामान पैक करो
दिव्या मौसी क इस तरह गौरी ममी की बात पर रिएक्शन को रजनी मौसी रीता मौसी और कामिनी ममी अछि तरह समझ गए थे क वो अमित को तो देखना भी पसंद नहीं करती तो उसे अपने घर कैसे आने देगी
थोड़ी देर में दिव्या मौसी और राधा ने अपना सामान पैक कर लिया . सब से मिलने क बाद विजय मां और कमलेश मां दोनों को बस स्टॉप पर बस में बिठा ए
मैं सो hi रहा था क मेरे ऊपर किसी ने पानी दाल दिया
नैना दीदी : उठ जाओ कुम्भ कारन कब तक सोते रहोगे अब तो सूरज भी सर पर आ गया
मैंने पानी पड़ने से हड़बड़ा क उठ गया मेरे सामने नैना दीदी और करुणा दीदी दोनों कड़ी है रही थी और नैना दीदी क हाथ में पानी की बाल्टी पकड़ी हुई थो अभी उन्होंने मुझ पर खली की थी
करुणा दीदी : अभी होश अति या थोड़ा और पानी लॉन तुम्हारे लिए
अमित : ाचा अभी बताता हूँ मैं
मैं जल्दी से बीएड से उठा तो मुझे आगे बढ़ता देख कर दोनों भागने लगी मेरे कमरे से निकल कर दोनों नीचे भागी और में उन दोनों को पकड़ने क लिए उनके पीछे भाग रहा था करुणा दीदी जल्दी से गौरी ममी क कमरे में घुस गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया . नैना दीदी भगति हुई बाथरूम में घुस गयी और जैसे hi दरवाज़ा बंद करने लगी तो मैंने दरवाज़े में तंग फसा कर दरवाज़ा रोक लिया और ज़ोर लगाकर अंदर घुस गया
नैना दीदी : देखो अमित मुझे हाथ मत लगाना हम तो बस तुम्हे जगाने ए थे ममी जी ने कहा था
अमित : जगाने ए थे या नहलाने ए थे अभी मज़ा चखता हूँ
इतना कह कर मैंने बाथरूम में पानी की बाल्टी उठाकर नैना दीदी क ऊपर दाल दी और वो शोर मचने लगी
नैना दीदी : मैं तुझे छोडूंगी नहीं
अमित : पहले पकड़ क तो दिखाओ
इतना कह कर मैं भाग गया . हमारी आवाज़े सुन कर सब आँगन में आ गए थे और हमारी शरारतों का मज़ा ले रहे थे . अब आलम ये था क मैं और नैना दीदी दोनों भीगे हुए थे . मैं आगे दौड़ रहा था और वो मुझे पकड़ने क लिए डी
पीछे दौड़ रही थी
रजनी मौसी : अरे बस करो ये सब क्या हो रहा है . नैना तुम कब बड़ी होगी रुक जाओ
मैं भाग कर गौरी ममी क पीछे छुपने लगा और नैना दीदी मुझे पकड़ने की कोशिश करने लगी
नैना दीदी : ममी जी आप पीछे हटिये मैं इस सांड को अभी मज़ा चखती हूँ
मैं नैना दीदी को चकमा देकर ऊपर भाग गया और नैना दीदी मेरे पीछे पीछे सब हमारी हरकतों से है रहे थे . मैं अपने कमरे में घुस गया और जैसे hi दरवाज़ा बंद करने क लिए पलटा , नैना दीदी भगति हुई सीधा मुझसे टकरा गयी और इस धक्के से हम दोनों गिरते चले गए
मैं पीठ क बल निचे गिरा और नैना दीदी मेरे ऊपर . उनको बचने क लिए मैंने दोनों हाथो से उन्हें थम लिया . गिरते वक़्त मुझे ज़रा भी ख्याल नहीं रहा क मेरे हाथ नैना दीदी क किस हिस्से पर हैं.
हम दोनों hi पानी में भीगे हुए थे जिसकी वजह से हमारे कपडे हमारे जिस्मो से चिपके हुए थे . मेरे हाथो नैना दीदी की पीठ और उनके चूतड़ों पर थे और मैंने अपने दोनों हाथो से उन्हें कास क पकड़ा हुआ था
नैना दीदी को जब सिचुएशन का एहसास हुआ तो उनको अपने नितम्बो पर मेरा हाथ महसूस हुआ . अपने कुंवारे यौवन पर किसी जवान लड़के क हाथों की मजबूत पकड़ का एहसास उनके लिए पहली बार था . वो जल्दी से शर्मा कर मेरे ऊपर से उठ गयी और मुझे डफ्फर कह कर बहार निकल गयी
मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस कर नाहा धोकर तैयार हुआ और नीचे आ गया
गौरी ममी : आ गया मेरा बीटा अब तबियत कैसी है
रजनी मौसी : क्या हुआ इसे
रीता मौसी : हाँ दीदी क्या हुआ इसे आपने हमें बताया नहीं
अमित : अरे मेरी प्यारी प्यारी माताओ मुझे कुछ नहीं हुआ वो बस कल क मैच की वजह से थोड़ा दर्द था बस अब मैं बिलकुल ठीक हूँ
कामिनी ममी मेरे लिए नाश्ता लती है
कामिनी ममी : तभी तो सुबह सुबह इतनी उछाल कूद कर रहा है
करुणा दीदी : उछाल कूद तो करेगा hi बन्दर जो ठहरा
अमित : और बन्दर की बहिन यानि क बंदरिया
मेरी बात पर सब हसने लगे मगर करुणा दीदी ने मुँह बना लिया
करुणा दीदी : मुझे बंदरिया कहा अभी मज़ा चखती हूँ
नेहा दीदी : बस करो करुणा उसे नाश्ता करने दो हर वक़्त मस्ती करती रहती हो
मैं नाश्ता कर रहा था क नैना दीदी भी आ गयी और मुझे पीठ पर चिकोटी काट ली जिसकी वजह से मेरे मुँह से आह निकल गयी
नैना दीदी : डफ्फर तेरी वजह से मुझे दूसरी बार नहाना पड़ा और कपडे बदलने पड़े
रजनी मौसी : ये क्या हरकत है नैना आखिर तुम कब समझदार बनोगी
अमित : ाचा हुआ न दीदी वैसे तो घर पर नहाती hi नहीं हो और यहाँ दो दो बार नहाने को मिल रहा है
नैना दीदी : तुझे तो बाद में देख लुंगी
रीता मौसी : कितना ाचा लगता है बचो को एक साथ मस्ती करते देख कर हम भी बचपन में ऐसे hi करते थे कमलेश और अजय भैया क साथ
रजनी मौसी : कितने अचे दिन थे जब हम सब साथ हुआ करते थे और दामिनी और दिव्या तो सबकी नक् में डैम कर देती थी
रजनी मौसी की बात पर सबकी नज़रें रजनी मौसी की तरफ घूम गयी और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ
मैं ये नाम सुन कर मौसी की तरफ देखने लगा और वो जल्दी से अपने आंसू चिपटी हुई उठ कर चली गयी उनके पीछे पीछे गौरी ममी और रीता मौसी भी चली गयी मगर मेरे हाथ वहीँ रुक गए
आजतक मुझे मेरे माता पिता क बारे में किसी ने कुछ बताया नहीं था और आज दामिनी नाम सुन कर मुझे पता चल गया क ये ज़रूर मेरी माँ का नाम है . माँ का नाम पता चलते hi मेरे दिलो दिमाग में दर्द की लहर उठने लगी और मैं अपने आप में hi खोता चला गया तभी दीपिका ममी ने मुझे हिलाया
दीपिका ममी : क्या हुआ अमित तुम खाना क्यों नहीं खा रहे
मैं कुछ नहीं कह पाया और बस खाना छोड़ कर रजनी मौसी क पीछे चला गया मगर दरवाज़ा अंदर से बंद था अब मुझे अपने माता पिता क बारे में जानने की इच्छा होने लगी . हालाँकि माँ बाबा ने कभी अपने प्यार में कमी नहीं राखी थी और मैं जनता था क उन्होंने ने hi सबको मन कर रखा मुझे कुछ बताने से इसी लिए आजतक मैंने उनकी कोई तस्वीर तक नहीं देखि मगर अब मेरा सबर का बांध टूट रहा था और मेरी आँखों में पानी आने लगा था
मेरी हालत देख कर कामिनी ममी और दीपिका ममी दोनों मेरे पास आ गयी और मुझे सँभालने लगी
दीपिका ममी मुझे अपने कमरे में ले गयी और बीएड पर बिठा कर दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आयी
दीपिका ममी : क्या हुआ अमित तुम कुछ बोल क्यों नहीं रहे
अमित : मुझे आखिर मेरे माता पिता क बारे में क्यों नहीं बताया जाता आखिर क्यों सब मुझसे उनके बारे में हर बात छुपाते हैं
दीपिका ममी : क्या आज तक बड़ी दीदी और बड़े भैया ने क्या माता पिता क प्यार में कमी अनिमे दी है जो तुम ऐसी बातें मर रहे हो
अमित : उनके प्यार में तो कोई कमी हो hi नहीं सकती ममी जी पर क्या मुझे हक़ नहीं है अपने माता पिता क बारे में जानने का आखिर किस वजह से मुझे कोई उनके बारे में नहीं बताता. काम से काम आप hi बता दीजिये
दीपिका ममी : मैं मजबूर हूँ अमित बड़े भैया और गौरी दीदी ने सबको अपनी कसम दे राखी है और तुम क्या चाहते हो क हम उनकी कसम तोड़ दे ?
अमित : ठीक है अगर आप भी मुझे नहीं बताना चाहती तो आज क बाद आप मेरे कमरे में मत आना
इतना कह कर मैं गुस्से में उनके कमरे से निकल गया और सीधा घर से बहार निकल गया मुझे इस वक़्त बहुत गुस्सा आ रहा था और अंदर से मैं बहुत दुखी भी था मैं गुस्से में किधर जा रहा था मुझे कोई खबर नहीं थी और चलते चलते में जंगल की तरफ चला गया
मेरे मन अंदर से बहुत दुखी था और मुझे एकांत चाहिए था जहाँ बैठ कर मैं अपना मन हल्का कर सकू इसी लिए अपने hi ख्यालों में दुबे हुए मेरे कदम जंगल वाले झोंपड़े की तरफ चल पड़े और चलता चलता मैं झोंपड़े क पास पहुँच गया
जैसे hi मैं झोंपड़े क पास पहुँच मुझे एहसास हुआ जैसे कोई अंदर है . झोंपड़े क अंदर से सिसकिओन की आवाज़ आ रही थी . सिसकिओन की आवाज़ सुनते hi मेरे दिमाग सब कुछ भूल कर उस आवाज़ की तरफ हो गया
मैं सोचने लगा क यहाँ कौन हो सकता है यहाँ पर तो मां आया करते थे मीणा को लेकर और अब तो वो यहाँ से जा चुकी है . छोटे मां भी अब सुधर चुके हैं फिर कौन है. ये जानने क लिए मैं छिप कर अंदर देखने लगा
अंदर का नज़ारा देखते hi मुझे गुस्सा आ गया
‘ लगता है ये सुधरने वाले नहीं हैं इन्हे बहार की छूट मरने का चस्का लग चूका है’
अंदर कमलेश मां एक औरत को घोड़ी बना कर पीछे से उसकी छूट में लैंड पेल रहे थे . औरत ने सदी पहनी हुई थी शायद जल्दी जल्दी में दोनों ने ये प्रोग्राम बनाया था इसी लिए तो दोनों ने कपडे नहीं उतरे थे .
औरत का झुकी हुई थी जिसकी वजह से मुझे उसका चेहरा नहीं नज़र आ रहा था मगर उसका जिस्म काबिले गौर था
उसका जिस्म गदराया हुआ था और रंग गोरा था पेट हल्का सा था मगर छोटाड बड़े थे जिसे देख कर किसी का भी लैंड खड़ा हो जाये. धक्को क साथ उस औरत की सिसकिओन क इलावा चूड़ियों और पायल क छनकने की आवाज़ भी आ रही थी
औरत : कक्कक्स आअह्ह्ह आआह्ह्ह आह्हः सीसीसी. ोुह्ह्ह हम्म्म्म जल्दी करो मुझे देर हो रही है कक्कक्स आअह्ह्ह्हह कोई आ गया तो मैं बर्बाद हो जाउंगी कक्कक्स आह्ह्ह्ह और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ आआह्ह्ह्ह आह्हः आह्हः
छोटे मां : बस 2 मिनट और मेरा होने hi वाला है
मां फुल स्पीड में धक्के मर रहे थे ऐसा लग रहा था क उनका काम होने hi वाला है और उनका पानी निकल गया इसके साथ hi मां शांत पद गए जबकि वो औरत अपनी कमर हिला रही थी शायद उसका पानी नहीं निकला था . वो मां को और धक्के मरने को कह रही थी मगर मां अब पास्ट हो चुके थे
पानी निकलते hi मां ने जल्दी से लैंड पेण्ट क अंदर किया और अपने कपडे ठीक कर क बहार निकल गए मैं जल्दी से छिप गया
मां क जाते hi मैंने सोचा क्यों न इस औरत का चेहरा देखूं आखिर ये है कौन. जैसे hi मैंने अंदर झाँका तो वो औरत सीधे लेती हुई अपनी टंगे फैलाकर सदी को उठाये हुए अपनी छूट में तेज़ तेज़ उंगली कर रही थी और अपनी आग को ठंडा करने की कोशिश कर रही थी. मैंने जब उस औरत का चेहरा देखा तो मैं हैरान हो गया
ये तो पूजा भाभी थी जो हमारे गाओं में hi रहती थी 3 साल पहले hi ये ब्याह क हमारे गाओं आयी थी इसका पति विदेश में नौकरी करता था और यहाँ वो अपनी सास ससुर और ननद क साथ रहती थी
पूजा भाभी की उम्र लगभग 25 साल थी रंग गौरा था जिस्म गदराया हुआ था
36 क बूब्स 30 की कमर और 38 क चूतड़
पूजा भाभी देखने में बहुत खूबसूरत थी मुझे हैरानी हो रही थी क इतनी खूबसूरत औरत मां ने कैसे पता ली और पूजा भाभी को मां में क्या नज़र आया वो तो उम्र में उससे कितने बड़े हैं
मैं ये सब सोच hi रहा था क पूजा भाभी की तेज़ सिसकी से मैं अपनी सोच से बहार आया. पूजा का शायद पानी निकल गया था और उसका शरीर झटके ले रहा था .
मैंने सोचा क क्यों न कुछ तस्वीरें उतर लूँ मगर जब जेब में हाथ डाला तो पता चला साला मोबाइल तो घर में hi रह गया था .
पूजा भाभी का मस्त फिगर देख कर मेरा मन मचलने लगा था कितने दिनों से मैंने चुदाई नहीं की थी और ऐसा स्नेहरा मौका मैं हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसी लिए मैंने अंदर जाने का फैसला किया