Adultery Manhoos se mahan tak - Page 4 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 27



फिर वो शख्स अमित क कमरे की तरफ अत है , दरवाज़ा बंद था मगर लोच नहीं था इस लिए वो शख्स जब दरवाज़े को खोलने की कोशिश करता है तो दरवाज़ा खुल जाता है


कमरे क अंदर नाईट बल्ब की हलकी रौशनी थी मगर वो शख्स अछि तरह देख प् रहा था क अमित का जिस्म कमर से ऊपर बिलकुल नंगा था और वो सो रहा था बिस्तर पर बीएड शीट पूरी अस्त व्यस्त थी

एक नज़र देखने क बाद वो शख्स दरवाज़ा बंद कर क चुप चाप अपने कमरे में लौट अत है और अमित और दीपिका क बारे में सोचते हुए सो जाता है

अब आगे -

सुबह अमित अपनी रूटीन से स्कूल जाता है आज टीचर फाइनल एक्साम्स की डेट बता देते हैं बोर्ड की क्लास होने क कारन मंडे से सबको स्कूल से फ्री कर दिया गया और एक्साम्स की तयारी घर बैठ कर करने को कह दिया गया

एक्साम्स 10 दिन बाद शुरू होने वाले थे स्कूल से घर आकर अमित सबको अपने एक्साम्स का बता देता है

गौरी : ठीक है मंडे से तू कहीं बहार नहीं जाना न किसी दोस्त से मिलना न hi खेतों में जाना , फाइनल एक्साम्स हैं मन लगा कर पदों और अचे मार्क्स ले कर पास हो

अमित : माँ इतने दिन तो मैं बोआर हो जाऊंगा काम से खेतों में जाने की तो आज्ञा दे दीजिये

गौरी : बिलकुल नहीं और तू खेतों में क्या करेगा एक्साम्स देने क बाद लगे रहना खेतों में

अमित : माँ मेरी पूरी तयारी है आप चिंता न करे मैं सब कर लूंगा

गौरी : एक बार कह दिया तो कह दिया बस

दीपिका : दीदी ठीक कह रही हैं बस थोड़े दिनों की तो बात है वैसे भी चाहे तूने साडी तयारी की हुई है पर बार बार अपनी तयारी को और पक्का कर और स्कूल में टॉप कर क दिखा

कामिनी : अब सिर्फ पड़े पर hi ध्यान देना बाकि सब काम बंद करदे

खाना खाने क बाद सब आराम करने चले जाते हैं गौरी अमित को आज से hi घर में रहकर पड़े करने का बोल देती है

शाम तक अमित अपने कमरे में hi आराम करता है और शाम को बैठ कर पड़ने लगता है

हॉस्पिटल में आज रत को विजय रुकने वाला था रत का खाना सब मिल कर कहते हैं अजय और कमलेश घर पर थे विजय जा चूका था . खाना खा कर सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं सोने

अमित कमरे में आ कर पड़ने लगता है रत को 12 बजे क बाद दीपिका कमरे में आ जाती है और अमित पड़े कर रहा था

दीपिका : हम्म तो आज से hi काम शुरू कर दिया तुमने

अमित : माँ ने आज से hi खेतों में जाने से मन कर दिया तो सोचा आज से तयारी भी शुरू कर दी जाये

दीपिका : ये तुमने ाचा सोचा अगर किसी भी हेल्प की ज़रूरत हो स्टडी में तो बेजीकहाक बता देना मुझे ख़ुशी होगी

अमित : ज़रूर ममी जी आप को hi तो बताता हूँ पहले भी

दीपिका : और एक बात अब तुम्हारे एक्साम्स आ गए हैं तो हम तुम्हारे एक्साम्स ख़तम होने तक सेक्स नहीं करेंगे

अमित : आप इतनी टेंशन मत लीजिये मैं मैनेज कर सकता हूँ

दीपिका : नहीं मैं चाहती हूँ तुम सिर्फ स्टडी पर कंसन्ट्रेट करो और टॉप करो ताकि आगे पड़े कर क अपनी लाइफ को सेट कर सको वर्ण तुम भी यहीं खेतो में hi फास कर रह जाओगे

अमित : ममी जी मैं आगे पड़ना तो चाहता हूँ मगर जो सुकून यहाँ गाओं की मिटटी में मुझे मिलता है वो शहर में नहीं मिलेगा

दीपिका : वो बाद की बात है क्या करना है क्या नहीं फ़िलहाल तुम्हारे एक्साम्स हैं तो कल से सेक्स बंद

अमित : कल से ?

दीपिका : मुस्कुराते हुए ) आज आखिरी बार इसके बाद एक्साम्स ख़तम होने क बाद

अमित अपनी किताबें बंद कर क दीपिका पर टूट पड़ता है और उसकी धुआंधार चुदाई करता है क्यूंकि इसके बाद एक महीने तक उसे दोबारा मौका नहीं मिलने वाला था इस लिए अमित आज hi साडी कसार निकल देना चाहता था

अमित दीपिका को साडी रत अपने लैंड पर नाचता रहता है और दीपिका भी मज़े ले ले कर चुदाई करवाती रहती है

सुबह 4 बजे तक 3 राउंड चुदाई कर क दोनों थक गए थे दीपिका बड़ी मुश्किल से खुद को संभल कर अपने कमरे में लौट जाती है

मगर आज 2 आँखों ने अमित और दीपिका की रास लीला का लाइव शो देखा था और उस शख्स की काम वासना इस शो क बाद बहुत भड़क गयी थी

मगर ममी भांजे का ये नाजायज़ रिश्ता जान कर उसको गुस्सा भी बहुत आ रहा था

आधे घंटे तक दीपिका को अमित का तगड़ा मुसल जैसा लैंड चूसते और उस मुसल की सवारी करते देख कर वो शख्स हैरान था और उसकी छूट से पानी की नदियां बहने लगी थी , सारा जिस्म काम वासना से उत्तेजित हो कर कांपने लगा था

चुदाई का लाइव शो देखते देखते hi उस शख्स की साडी छूट क पानी से भीग गयी थी और छूट रास छूट से बेहटा हुआ पाऊँ की एड़िओं तक पहुँच गया था

और ज्यादा उससे बर्दाश्त नहीं होता और वो शख्स एक बार बाथरूम में जाकर अपनी छूट में उंगली करता है और फिर से पानी बहकर खुद को शांत करता है मगर उसकी आँखों में बार बार अमित का hi लैंड घूम रहा था

रत देर तक जागने और चुदाई की मेहनत से अमित सुबह देर तक सोता रहता है और दीपिका भी देर से जगती है

गौरी : आज क्या बात है दोनों ममी भांजा देर तक सोये , क्या करते रहे रत भर

दीपिका गौरी क सवाल से हद बड़ा जाती है

दीपिका : वो वो मैं तो अपने कमरे में hi थी मुझे क्या पता अमित का

गौरी : मैंने कब कहा तुझे पता है मैं तो इस लिए पुछा क तुम आज देर से उठी रोज़ तो जल्दी उठ जाती हो

और वो भी अभी जगा है आज अखाड़े भी नहीं गया

कामिनी : क्या दीदी आप भी , लगता है देवर जी ने सोने नहीं दिया होगा hi hi hi

दीपिका शर्मा जाती है

दीपिका : क्या दीदी आप भी शुरू हो गयी ऐसी कोई बात भी है और रही अमित की बात तो वो साडी रत पड़े कर रहा था मैं दूध देने गयी थी तो मैंने देखा था

अमित नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है

घर क काम से फ्री होकर गौरी अपने कमरे में चली जाती है और दीपिका अपने कमरे में कामिनी दीपिका से मिलने उसके कमरे में जाती है

दीपिका कामिनी को कमरे में देख कर

दीपिका : दीदी आप ? मुझे आवाज़ दे देती मैं आ जाती आपके पास

कामिनी : क्यों , मैं नहीं आ सकती क्या? वैसे भी मुझे तुमसे बात करनी थी इसी लिए मैं चली आयी

दीपिका : कहिये क्या बात करनी थी

कामिनी : इतने सालों बाद तुम माँ बनने जा रही हो कैसे लगता है तुम्हे

दीपिका : क्या बताऊँ दीदी मैं कितनी खुश हूँ भगवन ने मेरी सुनली मुझसे तो इंतज़ार नहीं हो रहा बस जी चाहता है जल्दी से मैं माँ बन जॉन और अपने बचे को अपनी गॉड मि खिलौन

दुनिया भर क ताने सुन सुन कर मेरे कान पाक गए थे

कामिनी : वैसे ये सब हुआ कैसे मेरा मतलब है क शादी क इतने सैलून तक तुम माँ नहीं बन पायी और अब अचानक ये सब कैसे हो गया ये किसका चमत्कार है?

दीपिका : मतलब ?

कामिनी : मतलब ये क इस बचे का असली बाप कोण है

दीपिका कामिनी की बात सुनते hi गुस्से में आ जाती है और कामिनी से कहती है

दीपिका : ये आप क्या कह रही हैं दीदी आप होश में तो हैं

कामिनी : मैं अछि तरह जानती हूँ मैं क्या कह रही हूँ और तू अब मुझे सब कुछ सच सच बता

दीपिका : लगता है आप का दिमाग ठिकाने पर नहीं है जो आप मुझसे ऐसे बात कर रही हैं आप जाइये अपने कमरे में आराम कीजिये

कामिनी : पहले मेरे सवाल का जवाब दो क तुम्हारे पेट में किसका बचा है

दीपिका का गुस्सा कण्ट्रोल से बहार होने लगता है

दीपिका : बस दीदी और कोई बात मत कहियेगा मैं आपकी इज़्ज़त करती हूँ मगर लगता है आप रिश्तों का लिहाज़ भूल गयी हैं

कामिनी : रिश्तों का लिहाज़ में भूल गयी हूँ ? और तुम जो अपने hi बेटे जैसे भांजे से रत को छुप छुप कर चुदाई करवाती फिरती हो तब तुम्हे रिश्तों की फ़िक्र नहीं होती

कामिनी की बात सुनते hi दीपिका क होश उड़ जाते हैं उसकी हालत ऐसे हो जाती है मनो काटो तो खून नहीं दीपिका सर झुका लेती है और शर्मिंदगी से वो ज़मीन में धसी जा रही थी उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं

कामिनी : अब चुप क्यों हो जवाब दो

दीपिका कोई जवाब नहीं देती बस रोये जाती है

कामिनी : क्या तुम्हारे पेट में जो बचा है उसका बाप अमित है ?

दीपिका फिर भी कोई जवाब नहीं देती

कामिनी : लगता है मुझे दीदी से बात करनी पड़ेगी

दीपिका जल्दी से कामिनी क पाऊँ में गिर जाती है

दीपिका : नहीं ऐसा मत करना दीदी वर्ण सब कुछ तबाह हो जायेगा प्लीज आप माफ़ कार्डो मुझे प्लीज दीदी अगर आपने बड़ी दीदी को बता दिया तो वो बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी और फिर अमित का क्या होगा

कामिनी : ाचा !! तो तुझे अपनी नहीं उसकी टेंशन है , इतना प्यारा हो गया वो तुझे ,, हो भी क्यों न तुझे माँ जो बना दिया है उसने

कामिनी की एक एक बात दीपिका क दिल को छलनी कर रही थी और दीपिका क पास उसकी किसी बात का कोई जवाब नहीं था , दीपिका टी छह रही थी क काश धरती फट जाये और वो उसमे समां जाये

कामिनी : की मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था क तू ऐसी निकलेगी तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं आया मान मर्यादा का

और वो अमित मुझे लगने लगा था क मैंने साडी उम्र उसे ज़लील करती रही मैंने उसके साथ गलत किया

मगर अब लगता है वो इसी क लायक है , वो तो रामु से भी एक कदम आगे निकला

दीपिका अमित क बारे में कामिनी की बातें बर्दाश्त नहीं कर पायी और बोल पड़ी

दीपिका : आप मुझे जो चाहे कह लें मगर अमित को कुछ मत कहिये इसमें उसकी कोई गलती नहीं है , उसे मैंने hi मजबूर किया था

कामिनी : तू उसके पाप पर पर्दा दाल रही है उसकी भला क्या मज़बूरी होगी ऐसा पाप करने की

दीपिका : आप जानती hi क्या हैं अगर सच जानना है तो सुनिए

हाँ मेरे पेट में पलने वाले बचे का बाप अमित है और मैं खुश हूँ क मैं उसके बचे की माँ बनने वाली हूँ

आप का देवर तू मुझे माँ बना नहीं सका उल्टा अपनी कमज़ोरी को मेरे माथे पर मढ़ दिया और मुझे बाँझ कहने लगा

कौन स औरत भला ये बर्दाश्त कर सकती है

फिर दीपिका कामिनी को कमलेश और मीणा क चक्कर क बारे में सब बताती है और ये भी क कैसे उस रत अमित ने उसे बचाया और उसने अमित को मजबूर किया

दीपिका : अमित का कोई दोष नहीं है दीदी उसने तो मुझ पर उपकार किया है और इस घर को लूटने से बचाया है , अमित जैसा तो कोई लाखों में एक होता है मैं खुश हूँ क मैं उसके बचे की माँ बनूँगी और मुझे पूरा यकीन है क ये बचा उसके जैसा होगा

कामिनी दीपिका की साडी कहानी सुनने क बाद साडी बातों को गौर से सोच रही थी आखिर दीपिका ने जो किया वो गलत तो नहीं था

बाँझ होने का दुःख वो अछि तरह जानती थी ऊपर से कमलेश ने जो कुछ किया कोई भी औरत ऐसा hi करेगी या जान दे देगी

अमित ने दीपिका की न सिर्फ जान बचाई थी बल्कि उसे नयी ज़िन्दगी भी दी थी

दीपिका : मैंने आपको सब सच बता दिया दीदी आगे जो आपका फैसला होगा वो मुझे मंज़ूर होगा

कामिनी : रो मत छोटी मुझे माफ़ करदे मैंने तुझे गलत समझा . तुमने जो भी किया वो समाज की नज़र में चाहे गलत हो मगर एक औरत की नज़र से गलत नहीं हो सकता

तू मुझे माफ़ करदे मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी

दीपिका : दीदी आप प्लीज अमित की तरफ मन मैला मत करना वो बहुत ाचा है उसका दिल बहुत बड़ा है वो सब से प्यार करता है

कामिनी दीपिका का मूड ठीक करने और माहौल को हल्का करने क लिए दीपिका को छेड़ती है

कामिनी : हाँ दिल क साथ उसका और भी कुछ बड़ा है देखा है मैंने

दीपिका शॉकेड हो जाती है और अगले hi पल कामिनी को उसी की भाषा में जवाब देती है

दीपिका : लगता है आपको पसंद आ गया है अमित बड़ा पैन

दीपिका जान बुझ कर बड़ा शब्द को खींचती है

कामिनी : न बाबा न तुम्हे hi मुबारक मुझे ज़रूरत नहीं है

दीपिका : आपको ज़रूरत क्यों नहीं ? कब तक उंगली करती रहेंगी मैं तो कहती हूँ घर की बात है आप भी मोके का फायदा उठा लीजिये आपको डूबल फायदा होगा

एक तो आप भी माँ बन जाएँगी ऊपर से आपकी इतने साल की तड़प भी मिट जाएगी

कामिनी : रहने दे मैं ऐसे hi ठीक हूँ

दीपिका : एक बार तरय तो कीजिये आप सब भूल जाएँगी

कामिनी : लगता है तुम्हे घोड़े की सवारी कुछ ज्यादा hi रास आ गयी है

दीपिका सवालिया नज़रों से कामिनी को देखती है

कामिनी : कल रत तुम्हारा लाइव शो देखा मैंने कैसे तुम घुड़ सवारी कर रही थी

दीपिका : फिर तो आपको लाइव देख कर पूरा मज़ा आया होगा और फिर आपकी उंगलियां थक गयी होंगी

कामिनी : हैट बे शरण मैं ऐसा कुछ नहीं करती

दीपिका : झूठ मत बोलिये मैंने कई बार रत को आपको बाथरूम में उंगली करते अपने कानो से सुना है

कामिनी शर्मा जाती है

कामिनी : वो वो वो ज़रूरी थोड़ा है मैं hi हूँ वो दीदी भी तो हो सकती है

दीपिका : वो आप hi थी क्यूंकि गौरी दीदी को तो बड़े जेठ जी ठंडा कर देते होंगे मगर अजय भैया क बारे में आप मुझे खुद बता चुकी हैं

कामिनी को कोई जवाब नहीं सूझता

दीपिका कामिनी क कंधे पर हाथ रखती है

दीपिका : मैं जानती हूँ दीदी हर औरत को मर्द की ज़रूरत होती है और आप इतने सैलून से जो सजा भुगत रही हैं अब उससे मुक्त हो जाइये अगर आप कहें तो मैं अमित को तैयार करती हूँ आपके लिए

कामिनी : नहीं नहीं छोटी ये सब गलत है तुमने तो अपनी मज़बूरी में ये सब किया मगर मैं ये नहीं कर सकती अगर किसी को पता चल गया तो मैं किसी को मुँह दिखने क काबिल नहीं रहूंगी और अमित क्या सोचेगा मेरे बारे में , नहीं नहीं तू रहने दे जैसे चल रहा है चलने दे

अब तू आराम कर मैं चलती हूँ

कामिनी अपने कमरे में चली जाती है दीपिका कामिनी की बातों क बारे में सोचने लगती है

“ दीदी कब से काँटों की सेज़ पर सो रही हैं उनका दिल भी तो करता होगा वो सब करने का उनकी बातों से लगता है क वो भी करना तो चाहती हैं मगर डर्टी हैं किसी को पता न चले और अमित क्या सोचेगा उनके बारे में , मुझे अमित से बात करनी होगी और उसको मानना होगा मगर अभी तो उसको एक्साम्स तक कुछ नहीं कह सकती ”

कामिनी अपने कमरे में जाकर बीएड पर लेट जाती है मगर उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था आज पहली बार उसने किसी से ऐसी बातें की थी , सिर्फ बातों से hi वो कितना उत्तेजित हो गयी थी और उसकी आँखों क सामने रत का अमित और दीपिका की चुदाई का मंज़र आने लगा

कामिनी को पता hi न चला कब उसका हाथ उसकी छूट पर पहुँच कर उसे सहलाने लगा , कामिनी फिर से उत्तेजित हो गयी और जल्दी से अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर क साडी ऊपर उठाकर छूट में उंगली करने लगी

छूट में उंगली करते करते कामिनी आँखें बंद कर क अमित क लैंड को यद् करने लगी

“ आअह्ह्ह्हह कक्कक्स आआह्ह्ह्हह कितना बड़ा है आअह्ह्ह्हह ककक ये तो मेरी छूट फाड़ क रख देगा आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्स मेरी छूट फैट जाएगी कक्कवस्क्स ाआजहःहः कितना मज़ा आएगा कक्कक्क्स आआअह्हह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह्हह्ह छूट भोसड़ा बन जाएगी आआअह्हह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म कक्ककव आआअह्हह्ह्ह्ह ामीटटटटट आआह्ह्ह्ह फाड़ दे मेरी चुत कक्कक्क्स आअह्ह्ह्ह मैं भी तो तेरी ममी हूँ आआह्ह्ह्हह मुझे भी अपने लैंड की सवारी करवा दे रे आआह्ह्ह्हह्ह हम्म्म्म ककक

ऐसे सिसकीअन लेती छूट में उंगली चलती अमित क लैंड को यद् करती कामिनी अपना पानी छोड़ देती है

अमित स्कूल से वापिस आ कर खाना खता है अपने कमरे में आराम करने लगता है

कामिनी आज खाना कहते वक़्त अमित को प्यासी नज़रों से देख रही थी जिसे दीपिका नोट कर लेती है और मन hi मन मुस्कुराने लगती है

अजय सबको बताता है क कल रामु का बाप उसे लेने आ जायेगा उसकी बात हो गयी है

अजय : कामिनी तुम रामु का सामान बांध देना

कामिनी सर हाँ में हिला देती है

खाने क बाद अजय खेतों में चला जाता है और गौरी कामिनी दीपिका अपने कमरों में आराम करने लगती हैं
 
अपडेट 28

अजय सबको बताता है क कल रामु का बाप उसे लेने आ जायेगा उसकी बात हो गयी है

अजय : कामिनी तुम रामु का सामान बांध देना

कामिनी सर हाँ में हिला देती है

खाने क बाद अजय खेतों में चला जाता है और गौरी कामिनी दीपिका अपने कमरों में आराम करने लगती हैं

अब आगे -

अमित कमरे में जा कर थोड़ी देर आराम करने लगता है , कामिनी भी आराम करने क लिए लेट टी है तो उसको अजय की बात यद् आ जाती है और वो रामु का सामान बांधने क लिए उसके कमरे में चली जाती है पहले अमित का कमरा अत है कामिनी अंदर देखती है तो अमित आँखें बंद कर क सो रहा था

कामिनी एक नज़र अमित को देख कर रामु वाले कमरे में चली जाती है , रामु क सामान को बैग में भरते हुए कामिनी कामिनी एक बार सारा कमरा चेक करती है कहीं उस घटिआ लड़के की कोई चीज़ घर में रह न जाये .

कामिनी जब बीएड क गद्दे को उठाकर नीचे देखती है तो उसे किताब नज़र अति है कामिनी किताब को उठाकर जब खोलती है तो उसकी आँखें बड़ी हो जाती हैं , ये वही चुदाई की तस्वीरों वाली किताब थी जिसे देखते हुए उस दिन अमित ने दीपिका की धमाकेदार चुदाई की थी , चुदाई क बाद अमित और दीपिका किताब को ऐसे hi वापिस रख कर चले गए थे

कामिनी जैसे जैसे किताब क पैन पलटने लगती है वैसे वैसे उसकी उत्तेजना बढ़ने लगती है कामिनी किताब देखते हुए इतनी उत्तेजित हो गयी थी क उसका हाथ कब उसकी छूट पर गया उसे पता hi न चला , चुदाई क ऐसे आसान कामिनी ने न कभी सुने न कभी देखे न hi अजय ने कभी ऐसे उसको छोड़ा था कामिनी की उत्तेजना इतनी बाद गयी क उसे कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया उसने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और बीएड पर लेट कर अपनी साडी कमर तक उठाकर अपने पेंटी उतरी और किताब को देखते हुए एक हाथ से अपनी छूट में उंगली करने लगी , छूट में उंगली करते हुए कामिनी को अमित का मुसल जैसे लैंड यद् आने लगता है

कामिनी : मन में ) कितना बड़ा लैंड है जब अंदर जाता होगा छूट तो फट hi जाती होगी इतना बड़ा लैंड दीपिका ने आखिर लिया कैसे अगर मैं होती तो बेहोश hi हो जाती मगर दीपिका ,, वो तो कैसे उछाल उछाल कर मज़े से लैंड की सवारी कर रही थी कितना मज़े से चीख रही थी , क्या वाकई में बड़े लैंड से ज्यादा मज़ा अत है

अगर अमित का लैंड दीपिका ले सकती है तो मैं क्यों नहीं ? मगर अजय क लैंड से अमित का लैंड दोगुना है कहीं मेरी छूट फाड़ कर मेरे पेट में घुस गया तो

मगर ऐसा कहाँ होता है छूट तो बानी hi लैंड लेने क लिए है तो मेरी छूट अमित का लैंड क्यों नहीं ले सकती ? हाँ मेरी छूट भी उसका लैंड ले सकती है आखिर वो लैंड hi तो है और क्या मस्त लैंड है बिलकुल इन तस्वीरों में नज़र आ रहे गोरों क लैंड जैसा बड़ा और मजबूत

कामिनी छूट में उंगली करते अमित क लैंड को यद् करते हुए दीपिका की जगह खुद को ेमगीने करने लगती है और तेज़ी से अपनी छूट में उंगली चलती हुई बोलने लगती है

कामिनी : कक्कक्स आअह्ह्ह्हह ोुह्ह्ह्ह ह्म्म्मम्म फ़ायद दोओओओ मेररररीईई चूऊत्त बनन्ना दददूऊऊ ीिस्स्सस्स्स्सीीे बबहहहहउसससददद्दआ आअह्हह्ह्ह्ह सीसीसी सीसीसी और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ फ़ायद दो पूओरा अंदर दडआलल्लूऊऊ आआआह्ह्ह्हह्ह मममममअअअअअ ज़ज़्ज़ज़्ज़ऊऊऊरररररर ससससीईए ाअम्मम्मीीट्ट्ट्ट फफ्फायद ड्डड्डूओ मम्मीीररररीी छुओट छ्हूऊओडडडडूओ अपनी ममममआजमममममीएइ को आआअह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह आयआईइइइइइइइ म्मम्माआआआआ

इसी क साथ कामिनी झटके लेती हुई पानी छोड़ देती है उसकी चुत से आज कुछ ज्यादा hi पानी निकला था शायद ये अमित क लैंड को यद् करने का नतीजा था बीएड शीट ऐसे भीग गयी थी जैसे किसी ने पेशाब कर दिए हो

कामिनी का जिस्म 2 मिनट्स तक कंपता रहता है 10 मिनट्स बाद जब कामिनी की सांसे संभालती हैं तो वो उठती है और अपनी साडी ठीक करती है और किताब को छुपा देती है अपनी पेंटी उठाते हुए जब वो बीएड शीट को देखती है तो इतना ज्यादा पानी का निशान देख कर उसे हैरानी होती है और फिर अमित का लैंड फिर उसे यद् आ जाता है

कामिनी : ये मुझे क्या हो रहा है क्यों मेरा दिमाग बार बार अमित क लैंड की तरफ जा रहा है नहीं नहीं ये गलत है मैं ऐसा नहीं कर सकती

कामिनी खुद को कोसती हुई रामु का बैग पैक कर देती है जब वो बैग की ज़िप अछि तरह लॉक कर रही थी तो साइड जेब से उसे एक पैकेट मिलता है जिसमे कुछ दवाइयां थी कामिनी खोल क चेक करती है तो उसमे कंडोम क पैकेट भी थे कामिनी कुछ सोच कर वो पैकेट अलग रख लेती है और बैग पैक कर क निचे ले आती है

शाम को अमित उठ कर पड़े करने लगता है . गौरी कामिनी और दीपिका घर क काम कर रही थी अजय 5 बजे घर अत है

अजय : कामिनी मैं तुम्हारे भाई को लेने जा रहा हूँ वो पहुँचने वाला है

अजय अपनी मोटरसाइकिल ले कर निकल जाता है और कामिनी अपने भाई क लिए खाना तैयार करने लगती है

एक घंटे बाद अजय का फ़ोन अत है और वो कामिनी से कहता है की उसका भाई शर्मिंदगी क कारन घर नहीं आना चाहता है इस लिए वो उसको ले कर हॉस्पिटल आ गया है तुम अमित क हाथ रामु का सामान भेज दो

कामिनी अमित को रामु का सामान हॉस्पिटल ले जाने को कहती है और अमित बेमन से तैयार हो कर अपनी बुलेट बहार निकलता है और जब वो रामु का सामान उठाने लगता है तो कामिनी उसे आवाज़ देती है

कामिनी : अमित ज़रा रुकना सामान क साथ भैया क लिए खाना भी ले कर जाना है वो इतना सफर कर क ए हैं काम से काम उन्हें घर का खाना तो मिले

थोड़ी hi देर में कामिनी रोटी का टिफ़िन ले कर आ जाती है और अमित क पीछे बुलेट पर बैठ जाती है

अमित : ममी जी आप कहाँ बैठ रही है आप ये डिब्बा मुझे दो मैं ले जाता हूँ

कामिनी : अरे इतना सामान और ये डिब्बा तू कैसे संभालेगा कहीं गिर गया तो ? मैं पीछे पकड़ कर बैठ जाती हूँ वैसे भी इस बहाने भाई से भी मिल लुंगी

अमित : ममी जी टाइम देखो कितना हो गया है और ऊपर से बदल भी हैं अगर बारिश आ गयी रस्ते में तो भीग जायेंगे

कामिनी : तू चुप चाप मोटरसाइकिल चला तेरे होते मुझे चिंता नहीं और बारिश का क्या ये बदल तो कल से ऐसे hi हैं कोई बारिश नहीं आने वाली चल अब बातों में वक़्त जाया न कर

अमित कामिनी की. बात पर चुप हो जाता है और बुलेट को किक मरकर चल पड़ता है

आधे घंटे में दोनों हॉस्पिटल पहुँच जाते हैं , कामिनी जब अपने भाई से मिलती है तो उसका भाई रट हुए हाथ जोड़ता है और उसके पाऊँ पड़ने लगता है

कामिनी का भाई : मुझे माफ़ करदे बहिन मैं बहुत शर्मिंदा हूँ ऐसी घटिआ औलाद भगवन किसी को न दे इसकी गन्दी हरकतों की वजह से ये मुझे लोगों से बातें सुन्नी पड़ती हैं , मैंने तो ये सोच कर तुम्हारे पास भेजा था क शायद ये सुधर जायेगा मगर मुझे क्या पता था क इसके दिमाग में इतनी गन्दगी भरी हुई है क ये तुम्हारे साथ ऐसी गिरी हुई हरकत करेगा

कामिनी : भैया आप क्यों माफ़ी मांगते हैं आप ने तो गुनाह नहीं किया वैसे भी रामु को उसके किये की सजा मिल गयी है शायद अब वो सुधर जाये

मैं तो भगवन का शुक्रिया ऐडा करती हूँ क उसने समय पर अमित को भेज दिया और इसने मेरी लाज बचा ली

अजय : अमित ने न सिर्फ कामिनी की इज़्ज़त बचाई है बल्कि रामु को ऐसी सजा दी है क अब कभी रामु ऐसी हरकत नहीं करेगा

कामिनी का भाई अमित का भी शुक्रिया करता है पर अमित उन्हें मां जी कहकर उनके पाऊँ छूटा है जिसे देख कर कामिनी अंदर से बहुत खुश हो जाती है अमित को स्नेह भरी नज़रों से देखने लगती है

अजय : कामिनी अब तुम अमित क साथ घर चली जाओ अँधेरा हो रहा है और मौसम भी ख़राब है कहीं बाद में दिक्कत न हो

कामिनी और अमित कामिनी क भाई से मिल कर वापिस गाओं की तरफ निकल पड़ते हैं अभी थोड़ी दूर hi गए थे क बारिश शुरू हो गयी

अमित कामिनी से रुकने का पूछता है मगर कामिनी कहती है क अगर बारिश तेज़ हो गयी तो यहीं फस्स जायेंगे इस लिए तेज़ चलाओ और जल्दी घर पहुंचो

अँधेरा हो चूका था और सड़क वीरान हो चुकी थी बारिश की वजह से कोई भी सड़क पर नहीं था अमित बुलेट को तेज़ भागने लगता है मगर अचानक से बारिश तेज़ हो जाती है

तेज़ बारिश की वजह से अमित को सड़क अछि तरह नहीं दिख रही थी ऊपर से दोनों पूरी तरह भीग गए थे कामिनी अमित को रुकने का बोलती है क्यूंकि उसे अब बहुत ठण्ड लगने लगी थी

अमित जल्दी से बाइक साइड में लगा लेता है मगर वहां आसपास कोई भी जगह नहीं थी जहाँ बारिश से बचा जा सके अमित को पास में बरगद का पेड़ नज़र अत है तो वो कामिनी को लेकर उसके निचे पेड़ से सत्कार खड़ा हो जाता है मगर फिर भी बारिश की कुछ बूंदे कामिनी पर गिरती जा रही थी

अमित अपनी जगह कामिनी को कड़ी कर क पेड़ से सत्ता देता है और खुद थोड़ा हटकर खड़ा हो जाता

कामिनी को ठण्ड लग रही थी और उसके दांत बजने लगे थे , अमित कामिनी की ये हालत देख कर उससे सात कर खड़ा हो जाता है

अमित कामिनी को सीओ कवर करते हुए उसके दोनों तरफ से पेड़ पर हाथ रख कर खड़ा हो जाता है और कामिनी को हवा बारिश से बचने क लिए कामिनी से सात जाता है

कामिनी को थोड़ी सी रहत महसूस होती है और वो अमित क साथ सात कर कड़ी हो जाती है

अमित क जिस्म से कामिनी को थोड़ी गर्माइश मिलती है और वो और भी ज्यादा अमित से चिपक जाती है

अमित भी कामिनी से और ज्यादा चिपक जाता है उसे पता था क ममी इस वक़्त ठण्ड से कांप रही है और उसे गर्मी देने क लिए उसके साथ अपना जिस्म लगाना होगा

कामिनी क भीगने की वजह से उसकी सदी उसके जिस्म से चिपक गयी थी और उसके जिस्म क सरे कटाव नुमाया हो गए थे मगर इस वक़्त अँधेरा था तो अमित देख नहीं सकता था

अमित क जिस्म से लग कर खड़े होने से कामिनी क दूध अमित की छाती से चिपके हुए थे और अब कामिनी क जिस्म में गर्मी आने लगी थी जिससे उसके दूध टाइट होने लगे थे

कामिनी का मन फिर से डोलने लगा था और उसके मन में अमित क लैंड की छवि उभरने लगी थी , न चाहते हुए भी उसका जिस्म अमित से और ज्यादा चिपकने लगा था और कामिनी की दोनों बहन अमित की पीठ पर कास गयीं

अमित : ममी आप ठीक तो हैं?

कामिनी : मुझे बहुत ठण्ड लग रही है अमित कुछ करो कहीं मैं ठण्ड से मर न जॉन

अमित : मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा ममी जी आप मुझसे चिपक कर खड़े रहिये जिससे आपको ठण्ड नहीं लगेगी

कामिनी बेल की तरह पूरी तरह अमित से चिपक जाती है और अपने होंठ धीरे से अमित की गर्दन पर छुहा कर हटा लेती है

अमित को झटका लगता है मगर वो सोचता है शायद ठण्ड से कांपने क कारन ऐसा हुआ है

कामिनी अपने दूध अमित की छाती में गाड़ने लगती है और अमित को अपनी छाती पर ममी क नुकीले निप्पलों का एहसास होता है

कामिनी अमित इक टांग को अपनी दोनों टांगो में लेकर अपनी छूट अमित की जांघ पर रगड़ने लगती है

अमित का जिस्म भी गरम होने लगता है और उसका लैंड खड़ा हो जाता है

लैंड खड़ा होते hi कामिनी को अपने जिस्म पर उसकी चुभन का एहसास हो जाता है और कामिनी और भी ज्यादा अपनी छूट अमित की जांघ पर रगड़ने लगती है

कामिनी इस वक़्त पूरी तरह से माध होश हो चुकी थी उसकी आँखें बंद थी और उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था

अमित भी काम वासना में डूबने लगा था और वो कामिनी क जिस्म को दबाते हुए पेड़ से लगा देता है और अपने घुटने मोड़ कर अपना लैंड कामिनी की छूट पर एडजस्ट कर क लैंड को जोर से दबाने लगता है कामिनी को जैसे मन मांगी मुराद मिल गयी और उसके मुँह से मज़े की सिसकारी निकल गयी

कामिनी : cccccccccc. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

कामिनी की बहन अमित की गर्दन पर कास जाती हैं और वो मस्ती में ऑंखें बंद किये अमित क कण को दांतो से काट लेती है

अमित कमर को थोड़ा पीछे कर क फिर से लैंड को छूट पर दबा देता है

अमित : ममी जी अब ज्यादा ठण्ड तो नहीं लग रही

कामिनी : नहीं कक्कक्क्स अब नहीं लग रही कक्कक्क्स आआआअह्ह्ह्हह ऐसे hi मेरे गले लगे रो थोड़ी गर्माइश मिल रही है मुझे

अमित बार बार कमर को हिलाकर अपना लैंड कामिनी की छूट पर दबाता जा रहा था

मस्ती में कामिनी की छूट पनिया गयी थी और अब वो लैंड मांग रही थी कामिनी से बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था वो अमित को अपने अंदर समां लेना चाहती थी कामिनी अपनी दायीं तंग उठाकर अमित क पीछे लेकर उसे और अपने साथ कसने लगती है

अमित भी कामिनी की लगातार बाद रही उत्तेजना में उत्तेजित हो चूका था और वो भी सबकुछ भूल कर कामिनी क जिस्म क मज़े ले रहा था

दोनों बिना एक दूसरे को देखे बिना कोई बात किये बस एक दूसरे क जिस्म को रगड़ते जा रहे थे मगर शर्म की दीवार जो दोनों क रिश्ते क दरमियान थी उसकी वजह से डुबो एक दिउसरे क जिस्म को हाथों से दबा माहि सकते थे और न इससे आगे बाद सकते थे

अमित क मोठे लैंड की वजह से कामिनी पहले hi कितने दिनों से उत्तेजित थी और उसके लैंड की कल्पना से अपना पानी पहले भी बहा चुकी थी और आज तो डायरेक्ट लैंड छूट पर दस्तक दे रहा था वो भला कैसे बर्दाश्त कर पति , ऐसे hi एक दूसरे क जिस्म को रगड़ते हुए 5 मिनट्स में hi कामिनी की छूट से पानी का बांध टूट कर सारा पानी बहार निकल देता है , कामिनी का जिस्म झटके लेता हुआ ढीला होने लगता है उससे खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है और अमित उसे बाँहों में ले लेता है

अमित समझ गया था क ज़रूर ममी उत्तेजित हो कर पानी छोड़ चुकी है

दोनों आधे घंटे तक वहीँ खड़े रेहनते हैं मगर दोनों में कोई बात नहीं होती

बारिश क काम होते hi अमित कामिनी को पीछे बिठाकर घर की और निकल पड़ता है

घर एते hi कामिनी भागकर अपने कमरे में चली जाती है

गौरी और दीपिका अमित और कामिनी क भीगे कपड़ो से अंदाज़ा लगा लेता हैं ज़रूर बारिश की वजह से दोनों लेट हुए हैं

मगर कामिनी का ऐसे नज़रें चुरा कर भाग जाना दीपिका को खटक रहा था फ़िलहाल ये पूछने का सही समय नहीं था इस लिए वो चुप रहती है

गौरी अमित को जल्दी कपडे बदल कर आने का कहती है और खाना लगाने लगती है

थोड़ी देर में कमलेश गौरी कामिनी दीपिका और अमित मिलकर खाना कहते हैं विजय और अजय दोनों हॉस्पिटल पर hi रुक गए थे

खाने क दौरान कामिनी न कोई बात करती है न अपना चेहरा उठती है बस बातों का हूँ हाँ में जवाब देती रहती है दीपिका का शक बाद गया था मगर चुप hi रहती है

खाना खा कर सब अपने कमरों में सोने चले जाते हैं बहार बारिश तो थम चुकी थी मगर कामिनी की छूट में तूफ़ान आ चूका था आज जिस लैंड की वो कल्पना करती थी उसी लैंड ने उसकी छूट से पानी निकल दिया था और अब उसकी छूट बस उस लैंड को अंदर लेना चाहती थी मगर उसका दिमाग उसे रोक रहा था और रिश्तों की दुहाई दे रहा था

रत भर कामिनी बीएड पर करवटें बदलती सो जाती है और अमित भी थोड़ी देर पड़े कर क सो जाता है
 
अपडेट 29



खाना खा कर सब अपने कमरों में सोने चले जाते हैं बहार बारिश तो थम चुकी थी मगर कामिनी की छूट में तूफ़ान आ चूका था आज जिस लैंड की वो कल्पना करती थी उसी लैंड ने उसकी छूट से पानी निकल दिया था और अब उसकी छूट बस उस लैंड को अंदर लेना चाहती थी मगर उसका दिमाग उसे रोक रहा था और रिश्तों की दुहाई दे रहा था


रत भर कामिनी बीएड पर करवटें बदलती सो जाती है और अमित भी थोड़ी देर पड़े कर क सो जाता है

अब आगे -

अगली सुबह अमित अखाड़े से आकर खाना खा कर पड़े करने लगता है आज संडे था और कल से तो वैसे hi स्कूल से उसे फ्री कर दिया गया था और अब एग्जाम ख़तम होने तक उसे घर पर hi रहकर तयारी करनी थी

आज नाश्ता करते वक़्त कामिनी और अमित एक दूसरे से नज़रें नहीं मिला रहे थे कल हुई घटना क लिए शायद दोनों hi शर्म महसूस कर रहे थे मगर दीपिका की नज़रें दोनों पर hi थी

दोपहर का खाना भी हो जाता है मगर कोई खास बात नहीं होती अमित सुबह से पद रहा था अब वो खाना खा कर सुस्ताने लगता है सब अपने अपने कमरों में hi थे तब दीपिका कामिनी क पास जाती है

दीपिका : क्या कर रही हो दीदी

कामिनी : दीपिका तुम इस वक़्त आओ आओ बैठो बोलो क्या काम है?

दीपिका : क्या मैं आपसे बिना काम क नहीं मिलने आ सकती ?

कामिनी : नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं

दीपिका : ाचा छोड़िये ये बताइये कल रत आप कहाँ भीग कर आयी थी अमित क साथ

कामिनी : दीपिका क इस सवाल पर कामिनी को कल वाली घटना यद् आ जाती है ) कक क कक कहीं नहीं वो तो रस्ते में बारिश आ गयी थी इस लिए भीग गए

दीपिका कामिनी क एक्सप्रेशन से अंदाज़ा लगा लेती है क कामिनी कुछ छुपा रही है

दीपिका : हम्म्म मैं सब जानती हूँ आप अमित क साथ किस बारिश ने भीग कर आयी हैं कल

कामिनी दीपिका की इस बात पर सेहम जाती है

कामिनी : मन में ) दीपिका को कहीं शक तो नहीं हो गया मेरी किसी बात से ? मगर मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा और रत को भी मैं सीधा कमरे में आ गयी थी क किसी को मेरी हालत का अंदाज़ा न हो फिर कैसे ?

कामिनी को सोच में गम देख कर दीपिका को यकीन हो जाता है क उसका तीर निशाने पर बैठा है

दीपिका : आप चाहे जितना छुपा ले मगर मैंने आपको पकड़ लिया , मैं तो रत को hi समझ गयी थी मगर सोचा आप से अकेले में बात करुँगी , अब बताइये सच सच कल आपके और अमित क बीच क्या हुआ बारिश में ?

कामिनी : ये यई ये तुम क कक ककया कह रही हो ?

दीपिका : अरे दीदी अब मुझ से मत शर्माइये आप तो मेरे और अमित क बारे में सब जानती हैं और आपने तो लाइव शो भी देखा है तो मुझसे क्या शर्माना मैं जानती हूँ क आपके दिल में क्या चल रहा है

यकीन मानिये अगर आप चाहेंगी तो मैं आपकी हर तरह से मदद करुँगी

कामिनी : आ ा ऐसा क कक कुछ नहीं है

दीपिका : अब बता भी दीजिये दीदी मैं आपको अपनी बड़ी बहिन मानती हूँ और मुझसे आपका दुःख देखा नहीं जनता आखिर कब तक आप खुद को सजा देती रहेंगी आप एक बार मुझ पर भरोसा कर क देखिये

कामिनी : ऐसा कुछ नहीं है मेरी बहिन मैं जानती हूँ तू मुझे अपनी बहिन मानती है मगर जो तू सोच रही है ऐसा कुछ नहीं है

दीपिका : तो ठीक है मैं अमित से hi पूछ लूंगी

कामिनी : मैंने कहा न ऐसा कुछ नहीं है तो तू अमित से क्या पूछेगी

दीपिका : जो भी हो मैं उसी से पूछ लूंगी और वो मुझसे कभी झूठ नहीं बोलता

इतना कह कर दीपिका कमरे से उठ क जाने लगती है

कामिनी : रुक तो बैठ ज़रा मैं बताती हूँ

दीपिका कामिनी क पास बैठ जाती है

दीपिका : अब सब कुछ साफ साफ बताइये अगर मुझे अपनी बहिन मानती हो तो वर्ण मैं आपसे कभी बात नहीं करुँगी

कामिनी दीपिका को कल बारिश में जो हुआ वो बता देती है क कैसे वो खुद पर काबू नहीं रख पायी और अमित से चिपक गयी थी

कामिनी शर्मा रही थी इस लिए अपनी छूट और अपने पानी बहाने वाली बात नहीं बताती मगर दीपिका समझ जाती है क कामिनी शर्मा रही है

दीपिका : दीदी ऐसे क्यों शर्मा रही हो मैं भी तो औरत हूँ मेरे पास भी वो सब है जो तुम्हारे पास है और अपने तो मुझे पूरा नंगा देखा हुआ है और वो भी सब करते हुए

तो साफ साफ बताओ न क कल अपने अमित क साथ ऊपर ऊपर से मज़े लिए हैं और आपका कल पानी भी निकला है

कामिनी : की !! दीपिका ये तुम कैसी बातें कर रही हो कुछ तो शर्म करो और वो हमारा बीटा है और तुम मुझे उसके साथ ऐसे जोड़ रही हो बेशरम

दीपिका : वह जी वह जब उसके लैंड का मज़ा कल बारिश में छूट पर लेकर पानी निकल रही थी तब आपको नहीं यद् था वो आपका बीटा है

कामिनी : वो तो बारिश क मौसम से ठण्ड से बचने क चक्कर में मैं उसके साथ सात कर कड़ी हो गयी थी वो सब हादसा था

दीपिका : तो आप मानती हैं कल आपकी छूट ने उसके लैंड को महसूस कर क पानी निकला है

कामिनी : मैंने कब कहा ये तुम बोल रही हो

दीपिका : दीदी मैं सब समझ रही हूँ जो आप बोल रही हैं और जो आप नहीं बोल रही

आप मेरी बात मानिये आपको अब अमित क दमदार लैंड की सख्त ज़रूरत है और आप इसे झुठला नहीं सकती

मगर एक बात आपको अभी माननी होगी क अभी आप खुद पर कण्ट्रोल रखिये उसके एग्जाम होने तक उसके बाद मैं वडा करती हूँ क अमित आपके ऊपर होगा और उसका लैंड आपकी छूट में

कामिनी : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दीपिका वो मेरे बेटे सामान है ये सब गलत है ऐसा भला कहाँ होता है कैसे एक बीटा अपनी माँ क साथ वो सब कर सकता है

दीपिका : आप कौन से ज़माने की बात कर रही हो दीदी आज कल ये सब आम बात है रिश्तों में चुदाई आजकल आम बात है और अमित कौन सा हमारा सागा बीटा है ? है तो वो हमारा भांजा hi

वैसे भी आप जिसे बीटा समझ कर पीछे हैट रही हैं वो आपको एक hi बार में माँ बना सकता है और सबूत आपके सामने है

और ऊपर से उसका लैंड तो आप देख hi चुकी हैं अचे ाचों की बस करवा सकता है , सच्ची जब अंदर जाता है न तो जन्नत hi नज़र आने लगती है

मैं तो कहती हूँ क एक बार जो भी औरत अमित का लैंड अपनी छूट में ले लेगी वो ज़िन्दगी भर क लिए उसकी गुलाम हो जाएगी किया ज़बरदस्त चुदाई करता है क्या स्टैमिना है

दीपिका की बातों से कामिनी फिर से अमित क लैंड को यद् करते हुए छुडासी होने लगती है

दीपिका : दीदी एक बार आप हाँ तो कीजिये फिर देखिये मेरे साथ आप भी माँ बन जाएँगी और अमित क घोड़े की सवारी करेंगी

कामिनी : नहीं नहीं दीपिका अगर किसी को पता लग गया तो सब कुछ बर्बाद हो जायेगा

और अजय को मैं क्या जवाब दूंगी तुम तो जानती हो वो बाप नहीं बन सकते ऐसे में अगर मैं माँ बन गयी तो वो मुझे घर से hi निकल देंगे

दीपिका : दीदी आप बस हाँ कीजिये बाकि मैं संभल लूंगी और किसी को कुछ पता नहीं लगेगा , सब क होते हुए मैं भी तो अमित से चुदाई करवा hi रही थी न और कमलेश कौन सा बाप बन सकते हैं मगर उनको शक भी नहीं होने दिया मैंने वो तो यही सोच रहे हैं क ये बचा उनका है

कामिनी : शॉकेड ) क्याआ ? कमलेश भी बाप नहीं बन सकता ?

दीपिका : हाँ दीदी मगर वो ये बात नहीं जानते मैंने अपना टेस्ट करवाया था मेरी रिपोर्ट सही थी डॉ ने कहा था क कमी तुम्हारे पति में hi है

कामिनी : मगर अजय तो सब जानते हैं न फिर कैसे उनको शक नहीं होगा

दीपिका : इसका मतलब आप तैयार हैं

तो अब सुनिए डॉ ने बताया था क माँ बनने क दो तरीके हैं

पहला ये क वो किसी दूसरे मरद का वीर्य आपकी बचे दानी में इंजेक्शन से डाले

दूसरा आप किसी और मरद से डायरेक्ट अपनी बचे दानी में वीर्य डलवा ले

पहले में 2 से 3 लाख का खर्चा है और रिस्क भी है क पता नहीं किस आदमी का बीज हो और कल को कैसी औलाद निकले

मैंने दूसरा रास्ता अपनाया क्यूंकि एक तो इतने पैसे मैं कहाँ से लती और कमलेश को पता चलता तो वो कभी अपनी कमज़ोरी नहीं मानते

वैसे भी अमित कितना ाचा है ज़रा सोचिये उसके बीज से जो बचा पैदा होगा वो भी तो उसके जैसा hi होगा न

कामिनी दीपिका की बातों पर विचार करने लगती है , दीपिका की एक एक बात सच और सही थी उसने अमित को चुन कर कोई गलती नहीं की थी

वैसे भी अगर बहार क किसी मर्द से नाजायज़ सम्बन्ध बनाने से बदनामी का खतरा भी तो रहता है

दीपिका : दीदी अब इतना मत सोचिये आप एक बार अजय भैया को लेकर डॉ से टेस्ट करवा लीजिये और डॉ अजय भैया को सब समझा देगा उसके बाद मैं आपका साथ दूंगी और हम ऑपरेशन का बहाना बना कर पैसे भी बचा लेंगे और आप अमित से चुदाई कर क माँ बन जाएँगी

किसी को कानो कण खबर नहीं होगी

कामिनी : मगर दीपिका

दीपिका : कोई अगर मगर नहीं

ज़रा सोचिये दीदी आप कब तक ऐसे hi वीरान ज़िन्दगी जीती रहेंगी आखिर आपका क्या दोष है , अजय भैया अगर अपनी ताकत गवा बैठे तो क्या इसकी सजा आप भुगतेगी ?

मेरी बात मानिये आप अमित से चुद कर माँ बन जाइये आपके सुने जीवन में बहार आ जाएगी माँ होने का एहसास क्या होता है ये अब मुझे महसूस होने लगा है जब मेरे पेट में एक ज़िन्दगी पलने लगी है

औरत कितनी अधूरी है औलाद क बिना ये आप अछि तरह जानती हैं

कामिनी दीपिका की बातों से पूरी तरह सहमत थी और अब उसे दीपिका का बताया रास्ता hi सही लगने लगता है और वो दीपिका को है कर देती है

कामिनी: ठीक है दीपिका मगर क्या अमित इसके लिए मानेगा ?

दीपिका : वो आप मुझ पर छोड़ दीजिये, मैं जैसा कहूं आप वैसे करती जाइएगा बस फ़िलहाल उसके एग्जाम ख़तम होने तक हम उसे तंग नहीं करेंगी वर्ण उसकी पड़े पर असर पड़ेगा

कामिनी : ठीक है दीपिका जैसा तुम कहोगी मैं वैसा hi करुँगी अब तुझे hi सब करना है

दीपिका : आप मुझ पर भरोसा रखिये और एक काम आप आज से शुरू कर दीजिये

कामिनी : कौन सा काम?

दीपिका : आप अमित को अपनी तरफ आकर्षित कीजिये उसे अपने हुसैन क जलवे दिखाइए , उसे अपने इस गदराये बदन की खूबसूरती का एहसास करवाइये

कामिनी : ठीक है मैं आज से hi शुरू कर देती हूँ

दीपिका : मैं आपको फुल सपोर्ट करती रहूंगी मगर इतना यद् रखियेगा क इससे आगे मत बढियेगा वर्ण उसकी पड़े पर असर पड़ेगा

कामिनी और दीपिका दोनों अब एक हो गयी थी , कामिनी मन में खुश हो रही थी क उसे अमित तगड़ा लैंड मिलेगा और बरसों से प्यासी उसकी छूट की आग ठंडी होगी दूसरा अब वो माँ बन सकेगी

दीपिका भी अपने मन में खुश थी जिसकी तीन वजह थी

1 कामिनी उसका राज़ जानती थी अब अगर वो भी अमित से चुद जाएगी तो दीपिका को कोई दर नहीं रहेगी उसकी तरफ से

2 कामिनी इतने बरसो से तड़प रही है उसे भी शांति मिलेगी और वो भी माँ बन सकेगी

3 अमित को एक और छूट मिल जाएगी छोड़ने को और वो उससे और खुश होगा

ऐसे hi बातें करने क बाद दीपिका अपने कमरे में लौट जाती है और अपनी प्लानिंग पर खुश होने लगती है

कामिनी भी बीएड पर लेती अमित से चुदाई क ख्वाब देखने लगती है

आज रामु को उसका बाप वापिस ले गया था हॉस्पिटल से इस लिए अजय और विजय भी अब फ्री हो गए थे रोज़ रोज़ क चक्कर से

अमित ने बहार जाना छोड़ दिया था और सिर्फ पड़े पर hi ध्यान दे रहा था

अमित सारा दिन कमरे में hi रहता था इस लिए दीपिका कामिनी को कहती है क वो किसी न किसी बहाने से अमित क पास जाती रहे और उसे अपने जलवे दिखाए

कामिनी दीपिका क कहने पर अपना काम शुरू कर देती है रत को अमित जब खाना खा कर अपने कमरे में बैठ पद रहा था तो कामिनी अमित को दूध देने क बहाने आती है

कामिनी : क्या हो रहा है अमित

दीपिका : अरे आइये ममी जी , मैं बस पड़े कर रहा था

कामिनी : शाबाश ऐसे hi मन लगा कर पदों मगर अपनी सेहत का भी ख्याल रखो में तुम्हारे लिए दूध लायी हूँ गरमा गर्म

इतना कह कर कामिनी अमित क बिलकुल पास जा कर कड़ी हो जाती है और दूध का गिलास बिलकुल अपनी छाती क पास कर लेती है

अमित जब गिलास की तरफ देखता है तो उसकी नज़र कामिनी क बूब्स क बीच की घाटी पर जाती है ब्लाउज क ऊपर क दो बटन खुले होने की वजह से कामिनी क गोर गोर दूध आधे बहार झांक रहे थे और दोनों चुचों क बीच की गहरायी अमित को अपनी तरफ खींच रही थी

अमित लगातार कामिनी क दूध hi देखता जा रहा था

कामिनी अमित नज़रों को समझ कर अंदर hi अंदर खुश होने लगती है , उसका पहला वॉर सही लगा था

कामिनी : देख क्या रहे हो ताज़ा दूध है हाथ बढ़ाओ और पकड़ लो

अमित को ऐसे लगता है जैसे ममी उसे अपने चुके पकड़ने को कह रही है

अमित : कैसे पकड़ूँ लगता है बहुत गरम है , कहीं हाथ न जल जाये

कामिनी अमित की डबल मीनिंग बातों का मज़ा लेती हुई

कामिनी : इतना भी गरम नहीं है तुम हाथ तो लगाओ

अमित अभी भी कामिनी क दूध hi देख रहा था

अमित : मेरे हाथों में आएगा नहीं ममी जी

कामिनी : दोनों हाथो से पकड़ो न डरते क्यों हो

अमित हाथ बड़ा कर दूध का गिलास पकड़ लेता है और कामिनी थोड़ा सा झुक कर अपने दूध का नज़र अमित को दिखती हुई मुस्कुराती है और कमरे से बहार निकल जाती है

कामिनी मन में बहुत खुश थी क अमित भी उसके यौवन का रास आँखों से चख रहा था

अमित कामिनी क जाने क बाद आज जो कुछ हुआ सोचने लगता है

अमित : मन में ) ये मैं क्या बकवास कर रहा था ममी क साथ मुझे आखिर हो क्या जाता है , मैं कितना गिरता जा रहा हूँ , मेरा खुद पर कोई काबू नहीं रहा कैसे ममी की छाती को देख कर मैं सब भूल गया और ऐसी बातें करने लगा

ये सब गलत है वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में

शायद कल जो बारिश में हुआ उसी की वजह से ये सब हो रहा है

मुझे खुद को रोकना होगा नहीं तो ममी फिर से मुझ पर नाराज़ हो जाएँगी कितनी मुश्किल से तो मुझ से अब अछि तरह बात करने लगी हैं

मगर उनका ऐसे रूप में मेरे सामने आना और इस तरह बात करना कहीं उनके मन में कुछ चल तो नहीं रहा

नहीं नहीं मैं ये क्या सोच रहा हूँ वो ऐसी बिलकुल भी नहीं हैं , बीटा अमित खुद पर काबू रखो और सिर्फ पड़े पर ध्यान दो

फिर अमित पड़े करने लगता है और देर डट तक पड़ता रहता है फिर सो जाता है
 
अपडेट 30

नहीं नहीं मैं ये क्या सोच रहा हूँ वो ऐसी बिलकुल भी नहीं हैं , बीटा अमित खुद पर काबू रखो और सिर्फ पड़े पर ध्यान दो

फिर अमित पड़े करने लगता है और देर डट तक पड़ता रहता है फिर सो जाता है

अब आगे :

सुबह अमित जब नाश्ता करने बैठता है तो कामिनी उसे खाना परोसती है , खाना परोसते हुए कामिनी का अंचल ढलक जाता है और उसके ब्लाउज क 2 बटन खुले होने क कारन कामिनी की दूध अमित क सामने आ जाते हैं और अमित की नज़र कामिनी क गोर सफ़ेद दूध पर जैम जाती है , कामिनी जान बुझ कर थोड़ी देर झुकी रहती है और अमित को अपने दूध का पूरा नज़ारा करवाती है

अमित कामिनी क दूध देखने में hi खो जाता है दीपिका अमित और कामिनी को hi देख रही थी

खाना परोसने क बहाने अमित को अपना यौवन दिखने क बाद कामिनी अमित से पूछती है

कामिनी : दूध चाहिए ?

अमित कामिनी की बात और अंदाज़ से हड़बड़ा जाता है इस वक़्त दीपिका और गौरी पास में hi मौजूद थी इस लिए अमित जवाब देने से कटरा जाता है

गौरी : इसमें पूछने वाली क्या बात है इतनी मेहनत करता है दूध नहीं पियेगा तो कमज़ोर हो जायेगा

दीपिका : हाँ दीदी पीला दो अमित को दूध ये आजकल बहुत मेहनत करता है

इतना कहकर दीपिका अमित को एक कामुक इशारा करती है और अमित जल्दी से नज़रें झुका लेता है कहीं कामिनी ममी न देख ले

खाना खाने क बाद अमित कमरे में चला जाता है और थोड़ी देर बाद कामिनी दूध का गिलास लेकर चली अति है और फिर से अपनी कामुक अदाएं दिखती है

कामिनी लौट जाती है और अमित पड़े करने लगता है , एक घंटे क बाद कामिनी अमित क कमरे में फिर से चली अति है

कामिनी : अमित पाऊँ ऊपर उठा लो मैं पोछा लगाने आयी हूँ

अमित : अरे ममी जी आप रहने दीजिये कमरा ाचा भला साफ़ तो है

कामिनी : कहाँ साफ है तू बस चुपचाप पड़े कर मौजे अपना काम करने दे

अमित चुप चाप पाऊँ बिस्तर पर कर लेता है और पड़ने लगता है

कामिनी कमरे में नीचे बैठ कर पोछा मरने लगती है कामिनी क ब्लाउज क अब तीन बटन खुले हुए थी जिसकी वजह से उसके चुके आधे से ज्यादा बहार नज़र आ रहे थे

कामिनी जब बैठ कर पोछा लगा रही थी तो घुटनो को अपनी छाती में दबाकर अपने चोचों को बहार निकलने की कोशिश कर रही थी मगर अमित किताब में घुसा हुआ था

कामिनी अमित का ध्यान खींचने क लिए खांसी करती है मगर अमित की तरफ नहीं देखती

कामिनी की खांसी की आवाज़ से जब अमित कामिनी को देखता है तो उसका कलेजा मुँह को आ जाता है सामने कामिनी ममी क दूध ब्लाउज फाड़ कर बहार निकलने क लिए जड़ो जिहाद कर रहे थे अमित कामिनी क दूध देखने में hi खो जाता है , कामिनी कण अखिओं से अमित को देखती है तो मन hi मन मुस्कुराने लगती है

अमित को दूध दिखने क बाद कामिनी घूम जाती है अब कामिनी की गांड अमित क सामने आ जाती है बैठने की वजह से कामिनी की गांड पूरी तरह उभर कर सामने आ जाती है

अमित कामिनी क दूध और गांड देख कर उत्तेजित होने लगता है और उसका लैंड खड़ा होने लगता है , कामिनी 15 मिनट्स तक जी भर क अमित को अपना नज़ारा करवाती है और अमित से नज़र मिलकर मुस्कुराती हुई चली जाती है , अमित दिल पर पत्थर रख कर फिर से पड़ने लगता है

दोपहर का खाना खा कर अमित कमरे में आराम कर रहा था गौरी अपने कमरे में थी और दीपिका कामिनी दोनों कामिनी क कमरे में बैठी बातें कर रही थी

कामिनी कल से आज तक जो उसने किया और जो अमित का रिएक्शन था सब बता देती है

दीपिका : बहुत अचे दीदी ऐसे hi अमित को अपने जलवे दिखती रहो ताकि उसके दिल में आपका जिस्म भोगने की चाहत पैदा हो

कामिनी : वो तो ठीक है मगर मैं क्या करूँ दीपिका उसको अपना जिस्म दिखते दिखते मैं hi खुद पर काबू नहीं रख प् रही अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे जल्दी कुछ कर

दीपिका : दीदी जल्दी करने से नुकसान हो सकता है आप धीरे धीरे चलिए अगर अमित क एग्जाम न होते तो मैं कैसे भी कर क उसे आपके ऊपर चढ़ा देती मगर आप अभी थोड़ा सबर करिये

कामिनी : वो hi तो नहीं हो रहा अब

दीपिका : दीदी 8 दिन बाद उसके एग्जाम हैं और 10 दिनों में ख़तम हो जायेंगे बस तब तक खुद को रोक लो

और हाँ एग्जाम शुरू होते hi आप अमित को अपने जलवे दिखाना बंद कर देना नहीं तो उसका ध्यान भटके गए

कामिनी : ठीक है मगर एग्जाम क बाद भी अगर अमित राज़ी न हुआ तो

दीपिका : आपको मुझ पर भरोसा नहीं?

कुछ देर बातें करने क बाद दीपिका अपने कमरे में चली जाती है

कामिनी हर रोज़ किसी न किसी बहाने से से अमित को सडके करने की कोशिश करती है और दीपिका को सब बताती रहती है

अमित सिर्फ पड़े पर ध्यान दे रहा था मगर कामिनी क जलवे उसे बेचैन कर देते थे ऐसे hi एग्जाम का दिन आ गया

अमित : माँ आशीर्वाद दीजिये आज पहला एग्जाम है

गौरी : बीटा मन लगाकर पेपर देना किसी बात की चिंता मत करना

गौरी दही शक्कर खिलाकर अमित को खिलाती है जैसा की सब क साथ होता है पेपर देने से पहले माँ बच्चों की यही खिलाती है

फिर कामिनी और दीपिका अमित को शुभ कमाएं देती हैं

अमित क पेपर ख़तम होने तक कुछ खास नहीं होता बस पड़े और पेपर दीपिका क कहे अनुसार कामिनी अमित को सडके नहीं करती और 10 दिन में अमित क पेपर ख़तम हो जाते हैं

आज अमित बहुत खुश था उसके एक्साम्स ख़तम हो गए थे और सभी पेपर बहुत अचे गए थे

अमित स्कूल से वापिस आकर राजू से मिलता है

राजू : शुक्र है आज तेरा चेहरा नज़र आया मुझे तो तू भूल hi गया था

अमित : तुझे तो पता है न फाइनल पेपर थे और माँ ने सख्त हुकम दिया था क घर से बहार न निकलूं , खैर अब तो फ्री हो गया हूँ अब साडी कसार निकल देंगे तू बता कैसा चल रहा है क्या किया इतने दिन

राजू : अपना क्या है अपने को कौन सा पड़े करनी होती है बस इधर उधर क कामों में टाइम पास करता हूँ

कितने दिन से रेनू को भी नहीं मिल पाया वो भी अपने पेपर में बिजी है

अमित : हम्म अब तो मंजरी क भी पेपर हो रहे हैं उससे भी मिले कितने दिन हो गए

राजू : वैसे होली का क्या प्रोग्राम है

अमित : उसका क्या प्रोग्राम करना है वो hi बस सुबह सुबह माँ लाल रंग का टीका लगा देगी उसके बाद बाबा और दोनों मां को मैं रंग का टीका लगता हूँ और वो मुझे लगते हैं फिर तेरे पास आ जाऊंगा

तू बता अगर तूने कुछ सोचा है तो ?

राजू : मैं तो इस बार सबको साथ लेके रेनू की गली से रंग डालते हुए निकलूंगा और बहाने से उसे रंग लगा दूंगा

तू भी आ जाना मंजरी क घर की तरफ भी हो लेंगे

अमित : अबे मरवाएगा क्या मैं नहीं एंड वाला

राजू : चल साथ मत चलना मगर मुझसे आ कर रंग लगवा लेना

अमित : ठीक है लगवाउँगा और लगाऊंगा भी

राजू : चल मिलते हैं परसो सुबह 10 बजे तक आ जाना यद् से

अमित राजू से मिलकर घर आ जाता है

घर आ कर वो अपने पेपर क बारे में बताता है

गौरी खुश होती है क अमित क सभी पेपर अछि तरह हो गए वहीँ कामिनी का मन मयूर नाचने लगता है क अब वो आगे बाद सकती है जल्द hi अमित उसे अपना प्यार देगा और उसकी बरसों की प्यास बुझायेगा

अमित खाना खा कर जब अपने कमरे में लेता हुआ था तो दीपिका आ जाती है

दीपिका : तो आज तुम फ्री हो गए एक्साम्स से अब तो हम प्यार कर सकते हैं न

अमित : क्यों नहीं मैं तो कब से इंतज़ार कर रहा था जल्दी दरवाज़ा बंद कीजिये

दीपिका : इतने भी उतावले मत बनो मैं रत को आउंगी और आज तुम्हे सोने नहीं दूँगी

अमित : मगर अभी थोड़ा सा प्यार तो कर hi सकते हैं

इतना कहकर अमित दीपिका को बहिन में भरकर किश करने लगता है

5 मिनट्स किश कर क दीपिका अलग हो जाती है और अमित सवालिया नज़रों से उसे देखता है

दीपिका : बस अगर और ज्यादा किया तो फिर कण्ट्रोल नहीं होगा बाकि सब रत में

इतना कहकर दीपिका चली जाती है

रत में आज फिर कामिनी दूध देने क बहाने अमित को अपने दूध दिखा कर चली जाती है

अमित पहले से hi उत्तेजित था और अब कामिनी क दूध देख कर वो और उत्तेजित हो जाता है

रत को सबके सोने क बाद 12 बजे दीपिका अमित क कमरे में आ जाती है और अमित एते hi उसपर झपट पड़ता है

दीपिका : रुको तो मेरी बात सुनो

अमित तो उतावलेपन में दीपिका क दूध दबाये जा रहा था और उसको चूमे जा रहा था मगर दीपिका उसे दूर हटा देती है

दीपिका : आज मैं कुछ अलग करना चाहती हूँ

अमित : मतलब

दीपिका : मेरी एक इच्छा है जो मैं आज पूरी करनी चाहती हूँ

अमित : कैसी इच्छा

दीपिका : आज जो करुँगी वो मैं करुँगी और तुम बस चुप चाप मेरा साथ डोज और कोई सवाल नहीं मैंने जो करूँ जैसा करूँ वो मुझे करने डोज

अमित : आप करना क्या चाहती हैं ?

दीपिका : करनी तू चुदाई hi है बस आज अलग अंदाज़ में

अमित तैयार हो जाता है और दीपिका अमित को कपडे उतरने को कहती है , अमित जल्दी से नंगा हो जाता है और दीपिका भी कपडे उतर चुकी थी

दीपिका अमित को बीएड पर लिटा देती है और अपनी साडी से अमित क हाथ बीएड से बंद देती है और एक कपडे से अमित की आँखों पर पट्टी बंद देती है

अमित : ये आप क्या खेल खेल रही हैं ममी जी ऐसे मज़ा नहीं आएगा

दीपिका : तुम बस चुप रहो मैं जो करती हूँ करने दो और तुम्हे बहुत मज़ा आएगा

अमित चुप चाप लेता रहता है

अमित को अपने लैंड पर दीपिका क हाथ महसूस होते हैं , दीपिका उसके लैंड को मसलने लगती है और अमित का लैंड खड़ा होने लगता है

अमित : कक्ककव आआह्ह्ह्हह ममी जी मुँह में लो न कक्कक्स

तभी अमित को दरवाज़े की हलकी स आवाज़ अति है

अमित : ममी जी लगता है दरवाज़े पर कोई है

दीपिका : कोई नहीं है तुम बस मज़े लो

दीपिका लगातार अमित का लैंड मसले का रही थी

अमित को फिर कोई आहत सुनाई देती है मगर उत्तेजना में वो पहचान नहीं पता

दीपिका लगातार उसका लैंड मसले जा रही थी

फिर अमित को अपने लैंड पर गीला गीला सा एहसास होता है दीपिका ने उसके लैंड को मुँह में ले लिया था

अमित क मुँह से उत्तेजना में सिसकी निकल जाती है

अमित :!कक्कक्क्स मामंमी आआह्ह्ह्हह कककययय्यआआ मज़ाआ देती हो आआप आआह्ह्ह

दो मिनट में hi दीपिका लैंड चूस कर लैंड को मुँह से निकल देती है

दीपिका फिर से लैंड को हाथो में पकड़ती है मगर इस बार दीपिका क हाथ कांपने लगते हैं

अमित : सीसीसी ममम क्या हुआ ममी जी अआप क हाथ कांप क्यों रहे हैं

दीपिका : मुझसे ये गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही ह

अमित : तो आ जाइये न मेरे ऊपर और घोड़े की सवारी कर लीजिये

दीपिका : तुम चुप रहो मुझे करने दो जो मैं करना चाहती हूँ

फिर दीपिका कंपते हाथों से अमित क लैंड को सहलाती रहती है और लैंड अकड़ कर हाथो में hi झटके मरने लगता है

अमित : आअह्ह्ह ककक मुँह में लो न ममी जी क्यों तड़पा रही हो

दीपिका लैंड पर झुकते हुए लैंड क कैप पर अपने होंठ रखती है और एक किश कर क पीछे होने लगती है

अमित : ऐसे मत तड़पाओ ममी जी मुँह में लो न

दीपिका फिर से अमित क लैंड पर अपने होंठ रखती है और लैंड को मुँह में लेने की कोशिश करती है

अमित को कुछ अलग hi एहसास होता है आज दीपिका अलग hi अंदाज़ से लैंड चूस रही थी

अमित सिसकी लेता रहता है उसके दोनों हाथ बंधे हुए थे वर्ण वो ममी का सर पकड़ कर लैंड पर दबा देता पता नहीं क्यों ममी अछि तरह लैंड मुँह में नहीं ले रही थी

अमित : क्या ममी और अंदर तक लो न ऐसे मज़ा नहीं आ रहा और जल्दी जल्दी अंदर बहार करो

दीपिका थोड़ी स्पीड बड़ा देती है , अब वो आधा लैंड मुँह में लेने लगती है

अमित मज़े में सिसकारियां छोड़ रहा था

अमित : ऐसे hi ममी और अंदर तक लो और तेज़ करो

धीरे धीरे दीपिका की सपीड बढ़ती जा रही थी और अमित की सिसकारियां तेज़ होने लगती हैं

दीपिका 5 मिनट्स तक तेज़ तेज़ लैंड चुस्ती है और फिर एक डैम से लैंड मुँह से निकल कर पीछे हैट जाती है

अमित को दबी दबी सिसकीअन सुनाई देती हैं

अमित : क्या हुआ ममी जी रुक क्यों गयी कहीं आपका काम तो नहीं हो गया

दीपिका : अभी इतनी जल्दी कहाँ वो तो मेरी सांस फूल गयी थी

2 मिनट्स बाद hi दीपिका फिर से लैंड को मुँह में ले लेती है और अमित मज़े में चले जाता है अमित को फिर से दरवाज़े की आवाज़ अति है और वो पूछता है मगर दीपिका उसे चुप करवा देती है

अब दीपिका 69 में हो जाती है खुद अमित का लैंड चूसने लगती है और अपनी छूट अमित क मुँह पर लगा कर अपनी छूट उससे चटवाने लगती है

5 मिनट्स में hi दीपिका की छूट पानी पानी होने लगती है और वो जल्दी से अमित क लैंड पर बैठ जाती है और उसके मुँह से दबी दबी चीख निकल जाती है

दीपिका : आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह मम्माआ जब भी अंदर जाता है जान ले लेता है

धीरे धीरे दीपिका अमित क लैंड पर कूदने लगती है अब अमित को भी मज़ा एंड लागत है मगर हाथ बंधे होने क कारन वो पूरा एन्जॉय नहीं कर प् रहा था

अमित : ममी जी प्लीज मेरे हाथ और ये पट्टी खोल दीजिये मुझे मज़ा नहीं आ रहा

दीपिका अमित क हाथ और पट्टी खोल देती है और अमित फिर आज़ाद होकर ममी क दूध दबाता हुआ नीचे से धक्के मरने लगता है

दीपिका और अमित आधे घंटे तक चुदाई करते हैं और अलग अलग पोज़ में एक दूसरे को खूब मज़ा देते हैं

चुदाई ख़तम होने क बाद अमित सुस्ताने लगता है और दीपिका कपडे पहनने लगती है

अमित : क्या हुआ ममी जी आप तो साडी रत करने वाली थी

दीपिका : वो क्या है न कल मुझे जल्दी उठना पड़ेगा इस लिए आज इतना hi काफी है बाकि कल कर लेंगे

दीपिका अमित को किश दे कर दरवाज़ा बंद कर क चली जाती है और अमित सोने लगता है

दीपिका अमित क कमरे से बहार निकली तो सामने कामिनी कड़ी थी

दीपिका : क्यों दीदी कैसा लगा अमित क लैंड का सवाद

( अमित को बीएड पर बांध कर आँखों पर पट्टी बांध कर दीपिका ने कामिनी को कमरे में बुलाया था जब अमित को दरवाज़े की आवाज़ अति तब कामिनी hi कमरे में आयी थी और दीपिका क पीछे हैट ने पर दोबारा कांपते हाथो से कामिनी ने hi अमित का लैंड पकड़ा था और चूसा भी था)

कामिनी : क्या बताऊँ दीपिका कितना मज़ा आया इतना बड़ा लैंड हाथों में पकड़ते hi मेरे हाथों क साथ साथ सारा शरीर कांपने लगा था और जब उसके लैंड को मुँह में लिया तो क्या बताऊँ मेरी छूट तो पानी पानी हो गयी थी

दीपिका : वो तो मैं समझ गयी थी क आपका काम हो गया है

कामिनी : इतना तो तुमने कर hi दिया तो मुझे उसका लैंड छूट में क्यों नहीं लेने दिया

दीपिका : वो इस लिए दीदी क अमित का लैंड आप खुद अपनी छूट में नहीं ले पाएंगी , आपकी छूट में इतने सैलून से लैंड नहीं गया है इस लिए आपको बहुत तकलीफ होगी जब उसका लैंड अंदर जायेगा , अगर वो सब अमित खुद hi करे तो hi ठीक होगा आप चिंता मत करो जल्द hi उसका मुसल आपकी इस प्यासी तड़पती छूट में बहार लेन वाला है

कामिनी : मैं तो कब से मरे जा रही हूँ

दीपिका : बस जल्दी hi आपकी तड़प मिट जाएगी

दोनों फिर अपने अपने कमरे में चली जाती हैं और सो जाती हैं

कामिनी अमित क लैंड की आज हाथो में पकड़ कर और फिर मुँह में लेकर बहुत खुश थी वास्तव में आज पहली बार उसने कोई लैंड मुँह में लिया था उसे पहले तो अजीब लगा मगर बाद में बहुत मज़ा भी आया

अमित क लैंड क स्वाद अभी भी उसे अपने मुँह में महसूस हो रहा था और उसके मुँह में गले तक उसे लैंड का एहसास अभी भी था

ऐसे hi अमित क लैंड क सपने देखती कामिनी सो जाती है
 
अपडेट 31

दोनों फिर अपने अपने कमरे में चली जाती हैं और सो जाती हैं

कामिनी अमित क लैंड की आज हाथो में पकड़ कर और फिर मुँह में लेकर बहुत खुश थी वास्तव में आज पहली बार उसने कोई लैंड मुँह में लिया था उसे पहले तो अजीब लगा मगर बाद में बहुत मज़ा भी आया

अमित क लैंड क स्वाद अभी भी उसे अपने मुँह में महसूस हो रहा था और उसके मुँह में गले तक उसे लैंड का एहसास अभी भी था

ऐसे hi अमित क लैंड क सपने देखती कामिनी सो जाती है

अब आगे -

सुबह अमित अखाड़े में आज कई दिनों बाद गया था एक्साम्स की वजह से इस लिए आज इतने दिनों की कसार निकल रहा था और थोड़ा लेट घर गया , विजय अजय और कमलेश जा चुके थे अमित नहाकर तैयार हो कर नाश्ता करने पहुँच गया

गौरी : आज इतनी देर कैसे हो गयी आने में?

अमित : माँ इतने दिनों बाद गया था इस लिए थोड़ा ज्यादा टाइम लग गया

रसोई में गौरी और दीपिका hi थी कामिनी कहीं नज़र नहीं आ रही थी

अमित : माँ कामिनी ममी कहाँ है आज नज़र नहीं आ रही

गौरी से पहले दीपिका जवाब देती है

दीपिका : दीदी की तबियत कुछ ठीक नहीं है

अमित उठ कर कामिनी क कमरे की तरफ जाने लगता है तो दीपिका उसे रोक लेती है

दीपिका : वहां कहा जा रहा है ? दीदी आराम कर रही है तू नाश्ता कर

अमित नाश्ता कर क बहार जाने लगता है तो दीपिका उसे आवाज़ देती है

दीपिका : अमित मुझे तुमसे काम है ज़रा मेरे कमरे में आना

अमित दीपिका क कमरे में आ जाता है और दीपिका उससे बात शुरू करती है

दीपिका : अमित तुम्हे पता है कामिनी दीदी को क्या हुआ है?

अमित : मुझे कैसे पता होगा आप hi ने तो बताया उनकी तबियत ठीक नहीं है

दीपिका : तुम्हे यद् है तुमने कहा था क मैं पता करूँ क दीदी तुमसे नफरत क्यों करती है

अमित : हाँ कहा तो था मगर अब तो इसकी ज़रूरत नहीं है अब तो वो बदल गयी हैं

दीपिका : नहीं तुम्हे ये जानना चाहिए ये ज़रूरी है और आज कामिनी दीदी को कुछ हुआ नहीं है वो बिलकुल ठीक हैं बस तबियत का बहाना बना कर अपने कमरे में बीएड शीट में मुँह छुपा कर रो रही हैं

अमित : क्याआ? ममी रो रही हैं ? मगर क्यों आखिर क्या हुआ है ऐसा जो वो रो रही हैं

दीपिका : इसकी वजह तुम्हारे साथ उनकी जो नफरत थी उससे जुडी है

अमित हैरानी से दीपिका को देखने लगता है उसे समझ नहीं आ रहा था आखिर ऐसी क्या वजह है

दीपिका : तुम जानते हो न क कामिनी दीदी आज तक माँ नहीं बन पायी और इसके पीछे क्या वजह है ये कोई नहीं जनता

अमित तो लगातार हैरानी से दीपिका ममी का मुँह देख रहा था वो जो भी बोल रही थी अमित को हैरान करता जा रहा था

दीपिका अमित क बचपन में बर्थडे वाले दिन हुए अजय क एक्सीडेंट और कामिनी क गिरने उसके पेट में पल रहे बचे क मरने और अजय क नामर्द हो जाने की साडी बातें जो कामिनी ने उसे बताई थी वो साडी अमित को बता देती है

अमित को जब ये साडी बातें पता चलती हैं तो उसकी आँखों में पानी आ जाता है

अमित : ममी सही कहती थी मैं हूँ hi मनहूस , मेरी वजह से उनकी ज़िन्दगी दुखों से भर गयी मैं उनका मुजरिम हूँ

दीपिका अमित की आँखों में पानी देखती है तो जल्दी से उसे अपने गले लगा लेती है

दीपिका : ऐसा मत कहो अमित वो सिर्फ हादसा था बदकिस्मती से तुम भी उसका शिकार हो

मगर मुझे दीदी पर तरस अत है कितनी दुखी हैं वो मगर कभी ज़ाहिर नहीं करती मैंने कई बार अकेले में उन्हें रट देखा है

एक औरत की ज़िन्दगी में उसके पति और बच्चों का प्यार hi सब कुछ होता है और कामिनी दीदी को न बचे नसीब हुए न पति का प्यार

अमित : मगर अजय मां तो कितना प्यार करते हैं ममी को

दीपिका : अमित एक शादीशुदा औरत क लिए उसके पति का प्यार सिर्फ उसकी परवाह करना नहीं होता एक औरत कपडे खाने क इलावा भी कुछ चाहिए जिसके बिना ग्रहस्ती पूरी नहीं होती . तुम नहीं जानते अमित एक औरत भूखे पेट तो रह सकती है मगर प्यासी छूट क साथ नहीं रह सकती , अजय भैया दीदी की परवाह करते हैं उनकी सब ज़रूरते पूरी करते हैं मगर उनकी छूट की प्यास नहीं बुझा पते

ऐसा कोई दिन नहीं जब दीदी काँटों पर न लेती हो , औरत की इस पीड़ा को एक औरत hi समझ सकती है उनकी जगह कोई और होती तो किसी गैर मर्द क निचे लेट जाती मगर दीदी ने कभी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे इस घर की इज़्ज़त को डेग लगे , इस घर और अजय भैया की इज़्ज़त को बचने क लिए आज तक उन्होंने ये बात किसी को नहीं बताई और सारा दर्द अपने दिल में छुपाई बैठी हैं

अमित दीपिका की बातों को सुनते हुए कामिनी क दर्द को महसूस करने की कोशिश कर रहा था

दीपिका : कामिनी दीदी क ज़ख्मो पर अगर कोई मलहम लगा लगा सकता है तो वो सिर्फ तुम हो

अमित : हैरानी से ) मैं? मैं भला क्या कर सकता हूँ ? अगर मेरे बस में हो तो मैं उनके सरे दुःख दर्द अपने ऊपर ले लू

दीपिका : अपने ऊपर लेने की ज़रूरत नहीं है अमित बस उनको वो ख़ुशी दो जिसके लिए वो बरसों से तरस रही हैं

अमित : मतलब

दीपिका : मतलब कामिनी दीदी को वो प्यार दो जो उनको चाहिए और उनको माँ बना कर उनकी ज़िन्दगी से काले अँधेरे दूर कर दो

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ममी जी ये गलत है

दीपिका : कुछ गलत नहीं है , तुम क्या चाहते हो क दीदी साडी उम्र ऐसे hi तड़पती रहे और ऐसे hi तरसती हुई मर जाएँ

क्या तुम्हारा कोई फ़र्ज़ भी उनके दुःख दूर करने का ? क्या तुम उनको ख़ुशी नहीं देना चाहते?

अमित : मगर ममी जी सोचिये आप जो कह रही हैं वो गलत है किसी को अगर ये पता चला तो क्या होगा अभी तो जो दुःख है वो और है मगर जब उनकी बदनामी होगी तो वो जीते जी मर जाएँगी और वैसे भी ममी भी ये सब नहीं चाहेंगी . उन्हें अपनी इज़्ज़त की ज़्यादा परवाह है वर्ण वो ये सब किसी और क साथ भी कर सकती थी

दीपिका : तो तुम ये चाहते हो क वो बहार किसी दूसरे आदमी क पास जाएँ?

अमित : नहीं मैंने ये कब कहा

दीपिका : तो फिर तुम उनको वो प्यार दो

अमित : मगर

दीपिका : कोई अगर मगर नहीं मैंने कल रत भी उन्हें बाथरूम में रत अपनी इस आग को ठंडा करते और रट देखा है और मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा अगर तुम्हारे दिल में मेरे और दीदी क लिए थोड़ा सा भी प्यार है तो तुम उनका दुःख दूर करोगे

अमित दीपिका की बात पर चुप हो जाता है

उसके बाद अमित बहार जाने की बजाये अपने कमरे में चला जाता है और कामिनी ममी क बारे में सोचता रहता है

दोपहर का खाना खाने क बाद जब सब अपने कमरों में चले जाते हैं तो अमित कामिनी ममी क कमरे में जाता है

अमित : ममी जी आपकी तबियत तो ठीक है ? आज आप अपने कमरे से नहीं निकली

कामिनी : हाँ वो आज थोड़ा बुखार सा लग रहा था इस लिए दवा खा कर आराम कर रही हूँ

अमित : पक्का यही बात है ?

कामिनी : हाँ क्यों?

अमित : ममी जी मैं चाहता हूँ आप हमेशा खुश रहा कीजिये मैं आपको दुःख में नहीं देख सकता अगर आपको कोई भी तकलीफ हो तो आप मुझसे कहा कीजिये

कामिनी : मन में ) मैं तो कब से कहना चाहती हूँ मगर कह नहीं पति क तुम मुझे भी दीपिका की तरह प्यार करो मैं भी. तो तुम्हारी ममी हूँ

कामिनी : तुम्हारे होते मुझे क्या दुःख हो सकता है तुम हो न मेरा ध्यान टखने क लिए

अमित कामिनी से थोड़ी देर बातें कर क बहार निकल जाता है असल में वो आया तो कामिनी से बात करने था जो दीपिका ने बताया था मगर उसकी हिम्मत नहीं हुई आखिर वो कैसे पूछे

खेतों में दिन बिताकर रत को खाना खा कर अमित सो जाता है आज दीपिका भी उसके पास नहीं अति क्यूंकि वो अमित को सोचने का वक़्त देना चाहती थी ताकि उसे ऐसा न लगे क उसके साथ ज़बरदस्ती की जा रही है

अगली सुबह अमित जब अखाड़े से घर अत है तो गौरी उसे लाल रंग लगाकर होली की मुबारक बाद देती है और अमित भी गौरी को रंग लगता है फिर बरी बरी से विजय अजय और कमलेश भी अमित को रंग लगते हैं और वो भी लगता है , दीपिका और कामिनी अमित को नज़र नहीं अति अमित राजू क घर चला जाता है

राजू क घर पर उसके गाओं क कई दोस्त मौजूद थे वो सब होली खेलने जाने की तयारी कर रहे थे अमित राजू को रंग लगाकर होली विश करता है और राजू भी अमित को रंग लगता है

तभी राजू का एक दोस्त गिलास में लस्सी ले अत है और सबको पिलाने लगता है अमित भी एक गिलास पि लेता है मगर उसका टास्ते कुछ अलग सा था फिर भी ाचा था

आधा घंटा राजू क घर बिताने क बाद अमित घर लौट अत है और राजू अपने साथियों क संग गाओं में होली खेलने चला जाता है

घर एते hi अमित क ऊपर पानी की बरसात हो जाती है , ये दीपिका थी जो अमित क साथ आज खुल कर होली खेलना चाहती गहि और रत से hi उसने पक्का रंग भी तैयार रखा हुआ था

दीपिका : होली है

ऐसा कहते हुए दीपिका पानी की रंग वाली बाल्टी अमित क ऊपर दाल देती है अमित एक पल क लिए हड़बड़ा जाता है और जब वो संभालता है तो दीपिका को पकड़ने दौड़ता है तो दीपिका भाग जाती है

दीपिका ने आज सलवार सूट पहना हुआ था जो क कभी कभार hi पहनती थी

अमित दीपिका को पकड़ने दौड़ता है तो वो बाथरूम की तरफ भगति है जहाँ कामिनी पहले से hi मौजूद थी और रंग वाले पानी की बाल्टी लिए कड़ी थी

दीपिका क पीछे पीछे अमित जैसे hi बाथरूम में घुसता है तो कामिनी रंग वाली बाल्टी अमित पर दाल देती है

अमित की आँखें बंद हो जाती हैं जब वो अपना चहरे से पानी साफ कर क देखता है तो सामने कामिनी ममी को देख कर हैरान हो जाता है

आज कामिनी भी सलवार सूट में थी जो आजतक अमित ने कभी नहीं देखा था शायद दीपिका का पहना हो

अमित अवाक सा कामिनी को देखने लगता है

तब कामिनी उसे हकीकत में वापिस लती है

कामिनी : होली है , क्यों बच्चू आया मज़ा ? आज हम बताती हैं तुझे होली कैसे खेलते हैं

अमित खुश हो जाता है पास में कड़ी गौरी ये सब देख कर है रही थी जबकि विजय कमलेश और अजय घर से निकल चुके थे

अमित : ाचा टी आप दोनों मिल कर मुझे भिगो रही हैं अभी बताता हूँ , माँ आप बहार क दरवाज़ा बंद कर दीजिये इन्हे भागने नहीं देना

इतना बोल अमित जल्दी से दीपिका को पकड़ लेता है और रंग लेकर उसके चहरे पर पाठ देता है उसके बाद वो कामिनी को पकड़ने दौड़ता है और वो भागने लगती है मैं मगर जल्दी hi अमित उसे दबोच लेता है और उसको भी रंग लगा देता है तभी दीपिका अमित को पीछे से पक्का रंग पूरे मुँह पर लगा देती है

अमित जब देखता है दीपिका ममी ने पक्का रंग लगाया है तो वो भी पक्का रंग लेकर दीपिका को लगाने भागता है और दीपिका ऊपर भाग जाती है अमित उसके पीछे भागता है और दीपिका को रामु वाले कमरे में दबोच लेता है और उसके चहरे पर पक्का रंग लगा देता है

तभी कामिनी भी अमित को पकड़ कर पक्का रंग लगा देती है और अमित भी जवाब में कामिनी ममी को पक्का रंग लगा देता है

अब कंडीशन ये थी क कामिनी और दीपिका क रंग पक्के रंग क कारन लाल हो चुके थे और दोनों क कपडे भी रंग और पानी से भीगे हुए एक जैसे लग रहे थे जिसकी वजह से दोनों एक जैसी लगने लगी थी ऊपर से अमित जो लस्सी राजू क घर से पीकर आया था वो लस्सी नहीं भांग थी जिसका असर अब उसे होने लगा था

अमित जब कामिनी को पकड़ पर चेहरा रंग रहा था तो दीपिका पीछे से उसे दबोच लेती है और उसके लैंड को पकड़ कर मसलने लगती है अमित झटके से कामिनी को छोड़ देता है और दीपिका की तरफ पलट कर उसको तंग लगाने क बहाने उसके जिस्म को मसलने लगता है

कामिनी पानी लेने कमरे से बहार निकल जाती है तब अमित दीपिका क बूब्स पकड़ लेता है

बूब्स पर हाथ लगते hi उसे ऐसा लगता है जैसे अंदर से उसने कुछ नहीं पहना हो और था भी ऐसा hi आज दीपिका फुल मस्ती क मूड में थी इस लिए उसने सलवार सूट पहना था और अंदर से ब्रा पेंटी नहीं पहनी थी

अमित दीपिका क बूब्स दोनों हाथो से मसलने लगता है और दीपिका की सिसकीअन निकलने लगती हैं

दीपिका : आअह्ह्ह्हबक्कक्कक्स आराम से आह्हः ककक

दीपिका अमित क सीने से चिपक जाती है और अमित क हाथ दीपिका की गांड पर चले जाते हैं और वो गांड मसलने लगता है

अमित माध होश हो गया था एक तो भांग का असर दूसरा दीपिका की मस्ती

तभी कामिनी पानी ला कर अमित पर दाल देती है और अमित अपनी आँखों को माल्टा हुआ दीपिका से पीछे हैट जाता है , दीपिका अमित की बाँहों से निकल जाती है और कामिनी अमित को फिर से रंगा लगाती हुई उससे चिपक जाती है

अमित की आँखें बंद थी वो कामिनी को दीपिका समझ कर पकड़ लेता है और उसे ज़ोर से अपने सीने से लगाकर भींच लेता है जिससे कामिनी क मुँह से सिसकी निकल जाती है

कामिनी : कक्कक्कक्स आआह्ह्ह्हह

अमित मदहोशी में कामिनी क जिस्म को मसलने लगता है और उसके हाथ कामिनी की गांड पर चले जाते हैं

अमित ज़ोर ज़ोर से कामिनी की गांड मसलने लगता है और कामिनी को और जोर से खुद से भींच लेता है

अमित का लैंड इस मस्ती से खड़ा हो गया था सो अब वो सीधा कामिनी की छूट पर दस्तक दे रहा था , कामिनी का जिस्म लरजने लगा था

कामिनी : आअह्ह्ह्ह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह हम्म्म्म उम्म्म्म

अमित मस्ती में डूबता जा रहा था उसका दिमाग अब सोचने समझने क काबिल नहीं था वो जल्दी से कामिनी को पलट कर उसके बूब्स दबाने लगा था

अमित यही समझ रहा था क उसकी बाँहों में छोटी ममी है

वहीँ कामिनी मस्ती में सिसकारिआं निकल रही थी मगर मुँह से कुछ बोल नहीं रही थी

कामिनी : आह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स उम्म्म्म आआअह्ह्ह्ह ममममम

अमित मस्ती में डूबा ज़ोर ज़ोर से बूब्स मसल रहा था कामिनी की गांड अमित क लैंड से रगड़ खा रही थी

अपनी गांड पर अमित क खड़े लैंड का एहसास उसे और मस्त करता जा रहा था

कामिनी ने भी अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी इसी लिए अमित भी समझ नहीं पाया था और दोनों मामिओं की फिगर भी एक जैसे hi थी

कामिनी अपनी गांड को अमित क लैंड पर और दबाने लगती है , अमित अपना एक हाथ निचे लेजाकर कामिनी की छूट को पहले सलवार क ऊपर से रगड़ता है और फिर अपना हाथ सलवार क अंदर घुसा कर कामिनी की नंगी छूट रगड़ने लगता है

कामिनी : आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कक्स ममममम कक्कक्क्स उम्मम्मम ाआजहःहःह कक्कक्क्स

कामिनी अमित का हाथ अपनी छूट पर लगते hi मचल उठती है और उसकी छूट गीली हो जाती है

अमित छूट मसलता हुआ अपनी उंगली अंदर घुसा देता है और कामिनी चिहुंक उठती है

कामिनी : कक्कक्कक्स आआआअह्हह्ह्ह्ह ूईमंममम

कामिनी अपना हाथ मुँह पर रख कर अपनी आवाज़ दबाने की कोशिश करती है

अमित छूट को उंगली से छोड़ने लगता है भांग क असर की वजह से उसे ये भी नहीं पता चल रहा था क ये दीपिका की खुली छूट है या कामिनी की टाइट छूट

कामिनी एक हाथ निचे ले जाकर अमित का लैंड पकड़ कर मसल देती है तो अमित जल्दी से कामिनी को वहीँ ज़मीन पर पटक कर उसके ऊपर चढ़ जाता है और उसकी दोनों टैंगो क बीच आकर उसके ऊपर लेट जाता है और कपड़ों क ऊपर से hi अपना लैंड कामिनी की छूट पर लगा कर धक्के मरने लगता है

कामिनी अपनी टंगे उठाकर अमित की कमर पर बांध लेती है और अपनी छूट पर अमित क लैंड का एहसास और ज़ोर से करने लगती है

अमित दोनों हाथो से कामिनी क बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था

कामिनी की छूट पानी बहाये जा रही थी वो चाहती थी क अब अमित का लैंड छूट में घुस जाये कामिनी से गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी वो अमित को धक्का दे कर साइड में गिरा देती है और खुद अमित क लैंड क ऊपर बैठ कर ज़ोर ज़ोर से लैंड पर छूट रगड़ने लगती है और सिसकारियां तेज़ तेज़ छोड़ने लगती है

कामिनी : कक्कस्वक्स ह्म्म्मम्म्म्ब्कक्कक्कक्स उम्मम्मम

अमित : ममी जी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा जल्दी कुछ करो

कामिनी कोई जवाब नहीं देती और मस्ती में अपनी छूट लैंड पर रगड़े जा रही थी अमित कामिनी क बूब्स पकड़ कर मसलने लगता है , अमित क हाथ अब कमीज क अंदर कामिनी क नंगे बूब्स पर थे

अपने नंगे बूब्स पर अमित क हाथो का एहसास और छूट पर लैंड की रगड़ कामिनी से बर्दाश्त नहीं होती और वो झटके लेती हुई पानी छोड़ने लगती है

2 मिनट्स कामिनी अमित की छाती पर गिर कर ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगती है

साँसे सँभालते hi वो उठ कर बहार भाग जाती है और दीपिका अंदर आ जाती है

दीपिका : अमित नीचे लेट कर क्या कर रहे हो ? और दीदी क्यों भागती हुई गयी हैं ?

अमित दीपिका क सवाल से शॉकेड हो जाता है
 
अपडेट 32



कामिनी कोई जवाब नहीं देती और मस्ती में अपनी छूट लैंड पर रगड़े जा रही थी अमित कामिनी क बूब्स पकड़ कर मसलने लगता है , अमित क हाथ अब कमीज क अंदर कामिनी क नंगे बूब्स पर थे


अपने नंगे बूब्स पर अमित क हाथो का एहसास और छूट पर लैंड की रगड़ कामिनी से बर्दाश्त नहीं होती और वो झटके लेती हुई पानी छोड़ने लगती है

2 मिनट्स कामिनी अमित की छाती पर गिर कर ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगती है

साँसे सँभालते hi वो उठ कर बहार भाग जाती है और दीपिका अंदर आ जाती है

दीपिका : अमित नीचे लेट कर क्या कर रहे हो ? और दीदी क्यों भागती हुई गयी हैं ?

अमित दीपिका क सवाल से शॉकेड हो जाता है

अब आगे -

अमित को यकीन नहीं हो रहा था क अभी वो जिसे दीपिका समझ कर छोड़ने की तयारी कर रहा था जिसके बूब्स वो रगड़ रगड़ क मसल रहा था जिसकी नंगी छूट को वो मसल और उंगली कर रहा था वो कामिनी ममी है और वो उसके लैंड पर बैठ कर कैसे अपनी छूट रगड़ रही थी

अमित : मन में ) हे भगवन ये मैंने क्या कर दिया अगर ममी ने मां को या माँ बाबा को बता दिया तो क्या होगा

ये सब सोचते हुए अमित की गांड फटने लगी थी उसे समझ नहीं आ रहा था वो अब क्या करे , दीपिका अमित को शॉकेड देखती है तो वो अमित क पास अति है

दीपिका : बोलो अमित दीदी इस तरह भाग कर क्यों गयी हैं कहीं तुमने कुछ कर तो नहीं दिया उनके साथ

अमित : वो ममी जी वो मैं समझा आप हो तो मैं

दीपिक : हआ मतलब कहीं तुमने उनको रगड़ तो नहीं दिया ?

अमित जवाब देनी की बजाये सर झुका लेता है और दीपिका समझ जाती है

दीपिका : ये तूने क्या कर दिया अमित मैंने तुम्हे बताया था वो कितनी प्यासी हैं वो कितनी तड़प रही हैं और तुमने उनके ज़ख्मों पर नमक लगा दिया

तुमने एक बार भी नहीं सोचा उनका क्या होगा

अमित शर्मिंदगी से सर झुकाये बैठा था

दीपिका : अब ऐसे बैठे मत रहो मैं उनके पास जाती हूँ , कितनी मुश्किल से उनको बसने क लिए मैंने ये होली का प्लान किया था और तुमने ये क्या कर दिया

इतना कह कर दीपिका कमरे से निकल जाती है और कामिनी क पास चली जाती है

अमित कमरे में बैठा अभी जो कुछ हुआ उसी क बारे में सोच रहा था और पता नहीं कब तक वो सोचता रहा फिर गौरी क आने पर वो ख्यालों की दुनिया से बहार आया

गौरी : क्या हुआ अमित कब से यहाँ बैठे हो चलो अब अपना हुलिए ठीक करो नहा कर तैयार हो जाओ

अमित चुप चाप उठता है और बाथरूम में घुस जाता है और फिर तैयार हो कर नीचे अत है , खाने का वक़्त था इस वक़्त खाने पर केवल गौरी अजय अमित कमलेश और विजय मौजूद थे

अमित की नज़रें कामिनी और दीपिका ममी को ढून्ढ रही थी मगर वो अपनी शर्मिंदगी की वजह से गौरी से पूछ नहीं रहा था मगर उसका ये सवाल अजय पूछ लेता है

अजय : भाभी कामिनी और बहु नज़र नहीं आ रहीं कहीं गयीं है क्या ?

गौरी : अरे नहीं , दोनों अंदर कमरे में हैं आज होली खेलते हुए भीग गयीं थी शायद उसीसे सर्दी लग गयी है तो दोनों आराम कर रही हैं

अमित मन में सोचने लगता है ज़रूर कामिनी ममी मेरी वजह से दुखी होंगी और छोटी ममी उनको संभल रही होंगी

खाना खाने क बाद तीनो मां चले जाते हैं गौरी अपने कमरे में चली जाती है

अमित कामिनी ममी क कमरे में जाने की कोशिश करता है मगर दरवाज़ा अंदर से बंद था

अमित कामिनी ममी क बारे में सोचता हुआ वापिस अपने कमरे में लौट जाता है

अमित बीएड पर लेता आज जो हुआ और जो कामिनी ममी क बारे में छोटी ममी ने बताया था उसी क बारे में सोचता रहता है तकरीबन एक घंटे क बाद दीपिका अमित क पास अति है

दीपिका : अमित तुमने ाचा नहीं किया दीदी बेचारी का रो रो कर बुरा हल है

अमित : ममी जी कामिनी ममी अब कैसी हैं मुझे बताइये

दीपिका : तुमने उनके ज़ख्मों को आज कुरेद दिया है और अब उनसे ये सहा नहीं जा रहा है वो बेचारी तो मर जाने की बातें कर रही हैं अब तुम hi सोचो क तुम क्या चाहते हो

( दीपिका जानती थी अमित इमोशंस में बह कर हाँ कर देता है यही उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी थी)

अमित : नहीं ममी जी ऐसा मत कहो मेरी वजह से वो ऐसा करना चाहती हैं मैं ऐसा नहीं होने दूंगा

दीपिका : नहीं अमित उनके दुःख का कारन उनको पति का सुख न मिलना और उनकी कोख का सूनापन है अब तुम्हे उनका ये दुःख दूर करना है

अमित : ममी आप समझ क्यों नहीं रही ये गलत है ये अजय मां क साथ धोखा है

दीपिका : समझ तुम नहीं रहे हो अब दीदी और बर्दाश्त नहीं कर सकती अब फैसला तुम्हे करना है , तुम्हे उनको प्यार देना है या मौत

अमित चुप चाप सर झुका देता है

दीपिका : मैंने दीदी को बोल दिया है आज रत वो यहाँ आएँगी और अब तुम्हे उनको वो प्यार देना है जिसके लिए वो बरसो से तरस रही हैं

इतना कह कर दीपिका चली जाती है

अमित कामिनी ममी क बारे में सोचने लगता है

अमित : मन में ) अगर ममी को बचने का यही एक तरीका है तो यही सही वैसे भी छोटी ममी क साथ ये सब कर क मैं एक पाप तो पहले hi कर चूका हूँ तो एक और सही

शाम तक और कुछ खास नहीं होता रत का खाना सब मिल कर कहते हैं और आज थकन की वजह से सब जल्दी सोने चले जाते हैं

दीपिका ने कामिनी को नींद की गोली दे दी थी अजय को देने क लिए और कामिनी वो गोली अजय को दूध में मिलकर दे देती है

रत 12 बजे दीपिका अमित क कमरे में अति है

दीपिका : अमित चलो उठो दीदी साथ वाले कमरे में तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं

अमित : ममी एक बार फिर सोच लो क्या ये सही है

दीपिका : यही बिलकुल सही है और अब तू सोचना छोड़ और आज दीदी को इतना प्यार देना क वो अपने सरे गम भूल जाएँ

हो सकता हैं वो थोड़ा शर्माएं उन्होंने पिछले 15 सैलून से सेक्स नहीं किया है इस लिए आज जो करना है तुम्हे करना है अगर वो इंकार भी करें तो पीछे मत हटना और किसी चीज़ की चिंता मत करना मैं यहीं तुम्हारे कमरे में हूँ अगर ज़रूरत पड़े तो

अमित अपने कमरे से निकल कर साथ वाले कमरे में जाता है जहाँ कामिनी बीएड पर नयी दुल्हन की तरह सर झुकाये बैठी थी

कामिनी क मन में शर्म और दर क मिले जुले भाव थे उसे समझ नहीं आ रहा था वो कैसे ये सब करेगी और इसकी शुरुआत कौन करेगा कहीं अगर अमित शर्माता रहा तो पता नहीं क्या क्या विचार उसके दिल में आ रहे थे

अमित कमरे में घुसा तो कमरे में नाईट बल्ब जल रहा था अमित ने अंदर एते hi कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया

दरवाज़े की आहत से hi कामिनी का जिस्म लरज गया , कितने दिनों से कामिनी जिस पल क लिए मरी जा रही थी आज उसी से वो दर रही थी शर्मा रही थी

अमित भी मन में संकोच लिए खुद को हिम्मत देता हुआ आगे बढ़ता है धीरे धीरे वो कामिनी ममी क पास बीएड पर बैठ जाता है

कुछ पल क लिए कमरे में एक ख़ामोशी छ गयी कामिनी और अमित को अपनी धड़कने सुनाई दे रही थी

अमित कुछ बोल नहीं प् रहा था मगर उसे छोटी ममी क शब्द यद् आते हैं क जो करना है तुम्हे करना है

अमित अपना हाथ आगे बढ़ाता है और कामिनी ममी की तरफ झुकता हुआ उनके सर को पकड़ कर अपने होंठ सीधा कामिनी क होंठो पर रख देता है

दोनों की आँखें बंद थी दोनों शर्मा रहे थे मगर आगे तो बढ़ना था

अमित कामिनी क होंठो को चुम रहा था मगर कामिनी क होंठ बंद थे वो जवाब नहीं दे रही थी अंदर से वो कितना प्यासी थी मगर इस वक़्त उसे रिश्तों की मर्यादा मर रही थी

अमित हिम्मत नहीं हारता और वो लगातार कामिनी क होंठों पर छोटे छोटे किश करता रहता है 2 मिनट्स में कामिनी क होंठ खुल जाते हैं और अमित कामिनी क ऊपर वाले होंठ को अपने होंठों में पकड़ कर चूसने लगता है , कामिनी क जिस्म में कंपकपी छिड़ जाती है

अमित लगातार कामिनी क होंठो को चूसने लगता है कभी ऊपर वाला कभी निचे वाला धीरे धीरे कामिनी भी मदहोश होने लगती है और वो भी अमित क होंठो को चुम कर जवाब देने लगती है

अमित जब देखता है क ममी उसके किश का साथ देने लगी हैं तो वो अपनी जीभ ममी क मग में घुसा देता है और अपनी जीभ से ममी की जीभ को छेड़ने लगता है

ये कामिनी क जीवन का पहला एहसास था आजतक ऐसी किश अजय ने भी नहीं की थी बल्कि कामिनी तो भूल hi गयी थी किश होती कैसे है क्यूंकि अजय तो उसे हाथ लगता नहीं था हाँ कभी कभी उंगली कर क उसका पानी निकल देता था

कामिनी अमित क किश का आनंद लेती हुई उसकी जीभ को अपने होठों से पकड़ कर चूसने लगती है कामिनी क होंठों की पकड़ अपनी जीभ पर महसूस होते hi अमित और जोश क साथ किश करने लगता है और दोनों हाथो से कामिनी क सर पकड़ कर किश करता हुआ उसके ऊपर झुकने लगता है जिससे कामिनी बीएड पर लेट जाती है और अमित उसके ऊपर लेट जाता है

कामिनी क दूध अमित की छाती क नीचे डाब जाते हैं और कामिनी भी जोश में एते हुए अमित की पीठ पर अपनी बहन कस लेती है

दोनों की किश अब जोशीले अंदाज़ में होने लगती है कामिनी भी अपनी जीभ अब अमित क मुँह में घुसा देती है और अमित उसकी जीभ चूसने लगता है दोनों को इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था

अमित किश में इतना खो गया था क उसके हाथ कब कामिनी क सर से हटकर उसके दूध पर ए उसे खुद पता न चला

अपने बूब्स पर अमित क हाथो की पकड़ मजबूत होते hi कामिनी क मुँह से सिसकी निकल गयी जो अमित क मुँह में चली गयी

अमित जोशीले अंदाज़ में किश करता हुआ कामिनी क बूब्स दबाता जा रहा था और कामिनी की बहन अमित की पीठ पर चल रही थी और उसने अपनी टाँगें खोल कर अमित को बीच में ले लिया था जिससे क अमित का लैंड कपड़ो क ऊपर से hi छूट पर दस्तक देने लगा था

किश करते हुए दोनों की सांसे फूलने लगती हैं और साँस लेने क लिए अमित किश तोड़ता है मगर कामिनी अपनी आँखें बंद hi रखती है जबकि अमित एक नज़र कामिनी क चहरे को देखता है जो पूरा लाल था शायद रंग की वजह से या काम वासना की गर्मी से

कामिनी का खूबसूरत चेहरा देख कर अमित मन hi मन उसके हुसैन की तारीफ करता बाई उसकी तीनो ममियां कुदरत की कारीगरी का नमूना थी क्या नैन नक्श थे क्या सुंदरता थी

कामिनी की उम्र चाहे 39 साल थी मगर उसने न तो बचे पैदा किये थे न hi उसने ज्यादा सेक्स किया था और घर क कामो में लगी रहने से उसका बदन आज भी पूरा फिट था उसकी उम्र का कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कामिनी की काया ऐसी थी क वो कामदेव को भी काम अग्नि में जला दे 36 क कैसे हुए गोल मुलायम सफ़ेद दूध और 38 क ज़बरदस्त चूतड़ जो देखने वाले को लैंड हिलने पर मजबूर कर दे

अमित कामिनी क रूप जल से बहार अत है और उसके साइन से सदी का अंचल हटा कर ब्लाउज खोल देता है जिसके नीचे उसने पिंक ब्रा पहनी हुई थी

कामिनी क ऐसे लेते रहने से कपडे उतरने मुश्किल थे और अमित उसे कह भी नहीं सकता था इस किये वो खुद बीएड से उठ कर पहले अपने कपडे जल्दी से निकल देता है और फिर कामिनी का हाथ पकड़ कर उसे उठाने लगता है कामिनी अमित का इशारा समझ कर जल्दी उठ जाती है मगर आँखें नहीं खोलती

अमित कामिनी की सदी पकड़ कर खोलने लगता है और कामिनी चुप चाप कड़ी रहती है सदी उतरने क बाद अमित उसका ब्लाउज उतर देता है जिसमे कामिनी उसकी मदद करती है

ब्लाउज उतरने क बाद अमित उसके पेटीकोट का नाडा खोल देता है और पेटीकोट पाऊँ में गिर जाता है

कामिनी की टंगे कम्पनी लगती हैं उसे बहुत शर्म आने लगी थी अमित एक नज़र कामिनी क जिस्म को देखता है सफ़ेद दूध जैसा गोरा बदन कैसा हुआ शरीर गोरी मखमली जंघे केले क तने क सामान और गुलाबी पेंटी में कैद उसके बड़े बड़े चूतड़

अमित जल्दी से कामिनी को गले लगा लेता है और फिर से कामिनी क होंठ चूसने लगता है

कामिनी क होंठ चूसते हुए अमित हाथ पीछे ले जाकर ब्रा खोल देता है और कामिनी को फिर से बीएड पर गिरा देता है

कामिनी को बीएड पर गिराने क बाद अमित उसकी ब्रा निकल देता है , ब्रा निकलते hi कामिनी क कठोर पके आम क जैसे गोल दूध उसकी नज़रों क सामने आ जाते हैं अमित से सबर नहीं हो रहा था और वो जल्दी से ममी क इस अनमोल खजाने को लूट लेना चाहता था

अगले hi पल अमित कामिनी क बूब्स पर टूट पड़ता है और एक दूध को अपने मुँह में लेने की कोशिश करता हुआ दूसरे को अपने हाथ से दबाने लगता है

कामिनी सफ़ेद दूध क ऊपर हलके काळा रंग क निप्पल थे जो इस बात का सबूत थे क इनमे बहुत सारा दूध आ जायेगा एक दिन . अमित एक निप्पल को होठों में पकड़ कर खींचने लगता है और अंदर hi अंदर जीभ फिरने लगता है और दूसरे बूब क निप्पल को पकड़ कर खींचने लगता है . कामिनी से बर्दाश्त नहीं होता और उसके मुँह से तेज़ सिसकीअन निकलने लगती हैं

कामिनी : कक्कक्क्स कक आआअह्ह्ह्हह ममममायआ कक्कक्कक्स. आआअह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्हह्ह सीसीसी कक. एआईईईई

अमित कामिनी की सिसकीअन सुनकर और जोश में बूब्स मसलने लगता है एक दूध को अछि तरह चूसने क बाद वो दूसरे को चूसने लगता है . कामिनी अमित क सर को पकड़ कर अपनी छाती में दबाने लगती है

10 मिनट्स तक दूध मसलने से कामिनी की छूट बुरी तरह से पानी पानी हो जाती है और उसकी पेंटी गीली हो जाती है

बूब्स का रास निचोड़ने क बाद अमित कामिनी क जिस्म को चूमता हुआ निचे बढ़ता है और कामिनी की नाभि में अपनी जीभ घूमने लगता है , कामिनी क पेट में गुदगुदी होने लगती है और पूरा पेट वाइब्रेशन करने लगता है

नाभि को गीला करने क बाद अब अमित नीचे अत है और कामिनी के छुपे हुए अनमोल खजाने को बहार निकलने का सोचता है जिसे आजतक अजय क इलावा किसी ने नहीं देखा था ( हालाँकि रामु ने देखा था मगर कामिनी की बेहोशी में ) अमित कामिनी की पेंटी दोनों हाथो से पकड़ कर उतरने लगता है और कामिनी उसका साथ देते हुए अपनी कमर उठा देती है

अमित पेंटी को आराम से उतर कर एक बार पेंटी को नक् से लगाकर सूंघता है , पेंटी से आ रही मदहोश खुशबु सीधा अमित क दिमाग की नसों में घुल जाती है और उसकी काम अग्नि और भड़क उठती है

कामिनी कनखीओं से जब अमित को अपनी पेंटी स्मेल करते देखती है तो उसकी छूट तड़पने लगती है और आँखें ज़ोर से भींच लेती है

अमित कामिनी क पाऊँ की तरफ अत है

अमित की तीनो मामिआं पाऊँ में पायल पहनती थी और जब वो चलती थी तो पायल की छम छम की आवाज़ बहुत मधुर लगती थी

अमित कामिनी क पाऊँ को चूम लेता है और पाऊँ को पकड़ कर उठा लेता है और चूमता हुआ अपने चहरे पर फिरने लगता है . अमित एक एक अंदाज़ कामिनी क अंदर रोमांच पैदा कर रहा था .

पाऊँ को चूमते हुए अमित कामिनी की टैंगो में पोजीशन ले कर घुटने मोड़ कर बैठ जाता है और अपने दोनों कंधो पर टंगे सजा कर उनको चूमता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है वास्तव में कामिनी की सुंदरता का मोल उतरता हुआ अमित अपने होंठों और जीभ से चुम चाट कर अपने मन की प्यास बुझा रहा था . जांघों पर पहुँच कर अमित दोनों जांघों को मसल मसल कर चूमने चाटने लगता है कामिनी तो जैसे किसी और दुनिया में पहुँच चुकी थी

अब बरी थी छूट की , कामिनी की छूट बहुत काम चूड़ी थी और पिछले 15 सैलून से बस उंगली hi उसके अंदर गयी थी इस लिए उसके होंठ खुले होने पर भी वो कुंवारी छूट क जैसे टाइट हो चुकी थी

कामिनी छूट उसके बाकि जिस्म की तरह गोरी और चिकनी थी शायद कामिनी ने कल hi बल साफ किये थे . अमित अपने होंठ कामिनी की छूट पर लगा कर एक किश करता है

कामिनी की छूट को आज तक कभी अजय ने भी नहीं चूमा था कामिनी पागल होने लगती है और उसकी सिसकारिआं ऊँची हो जाती हैं

कामिनी : ककक कक्कक्स आआह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्हह्ह ममममम कक्कक्कक्स ोुह्ह्ह्ह

अमित कामिनी की छूट चूमता हुआ अपनी जीभ अंदर घुसा देता है और कामिनी अमित क सर को दोनों जांघों में कास लेती है

कामिनी : एआईईईई कक्ककक्कक्स ममममम आआह्ह्ह ोुह्ह्हह्ह कक्कक्क्स मममममआ खा जावूओ कक्कक्क्स. आआअह्ह्ह्हह खा जाओ इसे कक्कक्कक्स

ये पहले शब्द थे जो कामिनी क मुँह से निकले थे जो अमित को उसके मज़े का परमं दे रहे थे

अमित और जोश से कामिनी की छूट को जीभ से छोड़ने लगता है

कामिनी और बर्दाश्त नहीं कर पति और उसका पानी निकल जाता है

कामिनी कक्कक्क्स आआआह्ह्ह्हह्ह ममममम aaaaaaaaaaaa मैं गईइइइइइइइइ

इतना कह कर पानी छोड़ देती है और अमित का सर दोनों हाथों से छूट पर दबा देती है जिससे अमित की सांसे रुकने लगती हैं मगर वो छूट को नहीं छोड़ता और सारा पानी पि जाता है

छूट का सारा पानी पीकर भी अमित छूट चाट ता रहता है , कामिनी कुछ पल क लिए निढाल होकर पद जाती है मगर अमित अपना काम करता रहता है और अपने हाथो से कामिनी क दूध भी मसलने लगता है

2 मिनट्स में कामिनी की छूट फिर से तैयार हो जाती है और वो कमर हिलने लगती है अमित समझ जाता है क ममी तैयार है तो छूट से ऊपर उठकर अपनी पोजीशन लेता है और कामिनी की कमर क निचे तकिया रख कर अपने लैंड को कामिनी की छूट पर सेट करता है

अमित जनता था कामिनी इतने सालो क बाद छोड़ने वाली है उसे दर्द होगा इस लिए वो कामिनी क ऊपर आ कर उसके होठों पर अपने होंठ रख लेता है और एक हाथ से लैंड को पकड़ कर रखता है और एक झटका मर देता है जिससे उसका लैंड 2 इंच अंदर घुस जाता है

अमित का लैंड अजय क मुकाबले दोगुना था कामिनी को दर्द होता है और उसकी चीख निकल जाती है जो अमित क होंठो में डाब जाती है

अमित दो मिनट्स रुक कर कामिनी को किश करता है और उसके दूध मसलने लगता है जब कामिनी थोड़ा रिलैक्स होती है तो अमित एक और धक्का मर देता है जिससे लैंड 5 इंच तक लैंड अंदर पहुँच जाता है

यहाँ तक अजय क लैंड ने सफर किया था बहुत साल पहले मगर अमित का लैंड उसके लैंड से दोगुना मोटा था जो कामिनी को बहुत दर्द दे रहा था

कामिनी की चीखें अमित क मुँह में कैद हो रही थी . अमित फिर कुछ देर रुक कर कामिनी को रिलैक्स करता है और मौका देख कर आखरी ज़ोरदार धक्का मर देता है जिससे अमित का 8.5 इंच का लैंड पूरा छूट को फाड़ता हुआ बचे दानी में घुस जाता है

इस धक्के को कामिनी बर्दाश्त नहीं कर पति और उसका जिस्म गर्दन कटी मुर्गी की तरह तड़पने लगता है वो अमित को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करती है मगर अमित की मजबूत पकड़ से वो निकल नहीं पति . कामिनी का जिसम पसीने से भीग गया था और तड़प रहा था अमित उसे रिलैक्स करने क लिए ज़ोर ज़ोर से दूध मसलने लगता है 5 मिनट्स बाद कामिनी थोड़ा रिलैक्स होती है तो अमित अपने लैंड को धीरे धीरे हिलना शुरू करता है . कामिनी को अभी भी दर्द हो रहा था उसकी छूट ऐसे लग रहा था जैसे फैट कर सुन्न हो गयी हो

अमित अपने लैंड को हरकत किये जा रहा था . लैंड क अंदर बहार होने से छूट में उसकी जगह बनने लगती है और छूट थोड़ा ढीली होने लगती है जिससे कामिनी को थोड़ा आराम मिलता है और उसे मज़ा आने लगता है. कामिनी को कमर हिलता देख कर अमित धक्कों की सपीड बढ़ाने लगता है और कामिनी क ऊपर से हटकर बैठ जाता है और टैंगो को हवा में उठाकर तेज़ तेज़ धक्के मरने लगता है

कामिनी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह ोूझह ऊऊह्ह्हह्ह आआअह्ह्ह्हह ममममम आआअह्ह्ह्हह मममममम कक्कक्क्स

कामिनी मज़े से आवाज़ें निकलने लगती है अमित कामिनी की टांगों को दबाता हुए उसके पाऊँ को उसके सर क पास ले जाता है और ज़ोरदार धक्के मरने लगता है कामिनी का बदन इस पोजीशन में टूटने लगता है उसकी छूट कास जाती है और उसे बहुत ज़्यादा मज़ा भी एंड लगता है

कमरे में थप थप थप थप थप धक्कों की आवाज़ सुनाई देने लगती है और कामिनी कामुक शब्दों से अमित का जोश बढ़ाने लगती है

कामिनी : आआह्ह्ह्ह आएससीए hi आआह्ह्ह्ह ऊऊओह्ह्ह्हह ममममममअअअअअअ फ़ायद दो आआह्ह्ह्ह फाआद दो आआअह्ह्ह्हह मेरी चुत फ़ायद दो ाअजज्जजज आआह्ह्ह्हह्ह बहुत सताया है इसने आआह्ह्ह्हह्ह ाआईईईई ममममायआ और तेज़ज़्ज़ज़

थप थप थप थप की आवाज़ कामिनी की चीखें बीएड की चररर चररर चररर और कामिनी की पायल की छम चम् अमित का जोश दोगना ठिगना बढ़ती जा रही थी और उसके धक्के बढ़ते जा रहे थे

कामिनी जल्दी hi पास्ट हो जाती है और पानी छोड़ देती है

कामिनी: एआईईईई आआह्ह्ह्ह ममममआ ोुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह मैं गयी मैं गयी ककक ाआईईईईई aaaahhhhhhhhhhhhh

कामिनी 2 मिनट्स तक कम्पटी रहती है और उसकी छूट नदिअ बहा देती है

छूट गीली हो जाने से अब अमित का लैंड आराम से अंदर बहार हो रहा था कामिनी जब रिलैक्स हो जाती है तो अमित उसको पलटा देता है . कामिनी अमित का इशारा समझ कर घुटनो पर हो जाती है . अमित पीछे से लैंड छूट पर रख कर 2 झटकों में पूरा जड़ तक घुसा देता है . एक बार फिर से कामिनी की चीख निकल जाती है . अमित मज़े से कामिनी की कमर दोनों हाथों से थम कर धक्के मरने लगता है और कामिनी भी फिर से गरम हो जाती है

अब कामिनी चुदाई को एन्जॉय करते हुए पीछे को धक्के मरने लगती है ऐसा मज़ा उसे कभी अजय क साथ भी नहीं मिला था और वो अमित क धक्कों का पूरा जवाब दे रही थी

अमित 20 मिनट्स से लगा हुआ था अब उसे भी लगता है उसका पानी निकलने वाला है तो वो तूफानी धक्के मरने लगता है और एक हाथ से कामिनी क बाल खींच कर उसे सीधा करने लगता है

कामिनी को बाल खींचने से दर्द तो होता है मगर इस अंदाज़ का उसे मज़ा भी बहुत अत है 2 मिनट्स ऐसे तूफानी धक्के मर कर अमित अपना पानी कामिनी की बचे दानी में छोड़ने लगता है और कामिनी की छूट भी उसी वक़्त पानी छोड़ देती है

कामिनी धड़ाम से बीएड पर गिर जाती है और अमित भी उसके ऊपर गिर कर उसकी गर्दन और पीठ चूमने लगता है दोनों इस चुदाई से पूरे तृप्त हो गए थे

कामिनी को तो जैसे बरसों की प्यास क बाद आज अमृत मिल गया था

इस रोमांटिक और धमाकेदार चुदाई से दोनों hi थक गए और ऐसे hi सो गए
 
अपडेट 33



कामिनी धड़ाम से बीएड पर गिर जाती है और अमित भी उसके ऊपर गिर कर उसकी गर्दन और पीठ चूमने लगता है दोनों इस चुदाई से पूरे तृप्त हो गए थे


कामिनी को तो जैसे बरसों की प्यास क बाद आज अमृत मिल गया था

इस रोमांटिक और धमाकेदार चुदाई से दोनों hi थक गए और ऐसे hi सो गए

अब आगे -

शरीर पर अमित का भर होने से जब कामिनी को दिक्कत होने लगती है तो उसकी आँख खुल जाती है . कामिनी की बरसो की प्यास आज अमित ने अछि तरह बुझा डी थी और उसकी धमाकेदार चुदाई से छूट भी पूरी तरह खुल गयी थी.

सेक्स का खुमार उतरने क बाद अब कामिनी का बदन दर्द करने लगता है अब उसे छूट पर जलन होने लगती है. कामिनी अमित को साइड कर क बीएड से उठती है तो छूट में तेज़ दर्द क ली वजह से फिर बैठ जाती है और अपनी टाँगें खोल कर छूट को देखने लगती है

कामिनी : हाय राम क्या हालत कर दी है एक बार में hi , पता नहीं दीपिका इसे कैसे बर्दाश्त करती है . कैसा मुसल पाल रखा है पूरी फाड़ कर रख दी ऐसा लग रहा है आज फिर से सुहाग रत मनाई हो इतना दर्द तो पहली सुहाग रत में भी नहीं मिला था

कामिनी की छूट क किनारे थोड़े चिर गए थे और हल्का सा खून भी निकल आया था मगर कामिनी खुद को संभालती है और अपने कपडे पहन कर बहार निकल जाती है

कामिनी पहले अमित क कमरे में जाती है और दीपिका को जगती है जो सो गयी थी. कामिनी बाथरूम से फ्रेश होकर अपनी हालत ठीक कर क अपने कमरे में चली जाती है और दीपिका भी अपने कमरे में चली जाती है

सुबह जब अमित की आँख खुलती है तो वो अकेला नंगा बीएड पर सो रहा था , कामिनी को कमरे में न पाकर अमित सोचता है क उसने वाकई में रत कामिनी क साथ किया या कोई सपना था और फिर वो तैयार हो कर अखाड़े चला जाता है

अखाड़े से आकर अमित जब खाना खाने बैठता है तो आज फिर कामिनी उसे नहीं दिखती और वो गौरी से पूछता है तो गौरी बताती है क उसको बुखार है

अमित को चिंता होने लगती है मगर दीपिका उसे इशारे से समझा देती है क सब ठीक है

अमित घर से निकल कर राजू क पास जाता है

अमित : अबे कल तुम लोगो ने क्या पिल दिया था लस्सी में ?

राजू : लस्सी ? अरे वो तो भांग थी . क्यों क्या हुआ?

अमित : भांग ? तुम लोगो की वजह से कल मुझे कितनी परेशानी हुई पता भी है

राजू : अरे होली में तो मज़ा hi उसीसे अत है , वो छोड़ अब तो तू फ्री हो गया है न चल कहीं घूम कर एते हैं

अमित : कहाँ जाना चाहता है

राजू : जाना कहाँ है शहर हो एते हैं तूने बुलेट पर घूमने का वडा किया था अभी तक वो पूरा नहीं किया

अमित : चल ठीक है तू तैयार हो मैं अभी आया

अमित घर जा कर अचे कपडे पहनता है और माँ को बताकर बुलेट ले कर राजू क पास आ जाता है

दोनों दोस्त शहर को निकल जाते हैं , तकरीबन 1 घंटे में दोनों शहर पहुँच जाते हैं और एक सिनेमा हॉल में मूवी देखने लगते हैं

मूवी से फ्री होकर थोड़ा बहुत इधर उधर तफरी कर क घर लौट एते हैं

घर आते शाम हो गयी थी और मां लोगों का भी आने का वक़्त हो गया था . आज अमित शहर से आते समय रास मलाई ले कर आया था और जब वो रास मलाई माँ को देता है तो गौरी भी खुश हो जाती है

फिर अमित आज जो कुछ किया सब गौरी और दीपिका को सुनाता है और कपडे बदलने अपने कमरे में चला जाता है

रत का खाना सब मिल कर कहते हैं मगर कामिनी फिर से नदारद थी

रत 12 बजे क बाद दीपिका अमित क पास अति है

दीपिका : तो कर दिया तुमने दीदी को ठंडा

अमित मुस्कुरा कर सर झुका लेता है

दीपिका : तौबा ! तूने क्या किया दीदी क साथ जो वो सुबह से बिस्तर से नहीं उठी , मैंने तुमसे कहा था न वो कितने सैलून से चूड़ी नहीं हैं ज़रा आराम से करना मगर लगता है तुमने उनपर कोई रेहम नहीं किया

अमित : मैंने क्या किया ? मैंने तो सब कुछ ध्यान से किया था और उनको भी तो ाचा लग रहा था वो तो खुद मुझे ज़ोर से करने को कह रही थी

दीपिका : वो तो जब खुमार चढ़ता है तो ज़ुबान से अपने आप ये सब निकल जाता है मगर तुम्हे ख्याल रखना चाहिए था उनकी तो हालत पतली हो गयी है

अमित को चिंता होने लगती है . अमित क चहरे पर चिंता क भाव देख कर दीपिका हसने लगती है

दीपिका : ऐसे टेंशन मत लो सब ठीक है बरसो बाद उनकी चुदाई इतने तगड़े लैंड से हुई है न इस लिए छूट थोड़ी सूज गयी है कल परसों तक ठीक हो जाएँगी

अमित को कुछ तसल्ली मिलती है और वो अब दीपिका को छेड़ता है

अमित : तो बताइये अब आपकी भी सुजा दूँ उनकी तरह

दीपिका : मेरी अब तुम क्या सुजाओगे अब तो मेरी तुम्हारे डंडे की आदि हो गयी है

अमित : तो हो जाये मुकाबला ? देख लेते हैं कौन जित ता है

दीपिका : चलो दिखाओ मुझे अपना डैम . मैं भी तो देखूं क लैंड महाराज क्या कर सकते हैं

अमित दीपिका की बातों से उत्तेजित हो चूका था और वो दीपिका पर झपट पड़ता है और दोनों साडी रत गुथम गुथा होते रहते हैं.

सुबह 4 बजे तक अमित दीपिका को हर एंगल से छोड़ता है . दीपिका की छूट पानी बहा बहकर थक जाती है मगर अमित उसपर कोई रेहम नहीं दिखता और तीन बार अपना पानी दीपिका की छूट में छोड़ता है आखरी बार पानी छोड़ते वक़्त दीपिका बेसुध हो चुकी थी और अमित उसे ज़बरदस्त कपडे पहनकर उसको उसके कमरे तक छोड़ कर अत है

सुबह अमित देर से उठ ता है और नाहा कर जब खाना खाने निचे जाता है तो रसोई में उसे सिर्फ गौरी hi नज़र अति है

मां लोग जा चुके थे कामिनी शायद कमरे में होगी और दीपिका भी शायद आराम कर रही होगी. अमित जा कर पीछे से गौरी को गले लगा लेता है

गौरी : उठ गया मेरा बचा ? आज क्या बात है इतनी देर तक सोता रहा ? तेरी तबियत तो ठीक है न?

अमित : अरे माँ मैं तो बिलकुल ठीक हूँ शायद कल की थकावट की वजह से मैं कुछ ज्यादा hi गहरी नींद सो गया था जो आँख नहीं खुली

गौरी : चल बैठ खाना खले

अमित : माँ आज कोई नज़र नहीं आ रहा कहाँ हैं सब

गौरी : तेरे बाबा और कमलेश तो खेतों में गए हैं अजय कामिनी को लेकर शहर गया है डॉ को दिखने और दीपिका की तबियत ठीक नहीं है वो अपने कमरे में है

अमित कामिनी क बारे सुनकर शॉकेड हो जाता है

अमित :मन में ) कहीं मेरी वजह से तो ममी को कुछ हो तो नहीं गया

अमित : ममी को डॉ क पास क्यों ले कर गए हैं ? क्या उनकी तबियत ज़्यादा ख़राब है

गौरी : अरे नहीं ऐसी बात नहीं वो किसी और वजह से गए हैं तू चिंता न कर और खाना खा

अमित चुप चाप खाना खाने लगता है , खाने क बाद अमित दीपिका क कमरे में जाता है उसका हल जानने और कामिनी ममी क बारे में जानने

अमित : क्या हुआ ममी जी आप बीएड पर पड़ी हैं आज

दीपिका : मेरी ऐसी हालत कर क पूछ रहे हो क्या हुआ है , शर्म नहीं अति

अमित : है है है ममी जी आप hi ने शरत लगायी थी अब मैं क्या करूँ , अपने लैंड महाराज की ताकत देखनी थी सो मैंने दिखादि

दीपिका : तौबा ! आज क बाद फिर कभी नहीं कहूँगी , अभी तक मुझे नीचे दर्द हो रही है ये तो दीदी ने आकर मुझे सुबह दवा दी तो कुछ होश आयी वर्ण मुझे हॉस्पिटल ले जाना पड़ता

अमित : हॉस्पिटल से यद् आया कामिनी ममी को अजय मां डॉ क पास क्यों लेकर गए हैं

दीपिका : अरे तू टेंशन मत ले सब ठीक है . डॉ क पास इस लिए गए हैं ताकि वो भी मेरी तरह माँ बन सके

अमित : मतलब ?

दीपिका अमित को सारा प्लान समझा देती है जिसे सुन कर अमित समझ जाता है साडी बात

कुछ देर छोटी ममी से बातें करने क बाद अमित घर से निकल जाता है और राजू से मिलके आज खेतों में भी चक्कर लगाने चला जाता है

शाम को जब अमित कमलेश और विजय क साथ घर लौट कर अत है तो अजय और कामिनी भी घर आ चुके थे दीपिका की हालत भी अब कुछ ठीक थी और वो कामिनी और गौरी क साथ काम कर रही थी

विजय : अजय क्या कहा डॉ ने?

अजय : भैया डॉ ने टेस्ट लिए हैं और ये कहा है क अगर कामिनी की रिपोर्ट ठीक आयी तो वो माँ बन सकती है बस एक छोटा सा ऑपरेशन करवाना पड़ेगा

विजय : ये तो बहुत अछि बात है, कितना खर्च आएगा ऑपरेशन में ?

अजय : डॉ ने कहा है क 2 से 3 लॅक तक का खरच आएगा

विजय : कोई बात नहीं जितना भी पैसा लगे तुम लगाओ मैं दूंगा

अजय : अरे भैया इसकी ज़रूरत नहीं है मैंने बैंक में जो पैसा कामिनी क बैंक में थोड़ा थोड़ा कर क जोड़ा है वो कब काम आएगा

विजय : नहीं वो पैसा बहु का है उसे वहीँ रहने दो तुम मुझ से लेलो आखिर इस ख़ुशी क आगे पैसा क्या चीज़ है

अजय कुछ और बोलने लगता है तो विजय उस चुप करवा देता है

खाना खा कर सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

आज दीपिका अमित क पास नहीं अति क्यूंकि वो कल की चुदाई से निढाल थी और कामिनी भी आज शहर से आकर थक गयी थी

सुबह अमित अखाड़े से आकर खाना खा कर बहार निकल जाता है , दीपिका कामिनी से बात करने क लिए उसके कमरे में चली जाती है

दीपिका : दीदी कल क्या कहा डॉ ने ?

कामिनी : डॉ ने मेरा टेस्ट लिया है 4 दिन बाद रिपोर्ट्स देने का बोलै है और जैसा तुमने पहले बताया था वही सब डॉ ने बताया है माँ बनने क तरीके

कामिनी : रिपोर्ट्स तो आपकी ठीक hi होगी क्यूंकि आप तो पहले भी माँ बन चुकी हैं इस लिए वो बात आप छोड़िये अब आप रिपोर्ट्स लेने अजय भैया को साथ मत लेकर जाना वर्ण वो डॉ से साडी बात कर लेंगे और हमारा प्लान फ़ैल हो सकता है इस लिए अब आपके साथ मैं hi चलूंगी

कामिनी : हाँ वो मैं समझती हूँ मगर क्या अमित ने तुमसे कोई बात की उसके बाद

दीपिका : ए हाय आपको बड़ी जल्दी है ? लगता है फिरसे आप उसके नीचे लेटना चाहती हैं

कामिनी : शरमाते हुए ) क्या तू भी ,,

अब मेरा मज़ाक उदा रही है जा मैं तुझसे बात नहीं करती

दीपिका : अरे दीदी गुस्सा मत करो ये बताओ आज रत क लिए तैयार हो न

कामिनी : नहीं मुझे नहीं करना कुछ भी

दीपिका : तो ठीक है मैं अमित को बोल दूंगी अब कभी आपके साथ कुछ भी न करे आपको ये सब पसंद नहीं

कामिनी : तुझे शर्म नहीं अति ? वैसे तो दीदी कहती है और दीदी पर तुझे तरस नहीं अत

दीपिका : आप hi ने तो कहा क आपको कुछ नहीं करना

कामिनी : वो तो मैं

दीपिका : चलिए छोड़िये आज रत तैयार रहिएगा 12 बजे अमित क कमरे में चले जाना और हाँ आज मैं चौकीदारी नहीं करुँगी वर्ण बाद में मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं होता

कामिनी दीपिका से यूँ hi बातें कर क बाद में खाना बनाने लगती है, सारा दिन यूँ hi निकल जाता है और रत का खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं

कामिनी दीपिका से नींद की गोली ले लेती है अजय को देने क लिए मगर आज अजय कुछ ज्यादा hi थक गया था खेतों में तो जल्दी सो गया और कामिनी को ज़रूरत hi नहीं पड़ी उसे गोली देने की

12 बजे क बाद कामिनी अमित क कमरे का दरवाज़ा खत खटती है . आवाज़ सुन कर अमित आँख खोलता है और कामिनी को देख कर चौंक जाता है

कामिनी दरवाज़े पर नज़रें झुकाये कड़ी थी उसे समझ नहीं आ रहा था वो अमित से कैसे बात करे . अमित कामिनी को चुप चाप दरवाज़े पर खड़े देखता है तो वो समझ जाता है क कामिनी शर्म की वजह से आगे नहीं बाद रही है

अमित भी मन में सोच रहा था क उसे क्या करना चाहिए फिर वो छोटी ममी की बातों को यद् कर क आगे बढ़ता है और कामिनी का हाथ थम कर उसे अंदर लता है और दरवाज़ा बंद कर देता है

कामिनी अभी भी शर्मा रही थी फिर अमित कामिनी को पीछे से गले लगा कर कामिनी की गर्दन पर किश करता है और कामिनी क मुँह से सिसकी छूट जाती है

अमित लगातार किश करता जाता है और कामिनी मस्त होने लगती है . अमित कामिनी को घुमा कर उसका चेहरा दोनों हाथो में थम लेता है . कामिनी की आँखें बंद थी अमित उसके चहरे को देखे जा रहा था जब अमित कुछ नहीं करता तो कामिनी आँखें खोल कर देखती है तो अमित से उसकी नज़रें मिल जाती है और वो फिर से अपनी आँखें बंद करने की कोशिश करती है

अमित : ऐसे नज़रें मत चुराइए ममी जी मैं जनता हूँ मेरी वजह से आप ने साडी ज़िन्दगी कितने दुःख सही हैं , मैं बिता हुआ वक़्त वापिस तो नहीं ला सकता मगर मैं वडा करता हूँ आपको इतनी ख़ुशी दूंगा क आप सब गम भूल जाएँगी

मैं अपनी मनहूसियत क घाव आपके दिल से मिटा कर उन पर प्यार का मलहम लगा दूंगा

कामिनी अमित की बातों से भावुक हो जाती है और तड़प कर बोलती है

कामिनी : ऐसा मत कहो अमित, मनहूस तुम नहीं थे मेरी hi किस्मत ख़राब थी और मैं अपनी बदकिस्मती को तुम पर थोपती रही मुझे माफ़ कार्डो

अमित : ऐसा मत कहो ममी जी , जो भी हुआ हो मगर उसकी वजह से अपने साडी ज़िन्दगी सजा कटी है अब और नहीं . मैं आपकी ज़िन्दगी खुशियों से भर दूंगा क्या आप मुझे ऐसा करने देंगी

कामिनी बस हाँ में सर हिला देती है और अमित अपने होंठ कामिनी क होंठो से मिला देता है. दोनों एक दूसरे क होंठ चूसने लगते हैं आज कामिनी अमित का पूरा साथ दे रही थी अब वो अंदर से पूरी तरह तैयार थी खुल कर अमित का साथ देने क लिए

देखते देखते दोनों का किश वाइल्ड होने लगता है अमित क हाथ कामिनी की छाती और गांड पर घूमने लगते हैं और कामिनी भी अपने हाथ अमित की पीठ पर चलती हुई उसके लैंड को पकड़ लेती है

अमित किश तोड़ कर अपने कपडे उतर देता है और कामिनी क कपडे भी नोच कर उतर देता है कामिनी अमित का पूरा साथ दे रही थी

अमित कामिनी को बीएड पर लिटा कर उसके दूध मसलता और चुस्त है फिर उसकी छूट पर आकर छूट को चाटने लगता है और जीभ अंदर डालकर जीभ से छोड़ने लगता है

कामिनी मस्ती में सिसकारती हुई अमित का सर छूट पर दबाने लगती है छूट का पानी अमित चूस कर निकल देता है और जल्दी पोजीशन में आकर कामिनी की टंगे उठा कर अपने कंधे पर रखता है और लैंड को एक hi झटके में आधा अंदर घुसा देता है

कामिनी दूसरी बार अमित का लैंड ले रही थी वो भी 2 दिन बाद उसे दर्द होता है और एक चीख उसके मुँह से निकल जाती है

कामिनी : आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मममममअअअअअअ माररररर गईइइइइइइइ

अमित को कामिनी की ये चीख और उत्तेजित कर देती है और वो लैंड को थोड़ा बहार खींच कर एक और ज़ोरदार धक्का मरता है जिससे लैंड जड़ तक अंदर घुसकर बचे दानी में ठोकर मरता है

कामिनी से बर्दाश्त नहीं होता और एक ज़ोरदार चीख उसके मुँह से निकल जाती है

कामिनी : aaaaiiiiiiiiiii ममअअअअअअअ फट्ट्ट्ट गईइइइइइ आआह्ह्हह्ह्ह्ह ममायररररर दाहाललललाआ aaaaaaaaaaaa

अमित कामिनी क इतना चीखने से दर जाता है और जल्दी से उसका मुँह हाथ से दबा कर बंद कर देता है

अमित खुद को कोस्टा है क उसकी वजह से कामिनी ममी को इतना दर्द हुआ

अमित : माफ़ कर दो ममी जी गलती हो गयी

कामिनी कोई जवाब नहीं देती उसकी आँखों से पानी बेहटा रहता है

कुछ देर बाद जब कामिनी थोड़ी रिलैक्स होती है तो अमित को कुछ न करता देख कर वो अपनी कमर हिलती है

अमित इशारा समझ कर लैंड को धीरे धीरे अंदर बहार करने लगता है

कामिनी अपने मुँह से अमित का हाथ हटा देती है और अमित को स्पीड बढ़ाने को कहती है

दूसरी तरफ कामिनी की चीख सुन कर कोई था जो चौंक गया था , वो शख्स इस वक़्त आँगन में था और इतनी रत को अमित क कमरे से चीख सुन कर वो अमित क कमरे की तरफ अत है और जब वो कमरे क पास अत है तो अंदर से आ रही सिसकिओन और कामिनी की कामुक आवाज़ों को सुनकर सब समझ जाता है और अंदर झांक कर देखता है तो उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती हैं

उसकी आँखें गुस्से से लाल हो जाती हैं मगर अंदर कामिनी चुदाई करवाते हुए जो बोल रही थी वो सुन कर वो शख्स खुद को कण्ट्रोल करता है

कामिनी : आअह्ह्ह ममममम कक्कक्स शाबाश अमित और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह मममम कक्कक्स और तेज़ करो बरसो से मैं तड़प रही थी आज मेरी प्यास बुझा दो अमित आआअह्हह्ह्ह्ह ककक अह्ह्ह आअह्ह्ह

15 साल से एक भी रत ऐसी नहीं क जब मैं चैन से सोई हूँ आआह्ह्ह्ह ककक आअह्ह्ह्ह और तेज़ कक्कक्स तेरे मां क एक्सीडेंट क बाद मैं पति क प्यार क लिए तरस रही थी ककक आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्हह्ह एआईईईई और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स कितनी रातें रो रो कर गुज़री हैं कक्कक्स आआह्ह्ह्ह किससे कहती अपना दुःख कक्कक्क्स आआह्ह्ह्हह और तेज़ करो मेरी ज़िन्दगी सुनी हो गयी थी अमित प्लीज मुझे माँ बना दो ककक आअह्ह्ह्ह आह्हः आह्हः मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती ककक आअह्ह्ह्ह आखिर मेरा कसूर क्या है जिसकी ऐसी सजा मिली आआह्ह्ह्ह सीसीसी मुझे माँ बना दो मैं हाथ जोड़ती हूँ सीसीसी आह्ह्ह्ह

अमित : ममी जी आअह्ह्ह मैं आपको हर सुख दूंगा आह्हः आह्हः आपको माँ बनाऊंगा आठ आह्हः आह्हः आपको बहुत प्यार दूंगा हमेशा खुश रखूँगा

दोनों ज़बरदस्त चुदाई में बिजी थे बहार खड़े शख्स की आँखों में कामिनी की बातें सुन कर पानी आ जाता है और वो अपनी आँखें पोछता हुआ वापिस चला जाता है

अमित कामिनी की रत भर चुदाई करता है और तीन बार अपने लैंड का पानी कामिनी की बचे दानी में छोड़ता है

कामिनी रत भर अमित क लैंड की ज़बरदस्त ठुकाई से पास्ट हो गयी थी और मुश्किल से सुबह सवेरे अँधेरे में अपने कमरे में लौट कर सो जाती है
 
अपडेट 34



अमित कामिनी की रत भर चुदाई करता है और तीन बार अपने लैंड का पानी कामिनी की बचे दानी में छोड़ता है


कामिनी रत भर अमित क लैंड की ज़बरदस्त ठुकाई से पास्ट हो गयी थी और मुश्किल से सुबह सवेरे अँधेरे में अपने कमरे में लौट कर सो जाती है

अब आगे-

सुबह अमित आज फिर देर से उठा और जब तैयार हो कर नाश्ता करने नीचे आया तो रसोई में दीपिका और कामिनी hi थी

अमित : ममी जी माँ कहाँ है आज नज़र नहीं आ रही

दीपिका : तुझे पता नहीं ? दीदी और जेठ जी दीदी क भाई की बहु की गॉड भरे में गए हैं . मुझे लगा तुझे पता होगा

अमित : माँ ने तो नहीं बताया खैर छोड़िये लाइए खाना दीजिये

दीपिका : बस 10 मिनट्स रुक जा तेरे लिए ताज़ा परांठे बना देती हूँ बाकि तो सब नाश्ता कर चुके हैं

इस वक़्त घर में इन तीनो क इलावा कोई नहीं था अमित कुर्सी पर बैठ कामिनी और दीपिका को काम करते देख रहा था

कामिनी झुक कर सब्जी काट रही थी जिसकी वजह से इसकी गांड और ज्यादा बहार निकल आयी थी

अमित को रत की दमदार चुदाई की यद् आ जाती है और उसे कामिनी का नंगा जिस्म नज़र आने लगता है .

कामिनी की गांड देखते हुए अमित का लैंड सर उठाने लगता है और वो उठ कर कामिनी को पीछे से गले लगा लेता है और अपना लैंड कामिनी की गांड पर रगड़ने लगता है

कामिनी : ये क्या कर रहा है अमित जा कर कुर्सी पर बैठ मुझे काम करने दे दीपिका यहीं हैं वो क्या कहेगी

अमित कामिनी की गर्दन को किश करता हुआ उसके कान की लो को दांतो में दबाने लगता है और हाथों से उसके दूध मसलते हुए अपना लैंड कामिनी की गांड पर रगड़े जा रहा था

अमित : क्या कहेगी छोटी ममी ? मैं तो अपनी ममी से प्यार कर रहा हूँ

कामिनी दीपिका की मौजूदगी से शर्मा रही थी हालाँकि दीपिका ने खुद उसके लिए अमित को राज़ी करवाया था . कामिनी कसमसा रही थी और अमित को रोकने की कोशिश कर रही थी

कामिनी : ककक आअह्ह्ह्ह मत कर अमित ककक रत को तेरा जी नहीं भरा आआह्ह्ह्हह कक्कक्स ोूझ मम्मन

अमित कामिनी को थोड़ा और झुका कर झटके से उसकी सदी उठा लेता है और उसकी पेंटी को जल्दी से नीचे कर देता है

कामिनी अमित को रोकने की कोशिश कर रही थी पर अमित इस वक़्त कोई बात सुन्ना नहीं चाहता था वहीँ दीपिका भी दोनों का खेल देख कर गरम होने लगी थी

अमित कामिनी की पेंटी उतरने क बाद अपना लोअर और अंडर वियर नीचे कर क लैंड बहार निकल लेता है जो पहले hi खड़ा था और आगे बढ़कर लैंड छूट पर सेट कर क एक ज़ोरदार झटका मरता है जिसके साथ आधे से ज्यादा लैंड छूट में घुस जाता है

लैंड घुसाने से पहले अमित ने न तो लैंड को गीला किया था न hi कामिनी को अछि तरह गरम किया था जिससे क छूट अभी सुखी थी

सुखी छूट में एक झटके में आधे से ज्यादा लैंड घुसने से कामिनी को बहुत दर्द होता है और उसके मुँह से चीख निकल जाती है

कामिनी : aaaaaaaaiiiiiiiiiiiiii मम्माआआआआ

मर गयी aaaaaaaaaaaa

मर डालेगा क्या aaaaaaaaaa

अमित रुकता नहीं और दूसरा झटका भी साथ hi लगाकर पूरा लैंड अंदर घुसा देता है

कामिनी चीखने लगती है मगर अमित उसके दूध मसलते हुए धक्के मरने लगता है

दीपिका कामिनी की चीख सुनकर पूरी गरम हो जाती है और उसकी छूट में पानी आने लगता है . दीपिका को अमित क ऐसे तूफानी धक्के बहुत पसंद थे इस लिए वो चीख सुनते hi गरम हो जाती है और अपनी साडी उठाकर छूट में उंगली करने लगती है

अमित कामिनी को शेल्फ पर झुका कर लगातार धक्के मरी जा रहा था और साथ में उसके गोर मुलायम बड़े बड़े चूतड़ों को थप्पड़ मर कर लाल कर रहा था

कामिनी लगातार चीख रही थी मगर अब ये चीखें मस्ती की थी

कामिनी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्हह्ह आआअह्ह्ह्ह और तेज़. आआआह्ह्ह्ह मा और ज़ोर से आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स फ़ायद दे पूरी आअह्ह्ह्ह फ़ायद दे छूट को बना दे भोसड़ा आआह्ह्ह्हह्ह मम्माआ ऐसे hi और तेज़ और तेज़्ज़ज़ आआअह्ह्ह्हह

अमित ज़ोरदार धक्के मर रहा था उसकी नज़र दीपिका पर गयी तो छूट में उंगली करते हुए उसे देख कर अमित को और मज़ा आने लगा

5 मिनट्स में hi कामिनी ने पानी छोड़ दिया अब उससे खड़ा रह पाना मुश्किल हो गया था इस लिए जैसे अमित ने लैंड निकला वो निचे फर्श पर बैठ गयी

कामिनी का पानी निकलने क बाद अमित दीपिका की तरफ मुदा और बिना कुछ कहे उसे भी शेल्फ पर झुका कर उसकी छूट में झटके से लैंड घुसा दिया

दीपिका क मुँह से दर्द और मस्ती भरी आआह्ह्ह्हह्ह निकल गयी अमित लगातार दीपिका को धक्के मरने लगा 10 मिनट्स दीपिका की ज़ोरदार चुदाई कर क अमित ने अपना पानी दीपिका की छूट में निकल दिया और दीपिका भी अपना पानी निकल चुकी थी

कामिनी और दीपिका दोनों फर्श पर निढाल होकर बैठी थी और दोनों की छूट से पानी बह रहा था दोनों को होश नहीं थी

अमित कुछ देर कुर्सी पर आदम करता है और फिर से नाश्ता मांगता है

दीपिका खुद को संभालती हुई उसके लिए नाश्ता बना कर उसे नाश्ता करवाती है

कामिनी और दीपिका दोनों को एक दूसरे से थोड़ी शर्म आ रही थी चाहे दोनों को एक दूसरे क बारे सब पता था मगर ऐसे एक दूसरे क सामने एक hi शख्स से चुदाई करना उनको अजीब लग रहा था

नाश्ता कर क अमित बहार चला गया 12 बजे अजय किसी काम से घर अत है इस वक़्त घर में कामिनी और दीपिका hi थी

अजय : कामिनी अमित कहाँ है?

कामिनी : जी वो बहार गया है शायद दोस्त से मिलने गया होगा

अजय : मुझे तुमसे एक बात करनी है

कामिनी : कहिये

अजय : मैं सोच रहा हूँ डॉ से इलाज हम रहने देते हैं , हमें इसकी ज़रूरत नहीं है

कामिनी : ये आप क्या कह रहे हैं ( अगर ऐसा हुआ तो हमारा प्लान चौपट हो जायेगा और फिर मैं अमित क बचे की अगर माँ बन गयी तो क्या जवाब दूंगी नहीं नहीं ऐसा नहीं होने दूँगी) क्यों आखिर आप ऐसा क्यों कह रहे हैं ? क्या आप नहीं चाहते मैं माँ बनु ?

अजय : मैं तो चाहता हूँ तुम माँ बनो और तुम्हे वो हर ख़ुशी मिले जो मैं तुमने नहीं दे पाया

कामिनी : तो फिर आप ऐसा क्यों कह रहे है ?

अजय : कामिनी माँ बनने क साथ तुम्हे पति का वो प्यार भी तो चाही जो एक औरत को मर्द से चाहिए होता है जो मैं तुम्हे नहीं दे सकता

कामिनी : मतलब?

अजय : मतलब क 15 साल से तुम आदमी क प्यार को तरस रही हो और मैं चाहता हूँ क तुम डॉ क बजाये किसी दूसरे मर्द से बचा पैदा करो जिससे तुम्हे वो प्यार भी मिल जाये

कामिनी : चिल्लाकर) आप होश में तो हैं ? ये क्या कह रहे हैं आप ? मैं ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकती ?

अजय : मैं सब जनता हूँ कामिनी और सब देख भी चूका हूँ अपनी आँखों से जब तुम अमित क साथ थी

कामिनी की धड़कन hi रुक हटी है अजय क मुँह से ये सुन कर उसकी हालत ऐसी हो गयी जैसे कोई भूत देख लिया हो

अजय : डरो मत मैं जनता हूँ 15 सैलून से तुमने मेरी इज़्ज़त की खातिर कभी किसी पराये मर्द की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखा और खुद एक विधवा की ज़िन्दगी जी रही थी . यकीन मनो मैं खुद को दोषी मंटा आया हूँ आज तक क मैं तुम्हे न प्यार दे सका न माँ बना सका

अगर तुम किसी गैर मर्द क पास जाती तो शायद मैं ये बर्दाश्त न कर पता मगर तुमने अमित को चुन कर बहुत सही फैसला किया है

मैं भगवन से प्राथना करता हूँ क वो जल्द hi तुम्हारी सुनी कोख में बचा दे दे और तुम्हारे दुःख भरे दिन ख़तम हो

कामिनी अजय की बातें सुन कर फुट फुट कर रोने लगती है और वही ज़मीन पर गिर जाती है . अजय कामिनी को संभालता है और कहता है

अजय : तुम क्यों रो रही हो कामिनी तुमने कोई गलत काम नहीं किया है . आज तक तुमने जिस तरह हर जगह मेरा मान रखा है मैं तो तुम्हारा कर्ज़दार हूँ तुम ऐसे खुद को तकलीफ न दो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है तुम्हारे और अमित क रिश्ते पर बल्कि अमित तो जाने अनजाने मुझ पर एहसान कर रहा है मुझे बाप बना कर

कामिनी : मैंने आपके साथ धोखा किया है आप मुझे मारिये मेरी जान ले लीजिये

अजय : ऐसा मत कहो कामिनी तुम्हे मेरी कसम . तुम्हे भी ज़िन्दगी की सब खुशियां मिलनी चाहिए और अगर वो खुशियां तुम्हे अमित दे रहा है तो इसमें हर्ज़ hi क्या है

कुछ देर यूँही बातें कर क अजय कामिनी को रिलैक्स कर देता है

अजय : कामिनी एक बात क हमेशा ध्यान रखना ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए

कामिनी : मैं ध्यान रखूंगी और जैसे hi गर्भ ठहर जायेगा फिर अमित क साथ कभी नहीं करुँगी

अजय : नहीं कामिनी तुम्हे पति क प्यार की ज़रूरत है इस लिए तुम ऐसा मत करना और जब भी दिल करे अमित क साथ प्यार कर लेना और मुझे तुमसे कुछ चाहिए , बोलो डौगी ?

कामिनी : आप हुकम कीजिये

अजय : मुझे ढेर सरे बचे चाहिए

कामिनी शर्मा जाती है . दोनों ऐसे hi कुछ देर बातें करते हैं और फिर दोपहर क खाने का वक़्त हो जाता है

दीपिका और कामिनी खाना बनती हैं कमलेश और अमित भी आ जाते हैं . खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं और अमित अजय क साथ खेतों में चला जाता है

डरा जो क अमित क साथ अखाड़े में कसरत करता था और गाओं का सबसे ाचा पहलवान था वो अमित से मिलने खेतो में अत है

अमित : आइये भैया बैठिये आज कैसे आना हुआ ? मुझे बुला लेते

डरा : भाई तुम तो आज कल नज़र नहीं आ रहे उस्ताद जी बहुत नाराज़ हैं अब ज्यादा मेहनत की ज़रूरत है और तुम छुट्टिआं कर रहे हो

अमित : वो बस घर क कामों में कई बार लेट हो जाता हूँ तो सुबह लेट हो जाने की वजह से छुट्टी हो जाती है

डरा : उस्ताद जी नाराज़ हैं छोटे भाई तुमने तो पता है अगले महीने मुकाबला हो रहा है जिसमे हमारा जितना कितना ज़रूरी है वर्ण हमारे गाओं और उस्ताद जी की नाक कट जाएगी

अमित : मगर मैंने तो पहले hi कहा है मैं मुकाबले में हिस्सा नहीं ले सकता

डरा : मगर मेरा और दुसरो का साथ तो दे सकते हो तयारी में . तुम्हे तो पता है मेरे बराबर क सिर्फ तुम hi हो अब दूसरों क साथ मेरी प्रैक्टिस अछि तरह हो नहीं पति ऐसे में मैं कैसे जित पाउँगा ? अपने से कमज़ोर वाले क साथ प्रैक्टिस कर क भला क्या तयारी होगी

अमित : मैं समझ गया भैया मैं कल से कोई छुट्टी नहीं करूँगा

डरा : इतना hi नहीं शाम को भी तुम्हे आना पड़ेगा उस्ताद जी हम दोनों को अलग से कुछ ज़रूरी दो सीखने वाले हैं अब मुकाबलों में एक महीने से भी काम समय है

अमित : मैं अब कोई छुट्टी नहीं करूँगा

अजय जो अब तक चुप चाप सब कुछ सुन रहा था अब वो भी बोल पड़ा

अजय : अमित अब से तुम सरे काम छोड़ कर कुश्ती पर ध्यान दो और डरा की तयारी करवाओ हमारे गाओं की नाक नहीं कटनी चाहिए अगर घर में कोई कुछ कहे तो मैं देख लूँगा तुम बस मन लगा कर मेहनत करो

कुछ देर बातें करने क बाद डरा चला जाता है और शाम को अमित अपने मामाओं क साथ घर आ जाता है जहाँ विजय उसे आँगन में चिंतित बैठा नज़र अत है

अमित : क्या बात है बाबा आप किस चिंता में डूबे हैं

विजय : आ गया बीटा . अरे मुझे क्या चिंता होगी बस ऐसे hi बैठा था

अमित : आप झूठ बोल रहे हैं बताइये क्या बात है और माँ कहाँ है

विजय : अरे तेरी माँ अंदर है जा मिल आ उससे

विजय अमित को जवाब नहीं देता तो अमित सोचता है क माँ से पूछता हूँ और वो गौरी क पास कमरे में चला जाता है जहाँ कामिनी और दीपिका भी मौजूद थी

अमित को कमरे में अत देख गौरी अपनी आँखें साफ़ करती है मगर अभी भी उनमे नमी थी

गौरी : मुस्कुराते हुए ) आ गया मेरा बीटा अजा मेरे गले लग जा

इतना कह कर गौरी अमित को कास क गले लगा लेती है मगर अमित गौरी की आँखों में आंसू देख कर बेचैन हो उठा था और वो गले मिलने क बाद पूछता है

अमित : क्या बात है माँ आपकी आँखों में आंसू?

गौरी : कुछ नहीं ये आंसू थोड़ी हैं ये तो तो बस ऐसे hi आंख में कुछ चला गया था

अमित : माँ झूट मत बोलिये मैं बचा नहीं हूँ बहार बाबा भी चिंता में डूबे हुए हैं आखिर बात क्या है

गौरी : मुझे तो आज पता चला मेरा बीटा बड़ा भी हो गया है और तू बाबा की चिंता न करो उनको तो दुनिया भर की टेंशन रहती हैं ये पंचायत क काम कोई काम हैं क्या इनके पास

अमित : आप बात मत बदलिए मुझे. बताइये क्या बात है

गौरी : अरे तू ऐसे hi टेंशन ले रहा है ऐसी कोई बात नहीं है चल आजा खाना साथ में कहते हैं

गौरी और विजय दोनों hi अमित को बात नहीं बताते मगर अमित बेचैन था . अमित सोचता है क कामिनी और दीपिका ममी को पता गई उन्ही से सच पता चलेगा

खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं . अमित रत में बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था मगर न hi दीपिका आयी न hi कामिनी और अमित इंतज़ार करता हुआ सो गया

अगली सुबह अमित उठ कर अखाड़े जाता है जहाँ उसे उस्ताद वही सब कहते हैं जो कल डरा बता कर गया था

आज से अमित और डरा को उस्ताद स्पेशल ट्रेनिंग देने लगता है और दोनों को शाम में भी आने का कहता है . अखाड़े में आज अमित को कुछ ज़्यादा hi मेहनत करनी पड़ी और कुछ नए दो सिखने को मिले मगर इस सब से वो बहुत थक गया था और घर एते hi बीएड पर पसर गया
 
अपडेट 35



अगली सुबह अमित उठ कर अखाड़े जाता है जहाँ उसे उस्ताद वही सब कहते हैं जो कल डरा बता कर गया था


आज से अमित और डरा को उस्ताद स्पेशल ट्रेनिंग देने लगता है और दोनों को शाम में भी आने का कहता है . अखाड़े में आज अमित को कुछ ज़्यादा hi मेहनत करनी पड़ी और कुछ नए दो सिखने को मिले मगर इस सब से वो बहुत थक गया था और घर एते hi बीएड पर पसर गया

अब आगे -

अमित आज कुछ ज्यादा hi थक कर आया था और एते hi सो गया जब अमित नाश्ता करने नहीं अत तो गौरी उसे बुलाने कमरे में अति है और अमित को सोता हुआ देखती है तो उसे जगती है

गौरी: उठ जाओ अमित आज क्या बात है तुम ऐसे आकर सो गए तबियत तो ठीक है न तुम्हारी

अमित : अरे माँ कुछ नहीं हुआ बस थोड़ा थक गया हूँ इस लिए आराम कर रहा हूँ

गौरी : कितनी बार कहा है क बस कसरत उतनी hi किया कर जितना ज़रूरी है ज्यादा पहलवानी क चक्कर में मत पदों मगर तुम सुनते hi नहीं

अमित : अरे माँ अगले महीने कुश्ती क मुकाबले हैं जिसमे हमारे गाओं का क्सक्सक्स गाओं क साथ मुकाबला है और अगर हम हर गए तो सबकी नक् कट जाएगी

उस्ताद जी ने कहा है क मैं डरा भैया की प्रैक्टिस करवाऊं मुकाबले का वक़्त आने तक

गौरी : और कोई नहीं है क्या गाओं में , एक तू hi रह गया है प्रैक्टिस करवाने क लिए

अमित : मेरी प्यारी माँ , बस थोड़े दिनों की बात है और कौन सा मैं कुश्ती लड़ने जा रहा हूँ

गौरी : करना भी मत तुम , अब जल्दी उठ और नाश्ता करले

गौरी अमित क सर को चूमती है और नीचे चली जाती है . अमित भी तैयार होकर नीचे अत है और नाश्ता करने लगता है

नाश्ते क बाद अमित फिर से अपने कमरे में जा कर लेट जाता है और दोपहर खाने क वक़्त निचे अत है तब तक अजय और कमलेश भी खाना खाने आ गए थे

विजय कहीं काम से गया हुआ था इस लिए बाकि सब मिलकर खाना कहते हैं

अजय : अमित अखाड़े में आज बहुत देर करदी तुमने

अमित : मां जी वो आज से उस्ताद जी ने अलग से सीखना शुरू किया है डरा और मुझे

अजय : अछि बात है पूरी मेहनत करना हमारे गाओं की नक् नहीं कटनी चाहिए और शाम को अगर जाना पड़े तो चले जाना

गौरी : ये क्या देवर जी आप भी इसे छूट दे रहे हैं ये तो पहले hi मेरी नहीं सुनता इसे कौन सा हमने पहलवान बनाना है

अजय : भाभी आप इसकी चिंता मत करो ये तो हेरा है ये कुछ गलत नहीं करेगा मुझे इस पर पूरा भरोसा है

अजय : कामिनी आज से अमित को देसी घी दाल कर दूध पिलाया करो

कामिनी ( मन में ) मैं तो रोज़ इसे अपना दूध पिलाऊंगी और घी ( छूट का पानी ) वो खुद hi निकल लेता है

कामिनी: जैसा आप कहें

गौरी अजय की बात पर और कुछ नहीं कहती बल्कि उसे अमित पर गर्व होने लगता है .

खाना खा कर अमित कुछ देर आराम करता है और शाम में फिर से अखाड़े में जा कर डरा क साथ प्रैक्टिस करता है. दोनों अँधेरा होने तक खूब पसीना बहते हैं और थक हर कर अमित घर आ जाता है

खाना खाने क बाद कामिनी गरम दूध में घी डालकर अमित क लिए लेकर जाती है और बड़ी कामुक ऐडा से उसे अपना दूध दिखती हुई दूध का गिलास देती है

अमित : ममी जी कुश्ती क मुकाबले होने तक मुझे अपनी ताकत बचा कर रखनी होगी वर्ण मैं डरा को सही तरह से प्रैक्टिस नहीं करवा पाउँगा प्लीज आप कुछ दिन वेट कर लीजिये

कामिनी तो चुदाई क मूड में आयी थी मगर अमित ने तो सीधा सीधा इतने दिनों तक ब्रेक लगाने का बोल दिया

कामिनी मायूस सा चेहरा बना कर जाने लगती है जिसे देख कर अमित को बुरा लगता है और वो कामिनी का हाथ पकड़ लेता है

अमित : ममी जी मैं आपको उदास नहीं देख सकता आप इधर आइये

अमित कामिनी को अपनी बहिन में ले लेता है और उसके होंठ चूसने लगता है कामिनी पहले हैरान होती है मगर फिर अमित का साथ देने लगती है

अमित कामिनी को किश करते हुए उसको बीएड पर लिटा देता है और उसकी सदी को कमर तक उठाकर पेंटी निकल देता है

कामिनी मस्त हो जाती है और खुद hi अपने बूब्स दबाने लगती है अमित कामिनी की टैंगो क बीच बैठ कर अपना मुँह कामिनी की छूट पर झुका कर छूट को चाटने लगता है और साथ में उंगली करने लगता है . छूट चाटने क साथ अमित कामिनी की छूट क डेन को होठो में पकड़ खींचता है . कामिनी 5 मिनट्स में hi अपना पानी छोड़ देती बाई और अमित सारा पानी पि जाता है

कामिनी की सांस तेज़ चल रही थी , अमित अपना मुँह सदी से साफ करता है और कामिनी को फिर से पेंटी पहना देता है

कामिनी अमित को देखने लगती है जैसे पूछ रही हो ये क्या

अमित : ममी जी मैं अपना पानी नहीं निकल सकता मगर आपका तो निकल hi सकता हूँ

आपको जब भी ज़रूरत हो आप आ जाना मैं ऐसे hi आपका पानी निकल दूंगा

कामिनी अमित की बात से मुस्कुरा देती है और चली जाती है , अमित भी आराम से सो जाता है

अब से रोज़ अमित की यही रूटीन हो गयी थी वो अखाड़े में खूब मेहनत करने लगा था और इतना थक जाता था क और कहीं अत जाता hi नहीं था यहाँ तक क राजू भी उसे खुद hi मिलने अत था , मंजरी क पेपर भी इसी दौरान ख़तम हो गए थे मगर अमित उससे नहीं मिलने गया .

कामिनी और दीपिका ने भी अमित की बात का ध्यान रखा और उसे तंग नहीं किया हालाँकि दोनों ने 2/3 बार अमित से अपनी छूट चटवाकर अपनी गर्मी को कुछ शांत किया था

अमित और डरा ने खूब मेहनत की थी जिसे देख कर उस्ताद को यकीन हो गया था क इस बार जीत उनकी hi होगी

देखते hi देखते मुकाबले का दिन पास आ गया . 3 दिन बाद मुकाबले थे घर में सुबह नाश्ता करते समय गौरी विजय से कहती है

गौरी : सुनिए ! मैं कहती हूँ बैसाखी का त्यौहार आ रहा है अभी तक हमने किसी को दीपिका क माँ बनने क बारे में नहीं बताया कहीं कल को दीदी रीता और दिव्या को नहीं बताया है . आप उन्हें बैसाखी पर यहाँ बुला लीजिये और आज कल तो स्कूल कॉलेज में भी छुट्टी होती है इस लिए सब आ सकती हैं

विजय : बात तो तुम ठीक hi कह रही हो अगर उन्हें बाद में बताया तो कहीं हमसे नाराज़ न हो जाये . वो सब कब से इस घर क वारिस क लिए भगवन से दुआएं मांग रही हैं उन्हें बहुत ख़ुशी होगी .

तुम क्या कहते हो अजय ?

अजय : भाभी ने बिलकुल सही सोचा है भैया आप सब को बुला लीजिये

कमलेश : भैया आप उनको फ़ोन पर कुछ न बताना हम उनको यहाँ आने पर सब बताएँगे तो वो सब कितना खुश होंगी

विजय खाना खाने क बाद अपनी सब बहनो को फ़ोन करता है और सब बच्चों को साथ लेकर आने का कहता है और बरी बरी सब फ़ोन पर बात करते हैं

बैसाखी से एक दिन पहले सब बहने अपने बचे लेकर घर पहुँच जाती हैं

रजनी की बड़ी बेटी निधि और बेटे कारन को छोड़ कर सब क बचे ए थे

जब सब घर पर पहुंचे अमित घर नहीं था आज आखरी दिन होने की वजह से उस्ताद जी ने डरा और अमित को अपने साथ hi रखा और दोनों को कल क मुकाबले क लिए मेंटली तैयार कर रहे थे और उन दोनों को रिलैक्स कर रहे थे हालाँकि अमित तो मुकाबले में हिस्सा नहीं लेने वाला था मगर फिर भी वो साथ रह कर सब समझ रहा था

वहीँ घर पर जब तीनो बहने अपने बच्चों क साथ पहुंची तो तो घर में ख़ुशी का माहौल बन गया आज कितने समय क बाद सब एक साथ थे सब अंदर से बहुत खुश से बहुत खुश थे

रजनी : आज कितने दिनों बाद सब को एक साथ देख कर कितनी ख़ुशी हो रही है

रीता : सच कहा दीदी घर क कामों से फुर्सत hi कहाँ मिलती है

गौरी : तुम लोग तो एते hi नहीं कितनी बार कहा है आ जाया करो हमारा भी मन होता है तुमसे मिलने का बात करने का मगर तुम तो हमें अपना hi नहीं मानते . अब भी फ़ोन कर क बुलाया है वर्ण कहाँ एते तुम सब

रजनी : अरे हाँ , गौरी तुमने बताया नहीं आखिर किस लिए हम सब को यूँ अचानक बुलाया है इसकी कोई खास वजह

गौरी : वजह तो बड़ी खास है और वजह जान कर आप सब नाचने लगोगी

रीता : अरे वह ऐसी कौन स वजह है क हम नाचने लग जाएँगी ज़रा जल्दी बताओ भाभी

गौरी : वजह ये है क तुम बुआ बनने वाली हो

गौरी क मुँह से ये बात सुन कर तीनो बहने खुश हो जाती हैं और दिव्या जो अब तक चुप थी वो भी ख़ुशी से चीला उठती है

दिव्या : क्याआ ! सच भाभी ? इसका मतलब आप माँ बनने वाली हो ? कान तरस गए थे ये सुनने क लिए

रजनी : क्या सचमुच गौरी तुम माँ बनने वाली हो ? मैं बुआ बनने वाली हूँ हमारे भाइयों क घर चिराग रोशन होने वाला है . भगवन ने हमारी सुन ली

रजनी की आँखों में पानी आ जाता है

रीता : वह भाभी ये तो वाकई नाचने वाली खुश खबरि है

गौरी : अरे बुआ तो आप बनने वाली हो मगर माँ मैं नहीं छोटी बनने वाली है

दिव्या : कौन ? दीपिका ?

कामिनी : हाँ दीपिका माँ बनने वाली है

रजनी : बधाई हो दीपिका तुमने हमारी मुराद पूरी करदी . कितना ाचा होता अगर गौरी और कामिनी भी माँ बन जाती

ये सुन कर गौरी की हंसी काम हो जाती है

दीपिका : तो क्या हुआ दीदी बचा चाहे मैं पैदा करुँगी मगर माँ तो बड़ी दीदी भी होंगी न उसकी और रही कामिनी दीदी की बात तो जल्द hi भगवन ने चाहा तो ये भी माँ बन जाएँगी

रीता : मतलब कामिनी भाभी भी तयारी में है , ये तो तुमने बहुत अछि खबर सुनाई दीपिका

रजनी : भगवन किसी नज़र न लगाए कितने सैलून बाद आज ख़ुशी का माहौल बना है

दिव्या : मगर ये सब अचानक हुआ कैसे कुछ तो बताओ

दीपिका : कुछ नहीं दीदी बस थोड़ी से प्रॉब्लम थी डॉ ने दवा देकर ठीक करदी और अब कामिनी दीदी भी उसी डॉ ( अमित ) से अपना इलाज करवा रही हैं जल्दी hi इनकी तरफ से भी खुश खबरि मिल जाएगी

दिव्या : कौन से डॉ से ? यहाँ तो गाओं में कोई है नहीं

दीपिका : वो आपके शहर में है क्सक्सक्सक्स डॉ

दिव्या : क्या ? तुम मेरे शहर में अति रही और मुझसे मिलने भी नहीं आयी बुरी बात है मैं आपसे बात नहीं करती , कर दिया न परायी

गौरी : अरे ये क्या कह रही हो दिव्या तुम तो हम सब की लाड़ली है तुम्हे कैसे भूल सकते हैं, वो बात ये थी क हम चाहते थे जब तक पता न चल जाये हम ये बात किसी को भी माँ बताये और अब कन्फर्म होते hi आप सब को बुला लिया

वैसे भी शहर में सारा दिन तो डॉ क पास निकल जाता था और शाम को वापिस भी आना होता था

रजनी : गौरी अगर ये दोनों डॉ से इलाज करवा कर माँ बन सकती हैं तो तुम क्यों नहीं करवाती इलाज अपना

दीपिका और कामिनी एक दूसरे को देखने लगती हैं क अगर गौरी ने है करदी तो कहीं उनका भेद न खुल जाये

गौरी : नहीं दीदी मुझे ज़रूरत नहीं है भगवन ने मेरी झोली में पहले hi अमित को दाल दिया है और मैं उसी से खुश हूँ वो जितना मुझे प्यार करता है शायद मेरा अपना बीटा भी होता तो इतना प्यार न करता मुझे . भगवन उसके जैसा बीटा सब को दे

गौरी की बात से दीपिका और कामिनी कुछ ज्यादा hi खुश हो रही थी और मन में सोच रही थी क अमित क जैसा hi बीटा वो भी पैदा करेंगी बिलकुल उसकी कार्बन कॉपी

रजनी : अरे हाँ , है कहाँ वो जब से आयी हूँ देखा नहीं उसे

दिव्या : गया होगा कहीं आवारा गर्दी करने

ये बात गौरी कामिनी और दिव्या को बहुत बुरी लगती है

रजनी : ऐसा मत कहो दिव्या वो ऐसा नहीं है . वो तो बहुत संस्कारी है

दिव्या : देखा है मैंने उसे दोस्तों क साथ घूमते हुए अपनी आँखों से हमारे शहर में

दिव्या की बात से सब चौंक जाते हैं

रजनी : ाचा वो सब छोडो विजय भैया अजय और कमलेश कहाँ चले गए हमें यहाँ बुलाकर . उनको बुलाओ हमारा मुँह तो मीठा करवाओ

गौरी : वो बस अभी आ जायेंगे तुम लोगो क लिए मिठाई लेन hi गए हैं कमलेश को साथ लेकर और अजय भी अभी आ जायेगा खेतों से

यूँही बात चित चलती रहती है तीनो बहनो क साथ उनकी बेटियां भी आयी थी जो इतने दिनों बाद मिलने से बहुत खुश थी और एक कमरे में बैठ कर बातें कर रही थी

शाम को विजय अजय और कमलेश भी आ जाते हैं और बातों और हंसी मज़ाक का दौर चलता रहता है

अमित देर से घर अत है उसकी तीनो मासियां सफर की थकन क चलते जल्दी सो गयी थी इस लिए उनसे मुलाकात नहीं हो पति

सुबह जल्दी उठ कर अमित जाने क लिए तैयार हो जाता है दीपिका कामिनी और गौरी अमित को नाश्ता जल्दी करवा देती हैं और उसे बेस्ट ऑफ़ लक विश करती हैं . अमित माँ बाबा से आशीर्वाद लेकर जाने लगता है तो विजय उसे बताता है क वो भी उस मुकाबले में आएगा क्यूंकि उसे भी निमंत्रण दिया गया है

अमित सब से मिल कर डरा क घर जाता है जहाँ से वो दोनों उस्ताद जी क घर जाते हैं और बाकि साथियों क साथ मिलकर निकल पड़ते हैं
 
अपडेट 36



सुबह जल्दी उठ कर अमित जाने क लिए तैयार हो जाता है दीपिका कामिनी और गौरी अमित को नाश्ता जल्दी करवा देती हैं और उसे बेस्ट ऑफ़ लक विश करती हैं . अमित माँ बाबा से आशीर्वाद लेकर जाने लगता है तो विजय उसे बताता है क वो भी उस मुकाबले में आएगा क्यूंकि उसे भी निमंत्रण दिया गया है




अमित सब से मिल कर डरा क घर जाता है जहाँ से वो दोनों उस्ताद जी क घर जाते हैं और बाकि साथियों क साथ मिलकर निकल पड़ते हैं

अब आगे -

एक बहुत बड़े मैदान में कुश्ती क मुकाबले का पंडाल लगाया गया था एक साइड में ऊँची स्टेज बनाई गई थी विप क लिए जहाँ पर जिले क D.C. मला सप और बहुत सरे राजनीति क लीडर और दोनों गाओं की पंचायत प्रधान बैठने वाले थे बीच में एक अखाडा बनाया गया था और चारो तरफ कुर्सियां लगाई गयी थी दर्शकों क लिए

उस्ताद : डरा संभल कर लड़ना अपना भी ख्याल रखना और सामने वाले को चित भी करना आज सब की इज़्ज़त तुम्हारे हाथ में है

डरा : उस्ताद जी आप चिंता न करो मैं पूरी जान लगा दूंगा

उस्ताद जी ने डरा क इलावा जो 4 और लड़के हमारी तरफ से हिस्सा लेने वाले थे सबको वार्म उप करवाना शुरू कर दिया

कोई एक घंटे क अंदर मैदान लोगो से भर गया और उस गाओं क सरपंच ने खेल शुरू करने को कहा . कुश्ती क मुकाबले में हमारे पूरे जिले से पहलवान ए थे और सबको उनके बॉडी वेट क हिसाब से अलग अलग ग्रुप बता दिए गए

फिर वेट केटेगरी क हिसाब से मुकाबले शुरू हुए . मुकाबले में हिस्सा ले रहे सभी पहलवान अचे थे मगर हमारे उस्ताद जी पूरे राज्य में सबसे अचे पहलवान रह चुके थे इस लिए हमारे लड़के बाक़िओं से अचे साबित हो रहे थे और मुकाबले में अपना दबदबा बना रहे थे

लगभग सभी ने पहले राउंड में जित हासिल की उसके बाद सबको थोड़ी रेस्ट दी गयी

दूसरे राउंड में हमारे लड़कों में से 2 hi जीत पाए और 2 हार गए , जिस गाओं से हमारा मुकाबला था उसी गाओं में आयोजन होने का फायदा उन्हें मिल रहा था मगर हमे इसका कोई गम नहीं था हमारी उम्मीद डरा था जो हमें जीता सकता था .

डरा क सामने जो पहलवान था वो भी डरा की तरह ताकतवर था जब दोनों का मुकाबला शुरू हुआ तो दोनों एक दूसरे को बराबर टक्कर दे रहे थे मगर डरा की आंख मिटटी दाल कर दूसरे पहलवान ने डरा को उठाकर पटक दिया और डरा क कंधे पर चोट लग गयी और उसके मुँह से एक चीख निकल गयी उस्ताद जी सामने वाले पहलवान की इस हेराफेरी पर गुस्से में आ गए

उस्ताद जी : ये क्या हरकत है ? अगर मर्द की तरह मुकाबला नहीं कर सकते तो जाओ घर जा कर चूड़ियां पहन कर बैठ जाओ , ये खेल तुम जैसे घटिआ लोगो क लिए नहीं है , बंद करो अभी इसे यहीं पर

( सामने वाले गाओं क उस्ताद को मैं यहाँ उस्ताद 2 लिखूंगा. दोनों उस्ताद पुराने विरोधी थे जो अपने समय में कई बार एक दूसरे से मुकाबले में हर जीत कर चुके थे )

उस्ताद 2 : अगर तुम्हारे लड़को में डैम नहीं है तो जाओ ले जाओ इन्हे और चूड़ियां पहना कर घर बैठाओ साथ में तुम भी पहन लो अपनी हर को छुपाने क लिए बहाने न बनाओ

उस्ताद : ज़ुबान को लगाम दो , पहलवान वही होता है जो ईमानदारी से खेले और अपनी बाज़ुओं क डैम से जीते . तुमने तो लगता है सब कागज़ क पहलवान बना रखे हैं इसी लिए ये घटिया पेंट चला रहे हैं यहाँ पर

उस्ताद 2 : ज़बान को लगाम दो और अपनी हिजड़ों की फ़ौज ले जाओ यहाँ से और अपनी पगड़ी यही रख क चले जाओ अब तुम हर चुके हो तुम्हारा पहलवान अब हर चूका है

उस्ताद : ये हर नहीं है ये हेरा फेरी है आँखों में मिटटी दाल कर जितने वाले हिजड़े तेरे hi शागिर्द हो सकते हैं जैसा उस्ताद वैसे शागिर्द

दोनों में ज़ुबानी जुंग हाथ पायी पर आ गयी और देखते hi देखते मैदान में भीड़ जुट गयी जिस पर पुलिस ने काबू पाया क्यूंकि सब विप वहां पर आ चुके थे

दोनों तरफ को शांत करने क बाद आयोजकों ने दूसरे गाओं क पहलवान की गलती निकली मगर उसे इसके बदले में कुछ नहीं कहा .

लोगों क विरोध को देखते हुए उन्होंने मैच फिर से करवाने का एलान कर दिया मगर डरा अब नहीं खेल सकता था क्यूंकि उसके कंधे पर गहरी चोट आयी थी जिसका मतलब था बिना खेले hi दूसरा पहलवान जीत जाता और हमारे उस्ताद को अपनी पगड़ी उतरनी पड़ती जिससे हम सब की इज़्ज़त मिटटी में मिल जाती

डरा को फिट न पाकर उस्ताद जी मेरे पास आये

उस्ताद : अमित जल्दी से कपडे उतर कर तैयार हो जाओ अब डरा की जगह तुम्हे लड़ना है क्यूंकि उसकी केटेगरी क सिर्फ तुम्ही हो और कोई दूसरा उस पहलवान का सामना नहीं कर सकेगा तुमने तो डरा क साथ प्रैक्टिस की है न तुम ये कर सकते हो मैं जनता हूँ

अमित : उस्ताद जी अगर मेरे घरवालों को पता चला तो माँ बाबा बहुत नाराज़ होंगे और फिर शायद मुझे कभी अखाड़े में न आने दे

हमारी बाटे सुन कर डरा भी आ गया और वो भी मुझे मानाने लगा मगर मैं माँ बाबा क दर से नहीं मन रहा था तभी पीछे से किसी की आवाज़ आयी

आदमी : तुम्हारे गुरु की इज़्ज़त तुम्हारे गाओं की इज़्ज़त तुम्हारे माँ बाबा की नाराज़गी से ज्यादा ज़रूरी है और मुझे यकीन है तुम्हारे माँ बाबा भी इससे गुस्सा नहीं होंगे

मुझे आवाज़ अपनी स लगी और जब मैंने पलट कर देखा तो सामने बाबा खड़े थे

अमित : बाबा आप ?

विजय मां : हाँ मैं , तुम्हे कहा था न मुझे भी बुलाया गया है और अब तुम अपनी माँ की चिंता मत करो उसे मैं समझा दूंगा तुम जाओ और अपने उस्ताद की हमारे गाओं की और हमारे घर की इज़्ज़त बचाओ जा कर उस धोखेबाज़ को हरा दो और हमारा मान बढ़ाओ

बाबा की बात सुनकर मैं जोश से भर गया और जल्दी से कपडे उतर कर तैयार हो गया. बाबा और उस्ताद जी से आशीर्वाद लेकर मैं अखाड़े में कूद पड़ा

डरा की जगह मेरे आ जाने से दूसरे गाओं वालों ने मैच कैंसिल कर क उनके हक़ में फैसला देने को कहा

उस्ताद जी : क्यों निकल गया पानी , अब कहाँ गया दम , आ गए औकात पर एक लड़के क सामने hi घुटने तक दिए अगर वाकई में दम है तो करो मुकाबला वर्ण अपनी पगड़ी उतर कर जाओ

उस्ताद 2 : डैम तो तेरे पहलवान का निकल गया है इसीलिए अब नया ले ए हो

अगर तुम चाहते हो क ये मुकाबला हो तो एक hi शर्त पर होगा

उस्ताद जी : क्या है तुम्हारी शर्त

उस्ताद 2 : तुम सब को अपने कपडे उतर कर और अपनी पगड़ी हमारे पाऊँ में रख कर जाना होगा

सब लोग हैरानी से उस्ताद जी को देखने लगे ये बहुत घटिआ शर्त थी मगर उस्ताद जी ने एक नज़र मुझे देखा और फिर हाँ करदी. सब लोगो में बातें होने लगी क एक छोटे से लड़के पर जो क अभी इस खेल में उतरा भी नहीं है पर भरोसा कर क अपने पेअर पर कुल्हाड़ी मर ली है

उस्ताद जी मेरे पास ए और मैंने भी चिंता ज़ाहिर की

अमित : उस्ताद जी ये अपने क्या किया ये तो बहुत ज़्यादा हो गया और मैंने तो आजतक कोई मैच खेला भी नहीं है

उस्ताद जी : इस के इलावा कोई रास्ता नहीं था अगर मैं उन्हें नहीं उकसाता तो हम ये मुकाबले बिना खेले हर जाते और सर झुका कर जाते वैसे भी वो सब यही सोच रहे हैं क तुम नए हो और अभी बचे हो मगर मैं जनता हूँ क तुम डरा जैसे मजबूत हो चुके हो तुम्हे सब पता है कैसे खेलना है उनकी नासमझी का फायदा उठाओ और जीत क दिखाओ

मुझे अंदर से दर भी लग रहा था अगर मैं हर गया तो उस्ताद जी की कितनी बदनामी होगी मगर डरा उस्ताद जी और बाबा ने मुझ पर विश्वास दिखाया और मुझे हौसला दिया

मैच शुरू होते hi जब मैंने सामने वाले पहलवान की उँगलियों में अपनी उंगलियां फसकर ज़ोर लगाना शुरू किया तो उसने एक झटके में पलट कर मुझे पटक दिया

उस्ताद 2 : अभी भी वक़्त है हर मन जाओ कहीं इस बचे की हड्डी पसली न तुड़वा देना

मैं फिर से उठा और दोबारा से उंगलिया फसकर ज़ोर लगाने लगा एक बार फिर से पहलवान ने मुझे चकमा देकर पटक दिया . मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा और फिर से मैं उठा और एक और कोशिश की इस बार मैंने उसे मौका दिए बगैर झुक कर उसकी एक तंग को पकड़ कर उसकी गर्दन में एक बाजु फसे और अपनी दोनों टैंगो की कैंची बना कर उसकी दूसरी तंग को जकड कर उसकी गर्दन दबोचे हुए पलट कर गिर गया जिससे उसकी गर्दन मेरे निचे एक साइड में डाब गयी और वो पूरी तरह से मेरे काबू में आ गया .

ये स्पेशल दो था जो उस्ताद जी ने डरा और मुझे सिखाया था सामने वाला पहलवान मुझे बचा समझ रहा था और दो बार मुझे पटक कर थोड़ा लापरवाह हो गया था जिसका मैंने फायदा उठाया और इसी एक दो से वो चित हो गया

रेफ़री ने मेरी जित का एलान कर दिया और उस्ताद जी ने दौड़कर मुझे उस पहलवान क ऊपर से उठाकर अपने बाजुओं में ऊपर उठा लिया पूरे मैदान में शोर मच गया

उस्ताद 2 अभी तक जो हुआ उसे समझ नहीं प् रहा एक झटके में ये सब क्या हो गया

खैर हम सब बहुत खुश थे डरा और बाबा भी मेरे पास थे मगर हमारे साथियों ने मुझे कन्धों पर उठाया हुआ था तभी स्टेज से इनाम देने क लिए हमें बुलाया गया . मैं जब इनाम लेने स्टेज पर गया तो वहां मला क साथ एक आदमी कोट पेण्ट टाई लगाकर खड़ा था उसने मुझे हाथ मिलते हुए कहा

आदमी : हेलो यंग मन तुमने तो कमल कर दिया मगर उम्र से तो तुम अभी छोटे लगते हो क्या करते हो तुम पहलवानी क इलावा

अमित : जी मैंने अभी 12 क पेपर दिए हैं

आदमी : वैरी गुड ये तो बहुत अछि बात है आगे पड़ने का इरादा है न ?

अमित : जी मैं तो पड़ना चाहता हूँ मगर पता नहीं पद पाउँगा या नहीं

आदमी : क्यों ऐसी क्या बात है

अमित : जी एक तो कॉलेज दूर है शहर में ऊपर से सुना है पड़े का बहुत खरचा होता है शहर क कॉलेज में

आदमी : वेल अगर तुम पड़ना चाहते हो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ . तुम एक बहुत अचे खिलाडी हो अगर तुम पड़ना चाहोगे तो मैं तुम्हारी साडी फीस माफ़ करवा दूंगा फिर तो तुम्हे मुश्किल नहीं होगी

अमित : क्या सच में ऐसा हो सकता है

आदमी : ये लो मेरा कार्ड और क्सक्सक्सक्स कॉलेज में आ जाना रिजल्ट निकलते hi तुम्हारी एडमिशन हो जाएगी

उस आदमी ने मुझे अपना कार्ड दिया और मुझे मला ने इनाम दिए और मुबारक बाद दी सब विप ने मुझसे हाथ मिलाया मुझे इनाम का 11000 रूपया और एक गुर्ज दिया गया जिसे लेकर मैं नीचे आ गया और अपने उस्ताद और बाबा क पाऊँ छू कर आशीर्वाद लिया सबसे ज्यादा ख़ुशी बाबा को हो रही थी उनकी आँखों में ख़ुशी क आंसू आ गए थे

विजय मां : शाबाश मेरे शेर आज तूने मेरा नाम रोशन कर दिया मेरा सीना गर्व से छोड़ा हो गया है अब मैं फख्र से कह सकता हूँ मैं तेरा बाबा हूँ

इतना कहकर बाबा ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरा सर चूम लिया .

इसके बाद हमारे गाओं से जितने भी लोग ए थे सब एक साथ मिलकर ढोल ताशे बजाते हुए अपनी अपनी गाड़ियों में सवार हो कर चल दिए हम उस्ताद जी क साथ जीप में सवार थे और आगे आगे कुछ लड़के ढोल बजाते हुए मोटरसाइकिल पर चल रहे थे बाकि सब पीछे आ रहे थे

जब हम गाओं पहुंचे तो मुझे कंधो पर उठा लिया गया और ढोल बजाते हुए हुए सब मुझे मेरे घर तक लेन लगे

घर में मेरी किसी से मुलाकात नहीं हुई थी क्यूंकि मैं कल रत भी देरी से आया था और आज सबके जागने से पहले निकल गया था

रजनी मौसी : गौरी ये अमित कहाँ है कल से हम ए हैं अभी तक नज़र नहीं आया

रीता मौसी : हाँ दीदी पहले तो कभी ऐसा नहीं करता जब भी हम एते हैं तो हमारे पास hi बैठा रहता है और आज अभी तक शकल भी नहीं दिखाई

दिव्या मौसी: गया होगा कहीं आवारागर्दी करने और उससे क्या उम्मीद करते हो मैंने तो कल भी बताया था वो आवारा लड़कों क साथ शहर घूमता है पता नहीं और क्या क्या करता होगा

कामिनी ममी : नहीं दिव्या ऐसा मत कहो अमित ऐसा नहीं है वो तो हज़ारों में एक है

कामिनी की बात सुनकर रजनी और रीता दोनों चौंक जाती हैं और सब से बड़ा झटका दिव्या को लगता है

तीनो जानती थी क कामिनी अमित को पसंद नहीं करती मगर दिव्या से तो कामिनी खुल कर अमित की बुराई किया करती थी इसी लिए दिव्या हैरान हो कर उसका चेहरा देखने लगती है

दीपिका ममी : बिलकुल ठीक कह रही हैं दीदी अमित इस घर की जान है वो बहुत प्यारा है और हम सब का बहुत ख्याल रखता है

गौरी ममी चुप थी उसे दिव्या मौसी की बात बहुत बुरी लगी थी इसी लिए वो उठ कर चली जाती है

रजनी मौसी: दिव्या तुम बार बार अमित को यूँ आवारा क्यों कह रही है आखिर तुम क्या जानती हो

रजनी मौसी की बात पर दिव्या मौसी उसे बताती है क कैसे उसने अमित को एक लड़के क साथ मोटरसाइकिल पर घूमते देखा था

अभी ये सब बात चल hi रही थी क बहार से ढोल बजने की आवाज़ आने लगी नैना और करुणा आवाज़ सुनकर इनके पास आती हैं और पूछती हैं

नैना दीदी : आज क्या बात है ममी जी गली में ये ढोल क्यों बज रहे हैं

कामिनी ममी : पता नहीं शायद बैसाखी क कारन आज कटाई भी तो होती है न फसल की इसी लिए कोई ढोल बजा रहे होंगे

करुणा दीदी : मगर आवाज़ तो तेज़ होती जा रही है चल क देखते हैं क ये कौन ढोल बजा रहा है

करुणा और नैना दीदी दौड़ कर गेट पर जाती हैं और गेट खोल कर बहार देखने लगती हैं पीछे पीछे दीपिका ममी और नेहा दीदी भी आ जाती हैं जबकि रजनी मौसी रीता मौसी दिव्या मौसी कामिनी ममी और गौरी ममी अंदर hi थी राधा भी बहार नहीं आयी बल्कि छत पर चढ़ कर बहार देखने लगी

बहार जब उनकी नज़र भीड़ पर पड़ी तो तो मुझे सब क कंधो पर देख कर हैरान हो गयी

आवाज़ बढ़ती हुई जब गेट तक आ गयी तो गौरी भी आवाज़ सुन कर बहार आ गयी और सामने मुझे सबके कंधो पर देख कर हैरानी से मुझे देखने लगी सबके चेहरों पर ख़ुशी थी

मेरे गले फूलों क हर थे और हाथ में गुर्ज गेट पर पहुँचने पर जब मुझे निचे उतरा तो मैंने माँ क पाऊँ छुए

गौरी ममी : ये सब क्या है

विजय मां : अरे अमित की माँ अमित आज कुश्ती का मुकाबला जीत कर आया है इसे आशीर्वाद दो इसने हमारा नाम रोशन कर दिया

माँ ने मुझे गले लगा कर मेरा माथा चुम लिए . माँ की आँखों में ख़ुशी क आंसू थे. साथ hi कड़ी दीपिका और कामिनी ममी की आँखें भी नाम थी और चहरे पर मुस्कराहट

नैना नेहा करुणा दीदी दीपिका ममी और कामिनी ममी सब ने मुझे बधाई दी . मैं अपनी बहनो को देख कर खुश हो गया

थोड़ी देर में सब गाओं वाले चले गए अब सिर्फ घर वाले hi रह गए थे

अंदर रजनी मौसी रीता मौसी और दिव्या मौसी मौजूद थी मैंने आगे बाद कर सब क पाऊँ छुए रजनी और रीता मौसी. ने मेरा माथा चूमती है आशीर्वाद देती हैं पर दिव्या मौसी बिना बोले कमरे से निकल जाती है जिससे मुझे दुःख हुआ सब ये देख रहे थे

रजनी मौसी : तू तो बड़ा पहलवान हो गया है लगता है खूब ज़ोर इकठ्ठा कर लिया है तुमने

दीपिका ममी : मैंने कहा था न दीदी हमारा अमित लाखों में एक है

विजय मां सबको मिठाई खिलते हुआ

विजय मां : आज मेरे शेर ने मेरा सर गर्व से ऊंचा कर दिया

विजय मां सब को आज जो कुछ हुआ वो सब बताता है और सब खुश हो जाते हैं

रीता मौसी : शाबाश अमित ऐसे hi सबका मान बढ़ाते रहना

हर कोई मेरी तारीफ कर रहा था मगर गौरी की आँखों में आंसू थे ये रजनी देख लेती है और उसे अपने गले लगा कर कहती है

रजनी मौसी : रो मत गौरी तुझे तो खुश होना चाहिए तेरा बीटा आज इतना बड़ा काम कर क आया है . तुम क्यों रो रही हो

माँ : मेरा बीटा आवारा नहीं है दीदी आप ने देखा न क्या ये आवारा लगता है ? मैंने इसे अपने संस्कार दिए हैं क्या ये गलत हो सकता है

रजनी मौसी : गौरी दिव्या की बातों को दिल पर मत लो वो तो उसने गलत समझ लिया उसे मगर मैं जानती हूँ तुम्हारी परवरिश कभी गलत नहीं हो सकती

नैना दीदी : आज तो मैदान मर क आया है चल पार्टी दे हम सबको

करुणा दीदी : हाँ दीदी अब तो नहीं छोड़ेंगे हम

रीता मौसी : अरे उसे सांस तो लेने दो

करुणा दीदी : वो हमने कब मन किया है इसे मगर पार्टी तो देनी पड़ेगी वो भी डबल

रजनी / रीता मौसी : डबल ?

नैना दीदी: जनाब को जन्मदिन पर बुलेट मिली है गिफ्ट में ये क्या कोई काम है

पार्टी अब डबल hi देनी पड़ेगी

करुणा दीदी : और हमे अपनी बुलेट पर घुमा कर भी लाना पड़ेगा

अमित : सब को पार्टी मिलेगी और जहाँ कहो जैसे कहो वैसे मिलेगी आज मेरी जेब भी गरम है

नैना / करुणा दीदी : वो कैसे

विजय मां : वो ऐसे क इनाम में 11000 रूपए जो मिले हैं

सब खुश हो जाते हैं

करुणा दीदी : फिर तो शॉपिंग करवानी पड़ेगी

अमित : जैसा तुम कहो

गौरी ममी : चलो अब बैठो खाना तो खाया नहीं होगा पहले खाना खा लो

मैं जब अपने कमरे में कपडे बदलने क लिए जाने लगा तो सीढ़ियों पर hi मुझे राधा मिल गयी

मैं राधा को 3 साल बाद देख रहा था अब वो पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो गयी थी रंग तो पहले हो गोरा था अब और निखार आ गया था छाती का आकर भी बाद गया था , चहरे पर वही मासूमियत थी आँखों में एक ठहराव , हल्का चरेहेरा बदन

मेरी नज़र जब राधा से मिली तो एक पल क लिए हम दूसरे की आँखों में hi देखते रहे मगर अगले hi पल मैंने इस चुप्पी को तोडा

अमित : कैसी हो राधा कितनी देर बाद आज मिल रही हो

राधा मेरी बात का जवाब दिए बिना चली गयी और मैं उसके बारे में सोचते हुए अपने कमरे में चला गया

खाना खाने क बाद सब बैठ कर बातें करने लगे मेरी बहने मुझसे पार्टी देने क बारे में पूछने लगी

ऐसे hi बातें करते करते शाम हो जाती है इस दौरान अजय और कमलेश भी अमित क बारे में पता चलने पर घर आ गए थे आज घर में जश्न का माहौल था खूब साडी मिठाई घर में आ चुकी थी

रजनी रीता और दिव्या ने कमलेश को बधाई दी और अजय को भी जल्दी बाप बनने का कहा

आज का दिन बहुत ाचा गुज़रा और रत को जब सब अपने अपने कमरों में गए तो मैं माँ क पास गया

गौरी ममी : क्या बात है अमित तुम अभी तक सोये नहीं

अमित : माँ मुझे पैन किलर दे दीजिये कोई ज़रा दर्द हो रही है बॉडी में

गौरी ममी : क्या हुआ तुझे कहीं चोट तो नहीं लगी?

कितनी बार तुझे मन किया है मगर तू नहीं मंटा . मत किया कर ये कुश्ती

विजय बाबा: अरे अब तो तुम्हे फख्र करना चाहिए और तुम उसे दन्त रही हो

गौरी ममी: आप क्या जाने एक माँ पर क्या बिट टी है जब उसके बचे को चोट लगती है आपको तो बस वह वही अछि लगती है मेरे बचे को जो दर्द हो रहा है वो?

अमित : माँ मुझे कुछ नहीं हुआ ये तो बस थोड़ा बहुत बॉडी में पैन होता hi है मुकाबले क बाद

गौरी ममी: ाचा ाचा तू चुप कर मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध ले कर अति हूँ और दवा दीपिका क पास होगी मैं उसे कहती हूँ

मैं अपने कमरे में आ गया और माँ का इंतज़ार करने लगा थोड़ी देर में माँ दूध और दवा ले आयी

मैंने दूध पिया और दवा खा कर सो गया
 
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