Adultery Manhoos se mahan tak - Page 25 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 187



अमित मंजू की गॉड में सर रख और सो रहा था क मंजू का मोबाइल बजने लगा. ये शीना का फ़ोन था. मंजू ने जल्दी से फ़ोन उठाया ताकि अमित की नींद ख़राब न हो.

शीना : कैसी हो हुआ ?

मंजू : मैं ठीक हूँ शीना तुम कैसी हो ?

शीना : बस ठीक हूँ. दिन नहीं लग रहा था तो सोचा आपसे मिल लूँ. आप घर पर hi हैं न. मैं आ रही हूँ

मंजू : वो शीना मैं वो कहीं जा रही हूँ तुम आज रहने दो. मुझे देर हो जाएगी .

शीना : पर आप कहाँ जा रही हैं.

मंजू : वो मुझे एक ज़रूरी सामान लेना था और कुछ किताबें . तुम कल आ जाना.

शीना : ाचा ठीक है. पर अगर आप कहें तो मैं आपके साथ चल सकती हूँ

मंजू : नहीं कोई बात नहीं. मुझे टाइम लग जायेगा और मैं नहीं चाहती तुम मेरे साथ बोर होती रहो . ाचा अब कल मिलते हैं. Ok

शीना : ठीक है बुआ. Bye .

मंजू ने शीना को ताल दिया ताकि अमित को कोई परेशानी न हो और वैसे भी शीना पता नहीं क्या सोचती. उधर मोहित भी परेशां अमित को ढूंढ रहा था तो अचानक उसके ख्याल आया क क्यों न एक बार मंजू म क घर देख लिया जाये क्यूंकि अमित का उनके साथ भी जुड़ाव है. ये बात मन में आते hi मोहित पहुँच गया मंजू में क घर. और बहार अमित की बाइक देख कर उसके चेहरे पर रौनक आ गयी. मोहित लगभग दौड़ता हुआ दरवाज़े तक पहुंचा और बेल्ल बजा दी. मंजू म ने जैसे hi दरवाज़ा खोला तो मोहित को देख कर चौंक गयी.

मंजू : अरे मोहित तुम यहाँ ?

मोहित : वो मम असल में मैं अमित को ढूंढ रहा था. उसका फ़ोन बंद है और मैं दोपहर से उसे ढूंढ रहा हूँ. थैंक गॉड क वो आपके पास है . वर्ण पता नहीं कहाँ कहाँ ढूंढना पड़ता.

मंजू ( मन में ) हो न हो जो भी हुआ है वो मोहित क घर या इसकी बहिन क ससुराल में hi हुआ है. इसी लिए अमित बिना बताये निकल आया होगा.

मोहित : अरे मम आप कहाँ खो गयी? प्लीज आप अमित को बुला दीजिये.

मंजू : पर अमित तो यहाँ नहीं है.

मोहित : वो उसकी बाइक तो यहीं कड़ी है न मम. प्लीज मम उसे बुला दीजिये. हम लोग बहुत टेंशन में हैं.

मंजू : अरे मैं कह रही हूँ न वो यहाँ नहीं है. यकीन न हो तो अंदर आ कर खुद देख लो. आओ

मोहित : no मम it’s ok. पर उसकी बाइक तो यहीं है . आपके पास आया होगा न वो?

मंजू : हाँ वो आया तो था. उसकी बाइक शायद ख़राब हो गयी थी इस लिए यहीं कड़ी कर क चला गया.

मोहित : क्या ?? बाइक छोड़ कर चला गया. आपको पता है वो कहाँ गया?

मंजू : बता कर तो नहीं गया . हाँ कह रहा था क मोबाइल ख़राब है तो उसे ठीक करवा कर वो घर चला जायेगा. शायद बाइक लेने आये. अगर वो आया तो मैं उसे कह दूंगी क वो तुमसे बात कर ले.

मोहित : कुछ बता कर गया है क किस तरफ गया है.? चलिए कोई बात नहीं मैं खुद देख लेता हूँ. आप मेरा जो. रख लीजिये अगर वो आये तो मुझे फ़ोन ज़रूर कीजियेगा. प्लीज मम it’s अर्जेंट. हमें उसकी बहुत फ़िक्र हो रही है.

मंजू : वैसे तुम चिंता मत करो. वो बिलकुल नार्मल hi था और कह कर गया था क वो आएगा. वो जैसे hi अत है मैं तुम्हे फ़ोन कर दूंगी.

मोहित को कुछ तसल्ली हुई क चलो कुछ तो पता चला . फिर भी वो एक बार पास की मार्किट में उसे देखने चला गया. और उसने घर भी फ़ोन कर क इन्फॉर्म कर दिया. ये सुन कर रमा को कुछ तसल्ली हुई पर करिश्मा तो जैसे पछतावे की आग में जल रही थी. वो अमित से खुद माफ़ी मांगना चाहती थी. मंजू मन में सोचने लगी क उसने सही किया या गलत किया. मोहित अमित का बेस्ट फ्रेंड था मंजू ये अछि तरह जानती थी. पर फिर भी कुछ तो हुआ hi था चाहे फॅमिली में किसी और की वजह से hi हुआ हो. बस इसी लिए मंजू ने बात को छिपा लिया और अमित क पास बैठ गयी.

पता नहीं मैं कितनी देर सोता रहा . मेरी नींद मंजू म क जगाने से hi खुली. मैंने ऑंखें खोली तो वो प्यार से मेरा सर सेहला रही थी.

मंजू म : उठ जाओ देखो रत होने वाली है. रत को भी तो सोना है न. और फिर खाना भी खाना है. चलो उठ जाओ.

अमित : क्या टाइम हो गया है ?

मंजू म : क्यों ? कहीं जाना है क्या ?

अमित : वो बात नहीं मतलब मैं काफी देर से सो रहा हूँ.

मंजू म : ाचा वो सब छोडो पहले बताओ तुम्हारा फ़ोन कहाँ है?

अमित : वो यहीं होगा ये हाँ ये रहा. पर आप क्यों पूछ रही हैं?

मंजू म : इस लिए क सब परेशां हो रहे होंगे. कब से फ़ोन बंद है तुम्हारा? मोहित आया था तुम्हे ढूंढते हुए .

अमित : आपने क्या कहा उसे?

मंजू म : पहले तो मैं बताने वाली थी फिर सोचा क शायद वहीँ से तुम इतना परेशां हो कर आये तो फिर से तुम्हे वापिस नहीं जाना चाहिए तो मैंने कह दिया क तुम यहाँ बाइक कड़ी कर क अपना मोबाइल ठीक करने गए हो. अब उसे फ़ोन कर क कुछ कह दो वर्ण वो फिर से तुम्हे ढूंढने आ जायेगा. तुम बात करो तब तक मैं कॉफ़ी लती हूँ.

अमित : हम्म्म

मैंने अपना मोबाइल ों किया तो ढेरों मेस्सगेस आने लगे मॉस्कल्स क. मैंने पहले मोहित को hi फ़ोन किया.

मोहित : कहाँ है तू ? मैं दोपहर से तुझे ढूंढ ढूंढ क थक गया हूँ. यहाँ सब परेशां हो रहे हैं. है कहाँ तू.

अमित : अरे यार मैं वो हाँ वो मोबाइल ख़राब हो गया था तो उसे ठीक करवाने आया था तो यहाँ कुछ पुराने दोस्त मिल गए उन्ही क साथ चला आया.

मोहित : काम से काम एक फ़ोन तो कर सकता था. तुझे पता है यहाँ क्या हल हो रहा था हमारा. माँ और दीदी का रो रो कर बुरा हल है . आखिर हुआ क्या है तू ऐसे अचानक बिना बताये गया क्यों?

अमित : अरे कुछ नहीं यार वो फ़ोन की वजह से मैं जल्दी से निकल गया था और फिर टाइम hi नहीं मिला अभी फ़ोन ठीक हुआ है तो फ़ोन कर दिया. ाचा अब मैं जा रहा हूँ जब वापिस आऊंगा तो फिर मिलूंगा . मेरी चिंता मत करना. और आंटी से दीदी से कह देना क उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं.

मोहित : पर तू जा कहाँ ....

मैंने ज्यादा बात नहीं की और फ़ोन काट दिया . मोहित को क्या समझाता क हुआ क्या है बस इसी लिए मैंने फ़ोन काट दिया. फिर मैंने राधा को फ़ोन किया . राधा में पहली बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया .

राधा : रट हुए ) कहाँ हो तुम ? अभी क अभी घर आओ . तुम्हे ज़रा भी परवाह है किसी की? कहाँ हो कल से ? तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था? क्या हुआ है तुम्हे? जल्दी से घर आओ.

अमित : अरे अरे आराम आराम से तुम पहले रोना बंद करो

‘ कहाँ हो तुम ? जल्दी से घर आओ तुमने सुना न , घर आओ जल्दी से . वर्ण मैं कभी तुमसे बात नहीं करुँगी. ‘ ये दिव्या मौसी की आवाज़ थी जो गुस्से से मुझे घर आने को कह रही थी. मैं उनकी आवाज़ से समझ गया था क वो भी चिंता में होंगी और इसी लिए ऐसे बात कर रही हैं.

अमित : पर मौसी मैं ...

दिव्या मौसी: तुमने सुना नहीं ? मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना. अभी क अभी यहाँ आओ .

अमित : पर मौसी मैं अभी कैसे आ सकता हूँ ?

दिव्या मौसी: क्यों? क्यों नहीं आ सकते ? हो कहाँ तुम ?

अमित : मैं शहर से बहुत दूर हूँ . अपने एक दोस्त क साथ . रत भी हो गयी है तो अकेले इतनी रत को इतनी दूर से कैसे आऊं. आप खुद hi तो मन करती हैं न रत को सफर करने से.

दिव्या मौसी: पर तुम हो कहाँ ?

अमित : वो मैं आपके एक दोस्त के साथ हूँ .

दिव्या मौसी: कौन सा दोस्त है जिसके साथ घूम रहे हो? और तुमने फ़ोन क्यों बंद कर रखा था.? बात क्या है ? तुम्हे पता भी है यहाँ क्या हल हो रहा था हमारा?

राधा : ( दिव्या से फ़ोन छींटे हुए ) मुझे कुछ नहीं पता तुम अभी क अभी यहाँ आओ. खुद को समझते क्या हो तुम ? एक फ़ोन नहीं कर सकते थे ? मुझे तुम्हे देखना है तुम जल्दी से आ जाओ.

दिव्या मौसी: राधा मैं बात कर रही हूँ न. इतनी रत को कैसे आएगा वो अकेला? तुम रुको. हाँ अमित ठीक है तुम रत वहीँ रुक जाओ पर सुबह तुम यहाँ होने चाहिए मेरे सामने. समझ गए?

अमित : जी मौसी कल सुबह मैं पहुँच जाऊंगा.

दिव्या मौसी: अपना ध्यान रखना और ऐसे से आ जाना. मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी हैं और घर भी फ़ोन कर देना.

अमित : जी ाचा मौसी.

उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया पर दिव्या मौसी की बात से पता चल गया क वो गुस्से में हैं और कल मुझे उनके गुस्से का सामना करना पड़ेगा. साथ hi मुझे राधा को लेकर भी खुद पर अफ़सोस हो रहा था क वो मेरी कितनी परवाह करती है और मैंने उसे बताया तक नहीं. बताता भी क्या अगर उसे मेरी सचाई पता चले तो शायद वो कभी मुझे देखना भी पसंद न करे. खैर उसके बाद मैंने माँ से बात की . इस बीच आंटी का फ़ोन आने लगा पर मैंने फ़ोन नहीं उठाया. तभी मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आ गयी.

रीमा : टेंशन में ) कहाँ थे तुम ? कल से तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था ? तुम्हे किसी की परवाह है की नहीं ?

अमित : अरे रुको रुको मेरी बात तो सुनो.

रीमा : क्या सुनु सब सुन लिया है मैंने . मैं वहीँ थी राधा क पास. और अत भी है क्या हल बना रखा था राधा ने अपना. और मौसी भी कितना दुखी थी .

अमित : पर तुम वहां कैसे ?

रीमा : क्यों ? मैं वहां नहीं हो सकती क्या ? मेरी बेस्ट फ्रेंड है वो और मैं उसकी साइड hi लुंगी. जो हरकत तुमने की है न उसके लिए तुम्हे सजा मिलने चाहिए.

अमित : ाचा तो तुम मुझे सजा देना चाहती हो ? तो ठीक है देदो सजा पर जानना नहीं चाहोगी क मैं कहाँ था और फ़ोन क्यों बंद था ?

रीमा : तुम मिलो तो सही फिर बताती हूँ तुम्हे . तुम्हे तो कोई फरक पड़ता नहीं न चाहे कोई तड़प तड़प कर मर जाये.

अमित : सही कहा मुझे फरक नहीं पड़ता क्यूंकि मैं इंसान हूँ hi नहीं मैं तो जानवर हूँ बेशरम बेगैरत हूँ

रीमा : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो ? तू कहाँ हो ? हुआ क्या है ?

अमित : कुछ नहीं , कल मिलूंगा तो सब बताऊंगा . अभी तुम घर जाओ और आराम करो. मैं जहाँ भी हूँ बिलकुल ठीक हूँ.

रीमा : प्लीज मुझे बताओ मेरा दिल घबरा रहा है.

अमित : मैंने कहा न क मैं बिलकुल ठीक हूँ. तुम टेंशन न लो. कल मिलूंगा तो सब बताऊंगा . ाचा अब मैं रखता हूँ. Bye

रीमा : लव यू

अमित : 2

रीमा की कॉल मैंने जल्दी से कटी क्यूंकि निधि दीदी का फ़ोन आ रहा था .

अमित : hello दीदी

निधि दीदी: तुम वापिस आ गए और बताया तक नहीं.

अमित : वो दीदी मैं थक गया था तो सो रहा था अभी उठा हूँ और मेरा फ़ोन बी बंद था.

निधि दीदी : तुम हो कहाँ मुझे तुमसे मिलना है अभी.

अमित : पर अभी तो मैं यहाँ नहीं हूँ दीदी. मैं अपने एक दोस्त से मिलने आया था तो कल वापिस आऊंगा.

निधि दीदी : ाचा ठीक है कल जब आओ तो पहले मुझे फ़ोन करना एक सरप्राइज देना है तुम्हे .

अमित : ज़रूर दीदी मैं आपको फ़ोन ज़रूर करूँगा.

निधि दीदी : मैं इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.

अमित : ाचा दीदी मैं रखता हूँ . Bye

निधि दीदी : bye

मैंने दीदी से बात करते hi फ़ोन स्विच ऑफ कर दिया क्यूंकि आंटी और करिश्मा दीदी की कॉल्स आ रही थी और मैं उनसे बात नहीं करना चाहता था. मैंने जैसे hi फ़ोन बंद किया तो सामने मंजू म कड़ी मुझे hi देख रही थी.

अमित : ऐसे क्या देख रही हैं आप?

मंजू म : तुम्हे hi देख रही हूँ. पता चल गया न क अपने कैसे परेशां होते हैं जब बात न हो तो. और तुम वहां अकेले पार्क में बैठे थे फ़ोन बंद कर क. वैसे कब से बैठे वहां? वो तो ाचा हुआ कॉलेज से आते वक़्त मेरी नज़र तुम्हारी बाइक पर पद गयी . वर्ण तुम तो वहीँ बैठे रहते . कोई कुछ भी कहे या कुछ भी गलत करे इसका मतलब ये तो नहीं उसकी सजा हम अपनी को दें . मुझ नहीं पता क तुमने किस किस से अभी बात की पर इतना तो समझ सकती हूँ क वो सब परेशां हो रहे होंगे जो तुम इस तरह झूठ बोल कर उन्हें सफाई दे रहे थे. तुम इतने कमज़ोर तो नहीं थे क इतनी जल्दी टूट जाओ. फिर आज क्यों ऐसे थके हारे बैठे थे वहां?

अमित : कुछ नहीं मम बस कल किसी ने मुझे मेरा आइना दिखा दिया क मैं कितना गलत इंसान हूँ. मुझे रिश्तों की कदर नहीं मैं सिर्फ हवस का कीड़ा ......

मंजू म : मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) शहहहहह.... एक लफ्ज़ भी और मत कहना. किसी एक कुछ कह देने से तुम्हारी सचाई नहीं बदल जाएगी. दूसरों की इज़्ज़त बचने वाला हवस का भूखा हो hi नहीं सकता और ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है. अब उठ कर हाथ मुँह धोलो तुम्हारे लिए मैंने कपडे निकल कर रख दिए हैं.

मनु म ने मेरे माथे को चूमा और मुझे फ्रेश होने को कह कर खुद किचन में चली गयी. मैं कुछ देर उनके बारे में hi सोचता रहा. वो कितना प्यार करती थी मुझसे और मैं उन्हें बदले में उतना प्यार नहीं दे प् रहा था. मम क बारे में सोचता हुआ मैं उठा और फ्रेश हो कर कपडे बदल लिए. कुछ देर में hi मन ने खाना लगा दिया . मम कब दोनों क लिए खाना परोस रही थी तब भी मैं उन्हें hi देख रहा था.

मंजू म : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ क एक hi रूप में मुझे कितने सरे रिश्ते आप से मिले हैं.

मंजू म : मतलब ?

अमित : मतलब आप मेरी टीचर भी हैं मुझे दोस्त की तरह समझती समझती भी हैं. बहिन की तरह राखी बंधी. प्रेमिका की तरह प्यार किया बीवी की तरह मेरी सेवा की और माँ की तरह मुझे संभाला. आप ने मेरे लिए कितना कुछ किया , मुझे कितना प्यार दिया और बदले में मैं आपको कुछ भी नहीं देता.

मंजू म : कौन कहता है तुम मुझे कुछ नहीं देते? तुमने मुझे जीना सिखाया मेरी ज़िन्दगी को एक मकसद दिया ताकि मैं जी सकूँ. वर्ण पहले तो मुझे ऐसे लगता था क जैसे मैं उम्र कैद काट रही हूँ. तुमने मुझे वो हर ख़ुशी दी जो मुझसे दुनिया ने चीन ली थी. मुझे फिर से हसना सिखाया. तुम्हारी वजह से मुझे वो रिश्ते वापिस मिले जो वक़्त क साथ कहीं खो गए थे. तुम में मैंने वो भाई देखा जो मेरा सब कुछ था . तुमने मुझे प्यार दिया जो मुझे कभी मिला hi नहीं था. मेरी ज़िन्दगी तुम्ही से है . मैं तो मर कर भी तुम्हारा एहसान नहीं उतर सकती.

अमित : शहहह .... प्यार कोई एहसान नहीं होता. और आप ने मुझे कहीं ज्यादा प्यार दिया है. मुझे लगता है क मैं आपको बदले में उतना प्यार नहीं दे पता

मंजू म : बदले में?? बदला तो कारोबार में होता है, प्यार में तो सिर्फ देना hi होता है. और तुमने मुझे हो दिया है वो मेरे जीने क लिए काफी है. बस अब एक और चीज़ मुझे तुमसे चाहिए पर वो तब जब तुम्हे ठीक लगे.

अमित : आप हुकम कीजिये मैं आपकी हर बात पूरी करूंगा.

मंजू म ( शरमाते हुए ) मुझे ,,, मुझे तुम्हारी निशानी चाहिए

मंजू म ने शरमाते हुए ये बात कही और सर शर्म से झुका लिया. उनकी बात का मतलब समझ कर मैं हैरान भी हुआ पर मुझे उनकी इस बात पर प्यार भी आया.

अमित : क्या सच में ये चाहती हैं ??

मंजू म : नज़रें झुकाये हुए ) हम्म्म्म

अमित : पर आप सबको क्या जवाब देंगी? और अभी तो मैं खुद पड़े कर रहा हूँ . अभी मैं आपकी ज़िम्मेदारी ....

मंजू म : मैंने कहा न , जब तुम्हे ठीक लगे तब. और मैंने सब सोच रखा है. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा .

अमित : पर आप ये सब क्यों चाहती हैं? मेरा मतलब है क अगर किसी को पता चला तो आपके लाइफ परेशानी होगी.

मंजू म : औरत की ज़िन्दगी का ये सबसे ज़रूरी रूप है. माँ बन कर hi औरत पूरी होती है वर्ण तब तक अधूरी रहती है. और मैं तुम्हारे प्यार की निशानी को जनम देना चाहती हूँ. ताकि मैं भी वो सुख प् सकूँ जो हर औरत क लिए ज़रूरी होता है. और मुझे किसी की परवाह नहीं मैं सब देख लूंगी अगर कुछ समय क लिए कहीं जाना भी पड़ा तो चली जाउंगी.

अमित : तो ये आपका फाइनल फैसला है ?

मंजू म : सर हिलाते हुए ) हम्म्म

अमित : तो फिर आज hi बना दूँ आपको माँ ??

मैंने जान बुझ कर मंजू म को छेड़ते हुए कहा. तो वो हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी.

मंजू म : हाथ मरते हुए ) गंदे ,, मैंने ये कब कहा ? जब तुम एक बाप होने की ज़िम्मेदारी निभाने क काबिल हो जाओ तब बना देना अभी तो खुद को संभल नहीं पते. यद् है न क्या हालत बना राखी थी अपनी आज . तब ख्याल नहीं आया था किसी का?

अमित : सॉरी गलती हो गयी . आगे से ऐसा नहीं होगा.

मंजू म : होना भी नहीं चाहिए . मुझे हास्य खेलता अमित hi ाचा लगता है. ये तोंदू लड़का मुझे नहीं चाहिए.

अमित : ाचा तो अब मेरे मज़े ले रही हैं आप ? अगर मैंने कुछ किया न तो फिर आप hi रोटी फिरेंगी .

मंजू म : ाचा क्या कर लोगे ? बड़े आये मुझे रुलाने वाले. चलो चुपचाप खाना खाओ पहले

अमित : ठीक है पहले खाना खा लो आप फिर मैं आप को खता हूँ.

मेरी इस बात पर मंजू म ने ऑंखें बड़ी कर क मुझे देखा और फिर शर्मा गयी. मंजू म को मैंने अपने हाथों से खाना खिलाया और वो भी मुझे अपने हाथों से खाना खिलने लगी. खाना खाने क बाद मंजू म किचन में चली गयी. मैंने सोच लिया क आज मंजू म को वो प्यार दूंगा जो मैं कब से उन्हें दे नहीं प् रहा था. आज साडी रत अपनी थी. वैसे भी अब मेरा मन हल्का हो चूका था और मंजू म की वजह से hi ये हुआ था. मंजू म किचन में थी और बैडरूम में आ गया.

रमा अपने कमरे में बार बार अमित का फ़ोन तरय कर रही थी पर उसने फ़ोन नहीं उठाया और फिर उसका फ़ोन बंद आने लगा. रमा को ये तो तसल्ली थी क अमित की खबर मिल गयी और वो ठीक है पर उसका दिल अंदर से टूट भी गया था क अब अमित शायद उससे दूर हो गया है ऊपर से करिश्मा की नज़रों में भी अब वो गिर चुकी थी. अपने कमरे में बैठी वो रोये जा रही थी. उसने खाना भी नहीं खाया था और करिश्मा का भी यही हल था. एक तरफ तो पहले वो अमित से बेतहाशा गुस्सा थी और अपनी माँ पर भी पर सचाई जान लेने क बाद उसने अपनी माँ को समझा और अमित भी अब उसकी नज़र में गलत नहीं था. क्यूंकि उसने कुछ भी अपनी मर्ज़ी से नहीं किया था. पर उसे खुद पर अफ़सोस ज़रूर हो रहा था क उसने अमित को जो कुछ अपशब्द कहे हैं उसका कितना असर अमित पर हुआ है. रमा ने जिस तरह अमित क कुछ होने पर खुद को ख़तम करने की बात कही थी उससे भी उसे अंदाज़ा हो गया था क रमा क दिल में अमित की क्या जगह है और ये सिर्फ हवस नहीं है. राघव काम क सिलसिले में शहर से बहार था इस वजह से तीनो अपने अपने कमरे में अकेले बैठे थे. कोई भी खाना खाने नहीं आया. जहाँ दोनों माँ बेटी अमित को लेकर परेशां थी वहीँ मोहित भी चिंता में डूबा था. उसे किसी ने कुछ बताया नहीं था और इसी लिए वो अपनी सोच क घोड़े चरों तरफ दौड़ा रहा था. अमित का इस तरह चले जाना और दोनों माँ बेटी का इस तरह रोना धोना , करिश्मा का इस तरह अचानक से ससुराल जा कर वापिस लौट आना. उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क आखिर हुआ क्या है. ऊपर से राजीव ने भी उसका फ़ोन नहीं उठाया था. मोहित ने अमित से सचाई जानने का सोच कर कुछ देर मीनल से बात की और सो गया. जब घर में सन्नाटा पसरा था तब करिश्मा अपने कमरे से निकल कर अपनी माँ क पास जाने लगी पर दरवाज़ा बंद था. उसने सोचा क उसे अपनी माँ से बात करनी चाहिए कहीं उसकी माँ डिप्रेशन में न चली जाये.

थक थक थक

करिश्मा ने 2-3 बार दरवाज़ा खटखटाया पर रमा ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.

करिश्मा : माँ प्लीज दरवाज़ा खोलिये , मुझे आपसे बात करनी है. प्लीज माँ एक बार दरवाज़ा खोलिये. मैं जानती हूँ आप जग रही हैं. सिर्फ एक बार दरवाज़ा खोल दीजिये. मेरी बात सुन लीजिये माँ.

रमा : ?????

करिश्मा : प्लीज माँ सिर्फ एक बार मेरी बात सुन लीजिये. प्लीज सिर्फ एक बार ,, आपको अमित की कसम माँ प्लीज एक बार मेरी बात सुन लीजिये.

तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और करिश्मा अंदर आ गयी. रमा उसकी तरफ पीठ कर क कड़ी थी. करिश्मा ने पहले दरवाज़ा लॉक किया फिर अपनी माँ क सामने आयी . रमा का चेहरा आंसुओं से भरा हुआ देख के करिश्मा उससे लिपट गयी.

करिश्मा : रट हुए ) ी ऍम सॉरी माँ, मुझे माफ़ कर दीजिये. मैंने बिना सचाई जाने क्या कर दिया. ये सब मेरी गलती है. प्लीज आप मुझे माफ़ कर दीजिये. मैं अमित से भी माफ़ी मांगूंगी. प्लीज माँ

रमा : रट हुए ) तुम क्यों माफ़ी मांग रही हो? गलत तुमने नहीं गलत तो मैंने किया है. साडी गलती मेरी है. मैंने hi अमित को मजबूर किया क वो मेरे साथ वो सब करे. मुझे खुद को कण्ट्रोल करना चाहिए था. अपने बेटे क दोस्त क साथ hi मैंने .... और फिर तेरे ससुराल में अमित को ज़बरदस्ती भेज कर वो सब करने क लिए कहा. सरु गलती मेरी hi है. मुझे माफ़ कर दे बेटी मैंने बहुत बड़ा पाप किया है. तेरा घर बसने की जगह मैंने जब बर्बाद कर दिया.

करिश्मा : नहीं माँ ऐसा मत कहो , आपने कोई पाप नहीं किया. मैं जानती हूँ शरीर की भूख इंसान से बहुत कुछ गलत करवा देती है. इसमें कसूर पापा का भी है अगर वो आपका ध्यान रखते तो ऐसा कभी नहीं होता . आप ने हमेशा पापा को hi सब कुछ मन है मैं जानती हूँ . इसी लिए तो मैंने अमित को गलत समझा था और ये सोचा hi नहीं क वजह कुछ और भी हो सकती है. आप गलत नहीं हैं आपने अमित को जिस लिए भेजा था वो उसने कर भी दिया था माँ. वो दोनों माँ बेटी मुझसे अचे से पेश आने लगी थी पर जो सचाई फिर मेरे सामने आयी वो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकीय. मैंने राजीव का हर जुल्म सहा पर फिर भी उसे पति क रूप में hi मानती रही पर अब .. अब मुझे नफरत हो रही है इस बात से क मैं उस जैसे घटिया इंसान को इतनी इज़्ज़त देती रही . वो तो किसी की नफरत क भी लायक नहीं. कुत्ता ज़लील इंसान मैं एक पल भी उस जान क साथ नहीं रह सकती.

रमा : चौंकते हुए ) ये क्या कह रही हो तुम ? क्या हो गया ऐसे अचानक ? मुझे साडी बात बता .

करिश्मा : रहने दो माँ उन घटिया लोगों क बारे में मैं कोई बात नहीं करना चाहती.

रमा : पर मुझे बता तो सही क हुआ क्या है?

करिश्मा : वो घटिया इंसान अपनी hi सगी बहिन क साथ ,,,,,,, उफ्फ्फ मुझे तो बताने में भी शर्म आ रही है. कैसे घटिया लोग हैं. और वो कमीनी भी कैसे अपने पति को छोड़ कर अपने hi सेज भाई क साथ मुँह कला कर रही है.

रमा : शॉकेड ) क्याआ ? ये सब .....

करिश्मा : हाँ माँ मैंने अपनी आँखों से देखा था दोनों को और फिर मैं खुद को रोक नहीं पायी. मैंने दोनों को hi मरना शुरू कर दिया कैसे बेशर्मी क साथ दोनों नंगे .....

रमा : ये सब कब हुआ ? अमित कहाँ था तब ?

करिश्मा: रत को मुझे सोता देख कर जब राजीव कमरे से गया तो मुझे लगा कहीं अमित उस हेमा या उसकी माँ क साथ न हो तो मैं दर गयी की अगर राजीव ने देख लिया तो क्या होगा. मैं जब अमित क कमरे में गयी तो वहां कोई नहीं था. फिर मुझे दूसरे कमरे में किसी क होने का एहसास हुआ. मैंने दरवाज़े अंदर देखा तो दोनों बहिन भाई बीएड पर.... बस फिर मुझे होश नहीं रहा. अमित उस वक़्त पता नहीं कहाँ था पर जब राजीव ने मुझ पर हाथ उठाया तो अमित अचानक वहां आ गया और राजीव को पटक दिया.

रमा : इसका मतलब वो नज़र रख रहा था.

करिश्मा : क्याआ??

रमा : हाँ वो हर चीज़ का सबूत उकठा कर रहा था ताकि तुम्हारे ससुराल वाले अगर कभी तुझे तंग करें तो हम उनसे अपनी बात मनवा सकें.

करिश्मा : वो मेरे लिए सब कर रहा था और मैंने उसे hi

रमा : उसे hi क्या ?

करिश्मा : रट हुए ) वो जब मुझे चुप करवाने मेरे पास आया तो मैंने उस पर हाथ उठा दिया और उसे पता नहीं क्या क्या कह दिया.

रमा : रो मत बेटी गलती हम दोनों से हुई है. उस बेचारे ने तो जो भी किया मेरे कहने पर किया और तुम्हारी भलाई क लिए किया. तुम्हे अपनी बहिन मंटा है वो . वो तुम्हे ज़रूर माफ़ कर देगा . उसका दिल बहुत बड़ा है. पर मैं तो अब उससे माफ़ी भी नहीं मांग सकती. वो पहले hi मन कर रहा था पर मैंने hi उसे तुम्हारा वास्ता दे कर भेजा था. उसके दिल को बहुत ठेस लगी है . मेरा फ़ोन तक नहीं उठाया उसने.

करिश्मा: रो मत माँ मैं उसे मनाऊंगी. देखती हूँ कैसे नहीं मंटा. पर उससे पहले मोहित को क्या बताना है ये सोच लो. वो सुबह ज़रूर पूछेगा.

रमा : वो मैं देख लुंगी बीटा पर तू बता क अब तू क्या चाहती है?

करिश्मा : मैं उस घर में नहीं रहना चाहती. पर पापा ...

रमा : ऐसा hi होगा तेरे पापा से मैं बात कर लुंगी. और बीटा हो सके तो मुझे ....( हाथ जोड़ते हुए)

करिश्मा: नहीं माँ प्लीज ऐसा मत करिये. मुझे उस बात पर अब कोई गुस्सा नहीं है और आप चाहो तो अमित क साथ

रमा : नहीं बीटा अब तो वो शायद मुझसे कभी मिलेगा भी नहीं . चल ये सब छोड़ आज तू मेरे साथ यहीं रुक जा.

करिश्मा ( मन में ) नहीं माँ ,, मैं जानती हूँ आपको अमित की ज़रूरत है. मैं उससे माफ़ी मांगूंगी उसे आपके पास वापिस लाऊंगी.

दोनों माँ बेटी एक देर रत तक बातें करती हुई सो गयी.

उधर राधा ने कई बार अमित का फ़ोन तरय किया पर वो स्विच ऑफ आ रहा था. राधा अमित से ठीक से बात भी नहीं कर पायी थी अपनी माँ की वजह से . वो बिस्टेर प् करवटें बदल रही थी और अमित पर गुस्सा भी हो रही थी. फिर उसे रीमा की बातें यद् आने लगी.

राधा : प्यार तो तब से करती हूँ जब मुझे प्यार का मतलब भी नहीं पता था पर वो बूढी समझे तो न. आने दो कल इसे बहुत तंग करता है न . कल अचे से खबर लुंगी इसकी.

‘ आआआ मैडम जी प्लीज माफ़ कर दीजिये . मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा मैडम अअअअअ’ पुलिस लॉकअप में कल से hi इन 3 लोगों को ज़बरदस्त टार्चर किया जा रहा था. पर अभी तक इन्होने वो नहीं बताया था जो ऋतू सिंह जानना चाहती थी. ऋतू सिंह ने भी ठान लिया था क वो सच उगलवा क रहेगी.

ऋतू सिंह : तो तुम लोग नहीं बताना चाहते. चलो कोई बात नहीं. अगर तुम लोगों की यही मर्ज़ी है तो ठीक. पांडेय जी इनको और मत मारिये फ़िज़ूल में हम अपना वक़्त बर्बाद कर रहे हैं. आप इनको गाडी में बिठाओ अब इनको आज़ाद रिहा कर देते हैं.

ऋतू सिंह क मुँह से ये बात सुनते hi उन तीनो क दिल में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी. तीनो को जल्दी से कपडे पहना कर पुलिस वन में बिठाया गया और रत क अँधेरे में 4 पुलिस वाले इन तीनो को लेकर शहर क बहार इंसान रस्ते पर लेकर चल दिए. एक जगह पर गाड़ी रुकी और तीनो को गाड़ी से उतर कर उनके हाथ खोल दिए गए. पीछे से दुरी गाडी में ऋतू सिंह भी आ गयी.

ऋतू सिंह : भाई मन्ना पड़ेगा, तुम लोग हो बड़े वफादार जो इतनी मर खा कर भी अपना मुँह नहीं खोला. तुम लोगों की वफादारी से खुश हो कर मैं तुम लोगों को आज़ाद करती हूँ. अब तुम्हे कभी कोई दर्द नहीं होगा. जाओ भाग जाओ.

‘ नहीं मैडम कहीं नहीं जायेंगे . आप हमें वापिस लेकर चलो’ पहले वाले ने ये कहा जो समझ गया था क ऋतू सिंह क्या कह रही है.

‘ हह हमें वापिस लॉकअप में दाल दीजिये . आप हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकती ‘ दूसरा वाला भी ऋतू को देखता हुआ बोलै.

ऋतू सिंह : अरे मैं तो तुम लोगों को आज़ाद कर रही हूँ. वैसे भी तुम लोग सुधरने वाले तो हो नहीं और न hi तुम लोग सच बोलोगे तो क्यों न हम ये झगड़ा hi ख़तम कर दें.

‘ आप ऐसा नहीं कर सकती ये ये गलत है. पुलिस ऐसे नहीं कर सकती किसी को’ तीसरे वाले ने जब देख क पुलिस वालों ने अपनी गन्स लोड कर की हैं तो वो डरने लग और उसकी टंगे कम्पनी लगी. ऋतू ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और सिर्फ मुस्कुरा दी.

ऋतू सिंह : पांडेय जो जल्दी करो मुझे वापिस भी जाना है.

पांडेय : जी मैडम , चलो बे भागो जल्दी.

तीनो में से कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला तो पुलिस वाले ज़बरदस्ती खींच कर दो लोगों को गाड़ी से थोड़ा दूर ले गए और दोनों को गोली मार्डी. गोली की आवाज़ क साथ उन दोनों की चीखें भी सुनाई दी. ये मंज़र देख कर तीसरे वाला थार थार कम्पनी लगा और उसका पेशाब निकल गया. वो जल्दी से ऋतू क पाऊँ पद गया

‘ मुझे छोड़ दो मैडम मैं आपकी हर बात मानूंगा मैडम मुझे छोड़ दो’

ऋतू सिंह : तो बताओ मुझे सब कुछ सच सच

‘ मैडम मैंने ऐसा किया तो मेरे साथ मेरे घरवालों को भी मर दिया जायेगा’ प्लीज मैडम मुझे छोड़ दो’

ऋतू सिंह : तो फिर तुम भी अपने साथियों क पास जाओ. वैसे अगर तुम मुझे सच बताओ तो मैं तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कुछ नहीं होने दूंगी. इस बात की मैं गारंटी लेती हूँ. और तुम्हारा नाम भी नहीं आएगा.

‘ ठीक है मैडम मम मैं सब सच सच बता दूंगा. ‘



ऋतू सिंह : पांडेय जी इसके बयां नोट करो और उन दोनों को हॉस्पिटल पहुंचा दो. अगर बच गए तो उनकी किस्मत. वर्ण एनकाउंटर फाइल कर देना .
 
भाई लोगो आज और कल की छुट्टी रहेगी फिर परसो मिलते हैं. आउट ऑफ़ स्टेशन हूँ ज़रा
 
अपडेट 188



‘ ये लो ये दूध पि लो. ‘ मंजू म बैडरूम में आयी तो उनके हाथों में एक दूध का गिलास था जो उन्होंने मुझे देते हुए कहा .

अमित : आप नहीं पियेंगी ?

मंजू म : नहीं तुम पियो.

अमित : ऐसे कैसे , चलिए आप को भी पीना होगा वर्ण मैं नहीं पियूँगा .

मनु म : ये क्या बात हुई ? ाचा मैं बाद में पि लुंगी . तुम पियो

अमित : ुनहुन्न, आप को पीना hi होगा. ये मेरा हुकम है.

मंजू म : आँखें बड़ी कर क) हुकम??

अमित : हम्म हुकुम,, एक टीचर , दोस्त , माँ से मिल लिया अब मैं अपनी बीवी से मिलना चाहता हूँ. और ये हुकुम मेरी बीवी क लिए और तुम्हे मन्ना होगा.

मेरी बात सुनते hi मंजू म ने शर्म से नज़रें झुका ली . उनके गोर गाल टमाटर जैसे लाल हो गए.

अमित : जवाब नहीं दिया अपने? क्या मैंने कुछ गलत कहा ?

मंजू म : सर हिलाते हुए ) ओह्ह्ह , पर पहले तुम पियो फिर मैं. आधा तुम पियो फिर मुझे दे देना.

अमित : वो क्यों ?

मंजू म : शरमाते हुए ) बीवी को पति का जूठा पीना चाहिए इससे दोनों में प्यार बढ़ता है.

अमित : ाचा ,, तो ये लो.

मैंने जल्दी से आधा गिलास दूध का पिया और बाकि बचा उनके होंठों से लगा दिया. मंजू म ने एक बार नज़रें उठा कर मुझे देखा और उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी फिर से नज़रें झुका कर वो दूध पिने लगी. जैसे hi दूध का गिलास खतम हुआ तो उन्होंने खली गिलास मेरे हाथ से ले लिया.

अमित : कैसा लग ?

मंजू म ने जवाब नहीं दिया बस शर्मा गयी तो मैंने उनकी कमर में हाथ दाल कर अपने साथ सत्ता लिया . वो अभी भी शर्मा रही थी. मैंने उनकी थोड़ी पर हाथ रख कर उनका चेहरा ऊपर किया पर उन्होंने अपनी पलकें अभी भी झुकाई हुई थी.

अमित : मैं आपको पत्नी समझ सकता हूँ न ??

मंजू म : नज़रें झुकाये हुए) अभी भी समझने की ज़रूरत है ? मैंने तो तुम्हे साडी अधिकार दे दिए हैं.

अमित : फिर तो मैं हक़ जाता hi लेता हूँ.

इतना कह कर मैंने मंजू म क गुलाबी होंठों की कम्पन को काम करते हुए उनके होंठों अपने होंठों में कैद कर लिया. बहुत hi मुलायम और रास भरे होंठ थे मंजू म क . मंजू म क साथ किश करते हुए एक अलग hi आनंद मिल रहा था जिसमे रत्ती भर भी वासना का एहसास न था . मैंने प्यार से उनके होंठों को चूमा फिर ऊपर वाले होंठ को अपने होंठो में पकड़ कर चूसा और फिर नीचे वाले होंठ को अल्बी गिरफ्त में लिया. मंजू म ऑंखें बंद किये बस मेरा साथ दे रही थी . मैंने उनके सर क पीछे हाथ रख कर शिद्दत से उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए. कभी ऊपर वाला तो कभी नीचे वाला मैं बदल बदल कर उनके होंठों को चुस्त रहा. मंजू म क हाथ भी मेरी पीठ पर कास गए थे और वो पूरी तरह मेरे साथ चिपक गयी थी.

मंजू म : उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म उम्म्म

अमित : उम्म्म्म ुजम्मं ुम्माआठ अआप तो शहद से भी मीठी हैं. चलिए बाकि का भी रास चख लिया जाये.

इतना कह कर मैंने अपने होंठ उनकी गर्दन पर लगा दिए तो उनकी पूरी बॉडी में झुरझुरी सी दौड़ गयी और एक सिसकी उनके होंठों से निकल गयी.

मंजू म : आह्ह्ह्हह कक्कक्स रर रु ृक्क जाओ ना ककक

अमित : आज नहीं , बहुत दिनों से आपकी अनदेखी की है मैंने . आज नहीं , आज आपको इतना प्यार दूंगा जितना कभी नहीं किया.

मंजू म : आआह्ह सीसीसी उम्म्म मैं कब से उम्म्म इंतज़ार में थी इस ककक रात क.

मंजू म ने मेरे गले में बहन डाली और मुझे खुद hi किश करने लगी. वो अपने नरम मुलायम जिस्म को मेरे साथ ज़ोर से रगड़ने लगी. उनके बूब्स मुझे अपनी छाती पर दबाव देते महसूस हो रहे थे. मैंने मंजू म की कमर सहलाते हुए अपने दोनों हाथ उनके चूतड़ों पर रख दिए. और उन नरम मांस क गोलों को सहलाते हुए अपने हाथों में कास लिया. मम ने किश करते हुए मेरी इस हरकत पर अपनी एड़ियां उठा की तो मैंने भी उन्हें चूतड़ों से पकडे hi हवा में उठा लिया . मम ने अपनी टंगे मेरी कमर पर लपेट ली. मम मेरी गॉड में बचे की तरह मेरे साथ लिपटी मुझे किश कर रही थी मैं उन्हें ऐसे hi कुछ देर किश करता रहा फिर उन्हें बीएड पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर लेट गया पर हमने किश नहीं तोड़ी . मंजू म क साथ आज एक अलग hi एहसास हो रहा था और मैं इसे दिल से गया के रहा था हालाँकि पहले भी हर बार उनके साथ प्यार करते मुझे एक खिचाव हमेशा hi महसूस होता था. पर आज मैं दिल से उन्हें पत्नी मन कर उन्हें प्यार दे रहा था. मंजू म भी ऑंखें बंद किये बस मुझे चुम रहे थे. एक समर्पित प्रेमिका और पत्नी की तरह. किश करते करते मैंने उनके एक स्तन को अपनी हाथ में पकड़ा तो उनकी पकड़ मुझ पर कास गयी.

मंजू म : उउउउम्मम्मम्मम कक्ककक्कक्स

मंजू माँ मुझे अपने से अलग नहीं होने दे रही थी और मैंने भी अलग होने की कोशिश न की. अपना एक हाथ नीचे ले जा कर मैंने अपना लोअर और अंडरवियर नीचे सरका दिया. साथ hi मैंने मम की कमर पर हाथ रख कर उनके नाईट सूट का लोअर नीचे करने की कोशिश की तो काम ने अपनी टंगे मेरी कमर से नीचे कर ली और अपनी कमर को थोड़ा उठा लिया. मैंने एक झटके में ु का लोअर और पेंटी नीचे खिसका दी. हम दोनों सिर्फ किसिंग में लगे थे न मैं कुछ बोल रहा था न मम. पर दोनों एक दूसरे का इशारा बिना बात किये बिना देखे समझ रहे थे. मम को किश करते करते मैंने अपने हाथों और पैरों का इस्तेमाल करते हुए अपना और मम का लोअर निकल दिया. अब कोई रुकावट नहीं थी और जैसे hi फिर से हम एक दूसरे से जुड़े तो उनकी नंगी छूट पर मेरा लुंड दस्तक देने लगा . मैंने एक हाथ से लैंड को छूट पर टिकाया और दबाव बनाते हुए लैंड को छूट में घुसा दिया.

मंजू म : uuuummmmmmmmmmmmmm मम की सिसकी बीच में hi डाब कर रह गयी पर जिस तरह मेरे होंठ उन्होंने अपने होंठ में ज़ोर से दबाये मुझे उनके दर्द का एहसास हो रहा था. मैंने उन्हें कोई दर्द नहीं देना चाहता था. इस लिए कोई धक्का देने की बजाये आराम से hi लैंड को अंदर बहार करता गया और उनको किश करता हुआ उनके स्तन मतदान करने लगा. आज हम दोनों का ये मिलान अलग hi था. और खुद मुझे इस मिलान में जो फील हो रहा था अलग था. पिछले कुछ दिनों में मैंने. अहित सेक्स किया था और वो सब बहुत आक्रामक और हवस से भरा था पर यहाँ हवस जैसे थी hi नहीं. मैं मम को बिना दर्द दिए आधे लैंड को hi अंदर बहार कर रहा था. मम भी ऑंखें बंद किये बस मुझे चूमती रही और अपने हाथ पाऊँ मेरी पीठ थे.

मंजू म : उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह तुम आगे क्यों नहीं बढ़ रहे ? पहले भी तो किया है न.

मैं जब कुछ देर तक आधे लैंड से hi मम को छूट का मतदान करता रहा तो मम ने खुद hi हमारे बीच की ख़ामोशी को तोडा उन्हें लगा शायद मैं उनकी वजह से आगे नहीं बढ़ रहा.

अमित : मैं आपको दर्द नहीं देना चाहता. इसी लिए बस

मंजू म : इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं.

अमित : आप क्या हैं ये मेरे दिल से पूछिए.

मंजू म ने मेरी आँखों में प्यार से देखा और फिर से हमारे होंठ मिल गए. मैंने धीरे धीरे ऐसे hi प्यार से पूरा लैंड छूट में उतर दिया. धीरे धीरे इस मधुर मिलान में मम चरम पर पहुँच गए और उनका पानी निकल गया. पानी निकलते hi मम ढीली पद गयी पर मैंने धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार करता रहा . मम फिर से गरम होने लगी. एक बार फिर से वो मुझे कस्ते हुए खुद hi अपनी कमर उठाने लगी और मुझे पलट कर मेरे ऊपर आ गयी और किश करते करते अपनी कमर हिलती रही. कमरे में सिर्फ हमारी चुम्माचाटी और तेज़ सांसों का hi शोर था. इस तरह का मिलान भी एक अलग hi आनंद दे रहा था. कुछ देर में मम एक बार फिर से झाड़ गयी. मैं भी अब शांत होना चाहता था तो मम को अपने ऊपर दबाये मैंने कुछ आखरी धक्के पेले और अपना पानी मम क अंदर hi निकल दिया . 6-7 पिचकारियां मरने क बाद जब मेरी साँसे कुछ संभाली तो मम मेरे गले लगी बस मेरी सर सेहला रही थी.

मंजू म : धीरे से ) आज तुम दर क्यों रहे थे ?

अमित : दर नहीं रहा था बस आज दिल किया क आपको थोड़ी सी भी तकलीफ न दूँ.

मंजू म : वो क्यों ?

अमित : आप मेरा इतना ध्यान रखती हो तो मुझे भी तो आपका ध्यान रखना चाहिए न.

मंजू म ( मेरी आँखों में देखते हुए ) तुमसे मिला दर्द भी मुझे ख़ुशी देता है. तुम मुझे कभी दुःख नहीं दे सकते. मैं चाहती हूँ तुम मेरे साथ हमेशा दिल से hi रहो दिमाग से नहीं.

अमित : दिल से hi तो हूँ और हमेशा रहूँगा. और अगर आपको दर्द hi पसंद है तो फिर एक राउंड और हो जाये?

मैंने जान बुझ कर मम को छेड़ते हुए कहा तो उनके चेहरे पर शर्म आ गयी.

मंजू म ( मुझे हाथ से मरते हुए) बेशरम !! गंदे !! अभी क्या दर्द नहीं हो रहा. इतने दिनों बाद किया है दर्द तो होगा hi न. ऊपर से नार्मल इंसान तो हो hi नहीं तुम. अब चुपचाप सो जाओ.

अमित : उन्ह्हाँन , अभी तो मैं अपनी बीवी को और प्यार करूँगा. इतने दिन की कसार जो निकालनी है.

इतना कह कर मैंने मंजू म को पलट कर नीचे कर दिया और उन्हें फिर से किश केते हुए गरम करने लगा. मम भी फिर से मेरा साथ देने लगी. किश करते हुए हमने ऊपर क कपडे भी निकल दिए और शुरू हो गया एक और राउंड. एक बार फिर से मैंने मंजू म की छूट को अपने पानी से भरा और हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बाँहों में सो गए.

सुबह पता नहीं किस वक़्त मेरी आँख खुली . मम अभी भी मेरी बाँहों में थी. हम दोनों hi अलफ नंगे थे. मम ने अपनी एक तंग मेरी जांघों पर चढाई हुई थी जिससे मेरा लैंड उनकी छूट पर दस्तक दे रहा था. सुबह की सलामी देता हुआ लैंड मम की छूट का दरवाज़ा खटखटा रहा था. मैंने मम को देखा तो इस वक़्त वो बहुत hi प्यारी लग रही थी. उनके बल बिखरे हुए थे. मैंने उनके होंठों को चूम लिया पर वो वैसे hi सोती रही तो मैंने अपना एक हाथ उनके चूतड़ पर रख कर उन्हें अपनी तरफ खिंचा और अपने लैंड को भी आगे को धकेला तो लैंड छूट में घुसता चला गया. दूसरे hi धक्के में पूरा लैंड छूट में समां गया और मम नींद में हुए इस हमले से एक डैम जाग गयी.

मंजू म : आआह्ह्ह्ह कक्कक्स आराम से आअह्ह्ह

मम ने ऑंखें खोल कर मेरी तरफ देखा और अपनी हालत का अंदाज़ा लगाने क बाद मुझे बनावटी गुस्से से मरते हुए.

मंजू म : सुबह सुबह hi शुरू हो गए तुम , रत को मन नहीं भरा था क्या ?

अमित : किश करते हुए) मन तो कभी भर hi नहीं सकता. आप हो hi इतनी प्यारी. वैसे कैसे लगा गुड मॉर्निंग का तरीका?

मंजू म : अभी बताती हूँ

इतना कह कर मम ने मुझे पलटा और मेरे ऊपर आ गयी. और शुरू हो गया एक और राउंड . एक बार फिर से मैंने मम की छूट को भर दिया. मम मेरे सीने पर सर रख कर लेट गयी

मंजू म : काश क ऐसी सुबह हर रोज़ हो.

अमित : मतलब हर रोज़ आप सुबह सुबह मेरे साथ कबड्डी खेलना चाहती हैं हाँ ?

मेरी बात सुनते hi मम थोड़ी सी ऊपर उठी और मेरी छाती पर हाथ से मारा.

मंजू म : और कुछ नहीं सूझता तुम्हे हाँ ? मैं कह रही थी क तुम ऐसे hi हर रोज़ सुबह मेरे साथ हो और मैं तुम्हारी बाँहों में हूँ.

अमित: हाँ तो मैंने भी तो वही कहा न .

मंजू म : तुमने क्या कहा अछि तरह समझती हूँ मैं. अब चलो उठो और नाहा लो.

अमित : एक साथ नहाते हैं न मज़ा आएगा.

मंजू म : लगता है तुम ऐसे नहीं मानोगे मार खाना चाहते हो मेरे हाथों से है न?

अमित : आप प्यार से ज़हर भी.......

मंजू म : मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) ख़बरदार आगे एक लफ्ज़ भी बोलै तो. तुम्हे कुछ हुआ तो मैं भी ज़िंदा नहीं रहूंगी.

मम की आँखों में हलकी सी नमी आ गयी थी अचानक तो मुझे अपनी भूल का एहसास हुआ .

अमित : ऐसे कैसे कुछ होगा हाँ ?? अभी तो आप ने मुझे नंगे मुझे शहज़ादे देने हैं . जिन्हे मैं पहलवान बनाऊंगा.

मैंने मज़ाक किया तो मम बनावटी गुस्सा दिखते हुए

मंजू म : अभी बताती हूँ , तुम ऐसे नहीं मैंने वाले.

मम जल्दी से बीएड से उठी और और गाने की तरफ पड़ा पानी का जग उठा कर मेरे ऊपर उड़ेल दिया . मैं पानी से बचने क लिए पीछे को हुआ तो बीएड से नीचे जा गिरा और मम ज़ोर ज़ोर से हसने लगी. फिर क्या था मैं भी मम की तरफ लपका पर वो जल्दी से भाग कर बाथरूम में घुस गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया.

अमित : दरवाज़ा खोलो ,, खोलो दरवाज़ा .

मंजू म : बिलकुल नहीं.

अमित : खोलो न प्लीज

मंजू म : उन्ह्हूँन

अमित : प्लीज खोलो न मुझे आपके साथ नहाना है.

मंजू म : बिलकुल नहीं , तुम क्या करना चाहते हो मुझे अछि तरह पता है.

अमित : तो ठीक है मैं भी यहीं खड़ा हूँ. कब तक अंदर रहोगी आप . कपडे तो यहीं हैं न ??

मम को अपनी हालत का अंदाज़ा हुआ तो उनकी हंसी गायब हो गयी.

मंजू म : मुझे मेरे कपडे दो.

अमित : खुद आ कर ले लो.

मंजू म : प्लीज ऐसा मत करो न.

अमित : अब तो ऐसा hi होगा.

मंजू म : देखो देर हो जाएगी , तुम्हे जाना भी तो है न .

अमित : ओह सहित !! दिव्या मौसी ने कहा था सुबह होते hi पहुँच जाना . अब तो देर हो गयी . मैं तो गया. मम दरवाज़ा खोलो मुझे जाना होगा.

मेरी बात मानते हुए मम ने एक पल में दरवाज़ा खोल दिया. उनके चेहरे से हंसी गायब हो चुकी थी.

मंजू म : तुम जल्दी से तैयार हो जाओ मैं नाश्ता बनती हूँ.

अमित : आप भी ...

मंजू म : तुम जल्दी करो.

इतना कह कर मम ने जल्दी से अपने कपडे पहने और बाल बांधते हुए किचन में चली गयी. मैं भी जल्दी से तैयार हुआ और बहार आ कर अपने कपडे पेहेन लिए. तब तक मम ने कॉफ़ी क साथ टोस्ट बना लिए थे.

मंजू म : आज कॉलेज जाओगे या नहीं?

अमित : शायद hi पौन. मौसी पता नहीं क्या कहने वाली हैं. कॉलेज का टाइम तो वैसे भी होने hi वाला है.

मंजू म : रहने hi दो, अपनी फॅमिली से मिलो वो भी टेंशन में आ गए होंगे. वैसे मैं भी आज नहीं जा रही.

अमित : आप क्यों नहीं जा रही.?

मंजू म : मेरी आँखों में शरारत से देखते हुए ) इस लिए क कल रत एक कीड़े ने काट लिया था और अब मुझे आराम की ज़रूरत है.

अमित : कीड़े ने ?? ाचा तो ये बात है. अगर आप आज नहीं जा रही तो कीड़ा फिर से काट सकता है.

मंजू म : न बाबा न, मुझे आराम की ज़रूरत है . बीमार नहीं पड़ना है मुझे. और अब तुम जाओ वर्ण तुम्हारी मौसी कहीं नाराज़ न हो जाएँ. वैसे मोबाइल अभी ों किया क नहीं?

अमित : ओह तेरी , मैं तो भूल hi गया. मर गए. मैं चलता हूँ.

मैंने जल्दी से उठा और बहार निकलने लगा . मम मुझे जाते देख रही थी तभी मैंने पलट कर उनके होंठों पर किश र दिया तो ु के चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी.

मैं जल्दी से बाइक ले कर दिव्या मौसी क घर पहुँच गया. मैंने बेल्ल बजे तो दरवाज़ा दिव्या मौसी ने hi खौला. मुझे देख के उनके चेहरे पर रौनक आ गयी. मगर अगले hi पल वो फिर से गुस्से में आ गयी. मैंने उनके पाऊँ छुए तो वो बिना बात किये अंदर चली गयी. मैं समझ गया मौसी मेरी क्लास लगाने वाली है .

अमित : मौसी ....

दिव्या मौसी : मिल गया टाइम ? किसी की परवाह है क नहीं तुम्हे? खान हो क्या कर रहे हो खैरियत से हो क नहीं , इतना बताना भी मुश्किल काम लगता है तुम्हे? लोग तो यही कहेंगे न उसके घरवालों को इसकी कोई चिंता नहीं है .

अमित: मौसी मैं .....

दिव्या मौसी : खुद को समझते क्या हो ? इतने बड़े हो गए हो क खुद hi सरे फैसले लेते रहोगे और किसी को बाटोगे भी नहीं? एक फ़ोन नहीं होता तुम्हारे से? मैं बात करती हूँ भैया से, तुम्हे सीखना पड़ेगा क ज़िम्मेदारी भी कोई चीज़ है.

अमित : मौसी मैं .....

दिव्या मौसी : कहाँ हो कैसे हो रोटी खाई या नहीं ? ठीक से हो क नहीं ? कहाँ हो ? किन लोगों में हो ? कैसे रह रहे हो ? यही सब सोच सोच कर हम सब टेंशन लेते रहें पर तुम्हे क्या ? तुम्हे तो किसी को कोई जवाब देना hi नहीं होता.

अमित : मौसी मैं ......

दिव्या मौसी : लोग तो यहीं कहेंगे न माँ बाप नहीं हैं तो किसी को चिंता नहीं इसकी. सगी माँ नहीं हूँ न मौसी हूँ , इसी लिए तुझे मेरी कोई परवाह नहीं. मेरी hi गलती है सब . पहले मैंने तुझे दूर रखा और अब तू दूर भाग रहा है.

दिव्या मौसी गुस्से से बात करती करती भावुक हो गयी और उनका गाला रूँधने लगा. मेरी तरफ वो पीठ लिए कड़ी थी पर उनकी आवाज़ से मैं समझ गया क वो रो रही हैं. मैं जल्दी से उनके सामने आया तो सचमुच उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे. मुझे देख कर उन्होंने मुँह दूसरी तरफ फेर लिया .

अमित : मुझसे गलती हो गयी मौसी ऐसा दुबारा नहीं होगा. मेरा फ़ोन सच में ख़राब था. मुझे माफ़ कर दीजिये मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा. मैं जनता हूँ मुझे आप hi सब से ज्यादा प्यार करती हो. आप ने चाहे हमेशा मुझे खुद से दूर रखा पर प्यार भी आप हो सब से ज्यादा करती हो. मेरी वजह से आपकी आँखों में आंसू आ गए . मैं सच में ाचा बीटा नहीं हूँ. आप मुझे सजा दीजिये मुझे मारिये पर प्लीज खुद को दुखी कर क मुझे सजा मत दीजिये. प्लीज मौसी मुझे माफ़ कर दीजिये .

दिव्या मौसी : तो ऐसे काम hi क्यों करता है? तुझे ज़रा भी अंदाज़ा है क क्या क्या आ रहा था दिमाग में जब पता चला क तू बिना बताये चला गया है? अगर तुझे कुछ जो जाता तो ...

अमित : जब तक आप मेरे साथ हैं मुझे कुछ हो hi नहीं सकता .

मौसी ने मेरी बात सुनते hi कास क मुझे अपने गले लगा लिया. मुझे उनके प्यार में मेरे प्रति उनकी ममता का दरिया उमड़ता हुआ महसूस हो रहा था. दिव्या मौसी मेरे सर को सहलाती मुझे पर अपना प्यार लुटा रही थी. मैं भी कास क उन्हें गले से लगाए उस प्यार क सागर में खुद को डूबता हुआ प् रहा था. अपने आप hi मेरी ऑंखें बंद हो गयी . पता नहीं कब तक मैं दिव्या मौसी क गले लगा रहा. दिव्या मौसी भी मुझे अपने से अलग नहीं कर रही थी तभी एक आवाज़ से हम दोनों होश में लौटे.

‘ माँ इसे कह दो क जहाँ से आया है वहीँ वापिस चला जाये. हम तो उसके कुछ लगते hi भी न. जाये उन्ही क पास जहाँ था कल से किसी को बिना बताये.’

मैं मौसी से अलग हुआ तो देखा रेखा अपने रूम क दरवाज़े पर कड़ी थी और गुस्से से मुझे देख रही थी. जैसे hi मेरा ध्यान उसकी तरफ हुआ तो वो अपने रूम में चली गयी.

दिव्या मौसी : तू hi बात कर अब उससे . वो भी गुस्से में है. आज कॉलेज भी नहीं गयी इसी लिए. तू जा मैं नाश्ता बनती हूँ.

दिव्या मौसी क गुस्सा तो उतर गया था पर राधा को गुस्से में देख कर मुझे हैरानी हो रही थी . क्यूंकि मैंने उसे इतने गुस्से में कभी देखा hi नहीं था. बल्कि वो तो गुस्से में अति hi नहीं थी और आज मुझ पर गुस्सा दिखा रहा थी. मैं जल्दी से उसके कमरे में गया तो वो बीएड पर अपने घुटनो में सर दे कर बैठी थी.

अमित : बीएड पर बैठते हुए ) नाराज़ हो मुझसे .?

राधा :....

अमित : मैंने बताया था न वो फ़ोन ख़राब हो गया था .

राधा :......

अमित : ाचा बाबा सॉरी मैं माफ़ी मांग रहा हूँ न.

राधा :.....

अमित : तुम आज कॉलेज क्यों नहीं गयी ?

राधा :.....

अमित : अब गुस्सा छोड़ भी दो.

राधा :......

अमित : देखो अगर तुम बात नहीं करोगी तो मैं चला जाऊंगा.

राधा :.....

राधा मेरी किसी बात का जवाब नहीं दे रही थी और न hi मेरी तरफ देख रही थी. मुझसे राधा का इस तरह रूठना बर्दाश्त नहीं हो रहा था. जब राधा ने मेरी किसी बात का जवाब न दिया तो मैं बीएड से उठ गया .

अमित : तो ठीक है अगर तुम्हे मुझसे कोई बात नहीं करनी तो मैं चलता हूँ. मैं तो यहाँ आया था क तुम नाराज़ न हो मुझसे पर लगता है तुम्हे मेरी शका hi नहीं देखनी तो ठीक है .

मैं इतना कह कर जाने लगा तो राधा ने मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने पलट कर उसकी तरफ देख तो राधा का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था. उसको ऐसे देख कर मेरे दिल में दर्द सा उठा

राधा : तुम मुझे ऐसे छोड़ कर चले जाओगे??? इतनी hi परवाह है मेरी ???

राधा क ये चाँद अल्फ़ाज़ नश्तर की तरह मेरे दिल पर लगे . उसकी हालत और उसके अल्फ़ाज़ दोनों hi मेरे लिए अज़ाब बन गए थे मैं खुद को रोक न पाया और राधा को अपनी बाँहों में भर लिया. राधा ने भी मेरी पीठ पर अपने हाथ कास लिए. हम दोनों की hi ज़ुबान बंद हो गयी पर शायद दिल की धड़कने आपस में बात कर रही थी. राधा की हालत और बातों ने मेरी धड़कने बड़ा दी थी और राधा की धड़कने पहले hi तेज़ चल रही थी. मुझे तो होश hi न रहा क मुझे राधा से कुछ कहना भी है और शायद राधा को भी कुछ कहने की ज़रूरत न थी अब. कुछ देर एक दूसरे को महसूस करने क बाद मैंने hi इस ख़ामोशी को तोडा.

अमित : मैं तुम्हे कभी छोड़ सकता हूँ भला? तुम जानती हो न? बचपन से आज तक सिर्फ एक तुम hi हो जिसे देखने क लिए मैं हमेशा hi तरसता रहता था और तुम्हे लगता है मुझे तुम्हारी परवाह नहीं ? ऐसा कभी सोने में भी मत सोचना.

राधा : जानती हूँ , पर जाने की बात तो तुम hi कर रहे थे ने. कोई रे थे तो उसे मानना चाहिए पर तुम तो उल्टा खुद hi रूत रहे थे. क्या मुझे गुस्सा करने का भी हक़ नहीं है?

अमित : बिलकुल है , तुम्हे सब हक़ है. मेरी गलती है. मैं माफ़ी मांगता हूँ. प्लीज मुझे माफ़ कर दो राधा.

राधा : ऐसे माफ़ी मांगोगे तो कोई गुस्सा कैसे करेगा ..

अमित : मतलब अब तुम गुस्सा नहीं हो न?

राधा : ुँहुँणन

अमित : ाचा तो फिर कॉलेज क्यों नहीं गयी ?

राधा : तुम्हे देखना था इस लिए. वर्ण तुम फिर गाओं चले जाते . परसों से मेरी क्या हालत थी तुम्हे पता भी है. मैंने मोहित से भी कितना कहा क मेरी तुमसे बात करवाए. तुम थे कहाँ.?

अमित : कहीं नहीं मैंने बताया न क दोस्त क प् था. वो सब छोडो. चलो अब उठो मौसी क्या कहेंगी.

राधा : माँ क्या कहेंगी, तुम पहल सच सच बताओ क बात क्या है ? मेरा दिल घबरा रहा था कुछ तो हुआ है तुम्हारे साथ. प्लीज मुझे बताओ.

अमित : ( मन में ) तुम्हे क्या बताऊँ क मेरे साथ क्या हुआ है और मैंने क्या कुछ किया है. सचाई तुम सुन नहीं सकती राधा .

अमित : अरे कुछ नहीं है ऐसा. तुम तो ऐसे hi दर जाती हो. इतना मत सोचा करो. चलो अब नाश्ता करते हैं मौसी ने बना लिया होगा.

इतना कह कर मैंने राधा को खुद से अलग किया और खड़ा हो गया.

राधा : मैं जानती हूँ तुम झूठ बोल रहे हो

दिव्या मौसी : अमित राधा जल्दी आओ नाश्ता लग गया है.

दिव्या मौसी की आवाज़ सुन कर राधा भी जल्दी से बीएड से उठी और वो बाथरूम में चली गयी अपनी हालत ठीक करने. मैं बहार आ कर चेयर पर बैठ गया. पता नहीं क्यों पर मैं राधा की आँखों में आंसू नहीं देख सकता था. और आज भी उसके आंसू देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया था. मैं उसे कैसे अपनी बाँहों में भर लिया मैं यही सोच रहा था. उसके साथ मुझे वही महसूस होता था जो रीमा क साथ होता था और ये बात मुझे परेशां करती थी पर जब भी मौका अत मैं खुद को बंधा हुआ महसूस करता था. खैर राधा भी मेरे सामने आ कर बैठ गयी . राधा का चेहरा जो कुछ देर पहले मुरझाया हुआ सा लग रहा था उस पर फिर से रौनक आ गयी थी. राधा मुझे hi देखे जा रही थी. दिव्या मौसी ने हम दोनों को खाना लगा दिया. खाना कहते कहते मैंने फ़ोन ों किया तो मॉस्कल्स क मेस्सगेस आने लगे और सबसे पहली कॉल निधि दीदी की hi आयी.

निधि दीदी : कहाँ बैठे हो फ़ोन बंद कर क ? कितनी देर से तरय कर रही हूँ. हो कहाँ तुम?

अमित : सॉरी दीदी मैं यहाँ दिव्या अंशी क घर हूँ.

निधि दीदी : ाचा तू वहीँ रुक मैं अभी थोड़ी देर में वहां आयी.

अमित : दीदी .....

निधि दीदी ने जल्दी से फ़ोन काट दिया. मुझे तो समझ hi नहीं आयी क वो किस बारे में बात करना चाहती हैं.

राधा : क्या कह रही थी दीदी ?

अमित : पता नहीं बताया नहीं कुछ और फ़ोन काट दिया. वैसे वो थीं आ रही हैं.

दिव्या मौसी : पारो था लाते hue)nidhi आ रही है ? वो ऑफिस नहीं गयी क्या आज ?

अमित : अब ये तो उनके आने पर hi पता चलेगा

राधा : घूर कर देखते हुए ) वैसे तुमने रत को फ़ोन क्यों बंद कर दिया था?

अमित : वो बैटरी ख़तम हो गयी थी न इस लिए.

राधा : हर बात का जवाब पहले से hi सोच कर रखा है क्या. खाना खा लो फिर बात करती हूँ.

दिव्या मौसी : बस भी करो तुम , कल से क्या हालत बना राखी थी जब ये नहीं था तो और अब उसे तंग कर रही हो. चुपचाप खाना खाओ.

राधा को दिव्या मौसी ने गुस्सा दिखाया तो वो चुपचाप खाना खाने लगी. मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने शर्म से नज़रें झुका ली. मौसी फिर से किचन में वापिस चली गयी

अमित : क्या हुआ था तुम्हे कल ? क्या कह रही हैं मौसी ?

राधा : तुम्हे क्या ? तुम खाना खाओ , ये मेयर सोचना क मैं छोड़ने वाली हूँ तुम्हे.

राधा ने जिस तरह से ऑंखें छोटी कर क मुझे ये सब कहा तो मुझे अपने आप हंसी आ गयी . राधा मुझे गुस्से से देख रही थी और मुझे हंसी आ रही थी . दिव्या मौसी भी कुछ देर में हमारे साथ बैठ कर नाश्ता करने लगी. मेरे फ़ोन पर मोहित का फ़ोन आया तो मैंने बता दिया क मैं मौसी क घर हूँ. वो कॉलेज में मेरा इंतज़ार कर रहा था. खैर थोड़ी देर में दरवाज़े पर बेल्ल बजी तो दिव्या मौसी ने जा कर दरवाज़ा खोला. तभी निधि दीदी मुस्कुराती हुई अंदर आ गयी और आते hi मुझे गले से लगा लिया.

निधि दीदी : कैसे हो तुम ? कहाँ गायब थे ? कितना फ़ोन तरय किया मैंने?

अमित : दीदी वो मैं ...

राधा : दीदी इसकी अचे से खबर लो पता नहीं खुद को क्या समझता है .

दिव्या मौसी : तुम फिर शुरू हो गयी??

निधि दीदी : कहने दो न मौसी , ये भी तो परवाह hi करती है इसकी. और एक ये हैं क जनाब का पता hi नहीं होता क कहाँ हैं.

अमित : यहीं तो हूँ दीदी आपके सामने . आप बताइये क्या करना है ?

निधि दीदी : करना कुछ नहीं मेरे साथ चलना है.

अमित : कहाँ ?

दिव्या मौसी : अरे अभी तो ये आया है और फिर से तुम इसे ले जा रही हो.

निधि दीदी : सिर्फ इसे hi नहीं आप भी चलिए .

दिव्या मौसी : मैं भी ? पर कहाँ ?

निधि दीदी : बहार तो आइये पता चल जायेगा. और तुम , तुम्हारे लिए तो खास सरप्राइज hai.chalo मेरे साथ.

निधि दीदी ने मेरी आँखों पर हाथ रख और मुझे बहार ले आयी.

अमित : कहाँ ले जा रही हो दीदी.?

निधि दीदी : लो आ गए अब खोलो ऑंखें.

मैंने ऑंखें खोली तो सामने एक ब्रांड नई कार कड़ी थी. गाड़ी को देख कर hi लग रहा था क ये काफी मेहेंगी कार है .

अमित : वाऊऊ , दीदी ये आपकी है न कोंग्रटुलतिओन्स. ये तो बहुत अछि है. कब ली आपने?

निधि दीदी : आज hi , अभी ले कर hi आ रही हूँ सीधा.

राधा : वह दीदी , कोंग्रटुलतिओन्स

दिव्या मौसी : बहुत बहुत मुबारक हो तुम्हे निधि बीटा. ये तो बहुत मेहेंगी लगाती है

निधि दीदी : ( मुझे देखते हुए ) बॉस की तरफ से है मौसी. मैंने कुन सा अपनी जेब से ली है.

राधा : फिर तो आपके बॉस बहुत बड़े आदमी हैं. पर आप तो मोहित क पापा क पास.....

निधि दीदी : वो भी कंपनी में डायरेक्टर हैं . पर मेरे बॉस और हैं. और अंकल ने hi कहा था क मैं ये कार लूँ. ( मेरी तरफ देखते हुए) क्यूंकि मेरे बॉस खुद कार नहीं चलते तो इस लिए मुझे कार मिली है काम से काम मैं hi उन्हें कार में ले जा सकूँ.

राधा : तो क्या आप ड्राइवर बनेंगी

निधि दीदी : अरे नहीं कार मेरे लिए hi है. वो तो बस कभी बॉस को ऑफिस क काम से जाना हुआ तो मन उन्हें अपनी कार में ले जाउंगी. अब ाचा थोड़ी लगता है क एम्प्लाइज कार में जाएँ और बॉस बाइक पर.

राधा : लगता है आपके बॉस काफी सिंपल हैं

निधि दीदी : मुझे देख कर ) बहुत .....

अमित : अब क्या बातें hi करते रहेंगी या कार में बिठाएंगी भी?

निधि दीदी : यस बॉस , आपके लिए hi तो आयी हूँ.

निधि दीदी ने जब यस बॉस कहा तो राधा और दिव्या मौसी हम दोनों को देखने लगी .

राधा : बॉस ???

निधि दीदी : वो यय ये भी तो बॉस hi है न तभी तो आर्डर दे रहा है .

निधि दीदी ने बात बिगड़ने से पहले hi संभल ली. फिर दीदी ने मुझे फ्रंट सीट पर बिठाया और दिव्या मौसी क साथ राधा को पिछली सीट पर बिठाया और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गयी.

दिव्या मौसी : निधि तुम कार चलना जानती हो ? कब सीखा तुमने कार चलना.

निधि दीदी : ये सब इसी की मेहरबानी है मौसी. जाने से पहले ये hi शीना को कह गया था मुझे ड्राइविंग सीखने को. इसी लिए मैंने सोचा क कार में सब से पहले इसी को बिठाउंगी.

दिव्या मौसी : मेरे सर पर हाथ फेरते हुए ) सब का ख्याल रहता है इसे पर खुद का hi नहीं रखता.

निधि दीदी : ये है hi ऐसा . चिंता मत करो मौसी अब इसका ख्याल मैं रखूंगी.

निधि दीदी ने कार स्टार्ट की और हमें साथ लिए चल पड़ी. निधि दीदी तो खुश थी hi साथ में राधा और दिव्या मौसी भी खुश थी. और सबसे ज्यादा मुझे ख़ुशी हो रही थी क मेरी सबसे प्यारी दीदी अब कार में चलेगी. उनका ये सरप्राइज मुझे बहुत ाचा लगा. हालाँकि ये मेरे लिए इतनी झटके वाली बात नहीं थी पर उनकी अपनी फॅमिली क लिए ज़रूर ज़ोर का झटका देने वाली बात थी. खैर एक राइड दे कर दीदी वापिस घर ले आयी हमें और दिव्या मौसी ने जल्दी से मुँह मीठा कराया. फिर निधि दीदी ने दिव्या मौसी से इजाज़त ली और मुझे अपने साथ कार में बिठा कर चल पड़ी.

अमित : ी ऍम सो हैप्पी दीदी . आप को कार चलते देखा कर बहुत ाचा लग रहा है.

निधि दीदी : ाचा लगा न सरप्राइज? कार तो कल hi ले ली थी पर तुम नहीं थे तो फिर आज सुबह मैंने शोरूम से ली. और सब तुम्हारी वजह से हो रहा है. मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था ये सब.

अमित : ये सब आप डेसेर्वे करती हैं दीदी . मैं चाहता हूँ आपको दुनिया की हर ख़ुशी मिले.

निधि दीदी : मेरे लिए सब से बाद कर तुम hi हो . तुम हो तो सब है.

अमित : मैं तो हमेशा आपके साथ hi हूँ दीदी. वैसे अभी आपने घर किसी को बताया क नहीं?

निधि दीदी : नहीं , पहले मैं तुम्हे hi बिठाना चाहती थी इसमें . इसलिए अब बाकि सब को बताउंगी . पर पहले मंदिर चलते हैं.

अमित : पर मौसी या नैना दीदी नाराज़ हो गयी तो .

निधि दीदी : वो ऐसा कभी नहीं करेंगी क्यूंकि वो भी तुम्हे बहुत मानती हैं.

उसके बाद दीदी कार को सीधा मंदिर ले गयी और वहां मंदिर में पंडित जी से पूजा करवाई. पूजा करवाते वक़्त दीदी मुझे अपने साथ ऐसे रख रही थी जैसे हम ोति पत्नी हो. और पंडित hi भी यही समझ रहे थे.

पंडित जी : खुश रही बीटा तुम दोनों की जोड़ी भगवन बनाये रखे.

अमित : पर ....

निधि दीदी : शुक्रिया पंडित जी ये लीजिये दक्षिणा.

निधि दीदी ने जल्दी से पंडित जो 500-500 क दो नोट दिए और वो मुस्कुरा के आशीर्वाद देते हुए चले गए.

अमित : ये क्या दीदी वो क्या कह रहे थे और आपने उन्हें रोका भी नहीं.

निधि दीदी : अरे उनहोंने पूजा की भी गाड़ी क लिए मंतर पड़े तो क्या मैंने उन्हें टोक कर अपशगुन करती क्या ? चलो गाडी में बैठो जल्दी से. अब बताओ कहाँ चलें?

अमित : कहाँ जाना है ? आप जहाँ जाना चाहो ले चलो

निधि दीदी : तो चलो आज फिर मेरी मर्ज़ी की जगह पर.

निधि दीदी मुझे ले कर एक होटल में आ गयी. दीदी अपनी ऑफिस वाली फॉर्मल ड्रेस में hi थी. जैसे hi हम कार से उतर कर होटल में पहुंचे तो सबकी नज़रें निधि दीदी पर hi थी. जो लड़के अपनी गफ क साथ भी थे वो भी निधि दीदी को hi देख रहे थे. ग्रे कोट पेण्ट वाइट शर्ट में हील वाली जुटी में वो कॉन्फिडेंस से चलती हुई मॉडल सरीखी लग रही थी. निधि दीदी ने अपनी पसंद से hi सब आर्डर किया और हम ने साथ में बैठ कर हल्का फुल्का खाया. आसपास क सब लड़कों की नज़र निधि दीदी पर hi थी पर दीदी ने एक बार भी इधर उधर नहीं देखा वो तो बस मुझे hi देख रही थी.

निधि दीदी : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ क यहाँ सब आप को hi देख रहे हैं.

निधि दीदी : छोडो उनको तुम ये बताओ क तुम थे कहाँ ? करिश्मा क साथ गए थे न तो कल कहाँ चले गए थे तुम?

अमित : वो दीदी एक दोस्त क साथ चला गया था .

निधि दीदी : ाचा वैसे वहां कुछ हुआ है क्या ? करिश्मा से बात हुई थी तो वो मुझे कुछ अपसेट सी लगी.

अमित : वो उनके ससुरा में कुछ प्रॉब्लम है दीदी. शायद इसी लिए अपसेट होंगी.

निधि दीदी : ाचा , ये तो बहुत बुरा हुआ. मैं उससे बात करुँगी. ाचा मैं तुम वेट करो मैं ज़रा वाशरूम से हो कर आयी

दीदी उठ के वाशरूम गयी और इधर रीमा का फ़ोन आ गया . मैं रीमा से बात करने लगा . रीमा मुझे मिलने को कह रही थी और मैं उसे बता रहा था क मैं दीदी क साथ हूँ . मैंने उसे दीदी क सरप्राइज का बताया तो वो भी खुश हुई. अभी मैं रीमा से बात कर hi रहा था क मेरी नज़र वाशरूम की तरफ निधि दीदी को रोके खड़े लड़के पर पड़ी. वो दीदी से कुछ कह रहा था और दीदी थोड़ा गुस्से से बात कर रही थी . मुझे मामला कुछ गड़बड़ लगा तो मैंने रीमा को बाद में बात करने का कह कर फ़ोन काट दिया और निधि दीदी की तरफ चल दिया . मैं निधि दीदी क साथ जाकर खड़ा हो गया तो निधि दीदी मेरी बाजु को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे साथ जुड़ कर कड़ी हो गयी.

निधि दीदी : इनसे बात करलो जो करनी हो.

अमित : क्या बात करनी है ?

निधि दीदी : कुछ नहीं ये भाई साहब मेरा no. मांग रहे हैं तो मैंने कहा ये आप से hi बात कर लें.

वो लड़का मेरे आते hi चुप हो गया था और गुजर से मुझे देख रहा था. जैसे मेरी. दोउ देख कर अंदाज़ा लगा रहा हो.

अमित : क्यों भाई क्या तकलीफ है तुम्हे ?

लड़का : कुछ नहीं भाई मुझे लगा क ये शायद सिंगल हैं तो इस लिए ..... सॉरी भरी गलती हो गयी. मुझे नहीं पता था ये आपके साथ हैं .

इतना कह कर वो लड़का तो निकल गया पर निधि दीदी हसने लगी.

अमित : ये सब क्या था ?

निधि दीदी : क्यों समझ नहीं आया ? देखा नहीं कैसे भगा वो तुम्हे देख कर ? अभी हीरो गिरी दिखा रहा था पर तुम्हे देख कर हवा निकल गयी.

अमित : पर आप ने उसे कहा क्या?

निधि दीदी : मैंने क्या कहा कुछ भी तो नहीं. समझदार था खुद hi समझ गया. अब चलो माँ से भी आशीर्वाद लेते हैं चल क.

निधि दीदी वैसे hi मेरी बाजु दोनों हाथों से पकडे मेरे साथ होटल से बहार आयी. एक तरफ टेबल वो लड़का और उसके साथ 2-3 और उसके जैसे लड़के बैठे थे जिन्हे देख कर दीदी फिर से हसने लगी . उस लड़के ने शर्म से मुँह फेर लिया . दीदी का हसना मुझे ाचा लग रहा था. क्यूंकि ऐसा बहुत काम होता था क वो हस्ती थी नहीं तो हमेशा स्माइल hi रहती थी उसके चेहरे पर. आज तो कुछ ज्यादा hi हंसी आ रही थी उन्हें. घर पहुँचने तक वो हस्ती hi रही. मैं जब उनसे वजह पूछता तो कुछ देर चुप रह कर फिर हसने लग जाती. घर जाते हुए रस्ते से हमने मिठाई भी ले ली. घर जा कर जब मैंने बेल्ल बजे तो दरवाज़ा मौसी ने hi खोला और मुझे सामने देख कर उन्होंने जल्दी से मुझे गले से लगा लिया.

रजनी मौसी : अमित तू आ गया बीटा . कैसा है तू. कितने दिनों बाद देख रही हूँ तुम्हे.

अमित : मैं ठीक हूँ मौसी पर पहले आप बहार आइये. आपके लिए सरप्राइज है .

रजनी मौसी: अरे तू अंदर तो आ न कहाँ ये जा रहा है ...... ये क्याआ . निधि तुम ये कार ???

अमित : देखा मौसी दीदी कर लेकर आयी हैं . कैसा लगा सरप्राइज

रजनी मौसी : निधि ये सब क्या ??? ये कार ???

निधि दीदी : मुझे देखते हुए ) हाँ माँ ये कार मुझे बॉस ने दी है . मैंने कहा था न मेरे बॉस बड़े अचे हैं.

रजनी मौसी : खुश होते हुए) इतनी बड़ी कार ??? उन्होंने तुझे ऐसे hi कार दे दी ?? वो हैं कौन?? क्या राघव ने दी है ??

निधि दीदी : राघव अंकल तो हैं hi माँ पर मेरे बॉस कोई और हैं. और वो बहुत अचे हैं.

अमित : क्या दीदी आप भी , पता नहीं किस बॉस की बात किये जा रही हो आप . अंकल hi सब कुछ हैं.

निधि दीदी : पर मैं अपने बॉस की असिस्टेंट हूँ. उन्ही की वजह से तो ये नौकरी और ये कार मिली है .

रजनी मौसी : तेरे पापा बड़े खुश होंगे . मैं अभी उन्हें फ़ोन करती हूँ.

अमित : पहले आप गाड़ी में तो बैठिये और ये मुँह मीठा कीजिये .

मैंने रजनी मौसी का मुँह मीठा करवाया तो उन्होंने मुझे और निधि दीदी को भी मिठाई खिलाई. रजनी मौसी बहुत खुश थी. दीदी ने एक बार फिर से हम दोनों को साथ बिठा कर एक चक्कर लगाया. रजनी मौसी मौसा जिनको फ़ोन पर सब बताने लगी. निधि दीदी तो मेरे साथ hi बैठी थी. मैंने दीदी को मुझे वापिस छोड़ने को कहा तो वो नाराज़ होने लगी पर मैंने उन्हें बहाना बनाया क मुझे किसी दोस्त से ज़रूरी काम है तो दीदी ने मुझे वापिस दिव्या मौसी क घर छोड़ दिया जहाँ से मैं बाइक उठा कर निकल गया रीमा से मिलने . हालाँकि राधा और दिव्या मौसी मुझे जाने नहीं दे रही थी. पर मेरा जाना ज़रूरी था.

उधर मंजू आज कॉलेज नहीं गयी थी और घर पर रुक कर hi आराम कर रही थी. कल रत उसके जीवन की अब तक की सबसे अछि रत थी. उसने अमित क साथ बहुत हसीं पल बिताये थे और साडी रत उसकी बाँहों में बितायी थी. पर एक hi रत में और फिर सुबह सुबह शरीर की अछि तरह रगड़ से वो थोड़ा थक भी गयी थी और जांघों क बीच कुछ दर्द भी था इस लिए उसने आज आराम करना hi बेहतर समझा . ताकि कोई बदली हुई चल देख कर अंदाज़ा hi न लगा ले. सप ऋतू सिंह आज अपनी दोस्त से मिलने कॉलेज चली गयी पर उसे मंजू वहां नहीं मिली. वैसे वो ये जानने गयी थी क अमित लौटा या नहीं. पर मंजू को वहां न पाकर उसे उसकी चिंता होने लगी. क्यूंकि मंजू छुट्टी तो करती नहीं थी. ऋतू ने उसका हल जानने क लिए उसे फ़ोन किया .

ऋतू सिंह : hello , मंजू तुम कहाँ हो ? आज कॉलेज क्यों नहीं आयी तुम? तुम ठीक तो हो न ?

मंजू : तुम कॉलेज आयी थी ? मेरी चिंता मत करो मैं ठीक हूँ. बस थोड़ा थकावट हो गयी थी.

ऋतू सिंह : थकावट ?? थकावट कैसे ?

मंजू : वो ... वो कल रत ठीक से सो नहीं पायी न इस लिए

ऋतू सिंह : तुझे हुआ क्या है तू क्या कर रही थी रत को . मुझे बता तू है कहाँ .

मंजू : अरे मैं ठीक हूँ बाबा बस थोड़ा बदन टूट रहा है. और मैं घर पर hi हूँ. कुछ नहीं हुआ मुझे.

ऋतू सिंह : तू ये कैसी बातें कर रही है साफ साफ बता बात क्या है ? मुझे तेरी चिंता हो रही है

मंजू : अब तुझे कैसे बताऊँ ?? वो कल रत ... वो

ऋतू सिंह : अब बता भी क्यों मेरी टेंशन बड़ा रही है?

मंजू : वो कल अमित मेरे साथ था रत को . अब बाकि तू खुद hi समझ जा.

ऋतू सिंह : क्या ??? अमित वापिस आ गया ?? और वो तुम्हारे साथ था ?? इसका मतलब.... ओह्ह्ह तो कल रत जीजा जी क साथ .....

मंजू : चुप्प्प्प ,, शर्म नहीं आती तुझे.

ऋतू सिंह : ाचा !!! मुझे क्यों शर्म आये ? वैसे वो आ गया और तूने बताया भी नहीं. चल ाचा हुआ वो आ गया मुझे भी उससे बात करनी है. अभी कहाँ है वो.?

मंजू : तुझे उससे क्या बात करनी है ? कहीं ...

ऋतू सिंह : अरे यार है कोई बात , तुझे बताया था न वो केस क बारे में जिसके बारे में पता करने को अमित ने बोलै था अपनी फ्रेंड को उसी क बारे में बात करनी है. बाकि तू टेंशन मत ले मैं उसकी दिल से इज़्ज़त करती हूँ. हाँ अब जीजा साली क रिश्ते से थोड़ा हक़ तो मेरा भी बनता है पर पहले तो नाराज़ हैं जीजा तो मानना पड़ेगा.

मंजू : ध्यान रखना कहीं गुस्सा न दिला देना .

ऋतू सिंह : तू चिंता मत कर. मैं आज hi उससे मिलूंगी. ाचा रखती हूँ .



मंजू से बात करने क बाद ऋतू अपने ऑफिस वापिस चली गयी. और अमित का पता लगाने क लिए पुलिस वालों को भेज दिया एक खास हिदायत क साथ.
 
दोस्तों गुस्ताखी माफ़ करना. बात ये हुई क मेरा बहुत अज़ीज़ दोस्त अचानक से बीमार पद गया था तो उसके लिए भागदौड करनी पड़ी. कोरोना का खौफ था पर खुदा का करम है क कोरोना तो नहीं निकला पर खबीज़ को तब हो गयी है. अपनी hi चिड़िया गिरी में लपेटा गया . अब जो भी है , है तो अपना खासमखास. दुआ करो जल्दी फिट हो. मैं भी आज लिख रहा हूँ. पर टाइम उतना नहीं मिल पायेगा तो शायद आज न हो पाए पर कोशिश पूरी है. 50-50
 
अपडेट 189



‘ जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती , ऐसा भी कोई करता है भला? प्यार करने वाले तो एक पल भी दूर नहीं रह सकते और तुम बिना बताये गायब हो जाते हो. ‘

रीमा और मैं जब पार्क में मिले तो मुझ पर गुस्सा होने लगी.

अमित : बता कर तो गया था जान. और फिर तुम्हे कल मैंने बताया तो था

रीमा: पता है मुझे जो तुमने बताया था. और मैं ये भी जानती हूँ क वो सब सच नहीं था. और सच क्या है वो मैं तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहती हूँ.

रीमा की बात सुन कर मैं सोच में पद गया क अब मैं उसे क्या बताऊँ. वैसे तो मुझे पता था क रीमा मुझ पर पूरा विश्वास करती है पर फिर भी उसे बताने में मुझे संकोच हो रहा था.

रीमा : सोच क्या रहे हो ? क्या मुझ पर यकीन नहीं है तुम्हे ? पहले भी तो तुमने अपने बारे में बताया था न . क्या मैंने गुस्सा किया था? अगर तुम मुझे बताने में इतना सोच रहे तो इसका मतलब तुम्हे मुझ पर भरोसा नहीं .

अमित : नहीं वो बात नहीं है . मैं ये सोच रहा हूँ क तुम मेरे बारे में क्या सोचोगी सचाई जान कर . कहीं तुम मुझसे ......

रीमा : नफरत करुँगी ?? सोचना भी मत. मैं तुम्हे दिल से अपना सबकुछ मानती हूँ. और किसी भी कीमत तुम्हे गलत मन hi नहीं सकती. तुम मेरे लिए क्या हो ये शायद अभी तक तुमने जाना hi नहीं. अब क्या मुझे बताओगे क बात क्या है जो तुम ऐसे गायब थे और आज भी इसी लिए कॉलेज नहीं गए न क मोहित से मिलना नहीं चाहते ???

रीमा की बात पर मैंने हैरानी से उसे देखा क वो ये सब कैसे समझ गयी. पर अगले hi पल मुझे उस पर प्यार आ गया क वो कितना अचे से समझ जाती है मुझे.

अमित : ठीक कह रही हो तुम. मैं उसके सामने नहीं जाना चाहता था. असल में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है जिस वजह से मैं अब उसका सामना करना नहीं चाहता.

रीमा : हो भी हुआ है मुझे सब सच बताओ. मैं जानती हूँ बिना वजह क तुमने कुछ नहीं किया होगा.

रीमा ने प्यार से मेरा हाथ अपने दोनों हाथों में थम लिया. जैसे मुझे होंसला दे रही हो अपने दिल की बात कहने का.

अमित : तुम जानती हो न मैं करिश्मा दीदी क साथ गया था. पर क्यों गया था ये नहीं पता होगा और शायद मोहित भी ये नहीं जनता . असल में करिश्मा दीदी की सास और ननद उन्हें परेशां करती थी और इसी वजह से वो अपने ससुराल में सुखी नहीं थी. उनके पति भी अपनी माँ बहिन का hi साथ देते थे. मैं वहां गया था उनकी मदद करने और इसके लिए मैंने उनकी ननद और सास क साथ .....

रीमा : तो तुमने उन दोनों क साथ वो सब किया ??

अमित : हम्म पर दीदी को सब पता चल गया और वो मुझसे बहुत गुस्सा हैं. और जो कुछ उन्होंने मुझे कहा , सच कहूं तो मुझे खुद पर hi शर्मिंदगी हो रही थी इस लिए मैं बिना बताये ....

रीमा : एक बार मेरे पास तो आते , क्या मुझ पर भरोसा नहीं था ?? तुम अपने दिल में दर्द छुपाये अकेले दुखी होते रहे पर एक बार भी मुझे मौका नहीं दिया अपना दर्द काम करने का. क्या इस दिल पर मेरा कोई हक़ नहीं है ???

अमित : क्यों नहीं है ? तुम्हारा hi तो हक़ है.

रीमा : अगर मेरा हक़ समझते तो क्या मेरे पास नहीं आते ?

अमित : मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था रीमा . मुझे अपने आप से नफरत हो गयी थी. दीदी की एक एक बात मेरे कानो में गूँज रही थी. उन्होंने मुझ पर हाथ उठाया मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लगा पर जो कुछ उन्होंने कहा वो सब ..... मुझे फिर एहसास हुआ क मैं वाकई में कितना घटिया इंसान हूँ. जो किसी क साथ भी वो सब ....

रीमा : करिश्मा दीदी ने तुम्हे वो सब करते देखा होगा इसी लिए गलत समझा पर तुम्हे उन्हें सफाई तो देनी चाहिए थी न. मुझे नहीं लगता क तुमने उन्हें सच बताया होगा. पर जब उन्हें सच पता चलेगा तो वो ज़रूर तुमसे माफ़ी मांगेंगी देख लेना. और तुमने ऐसा कुछ भी गलत नहीं किया जिसके लिए तुम्हे शर्मिंदा होना चाहिए . मुझे तुम पर गर्व है क तुम दूसरों की ज़िन्दगी खुशहाल बनाने क लिए क्या कुछ नहीं कर रहे. अब वो सब भूल जाओ और मुझे नहीं लगता क मोहित को दीदी ने कुछ ऐसा बताया होगा. और हाँ मुझे न तुम ऐसे उदास बिलकुल भी अचे नहीं लगते चलो अब मुस्कुरा दो.

रीमा ने मेरा चेहरा अपने हाथों में थम कर प्यार से ये कहा तो उसकी आँखों में देखते हुए मेरे चेहरे पर अपने आप स्माइल आ गयी. मैंने रीमा को अपनी बाँहों में जकड लिया तो रीमा ने भी मेरे गले में बहन दाल ली.

रीमा : चाहे कुछ भी हो कैसे भी हालत हो तुम मुझसे दूर मत रहा करो. तुम नहीं जानते मेरे ऊपर क्या बीत रही थी.

अमित : अगली बार ऐसा नहीं होगा जान . बल्कि मैं अब ऐसे किसी चक्कर में पडूंगा hi नहीं. अब सिर्फ अपनों क साथ hi रहूँगा.

रीमा : हालत कब क्या करवा दें कोई नहीं जनता इस लिए ऐसा मत कहो. हाँ अगली बार अगर ऐसे उदास रहे और खुद को सजा दी तो मैं तुम्हे छोडूंगी नहीं देख लेना. वैसे एक बात तो बातो??

अमित : हम्म पूछो

रीमा : शरारत से देखते हुए ) दीदी की ननद कैसी थी ?

अमित : तुम .... अभी बताता हूँ .

इतना कह कर मैंने रीमा क होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे किश करने लगा. रीमा ने भी मेरा साथ दिया पर जल्द hi उसने किश ख़तम कर दी.

रीमा : देख तो लिया करो हम पार्क में हैं. कोई देख लेता तो.

अमित : तो देख लेता , मैं तो अपनी जान को hi प्यार कर रहा हूँ.

रीमा : हटो बड़े आये जान कहने वाले. थान तो बड़ा प्यार झाड़ रहे हो और जब मैं कहती हूँ क मुझे वो वाला प्यार करो तो करते नहीं और अनजान लोगों को पार्षद बाँट ते फिर रहे हो.

रीमा मेरे पेट पर कोहनी मार कर मेरी तरफ पीठ कर क कड़ी हो गयी. मैंने आगे बाद कर उसे पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया .

अमित : तुम्हे तो जी भर क प्यार करूँगा पर मैं चाहता हूँ क हमारा मिलान सुहाग की सेज पर हो.

रीमा : तुमने वडा किया था न तुम मेरे साथ वो सब करोगे . फिर अब ये सुहागरात का बहाना क्यों बना रहे हो?

अमित : अरे तुम भी अजीब हो. लड़कियां वो सब करने से मन करती हैं और तुम हो क उसी ृत्त लगाए बैठी हो.

रीमा : मुझे कुछ नहीं पता . तुम्हे मेरी विश पूरी करनी है बस . उसके बाद मैं खुद hi तुम्हे शादी तक हाथ नहीं लगाने दूँगी . बोलो अब कब मेरी विश पूरी करोगे ? तुमने गाओं आने क बाद का कहा था और अब तो कितने दिन हो गए .

अमित : जल्दी hi करूँगा .

रीमा : जल्दी नहीं इस बार गाओं से आकर मेरी विश पूरी न की न तो . देख लेना .

अमित : वो तो मैं देख hi रहा हूँ अपनी प्यारी प्यारी जान को .

रीमा : हटो ड्रामेबाज. ाचा सुनो वो न माँ तुम्हे यद् कर रही थी. तुम उन्हें एक बार भी मिलने नहीं गए. दीदी भी तुमसे नाराज़ हैं

अमित : ओह्ह्ह ,, हाँ यार टाइम hi नहीं मिला. तुम्हारी दीदी तो बहुत नाराज़ होंगी.

रीमा : होंगी क्या ,, हैं और शीना दीदी भी . अब उनसे कब मिलोगे?

अमित : अब तो गाओं से आ कर hi मिलूंगा. अब तो मैंने गाओं जाना है .

रीमा : अपना ध्यान रखना और कोई बात दिल पे मत रखना. तुमने कुछ भी गलत नहीं किया . ी होप क दीदी ज़रूर समझेंगी इस बटवको वक़्त क साथ.

उसके बाद मैं रीमा क साथ कुछ देर और प्यार भरी बाएं करता रहा फिर रीमा मुझसे विधा लेकर अपनी कार में वापिस चली गयी . इस दौरान मुझे कई बार ऋतू सिंह की कॉल आयी पर मैंने अटेंड नहीं की. उसके बाद मैं भी अपनी बाइक पर निकला था क मेरे आगे पुलिस की जीप आकर कड़ी हो गयी. मुझे भी अपनी बाइक रोकनी पड़ी. तभी जीप से पुलिस वाले बहार निकले और मेरी बाइक से के निकल ली.

पोलिसवाले : क्यों बे हीरो किधर जा रहा था? चल गाडी में बैठ.

अमित : मैं क्यों आपकी गाडी में बैठूं ? मैंने क्या किया है ? और ये आपने चाबी क्यों निकली है?

पोलिसवाले: सब पता चल जायेगा चल बैठ गाडी में .

अमित : देखिये आप ऐसा नहीं कर सकते , मैंने किया क्या है ? किस लिए आप मुझे अपने साथ ले जाना चाहते हैं और कहाँ ?

पोलिसवाले: सब पता चल जायेगा अभी चुपचाप गाडी में बैठ वर्ण मुझे दूसरा तरीका इस्तेमाल करना पड़ेगा .

अमित : देखिये आप ये गलत कर रहे हैं. ये आपको बहुत भरी पड़ेगा.

पोलिसवाले: मेरा कलर पकड़ते हुए ) साला हीरोगिरी दिखता है . चल बैठ गाडी में . हवलदार इसकी बाइक को तुम लेकर आओ.

3-4 पुलिस वालों ने मुझे ज़बरदस्ती गाडी में बिठाया. मैं चाहता तो उनका विरोध कर सकता था पर वो यूनिफार्म में थे और उनपर हाथ उठा कर मैं मुजरिम नहीं बनना चाहता था. मैंने ज्यादा विरोध नहीं किया और उनके साथ गाडी में बैठ गया. मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकल कर कल्पना को फ़ोन करने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा फ़ोन मुझसे छीन लिया .

अमित : देखिये मुझे फ़ोन करने दीजिये .

पोलिसवाले: उसका भी मौका मिलेगा पर जब तक हम नहीं कहते तब तक नहीं. ( अकड़ दिखते हुए ) बात तो ऐसे कर रहा है जैसे किसी मिनिस्टर का लौंडा है. कर लेना आपने बाप को फ़ोन पहले ससुराल तो देखले.

अमित : गुस्से में ) मुझे फ़ोन करने दीजिये पता चल जायेगा मैं किसके बाप को फ़ोन कर रहा हूँ.

पोलिसवाले: चुपचाप बैठ नहीं तो यहीं से खातिर करता ले जाऊंगा समझा.

मुझे उस पुलिस वाले पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर मैं अपना गुस्सा दबाते चुप हो गया. इतना तो मैं समझ गया था क ये ज़रूर सप ऋतू सिंह hi करवा रही है. मैंने उसका फ़ोन नहीं उठाया तो अपनी औकात पर आ गयी. खैर मैंने भी सोच लिया क अब उसको मज़ा चखा क रहूँगा. कल्पना क पापा से शिकायत करूँगा और मंजू म को तो उसकी असलियत बता क hi रहूँगा. पुलिस मुझे मुजरिम की तरह बिठा कर अपने साथ ले जा रही थी और एक पुलिस वाला मेरी बाइक लिए पीछे पीछे आ रहा था.

‘ बुआ आज आप कॉलेज क्यों नहीं आयी ? आपकी तबियत तो ठीक है न ? ‘

शीना कॉलेज से सीधा अपनी बुआ मंजू क घर पहुँच गयी थी. उसे फ़िक्र हो रही थी अपनी बुआ की .

मंजू : हाँ मैं बिलकुल ठीक हूँ. आज मेरा आराम करने का मन था तो छुट्टी ले ली .

शीना : मैं तो घबरा hi गयी थी क कहीं आप ... चलो ये भी ाचा है . वैसे आज आप काफी फ्रेश दिख रही हैं.

शीना की बात सुन कर मंजू क चेहरे पर ऐसे शर्मीली मुस्कान आ गयी जैसे किसी दुल्हन के चेहरे पर आती है जब उसकी सहेलियां सुहाग रत क बारे में पूछें

शीना : बुआ क्या अमित यहाँ आया था ??

ये सवाल सुनते hi मंजू क चेहरे से साडी मुस्कान गायब हो गयी और वो एक डैम से घबरा गयी जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.

मंजू : नं नहीं नहीं , नहीं तो वो यहाँ क्यों आएगा वो तो ......

शीना : मोहित से मुझे आज hi पता चला क वो कल का आ चूका है . पर देखो अभी तक न किसी से मिला है न मेरा फ़ोन उठा रहा है. पर बुआ मोहित तो कह रहा था क वो आपके पास ...

मंजू : हड़बड़ा कर ) हाँ वो मैं वही तो बता रही थी क वो आज नहीं वो कल आया था पर फिर चला गया . तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए कॉफ़ी बनती हूँ

मंजू शीना क सवालों से बचने क लिए किचन में जाने लगी तो शीना उसके पीछे पीछे hi किचन में आ गयी

शीना : आप रहने दो बुआ मैं बनती हूँ न. आप बस देखिये.

मंजू : अरे गुड़िया मैं बना लुंगी न

शीना : बनाने दीजिये न बुआ , पता है मुझे कितना बुरा लगा था उस दिन. अमित कहता है क लड़कियों को घर का काम भी आना चाहिए और मैं हूँ क मुझे कुछ अत hi नहीं.

मंजू : पर तुझे क्या ज़रूरत है ? घर में इतने सरे नौकर हैं न? और फिर किसी बड़े घर में hi तो जाएगी न मेरी राजकुमारी

शीना : नहीं बुआ मुझे बड़ा घर वाला नहीं बड़े दिल वाला , प्यार करने वाला साथी चाहिए.

मंजू : तो मेरी गुड़िया बड़ी हो गयी है हाँ ? कोई लड़का पसंद तो नहीं आ गया तुझे ?

शीना ( शरमाते हुए ) क्या बुआ आप भी .

मंजू : बता न कोई पसंद है क्या तुझे ?

शीना : आपको hi बताउंगी पहले , बुआ आप भी तो मेरी तरह इसी घर की बेटी हो न तो आपको कैसे सब कुछ अत है ?

मंजू ( ख़ामोशी से कुछ देर सोचते हुए ) भाभी ने , वो मुझे सब सिखाती थी . बहुत प्यार करती थी मुझे सहेली की तरह

शीना : आप किसकी बात कर रही हैं ?

मंजू : नाम आँखों से ) दामिनी भाभी की

कुछ hi देर में जीप एक सरकारी आवास पर पहुंची . बहार गेट पर hi पुलिस वाले खड़े थे. अँधेरा हो रहा था जिस वजह से मैं देख नहीं पाया क बहार क्या लिखा है. गेट क अंदर थोड़ी दूर जा कर कड़ी रुकी तो पुलिस वाले नीचे ुरते और मुझे भी उतरा. एक बहुत बड़े लॉन क बाद ये एक पुराणी पर बड़ी हवेली जैसी ईमारत थी. थान भी दरवाज़े पर पुलिस वाले खड़े थे और अंदर एक तरफ सरकारी गाड़ियां कड़ी थी.

अमित : ये आप मुझे कहाँ ले आये हैं? ये तो पुलिस स्टेशन नहीं है.

पुलिस वाला : अभी पता चल जायेगा. तुझे डायरेक्ट हेडक्वार्टर hi ले आये हैं. ज़रूर कोई बड़ा पन्गा किया है तूने पहलवान इसी लिए तुझे यहाँ क्या गया है. अब यहाँ पर तो तुझे कोई नहीं बचा सकता क्यूंकि हमारी सप साहिबा किसी की नहीं सुनती चल अंदर .

मैं समझ गया क ज़रूर ये सप का घर है. पुलिस वाला मुझे बाजु से पकड़ कर अंदर की तरफ धकेलता हुआ ले गया. अंदर का नज़ारा तो ऐसा था जैसे राजाओं का महल हो. पुराने ज़माने की कारीगरी और वैसा hi फर्नीचर ज़मीन पर कालीन बिछा हुआ. हॉल में एक टेबल क साथ सोफे चेयर्स लगी हुई थी. पुलिस वाला मुझे साथ लिए वहीँ खड़ा हो गया और एक नौकर जल्दी से अंदर गया बताने क लिए. कुछ hi पलों में अंदर से ऋतू सिंह निकली जिसे देख कर मुझे गुस्सा आने लगा. ऋतू सिंह ट्रैक सूट पहने बड़े आराम से चलती हुई आयी और एक नज़र मुझे देख कर सामने चेयर पर बैठ गयी . पोलिसवाले ने उसे सलूट किया.

पुलिस वाला : जय हिन्द मैडम , ले आये हैं हम इसे . बड़ा अकड़ रहा था मैडम. कह रहा था क मुझे फ़ोन करना है हमने फ़ोन ले लिया इससे.

सप ऋतू सिंह : हम्म्म , कहाँ था ये?

पुलिस वाला : पार्क में किसी लड़की क साथ था उसके जाने क बाद hi हमने उठाया है इसे. बड़ा अकड़ रहा था मैडम अगर आप ने मन न किया होता तो इसे बताता क पुलिस वालों से बात कैसे करते हैं.

ऋतू सिंह : ठीक है इंस्पेक्टर अब तुम जा सकते हो. बाकि मैं देख लूंगी.

पुलिस वाला : hi मैडम , गुड नाईट मैडम .

ऋतू सिंह : इसका मोबाइल मुझे देते जाओ.

पोलिसवाले ने मेरा मोबाइल ऋतू सिंह को दिया और सलूट कर क बहार निकल गया.

ऋतू सिंह : तो तुम लड़कियों क साथ मज़े कर रहे थे. वैसे कौन थी वो ??

अमित : आपसे मतलब ?? आप बताओ मुझे इस तरह से यहाँ क्यों बुलाया है?

ऋतू सिंह : शह्ह्ह्ह .... यहाँ सवाल मैं करुँगी तुम नहीं . आयी बात समझ में ? वर्ण मैं क्या कर सकती हूँ वो तो तुम जानते hi हो .

अमित : क्या कर लेंगी आप ? फिर से जेल में दाल देंगी या टार्चर कर लेंगी . इससे ज्यादा और क्या कर लेंगी आप ?

ऋतू सिंह : ाचा है तुम्हे इतना तो यद् hi है. अब मेरे सवाल का जवाब दो . कौन थी वो लड़की ?

अमित : मैं नहीं बताने वाला . कोई भी हो आपसे मतलब. मैं कोई नाम नहीं बतानेवाला . आप भी एक औरत हो काम से काम किसी की लड़की की इज़्ज़त की क्या कीमत है इतना तो आप जानती hi होगी ?

ऋतू सिंह : हम्म्म , अछि तरह जानती हूँ. इसी लिए तुम सही सलामत खड़े हो वर्ण जितनी अकड़ तुम दिखा रहे हो अब तक साडी निकल देती मैं. इज़्ज़त से बुलाया था तुम्हे पर लगता है तुम्हे पुलिसवालों की इज़्ज़त पसंद नहीं.

अमित : मुझे यहाँ क्यों बुलाया है साफ़ साफ़ बताओ . मुझे घर भी जाना है.

ऋतू सिंह : घर ?? यहाँ न तुम अपनी मर्ज़ी से आये हो और न अपनी मर्ज़ी से जा सकते हो . आयी बात समझ में? मैंने तो कोशिश की थी क तुम्हारे साथ अचे से पेश आऊं पर तुमने hi मजबूर किया है मुझे तो अब भुगतो .

अमित : देखिये , आप एक औरत हैं इस लिए इज़्ज़त से पेश आ रहा हूँ वर्ण .....

ऋतू सिंह : खड़े होते हुए ) वर्ण क्या ? क्या कर लेते तुम हाँ ?? अभी तक अकड़ कम नहीं हुई तुम्हारी ? खुद को समझते क्या हो ?? मैं चहुँ तो अभी क अभी तुम्हारा वो हश्र करवा दूँ क पाऊँ पर खड़े होने क लायक नहीं रहोगे .

अमित : जो चाहो करलो मुझे परवाह नहीं. ज्यादा से ज्यादा क्या कर लोगी ?? मरवा डौगी मुझे ?? जाओ वो भी कर लो पर मैं डरने वाला नहीं . आयी बात समझ में. अपनी ताकत की धौंस किसी और को दिखाना .

ऋतू सिंह गुस्से से तिलमिला उठी और गुस्से से चल कर मेरे पास आयी और मेरा कलर पकड़ लिया .

ऋतू सिंह : बड़ी अकड़ है न तुम में ?? आज तेरी साडी अकड़ निकल दूंगी .. चल ,,,, दिखा तेरी औकात .

ऋतू सिंह ने मेरा कलर पकड़ क मुझे खींचा और अंदर की तरफ ले जाने लगी. ऋतू सिंह जब मेरे इतने करीब आयी तो मुझे उसके मुँह से स्मेल आ रही थी मैं समझ गया क उसके ड्रिंक की हुई है और उसकी आँखें भी कुछ लाल थी . ऋतू सिंह मुझे खींचती हुई कमरे में ले गयी और अंदर धकेलते हुए अंदर से दरवाज़ा लॉक कर दिया .

ऋतू सिंह : खुद को बड़ा मर्द समझता है न तू . चल दिखा तेरी मर्दानगी , मैं भी तो देखूं क्या चीज़ है तू जो इतनी अकड़ है तुझ में .

अमित : देखिये आप ये ठीक नहीं कर रही . जाने दीजिये मुझे.

ऋतू सिंह : क्यों अब क्या हुआ ? निकल गयी साडी हवा? अभी तो बड़ा मर्द बन रहा था. दिखा न अब , है क्या तू? मर्द है भी या नहीं .

ऋतू सिंह ने मुझे धक्का दिया तो मैं पीछे को हुआ मेरी टंगे किसी चीज़ से अटक गयी और मैं पीछे पड़े सोफे पर गिर गया. तब मेरी नज़र टेबल पर पड़ी बोतल पर पड़ी जो किसी तरह की शराब थी और साथ hi आधा भरा कांच का गिलास पड़ा था. ऋतू सिंह पास आयी और उसने वो गिलास उठा कर एक hi घूँट में खली कर क वापिस रख दिया. मैं उसे hi देख रहा था.

ऋतू सिंह : ऐसे क्या देख रहा है ? तू क्या सोचता है हर चीज़ सिर्फ मर्दों क लिए hi है हाँ ? तुम सब मर्द जाट साले हमेशा खुद को औरत से ऊपर hi समझते हो है न ?? तू भी साला वैसा hi है. खुद को पता नहीं क्या समझता है . आज तुझे तेरी औकात बताती हूँ. कहाँ छुआ था तूने मुझे पहली बार ?? यहाँ न ?? ले लगा हाथ .

ऋतू सिंह ने अपनी गांड पर हाथ रखते हुए मुझे दिखाया और मेरे पास आ कर मुझे हाथ लगाने को कहने लगी. मैं इसे हैरानी से देख रहा था तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर खुद hi अपनी गार्डन पर रख दिया . पर मैंने अपना हाथ खिंच लिया .

अमित : देखो आप होश में नहीं हो . जाने दो मुझे .

ऋतू सिंह : क्या कहा साले ?? मैं होश में नहीं हूँ ? तुझे क्या लगता है आधी बोतल से मैं तकली हो गयी हूँ हाँ ?? अछि तरह जानती हूँ तुझे और तुझ जैसे मर्दों को . सब साले हवस क भूखे भेड़िये हैं. औरत का जिस्म मिलाना चाहिए बस रगड़ने को. प्यार की बातें कर क बस अपनी हवस hi मिटानी होती है. दिखा साला कितना बड़ा मरद है तू चल दिखा न अब .

बात करते करते ऋतू सिंह ने अपनी टीशर्ट एक मिनट में खोल कर उतर दी. अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और लोअर पहने कड़ी थी. ऋतू सिंह का रंग वैसे तो गोरा था पर चेहरे क मुकाबले उसकी बॉडी कुछ ज्यादा hi सफ़ेद थी और ब्रा में स्तन भी कैसे हुए लग रहे थे. हालाँकि वो ज्यादा बड़े नहीं थे पर थे कमल क . एक बार मेरी नज़र उसके स्तनों पर गयी पर फिर मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा. मैं उसकी इस हरकत पर हैरान हो रहा था. पुलिस की इतनी बड़ी अफसर जिससे लोग इतना खौफ कहते थे वो मेरे सामने ऐसे कड़ी थी. मैं हैरान था पर साथ में मेरे दिमाग में ये बात भी थी कहीं ये मुझे किसी केस में फसा न दे.

अमित : देखिये आप ये ठीक नहीं कर रही , मैं जनता हूँ आप मुझे किसी न किसी केस में फ़साना चाहती हैं . अगर अपना ऐसा कुछ किया तो फिर मैं भूल जाऊंगा क आप एक औरत हैं .

ऋतू सिंह : धमकी क्या देता है , मर्द है तो कर क दिखा न. मैं भी तो देखूं तेरी मर्दानगी . अगर कुछ न कर पाया तो तेरी साडी मर्दानगी तेरे पीछे घुसेड़ दूंगी.

इतना कहते हुए ऋतू सिंह ने अपना नंगा पाऊँ मेरे लैंड पर रखा और मेरे ऊपर झुकते हुए बिलकुल मेरे करीब हो गयी. उसने फिर से मेरा कलर पकड़ लिया था.

अमित: मैं फिर कह रहा हूँ मुझे जाने दो वर्ण ाचा नहीं होगा.

ऋतू सिंह : बातें hi छोड़ता रहेगा साले या कुछ करेगा भी ?? मर्द की औलाद है तो दिखा वर्ण मैं तुझे दिखाऊं तेरी औकात.

ऋतू सिंह की इस बात पर मुझे एक डैम से गुस्सा आ गया और मैंने ऋतू सिंह का गाला पकड़ा लिया .

अमित : मर्दानगी देखनी है न तुझे ? मर्दानगी देखेगी तू मेरी . चल आज तुझे बताता हूँ मैं कितना मरद हूँ .

मैंने ऋतू सिंह को वहीँ सोफे पर पलट दिया और खुद खड़ा हो गया. मैंने एक झटके में उसका लोअर पकड़ कर खींच दिया . लोअर क साथ hi उसकी पेंटी भी उतर गयी जिसे मैंने उसके पाऊँ से निकल दिया.

ऋतू सिंह : दिखा साले तू मर्द है भी या हिजड़ा है . दिखा तेरी मरदानगी

अमित : दिखता हूँ तुझे असली मर्द किसे कहते हैं . बड़ा शोक है न तुझे मर्दों पर हुकम चलने का अब देख .

मैंने एक झटके में अपनी पेण्ट अंडरवियर क साथ नीचे की और उसकी टांगों क बीच आ कर उसके दूध दोनों हाथों में पकड़ कर ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए.

ऋतू सिंह : आअह्ह्ह्ह साले जानवर आआह्ह दिखा तेरी मर्दानगी

मैं गुस्से में आ चूका था और ज़ोर ज़ोर से उसके स्तन मसलते हुए अपना लैंड उसकी छूट पर रगड़ रहा था. जैसे hi लैंड पूरी औकात में आया मैंने छूट पर लैंड सेट कर क दोनों स्तनों को ज़ोर से पकड़ कर करारा धक्का पेल दिया. मेरा लैंड ऋतू सिंह की छूट को दासता हुआ आधा घुस गया. ऋतू सिंह की छूट कुंवारी लड़कियों की तरह पूरी कासी हुई थी या फिर उसने कभी इतना मोटा लैंड नहीं लिया था. मेरा मोटा लैंड उसकी छूट को फायदा हुआ आधा अंदर घुस गया. इसके साथ hi एक ज़ोरदार चीक ऋतू सिंह क मुँह से निकल गयी.

ऋतू सिंह : आआआईईईई maaaaaaaaaaa मर्डर गयीईइ आआआह्ह्ह्ह

मैंने बिना तरस खाये एक और धक्का पेल दिया और पूरा लैंड जड़ तक छूट में घुस गया. ऋतू सिंह फिर से ज़ोर से चीखी

ऋतू सिंह : आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआआ मर्डरर गईइइइइइ छोड़ दो आआअह्ह्ह्हह निकालो आआआह्ह्ह्ह माआआ छोड़ दो

अमित : अब क्या हुआ ?? तुझे मेरी मरदानगी देखनी थी न . अब देख ये ले येह ये ले

मैंने ऋतू सिंह की कोई परवाह न करते हुए उसके स्तन ज़ोर से मसलते हुए धक्के मरने शुरू कर दिए . लैंड छूट में पूरा फास फास कर जा रह था पर मैंने कोई दया न दिखाई और ज़ोर दर धक्के मरने लगा. ऋतू सिंह लगातार चीख रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे और वो मुझे छोड़ने को कह रही थी. पर मैंने कोई रेहम न दिखे. मैं उसकी बातों और पुलिस वालों की वजह से बहुत गुस्से में था और अब सारा गुस्सा उस पर निकलने लगा. मुझे ये भी होश न थी की मैं ऋतू को उसी क घर में छोड़ रहा हूँ और उसकी चीखें सुन कर कोई पोलिसवाले यहाँ आ गया तो मेरा क्या होगा. मैं तो बस इस वक़्त अपना गुस्सा निकल रहा था. कुछ देर ऋतू सिंह दर्द से बिलखती रही और मुझे छोड़ने को कह रही थी पर फिर कुछ देर में hi वो शांत हो गयी और मेरी गर्दन पकड़ कर मुझे अपने ऊपर झुका लिया.

ऋतू सिंह : आह्हः आअह्ह्ह आह्हः उफ्फ्फ्फ़ कक्कक्स आअह्ह्ह्ह साले जानवर कहीं क आअह्ह्ह कक्कक्स मुझे मर्दानगी दिखता है कक्कक्स आअह्ह्ह दिखा और दिखा ,, दिखा तेरा डैम उम्मम्मम

ऋतू सिंह ने खुद hi मेरे होंठ अपने होंठो में जकड लिए और किश करने लगी. मैं भी उसके होंठ चूसने लगा और उसके कन्धों को पकड़ कर ज़ोर से अपनी कमर चलने लगा. ऋतू सिंह ने मेरी कमर अपनी टाँगें लपेट ली और मेरे गले में बहन डाली अब खुद hi अपनी कमर हिलने लगी. ऋतू सिंह मज़े में अब कमर हिला रही थी पर मुझे ये ाचा नहीं लगा . मैंने किश तोड़ी और उसके ऊपर से उठ गया. लैंड को बहार निकल कर मैंने ऋतू सिंह को बालों से पकड़ कर उठाया और वहीँ सोफे की बच से लगा कर घुटनों पर झुका लिया. मैंने पीछे से छूट पर लैंड सेट किया और एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया .

ऋतू सिंह : आआअह्हह्ह्ह्ह मायआ एआईई

अमित : चीख और चीख बुला अपने पुलिस वालों को . उन्हें भी देखने दे मुझमे कितन डैम है . ये ले ये ले

मैंने ऋतू सिंह क बाल पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए. मेरी जांघें ऋतू सिंह क गोल मुलायम चूतड़ों से टकरा रही थी जिससे उसके चूतड़ थिरक रहे थे और साथ hi कमरे में थप थप थप थप की आवाज़ें आ रही थी.

ऋतू सिंह : आह्हः आह्हः आह्हः फ़क फ़क दिख कितना मरद है तू आआह्ह्ह आअह्ह्ह सीसीसी फुककक फुककक

अमित : आअज क बाद सपनो में भी तुझे ये मरद hi नज़र आएगा . ये ले ईएह

मैं एक हाथ से ऋतू सिंह क चूतड़ों पर थप्पड़ मर रहा था और उसके गोर चूतड़ लाल हो रहे थे. साथ hi उसके बाल खिंच कर मैं उसे पूरा जोश में कुटिया बना कर छोड़ रहा था. लगभग 10 मिनट्स में hi ऋतू सिंह की छूट गीली हो कर संकुचित होने लगी तो मैं समझ गया क उसका काम होने वाला है. मैंने हाथ नीचे ले जाकर उसकी छूट को मसलने लगा. ऋतू सिंह की सिसकारियां और भी तेज़ हो गयी और वो खुद hi कमर पीछे को धकेलने लगी.

ऋतू सिंह : आठ ाःह आह्हः फुककक फुककक और ज़ोर से करो फुककक एआईईईई. ी ऍम क्युम्मिंग ी ऍम क्युम्मिंग आआअह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्ह्ह

ऋतू सिंह की पूरी बॉडी झटके कहानी लगी और उसकी छूट से इतना पानी निकला मनो किसी ने जग पानी का उड़ेल दिया हो. कुछ देर तक वो झटके कहती रही और पानी बाहरी रही. मैं रुक कर उसकी हालत देख रहा था. उसकी छूट से निकले पानी ने उसकी जांघों क साथ मेरी जांघें भी भिगो दी थी और सोफे पर बड़ा घेरा बन गया था पानी से. ऐसा लग रहा था जैसे वो सैलून बाद झड़ी हो . कुछ देर तक वो ज़ोर ज़ोर से सांसे लेती रही और एक डैम बेसुध सी हो गयी. मैं उसकी हालत देख रहा था. फिर मैंने उसे गॉड में उठाया और बीएड पर दाल दिया. फिर से मैं उसकी टांगों क बीच आया और एक बार फिर से मेरा लैंड उसकी छूट में था.

ऋतू सिंह : आअह्ह्ह

इस बार ऋतू सिंह न चीखी न चिल्लाई और न कुछ बोली बस आँखों को बंद किये पड़ी रही . मैंने उसकी टाँगें अपने कन्धों पर चढ़ाई और धक्के पेलने लगा. मैं अपना काम पूरी रफ़्तार से कर रहा था और थोड़ी देर में hi ऋतू सिंह की छूट फिर से गरम होने लगी और वो अपनी कमर उठान लगी. ऋतू सिंह फिर से सिसकारियां लेती हुई अपनी कमर उछलने लगी अति मैं भी ज़ोर से धक्के मरता रहा . ऋतू सिंह को मज़े लेते देख मुझे फिर गुस्सा आ गया . मैंने उसके पाऊँ उसके सर क ऊपर को पूरे फोल्ड करते हुए बीएड से लगा दिए और उसे दबाये हुआ उसकी छूट पर बैठ कर ज़ोरदार धक्के मरने लगा. ऋतू सिंह को कमर मेरे धक्कों और मेरे वजन से पूरी तरह हिल रही थी. उसे दर्द हो रहा था पर मैं नहीं रुका

ऋतू सिंह : आअह्ह्ह आअह्ह्ह छोडो आअह्ह्ह दर्द हो रहा है एआइइइइ ककक आआह्ह्ह

अमित : मर्दानगी देखनी थी न तुझे अब अछि तरह देखले और फिर कभी किसी मर्द को बेइज़्ज़त न करना. आज तेरी साडी गरमी निकल कर hi डैम लूँगा.

ऋतू सिंह की छूट कुछ hi देर में फिर से हार मान गयी और एक बार फिर से वो पानी बहाने लगी. मुझे अपने लैंड पर गरम पानी का शावर फिर से महसूस हुआ तो मैं भी अपना पानी निकलने क लिए आखरी धक्के ज़ोर से मरने लगा. जब मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने लैंड बहार निकल कर उसके पेट क ऊपर hi अपना पानी निकल दिया. पानी निकलते hi मुझे शांति मिली और मैं ऋतू सिंह की बगल में hi लेट कर सांसे दुरुस्त करने लगा .

कुछ देर तक हम दोनों की hi साँसों का शोर कमरे में गूंजता रहा . जब मेरी साँसे संभाला तो मैं बीएड से उठा. मैंने अपने कपडे सेट किये और एक नज़र ऋतू सिंह को देखा हो आँखें बंद किये नंगी hi पड़ी थी. उसकी खुली टांगों क बीच जब मेरी नज़र पड़ी तो मैं शॉकेड हो गया. छूट क आसपास खून लगा हुआ था. छूट क किनारे चीरे हुए लग रहे थे. छूट की हालत देख कर लग रहा था जैसे आज hi इसकी सील टूटी हो. मुझे अब एहसास हो रहा था क मैंने कितना बुरा कर दिया था उसके साथ. गुस्से में मैं पूरा जानवर बन गया था. मैंने एक नज़र सोफे पर डाली तो वहां भी खून क निशान थे. मुझे समझ नहीं आ रही थी क आखिर इतनी बड़ी अफसर होकर और इतनी उम्र होने पर भी उसकी छूट ऐसी कैसी हो सकती है. मैं अभी ये सब सोच hi रहा था क मेरे कानो में ऋतू सिंह की आवाज़ सुनाई दी और मैं उसकी बात सुन कर शॉकेड हो गया



ऋतू सिंह : अब तो मैं अपनी बहिन क घर आ सकती हूँ न जीजा जी ?
 
अपडेट 190



ऋतू सिंह : अब तो मैं अपनी बहिन क घर आ सकती हूँ न जीजा जी ?

ऋतू सिंह की ये बात सुन कर मैं हैरानी से उसकी तरफ देखने लगा. मुझे उसकी बात बिलकुल भी समझ नहीं आयी थी क वो क्या कह रही है. पर इस वक़्त कमरे में हूँ दोनों क इलावा और तो कोई था नहीं तो ज़ाहिर था मुझे hi ये सब कह रही थी.

अमित : ये ... ये सब क्या है ??

ऋतू सिंह : मुझे तुम्हारे और मंजू क बारे में सब पता है. मंजू मेरी दोस्त नहीं मेरी बहिन मेरी फॅमिली सब कुछ है. और उसके लिए भी मैं कुछ ऐसी hi हूँ. उसने खुद मुझे बताया था तुम दोनों क बारे में. मेरी वजह से तुम उससे नाराज़ हो गए थे तो मुझे बहुत बुरा लगा था. जानते हो जब उस दिन तुम मुझे देख कर घर से चले गए थे और फिर कई बार तुमने ऐसा hi किया. तब मेरी वो सबसे प्यारी दोस्त कितना दुखी हुई थी जिसकी वजह कहीं न कहीं मैं थी. उस दिन क बाद मैंने फैसला कर लिया था क मैं उसके घर नहीं जाउंगी जब तक की मैं तुम्हे मन नहीं लेती. और अब तक नहीं गयी. अगर तुम अब मुझसे नाराज़ नहीं हो तो क्या मैं जा सकती हूँ वहां ?

मुझे ऋतू सिंह क मुँह से ये सब सुन कर हैरानी हो रही थी . अभी भी मुझे समझ नहीं आ रहा था क कुछ देर पहले वो कुछ और बानी हुई थी और अब कुछ और.

अमित : तुम तो अभी कुछ देर पहले मुझे गलियां दे रही थी मुझे सजा दिलाने की बात कर रही थी तो अब ये सब ???

ऋतू सिंह : वो सब नाटक था .

अमित : नाटक ??? मगर क्यों ??

ऋतू सिंह : तो क्या करती ?? मैंने कितनी बार तुमसे बात करने की कोशिश की मगर तुम तो मेरी बात सुनने को hi तैयार नहीं थे. मैंने कितना तरय किया क तुमसे माफ़ी मांगूं जो कुछ हुआ उसके बारे में मैं खुद से hi शर्मिंदा थी. सच कहूं तो पहली बार ज़िन्दगी में मुझे अपने आप से इतनी नफरत होने लगी थी. तुम नहीं जानते मेरे बारे में इस लिए तुम समझोगे नहीं पर मंजू जानती है. मंजू और तुम्हारे बारे में जानने से पहले hi मैं तुमसे माफ़ी मांगने की कोशिश कर रही थी और जब मंजू और तुम्हारे बारे में पता चला तो मैंने और भी ज्यादा कोशिश की पर तुम तो मुझे देखना भी पसंद नहीं कर रहे थे. मंजू तुम्हे कितना चाहती है ये तो मुझे पहली hi मुलाकात में पता चल गया था ऐसे में अगर उसे पता चलता क मैंने अनजाने में hi सही पर तुम्हारे साथ जो किया है उसकी वजह से वो मुझसे नाराज़ हो जाती. और मैं उसे नाराज़ नहीं करना चाहती थी. मेरी ज़िन्दगी में और है hi कौन उसके सिवा. उसे तुम मिले तुम्हारा प्यार मिला मैं इसके लिए खुश हूँ पर हर कोई तो इतना लकी नै होता न.

इतना कह कर ऋतू सिंह चुप हो गयी और नज़रें झुका की. उसकी आँखों में मुझे नमी नज़र आयी. मुझे अब अपने आप पर hi गुस्सा आने लगा. ऋतू की ब्रेन सुनने क बाद मुझे एहसास हो रहा था क मैं hi गलत था. उसने तो कई बार मुझसे बात करने की कोशिश की थी जबकि मैं hi उससे दूर भागता था. पर मैंने कभी इस बात को इतना सीरियस नहीं लिया था वैसे भी वो एक बड़ी अफसर थी तो उसका ऐसे सोचना भी मुझे अजीब लग रहा था पर जैसा की उसने बताया क मंजू म क साथ उसका कैसा रिश्ता है तो ये हो भी सकता है. ऋतू सिंह नज़रें झुकाये खामोश हो गयी थी पर मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या बात करूँ. मैं खुद को मुजरिम महसूस कर रहा था .

अमित : ये सब आपने क्यों किया ? इसकी क्या ज़रूरत थी?

ऋतू सिंह : मुझे और कुछ समझ में नहीं आया. मैंने इतनी कोशिश की क तुम मन जाओ पर तुमने मेरी बात तक नहीं सुनी. और फिर इसकी एक और वजह भी थी .

अमित : और क्या वजह थी ?

ऋतू सिंह : वो मैं .. वो सच कहूं तो पहली बार ज़िन्दगी में कोई ऐसा मिला है जिसने मुझे गलत साबित किया है. मैंने पहली मुलाकात में hi तुम्हे गलत समझा और तुम पर हाथ उठा दिया और फिर उसके बाद भी तुम्हारे खिलाफ कुछ बातें सुनी तो तुम्हे गलत hi समझा और उसी का गुस्सा मैंने उस दिन निकला था पर मैं गलत थी. जब तुम्हारी सचाई सामने आयी तो मुझे खुद पर hi गुस्सा आने लगा. तुम्हारे दोस्तों से जो तुम्हारे बारे में सुना उसके बाद तो मेरी नज़रों में तुम्हारी क्या जगह बन गयी मैं बता भी नहीं सकती. स्पेशलय शालू जैसी मजबूर लड़की को जैसे तुमने बचाया . उस दिन मुझे अपने आप पर इतना गुस्सा आया था क दिल किया तुम्हारे कदमो में गिर कर माफ़ी मांगूं. तुम नहीं जानते पर मंजू सब जानती है क मैं कैसी लड़की थी. शुरू से hi आज़ाद ख्याल और खुद क बलबूते ज़िन्दगी जीने वाली. मुझे भी ज़िन्दगी में किसी से प्यार हुआ था पर उसने ऐसा धोखा दिया क कह नफरत सी हो गयी प्यार शब्द से. और उसके बाद ऐसे ऐसे एक्सपीरियंस हुए क पूरी मर्द ज़ात hi मेरी नज़रों में गलत बन गयी. पर तुम मिले और मुझे गलत साबित कर दिया. ऐसा मर्द मैंने आज तक नहीं देखा था जो औरतों की इतनी इज़्ज़त करता हो . जिस तरह तुमने दूसरों की इज़्ज़त की हिफाज़त की और उन्हें सहारा दिया तुम सच में आम इंसान नहीं हो. मंजू भी शायद इसी लिए तुम्हे इतना मानती है क्यूंकि तुमने उसे वो प्यार वो सम्मान और सहारा दिया है जो उसे शायद कभी नहीं मिला था. शुरू से hi हम दोनों एक दूसरे क बहुत क्लोज थी पर वक़्त ने हमें दूर कर दिया और देखो तुम्हारी वजह से hi हम वापिस मिली. तुम नहीं जानते शायद क तुम जब मेरी वजह से मंजू को इग्नोर करने लगे थे तो उसका क्या हल था. उसने मुझे मन कर दिया था आने से , अपनी उस सहेली को जो उसके लिए सबसे खास थी. तब मुझे लगा क मुझे किसी भी तरह तुम्हे मानना होगा. बस इसी लिए मैंने ये सब किया. अब तो नाराज़ नहीं हो न तुम ??

अमित : नाराज़ तो अब भी हूँ .

ऋतू सिंह : क्युँनन ??

अमित : आपको ये सब करने की ज़रूरत नहीं थी. हाँ मेरी भी गलती है क मैंने आपको मौका hi नहीं दिया पर फिर भी और कोई रास्ता भी तो निकला जा सकता था न. मैंने आपके साथ जो कुछ किया वो .....

ऋतू सिंह : उसके बारे में मत सोचो. मैंने कहा न मैं खुद तुम्हे पसंद करने लगी थी. समझ लो क दिल में एक ीचा थी क काम से काम ज़िन्दगी में एक सच्चे इंसान से प्यार मिले चाहे दो पल का hi सही और तुमसे सच्चा और कौन होगा .

अमित : पर मैंने आपको प्यार तो नहीं दिया न , मैंने तो आपके साथ वो सब गुस्से में किया. मैं समझ hi नहीं सका आपको. आप इतनी दर्द और दुःख से भरी हुई थी अंदर से , आपको प्यार की ज़रूरत थी पर मिला क्या ? सिर्फ दर्द.. मुझे माफ़ कर दीजिये मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी.

मैंने ऋतू सिंह क पास आ कर हाथ जोड़े तो उसने जल्दी से मेरे हाथ पकड़ लिए.

ऋतू सिंह : ये तुम क्या कर रहे हो ? नहीं ये नहीं ..... तुमने कुछ भी नहीं किया. वो सब तो मैंने hi तुमसे करवाया न तुम्हे उकसा कर.

अमित : फिर भी मैंने गलत किया है.

ऋतू सिंह : कुछ गलत नहीं है. हाँ मेरी हालत ज़रूर ख़राब कर दी है . लगता है कल आराम hi करना पड़ेगा . तौबा ,, मंजू कैसे तुम्हे झेलती है. मैं इतनी स्ट्रांग हो कर भी पास्ट हो गयी वो तो कितनी नाज़ुक है. आआह्ह्ह्ह मुझसे तो हिला भी नहीं जा रहा .

ऋतू सिंह ने बात को बदलते हुए इतना कहा पर जैसे hi वो हिली तो उसे दर्द हुआ . मैंने जल्दी से उसकी टांगों को क बीच देखा जहाँ अभी भी खून क निशान थे.

अमित : आप की तो सच में हालत ख़राब हो गयी है रुकिए मैं कुछ करता हूँ.

ऋतू सिंह: अरे तुम बैठो ....

ऋतू ने मुझे रोकने की कोशिश की पर मैं जल्दी से उठा और रूम क साथ hi बने आत्ताचé बाथरूम में घुस गया. मैंने जल्दी से से मुँह में पानी लिया और बाथरूम में hi पड़ा कपडा लिया और उनके पास आ गया. तब तक वो खुद को बेडशीट में धक् चुकी थी. मैंने बेडशीट को पकड़ा तो उसने मजबूती से बेडशीट पेड ली.

अमित : छोड़िये इसे

ऋतू सिंह : नहीं रहने दो मुझे शर्म आ रही है . तुम कुछ मत करो .

अमित : इतना कुछ होने क बाद शर्म आ रही है?? छोड़िये इसे .

ऋतू ने मेरे ज़ोर देने से बेडशीट तो छोड़ दी पर अपना चेहरा दोनों हाथों से धक् लिया. मैंने उसकी टंगे फैला कर गीले कपडे से छूट को साफ़ करने लगा

ऋतू सिंह : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स आराम से ाआईई

ऋतू को दर्द हो रहा था जब मैं छूट को साफ कर रहा था पर मैंने अपना काम पूरा किया और उसके पेट पर पड़े अपने वीर्य को भी साफ़ के दिया. उसके बाद मैंने ऋतू से पूछ कर उसे पैन किल्लेर टेबलेट दी. ऋतू बस ख़ामोशी से मुझे सब कुछ करते हुए देख रही थी.

अमित : अब आप आराम करो . लगता है आपने बहुत देर बाद आज ....

ऋतू सिंह : 10 साल से भी ज्यादा. तुम दूसरे मर्द हो और सच कहूं तो सही मर्द. पहला तो धोखेबाज़ hi था जिसने प्यार क नाम पर मुझे धोखा दिया और कभी न ख़तम होने वाला दर्द.

अमित : ऐसा मत कहिये , एक इंसान गलत हो सकता है पर प्यार नहीं. प्यार तो जीवन का आधार है जिसके बिना इंसान की ज़िन्दगी ऐसी है जैसे रंगों क बिना तस्वीर. अगर आप कोशिश करती तो आपको कोई न कोई ाचा साथी मिल hi सकता था .

ऋतू सिंह : बहुत लोग देखे मैंने अमित पर कोई भी ऐसा नहीं मिला जो मेरे दिल में उतरा हो. और जो उतरा वो पहले hi किसी और का है. मैं खुश हूँ क मंजू को तुम मिले. बस इतना hi कहूँगी क उसे हमेशा प्यार देना.

अमित : उनको मैं कभी खुद से दूर नहीं करूँगा . पर सीधा सीधा उन्हें अपना नाम भी शायद न दे पौन. मगर वो हमेशा मेरे साथ hi रहेंगी. और हाँ आपको भी अपने लिए कोई देख लेना चाहिए. आखिर कब तक अकेली रहेंगी? सब कुछ तो है आपके पास. इतनी अछि नौकरी है और आप खुद भी तो इतनी खूबसूरत हैं.

ऋतू सिंह : आँखें बचते हुए) हन्नन ,, क्या बात है साली कुछ ज्यादा hi पसंद आ गयी क्या, जीजा जी ???

अमित : वो बात नहीं मैं तो बस ....

ऋतू सिंह : मैं तो अब साडी ज़िन्दगी ऐसे hi रहने वाली हूँ. हाँ कभी कभी आप hi अपनी इस साली से थोड़ा प्यार कर लिया करना अगर आप को बुरा न लगे.

अमित : ये आप क्या ....

ऋतू सिंह : शह्ह्ह्ह ,,, बस कभी कभी . प्यार दिल से होता है जिस्म से नहीं. मैंने ये सब अपने जिस्म की आग बुझाने क लिए नहीं किया . दिल में एक बार तुमसे प्यार करने की ीचा सी थी सो कर लिया. अगर तुम चाहो तो ठीक वर्ण मैं फाॅर्स नहीं करुँगी. वैसे भी इतने सैलून से मैंने खुद को ढाल लिया था हालत क हिसाब से. अब ऐसी कोई ीचा नहीं होती पर तुम्हे देख कर दिल काबू में नहीं रहा. वैसे तुम्हे मैंने बहुत कुछ गलत कह दिया उसके लिए मुझे मा....

अमित : जो हो गया सो गया . वैसे भी बदले में इतनी अछि साली भी तो मिली है. हाँ गुस्सा तो मुझे बहुत आया था और उसकी आपको सजा भी दूंगा पर प्यार se.filhal आप आराम करो मैं चलता हूँ. रत यहाँ रुका तो लोग बातें बनाएंगे.

ऋतू सिंह : तुम सच में नाराज़ तो नहीं हो न??

अमित : बिलकुल भीं नहीं . यकीन नहीं हो तो सबूत क लिए एक राउंड और हो जाये ??

ऋतू सिंह : नहीं नहीं माफ़ करो , पहले hi बुरी हालत हो गयी है.

अमित : किसकी आप की या इसकी ??

मैंने ऋतू की छूट की तरफ इशारा किया तो उसने मेरे बाजु पर चपत मरी.

ऋतू सिंह : गंदे ,, बेशरम .. बताऊँ क्या मंजू को क तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?

अमित : बताओ बताओ , उन्हें भी तो पता चले उनकी सहेली छुम बहिन यहाँ क्या कर रही है .

ऋतू सिंह : पक्के बेशरम हो. वैसे तुम चाओ तो रत यहीं रुक सकते हो. मैं हैंडल कर लुंगी.

अमित : नहीं , मैं किसी को मौका नहीं देना चाहता. अब आराम कीजिये मैं चलता हूँ.

ऋतू सिंह : इतनी रत कहाँ जाओगे ? इस वक़्त तो गाओं जाना ठीक नहीं .

अमित : गाओं नहीं जा रहा

ऋतू सिंह : तो फिर कहाँ ??

अमित : तुम्हारी बहिन क पास .

ऋतू सिंह : ओह्ह .. मतलब अभी मन नहीं भरा .

अमित : मन तो नहीं भरा पर क्या करूँ अभी तो आप मन कर रही हो न.

ऋतू सिंह : यौऊ ... बहुत गंदे हो तुम.

ऋतू ने मुझे फिर से मरने की कोशिश की तो मैं उछाल कर दूर हो गया. मैं उसे bye कर क जैसे hi कमरे से निकलने लगा तो उसने फिर से मुझे आवाज़ दी.

ऋतू सिंह : रुको ज़रा , वो मंजरी क केस क बारे में तुमने पता करने को कहा था न कल्पना से ??

अमित : चौंक कर ) आपने पता कर लिया ? क्या पता चला ? क्या हुआ था मंजरी को ? किसने उसे मारा ?

मंजरी का ज़िकर होते hi मैं एक डैम से वापिस पलटा और एक साथ सवाल कर दिए. इतने दिनों में ये बात मेरे दिमाग से निकल सी गयी थी.

ऋतू सिंह : ऐसा कोई केस किसी ठाणे में नहीं है . मैं अछि तरह चेक कर लिया है. मैं तुमसे यही पूछने वाली थी . तुम कुछ और बताओ या उसकी फॅमिली क बारे में . मैं खुद पता लगवा लूंगी.

अमित : क्या ? कोई केस नहीं है ?? पर उसके चाचा तो कह रहे थे क वो इंस्पेक्टर से कई बार मिले हैं केस क बारे में .. मुझे पहले hi शक था वो ज़रूर झूठ बोल रहे हैं.

ऋतू सिंह : तुम मुझे उसका नाम पता बताओ सचाई मैं पता लगवा लूंगी. मुझ पर भरोसा रखो. एक बात पूछूं ??

अमित : पूछिए

ऋतू सिंह : तुम मंजरी से प्यार करते थे न ??

अमित : कुछ देर खामोश रहने क बाद) उसी ने मुझे प्यार का एहसास करवाया था . वो मुझे बहुत प्यार करती थी. अफ़सोस मैं उसके लिए कुछ नहीं कर सका.

ऋतू सिंह : चिंता मत करो , मैं हूँ न. मैं इंसाफ दिलाऊंगी मंजरी को . ये अब मेरी ज़िम्मेदारी है. तुम दिल मत छोटा करना.

मैंने ऋतू सिंह को मंजरी क चाचा न नाम पता बताया और फिर वहां से निकल कर मंजू म क घर चला गया. पुलिसवालों ने मुझे नहीं रोका क्यूंकि अंदर से ऋतू ने उन्हें फ़ोन पर समझा दिया था. रत हो चुकी थी उस लिए मैंने किसी और क पास जाने की बजाये मंजू म क घर का hi रुख किया. मुझे इस वक़्त घर क बहार देख कर मंजू म चूंकि पर फिर मुस्कुराते हुए मेरा स्वागत किया .

मंजू म : तुम ,, इस वक़्त ,,, यहाँ ?? गाओं नहीं गए ??

अमित : उदास मन से ) नहीं . देर हो गयी थी तो आपके पास hi आ गया .

मंजू म : चिंता से ) बात क्या है ? तुम उदास क्यों हो ? फिर से कुछ हुआ क्या ?? तुम थे कहाँ ??

अमित : वो मंजरी ...

मैंने इतना hi कहा था क मेरी आँखों की नमी देख कर मंजू म ने मुझे गले से लगा लिया और मुझे गले लगाए सहलाती रही .

मंजू म : शांत हो जाओ प्लीज खुद को सम्भालो. तुम्हे ऐसे देख कर क्या उसे दुःख नहीं होता होगा? शांत हो जाओ . आज उसका ज़िकर कैसे हो गया ? कहाँ थे तुम ?

अमित : मैं आपकी सहेली क पास से hi आ रहा हूँ . उन्होंने आज उसके बारे में बात की तो फिर से मुझे उसकी यद् आ गयी. मंजरी क साथ ज़रूर कुछ बहुत बुरा हुआ था . ऋतू जी कह रही हैं क उसके चाचा ने कोई केस दर्ज नहीं करवाया था मतलब वो आज तक सबको झूठ बोल रहे थे. मेरा दिल कर रहा है क अभी जाकर उसको जान से मार दूँ.

मंजू म : नहीं तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे समझे !! ऋतू है न वो सब देख लेगी. मुझे उस पर पूरा भरोसा है तुम भी उस पर भरोसा करो. तुमने खाना खाया या नहीं ???

अमित : मुझे भूख नहीं है .

मंजू म : भूख कैसे नहीं है ? तुम बैठो मैं खाना बनती हूँ.

मंजू म मेरे लिए कहाँ बनाने लगी और मैं फिर से मंजरी क चाचा क बारे में सोचने लगा. मुझे गुस्सा तो आ रहा था पर ऋतू की बातों से मुझे भरोसा था क वो ज़रूर कुछ न कुछ करेगी. मंजू म ने थोड़ी देर में खाना बना लिया और हम दोनों ने खाया . उसके बाद हम दोनों एक दूसरे क बाँहों में सो गए और मुझे उनके पहलु में वो सुकून मिला क मैं सब टेंशन भूल के आराम की नींद सो गया. सुबह जल्दी उठ कर मैं वापी गाओं चला गया. घर पहुंचा तो सब घर पर hi थे. मुझे देखते hi बाबा में मुझे गले से लगाया .

विजय म : आ गया मेरा शेर ? तुझे देख कर रूह खुश हो जाती है.

अमित : मैं ठीक हूँ बाबा , आप सुनाइए .

विजय म : मैं भी ाचा हूँ और तुझे देख कर और भी ाचा हो गया हूँ .

गौरी म : गुस्सा दिखते हुए ) पहले इससे पूछिए क कल क्यों नहीं आया ? और इसका फ़ोन क्यों बंद रहता है ? एक बार भी इसे हम लोगों की यद् नहीं आती? अभी से ये हल है तो कल को शायद शकल दिखने भी नहीं आएगा.

विजय म : भगवन तुम्हारे सामने hi है खेलो जो कहना है .

गौरी म : मैं इससे बात नहीं करती. वहां जा कर भूल hi जाता है ये तो मुझे. उससे पूछिए कहाँ गायब था ये जब सब इसके बारे में पूछ रहे थे. और कल रत भी बिना बताये ये फ़ोन बंद कर क सो गया . कोई परवाह है क नहीं इसे हमारी?

विजय म : सुन लिया अब दो खुद hi जवाब . मैं नहीं बोलता बीच में कुछ .

माँ गुस्सा दिख रही थी और उनकी बातें भी सही थी. बाबा ने तो उनका गुस्सा देख कर हाथ खड़े कर दिए पर मैं जनता था क वो मुझसे नाराज़ हो hi नहीं सकती. उनका गुस्सा बस पल दो पल का hi होता है .

अमित : वो माँ, मेरा फ़ोन ख़राब हो गया था बताया तो था . कल रत बस आ hi रहा था क रस्ते में बाइक ख़राब हो गयी तो वापिस जाना hi ठीक समझा वर्ण आप फिर नाराज़ हो जाती क इतने रत को क्यों आया . अगर पता होता आप इतना नाराज़ होंगी तो रत को hi आ जाता. आगे से कभी ऐसा हुआ तो रत को भी आ जाया करूँगा. अँधेरा hi तो होता है .

गौरी म : चुप , कोई ज़रूरत नहीं रत को आने की. काम से काम बता तो देता कोई दिक्कत हो गयी थी तो. मैं कितनी चिंता कर रही थी पता भी है तुझे. मैं तुझसे बात क्यों के रही हूँ . मुझे तुमसे बात नहीं इतनी .

माँ ने गुस्सा दिखा कर मुँह तो फेर लिया पर मैं जनता था वो गुस्से में नहीं हैं बस वो दुखी ज़रूर थी मेरे न आने से . ज़रूर चिंता करती रही होंगी साडी रत . मैंने पीछे से hi माँ को बाँहों में भर लिया और उनके गाल को चूम लिया .

अमित : माफ़ कार्डो माँ आगे से ऐसा नहीं होगा. वो असल में फ़ोन की बैटरी ख़तम हो गयी थी. वर्ण मैं ऐसा नहीं करता. अब गुस्सा छोडो माँ . पता है कितनी भूख लगी है. आपके हाथों का खाना खाने को तो तरस गया था . जल्दी से अपने हाथों का खाना खिलाइये मुझे.

गौरी म : तो क्यों जाता है इतनी दूर ? यहाँ नहीं रह सकता मेरे पास ??

विजय म : अब बातों से hi पेट भरोगी क्या ? देखा नहीं भूख लगी है उसे जल्दी से नाश्ता लगाओ

गौरी म : आप चुप रहिये मेरे बेटे का ध्यान मैं रख लुंगी . आप को तो चिंता होती नहीं न. सब आपका hi कसूर है. चल तू यहाँ बैठ मैं तेरे लिए नाश्ता लती हूँ.

माँ मुझे बिठा कर नाश्ता लेने चली गयी. बाबा माँ की बातों से मंद मंद मुस्कुरा रहे थे. अजय मां भी इतने में आ गए और मुझसे प्यार से मिले. कुछ hi पलों में कमलेश मां और दीपिका ममी भी आरव को साथ लिए आ गए. दीपिका ममी मुझसे नाराज़ नज़र आ रही थी . उन्होंने बस सबके सामने औपचारिक बातें की. नाश्ता करते हुए मैंने आरव को भी प्यार किया और गॉड में खिलाया. नाश्ता करने क बाद मैं कुछ देर कामिनी ममी क पास भी बैठा और फिर अपने कामे में चला गया. माँ किचन का काम ख़तम कर रही थी. दीपिका ममी आरव को लिए मेरे कामे में ा गयी.

अमित : अरे ममी आप ? आइये बैठिये .

दीपिका म: मुँह फूलते हुए) काम से काम अकेले में तो नाम से बुला लिया करो. तुम तो भूल hi गए हो मुझे. कितनी देर हो गयी तुम्हे 2 पल प्यार से मुझसे बात किये हुए.

अमित: ऐसा क्यों कह रही हैं आप?

दीपिका म: तो और क्या करूँ ? तुम तो ऐसे दूर हो गए जैसे तुम्हारा मेरे साथ और कोई रिश्ता hi नहीं.

अमित : ऐसा मत कहिये आप. आप जानती हैं न मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ. क्या आरव आपको एहसास नहीं दिलाता मेरे प्यार का?

दीपिका म : बातें न बनाओ तुम. आरव क होने क बाद से कितना समय दिया है तुमने मुझे हाँ ?? मन क अभी वो सब मैं नहीं के सकती पर क्या उसके इलावा तुम मेरे पास नहीं आ सकते ?

अमित : आपको ऐसा लगता है क मैं सिर्फ उसी वजह से आपके पास अत हूँ ? आप भी मुझे ऐसा समझती हैं ?

मेरी इस बात से दीपिका ममी जल्दी से उठी और मेरे गले लग गयी .

दीपिका म : मुझे माफ़ कर दो मेरा कहने का वो मतलब नहीं था . पर क्या करूँ , तुम मुझे वक़्त नहीं देते तो मेरा दिल कितना उदास रहता है. और तुमने ये क्यों कहा क मैं भी तुम्हे एशिया समझती हूँ ? मतलब किसी और ने भी ये बात कही थी ?

अमित : नहीं ऐसा कुछ नहीं है . आप बैठिये यहाँ .

दीपिका म : नहीं तुम कुछ छुपा रहे हो और मुझे सच सुन्ना है . मैं इसी लिए तुम्हारे पास आयी हूँ. तुम्हारा फ़ोन बंद क्यों था जब तुम करिश्मा क साथ गए थे ?? और तुम गए क्यों थे ? कुछ तो वजह ज़रूर होगी तुम्हारे वहां जाने की और तुम्हारी बातों से लग रहा है क वहां ज़रूर कुछ हुआ है है न ?

अमित : नहीं ऐसा ...

दीपिका म : तुम्हे मेरी कसम सब सच सच बताओ मुझे .

अमित : आप ,, ये,,, कसम ,,, कितनी बार कहा है मुझे कसम मत दिया करो आप .

दीपिका म : मुस्कुराते हुए ) तो फिर जल्दी से बताओ मेरे आरव क पापा क बात क्या है ?? और पूरी बात सच सच बताना वर्ण हम दोनों नाराज़ हो जायेंगे आप से .

फिर मैंने दीपिका ममी को साडी बात बताई कैसे मुझे आंटी ने वहां जाने क लिए मनाया और मैंने वहां पर क्या क्या किया. फिर उसके बाद कैसे करिश्मा दीदी ने मुझे वो सब कहा और मैं वहां से वापिस आ गया. दीपिका ममी सब कुछ शांति से सुनती रही और जब मेरी बात ख़तम हुई तो वो एक डैम गुस्से से बोली .

दीपिका म : कोई ज़रूरत नहीं तुझे वहां जाने की. एक तो खुद hi तुमसे गलत काम करवाया और उसका ये सिला दिया. वो कौन होती है तुम्हे भला बुरा कहने वाली. तुम तो उसका घर hi बसने गए थे न . सचाई जान लेती तो शर्म से तेरे पाऊँ में गिर जाती. आज क बाद तू वहां मत जाना बस कह देती हूँ . ये कोई बात हुई , इतना कुछ रिस्क लेकर टाइम किया और उसने तुझ पे हाथ उठा दिया. अपने पति की करतूत का गुस्सा तुझ पर उतर दिया. और वो कितने घटिया लोग होंगे पूरी फॅमिली hi घटिया लगती है. तूने सब रिकॉर्ड किया था ???

अमित : हम्म्म

दीपिका म : अभी भी है तेरे पास वो रिकॉर्डिंग?

अमित : आप क्यों पूछ रही हैं ?

दीपिका म : मुझे देखनी है .

अमित : क्या ???? आप क्यों देखेंगी वो सब ?

दीपिका म : बस देखना है मुझे , मैं भी तो देखूं माँ बेटी को कैसे पेल क आये हो .

अमित : आप को गुस्सा नहीं आएगा ?

दीपिका म : मुझे क्यों गुस्सा आएगा ? मैं तो खुश hi hi अपने पति की बहादुरी पर. देखूं तो सही कैसे इतने बड़े मुसल से तुमने दोनों को सजा दी .

अमित : आप को शर्म नहीं आती ये सब देखने में ?

दीपिका म : कैसी शर्म ? मेरा hi तो है , अब बातें मत बनाओ जल्दी दिखाओ वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा .

फिर मैंने अपने मोबाइल में वो रिकॉर्डिंग्स दीपिका ममी को दिखा दी. दीपिका ममी बड़े गौर से वो सब देखती रही . रिकॉर्डिंग देखते देखते ममी गर्म होने लगी थी उनका चेहरा लाल हो गया था और खुद hi उनका एक हाथ अपनी छूट पर चला गया .

दीपिका म : दोनों एक साथ hi पेल दिया ?? ये सब देख कर तो मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा . उफ्फ्फ कितनी गरम हैं दोनों माँ बेटी कैसे रंडियों की तरह वो सब .... आरव को देखना मैं ज़रा बाथरूम हो क आयी

अमित : अब क्या हुआ ? बड़ी ज़िद कर रही थी न देखने की और अब बाथरूम जा रही हैं हाँ ....

दीपिका म : तुम न ,,, सुधर जाओ. अगर मेरा बस चलता तो अभी दरवाज़ा बंद कर क चढ़ जाती तुम पर . सम्भालो अपने बेटे को अभी अति हूँ .



दीपिका ममी गुस्सा दिखते हुए अपने कमरे में चली गयी. मैं आरव क साथ खेलने लगा. थोड़ी देर बाद hi मुझे नीचे से आवाज़ें आने लगी तो मैं आरव को गॉड में लिए कमरे से बहार निकला. आँगन में hi मुझे नैना दीदी निधि दीदी रजनी मौसी मौसा जी और कारन भैया नज़र आये. वो सब का मुँह मीठा करवा रहे थे मैं समझ गया क दीदी नई कार दिखने आयी होंगी. मैं सीढ़ियां उतर hi रहा था क बहार से आने वाले शख्स पर मेरी नज़रें पड़ी तो मैं हैरान हो गया .....
 
भैया लिख रहा हूँ. कम्पलीट हुआ तो अपडेट कर दूंगा . टाइम तो लगता hi है न .
 
अपडेट 191



अपने घर में करिश्मा दीदी को देख कर मैं शॉकेड हो गया. उस दिन क बाद से मैंने आज उन्हें देखा था. अपने आप मेरी नज़रें शर्मिंदगी से झुक गयी. मुझे समझ नहीं आ रही थी वो हमारे घर क्यों आयी हैं. कहीं वो मेरे बारे में शिकायत करने तो नहीं आयी?? ये बात दिमाग में आते hi मुझे दर भी लगने लगा. मैं अपनी सोच में hi गम था क निधि दीदी ने आते hi मुझे गले से लगा लिया.

निधि दीदी : यहाँ क्यों खड़े हो चलो नीचे , पहले ये लो मुँह मीठा करो.

दीदी ने ज़बरदस्ती मेरे मुँह में मिठाई दाल दी और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे नीचे ले आयी. मैं अंदर से दर रहा था इस लिए चोर नज़रों से करिश्मा दीदी को देख रहा था. वो चलते हुए नज़दीक आ गयी थी. इतने में रजनी मौसी ने भी मुझे गले लगा लिया.

रजनी मौसी : जग जग जियो बीटा , ये सब तेरी hi मेहेरबानी है. वर्ण हमने तो सोचा भी नहीं था कभी क अपनी गाड़ी भी होगी. तेरे मौसा जी तो आज भी वही स्कूटर चला रहे हैं इतने सैलून से.

अमित : इसमें मैंने क्या किया मौसी ? ये सब तो दीदी की म्हणत का hi नतीजा है.

मौसा जी : अरे बीटा तुम्हारी मौसी बिलकुल ठीक कह रही है. तुम्हारी वजह से hi तो निधि को इतनी अछि जॉब मिली है.

मैंने मौसा जी क पाऊँ छुए. कारन भैया से मिलने लगा तो वो बाबा की तरफ हो गए. तभी नैना दीदी मेरे गले लग क मिली और मेरे कण में बोली.

नैना दीदी : मेरी यद् नहीं आता न बेवफा कहीं क.

मुझसे गले मिल क वो सब क सामने गुस्सा दिखने लगी.

नैना दीदी : जा मैं तुझसे बात नहीं करती. एक बार भी मुझसे मिलने नहीं आया न इतने दिनों से. कल भी बिना मिले भाग आया ..

अमित : सॉरी दीदी वो मुझे ज़रूरी काम था.

नैना दीदी : पता है तेरे ज़रूरी काम . हर बार तेरे पास कोई न कोई बहाना होता है.

निधि दीदी : अब बस भी कर न नैना , क्यों परेशां करती है.

विजय म : भाई आप सब को बहुत बहुत बधाई हो. निधि बीटा तुमने तो आज गर्व से सर ऊँचा कर दिया.

निधि दीदी : मां जी ये सब अमित की hi वजह से है.

गौरी म : इसकी वजह से कैसे ? ज़रा मुझे भी तो बताओ .

निधि दीदी : वो क्या है न ममी जी , ये जॉब अमित ने hi तो दिलाई थी. और कार चलना भी इसकी hi दोस्त ने सिखाया है इसके कहने पर.

माँ ने मुझे गले से लगा कर मेरा सर सेहला दिया. तभी उनकी नज़र करिश्मा दीदी पर पड़ी.

गौरी म : अरे करिश्मा बेटी!! आओ आओ तुम भी आओ वहां पीछे क्या कड़ी हो.

करिश्मा दीदी : नमस्ते आंटी जी , मैं बस आप सब का प्यार hi देख रही थी. कैसे हो अमित ?

करिश्मा दीदी चल कर पास आयी और माँ से मिली फिर मेरी तरफ देखते हुए पूछा . मैं तो उनसे नज़रें hi चुरा रहा था.

अमित : मैं ठीक हूँ , माँ मैं ज़रा बहार हो क आता हूँ .

नैना दीदी : तुम कहाँ जा रहे हो अब ? हम घर आये हैं और तुम गायब हो रहे हो ?

गौरी म : हाँ बीटा अभी मेहमान आये हैं अभी कहाँ जाना है तुझे ? पहले hi इतने दोनों बाद आया है. बेटी ( करिश्मा ) अकेली आयी हो ?

करिश्मा दीदी : हाँ वो दीदी से मिलने आयी थी तो पता चला ये सब गाओं आ रहे है तो मैं भी साथ hi आ गयी .

गौरी म : ाचा किया बीटा , तुझे परेशां तो नहीं किया था न इसने ? तेरे साथ गया था न .

करिश्मा दीदी : नहीं नहीं आंटी बल्कि परेशां तो मेरी वजह से ये हो गया है. उसी क लिए सॉरी बोलने आयी हूँ.

‘ सॉरी बोलने से क्या होता है? मुँह से निकली हुई बातें तो वापिस नहीं आती न? ‘

दीपिका ममी भी वहीँ आ गयी और आते hi ये शब्द कहे. करिश्मा दीदी चौंक कर उनकी तरफ देखने लगी.

दीपिका म : बहुत बहुत बधाई हो निधि और आप को भी दीदी जीजा जी . दीदी अमित को भेज कर बाजार से कुछ मंगवा लो मेहमानो क लिए . जा अमित कुछ ले कर आ सबके लिए .

रजनी मौसी : अरे रहने दे दीपिका कुछ नहीं चाहिए , सब घरवाले hi तो हैं.

दीपिका म : नहीं दीदी ऐसे नहीं चलेगा . जाओ अमित तुम लेकर आओ कुछ.

मैंने दीपिका ममी का दिल में शुक्रिया किया और जल्दी से वहां से खिसक गया. पर मेरे साथ hi कारन भैया भी बहार निकल गए . मैंने बाजार से खाने मैंने का सामान लिया और कुछ देर ऐसे hi बहार घूमता रहा क्यूंकि घर जा कर मुझे करिश्मा दीदी का सामना करना पड़ता. मगर मेरी कहाँ चलने वाली थी. माँ ने फ़ोन कर क जल्दी वापिस आने को कहा तो मुझे आना पड़ा. मैं उन्हें सामान पकड़ा कर निकलने लगा तो निधि दीदी ने रोक लिया .

निधि दीदी : अब कहाँ जा रहे हो ? चलो मुझे तुमसे बात करनी है .

अमित : मैं अपने दोस्त से मिलने जा रहा था दीदी बड़े दिनों से मिला नहीं.

निधि दीदी : तो क्या हुआ , तुम तो यहीं हो जा. हमने तो वापिस भी जाना है. चलो मेरे साथ.

मैं सोचने लगा क दीदी क्या बात करना चाहती हैं मुझसे ?? पर खैर चलो अब बात तो माननी hi थी. मैं उन्हें साथ लिए अपने कमरे में आ गया.

अमित : अब बताइये दीदी क्या बात करनी थी?

निधि दीदी : तुम करिश्मा से नाराज़ है क्या ?? देखो जो भी बात है साफ साफ बताओ.

मैं दीदी की बात से हैरान भी हुआ पर उनके सवाल से ये भी पता चल गुणक करिश्मा दीदी ने उसने उस बात का ज़िक्र नहीं किया है.

अमित : नहीं वो दीदी वो मैं वो

निधि दीदी : क्या वो वो लगा रखा है? पता है कितनी परेशां है वो ?? मेरे पास आयी थी वो. कह रही थी क तुम किसी बात पर उससे नाराज़ हो गए हो और अब बात नहीं कर रहे. देख वो भी तो तेरी बहिन hi है न. तुझे कितना मानते हैं सब. मुझे पता है क तू भी सबको बहुत प्यार करता है. अगर कोई बात हुई तो उसे भूल जा और बात ख़तम कर. बेचारी कितनी दुखी हो रही है तुम्हे नज़र नहीं आता?? वो तुमसे बात करने hi आयी है. प्लीज एक बार उससे बात करले .

अमित : दीदी मैंने कहाँ कुछ कहा था. वो तो खुद hi ....

मैं अपनी बात कहते कहते रुक गया . क्यूंकि अगर मेरे मुँह से कोई बात निकल जाती तो दीदी क सवालों क जवाब देते नहीं बनते मुझसे.

निधि दीदी : अब गुस्सा छोडो और मेरे लिए एक बार बात करलो उससे प्लीज. वो बहुत परेशां है और मैं उसे परेशां नहीं देख सकती.

इतना कह कर दीदी बहार गयी और करिश्मा दीदी को लेकर आ गयी.

निधि दीदी : लो बात करो करिश्मा ये कहीं नहीं जायेगा.

करिश्मा दीदी ने मुझे और निधि दीदी को एक नज़र देखा और बोली

करिश्मा दीदी : दीदी मैं अकेले में बात कर सकती हूँ अमित से ??

निधि दीदी : ाचा ठीक है करलो मैं बहार रूकती हूँ. और तुम भी अब आराम से बात सुन लेना समझे .

निधि दीदी बहार गयी तो करिश्मा दीदी मेरे करीब आ गयी और धीमी आवाज़ में बोली.

करिश्मा दीदी : तुम मुझसे नाराज़ हो न ? मैंने तुम्हारे साथ ाचा नहीं किया . ( हाथ जोड़ते हुए ) प्लीज एक बार मुझे माफ़ कार्डो. मैं नहीं जानती थी तुम वो सब मेरे लिए hi कर रहे हो . माँ ने मुझे सब कुछ बता दिया है. मैं गलत समझा था तुम्हे पर सचाई जान कर अब मुझे खुद पर शर्मिंदगी है क मैंने तुम्हे इतना कुछ कह दिया. मुझे वो सब नहीं कहना चाहिए था. मैंने तुम पर हाथ भी उठाया , तुम चाहो तो तुम भी मुझे थप्पड़ मर लो पर प्लीज एक बार मुझे माफ़ कर दो.

करिश्मा दीदी की ऑंखें भर आयी थी जिसे देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनके हाथ पकड़ लिए.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं . गलती मेरी थी , आपकी जगह कोई भी होता तो यही करता. मैंने जो किया वो माफ़ी क लायक नहीं . आपने जो भी किया वो सही था. आपको माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. हो सके तो आप मुझे माफ़ कर देना , मुझे वो सब नहीं करना चाहिए था. मैं किसी से गुस्सा या नाराज़ नहीं हूँ. मुझसे जो गलती हुई है वो बदल तो नहीं सकता पर खुद को तो बदल hi सकता हूँ. मैं अब कभी भी ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिसके लिए आपको दुःख हुआ था. मैंने आपको अपनी बहिन hi समझा था और इसी लिए आपकी मदद करने राज़ी हो गया था पर वही हुआ जिसका मुझे दर था. अब ऐसा कुछ नहीं होगा और न hi मैं अब कभी आंटी क पास जाऊंगा. हो सके तो अपने इस घटिया भाई को माफ़ कर देना.

इतना कह कर मैं कमरे से बहार निकलने लगा तो बहार hi निधि दीदी कड़ी थी. मेरे चेहरे क भाव देख कर उन्होंने मुझे नहीं रोका पर वो हैरान ज़रूर थी. मैं सीढ़ियों से निचे उतर रहा था क सामने से दीपिका ममी आ रही थी पर मैं बिना किसी को देखो घर से बहार निकल गया.

करिश्मा आयी तो थी यहाँ सब ठीक करने पर अमित की बातें सुन कर वो निशब्द हो गयी. अमित की बातें सुनते सुनते उसकी ऑंखें भर आयी थी . इससे पहले की वो अमित से कुछ कह पति वो अपनी बात कर क कमरे से निकल गया. वो उसे रोक भी न पायी. अमित क जाने क बाद निधि कमरे में आ गयी. करिश्मा की आँखों में पानी देख कर वो करिश्मा क पास आयी .

निधि : क्या हुआ करिश्मा ? तुम्हारी आँखों में आंसू ?

करिश्मा :आंसू पोछते हुए ) कुछ नहीं दीदी वो बस ऐसे hi .

निधि : क्या हुआ ? अमित ने कुछ कहा क्या ?

करिश्मा : नहीं नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है . वो बस अपनी hi बातों को यद् कर क आँख भर आयी. उसने तो कुछ नहीं कहा

निधि : बात क्या है ? मुझे कुछ बताएगी ? देख मैं तुम्हे अपनी बहिन अपनी दोस्त मानती हूँ. जो भी है मुझे दिल खोल कर बता.

करिश्मा : नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है. अमित बहुत प्यार करता है न सबको? वो मुझे भी अपनी बहिन की तरह समझता है . मैं उसे गलत समझ बैठी और अब अपनी इसी सोच पर मुझे गिलटी फील हो रहा है.

निधि : ऐसा कभी मत सोचना करिश्मा. वो बहुत प्यारा है इस लिए सब को hi प्यार देता है . कोई उसके साथ कुछ भी कर ले पर वो किसी क साथ गलत नहीं करता. मेरा बस चले तो उसका हर दुःख हर तकलीफ अपने ऊपर ले लूँ. तू मुझे बता नहीं पर कोई बात तो ज़रूर है. अभी मैंने उसकी आँखों में दर्द देखा है. वो बताता नहीं पर मैं महसूस करती हूँ उसे. अगर उससे कोई गलती हुई है तो मैं माफ़ी मांगती हूँ प्लीज उसे माफ़ कर दो.

करिश्मा : ये आप क्या कह रही हैं दीदी. मैं तो खुद उससे माफ़ी मांगने आयी हूँ. गलती तो मुझसे हुई है और पता नहीं मेरी ये गलती कब माफ़ होगी.

दोनों अंदर ये बातें कर रही थी और दरवाज़े क बहार कड़ी दीपिका ये सुन रही थी. उसे समझ आ गया क करिश्मा वाकई में माफ़ी मांगने आयी है. पर वो क्या कह सकती थी इस बात में. इस लिए चुपचाप वापिस चली गयी. उसके बाद सब ने दोपहर का खाना मिल कर खाया. इस दौरान अमित घर से बहार hi रहा जिस वजह से निधि क साथ करिश्मा भी अंदर hi अंदर दुखी रही. शाम होने से पहले सब वापिस चले गए इस दौरान अमित को कई बार फ़ोन किया गया पर उसने फ़ोन नहीं उठाया. करिश्मा जाते वक़्त भी अमित का इंतज़ार करती रही पर वो नहीं आया. एक बार फिर वो निराश हो गयी थी और अपनी उस भूल पर पचता रही थी.

‘ कहाँ था तू ? कितने फ़ोन किये तुझे , सब तेरा hi इंतज़ार कर रहे थे जाते वक़्त भी . और तू है क्या घर ठहरता hi नहीं. खाना खाया क नहीं ?’

माँ ने घर आते hi मेरी खिंचाई कर दी. पर साथ hi ममता भी दिखने लगी और मेरे कुछ कहने से पहले hi मेरे लिए खाने को ले आयी .

गौरी म : अब बोल कहाँ था ?

अमित : माँ वो मैं रही क पास चला गया था. इतने दिनों बाद आया था न तो सोचा उस से मिल लूँ. दीदी को तो शहर में मिल hi लेता हूँ.

गौरी म : पर घर आये मेहमानों क साथ भी तो बैठना चाहिए न.

‘ अरे दीदी आप भी ऐसे hi बात को खींच रही हैं. मिल तो लेता है सब से शहर में . वो तो हम hi हैं जिन्हे ये हफ्ते में एक दिन hi दीखता है. ‘

दीपिका ममी भी आरव को गॉड में उठए हमारे पास अति हुई बोली.

गौरी म : ठीक कह रही है तू. हफ्ते में एक दिन क लिए अत है और उसमे भी पाऊँ घर नहीं टिकते इसके.

अमित : माँ मैं न आपको अपने साथ hi ले जाऊंगा शहर फिर आपकी साडी शिकायत दूर हो जाएगी.

दीपिका म : और बाकि सब का क्या ? सिर्फ दीदी को hi प्यार करते हो क्या ??

अमित : मम मेरा मतलब था आप सब को hi साथ ले जाऊंगा.

गौरी म : कोई ज़रूरत नहीं हमें वहां ले जाने की. तू अपनी पड़े ख़तम कर क जल्दी से वापिस आजा बस. मैं दूध लती हूँ गरम कर क पता नहीं क्या खता है कमज़ोर होता जा रहा है दिनों दिन .

माँ उठ कर किचन में गयी तो दीपिका ममी मेरे करीब सरक गयी .

दीपिका म : कहाँ थे इतने देर ?

अमित : बताया न रही क साथ था.

दीपिका म : फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे फिर ??

अमित : वो मुझे पता नहीं चल फ़ोन साइलेंट था

दीपिका म: अब मुझसे तो मत छुपाओ. मैं जानती हूँ करिश्मा की वजह से तुम घर नहीं आये . यही बात है न?

अमित : जब पता है तो पूछ क्यों रही हैं?

दीपिका म : वैसे तुझे क्या लगता है क्यों आयी थी वो यहाँ ?

अमित : पता नहीं पर वो सॉरी बोल रही थी. मुझे लगा था क वो मेरी शिकायत करेंगी.

दीपिका म : मुझे भी पहले उसे देख कर गुस्सा आया था पर जब उसकी आँखों में पछतावा देखा तो मैं समझ गयी क वो शर्मिंदा है अपने किये पर. इसका मतलब यही है क उसे सब सच पता चल चूका है और ये बात तो सिर्फ रमा दीदी hi बता सकती है न.

मैं दीपिका ममी की बात पर उनकी तरफ चौंक कर देखने लगा.

दीपिका म : ऐसे क्या देख रहा है ? सोच क ये बात दीदी ने कैसे बताई होगी करिश्मा को? एक माँ कैसे कह सकती है अपनी रासलीला क किस्से अपनी बेटी से. वो कितनी मजबूर हुई होगी और ये सब उन्होंने किया होगा सिर्फ तुम्हारे लिए ताकि तुम पर इलज़ाम न आये.

दीपिका ममी की एक एक बात सच थी जिस पर मैंने अभी तक ध्यान नहीं दिया था.

दीपिका म : ज्यादा सोच मत, रमा दीदी ने साबित कर दिया है वो तुम्हे बहुत प्यार करती हैं. इस लिए करिश्मा का गुस्सा उन पर मत निकल. तुमने उन्हें अपने प्यार से सहारा दिया था अगर तुम वो सहारा उनसे छीन लोगो तो वो टूट जाएँगी और फिर उनकी पूरी फॅमिली पर इसका असर पड़ेगा. घर का आधार तो औरत hi होती है न.

मैं दीपिका ममी की बातें सुन कर दुविधा में पद गया था. कहाँ मैंने सोचा था क अब कभी रमा आंटी क पास नहीं जाऊंगा पर अब दीपिका ममी की बातों से मुझे आंटी की वेदना का एहसास हो रहा था. इसमें उनकी तो गलती नहीं थी. उन्होंने तो जो किया वो एक माँ होने क नाते किया. अपनी बेटी की खुशियों क लिए किया. तभी माँ दूध ले कर आ गयी तो दीपिका ममी ने बात बदल दी.

दीपिका म: तुझे ज़रा भी फ़िक्र है . कामिनी दीदी बीएड रेस्ट पर हैं तो क्या तेरा फ़र्ज़ नहीं बनता कुछ देर उनके साथ बैठने का बात करने का. चल ये सब ख़तम कर क दीदी क पास भी बैठ थोड़ी देर.

गौरी म : ठीक कह रही है छोटी. तू कामिनी क पास नहीं बैठता बस शकल दिखा कर गायब हो जाता है. चल ये दूध ख़तम कर क कामिनी क पास भी बैठ ले ज़रा.

अमित : ठीक है माँ मैं अभी जाता हूँ दूध वहीँ पि लूंगा.

मैं दूध का गिलास लिए कामिनी ममी क hi पास चला गया. वो बीएड पर लेती हुई थी . मुझे देखते hi उनके चेहरे पर रौनक आ गयी. सच में मैंने कितने दिनों से कामिनी ममी को समय hi नहीं दिया था इसका एक कारन ये भी था क वो कमरे में hi रहने लगी थी डॉ ने उन्हें बीएड रेस्ट को कहा था. मैं कामिनी ममी क पास बैठ तो वो थोड़ा सा उठा कर बीएड से तक लगा कर बैठ गयी.

अमित : कैसी हैं आप ममी ?

कामिनी म : मैं ठीक हूँ , तुम कैसे हो ? आ गयी यद् अपनी इस ममी की ?

अमित : कैसी बात करती हो ममी , मैं आप को भूला hi कब हूँ . इधर उधर भागदौड में वक़्त निकल जाता है पर मैं तो हमेशा आपको यद् रखता हूँ.

कामिनी म : जानती हूँ पर क्या करूँ. तुम पास नहीं होते और इस हालत में मैं तुम्हे यद् करती रहती हूँ

अमित : इतना यद् भी मत करिये ममी वर्ण बचे पर असर पड़ेगा.

कामिनी म : ाचा है न , मैंने सुना है इस हालत में जिसे यद् करो बचा वैसा hi होता है. मैं चाहती हूँ क मेरा बचा बिलकुल तुम्हारे जैसा हो.

कामिनी ममी की इस बात पर मुझे इतना प्यार आया क मैंने उन्हें गले लगा लिया और उनके होंठ चूम लिए. कामिनी ममी भी ख़ुशी से मेरे होंठ चूमने लगी.

कामिनी म: इस प्यार क लिए कितना तरस रही थी मैं. अब तो जल्दी से तुम्हारी गोद में हमारे बचे को दाल कर तुम्हे एक और बचे का बाप बनाना चाहती हूँ मैं.

अमित : मैं तो आपको कब से माँ बनते देखना चाहता हूँ. आप नहीं जानती मुझे कितनी ख़ुशी होगी जब आप माँ बनेंगी.

कामिनी म : ये दब तुम्हारी वजह से हो तो है. वर्ण मैं कभी माँ नहीं बन पति. मैं तुम्हारे साथ क्या क्या नहीं किया और तुमने फिर भी मुझे वो ख़ुशी दी जो अनमोल है.

अमित : शहहह .. ऐसा मत सोचिये , आप न सब से प्यारी हो. पहले गुसा करती थी पर प्यार भी उससे कहीं ज्यादा किया आपने मुझसे. अब बस आप जल्दी जल्दी माँ बनो और देखना घर में कितनी खुशियां आएँगी. अजय मां कितने खुश होंगे

कामिनी म: वो तो होंगे hi , बहुत ख्याल रखते हैं वो आजकल मेरा.

अमित : वो तो शुरू से hi ऐसे हैं. ाचा है न मुझे चिंता नहीं उनके होते आपकी.

कामिनी म : पर मैं चाहती हूँ जब मैं माँ बेबी तुम मेरे पास हो. ज्यादा टाइम नहीं है अब. इस लिए कहीं दूर मत जाना

अमित : ऐसा hi होगा आप चिंता मत करो.

इसके बाद मैंने कुछ देर और कामिनी ममी क साथ प्यार भरी बातें की और फिर सबके साथ रत का खाना खाया. अपने कमरे में आ कर मैंने रीमा से कुछ देर बातें की और फिर लेट गया . माँ रत को मेरे लिए दूध का गिलास ले आयी

गौरी म : दूध पिए बिना hi लेट गया तू ? चल दूध पि ले.

अमित : बैठो माँ आप क साथ तो बात करने क वक़्त hi नहीं मिलता

गौरी म : वक़्त तब मिले न जब तुझे अपनी माँ का ख्याल आये. जब देखो तब कोई न कोई काम तुझे यद् आ जाता है. सब क लिए टाइम है तेरे पास बस अपनी माँ क लिए hi नहीं है.

अमित : ऐसा मत कहो माँ , आप से बढ़कर तो कोई भी नहीं है मेरे लिए. आप ने hi तो मुझे ऐसा बनाया है. मैं जो कुछ भी हूँ आपकी और बाबा की वजह से हूँ वर्ण लोग तो मुझे मनहू..........

गौरी म : मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) ख़बरदार अगर खुद को कुछ कहा तो. पागल हैं वो लोग जो तुम्हे ऐसा वैसा कुछ कहते हैं. तुम क्या हो कोई मेरे दिल से पूछो. इस घर की खुशियां सिर्फ तुमसे है सिर्फ तुमसे. मेरा बस चले तो तुम्हे दुनिया से छुपा कर रख लूँ. तू मेरा बीटा है मेरा. तू किसी की ऐसी वैसी बात मत सुना कर.

माँ सच में मुझसे कितना प्यार करती थी. एक हाथ से गिलास मेरे मुँह को लगा कर वो मेरा सर सहलाने लगी. मैं उनको देखता हुआ दूध पिने लगा . दूध ख़तम होते hi माँ ने गिलास साइड में रखा और उठ कर दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आ गयी.

गौरी म : तू नाराज़ है क्या मुझसे ?

अमित : नहीं तो , आप ऐसा क्यों पूछ रही हैं?

गौरी म : वो पिछली बार जब तू आया था तो करवा चौथ की वजह से उस दिन मैं तेरे बाबा क साथ .....

अमित : आप ऐसा क्यों सोच रही हैं? बाबा का हक़ सबसे पहले है न आप पर. मैं भला इस बात पर क्यों गुस्सा करूँगा?

गौरी म : पर मुझे ाचा नहीं लग रहा था . तुम कितने खुश थे उस दिन मुझे वैसे देख कर . पर मैं तुझे छोड़ कर उनके पास चली गयी .

अमित : क्या माँ , अरे इसमें बुरा लगने वाली क्या बात है? वैसे आप लग तो सच में कमल की रही थी उस दिन.

गौरी म : शरमाते हुए ) शर्म नहीं आती अपनी माँ से ऐसे बात करते हुए?

अमित : इसमें कैसी श्रम ? मैंने तो वही कहा जो सच है. आप आज भी बिलकुल नवयुवतियों की तरह खूबसूरत हैं.

गौरी म : चपत मरते हुए ) धत्त , बड़ी बातें बनाने लग गया है तू. इतना सा था जब मेरी गॉड में आया था तू और आज इतना बड़ा हो गया है क मुझे ये सब कह रहा है.

अमित : जो भी हूँ जैसा भी हूँ आपका hi हूँ न माँ. मैं तो बस आपको खुश देखना चाहता हूँ.

गौरी म : सबसे बड़ी ख़ुशी तो मेरी तुम hi हो. और दूसरी भी तुमने दे hi दी है.

माँ ने नज़रें झुका कर अपने पेट पर हाथ फेरा तो मैंने भी उनके पेट पर हाथ रख लिया.

अमित : आप नहीं जानती माँ वो दिन कितना खुशनसीब होगा जब आप माँ बनोगी. मैं कब से आप को माँ बनते देखना चाहता था.

गौरी म : तुम न होते तो मैं कभी माँ बन hi नहीं सकती थी . लोग मुझे बाँझ hi कहते

अमित : माँ क मुँह पर हाथ रखते हुए ) ऐसा मत कहो माँ .

गौरी म : यही तो सच है . पहले तुम मेरी गॉड में आये तो मुझे तसल्ली हुई . माँ न बन क भी माँ बन गयी थी . और अब तो सच में माँ बनने वाली हूँ. पर जो भी हो मेरे लिए तुम hi सब से पहले रहोगे. तुम्हारी जगह मैं किसी को नहीं देने वाली.

अमित : माँ को गले लगते हुए ) ओह्ह माँ .. तुम न सबसे अछि हो.

गौरी म : और तुम मुझसे भी अचे. चलो अब आराम से लेट जाओ. मैं आज अपने बेटे क साथ hi सोऊंगी.

अमित : मैं भी यही चाहता था.

मैंने उठ कर लाइट बंद कर क जीरो का बल्ब ों किया और आ कर बीएड क पर माँ क साथ चिपक कर लेट गया. माँ ने मेरा मुँह अपनी छाती पर डाब लिया और मेरा सर सहलाने लगी. माँ क दूध पहले से बड़े हो चुके थे . उनकी दूध की घाटियों में मुँह दबाते hi उसकी मधुर सुगंध मेरी सांसों में घुलने लगी और मैंने अपना मुँह वहां और भी ज्यादा दबा दिया.

गौरी म : कक्कक्स क्या करते हो सीसीसी

अमित : माँ आपके ये दूध पहले से बड़े हो गए हैं न?

गौरी म : हम्म्म

अमित : क्या इनमे दूध भर गया है ?

गौरी म : हम्म

अमित : मैंने आपका दूध नहीं पिया न ??

गौरी म : कक्कक्स अब पि लेना जब आएगा . पहले तो सीसीसी कभी था hi नहीं .

माँ मेरा सर खुद hi अपने बूब्स पर दबाने लगी थी. मैं भी माँ क आगोश में गरम होने लगा था . मैंने अपना हाथ माँ क दूध पर रख कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया . माँ भी मेरा सर ज़ोर से दबाने लगी. दूध दबाते दबाते मैं माँ क ऊपर आ गया और माँ ने भी टंगे खोल कर मुझे जगह दी. मेरा लैंड अब अकड़ कर पूरा तनाव में आ चूका था जो माँ की छूट पर दस्तक दे रहा था .

गौरी म : आअह्ह्ह कक्कक्स कितने दिनों से ये तुम्हारे प्यार क लिए तरस रहे थे बीटा आअह्ह्ह सीसीसी आज इन्हे अचे से प्यार कर ले .

अमित : जैसा तुम कहो माँ उम्मम्मम

मैंने माँ क होंठों पर अपने होंठ रख दिए तो माँ भी अब मुझे किश कर ते हुए मेरा सर सेहला रही थी. मैंने एक हाथ निचे ले जा कर माँ की बायीं तंग को अपनी दये हाथ से अपने ऊपर कर क मसलना शुरू कर दिया. माँ की सदी घुटनो तक ऊपर हो गयी थी जिसे मैंने जांघों क जोड़ तक सरका दिया . माँ पूरी गरम हो चुकी थी और मेरी T-shirt नोच रही थी मैंने किश तोड़ कर ऊपर हो कर अपनी T-shirt निकल दी और माँ क पाऊँ को पकड़ कर उठाते हुए उनके पाऊँ को चूमने लगा . माँ एक तक मुझे देख रही थी . माँ क दोनों ूँ को बरी बरी चूमने क बाद मैंने उनके दोनों पाऊँ जोड़ कर टांगों को होर हवा में उठा दिया और उनकी गौरी पिंडलियों को चूमते हुए जांघों तक आ गया. माँ लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी. मैंने उनकी पेंटी को दोनों तरफ से पकड़ कर खिंचा तो उन्होंने खुद hi अपनी कमर उठा दी. पेंटी को पाऊँ से निकल कर मैंने उनकी जांघें फैलाई और उनकी छूट को एक बार देखा. छूट एक डैम साफचक थी बालों का नमो निशान तक न था .

अमित : माँ आपने आज hi इसे साफ़ किया है क्या ??

गौरी म : हम्म्म कक्कक्स तुम्हे ाचा लगता है न यहाँ सीसीसी उम्म्म आअह्ह्ह्ह

मैंने बिना जवाब दिए उनकी छूट पर अपने होंठ लगा दिए और उसे चूसने लगा. माँ अपनी कमर हिलने लगी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी .

गौरी म : आअह्ह्ह कक्कक्स आअह्ह्ह्ह खा जा आअह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़

माँ लगातार सिस्का रही थी और मैं अपना काम करता जा रहा था. माँ ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पायी और अपना पानी निकल दिया. मैंने उनकी छूट को चूस कर साफ किया और अपना लोअर अंडरवियर एक झटके में उतर कर उनके ऊपर आने लगा तो उन्होंने मुझे पलट के लिटा दिया . मैं हैरानी से उन्हें देख रहा था.

गौरी म : हर बार तू hi करता है न आज मैं करुँगी उम्मम्मम उम्म्म्म साररूउप साररूणुप्प

मेरे देखते देखते माँ मेरे लैंड पर झुकी और लैंड को अपने होंठ में कास के अंदर बहार करना शुरू कर दिया . माँ क होंठों में लैंड क कस्ते hi मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी .

अमित : कक्कक्क्स आअह्ह्ह्ह माआ ये अआप क्या सीसीसी

गौरी म : सारूउप सारूउप सर्रउपपप ुम्माआहहह आज मैं भी तुझे मज़ा दूंगी उम्म्म सारूउप सारूउप सारूउप

माँ मेरा आधा लैंड मुँह में अंदर बहार कर क मुझे मज़ा दे रही थी. माँ क मुँह की गर्मी से hi मेरा लैंड फूल कर फटने को होने लगा. मुझसे तो कण्ट्रोल hi नहीं हो रहा था. मैंने माँ क सर को पकड़ कर अपने लैंड पर दबाना शुरू कर दिया . वो ऑंखें बड़ी कर के मुझे देख रही थी पर मुझे रोका नहीं . मैंने जोश में कुछ ज्यादा hi ज़ोर से लैंड को मुँह में धकेल दिया तो वो खांसने लगी और लैंड को मुँह से निकल दिया .

गौरी म : ाखुन ाखुन ाखुन इतनी ज़ोर से ाखुन ाखुन ाखुन मैं कर रही हूँ न ाखुन ाखुन

फिर माँ मेरे ऊपर आ गयी और सदी को कमर पर इकठी कर क मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने बीएड पर रख कर एक हाथ से मेरा लैंड पकड़ कर छूट पर लगाया और धीरे धीरे नीचे होने लगी . मेरा लैंड धीरे धीरे सरक कर छूट की गहराई में उतर गया.

गौरी म : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स हर बार ये ऐसे लगता है जैसे आआह्ह्ह पहली बार hi जा रहा है कक्कक्स

अमित : आप आज भी कासी हुई हो माँ मैं खुद को रोक नहीं पता हूँ कक्कक्क्स उम्म्म

मैंने माँ को अपने ऊपर झुकाया और उनके होंठ चूमने लगा. माँ क कोमल होंठों को चूमने का अलग hi मज़ा था . माँ मेरे ऊपर झुकी हुई थी जिससे उनकी छूट थोड़ा ऊपर हो गयी तो मैंने अपनी कमर उठा कर धक्के मरने शुरू कर दिए . माँ की सिसकियाँ मेरे मुँह में hi दबने लगी . मैंने उनकी पीठ को दबा रखा था और दूसरे हाथ से सदी क नीचे से हाथ दाल कर उनकी गांड को मसलने लगा . थोड़ी देर इस पोज़ में माँ को छोड़ने क बाद मैंने उन्हें साइड में लिटा दिया और उनके ऊपर आ गया. माँ क पाऊँ को कन्धों पर रख कर मैंने फिर से अपना लैंड उनकी छूट में घुसा दिया .

गौरी म : आअह्ह्ह्ह धीरे आअह्ह्ह कक्कक्स

मैंने माँ क ऊपर झुकते हुए दोनों हाथ उनकी बगल में बीएड पर टिकाये और दंड मरने वाले पोज़ में हो गया . माँ की टंगे मेरे कन्धों पर hi थी और मेरे इस तरह ऊपर झुकने से उनकी कमर बीएड से थोड़ी ऊपर उठ गयी थी .

गौरी म : आअह्ह्ह ककक आराम से आअह्ह्ह ककक उफ्फ्फ्फ़ मेरी कमर आआह्ह्ह आराम से ाःह मेरे पैन तो नीचे कर दे आअह्ह्ह माआ कक्कक्क्स आआह्ह धीरे धीरे आअह्ह्ह्ह

माँ की ऐसी बातें सुन कर मेरी स्पीड बढ़ गयी और ऐसे धक्कों से बीएड भी हिलने लगा था . माँ की टाँगें मेरे कन्धों पर उनके सर क पास थी. उनका पेट फूल चूका था जिस वजह से उन्हें तकलीफ हो रही थी . मैंने और ज्यादा उन्हें तकलीफ न देते हुए लैंड बहार निकल लिया और बीएड से नीचे उतर कर माँ को पाऊँ से पकड़ कर घसीट कर बीएड से नीचे खिंच लिया. माँ जल्दी से नीचे उतर कर घोड़ी बन गयी और अपने हाथ बीएड पर रख लिए .

मैंने उनकी सदी को उनकी कमर रखा और लैंड को फिर से छूट में घुसा दिया .

गौरी म : आआह्ह्ह्ह कक्कक्स जल्दी कर बीटा आअह्ह्ह्ह कक्कक्स आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

मैंने उनकी कमर को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने शुरू कर दिए . वो मेरे धक्को से आएगी को गिरने को होती पर मैं उन्हें कमर से ज़ोर से पकड़ कर रखता. कुछ hi धक्कों में माँ फिर से चरम पर पहुँच गयी और मेरे लैंड पर गरमा पानी की बौछार कर दी.

गौरी म : आआह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्ह मैं गयी ाःह आअह्ह्ह सीसीसी आह्ह्ह्हम्म्म आअह्ह्ह हहहह हहहह हहहह

माँ बीएड पर hi आगे को गिर गयी और ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी. मैंने उनके घुटने बीएड पर टिकाये . उनकी कमर घुटनो पर थी और आगे का धड़ बीएड पर . वो ज़ोर ज़ोर से सांसे ले रही थी. इस पोज़ में माँ क गोर गोर चूतड़ मेरे सामने थे. और उनके बीच छिपा हुआ उनकी गांड का सुराख़. बड़े दिनों से मैंने उनकी गांड नहीं मरी थी तो मेरा दिल अब उनकी गांड मरने को होने लगा . मैंने उनके चूतड़ सहलाते हुए झुक कर उन्हें चूम लिया

अमित : माँ आपके ये तरबूज़ कितना गोल मुलायम और बड़े बड़े हैं उम्म्म्म दिल करता है इन्हे खूब प्यार करूँ उनममम

गौरी म : हहहह हहहह कक्कक्स न कर बीटा वर्ण कल ठीक से चल नहीं पाऊँगी ककक पहले hi तुमने इनका साइज बढ़ा दिया है कक्कक्स

मैंने गांड में उंगली घुसाई तो माँ क मुँह से लम्बी सिसकी निकल गयी .

अमित : क्या करूँ माँ आपकी गांड देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता ये बहुत hi प्यारी है

गौरी म : कक्कक्स ाः तुझे शर्म नहीं आती सीसीसी कैसे गंदे नाम ले रहा है कक्कक्क्स न कर न

अमित : प्लीज माँ करने दो न कितने दिन हो गए हैं मेरा बड़ा दिल कर रहा है यहाँ करने का

गौरी म : ककक आह्हः तेरा बहुत बड़ा है बीटा ककक बहुत दर्द होती है जब अंदर जाता है ये मुसल आआह्ह्ह्ह कक्कक्स फिर भी तेरा इतना hi मन है तो कर ले

माँ की इजाज़त मिलते hi मैंने छूट रास से भीगा हुआ लैंड उनकी गांड पर सेट किया और धीरे धीरे अंदर करना शुरू कर दिया. माँ की गांड बहुत टाइट थी और मेरा लैंड भी फास्ट हुआ जा रहा था .

गौरी म : आआह्ह्ह्ह बीटा आराम से आअह्ह्ह्ह ककक माआआ आराम से आअह्ह्ह्ह

मैंने धीरे धीरे कर क आधे से ज्यादा लैंड गांड में सरका दिया . माँ को दर्द हो रहा था और वो अपनी गार्डन को टाइट किये हुए थी. मैंने उतना hi लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. माँ को ज्यादा दर्द न हो इस लिए मैं एआरएम से hi अंदर बहार कर रहा था. कुछ hi पलों में जब लैंड आसानी से अंदर बहार होने लगा तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

गौरी म : आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आआह्ह्ह अअअअअअ आअह्ह्ह एआरआम से आआह्ह्ह आआह्ह एआई आआअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह

मैंने एक हाथ उनकी छूट पर लेजाकर उनकी छूट मसलने लगा. माँ एक बार फिर से गरम हो गयी और अपनी कमर खुद hi हिलने लगी. माँ को मस्ती में अत देख मैंने भी रफ़्तार बढ़ा दी और धक्के ज़ोर से मरने लगा . कुछ hi देर में hi माँ फिर से झाड़ गयी और मैं भी अब माँ की टाइट गांड की गर्मी की ज्यादा देर नहीं बर्दाश्त कर सकता था इस लिए अंतिम धक्के ज़ोर से मरने लगा. माँ समझ गयी क मेरा होने वाला है

गौरी म : आआह्ह्ह आआह्ह्ह अपना पानी आगे निकलना बीटा ाःह आआअह्ह्ह चोऊ आअह्ह्ह आठ ककक

अमित : आअह्ह्ह्ह एहहह आहहह कहाँ माँ कहाँ आगे जल्दी बोलो

गौरी म : आअह्ह्ह आह्हः आएगी बीटा आअह्ह्ह सीसीसी जल्दी आअह्ह्ह आगे छःहोंऊ छूट में आअह्ह्ह ाअघ

मैंने लैंड को गांड से बहार निकला और एक झटके से छूट ने घुसा दिया. और 2-4 धक्के मर कर अपना पानी उनकी छूट ने छोड़ना शुरू कर दिया . माँ की गांड क सुराख़ अभी भी खुला हुआ था. मेरे लैंड ने 5-7 पिचकारियां छूट में छोड़ी और पूरा वीर्य छूट में निकलने क बाद मैं माँ क ऊपर hi देह गया. कुछ देर हम दोनों hi अपनी साँसे सँभालते रहे.

गौरी म : ुह्ह्ह्ह हहहह अब तो छोड़ दे कितना भरी है तू. हहहह उतर मेरे ऊपर से मुझे बाथरूम जाना है.

मैं माँ की बगल में लुढ़क गया तो माँ बीएड से नीचे उतरी. पाऊँ नीचे रखते hi उनके मुँह से सिसकी निकल गयी.

गौरी म : आअह्ह्ह्ह कक्कक्स कर दी न हालत ख़राब कक्कक्क्स अब सुबह ठीक से चला भी नहीं जायेगा .

माँ अपनी सदी को कमर पर hi पकडे धीरे चलती हुई बाथरूम में घुस गयी. कुछ देर बाद वो वापिस आयी और मेरे साथ hi बीएड पर लेट गयी.

अमित : माँ एक बात पूछूं ??

गौरी म : हम्म्म्म

अमित : आपको मुझ पर गुस्सा तो नहीं ? मैंने आपके साथ ये सब .....

गौरी म : शह्ह्ह्हह्ह ... पहले मुझे गुस्सा आया था पर फिर समझ आया क ये सब भगवन की hi मर्ज़ी थी. और अब मुझे भी तेरा प्यार करना ाचा लगता है. अगर ऐसा नहीं होता तो क्या मैं खुद तेरे पास आती?? ऐसा कुछ मत सोचा कर. मैं जानती हूँ तू मुझे कितना ोये करता है . और मैं भी तुझे इतना hi प्यार करती हूँ. अब सो जा आराम से पहले hi इतनी देर हो गयी है. उम्म्म्म

माँ ने मेरे होंठों पर किश की और मैंने भी उन्हें वैसे hi जवाब दिया . फिर हम दोनों एक दूसरे की बहिन में सो गए. अगली सुबह मैं जब उठा तो माँ जा चुकी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ आज उतने दिनों बाद कॉलेज जाना था और आज से मुझे दिव्या मौसी क घर जाना था. माँ ने जल्दी से मेरे लिए नाश्ता बना दिया और मैंने घर से निकल गया . मैं सीधा दिव्या मौसी क घर hi गया. मुझे देख कर दिव्या मौसी क चेहरे पर रौनक आ गयी और मुझे गले से लगा लिया .

दिव्या मौसी : तुम आ गए . तेरा बैग कहाँ है?

अमित : वो बैग यहीं है मैं शाम को लेता आऊंगा. राधा तैयार है ?

दिव्या मौसी : हाँ वो तैयार हो रही है. नाश्ता करोगे न ?

अमित : नाश्ता तो मैंने कर लिया है मौसी आप राधा को करवा दीजिये. दोपहर का खाना आपके हाथ का खाऊंगा .

दिव्या मौसी : मुस्कुराते हुए ) तेरी पसंद का hi कहाँ बनाउंगी आज . देर मत करना. चल आजा बैठ अब .

मैं अभी अंदर सोफे पर बैठा hi था क अंदर से राधा बहार निकली और मुझे सामने देख कर वो भी खुश हो गयी और तेज़ी से मेरे गले लग गयी.

अमित : अरे ये क्या कर रही हो . मौसी क्या कहेंगी

राधा : गले लगे हुए ) क्या कहेंगी ? कुछ नहीं कहेंगी.

अमित : छोडो तो अब क्या बच्चों जैसे कर रही हो.

राधा : पता है आज सुबह तुम्हारा hi सपना देख रही थी . और देखो तुम मेरे सामने हो.

अमित : ाचा !! क्या सपना देख रही थी?

राधा : मैं क्यों बताऊँ ?? सपना बताया नहीं करते .

दिव्या मौसी : चलो अब नाश्ता करलो कॉलेज भी जाना है तुम दोनों को .

दिव्या मौसी खाने की प्लेट लती हुई बोली. तब तक हम अलग हो चुके थे. राधा जल्दी से खाना खाने लगी पर उसका ध्यान मेरी तरफ hi था . मेरे न करने क बाद भी राधा ने अपने हाथों से मुझे कुछ निवाले खिला hi दिए. उसके बाद राधा उछाल कर मेरे पीछे बाइक पर बैठ गयी और कल्पना को फ़ोन कर क बता दिया क वो मेरे साथ कॉलेज जा रही है. राधा क चेहरे पर अलग hi ख़ुशी दिख रही थी पता नहीं उसकी वजह क्या थी. पर वो बाइक पर बैठी भी मेरे साथ चिपक रही थी .

कॉलेज पहुँचते hi पार्किंग में कल्पना रीमा मीनल नेहा दीदी और मोहित मिल गए. मोहित आते hi मुझसे गुस्सा करने लगा पर मैंने बात को ताल दिया पर कल्पना भी आज अलग hi मूड में थी . वो मुझसे गुस्सा थी और मुझसे बात नहीं कर रही थी. जबकि नेहा दीदी ने भी कुछ नहीं कहा मुझे ये बात कुछ ठीक नहीं लगी. क्लास का टाइम हो रहा था सब अपनी अपनी क्लास में चल दिए .

क्लास में आज फिर मेरा सामना अपनी चिर परिचित विरोधी चन्दर्कांता से हुआ पर आश्चर्यजनक रूप से वो आज मुझे देख कर गुस्सा नहीं हुई बल्कि एक कामिनी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गयी. मुझे उसकी मुस्कान का राज़ तब समझ आया जब क्लास में पेओन ने आकर मेरा नाम लेकर कहा क प्रिंसिपल ने ऑफिस में बुलाया है. पेओन क आते hi चन्दर्कांता की मुस्कान और गहरी हो गयी.

अमित : मैं जॉन मैडम ??

चन्दर्कांता: मुस्कुराते हुए ) हाँ हाँ जाओ जाओ , जल्दी जाओ . और आराम से वापिस आना .



मैं मन में उसे गलियां देता हुआ बहार निकल गया . मोहित और कल्पना मुझे जाते हुए देख रहे थे. वो भी समझ गए थे ज़रूर चन्दर्कांता ने hi कुछ किया है. खैर मैं चल दिया प्रिंसिपल क ऑफिस की तरफ मन में सोचते हुए क पता नहीं अब क्या लफड़ा होने वाला है .
 
भैया कोशिश तो पूरी है .
 
अपडेट 192



‘ आओ आओ बीटा , कैसे हो तुम ? कहीं गए थे क्या ?’

ऑफिस एंटर होते hi प्रिंसिपल सर ने मुझसे सवाल पूछा .

अमित : जो सर वो फॅमिली में कुछ प्रॉब्लम थी तो मुझे अचानक से जाना पड़ा. सॉरी सर मैं बता नहीं सका जाने से पहले .

प्रिंसिपल: हम्म्म , कोई ज्यादा ज़रूरी बात रही होगी जो तुम ऐसे इतने दिन गायब रहे. चलो कोई बात नहीं वो तुम्हारा पर्सनल मटर है. तुम जानते हो मैंने तुम्हे क्यों बुलाया है ?

अमित : नहीं सर

प्रिंसिपल: देखो बीटा मैं जनता हूँ तुम एक बहुत अचे स्टूडेंट एक अचे खिलाडी और बहुत hi अचे इंसान भी हो. पर बात है डिसिप्लिन की. कोई भी संस्था तभी कामयाब होती है जब वहां डिसिप्लिन हो. और यही बात पर्सनल लाइफ पर भी लागु होती है. तुम्हारे बारे में मुझे कई बार शिकायत मिल चुकी है पर मैंने कभी तुम्हे कुछ नहीं कहा क्यूंकि थोड़ी बहुत ढील तो चलती hi है. मगर इस बार कुछ और भी टीचर्स ने तुम्हारी शिकायत की है और साथ hi मुझे ये भी सुनने में आया है क तुम प्रैक्टिस भी नहीं कर रहे. तुम जानते हो न तुम्हारे लिए वो कितनी ज़रूरी है? अगर तुम खेल पर hi ध्यान नहीं डोज तो कल को कम्पटीशन में कैसे परफॉर्म करोगे. देखो अगर तुम्हे कोई दिक्कत है तो तुम मुझे बता सकते हो. मैं तुम्हारी हर पॉसिबल हेल्प करूँगा.

अमित : जी सर मैं अपनी गलती मंटा हूँ. सॉरी सर. वो मैं पहले चोट की वजह से प्रैक्टिस नहीं कर रहा था मैंने कोच साहब को बताया भी था और फिर पिछले वीक मुझे इमरजेंसी में जाना पद गया. अब आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा सर .

प्रिंसिपल: हम्म्म मुझे तुमसे यही उम्मीद है. बीटा मुझे तुम पर पूरा भरोसा है और मैं आशा करता हूँ तुम मेरा भरोसा नहीं तोड़ोगे .

अमित : मैं आपको निराश नहीं करूँगा सर.

प्रिंसिपल: ठीक है अब तुम जा सकते हो और एक बार वरिंदर सर से ज़रूर मिल लेना.

अमित : जी सर .

उसके बाद मैं ऑफिस से बहार निकल आया और सीधा वरिंदर सर क ऑफिस में गया . वो अभी अपने ऑफिस में hi थे.

अमित : मई ी के इन सर ?

प्रोफ व् : यस के इन ,, अरे अमित तुम ?? आओ आओ बैठो.

अमित : गुड मॉर्निंग सर , आप कैसे हैं सर?

प्रोफ व् : मैं तो भला चंगा हूँ पर तुम कहाँ रहते हो ? आज इतने दिनों बाद देख रहा हूँ तुम्हे?

अमित : वो सर मैं लास्ट वीक कॉलेज नहीं आ पाया था. फॅमिली प्रॉब्लम की वजह से मुझे जाना पड़ा था कहीं.

प्रोफ व् : हम्म्म कोई बात नहीं. अभी प्रिंसिपल सर क पास से आ रहे हो ?

अमित : जी सर

प्रोफ व् : तुम्हे पता चल गया होगा क तुम्हारी शिकायत की गयी है ?

अमित : जी सर

प्रोफ व् : तुम मायूस न हो , ये सब तो होता hi रहता है. ाचा मैंने तुम्हे यहाँ इस लिए बुलाया है क अब तुम्हे अपने खेल पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए. तुम्हे शायद खाना मिली नहीं होगी दिसंबर वाले कम्पटीशन अब जनुअरी में होंगे. तुम लोगों को प्रैक्टिस क लिए और टाइम मिल गया है. पर दिसंबर एक्साम्स की वजह से पड़े पर भी ध्यान देना होगा. मैं बस इतना चाहता हूँ क तुम दोनों जगह ाचा परफॉर्म करो. खेल तो ाचा खेलना hi है पर पड़े भी अब तुम्हे डट कर करनी होगी. तुम्हे फ़ैल करने की तयारी किये बैठे हैं कुछ टीचर. तुम्हे किसी भी चीज़ की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. तुम्हारे साथ कुछ भी गलत नहीं होने दूंगा मैं. बस आज से अपनी पड़े और खेल पर पूरा ध्यान देना बाकि किसी भी बात की चिंता मत करना. अब तुम जाओ कोई बात हो तो किसी भी वक़्त मुझे मिल लेना .

अमित : जी सर मैं ध्यान रखूँगा.

वरिंदर सर से मिलने क बाद मैं वापिस क्लास की तरफ आया तो चन्दर्कांता फिर से मुझे ज़हरीली मुस्कान देने लगी. मैं ख़ामोशी से अपनी जगह पर बैठ गया. कुछ hi पल में बेल्ल बज गयी और चन्दर्कांता मुझ पर हस्ती हुई चली गयी. उसके बाद मंजू म क्लास लेने आ गयी और फिर ऐसे hi ु के लेक्चर क बाद हमारा कैंटीन लेक्चर शुरू हो गया. मंजू म क निकलते hi हम बहार निकले तो कल्पना शुरू हो गयी.

कल्पना : क्या कह रहे थे प्रिंसिपल सर ? ज़रूर ये सारा किया करता चन्दर्कांता का hi होगा . कैसे बत्तीसी दिखा रही थी वैसे तो चेहरे पे हमेशा गुस्सा hi रहता है इसके.

अमित : कुछ नहीं यार वो इतने दिन से एब्सेंट था तो सर पूछ रहे थे . वरिंदर की बातों से लगता है क चन्दर्कांता क साथ और भी किसी टीचर ने मेरी शिकायत की है और इस बार एक्साम्स में वो मुझे फ़ैल करना चाहते हैं.

कल्पना : ऐसे कैसे फ़ैल कर देंगे ? कर क तो दिखाएँ फिर देखेंगे इनको.

मोहित : वो सब छोड़ पहले ये बता तू उस दिन कहाँ गायब हो गया था और फिर मिला भी नहीं मुझसे? ऐसी क्या दिक्कत हो गयी थी ?

अमित ( मन में ) अब इसे क्या बताऊँ ??

अमित : कुछ नहीं यार वो बस मेरा मूड ख़राब था .

मोहित : तुझे मूड ख़राब करने की क्या ज़रूरत थी ? तुमने जो किया सही किया. बताया मुझे माँ ने .

अमित : शॉकेड ) क्या बताया आंटी ने ?

मोहित : यही क राजीव जीजा जी दीदी पर हाथ उठा रहे थे और तुमने उनको लगा दी. इसी बात से दुखी था न तू ? सच कहूं तो यार जो तूने किया वो तो शायद मैं भी न कर पता और माँ क साथ साथ दीदी भी खुश हैं. तू ऐसे hi मूड ख़राब किये बैठा था. आज चुपचाप घर चलना माँ तुमसे मिलना चाहती है . तूने उस दिन से एक बार भी उनसे बात नहीं की.

कल्पना : ये क्या बात हो रही है कोई मुझे भी बताओ ?

मोहित : बताया तो अभी तुम्हारे सामने .

कल्पना : मतलब पूरी बात बताओ ये सब हुआ क्यों ? ज़रा से झगडे पर तो ये ऐसा नहीं करने वाला ? ज़रूर कोई बात बड़ी hi होगी ?

मोहित : वो दीदी क ससुराल वाले तंग करते थे उन्हें उनकी सास और ननद मिल कर दीदी को बहुत परेशां करते थे . मगर दीदी ने कभी हम लोगों को कुछ बताया नहीं. इस बात अमित गया था साथ और इसके सामने जीजा जी सॉरी राजीव ने दीदी पर हाथ उठाया तो इसने उसे hi थोक दिया.

कल्पना : सच में तुमने ऐसा किया ??? शाबाश मेरे शेर , इसी लिए तो मैं तुम्हे इतना पसंद करती हूँ. पर यार इससे उनकी मैरिड लाइफ तो स्पोइल हो जाएगी न ???

मोहित : हम्म्म , पर अब बचा hi क्या है ? मुझे कल पता चला क वो लोग किसे कैसे दीदी को परेशां करते थे पर दीदी हम लोगों से सब छुपाती रही. सिर्फ इस लिए क पापा को दुःख न पहुंचे क्यूंकि ये शादी उन्होंने hi करवाई थी न अपने जान पहचान क घर में. पर कल पापा भी गुस्सा थे और दीदी को भी कह रहे थे क उन्होंने आज तक बताया क्यों नहीं. पापा तो कल hi कह रहे थे क वो दीदी को अब उस घर में दोबारा नहीं भेजेंगे.

अमित : सॉरी यार मेरी वजह से यह सब हो गया. अगर मैं वहां न जाता तो शायद ऐसा न होता.

मोहित : अरे ये कैसी बातें कर रहा है तू? जो कुछ कल दीदी ने बताया ाशिए तो यही लगता है क ये एक न एक दिन होना hi था . तुमने तो बिलकुल ठीक किया और पापा भी इस बात से खुश थे. कह रहे थे क तुमने भाई होने का फ़र्ज़ ऐडा किया है. वो तुमसे खुद मिल कर बात करना चाहते थे. वो तो कल hi गाओं आ रहे थे पर दीदी ने मन कर दिया . वो खुद तुमसे बात करना चाहती थी. कह रही थी तुम इसी बात से नाराज़ हो. यार तुझे नाराज़ होने की ज़रूरत नहीं. जो भी तूने किया वो एक डैम सही किया. अपने दिल पर कोई बोझ न रखिओ.

इतने में बातें करते करते हुए हम कैंटीन में आ गए. अभी हम अपनी जगह बैठे hi थे क उधर से पूरी फ़ौज आ गयी और आते hi मुझ पर चढ़ाई कर दी. कमांड संभाली थी शीना ने और उसका साथ दे रही थी शिवानी . शालू भी कुछ नाराज़ थी और राधा रीमा तो मज़ा ले रही थी इस सबका. बहती गंगा में हाथ धोने को मीनल और कल्पना भी लग गयी.

शीना : आ गए ? मिल गया टाइम ? काम से काम बाँदा बर्थडे hi विश कर देता है. गिफ्ट तो दूर मुँह से एक बार विश तक नहीं किया तुमने . बस यही है दोस्ती ? यही इज़्ज़त है हमारी ?

शिवानी : बाँदा काम से काम हलचल hi पूछ लेता है , अपना अटपटा hi बता देता है और नहीं . तुम्हे तो कोई फरक hi नहीं पड़ता.

मीनल : और क्या ? इतनी अछि पार्टी थी और ये जा कर दीदी क ससुराल में बैठा था . भला ये भी कोई बात हुई.

मोहित : मीनल यार काम से काम तुम तो कुछ मत कहो इसे.

कल्पना : क्यों न कहे ? बात कोई भी हो काम से काम बताना तो चाहिए न. 2 दिन फ़ोन बंद कर क ये कहाँ गायब था? दीदी आप इसे छोड़ना मत मैं आपके साथ हूँ.

शीना : पता है मैं कितने दिनों से सोच रही थी क मेरे बर्थडे पर हूँ सब साथ होंगे साथ में सेलिब्रेट करेंगे . पर नहीं तुम्हे तो अपनी hi मर्ज़ी करनी होती है. किसी का दिल टूटे तो टूटे तुम्हे क्या.

अमित : अरे यार मैं कौन सा मौज मस्ती करने गया था. और मुझे कौन सा पता था क मुझे ऐसे जाना पड़ेगा वो तो सब अचानक हो गया. तुमने अपना बर्थडे तो मनाया न. वैसे भी सब तो थे वहां एक क न होने से क्या होता है.

शीना : एक तो मेरे मौऊद का सत्यानाश कर दिया ऊपर से कह रहे हो क्या होता है? अगर पार्टी में सबसे खास मेहमान hi न आये तो पार्टी का मज़ा कहाँ रहता है ? मैं तुम्हे सबसे मिलवाना चाहती थी और तुम आये hi नहीं. मेरा तो बिलकुल मन नहीं था पार्टी का वो तो पापा की वजह से मुझे करना पड़ा सब. अब तुमने मेरे साथ मेरा बर्थडे नहीं मनाया तो देख लेना . कभी बात नहीं करुँगी तुमसे .

कल्पना: शाबाश दीदी ये हुई न बात . अब देखते हैं कहाँ भागते हो.

अमित : पर अब तो पार्टी हो गयी न अब क्या करना है?

शीना : मैं कुछ भी करूँ तुम्हे मेरे साथ मेरा बर्थडे मानना पड़ेगा बस .

अमित : ाचा ठीक है . पर अभी तो आराम से बैठो. और शालू तुम बताओ तुम कैसी हो?

शालू : मैं भी ठीक हूँ . तुम अपनी सुनाओ.? इतने दिनों बाद देख रही हूँ तुम्हे. तुम तो फ़ोन भी नहीं करते और न hi उठाते हो .

अमित : हाँ वो यार थोड़ा प्रॉब्लम थी.

शीना : क्या प्रॉब्लम थी ?

अमित : कुछ नहीं वो बस ऐसे hi तुम्हारे काम की नहीं . दीदी आप नहीं कुछ कहेंगी?

नेहा दीदी : नहीं बस सब ठीक है

दीदी ने बस इतना hi जवाब दिया और ध्यान दूसरी तरफ कर लिया. मुझे दीदी का इस तरह चुप रहना ाचा नहीं लग रहा था और सबके सामने मैं बात नहीं करना चाहता था . खैर ऐसे hi सब क साथ बातें करते करते टाइम का पता hi नहीं चला और लेक्चर की बेल्ल बज गयी . आज तो सब मेरी लेने में hi लगे रहे . राधा और रीमा आपस में खुसर फुसर कर क मज़ा लेती रही जैसे hi लेक्चर ख़तम हुआ और हम वापिस क्लास में चले गए .

छुट्टी क वक़्त फिर से हम सब इकठे hue.Mohit मुझे अपने साथ चलने को कह रहा था और शीना अपने साथ . पर मैंने दोनों को hi मन कर दिया . मैं नेहा दीदी से बात करना चाहता था पर फिर सबके सामने मैं चुप हो गया. और उसके बाद मैं राधा को लिए घर आ गया. दिव्या मौसी ने मेरी पसंद का hi खाना बनाया था. उनके प्यार और ममता से भरे स्वादिष्ट खाने को खाकर मैं सुस्त पद गया और कुछ देर सो गया. फिर शाम को चाय पीने क बाद आज मैं स्टेडियम गया. पहले तो कोच साहब में मेरी क्लास लगायी फिर नीरज भैया क साथ मैंने जैम क पसीना बहाया. आज इतने दिनों बाद एक्सरसाइज करने लगा था तो अछि तरह से कसरत की . उसके बाद मैं मंजू म क घर चला गया क्यूंकि आज से पड़े पर भी ध्यान देना था और वैसे भी मेरा सामान मंजू म क घर ोडा था उस दिन से hi. मंजू म ने आते hi मुझे गले लगा लिया. पर हमारी ोये भरी मुलाकात चाँद पलों की hi थी क्यूंकि शीना भी बीच में टपक पड़ी. शीना क सामने मैंने बस पड़े की . एक घंटा पड़े करने क बाद मंजू म कॉफ़ी बनाने चली गयी तो शीना कहने लगी

शीना : यहाँ से फ्री हो क मेरे साथ चल रहे हो न ?

अमित : नहीं यार आज नहीं किसी और दिन चलते हैं न .

शीना : क्यों आज क्यों नहीं ? अब तो तुम्हारी क्लास भी ख़त्म होने वाली है .

अमित : आज मुझे मौसी क घर जाना है इस लिए आज नहीं.

शीना : तो फिर कल चलोगे न ??

अमित : कल का मैं कह नहीं सकता .

शीना : ये बहुत गलत बात है . इसका मतलब मेरी कोई वैल्यू नहीं न ? इतनी सी बात क लिए भी क्या अब मैं निधि दीदी से सिफारिश करवाऊं? लगता है तभी तुम मानोगे.

अमित : नहीं यार ऐसी बात नहीं है. ाचा कल देखता हूँ अगर टाइम हुआ तो कल कर लेना जो तुम्हारा मन हो . वैसे करना क्या चाहती हो तुम ?

शीना : मुस्कुराते हुए ) अपना बर्थडे स्पेशल बनाना चाहती हूँ . ( मन में ) तुम्हे अपना बनाना चाहती हूँ हमेशा क लिए .

अभी हम बात कर hi रहे थे क मेरा फ़ोन बजने लगा. ये फ़ोन ऋतू सिंह का था. उसने मुझे एक जगह आने को कहा था. मैं जल्दी से उठा और मंजू म शीना को बता कर अपनी बाइक ले कर निकल गया . ऋतू ने मुझे जहाँ बुलाया था वो पुलिस हेडक्वार्टर था . मैं जल्दी से बाइक उडाता हुआ वहां पहुँच गया. मैं जब वहां पहुंचा तो ऋतू थोड़ी परेशां थी और मुझे अपने साथ ले गयी . अंदर एक कमरे में मंजरी क चाचा को कुर्सी पर बंधा हुआ था. उसकी हालत बता रही थी क उसकी अचे से खातिरदारी की गयी है .

ऋतू : देख लो इसे . कल से यहीं पर रखा है इसे और इसके बेटों को भी. कोई f.I.r नहीं करवाई थी इसने सब झूठ बोल रहा था बास्टर्ड

अमित : मगर उसने ऐसा क्यों किया ? शक तो मुझे उसी दिन हो गया था पर मुझसे सचाई जननी है.

ऋतू: अपने मुँह से हो बताएगा ये तुम्हे . कांस्टेबल !!!

ऋतू की बात सुनते hi एक पोलिसवाले अंदर आया और मंजरी क चाचा का सर बालों से पाकर कर ऊपर किया. वो दर्द से कराह था और जैसे होश में hi नहीं था. मगर पुलिस वाले ने उसे 2-3 थप्पड़ मर के होश में लाया .

कांस्टेबल: बता फिर से क्या हुआ था मंजरी क साथ ? रिपोर्ट क्यों नहीं कराइ तूने ? बता वर्ण

श्याम : छोड़ दो साहब मत मारो मैंने बता तो दिया था सब कुछ . अब और मत मारो मैं मर जाऊंगा

कांस्टेबल: तो बता फिर से साडी कहानी शुरू से

श्याम की ज़ुबानी -

मेरा भाई अपनी बेटी और बीवी क साथ मेरे पास आये थे . घर में फंक्शन था इस लिए 2-3 दिन वो लोग मेरे घर रहने वाले थे. मेरा भाई मुझे काम दिलवाने को कह रहा था ताकि वो भी शहर में hi आ जाये. इसी लिए मैंने उसे फैक्ट्री में लगवाने क लिए मैनेजर सर से बात की थी. अगले दिन दोपहर को वो मुझसे मिलने फैक्ट्री आय और उसकी बेटी मंजरी भी साथ आ गयी. मैनेजर सर बिजी थे तो दोनों को बैठा दिया. शाम को जब वो फ्री हुए तो उन्होंने मिलने क लिए बुलाया और उसके बाद मुझे दोनों को फैक्ट्री और काम का दिखने को बोलै. मैं दोनों को अपने साथ फैक्ट्री ले गया. और उसके बाद मैंने उन्हें वापिस मैनेजर साहब क पास ले आया. मैनेजर साहब ने मुझे वापिस काम पर जाने को कहा और बोले क वो मेरे भाई को एडवांस दे कर भेज देंगे. मैं वापिस चल गया. 1 घंटे बाद मुझे खबर मिली क मेरा भाई और उसकी बेटी दोनों की मौत हो गयी है एक्सीडेंट में. मैं भगा भगा आया. मैनेजर साहब में बताया क फैक्ट्री क बहार hi एक ट्रक ने दोनों को कुचल दिया. पर मुझे देख कर ऐसा नहीं लगा तो मैंने उन्हें पुलिस को बुलाने को कहा. मैनेजर साहब मुझे अपने साथ दफ्तर में ले गए और बोले क उन्होंने झूठ बोलै था असल में वो ट्रक क एक्सीडेंट से नहीं मरे बल्कि वो उनकी hi कार से टकरा गए थे रोड पर करते समय. मैनेजर साहब ने बोलै क अगर मैं पुलिस में गया तो वो तो पैसे क डैम पर बच जायेंगे पर गिर मुझे कहीं नौकरी नहीं मिलेगी उल्टा मुझे चोरी क केस में अंदर करवा देंगे. अपना मुँह बंद रखने क बदले में उन्होंने मुझे 10 लाख रूपए और तनख्वाह डबल करने का कहा.

मुज्जे उसकी बात सुन के एक डैम से गुस्सा आ गया और मैं उस पर टूट पड़ा.

अमित ( मरते हुए ) हरामज़ादे तूने मेरी मंजरी का सौदा कर लिया. कुत्ते , अगर वो तेरी बेटी होती तब भी क्या यही करता . मैं तुझे जान से मर दूंगा .

मैंने अभी 5-7 hi घुसे जमाये थे क उस पुलिस वाले और ऋतू ने मुझे पीछे खिंचा पर मैं तभी भी नहीं रुक रहा था तो बहार से 2 पुलिस वाले और आ गए और सब ने मुझे पकड़ लिया

ऋतू सिंह : खुद को सम्भालो अमित ये क्या कर रहे हो? हमें असली कातिल तक पहुंचना है . इसे तो इसके कर्मो की सजा मिल hi जाएगी.

बड़ी मुश्किल से मैंने खुद को रोका. और ऋतू सिंह उससे सवाल करने लगी.

ऋतू सिंह : तूने ये बहुत गलत किया है और तू भी बराबर का दोषी है इस जुर्म में. पर तुझे शक नहीं हुआ उस पर ? वो तुझे इतने पैसे क्यों दे रहा था . एक्सीडेंट केस वैसे भी वो रफादफा करवा सकता था. फिर इतने पैसे किस लिए?

श्याम : ाखुन ाखुन हहहहह हहहहह मुझे शक तो हुआ था मैडम पर मैं क्या करता मैडम. वो बड़े लोग हैं . मैं उनसे लड़ नहीं सकता था इस लिए उनकी बात चुपचाप मन ली. उन्होंने कहा था अगर मैंने मुँह खोला तो अंजाम बहुत बुरा होगा. बाद में मुझे फैक्ट्री में काम करने वाले एक आदमी ने बताया था क मंजरी छत से गिरी थी . और मेरे भाई को उन लोगों ने मारा था. मैंने अपनी और अपनी फॅमिली क लिए मुँह बंद रखना hi ठीक समझा.

मेरा दिल किया क मैं उसे अभी जान से मर दूँ पर मुझे पुलिस वालों ने पकड़ रखा था. मगर मुझसे पहले ऋतू सिंह ने डंडा उठा कर उसे मरना शुरू कर दिया .

ऋतू सिंह : यू बास्टर्ड अपनी बेटी जैसी भतीजी की इज़्ज़त और जान का सौदा करते तुझे शर्म नहीं आयी? कल को तेरी बीवी को कोई उठा लेगा तब भी यही करेगा. इसकी अचे से सेवा करो बेहोश हो जाये तो फिर से होश में ला कर मारो.

ऋतू सिंह मुझे अपने साथ अपने ऑफिस ले आयी. मैं गुस्से में पागल हो रहा था और अपना गुस्सा मंजरी क चाचा को अपने हाथों से मर कर निकलना चाहता था. साथ hi मंजरी क साथ जो कुछ हुआ वो जान कर मेरी आँखों से पानी अपने आप बहने लगा था. ऋतू सिंह ने मेरी ये हालत देखि तो मुझे गले से लगा लिया.

ऋतू सिंह : शांत ,,, शांत हो जाओ ,, खुद को सम्भालो अमित. तुम ऐसे टूट जाओगे तो हम असली मुजरिम को कैसे सजा दिलाएंगे. खुद को सम्भालो .

अमित : कैसे सम्भालूं खुद को ,, कैसे ??? उन लोगों ने मेरी मंजरी क साथ ..... मैं उन लोगों को ज़िंदा नहीं छोडूंगा . मैं एक एक को जान से मर दूंगा.

ऋतू सिंह : तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे . आई बात समझ में. जो करुँगी मैं करुँगी . कानून उसे सजा देगा. तुम अपने हाथ गंदे नहीं करोगे. मैं वडा करती हूँ जिसने भी ये किया है वो चाहे कोई भी हो उसे मैं छोडूंगी नहीं.

अमित : आप से कुछ नहीं होगा , कुछ बही होगा आपसे. इन जैसे जानवरों क लिए एक hi सजा है और वो मैं खुद दूंगा उसे.

ऋतू सिंह : तुम्हे मुझ पर भरोसा नहीं है क्या ? मैंने वडा किया है न तुमसे और मैं वडा निभाऊंगी भी. मैं नहीं चाहती तुम्हारे हाथ गंदे हो और तुम किसी चक्कर में फासो. तुम्हे अपनी फॅमिली को भी तो देखना है. बहुत स ज़िम्मेदारियाँ हैं तुम पर. अपनी लाइफ देखो और फिर अपने से जुड़े लोगों क बारे में सोचो. मैं तुम्हे निराश नहीं करुँगी कसम कहती हूँ.

ऋतू सिंह ने मुझे अपने गले लगा कर समझाया. उसने मुझे पूरा यकीन दिलाया क वो मंजरी को इंसाफ दिलाएगी. मैंने भी उसकी बात को समझा और खुद को कण्ट्रोल किया. पर दिल में फिर भी एक दर्द एक आग जल रही थी. जब मैं शांत हुआ तो ऋतू ने मुझे चेयर पर बिठाया और खुद मेरे पास बैठ गयी.

ऋतू सिंह : अब सब भूल जाओ. मैं कल hi उस मैनेजर को उठा लुंगी और साडी बात सामने आ जाएगी. फ़िलहाल तुम सब कुछ भूल जाओ. अपने दिमाग में कोई भी बात मत रखना. मेरे होते तुम्हे कुछ भी सोचने की ज़रूरत नहीं. अब से ये मेरा पर्सनल केस है . तुम्हारे लिए इतना तो कर hi सकती हूँ .

अमित : थैंक्स आप मेरे लिए इतना कुछ .....

ऋतू सिंह : शह्ह्ह्ह .... अब तुम गैर तो नहीं. मेरे लिए मंजू hi मेरी फॅमिली है और अब तुम भी . इस लिए कुछ कहने की ज़रूरत नहीं. वैसे भी आधी घरवाली तो हूँ hi.

ऋतू ने मुस्कुराते हुए आँख दबाकर ये बात कही तो न चाहते हुए भी मैं मुस्कुरा दिया.

ऋतू सिंह : that’s लिखे ा मन. ऐसे hi खुश रहा करो. बाकि सब टेंशन मुझ पर छोड़ दो. Don’t वोर्री अबाउट एनीथिंग. अब बोलो क्या सेवा करूँ जीजा जी.

अमित : ये आप न मुझे जीजा जी मत कहा कीजिये मुझे ाचा नहीं लगता . कोई सुनेगा तो क्या कहेगा.

ऋतू सिंह : यहाँ कौन है जो सुनेगा हाँ ? मैं अकेले में hi कहूँगी जो कहना है.

अमित : वैसे अब ठीक तो हैं न? सॉरी वो मैं कल आप से बात नहीं कर पाया .

ऋतू सिंह : शुक्र है जनाब को यद् तो आया . अब ठीक हूँ पर कल सारा दिन मैं घर पर hi थी. पाऊँ फैला कर चलते हुए कोई देखता तो क्या जवाब देती ? उफ्फ्फ तुम आम इंसान तो हो hi नहीं. न मन से ना......

ऋतू ने अपनी बात अधूरी hi छोड़ दी पर उसकी आँखों का इशारा देख कर मुझे हंसी आ गयी.

अमित : किसने कहा था वो मुझे ऐसे उकसाने को?

ऋतू सिंह : मुझे क्या पता था क्या बाला हो तुम ? मैं तो बस थोड़ा सा प्यार करना चाहती थी. बस दिल बेईमान हो गया था और गलती कर बैठी .

अमित : ओह्ह्ह गलती !!! ी ऍम सॉरी मैंने आपके साथ ऐसे ......

ऋतू सिंह : तुम फिर से शुरू हो गए? ये सब कहना ज़रूरी है ? मैंने कहा न क वो सब मेरी मर्ज़ी थी.

अमित : आप hi ने तो अभी कहा क आपने गलती करदी.

ऋतू सिंह : वो तो मैंने ऐसे hi कहा था.

अमित : तो वो गलती नहीं थी ?

ऋतू सिंह : नहीं

अमित : आपको ाचा लगा मेरे साथ

ऋतू सिंह : हम्म्म

अमित : एक बात कहूं बुरा तो नहीं मानेंगी आप ?

ऋतू सिंह : कहो , तुम्हारी बात का बुरा कैसे मन सकती हूँ?

अमित : अगर आप मंजू म को और मुझे अपना मानती हैं तो अब से आप भी अकेले रहना छोड़ दीजिये. कुछ वक़्त आप हमारे साथ भी तो बिता सकती हैं न. मतलब आपको अपनी लाइफ भी तो जीनी चाहिए न .

मेरी बात सुन कर ऋतू सिंह कुछ देर खामोश रही और मेरी आँखों में देखती रही . धीरे धीरे उसकी आँखों में नमी आ गयी .

अमित : ये क्या आप तो रोऊ.....

मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी क ऋतू मेरे गले लग गयी और कास क मेरे साथ चिपक गयी. तभी वो हिचकियाँ लेती हुई रोने लगी.

अमित : ये क्या आप तो सच में रोने लगी

मैं ऋतू की पीठ सहलाते हुए उसे चुप करवाने की कोशिश कर रहा था . पर वो लगातार रोये जा रही थी और उसी तरह ज़ोर से मेरे गले लगी हुई थी. इतनी सख्त अफसर बच्चों की तरह रो रही थी . मुझे महसूस हो रहा था उनका अकेलापन. मैंने उन्हें खुद से अलग करने की कोशिश नहीं की और उन्हें रोने दिया ताकि उनका मन हल्का हो जाये . अभी कुछ देर पहले वो मुझे समझा रही थी और अब मैं उन्हें. खैर कुछ देर बाद जब उनका मन हल्का हुआ तो वो मुझसे अलग हुई. मैंने उनके चेहरे को हाथों से साफ किया.

अमित : आप तो इतनी कमज़ोर नहीं थी फिर ऐसे क्यों ??

ऋतू सिंह : मैं भी तो इंसान hi हूँ न पत्थर तो नहीं ? मेरे अंदर भी दिल है मुझे भी अपनों की ज़रूरत है. पर किस्मत ने मुझे इतना अकेला कर दिया था क मैंने खुद को मजबूत दिखने क लिए पत्थर दिल होने का भेस बना लिया. वर्ण मैं भी मंजू की तरह प्यार करने वाली hi लड़की थी. बस कोई सच्चे दिल प्यार करने वाला hi नहीं मिला . इंसान भी क्या चीज़ है न . खुद को कितना भी मजबूत बना लो बड़े से बड़ा दर्द सेह कर भी आँखों से आंसू नहीं बहते और कभी कभी प्यार भरे चाँद अल्फ़ाज़ों से आँखों का पानी सीमा लांघ जाता है.

अमित : बहुत अकेली रही हैं न आप ? पर अब और नहीं. आपने मुझे अपना मन है न तो अब से मैं आपको अकेला नहीं रहने दूंगा . आप क पास जब भी टाइम हो आप मंजू म से और मुझसे मिला कीजिये और अगर नहीं आयी तो मैं ज़बरदस्ती उठा कर ले जाऊंगा . फिर बनती रहना अपने थाने में केस.

ऋतू सिंह : ( स्माइल ) तुम उठा क जहाँ मर्जी ले जाना तुम्हे कोई रोक नहीं. पर मंजू न कहीं हम दोनों की टंगे तोड़ दे.

अमित : वो कुछ नहीं कहेंगी. वो तो खुश हो hi क मैं उनकी बहिन को भी खुश रख रहा हूँ. आपकी तरह वो भी आपसे बहुत प्यार करती हैं.

ऋतू सिंह : वो ऐसी hi है.

अमित : वैसे हैं तो आप भी वैसी hi बस ये यूनिफार्म का असर hi ऐसा है क आप गाल लाल करते वक़्त ज़रा भी नहीं सोचती. हाँ इसके बिना आप भी उनके जैसी hi हैं .और कपड़ों क बिना तो और भी अछि.

ऋतू सिंह : आँखे बड़ी करते हुए) मार खाओगे तुम मुझसे.

अमित : अब इतना मज़ाक तो कर hi सकता हूँ न अपनी साली साहिबा क साथ.

ऋतू सिंह : ाचा !!! तो साली ने अगर कुछ किया तो फिर न कहना.

अमित : पहले कुछ कहा क्या? वैसे फायदा तो अपना hi है. चाहे आप ऊपर हो या मैं .

ऋतू सिंह : ऐसे नहीं मानोगे तुम अभी बताती हूँ .

मेरी बात का मतलब समझते hi ऋतू मुझसे मरने लगी और साथ में खिलखिला कर हसने लगी . ऋतू को फिर से हस्ता देख मुझे भी ाचा लगा.

अमित : ऐसे hi हस्ती रहा कीजिये. आप हस्ती हुई बहुत अछि लगती हैं.

ऋतू सिंह अचानक फिर से खामोश हो गयी और मेरी आँखों में देखने लगी. फिर वो मेरी तरफ झुकने लगी और हम दोनों क होंठ आपस में मिल गए. मैंने भी उनका साथ देते हुए उनके नरम होंठों को अपने होंठों में जकड लिया. मेरे सर क पीछे हाथ रख कर वो मुझे प्यार से किश कर रही थी बिलकुल एक प्रेमिका की तरह. ये पहली बार था क हम किश कर रहे थे . धीरे धीरे ऋतू किश करते हुए मेरे ऊपर हावी होने लगी. इस प्यार क लिए वो कई सैलून से तड़प रही थी और उसकी तड़प मैं अछि तरह महसूस कर प् रहा था. किश करते करते वो मेरे साथ बैल की तरह चिपक गयी थी. हम दोनों की साँसे उखाड़ने लगी तो ये किश टूटी. ऋतू लम्बी सांसे लेते हुए मेरी आँखों में hi देख रही थी. तभी बहार से किसी ने दस्तक दी तो ऋतू जल्दी से अपने होंठ साफ करती हुई अपनी साँसे संभालती अपनी चेयर पर बैठ गयी.

ऋतू सिंह : हहहह हम्म्म ,,, कौन है ?

बहार से : मैडम आप से कोई मिलने आया है.

ऋतू सिंह : 2 मिनट्स बिठाओ मैं अभी बुलाती हूँ.

अमित : मुझे अब चलना चाहिए .

ऋतू सिंह : ऐसे कैसे , मैं तुम्हे खुद ड्राप कर क आती हूँ .

अमित : नहीं कोई बात नहीं . वैसे भी मैं बाइक से आया था. आप को भी तो अपना काम करना है . मैं चलता हूँ एंड थैंक्स फॉर थिस लवली किश

मेरी बात से ऋतू शर्मा गयी और मैं मुस्कुराता हुआ बहार निकल गया. कहाँ पहले मुझे मंजरी क चाचा की बातें सुन कर इतना गुस्सा आ गया था क दिल कर रहा था उन लोगों को हाँ से मर दूँ और अब दिल को सुकून था. ऋतू क अकेलेपन को महसूस करना और उसे बिना सोचे समझे अपना मन लेना. ये अजीब तो था पर फिर भी दिल को इस बात से ाचा hi लग रहा था. मैं अभी बहार hi निकला था क मेरा फ़ोन बजने लगा. मोबाइल देखा तो दिव्या मौसी का फ़ोन था. मैंने फ़ोन उठाया तो वो गुस्से से बोलने लगी.

दिव्या मौसी : कहाँ जो ? ये तुम्हारा फ़ोन क्यों नहीं लग रहा था कब से तरय कर रही हूँ? टाइम देखा कितना हो गया है ? दोपहर से निकले हो अभी तक घर नहीं आये . तुम्हे अपने आप ज़िम्मेदारी का एहसास है क नहीं ?

अमित : वो मौसी वो मुझे नहीं पता क क्यों नहीं लग रहा था मैं .......

दिव्या मौसी : अभी क अभी घर आओ मुझे कुछ नहीं सुन्ना .



इतना कह कर दिव्या मौसी ने फ़ोन कर दिया . मैं तो मुसीबत में फास गया था. टाइम भी बहुत हो गया था इसी लिए मौसी इतना गुस्से में थी. मैंने भगवन को यद् किया और बाइक को हवा में उडाता हुआ पहले मंजू म क घर गया और अपना बैग ले कर दिव्या मौसी क घर की तरफ चल दिया . मम ने पूछने की कोशिश की पर मैंने जल्दी जल्दी में उन्हें कोई बात नहीं बताई . घर आते hi वही हुआ जिसका दर था .
 
Back
Top