Adultery Raj-- hero of the family - Page 51 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

इस बार आप सबको अपडेट जल्दी मिल जायेगा....
 
अपकमिंग अपडेट 169......

हंट बेगिंस......
 
अपडेट टुडे 2 पं

हंट ों हंट....
 
अपडेट मई काफी कमी रह गयी ह ी मैं फाइट एंट्री लिटेराल्ल्य मज़ा नहीं आया इसलिए चेंज करके कल दोपहर तक दूंगा....
 
अपडेट 169…

हंट ों हंट

रात के वक़्त ….

मनीषा — सो माय cutie….akele रहना पसंद ह …..या मेरे साथ रूम शेयर karegi…..dekh अगर कोई बॉय फ्रेंड ह तोह पास वाला रूम ले le….main तोह सिंगल हे हु …मुझे कोई दिकत नहीं ह पर तेरे भाई को पता लगा तोह वो तेरे बॉय फ्रेंड को कान्हा भेजेगा तू सपने के सपने मई भी नहीं सोच सकती ह…

Kavita—hhhhhh….dii… मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं ह और वैसे भी ये सब मुझे पसंद भी नहीं h……(phir नीची गर्दन karke)…ap अगर दांतो नहीं तोह मैं आपके साथ हे रूम शेयर करुँगी….…..

Manisha--main दन्तु नहीं toh….are मैं तुजे क्यों डांटूंगी …..पगली तू तोह मुझे इतनी स्वीट सी लगती ह बिलकुल मेरी छोटी बार्बी डॉल की तरह…

कविता-- वो सुनील भैया ने कहा था की आप राज भैया को भी दन्त देती हो तोह आपके साथ रेस्पेक्ट और सही से राहु वर्ण…….

मनीषा-- तेज़ी से क्या ….सुनील ने ऐसा कहा …दोनों भाई एक जैसे ह गधे कहिके मार खाने के layak…..tu उनकी छोड़ ….वो कुछ भी कहते ह.. है वैसे राज को मैंने खूब डांटा और पिता ह हे हे हे he….ab चल खाना कहते ह फिर कल कॉलेज जाना ह तेरे एडमिशन के लिए फिर तुजे मेरी बस्ती से मिलाने ले चलूंगी वो तुजसे मिलकर मुझसे भी जायदा खुस होगी …हालाँकि अभी उसी चोट लगी ह…..

कविता — ok पर दी मुझे शॉपिंग करनी पड़ेगी मेरे पास यंहा के ड्रेसेस नहीं ह वंहा तोह जीन्स टॉप हे पहनती थी…

मनीषा- डोंट वोर्री तुजे जो पहन न ह पहन अब चल…

उधर राज …..

उन दोनों शख्स का कुछ पता चला ….

मित्युदूत-- जब स्मोक बम ब्लास्ट हुवे थे तोह मैंने उन्हें जाने का इशारा कर दिया था पर ये साफ़ ह की ये सारा ट्रैप उन दोनों को मरने के लिए हे था….

सुनील-- इसका मतलब साफ़ ह वो दोनों भी किलर्स आर्गेनाईजेशन के दुश्मन ह ….

Raj--aur ये भी साह ह की उनकी दुश्मनी पुराणी ह इसीलिए इतने किलर्स ए थे उन्हें मरने और अगर हम वंहा नहीं होते तोह उनका बचना मुश्किल hota….par हीमत बहुत थी दोनों मई वो दोनों हे बहुत जायदा त्रिनेड थे इसलिए अकेले उनसे भीड़ गए …पर ये अटैक उनकी सोच से जायदा तगड़ा निकला …

मितिदूत — मास्टर दुबारा से कुछ बहुत बड़ा होने वाला ह …..कुछ दिएर पहले हे इनफार्मेशन आयी ह की …….बदल मुंबई से बहार गरजेंगे….

सुनील - बदल मुंबई से बहार गरजेंगे से क्या मतलब ह…..

राज — पता nahi…..tum इस कोड को सोल्वे करने की कोसिस karo..ki क्या मतलब ह इसका

सुनील मित्युदूत की तरफ देख कर मैंने कुछ और त्रिनेड आदमी बुलाये ह उनको इंस्ट्रक्शंस देकर काम पर लगा दो ….मैं जब फंक्शन्स से लौटूंगा तब बात करेंगे बाकी…

राज कन्फूसिओं से — तू क्या करने की सोच रहा ह ….

सुनील —- तू पढ़ाई पर फोकस कर …..मतलब अनु पर फोकस कर समझा …..और अपनी चोट तीख होने तक शांति से पढ़ाई कर….

एक दिन बाद…..

सुभे सुभे अनु अपनी लुगरी कार मई राज को लेने के लिए आयी हुवी थी…..

अनु घर के अंदर आते हुवे “हुर्री उप duffer”…..hamesa बिजी रहता ह तेरे नखरे हमसे जायदा ह…

राज निचे आते हुवे ी म रेडी ….

अनु--- रेडी तोह ऐसे बोल रहे हो जैसे पार्टी मई जा रहे हो …..

राज — अब इतनी खूबसूरत लड़की….

ख़ूबसूरत लड़की नाम सुनते हे ….अनु के तोह पाँव जमीं से ऊपर उठ गए की राज उसकी तारीफ karega….usai ऐसा शर्माता देख राज आगे बोलै “ अब इतनी खूबसूरत लड़की की जगह चुड़ैल के साथ जाना हो तोह तैयार तोह होना हे पड़ता ह क्या पता कब खून चूसने लगे”

अनु “ोूउउ क्या कहा मैं चुड़ैल ी विल किल यू “

राज इतना कह आगे तेज़ी से चला गया तोह अनु पीछे से पेअर पटकती चिक्ति रही ….आज तेरा सच मई खून पिऊंगा रूक जा..

राज — मैं चुड़ैलों से दूर रहता हु….

अनु - फ़्रस्ट्रेटेड होकर गधा कुत्ता कमीना ी विल डेफिनेटली किल यू….

राज — पास एते हे किश karlunga…pahle हे कह देता हु…

अनु की बोलती बंद हो गयी और राज बैक सीट पर शांति से बैठ गया और अनु उसके बगल मई उसके दिमाग मई वो किश और टचिंग घूम गयी

पुणे …..

विद्या ग्रुप ऑफ़ मेडिकल कॉलेज मई आज बहुत चहल पहल थी…..

ऋचा — कैटरिंग वाले कितनी दिएर मई पहुंच रहे….

डॉक्टर प्रेक्टिशनर लड़का — वो सब 10 मिनट मई पहुंचने वाले ह …

ऋचा — ok फ्लावर वाले…..

लड़का — वो फ्लावर्स लगा रहे ह…

ऋचा - रिसेप्शन पे एक लड़का और लड़की को लगवा दो ताकि सबका वेलकम फूलो से हो …

दूसरी लड़की-- बोल दिया ऋचा ….तुम इतनी टेंशन मत लो…

ऋचा — मुस्कराकर बात टेंशन की नहीं ह बात यंहा रेस्पोंसिब्लिटी और रेपुटेशन की ह geeta…isliye हमे सब अचे से करना ह …तुम यंहा देखो मैं बाकी देख कर आती हु …

ऋचा वंहा से उठकर सीटिंग अरेंजमेंट देखने आयी तोह गुसाई से तमतमा उठी और चीखी….

“यंहा ये सोफे सेट्स किसने लगाए h”uski तेज़ आवाज सून सब हक्के बक्के रह गए और सीटिंग अरेंजमेंट के लिए रेस्पोंसिबल 2 जाने सामने ए ह…

आदमी - kaho…kya हुवा

ऋचा — फर्स्ट ऑफ़ चेंज योर टोन यू अरे रेस्पोंसिबल फॉर सीटिंग अरेंजमेंट …ok….mujse इस टोन मई बात मत करना ….दुबारा से ….और यंहा वो सोफे सेट्स होने चाहिए थे जैसे मैंने कहा था तोह ये यंहा क्यों ह .

आदमी-- हमे यंहा डीन सर ने काम दिया ह तोह हम उन्ही से आर्डर लेते ह और फाइनेंस मिनिस्टर आने वाले ह वो हमारे खास नेता ह इसलिए वो स्पेशल सोफे सेट वंहा हमने उनके लिए लगवा दिए तोह क्या गलत किया ..

Chataakkkkk……ek भयंकर थपड गूंज गया …..

ऋचा-- यू फायर्ड idiot…..within 5 मिनट्स यंहा से गायब हो जाना और तुम्हारे ओनर को तुम्हारी ये हरकत लिखित मई लागली मैं भेज दूंगी ताकि दुबारा कभी जिंदगी मई भी तेरी ये अकड़ बहार नहीं आएगी समझा ….चल दफा हो ….

आदमी — मैडम….

ऋचा — एक सब्द और बोलै तोह हड़िया भी यही टूटेंगी और जोड़ूँगी भी मैं हे समझा …

डीन पीछे से आकर ऋचा बेटी तुम्हे पहली बार गुसा करते देखा ह क्या हुवा….

आदमी — मैं….

ऋचा — 2 मिनट बचे ह समझा …शिकायत करले या ….तू समाज जा…

आदमी अपने ग्रुप के साथ तुरंत वंहा से खिसक लिया क्योकि भीड़ को अपनी तरफ आते देख वो समाज गया था…

ऋचा — सर ये कॉलेज नहीं ह ये ड्रीम ह मेरे अपने का ….इसलिए मुझे कोई लापरवाही नहीं चाहिए ह …..क्योकि आज जो आरहे ह ….वो इस कॉलेज के ओनर हे नहीं ह वो हे ह जिन्होंने मेरी अँधेरी दुनिया को एक नयी प्रकाश की किरण दी ह …इसलिए ….उनकी दसरेस्पेक्ट मैं कभी सहन नहीं कर सकती हु फिर चाहे वो कोई भी हो….

डीन-- ok फाइन फाइन बेटी कलम डाउन 2 बजे ह फंक्शन मैं अभी सब देख रहा हु और देखो पूरा dr.staff भी आगया ह …तुम्हारा गुसा देख कर …..….कॉलेज की सबसे सिंकेरे और कलम रहने wali…ladki को इतना गुसा देख कर सब हैरान h…ab जाओ ठाकुर साब का पता करो कब तक आएंगे वो….

ऋचा —अपने सर पर हाथ मारकर है मैं अभी पूछती हु काम के चक्कार मई मैं भूल भूल हे गयीईइ….…..

तोह वंही ….

तोह वंही रजनी ने बस मई हर टीम अपने पार्टनर के साथ हे बैठेंगी ऐसा सिस्टम कर दिया था इसलिए साथ आयी सभी 6 टीम्स अपने अपने पार्टनर के साथ बैठी हुवी थी और उन्हें 4 ऑवर लगने थे ट्रैवेलिंग मई …..

राज और अनु दोनों सबसे पीछे बैठे हुवे थे जंहा राज ने बैठते हे आंखे बंद कर्ली थी..,

अनु — अरे अभी तोह सोकर ए थे और अभी दुबारा सोने लगे ……

राज ने अनु को एक नजर देखा और फिर उसके कंधे पर सर रख कर सोने लगा….

अनु — मैं तुम्हे पिलो दिख रही हु….

राज — यंहा सब ह वर्ण तुम्हारी गोदी मई हे सो जाता….. मुझे नींद आरही ह…

अनु — तुम्हे सच मई नींद आरही ह…..

राज — ाक्टुअलय मुझे कुछ रातो से बहुत बुरे सपने आते ह इसलिए कुछ रातो से तीख से सोया नहीं हु …

अनु — एक दम से राज को देखने lagi…phir राज के सर को वापस अपने कंधे पर रख लिया ….

राज को वाकई 2 दिन से वही चेहरा बार बार दिख रहा था जिसके बाद वो जग जाता था पिछली बार तोह कविता थी उसने अपनी गोदी मई रख कर सुला लिया tha…..par कल की रात वो अकेला हे था….

अनु के प्यार से सहलाने से राज को जल्द हे नींद आगयी ….रजनी ने पीछे मुड़कर देखा तोह वो मन हे मन हे बड़बड़ा उठी “ये क्या लड़का ह सेरियल्य वो सो रहा ह जबकि अभी तोह प्यार मोहब्बत की बात करनी चाहिए थी”

राज को गहरी नींद mai…dekh अनु उसे गर्दन मोड़कर चुपके देखती रही ….और अपने साथ राज की हुवी मुलाकात और नोखझोंक को याद कर धीरे धीरे मुस्कारने lagi…..phir धीरे से एक हाथ से राज के हाथ को अपने हाथो मई ले liya….usai राज का अपने कंधे पर सर रख कर सोना ाचा लग रहा tha….bus 2 ऑवर बाद एक रेस्टुरेंट पर रुकी तोह सब उतर गए …रजनी ने दोनों को देखा तोह मुस्कराने लगी और अनु ने रजनी को मुस्कराते देखा तोह शर्मा gayii….sabke जाते हे ….अनु अपनी टैंगो को सुकड़ना सुरु कर दिया क्योकि उसे बाथ रूम जाना tha…par राज को जगा भी नहीं सकती थिई….

राज अनु के हिलते हे जग गया और उसे अपने पैरो को सिकोड़ते देख समाज गया की उसे वाशरूम जाना h…..usne अपने सर को उसके कंधे से हटाकर उसके गाल पर प्यार से चुम लिया….

Pucch…..ki आवाज और अपने गाल पर किश का अहसास ने अनु की आंखे बड़ी कर di….usne राज की तरफ देखा तोह…

राज — थैंक यू ….इतनी अछि नींद के लिए औ कॉफ़ी पिटे ह …मुझे पता ह तुम्हे वाशरूम जाना ह….

अनु huuuuuu….phir है चलो जल्दी से…

अनु चलने लगी तोह राज ने उसके एक हाथ को अपने हाथ मई ले लिया और उसे प्यार से बस से उतरने मई हेल्प करि और दोनों एक साथ हे वाशरूम की तरफ चल दिए जंहा अनु जल्दी से विमेंस वाशरूम मई घुस गयी क्योकि उसे वाकई बहुत जोर से आयी हुवी थी उसकी हालत देख ….राज को भी हंसी आगयी …..

कुछ दिएर बाद जब वो बहार आयी तोह राज जा चूका tha….wo हॉल मई पहुंची तोह राज अकेला कफ पि रहा tha…anu के चेहरे पर थोड़ी शर्म थी जो पीछे बैठी रजनी साफ़ साफ़ देख रही थी…..

राज ने वेटर को बुलाया और चीज सैंडविच और कॉफ़ी आर्डर करदी ……

राज — फीलिंग गुड….

अनु — happpp…ab उसे बारे मई कोई बाते नहीं….

राज —- ok ok …..पर तुम मुझे जगा सकती थी….

अनु-- वो main…tum सो रहे थे न और ऊपर से तुम रात को भी सोये नहीं थे इसलिए नहीं जगाया….

राज — सो स्वीट तोह आज रात को भी मेरे पास हे सजाओ फिर…

अनु — बड़ी बड़ी आंखे दिखा कर …सोचना भी मत ….

राज मुस्कराकर ok ok गुसा क्यों हो रही हो दर तोह मुझे लग्न चाहिए कंही खून पि लिया तोह मेरा …

अनु बड़ी बड़ी आंखे करके अब तोह जरूर तुम्हारे साथ हे सोऊंगी और रात को तुम्हारा खून पी कर तुम्हे मार डालूंगी ….

राज — इतनी खूबसूरत चुड़ैल से मरना हो तोह मौत भी खुसी से होगी मेरी ……

अनु अपनी प्यारी सी बड़ी बड़ी आँखों से राज को एक तक देखने लगी ….तोह राज भी उसकी आँखों मई एक तक देखने लगा…..

रजनी — चले या यही रहने का इरादा ह तुम दोनों का ….

राज — है चलिए न …हम तोह आपका हे वेट कर रहे थे की कब मम का नास्ता ख़त्म हो ….

रजनी — राज का कान पकड़ते हुवे ….धीरे से बोली तुम्हे तोह मैं होटल मई बताती हु मस्करी कर रहे हो……

राज — सॉरी सॉरी आप तोह बहुत अछि हो …प्लीज ….डॉ की बात याद ह न no फिजिकल …..

बस …फिर क्या था रजनी के गाल लाल हो गए और वो राज के कान छोड़कर जल्दी से बस के अंदर चली गयीईइ….

अनु — तुमने ऐसा क्या कहा की वो जल्दी से चली गयी…….

राज — मैंने kya….maine इतना हे कहा आप ब्लू साड़ी मई आज बहुत बहुत ब्यूटीफुल लग रही हो….

अनु — tuummm…gadhe जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती ….

राज — अब इसे क्या हुवा….

पौंआ…..

साइड मई आकर दादाजी से बात कर रही थी….

ऋचा-- आप कब तक पहुंचोगे दादाजी….

जगमाल सिंह-- अभी तोह वक़्त h..programme दोपहर को ह …हम सही वक़्त पर पहुंच जायेंगे….

ऋचा — wo…wo… दादाजी …

जगमाल सिंह हल्का सा मुस्कराकर - राज नहीं ारः ह

ऋचा-- नहीं नहीं दादाजी मैं ये पूछ रही थी ….राज की बुआ आरही ह..

जगमाल सिंह-- ाचा है तुम्हे तोह पता हे नहीं hoga…wo राज की माँ भी ह …बाकी तुम समाज हे गयी होगी ….

ऋचा — जी दादाजी …

जगमाल सिंह तीख ह हम समय पर पहुंच जायेंगे ….

कॉल कट होने के बाद …

दिव्या — कौन थी पापा….

जगमाल सिंह-- तुम्हारे बेटे का प्यार …जिसका जिक्र उसने आज तक नहीं किया ह mujse…dono की गलती से हे दोनों अलग हो गए…

दिव्या-- तोह अपने तोह सोनाली को वचन दिया ह की वो घर की बहु बनेगी….

जगमाल सिंह-- राज सोनाली बेटी का प्यार ह और उसके लिए वो हर परीक्षा से गुजर रही ह ….और सायद अभी भी गुजर रही hogi…aur इस बची ने अपने आप को उसके लायक बनाने के लिए अपनी अरबो की दौलत और महलो की जिंदगी छोड़कर तुम्हारी विद्या भाभी का सपना पूरा करने के लिए पिछले कई साल से यंहा ह ….तोह तुम बताओ …क्या उसको …मौका नहीं मिलना चाहिए…

दिव्या — ओह्ह्ह्ह ….तोह ये वो लड़की ह जिसका जिक्र श्वेता ने मुझसे किया था …की राज एक लड़की से बहुत प्यार करता था …

जगमाल सिंह — है ये वही ह ऋचा …और अब जब तुम यंहा ज्वाइन हे कर रही हो तोह …तुम्हे सब पता लग जायेगा और इस लड़की पर मुझे यकीन ह मैंने उसकी आँखों मई देखा ह वो राज को पाकर हे रहेगी और उसे न पा सकीय तोह ये दुनिया हे छोड़ देगी इसलिए सोनाली और ऋचा आग और पानी की तरह h..jo दोनों तुम्हारी नाक मई दम कर dengi….aur वैसे भी तुम्हारे लादले साहबज़ादे की जिंदगी मई क्या पता ये दो अकेली हे हो और क्या पता वो एक आधी और ढूंढ ले मुम्बई मई….

दिव्या बड़ी सी आंख निकलकर — बस बहुत huva…bahut बोल लिए आप मेरे बेटे के बारे मई आज से मीठा बिलकुल बंद आपका....

जगमाल सिंह-- अरे अरे….

दूसरी तरफ….

एक साथ कई साडी गाड़िया एक के बाद एक कॉलेज परिसर के अंदर एंटर होती चली गयी एक दम से कई साडी गाड़िया अंदर आते देख सब काम छोड़कर उस तरफ देखने लगे दस फोर्टनेर और स्कार्पियो एक के बाद एक पेर्मिसेस के अंदर घुसती चली gayi…aur उनके रुकते हे एक के बाद एक कई सरे आदमी बहार निकलते चले गए गए …अचानक इतने सरे गुंडे जैसे लोगो को देख कर मेडिकल कॉलेज के और प्राइवेट सिक्योरिटी गॉर्ड आगे बढे तोह …एक गुंडों ने खंजर और लोहे की रोड्स बहार निकल ली तब उनका लीडर कार से बहार निकला और बोलै ….”सब बहुत आसान ह उसे मुश्किल मत banao…..bus एक सवाल यंहा की मद का ऑफिस कौनसा ह” …

कॉलेज के मेडिकल स्टूडेंट्स आगे ए तोह ….एक गुंडे ने एक स्टूडेंट के सर पर रोड मार दी….

लीडर — ये सिर्फ वार्निंग h…agli बार मौत मिलेगी…

तभी डीन आकर — आखिर तुम हो कौन और क्या चाहिए…

लीडर —बूढ़े तेरा दिमाग और कान दोनों ख़राब ह अभी तोह कहा था की यंहा की मद से मिलना ह क्या नाम था उसका है Richa….uska ऑफिस बता दो बात करनी ह चले जायेंगे….

ऋचा का मद नाम सुनते हे सरे स्टूडेंट्स और डॉ मई हलचल सी हो गयी की वो मद ह विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स की …

डीन — तुम्हे गलत जानकारी मिली ह मैं हु मद तोह…

लीडर — चटक …..एक थपड डीन के गाल पर कास दिया और बोलै होसियारी मत कर समझा मुझे सब पता ह …..तू नाम का मद ह …अब बताता ह या कुछ की मौत के बाद बोलेगा…..

……..”मैं हु ऋचा यंहा की मैनेजिंग डायरेक्टर”…..

लीडर ने पीछे मुड़कर ऋचा को ऊपर से निचे देखा और मुस्कराते हुवे बोलै — तू ह मद मैंने सोचा कोई बुढ़िया होगी

ऋचा गुसाई से —बको…….

लीडर — bako….bahut अकड़ h….tujmai …

ऋचा — बको….

लीडर — ऋचा की तरफ आगे बढ़ा तोह…

स्टूडेंट्स भी गुंडों की तरफ आगे बढे …एक गुंडे ने एक स्टूडेंट के पेट मई खंझर उतर दिया ….

लीडर —अरे वाह ये तोह हॉस्पिटल मई हे ह बच जायेगा पर क्या हो अगर इसे main…yanha से लेजाने हे नहीं दू toh……tab तोह ये मर जायेगा न…

ऋचा गुसाई से “तू” और आगे बढ़ उसने थपड मरना के लिए हाथ उठाया तोह उसके गाल पर एक खींचकर थपड पड़ा …जिसकी वजह से ऋचा की आंखे दर्द और गुसाई से लाल हो गयी…..

लीडर —- सिर्फ दस मिनट तुजसे यंहा बात करनी थी पर अब तू चलेगी हमरे साथ हमारे जिगरा भाई से मिलने सिर्फ दस मिनट फिर हम तुजे यंहा वापस छोड़ देंगे वर्ण ये स्टूडेंट तेरी जिद की वजह से यही मर जायेगा……

ऋचा ने एक बार उस निचे गिरे लड़के की तरफ देखा और बोली “चलो”

लीडर मुस्कराकर बस yahi…aise हे अकड़ काम करके बात करती तोह …ये सब नहीं होता…..

ये सब पिछले हाफ ऑवर से जायदा टाइम से हो रहा था tab….Dean ने जैसे हे इतनी फोर्टनेर और स्कार्पियो से आदमियों के उतारते देखा तोह पहले पुलिस को फ़ोन करना चाहा था पर फिर कुछ सोचकर पुलिस को कॉल न करके जगमाल सिंह को कॉल कर दिया जिसे दिव्या ने पिक किया..

दिव्या-- hello डीन सर….

डीन एक सांस मई “ठाकुर साब को बोलो कॉलेज मई कुछ लोग जबरदस्ती ऋचा बिटिया को उठाकर”….

डॉ पूरी बात बोलता उसे पहले हे कॉल डिसकनेक्ट हो गया …..और दिव्या ने तुरंत नंबर डायल कर दिया ….

उधर ऋचा को बैठकर …लीडर जाओ इनदोनो का ट्रीटमेंट कार्डो बच जाये तोह बोल देना दुबारा अपने काम से काम रखे…..

गाड़ियों के काफिले को वापस जाता देख एक डॉ डीन से सर पुलिस को कॉल करे …

डीन — विनाश काळा विपरत बूढी ……

डॉ-- मतलब…..

डीन —- तुम सब अपने अपने काम मई लग jao…aur आपको क्या लगता ह की ऋचा कोई मामूली लड़की ह ….इनलोगो ने ऋचा बेटी को लेजाकर साक्षात यौम दूत को बुलावा लिया ह…..

गाड़ी मई

काफिला निकले 10 मिनट हे नहीं हुवी थी की दूर से हे एक ब्लास्ट की आवाज गूंज गयी जो कॉलेज तक सुनाई दी

लीडर जो गाड़ी मई ऋचा से बोल रहा था क्या हुवा अभी भी अकड़ गयी nahi….uski बोलती बिच मई हे बंद हो गयी …..उसने अपने सबसे आगे चलरही कार को आगे से ब्लास्ट होते हुवे देखा…..

भड़ाएमममम ....………….एक और धमाका हुवा और लीडर ने अपने पीछे की कार के परखचे उड़ते हुवे देखा ….

और जब उसने दुबारा से सामने देखा तोह उसे वंहा दिखाई दिया एक क्लीन शेव सूट बूटेड ladka…..jo धीरे धीरे उनके काफिले की और चलता हुवा ारहस था उसके हर 5 कदम पर लीडर की कार से निकल रहे गुंडों को …सुनील के बॉडी गॉर्डस घेरते जा रहे थे जिनके हाथ मई लोडेड गन्स थी……

सुनील लीडर की कार की तरफ गया और ऋचा वाले गेट को जेंटलमैन की तरह ओपन किया … ऋचा ने बहार आने से पहले अपने बालो को पीछे से आगे कर लिया ऋचा बहार आयी तोह उसने ऋचा को dekha…aur बोलै “ आप तीख न …वो दिव्या बुआ का ….” इतना कहते कहते रूक गया और अपना हाथ बढ़कर ऋचा के गलो पर ए बालो को हटाने लगा ऋचा सकपका कर पीछे हटी पर सुनील को दिख गया जो देखना….

सुनील — किसने किया ये….

लीडर की आँखों मई कोई दर नहीं था वो बिच मई बोलै…. “छोकरे मौत से खेल रहा ह तू समझा ..अपने.”

वो पूरी बात करता उसे पहले हे सुनील का पंच उसके पेट मई पूरी ताकत से पड़ा और फिर उसके झुकते हे उसके झबदे पर एक और पंच पड़ा जिसे वो उड़ता हुवा पीछे की कार के आगे के शीशे को तोड़ता हुवा अंदर घुस गया…..

सुनील — kisne….kiya मैंने आपसे पूछा…

ऋचा उसे हैरानी से देखते हुवे बोली “उसे तुम पहले हे सजा दे चुके हो फिर हाथ से इशारा कर दिया जिदर लीडर था”

सुनील ने कार से रस्सी निकली और लीडर को अपनी कार के पीछे बांध लिया ….

ऋचा “तुम्हे इतना गुसा कब से आने लगा”

सुनील और दादाजी की बात होती हे रहती ह इसलिए दादाजी ने भी बता दिया था की वो भविष्य मई तुम्हारी भाभी बनेगी जिस पर सुनील काफी नाराज हुवा था पर दादाजी के तर्क के आगे वो भी चुप हो गया….

सुनील — आप जानती हो की क्यों मुझे गुसा आया

ऋचा — मतलब तुम मुझसे नाराज नहीं हो…

सुनील — chaliye….sabko आपकी चिंता हो रही होगी…

ऋचा सुनील की कार मई बैठ गयी …

धमको की वजह से पहले हे कॉलेज वाले दूर से उठ रहे धुंवे को देख रहे थे तोह अब एक साथ वापस कई साडी कार्स को अत देख एक बार फिर सब एक साथ इकहहट्टा हो गए पर इस बार उनकी आंखे हैरानी से खुली हुवी थी क्योकि थोड़ी दिएर पहले रुवाब मई गया लीडर अब घसीट ता हुवा पीछे ारः था….

सुनील ने ऋचा के लिए दूर ओपन kiya…richa निचे उत्तरी और उसने लीडर की तरफ इशारा किया इसका ट्रीटमेंट करो और इसे बेहोश हे रखना …..

सुनील ने अपने बॉडी गार्ड्स को इशारा किया तोह उन्होंने बाकि सबको भी कार से निकल दिया जो सिर्फ चड्डी मई हे थे …..

सुनील — कोई जगह जंहा इनको….

डीन — मेरे साथ आईये…..

सब दुबारा से काम मई लग गए पर कोई ये नहीं देख पाया की पीछे सुनील की आँखों मई क्या ह ….सुनील की आँखों क्रोध से जल रही thi…wo कैसे सह सकता था की कोई उसकी फॅमिली को हाथ लगाए और ऋचा तोह उसकी होने वाली भाभी थी और भाबी छोटी हो या बड़ी उसका दर्जा माँ के सामान होता ह …प्रोग्राम सुरु हुवा और अचे सेख़तम भी हो गया …..सब बहुत खुस थे सिमरन विद्या ग्रुप की ब्रांड एम्बेसडर बन गयी थी…

रात को सब ने साथ हे खाना khaya….janha दिव्या ने ऋचा के साथ खूब साडी बाते करि ….दिव्या को ऋचा बहुत अछि lagi….iski एक बड़ी वजह ये थी की कॉलेज के सभी लोग उसकी तारीफ कर रहे थे और ये बात दोपहर से हे दिव्या नोटिस कर रही थी …

उधर दिएर रात सुनील ने खिड़की खोली और निचे उतरने लगा पर ….ऋचा जिसे नींद नयी आयी थी और वो खिड़की के पास आसमान को देखते हुवे पुछलि यादे याद कर रही थी अचानक उसने सुनील को निचे जाता dekha……par उसने उसे कोई आवाज नहीं लगायी

निचे उतारते हे सुनील तेज़ी से कैंपस के बहार निकल गया और रोड पर आगया जंहा उसके बॉडी गॉर्डस पहले हे मौजूद थे …

सुनील — सब मिल गया …

बॉडी गॉर्ड — जी सर कोई मुम्बई ुन्दरवरल का डॉन ह जिगरा उसी के कहने पर ए ह ये लोग …और अब तोह उसे पता भी लग गया होगा की यंहा क्या हुवा hoga…wo तैयार होगा…

सुनील — सिखारी का सीकर करना ….गीदड़ो के बस की बात नहीं …..क्योकि आज सिखारी सीकर पर ह…..

एक ऑवर बाद ….

सुनील ने आगे भड़ने का इशारा किया तोह सभी जाने चुपके से दीवार फांद कर फैक्ट्री मई घुस गए जिसमे चारो तरफ अँधेरा हे अंधेर था ….वो सभी सबसे बचकर गन तने हुवे एक दूसरे को देखते हुवे अंदर घुसते चले गए …..पर उन्हें क्या पता था की ये एक बहुत बड़ा जाल ह अँधेरे मई छिपे हुवे लोग उन्हें मामूली से उजाले से देख रहे थे और जैसे हे वो सभी लोग हॉल मई पहुंचे अचानक पूरी फैक्ट्री जगमा उठी ….और आवाज गुंजी…

“तुमने क्या सोचा मेरे आदमियों को मारकर बच जाओगे तुम्हारी भी कब्र यही बनेगी मार दो इंसबको”

आर्डर सुनते हे गोलियों की बौछार होगयी और सभी वंही हाल मई मारे गए …

जिगरा-- साडी गोलिया भर दो सालो के साडी मई ताकि इनकी आत्मा के भी टुकड़े टुकड़े हो जाये….

और कुछ पल बाद क्लिक क्लिक की हे आवाजे आने लगी …जिगरा ने अपनी आदमी को निचे जाकर उनका फेस हटाने को कहा और जैसे हे उन्होंने फेस मास्क हटाए जिगरा की आंखे बड़ी हो गयी ….तब एक और आवाज गुंजी उस शांत महल मई ….

“मैं खुद सिखारी हु …..और ….सिखारी कभी सिखर नहीं होता ह वो जाल फेंकता ह और फिर आराम से सीकर करता h…..aur अब तुम मेरे जाल मई हो …”

जिगरा ने आवाज सुनते हे अपनी बैक से गन निकल कर फायर करना चाहा तोह एक गोली आकर सीधी उसकी गन पर लगी ..

सुनील--- हंट अकेले आया ह हंट के लिए गन की कोई जगह नहीं ह ………फिर अपने दोनों हाथ ऊपर करके ..देख कोई हथियार नहीं….

जिगरा-- मौत से खेलना ह tuje..toh तू जरूर खेलेगा….

इतना कह उसके आदमी सुनील को चारो तरफ से घेरने lage….niche खड़े सुनील की आँखों मई वो गुसा धधकने लगा जो दोपहर से उसने दबा रखा था …और उसके इशारे से लाइट ऑफ हो गयी …..

“तूने जिसे चुने की कोसिस की मैं उसे नाराज hu…par….wo मेरे भाई के जीने की उम्मीद ह …”

सुनील ये बोलते हुवे पैरो की आवाज की दिशा मई आगे भद्दा और पूरी ताकत से पंच मार दिया जो कान्हा लगा किसी लगा ये नहीं पता था पर टकराने की तेज़ आवाज हुवी और एक चीक गूंज गयी जो कुछ हे सेकण्ड्स मई शांत भी हो गयी

“और तूने उसी उम्मीद पर हाथ डालने की हीमत की”

अह्ह्ह्ह एक और जाना पंच के साथ उड़ता हुवा मशीन से टकराया और उसकी दर्दनाक चीक गूंज गयी

“वो जैसी भी ह”

इतने कहते वक़्त अँधेरे मई भी उसकी आंखे मनो बिजली की तरह कहते कहते चमकने लगी …वो तेज़ी से मुदा और अपने पीछे की तरफ एक के बाद एक कई पंच मरे और सिर्फ पंच लगने की आवाज आयी आदमी एक सब्द मू से नहीं निकल सका क्योकि सुनील के पूरी ताकत से मरे गए पंच दोनों के पेट मई लगे the…….apne आदमियों की चीखे सुनकर वो चीखा “आखिर तेरी क्या लगती ह वो…”

तभी हॉल की लाइट्स ों गयी जंहा सुनील अभी भी बिच मई खड़ा था ….उसने जिगरा की तरफ देखा और बोलै वो मेरी ….

“…….भाभी……….”

इतना बोलने के बाद उसकी स्पीड आम आदमी से दुगनी तेज़ हो गयी और अगले हे पल वो जिगरा के सामने था और जिगरा कुछ करता उसे पहले सुनील का घुटना उसकी चेस्ट पर पद चूका था जिसके प्रेशर से जिगरा पीछे की तरफ उड़ता हुवा पीछे गिरा और फिर घसीटते हुवे दीवार से टकराया …तभी सुनील की पीठ पर एक रोड takrayi….par सुनील पर उसका कुछ असर नहीं हुवा उसने घूमकर पीछे खड़े शख्स को देखा ..उसने दुबारा रोड मरने की कोसिस की तोह सुनील ने भये हाथ से रोड को पकड़ ली और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन पकड़कर ऊपर उठालिया अपनी नज़र से उस शख्स के पीछे मचिनार्य को देखा जिसके पास हथोड़ा पड़ा था …उसने उस आदमी को जोर से फर्श पर पटका और पीछे पड़े हथोड़े की तरफ गया ..सरे गुंडे बिना रिएक्शन उसे हे देख रहे थे सुनील ने हथोड़े को उठाया और घसीट ते हुवे उस आदमी के पास ले आया आदमी ने नज़र उठाकर ऊपर देखा तोह एक हथोड़ा उसे उसके चेहरे की तरफ अत दिखा bhaaacccchhh…..ki आवाज से उसके चेहरे के चिडथड उड़ गए…..

जिगरा जिसकी आंखे कुछ सुनील के वार से धुंधली हो गयी थी उसकी चेतना एते हे वो चिल्लाया “मारो सेल को देख क्या रहे हो 10 लाख मिलेग इसके टुडे कर दो “

सुनील ने तिरछे होकर जिगरा को देखा और बोलै …..”वेट फॉर में व्हेन ी म ब्रेक योर एव्री सिंगल बोन”

सुनील के तरफ बढ़रहे गुंडों पर सुनील टूट पड़ा …सुनील का एक एक पंच और किक्स किसी की रिब्स पर पड़ी तोह किसी के जबड़े पर जंहा भी पड़ी तोड़ती चली गयी कुछ हे पालो मई 20 गुंडे फर्श पर दर्द मई कराह रहे थे….

“ जिगरा एक बात तोह बताना भूल गया मैं मौत से पहले दर्द बहुत देता hu…bahut जायदा उसे मुझे सुकून मिलता ह तेरे पीछे जो ह उन्हें भी ऐसे हे दर्द दूंगा तुम्हारी किस्मत अछि ह जो आज वो यंहा नहीं ह वर्ण तेरी आत्मा तेरे पुरे खंडन की रूह को तड़पता वो और मौत भी नसीब नहीं होती तुझे”

इतना कह सुनील ने हथोड़ा उठा कर सबके पेअर फिर कंधे पर मार diya….har वार से वो चिक भी नहीं पाए क्योकि सुनील के बॉडीगॉर्ड्स ने उनके मू मई कपडा थुश कर बंद कर दिया था

जिगरा की तरफ सुनील हथोड़ा लेकर आगे बढ़ा तोह जिगरा की आँखों मई सबकी हालत देख सुनील का दर साफ़ देखा जा सकता था ..

सुनील — किसने भेजा तुजे…

जिगरा — मौत तोह तय ह बताऊंगा तोह मार देगा नहीं बताऊंगा तोह मार देगा…

सुनील — सच बोलै तोह आसान मौत दूंगा वडा ….

जिगरा-- victorrrrrrr……wo कान्हा रहता ह ये मुझे नहीं पता ह ..

भच्हहहह की आवाज से उसके सर के परखचे उड़ गए…….

सुनील जब वापस रूम मई पंहुचा और ड्रेस चेंज करने लगा तोह ….दूर पर थक थक की आवाज हुवी …..उसने जल्दी से टॉवल से खुद को कवर किया और दूर खोला…

सुनील — आप….

ऋचा उसे साइड हटते हुवे अंदर आगयी

ऋचा — कान्हा गया थे…

सुनील — काम से गया था…..

ऋचा-- रात को कौनसा काम होता ह ये कहते कहते उसकी नज़र फर्श पर बने खून के निशान पर पड़ी ….

सुनील हड़बड़ाकर —रात को आप मेरे कमरे मई हो किसी ने देख लिए गलत समझेगा ….

ऋचा — शट उप …..और फिर उसका टावल हटाकर देखा तोह उसकी शर्ट पर खून के बड़े बड़े निशान थे …..जिसे देख वो चिल्लाई ….तुम्हे चोट लगी ह जल्दी से चोट दिखाओ….

सुनील नज़रे चुरा कर ….ये खून मेरा नहीं ह ये उनका ह जिन्होंने आज आपके साथ बतमीज़ी करि थी….

ऋचा -व्हाट तुमने उन्हें मार दिया….

सुनील — है …

ऋचा — कोई भी मुझे हाथ लगाएगा सबको मार डोज …

सुनील — है….

ऋचा — राज को भी …

सुनील - है …..फिर जल्दी से नहीं ….मेरा मतलब tha…..ki ha…..nahi…..

ऋचा —-मुस्कराकर अब तुम्हारे भाई का दिल कभी नहीं तोडूंगी …..ये वडा ह mera…..bus जब उसे मिलो कहना जिन्दा रहना मैं उसका इंतज़ार karungi….jab हम हिमाचल मई जंहा हमने वडा किया था वंहा साथ साथ रहेंगे ….मैंने वंहा घर भी बनवा लिया ह उसी झील के किनारे…..

ये कहते कहते उसकी आंखे भीगने लगी ….उसने जल्दी से अपने आंसू पोंछे और गुड नाईट बोलकर चली गयी….

सुनील -खुदसे हे बोलै पर आज उसे प्यार सब मई सिर्फ धोखा दीखता h…apko बहुत बड़ी परीक्षा देनी होगी…..

आज के लिए इतना हे …….मस्ती मई पढ़ने का लाइक्स और रेवोएस पेलने का …
 
अपडेट 170 टुनाइट

मोरे सस्पेंस

रिव्यु के रिलीज अपडेट लिखने की वजह से कर नहीं पाया हु मौका मिलते हे दे दूंगा ...
 
वेल सी यू आल टुनाइट विथ नई सस्पेंस एंड ट्विस्टेड अपडेट....
 
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