Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 38 संजना & साहब ों थे माउंटेन्स अगेन

दूसरे दिन चावला साहब पहुँच गए दिन के 11 बजे संजना के घर. सान्वी ने जब पूछा कहाँ जा रहे हैं तो कहा के एक दोस्त से मिलने जा रहे हैं और शायद लेट वापस आएगा क्यूंकि दोनों समंदर किनारे जाएंगे. सान्वी ने कुछ नहीं कहा मगर अजीब नज़रों से देख रहे थे उनको और चावला साहब ने नोटिस किया सान्वी की नज़र को और खुद नज़रें चुराते हुए निकले थे घर से.

संजना एक सेक्सी ड्रेस में वेट कर रही थी उंनका और जैसे दोनों मिले एक दूसरे के बाहों में लिपट गए और मुंह में मुंह काफी देर तक किश करते रहे एक दूसरे के जीब के रस निचोड़ते हुए. चावला साहब के दोनों हाथ संजना के पुरे जिस्म पर फेरर रहे थे किश के दौरान, उस्सकी ड्रेस के निचे जाँघों पर, और उस से ऊपर भी पंतय को टटोलते हुए….. फिर उस्सकी नितम्बों को दबाते हुए किश जारी रखा उन्हों ने जबकि संजना का हाथ उनके पीठ सहलाते जा रहे थे. सजाना ने वापस इस ड्रेस को पहना था क्यूंकि उस्सकी जांघें इस में उभर कर एते हैं और चावला साहब को उस्सकी जांघें बहोत पसंद थे, तो चावला साहब के ख़ुशी और चॉइस के खातिर ड्रेस होती थी संजना. ड्रेस यह थी जो पहले भी यहाँ पोस्ट किया गया है.

9003ada2bff458855767ac418920cbe5.jpg


तो किश के दौरान चावला साहब के दोनों हाथ संजना के पीछे से होते हुए ड्रेस को उस्सकी नितम्बों के बिल्कुल ऊपर उठा दिए थे और संजना की जांघें पंतय समेत बिल्कुल बाहर थे और चावला साहब के लिंग पर दबे हुए थे और किश बरकरार थे. अपने बालों को भी ऐसे hi खुले चोरे थे संजना ने क्यूंकि वो भी चावला साहब की पसंद थी के वो खुले बाल में रहे.

कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे के कमर में हाथ डाले चल कर लाउन्ज के अंदर जा hi रहे थे के अचानक चावला साहब ने कहा, “आज कहीं बाहर चलते हैं किआ ख्याल है?” संजना ने पूछा किधर तो चावला साहब ने कहा उसी पहाड़ी के तरफ. संजना ने कहा मगर उस बार वहां एक आदमी दिखा गया था तो चावला साहब ने कहा ज़्यादा दूर और ऊपर जाएंगे जहाँ कोई अत जाता नहीं. संजना राज़ी हो गयी मगर डीडे किया के कुछ खाने पिने के चीज़ें भी ले चलें साथ में.

तो दोनों घर से निकले करीब 12 बजे और चावला साहब ने पहाड़ियों के तरफ ड्राइव किया. संजना आगे उनके बगल में बैठी थी और कहने की ज़रुरत नहीं के उस ड्रेस में बैठने से उस्सकी जांघें बिल्कुल बाहर थे और चावला साहब बार बार उसी को देखते हुए ड्राइव कर रहा था और उस का हाथ बार बार संजना के जाघों को सहलाते हुए पाए जाते थे. जब कभी उन् का हाथ ज़्यादा ऊपर उस्सकी पंतय तक जाते तो संजना उनके हाथ को पाकर कर कहती, “मैं ने मन किया है नाह, अभी 4 दिन नहीं हुए, वहां छूना मन है अभी! आईटी इस स्टिल सेंसिटिव हम्म्म!” तो चावला साहब मस्ती करते हुए उसस्के चुतरों के निचे हाथ करते और कहते, “यहाँ तो छूना मन नहीं है नाह!” तब संजना कहती, “अरे आगे देखो एक्सीडेंट हो जाएगा!” वैसे hi मस्ती करते और ड्राइव करते हुए पहाड़ी के काफी ऊपर आगये तो चावला साहब ने कार रोका और बाहर निकले नज़ारा देखने को. फिर संजना से पूछा, “इतनी ऊंचाई तक तो कोई नहीं अत होगा मेरे ख्याल से क्यों?”

संजना भी बाहर निकली और कहा, “आप के ख्याल से नहीं अत होगा कोई, लकड़हाड़े एते हैं लकड़ी काटने और भेंइस बकरी वाले भी ताज़ा घांस के लिए एते हैं कभी कभी!” चावला साहब ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता?” तो संजना ने हँस्ते हुए जवाब दिया, “मैं यहाँ रहती हूँ जी मुझे नहीं तो किआ आप को पता होगा?” फिर अपना सर खुजाते हुए चावला साहब ने कहा, “तो फिर किधर जाएँ?” और इतना कहकर उस्सने संजना को वहीँ अपने बाहों में जकरा और कार से सत्ता कर किश करने लगा अपने हाथ से उस्सकी उस ड्रेस को जाँघों के ऊपर उठाते हुए… संजना ने भी किश को अच्छी तरह से रेस्पोंद किया और अपने एक तंग को उठाकर चावला साहब के तंग पर क्रॉस किया जिस से उस्सकी पंतय उनके जिस्म के ऊपर रगड़ने लगे……

किश को रोका सांस लेने के लिए तो संजना उनके बाहों में hi रहते हुए उन् से कहा, अपनी हाथ से दिखते हुए, “थोड़ा आगे जाकर दाएं मुड़ना एक कच्चा रास्ता है उस में थोड़ा और अंदर तक चलेंगे उधर शायद कोई नहीं अत, और अगर किसी की वहां होने का निशाँ होगा तो और भी आगे चैलेंज.” चावला साहब ने फिर पूछा, “तुमको कैसे पता किसी के साथ आयी हो किआ इधर? हँ?” तो संजना ने कहा, “आप भी नाह बहोत सारे सवाल करते हो आप, मेरे पापा के साथ छोटी थी तो कई बार आई हूँ इधर और किआ?”

और कार ड्राइव किया गया और उस जगह पर पहुंचे. संजना पहले कार से निकली और चारों तरफ जैसे मुआएना करने के बाद कहा, “नहीं यहाँ ठीक नहीं है और आगे चलना होगा.” चावला साहब ने पूछा “क्यों? यहाँ किआ है?” तो संजना ने दिखाते हुए कहा, “देखिये यहाँ पर घांस कटा हुआ है, वहां देखो लकड़ी काटे गए हैं मतलब लोग आते हैं यहाँ!” तब चावला साहब ने कहा, “ओह ी सी!! काफी होशियार हो तुम भी!” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “और नहीं तो किआ आप ने किआ मुझको बुद्धू समझा था हीहीहीहीही” और तक़रीबन और 3 मिले दूर गए ड्राइव करते हुए और खुद संजना ने hi एक जगह पर रुकने को कहा. कार से बाहर निकली और कहा, “हाँ यह बहोत अच्छी जगह है इतने दूर तो कोई नहीं आएगा, और अगर आये भी तो जब तक वह यहाँ पहुंचे हमको पता चल जाएगा”

वो एक बिल्कुल hi सुनसान जगह था, चारों तरफ दरखतें, पेयर पौधे, घांस, फूल…. हवा की सरसराहट, और सूरज तो दिख hi नहीं रहे थे उन् बड़े बड़े दरख़तों के बीच. मानों एक घाना जंगल था वो जगह. और चावला साहब का मैं मचल गया बाहर निकला तो. वो काफी रोमांटिक हो गए और जिस काम के लिए संजना को यहाँ लेकर आये थे वो जगह बिल्कुल सही लगा उनको. उन्हों ने सोचा के संजना को बिल्कुल नंगी करके बाहर hi मज़ा कर सकेगा और कोई नहीं देख पाएगा परिंदों के इलावा! उंनका मैं एहि था के संजना को बिल्कुल नंगी करे नेचर में!

उन्हों ने संजना को बाहों में लिया और गाडी से उस्का पीठ लगाते हुए उस्सको दबाया अपने जिस्म से और संजना को चूमने लगा खुले आसमान के निचे. संजना को भी अच्छा लग रहा था ओपन में वैसे किश करते हुए उनके बाहों में. उस दौरान उनके हाथ वहीँ संजना के जाँघों पर गए और ड्रेस को ऊपर कर दिया तो संजना की पंतय सब दिह्कने लगे और उस वक़्त अगर कोई भी एते तो संजना के पुरे जांघ और पंतय नज़र आते और वहां पर चावला साहब के हाथ उस्सकी पंतय पर फरते हुए दीखते किसी को भी. मगर था तो कोई भी नहीं वहां सिवाए एक दो चीड़यों के जो ऊपर बैठे पेयर के शाखों से उन् दोनों को प्यार करते हुए देख रहे थे और अपनी जुबां में जैसे एक दूसरे को यह कह रहे थे, “वो देख, वह लोग किआ कर रहे हैं” और दूसरे चिडया ने जवाब में कहा, “करने दे हम जो ऊपर पेयर के डाली पर करते हैं वह लोग गाडी के ऊपर कर रहे हैं”

चवा साहब का हाथ फिरसे संजना के योनि के ऊपर गया पंतय के ऊपर से hi और फिर किश को रोकते हुए संजना ने कुछ नखरों से कहा, “हम्म नहीं वहां मत छुवो न प्लीज, अब भी कितना सेंसिटिव है!” तो झट से चावला साहब ने संजना को घुमाया और उस्सकी पीठ अब चावला साहब के आगे थे और संजना के आगे का हिस्सा कार पर थी. थोड़ा सा चावला साहब ने संजना के गर्दन पर हाथ रख के उस्सको झुकाया कार के ऊपर और उस्सकी कमर से लेकर निचे तक सब चावला साहब के निचे वाले जिस्म के हिस्से से डब्बे हुए थे, मतलब उस्सकी नितम्ब पर ड्रेस तो उठी हुई थी और संजना की वाइट पंतय नितम्बों के फॉर्म दिखा रहे थे उस पर चावला साहब का लिंग पंत के अंदर से संजना की नितबों पर दबाते हुए रागढ रहे थे. संजना ने अपने होंठों को दांतों में दबाते हुए थोड़ी से तड़पती हुई आवाज़ में, “ह्म्मम्म्म्म” किया और चावला साहब जोश में आ चुके थे तो संजना की पंतय को उतारने लगे धीरे धीरे अपने उँगलियों को उस्सकी कमर और पंतय के बीच डालते हुए. संजना ने जब फील किया के चावला साहब उस्सकी पंतय उतार रहे हैं तो झट से गर्दन घुअमाया और मुड़कर कहा, “ोफो किआ कर रहे हो आप, ऐसे खुले में कोई आया तो?” चावला साहब ने सोचा, ‘यह तो यह नहीं कह रही है के पीछे मत लो, बल्कि इस्को कोई और ना आजाये इस्सकी फ़िक्र है, मतलब मैं इस्को पीछे ले सकता हूँ’…….. ये सोचते हुए चावला साहब ने घुर्राटे हुए कहा, “आरी बेबी कौन आएगा इतने दूर पहाड़ के ऊपर भला, उतारने दो नाह निकल hi चुकी है तुम्हारे जांघों के काफी निचे कर दिया है मैं ने पंतय को अबतो….” और साहब बैठ कर उस्सकी पंतय को घुटनों के निचे से बाहर निकालने लगे और संजना ने झट से अपनी ड्रेस को निचे किया अपने नितम्बों को ढांकने के लिए. अब आप पिक्चर में ऊपर देखिये कितनी गोरी है वो जाँघों वाले हिंसा, तो वैसी hi गोरी ऊपर जहाँ तक ड्रेस उठा हुआ था नज़र आरहे थे और दूर तक किसी को भी वो दृष्ट साफ़ नज़र अत अगर कोई होता तो.

चावल साहब फिर खड़े हुए, अपने ज़िप को निचे किया और लिंग को बाहर निकालते हुए उस्सको अपने थूक से भिगोया और थूक को संजना के चुतरों पर भी लगाया ठीक चढ़ के ऊपर अपने ऊँगली को ुसस्पर घुमाते हुए, जबकि संजना कार के ऊपर झुकी हुई सब फील करते हुए छोटी छोटी आवाज़ें दे रही थी, “हम्म्म हम्म्म हम्म्म्म” कुछ इस तरह. संजना को पता था किआ होने जा रहा है, उस्सको अच्छी तरह से पता था के चावला साहब उस्सको पीछे से लेने जा रहे थे मगर वो वैसे hi झुकी रही चावला साहब को पोजीशन देते हुए!!

तो चावला साहब ने अपने लुंड को थूक से भिगोते हुए पहले संजना के नितम्बों के बीच ो बीच रगड़ा थोड़ा सा अपने कमर हिलाते हुए जिस से थूक सुख गया, फिर थूक लगाया और एक हाथ से दोनों नितम्बों के चीक्स को अलग करते हुए लुंड की ऊपरी हिस्से को संजना के गांड की चढ़ पर थोड़ा सा दबाया और अंदर ठुसस्ने की कोशिश किया तो संजना ने एक छोटी सी चीख देते हुए मुड़कर उनके चेहरे में देखे और बचपने आवाज़ में कहा, “हम्म्म मत डालो दुखेगा वहां ह्म्म्मम्म!” चावला साहब कहाँ सुनने वाले थे वो बिल्कुल जोश में थे और थुश दिया अपने लुंड का ऊपरी वाला हिस्सा तो संजना चिलायी, “रुको रुको रुको!!! धीरे धीरे प्लीज एकदम झट से नहीं, आहिस्ते आहिस्ते अंदर जाने दो नाह!!” तो चावला साहब एक नटखट मुस्कान में सज्जनः के कमर के दोनों तरफ पकड़ते हुए अपने कमर पर ज़ोर देते हुए और थोड़ा सा लुंड को अंदर पुश किया तो संजना ने तड़पती आवाज़ में कहा, “उफ्फ्फ, ठीक नहीं है बाबा!! बाहर निकालो और थूक लगाओ नाह सूखा हुआ है, मुझे दर्द होगा ऐसे, यह आगे थोड़ा hi है के मैं गीली रहूं वहां पर!! और भिगो दो तब डालना!!”

चावला साहब ने फिर दिल में सोचा के इस लड़की को सब पता है किआ कैसे करना है, आराम से झुकी हुई है कार के हुड के ऊपर और जानती है मैं इस्को पीछे लेने वाला हूँ और आराम से लेने दे रही है, और इस्को यह भी पता है के ज़्यादा थूक लगाना चाहिए… बाद में इस से सवाल करता हूँ और आज तो जानकार hi रहूँगा के यह किश के साथ पीछे मारवाती है!

तो चावला साहब ने और थूक लगाया मगर उस्का गाला सूखा हुआ था तो थूक नहीं थे काफी तो उस्सने संजना से कहा, “तुम अपने थूक लगाओ नाह मेरा मुंह अंदर सूखा पड़ा है…..” और संजना ने उनके ेंखों में देखते हुए खुद अपने थूक को उनके लुंड पर लगाया, खूब अपने हाथ से माला अपने थूक को उनके तन्ने हुए लुंड के ऊपर और थोड़ा थूक अपने पीछे भी लगाया संजना ने फिर झुक गयी कार के हुड के ऊपर और चारों तरफ नज़रें दौड़ाते हुए कहा, “ज़्यादा टाइम मत लो कहीं कोई आ ना जाए, मुसीबत आजायेगी अगर किसी ने भी देखा तो, पुरे गाओं में ढिंढोरा पीठ जायेगा के आनंद की बेटी अपने होने वाले ससुर से छुड़वा रही थी हीहीहीहीहीही” यह कहकर वो टांगों थोड़ा ज़्यादा फैलाकर पूरी तरह से झुक गयी.

उस्सकी बातों को सुनकर चावला साहब के अंदर एक उतेजिना की लेहेर दौड़ी और उस्सने संजना के गांड के चढ़ के अंदर अपने लुंड को ठुस्सा, पहले आहिस्ते आहिस्ते फिर धीरे धीरे ज़्यादा पुश किया और लो पूरा लुंड घुस गया और संजना ने उफ़ तक नहीं किया!! चावला साहब ने सोचा, कमाल है आगे तो छूने नहीं दे रही है और जहाँ ज़्यादा डिफिकल्ट है घुस्सना वहां आराम से ले लिया, यह ज़रूर गांड मरवाती है किसी से! विर्जिनिटी तो बचा के राखी थी मगर पीछे देती होगी ज़रूर यह चालू चीज़ है जिस्का नाम है संजना!

अब धक्का मारने का टाइम आया तब संजना गर्दन मुड़कर पीछे चावला साहब के चेहरे में देखते हुए कहा, “हम्म्म ज़्यादा फ़ास्ट नहीं मुझे दुखेगा आहिस्ते आहिस्ते hi ढाका देना प्लीज!”

अब एक मर्द को पीछे इतनी टाइट जगह पर घुसने से ज़्यादा धक्के की ज़रुरत hi नहीं पढ़ती, क्यूंकि जितना टाइट अंदर होती है उतनी hi मज़ा अत है और उतनी hi जल्दी आदमी झाड़ जाता है ख़ास कर अगर लेने वाली संजना जैसे खूबसूरत, भोली भाली दिखने वाली ुर इतने खूबसूरत जिस्म की मालिक हो तो!

तो बिल्कुल देर नहीं लगा कोई 10 बार अंदर बाहर करने के बाद hi चावला साहब बिल्कुल संजना के ऊपर झुक गए उस्सकी चूचियों को मसलते हुए और उस्सकी गर्दन की पीछे वाले हिस्से को चूस्ते हुए दो आखरी धक्के को फ़ास्ट किया और संजना के गांड के अंदर hi अपने सारे वीर्य को छोड़ दिया उन्हों ने कस्सके संजना के बबबस को दबाते हुए. काफी हांफ रहे थे संजना के गर्दन पर अपने गरम सांसें चोररटे हुए. संजना उसी पोजीशन में झुकी हुई अपने हाथ को पीछे करके उनके सर को सेहला रही थी प्यार से और धीमी आवाज़ में पूछा, “हम्म्म्म साहब को मज़ा आया नाह? हम्म्म?” अपने साँसों को बाहर करते हुए, चावला साहब ने भारी आवाज़ में कहार्टे हुए कहा, “हाआआआं बहोत hi मज़ा आया बेबी, फीीववववव! किआ चीज़ हो तुम मेरी जान… बहुत मज़ा आया जी करता है अपने लुंड को तेरे अंदर hi रहने दूँ!!” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “लो!! तो फिर बाद में कैसे खुश करोगे खुद को और मुझे अगर यह मेरे अंदर रह गया तो? अपने मोठे शैतान को निकालो अब और धीरे से, झट से nahin!!weise वो नरम हो रहा है मेरे अंदर hi हीहीहीहीही”

चावला साहब उसस्के ऊपर वैसे hi कुछ देर झुके रहे उसस्के बूब्स और पथ के निचे अपने हाथों को फरते हुए, और संजना ने कहा, “उफ़, मैं थक गयी हूँ इस पोजीशन में झुके हुए ऊपर से आप का बोझ पुरे मुझ पर है अब हत्तो भी!” तब चावला साहब ने लुंड को बाहर किया जो सच में नरम हो गए थे और उसस्के चढ़ से थोड़ा बहोत गीलापन दिख रहा था, चावला साहब अब भी हांफ रहे थे और संजना के चेहरे में कुछ सोचते हुए घुररते जा रहे थे जबकि संजना अपनी पंतय पहने लगी थी, और पेहेनते वक़्त चावला साहब से कहा, “अब आप यह मत कहना के इस पंतय को भी आप रखोगे अपने पास ट्रॉफी के तौर पे!!” तो चावला साहब ने कहा, “हाँ बिल्कुल सही याद दिलाया तुमने इस्को लेना hi पड़ेगा मुझे क्यूंकि फर्स्ट टाइम पीछे लिया तुमको तो तोहफे के तौर पे तो लेना hi चाहिए मुझे इस्को भी.” संजना ने एक नखरे के साथ कहा, “मैं नहीं निकलने वाली अब जो पेहेन चुकी हूँ घर जाने के बाद निकल कर दूंगी याद दिलाना वापस जाने से पहले!”

चावला साहब ने कार के अंदर से एक पानी का बोतल निकला और अपने लुंड को धोने गया कार के पीछे. संजना वही कड़ी देख रही थी और धीरे धीरे कार के पीछे गयी वो भी और कहा, “दो मैं नहलाती हूँ इस मोठे शैतान को!” चावला साहब ने ख़ुशी से उस्सको बोतल दिया और संजना लुंड के सामने बैठ गयी और पानी से उस्सको अपने मुलायम हाथों से धोने लगी….. धोकर सूखा दिया तो लुंड को प्यार करते हुए चुम्मा संजना ने और दोनों कार के अंदर चले गए पीछे वाले सीट पर बैठे एक दूसरे को बाहों में भरके. कार की दोनों तरफ के दरवाज़े को खुला चोर्रा गया था क्यूंकि मस्त हवा चल रही थी और आराम करने लगे दोनों.

कोई 20/25 मिनट्स के आराम के बाद चावला साहब ने कहा, “आज मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी सवाल करनी है उम्मीद है के तुम सच सच जवाब डौगी. मुझे झूट नहीं पसंद और अगर मुझसे सच में प्यार करती हो तो सब सच सच बताना जो भी मैं पूछूंगा okay?” संजना बिल्कुल भी हैरान नहीं हुई और कहा, “मुझे पता है आप किआ पूछने वाले हो बल्कि मुझे खुद आप से सब कुछ कहना है. याद है मैं ने आप से कहा था के वक़्त आने पर बताउंगी और सब जान्ने के बाद आप या तो मुझसे ज़्यादा प्यार करोगे या नफरत? याद है बात के नहीं?”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….. (2903 वर्ड्स)
 
अपडेट 39 संजना टेल्स हेर सीक्रेट तो हिम

चावला साहब बेताब था सुनने के लिए के उस्सको किआ कहना था तो कहा, “हाँ बोलो बोलो मैं सुन्ना चाहता हूँ ऐसी कौन सी बात है जिस से मैं तुमको या तो ज़्यादा प्यार करने लगूंगा या नफरत?”

उस वक़्त संजना चावला साहब के बाहों में थी, दोनों लेते हुए थे कार के पीछे वाले सीट पर जैसे बीएड पर हों. संजना का सर चावला साहब के नंगे छाती पर थे और अपने नरम उबगलियों को वो उनके छाती पर फेरर रही थी और रह रह कर किश करती जा रही थी उनके चेस्ट को.

संजना ने कहा “मगर आप खुद कुछ पूछने वाले थे नाह? तो आप पूछिए मैं देखूं के किआ आप वही पूछना चाहते हो जो मैं सोच रही थी!”

चावला साहब संजना के बालों में ऊँगली फरते हुए पूछा, “देखो तुम सिर्फ 18 साल की हो और जब भी मैं ने तुमसे प्यार किया, किश किया, सेक्स किया मुझे अक्सर डाउट हुआ के तुमको यह सब पहले से करना अत है, लगा के तुम बहोत एक्सपेरिएंस्ड हो. तो यह जानना चाहता हूँ के किआ यह मेरे ज़हन में एक शक है या सच में तुमको सब कुछ पहले से अत है, जैसे के तुमने मुझे पहली बार जब चूसा था, कितनी आराम से और सब कुछ जानते हुए किया था किआ वो नेचुरल था या तुमको अत था? अगर हाँ तो किश के साथ सब कुछ किया था, किआ कोई बॉयफ्रेंड था, या वो जिस्सके बारे में तुम्हारे पापा ने कहा था उसस्के साथ कुछ था तुम्हारा इसी लिए तुम्हारे पापा ने तुम्हारा स्कूल जाना बांध करवाया? बताओ अब?”

संजना उठ बैठी और उनके चेहरे में देखा, फिर उनको किश किया गालों पर फिर से अपने सर को उनके छाती पर रखा और कहा, “मैं आप से सब कुछ कई दिनों से कहना चाहती थी मगर ऐसे एक मौके की तलाश में थी के हम बिल्कुल अकेले होंगे तो बोलती और आज सही मौका है तो सुनए एक सवाल से शुरू करती हूँ देखती हूँ आप कितने समझदार हो, - सोचिये क्यों जब आप पहली बार मेरे हाथ मांगे थे तो पापा ने इंकार किया था? क्यों उस दिन को पापा मुझे बार बार अंदर जाने को कह रहे थे? क्यों वो नहीं चाहते थे के मैं आप के सामने आऊं? याद है आप को जब आप पहले दिन हमारे यहाँ आये थे तो?”

चावला साहब को सब एक पहेली जैसे लगने लगे और कहा के हाँ उस्सको सब याद है मगर संजना से दरख्वास्त किया के वो सब सीधे सीधे बताएं.

संजना ने बोलना शुरू किया:

“साहब मेरा कोई बॉयफ्रेंड वॉयफ्रैंड कुछ भी नहीं है. मेरा बॉयफ्रेंड तो मेरे पापा खुद है! पिछले पांच साल से वो मेरा सब कुछ है मां के देहांत के बाद मैं बिल्कुल अकेली हो गयी और बहोत ज़्यादा रोटी रहती थी. वो भी अकेले थे और तभी से ज़्यादा पीना शुरू किया है उस्सने. मैं उस्सको संभालती तो वो मुझे. मैं उस्सको बहोत बहोत ज़्यादा प्यार करती थी साहब, वो मेरा सब कुछ था मां के मरने के बाद. मैं थी तो क्यूट hi हमेशा से और भोली भली भी मगर मुझसे पापा का घूम नहीं देखा जाता था जिस तरह से वो मां के मरने के बाद टूट गए थे…….”

संजना के ेंखें भर आये यह इतना कहने के बाद और रुकी ेंख पोंछने के लिए तो चावला साहब ने उसस्के गाल पोंछते हुए उसस्के गालों पर किश करते हुए कहा, “मुझे थोड़ा बहोत डाउट हुआ था मगर यकीन नहीं था ok ठीक है थोड़ा सांस लो फिर बताओ. तुम्हारा किआ उम्र था तब?”

संजना ने थोड़ा सा मुस्क़ुआते हुए कहा, “अब अभी से 5 साल पहले आप hi गईं लो!” चावला साहब ने कहा, “हम्म okay okay आगे बताओ!”

संजना उनके ेंखों की गहराई में देखते हुए कहा, “आप को ग़ुस्सा तो नहीं ारः इतना सुनके? आप नाराज़ नहीं लग रहे हो मुझे?!”

चावला साहब ने कहा, “बिल्कुल भी नाराज़ नहीं हूँ, बल्कि सब जाने के लिए एक उत्सुकता है मेरे अंदर बताओ नाह!”

तब संजना ने कहा, “हीहीहीही मैं ने कहा था नाह या तो आप नफरत करोगे या ज़्यादा प्यार…. आप मुझे थोड़ा ठरकी टाइप लगे, तो मैं ने सोचा के अगर थोड़ा भी ठरकी हो तो आप यह सब सुनकर नफरत नहीं बल्कि ज़्यादा चाहोगे मुझे क्यूंकि पापा भी कुछ ऐसा hi है एहि समझ कर मैं ने आप को सब बताने को सोचा!! Okay तो फिर अब सब बताती हूँ! मगर पापा ने सख्त मन किया है बताने को…. फिर भी मैं ने पापा से कहा के अगर आप को सब कुछ बताया तो या तो आर या तो पार दोनों में से एक होगा hi होगा तो मैं ने अपने ऊपर लेते हुए सोचा के आप को सब सच पता चलना चाहिए इसी लिए सब बता रही हूँ.”

चावला साहब बहोत बेताब हो रहे थे और कहा, “अरे बोलो भी तब किआ हुआ उन् दिनों तुम्हारे मां के मौत के बाद?”

संजना ने बयां जारी किया, “मैं पापा को उस हाल में नहीं देख प् रही थी, वो इतने दुखी थे के मैं खुद रोना चोरर कर उसस्के देख भाल करने लगी. मेरा तो कोई नहीं था उस के इलावा तो अगर उस्सको कुछ होता तब मैं किआ करती, तो जिस तरह से मां उसस्के देख भाल करते थे मैं ने सोचा मुझे उस्सको वैसे hi उस्का केयर करूँ और प्यार करूँ ताके वो खुद को संभाल सके. उस्सने मां के मरने के बाद एक महीने तक काम नहीं किया और जब वापस गए तो वहां से काम से निकल दिया गया. तब वो और दुखी हो गए. रघु से उधार लेकर हर शाम को पीटा था और मां के तस्वीर को लेकर रोया करता था….. तो एक रात मैं उस्सको सुलाते हुए खुद उसस्के पास सो गयी. कब नींद आयी पता hi नहीं चला. अब वो मेरा बाप था तो बाप बेटी में प्यार होने से एक दूसरे के जिस्म को छूने से तो कोई बात नहीं होती है नाह? तो मैं उस्सको किसी तरह से भी पकड़ती थी, संभालती थी, मेरे जिस्म उसस्के जिस्म से टकराते थे, सट्टे रहते थे यह मामूली बात थी और कुछ फ़िक्र नहीं थी कभी मुझे. मगर एक रात को पापा का हाथ मेरे कमर पर थे और उस्सने मेरे जिस्म पर हाथ फरते हुए कहा, “मेरी संजू तुझ में मुझे तेरी माँ दिखती है, बिल्कुल वही बदन, वही खुस्भू है तेरे बदन में मुझे बहोत अच्छा लगता है जब तू ऐसे मेरे बाहों में होती हो तो… तुम हमेशा मेरे पास hi सोना आज के बाद मुझे बहोत hi अच्छा लगता है!”

तो उस रात को मैं ने सोचा चलो पापा की फ़िक्र अब कम हो जाएगी अगर मुझ में वो मां को देखता है तो. और उस दिन के बाद मैं ने हर उस काम को करना शुरू किया जो मां करती थी पापा के लिए उस्सको खुश रखने के लिए जैसे उसस्के सुबह का टिफ़िन बनाना, उसस्के कपडे को स्त्री करना, उसस्के सारे छोटी छोटी चीज़ जो मां किया करती थी मैं करने लगी और हर एक चीज़ का ख्याल रखने लगी बिल्कुल मां की तरह. मुझे सब पता था क्यूंकि मैं सब देखती थी के मां पापा के लिए किआ किआ करती थी. तो मैं वो सब उसी तरह करने लगी. और पापा खुश दिखने लगे और उस्सको दूसरी जगह काम भी मिल गया. वो जब खुश नज़र आने लगे तो मुझे बहोत अच्छा लगा और मैं ने सोचा के मैं कामयाब हो गयी उस्सको ठीक करने में. मगर हर रात एक साथ सोते थे क्यूंकि वो चाहता था और मेरी आदत भी हो गयी उसस्के बाहों में सोना हर रात को. वो कम पिने लगे थे मेरे कहने पर, मगर हर शाम को ज़रूर पीते थे. मगर तुन नहीं होते, पी कर आराम से चल कर वापस घर आते थे तो मुझे अच्छा लगता… कभी कभार कोई उत्सव जैसे होली या कुछ होता तब तुन होते थे पी कर….

मैं कॉलेज जाने लगी थी तो हर सुबह बहोत सारे काम करती थी घर के कॉलेज जाने से पहले और अक्सर हम दोनों सुबह घर से एक साथ निकलते, वो मुझे बस स्टॉप तक चोररटे तब काम पर जाते और मैं शाम को वापस उस से पहले आती तो घर के सब काम कर देती उसस्के वापस आने से पहले. मैं छोटी से hi बहोत खूब सूरत थी, लड़के मुझे चेररते थे तभी से, मेरा बॉडी भर आये थे उसी उम्र में, मां के जीते hi मैं ने ब्रा उसे करना शुरू कर दिया था उसी छोटी उम्र में. मेरा कॉलेज का यूनिफार्म ठीक मेरे घुटनों तक एते थे और बस में बैठी थी तो जांघ दीखते थे तो लड़के मुझको छूटे थे तो मैं पापा से कहती तो वो कहता “आरी तू इतनी खूबसूरत है के कोई भी तुम्हारे साथ शादी करने को तैयार होगा मगर तुम किसी के साथ कोई बी ऐसा रिश्ता मत बनाना, तुम मेरे लिए हो सिर्फ मेरे लिए” और वो खुद अपने हाथ को मेरे यूनिफार्म के निचे डालता और मेरे जाँघों को सहलाता था…… मैं उस से इतना प्यार करती थी के उसस्के छूने से मुझे अच्छा लगता मैं कभी नाराज़ नहीं होती वो मुझे कहीं भी छूटा तो. तो एक दिन तो उस्सने खुद कहा के दूसरी यूनिफार्म लेना तो तोडा और ऊपर लेना जो घुटनों के थोड़ा ज़्यादा ऊपर हो, और उसी ने मेरा यूनिफार्म ख़रीदा और टेलर के यहाँ देकर उस्सको और छोटा करवाया जिस में मेरी जांघें ज़्यादा दीखते….. हर शाम को स्कूल से वापस आने के बाद उसस्के कहने पर मैं यूनिफार्म में hi रहती जब तक वो काम से वापस नहीं आते क्यूंकि वो चाहते थे के जब वो वापस आये तो मुझे मेरी यूनिफार्म में hi देखे, और हर रोज़ मुझे उस यूनिफार्म में अपने गॉड में बिठाते, प्यार करते आउट जाँघों को सहलाते…. जैसे आप को मेरी जांघें पसंद है उस्सको भी वैसे hi पसंद है…..”

यह सब सुनते चावला साहब का फिर से खड़ा हो गया था और उस्सने उसी वक़्त संजना के जाँघों को सहलाया और चुम्मा और कहा, “तू है hi ऐसी माय लव, मेरे तो दो बेटे हैं, बेटी नहीं अगर तू मेरी बेटी होती तो मैं भी बिल्कुल वही करता जो आनंद ने किया….. उस्का कोई कुसूर नहीं तू है hi ऐसी, कोई भी तेरा दीवाना हो जाए…..”

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन नेक्स्ट अपडेट………
 
अपडेट 40 संजना कॉन्टिनुएस तो तेल्ल

संजना ने खुश होते हुए कहा, “सच? देखा मैं ने सही पहचाना आप को, मुझे भी ऐसा hi लगा आप को पहली बार देख कर, के अगर मुझे आप इतना पसंद आये थे और जिस को मैं बचपन से तस्वीरों में देख कर प्यार करती रही वो भी मुझको ज़रूर प्यार करेगा!!”

तब चावला साहब छोहके और पूछा, “व्हाट? तुम मेरे तस्वीर से प्यार करती थी?”

संजना boli,“Yeh उन्ही दिनों के बात है साहब जब पापा मुझसे इश्क करने लगे थे, तब मैं आप के तस्वीर को बाहों में भरके प्यार करती थी के जैसे आप मेरे दूल्हा हो… मैं एक सपनों की दुन्या में जीती थी के आप वो राजकुमार हो जिसस्ने मुझे इतनी कीमती नेकलेस दिया है और आप मुझको एक दिन लेने वापस आओगे!! बुसस एक सपना था और बचपना था मगर यह तो सच हुआ!!”

तो चावला साहब ने कहा, “अच्छा आगे बताओ फिर कैसे और किआ हुआ तुम्हारे पापा केक साथ?”

संजना ने कहा, “एक रात को मैं सो रही थी हमेशा की तरह पापा के बाहों में, तो बीच रात में मैं ने एक रागढ जैसा फील किया अपने नितम्बों पर, जैसे कोई मोटा सा चीज़ वह रागढ रहा है, मैं ने करवट लेना चाहि तो महसूस किया के पापा के बाहों में हूँ और उस्सने मुझको दबाये हुए हैं… मैं कुछ नहीं समझ पा रहे थी, तो धीमी आवाज़ में मैं ने कहा, “पापा मुझे करवट लेना है आप ने मुझे दबाया हुआ है हत्तीए नाह!” तो मैं ने उस्सकी साँसों को फील किया अपने गर्दन पर फिर उसस्के जीब को फील किया मेरे गर्दन से गालों के तरफ बढ़ते हुए…. मैं इतनी भी नादान तो नहीं थी के नहीं समझती के पापा किआ कर रहे थे साहब, मैं समझ गयी के पापा वो कर रहे है जो मां के साथ करते थे और मैं उसस्के लिए मां बन गयी उस रात के बाद. उस्का मोटा लिंग मेरे जाघों के बीच रागढ रहे थे और उस्का पानी चउथा तो मैं ने बहोत सारे गीली गीली फील किया अपने जाँघों के बीच और समझ गयी के पापा ने किआ किया. चादर में मैं ने सब पोंछा और क्युके बहोत ज़्यादा नींद आरही थी मैं तुरंत फिर सो गयी.”

चावला साहब ने अपने लुंड को पंत से निकला और संजना के हाथ में थमाया सब सुनने के बाद. संजना ने पूछा, “यह सब सुनके आप की कड़ी हुई किआ?” चावला साहब हांफने लगे और कहा, “हाँ बेबी बहोत इरोटिक सिचुएशन था तुम्हारे पापा और तुम्हारे बीच, मुझे तो सुनने में बेहद मज़ा ारः है और तुम पर बहोत ज़्यादा प्यार… और बताओ आनंद ने और किआ किआ किया तुम्हारे साथ, साला आनंद ने फुल मजा लिया अपनी उभरती बेटी की जिस्म के साथ, क्यों मैं ने तब तुमको नहीं पाया ऋ संजना मेरी जान, चूस, थोड़ा चूस नाह इस्को आआअह्ह्ह्ह!!”

संजना झुक कर उनको चुस्सने लगी, फिर सर को ऊपर उठाते हुए कहा, “किआ आप भी, अभी अभी तो आप ने एन्जॉय किया पीछे और किआ ……. अब आगे बताऊँ के नहीं?”

तो चावला साहब ने कहा, “ठीक है बताओ मगर इस्को अपने हाथ में थामे रखो और बोलते चलो. संजना ने कहा, “हीहीही okay ठीक है” और उनके लुंड को अपने हाथ में थामे हुए संजना ने बयां जारी रखा……..

“उस रात के बाद हर रात को पापा वही करता मेरे साथ. मैं भी अब इंतेज़ार करने लगी थी के कब वो अपना मोटा चीज़ मेरे जाँघों के बीच दाल कर रगड़ेगा…. मुझे एक तरह से ख़ुशी हो रही थी के मैं मां को रेप्लस कर रही थी और पापा खुश थे. मगर मैं सच में पापा को बहोत प्यार करती थी और करती हूँ अब भी. वो मेरा सब कुछ जो था. उसस्के इलावा कोई भी तो नहीं था मेरा. वो मेरा बॉयफ्रेंड बन चूका था, मेरा पापा hi था और रात में मेरा बॉयफ्रेंड थे वो. मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सोती थी हर रात को. कॉलेज में जब लड़कियां अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बात करते तो मैं भी कहती थी के मेरा भी बॉयफ्रेंड है और मैं भी सब कुछ करती हूँ जो वह लोग कहते थे…..

मगर दिन में पापा और मैं ऐसे बेहवे करते के रात को कुछ हुआ hi नहीं. वो सिर्फ रात के अँधेरे में कम्बल के निचे आहिस्ते आहिस्ते हुआ करता था, और उस बात का ज़िक्र दिन में नाह मैं करती नाह पापा. वो जैसे एक बड़ा सीक्रेट था जो सिर्फ उसी वक़्त बीच रात में किया जाता था. कोई 6 महीनों तक ऐसा hi चला.

फिर एक रात को पापा का हाथ मेरे आगे गया मेरे योनि पर और उस्सकी ऊँगली ने मुझे गिला किया था पहली बार और फिर वही, उस रात को पहली बार उस्सने मेरा पंतय उतरा था वार्ना हर रात को सिर्फ जाँघों के बीच करता था मगर उस रात को मुझे सिसकारियों में भर दिया था उस्सने क्यों के उस्सने वहां अपने जीब को लगाया और चाटना शुरू कर दिया और मैं ने ेंखें खोल डेल और उनको सब करते हुए देखने लगी…. एक छोटा सा लाइट जलता था हर रात को टेबल लैंप की तरह, उस धीमी रौशनी में मैं उनको देख रही थी जो वो कर रहे थे और में सिसक रही थी उनके सर को हाथ में थामे हुए और वो मुझे वहां चुस्सने लगे और मुझसे सेहेन नहीं हुई मैं तड़प उठती हुए मेरे जिस्म में एक आग जैसे भड़क उठती और मैं खुद उठ बैठी और उसस्के मुंह को अपने मुंह में ले liya…wo मेरा पहला किश था ज़िन्दगी का…. तब उस्सने मुझे बाहों में भरके मुझको लेटाया और उस्का नंगा जिस्म बिल्कुल मेरे ऊपर था मेरी पंतय निचे ज़मीन पर और उस्का लिंग मेरे गीले योनि के ऊपर रगड़ने लगे और वो पहली बार था जब उस्का पानी मेरे योनि के ऊपर गिर्रा था जाँघों के बजाए….. पहली बार मैं ने एक मर्द को अपने बाहों में भरे हुए उसस्के लिंग को अपने छूट के ऊपर फिसलते हुआ फील किया था मतलब सिर्फ मेरे अंदर करना बाकी था मगर उस्सने कभी अंदर पेनेत्रते नहीं किया हालां के मैं बहोत चाहती थी के वो अंदर डाले मगर वो मुझे वर्जिन रखना चाहते थे……

और इस बार हमने इस बारे में बात करना शुरू किया…. उस रात को नहीं मगर अगले दिनको, क्यों के जिस रात को यह हुआ वो सैटरडे था तो अगले दिन संडे थे तो हम दोनों घर पर थे और दिन में उस्सने मुझे अपने गॉड में बिठाया और कहा के रात को उस्सने बहोत एन्जॉय किया, उस्सको बहोत मज़ा आया और शर्माते हुए मैं ने भी कहा के मुझे भी बहोत hi अच्छा लगा. और उसी वक़्त उस्सने अपने लिंग को निकला और मुझे अपने हाथ में लेने को कहा, वो पहली बार थी जो मैं ने एक लिंग को अपने हाथों में लिया और इतने करीब से अपने ेंखों के सामंने देखा था…….”

चावला साहब दीवाना हो रहे थे और अपने कमर को हिलने लगे थे अपने लुंड को संजना के हाथ में रगड़ते हुए और उस से फिर चुस्सने को कहा… संजना ने उनको चुस्सना शुरू किया और चावला साहब ने कहाँरते हुए अपने पानी को चोर्रा कुछ संजना के मुंह के अंदर hi रहे कुछ बाहर गिरे और बाकी संजना ने थूका उन् के लुंड को हाथ में सेलाते हुए बाकी के वीर्य को लुंड पर रगड़ते हुए….. चावला साहब हांफ रहे थे संजना के चेहरे में देखते हुए और कहा, “तुम एक सेक्स की गॉडेस हो मेरी जान…… तुम किसी भी मर्द को पागल कर सकती हो, तुम्हारे पापा किआ चीज़ है जब मैं खुद पागल हो गया, कोई भी पागल हो जाता तुम्हारे लिए तुम चीज़ hi ऐसी हो!!”

संजना को यह सुनकर बहोत अच्छा लगा और कहा, “तो मैं ने सही सोचा था तब कहा के या तो आप मुझसे नफरत करोगे सब जान्ने के बाद या तो ज़्यादा प्यार? किआ मैं सही थी?” चावला साहब ने उस्सको चुम्मते हुए कहा, “तुम बहोत hi होशिआर हो, यू अरे वैरी इंटेलीजेंट माय गर्ल. तुमको पता चल गया था के मैं तुम्हारा दीवाना हो चूका हूँ तो नफरत तो बिल्कुल नहीं करूँगा और मेरा ठरकी शादी भी तुमको दिख गया था इसी लिए तुमको सब सही दिखा…… हाँ यू वेरे राइट, अब्सोलुतेल्य राइट… अगर मैं ने सिर्फ अपने बेटे के लिए तुमको देखा होता तब शायद नफरत करता यह जानकार के तुम्हारे बाप के साथ तुम्हारा ईन्सेस्तुओस रिश्ता है, मगर जब मैं खुद अपने बेटे को धोका दे रहा हूँ तो तुमसे क्यों नफरत करूँगा भला? मैं समझ गया के किश स्तिथि में तुम्हारे और तुम्हारे बाप के बीच सब शुरू हुआ, और मैं खुद बिल्कुल वही करता तुम्हारे साथ अगर मैं तुम्हारा बाप होता to….to फिर नफरत की कोई गुंजाइश hi नहीं!...... अच्छा अब आगे बताओ नाह फिर किआ हुआ मुझे यकीन है के अभी तुमको और बहोत कुछ बताना बाकी है……….”

संजना बहोत ज़्यादा खुश दिखने लगी थी और “हीहीहीहीहीहीहीहीहीही” करते हुए उनके लिंग को किश किया और कहा, “हाँ आप को और बहोत ज़्यादा ऐसे बताना बाकी है मगर एक दिन में तो सब नहीं बता पाऊँगी….. कुछ बाद के लिए भी रखें नाह जी?”

तो बे कॉन्टिनोएड………………… (3181 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 41 संजना रेलटेस मोरे

मगर चावला साहब और सुन्ना चाहता था, उस्सने कहा, “वहां से जारी रख जब दिन में तुम दोनों ने पहली बार उस बारे में बात किये और आनंद ने तुमको अपना लुंड हाथ में लेने को कहा,” तो संजना ने कहा “okay और 30 मिनट्स बात करते हैं तब वापस घर चलेंगे” उन्हों ने कहा okay तो संजना ने बोलना जारी रखा:

“हाँ तो उस दिन मैं ने पहली बार अपनी ज़िन्दगी में एक लुंड को अपने हाथों में लिया और उस्सको महसूस किया. हीहीहीहीहीही, वैसे पापा hi के लिंग को देखा था मैं ने एक्सिडेंटली एकांत बार जैसे जब वो नाहा रहे हो और मैं उनके तौलिया देने गयी जब मां ज़िंदा थे तब की बात बता रही हूँ अभी. एक बार पापा कपडे बदल रहे थे और मैं कमरे में अचानक घुस गयी थी अपनी किसी चीज़ को लेने अलमारी से, तब लटके हुए देखा था उसस्के लिंग को और एक बार उस्का बॉक्सर नहीं मिल रहे थे तो मां ने मुझसे कहा था जाकर पापा को देने के लिए उस दिन भी देखा था मगर इस तरह नहीं जैसे उस दिन को पापा ने मुझे अपने हाथ में थामने को दिया और उतने करीब से कभी नहीं देखा था….

तो उस वक़्त मैं ने थोड़ा शर्माते हुए, पापा के चेहरे में देखा, फिर लिंग को देखा दोबारा पापा को देखा, और वो बेचैन थे के मेरे हाथों का स्पर्श हो उनके उस पर… मेरे अंदर एक लेहेर सी दौड़ी और लगा के कांप रही हूँ, मगर मैं कांप नहीं रही थी वो कुछ और फीलिंग था जिस्सको मैं नहीं समझा सकती, तो कांपते हुए हाथ और ुंलियों में मैं ने पापा के लुंड को लिया. वो बिल्कुल तन्ना हुआ था, एक मोटा लकड़ी का टुकड़ा लग रहा था मुझे, बिल्कुल सांवला और काळा रंग के बीच का रंग था हालां के पापा तो गोरा है पर लुंड क्यों कला था मैं आज तक नहीं समझी हीहीहीहीहीहीहीही…………. तो मैं ने उस्सको अपने दोनों हाथों में लेते हुए सर ऊपर उठके पापा को फिर एक बार देखा, वो मेरे hi चेहरे में देख रहे थे और इस इंतज़ार में थे के मैं कुछ करूँ और पता नहीं क्यों बिना पापा के बोले मैं ने खुद उस्सको चुम्मा दो बार, तीन बार, चार बार फिर मैं बार बार लगातार उसस्के लिंग को चूमती गयी बिना पापा के कहे….

वो बहोत hi खुश लग रहे थे मेरे चुम्बन से. मैं खुद हैरान थी के मैं ने वैसा क्यों और कैसे किया बिना किसी के बताये या बोले. पता नहीं वो नेचुरल इंस्टिंक्ट था या किआ मगर मैं ने वो ऐसे hi कर दिया था, जैसे वो एक खिलौना है मेरा और मुझे उस खिलोने से प्यार था तो मैं उस्सको प्यार कर रही थी…… जब मैं ज़्यादा सयानी हुई तो एक किताब में एक दिन पढ़ा था के इंटुइशन होते हैं कुछ इंसानों को जो अपने आप hi, बिना सिखाये कुछ काम करने लगते हैं, वो गेन्स में होता है…….. तो बाद में जब भी मैं सोचती के क्यों मैं ने वैसा किया था तो बुसस उस इंटुइशन वाली बात को सोचती के वही किया था मैं ने, शायद मां वैसा करती थी तो पापा को पता था के मैं मां की बेटी हूँ तो मुझ में भी वैसा मैं ज़रूर होगा. मगर मैं ने कभी भी पापा से इस बारे में बात नहीं किया.

मगर बात तब मज़ेदार हुई जब पापा ने कहा, “इस्को मुंह में लो नाह मेरी गद्य!” तब मैं उस्सको झटकते हुए ज़ोर से कहा, “चीई!!” पापा ज़ोर से हंससने लगे और कहा, “आरी बुद्धू इससे मुंह में लेते हैं, चूस्ते हैं, चाटते हैं, तेरी मां यह सब करती थी रे!!” मैं नहीं मानी के मां यह सब करती थी मैं ने उस वक़्त सोचा के पापा मुझको ठग रहे हैं, फुसला रहे हैं ताके में वो करूँ…. मेरी कच्ची उम्र थी तब साहब मुझे किआ पता था के वो सब भी किया जाता है लव मेकिंग में उस वक़्त.”

चावला साहब संजना को देखते मुस्कुरा रहे थे और उसस्के गाल को अपने दो उँगलियों से दबाते हुए अपने दांतों को मुंह में दबाते हुए बड़े प्यार से कहा, “मेरी गद्य कहा पापा ने इस प्यारी सी संजना को हम्म्म… बहोत प्यार ारः है रे मुझको भी तुम पर और तुम्हारे उस बचपन और लड़कपन के बीच के उम्र पर जब तुमने यह सब कर लिया था, नासमज फिर भी बड़े वालों का प्यार, जिस्म रेडी पर तुम्हारे दिमाग़ नहीं रेडी जिस्म औरत की मगर दिमाग़ बची wali..haye रे मेरी संजना क्यों मैं उस वक़्त नहीं था यहाँ मैं भी कितना मस्ती करता तेरे साथ…. शायद तब तेरे बाप से पहले मैं ने hi वो सब कुछ किया होता तेरे साथ क्यों?!”

संजना ने मुठी बांध कर चावला साहब को उसस्के छाती पैट मारा और हंससने लगी, फिर किश किया जहाँ मारा था, तो चावला साहब उस्सको बाहों में भरके कहा, “ठीक है आगे बोलो अब”

संजना ने बोलना चालू किया, “तो मैं ने इंकार किया और पापा ने एक घंटा लिया मुझको मानाने में और आखिर में मैं ने मुंह में लिया उसस्के लिंग को. वो मेरा फर्स्ट टाइम था साहब. जीब से छाता, चूसा थोड़ा सा hi और जिस्म में एक गरम लेहेर जैसी दौड़ी और ज़्यादा चुस्सने को मैं किया अचानक, उस्सको टास्ते करने का और तरय करने को जी किया, तो आहिस्ते आहिस्ते मुंह के अंदर लेती गयी चूस्ते हुए और पापा खड़े होकर धक्के देने लगे मेरे मुंह में, और मैं अपने दोनों हाथों को उनके जांघ पर रख कर उस्सको पुश करने की कोशिश करती रही मगर उस्सने मेरे सर को एक हाथ से थामा और ढाका बढ़ता गया और जल्दी hi अचानक कहाँरते हुए लुंड को बाहर निकला वीर्य पिचकारी के जैसे चोररटे हुए ज़मीन और कुछ मेरे गालों और बालों में गिर्री…..

वो पहली बार थी जब मैं ने एक मेल एजकलशं को ेंखों के सामने देखा था.. अभी से सादे चार साल पहले की बात है huzoor…..to मैं समझ गयी के एहि वो गीली चीज़ है जो रात को मेरे जाँघों के बीच मुझे लतपथ करते थे!!... तब पापा ने उसस्के बाद अपने जीब से बचे हुए वीर्य को चाटने को कहा, मैं ने फिर से की कहा और उस्सने कहा के यह नार्मल है, उस्सने कहा बिल्कुल जैसे एक अंडे के अंदर पानी होता है वही है इस में कुछ भी बुरा नहीं…. मेरा पापा था वो और मुझको कभी धोका तो नहीं देता और ग़लत तो नहीं करवाता तो मैं ने सोचा के यह भी तरय करके देखती हूँ, तो छाता उसस्के लिंग के चढ़ को जहाँ थोड़ा गीलापन बाकी था और टास्ते सालती लगा तो मैं ने रुक कर कहा, ‘पापा यह नमक पानी वाला टास्ते ारः है,’ तो उस्सने कहा, ‘मैं ने कहा नाह अंडे वाला टास्ते है यह बिल्कुल वही है इस में विटामिन भी होते हैं इससे लेकर अपने गालों पर मालो, त्वचा के लिए अच्छा होता है….. हीहीहीहीहीहीहीहीही अब कितना झूट और कितना सच इस्सके तो पता नहीं था मगर साइंस पढ़ा कॉलेज में तो पता चला के पापा सही कह रहे थे बिल्कुल…………”

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट अपडेट इम्मेडिएटली
 
अपडेट 42 एंड शी कॉन्टिनुएस…..

चावला साहब ने भी कन्फर्म किया के उसस्के पापा सही कह रहे थे वो त्वचा और स्पेर्माटोज़ोइड के बारे में. और चावला साहब ने संजना को अपने गॉड में बिठाया, उस्सकी उस ड्रेस को बिल्कुल जाँघों के ऊपर उठाकर, मतलब उस्सकी गांड पंतय समेत चावला साहब के लुंड पर थे जब उस्सको वैसे चावला साहब ने बिठाया तो…… संजना ने कहा, “ोफो अब किआ, किआ यह मोटा शैतान फिर से खड़ा हो रहा है किआ जी?” चावला साहब बोले, “नहीं फिलहाल तो नहीं मगर तुम इसी पर बैठी रहो और सुनाओ फिर किआ हुआ…..”

संजना ने बोलना जारी किया, “फिर किआ, वही अब उस दिन के बाद हम जैसे दो प्रेमी थे घर में, जैसे मैं उस्सकी छोटी पत्नी वो मेरा पति. हम उस तरह से जीने लगे थे. जब वो काम पर होते तो दिन भर मेरे बारे में सोचते और मैं कॉलेज में उस्सको सोचती रहती. उसस्के लिए बेहतर से बेहतर खाना बनती, कुक बुक्स से रेसिपी लेती और नए नए खाने के चीज़ बनती, उसस्के हर काम को अच्छी तरह से करती, उस्का वेट करती, राह देखती. सुबह को जब हम साथ निकलते और बस स्टॉप पर जब वो मुझे चोररटा तो मेरा मैं करर्ता के मैं भागते हुए उसस्के पीछे जाऊं बस से उतर के….. बहोत प्यार हो गया उस से और वो मेरा सब कुछ हो गया. उस्का भी वही हाल था मुझको एक पल भी अकेली नहीं चोररटे काम से वापस आते तो, सिर्फ पिने को जाते वो भी ज़्यादा टर्र घर पर लाकर पिटे. मैं ड्रिंक बनती उस्सको सर्वे करती उसस्के लिए कुछ चिप्स वग़ैरा बनती और उस्सको पिलाती मैं खुद तब हम इश्क करते. बहुत hi ाचा लगने लगा था यह सब मुझे. मैं बिन बियाही एक बिहटा की ज़िन्दगी जीने लगी थी. सब कुछ बहोत ाचा लगने लगा था…..

रात का इंतज़ार करती मैं के कब वो मेरे कपडे उतारेंगे और मैं उनकी और मैं उसस्के पूरा जिस्म को चाटूँगी और वो मेरे बदन को चारों तरफ सहलाएगा और चूमेगा और चाटेगा. उसस्के मज़बूत बाहों में मुझको बहोत hi ाचा लगता था. जी करता था के उसस्के बाहों में hi रहूं हरदम.

फिर एक रात को उस्सने मुझको पथ के बल लेटाया और अपने लुंड को मेरे नितम्बों के बीच थूक लगाकर रागढ रहे थे, वैसा अक्सर करते थे…. यह दो साल पहले की बात है अभी से…… और उसस्के अपने लिंग को मेरे पिछवाड़े के चढ़ में दबाया जैसे ग़ुस्सा रहे हो… मैं ने कमर हिल्ला कर उस मूव को फ़ैल किया, उस्सने दोबारा वैसा किया और उसस्के लुंड का ऊपरी हिस्सा थोड़ा सा ग़ुस्सा और मैं चीख पड़ी…. और डर कर उठ बैठी उसस्के चेहरे में देखते हुए…. वो हंससने और kaha,’ofo अरे यह भी करते हैं यह चलता है थोड़ा सा अंदर लो फिर देखना…. मैं ने मन किया……

साहब वो मुझको वर्जिन इस लिए रख रहे थे आगे, क्यों के यह गाओं है साहब और यहाँ अगर एक लड़की शादी करके पति के घर गयी और उस्सको पता चला के लड़की वर्जिन नहीं है तो ढिंढोरा पिट जाता है और पुरे गाओं को पता चल जाता है और पंचायत में लड़की को और उसस्के घरवाले को बुलाकर सबके सामने लड़की को वापस मइके भेजा जाता है. यहाँ के आस पास के गाओं का एहि हाल है. यहाँ के लोग विर्जिनिटी को बहोत एहमियत देते हैं. तो पापा ने इसी वजह से आगे कुछ नहीं किया और मुझसे कहा भी के मेरे शादी होने तक वो आगे सिर्फ रगड़ेगा मेरे ऊपर…. मैं ने हुड कई बार अंदर लेना चाहा और कहा भी उस से एक्सटेसी के हालत में के पापा डाल्दो, प्लीज अंदर डाल्दो नाह मैं चाहती हूँ के आप अंदर डालो… मैं कई बार बिल्कुल गीली हो जाती थी और बहोत मैं करता था के वो मरे अंदर आये मगर वो एहि सब रीज़न बता कर ऊपर hi खुद को प्लीज करते रहे पिछले 5 सालों se…magar उस रात को उस्सने मुझे पीछे लेना चाहा, कहा के पीछे तो विर्जिनिटी की निशानी नहीं तो ले सकता है….. तो आज से दो साल पहले उस्सने मुझे उस रात को पहली बार पीछे लिया था….. शुरू में दर्द हुई मैं रोई भी मगर बाद में धीरे धीरे बिल्कुल आदत हो गयी और वो अक्सर पीछे hi करने लगे ऊपर रगड़ने के बजाए.

वो बहोत प्यार से और आराम से पीछे डालता था, मुझको दर्द नहीं होने देता, साथ साथ मुझको बहोत किश करता और गर्दन के पीछे तो बहोत सारे लोवेबिट्स करते थे जो मेरे कॉलेज की गर्ल्स को मैं दिखती जीन लड़कियों के बॉयफ्रैंड्स होते थे और वे मुझको अपने निशाँ दिखते थे तब…. एक बार मैं ने पापा से मेरे चूचियों पर खूब लोवेबिट्स बनाना को कहा था, उस्सने बिल्कुल डार्क रेड वाले सेंकरों निशाँ बनाये थे और हम क्लास में 7 गर्ल्स थे जो यह सब करते थे उन् में से अभी 7 विर्जिन्स नहीं थे सिर्फ मैं वर्जिन थी मगर उन् सब से मैं एहि कहती के मैं भी वर्जिन नहीं hoon….to उस रोज़ हम सब लड़कियों ने वाशरूम में मीटिंग रखे एक दूसरे के चूचियों पर लोवेबिट्स दिखने के लिए और उन् सब में से सब से ज़्यादा मार्क्स मेरे ब्रेअस्ट्स पर थे सब हार गए थे हीहीहीहीहीहीहीही…. आप को पता था लड़कियां यह सब भी करते हैं कॉलेज में? हम्म्म?? हीहीहीहीही………….. उन् लड़कियों में से एक और अपने बाप के साथ करती थी वो वर्जिन नहीं थी और उस्सकी माँ भी थी फिर भी उसस्के पापा उसस्के साथ करता था और एक का तो बड़ा भाई करता था उसस्के साथ… वह दो मेरे बेस्ट फ्रेंड्स थे इस लिए दोनों मुझको सब सच सच बताते थे, मगर मैं ने किसी से बिल्कुल नहीं बताया के मेरा भी पापा hi मेरा बॉयफ्रेंड है हीहीहीही…… हाँ तो मैं किआ कह रही थी, हाँ एहि के पापा बिल्कुल आराम और प्यार से करते थे, मगर जब ज़्यादा शराब पिए होते थे तब थोड़ा रफ़ होते थे और ठुस्स्ते थे रोगलय अंदर तब मुझको थोड़ा दर्द होता था मगर पता नहीं क्यों कभी कभी उस्का रफ़ होना भी मुझे अच्छा लगता था…. ऐसा क्यों था?? हम्म्म?”

चावला साहब का खड़ा हो गया था फिर से और संजना उस पर बैठी हुई थी तो चावला साहब ने कहा, “अपनी पैंटी निकालो फिर, अब तेरे अंदर घुसासता हूँ पीछे एक बार और!” संजना ने एक छोटी चीख के साथ कहा, “व्हाट? और? तीसरी बार? किआ फिर से कर पाओगे आप? पापा ज़्यादा से ज़्यादा दो बार एक साथ करता है तीसरी बार वो थोड़ा सा खड़ा होता है फिर बीच में नरम हो जाता है और वो थक कर रुक जाता hai….aap कर पाओगे किआ तीसरी बार? दो बार तो झाड़ चुके हो?!”

चावला साहब ने kaha,”chalo देखते हैं के कर पता हूँ या तेरे पापा की तरह रुकना पड़ेगा पंतय तो निकाल मेरी जान!” और यह कहकर वो खुद उस्सकी पैंटी को निकाल कर सीट पर अपने पीछे ग़ुस्सा दिया और संजना को बैठे हुए पोजीशन में hi उसस्के अंदर पीछे में घुसाया थोड़ा थूक लगाकर और संजना ने “ीिस्स्सस्स्स्शशस्स्सस्स” करते हुए उनके लुंड को अपने अंदर घुस्सने दिया और चावला साहब ने कहा, “अब तू hi उठक बैठक कर न इस पर देखता हूँ कैसे नहीं झाड़ता हूँ”….. तो संजना ने अपने हाथों को उसके काँधे पर किया और खुद अपने गांड को ऊपर निचे करती गयी चावला साहब के लुंड को अपने पिछवाड़े में लेते हुए, और ‘आआआह्ह्ह्ह ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ ुउउइइइइइइ” करती गयी अपनी धीमी धीमी आवाज़ में और चावला साहब कुछ धीरे धीरे कमर को हिलाता गया लुंड को उसस्के अंदर ज़्यादा घुसते हुए और बुसस कोई 4 मिनट्स के अंदर hi उस्सने संजना को बहोत ज़ोर से जकरा, उसस्के बूब्स को दबाते और मसलते हुए और घुर्राया, “आआअह्ह्ह्ह्ग्गहगह झाड़ रहा हूँ बेबी सब अंदर hi चोरर देता हूँ आआआअह्हह्ह्ह्ह वह रे वह मेरी संजना कितना मज़ा दिया तुम ने मुझे ाअजज्जजज तीन बार झाड़ा दिया तुमने मुझे आअह्ह्ह्ह्ह” और वो संजना के गर्दन को चुस्ता गया जब तक उसस्के वीर्य पूरी तरह से संजना के अंदर जमा नहीं हुआ……………..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………. (2491 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 43 रेतुर्न फ्रॉम थेमोन्टाइन्स

वहां से चलने का वक़्त आगया संजना ने कहा तो चावला साहब ने कहा हाँ चलते हैं. आसपास ड्राइविंग करते वक़्त संजना वैसे hi उनके बगल में बैठी उन् के छाती पर अपना सर रखे हुए. चावला साहब ने पूछा; “अच्छा एक बात बताओ….” तुरंत संजना ने उनको रोकते हुए कहा, “ोफो मैं बकबक करते थक गयी हूँ अब कुछ नहीं बोलूंगी!” तो चावला साहब ने सिर्फ इतना पूछा, “तो जिस दिन मैं पहली बार आया था और तुमको माँगा था अपने बेटे के लिए और तुम्हारे पापा ने मन किया था यह कहकर के तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है वग़ैरा वग़ैरा… मगर मेरे जाने के बाद तुमने कैसे मनाया उनको वो जानना चाहता हूँ… अगर वो तुमको अपने पास रखना चाहता था तो कैसे मान गया तुमको अलग करने के लिए यह मैं नहीं समझा….”

जाते वक़्त जो कुछ खाने के लिए ले गए थे संजना उन् में से कुछ खा रही थी और चावला साहब को खिलाती जा रही थी क्यों के वो ड्राइव कर रहे थे और पेप्सी पी रही थी और पीला रही थी उनको. तो संजना खाते खाते बात करने लगी उनको समझाने को के कैसे उनके पापा को मनाया उस्सने.

संजना बोली, “पापा ने मेरी शादी एक दिमाग़ के पैदल लड़के से करने को सोच लिया था. मुझसे कह भी दिया था के जान बुझ कर मेरी शादी उसस्के साथ करवाएगा और दो हफ्ते बाद मैं डाइवोर्स लुंगी क्यूंकि वो पागल है तब वापस पापा के पास चली आउंगी हमेशा के लिए. पापा ने यह प्लान सोच समझ कर बनाया था मुझे अपने पास हमेशा के लिए रखने के लिए. तो मैं भी राज़ी हो गयी थी क्यूंकि एक पागल लड़के के साथ कौन रहने को तैयार होगा. वो लड़का इसी गाओं का है और उसस्के माँ बाप उसस्के लिए लड़की ढूंढ रहे हैं यह सोचकर के शादी करने के बाद उस्का दिमाग़ी हालत ठीक हो जाएगा…. पापा का एक फायदा यह भी होता के मैं उस्सको वापस वर्जिन मिलती ऐसा उस्सने सोचा मुझसे यह कहते के मैं उस पागल को मुझे छूने hi नहीं दूँ शादी की रात को….

तो वो आप को इसी लिए मन कर रहा था क्यूंकि उस्का प्लान तब फ़ैल हो जाता नाह? फिर उस रात को आप से चाट करने के बाद रात को मैं पापा के साथ hi सोई थी और करने के बाद मैं ने उस से बात किये. उस्सको यह कह कर मनाया के आप रिच हो, मैं ड्राइविंग सीख लुंगी तो कभी भी ड्राइव करके उसस्के पास वक़्त बिताने आजाऊंगी, किसी को शक भी नहीं होगा क्यूंकि मैं तो अपने पापा से मिलने जाउंगी… मैं ने पापा को दौलत की लालच ज़्यादा दिया और पूछा के किआ उस्सको नहीं ख़ुशी होगी के मैं आप के बड़े घर की बहु बनूँ…. बहोत कन्विंस किया उनको तब जाके वो माना मगर कहा के कंडीशन करूँ के आरव मुझको शादी से पहले ड्राइविंग सीखेगा ताके मैं कभी भी ड्राइव करके उस से मिलने जा सकूँ. मैं ने उस से कहा के एक पागल से शादी करने से आप के बेटे से शादी करना तो सॉ गुना बेहतर है और उस्सको कहा के उस्सकी कितनी इज़त बढ़ जाएगी गाओं में अगर मैं आप की घर के बहु बानी तो 100 % एडवांटेज था आप की बहु बनने से के उस पागल से मेरी शादी होती… इस में सिर्फ पापा का स्वार्थ था मगर अगर मैं आप के यहाँ शादी करती तो इस में मेरा स्वार्थ था तो मैं ने पापा को चूसे करने का ऑप्शन दिया और यह भी कहा के अगर मैं उस पागल से डाइवोर्स लेकर उसस्के साथ रहने आयी तो ठीक तो होगा मगर कभी माँ नहीं बन पाऊँगी क्यूंकि अगर उसस्के बचे की माँ बानी तो उस्सको दुन्या को जवाब देना होता क्यूंकि उसस्के साथ रह रही हूँ और अगर आप के घर में शादी किया तो माँ बन सकुंगी और वो नाना…. यह सब कुछ कहा उस से मैं ने और आखिर में वो जाकर माना. मगर उस्सको बहोत तकलीफ हो रहा था सोचकर के मुझसे उस्सको बहोत दूर होना पड़ेगा…. मुझे भी सच कहूं तो बहोत hi दुःख होता था सोच कर के कहाँ इसी गाओं में रहती तो अन्य्तिमे उसस्के बाहों में आजाती और यहाँ से 200कंस दूर चली जाउंगी तो शायद hi हफ्ते में एक बार मिल सकूँ उस से यह दिल को बहोत दुक्खा रहे थे….”

चावला साहब ने सब ग़ौर से सुना और कहा, “अरे ड्राइविंग तो मैं hi तुझको झट से सिखदूँगा… और अब तो आटोमेटिक कार है क्लच नहीं दबाना पड़ेगा, गियर नहीं चेंज करना पड़ेगा, तुम आटोमेटिक बहोत फ़ास्ट ड्राइविंग सीख जाओगी… चलो एक बहाना मिल गया हर रोज़ तुमसे मिलने को ab…har रोज़ आऊंगा अब इन् तीन महीनों के अंदर तुमको लाइसेंस दिलवाना मेरा ज़िम्मा okay?”

संजना बहोत खुश हुई और राज़ी हुई के हर रोज़ वो उस्सको सिखाने आये. और तब तक वह लोग घर आ पहुंचे थे. तीन बार सेक्स कर लिया पहाड़ों पर तो अब तो कुछ वैसा करना मुमकिन नहीं था, बुसस चावला साहब ने संजना की पंतय माँगा जो उस्सने निकल कर दिया और कुछ बातें किये और चावला साहब निकले कल आटोमेटिक कार के साथ आने का वादा करके. जाते वक़्त चावला साहब अचानक रुक गए और वापस घर के अंदर संजना की बाहों को थाम कर लगाई और बैठ गए संजना को गॉड में लेकर और पूछा, “अब यह बताओ के मेरे जाने के बाद हर बार तुम अपने पापा के साथ भी करती थी है नाह? संजना ने सर झुका कर कहा, “हम्म्म हर बार तो नहीं मगर हाँ करती तो थी उसस्के साथ….” फिर चावला साहब ने पूछा, “उस रोज़ सुबह सुबह जब मैं ने तुम्मो अपने पापा को फ़ोन देने को कहा था तो तुम उस फ़्लीम्सय छोटी सी निघ्त्य में गयी थी उसस्के शामे बिना ब्रा के और में ने पूछा था हैरान होकर के किआ इस लिबास में तुम अपने पापा के सामने गयी तो तुमने जवाब दिया था के तुम उसस्के सामने वैसे hi जाते हो उस्सको पता है और निघ्त्य उसी ने तुमको दिया है….!”

संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब आप सब समझ गए नाह? कुछ और कहने की तो ज़रूरत hi नहीं अब, मैं ने तो सब बता दिया आप को! और उस रात को वो पुरे रात मेरे साथ सोये थे रात को किया भी था…. और याद है उस रात को आप मेरा वेट कर रहे थे व्हाट्सअप पर कितने मेस्सगेस भेजे थे और मैं ने आप से कहा था के मुझे नींद आगयी थी, अस्सल में पापा के साथ थी बीएड पर वो एन्जॉय कर रहे थे मेरे साथ आप के जाने के बाद, तो मैं कैसे आप को रिप्लाई करती तब? तब तो नाह आप को नाह hi उनको पता था के मैं आप से कम्यूनिकेट करती thi…magar अब ऐसा होगा चाहे रात को फ़ोन करो, चआहे वो मेरे साथ बीएड पर हो तब भी आप को रिप्लाई कर सकुंगी क्यूंकि अब उस्सको सब पता है हीहीहीही…. मैं उस रात उसी निघ्त्य में थी करते वक़्त मेरे बूब्स उसी के मसलने और चुस्सने से ऐसी बड़ी हुई है अब समझे नाह आप?” चवा साहब ने फिर पूछा, “मगर पहली रात को तुमने कितने देर रात तक मुझसे बात किये थे तब वो नहीं था तुम्हारे साथ?”

संजना ने कहा, “ोफो आप भूल गए वो पीने गए हुए था जब वापस आये तो हमने बात करना बांध कर दिया था, और रात को तब तक बात किये थे जब तक वो नशे में थे मेरे सोने का टाइम हुआ तो मैं उसस्के साथ बीएड पर thi…ussko बिल्कुल नींद आगये थे तब आप को टेक्स्ट करती थी! समझे किआ?” चावला साहब ने कहा, “ओह ी सी!! सच में चालू चीज़ हो तुम बाप रे!!” और संजना ने “हीहीहीहीहीही” किया और कहा, “मगर आप से बहोत प्यार करती हूँ सच में जैसे पापा से करती हूँ उस से ज़्यादा आप से करती हूँ! – एक बात बोलूं, 5 साल पहले जब मैं आप के तस्वीर को हमेशा गले से लगाए प्यार करती तो पापा नाराज़ होते थे, मैं ने उंनसे कह दिया था के आप से शादी करुँगी, आप मेरे दूल्हा बनोगे तो उस्सने हंस के जवाब दिया था के आप तो शादी शुदा हो मगर मैं ने कहा था कोई बात नहीं मैं दूसरी पत्नी बन जाउंगी. मगर पापा ने उस्सको मेरा बचपना समझ कर नज़र अंदाज़ किया था बात को मगर मैं तो सच में एहि चाहती थी…”

अब चावला साहब ने सीरियस बात पूछा, “अब यह बताओ, किआ तुम्हारे पापा को हमारे रिश्ते के बारे में पता है? किआ तुमने उस्सको बता दिया जो कुछ हम दोनों ने किया है अब तक?”

कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट अपडेट ों थे स्पॉट…..
 
अपडेट 44 वैरी सीरियस कन्वर्सेशन

संजना ने कहा, “उस्सको शक तो पहले दिन से hi है. जिस दिन पहली बार आप मुझको पहाड़ पर लगाए थे याद है उस्सको घर में हम पिटे चोरर गए थे? हालां के उस्सने मुझे आप के साथ जाने को कहा था मगर अस्सल में वो नहीं चाहता था के मैं आप के साथ बाहर जॉन. जब हम उस शाम को वापस लौटे थे तो याद है वो बिल्कुल नाशी में था और हम दोनों मेरे कमरे में गए थे? किआ आप को लगता है उससे मालूम नहीं था? वो सोये होने का नाटक कर रहे थे वो मेरे कमरे के दरवाज़े के पास आकर सब सुन रहे the….aap के जाने के बाद बहोत सवाल किया था मुझसे, क्यूंकि उस्सको पहले से जो पता था के मैं आप को कितना चाहती हूँ.”

चावला साहब थोड़ा फिकरमंद होते हुए पूछा, “किआ पूछा था उस्सने? और किआ पता चला था उस्सको उस शाम के बारे में….. हाँ उस दिन तुमने मुझे पहली बार मुंह में लिया था नाह? हम तो खुल के बातें कर रहे थे अंदर, अगर वो बाहर से सुन रहा था तो उस्सको तो सब पता चला होगा?! बोलो किआ कहा था उस्सने तुमको?”

संजना ने कहा, “उस्सको पूरा पता चल गया के मैं आप को चूस रही थी. उस्सको भी तो चुस्ती हूँ और आप के कहांरने की आवाज़, मेरे मुंह आप के मोठे शैतान पर जब चल रहे थे तो जो साउंड होते हैं सब सुना थे उस्सने….. मैं झूट तो नहीं बोल सकती उस्सको… तो मैं कहा के हाँ हम अंदर वही कर रहे थे, मगर साहब वो नाराज़ नहीं हुए मगर बहोत ज़्यादा खुश हुए और मुझसे जी भर के किया उस्सने उस रात को आप के चले जाने के बाद उस्सने कहा, ‘आरी अपने होने वाले ससुर को भी तू खुश करने लगी तब तो बहोत मज़ा करेगी उसस्के साथ उसस्के घर में! मेरी कमी तो नहीं महसूस होगी तुझे उस घर में अब, होने वाले ससुर को चूसा तुमने, इतनी ख़ुशी मिल गयी उस्सको मेरी बेटी के साथ? तैयार मैं ने तुम को किया और तुम ख़ुशी उस्सको देने लग गयी, यह तो मेरा सिखाया हुआ काम तुम दूसरे पर इस्तेमाल करने लगी…” जैसे आप उत्तेजित हुए मेरे और उनके बारे में सुनकर वैसे hi वो बहोत ज़्यादा उत्तेजित हुए थे हमारे बारे में जान कर और बहोत ज़्यादा मज़ा किया था उस रात को मेरे saath….raat में 3 बार किया था उस्सने उस रात को. एक हफ्ते तक सिर्फ आप की बातें होती थी और जब भी करता आप का रोले प्ले करता मेरे साथ जैसे वो आप हो और मैं आप की होने वाली bahu…bahot जल्दी झाड़ जाता था…. आज भी वही करता है… अब अभी आये हो नाह वो काम से वापस आएगा और आप को यहाँ पाएगा तो उस्सको पता चल जाएगा हम दोनों ने कितना एन्जॉय किया तो वो भी उतना hi एन्जॉय करेगा मेरे साथ…… अब मैं आप दोनों से उतना hi प्यार करती हूँ तो क्यों नाह उस्सको भी वही ख़ुशी दूँ जो आप को दिया? यह सोच कर मैं भी खुलके उसस्के साथ एन्जॉय कर लेती हूँ!”

चावला साहब बहोत एन्जॉय कर रहे थे संजना के बातों को और फिर से खड़ा हो गया उस्का मगर जल्दी hi नरम भी होगया, तीन बार करने के बाद इस उम्र में कहाँ से फिर कर पते वो! और फिर सवाल किया संजना से, “और बेबी, विर्जिनिटी? इस्सके बारे में पता चल गया उस्सको?”

सनजन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अभी तो 4 दिन हुए है नाह साहब तो मैं ने नहीं पता होने दिया मगर आज नहीं तो कल उस्सको पता चल hi जाएगा… और मैं सोच रही हूँ वो 5 सालों से मुझे वर्जिन रख रहे हैं मगर करना चाहते हैं आगे सिर्फ मेरी शादी की वजह से मुझको वर्जिन रख रहे हैं और अब नहीं हूँ, तो अभी 3 महीने तक आरव तो नहीं आएगा तो शादी से पहले hi पापा को भी वो ख़ुशी दे दूँ जो आप को दिया क्यों आप किआ कहते हो करने दूँ उस्सको भी नाह? आप मुझको अपने बेटे के साथ शेयर कर रहे हो तो मेरे पापा के साथ क्यों नहीं? बोलिये आप?”

चावला साहब ने थोड़ा सोचा फिर कहा, “बेबी उस्का हक़ पहले बनता है तुमपर, बाद में मेरा… मगर पहले तुमने वो हक़ मुझको दे दिया तो okay हाँ उस्सको भी वो ख़ुशी दे hi दो!”

संजना खुश हुई और कहा, “थैंक यू वैरी मच! मैं एहि चाहती थी के आप हाँ करो, मैं नहीं चाहती के आप दोनों के बीच किसी किसम की रिवालरी हो…. मैं ने सोच लिया था आप पहले हुए तो सेकंड मेरे पापा को hi दूंगी आगे में… शायद आज रात को या कल करने दूंगी उस्सको आगे!”

चावला साहब ने पूछा, “तो किआ कहोगी उससे के मैं ने तुम्हारी विर्जिनिटी ली?”

संजना ने कहा, “तो और किआ कह सकती हूँ? एहि तो कहना होगा नाह?”

चावला साहब: “तो वो नाराज़ नहीं होगा?”

संजना: “मुझे पता है कैसे मनाऊंगी और उसस्के नाराज़गी को कैसे दूर करुँगी यह भी पता है हीहीहीहीही”

चावला साहब: “मुझे भी बताओ नाह कैसे करोगी?”

संजना: “आसान है जी. कहूँगी के अगर शादी करके चली जाती तब तो हफ्ते में एक बार या महीने में सिर्फ दो बार उस से मिलती मगर अभी तो 3 महीनों तक उसस्के साथ रहूंगी तो उसस्के एडवांटेज में सब कुछ किया मैं ने! – 3 महीने कहाँ आरव 3 महीने के बाद वापस आएगा मगर शादी तुरंत तो नहीं होगा नाह? शायद और 3 महीने लग जाए क्यों?”

चावला साहब: “वह, मैं ने कहा नाह तुम बहोत hi इंटेलीजेंट हो, सब प्लान कर लिया है तुमने हम्म्म?”

चावला साहब को अब लगने लगा के संजना बहोत ज़्यादा hi चालू लड़की है, उस्सको संजना से थोड़ा सा डर भी लगने लगा उसस्के बारे में सोचते हुए. मगर उस्सको संजना से इतने दीवानों के हद तक प्यार हो गया था के उस्सको सब कुछ मंज़ूर था. उस ने सोचा के कुछ भी हो इस लड़की को अपने घर में लेकर जाना होगा बी हुक और बी क्रूक. तो अपने बेटे आरव से शादी के इलावा उस्सको और कोई रास्ता नहीं सूझ रहे थे. ऊपर से संजना खुद राज़ी थी. शुक्र है संजना ने यह कभी नहीं कहा के वो आरव से शादी नहीं करेगी मगर चावला साहब से hi करेगी. अगर वो कुछ ऐसा कहती तो चावला साहब फंस जाते. और चावला साहब को यह डर भी था के कहीं अगले 3 महीनों के बाद संजना अपने इरादा नाह बदल दे और खुद चावला साहब से शादी के लिए कहे…. यह सोच चावला साहब को परेशां करने लगा.

संजना ऐसा बिल्कुल सोच सकती थी या यह डिमांड कर सकती थी के चावला साहब के साथ hi वो शादी करेगी क्यूंकि चावला साहब की पत्नी तो नहीं थी, वो खुद उनकी पत्नी बन सकती थी, तो किआ होगा अगर संजना ने ऐसा प्रस्ताव रखा तो? तीन आदमियों से खुद को शेयर करने से संजना सिर्फ अपने पापा और चावला साहब को शेयर कर सकती थी अगर वो चाहती तो…… चावला साहब के दिमाग़ में यह बात शोर मचा रहे थे.

तब चावला साहब ने संजना से पूछा, “तो तुम्हारे पापा नहीं पूछेगा तुमसे के विर्जिनिटी ससुर को देदिया तो आरव को कैसे ये बात सम्झओगि?”

और संजना ने चावला साहब से खुद सवाल किया, “अब आप hi बताओ मुझे के मुझे किआ करना चाहिए, मेरे पापा को भूल जाईये फिलहाल आप यह बताओ के आरव से किआ कहूँगी? क्यों वर्जिन नहीं हूँ? बोलो बोलो जी?”

चावला साहब सर खुजाने लगे तो संजना ने खुद हँस्ते हुए कहा, “क्यों फ़िक्र होने लगी आप को? मत सोचिये मुझे पता है किआ और कैसे करना होगा!”

चावला साहब हैरत से संजना के चेहरे में देखते हुए पूछा, “किआ? किआ करोगी? किआ बोलोगे आरव को बताओ मुझे!”

संजना एक दो कदम कमरे में चली और कहा, इस से पहले मैं बोलूं आप बताओ किआ आप के पास कोई आईडिया है के अगर आरव को सुहाग रात की रात को पता चला के मैं वर्जिन नहीं तो वो किआ करेगा? वो तो बहोत कूल टाइप का है नाह? बहोत शांत स्वभाव वाला है नाह? आप के ख्याल से किआ वो अपने सान्वी भाबी को यह बात बता देगा या अपने तक रखेगा या मुझसे सवाल करेगा? आप का बीटा आप उस्सको मुझसे ज़्यादा जानते हो नाह तो बताओ वो कैसा बेहवे कर सकता है?”

चावला साहब फिकरमंद होते हुए कहा, “बिल्कुल कोई भी आईडिया नहीं मुझे के वो किआ करेगा या कैसा बेहवे करेगा….. हाँ अपने भाबी को ज़रूर बता सकता है यह पक्का है….. मगर वो तो शर्मीला है ऐसी बात कैसे बताएगा सान्वी को? नहीं नहीं वो छुप रहेगा कुछ नहीं बोलेगा… शायद तुमसे सवाल करे!!”

संजना: “और अगर मैं ने शादी से पहले उस से कह दिया के मैं वर्जिन नहीं हूँ, एक बॉयफ्रेंड ने मुझको धोका दिया तो??”

चावला साहब के चेहरे में एक चमक दिखाई दिए और कहा, “यह बेस्ट आईडिया है, अगर तुमने ऐसा कहा तो शायद वो कुछ नहीं कहेगा और उसस्के बाद अगर उस्सने मांगनी को तोड़ने की बात किया तो मुझसे ज़रूर कहेगा तब मैं उस्सको मनाऊंगा, no प्रॉब्लम. प्रॉब्लम साल्व्ड!! आह मुझको अब चैन आया!!”

संजना ने कहा, “और अगर उस्सने फिर भी शादी से इंकार किया तो? अगर उस्सने अपनी भाबी से जाकर कहा के मेरा लफड़ा था लड़कों के साथ में ठीक लड़की नहीं हूँ तब तो सान्वी भी आप को मन करेगी और मांगनी तोड़ने को कहेगी! तब किआ करोगे आप?”

चावला साहब फिर परेशान हुए. और संजना से कहा, “तो फिर किआ किया जाये?”

संजना ने कहा, “तब एक hi रास्ता बचा है, वो यह के मैं सुहाग रात से पहले उस्सको कुछ भी नहीं बताऊँ…. वो तो भोला है और किसी लड़की के साथ कभी कुछ नहीं किया है नाह? तो उस्सको पता hi नहीं चलेगा के विर्जिनिटी किआ होता है, बुसस खून की ज़रुरत है वो भी एक दो बूँद तो मैं अपने उगंली को ठीक उस्सको जोश में ान ेके बाद एक सुई से परिक करके चादर पर निचे उस जगह पर लगा dungi…wo समझेगा के मेरी विर्जिनिटी का खून है! कैसा रहा आईडिया? अब बोलिये आप!!”

चावला साहब शॉकेड थे संजना के इस बात से और दिल में सोचा के “संजना इस वैरी डेंजरस!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….. (3008 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 45 सान्वी टॉक्स तो हिम

चावला साहब वापस घर गए उस रोज़ संजना के साथ सारे बातें करने के बाद. पूरा रास्ता वो सभी किये हुए बातों को गहराई से सोचते हुए ड्राइव करते गए और उसस्के दिमाग़ के अंदर हलचल मचा हुआ था. घर आये तो सान्वी उनको देख कर hi समझ गए के वो परेशान है. सान्वी उनके हर हरकतों को अच्छी तरह से नोट कर रही काफी देर तक बिना कुछ कहे. और कोई एक घंटे के बाद जब चावला साहब फ्रेश हो गए और जब सान्वी उनके लिए ड्रिंक बना रही थी तो उनको गिलास देते वक़्त सान्वी ने उस से कहा, “आप संजना से मिलने गए थे नाह?” यह सुनकर चावला साहब को ज़बरदस्त झटका लगा. चावला साहब सान्वी के चेहरे में हकबकाए हुए देखने लगे बिना कोई जवाब दिए और सोचने लगे के अब किआ जवाब दें सान्वी को और कैसे उस्सको पता चला के वो संजना से मिलने गए थे, उसस्के समझ में नहीं ारः था के किआ कहें तो एक तरफ देखने लगे सान्वी से गिलास लेकर. तो सान्वी ने खुद बात किया, “क्यों आप ने झूट कहा था जाने से पहले के आप समुन्दर किनारे जा रहे हो किसी दोस्त के साथ?

चावला साहब ने कहा, “समुन्दर किनारे दोस्त के साथ hi था और वापस आते वक़्त संजना से मिल कर आया!”

सान्वी: “झूट. फिर झूट बोल रहे हो आप!”

चावला: “क्यों झूट बोलूंगा भला कहना किआ चाहती हो तुम?”

सान्वी: “अरे तो आप चिल्ला क्यों रहे हो? जब झूट छुपाना होता है तभी चिल्लाते हो आप!”

चावला: “ोफो मुझे अकेला चोररडो प्लीज मैं आराम करना चाहता हूँ.”

सान्वी: “हर बार जब आप उस से मिलकर आते हो तो बहोत परेशान दीखते हो, क्यों? किआ प्रॉब्लम है बताईये मुझे, शायद मैं सोल्वे कर सकूँ! ….. और वैसे आप मुझे बता तो सकते थे के आप उस से मिलने जा रहे हो आरव का मैसेज देना था संजना को!”

तब चावला साहब वापस सान्वी के चेहरे में देखते हुए पूछा, “मैसेज? कैसा मैसेज? आरव ने तुमको मैसेज किया किआ? कैसा है वो सब ठीक है वहां?” और सान्वी ने जवाब दिया, “नहीं उस्सने मैसेज नहीं किया बुसस, जाते वक़्त मेरे कान में कह गया के मैं संजना को कहदूँ के वो जा रहा है और उस्सको याद कर रहे थे जाते वक़्त और उस्सको बहोत मिस करेगा.”

तब चावला साहब ने कहा, “मुझसे कह दिया होता तो मैं बोल्ड एटा संजना को इस में किआ है. तुम ने पहले क्यों नहीं बताया मुझे?”

सान्वी: “पहले तब बताती जब पता होता की आप उस से मिलने जा रहे हो!”

सान्वी पुरे कन्वर्सेशन के दौरान सीधे उनके चेहरे में और ेंखों की गहराई में देखते हुए बात कर रही थी मगर चावला साहब नज़रें चुराते हुए बात कर रहे थे उस से. और चावला साहब ने कहा, “तो ठीक है कल बता दूंगा संजना को मैं!”

सान्वी ने हैरान होते हुए कहा, “व्हाट? कल आप फिर मिल रहे हो संजना से? क्यों? आप कुछ ज़्यादा नहीं मिल रहे हो उस से आज कल पापा?”

चावला साहब ने तब मुस्कुराते हुए आराम से कहा, “अरे अब तो हर रोज़ मिलूंगा उस से. उस्सको ड्राइविंग सीखनी है और आरव के वापस आने से पहले मैं ने उस्सको प्रॉमिस किया है के उस्सको ड्राइविंग लाइसेंस दिलवा दूंगा! आटोमेटिक कार लेकर जाऊंगा कल से!”

सान्वी उनके चेरे में सुकून देख कर कहा, “अरे वह अब तो आप बिल्कुल परेशान नहीं लग रहे हैं, संजना के मिलने की बात किआ हुई आप को तो आराम आगया? किआ बात है पापा जी? हम्म?”

चावला साहब ने कुछ नहीं कहा तो सान्वी hi बोल पड़े, “मुझे लग रहा के कुछ नाह कुछ तो है जो आप मुझसे छुपाने की कोशिश कर रहे हो है नाह? आप उस लड़की को बहोत पहले से जानते हो नाह? किआ आरव से उसस्के शादी के बारे में सोचने से बहोत सालों पहले से hi आप उस्सको जानते हो? किआ आप ने जान बूझकर आरव को उस से शादी के लिए कहा? मुझे कुछ अटपटा लगने लगा है पापा जी बोलिये नाह बात किआ है?”

चावला साहब ने बिल्कुल आराम से जवाब दिया सान्वी को जो तब तक उनके बगल में बैठ कर उनके छाती पर अपना सर रख गयी थी, “अरे बुद्धू औरत, मैं ने कहा नाह के वो मेरे गाओं के नौकर की बेटी है और उसस्के पैदा होते hi उस से मिल चूका हूँ. मुझे किआ पता था इतनी खूबसूरत पारी जैसी हो जाएगी वो, और यह तो शुक्र है के मैं उस दिन उस गाओं तक गया और आनंद से मिल गया तो संजना से मुलाकात हो गयी वार्ना संजना तो कभी नहीं मिलती वो तो किसी और की हो जाती.”

सान्वी ने उनके छाती पर अपना हाथ धीरे धीरे फरते हुए पूछा, “नहीं मिलती मतलब? किश की होजाती अगर आप उंनसे नहीं मिलते तो?”

चावला साहब ने सान्वी के सर पर हाथ फरते हुए कहा, “उस्का बाप ने उसस्के लिए वहीँ गाओं का एक लड़का देख लिया था तो संजना हमारी नहीं होती अगर हम वहां नहीं जाते उस दिन को. समझी?”

सान्वी ने फिर उनके लिए दूसरा पेग बनाया और फिर उनके बहोत करीब बैठ कर उनके एक हाथ को अपने मुठी में लेकर पूछा, “तो किआ अब संजना के इस घर में आने से आप का प्यार मेरे लिए कम हो जाएगा?”

चावला साहब हंस पड़े और खड़े होकर गिलास हाथ में लिए हुए एक दो कदम चलते हुए कहा, “प्यार कैसे कम होगा भला? प्यार कोई कम होने वाली चीज़ है किआ सान्वी? यह तो दिन बा दिन और बढ़ता जाता है बहोत बढ़ता जाता है हाँ!”

सान्वी सर उठाये उनके तरफ देख रही थी के चावला साहब बेहद खुश दिख रहे थे उन् बातों को करते हुए, जैसे वो सिर्फ संजना के बारे में सोचते हुए उन् प्यार के बातों को कर रहे थे; और सान्वी ने कहा, “पर मुझे तो यह लगने लगा है अभी से hi के संजना से मिलने के बाद आप का प्यार हमारे लिए कम होते जा रहे हैं, आप सिर्फ उसस्के पीछे लगे हुए हो आज कल क्यों?”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे वो नयी है नाह? तुम जब नयी आयी थी इस घर में तो कितना प्यार था तुमसे? वैसे hi वो नयी है इस लिए उसस्के तरफ थोड़ा ज़्यादा तवज्जो दे रहा हूँ, उस्सको भी तो पता चले के इस घर के लोग भी उस्सको कितना चाहते हैं, और भाई वो है hi प्यार के काबिल, है नाह?”

सान्वी ने सर झुकाते हुए कहा, “हाँ वो है सच में प्यार के काबिल मगर किश के प्यार के काबिल है आप के या आरव के? मुझे तो लगता है सिर्फ आप के क्यों ठीक कहा नाह मैं ने?”

तब तक सान्वी भी कड़ी हो गयी थी और चावला साहब सान्वी के तरफ बढे और उस्सको गले से लगाया और उसस्के सर को चूमने के बाद कहा, “तुम क्यों जल रही हो मेरा प्यार उसस्के तरफ थोड़ा सा ज़्यादा हुआ है तो? तुम भी मेरे अपने hi तो हो नाह? एक और आजाएगी इस घर में तो मेरा प्यार बाँट जाएगा दोनों में जलने की कोई बात नहीं है इस में.”

सावनी ने अपना सर उनके छाती में ज़ोर से दबाते हुए उनके पीठ पर अपने बाहों को ज़ोर से जाकर कर एक बची की नटखट आवाज़ में कहा, “हम्म आप ने कितने दिनों बाद आज मुझको ऐसे गले से लगाया, मैं इस हुग को कितना मिस कर रही थी, किआ संजना को भी ऐसे hi हुग करोगे आप? या करते भी हो उस्सको भी ऐसे बाहों में लेके?”

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट बिलो…………………….
 
अपडेट 46 संजना विथ हेर पापा

उधर संजना के पापा काम से वापस आये तो संजना नाहा रही थी. उस्सकी गुनगुनाने की आवाज़ पुरे घर में सुनाई दे रहे थे. आनंद ने अपने कपडे निकाले और बाथरूम के दरवाज़े के पास खड़े होकर अंदर झाँकने की कोशिश किया और दरवाज़े को खोलना चाहा जो अंदर से संजना ने लॉक किया हुआ था तो आनंद ने कहा, “संजू, खोलो नाह!” संजना ने नखरें भरी आवाज़ में कहा, “ोफो पापा, नै अभी नहीं, आप जाओ अपने ड्रिंक्स लेकर वापस ाजाओ तब!”

आनंद नंगा खड़ा था यह संजना को नहीं पता था. तो आनंद ने फिर कहा, “आरी एक बार खोल तो सही!” अंदर से संजना ने कहा, “किआ पापा, मैं नाहा चुकी, अब ड्रेस पेहेन रही हूँ वेट करो आप!”

और जब संजना ने दूर को खोला तो अपने पापा को नंगा अपने सामने देखा तो चीख उठी वापस अंदर घूसस्ते हुए, “नईईई नहीं नहीं मैं अभी अभी नाहा कर फ्रेश हुई हूँ आप मुझे गन्दा कर डोज नईईईई!!!” और संजना ने पीठ घुमा लिया एक छोटी से ड्रेस में थी और आनंद ने उस्सको पीछे से hi जकरा और उस्सकी ड्रेस को ऊपर उठाकर अपने लिंग को उस्सकी नितम्बों पर रगड़ने लगा!!

आनंद अपनी प्यारी बेटी की भीगे हुए गेसुओं को सूंघ रहा था और जो पानी के छोटे छोटे कतरे संजना के काँधे पर थे उस्सको आनंद ने चाटते हुए कहा, “आआह किआ खुशभू है तेरी, किआ यार कितने दिनों से बाथरूम में हम ने एक साथ नहीं नहाया आज तो दोबारा नाहा लो मेरे साथ!”

संजना उनके बाहों से निकलने की कोशिश में थी और कहा, “उफ्फ्फ चोर्रो न पापा सुनो सुनो एक इम्पोर्टेन्ट बात बताती हूँ!”

तो फिर आनंद ने उस्सको अपने तरफ घुमाते हुए उसस्के मुंह को अपने मुंह में लिया, और संजना ने खुद मुंह खोल कर अपने पापा के जीब को चूसा, और किश के बाद अपने कलाई को उसस्के छाती पर करते हुए कहा, “पापा आज मैं आप को एक बड़ा सरप्राइज देने वाली हूँ, आप प्लीज अभी कुछ मत करो आप बेहद खुश होंगे उस सरप्राइज से, आप जाओ अपने ड्रिंक्स लेकर आवो, मैं आप को पिलाऊंगी अपने हाथों से और बहोत प्यार करुँगी ोकिए पापा?”

तब आनंद ने कहा, “चाह बुसस थोड़ा सा मुंह में लो नाह देखो नाह किश तरह खड़ा हुआ है, दिन भर मैं तुमको सोचता रहा काम में….. थोड़ा सा कोई 3 या 4 मिनट्स तक लो नाह!!”

संजना ने एक लम्बी सांस चोररटे हुए कहा, “आप भी नहीं बिल्कुल नहीं मानोंगे ok ठीक है मगर ज़्यादा पुश मत करना मुंह के अंदर!”

और संजना वहीँ घुटनों के बल गयी और अपने पापा के लिंग को मुंह में लिया और चुस्सने लगी. आनंद की आवाज़ यूँ निकले “आआअह्हह्ह्ह्ह किआ मज़ा देती है तू अपने पापा को, wah…aaaaahhhhhh अब साला मालिक को भी तू एहि मज़ा देने लगी है वही सोच कर मैं दिन भर खड़ा रहता hoon…aahahah ाहः!!!! संजना!! स्स्स्सस्शह्ह्ह्ह मेरी संजना स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह”

कोई 3 मिनट्स के बाद संजना उठ कढ़ी हुई और अपने बाप को ढाका देते हुए बाथरूम से भागते हुए निकली और हँस्ते हुए कहते गयी, “बाकी सब बाद में, जल्दी से नहाकर अपने ड्रिंक्स लेने जाओ, आप के लिए बाध्य वाला सरप्राइज है आज की रात के लिए हीहीहीहीहीहीहीही”

आनंद ने मुस्कुराते हुए अपनी प्यारी संजना को देखा और सोचने लगा, “किआ सरप्राइज देगी अब यह मुझे, ज़रूर मालिक आया होगा आज जब मैं काम पर था!”

एक घंटे बाद जब आनंद ड्रिंक लेकर वापस आया तो उसस्के सामने चौकठ पर संजना को उस्सको वेट करते हुए पाया. एक बिल्कुल छोटी सी ड्रेस में जिस में उस्सकी जांघें बिल्कुल साफ़ दिखाई दे रहे थे और ऊपर क्लीवेज भी उभरे हुए जैसे ड्रेस के बाहर निकलने hi वाले the..yeh ड्रेस में थी संजना जो आनंद ने hi ख़रीदे थे उसस्के लिए एक दिन…

43064243_1014828522052341_2242503573281464921_n.md.jpg


अपने होंठों को दांतों में दबाये अपने पापा को देखते हुए ख़ुशी से मुस्कुरा रही थी. आनंद जैसे उसस्के करीब आया तो अपने बाहों को अपने पापा के गले में हार बनाते हुए डाली संजना ने और किश करते हुए चल कर घर के अंदर गए दोनों.

संजना ने उसस्के लिए चिप्स स्नैक्स वग़ैरा तैयार रखे थे जिस टेबल पर वो बैठ कर पीते थे और संजना ने ड्रिंक्स बनाये अपने पापा के लिए और उनके गॉड में बैठी और पिलाई उस्सने अपने हाथों से अपने प्यारे पापा को. आनंद ने पिया और अपने हाथ को अपनी बेटी के जाँघों पर फरते हुए कहा, “आज तू भी पी ले एकांत ड्रिंक, मिलकर पीते हैं!” सनजन ने इंकार किया यह कहकर, “नहीं यह देसी थर्रा मुझको बिल्कुल पसंद नहीं उलटी होती है एक बार आप ने पिलाया था नाह, फिर कभी नहीं पियूँगी कहा था मैं ने!”

आनंद ने कहा, “हाँ तो तुझको बियर पसंद है ठर्र रघु के यहाँ से लेकर अत हूँ पिछले 3,4 बार तुमने कितने बियर पिए थे, वेट करो मैं लेकर अत हूँ.”

संजना ने मन किया यह कहते हुए, “अरे आप को पता है वो कमीना रघु को पता चल गया था के आप मेरे लिए बियर लेते हो! भूल गए पिछली बार किआ हुआ था? नहीं उसस्के यहाँ से कुछ नहीं लेना है मेरे लिए…… अलमारी में चावला साहब की दी हुई व्हिस्की है आप चाहे तो मैं उस में से ड्रिंक बनती हूँ अपने लिया ठीक है?”

संजना ने एक व्हिस्की बनायी अपने लिए और अपने पापा से कहा के वो मिक्स बिल्कुल ना पिए और यह भी कहा के सिर्फ दो पेग पियेगा आज बाकी पीना है तो अपने सरप्राइज लेने के बाद जारी rakhe…..To आनंद के पूछा, “आरी ऐसा किआ सरप्राइज देने वाली हो मुझे तुम मेरी गद्य? हम्म्म कुछ हिंट तो देदे मुझे!”

संजना ने कहा, “नहीं अभी नहीं” व्हिस्की के सिप लेते हुए, और कहा, “बीएड पर वो सरप्राइज दूंगी आप को…. लो यह आप का दूसरा ड्रिंक है, इस्को पीने के बाद कमरे में चलते हैं okay?”

आनंद ने दूसरा पेग में से थोड़ा सा पिया, सनककक खाया और कहा, “हे गद्य इस दो पेग से तो बिल्कुल भी नहीं चढ़ा तो किआ मज़ा आएगा मुझे, एक और लेना होगा मुझे!”

संजना ने ांसाते हुए कहा, “ोफो पापा, मैं नहीं चाहती हूँ के आप इतने नाशी में हो के आप को पता भी ना चले के किआ सरप्राइज ले रहे हो आप…. बाद में आकर पी लेना नाह?!” फिर संजना ने कहा, “okay ठीक है एक लास्ट चलेगा, मतलब सिर्फ तीन पेग, ज़्यादा बिल्कुल भी नहीं सरप्राइज से पहले!”

और जल्द hi संजना ने तीरा पेग बना कर दिया अपने पापा को और अपने व्हिस्की को भी ख़तम किया. आनंद को हल्का सा नशा ारः था, मगर बिल्कुल सीधे खड़े हो सकते थे और आराम से चल भी सकते… संजना को उस एक व्हिस्की से hi बहोत अच्छा नशा आया और उस्सने अपने पापा के कमर में हाथ डालते हुए कहा, “चलिए अब बैडरूम के तरफ आप को आज बड़ी ख़ुशी देनी है…..”

आनंद ने उसस्के छाती के अंदर हाथ दाल दिए और बूब्स को मसलने लगे और मुंह लगाकर चाटने भी लगे….. संजना ने कहा, “ोफो कमरे में तो चलिए अंदर; सब आप के hi हैं यह….. चलो चलो बैडरूम में करते हैं नाह आराम से….”

बैडरूम में आते hi आनंद बीएड पर बैठा, और संजना उसस्के सामने बिल्कुल सत् के कड़ी हुई और कहा, “आप मेरे ड्रेस उतारतीये! बिल्कुल धीरे धीरे आराम से…. यहाँ निचे…. निचे जाँघों पर हाथ से ऊपर के तरफ उठाये और मेरे कांधों के ऊपर से निकालए….”

आप लोग वापस पिछ को देखिये ऊपर, ड्रेस जैसे जैसे ऊपर उठाया आनंद ने तो देखा के ब्रा नहीं पहनी हुई है संजना ने सिर्फ एक क्रीम कलर के पैंटी है ड्रेस के निचे…. ड्रेस निकाल दिया आनंद ने तो संजना के दोनों बूब्स उसस्के चेहरे से सामने थे और संजना बिल्कुल उस से सट्टे हुए तो आनंद ने अपने बाहों को उसस्के कमर पर करते हुए उसस्के बूब्स में अपना चेहरा कर दिया और चुस्सने लगे अपनी बेटी की दूध को….

और संजना ने कहा, “हम्म्म पंतय भी निकालो तब मैं आप के सभी कपडे उतारूंगी…..”

आनंद निचे घुटनों पर गया ज़मीन पर और संजना की पंतय को धीरे धीरे करके निचे करने लगा उसस्के पथ से लेकर निचे के तरफ हर अंग को चुम्मते, चाटते हुए…. तब संजना ने अपने पापा को खड़ा किया और उसस्के शर्ट निकाले उसस्के छाती को चुम्मते हुए, तब वो बैठी ज़मीन पर और अपने पापा के पंत को आहिस्ते आहिस्ते खोला और निचे किया तब उसस्के बॉक्सर के अंदर तन्ने हुए लुंड को किश किया और आहिस्ते से बॉक्सर को खिंच कर लुंड से अलग किया और उस्सको चुम्मे और बॉक्सर को निकलला, तब वहीँ अपने घुटनों पर होक अपने पापा के लिंग को पहले जीब से छाता उसस्के लम्बाई पर फिर ऊपरी हिसे को छाता और मुंह में ले लिए चूस्ते हुए…..

आनंद की तृप्ति आवाज़ ने कमरे के अंदर एक इको किये और वो कहाणररने लगे, “आअह्ह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्सह्ह्शशशशश फ्फ्फफ्फूऊऊफफफफूऊ” करते हुए और अपने कमर को हिलाते हुए छोटे छोटे ढके देने लगे अपनी बेटी के मुंह में उसस्के सर को एक हाथ से थाम कर…..

थोड़ी देर बाद संजना कड़ी हुई और पापा से कहा, “अब मैं लेटती हूँ और अपने टांगों को फैलाती हूँ तो अब आप वहां चाटो और चुसो मुझको…. तब आप को सरप्राइज दूंगी…..”

आनंद जैसे सातवे आसमानों पर थे, उस्का दिमाग़ जैसे काम करना भूल गया था, बेखुदी की हालत हो गए थे उस्का पर वही किया जो उस्सकी बेटी ने कहा…… संजना के दोनों फैले हुए टांगों के बीच आनंद ने उस्सकी गीली योनि पर अपने जीब फेर्रा और देखा के वो बिल्कुल hi भीग गयी है और चाटने और चुस्सने लगे अपनी बेटी को खुश करते हुए….. और संजना कसमसाते हुए बीएड पर एक तकिये को नोच रही थी दांतों में होंठों को दबाये हुए और धीमी आवाज़ में “ीिश्श्श्श्श्श स्स्सस्स्स्स आआअह्ह्ह्हह “ किये जा रही थी….

बाप थोड़ा ऊपर गया उसस्के बूब्स चुस्सने को मगर संजना ने कहा, “नहीं ऊपर मत आवो अभी वहीँ रहो नाह सरप्राइज वहीँ मिलेगा आप को…. जिस्सकी आप को 5 सालों से इंतज़ार था अब वो मिलेगा आप को पापा एन्जॉय करो नाह खूब मज़ा लेते हुए…..”

आनंद तुरंत निचे गया और संजना की छूट के अंदर थोड़ा सा अपना ऊँगली ठुस्सा और देखा के ऊँगली अंदर जा रहा hai…weise पहले 5 सालों में भी तरय किया मगर संजना तुरंत रोक देती थी और उस्का ऊँगली आधे इंच से ज़्यादा कभी नहीं जाते थे मगर आज चला hi जा रहा था….. तो आनंद बिल्कुल हैरान होकर ऊँगली को अंदर किये हुए संजना के चेहरे में देखा तो संजना मुस्कुराते हुए उनको देख रहे थे और आनंद ने पूछा….

“हो गया मेरी गद्य? कर लिया मालिक ने तेरा काम?! उसी ने किया नाह? बता जल्दी बता!”

संजना ने मुस्कुराते हुए और ेंखों से ेंसुओं को टपकाते हुए कहा, “हाँ पापा हो गया उन्हों ने hi लिया मेरी विर्जिनिटी को और मैं ने ख़ुशी ख़ुशी दिया इस लिए दिया पापा ताके मैं अपने पापा को वो सुक्ख वो ख़ुशी दे सकूँ अगले 3 महीनों तक lagaataar..agar मैं उनको नहीं देती तो आप कभी नहीं लेते यह मेरी विर्जिनिटी ko…main तो आप को hi देना चाहती थी बरसों से मगर आप नहीं ले रहे थे तो मेरे पास एक hi रास्ता बचा था के मैं उनको लेने दूँ ताके आप को दे सकूँ…. अब लेलो पापा मुझे मज़े से लो और एन्जॉय करो अपनी गद्य को मेरे पापा हम्म्म्म मुउउउउआआआह”

और संजना ने अपने पापा को बाहों में भरके चूमने लगी और आनंद ने आनंद से उसके अंदर अपने लिंग को फिसलते हुए अंदर दाखिल किया और दोनों बाप बेटी उस ख़ुशी में डूब गए जिस्सको 5 सालों से आनंद ने रोका हुआ था.

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (3162 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 47 आनंद एंड संजना कॉन्टिनोएड……

और संजना ने अपने पापा को बाहों में भरके चूमने लगी और आनंद ने आनंद से उसके अंदर अपने लिंग को फिसलते हुए अंदर दाखिल किया और दोनों बाप बेटी उस ख़ुशी में डूब गए जिस्सको 5 सालों से आनंद ने रोका हुआ था…….

अब आगे………..

आनंद ने जैसे hi अपने लिंग को अंदर किया, एक ऐसा लम्बा सांस लिया के जैसे पहली बार किसी को सांन्स लेने का मौका मिला जीवन में, और उसस्के चेहरे में देखते हुए संजना अपने पापा की ख़ुशी और आराम देख रही थी के जिस्का इंतज़ार उस्सने 5 सालों तक किया आज उस्का मज़ा ले रहा था वो. संजना को बहोत hi ख़ुशी हो रही थी अपने पापा को अपने अंदर लेकर, क्यूंकि वो भी तो शुरू से hi छह रही थी के वो उसस्के अंदर आएं. आनंद ने जैसे अपना पूरा सम्मान को अंदर कर दिया बाहर निकालने से पहले अंदर hi रखे रहा कुछ देर और अपनी संजना के चेहरे में देख कर बोलै, “किआ ऋ मेरी गद्य ाहः, कितना आराम है तेरे अंदर, कितनी ख़ुशी है साला मालिक ने तुम्हारे अंदर दाल दिया और मैं इतने सालों से रुका हुआ था, मैं ने क्यों नहीं डाला पहली बार ऋ!”

संजना ने अपने पापा के पीठ पर हाथ हलके हलके फरते हुए कहा, “पापा मैं तो 5 साल पहले से hi चाहती थी के तुम अंदर डालो मगर तुम थे के कहते रहते थे के यह गाओं है यहाँ अगर शादी के रोज़ वर्जिन लड़की नहीं रही तो मुसीबत आजाएगी….”

और तब आनंद ने एक हाथ से संजना की चूचियों को दबाते हुए आहिस्ते आहिस्ते ढके देने लगे मगर बिल्कुल आराम से अपनी बेटी की योनि के अंदर अपने लिंग को खूब अच्छे से फील करते हुए…. उस्सकी अंदर की गर्मी, उस्सकी फिसलती हुई गीलापन, उस्सकी कमर के हिल डॉल, उस्सकी जिस्म की थरथराहट सब को खूब अछि तरह से फील करते और देखते हुए आनंद संजना के अंदर बाहर अपने लिंग को चला रहा था और उसस्के चेहरे में बहोत प्यार से देख रहा था ढाका देते हुए.

क्यूंकि संजना को बहोत जलन हुई थी पिछली बार जब चावला साहब ने किया था तो उस्सको डर था के कहीं फिर से वही जलन महसूस नाह हो मगर संजना खुश थी कुछ ऐसा नहीं हुआ और बड़े आराम से अपने पापा को अपने अंदर वो भी फील करने लगी थी बड़े मज़े से. अब संजना चाहती थी के वो अपने पापा से अपनी ओर्गास्म रीच हो, वो नहीं चाहती थी के पापा पहले झाड़ जाये तो उस्सने कहा, “पापा आराम से करो और थोड़ा ढाका जल्दी जल्दी दो जैसे पीछे करते हो मैं चाहती हूँ के हम दोनों एक साथ jhade…kia ऐसा कर सकते हो? मैं ने इसी लिए आप को ज़्यादा पीने नहीं दिया, ये आप की पहली बार है मेरा भी पहली बार तो हम दोनों को एक साथ मज़ा आना चाहिए प्लीज ऐसा hi करो नाह!”

आनंद को बहोत ज़्यादा प्यार आया अपनी बेटी पर और उसस्के ऊपर झुक कर आनंद ने संजना का मुंह अपने मुंह में लिया और बड़े प्यार से दोनों एक दूसरे के जीब चुस्सने लगे निचे आराम से ढाका देते हुए. संजना को बहोत ाचा लग रहा था के इतने सालों के इंतज़ार के बाद आज वो अपने पापा के लिंग को अपने अंदर महसूस कर रही थी और वो भी आराम से बिना किसी दर्द के. वो भी 5 सालों से इस्सके इंतज़ार में थी. कहते हैं नाह के साबरा का फल मीठा होता है तो एहि वो मीठा फल था जो दोनों इंटने मज़े से एन्जॉय करने लगे थे.

आनंद की ख़ुशी का इन्तहा नाह था और अब तो कण्ट्रोल करके करना था क्यूंकि संजना को बी झड़ना था उससे, उस्सकी बेटी की मांग थी. तो उस्सने कहा, “मेरी गद्य, मैं पीठ पर होता हूँ तू मेरे ऊपर आह!” और वैसे hi लिंग को अंदर रहते hi आनंद ने एक हाथ के सहारे संजना को ऊपर घुमाया और खुद निचे हो गया… अब संजना ऊपर थी दोनों तंग अपने पापा के दोनों तरफ फैलाये हुए और उसस्के लिंग अपने अंदर लिए हुए, संजना ने झुक कर अपने पापा के गर्दन को चाटना और चुम्मन शुरू किया और अपने खुद की कमर हिलाने लगी लिंग को अपने योनि के अंदर आते जाते हुए करके… पीछे से देखा जाता तो नज़र यह ारः था के संजना की गांड ऐसे हिल रहे थे जैसे एक जॉकी घोड़े पर बैठे घोड़ सवार कर रहा है, संजना बिल्कुल उसी पोजीशन में बैठी थी झुकी हुई जैसे एक जॉकी घोड़े पर बैठता है. आनंद ढाका नहीं दे रहा था वो बुसस लेते हुए अपनी बेटी के चेहरे का एक्सप्रेशन देखे जा रहा था…..

आनंद का हाथ संजना के पीठ पर फरते हुए उस्सकी गांड तक गया और गांड के दोनों गालों को दबाया फिर ऊँगली को गांड के चिढ़ पर गोआल गोआल घुमाया उस्सने तो संजना के अंदर जैसे एक आग भड़की और और वो ज़्यादा तेज़ी से अपने कमर हिलने लगी और उसस्के पसीने छूटने लगे जो आनंद के चेहरे पर बूंद बांके गिर्री….. तो आनंद गोआल गोआल घुमाता गया अपने ऊँगली को वहीँ पर और एक हाथ से संजना की एक निप्पल को दो उँगलियों में लेकर उस निप्पल को मसलने लगा तो संजना की हांफते हुए आवाज़ निकलना शुरू हुआ और तड़पती हुई आवाज़ में संजना बोली, “आआअह्ह्ह्ह पपायपप्पाआआ अआप भी ढाका दो नाह, आआआअह्हह्ह्ह्हह स्स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह पआप्पाआआ!” तो आनंद ने भी कमर हिलाना शुरू किया संजना के निचे और उसस्के गांड पर अपने दोनों हाथों को दबाकर आनंद अपने कमर उठाकर ढके देने लगे, और संजना की चीख निकली, “आआआह्ह्ह्हह्ह उउउउइइइइइइइइ प्पाआआप्प्पपाआआ बहोत मज़ा ारः है और तेज़ पापा और टीएईएज़ज़्ज़ज़्ज़ आआआआअह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्शशशशशशशशशश मैं झाड़ रही हूँ पावप्पपाआआआ aaaaaaaaaaahhhhhhh” और आनंद भी ढके देते हुए गहराया “आआगघघघघघघ हाआआआआ ारीय मेरी गुड्ड़ियाआआआआ” और संजना के गले पर अपने मुंह दबाते हुए आनंद ने चूस्ते हुए संजना के गले में लोवेबिते का निशाँ बना दिया और संजना पहले झद्ध चुकी और लेट कई अपने बाप के छाती पर मगर आनंद ने धक्का जारी रखा और बुसस कुछ लम्हे बाद उस्सने अपने लिंग को बाहर निकालते हुए अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ा जो ऊपर हवा में होते हुए वापस संजना के कमर और गांड पर गिर्री!!!

और दोनों बाप बेटी एक दूसरे को वैसे hi उसी पोजीशन में बाहों में भरे बिस्तर पर लेते रहे काफी देर तक एक दूसरे को चूमते चाटते हुए… और कुछ देर बाद संजना उसस्के ऊपर से निकली और अपने पापा के लिंग को मुंह में लेकर चुस्सने लगी जब लिंग नरम होने लगे थे, बाकी के वीर्य को संजना ने छाता और चूसा अपने पापा के चेहरे में देखते हुए!!”

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
Back
Top