- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 106,865
अपडेट 38 संजना & साहब ों थे माउंटेन्स अगेन
दूसरे दिन चावला साहब पहुँच गए दिन के 11 बजे संजना के घर. सान्वी ने जब पूछा कहाँ जा रहे हैं तो कहा के एक दोस्त से मिलने जा रहे हैं और शायद लेट वापस आएगा क्यूंकि दोनों समंदर किनारे जाएंगे. सान्वी ने कुछ नहीं कहा मगर अजीब नज़रों से देख रहे थे उनको और चावला साहब ने नोटिस किया सान्वी की नज़र को और खुद नज़रें चुराते हुए निकले थे घर से.
संजना एक सेक्सी ड्रेस में वेट कर रही थी उंनका और जैसे दोनों मिले एक दूसरे के बाहों में लिपट गए और मुंह में मुंह काफी देर तक किश करते रहे एक दूसरे के जीब के रस निचोड़ते हुए. चावला साहब के दोनों हाथ संजना के पुरे जिस्म पर फेरर रहे थे किश के दौरान, उस्सकी ड्रेस के निचे जाँघों पर, और उस से ऊपर भी पंतय को टटोलते हुए….. फिर उस्सकी नितम्बों को दबाते हुए किश जारी रखा उन्हों ने जबकि संजना का हाथ उनके पीठ सहलाते जा रहे थे. सजाना ने वापस इस ड्रेस को पहना था क्यूंकि उस्सकी जांघें इस में उभर कर एते हैं और चावला साहब को उस्सकी जांघें बहोत पसंद थे, तो चावला साहब के ख़ुशी और चॉइस के खातिर ड्रेस होती थी संजना. ड्रेस यह थी जो पहले भी यहाँ पोस्ट किया गया है.
तो किश के दौरान चावला साहब के दोनों हाथ संजना के पीछे से होते हुए ड्रेस को उस्सकी नितम्बों के बिल्कुल ऊपर उठा दिए थे और संजना की जांघें पंतय समेत बिल्कुल बाहर थे और चावला साहब के लिंग पर दबे हुए थे और किश बरकरार थे. अपने बालों को भी ऐसे hi खुले चोरे थे संजना ने क्यूंकि वो भी चावला साहब की पसंद थी के वो खुले बाल में रहे.
कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे के कमर में हाथ डाले चल कर लाउन्ज के अंदर जा hi रहे थे के अचानक चावला साहब ने कहा, “आज कहीं बाहर चलते हैं किआ ख्याल है?” संजना ने पूछा किधर तो चावला साहब ने कहा उसी पहाड़ी के तरफ. संजना ने कहा मगर उस बार वहां एक आदमी दिखा गया था तो चावला साहब ने कहा ज़्यादा दूर और ऊपर जाएंगे जहाँ कोई अत जाता नहीं. संजना राज़ी हो गयी मगर डीडे किया के कुछ खाने पिने के चीज़ें भी ले चलें साथ में.
तो दोनों घर से निकले करीब 12 बजे और चावला साहब ने पहाड़ियों के तरफ ड्राइव किया. संजना आगे उनके बगल में बैठी थी और कहने की ज़रुरत नहीं के उस ड्रेस में बैठने से उस्सकी जांघें बिल्कुल बाहर थे और चावला साहब बार बार उसी को देखते हुए ड्राइव कर रहा था और उस का हाथ बार बार संजना के जाघों को सहलाते हुए पाए जाते थे. जब कभी उन् का हाथ ज़्यादा ऊपर उस्सकी पंतय तक जाते तो संजना उनके हाथ को पाकर कर कहती, “मैं ने मन किया है नाह, अभी 4 दिन नहीं हुए, वहां छूना मन है अभी! आईटी इस स्टिल सेंसिटिव हम्म्म!” तो चावला साहब मस्ती करते हुए उसस्के चुतरों के निचे हाथ करते और कहते, “यहाँ तो छूना मन नहीं है नाह!” तब संजना कहती, “अरे आगे देखो एक्सीडेंट हो जाएगा!” वैसे hi मस्ती करते और ड्राइव करते हुए पहाड़ी के काफी ऊपर आगये तो चावला साहब ने कार रोका और बाहर निकले नज़ारा देखने को. फिर संजना से पूछा, “इतनी ऊंचाई तक तो कोई नहीं अत होगा मेरे ख्याल से क्यों?”
संजना भी बाहर निकली और कहा, “आप के ख्याल से नहीं अत होगा कोई, लकड़हाड़े एते हैं लकड़ी काटने और भेंइस बकरी वाले भी ताज़ा घांस के लिए एते हैं कभी कभी!” चावला साहब ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता?” तो संजना ने हँस्ते हुए जवाब दिया, “मैं यहाँ रहती हूँ जी मुझे नहीं तो किआ आप को पता होगा?” फिर अपना सर खुजाते हुए चावला साहब ने कहा, “तो फिर किधर जाएँ?” और इतना कहकर उस्सने संजना को वहीँ अपने बाहों में जकरा और कार से सत्ता कर किश करने लगा अपने हाथ से उस्सकी उस ड्रेस को जाँघों के ऊपर उठाते हुए… संजना ने भी किश को अच्छी तरह से रेस्पोंद किया और अपने एक तंग को उठाकर चावला साहब के तंग पर क्रॉस किया जिस से उस्सकी पंतय उनके जिस्म के ऊपर रगड़ने लगे……
किश को रोका सांस लेने के लिए तो संजना उनके बाहों में hi रहते हुए उन् से कहा, अपनी हाथ से दिखते हुए, “थोड़ा आगे जाकर दाएं मुड़ना एक कच्चा रास्ता है उस में थोड़ा और अंदर तक चलेंगे उधर शायद कोई नहीं अत, और अगर किसी की वहां होने का निशाँ होगा तो और भी आगे चैलेंज.” चावला साहब ने फिर पूछा, “तुमको कैसे पता किसी के साथ आयी हो किआ इधर? हँ?” तो संजना ने कहा, “आप भी नाह बहोत सारे सवाल करते हो आप, मेरे पापा के साथ छोटी थी तो कई बार आई हूँ इधर और किआ?”
और कार ड्राइव किया गया और उस जगह पर पहुंचे. संजना पहले कार से निकली और चारों तरफ जैसे मुआएना करने के बाद कहा, “नहीं यहाँ ठीक नहीं है और आगे चलना होगा.” चावला साहब ने पूछा “क्यों? यहाँ किआ है?” तो संजना ने दिखाते हुए कहा, “देखिये यहाँ पर घांस कटा हुआ है, वहां देखो लकड़ी काटे गए हैं मतलब लोग आते हैं यहाँ!” तब चावला साहब ने कहा, “ओह ी सी!! काफी होशियार हो तुम भी!” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “और नहीं तो किआ आप ने किआ मुझको बुद्धू समझा था हीहीहीहीही” और तक़रीबन और 3 मिले दूर गए ड्राइव करते हुए और खुद संजना ने hi एक जगह पर रुकने को कहा. कार से बाहर निकली और कहा, “हाँ यह बहोत अच्छी जगह है इतने दूर तो कोई नहीं आएगा, और अगर आये भी तो जब तक वह यहाँ पहुंचे हमको पता चल जाएगा”
वो एक बिल्कुल hi सुनसान जगह था, चारों तरफ दरखतें, पेयर पौधे, घांस, फूल…. हवा की सरसराहट, और सूरज तो दिख hi नहीं रहे थे उन् बड़े बड़े दरख़तों के बीच. मानों एक घाना जंगल था वो जगह. और चावला साहब का मैं मचल गया बाहर निकला तो. वो काफी रोमांटिक हो गए और जिस काम के लिए संजना को यहाँ लेकर आये थे वो जगह बिल्कुल सही लगा उनको. उन्हों ने सोचा के संजना को बिल्कुल नंगी करके बाहर hi मज़ा कर सकेगा और कोई नहीं देख पाएगा परिंदों के इलावा! उंनका मैं एहि था के संजना को बिल्कुल नंगी करे नेचर में!
उन्हों ने संजना को बाहों में लिया और गाडी से उस्का पीठ लगाते हुए उस्सको दबाया अपने जिस्म से और संजना को चूमने लगा खुले आसमान के निचे. संजना को भी अच्छा लग रहा था ओपन में वैसे किश करते हुए उनके बाहों में. उस दौरान उनके हाथ वहीँ संजना के जाँघों पर गए और ड्रेस को ऊपर कर दिया तो संजना की पंतय सब दिह्कने लगे और उस वक़्त अगर कोई भी एते तो संजना के पुरे जांघ और पंतय नज़र आते और वहां पर चावला साहब के हाथ उस्सकी पंतय पर फरते हुए दीखते किसी को भी. मगर था तो कोई भी नहीं वहां सिवाए एक दो चीड़यों के जो ऊपर बैठे पेयर के शाखों से उन् दोनों को प्यार करते हुए देख रहे थे और अपनी जुबां में जैसे एक दूसरे को यह कह रहे थे, “वो देख, वह लोग किआ कर रहे हैं” और दूसरे चिडया ने जवाब में कहा, “करने दे हम जो ऊपर पेयर के डाली पर करते हैं वह लोग गाडी के ऊपर कर रहे हैं”
चवा साहब का हाथ फिरसे संजना के योनि के ऊपर गया पंतय के ऊपर से hi और फिर किश को रोकते हुए संजना ने कुछ नखरों से कहा, “हम्म नहीं वहां मत छुवो न प्लीज, अब भी कितना सेंसिटिव है!” तो झट से चावला साहब ने संजना को घुमाया और उस्सकी पीठ अब चावला साहब के आगे थे और संजना के आगे का हिस्सा कार पर थी. थोड़ा सा चावला साहब ने संजना के गर्दन पर हाथ रख के उस्सको झुकाया कार के ऊपर और उस्सकी कमर से लेकर निचे तक सब चावला साहब के निचे वाले जिस्म के हिस्से से डब्बे हुए थे, मतलब उस्सकी नितम्ब पर ड्रेस तो उठी हुई थी और संजना की वाइट पंतय नितम्बों के फॉर्म दिखा रहे थे उस पर चावला साहब का लिंग पंत के अंदर से संजना की नितबों पर दबाते हुए रागढ रहे थे. संजना ने अपने होंठों को दांतों में दबाते हुए थोड़ी से तड़पती हुई आवाज़ में, “ह्म्मम्म्म्म” किया और चावला साहब जोश में आ चुके थे तो संजना की पंतय को उतारने लगे धीरे धीरे अपने उँगलियों को उस्सकी कमर और पंतय के बीच डालते हुए. संजना ने जब फील किया के चावला साहब उस्सकी पंतय उतार रहे हैं तो झट से गर्दन घुअमाया और मुड़कर कहा, “ोफो किआ कर रहे हो आप, ऐसे खुले में कोई आया तो?” चावला साहब ने सोचा, ‘यह तो यह नहीं कह रही है के पीछे मत लो, बल्कि इस्को कोई और ना आजाये इस्सकी फ़िक्र है, मतलब मैं इस्को पीछे ले सकता हूँ’…….. ये सोचते हुए चावला साहब ने घुर्राटे हुए कहा, “आरी बेबी कौन आएगा इतने दूर पहाड़ के ऊपर भला, उतारने दो नाह निकल hi चुकी है तुम्हारे जांघों के काफी निचे कर दिया है मैं ने पंतय को अबतो….” और साहब बैठ कर उस्सकी पंतय को घुटनों के निचे से बाहर निकालने लगे और संजना ने झट से अपनी ड्रेस को निचे किया अपने नितम्बों को ढांकने के लिए. अब आप पिक्चर में ऊपर देखिये कितनी गोरी है वो जाँघों वाले हिंसा, तो वैसी hi गोरी ऊपर जहाँ तक ड्रेस उठा हुआ था नज़र आरहे थे और दूर तक किसी को भी वो दृष्ट साफ़ नज़र अत अगर कोई होता तो.
चावल साहब फिर खड़े हुए, अपने ज़िप को निचे किया और लिंग को बाहर निकालते हुए उस्सको अपने थूक से भिगोया और थूक को संजना के चुतरों पर भी लगाया ठीक चढ़ के ऊपर अपने ऊँगली को ुसस्पर घुमाते हुए, जबकि संजना कार के ऊपर झुकी हुई सब फील करते हुए छोटी छोटी आवाज़ें दे रही थी, “हम्म्म हम्म्म हम्म्म्म” कुछ इस तरह. संजना को पता था किआ होने जा रहा है, उस्सको अच्छी तरह से पता था के चावला साहब उस्सको पीछे से लेने जा रहे थे मगर वो वैसे hi झुकी रही चावला साहब को पोजीशन देते हुए!!
तो चावला साहब ने अपने लुंड को थूक से भिगोते हुए पहले संजना के नितम्बों के बीच ो बीच रगड़ा थोड़ा सा अपने कमर हिलाते हुए जिस से थूक सुख गया, फिर थूक लगाया और एक हाथ से दोनों नितम्बों के चीक्स को अलग करते हुए लुंड की ऊपरी हिस्से को संजना के गांड की चढ़ पर थोड़ा सा दबाया और अंदर ठुसस्ने की कोशिश किया तो संजना ने एक छोटी सी चीख देते हुए मुड़कर उनके चेहरे में देखे और बचपने आवाज़ में कहा, “हम्म्म मत डालो दुखेगा वहां ह्म्म्मम्म!” चावला साहब कहाँ सुनने वाले थे वो बिल्कुल जोश में थे और थुश दिया अपने लुंड का ऊपरी वाला हिस्सा तो संजना चिलायी, “रुको रुको रुको!!! धीरे धीरे प्लीज एकदम झट से नहीं, आहिस्ते आहिस्ते अंदर जाने दो नाह!!” तो चावला साहब एक नटखट मुस्कान में सज्जनः के कमर के दोनों तरफ पकड़ते हुए अपने कमर पर ज़ोर देते हुए और थोड़ा सा लुंड को अंदर पुश किया तो संजना ने तड़पती आवाज़ में कहा, “उफ्फ्फ, ठीक नहीं है बाबा!! बाहर निकालो और थूक लगाओ नाह सूखा हुआ है, मुझे दर्द होगा ऐसे, यह आगे थोड़ा hi है के मैं गीली रहूं वहां पर!! और भिगो दो तब डालना!!”
चावला साहब ने फिर दिल में सोचा के इस लड़की को सब पता है किआ कैसे करना है, आराम से झुकी हुई है कार के हुड के ऊपर और जानती है मैं इस्को पीछे लेने वाला हूँ और आराम से लेने दे रही है, और इस्को यह भी पता है के ज़्यादा थूक लगाना चाहिए… बाद में इस से सवाल करता हूँ और आज तो जानकार hi रहूँगा के यह किश के साथ पीछे मारवाती है!
तो चावला साहब ने और थूक लगाया मगर उस्का गाला सूखा हुआ था तो थूक नहीं थे काफी तो उस्सने संजना से कहा, “तुम अपने थूक लगाओ नाह मेरा मुंह अंदर सूखा पड़ा है…..” और संजना ने उनके ेंखों में देखते हुए खुद अपने थूक को उनके लुंड पर लगाया, खूब अपने हाथ से माला अपने थूक को उनके तन्ने हुए लुंड के ऊपर और थोड़ा थूक अपने पीछे भी लगाया संजना ने फिर झुक गयी कार के हुड के ऊपर और चारों तरफ नज़रें दौड़ाते हुए कहा, “ज़्यादा टाइम मत लो कहीं कोई आ ना जाए, मुसीबत आजायेगी अगर किसी ने भी देखा तो, पुरे गाओं में ढिंढोरा पीठ जायेगा के आनंद की बेटी अपने होने वाले ससुर से छुड़वा रही थी हीहीहीहीहीही” यह कहकर वो टांगों थोड़ा ज़्यादा फैलाकर पूरी तरह से झुक गयी.
उस्सकी बातों को सुनकर चावला साहब के अंदर एक उतेजिना की लेहेर दौड़ी और उस्सने संजना के गांड के चढ़ के अंदर अपने लुंड को ठुस्सा, पहले आहिस्ते आहिस्ते फिर धीरे धीरे ज़्यादा पुश किया और लो पूरा लुंड घुस गया और संजना ने उफ़ तक नहीं किया!! चावला साहब ने सोचा, कमाल है आगे तो छूने नहीं दे रही है और जहाँ ज़्यादा डिफिकल्ट है घुस्सना वहां आराम से ले लिया, यह ज़रूर गांड मरवाती है किसी से! विर्जिनिटी तो बचा के राखी थी मगर पीछे देती होगी ज़रूर यह चालू चीज़ है जिस्का नाम है संजना!
अब धक्का मारने का टाइम आया तब संजना गर्दन मुड़कर पीछे चावला साहब के चेहरे में देखते हुए कहा, “हम्म्म ज़्यादा फ़ास्ट नहीं मुझे दुखेगा आहिस्ते आहिस्ते hi ढाका देना प्लीज!”
अब एक मर्द को पीछे इतनी टाइट जगह पर घुसने से ज़्यादा धक्के की ज़रुरत hi नहीं पढ़ती, क्यूंकि जितना टाइट अंदर होती है उतनी hi मज़ा अत है और उतनी hi जल्दी आदमी झाड़ जाता है ख़ास कर अगर लेने वाली संजना जैसे खूबसूरत, भोली भाली दिखने वाली ुर इतने खूबसूरत जिस्म की मालिक हो तो!
तो बिल्कुल देर नहीं लगा कोई 10 बार अंदर बाहर करने के बाद hi चावला साहब बिल्कुल संजना के ऊपर झुक गए उस्सकी चूचियों को मसलते हुए और उस्सकी गर्दन की पीछे वाले हिस्से को चूस्ते हुए दो आखरी धक्के को फ़ास्ट किया और संजना के गांड के अंदर hi अपने सारे वीर्य को छोड़ दिया उन्हों ने कस्सके संजना के बबबस को दबाते हुए. काफी हांफ रहे थे संजना के गर्दन पर अपने गरम सांसें चोररटे हुए. संजना उसी पोजीशन में झुकी हुई अपने हाथ को पीछे करके उनके सर को सेहला रही थी प्यार से और धीमी आवाज़ में पूछा, “हम्म्म्म साहब को मज़ा आया नाह? हम्म्म?” अपने साँसों को बाहर करते हुए, चावला साहब ने भारी आवाज़ में कहार्टे हुए कहा, “हाआआआं बहोत hi मज़ा आया बेबी, फीीववववव! किआ चीज़ हो तुम मेरी जान… बहुत मज़ा आया जी करता है अपने लुंड को तेरे अंदर hi रहने दूँ!!” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “लो!! तो फिर बाद में कैसे खुश करोगे खुद को और मुझे अगर यह मेरे अंदर रह गया तो? अपने मोठे शैतान को निकालो अब और धीरे से, झट से nahin!!weise वो नरम हो रहा है मेरे अंदर hi हीहीहीहीही”
चावला साहब उसस्के ऊपर वैसे hi कुछ देर झुके रहे उसस्के बूब्स और पथ के निचे अपने हाथों को फरते हुए, और संजना ने कहा, “उफ़, मैं थक गयी हूँ इस पोजीशन में झुके हुए ऊपर से आप का बोझ पुरे मुझ पर है अब हत्तो भी!” तब चावला साहब ने लुंड को बाहर किया जो सच में नरम हो गए थे और उसस्के चढ़ से थोड़ा बहोत गीलापन दिख रहा था, चावला साहब अब भी हांफ रहे थे और संजना के चेहरे में कुछ सोचते हुए घुररते जा रहे थे जबकि संजना अपनी पंतय पहने लगी थी, और पेहेनते वक़्त चावला साहब से कहा, “अब आप यह मत कहना के इस पंतय को भी आप रखोगे अपने पास ट्रॉफी के तौर पे!!” तो चावला साहब ने कहा, “हाँ बिल्कुल सही याद दिलाया तुमने इस्को लेना hi पड़ेगा मुझे क्यूंकि फर्स्ट टाइम पीछे लिया तुमको तो तोहफे के तौर पे तो लेना hi चाहिए मुझे इस्को भी.” संजना ने एक नखरे के साथ कहा, “मैं नहीं निकलने वाली अब जो पेहेन चुकी हूँ घर जाने के बाद निकल कर दूंगी याद दिलाना वापस जाने से पहले!”
चावला साहब ने कार के अंदर से एक पानी का बोतल निकला और अपने लुंड को धोने गया कार के पीछे. संजना वही कड़ी देख रही थी और धीरे धीरे कार के पीछे गयी वो भी और कहा, “दो मैं नहलाती हूँ इस मोठे शैतान को!” चावला साहब ने ख़ुशी से उस्सको बोतल दिया और संजना लुंड के सामने बैठ गयी और पानी से उस्सको अपने मुलायम हाथों से धोने लगी….. धोकर सूखा दिया तो लुंड को प्यार करते हुए चुम्मा संजना ने और दोनों कार के अंदर चले गए पीछे वाले सीट पर बैठे एक दूसरे को बाहों में भरके. कार की दोनों तरफ के दरवाज़े को खुला चोर्रा गया था क्यूंकि मस्त हवा चल रही थी और आराम करने लगे दोनों.
कोई 20/25 मिनट्स के आराम के बाद चावला साहब ने कहा, “आज मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी सवाल करनी है उम्मीद है के तुम सच सच जवाब डौगी. मुझे झूट नहीं पसंद और अगर मुझसे सच में प्यार करती हो तो सब सच सच बताना जो भी मैं पूछूंगा okay?” संजना बिल्कुल भी हैरान नहीं हुई और कहा, “मुझे पता है आप किआ पूछने वाले हो बल्कि मुझे खुद आप से सब कुछ कहना है. याद है मैं ने आप से कहा था के वक़्त आने पर बताउंगी और सब जान्ने के बाद आप या तो मुझसे ज़्यादा प्यार करोगे या नफरत? याद है बात के नहीं?”
तो बे कॉन्टिनोएड…………………….. (2903 वर्ड्स)
दूसरे दिन चावला साहब पहुँच गए दिन के 11 बजे संजना के घर. सान्वी ने जब पूछा कहाँ जा रहे हैं तो कहा के एक दोस्त से मिलने जा रहे हैं और शायद लेट वापस आएगा क्यूंकि दोनों समंदर किनारे जाएंगे. सान्वी ने कुछ नहीं कहा मगर अजीब नज़रों से देख रहे थे उनको और चावला साहब ने नोटिस किया सान्वी की नज़र को और खुद नज़रें चुराते हुए निकले थे घर से.
संजना एक सेक्सी ड्रेस में वेट कर रही थी उंनका और जैसे दोनों मिले एक दूसरे के बाहों में लिपट गए और मुंह में मुंह काफी देर तक किश करते रहे एक दूसरे के जीब के रस निचोड़ते हुए. चावला साहब के दोनों हाथ संजना के पुरे जिस्म पर फेरर रहे थे किश के दौरान, उस्सकी ड्रेस के निचे जाँघों पर, और उस से ऊपर भी पंतय को टटोलते हुए….. फिर उस्सकी नितम्बों को दबाते हुए किश जारी रखा उन्हों ने जबकि संजना का हाथ उनके पीठ सहलाते जा रहे थे. सजाना ने वापस इस ड्रेस को पहना था क्यूंकि उस्सकी जांघें इस में उभर कर एते हैं और चावला साहब को उस्सकी जांघें बहोत पसंद थे, तो चावला साहब के ख़ुशी और चॉइस के खातिर ड्रेस होती थी संजना. ड्रेस यह थी जो पहले भी यहाँ पोस्ट किया गया है.
तो किश के दौरान चावला साहब के दोनों हाथ संजना के पीछे से होते हुए ड्रेस को उस्सकी नितम्बों के बिल्कुल ऊपर उठा दिए थे और संजना की जांघें पंतय समेत बिल्कुल बाहर थे और चावला साहब के लिंग पर दबे हुए थे और किश बरकरार थे. अपने बालों को भी ऐसे hi खुले चोरे थे संजना ने क्यूंकि वो भी चावला साहब की पसंद थी के वो खुले बाल में रहे.
कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे के कमर में हाथ डाले चल कर लाउन्ज के अंदर जा hi रहे थे के अचानक चावला साहब ने कहा, “आज कहीं बाहर चलते हैं किआ ख्याल है?” संजना ने पूछा किधर तो चावला साहब ने कहा उसी पहाड़ी के तरफ. संजना ने कहा मगर उस बार वहां एक आदमी दिखा गया था तो चावला साहब ने कहा ज़्यादा दूर और ऊपर जाएंगे जहाँ कोई अत जाता नहीं. संजना राज़ी हो गयी मगर डीडे किया के कुछ खाने पिने के चीज़ें भी ले चलें साथ में.
तो दोनों घर से निकले करीब 12 बजे और चावला साहब ने पहाड़ियों के तरफ ड्राइव किया. संजना आगे उनके बगल में बैठी थी और कहने की ज़रुरत नहीं के उस ड्रेस में बैठने से उस्सकी जांघें बिल्कुल बाहर थे और चावला साहब बार बार उसी को देखते हुए ड्राइव कर रहा था और उस का हाथ बार बार संजना के जाघों को सहलाते हुए पाए जाते थे. जब कभी उन् का हाथ ज़्यादा ऊपर उस्सकी पंतय तक जाते तो संजना उनके हाथ को पाकर कर कहती, “मैं ने मन किया है नाह, अभी 4 दिन नहीं हुए, वहां छूना मन है अभी! आईटी इस स्टिल सेंसिटिव हम्म्म!” तो चावला साहब मस्ती करते हुए उसस्के चुतरों के निचे हाथ करते और कहते, “यहाँ तो छूना मन नहीं है नाह!” तब संजना कहती, “अरे आगे देखो एक्सीडेंट हो जाएगा!” वैसे hi मस्ती करते और ड्राइव करते हुए पहाड़ी के काफी ऊपर आगये तो चावला साहब ने कार रोका और बाहर निकले नज़ारा देखने को. फिर संजना से पूछा, “इतनी ऊंचाई तक तो कोई नहीं अत होगा मेरे ख्याल से क्यों?”
संजना भी बाहर निकली और कहा, “आप के ख्याल से नहीं अत होगा कोई, लकड़हाड़े एते हैं लकड़ी काटने और भेंइस बकरी वाले भी ताज़ा घांस के लिए एते हैं कभी कभी!” चावला साहब ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता?” तो संजना ने हँस्ते हुए जवाब दिया, “मैं यहाँ रहती हूँ जी मुझे नहीं तो किआ आप को पता होगा?” फिर अपना सर खुजाते हुए चावला साहब ने कहा, “तो फिर किधर जाएँ?” और इतना कहकर उस्सने संजना को वहीँ अपने बाहों में जकरा और कार से सत्ता कर किश करने लगा अपने हाथ से उस्सकी उस ड्रेस को जाँघों के ऊपर उठाते हुए… संजना ने भी किश को अच्छी तरह से रेस्पोंद किया और अपने एक तंग को उठाकर चावला साहब के तंग पर क्रॉस किया जिस से उस्सकी पंतय उनके जिस्म के ऊपर रगड़ने लगे……
किश को रोका सांस लेने के लिए तो संजना उनके बाहों में hi रहते हुए उन् से कहा, अपनी हाथ से दिखते हुए, “थोड़ा आगे जाकर दाएं मुड़ना एक कच्चा रास्ता है उस में थोड़ा और अंदर तक चलेंगे उधर शायद कोई नहीं अत, और अगर किसी की वहां होने का निशाँ होगा तो और भी आगे चैलेंज.” चावला साहब ने फिर पूछा, “तुमको कैसे पता किसी के साथ आयी हो किआ इधर? हँ?” तो संजना ने कहा, “आप भी नाह बहोत सारे सवाल करते हो आप, मेरे पापा के साथ छोटी थी तो कई बार आई हूँ इधर और किआ?”
और कार ड्राइव किया गया और उस जगह पर पहुंचे. संजना पहले कार से निकली और चारों तरफ जैसे मुआएना करने के बाद कहा, “नहीं यहाँ ठीक नहीं है और आगे चलना होगा.” चावला साहब ने पूछा “क्यों? यहाँ किआ है?” तो संजना ने दिखाते हुए कहा, “देखिये यहाँ पर घांस कटा हुआ है, वहां देखो लकड़ी काटे गए हैं मतलब लोग आते हैं यहाँ!” तब चावला साहब ने कहा, “ओह ी सी!! काफी होशियार हो तुम भी!” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “और नहीं तो किआ आप ने किआ मुझको बुद्धू समझा था हीहीहीहीही” और तक़रीबन और 3 मिले दूर गए ड्राइव करते हुए और खुद संजना ने hi एक जगह पर रुकने को कहा. कार से बाहर निकली और कहा, “हाँ यह बहोत अच्छी जगह है इतने दूर तो कोई नहीं आएगा, और अगर आये भी तो जब तक वह यहाँ पहुंचे हमको पता चल जाएगा”
वो एक बिल्कुल hi सुनसान जगह था, चारों तरफ दरखतें, पेयर पौधे, घांस, फूल…. हवा की सरसराहट, और सूरज तो दिख hi नहीं रहे थे उन् बड़े बड़े दरख़तों के बीच. मानों एक घाना जंगल था वो जगह. और चावला साहब का मैं मचल गया बाहर निकला तो. वो काफी रोमांटिक हो गए और जिस काम के लिए संजना को यहाँ लेकर आये थे वो जगह बिल्कुल सही लगा उनको. उन्हों ने सोचा के संजना को बिल्कुल नंगी करके बाहर hi मज़ा कर सकेगा और कोई नहीं देख पाएगा परिंदों के इलावा! उंनका मैं एहि था के संजना को बिल्कुल नंगी करे नेचर में!
उन्हों ने संजना को बाहों में लिया और गाडी से उस्का पीठ लगाते हुए उस्सको दबाया अपने जिस्म से और संजना को चूमने लगा खुले आसमान के निचे. संजना को भी अच्छा लग रहा था ओपन में वैसे किश करते हुए उनके बाहों में. उस दौरान उनके हाथ वहीँ संजना के जाँघों पर गए और ड्रेस को ऊपर कर दिया तो संजना की पंतय सब दिह्कने लगे और उस वक़्त अगर कोई भी एते तो संजना के पुरे जांघ और पंतय नज़र आते और वहां पर चावला साहब के हाथ उस्सकी पंतय पर फरते हुए दीखते किसी को भी. मगर था तो कोई भी नहीं वहां सिवाए एक दो चीड़यों के जो ऊपर बैठे पेयर के शाखों से उन् दोनों को प्यार करते हुए देख रहे थे और अपनी जुबां में जैसे एक दूसरे को यह कह रहे थे, “वो देख, वह लोग किआ कर रहे हैं” और दूसरे चिडया ने जवाब में कहा, “करने दे हम जो ऊपर पेयर के डाली पर करते हैं वह लोग गाडी के ऊपर कर रहे हैं”
चवा साहब का हाथ फिरसे संजना के योनि के ऊपर गया पंतय के ऊपर से hi और फिर किश को रोकते हुए संजना ने कुछ नखरों से कहा, “हम्म नहीं वहां मत छुवो न प्लीज, अब भी कितना सेंसिटिव है!” तो झट से चावला साहब ने संजना को घुमाया और उस्सकी पीठ अब चावला साहब के आगे थे और संजना के आगे का हिस्सा कार पर थी. थोड़ा सा चावला साहब ने संजना के गर्दन पर हाथ रख के उस्सको झुकाया कार के ऊपर और उस्सकी कमर से लेकर निचे तक सब चावला साहब के निचे वाले जिस्म के हिस्से से डब्बे हुए थे, मतलब उस्सकी नितम्ब पर ड्रेस तो उठी हुई थी और संजना की वाइट पंतय नितम्बों के फॉर्म दिखा रहे थे उस पर चावला साहब का लिंग पंत के अंदर से संजना की नितबों पर दबाते हुए रागढ रहे थे. संजना ने अपने होंठों को दांतों में दबाते हुए थोड़ी से तड़पती हुई आवाज़ में, “ह्म्मम्म्म्म” किया और चावला साहब जोश में आ चुके थे तो संजना की पंतय को उतारने लगे धीरे धीरे अपने उँगलियों को उस्सकी कमर और पंतय के बीच डालते हुए. संजना ने जब फील किया के चावला साहब उस्सकी पंतय उतार रहे हैं तो झट से गर्दन घुअमाया और मुड़कर कहा, “ोफो किआ कर रहे हो आप, ऐसे खुले में कोई आया तो?” चावला साहब ने सोचा, ‘यह तो यह नहीं कह रही है के पीछे मत लो, बल्कि इस्को कोई और ना आजाये इस्सकी फ़िक्र है, मतलब मैं इस्को पीछे ले सकता हूँ’…….. ये सोचते हुए चावला साहब ने घुर्राटे हुए कहा, “आरी बेबी कौन आएगा इतने दूर पहाड़ के ऊपर भला, उतारने दो नाह निकल hi चुकी है तुम्हारे जांघों के काफी निचे कर दिया है मैं ने पंतय को अबतो….” और साहब बैठ कर उस्सकी पंतय को घुटनों के निचे से बाहर निकालने लगे और संजना ने झट से अपनी ड्रेस को निचे किया अपने नितम्बों को ढांकने के लिए. अब आप पिक्चर में ऊपर देखिये कितनी गोरी है वो जाँघों वाले हिंसा, तो वैसी hi गोरी ऊपर जहाँ तक ड्रेस उठा हुआ था नज़र आरहे थे और दूर तक किसी को भी वो दृष्ट साफ़ नज़र अत अगर कोई होता तो.
चावल साहब फिर खड़े हुए, अपने ज़िप को निचे किया और लिंग को बाहर निकालते हुए उस्सको अपने थूक से भिगोया और थूक को संजना के चुतरों पर भी लगाया ठीक चढ़ के ऊपर अपने ऊँगली को ुसस्पर घुमाते हुए, जबकि संजना कार के ऊपर झुकी हुई सब फील करते हुए छोटी छोटी आवाज़ें दे रही थी, “हम्म्म हम्म्म हम्म्म्म” कुछ इस तरह. संजना को पता था किआ होने जा रहा है, उस्सको अच्छी तरह से पता था के चावला साहब उस्सको पीछे से लेने जा रहे थे मगर वो वैसे hi झुकी रही चावला साहब को पोजीशन देते हुए!!
तो चावला साहब ने अपने लुंड को थूक से भिगोते हुए पहले संजना के नितम्बों के बीच ो बीच रगड़ा थोड़ा सा अपने कमर हिलाते हुए जिस से थूक सुख गया, फिर थूक लगाया और एक हाथ से दोनों नितम्बों के चीक्स को अलग करते हुए लुंड की ऊपरी हिस्से को संजना के गांड की चढ़ पर थोड़ा सा दबाया और अंदर ठुसस्ने की कोशिश किया तो संजना ने एक छोटी सी चीख देते हुए मुड़कर उनके चेहरे में देखे और बचपने आवाज़ में कहा, “हम्म्म मत डालो दुखेगा वहां ह्म्म्मम्म!” चावला साहब कहाँ सुनने वाले थे वो बिल्कुल जोश में थे और थुश दिया अपने लुंड का ऊपरी वाला हिस्सा तो संजना चिलायी, “रुको रुको रुको!!! धीरे धीरे प्लीज एकदम झट से नहीं, आहिस्ते आहिस्ते अंदर जाने दो नाह!!” तो चावला साहब एक नटखट मुस्कान में सज्जनः के कमर के दोनों तरफ पकड़ते हुए अपने कमर पर ज़ोर देते हुए और थोड़ा सा लुंड को अंदर पुश किया तो संजना ने तड़पती आवाज़ में कहा, “उफ्फ्फ, ठीक नहीं है बाबा!! बाहर निकालो और थूक लगाओ नाह सूखा हुआ है, मुझे दर्द होगा ऐसे, यह आगे थोड़ा hi है के मैं गीली रहूं वहां पर!! और भिगो दो तब डालना!!”
चावला साहब ने फिर दिल में सोचा के इस लड़की को सब पता है किआ कैसे करना है, आराम से झुकी हुई है कार के हुड के ऊपर और जानती है मैं इस्को पीछे लेने वाला हूँ और आराम से लेने दे रही है, और इस्को यह भी पता है के ज़्यादा थूक लगाना चाहिए… बाद में इस से सवाल करता हूँ और आज तो जानकार hi रहूँगा के यह किश के साथ पीछे मारवाती है!
तो चावला साहब ने और थूक लगाया मगर उस्का गाला सूखा हुआ था तो थूक नहीं थे काफी तो उस्सने संजना से कहा, “तुम अपने थूक लगाओ नाह मेरा मुंह अंदर सूखा पड़ा है…..” और संजना ने उनके ेंखों में देखते हुए खुद अपने थूक को उनके लुंड पर लगाया, खूब अपने हाथ से माला अपने थूक को उनके तन्ने हुए लुंड के ऊपर और थोड़ा थूक अपने पीछे भी लगाया संजना ने फिर झुक गयी कार के हुड के ऊपर और चारों तरफ नज़रें दौड़ाते हुए कहा, “ज़्यादा टाइम मत लो कहीं कोई आ ना जाए, मुसीबत आजायेगी अगर किसी ने भी देखा तो, पुरे गाओं में ढिंढोरा पीठ जायेगा के आनंद की बेटी अपने होने वाले ससुर से छुड़वा रही थी हीहीहीहीहीही” यह कहकर वो टांगों थोड़ा ज़्यादा फैलाकर पूरी तरह से झुक गयी.
उस्सकी बातों को सुनकर चावला साहब के अंदर एक उतेजिना की लेहेर दौड़ी और उस्सने संजना के गांड के चढ़ के अंदर अपने लुंड को ठुस्सा, पहले आहिस्ते आहिस्ते फिर धीरे धीरे ज़्यादा पुश किया और लो पूरा लुंड घुस गया और संजना ने उफ़ तक नहीं किया!! चावला साहब ने सोचा, कमाल है आगे तो छूने नहीं दे रही है और जहाँ ज़्यादा डिफिकल्ट है घुस्सना वहां आराम से ले लिया, यह ज़रूर गांड मरवाती है किसी से! विर्जिनिटी तो बचा के राखी थी मगर पीछे देती होगी ज़रूर यह चालू चीज़ है जिस्का नाम है संजना!
अब धक्का मारने का टाइम आया तब संजना गर्दन मुड़कर पीछे चावला साहब के चेहरे में देखते हुए कहा, “हम्म्म ज़्यादा फ़ास्ट नहीं मुझे दुखेगा आहिस्ते आहिस्ते hi ढाका देना प्लीज!”
अब एक मर्द को पीछे इतनी टाइट जगह पर घुसने से ज़्यादा धक्के की ज़रुरत hi नहीं पढ़ती, क्यूंकि जितना टाइट अंदर होती है उतनी hi मज़ा अत है और उतनी hi जल्दी आदमी झाड़ जाता है ख़ास कर अगर लेने वाली संजना जैसे खूबसूरत, भोली भाली दिखने वाली ुर इतने खूबसूरत जिस्म की मालिक हो तो!
तो बिल्कुल देर नहीं लगा कोई 10 बार अंदर बाहर करने के बाद hi चावला साहब बिल्कुल संजना के ऊपर झुक गए उस्सकी चूचियों को मसलते हुए और उस्सकी गर्दन की पीछे वाले हिस्से को चूस्ते हुए दो आखरी धक्के को फ़ास्ट किया और संजना के गांड के अंदर hi अपने सारे वीर्य को छोड़ दिया उन्हों ने कस्सके संजना के बबबस को दबाते हुए. काफी हांफ रहे थे संजना के गर्दन पर अपने गरम सांसें चोररटे हुए. संजना उसी पोजीशन में झुकी हुई अपने हाथ को पीछे करके उनके सर को सेहला रही थी प्यार से और धीमी आवाज़ में पूछा, “हम्म्म्म साहब को मज़ा आया नाह? हम्म्म?” अपने साँसों को बाहर करते हुए, चावला साहब ने भारी आवाज़ में कहार्टे हुए कहा, “हाआआआं बहोत hi मज़ा आया बेबी, फीीववववव! किआ चीज़ हो तुम मेरी जान… बहुत मज़ा आया जी करता है अपने लुंड को तेरे अंदर hi रहने दूँ!!” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “लो!! तो फिर बाद में कैसे खुश करोगे खुद को और मुझे अगर यह मेरे अंदर रह गया तो? अपने मोठे शैतान को निकालो अब और धीरे से, झट से nahin!!weise वो नरम हो रहा है मेरे अंदर hi हीहीहीहीही”
चावला साहब उसस्के ऊपर वैसे hi कुछ देर झुके रहे उसस्के बूब्स और पथ के निचे अपने हाथों को फरते हुए, और संजना ने कहा, “उफ़, मैं थक गयी हूँ इस पोजीशन में झुके हुए ऊपर से आप का बोझ पुरे मुझ पर है अब हत्तो भी!” तब चावला साहब ने लुंड को बाहर किया जो सच में नरम हो गए थे और उसस्के चढ़ से थोड़ा बहोत गीलापन दिख रहा था, चावला साहब अब भी हांफ रहे थे और संजना के चेहरे में कुछ सोचते हुए घुररते जा रहे थे जबकि संजना अपनी पंतय पहने लगी थी, और पेहेनते वक़्त चावला साहब से कहा, “अब आप यह मत कहना के इस पंतय को भी आप रखोगे अपने पास ट्रॉफी के तौर पे!!” तो चावला साहब ने कहा, “हाँ बिल्कुल सही याद दिलाया तुमने इस्को लेना hi पड़ेगा मुझे क्यूंकि फर्स्ट टाइम पीछे लिया तुमको तो तोहफे के तौर पे तो लेना hi चाहिए मुझे इस्को भी.” संजना ने एक नखरे के साथ कहा, “मैं नहीं निकलने वाली अब जो पेहेन चुकी हूँ घर जाने के बाद निकल कर दूंगी याद दिलाना वापस जाने से पहले!”
चावला साहब ने कार के अंदर से एक पानी का बोतल निकला और अपने लुंड को धोने गया कार के पीछे. संजना वही कड़ी देख रही थी और धीरे धीरे कार के पीछे गयी वो भी और कहा, “दो मैं नहलाती हूँ इस मोठे शैतान को!” चावला साहब ने ख़ुशी से उस्सको बोतल दिया और संजना लुंड के सामने बैठ गयी और पानी से उस्सको अपने मुलायम हाथों से धोने लगी….. धोकर सूखा दिया तो लुंड को प्यार करते हुए चुम्मा संजना ने और दोनों कार के अंदर चले गए पीछे वाले सीट पर बैठे एक दूसरे को बाहों में भरके. कार की दोनों तरफ के दरवाज़े को खुला चोर्रा गया था क्यूंकि मस्त हवा चल रही थी और आराम करने लगे दोनों.
कोई 20/25 मिनट्स के आराम के बाद चावला साहब ने कहा, “आज मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी सवाल करनी है उम्मीद है के तुम सच सच जवाब डौगी. मुझे झूट नहीं पसंद और अगर मुझसे सच में प्यार करती हो तो सब सच सच बताना जो भी मैं पूछूंगा okay?” संजना बिल्कुल भी हैरान नहीं हुई और कहा, “मुझे पता है आप किआ पूछने वाले हो बल्कि मुझे खुद आप से सब कुछ कहना है. याद है मैं ने आप से कहा था के वक़्त आने पर बताउंगी और सब जान्ने के बाद आप या तो मुझसे ज़्यादा प्यार करोगे या नफरत? याद है बात के नहीं?”
तो बे कॉन्टिनोएड…………………….. (2903 वर्ड्स)