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सुहागरात 1 बजे
देवरानी बलदेव को लिटा देती है और अपने हाथ में तेल ले कर बलदेव क लौड़े को अपने हाथ में ले कर ऊपर निचे कर लौड़े की मालिश करने लगती है
"ाः माँ ुआह"
"कितना बड़ा है ये तेल लगने पर तो और भयानक लग रहा है"
"माँ ये सिर्फ आपके लिए है यह"
देवरानी अपने दोनों हाथो से बलदेव क 9 इंच लम्बे और 3 इंच मोठे लौड़े को सरसों क तेल से मालिश कर रही थी और अपने नए पति क लौड़े को देख उसे अंदर हे अंदर गर्व हो रहा था
"में कितनी धनि हु राजा क मुझे इतना मज़बूत हथियार वाला पति मिला"
"माँ ये हथियार हे है जो आपके छूट की आग बुझा सकता है"
इतना सुनते हे देवरानी लैंड छोर सीधा लेट जाती है
"आजा न फिर आग बुझा दे मेरी राजा
बलदेव उठ ता है और उसका लौड़ा तेल में सना हुआ इठला रहा था जिसे लगातार एक तक लगाए देवरानी देख रही थी
"ये कभी थकता है क नहीं बीटा "
"अब जिसकी माँ तेरे जैसी माल हो उसका लौड़ा कभी थकेगा क्या"
बलदेव निचे बैठते हुए देवरानी क जांघो को पकड़ कर फैलता है और अपने तरफ खींच कर देवरानी क ायखो में देख
"माँ पेल दू आपको"
"हाँ पेल दो राजा"
और देवरानी आखे बंद कर लेती है
बलदेव अपना लौड़ा एक हाथ से छूट क मुहाने पे रखता है और एक धक्का मारता है
"पछहः "से पूरा लौड़ा एक बार में अंदर दाल देता है
"aaaaaaaaaaah रआआआज़ाअ"
इस बार देवरानी इतना ज़ोर से चिल्लाई थी क बगल क कक्षा में बंधे राजा राजपाल जो सो चूका था कुर्सी पर बैठा बैठा उसकी आखे खुल जाती है
राजपाल अपने हाथो को आगे पीछे रस्सी से आज़ाद होने की कोशिश करता है पर रस्सी टास से मास्स नहीं होती वो अपना सर झुकाये अपने आपको कोस रहा था
Rajpal:man me)Ye मेरी हे गलती का नतीजा है क आज में यहाँ बंधा हु और मेरी पत्नी क साथ मेरा बीटा सुहागरात मन रहा है
राजपाल को अपनी गलती का ाशस हो रहा था और उसका दुःख से भर गया था
फिर से देवरानी की एक चीख आती है
"आआआआह राजा"
"ये ले रानी मेरा लौड़ा"
घप्प से लौड़ा निकल कर दुबारा जड़ तक बलदेव पैंडेटा है
पुरे कक्षा में अब तेल में साणे छूट और लौड़े की आवाज़ "पाछह पाछह pachh"aarahi थी ऐसा लग रहा था क कोई बड़ी मछली पानी में डूबकी लगा रही है जैसे हे बलदेव का लौड़ा देवरानी क छूट में घुसता है
"माँ ये ले मेरा लौड़ा आह बहुत तरसी थी न तू लौड़े क लये"
"आह राजा ऐसे हे आह हां मेरे बरसो की प्राथना भगवन ने सुन ली और तुम मेरे पति बन गए ाआअह "
थोड़े देर ऐसे हे छोड़ने क बाद बलदेव देवरानी को झुका देता है और फिर लगातार धक्के मारने लगता है
"आह राजा आआह ऐसे कौन पेलता है आह ऐसे हे राजा आराम से ाः"
"रानी माँ तुम मेरी पत्नी हो अब में जितना भी पेलू जैसे भी पेलू तुमको पेलवाना पड़ेगा "
बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क गर्दन में हाथ लगता है
"बोल पेलवायेगी न जैसे में चहु वैसे"
"आह हां ाः है राजा आप मेरे पति हो आपकी हर बात मानूंगी"
ये सुनते हे बलदेव एक करदा धक्का मारता है
"aaaaaaaaaaaaah राजआआआ"
इस बार इतनी ज़ोर से चिल्लाती है देवरानी क उसकी आवाज़ रात क अँधेरे में पुरे महल में गूंज जाती है
"पछ पछ खछ क साथ चुडिओ और पायल की आवाज़ बलदेव सुन कर मज़े क समुन्दर में गोते लगा रहा था"
बलदेव अब खुद बैठ जाता है और देवरानी को अपने लौड़े पैर बैठा देता है
देवरानी अपना बड़ा गांड आगे पीछे करते हुए अपने बेटे का लैंड ले रही थी
बलदेव जैम कर हर आसान में देवरानी की छूट खोलता है पिछले दो घंटे में देवरानी क छूट की धज्जिया उदा देता है बलदेव और देवरानी कई बार झाड़ जाती है पर बलदेव एक बार भी नहीं झाड़ता है
"राजा जी आज झाड़ोगे क नहीं "
"माँ इतनी जल्दी क्या है इस बंजर ज़मीन को हरा भरा करना है क नहीं"
घप्प से फिर अपना लौड़ा पेल देता है
"आआह राजा करना है ाः आराम से"
बलदेव अपना हाथ उठा कर ज़ोर से थप्पड़ मारता है देवरानी क गांड पर जिस की आवाज़ पुरे कक्षा में गूँज रही थी
"ाः मार हे डालोगे बीटा"
बलदेव अब देवरानी को फिर से सीधा लिटा देता है और पहच पहच कर तेल से साणे हुए छूट जिसमे से अब देवरानी क छूट क पानी और बलदेव क वीर्य का मिश्रण बह रहा रहा दोनों टैंगो को उठा क घापा है चुदाई करने लगता है कुछ देर ऐसे हे भीषण चुदाई क बाद बलदेव क लौड़े से वीर्य निकलने वाला होता है और बलदेव देवरानी क भरी मम्मो को अपने हाथो में दबाये देवरानी क ऊपर पूरा लेट जाता है देवरानी आगे हाथ बढ़ा कर
"आ जा मेरा बच्चा"
"phachh"se पिचकारी छूट टी है और देवरानी क साथ साथ बलदेव भी ाअखे बंद कर लेता है
"ाः मा ाआअह मेरे लैंड को दबोच कर पानी निकल रही है तुम्हारी छूट आह"
"ाः बीटा ाः तर कर दे अपने पत्नी अपनी माँ का बुर अपने वीर्य से बरसो से सुखी थी हम्म"
दस मिंट तक दोनों एक दूसरे में समाये रहते है और देवरानी अपने छूट को सिकोड़ कर बलदेव क लौड़े क एक एक बून्द वीर्य को अपने अंदर महसूस करते हुए ले रही रही और बलदेव भी इतना ज़्यादा झाड़ा
"ाः माँ"
बलदेव देवरानी क ऊपर से हैट कर बगल में गिर जाता है और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगता है
देवरानी अपने छूट को देखती जिसका हाल देख उसे हैरानी होती है चुटी का छेड़ अब पहले से ज़्यादा बड़ा हो गया था और वो छेड़ खुला का खुला हो जिसे बलदेव क भरी लौड़े ने खोल कर रख दया था और छूट बेचारी दर क मरे बंद नहीं हो रही थी छूट से दोनों क प्रेम मिलान का मिश्रण वीर्य और छूट क दीवारे छिलने पर हल्का खून भी वीर्य क साथ छूट से होते हुए जांघो से होते हुए बिस्तर पर गिर रहे थे
"हे भगवन कितना पानी छोरा पूरा बिस्तर गिला हो रहा है"
"यह माँ अब ऐसी बंजर ज़मीन को ऐसे हे जोटा जाता है नहीं तो इसमें पौधे कैसे लगेंगे"
"राजा जी आपके हल ने मेरे ज़मीन को कुंवा बना दिया है"
Baldev:man me)Meri रानी तुम्हे पता हे नहीं क तुम्हारी हर चीख तुम्हारे नपुंसक पहले पति राजपाल सुन रहा है आज उसे पता चल रहा होगा क एक स्त्री को शारीरिक सुख देना क्या होता है
देवरानी बलदेव को देख
"राजा जी क्या सोच रहे हो में अछि तो लगी न"
बलदेव अपना हाथ बढ़ा कर देवरानी का सर अपने कंधे पैर लेते हुए
"अछि नहीं होती तो आज मेरी बाँहों में नहीं होती"
"राजा जी मेरे कहने का अर्थ ये था क मेरे शरीर को भोग कर सम्भोग कर कैसा लगा कही कोई कमी"
"हट पगली तुम्हे ज्ञात नहीं है क तुम्हारा ये मादक शरीर कितना मज़ा देता है और तेरे जैसी चुड़ककर माल मुझे कभी ढूंढ़ने से नहीं मिलती"
"ाचा इतना पसंद आई में"
बलदेव देवरानी को अपने ओरे खींच कर उसके भरी मम्मो को हाथ में ले कर
"मेरी रानी तेरे छूट में इतनी आग है और तेरा अंग अंग इतना मादक है क में तो चाहता हु मेरे हर जनम में तुम हे पत्नी बन"
"न बाबा न तुमने एक रात में मुझे अधमरा कर दिया सात जनम में नहीं चाहिए ऐसा पति"
बलदेव ये सुन कर मायूस हो जाता है
"ठीक है तो जाओ अगले जनम में किसी और छुड़वा लेना पर इस जनम में तो में जीवन भर अपने लौड़े पैर हे बिठाये रखूँगा"
देवरानी आगे बढ़ कर बलदेव क माथे को चुम कर
"अरे रे मेरा राजा गुस्सा हो गया पगलू में तो मज़ाक की अगर ऐसा होता तो में रात भर तुम्हारी निचे लेते तुम्हारे मुसल की मार न सेहती"
बलदेव देवरानी को अपने बहो में ले कर
"आह है माँ तो में भी तो मज़ाक हे कर रहा था मुझे पता है तुम सिर्फ मेरी दीवानी हु"
"हाँ देखो न दीवानी क योनि का क्या हाल क्या तूने और इस मुसल ने"
देवरानी देखती है बलदेव क लैंड को जो अब छोटा हो गया था
"कहा माँ देखो कितना प्यारा है आपका मुसल और छोटा भी"
बलदेव हस्ते हुए अपने सोये हुए लैंड पर इशारा करते हुए कहता है
"चुप करो अब जा कर ये शांत हुआ मेरी धज्जिया उदा कर आराम कर रहे है लिंग महाराज इसे तो में छोड़ूंगी नहीं"
"तो माँ रोका किसने है मत छोरो"
"बीटा इस मुसल ने मुझे थका दया और खुद सो रहा है"
"माँ तुम्हारे जैसी भरी भरकम को इतने घंटो से छोड़ रहा है थकना तो स्वाभाविक है"
देवरानी उठ कर बैठ जाती है
"इस से बदला लुंगी में मेरी योनि का हाल बेहाल कर दया इसे सोने नहीं दूंगी"
"माँ तो जगा दो इसको पर उसके बाद ये शेर उठ गया तो सोच लेना क्या होगा"
देवरानी उठ कर बैठ जाती है और सबसे पहले कपडा उठा कर अपने छूट को पोछती है फिर बलदेव क पैरो को बीच बैठ कर उसी कपडे से बलदेव क लौड़े को साफ़ करती है
"देखो कैसे भोला बना है जैसे कुछ किया हे न हो ये"
देवरानी बलदेव क लैंड को हाथ में ले लेती है और दूसरे हाथ से बलदेव क गोते को पकड़ लेती है
"आह माँ"
"क्यू दर्द हुआ मेरे राजा को"
"आह माँ आराम से पकड़ो"
देवरानी अपना हाथ का मुठी बना कर बलदेव क लौड़े क चमड़े को आगे पीछे करने लगती है और बलदेव अपने आखे बंद कए आहे भर रहा था
"आह माँ उसे मत सताओ नहीं तो उठ गया तो तुम्हारी खैर नहीं"
"देख लुंगी में भी कोई कच्ची खिलाडी नहीं"
देवरानी बलदेव क लैंड को दोनों हाथ से पकड़ कर मालिश कर रही थी फिर निचे झुक कर अपने दोनों बड़े पपीता को लैंड क ऊपर झुका कर मसलती है
"देखो मेरे दूध छूने पर हे इसका नस फूल रहा ह जैसे सांप हो दूध पीना है"
"माँ ये सांप तुम्हे इतना पलेगा क तुम्हारे इन बड़े पपीता में दूध भर जायेंगे"
"हट बड़ा आया सो रहा है लल्लू जैसा"
बलदेव ये सुनते हे देवरानी का सर पकड़ लेता है और अपना लौड़े क तरफ दबाता है
"ले मुँह में अभी बताता हु ये लल्लू क्या कर सकता है"
देवरानी का सर बलदेव दबाये रहता है जब तक देवरानी अपने होठ खोल कर लौड़ा अपने मुँह में नहीं ले लेती लौड़ा सिकुड़ क छोटे होने क कारन देवरानी क मुँह में पूरा समां जाता है
"चुसो इसे आह यह"
बलदेव अपने आखे बंद कर लेता है
देवरानी किसी आम को चूस रही हो ऐसे चूसते हुए बलदेव क लौड़े से हल्का वीर्य आ रहा था उसे पी रही थी
थोड़े देर ऐसे हे चूसने पर देवरानी क सांस फूलने लगते है और वो अपना मुँह उठती है और पक्क की ाआवाज़ से लौड़ा बहार आता है देवरानी क मुँह से वीर्य और थूक का मिश्रण टपक रहा था और वही लौड़े पे भी देवरानी क लगे थूक से लौड़े में थोड़ी अकड़न आगयी थी
"आह राजा इसे में पूरा मुँह में ले ली थी "
"माँ वो ये सोया है इसलिए तुमने ऐसा कर लिया नहीं तो खड़ा हो जाये तो तुम नहीं ले पाओगी"
"बीटा ये में पहली बार कर रही हु धीरे धीर सीख जाउंगी"
"सीख लो देवरानी क्यू क तेरे पति का लौड़ा तुझे पूरा मुँह में लेना है रोज़ समझी"
"जी महराज मेरे पति देव"
देवरानी निचे झुक कर एक हाथ में फिर लैंड पकड़ लेती है और एक हाथ से बलदेव क जांघ पर हाथ फेरते हुए अपने नाख़ून से रगड़ते हुए फिर से बलदेव को गरम करने लगती है बलदेव पीठ क बल लेते हुए
Baldev:man me)randi कहती है थक गयी हु पर अब भी इसका मन नहीं भरा फिर इसको ठुकाई करवानी है
"आह माँ "
"उठ जा मेरे शेर "
फिर से घप्प से अपने होठो क बीच बलदेव क लौड़े को अपने मुँह में भर्र लेती है फिर धीरे से अपने जीभ को लैंड क टोपे पर फिरने लगती है
"ाचा म्हणत कर रही हो देवरानी"
"अब ये तो पति धर्म है इस महराज ने भी तो मुझ पर कड़ी म्हणत की है"
कुछ देर ु हे चूसने चाटने क बाद देवरानी देखती है बलदेव का लौड़ा सर उठा रहा है देवरानी झट से अपना एक दूध बलदेव क लौड़े पर रगड़ने लगती है दूसरे हाथ से बलदेव का हाथ पकड़ कर अपने दूसरे दूध पर रख मुस्कुराती है
Baldev:man me)kaise मुस्कुरा रही है साली जैसे खज़ाना मिल गया हो अभी पेल कर इसकी प्यास बुझाता हु
बलदेव देवरानी क दूध को दबा रहा था और देवरानी फिर झुक कर अपना जीभ निकल कर बलदेव क लैंड को चाटने लगती है बलदेव अब फिर से गरम हो जाता है और उसका लैंड अब धीरे धीरे पूरा अकड़ने लगता है देखते हे देखते लौड़ा फिर पुरे 9 इंच का हो जाता है
"बीटा ये कुछ ज़्यादा मोटा लग रहा है पहले से"
"मेरी जान अब ये कुंवारा नहीं रहा तेरे छूट क पानी ने इसे फुला दया "
"चल हट"
बलदेव देवरानी का सर पकड़ कर अपने लौड़े पर धक्का मारता है और इस बार लौड़ा देवरानी क हलक तक जाता है
"ाः ले रानी मेरा पूरा लैंड अपने मुँह में"
"आह गलप्प ुहममम."
"क्या हुआ देवरानी बहुत शेरनी बन रही थी अब लो पूरा मुँह में"
ये कह कर बलदेव झट से उठ ता है और देवरानी को पटक कर उसके ऊपर चढ़ जाता है
"क्यू मेरी रानी की प्यास नहीं बुझी"
"सच कहु तो सुकून मिला है पर बरसो की प्यास अब भी नाह बुझी"
"में बुझाऊंगा तेरी प्यास मेरी रानी माँ"
और देवरानी क ऊपर पूरा लेट जाता है और अपना लौड़ा छूट पर रगने लगता है और अपने दोनों हाथो में बड़े मम्मो को पकड़ कर दबोच देवरानी क होठो को चूसने लगता है
गलपपपप गलप्प गलप्सलूरप्प हम्म गलप्प
गलप्प्प गलप्प्प गलप्प
थोड़े देर ऐसे हे चूसने क बाद बलदेव पीछे की ओरे हैट कर देवरानी क दोनों टैंगो को फैलता है और देवनी क छूट में अपने दो ऊँगली दाल देता है
"आह राजा"
बलदेव अपने ऊँगली अंदर बहार कर रहा था और देवरानी सिसकी ले रही थी कुछ देर ु हे ऊँगली पेले से देवरानी की छूट फिर पानी छोड़ने लगती है
"माँ तू तो फिर से गीली हो गयी"
"अब बेटे को फिर से पेलना है तो माँ को तो गीला होना हे पड़ेगा "
"साली बड़ी चुड़ककर है तू"
ये कहते हुए देवरानी क छूट को अपने लौड़े क सामने लगता है और फिर देवरानी की ोर्रे झुकते हुए देवरानी क छूट पर लौड़ा हस्ते हुए अपने एक हाथ से छूट क मुहाने पर अपना मोटा सोपारा रख एक धक्का मारता "है
"आह राजा"
बलदेव अब दोनों हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी क छूट में अपना टोपा फसाये ऊपर की ओरे चढ़ता है और इस बार "surrrr"se चिकनाहट क साथ छूट में पूरा लौड़ा घुस जाता है
देवरानी अपने आँख बंद कर लेती है
"क्या हुआ माँ इस बार चिल्लाई नहीं"
"आह राजा तूने पूरा एक बरी में घुसा दया दर्द इतना हो रहा क्या बताऊ"
बलदेव अब लैंड पीछे खींचता है और इसबार एक ज़ोरदार धक्का मारता है
"ाआअह राजा आराम से"
"यह माँ तेरी छूट कितनी कासी है आह"
फिर है से खींच कर लौड़ा पेल देता है और देवरानी चीख मारती है
कुछ धीरे धक्के मारने क बाद बलदेव
"घपपप घपपपप घपपप "
ज़ोर दर धक्को की बारिश कर देता है देवरानी कराह उठ टी है पर बलदेव बिना कोई चिंता कए हुए देवरानी को पेले जा रहा था कुछ देर बाद पेलते हुए बलदेव देवरानी को अपने बाहो में लिए पलट जाता है और खुद पीठ क बल आजाता है और देवरानी को ऊपर ले लेता है देवरानी समझते हुए बलदेव क जांघो पर हाथ रख बलदेव क लौड़े पे बैठ जाती है और ऊपर निचे हो कर अपने बेटे क लैंड को ज़द तक अपने छूट में समेत रही थी
"ाः मा ऐसे कूदो अपने बेटे क लैंड पे आह माँ तुम सच में रति से काम नहीं आह ऐस हे और ज़ोर से"
"आह राजा बीटा मुझे ऐसा लग रहा है जैसे में किसी छुरी को अपने योनि के ले रही ये तुम्हारा मुसल मेरे बचे दानी को चीयर रहा है आआह राजा ऐसे हे पेलो"
कुछ देर ऐसे हे छोड़ने पर देवरानी थक जाती है और बलदेव को समझते देर नहीं लगती वो उठता है और देवरानी को अपने बहो में भर कर पलंग से निचे ले आता है और देवरानी क एक पेअर को कुर्सी पर रखता है और दूसरा पेअर ज़मीन पर था एक पेअर
कुर्सी पर रखने से पीछे से देवरानी की छूट खुल जाती है बलदेव खड़े खड़े अपना बड़ा लौड़ा देवरानी क छूट में पीछे से दाल देता है और आगे से देवरानी क दूध को अपने हाथो में भर खेलने लगता है
"घप्प घपपप घपपप घपपप"
पछ पछ की आवाज़ चुडिओ और पायलो की छानकर से फिर गूंज उठ टी है
"आह माँ ऐसे खड़े खड़े छोड़ने में तुमको मज़ा है"
"मुझे भी ाचा लग रहा है जी"
"माँ जब भी में तुमको देखता था पहले डिल करता था ऐसे हे खड़े खड़े पीछे से पेल दू आह आज ऐसे पेल कर सपना पूरा हो गया"
"आह राजा में भी सपने में नहीं सोची थी क में कभी सम्भोग का मज़ा ले पाउंगी और मान बैठी थी जीवन भर जलती रहूंगी अपने शरीर आह क गर्मी से और मर जाउंगी"
"ाः माँ मेरे रहते हुए मेरी पत्नी मेरी प्यारी प्यासी रहे ऐसा में होने नहीं दूंगा"
बलदेव अपना गांड पीछे केर क ज़ोरदार धक्का मारता है
"आआह ाआअह बीटा तेरी पत्नी क साथ माँ भी हु तेरी आआह आराम से कर ाः हे भगवन ाः कुछ तो दया कर"
घप्प घपपप पछ पांच बलदेह देवरानी क गले में हाथ डाले पेलते रहता है और देवरानी चिल्लाती रहती है
.तभी बलदेव क कान में कुछ सुनाई पड़ता है
"ाःराजए आह ऐसे हे ाः माँ ाः
"स
बलदेव झटका देना धीरे करते हुए
"देवरानी चुप रहना किसी की आवाज़ आई"
देवरानी अपना मुँह बंद करती है और बबलदेव धीरे धीरे से पांच पांच कर क छोड़ रहा था अपने माँ को
देवरानी भी ध्यान लगा कर सुनती है
"कूऊह कुह"
देवरानी मुस्कुरा क
"बीटा ये कोयल की आवाज़ है ."
"हाँ माँ तुम सही कह रही हो"
"राजा जी एक बात आप भूल गए "
"क्या बात मेरी रानी जी"
"सुबह हो गयी है घडी की ओरे देखो 6 बज गए है"
बलदेव मुस्कुराता है और देवरानी को अपने गॉड में उठा कर फिर बिस्तर पर ले अत है
"मेरी पत्नी मेरी रानी शायद आप भूल गई क आज दुपहर आज आपका पति आपका बीटा आपकी ठुकाई करेगा ऐसा राजमहल में सबको सुचना दे कर आया है"
ये सुनते हे देवरानी शर्मा कर बलदेव क सीने में अपना मुँह छुपा लेती है और अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी जिसे देख कर बलदेव भी मुस्कुरा देता है
तो बे कॉन्टिनोएड
सुहागरात 1 बजे
देवरानी बलदेव को लिटा देती है और अपने हाथ में तेल ले कर बलदेव क लौड़े को अपने हाथ में ले कर ऊपर निचे कर लौड़े की मालिश करने लगती है
"ाः माँ ुआह"
"कितना बड़ा है ये तेल लगने पर तो और भयानक लग रहा है"
"माँ ये सिर्फ आपके लिए है यह"
देवरानी अपने दोनों हाथो से बलदेव क 9 इंच लम्बे और 3 इंच मोठे लौड़े को सरसों क तेल से मालिश कर रही थी और अपने नए पति क लौड़े को देख उसे अंदर हे अंदर गर्व हो रहा था
"में कितनी धनि हु राजा क मुझे इतना मज़बूत हथियार वाला पति मिला"
"माँ ये हथियार हे है जो आपके छूट की आग बुझा सकता है"
इतना सुनते हे देवरानी लैंड छोर सीधा लेट जाती है
"आजा न फिर आग बुझा दे मेरी राजा
बलदेव उठ ता है और उसका लौड़ा तेल में सना हुआ इठला रहा था जिसे लगातार एक तक लगाए देवरानी देख रही थी
"ये कभी थकता है क नहीं बीटा "
"अब जिसकी माँ तेरे जैसी माल हो उसका लौड़ा कभी थकेगा क्या"
बलदेव निचे बैठते हुए देवरानी क जांघो को पकड़ कर फैलता है और अपने तरफ खींच कर देवरानी क ायखो में देख
"माँ पेल दू आपको"
"हाँ पेल दो राजा"
और देवरानी आखे बंद कर लेती है
बलदेव अपना लौड़ा एक हाथ से छूट क मुहाने पे रखता है और एक धक्का मारता है
"पछहः "से पूरा लौड़ा एक बार में अंदर दाल देता है
"aaaaaaaaaaah रआआआज़ाअ"
इस बार देवरानी इतना ज़ोर से चिल्लाई थी क बगल क कक्षा में बंधे राजा राजपाल जो सो चूका था कुर्सी पर बैठा बैठा उसकी आखे खुल जाती है
राजपाल अपने हाथो को आगे पीछे रस्सी से आज़ाद होने की कोशिश करता है पर रस्सी टास से मास्स नहीं होती वो अपना सर झुकाये अपने आपको कोस रहा था
Rajpal:man me)Ye मेरी हे गलती का नतीजा है क आज में यहाँ बंधा हु और मेरी पत्नी क साथ मेरा बीटा सुहागरात मन रहा है
राजपाल को अपनी गलती का ाशस हो रहा था और उसका दुःख से भर गया था
फिर से देवरानी की एक चीख आती है
"आआआआह राजा"
"ये ले रानी मेरा लौड़ा"
घप्प से लौड़ा निकल कर दुबारा जड़ तक बलदेव पैंडेटा है
पुरे कक्षा में अब तेल में साणे छूट और लौड़े की आवाज़ "पाछह पाछह pachh"aarahi थी ऐसा लग रहा था क कोई बड़ी मछली पानी में डूबकी लगा रही है जैसे हे बलदेव का लौड़ा देवरानी क छूट में घुसता है
"माँ ये ले मेरा लौड़ा आह बहुत तरसी थी न तू लौड़े क लये"
"आह राजा ऐसे हे आह हां मेरे बरसो की प्राथना भगवन ने सुन ली और तुम मेरे पति बन गए ाआअह "
थोड़े देर ऐसे हे छोड़ने क बाद बलदेव देवरानी को झुका देता है और फिर लगातार धक्के मारने लगता है
"आह राजा आआह ऐसे कौन पेलता है आह ऐसे हे राजा आराम से ाः"
"रानी माँ तुम मेरी पत्नी हो अब में जितना भी पेलू जैसे भी पेलू तुमको पेलवाना पड़ेगा "
बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क गर्दन में हाथ लगता है
"बोल पेलवायेगी न जैसे में चहु वैसे"
"आह हां ाः है राजा आप मेरे पति हो आपकी हर बात मानूंगी"
ये सुनते हे बलदेव एक करदा धक्का मारता है
"aaaaaaaaaaaaah राजआआआ"
इस बार इतनी ज़ोर से चिल्लाती है देवरानी क उसकी आवाज़ रात क अँधेरे में पुरे महल में गूंज जाती है
"पछ पछ खछ क साथ चुडिओ और पायल की आवाज़ बलदेव सुन कर मज़े क समुन्दर में गोते लगा रहा था"
बलदेव अब खुद बैठ जाता है और देवरानी को अपने लौड़े पैर बैठा देता है
देवरानी अपना बड़ा गांड आगे पीछे करते हुए अपने बेटे का लैंड ले रही थी
बलदेव जैम कर हर आसान में देवरानी की छूट खोलता है पिछले दो घंटे में देवरानी क छूट की धज्जिया उदा देता है बलदेव और देवरानी कई बार झाड़ जाती है पर बलदेव एक बार भी नहीं झाड़ता है
"राजा जी आज झाड़ोगे क नहीं "
"माँ इतनी जल्दी क्या है इस बंजर ज़मीन को हरा भरा करना है क नहीं"
घप्प से फिर अपना लौड़ा पेल देता है
"आआह राजा करना है ाः आराम से"
बलदेव अपना हाथ उठा कर ज़ोर से थप्पड़ मारता है देवरानी क गांड पर जिस की आवाज़ पुरे कक्षा में गूँज रही थी
"ाः मार हे डालोगे बीटा"
बलदेव अब देवरानी को फिर से सीधा लिटा देता है और पहच पहच कर तेल से साणे हुए छूट जिसमे से अब देवरानी क छूट क पानी और बलदेव क वीर्य का मिश्रण बह रहा रहा दोनों टैंगो को उठा क घापा है चुदाई करने लगता है कुछ देर ऐसे हे भीषण चुदाई क बाद बलदेव क लौड़े से वीर्य निकलने वाला होता है और बलदेव देवरानी क भरी मम्मो को अपने हाथो में दबाये देवरानी क ऊपर पूरा लेट जाता है देवरानी आगे हाथ बढ़ा कर
"आ जा मेरा बच्चा"
"phachh"se पिचकारी छूट टी है और देवरानी क साथ साथ बलदेव भी ाअखे बंद कर लेता है
"ाः मा ाआअह मेरे लैंड को दबोच कर पानी निकल रही है तुम्हारी छूट आह"
"ाः बीटा ाः तर कर दे अपने पत्नी अपनी माँ का बुर अपने वीर्य से बरसो से सुखी थी हम्म"
दस मिंट तक दोनों एक दूसरे में समाये रहते है और देवरानी अपने छूट को सिकोड़ कर बलदेव क लौड़े क एक एक बून्द वीर्य को अपने अंदर महसूस करते हुए ले रही रही और बलदेव भी इतना ज़्यादा झाड़ा
"ाः माँ"
बलदेव देवरानी क ऊपर से हैट कर बगल में गिर जाता है और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगता है
देवरानी अपने छूट को देखती जिसका हाल देख उसे हैरानी होती है चुटी का छेड़ अब पहले से ज़्यादा बड़ा हो गया था और वो छेड़ खुला का खुला हो जिसे बलदेव क भरी लौड़े ने खोल कर रख दया था और छूट बेचारी दर क मरे बंद नहीं हो रही थी छूट से दोनों क प्रेम मिलान का मिश्रण वीर्य और छूट क दीवारे छिलने पर हल्का खून भी वीर्य क साथ छूट से होते हुए जांघो से होते हुए बिस्तर पर गिर रहे थे
"हे भगवन कितना पानी छोरा पूरा बिस्तर गिला हो रहा है"
"यह माँ अब ऐसी बंजर ज़मीन को ऐसे हे जोटा जाता है नहीं तो इसमें पौधे कैसे लगेंगे"
"राजा जी आपके हल ने मेरे ज़मीन को कुंवा बना दिया है"
Baldev:man me)Meri रानी तुम्हे पता हे नहीं क तुम्हारी हर चीख तुम्हारे नपुंसक पहले पति राजपाल सुन रहा है आज उसे पता चल रहा होगा क एक स्त्री को शारीरिक सुख देना क्या होता है
देवरानी बलदेव को देख
"राजा जी क्या सोच रहे हो में अछि तो लगी न"
बलदेव अपना हाथ बढ़ा कर देवरानी का सर अपने कंधे पैर लेते हुए
"अछि नहीं होती तो आज मेरी बाँहों में नहीं होती"
"राजा जी मेरे कहने का अर्थ ये था क मेरे शरीर को भोग कर सम्भोग कर कैसा लगा कही कोई कमी"
"हट पगली तुम्हे ज्ञात नहीं है क तुम्हारा ये मादक शरीर कितना मज़ा देता है और तेरे जैसी चुड़ककर माल मुझे कभी ढूंढ़ने से नहीं मिलती"
"ाचा इतना पसंद आई में"
बलदेव देवरानी को अपने ओरे खींच कर उसके भरी मम्मो को हाथ में ले कर
"मेरी रानी तेरे छूट में इतनी आग है और तेरा अंग अंग इतना मादक है क में तो चाहता हु मेरे हर जनम में तुम हे पत्नी बन"
"न बाबा न तुमने एक रात में मुझे अधमरा कर दिया सात जनम में नहीं चाहिए ऐसा पति"
बलदेव ये सुन कर मायूस हो जाता है
"ठीक है तो जाओ अगले जनम में किसी और छुड़वा लेना पर इस जनम में तो में जीवन भर अपने लौड़े पैर हे बिठाये रखूँगा"
देवरानी आगे बढ़ कर बलदेव क माथे को चुम कर
"अरे रे मेरा राजा गुस्सा हो गया पगलू में तो मज़ाक की अगर ऐसा होता तो में रात भर तुम्हारी निचे लेते तुम्हारे मुसल की मार न सेहती"
बलदेव देवरानी को अपने बहो में ले कर
"आह है माँ तो में भी तो मज़ाक हे कर रहा था मुझे पता है तुम सिर्फ मेरी दीवानी हु"
"हाँ देखो न दीवानी क योनि का क्या हाल क्या तूने और इस मुसल ने"
देवरानी देखती है बलदेव क लैंड को जो अब छोटा हो गया था
"कहा माँ देखो कितना प्यारा है आपका मुसल और छोटा भी"
बलदेव हस्ते हुए अपने सोये हुए लैंड पर इशारा करते हुए कहता है
"चुप करो अब जा कर ये शांत हुआ मेरी धज्जिया उदा कर आराम कर रहे है लिंग महाराज इसे तो में छोड़ूंगी नहीं"
"तो माँ रोका किसने है मत छोरो"
"बीटा इस मुसल ने मुझे थका दया और खुद सो रहा है"
"माँ तुम्हारे जैसी भरी भरकम को इतने घंटो से छोड़ रहा है थकना तो स्वाभाविक है"
देवरानी उठ कर बैठ जाती है
"इस से बदला लुंगी में मेरी योनि का हाल बेहाल कर दया इसे सोने नहीं दूंगी"
"माँ तो जगा दो इसको पर उसके बाद ये शेर उठ गया तो सोच लेना क्या होगा"
देवरानी उठ कर बैठ जाती है और सबसे पहले कपडा उठा कर अपने छूट को पोछती है फिर बलदेव क पैरो को बीच बैठ कर उसी कपडे से बलदेव क लौड़े को साफ़ करती है
"देखो कैसे भोला बना है जैसे कुछ किया हे न हो ये"
देवरानी बलदेव क लैंड को हाथ में ले लेती है और दूसरे हाथ से बलदेव क गोते को पकड़ लेती है
"आह माँ"
"क्यू दर्द हुआ मेरे राजा को"
"आह माँ आराम से पकड़ो"
देवरानी अपना हाथ का मुठी बना कर बलदेव क लौड़े क चमड़े को आगे पीछे करने लगती है और बलदेव अपने आखे बंद कए आहे भर रहा था
"आह माँ उसे मत सताओ नहीं तो उठ गया तो तुम्हारी खैर नहीं"
"देख लुंगी में भी कोई कच्ची खिलाडी नहीं"
देवरानी बलदेव क लैंड को दोनों हाथ से पकड़ कर मालिश कर रही थी फिर निचे झुक कर अपने दोनों बड़े पपीता को लैंड क ऊपर झुका कर मसलती है
"देखो मेरे दूध छूने पर हे इसका नस फूल रहा ह जैसे सांप हो दूध पीना है"
"माँ ये सांप तुम्हे इतना पलेगा क तुम्हारे इन बड़े पपीता में दूध भर जायेंगे"
"हट बड़ा आया सो रहा है लल्लू जैसा"
बलदेव ये सुनते हे देवरानी का सर पकड़ लेता है और अपना लौड़े क तरफ दबाता है
"ले मुँह में अभी बताता हु ये लल्लू क्या कर सकता है"
देवरानी का सर बलदेव दबाये रहता है जब तक देवरानी अपने होठ खोल कर लौड़ा अपने मुँह में नहीं ले लेती लौड़ा सिकुड़ क छोटे होने क कारन देवरानी क मुँह में पूरा समां जाता है
"चुसो इसे आह यह"
बलदेव अपने आखे बंद कर लेता है
देवरानी किसी आम को चूस रही हो ऐसे चूसते हुए बलदेव क लौड़े से हल्का वीर्य आ रहा था उसे पी रही थी
थोड़े देर ऐसे हे चूसने पर देवरानी क सांस फूलने लगते है और वो अपना मुँह उठती है और पक्क की ाआवाज़ से लौड़ा बहार आता है देवरानी क मुँह से वीर्य और थूक का मिश्रण टपक रहा था और वही लौड़े पे भी देवरानी क लगे थूक से लौड़े में थोड़ी अकड़न आगयी थी
"आह राजा इसे में पूरा मुँह में ले ली थी "
"माँ वो ये सोया है इसलिए तुमने ऐसा कर लिया नहीं तो खड़ा हो जाये तो तुम नहीं ले पाओगी"
"बीटा ये में पहली बार कर रही हु धीरे धीर सीख जाउंगी"
"सीख लो देवरानी क्यू क तेरे पति का लौड़ा तुझे पूरा मुँह में लेना है रोज़ समझी"
"जी महराज मेरे पति देव"
देवरानी निचे झुक कर एक हाथ में फिर लैंड पकड़ लेती है और एक हाथ से बलदेव क जांघ पर हाथ फेरते हुए अपने नाख़ून से रगड़ते हुए फिर से बलदेव को गरम करने लगती है बलदेव पीठ क बल लेते हुए
Baldev:man me)randi कहती है थक गयी हु पर अब भी इसका मन नहीं भरा फिर इसको ठुकाई करवानी है
"आह माँ "
"उठ जा मेरे शेर "
फिर से घप्प से अपने होठो क बीच बलदेव क लौड़े को अपने मुँह में भर्र लेती है फिर धीरे से अपने जीभ को लैंड क टोपे पर फिरने लगती है
"ाचा म्हणत कर रही हो देवरानी"
"अब ये तो पति धर्म है इस महराज ने भी तो मुझ पर कड़ी म्हणत की है"
कुछ देर ु हे चूसने चाटने क बाद देवरानी देखती है बलदेव का लौड़ा सर उठा रहा है देवरानी झट से अपना एक दूध बलदेव क लौड़े पर रगड़ने लगती है दूसरे हाथ से बलदेव का हाथ पकड़ कर अपने दूसरे दूध पर रख मुस्कुराती है
Baldev:man me)kaise मुस्कुरा रही है साली जैसे खज़ाना मिल गया हो अभी पेल कर इसकी प्यास बुझाता हु
बलदेव देवरानी क दूध को दबा रहा था और देवरानी फिर झुक कर अपना जीभ निकल कर बलदेव क लैंड को चाटने लगती है बलदेव अब फिर से गरम हो जाता है और उसका लैंड अब धीरे धीरे पूरा अकड़ने लगता है देखते हे देखते लौड़ा फिर पुरे 9 इंच का हो जाता है
"बीटा ये कुछ ज़्यादा मोटा लग रहा है पहले से"
"मेरी जान अब ये कुंवारा नहीं रहा तेरे छूट क पानी ने इसे फुला दया "
"चल हट"
बलदेव देवरानी का सर पकड़ कर अपने लौड़े पर धक्का मारता है और इस बार लौड़ा देवरानी क हलक तक जाता है
"ाः ले रानी मेरा पूरा लैंड अपने मुँह में"
"आह गलप्प ुहममम."
"क्या हुआ देवरानी बहुत शेरनी बन रही थी अब लो पूरा मुँह में"
ये कह कर बलदेव झट से उठ ता है और देवरानी को पटक कर उसके ऊपर चढ़ जाता है
"क्यू मेरी रानी की प्यास नहीं बुझी"
"सच कहु तो सुकून मिला है पर बरसो की प्यास अब भी नाह बुझी"
"में बुझाऊंगा तेरी प्यास मेरी रानी माँ"
और देवरानी क ऊपर पूरा लेट जाता है और अपना लौड़ा छूट पर रगने लगता है और अपने दोनों हाथो में बड़े मम्मो को पकड़ कर दबोच देवरानी क होठो को चूसने लगता है
गलपपपप गलप्प गलप्सलूरप्प हम्म गलप्प
गलप्प्प गलप्प्प गलप्प
थोड़े देर ऐसे हे चूसने क बाद बलदेव पीछे की ओरे हैट कर देवरानी क दोनों टैंगो को फैलता है और देवनी क छूट में अपने दो ऊँगली दाल देता है
"आह राजा"
बलदेव अपने ऊँगली अंदर बहार कर रहा था और देवरानी सिसकी ले रही थी कुछ देर ु हे ऊँगली पेले से देवरानी की छूट फिर पानी छोड़ने लगती है
"माँ तू तो फिर से गीली हो गयी"
"अब बेटे को फिर से पेलना है तो माँ को तो गीला होना हे पड़ेगा "
"साली बड़ी चुड़ककर है तू"
ये कहते हुए देवरानी क छूट को अपने लौड़े क सामने लगता है और फिर देवरानी की ोर्रे झुकते हुए देवरानी क छूट पर लौड़ा हस्ते हुए अपने एक हाथ से छूट क मुहाने पर अपना मोटा सोपारा रख एक धक्का मारता "है
"आह राजा"
बलदेव अब दोनों हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी क छूट में अपना टोपा फसाये ऊपर की ओरे चढ़ता है और इस बार "surrrr"se चिकनाहट क साथ छूट में पूरा लौड़ा घुस जाता है
देवरानी अपने आँख बंद कर लेती है
"क्या हुआ माँ इस बार चिल्लाई नहीं"
"आह राजा तूने पूरा एक बरी में घुसा दया दर्द इतना हो रहा क्या बताऊ"
बलदेव अब लैंड पीछे खींचता है और इसबार एक ज़ोरदार धक्का मारता है
"ाआअह राजा आराम से"
"यह माँ तेरी छूट कितनी कासी है आह"
फिर है से खींच कर लौड़ा पेल देता है और देवरानी चीख मारती है
कुछ धीरे धक्के मारने क बाद बलदेव
"घपपप घपपपप घपपप "
ज़ोर दर धक्को की बारिश कर देता है देवरानी कराह उठ टी है पर बलदेव बिना कोई चिंता कए हुए देवरानी को पेले जा रहा था कुछ देर बाद पेलते हुए बलदेव देवरानी को अपने बाहो में लिए पलट जाता है और खुद पीठ क बल आजाता है और देवरानी को ऊपर ले लेता है देवरानी समझते हुए बलदेव क जांघो पर हाथ रख बलदेव क लौड़े पे बैठ जाती है और ऊपर निचे हो कर अपने बेटे क लैंड को ज़द तक अपने छूट में समेत रही थी
"ाः मा ऐसे कूदो अपने बेटे क लैंड पे आह माँ तुम सच में रति से काम नहीं आह ऐस हे और ज़ोर से"
"आह राजा बीटा मुझे ऐसा लग रहा है जैसे में किसी छुरी को अपने योनि के ले रही ये तुम्हारा मुसल मेरे बचे दानी को चीयर रहा है आआह राजा ऐसे हे पेलो"
कुछ देर ऐसे हे छोड़ने पर देवरानी थक जाती है और बलदेव को समझते देर नहीं लगती वो उठता है और देवरानी को अपने बहो में भर कर पलंग से निचे ले आता है और देवरानी क एक पेअर को कुर्सी पर रखता है और दूसरा पेअर ज़मीन पर था एक पेअर
कुर्सी पर रखने से पीछे से देवरानी की छूट खुल जाती है बलदेव खड़े खड़े अपना बड़ा लौड़ा देवरानी क छूट में पीछे से दाल देता है और आगे से देवरानी क दूध को अपने हाथो में भर खेलने लगता है
"घप्प घपपप घपपप घपपप"
पछ पछ की आवाज़ चुडिओ और पायलो की छानकर से फिर गूंज उठ टी है
"आह माँ ऐसे खड़े खड़े छोड़ने में तुमको मज़ा है"
"मुझे भी ाचा लग रहा है जी"
"माँ जब भी में तुमको देखता था पहले डिल करता था ऐसे हे खड़े खड़े पीछे से पेल दू आह आज ऐसे पेल कर सपना पूरा हो गया"
"आह राजा में भी सपने में नहीं सोची थी क में कभी सम्भोग का मज़ा ले पाउंगी और मान बैठी थी जीवन भर जलती रहूंगी अपने शरीर आह क गर्मी से और मर जाउंगी"
"ाः माँ मेरे रहते हुए मेरी पत्नी मेरी प्यारी प्यासी रहे ऐसा में होने नहीं दूंगा"
बलदेव अपना गांड पीछे केर क ज़ोरदार धक्का मारता है
"आआह ाआअह बीटा तेरी पत्नी क साथ माँ भी हु तेरी आआह आराम से कर ाः हे भगवन ाः कुछ तो दया कर"
घप्प घपपप पछ पांच बलदेह देवरानी क गले में हाथ डाले पेलते रहता है और देवरानी चिल्लाती रहती है
.तभी बलदेव क कान में कुछ सुनाई पड़ता है
"ाःराजए आह ऐसे हे ाः माँ ाः
"स
बलदेव झटका देना धीरे करते हुए
"देवरानी चुप रहना किसी की आवाज़ आई"
देवरानी अपना मुँह बंद करती है और बबलदेव धीरे धीरे से पांच पांच कर क छोड़ रहा था अपने माँ को
देवरानी भी ध्यान लगा कर सुनती है
"कूऊह कुह"
देवरानी मुस्कुरा क
"बीटा ये कोयल की आवाज़ है ."
"हाँ माँ तुम सही कह रही हो"
"राजा जी एक बात आप भूल गए "
"क्या बात मेरी रानी जी"
"सुबह हो गयी है घडी की ओरे देखो 6 बज गए है"
बलदेव मुस्कुराता है और देवरानी को अपने गॉड में उठा कर फिर बिस्तर पर ले अत है
"मेरी पत्नी मेरी रानी शायद आप भूल गई क आज दुपहर आज आपका पति आपका बीटा आपकी ठुकाई करेगा ऐसा राजमहल में सबको सुचना दे कर आया है"
ये सुनते हे देवरानी शर्मा कर बलदेव क सीने में अपना मुँह छुपा लेती है और अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी जिसे देख कर बलदेव भी मुस्कुरा देता है
तो बे कॉन्टिनोएड