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गहतराष्ट्रा
रात क अँधेरे में कोई देवरानी क कक्षा में घुसता है और उसके कक्षा की पड़ताल शुरू करता है और हर एक कोने की जांच करता है ये कोई और नहीं महारानी षुरूश्ती थी जो रात क अँधेरे में देवरानी क कक्षा में thi.kuch पुस्तकों पर ध्यान जाता है जिसे खोल कर षुरूश्ती देखती है तो वो कामसूत्र की पुष्तक निकलती है
Shurushti:man me)Oh तो देवरानी इतना आगे निकल गयी अपने बेटे से रंगरलिया ये पढ़ क मानती है
षुरूश्ती पुष्तक को रखती है तभी उसमे से एक कागज़ निचे गिरती है जिसे षुरूश्ती उठा कर पढ़ती है और षुरूश्ती क पेअर कंपनी लगते है
षुरूश्ती मन में" हे भगवन प्रेम पत्र वो भी माँ बेटे का अब मज़ा आएगा बास देवरानी और बलदेव वापस आजाये अब मेरे वार से बच नहीं पाओगे हहहहह अब क्या करोगी देवरानी जब में ये पत्र महाराज को दे दूंगी हाहाहाहा"
षुरूश्ती धीरे धीरे हर प्रेम पत्र जो देवरानी क पास थे बलदेव क उसको अपने पास रख लेती है और फिर बलदेव क कक्षा में जा कर भी तलाशी कर देवरानी क लिखे हुए पत्र ढूंढ कर अपने कक्षा में आकर छुपा कर रख देती है
"देवरानी और बलदेव ये सब तुम दोनों क मृत्यु का कारन है देवरानी को में कभी इस राज्य की महारानी नहीं बन ने दूंगी"
षुरूश्ती अपने ख्वाबो को सजाये अपने कक्षा क बिस्तर पर लेट कर सो जाती है
गहतराष्ट्रा की सुबह बहुत हे शोर गुल से शुरुवात होती है जहा गहतराष्ट्रा क लोग हाहाकार मचा रहे थे
महाराजा राजपाल अपने कक्षा से निकलते है
Rajpal:Ye क्या शोर है
राजपाल चलते हुए महल से बहार निकलते है
चूँकि महल क अंदर सिर्फ काम वाली नौकरानी का छोर बिना काम क सैनिक को जाना वर्जित है
Rajpal:senapati ये क्या है
Somnath:maharaj आपके मित्र कुबेरी क महाराज आ रहे है
Rajpal:kya राजा रतन सिंह आरहे है
Somnath:ji महाराज
Rajpal:jao अंदर महल में और कह दो क वो महल में हे रुकनी अतिथि गृह में नहीं वो हमारे परिवार क अंग है उनके लये हर पकवान बनाया जाये
Somnath:jo आज्ञा महाराज
सोमनाथ महल क अंदर आकर घर क देश को ढूंढ हे रहा था क उसे सामने से महारानी षुरूश्ती चलते हुए आती दिखती है
सोमनाथ महारानी षुरूश्ती क मोठे लटक ते वक्ष और उसके गहरे नाभि को घूर रहा था महारानी षुरूश्ती सोमनाथ क पास आकर
Shurushti:somnath तुम होश में तो हो
Somnath:q महारानी मैंने क्या पाप कर दिया
Shurushti:tum अंदर कैसे आये
सोमनाथ से रहा नहीं जाता है और वो षुरूश्ती को अपने बहो में भर पास क कक्षा में घुस जाता है
"छोरो कमीने दुष्ट सेनापति"
"ओह महारानी जब मेरा लौड़ा तुम्हारे छूट में घुस सकता है तो क्या में महल में भी नहीं आसक्त"
सोमनाथ षुरूश्ती क दोनों हाथो को अपने हाथो में थम दीवार पर षुरूश्ती को चिपका देता है और षुरूश्ती क गले पैर चूमता है
"उम्मंहहआ"
"छोरो मुझे सेनापति"
सोमनाथ अब षुरूश्ती क होठ को अपने होठ में ले लेता है और चूसने लगता है षुरूश्ती अपने होठ ज़ोर से दबाये हुई थी और मुँह खोलने का नाम नहीं ले रही थी
सेनापति अब षुरूश्ती क कमर क चारो और बहो में कास क अपना खड़ा लैंड महारानी षुरूश्ती क छूट पर रगड़ते हुए चुम रहा था
"छोरो सेनापति कोई देख लेगा तो तुम्हे पता नहीं आज क दिन हे जान देनी पड़ेगी तुमको"
"महारानी तुम्हारे ये मादक शरीर क लये इस पल हे में मर्डर जाऊ "
सोमनाथ अब अपने एक हाथ से षुरूश्ती डूब को दबाने लगता है और दूसरे हाथ से उसके गांड को
"महारानी तुम इस घागरा चोली में बहुत सुन्दर लगती है"
"ाः उठ नहीं बस्स्स जाने भी दो"
सोमनाथ एक बार फिर षुरूश्ती क होठो पर टूट पड़ता है और एक गहरा चुम्बन ले कर छोरता है
"ठीक है महारानी जैसी आपकी आज्ञा जाने दया"
"कमीने तुम मुझे इस तरह उपयोग करोगे मैंने सोचा नहीं था"
सोमनाथ मुस्कुराता हुआ वह से आकर महल क देश को समझा कर चला जाता है
कुछ देर बाद सभा लगाई जाती है और राजा रतन भी समय पर पहुंच जाते है सबके स्वागत क बाद राजा रतन सिंह को महाराज राजपाल अपने घर या महल में हे रुकने को कहते है
पारस
पारस में सुबह हमेशा की तरह होती है चहल पहल से पूरा पारस बाजार भरा था जहा पूरी दुन्या क वयापारी अपने व्यापर क लये आते थे और पुरे दुन्या क राजा अपने मज़े क लये
पारस क सुल्तान मेरे वाहिद महल में आराम कर रहे थे तभी वह पर एक सिपाही आकर शिकायत करता है
"गुस्ताखी मुआफ सुल्तान पर कल रात शमशेर फिर से कोठे पे गए थे और"
"अब हमने उसे कई मरतबाह कहा क तुम्हारी शादी कर देते है पर वो है क मंटा नहीं अब हम क्या करे हम भी किसी ज़माने में शमशेर जैसे हे थे"
ये बात सुन कर सिपाही खामोश हो जाता है
इधर बद्री और श्याम उठ कर जाने की तैयारी कर रहे थे बलदेव की आँख खुलती है और भी तैयार होने लगता है
कुछ देर में सब खाने एक साथ बैठ ते है देवरानी बलदेव की ओरे देख भी नहीं रही थी जिसे सब महसूस कर रहे थे
Devraj:to बचो कब निकलोगे गहतराष्ट्रा क लये
Sultan:Han बहिन हिन्द देखने की ख्वाइश मुझे भी है पर जा नहीं पता
Devrani:kabhi पधारे हमारे राज्य सुल्तान हमे भी अतिथि की मान सम्मान क लये जाना जाता है
Sultan:beshaq
Badri:hamari पूरी तैयारी हो गयी है हम निकालेंगे दुपहर तक
सब खा कर उठ कर चले जाते है
और वह पर देवरानी और भूरिया थी और बलदेव बैठा भूरिया क जाने का इंतज़ार कर रहा था पर वो नहीं जाती हार कर
Baldev:maa
देवरानी अनसुना कर देती है
Baldev:maa क्या हुआ बताओ तो मेरी गलती क्या है
Devrani:deedi इसे कह दीजिये मुझसे बात न करे
Hooriya
evrani कब तक गुस्सा करोगी
Devrani:mujhe ऐसे चरित्रहीन व्यक्ति से कोई बात नहीं करनी
ये सुन कर बलदेव वह से उठ कर चला जाता है ये सोच कर अगर माँ कुछ और बोल दी तो भूरिया क सामने इनके प्रेम का भन्दा फुट जायेगा
बलदेव बहार अत है और उदास हो कर बैठ जाता है पास में अपने घोड़ो को चारा दे रहे उन्हें तैयार कर रहे बद्री की नज़र बलदेव पर पड़ती है और उसे ु दुखी देख कर
उसके पास जाता है
Badri:mitra तुम उदास क्यू हो
Baldev:sab तुम लोगो की किया दिया है
Badri:kya बक रहे हो
Baldev:han कल में तुम लोग क साथ वह गया और नशे में धुत हो कर आया माँ मुझपे गुस्सा है बात नहीं कर रही
Badri
ehli बात इसमें हमारा क्या दोष और दूसरी बात तुम दोनों प्रेमी प्रेमिका क बेच क्या है में नहीं बता सकता तुम मन लो
Baldev
ar बात ऐसी है क वो समझ रही है क चरित्रहीन हु और मैंने उसे धोका दया रात में रेशमा क साथ रात गुज़ारा
Badri
h तो ये बात है अब भाबी भी तुम्हे किसी और क साथ नहीं देख सकती पर उनको कैसे पता क हम रेशमा क कोठे पे गए थे
Baldev:ab मुझे पता नहीं पर कुछ करो मुझे तो समझ नहीं आता कैसे समझौ माँ को क्यू क अगर में ये कहु भी क तुम सब ने मज़े कए मैंने नहीं तो मानेगी नहीं वो
Badri:me कुछ करता हु जाओ तुम वापस चलने की तैयारी करो
बद्री कुछ सोचता हुआ अपने काम में लग जाता है
थोड़ी देर बाद देवरानी क कक्षा क पास खड़ा हो कर
"मौसी में बद्री "
"हाँ आजाओ बीटा"
"बलदेव कहा है"
"वो बहार हे होगा क्यू"
"वो ऐसे हे ..तो आप तैयार हो न वापस गहतराष्ट्रा जाने"
"हाँ बीटा बद्री"
"मौसी आप बुरा न मने तो आप उदास हो"
"नहीं तो उदास क्यू रहूंगी भला "
"बात ऐसी है क बलदेव ने कहा आप उसपर गुस्सा हो कल रात की बात ले कर"
देवरानी ये सुन कर गुस्सा हो जाती है
"बद्री जब तुमने बात निकल हे दया है तो क्या जो तुम लोग ने रात क्या रेशमा क वह जा कर वो ठीक था?"
"नहीं मौसी गलत था"
"और तुम लोग कैसे मित्र हो शमशेर नहीं जनता तुम दोनों तो ऐसी गन्दी जगह जाने से रोक सकते थे बलदेव को ?"
"हाँ पर"
"बद्री तुम दोनों को तो पता है हम एक दूजे को कितना प्रेम करते है और मेरा प्रेमी किसी और स्त्री क साथ की मुझे तो सोच क घिन्न आरही है"
"मौसी आप को हम बचपन से अपनी माँ सा समझते है आप को में जो में बोलूंगा सत्य हे कहूंगा"
"अब कहने को बचा क्या बद्री"
"देवरानी मौसी में अपनी माँ की कसम खा कर कहता हु हम रेशमा क कोठे पर ज़रूर गए थे पर बलदेव ने किसी भी स्त्री को छुआ भी नहीं"
देवरानी चौकते हुए
"क्या ये कैसे "
"हाँ मौसी शमशेर में और श्याम बहक गए परन्तु बलदेव पूरी रात पीटा रहा पर आपके दर से किसी को हाथ तक नहीं लगाया इतने नशे में भी वो आपका नाम हे ले रहा था"
ये कह कर अपने किये पर शर्मिंदा सा होते हुए अपना सर झुका कर खड़ा होजाता है
देवरानी ये सुन कर खुश हो जाती है
"बीटा जवानी में फिसल हे जाते है लोग तुम्हे सर झुकाने की आवश्यकता नहीं और धन्यवाद् बीटा मेरे मन की शंका दूर कर दया मेरा बलदेव कभी मुझे धोका नहीं दे सकता"
ये कह कर मुस्कुराती है
"धन्यवाद मौसी हमे समझने क लये और आज क बाद में भी कभी न जाऊंगा क्षमा कर दे"
"ठीक है बद्री जाओ अब तैयारी करो"
बद्री दरवाज़े क पास जाता है और मुद क
"वैसे भाबी बलदेव को अब भेज दू"
देवरानी एक बार तो गुस्साती है फिर मुस्कुरा क
"ठीक है देवर जी"
ये कह कर अपना सर निचे झुका लेती है
देखते देखते दुपहर हो जाती है
देवरानी देखती है बलदेव सामान ले जाने क लये कक्षा में आता है
देवरानी :बलदेव
बलदेव का जैसे अपने माँ क मुँह से अपना नाम सुन्ना था वो माँ की ओरे पलट ता है
देवरानी अपने हाथ में दूध का गिलास लये कड़ी थी
Devrani:ye लीजिये आप कल रत दूध नहीं पी पाए
बलदेव देवरानी से दूध ले कर पी लेता है
Baldev:maa मुझे क्षमा कर दे
देवरानी झट से बलदेव क गले लग जाती है
"मेरे राजा मुझे तुम पैर शक नहीं करना चाहिए था मुझे बद्री ने सब बता दया मेरे राजा"
बलदेव देवरानी को अपने बाहो में भरे कर
"मेरी रानी में जान दे देना पसंद करूँगा पर किसी गैर महिला को नज़र उठा क देखूंगा नहीं मेरी पहला प्रेम हो तुम देवरानी"
दोनों कुछ देर बैठ बात करते है फिर अपना सामान बहार ला कर घोड़ो पर लाड देते है
देवरानी सब से मिलती है
Hooriya:ary जाने की ख़ुशी में गुस्सा भूल गयी क्या उनको मुआफ कर दया
Devrani:nahi दीदी उन्होंने गलती नहीं की कुछ ये पता चल गया
दोनों मुस्कुराते है
Hooriya:dubara आना देवरानी तुमसे मिल कर ऐसा लगा जैसे हम सदीओ से जानते हो
Devrani:deedi हो आप मेरी इसलिए आपको एक बात कहु बुरा मत मन न
Hooriya:bolo मेरी बहिन
Devrani:mujhe नहीं लगता दीदी क आप खुश है देखिये आज में बलदेव क वजह से कितना खुश हु और बलदेव मुझे कितना चाहता है मुझे लगता है आप भी इतना खुश रह सकते hai..agar
Hooriya:agar क्या बहिन
Devrani:mujhe लगता है शमशेर भी बलदेव की तरह खुश रख सकता है..
Hooriya:Tauba..jate वक़्त ऐसी baat..mujhe जहन्नमी नहीं होना है बहिन ..और में खुश हु आप अपने ज़िन्दगी को जीयो पर हमारे मज़हब में..
Devrani:bass बास मल्लिका इ जहाँ भूरिया जी एक बार आपके साथ पूरी दुन्या घूमने की ीचा है
Hooriya:q नहीं देवरानी बास अगर ये फ़िज़ूल की बाते छोर दो तो तुम्हारा डिल सोने का है और ज़रूर हम कुछ करेंगे तुम्हारी इस ख्वाइश क लये आधी दुन्या पे तुम हमारी हे हुकूमत है
देवरानी भूरिया क पेअर छू कर बहार आती है
Hooriya:salamat रहो मेरी बची
देवरानी देवराज क पेअर छूती है
Devraj:me आऊंगा मेरी बहिन तुम से अब मिलते रहूँगा
बद्री :आये आप लोग भी हिन्द
Sultan:aap सब को कही भी रस्ते में कोई परेशानी पेश आये हमे यद् कर ले या कह दे सुल्तान मेरे वाहिद क मेहमान है
Baldev:zarur सुल्तान
Sultan:alvida बचो
Baldev:namaskar
सब से मिल कर बद्री श्याम और देवरानी घोड़े पर पेअर जाते है
Shamshera:apna ख्याल रखना खला और बलदेव तुम भी
बद्री और shyam:tum भी शमशेर हम मिलते रहेंगे
Shamshera:zarur दोस्तों
Shamshera:alvida
बलदेव सबसे पहले घोड़े को दौड़ता है उसके पीछे उसके पीछे श्याम और उसके पीछे बद्री दौड़ने लगते है
महल क सामने सुल्तान क साथ सब खड़े उन्हें दूर तक जाते हुए देख रहे थे..
तो बे कॉन्टिनोएड...
गहतराष्ट्रा
रात क अँधेरे में कोई देवरानी क कक्षा में घुसता है और उसके कक्षा की पड़ताल शुरू करता है और हर एक कोने की जांच करता है ये कोई और नहीं महारानी षुरूश्ती थी जो रात क अँधेरे में देवरानी क कक्षा में thi.kuch पुस्तकों पर ध्यान जाता है जिसे खोल कर षुरूश्ती देखती है तो वो कामसूत्र की पुष्तक निकलती है
Shurushti:man me)Oh तो देवरानी इतना आगे निकल गयी अपने बेटे से रंगरलिया ये पढ़ क मानती है
षुरूश्ती पुष्तक को रखती है तभी उसमे से एक कागज़ निचे गिरती है जिसे षुरूश्ती उठा कर पढ़ती है और षुरूश्ती क पेअर कंपनी लगते है
षुरूश्ती मन में" हे भगवन प्रेम पत्र वो भी माँ बेटे का अब मज़ा आएगा बास देवरानी और बलदेव वापस आजाये अब मेरे वार से बच नहीं पाओगे हहहहह अब क्या करोगी देवरानी जब में ये पत्र महाराज को दे दूंगी हाहाहाहा"
षुरूश्ती धीरे धीरे हर प्रेम पत्र जो देवरानी क पास थे बलदेव क उसको अपने पास रख लेती है और फिर बलदेव क कक्षा में जा कर भी तलाशी कर देवरानी क लिखे हुए पत्र ढूंढ कर अपने कक्षा में आकर छुपा कर रख देती है
"देवरानी और बलदेव ये सब तुम दोनों क मृत्यु का कारन है देवरानी को में कभी इस राज्य की महारानी नहीं बन ने दूंगी"
षुरूश्ती अपने ख्वाबो को सजाये अपने कक्षा क बिस्तर पर लेट कर सो जाती है
गहतराष्ट्रा की सुबह बहुत हे शोर गुल से शुरुवात होती है जहा गहतराष्ट्रा क लोग हाहाकार मचा रहे थे
महाराजा राजपाल अपने कक्षा से निकलते है
Rajpal:Ye क्या शोर है
राजपाल चलते हुए महल से बहार निकलते है
चूँकि महल क अंदर सिर्फ काम वाली नौकरानी का छोर बिना काम क सैनिक को जाना वर्जित है
Rajpal:senapati ये क्या है
Somnath:maharaj आपके मित्र कुबेरी क महाराज आ रहे है
Rajpal:kya राजा रतन सिंह आरहे है
Somnath:ji महाराज
Rajpal:jao अंदर महल में और कह दो क वो महल में हे रुकनी अतिथि गृह में नहीं वो हमारे परिवार क अंग है उनके लये हर पकवान बनाया जाये
Somnath:jo आज्ञा महाराज
सोमनाथ महल क अंदर आकर घर क देश को ढूंढ हे रहा था क उसे सामने से महारानी षुरूश्ती चलते हुए आती दिखती है
सोमनाथ महारानी षुरूश्ती क मोठे लटक ते वक्ष और उसके गहरे नाभि को घूर रहा था महारानी षुरूश्ती सोमनाथ क पास आकर
Shurushti:somnath तुम होश में तो हो
Somnath:q महारानी मैंने क्या पाप कर दिया
Shurushti:tum अंदर कैसे आये
सोमनाथ से रहा नहीं जाता है और वो षुरूश्ती को अपने बहो में भर पास क कक्षा में घुस जाता है
"छोरो कमीने दुष्ट सेनापति"
"ओह महारानी जब मेरा लौड़ा तुम्हारे छूट में घुस सकता है तो क्या में महल में भी नहीं आसक्त"
सोमनाथ षुरूश्ती क दोनों हाथो को अपने हाथो में थम दीवार पर षुरूश्ती को चिपका देता है और षुरूश्ती क गले पैर चूमता है
"उम्मंहहआ"
"छोरो मुझे सेनापति"
सोमनाथ अब षुरूश्ती क होठ को अपने होठ में ले लेता है और चूसने लगता है षुरूश्ती अपने होठ ज़ोर से दबाये हुई थी और मुँह खोलने का नाम नहीं ले रही थी
सेनापति अब षुरूश्ती क कमर क चारो और बहो में कास क अपना खड़ा लैंड महारानी षुरूश्ती क छूट पर रगड़ते हुए चुम रहा था
"छोरो सेनापति कोई देख लेगा तो तुम्हे पता नहीं आज क दिन हे जान देनी पड़ेगी तुमको"
"महारानी तुम्हारे ये मादक शरीर क लये इस पल हे में मर्डर जाऊ "
सोमनाथ अब अपने एक हाथ से षुरूश्ती डूब को दबाने लगता है और दूसरे हाथ से उसके गांड को
"महारानी तुम इस घागरा चोली में बहुत सुन्दर लगती है"
"ाः उठ नहीं बस्स्स जाने भी दो"
सोमनाथ एक बार फिर षुरूश्ती क होठो पर टूट पड़ता है और एक गहरा चुम्बन ले कर छोरता है
"ठीक है महारानी जैसी आपकी आज्ञा जाने दया"
"कमीने तुम मुझे इस तरह उपयोग करोगे मैंने सोचा नहीं था"
सोमनाथ मुस्कुराता हुआ वह से आकर महल क देश को समझा कर चला जाता है
कुछ देर बाद सभा लगाई जाती है और राजा रतन भी समय पर पहुंच जाते है सबके स्वागत क बाद राजा रतन सिंह को महाराज राजपाल अपने घर या महल में हे रुकने को कहते है
पारस
पारस में सुबह हमेशा की तरह होती है चहल पहल से पूरा पारस बाजार भरा था जहा पूरी दुन्या क वयापारी अपने व्यापर क लये आते थे और पुरे दुन्या क राजा अपने मज़े क लये
पारस क सुल्तान मेरे वाहिद महल में आराम कर रहे थे तभी वह पर एक सिपाही आकर शिकायत करता है
"गुस्ताखी मुआफ सुल्तान पर कल रात शमशेर फिर से कोठे पे गए थे और"
"अब हमने उसे कई मरतबाह कहा क तुम्हारी शादी कर देते है पर वो है क मंटा नहीं अब हम क्या करे हम भी किसी ज़माने में शमशेर जैसे हे थे"
ये बात सुन कर सिपाही खामोश हो जाता है
इधर बद्री और श्याम उठ कर जाने की तैयारी कर रहे थे बलदेव की आँख खुलती है और भी तैयार होने लगता है
कुछ देर में सब खाने एक साथ बैठ ते है देवरानी बलदेव की ओरे देख भी नहीं रही थी जिसे सब महसूस कर रहे थे
Devraj:to बचो कब निकलोगे गहतराष्ट्रा क लये
Sultan:Han बहिन हिन्द देखने की ख्वाइश मुझे भी है पर जा नहीं पता
Devrani:kabhi पधारे हमारे राज्य सुल्तान हमे भी अतिथि की मान सम्मान क लये जाना जाता है
Sultan:beshaq
Badri:hamari पूरी तैयारी हो गयी है हम निकालेंगे दुपहर तक
सब खा कर उठ कर चले जाते है
और वह पर देवरानी और भूरिया थी और बलदेव बैठा भूरिया क जाने का इंतज़ार कर रहा था पर वो नहीं जाती हार कर
Baldev:maa
देवरानी अनसुना कर देती है
Baldev:maa क्या हुआ बताओ तो मेरी गलती क्या है
Devrani:deedi इसे कह दीजिये मुझसे बात न करे
Hooriya
Devrani:mujhe ऐसे चरित्रहीन व्यक्ति से कोई बात नहीं करनी
ये सुन कर बलदेव वह से उठ कर चला जाता है ये सोच कर अगर माँ कुछ और बोल दी तो भूरिया क सामने इनके प्रेम का भन्दा फुट जायेगा
बलदेव बहार अत है और उदास हो कर बैठ जाता है पास में अपने घोड़ो को चारा दे रहे उन्हें तैयार कर रहे बद्री की नज़र बलदेव पर पड़ती है और उसे ु दुखी देख कर
उसके पास जाता है
Badri:mitra तुम उदास क्यू हो
Baldev:sab तुम लोगो की किया दिया है
Badri:kya बक रहे हो
Baldev:han कल में तुम लोग क साथ वह गया और नशे में धुत हो कर आया माँ मुझपे गुस्सा है बात नहीं कर रही
Badri
Baldev
Badri
Baldev:ab मुझे पता नहीं पर कुछ करो मुझे तो समझ नहीं आता कैसे समझौ माँ को क्यू क अगर में ये कहु भी क तुम सब ने मज़े कए मैंने नहीं तो मानेगी नहीं वो
Badri:me कुछ करता हु जाओ तुम वापस चलने की तैयारी करो
बद्री कुछ सोचता हुआ अपने काम में लग जाता है
थोड़ी देर बाद देवरानी क कक्षा क पास खड़ा हो कर
"मौसी में बद्री "
"हाँ आजाओ बीटा"
"बलदेव कहा है"
"वो बहार हे होगा क्यू"
"वो ऐसे हे ..तो आप तैयार हो न वापस गहतराष्ट्रा जाने"
"हाँ बीटा बद्री"
"मौसी आप बुरा न मने तो आप उदास हो"
"नहीं तो उदास क्यू रहूंगी भला "
"बात ऐसी है क बलदेव ने कहा आप उसपर गुस्सा हो कल रात की बात ले कर"
देवरानी ये सुन कर गुस्सा हो जाती है
"बद्री जब तुमने बात निकल हे दया है तो क्या जो तुम लोग ने रात क्या रेशमा क वह जा कर वो ठीक था?"
"नहीं मौसी गलत था"
"और तुम लोग कैसे मित्र हो शमशेर नहीं जनता तुम दोनों तो ऐसी गन्दी जगह जाने से रोक सकते थे बलदेव को ?"
"हाँ पर"
"बद्री तुम दोनों को तो पता है हम एक दूजे को कितना प्रेम करते है और मेरा प्रेमी किसी और स्त्री क साथ की मुझे तो सोच क घिन्न आरही है"
"मौसी आप को हम बचपन से अपनी माँ सा समझते है आप को में जो में बोलूंगा सत्य हे कहूंगा"
"अब कहने को बचा क्या बद्री"
"देवरानी मौसी में अपनी माँ की कसम खा कर कहता हु हम रेशमा क कोठे पर ज़रूर गए थे पर बलदेव ने किसी भी स्त्री को छुआ भी नहीं"
देवरानी चौकते हुए
"क्या ये कैसे "
"हाँ मौसी शमशेर में और श्याम बहक गए परन्तु बलदेव पूरी रात पीटा रहा पर आपके दर से किसी को हाथ तक नहीं लगाया इतने नशे में भी वो आपका नाम हे ले रहा था"
ये कह कर अपने किये पर शर्मिंदा सा होते हुए अपना सर झुका कर खड़ा होजाता है
देवरानी ये सुन कर खुश हो जाती है
"बीटा जवानी में फिसल हे जाते है लोग तुम्हे सर झुकाने की आवश्यकता नहीं और धन्यवाद् बीटा मेरे मन की शंका दूर कर दया मेरा बलदेव कभी मुझे धोका नहीं दे सकता"
ये कह कर मुस्कुराती है
"धन्यवाद मौसी हमे समझने क लये और आज क बाद में भी कभी न जाऊंगा क्षमा कर दे"
"ठीक है बद्री जाओ अब तैयारी करो"
बद्री दरवाज़े क पास जाता है और मुद क
"वैसे भाबी बलदेव को अब भेज दू"
देवरानी एक बार तो गुस्साती है फिर मुस्कुरा क
"ठीक है देवर जी"
ये कह कर अपना सर निचे झुका लेती है
देखते देखते दुपहर हो जाती है
देवरानी देखती है बलदेव सामान ले जाने क लये कक्षा में आता है
देवरानी :बलदेव
बलदेव का जैसे अपने माँ क मुँह से अपना नाम सुन्ना था वो माँ की ओरे पलट ता है
देवरानी अपने हाथ में दूध का गिलास लये कड़ी थी
Devrani:ye लीजिये आप कल रत दूध नहीं पी पाए
बलदेव देवरानी से दूध ले कर पी लेता है
Baldev:maa मुझे क्षमा कर दे
देवरानी झट से बलदेव क गले लग जाती है
"मेरे राजा मुझे तुम पैर शक नहीं करना चाहिए था मुझे बद्री ने सब बता दया मेरे राजा"
बलदेव देवरानी को अपने बाहो में भरे कर
"मेरी रानी में जान दे देना पसंद करूँगा पर किसी गैर महिला को नज़र उठा क देखूंगा नहीं मेरी पहला प्रेम हो तुम देवरानी"
दोनों कुछ देर बैठ बात करते है फिर अपना सामान बहार ला कर घोड़ो पर लाड देते है
देवरानी सब से मिलती है
Hooriya:ary जाने की ख़ुशी में गुस्सा भूल गयी क्या उनको मुआफ कर दया
Devrani:nahi दीदी उन्होंने गलती नहीं की कुछ ये पता चल गया
दोनों मुस्कुराते है
Hooriya:dubara आना देवरानी तुमसे मिल कर ऐसा लगा जैसे हम सदीओ से जानते हो
Devrani:deedi हो आप मेरी इसलिए आपको एक बात कहु बुरा मत मन न
Hooriya:bolo मेरी बहिन
Devrani:mujhe नहीं लगता दीदी क आप खुश है देखिये आज में बलदेव क वजह से कितना खुश हु और बलदेव मुझे कितना चाहता है मुझे लगता है आप भी इतना खुश रह सकते hai..agar
Hooriya:agar क्या बहिन
Devrani:mujhe लगता है शमशेर भी बलदेव की तरह खुश रख सकता है..
Hooriya:Tauba..jate वक़्त ऐसी baat..mujhe जहन्नमी नहीं होना है बहिन ..और में खुश हु आप अपने ज़िन्दगी को जीयो पर हमारे मज़हब में..
Devrani:bass बास मल्लिका इ जहाँ भूरिया जी एक बार आपके साथ पूरी दुन्या घूमने की ीचा है
Hooriya:q नहीं देवरानी बास अगर ये फ़िज़ूल की बाते छोर दो तो तुम्हारा डिल सोने का है और ज़रूर हम कुछ करेंगे तुम्हारी इस ख्वाइश क लये आधी दुन्या पे तुम हमारी हे हुकूमत है
देवरानी भूरिया क पेअर छू कर बहार आती है
Hooriya:salamat रहो मेरी बची
देवरानी देवराज क पेअर छूती है
Devraj:me आऊंगा मेरी बहिन तुम से अब मिलते रहूँगा
बद्री :आये आप लोग भी हिन्द
Sultan:aap सब को कही भी रस्ते में कोई परेशानी पेश आये हमे यद् कर ले या कह दे सुल्तान मेरे वाहिद क मेहमान है
Baldev:zarur सुल्तान
Sultan:alvida बचो
Baldev:namaskar
सब से मिल कर बद्री श्याम और देवरानी घोड़े पर पेअर जाते है
Shamshera:apna ख्याल रखना खला और बलदेव तुम भी
बद्री और shyam:tum भी शमशेर हम मिलते रहेंगे
Shamshera:zarur दोस्तों
Shamshera:alvida
बलदेव सबसे पहले घोड़े को दौड़ता है उसके पीछे उसके पीछे श्याम और उसके पीछे बद्री दौड़ने लगते है
महल क सामने सुल्तान क साथ सब खड़े उन्हें दूर तक जाते हुए देख रहे थे..
तो बे कॉन्टिनोएड...