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गहतराष्ट्रा
देवरानी स्नान करती है और अपने वस्त्र निकल कर देखते हुए सोचने लगती है क क्या पहने पर कुछ सोचते हुए मुस्कुराती है और वस्त्र अंदर रख कर संदूक बंद कर देती है ,खिड़की से आरही लाल रंग की सूर्य की किरणे से अंदाज़ा लग जाता है महारानी देवरानी को क अब महाराज बलदेव सिंह महल वापस आजायेंगे और ये सोच कर क महल आकर बलदेव उसे छोड़ेंगे देवरानी क होठो पर मुस्कान फ़ैल जाती है क्यू क आअज का दिन वो कितना खुल कर अपने बेटे क प्रतीक्षा कर रही थी परन्तु वो एक दिन था जब देवरानी किसी पुरुष से अवैध सम्बन्ध बनाने की कमला की बात से चिढ जाती थी परन्तु आज देवरानी बेजिझक अपने बेटे का राह देख रही थी क वो कब आये और उसके शरीर की आएग बुझाये आज दुपहर में जाम कर गांड मरवाई थी पर छूट की चिंगारी को बलदेव ने हवा दे कर चला गया था
देवरानी वही कड़ी अपने राज्य गहतराष्ट्रा को देखते हुए सूर्य को देख सोचने लगती है
devrani:man me)Mera जीवन इतना बदल जाएगा सोची नहीं थी ,कभी सिंहासन पर बैठने क लये तरसती थी जब लोग षुरूश्ती को महारानी कहते और मुझे केवल रानी कहते तो मेरे शरीर में लगता मानव कोई सुई चुभा दिया आज वही षुरूश्ती मुझे महारानी देवरानी कह कर सम्बोधित करती है और मैं उसे रानी कह कर समय चक्र ऐसा घुमा क जिस पति प्रेम क लये जीवन भर तरसी वो भी प्राप्त हो गया और बलदेव जी क रूप में एक शक्तिशाली और पागल प्रेमी पति मिला जो मुझे अपने प्राण से अधिक प्रेम करते hai,Ye भगवन की हे तो कृपा है क इस दुखिया क आंसू पॉच कर जीवन स्वर्ग बना dya..Haay कितना भोला और सज्जन पुरुष है मेरे पति बलदेव ,मेरी बात मानने क लये एक पेअर पे खड़े रहते hai,mai जितनी आभारी बलदेव की हु उतना हे गहतराष्ट्रा क प्रजा का जिसने मेरे ख़ुशी क लये मेरा और बलदेव जी जो मेरे बेटे भी है उनका विवाह को मान्यता दे di..haay बलदेव जी आपका नाम लेते हे शरीर में शुशुरी सी होने लगती है ाः इस होली आपके संग पहली होली होगी पति क रूप में..
देवरानी अपने दोनों टांगो से अपने छूट को दबाया पलंग पर लेट जाती है तकिया पकड़ कर
"है बलदेव महाराज कब आएंगे आप मेरी योनि रास छोर रही है आपके लिंग महाराज की यद् में आह हाय आपका लौड़ा कितना कठोर और बलशाली है आह है"
देवरानी बिस्तर पर अलाट पलट कर अपने बेटे बलदेव को याद कर रही थी ऐसे हे अँधेरा छ जाता है और गहतराष्ट्रा दियो से जगमाने लगता है और दिया अपने प्रकाश से गहतराष्ट्रा क अँधेरा को छटने की असफल कोशिश कर रहा tha,Baldev सिंह घोड़े पर बैठ महल क दुवार पर आते है तो सैनिक महाराज की जय जय कर करते है बलदेव अपने घोड़े को धीमे करते हुए महल की ओरे आगे बढ़ता है और महल क पहले हे अतिथि गृह क पास उसे आग तापते हुए वैध जी मिल जाते है बलदेव मुस्कुराते हुए निचे उतरता है
Baldev:sainiko मेरे घोड़े को ले जाओ
वैध जी बलदेव को देख खड़ा हो जाता है और अपने हाथ जोड़ कर परनाम करते हुए
"महाराज बलदेव सिंह जी सब कुशल तो है ?"
Baldev:Vaidh जी हम ठीक hai..Ye क्या आप आग तप रहे है
Vaidh:kshama महाराज अब वन में रहता था तो आदत है आग तपने की
Baldev:Aapko सरदी अधिक लग रही है प्रतीत होता है
vaidh:maharaj अब वृद्धा अव्वस्था मई सर्दी तो लगेगी हे वैसे आपको तो नहीं लग रही है न ?
Baldev:Nahi..Mai समझा नहीं
बलदेव वैध क चेहरे को देख रहा था जो इशारे से पूछना छह रहा था
vaidh:Maharaj यदि सर्दी लगे तो बास कह दिजीयाग आपको ऐसी औषधि देंगे क..
बलदेव वैध की बात सुन कर समझ जाता है क वो किस औसधि की बात कर रहा है
Baldev:Vaidh जी अब तक तो आपका दिया हुआ जड़ी बूटी कार्य कर रहा है
vaidh:Maharaj मैंने आपको शक्ति बूटी दिया है जिससे पुरुष की शक्ति एक घोड़े की तरह बढ़ जाती है और आप तो पहले हे घोड़े से शक्ति रखते थे आप पर तो और अधिक असरदार होगा
baldev:Vaidh जी.. हम संतुष्ट है अपने वैवाहिक जीवन से
vaidh:Ji महाराज वो तो महारानी देवरानी की हसी सुन कर हे लगता है क वो कितना खुश है
बलदेव ये सुन कर हल्का गुस्सा सा होते हुए क कैसे वैध कह दिया क वो चुदाई से खुश है फिर सोचता है
baldev:hasi सुन कर?
baldev:Vaidh जी आप क्या कह रहे है हसी सुन कर कैसे ?
Vaidh:maharaj ..महारानी तो घूँघट कए रहती है किसी पुरुष क सामने कहा अपना चेहरा खोलती है तो महल में जाना होता है तो केवल हसी सुन पता हु जिस से मई अनुमान लगा लिया क वो खुश hai..kshama कीजिये महाराज आपको बुरा लगा तो
baldev:nahi nahi..vaidh जी
vaidh:maharaj आप भाग्यशाली है जो इतनी पतिव्रता पत्नी मिली है आपको महारानी देवरानी गहतराष्ट्रवासिओ में बहुत काम समय में अपना पैठ बना उनका आदर सम्मान हर कोई करता है क्या बचा क्या बूढ़ा
Baldev:Theek है ठीक है मई थक गया हु विश्राम कीजिये आप
vaidh:Jo आज्ञा महाराज
वैध हाथ जोड़े खड़ा होता है महाराज बलदेव मुस्कुराते हुए जाने लगते है और वैध फिर से अपने आग क पास बैठ कर फूकते हुए
Vaidh:ab हम यहाँ बैठे आग सुलगा रहे है महाराज को अंदर आग सुलगी हुई मिलेगी आप का तो महारानी क गद्दे पर हे विश्राम होगा
वैध जी ये कहते हुए आगे पीछे देखते है क कही कोई सुन तो नहीं लिया फिर किसी को न पाकर फिर से अपने हाथ को आगे बढ़ाये आग तापने लगते है
महाराज बलदेव चहल कदमी करते हुए महल क पीछे बने राज घाट पर जाते है और स्नान करते है और वस्त्र बदल कर अपने तलवार को अपने मियां में खींच कर रखते हुए
"ाः आअज बहुत थक्क गए ये राज पात संभालना राज्य की सीमा की देख रेख करना सिपाहीओं को अभ्यास करवाना इतना आसान nahi..maharaj होना किसी राज्य का इतना सरल कार्य nahi..jata हु महारानी देवरानी भी राह देख रही होगी अभी एक और कर्त्तव्य है मेरा देवरानी को पति प्रेम देने का"
ये सोचते हुए महाराज बलदेव अपने मुख्या महल की ओरे जाते है दरवाज़े पैर दो सैनिक खड़े थे मुख्या महल क अंदर आते हे षुरूश्ती की नज़र पड़ती है
shurushti:Maharaj आज इतनी देरी से
Baldev:Ji बड़ी माँ
shurushti:aapka भोजन लगवा दू बीटा
baldev:nahi बड़ी माँ ऊपर भेज दीजिये मई थका हु
shurushti:Han ऊपर मैंने भेज दी थी वो महारानी भी ऊपर हे है दुपहर से अपने कक्षा में वो उनके कमर में दर्द था
बलदेव का दिमाग तेज़ी से सोचता है क वो दुपहर में तो ताब्यात से देवरानी की गांड मरी थी इसलिए वो नहीं आई निचे बलदेव क आँख बड़े हो जाते है जिसे षुरूश्ती समझ जाती है और मुस्कुराते हुए अपने बेटे
Shurushti:Beta...Bahu से थोड़ा प्रेम से हे कही भागी थोड़ी जा रही है..
षुरूश्ती ये कह कर कुटिल मुस्कान देती है जिसे देख बलदेव शर्मा जाता है
baldev:Ji बड़ी माँ अवश्य मई ध्यान रखूँगा
shurushti:theek है जाओ बीटा बहु प्रतीक्षा कर रही होगी
बलदेव ये सुनते हे तेज़ी से अपने कदम सीडीओ की ओरे बढ़ा देता है और चलते हुए ऊपर जाने लगता है
Shurushti:man me)Kitna बेचैन रहता है अपने माँ को छोड़ने क लये बलदेव ,देवरानी ने सच में अपने सूझ बुझ से सब प् लिया
तभी षुरूश्ती को राजा राज पल की आवाज़ सुनाई देती है
"जी आए महाराज"
Shurushti:man me)Rajpal हे वो पुरुष है जो अपने पत्नी को अपने बेटे को सौंप कर भी एक हे महल में रह रहा है किसी और पुरुष से नहीं होता ये ..अब गलती भी क्या है उसने
बलदेव सीडीओ से चढ़ते हुए ऊपर पहुँचता है और अपने माँ से मिलने क लये सीधा अपने कक्षा की तरफ जाता है और आवाज़ लगता है
"महारानी देवरानी ाजी दरवाज़ा खोलिये"
महारानी लेती थी वो उठ कर बैठ जाती है उसके बड़े दोनों वक्ष उछलने लगते है जैसे सुन लिए हो क उसके मालिक आगये है उसे दबाने क लये महारानी मुस्का रही थी क्यू क उसका साजन उसका पति बलदेव आगया था और एक माँ क रूप में नहीं एक पत्नी क रूप में देवरानी अपने बेटे का स्वागत करते हुए कहती है
"आए ाआआजिये न जी अति शीघ्र अआप्के याद में मरी जा रही है मेरी जवानी ..दरवाज़ा खुला है जी"
ये सुनते हे बलदेव क धोती में हे लैंड फैन उठा कर खड़ा होने लगता है बलदेव मुस्कुराते हुए दरवाज़ा धकेलता है और सामने का नज़ारा देख उसका मुँह खुला रह जाता hai,Devrani अंदर अपने बेटे क इंतज़ार में नग्न थी उसके सर पर केवल एक कपडा था
बलदेव देखते हे अपने माँ को अपने पेअर से दरवाज़ा पर लात मारता है दरवाज़ा बंद हो जाता है बलदेव देख रहा था उसकी माँ रंग की सारी को अपने सर पर राखी थी और दोनों ओरे लटके थी उसके उन्नत वक्ष दूधिया जाँघे ामान्तरण दे रही थी क "आ बैल मेरी maar"Devrani क नाक में नाथ हाथो में चुड़िआ और गले में हार था जिसे देख लग रहा था क देवरानी एक नै ब्याही दुल्हन है
बलदेव अपने माँ को देखते हुए पीछे घूमता है और दरवाज़ा की कुण्डी लगा कर अपने तलवार को निकल कर रख देता है और अपने माँ को देखते हुए
"क्या बात है भाग्यवान आज तो काम रति लग रही हो ऐसे नग्न अवस्था में दरवाज़ा तो बंद कर लेती देवरानी"
"महाराज अआप की रानी क कक्षा में वही पुरुष आने की सहस करेगा जिसे अपनी जान से प्रेम नहीं हो"
महारानी देवरानी अपने बिस्तर से उठते हुए अपने पति क पास आजाती है और झुक कर निचे पेअर को छूटे हुए
"पति देव इतना विलम्ब कर दिए आज"
"देवरानी पेअर मत छुवा करो मेरे ..वैसे मई भी तो पुरुष हे हु फिर भी आपके कक्षा में हु"
देवरानी शर्मा जाती है और चलते हुए अपने गांड मटकाये आईएनए क तरफ जाती है बलदेव अपने माँ क मटके जैसे गांड को नंगे मटकता हुआ ताड़ रहा था
"महाराज अब एक पत्नी धर्म का पालन करना हे पड़ता है न पेअर छू कर वैसे आप इस कक्षा में आने का प्रमाण पत्र ले चुके विवाह कर क मुझसे"
देवरानी अपना दर्पण देखती है फिर अपने साथ खड़े बलदेव को देखती है जो देवरानी क भरे गांड को देख रहा था देवरानी की आखो में काम वासना तैरने लगती है जिसे बलदेव देखता है और उसके पास आकर पीछे से अपने माँ को दबोच लेता है
"देवरानी आज सैनिको को अभ्यास देने क बाद मई सीमा सुरक्षा की पड़ताल करने हेतु चला गया था अन्यथा मई अपने जोरू को समय पर आकर छोड़ता"
"है बड़ा समय पर आकर छोड़ते पता है मई कितने समय से प्रतीक्षा कर रही थी"
देवरानी और बलदेव अब अपने प्रेम प्रसंग को चुदाई का नाम दे चुके थे और बिना लज्जाये दोनों सामान्य रूप से इन शब्दों का प्रयोग करते देवरानी बलदेव से दूर होते हुए बिस्तर की तरफ जाती है
"आयु देवरानी कहा न आज राज्य भरमान में समय निकल गया नहीं तो सूर्यास्त क बाद हे आजाता बहुत थक गया हु आज"
देवरानी बिस्तर पर बैठी थी और बलदेव उसके पास आकर चलते हुए खड़ा हो जाता है देवरानी अपने बेटे का चेहरा देख समझ जाती है क बलदेव थका हरा आया है
Devrani:man me)Ek तो ये थका हरा आये और मई इन्हे कोस रही हु बेचारे दिन में तो मेरी गांड मार कर गए हे थे थकेंगे हे नहीं तो और kya..abhi इनकी आयु तो 18 वर्ष हे है
Devrani:aap इधर आइये
देवरानी नाराज़ होते हुए अपने बेटे का हाथ खींचती है और बिस्तर पर साथ ले कर लेट जाती है अपने एक पेअर को बलदेव क टांगो क बीच रख कर अपने सर को बलदेव क कंधे पर रख अपने हाथ से बलदेव क छाती को सहलाते हुए अपने बेटे क आखो में देखती है
"आप सेनापति को भेज देते तो आप थकते नहीं देखिये आपके दोनों नेत्र में लालिमा आगे है "
बलदेव नंगी माँ जो गदरायी हुई भरपूर माल लग रही थी थी केवल सर क पल्लू में वो उसे अपने बाहो में खींचते हुए
"देवरानी राज्य का महाराज हु मई मेरा कर्त्तव्य है गहतराष्ट्रा क सुरक्षा का ध्यान dena.uhmmmmaaaa आआह क्या गाल है सेब जैसे "
बलदेव अपने मा क गाल को चूमते हुए चाट लेता है
"आह छोड़िये ना"
"क्यू छोरु आप तो नंगी हो कर मुझसे छोड़ने क लये तैनात थी हाँ आओ ुहम्म्म्माआअह गलपपपपप गलपपपप गलपपपपप गलप्प ाआअह hmmmmmmmmmhaaaaaaaaaah"baldev देवरानी क होठो को चूमते हुए चूस लेता है देवरानी अपने होठ छुड़ाते हुए
"आप थके हुए है और फिर भी विश्राम नहीं करना चाहते"
"अब राज्य का कर्त्तव्य तो पूरा कर लिया रात में अपने पत्नी को छोड़ कर खुश तो कर दू ये तो सबसे महत्वपूर्ण कर्त्तव्य है"
"महाराज जब आप दिन में मेरी चुदाई कर लेते है तो उसके बाद परिश्रम मत कीजिये अन्यथा आप का स्वस्थ्य ख़राब हो जायेगा"
"देवरानी जी कुछ नहीं होगा आप बास छूट खोलिये मेरा शेर आपके छूट को फंदे क लये सर उठाये हुंकार भर्र रहा है"
देवरानी बात नहीं सुनती अपने बेटे का उठ कर बैठ जाती है और उठ कर जाते हुए
"महाराज अब आप मेरी बात मानिये हाँ जो पुरुष अपने पत्नी की बात नहीं मन वो असफल हे हुआ है"
देवरानी अपने गांड को मटकाये जाती है और हाथ में तेल की मालसी ला कर "खास जाइये उधर आपके पेअर दबा दू maharaj"baldev क सामने माँ क लटकती चुचिअ थी
"देवरानी ये क्या कर रही हो तुम कोई दासी नहीं "
"बलदेव जी मुझे ज्ञात है आप कभी अपने मुँह से नहीं कहेंगे अपनी सेवा करने क लये पर ये तो मेरा धर्म है ,इतना प्रेम जो करते है आप"
देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए अपने बेटे क प्यार को अहसास करते हुए
"चलिए पेअर सीधा कीजिये"
देवरानी अपने हाथ में तेल लगा कर अपने बेटे पिनिडिलिओ में तेल लगाने लगती है और बलदेव अपनी आखे बंद कर लेता है
Baldev:man me)Kaise न करू तुम्हे प्यार देवरानी तुम इतनी अच्छी जो हो ऐसी पत्नी हर किसी क भाग्य में कहा
देवरानी अपने बेटे क धोती को ऊपर खिसका कर तेल हल्का सा लगा कर दबाने लगती है और बलदेव अपने आँख बंद कए अपने माँ से पेअर दबवा रहा था
devrani:Suniye न ये धोती उतर दीजिये न तेल लग जायेगा
baldev:ab धोती आपका है और अंदर का शेर देखिये कही काटना ले
devrani:sher का जान ले लुंगी
देवरानी मुस्कुराते हुए अपने बेटे क धोती क बंधन को खींचती है और धोती खुलते हे बलदेव आधा खड़ा लैंड ऊपर सर उठाये हिलने लगता है
Baldev:Jaan ले लीजिये देवरानी मेरे लैंड की पर अपने छूट में इसके सर को दबा क फांसी दे दीजिये
देवरानी मुस्कुराते हुए अब जांघो से ले कर निचे तक बलदेव क पेअर मालिश करने लगती है
"अब कैसा लग रहा है जी दर्द काम हुआ"
"मैंने कब बोलै दर्द है जी"
"आपको बोलने की आवश्यकता hai?aapko दर्द हो तो मुझे महसूस होता है बलदेव जी "
"रानी माँ तुम सचमुच एक अप्सरा सी हो जो मेरे जीवन में आकर मेरा जीना आसान कर दी"
देवरानी अपनी तारीफ सुन कर बलदेव की और अचे से पेअर दबाने लगती है कुछ देर तक ऐसे हे अपने बेटे क पेअर दबाने क बाद
"देवरानी बास अब रहा नहीं जाता अब आपकी सेवा कर दू"
बलदेव अपने माँ को खींच कर अपने ऊपर ले कर जकड़ता है देवरानी क दोनों गोलाकार लिए ख़रबूज़े से वक्ष बलदेव की छाती में धस्स जाते है
"ाः हेहेहे छोड़िये न आह हाय छोड़िये जी"
बलदेव देवरानी क कमर में हाथ दाल कर अपने माँ क बड़े मटके जैसे गांड को मारते हुए
"रानी मा आप आज इतना सज्ज धज्ज कर इसलिए तो बैठी थी क मई आ कर आपकी जैम कर चुदाई करू अब जो थकवार थी वो तुमने निकल दी अब तेरी छूट का पानी मई निकलूंगा देवरानी"
बलदेव देवरानी को मसलते हुए जकड लेता है और गॉड में अपने लैंड पर बिठाये उठ कर बैठ जाता है देवरानी की हसी अब वासना में बदलने लगती है उसके ाअखे में भी बलदेव का हिलता हुआ हुल्लाबी लौड़ा बस गया था
बलदेव अपने माँ को गॉड में बैठाये
"महाराज छोड़िये न आप थके है आज कल कर लीजिएयेगा"
बलदेव अपने माँ क नाक का नाथ खोलते हुए एक तरफ रखता है देवरानी की गांड पे लौड़ा चुभ रहा था फिर बलदेव अपने माँ क हाव् जेवर को उतार देता है
"जिसकी इतनी छुडासी पत्नी हो वो भला बिना चोदे कैसे सो सकता है अब बास जल्दी से माँ बन जाओ मेरे बचे को जन्म दे कर"
बलदेव अब अपने माँ को पटक कर अपना लौड़ा अपने माँ क छूट पर रगड़ने लगता है
Devrani:Ab मई खुद कैसे गर्भवती हो सकती हु
baldev:Aaj तो आपके ससुर मेरे पिता ने भी आपको आशीर्वाद दे दिए है फिर तो आपको मई शीघ्र हे पेट से कर दूंगा
Devrani:Baldev...
baldev:ji रानी माँ..
devrani:tum देखे न दिन में कैसे सब मुझे कोस रहे थे जैसे मई नहीं चाहती इस राज परिवार को वंश देना
baldev
atni जी अब वो आपको बहु समझते है तो आपको नहीं कहेंगे तो किसको कहेंगे
devrani:Iska अर्थ है क वो सही कहे?
Baldev:han हम सब यही चाहते है क हमारा वंश आगे बढे
देवरानी गुस्से से बलदेव को देखती है और अपनी ताक़त लगा कर अपने बेटे क चुंगल से निगल कर अपने छूट पर लगे बलदेव क लैंड क वीर्य को पोछते हुए एक जांघिए निकल कर पहन लेती है बलदेव का लौड़ा ये देख कर झुक जाता है
baldev:Kya हुआ देवरानी मैंने क्या गलत कह दिया
Devrani:aap उनका साथ दे रहे है जो मुझे ताना मारते है बांझपन का
Baldev:aao रानी लौड़े पे बैठो चुदाई तो कर लेने दो
devrani:unse हे कीजिये जिनकी बाते सही लगती है
Baldev:ary यार इन स्त्रीयो को समझ पाना असंभव hai,devrani को संभालना तो दांतो टेल चने चबाने वाली बात है
devrani:Q क्या हुआ विवाह से पहले तो शेर की तरह दहाड़ते थे क मई संभल लूंगा ये वो अब क्या हुआ
देवरानी को ये बात ज़्यादा बुरी लग जाती है
देवरानी ये कह कर अपने लम्बे घने बाल को बांधते हुए जाने लगती hai,Devrani का बड़ा गांड कभी दये कभी बाये मस्ती में हिल रहा था
देवरानी की गांड को आपस में टकराता देख बलदेव आहे भरते हुए अपने लौड़े को सहलाता है और दौड़ कर जा रही देवरानी को पकड़ लेता है पीछे से और अपना खड़ा लैंड गांड की दरार में घुसा देता है
"राआणि माआ मई तो ये नहीं कहा क आप गलत हो "
"छोड़िये मुझे जाइये उनके पास हे जो मुझे ताने देते है क्यू आये मेरे पास "देवरानी अपना मुँह बनाते हुए अपने बेटे से नाराज़ होते हुए कहती है जिस पर बलदेव मुस्कुराते हुए अपना कुरता निकल देता है और अपने गदरायी माँ को पुरे बहो में कास कर अपना लैंड देवरानी की गांड की दरार में मरता है
"रआआआआई मा अब एक पति अपने पत्नी क गांड क पीछे नहीं आएगा तो किसके पीछे आयेगा वैसे आपकी गांड दिन प्रति दिन विशाल होते जा रहे hai,kshama कर दीजिये चलिए बिस्तर में "
क्षमा मांगते हुए अपने बेटे को देख कर देवरानी का डिल पिघल जाता है और वो हल्का महसूस कर रही थी
"काम से काम महाराज आपने अपने भूल को स्वीकार तो क्या "
"अब रानी माँ मेरा लौड़ा आपके छूट में जाने क लये मारा जा रहा है आप की छूट क लये तो किसी की हत्या भी करना उचित होगा मेरे लये इस समय"
"आप गुस्से में आकर बोल रहे थे क मुझे संभालना आसान नहीं क्या मई आपसे रोज़ लड़ती हु "
"नहीं देवरानी बास गुस्से में निकल गया मेरे मुँह से अब क्षमा कर भी दीजिये "
"मई भरी लगने लगी हु क्या बताइये?"
Baldev:Raaani मा अआप भरी कभी नहीं मेरे सपनो की रानी हो तुम अआप्के हर नखरे मई नहीं सहूंगा तो कौन सहेगा..
देवरानी ये सुन कर मुस्कुराने लगती है और अपनी गांड को बलदेव क लौड़े पर लगते हुए बलदेव क लैंड पर घिसने लगती है
"छोड़ने दीजिये अब देखिये मेरा लैंड आशु बहाये जा रहा है वैसे आप क गांड का दर्द ठीक हुआ या नहीं"
"दुपहर क बाद दर्द और बढ़ गया था पर अब ठीक है"
"अब तो मान गई हो न छोड़ने क लये तो चलो नहीं तो खड़े खड़े पेल दूंगा ाः राआणि माँ"
बलदेव अपने हुल्लाबी लैंड को रगड़ते हुए देवरानी को बाहो में समेत लेता है और अपने हाथ आगे बढ़ा कर बड़े दूध को दोनों हाथ से पकड़ मर्दन करने लगता है
"आआह हूउउ ओह्ह्ह्ह राहाजा छोड़ लीजिये खड़े खड़े मन किसने क्या hai"baldev क लैंड पर देवरानी अपना गांड रगड़ते हुए अपने बेटे क जांघो को सहलाने लगती है ,बलदेव समझ जाता है क देवरानी भी फिर से गरम हो गई है वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर जांघिए को निचे खींचता है और देवरानी क मांसल जांघ क निचे करता है देवरानी अपने पैरो को ढीला करते हुए अपने जांघिए को निचे ले आती है फिर पहले एक पेअर बहार निकल कर उस पेअर से दूसरे पेअर में अटकी हुई जांघिए को निकल कर फेकती hai,baldev अपना लैंड अब गांड की दरार में धसाये देवरानी क कंधो और गले को चुम रहा था चाट रहा था
"ाआअह राआणि मा तेरी छूट की प्यास से मारा जा रहा हु बुझा दे मेरी प्यास ाः"
बलदेव ये कहते हुए अपना माँ क एक पेअर को अपने हाथ में लेते हुए थोड़ा मोड़ देता है और एक एक हाथ से देवरानी क पीठ को झुकाते हुए अपने माँ क फुले हुए पावरोटी जैसी छूट को देखते हुए अपना लौड़ा छूट क मुहाने पर रगड़ता है और एक धक्के में 9 इंच का लौड़ा अंदर पूरा दाल देता है "aaaaaaaaaaaaaaaaaah raaaaaaaajaaaaaaaaaa मररररर gayeeeeeeeeee आआआह मेरे सैय्याहा"
बलदेव अपने माँ क दये पेअर को उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और अपनी पूरी ताक़त लगा कर "पछहः पाछह पहछहः फक्क्क्क फककक पकककक पक्क्क घपपप घपपपप ghapppp"devrani हर धक्के में चीख रही थी चिल्ला रही थी पर उसका बीटा तो देवरानी को एक पत्नी डिल से मान लिया था और चुदाई में हर कुछ करता जो एक पति को करना चाहिए
बलदेव अपने माँ क गले को अपने हाथ में पकड़ तेज़ गति से छूट में पेलने लगता है "आआह रआआआआज़ा ाआअह ुहममम आआआह हाआआए कितना मज़ा है तेरे लौड़े में ाआअह राजा ऐसे हे आआआआह "
बलदेव कुछ देर तक अपने माँ को इसी मुद्रा में छोड़ता रहता है देवरानी भी चीख कर अपने बेटे का उत्साह बढ़ा रही थी
"आआह रंडी ये ले मेरा लौड़ा साली तेरी छूट को छोड़ कर गर्मी झाड़ दूंगा ाः ये ले ाः कितनी पानी छोर रही है राँद तेरी छूट "
"ाआअह हाए ाआअह आए आआ आआ आआ ाः धीरे आआह आआह उफ्फफ्फ्फ़ रआआआआज़ाअ बेताआए हाआए ाः ाः आआह ाः मर्डर गयी धीरे से मेरे सैन्यआ aaaaaaaaaaah"
फककक फककक पाछह पछ की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी तभी बलदेव अपने माँ क दोनों टांगो को उठा कर अपने मजबूत बाहो में उठा लेता है और देवरानी भी अपने बेटे का साथे देते हुए बलदेव का गर्दन में अपने बहो की माला दाल देती है बलदेव अब देवरानी क शरीर को उठा कर देवरानी की बड़ी गांड को निचे मारता और लौड़ा छूट में शररररर से अंदर तक चीयर देता
"आआह मायआ आआआआह मेरी सजनी ाआअह तेरी छूट मार क मेरी थकन मिटत गई ाआअह महारानी देवराञीीीे आआह"
"ाआअह ाआअह आआह आआह राजाआआ जी ाआअह ाः आह और छोड़ो आआह ज़ोर से ाः फाआजद दो मेरी छूट aaaaaah"devrani अब अपने बेटे का साथ देते हुए गांड को लौड़े पे तेज़ी से पटकती और पूरा लौड़ा अपने छूट क भीतर ले लेती देवरानी और बलदेव क निकले रस से छूट भीग गयी थी और बलदेव आसानी से झटके मार कर अपने रानी माँ को छोड़ रहा था
बलदेव अब खड़े खड़े अपने माँ क भरी शरीर को उठाये थकने लगता है और उसके झटके धीरे हो जाते है जिसे देख देवरानी मुस्कुराते हुए बलदेव को छेरती है
"क्यू शेर हो गया ढेर"
बलदेव ये देख जोश में आकर
"अभी बताता हु रनडीईई चल झुक्क तेरी छूट की चमड़ी उधर देता हु"
बलदेव अपने माँ को पलंग पर ले जा कर पटकते हुए झुका देता है
"हाय राजा इतना जोश लगता है दिनन भर्र मेरे महाराज को मेरी छूट की याद आती रही ाआअह"
खछ से बलदेव झुकी हुई देवरानी की छूट में अपना लौड़ा पेल देता है और अपने ज़ोर से और झटको से देवरानी क पुरे शरीर को हिला क रख देता है
"आआह आह ये ले रनडीईए ाः खा मेरा लौड़ा रआआआआई माआ तेरी छूट फाड़ दूंगा ाआअह ाः ये ले"
खछ खछ फैट फैट की आवाज़ कक्षा में फ़ैल रही थी जब भी देवरानी क छूट में लैंड घुसता और देवरानी की गोल निकली हुई गांड टेबल की तरह बलदेव सिंह क कमर पर टकराती ,देवरानी का मुँह खुल गया था आखे बड़ी हो जाती है और वो हर धक्के पर अपने बेटे को शाबाशी देते हुए चुद रही थी
"आआह आआआआआ आआआआह जी रआआआजाएआ जी ऐसे हे छोड़िये इस निगोड़ी छूट को आआह चूस लीजिये इसका रसससससस आआआह ओह साहाजाआआआं आआआह आआह"
"आआआआह रआआआई माआ तेरी छूट में कितनी तपिश है ाआअह मेरे लैंड को जकड कर राखी है आआआह कितनी कासी हुई है अब भी आआह ाः ये ले ाः रानी माँ"
बलदेव अपने माँ क हाथो को पीछे खींच कर किसी लगाम की तरह पकडे अपने माँ को घोड़ी बनाये बेतहाशा चोदे जा रहा था "ठप्प्प ठप्प्प पककककक पक्क्क छान छान की गूंज बहार तक जा रही थी बलदेव और देवरानी को ये अंदाज़ा नहीं था कोई सुन रहा है ये sab,Han कक्षा क दरवाज़ा पर कड़ी रानी षुरूश्ती देवरानी की चीख सुन रही थी और चुदाई की हर आवाज़ उसके सीने में तीर घुसने जितना दर्द दे रहा था
shurushti:man me)Kitna उछाल उछाल कर चुद रही है देवरानी और मई राजा राजपाल क रहते हुए प्यासी हु अब बलदेव का लौड़ा कितना शक्तिशाली होगा देवरानी की चीखे निकल दिया जो इतनी हटती काठी स्त्री है
अंदर चुदाई करते हुए माँ बेटे क बीच कुछ ाआवाज़ फुट पड़ती है
"महारानी देवराआणि बहु ...bahu...betaaaa बलदेव"
बलदेव और देवरानी ाः उठ की आवाज़ निकलते हुए एक दूसरे में समाये थे ठप्प ठप्प की आवाज़ षुरूश्ती की आवाज़ को दबा रही थी तभी देवरानी क कानो में षुरूश्ती की आवाज़ जाती है
"बलदेव ji..aaah ढर्रे ाः धीरे बहार कोई है ाआअह"
"महारानी कोई हो मुझे इस समय आपको छोड़ना है ाः ये ले ाः साली तेरी छूट का चटनी बना दूंगा भोसड़ा बना दूंगा छोड़ छोड़ क"
"ाः जी आआह हाय मुझे रानी षुरूश्ती की आवाज़ आई रुकिए न धीरे कीजिये ना ाआअह"
बलदेव समझते हुए अपने माँ क छूट में अपना लौड़ा धीरे धीरे अंदर बहार करते हुए सुनता है तो बहार से आवाज़ आरही थी
"बीटा बलदेव क्या आप लोग सो गए बहु रानी"
बलदेव अपना लौड़ा बहार खींच कर धीरे से अंदर अपने माँ क छूट में डालते हुए
"उफ़ देवरानी ये तो बड़ी माँ है ये अभी क्या करने आगे रात में"
"आह राज्जा आप पूछिए न ज़ोर से ाः आप तो छोड़ने लगते है तो सुनते हे नहीं दुन्या हे भूल जाते है"
"मेरी दुन्या तेरी छूट से आरम्भ हुई और तेरे छूट पर हे अंत होगा रानी माँ"
फुसफुसाते हुए अपने माँ क छूट में लैंड डाले बलदेव कहता है फिर सोचते हुए
"क्याआआआआ हुआआआ बड़ी मायआ कोई महत्त्वपूर्ण बात है ?"
shurushti:Beta बलदेव महत्त्वपूर्ण है इसलिए आना पड़ा
Baldev:ji ठीक है आहाता हु रुकिए कुछ समय
Devrani:ufff हाय अब क्या करू ऐसी अवस्था में षुरूश्ती आगे
baldev:Maa पहले तो अपने छूट से मेरा लैंड बहार निकालो हड़बड़ाओ नहीं बड़ी माँ को पता है रात में पति पत्नी क्या करते है
देवरानी आगे को हो कर पक्क से अपने छूट से लौड़ा बहार को खींचते हुए
"हाँ पर इतना समय लगेगा तो वो समझ जाएगी मेरे कपडे कहा गए उफ्फ्फ "
"देवरानी अपना समय लो साड़ी पहन लो उसके पहले अपने छूट को साफ़ कर लो रस टपक रही है"
बलदेव ये कहते हुए देवरानी क छूट पर देखता है जिसमे से गधा वीर्य बहार ाराहा था देवरानी शर्मा कर अपने साड़ी ब्लाउज देखने लगती है और बलदेव भी धोती पहनता है और अपने खड़े लौड़े को शांत करते हुए
"देवरानी हो गया तो खोलू"
धीरे से फुसफुसाता है
"रुकिए बिस्तर तो ठीक कर दू"
देवरानी झट्ट से अपनी जांघिए चुनरी और बलदेव का कुरता उठा कर एक ओरे रख देती है अब तक देवरानी ब्लाउज और पेटीकोट पहन लेती है साड़ी बांधते हुए
"अब खोलिये बलदेव जी"
देवरानी अब अपने बेटे को हुक्म देती है क उसके छूट चुदाई क सुराग ख़त्म कर दिए उसने बलदेव अस्वस्थ हो जाता है और जा जार दरवाज़ा खोता है
Baldev:aaaiye बड़ी माँ..
षुरूश्ती मुस्कुराते हुए अपने सौतेले बेटे को देखती है जो अपनी सगी माँ को कुछ समय पहले छोड़ रहा था और वो खुद सब सुन रही थी
shurushti:Kya हुआ बीटा सो गए थे क्या क्षमा करना इतने देर रात जगा दिया
Baldev:ary नहीं नहीं बड़ी मा क्षमा की क्या बात वो बास नीड आगे थी आइये न अंदर
षुरूश्ती देखती है बलदेव सिर्फ धोती में है उसका चौड़ा सीना और गले पर हल्का पसीना छूट रहा था
shurushti:man me)Tum तो अपने माँ की सेवा कर रहे थे उसके शरीर की गर्मी बुझा रहे थे इतनी बुद्धू नहीं हु पर क्या करू तुम दोनों को मई अपना बीटा और बहु मानी हु
षुरूश्ती अंदर आते हुए
"बलदेव सेनापति सोमनाथ आया था और उनके साथ तुम्हारे पिता जी गए है"
Baldev:Aisa क्या घटित हो गया बड़ी माँ क पिता जी महाराज को जाना पड़ा
Shurushti:Aapke पिता जी महाराज ने कहा है आपको बता दे क राज महल में घुशपैठि होने की संभावना है
बलदेव हैरत करते हुए अपने बड़ी माँ या सौतेली माँ को देखता है उसका लैंड जो सर उठाये फैन फ़ना रहा था
Baldev:Ho न हो युधा हारने क बाद दिल्ली का बादशाह शाहज़ेब हमारे विरुद्धा कोई योजना बना रहा हो .मई आता हु देवरानी
बलदेव पलट कर अपने माँ को देखता है जो अब भी अपने साड़ी पहन रही थी देवरानी सब सुन रही थी वो बास हाँ में इशारा करती है और बलदेव अपने माँ की आज्ञा पाकर फ़ौरन अपनी कुरता पहन कर अपने तलवार उठता है और जूती पहन कर कक्षा से बहार चला जाता है
षुरूश्ती देखती है देवरानी साड़ी पहन रही थी वो धीरे से उसके पास जाती hai,shurushti बिस्तर पर देखती है चुडिओ क टूटे हुए टुकड़े दिखाई देते है वही पास पलंग क देवरानी क नाथ हार और भी कई गहने रखे थे और पुरे कक्षा में वीर्य की चुदाई रस की मादक सुगंध आरही थी
Shurushti:maharani आराम से
Devrani:aaaiye सासु माँ baithiye..Ye बादशाह शाहज़ेब अवश्य हमसे युधा चाहता है
षुरूश्ती देवरानी क खुले बाल मोठे बड़े वक्ष और बहार को निकली हुई गांड देख समझ जाती है क देवरानी खूब चुद रही है आज कल
shurushti:Bahu रानी शाहज़ेब क युधा का तो पता नहीं परन्तु यहाँ युधा हो रहा था प्रतीत होता है
देवरानी मुस्कुराते हुए अपने साड़ी को मोड़ कर अपने छूट जो भीगी हुई थी बेटे क वीर्य से अपने कोचा बना कर अंदर डालती है तभी षुरूश्ती फिर से पूछती है "लगता है कार्यक्रम शुरू हो चूका था मई बंधा बन गई" ये सुन कर देवरानी अपने साड़ी का पल्लू कर अपने सौतन बानी सांस को देख मुस्कुराते हुए "नहीं नहीं सासु माँ wo..ab आपके सामने अस्त व्यस्त वस्त्र में आना एक बहु को शोभा तो नहीं देता "
Devrani:man me)kahi ये मेरे और बलदेव की चुदाई की चीखे सुन तो नहीं ली उफ्फ्फ इसको भी अभी हे आना था
shurushti:Bahu रानी अब ये मत कहिये ये बिस्तर का हाल इनपर टूटी चुड़िआ आपके गहने जो उतरे हुए है सब और अभी साड़ी पहनी जब क मई कितने देर बहार कड़ी थी ..ये न कहना ये सब सामान्य है
देवरानी बुरी तरह शर्मा जाती है और उसके आखो में वो लज्जा का भाव आजाता है अब शर्माए कैसे नहीं अपने बेटे से छोड़ने क बाद अगर कोई बहाना बनाये क नहीं वो चुद नहीं रही थी
devrani:Woo वो बस्स्स ..
shurushti:Bahu रानी मई भी एक स्त्री हु मुझे पता है जब दो प्रेमी जोड़े को दरवाज़ा खोलने में समय लगता है तो वो किस अवस्था में होते है
devrani:Ji वो अब उनके पेअर दबा रही रही थी तो चुनरी खोल दी थी अब कक्षा में गर्मी लगती है तो पेटीकोट में हे सोती हु
shurushti:Haha बहु रानी आप पेटीकोट में सोती हो जाड़े क दिन में बहुत गर्मी है ..कुछ काम नहीं क्या मेरे बेटे ने?
devrani:shurushti दीदी ..आप तो जानती है न वो नहीं मानते
देवरानी अब अपना मुँह बना कर षुरूश्ती को शिकायत करते हुए कहते है
shurushti
evrani आप मेरी सौतन थी अब बहु हुई हो शर्माओ mat..waise बलदेव हे जबरदस्ती करता है तुम्हे मज़ा नहीं आता ?
देवरानी क होठ पर मुस्कान फ़ैल जाता है और वो सोचते हुए
"जी आता है मुझे भी मज़ा"
shurushti:to फिर क्या है जीओ अपने बेटे संग भुला दो जीवन क dukh..waise बहुत गदरा गई हो बलदेव की मेहनत से
devrani:aap भी न deedi..ab पति है मेरे तो म्हणत किसपे करेंगे
shurushti:achha भूल गई मेरा बीटा बलदेव तुम्हारा सागा बीटा है और मेरा सौतेला
Devrani:han भूल गई अब मुझे केवल बलदेव पति क रूप में चाहिए बीटा आप बना कर रखिये हेहेहे
देवरानी हस्ती है
shurushti
evrani मैंने बहुत दुःख दिए है तुम्हे आज तुम्हारा हस्ता हुआ चेहरा देख ऐसा लगता है जैसे मैंने पापो की प्राश्चित कर रही हु
devrani:man me)Mujhe पता है षुरूश्ती तू चाहे मुँह से कुछ भी बोल पर तू अंदर से जलती है मेरे और बलदेव का प्यार देख
devrani:dhanywad दीदी मेरा और बलदेव जी का साथ देने क लये आपका साथ नहीं होता तो मई आज अपने बेटे की पत्नी नहीं बन पाती
shurushti:bass अब हमे कुछ नहीं चाहिए तुम दोनों से बास हमारा राज परिवार बढ़ा दो
devrani:deedi बुरा नहीं मानिये पर राजमाता जीविका आज कल अनाप शनाप बोल देती है अब बचा देना भगवन क हाथ में है
shurushti:Ary देवरानी वो बूढी हुई वो चाहती है अपने वंश को बढ़ता देख ले जीते जी बुरा न माना करो और हाँ तुम मुझे दीदी नहीं सासु माँ हे बोलै करो
devrani:Bolti तो हु पर अकेले में दीदी तो बोल सकती हु न अब जीवन भर तो दीदी हे बोली आपको
shurushti:theek है मई जाती हु विश्राम कीजिये आप महारानी देवरानी थक गई होंगी आप
षुरूश्ती ये कह कर आँख मारती है और देवरानी अपना मुँह फूलते हुए "डीईएडी हां अआप भी na"Shurushti बहार चली जाती है और देवरानी बिस्तर पर पेट क बल लेती जाती है "आआह मेरा छूट अब भी पानी छोर रहा है अब पता नहीं बलदेव कब आएंगे मेरी छूट की प्यास बुझाने ाआजाओ जल्दी सैया जी बीटा जी ाः मेरे पति देव ji"baldev का नाम ले कर देवरानी अपने छूट को बिस्तर पर रगड़ती है...
तो बे कॉन्टिनोएड...
गहतराष्ट्रा
देवरानी स्नान करती है और अपने वस्त्र निकल कर देखते हुए सोचने लगती है क क्या पहने पर कुछ सोचते हुए मुस्कुराती है और वस्त्र अंदर रख कर संदूक बंद कर देती है ,खिड़की से आरही लाल रंग की सूर्य की किरणे से अंदाज़ा लग जाता है महारानी देवरानी को क अब महाराज बलदेव सिंह महल वापस आजायेंगे और ये सोच कर क महल आकर बलदेव उसे छोड़ेंगे देवरानी क होठो पर मुस्कान फ़ैल जाती है क्यू क आअज का दिन वो कितना खुल कर अपने बेटे क प्रतीक्षा कर रही थी परन्तु वो एक दिन था जब देवरानी किसी पुरुष से अवैध सम्बन्ध बनाने की कमला की बात से चिढ जाती थी परन्तु आज देवरानी बेजिझक अपने बेटे का राह देख रही थी क वो कब आये और उसके शरीर की आएग बुझाये आज दुपहर में जाम कर गांड मरवाई थी पर छूट की चिंगारी को बलदेव ने हवा दे कर चला गया था
देवरानी वही कड़ी अपने राज्य गहतराष्ट्रा को देखते हुए सूर्य को देख सोचने लगती है
devrani:man me)Mera जीवन इतना बदल जाएगा सोची नहीं थी ,कभी सिंहासन पर बैठने क लये तरसती थी जब लोग षुरूश्ती को महारानी कहते और मुझे केवल रानी कहते तो मेरे शरीर में लगता मानव कोई सुई चुभा दिया आज वही षुरूश्ती मुझे महारानी देवरानी कह कर सम्बोधित करती है और मैं उसे रानी कह कर समय चक्र ऐसा घुमा क जिस पति प्रेम क लये जीवन भर तरसी वो भी प्राप्त हो गया और बलदेव जी क रूप में एक शक्तिशाली और पागल प्रेमी पति मिला जो मुझे अपने प्राण से अधिक प्रेम करते hai,Ye भगवन की हे तो कृपा है क इस दुखिया क आंसू पॉच कर जीवन स्वर्ग बना dya..Haay कितना भोला और सज्जन पुरुष है मेरे पति बलदेव ,मेरी बात मानने क लये एक पेअर पे खड़े रहते hai,mai जितनी आभारी बलदेव की हु उतना हे गहतराष्ट्रा क प्रजा का जिसने मेरे ख़ुशी क लये मेरा और बलदेव जी जो मेरे बेटे भी है उनका विवाह को मान्यता दे di..haay बलदेव जी आपका नाम लेते हे शरीर में शुशुरी सी होने लगती है ाः इस होली आपके संग पहली होली होगी पति क रूप में..
देवरानी अपने दोनों टांगो से अपने छूट को दबाया पलंग पर लेट जाती है तकिया पकड़ कर
"है बलदेव महाराज कब आएंगे आप मेरी योनि रास छोर रही है आपके लिंग महाराज की यद् में आह हाय आपका लौड़ा कितना कठोर और बलशाली है आह है"
देवरानी बिस्तर पर अलाट पलट कर अपने बेटे बलदेव को याद कर रही थी ऐसे हे अँधेरा छ जाता है और गहतराष्ट्रा दियो से जगमाने लगता है और दिया अपने प्रकाश से गहतराष्ट्रा क अँधेरा को छटने की असफल कोशिश कर रहा tha,Baldev सिंह घोड़े पर बैठ महल क दुवार पर आते है तो सैनिक महाराज की जय जय कर करते है बलदेव अपने घोड़े को धीमे करते हुए महल की ओरे आगे बढ़ता है और महल क पहले हे अतिथि गृह क पास उसे आग तापते हुए वैध जी मिल जाते है बलदेव मुस्कुराते हुए निचे उतरता है
Baldev:sainiko मेरे घोड़े को ले जाओ
वैध जी बलदेव को देख खड़ा हो जाता है और अपने हाथ जोड़ कर परनाम करते हुए
"महाराज बलदेव सिंह जी सब कुशल तो है ?"
Baldev:Vaidh जी हम ठीक hai..Ye क्या आप आग तप रहे है
Vaidh:kshama महाराज अब वन में रहता था तो आदत है आग तपने की
Baldev:Aapko सरदी अधिक लग रही है प्रतीत होता है
vaidh:maharaj अब वृद्धा अव्वस्था मई सर्दी तो लगेगी हे वैसे आपको तो नहीं लग रही है न ?
Baldev:Nahi..Mai समझा नहीं
बलदेव वैध क चेहरे को देख रहा था जो इशारे से पूछना छह रहा था
vaidh:Maharaj यदि सर्दी लगे तो बास कह दिजीयाग आपको ऐसी औषधि देंगे क..
बलदेव वैध की बात सुन कर समझ जाता है क वो किस औसधि की बात कर रहा है
Baldev:Vaidh जी अब तक तो आपका दिया हुआ जड़ी बूटी कार्य कर रहा है
vaidh:Maharaj मैंने आपको शक्ति बूटी दिया है जिससे पुरुष की शक्ति एक घोड़े की तरह बढ़ जाती है और आप तो पहले हे घोड़े से शक्ति रखते थे आप पर तो और अधिक असरदार होगा
baldev:Vaidh जी.. हम संतुष्ट है अपने वैवाहिक जीवन से
vaidh:Ji महाराज वो तो महारानी देवरानी की हसी सुन कर हे लगता है क वो कितना खुश है
बलदेव ये सुन कर हल्का गुस्सा सा होते हुए क कैसे वैध कह दिया क वो चुदाई से खुश है फिर सोचता है
baldev:hasi सुन कर?
baldev:Vaidh जी आप क्या कह रहे है हसी सुन कर कैसे ?
Vaidh:maharaj ..महारानी तो घूँघट कए रहती है किसी पुरुष क सामने कहा अपना चेहरा खोलती है तो महल में जाना होता है तो केवल हसी सुन पता हु जिस से मई अनुमान लगा लिया क वो खुश hai..kshama कीजिये महाराज आपको बुरा लगा तो
baldev:nahi nahi..vaidh जी
vaidh:maharaj आप भाग्यशाली है जो इतनी पतिव्रता पत्नी मिली है आपको महारानी देवरानी गहतराष्ट्रवासिओ में बहुत काम समय में अपना पैठ बना उनका आदर सम्मान हर कोई करता है क्या बचा क्या बूढ़ा
Baldev:Theek है ठीक है मई थक गया हु विश्राम कीजिये आप
vaidh:Jo आज्ञा महाराज
वैध हाथ जोड़े खड़ा होता है महाराज बलदेव मुस्कुराते हुए जाने लगते है और वैध फिर से अपने आग क पास बैठ कर फूकते हुए
Vaidh:ab हम यहाँ बैठे आग सुलगा रहे है महाराज को अंदर आग सुलगी हुई मिलेगी आप का तो महारानी क गद्दे पर हे विश्राम होगा
वैध जी ये कहते हुए आगे पीछे देखते है क कही कोई सुन तो नहीं लिया फिर किसी को न पाकर फिर से अपने हाथ को आगे बढ़ाये आग तापने लगते है
महाराज बलदेव चहल कदमी करते हुए महल क पीछे बने राज घाट पर जाते है और स्नान करते है और वस्त्र बदल कर अपने तलवार को अपने मियां में खींच कर रखते हुए
"ाः आअज बहुत थक्क गए ये राज पात संभालना राज्य की सीमा की देख रेख करना सिपाहीओं को अभ्यास करवाना इतना आसान nahi..maharaj होना किसी राज्य का इतना सरल कार्य nahi..jata हु महारानी देवरानी भी राह देख रही होगी अभी एक और कर्त्तव्य है मेरा देवरानी को पति प्रेम देने का"
ये सोचते हुए महाराज बलदेव अपने मुख्या महल की ओरे जाते है दरवाज़े पैर दो सैनिक खड़े थे मुख्या महल क अंदर आते हे षुरूश्ती की नज़र पड़ती है
shurushti:Maharaj आज इतनी देरी से
Baldev:Ji बड़ी माँ
shurushti:aapka भोजन लगवा दू बीटा
baldev:nahi बड़ी माँ ऊपर भेज दीजिये मई थका हु
shurushti:Han ऊपर मैंने भेज दी थी वो महारानी भी ऊपर हे है दुपहर से अपने कक्षा में वो उनके कमर में दर्द था
बलदेव का दिमाग तेज़ी से सोचता है क वो दुपहर में तो ताब्यात से देवरानी की गांड मरी थी इसलिए वो नहीं आई निचे बलदेव क आँख बड़े हो जाते है जिसे षुरूश्ती समझ जाती है और मुस्कुराते हुए अपने बेटे
Shurushti:Beta...Bahu से थोड़ा प्रेम से हे कही भागी थोड़ी जा रही है..
षुरूश्ती ये कह कर कुटिल मुस्कान देती है जिसे देख बलदेव शर्मा जाता है
baldev:Ji बड़ी माँ अवश्य मई ध्यान रखूँगा
shurushti:theek है जाओ बीटा बहु प्रतीक्षा कर रही होगी
बलदेव ये सुनते हे तेज़ी से अपने कदम सीडीओ की ओरे बढ़ा देता है और चलते हुए ऊपर जाने लगता है
Shurushti:man me)Kitna बेचैन रहता है अपने माँ को छोड़ने क लये बलदेव ,देवरानी ने सच में अपने सूझ बुझ से सब प् लिया
तभी षुरूश्ती को राजा राज पल की आवाज़ सुनाई देती है
"जी आए महाराज"
Shurushti:man me)Rajpal हे वो पुरुष है जो अपने पत्नी को अपने बेटे को सौंप कर भी एक हे महल में रह रहा है किसी और पुरुष से नहीं होता ये ..अब गलती भी क्या है उसने
बलदेव सीडीओ से चढ़ते हुए ऊपर पहुँचता है और अपने माँ से मिलने क लये सीधा अपने कक्षा की तरफ जाता है और आवाज़ लगता है
"महारानी देवरानी ाजी दरवाज़ा खोलिये"
महारानी लेती थी वो उठ कर बैठ जाती है उसके बड़े दोनों वक्ष उछलने लगते है जैसे सुन लिए हो क उसके मालिक आगये है उसे दबाने क लये महारानी मुस्का रही थी क्यू क उसका साजन उसका पति बलदेव आगया था और एक माँ क रूप में नहीं एक पत्नी क रूप में देवरानी अपने बेटे का स्वागत करते हुए कहती है
"आए ाआआजिये न जी अति शीघ्र अआप्के याद में मरी जा रही है मेरी जवानी ..दरवाज़ा खुला है जी"
ये सुनते हे बलदेव क धोती में हे लैंड फैन उठा कर खड़ा होने लगता है बलदेव मुस्कुराते हुए दरवाज़ा धकेलता है और सामने का नज़ारा देख उसका मुँह खुला रह जाता hai,Devrani अंदर अपने बेटे क इंतज़ार में नग्न थी उसके सर पर केवल एक कपडा था
बलदेव देखते हे अपने माँ को अपने पेअर से दरवाज़ा पर लात मारता है दरवाज़ा बंद हो जाता है बलदेव देख रहा था उसकी माँ रंग की सारी को अपने सर पर राखी थी और दोनों ओरे लटके थी उसके उन्नत वक्ष दूधिया जाँघे ामान्तरण दे रही थी क "आ बैल मेरी maar"Devrani क नाक में नाथ हाथो में चुड़िआ और गले में हार था जिसे देख लग रहा था क देवरानी एक नै ब्याही दुल्हन है
बलदेव अपने माँ को देखते हुए पीछे घूमता है और दरवाज़ा की कुण्डी लगा कर अपने तलवार को निकल कर रख देता है और अपने माँ को देखते हुए
"क्या बात है भाग्यवान आज तो काम रति लग रही हो ऐसे नग्न अवस्था में दरवाज़ा तो बंद कर लेती देवरानी"
"महाराज अआप की रानी क कक्षा में वही पुरुष आने की सहस करेगा जिसे अपनी जान से प्रेम नहीं हो"
महारानी देवरानी अपने बिस्तर से उठते हुए अपने पति क पास आजाती है और झुक कर निचे पेअर को छूटे हुए
"पति देव इतना विलम्ब कर दिए आज"
"देवरानी पेअर मत छुवा करो मेरे ..वैसे मई भी तो पुरुष हे हु फिर भी आपके कक्षा में हु"
देवरानी शर्मा जाती है और चलते हुए अपने गांड मटकाये आईएनए क तरफ जाती है बलदेव अपने माँ क मटके जैसे गांड को नंगे मटकता हुआ ताड़ रहा था
"महाराज अब एक पत्नी धर्म का पालन करना हे पड़ता है न पेअर छू कर वैसे आप इस कक्षा में आने का प्रमाण पत्र ले चुके विवाह कर क मुझसे"
देवरानी अपना दर्पण देखती है फिर अपने साथ खड़े बलदेव को देखती है जो देवरानी क भरे गांड को देख रहा था देवरानी की आखो में काम वासना तैरने लगती है जिसे बलदेव देखता है और उसके पास आकर पीछे से अपने माँ को दबोच लेता है
"देवरानी आज सैनिको को अभ्यास देने क बाद मई सीमा सुरक्षा की पड़ताल करने हेतु चला गया था अन्यथा मई अपने जोरू को समय पर आकर छोड़ता"
"है बड़ा समय पर आकर छोड़ते पता है मई कितने समय से प्रतीक्षा कर रही थी"
देवरानी और बलदेव अब अपने प्रेम प्रसंग को चुदाई का नाम दे चुके थे और बिना लज्जाये दोनों सामान्य रूप से इन शब्दों का प्रयोग करते देवरानी बलदेव से दूर होते हुए बिस्तर की तरफ जाती है
"आयु देवरानी कहा न आज राज्य भरमान में समय निकल गया नहीं तो सूर्यास्त क बाद हे आजाता बहुत थक गया हु आज"
देवरानी बिस्तर पर बैठी थी और बलदेव उसके पास आकर चलते हुए खड़ा हो जाता है देवरानी अपने बेटे का चेहरा देख समझ जाती है क बलदेव थका हरा आया है
Devrani:man me)Ek तो ये थका हरा आये और मई इन्हे कोस रही हु बेचारे दिन में तो मेरी गांड मार कर गए हे थे थकेंगे हे नहीं तो और kya..abhi इनकी आयु तो 18 वर्ष हे है
Devrani:aap इधर आइये
देवरानी नाराज़ होते हुए अपने बेटे का हाथ खींचती है और बिस्तर पर साथ ले कर लेट जाती है अपने एक पेअर को बलदेव क टांगो क बीच रख कर अपने सर को बलदेव क कंधे पर रख अपने हाथ से बलदेव क छाती को सहलाते हुए अपने बेटे क आखो में देखती है
"आप सेनापति को भेज देते तो आप थकते नहीं देखिये आपके दोनों नेत्र में लालिमा आगे है "
बलदेव नंगी माँ जो गदरायी हुई भरपूर माल लग रही थी थी केवल सर क पल्लू में वो उसे अपने बाहो में खींचते हुए
"देवरानी राज्य का महाराज हु मई मेरा कर्त्तव्य है गहतराष्ट्रा क सुरक्षा का ध्यान dena.uhmmmmaaaa आआह क्या गाल है सेब जैसे "
बलदेव अपने मा क गाल को चूमते हुए चाट लेता है
"आह छोड़िये ना"
"क्यू छोरु आप तो नंगी हो कर मुझसे छोड़ने क लये तैनात थी हाँ आओ ुहम्म्म्माआअह गलपपपपप गलपपपप गलपपपपप गलप्प ाआअह hmmmmmmmmmhaaaaaaaaaah"baldev देवरानी क होठो को चूमते हुए चूस लेता है देवरानी अपने होठ छुड़ाते हुए
"आप थके हुए है और फिर भी विश्राम नहीं करना चाहते"
"अब राज्य का कर्त्तव्य तो पूरा कर लिया रात में अपने पत्नी को छोड़ कर खुश तो कर दू ये तो सबसे महत्वपूर्ण कर्त्तव्य है"
"महाराज जब आप दिन में मेरी चुदाई कर लेते है तो उसके बाद परिश्रम मत कीजिये अन्यथा आप का स्वस्थ्य ख़राब हो जायेगा"
"देवरानी जी कुछ नहीं होगा आप बास छूट खोलिये मेरा शेर आपके छूट को फंदे क लये सर उठाये हुंकार भर्र रहा है"
देवरानी बात नहीं सुनती अपने बेटे का उठ कर बैठ जाती है और उठ कर जाते हुए
"महाराज अब आप मेरी बात मानिये हाँ जो पुरुष अपने पत्नी की बात नहीं मन वो असफल हे हुआ है"
देवरानी अपने गांड को मटकाये जाती है और हाथ में तेल की मालसी ला कर "खास जाइये उधर आपके पेअर दबा दू maharaj"baldev क सामने माँ क लटकती चुचिअ थी
"देवरानी ये क्या कर रही हो तुम कोई दासी नहीं "
"बलदेव जी मुझे ज्ञात है आप कभी अपने मुँह से नहीं कहेंगे अपनी सेवा करने क लये पर ये तो मेरा धर्म है ,इतना प्रेम जो करते है आप"
देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए अपने बेटे क प्यार को अहसास करते हुए
"चलिए पेअर सीधा कीजिये"
देवरानी अपने हाथ में तेल लगा कर अपने बेटे पिनिडिलिओ में तेल लगाने लगती है और बलदेव अपनी आखे बंद कर लेता है
Baldev:man me)Kaise न करू तुम्हे प्यार देवरानी तुम इतनी अच्छी जो हो ऐसी पत्नी हर किसी क भाग्य में कहा
देवरानी अपने बेटे क धोती को ऊपर खिसका कर तेल हल्का सा लगा कर दबाने लगती है और बलदेव अपने आँख बंद कए अपने माँ से पेअर दबवा रहा था
devrani:Suniye न ये धोती उतर दीजिये न तेल लग जायेगा
baldev:ab धोती आपका है और अंदर का शेर देखिये कही काटना ले
devrani:sher का जान ले लुंगी
देवरानी मुस्कुराते हुए अपने बेटे क धोती क बंधन को खींचती है और धोती खुलते हे बलदेव आधा खड़ा लैंड ऊपर सर उठाये हिलने लगता है
Baldev:Jaan ले लीजिये देवरानी मेरे लैंड की पर अपने छूट में इसके सर को दबा क फांसी दे दीजिये
देवरानी मुस्कुराते हुए अब जांघो से ले कर निचे तक बलदेव क पेअर मालिश करने लगती है
"अब कैसा लग रहा है जी दर्द काम हुआ"
"मैंने कब बोलै दर्द है जी"
"आपको बोलने की आवश्यकता hai?aapko दर्द हो तो मुझे महसूस होता है बलदेव जी "
"रानी माँ तुम सचमुच एक अप्सरा सी हो जो मेरे जीवन में आकर मेरा जीना आसान कर दी"
देवरानी अपनी तारीफ सुन कर बलदेव की और अचे से पेअर दबाने लगती है कुछ देर तक ऐसे हे अपने बेटे क पेअर दबाने क बाद
"देवरानी बास अब रहा नहीं जाता अब आपकी सेवा कर दू"
बलदेव अपने माँ को खींच कर अपने ऊपर ले कर जकड़ता है देवरानी क दोनों गोलाकार लिए ख़रबूज़े से वक्ष बलदेव की छाती में धस्स जाते है
"ाः हेहेहे छोड़िये न आह हाय छोड़िये जी"
बलदेव देवरानी क कमर में हाथ दाल कर अपने माँ क बड़े मटके जैसे गांड को मारते हुए
"रानी मा आप आज इतना सज्ज धज्ज कर इसलिए तो बैठी थी क मई आ कर आपकी जैम कर चुदाई करू अब जो थकवार थी वो तुमने निकल दी अब तेरी छूट का पानी मई निकलूंगा देवरानी"
बलदेव देवरानी को मसलते हुए जकड लेता है और गॉड में अपने लैंड पर बिठाये उठ कर बैठ जाता है देवरानी की हसी अब वासना में बदलने लगती है उसके ाअखे में भी बलदेव का हिलता हुआ हुल्लाबी लौड़ा बस गया था
बलदेव अपने माँ को गॉड में बैठाये
"महाराज छोड़िये न आप थके है आज कल कर लीजिएयेगा"
बलदेव अपने माँ क नाक का नाथ खोलते हुए एक तरफ रखता है देवरानी की गांड पे लौड़ा चुभ रहा था फिर बलदेव अपने माँ क हाव् जेवर को उतार देता है
"जिसकी इतनी छुडासी पत्नी हो वो भला बिना चोदे कैसे सो सकता है अब बास जल्दी से माँ बन जाओ मेरे बचे को जन्म दे कर"
बलदेव अब अपने माँ को पटक कर अपना लौड़ा अपने माँ क छूट पर रगड़ने लगता है
Devrani:Ab मई खुद कैसे गर्भवती हो सकती हु
baldev:Aaj तो आपके ससुर मेरे पिता ने भी आपको आशीर्वाद दे दिए है फिर तो आपको मई शीघ्र हे पेट से कर दूंगा
Devrani:Baldev...
baldev:ji रानी माँ..
devrani:tum देखे न दिन में कैसे सब मुझे कोस रहे थे जैसे मई नहीं चाहती इस राज परिवार को वंश देना
baldev
devrani:Iska अर्थ है क वो सही कहे?
Baldev:han हम सब यही चाहते है क हमारा वंश आगे बढे
देवरानी गुस्से से बलदेव को देखती है और अपनी ताक़त लगा कर अपने बेटे क चुंगल से निगल कर अपने छूट पर लगे बलदेव क लैंड क वीर्य को पोछते हुए एक जांघिए निकल कर पहन लेती है बलदेव का लौड़ा ये देख कर झुक जाता है
baldev:Kya हुआ देवरानी मैंने क्या गलत कह दिया
Devrani:aap उनका साथ दे रहे है जो मुझे ताना मारते है बांझपन का
Baldev:aao रानी लौड़े पे बैठो चुदाई तो कर लेने दो
devrani:unse हे कीजिये जिनकी बाते सही लगती है
Baldev:ary यार इन स्त्रीयो को समझ पाना असंभव hai,devrani को संभालना तो दांतो टेल चने चबाने वाली बात है
devrani:Q क्या हुआ विवाह से पहले तो शेर की तरह दहाड़ते थे क मई संभल लूंगा ये वो अब क्या हुआ
देवरानी को ये बात ज़्यादा बुरी लग जाती है
देवरानी ये कह कर अपने लम्बे घने बाल को बांधते हुए जाने लगती hai,Devrani का बड़ा गांड कभी दये कभी बाये मस्ती में हिल रहा था
देवरानी की गांड को आपस में टकराता देख बलदेव आहे भरते हुए अपने लौड़े को सहलाता है और दौड़ कर जा रही देवरानी को पकड़ लेता है पीछे से और अपना खड़ा लैंड गांड की दरार में घुसा देता है
"राआणि माआ मई तो ये नहीं कहा क आप गलत हो "
"छोड़िये मुझे जाइये उनके पास हे जो मुझे ताने देते है क्यू आये मेरे पास "देवरानी अपना मुँह बनाते हुए अपने बेटे से नाराज़ होते हुए कहती है जिस पर बलदेव मुस्कुराते हुए अपना कुरता निकल देता है और अपने गदरायी माँ को पुरे बहो में कास कर अपना लैंड देवरानी की गांड की दरार में मरता है
"रआआआआई मा अब एक पति अपने पत्नी क गांड क पीछे नहीं आएगा तो किसके पीछे आयेगा वैसे आपकी गांड दिन प्रति दिन विशाल होते जा रहे hai,kshama कर दीजिये चलिए बिस्तर में "
क्षमा मांगते हुए अपने बेटे को देख कर देवरानी का डिल पिघल जाता है और वो हल्का महसूस कर रही थी
"काम से काम महाराज आपने अपने भूल को स्वीकार तो क्या "
"अब रानी माँ मेरा लौड़ा आपके छूट में जाने क लये मारा जा रहा है आप की छूट क लये तो किसी की हत्या भी करना उचित होगा मेरे लये इस समय"
"आप गुस्से में आकर बोल रहे थे क मुझे संभालना आसान नहीं क्या मई आपसे रोज़ लड़ती हु "
"नहीं देवरानी बास गुस्से में निकल गया मेरे मुँह से अब क्षमा कर भी दीजिये "
"मई भरी लगने लगी हु क्या बताइये?"
Baldev:Raaani मा अआप भरी कभी नहीं मेरे सपनो की रानी हो तुम अआप्के हर नखरे मई नहीं सहूंगा तो कौन सहेगा..
देवरानी ये सुन कर मुस्कुराने लगती है और अपनी गांड को बलदेव क लौड़े पर लगते हुए बलदेव क लैंड पर घिसने लगती है
"छोड़ने दीजिये अब देखिये मेरा लैंड आशु बहाये जा रहा है वैसे आप क गांड का दर्द ठीक हुआ या नहीं"
"दुपहर क बाद दर्द और बढ़ गया था पर अब ठीक है"
"अब तो मान गई हो न छोड़ने क लये तो चलो नहीं तो खड़े खड़े पेल दूंगा ाः राआणि माँ"
बलदेव अपने हुल्लाबी लैंड को रगड़ते हुए देवरानी को बाहो में समेत लेता है और अपने हाथ आगे बढ़ा कर बड़े दूध को दोनों हाथ से पकड़ मर्दन करने लगता है
"आआह हूउउ ओह्ह्ह्ह राहाजा छोड़ लीजिये खड़े खड़े मन किसने क्या hai"baldev क लैंड पर देवरानी अपना गांड रगड़ते हुए अपने बेटे क जांघो को सहलाने लगती है ,बलदेव समझ जाता है क देवरानी भी फिर से गरम हो गई है वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर जांघिए को निचे खींचता है और देवरानी क मांसल जांघ क निचे करता है देवरानी अपने पैरो को ढीला करते हुए अपने जांघिए को निचे ले आती है फिर पहले एक पेअर बहार निकल कर उस पेअर से दूसरे पेअर में अटकी हुई जांघिए को निकल कर फेकती hai,baldev अपना लैंड अब गांड की दरार में धसाये देवरानी क कंधो और गले को चुम रहा था चाट रहा था
"ाआअह राआणि मा तेरी छूट की प्यास से मारा जा रहा हु बुझा दे मेरी प्यास ाः"
बलदेव ये कहते हुए अपना माँ क एक पेअर को अपने हाथ में लेते हुए थोड़ा मोड़ देता है और एक एक हाथ से देवरानी क पीठ को झुकाते हुए अपने माँ क फुले हुए पावरोटी जैसी छूट को देखते हुए अपना लौड़ा छूट क मुहाने पर रगड़ता है और एक धक्के में 9 इंच का लौड़ा अंदर पूरा दाल देता है "aaaaaaaaaaaaaaaaaah raaaaaaaajaaaaaaaaaa मररररर gayeeeeeeeeee आआआह मेरे सैय्याहा"
बलदेव अपने माँ क दये पेअर को उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और अपनी पूरी ताक़त लगा कर "पछहः पाछह पहछहः फक्क्क्क फककक पकककक पक्क्क घपपप घपपपप ghapppp"devrani हर धक्के में चीख रही थी चिल्ला रही थी पर उसका बीटा तो देवरानी को एक पत्नी डिल से मान लिया था और चुदाई में हर कुछ करता जो एक पति को करना चाहिए
बलदेव अपने माँ क गले को अपने हाथ में पकड़ तेज़ गति से छूट में पेलने लगता है "आआह रआआआआज़ा ाआअह ुहममम आआआह हाआआए कितना मज़ा है तेरे लौड़े में ाआअह राजा ऐसे हे आआआआह "
बलदेव कुछ देर तक अपने माँ को इसी मुद्रा में छोड़ता रहता है देवरानी भी चीख कर अपने बेटे का उत्साह बढ़ा रही थी
"आआह रंडी ये ले मेरा लौड़ा साली तेरी छूट को छोड़ कर गर्मी झाड़ दूंगा ाः ये ले ाः कितनी पानी छोर रही है राँद तेरी छूट "
"ाआअह हाए ाआअह आए आआ आआ आआ ाः धीरे आआह आआह उफ्फफ्फ्फ़ रआआआआज़ाअ बेताआए हाआए ाः ाः आआह ाः मर्डर गयी धीरे से मेरे सैन्यआ aaaaaaaaaaah"
फककक फककक पाछह पछ की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी तभी बलदेव अपने माँ क दोनों टांगो को उठा कर अपने मजबूत बाहो में उठा लेता है और देवरानी भी अपने बेटे का साथे देते हुए बलदेव का गर्दन में अपने बहो की माला दाल देती है बलदेव अब देवरानी क शरीर को उठा कर देवरानी की बड़ी गांड को निचे मारता और लौड़ा छूट में शररररर से अंदर तक चीयर देता
"आआह मायआ आआआआह मेरी सजनी ाआअह तेरी छूट मार क मेरी थकन मिटत गई ाआअह महारानी देवराञीीीे आआह"
"ाआअह ाआअह आआह आआह राजाआआ जी ाआअह ाः आह और छोड़ो आआह ज़ोर से ाः फाआजद दो मेरी छूट aaaaaah"devrani अब अपने बेटे का साथ देते हुए गांड को लौड़े पे तेज़ी से पटकती और पूरा लौड़ा अपने छूट क भीतर ले लेती देवरानी और बलदेव क निकले रस से छूट भीग गयी थी और बलदेव आसानी से झटके मार कर अपने रानी माँ को छोड़ रहा था
बलदेव अब खड़े खड़े अपने माँ क भरी शरीर को उठाये थकने लगता है और उसके झटके धीरे हो जाते है जिसे देख देवरानी मुस्कुराते हुए बलदेव को छेरती है
"क्यू शेर हो गया ढेर"
बलदेव ये देख जोश में आकर
"अभी बताता हु रनडीईई चल झुक्क तेरी छूट की चमड़ी उधर देता हु"
बलदेव अपने माँ को पलंग पर ले जा कर पटकते हुए झुका देता है
"हाय राजा इतना जोश लगता है दिनन भर्र मेरे महाराज को मेरी छूट की याद आती रही ाआअह"
खछ से बलदेव झुकी हुई देवरानी की छूट में अपना लौड़ा पेल देता है और अपने ज़ोर से और झटको से देवरानी क पुरे शरीर को हिला क रख देता है
"आआह आह ये ले रनडीईए ाः खा मेरा लौड़ा रआआआआई माआ तेरी छूट फाड़ दूंगा ाआअह ाः ये ले"
खछ खछ फैट फैट की आवाज़ कक्षा में फ़ैल रही थी जब भी देवरानी क छूट में लैंड घुसता और देवरानी की गोल निकली हुई गांड टेबल की तरह बलदेव सिंह क कमर पर टकराती ,देवरानी का मुँह खुल गया था आखे बड़ी हो जाती है और वो हर धक्के पर अपने बेटे को शाबाशी देते हुए चुद रही थी
"आआह आआआआआ आआआआह जी रआआआजाएआ जी ऐसे हे छोड़िये इस निगोड़ी छूट को आआह चूस लीजिये इसका रसससससस आआआह ओह साहाजाआआआं आआआह आआह"
"आआआआह रआआआई माआ तेरी छूट में कितनी तपिश है ाआअह मेरे लैंड को जकड कर राखी है आआआह कितनी कासी हुई है अब भी आआह ाः ये ले ाः रानी माँ"
बलदेव अपने माँ क हाथो को पीछे खींच कर किसी लगाम की तरह पकडे अपने माँ को घोड़ी बनाये बेतहाशा चोदे जा रहा था "ठप्प्प ठप्प्प पककककक पक्क्क छान छान की गूंज बहार तक जा रही थी बलदेव और देवरानी को ये अंदाज़ा नहीं था कोई सुन रहा है ये sab,Han कक्षा क दरवाज़ा पर कड़ी रानी षुरूश्ती देवरानी की चीख सुन रही थी और चुदाई की हर आवाज़ उसके सीने में तीर घुसने जितना दर्द दे रहा था
shurushti:man me)Kitna उछाल उछाल कर चुद रही है देवरानी और मई राजा राजपाल क रहते हुए प्यासी हु अब बलदेव का लौड़ा कितना शक्तिशाली होगा देवरानी की चीखे निकल दिया जो इतनी हटती काठी स्त्री है
अंदर चुदाई करते हुए माँ बेटे क बीच कुछ ाआवाज़ फुट पड़ती है
"महारानी देवराआणि बहु ...bahu...betaaaa बलदेव"
बलदेव और देवरानी ाः उठ की आवाज़ निकलते हुए एक दूसरे में समाये थे ठप्प ठप्प की आवाज़ षुरूश्ती की आवाज़ को दबा रही थी तभी देवरानी क कानो में षुरूश्ती की आवाज़ जाती है
"बलदेव ji..aaah ढर्रे ाः धीरे बहार कोई है ाआअह"
"महारानी कोई हो मुझे इस समय आपको छोड़ना है ाः ये ले ाः साली तेरी छूट का चटनी बना दूंगा भोसड़ा बना दूंगा छोड़ छोड़ क"
"ाः जी आआह हाय मुझे रानी षुरूश्ती की आवाज़ आई रुकिए न धीरे कीजिये ना ाआअह"
बलदेव समझते हुए अपने माँ क छूट में अपना लौड़ा धीरे धीरे अंदर बहार करते हुए सुनता है तो बहार से आवाज़ आरही थी
"बीटा बलदेव क्या आप लोग सो गए बहु रानी"
बलदेव अपना लौड़ा बहार खींच कर धीरे से अंदर अपने माँ क छूट में डालते हुए
"उफ़ देवरानी ये तो बड़ी माँ है ये अभी क्या करने आगे रात में"
"आह राज्जा आप पूछिए न ज़ोर से ाः आप तो छोड़ने लगते है तो सुनते हे नहीं दुन्या हे भूल जाते है"
"मेरी दुन्या तेरी छूट से आरम्भ हुई और तेरे छूट पर हे अंत होगा रानी माँ"
फुसफुसाते हुए अपने माँ क छूट में लैंड डाले बलदेव कहता है फिर सोचते हुए
"क्याआआआआ हुआआआ बड़ी मायआ कोई महत्त्वपूर्ण बात है ?"
shurushti:Beta बलदेव महत्त्वपूर्ण है इसलिए आना पड़ा
Baldev:ji ठीक है आहाता हु रुकिए कुछ समय
Devrani:ufff हाय अब क्या करू ऐसी अवस्था में षुरूश्ती आगे
baldev:Maa पहले तो अपने छूट से मेरा लैंड बहार निकालो हड़बड़ाओ नहीं बड़ी माँ को पता है रात में पति पत्नी क्या करते है
देवरानी आगे को हो कर पक्क से अपने छूट से लौड़ा बहार को खींचते हुए
"हाँ पर इतना समय लगेगा तो वो समझ जाएगी मेरे कपडे कहा गए उफ्फ्फ "
"देवरानी अपना समय लो साड़ी पहन लो उसके पहले अपने छूट को साफ़ कर लो रस टपक रही है"
बलदेव ये कहते हुए देवरानी क छूट पर देखता है जिसमे से गधा वीर्य बहार ाराहा था देवरानी शर्मा कर अपने साड़ी ब्लाउज देखने लगती है और बलदेव भी धोती पहनता है और अपने खड़े लौड़े को शांत करते हुए
"देवरानी हो गया तो खोलू"
धीरे से फुसफुसाता है
"रुकिए बिस्तर तो ठीक कर दू"
देवरानी झट्ट से अपनी जांघिए चुनरी और बलदेव का कुरता उठा कर एक ओरे रख देती है अब तक देवरानी ब्लाउज और पेटीकोट पहन लेती है साड़ी बांधते हुए
"अब खोलिये बलदेव जी"
देवरानी अब अपने बेटे को हुक्म देती है क उसके छूट चुदाई क सुराग ख़त्म कर दिए उसने बलदेव अस्वस्थ हो जाता है और जा जार दरवाज़ा खोता है
Baldev:aaaiye बड़ी माँ..
षुरूश्ती मुस्कुराते हुए अपने सौतेले बेटे को देखती है जो अपनी सगी माँ को कुछ समय पहले छोड़ रहा था और वो खुद सब सुन रही थी
shurushti:Kya हुआ बीटा सो गए थे क्या क्षमा करना इतने देर रात जगा दिया
Baldev:ary नहीं नहीं बड़ी मा क्षमा की क्या बात वो बास नीड आगे थी आइये न अंदर
षुरूश्ती देखती है बलदेव सिर्फ धोती में है उसका चौड़ा सीना और गले पर हल्का पसीना छूट रहा था
shurushti:man me)Tum तो अपने माँ की सेवा कर रहे थे उसके शरीर की गर्मी बुझा रहे थे इतनी बुद्धू नहीं हु पर क्या करू तुम दोनों को मई अपना बीटा और बहु मानी हु
षुरूश्ती अंदर आते हुए
"बलदेव सेनापति सोमनाथ आया था और उनके साथ तुम्हारे पिता जी गए है"
Baldev:Aisa क्या घटित हो गया बड़ी माँ क पिता जी महाराज को जाना पड़ा
Shurushti:Aapke पिता जी महाराज ने कहा है आपको बता दे क राज महल में घुशपैठि होने की संभावना है
बलदेव हैरत करते हुए अपने बड़ी माँ या सौतेली माँ को देखता है उसका लैंड जो सर उठाये फैन फ़ना रहा था
Baldev:Ho न हो युधा हारने क बाद दिल्ली का बादशाह शाहज़ेब हमारे विरुद्धा कोई योजना बना रहा हो .मई आता हु देवरानी
बलदेव पलट कर अपने माँ को देखता है जो अब भी अपने साड़ी पहन रही थी देवरानी सब सुन रही थी वो बास हाँ में इशारा करती है और बलदेव अपने माँ की आज्ञा पाकर फ़ौरन अपनी कुरता पहन कर अपने तलवार उठता है और जूती पहन कर कक्षा से बहार चला जाता है
षुरूश्ती देखती है देवरानी साड़ी पहन रही थी वो धीरे से उसके पास जाती hai,shurushti बिस्तर पर देखती है चुडिओ क टूटे हुए टुकड़े दिखाई देते है वही पास पलंग क देवरानी क नाथ हार और भी कई गहने रखे थे और पुरे कक्षा में वीर्य की चुदाई रस की मादक सुगंध आरही थी
Shurushti:maharani आराम से
Devrani:aaaiye सासु माँ baithiye..Ye बादशाह शाहज़ेब अवश्य हमसे युधा चाहता है
षुरूश्ती देवरानी क खुले बाल मोठे बड़े वक्ष और बहार को निकली हुई गांड देख समझ जाती है क देवरानी खूब चुद रही है आज कल
shurushti:Bahu रानी शाहज़ेब क युधा का तो पता नहीं परन्तु यहाँ युधा हो रहा था प्रतीत होता है
देवरानी मुस्कुराते हुए अपने साड़ी को मोड़ कर अपने छूट जो भीगी हुई थी बेटे क वीर्य से अपने कोचा बना कर अंदर डालती है तभी षुरूश्ती फिर से पूछती है "लगता है कार्यक्रम शुरू हो चूका था मई बंधा बन गई" ये सुन कर देवरानी अपने साड़ी का पल्लू कर अपने सौतन बानी सांस को देख मुस्कुराते हुए "नहीं नहीं सासु माँ wo..ab आपके सामने अस्त व्यस्त वस्त्र में आना एक बहु को शोभा तो नहीं देता "
Devrani:man me)kahi ये मेरे और बलदेव की चुदाई की चीखे सुन तो नहीं ली उफ्फ्फ इसको भी अभी हे आना था
shurushti:Bahu रानी अब ये मत कहिये ये बिस्तर का हाल इनपर टूटी चुड़िआ आपके गहने जो उतरे हुए है सब और अभी साड़ी पहनी जब क मई कितने देर बहार कड़ी थी ..ये न कहना ये सब सामान्य है
देवरानी बुरी तरह शर्मा जाती है और उसके आखो में वो लज्जा का भाव आजाता है अब शर्माए कैसे नहीं अपने बेटे से छोड़ने क बाद अगर कोई बहाना बनाये क नहीं वो चुद नहीं रही थी
devrani:Woo वो बस्स्स ..
shurushti:Bahu रानी मई भी एक स्त्री हु मुझे पता है जब दो प्रेमी जोड़े को दरवाज़ा खोलने में समय लगता है तो वो किस अवस्था में होते है
devrani:Ji वो अब उनके पेअर दबा रही रही थी तो चुनरी खोल दी थी अब कक्षा में गर्मी लगती है तो पेटीकोट में हे सोती हु
shurushti:Haha बहु रानी आप पेटीकोट में सोती हो जाड़े क दिन में बहुत गर्मी है ..कुछ काम नहीं क्या मेरे बेटे ने?
devrani:shurushti दीदी ..आप तो जानती है न वो नहीं मानते
देवरानी अब अपना मुँह बना कर षुरूश्ती को शिकायत करते हुए कहते है
shurushti
देवरानी क होठ पर मुस्कान फ़ैल जाता है और वो सोचते हुए
"जी आता है मुझे भी मज़ा"
shurushti:to फिर क्या है जीओ अपने बेटे संग भुला दो जीवन क dukh..waise बहुत गदरा गई हो बलदेव की मेहनत से
devrani:aap भी न deedi..ab पति है मेरे तो म्हणत किसपे करेंगे
shurushti:achha भूल गई मेरा बीटा बलदेव तुम्हारा सागा बीटा है और मेरा सौतेला
Devrani:han भूल गई अब मुझे केवल बलदेव पति क रूप में चाहिए बीटा आप बना कर रखिये हेहेहे
देवरानी हस्ती है
shurushti
devrani:man me)Mujhe पता है षुरूश्ती तू चाहे मुँह से कुछ भी बोल पर तू अंदर से जलती है मेरे और बलदेव का प्यार देख
devrani:dhanywad दीदी मेरा और बलदेव जी का साथ देने क लये आपका साथ नहीं होता तो मई आज अपने बेटे की पत्नी नहीं बन पाती
shurushti:bass अब हमे कुछ नहीं चाहिए तुम दोनों से बास हमारा राज परिवार बढ़ा दो
devrani:deedi बुरा नहीं मानिये पर राजमाता जीविका आज कल अनाप शनाप बोल देती है अब बचा देना भगवन क हाथ में है
shurushti:Ary देवरानी वो बूढी हुई वो चाहती है अपने वंश को बढ़ता देख ले जीते जी बुरा न माना करो और हाँ तुम मुझे दीदी नहीं सासु माँ हे बोलै करो
devrani:Bolti तो हु पर अकेले में दीदी तो बोल सकती हु न अब जीवन भर तो दीदी हे बोली आपको
shurushti:theek है मई जाती हु विश्राम कीजिये आप महारानी देवरानी थक गई होंगी आप
षुरूश्ती ये कह कर आँख मारती है और देवरानी अपना मुँह फूलते हुए "डीईएडी हां अआप भी na"Shurushti बहार चली जाती है और देवरानी बिस्तर पर पेट क बल लेती जाती है "आआह मेरा छूट अब भी पानी छोर रहा है अब पता नहीं बलदेव कब आएंगे मेरी छूट की प्यास बुझाने ाआजाओ जल्दी सैया जी बीटा जी ाः मेरे पति देव ji"baldev का नाम ले कर देवरानी अपने छूट को बिस्तर पर रगड़ती है...
तो बे कॉन्टिनोएड...