Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 20 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 180

गहतराष्ट्रा

देवरानी स्नान करती है और अपने वस्त्र निकल कर देखते हुए सोचने लगती है क क्या पहने पर कुछ सोचते हुए मुस्कुराती है और वस्त्र अंदर रख कर संदूक बंद कर देती है ,खिड़की से आरही लाल रंग की सूर्य की किरणे से अंदाज़ा लग जाता है महारानी देवरानी को क अब महाराज बलदेव सिंह महल वापस आजायेंगे और ये सोच कर क महल आकर बलदेव उसे छोड़ेंगे देवरानी क होठो पर मुस्कान फ़ैल जाती है क्यू क आअज का दिन वो कितना खुल कर अपने बेटे क प्रतीक्षा कर रही थी परन्तु वो एक दिन था जब देवरानी किसी पुरुष से अवैध सम्बन्ध बनाने की कमला की बात से चिढ जाती थी परन्तु आज देवरानी बेजिझक अपने बेटे का राह देख रही थी क वो कब आये और उसके शरीर की आएग बुझाये आज दुपहर में जाम कर गांड मरवाई थी पर छूट की चिंगारी को बलदेव ने हवा दे कर चला गया था

देवरानी वही कड़ी अपने राज्य गहतराष्ट्रा को देखते हुए सूर्य को देख सोचने लगती है

devrani:man me)Mera जीवन इतना बदल जाएगा सोची नहीं थी ,कभी सिंहासन पर बैठने क लये तरसती थी जब लोग षुरूश्ती को महारानी कहते और मुझे केवल रानी कहते तो मेरे शरीर में लगता मानव कोई सुई चुभा दिया आज वही षुरूश्ती मुझे महारानी देवरानी कह कर सम्बोधित करती है और मैं उसे रानी कह कर समय चक्र ऐसा घुमा क जिस पति प्रेम क लये जीवन भर तरसी वो भी प्राप्त हो गया और बलदेव जी क रूप में एक शक्तिशाली और पागल प्रेमी पति मिला जो मुझे अपने प्राण से अधिक प्रेम करते hai,Ye भगवन की हे तो कृपा है क इस दुखिया क आंसू पॉच कर जीवन स्वर्ग बना dya..Haay कितना भोला और सज्जन पुरुष है मेरे पति बलदेव ,मेरी बात मानने क लये एक पेअर पे खड़े रहते hai,mai जितनी आभारी बलदेव की हु उतना हे गहतराष्ट्रा क प्रजा का जिसने मेरे ख़ुशी क लये मेरा और बलदेव जी जो मेरे बेटे भी है उनका विवाह को मान्यता दे di..haay बलदेव जी आपका नाम लेते हे शरीर में शुशुरी सी होने लगती है ाः इस होली आपके संग पहली होली होगी पति क रूप में..

देवरानी अपने दोनों टांगो से अपने छूट को दबाया पलंग पर लेट जाती है तकिया पकड़ कर

"है बलदेव महाराज कब आएंगे आप मेरी योनि रास छोर रही है आपके लिंग महाराज की यद् में आह हाय आपका लौड़ा कितना कठोर और बलशाली है आह है"

देवरानी बिस्तर पर अलाट पलट कर अपने बेटे बलदेव को याद कर रही थी ऐसे हे अँधेरा छ जाता है और गहतराष्ट्रा दियो से जगमाने लगता है और दिया अपने प्रकाश से गहतराष्ट्रा क अँधेरा को छटने की असफल कोशिश कर रहा tha,Baldev सिंह घोड़े पर बैठ महल क दुवार पर आते है तो सैनिक महाराज की जय जय कर करते है बलदेव अपने घोड़े को धीमे करते हुए महल की ओरे आगे बढ़ता है और महल क पहले हे अतिथि गृह क पास उसे आग तापते हुए वैध जी मिल जाते है बलदेव मुस्कुराते हुए निचे उतरता है

Baldev:sainiko मेरे घोड़े को ले जाओ

वैध जी बलदेव को देख खड़ा हो जाता है और अपने हाथ जोड़ कर परनाम करते हुए

"महाराज बलदेव सिंह जी सब कुशल तो है ?"

Baldev:Vaidh जी हम ठीक hai..Ye क्या आप आग तप रहे है

Vaidh:kshama महाराज अब वन में रहता था तो आदत है आग तपने की

Baldev:Aapko सरदी अधिक लग रही है प्रतीत होता है

vaidh:maharaj अब वृद्धा अव्वस्था मई सर्दी तो लगेगी हे वैसे आपको तो नहीं लग रही है न ?

Baldev:Nahi..Mai समझा नहीं

बलदेव वैध क चेहरे को देख रहा था जो इशारे से पूछना छह रहा था

vaidh:Maharaj यदि सर्दी लगे तो बास कह दिजीयाग आपको ऐसी औषधि देंगे क..

बलदेव वैध की बात सुन कर समझ जाता है क वो किस औसधि की बात कर रहा है

Baldev:Vaidh जी अब तक तो आपका दिया हुआ जड़ी बूटी कार्य कर रहा है

vaidh:Maharaj मैंने आपको शक्ति बूटी दिया है जिससे पुरुष की शक्ति एक घोड़े की तरह बढ़ जाती है और आप तो पहले हे घोड़े से शक्ति रखते थे आप पर तो और अधिक असरदार होगा

baldev:Vaidh जी.. हम संतुष्ट है अपने वैवाहिक जीवन से

vaidh:Ji महाराज वो तो महारानी देवरानी की हसी सुन कर हे लगता है क वो कितना खुश है

बलदेव ये सुन कर हल्का गुस्सा सा होते हुए क कैसे वैध कह दिया क वो चुदाई से खुश है फिर सोचता है

baldev:hasi सुन कर?

baldev:Vaidh जी आप क्या कह रहे है हसी सुन कर कैसे ?

Vaidh:maharaj ..महारानी तो घूँघट कए रहती है किसी पुरुष क सामने कहा अपना चेहरा खोलती है तो महल में जाना होता है तो केवल हसी सुन पता हु जिस से मई अनुमान लगा लिया क वो खुश hai..kshama कीजिये महाराज आपको बुरा लगा तो

baldev:nahi nahi..vaidh जी

vaidh:maharaj आप भाग्यशाली है जो इतनी पतिव्रता पत्नी मिली है आपको महारानी देवरानी गहतराष्ट्रवासिओ में बहुत काम समय में अपना पैठ बना उनका आदर सम्मान हर कोई करता है क्या बचा क्या बूढ़ा

Baldev:Theek है ठीक है मई थक गया हु विश्राम कीजिये आप

vaidh:Jo आज्ञा महाराज

वैध हाथ जोड़े खड़ा होता है महाराज बलदेव मुस्कुराते हुए जाने लगते है और वैध फिर से अपने आग क पास बैठ कर फूकते हुए

Vaidh:ab हम यहाँ बैठे आग सुलगा रहे है महाराज को अंदर आग सुलगी हुई मिलेगी आप का तो महारानी क गद्दे पर हे विश्राम होगा

वैध जी ये कहते हुए आगे पीछे देखते है क कही कोई सुन तो नहीं लिया फिर किसी को न पाकर फिर से अपने हाथ को आगे बढ़ाये आग तापने लगते है

महाराज बलदेव चहल कदमी करते हुए महल क पीछे बने राज घाट पर जाते है और स्नान करते है और वस्त्र बदल कर अपने तलवार को अपने मियां में खींच कर रखते हुए

"ाः आअज बहुत थक्क गए ये राज पात संभालना राज्य की सीमा की देख रेख करना सिपाहीओं को अभ्यास करवाना इतना आसान nahi..maharaj होना किसी राज्य का इतना सरल कार्य nahi..jata हु महारानी देवरानी भी राह देख रही होगी अभी एक और कर्त्तव्य है मेरा देवरानी को पति प्रेम देने का"

ये सोचते हुए महाराज बलदेव अपने मुख्या महल की ओरे जाते है दरवाज़े पैर दो सैनिक खड़े थे मुख्या महल क अंदर आते हे षुरूश्ती की नज़र पड़ती है

shurushti:Maharaj आज इतनी देरी से

Baldev:Ji बड़ी माँ

shurushti:aapka भोजन लगवा दू बीटा

baldev:nahi बड़ी माँ ऊपर भेज दीजिये मई थका हु

shurushti:Han ऊपर मैंने भेज दी थी वो महारानी भी ऊपर हे है दुपहर से अपने कक्षा में वो उनके कमर में दर्द था

बलदेव का दिमाग तेज़ी से सोचता है क वो दुपहर में तो ताब्यात से देवरानी की गांड मरी थी इसलिए वो नहीं आई निचे बलदेव क आँख बड़े हो जाते है जिसे षुरूश्ती समझ जाती है और मुस्कुराते हुए अपने बेटे

Shurushti:Beta...Bahu से थोड़ा प्रेम से हे कही भागी थोड़ी जा रही है..

षुरूश्ती ये कह कर कुटिल मुस्कान देती है जिसे देख बलदेव शर्मा जाता है

baldev:Ji बड़ी माँ अवश्य मई ध्यान रखूँगा

shurushti:theek है जाओ बीटा बहु प्रतीक्षा कर रही होगी

बलदेव ये सुनते हे तेज़ी से अपने कदम सीडीओ की ओरे बढ़ा देता है और चलते हुए ऊपर जाने लगता है

Shurushti:man me)Kitna बेचैन रहता है अपने माँ को छोड़ने क लये बलदेव ,देवरानी ने सच में अपने सूझ बुझ से सब प् लिया

तभी षुरूश्ती को राजा राज पल की आवाज़ सुनाई देती है

"जी आए महाराज"

Shurushti:man me)Rajpal हे वो पुरुष है जो अपने पत्नी को अपने बेटे को सौंप कर भी एक हे महल में रह रहा है किसी और पुरुष से नहीं होता ये ..अब गलती भी क्या है उसने

बलदेव सीडीओ से चढ़ते हुए ऊपर पहुँचता है और अपने माँ से मिलने क लये सीधा अपने कक्षा की तरफ जाता है और आवाज़ लगता है

"महारानी देवरानी ाजी दरवाज़ा खोलिये"

महारानी लेती थी वो उठ कर बैठ जाती है उसके बड़े दोनों वक्ष उछलने लगते है जैसे सुन लिए हो क उसके मालिक आगये है उसे दबाने क लये महारानी मुस्का रही थी क्यू क उसका साजन उसका पति बलदेव आगया था और एक माँ क रूप में नहीं एक पत्नी क रूप में देवरानी अपने बेटे का स्वागत करते हुए कहती है

"आए ाआआजिये न जी अति शीघ्र अआप्के याद में मरी जा रही है मेरी जवानी ..दरवाज़ा खुला है जी"

ये सुनते हे बलदेव क धोती में हे लैंड फैन उठा कर खड़ा होने लगता है बलदेव मुस्कुराते हुए दरवाज़ा धकेलता है और सामने का नज़ारा देख उसका मुँह खुला रह जाता hai,Devrani अंदर अपने बेटे क इंतज़ार में नग्न थी उसके सर पर केवल एक कपडा था



बलदेव देखते हे अपने माँ को अपने पेअर से दरवाज़ा पर लात मारता है दरवाज़ा बंद हो जाता है बलदेव देख रहा था उसकी माँ रंग की सारी को अपने सर पर राखी थी और दोनों ओरे लटके थी उसके उन्नत वक्ष दूधिया जाँघे ामान्तरण दे रही थी क "आ बैल मेरी maar"Devrani क नाक में नाथ हाथो में चुड़िआ और गले में हार था जिसे देख लग रहा था क देवरानी एक नै ब्याही दुल्हन है

बलदेव अपने माँ को देखते हुए पीछे घूमता है और दरवाज़ा की कुण्डी लगा कर अपने तलवार को निकल कर रख देता है और अपने माँ को देखते हुए

"क्या बात है भाग्यवान आज तो काम रति लग रही हो ऐसे नग्न अवस्था में दरवाज़ा तो बंद कर लेती देवरानी"

"महाराज अआप की रानी क कक्षा में वही पुरुष आने की सहस करेगा जिसे अपनी जान से प्रेम नहीं हो"

महारानी देवरानी अपने बिस्तर से उठते हुए अपने पति क पास आजाती है और झुक कर निचे पेअर को छूटे हुए

"पति देव इतना विलम्ब कर दिए आज"

"देवरानी पेअर मत छुवा करो मेरे ..वैसे मई भी तो पुरुष हे हु फिर भी आपके कक्षा में हु"

देवरानी शर्मा जाती है और चलते हुए अपने गांड मटकाये आईएनए क तरफ जाती है बलदेव अपने माँ क मटके जैसे गांड को नंगे मटकता हुआ ताड़ रहा था

"महाराज अब एक पत्नी धर्म का पालन करना हे पड़ता है न पेअर छू कर वैसे आप इस कक्षा में आने का प्रमाण पत्र ले चुके विवाह कर क मुझसे"



देवरानी अपना दर्पण देखती है फिर अपने साथ खड़े बलदेव को देखती है जो देवरानी क भरे गांड को देख रहा था देवरानी की आखो में काम वासना तैरने लगती है जिसे बलदेव देखता है और उसके पास आकर पीछे से अपने माँ को दबोच लेता है

"देवरानी आज सैनिको को अभ्यास देने क बाद मई सीमा सुरक्षा की पड़ताल करने हेतु चला गया था अन्यथा मई अपने जोरू को समय पर आकर छोड़ता"

"है बड़ा समय पर आकर छोड़ते पता है मई कितने समय से प्रतीक्षा कर रही थी"

देवरानी और बलदेव अब अपने प्रेम प्रसंग को चुदाई का नाम दे चुके थे और बिना लज्जाये दोनों सामान्य रूप से इन शब्दों का प्रयोग करते देवरानी बलदेव से दूर होते हुए बिस्तर की तरफ जाती है

"आयु देवरानी कहा न आज राज्य भरमान में समय निकल गया नहीं तो सूर्यास्त क बाद हे आजाता बहुत थक गया हु आज"

देवरानी बिस्तर पर बैठी थी और बलदेव उसके पास आकर चलते हुए खड़ा हो जाता है देवरानी अपने बेटे का चेहरा देख समझ जाती है क बलदेव थका हरा आया है

Devrani:man me)Ek तो ये थका हरा आये और मई इन्हे कोस रही हु बेचारे दिन में तो मेरी गांड मार कर गए हे थे थकेंगे हे नहीं तो और kya..abhi इनकी आयु तो 18 वर्ष हे है

Devrani:aap इधर आइये

देवरानी नाराज़ होते हुए अपने बेटे का हाथ खींचती है और बिस्तर पर साथ ले कर लेट जाती है अपने एक पेअर को बलदेव क टांगो क बीच रख कर अपने सर को बलदेव क कंधे पर रख अपने हाथ से बलदेव क छाती को सहलाते हुए अपने बेटे क आखो में देखती है

"आप सेनापति को भेज देते तो आप थकते नहीं देखिये आपके दोनों नेत्र में लालिमा आगे है "

बलदेव नंगी माँ जो गदरायी हुई भरपूर माल लग रही थी थी केवल सर क पल्लू में वो उसे अपने बाहो में खींचते हुए

"देवरानी राज्य का महाराज हु मई मेरा कर्त्तव्य है गहतराष्ट्रा क सुरक्षा का ध्यान dena.uhmmmmaaaa आआह क्या गाल है सेब जैसे "

बलदेव अपने मा क गाल को चूमते हुए चाट लेता है

"आह छोड़िये ना"

"क्यू छोरु आप तो नंगी हो कर मुझसे छोड़ने क लये तैनात थी हाँ आओ ुहम्म्म्माआअह गलपपपपप गलपपपप गलपपपपप गलप्प ाआअह hmmmmmmmmmhaaaaaaaaaah"baldev देवरानी क होठो को चूमते हुए चूस लेता है देवरानी अपने होठ छुड़ाते हुए

"आप थके हुए है और फिर भी विश्राम नहीं करना चाहते"

"अब राज्य का कर्त्तव्य तो पूरा कर लिया रात में अपने पत्नी को छोड़ कर खुश तो कर दू ये तो सबसे महत्वपूर्ण कर्त्तव्य है"

"महाराज जब आप दिन में मेरी चुदाई कर लेते है तो उसके बाद परिश्रम मत कीजिये अन्यथा आप का स्वस्थ्य ख़राब हो जायेगा"

"देवरानी जी कुछ नहीं होगा आप बास छूट खोलिये मेरा शेर आपके छूट को फंदे क लये सर उठाये हुंकार भर्र रहा है"

देवरानी बात नहीं सुनती अपने बेटे का उठ कर बैठ जाती है और उठ कर जाते हुए

"महाराज अब आप मेरी बात मानिये हाँ जो पुरुष अपने पत्नी की बात नहीं मन वो असफल हे हुआ है"

देवरानी अपने गांड को मटकाये जाती है और हाथ में तेल की मालसी ला कर "खास जाइये उधर आपके पेअर दबा दू maharaj"baldev क सामने माँ क लटकती चुचिअ थी

"देवरानी ये क्या कर रही हो तुम कोई दासी नहीं "

"बलदेव जी मुझे ज्ञात है आप कभी अपने मुँह से नहीं कहेंगे अपनी सेवा करने क लये पर ये तो मेरा धर्म है ,इतना प्रेम जो करते है आप"

देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए अपने बेटे क प्यार को अहसास करते हुए

"चलिए पेअर सीधा कीजिये"

देवरानी अपने हाथ में तेल लगा कर अपने बेटे पिनिडिलिओ में तेल लगाने लगती है और बलदेव अपनी आखे बंद कर लेता है

Baldev:man me)Kaise न करू तुम्हे प्यार देवरानी तुम इतनी अच्छी जो हो ऐसी पत्नी हर किसी क भाग्य में कहा

देवरानी अपने बेटे क धोती को ऊपर खिसका कर तेल हल्का सा लगा कर दबाने लगती है और बलदेव अपने आँख बंद कए अपने माँ से पेअर दबवा रहा था

devrani:Suniye न ये धोती उतर दीजिये न तेल लग जायेगा

baldev:ab धोती आपका है और अंदर का शेर देखिये कही काटना ले

devrani:sher का जान ले लुंगी

देवरानी मुस्कुराते हुए अपने बेटे क धोती क बंधन को खींचती है और धोती खुलते हे बलदेव आधा खड़ा लैंड ऊपर सर उठाये हिलने लगता है

Baldev:Jaan ले लीजिये देवरानी मेरे लैंड की पर अपने छूट में इसके सर को दबा क फांसी दे दीजिये

देवरानी मुस्कुराते हुए अब जांघो से ले कर निचे तक बलदेव क पेअर मालिश करने लगती है

"अब कैसा लग रहा है जी दर्द काम हुआ"

"मैंने कब बोलै दर्द है जी"

"आपको बोलने की आवश्यकता hai?aapko दर्द हो तो मुझे महसूस होता है बलदेव जी "

"रानी माँ तुम सचमुच एक अप्सरा सी हो जो मेरे जीवन में आकर मेरा जीना आसान कर दी"

देवरानी अपनी तारीफ सुन कर बलदेव की और अचे से पेअर दबाने लगती है कुछ देर तक ऐसे हे अपने बेटे क पेअर दबाने क बाद

"देवरानी बास अब रहा नहीं जाता अब आपकी सेवा कर दू"

बलदेव अपने माँ को खींच कर अपने ऊपर ले कर जकड़ता है देवरानी क दोनों गोलाकार लिए ख़रबूज़े से वक्ष बलदेव की छाती में धस्स जाते है

"ाः हेहेहे छोड़िये न आह हाय छोड़िये जी"

बलदेव देवरानी क कमर में हाथ दाल कर अपने माँ क बड़े मटके जैसे गांड को मारते हुए

"रानी मा आप आज इतना सज्ज धज्ज कर इसलिए तो बैठी थी क मई आ कर आपकी जैम कर चुदाई करू अब जो थकवार थी वो तुमने निकल दी अब तेरी छूट का पानी मई निकलूंगा देवरानी"

बलदेव देवरानी को मसलते हुए जकड लेता है और गॉड में अपने लैंड पर बिठाये उठ कर बैठ जाता है देवरानी की हसी अब वासना में बदलने लगती है उसके ाअखे में भी बलदेव का हिलता हुआ हुल्लाबी लौड़ा बस गया था

बलदेव अपने माँ को गॉड में बैठाये

"महाराज छोड़िये न आप थके है आज कल कर लीजिएयेगा"

बलदेव अपने माँ क नाक का नाथ खोलते हुए एक तरफ रखता है देवरानी की गांड पे लौड़ा चुभ रहा था फिर बलदेव अपने माँ क हाव् जेवर को उतार देता है

"जिसकी इतनी छुडासी पत्नी हो वो भला बिना चोदे कैसे सो सकता है अब बास जल्दी से माँ बन जाओ मेरे बचे को जन्म दे कर"

बलदेव अब अपने माँ को पटक कर अपना लौड़ा अपने माँ क छूट पर रगड़ने लगता है

Devrani:Ab मई खुद कैसे गर्भवती हो सकती हु

baldev:Aaj तो आपके ससुर मेरे पिता ने भी आपको आशीर्वाद दे दिए है फिर तो आपको मई शीघ्र हे पेट से कर दूंगा

Devrani:Baldev...

baldev:ji रानी माँ..

devrani:tum देखे न दिन में कैसे सब मुझे कोस रहे थे जैसे मई नहीं चाहती इस राज परिवार को वंश देना

baldev:Patni जी अब वो आपको बहु समझते है तो आपको नहीं कहेंगे तो किसको कहेंगे

devrani:Iska अर्थ है क वो सही कहे?

Baldev:han हम सब यही चाहते है क हमारा वंश आगे बढे

देवरानी गुस्से से बलदेव को देखती है और अपनी ताक़त लगा कर अपने बेटे क चुंगल से निगल कर अपने छूट पर लगे बलदेव क लैंड क वीर्य को पोछते हुए एक जांघिए निकल कर पहन लेती है बलदेव का लौड़ा ये देख कर झुक जाता है

baldev:Kya हुआ देवरानी मैंने क्या गलत कह दिया

Devrani:aap उनका साथ दे रहे है जो मुझे ताना मारते है बांझपन का

Baldev:aao रानी लौड़े पे बैठो चुदाई तो कर लेने दो

devrani:unse हे कीजिये जिनकी बाते सही लगती है

Baldev:ary यार इन स्त्रीयो को समझ पाना असंभव hai,devrani को संभालना तो दांतो टेल चने चबाने वाली बात है

devrani:Q क्या हुआ विवाह से पहले तो शेर की तरह दहाड़ते थे क मई संभल लूंगा ये वो अब क्या हुआ

देवरानी को ये बात ज़्यादा बुरी लग जाती है

देवरानी ये कह कर अपने लम्बे घने बाल को बांधते हुए जाने लगती hai,Devrani का बड़ा गांड कभी दये कभी बाये मस्ती में हिल रहा था



देवरानी की गांड को आपस में टकराता देख बलदेव आहे भरते हुए अपने लौड़े को सहलाता है और दौड़ कर जा रही देवरानी को पकड़ लेता है पीछे से और अपना खड़ा लैंड गांड की दरार में घुसा देता है

"राआणि माआ मई तो ये नहीं कहा क आप गलत हो "

"छोड़िये मुझे जाइये उनके पास हे जो मुझे ताने देते है क्यू आये मेरे पास "देवरानी अपना मुँह बनाते हुए अपने बेटे से नाराज़ होते हुए कहती है जिस पर बलदेव मुस्कुराते हुए अपना कुरता निकल देता है और अपने गदरायी माँ को पुरे बहो में कास कर अपना लैंड देवरानी की गांड की दरार में मरता है

"रआआआआई मा अब एक पति अपने पत्नी क गांड क पीछे नहीं आएगा तो किसके पीछे आयेगा वैसे आपकी गांड दिन प्रति दिन विशाल होते जा रहे hai,kshama कर दीजिये चलिए बिस्तर में "

क्षमा मांगते हुए अपने बेटे को देख कर देवरानी का डिल पिघल जाता है और वो हल्का महसूस कर रही थी

"काम से काम महाराज आपने अपने भूल को स्वीकार तो क्या "

"अब रानी माँ मेरा लौड़ा आपके छूट में जाने क लये मारा जा रहा है आप की छूट क लये तो किसी की हत्या भी करना उचित होगा मेरे लये इस समय"

"आप गुस्से में आकर बोल रहे थे क मुझे संभालना आसान नहीं क्या मई आपसे रोज़ लड़ती हु "

"नहीं देवरानी बास गुस्से में निकल गया मेरे मुँह से अब क्षमा कर भी दीजिये "

"मई भरी लगने लगी हु क्या बताइये?"

Baldev:Raaani मा अआप भरी कभी नहीं मेरे सपनो की रानी हो तुम अआप्के हर नखरे मई नहीं सहूंगा तो कौन सहेगा..

देवरानी ये सुन कर मुस्कुराने लगती है और अपनी गांड को बलदेव क लौड़े पर लगते हुए बलदेव क लैंड पर घिसने लगती है

"छोड़ने दीजिये अब देखिये मेरा लैंड आशु बहाये जा रहा है वैसे आप क गांड का दर्द ठीक हुआ या नहीं"

"दुपहर क बाद दर्द और बढ़ गया था पर अब ठीक है"

"अब तो मान गई हो न छोड़ने क लये तो चलो नहीं तो खड़े खड़े पेल दूंगा ाः राआणि माँ"

बलदेव अपने हुल्लाबी लैंड को रगड़ते हुए देवरानी को बाहो में समेत लेता है और अपने हाथ आगे बढ़ा कर बड़े दूध को दोनों हाथ से पकड़ मर्दन करने लगता है

"आआह हूउउ ओह्ह्ह्ह राहाजा छोड़ लीजिये खड़े खड़े मन किसने क्या hai"baldev क लैंड पर देवरानी अपना गांड रगड़ते हुए अपने बेटे क जांघो को सहलाने लगती है ,बलदेव समझ जाता है क देवरानी भी फिर से गरम हो गई है वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर जांघिए को निचे खींचता है और देवरानी क मांसल जांघ क निचे करता है देवरानी अपने पैरो को ढीला करते हुए अपने जांघिए को निचे ले आती है फिर पहले एक पेअर बहार निकल कर उस पेअर से दूसरे पेअर में अटकी हुई जांघिए को निकल कर फेकती hai,baldev अपना लैंड अब गांड की दरार में धसाये देवरानी क कंधो और गले को चुम रहा था चाट रहा था

"ाआअह राआणि मा तेरी छूट की प्यास से मारा जा रहा हु बुझा दे मेरी प्यास ाः"

बलदेव ये कहते हुए अपना माँ क एक पेअर को अपने हाथ में लेते हुए थोड़ा मोड़ देता है और एक एक हाथ से देवरानी क पीठ को झुकाते हुए अपने माँ क फुले हुए पावरोटी जैसी छूट को देखते हुए अपना लौड़ा छूट क मुहाने पर रगड़ता है और एक धक्के में 9 इंच का लौड़ा अंदर पूरा दाल देता है "aaaaaaaaaaaaaaaaaah raaaaaaaajaaaaaaaaaa मररररर gayeeeeeeeeee आआआह मेरे सैय्याहा"

बलदेव अपने माँ क दये पेअर को उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और अपनी पूरी ताक़त लगा कर "पछहः पाछह पहछहः फक्क्क्क फककक पकककक पक्क्क घपपप घपपपप ghapppp"devrani हर धक्के में चीख रही थी चिल्ला रही थी पर उसका बीटा तो देवरानी को एक पत्नी डिल से मान लिया था और चुदाई में हर कुछ करता जो एक पति को करना चाहिए



बलदेव अपने माँ क गले को अपने हाथ में पकड़ तेज़ गति से छूट में पेलने लगता है "आआह रआआआआज़ा ाआअह ुहममम आआआह हाआआए कितना मज़ा है तेरे लौड़े में ाआअह राजा ऐसे हे आआआआह "

बलदेव कुछ देर तक अपने माँ को इसी मुद्रा में छोड़ता रहता है देवरानी भी चीख कर अपने बेटे का उत्साह बढ़ा रही थी

"आआह रंडी ये ले मेरा लौड़ा साली तेरी छूट को छोड़ कर गर्मी झाड़ दूंगा ाः ये ले ाः कितनी पानी छोर रही है राँद तेरी छूट "

"ाआअह हाए ाआअह आए आआ आआ आआ ाः धीरे आआह आआह उफ्फफ्फ्फ़ रआआआआज़ाअ बेताआए हाआए ाः ाः आआह ाः मर्डर गयी धीरे से मेरे सैन्यआ aaaaaaaaaaah"

फककक फककक पाछह पछ की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी तभी बलदेव अपने माँ क दोनों टांगो को उठा कर अपने मजबूत बाहो में उठा लेता है और देवरानी भी अपने बेटे का साथे देते हुए बलदेव का गर्दन में अपने बहो की माला दाल देती है बलदेव अब देवरानी क शरीर को उठा कर देवरानी की बड़ी गांड को निचे मारता और लौड़ा छूट में शररररर से अंदर तक चीयर देता

"आआह मायआ आआआआह मेरी सजनी ाआअह तेरी छूट मार क मेरी थकन मिटत गई ाआअह महारानी देवराञीीीे आआह"



"ाआअह ाआअह आआह आआह राजाआआ जी ाआअह ाः आह और छोड़ो आआह ज़ोर से ाः फाआजद दो मेरी छूट aaaaaah"devrani अब अपने बेटे का साथ देते हुए गांड को लौड़े पे तेज़ी से पटकती और पूरा लौड़ा अपने छूट क भीतर ले लेती देवरानी और बलदेव क निकले रस से छूट भीग गयी थी और बलदेव आसानी से झटके मार कर अपने रानी माँ को छोड़ रहा था

बलदेव अब खड़े खड़े अपने माँ क भरी शरीर को उठाये थकने लगता है और उसके झटके धीरे हो जाते है जिसे देख देवरानी मुस्कुराते हुए बलदेव को छेरती है

"क्यू शेर हो गया ढेर"

बलदेव ये देख जोश में आकर

"अभी बताता हु रनडीईई चल झुक्क तेरी छूट की चमड़ी उधर देता हु"

बलदेव अपने माँ को पलंग पर ले जा कर पटकते हुए झुका देता है

"हाय राजा इतना जोश लगता है दिनन भर्र मेरे महाराज को मेरी छूट की याद आती रही ाआअह"

खछ से बलदेव झुकी हुई देवरानी की छूट में अपना लौड़ा पेल देता है और अपने ज़ोर से और झटको से देवरानी क पुरे शरीर को हिला क रख देता है

"आआह आह ये ले रनडीईए ाः खा मेरा लौड़ा रआआआआई माआ तेरी छूट फाड़ दूंगा ाआअह ाः ये ले"

खछ खछ फैट फैट की आवाज़ कक्षा में फ़ैल रही थी जब भी देवरानी क छूट में लैंड घुसता और देवरानी की गोल निकली हुई गांड टेबल की तरह बलदेव सिंह क कमर पर टकराती ,देवरानी का मुँह खुल गया था आखे बड़ी हो जाती है और वो हर धक्के पर अपने बेटे को शाबाशी देते हुए चुद रही थी



"आआह आआआआआ आआआआह जी रआआआजाएआ जी ऐसे हे छोड़िये इस निगोड़ी छूट को आआह चूस लीजिये इसका रसससससस आआआह ओह साहाजाआआआं आआआह आआह"

"आआआआह रआआआई माआ तेरी छूट में कितनी तपिश है ाआअह मेरे लैंड को जकड कर राखी है आआआह कितनी कासी हुई है अब भी आआह ाः ये ले ाः रानी माँ"

बलदेव अपने माँ क हाथो को पीछे खींच कर किसी लगाम की तरह पकडे अपने माँ को घोड़ी बनाये बेतहाशा चोदे जा रहा था "ठप्प्प ठप्प्प पककककक पक्क्क छान छान की गूंज बहार तक जा रही थी बलदेव और देवरानी को ये अंदाज़ा नहीं था कोई सुन रहा है ये sab,Han कक्षा क दरवाज़ा पर कड़ी रानी षुरूश्ती देवरानी की चीख सुन रही थी और चुदाई की हर आवाज़ उसके सीने में तीर घुसने जितना दर्द दे रहा था

shurushti:man me)Kitna उछाल उछाल कर चुद रही है देवरानी और मई राजा राजपाल क रहते हुए प्यासी हु अब बलदेव का लौड़ा कितना शक्तिशाली होगा देवरानी की चीखे निकल दिया जो इतनी हटती काठी स्त्री है

अंदर चुदाई करते हुए माँ बेटे क बीच कुछ ाआवाज़ फुट पड़ती है

"महारानी देवराआणि बहु ...bahu...betaaaa बलदेव"

बलदेव और देवरानी ाः उठ की आवाज़ निकलते हुए एक दूसरे में समाये थे ठप्प ठप्प की आवाज़ षुरूश्ती की आवाज़ को दबा रही थी तभी देवरानी क कानो में षुरूश्ती की आवाज़ जाती है

"बलदेव ji..aaah ढर्रे ाः धीरे बहार कोई है ाआअह"

"महारानी कोई हो मुझे इस समय आपको छोड़ना है ाः ये ले ाः साली तेरी छूट का चटनी बना दूंगा भोसड़ा बना दूंगा छोड़ छोड़ क"

"ाः जी आआह हाय मुझे रानी षुरूश्ती की आवाज़ आई रुकिए न धीरे कीजिये ना ाआअह"

बलदेव समझते हुए अपने माँ क छूट में अपना लौड़ा धीरे धीरे अंदर बहार करते हुए सुनता है तो बहार से आवाज़ आरही थी

"बीटा बलदेव क्या आप लोग सो गए बहु रानी"

बलदेव अपना लौड़ा बहार खींच कर धीरे से अंदर अपने माँ क छूट में डालते हुए

"उफ़ देवरानी ये तो बड़ी माँ है ये अभी क्या करने आगे रात में"

"आह राज्जा आप पूछिए न ज़ोर से ाः आप तो छोड़ने लगते है तो सुनते हे नहीं दुन्या हे भूल जाते है"

"मेरी दुन्या तेरी छूट से आरम्भ हुई और तेरे छूट पर हे अंत होगा रानी माँ"

फुसफुसाते हुए अपने माँ क छूट में लैंड डाले बलदेव कहता है फिर सोचते हुए

"क्याआआआआ हुआआआ बड़ी मायआ कोई महत्त्वपूर्ण बात है ?"

shurushti:Beta बलदेव महत्त्वपूर्ण है इसलिए आना पड़ा

Baldev:ji ठीक है आहाता हु रुकिए कुछ समय

Devrani:ufff हाय अब क्या करू ऐसी अवस्था में षुरूश्ती आगे

baldev:Maa पहले तो अपने छूट से मेरा लैंड बहार निकालो हड़बड़ाओ नहीं बड़ी माँ को पता है रात में पति पत्नी क्या करते है

देवरानी आगे को हो कर पक्क से अपने छूट से लौड़ा बहार को खींचते हुए

"हाँ पर इतना समय लगेगा तो वो समझ जाएगी मेरे कपडे कहा गए उफ्फ्फ "

"देवरानी अपना समय लो साड़ी पहन लो उसके पहले अपने छूट को साफ़ कर लो रस टपक रही है"

बलदेव ये कहते हुए देवरानी क छूट पर देखता है जिसमे से गधा वीर्य बहार ाराहा था देवरानी शर्मा कर अपने साड़ी ब्लाउज देखने लगती है और बलदेव भी धोती पहनता है और अपने खड़े लौड़े को शांत करते हुए

"देवरानी हो गया तो खोलू"

धीरे से फुसफुसाता है

"रुकिए बिस्तर तो ठीक कर दू"

देवरानी झट्ट से अपनी जांघिए चुनरी और बलदेव का कुरता उठा कर एक ओरे रख देती है अब तक देवरानी ब्लाउज और पेटीकोट पहन लेती है साड़ी बांधते हुए

"अब खोलिये बलदेव जी"

देवरानी अब अपने बेटे को हुक्म देती है क उसके छूट चुदाई क सुराग ख़त्म कर दिए उसने बलदेव अस्वस्थ हो जाता है और जा जार दरवाज़ा खोता है

Baldev:aaaiye बड़ी माँ..

षुरूश्ती मुस्कुराते हुए अपने सौतेले बेटे को देखती है जो अपनी सगी माँ को कुछ समय पहले छोड़ रहा था और वो खुद सब सुन रही थी

shurushti:Kya हुआ बीटा सो गए थे क्या क्षमा करना इतने देर रात जगा दिया

Baldev:ary नहीं नहीं बड़ी मा क्षमा की क्या बात वो बास नीड आगे थी आइये न अंदर

षुरूश्ती देखती है बलदेव सिर्फ धोती में है उसका चौड़ा सीना और गले पर हल्का पसीना छूट रहा था

shurushti:man me)Tum तो अपने माँ की सेवा कर रहे थे उसके शरीर की गर्मी बुझा रहे थे इतनी बुद्धू नहीं हु पर क्या करू तुम दोनों को मई अपना बीटा और बहु मानी हु

षुरूश्ती अंदर आते हुए

"बलदेव सेनापति सोमनाथ आया था और उनके साथ तुम्हारे पिता जी गए है"

Baldev:Aisa क्या घटित हो गया बड़ी माँ क पिता जी महाराज को जाना पड़ा

Shurushti:Aapke पिता जी महाराज ने कहा है आपको बता दे क राज महल में घुशपैठि होने की संभावना है

बलदेव हैरत करते हुए अपने बड़ी माँ या सौतेली माँ को देखता है उसका लैंड जो सर उठाये फैन फ़ना रहा था

Baldev:Ho न हो युधा हारने क बाद दिल्ली का बादशाह शाहज़ेब हमारे विरुद्धा कोई योजना बना रहा हो .मई आता हु देवरानी

बलदेव पलट कर अपने माँ को देखता है जो अब भी अपने साड़ी पहन रही थी देवरानी सब सुन रही थी वो बास हाँ में इशारा करती है और बलदेव अपने माँ की आज्ञा पाकर फ़ौरन अपनी कुरता पहन कर अपने तलवार उठता है और जूती पहन कर कक्षा से बहार चला जाता है

षुरूश्ती देखती है देवरानी साड़ी पहन रही थी वो धीरे से उसके पास जाती hai,shurushti बिस्तर पर देखती है चुडिओ क टूटे हुए टुकड़े दिखाई देते है वही पास पलंग क देवरानी क नाथ हार और भी कई गहने रखे थे और पुरे कक्षा में वीर्य की चुदाई रस की मादक सुगंध आरही थी

Shurushti:maharani आराम से

Devrani:aaaiye सासु माँ baithiye..Ye बादशाह शाहज़ेब अवश्य हमसे युधा चाहता है

षुरूश्ती देवरानी क खुले बाल मोठे बड़े वक्ष और बहार को निकली हुई गांड देख समझ जाती है क देवरानी खूब चुद रही है आज कल

shurushti:Bahu रानी शाहज़ेब क युधा का तो पता नहीं परन्तु यहाँ युधा हो रहा था प्रतीत होता है



देवरानी मुस्कुराते हुए अपने साड़ी को मोड़ कर अपने छूट जो भीगी हुई थी बेटे क वीर्य से अपने कोचा बना कर अंदर डालती है तभी षुरूश्ती फिर से पूछती है "लगता है कार्यक्रम शुरू हो चूका था मई बंधा बन गई" ये सुन कर देवरानी अपने साड़ी का पल्लू कर अपने सौतन बानी सांस को देख मुस्कुराते हुए "नहीं नहीं सासु माँ wo..ab आपके सामने अस्त व्यस्त वस्त्र में आना एक बहु को शोभा तो नहीं देता "

Devrani:man me)kahi ये मेरे और बलदेव की चुदाई की चीखे सुन तो नहीं ली उफ्फ्फ इसको भी अभी हे आना था

shurushti:Bahu रानी अब ये मत कहिये ये बिस्तर का हाल इनपर टूटी चुड़िआ आपके गहने जो उतरे हुए है सब और अभी साड़ी पहनी जब क मई कितने देर बहार कड़ी थी ..ये न कहना ये सब सामान्य है

देवरानी बुरी तरह शर्मा जाती है और उसके आखो में वो लज्जा का भाव आजाता है अब शर्माए कैसे नहीं अपने बेटे से छोड़ने क बाद अगर कोई बहाना बनाये क नहीं वो चुद नहीं रही थी

devrani:Woo वो बस्स्स ..

shurushti:Bahu रानी मई भी एक स्त्री हु मुझे पता है जब दो प्रेमी जोड़े को दरवाज़ा खोलने में समय लगता है तो वो किस अवस्था में होते है

devrani:Ji वो अब उनके पेअर दबा रही रही थी तो चुनरी खोल दी थी अब कक्षा में गर्मी लगती है तो पेटीकोट में हे सोती हु

shurushti:Haha बहु रानी आप पेटीकोट में सोती हो जाड़े क दिन में बहुत गर्मी है ..कुछ काम नहीं क्या मेरे बेटे ने?

devrani:shurushti दीदी ..आप तो जानती है न वो नहीं मानते

देवरानी अब अपना मुँह बना कर षुरूश्ती को शिकायत करते हुए कहते है

shurushti:Devrani आप मेरी सौतन थी अब बहु हुई हो शर्माओ mat..waise बलदेव हे जबरदस्ती करता है तुम्हे मज़ा नहीं आता ?

देवरानी क होठ पर मुस्कान फ़ैल जाता है और वो सोचते हुए

"जी आता है मुझे भी मज़ा"

shurushti:to फिर क्या है जीओ अपने बेटे संग भुला दो जीवन क dukh..waise बहुत गदरा गई हो बलदेव की मेहनत से

devrani:aap भी न deedi..ab पति है मेरे तो म्हणत किसपे करेंगे

shurushti:achha भूल गई मेरा बीटा बलदेव तुम्हारा सागा बीटा है और मेरा सौतेला

Devrani:han भूल गई अब मुझे केवल बलदेव पति क रूप में चाहिए बीटा आप बना कर रखिये हेहेहे

देवरानी हस्ती है

shurushti:Devrani मैंने बहुत दुःख दिए है तुम्हे आज तुम्हारा हस्ता हुआ चेहरा देख ऐसा लगता है जैसे मैंने पापो की प्राश्चित कर रही हु

devrani:man me)Mujhe पता है षुरूश्ती तू चाहे मुँह से कुछ भी बोल पर तू अंदर से जलती है मेरे और बलदेव का प्यार देख

devrani:dhanywad दीदी मेरा और बलदेव जी का साथ देने क लये आपका साथ नहीं होता तो मई आज अपने बेटे की पत्नी नहीं बन पाती

shurushti:bass अब हमे कुछ नहीं चाहिए तुम दोनों से बास हमारा राज परिवार बढ़ा दो

devrani:deedi बुरा नहीं मानिये पर राजमाता जीविका आज कल अनाप शनाप बोल देती है अब बचा देना भगवन क हाथ में है

shurushti:Ary देवरानी वो बूढी हुई वो चाहती है अपने वंश को बढ़ता देख ले जीते जी बुरा न माना करो और हाँ तुम मुझे दीदी नहीं सासु माँ हे बोलै करो

devrani:Bolti तो हु पर अकेले में दीदी तो बोल सकती हु न अब जीवन भर तो दीदी हे बोली आपको

shurushti:theek है मई जाती हु विश्राम कीजिये आप महारानी देवरानी थक गई होंगी आप

षुरूश्ती ये कह कर आँख मारती है और देवरानी अपना मुँह फूलते हुए "डीईएडी हां अआप भी na"Shurushti बहार चली जाती है और देवरानी बिस्तर पर पेट क बल लेती जाती है "आआह मेरा छूट अब भी पानी छोर रहा है अब पता नहीं बलदेव कब आएंगे मेरी छूट की प्यास बुझाने ाआजाओ जल्दी सैया जी बीटा जी ाः मेरे पति देव ji"baldev का नाम ले कर देवरानी अपने छूट को बिस्तर पर रगड़ती है...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 181

shurushti:theek है मई जाती हु विश्राम कीजिये आप महारानी देवरानी थक गई होंगी आप

षुरूश्ती ये कह कर आँख मारती है और देवरानी अपना मुँह फूलते हुए "डीईएडी हां अआप भी na"Shurushti बहार चली जाती है और देवरानी बिस्तर पर पेट क बल लेती जाती है "आआह मेरा छूट अब भी पानी छोर रहा है अब पता नहीं बलदेव कब आएंगे मेरी छूट की प्यास बुझाने ाआजाओ जल्दी सैया जी बीटा जी ाः मेरे पति देव ji"baldev का नाम ले कर देवरानी अपने छूट को बिस्तर पर रगड़ती है.

बलदेव अपनी नंगी तलवार ले कर महल क बहार निकलता है और अपने सेना गृह की ओरे जाने लगता है तभी वह से बलदेव क पिता राजा राजपाल आते हुए दिखाई देते है और उनके साथ कुछ सैनिक थे बलदेव अपने पिता महाराज को देख रुकते हुए

"पिता जी महाराज क्या हुआ इतनी रात गए कैसा शोर है"

बलदेव को देख राजा राजपाल अपने सैनिको को भेज देते है और अपने बेटे क पास आ कर

"बलदेव मैंने हे षुरूश्ती को कहा था तुम्हे उठाने हमारे हाथो से घुशपैठि छूट गया"

Baldev:Pita जी ये हमारे राज्य में किसकी घुसपैठ हो सकती है और ये किस ओरे भगा है मई पीछा करता हु

बलदेव की बात सुन क्र राजा राजपाल कहता है

"बीटा मैंने सेनापति सोमनाथ को घुशपैठि क पीछे भेज दया है तुम्हे जाने की आवश्यकता नहीं है आओ हम चले"

"पर पिता जी महाराज मई महाराज हु गहतराष्ट्रा का ये मेरा दायित्व है"

"बीटा वो घुशपैठि जंगल की तरफ भगा है पता नहीं कितने हे देर तक उसे खोजना पड़े और वो अवश्य बिना जाल बिछा कर हे आया होगा"

राजा राजपाल अपने बेटे का हाथ पकड़ कर महल की ओरे चलते हुए बलदेव सिंह अपने नंगी तलवार को वापस मियां में दाल लेते है और दोनों महल में प्रवेश करते है

Rajpal:Beta बलदेव इतनी रात में उठा दया तुमको जाओ विश्राम करो

Baldev:Par ये घुसपैठि

Rajpal:Beta मुझे लगता है ये चाल दिल्ली क बादशाह शाजेब की है

Baldev:Mai उस शाहज़ेब को उसके कए की दंड अवश्य दूंगा अगर उसने मेरे राज्य पर आँख उठा कर देखा तो शाहज़ेब को इसका सुध समिट भुगतान करना होगा

Rajpal:Baldev..Shahzeb एक खूंखार बादशाह है उसको हराना इतना आसान नहीं

Baldev:Mujhe पता है पिता जी शाहज़ेब एक अय्याश राजा है जिसने हर वो स्त्री को अपने हरम में रख कर उसका दुरूपयोग क्या जो उसके मन को भा गयी परन्तु सत्य कभी पराजित नहीं होता उसके पाप का घड़ा भर गया है आप समझिये

Rajpal:Putra बलदेव आप एक युवा राजा है और आपके रक्त में उबाल अधिक है परन्तु एक राजा को अपने शत्रु को पराजित करने से अधिक महत्तव अपने परिवार को विजय बनाने क लये करना चाहिए

Baldev:aapke क कहने का क्या अर्थ है पिता जी?

Rajpal:Beta अब तुम्हारे पीछे तुम्हारी पत्नी भी है और तुम एकलौते हो जो गहतराष्ट्रा क वंश को आगे बढ़ाओगे यदि तुम्हे कुछ हो गया तो

Baldev:Pita जी जिस दिन मृत्यु होनी होगी मर जाऊंगा अपने राज्य क लये मई मुस्कुराते हुए शीश कटा सकता हु पर अपने गहतराष्ट्रा पर आंच नहीं आने दूंगा

Rajpal:Tum सचमुच एक वीर योद्धा हो गर्व होता है तुम्हे अपना पुत्र कह kar,,Hum कल राज सभा में इस पर विचार करेंगे अभी जाओ और आराम करो बहु भी राह देख रही होगी

Baldev:nahi नहीं देवरानी तो सो गई होगी

बलदेव अपने पिता क मुँह से ये सुन कर थोड़ा हीचिकिचाते हुए कहता है क उसकी माँ सो गई होगी

Rajpal:Theek है तो जाओ सो जाओ बलदेव

Rajpal:man me)Mere सामने हे अपने माँ का नाम ले कर पुकार रहा है वो भी अपने बाप क सामने

Baldev:ji पिता जी प्रणाम

बलदेव झट से अपने पिता जी क पेअर छूटा है और राज पल सर पर हाथ रख आशीर्वाद देता है

बलदेव सीडीओ की तरफ जाने लगता है

Baldev:man me)Itni जल्दी नहीं सोऊंगा पिता जी पहले तो जैम क छोडूंगा अपने माँ को

बलदेव सीडीओ पे चढ़ते हुए अपने कक्षा की ओरे जाने लगता है और राजा राजपाल अपने कक्षा में चले जाते hai,Baldev अपने कक्षा क दरवाज़े पर जैसे हे हाथ रख कर धक्का देता है वो अंदर खुलता जाता है और वो अंदर आकर पहले दरवाज़ा बंद करता है फिर देखता है उसकी माँ बिस्तर पर अपने आखे मूंदे सो रही है बलदेव मुस्कुराते हुए साड़ी में लिपटी अपने माँ को देखता है और उसके पास जा कर लेट जाता है ,देवरानी करवट लेती थी और उसकी गांड उसके बेटे की तरफ थी बलदेव पीछे से अपने माँ से चिपक जाता है और एक चुम्मी अपने माँ क भरे हुए दूधिए गालो पे करता है "ुहम्मम्मम्हा सो गई रानी maa"devrani नींद में तो थी नहीं पर अपने बेटे क चूमने से उसके चेहरे पर एक मुस्कान फ़ैल जाती है पर फिर भी वो नखरे दिखने का सोचती है

"छोड़िये न महाराज नींद बहुत आरही है"

बलदेव अपने माँ क गांड पे अपना लौड़ा लगा कर अपने बहो में पीछे से जकड लेता है

"देवरानी बिना छुड़वाए सो जाओगी नींद आजायेगी"

देवरानी फिर से अपने बेटे क तीखी सवाल पर मुस्कुरा देती है

"महाराज थक गई हु आप चोदे तो है और कितना छोड़ेंगे"

"देवरानी मेरा लौड़ा अब भी कड़ा है ये शांत कहा हुआ "

"मई थक गई हु अब सुबह में छोड़ लेना जी "

बलदेव देवरानी को सांप की तरह जकड लेता है और अपना खड़ा लैंड अपने माँ की गांड की दरार में हस्ते हुए "रानी माँ मुझे आपके खोख में वीर्य भर क आपको गर्भवती करना है मान जाओ माँ" ये सुनते हे देवरानी से रहा नहीं जाता और वो पलट कर "हाय मेरे baldev"devrani अपने बहो का हार अपने बेटे को पहना कर अमरलत्ती की तरह चिपक जाती है अपने भरी वक्षो को अपने बेटे क छाती से रगड़ रही थी और निचे अपने छूट को अपने बेटे क खड़े लैंड से सहला रही थी

"देवरानी मई तुमसे बहुत प्रेम करता हु आपके बिना चैन नहीं मिलता"

"ाः राजा आप से मई भी प्रेम करती हु छोड़ो मुझे ाः"

देवरानी अपने बेटे से चपक जाती है बलदेव अपने हाथ आगे बढ़ा कर अपने माँ क बड़े आम जैसे वक्षो को पकड़ कर मसूर देता है और हाथ निचे ले जा कर साड़ी को कमर से खींच देता है देवरानी अपने बेटे को बेतशाशा चूमने लगती है बलदेव पीछे हाथ ले जा कर ज़ोर से अपने माँ का गांड मसलते हुए पलट जाता है और देवरानी क ऊपर आजाता है देवरानी का बदन इतने लेम ुचे कद काठी क बलशाली श्री क निचे पइसस जाती है और उसके मुँह से "अऔच "निकल जाता है बलदेव अपने धोती की गाठ खोलते हुए देवरानी क दोनों हाथो को अपने हाथ में रख देवरानी क होठो को देखते हुए अपने होठो में भर कर चूसने लगता है देवरानी से रहा नहीं जाता और वो अपना पेटीकोट अपने गांड से खिसका कर निचे कर क नंगी हो जाती है बलदेव अपने हाथ से अपने माँ क ब्लाउज का बटन खोलता है और ब्लाउज को खींच देता है देवरानी अब ज़ोर से बलदेव क होठ को पकड़ कर चूसने लगती है निचे बलदेव का लौड़ा अपने माँ क छूट पर दस्तख दे रहा था देवरानी अपने बेटे को बाहो में भरते हुए पलट देती है और बलदेव क लौड़े पर बैठ कर अपने बेटे क कुरता को खोलते हुए अपने बेटे क सीने पर अपनी ऊँगली फिरते हुए मुस्कुराती है बलदेव का लौड़ा देवरानी क भरी गांड क निचे दबा था

"उफ़ ाः मा उठो देवरानी लौड़ा क ऊपर से "

"ाः मेरे राजा को मज़ा नहीं आरहा है अपने माँ को लौड़े पे बिठा क "

"रानी माँ आप क पहाड़ जैसे गांड से डब्ब कर मेरा लौड़ा बेचारा "

"बेचारा ये तो बड़ा शेर बनता है हाँ "

"साली रंडी तेरी गांड मारु उठ न मेरे लौड़े पैर से "

देवरानी मुस्कुराते हुए उठती है और बलदेव क निचे जाते हुए अपने हाथो में लौड़े को पकड़ कर बलदेव को देखती है

"ाः बलदेव क्या भयानक लौड़ा है आपका आह इतना मुतआ हम्म्म बड़ा सुन्दर लग रहा है "

देवरानी अपने हाथ में अपने बेटे का लौड़ा लिए मुठियाने लगती है और बलदेव अपने आँख बंद कए सिसकने लगता है



"हम्म्म्म आआह राजा बीटा का लौड़ा तो सही में दमदार है आज दिनन में तो इसने मेरी गांड मार क धज्जिया उदा दी थी हम्म ाः कितना मोटा है ाः"

कुछ देर ऐसे हे देवरानी अपने बेटे क लौड़े से बचे की तरह खेलती है तभी बलदेव अपना आप खो देता है और उठते हुए "जल्दी अपनी टाँगे खोल रंडी तेरी छूट मार क सुजा दू "बलदेव उठा कर देवरानी को लिटाता है और देवरानी भी अपने बेटे क बात मानते हुए चरण लेट जाती है और अपने टांग खोल कर अपने छूट का गुलाबी छेड़ खोल देती है ,बलदेव हल्का थूकता है और अपने लौड़े क ऊपर रगड़ते हुए "आजा रांड तेरी ठुकाई करू थूक लगा k"devrani मुस्कुरा देती है और अपने टाँगे फैला कर "क्या करू झुकू या ऐसे हे डालोगे राजा जी"

देवरानी की ओरे देखते हुए बलदेव जल्दबाज़ी में लेट जाता है और अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर लगा कर

"साली इतना समय नहीं है "घपपप की आवाज़ गूंजती है और बलदेव अपना लौड़ा पूरा एक हे घाछे में अपने माँ क छूट क जड़ तक दाल देता है "aaaaaaaaaaaaaaaah रआआआज़ाअ "

बलदेव अपना हाथ पीछे अपने माँ क गांड पर मरते हुए

"तेरी गांड बहुत मोती हो गई है साली देवरानी हम्म ये le"ghache खूब तेज़ गति से अपने माँ क



छूट में मरते हुए बलदेव कहता है "ाः राजा ाः ाः आपने हे तो गांड मार मार कर इतनी बड़ी कर आआह ुहममम आआआह राजाआं जी धीरे छोड़िये आआह हम्म्म्म ाआअह आपका लौड़ा आआह कितना कड़ा है आआह हम्म्म aaaaaaaaaaaaah आआआह"

बलदेव तेज़ रफ़्तार से अपने माँ की छूट मार रहा था पुरे कक्षा में गाछ गाछ पछ पछ की आवाज़े आरही थी

"ाआअह राजा कितना प्यारा है मेरा राजा बीटा आआह मेरा पति आप इतनी जल्दी कैसे आगये आप तो घुसपैठयो को पकड़ने गए ठआआआआह हम्म्म"

"ाः ये ले साली आआह मेरी रानी जैसे हे मई बहार गया तेरा पूर्व पति मेरे पिता राजपाल मिल गए उन्होंने कहा क जाओ बहु देवरानी को छोड़ो जैम क ाः ये ले"

"चल झूठे आआह वो क्यू कहेंगे अपने बेटे को ऐसा क उनकी हे पत्नी को चोदे ाः हम्म ाः "

"राआणि माआ मेरी रांड माँ उन्होंने ये कहा क जाओ बहु राह देख रही होगी इसका मतलब क्या होता है जब किसी पुरुष को कहा जाये वो भी जिसका विवाह कुछ दिन पेले हुआ हआ आआह साली तेरी छूट का भोसड़ा बना दूंगा ाः ये ले"

"आह राजा जी बना दीजिये मेरी छूट का भोसड़ा ाआअह हाँ फाड़ दीजिये अपने पत्नी का छूट ाः आप सही कह रहे है उन्होंने आपको भेज दया बहु क पास इसका अर्थ यही है क आपके पिता भी यही चाहते है क आप मेरी छूट सुजा दे छोड़ छोड़ क"

बलदेव अब देवरानी का पेअर उठाते हुए पीछे आजाता है और एक टांग उठा कर पीछे से घपपप घप्प अपने माँ की छूट मारने लगता है



"आआह राजा ाः ऐसे दुखता है धीरे ाः ऐसा लग रहा है आपने आआह तलवार मेरी छूट में घुसा दी हो आआह राजायआ जी"

"आह ये ले रंडी ाः वैसे षुरूश्ती माँ क्या कह रही थी ाः ये ले "

"हम्म्म्म ाः वो क्या कहेगी षुरूश्ती रंडी तो जलती है मुझसे कहने लगी लगता है कार्यक्रम शुरू है ाः धीरे जी ाः राजा "

"तुमने क्या बोलै आआह रानी मा आपकी छूट में कितनी तपिश है आआह हम्म्म"

बलदेव का हर धक्का देवरानी क बच्चेदानी क छिद्र को फाड़ दे रहा था और देवरानी की चीख निकल जाती पुरे कक्षा में दोनों की सिसकी थप थप और फच फच की आवाज़े अब और ज़ोर से गूंजने लगी थी

"अब मई क्या कहती क हाँ मई चुद रही थी आपसे मई कह दी वो बास सो रही थी ाः राजा हम्म"

"वैसे होली में इस साल मज़ा आएगा देवरानी ाः ये ले रंडी खा मेरा लौड़ा"

"ाः राआजाएआ जेईई छूट को फ़ायद दिया रीई हाआआए मेरी छूट हाँ मेरे पति देव ये होली हमारी पहली होली होगी आआह"

"आह ये ले रांडाः झूट बोलती है इसके पहले भी तो हम होली मन चुके है साथ"

"उफ्फ्फ ाः ाः आआह आआआआह नाहाआईई ाः राजा जी तब हमारा रिश्ता माँ बेटे का था अब पति पत्नी का है अअअअअअअहाआआआआह aaaaaaaaaah आआआआह हाआए रे मेरी छूट फआयआयड दियाआआरे आआआह महाराज धीरे साआह "

बलदेव अपने माँ की बात सुन कर जोश में आकर करारे घाछे मारने लगता है देवरानी को अब सीधा लेता देता है और घाचे मारने लगता है "ाआअह राजायआ जी ीीीे आआआआह हाआय मई जाने वाली हु ाआअह में स्खलित होने वाली हु और ज़ोर से छोड़ो ाआअह छोड़ लो अपने रानी माँ को आआह अब तो आपके पिता ने भी कह दया है मुझे छोड़ क गर्भवती करने क लये ाआअह"



"साली राँद आआह ये ले माधरचोद आआआह ये ले ाः देवरानी महारानी मेरा लौड़ा ाः तेरी छूट ाः"

"ाः और छोड़ो माधरचोद मई नहीं तुम हो बलदेव ाः और छोड़ो अपने रानी माँ का गहतराष्ट्रा का भविष्य तुम्हारे हाथ में है ाआअह मुझे गर्भवती कर दो अअअअअअअअअहाआआआआहा ा ा आआआआह मई gayeeeeeeeeeee आआआआहा हाआआआए oooooooooooooooh आआआह और ज़ोर सीईएह हुम्म्म्मम्म ाः मार डाला रे"

देवरानी क छूट से फव्वारे बहने लगते है और देवरानी स्खलित हो जाती है पर बलदेव हुमच हुमच क छोड़ना बंद नहीं करता देवरानी अपना हाथ अपने बलदेव क पीठ पर रख अपने नाखुनो को धसते हुए "आआह हम्म्म्म हाय रे कितना मेहनती है आआह मेरा राजा ाआअह मज़ा आआगया आआह कितना सुकून मिल रहा है "

देवरानी अपना पानी छोर कर खूब मज़े से आहे भर रही थी तभी बलदेव अपना दांत पिस्ता हुआ तेज़ धक्का लगाने लगता है और देवरानी फिर से चीखने लगती है बलदेव हुमच हुमच कर अपना 9 इंच का हुल्लाबी लौड़ा से अपने माँ की तबियत से ठुकाई करते हुए अपने आखे हलकी बंद करता है देवरानी समझ जाती है उसका बीटा झड़ने वाला है और वो अपने बेटे क कमर को हाथ को सहलाने लगती है

"आआह राजा जी ज़ोर से ाः छोर दीजिये अपना गधा वीर्य मेरी छूट में आआह आआह "

बलदेव क पेअर में हलकी कंपन होती है और उसका धक्का अब रुक कर लगने लगता है पर बलदेव अपने कमर चलना नहीं रोकता और उसका लैंड एक पिचकारी छोरता है और बलदेव अपना लौड़ा कास क बच्चेदानी तक घुसा देता है और देवरानी अपने ाअखे बंद कए लम्बी साँसे ले कर अपने बेटे क लौड़े से निकला गरम लावा अपने बच्चेदानी में महसूस करने लगती है बलदेव अपना आखे बन्दे कए धक्के लगा रहा था और हर धक्के में लौड़ा वीर्य की पिचकारी अपने माँ क छूट में मार रहा था बलदेव तब तक ऐसे हे अपने माँ क छूट में लैंड डालता रहा तब तक लौड़ा एक एक बून्द न छूट में छोर दिया बलदेव अब झुकता हुआ देवरानी क ऊपर छ जाता है और देवरानी भी अपने बेटे को अपनी बाहो में भरते हुए "ायजा मेरा राआजा बेटा हम्म्म ाः थक्क गए महाराज बलदेव"

बलदेव अपने मा क छूट में लौड़ा डेल हे अपने माँ क भरी वक्षो क ऊपर अपनी छाती रखे हुए ज़ोर की सांस लेते हुए लेता था देवरानी अपने बेटे क पीठ पर हाथ फेरते हुए सहला रही थी बलदेव क कान क जड़ो से पसीने की बुँदे निकल रही थी जिसे देख

Devrani:man me)Kitna म्हणत कर रहा है मेरा बीटा मुझे गर्भ से करने क लये हे भगवन हमारी मनोकामना पूरी कर दे

बलदेव और देवरानी कुछ देर ऐसे हे लेते रहने क बाद एक दूसरे से छेड़खानी करते हुए गहरे नींद में चले जाते है

पारस

ाआधी रात बीत चुकी थी और भूरिया अपने बिस्तर पर लेती किसी मछली की तरह तड़प रही थी अपने बेटे क पास जाने क लये ,शमशेर ने आज सिर्फ और सिर्फ बुरखे में आने क लये कहा था हूरजहाँ भी तो चाहती थी अपने बेटे से छोड़ना पर हुजरे में उसकी सौतेली बेटी समां थी जिसके सोने क इंतज़ार में थी भूरिया begum,Hooriya जैसे हे देखि समां नींद क आग़ोश में चली गई है और अब नहीं उठेगी

Hooriya:man me)Mujhe जल्दी से शमशेर से चुद कर वापस आना होगा नहीं तो समां कही उठ गई और मुझे यहाँ नहीं पाया तो उसका शक यक़ीन में बदल जायेगा

भूरिया उठ कर सबसे पहले अपने हुजरे में चिराग जलती है और फिर अपने हुजरे क उस कमरे में पहुँचती है जहा उसके सारे सामान होते थे वह वो हर निक़ाब को ढूंढ़ते हुए देखने लगती है और आख़िरकार एक बुरखा ले कर अपने कपडे उतारने लगती है और फिर अपने वज़नदार और भरी ममो को अपने ब्राज़िएर से आज़ाद करती है फिर जांघिए को निकल कर रख देती है अब वो बुरखा पहनते हुए

"उफ्फ्फ कही किसी ने शक कर लय क मई अंदर कुछ नहीं पहनी हु तो"

वो कुछ सोचते हुए अपने उतरे हुए कपडे को संदूक में रख देती है और बंद कर देती है और आईने क सामने कड़ी हो कर देखती है उसके आखे निचे हो जाती है उसके बड़े थान क नोखिले अंगूर क डेन से चुसनी साफ़ पता चल रहे थे भूरिया सुल्ताना पीछे मुद कर अपने गांड को देखती है तो मुस्कुरा देती है उसकी चर्बीदार भरी गांड बिना जांघिए क सिर्फ बुरखे में कहर ध रही थी भूरिया को शररर सूझत है और वो अपने बुरखा को थोड़ा ऊपर खिसका कर पहनती है और अपने नंगी गोरी पैरो की पिंडलिअ खोल देती hai,Hooriya लाली उठा कर अपने होठो पे लगाती है फिर थोड़ा इतर लगा कर अपने आप को खुसबूदार बनाने लगती है तभी उसे कुछ दिमाग में आता है और वो अपने बुरखा उठा कर अपने झाटो से भरी छूट पर रगड़ कर छूट को खुसबू दर कर देती है

Hooriya:man me)Shehzade शमशेर आपको मई नहीं खोना चाहती सुल्तान से देगा पाई क्यू क मई बन थान कर नहीं रहती थी और हमेशा ढीले निक़ाब में रहती अपने नाख़ून तक छिपा कर इसलिए वो मुझसे दूर होते गए पर मई शहज़ादे तुम्हे अपने जिस्म की दीवानी बना दूंगी.

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 182

पारस

Hooriya:man me)Shehzade शमशेर आपको मई नहीं खोना चाहती सुल्तान से देगा पाई क्यू क मई बन थान कर नहीं रहती थी और हमेशा ढीले निक़ाब में रहती अपने नाख़ून तक छिपा कर इसलिए वो मुझसे दूर होते गए पर मई शहज़ादे तुम्हे अपने जिस्म की दीवानी बना दूंगी.

सुल्ताना भूरिया अपने आप को आईने में देखते हे शर्मा सी जाती है इस वक़्त उसने बुरखा तो पहनी थी पर उसके भरी मम्मी और गांड साफ़ दिखाई पद रहे थे अंदर कोई लिबास नहीं होने क वजह से भूरिया का चेहरा शर्म और हाय क मारे मुस्कुरा रहा था क्यू क वो अपने बेटे से छोड़ने क लये इतनी तैयारी कर रही थी

Hooriya:man me)Sach में मई तो इस तरह एक वैश्य से काम नहीं लग रही हु सच में मुझे शहज़ादे शमशेर ने रांड बना दिया

और ये सोचते हे भूरिया मुस्कुराते हुए लज्जा कर अपने चेहरे पर हाथ रख कर धक् लेती है और फिर कुछ सोचते हुए

Hooriya:man me)Jaldi से चुद क आजाती हु अपने बेटे से नहीं तो समां जाग गई तो

भूरिया एक टाक अपने सौतेली बेटी समां को देखते हुए धीरे कदमो से हुजरे क बहार जाने लगती है और जैसे हे अपने हुजरे से निकलती है दरवाज़े पर कड़ी दोनों कनीज़ भूरिया को देख दांग रह जाती है भूरिया बिना परवाह क्या अपने बड़े मटकते गांड को मटकते हुए अपने बेटे क हुजरे की ओरे चली जाती है दोनों कनीज़ आपस में बात करते हुए

Kaneez1:ye आधी रात मल्लिका ेजहाँ कहा जा रही है वो भी इतना सज्ज धज्ज क

kaneez2:tumne देखा नहीं बुरखा कितना ऊपर पहनी है लगता है बहुत पुराण पहन ली है निचे से उनके नंगे पेअर दिख रहे है

kaneez1:aaj कल मल्लिका इ जहाँ का चाल ढाल हे बदल गया है पता नहीं क्या गुल खिला रही है

kaneez2:chup कर हमे क्या हम तो घुलम है बस अपना काम करो

इधर समां भूरिया क जाते हे अपनी आखे खोलती है और मुस्कुराते हुए

"बड़ी अम्मी आपके राज़ का पर्दाफाश कर क रहूंगी मई मुझे तो पता है क आप ये गुनाह अपने बेटे क साथ कर रही है"

समां सोने का नाटक कर रही थी और जैसे हे भूरिया बहार गई उठ जाती है और चलते हुए हुजरे क उस कमरे में आती है जहा मल्लिका इ जहाँ अपने कपडे बदलती थी और वह अल्मारिओ में भूरिया क कपड़ो से भरे the,Sama जैसे वह पहुँचती है तो उसे एक संदूक में कोई कपडा फसा हुआ दिखाई देता है वो उसे जा कर खोलती है

Sama:To मल्लिकाईजहान ने अपने लिबास बदल कर गई है और यहाँ का हाल देख कर लगता है क खूब साज श्रृंगार कर क गई है सुल्ताना भूरिया ,अब पता नहीं क्या लिबास पहन कर गई है अपने आशिक़ बेटे को खुश करने क लये तुम दोनों रंग जमाओ तब मई पहुँचूँगी

उधर भूरिया अपने धीरे कदमो से शमशेर क हुजरे की तरफ बढ़ रही थी और रास्ते में उसे हलकी हसी की आवाज़ आती है जो सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क तरफ से आरही थी भूरिया रुक कर अपने शौहर क हुजरे क खिड़की क पास कान लगा कर कड़ी हो जाती है तो उसे अंदर से आवाज़ सुनाई देती है

"मुस्कान बेगम लौड़ा चूसो इसे खड़ा करो फिर से छोडूंगा आपको आह क्या कमसिन काली हो मेरी जान"

भूरिया अपनी आखे बंद कर लेती है और खोलती है तो ासु क बुँदे उसके आखो से छलक जाती है भूरिया भले से हे अपने बेटे को अपना सबकुछ मन ली थी पर अब भी सुल्तान से शादी का बंधन था उसका और ये वही शौहर था जिसको हद से ज़्यादा प्यार की थी वो ,भूरिया अपने हाथ से अपने आसुओ को पोछते hue"Sultan तुमने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी अय्याशिओ me"sultana भूरिया कुछ सोचते हुए मुस्कुराती है और आगे बढ़ते हुए अपने बेटे क हुजरे क तरफ जाने लगती है

Hooriya:man me)Muskan बेगम तुम सुल्तान क लैंड को खड़ा करने की कोशिश करती रहो मई चली अपने आशिके क हुल्लाबी लौड़े से छोड़ने

भूरिया अब तेज़ कदमो से अपने बेटे शमशेर क हुजरे क तरफ बढ़ रही थी उधर शमशेर भी अपने अम्मी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा tha,hooriya अपने वज़नी गांड को कभी दये कभी बाये मटकते हुए शमशेर क हुजरे तक पहुँचती है और वह भी दो कनीज़ तैनात थी

kaneez:mallikaejahan मुआफ करे इतनी रात गए आप से शहज़ादे से क्या काम ाँ पड़ा क्या कोई परेशानी है

कनीज़ भूरिया क चुचो को बुरखे में से झाकते हुए देखती है भूरिया का चेहरा साज श्रृंगार से दमक रहा था

Hooriya:kaneez..Wo मई कोई दवा लाइ हूँ अपने बेटे को खिलने क लये मुझे अभी यद् आया

kaneez:Gustakhi मुआफ आप जा सकते है अंदर मल्लिका इ जहाँ

Sultana:Bhut खूब याद रहे कोई अंदर नहीं आये इस इलाज ज बीच कोई आगया तो नुकसानी बढ़ सकती है चाहे सुल्तान हे हो अंदर नहीं आने दीजिये उन्हें समझा दीजिये ठीक है

kaneez:Ji आपकी हुक्म सर आखो पर

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने गांड मटकते हुए अपने वज़नी दूध हिलाते हुए अंदर जाती है और दूसरे दरवाज़ा पर कड़ी हो कर "शहज़ादे क्या अंदर आजाये hum"shamshera ये सुनते हे अपने हाथ में पकडे लैंड को ज़ोर से हिलने लगता है "आअजाइये अम्मी जाएं दरवाज़ा खुला hai"hooriya मुस्कुराते हुए पर्दा हटती है और जैसे हे सामने का नज़ारा देखती है उसके आखे फटी की फटी रह जाती है अंदर शमशेर पूरा नंगा अपने लौड़े पे तेल से मालिश कर रहा था " ाआजाओ अम्मी जान मई कब से अपने तलवार की धार लगा रहा हु आपके छूट मारने क लये"



भूरिया देखती है 9 इंच का हुल्लाबी लौड़ा शमशेर अपने माँ को छोड़ने क लये तैयार कर रहा है और बैठा अपने अम्मी क नाम की माला जप रहा है अपने लैंड को पकड़ kar,hooriya अपने बेटे का इतना मोटा और लम्बा लैंड देख ताज़्ज़ुब कर रही थी और उसका सर मारे हाय क झुक जाता hai,shamshera देखता है क उसकी अम्मी दरवाज़े से अंदर नहीं आरही है और कड़ी हो कर शर्मा रही है तो वो उठ कर अपने अम्मी क पास जाता है और उसका बड़ा डंडा हिल रहा था

"आएये सुल्ताना भूरिया पारस सल्तनत की शान अआप छोड़ने आई हो न तो अंदर तसरीफ लाइए"

शमशेर अपने अम्मी को ऊपर से निचे तक देखते हुए कहता है



भूरिया बुरखे क निचे नंगी थी और उसने अपने बुरखे को ऊपर बांध कर घुटनो तक कर लिया था जिस से उसके गोर पेअर चमक रहे थे काळा बुरखे में ऊपर बड़े बड़े वज़नी भरी लटके हुए चुचिओ को देख शमशेर

"अम्मी जान छोड़ने हे आई हो न"

भूरिया ये सुन कर एक चौरी मुस्कान देती है और अपने बेटे क बड़े डंडे की तरफ देखते हुए

धीरे से "Ji"Kahti है शमशेर तो जैसे अपने माँ को दूसरी बार छोड़ने क लये मारा जा रहा था

"अम्मी जान अब क्या खड़े खड़े छोड़ दू या अंदर भी आओगी "

भूरिया क पेअर काँप रहे थे पिछली रात को तो उसने खूब अपने बेटे से छुड़वाई थी पर इस तरह अपने हे बेटे क सामने बुरखे में अंदर से नंगी रहना उसे असहज महसूस करवा रहा था

hooriya:man me)hooriya दर मत ऐसा जवान मोटा लौड़ा तेरे इंतज़ार के है फैला दे अपनी छूट और बुझा ले अपनी प्यास

hooriya:Shehzade वो जल्दी से कर लो नहीं तो समां उठ जाएगी

शमशेर अपने अम्मी को ऊपर से निचे तक देखता है और इशारे से कहता है दरवाज़ा बंद करो अपने बेटे की बात मानते हुए हूरजहाँ दरवाज़ा की किल्ली लगा देती है पर अभी भूरिया की गांड को देख शमशेर पागल हो जाता है और पीछे से जा कर बुरखे क ऊपर से हे अपना लौड़ा गांड में लगा कर "भूरिया बेगम अब छोड़ने आई हो तो अचे चुद लो दो चार झटको में तुम्हारी गहरी छूट को नापना मुश्किल hai..aur मई सुल्तान जैसा नहीं जो तुम्हारी छूट को तड़पता छोड़ दू अपना पानी निकल aah"shamshera अपने अम्मी क गले लगा था पीछे से और भूरिया अपने आँख बंद कए अपने गांड क दरार में मोटा लोहे सा लौड़ा महसूस कर ज़ोर से साँसे भर्ती है "आह जो भी कीजिये पर जल्दी फ़ारिग़ कर दीजिये शहज़ादे जल्दी से छोड़ लीजिये"

"अम्मी जान आपके गांड मारने दीजिये न आह क्या मोती और चर्बीदार गांड है इसमें तो माखन की तरह लौड़ा घुसेगा मेरा"

"उफ़ आप को वो कभी नहीं मिलेगी आप को क्या मेरी आगे की चीज़ नहीं पसंद"

"आगे की क्या"

"मेरी बुर"

"रांड़ी साली तेरी बुर को छोड़ क भोसड़ा बना दूंगा पर गांड भी मारूंगा तेरी मल्लिका इ जहाँ"

भूरिया पलट कर अपने बेटे से गले लग जाती है और गर्दन पर चूमते हुए "बीटा गांड नहीं दूंगी वह पर डालना गलत है आप चाहो तो मेरी छूट का चूरमा बना दो छोड़ छोड़ क"

"ाः अम्मी जहां मुझे मारनी हे है आपकी गांड कोई बात नहीं जब तक आपकी रसीली छूट को हे छोड़ क भोसड़ा बनता हु"

शमशेर अपने होठ अपने अम्मी क होठ से मिला कर चूसने लगता है "ाः अम्मी जान मैंने जैसे कहा था तुम ठीक वैसे हे तैयार हो कर आई हो गजब की माल लग रही हो एक डैम कोठे की वैश्य जैसी"



"अब आपकी ख्वाइश थी मई बुरखे क निधे कुछ नहीं पह्नु तो भला मई अपने सरताज की बात कैसे नहीं मानती"

शमशेर अपने ओरे भीचते हुए भूरिया की बुरखा को पीछे से ऊपर उठा देता है "ाः अम्मी जान आपकी ये गांड जब बुरखे में मटकती है तो जान हे ले लेती है मेरी हाय इसे मसल दूंगा आआह"

शमशेर अब अपने हाथो में भूरिया क वज़नी चुचो को पकड़ दबाने लगता है बुरखे क ऊपर से हे

"ाः धीरे से दबाओ न ाः हाय शहज़ादे हम्म्म्म आआआह"

शमशेर भूरिया को वही मेज़ पर बैठा देता है और भूरिया क चमचमाते पेअर को अपने हाथो में ले कर चूमने लगता है "हाय अम्मी जान आपके ये संगमरमरी पेअर आपके तलवे कसम से इसे चाट चाट कर साफ़ कर दू"



"ाः अम्मी जान इन तलवो में भी एक मिठास है कितनी चिकने पैरो की उंगलिअ है हम्म्म मज़ा आगया आपके पेअर चाट कर"

शमशेर कभी दाहिने पेअर की उंगलिअ तो कभी बाये पेअर की उंगलिअ मुँह में रख चूस रहा था और यदि और तलवे को अपने ज़ुबान निकल कर चाट रहा था और साथ में अपने लैंड भी बीच बीच में मुठिए देता

"बीटा शमशेर ये क्या कर रहे हो पैरो को चेतना चाहिए क्या ाः"

"अम्मी जान आपको ाचा लग रहा है न और मई तो हमेशा आपके कदमो टेल रहना चाहता हु ज़िन्दगी भर आपके कदमो को धो कर पीने की तमन्ना है मेरी भूरिया"

"ाः इतना चाहते है आप मुझे शमशेर ाः आप ऐसे इश्क़ करेंगे तो मई रोक नहीं पाऊँगी अपने आप को"

"अम्मी जान बास रोकना छोर दो अब टाँगे फैलाओ अपनी छूट तो दिखाओ मेरी पर्देदार हसीना अम्मी"

ये कह कर शमशेर मुस्कुराता है और भूरिया भी जवाब में एक क़ातिल मुस्कान देती है और लेट कर अपने टाँगे फैला कर अपने बेटे को अपने गुलाबी छूट का रास्ता दिखती है

"है अम्मी जान कितनी प्यारी छूट है आपकी "भूरिया अपने बुरखे को ऊपर करते हुए अपने दूध को नंगा कर देती है शमशेर भी अपने काम पे ध्यान देते हुए छूट को अपने एक हाथ से फैला देता है और दूसरे हाथ से एक ऊँगली से सहलाता है



शमशेर अब अपनी जीभ अपने अम्मी क छूट पर लगा कर चाटने लगता है और भूरिया जोश में आकर अपने भरी दूध को खुद दबाने लगती है

"आआआह शहज़ादे आपकी जुबां हे मेरी छूट का क़त्ल कर देती है आआआआह हम्म्म्म ाः ऐसे हे चाटो ाआअह"

"अम्मी जाएं मेरी ज़ुबान तो इतनी पसंद है और मेरा लैंड कितना पसंद है फिर मेरी मेहबूबा को जो आधी रात अपने बेटे क हुजरे में महल में सबकी मौजूदगी क बावजूद छोड़ने आगे"

शमशेर अपने बीच की ऊँगली अपने अम्मी की छूट में दाल देता है और खूब ज़ोर ज़ोर से अंदर बहार करने लगता है इतनी तेज़ी से ऊँगली से छोड़ने से भूरिया आहे भरते हुए सिसकने लगती है



"आआआआह आआआह शहज़ादी ाआअह मेरे नए सरताज मेरे मेहबूब ाः आपके लैंड पर तो मेरा डिल आगया है इतना ताक़तवर लौड़ा है आपका ाः जाएअनुम"

शमशेर अपने अम्मी को खींचते हुए निचे उतर देता है मेज़ से और उसको निचे बैठते हुए "तो जल्दी से चुसो अपने असली सरताज को आओ मेरी सुल्ताना भूरिया "भूरिया ये सुनते हे अपना बुरखा उतरने लगती है जो लुढ़क कर फिर से भूरिया क भरी दूध को धक् दिए थे

"अम्मी जाएं बुरखा मत उतारो आज आपकी चुदाई इसमें हे करूँगा मेरी जहां आओ लो चुसो मेरा लौड़ा मेरी वैश्य"

भूरिया निचे बैठ कर गौर से अपने बेटे क लम्बे और मोठे लौड़े को देखते हुए खुश होती है और अपने हाथो में लैंड पकड़ कर अपना मुँह खोल "galpppp"kar क मुँह में लौड़ा ले लेती है "आआआआह अमीबीएई जाआआआआ ह्म्म्मम्म" गलप्प्प गलप्प्प गलपपपप गलप्प्प



"ह्म्म्मम्म ाआअह गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प गलपपपप गलप्प"

भूरिया सिसकते हुए आवाज़े निकलते हुए अपने बेटे क चेहरे को देखते हुए लौड़ा अपने मुँह में अंदर बहार कर रही थी और शमशेर तो जैसे आसमान में उड़ रहा हो कुछ देर भूरिया लौड़ा चूसते हुए अपने मुँह से लौड़ा बहार निकल कर " अब छोड़ लीजिये न शहज़ादे "

"ायजा रांड कुटिआ बन जा तेरी छूट ठोकता हु मल्लिका ेजहाँ बहुत जल्दी है तुझे तो"

भूरिया बिस्तर पर जा कर अपने भरी गांड को पीछे को निकलते हुए अपने बेटे को इशारे से पास बुलाती है और शमशेर अपने माँ क थूक से भीगे हुए लौड़े को देख आगे बढ़ता है

"अम्मी जहां आपके निकली हुई गांड देख दिल करता है गांड में दाल दू "

"मर जाऔंगी मई गांड में डेल तो अआप छूट में डालिये जहा डाला जाता है जहा इसकी सही जगह है"

शमशेर अपने अम्मी क गांड पर हाथ अपने लौड़े का निशाना बैठा देता है और हलके से धक्के मारता है



"आआआआआह शमशेराआआ आआआआह कितना मोटा और लम्बा है आआह मर्डरर गयी"

भूरिया ाअखे बंद कर लेती है और शमशेर अब ज़ोर ज़ोर से ज़बरदस्त घाछे अपने अम्मी की छूट में मारने लगता है

"ाः ाः ये ले आआह अम्मी जहां आआह अआप्की गांड मारनी कब नसीब होगी आपकी गांड क लये तो मई आपसे शादी भी कर लूंगा ाः ये ले"

पाछह पछ गाछ गाछ ठप्प ठप्प की आवाज़े हुजरे में गूंज रही थी और दोनों माँ बेटे सिसकते हुए आहे भरते हुए जिस्म की प्यास बुझा रहे थे

"ाआअह आआह शहज़ादे आआह बीटा धीरे आआआह अआप को जो चाहिए वो तो मिल हे रहा है फिर आप शादी क पीछे क्यू पड़े रहते है "

"ाः ये ले राँद ाः गछहहह पछहः उफ्फ्फ चिकनी छूट है तेरी आआआह अम्मी जाएं मुझे लगता है कही शादी क बंधन में बांध लिया तो मेरी बात मान लो और गांड मरने का मौक़ा दे दो"

"चाहे कुछ हो जाए गांड नहीं दूंगी वह करने से बीमारिया होती है ाः उफ्फ्फ बीटा धीरे ाः वह करने में कोई मज़ा नहीं "

"अम्मी जाएं एक बार आप गांड मरवा लीजिये फिर देखिये आपको कितना मज़ा आएगा एक तो कुवारी गांड है आपकी अब उसे तो खोलने का मौक़ा दीजिये "

शमशेर ज़ोर ज़ोर से अपने अम्मी क छूट में धक्के लगा रहा था और भूरिया चीख रही थी उसने शमशेर का लौड़ा दूसरी बार हे तो ले रही थी



"ाः अम्मी जान गांड नहीं डौगी छूट का भोसड़ा बनाऊ साली रांड कोठे की 2 कौड़ी की वैश्य"

"ाः ाआअह उफ्फ्फ तो एक वैश्य से शादी करना चाहते हो ाः उफ़ धीरे शहज़ादे आआह और मेरी छूट मिलते हे मई 2 कौड़ी की वैश्य हो गई पहले तो मई पारी जैसी थी आआह उफ्फ्फ "

"है मेरी मल्लिकाजहं सुल्ताना भूरिया की गांड जाली बोलो तो लौड़ा पेल क जलन मिटा दू ाः ये ले मेरा लौड़ा आआह मेरी जान भूरिया पुरे दुन्या में सबको पता है तुम किसी गैर मर्द को देखती तक नहीं और दुन्या की सबसे ताक़तवर सुल्ताना आआह तुमको ऐसी कुटिया बना कर छोड़ने में मज़ा हे अलग है आह"

"आआह उफ्फ्फ हाँ बना दिए न मुझे 2 कौड़ी की रांड ाः यही चाहते थे न तुम "

"उफ़ ाः मेरी रांड हो तुम सिर्फ मेरी कोई सोने की महल भी दे दे तो भी तुम जैसी मखमली जिस्म की ख्वातून की इज़्ज़त खरीद नहीं सकता आप जैसी पर्देदार ख्वातून पाकर मई निहाल होगया वालिदा "

"ाः तो ज़ोर से छोड़िये आआह आआआआआह एमी गयी aaaaaaaaaaaaaaah betaaaaaaaaaa आआह झाड़ड़ड़ गई ाआअह"

शमशेर अपने अम्मी क छूट में जड़ तक धक्के मारते हुए अपने अम्मी क दूध को सहलाते हुए दबा रहा था और भूरिया मस्ती में अपने छूट का पानी छोर रही थी उसके आखे बंद हो गई थी ,शमशेर अपने भोली अम्मी को देखता है और सोचता है कैसे उसने अपने पर्देदार अम्मी को अपने लौड़े क निचे ले आया

उधर शहज़ादी समां हुजरे से निकल कर अपने शक कए हुए ठिकाना यानि क अपने सौतेले भाई शमशेर क हुजरे क पास पहुँचती है और कनीज़ों को देखते हुए अंदर आने की कोशिश करती है

kaneez:Shehzadi समां आप अंदर नहीं जा सकती अभी

sama:kaneez वो मई मल्लिका इ जहाँ मेरी बड़ी अम्मी को ढूंढ रही हु

kaneez:mallika इ जहाँ तो अंदर है पर उन्होंने सख्त हिदायत दी है क कोई अंदर न जाये

sama:acha ऐसा क्या खास है जो मेरे भाई और मेरी बड़ी अम्मी से मई मिल नहीं सकती

kaneez:Shehzadi समां हमारी बात मने अंदर शहज़ादे शमशेर का कोई इलाज चल रहा है मल्लिका इ जहाँ ने कहा है किसी क भी अंदर जाने से खलल पैदा हो जाएगी

Sama:man me)andar तो दुन्या क सबसे पाकीज़ा ख्वातून बनने का दिखावा करती है वो चुद रही होंगी अपने हे बेटे से काश मई तुम दोनों को रेंज हाथ पकड़ पति ऐसे तो ये क़ुबूल नहीं करेंगे

समां सोचते हुए वापस जाने लगती है और तभी उसे शमशेर क हुजरे की खिड़की दिखाई देती है जो बंद था समां मुस्कुराते हुए वह जाती है और इधर उधर देखती है क कही से कोई सिपाही या कनीज़ तो नहीं आरहा वो अपना कान सत्ता कर अंदर का आवाज़ सुनती है

"aaaaaaaaaaaaah शमशेराआआ उफ्फ्फफ्फ्फ़ बीटा ज़ोर से छोड़ो न आआह"

समां अपने बड़ी अम्मी की ये आवाज़ सुनते हे उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है और वो अपने मुँह पर हाथ रख कर अफ़सोस करने लगती है "बड़ी अम्मी आप ने हाडे पार कर दी छी घिन आती है आपको बड़ी अम्मी कहते हुए आप ने नाजायज़ रिश्ता बनाया ऐसा कोई कभी ख्वाब में भी नहीं सोच सकता और आप ने तो अपने हे बेटे को अपना शिकार बना ली मल्लिका ेजहाँ "समां ये कह कर इधर उधर देखती है फिर से अपने कान को खिड़की से लगाती है और खिड़की क कोने से हलकी आवाज़ को अपने तेज़ कान से सुनने लगती है

"aaaaaaaaaaaah अम्मीी जाएं आपके छूट का भोसड़ा बना दूंगा मेआएह ये ले मेरा लौड़ा"

खछः खछ पाछह पछ्ह्ह्ह आआआआह

शमशेर अब भूरिया को सीधा लेता कर अपना लौड़ा अपने माँ क दोनों टांग फैला कर पेलने लगता है

"ामी जाएं ाः मई चाहता हु क आप मेरे बचे की माँ बने आआह मेरी जान ले ले मेरा लौड़ा"

"उफ्फ्फ आआआह बेटा आआह ज़ोर से छोड़ो आआह सुल्तान क साथ तो मई तुम्हारे पैदाइश क बाद भी हमबिस्तर होती रही पर ये मुमकिन नहीं हो पाया आआआह बेताऑ "

"ामी जाएं आआह सुल्तान ने आपको दुबारा पेट से नहीं कर पाया कही मेरे से हो जाओ आप "



शमशेर अपना लौड़ा अंदर बहार करते हुए अपने अम्मी को छोड़ते हुए अपने अम्मी क बड़े दूध को पकड़ दबा रहा था और भूरिया ज़ोर से सिसकते हुए अपने बेटे से चुदाई क मज़े ले रही थी

"आआआह बेताऑ जाआआअनुम जो काम तुम्हारे बाप नहीं कर पाए वो तुमसे होगा आआह"

"मेरा बाआप तो आप ज़िन्दगी भर प्यासी छोर दिया और मेरे लौड़े में इतना डैम है क तुम्हे पेट से कर दू सुल्तान की तरह नुन्नू नहीं है"

"आआह बीटा ये मुमकिन नहिआअह ज़ोर से छोड़ो ाः आपका लौड़ा मेरे पेट तक जा रहा है ायः ाआअह ाः ाः आउच शमशेररराआआ आह मेरी उम्र नहीं अब माँ बनने की "

शमशेर अब अपना पूरा जिस्म की ताक़त लगा कर धक्के पेलने लगता है और भूरिया का वजूद हर धक्के में हिल जाता कुछ 8.10 घाछे मरते हुए शमशेर झड़ने क करीब आता है

"आआआह अमीबी jaaaaaaaaaaaan मेरी सुलताआआंआ मेरी बेगम आआह मई फ़ारिग़ होने वाला हु ाआअह फच्च फच्च फैट फैट आआआआआह ाआअह ameeeeeeeeeeeeeeee jaaaaaaaaaaaaaaan aaaaaaaaaaaah"

"आआआजाओ मेरे अंदर हे फ़ारिग़ हो जाओ अपने मणि से मेरी पयाआस बुझायआ दो ाआअह मेरे सरताज मेरे ाआशिक़ मेहबूब शमशेराआआअह क्या मरदाना ताक़त है आपमें आह"

शमशेर अब घाछे मारते हुए अपने लौड़े को अपने माँ क छूट में जड़ तक लगाए झाड़ रहा था और कुछ देर झड़ने क बाद अपना लौड़ा बहार खींचता है अभी भी उसके लैंड से वीर्य रिस रहा था वो अपना लैंड मुठियाते हुए अपना लौड़ा को छूट पर



रख अपना वीर्य अपने अम्मी क छूट पर झाड़ देता है भूरिया अपने छूट क ऊपर अपने हाथ से सहलाते हुए अपने ाअखे बंद कए ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी

शमशेर का बदन हल्का हो गया था और वो वही बिस्तर पर गिरते हुए लेट जाता hai,hooriya अपने बेटे की तरफ खिसकते हुए "थक्क गए मेरे आशिक़ "

"ाः अम्मी जान आपको छोड़ क मज़ा आगया "

"तो मई अब चालू जी समां उठ गई कही तो दस सवाल करेगी"

"अम्मी जान कह देना तुम्हारे शमशेर भाईजान से छोड़ने गई थी उसे भी तो पता चले क समां की भाबी इसी महल की सुल्ताना है"

भूरिया हसने लगती है जिसे देख शमशेर भी हसने लगता है इन दोनों को क्या पता ये सब बाटे कोई सुन रहा है ,बहार कान लगाए समां सब सुन रही थी

Sama:man me)aapne तो अपनी इज़्ज़त हे लीलाम कर ली अपने जिस्म क खातिर मल्लिका इ जहाँ अब मुझे शर्म आती है आपको एक पाकीज़ा औरत और सल्तनत की सुल्ताना कहते हुए ,खैर मुझे इस रांड औरत से पहले पंहुचा होगा अगर ये पहुंच गई तो इसे पता चल जायेगा

समां इधर उधर देखती है और अपने बड़ी अम्मी क हुजरे में वापस जाने लगती है वो चाहती थी क वो भूरिया से पहले पहुंच जाये और सो जाये जिस से भूरिया को शक नहीं हो

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 183

Sama:man me)aapne तो अपनी इज़्ज़त हे लीलाम कर ली अपने जिस्म क खातिर मल्लिका इ जहाँ अब मुझे शर्म आती है आपको एक पाकीज़ा औरत और सल्तनत की सुल्ताना कहते हुए ,खैर मुझे इस रांड औरत से पहले पहुंचना होगा अगर ये पहुंच गई तो इसे पता चल जायेगा

समां इधर उधर देखती है और अपने बड़ी अम्मी क हुजरे में वापस जाने लगती है वो चाहती थी क वो भूरिया से पहले पहुंच जाये और सो जाये जिस से भूरिया को शक नहीं हो

समां वापस हुजरे में चली जाती है और अपने गुस्से को सँभालते हुए पर उसके कानो में भूरिया की चीखे और चुदाई की सिसकी सुनाई दे रही थी ,इधर भूरिया अपने बेटे शमशेर क बाहो में लेती थी और उसको बहुत प्यार से देख रही thi,shamshera अपने अम्मी को छोड़ कर हाँफते हुए सुस्ता रहा था पर अपने छुडासी अम्मी जान को देख

"अम्मी जाएं आप ऐसे अपने क़ातिल निगाहो से मेरा क़त्ल करोगी तो मई आपको रात भर नहीं जाने दूंगा और छोड़ छोड़ कर छूट लाल कर दूंगा आपकी"

"ऐसा सोचना भी मत समां सो कर उठ गई और मुझे नहीं पाई तो हम पकडे जायेंगे शहज़ादे"

"अम्मी जान उसकी फ़िक़र आप मत कीजिये मई आपकी ननद समां को समझा दूंगा वो अपने भाबी को परेशां नहीं करेगी "

"चुप करो शमशेर हर वक़्त मज़ाक सूझता है"

"आप कहो तो हर वक़्त आपकी चुदाई करू मोहतरमा"

शमशेर अपने अम्मी को खींचते हुए अपने पास लाता है

"उफ्फ्फ शमशेर छूट पर जो मणि है उसको तो पॉच दो"

"ाचा जी तो आपकी छूट में अपना मणि भी छोरु और साफ भी मई करू पता है कितना म्हणत करना होता है आपके छूट को ठंडा करने क लये "

"हाँ रहने दो बहुत मेहनती हो हाँ मई खुद साफ़ कर लुंगी कोई कपडा दो"

शमशेर भूरिया का दुपट्टा आगे करते हुए "शहज़ादे कोई दूसरा कपडा दो इस से कैसे पोछूँगी गन्दा हो जायेगा"

शमशेर अपने अम्मी क हाथ उठा कर बगल क बाल को सहलाते हुए "मेरे लैंड का पानी आपके छूट में भी तो है तो क्या अआप्की छूट गन्दी हो गई ?"

"उफ़ तुमसे तो बहस करना हे बेकार है "भूरिया दुपट्टे से अपने छूट को अचे से साफ़ करने लगती है और शमशेर भूरिया क ब्याह को उठा अपने ज़ुबान से भूरिया क बगल क बाल को चाटने लगता है "अम्मी जान मेरे से बहस करना बेकार है और मेरे से छोड़ना ाचा है "

"ठीक है जानम मई अब जाती हु इस से पहले समां को हमारा सुराग मिल jaye"shamshera अपने अम्मी को ज़ोर से अपने ऊपर लेते हुए ज़ोर से बीच लेता है और भूरिया क आखो में देखते हुए

"अम्मी जान छोर क जा रही हो "

भूरिया अपने बेटे क आखो में प्यार देख रही थी और "hmmm"karti है "अम्मी जान मत जाओ न आपको रात भर्र प्यार करना है आपके बिना नींद नहीं aayegi"hooriya अपने बेटे क आखो में वो दर्द देख रही थी जुदाई का क्यू क अब भूरिया ने भी शमशेर को अपना मर्द मान ली थी उस से रहा नहीं जाता है और वो ज़ोर से अपने बेटे क बहो से लग जाती है "मेरी जाएं शमशेर नींद तो मुझे भी नहीं आएगी अकेले पलंग पर मेरा मरद मेरे मिया यहाँ रहेंगे और मई वह अपनी जवानी ले कर तड़पुँगी मेरे सरताज"

"तो अम्मी मत जाओ न क्यू हम अपनी मर्ज़ी से अपने जवानी का मज़ा नहीं ले सकते "

"बीटा मुझे मुआफ कर दो मेरी वजह से मई आपकी ख्वाइश पूरी नहीं कर सकती क्या करू मई मजबूर हु"

भूरिया उदास सी हो जाती है जिसे देख शमशेर अपने माँ को बहो में भींच सहलाते हुए "अम्मी जान इसमें आपकी कोई गलती नहीं अब हमारे इश्क़ क बीच ज़माना खड़ा है जो हमे रोकेंगे आप बास मुझसे ऐसे हे मुहब्बत करते रहे मेरी जान मेरा डिल को सुकून रहेगा"

"हाँ बीटा इस ज़माने में इस रिश्ते को कोई नहीं मैंने वाला सिवा महारानी देवरानी और बलदेव सिंह क "

"हाँ अम्मी जान बलदेव सिंह और खला देवरानी ये जान कर बहुत खुश होगी "

"क्या शमशेर "

"यही क हम दोनों अब दो जिस्म एक जान है खला देवरानी ने मेरी बहुत मदद की आपको अपना बनाने में मई उनका अहसानमंद ज़िन्दगी भर रहूँगा"

"तो बात दो शमशेर अपने खला को खत लिख दो "

"वह अम्मी जान आपने सही सलाह दिया है मई अभी लिख देता हु khat.zara कलम और दावत लाओ भूरिया"

"मई नहीं जाउंगी मई थक गई हु खुद उठ क जाओ "

"मई खुद बहुत थका हु पूरी जान खींच लेती है आपकी छूट"

"शमशेर मेरी बुर में दर्द है तुम्हे क्या दर्द है खुद जाओ "

"ामी जान आपको लग रहा है क मई आपको हुकम दे रहा हु तो क्या मिया अपने बीवी से छोटा सा काम नहीं करवा सकता ..छोड़िये मई खुद हे ले लेता हु आप मुझे अपना शौहर तो समझती नहीं हो शौहर नहीं तो अपना मर्द भी नहीं समझती"

शमशेर मुँह बना कर उठने लगता है तो भूरिया हाथ आगे से हाथ पकड़ खींचते हुए

"तुम बहुत चालबाज़ हो शहज़ादे पहले तो छूट मार ली जैम क अब कह रहे हो क मई मरद नहीं समझती बेशक तुम मेरे शौहर नहीं हो क्यू क हमारी शादी नहीं हुई"

ये कहते हुए भूरिया उठ कर कुछ पैन और दावत कलम ले आती है "ये लीजिये जहाँपनाह आपकी कनीज़ आपके खिदमत में हाज़िर hai"shamshera मुस्कुराते हुए भूरिया क हाथो से सामान ले कर बैठ कर स्याही लगते हुए लिखना शुरू करता है और सबसे पहले सलाम लिखता है

"अम्मी जान आप हे बताओ कैसे लिखू मुझे तो कुछ समझ नहीं आरही कैसे बताऊ उन्हें हमारे नए रिश्ते क बारे में"

"क्यू शहज़ादे हम से रिश्ता बनाते वक़्त तो शर्म नहीं आई और अभी समझ में ताले लग गए होने वाले सुल्तान को"

शमशेर मुस्कुराते हुए लिखना शुरू करता है

"मेरे भाई बलदेव सिंह और मेरी प्यारी भाबी महारानी देवरानी आप दोनों की मदद और हौसला अफ़ज़ाई क वजह से मैंने (sultana)Hooriya को अपना बना लिया और हम दोनों क बीच इश्क़ परवान चढ़ रहा है काश आप दोनों हमारे साथ hote,ammi जान भी आप दोनों का तहे डिल से शुकरिअ ऐडा करना चाहती है हम दोनों को मिलाने क लये,

आपका भाई शमशेर

आपकी भाबी सुल्ताना हूरजहाँ

Hooriya:tumne ये मेरा नाम सिर्फ भूरिया लिखा हूरजहाँ भी नहीं और तो और मई कोई मामूली ख्वातून लगती हु तुम्हे?

Shamshera:Aap कहना क्या चाहती है अम्मी जान

hooriya:Mai सुल्ताना हु मल्लिका इ जहाँ हु पारस सल्तनत की मेरे नाम क पीछे लगाओ

shamshera:achha मेरी जान सुल्ताना लिख देता हु बास काम जगह है

शमशेर भूरिया क पहले सुल्ताना लगा देता है

"अब खुश मेरी जानम?"

"हाँ अब ठीक है "

शमशेर उठ कर अपने हुजरे क उस कोने में जाता है जहा पर उसके तोते और कबूतर थी उसी में से एक कबूतर को पिंजरे में से खोल कर बहार निकलता है और उस खत को मोड़ कर कबूतर क पेअर में बांध कर खिड़की क पास जा कर

"जा कबूतर गहतराष्ट्रा और इस खत को मेरे दोस्त बलदेव सिंह को पंहुचा"

भूरिया वही पास कड़ी मुस्कुरा रही थी बलदेव उस कबूतर को छोरता है और कबूतर पंख फड़फड़ाते हुए खिड़की से उड़ जाता है

Hooriya:ye कबूतर पंहुचा तो देगा न खत

shamshera:ammi जान ये गहतराष्ट्रा क क़िले का हे कबूतर है आप फ़िक़र न करें

शमशेर अब भी नंगा था पर भूरिया अपने बुरखा को संभल क पहन ली थी शमशेर अपने बाहो को फैलता है भूरिया अपने बेटे से गले लग जाती है

"अम्मी जान आअज आपने मेरा डिल खुश कर दिया बोलिये आपको क्या चाहिए"

भूरिया भी एक झीनी सी कपडे बुरखे में हे थी अंदर उसने कुछ नहीं पहना था दोनों माँ बेटे क जिस्म पर पारस क वादी से आरही ठंडी हवा छू रही थी

"Shamsheraaaa..Aap से मुझे सिर्फ और सिर्फ प्यार चाहिए और कुछ नहीं मेरे सरताज"

"आपको कभी प्यार की कमी महसूस नहीं होगी मेरी सजनी"

शमशेर अपने अम्मी क होठ की अपने होठ में रख चूसने लगता है कुछ देर ऐसे हे एक दूसरे क होठ को चूसने क बाद भूरिया अपनी सांस सँभालते हुए रुक कर

"बास शमशेर अब जाती हु "

"अम्मी जान एक बार और छोड़ लेता हु झुक जाओ न तुम भी तो गरम हो गई हो "

"शमशेर समझो बात अब चलती हु"

भूरिया शमशेर से दूर होते हुए जाने लगती है

shamshera:zaalima

Hooriya:zaalim तुम्हारा वो है देखो फिर खड़ा हो गया अब जाती शब्बा खैर

भूरिया पलट कर जाने लगती है मुस्कुराते हुए और सिर्फ बुरखा में उसका भरी गांड जो अब तक कुंवारा था मटक कर शमशेर का चैन चुरा रहे थे ,देखते हे देखते भूरिया बेगम अपने बेटे क आखो से ओझल हो जाती है और शहज़ादे शमशेर अपना माँ क बड़ी गांड को याद करते हुए बिस्तर पर सो जाते है

भूरिया चलते हुए हुजरे से बहार निकलती है तो शमशेर क दरवाज़े पर खड़े रहने वाली दसिआ भूरिया क बिखरे बाल चूसे हुए होठ और सिलवाते आई हु बुरखा और लड़खड़ाई चाल को गौर से देख कर दांग रहती hai,Kaneez देखती है गांड में लचक कुछ ज़्यादा हे है ऐसे हे वो अपने हुजरे तक पहुँचती है मन में दर लिए क्यू क राज परिवार का कोई शख्स अगर इतनी रात को इस हाल में महल में देख लेता तो कई सवाल करता ,भूरिया अपने तेज़ कदमो से अपने हुजरे तक पहुँचती है उसके कनीज़ भूरिया को आते देख अपना सर झुका लेती है पर उन कनीज़ों क डिल में भी भूरिया क इस हाल की हलचल thi,hooriy जैसे हे अंदर जाती है तो उसे सामने शहज़ादी समां बैठ कर पानी पीती हुई दिखाई पड़ती है

भूरिया क तो हाथ पेअर काँप जाते है और वो समां को देखती है पर समां अपने अम्मी को देख

sama:man me)Chud कर आगे रांड भूरिया ची तुम तो रंडी से भी बत्तर निकली पर तुम्हे रेंज हाथ नहीं पकडू तब तक चुप रहूंगी

समां मुस्कुरा क अपने बड़ी अम्मी को देखती है और पूछती है

"बड़ी अम्मी आप इस वक़्त कहा गई थी आप तो सो रही थी न "

hooriya:man me)pata नहीं ये समां क्या कर क मानेगी अब इसे इस रिश्ते क लये राज़ी भी तो नहीं कर सकती मई

hooriya:Beti वो तुम्हारे अब्बा सुल्तान बुलाये थे वही थी

sama:badi अम्मी सुल्तान क पास तो जाते है आप तो सुबह हे आते है ऐसा क्या हो गया जो रात में हे आना पड़ा आपको

hooriya:wo कुछ खास बात थी

समां ऊपर से निचे तक भूरिया को देखती है

Sama:Aisi क्या खास बात थी और आपने बुरखे क अंदर कुछ नहीं पहना है क्या

Hooriya:Sama तमीज मत भूलो अपनी तुम अपनी ज़ुबान संभल क बात करो ,सुल्तान ने मुझे किसी सियासी काम से बुलाया था और मई बुरखा क अंदर क्या पहनी नहीं पहनी तुम मुझ पर इलज़ाम लगाना चाहती हो "

भूरिया अपने आपको बचने क लये गुस्से से कहती है और समां का डिल दहल जाता है क्यू क आज तक भूरिया से वो डर्टी आई थी

Sama:Muaaf कीजिये बड़ी अम्मी बास मैंने..

hooriya:Tumhari ज़ुबान लम्बी हो गई है बद्तमीज़ होते जा रही हो

भूरिया ये कहते हुए अपने उस कमरे में चली जाती है जहा उसे कपडे बदलती thi,sama कड़ी कड़ी अपने बड़ी अम्मी क बड़े मोठे दूध और मोती गांड को साफ़ साफ झीनी से कपडे से देख रही थी

समां :मन me)Sultana भूरिया ये ढोंग ज़्यादा दिनों तक नहीं रहेगा मई बहुत जल्द तुम्हारे चेहरे का निक़ाब हटा दूंगी ज़लील औरत

उधर भूरिया तुरंत अपना कपडा पहन लेती है जो वो उतार कर गई थी और बुरखा को वापस रख देती है भूरिया को ये अंदाज़ा भी नहीं था क समां ने उसके कपडे की छान बीन की है वो खुश हो रही थी क उसने समां को दन्त कर बच गई पर भूरिया इस बात से बेखबर थी क उसकी और उसके बेटे क चुदाई की आवाज़ समां ने खिड़की से सुन ली थी भूरिया तैयार हो कर वापस अपने बिस्तर में जाती है

Sama:man me)abhi बड़ी अम्मी को शक नहीं होने दूंगी क मुझे शमशेर भाईजान और इनके बीच क रिश्ता का पता है जब तक मई इनदोनो को सबूत क साथ न पकड़ लू

Sama:Badi अम्मी आपके पेअर दबा दू आप थक गई होंगी

hooriya:Zarurat नहीं है

Sama:aap अब भी गुस्सा हो बड़ी अम्मी गलती हुई मुझसे

hooriya:theek है ..चलो सो जाओ मुझे नींद आरही है

भूरिया और समां दोनों सो जाते hai,hooriya अपने बेटे से चुद क चैन क नींद सोती है और सीधा सुबह समां क जगाने पर उठती है समां अपने हुजरे में चली जाती है और आगे क मंसूबे पर काम करने लगती है कैसे शमशेर और भूरिया को पकडे रेंज हाथ वही भूरिया उठ कर नहाती है धोती है फिर अपने लिए एक नए लिबास निकल कर पहनती है और आईएनए में देख "इसका तो गाला बड़ा है इसमें तो मेरे दूध क ऊपरी हिस्सा दिख रहे hai"fir कुछ सोचते हुए भूरिया तैयार होती है अपने होठो पैर मॉल क लाली लगाती है

Hooriya:man me)Ab मैंने दरजी खला से कहा था बड़े गले का और कैसे हुए लिबास सिलने क लये तो वैसे इसमें तो शमशेर तो मुझे देखते हे टूट पड़ेगा हम्म कैसे मुझे पागलो की तरह चाहता है शमशेर अभी दो दिन हे हुए है चुदाई करते हुए पर दो रातो में हे मई खिल सी गई हु बदन में जैसे के नै फुर्ती और जोश आगया हो"

ये सोच हे रही थी क बहार से आवाज़ आती है नाज़ बेगम भूरिया क सौतन का "मल्लिका इ जहाँ क्या हम अंदर आ सकते hai"hooriya मुस्कुराते हुए "ाजैये नाज़ बेगम आज सुबह subah"naaz क साथ साथ पीच उसकी बेटी समां भी थी

Naaz:Ab सोची आज आपके पास बैठ गुफ्तुगू कर लू फिर साथ हे दरबार चलूंगी

Hooriya:aao बैठो नाज़ समां तुम भी बैठो

नाज़ और समां दोनों भूरिया क महकते जिस्म और चमकते चेहरे को देख दांग थे आज पहली बार इस रूप में देखा था खुले गले क काफटाण में हूरजहाँ क बड़े गोर दूध साफ़ नज़र आरहे थे जो बेताब थे बहार आने को

Naaz:waise भूरिया बाजी आज आप अलग लग रही हो इतनी हसीं और आप पर ये नया लिबास खूब फैब रहा है



भूरिया इतराते हुए अपने घने ज़ुल्फो को उठा कर पीछे फेकते हुए मुस्कुराती है "शुकरिअ नाज़ बहिन" ऐसा करता हुए भूरिया क बड़े दूध बड़े गले से झाकने लगती है जिसे समां और नाज़ दोनों देख रही थी और दोनों माँ बेटी का हालत ख़राब था

Naaz:Waise आपके लिबास का गाला कुछ बड़ा नहीं है

naaz:man me)hooriya क दूध भी दिख रहे है आज से पहले कभी ऐसी रान्दीपना तो देखि नहीं ये तो हमेशा अपने नाख़ून तक छुपा क राखी

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बड़े दूध अपने गांड मटकते हुए अपने सौतन नाज़ और उसकी बेटी क उतरे हुए चेहरे को देख कर

"नाज़ बेगम आज क ज़माने में तो इतना चलता है वैसे भी मैंने कौन सा मर्दो क बीच जाना है

naaz:aap आज ऐसे महल क बहार चले जाये तो न जाने कितने मर्द काट जाये आपको देखने क लये



hooriya:Naaz तुम भी न इतनी भी खूबसूरत नहीं हु मई पागल

भूरिया अपने कमर पर हाथ रखते हुए अपने हुस्न क जलवे को दिखते हुए कहती है

hooriya:man me)Ye हुस्न और ये ख़ुशी सब मेरे साजन मेरे मेहबूब शमशेर की वजह से है"

वही साथ में बैठी शहज़ादी समां अपने अंदर क गुस्से को शांत करने की कोशिश कर रही थी

Sama:man me)Hooriya सुल्ताना अपने हे बेटे क साथ रात गुज़री हो और सुबह में अधनंगे कपडे पहन कर किसी रैंड की तरह खुश हो रही हो छी तुम कैसी औरत हो हूरजहाँ अपने बेटे से हे चुद कर अपनी आग ठंडा कर रही हो देखो कितना इठला रही है जैसे सुहागरात क बाद दुल्हन इठला रही है"

Hooriya:Kya हुआ समां तुम चुप चाप बैठी क्या मई तुम्हे अछि नहीं लगी

sama:han wo..aap वो तो हो हे खूबसूरत

naaz:Aapko खुश देख कर ाचा लगा वैसे मुझे कुछ याद आगया भूरिया बजी

hooriya:Ji कहिये नाज़ बहिन

Naaz:Sama तुम दरबार पहुँचो हम आते है

sama:Ji अम्मी जान

नाज़ क कहने पर उसकी बेटी समां चली जाती है

hooriya:kya हुआ ऐसी क्या बात है जो तुमने समां को भेज दिया

Naaz:wo भूरिया बजी आप आज माल लग रही हो एक डैम

hooriya:dhatt तो यही बात थी

naaz:nahi भूरिया बजी वो जब आपकी ताब्यात ख़राब हुई थी तो हकीम ने कहा था आप क बारे में आज आपकी जवानी देख याद आई

hooriya:Kya कहा था उसने

naaz:Wo आपके घुटनो में दर्द और बुखार बार बार होने की वजह..

hooriya:Daro नहीं नाज़ बताओ क्या वजह..

Naaz:Wo हकमा कह रही थी क मल्लिका इ जहाँ अंदर हे अंदर बहुत ज़्यादा परेशां रहती है और आपके जिस्म की गर्मी बढ़ जाने क वजह से आप क साथ ऐसा होता है

hooriya:kya..ye क्या बक रही हो

naaz:baaji गुस्सा न हो पर ये हकीम ने कहा है उन्होंने ने कहा है हो सकता है सुल्तान आपको वक़्त नहीं दे प् रहे है इसलिए आपके जिस्म की ज़रूरत पूरी नहीं होती और आप को कमज़ोरी और बुखार हो जाता है

ये सुनते हे भूरिया मुस्कुराते हुए हसने लगती है पर अपने हसी को रोकते हुए

hooriya:man me)ab तुम्हे कैसे बतातु नाज़ बेगम पिछली बार मुझे बुखार इसलिए लगा क्यू क शमशेर ने मुझसे प्यार का इज़हार क्या था और आज मई इतनी खुश इसलिए हु क्यू क शमशेर अब सुल्तान की जगह ले लिया है और मेरी जिस्म की आग ठंडा कर रहा है और अगर हकीम की बात सही है तो जल्द हे मेरी सेहत पहले जैसी हो जाएगी

Naaz:kya सोचने लगी बजी

hooriya:Daro मत नाज़ तुम मेरी बहिन हो वैसे हकीम ने ये कहा था तो सच हे होगा

naaz:aap जैसी खूबसूरत मई होती तो किसी न किसी अचे मर्द को अपने जाल में फसा लेती और खूब ऐश करती पर आप तो बास भूरिया बजी अपने जवानी को बर्बाद कर रही है सुल्तान क लये

ये सुनते हे भूरिया को ज़ोर से हसी आजाती है उसे अपने सौतन की मासूमियत पर हसी आजाती है और वो लोट पॉट कर हसने लगती है भूरिया को इतना ज़ोर से हस्ते देख नाज़ भी हसने लगती है भूरिया को समझ नहीं आरहा था क वो नाज़ को कैसे बताये क वो बेवक़ूफ़ नहीं है और उसने अपने जवानी का मज़ा चखना शुरू कर दिया है वो भी अपने बेटे शहज़ादे शमशेर क लैंड से.

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 184

"आप तो बास भूरिया बजी अपने जवानी को बर्बाद कर रही है सुल्तान क लये"

ये सुनते हे भूरिया को ज़ोर से हसी आजाती है उसे अपने सौतन की मासूमियत पर हसी आजाती है और वो लोट पॉट कर हसने लगती है भूरिया को इतना ज़ोर से हस्ते देख नाज़ भी हसने लगती है भूरिया को समझ नहीं आरहा था क वो नाज़ को कैसे बताये क वो बेवक़ूफ़ नहीं है और उसने अपने जवानी का मज़ा चखना शुरू कर दिया है वो भी अपने बेटे शहज़ादे शमशेर क लैंड से.

सुल्ताना भूरिया की हसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी फिर भी अपने आप को सँभालते हुए भूरिया अपने सौतन नाज़ को देखते हुए

"नाज़ बेगम आप इतना मत सोचिये मेरे बारे में"

"क्या हुआ भूरिया बाजी आप है क्यू रही है इतना और मैंने कौन सी हसने की बात कह दी"

Hooriya:man me)Ab तुम्हे क्या पता नाज़ बेगम मई अब पहले जैसी डरपोक नहीं अब में अचे से अपनी जवानी क मज़े लेती हो शमशेर से

Hooriya:Hakeema की बात सही है जिस्म की आग ठंडी नहीं हो तो दस बिमारीअ होती है

naaz:Baaji पर अब आप तो पहले से ज़्यादा खुश रहती हो और अब आपके घुटनो में दर्द भी नहीं होता और न हे बुखार लग रहा है कुछ दिनों से

Hooriya:Man me)Mere इस ख़ुशी का राज़ सिर्फ और सिर्फ मेरा बीटा शमशेर मेरी रस को अचे से निचोड़ कर पीटा है क्या बताऊ नाज़ कितना बड़ा मोटा लौड़ा है उफ्फ्फ उसका लौड़ा

भूरिया ये सोच हे रही थी क शमशेर आए जाता है और दरवाज़े पे खड़ा अपने अम्मी को देखते हे मुँह खुल जाता है और चुप चाप खड़ा रहता है



भूरिया अपने बाल को सवारते हुए अपने खुले गले से अपने बेटे को अपने दूध का ऊपरी हिस्सा दिखा रही थी वही पर कड़ी नाज़ दोनों माँ बेटे को देख दांग थी और वो सोच में थी

Naaz:man me)Ye क्या हो गया भूरिया बाजी को अपने बेटे क सामने अपने सीने को दिखा रही है दुपट्टा भी नहीं रख रही है

Naaz:ary शमशेर आओ अंदर बीटा

shamshera:Ji नाज़ अम्मी

नाज़ भूरिया को देख फुसफुसाते हुए "भूरिया बाजी दुपट्टा रखिये सीने पे"

पर भूरिया न मई सर हिला क नाज़ का बोलती बंद कर देती है

Naaz:man me)Apne नाख़ून तक अपने बेटे से छुपाने वाली आज रंडी की तरह अपने बेटे को दूध कैसे दिखा रही है

Shamshera:Kaisi है नाज़ अम्मी आप

naaz:mai ठीक हु तुम सुनाओ शहज़ादे

shamshera:Bass नाज़ अम्मी जुंग की तैयारी और उस लूटेरा शुंग को पकड़ने की तैयारी में लगा हु

Naaz:Us क़ातिल को जल्द से पकड़ क सजा दो उसने तुम पर और भूरिया बजी पर जानलेवा हमला क्या

Shamshera:waise अम्मी जान आप बहुत अछि लग रही हो

शमशेर से रहा नहीं जाता और अपने अम्मी क कासी हुई जाँघे और भरी लटके हुए दूध को देख कहता है जिसे नाज़ देखते हुए

naaz:Q शहज़ादे मई खूबसूरत नहीं

shamshera:Han आप तो बहुत हसीं हो नाज़ अम्मी

शमशेर नाज़ को कहते हुए अपने अम्मी को आँख मार देता है और नाज़ को भागने क लये इशारा करता है भूरिया शर्मा कर अपने बेटे की बात मानते हुए

hooriya:Naaz ाचा तुम जाओ मई आती हु

naaz:Kya हुआ बाजी हम साथ जानेवाले थे न दरबार अब तो वक़्त भी हो गया

hooriya:islye कह रही हु तुम जाओ मई शमशेर को दवा खिला क आती हु

naaz:Theek है ठीक है जाती हु आप दोनों आओ

naaz:Man me)Pata नहीं क्यू मुझे क्यू अजीब लग रहा है

नाज़ क दरवाज़े क बहार कदम रखते हे शमशेर दौड़ कर अपने अम्मी भूरिया से गले लग जाता है और भूरिया भी अपने बेटे को अपने बाहो के समेत लेती है

"अम्मीी जाहां कसम से एक डैम चुड़क्कड़ माल लग रही हो इस खुले गले क लिबास में"

"ाः तो मेरे बेटे को इतना पसंद आया लिबास अह्ह्ह "

"अम्मी जान माल हो आप चाहे जो पहन लो एक डैम चुड़क्कड़ रांड लगती हो मेरी जान ाः आओ ुहम्म्म्म आआह"

शमशेर अपने अम्मी क गांड की दबाते हुए भूरिया क गले पर चूमने लगता है और भूरिया भी बेतहाशा अपने बेटे क साथ देते हुए अपने बेटे क लौड़े पे अपना छूट रगड़ते हुए

"ाः अहम्म्म्म्म आआह बड़े उतावले हो रहे थे नाज़ क सामने हे घूरे जा रहे थे ाः ुहममममम आआह जानम"

"क्यू न देखु मेरी लैला को तुम तो मेरी माल हो तुम्हे न छोड़ू तुम्हे न पेलू तुम्हे न देखु तो किसे dekhu..waise तुमने सही तरीक़ा से भगा दिया नाज़ अम्मी को या कहु तो अपने सास को"

"ाः ुहम्मा ज़ोर से मसलो मेरी दूध को पकड़ो बेताऑ आआह मसल मसल क इसकी गर्मी निकल दो ाः मेरे सरताज"

शमशेर अब जैम क अपने अम्मी क दूध को दबा रहा था

"ाः शमशेर मेरी सास कैसे हुई नाज़ ाआअह"

"मेरी जनम भूरिया तुम मेरी बीवी और मेरी सौतेली माँ तुम्हारी सास ..इधर आओ मेरी गॉड में बैठो"

शमशेर भूरिया को धकेलते हुए बिस्तर पर बैठ जाता है और भूरिया को अपने गॉड में लैंड पर बिठा कर अपने हाथो से दोनों मम्मो को पकड़ मर्दन करने लगता है

"ुहममम आआआआह आआआह शमशेरराआआ आआह मई तुम्हारी बीवी कहा से हु"

"उफ़ मेरी जनम भूरिया मेरे लौड़े पे बैठ मज़े ले रही हो और बीवी नहीं हो मई तो आज शादी कर लू तुम से भूरिया तुम हाँ तो कहो"

"नहीं आआआह नहीं शादी कभी नहीं गलत है एक माँ एक बीटा से कैसे ये मुमकिन नहीं ाः उफ्फ्फ "

"ामी जान आपकी गांड मारना चाहता हु आशिक़ को अपनी कुवारी गांड का मज़ा तो चखाओ"

"ाः नहीं छूट मारो बास ाआअह ुह्ह्ह्ह "

शमशेर अपने अम्मी को खूब जैम क चूमता छत्ता है और कुछ देर ऐसे हे दोनों एक दूसरे क बदन को मसल कर मज़े लेते है फिर शमशेर अपने अम्मी को छोर दरबार की तरफ चला जाता है और जा कर अपने आसान पर बैठ जाता है कुछ देर बाद मल्लिका इ जहाँ भी चली जाती है कुछ देर बाद दरबार में पारसी सुल्तान मेरे वाहिद आटे है और एक सिपाही ज़ोर से आवाज़ लगते हुए

"होशियार होशियार पारस क सुल्तान दरबार पहुंच चुके है"

दरबार में बैठे सब अपने आसान से उठ खड़े हो जाते है सुल्तान की सम्मान में सुल्तान धीरे कदमो से आकर अपने आसान पर विराजमान होते है और अपने हाथ क इशारे से सबको बैठने क लये कहते है

Sultan:Shamshera क्या उस शुंग का कुछ पता चला

Shamshera:Hum ने पारस का चप्पा चप्पा छान मारा पर शुंग का नमो निशान तक नहीं मिला अब्बा जान

Gulshah:Tumne तो कहा था शमशेर शुंग जल्द गिरफ्त में होगा

shamshera:bhut जल्द होगा और वो भी जिसमे शुंग का इश्तेमाल क्या है

Gulshah:Man me)shungu इसके पहले तुम्हे मेरा राज़ बताये मई अपना काम होते हे शुंग को उसके साथिओ क साथ क़त्ल कर दूंगा और तुम कभी नहीं पता कर पाओगे

Sultan:Gul शाह ये वक़्त बहस करने की नहीं मुझे किसी हाल में शुंग चाहिए ज़िंदा...

गहतराष्ट्रा राज्य

सुबह क समय सब बैठ कर नाश्ता कर रहे थे राजा राजपाल क पास रानी षुरूश्ती बैठी थी और महाराज बलदेव क पास महारानी देवरानी और उनके साथ में थी राजमाता जीविका सब खाने में लगे थे और कमला और राधा पडोसने में तभी बलदेव उठ जाता है खा कर

Shurushti:Ary बीटा बलदेव इतनी जल्दी कितना काम खाये

baldev:Badi माँ बास अब और खाया नहीं जाता

Shurushti:aaj कल काम कहते हो बहुत

देवरानी अपने पति बलदेव क उठ जाने पर अपना हाथ रोक लेती है और बलदेव की ओरे देख रही थी

shurushti:Maharani आप हे कुछ कहो ऐसे तो हमारा बीटा कमज़ोर हो जायेगा

devrani:Kya हुआ जी इतनी जल्दी आपका पेट भर्र गया

देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए पूछती है और हल्का नाराज़ हो कर देखती है

Baldev:Aap खाइये महारानी देवरानी मुझे अभ्यास क्षेत्र में भी जाना है

Jeevika:ab षुरूश्ती हमारा पोता आजाये तो हम सबको खाना भी ाचा लगे पता नहीं होगा या नहीं

Shurushti:Rajmata आप ये क्या कह रही है हमे पूर्ण विश्वास है

jeevika:pata नहीं कही आयु क कारन तो गर्भ नहीं रुक रहा

shurushti:Kiske?

जीविका अपने आखो से इशारे से देवरानी की ओरे दिखती है देवरानी अपने ऊपर ये तना सुन कर रुआँसी हो जाती है झट से उठ कड़ी होती है पर बलदेव जो जा रहा था अपने दादी की बात सुन रुक कर वापस आता है

Baldev:Raaaaaj माता

बलदेव गरज कर बोलता है जिसे सुन राजपाल भी दर क मरे उठ खड़ा हो जाता है

jeevika:Kya हुआ पुत्र

Baldev:Aapko संदेह है क महारानी देवरानी गर्भवती नहीं हो सकती ?

Jeevika:nahi नहीं बलदेव वो तो मई..

Baldev:chup कीजिये राजमाता जीविका मैंने सुना आपके टुच्चा शब्दों को

देवरानी क आखो में ासु थे वो अपने बेटे को इशारे से मन कर रही थी क वो गुस्सा न हो

Baldev:Devrani अब भी आप इनका उत्तर देने से मुझे रोक रही ho..par आज नहीं देवरानी ....सुनो राआजमारा अगर अआप मेरी दादी नहीं होती तो अभी मई आपका सर धार से अलग कर deta..aaplogo को क्यों ऐसा लगता है क गर्भ नहीं ठहरने का कारन देवरानी है तो सुनिए देवरानी की आयु हे 37 वर्ष है और मेरी पत्नी देवरानी की जैसी जवानी तो गहतराष्ट्रा क किसी 18 वर्षा स्त्री में नहीं होगी देवरानी 1 क्या वो इतनी जवानी रखती है क मेरे 10 बच्चे जान सकती hai..ary महारानी देवरानी क पैरो में जो सुंदरता है वो किसी स्त्री क चेहरे पर नहीं hai...aap अपने ताने से मेरी पत्नी को दुःख नहीं पहुचाये मई तंग आज्ञा हु

Shurushti:Rajmata आप देवरानी को दोष मत दीजिये भगवन जब चाहेंगे हमे गहतराष्ट्रा का वंश मिल jayega..baldev बीटा आप शांत हो जाओ बूढी है वो उनकी अंतिम ीचा हे यही है इसलिए..

देवरानी कड़ी सब सुन रही थी और उसके आखो से ासु छार छार बहने लगे वो दौड़ कर सामने हे महल क अंदर बने छोटे से मंदिर में घुटने क बल बैठ जाती है

Devrani:Hey bhagwaaaaan...kab तक मई ताने सुनती रहूंगी क्या मुझे खुश रहने का अधिकार नहीं है क्या मई गर्भवती नहीं हो सकती ..क्या तुझे ाचा लगता है भगवन लोग मुझे बाँझ समझते है और ताना देते है तो

राजा राजपाल क रोंगटे खड़े हो गए थे अपने बेटे दुवारा अपने पूर्व पत्नी की तारीफ सुन वो अपने बेटे बादेव क पास जाता है

"बीटा बलदेव जाओ अपने पत्नी को sambhalo..aur माँ आप क्यू बहु रानी को कुछ कहती हो ..अब भगवन क हाथ में है ये सब तो.."

रानी षुरूश्ती भी अपने आखो से इशारा करती है और बलदेव अपने रोटी बिलखती माँ क पास जा कर निचे बैठ जाता है और उसके कंधो को पकड़ उठाते हुए

"देवरानी उठ जाइये आप रो क्यू रही है आप की गलती नहीं चलिए आप"

देवरानी उठती है और ज़ोर से रट हुए अपने बेटे क गले लग जाती है सब क सामने दोनों माँ बेटे गले लगे चिपके थे राजा राजपाल शर्मा कर अपना सर दूसरी तरफ घुमा लेता है षुरूश्ती इशारे से बलदेव को कहती है देवरानी को ले जाने

Baldev:Chaliye महारानी ऊपर कक्षा में

devrani:Mujhe नहीं जाना

बलदेव कुछ सोचते हुए

Baldev:Theek है तो चलो बहार देवरानी तुम्हे नदी तात पर घुमा लौ

Shurushti:Han बीटा ले जाओ राज पात सँभालते हुए थक जाती है महारानी को बहार की हवा खिला लाओ

बलदेव देवरानी को अपने बाहो में लिए बहार जाने लगता है देवरानी भी सुबकते हुए महल क बहार जाने लगती है ,षुरूश्ती फिर से सबको बैठने क लये कहती है और खाने क लये कहती है उधर बलदेव अपने माँ को बहार ले जाता है

Baldev:sainik घोडा लाओ

एक सैनिक घोडा ले आता है और बलदेव सबसे पहले अपने माँ को ऊपर बैठा देता है फिर खुद बैठ जाता है दोनों हवाओ से बात करते हुए जंगल की ओरे भाग रहे थे

Baldev:Raani माँ अब तो चुप हो जाओ

Devrani:Tumne सुना नहीं तुम्हारी दादी क ताने

baldev:chhor दो उनको मैंने दांत दिया है आज क बाद नहीं कहेगी कुछ वैसे रट हुए भी तुम बहुत सुन्दर लग रही हो देवरानी तुम्हे गोदी में बिठा कर कुछ कुछ होने लगा

देवरानी अपने बेटे की छेड़खानी से मुस्कुरा देती है और अपना बड़ा गांड उठा कर अपने बेटे क लैंड की ओरे रगड़ते हुए बैठती है

"बलदेव आह लौड़े को तोड़ डौगी क्या देवरानी ..वैसे याद है हम मेला गए थे "

"हाँ मुझे याद है और तुम एक मौक़ा नहीं छोरे मुझे रगड़ने का"

"हाँ देवरानी तुम जैसी घोड़ी को छमिअ को कैसे नहीं रगड़ता तुमने जो निर्त्य क्या था वह सब का लैंड खड़ा हो गया था डिल तो तभी क्या क पकड़ क पेल दू"

"अच्छा मेरे पेलू पति अब तो आपको मज़ा आरहा है न मुझे छोड़ क अब पता नहीं मई गर्भवती होउंगी या नहीं"

"रानी माँ आप का बलदेव आपको एक बार क्या पता नहीं कितनी बार गर्भवती करेगा और आप को मेरे बचे जनम देने होंगे"

"मई तो तैयार हु आपके बच्चो को जान ने क लये भगवन करे जल्दी से हमारी ीचा पूरी हो जाये"

दोनों जंगल में पहुंच कर नदी तात पर उतारते है और बलदेव घोडा को एक पेड़ से बाँध कर अपने माँ को ऊपर से निचे तक देखते हुए "इधर आओ मेरी बाहो में माँ आज जंगल में मंगल करूँगा आपकी छूट क चटनी यही बनाऊंगा"

"उफ़ तो तुम इस लिए मुझे लाये यहाँ खुले में नहीं छुडवाउंगी कोई आगया तो "

आर्य इधर आए मेरी रानी बलदेव अपने माँ क हाथ को पकड़ खींचता है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 185

गहतराष्ट्रा राज्य

दोनों जंगल में पहुंच कर नदी तात पर उतारते है और बलदेव घोडा को एक पेड़ से बाँध कर अपने माँ को ऊपर से निचे तक देखते हुए "इधर आओ मेरी बाहो में माँ आज जंगल में मंगल करूँगा आपकी छूट क चटनी यही बनाऊंगा"

"उफ़ तो तुम इस लिए मुझे लाये यहाँ खुले में नहीं छुडवाउंगी कोई आगया तो "

आर्य इधर आए मेरी रानी बलदेव अपने माँ क हाथ को पकड़ खींचता है

देवरानी खींची अपने पुत्र बलदेव से लग जाती hai,baldev अपने माँ को अपने बहो में ले कर अपने समीप करते हुए अपने हाथो से घेरा बना कर अपने माँ क चिकनी कमर पर हाथ रख लेता है "देवरानी ...अब भी उदास हो आप तो गहतराष्ट्रा की सबसे शक्तिशाली महिला हो आप का रोना शोभनीय nahi"devrani अपने गुस्से और उदासी से भरे चेहरे को उठा कर "और आपकी दादी जो मुझे बाँझ कहती है वो शोभनीय है maharaj"Baldev मुस्कुराते हुए अपने माँ क कंधो को दोनों हाथ से ज़ोर से पकड़ते हुए "रानी माँ कदापि नहीं राजमाता जीविका अपने वंसज को देखने क लये उत्साहित है और इसलिए वो अतिउत्साहित हो कर आपको बोल देती है विश्वास कीजिये वो हम से अपेक्षा कर रही है क हम उनका वंश de"Devrani बलदेव का हाथ पकड़ कर निचे करते हुए "हाँ हाँ इसलिए मुझे ताने देती है क्या मई इतनी बूढी हु क मई गहतराष्ट्रा को एक वंश नहीं दे सकती"

"रानी मा अआप उदास क्यू होती हो आपके शामे मैंने दादी से कह दिया क मेरी देवरानी में कोई कमी नहीं "

"हाँ और आप को लज्जा नहीं आई ये कहते हुए क मई 10 बच्चो को जन्म दे सकती हु और मेरे पैरो में इतनी जवानी है छी आप पुरे परिवार क samne"devrani ये कहते बलदेव को पीछे छोड़ते हुए चलने लगती है बलदेव देवरानी क भरी भरकम गांड को मटकता देख अपने मच को ऊपर करते हुए अपने लौड़ा को सहलाता है और आगे बढ़ कर दौड़ क अपने माँ को पीछे से गले लगा लेता है "रआआआआई माआ कहा भाआयगी आअज क बाद परिवार में कोई कुछ नहीं kahega"Baldev ये कहते हुए अपना लौड़ा देवरानी क गांड क दर्द में फसा देता hai"Ufff छोड़िये न ऐसे घने वन में आप मुझे ला कर ये सब कर रहे है" "क्यू नहीं कर सकता मेरी पत्नी हो मेरी इच्छा चाहे जहा पटक क छोड़ू और आपको छोडूंगा नहीं तो दादी माँ को मेरे पुत्र को देखने की इच्छा कैसे पूर्ण होगी maate"baldev अपने मुचो को अपने माँ क गर्दन और कंधे पे चुभते हुए "हाँ कल हो कर तो वो ये कहेगी क दूसरा विवाह कर लो उनके इच्छा क lye"baldev ये सुन कर हसने लगता है और देवरानी पीछे मुद कर बलदेव को घर कर देखता है और बलदेव हसना बंद कर "तो मेरी रानी क उदासी का कारन ये है तो सुनो आप कहो तो मई सबको ये कह देता हु चाहे देवरानी मुझे बचा दे सके या नहीं मई दूसरा विवाह नहीं करूँगा "देवरानी ये सुन कर घूम कर अपने बेटे क गले लग जाती है और ज़ोर से भींच लेती है "मेरे राजा इतना प्रेम करते हो मुझसे "

"रानी माँ आप मेरे रोअम रोअम में बस्ती हो मर जाऊंगा दूसरा विवाह नहीं करूँगा मुझसे सातो जनम में विवाह करोगी न देवरानी"

"जी मेरे राजा बीटा उफ्फ्फ मेरे पति देव आपकी महारानी आपकी सेवा में जीवन बीतने चाहती है और ऐसी कोई बात मत कहना ,क्या आपको मुझपर विश्वास नहीं क मई आपको बचा दे पाऊँगी"

"पूर्ण विश्वास है देवरानी तुम जैसी मस्त जवानी को मई गर्भवती नहीं कर पाया तो अवश्य मेरे अंदर हे कमी होगी"

"चुप kijiye...aap से संतुष्ट हु मई आपके मर्दानगी में कोई कमी नहीं भगवन मेरी गॉड भी बच्चो से भर्र देगा मेरा जीवन दुःख में निकला अब ख़ुशी मिली है एक पति की तो अब भगवन मुझे दुखी नहीं रखेगा"

"ाः रानी मायआ ाः आजाओ मेरी बाहो में मेरी घोड़ी"

बलदेव देवरानी क चेहरे को चूमने लगता है देवरानी अपने आखे बंद कए नदी से बहते हुए हवा को अपने चेहरे पर महसूस कर रही थी वही वो अपने हे पुत्र क चुम्बन से सब कुछ भूल गई थी क वो नदी क किनारे एक वन में hai,Baldev अब देवरानी क होठ को अपने होठ से पकड़ कर चूसने लगता है देवरानी आखे बंद कए पपीहे की आवाज़ सुन रही थी और साथ हे उसके होठ चूसने पर "चप्प्प galpppppp"Ki आवाज़ सुन वो अपने आप को किसी और संसार में पति है ,देवरानी का डिल अब हल्का हो गया था और उसके दिमाग ने हर दुःख भुला दिया सुबह का समय था सूरज निकले दो तीन पहर बीत गए थे बलदेव अपने माँ को देखता है जो आखे बंद कए बलदेव क होठो को चूस रही थी और भरपूर सहयोग कर रही थी ,बलदेव अपने माँ का एक हाथ पकड़ कर अपने धोती में खड़े लौड़े पर रख देता है तभी "ouchhh"kar क देवरानी जैसे स्वप्न से जगती है और इधर उधर देखते हुए अपने हाथ पीछे कर "महाराज नदी तात पर है हम यहाँ कोई स्त्री स्नान करने आगे तो महल चलते है"

"महारानी देवरानी यहाँ कोई नहीं आएगा वैसे भी कोई आगया तो हम पति पत्नी है"

"महाराज कोई वन में शिकार करने आगया तो क्या कहेगा यहाँ पर सम्भोग करना उचित नहीं"

"रानी माँ और अपने बेटे का लैंड बंद कोठरी में लेना उचित है?"

देवरानी ये सुनते हे लज्जा से अपने आखे निचे करलेती है "महाराज कोई जंगली पशु आगया तो"

"महारानी वो देखेंगे क मस्तानी घोड़ी की चुदाई हो रही है और वो चले जाएंगे इधर आए देवरानी"

बलदेव अपने माँ को अपने पास फिर से खींच कर दबोच लेता है और इस बार अपने बड़े पंजे से अपने माँ क बड़े थान को दबोच लेता है "आआआआह राजा ji"baldev अपने सर से अपना मुकुट उतारता है एक हाथ से और एक तरफ रख देता है फिर तलवार को एक ओरे रख देवरानी को दबाते हुए दोनों बड़े ख़रबूज़े जैसे गांड को पकड़ कर दबाते हुए अपना मुँह देवरानी क बड़े दूध को ब्लाउज क ऊपर से हे अपने मुँह में भर कर काटने लगता है "आआहा ुहममममम आआआह राजाआं जी" ये देख पास बंधा घोडा अपने दोनों टैंगो को उठा ज़ोर से हिह्याता है जिसे सुन देवरानी "देखिये न घोडा मेरी ओरे हे देख रहा है मुझे लज्जा आरही है"

"राआनीमा आप जैसी घोड़ी की जवानी देख मेरा घोडा भी उत्तेजित हो गया है बेचारा उसको भी छूट दे दो "

"आपका लौड़ा लेने में हे इतना भरी हो जाता है उसका कहा से लुंगी"

"पर्यटन करना चाहोगी देवरानी घोड़े का लौड़ा ले कर"

"ाः आपका लौड़ा उस घोड़े क लौड़े से कोई काम नहीं 19 ..20 होगा ाः राजा"

बलदेव अब ज़ोर ज़ोर से अपने माँ क गांड और बड़े ठण्ड को निचोर्ने लगता है और देवरानी भी अपने बेटे का साथ दे रही थी ,दोनों माँ बीटा नदी तात पर वन में प्रेम क्रीड़ा क खेल में मगन थे

"आआह राजाआं जीई आआह ज़ोर से दबाइये आआह उफ्फ्फ आपका हाथ कितना कठोर है ुह्ह्हह्ह हे भगवान राजा जी"

"रानी माँ आप जैसी अतिसुन्दर माल की जवानी प्यास बुझाने योग्य हु मई यही मेरे लिए गर्व की बायत है आआह उतार इस चुन्नी को बीचा देवराआणि आज इस वन में तेरी चुद मारूंगा"

"महाराज आआह चुभेगा आआह "

"देवरानी जल्दी बिछा आआह तेरी छूट की आएग ठंडा कर दू साली"

देवरानी अपने चुन्नी को ले कर वही पर हरे घास पर बिछा देती है और चारो ओरे देखती है तो उसे वृक्ष हे दिख रहे थे

"देवरानी जल्दी से लेट जा और अपने टाँगे फैला मेरी रानी"

बलदेव अपना कुरता उतार देता है और देवरानी वही पर लेट जाती hai,Baldev अपने माता देवरानी को देख उत्तेजित हो रहा था जब से देवरानी से विवाह क्या था देवरानी और ज़्यादा गदरा गई थी उसके चुचिअ हमेशा फुले हुए रहते पेट पर भी हलकी चर्बी छ गई थी कुल मिला कर थोड़ा सा मोटा गई थी देवरानी अपने बेटे से चुद चुद क बलदेव अपने माँ को देखते हुए अपने माँ क वस्त्र को खींचते hue"Devrani अपना वस्त्र निकालो अति शीघ्र आपकी जवानी देख मेरा लिंग आपके बिल में घुसना चाहता है"

बलदेव अपने माँ क साड़ी को खींच देता है



"ह्म्म्मम्म आआह मेरे स्वामी आप एक स्त्री को जाल में फसा कर इस वन में उसको सम्भोग करने ले आये"

"तुम मेरी पत्नी हो इधर आओ मेरी रांड मेरी रानी मा ुहंममआ ाः"

देवरानी क ऊपर छाते हुए बलदेव अपने माँ को अपने बाहो में भर अपना लौड़ा अपने माँ क छूट क ऊपर रगड़ते हुए देवरानी क सुन्दर चेहरे को चूमने लगता है बलदेव का कठोर छाती देवरानी क बड़े गुब्बारे जैसे थान डाब कर रह गए थे

"महाराज आआह चुभ रहा है निचे मुझे आआह "

बलदेव अपने माँ क ऊपर से उठ अपने माँ क ब्लाउज को खोल देता है और दोनों बड़े मम्मी छलक जाते है "साली आज तूने तो अंतर्वस्त्र भी नहीं पहनी निचे जांघिए पहनी है क्या रांड"

"ाः नहीं ाः महाराज मेरे दूध को मसलिये जंगहिआ ाः नहीं पहनी वो आअज सवेरे पूजा क लये जल्दी भागी थी न उठाः"

बलदेव अपने माँ को अपने बाहो में ले कर पलट जाता है और अब बलदेव पीठ क बल था और देवरानी ऊपर लेती thi,baldev अपने माँ क दोनों मम्मो को अपने मुँह में ले कर चूसने लगता है देवरानी सिस्किअ लेते हुए अपने बेटे से अपने बड़े ायमो को चुसवा रही थी "आआह ायीय राजायआ जे आआह कितना निर्दयी हो आआह मेरे पिया ाआअह बलदेव जी ाः काटो नहीं ाः"

बलदेव निचे से पेटीकोट उठाने लगता है और देवरानी क पेटीकोट को गांड क ऊपर कर टंगे फैला देता है और अपना हाथ पीछे ले जा कर दो थप्पड़ गांड पर मरता है "उफ्फ्फ राजा रुकिए न अभी मत डालिये ाः"

"साली रांड महारानी छूट में लौड़ा लेने क लिए तो मर रही है और मुझे मन कर रही है "

"ाः राजा आपका लिंग बहुत बड़ा है आह धीरे से डालिये"

"Ghapppp"Niche बलदेव एक करारा धक्का देता है और देवरानी क छूट में अंदर तक



पेल देता है "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh आईये माआआ माआर दिया रे सूखा सूखा पेल दियाः"

देवरानी अपने हाथो से अपने बेटे क गर्दन में माला बना कर पकड़ लेती है और पीछे मुद कर अपने गांड को ऊपर उठती और बलदेव भी अपना लौड़ा पीछे खींचते हुए फिर से "ghappp"se अपने माँ क छूट में पेल देता है देवरानी ज़ोर से चिल्लाने लगती है जिसका सुन पास में बंधा घोडा भी हिह्याने लगा और अपने दोनों अगले पेअर को उठा कर भागने लगता है पर वो बंधे होने क वजह से भाग नहीं पता

"आआह राजा जी घोड़ा भाग न जाए आप उसके सामने छोड़ रहे है वो भाग गया तो ाः"

"तेरी जैसी माल को देख घोडा क्या कुत्ता भी तेरी छूट छोड़ना चाहेगा बड़े गांड की मालकिन महारानी देवरानी"

बलदेव अपने लैंड घुसाए हुए देवरानी को ऊपर उठा लेता है और पास में एक टेढ़ा निचे को झुका हुआ पेड़ पर देवरानी को लिटा देता है और पीछे हो कर करारा ग़च्चा मारता है "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah राजआआआ जेईई ाआअह धीरे आआह कोई सुन लगायआ आआआह कोई अअअअअअअअअज्ञा तू"

"राँद जितना चिल्लाना है चिल्ला इस समय इस वन में कोई पक्षी पर नहीं मरता मनुष्य क्या आएगा ाः ये ले साली खा मेरा लौड़ा ाः "



बलदेव अब अपने एक पेअर को उठा कर वरिसखा क तन पर रख देता है और फिर से अपने माँ महारानी देवरानी क योनि में अपना लिंग फसा करारा प्रहार करने लगता hai,devrani की चीखे पुरे वन में गूंजने लगती है और पहाड़ो से टकरा कर वापस आने लगती है

"आआआह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa आआआआह रआआआआजआआआआ जीई वस्त्र तो ुताआर दीजिये आआआआह अआप को छोड़ने में कठिनाई होरही है ाआअह"

बलदेव देवरानी क ब्लाउज पेटीकोट उतार का फेक देता है और "पक्क्क "से अपना लौड़ा खींच कर बहार निकालता है और देवरानी को ऊपर करते हुए अपने कंधे पर उठा लेता है और उसके छूट क भागसे में अपना मुँह लगाए चाट रहा था और सामने एक छोटे पठार क ऊपर देवरानी को बैठा देता है "आआह राजा आआह गिर जाउंगी"

"ाः रानी माँ नहीं गिरेगी आआह बैठो"

बलदेव देवरानी को ऊपर बैठा देवरानी क टैंगो को खोल अपना मुँह छूट क भागसे पर राग अपने मुँह में रख कर चूसने लगता है ,अपने बेटे दुवारा



ऐसे छूट चूसै से देवरानी सिसकने लगती है पुरे वन क पक्षी उड़ कर अपने घोसले से ऊपर आकाश की ओरे उड़ने लगते है क्यू क ये धवनिअ आज इन जीव जंतूंपाहली बार सुन रहे थे

"आआआआअह्ह्ह्हह राजाआं जीई उफ्फ्फ न kaato..aaaaah आपकी जीभा aaaaaaaaaaah ह्म्म्मम्म अब न तडपाआआआआ छोड़ भी दो "

बलदेव देवरानी को पकड़ कर निचे कर एक पठार पर बिठा देता है "रानी मा इस खुले गगन में तेरी ये छूट चमक रही है मेरी रांड मेरी देवरानी पत्नी तू कितनी गदराए भरपूर माल है आआह ये "Ghappp"se अपना लौड़ा दाल देता है और देवरानी चीख पड़ती है और अपना एक हाथ पीछे एक पठार से लगा अपने बेटे दुवारा हर धक्के का सम्मान करती है



देवरानी अपने बेटे क सर को दूसरे हाथ से सहलाते हुए "आआह्ह्ह राजा जी कितना बड़ा मोटा लौड़ा है ाआअह मेरी छूट फाड़ दया aaah"Baldev अपने माँ क बड़े मम्मो में मुँह लगाए चूस रहा था और अपना लौड़ा अपने माँ क छूट में अंदर बहार कर रहा था

"आआआह ुहममममम आआआआह राजाआं जी आआआआह आआआआह उफ्फ्फ छोड़िये आआआह ऐसे हे आआआह ाआअह आह्ह्ह्ह बहुत ानाद आ रहा है ाआअह मेरे राजाआआ "

"ाः मा ाः ये ले मेरा लौड़ा ायजा अब निचे तेरी ठुकाई करू ाः"

ये कह कर बलदेव निचे ज़मीन पर बिछे चुनरी पर लेट जाता है

"आजा मेरी रांड अब कूद मेरे लौड़े पे महारानी देवरानी"

देवरानी ये सुन मुस्कुराते हुए अपने बड़े चूचे नारियल जैसे को हवा में लहराते हुए अपने गांड को दये बाये हिलाते हुए बलदेव क लौड़े पे निचे बैठने लगत्ती है और लौड़ा देवरानी क छूट में किसी तलवार की तरह चीरता हुआ पूरा 9 इंच अंदर समां जाता है "ाआअह ुहम्म्म्म आपका लिंग मेरे पेट तक पहुंच रहा है ाः पीरा हो रही है महाराज"

महारानी अपने गांड को धीरे से ऊपर निचे करते हुए अपने बेटे का लैंड लेने लगती है



"महारानी आप जैसी गदराई माल को पीड़ा न हो तब तक चुदाई का मज़ा कहा आता हे माते मुझे तेरी छूट खोद क अपने लौड़े से असीम आनंद आरहा है"

झाड़िओ में दोनों माँ बीटा अपने चुदाई का खेल खेल रहे थे और देवरानी अपना गएआंद उठा कर अपने बेटे क लौड़े पर पटक रही थी जिसे देख सामने बंधा घोडा अपना लौड़ा बहार निकल लेता है और देवरानी की छूट चुड़ते और गांड देख अपने टैंगो को उठा हिह्याता है

"महाराज ाः ये घोडा तो मेरी ओरे हे घूरे जा रहा है ाआअह ुहममम ऐसे आआ"

"तेरे जैसी माल पैर तो सबकी नज़र जाती है देवरानी और ये घोडा तुमने पसंद करने लगा है या कहु तू तुम्हारी ये गोल तरबूज़े जैसी गांड को और रसीली छूट को मारना चाहता है आआह ये ले आआह अब कुटिआ बन जा नहीं तो तेरी निकली हुई गांड देख घोडा रस्सी तोड़ कर पेल देगा तुम्हे"

देवरानी उठ कर अपने बेटे क मानते हुए घोड़ी बन जाती है

"ाचा पहले घोड़ी बनती थी अब कुटिआ हो गई मई"

"रानी माँ आप घोड़ी हे हो कभी कभी कुटिआ जैसी रांड लगती हो आआह ये लो "घपपप""

बलदेव अपने माँ क चुतर पर हाट मरते हुए छोड़ने लगता है अपने माँ ko"aaaaaah राजाआं "



"Aaaaaaaaaaaaaaaaaah उफ्फ्फ्फ़ आआआआह राआजाएहा बेताआए आआआआह मारर्र दया रे आआआआआह अति आनंदमयी आआआआह मेरी छूट का पूरा ढीला कर दिया हाआआआहहहहहहह रे पिया बलदेव अपने प्रेमिका को आआआआह ऐसे आआआआआह "

ये कहते हुए देवरानी क छूट में लावा फुट जाता है और वो झड़ने लगती है बलदेव भी अपनी गति बढ़ाते हुए "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa मई भी गयाआआ"

पुरे जंगल में दोनों माँ बेटे क चीख गूंज उठते hai,Waha की लगभग हर घोसलो से पक्षी निकल कर आसमान में उड़ कर आवाज़े करने लग जाते है जैसे उनको कोई खतरा आगया ho,Cheel कौवी कबूतर अपने तोलिओ में आसमान में हस्त कर रहे थे और बलदेव देवरानी क दोनों वक्षो को पकड़ अपने माँ क होठो को चूसने लगता है और झड़ने लगता है



"महाराज बलदेव थोड़ा अपना वीर्य चखा दीजिये प्यास लग गई"

"रांड साली महल में तो पतिव्रता स्त्री सावित्री बनती है तेरी छूट की प्यास बुझा दिया ले चूस ले मेरा लौड़ा पी ले

मेरा वीर्य"

देवरानी उठ कर घुटनो क बल बैठ कुटिया बन जाती है और अपने जीभा से बलदेव क लौड़े क ऊपर क वीर्य को चाटने लगती है "ुहममममम आह्हः ह्म्मम्म्म्म "चटकारे लेते हुए देवरानी अपने बेटे का लौड़ा चाट रही थी वही बलदेव अपने हाथ में लौड़ा हिलने लगता है और कुछ वीर्य की बुँदे देवरानी ज खुले मुँह में प्रवेश होता है



देवरानी मुस्कुराते हुए नीले आकाश क निचे वन में अपने बेटे क लैंड से निकलता हुआ पानी को अपने जीभा से पकड़ते हुए चस्का ले कर खाने लगती है

"ह्म्म्मम्म हम्म्म्म ाआअह कितना नमकीन है मेरे राजा का गधा वीर्य aaaah"Baldev अपने बची हर बून्द अपने माँ की भेट कर देता है और उसके बाद वो थक कर वही बैठ कर लेट जाता है देवरानी अपने बेटे क वीर्य को अपने मुँह में लिए अंदर गटकती है और अपने आखो को बंद एक ठंडी हवा झरोको को अपने पुरे शरीर पर महसूस करती है देवरानी क बाल हवा से उड़ रहे थे और उसकी बड़ी



चुचिअ ख़ुशी से झूम रहे थे बलदेव ने अपने माँ को छोड़ तृप्त कर दया था और देवरानी अपने आपको ऐसी नग्न अवस्था में भी आज संसार क हर बोझ से मुक्त और एक अलग प्रकार की ऊर्जा का अहसास कर रही थी बलदेव अपने आखे बंद क्या लेता था और अपने साँसों को संभल रहा था उसे कोई चिंता नहीं थी क उसकी माता श्रीमती देवरानी वस्त्रहीन वन में बैठी है तभी बलदेव अपने आखे खोलता है और उसके शरीर पर भी हवा की शीतलता का आभास होता है और वो मुस्कुराते हुए अपने माँ को देखता है जिसके होठो क आस पास अपने हे बेटे का वीर्य लगा था और वो आखे बंद कर इस पल का आनंद ले रही थी

"मेरी माँ आअज कितनी खुश है मैंने माँ क हर कष्ट को दूर कर दिया उन्हें सामनां दिलाया राज्य में कभी सोचा नहीं था माँ को इतना खुश रख लूंगा"

बलदेव अपने मन में सोचता है और अपने माँ को देखते हुए मुस्कुरा रहा था.

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 186

गहतराष्ट्रा राज्य

देवरानी वस्त्रहीन वन में बैठी है तभी बलदेव अपने आखे खोलता है और उसके शरीर पर भी हवा की शीतलता का आभास होता है और वो मुस्कुराते हुए अपने माँ को देखता है जिसके होठो क आस पास अपने हे बेटे का वीर्य लगा था और वो आखे बंद कर इस पल का आनंद ले रही थी

"मेरी माँ आअज कितनी खुश है मैंने माँ क हर कष्ट को दूर कर दिया उन्हें सामनां दिलाया राज्य में कभी सोचा नहीं था माँ को इतना खुश रख लूंगा"

बलदेव अपने मन में सोचता है और अपने माँ को देखते हुए मुस्कुरा रहा था.

देवरानी वन में चल रही ठंडी हवाओ से अपने नग्न शरीर को ठंडा कर रही thi,baldev ने अपने माँ की जिस्म की गर्मी को आज खुले वन में ठंडा क्या था और इस समय गहतराष्ट्रा राज्य की महारानी अपने भरी शरीर को खुले आसमान क निचे बैठ आनंद ले रही थी बलदेव अपने माँ को देखते हुए "देवरानी कोई कपडा दो लैंड साफ़ करना hai"devrani अपनी आखे खोलती है देखती है उसके बेटे का लैंड अब भी आधा अकड़ा हुआ है और सम्भोग रस से लटपट है "महाराज अब क्या दू यहाँ कोई फालतू वस्त्र भी तो नहीं"

"देवरानी आपका चुनरी है न"

"नहीं नहीं बलदेव मई वापस महल जाउंगी तो किसी ने देख लिया तो क्या सोचेंगे"

"क्या सोचेंगे यही सोचेंगे दोनों पति पत्नी चुदाई कए होंगे तो वीर्य लग गया"

"तुम समझते नहीं सब मज़ाक उड़ाएंगे क आज कल महारानी देवरानी वन में भी चुदती फिरती है"

"तो समझने दीजिये महारानी मेरी पत्नी हो तुम हम कही भी करे वैसे इस से पॉच लेता हु यही छोर देना "

बलदेव झट से चुनरी उठा क अपना लैंड साफ़ करने लगता है देवरानी बास मुँह खुला देख रही थी बलदेव झट से अपना धोती और कुरता पहनता है

"देवरानी अब तुम भी अपना वस्त्र पहन लो "

देवरानी मुस्कुराते हुए वही चुनरी उठती है और अपने छूट को फैला कर अपने छूट को साफ़ करने लगती है बलदेव ने वीर्य से भर्र दया था जो छूट क अंदर बहार निकल रहा रहा देवरानी जड़ तक अपने टांग फैलाये साफ करती है जिसे देख मुस्कुराते हुए "कैसा लगा मेरी रानी माँ को आज"

देवरानी झट से अपने ब्लाउज फिर अपने साड़ी पहनते हुए "बहुत आनंद आया जी आज पता नहीं क्यू दिन नहीं होता तो यही रुक जाती कितना सुकून है यहाँ कोई रोकने टोकने वाला नहीं "

"ठीक है अब चलो इस चुनरी को यही छोर दो"

"हाँ पर इसे छुपा दो कही बलदेव किसी ने देख लय तो"

"आर्य अब हम जा रहे है माता जी बास आप तैयार होये मई घोडा खोल कर लता हु"

बलदेव झट से जा क घोडा खोल लेता है और देवरानी को आने का इशारा कहता है देवरानी अपना चुनरी वही छोर बलदेव क पास आती है और दोनों पैदल हे घोड़े क साथ आगे बढ़ने लगते है

"वैसे देवरानी आज आपकी चुदाई कर मुझे बहुत मज़ा आया आप आज खूब खुल क चुदाई करवाई हो बोलो कुछ चाहिए"

"नहीं महाराज आप हमारे लये सब से बड़े उपहार है मुझे बास ऐसे हे प्रेम करते रहिये और कोई ीचा नहीं"

दोनों माँ बेटे वन में आगे बढ़ रहे थे तभी वह पर एक बूढ़ा आदमी जिसने धोती और ऊपर एक कपडे क नाम पे गमछा ओढ़ा था वो देखते हे दोनों माँ बेटे को गौर से देखते हुए

"प्रणाम महाराज प्रणाम maharani"baldev और देवरानी उस बूढ़े व्यक्ति को देख चौक जाते है क्यू क ये वही बूढ़ा है जिसने मेला पुछया था अपने नव पर बैठा क जब दोनों की प्रेम कहानी शुरू हुई थी

Baldev:Aap...

Vyakti:aapke परिधान से प्रतीत होता है आप राज परिवार से है

Baldev:Ji मई यहाँ का महाराज बलदेव सिंह हु और ये मेरी पत्नी महारानी देवरानी

देवरानी क पास तो अब चुनरी भी नहीं थी मुँह ढकने क लये वो बास अपना सर शर्म से दूसरी तरफ क्र लेती है

Devrani:man me)Hey भगवन ये तो वही नाविक है जिसने हमे नदी पार करवाया था और हमे आम नागरिक और पति पत्नी समझ बैठा था

Vyakti:Maharaj आप दोनों की कहानी हमारे गाओ में बहुत चलती है

Baldev:man me)Ise पैट नहीं उस दिन की बात याद है या नहीं जब मई देवरनै को पटाने क लये मेला ले गया था इसके नव से

Baldev:Hmm क्या बात

Vyakti:maharaj आपने अपनी माता श्री से विवाह कर लय

Baldev:Han वो हम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे तो कर लये

vyakti:Aakhir आप दोनों ने हमारे राज्य क बहु बेटिओ को उस क्रूर राजा शाहज़ेब से बचाया और हमे क्या चाहिए वैसे महाराज मैंने आपको पहले भी देखा हु कही

Baldev:Ka कहा?

vyakti:Han आप जैसा हे कोई था जो अपने पत्नी क साथ नदी पार गए थे वो आप तो नहीं थे

Baldev:Han हम हे थे वो मई अपने महारानी संग गया था भेस बदल कर हम नहीं चाहते थे आम नागरिक हमारे वजह से

Vyakti:bass बास वैसे उन दिनों से हे आप दोनों प्रेमी हो क्या

Devrani:man me)Ishhhh गयी भैस पानी में

baldev:nahi उस दिन हम इनको लुभाने क लये मेला ले गए थे तब हम प्रेमी प्रेमिका नहीं थे

Vyakti:acha इसका मतलब है तब आप दोनों माँ बेटे हे थे और आप पता रहे थे महारानी को और आपको मैंने गीत भी गवाया था महारानी क लये

Baldev:Bass karo..ab पूरा गहतराष्ट्रा जनता है महारानी देवरानी मेरी पत्नी है हमारा प्रेम सच्चा है

Vyakti:kshama कीजिये महाराज मई कुछ भी बोले जा रहा ठीक है मई तो नदी की ओरे जा रहा था चलता हु महाराज महारानी ..ाहिरवाद बनाये रखिये

देवरानी मुस्कुराते हुए मुद कर आगे बढ़ती है वो बूढ़ा व्यक्ति आगे जाता है फिर पीछे मुद कर देखता है देवरानी की बड़ी गांड देख उसके आखे चौंधिया जाती है दोनों बलदेव और देवरानी अपने घोड़े क साथ चल रहे थे

Vyakti:man me)Hey भगवन इतना बड़ा गांड महारानी देवरानी की तो गाछक क पेलते होंगे Maharaj..haye क्या तुनक रहे है गांड महाराज भला कैसे न अपनी हे माँ को पत्नी बनाते ..छी मई ये क्या सोच रहा हु

वो वह से नदी क तात पर गुनगुनाते जाने लगता है कुछ दूर चलने पर उसे कोई वस्त्र नज़र आता है वो वह पहुंच कर

Vyakti:man me)Ye वस्त्र तो रानी महारानी का लगता है कही ये महाराज बलदेव तो नहीं भूल गए देखता हु

वो उस वस्त्र को जैसे उठता है उसके हाथ में गीला मसहूस होता है वो देखता है एक चुनरी है जिसपे बहुत सारा वीर्य लगा है वो फिर उसको अपने नाक में लगा क सूंघता है

Vyakti:chhi छी ये तो वीर्य है ..महाराज बलदेव महारानी देवरानी को यही छोड़ रहे होंगे और वीर्य साफ़ कर चुनरी छोर gaye..kitne छुडासी है दोनों माँ बेटे ..महल में क्या जगह नहीं जो जंगल में छोड़ने आती है महारानी मुझे स्नान करना पड़ेगा

वो वही पर वो चुनरी फेकता है और अपने हाथ में लगा वीर्य घास पे पोछता है और भनभनते हुए चला जाता है

इधर महाराज बलदेव और महारानी देवरानी चलते हुए जंगल क उस रास्ते में आते है जहा से वो बैठ क घोड़े पर जायेंगे

Devrani:Baldev कही कुछ लगा तो नहीं है बाल ठीक है

Baldev:q क्या हुआ

Devrani:Tum समझते नहीं हो किसी ने शक कर लय तो

Baldev:Kya करेगा कोई

Devrani:karega तो कुछ नहीं सब यही सोचेंगे क देवरानी अब महल में हे नहीं जंगल में भी छोड़ने जाती है

Baldev:sochne वाले हमारा क्या कर लेंगे आजाओ बैठो घोड़े पे

बलदेव देवरानी को उठा घोड़े पे बिठा देता है फिर खुद देवरानी क पीछे बैठ घोड़े को खींचते हुए महल की ओरे घोडा को भागने लगता है और कुछ हे देर में दोनों माँ बीटा महल क सामने पहुंच जाते है बलदेव घोड़े से उतर देवरानी को हाथ पकड़ा कर उतरता है सैनिक घोड़े को ले जाता है और दोनों माँ बेटे अंदर महल में जाते है सामने से रानी षुरूश्ती चली आरही थी और देवरानी को देख मुस्कुराते हुए

Shurushti:Kya हुआ शांत हुआ गुस्सा महारानी का बलदेव

baldev:ji बड़ी माँ आप देवरानी का मुस्कुराता हुआ चेहरा देख समझ जाइये

shurushti:aisa क्या जादू कर दिया बीटा बलदेव

Baldev:bass बड़ी माँ वन में घुमा दिया

Shurushti:Mujhe नहीं लगता ये ख़ुशी केवल वन में घूमने की है कुछ ..

Devrani:Saasu maa..aap भी न

shurushti:aay हाय मेरी बहु शर्मा गई जाओ अब आराम करो

Devrani:Ji सासु माँ

Baldev:aap जा क विश्राम कीजिये महारानी

देवरानी जैसे हे चल क आगे बढ़ती है वाइस हे षुरूश्ती देवरानी क भरी भरकम गांड को देखती है जिसके ऊपर हल्का धुल लगा था और उसका चुनरी भी नहीं था

Shurushti:Waise महारानी देवरानी आपकी चुनरी कहा गई

Baldev:Badi माँ वो वन में झाड़िओ से लगने से फैट गया तो वही छोर डाई

देवरानी मुद कर देखती है पर अपने बेटे दुवारा जवाब दिए जाने पर सीधा ऊपर जाने लगती है

baldev:theek है बड़ी माँ मई सैनिको से मिल लू

बलदेव ये कह कर चला जाता है षुरूश्ती वही कड़ी सोच रही थी

Shurushti:man me)Devrani तुम मुझसे नहीं छुपा सकती एक स्त्री इतनी खुश जब होती है जब मोटा लौड़ा उसके छूट में जाता है तुम तो अचे से चूड़ी हो जंगल में बलदेव क मोठे लौड़े से शायद चुनरी बिछा क चुदाई कए होंगे दोनों माँ बेटे इसलिए चुनरी छोर di..Badi छुडासी हो गई है देवरानी

षुरूश्ती ये सोचते हुए अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है

दिल्ली सल्तनत

एक बड़े से कमरे में बड़े पलंग पर एक गोरी लड़की अपने दोनों टैंगो को फैलाये उठ ाः की आवाज़े निकल रही थी और दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब अपने पूरी ताक़त लगा कर उस गोरी जो अँगरेज़ मूल की युवती थी उसे चोदे जा रहा था

Shahzeb:Eliza..aaaaaah कितनी चिकनी छूट है तेरी राण्डड्द आआह तू सोची थी तू मेरे चुंगल से भाग जाएगी

eliza:aaaaaaaah आपने मुझे पकड़ अपने लैंड का घुलम बना लिया बादशाह शाहज़ेब

ये एलिज़ा वही थी जो कुबेरी क राजा रतन सिंह की पत्नी थी जिसको राजा रतन ने जीत कर लाया था एलिज़ा एक ब्रिटिश थी पर राजा रतन सिंह क यहाँ आने क बाद हिंदी सीख गई थी पर अब भी उसकी बोली इतनी साफ़ नहीं थी

Shahzeb:agar तुम भाग जाती उस दिन तो मेरे लौड़े क निचे नहीं होती छिनाल अब तो बास उस दिन का इंतज़ार है जब महारानी देवरानी को मई अपने लौड़े का गुलाम banau..haay क्या माल है देवरानी

Eliza:aaap तो उसको हे याद कर क मुझे छोड़ते है क्या मेरी अंग्रेजी छूट में मज़ा nahi..waise बलदेव से देवरानी को छेन्ना आसान नहीं

Shahzeb:eliza eliza..Maharani देवरानी ाः हाय जब उछाल कर वो तलवारबाज़ी का जौहर दिखा रही थी उसके बड़े गोल गांड और उसके बड़ी गोल चुचिअ उछाल कर मेरे सीने छली कर रही थी उसके खूबसूरत चेहरे की लाली देख किसी बूढ़े का भी लैंड खड़ा हो जाये उसके नशीली आखो में अपना लैंड का पानी डालूंगा एक दिन

तभी दरवाज़े पैर कोई आदम आता है

"जहाँपनाह हमारा मुखबिर गहतराष्ट्रा से खबर लाया है"

Shahzeb:Use अंदर भेज दो

eliza:Mai नंगी हु तुम बहार हे जा क मिल लो न

शाहज़ेब वह रखा खंज़र उठता है और उसकी नोख से एलिज़ा क दूध पर धीरे से चलते हुए हल्का सा चीयर देता है एलिज़ा रोटी हुई आखे बंद कर लेती है और उसके दूध क ऊपर हिस्से से खून निकलने लगता है

Shahzeb:Tum कब से हुक्म देने लगी ..एक दिन ऐसे हे महारानी देवरानी क दूध को काट खून का मज़ा चखूँगा

शाहज़ेब फाटक से दूध को चूसते हुए ज़ोर का धक्का छूट में मरता है और भूरिया क निकलते खून को चाटने लगता है

एलिज़ा रट हुए सिसकने लगती है तभी वह पर एक आदमी आता है और अपने बादशाह को ु चुदाई करते देख अपना सर निचे कर खड़ा हो जाता है

Shahzeb:Kya खबर लाये हो जल्दी बको

aadmi:Jahanpanah खबर ये है महाराज बलदेव ने अपनी माँ से शादी कर लय है और पूरा गहतराष्ट्रा इस बात से खुस है यहाँ तक क वह की एवं चाहती है क गहतराष्ट का वारिस भी महाराज बादेव और महारानी देवरानी दे

शाहज़ेब अपने लौड़े को ज़ोर ज़ोर से लेती हुए एलिज़ा क छूट पे मरते हुए "ाः आआह महारानी देवरानी तुम बचा तो पैदा करोगी पर बलदेव की नहीं शाहज़ेब की ..सुनो जाओ और उनके सिपाहीओं का और उनके हर कमज़ोरी का पता लगाओ मुझे किसी भी हाल में गहतराष्ट पर हमला कर महारानी देवरानी को उठा कर लाना है"

Aadmi:Jo हुकम

वो आदमी चला जाता है और शाहज़ेब हस्ते हुए "एलिज़ा रंडी तुम्हे क्यू लगता है बलदेव से मई हार जाऊँगा उसको अपनी जूती टेल मसल कर देवरानी को अपने हराम की रांड बनाऊंगा मेरा नाम शाहज़ेब है शाहज़ेब"

Eliza:Aaaah बादशाह शाहज़ेब मुझे पता है पर अब तो बलदेव क साथ उसकी प्रजा भी है

Shahzeb:ek बार हम शिकश्त खाये और भाग गए जुंग इ मैदान से इस बार या तो

मई ज़िंदा रहूँगा या baldev..jab से देवरानी को देखा हु मेरे रातो की नींद गायब हो गई है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 187

गहतराष्ट्रा

आज सूर्योदय क पश्चात हे पूरा गहतराष्ट्रा होली की तैयारिओं में जुट गया tha,Ghatrashtra वासी और महाराज बलदेव और महारानी देवरानी को नहीं पता था क क्रूर राजा शाहज़ेब महारानी देवरानी को पाने क लये दिन रात स्वप्न देख रहा है और अपने सैनिको क साथ गहतराष्ट्रा पर कभी भी आक्रमण कर क महारानी देवरानी को अपने हराम में रखना चाहता है और देवरानी क जवानी का रसपान करना चाहता है इन बातो से अनजान आज पूरा गहतराष्ट्रा ख़ुशी उल्लास क साथ होली उत्सव मानाने की तैयारी में जुटे थे

सुबह सवेरे देवरानी उठ जाती है और बलदेव को उठा कर स्नान करने चली जाती है बलदेव भी उठ कर राजघाट जा कर स्नान करता है और फिर वापस अपने कक्षा में आता hai,Idhar देवरानी अपने पूजा में मग्न थी और अपने पूर्वज और अपने बेटे बलदेव क लये प्राथना कर रही थी बलदेव धीरे धीरे अपने कक्षा में उस ओरे आरहा था जहा पर देवरानी पूजा कर रही thi,Baldev क कदमो की आहात देवरानी सुनती है और उसके आँख जो बंद थे वो खुल जाते है वो फिर से अपने आखे बंद कर

Devrani:man me)Hey भगवन मेरे पति और मेरी मान रख ले मुझे एक सुन्दर बच्चा दे दे ,

ये सोचते हुए देवरानी पूजा की थाली ले कर मुड़ती है तो देखती है बलदेव अपना चौड़ी छाती को किसी योद्धा की तरह गर्व से चलते हुए उसके ओरे आरहा है

Devrani:man me)Kitne भोले लग रहे है बलदेव और बलिष्ट भी

वो ये सोच कर मुस्कुराते हुए अपने बेटे को देखने लगती है बलदेव भी अपने माँ को इस संस्कारी रूप में देख बास अपने माँ क सुंदरता में खो सा जाता है



बलदेव देवरानी को देखते हुए अपने माँ क समीप आता है और उसके आखो में देखते हुए "देवरानी ये हमारे वैवाहिक जीवन की पहली होली hai..aapko मेरी ओरे से होली की शुभकामनाये अआप ऐसे हे खुश रहिये जीवन भर"

"धन्यवाद् जी ..अआपने तो न रंग लगाया न गुलाल और शुभकामनाये देने lage..aaaiye बैठिये महाराज"

बलदेव पास रखे झूले पर बैठ जाता है और देवरानी पूजा की थाली ले कर अपने बेटे को प्रेम से देख रही थी

"क्या हुआ देवरानी अब क्या हमारी आरती उतरेगी अब इस पापी का"

ये कहते बलदेव हस्ता है पर देवरानी मुस्कुराते हुए

"महाराज एक पत्नी क लये उसका पति परमेश्वर होता है और आप मुझसे इतना प्रेम करते ह तो क्यू न पूजू मई अपने पतिदेव को "

बलदेव झूला पर झूलते हुए देवरानी क पास आता है और देवरानी तिलक बलदेव को लगते हुए आरती उतरती है



"भगवन जी ने हे तो आपको भेज मेरे जीवन क हर कष्ट को दूर कर दिया अवश्य हे मैंने पिछले जनम में कोई ऐसा पुण्य क्या है जिसके फलस्वरूप आप मुझे मिले महाराज बलदेव"

"महारानी देवरानी आप का हृदय पवित्र है इसलिए आपको ऐसा लगता है अन्यथा मई अपने आप को शौभाग्यशाली मंटा हु क आप मुझे पत्नी क रूप में मिली वैसे आप इस रूप में देवी लगती हो"

"अच्छा जी तो हम इतने सुन्दर लगते है आपको इस रूप में और.."



देवरानी अपने हाथ में रंग ले कर अपने बेटे क क दोनों गालो पर बारी बारी लगते हुए

"और क्या महारानी.."

बलदेव ऊपर से निचे तक अपने माँ को निहारता है जो एक साड़ी में थी और अपने हर अंग को छुपाई थी आभूषण से सजी सॉरी देवरानी एक परिवार्ता नारी लग रही थी.

"महाराज जो रात में देवरानी आपको मिलती है वो कैसी लगती है"

ये कहते हुए देवरानी लज्जा जाती है बलदेव भी अपने माँ क आखो में देख

"वो कमा की देवी रति लगती है"

ये सुनते हे देवरानी मुस्कुराते हुए थाली से रंग उठा कर बलदेव क मुँह पर मारते हुए

"होली की आपको भी हार्दिक शुभकामनाये मेरे बलमा"



देवरानी झुक कर निचे बैठ जाती है और बलदेव क पेअर को छूटे हुए उसके पैरो पर बरी बरी रंग लगाती है

"देवरानी ये क्या उठो.."

बलदेव देवरानी को अपने निचे बैठे देख कहता है

"पति देव महाराज एक पत्नी का स्थान तो यही है मई बास आपका जीवन भर सेवा करना चाहती हु"

"देवरानी आपका स्थान आपके पति क हृदय में है आप ने जीवन में दुःख बहुत उठा लिया अब मई आपकी सेवा करना चाहता हु"

ये सुनते हे देवरानी क आखो में हलके ासु आजाते है और वो अपने बेटे को प्रेम से देखते हुए

"भगवन करे आप सदैव ऐसे हे मुझे प्रेम करते रहे"



देवरानी क आखो में देख बलदेव देवरानी का हाथ पकड़ लेता है

"महारानी मेरे अंतिम सांस तक केवल आपको प्रेम करूँगा और आप क लये आसविअकता पड़ी तो अपनी जान दे दूंगा पर आप पर कभी आंच नहीं आने दूंगा"

"महाराज आप को मेरी भी आयु लग जाये "

"महारानी अब आप बैठ जाइये अब मेरी बारी रंग लगाने की मेरी प्रेमिका को"

देवरानी क हाथ से थाली ले कर बलदेव घुटने क बल बैठ जाता है और देवरानी अपने बेटे की बात मानते हुए पलंग पर बैठ जाती है

"आप न बहुत नटखट हो महाराज अब तो मई आपकी पत्नी हु"

देवरानी हस्ते हुए अपने बेटे बलदेव को देख कहती है बलदेव मुस्कुराते हुए

"अब आप जैसी पत्नी जिसकी हो वो नटखट न हो ये असंभव है"

बलदेव रंग ले कर देवरानी क भरी दूध क ऊपर गले पर रंग मारता है



बलदेव क ऐसे करने से देवरानी क दोनों बड़े वक्ष ऊपर को हो जाते है बलदेव रंग उठा कर अपने हाथ को अपने माँ क गर्दन से रगड़ते हुए दूध क ऊपर हिस्से पर रगड़ता है देवरानी अपने आखे बंद कर अपना सर उठा कर एक भरी सांस भर्ती है

"बुरा न मानो होली है ..अब कैसा लगा मेरी रानी को"

"आप तो बास अवसर खोजते रहते है"

"महारानी आप की सुंदरता मुझे अवसर ढूंढ़ने पर विवश कर देती है उफ़ ये आपके पिण्डिल्य"



बलदेव अपने एक हाथ से रंग ले कर अपने माँ क गोर पैरो पर रंग मरता है और सहलाते हुए ऊपर ले जाने लगता है देवरानी समझ जाती है क बलदेव को न रोकी तो वो अभी पेल देगा घागरा उठा क वो बलदेव का हाथ पकड़

"महाराज संयम रखना अब तक नहीं आया आपको मई कही भागी जा रही hu..mere बलमा मेरे नटखट गोपी"

"मेरी राधा वो मर्द हे क्या जो आप जैसी स्त्री को देख संयम रख ले"

बलदेव थाली से गेंदे क फूलो क पत्ते को उठा कर अपने माँ क सुन्दर मुखड़े क ऊपर फेकता है



बलदेव निचे झुक कर अपने माँ क मुलायम माखन जैसे गाल को सहलाते हुए अपने होठ को अपने माँ क लरजते होठ पर रख देता है और चुम लेता है देवरानी अपने आखे बंद कर अपने बेटे क चुम्बन का मज़ा लेती है और उसके पुरे शरीर में झुनझुनी होते हे वो वही पर लेट जाती है बलदेव देखता है उसकी माँ बिना कुछ कहे लेट गई जिसका अर्थ ये है क देवरानी भी अपने टंगे खोलने को राज़ी थी और उसके छूट में लैंड लेने की खुजली शुरू हो चुकी थी

बलदेव देवरानी क सर क पास सर रख दूसरे ओरे पेअर रख देता है और देवरानी क तरफ झुक कर उसके बंद आखो को भी पढ़ने लगता है

"महाराज कक्षा का दुवार खुला है कोई आएगया तो"

देवरानी बिना आँख खोले हे बोलती है

"महारानी आप चिंता न करे ुह्हम्म्म्म ाः क्या सुगंध आरही है आपमें से "



बलदेव अपने माँ क गर्दन को चूमते हुए चाटने लगता है और देवरानी सिसकते हुए अपने घुटनो को मोर अपने छूट को दबाने लगती है "उफ्फ्फ्फ़ आआह्ह्ये राजायआ जीईएएए"

तभी दोनों की कानो में आवाज़ गुंजी "बहु रानी कहा हो आज क दिन तो जल्दी उठ जाते "

ये रानी षुरूश्ती की आवाज़ थी ,दोनों माँ बेटे सुनते हे उठ कर बैठ जाते है और अपने वस्त्र ठीक करते हुए

Devrani:aaajaiye सासु माँ दुवार खुला है

षुरूश्ती अंदर आती है दोनों माँ बीटा खड़े हो जाते है और षुरूश्ती दोनों से मिलती है रंग लगाती है

"क्या बलदेव बीटा आज भी अपने कक्षा में हे रहना है बहार पुरे गहतराष्ट्रा वासी महाराज बलदेव संग होली खेलने आये है और महारानी देवरानी आप भी.."

Devrani:Ji वो जा हे रहे थे

Baldev:Han हाँ चलो हम चलते है

shurushti:Rang गुलाल ले लो बहार हमारा राज परिवार हम पर रंग बरसाने क लये तैयार बैठे hai..Baldev क पिता महाराज राज पल तो कब से प्रतीक्षा कर रहे है

devrani:Ji अवश्य परन्तु मई सबके साथ होली नहीं खेल सकती

Devrani:man me)Mai उस राजपाल को अपने आप को छूने का अवसर नहीं दे सकती अब वो मेरे पति नहीं रहे

Shurushti:mai समझी नहीं बहु रानी

Devrani:Sasu माँ आप बुरा न माने मई ससुर जी क साथ होली नहीं खेलूंगी

shurushti:Wo तो परिवार क सदस्य है बास चेहरे पर गुलाल लगवा लेना

Devrani:Nahi मई सब कुछ भूल चुकी हु मई उनको छूने नहीं दे सकती जो व्यक्ति मेरे साथ इतना गलत क्या

Baldev:Badi माँ आप पिता जी को ये बात से अवगत करा दे जैसा देवरानी चाहती है वैसा हे होगा

shurusti:Ab जैसा आप लोगो को ाचा लगे चलो अब पूजा भी है

Devrani:ji चलिए

देवरानी मुस्कुराते हुए बलदेव और षुरूश्ती क साथ निचे आती है जहा पर कमला राधा जीविका और राजपाल महाराज और महारानी की प्रतीक्षा कर रहे the,sabse पहले षुरूश्ती जा कर राजा राजपाल से काम में फुसफुसाती है और सुनते हे रपाल उदास हो जाता है फिर भी आगे बढ़ कर अपने बेटे से गले मिलता है और फिर सब एक साथ इकठे हो कर पूजा करते है और रंग लगाने का कार्यकर्म शुरू हो जाता कमला और राधा एक दूसरे को

मॉल मॉल क रंग लगा रही थी वही षुरूश्ती देवरानी को पकड़ रंग भरे पानी से नाहा देती है कमला देखते रह जाती है देवरानी भीगने क वजह से उसका गदराया शरीर साड़ी में उभर कर दिखने लगता है और सब देवरानी को हे देखने लगते है देवरानी भी अपना बदला लेते हुए षुरूश्ती को रंग से नाहा देती hai,Shurushti और देवरानी को पानी से भीगा देख बलदेव ज़ोर से हसने लगता है जिसपर देवरानी और षुरूश्ती एक बाल्टी पानी से बलदेव को रंगो से भीगा देती है

devrani:Bura न मानो होली है

बलदेव भीग जाने से गुस्सा हो जाता है देवरानी उसे अपना जीभ निकल कर चिढ़ाती है बलदेव देवरानी की ओरे झपट्टा है और देवरानी वह से आगे भागती है बलदेव भी भागने लगता है सब लोग होली खेलने में मग्न थे पर कमला देखती है कैसे देवरानी की मोती भरी गांड साड़ी में चिपकी कितने ज़ोर से मटक रहे थे और उसके दूध भी पहले से बड़े हो गए थे

"देवरानी मई आज आपको छोड़ूंगा नहीं आपने मुझे भिगाया.."

"हहै पकड़ लीजिये पकड़ सकते है तो बड़े घोड़े बनते है न"

देवरानी पीछे देखते हुए भाग रही थी और आगे वो उलटी दिशा में भाग गई जहा दीवार था बलदेव पीछे से तेज़ी से देवरानी क समीप पहुँचता है जैसे हे देवरानी आगे देखती है वो दूसरी और भागने क लये मुड़ती है पर बलदेव किसी शेर की तरह अपने दोनों बहो को फैला कर जिस ओरे देवरानी भागने का प्रयास करती बलदेव भी उस ओरे भागता फिर देवरानी क़िले क दीवार पर रुक जाती ऐसे हे एक दो बार प्रयत्न करती है पर असफल हो जाती है और बलदेव आगे बढ़ता है ये सब बलदेव क पिता राजा राजपाल देख रहे थे जो खड़े हो गए थे देवरानी की आखे राजा राजपाल से मिलती है तो राजपाल दूसरी ओरे देखने लगता है पर बलदेव क पीठ क पीछे राजपाल था इस वजह से वो समझ नहीं पता उसका बाप उसके पीछे से उसे और देवरानी को देख रहा है

Baldev:Fass गई न आप महारानी मई बलदेव हु रणभूमि में कभी मेरी चुंगल से बच क जा नहीं पाया

देवरानी एक टाक अपने पूर्व पति और वर्त्तमान ससुर को देखती है फिर कुछ सोचते हुए मुस्कुराती है

Devrani:man me)rajpal नपुंसक को जलने का यही समय है

देवरानी अपने बड़े दूध जो पानी में भीगने से गोलाकार लये नारियल की तरह कड़क लग रहे थे देवराज उसे हल्का सा ऊपर कर देती है जिसे देख बलदेव का लौड़ा तन्न जाता है

"है मेरी रआआआई अब बचा लो अपने आप को"

बलदेव क हाथो में रंग था वो आगे बढ़ते हुए अपने माँ को देखते हुए अपने हाथ को देवरानी क गोर गालो पर ले जाता है और मलने लगता है देवरानी अपने आखे बंद कए अपने बेटे क हाथ क मर्दन का मज़ा ले रही थी



देवरानी देख चुकी थी क राजपाल उसे देख रहा है इसलिए वो आहे भरते हुए अपने बड़े दूध को बलदेव क सीने से दबाते हुए

"aaaah"karti है बलदेव अपने माँ को लगभग अपने बाहो में लेते हुए कान में कहता है

"देवरानी आपकी भरी गांड साड़ी से में चिपक कर मुझे पागल कर रही है ..चलिए न कक्षा में गांड मारनी है आपकी"

देवरानी से कुछ दूर खड़ा राजा राजपाल क पसीने छूट रहे थे अपने हे बेटे और पूर्व पत्नी की रंग रलिया देख देवरानी एक टाक राजपाल क आखो में देखती है फिर अपने बेटे क ऊपर झपटते हुए

"आआह मेरे रसिए"



बलदेव से चिमटे हुए देवरानी अपने बेटे को अपने बाहो में भर्र कर अपने बड़े दूध को अपने बेटे क छाती से चिपका देती है बलदेव भी अपने माँ की गर्मी महसूस कर अपने माँ को दबा क पकड़ लेता hai,par ठीक उसी समय राजपाल अपने आखे बंद करता है और अपने ासु को रोकने की कोशिश करते हुए अपने बेटे और अपने पत्नी को देखता रहता है जो एक दूसरे से चुम्बक की तरह चिपके हुए थे और अपने जिस्म को आपस में रगड़ रहे the..Devrani क छूट क ऊपर से बलदेव का लौड़ा रगड़ खा रहा था और वो धीरे धीरे उठने लगा देवरानी को जैसे हे अपने छूट पर अपने बेटे का लैंड आभास होता है वो दूर हैट कर हांफने लगती है और उसकी दोनों उन्नत चुचिअ हवा में ऊपर निचे कर रही थी बलदेव से रहा नहीं जाता है वो अपने माँ की ओरे झपट्टा है देवरानी घूम जाती है ये सोचते hue"Baldev का लौड़ा कही खड़ा हो गया पूरा to"devrani जैसे हे मुड़ती है देखती है राजा राजपाल उसे हे देख रहा है तभी बलदेव पीछे से अकार देवरानी क उठे हुए मटके जैसे गांड क दरार में आधा खड़ा लौड़ा घुसा देता है



देवरानी अपने बेटे से दूर होने की सोचती है पर बलदेव अपने मजबूत बहो में भर कर अपने माँ क हाथ को पकड़ लेता है और देवरानी क कानो में शरगोशी करते हुए कहता है "रानी माँ मेरा मैं आप क गदराये शरीर को देख कस क आप कुटिआ बना क छोड़ने का मन करता hai..aaj अपने पिचकारी से आपके गुदा को अपने रंग से भर दूंगा"

बलदेव अपने हाथ से अपने माँ क घने बालो क एक लत को आगे से पीछे करते हुए कहता है और पीछे से अपना लौड़ा देवरानी क गांड की दरार में रगड़ता है देवरानी अपने आखे बंद कर लेती है तभी गोर पीठ पर बलदेव अपने होठ रख कर चुम लेता है देवरानी का मुँह खुल जाता है उसके मुँह से "aaah"nikal जाती है देवरानी को तभी राजपाल का ध्यान अत है वो आखे खोलती है तो देखती है राजा राजपाल उसके और बलदेव क प्रेम क्रीड़ा को निहार रहा था देवरानी अपने पूर्व पति क आखो में देखती है जो गुस्से से या इस वजह से लाल हो गई थी क उसकी पत्नी उसके बेटे क साथ मौज कर रही है बाप क सामने देवरानी राजपाल को देख एक ठंडी आह भर्ती है उसके कलेजे को आज ठंडक सी मिली थी देवरानी अपने पूर्व पति को देख एक क़ातिल मुस्कान देती है फिर अपने बेटे को धीरे से कहती है "बलदेव जी आपके पिता हमे देख रहे है"

बलदेव जैसे नींद से जगता है और सामने देखता है तो सचमुच राजा राजपाल देख रहा था उसकी आखे बड़ी हो जाती है तभी राजपाल क पास रानी षुरूश्ती आयति है और राजपाल से

Shurushti:Maharaj बुरा न मानिये होली है अब तो वो दोनों पति पत्नी है खेलने दीजिये उनकी पहली होली है

राजपाल अपना चेहरा षुरूश्ती की ओरे करते हुए रंग षुरूश्ती क गालो पर लगाने लगता है इधर बलदेव अपने लौड़े को बैठते हुए अपने पिता राजपाल क पास अत है देवरानी बलदेव क चुंगल से छुट्टे हे हस्ते हुए कहती है "लुच्चा कही k"aur भाग जाती है तभी राजपाल बलदेव को आता देख

rajpal:Baldev हमारे सेना और हमारी प्रजा भी हमारा प्रतीक्षा कर रही है

Baldev:avashya पिता श्री महाराज ये सेना पति सोमनाथ कहा है

Rajpal:Wo क़िले क बहार हे है चलते है

baldev:Han चलिए पिता जी

राजपाल और बलदेव क़िले से बहार जाने लगते है क़िले क बहार गहतराष्ट्रा की पूरी सेना और दूर गाओ से होली का उत्सव मानाने क लये प्रजा पहुंची थी खासकर युवा वर्ग जो मदिरा और भांग राजा की ओरे से पीने से क लये आये थे

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 187

राजपाल और बलदेव क़िले से बहार जाने लगते है क़िले क बहार गहतराष्ट्रा की पूरी सेना और दूर गाओ से होली का उत्सव मानाने क लये प्रजा पहुंची थी खासकर युवा वर्ग जो मदिरा और भांग राजा की ओरे से पीने क लये आये थे

राजा राजपाल और महाराज बलदेव सिंह अपने क़िले क मुख्या द्वार से बहार आते है तो देखते हे दांग रह जाते है आज महल क आगे इतनी भीड़ थी जितनी आज से पहले कभी नहीं hui,senapati सोमनाथ अपने तलवार को मियां से निकल कर चिल्लाता है "महामहिम गहतराष्ट्रा क महँ राजा महाराज बलदेव सिघ जी आ रहे है "

पुरे क़िले को फूलो से सजाया गया था और क़िले क बहार लोगो क बैठने और होली मानाने क लये मंडप लगाया गया था और वही पर सबसे आगे महाराज क बैठने क लये आसान बनाया tha,Maharaj बलदेव मुस्कुराते हुए अपने आसान की ओरे जा रहे थे और पुरे गहतराष्ट्रा की जनता "महाराज बलदेव की jai"Jay जय करते हुए थक नहीं रहे the..jaise हे आसान क पास महाराज बलदेव पहुंचते है सेनापति सोमनाथ आदरपूर्वक उनको बैठने क लये कहता है बलदेव आसान ग्रहण कर अपने दये ओरे खड़े अपने पिता श्री राजा राजपाल जी को बैठने क लये कहता है और वो भी बैठ जाते है फिर सोमनाथ को बैठने क लये बलदेव इशारा करता है और वो भी बाये ओरे बैठ जाता है ,वह पर कड़ी दसिआ अपने थाली में रखे फूल पत्तिओ को महाराज क ऊपर फेकते है

Somnath:Maharaj बलदेव जी आपको होली की हार्दिक शुभकामनाये आपकी आज्ञा हो तो गुलाल लगा दू

सोमनाथ खड़ा होता है और अपने हाथ में रंग ले कर बलदेव क पैरो टेल बैठ जाता है वैसे हे बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ता है और सोमनाथ अपने हाथ में रंग ले क हल्का सा महाराज बलदेव क हाथ पे लगा देता है फिर वो राजा राजपाल को भी हल्का रंग लगा देता है

Somnath:Ab जितने भी चौधरी और मुखिया है आकर महाराज को रंग लगाए

गहतराष्ट्रा क कोने कोने से आये हर गाओ क मुखिया चौधरी अपने महाराजा को रंग लगते हुए शुभकामनाये देने लगते है तभी एक चौधरी आकर बलदेव क हाथ पर चुटकी से रंग लगा कर

Chaudhri:Maharaj बलदेव आप जैसा सम्मान इस राज्य की प्रजा ने आज तक किसी महाराज को नहीं दिया

Baldev:Chaudhri ये प्रजा हम से क्यू प्रेम करती है तुम जानते हो?

चौधरी :वो क्यू महाराज

Baldev:Q क ये प्रजा को हम ने और महारानी ने अपने परिवार की तरह सींचा है और जब हम अपने परिवार से इतना प्रेम करते है तो प्रजा हमारा मान सम्मान क्यू न करे

Chaudhri:Maharaj आप सत्य कह रहे है जब से आप गहतराष्ट्रा क महाराज बने है हर घर खुशहाली आगयी है हमारा राष्ट्र प्रगति की ओरे बढ़ रहा है वैसे महारानी देवरानी कहा है वो ठीक तो है न यदि महारानी देवरानी हमारे बहुओ बेटिओ को शाहज़ेब की चुंगल से नहीं बचती तो कितना बुरा होता

Baldev:Bhagwan की दया से कुशल है आपकी चिंता का कारन जान सकता हु

chaudhri:Maharaj अब हमारे राष्ट्र को राज वंश तो महारानी देवरानी हे देगी आशा करता हु क भगवन आपको पुत्र दे

Baldev:avashya होगा हमारा पुत्र जो गहतराष्ट्रा पर शाशन करेगा चौधरी जी

बलदेव मुस्कुराते हुए कहता है फिर अपने पिता की ओरे मुद कर देखता है वो मुँह लटकाये ज़मीन की ओरे देख रहे थे

Senapati:Maharaj रीती अनुसार आप प्रजा क समक्ष अपने दो शब्द रखे और होली मानाने की आज्ञा दे दीजिये

Baldev:Avashya सेनापति

बलदेव उठ खड़ा होता है और पूरी प्रजा अब खामोश हो कर अपने महाराज को देखने लगती है

Baldev:Ghatrashtra की प्रजा आप सब का आभारी हु जो आप सब यहाँ उपस्थित हुए ..आअज होली क इस पवन उत्सव पर मई महाराज बलदेव सिंह आप सब को हृदय से शुभकामनाये देता हु आज का दिन बुराई पर अच्छे का जीत का दिन है ,हमारा राज्य विदेशी आक्रमणकारिओं क कारन बहुत कुछ खोया पर हम और हमारे सैनिक अपने मातृभूमि को अपने लहू से रंग दिए पर आंच नहीं आने दिए और आगे भी हम किसी को गहतराष्ट्रा की ओरे आँख उठा कर नहीं देखने देंगे"

पूरी प्रजा महाराज बलदेव की जय जय कर करना शुरू कर देते है बलदेव सिंह अपना हाथ ऊपर उठाते हुए

"मई महाराज बलदेव सिंह आप सबको होली मानाने की आज्ञा देते हुए आज क कार्यकर्म को आरम्भ करता हु"

पूरी भीड़ एक दूसरे को होली है कहते हुए रंग और गुलाल उड़ने लगती है और ढोल ताशे वाले अपने कला का प्रदर्शन करते हुए नाचते गाते hai,Koi गीत गता है तो कोई नाचता है एक तरफ खाने का मंडप था जहा मिठाइए बांटा जा रहा था वही पर bhaang,somras और मदिरा भी लोग एक दूसरे को पीला रहे थे

सेनापति somnath:Maharaj सोम रास पीयेंगे

Baldev:Nahi सेनापति किसी भी प्रकार नशा करना उचित नहीं

Senapati:Maharaj होली में सोमरस तो बचे भी पीते है अब आप तो विवाहित पुरुष है

Rajpal:Baldev सोमरस हिमालय क उत्तम बूटी सोम से बनता है इससे लाभ हे होता है यदि ुचि मात्रा में पीये aaah..mera पीठ

Senapati:Raja राजपाल आप ठीक तो है न

rajpal:Senapati मुझे अब अपने कक्षे में जा कर विश्राम करना चाहिए

Senapati:Sainiko राजा राजपाल जी को क़िले तक पहुचाओ और हाँ अंदर कोई न जाये किसी भी पुरुष को अंदर जाना वर्जित है

baldev:pita जी आप ठीक तो है न या मई ले चालू

Rajpal:Nahi पुत्र अआप अपने प्रजा को संभाले मई स्वयं चला जाऊंगा ाः पीठ में पीरा होरहा है

Baldev:Sainiko पिता जी को संभल कर ले जाओ

बलदेव क कहने पर दो सैनिक राजा राजपाल को क़िले की ओरे ले जाते है और बलदेव और सोमनाथ

Somnath:Maharaj ये लीजिये सोमरस आगया अब तो आपके पिता जी भी कह दया क ये रस लाभकारी है

Baldev:Theek है लाओ परन्तु इस नशा हुआ तो ठीक नहीं

Somnath:Q महारानी देवरानी ने मन क्या है मदिरा पीने डर रहे है उनसे

Baldev:Nahi नहीं मई किसी से नहीं डरता सोमनाथ

Somnath:man me)Ek दिन तुमने डरना होगा बलदेव मई तुम्हारे पाप क घड़ा को फोड़ दूंगा और गहतराष्ट्रा का महाराजा बन कर तुम्हारे माँ और तुम्हारी मनमानी भी बंद कर दूंगा

baldev:kya हुआ क्या सोचने लगे

Somnath:Hume ज्ञात है महाराज आप इतनी काम आयु में गहतराष्ट्रा क महाराज सहस क बल पर हे बने और विवाह कर महारानी को अपनी पत्नी तो सहस और हिम्मत से हे बनाये

Baldev:Somnath महारानी देवरानी मेरे जीवन में पत्नी क रूप मिली क्यू क हमारे प्रेम अटूट था सच्चा था हेयर और जीवन भर रहेगा

Somnath:To इसी बात पर मदिरा पीजिये महाराज मुझे पता है एक दिन पी लेने पर कोई पत्नी नहीं बोलती

baldev:parantu..

Somnath:kuch नहीं ..महाराज क लये सोमरस भंगरास और मदिरा लाओ

Baldev:man me)Ye कहा फास गया यदि पील लिया तो महारानी देवरानी गुस्सा हो जाएगी दूसरी बार कैसे गलती कर सकता हु नहीं पिया तो ये सोमनाथ मुझे डरपोक समझेगा

Somnath:ye लीजिये महाराज आगया

Baldev:Theek है मई केवल सोमरस थोड़ा पीऊंगा

Somnath:Jo ीचा हो महाराज

बलदेव और सोमनाथ क साथ बैठे महल क मंत्रीगण और चौधरी भी अपने अपने गिलास में सोमरस और मदिरा ले क गटकता शुरू करते है

somnath:Uthaiye महाराज बलदेव देखिये सब पी रहे है

Baldev:hmm ठीक है

बलदेव गिलास उठा कर पहले एक घुट सोमरस का पीटा है और धीरे धीरे वो पूरा गिलास जातक जाता hai.somnath अब अपने गिलास में और बलदेव क गिलास में मदिरा रख देता है और बलदेव को देखते हुए "उठाइये महाराज आज होली है" "सोमनाथ"

"महाराज यदि आप नहीं पीयेंगे तो मई भी नहीं पीऊंगा "बलदेव चुपचाप उठता है और गटकने लगता है सोमनाथ भी पीने लगता है कुछ देर में हे बलदेव नशे में धुत था और उसे मज़ा आने लगा था अब तो वो बिना सोमनाथ क कहे हे गिलास में हर प्रकार का रस रख पीने लगता है

Somnath:Maharaj मैंने सुना है ये रस पी कर एक पुरुष अपने पत्नी और अधिक खुश कर सकता है

Baldev:aisa है क्या आ आओर लाओ

Somnath:Maharaj साथ में ताज़ा फलो का भी आनंद ले

Baldev:Somnath सचमुच ये रस तो बहुत स्वादिष्ट है आह मज़ा आगया

ऐसे हे ढोल नगाड़े बज रहे थे और हज़ारो की संख्या में लोग वह होली खेल रहे थे और मदिरा का मज़ा ले रहे थे

क़िले क अंदर

महारानी देवरानी को पकड़ कर कमला और षुरूश्ती उसके गालो पर गुलाल रगड़ रही थी और वो अपने आप को छुरा रही थी

Kamla:q बास महाराज बलदेव का हे रगड़ना पसंद है

Shurushti:Kamla आज तो मेरा बीटा बलदेव अपने पिता क सामने हे महारानी को रगड़ रहा था

Devrani:tum दोनों मिल कर मुझे पकड़ लिए हो अभी बताती हु

देवरानी अपने हाथो को आगे बढ़ा कर कमला और षुरूश्ती क पेट पर गुदगुदी करती है और दोनों हस्ते हुए हैट जाती है फिर देवरानी दोनों को अपने भरी बाहो में जकड लेती है ुचे कद की देवरानी क सामने दोनों बचे से जकड जाते है

devrani:ab बताओ कैसी रही

देवरानी दोनों को पकड़ दीवार से सत्ता देती है और दोनों को गुगुड़ी करते हुए अपने हाथ से गुलाल उठा कर दोनों क मुँह पर दोनों हाथो से रगड़ने लगती है

राजमाता जीविका देवरानी की शक्ति प्रदर्शन को देख अचंभित थी

Jeevika:man me)Ye देवरानी तो दो स्त्री का मिला क एक है इतनी शक्तिशाली इतने लम्बे लम्बे पेअर हाथ कितना मादक शरीर है

उधर क़िले क बहार बलदेव क पास वैध जी आते है और उनसे मिल कर होली की शुभकामना देते है

Baldev:aaiye वैध जी मदिरा पीजिये

Vaidh:nahi अब इस आयु में पीना उचित नहीं

Baldev:Aur सब कुछ तो करते हे है बुढ़ापे में फिर मदिरा क्यू नहीं

बलदेव की बात सुन कर सब है पड़ते है

Baldev:waise आप कहा थे

vaidh:man me)Kahi मेरे और कमला क बारे में तो नहीं जान गए है महाराज

Vaidh:Maharaj वो मई पहाड़ो पर जड़ी बूटीओ को ढूंढ रहा था अब सोमरस बनाने क लये सोम तो चाहिए और हर सैनिक इस बूटी को पहचान नहीं सकता

Baldev:Koi बात नहीं वैध जी स्थान ग्रहण करे मदिरा नहीं तो लड्डू हे खा ले

ये सुनते हे सब है पड़ते है और बलदेव भी हसने लगता है ऐसे हे दिन भर आस पास क राज्य से राजा महाराजा बलदेव से मिलने क लये आते रहते है और संध्या कब हो जाती है पता हे नहीं चलता

क़िले क अंदर महारानी देवरानी संध्या होने पर अपने कक्षा में जाने लगती है तो कमला उसे कहती है "महारानी मई आपका रात का भोजन रख दी हु आपको निचे आने की आवश्यकता नहीं वैसे भी महाराज अपने रंग की पिचकारी से आपको रंग देंगे"

Devrani:chup करो मई जाती हु तैयार होने महाराज आये तो ऊपर कक्षा में भेज देना

Devrani:wo आपके कक्षा में हे जायेंगे जो आप दे सकती है वो कोई और थोड़ी देगा

Devrani:bhakk मई चली

देवरानी सीडीओ से ऊपर चढ़ जाती है और स्नान कर पारदर्शी लाल रंग का साड़ी पहन लेती है और अंगिया नहीं पहनती देवरानी अपने बेटे क बिस्तर पर बैठ अपने पति का प्रतीक्षा करने लगती है

बलदेव नशे में धुत था और वो अपने क़िले की ओरे आने लगता है पर अभी भी कई लोग नशे में धुत होली मन रहे थे ,बलदेव लड़खड़ाते हुए कुछ सैनिको क साथ क़िले क मुख्या दुवार पर आता है फिर कुछ सोचते हुए

Baldev:Sainiko तुम सब जाओ मई राज घाट पर स्नान कर जाऊंगा

Sainik:maharaj आप अकेले चले तो जायेंगे न

Baldev:Mai नशे में हु चलो निकलो मई अपने आप को संभल सकता हु जाओ मेरे वस्त्र ले क्र आओ

Sainik:jo आगया महाराज

बलदेव राज घाट पर जाता है और डुबकी लगा कर स्नान करने लगता है ये नहर केवल राजपरिवार क लये था कुछ देर में सैनिक वस्त्र ले कर आते है बलदेव उनसे वस्त्र रखने क लये कह देता है और उनको भेज देता है और फिर से नहाने में व्यस्त हो जाता है बलदेव का सर गरर्म हो चूका था पानी लगने से वो कुछ ठीक महसूस करता है और जैसे हे वो अंदर पानी में अपने लैंड पर हाथ लगता है "आह सांप off"tabhi वो अपने लौड़े को हाथ में लिए गोल घुमा कर "आर्य ये तो मेरा हे लिंग है "बलदेव अपने खड़े लैंड होने पर आश्चर्य करता है फिर वो पानी से बहार आकर अपने वस्त्र पहनता है और किसी भी तरह अपने लैंड को हल्का अपने धोती में छुपाते हुए क़िले की ओरे जाता है और मुख्या दुवार पर खड़े दोनों सैनिक बलदेव को देख अपना सर झुका लेते है

baldev:Darwaza खोलो नालायको

दरवाज़ा खुलता है क़िले का और बलदेव हल्का लड़खड़ाते हुए अंदर जाने लगता और फिर दूसरे दुवार से अंदर जाता है क़िले में सन्नाटा था वो चुप चाप सीडीओ पे चढ़ते हुए ऊपर अपने कक्षा की ओरे जाने लगता है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 188

दरवाज़ा खुलता है क़िले का और बलदेव हल्का लड़खड़ाते हुए अंदर जाने लगता और फिर दूसरे दुवार से अंदर जाता है क़िले में सन्नाटा था वो चुप चाप सीडीओ पे चढ़ते हुए ऊपर अपने कक्षा की ओरे जाने लगता है

बलदेव जैसे हे अपने कक्षा क दरवाज़ा पर लगता है वो अंदर खुलता चला जाता है वो समझ जाता है क उसकी माँ दरवाज़ा खोल कर राखी hai,baldev धीरे कदमो से अंदर जाता है तो देखता है कक्षा में अँधेरा है और कही कही पर मोमबत्ती और दिया की रौशनी से सुन्दर कक्षा जगमगा रहा था बलदेव नशे में धुत्त था और जब भी वो रौशनी क ऊपर देखता उसको हल्का चक्कर सा आता उसकी आखे बेताबी से अपने माँ को ढूंढ रही थी उसका लौड़ा पहले हे तना था ,बलदेव अपने हाथ में लौड़ा ले क सहलाते हुए "ये माँ कहा चला गई आज तो रगड़ क छोडूंगा साली ko"Baldev नशे में धुत अंदर जाता है तो पलंग क पास अपने माँ देवरानी को देख हल्का मुस्कुराते हुए अपने हाथ में लैंड को पकडे आगे पीछे करता hai,Devrani बाला की खूबसूरत लग रही थी उसके एक लाल रंग की परदासरहि साड़ी और ब्लाउज पहनी ,ब्लाउज क अंदर ब्राज़िएर न होने क कारन देवरानी क चुकी की मोती घुंडी साफ़ नज़र आरही thi,Devrani अपने बेटे क कदमो की आहात सुन अपने बेटे को देख अपना एक पेअर मोड़ लेती है और अपने चुचिओ को



ऊपर उठाते हुए "आगये आप मई कब से आपका प्रतीक्षा कर रही थी"

देवरानी अपने बेटे की दशा देख अपने सुंदरता पर इतराती है बलदेव तो नशे में धुत था उसका लौड़ा जड़ी बूटीओ खाने से आज बुरी तरह अकड़ा था वो अपने लैंड को हिलाये जा रहा tha,Devrani मुस्कुराते हुए "ाजैये न महाराज आज होली क अवसर पर मेरे गांड में अपना गधा वीर्य भर दीजिये न अपने पिचकारी से"



देवरानी अपने बीटा को उकसाते हुए अपने पास बुलाती है बलदेव देवरानी क मांग पर टिका उसके निचे रसीले लाल होठ गले में सोने का हार उसके निचे बड़े नारियल से ठोस दोनों चुचो और उसकी घुंडीअ निचे पतली कमर और ठीक छूट क ऊपर पहनी एक झींणी सी पेटीकोट में निहारते हुए बलदेव अपने माँ क समीप आटा है

"माँ जल्दी से मुझे छोड़ने दो मेरा लैंड फटा जा रहा है "

ये सुन कर देवरानी हैरान होते हुए

"महाराजा आप मेरे पति है अब आप को क्या हुआ"

बलदेव आता है और झट से देवरानी क बड़े दूध को दोनों हाथ में जकड कर ज़ोर से दबा देता है देवरानी अचानक हमले को संभल नहीं पाती और ज़ोर से चीखती है उसके नाक में दुर्गन्ध आती है जिसे वो समझ कर

"ाः महाराज आपने आज पी राखी है आपको हमने कहा था न मदिरा नहीं पीना है ये आपके स्वस्थ क लये हानिकारक है"

"चुप्प रंडी बहुत आए ज्ञान देने वाली चल झुक्क तेरी गांड लाल करू मार क अपने लौड़े से"

"महाराज शायद आप भूल रहे है मैंने आपको कहा था आप पीयोगे तो मेरे साथ मत सोना मई आपको नहीं करने दूंगी कुछ"

"रंडी साली तू बहुत बोलने लगी है तू सही गलत बताएगी जो खुद माँ हो कर अपने बेटे का लौड़ा रोज़ अपने तीनो छेड़ में लेती है चल झुक रंडी नहीं तो"

"नहीं तो क्या आप अपने होश में नहीं हो महाराज मुझे बहुत दुःख है इस बात का"

"माँ झुक जा रांड साली तेरा बीटा आज तेरी माँ याद करवा देगा"

"महाराज आप अपशब्दों का प्रयोग न करे मई आपकी पत्नी हु आपने मदिरा क्यू पी"

बलदेव गुस्से में पागल हो जाता है और उल्टा हाथ एक देवरानी क गाल पर मारता है चतत्त से और पुरे कक्षा में आवाज़ गूंज जाती है देवरानी चोट से तिलमिला जाती है उसके आँख भर्र जाते है

"माँ झुक जाओ मई कब से कह रहा हु पर नहीं तू कुटिआ ऐसे नहीं मानेगी"

बलदेव देवरानी को धक्का देते हुए बिस्तर पर झुका देता है देवरानी भी मजबूरन अपने बड़े गांड को निकले कुटिआ की तरह झुकी थी "आह हु बलदेव होश में आओ आप इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते ाः हु"



देवरानी अपने बेटे से रेहम की भीक मांगने लगती है हाथ जोड़ कर तभी बलदेव अपने बड़े पंजो को उठा कर तरार देवरानी की गांड पर चाटो की बारिश कर देता है देवरानी को गाली देते हुए देवरानी की आखो से ासु टपक पड़ते है और वो रोने लगती है

"रंडी साली छिनाल बहुत रोटी है तेरी छत्तत्ततत्तत्त तू मन करेगी मुझे चतत्त"

देवरानी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है तभी बलदेव अपने धोती को खोलता है और अपने झुकी हुई माँ क गांड जिसपे सिर्फ नाम का एक झीना सा पारदर्श कपडा था उसको दोनों हाथो से चरररररर से फाड़ देता है देवरानी अपने आखे बंद कए रट जा रही थी

"महाराज आप किसी जंगली पशु की तरह कर रहे है महाराज आपकी महारानी हु मई आपकी प्रेमिका हु"

बलदेव अपना लौड़ा छूट पर रगड़ते हुए एक ज़ोर से ग़च्चा मारता है और एक बार में हे आधा लैंड अंदर घुसा देता है

"माआआआ तेरे छूट की तिल्ली काट क कौवो को खिला दूंगा साआली रंडी"

"aaaaaaaaaaaaaah महाआआअआआअज हूहूहू मत कीजिये ाआअह पीरा होरहा है"

बलदेव झट से एक और करारा धक्का मारता है और पूरा 9 इंच का हुलआबि लौड़ा देवरानी की छूट को चीरते हुए बच्चेदानी तक पहुंच जाता है और देवरानी अपने आखे बंद कर पीरा सहन करते हुए रोने लगती है पर बलदेव माँ क ासु को अनदेखा करते हुए ज़ोर ज़ोर से अपने माँ क छूट में घाचे मारने लगता है और देवरानी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है

"हु हु हु हु हु आआआह हु हु हु हु aaaaaaaaaaaah हु हु आआह हे भगवन हु हु ाआअह मर्डर जाउंगी हु हु"

बलदेव अपने आखे बंद कए किसी दूसरे दुन्या में चला जाता है और अपने पूरी शरीर की ताक़त से अपना लौड़ा अपने माँ को झुकाये छूट में जड़ तक पेल रहा था देवरानी और ुचा हो कर रोने लगती है इतना ज़ोर से रोटी है क आवाज़ निचे तक चली जाती है राजा राजपाल अपने बिस्तर पर लेते अपने पत्नी रानी षुरूस्ती क आने का प्रतीक्षा कर रहे थे तभी उसके कानो में किसी क ज़ोर ज़ोर से रोने की आवाज़ आती है और उठ कर सोचते है क आखिर कौन रो रहा है

Rajpal:man me)ye तो देवरानी की आवाज़ है क्यू रो रही है वो इतना

तभी रानी षुरूश्ती आती है और राजपाल को परेशां देख

"क्या हुआ महाराज आप चिंतित क्यू है"

Rajpal:Shurushti ये देवरानी इतने रात गए रो क्यू रही है वो भी इतने ज़ोर से

षुरूश्ती मुस्कुराते हुए अपने पति की मूर्खता पर "अब आपको क्या पता एक पति पत्नी जब प्रेम करते है तो ऐसा होता हे hai,Baldev देवरानी को पेल रहा होगा जैम क छोड़िये न चलिए सो जाते है"

राजपाल को समझ नहीं आता वो क्या करे उसके कानो में रोने की आवाज़ गूंज हे रही थी वो फिर से बिस्तर पर लेट जाता है

ऊपर कक्षा में झुके हुए देवरानी को पिछले पंद्रह मिंट से बलदेव छोड़ रहा था देवरानी का रट हुए बुरा हाल था देवरानी क सबर का बाँध टूट जाता है और बलदेव का हाथ अपने गांड से झटक कर अपने छूट से बलदेव का लम्बा लौड़ा खींचते हुए बिस्तर पर आगे बढ़ जाती है और पलांद क दूसरी तरफ जा कर अपने हाथ जोड़ कर कर कड़ी हो जाती है

"दया कीजिये बलदेव मई आपके हाथ जोड़ती हु मत कीजिये आज आप होश में नहीं है"

बलदेव का लौड़ा तन्ना कर बार बार हिल रहा था और अपने शिकार को छूट जाने से बलदेव गुस्से से ला हो जाता है और वो पहले भागते हुए कक्षा का दरवाज़ा बंद करता है और एक लम्बी रस्सी ले आता है बलदेव को रस्स्सी लाता देख देवरानी असमंजस में थी

"बलदेव ये क्या है रस्सी क्यू ले आये "

"तेरी गांड मारूंगा आज तुझे बाँध क पेलुँगा रंडी कही की तू भागती है न"

देवरानी भागने लगती है बलदेव पीछे से देवरानी को पकड़ता है देवरानी दीवार पर अपने हाथ उठाये "बलदेव क्षमा कर दीजिये मई झुक जाती हु छोड़ लीजिये परन्तु बांधिए मैट "

बलदेव अपने हाथ आगे बढ़ा कर सबसे पहले गांड क ऊपर से फैट चुके पेटीकोट को फाड़ते हुए फेकता है फिर पारदर्शी ब्लाउज को चररररर से बीचो बीच फाड़ कर अपने माँ को नंगा कर देता है

"माँ अब मैंने अपना निर्णय ले लिया हु तेरी गर्मी निकल दूंगा रंडी"

बलदेव देवरानी को कस क पकड़ लेता है देवरानी बलदेव जैसे शक्तिशाली पुरुष क हाथ एक डैम मसल क रह गई थी देवरानी अपने पुरे दमखम से छूटना छह रही थी पर बलदेव अपने काम को अंजाम देते हुए रस्सी को देवरानी क इर्दगिर्द बांधते हुए घुमा रहा था देवरानी पानी बिन मछली तड़प रही थी "ाः छोरो बलदेव तुम कितने निर्दयी हो छोर दीजिये ah"Baldev देवरानी क दोनों हाथ को कस क बाँध देता है और देवरानी को बिस्तर पर पटक देता है

"छिनाल तेरी नसस ढीली करता हु अब"

बलदेव अपने कुरता को निकल कर फेक देता और अपना लौड़ा हाथ में लार कर मुठियाते हुए

"खोल अपना मुँह माँ"

बलदेव अपना लौड़ा देवरानी क होठो पर मारता है और देवरानी अपना मुँह खोल देती है बलदेव आव देखता है न तव अपना लौड़ा मुँह में घुसा देता है

"ुघठ ाः महाराज"

"रंडी नाटक मत कर ले चूस अपने बेटे का लौड़ा"

बलदेव अपना लौड़ा देवरानी क छोटे मुँह में अंदर बहार करने लगता hai,Devrani बंधी हुई थी उसके आखो से ासु टपक



रहे थे फिर भी बेचारी मुँह खोले अपने बेटे क लौड़े को अपने जीभा से चाट रही थी बलदेव अपने हाथ को आगे बढ़ाते हुए अपने माँ क जांघो पर छठा मरता है

"तेरी छूट तो दिखा रंडी माँ"

देवरानी अपने दोनों जांघ को खोल अपने छूट क दर्शन अपने बेटे को करवाती है बलदेव अपने माँ क मुँह को छोड़ रहा था ,बलदेव कुछ देर ऐसे हे माँ का मुँह छोड़ कर अपना लैंड खींचता है देवरानी एक लम्बी सांस लेती है

"आह आपको ाचा लग रहा है महाराज मुझे इस तरह प्रताड़ित कर k"baldev अपने माँ क छूट को सहलाते हुए "मात मेरी मैया तुझे इस दुःख में भी मई सुख दूंगा आनंद ले अपने बेटे क लौड़े का"

बलदेव अपने एक ऊँगली छूट में घुसा देता है

"आआह रआआआआज़ा "

बलदेव की ऊँगली अंदर जाते हे एक मादक सिसकी लेती है और बलदेव ये देखते हुए अपने दूसरी ऊँगली भी अंदर दाल देता है दो मोती ऊँगली को ज़ोर ज़ोर से अंदर बहार करने लगता है इस बार देवरानी को पीरा महसूस होती है और फिर से वो चीखने लगती है बलदेव अपने माँ क छूट में तीसरी ऊँगली भी डालता है और अपने माँ क मुँह पर हाथ रखते हुए "रंडी बहुत चिल्लाती है तू "

बलदेव अपने तीनो ऊँगली को ज़ोर ज़ोर से अंदर बहार करते हुए अपने माँ की छूट को अपने उंगलिओ से छोड़ने लगता है देवरानी क आखो में फिर से ासु भर जाता है और वो रोने लगती है पर उसके आवाज़ बलदेव अपने हाथ से दबा देता hai,Devrani अपने मुठी को बंद करती कभी खोलती और अपने बेटे को छह कर भी आराम से करने क लये नहीं कह सकती थी



"उठ ाः आह यह आआआआह बॉल देववव ाआअह"

"आज क बाद तू कभी भागेगी नहीं माता श्री आअज आपके योनि को अपने वीर्य से भर्र दूंगा मेरे होने वाले बचे की माँ"

बलदेव अपने माँ को पलट कर झुका देता है और रस्सी को अचे से कस्ते हुए देवरानी क हाथ को बंद देता है देवरानी को कुटिया की तरह झुकी थी बलदेव रस्सी का एक मोर पकड़ कर बलदेव एक तगड़ा झटका मारता है और पूरा लौआ एक बार में हे छूट क जड़ तक दाल देता है देवरानी ज़ोर से चिल्लाते हुए ज़ोर से रोने लगती है

"हुहहु हु हु aaaaaaaaaaaaah मर्डर गयी आआआह"



बलदेव अपना 9 इंच का हुल्लाबी लौड़ा माँ देवरानी क छूट में खचाखच तलवार की तरह अंदर बहार करने लगता है देवरानी ज़ोर से चीखते हुए इस बार और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है

बलदेव क पिता राजा राजपाल जो अपने आँख बंद कर क सोने की कोशिश कर रहे थे देवरानी की इस बार की चीख से फिर से खुल जाती है और वो पास में सोइ षुरूश्ती को उठाते हुए

rajpal:shurushti क्या तुमने सुना देवरानी बहुत हे पीरा से रो रही है

Shurushti:Maharaj वो माँ बेटे जवान गरम खून है अपने गर्मी निकल रहे है आप जैसे नहीं जो आकर 5 धक्को में सो जाये उन्हें करने दीजिये

Rajpal:shurushti एक बार पूछ लीजिये कही बलदेव और देवरानी को

Shurushti:Devrani को हुमच कर छोड़ रहा होगा या तो गांड मार रहा होगा आपकी पूर्व पत्नी का और इस समय उनसे जा क पूछना उचित नहीं महाराज अब आप भी सो जाइये यदि आपको पूछना है तो आप जाये और अपने बेटे को कहिये क धीरे से पेले अपने माँ को

षुरूश्ती अपना करवट बदल कर राजा राजपाल पर भड़कते हुए सो जाती है राजा राजपाल अपने हे पत्नी और बेटे की इस चुडैमै ध्वनिओ को सुन आत्मग्लानि से रोने लगता है और अपना आँख बंद कर लेता है

उधर बलदेव घपाघप अपने माँ क छूट क छेड़ को फाड़ कर तीतत बितर कर देता है देवरानी थी चुप होने का नाम नहीं ले रही थी और बलदेव भी बिना किसी डर क अपने माँ को रुलाते हुए खूब हुमच कर पेल रहा था और देवरानी क आखो से आसुओ की लारी बह रही थी और ज़ोर से चिल्ला चिल्ला क पुरे क़िले को अपने सर पर उठा ली थी तभी बलदेव अपने लैंड को अपने माँ क छूट से बहार खींचता है और फिर एक छोटे से रस्सी क टुकड़े से अपने माँ क मुँह पर बांधने लगता है "बलदेव ये क्या कर रहे हो"

"तू बहुत चिल्लाती है किसी रांड की तरह तेरा मुँह बाँध रहा हु"

बलदेव देवरानी क मुँह खोल रस्सी फसा देता है और सर पर लपेट रस्सी बांध देता है

"अब चिल्ला साली बहुत डैम है तेरे में चिल्लाने का तो"

बलदेव फिर से देवरानी क सर को निचे कर देवरानी क गांड को ऊपर उठा कर अपने लौड़े को छूट पर निशाना लगते हुए "ghapp"se अंदर दाल देता है

"रंडी छिनाल चिल्लाए और चिल्लाआ माधरचोद "

"ुघ्घ आआह आग्घ ाआअह ह्ह्हआआआह"



"घप्प घपपप घप्प पाछह पहछह घपपप घप्प घपपप आआआह उठ आआआआह माआ मेरी गडराआआई रांड मा आह घपपप घपपप गलपपपप आआह घपपप पछ"

पुरे कक्षा में पांच पांच घच घच की आवाज़ गूंज रही थी देवरानी मरती क्या न करती अपने बेटे का हर धक्का खा रहे थी और ासु बहते हुए अपने आँख बंद कर लेती है और हर धक्के को महसूस कर इस दर्द में भी मज़ा तलाशने लगती है वही बलदेव किसी ज़ालिम की तरह देवरानी पर कहर बन कर बरस रहा tha,aise हे घंटो तक बलदेव छोड़ता है अपने माँ को और देवरानी कई बार झाड़ जाती है बलदेव अब देवरानी को अपने बहो में उठा लेता है और फर्श पर उल्टा लिटा देता है देवरानी जो एक भरी भरकम शरीर की मालकिन थी आज वो किसी बंधी हुई गुडिअ की तरह हो गई थी

"माँ गांड को ऊपर कर थोड़ा "

देवरानी अपने बेटे का बात मानते हुए अपने गांड को ऊपर करते है बलदेव उल्टा लेती देवरानी क ठीक ऊपर आता है और अपने दोनों हाथ अपने माँ क दये बाये रख निचे होते हुए अपने लौड़े को छूट में "ghapp"se पेल देता है फिर ऊपर निचे होते हुए जड़ तक देवरानी की छूट की कुटाई शुरू कर देता है

"महारानी बनती फिरती है ले माधरचोद रंडी साली खा मेरा लैंड आआह "बलदेव अपने निचे अपने माँ को लिटाये ऐसे छोड़ रहा था जैसे व्यायाम कर रहा हो



"आआह मा तेरी छूट कितनी रसीली है ाः पुरे गहतराष्ट्रा में तेरे जैसी गदराए माल कोई नहीं पिता जी का धन्यवाद जो आपको मुझे सौंप दिया आआहा aaaaaaaaaah मई स्खलित हो रहा हुआहासश माआआआआ"

बलदेव अपना गधा वीर्य देवरानी क छूट में छोड़ने लगता है और अपना हाथ एक आगे बढ़ा कर देवरानी क मुँह से रस्सी खोलते हुए अपने होठ देवरानी क होठ को चूसने लगता है

"ुहम्म्म्म ाः मज़ा आगया माँ ाआअह मेरी मायआ "

देवरानी का गाला सुख रहा था वो बलदेव से विनती करते हुए

"महाराज मुझे प्यास लगी है जल दीजिये मेरा गाला सुख रहा है"

बलदेव झट से उठ जाता है और अपने लाऊड को देवरानी क मुँह में भर कर अपना वीर्य अपने माँ को चाटने लगता है

"मा बुझा ले अपनी प्यार पी ले मेरा वीर्य"

देवरानी प्यासी थी वो अपने जीभा से अपने बेटे क लिंग पर लगे वीर्य की एक एक बून्द पि जाती है और सब चाट क उखड़े सांसो को सँभालते हुए "आह बीटा अब तो खोल दो राजा बीटा"

बलदेव मुस्कुराते हुए देवरानी क रस्सी की गाठ खोल देता है और जा कर बिस्तर पर लेट जाता है देवरानी अपने शरीर को ढीला करते हुए रस्सी को सुलझाने लगती है उसके आखो से ासु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे बलदेव जैसे हे बिस्तर पर लेटता है सो जाता है देवरानी अपने रस्सी को सुलझाते हुए उठने का प्रयत्न करती है पर उसके कमर में दर होता है वो फिर ज़मीन पर बैठ जाती hai"Baldev जी मेरी मदद कीजिये मुझे बहुत प्यास लगी है इधर आइये उठाइये mujhe"par बलदेव तो खर्राटे मरने लगा था देवरानी को तभी कुछ गीला महसूस होता है वो अपने छूट पर जैसे हे ऊँगली लगाती उसके हाथ में कुछ लगता है वो देखते हे

"रक्त हे bhagwan..baldev इस तरह तो किसी वैश्य क साथ भी कोई सम्भोग नहीं करता" देवरानी क ायखो में ासु लबलब क भर आते है और वो रट हुए अपने पूरी हिम्मत कर कड़ी होती है और सबसे पहले अपने छूट को साफ़ करती है फिर गिलास में पानी ले कर पीती है और किसी ज़िंदा लाश की तरह बिस्तर पर गिर जाती है कब उसे नींद आती है उसे पता भी नहीं चलता.

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
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