Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 9 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

75

गहतराष्ट्रा

रात क अँधेरे में कोई देवरानी क कक्षा में घुसता है और उसके कक्षा की पड़ताल शुरू करता है और हर एक कोने की जांच करता है ये कोई और नहीं महारानी षुरूश्ती थी जो रात क अँधेरे में देवरानी क कक्षा में thi.kuch पुस्तकों पर ध्यान जाता है जिसे खोल कर षुरूश्ती देखती है तो वो कामसूत्र की पुष्तक निकलती है

Shurushti:man me)Oh तो देवरानी इतना आगे निकल गयी अपने बेटे से रंगरलिया ये पढ़ क मानती है

षुरूश्ती पुष्तक को रखती है तभी उसमे से एक कागज़ निचे गिरती है जिसे षुरूश्ती उठा कर पढ़ती है और षुरूश्ती क पेअर कंपनी लगते है

षुरूश्ती मन में" हे भगवन प्रेम पत्र वो भी माँ बेटे का अब मज़ा आएगा बास देवरानी और बलदेव वापस आजाये अब मेरे वार से बच नहीं पाओगे हहहहह अब क्या करोगी देवरानी जब में ये पत्र महाराज को दे दूंगी हाहाहाहा"

षुरूश्ती धीरे धीरे हर प्रेम पत्र जो देवरानी क पास थे बलदेव क उसको अपने पास रख लेती है और फिर बलदेव क कक्षा में जा कर भी तलाशी कर देवरानी क लिखे हुए पत्र ढूंढ कर अपने कक्षा में आकर छुपा कर रख देती है

"देवरानी और बलदेव ये सब तुम दोनों क मृत्यु का कारन है देवरानी को में कभी इस राज्य की महारानी नहीं बन ने दूंगी"

षुरूश्ती अपने ख्वाबो को सजाये अपने कक्षा क बिस्तर पर लेट कर सो जाती है

गहतराष्ट्रा की सुबह बहुत हे शोर गुल से शुरुवात होती है जहा गहतराष्ट्रा क लोग हाहाकार मचा रहे थे

महाराजा राजपाल अपने कक्षा से निकलते है

Rajpal:Ye क्या शोर है

राजपाल चलते हुए महल से बहार निकलते है

चूँकि महल क अंदर सिर्फ काम वाली नौकरानी का छोर बिना काम क सैनिक को जाना वर्जित है

Rajpal:senapati ये क्या है

Somnath:maharaj आपके मित्र कुबेरी क महाराज आ रहे है

Rajpal:kya राजा रतन सिंह आरहे है

Somnath:ji महाराज

Rajpal:jao अंदर महल में और कह दो क वो महल में हे रुकनी अतिथि गृह में नहीं वो हमारे परिवार क अंग है उनके लये हर पकवान बनाया जाये

Somnath:jo आज्ञा महाराज

सोमनाथ महल क अंदर आकर घर क देश को ढूंढ हे रहा था क उसे सामने से महारानी षुरूश्ती चलते हुए आती दिखती है

सोमनाथ महारानी षुरूश्ती क मोठे लटक ते वक्ष और उसके गहरे नाभि को घूर रहा था महारानी षुरूश्ती सोमनाथ क पास आकर

Shurushti:somnath तुम होश में तो हो

Somnath:q महारानी मैंने क्या पाप कर दिया

Shurushti:tum अंदर कैसे आये

सोमनाथ से रहा नहीं जाता है और वो षुरूश्ती को अपने बहो में भर पास क कक्षा में घुस जाता है

"छोरो कमीने दुष्ट सेनापति"

"ओह महारानी जब मेरा लौड़ा तुम्हारे छूट में घुस सकता है तो क्या में महल में भी नहीं आसक्त"

सोमनाथ षुरूश्ती क दोनों हाथो को अपने हाथो में थम दीवार पर षुरूश्ती को चिपका देता है और षुरूश्ती क गले पैर चूमता है

"उम्मंहहआ"

"छोरो मुझे सेनापति"

सोमनाथ अब षुरूश्ती क होठ को अपने होठ में ले लेता है और चूसने लगता है षुरूश्ती अपने होठ ज़ोर से दबाये हुई थी और मुँह खोलने का नाम नहीं ले रही थी

सेनापति अब षुरूश्ती क कमर क चारो और बहो में कास क अपना खड़ा लैंड महारानी षुरूश्ती क छूट पर रगड़ते हुए चुम रहा था

"छोरो सेनापति कोई देख लेगा तो तुम्हे पता नहीं आज क दिन हे जान देनी पड़ेगी तुमको"

"महारानी तुम्हारे ये मादक शरीर क लये इस पल हे में मर्डर जाऊ "

सोमनाथ अब अपने एक हाथ से षुरूश्ती डूब को दबाने लगता है और दूसरे हाथ से उसके गांड को

"महारानी तुम इस घागरा चोली में बहुत सुन्दर लगती है"

"ाः उठ नहीं बस्स्स जाने भी दो"

सोमनाथ एक बार फिर षुरूश्ती क होठो पर टूट पड़ता है और एक गहरा चुम्बन ले कर छोरता है

"ठीक है महारानी जैसी आपकी आज्ञा जाने दया"

"कमीने तुम मुझे इस तरह उपयोग करोगे मैंने सोचा नहीं था"

सोमनाथ मुस्कुराता हुआ वह से आकर महल क देश को समझा कर चला जाता है

कुछ देर बाद सभा लगाई जाती है और राजा रतन भी समय पर पहुंच जाते है सबके स्वागत क बाद राजा रतन सिंह को महाराज राजपाल अपने घर या महल में हे रुकने को कहते है

पारस

पारस में सुबह हमेशा की तरह होती है चहल पहल से पूरा पारस बाजार भरा था जहा पूरी दुन्या क वयापारी अपने व्यापर क लये आते थे और पुरे दुन्या क राजा अपने मज़े क लये

पारस क सुल्तान मेरे वाहिद महल में आराम कर रहे थे तभी वह पर एक सिपाही आकर शिकायत करता है

"गुस्ताखी मुआफ सुल्तान पर कल रात शमशेर फिर से कोठे पे गए थे और"

"अब हमने उसे कई मरतबाह कहा क तुम्हारी शादी कर देते है पर वो है क मंटा नहीं अब हम क्या करे हम भी किसी ज़माने में शमशेर जैसे हे थे"

ये बात सुन कर सिपाही खामोश हो जाता है

इधर बद्री और श्याम उठ कर जाने की तैयारी कर रहे थे बलदेव की आँख खुलती है और भी तैयार होने लगता है

कुछ देर में सब खाने एक साथ बैठ ते है देवरानी बलदेव की ओरे देख भी नहीं रही थी जिसे सब महसूस कर रहे थे

Devraj:to बचो कब निकलोगे गहतराष्ट्रा क लये

Sultan:Han बहिन हिन्द देखने की ख्वाइश मुझे भी है पर जा नहीं पता

Devrani:kabhi पधारे हमारे राज्य सुल्तान हमे भी अतिथि की मान सम्मान क लये जाना जाता है

Sultan:beshaq

Badri:hamari पूरी तैयारी हो गयी है हम निकालेंगे दुपहर तक

सब खा कर उठ कर चले जाते है

और वह पर देवरानी और भूरिया थी और बलदेव बैठा भूरिया क जाने का इंतज़ार कर रहा था पर वो नहीं जाती हार कर

Baldev:maa

देवरानी अनसुना कर देती है

Baldev:maa क्या हुआ बताओ तो मेरी गलती क्या है

Devrani:deedi इसे कह दीजिये मुझसे बात न करे

Hooriya:Devrani कब तक गुस्सा करोगी

Devrani:mujhe ऐसे चरित्रहीन व्यक्ति से कोई बात नहीं करनी

ये सुन कर बलदेव वह से उठ कर चला जाता है ये सोच कर अगर माँ कुछ और बोल दी तो भूरिया क सामने इनके प्रेम का भन्दा फुट जायेगा

बलदेव बहार अत है और उदास हो कर बैठ जाता है पास में अपने घोड़ो को चारा दे रहे उन्हें तैयार कर रहे बद्री की नज़र बलदेव पर पड़ती है और उसे ु दुखी देख कर

उसके पास जाता है

Badri:mitra तुम उदास क्यू हो

Baldev:sab तुम लोगो की किया दिया है

Badri:kya बक रहे हो

Baldev:han कल में तुम लोग क साथ वह गया और नशे में धुत हो कर आया माँ मुझपे गुस्सा है बात नहीं कर रही

Badri:pehli बात इसमें हमारा क्या दोष और दूसरी बात तुम दोनों प्रेमी प्रेमिका क बेच क्या है में नहीं बता सकता तुम मन लो

Baldev:par बात ऐसी है क वो समझ रही है क चरित्रहीन हु और मैंने उसे धोका दया रात में रेशमा क साथ रात गुज़ारा

Badri:oh तो ये बात है अब भाबी भी तुम्हे किसी और क साथ नहीं देख सकती पर उनको कैसे पता क हम रेशमा क कोठे पे गए थे

Baldev:ab मुझे पता नहीं पर कुछ करो मुझे तो समझ नहीं आता कैसे समझौ माँ को क्यू क अगर में ये कहु भी क तुम सब ने मज़े कए मैंने नहीं तो मानेगी नहीं वो

Badri:me कुछ करता हु जाओ तुम वापस चलने की तैयारी करो

बद्री कुछ सोचता हुआ अपने काम में लग जाता है

थोड़ी देर बाद देवरानी क कक्षा क पास खड़ा हो कर

"मौसी में बद्री "

"हाँ आजाओ बीटा"

"बलदेव कहा है"

"वो बहार हे होगा क्यू"

"वो ऐसे हे ..तो आप तैयार हो न वापस गहतराष्ट्रा जाने"

"हाँ बीटा बद्री"

"मौसी आप बुरा न मने तो आप उदास हो"

"नहीं तो उदास क्यू रहूंगी भला "

"बात ऐसी है क बलदेव ने कहा आप उसपर गुस्सा हो कल रात की बात ले कर"

देवरानी ये सुन कर गुस्सा हो जाती है

"बद्री जब तुमने बात निकल हे दया है तो क्या जो तुम लोग ने रात क्या रेशमा क वह जा कर वो ठीक था?"

"नहीं मौसी गलत था"

"और तुम लोग कैसे मित्र हो शमशेर नहीं जनता तुम दोनों तो ऐसी गन्दी जगह जाने से रोक सकते थे बलदेव को ?"

"हाँ पर"

"बद्री तुम दोनों को तो पता है हम एक दूजे को कितना प्रेम करते है और मेरा प्रेमी किसी और स्त्री क साथ की मुझे तो सोच क घिन्न आरही है"

"मौसी आप को हम बचपन से अपनी माँ सा समझते है आप को में जो में बोलूंगा सत्य हे कहूंगा"

"अब कहने को बचा क्या बद्री"

"देवरानी मौसी में अपनी माँ की कसम खा कर कहता हु हम रेशमा क कोठे पर ज़रूर गए थे पर बलदेव ने किसी भी स्त्री को छुआ भी नहीं"

देवरानी चौकते हुए

"क्या ये कैसे "

"हाँ मौसी शमशेर में और श्याम बहक गए परन्तु बलदेव पूरी रात पीटा रहा पर आपके दर से किसी को हाथ तक नहीं लगाया इतने नशे में भी वो आपका नाम हे ले रहा था"

ये कह कर अपने किये पर शर्मिंदा सा होते हुए अपना सर झुका कर खड़ा होजाता है

देवरानी ये सुन कर खुश हो जाती है

"बीटा जवानी में फिसल हे जाते है लोग तुम्हे सर झुकाने की आवश्यकता नहीं और धन्यवाद् बीटा मेरे मन की शंका दूर कर दया मेरा बलदेव कभी मुझे धोका नहीं दे सकता"

ये कह कर मुस्कुराती है

"धन्यवाद मौसी हमे समझने क लये और आज क बाद में भी कभी न जाऊंगा क्षमा कर दे"

"ठीक है बद्री जाओ अब तैयारी करो"

बद्री दरवाज़े क पास जाता है और मुद क

"वैसे भाबी बलदेव को अब भेज दू"

देवरानी एक बार तो गुस्साती है फिर मुस्कुरा क

"ठीक है देवर जी"

ये कह कर अपना सर निचे झुका लेती है

देखते देखते दुपहर हो जाती है

देवरानी देखती है बलदेव सामान ले जाने क लये कक्षा में आता है

देवरानी :बलदेव

बलदेव का जैसे अपने माँ क मुँह से अपना नाम सुन्ना था वो माँ की ओरे पलट ता है

देवरानी अपने हाथ में दूध का गिलास लये कड़ी थी

Devrani:ye लीजिये आप कल रत दूध नहीं पी पाए

बलदेव देवरानी से दूध ले कर पी लेता है

Baldev:maa मुझे क्षमा कर दे

देवरानी झट से बलदेव क गले लग जाती है

"मेरे राजा मुझे तुम पैर शक नहीं करना चाहिए था मुझे बद्री ने सब बता दया मेरे राजा"

बलदेव देवरानी को अपने बाहो में भरे कर

"मेरी रानी में जान दे देना पसंद करूँगा पर किसी गैर महिला को नज़र उठा क देखूंगा नहीं मेरी पहला प्रेम हो तुम देवरानी"

दोनों कुछ देर बैठ बात करते है फिर अपना सामान बहार ला कर घोड़ो पर लाड देते है

देवरानी सब से मिलती है

Hooriya:ary जाने की ख़ुशी में गुस्सा भूल गयी क्या उनको मुआफ कर दया

Devrani:nahi दीदी उन्होंने गलती नहीं की कुछ ये पता चल गया

दोनों मुस्कुराते है

Hooriya:dubara आना देवरानी तुमसे मिल कर ऐसा लगा जैसे हम सदीओ से जानते हो

Devrani:deedi हो आप मेरी इसलिए आपको एक बात कहु बुरा मत मन न

Hooriya:bolo मेरी बहिन

Devrani:mujhe नहीं लगता दीदी क आप खुश है देखिये आज में बलदेव क वजह से कितना खुश हु और बलदेव मुझे कितना चाहता है मुझे लगता है आप भी इतना खुश रह सकते hai..agar

Hooriya:agar क्या बहिन

Devrani:mujhe लगता है शमशेर भी बलदेव की तरह खुश रख सकता है..

Hooriya:Tauba..jate वक़्त ऐसी baat..mujhe जहन्नमी नहीं होना है बहिन ..और में खुश हु आप अपने ज़िन्दगी को जीयो पर हमारे मज़हब में..

Devrani:bass बास मल्लिका इ जहाँ भूरिया जी एक बार आपके साथ पूरी दुन्या घूमने की ीचा है

Hooriya:q नहीं देवरानी बास अगर ये फ़िज़ूल की बाते छोर दो तो तुम्हारा डिल सोने का है और ज़रूर हम कुछ करेंगे तुम्हारी इस ख्वाइश क लये आधी दुन्या पे तुम हमारी हे हुकूमत है

देवरानी भूरिया क पेअर छू कर बहार आती है

Hooriya:salamat रहो मेरी बची

देवरानी देवराज क पेअर छूती है

Devraj:me आऊंगा मेरी बहिन तुम से अब मिलते रहूँगा

बद्री :आये आप लोग भी हिन्द

Sultan:aap सब को कही भी रस्ते में कोई परेशानी पेश आये हमे यद् कर ले या कह दे सुल्तान मेरे वाहिद क मेहमान है

Baldev:zarur सुल्तान

Sultan:alvida बचो

Baldev:namaskar

सब से मिल कर बद्री श्याम और देवरानी घोड़े पर पेअर जाते है

Shamshera:apna ख्याल रखना खला और बलदेव तुम भी

बद्री और shyam:tum भी शमशेर हम मिलते रहेंगे

Shamshera:zarur दोस्तों

Shamshera:alvida

बलदेव सबसे पहले घोड़े को दौड़ता है उसके पीछे उसके पीछे श्याम और उसके पीछे बद्री दौड़ने लगते है

महल क सामने सुल्तान क साथ सब खड़े उन्हें दूर तक जाते हुए देख रहे थे..

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 76

गहतराष्ट्रा

महल में जहा राजपाल अपने मित्र राजा रतन सिंह क आने से खुश थे वही महारानी षुरूश्ती क हाथो बलदेव और देवरानी क प्रेम पत्र मिल जाने से उसे अपने चाल कामयाब नज़र आरही थी देवरानी को जान से मरने की.

षुरूश्ती मौके की तलाश में थी क कब वो राजा राजपाल से बात कर क प्रेम पत्र दिखा दे पर राजपाल अपने मित्र क साथ समय बिता ते और षुरूश्ती मन मसल क रह जाती

आज बलदेव और देवरानी को पारस से निकले दो दिन हो गए थे और महल में राजा रतन और राजा राजपाल मदिरा क चुस्की लेते हुए

Ratan:yaar राजपाल लगता है हमारे शत्रु हमसे दर क भाग गए अब तक आक्रमण नहीं क्या

Rajpal:Maharaj अभी कुछ कहा नहीं जा सकता

रतन नशे क हाल में

Ratan:rajpal जी आने दो उनके खून से होली खेलेंगे हम

Rajpal:han ज़रूर वैसे मदिरा कैसा लगा हमारे गहतराष्ट्रा का

Ratan:Ab हमारे कुबेरी जैसा नशा तो नहीं इसमें पर गहतराष्ट्रा का भी मदिरा काम नहीं

Rajpal:hmm और परिवार में सब कैसे

Ratan:rajpal परिवार का पूछ रहे हो या एलिज़ा का पूछ रहे हो मेरी अंग्रेज़न पत्नी

राजपाल शर्मा जाता है

Rajpal:sab का महाराज

Ratan:tumhe वो याद करती रहती है जब से तुमने उसे मज़ा दया है ..कह रही थी मेरी पत्नी एलिज़ा क तुम अचे पेलू हो

Rajpal:ary कहा वो तो अब पहले जैसा काम नहीं करता परन्तु तुम्हारे पत्नी की गोरी चमड़ी ने ऐसा असर क्या क

दोनों हसने लगते है

षुरूश्ती अपने कक्षा में

"ये महाराज क पास तो मेरे लये समय हे नहीं है अब उनको राजा रतन सिंह क सामने कैसे बताऊ सब "

देखते हे देखते शाम होने लगती है

महल क आगे सैनिक खड़े पहरेदारी कर रहे थे

sainik:wo देखो रानी देवरानी और युवराज आरहे है

दूसरा sainik:han

Sainik:kamla ो राधा

कमला और राधा महल से बहार आती है और दरवाज़े पर कड़ी दोनों सैनिको से

"क्यू चिल्ला रहे हो"

sainik:wo देखो युवराज बलदेव वापस आगये पारस से

कमला को जहा ख़ुशी होती है वही राधा चुपचाप अंदर अपने महारानी षुरूश्ती क पास जा कर

Radha:maharani षुरूश्ती वो लोग पारस से वापस आगये

Shurushti:aagye ठीक है अब उन्हें इस दुन्या से दूद भेजने क समय आगया है

और हसने लगती है जिसे देख राधा भी मुस्कुराती है

सूर्यास्त हो चूका था बलदेव देवरानी घोड़े से उतारते है देवरानी उतारते साथ हे अपने ससुराल क सम्मान में अपना पल्लू अपने मुँह पैर धक् लेती है

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सामने मुख्या द्वार पैर देवरानी की सास महारानी जीविका क साथ महारानी षुरूश्ती और साथ हे कमला और राधा खड़े थे

Shurushti:aaao देवरानी आप सब का स्वागत है गहतराष्ट्रा में

देवरानी आकर सीधा सबसे पहले महारानी जीविका अपने सास क पेअर पड़ती है और आशीर्वाद लेती है और फिर षुरूश्ती क पेअर पड़ने जा हे रही थी क षुरूश्ती देवरानी को पकड़ गले लगा लेती है

"देवरानी तुम मेरी सौतन नहीं तुम तो मेरी बहिन हो छोटी "

Kamla:aap लोगो को सुरक्षित देख बहुत ख़ुशी हो रही है

बलदेव आगे आता है

दादी क पेअर छूटा है

"दादी आप ठीक तो है न"

"हाँ जीते रहो"

बलदेव फिर अपने बड़ी माँ क पेअर छूटा है

"बड़ी माँ"

"जीते रहो मेरे लाल"

बद्री और श्याम भी पेअर छूटे है दादी क सहर्षति क

Baldev:badi माँ पिता जी कहा है

Shurushti:wo कुबेरी क राजा रतन जी आये है उन्हें क साथ बैठे है उन्हें खबर मिल गयी है आते होंगे

तभी नशे में धुत राजपाल आता है

Rajpal:sab बहार हे रहोगे क्या अंदर आओ

सब अंदर आते है बलदेव अपने पिता का पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है

Rajpal:kaisa रहा तुम सब का यात्रा

devrani:ji ाचा था महाराज

ये सुन कमला मंद मंद मुस्कुराती है

Rajpal:mera साला देवराज मुझे याद किया क नहीं

Devrani:ji पूछ रहे थे तो मैंने बता दी क वो नहीं आ सके

Rajpal:chalo जाओ अब तुम सब आराम करो इनसब क क खाने का प्रबंध करो रात तो होने हे वाली है

बलदेव बद्री और श्याम को ले कर चला जाता है कमला देवरानी को ले कर उसके कक्षा में जाती जय

Kamla:Maharani बहुत खिल रही हो खूब रंग रलिया मनाई हो लगता है

Devrani:pagal ऐसा कुछ नहीं है

Kamla:ab न बताओ अपने मुँह से पर मुँह गोल हो गया है और बदन भी जैसे खूब म्हणत हुई हो

devrani:chup कर और जा अपना काम कर मेरा खाना यही ले आजा मुझे नींद आरही है

देवरानी अपने बिस्तर पर जैसे लेट टी है उसे कुछ अहसास होता है

Devrani:man me)mujhe ऐसा क्यू लग रहा है क यहाँ कोई आया था मेरे न होने पे मेरे सामन भी सब सही जगह पर नहीं है

देवरानी थकी थी इसलिए आखे बंद कर लेती रहती है

इधर बलदेव और श्याम बद्री बैठे बाते कर रहे थे

Badri:ye कुबेरी क राजा रतन सिंह नहीं दिखे

Baldev:nashe में होगा वो

Shyam:bhai ये राजा रतन सिंह को घर में मेरा मतलब है महल में क्यू रखे बहार अतिथि गृह में क्यू नहीं

Baldev:ab वो मेरे पिता क खास है तो नहीं तो हम किसी गैर मर्द को अंदर नहीं आने देते भले वो सैनिक हे क्यू नहो बिना वजह क नहीं आसक्ति

तीनो बात करते रहते है और कमला खाना ले कर आजाती है

Kamla:ye लीजिये युवराज आप सब का खाना

Baldev:wo माँ खा ली

कमला मुस्कुरा क

"माँ की बड़ी चिंता हो रही है में उन्हें खिला दूंगी"

ये सुन कर बद्री और श्याम चुटकी लेते हुए हसने लगते है

और बलदेव चिढ क उनपर तकिया फेक कर मरता है

बद्री और श्याम भागते है और बलदेव तकिये से उन्हें मरता है

Kamla:bacho खा लेना तुम सब में चली महारानी देवरानी को खाना देने

कमला देवरानी को खिला कर अपने घर लौट जाती है

बद्री और श्याम भी खाना कहते है

Badri:kal सुबह हम चलेंगे श्याम

Shyam:theek है

Baldev:kuch दिन रुक जाते

Badri:samjho बलदेव हमे हमारे परिवार से भी मिलना है फिर कभी हम आएंगे

तीनो अपनी पुराणी बात करते हुए सो जाते है

रात बीत जाती है सुबह सवेरे सबसे पहले देवरानी की आँख खुलती है वो उठ कर

"हे भगवन"

सबसे पहले वो पूजा करती है फिर योग करती है और महल से बहार बगीचे में घूमने निकलती है

बाघ में टहल रही देवरानी इस बात से अनजान थी क कोई उसे देख रहा है

सुबह रतन सिंह भी उठ गया था और जैसे महल से बाघ की ओरे जा रहा था उसके आखे जैम जाती है सुन्दर देवरानी को देख कर वो बास देखता हे रहता है

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राजा ratan:sainiko सुनो

Sainik:ji महाराज

राजा ratan:ye सामने कौन स्त्री टहल रही है

Sainik:maharaj उन्होंने घूँघट नहीं क्या है इसलिए हम उस तरफ नहीं देख सकते आप भी नहीं देखे क्यू क वो महाराज की पत्नी रानी देवरानी है उन्हें पता चल गया तो..

राजा रतन सिंह मुस्कुराता है

"चल हट"

सैनिक को धक्का दे कर दूर करता है

रतन singh:man me)ise तो देख कर हे मेरा लैंड खड़ा हो गया भाग्य से ये देवरानी निकली राजपाल की पत्नी जिसका विवाह मैंने हे करवाया था तब तो ये पतली दुबली थी ऐसी भरपूर माल हो जाएगी सोचा न था इसे तो में पेल क रहूँगा है कितना मज़ा आएगा..

रतन सिंह वापस महल में आजाता है अभी भी सब सो रहे थे

कुछ देर टहल क रानी देवरानी महल में आती है और जैसे अपने कक्षा में घुसने को होती है

रतन singh:Devrani जी

देवरानी मुद कर देखती है और रतन को पहचान लेती है

"आर्य आप महाराज रतन जी"

"आप कैसी हो देवरानी जी"

"में ठीक हु"

"तुम ठीक नहीं अति सुन्दर हो"

और रतन देवरानी क करीब आता है

"ये क्या बात कर रहे है आप"

"सही कह रहा हु देवरानी जी मुझे पता नहीं था आप इतने सुन्दर हो जाओगी"

"महाराज आप हमारे पिता क आयु क है ऐसी बाते आपको सोभा नहीं देती "

और देवरानी अपने कक्षा में जाने लगती है पर राजा रतन सिंह देवरानी का हाथ पकड़ लेता है

"छोड़िये हमे हम महाराज को कह देंगे"

"वो राजपाल जो खुद मेरे साथ जीवन भर ऐय्याशी क्या है वो क्या करेगा तुम्हे पता नहीं राजपाल कितने मज़े करता है तुम भी चाहो तो में हु"

और देवरानी को खींचता है और उसके एक हाथ को ज़ोर से पकड़ कर कहता है

देवरानी ऐसे खुलेआम ऐसी अश्लील बात से गुस्सा हो जाती है

"तुम्हारी इतनी हिम्मत "

"फैट" कर क एक तमाचा रतन सिंह क गाल पर रख देती है

"राजा रतन तुम्हे मई अपने पिता सम्मान मानती थी और तुम इतने घिनोने निकले तुम एक राजपूतनी पे हाथ डालने का मतलब भला करो हमारे हाथ में तलवार नहीं था नहीं तो अभी सर धार से अलग कर देते नीच व्यक्ति"

राजा रतन सिंह अब देवरानी से दूर खड़े हो जाता है और एक हाथ उसके लाल हुए गाल पर था

देवरानी अपने कक्षा में घुस कर दरवाज़ा बंद कर लेती है

राजा रतन सिंह वही खड़ा रहता सोचने लगता है

"मेरी जान देवरानी तुम्हे तो उल्टा कर क छोडूंगा देखता हु तुम्हे कौन बचता है और राजपाल मेरा कुछ नहीं करेगा मेरा उधर है राजपाल जो वो तुम्हे सौंप कर चुकता करेगा"

और राजा रतन सिंह मुस्कुराता है ..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 77

सुबह सवेरे अपने साथ ऐसी हरकत किये जाने से देवरानी उदास हो जाती है और भाग कर अपना दरवाज़ा बंद कर बिस्तर पर लेट कर रोने लगती है

Devrani:man me)us टुच्चा रतन सिंह की हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की में बलदेव को कहूँगी ..नहीं नहीं उसे पता चल गया तो वो महाभारत खड़ा कर देगा

कुछ सोच कर देवरानी उठ टी है और अपने पुष्तकों में अपने बेटे द्वारा लिखे गए प्रेम पत्र ढूंढ़ती है पर उसे कुछ नहीं मिलता है

देवरानी क माथे पे पसीने क बून्द आजाते है

"हे भगवन ये पत्र कहा चले गए यही तो थे उफ़ "

देवरानी अपने मेज़ पर रखे हर सामान को फेकने लगती है पुरे कक्षा का कोना कोना देखती है पर उसे प्रेम पत्र नहीं मिलता है

देवरानी मने me:kahi ये रतन सिंह तो नहीं जो पत्र देख लय हो इसलिए मुझे भोगने की प्रयास कर रहा है ..है में क्या करू अब किसीको भी मिला हो पर वो तो मेरे और बलदेव क फांसी का कारन हो सकता है मेरी हे गलती का परिणाम है में इतनी लापरवाही से कैसे रख सकती हु

पसीने पसीने हुए देवरानी थक हर क अपने नाम आखे लिए बिस्तर पर लेट जाती है उसे पता हे नहीं चलता और तेज़ी से समय निकल जाता है और अब तक सब सो कर उठ गए थे और बद्री और श्याम जाने की तैयारी कर क निकलने हे वाले थे पर उनको याद आया क वो देवरानी मौसी से नहीं मिले

Rajpal:ary क्या हुआ रुक क्यू गए बचो

Badri:maharaj वो मौसी से नहीं मिला

Kamla:wo तो सो रही है अभी तक

Baldev:aisa करो चलो अंदर हे जा कर मिल लो

बद्री और श्याम देवरानी क कक्षा में आते है

बद्री और श्याम खड़े होते है बलदेव देवरानी जिसे आँख लग गई थी उसके बगल में पलंग पर बैठ

Baldev:devrani ाजी उठ भी जाओ कब तक सोती रहोगी

देवरानी झट से उठ टी है और सामने बलदेव को देखती है और दूर बद्री और श्याम को खड़े देख शर्मा जाती है

Badri:kya हुआ भाबी माँ आप की ताब्यात ठीक नहीं लग रही

Devrani:nahi देवर जी बास ु हे आँख लग गयी थी व्यायाम करने क बाद

Badri:hum लोग जा रहे है आशीर्वाद दीजिये

बद्री और श्याम दोनों पेअर छूटे है

देवरानी दोनों क सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद देती है

Baldev:ab तो भाबी कहे जाने से चिढ नहीं रही हो देवरानी ऐसा क्या सीखा दया अपने भाबी को बद्री

Badri:wo हम आपको नहीं बताएँगे बलदेव भैया वो हमारे देवर और भाबी की बात है

Baldev:to बात यहाँ तक पहुंच चुकी है

बद्री और श्याम मुस्कुराते हुए विदा ले कर बहार निकलते है और अपने घोड़ो पर बैठ

Baldev:apna ख्याल रखना मित्रो

shyam:tum भी और उनका भी

बलदेव बात समझ कर मुस्कुरा देता है दोनों घोड़ो को दौड़ा कर थोड़ी देर में हे आखो से ओझल हो जाते है

दुपहर क भोजन क बाद राजा राटा और राजा राजपाल मदिरा पीने बैठ ते है

Ratan:rajpal आज मुझे कोई चीज़ पसंद आगे गहतराष्ट्रा की

rajpal:kaho क्या पसंद है अभी वो आपके कदमो में होगा राजा रतन सिंह

Ratan:bhai देखो मुझे एक महिला पसंद आगयी है जिसे मुझे भोगना है और तुम्हे तुम्हारा वचन याद है न जब तुमने मेरी पत्नी क साथ अपनी रात रंगीन की थी

rajpal:ratan जी ऐसे कैसे हम भूल सकते है जो मज़ा मुझे तुम्हारे पत्नी एलिज़ा ने दया था

Ratan:to समझो तुम्हे अपना वचन पूरा करने का समय आगया है

Rajpal:ary आप कहो पुरे गहतराष्ट्रा की कन्याये तुम्हारे बहो में होगी

Ratan:mujhe पुरे गहतराष्ट्रा की नहीं चाहिए पर ये महल की..

राजपाल अब थोड़ा भयभीत हो जाता है

Rajpal:ma महल की मतलब समझा नहीं

Ratan:matlab देखो सीधा है राजा राजपाल मुझे तुम्हारी छोटी पत्नी का उभरा हुआ शरीर पसंद आगया है

राजपाल का मुँह खुला का खुला रह जाता है

Rajpal:matlab देवरानी

ratan:tum सही समझे रानी देवरानी को भोगना है मुझे और मेरे ख्याल से तुम्हे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए

Rajpal:par राजा रतन जी

रतन सिंह अब गुस्से से लाल हो जाता है

Ratan:dikha दी न अपनी अवक़ात तुम सिंह हो और अपना वचन भूल गए जब मेरी पत्नी को रात भर चुदाई किया तब तो शर्म नहीं आई और अब अपनी पत्नी देने में जीभा हलक में अटक गयी

राजा राजपाल इस बात को सही समझते हु

Rajpal:maharaj मई तो कोशिश कर सकता हु पर देवरानी नहीं मणि तो..

Ratan:mujhe कुछ नहीं पता तुम्हे अपना वचन पूरा करना है तुम कैसे करोगे तुम समझो

Rajpal:theek है में कोशिश करूँगा

ratan:dekho अगर मुझे देवरानी नहीं मिलती तो में कल क कल गहतराष्ट्रा पैर हमला कर अपना राज्य बना लूंगा और तुम्हारा कच्चा चिता तुम्हारे राज्य क सामने रख दूंगा जिस से तुम्हारा प्रतिष्ठा और तुम्हारा राज्य दोनों जायेगा हाथ से और तो और देवरानी को उठा क ले जाने में मुझे समय नहीं लगेगा

Rajpal:nahi ऐसा कुछ मत करना महाराज

Ratan:tum मेरे शक्ति से परिचित हो इसलिए मुझे कुछ भी ऐसा करने पर मजबूर न करो जिसका पछतावा मुझे भी हो और तुम्हे भी

Rajpal:nahi आपको मिल जाएगी देवरानी पर मेरा राज्य मेरा हे रहे

Ratan:chatur हो अपनी पत्नी दे कर सत्ता में बने रह सकते हो तुम

राजपाल और रतन सिंह फिर मदिरा पी रहे थे

इधर देवरानी अपने कक्षा में बैठ

devrani:man में) अब ये पत्र जिसने भी चुराया है वो हमारे जान क दुश्मन होंगे

devrani:kamla ो कमला

कमला भाग कर आती है

देवरानी उसे पूरा बात बताती है

kamla:maharani में तो किसी को नहीं देखि इन दिनों यहाँ आते हुए और में क्या करुँगी प्रेम पत्र अपने पास रख कर

Devrani:kamla मुझे समझ नहीं आरहा क्या करू बलदेव को बुलाओ

कमला तुरंत जा कर बलदेव को साथ ले कर आती है

Baldev:maa क्या हुआ इतनी घबराहट क्यू

Devrani:man में) मेरे राजा कैसे बताऊ क मेरे इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश क्या रतन सिंह ने ,अभी प्रेम पत्र की गुथी तो सुलझे मुसीबत एक साथ हे आणि थी

Baldev:kaho माँ क्या सोच रही हो

Devrani:wo तुम्हारे लिखे हुए प्रेम पत्र सब गायब है

Baldev:kyaa

बलदेव अचम्भित हो कर कहता है

Devrani:mujhe बहुत दर लग रहा है बलदेव अब क्या होगा

Kamla:Mahrani मेरा शक तो महारानी षुरूश्ती पैर है

देवरानी रट हुए आकर बलदेव क गले लग जाती है

Baldev:sanyam रखो माँ हम डरेंगे तो कुछ नहीं होगा

kamla:himmat से काम लो तुम दोनों की ये अग्नि परीक्षा हो सकती है इसे पार कर लो जीवन संवर जायेगा

devrani:par कैसे वो षुरूश्ती क हाथ अगर पत्र लग गया तो वो कभी भी हमे फांसी क फंदे तक पंहुचा देगी और हम कुछ नहीं कर पाएंगे

Baldev:kamla तुम माँ को सम्भालो में सोचता हु कुछ

बलदेव बहार आकर उद्यान में इधर से उधर टहलने लगता है

बलदेव मन me:kya करू अब ऐसे में तो हम दोनों मरे जायेंगे हमारे पास कोई रास्ता हे नहीं है अपने आप को सही साबित करने का

तभी राजपाल बलदेव को देख

Rajpal:ary पुत्र क्या हुआ क्यू इतने चिंतित हो

बलदेव मुस्कुरा कर

baldev:nahi पिता जी कुछ नहीं बास बद्री और श्याम चले गए तो उनकी याद आरही है

Rajpal:oh और तुम्हारी माँ कहा है

बलदेव अपनी आखे बड़ी कर क

Baldev:wo कक्षा में हे थी

rajpal:man me)agar ये बात बलदेव को पता चले क में उसकी माँ को किसी और क साथ सोने क लये मानाने जा रहा हु तो वो क्या सोचेगा मेरे बारे में

ऐसे हे शाम हो जाती है और गहतराष्ट्रा क महल में हर ओरे दिया क रौशनी जगमगा रही थी

राजपाल देवरानी क कक्षा की ओरे जा कर

"देवरानी क्या आप अंदर हो"

Devrani:aayiye महाराज

राजपाल अंदर अत है

Rajpal:kya हुआ देवरानी जब से आयी आप अंदर हे हो

Devrani:man me)kahi महाराज तक पत्र पहुंच तो नहीं गया जो यह आये

और देवरानी कंपनी लगती है

राजपाल कुछ देर इधर उधर की बाटे करने क बाद

Rajpal:Devrani एक महत्वपूर्ण बात करनी थी आपसे

Devrani:kahiye महाराज

देवरानी काँप रही थी कही महाराज पत्र को लेकर न उनसे सवाल पूछे

राजपाल भी कैंप रहा था क रतन सिंह क साथ रात बीतने वाली बात पर देवरानी पता नहीं क्या प्रतिकिर्या देगी

Rajpal:baat ये है राजा रतन सिंह बहुत नीच व्यक्ति है

Devrani:han क्या हुआ महाराज

राजपाल अपने आखो में झूटी ासु ला कर मासूमियत से

rajpal:wo कहता है क हमारे राज्य पर आक्रमण कर देगा और हम सबको बंदी बना लेगा अगर उसकी बात नहीं मानी

Devrani:kaun सी बात महाराज

Rajpal:mujhe तो बहुत लज्जा आरही है ये कह कर पर में तुमसे अनुरोध करना चाहूंगा देवरानी तुम हे हम सब क जान को बचा सकती हो

Devrani:par कैसे महाराज

राजपाल अपना सर झुका कर

rajpal:Devrani तुम्हे रतन सिंह पसंद करता है उसे एक रात गुज़ारना है तुम्हारे साथ

ये सुनते हे देवरानी क आखो से ासु की गंगा बहाने लगती है

Devrani:maharaj क्या आपने उसे कुछ नहीं कहा जब उसने ऐसी मांग की?

Rajpal:wo

Devrani:dhitkar है आपके जैसे राजा पर जिस से कोई उसकी पत्नी की एक रात मांगता है और वो चुप चाप सुन कर अपनी पत्नी को मानाने आजाता hai..chiii महाराज घिन्न आती है आप पर कोई और राजा होता तो अपने पत्नी क लये ऐसा सुन कर उसी समय उसका सर काट देता

Rajpal:wo बहुत शक्तिशाली है

Devrani:aapko अपनी सत्ता अपनी राजशाही प्यारी है न? उसके बदले में अपनी पत्नी को किसी और को सौंप डोज महाराज

देवरानी अब फुट फुट कर रोने लगती है

Devrani:aaj तक तो आपने मुझे पत्नी का हक़ भी नहीं दया और आज आपने ऐसी मांग कर क बता दया क आपने सात फेरे भी नाम क लये लिया था ..मई उफ़ तक नहीं की आज तक पर आपकी पत्नी बन कर शर्मिंदा हु ऐसे

Rajpal:chup करो ज़्यादा हे बोल रही हो अब तुम

Devrani:wah उल्टा चोर कोतवाल को दांते अपने काळा चरित्र को छुपाने क लये अपने पत्नी का सहारा ले रहे हो उसके शरीर का सौदा कर क

Rajpal:suno तुम ऐसे नहीं मान ने वाली तो सुनो है मुझे मर्रा राज्य चाहिए में नहीं चाहता क गहतराष्ट्रा पे कोई और राज करे और अपने राजशाही अपनी संपत्ति अपने महल क लये में तुम क्या तुम्हारी जैसी 10 देवरानी को रतन क निचे लित्वा दू

Devrani:chupppp हो जाओ राजपाल अब नहीं तो एक राजपूतनी की हाय तुझे कही नहीं छोड़ेगी और तुम मेरे पति नहीं होते भले से नाम क हो तो तुम्हारा सर में धरर से अलग कर देती

Rajpal:veerta का प्रमाण किसी और को देना अपने आप को तैयार करो दो दिन क अंदर नहीं तो मुझे जबरदस्ती करना पड़ेगा

ये कह कर गरजते हुए राजपाल बहार चला जाता है

देवरानी गुस्से में आकर अपने घर का सामान उठा कर फेकने लगती है पुरे कक्षा क सामान को बिखेर देती है

"कुत्ते राजपाल क्यू मेरे जीवन में आये तुम और सामने रखे फल क बर्तन को उठा कर आईने पे दे मरती है जिस से आईना टूट जाता है और पुरे कक्षा में बिखर जाता है

इतना शोर सुन कर कमला आती है

Kamla:maharani क्या हुआ आपने क्या हाल बना दया कक्षा का

देवरानी रट हुए ज़मीन पर बैठ जाती है

"कमला मेरे जीवन का हाल ऐसा हो गया है इस कक्षा क हाल से क्या करू"

कमला देवरानी को पकड़ कर

"महारानी कांच क टुकड़े है निचे आप ऊपर आईये पलंग पे और बताइये आखिर हुआ क्या"

"कमला भला कौन अपने पत्नी का सौदा करता है"

"महारानी कौन क्या आप रोये नहीं पूरी बात बताओ"

"सुबह में मेरी इज्जत पे हाथ डालने की कोशिश की राजा रतन सिंह ने"

"क्या कह रही हो महारानी"

"हाँ कमला और अभी मेरे नाम क पति मुझे कहने आये थे क तुम्हे रतन सिंह क सोना है तैयारी कर लो"

"हे भगवन क्या कलियुग आगया है उसे शर्म नहीं आयी"

"आपने बलदेव को क्यू नहीं बताई महारानी"

"कमला तुम तो जानते हो बलदेव कच्ची उम्र का है कुछ जोश में आकर उल्टा सीधा कर दया तो और वाइस भी हमारा प्रेम पत्र भी गायब है अगर बलदेव में कुछ क्या रतन सिंह को तो कही षुरूश्ती या जिसके पास है ये वो निकल का दे हमारे विरुद्धा"

और देवरानी रोने लगती है

"महारानी चुप करो मेरी बहिन ऐसे पति धित्कार है समाज पे खुद वैश्यों में पड़े रहते थे राजा रतन सिंह क साथ उसका हे बदला चुकाना छह रहे है में सब समझती हु"

"कमला पूरी जीवन भर इन सब ने मुझे दुःख हे दया अब में बलदेव क साथ कुछ सुख क पल जीना सीख रही हु तो ये सब म"

"हिम्मत करो देवरानी और बलदेव को बताओ अब तुम दोनों को मिल कर हे ये युधा लड़ना है "

कमला कक्षा को साफ़ सफाई करने लग जाती है और देवरानी अपने जीवन को शुरू से सोच कर ासु बहाने लगती है

इधर षुरूश्ती राजपाल से मिलने क लये आती है अपने हाथ के पत्र छुपा क

shurushti:man में) ाजे हे पत्र दे देती हु कल तक दोनों माँ बेटे को फांसी मिल जाएगी

और मुस्कुराते हुए राजपाल क कक्षा क पास आकर

shurushti:maharaj

राजपाल और रतन सिंह अंदर बैठे बात कर रहे थे

Rajpal:han महारानी षुरूश्ती कहिये हम अभी महाराजा रतन जी क साथ है

shurushti:man me)ye रतन जब से आया है राजपाल को छोरता हे नहीं

षुरूश्ती दरवाज़े पर परदे क पीछे कड़ी हो कर

shurushti:Koi बात नहीं महाराज मुझे आप से कुछ बात करनी थी आप अजय मेरे कक्षा में जब आप दोनों की बात पूरी हो जाये

और षुरूश्ती वापस चली जाती है

अंदर बैठा रतन सिंह

ratan:kya हुआ भाई देवरानी मणि क नहीं

Rajpal:abhi तक तो नहीं पर मानेगी

ratan:manni हे चाहिए नहीं तो..

Rajpal:ary आप मदिरा पीजिये महाराज आप चिंता न करे में कुछ भी कर क आप को देवरानी को भोगने का अवसर दूंगा..

रात का भोजन कर क सब सोने की तैयारी कर रहे थे

बलदेव चुपके से अपनी माँ क कक्षा में आता है

Baldev:maa आपने खाना खाया

Devrani:nahi बास ीचा नहीं थी

Baldev:meri रानी ऐसे तो कमज़ोर हो जाओगी

देवरानी दौड़ क आयकर बलदेव क गले लग जाती है

Baldev:devrani क्या हुआ क्यू इतनी दरी हो

देवरानी रोने लगती है

Baldev:ro मत देवरानी

Devrani:baldev आज सुबह सवेरे जब में उद्यान से टहल कर आरही थी दुष्ट रतन ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझसे गन्दी बात कही

बलदेव देवरानी को छोर अपना तलवार उठा ता है

Baldev:us हरामी की इतनी हिम्मत अभी उसका सर काट कर तुम्हारे कदमो में लता हु

देवरानी रट हुए

"तुम्हे मेरी कसम अभी तुम कुछ भी नहीं करोगे मेरे लाल"

"माँ तुम कसम वापस लो मुझे मजबूर न करो राजा रतन सिंह का हल ऐसा करूँगा क उसकी माँ भी उसे नहीं पहचान पायेगी"

"बीटा समझो अभी हमारे हालत ऐसे है हमारे पत्र को हमारे शत्रु हथ्यार बना कर हम पर पलटवार कर सकते है संयम से काम लो बीटा और इस अपमान का बदला तुम ले लेना पर अभी नहीं"

बलदेव तलवार को दूर फेकता है और देवरानी को अपने बहो में भर

"जो मेरी रानी को ायकः भी उठा कर देखा "

"पूरी बात तो सुनो मेरे राजा"

"हाँ कहो मेरी जान"

"वो राजपाल आया था और उस दुष्ट ने कहा है क रतन गहतराष्ट्रा कब्ज़ा कर लेगा अगर उसकी ीचा पूरी न हुई और मुझे रतन क साथ एक रात गुजरने .."

बलदेव अपना हाथ देवरानी क मुँह पर रख

"बॉस एक और शब्द नहीं देवरानी इन हरमिओ को स्त्री को भोगने अत है सम्मान नहीं करना अत "

"हाँ में कैसी अभागन हु जो ऐसे मनुष्य से मुझे विवाह दया गया"

"वो तुम्हारा पति नहीं है देवरानी में हु तुम्हारा पति वो कुत्ते राजपाल को राजशाही की लालच और स्त्रीयो और वैश्यों से रंगरैलया इन सब का उत्तर मिलेगा अब में इन्हे सिर्फ मरूंगा नहीं तड़पन तड़पा क मरूंगा"

आधी रात देवरानी और बलदेव एक दूसरे क बहो में अपने दुःख दर्द बाँट रहे रहे थे

वही षुरूश्ती महाराज को पत्र दिखने क प्रयास में लेती थी

राजा रतन सिंह अपने प्यास कैसे बुझाई जाये देवरानी से ये सोच रहा था

और अपने कक्षा में लेता राजपाल अपने पत्नी देवरानी को कैसे मनाये रतन सिंह क साथ रात गुजरने क लये सोच रहा था

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 78

आधी रात को महल में सब अपनी अपनी सपने सजा रहे थे और और बलदेव और देवरानी एक दूसरे क बहो के इस दुःख भरी घरी में एक दूसरे का सहारा बने लिपटे थे

Baldev:man में) में यानि क बलदेव सिंह गहतराष्ट्रा क होने वाला महाराज वचन लेता हु क इस राज्य की महारानी का ताज महारानी षुरूश्ती से ले कर इसके सही हक़दार मेरे होने वाली पत्नी महारानी देवरानी क सर पर सजाया जायेगा

कुछ देर बाद बलदेव और देवरानी लेट जाते है और देवरानी की आँख लग जाती है बलदेव उसके मासूम चेहरे को देख देवरानी का सर अपने हाथ पर रखे आखे बंद कर आराम करते हुए गहरी साँसे ले कर आखे बंद करता है बलदेव क आखो में आएग की लहर और बदले की भावना अपने पिता और रतन सिंह क खिलाफ भड़क गयी थी

दोनों इकठे सो जाते है सुबह सवेरे देवरानी की आँख खुलती है और वो अपने आपको बलदेव क बहो में पाकर उठ कर रोज़ की तरह नाहा धो कर तैयार हो कर पूजा करने लगती है

Devrani:man me)bhagwan क्या करू में हम दोनों की सचाई जैसे महाराज तक पहुंचेगी वो दिन हम दोनों का आखिरी दिन होगा

तभी देवरानी क मन में कुछ बात आती है

Devrani:man me)Han अगर हम गहतराष्ट्रा को छोर कही और चले जाये तो राजपाल हमारा छह क भी कुछ नहीं कर payega..par मेरे महारानी बन ने का सपना जो मैंने बचपन से सजाया था उसका क्या ..और बलदेव कभी अपना पीठ दिखा कर इन पापीओ से बिना बदला लय बिना जायेगा नहीं ..पर जान बचानी है अभी तो

सुबह सवेरे कमला भी अपने गाओ से महल को आजाती है और सबसे पहले देवरानी क कक्षा क पास आकर

"महारानी"

देवरानी दरवाज़ा खोलती है

"सुश्ह धीरे बोलो बलदेव की नींद न टूट जाये"

"महारानी क्या सोचा है आपने "

"कमला मैंने निर्णय ले लिया है हम गहतराष्ट्रा छोर देंगे"

"ये क्या महारानी पर आप लोग कहा जाओगे"

"संसार इतना बड़ा है हम कही भी गुज़ारा कर लेंगे मई नहीं चाहती बलदेव इन कुत्तो क चुंगल में फसे और उसे कुछ हो जाये"

"महारानी अगर आप ये सोच रही हो तो जल्दी निकल जाना बेहतर होगा क्यू क आज तो किसी हाल में वो रतन तुमसे जबरदस्ती करेगा और वो षुरूश्ती हो सकता है पत्र महाराज को दे दे तुम दोनों तरफ से फस्स रही हो"

"बहिन ऐसा करती हु में अभी निकल जाती हु तुम सबको कह देना में सो रही हु और बलदेव जैसे उठेगा उसे नदी तात पर घोड़े क साथ भेज देना"

"हाँ महारानी और वैसे भी बलदेव क साथ अगर तुम निकलोगी तो सब शक करेंगे"

"ठीक है में कुछ सामान अपने ले लेती हु और अपना भगवन की मूर्ति भी मेरी मदद करो"

"पर बलदेव ज़िद्दी है"

"कमला तुम उसे कुछ मत बताना कहना मई उसे सिर्फ बुलाई हु बलदेव को में मन लुंगी नहीं तो वो इन दोनों की जान लिए बिना जायेगा नहीं"

कमला देवरानी की मदद करती है और एक चादर देवरानी ओढ़ लेती है जिस से उसे कोई पहचान न सके जाते हुए और कुछ सामान की गठरी बाँध लेती है

Kamla:aap पीछे क दरवाज़े से निकल जाओ

Devrani:Dhanyawad मेरी बहिन हर कदम पे साथ देने क लये

देवरानी कमला क गले लग जाती है

Kamla:meri छोटी बहिन हो आप महारानी ,अपना ख्याल रखना हिम्मत नहीं हारना कभी

कमला क आखो में ासु थे

देवरानी भी कमला को देख आखे नाम करते हुए

"चलो कमला अब फिर कभी मिले न मिले ..ज़िंदा रही तो ज़रूर मिलेंगे"

"ऐसी बात न कहो महारानी बलदेव सब ठीक कर देगा उसके रहते हुए तुम्हे कुछ नहीं हो सकता"

देवरानी अपने पुष्तकों क बीच से कलम निकल कर एक कोरे कागज़ पर कुछ लिखने लगती है और फिर वो कमला को दे दी

"महारानी ये क्या लिख कर दया"?

Devrani:jab बलदेव निकल जाये तो ये मेरे तकिये पर रख देना इसमें लिखा है साफ़ साफ़ में अपने प्रेमी बलदेव क साथ घर छोर रही हु ..और ये पत्र जखम पर नमक की तरह काम करेगा राजपाल क

Kamla:par महारानी इस से तो पुरे महल या पुरे गहतराष्ट्रा में पता चल जायेगा क तुमको तुम्हारे बेटे ने भगा क ले गया

देवरानी मुस्कुराती है

"अब मुझे इस समाज की कोई परवाह नहीं"

ये कह कर देवरानी पीछे क रस्ते से अपना चादर अपने आधे मुँह पर ढकते हुए सुबह सवेरे निकल जाती है नदी तात पर

कमला आ कर अपने काम में लग जाती है और उसका ध्यान बलदेव पर हे था क कब उठेगा वो कुछ एक घंटे बाद बलदेव उठ ता है

"माँ कहा हो"

ये सुनते हे दौड़ कर कमला बलदेव क कक्षा में जाती है

"युवराज आप उठ गए "

"हाँ कमला में नाहा धो कर तैयार भी हो गया ये रतन सिंह कहा है आज उसे कही दूर ले जा कर उसके पाप का दंड दूंगा"

"युवराज अआप जो चाहे कर लेना पर अभी माँ ने आपको अति शीघ्र नदी तात पर बुलाया है घोडा ले कर"

बलदेव जनता था क ये समय कभी भी उसका राज खुल सकता है वो अपने हाथ में तलवार लेता है और बहार जाने लगता है

बहार उसे उसकी दादी जीविका मिलती है

Jeevika:ary बलदेव बीटा कहा जा रहे हो

Baldev:dadi थोड़ा काम है सीमा पर

बलदेव बहार निकल कर अपने घोड़े की तरफ बढ़ता है उसे वैध जी दातुन करते हुए नज़र आते hi

Vaidh:shubh प्रभात युवराज सवेरे सवेरे

Baldev:shubh प्रभात जी आया थोड़ा काम से

बलदेव अपने घोड़े पर बैठ नदी क तात पर चल देता है और इधर अपनी आखो में ासु लिए बलदेव को कमला देख रही थी वो झट से अंदर आकर देवरानी का दिया हुआ पत्र उसके तकिये पर रख देती है

कमला चुप चाप अपने काम में फिर लग जाती है

धीरे धीरे महल क सब लोग जागने लगते है और महारानी षुरूश्ती भी जगती है

Shurushti:man me)ye महाराज भी न कल रात आये नहीं नहीं तो आज इन दोनों की फांसी हो गयी उफ़ मेरा मैं नहीं मान रहा कितना जल्दी ये पत्र दू महाराज को

थोड़ी देर में महाराज राजपाल उठ ते है और

"आर्य मुझे तो षुरूश्ती ने बुलाया था "

राजपाल तैयार हो कर महारानी षुरूश्ती क कक्षा में जाने लगता है

कमला रसोई में काम कर रही थी और उसे दिखाई पड़ता है महाराज राजपाल षुरूश्ती क कक्षा की ओरे जा रहे है

Rajpal:maharani षुरूश्ती

षुरूश्ती नाहा धो कर तैयार हो रही थी

"आईये महाराज"

राजपाल अंदर आता है

"आज तो बहुत सुन्दर लग रही हो महारानी"

"धन्यवाद महाराज"

"आप कुछ कहने वाली थी न महारानी"

"महाराज आप क रहते हुए इतना घिनोना अपराध कैसे कर सकता है जिस से हमारी पूरी देश दुन्या में बदनामी हो"

"महारानी पहेलिए न बुजाहो कहो क्या बात है"

"में कहूँगी तो आपको झूट लगेगा आप खुद देख लीजिये"

षुरूश्ती अपने तकिये क निचे से पत्र को उठा कर राजपाल को देती है

"ये क्या है "

"ये तुम्हारे लादले पुत्र बलदेव और तुम्हे पत्नी की प्रेम कहानी का कच्चा चिता है महाराज"

"क्या बक्क रही हो तुम"

"में बक्क नहीं रही तुम खुद देखो"

राजपाल तेज़ी से एक पत्र ले कर पढ़ने लगा

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प्रिय शेर सिंह उर्फ़ बलदेव जी

आशा करती हु आप अभी मेरा पत्र देख मुस्कुरा रहे honge,me आपको सदैव ऐसे हे मुस्कुराते रहते देखना चाहती हु और उसके लिए में अपनी प्राण भी त्याग दू तो मुझे परवाह नहीं होगा

बलदेव मैंने हर

एक बात कमला द्वारा जान ली हु और

तुम्हारे हर निर्णय की वजह सिर्फ में हु और मेरा दुःख hai,mai हे पागल थी जो तुम्हे एक हवसी और मेरे मान सम्मान की परवाह न करने वाला समझ लय क्यू क

तुम मुझे पाने क लये शेर सिंह का भेस अपनाया जिसके वजह से मुझे लगा तुम मेरे जिस्म को पाने क लये किसी हद्द तक गिर सकते पर में गलत थी

तुमने मुझे पाने क लये कमला से मदद. ली जिस से मुझे लगा तुम मेरी मन मर्यादा दुन्या क सामने उजागर कर क मुझे बदनाम कर डोज पर में गलत थी

कमला ने बताया कैसे तुमने मेरे लिए किसी शेर सिंह नमक व्यक्ति क चयन कर लय था यदि में उस दिन घोड़े पे बैठ जाती तुम मुझे उसके पास छोर देते

तुम मेरी ख़ुशी क लये इतना बड़ा बलिदान देने जा रहे थे

मई ने जीवन में किसी से पहले प्रेम नहीं क्या विवाह तो मेरे पिता जी ने जबरदस्ती करवा दी

मेरा पहला प्रेम शेर सिंह है या शायद बलदेव मुझे नहीं पता पर तुम दोनों क लये मेरे दिली में प्रेम क जज़्बात ए और जब अब ये बात हे ख़त्म हो जाती है क में किसका चुनाव करू

मेरे डिल ने पहली बार किसी क सपने सजाये वो था शेर सिंह और किसीने अपने प्यारी बाटे और मेरा ख्याल रख कर मेरे डिल को भय वो था बलदेव

बलदेव उर्फ़ शेर सिंह जी मेरा जीवन अब आपके नाम बास ये डिल कभी मत तोडना क्यू क एक औरत हर मर्यादा नियम और धर्म क विरुद्धा जा कर फैसला लेती है तो उसके साथ कुछ गलत हो तो वो दुबारा अपने जीवन में वापस नहीं जा सकती है.

आपकी देवरानी

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Rajpal:Adharmi देवरानी

Shurushti:ye भी पढ़िए आपके बेटे की करतूत

षुरूश्ती एक पत्र निकल कर राजपाल को देती है

राजपाल गुस्से से लाल हुए दूसरा पत्र पढता है जो बलदेव ने अपनी माँ को लिखा था

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प्रिय माँ

मई आपका बलदेव हु और आपका हमेशा रहूँगा ,अपनी माँ का बलदेव जितना सम्मान कल करता था उतना आज करता है और वो सम्मान कल भी उतना हे रहेगा चाहे प्रस्तिथि कैसी भी हो

मेरी माँ की मान मर्यादा इज़्ज़त का रखवाला जितना बचपन से था उतना भी आज हु और कल भी नहीं बदलूंगा और सदैव आपकी मान मर्यादा की रक्षा करूँगा

माँ अगर मेरे किसी भी गलत तरीके से आपके डिल से ठेस पहुंची है तो उसके लिए क्षमा मांगता हु मुआफ कर दो मुझे

जीवन में मई कल तक बहुत अकेला महसूस करता था जब तक में अपनी शिक्षा पूरी कर क नहीं आया था और जैसे हे मेरी नज़र तुम पर गयी तब से में तुम्हारे लिए पागल हो गया था कही न कही मेरा डिल तुमने उस दिन हे चुरा लिया पर इस बात को मानते हुए मुझे समय लगा

सिर्फ इसलिए नहीं क तुम्हारा दुःख देख कर मेरा डिल पसीज गया पर सही कहु तो तुम्हारे ख़ूबसूरती भी बहुत बड़ी वजह थी जिसने मेरे डिल को बेबस कर दया अपने माँ क प्यार में पड़ने क लये

माँ में तुमसे बहुत प्रेम करता हु और तुम्हारे साथ अपनी साडी ज़िन्दगी बिताना चाहता हु और मई तुम्हारे हर वो दुःख जो तुमने जीवन में देखे है सब पर मरहम की तरह लग जाना चाहता हु जिस से तुम्हारा डिल का दर्द मिट जाये और तुम जीवन का सही आनंद ले सको

मैंने बहुत सोचा समाज क बार में पर आखिर कर मेरे डिल नहीं मन और मई और मेरा डिल अपने हसरते पूरा कर क रहेंगे और सबसे बड़ी हसरत है तुम्हे जीवन भर की खुशीअ dena,uske लिए ज़माने से लड़ने का और मरने का गम नहीं अब बास जीने की ख़ुशी है

बोलो जियोगी मेरे साथ?

तो आज रात भोजन क बाद नदी किनारे आजाना

तुम्हारा प्रेमी

बलदेव उर्फ़ शेर सींग

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राजपाल गुस्से से लाल हो जाट है और अपना तलवार निकल कर

"सेनापति सोमनाआआत "

Shurushti:inhe ऐसे मत मारना सबके सामने फांसी देना महाराज

"तुम चुप करो"

सेनापति सोमनाथ महाराज क बोली सुन कर दौड़ कर महल में आता है

senapati:ji महाराज

Rajpal:aaj दो फांसी क फंडो का प्रबंध करो आज की आज हे दी जाएगी

Senapati:par किसको महाराज

Rajpal:aao मेरे साथ

राजपाल सबसे पहले बलदेव क कक्षा में जाता है पर उसे नहीं प् कर

षुरूश्ती कड़ी मुस्कुरा रही थी

Shurushti:wo दोनों देवरानी क कक्षा में होंगे महाराज

राजपाल और सोमनाथ देवरानी क कक्षा का दरवाज़ा जैसे खोलते है उसे वह भी दोनों नाह मिलते है

rajpal:senapati सैनिको को बुलाओ

बहार खड़े सैनिक खूब तेज़ी से भला लिए महल में घुसने लगे सोमनाथ क बुलाने पर

देवरानी क कक्षा में आकर सैनिक सब

"क्या हुआ सेनापति जी"

Rajpal:sainiko महल में कही भी बलदेव और देवरानी हो बुलाओ

तभी सेनापति की नज़र तकिये पैर रखे कागज़ पर जातीहै

senapati:maharaj ये क्या है

अब तक कमला और षुरूश्ती क साथ राधा भी देवरानी क कक्षा क द्वार पर कड़ी हो गयी थी

सेनापति आगे बढ़ कर देवरानी क रखे पत्र को उठा कर देखता है

Senapati:maharaj इस्पे तो रानी देवरानी का नाम है

राजपाल तुरंत सेनापति क हाथ से पत्र छीन कर

राजपाल पढ़ने लगता है

**************************************************

राजपाल उम्मीद करती हु क तुम इस समय मेरे और बलदेव की सचाई जान गए होंगे और तुम मुझे जान से मरने की ीचा लिए मेरे कक्षा में आये ho,jaisa दर्द तुम अभी महसूस कर रहे हो वाइस में जीवन भर की हु और आखिर कार मुझे अपना प्रेमी बलदेव मुझे मिल गया और में उसके साथ गहतराष्ट्रा छोर कर जा रही हु

ठु है तुम्हारे जैसे पति पर जो अपने पत्नी किसी और को भेट देना छह रहा था

बलदेव की पत्नी

देवरानी

**************************************************

तभी एक सैनिक पूरा महल घूम कर अत है और कहता है

"महाराज पुरे महल में कही नहीं है वो दोनों आसपास भी नहीं"

राजपाल अपने नंगे तलवार को गुस्से से घूमता है और उस सैनिक क सर को धार से अलग कर देता है

सेनापति जो राजपाल क पास हे खड़ा था और पत्र पढ़ कर उसे समझ आगया था

senapati:maharaj आप ने क्या किया अपने हे सैनिक को मार दया अपने क्रोध पर काबू रखिये

Rajpal:ye कामिनी अधर्मी देवरानी अपने बेटे क साथ भाग गई

ये सुन कर श्रुष्टि और राधा क आखे बड़े हो जाते है

Shurushti:man में) ये क्या कामिनी लगता है भाप गयी थी क उसके जान को खतरा है और भाग गई

Shurushti:senapati सुनो वो लोग सुबह महल में हे थे वो गहतराष्ट्रा को पार कर क नहीं जाना चाहिए

ये सब शोर और महल में खून बहता देख महारानी जीविका राजपाल की माँ बहार आती है

jeevika:kya हुआ राजपाल ये सब क्या हो रहा है

shurusti:hoga क्या आपका लाडला पोता आपके बहु अपने माँ देवरानी को ले कर भाग गया

जीविका सुनते हे

"क्या shurushti..hey भगवन"

"जी माँ जी बलदेव देवरानी को ले कर भाग गया और देवरानी ने पत्र भी छोर गयी है"

जीविका अपना सर पर हाथ रख कर चक्र कर गिर जाती है और बेहोश हो जाती है

राजपाल षुरूश्ती दौड़ कर आते है

Rajpal:maaa ा

shurushti:maa जी

राजपाल अपने माँ को उठाने क लये अपनी खून से सनी तलवार को फेकता है और षुरूश्ती और सेनापति क मदद से अपने माँ को उसके कक्षा में ले जाता है

Senapati:sainiko वैधजी को बुलाओ

इधर बलदेव नदी तात पर पहुंच जाता है और अपने माँ को सामान लिए कड़ी प् कर

Devrani:beta देर कर दी आने में

"माँ क्या हुआ आपने यहाँ क्यू बुलाया है"

"बीटा मैंने फैसला कर लिया है अभी हमे गहतराष्ट्रा छोरना होगा उनसे बचना है तो"

"माँ मई कायर नहीं अगर समाज क खिलाफ हम गए है तो वो कौन से पुजारी है कही क सब हमारा साथ देंगे में उनसब से अकेला लड़ सकते ही"

"मेरे बचे आज चल इनसे हम कभी और बदला ले लेंगे "

"पर हम जायेंगे कहा माँ"

इधर महल में

Rajpal:senapati गहतराष्ट्रा का चप्पा चप्पा छान मारो और इन दोनों अधर्मी को मेरे समक्षा लाओ इन्हे मृत्यु दंड की घोसना में करता हु

Senapati:jo हुकम महाराज

Rajpal:chalo सैनिको

Senapati:aap भी

rajpal:han सैनिको को हर दिशा पूर्व पश्चिम दक्षिण क दिशा में भेजो

हर गांव हर घर छान मारो

सेनापति राजपाल को कहे अनुसार सेना को हर दिशा में भेज देता है

Rapal:ab हम पारस की दिशा की ओरे चलते है नदी क उसपर

कुछ देर में राजपाल अपने सैनको क साथ नदी तात पर पहुंच जाता है

महारानी अब भी बलदेव से बहस कर रही थी पर बलदेव मान ने को तैयार नहीं था देवरानी बलदेव क गले लग जाती है

"बीटा तुम्हे तुम्हारे प्यार की कसम चलो हम दूर चले "

"माँ कसम क्यू पर जाये कहा"

सामने से राजपाल आरहा था उसे नदी तात पर बलदेव का घोडा दीखता है

rapal:wo देखो बलदेव का घोडा

वो आसपास होंगे

senpati:wo देखो उस वृक्ष क पास

जैसे जैसे राजपाल करीब अत है वो देखता है दोनों एक दूसरे क गले लगे थे

राजपाल इशारे से सैनिको को घेरने क लये कहता है

बलदेव देवरानी को अपने बहो में लिए खड़ा था इस बात से अनजान क उसका घेराव हो चूका है

Baldev:theek है चलते है मेरी रानी

बलदेव आगे बढ़ कर अपने होठ देवरानी क गले पे रख चूमता है और अपने हाथों से देवरानी क कमर पर रख सहलाता है

ये दृश्य देख राजा राजपाल क धैर्य टूट जाता है

rajpal:aakaraman

ये सुनते हे बलदेव और देवरानी एक दूसरे को छोड़ते है और अपने आप को घिरा पते है सैनिको से और सहम जाते है..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 79

बलदेव और देवरानी अपने आप को सैनिको से घिरे पते है देवरानी डर क बलदेव से चिपक जाती है

Rajpal:pakad लो इन अधर्मिओं को

दो सैनिक बलदेव की ओरे तेज़ी से घोड़े को दौड़ते है

देवरानी इशारे से बलदेव को भागने क लये कहती है बलदेव नदी क तात पर रेट क अंदर अपना पेअर घुसता है और एक झटके से सैनिको क ऊपर दे मरता है जिस से पूरा वातावरण धूल धूल हो जाता है और सैनिको क आँख में धूल जाने से वो देख नहीं पते है

मौके का फायदा उठा कर बलदेव जल्दी से देवरानी को उसके सामान सहित गॉड में उठा क घोड़े पैर बिठाता है और खुद छलांग मार क भागता है

जब तक धूल छत पता और सैनिक को सब सूझता बलदेव और देवरानी घोड़े से निकल जाते है

Rajpal:wo भाग रहे है पश्चिम की दिशा चलो

सेनापति और सैनिक बलदेव और देवरानी क पीछे अपना घोडा भागने लगते है कुछ दूरी पर बलदेव देवरानी को अपने गॉड में लये घोड़े को भगा रहा था

Rajpal:ruk जाओ नहीं तो तुम दोनों क लये ाचा नहीं होगा

Devrani:rukna नहीं बीटा ले चलो मुझे ये सब से दूर खास कर ये राजपाल से

बलदेव घोड़े को भागते भागते जंगल की ओरे मोड लेता है और उसके पीछे राजपाल भी जंगल की ओरे मोड़ लेता है

बलदेव घने जंगल में घोड़े को कभी दाए झाडिओं क अंदर मोड़ता तो कभी बाये और राजपाल भी उनका पीछा करना छोर नहीं रहा tha..baldev क आगे एक छोटा सा पहाड़ अत है वो घोड़े क लगाम को खींचता है घोडा समझते हुए हहहयते हुए पहाड़ क ऊपर तेज़ी से चढ़ने लगता है और फिर तेज़ी से उतरता है पर राजपाल और सेनापति क घोडा बहुत धीमे गति से चढ़ता है और जब वो पहाड़ पर पहुँचता है तब तक बलदेव घने जंगल में घोड़े को घुसा देता है

Rajpal:ye फिर हमारे हाथ से निकल गए

senapati:chinta न कीजिये महाराज सीमा से बहार में इन्हे जाने नहीं दूंगा

rajpal:theek है तुम सैनिको को ये खबर पंहुचा दो

Senapati:theek है

rajpal:chalo अब वापस महल

राजपाल और सेनापति वापस महल की ओरे चल देते है

महल पहुंच कर राजपाल देखता है अब तक उसकी माँ जीविका होश में आगयी है और उसके आखो में ासु थे और लगभग घर का हर व्यक्ति आज उदास था

Jeevika:aagaya बीटा हम सब तेरा हे राह देख रहे थे

राजपाल अपने सर का पगड़ी को फेकते हुए बैठ ता है

Rajpal:tum सब क घर में रहते हुए ऐसा कैसे हो सकता मुझे इस बात की खबर क्यू नहीं की गयी ..कैसे मेरे नाक क निचे ये दोनों ऐसा करते रहे और आज बलदेव ने अपने माँ को भगा ले गया पर मुझे भनक तक नहीं हुई क्यू ाआआखिर क्यू मुझे उत्तर चाहिए इसका

Shurushti:maharaj जैसे हे मुझे शक हुआ इनपर में इनके कक्षा की तलाशी की और प्रेम पत्र मिला

Rajpal:maa क्या आपको इनदोनो क लक्षण से नहीं लगे क ये दोनों क्या गुल खिला रहे है?

jeevika:beta तुम इतनी चिंता मत करो वे अधर्मी थे वो तुम्हारे लायक हे नहीं थी देवरानी जैसी भ्रस्ट महिला और बलदेव जइसन अधर्मी पुत्र मैंने नहीं देखि

Rajpal:chinta कैसे न करू माँ आज पुरे महल में ये बात सबको पता चल गयी है

उतने में राजा रतन सिंह अपने कक्षा से निकलते हुए

Ratan:rajpal तुम सही में नामर्द निकले तुम्हारे सामने से तुम्हारी रानी को तुम्हारी पत्नी को कोई भगा क ले गया और तुम कुछ नहीं कर पाए

Rajpal:humne कोशिश की

Ratan:pakad तो नहीं पाए न और उनके प्रेम पूजा तुम्हे इतने दिनों से नहीं दिखी अब हाथ मॉल क कुछ नहीं होगा एक स्त्री को संभल नहीं सके तुम

राजपाल रतन सिंह क गुस्से को जाएज़ समझ कर चुप चाप था

Ratan:me ऐसे अधर्मी परिवार क साथ एक क्षण नहीं रुक सकता और रही बात मेरी ख्वाइश की वो में जनता हु कैसे पूरी करनी है

Rajpal:ary रुको तो अभी कहा जाओगे

Ratan:apne राज्य राजपाल बास तुम सब अपना ख्याल रखो और ढूंढ सको तो ढूंढ लो अपने रानी को छुरा लो अपने बेटे क चुंगल से

रतन सिंह ये कह कर बहार ाआजाता है और अपने घोड़े से कुबेरी की ओरे चल देता है

राजपाल अपने आखे बंद क्या

rajpal:ye माँ बीटा क वजह से मुझे कितने बेइज़्ज़ती साहनी पद रही है

Rajpal:kamla राधा वैध जी क्या आप लोगो को भी इन दोनों में कुछ चल रहा है ये महसूस नहीं हुआ ?

सब ने नकार दया और कहा उन्हें इस बात की खबर नहीं थी

Rajpal:kamla तुम सच बताओ मुझे क्यू लगता है तुम्हे पता था

Kamla:nahi महाराज ऐसे अधर्म होने की भनक भी मुझे लगती तो में सबसे पहले में हे उन्हें घर में बेइज़्ज़त कर देती

Rajpal:jaao तुम सब अपने अपने कक्षा में मुझे अकेला छोर दो

सब जाने लगते है और राजपाल अपने कक्षा में जा कर लेट जाता है

थोड़ी देर में षुरूश्ती आजाती है

shurushti:maharaj

rajpal:han महारानी

shurushti:aap इनके बारे में सोच कर अपनी सेहत ख़राब न करे इन दोनों ने जो किया उसका फल उन्हें अवश्य मिलेगा

राजपाल क पास बैठ कर षुरूश्ती राजपाल का सर दबाने लगती है

इधर बलदेव और देवरानी जंगल को चीरते हुए तेज़ी से गहतराष्ट्रा क सीमा तक पहुंच जाते है और बलदेव अपने तलवार निकल कर घोडा भागने लगता है

सीमा पर सैनिक जैसे देखता है बलदेव को इनके पीछा करने लगते है

तभी बलदेव अपना तलवार ज़ोर से गोल गोल घुमा कर

"सैनिको हमे जाने दो नहीं तो तुम सब जानते हो ये तलवार तुम सब का खून पी सकती है एक हे साथ"

बलदेव क आखो में जलते अंगारे देख सैनिक पीछे हैट जाते है और बलदेव घोड़े को आगे बढ़ाते हुए गहतराष्ट्रा क सीमा को पार कर लेता है

बलदेव अब घोड़े को धीरे करते हुए

Baldev:ab कहा जाये हम

devrani:hum भैया से बात करेंगे

Baldev:par मां जी क्या हमारा रिश्ता स्वीकार करेंगे

Devrani:hamare पास और कोई रास्ता नहीं है सेनापति और राजपाल हमे कही न कही से ढूंढ निकालेंगे और रतन भी

Baldev:par माँ

Devrani:prem कए हो तुम अब परीक्षा देनी पड़ेगी बलदेव अब समय आगाया है मेरा हाथ मानगो मेरे भैया से

Baldev:agar नहीं मने तो

Devrani:to भी में तुम्हारी हे रहूंगी

दोनों पारस की ओरे घोड़े को मोड़ते है

थोड़ी दूर जाने क बाद देवरानी को एक बाजार नज़र आता है और अब लगभग रात हो गयी थी

Devrani:mujhe भूक लग गई सुबह से कुछ नहीं खाया तुमने भी चलो कुछ खा ले

दोनों बाजार में जा कर लड्डू वाले क पास जा कर घोड़े से उतारते है देवरानी सावधानी से अपने चादर को अपने मुँह पर ओढ़ लेती है जिस से कोई उसे पहचान न पाए

Baldev:bhaiya लड्डू कैसे दिया

Ladduwala:bhaiya 30 सिक्के क एक सेर है

बलदेव सिक्के निकल क देता है

Ladduwala:ary ये तो गहतराष्ट्रा क सिक्के है

Baldev:han

Ladduwala:aap दोनों गहतराष्ट्रा से हो क्या

Baldev:nahi हम कुबेरी से है रतन सिंह क राज्य से सैनिक हु में

Ladduwala:or ये आपकी पत्नी

Baldev:ji हाँ मेरी पत्नी

Ladduwala:lagta है इनकी ताब्यात ठीक नहीं या कुछ ज़्यादा हे ठण्ड लग रही है

Baldev:aap हमे लड्डू दो पहले

Ladduwala:kahe चिढ रहे हो ..गहतराष्ट्रा से याद आया आज एक सैनिक आया था वह एक अध्भुत घटना घाटी है

Baldev:kya घटना"

देवरानी भी अब ध्यान से लड्डू वाले हलवाई की बात सुन ने लगी

लड्डूवाला हस्ता हुआ कहता है

"भैया कलियुग आगया है गहतराष्ट्रा की रानी और उनके पुत्र का प्रेम प्रसंग चल रहा रहा और आज राजपाल क पुत्र अपने माँ या फिर ये कहिये राजपाल की छोटी रानी को भगा ले गया"

ये सुनते हे देवरानी डर से काँप जाती है और लड्डूवाले को देखने लगती है

Baldev:bhaiya हमे क्या पता इस बारे में में खुद छुट्टी पर hu..kya आप देखे हो वो युवराज को जो अपने माँ को ले के भाग गया

Ladduwala:dekha नहीं हु और देखना भी नहीं ऐसे अधर्मी व्यक्ति ko..aap ये सब छोड़िये आप लड्डू खाये

बलदेव अपने हाथ में लड्डू लिए देवरानी क साथ एक वृक्ष क नीचे बैठक पे बैठ कर लड्डू खाने लगे वही पर बैठे कुछ लोग आपस में बात कर रहे थे और सब क मुँह पैर सिर्फ बलदेव और देवरानी की बात हे थी

बलदेव और देवरानी वह से जल्दी निकलते है और रात में रुकना भी ठीक नहीं समझते है और पारस की ओरे घोडा भागने लगते है..

रात भरे घोडा भागने क बाद देवरानी नींद क मारे थक जाती है और बलदेव क गॉड में हे सो जाती है और बलदेव बास घोड़े क लगाम को सँभालते हुए पारस की ओरे बढ़ रहा था

सुबह में गहतराष्ट्रा महल

राजपाल अपनी तलवार लगा कर और पूरी तैयारी कर क जैसे युधा में जा रहा हो महल से बहार निकलता है

rajpal:senapati सोमनाथ

senapati:ji महाराज

rajpal:unka कुछ पता चला

तभी महल से षुरूश्ती बहार आती है

shurushti:maharaj आप ने कल से कुछ खाया नहीं खा लीजिये कुछ

Rajpal:mai तब तक नहीं खाऊंगा जब तक वो दोनों मेरे सामने न आजाये

Rajpal:senapati तुम हर पडोसी राज्य में ये खबर फैला दो जो हमारी मदद करेगा उन दोनों को पकड़ने में हम उसे मुँह माँगा इनाम देंगे

senapati:par महाराज वैसे तो ये बात आग की तरह पूरी दुन्या में फ़ैल जाएगी

Rajpal:mujhe कुछ नहीं पता मुझे बलदेव और देवरानी चाहिए ज़िंदा या मुर्दा और अभी गहतराष्ट्रा क जितने गाओ है और जितने चौधरी है इन गाओ क सबको बुला कर कह दो हम इनदोनो को फांसी की सजा सुना डाई सब को पता चलना चाहिए इन दोनों कितना बड़ा पाप किया है

सेनापति :जो आज्ञा महाराज

सेनापति हर गाओ क मुखिया या चौधरी को आपात बैठक में बुलाता है और साडी बात बताते हुए कहते है महाराज ने अपने छोटी रानी और बेटे को मौत की सजा सुना दी है सब हैरान परेशां थे ये सुन कर और आपस में बलदेव और देवरानी को कोष रहे थे इतनी बुरी हरकत पर

शाम हो जाती है और बलदेव और देवरानी पारस पहुंच हे जाते है महल क बहार सैनिक देख समझ जाते है ये तो वही लोग है जो कुछ दिन पहले मेहमान बन क आये थे

बलदेव और देवरानी पारस क महल पहुंच कर सैनिक से पूछते है देवराज कहा है और सीधा देवराज क पास पहुंच जाते है जो अपने कक्षा में थे

Devraj:ary मेरी बहिन देवरानी तुम आर्य भांजे तुम दोनों बहुत जल्दी आगये और ये क्या हाल बना लय तुम दोनों ने

बलदेव और देवरानी देवराज का पेअर छूटे है

Devrani:aap मेरे पिता सम्मान है आप से एक अनुरोध है

Devraj:kaho मेरी बची

Baldev:baat ये है मां जी क हमे देश निकल का हुक्म दया है

devraj:kisne

devrani:rajpal ने

देवराज अचंभित हो कर

Devraj:par ऐसा क्या अपराध

Baldev:apradh क्या प्रेम का मैंने

Devraj:mai समझा नहीं

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 80

Devraj:mai समझा नहीं

Baldev:mama जी मैंने अपराध क्या है अपनी माँ से प्रेम कर क

देवराज असमंजस से देखते हुए

Devraj:tumhara अर्थ क्या है?

Baldev:Mama जी मई आपकी बहिन देवरानी का आपसे हाथ मांगता हु हम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते है और में जीवन भर आपकी बहिन की रक्षा करूँगा

Devraj:kya बक्क रहे हो बलदेव

Devrani:ye सही कह रहा है भैया हम दोनों एक दूसरे क बिना जी नहीं सकते

Baldev:mai देवरानी से आपके बहिन से विवाह करना चाहता हु और उनको अपनी माँ से अपनी पत्नी बनाना चाहता हु में अब और नहीं सह सकता

देवराज ये सुन कर आग बबूला हो जाता है और इससे पहले वो कुछ और सुने "ठप्प" से थप्पड़ बलदेव क गाल पर रख देता है

Devraj:haramzade

बलदेव अपने गाल पर हाथ रख

Baldev:is थप्पड़ की क़ीमत आपको चुकानी पद सकती है मां

ये सब सुनते हे भूरिया आजाती है

Devraj:nikal जा यहाँ से अधर्मिओं

Devrani:Mere शरीर का सौदा क्या गया भैया आपके जीजा राजपाल ने क्या जीवन भर मुझे सताया अब वो हमे मरना चाहता है

ये कह कर देवरानी रोने लगती है

Devraj:Mujhe तुम पैर घृणा हो रही है देवरानी तुम्हारी जैसी बहिन मर्डर जाये तो ाचा जो अपना मुँह अपने बेटे से हे कला करवा रही है और तुमने अपना ससुराल छोर यहाँ भाग आयी बेटे साथ

Devrani:bhaiya

Devraj:agar तुम मेरी बहिन न होती जिसे मैंने बचपन से बेटी की तरह पला है तो भगवन कसम आज तुम दोनों की लाशे निचे होती

Baldev:chalo माँ हमारी यहाँ कोई नहीं सुन ने वाला

Devrani:to भैया क्या आपको ये गवारा है क आपके बहिन को राजपाल बेच दे ?पर बहिन अगर अपने बेटे से प्रेम कर ली तो ये अधर्म हो गया ..भैया अगर ये अधर्म है तो में हु अधर्मी और आप सब धर्म पैर चलते रहे ..

बलदेव देवरानी को सहारा देते हुए बहार ले कर आने लगता है रास्ते में भूरिया कड़ी थी

Hooriya:kya हुआ

देवरानी और बलदेव चुप चाप महल से बहार निकल कर अपने घोड़े पे सवार हो कर चले जाते है

Devraj:Sultan ने तो नहीं सुना न ये सब

Hooriya:wo सो रहे है और शमशेर शिकार पर गया है तुम्हे इस तरह नहीं करना चाहिए था

देवराज शर्म क मरे अपना सर पकड़ क बैठ जाता है

Devraj:kya करता मल्लिका इ जहाँ ऐसे अधर्मिओं को शाबाशी देता इन्होने मेरा नाक कटा दया

Hooriya:ary तुम टूटो मत देवराज जी

देवराज को छोर कर भूरिया बहार आजाती है

Hooriya:man me)kya करू देवरानी तो बात भी कही की पर वो मुसीबत में है कैसे मदद करू

बलदेव घोडा बहगते हुए पारस से निकल रहा था

Baldev:maa तुम चुप हो जाओ रोने से कुछ नहीं होगा और ये भूल जाओ क हमारी कोई मदद करेगा और हमे शरण देगा

Devrani:tumne ठीक कहा बलदेव अब हमे खुद लड़ना होगा

Baldev:ye हुई न बात और वाइस भी

में हु न तुम्हारे साथ

Devrani:mujhe कुछ और नहीं चाहिए बास आप हमेशा मुझ से ऐसे हे प्रेम करते रहे

Baldev:devrani अब हमे गहतराष्ट्रा में हे जगह बनानी है और वैसे भी तुम्हारा भी तो सपना था महारानी बन ने का

Devrani:han क्या ये मुमकिन है?

Baldev:Sab मुमकिन है मेरी जान

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देवरानी मुस्कुरा देती है और दोनों तेज़ी से पारस से निकल रहे थे

तभी सामने से एक रस्सी बलदेव की ओरे आती है जो एक फंदा था उसे देखते हे बलदेव अपना सर हटाता है और

देवरानी पीछे मुद कर देखती है तो कुछ घुड़सवार उनका पीछा कर रहे थे

वही जंगल में शमशेर शिकार कर रहा था और वो देखता है क कुछ घुड़सवार किसी का पीछा कर रहे है

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शमशेर अभी जंगल में अपने घोड़े को दूर बंधा था

Shamshera:dekhu तो कौन है ये लोग

शमशेर अपने घोड़े की ओरे जाता है

इधर बलदेव क ऊपर फिर से दोनों तरफ से घुड़सवार रस्सी फेकते है और बलदेव को कुछ हे देर में रस्सी से लपेट लिया जाता है और बलदेव को खींच कर घोड़े से गिरा देते है

Baldev;devrani तुम सुरक्षित स्थान पर चली जाओ मेरी चिंता न करो

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देवरानी घोड़े को भागने लगती है और कुछ दूर भागते हुए वो पीछे मुद कर देखती है घुड़सवार नहीं थे तभी सामने से अपने हाथो में तलवार लिए कुछ नकाबपोश खड़े थे

"ऐ उतरो घोडा से और चुप चाप हमारे साथ चलो चालाकी करने की कोशिश की तो बलदेव का बुरा हाल कर देंगे हम वो चुंगल में है हमारे"

"एक मर्द को तुम सब मिल क धोके से पकड़ लिए ध्यान देना बलदेव शेर है कही कुछ उल्टा न पद जाये "

देवरानी ये कह कर उतरती है..

सैनिक देवरानी का हाथ पकड़ते हुए

Devrani:mera हाथ मत छूना एक राजपूतनी को छूने की क़ीमत जानते हो न?

वो नक़ाब पॉश जो देवरानी को बांधने आरहा था पीछे हैट जाता है

Devrani:chalo में तुम क साथ जाने को तैयार हु और बलदेव मेरी जान है वो तुम्हारे साथ है उसके लये में भी ख़ुशी ख़ुशी मर सकती हु

तभी कुछ और सैनिक नकाबपोश वह पर बलदेव को चारो ओरे से मोती रस्सी से जकड़े ले आते है और एक सैनिक उसको अपने साथ घोड़े पैर बिठा लेता है

Sainik:theek है हम तुम्हे नहीं छूटे चलो आजाओ घोड़े पे

Devrani:me तुझ जैसे टुच्चा क साथ सात कर बैठु घोड़े पे अपनी सूरत देखि है आयने में

ये सुन कर और सैनिक भी हसने लगते है

Devrani:mujhe एक घोडा दो

देवरानी को एक घोडा दया जाता है और वो सब चल देते है

इधर शमशेर अपने घोड़े क पास पहुँचता है और जब तक वो इनके पास अत है ये लोग निकल जाते है

Shamshera:ye लोग तो

बहुत जल्दी गायब होगये कौन थे ये लोग

शमशेर अपना घोडा पारस की ओरे घुमा कर अपने महल जाता है

Shamshera:salam अम्मी

Hooriya:salam beta,bhut देर करदी आने में जंगल में इतना अँधेरे में शिकार मत किया करो मुझे दर लगा रहता है तुम्हारा

Shamshera:ammi जान ऐसी कोई चीज़ हे नहीं बानी जो शमशेर को नुक्सान पंहुचा दे

Hooriya:han बड़ी बाते न करो जाओ मुँह हाथ धो लो में तुम्हारे लिए कबाब बनवाये है

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Shamshera:aaj तो मज़ा आजायेगा

Shamshera:maa आज जंगल क रास्ते कुछ लोगो को देखा जो किसी का पीछा कर रहे थे और वो पारसी नहीं लग रहे थे पहनावे से

Hooriya:man me)Kahi वो बलदेव और देवरानी तो नहीं और दुश्मन उनका पीछा करते हुए यहाँ तक तो नहीं aagaye,par शमशेर को कैसे बताऊ क वो दोनों प्यार करते है और नहीं ..देवराज से बात करती हु

शमशेर माँ को निहारे जा रहा था

Shamshera:kitni खूबसूरत है

भूरिया होश में एते हुए

Hooriya:ky क्या शमशेर?

Shamshera:wo माँ ये नए कालीन की बात कर रहा था

Hooriya:acha बीटा मुस्कुरा कर बावर्ची खाना क तरफ जाने लगती है

शमशेर उसे खा जाने वाली नज़र से देख रहा रहा और उसके मटकते गांड हिजाब क ऊपर से कमल ध रहे थे

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गहतराष्ट्रा

Senapati:Maharaj हमारे सैनिक उनका पीछा करते हुए पारस क सीमा तक पहुंच गए होंगे

Rajpal:ye अधर्मिओं की मदद देवराज कभी नहीं करेगा वो ये सोचे क वो पारस जा कर बास जायेंगे हाहाहा

Senapati:han हो सकता है

Rajpal:hasi आती है क्रोध भी क भला कोई व्यक्ति क पास उसका भांजा जाये और कहे क मुझे अपनी माँ चाहिए में उसे भगा क ले आया हु तो क्या वो व्यक्ति अपने भांजे और बहिन का साथ देंगे ?

Senapati:man me)ye पागल तो नहीं हो गया हस्स रहा है क गुस्सा हो रहा है समझ नहीं आरहा साला पागल हो गया है जब से पत्नी भागी है इसकी

Rajpal:bolo सेनापति

राजपाल मदिरा पीते हुए पूछता है

सेनापति: नहीं महाराज कोई भी व्यक्ति अपने बहिन और भांजे की जोड़ी को सहमति नहीं दे सकता है

Rajpal:un दोनों की चमड़ी उधेड़ देंगे हम बास एक बार हमारे हाथ लग जाये

Senapati:hamare सैनिक उसे ज़रूर पकड़ लेंगे वो दिन रात काम कर रहे है आप सो जाये अब रात हो गयी है में भी जाता हु

सेनापति राजपाल को उसके कक्षा में छोर कर बहार जाने लगता है तभी रानी षुरूश्ती अपना कक्षा का द्वार खोल कर बहार आती है

Somnath:ary इतनी रात में कहा जा रही महारानी

Shurushti:Tumse मतलब और में अपने घर में हु अपने महल में हु बहार नहीं जा रही बहार तुम जाओ अभी

Somnath:nahi इतनी बन थान क निकली हो कही महाराज क पास तो नहीं

और सोमनाथ षुरूश्ती को आँख मरता है

Shurushti:Kamine अपने नीच जाती की नीच हरकत दिखा हे दी

सोमनाथ को गुस्सा ाजत है और वो देवरानी को पकड़ कर उसके हे कक्षा में घुस जाता है और फाटक से दरवाज़ा बंद कर क महारानी षुरूश्ती को दीवार से लगा कर उसके बदन से चिपक जाता है

Shurushti:chhoro मुझे कमीने कुत्ते

सोमनाथ सब अनसुना क्या हुए षुरूश्ती क गर्दन पर चूमते हुए अपना हाथ घागरा क ऊपर महारानी क गांड को दबाते हुए अपने लैंड को षुरूश्ती क छूट पर रगड़ने लागत है

shurushti:chhor नहीं तो तेरा सर कलम करवा दूंगी

सोमनाथ झट से अपना धोती निचे करता है और अपना लौड़ा अपने हरह में लिए हिलता है और षुरूश्ती का एक हाथ पकड़ कर अपना लौड़ा उसके हाथ में देता है

Shurushti:neech

Somnath:ye नीच का जैसा लौड़ा है वैसा लौड़ा से आज तक किसी राजा ने तुम्हे छोड़ा नहीं होगा

ये बात सुन कर षुरूश्ती शर्मा जाती है

सोमनाथ आगे बढ़ कर ब्लाउज क ऊपर से उसका दूध पकड़ कर मसलते हुए

"अब देखिये महारानी कैसे ये नीच आपके छूट में उच्च मचा देता है"

षुरूश्ती अपना हाथ लैंड से थिरक कर छोर देती है सोमनाथ अपना हाथ निचे ले जा कर घागरा को उठा ता है और षुरूश्ती क घागरा को कमर तक उठा क घागरा क कोने को अपने मुँह में दन्त से पकड़ लेता है और अपने दोनों हाथो से षुरूश्ती को अपने लौड़े क तरफ खींच कर एक पेअर को उठा कर शुरुश्ते क छूट में अपना लैंड एक हाथ से पकड़ कर लगता है और एक करारा धक्का मरता है

"हाआआआआए में मर्डर गयी"

"ये ले मेरी महारानी लोहार का लैंड"

सोमनाथ और धक्के पे धक्के पेले जा रहा था

"उठ ाः नहीं सोमनाथ यह ओह"

"ले मेरा लैंड महारानी बहुत गांड मटका क जा रही थी न अपने गेंद को हिलाये अपने महाराजा क पास ले मेरा लैंड "

"कुत्ते आराम से कर में महारानी हु कोई वैश्य नहीं"

सोमनाथ खड़े खड़े पेलने लगता है

पुरे कक्षा में "पहच phach"ki आवाज़ गूंज रही थी अब तक षुरूश्ती का छूट भी पानी छोड़ने लगता है और अब सोमनाथ षुरूश्ती क ब्लाउज क ऊपर कर उसके वक्ष को अपने हाथो में थामे दबाता है

"आध धीरे"

सोमनाथ अब लटके हुए 48 वर्षीया भरी महिला जो सिर्फ 5.5 की थी अपने लैंड पर टंगे दरवाज़े क पीछे पेले जा रहा था

कुछ देर पेलने क बाद षुरूश्ती क आखो में ासु आजाते है और अपना भार पूरा सोमनाथ क ऊपर दे कर अपनी आखे बंद कए झटके सहने लगती है

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"यह ाः "

"यह ओह्ह आआह"

"फच्च फच्च"

Somnath:ye लीजिये महारानी मेरा लोहे का लैंड

कुछ देर और पेलने क बाद सोमनाथ झड़ने वाला था

somnath:ary तुम सो हे गयी मेरे पे अब विरोध तो नहीं कर रही लैंड लेने में मज़ा आ रहा है महारानी

षुरूश्ती सीधा होती है और सोमनाथ षुरूश्ती क होठो को अपने होठ में भर कर चूस कर दो तीन तगड़े झटके मार क अपना वीर्य महारानी षुरूश्ती क छूट में हे छोर देता है

"आआह महारानी चूस लो अपने सेनापति क लौड़े का पानी"

"ाः सेनापति सोमनाथ तुम ओह"

दोनों एक साथ झड़ते है

सोमनाथ अपना लौड़ा निकल कर अपना धोती पहनता है

Somnath:ab आप जा सकती हो महारानी राजपाल क पास

सहर्षति अपना ब्लाउज पहनती है और अपने पलंग क पास जा कर एक कपडा उठा का अपना घागरा उठा कर छूट पर रख वीर्य को साफ़ कर देती है

"तुम सोमनाथ मेरे साथ जबरदस्ती कर क सही नहीं कह रहे हो"

"महारानी अब झूट न कहो कैसे मस्ती में चुद रही थी अभी अभी अब और नाटक नहीं"

इस बात का षुरूश्ती क पास जवाब नहीं था सोमनाथ अपना मुँह पॉच कर बहार निकलता है तो देखता है दोनों दरबान जो महल क मुख्या द्वार पर पहरेदारी करते है बैठ कर आपस में बात कर रहे थे

sainik:ary यार हमारे राज्य में ये पहली घटना है क एक माँ बीटा प्रेम करते हो

दूसरा sainik:han भाई ये तो सोच से परे है अपने माँ से एक बीटा कैसे प्रेम कर सकता है और माँ भी अपने बेटे को कैसे एक प्रेमी क रूप में स्वीकार कर सकती है ये बलदेव ने तो बहुत मज़े कए होंगे रानी देवरानी क साथ

Sainik:islye तो आज कल ज़्यादा खिल रही थी रानी देवरानी और मुझे लगता है ये दोनों पारस भी अपने प्यास बुझाने हे गए the.pure गहतराष्ट्रा में ठु ठु हो रही है राज परिवार की

ये सब सुन रहा सोमनाथ

"क्या चल रहा ये सब"

सैनिक दोनों खड़े हो जाते है

Sainik:ji सेनापति जी

Senapati:tum दोनों को यहाँ पर काम करने क लये रखा गया है क गप्पे मरने ?

sainik:hume क्षमा कर दीजिये

Senapati:thek है खड़े हो महल की निगरानी करो

सोमनाथ अपने सेनगृह में जो महल क आगे हे था अपने कक्षा में जा कर सो जाता है वो षुरूश्ती को छोड़ कर थक चूका था उसे नींद आजाती है

सुबह होती है और गहतराष्ट्रा में हंगामा होरहा था सेनापति की नींद खुलती है और बहार आकर देखता है

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कुछ सैनिक बलदेव को रस्सी से बंधे घोड़े पर लादे ला रहे थे और साथ हे देवरानी एक घोड़े पैर बैठी आरही थी

सोमनाथ मुस्कुराते हुए

"शाबाश सैनिको .."

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 81

Somanth:shabash सैनिको

सैनिक घोड़े पर बंधे बलदेव को उतरता है

Somnath:koi जाकर महाराज को ये समाचार दे दो

सोमनाथ मुस्कुराते हुए बलदेव को देखता है

Somnath:man me)ye तो मेरे से भी कमीना निकला अपनी माँ को हे फसा क ले भगा था पर हमारे चुंगल से बलदेव कहा बच पाओगे

Sainik:senapati जी बलदेव की रस्सी खोल दे क्या ?

Somnath:pagal हो गए हो क्या तुम जानते नहीं वो बलदेव सिंह है अगर उसके हाथ खुल गए तो तुम सब बच नहीं पाओगे

देवरानी अपने घोड़े से उतर कर अपने घूंघट को खींच क अपना मुँह पूरा धक् लेती है

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Somnath:man me)saali मुँह धक् क बड़ा देवी बन ने का नाटक कर रही है

Somnath:tumne सिर्फ बलदेव को हे क्यू बंधा सैनिको

Sainik:maharaj वो ये हमे छूने नहीं दिए हम बांधते कैसे

Devrani:Senapati..mat भूलो क में अब भी रानी हु और तुम बलदेव को युवराज न कह कर गलती कर रहे हो

देवरानी अपना पल्लू को हल्का सा उठा कर सक हाथ से पल्लू पकडे कहती है

महल क अंदर सैनिक दौड़ कर जाता है

Rajpal:ary तुम इतनी सवेरे महल में भागे क्यू आरहे हो

Sainik:'wo महा राजा वो युवराज बलदेव

राजपाल अपनी आखे बड़ी करते हु

Rajpal:kya तुम सच कह रहे हो क्या वो दोनों पकडे गए?

Sainik:ji महाराज

राजपाल अपने गले में पहने एक मोती क हार को उतार क उस सैनिक को देता है

rajpal:ye रहा तेरा इनाम

राजपाल जल्दबाज़ी में महल क बहार आता है

जहा सेनापति और सेना क बीचो बीच बलदेव घुटनो क बल बैठ था

बलदेव अपना सर झुकाये बैठा था उसके पुरे शरीर पर मोती रस्सी क निसान पद गए थे

Baldev:pani

Devrani:koi पानी लाओ

मेरे जिगर क लये पानी मेरे लाल क लये

Sainik:le आता हु अभी

तभी राजपाल आजाता है

Rajpal:ruk जाओ

सब आवाज़ क तरफ नज़र घूमते है और राजपाल अपने आखो को बड़ी कर

Rajpal:paani तो इस कुत्ते को में पिलाऊंगा

Devrani:tum सब की मानवता कहा मर गयी क्या यही धर्म सीखा है तुम लोगो ने

धीरे धीरे लोग इकठा हो जाते है ये सुन कर क बलदेव और देवरानी पकडे गए है

देवरानी से देखा नहीं जाता है और वो पानी लाने क लये भागने लगती है

Rajpal:is बलदेव को सीधा कर क बाँध दो और इस अधर्मी देवरानी को क्यू खुला छोड़ा है

इस कुटिया को में देखता हु

senapati:maharaj इन्हे सैनिक हमारे दर क मरे बंधे नहीं

Rajpal:q रे देवरानी अपना पल्लू से मुँह धक् क क्यी साबित करना चाहती हो

Devrani:suno सब कण खोल क तुम सब कायर हो में नहीं में चाहती तो तुम्हारे इन सैनिको का खत्म कर दी होती लेकिन मुझे अपने बलदेव पे पूरा भरोसा है डैम है तो उससे मुक़ाबला karo..or में अपने पल्लू से मुँह धक् कर ये साबित कर रही हु क में मजबूरन कोई भी कदम उठाई पर तुझ से ज़्यादा शर्म है मेरे अंदर

Rajpal:badtameez अधर्मी

Devrani:jo अपने पत्नी को दूसरे क बिस्तर पर भेजे वो क्या धार्मिक होता है लोगो?

वह पर चारो ओरे घिरे लोग ये सुन कर चौंक जाते है और सबका मन उदास होजाता है

Devrani:Ghatrashtra की प्रजा आप लोग एक बार सोचना ज़रूर जो स्त्री अपने मान मर्यादा का इतना ख्याल रखती है वो ऐसा कदम क्यू उठाई शायद तुम सब को उत्तर मिल जाये

पुरे प्रजा में हाहाकार मच जाता है सब आपस में बात करने लगते है

"ये तो ठीक कह रही है इसका मुँह हमने कभी नहीं देखा इसके साथ ज़रूर कुछ गलत हुआ है'

Devrani:praza सिर्फ एक बात समझ लो ये राजाओ से एक ज़्यादा पत्नी संभालती नहीं तो एक से ज़्यादा विवाह करते क्यू है

हंगामा को सुन अंदर से जीविका और षुरूश्ती भी आजाती है

राजपाल देखता है क लोग देवरानी क बात से सहमति दिखा रहे है

Rajpal:Gaur से सुन लो सब मैंने बलदेव को पहले हे फांसी की सजा सुना दी है और कल सूर्य उदय से पहले इसको फांसी दी जाएगी

Devrani:fansi मुझे भी दो बलदेव को हे क्यू

Rajpal:hasta हुआ तुझे तो जीवन भर तड़पा तड़पा क मारुणः और कान खोल कर सुन लो सब देवरानी को आजीवन कारावास की सजा सुनते है हम

Devrani:namard हो तुम राजपाल

राजपाल गुस्से से लाल हो जाता है और देवरानी को पकड़ कर खींचते हुए महल में ले जाने लगता है

Rajpal:chal कुटिया तेरी गर्मी निकलता हु

महल क द्वार पे कड़ी जीविका सब कुछ देख रही थी राजपाल अंदर देवरानी को लाकर

Rajpal:bhut गर्मी थी न तेरे में सब निकलता हु आज

Devrani:bass तुम से यही उम्मीद थी राजपाल

राजपाल गुस्से से लाल हो जाता है और अपना हाथ देवरानी क गले में दाल कर उसका गाला दबा कर पकड़ लेता है

devrani:ahh छोरो

जीविका अंदर आती है

Jeevika:rajpal बस्स्स

Rajpal:kya हुआ माँ

jeevika:tum एक राजपूत हो स्त्री को यु पीदे देते हो कैसे राजा हो तुम

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जीविका की बात सुन कर राजपाल अपना हाथ देवरानी क गर्दन से हटाता है

Rajpal:maa इसने जो गलती की है उसकी सजा ये कुछ भी नहीं

Jeevika:me समझती हु पर तुमने इन्हे सजा सुना हे दया है इस अधर्मी को मर कर अपना हाथ गन्दा न करो तुम शायद नहीं जानते इसका हर आरोप तुम पैर प्रजा क लये क्या सन्देश जायेगा?

राजपाल झट से एक रस्सी निकल कर देवरानी को बांध देता है और जीविका क साथ बहार आजाता है

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बहार देखता है कमला पानी लिए बलदेव क पास कड़ी थी और उसे पीला रही थी

राजपाल जैसे हे कमला को रोकने क लये जाता है जीविका उसे हाथ से इशारा करती है वो रुक जाता है

सेनापति अब बलदेव क दोनों हाथो को बांध खड़ा कर देता है

Rajpal:q प्रेमी बलदेव बहुत पत्र लिखते थे क्या हुआ प्रेम का भूत निकल गया ?

बलदेव पसीने पसीने था और अपना सर उठा क घर क देखता है राजपाल को

rajpal:senapati कोड़ा लाये

Rajpal:abhi उतार देते है इसकी भूत

राजपाल क हाथ में कोड़ा आते हे बलदेव क नंगे पीठ पर राजपाल कोड़े की बारिश कर देता है

"चटक" चटक"

की आवाज़ फ़िज़ा में गूंज रही थी

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Baldev:ah

अपने आखे बंद कर अपने पिता राजपाल क हर कोड़े की मार बर्दाश्त कर रहा था

Rajpal:muaafi मांग लो में मरना छोर दूंगा

कमला से देखा नहीं जाता है

Kamla:muafi मांग लो युवराज बलदेव

बलदेव शेर की तरह हुंकार मरता है उसके जिस्म पर लाल निशान पद चुके थे हर जगह

Baldev:Kamla मुआफी क्यू मांगू मैंने कोई गलती नहीं की प्रेम क्या है

Rajpal:ye ले

चटक"

kamla:muaafi मांग लो शायद आपकी जान बक्श दे

और कमला रोने लगती है

Rajpal:Han मुआफी मानगो

Baldev:Kamla मैंने देवरानी से प्रेम क्या है अय्याशी नहीं

Rajpal:teri ये ले

"चटक"

Baldev:mai उस बात का क्षमा नहीं मांग सकता जिसमे में कुछ गलत नहीं क्या

कुछ देर मरने क बाद राजपाल थक जाता है

Rajpal:senapati इसे ले जाओ और कारगर में दाल दो कल की फांसी की तैयारी की जाये

ये सुन कर गहतराष्ट्रा हिल जाता है क्यू क गहतराष्ट का एकलौता राजकुमार जो आगे जा कर गहतराष्ट्रा को संभालता वो आज फांसी क लये बंधा खड़ा था

षुरूश्ती कड़ी सब देख कर खूब मज़े ले रही थी

Shurushti:maza तो बहुत आया ये दृश्य देख क

षुरूश्ती ये सोचते हुए हल्का मुस्कुराती है

बलदेव को सैनिक निचे उतारते है और उसे सेनगृह क पास कारगर में ले जा कर बांध देते है और फांसी की तैयारी करते है

राजपाल आकर अपने कक्षा में बैठ कर सोचने लगता है कैसे उसके जीवन में ये सब हुआ

तभी षुरूश्ती आजाती है और उसके निर्णय को सही बता कर राजपाल को समझती है

पारस

भूरिया परेशां थी और अपने बेटे को नहीं बता कर देवराज से बात करने का फैसला करती है

भूरिया देवराज को अपने दासी से कह कर बुलवाती है

Devraj:Ji मल्लिका इ जहाँ आपने याद किया

Hooriya:aaye देवराज जी

Devraj:kahiye

Hooriya:Aapse एक गुज़ारिश थी

Devraj:aisi क्या बात है जो मल्लिका जहाँ आधे जहाँ क मालकिन को गुज़ारिश करनी पड़े

Hooriya:dekhiye देवराज जी मुझे नहीं पता क आप उस दिन क बाद देवरानी को देखना चाहते है या नहीं और मुझे लगता है कोई भी भाई अपने बहन की ऐसी हरकत पर ऐसा हे करेगा

ये बात सुन कर देवराज शर्म से अपना सर निचे झुका लेता है

Devraj:Ji वो शायद अब दिमाग से पागल है

Hooriya:jo भी है वो तो है आपकी बहिन हे और शमशेर कह रहा था क कुछ लोगो को किसी का पीछा करते हुए देखा और

मुझे पूरा यक़ीन है क उस दिन बलदेव और देवरानी पर हे हमला हुआ हो और वो खतरे में है

Devraj:wo मेरे लये मर गयी है

Hooriya:devraj जी भले से वो आप क लये मर गयी है पर उसके गुनाह की सजा उसकी जान तो नहीं

देवराज चुप चाप ख़ामोशी से सुनता रहता है

Hooriya:uski जान चली जाएगी तो क्या हम सब को ाचा लगेगा ..में चाहती हु क आप सुल्तान क साथ जाये और उसकी जान की हिफाज़त करे

Devraj:Mallika जहाँ ये आप कह रही है जिसे पुरे जहाँ में मज़हबी और हर गुनाह हर पाप से महफूज़ स्त्री मन जाता है आप तो उपदेश देती हो सबको तो क्या जो देवरानी की वो सही था?

Hooriya:Me उनका हरगिज़ साथ नहीं दे रही हु जो वो किये है पर क्या हम उसके जान लेने वाले कौन होते है बेशक वो दोनों जहन्नम क आग में जलेंगे पर इसका फैसला हम नहीं खुदा करेगा

Devraj:theek है तो आप चाहती क्या है

तभी सामने से सुल्तान मेरे वाहिद अंदर आते है

Sultan:aapne बुलाया मल्लिका इ जहाँ और हम चले आये

भूरिया मुस्कुराते हुए

"आईये मेरे सरताज मेरे सुल्तान"

sultan:Kya बाते चल रही है

Hooriya:sultan बलदेव और देवरानी खतरे में है और मुझे लगता है क आपको कुबेरी का खज़ाना दिलवाने में बलदेव हे मदद कर सकता है

Sultan:hmm सही कह रही हो वो दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब न हम से पहले हाथ मार ले

Hooriya:jaha तक में सुनी हु शाहज़ेब गहतराष्ट्रा क सीमा तक पहुंच गया है

सुल्तान मुस्कुराते हुए

"आपको बहुत खबर होने लगी दुन्या की जासूसी भी शुरू कर दी क्या मोहतरमा"

hooriya:ji नहीं sultan(muskura k)jiska बीटा शमशेर जैसा जासूस हो उसे ये बात जान ने क लये जासूसी नहीं करनी पड़ती

Sultan:aap तो बूट बने खड़े है देवराज जी आपका क्या कहना है

Devraj:wo

Hooriya:sultan वो तैयार है

Sultan:to फिर हम आज हे निकलेंगे कल सुबह तक हम गहतराष्ट्रा होंगे

Devraj:avashya सुल्तान शमशेर आजाये फिर

Sultan:ary मेरा बीटा कभी जुंग क लये न नहीं कहेगा हम चले भी गए तो वो सुनते हे क उसके अब्बू जुंग पर गए है वो आजायेगा

Hooriya:bass आपकी हे पैदाइश है ज़िन्दगी भर आपने जुंग लड़ी और भी यही करेगा

Devraj:theek है सुल्तान ठीक है मल्लिका इजाज़त चाहता हु

देवराज जाता है तय्यरी करने गहतराष्ट्रा निकलने की

कुछ देर में शमशेर भी आजाता है और वो इस बात से खुश हो जाता है क वो जुंग पैर जा रहा है

कुछ देर में सेना एकत्रित करने क बाद सुल्तान शमशेर और देवज इकठे होते है

Sultan:hamari तादाद क्या है?

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Devraj:Hum पचास हज़ार(50,000) सैनिको क साथ आक्रमण करेंगे

Sultan:hmm कोई कमी हो तो बताये हम अरब से बुलवा लेंगे

Devraj:nahi सुल्तान हमारे सैनिक कुछ देवगढ़ में भी जुड़ेंगे यहाँ से हम देवगढ़ होते हुए जायेंगे

Shamshera:Hume कुबेरी लूटना है किसी भी हाल में चाहे हमे लाखो की फौज ले जनि पड़े

Devraj:han युवराज हम दो टुकड़ी में बाटेंगे एक टुकड़ी गहतराष्ट्रा पैर हमला करेगी और दूसरी टुकड़ी कुबेरी पैर एक साथ हमले क वजह से ये दोनों एक दूसरे को समर्थन करने लायक नहीं रहेंगे और कोई षड़यंत्र नहीं बन सकेगा हम से युधा जीतने का

Shamshera:wah

Devraj:Jeet हमे मिलती है जब शत्रु षड़यंत्र करना छोर दे और युधा लड़ने का हौसला पास्ट हो जाये

Sultan:tum सही में बहुत क़ाबिल हो राजा देवराज जी

shamshera:par अब्बू हम गहतराष्ट्रा पर हमला क्यू करेंगे? और गहतराष्ट्रा पर तो दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब हमला करने वाला है वो सीमा तक पहुंच गया है

देवराज और सुल्तान हस्ते है

Sultan:beta जासूसी सीख ली पर जुंग लड़ना देवराज से सीख लो

devraj:yuvraj शमशेर हम गहतराष्ट्रा वासिओ पैर हमला नहीं करेंगे उनके सैनिको और वह पहले से मौजूद शाहज़ेब की सेना पर हमला करेंगे

Shamshera:oh में तो सोचा हे नहीं तो इसलिए हम दो हिस्सों में हमला करेंगे

Sultan:han बीटा कुबेरी का खज़ाना मेरा ख्वाब है और मई नहीं चाहता कोई तीसरा हमारी जुंग का फायदा उठा कर खज़ाना लूट कर चले जाये

तीनो दोपहर का खाना खा कर सैनिको को जमा कर अपने घोड़े पे सवार हो जाते है

Hooriya:aap सब को खुदा सलामत रखे

Devraj:hum जल्द लौटेंगे

Shamshera:salam अम्मी जान अपना ख्याल रखे

Sultan:Jaan बाकी रहे तो फिर मिलेंगे मल्लिका

Hooriya:khuda करे मेरी उम्र आपको लग जाये

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Hooriya:devraj जी मेरी इल्तिज़ा है अपनी बहिन से निर्मित से पेश आये उसने शादी क बाद बस दुःख देखा है शायद वो आपसे कभी नहीं कह पाए

सब घोड़े को देवगढ़ की तरफ घूमते है

devraj:chalo सैनिको

एक सैनिक ज़ोर से पारस क झंडे को लहराते हुए नैरा लगता है और सब धीरे धीरे अपने घोड़े क साथ आगे बढ़ते है

गहतराष्ट्रा

शाम हो गयी थी और कल सुबह बलदेव को फांसी देने जाने की तैयारी हो रही थी वही गहतराष्ट्रा क सीमा पर सोमनाथ ने अछि खासी सेना पहरेदारी क लये राखी थी जो रात भर सीमा पर होते

गहतराष्ट्रा सीमा पर दो सैनिक टहल रहे थे

सैनिक 1 : भाई ये हमारी रातो की नींद हमने ख़राब की पर साला ये बादशाह शाहज़ेब का अत पता नहीं

Sainik2:mujhe नहीं लगता क इतना बड़ा राजा हमारे राज्य पर हमला करेगा कुबेरी में तो खज़ाना भी है यहाँ क्या है

Sainik1:han शायद तुम ठीक कहते हो ये राजा और युवराज तो अलग हे उलझे हुए है माँ बीटा प्रेम कहानी में

और दोनों हसने लगते है

ये दोनों अनजान ठीक इनके पीछे गहतराष्ट्रा क पहाड़ो पर बादशाह शाहज़ेब अपने सेना को ले कर खड़ा था

Shahzeb:bhaio हम गहतराष्ट्रा क सीमा पर है और हम उस पहाड़ क सामने खड़े है जिसे हरा कर हम गहतराष्ट्रा को हरा पाएंगे कई बादशाह इस पहाड़ को पार नहीं कर सके पर ?

Sainik:hum kareng..hum करेंगे ..

Shahzeb:aap सब क जोश इ जज़्बा को सलाम दोस्तों हम 25000 है हम गहतराष्ट्रा को राउंड कर रख देंगे और सुना है राजा रतन यही है हमे उसे भी कुबेरी लेते हुए chalenge..to चलो कल सुबह हम गहतराष्ट्रा फ़तेह करे

सैनिक सब हुंकार भरते है

शाहज़ेब इस बात से अनजान था क राजा रतन वापस कुबरी चला गया है

दिल्ली की बादशाह अपने सेना क साथ पहाड़ पैर चढ़ाई करने लगता है और सुबह सवेरे गहतराष्ट्रा पर हमला करने को तैयार था

गहतराष्ट्रा क महल में सन्नाटा छाया हुआ था

रात का भोजन बना कर कमला जाने लगती है पर उसका डिल नहीं मंटा और वो वैध जी क यहाँ रुक जाती है

जीविका एक थाली ले कर राजपाल क कक्षा में जाती है जहा देवरानी बंधी थी वो उसका हाथ पेअर खोल कर उसको खाना देती है

Jeevika:ye ले खा ले

Devrani:rehne दीजिये माँ जी मेरे बलदेव को कल सुबह फैंसी है और में खा लू

jeevika:fasi वो भी तेरे कारन अगर तू समझदारी दिखती तो

Devrani:samajhdari दिखती तो कभी राजपाल जैसे व्यक्ति से विवाह नहीं करती आप स्त्री हो कर नहीं समझी तो राजपाल क्या समझेगा

तभी षुरूश्ती और राजपाल आजाते है

Shurushti:isko समझने से कोई फयदा नहीं माजी ये चरित्रहीन हमारी बातो को राज घराने की इज़्ज़त को कभी नहीं समझ पायी

rajpal:maa आप जाओ अपने कक्षा में

Rajpal:shurushti आप भी जाओ सुबह से आप लोग आराम नहीं कए

राजपाल जा कर कक्षा का दरवाज़ा बंद कर देता है

Rajpal:dekho देवरानी में तुम्हे एक मौक़ा देता हु अगर तुम मेरी बात मान ली तो तुम्हारा बलदेव फांसी पैर लटकने से बच जायेगा

Devrani:kya चाहते हो तुम

देवरानी थोड़ा सोच कर कहती है

Rajpal:tumhe रतन को खुश करना पड़ेगा और क्षमा मांगना पड़ेगा हम सब से और आज क बाद तुम बलदेव से जीवन भर बात नहीं करोगी

देवरानी आव देखती है न ताव और राजा राजपाल

क गिरेबान पकड़ कर राजपाल क मुँह पैर थूक देती है

Devrani:thu है तेरे जीवन पैर राजपाल कैसे पति हो अपनी पत्नी का सौदा करते हुए शर्म नहीं आई और में रतन सिंह क पास जाने से ाचा मर जाना पसंद करुँगी

Rajpal:jab अपने बेटे से मुँह कला की तो शर्म नहीं आयी

Devrani:Baldev मेरा प्यार है तुमने कब मुझे एक पत्नी का सम्मान और प्यार दया राजा राजपाल? तुम्हे तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए

Rajpal:tujhme इतनी गर्मी थी तो किसी और से निकलवा लेती .अभी तेरी गर्मी शांत करता हु

राजपाल आगे बढ़ कर दबोचने की कोशिश करता है

Devrani:mujhe छूना मत राजपाल

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राजपाल देवरानी क जांघ पर हाथ रखता है

देवरानी धक्का देती है

devrani:kameen..mujhe छूना मत कहा न मुझ पर सिर्फ मेरे बलदेव का हक़ है..

राजपाल गुस्से से उसका हाथ मरोड़ कर

Rajpal:teri तो गर्मी ऐसी निकलूंगा बस सुबह बलदेव को फांसी हो जाये

Devrani:me जान दे दूंगी अगर किसी ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की

राजपाल फिर से देवरानी को उसी रस्सी से लपेट क ज़ोर से बांधता है

Rajpal:ab इधर बंधी बैठी रह तेरे प्रेमी की चमड़िया उधर क अत हु

राजपाल महल से निकल कर अत है रात में शांत माहौल में आअज कुछ ज़्यादा शांति थी पूरा गहतराष्ट्रा आज सो नहीं प् रहा था

राजपाल कारगर में जाता है जहा बलदेव बंधा हुआ था

राजपाल सैनिक से

"मेरा कोड़ा लाओ आज इसे अहसास दिलाओ क ऐसा अपराध करने का अंजाम क्या होता है"

सैनिक राजपाल को कोड़ा ला कर देता है और चला जाता है कारगर में सिर्फ बलदेव और राजपाल थे बलदेव मार खा कर उसके शरीर को थकन महसूस हुई और उसकी आँख लग जाती है

राजपाल एक कोड़ा सोते हुए बलदेव को मरता है

Baldev:aaaaaah

Rajpal:kamine हम सब की नींद हराम कर तू सो रहा है

राजपाल लगातार कोड़े बरसाने लगता है

Rajpal:teri हिम्मत कैसे हुई ये कदम उठाने की

बलदेव से अब रहा नहीं जाता है

Baldev:jab प्रेम होता है तो कोई घबराता नहीं

Rajpal:kameene मेने तुझे पैदा कर क गलती कर दिया

Baldev:sahi क्या नहीं तो में मेरी प्यारी प्रेमिका देवरानी क जीवन का कैसे ठीक कर पता

Rajpal:tumhari ये हिम्मत

रपाल और कोड़े बरसाने लगता है

Baldev:aaaah हिम्मत की बात क्या बताऊ देवरानी जैसी स्त्री को तुम छोर क इधर उधर मुँह मरते हो हाहाहा

राजपाल और कोड़े बरसता है

Baldev:maar लो मुझे पर जो मई तुम्हारे

पत्नी क साथ मज़े क्या ..क्या बताऊ क्या माल है रात भर मेरे गॉड में सोती थी आह उसके गद्देदार जिस्म बिना वस्त्र क यह वो

तो अप्सरा है

राजपाल और गुस्सा होता है और बलदेव को लगातार कोड़े से मरते रहता है

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Baldev:mahraj थक गए क्या और मारो ..पर देवरानी क भरी मांसल शरीर को मसलने में जो मज़ा है वो और किसी में नहीं :.और तुम्हारी पत्नी देवरानी भी सुबह तक मेरे गॉड में बैठी रहती थी अब क्या बताऊ

राजपाल बलदेव की बात सुन कर बुरी तरह शर्मा जाता है क्यू क था तो आखिर उसका बीटा हे

वो कोड़ा को फेकता है

Rajpal:kar लिए जो करना था अब सुबह नरक में पहुंचने क लये तैयार रहो

बलदेव मुस्कुराता है

राजपाल वपा महल आजाता है

ऐसे हे गहमागहमी में रात बीत रही थी और आने वाले सवेरे का सोच कर गहतराष्ट्रा क हर एक नगरी का डिल दहल जा रहा था गहतराष्ट्रा आज पहली बार जाग रहा था.

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 82

गहतराष्ट्रा

अँधेरा धीरे धीरे छत रहा था और गहतराष्ट्रा क धरती पर पहली बार किसी का आक्रमण होने वाला था जिस धरती पैर आज तक कोई नहीं पहुंच पाया और गहतराष्ट्रा जो शांति का प्रतीक था वो आज संकट में था

बादशाह शाहज़ेब अपने सैनिको क साथ पहाड़ पैर चढ़ाई की और आधी रात हे वो पहाड़ क छोटी पर पहुंच गया था और शाहज़ेब ने बड़ी चतुराई से अपने 25000 सैनिको में से 15000 सैनिक को अपने मंत्री क साथ कुबेरी रवाना कर देता है

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अभी पूरी तरह से अँधेरा छटा नहीं था और सब गहतराष्ट्रा क सीमे में प्रवेश कर चुके थे

Shahzeb:Thahar जाओ सब yaha.hum अब गहतराष्ट्रा क सीमा में है यहाँ से हमे सूझ बुझ से आगे बढ़ना hai,aaj शाम तक हम इस राजपाल को सबक सीखा कर कुबेरी हमारे लस्कर जो कुबेरी पर फ़तेह कर ली होगी वह जा कर कुबेरी को lootenge..sab तैयार?

Sainik:hum तैयार है जहापनाह

तभी सबका ध्यान एक पेड़ की ओरे जाता है जिसकी डाली हिल रही थी जैसे शाहज़ेब देखता है उसपे से एक सैनिक कूद कर भाग कर घोड़े पर बीअत जाता है

Shahzeb:teer से छल्ली कर दो वो गहतराष्ट्रा का जासूस है

तीरंदाज़ अपने तीर की बौछार करदेते है और वो घुड़सवार को कई तीर उसके पीठ पर लगते है पर वो रुकता नहीं और महल की ओरे जाते रहता है

Shahzeb:Chalo ये जा कर खबर पहुचायेगा राजा राजपाल को क हम आगये है हाहाहाहाहा

ये सब पहाड़ क छोटी पर पहुंच चुके शमशेर और सुल्तान क साथ देवराज भी सुन रहे थे बादशाह शाहज़ेब इस बात से अनजान था क ठीक उसके पीछे सुल्तान मेरे वाहिद पारस से सेना लिए खड़े है

शमशेर आहिस्ता से

Shamshera:Ishhhh कोई आवाज़ नहीं करेगा सब अपने घोड़ो को पीछे ले चलो बिना आवाज़ क्या हमारे दुश्मन हमारे निचे है

शाहज़ेब निचे खड़ा अपने सैनिको को बताता है क गहतराष्ट्रा और कुबेरी को जीतना उसके लये कितना अहम् है और थोड़ी देर में सब तैयार हो जाते है गहतराष्ट्रा पैर हमला करने क लये

Shahzeb:Fateh हमारी है

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Sainik:fateh हमारी है

शाहज़ेब अपने 10,000 सैनिको को ले कर गहतराष्ट्रा क महल की ओरे अपने सैनिको क साथ जाने लगता है

इधर अपने सेना को रोके सुल्तान मेरे वाहिद खड़े थे

Sultan:humse भूल हो गयी देवराज

Devraj:kya भूल सुल्तान हम तो समय पर पहुंच गए है और हम जब चाहे आक्रमण कर सकते है

Sultan,devraj जी शायद आपने शाहज़ेब की फौज को नहीं देखा है हमे खबर थी क वो 25000 फौज ले कर आरहा है पर ये उसका आधा भी नहीं था

Devraj:aapne सही कहा सुल्तान ये बात पर मेरा ध्यान नहीं गया

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Sultan,devraj जी ये बात साफ़ है क बादशाह शाहज़ेब ने अपनी आधी से ज़्यादा फौज कुबेरी भेज दया है लूटने क लये

Devraj:kya

Sultan:han

shamshera:par अब्बा हुज़ूर ऐसे में तो हम कुबेरी का खज़ाना खो देंगे और वो लूट क दिल्ली ले गए होंगे जब तक हम यहाँ का काम कर क कुबेरी पहुंचेंगे

Sultan:Han बीटा

Devraj:ghabraye नहीं सुल्तान अब हमे दो फौज से नहीं चार फौज से एक साथ समय लड़ना होगा

Sultan:par कैसे देवराज जी

Devraj:sainikko अब धीरे धीरे निचे उतरो ..सुल्तान जी हम भी अपने आधे सैनिक कुबेरी भेज देंगे जिस से क कुबेरी राज्य को वो लूट क भाग न सके

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Sultan:par वो तो निकल गए है अब पता नहीं कहा तक पहुंचे है शाहज़ेब क फौज

Devraj:sultan हम उनके फौज क मुक़ाबले दो गुने ज़्यादा है अगर वो हम से पहले लूट ले फिर भी हम उन्हें कुबेरी से बहार जाने नहीं देंगे

Sultan:par बलदेव और देवरानी का कुछ अत पता नहीं है क वो कहा hai..Hooriya ने कहा था क शमशेर ने देखा था पीछा करते हुए उनका

Shamshera:main देखा तो था कुछ लोगो को एक घोड़े का पीछा करते हुए पर में देख नहीं पाया कौन थे ,क्या वो बलदेव था?

Sultan:han बलदेव और बहिन देवरानी आई थी

Shamshera:kya? पर वो चले क्यू गए जब आये थे तो

Devraj:chhoro युवराज अभी हमे क्या करना है ये सोचते है

देवराज अपने बहिन और भांजे का सुन कर झिन्झिला जाता है

Devraj:hum में से किसी न किसी को सेना क साथ कुबेरी जाना होगा

Shamshera:me तो ये कहूंगा अब्बा हुज़ूर क आप राजा देवराज क साथ कुबेरी चले जाये क्यू क कुबेरी लूटना हमारे लिए ज़्यादा ज़रूरी है

Sultan:par शहज़ादे आप अकेले कैसे सामना करेंगे शाहज़ेब का वो जुंग जीतने क लये किसी भी हद्द तक जा सकता है

Shamshera:aap भरोषा रखे फ़तेह हमारी होगी

Devraj:theek कह रहे हो युवराज सुल्तान को हम अकेला न तो गहतराष्ट्रा रख सकते है न वह भेज सकते है

Sultan:han देवराज आज कल ताब्यात नासाज़ रहती है और कभी कभी भूलने भी लगा हु उसके अलावा आज भी तलवार में धार वही है हमारे

Devraj:ji आप अब भी 100 क बराबर है सुल्तान पर हम कोई जोखिम नहीं ले सकते ,आप हमारे साथ कुबेरी चलिए

Shamshera:aap लोग जाये और ये जुंग मुझ पैर छोर दीजिये हम संभल लेंगे इस दिल्ली क शाहज़ेब को

Devraj:sainiko क्यू क बादशाह शाहज़ेब अपने सैनिक को कुबेरी भेज दया है इसलिए हम आधे सैनिक को यही रखेंगे और आधे मेरे और सुल्तान क साथ कुबेरी जायेंगे

कुछ देर में हे आधे सैनिक बाँट जाते है और सब अब तक पहाड़ से निचे आचुके थे

Devraj:yaha का कमान शहज़ादे शमशेर संभालेंगे ,घबराना नहीं शाहज़ेब इस बार बच क नहीं जाना चाहिए

Shamshera:devraj जी आपका दुश्मन हमारा दुश्मन है आप फ़िक्र न करे बादशाह शाहज़ेब इस बार मेरे हाथो बचेगा नहीं

Devraj:theek है युवराज आप क भरोसे में अपना शत्रु छोर रहा हु

सुल्तान और देवराज 25000 फौज ले कर कुबेरी की ओरे चल देते है और शमशेर अपने 25000 फौज क साथ

Shamshera:sathio अभी हम हमला नहीं करेंगे

सैनिक 1:क्यू शहज़ादे हमे इनके पीछे हे जा कर इन्हे सबक सीखना था

Shamshera:ab ये जा रहे है गहतराष्ट क सैनिको से लड़ेंगे और जैसे हे ये शाहज़ेब गहतराष्ट्रा अपना झंडा लहराएगा हम आक्रमण कर देंगे .इस से फायदा ये होगा क हम सिर्फ दिल्ली से आये फौज से लड़ेंगे और गहतराष्ट्रा से हमे नहीं लड़ना hoga..islye थोड़ा आराम कर लो

Sainik2:par शहज़ादे सुल्तान ने तो कुछ और कहा था

Shamshera:uff अब आराम करने कह रहा है बादशाह तो भी मंज़ूर nahi..sab अपने घोड़ो से उतर कर बैठ जाओ और खाओ पीओ आराम करो

सब सैनिक हसने लगते है और अपने घोड़े से उतर कर बैठ जाते है कोई लेट जाता है

शमशेर भी पास क एक पठार पर जा कर बैठ जाता है और सोचने लगता है

Shamshera:man me)Agar अम्मी ठीक थी तो ये लोग कौन थे जो इनको पकड़ना चाहते थे और देवराज क्यों अपने बहिन क ससुराल पर हमला करने क लये हमारे साथ नहीं आया और न हे कहा क उनके परिवार को नुकसान न ho..or मेरे बलदेव कहने पर वो बात पलट रहे थे ..इसका मतलब या तो वो लोग राज्य में नहीं है या तो उनके खिलाफ हो गए है देवराज जी

ये सब सोचते हुए शमशेर झट से उठ ता है

Shamshera:chalo एक बार फिर से जासूसी की जाये गहतराष्ट्रा की

Shamshera:ae इधर आओ

शमशेर अपना मुकुट उतरता है

"सुनो मुझे पगड़ी बांधने में मदद करो"

Sainik:par क्यों शहज़ादे आप जुंग में है पगड़ी से हिफाज़त नहीं हो पायेगी

shamshera:bade भोले हो या मुझे समझते ho..me इसलिए ुअटारा हु ताके मुझे कोई पहचान नहीं पाए में गहतराष्ट्रा हो कर आता hu,jayza ले कर

Sainik:par आपका अकेला जाना खतरे से खली नहीं शहज़ादे ये जासूसी का वक़्त नहीं है आप जुंग इ मैदान में है

Shamshera:shamshera को तलवार छू ले ऐसा हो नहीं सकता है

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शमशेर अपना घोड़े पैर बैठ

shamshera:mere आने तक कोई हिलना नहीं भले से पीछे हो जाना पर आगे नहीं

सैनिक मुँह देखते रहते है और शमशेर घोडा क साथ हवा से बाते करने लग जाता है

सूर्य की पहली किरण खिल रही थी और रात भर गमहीन माहौल क बाद सुबह भी शांत था ,पूरा रात कोई सो नहीं सका

सुबह राजा राजपाल महल से बहार अत है देखता है सैनिक फांसी की तैयारी कर रहे थे

कुछ देर में पूरा गहतराष्ट्रा धीरे धीरे फांसी देने वाले स्थान पर इकठा हो जाता है

Senapati:Sainiko जाओ बलदेव को ले आओ

सैनिक जा कर बलदेव को ले आते है और फ़ासी क तख़्त पर खड़ा कर क बांध देते है

महल से जीविका और षुरूश्ती आजाती है साथ हे साथ रात भर कमला जो वैध जी क यहाँ जाग रही थी वो भी रट हुए आती

पुरे समाज क सामने से बलदेव को फांसी देने की तैयारी चालू थी और सब क आखो में ासु थे गहतराष्ट्रा का भविष्य जो था आज वो हमेशा क लये ख़तम होने वाला था

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अंदर देवरानी जो रस्सी से बंधी थी अपना हाल रो रो कर ख़राब कर ली थी रात भर में और अपने आखे बंद कए रात भर भगवन से प्राथना कर रही थी

Devrani:man me)bhagwan अगर आज मेरे बलदेव को कुछ हो गया तो मेरा तुझ से विश्वास उठ जायेगा और तेरा नाम अपने जीवन में कभी नहीं लुंगी ,भगवन मेरे बलदेव को बचा ले भले तू मेरी बलि ले ले

राजपाल क दोनों आखो की लाली बता रही रही थी क वो आज अपने पुत्र को फांसी पर चढाने क लये आतुर था

Senapati:maharaj अब सूर्य उदय होने वाला है ..आपकी आज्ञा हो तो फांसी दी जाये

Rajpal:ha..

जैसे हे कहता है लोग हाहाकार मचा देते है और लोगो की शोर गुल में एक घोड़े क आने की आहात आती है और वो घोड़े पैर से एक सैनिक गिरता है जिसके पुरे बदन पैर तीर लगे थे

sainik:maharaj ..

सेनापति और राजपाल दौड़ कर जाते है सैनिक क पास

Senapati:bolo कौन क्या तुम्हारे साथ ऐसा

Sainik:maharaj..wo डिल का शाहज़ेब गहतराष्ट्रा में घुस आया है और कभी भी हमला कर सकता है

ये कह कर सैनिक अपना डैम तोड़ देता है

Rajpal:senapati सैनिको को एकतत्रित करो गहतराष्ट्रा खतरे में है

Senapati:sainiko .. गहतराष्ट्रा में हमारे शत्रु दिल्ली क बादशाह शाजेब कभी भी हमला कर सकते है ..गहतराष्ट्रा क लोगो आप सब से अनुरोध है क आप सब हमारा सहयोग दे..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 83

गहतराष्ट्रा का सैनिक मरते डैम तक अपने राष्ट्र क हिट में काम करते हुए गहतराष्ट्रा वासिओ को शाहज़ेब क आक्रमण करने की बात कह देता है और पुरे गहतराष्ट्रा में हलचल मच जाती है लोग बलदेव को भूल जाते है सेनापति लोगो को भागते दौड़ते देख सब को गहतराष्ट्रा क सैनिको का साथ देने क लये कहता है

Senapati:budhe और बचे को कृपया कर क सुरक्षित स्थानों पर रखे ,

महाराज अब इस बलदेव का क्या करे

Rajpal:Pehle हमे शाहज़ेब से निपटना है और रही बात बलदेव की तो में इसे शाहज़ेब क साथ हे अपने तलवार से ख़तम कर दूंगा तुम सब जाओ और महल क चारो ओरे सैनिक को तैयार करो

Senapati:jaisi आपकी इच्छा महाराज

Senapati:is सैनिक क बलिदान व्यर्थ नहीं जनि चाहिए हम सब को शाहज़ेब को किसी हाल में रोकना है

सैनिक अपने भला तलवार और तीरंदाज़ अपने बन और तीर क साथ महल क चारो ओरे घेराव कर लेते है

महारानी जीविका और षुरूश्ती महल क अंदर जाती जय

Jeevika:bahu महल का हर दरवाज़ा और खिड़की लगा दो

Shurushti:ji माँ जी

Jeevika:ye सब देवरानी क पाप का फल है जो हमारे गहतराष्ट्रा में आज ऐसी मुसीबत आती है

Kamla:radha तुम जा कर पीछे का द्वार बंद क्र दो में खिड़किया लगाती हु

Jeevika:ye बादशाह शाहज़ेब जब दिल्ली पैर आक्रमण क्या था कई वर्ष पहले तो वह क हर स्त्री को इनके सैनिको ने उठा लिया था

Shurushti:Maa जी मुझे बहुत डर लग रहा है

Jeevika,darne की ज़रूरत नहीं हम उनसे युधा करेंगे और अगर कुछ ऐसा हुआ बहु तो हम तहखाने क रस्ते से महल क बहार निकल जायेंगे

Shurushti:wo कहा है

Jeevika:mere कक्षा में है

Shurushti:theek है पर मुझे तो उसका पता नहीं था

Jeevika:bahu राजपाल क पिता ने गुप्त रखा सब हम इस रास्ते से सीधा गहतराष्ट्रा क सीमा तक पहुंच सकते है ज़मीन क अंदर हे अंदर

Shurushti:Bhagwan न करे ऐसा कुछ हो

कमला और षुरूश्ती महल क हर खिड़की और दरवाज़ा बंद कर देती है

बहार का नज़ारा ऐसा था क राजपाल और सोमनाथ सैनिको क साथ शाहज़ेब क आने की प्रतीक्षा कर रहे थे और सैनिक सब तैयार थे

somnath:sainiko सब तैयार ?

Sainik:Han हम तैयार है

Somnath,darne की ज़रूरत नहीं मेरे बहादुर सैनिको आज तक गहतराष्ट्रा पर कोई नहीं कब्ज़ा कर सका ये शाहज़ेब को भी खली हाथ लौट कर डिल जाना होगा

Rajpal:Sainiko हमारी माँ गहतराष्ट्रा पैर ये विदेशी न कल कब्ज़ा कर पाए थे न आज कर पाएंगे और शाहज़ेब इस बार दिल्ली ज़िंदा नहीं जायेगा

Sainik:han शाहज़ेब ज़िंदा नहीं जायेगा

अब शांत माहौल था बलदेव ये सब देख रहा रहा उसके हाथ पेअर अब भी बंधे थे

महल में कमला देवरानी क पास जाती है जो राजपाल क कक्षा में बंधी थी कमला देवरानी क मुँह पर बंधा कपडे को खोलती है

Kamla:chup करो महारानी

Devrani:kya चुप करू जब मेरा प्रेमी मेरे प्रेम में अपना जान दे दया फांसी पैर लटक गया मेरा ज़िंदा रह क क्या फायदा मुझे भी मार दो कमला ..गाला घोट दो मेरा

देवरानी फफक फफक कर रो पड़ती है

कमला क आखो में ासु आजाता है

Kamla:aisa नहीं कहते महारानी भगवन बहुत बड़ा है उसने तुम्हारी सुन ली बलदेव का फ़ासी ताल गया है

देवरानी ये सुनते हे ऐसा महशुस करती है जैसे उसके शरीर से रूह निकल गयी थी पर फिर से आगयी हो

Devrani:kya तुम सच कह रही हो कमला

Kamla:han पर बुरी खबर ये है क दिल्ली क राजा हम पर आक्रमण कर सकते है किसी भी क्षण

Devrani:kya ..

kamla:han महारानी और उसके सेना जितनी क्रूरता करती है वो तो जानती हो शाहज़ेब खुद जो राज्य लूट ता है उस राज्य क राणिओ को अपने हरम में रख लेता है

Devrani:hume क्या करना चाहिए कमला

Kamla:me वही बताने आई हु आपको यहाँ एक रास्ता है महारानी जीविका क कक्षा में जो हमे ज़मीन क भीतर से हे गहतराष्ट्रा क सीमा तक पंहुचा देगी

Devrani:samajh नहीं अत शाहज़ेब क हमले का में धन्यवाद् कहु या ..

Kamla:bass जो होता है अचे क लये होता है

Devrani:tumne देखा मेरे बलदेव को कैसा है

Kamla:wo ठीक है उस पर बहुत ज़ुल्म क्या महाराज ne.aap दोनों को इतने बड़े संसार में कही जा कर बास जाना था

Devrani:me भागने वालो में से नहीं अब मुझे मेरा हक़ चाहिए और यही गहतराष्ट्रा में चाहिए ..मेरे और बलदेव का रिश्ता यही शुरू हुआ था कमला हमारी यदि यहाँ से जुडी है हमे कही और नहीं जाना

Kamla:kya बचपना hai..khair बाद की बात बाद में पहले हमे बलदेव को छुड़ाना होगा

Devrani:par कैसे

Kamla:wo में देख लुंगी बास अब आप रोना बंद कर दो और सही समय पर यहाँ से निकल जाना बलदेव क साथ

बहार सेना शाहज़ेब की सेना की प्रतीक्षा में कड़ी थी और तभी हवा जो तेज़ चल रही थी उसमे धूल उड़ने लगे और घोड़ो की चलने की आवाज़ क साथ घोड़ो की हिह्याने की आवाज़ आने लगी सब की नज़र सामने जाती है दूर दिल्ली क सैनिक गहतराष्ट्रा की ओरे बढ़ रहे थे

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Somnath:wo आगये है महाराज

Rajpal:aane दो वापस नहीं जा पाए

राजपाल अपना तलवार रख कर तीर कमान उठा लेता है

Somnath:teerandaaz आगे हो jao..Ghudsawar पीछे तैयार रहना है

जैसे जैसे शाहज़ेब की फौज आगे आरही थी उनके तादाद देख कर सैनिक आपस में बात करने लगते है

Somnath:Chup करो सैनिको हिम्मत मत हारो ..युधा सेना से नहीं हिम्मत से जीती जाती है और हम उनसे गिनती में काम है तो क्या हुआ हम एक उनके 10 क बराबर hai..jai भवानी

Sainik:jai भवानी

सोमनाथ आकर राजपाल से पूछता है धीरे से

Somnath:maharaj क्या हमे कुबेरी से कोई मदद मिल सकती है अभी?

Rajpal:chinta नहीं करो भले हे रतन सिंह गुस्से में गया है यहाँ से मुझे विश्वास है वो हमारी मदद करने क लये ज़रूर सेना भेजेगा

Somnath:to फिर हमे अपना दूत भेज देना चाहिए

rajpal:humne पहले हे अपना दूत भेज दया है कुबेरी

Somnath:wah ये आपने ाचा क्या जब तक हमे कुबेरी से मदद नहीं मिल जाती तब तक तो हम इन शाहज़ेब की सेना को हम संभल लेंगे

शाहज़ेब अब ठीक महल क सामने आकर रुकता है

Shahzeb:fauzio अब हम इन्हे मसल क रख देंगे सब हमला करने क लये तैयार?

Sainik:hum तैयार है

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Shahzeb:yalgaar हो

शाहज़ेब क सैनिक आवाज़ करते हुए महल की ओरे घोड़ो को बहगते है

इधर

somnath:Teerandaz आक्रमण

तीरो की बौछार कर दी जाती है जो कई शाहज़ेब क सैनिको को घोड़े से निचे गिरा रही थी

somnath:Ghudsawar आगे बढ़ो तीरंदाज़ हाथ में भला उठाओ

डिल क सेना सामने और महल क तरफ से गहतराष्ट्रा की सेना दोनों अपने घोड़ो को तेज़ी से भगा रहे थे और कुछ हे पालो में दोनों आपस में मिल जाते है और शुरू हो जाता है मार काट दोनों तरफ से सैनिक एक दूसरे पर हमला कर रहे थे और मार रहे थे

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शाहज़ेब पीछे खड़ा देख रहा था उसने बड़े चतुराई से अपने आधी सेना को हे पहले भेजा था लड़ाई क लये उसकी आधी सेना अब भी पीछे थी

Shahzeb:bhaio अब ये आग क गोलों से महल क दीवाल को छल्ली कर दो

शाहज़ेब की सेना आग क गोलों को तोपों में लगा कर मरना शुरू कर देते है जो सीधा राजपाल क महल क बाहरी दीवारों पैर जा कर गिर रहे थे

Somnath:ye क्या ये शाहज़ेब ने अपनी फौज पूरी नहीं भेजी थी

बलदेव अब भी बंधा हुआ खड़ा था बलदेव क सब्र का बांध टूट जाता है

Baldev:somnath वो शाहज़ेब है उसको हराना हासन नहीं मुझे खोल दो नहीं तो तुम सब की नीति क वजह से पुरे गहतराष्ट्रा को भुगतना पड़ेगा

Rajpal:somnath इसे कह दो आज इसका अंतिम दिन है और अपना पापी मुँह न खोले

Somnath:Hume हमारा काम करने दो बलदेव नहीं तो मजबूरन तुम्हारे मुँह को भी बांधना होगा

Somnath:sainiko शाहज़ेब क सैनिक पीछे भी है उनको मुँह तोड़ जवाब दो गोले मारो उन पर

तीरंदाज़ अपने तीर कमान छोर तोपों में गोलों में आग लगा कर शाहज़ेब की खेमे में मरने लगते है अब आसमान में दिन में रात का दृश्य था .महल क दीवारों पैर जैसे हे आग क गोले लगते और बहार सैनिको क चीख कर मरने की आवाज़ सुनते गहतराष्ट्रा क घर घर में सब क शरीर कैंप उठ ते

उधर शमशेर भी शाहज़ेब क सेना क पीछे पीछे महल तक आजाता है और महल क पास आकर अपना रास्ता बदल लेता है क्यू क शमशेर पहले भी गहतराष्ट्रा आचुका था वो गली गली जनता था और किसी भी तरह से वो गहतराष्ट्रा क सैनिक क रूप में गहतराष्ट्रा में घुस जाता है शमशेर को इतनी सुनी गहतराष्ट्रा की गाओ और गालिया कभी नहीं लगी जितनी आज थी वो महल क करीब आकर अपने घोड़े को महल क पीछे बांध देता है और अपने हाथ में तलवार लिए जहा पर युधा चल रही थी वह जाता है दूर से उसे बलदेव बंधा हुआ दीखता है और निचे राजपाल और सोमनाथ अपने मंत्रीओ क साथ युधा की रणनीति पर काम कर रहे थे

शमशेर देखता है महल क सामने मैदान में सो गुटों की भिड़ंत हो रही है शमशेर मुस्कुराते हुए

Shamshera:Shahzeb तो भरी पद रहा है गहतराष्ट्रा पर देखते है मज़ेदार होने वाला है

शाहज़ेब ये कह कर अपना तलवार उठा कर भागते हुए राजपाल और सोमनाथ की ओरे जाता है

"जय गहतराष्ट्रा जय भवानी"

सोमनाथ देखता है क ये कौन सैनिक पीछे छूट गया था

सोमनाथ.. कौन हो और अब जा कर तुम्हे सूझ रहा है हम पर आक्रमण हो गया है

शमशेर समझ जाता है हुलिए से क यही सेनापति है और वो राजपाल है

Shamshera:senapati जी हम किसान है पर हमारे पिता एक योद्धा थे जो राजा राजपाल क पिता का साथ जीवन भर दिए हम से रहा नहीं गया तो हम अपने पिता का तलवार और पोषक पहिं आगये ..कुछो गलत कए क्या

शमशेर बड़ी होशियारी से अपने भासा बदल कर सोमनाथ और राजपाल को चकमा दे देता है

Rajpal:bas अब पूरी रामकहानी न सुनाओ सैनिको क साथ जुड़ जाओ

Somnath:suno तुम उन तीरंदाजों क साथ रुको जब हम कहे तो राण में जाना

शमशेर हाथ जोड़ कर

"जो आगया महाराज"

शमशेर की इस बात को बलदेव भी देख रहा था और शमशेर सेना की ओरे जाते हुए बलदेव को देखता है और बलदेव को देख आँख मार देता है

Baldev:man me)bahurupiya शमशेर

और उसके चेहरे पैर एक मुस्कान आजाती है

युधः शुरू था और शाहज़ेब की सेना गहतराष्ट्रा की सेना पर भरी पद रही थी अब दोपहर हो गया था

Somnath:maharaj अब हमारे सैनिक राण में बहुत काम है अब हमे जाना होगा

Somnath:Jitne सैनिक है कान खोल कर सुन लो हम मर जायेंगे लेकिन शाहज़ेब को कभी गहतराष्ट्रा पर कब्ज़ा नहीं करने देंगे

राजपाल और सोमनाथ बाकी सैनिको को तैयार कर घोड़ो पे सवार हो कर राण भूमि में जाने लगते है

Somnath:hum शाहज़ेब की सैनिको क मौत क घाट उतर देंगे

सब सैनिक राजपाल और सोमनाथ क पीछे जाने लगते है और शमशेर अपने घोड़े को राजपाल की सेना क साथ जुड़ता है और जब देखता है राजपाल और सोमनाथ युधा शुरू कर दिए अपने घोड़े को छोर दौड़ कर बलदेव की ओरे आटा है

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राजपाल और सोमनाथ अपने तलवार कला का ाचा प्रदर्शन करते है और शाहज़ेब क सेना में हड़कंप मच जाती है

Shahzeb:peeche मत हटो भइओ

शाहज़ेब की सेना अपने बादशाह की बात सुन कर डट कर सामना करने लगते है

शाहज़ेब अब आगे आकर अपने आखिरी दस्ते क साथ राजपाल और सोमनाथ क सैनिको क साथ लड़ने लगते है

कुछ देर में हे गहतराष्ट्रा की सेना बहुत काम हो जाती और वो भागने लगती है और शाहज़ेब की सेना उनको खदेड़ते हुए महल की ओरे बढ़ने लगते है

saiinik:bhago हम सब मारे जायेंगे

Rajpal:bhago मत सैनिको अपनी आखिरी सांस तक लड़ो

somnath:maharaj अब हमारा जीतना मुश्किल है आप तहखाने क रस्ते से राज परिवार को बचा लीजिये में इंसबको रोकता हु

सोमनाथ और राजपाल महल क आगे खड़े हो कर शाहज़ेब क सेना पर भरी पद रहे रहे

somnath:maharaj आप अंदर जाए

राजपाल की नज़र तभी सामने पड़ती है और उसे बलदेव नहीं दीखता है

Rajpal:ye बलदेव कहा गायब हो गया

******(हुआ ये था)

शमशेर फौज को छोर आकर बलदेव क पास अत है और उसके हाथ की रस्सी को काट कर उसे आज़ाद करता है

Baldev,dhanyawad भाई शमशेर

Shamshera:tum मेरे छोटे भाई हो चलो अब हमे निकलना होगा यही सही समय है शाहज़ेब क फौज इस तरफ आरही है

Baldev:tum जा कर घोडा तैयार करो में माँ को ले कर आटा हु )

********

somnath:aap अपनी जान बचाये महाराज

राजपाल घोड़े से उतर कर भाग कर महल

में घुसता है पर तब तक शाहज़ेब भी महल तक पहुंच जाता है और सोमनाथ को चारो ओरे से घेर लेता है

शाहज़ेब अपने सैनिको क साथ महल में घुस जाता है

सोमनाथ अपने आप को घिरा प् कर घोड़े से कूद जाता है और महल की ओरे भागता है कुछ सैनिक उसके पीछे भागते है सोमनाथ पीछे मुद कर बैठ कर उनके पेअर पर तलवार मरता है और महल में घुसता है उसके पीछे शाहज़न की सैनिक भी घुस जाते है

बलदेव महल में आकर अपने माँ को इधर से उधर हर कक्षा में देख रहा था तभी उसके कान में हंगामा होता है और वो समझ जाता है क महल में शाहज़ेब ने ढाबा बोल दया है और वो और शिद्दत से अपने माँ को हर कक्षा में ढूंढ़ता है

इधर कमला और राधा जीविका साथ उसके कक्षा में थी और उनके साथ वैध जी भी थे

Kamla:Maharani जीविका आप चले जाये सब महल में ाएगए है

Jeevika:tum सब भी चलो मेरे बीटा राजपाल कहा है उसे भी ले चलो में अकेला जीवित रह क क्या करुँगी

Kamla:aap बात मानिये आप जाये एक काम कीजिए वैध जी आप ले जाये इनको अगर वो सब इस कक्षा में आगये तो कोई बच क निकल नहीं पायेगा

Jeevika:shurushti कहा है उसे लाओ

जीविका ये कह कर तहखाने क सीडीओ से उतरने लगती है अपनी वैशाखी ले कर और उसका साथ देते हुए वैध जी भी उतरने लगते है दूनो निचे पहुंच कर गुफा क रस्ते पर चलने लगते है

Kamla:maharani षुरूश्ती कहा हो आप

षुरूश्ती अपने कक्षा में हे थी जैसे हे शाहज़ेब क सैनिक महल में घुसे वो अपने कक्षा से निकलने हे वाली थी क शाहज़ेब क सैनिक उस तरफ आने लगे और न चाहते हुए भी वो रुक कर अपना कक्षा का दरवाज़ा बंद कर लेती है

कमला जीविका क कक्षा में षुरूश्ती का इंतज़ार कर रही थी क्यू क उसे देवरानी को भी बचाना था

कमला जीविका जिस रस्ते से गई थी उसको छुपा देती है कारपेट से और खुद देवरानी क को बचने क लये निकल पड़ती है

महल क बीचो बीच शाहज़ेब और राजपाल लड़ रहे थे और वही उसके सैनिक सोमनाथ से लड़ रहे थे

कमला बहार निकलती है तो देखती है बलदेव उसे दीखता है

Baldev:kamla माँ कहा है

कमला बलदेव को देख खुश हो जाती है

Kamla:wo राजपाल क कक्षा में है

दोनों भाग कर राजपाल क कक्षा में आते है जिसे शाहज़ेब क सैनिक भी देख लेते है उनके पीछे वो भी दौड़ने लगते है

"पकड़ो उन्हें कोई बच नहीं पाए"

"कमला जल्दी भागो"

दोनों आते है और देवरानी को बंधा देख बलदेव का खून खौल जाता है

देवरानी आहात सुन कर आखे ऊपर करती है उसके ायखो क सामने बलदेव था

देवरानी मन me:Bhagwan धन्यवाद में इसके बदले में चारो धाम यात्रा करुँगी मेरे बलदेव की जान बचन्ने क लये धन्यवाद्

Baldev:maaa

बलदेव और कमला झट से देवरानी क रस्सी को खोलते है

Devrani:baldev तुम ठीक तो हो न

बलदेव देवरानी को गले से लगा लेता है

कमला जा कर कक्षा का दरवाज़ा लगा देती है

Kamla:abhi सही समय नहीं है तुम दोनों निकलो यहाँ से

Baldev:chalo देवरानी

Devrani:chalo राजा

दरवाज़े पैर अब शाहज़ेब क सैनिक आजाते है और दरवाज़ा पीटने लगते है

kamla:tum दोनों खिड़की से चले जाओ

Devrani:par तुम

Kamla:meri चिंता मत करो तुम लोग जाओ

Baldev:dhanywad कमला फिर मिलेंगे

कमला क आखो में ासु आजाते है

Kamla:kamla इतने जल्दी नहीं मरने वाली तुम दोनों क बचे को देख क हे मारेगी और कमला क आखो से ासु छलक जाते है बलदेव देवरानी को उठा कर खिड़की पैर चढ़ा देता है और बरी बरी से दोनों महल क दूसरी ओरे कूद जाते है

तभी कमला को ज़ोर का धक्का लगता है और दरवाज़ा टूट जाता है और सैनिक अंदर आजाते है

एक सैनिक आकर कमला को पकड़ कर एक थप्पड़ मरता है

"हरामज़ादी कहा गए वो लोग"

कमला को थप्पड़ इतना ज़ोर से लगता है क वो सीधा दूर जा कर गिरती है

बलदेव देवरानी का हाथ पकडे भाग रहा था

तभी इन के दोनों तरफ से सैनिक आजाते है बलदेव थोड़ा रुकता है और अपने कमान क तीरो से बरी बरी से दोनों सैनिक को मार गिरता है

और फिर देवरानी का हाथ पकड़ कर भागने लगता है

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देवरानी मुस्कुरा कर बलदेव को देखती है

इधर राजपाल क हाथ से तलवार छूट जाती है और सोमनाथ भी अपने हाथ खड़े कर देता है

Shahzeb:pakad लो इन्हे..

शाहज़ेब भाग कर हर कक्षा की तलाशी लेने लगता है

शाहज़ेब अपने हाथ में तलवार लिए जैसे हे महारानी षुरूश्ती क कक्षा पर धक्का देता है दरवाज़ा बंद पता है

शाहज़ेब एक ज़ोरदार धक्का मारता है और 6 फिट क ऊपर और जानवर जैसी ताक़त रखने वाला शाहज़ेब दरवाज़ा को तोड़ गिरा देता है और अब सिर्फ पर्दा हे लगा था दरवाज़े पैर

शाहज़ेब अपनी तलवार आगे बढ़ता है उसे सामने महारानी षुरूश्ती दिखती है जिसके हाथ में तलवार था

shahzeb:dekh कर तो लगता है क यहाँ की मल्लिका हो पर तलवार आपने सही से पकड़ा नहीं है

षुरूश्ती एक कदम पीछे होते हुए

Shurushti:tumne सही समझा शाहज़ेब हमे तलवार पकड़ना भी आता है और सर काटना भी

Shahzeb:to आप जानती है हमे

Shurushti:tujhe जैसे नीच को सब जानती है कुत्ते

शाहज़ेब गाली सुन कर गुस्से में अत है फिर षुरूश्ती को ऊपर से निचे तक देखता है

Shahzeb:kad क साथ आपने ज़ेहन भी छोटा है महारानी आपको एक बादशाह से बात करने नहीं आती

षुरूश्ती आगे बढ़ कर तलवार चलती है

Shahzeb:haha उम्र ढल गयी लेकिन अब भी लड़ाकू हो महारानी

और शाहज़ेब आगे बढ़ कर एक ज़ोर का प्रहार करता है जिस से षुरूश्ती क हाथ की तलवार गिर जाती है

शाहज़ेब अपना तलवार आगे बढ़ा कर षुरूश्ती क गर्दन पर रख

"चीज़ तो बड़ी मस्त हो पुराणी शराब हो तुम "

शाहज़ेब एक हाथ से षुरूश्ती क कमर पर हाथ रख कर सहलाता है और अपने तलवार फेक कर षुरूश्ती को दबोच कर बहो में ले लेता है

"आह मेरी रानी तेरी जैसी माल को छोड़ कर मज़ा आजायेगा आज"

"छोर दे मुझे शाहज़ेब अंजाम ाचा नहीं होगा"

शाहज़ेब आगे बढ़ कर षुरूश्ती क होठ को अपने होठ में भर लेता है और चूसने लगता है

इधर बलदेव और देवरानी महल से भागने में कामयाब हो जाते है और शमशेर अपने साथ एक और घोडा लिए दोनों का इंतज़ार कर रहा था

"जल्दी इस घोड़े पैर बैठ मेरे पीछे आजाओ"

ये कह कर शमशेर अपने घोड़ो को भागता है

बलदेव देवरानी को घोड़े पैर बिठाता है फिर खुद कूद कर बैठ जाता है और शमशेर क पीछे जाने लगता है

दोनों तरफ से शमशेर क पीछे सैनिक थे शाहज़ेब क

शमशेर अपने दोनों हाथो में तलवार लिए सब को काट रहा रहा और बलदेव भी अपने हाथ में तलवार लिए उसके पास जो सैनिक हमला करने आरहा था उसे मरते जाता है

कुछ दूर यु हे चलते हुए अब शमशेर और बलदेव क पीछे अब कोई नहीं था

बलदेव पीछे मुद कर देखता है

Baldev:shamshera अब हमारा पीछा कोई नहीं कर रहा

Shamshera:chalte रहो बलदेव ये शाहज़ेब हरामी है कही से भी टपक सकता है

शमशेर बलदेव देवरानी हवा में बात करते हुए गहतराष्ट्रा की सीमा पर कर रहे थे

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 84

बलदेव और देवरानी को शमशेर बचा कर ले आता है और उधर वैध जी क साथ महारानी जीविका भी गुफा क रस्ते से बच कर निकल जाती hai.mahal में राजपाल और महारानी षुरूश्ती फस्स जाती है और साथ हे राधा कमला और सेनापति सोमनाथ भी पकड़ा जाता है

शमशेर अपने सैनिको को देखता है जो आराम कर रहे थे और वो घोड़े से उतर कर

Shamshera:Aajao बलदेव

बलदेव क घोड़े पे से पहले देवरानी उतरती है फिर बलदेव घोड़े की लगाम पकड़ कर चलते हुए उसे सेना देख हैरानी होती है

Baldev:Ye इतने सैनिक यहाँ पर क्या कर रहे है

Shamshera:ye तो काम हो गए है आधे फौज हमने कुबेरी भेज दिए

Baldev:Par क्यू

Shamshera:Q क हम कुबेरी लूटने आये है बलदेव इसलिए गहतराष्ट्रा पर चढ़ाई किये बिना हम लूट नहीं सकते पर राजा रतन दिखाई नहीं दिया

Devrani:wo महल में नहीं है कब का चला गया अपने राज्य

Shamshera:sab बात तो ठीक है पर बलदेव तुम्हे क्यू अपने हे राज्य में बंदी बनाया गया

बलदेव ये सुन कर देवरानी की ओरे देखता है

देवरानी बलदेव को कहने का हाँ में इशारा कर देती है

Baldev:zara इस तरफ आओ

Shamshera:bolo भी फौज हम से दूर है ..मुझे ये बात समझ नहीं आती बाप आखिर क्यू अपने बेटे को बंदी बनाएगा

बलदेव वही रुक जाता है

"इधर आओ शमशेर"

शमशेर पीछे मुद कर बलदेव क पास आता है

Baldev:bhai बात कुछ ऐसी है क मैंने ऐसा कदम उठा लय जिसके वजह से ये सब हुआ

Shamshera:kaisa कदम बलदेव ..अगर तुम मुझे नहीं बताना चाहते हो तो कोई बात नहीं

Devrani:nahi नहीं बीटा तुमने तो अपने जान पर खेल क हमे बचाया तुम्हारा अहसान हम नहीं भूलेंगे

Shamshera,devrani खला कर दिया न एक पल में पराया वो तो हमे शक हुआ क आप दोनों खतरे में हो और में तो महल सिर्फ वह की फौज का जायज़ा लेने गया था क शाहज़ेब की फौज और ताक़त कितनी है और वह मुझे बलदेव बंधा हु दिख गया

Baldev,dhanywad मेरे mitra..baat ये है क में इनसे प्रेम करता हु

Shamshera:acha तो इसमें क्या नै बात है

Baldev:tum समझ नहीं रहे हो में माँ को एक स्त्री क रूप में चाहता हु और हम एक दूसरे क बिना रह नहीं सकते

शमशेर अपनी आखे बड़ी करते हुए

Shamshera:hmm अगर में समझ प् रहा हु तो तुम अपने माँ को चाहते हो इश्क़ करते हो तुम दोनों एक मर्द औरत जिस तरह करते है

Devrani:Han बीटा हम कब एक दूसरे को चाहने लगे पता भी नहीं चला

ये कह कर देवरानी अपना सर निचे कर लेती है

Shamshera:hhaahhahahaha

हस्ते जा रहा था

Baldev:kya हुआ है क्यू रहे हो

Devrani:beta तुम्हे पसंद नहीं आई ये बात

शमशेर अपनी हसी रोकते हुए

Shamshera:me इसलिए है रहा हु क आप दोनों एक दूसरे को प्यार करते है एक शौहर बीवी की तरह तो फिर में आपको खला कहता हु तो बलदेव को क्या खलु कहु?

और शमशेर फिर ठहाका लगाकर हस्ता है

बलदेव ये सुन कर शर्मा जाता है और देवरानी अपना सर निचे किये रहती है

Shamshera:ya फिर ये हो सकता है क बलदेव मेरा छोटा भाई है तो आप मेरी भाबी हो गयी देवरानी खला

Devrani:chup करो शमशेर शैतान की तरह हसे जा रहे हो

Shamshera:muaf कर दो

शमशेर हसी रोकते हुए कहता है

shamshera:Baat तो ये है क में बहुत खुश हु सुन कर ये बात क्यू क जैसे बलदेव तुम अपने माँ से मुहब्बत करते हो वैसे हे डिल हे डिल में मुझे भी मेरी अम्मी जान से मुहब्बत है

बलदेव और देवरानी इस तरह से शमशेर क मुँह से साफ़ सपाट सुन और उसकी हिम्मत को देख अपने आखे फाडे शमशेर को हे देख रहे थे

Devrani:tumhari हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी वैसे मुझे ये पहले से पता था

और इस बार देवरानी है देती है

अब बलदेव और शमशेर देवरानी को अचंभित हो कर घुड़ रहे थे

Devrani:tum दोनों उल्लू की तरह क्यू घुड़ रहे हो

Shamshera:par खला आप को कैसे पता ?मई तो कभी किसी को नहीं बताया

Devrani:Babu हो तुम मेरे सामने भले कितने भी जासूस बनो ..पहले दिन हे मई तुम्हारे आखो का पीछा करते हुए देख ली थी क तुम किस निगाह से अपनी अम्मी को देखते हो

बलदेव और शमशेर देवरानी को हे देख रहे रहे थे

Shamshera:aap तो बहुत तेज़ निकली खैर अब मुझे लगता है ये मुमकिन है

Devrani:namumkin ...

Shamshera:Q

Devrani:maine दाना डालने की कोशिश की तुम्हारे अम्मी को पर वो हमेशा नकार दी ये कह कर क कितना बड़ा गुनाह hai.jaha तक में समझी हु भूरिया दीदी मर जाएगी पर तुम्हारे प्रेम को स्वीकार नहीं करेगी

Shamshera:koi बात नहीं खला जान अब आप दोनों को हे देख कर खुश रह लूंगा

आखे नाम करते हुए कहता है

Devrani:Shamshera बीटा तो तुम विवाह कर लेना अछि सी लड़की देख कर

Shamshera:nahi खला जान मेरे ज़िन्दगी में उनके सिवा कोई और नहीं आ सकती

Devrani:islye तुम हमेशा शादी क लये मन कर देते ho..to क्या जीवन भर कुंवारे रहोगे?

Shamshera:yaado क सहारे ज़िन्दगी काट लूंगा

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Baldev,devrani इसके बातो को क्या सुन रही हो ये बहुत बड़ा ठरकी है..

शमशेर ये देख क बलदेव अपने माँ का नाम ले कर बुला रहा है अपने आखे बड़ी कर

Shamshera:jhute में और ठरकी

Baldev:mujhe विश्वास नहीं होता तुम अपने अम्मी को ऐसे नज़र से देखते हो

शमशेर अब मायूस हो जाता है

Shamshera:Baldev तुम इसलिए कह रहे हो न क्यू क में कोठा पर जाता हु?

Baldev:han शमशेर प्रेमी कभी दूसरे क तरफ आँख उठा कर नहीं देखते

Shamshera:dekho भाई मुझे वो जब बहुत याद आती है तो अपने मेहबूबा भूरिया क नाम का जाम जातक लेता हु

Baldev:zaam तक तो ठीक है पर तुम जो सम्बन्ध

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देवरानी हल्का खास्ती है

devrani:bhulo मत मई यही पर हु तुम दोनों बात को कहा से कहा ले जा रहे हो

बलदेव और शमशेर शर्मा जाते है

Baldev:wo माँ

Devrani:waise भूरिया क नाम का जाम?

ये ाचा था शमशेर

Baldev:apne माँ को नाम से बुलाता है

Shamshera,or तुमने अभी जो अपने माँ को नाम से बुलाया उसका क्या ?

ये सुन अब बलदेव और देवरानी शर्म से पानी पानी हो जाते है

Baldev:wo वो तो हम एक दूसरे को प्रेम करते है और हम दोनों को इस बात से कोई आपत्ति नहीं

Shamshera:to जैसे तुम अपने माँ से प्यार करते हो तो नाम ले कर बुला सकते वैसे हे मेरा प्यार एक तरफ़ा हे सही में क्यू नहीं ले सकता nam..tum तो उनके सामने में ले रहे हो में पीठ पीछे भी नहीं

baldev:ab तुम्हारी मर्ज़ी

Devrani:ab तुम दोनों झगड़ो मत

Shamshera:dekha न आपने खला ये जाम की कोठा की हर बात पर्दाफाश कर रहा है तो ये गलत नहीं

Devrani:mujhe पता है शमशेर पहले से हे क तुम्हारी लत ख़राब है पर बलदेव को मेरे सामने तुम्हारी पोल नहीं खोलनी चाहिए

और देवरानी हस्ती है

shamshera:khala वो में मज़बूरी में कभी कभी

Devrani:islye तो कहती हु विवाह कर लो पत्नी आजायेगी तो इधर उधर नहीं jaoge..or तुम तो बलदेव को भी बिगड़ रहे थे

Shamshera:han वो उस दिन .तब मुझे क्या पता था ये मजनू है अपने माँ का हे ..अगर पता होता तो इसे वह न ले जाता

बलदेव और देवरानी एक साथ

"कोई बात नहीं शमशेर"

तभी पीछे से आवाज़ आती है

"शहज़ादे "

शमशेर पीछे मुद कर देखता है तो सैनिक उसे बुला रह थे

तीनो चल कर सैनिको क पास पहुंचते है

गहतराष्ट्रा महल

महल का दृश्य ऐसा था शाहज़ेब की सेना महल में घुस सब को क़ैद कर रही थी और उधर षुरूश्ती को पकडे बादशाह शाहज़ेब चूस रहा था

Shurusti:chhoro मुझे

शाहज़ेब को एक धक्का मारती है

शाहज़ेब षुरूश्ती क सर को पकड़ क दीवार दे मरता है षुरूश्ती बेहोश हो जाती है

तभी शाहज़ेब क सैनिक आजाते है

Shahzeb:is कमीनी को होश में लाओ इसे हम दिल्ली ले कर जायेंगे इसको हम अपनी हरम में रखेंगे

sainik1:Badshah सलामत आप का हुक्म हो तो हम भी कोई मुर्ग मुसल्लम का इंतेज़ाम कर ले

Shahzeb:utha लो हमारे जाने से पहले यहाँ की जितनी खूबसूरत औरते है

Sainik2:Badshah सलामत तो हम कुबेरी कब जायेंगे

Shahzeb:hum शाम में निकलेंगे थोड़ा आराम कर लेते है जाने से पहले गहतराष्ट्रा क हर मर्द को मारो गाओ में जाओ हर एक राजपाल को फांसी दे दो उसके खंडन का कोई नहीं बचना चाहिए

इधर जीविका और वैध जी गुफा क रास्ते चलते जा रहे थे

Vaidh:Maharani आज हम इस गुफा से बहार निकल पाएंगे क नहीं

Jeevika:Vaidh जी अब हम बास पहुंचने वाले है

गहतराष्ट्रा क हर गाओ में में शाहज़ेब क सेना जा कर लूट पात शुरू कर देते है और जो औरत उन्हें पसंद आती उन्हें उठा लेते है

गहतराष्ट्रा में लगभग 30 गाओ थे और हर तीन चार गाओ का एक चौधरी था जो महाराजा क लये काम करते थे वो सब मिल कर एक सभा बुलाते है जिसमे कुछ सैनिक वो होते है जो युधा से अपनी जान बचा कर भागे थे और कुछ वो जो महल क पहरेदार थे लड़ नहीं सकते थे और वो भाग कर आकर चौधरी से बात करते है

सब मिल कर ये निर्णय करते है क वो सब मिल गहतराष्ट्रा क सीमा पर जो सुरंग का रास्ता है जो सीधा महल ले कर जाता है वह जायेंगे

20 चौधरी 10 सैनिक और पहरेदार मिल कर गहतराष्ट्रा क सीमा पर जाते है

चौधरी 1:सैनिको तुम सही कह रहे हो न महारानी जीविका महल में नहीं थी

sainik1:ha चौधरी साहब वो महल में नहीं थी

chaudhari2:theek है हम उस जंगल क समीप है जहा वो रास्ता खुलता है

तभी एक सैनिक पहाड़ पर नज़र घूमता है और वो सेना को देख

"हे भगवन इतनी सेना यहाँ क्या कर रही है"

सब देखते है उस तरफ वह शमशेर की सेना पुरे पहाड़ पर छायी थी जिस से पहाड़ का रंग बदल गया था

Chaudhari1:ye सेना अब किसकी है

sainik:hum सबका वह पर जाना ठीक नहीं आप सब यही रुके में थोड़ा करीब जा कर देखता हु

Sainik:sena का झंडा हरा है ये विदेशी सेना है

सैनिक अपने घोड़े क तरफ ले जाता है और कुछ दूर जाने क बाद वापस अपना घोडा मोड़ कर ले आता है

chaudhari1:kya हुआ तुम वापस क्यू आगये

Sainik:chaudhari साहब वो सेना पारस की है उसके झंडे से समझ गया और एक बात

Sainik:Unke साथ बलदेव भी दिखाई दिया

chaudhari1:kya

Chaudhari2:acha इसका मतलब है देवरानी क मदद से ये फौज यहाँ कड़ी है

Sainik2:iske पीछे बात कुछ और लग रही है

Chaudhari1:hume महारानी जीविका को ढूंढ़ना चाहिए बलदेव क पास जाना ठीक नहीं होगा

सब जीविका को लेने क लये उस जंगल में पहुंचते है और उस सुरंग क रस्ते को खोलते है

जैसे ऊपर से जीविका और वैध को रौशनी दिखती है वो समझ जाते है उन्हें लेने कोई आगया है

जीविका और वैध जी उभर खबर सीडीओ और पथरो पर चढ़ने की कोशिश करते है पर चढ़ नहीं प् रहे थे

Chaudhari1:shayad वो लोग ऊपर नहीं आपराहे सैनिको रस्सी अंदर फेको

सैनिक रस्सी ले अत है और रस्सी को सुरंग में फेकता है जिसे पकड़ कर वैध जी और जीविका महारानी ऊपर आती है

जीविका ऊपर आते हे लेट जाती है

jeevika:paani

सैनिक तुरंत अपने बास्ते में से पानी निकल कर देते है और जीविका पानी पी कर अपनी आखे बंद क्या लेती रहती है

chaudhari2:maharani आप ठीक तो है न

वैध जा कर जंगल से कुछ जड़ी बूटी लेते है और जीविका को खिलते है

थोड़े देर बाद जीविका होश में आती है

जीविका को ले कर सब पास में हे एक गुप्त गुफा में ले आते है

Jeevika:mujhe यहाँ कहा ले आये ..मेरा बीटा rajpal:.aaah

और फुट फुट कर रो पड़ती है

Chaudhari2:maharani आप रोये नहीं हम कुछ करते है

jeevika:maar डालेंगे वो मेरे परिवार को चौधरी साहब

Jeevika:sab लूट गया बर्बाद हो गया हमारे राष्ट्र में अब विदेशिओ ने कब्ज़ा कर लय

chaudhari2:Aap ठीक कह रही है महारानी जीविका आज गहतराष्ट्रा क हर गाओ हर घर में लूट पात मचा रखा है शाहज़ेब ने और हमारी बहु बेटिओ को भी उठा कर ले जा रहे है

jeevika:in सब का कारन में हे हु ..हम आप सब को सुरक्षित नहीं रख सके

और खूब ज़ोर से रोने लगती है

Sainik1:Maharani हम महल से भाग आये शाहज़ेब ने हुक्म दे दिया है क महाराज राजपाल का परिवार में कोई जीवित नहीं रहे महाराजा राजपाल भी बंदी बने है और वो सब जाने से पहले सब ख़त्म कर देंगे

jeevika:nahi मेरा लाल मर नहीं सकता मेरा चिराग

sainik2:maharani अब हमारे पास कोई रास्ता नहीं सिर्फ एक रास्ता है

Jeevika:kya..me सब कुछ करुँगी अपने ला को बचने क लये

Sainik2:Hum युवराज बलदेव क मदद से बच सकते है

Jeevika:wo कैसे

sainik2:maharani वो अभी हज़ारो सैनिको क साथ गहतराष्ट्रा क सीमा पर है शायद वो पारसी सैनिक है अगर

chaudhari1:par वो हमारा साथ क्यू देंगे अभी तो महाराज बलदेव को फांसी देने वाले थे

Sainik2:par हम बात कर क देख सकते है

Jeevika:theek है उन्हें यहाँ बुला लो

chaudhari2:han अगर उसके डिल में ज़रा भी गहतराष्ट्रा क लये जगह होगा तो ज़रूर साथ देगा

Sainik2:hume जल्दी जाना होगा ..हो सकता है पारसी सेना युवराज बलदेव को ले जाने क लये आई है यहाँ तो वो लोग कभी भी पारस निकल सकते है

Jeevika:aap चौधरी साहब दो सैनिको को ले कर जाये और प्यार से ले कर ए उन्हें

एक चौधरी और दो सैनिक गुफा से निकल कर घोड़ो पर सवार हो कर उस पहाड़ की ओरे चल देते है जहा बलदेव था

इधर बलदेव और देवरानी बैठ कर शमशेर से गप्पे मार रहे थे और बलदेव और देवरानी पूरी कहानी सुनते है कैसे उन्हें प्यार हो गया और कैसे वो दोनों पकडे गए

Devrani:to शमशेर अब आगे क्या करना ह

Shamshera:ab हम बिना शाहज़ेब को सबक सिखाये तो जायेंगे नहीं क्या आप दोनों हमारा साथ डोज

देवरानी: में चाहती हु मुझे मेरा हक़ मिले घरराष्ट्रा में जिस से मुझे वंचित रखा गया पर जबरदस्ती नहीं युधा कर क नहीं

shamshera:aap लोग चाहे तो रुक जाये नहीं तो आप चाहे तो पारस जा कर रुक सकते है में शाहज़ेब का काम तमाम कर क हे आऊंगा

Baldev:maa आज कल कोई आपकी नहीं सोचता

इतने में सामने से तीन घुड़सवार आते दिखाई देते है और शमशेर क सैनिक अपने तलवार निकले

"कौन हो तुम लोग"

Chaudhri:Bhai में चौधरी हु गहतराष्ट्रा का युवराज बलदेव से बात करने आये है

ये सुन कर क गहतराष्ट्रा का कोई है देवरानी अपना पल्लू निचे कर अपना मुँह धक् लेती है

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Baldev:ary चौधरी साहब

chaudhari:Yuvraj आपको देख क प्रसन्नता हुई

Baldev:Chalo कोई तो है जिसे हम जीवित पसंद है नहीं तो सब चाहते है क हम मर जाये

chaudhadi:nahi ऐसा नहीं है..

Baldev:kahiye क्या सेवा करे आपकी

चौधरी देवरानी को देखता है जो अपने पल से अपना मुँह ढके कड़ी थी

chaudhari:Bahu रानी भी यही है क्या

Baldev:Ji हाँ भगवन ने हम दोनों को बचाना था

Chaudhari:Wo आपको आपकी दादी महारानी जीविका याद की

तभी देवरानी अपने एक हाथ से अपने पल्लू को खसका कर बोलती है

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devrani:Inki कोई दादी वाड़ी नहीं है न कोई परिवार है हमारा

Baldev:Jane दो माँ मत कहो

Chaudhari:hum समझ सकते है बहु रानी जिस बहु का आवाज़ मई आज पहली बार सुन रहा हु वो अगर ऐसा कह रही है तो उसके डिल में कितना दर्द होगा

Baldev:hume नहीं मीणा किसी से

देवरानी को चौधरी बात पसंद आता है

devrani:theek है हम चलते है पर हमारे साथ कुछ गलत नहीं होगा तो

chaudhari:Me मर्डर जाऊंगा पर आप दोनों को क्षति नहीं पहुंचने दूंगा किसी को

वो तो जीविका जी यही आजाती पर इतनी सेना देख हम खुद नहीं आयना चाहते थे यहाँ

ये सुन बलदेव मुस्कुरा देता है

shamshera:agar इनको कुछ हुआ तो सोच लो.

chaudhari:aap लोग पारस निकलने वाले है kya...aap लोग रुक जाये जब तक युवराज बलदेव नहीं आजाते

ये सुन कर शमशेर मुस्कुराता है

Shamshera:man me)ye बूढ़े को क्या बताऊ क हम शाहज़ेब को लिए बिना यहाँ से नहीं जायेंगे

बलदेव और देवरानी चौधरी क साथ चल देते है उसी गुफा में जहा गहतराष्ट्रा क कुछ सैनिक और चौधरी रुके थे जीविका और वैध जी क साथ

थोड़े देर में हे सब उस गुफा तक पहुंच जाते है अंदर जाते हे जैसे बलदेव की नज़र जीविका पर पड़ती है उसका आखे गुस्से से लाल हो जाती है

देवरानी जीविका को देख अपना मुँह फेर कर एक कोने में चली जाती है

Vaidh:aaye युवराज बलदेव

Baldev:ji वैध जी आप ठीक तो हो न

जीविका क तरफ देख भी नहीं रहा था बलदेव

Chaudhari1:aaye आप लोग बैठए

Sainik2:Yuvraj हमारे गहतराष्ट्रा का हाल अभी बहुत बुरा है शाहज़ेब ने अति कर दी है

chaudhari2:han युवराज हमारे बहु बेटी कोई सुरक्षित नहीं

Baldev:ab इसका कारन में तो नहीं ?

sainik2:par आप हमारे मदद कर सकते हो

chaudhari2:Maharani जीविका आप हे कहिये

Jeevika:Baldev जो हुआ सो हुआ अभी सिर्फ मेरे बेटे राजपाल की जान हे नहीं पुरे गहतराष्ट्रा वासिओ की जान और इज़्ज़त तुम्हारे हाथो में है अगर तुम हमारी मदद कर दो तो

Baldev:Jab मुझे मरता हुआ छोर दया था तब तो कोई मेरी मदद क लये नहीं आया में क्यू करू मदद

Jeevika:tum हमारी मदद करो हम सब तुम्हारा अहसान नहीं भूलेंगे

Baldev:Maharani जीविका हम ने भी आप से बहुत बार कहा हम पर अहसान कर दें

Jeevika:dekho अभी बदला लेना का समय नहीं बोलो बदले में तुम्हे क्या चाहिए

बलदेव कुछ सोचता है फिर कहता है

Baldev:Badle में मुझे गहतराष्ट्रा का राजा की गद्दी चाहिए और

Chaudhari2:aur क्या

जीविका भी बलदेव की ओरे देख रही थी और सब एक टाक बलदेव को देखे जा रहे थे

Baldev:Aur देवरानी मुझे मेरे रानी क रूप में चाहिए जिसे सब आदर सत्कार kare..Mujhe बन न है गहतराष्ट्रा का महाराजा और में देवरानी को बनाऊंगा Maharani..agar मेरी मांगे पूरी हुई तो हे में तुम सब की मदद कर सकता हु

ये सुन कर वह पर जितने चौधरी और सैनिक थे सब को सांप सूंघ गया और देवरानी अपने पल्लू को हल्का सा ऊपर उठाये बलदेव को देखती है जो

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मुस्कुरा रहा था और देवरानी भी मुस्कुरा दी



जीविका को ये सुन चक्कर सा आजाता है

सन्नाटा छ जाता है और सब लोग इस कश्मकश में पद जाते है और सोचने लगते है आखिर क्या किये जाये...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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