Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 2 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 9

दादी से बात क्र क बलदेव सीधा अपने माँ क कक्षा की ओरे जाता है और जैसे हे अंदर जाता है सामने से कमला आ रही होती hai,baldev को देख कमला हाथ जोड़ क्र साइड में कड़ी हो जाती है और कहती है "yuvraj"paas में कड़ी माँ को एक सफ़ेद आभूषण में देख वही ठहर जाता है



Baldev:waah कितनी सुन्दर हो तम (मन में)

ये सब कमला देख क्र अपने निचले होठ दबा क्र मुस्कुराती hai,tabhi देवरानी भी मुद क्र बलदेव को देखती है



Devrani:man me)kitna सुन्दर है इसे देखते हे मेरा डिल शांत हो गया.

बलदेव अपने हाथो से इशारा करता है कमला को जाने का और कमला शर्म और ख़ुशी क मरे जल्दी से कक्षा से बहार निकल जाती है पर उसका डिल नहीं मंटा और दरवाज़े पर कड़ी हुई परदे क पीछे छुप जाती है और देखने लगती है

Baldev:dheer धीरे माँ क आखो में देखते हुए माँ क करीब जाता है और उसको अपने आलिंगन में बंद लेता है पीछे से

हे



Baldev:Maa..

Devrani:beta..kitni देर लगा दी तूने

Baldev:kahi नहीं

Devrani:jhuta

Baldev:tmhare डिल में तमने खोजै नहीं maa,nahi तो में मिल जाता

देवरानी ये बात सुन क्र मुड़ती है और बलदेव को ज़ोर से जकड लेती है



Devrani:betaa

देवरानी क बड़े दूध बलदेव क कठोर छाती से चिपक जाती है और दोनों को बेहिसाब गरमी का अहसास होता है

वही दूर कड़ी कमला "महरानी और युवराज तो प्रेम में पागल हॉवे जा रहे है ऐसे हे लापरवाही करेंगे तो इनका प्रेम शुरू होने से पहले ख़त्म क्र दया जायेगा महाराज duwara,kuch करना पड़ेगा" और वो अपने घर जाने क लये महल से बहार आ जाती है.

देवरानी और बलदेव एक दूसरे को बहो में लये बाते करते रहते है और बलदेव अपनी पूरी दिन चर्या बता ता है क्यू उसे इतनी देरी हुई

devrani:tjhe मेरी तो चिंता हे नहीं है

सब से आखिर में मेरे पास आया

Baldev:chinta है इसलिए तो तम मेरी बाहो में हो और यही मेरा असली स्थान है चाहे में पूरा संसार घूम लू आखिर में मझे तो यही आकर सुकून मिलना है

बलदेव की बात सुन क्र वो अपना सर उसके कंधे पर रख क्र शरमाते हर मुस्कुराती है

devrani:ab खाना कहते है

Baldev:han खाना कहते है

devrani:to चलो

baldev:han

devrani:beta

baldev:ji माँ

Devrani:tu मुझे छोड़ेगा तभी हम खा सकते है न

ये सुन क्र बलदेव झट से अपनी माँ को बंधन से मुक्त क्र क मुस्कुरा देता है और देवरानी बलदेव की बेवकूफी पर हसने लगती hai,devrani को हस्ता देख बलदेव भी हसने लगता है ,फिर दोनों साथ खाना खा क्र अपने अपने कक्षा में सोने चले जाते है.

नै सुबह बलदेव कोयल की कोको से उठ ता है और अपने दादी की कही हुई बात और अपना हाल को मिलते हुए समझने की कोशिश करता है क क्या यही प्यार है और अंत में मान लेता है क वो अपने माँ को एक स्त्री क रूप में देखने लगा hai,fir वो इस प्रेम से आने वाले तूफ़ान का सोचता है क्या वो उन सब से मुक़ाबला क्र payega?ant में उसे दादी की बात यद् आती है और वो निर्णय करता है क वो अपने डिल की सुनेगा और अपने प्रेम को पा कर हे रहेगा

baldev:man में"" दुन्या क सरे नियम प्रेम से बढ़ क्र नहीं हमारी ख़ुशी से बढ़ कर नहीं"

और बलदेव प्रतिज्ञा लेता है त्रीव हो क्र कहता है" में यानि क महाराजा बलदेव सिंह अपना प्रेम हासिल करेगा और प्रेमिका यानि क रानी देवरानी को महारानी देवरानी बनाएगा और मेरी हर बात पत्थर की lakeer"or बलदेव क आखो क नस लाल पद जाते है.

आज बलदेव देरी से उठा था और वैध जी सवेरे हे अपने कलाकारी दिखा क्र महरानी जीविका को एक वैशाखी ला क्र दे देता है जिसे ले क्र वो ख़ुशी नहीं समाती और कहती hai"me सबसे पहले इस वैशाखी से चल क्र अपने पोते से मिलने जाउंगी जिसके वजह से आज में चल सकती हु कई वर्षो bad"or जैसे हे बलदेव क कक्षा क पास पहुँचती है तो उसके कान में बलदेव की प्रतिज्ञा सुनाई देती hai.pote क मुख से उसके बहु को अपनी महरानी बनाने की बात सुन क्र उसे ऐसा लगता है जैसे आसमान पहात गया हो और वो चुपके से अपने कक्षा में आ जाती है.

उधर देवरानी अपने बिस्तर पर उठ टी उसके बदन की खुमारी में पलट क्र तकिये को अपने सीने से लगाए फिर सोचने लगती है

Devrani:man में) अगर कमला की बात मणि जाये तो प्रेम की शुरुवात मेरे बेटे से मेरी हो गयी है और उसे में छह क्र भी नहीं रोक प् रही hu.pr ऐसा कुछ राज दरबार में बात पहुंच गयी तो यहाँ क नियम क हिसाब से मझे और मेरे पुत्र को मौत क घाट उतर दया jayega,pr में क्या करू में उसे भूल भी नहीं सकती पहली बार तो मझे प्रेम हुआ hai,to क्या दोनों क जान को खतरे में डालना सही hai?agar सिर्फ मेरी जान जाती इस प्रेम से तो में अपने युवराज से जी भर क प्रेम क्र हस्ते हस्ते इस दुन्या से अपने जान त्याग देती पर इसमें तो बलदेव की जान को भी खतरा hai,me ऐसा नहीं होने दे skti,agar वासना की भूक ने इस प्रेम को जन्म दया है तो में किसी न किसी से सम्बन्ध बना lungi,ho सकता है मेरे हृदय से ये प्रेम निकल jaye,mjhe कमला से बात करनी चाइये

आज राज परिवार कुश्ती का खेल देखने जा रहा था सब तैयार हो क्र देवरानी का इंतज़ार क्र रहे थे तभी राजपाल कहते है

राजा rajpal:Kamla जाओ देवरानी को बुलाओ

Kamla:ji महाराज

कमला जैसे हे देवरानी क कक्षा में जाती है उसे सामने से तैयार हो क्र एक हरे रंग की सदी में आती दिखती है वो सदी ऐसा था क उसके छाती तो छुपे थे पर उसके दोनों गांड क पैट साफ हिल रहे थे

Kamla:ary आ गयी महारानी

Devrani:kamla हाँ और एक बात करनी थी तमसे

Kamla:boliye महरानी

Devrani:mjhe लगता है तम सही कहती हो मझे कोई ऐसा ढूंढ लेना चाहिए जो मेरी इच्छा पूरी करे और टम्पे में सबसे ज़्यादा भरोषा करती हो तम ढूंढ सको तो ढूंढ लो ??और मुस्कुराती है

Kamla:Man me)Kamini प्यार का खेल किसी और से और इच्छा किसी और से पूरी करवाने का सोच रही है पर में युवराज क आखो में सच्चा प्यार देखा है)

Devrani:kuch कहा तमने

Kamla:nahi तो ..में पक्का एक कॅशे ढूंढ़ती हो जो आपके बूटी बूटी को खा जाये और हसने लगती

Devrani:dekh लो पर मझे पसंद आना चाहिए

Kamla:aapko पसंद आएगा

कमला बोल तो देती है पर मन हे मन कोसती है अपने आप को क ये करमजली है जो युवराज का प्यार छोर किसी और को देख रही है पर में युवराज क साथ ऐसा धोका होने नहीं दूंगी

सब महल से निकल क्र बरी बरी से रथ में बैठने लगते hai,jab देवरानी की बैठने की बरी आती है तो बलदेव आगे बढ़ क्र दोनों हाथो से पाकर क्र देवरानी को ऊपर खींचता है और वो भी रथ में बैठ जाती hai.ye सब कमला और खासकर क बलदेव की दादी देख रही थी और उसके चेहरे का रंग भी उदा था.

रस्ते भर बलदेव और देवरानी एक दूसरे से चिपकने की कोशिश करते रहते है और आखिर कर एक बड़े मैदान क पास रथ रोका जाता है जहा पर चारो ओरे से लोग इकठे होते है और तरफ कुर्सियां राखी होती है जा राज परिवार जा क्र बैठ ता है इस बार भी देवरानी क बगल में बलदेव जा क्र बैठ ता और उसका बाये हथेली पर अपना दया हाथ रख क्र सहलाते हुए कुश्ती का मज़ा लेने लगता hai.insb हारकर पैनी नज़र बलदेव की दादी की होती hai,kushti ख़त्म होती है और विजेता को उपहार देकर सब राज महल वापस लौट आते है.
 
अपडेट 10

कुश्ती देख क्र राज घराना अति प्रसन्न था और हो भी क्यू न आज बल राज की माँ भी तो चलना शुरू क्र दी थी वैसाखी se.sb लौट क्र महल आते है और अपने अपने कक्षा में चले जाते hai.devrani अपने स्नान गृह में घुस जाती है उसके पीछे कमला जाती है तो उसे बिस्तर का कोना कुछ ुचा लगता है वो बिस्तर जैसे हे हटा टी है उसके निचे से उसे दो पुष्टकेँ मिलते है जैसे हे वो किताब खोल क्र देखते उसके कान खड़े हो जाते है "हाय राम महरानी ये कामसूत्र क आसान देख और पढ़ रही है इसे हे उस दिन छुपाने आई थी जल्दी me"abhi कमला कुछ और सोचती उसे एक और झटका लगता है सामने से बलदेव उसके पास हे आरहा था उसे आते देख कमला हड़बड़ा जाती hai,baldev उसके सामने खड़ा था और कमला नग्न चित्र लये वही कड़ी thi,baldev का नज़र पड़ता है और उसे समझते देर नहीं लगती क ये पुष्तक कौन सी है वो क्रोध में आ क्र

Baldev:ye क्या है कमला

Kamla:wo ye..wo..

Kamla:tum ये सब...

इतने में खत सी आवाज़ आती है और स्नान घर से आवाज़ अति है कौन है बहार?

kamla:me और युवराज

इतना सुन न था क कमला अपने बालो को सूखते हुए अपने वस्त्र जो वो सोने क समय पहनती या नहाने क समय वही पहन क्र जानबूझ क्र बहार निकलती है



सामने से देवरानी को आते देख दोनों अपनी बाटी भूल जाते hai.devrani क छोटे अंग वस्त्र में उसके वक्ष समां नहीं प् रहे थे और बहार को झक रहे उसके निचे उसकी गहरी नाभि और सपाट पेट कहर ध रहा था

कमला ने चालाकी से वो पुष्तक को जैसे हे देवरानी क आवाज़. आई बिस्तर क निचे रख दी थी

देवरानी क्या हुआ तम दोनों क्या बाटे क्र रहे हो

kamla:mahrani वो युवराज कह रहे क उनका भोजन में क्या क्या चाहिए

devrani:ow ाचा क्र क चलती रहती है और अपने वस्त्र क अलमारी क तरफ बढ़ने लगती hai,jab वो बलदेव और कमला को पीछे छोर आगे वाले कक्षा में जाने लगती है तो उसे देख

/



बलदेव का हालत ख़राब हो जाता है और उसे ये सब देख इतनी उत्तेजना होती है क उसका लैंड उसके पजामा से साफ़ ऊपर उठ जाता है



बलदेव का हल्का आँख बंद होता है और उसके सामने कड़ी कमला की नज़र सीधे उसके हुल्लाबी लौड़े पे जाता और उसके आखे दोगुना खुल जाता है है "मन में) है राम ये लौड़ा है क कहता)

Baldev:ye क्या हो रहा था कमला

तभी देवरानी की आवाज़ आती है "मझे भूक लगी है में जाती हु तम दोनों वह क्या क्र रहे जल्दी आ जाओ " और देवरानी अपने कक्षा से निकल क्र खाना खाने आजाती है जहा पर सब बैठ क खा रहे थे.

Kamla:kya क्या हो रहा था?

Baldev:kaisi पुष्तक थी वो

Kamla:(ab मझे इस युवराज से बेशर्म बन न हे पड़ेगा नहीं तो ये मेरे ऊपर हावी हो जायेगा )युवराज वो जैसी पुष्तक थी अपने देखा पर ये कैसी हरकत थी कमला अपनी आखे निचे क्र क उसके लैंड को दिखते हुए कहती है

इस बात को समझ बलदेव निचे देखता है तो पता है उसका लौड़ा पूरा तन्नाया साफ झलक रहा था

kamla:or ये महारानी को आते जाते देख ऐसा hua,ye कैसी हरकत है ?

अब खेल कमला क पाले में था

baldev:ary वो तो ु हे

kamla:u हे नहीं मेने देखि तम्हारी नज़र महरानी पर थी और ये हरकत हुई और तमने एक बार आँख भी बंद कए थे

अपनी चोरी पकरि जाने पर बलदेव चुप चाप बैठ गया और क्या कहे सोचने लगा

kamla:ab पूछिए युवराज किसकी पुष्तक थी

कमला अब समझ गई क युवराज क बास की नहीं अब कुछ बोले

Kamla:suniye युवराज मेने आपको बचपन से khilaya,pala पोषा ,है और आप इस बात की चिंता न करे क में आपके अपमान करने का सोच भी नहीं सकती हु

Baldev:hmm

kamla:abhi भोजन करने चलिएए

आप मुझे शाम में झील क पास मिलिए मझे कुछ बात करनी है आपसे

और दोनों जाने लगते है तभी थोड़ी दूर जा क्र कमला कहती है

और है युवराज आपको जान था न पुष्तक क बारे में

"तो वो आपकी प्रिय माँ की पुष्तक hai"or मुस्कुरा क भाग जाती है और बलदेव वही खड़ा स्तब्ध रह जाता है.
 
अपडेट 11

सूर्य ढलते हे बलदेव ये सोचते हुए पता नहीं कमला क्या बात करना चाहती है कही वो मेरे इज़्ज़त और सम्मान को बचाये रखने बदले में कुछ मांग तो नहीं करेगी वो जा क्र झील किनारे बैठ जाता है और प्रतीक्षा करने लगता hai.Halka अँधियारा छाने लगा था सूर्यास्त देखते देखते उसे पता हे नहीं चलता उसके बगल में कमला आ क्र बैठ जाती hai.ye पहली बार था जब कमला युवराज क बराबरी में कमला बैठी थी.

Baldev:murjhaya सा मुँह ले क्र "तम कब आयी?"

kamla:aap किसके याद में थे जो आपको पता नहीं चला

Baldev:kisi क नहीं

Kamla:kahi महारानी क यद् में तो नहीं

Baldev:halka क्रोधित हो क्र देखता है

"बोलो क्यों बुलाया क्या काम है"

kamla:Jab मेने पहली बार आप को और महरानी को देखा था तभी समझ गयी थी क आप दोनों में कुछ खिचड़ी पाक रही hai"jaise आप दोनों एक दूसरे को घर रहे the"fir आप दोनों का गले लग्न. सहलाना...

Baldev:Isme माँ की गलती नहीं है

में हे बहक गया था

Kamla:badi चिंता है माँ की अपने ऊपर पूरा ले रहे हो

Baldev:hmm

Kamla:dekhiye युवराज में अपने आप से ज़्यादा महारानी को चाहती हु उनका दुःख में बिलकुल नहीं देख सकती

baldev:hmm

kamla:Mene आप दोनों में सच्चे प्यार का दिया जलता हुआ देखा है और मझे इस से कोई आपत्ति भी नहीं है

बलदेव क अब सांस में सांस आती है

Kamla:pichle 18 वर्ष में कभी इतना खुश और चैन की नींद सोते मेने महरानी को कभी नहीं देखा जितना अब देख रही hu,mene उनको खून क ासु रट देखा है ,उन्हें न पति का प्यार मिला न उनके भाई या बाप का न ससुराल वालो का सबने उनका सिर्फ समय समय पर इश्तेमाल क्या है

और वो बिना पति क इतने साल गुज़र दी सिर्फ तम्हारा मुँह देख क्र नहीं तो किसी औरत क बास की बात नहीं क वो अपने आप पर काबू क्र ले और महाराज को बाधित क्या आपकी बड़ी माँ ने फिर महाराज भी तम्हारी माँ से दूरी बना लये जैसे क वो दुन्या की सब से बदसूरत औरत हो

Kamla:boliye युवराज आप मेरे बेटे जैसे है "क्या आपको देवरानी पसंद है"

बलदेव चुप चाप एक गहरी सोच में डूबा था क वो क्या करे"

baldev:me क्या कहु मेरे पास उत्तर नहीं

kamla:wahi जो आपका डिल कहे

Baldev:Haan में उनसे प्रेम करने लगा हु उनकी बोली से उनके अंदाज़ से उनके सोच se,mera प्रेम सिर्फ शरीर तक सिमित नहीं मेरी आत्मा में बास चुकी ह वो

kamla:halka हस्ते हुए )है है में समझ सकती हु वो उस दिन महरानी ऐसी प्रदर्शनी क क आप फिसल gaye,or उनका शरीर हे ऐसा है क कोई भी फिसल जाये

Baldev:Han वो तो है में तो उनके सामने कुछ भी नहीं

kamla:ary नहीं युवराज आप जैसा भी कोई नहीं ,महरानी जैसी शरीर की मालिकिन क उपयुक्त आपका शरीर है

बलदेव इस बात पे हल्का मुस्कुरा देता है और अपने मुचो पर तव देता है

कमला : इतना भी नहीं है आपको संयम बरतने और बहुत कुछ सीखना होगा महरानी क ज़िम्मेदारी उठाने लायक बन ने क लये

Baldev:to क्या करे हम कमला जी

kamla:sb तो ठीक है पर आज एक आज नया मोड़ आ गया है वो नहीं बताया आपको

Baldev:kaisa मोर

kamla:thoda चिंतित होते हुए ,बात ये है क महरानी मझे आज मिली.. और उसने वो सब बात. बता दी जो महरानी ने सुबह की थी

ये सुन क्र क उसकी माँ कोई और पुरुष देख रही है अपनी प्यास बुझाने क लये बलदेव क आँख भर आते है

baldev:shayad वो मुझे एक पुरुष क रूप में नहीं देखती

kamla:nahi ऐसा नहीं उनकी सेहन शक्ति हम से कई गुना ज़्यादा और इतने सालो हर कुछ सेहन करती आई hai,wo इतनी संस्कारी है क वो चाहते हुए भी समाज विरुद्धा नहीं जो स्त्री इतने सालो से कभी गैर मर्द की ख्वाइश नहीं ki,mjhe लगता है क वो अपने प्यार को दबाना चाहती है किसी और से सम्बन्ध रख क्र

Baldev:agar ऐसा न हुआ तो और वो सच में मझे नहीं चाहती हो और वो सचमुच किसी से सम्बन्ध रखना चाहती है न की मेरे प्यार को दबाने क लये फिर ?

kamla:tmhara डिल क्या कहता है जैसे तम्हारे सामने उस दिन आधी नंगी आ गई जैसे चिमट टी है वो एक बेटे से करते है?

Baldev:dill तो कहता है क उसे भी प्यार पर दिमाग नहीं मंटा

Kamla:dill की सुनो

और वैसे भी एक बरी प्रयत्न क्र देखो पता लगा क्र क आखिर वो चाहती क्या है

baldev:han ये ठीक रहेगा

kamla:agar सब कुछ सही रहा तो महरानी का भर सँभालने क लये त्यार rho,jaise उस पुष्तक क चित्र में था

Baldev:yaad करते हुए उसी चित्र जिसमे स्त्री को पुरुष खड़े खड़े अपने गॉड में बैठे अपना लैंड पेला tha)uske चेहरे पैर एक मुस्कराहट फ़ैल जाती है " नहीं कमला वो सब कला है ऐसा सच में नहीं होता है"

Kamla:hota है ,जब ऊर्जा हो उतनी और मझे यक़ीन है तम क्र लोगे और हसने लगती है

बलदेव अपना सर झुका लेता है शर्म क मरे

Baldev:wo सब छोरो आगे क्या करना है

Kamla:me महरानी क कहे अनुसार उसके लये एक पुरुष ढूंढूगी

baldev:kya ? विचलित हो क्र

Kamla:puri बात suno,wo पुरुष कोई और नहीं तम हो

में पत्र पहुचाउंगी क कोई तमसे प्रेम करता है तम्हे बास अपना नाम बदल क्र पत्र देना है फिर तम दोनों पत्र से बात आगे बढ़ाओ

Baldev:fir?

kamla:aage की आगे बताउंगी

कल पत्र दे देना और हाँ अपना नाम शेर सिंह लिख देना आज में उन्हें कह देती हु क कोई शेर सिंह कुश्ती मैदान में देख लय उनको और वो पागल हो gaya,smjh गए न तम?

उसे पटाओ पर किसी और नाम से

Baldev:haste हुए ठीक है कमला जासूस

फिर दोनों उठ क्र आ जाते है महल कमला देवरानी क ओरे चली जाती है और बलदेव. वैध जी क कक्षा में.
 
अपडेट 12

बलदेव सीधा वैध जी क पास जाता है जहा पर वैध जी अपने कक्षा में बैठ क्र योग क्र रहे थे

Baldev:Pranam गुरु देव

Vaidh:aaao बालक

और तम भी बैठो आसन्न करो

बलदेव भी वैध क सामने बैठ जाता है अपने पेअर मोड़ क

के

कुछ देर योग करने क बाद दोनों उठ क कुर्सी पर बैठ ते है और बलदेव को कुछ आसान और जड़ी बूटी की ज्ञान देने क बाद कुछ जड़ी बूटी खनेल को देता है

Vaidh:lo बालक

इस से तम्हारी ऊर्जा में वृद्धी होगी

कमला देवरानी क कक्षा में पहुँचती है. तो देखती है क वो अपने कक्षा क बने छोटे से मंदिर क सामने हाथ जोड़े पूजा क्र रही है

कमला भी चुपचाप उसके पीछे खड़े हो क्र उसके भजन सुन ने लगती है इतने मधुर आवाज़ में देवरानी गए रही थी ,पूजा खत्म होते हे प्रसाद ले क्र देवरानी कमला को देती है और फिर खुद कहती है

kamla:krisna कन्हैया. ने आपकी बरसो की तपस्या से खुश हो गए ह महरानी

devrani:tmhe कैसे पता
 
अपडेट 13

प्रेम पत्र जो शेर सिंह क तरफ से बलदेव ने लिखा था अपनी माँ क डिल का हाल जान ने क लये क क्या उसकी माँ उसे सच में प्यार करती है या सिर्फ उसे एक पुरुष की ज़रूरत है और कोई पुरुष उसे मिल जाये तो वो बेटे का का सोचेगी भी नहीं कभी.

कमला पत्र ले क्र देवरानी क पास पहुँचती है और कमला को देख देवरानी की साँसे बढ़ जाती है और मुस्कुराते हे

Devrani:tmhe कोई देखा तो नहीं न यहाँ आने तक

Kamla:nahi जी कमला इतनी बेवक़ूफ़ नहीं

Devrani:acha

Kamla:ji ये लो अपने आशिक़ का पत्र और हाँ अपने पति से छुप क्र पढ़ना

Devrani:muskurati है

Kamla:me आती हु क्या करना है आप बताना फिर

कमला सीडीओ से होते हुए ऊपर बलदेव क कक्षा में प्रवेश करती है और बलदेव गहरी सोच में देख

Kamla:kya हुआ इतना क्या सोचते हो

baldev:kya कहा माँ ने

kamla:mahrani ने कहा बताएगी उत्तर देना है क नहीं

ये सुन क्र बलदेव क जान में जान आती है

और कमला वापस निचे आ क्र अपने काम में लग जाती है

देवरानी पत्र लेकर अपना दरवाज़ा बंद क्र क उत्साह क साथ पलंग पर बैठ क पत्र को खोलती है और पढ़ने लगती है

प्रिये देवरानी,

में हु शेर सिंह आपके क राज्य क पास हे मेरा राज्य hai.Baat उस दिन की है जब तम कुश्ती देखने आई थी और वह पैर अनेक राजाओ क साथ में भी निमंत्रण पर देखने गया tha.jab पहली बार टमको देखा तो अहसास हुआ क स्त्री हे जिसे भगवन ने सबसे ज़्यादा सुन्दर बनाया और मेने अपने जीवन में कभी तम्हारे जितने सुन्दर स्त्री नहीं dekhi.tmhare मुस्कान ने मेरे डिल पे ऐसा कब्ज़ा क्या क है क अब में तमसे प्रेम करने लगा लगा हु और तम्हे अपनी महरानी बनाने का इच्छुक हु अगर तम साथ दो तो ऐसा बहुत जल्द हो सकता है और मझे पता है तम अपने जीवन से खुश नहीं हो और दिन रत भगवन की साधना में लगी रहती हो अब और नहीं अब तम्हे प्यार क साधना में डूब जाना है

उत्तर की प्रतीक्षा शुरू हुई.

शेर सिंह

ये पढ़ क्र देवरानी गड गड हो जाती है उसने जीवन में पहली बार प्रेम पत्र पढ़ा था तभी उसके कानो में कमला की आवाज़ गूंजती है और वो होश में एते हुए दरवाज़ा खोलती है

Kamla:kya क्र रही थी महरानी

Mahrani:kuch नहीं

kamla:apne पत्र पढ़ा

mahrani:han और मुस्कुरा क्र हम अभी उत्तर लिखने क लये समय लेंगे अगर तमसे वो आज मिले तो कह देना

Kamla:man me"man में कामिनी दूद गांड बेटे से रगड़वाती है दिखती है प्रेम क भूत बलदेव को पकड़ा और अपनी छूट की कुटाई इसको किसी से भी करवानी hai,me ये होने नहीं दूंगी महरानी और मुस्कुराती है कमला "और मेरे रहते हुए तो कटाई नहीं"

कमला :ठीक ह महरानी

और वह से ऊपर बलदेव क कक्षा में आती hai,baldev कमला को देख झट से उठ खड़ा होता है

baldev:kya प्रतिकिर्या है माँ की?

कमला थोड़ा उदास होते हुए

kamla:wo उत्तर देने क लये मान गई

और बलदेव ये सुन क्र फिर से वही कुर्सी पर बैठ जाता hai,or उसे समझ नहीं आ रहा था क अब क्या करे "

Kamla:chup क्यू ह युवराज

baldev:ab ये साफ़ हो गया ह उनके डिल में मेरे लये कोई प्रेम नहीं ह उन्हें सिर्फ एक पुरुष क ज़रूरत जो कोई भी रहे मिल जाये तो उनके साथ वो चली जाएगी मुझे छोर देगी

कमला :ऐसा नहीं है युवराज

Baldev:bass करो अब कमला ये सब बंद करूंगा में अब और तम भी (थूक गुटक ते hue)maa क लये कोई देख लो और ये पत्र में उसको शामिल क्र लो और बुझा लेने दो देवरानी को अपना pyas(halka क्रोधित हो क्र)

kamla:yuvraj. तमने दुन्या नहीं देखा abhi,pyas तो वही बुझती है जहा प्यार होता hai,or तम बड़े प्रेमी बन रहे थे मजनू बन रहे थे इतनी जल्दी हार गए ?

Baldev:haa हाँ में हार गया

kamla:tmhe नहीं हारना है बलदेव ये प्रेम में पागल लोगो को सहना पड़ता है और प्रेम क आग में कूड़े हो तो जल क्र नहीं खिल क निकलो ,डरो मत ,दत्त क मुक़ाबला करो तम बलदेव हो बलदेव

Baldev:kya करे हम

kamla:suno ये जुंग अब तम्हारी यानि क एक बेटे की प्रेम और एक अनजान व्यक्ति शेर सिंह की hai,tmhe शेर सिंह को हराना hoga,tm अपने माँ को इतना प्यार दो क वो शेरसिंघ से मिलाप क लये तैयार नहीं हो और डरो नहीं मझे यक़ीन है महरानी जो अपने और अपने प्रेम की बलि देने जा रही है इस समाज क दर से दे नहीं पायेगी

Baldev:hmm

kamla:mjhe पूरा यक़ीन है क वो एक अनजान व्यक्ति क साथ कभी नहीं जाएगी और तम्हे हे अपना वर चुनेगी बास तम्हे अब अपनी पुरुष कला से अपनी माँ को पटना होगा उसे हर कदम पर अहसास दिलाना होगा क तम हे हो जो उसको हर प्रकार से खुश रख सकते हो

Baldev:Tm सही कहती हो मझे हार नहीं मान न है

Kamla:or तम इतने समझदार हो क पुरुष कला तम्हे सीखने की ज़रूरत नहीं और मुस्कुराती है

बलदेव मुस्का देता है

Kamla:or हाँ अगर महरानी तम्हारी हुई और गहतराष्ट्रा ने स्वीकार लये तो अगले महाराज तम हे हो

बलदेव आश्चर्य से देखता है

Kamla:han महारानी को उदा लो राज्य तम्हारा पर राज्यवासी विद्रोह नहीं करे तो ,गहतराष्ट्रा क नियम अनुसार

कमला :ठीक ह तम अपने काम पे ध्यान दो और प्रेम पत्र का भी तम उत्तर देते रहना शेर सिंह बन क पर स्मरण रहे शेरसिंघ क और महरानी क मिलने की स्तिथि न आये उस से पहले अपना काम क्र लो

और कमला वह से चली आती है

बलदेव अपने मन में सोचते हुए "शेरसिंघ क्या मेरी देवरानी को मझसे कोई नहीं चीन skta,wo सिर्फ मेरी है सिर्फ मेरी"

और क्रोध में आ क्र

"में यानि क महाराजा बलदेव सिंह ये शपथ लेता हु क में देवरानी को अपनी बना क रहूंगा मेरी बात यानि क पठार की लकीर"

ऐसे हे रात हो जाती है और चारो तरफ दिया की रौशनी जग मैग करने लगती गहतराष्ट्रा में कमला और जितने दस दसिया थे वो भोजन बना क्र राज महल से बहार आने लगते है और अपने अपने घर जाने लगते कोई पास हे गाओ में रहता है तो कोई door,mahal क चारो तरफ सैनिको का पहरा होता है रात bhar.pr राज महल में सिर्फ राज परिवार हे रहते है बाकी अन्यो क लये अलग से राज दरबार जहा सभा लगती h,uske बगल में सैनिको का गृह और भोजन दरबार, और अतिथि गृह था

वही अतिथि गृह था जो महल से निकलते हे सीधा दीखता था,

अतिथि गृह क पास हे बैठ क वैध जी चटाई पैर कुछ जड़ी बूटी बिछा रहे थे जिसे जाती हुई कमला देख लेती है और उनके पास जा कर आश्चर्य से

Kamla:o वैध जी ये आधी रात में क्या सूखा रहे ho,subah में सुखना होता है

Vaidh:ary कमला तुम

kamla:han हम ,जो पूछा वो बोलो

वैध मुस्कुराते हुए

vaidh:baat ये है क इसे धुप की नहीं उस की आवश्यकता है जब रात में उस का पानी इन जड़ी बूटी पे लगेगी इसका काम मौश्यो क लये दुगना हो जायेगा

और वैसे में वैध हु तम नहीं

kamla:tunak k,Vaidh"sb जानती हु वैध जी क्या क्या करते है इन जड़ी बूटीओ का

वैध ji:sharmate हुए ऊपर से निचे तक कमला को देखता है ऊपर से निचे तक सावला गोल चेहरा बड़े पपीता जैसे लटके हुए वक्ष मोती कमर और नाभि क निचे मोती गांड

"कमला जो काम से सेहत अछि हो वैध जी वही करते है"

Kamla:ha हाँ ठीक ह

vaidh:waisse तम कहा रहती हो

kamla:paas क गाओ में ,सुनो पानी की प्यास लग गई

vaidh:kamla पानी अंदर है जा क्र मटका से पी लो

और वैध अपने काम में लगा रहता और कमला पानी पीने वैध जी क घर में घुसती है वही पर उसे वो तेल की शीशी और बिस्तर दीखता है जहा पर वैध अपने लैंड पर तेल लगाए मसल रहा था उसके छूट में चिति रेंगने लगती है और मटका जो क कपडा ढाका हुआ होता उसके पास कड़ी हो kr"vaidh जी ो वैध जी आपका मटका कहा hai"vaidh जी तुरंत अंदर आते hai"yahi पर तो था तम्हे दीखता हे nahi"or देखता है कमला अपना गांड निकले कड़ी थी और मटका और गिलास कपडा से ढाका वही उसके सामने tha."kamla तम्हे कुछ नहीं दीखता वो तम्हारे सामने है matka"kamla कहती hai"kaha hai"vaidh जी थोड़ा झल्लाते hue,kamla क पीछे जाते है और हाथ आगे बढ़ा कर कपडा हटा क मटके पे से ग्लास उठा ते है और पानी निकलने क लये ज्यू हे गिलास अंदर डालते है ,वैध जी कमला से पीछे से चिपक जाते है और उनका लैंड बिना देरी कए खड़ा हो क्र कमला क गांड क दरार में घुस जाता है और कमला की आखे बंद हो जाती

kamla:"aah" कमला की तीन साल प्यासी छूट में जैसे पानी की तड़प आ जाती है जिसे एक मुसल लौड़ा हे बुझा सकता है

वैध जी अब गिलास पीछे ले क्र कमला क हाथ में देते है तभी उनका हाथ कमला उन्नत चुचो से टकरा जाता है कमला का हाथ अभी निचे अपने घागरा को पकडे मसल रहा tha,vaidh जी थोड़ा पीछे से ज़ोर लगते है और लैंड को थोड़ा और गहराई में घोषते है और अपने एक हाथ से कमला क कंधे पर हाथ रखते है दूसरे से गिलास क साथ अपना हाथ कमला क बिना अंतर वस्त्र क दूध को पिस्टे है.

तभी कमला अपने बंद आखे खोलती है और पानी का ग्लास ले क्र एक सांस में जातक जाती है

और थोड़ा झल्लाते हुए एक झटका पीछे मरती है और वैध जी क लैंड पर इतने मोठे गांड का झटका और धक्का से वैध जी अपने आप पर काबू नहीं रख पते है और वही बिस्तर पर gif जाती

Kamla:bada आया

vaidh:aaah में मर गया और झूट मूट का दर्द. की चीखे निकलने लगता है

kamla:sb समझती थी क ये बूढ़ा नाटक क्र रहा है और मन me"land मेरे गांड में पेल रहा था और गांड इसकी पहात रही है"

कमला :क्या हुआ वैध जी

vaidh:tmhare धक्के क वजह से नस चढ़ गया aaaa,koi मेरी मदद करो

kamla:ab तो सब दास दासी अपने अपने घर जा चुके है पूरा गहतराष्ट्रा सो चूका होगा तम खुद क्यू नहीं मदद क्र लेते अपनी

Vaidh:sb नहीं ही पर तम तो हो यहाँ पर ,तम निर्दयी हो आए

Kamla:(budha लगता है मेरी छूट खोले बिना मानेगा नहीं और वैसे भी में तड़पती हु अचे लैंड क लये और इसका तो मेने देखा हे hai,mjhe ये मौक़ा नहीं खोना chahiye)pr वैध जी मुझे मेरे घर भी तो जाना देरी हो रही है

वैध: तम्हारी मर्ज़ी. आए में मर गया

कमला कुछ सोच क्र ठीक है "बताओ कहा पर नस चढ़ा है"

vaidh:kamar से निचे का

कमला कमर पे हाथ लगा क्र यहाँ

vaidh:han

और कमला दरवाज़ा बंद क्र दो ठंडी हवा आरही है कही मेरी जान न चली जाये

kamala:man me)budhe तेरी जान तो नहीं पर दरवाज़ा बंद की तो मेरी गांड तो चली हे जाएगी

और कमला हल्का मुस्कुराते हु बहार आकर अपने सामान की पोटली अंदर रखती है और दरवाज़े बंद क्र खिड़की क दोनों पैट सत्ता देती है.

वैध ji:samne रखा शीशी में तेल है वो लगाओ उस से मुझे रहत मिलेगा

कमला उठ क्र मेज़ से वो तेल उठा क्र बिस्तर पर आती है जहा वैध सिर्फ धोती और कुरता पहने पेट क बल लेता था

कमला एक क़ातिल मुस्कान क साथ अपने हाथ में तेल लगा क्र कुरता उठा क्र वैध क कमर पर तेल लगाती है

वैध ji:ary मेरा कुरता ख़राब हो जायेगा

इसे निकल दो

कमला कुरता को दोनों ओरे से पाकर क्र सर क तरफ खींचती है और वैध हल्का उठ कर कुरता निकलने में मदद करता hai,ab कमला क सामने एक 63 वर्षीया पुरुष जिसके सीने क बाल सफ़ेद होने चाहिए

kamla:aapke बाल दाढ़ी इतनी उम्र होने पर भी सफ़ेद नहीं हुए कितनी उम्र है आपकी

और हल्का हल्का उसके कमर पे तेल लगाने लगती है

वैध:63 है पर ये सब मेरे योग और जड़ी बूटी का कमल है और जवानी आयु से नहीं हृदय में होती है और शक्ति में होती है

Kamla:ha में 50 की हु अभी से बाल सफ़ेद हो गए आधे

vaidh:me तम्हे नुस्खा बताऊंगा शक्ति मिलेगी ख़ुशी मिलेगी और सफ़ेद बल काळा हो जायेंगे

kamla:ha बड़े आये जवान

vaidh:aaaa और दर्द बढ़ रहा है थोड़ा निचे मालिश करो

kamla:dhoti क अंदर हाथ दाल वैध क गांड क दरार पे मालिश करती है

vaidh:dhoti निचे क्र दो

कमला भी मर्द क छूने और ऐसी बाते क्र क्र उत्तेजित हो गई और इस बार वो बिना नखरा दिखाए धोती निचे क्र क मालिश करती है

वैध एक बार फिर ज़ोर से चिल्लाता है

kamla:ab क्या हुआ

vaidh:dard अब नाभि पे पेट क तरफ हो रहा है

kamla:aakho में वासना लये तो पलट जाओ

जैसे हे वैध पलट ता है उसका7 इंच का लैंड धोती साफ दिख रहा था

kamla:aakhe फाड् देखते हुए कहा हो रहा दर्द ?

वैध अपने आखे से इशारे अपने लैंड पर करता hai,kamla अपने निचले होठ काट ते हुए उसके लौड़े को अपने दोनों हाथो से पकड़ लेती hai,vaidh अपने आखे बंद क्र लेता और कहता hai"ispe तेल्ल लगाओ"

कमला झट से धोती खोल क्र निचे फेक देती है और अपने तेल भरे हाथ उसके लौड़े पर मंथन करने लगती hai,kamla क आखो में वासना की लाली छ जाती कुछ दो मिंट रगड़ने से लौरा सख्त हो जाता है तब वैध जी "कमला और झट से उठ क बैठ ते है और उसे बैठे बैठे गॉड में ले लेते है"

kamla:vaidh क सर पर हाथ रखते हुए सिसकी लेती है और वैध उसके घाघरा को खींच क्र कमला को निचे से नंगी क्र देता है और उसे अपने खड़े लैंड और बैठा क्र. उसके दोनों आम जैसे वक्ष का मर्दन करने लगता hai,kamla आँख बंद कए होती है

vaidh:aakhe खोलो कमला

kamla:humm और कमला घूम क्र वैध से सीधा हो क्र गले लग जाती है और अपना दूध सीने से रगड़ने लगती hai,vaidh हल्का निचे की तरफ गिर जाता है पलंग क सिरहाने की तरफ तक लगा लेता है और पीछे हाथ ले जा कर कमला की पहाड़ जैसी गांड पर दो ज़ोर दर थप्पड़ लगता है

kamla:aaaah नहीं वैध जी

Vaidh:inhe पहाड़ो ने मझे तड़पाया ह

में इन्हे भुर्जी भुर्जी करदूंगा

kamla:ye पहाड़ भी टूटने क लये तैयार चकना चूर क्र दो अपने हथोड़े से

वैध अब उसकी चोली को उतर फेकता है और उसके दूध मुँह में ले क्र चूसने लगता है और एक हाथ से उसके दूसरा दूध दबाता है और दूसरे उसके गांड को दबोचता hai,kamla अपना छूट जो रॉस छोर रही थी वैध क लौड़े से रगड़ रही thi,kuch देर ऐसी हे दूध और गांड को बरी बरी से रगड़ने क बाद वैध और कमला एक दूसरे को बहो में जकड क्र होठ चूसने लगते है और वैध कमला को अपने निचे ले क्र अपना लैंड छूट पर रगड़ता है और एक बार में कमला की छूट में घुसा देता है कमला बास "ुह्ह्ह्ह क्र रह जाती hai"or अपना हाथ वैध क सर पर रख देती hai.ab गति से वैध कमला की छूट चुदाई करने लगता है और "उह्ह्ह आह "क सिसकी निकलती रहती क 20 मिंट की चुदाई क बाद वैध निढाल हो जाता है कमला पर

vaidh:kamla मेरी जान तम कितनी अछि हो

kamla:humm वैध जी

vaidh:waise तो तम बहुत बोलती हो पिलाई से तो एक डैम शांत अवतार धारण क्र लय तमने

kamla:hmm मेरा सरताज आज तीन वर्षो बाद चूड़ी हु

vaidh:kyu इतना दिन बाद

कमला बताती है कैसे उसका पति तीन वर्ष पहले मर्डर गया और वैध जी उसको वडा करते है क वो उसको अपनी पत्नी की तरह रखेंगे उस रात एक बार और वैध जी कमला की चुदाई करता है और दोनों वही सो जाते है.
 
अपडेट 14

रात भर चुदाई क बाद जब सुबह कमला की आँख खुलती है वो अपने आप को नंगा पति है उसके दोनों दूध वैध जी क सीने में दबे थे और गांड पे उनका हाथ रखा था ये देख कमला शर्म से पानी पानी हो जाती है और जल्दी से उठ क्र स्नान घर में घुस क स्नान क्र तैयार होती है और आ क्र वैध जी को उठा टी है

kamla:uthiye जी

vaidh:hmm

kamla:shreeman ठीये सर पे सूरज आ गया

वैध जैसे नींद से जागते हुए आखे खोलता है और कमला को देखता है उसके चेहरे की चमक देखते हे वैध का लैंड खड़ा होने लगता है वो कमला को खा जाने वाली नज़र से ऊपर से निचे देखता hai,kamla क छोटे कद काठी पर उसके बड़े वक्ष और चूतर कहर ध रहे थे और वैध उठ क्र कमला को पकड़ने क लये आगे बढ़ता है ,कमला फुर्ती दिखते हुए आगे बढ़ जाती

Kamla:raat भर छोड़ क मन नहीं भरा

vaidh:tujhe दिन रत छोड़ू तो भी मेरा मन न भरे

kamla:aapko में जब दूंगी दिन रत तभी पलोगे न

Vaidh:dekhte hai,tm खुद आओगी मेरे पास

kamla:par अभी मेरे हाज़िरी का वक़्त है महल में और उदास होते हुए कहती फिर कभी

vaidh:theek है जाओ कमला जी

कमला देवरानी से मिलने निकल पड़ती है

इधर महरानी सुबह सवेरे उठ कर तैयार होती है और पीले रंग की साडी पहन क्र पूजा समाजी इकठा क्र पूजा करने लगती है मंदिर जो क उसके हे कक्षा में था छोटा सा.

हाथ जोड़े वंदना करती हुई देवरानी किसी देवी दे काम नहीं लग रही थी वो देवी जिसका सम्मान ,मर्यादा ,और जीवन में ईश्वर से प्रेम और उसके चलाये रस्ते पैर चलने क अलावा कुछ नहीं hai.ye वही देवरानी है जो हर कष्ट सेह क्र भी अपने परिवार का साथ देती रही और उफ़ तक नहीं की.

महरानी पूजा का भजन समाप्त कर अब भगवन से धीरे धीरे बात करने लगती है

बलदेव को पांच वर्ष बाद देखने पर दुलार दिया ,मेरे साथ झील क किनारे गले लग गया था खेल खेल me,fir एक दूसरे से हसी मज़ाक और कुश्ती मैदान में तो उसने मेरा हाथ थामे बैठा रहा.

ये सब से में हल्का उत्तेजित सी हो गई थी पर में एक माँ क साथ स्त्री भी तो हु

मुझे मुआफ क्र दो क्षमा क्र do,bhagwan,

Mahrani:bhagwan में बड़ी दुविधा में हु ,मेरा धर्म मेरी मर्यादा मझे इस बात का आज्ञा नहीं देता क में अपने पति को छोर किसी और से सम्बन्ध रखु पर में क्या करू?

भगवन अब मझ से बर्दाश्त नहीं होती peera(or रोने लगती है)

भगवन शेर सिंह मझे बहुत चाहता है और में उसका डिल नहीं तोड़ सकती मुझे मुआफ क्र देना भगवन पर में आज उसे पत्र दूंगी और रट हुए अपना माथा टेकती है "मेरी इच्छा पूरी हो जाये ,तभी एक फूल निचे गिरता है जो भगवन क पैरो निचे देवरानी क सर क पास"

इधर दरवाज़े क पीछे छुप कमला हर बात देवरानी की सुन रही thi,jaise हे कमला अंदर आने लगी वो देवरानी क आवाज़ सुन छुप गई थी

kamla:man me)apne बेटे को अपनी सुंदरता दिखा क्र उसका लैंड खड़ा क्र दी और अब शेर सिंह क लये भगवन को मन रही है

उस दिन कैसे बिना सदी क ब्लाउज में हे अपने बेटे क सामने आ गयी थी ,इस से पूछूँगी ये बात तो यही कहेगी क मेरा बीटा था इसलिए आई ब्लाउज में कोई गैर तो नहीं था,

"हाय राम अब तो बलदेव क लये चुनौती और बढ़ गयी है"

कमीनी की सुंदरता और चाल ऐसे हे क इसे देख क्र तो मेने हर किसी को आहे भरते हुए देखा है भला इसके बेटे को जो अभी कच्चा कुंवारा है कभी स्त्री को छुवा भी नहीं वो भला कैसे न इस जैसी घोड़ी क प्रेम में पद जाये"

कमला तभी महरानी महरानी कहा हो क्र क कक्षा में अंदर आती है

कमला को देख देवरानी अपने ासु पॉच क्र खड़े होजाती है और मुस्कुराते हुए

"बोलो कमला"

kamla:kaisi हो महरानी?

Mahrani:me खुश हु

Kamla:man में )तझे तो लैंड चाहिए पर तेरे बेटे का क्या जो प्यार में पागल हुआ है)

Kamla:aapne पत्र का कुछ उत्तर देने का सोचा

Devrani:Han मुझे कुछ समय दो में अभी लिख देती हु

Kamla:waise आज इस पीले सदी में जांच रही हो आप बिलकुल देवी सीता जैसी लग रही हो

Devrani:dhanywad

Kamla:man में) तम महरानी पत्र दो शेर सिंह को पर वो तो मिलेगा बलदेव को हे और मेरे रहते हुए बलदेव का डिल टूट नहीं सकता और तम किसी और क तरफ जा न सकती और क़ातिल मुस्कान देती है)

Devrani:muskura क्यू रही हो

Kamla:bass ऐसे हे कुछ याद आगया

devrani:waise आज तम बड़े सवेरे आगयी

देवरानी सोचती है क वो वैध से चुद क आई है बता दे फिर कहती है अभी नहीं

कमला वह से विदा लेती है और देवरानी सबको घर में प्रसाद देने लगती है पर उसे बलदेव नहीं दीखता .

देवरानी प्रसाद की थाली ले क्र बलदेव क कक्षा में ऊपर जाती है जहा बलदेव अपने तलवार को लिए देख रहा था

बलदेव जैसे हे अपने माता को आते देखता है झट से तलवार को निचे रख क्र अपने माता क पेअर छूटा है

Baldev:maatey

देवरानी छह रही थी क वो उसको गले लगाए पर वो कुछ सोच क्र ऐसा नहीं करती है

Devrani:beta ये लो प्रसाद

बलदेव प्रसाद लेते हुए माँ क्या स्वादिष्ट है"

Baldev:maa आज इस पीले सदी में देवी लग रही हो

देवरानी बास मुस्कुरा देती है और अपने दोनों हाथो से थाली पकड़े घूम क बहार जाने लगती है

देवरानी क ख़ुशी क चल अलग हे थिरकन पैदा क्र रहे थे उसके बड़े दोनों गांड क पैट एक दूजे से लार रहे थे और धक्का मुकि क्र क एक दूसरे को बहार फेक रहे थे जिसे बलदेव बड़े गौर से देख रहा था





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देवरानी को यु मटक ते देख बलदेव का लैंड खड़ा हो जाता है वो झट से अपने लैंड पर हाथ रख क्र मसल देता hai"aah माँ कब देखने को मिलेगी मुझे तेरी रस की गगरी"

Baldev:Man में) कोई बात नहीं तम शेर सिंह से कभी मिलाप नहीं करोगी क्यू क शेर सिंह में हे हु और तम जब तक ये निर्णय लोगी क तम्हे उसके साथ जाना है में तम्हे अपने प्यार में दीवाना कर dunga.or मुस्कुराता है

राज दरबार लगा था और राजा राजपाल क पास सेनापति आ क्र एक सन्देश सुनाता है

senapati:maharaj राजा रतन सिंह का सन्देश आया है उन्होंने कहा है क उनके राज्य "KUBERI"pe बाहरी आक्रमण का अंदेशा है इसलिए हमे सैनिक इकठा क्र वह सैनिक बल बढ़ने क लये कहा गया है.

rajpal:avshaya हम राजा रतन क साथ हमेशा से रहे है और इस कथित परिस्थिति में भी हम उनके साथ रहेंगे

Senapati:ji महाराज

Rajpal:senapati तम तैयारी करो हमे अतिशीघ्र "Kuberi"kooch करना होगा

बात ये थी राजा रतन ने अपने लोभ क लये कई राज्यों को जीत लय था और अपने राज्य को सोना और जवाहरात से भर दया था जिसको भनक बाहरी राजाओ यहाँ तक विदेशो तक फ़ैल गई थी और सब छह रहे थे क कुबेरी राज्य को लूट ले

इधर दोपहर क भोजन क बाद देरव्रनि पत्र लिख लेती है और उसे अपने पास संभाल क रख लेती है और ख़ुशी क मरे कमला को ढूंढ़ने लगती है जैसे हे चलते हुए तेज़ी से अपने कक्षा से बहार आ रही होती है उसका पेअर फिसल जाता है और वो मुँह क बल गिरने वाली हे थी क किसीका हाथ उसके कमर पर लगता है

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और देवरानी क नाभि को गहराई तक दबोच लेता और दूसरा हाथ उसका बांह पाकर लेता है ऐसे अचानक गिरने की दर और अपने आप को किसी क द्वारा पकड़े जाने से देवरानी आश्चर्यचकित हो क्र पहले अपने साँसों को संभालती है फिर पीछे देखती है

पीछे बलदेव खड़ा था उसे देख देवरानी मुस्कुरा देती है

devrani:dhanyawad बीटा मुझे बचा लय tmne(apne कमर क पकड़े जाने से थोड़ा शर्मा जाती ह अंदर से)

Baldev:maa धन्यवाद क्यू तम्हारी रक्षा तो मेरा फ़र्ज़ है

फिर बलदेव मुस्कुराते हुए वह से चला जाता है

बलदेव मन me"ek बार धन्यवाद बोल डौगी में तो तम्हे जीवन भर संभालने क लये बेक़रार हु"
 
अपडेट 15

गहतराष्ट्रा में सैनिक अभ्यास में जुड़े थे और तैयारी थी राजा रतन सिंह क राज्य जाने की क्यू क आज हे महराजा को सन्देश मिला था क राजा रतन को सैनिक बल क आवश्यकता होगी अपने राज्य की सुरक्षा को ले कर.

सैनिको को एकता कर सेनापति ज़रूरी बाते बता रहा था और दूसरी तरफ राजा राजपाल राज दरबार में अपने मंत्रीओ और अपनी पत्नी षुरूश्ती क साथ बैठ अपने रणनीति पर बात क्र रहा था

कुछ देर बाद पूरी तैयारी हो जाती है और राजा राजपाल क जाने का समय होगया था वह पर राजपाल एक ऐलान करता है

Rajpal:Raj दरबार क मंत्री गैन आज में दूर यात्रा पर जा रहा हु जहा भीषण युधा होने संभावना है इसलिए मेरे नहीं रहते हुए मेरा हर कार्य महारानी षुरूश्ती करेगी.

ये कहते है और तालिओं की गूंज पुरे सभा में उठती. है इस बीच दरबार में देवरानी और बलदेव आ जाते है और इस बात को सुन दोनों क डिल को ठेस पहुँचती है.

राजपाल को सेनापति कहता hai"maharaj chaliye"or राजपाल को सब शुभ कामना दे क्र जाने लगते hai.raja राजपाल अपनी पहली पत्नी षुरूश्ती क पास जा क्र उसको कार्य समझते हुए विदा ले क्र आगे बढ़ता है पर उसे पास बैठी देवरानी नहीं dikhti,devrani कड़ी हो क्र जैसे हे आने लगती है राजपाल क पास

Shurushti:Maharaj समय ज़्यादा हो गया आप

जाये

और सेनापति की तरफ इशारा करती हे वो राजपाल को जल्दबाज़ी लेकर सैनिक बल क पास ले जाता है

नियम अनुसार बलदेव भी घोड़े पर सवार हो कर अपने पिता और सैनको को छोड़ने गहतराष्ट्रा क सीमा तक जाता है और सीम तक पहुंच कर अपने घोड़े से निचे से उतर कर

अपने पिता क पेअर छू क्र आज्ञा लेता है

rajpal:Baldev तम्हे षुरूश्ती जो काम देगी वो तम्हे करना है और तम्हे हमेशा राज्य सेवा क लये खड़े रहना है

rajpal:ji महाराज

Rajpal:jao अब

ये कह कर राजपाल आगे की ओरे बढ़ जाता है पर वही खड़ा बलदेव सोचता है

"जाते जाते पिता जी ने मुझे पुत्र का स्नेह नहीं दया न गले से लगाया उनके नज़र में सिर्फ में एक राज्य का सदस्य है ,मेरे से बात भी किया पर माँ को तो जैसे अनदेखा क्र बिना कुछ बोले विदा हो गए और सब कुछ षुरूश्ती माँ को सौंप दया जैसे मेरे और मेरे माँ का कोई हक़ हे नहीं"

और बलदेव एक ज़ोर से चीख निकल क्र चिल्लाता है और कहता है इनसब अपमान का बदला लय जायेगा और फिर अपने घोड़े को गहतराष्ट्रा की ओरे मोड़ देता है

महल पहुंच क्र सीधा अपने माँ देवरानी क कक्षा में जाता है जहा देवरानी आईने क सामने. बैठ सोच रही थी

"क्या में इतनी बुरी हु जो महाराज मुझसे बोले बिना चले गए और हर बार मुझे राज दरबार में सबके सामने बेइज़्ज़त क्र देते hai"devrani क आखो क ासु अब सुख चुके the.devrani जैसे हे ध्यान से आईने में देखती उसे बलदेव निहार रहा था

Baldev:kya हुआ माँ

देवरानी मुस्कुराते hue"kuch नहीं बीटा"

बलदेव समझ जाता है क क्यू वो अंदर से उदास है.

बलदेव देवरानी क पास आ क्र उसके कंधो पे हाथ रख क्र "माँ तुम कितनी सुन्दर हो कितनी अछि हो"

devrani:chup क्र कुछ भी कहता है और लज्जा जाती ह

Baldev:sach माँ मेरा बस चले तो तम तम्हे गहतराष्ट्रा क्या पुरे दुन्या की महारानी बना दू

Devrani:Maharani में कार्य शैली होनी चाहिए

Baldev:tm हर एक कार्य अपनी सूझबूझ से क्र सकती हो यहाँ तक तम पिता जी से भी ज़्याद सूझ बुझ रखती हो

ये सुन क्र देवरानी मुस्कुरा देती है

तभी एक सोने की हां निकल कर बलदेव अपने माँ जो कुर्सी पर बैठी थी उसके गले में बांध देता hai,achanak से ऐसे हार पहनने से वो समझ नहीं पति क्या प्रतिक्रया. और वो उस सोने की हार क बनावट कला में खो सी जाती है.

Baldev:ab तम सच में पूरी दुन्या क सबसे प्यारी महारानी लग रही हो

इतने सालो बाद अपने सूने जिस्म पर ये हार की छुवन भर देवरानी का रूह सिहर सा जाता है

देवरानी होश में आते हुए

Devrani:ye कहा से लाया तमने

baldev:kaha से लाया ये मत पूछो तम्हे पसंद आया या नहीं ये बताओ

Devrani:dhanywad बीटा तम बिना कहे मेरे डिल की बात समझ जाते हो

baldev:hmmm प्यार से देखता है

Devrani:me कैसी लग रही हु इस हार में

Baldev:ek डैम देवी जैसी सक्चत सेठा जी आगयी हो ऐसा लगरहा hai(man me:upar से देवी और अंदर से रति हो र एक आह अंदर हे अंदर भरता है)

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ये सुन कर देवरानी खुश होते हुए

devrani:theek है में रसोई में जा रही हु कमला और राधा का हाथ बताने भोजन बनाने में और बलदेव पीछे खड़े रह क्र ख़ुशी से इठलाती बड़े 44 क गांड को हिलते देख रहा था

देवरानी कोई बची नहीं थी अपने बेटे को चुपचाप अपने पीछे खड़े देख निहारते वो समझ जाती है वो क्या देख रहा है और अंदर हे अंदर शर्म से गाड़ी जाती है और उसके मन में कुछ भाव अत है और वो पलटी है

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Devrani:muskurate हुए बीटा वह खड़े खड़े क्या कर रहे हो

Baldev:jaise हड़बड़ा जाता है "कुछ नहीं माँ"

Devrani:tmhe कुछ काम है?

Baldev:nahi

devrani:to तम चाहो तो मेरे साथ रसोई में आ सकते हो

और देवरानी अपनी प्रसंशा खुश होते हुए रसोई घर की ओरे चलने लगती है

Baldev:me अत हु माँ

फिर देवरानी सोचते हुए "लगता है मझे इसके लये कन्या तलाशनी पड़ेगी ये तो मेरे चूतर ऐसे घूरता है जैसे खा हे jayega"or उसके चेहरे पर एक मुस्कान फ़ैल जाती है" राम राम में क्या सोच रही हु" बीटा है वो मेरा उसने अभी अभी जवानी क दहलीज़ पे क़दम रखा है फिसल जाता है मन"

तभी उसे किसी क आने की आहात आती है पर वो अपने काम में लगी होती hai,ye आहात किसी और की नहीं बलदेव की थी जो रसोई घर की तरफ आरहा था और जैसे हे रसोई घर में अत है

वैसे हे उसके नज़र महँ चुतर की रानी देवरानी पर पड़ती है

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baldev:mann में .(उठ क्या तगड़े गांड है)

और फिर मुस्कुराते हुए अपने माँ क पीछे लग जाता है और उसके आखो पर अपने दोनों हाथ लगा कर बंद क्र देता है.

देवरानी को मरदाना हाथ लगते हे समझते देर नहीं लगती क ये बलदेव है

devrani:khil खिला क "बलदेव ये तम हो"

baldev:maa आप कैसे इतनी जल्दी समझ गई और अपना हाथ निचे लेता hai,pr बलदेव एक डैम देवरानी क पीछे होने क वजह से उसके हाथ देवरानी क दोनों चुतर को छू लेता है और देवरानी फिर से अपने दो आँख मैच लेती है

बलदेव अब साइड में खड़े हो क्र माँ से बाटे करने लगता है

Devrani:kaise न समझू भला तू मेरे जिगर का टुकड़ा है कितनी हे रात में तेरे बीमार होने हर जग. क्र बिताया है और कभी तू रोने लगता तो में नींद से भी उठ जाती थी

Baldev:pr अब तो तम्हे मेरा ध्यान हे नहीं

devrani:Kaun बोलै मेरे बेटे का ऐसा

Baldev:dikhta है

devrani:bhut जल्द मेरे बलदेव की पत्नी आ जाएगी जो मेरे बेटे का ध्यान रखेगी

और हस्ती है

Baldev:nahi मझे शादी नहीं करनी माँ

devrani:q बीटा अब तो तम बड़े भी हो गए हो

baldev:pr माँ मझे नहीं करनी

devrani:nakhre न करो बताओ तम्हे कैसी पत्नी चाहिए में ढूँढोगी

baldev:mujhe नहीं चाहिए

devrani:fir भी

baldev:aap जैसी

देवरानी की आखे फटी की फर्जी रह जाती है

Devrani:baat संभालते हुए )ठीक है में मेरी जैसी हे ढूंढूगी

और वैसे तम्हे मेरी जैसी हे क्यू चाहिए

Baldev:q क माँ आपके अंदर हर एक वो गन है जो एक स्त्री में होनी चाहिए

devrani:jaise k(apni तारीफ जैसे सालो बाद किसी क मुँह से सुन रही थी)

baldev:tmhare अंदर संयम hai,tm मेहनती ho,sachi हो ,डिल की अछि हो ,और तम से सुन्दर कोई और नहीं

devrani:thoda शर्मा जाती hai,bas बीटा

में तेरे लये ऐसी हे लड़की ढूँढोगी

baldev:pr मझे शादी नहीं krni,me तो चाहत हु आपको देवी की तरह पुजू और आपकी आधी जीवन जो बची है उसे हर एक दर्द से दूर राखु

devrani:tu मेरी रक्षा विवाह क बाद भी क्र सकता है

baldev:nahi माँ आज देखा हे न तमने कैसे पिता जी अपने माता से बिना जल्दबाज़ी में निकल गए

देवरानी को यद् अत है वो उस से भी नहीं मिले

Baldev:bass यही होता है माँ को लोग भूल जाते है

तभी वह पर कमला आ जाती है

Kamla:mahrani ले आई में सब्ज़िया

और कमला रसोईघर में दोनों को देख समझ जाती है क यहाँ पर क्या चालू है और वो बलदेव को देख क आँख मरती है जिस पर बलदेव समझते हुए मुस्कुराता है

baldev:to ठीक है माँ में अत हु

कह क्र बलदेव अपने कक्षा में निकल जाता है

रात क भोजन क बाद कमला देवरानी का पत्र ले क्र बलदेव क कक्षा में जाती है और

kamla:ye लो आपकी देवरानी का उत्तर शेर सिंह

Baldev:muskurate हुए हाथ आगे बढ़ा कर पत्र लेता है और अपने पास रख लेता है

Baldev:me बाद में पढ़ लूंगा

kamla:kya बात है तम तो मेरे सामने भी शर्मा रहे हो पत्र पढ़ने से

baldev:nahi ऐसा नहीं ह

kamla:sharmaoge तो देवरानी जैसी शेरनी की सवारी नहीं क्र पाओगे

baldev:chup चाप देखता है कमला को

kamla:sahi कहती हु तम्हे करिश्मा दिखाना होगा नहीं तो मालूम पड़ा तम हे अपने माँ क लये वर ढूंढ रहे हो कुछ दिन बाद और हस्ती है

baldev:aisi बात मत करो

kamla:acha एक बात कहो तम्हे सच में प्यार है न देवरानी से

बलदेव: कमला पहले मझे उनके दर्द दुःख से जुड़ा और उनके करीब गया फिर उनकी सुंदरता का कायल हो क्र मेरा डिल उन पर फ़िदा हो गया ,फिर उनके शारीरिक सुख की कमी देख उत्तेजना हुई पर मुझे अब ये सब मझे बकवास लगता है

Kamla:fir ?

baldev:ab मझे उनके सोच उनकी संयम उनके सत्य और उनके भक्ति उनके हृदय से प्रेम हो गया है और मझे लगता कैसे में उन्हें बास दिन रात बाते करता राहु

kamla:to ऐसा है पर बात क साथ तम्हे उनके दर्द को दूर करना hoga,unke शरीर से भी प्रेम करना होगा और उसे तम्हे बताना होगा क उसका शरीर कोई सामान्य नहीं और आख़िरकार उसके शारीरिक इच्छा जो इतनी वर्षो से अनछुई है उसकी कमी भी दूर करनी होगी.

बलदेव इतना सब अपने और माँ क बारे में सुन शर्मा जाता है

kamla:theek है आराम से पत्र पढ़ लो और जैसे तम्हे महरानी को मानना है मनाओ कल मिलते है

और वो चली जाती है
 
अपडेट 16

राजा रतन क राज्य कुबेरी में राजा राजपाल अपने सैनिको क साथ पहुंचते है जहाँ उनका ज़ोरदाद स्वागत किया जाता hai,kuberi बहुत बड़ा राज्य था उतना हे बड़ा वह का महल tha.Ghatrashtra में तो सिर्फ एक घर नुमा महल था और राजदरबार अलग से था पर इसके उलट यहाँ महल क अंदर हे राज दरबार था और सैनिक से ले कर अतिथि रहिवास भी अंदर हे tha.raja रतन की तीन पत्निया थी पहली दोनों पत्नी आपस में बहाने थी जिनके नाम रुख्मणि और सुखमनी था और तीसरे का नाम एलिज़ा tha.rukhmani और सुखमनी भारतीय देसी नारी थी पर एलिज़ा एक ब्रिटिशर थी जो राजा रतन को एक राजा ने भेट क रूप में राजा रतन को दया था

रात क भोजन क बाद दोनों राजा एक हॉल जैसी जगह पर जहा पर कालीन बिछाया गया था और बैठने क लये गद्दे रखे थे उनपर बैठ राजा राजपाल चुस्की ले रहा था शराब का.

राजा rajpal:yaar मज़ा आज्ञा शराब बहुत अछि है

राजा ratan:han मज़े करो भाई

rajpal:yaar मझे ऐसा लग रहा हु जैसे में आसमान में उड़ रहा हु

राजा ratan:han ये विदेशी चीज़ है मित्र

तभी उनका शराब ख़तम हो जाता है और राजा राजपाल और मंगवाने क लये कहता hai,raja रतन ताली मरता है सामने एक सुन्दर गोरी आ क्र कड़ी होती है



राजा rajpal:ary ये तो विदेशी है

राजा ratan:han ये अँगरेज़ है ये मेरी तीसरी पत्नी है

राजा रतन एलिज़ा को कहता है क और शराब ले आये थोड़े देर में शराब ला क्र रख देती है फिर चली जाती है

Rajpal:yaar ये कितनी सुन्दर है मेने ऐसी लड़की कभी नहीं देखि

Ratan:han वो तो है

rajpal:tmhe याद है पिछले कई सालो से हमने कई हज़ारो स्त्री को भोगा है

Ratan:han इसलिए में कहता था इतना ज़्यादा अय्याशी मत करो अब देखो तम्हारा उठ ता हे नहीं (और हस्ता है)

rajpal:yar ऐसी बात नहीं अब पहले जैसी बात नहीं रही बस

ratan:han तो कहना क्या चाहते हो

rajpal:yaar बुरा न मनो तो एक बात कहु

ratan:kaho मित्र

rajpal:aaj कई सालो बाद मेरा लैंड बहुत ज़ोर से खड़ा हुआ है

और वो भी तम्हारी पत्नी एलिज़ा को देख क

ratan:asmanjash से देखता है

rajpal:me सबकुछ तम्हे देने क लये तैयार हु जो मानगो वो दूंगा पर मुझे एलिज़ा चाहिए अभी

ratan:hosh में नहीं हो तम राजपाल

rajpal:me होश में हु

ratan:to क्या तम अपना राज्य मझे दे सकते हो में कहु तो?

rajpal:me तुम्हारा ज़िन्दगी भर गुलाम बन क रह जाऊंगा

राजा रतन एक लालची मनुष्य था उसने अपने फायदा देख क्र मुस्कुराता हुआ हुआ

rajpal:kaho रतन

ratan:jao जी लो आज रत क लये एलिज़ा तम्हारी हुई

और फैट से ताली बजता है एलिज़ा वापस आती है

और रतन उसके कान में जा क्र कुछ कहता है पहले तो एलिज़ा नहीं मानती पर कड़े निर्देश क बाद वो तैयार हो जाती है

rajpal:bolo राजा रतन तम्हे क्या चाहिए

ratan:abhi अपना काम करो तम्हारे पर ये अहसान उधर रहा

rajpal:me भी वडा करता हु क सर कटा दूंगा पर अपना वडा नहीं भूलूंगा

ये सुन रतन सिंह मुस्कुराते हुए कक्षा क बहार चला जाता है और एलिज़ा राजपाल सिंह क पास आ कर अपने ऊपर का कपडा खोल देती है



राजा रतन उसके पास जा क्र सीधा उससे गले लग क्र उसके गांड को दबाने लगता है और उसके गर्दन को चूमने लगता है एलिज़ा एक हाथ से राजपाल क धोती क ऊपर से लैंड पाकर लेती है राजा अब उसको धकेलते हुए गद्दे क तरफ ले जाता है तभी एलिज़ा उसे रोकती है और वो निचे बैठ जाती है और राजपाल का धोती खोल कर उसका लैंड सहलाने लगती है और fir"galppppp"kar क पूरा लैंड निगल जाती है

rajpal:uhmmm एलिज़ा अहम्म्म्म

एलिज़ा फटा फैट लैंड चूस रही थी और हाथ से मुठ मर रही थी राजा राजपाल आँख बंद कए सिसकी ले रहा था अब राजपाल एलिज़ा को पाकर लेता है और अपने गॉड में ले क्र बैठ जाता है और उसके लाल सुर्ख होठ को चबाने लगता है और अपने हाथो से उसके अंतर वस्त्र निकल कर दोनों हाथो से उसके दूध का मर्दन करने लगता है



eliza:aaaah न्यू

rajpal:eliza

राजपाल से अब रहा नहीं. जाता है और एलिज़ा को अपने ऊपर ले क्र एक ज़ोरदाद धक्का मरता है और एलिज़ा की छूट फच्च की आवाज़ से खुलती है

और राजपाल धपधप पेलते जा रहा था

एलिज़ा "आआह नाआ "



कुछ दस मिंट क पेले क बाद एलिज़ा को सीधा लेता क्र दो तीन धक्के लगा राजपाल अपना पानी छोर देता है और हांफने लग जाता है.

उस रात एलिज़ा रात भर राजपाल क साथ बीतती है और राजपाल दो बार और एलिज़ा की छूट की कुटाई करता है

इधर कमला क जाते हे बलदेव अपना कक्षा का दरवाज़ा बंद क्र क पत्र पढ़ना शुरू करता है

श्रीमान शेरसिंघ

आप का पत्र mila,padh कर अत्यंत प्रसन्नता hui.aap और आपका डिल ठीक होगा ऐसा आशा करती hu.me एक स्त्री हु और मझे अपने सीमा लांघना इतना आसान नहीं लेकिन जितना प्रेम आप हमसे प्रकट किये उसे देख क्र मेरा मैं भी दोल गया है और आपके दासी बन न चाहती हु पर ये सब क लये हमे सही समय का प्रतीक्षा करना hoga,aasha करती हु आप मेरी बात समझेंगे

आपकी

देवरानी

ये पढ़ कर जहा हल्का मुस्कुराया वही भयभीत भी हुआ था baldev,or हो भी क्यू न उसके प्रेमिका किसी और क प्रेम की ओरे अग्रसर हो रही थी वो प्रेम पत्र को रख क्र सोने की कोशिश करता है पर आँख बंद करते हे उसे देवरानी का चेहरा नज़र अत कभी देवरानी हस्ती तो कभी मुस्कुराती तो कभी गुस्से में बलदेव को देखती बलदेव क डिल ो दिमाग पे सिर्फ देवरानी छ गयी थी पर

देवरानी इधर अपने कक्षा में लेती थी एक एक झीनी सी पोषक पहन क्र जो वो सोने क समय पहनती थी

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वो लेती थी और आज क घटना का सोच रही थी कैसे बलदेव उसकी तारीफ क पुल्ल बांध रहा था और कह रहा था वो शादी नहीं करेगा और हमेशा मेरे लये मेरे सेवा में जीवन बिताएगा आज वर्षो बाद ऐसा लग रहा है क कोई मेरी चिंता करता है कसम से बहुत बड़ा डिल वाला है बलदेव.

और शेरसिंघ भी तो मेरे लये मर मिटने को तैयार है अगर में शेरसिंघ की बात मणि तो क्या बलदेव मेरा सम्मान मेरी इज़्ज़त काम तो नहीं क्र देगा या मझसे नफरत तो नहीं करने लगेगा पर मेरे लये दोनों उतने हे प्यारे है एक आशिक़ है और एक लाडला beta.ye बात कमला से पूछूँगी फिर वो ख़ुशी ख़ुशी सो जाती है.
 
अपडेट 17

सुबह सवेरे उठ कर देवरानी स्नान करती है

और तैयार होने क लये आईएनए क पास आ क्र बैठ टी है और शेर सिंह का सोच कर खूब मन से सजती सवारती है और आज वो गहतराष्ट्रा क सबसे बड़ी देवी मंदिर जाने का निर्णय लेती है और मंत्री को कह क्र रथ मंगवा लेती है और एक घोड़े का रथ बिलकुल तैयार महल क द्वार पे खड़ा था.

इधर बलदेव भी जल्दी उठ जाता है और स्नान कर पहले अपने दादी क कक्षा में जाता है और उनसे उनका हाल पूछ कर सोचता है बहार जा कर एक बार वैध जी से पता करे क उपचाफ में कोई कमी तो नहीं और जैसे हे बहार जाने लगता है सामने उसे देवरानी दिखती है

जिसे देख बलदेव क लार टपकने लगते है कल जहा देवरानी क नितम्ब केहर ध रहे वही आज उसके कमल वक्ष सदी से बहार आने को तड़प रहे थे

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Baldev:itne बड़े वक्ष आज इसे देख तो मेरा दिन बन गया जैसे कल उन्नत नितम्ब देख क्र हुए the(man में)

अपने आप को ताड़ते देख देवरानी हल्का सा मुस्कुराती है और कहती है

Baldev:kaha जा रहे हो इतने सवेरे

Devrani:wo आज माता रानी क मंदिर जा रही थी

baldev:pr किसके साथ

devrani:sainik है न

baldev:maa आप मेरे होते हुए किसी और क साथ

devrani:mujhe लगा

baldev:aapko लगा क में नहीं जाऊंगा?

devrani:hmm

तम सैन्य अभ्यास करते हो थक जाते हो देर तक सोते हो इसलिए

कही तम न जाओ

baldev:maa में भले हे कितना थका राहु पर आपका साथ देने हमेशा तात पर रहूंगा सदैव

Devrani:acha चलो

baldev:aage से सोच लेना कोई कदम उठाने से पहले

devrani:acha श्रीमान अब चले

फिर वो दोनों बहार निकलते है और रथ क पास आते है बलदेव कहता hai"sainik तम जाओ रथ हम चलाएंगे "

devrani:aascharya से देखती है

और वो रथ पे बैठ जाती है और बलदेव रथ को दौड़ा देता है

कुछ देर की दूरी तय कर दोनों मंदिर क पास पहुंचते है और बलदेव मंदिर परिषर में अपना रथ खड़ा करता है और उतर ता hai.or रथ पर बैठी देवरानी को अपना हाथ देता है और निचे उतरता है और उतरने क लये अपने खुले बल को पीछे हटा कर संभाल क्र उतरती देवरानी को देख बलदेव जैसे स्वर्ग का आनंद मिलने लगता है वो इतनी सुन्दर लग रही थी और पारदर्शी सदी में उसके वक्ष क़यामत लग रहे होते है

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निचे देख रथ से उतारते समय ऐसा लग रहा जैसे देवरानी क वक्ष गिर जायेंगे अपने बेटे को ऐसे नज़र अपने दूध पर देख देवरानी शर्मा जाती है और मन में भगवन को यद् कर क आगे बढ़ती है और बलदेव क साथ मंदिर में चढ़ावा चढाने की सामग्री ले क्र मंदिर क सीडीओ पर चढ़ने लगती है और बलदेव भी जा कर अपने माँ क साथ चढ़ावा चढ़ा कर माथा टेकता है

Devrani:man में) माता मझे इतनी शक्ति दे क में हर परिस्थिति से लड़ saku,me अब खुश रहना चाहती हु किसी क साथ जो मेरा सम्मान करे मुझे डिल से प्रेम करे

मैंने पत्नी धर्म बहुत निभाई पर मझे कुछ नहीं मिला दुःख क सिवा इस बार मझे शेर सिंह क रूप में वो मिला है जो मेरा जीवन सफल कर सकता है, मुझे मुआफ कर देना पर में वही करुँगी जिससे अब मेरा जीवन ठीक हो

Baldev:man me)Mata रानी में तेरा भक्त हु और मुझसे बड़ी भक्त मेरी माँ देवरानी है जिसने हमे सुख नहीं देखा जीवन में अगर संसार में तेरे नियम से पत्नी को सिर्फ खून क ासु रोना है तो अब और नहीं तू उसे इतनी शक्ति दे क वो अपने जीवन में खुसीआ लेन का फैसला खुद कर सके और रही बात मेरे प्रेम की तुझे पता है क मेरा प्रेम कितना पवित्र है और हो भी क्यू न में अपने माँ को किसी अज्ञात पुरुष क पास भटकने क लये भेज नहीं सकता जिस से वो आगे माँ का साथ छोर दे तो और वो माँ को दुःख दे तो.

में एक पाप क्या हु प्रेम क्र क तो इसको पूरा भी करूँगा शक्ति देना...

बलदेव जैसे अपने आँख खोलता है उसे सामने झुके प्रसाद की थाली लेने क लये झुकी हुई दिखती है

उसके वक्ष ऐसे लग रहे थे जैसे दो बड़े तरबूज़े हो



ये देख बलदेव को आप पर काबू मन मुश्किल था और वो

Baldev:chale माँ

तभी दोनों मंदिर से बहार आते है तो देखते है क उसके रथ को कुछ बालक चलने की कोशिश क्र रहे थे और घोडा ने उस रथ क पहिये को ले जा कर दो वृक्ष क बीचो बीच फसा दया और पहिया का निचला भाग टेढ़ा हो गया रहा

baldev:bacho तम सब ये क्या कर डाई

devrani:bache है जाने दो हम कुछ और प्रबंध क्र लेंगे जाने का और वो चल कर आगे बढ़ती है

उसके पीछे से गांड देख बलदेव का लैंड फिर तन जाता है



बलदेव को कुछ सूझता है और वो रथ से घोडा खोलने लगता है

देवरानी अपने बेटे द्वारा अपने मोठे नितम्ब घूरे जाने से अंदर हे अंदर सांस दुगनी गति से चलने लगी



और दूर खड़े हो कर अपने आप को निहारती है और अपनी सुंदरता देख उसे खुद शर्म आ जाती है

Devrani:ye बलदेव भी न ऐसे देखता है जैसे खा जायेगा अभी क अभी पता नहीं इसके दिमाग में क्या चल रहा है

तभी बलदेव आवाज़ लगता है "माँ आए जाओ हम इस घोड़े से जाएंगे"

devrani:par बीटा एक घोड़े पे कही गिर गए तो

Baldev:ghursawari आप नहीं में करूँगा आप क्या समझती हो मुझे घुड़सवारी नहीं आती

Devrani:maine ये तो नहीं कहा

baldev:aap घबराये नहीं और मेरे आगे बैठे में आपको संभाल लूंगा



देवरानी अपने आपको देखे फिर निचे देखती है

Devrani:man me)Ye लड़का भी na...mjhe आज ये सदी नहीं पहन न tha,ye घोड़े पे तो..

देवरानी न चाहते हुए भी पहले घोड़े पे बैठ जाती है फिर बलदेव उसके पीछे बैठ ता hai.jaise वो वो घोड़े का लगाम पकड़ता है और पीछे खींचता है उसका हाथ देवरानी क वक्ष से चिपक जाता है और देवरानी क मोठे गांड चढ़ कर बलदेव क लौड़े पर चिपक जाता hai.ye छुवन से एक पल क लये देवरानी आखे बंद करती है

अब बलदेव घोड़े को तेज़ी से दौड़ने लगा जब जब वो लगाम खींचता है उसके दोनों कठोर हाथ बड़े बड़े वक्ष को चाप देता था अनजाने में और उसके लैंड पर देवरानी क बड़े गांड का घसरण होता हर बार हिलने पर ये रगड़ से देवरानी उत्तेजित हो गई थी और उसे बुरा भी लग रहा था और वही बलदेव का लैंड खड़ा हो चूका था और खूब अचे से गांड क दरार में जगह बनाने की कोशिश कर रहा था

कुछ देर बाद वो दोनों पहुंचे महलोर देवरानी उतर कर जल्दी से अंदर चली जाती है और बलदेव घोडा को एक ओरे बांधने लगता है.

देवरानी लम्बी सांस लेते हुए अपने कक्षा में पहुँचती है और आईने में अपने आप को देखती है जहा जहा राहगढ हुई थी वो जगह लाल हो गई थी "कितना कठोर है बलदेव बस रगड़ें ने मेरे दूध और चुतर लाल क्र डाई " और मर्दन करेगा तो ? हाय राम में क्या सोच रही हु

तभी कमला आती है कारा जड़ी बूटी का ले कर

kamla:ye लीजिये महरानी

Devrani:han लाओ पी लेती हु

kamla:aapne बताया नहीं आप आज कल रोज़ योग करती हो और ये कारा क्यू पीती हो

devrani:wo बस अछि सेहत क लये

kamla:banao मत

devrani:han तो सुनो इस से जिस्म गठीला और मज़बूत होता जो क काम क्रिया में मदद करता है इसके सेवन से अचे अचे मर्द भी मेरे सामने नहीं टिकेंगे

kamla:han मुझे पता hai,ye किताबी बाटे ह

Devrani:tmhe कैसे पता

कमला को एक झटका लगता है

kamla:wo मुझे पढ़ना नहीं अत पर वो

devrani:jhut मत कहो सच सच कहो

kamla:to सुनो आपके पास जो किताब है वो वैध की है और मेने वो पुष्टकेँ आपके बिस्तर में देखा जब में सफाई कर रही थी

वो अलग अलग मुद्रा में सम्भोग क्र रहे चित्र

devrani:suhss धीरे से

kamla:aap डर्टी क्यू हो में तो कहती हो सम्भोग क अलग अलग क्रिया भी सीखो

devrani:sharm से चुप रो

kamla:ye बताओ आप ये सब तैयारी क्र रही शेर सिंह क लये न?

devrani:han और सर निचे क्र लेती है

Kamla:or वो नहीं मिला to..fir ये आग बुझ जाएगी .है न?

devrani:aisa नहीं है

kamla:tmhe एक राज़ की बात बताती हु मेने अपनी प्यास बुझा ली किसी से

devrani:kis से

kamla:usi से जिसके पुष्तक से आप सीख रही हो

देवरानी हैरत से देखती हो

"तम्हारा मतलब वैध जी"

kamla:han महरानी अब आप से क्या छुपाना

devrani:par कैसे

फिर कमला सब उस दिन की बात बता देती है

kamla:me आपके जैसी नहीं अचे समय आने का प्रतीक्षा में जीवन काट दू

ाचा समय लाना पड़ता है

devrani:hmmm पर अगर ये बात महाराज या किसी तक पहुंच गई तो

kamla:pahuchne दो में डर्टी नहीं हु प्रेम और सम्भोग मेरा अधिकार है और आपके तरह दर क इतना दूर सम्बन्ध बना न क मिलाप हे न हो

devrani:par पास में कहा कोई ह तू तो जानती है

kamla:ache से देखो कही दिया टेल अँधेरा तो nahi,ache से देखो अगर में तम्हारी जगह होती तो में विधवा से सुहागढ हो जाती उसे प् कर

devrani:itni बेवक़ूफ़ नहीं थी वो कमला का इशारा समझ जाती है क्यू क महाराज का छोर कर घर में एक हे पुरुष था वो था बलदेव

devrani:chup कर कामिनी

और बैठ कर अपने वायें करने लगती है और

kamla:Khushi क लिए बलिदान तो देना हे पड़ता है

कमला तुनक क बहार चले जाती है

इधर अपने कक्षा में आकर बलदेव पत्र लिखता है और उसे अपने खीसे में छुपा लेता है थोड़े देर बाद कमला उस से पत्र लेने आती है तो बलदेव को खुश. प् कर

kamla:maharaj क जाते हे तम दोनों बड़े खुश लग रहे हो

baldev:hmmm अब ज़्यादा समय मिलता है

kamla:to बात कहा तक आगे बढ़ी

baldev:unke मैं को समझना नामुमकिन hai,islye कहते क स्त्री को कभी समझा नहीं जा सकता

kamla:wo सब छोरो तम बिंदास आगे बढ़ो जो होना है आगे होगा और बलदेव से पत्र ले कर चली जाती है.

और शाम को पत्र ले जा करके देवरानी को देती जिसे वो पढ़ना शुरू करती है

प्रिये देवरानी,

में संयम बरतने क लये तैयार हु पर आखिर कब तक एक सीमा निर्धारित करो क इतने दिनों में तम सब छोर मेरे पास आजाओगी और युधा भी हुआ तो में नहीं डरता.

में तुम्हे अत्याधिक प्रेम करता हु देवी

शेर सिंह

पत्र पढ़ कर उसे समझ नहीं आरहा था क वो इसका उत्तर क्या दे

और दूसरे मन में उसे कमला की बात भी खाये जा रही थी

वो उस दिन से बलदेव से काट ने लगती है और बहुत काम मिलती है ये सोच कर क इस से बलदेव अपनी चल ठीक क्र लेगा वो लगातार 7 दिन तक उसके समीप नहीं जाती

पर ये 7 दिनों में उसे अहसास होता है क जब वो बलदेव क साथ हस्ती खेलती है तभी उसे ये जीवन ठीक लगता है पर जब से उसने दूरी बनाई ह ज़िन्दगी बेरंग सी है

तभी उसके कानो में "माँ इधर आना"

"बीटा मेरे व्यायाम का समय होगया बोलो न ""और वो कमला को बुला कर बलदेव क पास भेज देती है

kamla:beta कमला जा रही है उस से मदद ले लो

बलदेव अंदर हे अंदर दुखी था पर जानबूझ कर चेहरे पर सिकन नहीं आने देता है उसे यक़ीन था क अगर उसका प्रेम सच्चा है तो जैसे में तड़प रहा हु वो भी तड़प रही होगी,

आज पुरे 7 दिन हो गए थे बलदेव से अचे से बात कए और न हे देवरानी ने पत्र का उत्तर दया था शेर सिंह को उसके समझ में कुछ नहीं आ रहा था

Devrani:man में) क्या करू में शेर सिंह को कैसे बताऊ क मेरा पुत्र है उसे छोरना मेरे लिए आसान नहीं और तो और ये बलदेव भी शराररति हो गया है इसके पास जाना भी नहीं बनता दूर रहना भी नहीं बनता

पर मेरे से कितना प्यार करता है इतना दूर जाने क बाद भी बेचारा मेरे पीछे पड़ा रहता है बुलाते रहता में उसे दन्त ते भागते थक गई पर फिर वो नहीं थका

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट 18

देवरानी खोयी हुई थी सोच me"pichle 7 दिनों से दूरी बनाये हुए थी फिर बलदेव में कोई बदलाव नहीं आया था ,जितना दूर भगति देवरानी उतना हे बलदेव पास आजाता,

"बलदेव मझे पे तो जान छिरकता है कैसे मेरे हर छोटी छोटी चीज़ो का ख्याल रखता है और मेरे पास आने क लये तड़पता रहता है"

"कैसे मेरे दूध और नितम्ब घूरता है मौक़ा मिलते हे ,जैसे खा हे जायेगा रोज़ देखता है फिर भी नहीं थक ता और मेरी आखो में पता नहीं क्यू वो कुछ पढ़ने की कोशिश करता रहता है"

"कही ये बलदेव वासना में आ कर तो नहीं karta,par ऐसा होता तो पीछे 7 दिनों से उसने मुझे छुआ भी नहीं है फिर भी वो मेरा इतना ख्याल रखता है"

"अगर ये वासना नहीं तो क्या बलदेव मुझे चाहने लगा है ,तो क्या उसे प्रेम हो गया है"?

"और ये कमला भी तो इशारे से कहती रहती है बलदेव को ले kar,to क्या उसने बलदेव की सोच भाप ली है अगर ऐसा है और वो किसी से कह दे तो क्या होगा?"

देवरानी ये सब बात सोचते हुए महल से निकल कर महल क पास में बाग़ में घूमने क लये निकलती hai,devrani आज काळा रंग की सदी अत्यंत सुन्दर दिख रही थी

देवरानी जाते जाते उसके मन में कुछ ख्याल अत है और वो मुद क्र वैध जी क कक्षा की ओरे घूम जाती है.

जहा पर पहुंचते हे उसके कानो में "ाः उठ" "और ज़ोर से ""हाय मर्डर गयी" क आवाज़ आने लगती hai.devrani की धड़कने तेज़ होने लगती है और वो उत्सुकता से अंदर का नज़ारा देखने की कोशिश करते है

तभी उसकी नज़र खुले हुए खिड़की क दो पैट क बीच की दरार दिखाई देती है ,क्यू क वैध जी खिड़की को सिर्फ सत्ता दया था और वह जगह होने क वजह से अंदर का दृश्य पूरा दिख रहा था

देवरानी जैसे हे वह आँख गड़ाए अंदर देखती है उसके हाथ पेअर में कम्पन सी होने लगती है ,क्यू क अंदर का नज़ारा हे कुछ ऐसा था

अंदर कमला झुकी थी और वैध जी सत्ता सात अपना लम्बा तगड़ा लौड़ा पेले जा रहे थे जिसके वजह से कमला की आवाज़ गूंज रही थी

"उह्ह्ह आह" "धीरे से वैध जी"

और वैध जी एक और ज़ोर का झटका मरते है अपने लौड़े को पूरा बहार खींच क एक और ज़ोरदाद धक्का डेरे है.

kamla:aaaaaaaaah वैध जी



ये दृश्य देख देवरानी का छूट का दाना फाड़ने लगता है और उसके छूट पनिया जाती है आज काम से काम 17 वर्षो बाअद चुदाई देखि थी थी देवरानी ने और वो वैध का लौड़ा देख क्र अपना हाथ छूट क पास ले जा क्र मसल देती है.

Kamla:haaye वैध जी क्या ज़ालिम चुदाई करते हो "आआह ओह्ह्ह"

तभी कमला की नज़र खिड़की पे जाती है और उसे आभास होता है कोई है वह और कमला थोड़ा गौर से देखती है तो उसे सदी का कला रंग दिखाई पड़ता है और उसे समझते देर नहीं लगता क कौन कड़ी है.



Kamla:man में ये तो देवरानी है

वैध जी हुमच हुमच क कमला की छूट की झिल्ली फाड़ रहे थे अपने मोठे लौड़े से

Vaidh:or ले साली मेरा लैंड बहुत खुजली है तुझे

Kamla:"uhh आआआआह वैध जी आपका लैंड कितना बड़ा है"

वैध :तू तो साली न जाने कितने बड़े लैंड लिए हुए होगी तुझे क्या है

Kamla:han मई बहुत लैंड खायी हुई पर एक का लौड़ा इतना बड़ा है जिसे मेरी छूट भी झेल न पाए

वैध पहच क्र एक और शॉट मरता hai"kiska लौड़ा देख ली तूने"

Kamla:Baldev का

Vaidh:tu उसका भी लेगी क्या

kamla:nahi बाबा नहीं मेरी जान हे चली जाये उसका लौड़ा नहीं हुल्लाबी लौड़ा है

vaidh:tujhe कैसे मालूम रंडी

kamla:bass एक बार स्नान करते हुए देख लय था

vaidh:agar तेरी इतनी गहरी छूट उसके लौड़े को नहीं ले सकती तो दुन्या में उसका लौड़ा कोई नहीं ले सकती

Kamla:Nahi में कहा छोटे कद काठी की महिला एक है जो उसका ले सकती है पर भरी तो उसको भी पड़ेगा लेने में

Vaidh:kaun "और खच क्र अपने लौड़ा पेलता है फिर से"

kamla:"aaah वैध ji"Or कौन उसकी माँ देवरानी

ये सुन कर देवरानी और वैध दोनों आश्चर्यचकित होते है

vaidh:tm पागल हो कुछ भी कहती हो

devrani:sambhog का असली मज़ा तो पागल बन क्र. हे है और

vaidh:koi माँ भले कैसे ऐसे अपने पुत्र से कर सकती है

kamla:agar मेरा पुत्र होता बलदेव तो अब तक में उसके बचो की माँ बन गयी hoti"aaah आराम से वैध ji"samaj का क्या है आज है कल नहीं बीटा तो हमेशा रहेगा में अपनी ख़ुशी देखती हु.

vaidh:tu तो है हे रंडी

अभी

देवरानी कई वर्षो बाद lauda,chudai और ऊपर से कमला की उत्तेजना से भरी बात को सुन क्र उसका छूट पसीजने लगता है और गाला सूखने लगता है

वो पानी पीने क लये रसोई में जाने लगती है और सामने से बलदेव को अत देख एक बार रुक जाती है और बलदेव की नज़र अपनी माँ से मिलती hai.devrani क आखो में वासना थी उसे छुपाते हुए बस बलदेव को एक मुस्कराहट देती है



Baldev:man me)aaj माँ इतने दिनों बाद मुझसे मुस्कुरा कर देख रही है और आज तो अप्सरा से काम नहीं लग रही hai,kya गोरा बदन है क्या पहाड़ जैसे वक्ष है

अपने आप को घूरता देख आज पता नहीं क्यू देवरानी न लज्ज़ती है और न हे अपने पल्लू को ठीक करती है वो आगे रखे मटके की तरफ घूम जाती है और फिर मुद क्र देखती है तो पाती है क बलदेव अब उसके चुतर निहार रहा था

वो एक क़ातिल मुस्कान देती है



ऐसे देवरानी क वक्ष देख कर फिर देवरानी जैसे मुड़ती है और चल क पानी क मटके क पास जाती है तो उसके चुतर काली सदी में साफ तौर से दिख रहे थे और ये खूबसूरत दृश्य देख बलदेव का हथियार अपने रूप में आ जाता है.

और जैसे हे देवरानी मुद क्र एक मुस्कान देती है बलदेव लैंड ज़ोर से धोती क अंदर हिलोरा मरता hai,use अब रहा नहीं जाता और पानी पी रही अपने माँ क पास जाता है

Baldev:maa कैसी हो

devrani:tujhe नहीं पता है क में कैसी हु (और हल्का शर्मा क्र तना मरती है)

baldev:mujhe पता है दुन्या की सबसे हसीं लड़की तुम हे हो

devrani:nahi में अब लड़की नहीं अब तो में बूढी स्त्री हो गयी हु

baldev:jo आपको बूढी समझा समझो क उसका खुद की कोई मानसिक बीमारी है

इस बात से देवरानी हस्स देती है

baldev:tumhari ये हसी कितनी प्यारी है

devrani:chup करो (झूठा गुस्सा दिखते हुए)

baldev:or तुम्हारे नक् पर ये गुस्सा

devrani:ufff हे भगवन "में जाती हु

बलदेव झट से उसे अपने दोनों हाथो से उसके दोनों हाथो से पाकर लेता है ऐसा करने से देवरानी क सदी का पल्लू निचे गिर जाता है और उसके कठोर वक्ष देवरानी क गहरी साँसे लेने से ऊपर निचे हो रही थी

Baldev:maaa रुको

देवरानी पहले से उत्तेजित थी और बलदेव की ऐसी बाटे सुन कर उसके सांस फूलने लगे

devrani:halke आवाज़ में कहती h"hm मझे जाने deu"or कही न कही उसके मन में भी जाने की इच्छा नहीं थी



baldev:maa तुम कितनी सुन्दर हो ये तो सुनलो

और बलदेव अपना खड़ा लैंड देवरानी क चुतर पर सत्ता देता है

देवरानी :उम्म्म

baldev:tmhara ये गोरा रंग ,तीखे नैन नक्श और तम्हारा ये संगमरमरी बदन भगवन ने बड़ी फुर्सत से बनाया होगा

बलदेव कान क पास जा कर देवरानी को कहता है

"माँ तम्हे भगवन ने देव लोक क लये बनाया था पर तम गलती से मौश्यो की बीच आगयी"

"तम एक अप्सरा हो"

ये सुन कर देवरानी अपना आप खो बैठ टी और उसके चुतर पर चुभ रहे बलदेव क लैंड पर अपने बेशकीमती 44 क चुतर को पीछे करती है और एक रयथ्म में लौड़ा से देवरानी का चुतर रगड़ खा जाता है

देवरानी क मुँह से सिसकी निकल जाती hai"aah भगवन"

और तभी बलदेव आगे बढ़ क्र अपने. होठ कण से दूर ले जा क्र देवरानी क लाल हो चुके गाल पर ले जाता है

"puchhhhhhhhhhh" से एक चुम्मा उसके गाल पर ले लेता है

baldev:maa

देवरानी ने सोचा भी नहीं था बलदेव ऐसी हरकत करेगा वो झट से अपने चुतर जिसे वो पीछे की थी बलदे क लैंड से दूर करती है और आखे फाडे देख रही थी बलदेव को

देवरानी का जैसे मोह भांग हो गया था और उत्तेजना से निकल कर अपने आप पर काबू प् ली थी इस हमले से.

बलदेव मुस्कुराते हुए देवरानी को छोर बहार चला जाता है.

देवरानी अपने आप को देखती है उसके बाल खुल गे थे और उसके पल्लू गिरने क वजह से उसके उभर साफ़ दिख रहे थे

देवरानी बलदेव क जाते हे सबसे पहले अपना पल्लू से अपने वक्ष ढकती है और अपने हालत देख क्र सोचती है कैसे उसने अपने आप खो कर अपना चुतर पीछे क्र क लौड़े पे मसला और बलदेव का उसके गाल पे चुम्मा से अभी तक उसके गाल लाल और गीला था ,लज्जा ाआरही थी और एक अलग क़िस्म का मज़ा भी देवरानी ko,wo बास अपने कए पर मुस्कुरा देती है

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